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स्वर्गीय रतन चंदानी मेमोरियल आर्ट एंड साइंस कॉलेज ..
मेरे सामने एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था, आज मेरा यंहा पहला दिन था, सम्पत मां ने सब कुछ जुगाड़ लगा दिया था, मैंने बीएससी करने के लिए यंहा आया हुआ था, ये कॉलेज इस सिटी का जाना मन कॉलेज था और इसकी स्थापना यंहा के एक बड़े बिज़नेस मन राज चंदानी ने अपने पिता के यद् में बनवाया था..
मैंने एक गहरे साँस भरी , मैं थोड़ा नर्वस भी था क्योकि पढाई छोड़े बहुत दिन हो चुके थे , मैं कहा डॉन बनने के सपने देखने लगा था और कहा फिर से वही किताबो का बोझ धोना पड़ेगा , दूसरी तरफ यंहा मेरा कोई दोस्त भी नहीं था जिसके साथ मैं थोड़ी मस्ती कर सकता , खैर सब कुछ सही हो जायेगा यही सोचकर मैं अपने क्लास में गया और एक पीछे की सीट पर बैठ गया .. क्लास अभी खली hi थी ..
थोड़ी hi देर में कोई 50-60 बच्चे वंहा आ चुके थे ,लेकिन अभी भी लास्ट में राखी इस सीट में कोई नहीं बैठा था , मुझे लगा की शायद मुझे यंहा अकेले hi बैठना होगा , मैं अपने स्कूल के दोस्तों को मिस करने लगा था , यंहा सभी किसी न किसी के साथ था सिर्फ मैं hi अकेला था , सभी एक दूसरे से बात कर रहे थे ,ये सामान्य सी बात थी की यंहा अधिकतर यही के स्कूल्ज के बच्चे आते थे या आस पास के छोटे शहरो और गांवो से , और सभी ग्रुप्स में आते थे , मुझे लगा की मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया हु , ये सभी लोग मुझसे बहुत अलग भी थे , अधिकतर तो इंग्लिश में बात करने वाले थे और मैं ठहरा शुद्ध देसी इंसान ..
सच बोलू तो मुझे शहर आये इतने दिन हो गया था लेकिन मुझे कभी नहीं लगा की मैं एक गांव से आया हुआ हु क्योकि मैं जंहा भी रहा वो लोग या तो बेहद hi गरीब थे या फिर बिना पढ़े लिखे गुंडे , लेकिन आज ये सब मुझसे बहुत hi अलग लग रहे थे , मैंने एक सस्ती सी जीन्स और शर्ट पहनी थी जो मुझे लगता था की ये मेरे गांव के सबसे अच्छे और रहिस या पढ़े लिखे लोगो के बच्चे पहनते थे, लेकिन इन लोगो के कपडा भी बड़े hi शानदार थे , लड़कियों को तो जीन्स पहने इतने करीब से मैंने आज hi देखा था कुछ तो स्कर्ट में भी थी ..
इन सब को देखकर मैं और भी नर्वस हो गया था मुझे समझ आ गया था की मुझे पूरा कॉलेज इस लास्ट की बेंच में बैठकर अकेले hi बितानी है मेरा कोई भी दोस्त यंहा नहीं बनने वाला सभी मेरे स्टैण्डर्ड के बहुत ऊपर के लोग है , और स्टैण्डर्ड आखिर मैं मेन्टेन भी कैसे करता , कॉलेज की फीस सम्पत मां दे रहे थे , मेरा और मेरी भाभी का पूरा खर्च तो वही उठा रहे थे अभी तक मैंने उनके लिए कोई काम भी तो नहीं किया था ..
“कहा फंसा दिया मां साला मैं गन चलते हुए hi ठीक था “
मैंने अपने मन में कहा ,
आखिर पहली क्लास शुरू हुई , ये केमिस्ट्री की क्लास थी एक सर अन्दर आये ..
