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करीम पूर्वी को अब फर्श पे रख देता है… दोनों उस रूम मई नंगे hi थे… एक था काला … और एक थी गोरी.. मख्हन जैसे बदन की मालकिन … नाज़ुक सी… …
करीम कुछ डियर तक ऐसे hi पूर्वी को एक तुक देखता हैं.. फिर वो अपनी एक उंगली पूर्वी के चेहरे पर ले जाता हैं और उसके गलों से लेकर उसके गार्डन तक अपनी उंगली धीरे धीरे फेरने लगता हैं.........
फिर वो अपने एक उंगली पूर्वी के लैब पर रख देता हैं ...
और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने का इशारा करता hain........Purvi भी बिना किसी विरोध के अपना मुँह हौले से खोल देती हैं और करीम की उंगली धीरे धीरे अपने मुँह में लेकर चूसने लगती हैं......
करीम फिर झट से अपनी दूसरी उंगली भी पूर्वी के मुँह में दाल देता हैं और पूर्वी बिना किसी विरोध के उसकी दोनों ऊँगली बरी बरी चूसने लगती हैं.......
करीम फिर से पूर्वी के और करीब आता हैं और एक तुक उसके ख़ूबसूरत चेहरे को देखता हैं .. फिर वो अपना होंठ पूर्वी के होंठों पर रख देता हैं और उसे बड़े हौले हौले चूसने लगता हैं.........
पूर्वी भी झट से अपने मुँह खोल लेती हैं और वो भी करीम के होंठों को धीरे धीरे चूसने लगती हैं.........
पूर्वी किसी मदहोशी के आलम में अपने होंठों को करीम के होंठों पर रखकर उसे हौले हौले चूस रही thi........Karim के मुँह से पान और बीड़ी का स्वाद धीरे धीरे उसके मुँह में भी जा रहा tha.......magar आज उसे ये सब कुछ बिलकुल बुरा नहीं लग रहा tha......ek नशा एक खुमार सा आज उसपर चाय हुआ tha......Karim धीरे धीरे अपने हाथों को भी हरकत कर रहा tha.........wo धीरे धीरे कभी अपने उँगलियों को पूर्वी की नंगी पीठ पर फेरता तो कभी उसके चेहरे पर........
करीम फिर अपना एक हाथ पूर्वी के राइट बूब्स पर रख देता हैं और उसे एक बार हौले से मसल देता hain........Purvi के मुँह से एक धीमी सी सिसकारी फुट पड़ती hain.......fir वो अपना दूसरा हाथ भी वहीँ पूर्वी के लेफ्ट बूब्स पर रख देता हैं और उसे भी धीरे से मसल देता hain......Purvi भी अपना दोनों हाथ अपने सीने पर रख देती हैं करीम के हाथों par........aur फिर वो करीम की ओरे अपना चेहरा लेजाकर उसके होंठों को दुबारा चूसने लगती हैं........
करीम एक नज़र पूर्वी की आँखों में देखता हैं फिर वो पूर्वी के होटों को अपने जीभ में लेकर फिर से चूसने लगता हैं और धीरे धीरे अपने दोनों हाथों पर दबाव भी बनाने लगता hain.........kabhi वो पूर्वी के दोनों बूब्स को अपने हाथों में लेकर मसलता तो कभी उसके दोनों निप्पल्स को अपनी उंगली के बीच लेकर दबाता........
तभी करीम उसे निचे पीठ के बल सुलाता हैं . करीम फिर उसके ऊपर आता हैं और अपने पूरे जीभ पूर्वी के पीठ पर फेरने लगता hain.......Purvi का इस वक़्त बहुत बुरा हाल tha.......baar बार उसके मुँह से सिसकरी निकल रही थी........
करीम - पूर्वी....... रानी …तेरा जिस्म बहुत खूबसूरत हैं........
पूर्वी एक नज़र करीम को देखती हैं फिर वो झट से अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रख लेती हैं और वहीँ उठ कर बैठ जाती hain.........is वक़्त उसका चेहरा शर्म से बिलकुल लाल पढ़ गया था......
