पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
मदन रूखी के साथ रात बिताने की योजना बना रहा था लेकिन उसे कोई बहाना नहीं सूझ रहा था.. इसी बीच उसकी पत्नी शीला का फोन आया, जो अपनी बेटी वैशाली के यहाँ थी.. शीला ने बताया कि वह कुछ और दिन वहीं रुकेगी, जिससे मदन को खुशी हुई.. उसकी इस असामान्य खुशी पर शीला को शक हुआ, लेकिन उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि वह खुद भी वैशाली के घर पर कुछ योजनाएँ बना रही थी..
फोन रखने के बाद मदन टहलने निकला और चाय की दुकान पर बैठा, जहाँ उसने एक मजदूर महिला को अपने बच्चे को दूध पिलाते देखा.. तभी रूखी का फोन आया.. रूखी ने बताया कि उसने अपने सास-ससुर से कह दिया है कि शीला और मदन शहर से बाहर गए हैं और घर की देखभाल के लिए उसे रात भर वहाँ रुकना होगा.. उसने अपनी सास को ५०० रुपए देकर मना लिया था..
रूखी ने मदन को एक खास तोहफा लाने की बात भी कही.. शाम साढ़े नौ बजे जब रूखी आई, तो वह अपनी पड़ोसन चंपा को भी लेकर आई.. चंपा बीस साल की युवा महिला थी, जो हाल ही में माँ बनी थी और जिसके स्तनों में अधिक दूध भर जाने की समस्या थी.. रूखी ने समझाया कि चंपा के पति छह महीने के लिए शहर गए हैं और उसकी सास बच्चे की देखभाल करेगी, इसलिए वह रात भर रुक सकती है.. रूखी ने चंपा को केवल मदन को दूध पिलाने के लिए लाने की बात कही, और चेतावनी दी कि चंपा मदन के लंड को बिना अनुमति न छुए..
अब आगे..
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"अरे तो टाइम क्यों खोटी कर रही है.. आ बैठ शेठजी के पास और जल्दी दूध पीला उनको.. भूखे होंगे बेचारे" रूखी ने उसका हाथ पकड़ कर खींचा और पलंग पर उसके पास बिठा दिया.. वह सिरहाने से टिक कर बैठा था..
चम्पा मदन के पास सरकी, उसकी काली आँखों में मस्ती झलक रही थी.. उसके मम्में मदन के बिल्कुल सामने थे.. निप्पलों के चारों ओर तश्तरी जैसे बड़े गोले थे.. पास से वे मोटे-मोटे लटके स्तन और भी ज़्यादा रसीले लग रहे थे..
अब मदन से नहीं रहा गया और झुक कर उसने एक काला जामुन मुँह में ले लिया और चूसने लगा.. मीठा कुनकुना दूध उसके मुँह में भर गया.. उस अवस्था में तो उसे वह अमृत जैसा लग रहा था.. मदन ने दोनों हाथों में उसकी चूंचि पकड़ी और चूसने लगा जैसे कि बड़े नारियल का पानी पी रहा हो.. ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह फिर से बच्चा बन गया हो..

मदन अपनी आँखें बंद करके वह स्तनपान करता रहा.. तो दूसरी तरफ रूखी ने उसका लंड मुँह में ले रखा था.. अपनी कमर उछाल उछालकर मदन उसका मुँह चोदने की कोशिश करने लगा.. रूखी भी महा उस्ताद थी, बिना उसे झड़ाए प्यार से उसका लंड चूसती रही..

एक तरफ निप्पल की चुसाई और सामने रूखी का लंड चूसता हुआ द्रश्य.. अब तो चम्पा भी गरमा गई थी.. मदन का सिर उसने कस कर अपनी चूचियो पर भींच लिया जिससे वह छूट ना पाए और उसका निप्पल मुँह से ना निकाले.. उसे क्या मालूम था कि उसकी उस मतवाली चूंचि को छोड़ दे ऐसा मूर्ख नहीं था मदन..
उसका मम्मा दबा-दबा कर दुहते हुए वह दूध पीने लगा.. चम्पा ने बड़े ही प्यार से मदन के माथे को चूम लिया.. सुख की सिसकारियाँ भरती हुई बोली
"भाभी, ये शेठजी तो जोरदार है.. देख क्या मस्त चूस रहे हैं मेरी चूंचि, एकदम भूखे बच्चे जैसे पी रहे हैं.. और उनका यह लंड तो देख भाभी, कितनी ज़ोर से खड़ा है.. भाभी, मुझे भी चूसने दे ना!"
रूखी ने उसका लंड मुँह से निकाल कर कहा "कल से, आज नहीं, वो भी अगर शेठजी हाँ कहें तो! पता नहीं तेरा दूध उन्हें पसंद आया भी है कि नहीं" वैसे चम्पा के दूध के बारे में वह क्या सोचता है, इसका पता उसे उसके उछालते लंड से ही लग गया होगा..
चूसते चूसते आख़िर चम्पा का एक स्तन खाली हो गया.. मदन ने दबा-दबा कर पूरा दूध निचोड़ लिया.. फिर भी उसके उस मोटे जामुन से निप्पल को मुँह से निकालने का मन ही नहीं हो रहा था.. पर उसने देखा कि चम्पा के दूसरे निप्पल से अब दूध टपकने लगा था.. शायद इस स्तन में पहले वाले से कुछ ज्यादा ही दूध भर गया था..

