Adultery BUDHHA TAILOR - Page 5 - SexBaba
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Adultery BUDHHA TAILOR

आंख बंद करके इस सिचुएशन का लुफ्त उठा हे रही थी की करीम ने उसके हाथ को चोरते हुए उसकी निघ्त्य को नीचे से ऊपर की और उठाते हुए उसको निकल कर किचन में एक कोने पे फेक देता है और फिर सिमरन की ब्रा निकल कर दूसरे कोने में फेक देता है फिर पंतय को निकल कर उसको एक बार शुंग कर उसको नीचे फ्लोर पे फेक कर अपने लेग से दूर फेक देता है.

सिमरन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था .. सिमरन इस तरह के सेक्स के लिए बिलकुल त्यार नहीं थी. करीम जान जान बोल बोल कर सिमरन को चूमे जा रहा था. जैसे की कह रहा हो की आज तेरी छूट को छोड़ के भोसड़ा बना दूंगा. वो मस्ती में चूमे जा रहा था. तभी करीम सिमरन को अपने दोनों हाथो से उठा कर उसको किचन से गेस्ट रूम में ले आता है. गेस्ट रूम किचन के बाजू मई थी.. गेस्ट रूम घर का सबसे आगे का कमरा था… आज पहली बार सिमरन पूरी नंगी आपने गेस्ट रूम में थी .

सिमरन - ये क्या करने जा रहे हो जान प्लीज चोरो मुझे बहुत गिल्टी मह्शूश हो रहा है .. प्लीज यहाँ कुछ मत करो कभी भी कोई आ सकता है. बैडरूम में चलते है न वहा कर लो जो करना है लेकिन यहाँ नहीं प्लीज...

करीम- बैडरूम मई तेरा हस्बैंड होगा न..

सिमरन- करीम … प्ल्ज़्ज़.. करीम अभी नहीं.. मेरे हस्बैंड घर पर है.. वो आ जायेंगे…

आज करीम कहा किस का सुनाने वाला था. कल उसकी प्यास को माहि ने बढ़ावा जो दिया था.. उसका बदला वो सिमरन के साथ ले रहा था..

करीम- चुप कर रंडी आज तुझे यही छोडूंगा गेस्ट रूम में ... तेरी आज गाड़ भी मरूंगा रंडी.. और अगर तेरा हस्बैंड आएगा तो तेरे हस्बैंड के सामने तुजे छोडूंगा…

सिमरन को घुमा कर मतलब सिमरन की गाड़ करीम के लुंड की तरफ और करीम का हाथ पीछे से सिमरन के बूब्स को मसलने लगता है. और तभी बहार से सिमरन का हस्बैंड आवाज देता है.. वो आवाज सुनकर करीम गुस्से मई बोल पड़ता है…

करीम – साले इस बहनचोद को इस टाइम hi आना था क्या..

सिमरन का हस्बैंड फिर से आवाज देता है..

सिमरन- आ… रही.. हु..

सिमरन गुस्से से करीम को कहती है..

सिमरन- कपडे नहीं है बॉडी पे… अब बहार कैसे जाऊ..

करीम हास्के वह छोत पे लेट जाता है..

सिमरन- तुम है क्या रहे हो.. जाओ.. किचन मई जाकर मेरे कपड़े लाओ..

करीम- मई क्यों जाओ..

सिमरन- तुमने निकले थे न.. जल्दी जाओ न… मेरे हस्बैंड इधर आ जायेंगे…

करीम- नहीं जा सकता..

सिमरन- तुम जो बोलोगे वो कर lungi..plz जाओ न..

करीम- ठीक है.. वो डिलडो आपने छूट मई दाल के ले लो..

सिमरन- ओह्ह्ह्हह्ह… शीट्ट्ट्ट्ट.. वो तो किचन मई hi रह गया.. मेरे हस्बैंड ने उसको देख लिया तो बहोत बड़ी प्रॉब्लम होगी.. प्ल्ज़ जल्दी जाओ… तुम जो बोलोगे वो सबकुछ कर लुंगी..

करीम- ठीक है.. एक किश दे दो..

सिमरन करीम को किश देती है और रूम से बहार निकलती है.. करीम किचन से सिमरन के कपडे लता है.. साथ मई डिलडो भी.. कपडे लेन के बाद सिमरन कपडे पहन कर करीम को वह से बहार जाने को कहती है.. गाड़ी के पास.. ताकि उसके हस्बैंड को कोई शक न हो..

करीम के जाने के बाद सिमरन डिलडो को लेकर अपने कमरे में चल पड़ती हैं ........... वहीँ करीम के चेहरे पर एक बार फिर से शरारती मुस्कान थी.......

करीम बहार जाकर कुछ देर तक वहीँ खड़ा रहता हैं और अपने ख्यालों में खोया रहता हैं… वो आपने आप से कहता है… तू आज देखती जा सिमरन आज मैं तेरे साथ क्या क्या करता हूँ ......... आज तू इतना तड़पेगी की तुझे अपनी छूट की आग के सिवा और कुछ नज़र नहीं aayega........tune अभी मेरे खुरापाती दिमाग को ाचे से जाना hi कहा हैं....... आज तुझे पता चल जायेगा की करीम आखिर क्या चीज़ हैं.......

थोड़े डियर बाद सिमरन बाथरूम में चल पड़ती hain.......uske अंदर भी एक्ससिटेमेंट धीरे धीरे बढ़ती जा रही thi........wo करीम को खुश देखना चाहती thi..........uske ख़ुशी के लिए वो आज कुछ भी करने को तैयार thi.........fir ये डिलडो अपनी छूट में रखना कौन सी बड़ी बात thi.........kareeb 30 मिनट बाद सिमरन नहाकर बाथरूम से बहार निकलती hain.........fir वो अपने कमरे में जाती हैं और एक वाइट रंग की साड़ी निकल कर पहने लगती हैं ........ साड़ी नेट वाली थी ...... और काफी महंगी भी .......

अगर नीचे पेटीकोट नहीं होता तो उस साडी में उसका सारा जिस्म दिखाई देता ........ कुछ देर की तैयारी के बाद सिमरन फाइनल टच देकर अपने किचन में दुबारा चल पड़ती हैं.......... थोड़ी देर बाद सिमरन डाइनिंग टेबल पर नास्ता लेकर आती हैं..... आपने हस्बैंड को वो आवाज देती है.. उसका हस्बैंड आता है.. नास्ता करते वक़्त वो उसे घूर घूर कर देख रहा था........ सिमरन इन् कपड़ों में आज क़यामत लग रही थी ........ सिमरन को देखकर उसके लुंड में एक हलचल सी होने लगी थी ......... सिमरन ने आज कुछ वैसे hi कपडे सेलेक्ट किये थे जैसे करीम उसे देखना चाहता था......

सिमरन का हस्बैंड- आज तो तू बहोत हॉट लग रही हो…

सिमरन- थैंक्स..

सिमरन का हस्बैंड- किश पे बिजली गिराने का इरादा है..

सिमरन – किसी पे नहीं..

सिमरन आपने हस्बैंड के किसी भी रिएक्शन को आज इम्पोर्टेंस नहीं दे रही थी.. उसे तो जल्द से जल्द ये सदी.. ये मेक उप करीम को जो दिखाना चाहती थी..

नास्ता करने के बाद सिमरन बहार आ जाती है.. वहीँ करीम और सिमरन का हस्बैंड बहार खड़े होकर कार के पास उसके आने का इंतज़ार कर रहे थे......... सिमरन के छूट में रखा डिलडो उसे बहुत परेशां कर रहा tha........wo बार बार उनकंफर्टबले सी फील कर रही थी ...... करीम एक नज़र सिमरन के चेहरे की ओरे देखता हैं फिर वो उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं..... सिमरन भी जवाब में हलकी सी स्माइल कर देती हैं .......





उसके हस्बैंड का ध्यान किसी और है ये देखके करीम हाथ से सिमरन के सदी और मेक की टैरिफ करता है … और सिमरन के थोड़े पास जाकर कहता है …

करीम- masha allah... aaj aap bahut hi khoobsurat lagh rahi ho..

सिमरन भी राइट हैंड उठा कर करीम को आदाब करती है... जैसे मुस्लिम लोग करते है… करीम स्माइल देता है.. और सिमरन धीरे से कहते है… बहुत बहुत शुक्रिया ….

अगले hi पल करीम अपने जेब में हाथ डालता हैं और अपने पेण्ट के जेब में रखा रिमोट का बटन जोर से पुश कर देता hain.......wahin सिमरन जगह पे उछाल पड़ती है… और उसके मू से अह्ह्ह्हह्हआआ.. निकल पड़ती है.. वो आवाज सुनकर सिमरन का पति सिमरन की तरफ घूम जाता है.. जैसे hi सिमरन आवाज करती है वैसे hi करीम पीछे हैट जाता है… सिमरन गुस्से से करीम को देखते है…





सिमरन का पति- क्या हुआ सिमरन…

सिमरन आपने आप को संभालती है…

सिमरन- कुछ नहीं… जस्ट ये संदेल थोड़ी क्रॉस हो गयी इस वजह से आवाज निकल गयी..

सिमरन का हस्बैंड- हेल्प करू क्या ..

सिमरन- no.. नू.. ी कैन मैनेज..

सिमरन का हस्बैंड- टेक केयर सिमरन… ड्राइवर चलो…

करीम आपने ड्राइवर वाले सीट के बाजु मई खड़ा हो जाता है.. ..सिमरन का हस्बैंड कार के अन्दर बैठ जाता है.. सिमरन और करीम कार के दोनों साइड मई एक दूसरे को देखते हुई खड़े थे… सिमरन गुस्से से करीम को देखती है और आँखों से hi इशारा करते हुई पूछती है.. क्या है ये… करीम भी इशारे से कहता है… वाइब्रेटर.. जैसे hi करीम कहता है वैसे hi सिमरन आपने हाथ आपने माथे पे मारती है और धीरे से कहते है…. ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… माय गूदड़…. सिमरन के इस एक्सप्रेशन पर करीम स्माइल देता है…

सिमरन जैसे hi कार के नज़दीक पहुँचती हैं … जैसे hi वो कार का दूर ओपन करने वाली होते है वैसे करीम वाइब्रेटर का रिमोट फिर से जोर से दबाता है.. सिमरन के छूट में रखा वाइब्रेटर तुरंत ों हो जाता हैं और उसके बढ़ते कदम तुरंत डगमगा से जाते हैं ...... वो वहीँ गिरते गिरते बचती hain.........aur फ़ौरन अपने हाथों से कार का दरवाज़ा झट से थम लेती hain.....uske मुँह से एक ज़ोरों की सिसकारी फुट पड़ती hain........agle hi पल सिमरन के चेहरे का रंग पूरा फीका सा पढ़ जाता हैं .........





अब सिमरन को ाचे से समझ में आ गया था की करीम की आज उसने बात मानकर बहुत बड़ी गलती की hain........wo तो बस उसे एक डिलडो hi समझ रही थी मगर वो तो एक तरह का वाइब्रेटर tha........aab वो आने वाले उस तकलीफ को सोच सोचकर उसका गाला अब सूखने लगा tha......aabhi भी वो बेबसी भरी नज़रियों से करीम के चेहरे की तरफ देख रही थी.....





वहीँ उसका हस्बैंड उसे अजीब सी नज़रियों से घूर रहा tha.....agar इस वक़्त उसका हस्बैंड वह नहीं होता तो वो फ़ौरन अपने छूट में रखा डिलडो निकल फेंकती .......मगर अब कुछ नहीं हो सकता था ........

उसका हस्बैंड दोबारा सिमरन की आवाज सुनकर फ़ौरन गाड़ी से उतारकर सिमरन के पास जाता हैं और उसके एक दम करीब जाकर खड़ा हो जाता हैं और सिमरन के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain.......Simran की आँखें कभी बंद हो रही थी तो कभी खुल रही thi.......laajat की वजह से......

सिमरन का हस्बैंड - Simran....aap ठीक तो हैं naa.......kya हुआ आपको अचानक .......

सिमरन एक नज़र करीम के चेहरे की तरफ देखती हैं करीम उसे देखकर अभी भी मंद मंद मुस्कुरा रहा tha.........wo विबरटोर की स्पीड थोड़ी सी और बढ़ा देता हैं वहीँ सिमरन की हालत एक बार फिर से धीरे धीरे ख़राब होने लगती hain.....ek बार फिर से वो पूरी तरह तड़प सी जाती hain......uske छूट में गुदगुदी सी हो रही थी ........ और साथ में गीलापन भी बढ़ता जा रहा tha.......ek अजीब से सेंसेशन बार बार उसके छूट में उठ रही थी ....... धीरे धीरे उसके अंदर हवस अब फिर से बढ़ने लगी thi......aankhon में लाल डोरे भी साफ़ नज़र आने लगे थे.....

सिमरन –वव्वव्वव्व ..... उउउउउ ..... ंन्न ... ह्ह्हह्ह्ह्ह ....... वो ....बस ऐसे hi........thoda चाकर आ गया था........ मैं ठीक हूँ........

सिमरन अपना एक हाथ अपने छूट पर ले जाना चाहती थी मगर वो अब ऐसा आपने हस्बैंड के सामने नहीं कर सकती थी........ धीरे धीरे उसकी बेचैनी अब बढ़ने लगी thi........Karim सिमरन के करीब आता हैं और आकर कहता है…

करीम- मैडम जीई… कुछ हेल्प करू…

सिमरन गुस्से से उसको देखती है..





सिमरन का हस्बैंड भी करीम को देखते हुई कहता है…

सिमरन का हस्बैंड- मई हु न हेल्प करने के लिए… मई हु इनका हस्बैंड.. मई आपने वाइफ का ख्याल अचे से रखना जनता हु..

करीम हस्ते हुई फिर एक बार वाइब्रेटर ों करता है.. वैसे hi सिमरन उछाल पड़ती है.. और डगमगाते हुई थोड़ी बाजु के और झुक जाती है... झुकने की वजह से उसके आम करीम के सामने आ जाते है.. करीम उसको hi देख रहा था.. सिमरन का हस्बैंड ये देख लेता है की ड्राइवर मेरे वाइफ के बूब्स देख रहा है.. वो गुस्से मई कहता है.. ड्राइवर आपने सीट पे जेक बैठ जाओ..

करीम फिर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता हैं....

सिमरन का हस्बैंड - चले सिमरन ........

सिमरन एक नज़र करीम को देखती है फिर आपने हस्बैंड को देख कर फिर वो उससे बिना कुछ कहे कार के अंदर आकर चुप चाप बैठ जाती hain.....wahin उसका हस्बैंड भी उसके बाजु में आकर बैठ जाता हैं....

सिमरन का हस्बैंड -

अगर आपकी तबियत ठीक नहीं है तो सिमरनजी आप अभी घर वापस चली जाओ.... मई अकेला चला जाऊंगा और काव्य जी को बोल दूंगा की आप की तबियत ठीक नहीं है इसलिए आप नहीं आ payee…waise वो आप की ाची फ्रेंड है वो समाज जायेंगे…

सिमरन फ़ौरन आपने हस्बैंड का हाथ थम लेती हैं और ना में अपनी गार्डन धीरे से हिला देती हैं .....

सिमरन का हस्बैंड- नहीं .. नहीं.. आप घर पर hi रुकर आराम करो… लगता है आप बहोत वीकनेस फील कर रही हो.. आप रेस्ट कर लो…

इस पर सिमरन कुछ बोलना चाहती थी की तभी करीम रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता है…. सिमरन एक बार फिर से तड़प उठाती है….

सिमरन- आआआआअह्हह्ह्ह्ह…..

और अपनी आँखे बंद कर लेते hai…Simran का हस्बैंड- देखिये… आप कितनी वीकनेस फील कर रही है… आप ठीक से बोल भी नहीं पा रही है..

सिमरन - aaaaaa......hhhhhh.....main ठीक हूँ जीईई .......बस थोड़ी वीकनेस की वजह से ....... ऐसा हो रहा है शयद…

सिमरन का हस्बैंड- लगता है आप बहोत परेशां है…. हम अभी डॉक्टर के पास चलते है…

डॉक्टर का नाम सुनते hi झट्ट से सिमरन चिल्ला पड़ती है…

सिमरन- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii….

तभी करीम एक बार फिर वाइब्रेटर का रिमोट पहले से ज्यादा जोर से दबाता है और उसके स्पीड बढ़ाता है.. इस वजह से सिमरन आपने जगह पे उछाल पड़ती है..

सिमरन- uuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii….. mmmmmmaaaaaaaaaaaaaaa…… मर्डरर… gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…..

सिमरन का हस्बैंड- क्या हुआ सिमरन जी…

अब सिमरन आपने हस्बैंड को क्या कहातीय… वो क्या ये कहती आपने हस्बैंड से की वो इस वक़्त अपने छूट में डिलडो लिए बैठी हैं ...... और सामने बैठा हुआ बड़ा उस डिलडो को चला रहा है रिमोट से… लेकिन थोड़े hi देर मई सिमरन ने आपने आप को सम्बल….

सिमरन- कुछ नाहीइ…. वो पौन को जो थोड़े देर पहले मोच आयी थी उस पेअर पे परिसर पद गया था.. उतने की वजह से.. उसकी वजह से दर्द कर रहा है…

सिमरन की ऐसी हालत देखकर करीम वहीँ मंद मंद मुस्कुरा रहा tha......use सिमरन की बेबसी देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था ....... अब करीम बार बार उस रिमोट से कभी वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता तो कभी उसे बहुत स्लो कर deta......Simran बार बार तड़प uthathi......aur सिमरन कभी अपने होंठों को कटती तो कभी अपने हाथों को कसकर सीट पर रखकर मसल देती......... अब उसे बर्दास्त नहीं हो रहा tha.......Simran की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi......aab उसका साबरा धीरे धीरे टूटता सा जा रहा tha.......kabhi तो उसे ये ख्याल आता है की वो फ़ौरन आपने हस्बैंड से लिपट जाये और अपने अंदर की आग को बुझा lein......magar शायद सिमरन और उसके हस्बैंड के बीच मई रिलेशन फॉर्मल hi था.. और किसी तीसरे आदमी के सामने उसके हस्बैंड के साथ ये वो नहीं कर सकती थी… उनका बीच मई का सेक्स नार्मल सेक्स hi था.. करीम और सिमरन के बीच मई जैसे था वैसे नहीं था.. अभी भी मर्यादा की लक्समन रेखा कहीं न कहीं बची थी ....... सिमरन और उसके हस्बैंड के बीच मई..

उसे करीम की हरकतों पर अब बहोत गुस्सा आ रहा था ....... मगर वो कराती तो क्या कराती… वो एक द्क्प होकर करीम के आगे बेबस थी.. वो न hi करीम से कुछ कह सकती थी और न hi उसे मन कर सकती थी ...... उसकी छूट में गीलापन अब और भी बढ़ता जा रहा था ...... मगर ये तो सिर्फ शुरुवात thi.......pata नहीं करीम उसके साथ ये सब खेल और कितनी देर तक खेलने वाला था .......

सिमरन का हस्बैंड – सिमरनजीई… आप ठीक हो…

सिमरन है मई गार्डन हिलती है…

सिमरन का हस्बैंड- तो चले…

सिमरन आँखे बंद किये हुई hi हां मई गार्डन हिलती है…

सिमरन का हस्बैंड – ड्राइवर चलो…

जैसे hi सिमरन का हस्बैंड चलो बोलता है वैसे hi करीम कार स्टार्ट करता hai..aur रिमोट जेब मई से निकल के आगे रखता hai..dono पैरो के बीच मई आगे की और… जैसे जैसे गाड़ी की स्पीड बढ़ती है वैसे की करीम रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था.. और जैसे कार की स्पीड काम करता वैसे hi वाइब्रेटर की स्पीड काम करता.. कार को जैसे hi ब्रेक मरना पड़ता वैसे hi रिमोट से वाइब्रेटर स्टॉप करता … वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा करने की वजह से सिमरन की हालत बहोत ज्यादा ख़राब हो गयी थी…

लेकिन सिमरन कुछ नहीं कह पति और चुप चाप आपने सीट पर बैठी रहती hai..........Karim के हरकत की वजह से अभी वो लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi.......jis से उसके बड़े बड़े बूब्स और भी क़यामत धा रहे the......uska हस्बैंड बड़े गुजर से सिमरन को देख रहा था.....

सिमरन का हस्बैंड - अरे यू ऑलराइट सिमरन जी......

सिमरन एक नज़र आपने हस्बैंड के चेहरे की तरफ देखती हैं .. फिर वो अपनी निगाहें उसके चेहरे से फ़ौरन हटा लेती हैं.......

सिमरन- हआ.. ी ऍम ऑलराइट…

कुछ देर बाद सिमरन के हस्बैंड को किसी का फ़ोन आटा है.. वो फ़ोन पे बाते करने मई बिजी है ये देख के सिमरन करीम को एक हाथ आगे बड़के उसके हाथ को टच करती है.. करीम पीछे देखता है.. सिमरन आँखों से इशारा करके कहती है.. प्ल्ज़ ..स्टॉप आईटी.. करीम धीरे से कहता है.. कार… सिमरन धीर से कहती है… नहीं बाबा.. वाइब्रेटर … करीम हसता है.. और नहीं बोलता है.. सिमरन का हस्बैंड फ़ोन रखने के बाद पूछता है.. क्या पूछ रही थी आप ड्राइवर से.. सिमरन कहती है.. पार्टी प्लेस आने मई कितना टाइम लगेगा ये पूछ रही थी.. वो कहता है .. अब जल्द hi आ जाएगा..

करीब 15 मिनट बाद उनको जहा पार्टी के लिए पहुँचाना था उस फार्महाउस पर वो पहुँच जाते है..

वह पहुंचते हुई hi सिमरन के हस्बैंड को एक फ्रेंड मिलता है .. वो सिमरन के हस्बैंड के साइड का कार का दूर ओपन करता है.. वो निचे उतरता है.. .. उसको वो बात करते हुई आगे निकलता है और कहता है.. चलो सिमरन..

सिमरन – हां..

आपने हस्बैंड को आगे गया हुई देखके सिमरन गुस्से से करीम की और देख के कहती है..





सिमरन - तुम ये सब मेरे साथ करने में क्या मज़ा आता हैं करीम ....... तुम एहि चाहते हो न की मैं बस ऐसे hi तड़पती रहूं...... शायद तुम मेरी इस बेबसी पर मज़ा आता hain......hain ना .......

करीम - नहीं मेरी जान .......

सिमरन- यहाँ मुझे जान मत कहो.. कोई सुन लेगा..

करीम- तुम मुझे गलत समझ रही ho......main तो बस तुम्हारे साथ खुलकर एन्जॉय करना चाहता hoon.....tumhein वो सरे खुशियां देना चाहता हूँ जो तुम तेरे नामर्द पति ने कभी नहीं दिए हैं.......

सिमरन - ऐसे tadpaakar........tum नहीं जानते इस वक़्त की मैंने कैसे आपने आपको संभाले राखी हूँ ......... मगर तुम्हारी एहि ज़िद्द हैं तो फिर मुझे तुम्हारी खुशियों के लिए आज सब मंज़ूर hain.......kar लीजिये जो तुम करना चाहते ho.........chahe तो सरे आम मेरी इज़्ज़त उछलिये या फिर इसे बचाकर rakhiye......faisla अब तुम्हारे हाथ में हैं........

करीम - तुम उसकी चिंता मुट्ठ करो सिमरन........ मेरी.. जान.. तुम्हारी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त hain......bus लाइफ को खुलकर जियो.........

करीम इतना कहकर फिर से हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं वहीँ सिमरन न चाहते हुए भी धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं....

सिमरन – करीम तुम सच में बहुत गंदे ho.....aab यहीं रहना है या फिर अन्दर भी चलना हैं......

करीम- सिमरन तू आज बहोत कड़क माल लग रही है इस सदी मई… मैं तो कर रहा है.. यहाँ hi तुजे चूड दू..

सिमरन अपनी अदा चहरे पर लेट हुई कहती है…





सिमरन- पागल हो गए हो क्या.. यहाँ कोई आ जायेगा .. हम ज्यादा देर तक यहाँ ऐसे बैत नहीं सकते …

करीम- काम से काम एक किश तो दे दो.. मेरे जान…

सिमरन- सिर्फ.. किश.. और कुछ नहीं.. पहले दूर की कांच उप्पर कर लो…

करीम वैसे hi करता है. और सिमरन को किश करता है..





किश करते हुई करीम वाइब्रेटर की स्पीड बहुत स्लो कर देता हैं.. इस वजह से सिमरन अपनी आँखें बंद कर लेते है … किश टूटने के बाअद सिमरन लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain.......aab उसे कुछ सुकून सा महसूस हो रहा tha.......kuch डियर बाद सिमरन और करीम कार से नीचे उतरने लगते है.. ......जैसे hi सिमरन कार से बहार उतरती हैं करीम एक बार फिर से वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ा देता hain.....ek बार फिर से सिमरन गिरते गिरते बचती हैं.......

अब उसके छूट में धीरे धीरे आग शोला का रूप लेती जा रही थी ......... करीम गलत जगह पर वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ा देता था ...... जिस से सिमरन चाह कर भी कुछ न कर pati.........jaise तैसे वो धीरे धीरे चलते हुए फार्महाउस के अंदर जाती हैं........ वाइब्रेटर की स्पीड ज़्यादा होने की वजह से उसकी कमर धीरे धीरे हिल रही thi.........wo नहीं चाहती थी की इस बात का किसी को कोई आभास हो...... करीम उसके पीछे पीछे चल रहा था...... वहीँ सिमरन बार बार अपने होंठों को अपने डेंटन से काट भी रही thi.....baar बार उसकी आँखें बंद सी होती जा रही thi........choot में सेंसेशन अब फिर से बढ़ता hi जा रहा था .........

जैसे hi पार्टी हाल मई ये दोनों एंट्री करते है वैसे hi सिमरन को सामने अपनी फ्रेंड काव्य दिख जाती है..





काव्य भी सिमरन को देख के सिमरन के तरफ चलने लगाती है… काव्य सिमरन से थोड़ी दूरी पर थी.. उसको देख के करीम देखता hi रहता है… और उसके मू से काव्य के लिए शब्द निकल पड़ते है…

करीम- क्या.. माल है…

सिमरन ये सुन के पीछे आपने चेहरा घुमा के गुस्से से बोलती है..





सिमरन- तुम अपनी कमीनापन नहीं छोड़ोगे… नयी औरत देखि की उसके पीछे पड़ते हो..

जैसे hi काव्य उन दोनों के पास आती है करीम काव्य को सर से लेकर पवन तक घूरने लगता हैं.......





वहीँ जब काव्य और सिमरन की नज़र एक दूसरे पर पड़ती हैं अगले hi पल वो दोनों एक दूसरे के सीने से लिपट जाती hain.......wahin अभी भी करीम की नज़र काव्य पर hi थी.. अब सिमरन की पीठ करीम के सामने थी और काव्य का फेस करीम के सामने tha..itane देर से करीम काव्य को जो घर के देख रहा था वो काव्य जान जाती है.. वो सिमरन को गले लगते हुई पूछते है..

काव्य- कोण है ये..

सिमरन- मेरा ड्राइवर..

काव्य- बहोत घर रहा है..

सिमरन- ऐसा hi है वो..

अब वो एक दूसरे से अलग होती है.. करीम काव्य को hi घर रहा था.. काव्य करीम को तिरछी नज़ए से देखती है…





काव्य- बड़ी देर कर दी सिमरन आने mein......main कब से राह देख रही थी .......

सिमरन - वो थोड़ा निकलने मई लेत हो गया था.. इस सब को छोड़ो और ये बताओ की भाई साब कैसे है..

तभी वह काव्य का पति आ जाता है..

काव्य का हस्बैंड- मैं ठीक हूँ बहाना.. .........बस आप लोगों के आने का hi मुझे इंतज़ार था.........

अभी भी करीम वहीँ काव्य को तिरछी नज़रो से देखता है.. जवाब मई काव्य भी सिमरन की नज़र चुराके बीच बीच मई करीम को देख रही थी..





उसके आँखों का पीछा कर रही thi..ek बार फिर से करीम की नज़रें काव्य के जिस्म को स्कैन कर रही थी....... बार बार उसकी नज़रें काव्य के क्लेवराज पर जाकर रुक jati......kavya भी करीम की नज़रियों को ाचे से पहचान थी है और आपने आम पर का सदी का पालू ठीक कर लेती है..

सिमरन काव्य के पति के पास जाती हैं और वहीँ उसके पास जाकर कड़ी हो जाती hain......idher करीम धीरे से वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता हैं अगले hi पल सिमरन एक बार फिर से उछाल सी पड़ती hain..........aab उसका साबरा टूटा जा रहा tha......wo अपने दोनों हाथों से वह कड़ी रहते hi निचे देख कर रेलिंग के एक बार को कसकर पड़की हुई थी और साथ hi साथ अपने होंठों को काट भी रही thi........baar बार उसकी आँखें लाजत से बंद होती जा रही थी.......

अब उसके छूट में रखा वाइब्रेटर उसकी मुश्किलें बढ़ता जा रहा tha......wo इन सब के सामने चाह कर भी अपने छूट पर हाथ नहीं रख सकती thi.......jaise तैसे वो अपने आपको संभालती हैं और एक नज़र इंकार में करीम के चहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं ........ वो उसे इशारों में ये सब के लिए मन कर रही thi...magar करीम को इन सब में मज़ा आ रहा tha.....wo भला ऐसे मौके क्यों जाने देता .... लेकिन जब सिमरन को ये इशारा करती है तब काव्य सिमरन को देखती है.. और थोड़े देर मई वो करीम को गर्दन घुमाके देखते है..





करीम भी सिमरन को देख रहा था.. काव्य को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था.. वैसे काव्य एक चालू लेडी थी..

काव्य का पति - आप ठीक तो हो न बहाना ......जब से आप यहाँ आयी हो कुछ परशान सी दिखाई दे रही ho........aap की तबियत तो ठीक हैं ना......

सिमरन - jee........bhaisahab.....main ठीक hoon......wo थोड़ी तबियत आज कुछ ठीक नहीं लग रही......

काव्य का पति एक नज़र काव्य के चेहरे की ओरे घूर कर देखता हैं

काव्य का पति – काव्य जब तुम्हें मालूम था की सिमरन जी की तबियत ठीक नहीं थी तो फिर तुमने इन यहाँ क्यों बुलाया .... घर पर रहती तो थोड़ी आराम कर लेती न ये ..... तुमने क्यों बेवजह इनको परेशां किया.......

सिमरन - नहीं भाईसाहब ........इसमें काव्य की कोई गलती नहीं......

काव्य- आप परेशां मत हो.. आप के सिस्टर को कुछ नहीं हुआ है..

ताभ्ही वह सिमरन का पति आता है.. काव्य का पति उसके साथ जाता है.. तभी काव्य सिमरन के पास जाती है और उसके कानो मई धीरे से बोलती है..

काव्य- सिमरन वैसे तुजे कुछ नहीं होना चाहिए..

सिमरन आचर्य से काव्य को देखती है..

सिमरन – क्यों…

काव्य- तेरे पास इतना हत्ता कट्टा ड्राइवर जो है तो तुजे क्या होगा..

सिमरन- क्या मतलब

काव्य हसती है..

काव्य- कुछ नही..

ऐसा कहती हुई काव्य दूसरी तरफ चेहरा करके कड़ी हो जाती है… तभी करीम को सामने से माहि आते हुई दिख जाती है..





मगर माहि ने अब तक करीम को देखा नहीं था.. माहि तो काव्य को देख के उस से मिलाने आ रही थी.. जैसे hi माहि काव्य के पास आती है तब उसकी नज़र करीम पे पड़ती है.. .. काव्य उसको वह देख कर आचार्यचकित हो जाती hai..usko समाज मई नहीं आता की एक बहार का आदमी इस पार्टी मई कैसे आ गया …

करीम को देखते hi माहि का चेहरा उतर जाता है.. और वो धीरे से बोल पड़ती है..

माहि- ये कमीना यहाँ क्या कर रहा है..

कव्य- कोण..

माहि- ये कला सांड..

काव्य पीछे घूम के देखती है..

काव्य- इसको तुम जानती हो… माहि..

माहि- है.. इस कमीने को मई अचे तरह से जानती हु..

काव्य- ारे माहि .. तुम इसको देख कर ये गंदे वर्ड क्यों उसे कर रही हो..

माहि- ये आदमी hi इतना गन्दा और घटिया है की इस्सके लिए मेरे पास कोई अचे वर्ड है hi नहीं..

काव्य- क्या..

माहि- है .. काव्य.. बहोत hi कमीना इंसान hai..tum इससे दूर रहो..

काव्य- लग तो रहा है… लेकिन तुम इस को कैसे जानती हो…

माहि- मई अब ये सब यहाँ बता नहीं सकती ..लेकिन इतना बता देती हु की यहाँ इस घटिया आदमी से बच के रहो.. और हो सके तो इस्को यहाँ से जल्द से जल्द निकल दो..

काव्य- क्यों… िस्सने ऐसा क्या किया है

माहि- वो बाद मई बताती हु..

तभी माहि को कोई लेडी आवाज देते है इस वजह से माहि वह से चली जाती है..

माहि और काव्य की बाते करीम वह खड़ा रहकर सुनाता है.. उसको लग रहा था की माहि उसके प्लान की वात लगा degii..aab माहि का कुछ न कुछ करना पड़ेगा.. नहीं तो मुझे यहाँ से ये पागल औरत निकल देगी.. इसके छूट के चक्कर मई जो बाकि की छूट मिल रही है वो भी हाट से जाएगी.. इस औरत से माफ़ी मागणी hi पड़ेगी…

फिर करीम ये सोच कर माहि के पीछे जाता है.. माहि उस लेडी से बात कर रही थी.. करीम सोचते है की इस माहि रांड का क्या करे.. ये सोचते हुई वो एक कार्नर मई चला जाता hai..tabhi करीम को मिलाने के लिए सिमरन आती है.. .. वो उसको हाट जोड़ के विनती करती है

सिमरन - यहाँ किसी के साथ फ़्लर्ट मात करना… मेरे इज़्ज़त का सवाल है… उसके हाथ को करीम पकड़ता है और बोलता है..

करीम - डर मत..

ये माहि देख लेती hai...Ye देख कर माहि को कुछ समाज नहीं आ रहा था की ये माजरा क्या… वो जानती थी की सिमरन को करीम ने छोड़ा है.. लेकिन वो समाज नहीं पा रही थी की द्क्प सिमरन कौर इस को हाट क्यों जोड़ रही है.. सिमरन इस घटिया आदमी के सामने इतना बेबस क्यों हो गयी है.. मुझे तो लगा था की उस दिन इनका सेक्स ऐसे hi कुछ हुआ होगा.. कभी कभी हमसे अनजाने मई गलती हो जाती है वैसे सिमरन मैडम से गलती हुई होगी.. लेकिन अब मुझे ऐसा नहीं लग रहा hai..aise माहि सोच रही थी.. उसे लग रहा था की यहाँ कुछ गड़बड़ है.. अब सिमरन करीम से दूर चली गयी थी..

माहि करीम के पास गुस्से मई चली जाती hai..usko गुस्से से बोलती है..





माहि- तुम यहाँ कैसे…

करीम- मई यहाँ स्पेशल गेस्ट हु…

माहि- तू द्क्प सिमरन मैडम को क्यों धमका रहा था..

करीम- मई कब धमका रहा था..

Mahi-wo तुजे हाट जोड़ के क्या कह रही थी…

Karim-use तेरे को क्या करना है..

माहि- तू जनता है मई कोण हु.. माहि हु.. काँटी शेठ की बहन..

करीम- हां.. पता है…

माहि- तू भूल गया है शयद.. मेरे वजह से कल कैसे मार खाया था तूने..

करीम कुछ नहीं बोलता है..

माहि- मई देख रही हु तू मुझे हमेशा गुर था है.. इतना मार खाने के बाद भी तुजे अक्कल नहीं आयी.. कल भाई के हाट से इस वजह से hi मार खाया.. और आज भी.. अभी भी मुझे घर रहा है..

करीम गुस्से मई माहि को हाट जोड़ता है..

करीम- मैडम जी .. मुझे बक्श दो.. मई आप को आज से नहीं गुरुंगा… आप भी मेरा रास्ता मत काटिये..

माहि- ज्यादा शहाणा मत बन…

करीम- अब मैंने क्या किया .. माहि जी..

ऐसे कहते हुई माहि के बूब्स को.. उसके क्लीवेज को देखता है.. माहि का एक बूब्स और नवल ओपन थे उसको hi करीम देख रहा था.. माहि वो जैसे जान तेति वैसे hi पालू से उसको धक् लेती है.. और गुस्से मई कहती है..

माहि- अपनी गन्दी जबान पे मेरा प्यारा नाम मत ले..

करीम- आप के जैसे hi आपका नाम प्यारा है इसलिए जुबान पाई आ गया..

माहि- ज्यादा होशियारी मत कर मेरे saath..nahi तो मई तुजे भाईसाहब के पास ले जेक ऐसा मार खिलाऊंगी की किसी औरत की तरफ देखने के लिए लायक नहीं रहेगा… समाज न… क्या नाम है तेरा..

करीम- करीम…

माहि- टेलर है न..

करीम- हां…

टैलोरकी hi कर ज्यादा शहाणा मत बन…

करीम कुछ नहीं बोलता है…

माहि- ज्यादा गुर मत मुझे…

करीम गुस्से मई बोलता है..

करीम- मैडम जी.. बोलै न.. अब से नहीं गुरुंगा…

माहि- मतलब अब तक घूरता था..

करीम- हां..

माहि- क्यों..

करीम- आप दिखने मई अचे है इस लिए..

माहि- तुजे दिखने मई जो भी औरत अच्छी लगेगी उस हर औरत को घूरेगा..

करीम- हां..

माहि- कमीना .. कही का..

करीम- मैडम अब से नहीं गुरुंगा..

माहि- क्यों..

करीम- आप ने जो मन किया है..

माहि आपने बालो मई हाट घूमते हुई.. आपने सेक्सी अड्डा के साथ कहती है..





माहि- मैंने मन किया है.. अच्छी बात hai..aab से मई जैसे बोलूंगी वैसे hi करेगा न..

माहि अब थोड़ा क्रॉस हो के कड़ी थी.. इस वजह उसका एक आम थोड़ा आगे की तरफ आया हुआ है ऐसे लगता था.. ऐसे दिखता था..





करीम- है मैडमजी.. खूबसूरत औरत की हार बात माननी hi पड़ेगी न..

माहि- मेरे साथ फ्लेर्टिंग मत कर.. वह सिमरन मैडम के साथ.. मेरे साथ नहीं..

करीम- जी मैडम जी..

करीम माहि को जी मैडम जी ऐसे कहते हुई उसके उस आम को देख रहा था..

माहि आपने चहरे पर सेक्सी अदा लेट हुई कहती है..





माहि- गुरुंगा नहीं.. ऐसे कहता है.. और हमेशा घूरता है..

करीम- सॉरी मैडम अब से नहीं..

माहि- क्या .. अब से नहीं..

करीम- घूरना..

माहि- तो अब क्या कर रहा है..

करीम- वो क्या करे मैडम.. आदत से मजबूर हु.. आप जैसे कोई कड़क माल सामने आ जाता है तो देखने का मैं करता है..

माहि- माल.. मुझे क्या समाज के रखा है..

करीम- सॉरी... खूबसूरत औरत..

माहि- मुजसे बाते करते वक़्त वर्ड गंदे उसे मत करना..

करीम- हां.. मैडम जी.. आप जैसे ब्यूटीफुल एंड सेक्सी औरत अगर सामने आ जाती है तो मैं आपने बस मई नहीं रहता..

माहि आँखे बड़ी करके करीम को गुस्सा दिखती है..

माहि- फिर से गंदे वर्ड

करीम - सॉरी... माहि जी.

माहि- only..madam..jiii.. no माहि.. जी.

करीम- ok मैडम जी..

अब माहि वह से चली जाने लगाती है..

करीम- मैडमजी..

माहि पीछे घूम के देखते है..





माहि- अब… क्या है…

करीम- वो मेरे बारे मई किसी को उलटा सीधा मत बोलिये न..

माहि- क्यों

करीम- मई आप के रस्ते नहीं आऊंगा.. आप भी प्ल्ज़ मेरे रस्ते मई मत आइये न..

माहि स्माइल देते है..





और चेहरा घुमा के वह से चली जाती hai..Karim उसके पीछे चला जाता है..

करीम- मदमजीए.. प्ल्ज़्ज़… कुछ कहियेना

माहि फिर घूम जाती है..

माहि- मेरा पीछा क्यों कर रहे हो.. अब तो कह रहे थे न मेरे पीछे नहीं आओगे..

करीम - नहीं आऊंगा..

माहि- फिर अब क्या कर रहे हो..

करीम- एक बार मेरे हेल्प कीजिये ना..

माहि- कैसे हेल्प

करीम- वो मेरे बारे मई कुछ भी किसी को मत कहिये न..

माहि- तुम अपनी बात मुजसे मानवके hi रहोगे न...

करीम- हां..

माहि – देखुंगीय.. मेरा पीछा मत कर..

करीम- नहीं... नही.. ऐसा नही.. प्ल्ज़.. प्रॉमिस कीजिये..

माहि- प्रॉमिस और तुमसे..

करीम- हां...

माहि- क्यों करू..

करीम- एक आपने मुलाज़िम समाज के..

माहि- मई क्यों समाजु..

करीम- आपको एक अच्छा सा ब्लाउज सिलवा दूंगा..

माहि- मुझे नहीं चाहिए..

करीम- क्यों..

माहि- मई जानती हु तुम जैसे लेडीज टेलर को अच्छे तरीके से..

करीम- कैसे

ऐसे कहके करीम थोड़ा सा माहि के पास आता hai..aabhi भी वो दोनों एक कार्नर मई खड़े थे... वैसे hi करीम माहि की तरफ देख कर आँख मार देता है.. … माहि गुस्से मई बोलती है…





माहि- तुम आपने आप को समजते क्या हो…. सिमरन मैडम के साथ फ़्लर्ट कर लिया इसका मतलब तुम कुछ भी करोगे..

करीम उसके आँखों मई hi देख रहा था…

माहि- तेरे ये डेरिंग की तूने मुझे आँख मरी …

करीम उसके आँखों मई hi देखता है..





माहि- ऐसे क्या आँखे फाड़ के देख रहा है… हरामखोर… ज्यादा देखा तो कच्चा चबा जाउंगी…

करीम- तो चभा जा न…

माहि- मुजसे उलझ रहा है.. हरामी..

ऐसे कहकर माहि उसके कालर को पकड़ के एक कार्नर मई ले जाती है… और पीछे ले जाती hai..uske फेस को एक हाथ मई पकड़ थी है और बोलती है…

माहि- मेरे से मत उलझ.. समाज न… और रेज आँखे फाड़ कर मेरे को देख भी मत..

करीम- क्या करेगी…

करीम ने ऐसे बोलते hi…Mahi आपने घुटने से उसके पथ मई जोरदार मारती है.. करीम कराह रहा था…

माहि- समाज मई आ गया न… मई क्या कर सकती हु… सुधर ja..bachooo…. मई बहोत तीखी चीज़ हु…

ऐसे कहते हुई वो वह से चली जाती है… करीम उसको hi देख रहा था..





उसके गांड और कमर को देख रहा था..

करीम… तू चीज़ तो तीखी है… तुजे छोड़ने मई तो बहोत मज़्ज़ा आएगा… तूने बहुत बड़ी गलती की है मुजसे ुलाज़ के माहि… तुजे तो ऐसे चौडूँगा की तू साड़ी जिंदगी मेरे याद करेगी…. माहि…

थोड़ी देर तक ऐसे hi चहल पहल वह चल रही थी.. करीम भी वह की करीमली देख रहा था.. सिमरन कुछ मेहमान से बात कर रही थी साथ मई वो करीम को देख रही थी… करीम का ध्यान अब सिमरन पे उतना ज्यादा नहीं था.. इस वजह से सिमरन को वाइब्रेटर से रहत मिली हुई थी.. सिमरन को लग रहा था की करीम मई कुछ फरक पड़ा है … सिमरन सोच रही थी की यहाँ इतने सारे लोग है इस वजह से शयद करीम डरकर वाइब्रेटर ों नहीं कर रहा है.. लेकिन असली वजह करीम hi जनता था..

इधर करीम आपने आप पर अब बहोत ज्यादा गुस्सा था.. वो आपने आप को कह रहा था साला.. मई तो इस माहि को माफी मांगने गया था .. थकी वो मेरे काम के बीच मई न आ जाये.. लेकिन मैंने ये क्या कर दिया.. उसने थोड़ा अच्छा क्या बोलै .. थोड़ी लाइन क्या दी मई उस से इस तरह से पेश आया और उसको आँख मर दी.. साला ये रंडी अब मुझे नहीं छोड़ेगी.. अगर ये बात उसने अपने भाई को बता दी तो साला वो कमीना थो मुझे जान से मार देगा.. नहीं तो काम से काम आपने घर से मार्के निकल देगा.. साला इस माहि के चक्कर मई जो अब तक छूट मिल रही थी वो भी हाट से चली जाएँगी… अब क्या करू मई.. साली इसने अब यहाँ किसी और को बता दिया तो इस पार्टी से भी जाना पड़ेगा.. यहाँ जो हहरयलि का मज़ा मिल रहा है वो भी अब नहीं मिल पायेगा.. अगर मई उसके पास अब माफ़ी मांगने गया तो वो बहोत भाव खायेगी.. अब क्या करू .. वो तो अब मुझे आपने पास आने भी नहीं देंगे… मैंने ये क्या किया.. मेरा दिमाग नहीं चल रहा है.. अब दारू पिनेही पड़ेगी.. वर्ण मेरा दिमाग नहीं चलेगा.. मई कुछ सोच नहीं पाउँगा..

ये सोच कर करीम पार्टी हॉल से बहार जाता है.. कार जहा पार्क की हुई थी वह.. वो सोचता है साला किसी ड्राइवर के पास दारू मिल जाये पिने को.. यहाँ पार्टी मई अब तक दारू सर्वे करना स्टार्ट नहीं किया है.. बहार कुछ ड्राइवर आपस मई बात कर रहे थे… उनसे जान पाचन करीम कर लेता है.. वो 3-4 लोग the..aapas मई आपने मालिक और मालकिन के बारे मई बैठे कर रहे थे.. उस मई एक बोलता है .. साला यहाँ दारू अगर मिल जय तो मज़ा आ जायेगा.. उसमे से दूसरा बोलता है मई जुगाड़ करके आता हु.. थोड़े देर बाद वो कहा से तो दारू के 2 बड़ी बोतल लेके आता है.. वो माहि का ड्राइवर था.. रघु.. करीम को जब पता चलता है की रघु माहि का ड्राइवर है तो उसके दिमाग मई एक प्लान आ जाता है.. वो रघु से ज्यादा बातचीत करने लगता है.. ड्राइवर आपने मालकिन के बारे मई बात कर रहे थे तब करीम बोल पड़ता है..

करीम- साला.. ये माहि मैडम तो बहोत गुस्सैल है..

दूसरा ड्राइवर बोलता है… क्या हुआ भाई .. उसने तुजे कुछ कहा क्या.. करीम कहता है ..है भाई.. तभी वो ड्राइवर कहता है.. है भाई .. वो जरा ज्यादा hi गुस्सा करती hai..tabhi रघु बोल पड़ता है..

रघु- ारे हमारी मैडम वैसे नहीं है जैसे तुम कह रहे हो.. आज कल वो ज्यादा hi गुस्सा कर रही है लेकिन पहले वैसे नहीं थी.. वो बहोत अचे स्वाभाव की लेडी है..

करीम- लगता है तुजे कुछ ज्यादा hi पता है आपने मैडम के बारे मई..

रघु- है ..करीम भाई.. पिछले 5-6 सालो से उनके साथ काम कर रहा हु..

करीम- तो कुछ बता न आपने मैडम के बारे मई..

और दूसरे ड्राइवर को बोलता है..

करीम- रघु भाई का एक गिलास और भर दो..

दूसरा ड्राइवर बोलता है .. हां.. क्यों नहीं…

रघु- वैसे हमारी माहि मैडम जितने दिखने मई अच्छी है उतनी hi स्वाभाव से अच्छी है… लेकिन अब शादी को7-8 साल हो चुके है.. अब तक बच्चा नहीं है.. शयद इस वजह से थोड़ी गुस्सैल हो गयी है.. और साहिब भी बहोत ज्यादा बिजी रहते है… वैसे माहि मैडम को पैसे की कोई कमी नहीं hai…muje जो लगा मैंने बोल दिया ..उस मई सच भी हो सकता है और झूट भी...

फिर करीम थोड़ी इधर उधर की बाते करता है… और थोड़े देर बाद सब लोगो के साथ वह से चला जाता है.. अन्दर पार्टी हाल मई आजाता है.. उसको सामने सिमरन दिख जाती है.. सिमरन दिखते hi उसको सिमरन के छूट मई जो वाइब्रेटर की याद आ जाती है… फिर करीम वाइब्रेटर ों करते हुई उसकी स्पीड बढ़ाता है.. वैसे hi सिमरन आपने जगह पाई उछाल पड़ती है.. और आपने आप को कहती है.. आ गया कमीना.. अब तक कहा था पता नाह.. कितना सुकून था अब tak..ye अब कहा से आ गया .. फिर वो इधर उधर देखते hai..piche घूम के जैसे उसको करीम दिखता है वो करीम के पास आ जाती है..

सिमरन- कहा गए थे..

करीम- यही.. बहार था..

सिमरन- इतने देर तक कितना सुकून था मुझे.. तुम आते hi मुझे दर लगता है.. कब क्या करोगे कुछ कहा नहीं जा सकता है.. तुम देखते hi मई डर जाती हु..

करीम- दर मत मेरी जान..

ऐसे कहते हुई जोरसे रिमोट का बटन दबाता हुई स्पीड बढ़ाता है… सिमरन आपने जगह पे उछाल पड़ती है..

