Adultery BHABHI MAA - Page 5 - SexBaba
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Adultery BHABHI MAA

अपडेट 40


हम वही खड़े थे जंहा से चले थे , मेरा गांव ..

काजल किसी काम की वजह से हमारे साथ नहीं आयी थी , नेहा , mahima(Neha की माँ ) , भाभी और मैं एक गाड़ी से रातो रत यंहा पहुंच गए थे ..

वही कॉलेज के बहार की छोटी सी चाय की टापरी जो की अभी बंद थी ..

उसे देखकर भाभी एक बार के लिए इमोशनल हो गयी ..

भाभी ने अपने घर का पता बताया , घर क्या था 2 कमरों की छोपडी hi कहिये ..

लेकिन उसमे भी टाला लगा था ,

पड़ोस की महिला ने जैसे hi भाभी को देखा वो उन्हें गाला लगाकर रोने लगी ..

“आरती तू कहा थी , और ये क्या सुनने में आया की तू अपने देवर के साथ भाग गयी .. ऐसा क्यों किया बेटी तूने .. तेरे माँ बाप तो जैसे टूट hi गए ये सब सुनकर “

उस महिला की बात से भाभी पर क्या असर हुआ ये तो मुझे नहीं पता लेकिन है मुझे अपने भाई पर जरूर जोरो का गुस्सा आया , जो गुस्सा उस समय हालत की वजह से मैंने अपने अंदर दबा लिया था .. उसने न सिर्फ हमें हमारे hi घर और जिंदगी से निकाल दिया बल्कि हमारे पवित्र रिश्ते को भी बदनाम किया था ..

“माँ बाबू जी कहा है काकी “

भाभी ने अपने आप को सम्हालता हुए कहा

“क्या पता बेटी जब से वो खबर आयी कुछ दिन तक तो उन्होंने तुम्हारा राष्ट देखा लेकिन फिर अचानक से गायब हो गए किसी को कुछ भी नहीं बताया की कहा जा रहे है कब आएंगे ..”

उनकी बात सुनकर सभी के माथे में बल पद गए थे ..

अब आखिर ये लोग कहा गायब हो गए थे ..

मैंने सबसे दूर हटकर काजल को फ़ोन लगा दिया ..

“ओह्ह सच को सामने लेन के लिए कोमल का मिलना बहुत जरुरी है सोनू , अगर वो नहीं मिली तो … हमारा तो कुछ नहीं जायेगा लेकिन रीडर्स का जरूर भेजा ख़त्म हो जायेगा :हहै:”

(जस्ट जोकिंग)

“है आप सही कह रही हो लेकिन .. लेकिन आखिर वो गयी कहा होगी ..”

“हम्म एक काम करो एक एड्रेस देती हु वंहा चले जाओ , शायद वंहा तुम्हे कोई हेल्प मिल जाए “

काजल ने मुझे मेरे गांव से 20 कम दूर जंगल की तरफ एक आश्रम का पता दिया ..

मैं सभी को लेकर उस आश्रम की तरफ निकल पड़ा..

“हमें कोमल जी को ढूंढना है और तुम ये हमें कहा बाबा बाबा के पास ले जा रहे हो “

नेहा ने मुझे गुस्से से कहा

“यार जब कही से कोई उम्मीद नहीं दिखती न तो एक hi सहारा बचता है… “

मेरी बात सुकर सभी चुप थे ,

“लेकिन ये बाबा है कौन ??“ इस बार महिमा आंटी (मेरी सौ माँ :ब्लश: ) ने कहा था

“क्या पता, सुना है कोई बहुत hi सिद्ध बाबा है , सब कुछ जानते है .. कुछ लोग तो उन्हें देवता की तरह पूजते है .. “

जो जानकारी मैंने आश्रम के बारे में अभी तक जुताई थी उसी आधार पर मैंने कहा था ..

कुछ देर के सफर के बाद hi हम आश्रम के बहार खड़े थे ..

वो आश्रम कोई बहुत hi खास नहीं लग रहा था बस घास फुस की कुछ छपड़िया और बस जंगल का साम्राज्य ..

कोई घेरा नहीं था , जंहा से पता चलता की आश्रम कहा से शुरू होता है और कहा ख़त्म .

है पास में एक झरने का आभास जरूर हो रहा था, कितनी शांति थी वंहा ..

जंहा तक गाड़ी जा सकती थी हम वंहा तक गाड़ी से गए फिर हमने पगडण्डी पकड़ ली थी ..

थोड़ी hi दूर में हमें लोग मिलने शुरू हो गए वो पेड़ो के निचे ध्यान लगाए बैठे हुए दिख रहे थे ..

हम थोड़ी hi दूर गए थे की

“हे भगवन “

ये आवाज महिमा की थी ,हम सभी ने उस और देखा जंहा वो देख रही थी , सभी का मुँह खुला का खुला hi रह गया था

एक जवान जोड़े पूर्ण तह नंग अवस्था में एक दूसरे से सम्भोग में लिप्त थे .. जैसे दुनिया की कोई भी खबर नहीं हो , एक दूसरे को ऐसे खा रहे थे जैसे कोई फल को चूस रहे हो , इतना सूंदर सम्भोग का दृश्य मैंने कभी नहीं देखा था ..

हम सभी की नज़ारे वंहा ऐसे जैम गयी की हम खुद को hi भूल गए थे .. नेहा ने मेरे हाथो को जोरो से पकड़ लिया था ,,

“अरे ये सब क्या देख रहे हो आगे चलो, न जाने ये कैसी जगह आ गयी मैं अपने जवान बेटी के साथ “

महिमा ने अपना सर झटक दे कहा , उसकी बात से हम सभी को जैसे होश आया , मेरी और नेहा की नज़ारे मिली और वो शर्मा गयी .. वही भाभी के चेहरे में बस एक हलकी सी मुस्कान थी ..

हम थोड़े और आगे गए तो हमें एक विदेशी सी महिला मिल गयी

“नमस्कार आप लोगो का स्वागत है .. क्या आप hi अंकित है “

उसकी हिंदी सुनकर मैं भी थोड़ा दांग था क्योकि वो पूरी विदेशी लग रही थी , लेकिन थोड़ी इंडियन .. जैसे कोई नृ होइ .. भरा हुआ मांसल बदन जो हर जरुरत की जगह से कैसा हुआ था ..

उसे देख कर मेरे मुँह से निकल गया ‘सनी लीओन यंहा’

एक सफ़ेद साड़ी में लिपटी हुई टपकती हुई जवानी का झरना थी वो , बस एक सफ़ेद साड़ी थी उसके जिस्म पर .. बस एक साड़ी ..:विंक:

उसके उभारो को देखकर तो किसी भी मर्द का ईमान दोल जाए तो मैं क्या चीज था ..

नेहा ने एक बार मेरे कमर में जोरो की चिमटी की ..

“खा जाओगे क्या उसे जो ऐसे घर रहे हो “

उसकी आवाज में जलन की बू साफ साफ सुनाई दे रही थी ..

“जी आपको कैसे पता की हम ..”

“काजल कामिनी ने फ़ोन किया था , आइये अंदर आइये “

काजल कामिनी ??? उसने बड़े hi सपाट रूप से कहा था उसके चेहरे में कोई सिकन तक नहीं आयी थी ..

और वो कहा अंदर आने के लिए कह रही थी , साला यंहा तो कोई बाउंड्री hi नहीं था , बस जैसे कोई जंगल हो और जंगल में कुछ जगह को साफ़ कारक छोटा गरदन जैसा बना दिया गया हो ..

हम उसके पीछे चले गए ..

“बाबा जी है न हमें उनसे hi मिलाना है “

मैंने उससे पूछ लिया ..

“है हमारे सिद्ध महाराज बाबा जी आपने भक्तो को घ्यान दे रहे है “

उसने बड़े hi प्यार से कहा

“क्या वो सच में सिद्ध है “

महिमा के मुँह से अचानक से निकल गया

“है बिलकुल ..मन सालो पहले उनके पास अपने पति से झगड़ा करके आयी थी ताकि वो हम दोनों को मिला दे .. तब से मैं उनके hi पास हु …”

उसने मुस्कुराते हुए कहा

“और आपका पति ..” नेहा ने पूछ लिया

“मुझे क्या पता ..:डेड: “ उसने बेख्याली से कहा

एक पेड़ के निचे तबूतरा जैसा बना था जिसमे एक व्यक्ति बैठा था .. तो ये hi है वो बाबा जी .. सामने कुछ लोग बैठे हुए थे , हम भी उनमे शामिल हो गए ..

“बाबा जी मेरा पति बहुत hi कमजोर हो गया है कुछ भी नहीं कर पता ..”

एक महिला और उसका पति जो की किसी कंकाल की तरह hi दिख रहा था दोनों hi हाथ जोड़कर खड़े हुए ..

“ये कुछ नहीं कर पता तो दूसरे से करवा देता हु पुत्री …”

पास खड़े एक पहलवान की तरफ इशारा करते हुए बाबा जी ने कहा

उसे देखकर महिला तो जैसे उछाल hi पड़ी लेकिन वो इंसान बोल पड़ा

“नहीं नहीं महराज ऐसा अन्याय न करना .. जो करना है मैं hi करूँगा “

“बीटा तूने दारू पि पि कर अपना पूरा मांस तो गाला hi दिया अब कुछ करने जायेगा तो बची खुची हड्डिया भी गाल जाएगी “

“नहीं महराज आप कुछ ऐसा उपाय बताओ की मैं hi कर पाउ ..”

“अच्छा ठीक है तो पुत्री इसे दूध पिलाया करो “

“महराज दूध तो पिलाती हु लेकिन साला पिता काम है और मसलता जायदा है ..”महिला की बात सुनकर बाबा जी मुस्कुरा उठे

“अरे बेटी अपना नहीं कुटिया का दूध पिलाओ इसे तब जाकर कुत्तो जैसे चादहए करेगा तुम्हारे ऊपर “

महराज की बात सुनकर महिला शर्मा गयी थी

“महराज अगर घोड़ी का पुलाव तो ..”

“देखो बीटा जयदा लालच नहीं करते घोड़ी का दूध पीकर अगर ये पड़ोस की घोडियो पर पढ़ने लगा तो फिर तुम्हे hi दुखो होगा ..जाओ कल्याण होगा “

दोनों hi उनका चाहरण स्पर्श करके वंहा से निकल गए ..

तभी दूसरी ायरत कड़ी हुई ..

“बाबा जी पिछले सप्ताह आपको बताया था न की मुझे गर्मी बहुत रहती है .. आपने गाजर और खीरा लेने को कहा था “

“है पुत्री .. तुमने गाजर लिया “

“जी महराज लिया लेकिन फायदा नहीं हुआ ..”

“ओह्ह कैसे लिया ..??”

“दो दिन तो आगे से hi लिया फिर सोचा की पीछे से ले के देखु तो पीछे से लिया , फिर खीरा आगे से और गाजर पीछे से लिया फिर..”

“रुको रुको … बेटी लेने का मतलब ऐसा लेना नहीं उसे मुँह से लेना था “

“महराज मुँह में भी लिया ना”

वो शर्मा गयी थी

“बेटी मुँह में नहीं लेना था .. मुँह से लेना था .. मतलब खाना था “

उसकी बात सुनकर वो थोड़ी उदास हो गयी ..

“ओह्ह खाना था क्या…”

“है अब की बात उसे खाना , लेने के लिए हम दूसरी चीज दे देंगे जो शहर की महिलाओ की असली सहेली होती है .. जिसका नाम दिल से शुरू होता है .. दिल दो… कहा जाता है “ :हहै:

“जय हो महाराज की ..”

वो महिला चिल्ला उठी ..

तभी एक भक्त चिल्लाया

“बोलिये ज्ञानियों से घ्यानी , ध्यानियों से ध्यानी , सिद्ध पुरुष , मन मानव , चुतियो के चुटिया महा चुटिया .. चुटिया डॉ महराज की ..”

जय जय जय ………



ाक्ष में एक घोष होने लगा था …….
 
अपडेट 41

“मुझे यंहा कुछ ठीक नहीं लग रहा है अंकित, ये लोग कैसी कैसी बाटे कर रहे है ..”

महिमा का चेहरा उतर गया था

“अरे माँ आपने इन्हे पहचाना नहीं ??”

नेहा की बात से हम सभी उसे hi देखने लगे

“अरे ये डॉ चुन्नी लाल है .. डॉ चुटिया, पापा के दोस्त ,बस दाढ़ी बढ़ा ली है ..”

महिमा ने फिर से उसे देखा और उसके चेहरे में एक चमक आ गयी ..

थोड़ी hi देर में सब भीड़ हैट गयी थी और हमें बाबा जी के कमरे में भेजा गया ,

हमने देखा की वो अपनी दाढ़ी उतार रहे थे ..

“ोूफ़ साला ये काम भी बड़ा अजीब है … कैसे कैसे चूतिये यंहा आते रहते है “

उन्होंने पास में रखा पानी पि लिया, फिर हमारे और देखने लगे

“ही महिमा कैसी हो , hi नेहा बेबी “

“डॉ साहब ये आप किन नाटकों में पढ़े है “

महिमा की बात सुनकर डॉ जोरो से हंस पड़ा ..

“अरे मत पूछो यार बस एक काम के चक्कर में यंहा फंसा हुआ हु , जो बाबा जी यंहा थे वो नहीं है तो मैं hi बाबा बना हुआ हु “

“लेकिन ऐसे में तो आश्रम की ऐसी की तैसी हो जाएगी “

मैंने मुस्कुराते हुए कहा

“कोई नहीं देखेंगे ऐसे भी मैं एक डॉ हु तो लोगो का इलाज करने की कोशिस करता हु .. थोड़े अलग तरीके से , तुम लोग बताओ की यंहा आना कैसे हुआ ..”

डॉ की बात से सभी के चेहरे में एक मुस्कान आ गयी थी .

“डॉ साहब हम एक मुसकीबत में फंस गए है “

महिमा की बात से डॉ थोड़े अलर्ट हो गए थे, मैंने अपनी कहानी बतानी शुरू की , की कैसे हम गांव से शहर पहुंचे और कैसे भाभी को जीवा गैंग ने इस्तमाल किया ,कैसे मर्डर्स हुए और शिवा का नाम उसे किया गया जो की मेरा hi पैन नाम है , कैसे हमें ये नहीं पता की कौन हमारे साथ है और कौन हमारे खिलाफ … और अब हमें कोमल की जरुरत है जो हमें सच्ची बता सके की आखिर हुआ क्या था .. वही महिमा ने भी अपने बारे में सब बताया ..

“ओह्ह तो तुम कोमल को ढूंढते हुए आये हो , काजल के कहने पर …हम्म सही जगह आये हो लेकिन तुम्हे एक दिन दो का इन्तजार करना होगा ..”

“क्यों..??”

मेरे मुँह से अचानक से निकल गया ..

“क्योकि कोमल उर्फ़ शक्ति तुम्हे ढूंढती हुई शहर चली गयी है … “

“व्हाट ..:व्हाट:”

सभी के मुँह से एक साथ निकला

“है जब से तुम लोग गांव छोड़कर गए तब से वो भी तुम्हे ढूंढते हुए शहर चली गयी , क्योकि उसे ये अंदाजा लग गया था की तुम्हारे चेहरे के कारण तुम फंस सकती हो .. कुछ दिनों तक वो मेरे पास hi थी ..”

“व्हाट…”

हम सभी के मुँह से फिर से निकला

“अब इसमें इतना चौकाने वाली क्या बात है , क्या तुम लोगो को नहीं पता की उसे तिवारी और जीवा से छुपकर इस गांव में बसने वाला मैं hi था “

हम सब एक दूसरे का चेहरा देखने लगे थे

“वो जब शहर आयी तो पहले मेरे पास hi रुकी थी , हम तुम्हे धुंध hi रहे थे की पाण्ड्य का मर्डर हो गया , इसी बिच मुझे भी इधर आना हो गया .. हमें ये तो पता चल गया की तुम लोग सम्पत के हवेली में हो .. सकती सामने नहीं आना चाहती थी इसलिए वो तुमसे नहीं मिली .. और मुझे इसी दौरान एक काम के सिलसिले में यंहा आना पद गया तब से मैं यही हु ..”

“तो माँ कहा है ??”