“आज आप लोगो की पहली क्लास है बच्चो आप सभी का हमारे कॉलेज में वेलकम , मेरा नाम पवन है और मैं आप लोगो का केमिस्ट्री का टीचर हु .. क्योकि आज पहली क्लास है तो पढाई करने से अच्छा है क्यों न हम आप सभी का इंट्रोडक्शन ले ले ,आप सभी अपना नाम बोलिये, आपके 12तह स्टैण्डर्ड का परसेंट और साथ hi की आप जीवन ने आगे क्या बनना चाहते है “
परसेंट इसलिए भी पूछा जा रहा था क्योकि यंहा दो hi टाइप के लोगो का एडमिशन होता था या तो जिसने 95% से ऊपर लाये हो या फिर जिसने मैनेजमेंट को अच्छे खासे पैसे खिलाये हो
सर के बोलने के बाद एक एक करके लोग उठाने लगे और अपना अपना इंट्रोडक्शन देने लगे तभी कुछ लोग क्लास के बहार आये
“मई ी के इन सर “
उनमे से एक ने कहा सर ने पहले तो उन्हें घुरा
“पहली क्लास में hi लेट हो तुम लोग , ये कोई टाइम होता है क्या आने का “
“सॉरी सर “
सभी ने एक साथ कहा
“ठीक है अंदर आ जाओ लेकिन यद् रखना आज पहली और आखिरी बार है अब लेट आये तो अंदर आने नहीं दूंगा “
मैंने देखा की वो दो लड़कियों और दो लड़को का एक ग्रुप था ,वो देखने से hi बड़े hi जाहिं लोग लग रहे थे , दो लड़कियों में एक ने पिंक और दूसरे ने ब्लैक स्कर्ट पहनी थी दोनों hi चेहरे से अच्छे घर के लग रहे थे वही उनके चेहरे की चमक और खूबसूरती ऐसी थी की एक बार को क्लास में सभी की नजरे उनपर hi जाकर टिक गई थी , साथ hi दोनों लड़के भी बड़े hi ड्रेसिंग लग रहे थे , वो अंदर तो आ गए लेकिन फिर आंखे घुमाकर बैठने के लिए जगह देखने लगे , पूरा क्लास भरा हुआ था सिवाय मेरे और मेरे बाजु वाले टेबल के एक टेबल में दो लोग आराम से बैठ सकते थे और एडजस्ट करके 3 भी , लास्ट में खली टेबल को देखकर सभी की आंखे चमक गई ..वही मेरे दिल की धड़कने अचानक से hi बाद गई , मैंने तो सोचा था की मैं पुरे कॉलेज अकेले hi रहने वाला हु और ये सेल तो बड़े hi हाई क्लास लग रहे थे पता नहीं लेकिन मैं और भी नर्वस होने लगा था ,मैं ठहरा गांव का एक सीधा साधा आदमी पता नहीं क्यों मेरे दिगमग में अजीब तरह की बाटे आ रही थी, मुझे लगा जैसे मैं खुद को इन सबसे इन्फीरियर महसूस कर रहा था और यही कारण था की मेरे दिल की धड़कने भी तेज हो गयी थी ,
“बॉस क्या हम दोनों यंहा बैठ सकते है ?“
एक लड़के ने कहा, मैंने बस हां में सर हिला दिया
दोनों लड़के मेरे बाजु में बैठे वही दोनों लड़किया बाजु वाले टेबल में , बैठते hi उन्होंने एक दूसरे के साथ खुसुर फुसुर शुरू कर दी थी किसी ने अभी तक मुझसे कोई बात नहीं की थी वही लोग एक एक करके अपना इंट्रोडक्शन दे रहे थे , मुझे देख के आश्चर्य भी हुआ की सेल यंहा सभी के सभी 90% के ऊपर वाले hi है ,जब सम्पत मां ने मेरी मार्कशीट में 96% डलवाये थे मैंने उनसे कहा था की मां ये थोड़ा जयदा हो जायेगा ,लेकिन यंहा आने के बाद पता चला की लोग सच में इतना लाते भी है ..
अब आखिरी no. हम लोगो का था , लड़कियों ने शुरू किया ,पहले पिंक वाली कड़ी हुई
“होई माइसेल्फ नेहा , मेरा परसेंटेज 95.56 है और मैं आगे जाकर बॉटनी से पीएचडी करना चाहती हु क्योकि मुझे नेचर से बहुत प्यार है और खासकर प्लांट्स से “
वो बैठी और ब्लैक वाली खड़े हो गई
“ही माइसेल्फ मोनिका, मेरा परसेंटेज 92 , और मैं आगे चलकर मॉडलिंग करना चाहती हु ..”
उसकी बात सुनकर सभी का ध्यान उसपर चला गया वो थी भी बहुत खूबसूरत और साथ hi उसका ऐटिटूड और कॉन्फिडेंस भी कमाल का था , लड़को की नजर देख कर hi मैं समझ गया था की ये इस क्लास के सभी लड़को के दिल का धड़कन बनने वाली है
उसके बाद साइड वाला लड़का खड़ा हुआ
“ही मेरा नाम है अर्जित और मेरा परसेंटेज है 85% (सभी उसकी और देखने लगे क्यों की ये अब तक का सबसे काम था ,समझ में आता था की इसके बाप ने अच्छे पैसे दिए होंगे ) और मैं आगे चलकर राज चंदानी जैसा बिज़नेस मन बनना चाहता हु और इसके साथ hi साथ मैं मॉडलिंग भी करना चाहता हु “
क्लास की कुछ लड़किया उसे ऐसे देख रही थी की उनकी आँखों से hi पता चल रहा था की वो इस लड़के से कितना इम्प्रेस है ..