सिमरन- ोोोोोुछहहहहहहह….. इससे मुझे छुटकारा कब मिलेगा…

करीम- मिलेगा ..मिलेगा… वह.. जा ..तेरा पति हमारे तरफ hi देख रहा है..

फिर सिमरन आपने पति के तरफ जाती है .. इधर माहि बहोत ज्यादा गुस्से मई थी.. वो सोचती है इस हरामी से थोड़ी प्यार से बात कर क्या ली इस ने मुझे डायरेक्ट आँख hi मार ली.. साला खुद को क्या समजता है… मई भी कैसे लेडी हु.. इस हरामी के बारे सब कुछ जानते हुई भी उसे बाटे करने लगी .. अब इस को मई आपने पास आने नहीं दूंगी… इस से बाते नहीं करुँगी… लेकिन इस पर वाच रखना पड़ेगा.. ये आदमी क्या करेगा इसका कुछ भरोसा नहीं hai..is लिए सिमरन और करीम जब बाते कर रहे थे तब माहि दूर से देख लेती है.. जैसे hi करीम देखता है वैसे hi माहि आपने मू दूसरे और घुमा लेते है..

करीम इधर उधर घूम रहा था… वो जनता था की माहि उस पर नज़र रख रही है… इस वजह से करीम सोचता है थोड़ा सिमरन और काव्य के और करीब जाते है.. और इस माहि को जरा दिखते है.. जरा इसको जलाते hai..Sali दूर से मुज पर नज़र रख रही है.. उन दोनों के और करीब जाने के कोशिश करीम करता है… एक बार वो सिमरन के पास जाता है.. उसके बाजु मई खड़ा रहता है… करीम के पीछे माहि कड़ी थी… दूरी बनाये रखते हुई… करीम वो जनता था इसलिए वो सिमरन के कमर पाई हाथ रखता है… सिमरन उसे कुछ नहीं बोलती… माहि वो देख रही थी.. माहि पहले से जानती थी की करीम और सिमरन के रिश्ते के बारे मई.. पर उसको ये सब देख के आचर्य होता है की करीम सरे आम सिमरन के कमर पर हाथ रखता है.. वो सोचती है ..ये आदमी बहोत घटिया hai..issko जरा भी शर्म नहीं है.. ये सरे आम एक शादीशुदा औरत के कमर मई हाथ दाल रहा है.. वो भी सिमरन मैडम का हस्बैंड इस पार्टी मई रहते हुई.. और सिमरन मैडम भी कुछ नहीं बोल रही है.. इस टेलर को थो पहले से hi कोई इज़्ज़त की पर्व नहीं है लेकिन मैडम को तो होनी चाहिए… माहि अभी भी करीम और सिमरन को देख रही थी.. करीम घूम के माहि की तरफ देखता है.. और चहरे पर हसी लेट हुई सिमरन के कमर पर आपने हाथ वैसे hi रखता है..

बाद मई थोड़ी देर बाद वो काव्य को मिलाने के उसके पास पहुंचता है..





काव्य बहोत मस्त लग रही थी.. और उस से बात करने लगता है.. … काव्य को बात करने के पीछे उसका कोई और hi मकसद था.. उसके दिमाग मई एक प्लान tha..wo काव्य से बाते कर रहा था और काव्य को हँसा रहा था.. काव्य के हाथ पाई हाथ एक बार वो मरता hai..Mahi वो देख रही थी.. करीम वो जनता था.. इस बार वो माहि को देखता भी नहीं है.. वो ऐसे दिखा रहा था की माहि के तरफ अब वो ध्यान नहीं देगा.. वो काव्य से है के बाते कर रहा था.. माहि को समाज मई नहीं आ रहा था की मैंने काव्य को इतना कुछ बताया इस आदमी के बारे मई फिर भी काव्य उसे बात कर रही है.. ये कितने देर से काव्य से बाते कर रहा है.. इतने देर से क्या बाते कर रहा होगा ये आदमी.. और काव्य भी इसके बातो मई इतना क्यों इंटरेस्ट ले रही है.. कितने देर से बाते कर रहा है और मेरे तरफ देख भी नहीं रहा है.. जाने दो मुझे क्या करना है .. वो मुझे देखेगा या nahi..aab काव्य है नहीं रही थी पर करीम की बात प्यार से सुन रही थी..





काव्य के सामने hi खड़ा रहके वो बार बार काव्य के आम को देख रहा होता है.. स्टार्ट मई तो काव्य उसके ऐसे देखने पे ध्यान नहीं देती.. पर माहि का पूरा ध्यान था.. करीम कहा देख रहा है… माहि सोच रही थी की काव्य को कैसे पता नहीं चल रहा है की ये आदमी कहा देख रहा है.. मई काव्य को जेक बता दू क्या.. नहीं.. नहीं.. अब नहीं बाद मई बता देते हु.. नहीं तो ये घटिया आदमी कुछ दूसरा hi samajega..Karim जब ज्यादा hi काव्य के आम को देखने लगता है तभी काव्य को समाज मई आता है की करीम कहा देख रहा hai..aab काव्य शर्माकर दूसरी तरफ चली जाती है…





लेकिन करीम को कुछ नहीं बोलती है…

अब काव्य के पास माहि चली जाती है..

माहि- क्या काव्य.. मैंने बताया था न तुम..

काव्य- क्या..

माहि- उस घटिया आदमी से ज्यादा बाते न करने का..

काव्य- वो कोई ऐसे वैसे बाते नहीं कर रहा था.. वो तो सिर्फ जोके सुना रहा था..

माहि- इसलिए तू है रही थी..

काव्य- हां..

माहि- मई तो सोच रही थी की तू उसे क्या बात कर रही है..

काव्य- डर मत… मई ऐसा वैसा कुछ नहीं करूंगी.. उसके साथ..

माहि- तूने देखा वो तेरे बूब्स को कैसे गुर रहा था ..

काव्य- हां.. देखा.. तू उसे जो घटिया बोलती है.. वो बिलकुल सही है..

माहि को अब क्यूरोसिटी थी की करीम ने काव्य को मेरे बारे कुछ बताया तो नहीं.. ऐसा वैसा..

माहि- उसने मेरे बारे मई कुछ कहा..

काव्य- नही.. क्यों कुछ कहने वाला था क्या…

माहि- नही.. मुझे कैसे पता होगा..

काव्य- वैसे वो बहुत चालू बाँदा है.. तू

भी उसे बच के रहना..

माहि- क्यों… मई क्यों बच के राहु उसे..

काव्य- तू जिस तरह से मुजसे पूछ रही है उस से मुझे लग रहा है …

माहि- nahii..nahii..iss मई ऐसा क्यों लगेगा …

काव्य हसती है..

माहि- काव्य .. तू कुछ छुपा रही है.. क्या कहा उस कमीने ने मेरे बारे मई..

काव्य- कुछ स्पेशल नहीं.. ऐसा hi नार्मल है…

माहि- नार्मल है.. तो तू बता क्यों नहीं रही है…

काव्य- वो कह रहा था.. माहि मैडम बहोत अच्छी है.. लेकिन उनको मेरे बारे कुछ गलत फैमि हुई है…

माहि- और क्या कहा..

काव्य- यही की मई ऐसा नहीं हु… मई एक सीधा साधा आदमी हु…

माहि – और क्या कहा..

माहि का फेस देखने लायक हो गया था..





माहि को और क्यूरोसिटी हो रही थी की करीम ने उस के बारे मई काव्य को क्या कहा..

काव्य- लगता है तुम बहोत जल्दी है जानने की… तेरे उस घटिया आदमी ने तेरे बारे मई क्या कहा है..

ऐसे कह के काव्य हस्ती है..

माहि- वो मेरा नहीं है.. मई तो सिर्फ जानना चाहती हु की उसने क्या कहा तुम मेरे बारे मई..

काव्य- मई जानती हु.. तुम क्या लगा रहा है.. तो सुन.. बहोत ध्यान लगा के सुन.. शयद आज तक तेरे इस तरह की टैरिफ किसी ने भी नहीं की होगी.. शयद तेरे हस्बैंड ने भी…

माहि- बता..

काव्य- माहि मैडम बहुत खूबसूरत है.. इतनी सुन्दर औरत मैंने आज तक नहीं देखि.. उपरवाले ने बहुत फुर्सत से बनाया है उन.. मैं तो माहि मैडम की सूरत देखते hi उस पर फ़िदा हो गया था. इतना सुन्दर चेहसरा हर किसी को नहीं मिलता. उसकी आँखों की चंचलता उनके मटकने का अंदाज उफ्फ्फ..

काव्य थोड़ी देर रुकते है और माहि की तरफ देखती है.. और फिर से कहने लगाती है..

kavya-Uske होंठ तो बस.. एक डैम गुलाब गुलाबी.. जब दोनों पंखुडिया खिलती है तो देख कर ऐसा लगता है की हर वक्त कामुक रास टपकता रहता है उनके होंटो से.. खुसनसीब है मनीष भैया जो की उन इतने रसीले होंठ चूसने को मिलते हैं..

माहि- और क्या कहा ..उसने..

काव्य- बहोत मज़ा आ रहा है अपनी टैरिफ सुनकर..





माहि- नहीं.. ऐसे बात नहीं है.. उसने जो कहा बस वो तुम्हारे मू से सुनना चाहती हु..

काव्य- इतने hi इच्छा हो रही आपने खूबसूरती की टैरिफ सुनाने की तो जा न आपने घटिया इंसान के पास तेरे अछि से टैरिफ करेगा.. और..

माहि- और क्या..

काव्य- और…. तेरे अच्छी से लेगा भी..

तब शरमाते हुई माहि कहते है..





माहि- मई कभी नहीं जाउंगी उस घटिया आदमी के paas..aur अपनी कभी लेने भी नहीं दूंगी..

काव्य- तो उस ने जो कहा है वो क्यों सुनना चाहती है..

Mahi-tu सिर्फ बता न.. और क्या कहा usne..mere बारे मई..

काव्य- तेरे उस घटिया इंसान ने कहा..

माहि मैडम के दोनों उरोज.. उनकी तो बात hi निराली है.. दोनों उरोज हिमालय पर्वत के जैसे तने हुए उसकी छाती से चिपके हुए है.. जब वो चलती है तो दोनों उरोज उसके चलने से कामुक अंदाज़ में ऊपर नीचे हिलते हुए हायई.. दिल बैठ जाता है मेरा उन्हें यु हिलते देख कर. दोनों उरोजों की मोटाई और गोलाई एक डैम गजब की है.. ऊपर वाले ने एक डैम अलग hi साँचा तैयार करा होगा उनके उरोजों को ढलने के लिए.. जो भी उन्हें देखता होगा उसके मुँह में पानी आ जाता होगा.. जैसे मेरे मुँह में आ जाता hai..aur बाकियो के भी आता होगा..

माहि- इतना गन्दा कहा..

काव्य- ये गन्दा है क्या..

माहि शरमाते हुई नीचे देखने लगाती है…





काव्य- हीईई… मई मर जवायआ.. मेरे माहि के अड्डा वो पे.. क्या शर्मा रही हो.. शयद मनीष भैय्या ने पहली बार देखा होगा तभी इतना शर्माए नहीं होगी.. और अब एक बूढ़े के टैरिफ ने.. वो भी मेरे सामने की.. तेरे सामने भी नहीं की ..इतना शर्मा रही है..

तब नखरा करते हुई माहि कहते है..





माहि- आगे बता न.. क्या कहा उसने..

काव्य- आगे कहने laga...Itni सब खुबिया होने के बाद भी माहि मैडम में जो सबसे ज्यादा आकर्षक चीज है उनका पिछवाड़ा… ( उसने कहा आप लोग इंग्लिश मई अस्स कहते हो न… मैंने हां मई गार्डन हिला दी.. फिर उसने कहा हम लोग उसको क्या कहते है पता है आपको काव्यजी.. मैंने कहा नहीं.. वो बोलै.. गांड.. मई शर्मा के आपने गार्डन निचे कर ली और उसको बोली कितने गंदे हो तुम.. उसने कहा गांड को गांड hi कहेंगे न.. मैंने कहा मत कहो..)

माहि- तो तुम इस वजह से शर्मा रही थी..

काव्य- हां..

माहि- मुझे लगा… वो तुम्हारे बूब्स देख रहा था न इस वजह से तुम शर्म आ रही थी…

काव्य- मैंने वो तो देखा hi नहीं .. मई तो उसके बातो मई डूब गयी थी..

माहि- आगे क्या कहा उसने..

काव्य- आगे कहने लगा.. माहि मैडम की gaand..sorry सॉरी अस्स.. ऐसे कहने लगा.. ..माहि मैडम के अस्स के बारे में क्या कहु कुछ समझ नहीं आ रहा.. कातिल गांड .. सॉरी .. सॉरी.. अस्स है माहि मैडम की.. मेरे दिल का कतल कर दिया माहि मैडम की अस्स ने.. इतनी मस्त अस्स मैंने आज तक नहीं देखि.. जब वो चलती है तो अस्स के दोनों गोल गोल तरबूज बहुत कामुक अंदाज में हिलते हैं.. उनका फुला हुआ पैन उसके दोनों भागो को और भी ज्यादा आकर्षित बनता है.. नपुंसक का लुंड भी खड़ा हो कर झटके मरते हुए सलामी देने लग जाये..

माहि- क्या.. ऐसा कहा तुम उसने.. इतना गन्दा…

काव्य- हां.. बहोत गन्दा कहा उसने.. मैंने भी गुस्से मई उसको कहा.. क्या गन्दा बोल रहे हो.. इस लिए वो थोड़ा देर शांनत हो गया..

फिर काव्य भी थोड़ी डियर शांत हो गयी.. वो जानना चाहती थी की माहि की अब क्या रिएक्शन आएगी.. माहि भी थोड़ी देर शांत रहती है.. जब वो देखती है की अब काव्य आगे कुछ नहीं कह रही है.. तब उसने कहा ..

माहि- आगे उसने कुछ कहा.. या चला गया.

काव्य- थोड़ी देर हम दोनों hi शांनत थे.. मुझे भी कुछ समाज नहीं आ रहा tha..ki आगे क्या करू.. इस की टैरिफ सुनु ..जो तेरे बारे मई है या यहाँ से चली जाऊ.. फिर मैंने थोड़ी देर सोचा .. मई ये जानना चाहती थी की वो तुम्हारे बारे किस हद तक गन्दा सोचता है..

फिर काव्य माहि को पूछती है..

काव्य- माहि.. मैंने ठीक किया न..

माहि- हां.. ठीक kiya..aage कुछ कहा उसने..

काव्य- थोड़े देर बाद मैंने कहा.. और कुछ बचा है क्या माहि के बारे मई कहना.. तो उसने कहा.. अगर मैंने कुछ कहा तो आप उसको गन्दा कहोगे.. मैंने कहा.. अब इतना गन्दा कह hi चुके हो तो आगे और क्या गन्दा कहोगे. बोलो और क्या कहना है..

माहि काव्य को देखते hi रहती है..





काव्य- वो कहने लगा.. पक्का न.. मैंने कहा हां.. तो वो बोल pada..Mera तो माहि की गांड के बारे में सोच कर hi बुरा हाल हो जाता है.. लुंड बिठाये नहीं बैठता.. बार बार खड़ा हो कर उसकी गांड को सलामी देना शुरू कर देता है..

माहि- इतना गन्दा… मई सोचती थी उससे ज्यादा गन्दा और घटिया आदमी है ये.. और तुमने ये नोटिस किया काव्य..

काव्य- क्या..

माहि- अब तक वो मुझे माहि मैडम कह के बुलाता था अब माहि कह रहा है..

काव्य- haa..ye सच है.. आगे बता दू..

माहि- हां..

अब दोनों को भी सुनाने और सुनाने मई इंटरेस्ट आ रहा था..

काव्य- वो कहने laga..mujhe पूरा यकीं है की इस अप्सरा की छूट भी काम कातिल नहीं होगी..

माहि- क्या.. छूट .. वर्ड.. उसे किया उसने..

काव्य- हां..

माहि- और तुमने कुछ कहा नहीं..

काव्य- मेरी hi गलती thi..maine hi उसको छूठ दी थी… कुछ भी कहने की .. इस लिए उसने उसका अचे से फायदा उठा लिया…

माहि- काव्य.. एक बात पुछु..

काव्य- हां…

माहि- उसने तुजे कही टच नहीं किया न..

काव्य- तू पागल हो गयी है क्या.. तू शयद भूल गयी hai..ye बोर्डिंग सब तेरे लिए थी.. मेरे लिए नहीं थी… मेरे लिए होती तो उसको कब का मजा सिखाती ..

माहि कुछ नहीं bolati..aab काव्य माहि को न पूछते हुई आगे कहने लगते है..

काव्य- वो बोलने लगा.. बल्कि उनकी छूट तो सबसे ज्यादा क़यामत ढाती होगी.. कैसी दिखती होगी माहि की छूट.. झाते होगी उस पर या एक चिकनी होगी.. जैसी भी होगी.. कमाल होगी..

माहि- माय goddddddddddddddddd… कितना गन्दा इंसान है ये…

काव्य- आगे तो इससे ज्यादा है..

माहि- आगे और क्या कहा इस हरामी ने..

काव्य- आगे उसने.. कहा.. उसननी.. कहहआ…

माहि- इतनी क्यों डर रही है…

काव्य- वो कहने लगा…

ऐसा कहके काव्य शांत हो जाती है.. माहि अब आगे करीम ने और क्या कहा ये जानना चाहती थी.. उसको अब साबरा नहीं हो रहा था…

माहि- कहो न.. अब.. इतना कुछ गन्दा कहा है मेरे बारे मई अब तक .. और क्या गन्दा कहेगा मेरे बारे मई..

काव्य अपनी आँखे बंद करके कहती है..

काव्य- माहि तुम जो कहती हो न वो घटिया है.. उस से भी ज्यादा ये घटिया है.. बहोत नीच है वो कला बुद्धा..

माहि- बाते मत बनाओ.. बताओ उसने क्या कहा..

काव्य अभी भी आँखे बंद की हुई thi..wo बहोत धीरे से बोलती है..

काव्य- माहि बहोत शर्म आ रही है.. उसने जो कहा वो बताने मई…

माहि- सुनाने मई नहीं आयी शर्म .. अब कहने मई आरही है शर्म तुजे kavyaa..jo भी है बात दो काव्य..

काव्य- वो कहने लगा.. एक बार माहि को जी भर कर छोड़ना चाहता हु.. हर उस तरह से जैसा उसे देख कर मन में ख्याल आता है.. कभी तो मन करता है की उसे घोड़ी बना कर उसकी छूट मरू कभी गांड मरू.. कभी ख्याल आता है उसकी दोनों चिकनी चिकनी टाँगे अपने कंधे पर रख कर उसकी छूट मरू.. लेकिन जानता हूँ की ये मुमकिन नहीं है.. ये मेरे दिल का केवल ख्याल है एक सपना है.. माहि मनीष भैया की बीवी है और मेरी मालकिन है.. इसलिए उसको छोड़ने का ख्वाब हमेशा ख्वाब hi रहेगा.. पर मुझे खुसी है की ऐसी सूंदर अप्सरा के साथ मुझे एक hi घर की छत्त के नीचे रहने का मौका मिला है.. अगर माहि को छू नहीं सकता काम से काम देख तो सकता हु.. मैं उस ऊपर वाले का शुक्र गुजर हु जिसने मुझे इतनी हसीं खूबसूरत अप्सरा को देखने का सौभाग्य दिया.. आगे कहने लगा.. मई वैसे गन्दा इंसान नहीं हु.. सिर्फ आप माहि मैडम को बोल दो.. मई अब उनके रस्ते मई नहीं आऊंगा और वो भी मेरे रस्ते मई न आये..

इतना कुछ सुनने के बाद माहि को बहोत गुस्सा आ रहा था करीम का और काव्य का.. जो उसके इतनी गन्दी भाषा उसने सुन ले थी..

माहि- इतना कुछ कहा उसने मेरे बारे मई और तुम ने सुन लिया

काव्य- तो क्या करती..

माहि- तू मेरे अच्छी फ्रेंड है न.. फिर सुन के कैसे लिया..

काव्य - क्या kahati..mere सहेली .. खूबसूरत नहीं है.. माहि तुम hi पागल हो.. वो आदमी घटिया है.. लेकिन उसकी टैरिफ.. जो तुम्हारे की थी.. मेरे सामने की थी.. वो तो झूट नहीं थी… और उसने बड़े छलखि से ये सब कहा.. मैंने भी उसको कहा जो भी कहना है कह दो.. मुझे क्या पता था वो इतना गन्दा बोलेगा.. कोई आपने वाइफ के साथ या गर्लफ्रेंड के साथ भी इतना गन्दा बोलता नहीं है..

माहि सोचने लगाती है..

काव्य- और एक बात hai…Tumari इतनी टैरिफ शयद मनीष भैय्या ने भी कभी नहीं की होगी ..

माहि- तो क्या मई अब उस को जा के थैंक्स बोलू

माहि गुस्से मई बोलते है..

काव्य- मई वो नहीं कह रही हु..

Mahi-To तुम्हारा क्या कहना है..

काव्य- यही.. की.. इस आदमी को मानना पड़ेगा.. न जाने सिमरन ने इस को कहा से उतके ले आयी

Mahi-Bhaiyya के घर से

काव्य- क्या.. तुम कैसे पता..

माहि- भैय्या के घर से तो मेरे पीछे पड़ा है..

काव्य- तो क्या तूने भैयासाहब को नहीं बताया..

Mahi-Bataya .. मेरी जान.. कल hi भैय्या ने उस को बहोत मारा है..

काव्य- फिर भी नहीं सुधारा वो..

माहि- हां..

काव्य- मानना पड़ेगा उसको

Mahi-Kya ..मानना पड़ेगा उसको

गुस्से से बोलती है..

काव्य- उसके डेरिंग को…

माहि- दिन बा दिन उसकी डेरिंग बढ़ती hi जा रही है.. अब थोड़े देर पहले तो उसने हद hi कर दी..

Kavya-Kab..

Mahi-Aab तुजसे बाते करने से पहले

Kavya-Kya किया

Mahi-Aankh मारी.. मुझे ..

काव्य- क्या???????????? … ऑर्डर… कहा

माहि- यहाँ पार्टी मई..

काव्य- माय गॉड.. ये आदमी तो बहोत पहुंचा हुआ लगता है..

Mahi-Haa..

Kavya-Mahi..kuch भी कहो डेरिंग बहोत है इस बन्दे मई.. मई उसको जानती नहीं हु.. फिर भी मेरे सामने तुम्हारे टैरिफ की.. वो भी इस kadar…iss गंदे तरीके से.. तू बच के रहना इस से .. तुजे कब उदा ले जायेगा तुजे पता hi नहीं चलेगा..

Mahi-Mai क्या कोई ऐसे वैसे हु क्या.. जो कोई भी मुझे उदा लेजायेगा..

काव्य- माहि.. ये कोई भी नहीं है.. स्पेशल है.. मई सच बोल रही हु.. सम्बल के रहना इस से नहीं तो हम आज तक माहि को मनीष भैय्या की बीवी कहते थे .. अब न जाने करीम काका की बेगम न कहना पड़े..

माहि- काव्य तू क्या पागल हो गयी हो क्या.. वो काका मुझे क्या करेगा.. ऐसा कभी नहीं होगा.. मई ऐसे कभी नहीं होने dungi..mai मेरे मनीष की अमानत हु.. है और रहूंगी.. मई कभी भी ऐसे ैरे गैर लाफहंगे करीम की कभी नहीं हो सकती.

Kavya-That’s स्पिरिट माहि.. कीप आईटी उप..

तब काव्य को कोई आवाज देता है.. इसलिए काव्य माहि के पास से चली जाती है.. आपने बाजरे मई इतना कुछ सुनने के बाद माहि को समझ में नहीं आ रहा था की कैसे रियेक्ट करूँ इस par.wo सोचने लगाती है मेरे बारे में बहुत गन्दी गन्दी बाते कही है इस घटिया आदमी ने काव्य को.. वो सोचने लगाती hai..iska मतलब वो हर वक़्त मुझे घूरता रहता था. कितना बेशरम था शुरू से hi.. तभी उसकी निगाहें मुझे अपने ऊपर हमेशा महसूस होती रहती थी..

अपने बारे में इतना गन्दा सुनने के बाद माहि शर्म से पानी पानी हो gayi..us को एक तरफ तो गुस्सा आ रहा था और दूसरी तरफ शर्म भी आ रही थी.. लेकिन गुस्से से ज्यादा शर्म आ रही थी.. वो सोचती है मनीष ने आज तक कभी मेरे से ऐसे वर्ड उसे नहीं करे थे.. लेकिन ये आदमी ने मेरे बारे मई ऐसे वर्ड क्यों उसे किये.. क्या वजह है.. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है की करीम ने मेरे बारे मई ऐसे वर्ड उसे किये लेकिन काव्य ने कहा तो सच hi होगा..

बाद मई कुछ देर बाद करीम सिमरन के पास चला जाता है.. उसकी गांड दबाता है…. और बाद मई माहि के तरफ देख कर हास्के चला जाता है दूसरी तरफ…. माहि को अब बहोड़ ज्यादा गुस्सा आ रहा था.. वो माहि के तरफ देख कर सिमरन के साथ छेद चढ़ कर रहा था अब.. माहि सोच रही थी की इसको सिमरन मैडम के साथ अगर फ्लेर्टिंग करने है तो kare..lekin मुझे क्यों दिखा रहा है.. वो मुझे दिखा कर क्या जाताना चाहता है.. मुझे कुछ समाज मई नहीं आ रहा है ये आदमी..

थोड़ी देर के बाद करीम सिमरन को इशारा करता है .कुछ पिने को लेन के liye..wo माहि देख रही थी… सिमरन पानी लती है.. सिमरन जब आ रही थी तब करीम वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था.. जैसे hi स्पीड बढ़ती सिमरन के छूट को जतका लगता है ..इस वजह से वो कमर को जहतका देते है.. और अपनी गांड हिलाते हुई आती है.. माहि को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था की सिमरन को क्या हो गया है.. माहि जानती थी की नोर्मल्ली सिमरन ऐसे लचक के नहीं चलती थी..

सिमरन पानी लेके करीम के पास आती है.. लेकिन करीम को जूस चाहिए होता है.. करीम सिमरन पर गुस्सा हो जाता है.. सिमरन जल्दी hi भाग कर जूस और ice-cream लती है…… बीच बीच मई करीम वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता था इस वजह से वो आपने कमर को जातक देके चल रही thi..Karim जूस पिता है और आइस- क्रीम कहते कहते hi सिमरन की कमर मई हाथ दाल देता hai..Simran दर कर एक कार्नर मई करीम को लेके चली जाती है… एक वाल के पीछे.. माहि भी उनके पीछे चली जाती hai..waha वो दोनों एक दूसरे को ice-cream खिलते hai..phir करीम उसको किश करता है…





उसके होंटो को.. उसके गाल को और उसके नवल को.. माहि वो देख लेती hai..wo देख कर माहि को कुछ सूज नहीं रहा था… की ये आदमी कैसा है… मेरे इतनी गन्दी टैरिफ की ..वो भी मेरे एक फ्रेंड के पास .. और इधर सिमरन मैडम को किश कर रहा है.. लगता है ये आदमी एक टाइम पे बहोत सरे औरत से खेलता hai..tabhi सिमरन को कॉल आता है तो वो वह से चली जाती है… करीम जैसे hi पीछे घूम जाता है और वाल से होते हुई आगे आता है तो उसे माहि दिख जाती है … माहि उसको hi दिख रही थी..





करीम चलते चलते माहि के पास आता है.. माहि वही कड़ी रहती है और वो भी करीम के तरफ देखने लगाती है.. माहि आपने बालो से खेलते हुई करीम को देख रही थी.. माहि की सेक्सी ऐडा देखए हुई करीम उसके तरफ आ रहा था.. करीम आते आते माहि के आँखों मई देखते हुई आपने हूंतो पाई लगी हुई आइसक्रीम को अपनी जीभ से चाट रहा होता है.. माहि के पास आते हुई उसको गुरते हुई कहता है…

करीम- देखा मई किस्स्स्स( इस वर्ड पे जोर देते हुई) टाइप का स्पेशल गेस्ट हु…

ऐसे कहके वो माहि के पास से जाता है.. माहि के बदन की खुशबू लेते हुई…… और कहता है…..

करीम- aaaaaaaaaaaaahhhhaaa….. मज़ा आ गया……

अब करीम काव्य की तरफ जाता है.. उस से पूछता है

Karim-koi हेल्प चाहिए क्या…

काव्य - थैंक्स… पर हम लोग कर लगे..

ऐसे बोलते है… करीम फिर से बोलता है… तब काव्य बोलती है

काव्य- यहाँ का ये सामान उधर रखना है.. इस लड़के से वो उठा नहीं जा रहा है…

करीम वो सामान उठा के दूसरी जगह रख देता है… जाते जाते वो काव्य के कमर को टच करता है …

काव्य के मू से हलकी सी सिसकारी निकलती है..

काव्य- आआआआहहहहह..

और काव्य करीम की तरफ देखते हुई उसे स्माइल देते है … थोड़े देर करीम और काव्य एक दूसरे को देख रहते है.. और बाद मई वो दोनों वह से चले जाते है..

अब थोड़े देर तक करीम एक कार्नर मई बैठ जाता है.. उसको माहि कही नज़र नहीं आती.. अब वो सिमरन को ढूडने लगता है.. सिमरन उसको सामने कड़ी हुई नज़र आते hai..Simran , काव्य ,सिमरन और काव्य के हस्बैंड आपस मई बात कर रहे थे.. फिर करीम अपने जेब में रखा रिमोट से वाइब्रेटर की स्पीड धीरे से बढ़ा देता hain....agle hi पल सिमरन एक बार फिर से तड़प उठती हैं......... करीम एक वाल के पीछे चुप जाता है .. और वह से वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा कर रहा था.. सिमरन करीम को देखने लगाती है.. लेकिन उसको करीम कही नज़र नहीं आता hai..wo इस वक़्त पूरी तरह से बेबस हो चुकी थी....... उसको करीम कही दिख नहीं रहा था लेकिन वो वाइब्रेटर की स्पीड काम ज्यादा कर रहा tha..dheere धीरे अब उसका दिमाग काम करना बंद सा हो गया tha.......badan की आग धीरे धीरे उसपर हावी होती जा रही thi........aab उसे अपनी छूट की प्यास बुझाने के सिवा और कुछ नज़र नहीं आ रहा tha......magar यहाँ इन सब के beech.....ye सिमरन के लिए बिलकुल मुमकिन नहीं था......

करीम अब एक चेयर पाई बैठ जाता है.. सिमरन के samane..us वजह से सिमरन को करीम दिखाई देता है.. वो एक नज़र करीम के चेहरे की ओरे देखती हैं …फिर ना में धीरे से अपनी गार्डन हिला देती hain......uski आँखों में फर्याद साफ़ झलक रही thi........wahin करीम सिमरन की बेबसी देखकर हंस पड़ता हैं......

फिर परेशां होकर सिमरन आपने हस्बैंड को बोल देती है..

Simran-mere ख्याल से अब हमें चलना चाइये.........

जैसे तैसे ये बात सिमरन आपने हस्बैंड से कह पति हैं....... तब काव्य एक नज़र सिमरन के चेहरे की ओरे देखती हैं..

काव्य सिमरन के उस बदले हुए रूप को देखकर बहुत हैरान थी........ उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की आज सिमरन को हो क्या गया हैं....... वो सिमरन को थोड़ा बाजु मई ले जाती hai..aur उससे कहती है..

काव्य – सिमरन .. तुम ठीक तो हो न ...... तबियत ठीक नहीं हुई kya..aur अभी तो तुम यहाँ आयी ho........fir इतनी जल्दी जाने का क्या मतलब........

सिमरन अपने चेहरे पर झूटी मुस्कान लेन की कोशिश करती हैं..

सिमरन - मैं ठीक हूँ kavya........bus .......ऐसे hi......

काव्य – लगता है तुम बिलकुल ठीक नहीं हो ............. लगता है डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा..

सिमरन कुछ पल तक खामोश रहती हैं ......... उसके अंदर ज़रा भी हिम्मत नहीं थी की वो डिलडो वाली बात काव्य से कह sake.......wo आगे कुछ कहती तभी वहां करीम आ जाता हैं...... वो उन दोनों के पीछे खड़ा हो जाता hai..aur सिमरन और काव्य को देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं..... वो दोनों भी करीम को देखकर मुस्करा पड़ती hai..fir वो फ़ौरन अपने एक हाथ को धीरे से सरकते हुए काव्य के कंधे से होते हुए उसकी कमर तक ले जाता हैं ......





और अगले hi पल वो फ़ौरन अपना हाथ उसकी गांड पर फेरते हुए अपना हाथ झट से हटा लेता हैं.....

काव्य के जिस्म में एक आग सी लग जाती है .....उसका चेहरा लाल पढ़ जाता है.. ........ करीम की इन् हरकत से...... ये सब बहुत जल्दी में हुआ tha......magar काव्य के अंदर उस आग को भड़काने के लिए काफी tha.......kavya करीम के हरकत की वजह से लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain......aur अपने बेकाबू सांसिओन को फिर से सँभालने लगती हैं.......

सिमरन करीम की हरकत देख चुकी थी..

उसकी नज़रियों से करीम की हरकत छुपी नहीं थी...... सिमरन जैस एही गुस्से से करीम को देखते hi वैसे hi करीम वाइब्रेटर की स्पीड बड़ा देता hai..iss वजह उसके जिस्म में आग और भी बढ़ जाती है ...........अब उसका साबरा पूरी तरह से टूट गया tha....Simran की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी थी ........ वाइब्रेटर की स्पीड की वजह से उसकी आँखें बार बार बंद सी हो रही thi......jaise तैसे वो अपने होश संभाले हुई thi.....magar अब ये होश भी बहुत जल्द उसके कण्ट्रोल से बहार होने वाला था......

काव्य अब कुछ दूर जाती हैं और एक अजीब सी नज़रियों से करीम को पलटकर देखने लगती हैं





और फिर वो उसे देखकर मुस्कुराते हुए अपनी हस्बैंड की तरफ जाने लगाती है.. वहीँ बगल मई कड़ी सिमरन ये नज़ारा देख लेती है और गुस्से से करीम की और देखने लगाती है.. और आँखों से करीम को इशारा करती है.. बाजु मई आने को.. करीम बाजु मई आ जाता hai..Simran करीम के हातो को पकड़ के दिवार के पीछे ले जाती है.. अब वह उन्दोनो के अलावा वह कोई और नहीं था..

सिमरन एक नज़र करीम के चेहरे की तरफ देखती हैं ..

गुस्से se..Karim उसे देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं...

सिमरन- करीम तुमने काव्य के साथ ये सब क्यों kiya.....kisi ने ये सब देख लिया होता तो..

करीम- कोण देकहता..

सिमरन- वह मेरे और काव्य के पति थे.. उन्दोनो मई से कोई भी देख सकता था..

करीम- कुछ नहीं होता .. देखा तो नहीं न..

सिमरन- उसने आपने पति को बता दिया तो..

करीम- मैं अचे से जनता हूँ की वो ये बात अपने पति को कभी नहीं कहेगी........

सिमरन- तुम कैसे पता..

करीम- तुमने आपने पति को बताया kya..maine तुजे छोड़ा तो …

सिमरन हसती है..





सिमरन- फिर भी बताये तो..

करीम- नहीं बताएगी.. तुमने देखा होगा न उसे भी मेरा चूना ाचा लगा ......अगर उसे ये सब पसंद नहीं होता तो वो मुझे इंकार ज़रूर करती...... या वही पाई कुछ kahati..magar उसने कभी इस बारे में मुझसे कुछ नहीं kaha........iska मतलब उसे मेरी हरकतें पसंद hain........zaroor उसके छूट में भी सेंसेशन हुआ होगा मेरे इस तरह छूने se.....uski आँखें देखि tumne.......poori लाल हो गयी thi......hawas दिखाई दिया मुझे आज उसकी आँखों में.......

सिमरन करीम की बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ती हैं…

सिमरन- तुम तो बहुत जानकारी हैं इन सब के बारे mein......aur मेरी आँखों में तुम क्या नज़र आ रहा hain...........main कब से इस आग में जल रही हूँ उसका kya........kya मेरी आँखों में हवस नहीं दिखाई देती...... करीम तुम्हे तो मेरी ज़रा भी परवाह नहीं हैं........

करीम- ऐसे बात नहीं है..

सिमरन- अब बातें मुट्ठ बनाइये और चुप चाप कही चलते hai.........aab मेरा साबरा टूटता जा रहा हैं......

करीम - इतनी भी क्या जल्दी हैं सिमरन....... अभी तो पार्टी शुरू हुई है..

अगले hi पल सिमरन फ़ौरन करीम के और करीब आती हैं और उसके सीने से फ़ौरन लिपट जाती हैं........ और करीम के होंठों को बड़े प्यार से चूम लेती हैं.....





सिमरन – पार्टी गयी भाड़ में ........ मुझे नहीं करनी कोई पार्टी ...... इधर मेरे छूट मई आग लगी हुई है और तुम पार्टी की पड़ी हुई है..

करीम हस्ता है..

सिमरन- करीम .. तुम्हे.. मुझपर ज़रा भी तरस नहीं aata........kya हालत कर दी हैं तुमने मेरी इस waqt.......main तुम्हे बता नहीं sakti.......meri पंतय पूरी भीग चुकी hain........aab और नहीं बर्दास्त होता mujhe.......please.......main तुम्हारे सामने हाथ जोड़ती hoon............meri प्यास अभी बुझा दीजिये......

करीम - यहाँ ....इस waqt...........tumhara दिमाग ख़राब हो गया हैं क्या Simran......ye कोई तुम्हारा घर नहीं hain.......ye पब्लिक प्लेस हैं..... यहाँ पार्टी चल रही hai..yaha इतने सरे लोग है.. तुम्हारा पति भी hai..aur इस वक़्त यहाँ ये सब करना पॉसिबल नहीं........ पार्टी के बाद हम घर चलकर ये सब आराम से कर लेंगे.......

सिमरन- मेरा पति कुछ नहीं करेगा.. उसको दारू पिने से फुर्सत मिले तो मुज पर ध्यान दे..

करीम- कुछ भी हो जय.. अब इस वक़्त पॉसिबल नहीं है.. थोड़े देर बाद तेरे पति को दारू ज्यादा होने के बाद hi मैं तुम्हारे छूट की आग बुझा पाउँगा ......बस तब तक साबरा करती रहो......

सिमरन- promise..na..

करीम- हां...

सिमरन के पास से आने के बाद करीम थोड़े देर यहाँ वह घूमता रहता है.. थोड़ी ड्रिंक करता है.. फिर वो माहि को ढूंढने लगता hai..lekin उसको माहि कही नज़र नहीं आती.. फिर वो काव्य के पास जाता है.. माहि को ढूढते hui..waha काव्य और उसके हस्बैंड खड़े थे.. काव्य को माहि मैडम कहा है ये करीम पूछता है.. काव्य हसती है.. अब काव्य ज्यादा कुछ नहीं बोल pati..uska हस्बैंड वह होने की वजह से… तभी काव्य का पति पूछता है क्या काम है.. तो करीम बोलता है… काँटी शेठ का एक मैसेज देना है.. काव्य जान चुकी थी की करीम झूठ बोल रहा है.. इस वजह से काव्य करीम की तरफ देख कर मंद मंद है रही थी.. करीम भी काव्य के तरफ देख कर hi कहता hai..Sheth बोल रहे थे उनका फ़ोन नहीं लग रहा है.. तब काव्य का पति बोलता है.. पीछे गार्डन मई बैठे hai..us फार्महाउस मई पिछले बाजु मई एक छोटा सा गार्डन था.. वह माहि गार्डन मई अकेली घूम रही थी.. काव्य आपने हस्बैंड को एक काम है बोल के वह से चली जाती है… और करीम का पीछा करती hai..Karim अब माहि के पास उस गार्डन मई चला जाता है..

माहि करीम के सामने इधर उधर टहल रही thee……aur करीम माहि के बदन से अपनी अंकेछण सेंक रहा tha…..thalate हुए अचानक माहि के कदम थम gaye….wo कुछ पलों के लिए एक जगह पाई रुख जाती है.. वो घूम कर करीम की तरफ गुस्से से देखती hai..kamar पर हाथ रख kar…Karim भी उसी के तरफ देख रहता है….. तभी वह गार्डन के पीछे एक छोटा सा स्टोर रूम था वह काव्य आ जाती है.. और विंडो से उन्दोनो को चुपचाप देखने लगते है.. अब दोनों ..माहि और करीम एक दूसरे को देख रहे थे.. माहि के चहरे और आँखों मई गुस्सा था तो करीम के आँखों मई हवस और चहरे पर हसी थी..

दोनों एक दूसरे को कुछ नहीं बोल रहे थे.. बस देखते जा रहे थे.. कुछ 2-3 मिनट ऐसे hi सिचुएशन थी.. पीछे छोटे से रूम मई कड़ी काव्य आपने आप को कह रही थी..

काव्य- कुछ तो बोलो.. कोई तो स्टार्ट करो..

शायद काव्य के मैं की बात उसकी बेस्ट फ्रेंड माहि ने सुन ली थी..

माहि- यहाँ.. क्यों आये हो…

काव्य- माही.. ु अरे माय बेस्ट फ्रेंड .. तुमने मेरे दिल की बात सुन ली.. स्टार्ट तो हुआ..

करीम- माफ़ी मांगने आया हु..

माहि- किस बात की माफ़ी..

करीम- मैंने जो थोड़े देर पहले आप के साथ बतमीज़ी के थी उसकी..

माहि- अच्छा.. कोण सी बतमीज़ी..

करीम- जो मैंने आप को ऐसी आँख मरी थी.. वो..

ऐसे कहते हुई करीम माहि को आँख मरता है..

माहि गुस्से से बोलती है

माहि- बतमीज़ इंसान.. माफ़ी मांग रहे हो और फिर से आँख मार रहे हो..

काव्य को इन दोनों के बातो से बहुत अच्छा लग रहा था..

करीम- मैडम जी.. मई आँख नहीं मार रहा हु तो… आप को बता रहा हु की मैंने आप को ऐसी आँख मर्री थी इस वजह से मई आपकी माफ़ी मांग रहा हु ..
 
ऐसी आँख मर्री थी इस वजह से मई आपकी माफ़ी मांग रहा हु ..

माहि करीम की तरफ गुस्से से अभी भी देख रही थी..





करीम थोड़ा आगे आता है.. माहि की तरफ..

माहि- मेरे सामने मुझे मैडम कह रहे हो और मेरे फ्रेंड के सामने मुझे माहि बोलते हो..

करीम- मैडम जी मई आप को माहि कैसे बुला सकता हु..

माहि- तो क्या मेरे फ्रेंड मुजसे झूठ बोल रही है..

करीम- आप कोनसे फ्रेंड की बात कर रहे हो..

माहि- काव्य की..

करीम- मैंने काव्य जी के सामने आप को माहि मैडम कहके hi बुलाया था.. कभी भी आपको मैंने माहि कहके नहीं बुलाया..

माहि और ज्यादा गुस्सा होते है..

माहि- तो क्या काव्य झूट बोल रहे है..

करीम- वो मुझे पता नहीं है मैडम जी… काव्य मैडम ने आपको क्या कहा और आपने क्या सुना ये मुझे पता नहीं है.. लेकिन मैंने हमेशा आपको माहि मैडम कह के hi बुलाया था..

काव्य- क्या झूठा इंसान है ये… मेरे सामने माहि कह के बुलाया और अब कह रहा है मैंने ऐसे नहीं बोलै..

करीम- मतलब तुम सच बोल रहे हो और काव्य ने मुझे झूठ बोलै..

माहि ऐसा कहते हुई वह एक स्टेप बनाये हुई थी वह बैठ जाती है..





काव्य- क्या Mahi..tu भी इसकी बातो मई आ गयी..

काव्य ऐसे hi धीरे से बोलती है…

करीम अब उसके सामने आके खड़ा हो जाता है.. और माहि के पुरे बदन को अच्छे से स्कैन करने लगता है..

माहि- तुम तमीज नहीं है क्या..

करीम- अगर आप दिखाओगे तो हम जैसे लोग देखेंगे hi न..

तब माहि की नज़र करीम के नज़र का पीछा करती है तो उसे पता लगता है की करीम कहा देख रहा है.. और वो क्या कह रहा है.. करीम माहि के बूब्स को देख रहा था.. उसके सदी का पलु ठीक तरीके से नहीं रखा था इस वजह से उसके क्लीवलगे दिख रहे the..Mahi आपने सदी का पल्लू ठीक करती है.. और कहती है..

माहि- मई इसकी बात नहीं कर रही हु..

करीम हीईई करके हस्ता है और कहता है..

करीम- तो आप किस की बात कर रही हो मैडम जी..

माहि- तुम ने जिस तरीके से मेरे फ्रेंड के साथ बात की थी.. उस बारे मई मई बात कर रही हु..

काव्य- सही जा रहे हो माहि.. ऐसे hi पूछो उसे.. कितनी गन्दी टैरिफ किट hi उसने तुम्हारी.. मेरे सामने.. उसको अच्छे से मजा सिखाओ..

अब करीम थोड़ा और आगे झुख कर उसके आम को देखने की कोशिश करता है… वो जो थोड़ी जूक हुई थी...





माहि वो जान जाती है..

माहि- अब कुछ नहीं दिखेगा…

करीम- क्या कुछ नहीं दिखेगा मैडम जी..

माहि- जो तुम देखने की कोशिश कर रहे हो..

करीम- मई क्या देखने की कोशिश कर रहा हु मैडम जी..

ऐसे कहके वो सामने थोड़ा और झुक्क के उसके आम को अचे तरीके से देखने की कोशिश करीम कर रहा था..

माहि आपने चहरे पर सेक्सी स्माइल लेट हुई कहते है..





माहि- इतना आगे झुख के जो देखंज चाहते वो ..

करीम – क्या मैडम जी.. उसका कुछ नाम तो होगा न..

माहि- मुझे नहीं पता.. और इतना आगे आके कुछ फायदा नहीं है.. तुम अब और कुछ ज्यादा देखने को नहीं मिलेगा..

करीम- मिल गया.. और थोड़ा ज्यादा देकहने को मिल गया..

माहि आप बूब्स की और देख के आपने सदी का पल्लू फिर से ठीक कर के लेते hai..aur चहरे पर थोड़े नाराज़गी के भाव लेट हुई कहते है..





माहि- बत्तमीज़ आदमी..

करीम होई करके हँसाने लगता है..

माहि- तुम बात को मत घुमाओ..

करीम- पूछिए मैडम… आप क्या पूछना चाहती थी..

माहि- मई ये पूछ रही थी की तुम कुछ तमीज़ है क्या नहीं..

करीम- अब क्या कर दिया मैंने ..

माहि- तुम पता भी है की लेडीज के सामने किस तरीके से बाते की जट्टी है और किस तरीके से उसकी टैरिफ की जाती है..

करीम- मैडम ..क्या हुआ hai..ye साफ़ साफ़ बता दीजिये.. आप बात को ऐसा गोल गोल मत घुमाइए..

माहि 2 सेकंड के लिए आपने सांस को थाम के कहते है..

माहि- बताती हु..

करीम- बताइये..

माहि- रुको न बता रही हु न.. तुम थोड़ा hi साबरा नहीं है..

करीम- कैसे रहता साबरा..

माहि- मतलब…. मई सामजी नहीं..

करीम- मैडम जी.. आप बहोत न समज हो..

उधर इनकी बाते सुन के काव्य कहती है.

काव्य- लगता है.. अब करीम जल्दी hi माहि को बोतल मई उतर लेगा.. अब आएगा मज़ा.. ये खेल देखने मई.. मई आपने मोबाइल साइलेंट करती हु.. किसी का कॉल आ जायेगा तो आफत हो जाएगी..

माहि- अब तुम बात को गोल गोल मत घुमाओ.. साफ़ साफ़ बोल दो..

करीम- हमारी hi बिल्ली हमें hi myanv..myanv…

माहि करीम की तरफ ऊपर गार्डन करके .. गार्डन को थोड़ा क्रॉस करके देखने लगाती है....





इस वजह से उसके क्लेलवागे करीम को पहले से ज्यादा दिखने लगते है…

माहि- मतलब.. तुमने क्या कहा..

करीम का ध्यान माहि के बातो पर नहीं था तो उसके बूब्स के गोलाई पर था.. माहि फिर से कहते है… इस बार जरा जोर से कहती है.. करीम जैसे नींद से जग उठता है वैसे कहता है…

करीम- kya..kya…

माहि- तुमने जो कहा उसका मतलब क्या है..

करीम- क्या कहा था मैंने..

माहि- तुम्हारा ध्यान किधर है करीम .. लगता है मेरे बातो पाई नहीं है.. कहा है ध्यान..

करीम पहले से hi निहायती बेशरम था.. उसको तो माहि के बात से एक मोखा मिल गया.. वो माहि के आम की तरफ अपनी हाथ से इशारा करते हुई कहता है…

करीम- आप के आम की तरफ…

माहि आपने बूब्स के तरफ देखने लगाती hai..tabhi करीम वही हाट थोड़ा और आगे लता है और उसकी एक उंगली उसके आम के उप्परि हिस्से को.. ब्लाउज के उप्पर वाले हिस्से को थोड़ा सा टच करता है.. वैसे hi माहि करीम के उस उंगली को.. उस हाथ को आपने दूसरे हाथ से मारती है…

माहि- don’t touch..me…

वैसे hi करीम आपने हाट पीछे हटा लेता है..

तब इधर काव्य नखरा करते हुई कहते है..





काव्य- मुझे बोल रही थी न माहि की करीम तुम्हारे बूब्स को देख रहा था तो तूने वह धयान कैसे नहीं दिया.. अब क्या हुआ.. मेरे बोस को करीम ने सिर्फ देखा तो था वो भी ब्लाउज के उप्पर से .. तू तो उससे आपने बूब्स नुदे दिखा रही है और टच भी करने दे रही है.. और मुझे सीखा रही थी..

माहि- कितनी गन्दी भाषा है तुम्हारी..