भाभी लगभग चिल्ला पड़ी

“शहर में मेरे घर में hi रह रही थी लेकिन मेरे आने के बाद से उसका कोई पता नहीं है , उसने तुम्हारे पिता को वापस भेज दिया वो अभी इसी आश्रम है , थोड़ी देर में आता होगा … लेकिन तुम्हारी माँ वही रुक गयी “

“क्या.. पिता जी ऐसा कैसे कर सकते है , उन्होंने माँ को अकेले कैसे छोड़ दिया “

भाभी मनो आग बबूला हो गयी थी , उन्हें इतने गुस्से में मैंने कभी नहीं देखा था ..

उनकी बात सुनकर डॉ मुस्कुरा उठे

“बीटा वो सकती है, उसकी चिंता तुम छोड़ hi दो .. और उसके सामने तो बड़े बड़े गैंगस्टर्स की नहीं चली तुम्हारे पिता तो बेचारे भोले भले से इंसान है … उसने कह दिया तो बेचारे को वापस आना hi पड़ा ..”

डॉ की बात सुनकर भाभी भी शांत हो गयी थी , इतने दिनों में उन्हें ये तो पता चल hi गया था की उनकी माँ आखिर चीज क्या है ..

“तो क्या वो दो खून ..”

मेरे मन में अचानक से एक शंका जाएगी

“कुछ भी कह नहीं सकते .. “

डॉ ने भी सफाई दे दी

“लेकिन काजल ने इस बारे में हमें क्यों नहीं बताया ..”

मुझे काजल पर गुस्सा आ रहा था ..

“अब उसे खुद पता हो तब वो बताएगी , और मुझे क्या पता था की वो इस केस में फंस जाएगी , और मैं भी तो इतने दिनों से यहाँ hi हु , सब से दूर … काजल और मेरी इस बारे में बात hi नहीं हुई … चलो तुम लोग थक गए होंगे तुम लोग आराम करो और जब तक कोमल का पता नहीं चल जाता यही रहो क्योकि बहार तिवारी और जीवा के लोग भी तुम्हे ढूंढ रहे होंगे .. और सबसे पहले वो इस गांव में भी चक्कर काट लेंगे .. मैं कोमल को ढूंढने के लिए अपने लोगो को लगा देता हु , तुम्हारा नाम सुनते hi वो यंहा चली आएगी उसे पता है की मैं कहा हु “

“लेकिन आखिर माँ शहर गयी hi क्यों सब मेरी गलती है “

भाभी अपना सर पकड़कर रो रही थी



“आरती तुम्हारी माँ बहुत hi चालाक महिला है , उसकी सकती और बुद्धि की लोग मिशाल दिया करते थे .. जब तुम दोनों गांव से भागे तो उसने तुरंत hi पता कर लिया की आखिर तुम गए कहा हो और किसके हाथ लग गए , वो ये भी जानती थी की जीवा पहले तुमसे तुम्हारे गांव का पता निकलवायेगा फिर अपने आदमियों की कोमल को पकड़ने के लिए भेजेगा , इसलिए वो भी तुरंत hi गांव छोड़कर चली गयी .. और ऐसा हुआ भी जीवा से तुम लोगो के मिलने के दूसरे दिन hi कोमल की पता सजी करने वाले आने लगे थे , कॉलेज के बहार hi एक नयी दुकान भी खुल गयी , जो हर हरकत पर नजर बनाये हुए है , अब तुम समझ सकते हो की तुम लोगो का यंहा आना भी उन्हें पता चल गया होगा , और शायद यंहा रुकना भी तो तुम्हे झूठ मुठ hi सही लेकिन फिर से गांव में जाकर एक गेम खेलना होगा ताकि तुमपर नजर बनाये रखने वाले गुमराह हो सके …लेकिन वो सब कल hi करना .. ऐसे भी यंहा शहर से जो लोग आते है एक दिन रूककर hi जाते है “

डॉ ने मुस्कुराते हुए कहा ..
 
अपडेट 42
कोमल शहर में थी , जिसके लिए हम यंहा आये थे वो hi गायब थी , क्या वही शिवा बनकर कतल कर रही थी ???????

मैंने अभी तक जीतनी भी चीजे देखि थी मुझे लगने लगा तह की कुछ भी हो सकता है , मुझे तो अब सब पर hi शक होता रहता था ,,

डॉ चुटिया के आश्रम में बैठे बैठे मैं बोर हो रहा था , हम लोगो के पास कोई भी काम भी तो नहीं था , तभी मेरे दिमाग में एक विचार कौंद गया ..

मैंने अपना चेहरा धक् लिया और कही निकल गया, शाम का वक़्त था ..

मैं सबकी नजरो से बचता हु अपने गांव पहुंच चूका था..

अपने घर के बहार , ये वही घर था जिसमे मैंने अपना बचपन बिताया था , जिसमे माँ बाप का प्यार मिला और फिर भाई से दुद्कार भी ,

यही वो घर था जंहा से मुझे और मेरी भाभी को बेइज्जत करके निकाल दिया गया था ..

मैं कुछ देर तक वही खड़ा रहा , सरे दृश्य जैसे मेरे आँखों में आ गए थे , जैसे कोई फिल्म चल रही हो ,मेरे आँखों में आंसू आ गए थे..

मैंने वंहा से पलटा और फिर किसी गंतव्य स्थान की और चल दिया ..

“कोण है ..??”

“मैं मुंबई से आया हु , अनुराग साहब को आपका काम इतना पसंद आया की आपको तुरंत hi मुंबई बुलाये है ..”

“क्या??”

हरिया जैसे खुद पड़ा था , मेरा चेहरा बंधा था मैं मेरे बचपन के दोस्त हरिया के घर के बहार खड़ा था , इन दिनों में मेरा शरीर भी बहुत कुछ बदल गया था और आवाज मैंने खुद थोड़ी सी बदल ली थी ..

मुझे पता था की हरिया अनुराग कश्यप की फिल्मो का बहुते बड़ा वाला पंखा था , और जैसे एक कीड़ा सबके दिलो में पलटा है वैसा hi उसके दिल में भी पल रहा था फेमस होने का , वो भी हीरो बनकर ..

वो मुझे हमेशा कठ्टा था की हम जैसे देहाती लोगो को अगर कोई चांस दे सकता है तो वो है अनुराग कश्यप ..

मुझे लगा hi था की ये साला जरूर तरय कर रहा होगा ..

“अनुराग भैया हमको बुलाये है ??”

हरिया जैसे ब्यौरा hi गया था ..

“अरे बिलकुल अपने hi गांव घर के आदमी हो तुमका देखे तो बोले की अगली फिल्मवा में हमरा हीरो यही होगा , हरिया ..”

हरिया का शरीर जैसे कपङे लगा था ..

“अरे भैया आप तनिक अंदर आओ हो .. थोड़ा बैठो “

मैं अभी अंदर नहीं आना चाहता था ..

मुझे हरिया को ऐसे देखकर बहुत hi मजा आ रहा था .. असल में मैं तो उसे जोरो से गले से लगाना छह रहा था लेकिन क्या करे जब कोई खेल शुरू हो गया हो तो फिर उसे अंजाम तक भी तो पहुंचना पड़ता है ..

“अरे हरिया भैया आपके वो दोस्त कहा है सोहन ..”

हरिया अचानक से मेरी और देखने लगा

“क्यों भैया ??”

“अरे साइड एक्टर की भी जरुरत पड़ती है न , और आपके फेसबुक में अपने उसके साथ फोटो डाली थी ..”

जैसे हरिया को सब समझ आ गया हो

“अरे है है , चलो तो उससे भी मिल आते है “

हम दोनों सोहन के घर की और निकल गए , ये सेल कैसे लोग थे दिमाग के नाम पर कुछ चलते hi नहीं , किसी की भी बात पर यकीं कर लेते है , भोले थे लेकिन दिल के बिलकुल hi साफ़ कोई कड़वाहट नहीं कोई दाग नहीं ..

बस प्रेम से भरे हुए लोग थे ..

मेरे सामने सोहन खड़ा हुआ था , सोहन , हरिया की तरह बावला नहीं था उसे थोड़ी समझ थी ..

“ये कौन है “

“अबे मुंबई से आये है”

हरिया ने पूरी कहानी बताई , रात हो चुकी थी और कहानी सुनकर सोहन के भाव चढ़ गए , उसने मुझे बहुत hi संदेह की निगाहो से देखा ..

“आप अपना चेहरा क्यों छुपाये हुए है “

मेरे सामने मेरे दोस्त खड़े थे , और मैं उन्हें साइन से लगाना चाहता था उन्हें एक साथ देखकर मेरे आँखों में आंसू आ गए जो सोहन से नहीं छुप पाया था ..

उसने बस मेरे आँखों में देखा ..

“सेल सोनू..”

उसने थोड़ा अच्छा बोलै लेकिन मेरा इशारा मिलते hi वो चुप हो गया और सीधे मेरे साइन से आ लगा ,

हरिया थोड़ा हड़बड़ाया हुआ हमें देख रहा था लेकिन जैसे hi उसे समझ आया की ये क्या हो रहा है वो भी ख़ुशी में खुद पड़ा था ..

हम तीनो खेत में बैठकर दारू पि रहे थे , जी है मेरे दोस्त मेरे आने की ख़ुशी में कही से देसी दारू और देसी मुर्गे का इंतजाम कर लाये थे, ये सोहन की सब्जी की बड़ी थी..

“भाई जब से तू गया है न वो मजा नहीं आता बे “

हरिया अभी भी इमोशनल हो रहा था ..

“और बता शहर कैसा है , सेल तू तो चमक hi गया बे , बिलकुल hi पहचान नहीं आ रहा , बिलकुल hi साहब लग रहा है ,मादरचोद ये घडी तो देख ..”

“बस भाई वंहा कुछ अच्छे दोस्त मिल गए , सालो तुम्हारी बहुत याद आती थी बे , और गांव की भी … यार भैया और उस रैंड के क्या हाल चाल मन करता है सेल को घर से निकाल कर मारु , लेकिन अभी किसी के सामने आने में खतरा है ..”

“कैसा खतरा बे , ऐसे भी तेरा भाई कब ऐसा नहीं रह गया की तेरा कुछ उखड भी पाए , वो तो खुद hi भिखारी हो गया है ..”

“क्या ..??”

“है वो साली सच में बहुत बड़ी रैंड है भाई , पहले तेरे भाई को फंसा कर भाभी और तुझे निकलवा दी , फिर खुद सारा जायजाद अपने नाम करवा लिया और अब तेरे भाई को भी घर से धक्का मार कर निकलव दिया ..”

“क्या..?”

ये मेरे लिए एक नया बम था

“अरे है तेरा भाई साला भिखारी जैसे चौराहे पर पड़ा रहता है , शायद उसके पाप की यही सजा दी है भगवन ने उसे , और जिसके लिए उसने हमारी भाभी को घर से निकला था अब वो अपने यारो के साथ मिलकर घर में बस ऐयाशी करती है, सालो ने पुरे गांव का hi माहौल ख़राब कर रखा है “

भैया के बारे में जानकर पता नहीं क्यों मुझे थोड़ा दुःख हुआ , आखिर मेरा भाई था ..

लेकिन फिर जब मेरे सामने वो रत की बात आयी जब उसने भाभी और मुझे घर से निकाल दिया था , हमारे रिश्ते को बदनाम किया था .. ये सोचकर hi फिर से उसके लिए दिल में बस गुस्सा और ग्रीन hi पैदा हुई ..

“अबे उस चूतिये को लेकर अपना मूड मत ख़राब कर , उसे जो सजा मिलनी चाहिए थी वो तो कुदरत ने hi उसे दे दी , तू सुना सेल क्या कर रहा है शहर में जो ऐसा चमक रहा है , और इन दिनों में सेल किसी की ली या अभी भी वही कुंवारा छोरा है ..बॉडी वाद्य तो सॉलिड बना लिया बे “

उनकी बात सुकर मेरे होठो में मुस्कान आ गयी ..

मैंने उन्हें बताया की कैसे मैं शहर पंहुचा और कैसे कलवा से मुलकर हुई , कैसे पाण्ड्य को मारा और सम्पत से जा मिला , कैसे कॉलेज गया और दोस्त बने फिर कैसे फिर से मर्डर हुए और मेरा नाम उसे किया गया , फिर सस जो मेरी फ्रेंड विथ बेनिफिट बानी , रानी की मैंने ली और उनकी भाभी नेहा के बारे में बताया … और फिर पार्टी और भाभी और कोमल के बारे में ..

वो कभी हांसे तो कभी आश्चर्य से उनका मुँह hi खुला गया, कभी उन्हें यकीं hi नहीं आया की मैं सच बोल रहा हु लेकिन खबर तो उन्होंने भी पढ़ी या सुनी थी …

“बाप रे भाई , यंहा से तो तू अच्छा भला निकला था बे , इतने कांड कर डाले .. “

सोहन को यकीं hi नहीं हो रहा था की उसका वो भोला भला दोस्त जो उसके सलाह के बिना कुछ भी नहीं करता था ऐसा सायना कैसे बन गया ..:)

“अरे वो सब छोड़ सेल भाभी से कब मिला रहा है “

हरिया उछाल उठा

“भाई अभी वो अपनी माँ के कारण थोड़ा परेशां है “

“अबे हम हमारी भाभी की बात कर रहे है “

मैंने उसे अजीब निगाहो से देखा

“मैं तो तेरी hi भाभी की बात कर रहा हु “

“अबे नहीं मैं शहर वाली भाभी की बात कर रहा हु “

“अबे गांडू मैं भी शहर वाली भाभी की hi बात कर रहा हु “

“अबे चूतिये मैं भाभी की बात कर रहा हु भाभी की नहीं “

हरिया की बात सुनकर सोहन जोरो से हंस पड़ा

“अबे चूतिये साफ साफ बोल न की तू आरती भाभी की बात कर रहा है या नेहा भाभी की ??”

“मैं नेहा भाभी की बात कर रहा था “ हरिया ने छिड़ते हुए कहा

“सेल गांडू मैं भी उसी के बारे में hi बता रहा था ..”

मैंने अपना सर पकड़ लिया और सभी जोरो से हंस पड़े ..

***********

हम एक गाड़ी में 3 लोग आश्रम की और जा रहे थे , जैसा हम अक्सर घुमा करते थे , दारू अच्छी खासी छड़ी हुई थी ,इतने दिनों बाद दोस्तों से मिलने की वजह से हमने बहुत मस्ती की

न जाने कितनी बाटे उनसे करनी थी , रत के 3 बज चुके थे , मैंने उन्हें बहुत मन किया लेकिन वो मुझे आश्रम तक छोड़ने पर तुले हुए थे , हम चौराहे से गुजर रहे थे तभी मेरी नजर एक भिखारी पर पड़ी ..

सोहन नशे में था और गाड़ी ले जाकर उसके सामने रोक दिया , भिखारी जैसे हड़बड़ाते हुए उठ बैठा ,

ऐसा लग रहा था जैसे कई दिनों से नहाया नहीं है न hi ढंग से खाना hi मिला है , कपडे के नाम पर शरीर में बस चिथड़े थे , शरीर दर से कैंप रहा था …

उसने तुरंत hi हमारे सामने हाथ जोड़ लिया ..

“नहीं मुझे मत मरना मुझे माफ़ कर दो , तुम उसके साथ कुछ भी करो मैं कुछ नहीं बोलूंगा .. “

“ये क्या बोल रहा है “

“उस रैंड चंचल को इसने एक दिन अपने आशिक़ो के साथ नंगे पकड़ लिया था , इसने गुस्से में आकर उसपर हाथ छोड़ दिया सोचा होगा की ये भी भोली भली आरती भाभी की तरह मार खा जाएगी और इस बार तो उसकी गलती साफ साफ सामने थी .. सभी ने इसे कमरे में बंद करके इतना मारा था की थोड़ा हिल गया .. 10 दिन तक एक कमरे में बंद रखा था , रोज कुत्तो की तरह इसे मरते थे खाने को खुछ देते नहीं थे , सुना है की वो इसके मुँह में मुट्ठी थी ..

फिर इसे घर से बहार फेक दिया , गांव वाले दया करके खाने के लिए दे देते है , लेकिन तब से ये थोड़ा पागल जैसा हो गया है .. कोई भी हलके से भी धमका दे तो दर जाता है , रत रत भर रोटा रहता है .. शायद अपने गुनाहो की माफ़ी मांगता है ..”

ये मेरा भाई था , मैंने उसकी आँखों में देखा , वो न तो मेरे दोस्तों को पहचान रहा था न hi मुझे, वो ऐसे डरा हुआ था जैसे कोई उसकी जान लेने वाला है ..