मैंने एक बार अर्जित की और देखा सच में उसकी पर्सनालिटी में कोई बात तो थी , lamba-chouda , gora-nara , hatta-katta लड़का था ,साथ hi दिखने में भी बहुत hi हैंडसम था
फिर मेरे बाजु में बैठा लड़का उठा
“ही दोस्तों मेरा नाम आकाश है आप मुझे प्यार से अक्की भी बोल सकते है , मेरा परसेंटेज 96 था और मैं आगे केमिस्ट्री से पीएचडी करना चाहता हु , मुझे चेमिकल्स और उसके कॉम्बिनेशंस बेहद hi पसंद है मैं उनही पर रिसर्च करना चाहता हु “
(दोस्तों यंहा पर आकाश अक अक्की का करैक्टर में मैंने हमारे प्यारे दोस्त भाई को पोर्ट्रेट करने की कोशिस की है , जितना मैं उन्हें समझ पाया हु ,उन्हें एक वडा किया था की मैं उनको अपनी स्टोरी में पोर्ट्रेट करूँगा , तो ये रहे हमारे अक्की भाई )
उसकी आवाज बहुत hi सॉफ्ट थी , एक छरहरे बदन का लड़का था मेरे hi जैसा था लेकिन उसके चेहरे , आवाज और आँखों में एक मासूमियत थी , साथ hi साथ एक चार्म भी था… मैंने इतने देर में पवन सर को पहली बार किसी का इंट्रो सुनकर खुस होते देखा था , शायद वो इसलिए भी क्योकि वो खुद भी केमिस्ट्री के टीचर थे ..
इन सबके बाद मेरी बरी आयी , मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा था , लोग इंट्रो सुन सुनकर ऐसे भी बोर हो चुके थे और मैं ईंटो देने वाला अंतिम शख्श था
“जी मेरा नाम अंकित है (मेरे मुँह से सोनू निकलने वाला था फिर एक बार शिवा यद् आया लेकिन फिर यद् आया की यंहा के लिए मेरा नाम अंकित है ) ..
जी मेरा परसेंटेज ..(मैं थोड़ी देर सोच में पद गया ) जी वो 96 है “
और मैं चुप हो गया , मेरी अजीब बातो ने सभी का ध्यान मेरी और खींच लिया था सभी मुझे अजीब निगाहो से घर रहे थे और साथ hi मेरे साथ बैठे लोग भी जो अभी तक मेरी तरफ कोई भी ध्यान नहीं दे रहे थे ..
“तुमने बताया नहीं की तुम आगे जाकर क्या करना चाहते हो “
पवन सर ने कहा और मैं थोड़ा सोच में पद गया की ये क्या मुसीबत है
“सर कुछ भी कर लूंगा बस मेरी भाभी माँ को वो पसंद आये, रोजी रोटी चलनी चाहिए ..ऐसे भी तो मजदूरी hi कर के गुजरा कर रहे है, पढ़ लेंगे तो शायद कुछ अच्छी कमाई कर ले ”
एक बार को ऐसा लगा जैसे सभी को सांप hi सूंघ गया हो..
लेकिन फिर पवन सर ना जाने क्यों ताली बजने लगे , मैं खुद भी शॉक में था की आखिर उन्हें क्या हुआ है
“बहुत बढ़िया , देखो बच्चो हमारे साथ एक ऐसा शख्स भी है जिसने अपनी विषम परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और 96% के साथ इस कॉलेज में हमारे साथ है , इसे कहते है स्पिरिट , इसे अपनी नहीं बल्कि अपने फॅमिली की चिंता है .. गुड बेटे तुम्हारी भाभी माँ को तुम्हारे ऊपर गर्व होगा और तुम उन्हें एक अच्छी जिंदगी दे पाओगे जैसा म्हणत तुमने 12तह में किया था वैसा hi यंहा भी करना और अच्छे ग्रेड से ग्रेजुएट होना हम तुम्हे स्कालरशिप दिलवेनेगे ताकि तुम आगे की पढाई कर सको… गरीबी में भी पढ़ने का हौसला इसे कहते है बच्चो इससे कुछ सीखो आप लोग भी ..”
पुरे क्लास में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी थी , मुझे खुद भी यकीं नहीं हो रहा था की लोग फेक मार्कशीट से मिले फेक नाम वाले इंसान के फेक ग्रेड के ऊपर तालिया बजा रहे थे … किसी ने सच hi कहा है की जो दीखता है वो बिकता है ….
क्लास मेरे इंट्रो के साथ hi ख़त्म हो गई , मैं अभी इन सबसे सम्हाल पता उससे पहले hi मेरे बाजु वाला शख्स बोल पड़ा ..