करीम- कोनसी भाषा .. क्या कहा मैंने गन्दा…

माहि- वो जाने दो.. तुमने कुछ कहा था..

करीम- क्या .. आपका आम..

तब नखरा करते हुई कहते है..





माहि- तुम्हारा हमेशा न इधर hi ध्यान rahata..mere बूब स्की तरफ..

करीम- जो दिल्हाने को अच्छे चीज़ होगी न मैडम जी ध्यान उधर hi रहता है..

माहि- हां. पता है… ज्यादा गन्दा मेरे साथ होने की जरूरत नहीं है..

करीम- मैडम जी.. कुछ भी कहिये .. आप के आम बहोत मुलायम है..

माहि- बोलै न .. ज्यादा गन्दा मेरे साथ होने की जरूरत नहीं है…

करीम- आगे से नहीं होगा.. मैडम जी..

माहि- तो तुम क्या कह रहे थे..

करीम- आप के आम के बारे मई..

माहि- फिर से गन्दी भाषा..

करीम- आप ने पूछा इसलिए जवाब दिया..

माहि- ारे बाबा ..मई वो नहीं पूछ रही थी.. वो तुमने कहा था न.. बिल्ली वाला डायलाग.. उस का मतलब क्या है..

करीम- मेरा hi डायलाग आप ने रिपीट किया न इसलिए बोलै था ..

महू- ok

फिर कुछ सोच कर कहती है





माहि- तुम हमेशा hi ऐसे गन्दी भाषा मई बात करते हो क्या..

करीम- कोनसी गन्दी भाषा..

माहि- तुमने जो मेरे गन्दी टैरिफ की थी काव्य के सामने वो ..

करीम- मैडम जी टैरिफ तो हमेशा अच्छी hi होते है न..

माहि- है.. लेकिन अचे अल्फ़ाज़ मई टैरिफ की जाये तो अचे लगाती है ..लेकिन अगर वर्ड गंदे हो तो टैरिफ भी की जय तो वो अच्छी नहीं लगाती..

करीम- तो मैंने आप की जो टैरिफ की काव्य के सामने..

माहि करीम को अच्चर्य से देखने लगाती है.. करीम ने काव्य मैडम को काव्य कहा था.. काव्य माहि के रिएक्शन को hi देख रही थी.. माहि ने कुछ नहीं कहा.. करीम भी माहि को hi देखता है.. कभी उसके चहरे को तो कभी उसके आम को.

करीम- वो आप को अचे नहीं लगी ….

काव्य- मेरे सामने माहि तुम माहि कहा उसने तो तुमने मुझे कहा की तुमने उसे क्यों कुछ नहीं बोलै .. और अब क्या हुआ.. माही.. उसने तो मुझे काव्य कहा.. काव्य मैडम नहीं कहा.. अब क्यों कुछ नहीं बोलती…

माहि करीम को hi देखने लगाती है..

करीम कहता है..

करीम- बोलिये माहि मैडम.. मैंने आपके खूबसूरती की टैरिफ की .. काव्य के सामने.. क्या वो आपको पसंद नहीं आये…

ऐसे कहते हुई करीम थोड़ा झुख जाता है.. औरर आपने फेस माहि के चहरे के पास ले जाता है..

करीम- बोलिये मैडम..

माहि शरमाते हुई नीचे देखने लगाती है..





माहि- वैसे बात नहीं है करीम..

करीम- तो क्या बात है..

माहि- टैरिफ हर किसी को पसंद आती hai..lekin तुमने बहोड़ hi गंदे वर्ड उसे किया थे…

करीम आपने हाथ माहि के चीन पे ले जाता है और उसके चहरे को ऊपर उठता है.. और उसके आँखों मई देखने लगता है..

काव्य- करीम.. है .. ऐसे hi.. और .. आगे बाड़ू..

करीम- बोलिये ..कोनसे गंदे वर्ड मैंने आपके खूबसूरती की टैरिफ मई कहे है .. हमें भी पता चले ..

शर्मा कर माहि अपनी आँखे बंद कर लेते है…

करीम- बोलो न माहिई..

काव्य अब हँसाने लगाती है..

काव्य- माहि.. अब क्या कहोगी तुम.. तुम्हारे सामने ये कला बुद्धा.. तुम्हारा घटिया इंसाने.. तुम माहि कह के बुला रहा है.. मुझे पता है तुम कुछ नहीं कहोगगी.. बल्कि तुम कुछ कह नहीं पाओगे.. कुछ कहने के हालत मई hi तुम नहीं हो.. माहिई..

माहि- मुझे नहीं पता…

करीम- लेकिन… मुझे पता है न..

माहि कुछ नहीं बोलती …

करीम- सुना दू क्या..

माहि- मुझे नहीं सुनना ..

करीम- तेरे टैरिफ सुननी है क्या तुजे.

माहि झट से बोलती है..

Mahi—nahiii.. नाहीइ.. मुझे नहीं सुननी..

करीम- एक बार सुन लो न..

माहि- मैंने सुनी है..

करीम- आपने सहेली के मू से सुनी है.. अब मेरे मू से सुनो..

माहि आपने आखे खोलती है.. और करीम की और देखने लगाती है..





माहि- नहीं सुननी है..

करीम- तुम तुम्हारी टैरिफ मई से क्या पसंद नहीं आया..

माहि- गंदे वर्ड..

करीम- कोनसे..

माहि- मुझे नहीं पता ...

करीम- गांड... छूट.. मई तुम एक बार छोड़ना चाहता हु.. यही वर्ड तुम पसंद नहीं आये न माहि..

माहि है मई गर्दन हिलाते है..

माहि- तुम एक नंबर के बेशरम आदमी हो..

करीम- क्यों.. कह रही हो मेरे जान ऐसा..

माहि- मई तुम्हारी जान नहीं हु.. मेरे जान बहार पार्टी मई है.. मनीष है मेरे जान..

करीम- कैसे जान है तुम्हारी.. वो अकेला पार्टी कर रहा है और तुम मेरे जैसे.. गंवार.. काळा.. बूढ़े.. टेलर के हांतो मई छोरा है..

इसपर माहि हसती है..





करीम- मई क्यों बेशरम हु.. बताओ न..

माहि करीम के आँखों में आँखे डालके कहती है..





माहि- कोई किसी भी औरत के खूबसूरती की तारीफ दूसरे किसी औरत के सामने नहीं करता.. और वो भी इतने गंदे अल्फ़ाज़ मई..

करीम उसके एक बूब्स को आपने हाथ मई

लेता है.. माहि वो हाट वह से हटा देता है..

करीम- तो मेरी माहि जान को गंदे वर्ड्स बुर नहीं लगे तो दूसरे औरत के सामने मेरी गन्दी तारीफ बुरी लगी..

माहि-- दोनों.. ही..

करीम फिर से वही हाट वही आम पर रखता है.. माहि फिर से हटते है.. ऐसे hi 4-5 बार होता है..

करीम- टच करने दे न..

महहि इस बार कुछ बोलती नहीं है.. इस वजह से अक्रम माहि के उस आम पर आपने हाट रख देता है…

माहि- सिर्फ टच करो … और कुछ मत करो…

करीम- इतने लाजवाब गोलाई वाले मुलायम आम अगर हाट मई आये तो क्या मई उसको न दबाते हुई क्या उसकी पूजा करूँगा..

इसपर माहि हसती है..





काव्य उधर से कहती है..

काव्य- लड़की हसी.. तो फांसी.. माहि अब तू तो गयी.. अब आज से तुजे मई मनीष की बीवी माहि नहीं बुलाऊंगी.. तो करीम काका की बेगम कह के बुलाऊंगी..

अब करीम का एक हाथ माहि के आम पर था और दूसरी तरफ वो आपने फेस माहि के हूंतो के नज़दीक ले जाता है.. वैसे hi माहि को दारू की बदबू आती है.. इस वजह से वो आपने चेहरा घूमती है..

माहि- दारू की स्मेल आ रही है..

माहि जैसे hi चेहरा घूमती है करीम वैसे hi उसका एक आम जोर से दबाता है..

माहि जोर से सिसकती है..

माहि- ouchhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh… जारहा.. dhireeeeeeeeeeee… न्नन्ना..

करीम उसका चेहरा आपने और घूमता है.. और उसको किश करने की कोशिश करता है..

माहि- nahiiiiiiiiiiii.. nooooooooooooo…

करीम- क्या हुआ मेरे जान..

माहि धीरे से बोलती है.. करीम के कानो के पास..

माहि- मई नहीं हु तुम्हारी जान.. तुम्हारी जान तो सिमरन है..

ये इतने धीरे से बोलती है की काव्य ठीक से सुन नहीं पति…

करीम- वो तो पुराणी हो गयी आज से तू भी बन जा….

माहि- मुझे नहीं बनाना है तुम्हारी जान.. किसी और को बना दो.. वैसे तुम तो बहोत साडी मिल जाएँगी ना..

करीम- मिल तो जाएँगी बहोत साडी.. लेकिन तुम्हारी जैसे मुलायम कोई नहीं मिलेगी..

अब करीम आम दबाते हुई उसका हाथ ब्लाउज के अन्दर डालने की कोशिश करने लगता है…

वैसे hi माहि कहती है..

माहि- तुम सदी दी तो तुम पंतय निकलने के पीछे पड़े हो…

करीम- क्या तुम्हारी पंतय निकलू क्या.

माहि- नहीं… बाबा.. मई तो सिर्फ डायलाग बोल रही थी..

करीम- किश दो न एक..

माहि तभी कहती है..

माहि- ये ठीक नहीं है.. मई मैरिड हु.. मई आपने हस्बैंड को धोका नहीं दे सकती..

ऐसा कहके माहि करीम को धक्का देके वह से उठा जाती है और अन्दर पार्टी हाल मई जाती है..

उधर करीम और काव्य सोचने लगते है इसको अचनाक क्या हो गया..

अब माहि का पीछा करते हुई करीम पार्टी हाल मई जाता है.. और माहि से पूछता है..

करीम- क्या हुआ माही..





माहि- कुछ नही..

करीम- तो तुम अचनाक अन्दर क्यों आयी..

माहि- मई ये नहीं कर सकती..

करीम- ठीक है नहीं करना है तो मत करो.. हम बात तो कर सकते है न..

माहि- मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है…

करीम- क्यों..

माहि- मुझे नहीं पता..

करीम- माहि बहार चलो .. मुझे तुमसे बात करनी है..

माहि- मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है..

करीम- सिर्फ 5 मिनट..

माहि- सिर्फ 5 मिनट और सिर्फ बात ..और दूसरा कुछ नहीं समजे..

करीम- हां.. बाबा..

माहि का मैं नहीं हो रहा था गार्डन मई जाने को लेकिन करीम उसको हाट पकड़के बहार गार्डन मई ले जाता है.. काव्य उस रूम से बहार आने hi वाली थी की उसको सामने से करीम माहि को बहार गार्डन के तरफ ले जाता हुआ दिख जाता है.. जैसे वो उन्दोनो को देखती है वो रूम मई चुप जाती है.. एक छोटे से रूम के एक विंडो से काव्य उन दोनों को देख रही थी.. वो जानना चाहती थी की करीम आज माहि के साथ क्या करनेवाला है… और माहि उसको क्या करने देने वाली है.. काव्य को अब बहोत क्यूरोसिटी हो रही थी उन दोनों के बीच मई क्या होगा ये जानने के लिए..

अब दोनों गर्दन मई आ चुके थे..

करीम – माहि क्या हो गया है अचानक..

माहि- बोलै न मई ये तुम्हारे साथ नहीं कर सकती..

करीम- मेरे मई क्या बुराई है..

माहि- मई ये सिर्फ आपने हस्बैंड के साथ कर सकती हु.. दूसरे किसी के साथ नहीं..

Karim-madam जी आप मुझे क्यों ऐसे सजा दे रही हो.. हमेशा..

माहि घूम जाती है..





माहि- मतलब..

करीम- मैडम जी मुज जैसे गरीब की क्या गलती थी कल.. ऐसे मैंने आप के साथ क्या किया था जो आप ने मुजा को इतना मार खिलाया..

माहि- तुम मुज को घर के देखते थे..

करीम – घर के देखने की इतने बड़ी सजा माहि मैडम..

माहि- तुमने गलती की है तो उसकी सजा तो तुम मिलेगी न..

करीम के दिमाग मई एक नया प्लान आता है माहि को पाने का..

माहि ने ऐसा कह देते hi करीम रोने लगता है.. माहि हैरत से करीम की ओरे देख रही थी.... उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो करीम के बाटिओं का क्या जवाब दे.....

माहि - चुप हो जाओ करीम....

करीम- नहीं मैडमजी..... गलती मेरी hi hain....agar ऊपर वाले ने मुझे ऐसे आँखे दिए हैं तो इसमें दूसरे का क्या दोष.....

माहि – क्या मतलब

करीम- शायद इसी वजह से जब भी मई किसी को भी देख लेता हु तो उसको लगता है मई उसको घर रहा हु.. ......इन सब का कसूरवार मैं hi हूँ......

करीम की बाटिओं से माहि के भी दिल की धड़कनें बढ़ चुकी thi......wo भी अपनी सांसों को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी....... करीम को ऐसे अचानक रोटा हुआ देखकर माहि के भी कुछ समझ में नहीं आता और माहि झट से उसके कंधे पर अपना हाथ रख देती हैं…

माहि - चुप हो जाओ करीम.. ीाम सॉरी मुझे पता नहीं tha........agar मुझे पता होता तो मई तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं करती..

करीम को शायद इसी मौके की तलाश थी वो भी बिना डियर किये माहि के बेहद करीब जाता हैं और झट से उससे लिपट जाता है..





माहि चाह कर भी करीम का कोई विरोध नहीं कर पाती.....

माहि - प्लीज करीम चुप हो jawo.....aab रोना बंद karo.....mujhe दुःख हुआ तुम्हारे साथ जो भी कुछ हुआ कल जो.. जाने आंजने मई उस मई मेरे hi गलती थी......

माहि करीम को अपने से दूर करती हैं मगर करीम अपने हाथों को कसकर माहि के कमर पर ले जाता हैं और कसकर उससे अपने से सत्ता लेता हैं ....... उसके नरम बूब्स करीम के सीने पर डाब रहे the.....aur माहि का नाजुक बदन करीम के लुंड में हलचल कर रहा था.......

माहि- ये क्या कर रहे हो करीम ...... चोरो मुझे .........

मगर करीम इतनी आसानी से ये मौका अपने हाथ से कैसे जाने दे सकता था..... वो अपने हाथों को माहि के पीठ से लेकर उसकी गांड तक फिरता हैं और माहि को कसकर अपने सीने से सताए रखता हैं.....

माहि तुरंत उसके पैरों पर ज़ोर से संदल का वॉर करती हैं और तभी करीम की पकड़ थोड़ी सी ढीली पड़ती हैं और करीम उसके पकड़ से छूट जाती hain.......aur तभी माहि गुस्से में आकर एक ज़ोरदार थपाद करीम के गाल पर जड़ देती hain.......thappad की गूँज इतनी तेज़ थी की पूरे गार्डन मई और बाजु के कमरे मई वो उसकी आवाज़ फ़ैल गयी थी ............. काव्य को भी वो आवाज सुनाई देती है..

माहि- कितने गंदे इंसान हो .. माफ़ी मंगाते हो और साथ मई गंदे हरकत भी करते हो.. अब मई भैय्या को बता दूंगी.. तुम्हारी साडी हरकत..

इतना कहकर माहि जैसे hi जाने के लिए मुड़ती हैं तभी करीम वहीँ झट से माहि के बढ़ते क़दमों के पास जाकर बैठ जाता हैं और उसके क़दमों को पकड़ कर रोने लगता हैं.......

करीम - मुझे माफ़ कर दो मैडम ji.....mujhse बहुत बड़ी भूल हो gayi.....mera ऐसा कोई इरादा नहीं था ..... आप जब मेरे इतने करीब आयी तब मैं अपने आप को संभल न सका..... आपने आप को रोक नहीं पाया और आप हैं hi इतनी खूबसूरत की किसी की भी नियत दोल सकती hain.....magar मैडम जी मैं आगे से कसम खाकर कहता हूँ की आज के बाद आपको कभी चुने की कोशिश नहीं करूँगा ...... और ना hi मैं आपके कभी करीब ावोंगा ...... प्लीज आप मेरी शिकायत शेठ जी से मुट्ठ कीजिये.....

माहि बड़े गौर से करीम को देख रही थी.....





थोड़ी डियर तक वो वहीँ चुप चाप कड़ी रहती हैं और आखिरकार उसका दिल पिघल जाता हैं ....

माहि - ठीक हैं ये लास्ट वार्निंग दे कर चोर रही hoon........agar आज के बाद मेरे साथ ऐसी वैसी कोई हरकत करने की दुबारा कोशिश की तो मुझसे बुरा और कोई नहीं होगा.....

इधर कमरे मई काव्य सोचती है. ..





कितना कमीना इंसान है..

अभी तक माहि के बॉडी के मज़े ले रहा था और अब माफ़ी मांग रहा है.. इसका मतलब ये सेक्स के लिए किसी भी हद तक जा सकता है..

अब दोनों उसी गार्डन मई खड़े थे.. एक दूसरे को देख नहीं रहे थे.. थोड़े देर बाद करीम माहि को फिर से देखने लगता है.. वो अपनी आँख फाड़े माहि को घूर घूर कर देखने लगता hain.....uska तो मुन्न हो रहा था की अभी इस वक़्त माहि को अपनी बाहों में ले ले और उसकी जवानी का रूस पूरा पी jaye......magar वो भी जनता था की ये एक ख्वाब हैं जो सच तो ज़रूर होगा मगर कब ये उसे भी नहीं पता था ...... वो तो कैसे भी इस पारी को अपनी नीचे लाना चाहता था..........

करीम इतने देर शांत रहने के बाद माहि को कहता है..

करीम- मैडम जी.. आपने मुझे माफ़ कर दिया न…

इतने देर तक काव्य उस रूम मई बैठ के बोर हो रही थी.. करीम का आवाज सुनते hi उठ कड़ी हो जाते है..

माहि- माफ़ कर दिया..

करीम- नहीं मैडम जी.. आप झूट बोल रही हो.....

माहि चहरे पर थोड़ी स्माइल लेट हुई कहते है..





माहि- तुम यकीं दिलाने के लिए अब मई क्या करू..

करीम आपने कातिल चाल चलता है..

करीम- आप कुछ सवालो के जवाब दीजिये तो मई समाजु गए की आपने मुझे माफ़ कर दिया..

माहि- कैसे सवाल..

करीम- नार्मल.. सवाल.. मेरे पेशे से रिलेटेड है.. मैडम जी.. ..

माहि करीम की बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा देती हैं..





माहि- ठीक है..

करीम झट से माहि के सामने खड़ा हो जाता हैं … माहि एक नज़र करीम की ओरे देखती हैं और उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती हैं.......





करीम माहि का हाथ पकड़ के वह स्टेप्स पर उसको बिठा देता है.. माहि एक एक तुक करीम की ओरे देखती हैं फिर वो धीरे से मुस्कुरा देती है.. करीम का इस तरह से उसके क़दमों में गिरकर उससे माफ़ी मांगना बार बार माहि का ध्यान उसे अपनी तरफ खींच रहा था........ वो अब सिर्फ करीम के बारे मई hi सोचने लगाती है..

करीम- आप कुछ कह रही थी टेलर के बारे मई..

माहि- क्या..

करीम- यही की आप लेडीज टेलर को अचे तरीके से जानती हो..

Mahi-haa..

करीम- क्या जानती हो आप..

माहि शरमाते हुई निचे देखकर कहती है..

माहि- यही की मेज़रमेंट लेने के बहाने लेडीज टेलर लेडीज का मिसयूज करते है..

करीम- कैसे..

माहि शरमाते हुई उठ जाती है…

माहि- बॉडी को टच करते है..

करीम माहि के पीछे खड़ा था ..वो थोड़ा नज़दीक जाता है और उसके कमर मई हाट डालता है..





करीम- कैसे…

माहि- अब तुम जैसे हाथ दाल रहे हो वैसे..

करीम- कैसे जानते हो आप हम जैसे लेडीज टेलर को .. बताईये न..

अब करीम माहि के बहोत करीब आ गया था.. उनके साँस ीक दूसरे को अचे तरीके से मेहसूस की जा सकती थी..

करीम- बताये न..

करीम को आपने इतने करीब आते हुई देखकर माहि थोड़ा शर्मा जाती है और इधर उधर देखने लगाती है..

माहि- मुझे नहीं मालूम..

करीम- मैडम जी.. एक बात बताऊँगी आप..

माहि- पुछू..

करीम- ये ब्लाउज किसी गेट्स टेलर ने सिलए है या लेडीज टेलर ने..

माहि अब घूम जाती है..





माहि- क्यों

करीम- बताओ न..

माहि- लेडीज

करीम- तभी..

माहि- क्या हुआ इस ब्लाउज को..

करीम- गड़बड़ है..

माहि- कहा..

करीम- यहाँ .. इस लेफ्ट शोल्डर मई..

ऐसे कहके आपने एक हाट माहि के लेफ्ट शोल्डर पर रखता है.. और उस ब्लाउज को शोल्डर के वह से थोड़ा उप्पर खींचता है..

करीम- yaha..loose है..

माहि वह पे अपनी गार्डन घुमा के देखते है..

माहि- हां. लग रहा है..

करीम- इस लिए मैंने बोलै था..

माहि- क्या..

करीम माहि कके उप्पर वाले कानो के पास.. उसके गार्डन आपने लेफ्ट साइड पे घूम जाने के वजह से ..एक साइड करीम के चहरे के सामने थी.. माहि के उस कानो के पास आपने चेहरा ले जाते हुई कहता है..

करीम- मैडम jii..aap जैसे कड़क.. फटका आइटम का सही तरीके का नाप कोई लेडीज टेलर नहीं ले सकती.. उसको करीम टेलर hi चाहिए..

जैसे hi करीम ऐसे कहता है माहि पीछे की तरफ घूम जाती है..

माहि- मेरे साथ गंदे वर्ड उसे मत करो ऐसे बोलै था न..

Karim—kyon

माहि- अच्छा… नहीं लगता..

अब करीम तुरंत माहि के कंधे पर रख देता हैं और उसके कंधे को सहलाने लगता हैं.... करीम बड़े हलके हाथों से उसके कंधे पर अपनी एक एक उंगली धीरे धीरे सरका रहा था....... इस वक़्त करीम माहि के पीछे खड़ा था और वो माहि के शोल्डर के होते हुई आगे आपने हाट डालके उसके ब्लाउज से ब्रा की स्ट्रिप्स को थोड़ा बहार निकलता है.. ये खेल काव्य विंडो से देख रही थी..

इस वक़्त उसकी उंगली माहि के ब्रा की स्ट्रिप्स पर थी जो वो अपने हाथों पर फील कर रहा tha......ek बार फिर से उसका लुंड में हलचल होने लगती hain........baar बार उसका दिल कर रहा था की वो अपना हाथ झट से नीचे ले जाये और अपने इन्ही हाथों में माहि के नरम बूब्स को थम lein........aur तब तब उसके बूब्स से खेलता रहे और उन्हें मसलता रहे जब तक उसका मुन्न न भर jaye.......wo बड़े मुश्किलों से अपने आप को संभल रहा था........

करीम ये बात ाचे से जनता था की अगर उसने ऐसी कोई भी हरकत की तो माहि अब उसके हाथ कभी नहीं aayegi......ek बार वो उंसकीसफूल हुआ था.. माहि के नज़रियों में गिर चूका tha......aur इस बार वो ऐसी गलती दुबारा नहीं करना चाहता tha........use भी अब विश्वास हो चला था की देर सावेर माहि उसके दिल में तो नहीं मगर हाँ उसके दिल के 2 फ़ीट नीचै जरूर आएगी.......

इस वक़्त माहि का दिल ज़ोरों से धड़क रहा tha......shayad ज़िन्दगी में ऐसा पहला दफा था जो उसे ऐसा अनुभव मिल रहा था.. किसी पराये मर्द के हाथो se…use कुछ नया रोमांच सा लग रहा था.....

इस वक़्त माहि के बदन से परफ्यूम की हलकी सी खुसबू आ रही thi.......Karim की निगाह इस वक़्त माहि के गांड पर thi......is वक़्त वो इतना करीब था की वो आसानी से अपना एक हाथ आगे बढाकर उसका गांड छु सकता tha......magar उसकी हिम्मत नहीं होती की वो ऐसा कुछ kare.........wo ऐसा कोई और रिस्क नहीं उठाना चाहता था.......

करीम- उफ़ कितना मुलायम हैं मैडम जी आपका jism.....kisi फूलों की तरह najuk........aisa लगता हैं जैसे मैं कोई हसीं सपना देख रहा हूँ......

माहि शरमाते हुई कहते है..





माहि- dhattttttttttt… बेशरम कही के..

करीम- तुम अच्छा नहीं लग रहा है क्या मैडम जी..

माहि- नाहीइ…

करीम- फिर मन क्यों नहीं कर रही हो..

Mahi-mere मन करने से तुम मुझे चोर डोज क्या..

करीम- हां.. मई किसी भी खुबसुआरत औरत की बात को मन नहीं करता..

माहि- और किसी भी खुबसुआरत औरत का जल्दी से पीछा नहीं चोरता… ऐसा hi न..

ऐसा कहके माहि हस्ते है..





और कहते है..

माहि- करीम मुझे चोर दो..

करीम- अब मैंने बोलै इस लिए बोल रही हो

माहि- मई पहले से hi जानती हु तुम्हारे जैसे टेलर को..

करीम- और क्या जानते हो टेलर क्र बारे मई..

माहि- यही की आप लेडीज को सडके करते हो..

करीम- कैसे

माहि- अब जोट ुम कर रहे हो वैसे..

करीम- तुम किसी टेलर ने सडके किया था पहले

उसकी और देखते हुई कहते है..





माहि- नही

ककृं- तो तुम कैसे जानती हूँ

माहि- मेरे फ्रेंड को किया था..

करीम अब माहि का एक हाथ आपने हातो मई थम लेता hai..ek बार फिर से उसके जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ पड़ती hain......aur वो हाथ करीम इस झट से माहि के बूब्स पर ले जाता हैं और बड़े हलके हाथों से .. माहि के हातो से माहि के बूब्स पर फिरने लगता hain.....aur धीरे धीरे माहि के दोनों निप्पल्स को माहि के दोनों हाथों में लेकर उसे मसलना शुरू करती हैं....... माहि जिस्म किसी आग के भत्ते की तरह तपने लगता हैं..... झट से करीम अपने एक हाथ मई माहि का एक हाथ थम लेता है और उसी हाथ को नीचे ले जाता हैं और उसके छूट पर रखकर एक उंगली धीरे से अंदर दाल देता हैं...... सदी के उप्पर से … लज्जत से उसकी आँखें बंद हो जाती हैं





और उसके मुँह से एक सिसकारी फुट पड़ती हैं.....

माहि - aaaaaaaaaaaaa ............. सससससस .. iiiiiiiiiiihhhhhhhhhhhh ......

इस वक़्त उसका लुंड माहि के गांड से पूरी तरह से सत्ता हुआ tha.........wo झट से उसका मुँह माहि के गार्डन के एकदम करीब लता hai......wo उसकी बदन की खुसबू ाचे से महसूस कर सकता था..... वो झट से अपना होंठ माहि के गार्डन पर रखकर उसकी गार्डन को बहुत धीरे से चूम लेता हैं......





करीम के इस हरकत से माहि को मनो ऐसा लगता हैं जैसे किसी ने उसे 440 वाल्ट का करंट चुवा दिया ho......wo करीम के इस हरकत से मनो चंक सी पड़ती hain.......uska दिल फिर से ज़ोरों से धड़कने लगता हैं ........ सांसें एक बार फिर से बेकाबू होने लगती hain........tabhi वो झट से अपना दूसरा हाथ माहि के दूसरे कंधे पर रख देता हैं और उसे भी धीरे धीरे नीचे की ओरे बहुत आहिस्ता से सरकने लगता hain........Mahi के मुँह से एक लज्जत भरी सिसकारी निकल पड़ती हैं...........

Mahi-aaaaaaaaa..ssssssssssssssss......ye क्या कर रहे हो Karim......ye सही नहीं हैं .......प्लीज लीव में..........

करीम- मैडम जी साहेब सच में बहुत खुसनसीब हैं जिसे आप जैसी बीवी मिली....... और मैं भी बहुत खुसनसीब हूँ जिसे आप जैसा माल मिला..

तब शरमाते हुई माहि कहते है..





माहि- बेशरम कुछ भी बोले जा रहे हो..

तभी माहि को एक फ़ोन आता है.. फ़ोन उतने के लिए माहि जैसे hi निचे झुक जाती है.. क्यों की माहि ने आपने पार्स निचे राखी थी.. और उसमे माहि का मोबाइल tha..Mahi जैसे hi निचे झुक जाती है करीम उसका वो हाट पकड़ लेता है.. माहि निचे झुकी हुई थी.. करीम एक हाथ से माहि का वो हाथ पकड़ता है और दूसरे हाट उसके कमर से होते हुई उसके नवल तक ले जाता है..

माहि- करीम.. छोड़ दो मुझे.. फ़ोन उतने दो..

इधर विंडो से काव्य धीरे से बोलती है..

काव्य- करीम मोबाइल मत उतने दो.. माहि को.. वर्ण आज तेरे हाथ से चली जायेगे..

करीम- मत उठाओ..

काव्य- yesssssssssssssss… mmereeeeeeeeeeeeeeeeeee करिममम… कीपपपपप.. आईटी उपपपप.

माहि- पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़… मुझे देखने तो दो naaaaaaaaaaaa…. किस का है…

अब माहि कड़ी हो गयी थी उसका एक हाट पार्स मई था अब.. मोबाइल निकलने के लिए..

काव्य- नाहीई.. nahiiiiiiiiiiiiiiii.. करिमममममम.. उसकी बाततततततततत.. मत सुनु.. उसको मोबाइल मत उतने दो..

करीम- एक किश दे दो …

माहि- kyaaaaaaaaaaaaa???????

काव्य- एसससस… करिममममम.. किश करो उसको..

माहि- ये नाहीइ हो सकता ……..

माहि ने ऐसे कहते hi करीम पीछे खड़े रहते hi उसके शोल्डर को चुम लेता है ……..

माहि- आअह्ह्ह्हह्हआआआआ…..

Kaaarrrrrrrrrrrrrriiiiiiiiiiiiimmmmmmmmm………. Plzzzzzzzzzzzzzz.. न्यूऊओ..

काव्य- yesssssssssssssssssssss… एस… Karimmmmmmmmmmm..

तभी कैसे तो करके माहि फ़ोन पर्स से बहार निकल लेती है..

करीम- मेरे हस्बैंड का फ़ोन है.. मुझे उतने दो..

काव्य- सहित.. yaar..ye आ गया लगता है..

माहि- हां.. मनीष

मनीष- कहा हो तुम..

माहि- पार्टी मई

मनीष – मई भी आ गया हु..

माहि- 2 मिनट मई आते हु… तुम्हारे पास..

ऐसा कह के फ़ोन रख देते है..

माहि- प्लीज करीम मुझसे दूर हटो ...... मुझे जाना है.. बहार मेरे हस्बैंड आये hai..try तो understand......chorho मुझे ......

और माहि झट से पीछे मुड़कर अपने दोनों हाथों को करीम के सीने पर रख देती हैं और उससे आपने से दूर करती hain........Karim भी झट से माहि से दूर हो जाता हैं....

माहि जैसे hi वह से चली जाती है वैसे करीम पीछे घूम जाता है और पार्टी हाल के तरफ जाना चाहता था.. तभी उसको कार्नर मई एक जो छोटी सी विंडो थी वह काव्य दिख जाती है..





जैसे hi दोनों की नज़र एक दूसरे से मिलती है काव्य साइड मई होक चुप जाती है… लेकिन करीम जान चुक्का था की वो काव्य hi है.. करीम आगे बढ़ते हुई गार्डन से अन्दर आता है और उसी स्टोर रूम के दूर पे खड़ा रहता है.. सामने रूम मई काव्य कड़ी थी.. दोनों एक दूसरे को hi देख रहे the..bade अड्डा के साथ काव्य करीम को देख रही थी..





थोड़े देर वह दूर पे खड़े रहने के बाद करीम स्टोर रूम के अन्दर आने लगता hai…aur काव्य को देखने लगत है..

करीम दूर पीछे करता है … अभी भी दूर खुला hi था.. अब धीरे धीरे करीम काव्य के तरफ बढ़ने लगता hai.....kavya करीम को अपने चोर नज़रों से देख रही thee....jaise जैसे करीम उसके करीब आ रहा tha....uske सांसे उत्तेजना और दर के मरे और तेज होती जा रही थी. कुछ ही पलों मैं करीम काव्य के एक दम सामने उसके पास खड़ा tha...itna पास के काव्य के चलती दिल के तेज धड़कन को सुन पा रहा था .....करीम काव्य को अब घर रहा था… करीम का इस तरह से घूरना उसके जिस्म में एक अजीब सा सेंसेशन सा फील कर रहा था…

काव्य ने घबराते हुए अपने सर को उठाकर करीम के तरफ देखा.





करीम अपने चहरे पर वासना से भरी मुस्कान लाये उसकी तरफ ही देख रहा tha.....aur अगले ही पल काव्य के नज़रे फिर से झुक गए...

करीम- क्या देख रही थी…

काव्य- wo….woooo… स्टोर रूम से सामान लेने आयी थी…

करीम- फिर गार्डन मई क्या देख रही थी..

काव्य- कुछ नाहीइ…

करीम धीरे से काव्य के पास जाता हैं और उसके कमर पर अपना एक हाथ हौले से रख देता हैं.... और अपने हाथों को कसकर उसके कमर पर धीरे धीरे दबाव डालने लगता हैं......... करीम ने अपने दोनों हाथों से अब काव्य के कमर को पकड़ा हुआ था .....





करीम के हाथो को अपने कमर पर महसूस करते ही काव्य का पूरा बदन कनाप gaya.....usne पीछे हटाने के कोशिश की पर करीम ने उसके कमर को मजबूती से पकड़ा हुआ tha.....kavya किसी कटपुतली के तरह करीम के हाथों का आदेश मानते हुए कड़ी हो गए..

उसके सांसे और तेजी से चलने लगी .... अपने चहरे पर काव्य के गरम और मस्त कर देने वाली सांसो को महसूस करते hi करीम एक दम से मस्त हो gaya.....aur अपने होंटो को काव्य के होंटो के तरफ बढ़ने laga.....uske रसीले और कनपटी हुए होंटो के तरफ .....





जैसे ही काव्य को करीम के इरादों का अहसास हुआ उसका पूरा बदन थार थार कनापने laga.....jaise काव्य के सांसे मनो उसके हलक मैं अटक गए ho…..uske हाथ पेअर जैसे वही जैम गए…… अब्ब काव्य करीम से नज़रे भी नहीं मिला पा रही thee....sharam और संकोच वाश उसके ऑंखें बंद हो gaye....kavya को कुछ समाज मैं नहीं आ रहा था की आखिर वो करे तो काया…..
 
जैसे ही काव्य को करीम के इरादों का अहसास हुआ उसका पूरा बदन थार थार कनापने laga.....jaise काव्य के सांसे मनो उसके हलक मैं अटक गए ho…..uske हाथ पेअर जैसे वही जैम गए…… अब्ब काव्य करीम से नज़रे भी नहीं मिला पा रही thee....sharam और संकोच वाश उसके ऑंखें बंद हो gaye....kavya को कुछ समाज मैं नहीं आ रहा था की आखिर वो करे तो काया….. उसने करीम के तरफ पीठ करके सर को झुका लिया…..





बचने को उसको कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था…… करीम ने पालक झटपट ही काव्य को पीछे से बाँहों मैं भर लिया और अपने होंटो को काव्य के गर्दन पर लगा दिया…..





करीम का तना हुआ लुंड सीधा काव्य के चूतड़ों के दरार मैं जा धंसा ….. अभी भी वह सदी और पेटीकोट थी पर भी काव्य के पूरे बदन मैं बिजली से दौड़ gaye…..aur वो एक दम से सिस्का उठी…..

काव्य- अह्ह्ह्हह सीईई ये एई कया कर रहे हो …….

करीम- कुछ नाहीइ…

काव्या: अहह करीम चोर दो मुजी कोई देख लेगा अह्ह्ह्ह (काव्य ने कनपटी हुई आवाज़ मैं कहा)

करीम- कोई नहीं आएगा…

काव्य- माहि आ जायेगे…

करीम : (काव्य के चुच्यों को मसलते हुए) वो तो कब के चली gaye….usse ना तो मेरे परवाह है और ना ही मेरे लुंड की.. अब्ब मेरा और मेरे लौड़े का धयान रखना तुम्हारा फ़राज़ बनता hai…..kyon सही कह रहा हूँ ना…..

काव्य न मई गार्डन हिलती है..

करीम- तो कोण ख्याल रखेगा..

काव्य- माहिई…..

करीम- तुमने सब देखा क्या..

काव्य है मई गार्डन हिलती है..

करीम- तो तुमने देखा hi होगा न माहि मुझे छोड़ के चली गयी.. अब मेरा और मेरे लौड़े का ख्याल तुम hi रखो..

काव्य न मई गार्डन हिलती है..

करीम- क्यों ..

काव्य- माहिई.. रखेगीइ..

करीम- वो तो चली गयी..

करीम काव्य के शोल्डर को किश करता है..





काव्य- ahhhhhhhhhhhha.. वो आ जाएगी

करीम- तुम मनके लाओगे उसे..

काव्य हां मई गार्डन हिलती है..

काव्य- अब मुझे छोड़ दो..

काव्य अब करीम के साथ मदहोस होते जा रही थी.. ….. करीम काव्य को और ज्यादा चिपक गया..

काव्य- कोई देख लेगा यहां..

काव्य ने फिर से धड़कते हुए दिल के साथ एक बार फिर कहा…….

करीम- कोई नहीं आएगा यहाँ…….

करीम ने काव्य को अपने बदन से चिपकते हुए kaha…….aur अपने दोनों हाथों से काव्य के चुच्यों को ब्लाउज के ऊपर से पकड़ कर धीरे धीरे मसलने लगा …….

काव्य अपनी अधखुली आँखों से करीम के हाथों के हरकत देखते हुए कहती है..

काव्य- ुईंहहह एई एई कया कर रहे हो ? अह्हह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है…….

करीम ने अपने दहकते हुए होंटो को काव्य के गर्दन पर लगा दिया..





और काव्य के मुँह से शी के मस्ती भरी सिकसरी निकल गए.

करीम- यहाँ कोई नहीं dekhega……main तुम्हें प्यार कर रहा hun.tumhen अच्छा नहीं लग रहा क्या………

करीम के बात का काव्य ने कोई जवाब नहीं diya…..Karim उसके दोनों चुच्यों को धीरे धीरे अपने हाथों मैं भर कर मसलते हुए उसके गर्दन पर अपने होंटो से रगड़ रहा था……





काव्य- मई शादीशुदा हु.. ये सब ठीक नहीं है…

करीम- किसी दूसरे शादीशुदा को मेरे हातो से छोड़ते हुई देखना …ठीक है क्या..

काव्य के मू से हलकी से हसी निकल जाती है..





काव्य- मई किसी दूसरे की अमानत हु.. आपने हस्बैंड की अमानत हु..

करीम- माहि भी तो उसके हस्बैंड मनीष की अमानत thi..na..to तुम भी तेरे पति की अमानत तो रहोगी hi न… उससे क्या फरक पड़ता है..

काव्य हसती है..

काव्य- तुम बहोत चालू हो…

करीम उसके शोल्डर को किश करता है..





करीम- हां..

काव्य- मेरे हस्बैंड मुझे ढूंढते हुई यहाँ आ जायेंगे..

करीम- उसको क्या पता है तुम यहाँ हो..

काव्य- दूर ओपन hi है..

करीम- कुछ नहीं होगा..

काव्य के सांसे एक बार फिर से पूरी तेजी से चलने लगी thee…..aur वो घुटी आवाज़ मैं सिसाय रही thee……..jisse देख कर करीम के हिम्मत और बढाती जा रही thee……usne अपना एक हाथ उसकी चुकी से हटा कर नीचे के तरफ .. सदी के तरफ.. लेजाना शुरू कर दिया……

अब करीम का वो हाट काव्य के नवल से होते हुई सदी तक पहुँच चुक्का tha..Jaise ही काव्य को इस बात का अहसास हुआ उसने अपने सदी को कास के पकड़ liya…..tanki करीम अपना हाथ अंदर ना ले जा sake……par करीम के अग्गे काव्य के एक ना चली और करीम थोड़ी से मुस्कात के बाद अपना हाथ काव्य के सदी और पेटीकोट के अन्दर से होते हुई छड़ी के अंदर ग़ुस्सा दिया……

करीम- अह्ह्ह्हह… क्या अहसास है… काव्य टेर्री छूट का.. एक दम ग्राम और गदराये हुई है …….

काव्य शर्म से आपने दोनों हाथ को आपने चहरे पर ले जाती है और आपने चेहरा छुपा लेती hai..Apni छूट पर करीम का अहसास पाते ही काव्य एक दम से मचल उठी है और उसने अपनी पीठ को करीम के छथि से सत्ता liya……..jisse करीम का होंसला हर पल बढ़ता जा रहा tha….Kavya के छूट एक दम चिकनी thee……shayd उस्सने एक दिन पहले ही अपनी छूट के बालों को साफ़ किया था……

तब नखरा करते हुई कहते है..





Kavya—kitane बेशरम हो… करीम तुम..

करीम- वो तो हु..

काव्य - वो तो हु… चुप नहीं बैठ सकते क्या????

करीम- कैसे चुप बैठ जाये काव्य.. इतने कोमल छूट का अहसास पते hi.. कोण चुप बैठता है..

काव्य- मज़े ले रहे हो… और उप्पर से बेशर्मो की तरह बोले जा रहे हो..

करीम- काव्य .. चुदाई करते हुई तेरा पति चुप बैठता है क्या..

काव्य हां मई गर्दन हिलती है..

करीम- चुदाई का असली मज़ा बात करते हुई hi आता है..

काव्य- बेशरम...

करीम - वैसे एक बात कहूं..

काव्य- कहो..

करीम- छोड़ते टाइम औरत बेशरम रहे तभी वो ज़्यादा ाची लगती hain......mujhe बेशरम औरत बहुत पसंद hain...dekh लेना एक दिन तुम भी मेरे hi रंग में रंग जाओगी.......

करीम की बाटिओं को सुनकर काव्य शर्म से अपनी नज़रें नीचे झुका लेती हैं......





काव्य- तुम बहोत ज्यादा बेशरम हो

करीम- काव्य.. तुम नहीं जानती तेरे छूट कितनी नाज़ुक है… किसी रुई की तरह..

काव्य- पागल.. चुप हो जाओ..

करीम- काव्य लगता है तूने तेरे छूट के बाल निकले हुई है..

काव्य- बोलै न चुप हो जाओ..

करीम- बोल न निकले न..

काव्य है मई गार्डन हिलती है..

करीम- कब

काव्य शरमाते हुई कहती है..

काव्य- कल……………

अब करीम का एक हाथ काव्य के छूट पर था और दूसरा हाथ काव्य के ब्लाउज पर tha..Karim अब दूसरे हाथ को नीचे लेजाकर काव्य के ब्लाउज के नीचे से डालते हुए उसकी चुच्यों पर पहुंचा दया……. अब उसके ब्रा के अन्दर से उसके कोमल आम पर करीम का हाट पहुँच चुक्का था..

काव्य के नंगी चुच्यों को महसूस करते ही करीम का लुंड अपनी ाकुआत पर आ गया. करीम उसके छूट और एक आम से खेल रहा था इस वजह से.. ूतीजाणा मई काव्य थोड़ी निचे झुख गयी thi..iss वजह से करीम का लुंड पीछे काव्य के कमर पर जा धंसा…… अब करीम ने पंत से उसका लुंड बहार निकला tha..iss लिए करीम के लुंड के गरमी को अपनी कमर पर महसूस करते काव्य एक दम से सिहर उठी… उसकी सांसे और तेज हो gaye…..hont उत्तजेना के कारन कनाप रहे thee…….Karim ने काव्य के लेफ्ट चुकी को अपने हाथ मैं लेकर धीरे से मसल दिया….. काव्य के दिल ने धड़कना बंद कर दिया……

काव्य- अह्ह्ह्ह शहहह बस्स्स ुंहःहःहःह…

काव्य एक दम से सिसकात uthi…uske ये सिसकर्यां बयां कर रही थी की वो कितनी गरम हो चुकी hai….phir करीम ने काव्य के गर्दन पर अपने दहकते हुए होंटो को रख कर उसके चुकी के निप्पल को अपनी उंगलयों के बीच मैं लेकर मसलना शुरू कर दया…..





काव्य के निप्पल एक दम नुकले होकर कड़क हो चुके थी ….. काव्य के मस्ती का कोई टिकना नहीं था…….

करीम का एक हाथ अब सीधा काव्य के छूट के ऊपर tha..…kavya के छूट पूरी पांये हुई थी…… जैसे hi करीम ने अपनी एक उंगली काव्य के छूट के अन्दर आहिस्ता से डाली तो काव्य आपने जगह पर hi उछाल पड़ी..

काव्य- ouchhhhhhhhhhhhhh….

Kariiiiiiiiiiiimmmmmm……. प्लललज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़…. नूवो..

करीम की उंगली अपने छूट के अन्दर महसूस करते ही काव्य के बदन ने एक जोर दर झटका खाया और वो एक दम से करीम से चिपक गए.





करीम- उंगली से इतनी तड़प ुति तो काव्य मेरे लुंड से तेरा क्या हाल होगा..

काव्य के चहरे पर थोड़ी हसी आते है..

काव्य- धत्तत्तत..

काव्य के छूट मैं सरसराहट और तेज हो गए थी…… उसकी चूड़ी हुई छूट लगतार अपना कॉमर्स बहा कर लुंड को लेने के लये तड़प रही thee……madhosh हो रही काव्य ने अपना सारा वजन करीम के ऊपर दाल दिया tha….uska सर पीछे लुढ़क कर करीम के कंधे पर टिका हुआ tha…..jiska फदया उठाते हुए करीम ने अपने होंटो को काव्य के रसीले होंटो पर टिका दिया……





इस बार काव्य ने कोई विरोध नहीं kiya….aur उसने अपने होंटो को ढीला चोर कर करीम के हवाले कर diya…..uska पूरे बदन मैं मस्ती के लेहरे दौड़ा रही thee…..aur उसका बदन आग के तरह तप रहा था…. अब करीम ने काव्य को घुमा liya..Karim अब्ब आराम से काव्य के होंटो को रास चूस चूस कर पी रहा था….





और काव्य भी अपने होंटो को ढीला चोर कर करीम से चुसवाते हुए मदहोश होती जा रही थी……

अब करीम ने काव्य के सदी से हाथ बहार निकला और अपने चहरे के पास लेजाकर उससे देखने लगा. उसके उंगलयां काव्य के छूट से निकले आम रास से सनी हुई thee….kavya के ऑंखें अभी भी बंद थी. और वो तेजी से सांसे ले रही थी…....

तभी दोनों के किसी के कदमो के आहत रूम के बहार पास एते हुई महसूस हुई.. दोनों एक दम से अलग हो गए..

अपने कपड़ो को दुरस्त करना lage…tabhi स्टोर रूम के पास से एक आदमी gujara…..aur वो अग्गे के तरफ चला gaya……..dono ने चैन के सांस ली……..

काव्य- मैंने कहा था न दूर ओपन है..

काव्य ने घबराये हुए हाड़बते हुए कहा……

करीम - हाँ ओपन hi है.. बंद करके आता हु..

काव्य कुछ नहीं boli..Karim रूम से थोड़ा बहार चला गया.. करीम मान ही मान मई उस आदमी को कोस रहा था..... घुसे मई वो बोल hi पड़ा..

करीम- कोण हरामी था साला .. जो डिस्टर्ब करने आ गया.. सेल रूक तेरे माँ को यही छोड़ता हु..

करीम के ये गली सुनते hi काव्य के चहरे पर हसी आ जाती है..





करीम का मान कह रहा था की अब काव्य उससे कुछ नहीं करने देगी.... दो बार ऐसे hi माहि के साथ हुआ था थोड़ी देर पहले इस वजह से करीम पहले से hi गुस्से मई था..

करीम ने काव्य को देखा वो अभी भी वैसे ही खड़े रह कर निचे देख रही थी..... करीम के कदमो के आहत सुन कर काव्य ने वैसे अपने फेस को ऊपर कर के दूर के तरफ देखा...





और उसके नज़रें करीम के नज़रों से जा takrye...kavya उससे अंकेछण नहीं मिला paye.....aur उसने फिर से अपना फेस को निचे कर दिया..

ये देख के करीम के होंटो पर मुस्कान फेल गए... काव्य का दिल जोरों से धड़क रहा था..... दूर बंद कर के करीम धीरे धीरे काव्य के तरफ बढ़ने लगा.....

काव्य करीम को अपने चोर नज़रों से देख रही thee....jaise जैसे करीम उसके करीब आ रहा tha....uske सांसे उत्तेजना और दर के मरे और तेज होती जा रही थी. कुछ ही पलों मैं करीम काव्य के एक दम सामने उसके पास खड़ा tha...itna पास के करीम काव्य के चलती दिल के तेज धड़कन को सुन पा रहा था.....

करीम को इतने करीब आते हुई देख कर अब्ब काव्य करीम से नज़रे भी नहीं मिला पा रही thee....sharam और संकोच वाश उसके ऑंखें बंद हो गए.... काव्य शर्मा कर घूम जाती है.. करीम धीरे से खिसक कर काव्य के साथ एक दम से सात gaya....Karim के बदन को अपने पीठ पर महसूस करते ही काव्य के सांसें एक बार फिर से तेज हो गए....

करीम का तना हुआ लुंड काव्य के चूतड़ों के गोलियों पर रगड़ खा रहा था.... जिस से महसूस करते ही काव्य के पूरे बदन मैं बिजली से कोंध gaye....usne अपने हाथों को वाल पे रख diye..aur वाल के सहारे वह कड़ी हो gayi..waise hi करीम ने काव्य के पीठ को चुम liya..jis के वजह से काव्य के मुँह से मस्ती भरी आह निकल गए.....