वो दर से काँप रहा था , ये सजा थी , ये सजा थी जो कुदरत ने उसे दी थी ..

ये उसके पापो की सजा थी , इस नशे की हालत में भी मेरे आँखों में पानी सा आ गया था , ये ख़ुशी था या की गम …:डेड:

खुदा की मेहर hi थी की उसने इसे इसके पापो की सजा दे दी , लेकिन इसके इस अवस्था को देखकर भी तो दिल में एक दर्द सा हो रहा था ..

मैंने जेब से कुछ पैसे निकले और उसके ऊपर फेक दिए ..

“इन्ही कागज के कुछ टुकड़ो के कारण तूने मेरी भाभी की पवित्रता पर शक किया था , हमारे सम्बन्धो की प्रेम को बदनाम किया , तेरे कारण देख आज हम क्या से क्या हो गए है , कितने दर्द झेले , एक सामान्य सी जिंदगी थी हमारी लेकिन तूने.. तूने सब बर्बाद कर दिया.. किसके कारण .. किस चीज की वाशना थी तुझे.. जिस्म की ?? दौलत की ?? देख .. देख की आज तेरे पास क्या है .. जिस्म का सुख .. नहीं , तू बीमार है , थका हुआ है विक्छिप्त होकर घूम रहा है , खाने के लिए भी तुझे भीख मांगनी पद रही है … और दौलत .. (मैं जोरो से हंस पड़ा था , लेकिन फिर भी मेरे आँखों में पानी था ) दौलत … तूने मुझे इसीलिए फसाया था न ताकि दौलत को हड़प सके … जो कुआ तूने हमारे लिए खोदा था उसमे तू खुद hi गिर गया रे .. ये ले पकड़ खा इसे … “

मैंने अपने हाथो में पकड़ा हुआ चिकन का टुकड़ा उसके सामने फेक दिया .. वो बड़ी hi लालच के साथ उसे देख रहा था ..

“सोनू जाने दे उसे कुछ समझ नहीं आएगा “ सोहन ने मुझे खिंच लिया ..

मैं जैसे hi पीछे हटा उसने वो चिकन का टुकड़ा उठा लिया वो उसे ऐसे खा रहा था जैसे कोई कुत्ता रोटी को खता है ..

अपने भाई की ये हालत देख कर मन में एक दुःख तो हुआ लेकिन फिर उसकी करनी को यद् करके मैं वंहा से हैट गया लेकिन जाते जाते मैंने अपने मोबाइल से उसका वीडियो बना लिया ……

दिल में एक अजीब सा नया विचार लेकर मैं यंहा से जा रहा था ..



शायद इस कुदरत के नियम ऐसे है की जो जैसा करेगा वो वैसा भरेगा …
 
अपडेट 43


“अरे उठो न ये क्या घोडा बेचकर सो रहे हो “

नेहा मुझे जोरो से उठा रही थी ,

जब नींद टूटी तो शराब के नशे का आभास होने लगा, रत का अभी भी अच्छे से नहीं उतरा था ..

“सोने दे न “

“दोपहर हो गयी है और साहब को सोना है , यंहा काम से आये हो या दारू पिने , अभी तक पुरे शरीर से दारू की बदबू आ रही है , चलो उठो.. यंहा कांड हो गया है और तुम्हे कोई फिक्र hi नहीं है “

कांड????

“क्या हुआ ?”

“फ्रेश हो कर आ जाओ भाभी जल्दी बुला रही है ,अब की नहीं उठे न तो पूरा बाल्टी तुम्हारे ऊपर दाल दूंगी “

नेहा ने थोड़ा जोर दे कर कहा, ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपने पति को उठा रही हो , ये ख्याल आते hi मेरे होठो में एक मुस्कान आ गयी ..

“ोकक जणू “

मने थोड़ी शरारत से कहा था जिससे उसके होठो में भी मुस्कान आ गयी

“बड़े आये जणू वाले जल्दी आओ”

वो वंहा से निकल गयी थी , मैं भी तैयार होकर तुरंत भाभी के कमरे में पंहुचा , टीवी ों था और लगभग सभी वही बैठे थे..

“तू पागल हो गए हो क्या कहा थे रत भर …(फिर अपना नाक बंद करती है ) देसी शराब पि कर घूम रहे हो यानि गांव गए थे “भाभी ने मुझे घुरा तो मैं झूठ नहीं बोल पाया

“है भाभी वो दोस्तों के साथ ..”

“तुम पागल हो गए हो क्या .. ये देखो ये क्या हो गया है गांव में “

मैंने टीवी की और देखा न्यूज़ चल रही थी ..

“शिवा के नाम से क़त्ल करने वाली सकती गैंग की सदस्य आज पकड़ी गयी , पुलिस ने उसे उसके घर से तब गिरफ्तार किया जब उसने 3 नए खून किये वो भी अपने hi आशिक़ो के , गांव वालो के अनुसार इस कातिल का नाम चंचल है और ये अपने पति का घर छोड़कर गांव में रहा करती थी , वही इसने एक शादी शुदा मर्द से सम्बन्ध बनाया और फिर उसके घर में रहने लगी लेकिन चंचल के सम्बन्ध तिवारी गैंग के 3 गुंडों से भी था , जिसके कारण उस व्यक्ति को उसी के घर से निकाल कर वो उन गुंडों के साथ रहने लगी थी , लेकिन कल रत उसी शैली में 3no का कतल कर दिया जिसे कतल शहर में हो रहे है …इससे पुलिस ने ये मान लिया है की शहर में तिवारी गैंग से जुड़े हुए लोगो को मरने वाली भी यही ायरत है …”

नई सुनकर मैंने भाभी, महिमा, नेहा और डॉ की और देखा जो की वही बैठे थे ..

“तो तुम्हे क्या लगता है शिवा की ये शिवा के नाम पर खून किसने किया होगा , क्या तुम्हे लगता है की ये इसी ायरत ने किया है जो तुम्हारे भाई की रखैल थी ..??”

डॉ ने मुझे अंकित या सोनू न कहकर शिवा कहा था जिससे मैं थोड़ा झेप गया ..

“मुझे क्या पता डॉ साहब , ऐसे भी काजल और पूर्वी दोनों ने hi एक चीज कही थी वो था की कातिल कोई ायरत है “

डॉ न जाने क्यों मेरी बात सुनकर हँसाने लगा ..

“ायरत है है ायरत hi तो है , और शायद अब मुझे समझ आने लगा है की वो ायरत कौन है “

उसने हम सभी को घुरा और भाभी ,मेरे और महिमा के चेहरे का भाव एक साथ बदलने लगा ……..

*********

शाम होते hi मेरे दोस्त गांव पहुंच चुके थे , हमें आश्रम से निकलने की सख्त मनाही थी क्योकि बहार की हालत सही नहीं चल रही थी , गांव में एक क़त्ल हो गया था शहर से पुलिस और क्रीम ब्रांच के अलावा स्पेशल इन्वेस्टिगेटर्स की टीम भी आयी थी जिसमे पूर्वी और विजय भी थे , तिवारी के गैंग के साथ साथ जीवा गैंग वाले भी कुत्तो की तरह हमें ढुंढाहने में लगे थे और इस कांड के बाद तो सभी का ध्यान गांव पर चला गया था …

लेकिन मेरे दोस्तों को कौन समझाए ऐसे भी गांव के कई लोग आश्रम आते रहते थे तो ये लोग भी आ hi गए ..

साथ में एक देसी दारू की बोतल भी थी , हम जंगल के अंदर एक झरने के किनारे बैठे थे ..

“सालो इतने खतरे में क्यों आ गए क्या पता तुम्हारा भी पीछा हो रहा होगा “

“अबे टेंशन नहीं लेने का हम लोगो ने पूरा सेफ्टी रखा है, लेकिन साला ये भी कमाल हो गया कैसे , उस चुतियो को मार कर किसीने उस रंडी को फंसा दिया , मुझे तो लगा था की ये तेरा काम होगा सेल दारू के नशे में उन लोगो को पेल दिया होगा लेकिन फिर पता चला की कोई लौंडिया ये क़त्ल कर रही है … बाप रे भाई साली क्या खतरनाक चीज होगी यार वो “

“है खतरनाक तो होगी तभी ये सब कर रही है “

मैंने अपना पग हिलाते हुए कहा

तभी मुझे मैरी मार्लो (सेकेट्री और डॉ चुटिया ), और नेहा आते हुए दिखे , मैरी हमेशा की तरफ बस एक साड़ी में थी जो उसके जिस्म से पूरी तरह से चिपका हुआ था , सफ़ेद रंग की साड़ी में उसका यौवन जैसे झलक कर बहार की और आने को बेताब था , ऐसे भी उसके जिस्म का सबसे आकर्षक अंग उसके साइन में उठे हुए वो पर्वत hi थे जिसपर कोई भी इंसान चढ़ने की छह करने लगता ..

वही नेहा एक सादे सलवार कमीज में थी , माथे में छोटी सी बिंदी उसके चेहरे को और hi खूबसूरत बना रही थी , बल खुले हुए लहरा रहे थे और दोनों के पायलो की खान खान से पूरा माहौल गूंज रहा था ..

दोनों एक दूजे से एक डैम अलग लग रहे थे एक तरफ मैरी काम की देवी लग रही थी तो नेहा प्रेम की देवी ..

“मादरचोद ये कौन है..”

करिया के मुँह से ये निकलना स्वाभाविक भी था ..

“ओह है तुम अपनी भाभी से मिलना छह रहे थे न ये आ गयी “

हरिया का तो जैसे मुँह hi खुला का खुला रह गया

“ये मेरे दोस्त है , और ये मैरी जी है और ये नेहा है मेरी दोस्त “

मैंने दोस्त पर थोड़ा जोर दिया था , जंहा सोहन नेहा को देखकर अपने हाथ जोड़ दिया वही हरिया अपना सर गड़ाए खड़ा था ..

“अबे नजर उठा के देख भी ले अपनी भाभी को “

इस बार मैंने सीधे hi भाभी कहा

“नहीं भाई हमारी नजर भाभी के चरणों पर hi रहेगी भाई मैं भाभी को नहीं देख सकता “

मर्री और नेहा ने मुझे अजीब निगाहो से देखा

“अरे वो क्या है न की गांव में भाभी का इतना सम्मान किया जाता है की उनका चेहरा नहीं देखा जाता “ सोहन ने मुश्किल से अपनी हंसी छुपाते हुए कहा था

“ओह्ह सो क्यूट ,तुम बहुत hi सरीफ हो हरिया “

मर्री ने उसके बालो को सहलाया , और हरिया जैसे कैंप hi गया

“नहीं भाभी आप ऐसा मत कीजिये मैं आपसे दूर राहु तभी ठीक है “

अब तब मुझे भी समझ आ चूका था की हरिया ने मर्री को अपनी भाभी समझ लिया है और इसीलिए उसको नहीं देख रहा है क्योकि मर्री ने पारदर्शी कपडे पहन रखे थे ..

लेकिन हमने थोड़ा और मजा लेनी की सोची

“तो क्या हुआ हरिया देख तेरी भाभी इनाम में तुझे कुछ दिखाना चाहती है”

“अरे भाई इतना तो सब दिखा रही है और क्या दिखाएगी , मुझसे ये पाप नहीं होगा भाई “

“अरे देख ले कुछ नहीं होता शहर में सब चलता है “

हरिया ने इस बार मुझे घुरा

“अबे मुझे पता था की शहर जाकर तू बदल गया है लेकिन इतना बदल जायेगा ये नहीं सोचा था यार , अरे वो हमारी भाभी है उनके जिस्म के ऐसे अंगो को तू खुद hi देखने के लिए कह रहा है .. तू पगला गया रे सोनू , चलो सोहन चले यार यंहा से ये साला तो पाप करवाएगा रे “

हम सभी जोरो से हंस पड़े थे

“अरे देवर जी एक बार सर उठा कर देख तो लीजिये की आपकी भाभी है कौन “

इस बार नेहा ने कहा था , नेहा की आवाज सुनते hi जैसे हरिया को होश आया उसने सर उठा कर देखा और बस थोड़ी देर तक नेहा के चेहरे को देखता hi रहा

“वाह आप तो सक्छात देवी है ,,इतनी सूंदर “

उसने सीधा नेहा के चरणों में अपने सर को रख दिया था

“अरे ये क्या कर रहे हो “ नेहा जैसे हड़बड़ा गयी , वही मेरे होठो में मुस्कान आ गयी ..

ये साला इतना मासूम और देसी तो सिर्फ अपना हरिया hi हो सकता है ऐसे मासूम से मुझे अपने अक्की की भी यद् आ गयी पता नहीं वो क्या कर रहा होगा , अब मैं और नेहा तो ट्यूशन नहीं जाने वाले थे और उसे सस के साथ जाना था या फिर अकेले :ो

यंहा हरिया को देखकर मर्री खुश हो गयी

“तुम बहुत hi क्यूट हो , आओ मैं तुझे कुछ दिखती हु”

उसने हरिया के गलो को सहलाते हुए कहा , इस बात तो जैसे हरिया बिलकुल खुद hi गया , क्योकि अब तक सोहन ने तो गांव की दो तीन ओउरतो की ले ली थी लेकिन हरिया का धागा अभी तक नहीं टुटा था ..



मर्री ने उसे झाड़ियों के तरफ इशारा किया , हैरया ने बड़ी hi उम्मीद से मुझे देखा और मैंने बस उसे आंख मार दिया..
 
अपडेट 44
भाभी मेरे मोबाइल में रखा वो वीडियो ध्यान से देख रही थी जो मैंने कल रत में बनाया था ..

मैं अभी नशे में था और अपने कमरे में आकर बैठा था, भाभी भी मेरे कमरे में आ गयी थी साथ hi नेहा भी बैठी थी, किसी भाभी ने ऐसे hi मोबाइल उठाया और भैया का वो वीडियो उनके सामने था ..

“ये सब क्या है सोनू ?“

“कल रत जब उनकी ये हालत देखि तो मुझे बहुत बुरा लगा भाभी , लेकिन एक ख़ुशी भी हुई , इस आदमी ने आपको न सिर्फ गांव से बहार निकला बल्कि आज पुरे गांव वाले यही समझते है की हम दोनों एक साथ भागे थे, इसने हमें और हमारे रिश्ते को भी बदनाम कर दिया है भाभी , इसे तो सजा मिलनी hi थी “

अब ये ख़ुशी था या दुःख मादरचोद कुछ भी समझ नहीं आ रहा था , भाभी की आँखों से भी neer(pani) बाह रहे थे, नेहा ने उन्हें सम्हाला

“जैसा भी है मेरा पति है ये, मैंने प्यार किया था इससे ..”

वो फफक कर रो पड़ी थी ..

“जिसने आपके साथ ऐसा किया उसे भी भगवन ने सजा दे hi दी , और जिसने इनके साथ ऐसा किया उसे भी “

नेहा ने सांत्वना भरे शब्दों में कहा ..

“है ये तो है लेकिन एक सवाल अब मेरे दिमाग में और जोरो से गूंजने लगा है नेहा , आखिर कौन है जिसने चंचल को फसाया है?? “

नेहा उसकी बात से थोड़ी हड़बड़ाई

“आपको ऐसा क्यों लगता है भाभी “

नेहा की बात सुनकर भाभी बस हलके से मुस्कुराई और मुझे देखने लगी

“ये बात क्या तुम्हे थोड़ी अजीब नहीं लगती की एक दिन अचानक सोनू को उसके भाई इस हालत में मिलते है, और उसी रत चंचल ये क़त्ल कर देती है .. अगर मरना hi था तो उसी रत क्यों ??”

“तो आप क्या बोल रही हो की मैंने उसे मारा है “

मैंने भी भाभी की निगाहो से अपनी निगाहो को मिला लिया

“मारा नहीं लेकिन मरवाया तो जरूर है , ये कोई इत्तफाक नहीं हो सकता की जिस दिन तुम्हे दुःख होता की तुम्हारे भाई की हालत ऐसी हो गयी है उसी दिन वो ायरत फंस जाती है …”

उनकी बात सुनकर मैं थोड़ा हंस पड़ा

“क्या भाभी आप भी “

लेकिन भाभी गंभीर थी

“सोनू …. मेरी और देख … बता दे .. काम से हम दोनों से तो मत छुपा रे ..”

तभी कमरे में महिमा (नेहा की माँ) भी आ गई ..

“कोण किस्से क्या छिपा रहा है है भाई ..”