मदन ने उसे मुँह में लिया और उसकी दूसरी चूंचि दूह कर पीने लगा.. चम्पा खुशी से चहक उठी..
"भाभी, ये तो दूसरा मम्मा भी खाली कर रहे हैं.. मुझे लगा था कि एक से इनका मन और पेटभर जाएगा.."
"तो पीने दे ना पगली, उन्हें भूख लगी होगी.. अच्छा भी लगा होगा तेरा दूध.. अब बकबक मत कर, मुझे शेठजी का लौड़ा चूसने दे ठीक से, बस मलाई फेंकने ही वाला है अब" कह कर रूखी फिर शुरू हो गई..
मदन ने जब दूसरा बोबला भी चूस चूसकर खाली कर दिया तब रूखी ने उसका लंड जड़ तक निगल कर अपने गले में ले लिया और ऐसे चूसा कि मदन अपने आप को ओर रोक नहीं पाया.. रूखी के कंठ के अंदर ही वो झड़ गया.. मदन को चम्पा का दूध पिला कर.. रूखी नाम की यह बिल्ली उसकी मलाई निकालकर खा गई..

इस परिश्रम से लस्त होकर मदन पीछे लुढ़क गया पर चम्पा अब भी उसका सिर अपनी चूची पर भींच कर अपनी चूंचि उसके मुँह में ठूँसती हुई वैसे ही बैठी थी.. मदन ने बड़ी मुश्किल से खुद को चम्पा के चंगुल से अलग किया..
चम्पा मदन की ओर देख कर बोली "शेठजी, पसंद आया मेरा दूध?" वह ज़रा टेंशन में थी कि मदन क्या कहता है..
जवाब में मदन मुस्कुराया और फिर उसने चम्पा का गाल खींच कर चूम लिया और बोला "बिल्कुल अमृत था चम्पा रानी, रोज पिलाओगी ना?" वह थोड़ी शरमा गई पर आँख मार कर हँसने लगी..
मदन ने रूखी से पूछा "कितना दूध निकलता है इसके थनों से रोज रूखी? आज तो मेरा ही पेट भर गया, इसका बच्चा कैसे पीता था इतना दूध..!!"
रूखी बोली "अभी ज़्यादा था शेठजी, कल से बेचारी की चूंचि खाली नहीं की थी ना.. नहीं तो करीब इसका आधा ही निकलता है एक बार में.. वैसे हर चार घंटे में पिला सकती है ये.."
मदन ने मन ही मन हिसाब लगाया.. उसने कम से कम पाव-डेढ़ पाव दूध ज़रूर पिया होगा.. अगर दिन में चार बार यह आधा पाव दूध भी दे तो आधा पौना लीटर दूध बन जाता होगा दिन का.. दिन में दो-तीन पाव देने वाली उस मस्त दो पैर की गाय को देख कर वह बहक गया..
मदन यह सोच ही रहा था की तब चम्पा ने झुक कर अचानक उसके लंड को चूम लिया.. वो कुछ कहता इसके पहले रूखी हँसती हुई उसके पास आकर बैठ गई.. उसका ज़ोर का चुंबन लेकर अपना बोबा उसकी छाती पर रगड़ते हुए बोली.. "अरे ये चम्पा तो बावरी हो गई है, जब से आपके गोरे मतवाले लंड को देखा है, पागल ही हो गई है.. मैंने मना किया था पर ये मानेगी थोड़े ही.. चलो सेठ अब आप मेरी बुर की सेवा करो, चम्पा आप के लंड के मजे लेगी अपने मुँह से.."
मदन: "अरे यार रूखी.. सांस तो लेने दो.. अभी अभी तो झड़ा हूँ.. थोड़ा वक्त दो फिर जाकर ये खड़ा होगा..!!"
चम्पा ने मचलते हुए कहा "बाबू शेठ, मुझे एक बार मौका तो दो.. मुंह में लेकर खड़ा कर दूँगी.. एकदम टाइट" हँसते हुए उसने अपनी मुट्ठी बंद कर झटका देते हुए खड़े लंड का इशारा किया
मदन घबरा गया.. कहीं ये दोनों चुड़ैलें मिलकर आज की रात उसके प्राण का हरण तो नहीं कर लेगी.. बाप रे बाप.. कितनी गरम और चुदासी है दोनों.. बेटा मदन.. दूध पीने के चक्कर में कहीं लंड से हाथ न धोना पड़ें..
"मैं बाथरूम जाकर आता हूँ" कहते हुए मदन उठा और बेडरूम के बाहर निकल गया.. वैसे बाथरूम तो बेडरूम में भी था.. पर वो फिलहाल कमरे से बाहर निकलकर अपने लंड को थोड़ा आराम देना चाहता था.. अंदर रहता तो वह दोनों डायनें उसका लंड नोच खाती..
हांफते हुए पहले तो वो किचन में गया.. फ्रिज से पानी की बोतल निकालकर उसने ढेर सारा ठंडा पानी मुंह के अंदर उंडेल दिया.. ठंडा पानी शरीर के अंदर उतरते ही उसकी सांसें पूर्ववत होने लगी.. फिर उसने दूसरे कमरे में जाकर दवाइओ वाले डब्बे से वायग्रा की गोली निकाली.. पूरी रात का चुदाई समारोह हो तो तब वो अक्सर इस गोली का उपयोग करता था.. थोड़े से और पानी के साथ उसने गोली खा ली और थोड़ी देर सोफ़े पर बैठ गया ताकि गोली को असर दिखाने का समय मिलें
करीब पंद्रह मिनट तक जब वो अंदर नहीं गया तो रूखी बेडरूम से बाहर आ गई
"ये क्या सेठजी, आप यहाँ बैठे है?? हम दोनों अंदर अपनी अँगीठियाँ जलाएँ राह देख रही थी की कब सेठजी आए और अपनी लकड़ी इसमें डालें..!!" हँसते हुए बड़े ही नटखट अंदाज में रूखी ने कहा.. जब वो हँसती थी तब उसके स्तन उछलते थे..