काव्य- आआआअह्हह्ह्ह्हह ….ह्ह्हह्ह्ह्ह

अब काव्य के ब्लाउज की लास करीम ने आपने मू मई ले ले.. ब्लाउज को खोलने के लिए.. वैसे hi काव्य बोल पड़ी..

काव्य- ननननननॉऊऊऊओ… करररररीईएमं…….

करीम वैसे hi बोल पड़ता है..

करीम- क्या.. नू. काव्य..

काव्य- करीम प्ल्ज़ ब्लाउज मत खोलो..

काव्य ने ऐसे बोलते hi काव्य के ब्लाउज

की लास करीम खोलता है.. पहले एक .. फिर दूसरे .. फिर तीसरी..

करीम के बदन को अपने पीठ पर महसूस करते ही काव्य के सांसें एक बार फिर से तेज हो गए....

उसने आपने सांसो को काबू मई करते हुई कहा..

करीम- k…aaa…rrr…..iiii..mmmmm… plzzzzzzzzzzzzzz….. ब्लूसीएएएए… को खोलो.. matttttttttt…..

करीम- तो क्या करू… मेरी जाएं..

काव्य- ऊपर से hi कारु.. naaaaaaaaaaaaaaaaaaaa..

करीम- उप्पर से मज़ा नहीं आता..

काव्य- कोई आ जायेगा तो आफत हो जाएगी..

करीम- दूर लॉक है न..

काव्य- कोई नॉक करेगा तो मई उतनी जल्दी मई ब्लाउज नहीं पहन पाऊँगी..

करीम- मई पहना दूंगा मेरी जान..

इस पर काव्य के मू से हलकी से हसी निकल जाती है..

ये देखते ही करीम का लुंड पजेमे मैं झटके कहते हुए बहार को ऐनी के उतावला होने लगा था ...... आज करीम ने पैजामा पहना हुआ था.. करीम ने अपने पायजामे के नदी को खोल कर पायजामे को निकल कर नीचे फ़ेंक दिया....

करीम ने अपना अपना एक हाथ अग्गे ले जकर काव्य के पेट पर रख कर धीरे धीरे घूमना शुरू कर diya....Karim के हाथ के ताल पर काव्य का पूरा बदन थरथराने लगा..... और करीम उसके पेट को अपने हाथों से सहलाते हुए धीरे धीरे फिर से सदी को खोलने के तरफ बढ़ने laga...aur साथ ही उसने अपने दहकते हुए होंटो को काव्य के नैक पर लगा दया......





काव्य- अह्ह्ह्हह करीम सीईईई..

काव्य एक दम से सिसक uthi....jaise ही करीम का हाथ काव्य के सदी को खोलने के लिए पहुंचा तो काव्य एक दम से दांग रह गयी.... काव्य कुछ सोचती तब तक करीम ने काव्य की सदी कमर से लूसे कर दी.. अब काव्य की सदी उसकी कमर पर एक दम से ढीली थी.... पर अभी भी उसके कमर पर hi thi..ye महसूस करते ही करीम का लुंड एक दम से फुंकार उठा....

करीम ने काव्य के कमर मैं हाथ दाल कर उससे अपने तरफ ghumaya..samane काव्य ऑंखें बंद कए हुए तेज से सांसे ली रही थी....





वासना के कारन उसके पूरा चेहरा लाल होकर देहक रहा tha.....uski गुदाज चुच्यां उसके सांस लेने से ऊपर नीचे हो रही थी.....

ये सब देख कर करीम मनो जैसे पागल हो गया..... काव्य अब अपने आप पर काबू रख नहीं पा रही thee....Karim के हाथ अब काव्य के कधों पर आ चुके thee....uske गाल और कान दोनों लाल सुर्ख होकर दहकने lagee......Karim ने अपने बाँहों को काव्य के कमर के गिर्द कसकर उससे अपने से छिपा लिया..... काव्य के ेड्याना ऊपर उठ gaye.....jo की काव्य के एक और बढ़ी गलती thee....bhale ही काव्य पर वासना हवाई होने लगी thee......par उसके मान का एक कोना अब्ब भी उससे ये सब करने के लये रोक रहा tha.....par अगले ही पल नीचे करीम का तना हुआ लुंड सीधा काव्य के छूट पर सदी के ऊपर से जा laga.....kavya का पूरा बदन ऐसे कनाप gaya.....jaise उसने बिजली के नंगी तारों को छू लाया ho...usne करीम के कंधो को पीछे के और dekhela....aur अपने को करीम के गिरप्त से अलग कर दिया .....

काव्य के सांसे उखड़ी हुई thee.....aur वो भोत मुश्किल से अपने आँखों को खोल कर करीम के तरफ देख रही thee....jaise आँखों से कह रही ho....ki उससे चोर do.....par करीम का तना हुआ लुंड जैसे अपने इरादे से पीछे हटाने वाला नहीं tha...use तो उस पतली से महंगी सदी के पीछे के छूट के सुंगध आ गए थी..

और अगले ही पल करीम फिरसे थोड़ा आगे आया और काव्य के कनाप रहे रसीले गुलाबी होंटो को अपने होंटो मैं भर लिया.....





न चाहते हुए बी गरम होने लगी ..... उसके हाथ पेअर उसका साथ छोड़ने लगी.. और करीम इस बात का फायदा उठाते हुए उसके होंटो को जोर जोर से चूसने laga....jab करीम काव्य के नीचे वाले होंठ को अपने होंटो मैं दबा कर चुस्त, तो काव्य के होंटो मैं सनसनी दौड़ jati......aur वैसे hi हाल करीम का भी hota..jab काव्य भी जवाब मई करीम का उप्परि होंठ चूसती और उसका लुंड बुरी तर्हां फुँकारते हुए झटके खानता tha....jaise ही करीम का लुंड फनफनाते हुए झटका खा कर काव्य के छूट के ऊपर रगड़ खता काव्य बिन जल मछली के तरह तदाहप उठती... करीम जनता था की अब काव्य उससे नहीं रोक पाएगी .... काव्य ने झट से अपना एक हाथ नीचे लेजाकर अपने लूसे सदी को खोल कर निचे गिरा दिया.....

जोश मई आकर काव्य ने अपनी सदी तो निचे गिरा दिया पर अब वो शर्म के मरे नीचे नहीं देख पा रही thee.....par अब्ब उसकी हालत हर पल और ख़राब होती जा रही thee....Karim ने अब्ब फिर से अपने लुंड को पकड़ कर काव्य के छूट के फांकों पर पेटीकोट के ऊपर से टिका दया....

काव्य- अह्ह्ह्ह करीम ..

काव्य अपनी छूट पर करीम के मोठे सुपड के गरमी को महसूस करते हुए सिसक उठी.....

जैसे काव्य को करीम के लुंड के सुपड के गरमी अपनी छूट के छेद पर महसूस हुई काव्य के झंगें अपने आप खुलने lagee....kavya को यू मदहोस होता देख कर करीम ने धीरे से अपने कमर को झटका दिया... करीम का लुंड काव्य के छूट के छेद पर पेटीकोट के ऊपर से रगड़ खा गया...

काव्य- अह्ह्ह्ह करीम..

काव्य एक दम से सिस्का उठी...

करीम के इस हमले से काव्य तड़प उठी और उसने जवाब मई करीम के बाँहों को और कास के पकड़ liya....kavya के होंठ कनाप रहे thee....jisse देख एक बार फिर से करीम के मुँह मैं पानी आ gaya....aur उसने काव्य के होंटो को अपने होंटो मैं लेकर फिर से चूसना शुरू कर दिया.....

और अपना एक हाथ नीचे लेजाकर काव्य के पेटीकोट के नदी को पकड़ कर खेंचना शुरू कर diya.....Karim के इस हरकत से काव्य एक दम से चौंक gaye.....aur उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर करीम के हाथों को पकड़ कर रोकना शुरू कर daya....par करीम के अग्गे काव्य के एक ना चली.. ...और करीम ने कवय के पेटीकोट के नदी को खेंच कर खोल दिया....

काव्य को जैसे ही अपनी पेटीकोट अपनी कमर पर ढीली होती महसूस हुई उसका दिल जोरो से धड़कने laga....sanse उखाड़ने लगी.. और अगले ही पल उसका पेटीकोट निचे गिर पड़ा.. काव्य कुछ सोच पति उसे पहले hi करीम ने ऐसा कुछ किया की काव्य की सांसे मनो जैसे थम गए ho...Karim ने अपना एक हाथ काव्य के पंतय के अंदर दाल कर उसकी छूट के फांकों के बीच अपनी उंगलयों को चलना शुरू कर दिया...

इस वजह से काव्य किसी बिन जल मछली के तरफ फड़फड़ाने लगी....

काव्य- ुम्मःहः ओह्ह्ह्ह करीम नही ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह सीईईई करीम चोरर दोऊ ईई थेकक नहीं है कुछहहह हो जाएगा ... ओह्ह्ह्हह करीम…

पर काव्य के बातों और दलीलों का करीम पर कोई असर नहीं हो रहा tha..wo बुरी तरह से उसकी छूट को मसलते हुए अपनी उंगलयों को उसके छूट के फांकों मैं घुमा रहा tha....kavya ने अब्ब अपना बदन पूरा ढीला चोर दिया tha....jab करीम अपनी उंगलयों काव्य के छूट के डेन को मसलता तो काव्य का पूरा बदन खड़े खड़े hi झटके खाने लगता....

उसकी छूट से काम रास बह कर करीम के उंगलयों को सं करने laga...kavya के मदहोशी भरी अहइँ करीम को और पागल बना रही थी....

अब काव्य के बदन पर पंतय और पीछे से खुला हुआ ब्लाउज tha…Kavya अब तो जन्नत की कोई हूर लग रही thi..Iski वजह से उस की मस्तानी गोल चूचियां तानी हुयी हिल रही thi...Idhar उधर...

Kavya-tum एक बात बताओ तुम्हे माहि बहोत पसंद है क्या

छूट मई उंगली डालते हुई करीम कहता है..

करीम -है

जैसे hi करीम है कहता है काव्य उसे गुस्से से पीछे धकेल देती hai..Aur गुस्से से उसे देखने लगाती है..





करीम उसके तरफ देखता है..

करीम –क्या हुआ. .मुझे पीछे क्यों धकेल दिया..

Kavya-tume शर्म नहीं आती kya....mere बॉडी के मज़े ले रहे ho..aur माहि मुझे पसंद है ऐसे बोल रहे हो.. माहि तुम पसंद है तो फिर उसके पास hi जाओ न..

करीम – खफा क्यों हो रही हो मेरे जान

काव्य और ज्यादा गुस्से मई कहती है..

Kavya-aisa क्या पसंद आता है तुम माहि mai..aisa क्या है उसमे..

करीम ने आह भरते हुए कहा

करीम –वह तो कुदरत का कमला है काव्य … उसकी तारीफ़ मैं क्या करून.

काव्य ये बात सुनकर उसको देखने लगी...





वह सुंदरता में खुद को किसीसे कम कैसे मान सकती थी. और एक औरत के सामने किसी दूसरी औरत की प्रशंसा कोई करे तो वो बात चुभनी तो

थी hi ...चाहे वो दूसरे औरत कितनी भी बेस्ट फ्रेंड क्यों न हो..

Kavya-tume उस में सब से सुन्दर क्या लगा?"

करीम –काव्य उस में तो हर बात जज्बात जगाने वाली है ... उस में कौन सी hi बात ऐसी नहीं है जो मुझे दिवानाना न करती हो..

काव्य से अब सहन नहीं हो रहा था.. उसने करीम को अपनी हैसियत दिखने की सोची...

काव्य- वो इतनी सुन्दर है तो उसकी तारीफ मेरे सामने करने की क्या जरूरत..

करीम- वो तुम्हारी फ्रेंड है इस लिए..

काव्य- और इतने गंदे तरीके से कोई करता है क्या..

करीम हस्ता है..

बड़ी अड्डा के साथ काव्य कहती है..





Kavya-kya वो मुझ से भी सुन्दर है ?

करीम का ध्यान उसके लटकते आमों पर चला gaya..uska दिमाग ने काम करना छोड़ diya..Par जलधि उसने खुद को संभल लिया और नजरें घुमाकर कहा

करीम –मैं ने तुम्हे तब उस नजर से थोड़े hi देखा था.

Kavya-aab तो देखा है न उस नजर से

Karim-ha

काव्य- तो एक बार देख कर bataona....Hum में ज्यादा सुन्दर कौन है?

काव्य ने अपनी कमर को थोड़ा झटका diya..aur बड़े अड्डा से उसके सामने कड़ी हो गयी..





जिससे उस के आमों का ठमेव फिर से गतिमान हो gaya.Karim की नजरें बार बार काव्य की गोलाई योन और गहराई की तरफ जा रही थी..

काव्य ने आपने आम को दबाते हुई कहा

Kavya-bataayiye न करीम जीईईई! क्या माहि मुझसे भी सुन्दर है...

करीम ने अपनी नजर को तिरछा कर के काव्य की और dekha....Kavya के ऊपर से वो अपनी आँखों

को हटा hi नहीं प् रहा था.... और वो सोचने लग गया.. Aah!Mai ने पहले कभी इन् पारर ध्यान

क्यों नहीं दिया. वो उस पल के लिए माहि को भूल कर काव्य की मस्तियों का दीवाना हो gaya...Aur

उन्हें hi बार बार घूरता रहा... और खुद को कहने लग Gaya..Kaise इनको अपने हाथों में

ठाम कर सहलाऊँ?

उधर काव्य को भी अपनी चूचियों पर चुभती करीम की नजरे महसूस हो रही थी...

Kavya-batao न

उसकी आवाज में वासना का असर साफ़ सुनाई दे रहा tha...Wah जैसे वासना से भरे गहरे

कुएं से बोल रही हो!

काव्य उसकी चूचियों को देख पागल हो चुके करीम को देख कर मुस्कुरायी.

करीम शातिर खिलाडी था पर अब उसको क्या बोलू ये समाज मैं नहीं आ रहा tha..agar वो काव्य को सुन्दर बोलता तो काव्य उसको जरूर कहती की फिर माहि की इतने गंदे टैरिफ मेरे मू पाई क्यों की और माहि को सुन्दर बोलै तो ये हाट मई आया हुआ माल चला जाता.. वो अब कंफ्यूज हो गयाथा .. वो हकलाने लगा... उसको समझ में नहीं आ रहा था की अब इसको क्या जवाब दू..

करीम -.Mm..mera मतलब hai..Nahi.. है..

दोनों की आँखों में चमक बराबर थी... दोनों की आँखों में वासना हावी होती जा रही थी....

करीम की आँखों को अपनी छातियों की और लपकती देखकर काव्य को अन्दर से बहोत अच्छा लग रहा था..

काव्य- तुम क्या बोल रहे हो मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है..

करीम- वो बात ऐसे है की…

करीम ये बोल रहा था पर उसकी नज़र काव्य के चूचियों पर thi..uski चूचियों अब इतनी सख्त हो चुकी थी की निप्पल मुंह उठाने लगे थे... बहार निकलने के लिए.. इस वजह से करीम कुछ बोल hi नहीं पाया.. करीम रुक गया है ये देखते हुई काव्य कहती है..

काव्य- आपको कौन ज्यादा सुन्दर लगती है.. मैं या माहि!!!

करीम ने उसकी गोल मटोल चूचियों में अपनी नजरें गड़ाए हुए कहा

करीम- काव्य मैंने तुम्हे कभी उस नजर से देखा hi नहीं.

ाक्टुअलया करीम बात को टालना चाहता था..

काव्य- किस नजर से

काव्य ने अनजान बनते हुए अपनी जवानियों को उसकी और जैसे उछाल hi दिया... और एक मादक अंगड़ाई ली ...

करीम के मुंह में कुत्ते की तरह बार बार लार आ रही थी... भहूखे कुत्ते की तरह...

करीम- उस नजर से.. जिस नजर से अपनी प्रेमिका और बीवी को देखते हैं...

उसपर काव्य बोल पड़ी

काव्य- पर क्या सुंदरता का पैमाना प्रेमिका और पत्नी के लिए hi होता है...

करीम तो पैदाशी hi हरामी था..

करीम- होता तो नहीं... सुंदरता तो हर रूप में हो सकती hai..patni, बीवी, रांड और रखेल..

काव्य – .. पत्नी या प्रेमिका मुझे पता है लेकिन बाकि दो के बारे मई पता नहीं है..

करीम- हम ब्बता देंगे जान..

काव्य कुछ नहीं बोलती..

करीम- वासना हावी होने पर कुछ भी सही या गलत नहीं होता... बस मजा देना और मजा लेना hi सही है... और उससे वंचित रखना गलत होता है

काव्य- तुम किस सुंदरता की बात कर रहे हो मुझे पता नहीं है .. पर मई तो प्रेमिका के बारे मई बात कर रही हु.. वो सुंदरता आदमी प्रेमिका में hi देख सकता है...

करीम – तो ठीक है प्रेमिका के बारे मई बात करते है..

काव्य- तो क्या तुम एक पल के लिए मुझे प्रेमिका मान कर नहीं बता सकते की तुम्हारी ये प्रेमिका सुन्दर है या वो?

हवस पूरी तरह से काव्य के दिलोदिमाग पर छायी हुयी थी...

करीम- मैं कोशिश करूँगा देख कर बताने की..

ये सुनकर काव्य की ख़ुशी का ठिकाना hi न raha.Karim कुछ देर तक यूँही काव्य को देखता रहा.... वो कहीं से भी उसको माहि से कम नहीं लग रही थी... कम से कम उस पल के लिए.. अब वो काव्य को भी पाना चाहता था और साथ मई माहि को भी खोना नहीं चाहता था.. क्यों की वो जान चूका था की काव्य को वो जो भी कहेगा काव्य माहि को बता देगी.. इस लिए वो एक प्लान बनता है.. जिस से दोनों hi उसको मिल जय..

करीम- देखो काव्य! मेरी किसी बात का बुरा मत मानना... मैं जो कुछ भी करूँगा या करने को कहूंगा वो यही जान्ने के लिए करूँगा की तुम सुन्दर हो या वो.. माहि .... और वो भी तुम्हारे कहने पर... O.K.?

काव्य- haan!....O.K.

वह बेताबी से मरी जा रही थी की जाने क्या होगा आगे!

करीम: उस कोने में जाकर कड़ी हो जाओ! ये सुंदरता मापने का पहला चरण है... जैसा मैं कहूँ; करती जाना... अगर तुम्हे लगे की तुम नहीं कर पाओगी तो बता देना.... मैं बीच में hi छोड़ दूंगा... पर मैं तुम्हे ये पूरा काम हो गया तो hi बताऊंगा की सुन्दर कौन है! ठीक है...

काव्य को यकीन था की उसकी उम्मीद से भी ज्यादा होने वाला है... वह शर्माती हुयी सी जाकर कोने में कड़ी हो गयी.... उसके चेहरे पर अभी से हाय की लाली दिखने लगी थी....





करीम ने काव्य को अपने हाथ अपने सर से ऊपर उठाने को कहा...





काव्य ने वही किया... पर जैसे जैसे उसके हाथ ऊपर उठाते गए... उसकी गदरायी हुयी चूचिवँ भी साथ साथ मुंह उठती चली गयी... और नजरें करीम की और तानी हुयी उसकी मस्तियों को देखकर उसी स्पीड से नीचे होती गयी... शर्म से...

अपने से करीब 6 फ़ीट की दूरी पर कड़ी काव्य की चूचियों को इस कदर तने हुए देखकर करीम की पंत में उभर और कड़क हो गया…... उसका ब्लाउज पहले से hi अदा खुला हुआ था… सिर्फ पीछे से एक बटन निकलना बाकि था.. उसने पहले से hi उसके ब्लाउज के लेस को निकला था.. काव्य के उत्तेजित होते जाने की वजह से और अदा ब्लाउज ओपन होने की वजह से उसकी चूचियों के डेन रास से भरकर उसके ब्लाउज से बहार झाँकने की कोशिश कर रहे थे.. करीम उनकी चोँच को साफ़ साफ़ अपने दिल में चुभते हुए महसूस कर रहा था. वह सोच hi रहा था की अब क्या करून.. तभी काव्य बोल पड़ी..

काव्य- हाथ दुखने लगे हैं... नीचे कर लून क्या.

वह नजरें नहीं मिला रही thhi...Karim तो भूल hi गया था की काव्य को सुंदरता की पहली परीक्षा देते हुए 5 मिनट से भी ज्यादा हो गए हैं...

करीम- घूम जाओ.. और हाथ नीचे कर लो!

काव्य कहे अनुसार घूम गयी...





अब नजरें मिलने की संभावना न होने की वजह से काव्य को अब शर्म कम आ रही थी...

करीम ने उसके चूतड़ों को जी भर कर देखा... उसके बदन पर ब्लाउज के निचे सिर्फ पंतय थी.. सदी और पेटीकोट पहले hi करीम ने निकल दिए थे..

करीम अब काव्य के गांड की मस्त मोटाई का अंदाजा लगा रहा था.

करीम- काव्य.. अगर चाहे तो आपने पंतय निकल दो..

यह बात सुनते hi काव्य के पेअर कांपने lage...kavya पहले से hi करीम के सामने आदि नंगे हुई थी.. पर आपने पंतय निकलने मई उसे डर लग रहा था.. उसे बहोत शर्म आ रही थी..

करीम- मैंने पहले hi कह दिया था... मर्ज़ी हो तो करो वर्ण आ जाओ! पर में फिर बता नहीं पाऊंगा सच सच....

करीम ने ये नया दांव खेल लिया tha..waha से जाना काव्य नहीं चाहती thhi...Karim उसकी पतली कमर, उसकी कमर से निचे के उठान और कमर का मछली जैसा आकर देखते hi पगला सा हो गया था...

काव्य का दिल जोर जोर से धड़क रहा था...

काव्य- सिर्फ सुंदरता देखने के लिए तो ये सब हो नहीं सकता... आखिर करीम आप ने माहि को कब ऐसे देखा था...

करीम- तुम आम खाने से मतलब रखना चाहिए काव्य... पेड़ gin-ne से नहीं...

काव्य अब आम छैक छैक कर खा रही थी... तड़प तड़प कर.... जी भर कर... उसको पता नहीं था की इस सौंदर्य परीक्षा का अगला कदम कौनसा होगा... पर वो ये भली बहती जान चुकी थी की फाइनल एग्जाम में वो आज चुद कर रहेगी........

और गजब हो गया... करीम ने उसको आँखें बंद करके घूम जाने को कहा.... आँखें तो वो वैसे भी नहीं खोल सकती थी.. काव्य अब करीम से नजरें मिलाना बहुत दूर की बात थी... गहहुमते हुए hi उसका सारा बदन वासना की ज्वाला में तप कर कांप रहा था... उसका सारा बदन जैसे एक सुडौल ढाँचे में ढला हुआ सा करीम की और घूम गया... उसका लम्बा पतला और नाजुक पेट और उसके ऊपर तने कड़ी दो रसभरी चूचियां सब कुछ जैसे ठोस हो गया हो... अब उसकी छातियों का रहा सहा लचीलापन भी जाता रहा... उसककी चूचियों के चूचक भी अब तक बिलकुल अकड़ गए थे...

कवय के लिए हर पल मुश्किल हो रहा था... अब तक उसका शरीर मर्द के हाथों का स्पर्श मांगने लगा था... तड़प दोनों hi रहे thhe...kavya से न रहा गया. . उसकी और देखते हुई कहती है..





काव्य- यहाँ तक में कैसी लग रही हूँ..

मतलब साफ़ था... परीक्षा तो वो पूरी hi देना चाहती थी... पर अब तक का हिसाब किताब पूछ रही thhi...ispar करीम ऐसा कुछ बोलै की काव्य शर्म से जमीं मई जाने को बेताब हो उठी..

करीम- मैंने इतना भव्य शरीर कभी ब्लू फिल्मों में भी नंगा नहीं देखा है ...

अब करीम का हाथ अपने आप hi अपने तब तक तन चुके लुंड को काबू में करने की चेस्टा करने लगा...

करीम- तुम ऐसा देख कर अब मेरा लुंड शांत hi हो नहीं रहा है.. ... वो भीतर से hi बार बार फुफकार कर अपनी नाराजगी का इजहार कर रहा है और कह रहा है अभी तक में बहार क्यों hoon..meri काव्य की छूट से.... मेरा लुंड तुम्हारे छूट से कह रहा है .. अब बस कण्ट्रोल नहीं होता... आ जा…

तब बड़ी अड्डा के साथ कहते है..





काव्य- बेशर्मम… कितने गंदे हो तुम.. कोई ऐसा कहता है क्या.. मई अपनी सुंदरता पूछ रही थी और तुम आपने गन्दी भाषा मई ये कह रहे हो..

उसपर करीम कुछ नहीं बोलता है.. सिर्फ काव्य के तरफ देखने लगता है.. अब काव्य को भी कण्ट्रोल नहीं हो रहा था.. काव्य ने लरजते हुए होंठों से अपनी साडी सकती samet-te हुए कह hi दिया...

काव्य- aaa..ppani पंतय उतर दूँ क्या? गीली होने वाली है...."

करीम ललचही नज़रो से कह पड़ा

करीम- नेकी और पूछ पूछ..

शरमाते हुई काव्य ने निचे देखते हुई अपनी पंतय को उतर दिया...

करीम तो बस काव्य के अंगों की सुंदरता देखकर हक्का बक्का रह गया... और बेशरमी से बोल पड़ा

करीम- काश मुझे पता होता... मेरे काव्य ऐसा माल है.. तो मई कभी माहि के पीछे पड़ता hi नहीं...

करीम के ऐसे बातो से काव्य की छूट टप्प टप्प कर छु रही थी... उसकी छूट का रास उसकी केले के तने जैसी चिकनी और मुलायम जांघों पर बह कर चमक रहा था... और महक भी रहा था...

करीम को अब मस्ती सूजी..

करीम- ये रास कैसा है.. मेरे जान?

ऐसा कहके वो काव्य के नज़दीक पहुँच गया..

करीम ने अपनी आंखइन बंद किये आनद के मारे कांप रही काव्य से पूछा...

काव्य- ीईए इस्स्में से निकल रहा है

काव्य ने कोई इशारा न किया... बस 'इसमें से' कह दिया...

करीम- किस्में से?

करीम ने अनजान ban-ne की एक्टिंग करते हुए poochha.aur उसके मुलायम और चिकने जांघो को टच कर diya..touch करते hi काव्य तड़प उठी..

काव्य- आआआअह्हह्ह्ह्हह…..

काव्य का एक हाथ अपनी छातियों से टकरा कर निचे आया और उसकी छूट के डेन के ऊपर टिक गया

काव्य- इसमें से!

उसकी छातियां लम्बी लम्बी साँसों की वजह से लगातार ऊपर नीचे हो रही थी..

करीम थोड़ा सा खुल कर बोलै..

करीम- नाम क्या है जान इसका?

काव्य का जो हाथ उसके छूट पर टिका हुआ था उसी हाथ के एक उंगली को काव्य के छूट मई अन्दर डालते हुई बोल pada…ispar काव्य जगह पर hi उछाल पड़ी…

काव्य- ooooooooouchhhhhhhhhh… कक…. Aaa..rriii… मममम

काव्य शर्म से दोहरी हो गयी... पर खुलना वो भी चाहती थी....

काव्य- ... च..... छूओ...?"

करीम- पूरा नाम ले दो न!... प्लस जान... बस एक बार..

ऐसा कहके वही उंगली बाहर निकल कर जोर से फिर से उसके छूट में गुसा दी.

काव्य- oooooooouuu..c …हहह... aaaaaaahhhhhh….dhireeeee.... सीईई... करूऊओ नाआआ.....

करीम- बोलो न....

काव्य- ककक….. हहहहह… ooooo..ttttt!

और वो घूम गयी दिवार की तरफ... उसकी शर्म ने भी हद कर दी थी.. कोई और होती तो इसके बाद कहने सुनने के लिए कुछ बचा hi न था... बस करने के लिए बचा था... बहुत कुछ!

अब करीम ने उसकी गांड को ध्यान से देखा... उसके दोनों चूतड़ उसकी चूचियों की भाँती सख्त दिखाई दे रही thhe...gaand के नीचे से उसकी उभर आयी छूट की मोटाई झलक रही थी... और अब भी उसकी छूट टपक रही thi...Karim उसके पीछे गया और उसके कान में बोलै...

करीम- जान तुमसे ज्यादा सुन्दर कोई हो hi नहीं सकता...

काव्य परीक्षा में प्रथम आयी थी. अब सहना उसके वश में नहीं था... आखिर उसको भी तो फर्स्ट आने का इनाम मिलना चाहिए.. वो घूमी और अपने ... प्रेमी बन चुके करीम से लिपट कर अपनी तड़प रही चूचियों को शांत करने के कोशिश ki...aur कह पड़ी..

काव्य- ठनकककककककससससससससस..

करीम को उसकी चूचियां अपनी छाती में चुभती हुयी सी महसूस हो रही थी... वह वही बैठ गया और अपनी नयी प्रेमिका की तरसती छूट पर अपने होंठ टिका दिए....

करीम को उसकी चूचियां अपनी छाती में चुभती हुयी सी महसूस हो रही थी... वह वही बैठ गया और अपनी नयी प्रेमिका की तरसती छूट पर अपने होंठ टिका दिए....

जैसे hi करीम के होंठ काव्य ने आपने छूट पर महसूस हुई वो शर्माकर घूम गयी..

काव्य- noooooooooooooooooo … करीम

करीम उठ गया और काव्य को अपनी तरफ घुमा diya..usne काव्य के ब्लाउज को पीछे से पकड़ के झटके से निकल दिया.. काव्य के 32 साइज के चूचिया ब्रा मई उछाल कर बहार आ gaye....kavya अपनी सनसनी थामे ऐनी वाले पलों का इन्तजार कर रही thee....usne अपने दोनों हाथों को अपने ब्रा पर रख कर आपने दोनों बड़े बड़े आम को छुपा दिया.. ......

अब काव्य के दोनों हाट आपने ब्रा पर थे … काव्य कुछ सोच पति इस से पहले hi करीम ने ब्रा के बटन भी खोल दिए..

काव्य- प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़….. नू..

करीम कुछ बोलता नहीं है .. और उसका ब्रा खींचने लगता है..

काव्य- करीम….. इसको तो रहने दो..

करीम- मेरे जान .. तुजे मई बिना कपड़ो मई देकहन चाहता हु.. देख तू लो.. क्या फटका दिखती है या नहीं.. माहि के जैसे..

काव्य गुस्से से करीम की और देखती है..





काव्य- उसको बीच मई क्यों ला रहे हो

काव्य ऐसा कहती तब करीम एक झटके मई hi काव्य के ब्रा को काव्य के हांतो से चीन लेता है.. तब काव्य ने अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को दबोच रख liya......kavya अपनी सनसनी थामे ऐनी वाले पलों का इन्तजार कर रही थी.... वो हाथ करीम हटा देता hai....Pink कलर के निप्पल जो एक दम तने हुए थी... करीम के सामने आ जाते है.. ये सब देख कर करीम मनो जैसे पागल हो जाता है..... तने हुई निप्पल को देखते हुई करीम का लुंड झटके खाने लगता है........

अब काव्य को वाल से सत्ता कर उसके ऊपर झुक कर उसकी चुकी को मुँह मैं भर कर चूसने laga.....apne निप्पल पर करीम के जीभ को महसूस होते ही काव्य एक दम से सिहर उठी....

उसने अपने होंटो को डेंटन मैं भींचते हुए मादक आवाज़ें निकलना शुरू कर diya......aur अपने सर के पीछे हाट दाल के विंडो को और जोर से अपने हाथों मैं लेकर पकड़ना शुरू कर दिया....

काव्य- ुम्हह सीईई करीम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुजीबी मुजीईई कुछ हो रहा हैई ओह्ह्ह्हह बुस्स्सस्स्स्स करूऊ अह्हह्ह्ह्ह करीम

करीम ने अपने मुँह को उसके निप्पल से हटाया और काव्य के चहरे के और देखते हुए बोलै......

करीम- काया हो रहा हैई काव्य jeeee.....accha नहीं लग रहा क्या ? बोलो मजा आ रहा है ना

और एक बार फिर से करीम ने काव्य के निप्पल को अपने होंटो मैं भर कर चूसना शुरू कर दिया. काव्य का बदन एक बार फिर से थरथरा utha.....poore बदन मैं मस्ती और वासना के लेहरिये दौड़ गए......

काव्य- सीईईई करीम बस्स्स नाहीइ ओह्ह्ह्हह भोत अछाअअअ लग रहा हैईईई ओह्ह्ह्हह्ह मुजीब काया हूँ रहा ही ओह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सीईई ुंहःहःहःहः......

कवय अब्ब पूरी तरह गरम हो चुकी thee.....neeche करीम का तना हुआ लुंड अब्ब उसके छूट के ऊपर और नाभि के नीचे पेट पर रगड़ खा रहा tha.....Karim ने काव्य के निप्पल को चूसते हुए अपने एक हाथ को नीचे ले जाना शुरू किया ..

जैसे ही काव्य को ये अहसास हुआ तो काव्य ने सहरमा कर अपनी झांगों को बीच liya....uske दोनों टाँगें आपस मई चिपकी हुई thee.....aur टांगों के अप्प्स मैं सटे होने के कारन काव्य के छूट के फांकों के पतली से लकीर नीचे से साफ़ नज़र आ रही thee....Karim ने काव्य के टांगों को पकड़ कर अपने कंधे पर रख diya....jisse से काव्य के गोल गांड जमीं से थोड़ी सी ऊपर उठ गए.. और काव्य के छूट के फांकों के लकीर करीम के सामने भोत ही कामुक नज़ारा पेश कर रही थी....

करीम को अपने लुंड के नसों मैं खून का भाव और तेज होता महसूस हो रहा tha....usne काव्य के झांगों के नीचे वाले हिस्सों को चूमते hue,apni एक ऊँगली को काव्य के छूट के फांकों मैं आहिस्ता से घुमा दिया......

काव्य- अह्ह्ह करीम मुजेसी सीए सहनननन नहीं हो रहा हीी..

काव्य एक दम से सिसक uthi....abb करीम एक पल के लये भी देर नहीं करना छठा tha.....usne धीरे धीरे उसकी टांगों को अपने कंधे से नीचे utara....aur उसके अप्प्स मैं सटी हुई झांगों को धीरे धीरे खोलना शुरू कर दिया....

काव्य अपनी छूट को करीम से छुपाये रखें के लये अपनी झांगों को भेंचने मैं जोर लगा रही thee....par अब्ब भोत देर हो चुकी थी... अब्ब तो उसकी छूट के फांकें भी करीम के लुंड के गरमी का अहसास पाने के लिए फुदक रही थी....

और करीम ने धीरे धीरे काव्य के झांगों को खोल दिया....

करीम- उफ़ काया नज़ारा है सामने..... मेरी जान.. kavya….ek दम कासी हुई छूट…

शर्माकर काव्य आपने चेहरा छुपा लेती hai..dono फांकें अप्प्स मैं सटी हुई थी ....जो मुश्किल से थोड़ा खुल रही thee...jo शायद काव्य के छूट मैं हो रहे संकुचन के कारन हो रहा tha....aur उस्सकी छूट से काम रास बह कर नीचे उसके गांड के छेद के तरफ जा रहा था....

काव्य इतनी मस्त हो चुकी thee...ki उसके गांड अपने आप ऊपर के और उठाने lagee....jisse उसकी छूट करीम के लुंड के मोठे के सुपड पर दबाने lagee.....aur करीम के लुंड का सुपड काव्य के छूट के फांकों को फैलता हुआ अंदर के और घुसाने laga....aur जैसे ही करीम के गरम सुपड ने काव्य के छूट के गुलाबी छेद को छुआ तो वो एक दम सिसक उठी....

काव्य- अह्ह्ह सीईई करीम ुंहःहःह भोटा माजा आए रहा haii....karooo नाआ अह्ह्ह करीम .....

करीम- : काया करू काव्य जी.....

काव्य: (करीम के बात सुन कर काव्य एक दम शर्मा gaye...aur एक हलाकि से मुस्कराहट उसके होंटो पर फेल गए....) अह्ह्ह्ह अब्ब ऑर्डर बरदस्तटत नहीं हो रहा है.....

करीम: (काव्य के दोनों चुच्यों को मसलते हुए) अह्ह्ह बोलो ना काया करूँ....

काव्य: अह्हह्ह्ह्ह छोड़ो मुजीई.......

उधर नीचे करीम के लुंड का दहकता हुआ सुपड काव्य के छूट के छेद पर रगड़ खा रहा tha.....aur काव्य वासना के सागर मैं डूबती जा रही thee....abb वो और मस्त होकर सिसाय रही thee...Karim ने अपने लुंड को ठीक काव्य के छूट पर सेट kaya.....aur काव्य के कानो के पास अपने होंटो को लेजाकर कहा....

करीम: काव्य जी वैसे तो तुम पहली बार छुड़वा नहीं रही हो........ फिर भी बता दे रहा हु… किसी और से छुड़वाना और करीम से छुड़वाना फरक होता है.. तेरा हस्बैंड कैसे तुजे छोड़ता है ये तो मुझे पता नहीं है.. पर मेरे से छुड़वाते टाइम हर किसी को पहली बार थोड़ा दर्द होता hi है ..

काव्य है मई गार्डन हिलती है..

काव्य : अह्ह्ह्ह मुजीब अब्ब्ब्ब और इंतजार नहीं हो रहा.....

करीम ने घुटनो के बल बैठते हुए काव्य के टांगों को खोल कर घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठा daya....aur एक जोर दर देखा mara...Karim का लुंड काव्य के छूट के टाइट छेद को फैलता हुआ अंदर घुसते हुए आधे से जायदा अंदर जा ग़ुस्सा.....

काव्य: अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह maaaaaaaaaaa ....... miiiiiiiiiiiiiiiiiii

काव्य एक बदन मैं एक दम से दर्द के तेज लहर दौड़ gaye….usse अपनी छूट का छेद एक दम पहला हुआ महसूस कर रही thee….aur उससे लग रहा था जैसे इस दर्द से उसकी जान ही निकल jayge….par किसी तरह से काव्य ने अपनी आवाज़ को दबा लाया tha…..jisse उसके दर्द भरी आवाज़ उस कमरे मैं ही घुट कर रह गए….

काव्य: ओह्ह्ह मुमीइ भोत दर्द हो रहा hai……Karim बहार निकालो इससे….

करीम: सीई चुप karo…kuch नहीं hogaaa..thodi देर साबरा karo.phir सब ठीक हो जायेगा….

काव्य: (रुंआसी आवाज़ मैं) अह्ह्ह्ह नहीं मुजसे बर्दास्त नहीं हो raha….ise बहार निकल lo…bhot दर्द हो रहा है…..

करीम- पहले तो कही बार चूड़ी होगी न आपने हस्बैंड से..

काव्य- वो इतने बेरहमी से नहीं छोड़ते है न

करीम ने काव्य के आवाज़ को दबाने के लये उसके होंटो को अपने होंटो मैं भर liya…aur उसके दोनों निप्पल को अपने हाथों को उंगलयों मैं धीरे धीरे मसलने laga……har पल कवय का दर्द काम होता जा रहा tha…..aur उससे करीम के लुंड के गरमी अपनी छूट मैं भोत अनाददायिक लग रही थी….

जब करीम ने कवय के होंटो से अपने होंटो को अलग काया, तो उसने काव्य के चहरे के तरफ dekha…..kavya के ऑंखें बंद thee….aur उसके चहरे पर अब दर्द के भाव थी

करीम: अभी भी भोत दर्द हो रहा है क्या ?

काव्य: हाँ पर अब्ब काम है……

ये सुन कर करीम के होंटो पर मुस्कान फेल gaye…..aur उसने झुक कर काव्य के चुकी को मुँह मैं भर liya….aur उसके निप्पल के चारो और जीभ घूमते हुए, उसके चुकी को जोर जोर से चूसने laga….kavya के पूरे बदन मैं सिहरन दौड़ gaye….uska पूरा बदन एक बार फिर से मस्ती मैं कंपनी लगा…..

काव्य- अह्ह्ह्ह करीम सीईई अह्हह्ह्ह्ह भोत अच्छा लग रहा हैई ओह्ह्ह्हह्ह अब्बब्बब्बब्ब डरडडडडड नहीं हो रहा ……ओह्ह्ह्हह्ह करिमममम….

करीम के बातें और सिसकियाँ इस बात का इशारा था की अब वो छुड़ाने के लये पूरी तरहनह से तैयार hai…uski छूट के दीवारे करीम के लुंड को अंदर ही अंदर मसल रही thee…..aur काव्य अपनी छूट के दीवारों पर करीम के लुंड को महसूस करके सिकौर और फेल रही थी…..

करीम के लुंड का अहसास काव्य को अपनी छूट के अंदर सवर्ग का अहसास करा रहा tha….uski गांड अपने आप ही ऊपर नीचे होने lagee…..jaise करीम को इस बात कर अहसास hua…..usne dhere-dhere अपने आधा से जयादा लुंड काव्य के छूट से बहार निकल laya…Karim के लुंड का सुपड काव्य के छूट के दीवारों से रगड़ खता हुआ बहार ऐनी लगा……

करीम के लुंड के सुपड के रगड़ को अपनी छूट के दीवारों पर महसूस करके काव्य के पूरे बदन मैं मनो जैसे बिजली कोंध गए ho….usne अपनी बाँहों को करीम के पीठ पर कास laya…..aur अपनी गांड को ऊपर के और उठा कर करीम के लुंड को एक बार फिर से अपनी छूट मैं लेने के लये मचल उठी. करीम काव्य के इस उतावले पर को देख कर मान ही मान भोत खुस हो रहा tha….usne भी काव्य को अपनी बाँहों मैं भर कर एक बार फिर से अपने लुंड को धीरे धीरे छूट के अंदर सरकना शुरू कर दया….

करीम के लुंड के सुपड के रगड़ को एक बार फिर से महसूस करके, काव्य मस्ती मैं सिसक उठी…….

काव्य- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करीम भोत अच्छाआ लग रहा ही करूओ ना..

काव्य पागलो के तरह सिस्यते हुए, अपने होंटो को करीम के कन्धों और छथि पर रगड़ने lagee….jisse करीम भी और जोश मैं आ gaya….aur अपने लुंड को धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा….

करीम के हर देखें के साथ काव्य के पूरे बदन मैं मस्ती के लहर दौड़ jati….aur वो मस्त हो कर अपनी दोनों झांगों को पहला कर अपनी गांड को ऊपर के और उठा कर काव्य के लुंड को अपनी छूट के गेहरों मैं लेने के लये तड़प उठती…..

करीम- (काव्य के छूट मैं अपना लुंड अंदर बहार करते हुए) अह्ह्ह काव्य जी अपनी छूट भोत कासी हुई hai….kya गरम फुद्दी है आपकी……

काव्य करीम के ऐसे गन्दी बातें सुन कर बुरी तरह झेंप गए…..





उसके दिल के धड़कन और तेज चलने lagee…..Karim ने काव्य के होंटो को एक बार फिर से अपने होंटो मैं भर लिया….





और उसके होंटो को जोर जोर से चूसते हुए काव्य के छूट मैं अपने लुंड को अंदर बहार करते हुए ढकें लगाने लगा….

करीम के हर देखें के साथ काव्य और मस्त और गरम होती जा रही thee…uski कमर अपने आप ही लगतार हिल रही thee….jaise करीम के लुंड को अपनी छूट के गेहरों मैं समां लेना छथि ho….kavya के हाथ करीम के पीठ को सहला रहे thee…..jisse करीम का जोश हर पल बढ़ता जा रहा tha….aur वो और तेजी से अपने लुंड को छूट के अंदर बहार करने laga…..kavya के छूट पूरी तर्हां से पनाया गए thee…aur करीम का लुंड काव्य के छूट से निकल रहे काम रास से भीग कर आसानी से छूट के अंदर बहार हो रहा tha…..aur जब करीम के लुंड का सुपड काव्य के छूट गेहरों मैं उतर कर उसके बच्चेदानी पर लगता. तो काव्य एक दम से मचल uthati……aur उसके पीठ पर अपने नाख़ून को गधा देती….

काव्य- (करीम के होंटो से अपने होंटो को अलग करते हुए) अह्ह्ह्ह करीम चोदूओ मुजीब अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुजी कुछः हो रहा हीी अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह सी ुम्मःहःहः भोत मजा आ रहा हीी ओह्ह्ह्हह्हह ढेरी अह्हह्ह्ह्ह अहह ओह्ह्ह करीम मेंनननन तुमममममसीई भोत प्यार करती हुण्णनं…..

करीम- कहा हैं मेरी रानी तुम्हीं तो अब्ब्ब मैं दिन रात छोडूँगाआ. अह्ह्ह्हह्हह ऐसी छुट्ट्ट्ट मजा आ गयाए…..

काव्य अब झड़ने के बिकुल करीब पहुंच चुकी thee….abb वो भी पागलों के तरह काव्य के यहाँ वह अपने होंटो को रगड़ रही thee….aur करीम का लुंड अब्ब पूरी रफ़्तार से काव्य के छूट मैं अनादर बहार हो रहा tha….eka एक काव्य के पूरा बदन आकड़ें laga….usne अपनी टांगों को करीम के कमर पर कास लाया….

काव्य- अह्ह्ह्हह करीम धीरे ओह्ह्ह्हह मुजीई मेरा निकालें वाला हीी ओह्ह्ह्ह मैं पागल हो जौंगीय कर्म ओह्ह्ह्हह्ह

जैसे ही करीम को पता चला के काव्य अब्ब झड़ने वाले hai….usne अपने देखों के रफ़्तार को और बढ़ा daya….aur काव्य के छूट से लावे के नदी बह nikali….uska पूरा बदन जोर जोर से कनापने laga….aur कमर तेजी से झटके देने lagee…..kava बुरी तर्हां झड़ी thee…..apne पूरे जीवन उससे ऐसे सुख के अनुभूति नहीं हुई thee….usne करीम के सर को अपने बाँहों मैं कास laya….aur पागलो के तरह करीम के होंटो को चूसते हुए, झड़ने लगी…

करीम ने अपने ढको को जारी rakha….aur कुछ पालो बाद उसके लुंड ने भी काव्य के छूट को अपने वीयर से भर daya…..Karim के गरम वीर्ये के बौछार को काव्य अपनी छूट के दीवारों पर महसूस करके एक दम मस्त हो gaye…..usse अपना पूरा बदन एक दम हल्का महसूस हो रहा tha…..jhadne के बाद करीम काव्य के ऊपर हे लुढ़क गया…..

काव्य ने उसके माथे को चूम लिया और उसकी आँखों में देखकर कहने लगी

काव्य- मैं तुझे किसी के पास नहीं जाने दूँगी जान... तू सिर्फ मेरा है... मेरा यार... मेरा प्यार....

करीम गौर से काव्य को देखने लगा.... पर अब उसको माहि याद आ रही थी.............

अब करीम हाल मई आ जाता है… माहि जहा कड़ी थी वह उसके पास जाकर खड़ा हो जाता है..





वह माहि के अलावा अब कोई नहीं था.. थोड़े देर दोनों वह खड़े रहते hai..baat कोई भी नहीं करता है.. सामने सिमरन आकर कड़ी रहती है.. थोड़े दुरी पर ..





सिमरन की पीठ इन दोनों की तरफ थी.. सिमरन किसी से फ़ोन पर बात कर रही thi..beech बीच मई वो आपने कमर को जोरदार जतका दे रहे थे… जैसे करीम विब्रेटर ों करता है या उसकी स्पीड बढ़ाता था तो सिमरन अपनी कमर को जाहताका देते थे.. ये बात माहि को पता नहीं थी.. लेकिन माहि सोचने लगाती है की सिमरन मैडम ऐसे क्यों कर रहे है.. ये खेल लगबघ 5-10 मिनट चलता है.. करीम बीच बीच मई विब्रेटर की स्पीड बढ़ाता तो सिमरन उछाल पड़ती … माहि को कुछ समाज मई नहीं आ रहा था ये सिमरन मैडम को आज क्या हो गया है… सिमरन भी पीछे मुद के और आजु बाजु मई देख रहे थी की करीम कहा है.. लेकिन जैसे की सिमरन पीछे घूम जाते थी तब करीम वह वाल के पीछे चुप जाता था.. माहि सोचने लगते है की जैसे hi सिमरन मैडम पीछे घूमती है तब करीम क्यों चुप रहा है.. वो अब तक ये जान चुकी थी की करीम किसी को डरता नहीं है पर आज वो सिमरन मैडम को डरके क्यों चुप रहा है..

एक बार जब करीम विब्रेटर ों करने के लिए जेब मई हाट डालता है तब माहि देखती है.. जैसे hi करीम जेब मई हाथ डालता है वैसे hi वह दूसरी तरफ सिमरन उछाल पड़ती है… ऐसे hi 2-3 बार होता है… माहि सोचती है कुछ तो है इसके हाथ मई..

माहि- तुम सिमरन मैडम को देखके क्यों चुप रहे हो

करीम- कुछ नहीं ऐसे hi..

माहि- और तुम्हारे जेब मई क्या है..

करीम- कुछ नहीं है..

माहि- मई जानते हु कुछ न कुछ तो है…

करीम- कुछ भी नहीं है..

माहि- मुझे कुछ समाज मई नहीं आ रहा है.. सिमरन मैडम बीच बीच मई आपने कमर को जतका क्यों दे रहे है.. बीच बीच उछाल भी रही है..

करीम- मुझे क्या पता..

माहि- तुम तो पता होगा hi न..
 
करीम माहि की तरफ देखता है..

करीम- मुझे कैसे पता होगा…

माहि- तुम जब भी जेब मई हाट डालते हो तब सिमरन मैडम उधर उछाल पड़ती है.. वो क्यों…

करीम- मुझे क्या पता..

माहि- तुम्हारे जेब मई जो है वो पहले बहार निकालो..

करीम हसता है..