हम सभी के चेहरे गंभीर हो चुके थे जिसे देखकर वो भी थोड़ा गंभीर हो गयी

“क्या हुआ ..??”

“वही हुआ जो बहुत पहले हो जाना था , एक दूसरे पर पूरा विश्वास ..” इस बार ये बात डॉ ने कही थी वो भी कमरे में आ गए थे ..

“एक दूसरे पर पूरा विश्वाश करो और सब कुछ साफ साफ बता दो , हम सभी को पता है की ये किसने किया है लेकिन बोल कोई नहीं रहा है , जिससे भी कोमल का जो भी रिश्ता है वो बोल दे …”

हम सभी एक दूसरे के चेहरे को देखने लगे थे वही नेहा बेचारी बड़े hi आश्चर्य से हमें देख रही थी ..

“देखो मैं कोमल को सालो से जनता हु जब वो सकती हुआ करती थी तब से , उसके काम करने का तरीका बड़ा hi पेचीदा है , सोनू तुम्हे नहीं पता लेकिन तुम्हारी भाभी को जरूर उसका गेम समझ आ गया होगा , वो है भी तो उसकी hi बेटी न … “

डॉ हलके से हंस दिया , अब तो मैं भी भाभी को ध्यान से देखने लगा … आखिर क्या बात वही थी जो मैं समझ रहा था ..

“भाभी …?? क्या जो मैं सोच रहा हु वो सच है “

बदले में भाभी मुस्कुराई

“है सोनू … मैं भी कितनी पागल हु जो इतना नहीं समझ पायी लेकिन इस क़त्ल से मेरे दिमाग में हर चीज साफ हो गयी , मेरी माँ सच में सबकी माँ है हम दोनों के साथ गेम खेल गयी और हम दोनों एक साथ होते हुए भी उसे समझ नहीं पाए “

मेरी आंखे चौड़ी हो गयी

“हे भगवन , मैं hi चुटिया निकल गया “मैंने अपना सर पकड़ लिया था लेकिन मैं अकेला नहीं था

“तुम अकेले नहीं हो मुझे लग रहा है की मैं भी इस गेम में शामिल हु “ नेहा की माँ महिमा ने कहा सभी उसकी और देखने लगे और सभी एक साथ जोरो से हंस पड़े ..

“लेकिन उसने ये सब किया कैसे “ डॉ बोल पड़ा ..

“जब सबको मेरे बारे में पता चल hi गया है तो क्यों न मैं hi बता दू “

सभी की नजर दरवाजे की और गयी जंहा पर कोमल कड़ी थी , बिलकुल भाभी की कॉपी थी लेकिन उम्र के अंतर के कारण आया बदलाव साफ साफ पता चल रहा था ..

“आखिर आप आ hi गयी “ मैंने , भाभी ने , महिमा ने एक साथ hi बोलै था …

जिसे सुनकर कोमल के चेहरे में मुस्कान खिल गयी ..

*************

“तो कहा से शुरू किया जाए “कोमल ने हम सभी को एक नजर देखा

अभी रत हो चुकी थी खाना खाकर हम सभी क जगह इकठ्ठा हुए थे , सभी गोल घेरा बनाकर बैठे थे ..

“शायद जब हमने गांव छोड़ा तब से क्योकि स्टोरी तो वही से शुरू होती है न “भाभी ने अपनी बात राखी

“नहीं मेरे ख्याल से तब से जब मैं आपसे पहली बार मिला था , और आपको भाभी समझ लिया था “ ये बोलकर मैंने कोमल को देखा उसके होठो में एक मुस्कान आ गयी ..

“नहीं मेरे ख्याल से कहानी तो तब से शुरू हुई जब जीवा और तिवारी ने मिलकर नेहा के पिता की हत्या की थी ..” महिमा ने अपने आँखों में आया आंसू पोछते हुए कहा ..

सभी अभी कोमल की और hi देख रहे थे तभी डॉ बोल पड़े

“मेरे ख्याल से तो कहानी चिकारा गांव के उस छोटे से गैंग वार से शुरू होनी चाहिए जिससे जीवा गैंग बना और फिर कॉलेज का वो इलेक्शन जनाः से कोमल सकती में बदल गयी “

हम सभी के लिए ये बात बिलकुल नयी थी हम सभी ये कहानी सुन्ना चाहते थे इसलिए सभी ने एक साथ हां में सर हिलाया ..

“हुम्म्म तो मुझे शुरू से शुरू करना होगा , ठीक है तो सुनो ..”

उसने एक गहरी साँस छोड़ी …



(note-dosto यंहा से स्टोरी कोमल के पोव से चलेगी , कोशिस करूँगा की कोमल की स्टोरी जयदा समय न ले कुछ उपदटेस में कम्पलीट हो जाए )
 
अपडेट 45
फ्लैशबैक स्टार्ट ..

मैं जीवा और सम्पत एक साथ hi बड़े हुए थे , मैं एक सीधी सधी सी पढ़ने वाली लकड़ी थी वही सम्पत और जीवा को पैसे से बहुत प्यार था , और पैसो के लिए hi वो उटपटांग काम किया करते थे ,उनके लिए मेरी पढाई लिखे महज तिमेपास hi थी , ऐसे भी वो बेचारे करते भी तो क्या करते , माँ बाप का साया बचपन में hi हमारे ऊपर से छूट गया था , और इसी gurbat(garibi) ने सम्पत से हमारा रिश्ता मजबूत किया था , वो भी हमारे पास वाली जुग्गी में रहता था, वो भी अनाथ और हम भी और शायद इसीलिए उसने जीवा को hi अपना परिवार मान लिया क्योकि जीवा hi उसे भी खाना खिलता था ..

इसी सिलसिले में वो मार पिट करने लगे , जीवा और सम्पत थे तो दोस्त लेकिन भाई से बढाकर थे ..

समय बीतता गया और हम बड़े होते गए , न तो जीवा ने पढाई की और ना hi सम्पत ने लेकिन मुझे पढ़ना था , मुझे इन चुतियो के चोचलो में नहीं पड़ना था..

मैंने अपनी पढाई जारी राखी ..

वो समय ऐसा हो चला था की हमारा गांव गंजे की तस्करी का अड्डा बन गया था , आये दिन इसी बात के लिए मार पिट हुआ करती थी और गंजे के व्यापार में दो hi लोग थे

एक था जीवा और दूसरा था पठान गैंग का सलीम ..

उस समय पठान गैंग का हर जगह बहुत hi रौब था और सभी लावांडो को बस करीम भाई बनना था..

करीम भाई यानि की करीम पठान , पठान गैंग का बॉस जो की शहर में रहकर सब कुछ चलता था , सभी छोकरे लोगो का वो रोले मॉडल था …

जीवा को भी डॉन बनना था लेकिन करीम जैसा नहीं उससे भी बड़ा , उसके पास उस टाइम कोई गैंग नहीं थी लेकिन जिगर था ..

सलीम और जीवा के आये दिन लड़ाई झगड़े होते रहते थे , सलीम, जीवा को करीम के नाम से डराने की कोशिस भी करता था लेकिन जीवा किसी की सुनता तब न …

एक दिन जब हम खाना खाने बैठे थे …

“अबे तो सलीम हमारे लड़को को धमका रहा है , साला पठान गैंग का रॉब दिखा कर हमारे लड़को को डरता रहता है “

सम्पत थोड़ा गुस्से में दिख रहा था जैसा वो हमेशा hi होता था …

“टेंशन नहीं लेने का उस मादरचोद को तो एक दिन मौका देखकर उदा देना है “

जीवा ने भी स्वाभाविक रूप से कहा था

“सालो तुम लोग कैसे भाई हो, जवान बहन बैठी हुई है और तुम लोग ऐसे गालिया दे रहे हो शर्म नहीं आती क्या “

मैं ऐसे इस बात पर रोज hi चिल्लाया करती थी लेकिन फर्क किसे पड़ता था, वो दोनों बस बेशर्मो जैसे हंस पड़े थे ..

तभी अचानक ..

धाय..

एक तेज गोली आकर सीधे जीवा के गिलास में लगी ..

हम सभी झुक गए थे , समझ आ चूका था की हमला हुआ है .

जीवा ने मेरे हाथो में एक पिस्तौल थमा दी

“मैं इसका क्या करुँगी “

मैं चौक गयी थी

“रखो वक़्क़त पड़े तो चलना “

जीवा इतना बोलकर वंहा से निकल गया , गोलिया चली और जीवा और सम्पत भी घायल हुए लेकिन आखिर में जीवा ने पुरे बाजार के सामने सलीम का गाला काट दिया था …..

सलीम का गाला काट कर चौराहे पर तंग दिया गया … ये सीधे सीधे डिक्लेरेशन था की अब से वंहा बस एक hi डॉन था , जीवा भाई ..

और एक hi गैंग था जीवा गैंग ……..

लेकिन इन सबसे पठान बौखला गया था , लेकिन सहीद उसकी इस जगह से दुरी और अपने सभी वफादारों के क़त्ल के कारण उसका इस जगह से कण्ट्रोल खो गया , और जीवा की किस्मत भी उसपर महेरबान थी , सलीम के सभी लोग अब जीवा के साथ आ गए थे , गंजे के साथ साथ जमीन और पिस्तौल का काम भी चल पड़ा था , सब को पैसे जाने लगे थे इसलिए अब करीम के खास सरकारी लोग भी जीवा के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले रहे थे ..

सब कुछ बढ़िया चल रहा था तभी मेरा सिलेक्शन कॉलेज के लिए हुआ , जीवा को मुझसे कोई मतलब नहीं था की मैं क्या कर रही हु , कॉलेज शहर में था तो पहला सवाल ये आया की मैं शहर कैसे जाउंगी …

अब जीवा तो मेरी मदद करने से रहा ऐसे भी उसे मेरा पढ़ना पसंद भी नहीं आता था , तब मुझे शहर ले जाने की जिम्मेदारी ली मेरे बचपन के दोस्त भुवन ने ….

“बाबा ने “… आरती भाभी अचानक से बोल उठी

“है बीटा तुम्हरे बाबा ने “ इतना बोलकर कर कोमल ने वंहा बैठे भुवन की और देखा जो की हलके हलके मुस्कुरा रहा था ..

स्टोरी फिर से शुरू ..

भुवन और मैं भी बचपन से दोस्त थे , भुवन हमेशा से एक सीधा साधा लड़का था , जंहा गांव के सभी लोग गंजे और बंदूख में व्यस्त थे वही मैं किताबो में और भुवन मुझमे (वो हलके से हंसती है )..

मुझे पता था की भुवन मुझे पसंद करता है लेकिन मैंने उसे हमेशा hi अपना दोस्त hi समझा था , वो मेरी हर चीज में मदद करता था , मेरे हर फैसले में मेरे साथ खड़ा होता , आज भी मेरे साथ hi है जबकि सभी मुझे छोड़ कर चले गए ..

(कोमल ने भुवन को बड़े hi प्यार से देखा और फिर सर झटककर फिर से बोलने लगी )

तो है हम कॉलेज पहुंचे , और पहले hi दिन कुछ लड़के मुझे घेर कर मेरी राकिंग लेने लगे …

“ये छमिया नाम क्या है रे तेरा “

एक लड़का ने बड़े hi बत्तमीजी से पूछा ..

“तमीज से बात करो “ उस लड़के की बात सुनकर भुवन को गुस्सा आ गया था , लेकिन वो लोग लगभग 10-15 की संख्या में थे वही हम बस 2 , और भी लड़के और लड़किया वंहा मौजूद थे लेकिन सभी अपनी नजरे झुकाये हुए खड़े थे ..

“मादरचोद हमें आंखे दिखता है जनता नहीं क्या हम करीम भाई के लड़के है , और यंहा तुम्हारे सीनियर “

करीम का नाम सुनकर दिमाग hi हिल गया था , ये गांव नहीं था और अगर किसी को पता चल गया की मैं जीवा की बहन हु तो पता नहीं करीम हमारे साथ क्या करेगा , मैंने भुवन का हाथ बढ़ाया और आँखों से hi समझाया की चुप रहे ..भुवन चुप हो चूका था ..

“करीम भाई का नाम सुनकर देखो साला कैसे दुबक गया “

सभी जोरो से हांसे

“भाई क्या मस्त माल है यार , अगर इसे दिखने में इतना लजीज है तो कहने में कैसा होगा “ उसी ग्रुप के एक लड़के ने दन्त दिखते हुए कहा सभी लोग हंसने लगे और सभी की नजर मुझपर hi टिक गयी थी , मैं उन लोगो की हवसी नजरो को अपने जिस्म के हर कटाव को घूरते हुए महसूस कर सकती थी ..

वो भूखे भेडियो जैसे मुझे देख कर अपने लार टपका रहे थे , जीवन में पहली बात मुझे इतना दर लग रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे जे लोग आँखों से hi मेरा बलात्कार कर देंगे ,

आज मुझे अहसास हुआ था की मर्द न सिर्फ जिस्म से बल्कि अपनी नजरो से भी एक लड़की को नंगा कर देता है ..

उनकी नजरे मुझे चुभने लगी थी ..

“भाई ये कच्ची काली लग रही है देखो तो कैसे मचल रही है , अभी तो इसे छुवा भी नहीं है और ऐसे शर्मा रही है , जब इस नंगी करके रगड़ेंगे तब तो मजा hi आ जायेगा “

सभी कुत्ते फिर से हँसाने लगे थे ..

“बस बहुत हुआ , एक लड़की से बात करने की तमीज नहीं है क्या तुम्हे “

भुवन गुस्से से लाल हो चूका था, मैंने जोरो से उसका हाथ दबाया था लेकिन मैं जानती थी की ये लोग भी अपने हद से बाद रहे थे और किसी भी सच्चे मर्द के लिए एक लड़की के बारे में इतना सुन्ना सहन सकती से बहार hi होता है ..

है सच्चा मर्द वही होता है जो ायरत की इज्जत करे और उसके इज्जत की रक्षा करे न की वो जो किसी ायरत की इज्जत को उछलता हो ..

“मादरचोद हमें सिखाएगा तू की कैसे बात करते है, अभी तेरी आइटम को पुरे कॉलेज के सामने नंगा करके पेल देंगे न तो भी तू कुछ नहीं कर पायेगा “

एक लड़का सामने बाद कर भुवन के कालर को पकड़ने लगा , तभी भुवन भी गुस्से भी फुट गया

“मादरचोद इसे नंगा करेगा तेरी माँ की “

भुवन ने एक घुसा लड़के के मुँह में मार दिया था , सभी लोग हस्तप्रद थे , जैसे समय रुक सा गया हो , सभी नए लड़के और लड़किया हमें hi ध्यान से देख रहे थे उनके साथ साथ और भी लोग रूककर हमें hi देख रहे थे ..

भुवन का घुसा लगने पर उस लड़के की हालत वही हुई जो अक्सर नामर्दो की होती है , उसने अपने दोस्तों से भुवन को मरने के लिए कहा … वो भौखला गया था ..

भुवन भी अपने पोजीशन में आ गया था लेकिन एक अकेला इंसान आखिर कितनो से लड़ पता , कुछ hi देर में उसके ऊपर काबू कर लिया गया था उसके हाथ पैरो को लोगो ने पकड़ लिया था और उसे बुरी तरह से मार रहे थे ..

मेरे सामने ये सब हो रहा था, मेरे कारन मेरा दोस्त मार खा रहा था और मैं बस चुप चाप देख रही थी … अचानक भुवन की आंखे मेरी आँखों से मिली जैसे वो कह रहा हो की जब तक मैं जिन्दा हु मैं लड़ता रहूँगा ..

और वही वो पल था जब मेरे अंदर कुछ हो गया …

मेरे हाथ वंहा गए जंहा मैंने सोचा भी नहीं था , मेरे बैग में अभी भी जीवा का दिया वो पिस्तौल था मैंने पिस्तौल निकाल लिया और सीधे उन लोगो पर तान दिया…

“छोडो इसे वर्ण “

मैं जोरो से चिल्लाई थी

सभी की नज़ारे मेरे hi ऊपर थी

“साली हमें पिस्तौल दिखती है “

उनमे से एक चिल्लाया और दो तीन लोगो ने अपने अपने जेबो से पिस्तौल निकाल ली , मेरे हाथ ट्रिगर पर जा चुके थे ,

धय धाय धाय ..

हवा में तीन गोलिया उड़ने लगी थी ,, न जाने ये गोलिया किसके किस्मत में थी ..

एक के कंधे में ये जा घुसी, तो 2 गोलिया बस लोगो के आजु बाजु से hi निकल गयी थी ..