गोली भी अब असर दिखाने लगी थी.. बस थोड़ी सी सुस्ती थी मदन को
मदन "रूखी, एक कप चाय बना दे यार.. मैं बेडरूम में जाकर बैठता हूँ, वहीं ले आना"
एक पल के लिए सोच में पड़ गई रूखी.. फिर अचानक से उसकी आँखों में चमक आ गई.. वह हँसते हँसते किचन में चाय बनाने गई.. मदन फिर कुछ देर बैठा रहा सोफ़े पर.. उसके लंड में धीरे धीरे रक्त भर रहा था.. मरी हुई छिपकली से अब वो वापिस मूसल का स्वरूप धारण करने लग गया था..
जब लंड में पर्याप्त सख्ती महसूस हुई तब मदन बेडरूम के अंदर आया.. उसे देखते ही अधनंगी चम्पा ने अपना घाघरा उतार फेंका.. चड्डी तो वैसे भी यह गांवठी लड़कियां नहीं पहनती..
तभी मादरजात नंगी रूखी ने हाथ में चाय का कप लिए बेडरूम में प्रवेश किया.. मदन के हाथ में चाय का कप थमाकर वह अपने कूल्हे मटकाते हुए बेड पर बैठ गई.. यह देखकर मदन का लंड कस कर खड़ा हो गया..
अब उसने चाय की चुस्की लेने की कोशिश की और देखा तो बिना दूध की चाय थी..
मदन: "ये क्या रूखी? पानी और चायपत्ती मिलाकर ले आई तू.. दूध तो डाला ही नहीं"
बदमाश रूखी जो जानबूझकर बिना दूध वाली चाय लेकर आई थी वो दिखावे के लिए झूठ-मूठ अपना माथा धौंक कर बोली "हाय, मैं तो बताना ही भूल गई.. दूध ही खत्म हो गया है.. अब क्या करे"
मदन को समझ में नहीं आ रहा था की रूखी क्या बोल रही थी.. अभी शाम को उसने चाय बनाने के लिए फ्रिज से पतीला निकाला तब करीब आधे लीटर जितना दूध था अंदर.. एकदम से कैसे खत्म हो गया सारा दूध..!!
असमंजस के भाव से वो रूखी की ओर देखता रहा.. हाथ में बिना दूध वाली चाय का कप पकड़ें हुए..
उसे इस हाल में देखकर रूखी ठहाका मारकर हंस पड़ी और बोली "फिकर की बात नहीं है शेठजी, अब तो ये दो पैरों वाली दो थनों की खूबसूरत गैया है ना यहाँ! ए चम्पा, इधर आ जल्दी"
यह बातें चल रही थी उस दौरान चम्पा अपने आप को रोक नहीं पा रही थी और उसने मदन के लोडे को मुंह में लेकर चूसना भी शुरू कर दिया था और रूखी के बुलाने पर उसने ध्यान ही नहीं दिया

रूखी: "ये देखो इस चटोरी छिनाल को.. लंड देखा नहीं की चुंबक की तरह चिपक गई.. अरी ओ चम्पा.. छोड़ दे बाबू का लंड.. और देख सेठजी बिना दूध की चाय पी रहे है, चल अपना दूध डाल जल्दी, शेठजी की चाय में"
सुनते ही चम्पा तो तपाक से उठ कर रूखी के पास आ गई.. उसके देसी जोबन गजब का था.. बदन एकदम मांसल और गोल-मटोल था, चूंचियाँ तो बड़ी थी ही, चूतड़ भी अच्छे ख़ासे बड़े और चौड़े थे.. गर्भावस्था में चढ़ा माँस अब तक उसके शरीर पर था.. जाँघें भी मोटी-मोटी और पाव रोटी जैसी फूली बुर, पूरी बालों से भरी हुई..
"जल्दी दूध डाल चाय में" रूखी ने उसे खींच कर कहा..
चम्पा अपने दोनों बबले पकड़ कर चाय के कप के ऊपर लाई और दबा कर उसमें से दूध निकालने लगी.. दूध की तेज पतली धार चाय में गिरने लगी.. अपनी निप्पल को वो तक तक दुहती रही जब तक की काली चाय एकदम सफेद न हो गई..