करीम झट से अपना एक हाथ पूर्वी के पवन के पास ले जाता हैं और फिर अपना वहीँ हाथ धीरे धीरे ऊपर की ओरे यानि पूर्वी के जांघों के तरफ बढ़ने लगता hain......jaise जैसे करीम का हाथ ऊपर की ओरे जाते हैं वैसे वैसे पूर्वी के चेहरे के भी भाव बदलते जाते hain.......aaj उसकी आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi.......vaasna उसकी आंखों से साफ़ चालक रही tha........Karim का हाथ जैसे hi पूर्वी के छूट के करीब जाता हैं पूर्वी झट से अपनी आँखें बंद कर लेती hain.......ye देखकर करीम मुस्कुरा पड़ता हैं........
करीम झट से अपना हाथ पूर्वी के छूट पर रख देता हैं और वहां पर अपनी उंगली धीरे धीरे फेरने लगता hain.......Purvi का इस वक़्त बहुत बुरा हाल tha.........wo hi समझ रही थी की आज उसपर क्या बीत रही hain.......thodi डियर तक करीम उसके छूट पर ऐसे hi अपनी उंगली का कमल दिखता हैं .
पूर्वी अब ऐसे बैठे थे की उसके दोनों घुटने उसने आपने आम के सामने खड़े किये हुई थी… और उस के बीच आपने चेहरा छुपा लिया था.. और करीम ने भी उसके दोनों घुटनो के नीचे से आपने एक हाट दाल के पूर्वी के छूट तक लेके गया था.. और वह अब वो पूर्वी के छूट के सात खेल रहा था..
अब करीम फिर से पूर्वी को पीठ के बल सुलाता है .. वैसे पूर्वी झट से अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रख लेती हैं और अपनी आँखें दुबारा बंद कर लेती hain............Karim अपनी आँख फाड़े पूर्वी के ख़ूबसूरत बदन को देख रहा था.......
करीम फिर अपना हाथ आगे बढाकर पूर्वी के सीने पर से उसका हाथ हटा देता hain.........Purvi के दोनों बूब्स अब करीम के आँखों के सामने be-parda the........wo झट से पूर्वी को वहीँ लेटता हैं और तुरंत अपना होंठ पूर्वी के एक निप्पल्स पर रखकर उसे बड़े आराम से अपने मुँह में लेकर चूसने लगता hain........Karim के इस हरकत पर पूर्वी मनो उछाल पड़ती hain.......uske मुँह से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa................sssssssssssssssss की सिसकारी फुट पड़ती हैं..........................
करीम – तेरे दूध कितने मस्त hain........mera तो कभी इससे मुन्न नहीं bharega.........jee तो करता हैं मैं इन्हें अपने मुँह में लेकर ऐसे hi चूसता रहूं.......
पूर्वी - aaahhhhhhhhhhhh.......sssssssss....Karim ..........
पूर्वी चाह कर भी कुछ नहीं बोल पा रही thi.......ek तरफ उसकी छूट गीली हो रही थी वहीँ उसकी सांसें भी अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी thi.........aab धीरे धीरे उसके जिस्म से उसका कण्ट्रोल पूरा ख़तम होने लगा tha........wo झट से अपना एक हाथ करीम के सर पर रख देती हैं और बड़े प्यार से उसके सर पर अपना हाथ फेरती hain.......Karim कभी उसके लेफ्ट निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसता तो कभी राइट निप्पल ko........kabhi कभी वो अपने हलके डेंटन से उसे काट भी leta........aur वहीँ अपने हाथों को पूर्वी के जिस्म के हर हिस्से पर फिरता.........
पूर्वी ने आपने दोनों पाँव नज़दीक लेकर रखे थे… अपनी छूट छुपाने क लिए.. अब करीम पूर्वी के दोनों पाँव को दूर करता है … वैसे करीम के सामने पूर्वी की पिंक छूट आ जाती है… करीम बहुत गौर से पूर्वी की छूट को देखने लगता है…
जब पूर्वी की छूट पर उसकी नज़र जाती हैं वो वहां पर अपना हाथों को ले जाने से नहीं रोक paata......uske छूट पर थोड़े थोड़े बाल थे … पूर्वी की छूट करीम की आँखों के सामने अब be-parda हो चुकी thi.......Purvi झट से अपनी आँखें बंद कर लेती hain.........Karim करीब 2 मिनट तक पूर्वी को एक तुक देखते hi रहता हैं........