मैंने जीवन में पहली बार बंदूख चलायी थी , मुझे नहीं पता था की मेरा निशाना क्या है …

मैं बस मूर्ति के जैसे कड़ी थी की..

“मादरचोद ने गोली चला दी ,मारो साली को “

लगभग 4-5 बंदूखों की नोक मेरी और हो चुके थे , धाय धाय धाय ..

हवाओ में गोलियों की आवाज गूंज गयी थी , मैं अभी भी मूर्ति के जैसे जमी हुई कड़ी थी की ..

किसी ने मुझे धक्का देकर निचे गिरा दिया था , और भी गोलिया चली ..

“तिवारी निकल जा यंहा से ये तेरा मामला नहीं है ..”

“ये मेरा कॉलेज है , और यंहा का हर मामला मेरा मामला है … अगर करीम भाई को पता चला की तुम लोग कॉलेज में ये सब कर रहे थे तो सोचो तुम्हारा क्या हल होगा …”

उस शख्स की बातो से वो लोग जैसे शांत हो गए

“लेकिन इस साली ने ..”

“टुनमे बत्तमीजी की थी … अब मामला यही ख़त्म करो , मैं इसमें पुलिस और करीम भाई को इन्वॉल्व नहीं करना चाहता “

“ठीक है आज तो बच गए लेकिन साली अगर कभी अकेली मिली न तो पुरे शरीर का गोश्त नोच लेंगे “

वो लोग वंहा से निकल गए थे ..

ये वही शख्स था जिसने मुझे धकेल कर मेरी जान बचाई थी , वो एक लम्बा चौड़ा , गोर रंग का शख्स था .. माथे पर एक तिलक लगा हुआ था जो उसके गोर रंग में और भी खिल रहा था ..

गले में एक दुप्पट्टा और कुरता और जीन्स पहने हुए ये कोई नेता जैसे लग रहा था ..

“तुम लोग तो बड़े hi बहादुर निकले , अकेले hi इन लोगो से भीड़ गए , गनीमत है की मैं आ गया वर्ण “

हमारी आंखे मिली और जैसे कुछ हो गया , ये अहसास जीवन में पहली बार हुआ था , जैसे पुरे शरीर में एक करंट सी दौड़ गयी थी ..मैं अब भी मूर्ति की तरह कड़ी हुई उसके उन गुलाबी होठो दो देख रही थी जिनसे इतने प्यारे शब्द निकल रहे थे ..

उसकी वो बड़ी बड़ी आंखे , मैं न जाने क्यों शर्मा सी गयी थी ..

“hello ..”

उसने मुझे थोड़ा सा हिलाया

और जैसे मैं किसी सपने से जाएगी

“जी जी .. थैंक्स आपने हमें बचा लिया “

“थैंक्स वाली क्या बात है , ऐसे मैं इस कॉलेज का होने वाला प्रेजिडेंट हु , दया संकर तिवारी , आप लोगो का पहला दिन है ??”

उसने अपना हाथ बढ़ाया और भुवन और मैंने उससे हाथ मिलाया .. उसकी आंखे भी बार बार मेरी और hi जा रही थी ..

हम थोड़ी देर तक बात किये , पता चला की कॉलेज में इलेक्शन होने वाला है और दया सनकर भी एक कैंडिडेट है ..

लेकिन तो तगड़ा कैंडिडेट है वो वंहा के मला का बीटा है , यंहा मजेदार बात ये थी की दोनों hi करीम से सपोर्ट में थे ..

करीम ने दोनों को hi कह दिया था की अपने लेवल में काम करो ..

करीम का नाम यंहा ऐसे था जैसे वो कोई भगवन हो, उसकी परमिशन के बिना यंहा कोई भी कुछ नहीं कर सकता था ..

“तो तुम्हारे लिए तो बड़ी मुश्किल होगी “ भुवन ने तिवारी से कहा

“है मुश्किल तो है , उसका बाप मला है और उसके पास पैसे भी बहुत है , लड़के भी ऐसे है जो मार काट कर सके … पावर पैसा दोनों है उसके पास .. और मेरे पास है सिर्फ मेरा हौसला .. बिना किसी सपोर्ट के इतना आगे बाद गया की तो आगे भी कर hi लूंगा , कुछ लड़के है मेरे पास और साथ में करीम भाई से परमिशन भी ले ली है चुनाव लड़ने की “

दया की हर बात मुझे और भी इम्प्रेस कर रही थी , वो सिर्फ हैंडसम hi नहीं था उसके अंदर हुमूर भी था , कुछ करने का जस्बा उसके आँखों में दिखाई देता था , उसके चेहरे में एक तेज था , वो इंटेलीजेंट था बिलकुल शार्प … कुल मिलकर मुझे वो पसंद था .. पहली hi मुलाकात में उसने मुझे इतना इम्प्रेस कर दिया था जितना अभी तक कोई नहीं कर पाया था …….

“ऐसे तुम लोग मेरी पार्टी ज्वाइन कर रहे हो न “

उसने आखिर में कहा

“है बिलकुल “ भुवन और मेरे मुँह से एक साथ निकला था ..

चीजे बड़ी hi सिंपल लग रही थी लेकिन मुझे क्या पता था की ये मुलाकात और वो लड़को से मेरा लड़ जाना आगे कितना बड़ा तांडव करने वाला था ……….

दूसरे दिन जब हम कॉलेज पहुंचे तो वह पर भीग लगी हुई थी जंहा पर हमारी लड़ाई हुई थी ..

कई लाशे रस्सियों के जरिये छत से बांध दी गयी थी , उनका खून निचे टपक रहा था , जमीं पर खून फ़ैलाने लगा था , पुलिस वाले भी अपने नाक में रुमाल रखे थे, जो भी कमजोर दिल का इंसान उसे देखता वो उलटी कर डालता ..

जब मैंने उन्हें देखा तो मेरी भी सांसे रुक सी गयी ..



वो लोग वही थे जिनके साथ कल हमारा झगड़ा हुआ था ….
 
अपडेट 46
पुलिस पूछतज कर रही थी साथ hi करीम भी वंहा आने वाला था …

उसके लड़को को किसी ने इतनी बेरहमी से मारा था की ये हर जगह चर्चा का विषय बन चूका था ..

दया संकर भी मौके पर पहुंच चूका था ,

“तुम दोनों जीतनी जल्दी हो सके यंहा से गायब हो जाओ “

तिवारी ने हमें देखते हुए कहा

“लेकिन क्यों हमने तो कुछ नहीं किया है “

मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर वो हमें क्यों गायब होने के लिए बोल रहा है ,

“तुम समझ नहीं रही हो , करीम शैतान है .. और ये उसके hi लोग थे , इनको इतनी बेरहमी से मारा गया है की वो बौखला hi गया होगा, इससे पहले की उसे पता चले की कल तुम लोगो का इन लोगो से झगड़ा हुआ है तुम लोग निकल जाओ “

“लेकिन यार जब हमने कुछ किया hi नहीं तो ..”मैं फिर से कुछ बोलने वाली की दया ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे कोने में खींचा साथ साथ भुवन भी आ गया

“तुम समझ क्यों नहीं रही हो करीम को तो बस बहाना मिल जायेगा “

“किस बात का “ इस बात भुवन ने कहा था

“वो साला बहुत hi ठरकी टाइप का इंसान है , तुम्हे देखते hi लार टपकने लगेगा , और जब उसे पता चलेगा की कल इन लोगो का तुमसे झगड़ा हुआ था तो उसे बहाना मिल जायेगा तुम्हे परेशां काने का “

दया के मन में मेरे लिए इतनी चिंता देख कर मुझे सच में अच्छा लगा …

“है कोमल ये सही बोल रहा है , मैंने भी करीम के बारे में बहुत सुना है “

भुवन भी चिंता में पद गया था , दया ने हमें कॉलेज से बहार कही जाने के लिए कहा लेकिन हम दोनों कॉलेज में hi ऊपर की एक क्लास में छिप गए थे जंहा से बहार का नजारा साफ साफ दीखता था , वो ऐसी जगह थी जंहा से हम जब चाहे तब बहार भी भाग सकते थे ..

थोड़े देर में करीम आया बहुत गली गलोच वैगेरह हुए , हमारे बारे में भी किसी ने बता दिया , उसने पुलिस के सामने hi हमें मार डालने की बात भी कह दी और पिस्तौल निकाल कर हवाई फायर भी कर दिया , मुझे समझ आ गया था की मेरे पढ़ने का सपना अब सपना hi रह जायेगा ऐसे माहौल होने के बाद मैं फिर से कभी कॉलेज नहीं आ पाऊँगी …

ये सोचते सोचते hi मेरे आँखों में आंसू आ रहे थे तभी मैंने जो देखा उसे देखकर मेरी हालत hi खराब हो गयी ..

‘धाम धाम धड़म ढैया रे सबसे बड़े लड़ाईया रे ओमकारा ..’

ये गण सुनकर मैं और भुवन दोनों hi चौक गए थे , चौकाने का कारण भी था ये गण जीवा और सम्पत का फव था और वो अपनी जीप में इसे फुल आवाज में चलकर घुमा करते थे , और ये क्या वो लोग सच में इधर hi आ रहे थे …

उनकी जीप कॉलेज में आकर रुकी साथ में उनके चलो की पूरी की पूरी टोली भी उतर गयी सभी के हाथो में बड़े बड़े बंदूख थे ..

सभी लोग आंखे फाडे हुए उन्हें hi देख रहे थे साथ hi कमरे में खड़े हम लोग भी ..

“दीदी जीवा भैया आपको बुलाये है “

हमरे कमरे के बहार खड़े एक लड़के ने कहा , वो हमारे hi गांव का था ..

मैंने और भुवन ने एक दूसरे को देखा ..

“हो गया सत्यानाश “भुवन के होठो से निकल गया था ..

“करीम भाई … ये लड़के मेरी बहन को छेड़ रहे थे इसलिए इन लोगो का ये हाल कर दिया, फिर से कोई नजर उठा कर देखेगा तो उसकी भी आंखे निकाल लूंगा चाहे वो किसी का भी आदमी हो “

जीवा के आदमी करीम के सभी लोगो को घेर कर खड़े थे …

“जीवा… तो तू hi जीवा है .. सेल शहर आकर बड़ी गलती कर दी तूने “

मैं और भुवन भी निचे जीवा और सम्पत के साथ खड़े हुए थे , सब को समझ आ चूका था की माजरा क्या है , ऐसे भी जीवा को शहर में अपनी धाक जमनी थी और उसके लिए सेल ने मेरे कॉलेज लाइफ की क़ुरबानी दे दी ..

मैं जानती थी की उन लोगो को कितनी बेरहमी से मरने का कारण सिर्फ बहन का प्यार नहीं है बल्कि करीम को उसके घर में घुसकर चैलेंज देना है, ताकि सबके होठो पर जीवा का नाम आ जाए ..

“जैसे अपने गांव से तेरा धंधा उखाड़ा है वैसे hi यंहा से भी तुझे उखड दूंगा करीम “

जीवा के होठो में मुस्कान आ गयी थी , करीम ऐसी हालत में थे की वो कुछ नहीं कर सकता था , पुलिस वाले भी बस खड़े हुए देख रहे थे शायद जीवा ने पैसा और बंदूख दोनों से उन्हें चुप करवा दिया था …

“तूने अपनी बहन को मेरे नजर में लेकर अच्छा किया जीवा “

करीम की आँखों में मैंने एक कमीने पैन को देख लिया था, उसकी ललचाई आंखे मेरे पुरे बदन को घर रही थी ..

तभी ..

“aaaaaaaaaaa”

एक चीख से पूरा माहौल hi गूंज गया ..

करीम के ऐसा बोलते hi सम्पत ने करीम के एक आदमी जो उसकी बात पर हंस रहा था उसके पेट में आधी तलवार घुसा दी , करीम गुस्से में अपने पिस्तौल पर हाथ को बंधा लेकिन अगले hi पल उसके कनपट्टी में बंदूख टिका दी गयी थी , करीम ने अपने गुस्से का घुट पि लिया ..

“ये तुझे बहुत भरी पड़ेगा जीवा ..”

करीम ने अपने दांतो को कसते हुए कहा

“हलकी चीजों का सूक भी नहीं है करीम “

जीवा की बात सुनकर उसके सभी लड़के हंस पड़े थे .. करीम के जाते hi जीवा के लड़को ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी ..

बाकि के लोग बस किसी मूर्ति की तरह खड़े रह गए , अब तो इन लोगो को इन सभी चीजों की आदत सी hi हो गयी थी , लॉ एंड आर्डर के नाम पर कुछ बचा hi नहीं था ,, करप्शन और दर का माहौल था , जो पैसो से नहीं बिकता उसे पिस्तौल के डैम पर काबू में लाया जाता था ..

ये माहौल करीम ने hi बनाया था की उसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा सकता था लेकिन आज उसका पूरा उपयोग जीवा कर रहा था , सभी को पता था की जीवा ने अपने पुरे इलाके में करीम की ऐसी की तैसी कर राखी है , इसलिए लोग उसका सहयोग भी कर रहे थे क्योकि दो गैंग की लड़ाई में बहुतो का फायदा होता है ..

एक कम्पटीशन हो तो लोगो को दाम भी सही मिलता है और प्रतियोगिता तो पैदा हो hi चुकी थी ..

लड़के जीवा भैया की जय सम्पत भैया की जय के नारे लगा रहे थे , तभी दया भी दौड़त हुआ आ गया और जीवा के पेअर छू लिए ..

“अरे तुम कौन हो ..”

“अरे भैया ये वही है जिसने कल कोमल दीदी की मदद की थी “मेरे गांव वाला लड़का बोल पड़ा अब मुझे समझ आ गया था की आखिर जीवा को इन सबके बारे में इसी चूतिये ने बताया था ..

“ओह अच्छा नेता जी “

जीवा ने दया की पीठ थपथपाई

“अरे कहा भैया , हम तो बस अभी चुनाव में खड़े हो रहे है , मैं चाहता हु की मेरा सपोर्ट आप करो “

दया संकर की बात सुनकर जीवा ने उसे थोड़ा घुरा

“क्यों भाई ..”

“क्योकि भैया हमारे ओप्पोसिशन का साथ करीम भाई दे रहे है “

जीवा ने एक बार सम्पत को देखा

“अबसे करीम , करीम है न की करीम भाई ..और तू लड़ चुनाव साला पिस्तौल और गंजे से पूरा कॉलेज को भर देंगे … जो सामने आये ठुकवा देंगे , करीम की माँ छोड़नी है हर जगह .. अब से बस एक hi भाई होगा जीवा भाई …समझा छोटे “

दया संकर ऐसे खुस हुआ जैसे सेल को कोई वरदान मिल गया हो ..

“बिलकुल भाई अब तो आपके hi नाम का डंका बजेगा “

तिवारी की नजर मुझपर पड़ी , लेकिन मैं उसकी इस हरकत से बहुत गुस्से में थी , मैं नहीं चाहती थी की जीवा अब इस कॉलेज में भी अपना उत्पात मचाये .. मेरा बिगड़ा हुआ चेहरा देख कर जीवा ने मेरे गलो को पकड़कर हिलाया

“अब मेरी प्यारी बहन के पुरे कॉलेज में बस जीवा भाई का नाम होगा “

उसकी आँखों में शरारत थी और वो मुझे चिढ़ा रहा था.. मैं मुँह बनाकर भुवन का हाथ पकड़कर वंहा से निकल गयी और जीवा और सम्पत जोरो से हंस पड़े थे ……….

******

“यार गांव में तो जीना हराम कर hi रखा था अब यंहा भी सर में बैठा कर नाचेंगे , कॉलेज को पूरा बर्बाद कर देंगे ये लोग, अब रोज बस मार काट और गंजे बजी होगी यंहा पड़े तो भूल hi जाओ “

मैं बुरी तरह से अपसेट थी , भुवन को तो कुछ फर्क hi नहीं पड़ता जो मैं बोलती वो बस उसी में सर हिला देता था ..