"बस बहोत हो गया" रूखी का ये कहते ही चम्पा ने अपने चूँचियों को छोड़ दिया और फिर जाकर मदन की कमर के पास बैठ गई और उसके लंड को चाटने लगी..
मदन के लिए यह अद्वितीय अनुभव था.. मानव दूध तो उसने कई दफा पिया था पर इंसानी दूध से बनी चाय..!! ये पहली बार था.. हाथ में ये खास चाय और नीचे हो रही लंड चुसाई.. मुख-मैथुन का आनंद लेते हुए ऐसी अनोखी चाय पीने का लुत्फ ही अलग होगा..
मदन ने चाय की चुस्की लगाई.. स्वाद अलग था पर उसकी उस अवस्था में एकदम मस्त लग रहा था.. उसका सिर चकराने लगा.. एक जवान लड़की के दूध की चाय पी रहा है और वही लड़की उसका लंड भी चूस रही है और दूसरी तरफ रूखी इस इंतज़ार में बैठी है कि कब उसकी चाय खत्म हो और कब वह अपनी चूत उससे चुसवाए..
मदन ने चाय खत्म करके रूखी को बाँहों में खींचा और उसके अलमस्त मम्में मसलते हुए उसका मुँह चूसने लगा.. उसकी हालत देख कर रूखी ने कुछ देर उसे चूमने दिया.. फिर मदन को लिटा कर उसके मुंह पर चढ़ बैठी और अपनी चूत उसके मुँह में दे दी..
"शेठजी, अब नखरा ना करो, ऐसे नहीं छोड़ूँगी आपको, बुर का रस ज़रूर पिलाऊँगी, चलो जीभ निकालो, आज उसी को चोदूँगी" उधर रूखी ने उसे अपनी चूत का रस पिला रही थी तो दूसरी तरफ चम्पा मदन का लंड लोलिपोप की तरह चूस रही थी
रूखी को यूं मदन की मुंह की सवारी करते हुए देखकर चम्पा रुक गई और मदन का लोडा मुँह से निकालकर उठ खड़ी हुई.. रूखी के करीब आकर वो उससे लिपटने लगी
"हाय भाभी, कितना मज़ा आ रहा होगा ना.. मुझे तो यकीन नहीं हो रहा की सेठजी आपकी चाट रहे है"
चम्पा की बात सुन रही रूखी जवाब नहीं दे रही थी.. बस मदन के मुंह पर अपना भोसड़ा आगे पीछे रगड़ते हुए बस मुंह से सी-सी-सी की आवाज़ें निकाल रही थी.. वो अब झड़ने के बेहद करीब थी.. थोड़ी ही देर में वह थरथराते हुए झड़ गई और अपने भोसड़े का सारा खारा पानी मदन के मुंह में खाली कर गई..

एक बार और उसके मुँह में झड़ कर सामने से सी-सी करती रूखी उठी.. "चल चम्पा, अब शेठजी को अपना दूध पीला दे.. फिर आगे का काम करेंगे"
यह सुनते ही चम्पा मदन के ऊपर झुकी और उसे लिटाए-लिटाए ही अपना दूध पिलाने लगी.. रात के आराम के बाद फिर उसके मम्में भर गये थे और उन्हें खाली करने में उसे दस मिनट लग गये.. तब तक रूखी की जादुई जीभ मदन के लंड को चाटती रही..
वायग्रा की गोली और चम्पा के दूध ने ऐसा जादू किया कि मदन का लंड ऐसा खड़ा हुआ जैसे झड़ा ही ना हो..
रूखी उसका लंड मुँह से निकाल कर उसके पास आ कर बैठ गई.. उसकी आँखों में गहरी वासना थी..चम्पा की आँखों में भी जबरदस्त चुदासी थी
"तो आओ, अब कौन चुदेगा पहले, रूखी तुम या फिर चम्पा?" मदन ने दोनों से पूछा
"भाभी, पहले मैं चुदवा लूँ?" चम्पा ने अधीर होकर पूछा..
रूखी अब तैश में थी "बड़ी आई पहले चुदने वाली, अपनी भाभी को तो चुदने दे पहले सेठजी से.. तब तक तू ऐसा कर, उनको अपनी बुर चटा दे, वो भी तो देखें कि मेरी पड़ोसन की बुर का क्या स्वाद है.. तब तक मैं तेरे लिए उनका सोंटा गरम करती हूँ" उसे आँख मार कर रूखी हँसने लगी.. अब वह पूरी मस्ती में आ गई थी..
चम्पा फटाफट उसके मुँह पर चढ़ गई.. यह देखते ही रूखी ने चिल्लाते हुए कहा
"अरी ओ नलायक, बैठना मत अभी सेठजी के मुँह पर.. ज़रा पहले उन्हें ठीक से दर्शन तो करा अपनी जवान गुलाबी चूत के" यह सुनते ही चम्पा घुटनों पर टिक गई, उसकी चूत मदन के चेहरे के तीन-चार इंच ऊपर ही थी.. उसकी बुर रूखी से ज़्यादा गुदाज और मांसल थी.. झांटें भी घनी थी.. चूत के गुलाबी पपोते संतरे की फाँक जैसे मोटे थे और लाल छेद खुला हुआ था जिसमें से घी जैसा चिपचिपा पानी बह रहा था..
मदन ने चम्पा की कमर पकड़कर नीचे खींचा और उस मिठाई को चाटने लगा.. उधर रूखी ने उसका लंड अपनी बुर में लिया और उस पर चढ़ कर उसे हौले-हौले मज़े लेकर चोदने लगी.. अपनी पड़ोसन का स्तनपान देखकर वह बहुत उत्तेजित हो गई थी, उसकी चूत इतनी गीली थी कि आराम से मदन का लंड उसमें फिसल रहा था..