करीम- ारे मेरे रानी.. तेरे छूट तो शडिशुद्धा औरत की तो लग नहीं रही है… लगता है तेरे शौहर ने इस्सकी अचे से नहीं ली है.. अबतक..
उस से पूर्वी को शर्म आते है… फिर पूर्वी अपनी छूट पर हाथ रखती है..
करीम- ारे क्या हुआ मेरे पूर्वी raani…dekhne दे न मुझे.. मैं आज तुजे सर से लेकर पवन तक नंगा देखना चाहता hoon.........main देखना चाहता हूँ की क्या तू बिन कपड़ों में भी इतनी hi ख़ूबसूरत लगती हैं........
पूर्वी एक नज़र करीम की ओरे देखती हैं फिर वो झट से अपना हाथ वहां से हटा लेती hain......aaj पूर्वी के ऐसे गोर बदन को देखकर करीम की आँखें चमक जाती हैं.......
आज पहली बार था जब पूर्वी किसी पराये मर्द के सामने इस हाल में thi......uske हस्बैंड के बाद करीम पहला मर्द था.......
करीम - मेरी raanii......kamal की ख़ूबसूरत हैं tu........maine जैसा तेरे बारे मई सोचा था उससे भी बढ़कर निकली तू ........
और करीम झट से पूर्वी के छूट पर अपना एक हाथ रख देता हैं जिससे पूर्वी सिसक पड़ती हैं..........
करीम फिर से पूर्वी के ऊपर आता हैं और अपना होंठ पूर्वी के आम पर रख देता हैं और उसे फिर से चूसने लगता hain.........Karim की हर हरकत पर वो बार बार तड़प उठती हैं....
इस वक़्त उसका एक हाथ पूर्वी के एक आम पर था जो वो उसे बड़ी hi बेरहमी से मसल रहा था वहीँ उसका दूसरा हाथ उसके गांड पर सरक रहा tha........Purvi के अंदर अब किसी बात का कोई विरोध नहीं था या यु कहो की अब विरोध पूरी तरह से ख़तम हो चूका था.......
अब करीम पूर्वी के गार्डन से अपनी जीभ फेरते हुए धीरे धीरे नीचे की ओरे सरकने लगता hain.........Purvi झट से अपनी आँखें बंद कर लेती hain........uske मुँह से धीमी धीमी सिसकारी निकलने लगती hain.........Karim फिर धीरे धीरे बढ़ते हुए पूर्वी के दोनों आम पर आता हैं और अपने मुँह में एक बार फिर से लेकर पूर्वी के दोनों निप्पल्स को बरी बरी से चूसने लगता हैं.......
पूर्वी का जिस्म से अब उसके कण्ट्रोल धीरे धीरे ख़तम होते जा रहा tha........Karim बड़े आराम से अपने जीभ का जादू पूर्वी के सरे बदन पर चला रहा tha..........Purvi की बेकरारी अब उसकी हरकतों से पता चल रही thi........thodi डियर बाद वो अपने जीभ पूर्वी के नैवेल पर रख देता हैं और वहां भी बड़े हौले हौले चाटने लगता hain........Purvi की सिसकारी एक बार फिर से तेज़्ज़ होने लगती hain......aab करीम के जीभ और पूर्वी की छूट के बीच कुछ hi दूरी का फासला था........
पूर्वी ाचे से जानती थी की करीम कुछ hi डियर में उसकी छूट पर भी अपना जीभ firayega.........uski छूट अब हुड्ड से ज़्यादा गीली हो चुकी thi........aankhein सुर्ख लाल हो गयी thi.........jaise जैसे करीम के जीभ उसके नैवेल के नीचे की ओरे जा रहे थी वैसे वैसे पूर्वी की सांसें धीरे धीरे बेकाबू होती जा रही thi........aane वाला पल उसके लिए एक्ससिटेमेंट से भरा tha........Karim का ऐसा ऊके जिस्म पर जीभ फेरना उसे मनो पागल करता जा रहा था........
अब वो पल भी आ गया था जब करीम की जीभ पूर्वी के छूट पर पहुँच गयी thi.......Karim थोड़े डियर वहीँ रुक जाता हैं … औरर पूर्वी की चूत सुंगता है…
करीम – पूर्वी रानीय.. तेरे छूट की खुसबू बहुत ाची hain......jee तो करता हैं की मैं इस खुसबू में हमेशा हमेशा के लिए खो जवां........ और
ऐसे hi तेरे छूट की खुशबू लेता राहु…
करीम कुछ डियर तक ऐसे hi पूर्वी को एक तुक देखता हैं.. फिर वो अपनी एक उंगली पूर्वी के चेहरे पर ले जाता हैं और उसके गलों से लेकर उसके गार्डन तक अपनी उंगली धीरे धीरे फेरने लगता हैं.........