“ही ी ऍम अक्की , तुमने कोण से स्कूल से पढाई की है “
वो अपना हाथ मेरे और बढ़ाते हुए बोलने लगा उसके बाद hi अर्जित ने मुझसे हाथ मिलाया.. वही मोनिका और नेहा ने मुझे दूर से hi होई कहा , ये सब करते हुए मैं अपने दिमाग में उस स्कूल का नाम सोच रहा था जो की मेरे मार्कशीट में था ..
“गवर्नमेंट स्कूल “
मुझे बस इतना hi यद् आया था स्कूल का नाम भी मैं भूल गया था..
“वाओ गवर्नमेंट स्कूल से भी पढ़कर तुमने बहुत अच्छा मार्क लाया है , और वो भी काम करते हुए यू अरे ग्रेट मन”
पिंक ड्रेस वाली पारी बोल उठी जिसका नाम नेहा था , लेकिन इन सबमे मुझे समझ आ गया था की लोग मुझे इतना भाव क्यों दे रहे थे , मेरा परसेंट और साथ hi ये की मैंने मजदूरी करते हुए पढाई की है , अब हंसी तो मुझे भी आ रही थी लेकिन मैं उसे रोके हुए था , मेरे कपडा ऐसे भी गरीबो वाले hi थे और अभी के हालात में मैं था भी एक गरीब ग़ुरबत में पड़ा हुआ आदमी . और सम्पत मां की बनायीं मार्कशीट के मार्क ने उसमे चार चाँद लगा दिए थे. देखने से ऐसा लग रहा था की मैंने बहुत hi म्हणत और संघर्ष करके ये मार्क लाये है और इतने बड़े कॉलेज में एडमिशन के काबिल बन पाया हु ..
“थैंक्स …”
मैंने नम्रता के साथ कहा
“तो तुम क्या काम करते थे स्कूल के टाइम पर “
अर्जित ने पूछा, ये सेल आमिर लोगो को गरीबो के जीवन में थोड़ा जयदा hi इंटरेस्ट होता है
“वो मैं सामान ढुलाई का काम करता था , ट्रैक्स में सामान डालना और उतरने का काम था ..”
मैंने लाला के पास किये काम का बयां कर दिया था , वो लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं कोई एलियन हु ..
“ओह माय गॉड ये तो बहुत hi म्हणत का काम होता है यार , तुम पढ़ते कब थे , टाइम मिल जाता था ??”
इस बार भी नेहा hi थी उसके आवाज में एक दर्द था , दर्द मेरे लिए , उसका मासूम सा चेहरा उसके दुःख को और भी खिल कर बहार निकाल रहा था ..जब इतना हो hi चूका था तो मैंने सोचा की क्यों न थोड़ा और मिर्च मसाला लगा दिया जाय..
“है काम से आता था उसके बाद खोली में बैठकर रत में पढ़ लेता था, अधिकतर वंहा लाइट नहीं होती थी तो स्ट्रीट लाइट के निचे बैठकर पढ़ा करता था “
मैंने ये सुन रखा था की कई महँ इंसानो ने स्ट्रीट लाइट के निचे पढ़कर काबिलियत हासिल की थी वही चीज मैंने यंहा चिपका दी थी ..
“ओह माय गॉड ..”
दोनों लड़किया एक साथ बोल उठी
“कोई नहीं दोस्त तू फ़िक्र मत कर अब हम तेरे साथ है , तुझे किसी भी चीज की जरुरत हो तो हमें बोल देना , और आज से तू अपना दोस्त है, आज से हमारा 4 का नहीं बल्कि 5 का ग्रुप होगा , क्यों दोस्तों “
अर्जित ने बहुत hi गर्मजोशी के साथ कहा, और सभी ने एक स्वर में है से है मिलाया ..
भगवन सच में दयालु है , कुछ झूठ से hi सही लेकिन मुझे ऐसे दोस्त मिल गए थे जो सच में गरीबो की और उनके म्हणत की इज्जत करते थे , उनके दर्द के लिए जिनके दिल में संवेदनाये थी, शायद अब मेरा कॉलेज अकेले इस लास्ट बेंच में बैठकर नहीं बीतेगा , ये लोग मुझे बड़े hi सच्चे लगे थे और मैं इनके साथ खुश भी था , ये मेरे साथ एक दोस्त की तरह hi वयवहार करने लगे थे शुरू में मैं hi थोड़ा नर्वस था लेकिन कुछ hi देर में मुझे लगा की ये भी मेरे पुराने दोस्तों की hi तरह है बस थोड़े अलग परिवेश में पीला बढे है ..
अब मेरे होठो में एक मुस्कान थी और साथ hi दिल में एक जोरो की इक्छा जाएगी की जल्दी से घर जाकर सब कुछ भाभी को बताऊ …
स्वर्गीय रतन चंदानी मेमोरियल आर्ट एंड साइंस कॉलेज ..