करीम- निकलू…

माहि है मई गार्डन हिलती है…

करीम जैसे hi विब्रेटर का रिमोट बहार निकलता है तो माहि करीम के तरफ आचर्य से देखते है..

माहि- ये तो रिमोट है…

करीम- हां..

माहि- मतलब तुमने सिमरन मैडम के साथ ?????????????

करीम- हां मैंने तुम्हारे सिमरन मैडम के छूट मई विबरटोर डाला है… और इस वजह से वो उछाल पद रही है..

माहि- क्या…

करीम- तुम यकीं नहीं है क्या… तो एक बार फिर से तुम शो दिखता हु.. लेकिन

माहि- लेकिन क्या..

करीम- हमें सिमरन से छिपाना पड़ेगा … इस वाल के पीछे ..

माहि है मई गार्डन हिलती है.. अब दोनों उस वाल के पीछे चुप कर देख रहे थे.. करीम जैसे hi विब्रेटर ों करता है सिमरन उछाल पड़ती है.. सिमरन पीछे मुद के करीम को देखने लगाती है.. जैसे hi उस विब्रेटर की स्पीड करीम बढ़ाता है वैसे hi सिमरन के चहरे के भंव बदलने लगते hai…aab सिमरन का चेहरा करीम और माहि के सामने था.. वो दोनों सिमरन को देख रहे थे… करीम विब्रेटर के स्पीड काम ज्यादा कर रहा था… सिमरन न चाहते हुई भी धीरे से अपना एक हाट छूट के पास ले जाती थी.. लेकिन जैसे उसे याद आता की वो एक पब्लिक प्लेस मई है वैसे hi सिमरन जाट से आपने हाथ ऊपर उठा लेती थी.. ऐसे hi कुछ 2-3 बार होता है.. सिमरन के ये हालत देख के माहि हँसाने लगाती है.. माहि और करीम जहा थे वह उनको कोई भी नहीं देख सकता था.. और उस हाल मई अब माहि ,सिमरन और करीम के अलावा कोई भी नहीं था.. शयद बाकि लोग बहार पार्टी हाल मई चले गए थे.. ये हाल रेस्ट के लिए था…

अब करीम माहि के हाथ मई विब्रेटर देता है.. और धीरे से माहि के एक शोल्डर पर आपने एक हाट दाल देता है और दूसरे हाट से माहि के दूसरे हाथ को पकड़ के विबरेटर का रिमोट चलने लगता है.. 5-10 मिनट तक ऐसे hi माहि करीम के हाथ के सहारे विबरेटर चलती है.. उसे अब मजा आने लगता है.. माहि को इस मई मज़ा आ रहा है ये देख के करीम आपने शोल्डर वाला हाथ धीरे से माहि के एक बूब्स के पास ले जाता है.. वैसे माहि उसके उस हाट को आपने एक हाथ से जतका देते है.. लेकिन बोलती कुछ नहीं है.. थोड़े देर करीम कुछ नहीं करता है..

थोड़े देर बाद करीम अब माहि के पीछे खड़ा हो जाता है.. चुचाप.. वो कुछ नहीं बोलता hai..Mahi भी कुछ नहीं बोलती है.. इस वक़्त माहि के अन्दर एक असमंज की स्तिथि थी.. वो करीम को न भी नहीं बोल प् रही थी और है भी नहीं बोल रही थी… वो करीम के तरफ पीछे मुद के भी नहीं देखती है.. करीम उसके पीछे खड़ा हो जाता है.. अब वो दोनों वह अकेले खड़े थे.. कुछ न बोलते हुई.. और थोड़ी दूरी पर सिमरन तड़प रही थी.. थोड़े देर बाद करीम माहि के पीछे चिपक के खड़ा हो जाता है .. आपने दोनों हाथ करीम माहि के दोनों बाजु से आगे ले जाता है और उसके दोनों हाथो पर रख कर रिमोट चलने लगता है..

इस वक़्त माहि के दिल ज़ोरों से धड़क रहा था............. करीम माहि की ये हालत देखकर मुस्कुरा पड़ता हैं.......

करीम- कुछ हो रहा है क्या मैडम आपको

माहि करीम की बात सुनकर बोल पड़ती है..

माहि- nahin............main......main ठीक हूँ.....

माहि के चहरे पर पसीने के कुछ बूँदें साफ़ चालक रहे थे......

करीम अपने सीने का भार माहि के पीठ पर थोड़ा और रख देता हैं और अपने दोनों हाथों को माहि के हाथों में थम लेता हैं रिमोट के ऊपर से hi.......Mahi चुप चाप वहीँ अभी भी खामोश सी कड़ी हुई thi......Karim अपना चेहरा माहि के गार्डन के पास लता हैं और बहुत धीरे से अपने जीभ आगे निकलकर माहि के कान के नीचे अपना होंठ रख देता हैं.......





करीम के इस हरकत से माहि एक बाफ फिर से बेचैन हो उठती हैं ........ उसके जिस्म के रोएं एक बार फिर से खड़े हो गए the....na चाहते हुए भी माहि के मुँह से सिसकारी फुट पड़ती हैं......

माहि- आए ... ssssssssssssssss .. हहहहहह.... ये क्या कर रहे हो करीम ......प्लीज मेरे इतने करीब न आवो.......

करीम झट से अपना एक हाथ माहि के गलों पर रख देता हैं और उसे अपने चेहरे की ओरे घूमता hain......Mahi एक नज़र करीम के चेहरे की ओरे देखती हैं और फिर अपनी नज़रें नीचे झुका लेती हैं........





करीम के हाथ अब माहि के कमर पर आ चुके थी.... इस वजह से माहि अब अपने आप पर काबू रख नहीं पा रही थी.... उसके गाल और कान दोनों लाल सुर्ख होकर दहकने लगी...... अब करीम ने अपने बाँहों को माहि के कमर के गिर्द कसकर उससे अपने से चिपका लिया..... इस वजह से माहि के ेड्याना ऊपर उठ gaye.....jo की माहि के एक और बढ़ी गलती thee....bhale ही माहि पर वासना हवाई होने लगी thee......par उसके मान का एक कोना उससे ये सब करने के लये रोक रहा tha.....par अगले ही पल नीचे करीम का तना हुआ लुंड सीधा माहि के गांड पर सदी के ऊपर से जा laga.....Mahi का पूरा बदन ऐसे कनाप गया ..... जैसे उसने बिजली के नंगी तारों को छू लाया हो...

करीम झट से अपना होंठ माहि के गार्डन पर रख देता हैं और बहुत आहिस्ता से वहां पर चूम लेता हैं.........





माहि के मुँह से एक बार फिर से सिसकारी फुट पड़ती हैं........ करीम झट से अपना एक हाथ माहि के नैवेल के पास ले जाता हैं और वहीँ अपने उँगलियों से बहुत हलके से वहां पर फिरने लगता हैं ....... माहि की इस वक़्त लज्जत से आंखें बंद हो चुकी thi.........wo कुछ डियर तक अपने उँगलियों को माहि के नैवेल पर घूमता हैं फिर वो दूसरा हाथ भी वहीँ रख देता हैं........

फिर वो दोनों हाथों से अपने उंगलिओं का कमल दिखता hain.......Mahi की सांसें एक बार फिर से तेज़्ज़ हो गयी thi.......tabhi करीम अपने दोनों हाथों को धीरे धीरे ऊपर की ओरे माहि के बूब्स की तरफ ले जाता हैं ...... इससे पहले की वो अपने दोनों हाथों से माहि के नरम बूब्स को थम लेता माहि झट से उसके बढ़ते हुए हाथों को थम लेती हैं और उसपर अपने दोनों हाथ रख देती हैं..........

माहि - ये क्या कर रहे हो Karim.........ye सही नहीं हैं.........

करीम – मैडम जी ......... प्लीज एक बार इन्हें अपने हाथों पर महसूस करने dijiye.......kab से मेरे ये हाथ तरस गए हैं इन्हें अपने हाथों में थमने के liye.......main आपके इन बूब्स को अपने हाथों से एक बार चूना चाहता हूँ.......

माहि झट से घूम कर करीम की ओरे देखने लगती hain.......is वक़्त उसकी आंखें सुर्ख लाल हो गयी थी................





माहि - ाचा तो अब तुम मेरा फायदा उठाना चाहते हो........

माहि के चेहरे पर एक शरती मुस्कान थी........

माहि – सिमरन मैडम को तड़पते हुई तुम मेरा फायदा उतना चाहते हो..

करीम- वैसे कुछ प्लान तो नहीं था .. पर आप कह रहे हो तो वैसे भी किया जा सकता है..

करीम के ऐसे कहते hi माहि घूम गयी और बोल पड़ी..

माहि- मुझे क्या इतना बुद्दू समाज है क्या ..

ऐसा कहके करीम के कंधो को पीछे के और dekhela....aur अपने आप को संभालते हुई वह से दूसरे और चल पड़ी… जाते वक़्त उसने करीम को विब्रेटर का रिमोट दे दिया..

करीम पार्टी हाल मई आते hi सिमरन करीम को इशारा करती है… बाजु वाले छोटे से कमरे मई आने का इशारा करती है.. वैसे करीम उस कमरे मई जाता है.. सिमरन इधर उधर देखने लगाती है और थोड़े देर बाद उस कमरे मई जाती है..

करीम- Simran....baat क्या hain......tumne मुझे यहाँ क्यों बुलाया .....

सिमरन - बस ऐसे hi........ek बात केहनी थी ........

करीम – बोलो क्या बात है .....





सिमरन - लगता हैं आपको मेरी फ़िक्र hi नहीं है............

अगल hi पल करीम सिमरन की बात सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं

करीम- - वैसे बात नहीं है सिमरन

सिमरन- मुझे अकेला छोड़ के कहा चले गए थे इतने देर तक..

करीम- यही था.. इधर उधर घूम रहा था..

सिमरन- - आप मेरे साथ ये सब क्यों कर रहे हो …

करीम- क्या हुआ .. मैंने क्या किया..

सिमरन- मैं कब से इस आग में जल रही हूँ .............. आपने सुबह से मेरे अन्दर जो विब्रेटर दाल के रखा है उस से मई परेशां हो चुकी hu…aapko तो मेरी ज़रा भी परवाह नहीं हैं........

करीम- परवाह क्यों नहीं है…

सिमरन- अब बातें मुट्ठ बनाओ और चुप चाप घर चलो .......अब मेरा साबरा टूटता जा रहा हैं......

करीम - इतनी भी क्या जल्दी हैं सिमरन .......अभी तो पार्टी सुरु हुई है .........

अगले hi पल सिमरन फ़ौरन करीम के और करीब आती हैं और उसके सीने से फ़ौरन लिपट जाती hain........aur करीम के होंठों को बड़े प्यार से चूम लेती हैं.....





और कहती है...

सिमरन - पार्टी गयी भाड़ में ........ मुझे नहीं करनी कोई पार्टी .............. आपको मुझपर ज़रा भी तरस नहीं aata........kya हालत कर दी हैं आपने मेरी इस waqt.......main आपको बता नहीं sakti.......meri पंतय पूरी भीग चुकी hain........aab और नहीं बर्दास्त होता mujhe.......please.......main आपके सामने हाथ जोड़ती hoon............meri प्यास अभी बुझा दीजिये......

करीम- यहाँ ....इस waqt...........tumhara दिमाग ख़राब हो गया हैं क्या सिमरन ......ये कोई तुम्हारा घर नहीं hain.......yaha बहार पार्टी चल रही hain.....aur इस वक़्त यहाँ ये सब करना पॉसिबल nahin........party के बाद हम घर चलकर ये सब आराम से कर लेंगे.......

करीम सिमरन को और तड़पना चाहता था..

सिमरन - मगर मेरे हस्बैंड तो घर पर hi honge.......to उनके रहते ये sab.......its नॉट पॉसिबल........

करीम - तो फिर रात में आकर hi मैं तुम्हारे छूट की आग बुझा पाउँगा ...... बस तब तक साबरा करती रहो......

करीम ये जब कहता है उसके अगल hi पल सिमरन फ़ौरन अपने साडी का पल्लू अपने सीने से हटा देती hain.......aab उसके बड़े बड़े बूब्स करीम की आँखों के सामने the.......blouse mein.......Karim बड़े गौर से सिमरन के हर हरकतों को देख रहा tha.........Simran फ़ौरन करीम को नीचे बिठा देती है और अपनी साडी अपने घुटनों तक ऊपर की ओरे सरका देती हैं और फिर वो करीम के गॉड में आकर बैठ जाती hain......aab उसका चेहरा करीम के चहरे के ठीक सामने tha.......aur उसके दोनों पवन करीम के दोनों तरफ थे .......

सिमरन एक नज़र करीम के चहरे की ओरे बड़े गौर से देख रही थी .....उसकी आँखों में ......... फिर वो बड़े प्यार से करीम के होंठों को चूम लेती हैं .....





और धीरे धीरे अपने डेंटन से उसके नीचले होंठों को काटने लगती हैं...... करीम चुप चाप अपनी आँखें फाड़े सिमरन को एक तुक देख रहा tha.......aaj उसने सिमरन को छेड़कर अपने लिए खुद मुसीबत बुला ली thi.......Simran अगले hi पल अपने दोनों डेंटन के बीच करीम के होंठों को कसकर काट लेती hain.....wahin करीम दर्द से चीख पड़ता hain.....magar सिमरन उसकी परवाह किये बगैर अपने डेंटन को उसके होंठों से नहीं हटती.......

जैसे जैसे सिमरन अपने डेंटन पर दबाव डालती जा रही थी वैसे वैसे करीम की चीखें भी बढ़ती जा रही thi........wo बार बार सिमरन को अपने से दूर करने की कोशिश कर रहा tha.......dono की सांसें एक दूसरे से पल पल टकरा रही thi....dono की गरम सांसें एक दूसरे में घुल रहे the........Simran का बदन किसी आग के सामान टप्प रहा tha........Simran पागलों की तरह करीम के होंठों को अपने डेंटन से कटे जा रही थी......

कुछ देर बाद करीम फ़ौरन अपना हाथ सिमरन के बल पर ले जाता हैं और कसकर अपने मुट्ठी से उसके बालों से ज़ोरों से भींच लेता hai.......agle hi पल सिमरन वहीँ ज़ोरों से दर्द से सिसक पड़ती hain......uske सिसकने से उसके डेंटन के बीच दबा करीम का होंठ आज़ाद हो जाता हैं और करीम फिर से वहीँ ज़ोरों से सिसक पड़ता hain.....uske होंठों से अब खून धीरे धीरे बहार की ओरे बहने लगा tha.....wahin सिमरन धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं.........

करीम - Simran....tum सच में बहुत जालिम चीज़ ho.......ye क्या तारीख हैं किश करने ka..........tumne मेरे होंठों से खून निकल दिया........

सिमरन एक नज़र करीम की ओरे घूरती हैं.......



इस वक़्त उसकी आँखें हवस में पूरी तरह से सुर्ख लाल हो चुकी थी.........

सिमरन - अब पता चला की दर्द क्या होता hain..........main पिछले 4 घंटे से इस आग में तड़प रही हूँ उसका आपको कोई होश nahin..........main आपके जैसी नहीं hoon......mujhe तो दर्द में भी मज़ा आता hain.......agar यकीन न आये तो एक बार आप खुद hi आज़मा कर देख लीजिये.........

ऐसे कहते हुई अगले hi पल सिमरन अपने दोनों बूब्स को करीम के चहरे पर ले जाती हैं और अपना एक हाथ अपने उभारों पर रखकर उसे ज़बरदस्ती करीम के मुँह में डालने लगती हैं.......... करीम धीरे से अपना मुँह पूरा खोल देता हैं और उसके ब्लाउज के ऊपर से hi सिमरन के दूध को पीने लगता hain.....Simran की आँखें लज्जत से बंद हो जाती हैं और वो वहीँ ज़ोरों से aaaaaaaaaaaaaaa.sssssssssssssssssss...................hhhhhhhhhhhhhhhhhh.....karte हुए सिसक पड़ती हैं......

सिमरन - ऐसे नहीं ....... करीम ......aaaaaaaa......hhhhhhh......meri निप्पल्स को अपने डेंटन से कसकर काटो ......... चबा जाओ inhein.........chahe मैं कितना भी चीकून .......chillawun......tumse रेहम की भीख mangun........aap मेरी परवाह मुट्ठ karooo........aap अपने डेंटन से मेरी निप्पल्स ऐसे hi कसकर काटते रहो ....... प्लीज .......aaaaaaaaaa........sssssssssssss........

अगले hi पल करीम अपना मुँह पूरा खोल देता हैं और अपने दोनों डेंटन के बीच सिमरन की राइट निप्पल को उसके ब्लाउज के ऊपर से hi दबा देता हैं और फिर अपने डेंटन में लेकर उसपर अपने डेंटन से धीरे धीरे दबाव डालने लगता hain........jaise जैसे वो सिमरन के निप्पल्स पर अपने दांत गदा रहा था वैसे वैसे सिमरन की सिसकारी बढ़ती जा रही थी..........

सिमरन – aaaaaaaaaaa ........ hhhhhhhhhhhhhhhhhh......mmmmmmmmmmmm......iiiiiiiii...........aur kaskar............aur ज़ोर se......kato .........

सिमरन की सांसें बहुत ज़ोरों से चल रही thi.....hawas ने आज उसे पूरी तरह से मज़बूर कर दिया tha....wo ये भूल चुकी थी की वो इस वक़्त आपने फ्रेंड की पार्टी में हैं.... एक छोटे से रूम मई है ..और कोई भी उन्हें आसानी ढूंढते हुई वह आ सकता hain........magar आज उसे किसी बात की कोई परवाह नहीं thi.....pichel 4 घंटों से वो अपने छूट में विब्रेटर लिए हुई thi.....aur अब उसके छूट की आग अब पूरे उफान पर thi....ek भी बार उसका ऑर्गैस्म नहीं हुआ tha......jab वो ऑर्गैस्म के नज़दीक पहुँचती तभी करीम वाइब्रेटर की स्पीड कम कर deta.....aab वो हवस में मनो पागल सो हो गयी थी....

करीम अपने दोनों डेंटन के बीच कसकर सिमरन की निप्पल्स कटे जा रहा tha......wahin सिमरन दर्द के साथ साथ मज़े में डूबती जा रही thi.....ek अलग सा एहसास उसके चेहरे पर साफ़ नज़र आ रहा tha........aur साथ hi साथ कुछ सटिस्फैक्शन bhi.......wo दोनों हाथों से करीम के सर को सेहला रही thi.........aur उसके सर के बालों को अपनी मुट्ठी से मसल भी रही thi.......Karim इस बार नहीं रुकता और पूरी ताक़त से सिमरन के णीप्पस को काट लेता hain.....wahin सिमरन इस बार दर्द से चीख पड़ती हैं .... aaaaaaaaaaaaaa .......... sssssssssssssss.....jaisi आवाज़ें सिमरन के मुँह से पल पल गूँज रही thi..........uski आँखों में दर्द से आंसूं आ गए थे..... मगर फिर भी वो अपने बूब्स को करीम के मुँह से एक पल भी नहीं हटा रही thi.........aur बार बार वो उसे काटने को कह रही थी......

सिमरन –mmmmmmmmmmmm ... आआआआआ ....... स्स्स्सस्स्स्स ....... और zor.....se ......काटो इन्हें ...........

करीम भी उसकी परवाह किये बगैर पूरी ताक़त से अपने डेंटन के बीच उसकी निप्पल्स को चबा रहा tha......wahin उसके थूक से सिमरन की ब्लाउज भी कुछ गीली हो गयी thi.......ab उसके निप्पल्स का दर्द बढ़ जाता हैं तो वो फ़ौरन अपने दूसरे बूब्स को करीम के मुँह में दाल देती हैं और करीम फिर से उसके दूसरे बूब्स के निप्पल्स को भी काटने लगता हैं .......... दर्द और जोश दोनों का एक्ससिटेमेंट सिमरन इस वक़्त महसूस कर रही thi.........wahin उसकी छूट से लगातार पानी बेहटा जा रहा tha.........panty उसकी गांड से पूरी तरह से चिपक गयी thi........uska जिस्म हवस की वजह से काँप रहा tha......aisa लग रहा था जैसे उसने कोई बहुत बड़ी तूफ़ान अपने अंदर समेटे राखी हुई ho......Karim पूरी ताक़त से इस बार फिर से सिमरन के णीप्पस को काट लेता hain......wahin सिमरन फिर से सिसक पड़ती हैं.........

सिमरन - aaaaaaaaaa.bbbbbbbbbbbbbbb.......bbbbuuusssssssssss..............aab और नहीं....

और सिमरन वहीँ ज़ोरों से हाफने लगती hain......sansein उसकी बहुत ज़ोरों से चल रही thi.........agle hi पल करीम अपना मुँह सिमरन के निप्पल्स से हटा लेता hain...wo भी इस वक़्त वहीँ लुम्बी लुम्बी सांसें ले रहा था .........इस वजह से सिमरन का ऑर्गैनिस्म नहीं होता hai..Simran की आँखों में इस वक़्त आंसूं the........wo अपने ऑर्गैस्म न होने की वजह से बहुत परेशां thi......aab उसका किसी भी चीज़ में ध्यान नहीं लग रहा tha....wo अब मनो पागल सी हो गयी थी........

करीम - ssssssss.......aaaaaaaaaaa.....bus करो सिमरन ........यहाँ ये सब ठीक नहीं.......

और करीम फ़ौरन सिमरन का पालू उसके सीने पर दाल देता हैं.........

सिमरन - ..... aaaaaaaaaa ........ nahin............Karim तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर sakte........mujhe आज किसी की परवाह नहीं hain........agar तुम अभी मुझे कहोगे की मैं अपने सरे कपडे यहीं उतर दूँ तो मैं तुम्हारे लिए ये भी करने को तैयार hoon.......jise देखना हैं वो देखें.........

करीम को भी यही चाहिए था.. वो सिमरन को जलील करना चाहता था.. लेकिन वो सिमरन को वैसे दिखता नहीं चाहता था..

करीम - होश में आवो Simran........ye सब यहाँ ठीक नहीं........

सिमरन - तो फिर हम लोग यहाँ से चलते है.. कहीं किसी होटल में चलते है aabhi.......isi waqt......main तुम्हारे साथ किसी होटल में जाना चाहती hoon.....wo जगह तो सेफ रहेगा na.........meri चुदाई के लिए.......

करीम बड़े प्यार से सिमरन के लबों को चूम लेता हैं........





और फिर वाइब्रेटर की स्पीड बिलकुल कम कर देता हैं......

करीम - nahin........aaj nahin.........kabhi मैं तुम्हें होटल भी ले jawunga.....aabhi सही वक़्त नहीं आया हैं......

फिर वो सिमरन को उठा के बाजु मई बैठता हैं और वहीँ टेबल पे रखा बोतल का ठंडा पानी सिमरन को पीने को देता हैं.......

करीम - ये पानी पी लो सिमरन ........ यकीन करो mera......tum एक द्क्प हो.. एक बहोत बड़ी पुलिस अफसर हो.. तुम्हारी बहोत इज़्ज़त है यहाँ.. लोग बहोत डरते है tume...........aur मैं कभी नहीं चाहूंगा की तुम्हारी इज़्ज़त सरे आम नीलम ho........tum मेरी बात समजह रही हो naa.........bus थोड़ा सा साबरा रखो ....... तुम्हारी ये प्यास मैं ज़रूर bujhawunga.......jab आग मैंने लगायी हैं तो इस आग को बुझाना अब मेरी ज़िम्मेदारी हैं.......

( लेकिन मान मई सोचता है तेरे इज़्ज़त तो सरे आम ये करीम hi उतरेगा.. पहले दिन बहोत नखरा कर रही थी न… अब देख मई तुजे कैसे तड़पता हु )

फिर करीम बड़े प्यार से सिमरन के गलों से बहते आंसूंओं को चूम लेता हैं





और उसका सर अपने सीने पर रख देता हैं.......





करीम सिमरन के इज़्ज़त कर के उसे तड़पना चाहता tha..Simran बस ख़ामोशी से चुप चाप करीम की बाँहों में thi..........aab उसके मुँह से एक भी बोल नहीं फुट रहे थे......

करीम - चलो देर हो रही hain.........chalte हैं बहार........

सिमरन की दोनों निप्पल्स इस वक़्त बहुत जलन कर रही थी ........ करीम ने उसे बहुत ज़ोरों से कटा था .......... शायद वो दोनों सूझ कर लाल भी हो गयी थी ......... सिमरन अपनी साडी सही करती हैं … ताकि उसका गीला ब्लाउज किसी को न दिख paye..aur फिर वो उस हाल के तरफ चल पड़ती हैं...........

अब वो दोनों बहार पार्टी हाल मई आ जाते है..

वह एक दारू के लिए काउंटर tha..yahan कई वैरायटी की महंगी दारू वगैरह थी.........

करीम सिमरन को आगे चलने का इशारा करता हैं .......

करीम- सिमरन तुम दारू पिटे हो न..

सिमरन न मई गर्दन हिलती है..

तभी करीम एक बार फिर से उस वाइब्रेटर की स्पीड फ़ौरन तेज़्ज़ कर देता हैं और एक बार फिर से सिमरन वहीँ तड़प उठती हैं........

एक बार फिर से करीम ने उसे पूरी तरह से मज़बूर कर दिया tha.........wo सिमरन के पास जाता हैं और उसे बार काउंटर के पास चलने का इशारा करता हैं.....

सिमरन - Karim.....please......band करो ise........aab और nahin...........aab नहीं सहा जाता मुझसे.......

करीम - एन्जॉय करो Simran......is मोमेंट को........

सिमरन- मुझे क्यों तड़पा रहे हो.. यहाँ नहीं रुकना है मुझे … मुझे किसी होटल मई लेके चलो..

करीम- हां सिमरन .. जायेंगे होटल मई..

सिमरन बहोत कुश हो जाते है ..

सिमरन- सचमुच..

करीम- लेकिन उसके लिए मेरे एक कंडीशन है.. मेरे एक शर्ट है..

सिमरन झट से बोलती है..

सिमरन- तुम्हारी हर शर्ट मुझे मंजूर है..

करीम- सुनो पहले..

सिमरन- बता दो

करीम- वो जो काउंटर पर लड़का बैठा है

सिमरन- हां.. उसका क्या ..

करीम हौले से सिमरन के करीब जाता हैं और उसके कानों में कुछ कहता hain......agle hi पल सिमरन के चहरे का रंग बिलकुल फीका सा पढ़ जाता हैं ......वो धीरे से ना में अपनी गार्डन हिला देती hain......aur करीम को फर्याद की नज़रियों से एक तुक देखने लगती hain........wahin करीम के चहरे पर शरारती मुस्कान थी......

सिमरन इधर उधर देखते है ..उसे आस पास कोई पाचन वाला दिखता नहीं है .. सिमरन करीम को घूरने लगती हैं.....

सिमरन – तुम अंदाज़ा भी हैं की तुम मुझसे क्या करने को कह रहे हो ....... उस काउंटर पे जो लड़का है उसको सडके करने ko........ye सब मुझसे नहीं होगा .......

करीम- ठीक hain......to फिर कुछ ऐसा करो की उसका लुंड फ़ौरन खड़ा हो जाये...... और उसे तुम अपने सीट पर बैठने पर मज़बूर कर do........yaad रखो ये काम तुम जितनी जल्दी करोगी उतनी hi जल्दी हम किसी प्राइवेट जगह जायेंगे ...... और तुम्हारी छूट की आग उतनी hi जल्दी bujhegi.......agar नहीं तो मैं भी यहाँ से कहीं नहीं जाने वाला ....... तड़पती रहो विबरटेर लेकर यहीं पर........

सिमरन बस इस वक़्त रू नहीं रही थी .......मगर करीम ने उसकी हालत रोने जैसी ज़रूर कर दी thi.......uska दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद सा पढ़ गया था....

तभी वो कटर वाला लड़का सिमरन के तरफ देखने लगता है .. करीम ये देख लेता है और करीम सिमरन को देखकर धीरे से आँख मार देता हैं..... और कहता है

करीम - जल्दी से आपने काम ख़तम करो नहीं तो ये वाइब्रेटर अब तब तक नहीं कम होगा जब तक तुम यहाँ से आपने काम ख़तम करके वापस नहीं निकल जाती.............

और सिमरन से दूर हुत्त जाता हैं.....

अब सिमरन का खड़ा होना मुश्किल होता जा रहा tha.........na hi वो अपने छूट पर हाथ रख सकती thi......aur न hi वो करीम को मन कर सकती thi.........jada लोग तो अब तक पार्टी मई आये नहीं थे मगर जो भी वह मर्द थे सबकी नज़र इस वक़्त सिमरन पर ज़रूर थी.... वह कटर पर एक लड़का था … इतने देर से वो सिमरन और करीम के तरफ hi देख रहा था .. उस काउंटर के पास सिमरन आते hi वो लड़का कहता है

लड़का- कहिये madam........aap क्या लेना पसंद करेंगी.......

सिमरन काउंटर पे आके बैठ जाते है.. उसने ये बात डबल मीनिंग में कही थी.... सिमरन एक नज़र उस लडके की तरफ देखती हैं फिर वो लडके को कहते है

सिमरन- वोदका…

वहीँ बाजु मई करीम खड़ा था .. वो बाजु मई खड़े होक देख रहा था ..

अब वो काउंटर के पास आके बैठ जाता है

करीम- लडके एक कड़क माल दे दे मुझे ..

करीम बड़े तेवर से बोलता है.. लड़का वो सुनके थोड़ा गुस्से मई बोलता है.. उसको लग रहा था अच्छा माल सामने बैठा है और ये बुद्धा किस माल के बारे मई पूछ रहा है..

लड़का- यहाँ देसी नहीं मिलते..

लडके के ऐसे बोलते है उतने hi जल्दी और बड़े आवाज मई करीम कहता है..

करीम- ये हरामी.. तूने मुझे समाज क्या रखा है… सेल मई क्या तुजे देसी पिने वाला लगता हु..

लड़का- आप गालिया मत दो …

तभी वह करीम का बड़ा आवाज सुनके माहि आ जाते है.. माहि को देख के करीम का आवाज और बाद जाता है..

करीम- तो क्या तेरे बक्वज सुनो ..

करीम का बड़ा आवाज सुनके लड़का थोड़ा नरम पड़ता है..

लड़का- आप ने hi कहा न कड़क माल.. इसलिए मुझे लगा …

करीम- क्या लगा भी भड़वे…

लड़का- sahab..plz गालिया मत दो न..

करीम का बड़ा आवाज देख के सिमरन को लगा की अब यहाँ पे सब लोग जमा हो जायेंगे और यहाँ तमाशा हो जायेगा ..सिमरन एक नज़र करीम के चहरे की ओरे देखती हैं फिर वो धीरे से उस लडके की तरफ मुस्कुरा पड़ती hai......baat को समाज कर वो उस लडके को कहती है..

सिमरन- साहब.. को जो चाहिए वो दे दो..

लड़का- साहब बताइये न आपको क्या चाहिए..

करीम- कॉकटेल..

लड़का करीम का पैक बनके करीम को देता है .. करीम आपने पैक लेके वह से चला जाता है.. तब वह पे माहि , माहि का पति और सिमरन का पति आ जाते है.. वो जैसे hi आ जाते है वैसे hi सिमरन आपने पैक आपने सदी मई छुपा लेते है..

सिमरन का पति – क्या हुआ यहाँ

वो लड़का कुछ बोलता उस से पहले hi सिमरन बोल पड़ी

सिमरन- उस ड्राइवर को थोड़ी ज्यादा हो गयी थी इस वजह से उसका जरा बहार निकल दिया

सिमरन का पति- वो तो अच्छा बाँदा है..

माहि का पति- ज्यादा हो गए होंगे .. जाने दो .. होता है पार्टी मई कभी कभी ..

माहि- सिमरन मैडम .. आप की तबियत कैसे है अब

सिमरन- अच्छे है

माहि- और गर्मी

सिमरन- कैसे गर्मी .. माहि

माहि बात को घूमते है.. चहरे पर हसी लेट हुई..





माहि- आप को फीवर आया था न .. वो गर्मी पूछ रही थी ( मन मई कहती है.. तेरे अन्दर की गर्मी नहीं पूछ रही थी.. वो तो करीम ठीक करेगा)

सिमरन- काम हुई है

सिमरन का पति- सिमरन.. आप यहाँ क्या कर रहे हो..

सिमरन- वो थोड़े वीकनेस फील कर रही थी इस वजह से जूस पिने आये थी यहाँ

सिमरन का पति- ok

सिमरन का पति सबको कहता है चलो बहार कह के चले जाते है.. सिमरन उनको कहती है आती हु मई थोड़ी hi देर मई… माहि सोचने लगाती है करीम को इसने बहार कैसे निकल लिया …

वो लोग जब बहार जाते है तब सिमरन जल्दी जल्दी अपना पैक पिने लगती hain...wahin बार बार उस लडके की नज़र सिमरन पर जा रही thi.....itna तो वो समझ hi चूका था की इस वक़्त सिमरन बड़ी जल्दी कर रही thi....magar वो क्या जनता था की इस वक़्त सिमरन की क्या हालत hain.....wo इस वक़्त अपने छूट में विब्रेटर लिए हुई हैं.........

वो लोग उस हाल मई से चले जाने के बाद करीम उस हाल मई फिर से चला आता है..

लड़का- madam.......aap बड़ी जल्दी में लग रही hain.....aap आराम से यहीं बैठ jaiye....aur आराम से आपने पैक पीजिये गए

.........

सिमरन एक नज़र करीम के चहरे की ओरे देखती हैं..





करीम के चहरे पर वहीँ हंसी thi......na जाने क्यों अब सिमरन को ऐसा लगाने लगा था की अब करीम की ये हंसी उसकी जान ज़रूर ले लेगी ......... .......

सिमरन की हालत इस समय बहुत ख़राब thi........wo तो सोचने समजने की हालत में भी नहीं thi......mazbooran उसे उस लडके की बात माननी पड़ती हैं और वो वहीँ चुप चाप बैठ कर आपने पैक धीरे से पीने लगाती है… अगर वो बात नहीं मानती तो वो जानती थी की करीम उस के साथ क्या करता … उसके छूट के साथ क्या करता .. ........ जैसे hi वो आपने पैक फिर से पिने लगाती है तभी करीम वाइब्रेटर की स्पीड फुल कर देता हैं और सिमरन एक बार फिर से तड़प उठती hain.......baar बार उसकी आँखें बंद सी होती जा रही thi......aur वहीँ वो अपने होंठों को बड़ी hi बेरहमी से काट भी रही thi......wahin सामने बैठकर वो लड़का सिमरन को अजीब सी नज़रियों से घूर रहा था ........ उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था … वो सोचने लग गया ..एक hi पैक मई मैडम को कैसे चढ़ गयी… मैंने कॉकटेल तो नहीं दे न.. चढ़ाने के बाद बाँदा आँखे तो बंद करता है लेकिन ये आपने होंठ क्यों कांत रही है.. बात मई कुछ गड़बड़ है..

अब करीम फिर से सिमरन के पास आकर बैठ जाता है..

करीम- क्या देख रहा है बे भड़वे …

लड़का निचे देखते हुई कहता है..

लड़का- कुछ नहीं साहब

करीम- सेल .. ऐसा कड़क माल पहले कभी देखा नहीं क्या...

लड़का शरमाते हुई ऊपर देखते हुई थोड़ा स्माइल देता है..

करीम- मादरचोद… तेरे बाप का माल है क्या .. जो मैडम को ऐसे बुरी नज़र से देख रहा है..

लड़का फिर से दर जाता है..

लड़का- साहब .. मैंने अभी तो कुछ किया भी नहीं है..

करीम फिर गुस्से मई कहता है..

करीम- मादरचोद.. बता तेरा साहब कहा है..

लड़का डरते हुई..

लड़का- साहब माफ़ करो na..garib हु साहब .. जॉब का सवाल है.. जाने दो न साहब..

करीम- तू जनता है मादरचोद ये मैडम कोण है

लड़का करीम की तरफ देखते रहता है..

करीम सिमरन की तरफ देखते हुई कहता है..

करीम- ये है द्क्प सिमरन कौर..

द्क्प का नाम सुनते hi लड़का आपने जगह पाई बैठ जाता है दर के...

लड़का- द्क्प… यानि पुलिस अफसर ..

करीम- हां.. उनके पास मई एक रिवाल्वर है.. ज्यादा शाहनपट्टी की तो तेरे को यह अभी गोली मर देगी ये.. बहोत गुस्सैल औरत है ये मैडम..

लड़का अब और ज्यादा डर जाता है …

लड़का- साहब माफ़ कर दो.. अभी ऐसे गलती कभी नहीं होंगे…

करीम- लडके .. मुझे एक बात बता..

लड़का- हां.. साहब..

करीम- ये मैडम एक डैम कड़क माल है न

लड़का डर के न न मई गार्डन हिलता है

करीम गुस्से मई कहता है

करीम- क्या कह रहा है.. ये कड़क माल नहीं है…

करीम सिमरन के तरफ देखके कहता है..

करीम- द्क्प मैडम.. ये लड़का कह रहा है आप ब्यूटीफुल नहीं हो

सिमरन ऊपर करीम के तरफ देखती है..





फिर वो उस लडके की तरफ देखते है.. लड़का डर जाता है.. उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था .. है बोलो तो मुसीबत न बोलो तो भी मुसीबत.. साला करो तो करू क्या.. अजीब मुसीबत मई डाला है इस बूढ़े ने.. उसको लग रहा था की मैडम अब उस पे गुस्स हो गयी है..

लड़का- मैडम.. मेरे कहने का वो मतलब नहीं है मैडम .. आप कड़क माल hi हो..

करीम- हरामखोर.. तू द्क्प मैडम से बत्तमीजी कर रहा है.. मैडम लगता है एक बार इस लडके को आप के हाथ का मार खाना है ...

लड़का- सॉरी.. सॉरी.. साहब .. मेरे कहने का मतलब है की मैडम ब्यूटीफुल है.. वो मई दर गया था न तो दर की वजह से मू से निकल गया..

करीम- हां हां.. बाटे मत बना.. मैडम के मू की तरफ मत देख ऐसे.. काम कोण तेरा बाप करेगा क्या..

लड़का- काम कर रहा हु मई साहब

करीम- मैडम का पैक कब का ख़तम हो गया है .. तुजे दिखता नहीं क्या.. रेपेट कर मैडम को..

वो लड़का सिमरन की तरफ देखने लगता है..

लड़का- द्क्प मैडम .. एक पैक रेपेट करो क्या आपको

सिमरन के अंदर की हिम्मत अब धीरे धीरे पूरी तरह से टूटती जा रही thi.........baar बार वो अपने हाथों को कसकर चेयर पर मसल रही thi........wahin अब उसके चहरे पर पसीने की चाँद बूँदें भी साफ़ नज़र आने लगी thi.......halanki अंदर A.C चल रही थी फिर भी सिमरन का बदन गर्मी से पूरी तरह से भीगता जा रहा था........

करीम – मैंने बताया तुजे समाज नहीं आता क्या तुझको

वो लड़का फिर से सिमरन की तरफ देख कर पूछता है… आखिर सिमरन का रहा सहा साबरा भी पूरी तरह से टूट जाता हैं..... और वो बस हाँ हूँ में अपना सर हिलती है .......... और कह पड़ती है

सिमरन – ladake…sssssssssss........ साहब ने जो बोलै है वो kar…........main अब बहार जा रही हु …

सिमरन कहना तो और भी बहुत कुछ चाहती थी .. क्यों की इतने देर से काउंटर पैर बैठ के करीम ने विबरेटर की स्पीड बहोत बड़ा दी थी इस वजह से उसकी हालत बहोत ख़राब हो गयी थी.. मगर अपने सामने उस अजनबी लडके को देखकर वो चुप हो जाती hain.........wahin करीम झट से अपने जगह पे से उठ जाता है और सिमरन को देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं.....

करीम – आप जरूर चली जाइएगा द्क्प मैडम.. लेकिन आपने पैक ख़तम कर के जायेगा.. इस लडके ने इतने प्यार से इससे बनाया है.. उसको ख़तम कर के जायेगा..

सिमरन करीम की तरफ देख के कहते है..

सिमरन - मगर..... .......अब ......

आगे वो बोल नहीं pati..tab वो लड़का बोल पड़ता हैं

लड़का – लगता है मैडम जल्दी में दिखाए दे रही हैं .. साहब मैडम को जाने दो..

सिमरन एक नज़र उस लडके के चहरे की तरफ घूरने लगती हैं मगर कहती कुछ nahin.....aakhir क्या कहती वो usse.......ki इस वक़्त उसकी क्या हालत हो रही हैं ....... बहार से शरीफ दिखने वाली वो इस वक़्त अपनी छूट में विबरेटर लिए घूम रही हैं........

अब सिमरन हाथ मई आपने पैक लेके बैठ जाते है ..सिमरन को ये समझ में नहीं आ रहा था की वो अब उस लडके को सडके कैसे kare.......wo भी करीम के samne.........shayad करीम उसकी परेशानी समझ गया था इस लिए वो फ़ौरन अपनी जगह से उठता हैं और बाथरूम करने का बहाना करके वहां से बहार की ओरे चला जाता हैं...... इधर सिमरन बिलकुल खामोश thi........aur लम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi.......use ये समझ में नहीं आ रहा था की वो ये सब शुरू कहाँ से करे..... वो सोच रही थी की अगर वो स्टार्ट भी कर दे तो लड़का रिस्पांस देगा की नहीं.. करीम ने इससे पहले से बहोत डरके रखा हुआ है … मगर जो भी था करना तो था hi उसे हर हाल mein..........apni छूट की प्यास के लिए hi सही......

अब वह से करीम चला गया था .. वह सिर्फ वो लड़का और सिमरन थी.. पैक पिटे पिटे hi सिमरन उस लडके को निहारने लगी.. और सोचने लगी .. कसिए शुरू किया जय..

वो लड़का भी बीच बीच मई सिमरन को देख रहा था और घर रहा था .. और वो भी सोचने लगता है.. सचमुच मई ये द्क्प है या बूढ़े ने मुझे ऐसे hi डरने के लिए बोलै ..तभी बहोत सोच विचार के बाद वो लड़का बोल पड़ता है..

लड़का- मैडम जी.. क्या मई एक बात पूछ सकता हु..

सिमरन उसके तरफ देख के कहते है

सिमरन- हां…

लड़का- क्या आप सच मई द्क्प है.. मतलब एक पुलिस अफसर …

सिमरन आपने चहरे पर एक हलकी सी स्माइल लेट हुई कहती है..





सिमरन- क्यों.. नहीं लगाती क्या.. मई पुलिस अफसर..

लड़का- वैसे बात नहीं है … मई सिर्फ मेरे तसली के लिए कह रहा हु..

सिमरन सोचती है अगर मई हां कहूँगी तो ये लड़का मुझे दर के रिस्पांस नहीं देगा और फिर दिन बार मुझे ये छूट की आग मई उलझना पड़ेगा.. इस को न hi कहूँगी..

सिमरन- नहीं हु..

लड़का बहोत कुश होता है..

लड़का- लगा hi मुझे..

सिमरन- ऐसे क्यों लगा..

लड़का- आप जैसे खूबसूरत औरत पुलिस मई कैसे हो सकते है…

फिर उसको अपनी गलती याद आयी..

लड़का- सॉरी.. सॉरी.. कुछ ज्यादा hi मई बोल गया.. सॉरी .. आप को बुरा लगा होगा न..

सिमरन - nahin......aisi बात नहीं हैं........... अगर तुम लगा की मई पुलिस अफसर नहीं हु तो पूछा क्यों ..

लड़का- मैडम ........ आप जितने ख़ूबसूरत है उतनी hi बोल्ड दिखती है .. इस वजह से दर लगाने लग रहा था..

सिमरन उसके तरफ स्माइल देते हुई कहती है..

सिमरन- तो क्या अब तुम्हारा डर चला गया..

वो लड़का हां मई गार्डन हिलता है..

अगले hi पल सिमरन के चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान तैर जाती हैं......





सिमरन - एक बात poochon......kya तुम्हारी शादी हो गयी हैं........

अगले hi पल वो लड़का अजीब सी नज़रियों से सिमरन के चहरे की ओरे घूरने लगता हैं....... वो ऐसे देखने लगता है जैसे आज से पहले उससे किसी ने ये सवाल कभी नहीं पुछा ho......uske चहरे पर हैरानी के भाव थे.......

लड़का - जी नहीं madam......main तो अब तक कुंवारा हूँ.......

सिमरन- कोई मिली नहीं या फिर कोई लड़की अब तक पसंद नहीं आयी......

लड़का - आप जैसे कोई मिली नहीं .. मैडम जी.........

सिमरन हसती है...





सिमरन फिर अपने पर्स काउंटर पर से धीरे से निचे जमीन पर गिरा देती हैं और फिर जब वो उसे उठाने के लिए झुकाती हैं अगले hi पल उसकी साडी का आँचल उसके सीने से हुत्त जाता hain........agle hi पल सिमरन के बूब्स का 70 % क्लेवराज उस लडके के आँखों के सामने होता हैं......

सिमरन के बड़े बड़े बूब्स अब उसकी आँखों के सामने the.....wahin सिमरन शर्म से पानी पानी होती जा रही thi.....wo ाचे से जानती थी की इस वक़्त लड़के की निगाह कहाँ पर हैं.....

एक अलग सा एक्ससिटेमेंट उसके जिस्म में फिर से दौड़ने लगता hain......choot में गीलापन और भी बढ़ चूका था ........ लड़का अपनी आँखें फाड़े सामने उस बाला को खा जाने वाली नज़रियों से घूरे जा रहा tha.....Simran ऐसे hi कुछ देर तक झुकी रहती हैं और कुछ देर बाद वो अपना पर्स उठती hain.......aur जब उसकी नज़र सामने खड़े लडके पर पड़ती हैं .......उसकी नज़रें अब भी सिमरन के सीने पर जमी हुई thi....jaise hi सिमरन की नज़र उससे टकराती हैं वो फ़ौरन अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेता hain.....wahin सिमरन अपनी साडी का ाचल ठीक करती hain........us लडके की भी हालत इस वक़्त देखने लायक thi.....baar बार वो थूक अपने गले के नीचे उतर रहा था....

ऐसा नज़ारा देखकर उस लडके का लुंड इस वक़्त पूरे उफान पर खड़ा tha.......aab वो अपनी शर्मिंदगी छुपाने के लिए वहीँ चेयर पर धीरे से बैठ जाता hain.....aur सिमरन को चुप चुप कर देखने लगता hain.......tabhi करीम भी बाथरूम से वह आता हैं और जब उस लडके को अपनी चेयर पर बैठा हुआ पता हैं तो उसके चेहरे पर मुस्कान और भी गहरी हो जाती hain.....wahin सिमरन शर्म से अपनी नज़रें नीचे की ओरे झुका लेती हैं.....





उसने इतनी जल्दी इन सब की उम्मीद तो बिलकुल भी नहीं की thi.....Karim जैसे से नज़दीक आता है वैसे hi सिमरन उस लडके से दूर हो जाती है … और शर्माकर निचे देखने लगते है.. फिर करीम जैसे hi उस लडके के पास आता है वैसे hi वो लड़का डरकर जैसे तैसे अपनी जगह से खड़ा होता हैं और अपने पेण्ट को सही से एडजस्ट करने लगता हैं....... करीम उस लडके को देखने लगता है.. उस लडके का खड़ा लुंड का टेंट वो पंत के उप्पेर से देखता है और सिमरन के तरफ हास्के देखता है .. अब करीम सिमरन के पास जाता है और धीरे से उसके कान मई कहता है..





सिमरन- रांड.. तू तो बाजारू रांड से फ़ास्ट निकली.. इतने जल्दी उस लडके का खड़ा भी कर दिया.. मन गए तुजे और तेरे नज़र को..

करीम के ऐसे कहने से सिमरन एक बार फिर शर्मा जाती है..





अभी भी वो लड़का सिमरन को अजीब सी नज़रियों से घूर रहा tha.......jo भी था आज उस लडके की लूटेरी लग गयी thi......wo बार बार सिमरन के जिस्म को घूर रहा था.... दूसरी तरफ सिमरन निचे देखकर शर्मा रही है ये जब करीम देखता है तब वो वाइब्रेटर की स्पीड बढ़ाता है.. करीम के ऐसे कहने से सिमरन तड़प उठाती है और थोड़े आगे चलती है.. उसके पीछे करीम आता है..

सिमरन - Karim....please......band कीजिये न इस वाइब्रेटर ko........nahin तो मेरी ये साडी पूरी ख़राब हो jayegi........aab और मुट्ठ तड़पाइए मुझे ....... प्लीज ................. aaaaaaaaaaaaa...................... मैंने अब आपका कहना मन न.. अब तो मेरे प्यास बजा दो न… करीम..

करीम उसके तरफ देख कर कहता है..

करीम- ठीक है .. चलो..

इसपर सिमरन कुश होती है..

सिमरन- मई आपने हस्बैंड से बात करती हु.. उसको बताती हु..

करीम- क्या बताओगी उसको.. करीम आज मेरे प्यास बजानेवाला है..

सिमरन अपनी कातिल अड्डा चहरे पर लेट हुई उसके शोल्डर को धीरे से मरती है..





सिमरन- चुप करो … बदमाश..

करीम हसता है..

सिमरन- मई बीमार हु ऐसे कहूँगी.. और घर जा रही हु.. ऐसे कहूँगी… वैसे भी पार्टी ख़तम होने मई और 3-4 घंटे लगेंगे न.. तो तब तक हम किसी होटल मई जाते है …

करीम- नहीं..

सिमरन- तो कहा..

करीम- आज मई तुम मेरे घर मई चौडूँगा..

सिमरन- लेकिन .. वह तुम्हारे वाइफ होगी न..

करीम- वो कही बहार मरने गयी है ..

सिमरन – तो ठीक है..

जब करीम सिमरन को लेके जा रहा था तब बहार हाल मई माहि बैठी थी.. जैसे hi करीम सिमरन के साथ आता है वैसे hi माहि करीम को एक जगह बैठे देखने लगते है..