इधर चम्पा के चूतड़ पकड़कर मदन ने उसकी तपती बुर में मुँह छुपा दिया और जो भाग मुँह में आया वह आम की तरह चूसने लगा.. चम्पा की जवान चूत के अनार का कड़ा दाना मदन ने हल्के से दाँतों में लिया और उस पर जीभ रगड़ने लगा.. दो मिनट में वह छोकरी सुख से सिसकती हुई झड़ गई.. उसके मुँह में रस टपकने लगा..
चम्पा चहकते हुए बोली "अरी भाभी, सेठजी तो कितना अच्छा करते हैं.. मैं तो घंटे भर अपनी चूत चुसवाऊँगी आज.."
मदन अब एक अजीब मस्ती में डूबा हुआ उस जवान छोकरी की चूत चूस रहा था, वह ऊपर-नीचे होती हुई उसके सिर को पकड़कर उसका मुँह चोद रही थी और सामने की तरफ रूखी मदन के लंड को अपनी चिपचिपी बुर में डालकर चुदवा रही थी.. ऐसा लग रहा था जैसे वह साइकिल है और ये दोनों आगे-पीछे बैठकर उसपर सवारी कर रही है..
मदन मन ही मन सोचने लगा कि अगर यह स्वर्ग नहीं है तो और क्या है..!!
चम्पा हल्के-हल्के सिसकारियाँ भरते हुए रूखी से बोली "भाभी, चूचियाँ कैसी हल्की हो गई हैं, सेठजी ने पूरी खाली कर दी चूस-चूस कर.. तू देख ना, अब ज़रा तन भी गई हैं नहीं तो कैसे लटक रही थीं.."
मदन की नाक और मुँह चम्पा की बुर में क़ैद थे पर आँखें बाहर होने से उसका शरीर दिख रहा था.. उसने देखा कि रूखी ने चम्पा के दोनों स्तन पकड़ लिए थे और प्यार से उन्हें सहला रही थी..
"हाँ सच में, एकदम मुलायम हो गये हैं.. चल मैं इनकी मालिश कर देती हूँ, तुझे सुकून मिल जाएगा.." रूखी बोली.. उसके हाथ अब चम्पा के स्तनों को दबाने और मसलने लगे..
दस मिनट बाद उन दोनों ने जगह बदल ली.. मदन का लंड अब भी तना हुआ था और झड़ा नहीं था.. रूखी एक बार झड़ चुकी थी और अपनी चूत का रस मदन को पिलाना चाहती थी.. चम्पा दो-तीन बार झड़ी ज़रूर थी पर चुदने के लिए मरी जा रही थी..
रूखी तो सीधे मदन के मुँह पर चढ़ कर उसे बुर चुसवाने लगी.. चम्पा ने पहले उसके लंड का चुम्मा लिया, जीभ से चाटा और कुछ देर चूसा.. फिर लंड को अपनी बुर में घुसेड़ कर उसके पेट पर बैठ गई और चोदने लगी.. उसके मन में आया कि सेठ के लंड को चूसते समय रूखी की बुर के पानी का स्वाद भी उसे आया होगा..
चम्पा की चूत रूखी से ज़्यादा ढीली थी.. शायद माँ बनने के बाद अभी पूरी तरह टाइट नहीं हुई थी.. पर थी वैसी ही मखमली और मुलायम..
रूखी ने उसे हिदायत दी "ज़रा संभालकर चोदना नहीं तो सेठजी झड़ जाएँगे.. अब मज़ा कर ले पूरा"
चम्पा ने रूखी की बात मानी पर सिर्फ़ कुछ मिनट.. फिर वह ऐसी गरम हुई कि उछल-उछल कर उसे पूरे ज़ोर से चोदने लगी.. उसने उसे ऐसे चोदा कि पाँच मिनट में झड गई, मदन ने बड़ी मुश्किल से अपना वीर्य निकालने से रोका..
रूखी अभी और मस्ती करना चाहती थी इसीलिए चिढ़ गई.. उसके मुँह पर से उतरते हुए बोली "अरी ओ मूर्ख लड़की, अभी सेठ का काम तमाम हो जाता.. मैं कह रही थी सब्र कर और मज़ा कर.. मैं तो घंटों चोदती हूँ शेठजी को.. अब उतर नीचे नलायक वरना मैं भूखी रह जाऊँगी"
रूखी ने पहले मदन का लंड चाट कर साफ किया.. फिर उंगली से चम्पा की बुर से निकले पानी को साफ करके उंगली चाटने लगी
"अमम बड़ा लजीज है तेरा पानी.. तू ज़रा टाँगें खोल, ठीक से साफ कर देती हूँ" उसने उंगली से बार-बार चम्पा की बुर पुंछी और चाटी.. फिर झुक कर चम्पा की जाँघ पर बहे उसके चूत के पानी को चाट कर साफ कर दिया..
काफी देर तक दोनों ने अदला बदली का यह खेल जारी रखा.. कभी रूखी लंड पर बैठती तो चम्पा मुंह की सवारी करती तो कभी चम्पा घुड़सवारी का आनंद लेती और रूखी अपने दोनों विशाल चूतड़ों को फैलाकर मदन के मुंह पर बुर घिसाई करती.. मदन को रूखी के दोनों कूल्हों को पकड़कर सहारा देना पड़ता.. जब रूखी अपनी चूत रगड़ती तब मदन की नजर रूखी की सिकुड़ते फैलते गांड के छेद पर पड़ी और उसकी नियत डोल गई