मेरे सामने एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था, आज मेरा यंहा पहला दिन था, सम्पत मां ने सब कुछ जुगाड़ लगा दिया था, मैंने बीएससी करने के लिए यंहा आया हुआ था, ये कॉलेज इस सिटी का जाना मन कॉलेज था और इसकी स्थापना यंहा के एक बड़े बिज़नेस मन राज चंदानी ने अपने पिता के यद् में बनवाया था..
मैंने एक गहरे साँस भरी , मैं थोड़ा नर्वस भी था क्योकि पढाई छोड़े बहुत दिन हो चुके थे , मैं कहा डॉन बनने के सपने देखने लगा था और कहा फिर से वही किताबो का बोझ धोना पड़ेगा , दूसरी तरफ यंहा मेरा कोई दोस्त भी नहीं था जिसके साथ मैं थोड़ी मस्ती कर सकता , खैर सब कुछ सही हो जायेगा यही सोचकर मैं अपने क्लास में गया और एक पीछे की सीट पर बैठ गया .. क्लास अभी खली hi थी ..
थोड़ी hi देर में कोई 50-60 बच्चे वंहा आ चुके थे ,लेकिन अभी भी लास्ट में राखी इस सीट में कोई नहीं बैठा था , मुझे लगा की शायद मुझे यंहा अकेले hi बैठना होगा , मैं अपने स्कूल के दोस्तों को मिस करने लगा था , यंहा सभी किसी न किसी के साथ था सिर्फ मैं hi अकेला था , सभी एक दूसरे से बात कर रहे थे ,ये सामान्य सी बात थी की यंहा अधिकतर यही के स्कूल्ज के बच्चे आते थे या आस पास के छोटे शहरो और गांवो से , और सभी ग्रुप्स में आते थे , मुझे लगा की मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया हु , ये सभी लोग मुझसे बहुत अलग भी थे , अधिकतर तो इंग्लिश में बात करने वाले थे और मैं ठहरा शुद्ध देसी इंसान ..
सच बोलू तो मुझे शहर आये इतने दिन हो गया था लेकिन मुझे कभी नहीं लगा की मैं एक गांव से आया हुआ हु क्योकि मैं जंहा भी रहा वो लोग या तो बेहद hi गरीब थे या फिर बिना पढ़े लिखे गुंडे , लेकिन आज ये सब मुझसे बहुत hi अलग लग रहे थे , मैंने एक सस्ती सी जीन्स और शर्ट पहनी थी जो मुझे लगता था की ये मेरे गांव के सबसे अच्छे और रहिस या पढ़े लिखे लोगो के बच्चे पहनते थे, लेकिन इन लोगो के कपडा भी बड़े hi शानदार थे , लड़कियों को तो जीन्स पहने इतने करीब से मैंने आज hi देखा था कुछ तो स्कर्ट में भी थी ..
इन सब को देखकर मैं और भी नर्वस हो गया था मुझे समझ आ गया था की मुझे पूरा कॉलेज इस लास्ट की बेंच में बैठकर अकेले hi बितानी है मेरा कोई भी दोस्त यंहा नहीं बनने वाला सभी मेरे स्टैण्डर्ड के बहुत ऊपर के लोग है , और स्टैण्डर्ड आखिर मैं मेन्टेन भी कैसे करता , कॉलेज की फीस सम्पत मां दे रहे थे , मेरा और मेरी भाभी का पूरा खर्च तो वही उठा रहे थे अभी तक मैंने उनके लिए कोई काम भी तो नहीं किया था ..
“कहा फंसा दिया मां साला मैं गन चलते हुए hi ठीक था “
मैंने अपने मन में कहा ,
आखिर पहली क्लास शुरू हुई , ये केमिस्ट्री की क्लास थी एक सर अन्दर आये ..