फिर वो अपने एक उंगली पूर्वी के लैब पर रख देता हैं ...
और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने का इशारा करता hain........Purvi भी बिना किसी विरोध के अपना मुँह हौले से खोल देती हैं और करीम की उंगली धीरे धीरे अपने मुँह में लेकर चूसने लगती हैं......
करीम फिर झट से अपनी दूसरी उंगली भी पूर्वी के मुँह में दाल देता हैं और पूर्वी बिना किसी विरोध के उसकी दोनों ऊँगली बरी बरी चूसने लगती हैं.......
करीम फिर से पूर्वी के और करीब आता हैं और एक तुक उसके ख़ूबसूरत चेहरे को देखता हैं .. फिर वो अपना होंठ पूर्वी के होंठों पर रख देता हैं और उसे बड़े हौले हौले चूसने लगता हैं.........
पूर्वी भी झट से अपने मुँह खोल लेती हैं और वो भी करीम के होंठों को धीरे धीरे चूसने लगती हैं.........
पूर्वी किसी मदहोशी के आलम में अपने होंठों को करीम के होंठों पर रखकर उसे हौले हौले चूस रही thi........Karim के मुँह से पान और बीड़ी का स्वाद धीरे धीरे उसके मुँह में भी जा रहा tha.......magar आज उसे ये सब कुछ बिलकुल बुरा नहीं लग रहा tha......ek नशा एक खुमार सा आज उसपर चाय हुआ tha......Karim धीरे धीरे अपने हाथों को भी हरकत कर रहा tha.........wo धीरे धीरे कभी अपने उँगलियों को पूर्वी की नंगी पीठ पर फेरता तो कभी उसके चेहरे पर........
करीम फिर अपना एक हाथ पूर्वी के राइट बूब्स पर रख देता हैं और उसे एक बार हौले से मसल देता hain........Purvi के मुँह से एक धीमी सी सिसकारी फुट पड़ती hain.......fir वो अपना दूसरा हाथ भी वहीँ पूर्वी के लेफ्ट बूब्स पर रख देता हैं और उसे भी धीरे से मसल देता hain......Purvi भी अपना दोनों हाथ अपने सीने पर रख देती हैं करीम के हाथों par........aur फिर वो करीम की ओरे अपना चेहरा लेजाकर उसके होंठों को दुबारा चूसने लगती हैं........
करीम एक नज़र पूर्वी की आँखों में देखता हैं फिर वो पूर्वी के होटों को अपने जीभ में लेकर फिर से चूसने लगता हैं और धीरे धीरे अपने दोनों हाथों पर दबाव भी बनाने लगता hain.........kabhi वो पूर्वी के दोनों बूब्स को अपने हाथों में लेकर मसलता तो कभी उसके दोनों निप्पल्स को अपनी उंगली के बीच लेकर दबाता........
तभी करीम उसे निचे पीठ के बल सुलाता हैं . करीम फिर उसके ऊपर आता हैं और अपने पूरे जीभ पूर्वी के पीठ पर फेरने लगता hain.......Purvi का इस वक़्त बहुत बुरा हाल tha.......baar बार उसके मुँह से सिसकरी निकल रही थी........
करीम - पूर्वी....... रानी …तेरा जिस्म बहुत खूबसूरत हैं........
पूर्वी एक नज़र करीम को देखती हैं फिर वो झट से अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रख लेती हैं और वहीँ उठ कर बैठ जाती hain.........is वक़्त उसका चेहरा शर्म से बिलकुल लाल पढ़ गया था......
करीम झट से अपना एक हाथ पूर्वी के पवन के पास ले जाता हैं और फिर अपना वहीँ हाथ धीरे धीरे ऊपर की ओरे यानि पूर्वी के जांघों के तरफ बढ़ने लगता hain......jaise जैसे करीम का हाथ ऊपर की ओरे जाते हैं वैसे वैसे पूर्वी के चेहरे के भी भाव बदलते जाते hain.......aaj उसकी आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi.......vaasna उसकी आंखों से साफ़ चालक रही tha........Karim का हाथ जैसे hi पूर्वी के छूट के करीब जाता हैं पूर्वी झट से अपनी आँखें बंद कर लेती hain.......ye देखकर करीम मुस्कुरा पड़ता हैं........