जब दोनों चुदासी बुरें यह खेल खेलते हुए थक कर बेड पर बैठ गई तब आखिर मदन खड़ा हुआ.. अपने तने हुए गीले लंड को मसलने लगा.. थकी होने के बावजूद चम्पा ललचा कर उसके सामने बैठ कर उसे चूसने की कोशिश करने लगी तो मदन ने उसे रोक दिया..
"रुक जा चम्पा, तुझे अब बाद में खुश करूँगा, पहले तेरी इस चुदैल भाभी की गांड मारनी है.. कब से मेरे मुंह के ऊपर मचल रही थी.. चल रूखी, तैयार हो जा"
यह सुनते ही रूखी चुपचाप बिस्तर पर ओंधी लेट गई
"अब दुखेगा रे मुझे, देख कैसे खड़ा है शेठजी का लंड मूसल जैसा"
चम्पा बड़े उत्साह से मदन की ओर मुड़ कर बोली "सेठजी, मेरी मार लो, मुझे मज़ा आएगा.. बहुत दिनों से सोच रही थी कि गांड मरवाने का मज़ा मिले.. उंगली डाल कर और मोमबत्ती घुसेड़ कर कई बार देखा पर सुकून नहीं मिला.. आप से अच्छा लंड कहाँ मिलेगा गांड मरवाने को?"
मदन तैयार हो गया, अंधे को ओर क्या चाहिए दो आँखें! रूखी की गांड तो वो पहले भी मार चुका था.. अब इस नई कोरी गांड में घुसने की कल्पना से ही उसका लंड और उछलने लगा था..
दूसरी तरफ रूखी जान छूटने से खुश थी.. ऐसा नहीं था की उसे अपनी गांड मरवाना पसंद नहीं था.. पर आज वो बेहद थक गई थी
वह बोली "हाय चम्पा, तूने मेरी जान बचा ली.. जान क्या.. तूने तो मेरी गांड बचा ली आज.. चल तेल से मस्त चिकनी कर देती हूँ तेरी गांड, दुखेगा नहीं.. सेठजी, तेल की शीशी कहाँ रखी है?" हँसते हँसते रूखी ने कहा
मदन ने उंगली से इशारा करते हुए ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी हुई पैराशूट की नारियल तेल की बोतल दिखाई.. रूखी तुरंत वह नीले रंग की प्लास्टिक की बोतल ले आई.. फिर चम्पा को ओंधा लिटा कर उसने उसकी गांड में और मदन के लंड को तेल से सराबोर कर दिया..
तेल से चमचमाता हुआ लंड लेकर जब मदन चम्पा पर चढ़ा तो रूखी ने चम्पा के दोनों चूतड़ों को अपने हाथ से फैलाए.. उसके भूरे गुलाबी छेद पर मदन ने सुपाड़ा रखा और ठेलने लगा.. सुपाड़ा सूज कर बड़ा हो गया था फिर भी तेल से स्निग्ध होने के कारण फचाक से एक बार में ही गांड के अंदर घुस गया..