“आज आप लोगो की पहली क्लास है बच्चो आप सभी का हमारे कॉलेज में वेलकम , मेरा नाम पवन है और मैं आप लोगो का केमिस्ट्री का टीचर हु .. क्योकि आज पहली क्लास है तो पढाई करने से अच्छा है क्यों न हम आप सभी का इंट्रोडक्शन ले ले ,आप सभी अपना नाम बोलिये, आपके 12तह स्टैण्डर्ड का परसेंट और साथ hi की आप जीवन ने आगे क्या बनना चाहते है “
परसेंट इसलिए भी पूछा जा रहा था क्योकि यंहा दो hi टाइप के लोगो का एडमिशन होता था या तो जिसने 95% से ऊपर लाये हो या फिर जिसने मैनेजमेंट को अच्छे खासे पैसे खिलाये हो
सर के बोलने के बाद एक एक करके लोग उठाने लगे और अपना अपना इंट्रोडक्शन देने लगे तभी कुछ लोग क्लास के बहार आये
“मई ी के इन सर “
उनमे से एक ने कहा सर ने पहले तो उन्हें घुरा
“पहली क्लास में hi लेट हो तुम लोग , ये कोई टाइम होता है क्या आने का “
“सॉरी सर “
सभी ने एक साथ कहा
“ठीक है अंदर आ जाओ लेकिन यद् रखना आज पहली और आखिरी बार है अब लेट आये तो अंदर आने नहीं दूंगा “
मैंने देखा की वो दो लड़कियों और दो लड़को का एक ग्रुप था ,वो देखने से hi बड़े hi जाहिं लोग लग रहे थे , दो लड़कियों में एक ने पिंक और दूसरे ने ब्लैक स्कर्ट पहनी थी दोनों hi चेहरे से अच्छे घर के लग रहे थे वही उनके चेहरे की चमक और खूबसूरती ऐसी थी की एक बार को क्लास में सभी की नजरे उनपर hi जाकर टिक गई थी , साथ hi दोनों लड़के भी बड़े hi ड्रेसिंग लग रहे थे , वो अंदर तो आ गए लेकिन फिर आंखे घुमाकर बैठने के लिए जगह देखने लगे , पूरा क्लास भरा हुआ था सिवाय मेरे और मेरे बाजु वाले टेबल के एक टेबल में दो लोग आराम से बैठ सकते थे और एडजस्ट करके 3 भी , लास्ट में खली टेबल को देखकर सभी की आंखे चमक गई ..वही मेरे दिल की धड़कने अचानक से hi बाद गई , मैंने तो सोचा था की मैं पुरे कॉलेज अकेले hi रहने वाला हु और ये सेल तो बड़े hi हाई क्लास लग रहे थे पता नहीं लेकिन मैं और भी नर्वस होने लगा था ,मैं ठहरा गांव का एक सीधा साधा आदमी पता नहीं क्यों मेरे दिगमग में अजीब तरह की बाटे आ रही थी, मुझे लगा जैसे मैं खुद को इन सबसे इन्फीरियर महसूस कर रहा था और यही कारण था की मेरे दिल की धड़कने भी तेज हो गयी थी ,
“बॉस क्या हम दोनों यंहा बैठ सकते है ?“
एक लड़के ने कहा, मैंने बस हां में सर हिला दिया
दोनों लड़के मेरे बाजु में बैठे वही दोनों लड़किया बाजु वाले टेबल में , बैठते hi उन्होंने एक दूसरे के साथ खुसुर फुसुर शुरू कर दी थी किसी ने अभी तक मुझसे कोई बात नहीं की थी वही लोग एक एक करके अपना इंट्रोडक्शन दे रहे थे , मुझे देख के आश्चर्य भी हुआ की सेल यंहा सभी के सभी 90% के ऊपर वाले hi है ,जब सम्पत मां ने मेरी मार्कशीट में 96% डलवाये थे मैंने उनसे कहा था की मां ये थोड़ा जयदा हो जायेगा ,लेकिन यंहा आने के बाद पता चला की लोग सच में इतना लाते भी है ..
अब आखिरी no. हम लोगो का था , लड़कियों ने शुरू किया ,पहले पिंक वाली कड़ी हुई
“होई माइसेल्फ नेहा , मेरा परसेंटेज 95.56 है और मैं आगे जाकर बॉटनी से पीएचडी करना चाहती हु क्योकि मुझे नेचर से बहुत प्यार है और खासकर प्लांट्स से “
वो बैठी और ब्लैक वाली खड़े हो गई
“ही माइसेल्फ मोनिका, मेरा परसेंटेज 92 , और मैं आगे चलकर मॉडलिंग करना चाहती हु ..”
उसकी बात सुनकर सभी का ध्यान उसपर चला गया वो थी भी बहुत खूबसूरत और साथ hi उसका ऐटिटूड और कॉन्फिडेंस भी कमाल का था , लड़को की नजर देख कर hi मैं समझ गया था की ये इस क्लास के सभी लड़को के दिल का धड़कन बनने वाली है
उसके बाद साइड वाला लड़का खड़ा हुआ
“ही मेरा नाम है अर्जित और मेरा परसेंटेज है 85% (सभी उसकी और देखने लगे क्यों की ये अब तक का सबसे काम था ,समझ में आता था की इसके बाप ने अच्छे पैसे दिए होंगे ) और मैं आगे चलकर राज चंदानी जैसा बिज़नेस मन बनना चाहता हु और इसके साथ hi साथ मैं मॉडलिंग भी करना चाहता हु “
क्लास की कुछ लड़किया उसे ऐसे देख रही थी की उनकी आँखों से hi पता चल रहा था की वो इस लड़के से कितना इम्प्रेस है ..