“ऐसे भी ये कॉलेज पहले से hi बर्बाद था देखि न कल की लड़कियों से सेल कैसे बात कर रहे थे , दादागिरी तो पहले भी थी और नेता गिरी भी … वो साला तिवारी कैसा दाल बदलू आदमी है , कल तक तो करीम भाई करीम भाई बोल रहा था आज जीवा के साइड आ गया “

भुवन ने भी गुस्से में कहा

“है यार लेकिन अब इस कॉलेज में बस गैंग वार टाइप की चीजे होने लगेंगी और सबसे जयदा घटा तो मुझे है न करीम के आदमियों का हमेशा खतरा रहेगा … और जीवा के लोग भी हमेशा नजर रखेंगे … जिंदगी नर्क बना के राखी है सालो ने “

मेरी बात सुनकर भुवन थोड़ा हंसा

“मैं परेशां और तू हंस रहा है “

“अरे तो क्या करू .. मेरे दिमाग में एक बात आयी इसलिए हंसी आ गयी ..”

“अच्छा क्या ??”

“तू गुस्से में बड़ी प्यारी लगती है”

भुवन की बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठी थी , कभी कभी तो लगता था की इसे अपना hi लू लेकिन फिर लगता की हम अच्छे दोस्त hi अच्छे है …

मैंने उसके गलो में हलकी सी चपत लगा दी

“तुम्हे क्या लगता है की कौन जीतेगा , “

मेरे मन में एक संदेह आ गया था …

मेरी बात सुनकर भुवन मुस्कुराया

“जिसके साथ तुम हो वो hi जीतेगा “

मैंने उसे गुस्से से देखा

“वह .. मैं किसी के साथ नहीं हु “

वो हंस पड़ा

“तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे की जीवा के ऊपर कोई मुसीबत आ जाये तो तुम पीछे हैट जाओगी.. अभी तक जीवा को तुम्हारी जरुरत नहीं पड़ी लेकिन मुझे पता है की आगे पड़ेगी और तुम उसकी मदद भी करोगी …”

मैंने एक बार भुवन को घुरा , क्या सच में ऐसा था …

“मुझे नहीं लगता की मैं जीवा की मदद करुँगी या ऐसा कुछ काम भी करुँगी ..”

“मुझे इतना तो पता है की अगर उसके ऊपर कोई अफाट आयी तो तुम उसकी हेल्प जरूर करोगी “

“अब वो मेरा भाई जो है “

मैं खिड़खी से बहार देखने लगी थी…

माहौल बदल रहा था कॉलेज का चुनाव ऐसा होता है मैंने सोचा भी नहीं था , पैसे बहाये जा रहे थे ,तलवारे और बन्दूखे चल रही थी .. लेकिन फिर भी पढाई चल रही थी , सब कुछ अपने अपने जगह पर था , सम्पूर्ण बैलेंस की स्तिथि .. के साथ ..

तभी एक दिन दया संकर मेरे पास आया ..

बातो hi बातो में उसने मुझसे कहा

“तुम हमारी पार्टी की तरफ से चुनाव क्यों नहीं लड़ती ..??”

“तुम्हारी पार्टी ?? तुम तो जीवा के हाथो की कटपुतली बन गए हो “

मेरी बात सुनकर उसने एक बार मुझे घुरा

“तुम जीवा भाई से नफरत क्यों करती हो “

“बात नफरत की नहीं है , वो मेरा भाई है और मैं उससे नफरत नहीं करती लेकिन बात वसूलो की भी तो है , ऐसे किसी को भी मार देना , अपना वर्चस्व फ़ैलाने के लिए किसी की फिक्र न करना .. ये सब कहा तक सही है ..”

“यार सबका अपना काम होता है , और जीवा भाई का काम hi यही है तो वो क्या करे , अपना काम तो ईमानदारी से पूरा कर रहे है न “

मैंने दया को एक बार घर कर देखा

“अच्छा और तुम्हारा काम क्या है , लोगो के जुटे चाटना , कभी करीम के चाटते थे और अब जीवा के “

मेरी बात सुनकर भुवन सकते में आ गया था , उसने मेरे हाथो को जोरो से दबाया लेकिन जिसे बुरा मन्ना था वो बिलकुल भी बुरा नहीं मान रहा था , तिवारी के चेहरे पर कोई भी गुस्से वाला भाव नहीं आया बल्कि वो बस मुस्कुरा रहा था …….

“ये पावर का गेम है कोमल , मुझे पॉलिटिक्स में आना है और जो भी मुझसे पावरफुल है और आगे बढ़ा सकता है मैं उसके साथ हो जाऊंगा , अगर धोखा देना पड़े तो धोखा भी दूंगा , यही राजनीती है यही सियासत के देव पेंच है ..”

उसकी इस बात से मेरा गुस्सा और भी तेज हो गया था , मैं उसे पसंद करती थी लेकिन उसकी इन हरकतों से मुझे बहुत hi छिड़ होती थी

“तो क्या तुम उनके कुत्ते बन जाओगे “

वो जोरो से हंसा

“तुम्हे लग रहा है की मैं उनका कुत्ता बन गया, यही सोच लोगो को आगे बढ़ने नहीं देती तुम ये नहीं देख रही हो की पावर मिलने के बाद मैं जीवा और करीम दोनों से hi जयदा पावरफुल हो सकता हु …….

नेता बनने के लिए गुंडे बस सिदहि की तरह होते है , एक बार जो पावर में आ गया उसके सामने फिर करीम और जीवा जैसे गुंडों की कोई ावुकत नहीं होती , लेकिन फिर भी नेता लोग इन्हे पाल कर रखते है , अभी मैं तुम्हे इनका कुत्ता लग रहा हु न , देखना एक दिन ये मेरे कुत्ते की तरह होंगे …”

दया की आँखों में कोई बात तो थी जिसने मुझे उसकी बातो की सच्चाई और दृढ़ता का अहसास दिलाया था ..

मैं स्तब्ध बस उसके तेजस्वी चेहरे को देखे जा रही थी

“और कोमल गुंडा होना से जयदा म्हणत नेता होने में लगती है , बहुत दिमाग का काम है .. और इसलिए मैं चाहता हु की इसमें तुम मेरा साथ दो , पावर की बात hi अलग होती है “

उसकी बात सुनकर मैं जैसे इम्प्रेस hi हो गयी थी ..

“मुझे भी पावर चाहिए लेकिन आईएएस बनकर “

वो जोरो से हंसा

“अगर मंत्री बन जाओगी न तो कई आईएएस तुम्हारे निचे काम करेंगे “

“है लेकिन सिर्फ 5 सालो के लिए .. लेकिन आईएएस तो जीवन भर के लिए होता है “

वो फिर से हंसा

“तुमने अभी दुनिया देखि नहीं है इसलिए ऐसा बोल रही हो , यंहा सब भ्रस्ट हो जाते hi और एक बार जिसने अपनी ईमानदारी छोड़ी या गलती से भी कोई गलत काम किया तो फिर आईएएस की पावर बस नेताओ का खिलौना बनकर hi रह जाता है … आईएएस की एक गलती को जीवन भर के लिए उसके खिलाफ उसे किया जाता है , उन्हें इतना मजबूर कर दिया जाता है की वो अपने पावर का उसे hi नहीं कर पते और करते है तो बस नेताओ के इशारे पर …

और एक नेता जीवन भर के लिए नेता होता है , ये सभी जानते है की आज भले hi कोई सत्ता में ना हो लेकिन कल को हो सकता है .. इसलिए किसी पर हाथ लगाने से पहले 10 बार सोचना पड़ता है “

तिवारी की बातो से मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा कोई सपना कांच सा टूट गया हो .. मैंने आईएएस अधिकारी के बारे में जो भी सुना और देखा था यंहा सब कुछ टूटता हुआ दिख रहा था , मुझे किसी ने उनके कमजोर पक्ष के बारे में नहीं बताया था , सब बस यही बोलै करते थे की एक बार आईएएस बन जाये तो लाइफ बन जाती है या फिर इतना पावर मिल जाता है की आप hi भगवन हो ..

लेकिन है ये भी एक कला पक्ष था जिसे सभी इग्नोर कर जाते है , असल में सभी चीजों का एक बैक दूर भी होता है ..

“है लेकिन वो इतने भी कमजोर नहीं होते जितना तुम समझ रहे हो “

मैंने अंतिम बार प्रयास किया

“है मैं मंटा हु , लेकिन वो इतने पावरफुल भी नहीं होते जितना तुम सोचती हो “

दया हंस पड़ा , और मैं मनो नर्वस हो गयी

“देखो कोमल ये एक बहस है की कोण ज्यादा पावरफुल होता है , यद् रखो की कोई पूरी तरह से सही नहीं हो सकता , सभी के ऊपर कोई न कोई कंडीशन तो होती hi है जो किसी खास परिस्थिति में लोगो को पावर प्रदान करती है और किसी खास परिस्थिति में लोगो को कमजोर कर देती है.. तो सब बाटे अभी दिमाग से निकाल दो ..

तुम्हे जो करना है वो करना लेकिन काम से काम अभी तो मेरा साथ दो .. समझ लो की मुझे तुम्हारी जरूरत है “

मैंने उसके चेहरे को देखा , उसके पास बात करने का एक सलीका था , उसने ऐसे कहा था की सच में मेरे बिना उसका कोई काम नहीं हो पायेगा , मुझे पता था की वो झूठ था लेकिन फिर भी उसका ये झूठ भी बड़ा hi मीठा था ..

उसने बोलना जारी रखा

“कोमल तुम मेरे पार्टी से और किसी भी पार्टी से अकेली लेडीज कैंडिडेट होगी , तो लड़कियों का वोट हमरे तरफ खींचने में मदद मिलेगी “

मैं उसकी बात सुनकर चौकी

“तो क्या दूसरी पार्टी की तरफ से कोई भी लड़की कड़ी नहीं हुई है “

दया ने एक गहरी साँस ली

“यंहा की पॉलिटिक्स इतनी ख़राब है की कोई भी लड़की इसमें फ़साना नहीं चाहती , या घर वाले hi मन कर देते है … हमारे सामने वालो के पास इतना दिमाग भी नहीं है की किसी लड़की को खड़ा करने की भी सोचे , उन्हें तो लगता है की चङाव बस पैसे और ताकत के बल पर hi जीती जाती है … ये एक अच्छा बदलाव होगा और ऐसे भी तुम चाहे जो भी बनो मकसद तो एक hi है न ..

बदलाव……..”


उसकी बात सुनकर मनो मेरा दिमाग hi खुल गया था , मैंने बस सर हिलाकर उसे सहमति दे दी ……
 
अपडेट 47
चुनाव अपने पुरे जोरो पर था, मुझे भी एक पोस्ट के लिए खड़ा करवाया गया था सच पूछो तो सामाजिक काम करने का मजा भी अलग hi होता है , मनो एक नशा सा हो …

मैं रोज hi 100 से जयदा लड़कियों से मिल रही थी बहुतो की समस्या सुन रही थी और उन्हें भरोषा दिला रही थी , अधिकतर लड़कियों की तकलीफ यही थी की गुंडे उन्हें परेशां करते है..

मैंने साफ कह दिया था की अगर मैं जीती और दया संकर तिवारी प्रेजिडेंट बना तो पहला एक्शन इन्ही पर होगा , लड़किया मेरी बात मान भी रही थी क्योकि उन्हें पता था की मैं भी एक गैंगस्टर की बहन हु और छोटे मोठे गुंडों की तो बस मुझे देख कर hi फैट जाती थी ..

इधर दूसरी पार्टी भी पूरा डैम लगा रही थी , महिला कैंडिडेट का ना होने का गम अब उन्हें सत्ता रहा था , क्योकि वो लड़को को फुल दारू पार्टी देते थे और वही लड़के दूसरे दिन पार्टी बदलते हुए देखे जाते थे …

दूसरी तरफ से खुद मला तक अपने बेटे को जितने में लगा हुआ था, ये ना सिर्फ उसका बल्कि करीम की इज्जत का भी सवाल था ..

कभी भी मार पिट शुरू हो जाती थी , मला ने अपना पोलिटिकल रुतबा दिखा कर जीवा के बहुत से लोगो को और दया के बहुत से दोस्तों को भी अंदर करवा दिया था लेकिन फिर खुद जीवा पुलिस स्टेशन जाकर उन्हें छुड़वाता ,,

जैसे जैसे चुनाव पास आ रहा था राजनीती का असली रंग दिखाना शुरू हो रहा था , वो गन्दी से और भी गन्दी होते जा रही थी , कैंडिडेट्स को धमकाने से लेकर किडनेपिंग तक सब चालू था, दया संकर , भुवन और सम्पत हर समय कॉलेज और होस्टल्स में hi पड़े रहते थे ,मेरी सुरक्षा का इंतजाम ऐसे किया गया था जैसे मैं कोई महारानी हु :lol1:

हमें टूटता हुआ न देखकर करीम और मला दोनों hi भड़के हुए थे ,खतरा हर समय बाद रहा था, इलेक्शन में बस दो hi दिन बचा था की……….

“कोमल तुम आज यही रुक जाओ फिर गांव जाओगी और फिर कल वापस आओगी , ऐसे भी काम बहुत है और भुवन भी यही रुकेगा “

रत होने वाली थी और दया संकर मुझे समझा रहा था, अब हम दोनों के बिच अच्छी दोस्ती सी हो गयी थी , ऐसे आकर्षण तो दोनों के मन में था लेकिन काम की अधिकता के कारण कभी हमारी भावनाये बहार नहीं आ प् रही थी ,वही भुवन भी अब कॉलेज में अच्छे से राम गया था उसे भी मजा आ रह था ..

“नहीं यार इतने लड़को के बिच कहा सोऊंगी “

मैंने उसे आंखे दिखते हुआ कहा

“अरे पागल तेरे लिए गर्ल्स हॉस्टल में एक कमरा खली करवा देते है “

“नहीं यार जीवा भाई भी अकेला होगा , क्या भुवन सच में रुक रहा है ??”

तिवारी ने भुवन को देखा ..

और हाथ हिलाया , भुवन भी पास आ चूका था ..

“नहीं मतलब नहीं देख रही है की रत होने वाली है मैं तुझे नहीं जाने दूंगा “

भुवन ने सुनते hi प्रतिकार किया था

“अरे यार कार से जा रही हु और ये लड़के भी तो जा रहे है साथ में “

भुवन ने एक बार उन लड़को को देखा मुझे गांव छोड़ने के लिए तिवारी ने 2 लड़को को नियुक्त किया था

“उउउ नहीं , चल मैं चलता हु साथ “

भुवन की बात सुनकर दया संकर का मुँह थोड़ा उतर गया

“यार भुवन बहुत काम है ..”

“कोमल से जयदा जरुरी क्या काम है “

भुवन की बातो का तो तिवारी के पास कोई भी जवाब नहीं था , भुवन की बात सुनकर मेरे भी होठो में मुस्कान आ गयी थी , ऐसे hi नहीं वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , मेरे भाइयो से ज्यादा ख्याल तो ये मेरा रखता था ..

“यार कोमल रुक जा न बहुत काम है ऐसे भी वंहा जा कर क्या करेगी “ तिवारी ने एक आखरी बार जैसे मुझे रोका …

मैंने भुवन की और देखा

“तेरी मर्जी है मैं कुछ नहीं बोलूंगा , ऐसे सम्पत भी रत को यही आ जायेगा, और जाना है तो बता मैं साथ चलूनागा “

भुवन ने पूरी बात मेरे ऊपर दाल दी थी

“सच पूछो तो इसीलिए नहीं रुकना चाहती , सम्पत भी आएगा फिर तुम लोग तो पि कर हो जाओगे टुन्न और फिर करोगी गली गलौच और मैं पद जाउंगी अकेली “

मैंने मुँह बनाते हुए कहा

“तो गर्ल्स हॉस्टल में रुक जा न “ तिवारी फिर बोल उठा

“वंहा अकेले क्या करुँगी , बोर हो जाउंगी “

“अच्छा ऐसा कर की तू गर्ल्स हॉस्टल में hi रुक जा , मैं काम होने के बाद आ जाऊंगा , बियर लेके साथ बैठकर बियर पिएंगे “

भुवन का प्लान तो मस्त था लेकिन इससे दया के चेहरे पर चिंता के भाव साफ दिखाई दिए ऐसा लगा जैसे इस बात से उसका दिल जल रहा हो , सच बताऊ तो मुझे ये देखने में बहुत मजा आया और मैंने झट से भुवन का ऑफर एक्सेप्ट कर लिया ..

“ठीक है फिर मैं इंतजाम करवा देता हु , और रत में मैं भी वही आ जाऊंगा “

“नहीं तुम मत आना तुम्हे तो बहुत काम होगा न ..”