"ऊईईईई मेरी अम्मा.. मर गई मैं तो" चम्पा का शरीर दर्द से ऐंठ गया और वह काँपने लगी थी.. पर छोकरी हिम्मत वाली थी, अपनी जगह से हिली नहीं.. उसे संभलने का मौका देने के लिए मदन एक मिनट रुका और फिर लंड अंदर घुसेड़ने लगा..
इस बार उसने कस के एक धक्के में लंड सट से उसके चूतड़ों के बीच पूरा गाड़ दिया.. अब चम्पा बेचारी दर्द से चीख पड़ी.. सिसकते हुए बोली "माँ मेरी, मर गई मैं, सेठ ने गांड फाड़ दी.. देख ना भाभी, खून तो नहीं निकला ना!"
रूखी उसे चिढ़ाते हुए बोली "आ गई रास्ते पर एक झटके में? बातें तो पटर-पटर करती थी कि गांड मरवाऊँगी.. पर रो मत, कुछ नहीं हुआ है, तेरी गांड सही-सलामत है, बस पूरी खुल गई है चूत जैसी.. सेठजी, आपने भी कितनी बेरहमी से लंड डाल दिया अंदर, धीरे-धीरे पेलना था इस बच्ची के चूतड़ों के बीच जैसे मेरी गांड में पेला था.."
"अरे रूखी, मैं तो तेरी गांड ही मारने वाला था.. पर ये ही मरी जा रही थी ना गांड मराने को! तो सोचा कि दिखा ही दूँ असली मज़ा.. वैसे चम्पा तेरी गांड बहुत मोटी और गूँदाज है, डन्लोप की गद्दी जैसी है, इसे तकलीफ़ नहीं होगी ज़्यादा" उसने चम्पा के चूतड़ दबाते हुए कहा..
उसका लंड अब लोहे की मुसली जैसा उसके चूतड़ों की गहराई में उतर गया था.. चम्पा की गांड बहुत गुदाज और मुलायम थी.. रूखी जितनी टाइट तो नहीं थी पर बहुत गरम थी, भट्टी जैसी.. वह उस पर लेट गया और उसके मम्में पकड़ लिए.. उसके मोटे चूतड़ स्पंज की गद्दी जैसे लग रहे थे.. उसकी चूंचियाँ दबाते हुए वह धीरे-धीरे उसकी गांड मारने लगा..
शुरू में हर धक्के पर उसके मुँह से सिसकी निकल जाती, बेचारी को बहुत दर्द हो रहा होगा.. पर साली पक्की चुदैल थी.. पाँच मिनट में उसे मज़ा आने लगा.. फिर तो वह खुद ही अपनी कमर हिला कर गांड मरवाने की कोशिश करने लगी..
"सेठजी, मारो ना! और जम कर मारो, बहुत मज़ा आ रहा है! हाय भाभी, बहुत अच्छा लग रहा है.. आह सेठ, मारो मेरी गांड हचक-हचक कर, पटक-पटक कर चोदो मेरी गांड को, माँ कसम मैं मर जाऊँगी"

धनाधन धक्के लगाते हुए मदन की जब सांसें फूलने लगी तो रूखी को लगा की वो चम्पा की गांड में ही झड़ जाएगा..
"शेठजी अब बस भी करो.. फट जाएगी बेचारी की गांड" धक्के लगा रहे मदन से रूखी ने कहा
नीचे दबी हुई चम्पा चिलाई "मत रुकना सेठजी.. अंदर ही पिचकारी मार दो.. तब जाकर ही जलन ठंडी होगी"
मदन अब उलझन में था.. रूखी की बात सुनें या चम्पा की.. लेकिन तभी रूखी चम्पा के बगल में टांगें पसारकर ऐसे लेट गई की उसकी फूली हुई डबलरोटी जैसी गीली बुर उभरकर मदन को लुभाने लग गई..
मदन ने धीरे से चम्पा की गांड से लंड निकाला.. पास पड़े नेपकिन से उसे पोंछा और रूखी की खुली जांघों के बीच बैठ गया.. निराश चम्पा यूं ही उलटे पड़े पड़े दोनों का खेल देखने लगी.. वह चाहती तो थी की उसकी गांड-चुदाई जारी रहे पर रूखी के आगे उसकी चली नहीं
बड़े बड़े स्तनों की निप्पलें मसलते हुए कराह रही रूखी, अपने भोसड़े में मदन के लंड के घुसने का इंतज़ार कर रही थी.. मदन ने अपने मुंह से लार निकालकर लोडे को गीला किया.. रूखी के भोसड़े पर सुपाड़ा टिकाया और एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर पेल दिया..

"आह्ह आह्ह उफ्फ़ आह्ह.. जोर सी.. ओह ओह्ह" मदन के हर धक्के के साथ रूखी के मुंह से आवाज़ें निकलती रही
आखिर कुछ मिनटों तक धक्के लगाने के बाद मदन को अपने टट्टे सिकुड़ते हुए महसूस हुए.. उसके लंड पर कब से अत्याचार हो रहा था और अब वह और बर्दाश्त कर सक्ने की स्थिति में नहीं था.. रूखी के शरीर पर झुककर उसके दोनों विराट स्तनों का सपोर्ट लेते हुए उसने आखिरी जोर लगाया और उसके भोसड़े को अपने वीर्य से पवित्र करने लगा.. करीब छह-सात पिचकारियाँ मारकर वह निढाल हो गया.. हांफते हुए वो की मिनटों तक रूखी के बबलों पर ही पड़ा रहा

बगल में लेटे हुए देख रही चम्पा की चूत नए सिरे से गरम हो गई.. पर अब इसका क्या मतलब?? मदन तो झड़कर चूर हो चुका था.. अब तो वो रूखी के शरीर से उतरकर, बेड के कोने पर जाकर लेट गया था.. थकान के कारण उसकी आँख भी लग चुकी थी
करीब आधे घंटे तक सोते रहने के बाद जब उसकी आँख खुली तो उसे महसूस हुआ की बेड पर उसके बगल में कुछ हरकतें हो रही है.. रूखी और चम्पा एक दूसरे के जिस्मों से खेल रही थी.. वहीं पड़े रहकर मदन उनका वह सजातीय खेल देखता रहा
रूखी चम्पा की जांघें फैलाकर अपनी जीभ लपलपाते हुए उसकी बुर चाट रही थी