करीम झट से अपना हाथ पूर्वी के छूट पर रख देता हैं और वहां पर अपनी उंगली धीरे धीरे फेरने लगता hain.......Purvi का इस वक़्त बहुत बुरा हाल tha.........wo hi समझ रही थी की आज उसपर क्या बीत रही hain.......thodi डियर तक करीम उसके छूट पर ऐसे hi अपनी उंगली का कमल दिखता हैं .
पूर्वी अब ऐसे बैठे थे की उसके दोनों घुटने उसने आपने आम के सामने खड़े किये हुई थी… और उस के बीच आपने चेहरा छुपा लिया था.. और करीम ने भी उसके दोनों घुटनो के नीचे से आपने एक हाट दाल के पूर्वी के छूट तक लेके गया था.. और वह अब वो पूर्वी के छूट के सात खेल रहा था..
अब करीम फिर से पूर्वी को पीठ के बल सुलाता है .. वैसे पूर्वी झट से अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रख लेती हैं और अपनी आँखें दुबारा बंद कर लेती hain............Karim अपनी आँख फाड़े पूर्वी के ख़ूबसूरत बदन को देख रहा था.......
करीम फिर अपना हाथ आगे बढाकर पूर्वी के सीने पर से उसका हाथ हटा देता hain.........Purvi के दोनों बूब्स अब करीम के आँखों के सामने be-parda the........wo झट से पूर्वी को वहीँ लेटता हैं और तुरंत अपना होंठ पूर्वी के एक निप्पल्स पर रखकर उसे बड़े आराम से अपने मुँह में लेकर चूसने लगता hain........Karim के इस हरकत पर पूर्वी मनो उछाल पड़ती hain.......uske मुँह से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa................sssssssssssssssss की सिसकारी फुट पड़ती हैं..........................
करीम – तेरे दूध कितने मस्त hain........mera तो कभी इससे मुन्न नहीं bharega.........jee तो करता हैं मैं इन्हें अपने मुँह में लेकर ऐसे hi चूसता रहूं.......
पूर्वी - aaahhhhhhhhhhhh.......sssssssss....Karim ..........
पूर्वी चाह कर भी कुछ नहीं बोल पा रही thi.......ek तरफ उसकी छूट गीली हो रही थी वहीँ उसकी सांसें भी अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी thi.........aab धीरे धीरे उसके जिस्म से उसका कण्ट्रोल पूरा ख़तम होने लगा tha........wo झट से अपना एक हाथ करीम के सर पर रख देती हैं और बड़े प्यार से उसके सर पर अपना हाथ फेरती hain.......Karim कभी उसके लेफ्ट निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसता तो कभी राइट निप्पल ko........kabhi कभी वो अपने हलके डेंटन से उसे काट भी leta........aur वहीँ अपने हाथों को पूर्वी के जिस्म के हर हिस्से पर फिरता.........
पूर्वी ने आपने दोनों पाँव नज़दीक लेकर रखे थे… अपनी छूट छुपाने क लिए.. अब करीम पूर्वी के दोनों पाँव को दूर करता है … वैसे करीम के सामने पूर्वी की पिंक छूट आ जाती है… करीम बहुत गौर से पूर्वी की छूट को देखने लगता है…
जब पूर्वी की छूट पर उसकी नज़र जाती हैं वो वहां पर अपना हाथों को ले जाने से नहीं रोक paata......uske छूट पर थोड़े थोड़े बाल थे … पूर्वी की छूट करीम की आँखों के सामने अब be-parda हो चुकी thi.......Purvi झट से अपनी आँखें बंद कर लेती hain.........Karim करीब 2 मिनट तक पूर्वी को एक तुक देखते hi रहता हैं........
करीम- ारे मेरे रानी.. तेरे छूट तो शडिशुद्धा औरत की तो लग नहीं रही है… लगता है तेरे शौहर ने इस्सकी अचे से नहीं ली है.. अबतक..