करीम जैसे hi देखता है की माहि उन्दोनो की तरफ देख रही है तब करीम सिमरन के कमर मई हाथ रख देता है और सिमरन के तरफ देख के स्माइल करने लगता है.. तभी सिमरन को आपने हस्बैंड दिख जाता है वैसे hi सिमरन वो हाथ हटती है और फिर सिमरन आपने हस्बैंड से बात करने चली जाती है.. वो हस्बैंड से कुछ बात करती है और फिर रेतुर्न आकर करीम को कहते है चलो.. फिर करीम सिमरन के साथ चलने लगता है.. एक बार करीम माहि के तरफ पलटके देखता है .. माहि अब बैठी बैठी hi करीम और सिमरन को घर रही थी..





फिर करीम सिमरन के साथ कार मई बैठ जाता है.. बहार आकर माहि उन दोनों को देखने लगाती है.. ..

करीम अब वाइब्रेटर की स्पीड बहुत स्लो कर देता हैं और सिमरन कार में जाकर बैठ जाती हैं और लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain........Karim एक नज़र सिमरन के चहरे पर डालता हैं फिर वो ड्राइव करने लगता hain......aabhi भी उसके चेहरे पर मुस्कान थी.....

सिमरन – करीम तुमने ये सब क्यों किया मेरे साथ.........

करीम उसके चहरे पर नज़र डालता है..

करीम- क्या???

सिमरन- यही जो तुमने मुजसे करवाया … अभी उस लडके के saath..mera जिस्म दूसरों के सामने क्सपोसे करवाना….......

करीम हसता है …

करीम- वो क्या…

सिमरन चहरे पर नाटकी गुस्सा लेट हुई कहती है..





सिमरन- मुझे ये सब पसंद नहीं है.. मई कोई बाज़ारू औरत नहीं हु..

करीम - क्या करू Simran.......jab भी कोई तुम घूरता हैं न जाने क्यों मुझे बड़ा मज़ा आता हैं ........

सिमरन चहरे पर नाटकी गुस्सा लेट हुई फिर से कहती है..

सिमरन- तब तो तुम मुझे दूसरों के साथ छुड़वाते देखकर भी मज़ा आता होगा......

सिमरन बुरा सा मुँह बना लेती हैं वहीँ करीम सिमरन की बाटिओं को सुनकर हौले से मुस्करा पड़ता हैं.....

करीम- तू चाहे तो मई एक पार्टनर को बुला लूंगा.. हम दोनों एक साथ तुजे चौंड़ेगे… बहोत मज़ा आएगा..

सिमरन गुस्से से कहते है..





सिमरन- हरगिज़ नहीं..

करीम- एक बार तरय करने मई क्या प्रॉब्लम है..

सिमरन करीम को गुस्से से देखते है..

सिमरन- तुम अगर मुझे रंडी बोल रहे हो इसका मतलब मई कोई बाज़ारू रंडी नहीं हु..

करीम सिमरन का हाथ पकड़ता है..

करीम- एक बार..

सिमरन- नाहीइ…

सिमरन सोचने लगाती hai…oh...god.... पता नहीं मेरा आगे क्या होगा...... उदार करीम मैं मई कहता है.. वहीँ होगा जो मैं chahunga........hahahahah.......... आगे आगे देख तेरे साथ क्या होगा..

थोड़े डियर बाद वो दोनों करीम के घर पर पहुँच जाते हैं..... घर लॉक था ये देखकर सिमरन के चहरे पर खुशियां साफ़ दिखाई देने लगती hain.........aabhi घर पर करीम की वाइफ और बच्चे नहीं है ये देखकर सिमरन की बेचैनी अब हुड्ड से ज़्यादा बढ़ चुकी thi........wo अपने छूट में सुलह रही आग को बुझा लेना चाहती थी....... चाहे किसी भी हाल में........

करीम का घर एक स्लम एरिया मई था… छोटा सा घर था.. छोटे से दो रूम थे.. बहार के र्रोम मई शयद उसका टेलरिंग का काम चलता होगा.. साथ मई एक छोटा सा किचन था.. अन्दर वाले रूम मई एक छोटा सा बीएड था.. वह पे एक गन्दी से गद्दी थी.. उसपर पुराण हुई बेडशीट थी.. उसे देखकर ऐसा लग रहा था की उसको महीनो से वाश नहीं किया है.. घर के अन्दर आते सिमरन घर की हालत देखते है..
 
सिमरन उस बीएड को देखते हुई करीम को कहते है..

सिमरन- हम लोग यहाँ करेंगे…

करीम- तुजे छुड़ाना है या ये क्लीननेस्स देखने है..

सिमरन कुछ नहीं बोलती hai..is वक़्त घर मई कोई भी नहीं था..

जैसे hi सिमरन अंदर बीएड वाले रूम मई आती हैं वो फ़ौरन करीम के सीने से लिपट जाती हैं .... तब उसके माथे को करीम चुम लेता है..





तब सिमरन उसे बीएड पे गिरा देते है और उसके उप्पर आ जाती है.. उसके उप्पर आकर सिमरन करीम के होंठों को पागलों की तरह चूसने लगती हैं .... .....





वहीँ करीम भी झट से सिमरन की साडी उतरने लगता hain.....wo भी जल्द से जल्द सिमरन को नंगा करना चाहता tha.......Simran वहीँ ज़ोरों से सिसक पड़ती हैं और करीम के होंठों को तो कभी उसके कानों पर अपना जीभ फेरने लगती hain.........dono को आज बहुत जल्दी thi.....khas कर सिमरन को......

करीम एक एक कर सिमरन के सरे कपडे उतरना शुरू करता hain......pehle उसकी saadi....fir blouse...fir peticoat..........bra और लास्ट में उसकी panty........jab उसका हाथ सिमरन के पंतय पर जाता हैं तो करीम के चहरे पर मुस्कान और भी गहरी हो जाती हैं ...... सिमरन की पंतय पूरी तरह से भीग चुकी thi........uski छूट रूस में उसकी पंतय पूरी तरह से सं चुकी thi........aab करीम के हाथों में भी सिमरन के छूट का रूस लग चूका tha.....wahin सिमरन ज़ोरों से सिसक रही थी......

सिमरन - कक्क... आए... ररर... ीी... मममम… aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa... hhhhhhhhhhhhhhhh ........ अब और नहीं ....जल्दी से मेरी छूट की प्यास बुझा दो ..... ..... नहीं तो मैं पागल हो जावूँगी ....... तुमने आज मेरी क्या हालत कर राखी हैं..........

करीम - इतनी भी क्या जल्दी हैं मेरे द्क्प raani.......pehle मेरा लौड़ा ाचे से chooso…uska रास पियो.. ........फिर उसके बाद hi मैं तुम्हारी छूट की आग ठंडी करूँगा .......

सिमरन एक बार फिर से तड़प उठती hain.....fir से करीम उसके सामने कंडीशन रख देता hain.........na चाहते हुए भी सिमरन जल्दी से करीम के पेण्ट खोलने लगती हैं और एक एक कर उसके सरे कपडे उतरने लगती हैं ........ कुछ देर में करीम बिन कपड़ों के उसके सामने होता hain.....uska लुंड फनफनाता हुआ अब सिमरन के सामने झूल रहा था ........

वो फ़ौरन सिमरन को अपनी गॉड में उठा लेता हैं और उसे वहीँ छोटे से बीएड पर पीठ के बल सुला देता हैं........... वो उसका सर बीएड के नीचे की ओरे झुका देता hain....aab उसकी पूरी बॉडी बीएड पर थी मगर उसका सर नीचे की तरफ लटक रहा tha.......Karim फिर सिमरन के सर के पास चला जाता है …करीम हौले से अपने दोनों हाथों से सिमरन के सर को पकड़ लेता हैं और फिर अपना लुंड हौले हौले सिमरन के मुँह में पेलने लगता हैं ...... सिमरन को आज अपनी छूट के खातिर सब मंज़ूर tha.........wo जानती थी की जब तक करीम का छुम नहीं निकल जाता वो उसकी छूट की आग ठंडी नहीं karega.....yehi सोचकर वो अपना मुँह पूरा खोल देती हैं और उसका लुंड अपने गले के नीचे धीरे धीरे उतरने लगती हैं....... वहीँ करीम आपने पंत से वाइब्रेटर का रिमोट निकालता है और वाइब्रेटर की स्पीड फिर से फुल कर देता हैं … इस वजह से सिमरन की करीम के लुंड को चूसने की रफ़्तार और भी तेज़्ज़ हो जाती hain.......wo बार बार अपना जीभ उसके लुंड से होते हुए उसके दोनों ांडों पर फेर रही thi........iss वजह से करीम के मुँह से हलकी हलकी सिसकारी निकल रही thi........Karim की जब नज़र सिमरन के निप्पल्स पर जाती हैं वहां उसे काळा दाग साफ़ नज़र आते hain......ye वहीँ दाग थे जो उसने थोड़े देर पहले सिमरन के निप्पल्स को कसकर कटा था वो the......is समय वो पूरी तरह से सूझ गए थे..... करीम हौले हौले से सिमरन के निप्पल्स को छेद रहा tha.....wahin सिमरन जितना हो सके करीम के लुंड को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी........

करीम – aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa .. ssssssssssssssss ...... मेरी द्क्प .. रानी...... मेरी ांडों को भी ाचे से छतो न .........

सिमरन फिर अपने जीभ धीरे से फेरते हुए करीम के दोनों ांडो पर ले जाती हैं और बहुत हौले हौले से उसके दोनों बॉल्स को चाटने लगती hain......wahin करीम अपने दोनों ाण्डू को सिमरन के मुँह में ज़बरदस्ती ठूसने लगता हैं... एक बार फिर से सिमरन की सांसें भरी होती जा रइही thi........use सांस लेने में तकलीफ होने लगी thi.........jaise तैसे वो करीम के ांडों को अपने मुँह में लेने की कोशिश करती हैं मगर वो इसमें पूरी तरह से सफल नहीं हो pati........kafi देर तक करीम बरी बैर से अपने ांडों को सिमरन से चूस्वाता hain.......aur फिर वो अपना लुंड एक hi बार में सिमरन के गले के नीचे उतरने लगता हैं....

सिमरन की बेचैनी फिर से बढ़ाने लगी थी....... उसके मुँह से gggggggggg .. ooooooooooooo.......jaisi आवाज़ें गूँज रही thi...wahin करीम aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh..ssssssssssssssssss.. करता हुआ अपना लुंड सिमरन के गले की गहराई में उतरता जा रहा tha............kabhi कभी तो उसके दोनों हाथ सिमरन के गले पर भी चले जाते और सिमरन की हालत और ख़राब हो jati......uska चेहरा पूरा लाल पढ़ गया tha....Karim के लुंड से कुछ छुम और उसका थूक बेहटा हुआ उसके गलों से नीचे फर्श की ओरे टपक रहा था......

अब उसका लुंड सिमरन के गले की गहराई में पूरा उतर चूका tha......wahin दूसरे और सिमरन एक बार फिर से तड़प उठती hain......uski सांसें रुक सी गयी thi........aankhein पूरी तरह से बहार की ओरे आने लगी thi...aankhon में फिर से आंसूं चालक पड़े the.........Karim अपने लुंड को ऐसे hi प्रेशर बनाये रखता हैं और करीब 25 सेकंड बाद उसके साबरा का बांध टूट जाता हैं और वो वहीँ ज़ोरों से ssssssssssssssssss.aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.................karte हुए चीख पड़ता hain..........aur ज़ोरों से हाफने लगता हैं.....

उसके लुंड से गधा गधा वीर्य अब सिमरन के मुँह में जा रहा tha...kuch तो उसके हलक के नीचे चला जाता हैं और कुछ उसके गलों से बेहटा हुआ नीचे फर्श पर टपकने लगता hain......jaise hi करीम अपना लुंड बहार निकलता हैं सिमरन वहीँ एक बार फिर से ज़ोरों से खस्ने लगती hain........kuch छुम वो वहीँ थूक देती हैं और फिर से लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain........is वक़्त उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा tha.......wo वहीँ चुप चाप करीम के चहरे की ओरे एक तुक देखने लगती हैं ......... करीम अपनी आँखें बंद किये वहीँ सिमरन के सीने पर सर रखकर पड़ा हुआ tha.....kareeb 5 मिनट बाद उसे होश आता हैं......

सिमरन – करीम ......please.....aab तो इस आग को बुझा do.......nahin तो मैं आज कुछ भी कर जावूँगी........

और ऐसे कहते hi सिमरन की आँखों में इस बार आंसूं और भी गहरे हो चुके थे ........ करीम सिमरन के आँखों से बहते आंसुओं को बड़े प्यार से चूम लेता हैं और फिर सिमरन को वहीँ बीएड पर दोनों पवन फैलाकर बैठने को कहता hain.......Simran अगले hi पल अपनी दोनों टांगें पूरी चौड़ी कर देती हैं और उसकी छूट की लिप्स करीम की आँखों के सामने साफ़ साफ़ नज़र आने लगती hain......Karim हौले से अपने जीभ फेरते हुए उसके छूट पर रख देता हैं और बड़े प्यार से वहां पर चूम लेता हैं...... करीम के उस हरकत पर सिमरन वहीँ ज़ोरों से सिसक पड़ती हैं और उसके मुँह से एक आआआआआ... hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.....foot पड़ती हैं.....





उसके आँखें लजात से पूरी बंद हो जाती hain.....aur दिल की धड़कनें फिर से तेज़्ज़ होती चली जाती hain........Karim अपने दोनों हाथों को सिमरन के छूट के लिप्स पर रख देता हैं और अपने उँगलियों से उसे पूरा फ़ैलाने लगता hain.......choot के लिप्स खुलने से अंदर रखा वाइब्रेटर साफ़ दिखाई देने लगता हैं जो इस वक़्त छूट रूस में बुरी तरह से सं चूका था........ उसपर सिमरन के छूट से बेहटा प्रेकम भी साफ़ चमक रहा था......... अगले hi पल वह पर करीम हौले से अपने जीभ फेरने लगता हैं और अंदर रखे उस वाइब्रेटर को अपने जीभ से छेड़ने लगता hain.......saath hi साथ वो अपनी एक ऊँगली सिमरन की गांड की छेद पर भी फेरने लगता हैं.....

करीम की इन हरकटीओं से सिमरन वहीँ ज़ोरों से चिल्ला पड़ती hain.......wo बार बार अपनी मुट्ठी से बीएड को कसकर पकड़ के मसल रही thi....wahin उसकी आहें पल पल गूँज रही thi..........excitement की वजह से उसका जिस्म लाजत से काँप रहा tha......jaise अब जिस्म में जान hi न बची हो......

करीम- मेरीए द्क्प रानी.... तेरे छूट मई फसा हुआ वाइब्रेटर … निकलना है न..

आपने आप को काबू मई करते हुई सिमरन हां मई गार्डन हिलाते है… करीम फिर से सिमरन की तरफ देखने लगता है..

करीम- कहो न मेरी द्क्प रानी.. या तेरे छूट मई hi रखना है.. या बहार निकलना है..

उसपर सिमरन झट से बोलती है..

सिमरन- नहीं.. नहीं.. उसे बहार निकालो..

करीम सिमरन के आँखों मई देखते हुई कहता है..

करीम- तो मेरे रानी.. उसको बहार पुश करो..........

अगले hi पल सिमरन एक नज़र करीम के चहरे की ओरे देखने लगती हैं फिर धीरे धीरे अपने छूट पर दबाव डालने लगती hain..........wo वाइब्रेटर थोड़ा सा बहार की ओरे सरकता हैं और वहीँ करीम अपना जीभ उसपर फेरने लगता hain.......aur साथ hi साथ अपनी एक ऊँगली धीरे से सिमरन की गांड में दाल देता हैं और बहुत आहिस्ता से अपने उँगलियों को आगे पीछे करने लगता हैं.....

करीम बार बार सिमरन को पुश करने को कह रहा tha....wahin सिमरन सिसकते हुए अपने छूट से वाइब्रेटर बहार की ओरे पुश करती जा रही thi.......ye मंज़र कुछ ऐसा था जैसे कोई औरत बाचा देते समय अपनी छूट पर दबाव डालती हैं........ करीम अपने जीभ हौले हौले से फेरता जा रहा था वहीँ सिमरन पल पल सिसकती जा रही थी...... पूरे कमरे में सिमरन की आहें गूँज रही थी....... वो अब अपने चरम पर धीरे धीरे पहुँचाने लगी thi........jaise जैसे वो अपने छूट पर दबाव डालती जा रही थी वैसे वैसे अंदर रखा वाइब्रेटर धीरे धीरे सरकते हुए बहार की ओरे आ रहा tha........jab वाइब्रेटर कुछ हुड्ड तक बहार आता हैं तो करीम उसे हौले से अपने डेंटन में फंसा लेता हैं और बहुत आराम से चाटने लगता हैं.......

सिमरन का इस वक़्त बहुत बुरा हाल tha...........wo सब कुछ भूल चुकी thi......na जाने कितने देर से वो इस विब्रेटर को अपने छूट में राखी हुई थी जिस से उसकी छूट की आग अब शोला बन चुकी thi......wo अपनी गांड धीरे धीरे करीम के चहरे पर भी रगड़ रही thi..........wahin करीम बड़े प्यार से सिमरन की छूट चाटने जा रहा tha......aur साथ यह साथ उसकी गांड में ऊँगली भी कर रहा था......

अगले hi पल सिमरन वहीँ ज़ोरों से चीख पड़ती हैं और इस बार वो वाइब्रेटर pppuch.......ki आवाज़ के साथ उसकी छूट से बहार निकल जाता hain.......aur उसके छूट से बेहटा सारा छुम वहीँ बीएड पर गिरता hain..........wo अपने सर को दोनों हाथो से पकड़ लेती हैं और वहीँ ज़ोरों से सिसक पड़ती है…

सिमरन - aaaaaaaaaaa ........... mmmmmmmmmmmmmmmmm......... uuuuuuuuuu.mmmmmmmmmmmm...mmmmmmmmmmm.yyyyyyyyyyyy....sssssssssssssssssss.................hhhhhhhhhhhhhhh...mmmmmmmmmmmmmmmm....aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa............

अब सिमरन बिलकुल किसी लाश की तरह ठंडी पढ़ी रहती हैं..........

जब सिमरन के छूट से एक पिचकारी निकली थी वो करीम के चहरे पर गिरी थी.. अब वो साफ़ नज़र आ रही thi............wo वहीँ किसी लाश की तरह बिलकुल ठंडी पढ़ जाती hain.....uska इस तरह से ोगसम पहले कभी नहीं हुआ tha......wo वहीँ ज़ोरों से हफ्ते हुए बीएड पर पीठ के बल पसर जाती hain.......wahin इस वक़्त वो वाइब्रेटर नीचे बीएड पर गिर चूका tha.....aur इस वक़्त उसपर सिमरन की छूट का रूस लगा हुआ था.........

अब सिमरन वहीँ लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही थी और अपने बेकाबू सांसिओन को सँभालने की पल पल कोशिश कर रही thi..........wahin करीम अभी भी टकटकी लगे सिमरन के छूट से बेहटा छुम एक तुक देख रहा tha........aabhi भी उसके चेहरे पर सिमरन के छूट का रास लगा हुआ tha.......isse पलहे की वो अपना चेहरा साफ़ करता तभी उस रूम के दूर तेज़ी के साथ खुलता हैं और एक 24 साल का लड़का फ़ौरन अंदर चला आता हैं........

दरवाजे का आवाज सुनकर सिमरन बीएड पे से लेते हुई hi अपनी गार्डन उप्पर कर के सामने दूर की तरफ देखने लगाती hai..aur जब सिमरन की नज़र सामने दरवाजे पर पड़ती है और जो नज़ारा उसे अपनी आँखों के सामने दिखाई देता हैं वो उसे देखकर चौंक से जाती hain.........jab सिमरन की नज़र सामने खड़े नौजवान पर पड़ती हैं तो उसके चहरे का रंग बिलकुल फीका सा पढ़ जाता hain....aab सिमरन बस एक तुक सामने खड़े लडके के चहरे की ओरे देखती रहती हैं........

सामने छोटू खड़ा tha…chotu एक 24 साल का नौजवान लड़का था.. वैसे तो करीम का और छोटू का कोई ख़ास ब्लड रिलेशन नहीं था.. लेकिन दूसरे टाइप का रिलेशन था.. वैसे तो छोटू को छोटे से बड़ा करीम ने hi किया था.. बचपन मई hi छोटू के माँ बाप एक्सीडेंट में चल बेस .. तब से छोटू को करीम ने पला था.. छोटू का बाप शंकर करीम का बचपन का दोस्त था.. दोनों एक hi बस्ती मई छोटे से बड़े हो गए थे.. जब छोटू के माँ बाप चले गए तब करीम को एक बच्चे हुई थी.. तब करीम ने सोचा इस मेरे दोस्त के bête को दर दर के ठोकरे कहानी से बेहतर है उसको मई hi सम्बल लूंगा.. बचपन में उसे छोटू कहते थे वही नाम छोटू बड़ा हो गया थो भी रहा.. वैसे देखा जय तो छोटू करीम का असिस्टेंट था.. उसके टेलरिंग और दूसरे कामो मैं छोटू हेल्प करता था.. छोटू जनता था की करीम को लड़की और औरतो को छोड़ने की आदत है.. यही आदत करीम ने छोटू को भी लगाई थी.. दोनों ने कही बार एक साथ रंडिया भी छोड़ी है.. लगबघ करीम की हर बात छोटू जनता था.. वो करीम को थोड़ी ज्यादा शराब पिलाकर करीम से साडी बाते जान लता था.. करीम भी लगबघ छोटू के साडी बाते जनता था पर सभी नहीं.. वो आप आगे जान जायेंगे.. छोटू भी करीम जैसे hi पहुंचे हुई चीज़ थी..

छोटू को देख कर सिमरन की सिटी पित्ती गम हो गयी और वो अपनी जगह पर स्तब्ध हो गयी.. करीम भी छोटू को देख कर थोड़ा चौंक गया लेकिन सिमरन के जितना nahi…Simran अभी भी करीम के बगल में बैठ कर छोटू को देख रही thi..chotu को देख कर वो बहुत शॉकेड हो गयी थी .. छोटू को देखकर उससे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्यों की करीम ने उसकी जो हालत अब तक बनायीं थी तबसे उसस्के सोचने समझने की शक्ति थोड़ी ढीली हो गयी thi…kuch पाल ऐसे hi बैठे रहने के बाद तब सिमरन को सिचुएशन की गंभीरता का एहसास हुआ जब छोटू कुछ बोलता है तब…

छोटू- कोण है ये माल.. काका.. आज तक कभी दिखाया नहीं..

करीम का लुंड अब भी तना हुआ tha..Karim भी वहीँ उसी पोजीशन मई खड़े होते हुई उन दोनों को देख रहा tha…kabhi सिमरन का ख़ूबसूरत नंगा जिस्म जिसको वह थोड़े देर से निचोड़ रहा था और तोह कभी छोटू को जो सिमरन के नंगे बदन को आपने आँखे फाडे देख रहा था.. छोटू ने ऐसा कहा तब सिमरन होश मई आ गयी और वह पड़ा बेडशीट आपने बदन पर लेके सिमरन ने आपने बदन को धक् लिया.. और बहोत hi धीरे आवाज मई बोल पड़ी….

सिमरन- कोण है ये..

करीम सिमरन को कोई जवाब नहीं देता है..

करीम छोटू का स्वाभाव अचे से जनता था.. वो जनता था की छोटू अब कुछ उलटा सुलाता कहेगा.. इस्सलिये करीम छोटू को देख कर उससे आँखों hi आँखों मई कुछ उल्टा न कहने का इशारा करता है.. छोटू करीम का इशारा समझकर चहरे पर हसी लता है.. पर कुछ कहता नहीं है.. और उन् दोनों के करीब बढ़ने लगता ही.. जैसे जैसे छोटू उन्दोनो के करीब आ रहा था वैसे वैसे सिमरन डरते जा रही thi..Simran अब समझ गयी थी की उसकी चोरी किसी तीसरे आदमी ने पकड़ी है .. वो अब उस बेडशीट को और जोर से आपने बदन को लिपट रही थी.. शर्माकर वो निचे देखने लगाती hai..chotu अब आकार उनके सामने आकर खड़ा होता है और बोलता है…

छोटू- कोण है ये रांड…. काका… आज आप ने तो बड़ा कातिल माल लाया है.. और मुझे बताया भी नहीं है.. ये अचे बात नहीं है .. करीम काका..

करीम- तू चुप कर.. ये कोई बाजारू रांड नहीं है.. ( सिमरन को अपनी बहू मई लेते हुई कहता है ) .. ये तो मेरा आइटम है.. द्क्प है .. पुलिस वाली है.. ज्यादा बोलेगा तो तुजे जेल मैं डालेगी.. इसका नाम है द्क्प.. सिमरन.. द्क्प.. सिमरन कौर…

छोटू बड़े गौर से सिमरन को देखने लगता है.. आँखे फाड् के सिमरन को छोटू अब देख रहा था.. इस वजह से शर्माकर और डर कर सिमरन करीम के पीछे चुप जाती है..

छोटू- तो ये पुलिसवाली है.. और आप पुलिसवाली को छोड़ रहे हो.. हां. हां.. याद आया.. आपने जिस पुलिसवाली को काँटी शेठ के बालकनी में छोड़ा था वो यही है ..

छोटू के ऐसे बोलने से सिमरन करीम की तरफ आँखे फाड़े देखती है.. और कहती है..





सिमरन- क्या तुमने इस लडके को मेरे बारे में सब बताया है…

करीम सिमरन के कमर के पीछे हाथ रख देता है और उसे आपने आगे की तरफ जोर से खींचता है…

करीम- आपने hi बच्चा है…

सिमरन करीम के तरफ सवाल भरी नज़रो से देखते है..

सिमरन- तुम्हारा बच्चा?????

करीम- मतलब.. मैंने इससे बचपन से पला है.. बेचारे के माँ बाप इसके बचपन में hi चल बेस…

तभी छोटू बोल पड़ता है..

छोटू- क्या काका.. आप भी.. इतना कड़क माल सामने पड़ा है और आप मेरे दुःख बरी दास्ताँ इससे सुना रहे हो…

छोटू के ऐसे कहने से सिमरन छोटू की तरफ गुस्से से देखते है..





सिमरन के कपडे थोड़े दूर पड़े थे.. उसका हाथ वह तक पहुँच नहीं सकता था..

सिमरन- ये लडके मेरे कपडे दे.. मुझे जाना है…

छोटू- इतनी भी क्या जल्दी है… तू शयद जानती है या नहीं मुझे पता नहीं है.. शयद काका ने तुजे कभी बताया नहीं होगा.. मैंने और काका ने बहोत साडी रंडियो को एक साथ छोड़ा है.. इससे रूम मई और दूसरे जगह पे भी..

सिमरन- ये लडके में कोई बाजारू रंडी नहीं हु.. जो तू ये बात कर रहा है.. ऐसे बात मुजसे मत कर… तेरे जैसे को कैसे ठीक करना है मई अचे से जानती हु…

करीम के चहरे पर इन् दोनों की ऐसे बातचीत सुनकर और देखकर हलकी सी हसी आ जाती है.. करीम जान चुक्का था की छोटू सिमरन के पीछे पद चुक्का है अब ये इससे छोड़ेगा नहीं..

छोटू- ारे नखरा क्यों कर रही है इतना.. काका को इतनी बार अपनी छूट दे चुकी है एक बार मुझे भी दे.. तेरा क्या जायेगा.. काका से अच्छा चौंदूगा.. काका ने hi सिखाया है.. काका जरा बताओ न आपने आइटम को..

करीम हँसाने लगता है .. लेकिन कुछ नहीं बोलता है.. सिमरन गुस्से में झट से बीएड से बैठे बैठे hi उठ जाती हैं… उसको जब पता चलता है की आपने बदन पर कपडे नहीं है तो वो आपने बदन पर के बेडशीट को संभालते हुई कहती है…

सिमरन - हाउ डरे यू तो से लिखे तहत!!!!!! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सब बातें मुझसे कहने ki.......tumhari अंदर ज़रा भी शर्म नहीं हैं kya......tum होश में तो हो की तुम मुझसे क्या कह रहे ho........agar मैं चंहु तो मैं तुम्हें इसी वक़्त अरेस्ट कर के जेल मैं दाल सकती हु.. तुमने आपने आप को क्या समझते हो.......

फिर सिमरन करीम की तरफ देखकर कहती है..

सिमरन- करीम ..इस्को बताओ मेरे कपडे देने को..

करीम कुछ कहता नहीं है..

छोटू अब वहीँ हाथ जोड़कर सिमरन के सामने खड़ा हो जाता हैं और दर के कहता है….

छोटू - मुझे माफ़ कर दीजिये मैडमजी ........ मेरी गलती हुई madamji…magar एक छोटा बच्चा समाज कर मुझे माफ़ कर digiyega..aab आप मैडमजी हो सके तो इसे मेरी नादानी समझ कर माफ़ कर dijyega.......aur हाँ मेरी ये आपसे विनती हैं की आप मुझे अरेस्ट मत कीजियेगा.. और मुझे जेल में मत डालियेगा.. मुझे पुलिसवालो से बहोत दर लगत है.. मैडमजी..

छोटू के ऐसे बातो से करीम जोर जोर से हँसाने लगता है.. उसके बाद छोटू भी हँसाने लगता है.. सिमरन को कुछ समाज नहीं आ रहा था की ये दोनों क्यों है रहे है..

छोटू- जाने दे छूट नहीं तो गांड दे दे..

अब सिमरन को समाज आ गया था की ये दोनों क्यों है रहे है.. सिमरन को समाज आ गया की ये लड़का मुझे डर ने का नाटक कर रहा है..

सिमरन- ये पागल लडके .. तुजे एक बार बताया तो समाज नहीं आता क्या…

सिमरन के ऐसे कहने से छोटू गुस्से मई कहता है…

छोटू- ये बातचलन औरत अपनी छूट की आग शांत करने के लिए तुजे एक बुद्धा hi मिला क्या.. कही मेरा जैसा यंग डैशिंग लड़का नहीं मिला क्या??? अपने बाप के उम्र के एक बूढ़े आदमी को फांस लिया तूने.. यह तोह बेचारा बुढ़ापे का मारा है.. इसकी उम्र देख तेरे उम्र देख … ये तोह बुद्धा हो चूका है.. तू तो समझदार लगाती है.. द्क्प है न tu..…tujhe शर्म नहीं आयी अपने बाप के उम्र वाले के साथ छुड़वाते हुए.. और बेशर्मी से अपनी छूट और गांड मरवा रही hai..hey भगवन क्या क्या हो रहा है इस दुनिया mai…ghorr कलयुग आ चुक्का hai…hey भगवन अब तोह अवतार ले hi लो और पापियों का नाश कर दो….

छोटू के ऐसे बोलने से सिमरन सोचने लगाती है.. सिमरन अपने खूबसूरत जिस्म को ढके हुए छोटू की बाते सुन रही थी और अब उसकी आँखों मई पानी आने वाला hi था.. ऐसा लग रहा था की सिमरन सोच रही हो की मैंने सच मच एक घूर पाप कर दिए है और दुनिया और भगवन इस गंदे कर्म के लिए मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे…

करीम वहां नंगा खड़ा हुआ था .. .. करीम भी छोटू की बाते सुन्न कर शॉक था और मैं hi मैं सोच रहा था की… यह साला भादवा क्या बक्क रहा hai…khud तोह कितनो को छोड़ चुक्का है.. छोटे लड़की से लेके बुद्धि रंडी तक.. और यहाँ प्रवचन दे रहा है…

छोटू अब भी अपना प्रवचन दे रहा था और सिमरन का रोना चालू हो गया tha..jab करीम ने सिमरन को सिसकते हुए देखा तोह उससे छोटू पे गुस्सा आने laga..voh कुछ बोलना तोह छह रहा था पर उससे समझ नहीं आ रहा था की की इस बडवे को अगर यहाँ मैंने गालिया दे और िस्सने सिमरन को सब बता दिया तो आगे प्रॉब्लम आएगी.. ह्यूमेन एक साथ कितने को यहाँ छोड़ा है ये डिटेल में बता दिया तो साला कहीं ऐसा न हो की सिमरन मुझसे छुड़वाना चोरर दे यह जान के की मई कितनी औरतो की ले चुक्का हु… उसको कुछ पता है और इस बडवे ने थोड़ा अब बताया है .. लेकिन सब पता नहीं है न.. करीम इन्ही खयालो मई खोया हुआ सही और गलत का फैसला सोच hi रहा था की सिमरन की मोठे मोठे ांसो टपकने लगे थे वोह चाहते हुए भी छोटू के सामने कुछ बोल नहीं पा रहा था…

जब करीम ने देखा की सिमरन के आंसू निकल गए है वोह झुक गया उसके आगे और उसके आंसू पोछने लगा ….इसपर छोटू कहता है..

छोटू- अरे मेरी नाजुक काली तू तोह रोने lagi…mujehe लगा तू द्क्प है .. लेकिन तू तो किसी नाज़ुक औरत जैसे रोने लगी…

यह बात सुनके सिमरन चौंक गयी और रूट हुए hi छोटू को देखने लगी .. छोटू के मुखड़े पर अब एक शैतानी मुस्कान थी.. करीम यह देख के समझ गया की छोटू सिर्फ मजाक कर रहा है ..

छोटू मैं hi मैं सोचने laga..yeh तोह मेरे टेस्ट मई फ़ैल हो गयी… इसको तो आज जमके छोड़ना पड़ेगा.. ये उतनी कड़क नहीं है.. ये तो नाज़ुक है .. फूलो जैसे..

सिमरन के मुँह से अब भी शब्द नहीं निकल रहे थे और हु अब बहुत कंफ्यूज हो गयी thi…wo सोचने लगी आखिर यह सब हो क्या रहा hai…Simran के पल्ले कुछ नहीं पढ़ रहा tha….Karim अब मुस्कुरा रहा था कर सिमरन को देखते हुए अपने लुंड को मसलने लगा…

छोटू सिमरन को अपनी तरफ सवालिया नजरो से देखते हुए समझ गया की सिमरन कंफ्यूज हो गयी hai…wo बोलता है

छोटू- काका आप तोह बड़े कमेने निकले… आप इस जैसे नाज़ुक काली को इतने दिनों से छोड़ रहे हो और अपने सबसे अचे दोस्त को इस मई शामिल नहीं किया.. ये तो न इंसाफ़ी हुई काका.

करीम सिमरन की तरफ देखकर कहता है..

करीम- ारे छूटउ.. तू क्यों इससे परेशां कर रहा है.. जाने दे न इससे..

छोटू करीम की तरफ देख के कहता है..

छोटू- वेयर काका.. यही क्या अपनी दोस्ती.. साला इसको कितनी बार छोड़ा होगा आपने और अब मेरे बरी आयी तो मुझे बोल रहे हो जाने दो इससे …

इसपर करीम हँसाने लगता है..

छोटू- चाहा.. इसको बोलो अगर छूट नहीं देने है तो एक बार अपनी गांड दे दो जाने दूंगा इससे..

करीम- सेल छोटू.. आज तक इसने मुझे अपनी गांड नहीं दी तो तुजे कैसे देंगे. मई तो कितनी बार मांग चुक्का हु लेकिन ये देते नहीं है…

इसपर छोटू हसता है..

छोटू- क्या…???????? काका.. लगता है आप अब बूढ़े हो गए हो.. आप को इस आइटम ने अभी तक अपनी गांड नहीं दी है.. इतनी मस्त गांड आपको नहीं दे है… ठु आपके जिंदगी पर…
 
इनके ये बात सुनकर सिमरन दोनों की तरफ देखने लगाती है… अब उसका पोलिसवाले दिमाग काम करने लगता है.. उसको अब लग रहा था की शयद ये इन् दोनों का प्लान तो नहीं है न.. शयद ये दोनों एक साथ मुझे उसे करना थो नहीं चाहते न… साला मई तो इस करीम के बातो मई आके यहाँ फास गयी.. अब सिमरन छोटू को देखते हुई थोड़ी आगे आती है.. बैठते हुई hi.. आपने बदन पर बेडशीट लेते हुई hi..

वो देखकर छोटू वह पड़ा सिमरन के पंतय देख लेता है.. और वो आपने हाथो मई उठा लेता hai...........wo एक नज़र फिर से सिमरन की पंतय की ओरे देखने लगता hain.....fir वो धीरे से सिमरन की ओरे देखते हुई उसकी पंतय अपने नाक के पास ले जाती हैं और उसकी खुसबू सूंघने लगता hain.....is वक़्त उसकी पंतय से हलकी हलकी उसकी छूट की खुसबू आ रही thi.....chotu कुछ डियर तक पंतय अपने नाक के पास लगाए रहता हैं..... छोटू की ये हरकतें तो सिमरन के लिए कुछ अजीब थी पर जो भी था उसे भी अब इस खेल में मज़ा आने लगा tha.......lekin वो ये देखना नहीं चाहती थी.. फिर वो अपनी गार्डन ना में हिला कर छोटू को देखकर सिमरन बोल पड़ती है..

सिमरन- noooooooooo…. तुम ऐसा नहीं कर सकते…

ऐसा कहके वो निचे देखते है.. जैसे hi फिर से आपने नाक के पास सिमरन के पंतय आती है वैसे hi छोटू बड़े hi जोर से बोल पड़ता है…

छोटू- बड़ा hi मादक खुशबू आ रही है इस द्क्प के पंतय से …. बड़ा मज़ा आया होगा काका आप को इस रांड को छोड़ने मई…

करीम- हैं.. छोटू.. बता नहीं सकता तुजे.. बहोत hi मज़ा आया था इससे छोड़ने मई…

करीम के ऐसे कहने पर सिमरन करीम की तरफ गुस्से से देखती hai…udhar दूसरी तरफ छोटू सिमरन के पंतय को निचे ले जाता है .. वह आपने लुंड के उप्पर पंत के उप्पर से रगड़ने लगता hain.....kuch डियर तक पंतय को अपने लुंड पर रगड़ने के बाद वो दुबारा पंतय अपने नाक के पास ले जाता है ..... तभी उसके चेहरे पर एक शरती मुस्कान तैर जाती हैं..

छोटू- काका इस बार पहले से थोड़ा ज़्यादा इस द्क्प की छूट की खुसबू आ रही थी.....

छोटू ने ऐसे कहते hi सिमरन शर्माकर अपनी दोनों हातो मई आपने चेहरा छुपा लेती है…

तभी वह छोटू को विबरेटर दिख पड़ता है… वो सिमरन के छूट के रास से भीगा था.. वो देख के उसको आपने हाथो मई छोटू उठा लेता है.. ये सिमरन चोरे से देख लेते है.. और सोचने लगाती है.. अब ये बदमाश और क्या करेगा इस विब्रेटर के साथ..

छोटू- काका.. ये मशीन तो में ने hi ले थी.. आप ने इसके छूट मई डाली क्या..

करीम- हां..

छोटू- बड़ा मज़ा आया होगा..

करीम- इसको पूछ न..

छोटू- बता न नाज़ुक काली.. मज़ा आया न इसको आपने छूट में डालते हुई..

सिमरन- चुप करो.. तुम दोनों.. और मुझे जाने दो.. मुझे जाना है..

अब छोटू विब्रेटर को आपने नाक के पास ले जाता है … और सुंघाते हुई कहता है.

छोटू- अरे ये क्या...... मैं तो समाज रहा था की द्क्प की पंतय में उसकी छूट की खुसबू ाची खासी आएगी मगर इसमें तो पंतय से ज्यादा खुशबू आ रही hai..muje तो पंतय से ज्यादा इस मशीन में मज़ा आ रहा है....... अब मैं क्या करूँ ऐसा जिस से इसके पंतय में मुझे ज्यादा मज़ा आ jaye.......haan एक काम करता हूँ....

और तभी छोटू पंतय को विब्रेटर के ऊपर रगड़ता है जिस की वजह से विब्रेटर पर जो सिमरन के छूट का रास था वो सिमरन के पंतय पर लग जाता है और इस के वजह से वो सिमरन के छूट के रास मई गीली हो जाती है.. छोटू का ये सब खेल करीम ध्यान से देख रहा था ..

फिर से छोटू सिमरन के पंतय आपने नाक के पास ले जाता है और उसे सुगने लगता hai..bahot hi धीरे से.. छोटू के इस खेल से करीम अब गरम हो चुक्का था.. वो आपने एक हाथ धीरे से बेडशीट के नीचे से धीरे धीरे सिमरन के छूट की तरफ ले जाता है और अपनी वो एक उंगली आगे सरकते हुए सिमरन के छूट के अंदर धकेलने लगता hai......is वजह से सिमरन के मुँह से हलकी सिसकारी निकलती है ......

सिमरन- aaaaaaa...hhhhhhhhhhhh..sssssss

ये आवाज़ें उसके मुँह से निकलते hi छोटू उन्दोनो की तरफ देखने लगता है.. वो फिर दुबारा से पंतय को अपने नाक के पास लता हैं और फिर से उसे सूंघने लगता hain....is बार उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती हैं...... और वो बोल पड़ता है..

छोटू- तुम दोनों ने फिर से गेम स्टार्ट किया ऐसा लगता है..

सिमरन का चेहरा शर्म से लाल पढ़ गया tha......wahin वो हौले हौले मुस्कुरा भी रही thi......magar कहीं न कहीं वो करीम के साथ ये सब करना चाहती थी पर किसी तीसरे आदमी के होते हुई nahi..chotu के ऐसे कहते hi सिमरन आपने छूट के पास का करीम का हाथ हटा देते hai..sharam तो उसे बहुत आ रही थी करीम के साथ ये सब किसी तीसरे आदमी के होते हुई मगर साथ hi साथ उसके अंदर एक अलग एक्ससिटेमेंट भी thi.......jahan उसका चेहरा इस वक़्त शर्म से पूरा लाल था वहीँ दूसरी तरफ उसकी छूट भी लगातार पानी छोड़ रही thi……use भी नहीं मालूम था की ऐसा उसके साथ क्यों हो रहा है पर जो भी था ये सिमरन के लिए एक अलग रोमांच था……

छोटू सिमरन के ये हालत देखर मुस्कुरा पड़ता hain…….josh में उसका भी लुंड अपना सर उठा रहा था …..मगर इस समय उसे जोश से नहीं बल्कि होश से काम लेने की ज़रुरत thi…..wo अब इस बने बनाये खेल को नहीं बिगड़ना चाहता था…….

सिमरन बड़े मुश्किलों से अपना थूक निकल पा रही thi…..wo फिर बड़े हिम्मत करके करीम से कहती है

सिमरन – अब बस करो करीम.. अब यहाँ नहीं.. मुझे घर जाना है.. मुझे लेत हो रहा है.. घर में मेरे हस्बैंड आ चुके होंगे..

तब उसके गाल को प्यार से सहलाते हुई करीम कहता है..





करीम- डर मत ये आपने hi बच्चा है.. किसी को कुछ नहीं बताएगा..

छोटू सिमरन की बाटिओं से मुस्कुरा पड़ता हैं..

छोटू- डरिये मत द्क्प मैडमजी.. ….. किसी को कुछ पता नहीं chalega..aap इस बात से निश्चिंत rahiye……kisi को इस बारे में कानो कान खबर नहीं होगी…..

सिमरन झट से न में अपनी गार्डन हिलती है..

सिमरन- नाहीइ.. नाहीइ.. मुझे जाना है.. मुझे मेरे पंतय दे दो तुम..

छोटू बड़े गौर से सिमरन की पंतय को अपने हाथों में लेकर देखने लगता hain……fir वो झट से उस पंतय को अपने नाक के पास ले जाता हैं और उसकी खुसबू को अपने अंदर समेटने लगता hain……panty की खुसबू से उसका लुंड फिर से अकड़ गया tha…..magar अब उसे मनो किसी भी चीज़ का कोई होश नहीं tha….wo बस पूरे मुन्न से पंतय की खुसबू अपने अंदर उतरना चाहता tha……..ye मंज़र देखकर सिमरन का चेहरा शर्म से दुबारा लाल पढ़ जाता हैं….....

सिमरन - ये क्या कर रहे हो …… मुझे मेरे पंतय दे दो..

छोटू- तुम में ने टच तो नहीं किया न..

सिमरन- यहाँ मेरे सामने तुम्हें ये सब करते हुई ज़रा भी शर्म नहीं आ रही हैं क्या ……..कहाँ कौन सा काम करना चाहिए ये तुम्हें ज़रा भी नहीं मालूम…..

भले hi सिमरन छोटू से गुस्सा कर रही थी मगर कहीं न कहीं उसे भी ये सब ाचा लग रहा था.......

छोटू – मैडम जी आपकी बदन की खुसबू सच में लाजवाब hain…...jab आपकी पंतय मेरे हाथों में आयी तब से मैं मनो अपना सब कुछ भूल सा गया हु………… क्या करूँ मेरे लिए तो एहि जन्नत hain…..main बता नहीं सकता की आज आपने मुझे कितना बड़ी चीज़ दी hain…..main आपका ये एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगा……

सिमरन – मैंने कुछ नहीं दिया है .. तुमने hi मेरे पंतय वह से उठा ले है और अब मुझे वो दे भी नहीं रहे हो..

सिमरन का चेहरा शर्म से इस वक़्त पूरी तरह लाल था …….वो चाहती तो एक शब्द भी छोटू को नहीं कहती पर उसे पता था अगर यहाँ इसको कुछ नहीं कहा तो ये आगे बाद जायेगा..……. छोटू तो मुन्न hi मुन्न मुस्कुरा रहा था वो अब समझ चूका था की बहुत जल्द उसे सिमरन की छूट एक सौगात के रूप में मिलने वाली hain......wo मुस्कुराते हुए सिमरन के पंतय को सुंघाते हुई थोड़े आगे आता है..………… सिमरन न चाहते हुए भी एक बार उसका ध्यान छोटू के लुंड की ओरे चला जाता हैं….. छोटू के पेण्ट में इस वक़्त एक तम्बू की तारक उसका लुंड खड़ा दिख रहा tha……ye नज़ारा देखकर सिमरन एक बार फिर से सिहर उठती hain…..uski सांसें फिर से ज़ोरों से चलने लगती हैं……

सिमरन को कुछ समझ नहीं आ रहा था … छोटू आगे आगे बाद रहा था .. करीम उसे रोक नहीं रहा था.. सिमरन ने 2-3 बार करीम को कहा की उसे आगे मत आने दो पर वो सुन नहीं रहा था.. अब भी उसने अपने बदन को ढाका हुआ था एक बेडशीट से.. छोटू बीएड के नज़दीक आया था ये देखते हुई वोह हकलते हुए कहती है…

सिमरन- वुछ्ह… मेरे…. वोह… chotu…..voh…darasal.. छोटू.. पास .. मत …aao….voh…mere…panty …. मुझे दूर ……खड़े ….होक… voh….de … दोऊ…

सिमरन को हकलाते देख कर छोटू मंद मंद मुस्कुराने लगता है और सोचने लगता है की मैंने ज्यादा तो नहीं कर दिया न इस द्क्प के साथ.. साली बहोत डर रही है.. ..यह तोह बहुत दर गयी है…. साली द्क्प को डरने में बहोत मज़ा आ रहा है..

छोटू- साली तू तोह अभी बड़ी कुटिया की तरह मारा रही थी अपनी छूट .. अपने बाप के उम्र वाले से बेशरम hokar….randi लग रही थी bilkul…maine सोचा था की अगर मई तेरे सामने बी आ जाऊ तब भी तू अपना रान्दीपना नहीं छोड़ेगी और मेरे सामने hi अपनी छूट और गांड मरवाती rahegi…..par तेरी तोह गांड hi फट गयी मेरे को देख कर और मोठे मोठे आंसू बहाने lage….kam से काम रूम का दरवाजा तोह बंद कर लेते अपनी चुदाई शुरू करने से pehle…itna भी कण्ट्रोल नहीं हुए तुझे….

यह बोलते हुए छोटू हसने laga..Simran छोटू की बाते सुनका चौंक सी गयी ..

सिमरन- मेरे पंतय दे दो..

उसपर छोटू हसते हुई कहता है..

छोटू – ले लो..

ऐसे कहते हुई छोटू पंतय देने के लिए झुकता है और सिमरन लेने के लिए थोड़े आगे होकर झुकाते hai..jab छोटू सिमरन को पंतय दे रहा था तब छोटू ने जान बूझ कर सिमरन का हाथ अपने हाथ में लेकर उसे अच्छे से छु लिया tha.....ek बार तो सिमरन भी छोटू के इस हरकत से छोनूक सी पड़ी…

छोटू एक नज़र सिमरन के खूबसूरत चेहरे को दुबारा से देखने लगता हैं और धीरे से मुस्कुरा देता हैं...... छोटू की आँखों में इस वक़्त उसके लिए हवस साफ़ झलक रही थी...... ....... छोटू जिस तरह से सिमरन को देख रहा था इस वजह से वो झट से अपनी नज़रें दूसरी ओरे फेर लेती हैं….... इसकी फायदा लेते हुई छोटू झट से सिमरन के बदन पे बेडशीट जोर से खिंच लेता है.. सिमरन को कुछ समजने से पहले hi छोटू वो बेडशीट वो उतके पीछे फेक देता है.. सिमरन की नज़र दूसरी तरफ थी इस वजह से वो बेडशीट को पकड़ hi नहीं पायी.. जब उसको पता चला की वो छोटू के सामने नंगी है वो पीछे झट से हैट गयी… और आपने दोनों हाट आपने आम पर रख देती है. जब उसने आपने आम छुपा लिए तो छोटू की नज़र उसके छूट पर गयी.. छोटू अपनी छूट देख रहा है ये जब सिमरन ने देख लिया तो उसने एक हाथ से अपनी छूट छुपा li…Aab उधर दूसरे तरफ छोटू सिमरन के ब्रा को आपणी जीभ लगता है और उसे चाटने लगता है..

छोटू- बड़ा मादक स्वाद है इस द्क्प के आम का..

छोटू के ऐसे कहने से सिमरन छोटू की तरफ देखने लगाती hai…aur फिर करीम की तरफ देखते हुई कहती है..