चम्पा बोली "भाभी, बहुत अच्छा लग रहा है.. तू कितना मस्त करती है मेरी बुर को.. पर देख ना.. मेरी चूंचियाँ फिर टपक रही हैं, सेठजी भी सो गए.. बहुत भारी-भारी लग रहीं हैं.. अब मैं क्या करूँ?"
रूखी ने झुक कर उसके मम्में को प्रेम से चूमते हुए कहा "तो मैं काहे को हूँ मेरी रानी? मैं खाली कर देती हूँ दो मिनट में!"
चम्पा रूखी से लिपट कर खुशी से चहक पड़ी "सच भाभी? बड़ी छुपी रुस्तम निकली तू? मुझे नहीं पता था कि तुझे मेरे दूध की आस होगी!"
रूखी चम्पा को नीचे लिटाते हुए बोली "मेरे खुद का दूध निकलता है पर खुद का दूध कैसे चुसूँ भला..!! जब शेठजी को तेरा दूध चूसते हुए देखा, तब मेरे दिल में आग सी लग गई है.. मैं तो उनके सामने ही पी लेती पर क्या पता वो नाराज़ ना हो जाएँ इसीलिए चुप रही.. उनके हिस्से का दूध पीने में हिचक होती थी.. अब आजा, तेरी छाती हल्की कर दूँ, फिर तेरी बुर हल्की करूँगी"
चम्पा के बगल में लेट कर रूखी ने उसकी निप्पल मुँह में ली और आँखें बंद करके पीने लगी.. उसके चेहरे पर एक अजीब तृप्ति झलक रही थी.. चम्पा ने रूखी का सिर छाती से लगा लिया और उसे दूध पिलाने लगी..

रूखी के बालों में प्यार से उंगलियाँ चलाने लगी.. अब तक वो दोनों ऐसी गरम हो गई थी कि लिपट कर एक दूसरे पर चढ़ कर चूमते हुए कुश्ती खेलने लगी..
"आज तो तुझे कच्चा चबा जाऊँगी.." चम्पा कुछ कहने के लिए मुँह खोलती है मगर रूखी उसके मुँह में अपना मुँह डाल देती है और गहरे-गहरे चुंबन लेने लगती है.. चम्पा बहुत गरम हो जाती है और वो भी रूखी को पूरी तन्मयता से चूमने लगती है...
रूखी पागलों की तरह चम्पा को चूसती है फिर आहिस्ता-आहिस्ता किस करती है.. चम्पा रूखी की नंगी टाँगों पर हाथ फेरती है.. रूखी चम्पा के चूंचियों को दबाती है..और फिर बिस्तर पर धक्का दे कर गिरा देती है.. उसकी चूंचियों पर अपनी चूंचियाँ रगड़ने लगती है..
चम्पा फिर रूखी को बाँहों में भर कर पलट जाती है मगर रूखी फिर से उसके ऊपर आ जाती है.. अब दोनो नंगी औरतें बिस्तर पर लोट रही हैं.. रूखी चम्पा की चूंचियों को मुँह में लेकर चूसती है..
रूखी का सर अपनी चूंचियों पर दबाते हुए रूखी को कहती है, "कुतिया निचोड़ ले सारा दूध पी ले मेरा.." और रूखी यह सुन कर पागल हो जाती है और चम्पा की चूंचियों को काटने लगती है..
"सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स आआआआआआआः" चम्पा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगती हैं.. रूखी उसकी दोनो चूंचियों को काफ़ी देर तक चूसती है.. चम्पा रूखी के नीचे से अपनी चूंचियाँ मसलने लगती है.... रूखी नीचे चूसते हुए चम्पा की टाँगों को खोलती है और उसकी झांटों से भारी हुई चूत देखती है... चूत की फाँकों के बीच से रस टपक रहा था
चम्पा ने कहा "क्या देख रही हो मेरी छिनाल माँ, खा लो सारी मेरी मलाई फिर भी खत्म नहीं होगी.." यह सुनते ही रूखी चूत पर टूट पड़ती है और बिल्ली की तरह चाटने लगती है
"उम्म्म्ममममममममम उम्म्म्ममममम म्म्म्मममममममममममम म्म्म्मममममममममममममममममम म्म्म्ममममम म्म्म्मम म्म्म्मम करती हुई चम्पा ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ भरने लगती है.
चम्पा "आहा आहा छिनाल हरामजादी चूस रंडी और चूस, दिखा आज क्या कर सकती है, चूस चूस ओर ज़ोर से चूस" ओर उसकी आँखें बंद हो जाती है.. वो बिस्तर पर पड़े पड़े हाँफने लगती है.
चम्पा का पानी निकलने ही वाला था वह बोली "मेरा पानी निकलने वाला है.."
रूखी मचलते हुए कहती है "छोड़ दे मेरे मुंह मैं तेरा पानी.." ये कहते हुए उसने चम्पा की चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दी ओर अंदर बाहर कर चोदने लगी.
चम्पा: "उम्म्म् ऊई माँ... आईईईई.. उफ्फ़" उसका पानी छूट गया, रूखी उसकी चूत को चटकारे मारते हुए चाटने लगती है.

कब से शांत पड़े हुए इन दोनों की रति क्रिया को देख कर मदन का मन तो बहुत हा उठकर शामिल होने का पर अब उसका लंड साथ नहीं दे रहा था.. इतनी घनघोर चुदाई के बाद दर्द कर रहा था.. वह वैसे ही पड़ा पड़ा इन दोनों के उठा-पकड़ देखता रहा और सो गया
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