उस से पूर्वी को शर्म आते है… फिर पूर्वी अपनी छूट पर हाथ रखती है..
करीम- ारे क्या हुआ मेरे पूर्वी raani…dekhne दे न मुझे.. मैं आज तुजे सर से लेकर पवन तक नंगा देखना चाहता hoon.........main देखना चाहता हूँ की क्या तू बिन कपड़ों में भी इतनी hi ख़ूबसूरत लगती हैं........
पूर्वी एक नज़र करीम की ओरे देखती हैं फिर वो झट से अपना हाथ वहां से हटा लेती hain......aaj पूर्वी के ऐसे गोर बदन को देखकर करीम की आँखें चमक जाती हैं.......
आज पहली बार था जब पूर्वी किसी पराये मर्द के सामने इस हाल में thi......uske हस्बैंड के बाद करीम पहला मर्द था.......
करीम - मेरी raanii......kamal की ख़ूबसूरत हैं tu........maine जैसा तेरे बारे मई सोचा था उससे भी बढ़कर निकली तू ........
और करीम झट से पूर्वी के छूट पर अपना एक हाथ रख देता हैं जिससे पूर्वी सिसक पड़ती हैं..........
करीम फिर से पूर्वी के ऊपर आता हैं और अपना होंठ पूर्वी के आम पर रख देता हैं और उसे फिर से चूसने लगता hain.........Karim की हर हरकत पर वो बार बार तड़प उठती हैं....
इस वक़्त उसका एक हाथ पूर्वी के एक आम पर था जो वो उसे बड़ी hi बेरहमी से मसल रहा था वहीँ उसका दूसरा हाथ उसके गांड पर सरक रहा tha........Purvi के अंदर अब किसी बात का कोई विरोध नहीं था या यु कहो की अब विरोध पूरी तरह से ख़तम हो चूका था.......
अब करीम पूर्वी के गार्डन से अपनी जीभ फेरते हुए धीरे धीरे नीचे की ओरे सरकने लगता hain.........Purvi झट से अपनी आँखें बंद कर लेती hain........uske मुँह से धीमी धीमी सिसकारी निकलने लगती hain.........Karim फिर धीरे धीरे बढ़ते हुए पूर्वी के दोनों आम पर आता हैं और अपने मुँह में एक बार फिर से लेकर पूर्वी के दोनों निप्पल्स को बरी बरी से चूसने लगता हैं.......
पूर्वी का जिस्म से अब उसके कण्ट्रोल धीरे धीरे ख़तम होते जा रहा tha........Karim बड़े आराम से अपने जीभ का जादू पूर्वी के सरे बदन पर चला रहा tha..........Purvi की बेकरारी अब उसकी हरकतों से पता चल रही thi........thodi डियर बाद वो अपने जीभ पूर्वी के नैवेल पर रख देता हैं और वहां भी बड़े हौले हौले चाटने लगता hain........Purvi की सिसकारी एक बार फिर से तेज़्ज़ होने लगती hain......aab करीम के जीभ और पूर्वी की छूट के बीच कुछ hi दूरी का फासला था........
पूर्वी ाचे से जानती थी की करीम कुछ hi डियर में उसकी छूट पर भी अपना जीभ firayega.........uski छूट अब हुड्ड से ज़्यादा गीली हो चुकी thi........aankhein सुर्ख लाल हो गयी thi.........jaise जैसे करीम के जीभ उसके नैवेल के नीचे की ओरे जा रहे थी वैसे वैसे पूर्वी की सांसें धीरे धीरे बेकाबू होती जा रही thi........aane वाला पल उसके लिए एक्ससिटेमेंट से भरा tha........Karim का ऐसा ऊके जिस्म पर जीभ फेरना उसे मनो पागल करता जा रहा था........
अब वो पल भी आ गया था जब करीम की जीभ पूर्वी के छूट पर पहुँच गयी thi.......Karim थोड़े डियर वहीँ रुक जाता हैं … औरर पूर्वी की चूत सुंगता है…
करीम – पूर्वी रानीय.. तेरे छूट की खुसबू बहुत ाची hain......jee तो करता हैं की मैं इस खुसबू में हमेशा हमेशा के लिए खो जवां........ और
ऐसे hi तेरे छूट की खुशबू लेता राहु…





