सिमरन- चींईईई.. ये क्या कर रहा है ये लड़का…

सिमरन के सामने खड़ा होक एक लड़का उसके ब्रा को चाट रहा था ये देख के सिमरन को गुस्सा बहोत आ रहा था साथ में उसके मैं मई हलकी सी शर्म भी thi..jaise जैसे छोटू सिमरन की तरफ देखकर सिमरन के ब्रा को चाट रहा था और ब्रा आपने मू में दाल के उसे जोर जोर से खा रहा था इस वजह से सिमरन की शर्म तो बहुत बढ़ती जा रही थी.. मगर साथ hi साथ उसकी एक्ससिटेमेंट भी बढ़ती जा रही thi....uske लिए ये सब रोमांच बिलकुल नया था......

सिमरन अपने धड़कते दिल से छोटू जो उसके ब्रा के साथ कर रहा था वो बड़ी hi बेसब्री से देख रही थी..

उधर छोटू सिमरन के ब्रा को चाटते हुई बार बार वो अपना एक हाथ कभी अपने लुंड पर ले जाता तो कभी अपनी जाँघों पर भी फिर देता........ छोटू की बेचैनी से साफ़ उसकी हरकतों से पता चल रहा था की वो अब सिमरन के लिए कितना बेचैन hain.......uska लुंड भी अब धीरे धीरे हरकत करने लगा था…….

वो अपने अंदर इस उफनते हुए आग को बड़ी hi मुश्किलों से अपने बस में कर पा रहा tha…….magar हर बार ये आग उतनी hi भड़कती जा रही thi…..udher कुछ ऐसा hi हाल अब सिमरन का भी होने लगा था …… उसके शरीर में भी ये सब देखते हुई एक अजीब सी सिरहान दौड़ रही थी….…....

सिमरन वहीँ अपनी आँखें फाड़े कभी छोटू के चहरे के तरफ तो कभी करीम के चहरे के तरफ घूरे जा रही थी ........ उसे अपनी आँखों पर बिलकुल विश्वास नहीं हो रहा था ..........उसको समाज नहीं आ रहा था की करीम के होते हुई ये लड़का मेरे साथ ये सब कर रहा है और करीम कुछ नहीं बोल रहा hai..wo वहीँ चुप चाप एक तुक उन दोनों को ऐसे hi घूरती रहती hain.....aab सिमरन के चहरे का रंग बिलकुल फीका सा पढ़ चूका था........ शर्मिंदगी की वजह से वो अपनी नज़रें छोटू से बिलकुल भी नहीं मिला पा रही thi.....wo वहीँ पास में रखे आपने पंतय को उठाकर फ़ौरन पहन लेती हैं और अपने छूट को छुपाने की कोशिश करती hain.........magar अब तक छोटू की नज़रें सब कुछ देख चुकी थी .........

वहीँ छोटू सिमरन को अभी भी बेशरोमों की तरह उसके ब्रा को चाटते हुई सिमरन को चुप चाप निहार रहा था.......

जब सिमरन कोई रिएक्शन नहीं करती है तब छोटू चलते हुए सिमरन के पास आता हैं और उसके चेहरे को बड़े गौर से एक तुक देखने लगता hain.........simaran ख़ामोशी से छोटू के चेहरे को बस देखे जा रही thi........shayad उसके पास कहने को कुछ था hi नहीं या वो कुछ कह नहीं प् रही थी.. .......

छोटू वहीँ सिमरन के सामने आकर जुख जाता हैं और सिमरन के चहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain......aakhir कर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती हैं......

छोटू – सिमरन ....... जो कुछ तुम सोच रही हो वो सब सच हैं........ अब तक हमारे बीच यहाँ जो कुछ हुआ वो कोई इत्तिफ़ाक़ नहीं है..

सिमरन छोटू को गुस्से से देखते है और फिर करीम की तरफ देखते हुई कहती है..

सिमरन- मतलब.. तुम दोनों ने प्लान कर के मुझे यहाँ लाया है न ..

करीम- वैसे बात नहीं है सिमरन

सिमरन- तो बात क्या है..

छोटू- अब मई तुम सब सच बता देता हु.. ये तो मैं नहीं जनता की बात कब से शुरू hui...........chahe तो तुम कोई भी मतलब निकल सकते हो........ मगर बात ये है की करीम काका जिस को छोड़ते है उसको एक न एक दिन मई छोड़ता हु hi..agar तुम चाहे तो हमारे साथ इस खेल में शामिल हो सकते ho.........hum लोगों को इसमें कोई अप्पति नहीं हैं....... वैसे तुम आज मुजसे छुड़ाने वाली हु hi.. अगर खुद होकर शामिल हो जाओगी तो बहोत माझा आएगा..

छोटू की बात को सुनकर सिमरन उससे अजीब सी नज़रियों से देखने लगती हैं.....





उसे ये बिलकुल समझ में नहीं आ रहा था की छोटू ये सब क्या बोले जा रहा हैं ...... सिमरन करीम की तरफ देखते हुई कहती है..

सिमरन- करीम.. ये लड़का क्या बोले जा रहा है..

करीम- हां.. सच कह रहा है..

करीम के ये कहते हुई सिमरन गुस्स्से से तिलमिलला ुति..

सिमरन- Karim......ye ...तुम क्या बोल रहे ho.......tum होश में तो हो ना.... तुम दोनों ने मुझे समाज क्या रखा है.. मई कोई बाजारू औरत नहीं हु.. मई भला कैसे इस लडके साथ ये सब कर सकती हु......... मई एक अचे घर की औरत हु.. मई ये सब नहीं कर सकती .. समजे करीम.. अगर तुम लोगो को ऐसे कुछ करना है तो किसी बाजारू औरत को लेके आओ..

छोटू- तुम्हारे जैसा माल नहीं होता है न बाजारू औरत..

सिमरन- ये लडके.. मई ये नहीं कर सकती.. दूर हो जाओ मुजसे..

अगले hi पल छोटू सिमरन को देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं

छोटू - बिलकुल कर सकती ho.........jaise तुम काका के साथ कर सकते ho.........waise hi मेरे साथ करो.. .......... क्यों काका ...... मई इस रंडी के साथ कर सकता हु न..

करीम छोटू को देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता hain........aur धीरे से अपनी गार्डन हाँ में हिला देता hain........wahin छोटू के चेहरे पर भी कुटिल मुस्कान तैर जाती हैं........

सिमरन- तू दोनों ने मुझे क्या बाजारू रंडी समाज है क्या .. पहले काका और फिर भतीजा.. तुमने ये सब किसी बाजारों औरत के साथ किया होगा मेरे साथ ये नहीं चलेगा..

ऐसा कहके सिमरन बीएड पे पड़ी हुआ आपने ब्लाउज उठा लेती है जल्दी से छोत से निचे उतर कर ब्लाउज पहन लेती है.. अब सिमरन ब्लाउज और पंतय मई थी.. उन्दोनो के सामने..

करीम - Simrana...i ऍम सॉरी................

सिमरन- किस बात की सॉरी करीम ..

करीम- छोटू की बात मान लो..

करीम की ऐसी बात सुनकर सिमरन वहीँ ज़ोरों से उछाल सी पड़ती हैं...... करीम की बात सुनकर उसे बहुत ज़ोरों का झटका सा लगता हैं...

सिमरन- क्या!!! ...ये तुम क्या कह रहे हो......

करीम - रिलैक्स Simran........daro मुट्ठ.............. छोटू हमारा अपना hi hain........tume वो बहोत पसंद करता hai........use तुम्हारी छूट की न जाने कब से तालाब hain........wo न जाने कब से तुम्हारी छूट के सपने देख रहा हैं.........

सिमरन- मैं नहीं करने वाली ये साब .......मैं कोई रंडी नहीं हूँ की तुम जिस से कहेंगे उससे मैं अपनी छूट देती firungi........ye सब मुझसे नहीं hoga.......main वापस जा रही हूँ मेरे घर ....अभी इसी वक़्त.......

सिमरन के चहरे पर करीम के प्रति गुस्सा साफ़ नज़र आने लगा tha........baar बार उसके जेहन में एहि सवाल उसे परेशां कर रहा था की aakhir..............wo हैं कौन!!!! वो अभी भी करीम के चहरे को गुस्से से घूर रही थी.....

करीम- नाराज़ मुट्ठ हो सिमरन jaan......i ऍम sorry......agar मैं तुम्हें सच बता देता तो तुम ऐसे यहाँ कभी न आती.........

सिमरन - क्या मतलब हैं सच बता dete.......main कोई धंदे वाली नहीं hoon........aap को जिसके साथ चाहे....... जब चाहे मैं उसका बिस्टेर गरम karoon........ye सब मुझसे नहीं होगा.......

करीम - एक बार उसको तुम्हारे साथ थोड़े मज़े तो करने दो ........मैं तुम्हें उसके साथ सेक्स के लिए कभी नहीं कहूंगा..........

सिमरन कुछ देर तक वैसे hi खामोश रहती हैं मगर कहती कुछ नहीं.......

करीम - तुम्हारी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त hain.........main तुम्हें बदनाम नहीं होने doonga......ye मेरा तुमसे वादा hain.....bus एक बार मेरी बात मान लो........

सिमरन एक नज़र घूर कर करीम के चहरे की तरफ देखती हैं फिर ....

सिमरन- पागल हो गए हो क्या.. मई ये नहीं कर सकते.. इसकी इतनी hi इच्छा हो रही है सेक्स करने की तो इसको कोई बाजारू औरत लेक दो करीम..

छोटू- मुझे तुम hi चाहिए.. बाजारू रांड को तो मई कभी भी छोड़ सकता हु..

सिमरन- ये लडके तुम जो ख्वाब देख रहे हो ये कभी भी नहीं हो सकता

करीम- देखो सिमरन .. ये अब किसी की भी बात नहीं मानेगा.. ये ऐसा hi है..

और करीम सिमरन के पास जाता हैं और उसके सर पर बड़े प्यार से अपने हाथ फेरने लगता हैं....

करीम- मेरे बात मान लो सिमरन.. जो इसको चाहिए वो दे दो.. ओने टाइम.. एक दिन की तो बात है… फिर मई हु hi न.. तुम्हारे लिए..

करीम की ये बात सुनकर सिमरन करीम को आचर्य से देख रही थी..

सिमरन- करीम तुम समजने की कोशिश क्यों नहीं कर रहे हो… मई ऐसा नहीं कर sakati..mera जमीर ये सब करने की मुझे परमिशन नहीं देता है.. तुम जानते हो मई इस टाइप की औरत नहीं हु.. तुम्हारे साथ मैंने ये कर लिया इसका मतलब मई हर किसी के साथ ये नहीं कर सकती.. मुझे मजबूर मत करो .. करीम.. और मुझे जाने दो..

अब छोटू अनडू को बड़े प्यार से देख रहा था.. .......... वो कभी सिमरन के चहरे की तरफ घूर रहा था तो कभी करीम के चहरे के taraf.......use कुछ समझ में नहीं आ रहा था की सिमरन के मुन्न में इस वक़्त क्या चल रहा हैं ....... और इस दुनिया का कोई भी मर्द औरत के दिल की बात को नहीं जान sakta.....aur न hi उसे पूरी तरह से समझ सकता hain.........to भला छोटू कैसे जान पता......

सिमरन के ऐसे कहने से करीम सिमरन के तरफ देख कर हौले से मुस्कुरा पड़ता है..........

करीम- सिमरन अब ये मेरे भी बात नहीं मानेगा….... तू इसकी बात मान ले नहीं तो इस घर में क़यामत आ जाएगी.......

सिमरन- नहीं.. कभी नहीं…

फिर छोटू सिमरन के पास आता हैं और आकर उसके सामने खड़ा हो जाता हैं..... छोटू नज़दीक आया है ये देखते हुई सिमरन निचे देखने लगाती है..

छोटू - जब छुपाने को कुछ रहा hi नहीं सिमरन तो अब शर्माना kaisa.........chalo इस पल को खुल के एन्जॉय करो .........

और छोटू सिमरन के तरफ देखते हुई आपने शर्ट को धीरे धीरे उतरने लगता हैं ..... निचे देखते हुई hi सिमरन करीम को कहती है

सिमरन- करीम इसको कहो आपने ड्रेस न उतरे..

सिमरन के चहरे पर अभी शर्म साफ़ झलकने लगी thi......use बहुत अजीब सा महसूस हो रहा tha.......use कुछ समाज नहीं आ रहा था की वो क्या रिएक्शन दे.. शर्म करे या गुस्सा करे.. उसका मैं तो ये साब करने है नहीं कर रहा था पर वो पुरे तरीके से छोटू को विरोध भी नहीं कर प् रही थी.. अपने यार के सामने दूसरे किसी के साथ ये सब करना उसको बिलकुल पसंद नहीं था.. ........मगर हवस इंसान को कुछ भी करवा सकती हैं................

अब छोटू ने आपने शर्ट और पेण्ट उतर चुक्का था और फिर छोटू सिमरन से कुछ दूर हुत्त जाता हैं.....

वहीँ सिमरन एक नज़र छोटू के चहरे की तरफ देखने लगाती हैं मगर कहती कुछ नहीं...... अब छोटू सिर्फ ुंदरपनत मई था .. उसका लुंड आपने औकाद मई आ चुक्का था.. छोटू के चहरे की तरफ देखते हुई जैसे hi सिमरन की नज़र जैसे hi छोटू के लुंड पर जाती है तो सिमरन के आँखों के सामने छोटू का लुंड सिमरन को साफ़ नज़र आने लगता हैं......... सिमरन की नज़र कहा है ये देखते hi छोटू हौले हौले मुस्कुराता है .......और छोटू सिमरन को देखकर धीरे से आँख मर देता हैं और बड़ी ऐडा से मुस्कुरा पड़ता hain.........wahin छोटू की ये हरकत देख कर सिमरन डर जाती है और वो अपनी नज़र छोटू के लुंड से हटके करीम की तरफ देखने लगाती hai..........wahin छोटू बड़े गौर से सिमरन को देख रहा tha......wahin अभी भी करीम खड़ा था .. वो दोनों के नज़रो को इतने देर से घर रहा था.. अब करीम बड़े प्यार से सिमरन के बालों से खेल रहा tha.......kabhi कभी उसकी नज़र छोटू के तरफ भी चली jati......idher सिमरन कभी करीम के चहरे की तरफ देखती तो कभी सामने खड़े छोटू के चहरे की taraf........wahin छोटू की नज़रें बार बार सिमरन के चूचियों पर जा रही thi.....wo उसे देखकर हौले से मुस्कुरा रहा था....

उधर सिमरन को शर्म तो बहुत आ रही थी मगर साथ hi साथ उसका गुस्सा बढ़ता जा रहा था.... करीम उसके साथ खेल रहा था और छोटू उसके बूब्स को घर रहा था.. छोटू का ऐसा घूरना उसे पसंद नहीं आ रहा tha..uske लिए ये सब बिलकुल नया था......

अब छोटू थोड़ा पीछे छोत की तरफ आ जाता है .. और वह वो झट से से वहीँ रखा सिमरन का ब्रा उठा लेता है.. सामने कड़ी सिमरन सिर्फ पंतय और ब्लाउज मई कड़ी थी और वो छोटू को देख hi रही थी अब वो क्या karega..Simran अपने धड़कते दिल से छोटू अब क्या करेगा ये बड़ी hi बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी…… जैसे hi छोटू ने उसका ब्रा उठा लिया तब सिमरन आपने आप को कहने लगी.. हे भगवन.. ये लड़का फिर से वही गन्दी हरकत करेगा अब.. अभी भी करीम सिमरन के बालो से खेल रहा था.. अब छोटू अपना एक हाथ मई ब्रा को लेके वो हाथ अपने लुंड पर ले जाता है तो अपना दूसरा हाथ अपनी जाँघों पर फिर देता है ........ सिमरन की बेचैनी साफ़ उसकी हरकतों से पता चल रही थी.. वो छोटू को hi देख रही थी.. वो बड़ी hi बेकाजलरी से छोटू के अगले एक्शन का इंतज़ार कर रही थी..

उदार छोटू भी अब बहोत की बेचैन tha.......aab वो एक नज़र फिर से सिमरन के ब्रा की ओरे देखने लगता hain.....fir वो धीरे से ब्रा अपने नाक के पास ले जाता हैं और उसकी खुसबू सूंघने लगता hain.....is वक़्त सिमरन के ब्रा से हलकी हलकी उसके बॉडी की खुसबू आ रही thi.....chotu कुछ डियर तक ब्रा अपने नाक के पास लगाए रहता hain.....chotu की ये हरकत कुछ अजीब थी पर जो भी था सिमरन को भी अब इस खेल में मज़ा आने लगा था....... फिर सिमरन के तरफ देखकर हौले से मुस्कुराते हुई छोटू कहता है..

छोटू- क्या .. खुशबू है काका इस रैंड के बॉडी की.. मज़ा आ गया..

छोटू बड़े गौर से सिमरन के ब्रा को अपने हाथों में लेकर देखने लगता hain……fir से वो झट से उस ब्रा को अपने नाक के पास ले जाता हैं और उसकी खुसबू को अपने अंदर समेटने लगता hain……bra की खुसबू से उसका लुंड फिर से अकड़ गया tha…..magar अब उसे मनो किसी भी चीज़ का कोई होश नहीं tha….wo बस पूरे मुन्न से ब्रा की खुसबू अपने अंदर उतरना चाहता tha……..ye मंज़र देखकर सिमरन का चेहरा शर्म से दुबारा लाल पढ़ जाता हैं….....

सिमरन - ये क्या कर रहे हो …… यहाँ मेरे सामने ये मत करो… पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ …

लेकिन छोटू सिमरन की बात को नहीं सुन रहा था और वो आपने काम कर रहा था..

सिमरन- …..यहाँ मेरे सामने ये मत करो …..तुम्हें तो ज़रा भी शर्म नहीं hain……..kahan कौन सा काम करना चाहिए ये तुम्हें ज़रा भी नहीं मालूम…..

भले hi सिमरन छोटू से गुस्सा कर रही थी मगर कहीं न कहीं उसे भी ये सब ाचा लग रहा था.......

छोटू – सिमरन तेरे बदन की खुसबू सच में लाजवाब hain…...jab से ये ब्रा मेरे हाथों में आयी तब से मैं एक पल के लिए मनो अपना सब कुछ भूल सा गया hu…………par क्या करूँ तू चीज़ hi ऐसे है..

सिमरन का चेहरा शर्म से इस वक़्त पूरी तरह लाल tha…….wo चाह कर भी एक शब्द छोटू को कुछ नहीं कह प् रही थी……. पर फिर भी वो हिम्मत कर के कहती है…

सिमरन- बड़े बेशरम हो..

छोटू मुन्न hi मुन्न मुस्कुरा रहा था वो अब समझ चूका था की बहुत जल्द उसे सिमरन की छूट एक सौगात के रूप में मिलने वाली हैं...... सिमरन न चाहते हुए भी एक बार उसका ध्यान छोटू के लुंड की ओरे चला जाता hain…..chotu के ुंदरपेन्ट में इस वक़्त एक तम्बू की तारक उसका लुंड खड़ा दिख रहा tha……ye नज़ारा देखकर सिमरन एक बार फिर से सिहर उठती hain…..uski सांसें फिर से ज़ोरों से चलने लगती हैं…… सिमरन के नज़र को देखते हुई छोटू ब्रा को आपने लुंड की उप्पर ले गया था अब … और वह ुंदरपनत के उप्पर से सिमरन के ब्रा को रगड़ रहा था… छोटू ये सब करते हुई देखते hi सिमरन कहती है..

सिमरन- मेरे ब्रा वह से हटा दो.. गन्दी हो जाएगी.. छोटू अपनी बात नहीं सुन रहा है ये देखते हुई सिमरन करीम को कहती है..

सिमरन- इस को बता दो वर्ण तुम्हारे भतीजा आज मेरे हाथ से मार खायेगा..

करीम - मुझे प्यास लगी है .. मई पानी पाइक आता हु..

ऐसा कह के वो वह से जाने लगता है..

छोटू- काका.. आप पानी से अपनी प्यास बजाओ और मई इसकी छूट से अपनी प्यास बजता हु..

सिमरन गुस्से से छोटू के तरफ देखती है.. और फिर करीम के और सर घुमाकर कहती है..

सिमरन- तुम ऐसे नहीं जा सकते करीम.. मुझे यहाँ अकेले छोड़ के ..

लेकिन सुनकर भी करीम सिमरन के बात को अनदेखा करता है.. ये देखते हुई छोटू हौले से हंस पड़ता hain......wahin करीम कुछ छोटू को कह नहीं रहा है ये जानकर चुप चाप वही कड़ी रहती है.......... और थोड़े देर बाद कहती है..

सिमरन- छोटू ये सब करके आखिर तुम क्या चाहते हो ..

सिमरन के चेहरे पर अब गुस्से के और बेबसी के बदल धीरे धीरे नज़र आने लगे थे........ गुस्सा तो पहले था hi अब वो छोटू के सामने बेबस नज़र आने लगी थी..

छोटू- चाहते तो हम तुमसे बहुत कुछ हैं सिमरन .........जैसे तेरे छूट........... तेरी gand.......to दे डौगी न मुझे अपनी छूट और गांड मरवाने ......... और ऐसा कहके छोटू इस बार ज़ोरों से खिलखिला पड़ता hain.....wahin सिमरन छोटू पर मनो भड़क उठती हैं.....

सिमरन- जबान संभलकर बात करो छोटू ........ मेरे सामने तुम्हारी हैसियत क्या है ........ करीम की वजह से मई तुम कुछ नहीं कह रही hu..agar मैं अपने पर उतर आयी तो तुम्हें यहाँ से दो मिनट लगेगा बहार निकलवाने में........

और सिमरन इतना कहकर फिर से बिलकुल शांत हो जाती hain..........use अब छोटू पर बहोत गुस्सा आने लगा था......

छोटू- ये तो मैं भूल hi गया था .. .......... आप तो द्क्प है .. द्क्प सिमरन… जिसको एक बुद्धा टेलर रोज रंडी योकि तरह छोड़ता है .. और ये साली मुझे मेरे हैसियत बता रही है .. साली मैंने थान लिया तो अभी यहाँ तुजे रपे करूँगा.. पर क्या करू चच्चा को बुरा लगेगा.. और वो क्या हैं na.......aap इस शहर की द्क्प hain......agar मैंने आपके कपडे फाड़ दिए तो आप नंगी हालत में मई घर कैसे जायेंगे.. और अगर किसी ने आपको इस हाल में देख लिया तो आपकी बड़ी बदनामी होगी न......... और आप कह रही हो न काका की वजह से मुझे कुछ कह नहीं रही है वर्ण मुझे यहाँ से निकल सकती है .. काका कुछ नहीं करेंगे.. मुझे यहाँ से निकल के दिखाओ..

फिर छोटू करीम के तरफ देख कर कहता है ..

छोटू- कुछ नहीं करोगे न ..काका..

और छोटू फिर से ज़ोरों से हंस पड़ता hain.....wahin सिमरन गुस्से से छोटू को देख रही थी..

करीम- मई तुम दोनों के जगदे मई नहीं पडूंगा.. तुम दोनों आपस मई देख लो..

करीम के ऐसे कहने से सिमरन आचर्य से उसके तरफ देखती है.. सिमरन को उम्मीद नहीं थी की करीम ऐसा कुछ कहेगा.. और उसको ये उम्मीद तो कभी नहीं थी की छोटू ऐसा कुछ कहेगा.. और रपे करने की धमकी देगा..

सिमरन गुस्से मई कहती है..

सिमरन- आज तू मुझे जितना चाहे उतना मज़बूर कर le........main इतनी आसानी से हार नहीं मानूगी.......... तू मेरे बॉडी को टच करके दिखा फिर तुझे मैं बाटूंगी की मैं क्या चीज़ हूँ.....

और सिमरन फिर से छोटू को गुस्से से देखती है.. अब करीम कुछ नहीं बोलते हुई वह से चला जाता है . और रूम को बहार से लॉक कर लेता है.. सिमरन तो करीम के साथ जाना चाहती थी पर करीम इतने फ़ास्ट चला गया की सिमरन कुछ कर hi नहीं पायी.. अब उस रूम मई छोटू और सिमरन दोनों अकेले hi थे… सिमरन ब्लाउज और पंतय मई थी.. और छोटू सिर्फ ुंदरपनत मई था.. छोटू के सामने सिमरन कड़ी थी....... शर्म से उसकी नज़रें नीचे की तरफ झुकी हुई thi......wahin छोटू सर से लेकर पवन तक सिमरन को घूरे जा रहा tha......jaise वो उसे काचा चबा जायेगा.......

छोटू सिमरन के बदन को स्कैन करता है और सोचता है.. .. अब तक तू मुझसे बचती आयी थी मेरी जान मगर अब देखता हूँ की तू मुझसे कैसे bachegi.........jis वक़्त तू मेरे नीचे आएगी मैं तेरे को जानवर की तरह chodunga.........aur अभी तो ये सब शुरुआत hain.......dekhna मैं तेरी वो हाल कर दूंगा की तू मेरे लुंड के बगैर एक पल नहीं रह sakegi........aur हाँ एक दिन तू मेरे रखेल बनेगी .......इसका मुझे पूरा यकीन हैं........... बार बार उसका एक हाथ अपने लुंड पर जा रहा tha........wo अब सिमरन के लिए पागल हो गया tha........aab उसे किसी भी कीमत पर सिमरन की छूट चाहिए thi.........aur उसके लिए वो आज कोई भी कदम उठाने को तैयार था....... उसकी नज़रें बार बार सिमरन के चूचियों पर जा रही thi.......wo उसकी दोनों गोलियों को अपनी आँखों से नाप रहा था...... उधर दूसरी तरफ सिमरन भी सोचने लगाती है ..वो सोचती है जब छोटू करीम के सामने इतना कुछ कर सकता है तो पता नहीं वो अब उसके साथ अकेले मई क्या क्या karenga......ye सब सोचकर सिमरन मुन्न hi मुन्न घबरा रही थी..... करीम ने बहार से कमरे का दरवाज़ा लॉक कर दिया है यही सोचकर सिमरन की दिल की धड़कनें और ज़ोरों से धड़कने लगती हैं.......
 
अब छोटू सिमरन के पास आता है ..

सिमरन- तुम मेरे पास मत आओ ..

छोटू- क्या करेगी तू..

सिमरन कुछ नहीं कहती .. सिमरन कुछ नहीं कहती ये देखककर छोटू सिमरन के कमर से हाट पीछे डालता है और सिमरन को आपने पास खिंच लेता है..

छोटू - मान जा ..नहीं तो रपे करूँगा..

सिमरन- कभी नहीं.. मैंने कोई चुडिया नहीं पहन राखी है .. तुम्हारे जैसे के सामने मई कभी भी सरेंडर नहीं करूंगी.. अगर तुमने मेरे साथ ऐसे वैसे हरकत की तो तुजे मई अच्छे से सबक सिखाऊंगी.. मत भूलो मई एक पुलिस अफसर हु..

सिमरन के बात की तरफ ध्यान न देते हुई छोटू सिमरन को किश करने की कोशिश करता है..





........

तब सिमरन आपने चेहरा दूसरे तरफ घूमती है.. गुस्से मई छोटो उसका ब्लाउज फाड़ देता hai..waise सिमरन ने जल्दबाज़ी मई ब्लाउज के बटन अचे से लगाए नहीं थे .. जैसे hi छोटू ब्लाउज को जोरसे खींचता है तो सिमरन के ब्लाउज के बटन निकल जाते है.. ब्लाउज फटता नहीं है.. उसके बटन निकल जाने की वजह से सिमरन का ब्लाउज आगे से ओपन हो जाता है…

सिमरन- chotu…tum ऐसे जट्टी मेरे साथ नहीं कर सकते ..

छोटू- करने को तो मई बहोत कुछ कर सकता हु.. अगर तू प्यार से मानेगी तो सब अचे से होगा.. वैसे जबरदस्ती मुझे भी पसंद नहीं है..

सिमरन- फिर मुझे जबरदस्ती क्यों पकड़ के रखे हो..

सिमरन के ऐसे कहने से सिमरन को छोटू चोर देता है.. जैसे hi सिमरन से छोटू दूर हो जाता है वैसे hi सिमरन आपने ब्लाउज के बटन अचे से लगा लेते है.. और थोड़ा पीछे हैट जाती है.. सिमरन शर्म से अपनी नज़रें नीचा की तरफ झुकाये कड़ी thi.......bilkul खामोश si.........wo कुछ नहीं कहती .....डर से उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा tha........wo अब तक छोटू को बहुत ाचे से जान चुकी थी.. ......

अब छोटू फिर से सिमरन के बदन को सर से लेकर पवन तक घूरने लगता हैं.............. छोटू के ऐसे देखने से वो दर जाती है .. और घूम जाती है .. छोटू फ़ौरन सिमरन के पास जाता हैं और उसके ठीक पीछे आकर खड़ा हो जाता hain........usse बिलकुल satkar.....aab उसका लुंड सिमरन के नंगी गांड को टच कर रहा था...... इस वजह से सिमरन की सांसें और भी भरी हो चुकी थी........ छोटू सिमरन को पीछे से अपनी बाँहों में भर लेता हैं....





वहीँ सिमरन उसे अपने से दूर धकेलने की पूरी कोशिश करती है.... शायद अभी भी उसका गुस्सा कम नहीं हुआ था...... वो फ़ौरन छोटू के तरफ पलटी हैं और बड़े गौर से छोटू की आँखों में देखने लगती हैं......... शर्म और घबराहट अब भी उसके चेहरे से साफ़ झलक रही thi......wahin दिल की धड़कनें पूरे उफान पर thi.......uski लुम्बी लुम्बी साँसों से उसके दोनों बूब्स और भी क़हर धा रहे थे.......

वो अब सोचते है ये लड़का मुजसे सम्बलनेवाला नहीं है.. डर भी नहीं रहा है.. कुछ तो प्लान करना पड़ेगा.. कुछ बातो मई इसको उलझना पड़ेगा .. नहीं तो इसको ताकत दिखाए तो ये मुझे जाने नहीं देगा.. इससे तोडा बातो मई लेना पड़ेगा.. यही सोचते हुई सिमरन कहती है..

सिमरन – मुझे जाने दो छोटू ....... कोई आ jayega.......aur अगर किसी ने हमें यहाँ इस हाल में देख लिया to...........qayamat आ jayegi........tum समझा करो......

इस बार सिमरन ने ये बात छोटू की आँखों में आँखें डालकर कही thi........wahin छोटू बड़े गौर से सिमरन के खूबसूरत चहरे को एक तुक निहार रहा tha.........jaise वो उससे कोई शिकवा गिला कर रहा हो ...........

छोटू- यहाँ इस घर मई अब मुझे और काका को चोर के कोई नहीं है..

वहीँ छोटू अब और भी उतावला होते जा रहा tha......chotu अपना एक हाथ की ऊँगली सिमरन के बालों पर फेरता हैं और उसे धीरे धीरे सिमरन के गालों की तरफ ले जाने लगता hain.......wahin सिमरन घबराकर अपनी दोनों आँखें फ़ौरन बंद कर लेती hain......aab उसका कलेजा बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था.......

सिमरन- करीम के बीवी और बच्चे..

करीम- वो शहर से बहार गए है दो दिन बाद आएंगे..

छोटू अपना एक हाथ सिमरन के गांड पर रख देता हैं और बहुत आहिस्ता से अपने हाथों पर दबाव डालने लगता hain.....wahin इस बार सिमरन के मुँह से हल्की सी सिसकारी फुट पड़ती हैं...........

सिमरन- aaaaaaahhhhhhhhhhh..... तुम बहुत गंदे हो ........

सिमरन की ये बात सुनके छोटू के चेहरे पर सवालियां निशान आ जाते है ........

छोटू- ऐसा क्या गन्दी वाली हरकत मैंने तुम्हारे साथ कर दी..

सिमरन- इतने जल्दी कहा भी तुम हाट लगा रहे हो…

छोटू अपना हाथों पर दबाव धीरे धीरे बढ़ता जाते हुई कहता है ..

छोटू- तो क्या थोड़े देर बाद लगा दू क्या…

सिमरन- मुझे नहीं पता..

सिमरन ये सब चाहती थी तो नहीं पर उस के अंदर इंकार का कोई भी भाव अब नहीं था........ सिमरन के दिल में एक्ससिटेमेंट भी बढ़ती जा रही tha......sach तो ये था की उसे छोटू पर गुस्सा आ रहा था पर छोटू की साडी हरकतें ाची लगने लगी thi........use देखने से ऐसा लग रहा था जैसे वो अब वो छोटू के लिए तैयार हो गयी हो...... जैसे वो उससे मुन्न hi मुन्न कह रही ho.......aawo छोटू और आज मेरे जिस्म से जी भर कर khelo.......mere बदन के हर हिस्से को जी भर का masalo......aur तब तक मसलते रहो जब तक तुम्हारा मुन्न न भर jaye.......aaj आपने जिस्म की साडी गर्मी को शांत कर दो........ मुझे अपना बना लो........... शर्म से सिमरन का चेहरा और भी लाल पढ़ चूका tha.........aabhi भी उसकी दोनों आँखें बंद थी वहीँ छोटू बड़े गौर से सिमरन के खूबसूरत चेहरे की तरफ देख रहा था..... अब सिमरन अपनी आँखे खोलती है..

छोटू के हरकत से सिमरन की आँखें सुर्ख लाल होती जा रही thi........hawas अब उसकी आँखों में भी साफ़ नज़र आने लगे the.......ek बार फिर से उसकी छूट गीली हो चुकी थी........... आपने आप पर काबू पते हुई वो कहती है..

सिमरन- chotu.........humein अब जाने दो...............

और सिमरन इस बार छोटू से थोड़ी सी दूरी बनती hain.......wahin छोटू अब अपने हाथ आये शिकार को भला इतनी आसानी से कैसे जाने दे सकता था........

छोटू- चली jana........main तुम्हें रोकूंगा nahin........bus ये तो बता दो की अकेले में मुझसे कब मिलने aawogi.......aaj रात mein..........main अब तुम्हसे और दूर नहीं रह सकता.........

सिमरन फ़ौरन पलट जाती हैं और जैसे hi वो अपना पहला कदम आगे बढाती हैं छोटू इस बार अपना दोनों हाथ सिमरन के कंधे पर रख देता हैं और इस बार ज़ोरों से सिमरन को अपने तरफ खींच लेता हैं........





सिमरन का पूरा जिस्म छोटू के जिस्म से सत्ता हुआ tha........wo कुछ पल तक उसी पोजीशन में रहती हैं और फिर से छोटू को अपने से दूर करने की कोशिश करती हैं......

छोटू इस बार आपने दोनों हाथ तेज़ी से सरकते हुए सिमरन के सीने पर ले जाता हैं और इस बार पूरी ताक़त से सिमरन के दोनों चूचिया को कसकर मसलने लगता हैं....... वहीँ वो अब अपना लुंड हौले हौले सिमरन के गांड पर भी रगड़ रहा tha......Simran पूरी तरह से बेचैन हो उठी thi......is तरह से छोटू ाचकनक उसके साथ ये सब करेगा उसने ऐसा कभी सोचा न tha........insaan जो चीज़ न सोचे वो अक्सर होता हैं..... सिमरन ने सोचा था छोटू को बातो मई उलझा देगी लेकिन यहाँ तो छोटू ने आपने हरकत से सिमरन को hi काबू मई कर रहा था..

छोटू अपने हाथों को तेज़ी से सिमरन के दोनों चूचियों पर चला रहा था...... मनो वो उसके चूचियों से दूध निकल रहा ho.........wahin सिमरन के मुँह से सिसकारी फुट रही thi.......wahin वो अब छोटू को अपने से दूर भी धकेल रही thi.....magar छोटू के आगे वो बार बार नाकाम सी साबित हो रही थी.......

सिमरन - aaaaaaaaaaaaaa…. sssssssssssssssssssssss...........chor दो न छोटू ........अगर किसी ने देख लिया to..............main कहीं की नहीं rahungi............please...........

इसपर छोटू कुछ कहता नहीं है..

सिमरन फिर से छोटू को अपने से दूर करने की नाकाम कोशिश करती हैं ....... वहीँ छोटू अपने दोनों हथेली से सिमरन की दोनों चूचियों को लगातार मसल रहा tha.......use ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसने कोई रुई अपने हाथों में पकड़ी ho.........isse पहले सिमरन कुछ संभालती छोटू अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाता हैं और इस बार वो अपनी हथेली से सिमरन के छूट को कसकर पकड़ लेता हैं...... इस वजह सिमरन के मुँह से सिसकारी फिर से फुट पड़ती हैं............

छोटू- तुम बहुत सूंदर हो सिमरन .......... जब से तुम्हारी तस्वीर करीम काका ने मुझे दिखाए है तब से मुझे तुम्हे पाने की चाहत thi.......chahe जो हो अब मैं तुम्हे अपने से दूर कभी नहीं जाने doonga.......tumhare लिए मैं कुछ भी कर jawunga.........kisi से भी लुद्द jawunga........tum बस मेरी हो Simran...........bus मेरी...........

सिमरन थोड़ी मुस्कराते हुई कहती है धीरे से…

सिमरन- और करीम..

छोटू- करीम काका कुछ नहीं करेंगे..

और करीम फिर से अपने हाथों को हौले हौले हरकत करने लगता hain.......uski एक हाथ की ऊँगली सिमरन के गलों पर थिरक रही thi........usi हाँ तो से उसके चहरे को अपनी और घुमाया और उसको किश करने चाहा..





तब सिमरन हौले से अपनी दोनों आँखें खोलती हैं और बड़े गौर से एक तुक छोटू के चहरे की तरफ देखने लगती hain......mano वो उससे शिकायत कर रही हो ............. तुमने मुझे ये क्या कर दिया hai..aur कुछ सोचकर अपनी गर्दन घूमती है..

छोटू अपना दूसरा हाथ सिमरन के छूट पर रख कर बहुत आहिस्ता से आपने हाथों को हरकत करने लगता hain........ek बार फिर से सिमरन की सांसें बेकाबू हो चुकी thi.........seene में जो दिल था अब वो भी ज़ोरों से धड़क रहा tha.......magar लैब पूरी तरह से खामोश the.........aankhon ने शायद आज छोटू को पूरी मनमानी करने की इज़ाज़त दे दी थी........

छोटू तो जैसे पागल सा हो गया tha.......uska अगर बस चलता तो वो सिमरन को वहीँ इसी वक़्त नंगा कर देता और जी भर कर उसके जिस्म के साथ khelta........magar वो भी जनता था की ऐसे नाचीज़ को आहिस्ता आहिस्ता खेलने मई hi मज़ा hai..wo यही सोचकर अपना होंठ सिमरन के गार्डन पर रख देता हैं और बहुत आहिस्ता से सिमरन के गार्डन को धीरे धीरे चाटने लगता हैं.......





सिमरन इस हमले को बर्दास्त नहीं कर पति और वो इस बार ज़ोरों से सिसक उठती हैं...........

सिमरन इस बार छोटू से फर्याद करने लगती hain.......aab उसका भी गाला भरी हो गया tha....mano अभी वो रू देगी........

सिमरन- बस करो न..

वहीँ छोटू कुछ सोचकर सिमरन से दूर हो जाता hain....aur बड़े गौर से सिमरन के चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगता हैं.....

छोटू- ठीक हैं Simran.........main तुम्हारी माज़री के बगैर कुछ नहीं kArunga.......magar मुझसे जाते जाते ये वादा करो की तुम आज रात मुझसे मिलने aawogi........yahin....

छोटू अब नार्मल हो चूका tha.....magar अब भी उसके ुंदरपेन्ट में टेंट बना हुआ tha.......mano लुंड महाराज बहार निकलने को कब से बेताब ho........Simran एक नज़र छोटू को सर से लेकर पवन तक देखती हैं और जब उसकी नज़र छोटू के पेण्ट की तरफ जाती हैं एक बार फिर से उसके चेहरे पर शर्म की लखीरें साफ़ झलक पड़ती हैं..... फिर सिमरन सोचती है अगर हाँ बोलूंगी तो hi ये लड़का जाने देगा नहीं तो नहीं जाने देगा.. पोलिसवाले दिमाग यहाँ चलने से कोई फायदा नहीं है.. इसके ताकत के आगे मैं कुछ नहीं कर सकती .. एक बार यहाँ से चली जाउंगी तो फिर यहाँ कभी नहीं आउंगी.. इतना सब सोचने के बाद वो कहती है..

सिमरन - ठीक hain......mujhe मंज़ूर हैं..........

और सिमरन आगे कुछ नहीं कहती .........वहीँ छोटू चुप चाप खड़ा मंद मंद मुस्कुरा रहा tha........jaise आज उसने जग जीत लिया ho.....haan जग hi तो जीता लिया था उसने aaj............Simran जैसा आइटम पाकर........

फिर आपने आप से कहता है .. आज रात एक बार तू आ जा .... फिर मई दिखता हु ............... इतने देर से तू जो नखरा कर रही मैं जिन्न गईं कर एक एक का हिसाब तुझसे lunga........aaj तुझे मैं सर से लेकर पवन तक नंगा kArunga.......aur साडी रात तेरी छूट में अपना ये लुंड pelunga........tu भी क्या याद करेगी की किस मर्द से तेरा पला पड़ा था...... .और छोटू ये सब खुद से कहकर फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं...... अब छोटू के चेहरे पर खुशियां साफ़ झलक रही थी..................... सिमरन को लगता है छोटू मान गया है.. वो आपने चालाकी पपे मैं hi मैं है रही थी.. पर वो क्या जानती थी छोटू क्या चीज़ है.. खुश होक सिमरन आपने ब्लाउज के बटन लगाना शुरू करती hai..panty पहन लेती hai..tabhi अचानक सिमरन को बाहों में उठाके कला कलूटा छोटू उसको खाट पे पटक देता है ..और उसके उप्पर आता है..





और उसके पंतय निकल के निचे फेक देता है.. पालक झपकते ही सिमरन के कमसिन योनी में छोटू ने अपना तना हुवा लैंड घुसा दिया था. ये इतना तेज़ हुआ के सिमरन को समझने का मौका ही नहीं मिला..





सिमरन - उईईईई mmmaaa......mar गयी.......”

सिमरन के मुँह से चीख निकली. यहां छोटू अपना मुसल तना हुआ लैंड सिमरन के योनी में घुसेड़ता जा रहा था. जो सर सर करके साप के भाँती उसके बिल में घुसे जा रहा था.

“aah....Simran... रानी... इतना क्यों चीख रही हो?? अब तो इसकी आदत कर लो जान”

सिमरन की छूट में अपना मुसल लैंड ढसाते हुए छोटू सिमरन के बदन पर टूट पड़ा. उसकी चूँचियों को मसलते हुए वो उसकी योनी में कोहराम मचा रहा था.

हरामी…. धोकेबाज…. मादरचोद… बास्टर्ड…

क्या हुआ रानी.. क्यों गालिया दे रहे हो..

हरामी… मुझे धोके मई रखकर ये सब मेरे साथ कर रहे हो… मुझे कहा जाना है तो जाओ… और मई जाने लगी तो धोके से मेरे साथ ये सब किया…

तूने ये सोचा भी कैसे की मई तुजे चोदे बगैर यहाँ से जाने दूंगा.. ये तो तुजे काबू मई लेन के लिए झूठ बोलै था..

हरामखोर चोर मुझे..

सिमरन ने जब ये कहा तब छोटू ने अपना लैंड पूरा का पूरा बहार निकल के सिमरन के योनी में बड़ी तेज़ी से और निर्दयता से भींच दिया.

“ आआआआआ...... chhod...maar दिया कमीने.........”

सिमरन के मुँह से फिर से एक जोरदार आह निकली. उसकी चीख इतनी दमदार थी के छोटू के कानो में भूचाल आ गया. आर उसके हाथ उसके लैंड से सीधे उसके कान पे जा रुके…

“अबे साली, कान पहाड़ देगी क्या? रुक, तेरा इलाज करना पड़ेगा..”

छोटू ने यहां वह देखा. और नंगा मादरजाद किसी रेडे के माफिक ज़मीन पे बैठ gaya.Simran उतने लगाती है तब उसे उठ कर फिरसे गिरा देता है.. खाट के नीचे राखी हुयी एक देसी शराब की बोतल उसको दिख गयी. उसने अपना हाथ खाट के निचे दाल दिया और वो बोतल निकाली. उसमे से थोड़ी शराब निकाल के बाजू पड़े एक गिलास में दाल दी. एक घूँट में ही उसने वो गिलास जातक लिया.

“aah....maja आ गया ..तनिक अब अच्छा लग रहा मादरचोद.. शबाब और शराब का एक साथ मज़ा.. बहुत मज़ा आता है..

तभी बहार से करीम का आवाज आता है..

सेल छोटू.. धीरे से छोड़ मेरे रानी को.. वो कोई बाजारू रांड नहीं है … नाज़ुक काली है.. मार डालेगा क्या .. उसे..

ये सुनते hi सिमरन गुस्से मई बोलते है..

हरामी.. तुजे तो मई देख लुंगी.. छोड़ूंगी nahi..sale .. करीम.. धोकेबाज.. धोके से मुझे यहाँ बुलाया और मेरे साथ यहाँ जबरदस्ती कर रहे हो..

करीम- हारे छोटू.. जबरदस्ती मत कर उसके साथ.. वो पुलिस अफसर है.. दोनों को जेल मई डालेंगे…

छोटू- फ़िक्र मत कर काका.. मई ाची से चौंदूगा तेरे इस बुलबुल को..

हरामखोर चोर मुझे…

अपने गंदे मुँह से सिमरन की और देख के उसने कहा

..आई ही.. क्या गुस्सा hai..kya मस्त ले गयी मेरा लौड़ा आपने छूट के अंदर तू ...चिलाती बहुत हो सिमरन रानी तू..

सिमरन जातक से छोटू को आपने से दूर करने की कोशिश करती है..

सिमरन रानी tanik..piyogee? मजा आएगा तुझे भी... इंग्लिश तो पिटे हो .. ये देशी भी पीओ…

नहीं … कभी नहीं… मुझे क्या आपने जैसा घटिया … गन्दी नाली का कीड़ा समाज है क्या तूने…

गन्दी नाली का कीड़ा क्या… अब देख ये कीड़ा क्या करता है..

और शराब गिलास में डालकर वो सिमरन के मू के पास लाया. उसने वो कड़वी शराब सिमरन के मुँह को लगाके बोलै..

“इससे पियो Simran...chillaogee nahin..tanik मजा लोगी.... इंग्लिश से

ज्यादा..

सिमरन ने मुँह दूसरी तरफ गुस्से से फेर लिया.

इसपे छोटू बोलै…

ये तो नखरा कर रही है.. ये ऐसे नहीं maanegee..isaka इलाज करना पड़ेगा..

छोटू ने उसकी नाक दबाई और अपना लैंड एकदम से पूरा बाहर निकल के जपाक से एक और बार अंदर छूट में भींच दिया. किसी सुनामी के प्रति उसने सिमरन के छूट में हमला बोल दिया. वो दृश्य भी अजीब था ऐसा जैसे काऊबॉय की तरह छोटू सिमरन को घोड़ी की तरह नचा रहा हो.

न चाहते हुए भी सिमरन का मुँह खुल गया और तुरंत बाद छोटू ने वो गिलास उसके मुँह पे लगा दिया. कड़वी देसी शराब उसके गले के अंदर पूरी की पूरी उतर गयी. जैसे ही छोटू ने सिमरन का नाक छोड़ा, सिमरन ने धस करके अपनी सांस छोड़ी. और नीचे मुँह में बची थोड़ी बहुत शराब थूक दी. छोटू राक्षस की तरह हंस पड़ा. देसी शराब का असर अब सिमरन पर जो पड़ने वाला था. पहले उसने इंग्लिश पी थी और अब देशी.. अब कॉकटेल आपने असर दिखा रहा था.. उस छोटीसी रूम में मानो शराब और शबाब का मौसम चालू हो गया था अब. छोटू के धक्को को बर्दाश्त कर के सिमरन भी अब चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी.

उसने अपने दोनों पाँव उठा लिए और छोटू की पिट के ऊपर जकड दिए. छोटू ये देखकर चौक गया. सिमरन इतने जल्दी ये करेगी उसको उम्मीद नहीं थी.. . सिमरन वही नहीं रुकी तो उसने छोटू का सर अपने हाथो में भींच कर के उसको अपने सीने से रगड़ के रखा. इस कारण छोटू के लैंड में तनाव आना शुरू हो गया. क्योंकि सिमरन अपने छूट में खुद होकर उसका लैंड निगल रही थी.

chod..bhadave...chod...mita दे अपनी bhook...aah.....

सिमरन की ये बाते और उसका रूप देख छोटू है पड़ा. अपने नशे में धूत वो सिमरन के करीब आ के उसके गर्दन को चूमते हुई बोल पड़ा..





भूक तो तुझे भी लगी हैं रानी... अब बर्दाश्त हमका भी नहीं हो रहा चल पकड़...

और अपना खड़ा लैंड वही उसके हाथ में दे दिया. सिमरन ने कोइ डेरी न करते उसका लैंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उसको आगे पिच्छे करना चालू कर दिया. दृश्य बहुत ही विचित्र बन गया था. बड़े कामुकता से सिमरन उसका लैंड भी मसल रही थी और जकड भी रही थी. उसकी इस हरकत से छोटू को असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी.

जोश मई आकर छोटू ने फिरसे सिमरन को छोड़ना शुरू kiya..chotu कास कास के सिमरन को चोदे जा रहा था. 15 मिनट हुए वो सिमरन की छूट में अपने लैंड को पेले हुए था. और देसी शराब का नशे का असर अब उसपे भी होने लगा.

“aah...meree raanee...randee ...छुड़वा ले.....”

छोटू की इस गाली का जवाब सिमरन ने ऐसा दिया के जिसका छोटू को उम्मीद नहीं थी..

हाँ.. bhadave..chod..um...jitana चाहता हैं chod..aannn....

छोटू सिमरन की ये बात सुनके चौक तो गया पर जोर से हँसाने लगा.

अरे व... सिमरन बोलै था न देसी शराब पीकर देखो मजा आएगा तुमको bhee...dekhee हमारी राय सुनाने का फायदा..