मैंने एक बार अर्जित की और देखा सच में उसकी पर्सनालिटी में कोई बात तो थी , lamba-chouda , gora-nara , hatta-katta लड़का था ,साथ hi दिखने में भी बहुत hi हैंडसम था
फिर मेरे बाजु में बैठा लड़का उठा
“ही दोस्तों मेरा नाम आकाश है आप मुझे प्यार से अक्की भी बोल सकते है , मेरा परसेंटेज 96 था और मैं आगे केमिस्ट्री से पीएचडी करना चाहता हु , मुझे चेमिकल्स और उसके कॉम्बिनेशंस बेहद hi पसंद है मैं उनही पर रिसर्च करना चाहता हु “
(दोस्तों यंहा पर आकाश अक अक्की का करैक्टर में मैंने हमारे प्यारे दोस्त भाई को पोर्ट्रेट करने की कोशिस की है , जितना मैं उन्हें समझ पाया हु ,उन्हें एक वडा किया था की मैं उनको अपनी स्टोरी में पोर्ट्रेट करूँगा , तो ये रहे हमारे अक्की भाई )
उसकी आवाज बहुत hi सॉफ्ट थी , एक छरहरे बदन का लड़का था मेरे hi जैसा था लेकिन उसके चेहरे , आवाज और आँखों में एक मासूमियत थी , साथ hi साथ एक चार्म भी था… मैंने इतने देर में पवन सर को पहली बार किसी का इंट्रो सुनकर खुस होते देखा था , शायद वो इसलिए भी क्योकि वो खुद भी केमिस्ट्री के टीचर थे ..
इन सबके बाद मेरी बरी आयी , मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा था , लोग इंट्रो सुन सुनकर ऐसे भी बोर हो चुके थे और मैं ईंटो देने वाला अंतिम शख्श था
“जी मेरा नाम अंकित है (मेरे मुँह से सोनू निकलने वाला था फिर एक बार शिवा यद् आया लेकिन फिर यद् आया की यंहा के लिए मेरा नाम अंकित है ) ..
जी मेरा परसेंटेज ..(मैं थोड़ी देर सोच में पद गया ) जी वो 96 है “
और मैं चुप हो गया , मेरी अजीब बातो ने सभी का ध्यान मेरी और खींच लिया था सभी मुझे अजीब निगाहो से घर रहे थे और साथ hi मेरे साथ बैठे लोग भी जो अभी तक मेरी तरफ कोई भी ध्यान नहीं दे रहे थे ..
“तुमने बताया नहीं की तुम आगे जाकर क्या करना चाहते हो “
पवन सर ने कहा और मैं थोड़ा सोच में पद गया की ये क्या मुसीबत है
“सर कुछ भी कर लूंगा बस मेरी भाभी माँ को वो पसंद आये, रोजी रोटी चलनी चाहिए ..ऐसे भी तो मजदूरी hi कर के गुजरा कर रहे है, पढ़ लेंगे तो शायद कुछ अच्छी कमाई कर ले ”
एक बार को ऐसा लगा जैसे सभी को सांप hi सूंघ गया हो..
लेकिन फिर पवन सर ना जाने क्यों ताली बजने लगे , मैं खुद भी शॉक में था की आखिर उन्हें क्या हुआ है
“बहुत बढ़िया , देखो बच्चो हमारे साथ एक ऐसा शख्स भी है जिसने अपनी विषम परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और 96% के साथ इस कॉलेज में हमारे साथ है , इसे कहते है स्पिरिट , इसे अपनी नहीं बल्कि अपने फॅमिली की चिंता है .. गुड बेटे तुम्हारी भाभी माँ को तुम्हारे ऊपर गर्व होगा और तुम उन्हें एक अच्छी जिंदगी दे पाओगे जैसा म्हणत तुमने 12तह में किया था वैसा hi यंहा भी करना और अच्छे ग्रेड से ग्रेजुएट होना हम तुम्हे स्कालरशिप दिलवेनेगे ताकि तुम आगे की पढाई कर सको… गरीबी में भी पढ़ने का हौसला इसे कहते है बच्चो इससे कुछ सीखो आप लोग भी ..”
पुरे क्लास में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी थी , मुझे खुद भी यकीं नहीं हो रहा था की लोग फेक मार्कशीट से मिले फेक नाम वाले इंसान के फेक ग्रेड के ऊपर तालिया बजा रहे थे … किसी ने सच hi कहा है की जो दीखता है वो बिकता है ….
क्लास मेरे इंट्रो के साथ hi ख़त्म हो गई , मैं अभी इन सबसे सम्हाल पता उससे पहले hi मेरे बाजु वाला शख्स बोल पड़ा ..