मैंने दया को और भी जलाते हुए कहा था ,

रत के करीब 12 बज रहे थे जब भुवन वंहा आया , उसके साथ कुछ लड़के और थे , वो बियर की पूरी करीब 10 पति वंहा रखकर चले गए …

“अरे ये सब क्या है “ मैं अपने कमरे में अकेले थी असल में ये मेरा कमरा नहीं था लेकिन मेरे लिए खली करवाया गया था ..

“अरे इसे सुबह हॉस्टल के फ्रीजर में रखवाना है ताकि कल शाम को यंहा की लड़कियों को बियर की पार्टी दिया जाये “

भुवन की बात सुनकर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया

“पागल है क्या लड़किया ये पियेंगी …. किसी को पता चला न तो इनके माँ बाप इन्हे कॉलेज से खींचकर घर ले जायेंगे ..”

वो दौर था जब लड़किया जायदा पड़े नहीं करती थी , सिर्फ पढ़े लिखे घर की लड़किया hi कॉलेज जाया करती थी , उस समय लड़कियों का बियर या सिगरेट पीना बहुत बोल्ड कदम मन जाता था , मजेदार बात ये है की कही कही आज भी ऐसा hi मन जाता है …

“अरे फ़िक्र न कर सब पीती है “

हम दोनों hi हॉस्टल के छत पर बैठे तारो को देख रहे थे, आस्मां में टारे चमक रहे थे और हमारे हाथो में बियर की बोतल ..

“भुवन अगर मेरे जीवन में सबसे जयदा कोई अहमियत रखता है तो वो तू है “

मैं हलके नशे में आ चुकी थी और भुवन के लिए मेरा प्यार उमड़ने लगा था ..

भुवन मेरी बात सुनकर बस हलके से मुस्कुराया

“अच्छा और तिवारी “

“तिवारी क्या ??” मैं उसके बात से चौक गई थी

“जिस तरह से तू उसे देखती है तेरी आंखे तो कुछ और hi कहती है “

भुवन की बात सुनकर मैं थोड़ा घबरा गयी थी , मैं जानती थी की वो मुझे प्यार करता है लेकिन कभी कहता नहीं , उसके आवाज की उदासी भी इसका सुबूत थी ..

“देख भुवन अभी मैं..”

“कोमल मैं तुझसे प्यार करता हु “ भुवन ने एक hi साँस में कह दिया था .. मैं स्तब्ध hi उसे देख रही थी मुझे समझ hi नहीं आ रहा था की मैं उसका क्या जवाब दू, वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , बचपन से उसने मेरे खुद के भाइयो से जयदा मेरी हिफाजत की थी, मैं उसका दिल नहीं दुखाना चाहती थी ..

“मैं जनता हु कोमल की तुम भी ये जानती हो , और ये भी जनता हु की तुम मुझे प्यार नहीं करती … और मैं शायद ये कभी तुमसे न कहता लेकिन ……. “

मैंने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ..

“तू मेरे जीवन का एक बहुत hi अहम् हिस्सा है भुवन और हमेशा रहेंगे .. तू ऐसे दुखी न होना , मैं किसी की भी राहु लेकिन दोस्त मैं हमेशा तेरी hi रहूंगी ..”

भुवन के चेहरे में हलकी सी मुस्कुराहट आयी उसने मेरे गलो को थाम लिया और हलके से एक चुम्मन मेरे माथे में कर दिया ..

“दया संकर मुझे सही लड़का नहीं लगता कोमल, मैं जनता हु की तू उसे पसंद करती है लेकिन वो अलग hi तरह का कमीना है , अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकता है “

भुवन ने पहली बार दया संकर के बारे में मुझसे कोई बात की थी

“शायद है वो कमीना है लेकिन क्या मेरे लिए भी , मतलब मुझे तो लगता है की वो मुझसे प्यार करता है ..”

“हो सकता है लेकिन कोई भी फैसला बहुत hi सोच समझ कर लेना कोमल , मैं तुम्हे दुखी नहीं देख सकता “

भुवन की इस बात से मैं उसके साइन से लग गयी , अब ये शराब का नशा था की हमारे बिच का दोस्ताना की मैं अपना दिल खोल कर उससे प्यार जाताना चाहती थी ..वो अपनत्व जाताना चाहती थी जो एक दोस्त में होता है ..

वो भी मेरे बालो को सहला रहा था ,

“फ़िक्र मत करो तुम तो हो न मुझे हर मुसीबत से बचने वाले “

मैंने मुस्कुरा कर उसे देखा

“है मैं तो तुम्हारे साथ हमेशा hi खड़ा रहूँगा लेकिन … लेकिन कोमल मैं नहीं चाहता की तुम्हारा दिल टूटे क्योकि दिल टूटने पर कोई किसी के काम नहीं आता , वो दर्द उसे भी भोगना पड़ता है जिसका दिल टुटा हो ..”

उसकी बात भी सही थी लेकिन प्यार भी तो ऐसी चीज है की करने वाला भी करने के लिए छटपटाता रहता है , और जब हो जाए तो फिर उस बेचैनी में दर्द भरी आहे भरता है , जब अपने प्रेमी से मिलता है तो उसकी खुसी में खुस होता है और फिर बिछुड़ने पर उस दर्द से दुखी होता है..

अजीब सा मामला है प्यार का , लेकिन अभी मेरे लिए ऐसा नहीं था ,मेरे पास सोचने समझने के लिए समय था , मेरे साथ भुवन था जो मुझे सही सलाह दे सकता था ..

लेकिन दिक्कत ये थी की क्या मैं उसके सलाह को मानती ???

और यही दर भुवन के मन में भी था ………

इसी सोच में दुबे हुए मैं भुवन के बांहो के घेरे में दबी हुई थी की ..

“दया संकर ..”

भुवन ने ऐसे कहा जैसे उसने तिवारी को देखा हो , मैं उससे अलग हुई तो छत के निचे खड़ा हुआ दया संकर हमें दिखाई दिया वो हमें hi घर रहा था ..

रत के अंधियारे में न जाने उसने क्या देखा था लेकिन ये बात तो साफ थी की उसने हमें पहचान जरूर लिया था , और बस वही स्तब्ध सा खड़ा था ….

भुवन ने चिल्लाकर उसे बुलाया लेकिन वो बिना कुछ बोले hi वंहा से निकल गया …………



मैं और भुवन दोनों hi समझ गए थे की तिवारी ने हमारे बारे में क्या सोचा लिया है ……….
 
अपडेट 48
चुनाव के एक दिन पहले

दया संकर मुझसे और भुवन दोनों से hi ठीक से बात नहीं कर रहा था , ऐसा नहीं था की वो हमें इग्नोर कर रहा था, नहीं वो बस जैसे अपने इमोशंस को छुपा रहा हो ..

अपने को जबरदस्ती बिजी करने की या दिखने की कोशिस कर रहा था लेकिन काम में उसका दिल भी नहीं लग रहा था ..

हमने उससे बात करने की और बात को क्लियर करने की भी कोशिस की लेकिन उसने बात को ताल दिया ..

हमने सोच लिया था की चुनाव के बाद hi इस बारे में बात करेंगे ..

इधर चुनाव की गहमा गहमी भी अपने चरम में थी ,मेरे और दया संकर के अलावा हमारी पार्टी के सभी कैंडिडेट अंडरग्राउंड कर दिए गए थे ..

तभी हमें पता चला की खुद मला उससे मिलने आया था ..

दोनों ने के कमरे में अकेले में बात की , ऐसे भी दया संकर टेंशन में था लेकिन मला से मिलने के बाद वो और भी बेचैन दिख रहा था,

“क्या हुआ क्या बोलै उसने “

सभी के मन में एक hi प्रश्न था

“उसने मुझे एक ऑफर दिया है ..”

“कैसा ऑफर ??”

“यही की चुनाव हार जाऊ ..”

“क्या ??”

सभी स्वाभाविक रूप से चौक गए

“और बदले में उसने तुम्हे क्या देनी की बात कही है “

भुवन मनो गुस्से से आग बबूला हो रहा था

“उसकी पार्टी के छात्र संघ के अध्यक्ष की पोस्ट “

तिवारी ने बड़े hi शांति के साथ कहा था ..

सभी की आंखे तिवारी पर hi लगी हुई थी , उसने एक बार मुझे घुरा उसकी आंखे ऐसी थी जैसे वो मुझमे गहराई से झांक रही हो ….

“हम सभी ने इसके लिए बहुत म्हणत की है दया , ये फैसला सिर्फ तुम्हारा नहीं हो सकता .. “

भुवन ने फिर से जोरो से कहा

“है और हम ये चुनाव जित कर रहेंगे .. ऐसे भी मैं जीवन में सभी मोर्चो में एक साथ तो नहीं हार सकता , कही न कही तो अब जितना hi है “

ये कहते हुए उसने मेरे आँखों में देखा था , मैं समझ सकती थी की वो क्या बोलना चाहता है …

शाम हो चली थी और मला तक भी ये बात जा चुकी थी की तिवारी इलेक्शन से नहीं हैट रहा था और उसने अपनी तरफ से धमकिया भी भिजवा दी .. ये सब तो चलता hi रहता था ..

शाम झमाझम बारिश हो होने लगी थी ……

“दया मुझे हॉस्टल तक छोड़ आओ “

उसने मुझे अजीब निगाहो से घुरा

“भुवन को ले जाओ , या किसी को भी ले जाओ पास hi तो है “

“नहीं तुम hi चलोगे “

“देख नहीं रही हो कल इलेक्शन है और इतना काम है “

वो कुछ और भी बोलने वाला था की मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे उठा लिया था ..वो बड़े hi असमंजस से मुझे देख रहा था लेकिन मैं जैसे उसे लगभग गहरीतते हुए भहर ले गयी ..

“ये क्या बत्तमीजी है “

वो कुछ बोलता उससे पहले मैंने उसे एक दीवाल से सत्ता दिया , ये बॉय हॉस्टल का एक कोना था जंहा अभी अँधेरा हो गया था बारिश के कारण हमारे शरीर भी भीग गए थे ..

दूर जल रहे एक स्ट्रीट लाइट से छानकर आने वाली रोशनी में उसके चेहरे में उभरते हुए भावो को मैं साफ साफ देख सकती थी , उसके माथे पर पसीना था शायद मेरे माथे पर भी होगा ..

वो कुछ समझने की कोशिस कर रहा था ..

“तुम ये क्या कर रही हो कोमल ?”

“मैं बस तुम्हे ये बताना चाहती हु की जो तुमने कल देखा वो सही था लेकिन जो तुमने समझा वो गलत था “

उसके चेहरे में बड़े hi निर्जीव भाव आये , जैसे उसे अब कोई मतलब hi नहीं रह गया हो /..

“मुझे सफाई क्यों दे रही हो कोमल , ये तुम्हारी जिंदगी है और तुम जिसके साथ भी चाहो जी सकती हो ..”

“मैं सफाई क्यों दे रही हु ???”

मैंने उसकी आँखों में देख कर कहा था ,

“भुवन मेरा बेस्ट फ्रेंड है दया , क्या मैं अपने दोस्त के बहो में अपना सर भी नहीं रख सकती .. तुम्हें बस ये hi देखा था लेकिन तुमने न जाने क्या समझ लिया “

वो थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को देखता रहा

“ये सब मुझे क्यों बता रही हो , मुझे बहुत सरे काम है तुम जाओ यंहा से ..”

उसने मुझे खुद से थोड़ा दूर हटाने की कोशिस की और तभी मैंने जैसे एक फैसला कर लिया था ..

मैंने उसे पूरी ताकत से दिवार में सत्ता दिया , शायद उसका सर भी दिवार से टकरा गया था ..

“आउच ये क्या कर रही हो “

वो थोड़ा भौखलाया लेकिन मैंने उसकी एक भी न सुनी मैंने बस उसके गलो को अपने हाथो से दबा लिया था और उसके होठो पर अपने होठो को भर दिया , उसकी छटपटाहट जैसे एक hi पल में बिलकुल hi शांत हो गयी हो ….

मैं उसके होठो को बस चूसे जा रही थी , मेरी आंखे बंद थी वही हाल शायद उसका भी था , उसके हाथ अपने hi आप मेरी कमर पर आ गए थे वही मैं उसके गले में अपने हाथ फंसा कर कड़ी थी ..

तभी मुझे अहसास हुआ की कोई हमें देख रहा है ..

जब किश टूटी तो मैंने उस और देखा , वो भुवन था ..

दूर खड़े भुवन के चेहरे पर आयी उदासी को मैं वही से खड़े हुए भी महसूस कर सकती थी , तिवारी ने भी उस और देखा , मैं उसके और जाने को मुड़ी hi थी की भुवन खुद hi मुद गया और मुझसे दूर जाने लगा ..

“भुवन … “ मैं हलके से चिल्लाई , मैं जानती थी की अभी वो दुखी है लेकिन मैं ये भी जानती थी की वो मुझे समझ सकता है , वो जनता है की प्यार जबरदस्ती से नहीं किया जाता ..

प्यार बस हो जाता है या फिर नहीं होता , लेकिन अभी … अभी वो दुखी था बहुत दुखी था और अभी शायद उसे मेरी जरुरत थी ..

या फिर बस अकेले hi रहने की जरुरत थी ???

तभी मेरी नज़ारे और कही पड़ी और मैं फिर से चिल्ला पड़ी

“भुवन ..”

इस बार मैंने अपनी पूरी ताकत से चिल्लाया था … लेकिन भुवन ने मनो न सुनने की कसम hi खा ली हो ..

उसके सामने एक जीप आकर कड़ी हो गयी थी , उसमे मला का बीटा और उसके दोस्त थे सभी के हाथो में अलग अलग तरह के हथियार थे , एक लड़के ने बंदूख की नोक सीधे भुवन के ऊपर टिका दी थी लेकिन भुवन था की अपनी hi दुनिया में खोया हुआ उनके hi और चले जा रहा था ..

“भुवन रुको …नहीं ..”

इस बार मेरे साथ साथ तिवारी भी चिल्ला उठा लेकिन तभी

‘धाय…. ‘

गोली की एक आवाज से पूरा माहौल गूंज गया ..

और मैं जिस अनहोनी के बारे में सोच रही थी जाइए वही घाट गयी .. गोली सीधे भुवन के कंधे पर जा टकराई …

उसे मनो अचानक hi होश आया हो , इससे पहले की वो कुछ समझ पाटा गाड़ी और पास आती गयी और एक लड़के ने तलवार लहराई और साइड भुवन के छाती पर दे मारा .. भुवन उस वार से मुद गया था मैं उसके hi और भाग रही थी उसका चेहरा मेरे सामने आ गया था वो गिर रहा था जमीं में गिर रहा था , मैं उसके और दौड़ रही थी ..

“नहीं भुवन ..”

लेकिन मनो सुनने वाला कोई नहीं था , गोलियों की आवाज से कुछ लड़के बहार आ गए थे लेकिन अभी इन सबको हुए कुछ hi सेकण्ड्स तो हुए थे अभी तक कोई भी पूरी तरह से समझ नहीं पाया था की वो क्या करे ..

वो लोग तलवार मारकर तिवारी को चिढ़ाने के लिए वही खड़े हो गए थे , मैं भुवन तक पहुंच चुकी थी ..

मेरे बचपन का दोस्त मेरे गॉड में लहू से नहाया हुआ पड़ा था , कंधे में एक गोली लगी थी और छाती में तलवार वार किया गया था..

मैं उसके चेहरे को देखे जा रही थी , उसे जगाने की कोशिस कर रही थी .. तभी ..

“मादरचोदो बोलै था की मुझसे मत टकराओ ..अब तू भी मर “

ये मला का लड़का था जिसने अब बंदूख की नोक दया के तरफ कर दी थी ..

“कमीने ..” मैं चिल्लाई जैसे मेरे अंदर से कुछ फूट गया हो …

मैं कड़ी हो चुकी थी जो लोग अभी तक तिवारी की और देख रहे थे वो अब मेरी और देख रहे थे ..

“नहीं कोमल ..” दया चिल्लाया था लेकिन अभी तो मेरे सर पर खून सवार था और मेरी नजरो में अभी भी भुवन का वो चेहरा झूल रहा था .. मैंने पास hi पड़ा हुआ रोड उठा लिया था ..

वो लोग पास में hi थे और कोई कुछ समझ पता उससे पहले hi मैं उन तक पहुंच गयी थी , उसने अपनी पिस्तौल की नोक मेरे और मोदी hi थी लेकिन उससे पहले ..