“ही ी ऍम अक्की , तुमने कोण से स्कूल से पढाई की है “
वो अपना हाथ मेरे और बढ़ाते हुए बोलने लगा उसके बाद hi अर्जित ने मुझसे हाथ मिलाया.. वही मोनिका और नेहा ने मुझे दूर से hi होई कहा , ये सब करते हुए मैं अपने दिमाग में उस स्कूल का नाम सोच रहा था जो की मेरे मार्कशीट में था ..
“गवर्नमेंट स्कूल “
मुझे बस इतना hi यद् आया था स्कूल का नाम भी मैं भूल गया था..
“वाओ गवर्नमेंट स्कूल से भी पढ़कर तुमने बहुत अच्छा मार्क लाया है , और वो भी काम करते हुए यू अरे ग्रेट मन”
पिंक ड्रेस वाली पारी बोल उठी जिसका नाम नेहा था , लेकिन इन सबमे मुझे समझ आ गया था की लोग मुझे इतना भाव क्यों दे रहे थे , मेरा परसेंट और साथ hi ये की मैंने मजदूरी करते हुए पढाई की है , अब हंसी तो मुझे भी आ रही थी लेकिन मैं उसे रोके हुए था , मेरे कपडा ऐसे भी गरीबो वाले hi थे और अभी के हालात में मैं था भी एक गरीब ग़ुरबत में पड़ा हुआ आदमी . और सम्पत मां की बनायीं मार्कशीट के मार्क ने उसमे चार चाँद लगा दिए थे. देखने से ऐसा लग रहा था की मैंने बहुत hi म्हणत और संघर्ष करके ये मार्क लाये है और इतने बड़े कॉलेज में एडमिशन के काबिल बन पाया हु ..
“थैंक्स …”
मैंने नम्रता के साथ कहा
“तो तुम क्या काम करते थे स्कूल के टाइम पर “
अर्जित ने पूछा, ये सेल आमिर लोगो को गरीबो के जीवन में थोड़ा जयदा hi इंटरेस्ट होता है
“वो मैं सामान ढुलाई का काम करता था , ट्रैक्स में सामान डालना और उतरने का काम था ..”
मैंने लाला के पास किये काम का बयां कर दिया था , वो लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं कोई एलियन हु ..
“ओह माय गॉड ये तो बहुत hi म्हणत का काम होता है यार , तुम पढ़ते कब थे , टाइम मिल जाता था ??”
इस बार भी नेहा hi थी उसके आवाज में एक दर्द था , दर्द मेरे लिए , उसका मासूम सा चेहरा उसके दुःख को और भी खिल कर बहार निकाल रहा था ..जब इतना हो hi चूका था तो मैंने सोचा की क्यों न थोड़ा और मिर्च मसाला लगा दिया जाय..
“है काम से आता था उसके बाद खोली में बैठकर रत में पढ़ लेता था, अधिकतर वंहा लाइट नहीं होती थी तो स्ट्रीट लाइट के निचे बैठकर पढ़ा करता था “
मैंने ये सुन रखा था की कई महँ इंसानो ने स्ट्रीट लाइट के निचे पढ़कर काबिलियत हासिल की थी वही चीज मैंने यंहा चिपका दी थी ..
“ओह माय गॉड ..”
दोनों लड़किया एक साथ बोल उठी
“कोई नहीं दोस्त तू फ़िक्र मत कर अब हम तेरे साथ है , तुझे किसी भी चीज की जरुरत हो तो हमें बोल देना , और आज से तू अपना दोस्त है, आज से हमारा 4 का नहीं बल्कि 5 का ग्रुप होगा , क्यों दोस्तों “
अर्जित ने बहुत hi गर्मजोशी के साथ कहा, और सभी ने एक स्वर में है से है मिलाया ..
भगवन सच में दयालु है , कुछ झूठ से hi सही लेकिन मुझे ऐसे दोस्त मिल गए थे जो सच में गरीबो की और उनके म्हणत की इज्जत करते थे , उनके दर्द के लिए जिनके दिल में संवेदनाये थी, शायद अब मेरा कॉलेज अकेले इस लास्ट बेंच में बैठकर नहीं बीतेगा , ये लोग मुझे बड़े hi सच्चे लगे थे और मैं इनके साथ खुश भी था , ये मेरे साथ एक दोस्त की तरह hi वयवहार करने लगे थे शुरू में मैं hi थोड़ा नर्वस था लेकिन कुछ hi देर में मुझे लगा की ये भी मेरे पुराने दोस्तों की hi तरह है बस थोड़े अलग परिवेश में पीला बढे है ..
अब मेरे होठो में एक मुस्कान थी और साथ hi दिल में एक जोरो की इक्छा जाएगी की जल्दी से घर जाकर सब कुछ भाभी को बताऊ …