“आआह्ह्ह्हह” उसने मुँह से एक चीख निकली थी , मैंने सरिया सीधे उसके चेहरे में घुसा दिया था ………

उसके दोस्त तुरंत hi एक्टिव हो गए थे , उन्होंने मुझपर तलवारो से वार किया लेकिन मैंने झट से उसके hi तलवार को उसके hi पेट में घुसा दिया , ईशर मेरे हाथो में वो पिस्तौल आ गयी जो अभी अभी सरिया घुसाने से मला के बेटे के हाथो से छूट गयी थी , और जैसे मैंने अपना आप खो दिया हो .. मैंने जीवन में पहली बार बंदूख चलाई थी ..

‘धाय धाय धाय धाय धाय …’5 गोलिया लगातार

अब तक पूरा हॉस्टल hi बहहर , तिवारी स्तब्ध सा किसी मूर्ति की तरह खड़ा हुआ बस मुझे hi देख रहता था , गोलियों के शोर के बाद माहौल में बस सन्नाटा था ………..



गोलियों ने 3 सरो के चिथड़े उदा दिए थे , जिसमे से एक मला का बीटा भी था , अभी तक उसके चेहरे पर वो सरिया घुसा हुआ था लेकिन उसकी जीवन लीला अब समाप्त हो चुकी थी , जिसके पेट में तलवार घुसा था वो अभी तक छटपटा रहा था , खून से पूरी जीप hi नाहा चुकी थी ,और 2 लोग कांपते हुए कोने में का दुबके थे जैसे उन्होंने काल को hi तांडव करते देख लिया हो …………
 
अपडेट 49
“ये क्या कर दिया तुमने ..” दया संकर की आवाज अब भी काँप रही थी .. लेकिन मुझे उसकी बातो से कोई भी फर्क नहीं पड़ा, मैं तो बस भुवन को देखने के लिए दौड़ी .. बाकि के लोग भी बहार आ चुके थे , तभी दो गोलिलया और चली ..

मैंने जब पलट कर देखा तो वो सम्पत था ..

“इन दोनों को क्यों बचा दिया था ..” उसके होठो पर मुस्कान आ गयी थी..

भुवन को तुरत hi हॉस्पिटल के लिए ले जाया गया …

दया संकर जैसे अभी भी स्तब्ध था वही मुझे जैसे कोई भी फर्क नहीं पद रहा था , मैं तो बस भुवन को सही सलामत देखना चाहती थी ..

मैं हॉस्पिटल में िक के बहार hi कड़ी हुई इधर उधर चल रही थी ..

तभी ..

“शाबास मेरी बहन मुझे तुझपर नाज है , आज तेरा भी उद्घाटन हो hi गया …”जीवा ने आते hi मुझे गले से लगा लिया , लेकिन मैंने उसे अपने से दूर झड़क दिया ..

“देख कोमल जो हो गया अब तू उससे पीछे नहीं हैट सकती , थोड़े hi देर में बात हवा के जैसे फैलेगी और फिर एक तरफ मला भौखला जायेगा और दूसरी और करीम .. कब तक छिपेगी “

“तो क्या करू तुम लोगो के जैसे गैंगस्टर बन जाओ “

जीवा मेरी बात सुनकर हंसाने लगा

“अरे तू तो हमसे भी बड़ी गैंगस्टर बनेगी आखिर तू हमेशे जदया समझदार जो है क्यों सम्पत “

“सही कहा भाई “

दोनों hi हँसाने लगे …..

उन्होंने दया को देखा

“जितने लोगो ने ये सब देखा था वो तेरे hi लोग थे न कोई बहार वाले ने तो ये नहीं देखा था “

“नहीं भाई सभी दोस्त hi है , लेकिन पता नहीं कोण मुँह खोल दे “

“बंद कवर .. मुँह बंद करवा , समझा की जो इन लोगो के साथ हुआ वो उनके साथ भी हो सकता है इसलिए चुप रहे … और सब लाशो को तो ठिकाना लगा hi दिए है ,”

“हो जायेगा ..”

“अभी कोमल को यंहा से निकाल कर किसी सेफ जगह पर ले जाना होगा “

जीवा ने मेरी और देखा था

“नहीं मैं कही नहीं जा रही हु , मैं भुवन के साथ hi रहूंगी “

“पागल मत बनो हम कितना भी लीपापोती कर ले , लीपापोती से पुलिस तो सम्हाल जायेगी लेकिन करीम और मला .. नहीं वो लोग तो तुम्हे हर हल में मौत के घाट उतरने को मचल रहे होंगे , ऐसे में तुम्हारा यंहा रहना खतरे से खली नहीं है “

तिवारी की बात का मुझपर असर हुआ लेकिन मैं भुवन के बारे में सोचने लगी ,

“जब उन लोगो को पूरी बात का पता चलेगा तो भुवन की जान को भी तो खतरा हो जायेगा न , क्या वो लोग इसे छोड़ेंगे “

मेरी बात सुनकर सभी चुप हो गए थे , जीवा जनता था की मैं कितनी जिद्दी थी …

“ठीक है…. शुरवाती इलाज करवा कर भुवन को भी तुरंत hi गायब कर देते है “

सभी ने सहमति में सर हिलाया ..

डॉ ने भुवन के घावों में मरहम पट्टी कर दी , वो होश में भी आ चूका था , कंधे में घुसी हुई गोली निकाल दी गयी थी , अब भुवन जीवन भर अपने एक हाथ को अच्छे से नहीं चला पायेगा , लेकिन फिर भी जान का कोई खतरा नहीं था इसलिए आराम से किसी सेफ जगह ले जाया जा सकता था ……..

हम रातो रत गांव आ गए थे जो की जीवा का गढ़ था ..

जब मेरी नींद टूटी तो सूरज निकल चूका था, मैं भुवन के बिस्टेर से तिकी हुई hi बैठी थी , जब मैंने भुवन की और देखा तो वो मुस्कुरा रहा था ….

“अब तबियत कैसी है ..”

मैं मुस्कुराई , उसका चेहरा सूरज की छान कर आती हुई धुप से जैसे खिल गया था .. क्या था इसके अंदर जो मुझे इतना आकर्षित कर रहा था , मैं तो दया संकर से प्यार करती हु लेकिन ये …

मुझे इस पल ऐसा क्यों लगा की यही मेरी किश्मत है , जैसे ऊपर वाले ने hi इसे मेरे लिए बनाया है ……..

(उसी समय हाल में बैठी हुई कोमल ने भुवन की और देखा , वो वैसे hi मुस्कुरा रहा था , खिड़खी से सूरज की ताज़ी किरणे छान कर आ रही थी ……… और वही बैठी आरती की नजर अंकित पर गयी .. वो जैसे मंत्र मुघ्ध होकर कोमल की बातो को सुन रही थी और उसे इस पल यही लग रहा था जैसे ये उसके साथ hi हो रहा हो )

उस पल में कुछ था जो कुछ होगा था ..

तभी

“तुमने तो कल मेरी जान hi बचा ली “

कमरे में कोई आया था , जब मैंने निगाहे घुमाई तो वो दया संकर था …

“मैंने तुम्हारी जान बचाई ??”

भुवन के चढ़े में प्रश्न वाचक चिन्ह आ गया

“असल में तुम दोनों ने मिलकर , वो लोग मुझे hi मरने आये थे लेकिन सामने तुम आ गए , और कोमल ने तो जो किया … वाओ “

तिवारी की बात सुनकर मेरे होठो में मुस्कान उभर गयी थी ..

“ये तो ऐसे लड़ी जैसे लड़ना इसकी रोज की आदत रही हो .. कोई दर नहीं किसी तरह का हिचकिचाहट नहीं .. ऐसा लगा की तुम ये हमेशा से करते आयी हो “

दया की इस बात को सुनकर मेरे चेहरे में एक फीकी सी मुस्कान आ गयी थी ……….

मैंने भुवन को गर्म पानी से साफ़ कर दिया था , इन दो दिनों में hi भुवन के लिए मेरा प्यार बहुत hi बढ़ गया था , या ये कहो की दबा हुआ प्यार बहार आ रहा था , हम आज भी दोस्त hi थे , लेकिन एक अपनत्व का अहसास जो अभी तक नहीं हुआ वो अब होने लगा था , शायद प्रेम भी तब hi बहार आता है जब उसकी जरुरत हो …..

मैं उसे बिस्कुट और चाय खिला रही थी , मेरे हाथ में आज का पेपर था ..

“तो आखिर मला के बेटे की लाश मिल ह गयी , लेकिन ये क्या ??“

“क्या हुआ ..??”

भुवन भी पेपर की और hi देखने लगा ,, हमारे शहर की हैडलाइन वाली खबर के रूप में इसे स्थान मिला हुआ था ..

“इनकी लाश शहर के बहार हाईवे पर मिली , और सकती गैंग ने मारा …??”

मैं न्यूज़ पढ़कर कंफ्यूज थी ..

“ये तो जीवा का hi काम है , उसी ने ये न्यूज़ बनवायी होगी ..”

भुवन हलके से हँसता है

“है लेकिन ये सकती गैंग क्या है .. सकती यही नाम मिला था उसे डालने के लिए “

भुवन जोरो से हंस पड़ा था

“ये तो तुम्हारे बचपन का नाम है न “

“है मेरे पिता जी मुझे शक्ति बोलते थे , ये जीवा भी न पता नहीं मुझे गैंगस्टर बनाने पर तुला हुआ है .. और जब नाम रखना hi था तो काम से काम मुझसे तो पूछ लेता “

मैं मुँह बनाते हुए कहा था लेकिन भुवन का चेहरा सच में गंभीर हो गया ..

“क्या हुआ भुवन ??”

“बात नाम की नहीं है कोमल , बात तो काम की है ..?? क्या तुम सच में ये काम करना चाहती हो , जीवा तुम्हारा उपयोग करना चाहता है, सकती का नाम देखकर तुमसे न जाने क्या क्या गलत काम करवाएगा ..”

मैंने हलके से उसके गलो पर हाथ रखा

“तुम्हे क्या लगता है की मेरे इजाजत के बगैर वो मुझसे कोई गलत काम करवा सकता है , और ऐसे भी मन तो एक सिंपल सी लड़की hi हु , मुझसे क्या hi काम करवाएगा ??”

भुवन ने एक गहरी साँस ली

“उम्मीद तो है की नहीं करवा पायेगा .. और अब तुम वो सिंपल सी लड़की नहीं रह गयी हो , जिसने भी तुम्हे देखा है तुम उसके लिए बदल गयी हो .. पता नहीं तुम्हारे अंदर क्या हो गया था उस समय जो तुम कोई अलग hi ताकत में तब्दील हो गयी थी .. और वही बात मुझे डराए जा रही है “

भुवन की बात सुनकर मैं हंस पड़ी

“वो तो इसलिए की मेरी जान की जान पर बन आयी थी “

मेरे मुँह से तो निकल गया था लेकिन ऐसा कहते hi मेरे दिल की धड़कन एक बार जोरो धड़क गयी थी .. वही हल भुवन का भी था ..

लेकिन फिर उसका चेहरा फीका पड़ने लगा

“अजीब लड़की हो तुम , जान मुझे कहती हो और बांहो में किसी और के रहती हो “

भुवन ने हलके आवाज में hi कहा ,लेकिन मैं उसकी बात को समझ सकती थी

“देखो भुवन दया संकर मेरा प्यार है , और तुम मेरे दोस्त .. तुम तो बचपन से मेरे लिए खास रहे हो , तुमने तो मेरी जीतनी देखभाल की उतनी मेरे खुद के भाइयो ने नहीं की है , और न hi शायद कोई और करेगा .. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हु लेकिन क्या हर प्रेम जिस्मानी hi होता है …”

“पागल मैंने तुझसे कब कहा की मुझे जिस्मानी प्यार चाहिए “

उसकी बात से मैं मुस्कुरा उठी

“हम दोस्त है भुवन और एक दोस्त की टूर पर मैं तुझे बहुत प्यार करती हु .. लेकिन दया मेरा .. मेरा बॉयफ्रेंड है और शायद कल को मेरा पति बनेगा …मैं उससे भी प्यार करती हु .. मुझे दोनों में से एक को चुनने के लिए मत बोलना , मैं तुम दोनों को नहीं छोड़ सकती .. तुम दोनों hi मेरी जान हो “

भुवन ने मेरे हाथो को अपने हाथो में थाम लिया …

“हुम्म्म लेकिन तू जानती है की मैं तुझसे प्यार करता हु और मेरा प्यार सिर्फ दोस्ती वाला नहीं है “

उसका चेहरा रिलैक्स था और होठो में थोड़ी शरारत

“जानती हु …. कमीने “

इस बार हम दोनों hi हंस पड़े थे ………

************

दिन गुजरने लगे थे , तिवारी और मेरे बिच के फैसले और भी काम होने लगे थे ..

तिवारी पूरी तरह से जीवा के साथ आ चूका था लेकिन भुवन और मैं अपने hi शर्तो में काम करते थे , हमने सोचा की क्यों न अपनी ताकत का प्रयोग लोगो के हिट के लिए भी किया जाए , इसलिए हमने अलग तरीके से अपनी गैंग बनायीं और इस गैंग का एक विंग गरीब बच्चो को पढ़ने का काम करता था , जीवा सभी के हाथो में बंदूख थमने को उतावला था लेकिन मैंने उसे रोक कर बच्चो के हाथो में किताबे थमा दी थी ..

हम सिर्फ कोर्रुप्त ऑफिसर्स को hi मारा करते थे , लेकिन मेरे साथ एक चीज बड़ी hi बेकार थी और वो था की अगर मैं किसी को मरने जाती तो समझो खून की नदिया बहती थी .. मैंने कोई खास ट्रेनिंग नहीं ली थी लेकिन फिर भी जब मैं मरने पर आती तो पता नहीं मेरे अंदर एक ताकत का संचार हो जाता ..

मैं जितना खून कर रही थी मेरे अंदर उतनी खून की प्यास बढ़ने लगी थी ,मुझे जान लेने में मजा आता था … मैं बहुत hi बेरहमी से कतल करती और फिर उन्ही लोगो के खून से अपना नाम सकती लिख देती ..

एक बार जो वहशीपन मेरे अंदर आ जाता तो उसे बस भुवन hi काबू में कर पता था …

मेरे अंदर के शैतान को इस तरह बढ़ता हुआ देखकर भुवन चिंतित था … लेकिन दूसरे लोग नहीं , जीवा तो मेरा नाम लेकर hi काम करवा लेता था , तिवारी को भी इससे फायदा hi हो रहा था , वो भी मेरा सपोर्ट करता था …….

जीवा गैंग तेजी से बढ़ने लगा था साथ hi सकती गैंग भी, इसमें मैंने बहुत सी लड़कियों को भी दाखिल किया था … लड़किया मार काट से दूर अधिकतर कोई ऐसा काम करती थी जिससे उनकी भी आमदनी हो जाए और उनका भविष्य सवार जाए ..

मेरे दिल में जंहा एक तरफ प्रेम खिल रहा था लोगो के लिए सहयोगी की बह्व्ना जन्म ले रही थी वही दूसरी तरफ एक शैतान ने जन्म ले लिया था …

हमारे दो सबसे दुशमन मला साहब और करीम बहुत हद तक कमजोर पद गए थे सभी मुझे मरना चाहते थे , लेकिन मैं अभी तक किसी के हाथ नहीं लगी थी ..

तभी जीवा ने एक ऐसा प्लान बनाया जिससे सब कुछ बदल गया, वो जीवा और तिवारी के साथ मेरा आखरी काम था …

मला को मार कर तिवारी को नया मला बनाने का प्लान जिसे पूरा करने की जिम्मेदारी मुझे दी गयी ……..

मैंने अपनी तलवारे चमका ली थी प्लान बनाने का जिम्मा तिवारी और जीवा का था , आज भुवन बहुत hi ुप्सते लग रहा था हो भी क्यों न हमें उसके घर में घुस कर उसे मारना था .. लेकिन मेरे दिल में जैसे कोई चीज कूद रही हो , मैं मला को अपने हाथो से कटाने के लिए मरी जा रही थी ..

मैं और भुवन तिवारी के कर्मरे की और बढ़ गए थे , वंहा जीवा और तिवारी पहले hi बाटे कर रहे थे ..

और कुछ आवाजे हमारे कानो में आयी , जैसे जैसे मैंने उनकी बातो को सुना मेरे पैरो से मानो जमीं hi खिसकने लगी थी ………


भुवन ने मुझे सम्हाल रखा था उसने मुझे छुप रहने का इशारा किया लेकिन मेरी आँखों में बस पानी था ………..
 
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