हाँ .. साले… ऐसा hi लग रहा है..

छोटू अपना लैंड सिमरन की छूट वैसे ही मार मार ते बोलै…

raand...aah...saali शराब नहीं,, ये मेरे लैंड का कमाल hain...aah....meree सिमरन...... रांड

बात तो तू सही कह रहा हैं ..हरामी.. मुझे भी ऐसा hi लग रहा है.. तेरे उस बूढ़े काका ने कभी मुझे ऐसा नहीं छोड़ा था.. तू तो कमल है..

छोटू पूरा लुंड बहार निकल के जोर से अन्दर डालते हुई कहता है..

साली तू पुलिसवाली है न.. आपने जाट पे आ hi गयी न.. मार ली पलटी… काका के सामने काका का गुणगान और मेरे सामने मेरा..

इसपर सिमरन हस्ती है..





अबे भड़वे ...ruk..aaaah....ruk तू zara..us कमीने मई इतना दम नहीं है ... ..मममममममीयीय.... तू बहुत जबरदस्त छोड़ता है..

सिमरन की इस बात पे छोटू जोर से हंस पड़ता है. छोटू आज ज्यादा ही जोश में चुदाई कर रहा था शायद उसको सिमरन की बाते सुनके और नशा चढ़ रहा था. 20 मिनट होने को थे, उसका लैंड हैं के झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था. सिमरन की शराब उसको इस कसी हुयी चुदाई का मजा लेना सीखा रही थी जिसका वो खुद होक मजा ले रही थी.

सच में शराब कैसी बुरी बाला हैं जो मर्द तो मर्द , औरत को भी अपने जैसा बना देती हैं. सिमरन भी शराब के नशे धुत जनाब शनाब बाके जा रही थी. कुछ भी हो दोष किसका भी हो, यह अंतिम सत्य हैं के मनुष्य भोग और नशे में खुदको भी भूल जाता हैं इसका सिमरन प्रत्यक्ष उदहारण हैं.

यहां छोटू धक्के पे धक्के मार रहा था. 20 मिनट होने को थे लेकिन वो तो झड़ने का नाम नहीं ले रहा था. चुदाई का जैसे कोइ भूत उसपे सवार हो गया था. सिमरन अब थक गयी थी..

chotu...bas भी करो... रुक जाओ ना… हमको मार डालने का इरादा है क्या…

छोटू अपने धक्के चालू रखते हुए वैसे ही हफ़्ते हफ़्ते बोलै,

साली रंडी ..आज साला मन नहीं कर रहा रुकने ka..aaaahh...aaj तक इतने रंडियो को छोड़ा है लेकिन इतना मजा कभी नहीं आया.. तेरे छूट ने आग लगा दी hain...aah..

तभी वह छोटू के सामने दिवार पर पर एक लड़की की तस्वीर थी …





उसकी तरफ देख के छोटू सिमरन को जोरजोर से छोड़ रहा था.. वो सिमरन देख लेते है..

उस तस्वीर को देखकर मुझे क्यों जोरजोर से छोड़ रहा है… कोण है वो रांड..

चुप कर साली .. उसको रांड मत बोल..

कोण है वो…

सलमा..

कोण सलमा..

तेरे यार की बेटी..

साला इतना बुद्धा है क्या करीम .. उसके बेटे इतने बड़ी हो गयी क्या..

हाँ…

तू चाहता है उसको..

हाँ

छोड़ा नहीं क्या उसको

नहीं .. नजदीक आने hi नहीं देते..

ऐसा कहके छोटू जोरसे लुंड सिमरन के छूट मई पेल देता है..

आह्ह्ह्हह्हहआ… धीरे न…

नशे में धूत सिमरन गुस्से से उसने chudate-chudate ही छोटू की और देख बोलै..

aah....aa...kutte..isalie तू मुझे इतने जोर से छोड़ रहा है ...aahhh...to सलमा की ले na...meree क्यों ले रहा hain..aah......... मममममय… मर गयी..

20 मिनट से लगातार धक्के खाती हुयी सिमरन अटक अटक के बड़े कामुक अंदाज़ में गुस्से से सब बोल रही थी. पर इसका परिणाम होता उल्टा. उसकी ऐसी बाते सुनके छोटू को और ज्यादा जोर आता. वो हर आगे का धक्का पीछेवाले से जोर से लगाता. और उसका हिसाब बराबर करता. उसने अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ाई और बोलै..

Aahh..ye ले मेरी सिमरन raanee...ab उस रंडी को भी chodunga..par पहले ..aah....teree छूट तो खाने दे..

और एक जोर का धक्का लगाके उसने सिमरन की छूट के कोने कोने में अपनी मौजूदगी दिखा दी. रूम में ाहो की चीखों की आवाजे घूम रही थी. शराब की बदबू और शबाब की खुशबू से वो समां इतना मादक बन गया था के मत पूछो.

सिमरन भी अब खुद होक इन सब का मजा ले रही थी. उसको ये सब पसंद आने लग रहा था. जो नफरत उसको एक घंटे पहले आ रही थी अब वो नफरत अब हवस में परिवर्तित हो गयी थी. इसमें कारण छोटू था के सलमा थी ये बड़ी रोचक बात हैं. छोटू से हो रही चुदाई को देख उसको ये भी लगाने लगा था के छोटू के इस रफ़्तार को रोकना हैं तो उसीको ही कुछ करना पड़ेगा.

aah......aah....aah....Simran...teree छूट की to....aah...... आह... वात लगा दूंगा.. आज..

छोटू ने अपना लैंड निकाला और उसकी छूट में सपाक बोलके ऐसा भींच दिया मानो कोइ तलवार.... उसकी छूट इतनी गीली हो गयी थी की लैंड उसकी छूट में जड़ तक समां गया. उसने जोर से सिसकारी भरी और उस को अपनी बाँहों में जकड लिया. छोटू ने और तेजी से धक्के मारना चालू कर दिया. हर धक्के पर उसकी सिसकारियां तेज होती जा रही थी. इस लम्बी हुई चुदाई से एकदम से उसका बदन थरथराया और उसने कास कर छोटू की पीठ पर नाखून गाड़ दिए और उसने अपनी आँखे बहुत जोर लगाके मीता दी और अपने होठ चबाके एक आह भरी...

aah....mmuuummy....maee तो गयी......

यहां सिमरन ने अपना पानी छोड़ दिया था. वो झाड़ गयी थी. उसके बुर में से उसका काम रास रिस होकर बाह उठा जो सीधे छोटू के लैंड के ऊपर से चलते होक खाट पे बाह गया. वो निढाल होकर ढेर हो गयी. अब छोटू भी अपने चरम सीमा पर था. आधे घंटे से वो सिमरन को चोदे जा रह था. उसका भीगा लैंड अब अकड़ कर फूल रहा था. सिमरन को उसके गरम फुलेहुए लैंड की हलचल अपने योनि में महसूस हो गयी.

aah...randee....mera निकल रहा hain...aah..

वहां छोटू अब अपनी चरम सीमा पे खड़ा था. उसका लैंड अब सिमरन की छूट खा के तृप्त होने जा रहा था. सिमरन जो बस कुछ ही पल के पहले अपना पानी छोड़ गयी थी. उसको भी ये अंदाजा लग गया के छोटू अपनी पिचकारी कभी भी छोड़ सकता हैं. लेकिन उस को ये नहीं समझ रहा था के वो लैंड और अंदर की तरफ क्यों सरका रहा हैं. तभी छोटू अपने आखरी धक्के देते हुए बोल पड़ा..

aah...meree रंडी..

ऐसा बोलकर छोटू ने सिमरन को जोर से अपनी बाहों में भींच लिया और उसके होठो को अपने होठो में कैद कर डाला.





उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी के सिमरन हिल भी नहीं प् रही थी. उसका नाक उसकी नाक से साँसे चुरा रहा था. होठ उसके होठो की गिरफ़्त में थे. बड़े कास के वो उसको चूस रहा था. अपना बदन फेविकोल की तरह चिपकाके दोनों भी पसीने से एकदम लदबद खाट पे पड़े थे. वैसे ही अंग से अंग रगड़ाके छोटू ने वो किआ जो सिमरन कभी सोचा ही नहीं था. उसने सिमरन के छूट में अंदर तक घुसे अपने लैंड से वीर्य की धार सर्रर्रर्र ... बोलके छोड़ दी. उसका लिंग आधे घंटे से पहला हुआ था. मुसल लैंड सिमरन की छूट में ही अपना वीर्य थूक रहा था. एक बड़ी पिचकारी ऐसे निकली के वो सिमरन के बच्चेदानी पे जा कर ही रुक गयी. गरम गरम लावा उसको महसूस हुआ. सिमरन ने भी आह निकली..

haayyyyyyyyyyyyyyyyy...haaaaaaa..gayeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee....meeeeeeeeeeeeeeee,,,,haaaa..kameene.....kutte.. अन्दर क्यों डाला..

पहली बार किसी ने उस के छूट के अंदर अपना पानी छोड़ा था. सिमरन उस वक़्त सब चीजों से परे हो गयी. उसकी आवाज भी कमजोर गिराने लगी और उसकी आँखे संतुष्टि से बंद हो गयी और साथ ही नए अनुभव में उसका अंतर्मन लीं हो गया.

aah.......randee.......le saalee.....aah.......

छोटू वैसे हो दबोच के सिमरन के छूट में अपने लैंड की पिचकारी छोड़े जा रहा था. कुछ समय के बाद उसके लैंड ने पिचकारी बंद कर दी. सिमरन की छूट से उसका वीर्य निचे सर्र होक टपक रहा था. दोनों निढाल हो पड़े थे. सिमरन वैसे ही उसके बदन पर चिपके हुए ढेर हो गया. पसीना शराब और वीर्य तीनो की खुशबू से रूम का समां रंगीन हो गया था.

थोड़े देर बाद सिमरन वह से उठ के आपने कपडे पहनती है.. छोटू वह सो रहा था.. घर मई कही करीम नहीं था.. उसने दूर जो बहार से लॉक किया था वो निकला था.. सिमरन खुद को तैयार कर के गाड़ी की के ढूंढ लेती है और आपने घर जाने के लिए दूर के पास चली जाती है …

जा रहे हो क्या

तब पलटकर सिमरन छोटू की तरफ देखती है..

तो क्या यही राहु क्या??

अब सिमरन पर का हवस का और शराब का नशा उतर चूका था..

थोड़े देर और रुकती तो और एक दो और राउंड हो जाते..

छोटू के इस बात से सिमरन को बहुत गुस्सा आ जाता है.. तभी उसकी नज़र सामने पड़े फोटो पाई जाती है.. उस फोटो को देखते हुई सिमरन के दीमक मई एक प्लान आ जाता है. ..वो सोचते है .. इन् दोनों कमीने ने मुझे धोके से प्लान बनके मुझे यहाँ बुलाया और मुझे एक रंडी की तरह छोड़ा.. साला इस करीम की लड़की को उसे करके मई इन् दोनों मई जगदा लगा दूंगी और करीम की लड़की और इस कमीने के महबूबा को सच की रंडी बना दूंगी.. इन् दोनों को भी दिखा दूंगी सिमरन कौर से पन्गा लेने का क्या नतीजा होता है..

फिर वो छोटू की और देखते हुई कहते है..

बाकि के साथ इस रंडी के साथ मन लेना

उसको रंडी मत कहो.. मई उसे प्यार करता हु..

प्यार करता है तू

हाँ

मतलब ये तेरे माशूका है..

हाँ

वो तेरे माशूका तुजे चाहती है क्या

पता नहीं

और करीम को पता है क्या

नहीं..

छोटू के जवाब से सिमरन कुश हो जाती है.. और वो खुद से कहती है.. अब आएगा मज़ा.. साला करीम के साथ रण्डियोंको छोड़ता है और इधर उसके बेटे से प्यार करता है.. करीम को इसने अभी तक नहीं बताया है.. और करीम को बहार से पता चला तो करीम को बहुत गुस्सा आएगा और करीम गुस्से मई आ गया तो कुछ भी कर सकता है..

प्यार करती है तुजे ये तुजे पता नहीं क्या

वही तो प्रॉब्लम है.. उसका कुछ पता नहीं चलता है

मतलब

कभी बहुत प्यार से बात करती है तो कभी बहुत गुस्सा.. फिर कुछ कुछ दिनों तक मुझे बात नहीं करती

अच्छा

हाँ.. उसको पटाने का कबसे तरय कर रहा हु पर पैट नहीं रही है

मई पटके दू तो

छोटू सिमरन के बात से आचार्यचकित हो जाता है..

तू कैसे.. मतलब तू उसे जानती भी नहीं है

पुलिसवाली हु सब जानती हु

पर तू मेरे लिए क्यों करेगी ये सब

तब कुश होक शर्माने का नाटक करते हुई कहते है..





अब तुमने इतना मुझे कुश किया है तो मेरा मैं कह रहा है तुम्हारे लिए कुछ अच्छा करू..

सिमरन के इस बात से खुश होक छोटू उठ जाता है और उसके पास जेक उसको बहो मई लेता है और कहता है..

अब आ जाओ न मेरे पास तुम जोर से किश करने का मैं कर रहा है..





और उसे किश करने लगता है.. सिमरन भी उसको किश करने लगती है.. अब दोनों का किश जोरो से चल रहा था..

तो सचमुच तुम मुझे सलमा पटके डोज

हाँ मेरे राजा

पर याद रखना हमारे मुलाकात मई जितने डेरे होंगे होतो की वसूली उतनी hi ज्यादा होगी मेरी जान..





कर लेना..

“बहुत प्यार करता हु मई उससे yar………aisaa प्यार किस्से नहीं करता …….. एक आखिरी कोसिस करना चाहा रहा हु मैब….. तेरे जरिये.. मुझे निराश मत करना..

छोटू बोल भी न पाया आगे …उसके आँखे नम्म हुई..

haan…haan…pta है मुझे की तुम बहोत प्यार करते हो सलमा से … और तुम मई बिलकुल निराश नहीं करूंगी..

ऐसा कहते हुई उसके बहो मई हाट डालके उसको चिपक जाती है..





पर एक बात कहु..

हाँ कहो..

तुम्हारे सलमा को देख के मुझे एक श्यारी की लाइन याद आ गयी..

कोनसी..

और लोगो के दिल जलने lage………….jalan होने लगी मुझसे……

जाने किस मिटटी की बानी थी सिमरन.. छोटू उसे देखता hi रह gya..par सिमरन को कोई फर्क नहीं पद रहा था ……

….मुझे जलन होती है तुम्हारी सलमा से ??????????

जलन और तुम??

हाँ

वो तो तुमसे ज्यादा खूबसूरत तो नहीं है

किसने कहा?? मुझसे बहुत ज्यादा खूबसूरत है.. इसलिए तो जलन हो रही है मुझे

देखना तुम्हारी जलन की वजह से मेरे ख़ुशी मई कोई दिक्कत न आ जय..

...नहीं छोटू ….मैं तो तुम्हारी खुसी के सिवा कुछ भी नहीं चाहूंगी …..मई आगे जो भी कुछ करुँगी तुम्हारी खुसी के लिए hi karungi……agar ज़िन्दगी में कभी मेरी वजह से तुम दुःख हुआ तो तुम जो चाहो मेरे साथ करो……..

सिमरन के इस बात से छोटू कुश हुआ..

बहोत प्यार करते हो न सलमा से ???

हाँ

कुछ मांग सकती हु तुजसे से उसी प्यार के खातिर ……..

मेरे पास कुछ नहीं तुम्हे देने ko………jaan मांग लो तुम्हारी कसम उफ़ तक नहीं करूँगा..

जो कुछ हम दोनों के बिच हुआ ...गलती से hi सही …… तू उसका ज़िक्र कभी किसी से नहीं करेंगे और न hi दोबारा कभी मुझसे इस बारे में बात करेंगे..

सिमरन जाने क्या छाती थी छोटू नहीं समाज पा रहा था..

huh…bas इतनी सी बात …नहीं karunga…kabhi नहीं karunga…..tumse भी नहीं karunga..……..bas एक बात बता दो…..

हाँ पूछो

मैंने और करीम चाचा ने तुम्हारे साथ जो किया उसके वजह तुम गुस्सा नहीं आया

नहीं पर याद रखना किसी से बात मत करना

हाँ

करीम से भी

चाचा को तो सब पता है

अदा पता है.. ये बात थोड़े पता है..

हाँ

मत बताना उसे..

ठीक है.. अब मई चलते हु..

और उसको किश करके जाने लगे…





करीम का रूम शहर के एक बेहद गरीब और पिछड़े हुए एरिया में tha….rat के 10 बज रहे थे और वो एरिया गुमसुम सा था…… पर सिमरन पुलिस अफसर थी.. तो उसको कैसा डर.. फिर वो अपनी कार मई बैठकर वह से चली गई आपने घर..
 
दूसरे और माहि भी आपने घर आती है.. घर आते hi वो बीएड पाई बैठ जाती है और सोचने लगाती ये कैसे हो गया..





इतने बड़े गलती मुजसे कैसे हो गयी.. ये तो मई कभी भी नहीं चाहती थी.. फिर मेरे हाथ से ऐसा कैसा हो गया.. माहि की आँखें अब बंद थी पर दिमाग बेचैन!





माहि समझ नहीं पा रही थी की क्या करे. उसके अंदर की पतिव्रता नारी कह रही थी की ये सब ठीक नहीं है पर उसके अंदर की अतृप्त कामना की मूर्ती कह रही थी की थोड़ा सा मज़ा तू भी ले ले माहि. फिर शायद ऐसा मौका मिले न mile.aise सोचने की वजह से hi उसके दिल की धड़कने तेज़ हो गयी.





उसकी साँसे तेज़ होने लगी. उसके निप्पल हार्ड हो रहे थे और ब्लाउज टाइट होने लगी. अपने जाँघों के बीच भी माहि को एक अजीब सेंसेशन हो रहा था. कुछ कुछ वैसा hi जैसा कुछ पल पहले करीम सी बूब्स दबाने के बाद हुआ था. पर मनीष के साथ सेक्स के वक़्त से अबकी बार वो सेंसेशन और तीव्र था. शायद इसलिए की वो घर परिवार, समाज के बंधन से मुक्त होना चाहती थी . माहि अपने जाँघों के बीच से ृस्टि गीलापन को मह्शूश कर सकती थी. वो अपने जांघ को फैला कर अपनी छूट को कुछ आज़ादी देना चाहती थी. पर वो तो बीएड पे पिट के बल लेते हुई थी.. कैसे करे .. वही वो सोच रही thi..aur स्माइल कर रही थी..





ऐसे देखने में तो माहि का जीवन खुशाल था. अपने पति मनीष के साथ वो खुसी खुसी रह रही थी. उसकी फॅमिली पहले से hi बहोत रिच थी.. एक सुखी जीवन के लिए ज़रूरी सभी चीजें थी उसके पास. बस शादी के 4 साल बाद भी वो माँ नहीं बन पायी थी. वो नहीं जानती थी की माँ क्यों नहीं बन पायी.. उसमे कमी थी या उसके हस्बैंड मनीष मई.. आज तक उसने इस बारे मई ज्यादा सोचा नहीं था..

माहि ने सेक्स के बारे में जो भी सुना था उसे कभी पता hi नहीं चल पाया की वो सब केवल कहने की बातें हैं या बस उसके जीवन में hi वो आनंद नहीं है जो उसने लोगों से सुना है. उसकी सहेलियों ने उसे कई बार बताया था की चुदाई सुरुवात में दर्द तो होता है पर उसके बाद स्वर्ग सामान आनंद है. उसने न तो दर्द की hi अनुभूति की और न hi स्वर्ग सामान आनंद की. बिस्तर में भी मनीष अधिक देर नहीं टिक पाटा था. उसके लिए तो चुदाई बस 5 मिनट का एक रिचुअल मात्रा था . मनीष उसके साड़ी या गाउन को ऊपर सरका कर उसके कमर के नीचे, जांघों के बीच, घनी झारिओं में छिपी गुलाबी गहरी गुफा में अपना छोटे से अकार का लुंड… उसको लुंड कैसे कहेंगे .. जाने दो लुंड hi कहते है.. नहीं तो मनीष बुरा मान जायेगा.. जितना अभी तक वो करता है उतना भी नहीं करेगा.. घुसता और क्षण भर में निढाल हो कर सो जाता. माहि तो ये भी नहीं जानती थी की मनीष का लुंड बड़ा है या छोटा! उसने कभी किसी और मर्द का लुंड देखा भी नहीं tha.Wo हमेशा अपने व्यवहार और बातों में आदर्श पत्नी की तरह hi रहती thi.balki वो आदर्श पत्नी hi थी..

अब माहि के मैं में उथल पुथल हो रही थी. पिछले 4 साल से वो किसी के पत्नी होने का सुख नहीं उठा पा रही थी. शादी का मतलब क्या होता है.. पति पत्नी को सम्भोग का सुख देता है, बदले में पत्नी पति को शारीरिक और संसारी सुख देती है. ये कैसा बंधन हुआ की वो पति को सबकुछ दे और पति उसे सम्भोग का सुख भी न दे सके?

महसूस तो माहि को भी बहुत कुछ हो रहा था सिमरन की तरह. बस एकतरफ शोर का माहौल था और दूसरी तरफ वीराने का. एक तरफ बदन से बदन घिस रहा था तो दूसरी तरफ एक हल्का सा स्पर्श का अहसास मिल रहा था. कितने अलग दृश्य थे दोनों भी. एक तरफ तूफ़ान था तो दूसरी तरफ पहल. एक तरफ अंत था तो एक तरफ प्रारम्भ. जहा छोटू noch-noch के खाना खा रहा था और एक तरफ माहि जो सोच मई डूबी हुई थी.. ऐसा कैसा हो गया .. मैंने उसको आपने पास क्यों आने दिया.. क्यों उसको आपने बदन चुने दिया.. पर दोनों में एक बात एक जैसी थी और वो थी “काम वासना ” जो उस वक़्त अपने शिखर पर विराजमान थी.

माहि सोचने लगाती है..

माहि के आँखों के सामने अब सारा नज़ारा आ रहा था.. लास्ट 15 डेज का.. उसको माहि ने 15 दिन पहले hi देखा था.. वो सोचने लगाती है..

मुझे आज भी याद है जब उसने मुझे पहले बार देखा था तो कितना बेशर्मो की तरह मुझे देखने ला गया था और मुश्कुराने लगा था. उसके सामने की दांत लम्बी और बदसूरत थी. उसके चेहरे को देख कर मुझे घुन आ रही थी. वो नीचे सिमरन मैडम के साथ सेक्स कर रहा था और उपकार मुझे देख रहा था.. कोई आदमी इतना बेशरम हो सकता है क्या.. गेनेराल्ल्य अगर कोई किसी को ऐसे हालत मई देख लेता है तो शर्म से मारा जाता है.. अगर कोई किसी को गर्लफ्रेंड या वाइफ के साथ ऐसे सिचुएशन मई खुले जगह पाई पकड़ता है.. तो शर्म से मारा जाता है.. लेकिन ये तो एक्स्ट्रा मार्टिकल अफेयर्स था.. वो भी मेरे घर मई .. उसको उसदिन उसका कोई डर नहीं था.. अब मैडम ने पकड़ लिया .. अब क्या होगा.. ये कोई भी दर उसको नहीं था.. उसके बजाय वो लालची नज़र से मुझे बेशर्मो की तरह देख रहा था.. मुझे पहले से एक्स्ट्रा मार्टिकल अफेयर्स से नफरत थी.. अगर मैंने उसी दिन उसको वैसे देखी के बाद अगर मेरे घर से बहार निकला होता तो आज मुझे ये दिन देखना न पड़ता.. मेरे hi गलती है मैंने इस को लिघ्टली लिया.. अब इसी का हर्ज़ाना बरना पद रहा है मुझे..

उस दिन मुझे सिमरन मैडम पे कितना गुस्सा आया था.. आज तक मैंने सिमरन मैडम का कितना आदर किया था.. उन रेस्पेक्ट देती थी मई हमेशा .. लेकिन अब वो रेस्पेक्ट मेरे दिल मई नहीं रही थी.. मैंने उसदिन कितना सोचा था मैडम के बारे मई. की सिमरन मैडम इतना निचे कैसे गिर सकती है.. इतने घटिया हरकत कैसे कर सकते है.. और वो भी हमारे घर मई… सिमरन मैडम का हस्बैंड इतना अच्छा है.. फिर इनको ये करने की क्या जरूरत थी…

लेकिन बाद मई मुझे इसका पता चला.. क्यों न करती सिमरन मैडम ऐसा.. करीम का इतना बड़ा......... उस दिन मेरे सामने उसका लुंड फनफनाता हुआ अपने अकार में आया था .....वैसे करीम का लुंड पूरे 9 इंच का tha.....aur 3 इंच मोटा....... उसदिन मुझे क्लियर नहीं दिखा tha..lekin जब बाद मई मैंने एकबार क्लेअर देखा तभी मेरे होश उड़द गए थे.. और अब भी उसके होश उड़द गए the..wo सोच रही थी इतने बड़े लुंड पे तो कोई भी पागल होगा.. ..और ये सब सोचकर माहि धीरे से मुस्कुरा देता हैं.....





उसदिन बाद मई जब गार्डन मई वो पहली बार मेरे सामने आया था तब मुझे कितना गुस्सा आया था uspar..usdin कितने बेशर्मी से भैय्या को पूछ रहा था ये कोण है.. याने मई कोण हु.. मेरे hi घर मई.. और भाई के सामने hi बोल रहा था ब्लाउज कुछ सिलना है क्या.. देखो इसकी डेरिंग.. साडी दुनिया भाई को डरते है और ये भाई के सामने भाई की लाड़ली बहन पे डोले दाल रहा था.. डोले नहीं तो क्या.. उसी दिन hi मुझे समाज लेना चाहिए था.. लेकिन मई भी कितने बुद्धू हु .. उस का प्लान समाज नहीं पायी और सिर्फ गुस्सा करती rahi..aur उसदिन भाई भी इसकी तारीफ करने लगे थे.. भाई को भी क्या हो गया था जो इस बूढ़े की तारीफ करने लगे थे..

और उस दिन पुजा और करीम के बीच कुछ हुआ था क्या… कुछ गिरा था फर्श पर.. स्पर्म जैसा.. लेकिन पूजा उस घी कह रही थी.. घी तो नहीं था.. नहीं नहीं पूजा ऐसे नहीं कर सकती.. वो क्या सिमरन जैसे गिरी हुई नहीं है.. मई क्या भी सोचती हु .. ऐसा हरगिज नहीं हो सकता.. और पूजा के सामने hi मुझे क्या कहा था.. करीम ने.. क्या माल है.. कितना बेशरम है ये.. और मई भी कितना गुस्सा हुई थी uspar..aur उसके इस बात पर पूजा हँसाने लगी थी… कितने बेशरम हो गयी है Pooja..aur मुझे कैसे बोल रहा था .. देखने की चीज़ हु तो देखूंगा hi… बत्तमीज़ आदमी… उसदिन कितने जल्दी मेरे से फ्लेर्टिंग शुरू की.. मेरे कमर पर हाथ रख diya..maine भी गुस्से मई उसे छठा मार दिया.. मुझे लगा अब ठीक हो जायेगा .. लेकिन उसके बाद तो इसने हद hi कर दी…. मनीष से 2 मिनट मई दोस्ती कर ली और मनीष भी मुझे बोलने लगा .. इस से कुछ सिलवा लो… मैंने सोचा अब तो हद hi हो गयी.. मेरे हस्बैंड को भी अपनी और खिंच लिया.. मेरे हस्बैंड के सामने मेरे खूबसूरती की तारीफ करने लगा..

दूसरे दिन वो सुबह सुबह hi मुझे मिल गया.. और मेरे सूरत की तरफ hi देखने लगा.. मई उसी टाइम सोचने लगी… सुबह सुबह आ गया हरामी साला.. लगता है आज का मेरा पूरा दिन ख़राब hi जायेगा.. इस हरामखोर की नज़ारे मेरे पुरे जिस्म पर है.. मुझे ये गन्दी नज़ारे चुभती हुई महसूस हो रही है.. क्या घटिया आदमी है मेरे से नज़र hi हटा नहीं रहा hai..kabhi मेरे चेहरे को तो कभी मेरी छाती को एक तक घोड़े जा रहा hai..iss गंदे आदमी के यूँ घूरने से और इस की सूरत से hi मुझे अब नफरत सी हो गयी है..

उस दिन मनीष को कहने लगा.. आप की हर रात रंगीन होगी.. बाद मई हम दोनों जब बैडरूम मई किश करने लगे थो हमें चुपके से देखने लगा.. हस्ते हुई.. मेरा तो दिमाग hi ख़राब हो गया tha..uski ये हरकत को देख कर.. ुस्तिमे मुझे कुछ समाज मई नहीं आ रहा था की मई मनीष को बताऊ या नहीं.. मुझे तभी पता चल जाना चाहिए था.. मई जानती थी पहले दिन से उसकी नजर कहा है..

मई जानती थी जब से मई यहाँ पर आयी हु तब से मुझे उसकी नीयत ठीक नहीं लग रही है.. वो जिस तरह से मुझे देखता था मन तो ऐसा करता की अभी इसका खून कर दू .. … मुझे आज लग रहा है उसका खून कर hi देना चाहिए था.. अगर उसका खून कर देते तो आज मई ये सब उसके बारे मई सोचते hi nahi…Us वक़्त मई सोचने लगी थी.. साला बात मनीष से कर रहा है पर देख मेरी तरफ रहा है .. इस के देखने में हवस साफ़ नजर आ रही है .. हरामी मेरी तरफ बराबर घूरे जा रहा है.. साले की मुस्कराहट एक डैम घिनोनी है .. जब मनीष मुझे लेके बैडरूम मई लेके जा रहा था तब कह रहा था .. जाओ साहब.. ऐश करो.. हरामी साला.. कैसे भी बाते करता है.. लेडीज के सामने..

दूसरे दिन जब मई नाहा कर चुप चाप अपने बैडरूम में शीशे के आगे खड़े हो कर अपने बाल सही करने लगी थी.. तब करीम की हैवानियत भरी हसी बार बार मेरे आँखों के आगे दिखाई देने लगी थी .. वही हसी जब वो मुझे और मनीष को देख कर मुस्कुरा रहा tha..tab मैंने सोचा था.. साला घटिया आदमी मेरे दिमाग से जा hi नहीं रहा है.. और आपने आप को हँसाने लगी.. कितना गन्दा है.. कितना कला है.. और उसकी सोच भी उसके रंग जैसे hi काली है… साला हर बार मुझे hi घूरता है.. मुझे गन्दी नज़र से देखता है… कुछ तो करना पड़ेगा और भैय्या भाभी को बोल के इस घर से इसको जल्दी से निकलना पड़ेगा…

लेकिन मई कुछ कर नहीं पायी ….जब मई घर के सभी लोंगो के साथ ड्राइंग रूम मई बैठ के खाना खा रही थी … तभी वो वह करीम अपनी उसी गन्दी सी हसी के साथ मुस्कुराता हुआ वह आ गया … वो मेरे और भाभी के सामने आके खड़ा हो गया .. वो मुझे घूरे जा रहा था .. लेकिन पता नहीं उसको देखके भाभी क्यों मुस्कुराहा रही thi..aur बीच बीच मई शर्माकर निचे देख रही थी.. और दूसरे तरफ वो मुझे लगातार प्यासी नज़रो से देख रहा था.. इस वजह से मई लगातार गुस्से मई पागल हो रही थी.. मुझे करीम पाई गुस्सा तो बहोत आ रहा था.. लेकिन भैय्या के सामने मई ज्यादा गुस्सा भी दिखा नहीं सकती थी… उसकी नजर कभी मेरे चेहरे पर तो कभी छाती पर होती thi..Uski नजर देख कर मुझे उसी वक़्त साफ़ पता चल गया था की वो मेरे बारे में कुछ न कुछ गलत सोच रहा था.. उसकी नजरे मेरे पुरे जिस्म पर किसी तलवार की तरह से चल रही थी .. एक तो मेरा मूड पहले से hi खराब था.. करीम के हरकत की वजह से और उस पर उसकी गन्दी सी हसी.. मेरा गुस्सा अब कण्ट्रोल से बहार हो गया था.. इस वजह से गुस्से से मेरा गुस्सा मेरे प्यारे पतिराज पाई टूथ पड़ा और मई उसपर चिल्ला उठी..

मनीष.. ये घटिया आदमी यहाँ क्या कर रहा है..

मनीष उस वक़्त कितना दर गया tha…aur धीरे से कहने लगा..

..मुझे कैसे पता होगा.. वो यहाँ क्यों आया है..

करीम भी हरमि था.. वो बोलने लगा..

करीम हरामी आदमी है… भैय्या का नाम लेके कहने लगा..

शेठजी.. आपको मिलाने आया हु..

भैय्या ने जब उसे दताना सुरु किया तो भाभी ने उसकी साइड ले ली.. मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा tha..bhabhi कुछ बोलने नहीं दे रही थी.. फिर भी मैंने भैय्या को बोल hi दिया..

भैय्या.. ये मेरे तरफ हमेशा देखता रहता है … गन्दी नज़र से..

इसपर भैय्या ने उसे बहोत मारा..

इसपर भाभी कहने लगी.. मुझे कुछ गलत फैमि हुई है.. भैय्या फिर भाभी पाई hi गुस्सा होने लगे तो भाभी शांत हो गयी.. और भैय्या ने फिर से उसे मरना शुरू किया.. थोड़े देर और मरने के बाद भैय्या ने करीम को कहा की मेरे तरफ नहीं देखना है.. मई तो चाहती थी की भैय्या उसको घर से निकल दे पर भैय्या ने कहा अब वो ऐसे वैसे कोई हरकत नहीं करेगा.. मेरे भी बहीय्या के सामने कुछ न चल पाई..

करीम और भैय्या जाने के बाद भाभी मुझे समजने लगी.. माहि .. करीम अच्छा आदमी है.. मई उस वक़्त सोचने लगी थी.. क्या इस हरामी ने भाभी को भी आपने जाल मई फसा लिया.. फिर आपने आप को hi समजने लगी.. ऐसा नहीं हो सकता.. भाभी ऐसा नहीं कर सकती.. भाभी क्या सिमरन मैडम है.. ये सोचते हुई hi मई वह से चली गयी…

अब माहि सब ये याद करने लगाती है…

करीम को शेठ ने मारा था उसके नेक्स्ट डे जब करीम गर्दन मई ग्रास के साथ कुछ कर रहा था.. या किसी सांप या कोई किसी को आपने शूज़ हवा मई लेके मार रहा था.. तभी माहि बहार जाने के लिए वह आती है.. दूर के पास ..

वह उसको गर्दन मई करीम दिख जाता है.. उसको शक हो जाता है की करीम कुछ गलत कर रहा है.. माहि उसको पीछे से देखते है.. माहि कुछ देर वैसे hi कड़ी रहकर देखती है की वह आखिर करीम क्या कर रहा है.. लेकिन उसको कुछ समाज मई नहीं आ रहा था.. इस लिए वो करीम के पास चली जाती है... करीम उसके सामने निचे जुख कर किसी को मार रहा था..

माहि - क्या कर रहा है हरामखोर...

करीम को पहले से गुस्सा था माहि पर.. वो पीछे गर्दन कर के माहि को देखता है..





और गुस्से मई बोलता है..

कुछ नहीं चींईईईई.....

और रुख जाता है... लेकिन माहि को समाज आ गया की करीम क्या कहना चाहता है.. करीम का गन्दा वर्ड माहि जान चुकी थी...

क्या कहा तूने हरामखोर.....

करीम कुछ नहीं कहता ....

तूने मुझे गाली दी... न… हरामखोर..

करीम कुछ नहीं बोलता... मुझे गन्दा वर्ड उसे किया... न..

करीम कुछ नहीं बोलता इस वजह गुस्से मई आकर माहि करीम के गांड पर जोरदार लाठ मरती है... करीम इस के लिए तैयार नहीं था इस्सलिये वो मू मई गिर जाता है..

भाभी जी बिच्छू मार रहा था.. ..

साले.. हरामखोर... मुझे गाली देता है... मेरे से ठीक से पेश आ .. नहीं तो खाल खिंच लुंगी..

करीम कुछ कहता या कुछ करता इस से पहले वह 2-3 नौकर आ जाते है..

क्या हुआ मेमसाब..

माहि गुस्से से करीम की तरफ देखती है...

िस्सने कुछ कहा क्या... मेमसाब...

माहि कुछ नहीं kahatii...aur वह से चली जाती है.. फिर करीम को वो नौकर खरी खोटी सुनते है.. उसमे से एक माहि का ड्राइवर था.. करीम उससे जान पेचान कर लेता है... बाद मई करीम उससे माहि और मनीष के बारे मई सब पता कर लेता hai…Thodi देर तक करीम इधर उधर के काम करता है.. कुछ परेड के मेज़रमेंट लेने के लिए हॉल मई आ जाता है .. वह माहि हॉल मई बैठे थी.. टीवी देखते हुई.. तब करीम आता है.. करीम परेड का मेज़रमेंट लेने लगता है… और चिनेसे मॉडल वाले मोबाइल पे गण लगता है..

ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आंखे

इन्हे देखकर जी रहे हैं सभी

जो ये आंखे शर्म से झुक जाएगी

साड़ी बातें यहीं बस रुक जाएगी

चुप रहना, ये अफसाना कोई इनको न बतलाना

की इन्हे देखकर पि रहे हैं सभी

जुल्फें मगरूर इतनी हो जाएंगी

दिल को तड़पाएंगी, जी को तरसाएगी

ये कर देंगी दीवाना, कोई इन को न बतलाना

की इन्हे देखकर जी रहे हैं सभी

सारे इनकी शिकायत करते हैं

फिर भी इनसे मोहब्बत करते हैं

ये क्या जादू है जाने, फिर चाक गिरेबान दीवाने

इन्हे देखके सी रहें हैं सभी

निचे देखकर माहि गण सुन रही thi..gana सुनते हुई काम करते वक़्त करीम माहि को देखने लगता है.. माहि भी जनन चुकी थी की करीम बीच बीच मई उसे देख रहा है.. माहि यही सोच कर नज़रअंदाज करती है की ये घटिया आदमी है .. इस्पे ज्यादा धन ढोंगी तो तुम ये ज्यादा डिसट्रब करेगा.. आपने बालो की तारीफ मई hi करीम ने ये गण लगाया है ये जानकर माहि आपने बालो पाई हाथ घुमाकर करीम को देखने लगी...





माहि भी बीच बीच मई उसे देख रही थी की करीम उसको देख रहा है या नहीं… करीम भी ये पेचान जाता है.. माहि उसको देख रही है ये जानकर करीम की हिम्मत बाद जाती है.. और एक सेक्सी हिंदी गण लगता है…

आए… आए…

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे…

एह आहे आए… एह आहे आए…

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे…

ो काले काले बाल गाल गोर गोर

एह आहे आए…

काले काले बाल गाल गोर गोर

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

(उधर माहि मैं मई कहती है सेल ने तो सेक्सी गण लगा लिया … बहुत hi कमीना है ये साला .. थोड़ा इसके तरफ घर के देख क्या लिया ये तो ओपन हो गया..





हो यूँ न मुझपे दाल दाल डोरे डोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

मेरी बहकी बहकी चाल कर गई ऐसा कमाल मर गए छोरे छोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

( तू छोरा नहीं बुद्धा है .. कमीने.. बूढ़े ..)

ो काले काले बाल गाल गोर गोर

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

हो यूँ न मुझपे दाल दाल डोरे डोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

मेरे रंग रंगीले, वाह वाह

मेरे नैन कटीले, वाह वाह

छू के देख ज़रा दीवाने, मेरे होंठ रसीले, वाह वाह

एह आहे आए…

मैं हूँ अभी कुंवारी, वाह वाह

( मई शादीशुदा हु )

लगती सबको प्यारी, वाह वाह

मेरी एक ऐडा पे देखो, मर गयी दुनिया साड़ी, वाह वाह

मेरा कुसुम्बी रुमाल, कर गया ऐसा कमाल, मर गए छोरे छोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

ो काले काले बाल गाल गोर गोर

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

हो यूँ न मुझपे दाल दाल डोरे डोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

मेरी मस्त जवानी, शव

है दरिया तूफानी, शव

मेरा लाख ताकेका जोबन, चेहरा है नूरानी, शव

एह आहे आए…

मस्ती की मैं प्याली, शव

महके फूल की डाली, शव

कितने नाम गिनाऊ, तौबा लाखों की दिलवाली, शव

मेरा तीखा चम्याल, कर गया ऐसा कमाल, ो मर गए छोरे छोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

ो काले काले बाल गाल गोर गोर

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

हो यूँ न मुझपे दाल दाल डोरे डोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

मेरी बहकी बहकी चाल कर गई ऐसा कमाल मर गए छोरे छोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

ो काले काले बाल गाल गोर गोर

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

हो यूँ न मुझपे दाल दाल डोरे डोरे

अरे ओरे ओरे, अरे ओरे ओरे

गण ख़तम होते hi माहि करीम की तरफ स्माइल करके देखते है…





करीम को तो यही मोखा चाहिए था.. वो बोल पड़ता है..

भाभी जी एक बात कहु…

हरामी बोल hi पड़ा… आदत से मजबूर.. क्या करू मई अब… हाँ hi बोलती हु .. देखती तू हु क्या बोलता है… ऐसा माहि सोचने लगाती है..

बोलो.. क्या बोलना है..

वैसे भाभी जी आप से एक बात कहु आप हो बोहोत खूबसूरत. मनीष भैया ने सच में बोहोत पुण्य करे होंगे जो उन्हें आप जैसी लड़की मिली.

माहि को समझ में नहीं आ रहा था की वो उसका मजाक बना रहा था या उसकी तारीफ कर रहा है .. वो आचार्य भरी निगाहो से उसकी तरफ देखने लगी.





अरे भाभी जी सच में आप सच में बोहोत सुन्दर हो. अपने पुरे शहर में आप जैसे सुन्दर बीवी किसी की नहीं है.

अपने तारीफ सुन कर न जाने क्यों माहि को अच्छा लगने लग रहा था. पर ऊपर से दिखावा करते हुए उसने उसे दांत दिया.





बंद करो अपनी ये सब बकवास और अपने काम से काम रखो.. भैय्या को आने दो मैं तुम्हारी शिकायत करुँगी. माहि ने उसे थोड़ा डरते हुए कहा.

क्या होगा शिकायत कर के..

मार पड़ेगी..

वो तो आपने दो बार पड़वाए है.. एक बार शेठ जी से और एक बार आप से.. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा शेठ जी और एक बार मरेंगे.. उससे ज्यादा क्या..

माहि ुत जाती है और हास्के कहती है.. ऐडा के साथ.. माहि को देखता है और उसके बाल के तरफ इशारा करके बताता.. है.. इशारा करके उंगली से... बेस्ट है.. माहि शर्माके आपने पल्लू ठीक करती है..

करीम- हमारे दबंग भाभी को भी शर्म आती है... हमें पता hi नहीं था.. माहि चहरे पर थोड़ी स्माइल लती है ..

बेशरम .. मार से डर नहीं लगता क्या …

नहीं ..

और भैय्या ने घर से बहार निकल दिया तो..

तब उनके पैरो मई पड़के माफ़ी मांग लेंगे…

माहि के थोड़ा नज़दीक आता है करीम..





माहि उसके तरफ सेक्सी ऐडा के साथ देखने लगाती है.. लेकिन अभी भी उन्दोनो मई डिस्टेंस काफी था..

एक नंबर के हरामी हो तुम ..

हाँ वो तो हु.. पर आपकी तारीफ झूटी नहीं थी भाभीजी..

चल झूठे… सिमरन मैडम की तारीफ ऐसे hi की होगी और उनको ऐसे hi पटाया होगा..

उनकी बात अलग है भाभी जी..

मतलब ..

वो तो बहुत जल्दी पैट गयी थी…

लेकिन मेरे साथ फ़्लर्ट करने की कोशिश मत करना .. कुछ होने वाला नहीं है..

भाभी जी मई आपसे फ़्लर्ट नहीं कर रहा हु..

तो ठीक है..

आप सच मई बहुत खूबसूरत है ..

पता है..

करीम सोचता है.. साली को आपने खूबसूरती पाई बहुत ज्यादा गर्व है ...

माहि को लगता है ये कुछ ज्यादा hi नज़दीक आने की कोशिश कर रहा है.. इसको दूर करना पड़ेगा ये सोचकर माहि फिर चहरे पर गुस्सा लती है.. वो गुस्से से बोलती है..

जाओ यहाँ से... कमीने कही के..

तब वह पे काँटी शेठ आ जाता है..

काँटी शेठ करीम से बाते करने लगता है .. थोड़ी देर बाद माहि वह से चले जाने लगाती है… थोड़ा आगे जेक माहि पीछे घूम के देखते है करीम उसको देख रहा है या नहीं …तो करीम की नज़र माहि के गांड पर hi थी.. करीम की नज़र कहा है ये सोचकर माहि फिरसे एक बार शर्मा जाती है और वह से जल्दी निकल जाती है..





अब वो हिम्मत नहीं कर पति है फिर से घूम के देखने की करीम क्या कर रहा है.. और क्या देख रहा है .. वो अच्छे से जानती थी की करीम की नज़र कहा होगी.. ये सोचते हुई माहि आपने रूम मई पहुँच जाती है..

माहि बाथरूम मई जाकर फ्रेश हो जाती है.. जब माहि शीशे में खुद को देखती है तो उसके आँखे एक डैम गुलाबी हो गयी थी जैसी किसी शराबी की नशा करने के बाद हो जाती है, ठीक वैसी hi आँखे हुई थी इस वक़्त .. और उसी नशे में डूब कर वो सोचने लगी.. ..

पहली बार शीशे के आगे खड़े होकर खुद को देखने लगी ..





शीशे में अपने हुस्न का नजारा देख कर उसके मुंह से सिसकारी सी निकल गयी.. आज पहली बार शीशे के आगे खुद को इस तरह से देख कर उसे अपनी खूबसूरती का अहसास हुआ था.. आज पहली बार उसे लगा था की मैं कितनी सुन्दर हु.. आज hi पहली बार उसे पता चला था की लोग उसे घूर घूर कर क्यों देखते है.. और आज hi पहली बार उसे एहसास हुआ था की करीम की इसमें कोई भी गलती नहीं है. ऊपर वाले ने उसे बनाया hi इतनी फुर्सत से जो है..

अपने रूप को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान की लहार सी दौड़ गयी.. शीशे में ये नजारा देख कर उसे खुद पर एक पल के लिए हसी आयी… लेकिन बाद मैं वो सोचने लगी ये सब उल्टा सीधा क्या सोच रही हु मई.. और ये मई क्या कर रही हु.. वो भी उस घटिया आदमी के देखने से … नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. मई ये नहीं कर सकते .. ये सोच कर माहि शीशे के सामने से हैट गयी.. और बिस्टेर पर लेट गयी…





अपने रूप को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान की लहार सी दौड़ गयी.. शीशे में ये नजारा देख कर उसे खुद पर एक पल के लिए हसी आयी… लेकिन बाद मैं वो सोचने लगी ये सब उल्टा सीधा क्या सोच रही हु मई.. और ये मई क्या कर रही हु.. वो भी उस घटिया आदमी के देखने से … नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. मई ये नहीं कर सकते .. ये सोच कर माहि शीशे के सामने से हैट गयी.. और बिस्टेर पर लेट गयी…

और सोचते सोचते hi माहि सो गयी… रात को करीब 8 बजे उठ गयी … और खुद को hi कहने लगी..

बहोत लेत हो गया है.. मनीष घर पाई आ गया होगा… चलो जल्दी चलते है.. ये सोच कर माहि जल्दी फ्रेश होकर आपने घर जाने लगी..





तब करीम उसको पीछे से देख लेता है.. हमारी फटका भाभी कहा जा रही है..

माहि आवाज सुनकर पीछे घूम जाती है..





माहि- तुम यही पे हो.. अभी तक… घर भी जाते हो क्या कभी या यही दिन बार पड़े रहते हो..

करीम- आपका दीदार करने को रुका था...

माहि- तुम सुदरोगे नहीं न... अपनी औकात दिखा hi देंगे न...

करीम - क्या.. अदा है हमारी भाही की... लाजवाब.. अभी तो सुबह से ज्यादा खूबसूरत दिख रही है हमारी भाभी...

माहि- यहाँ क्यों रुके हो...

करीम - आपका दीदार करने ...

हो गया न दीदार..

आपने बाल को सवारते हुई करीम की तरफ देखते हुई कहती है.. अब जाओ यहाँ से...

एक बार आपने जलवा दिखा दो न..

कल का मार भूल गए क्या..

.. करीम हस्ता है.. और माहि आपने घर चली जाने को निकलती है वैसे hi माहि का हस्बैंड मनीष वह आ जाता

है…

माहि- अब मई घर को जाने के लिए निकली hi थी की तुम आ गए.. आफ्टरनून मई नींद आ गयी .. पता hi नहीं चला 8 कब बज गए…

मनीष- अच्छा हुआ ..

माहि- क्या मतलब है तुम्हारा..

मनीष- मेरा मतलब ये है की तुम लेट हुआ अच्छा hi हुआ.. तुम घर चली जाती और मई यहाँ रुकनेवाला हु तो तुम अकेले घर पाई क्या करती..

माहि- मनीष तुम यहाँ रुकनेवाले थे…

मनीष- हाँ… रुकनेवाला हु… कल भैय्या के साथ अर्ली मॉर्निंग निकलना है इसलिए..

माहि- ओह्होऊ… ऐसा क्या… अच्छा हुआ मई रुख गयी…

मनीष- भैय्या ने कहा था तुम इधर hi आ जाओ.. हम सुबह जल्दी निकल जाते है .. माहि वैसे भी यही रहती है..

माहि- मुझे तना मार रहे हो..

मनीष- नहीं तो…

माहि- भैय्या ने ऐसा कहा … आने दो भैय्या को पूछती हु..

मनीष- तुम यहाँ हो इसलिए ऐसा कुछ बोलै होगा..

करीम- हाँ साहब जी मैडम तो यही पे पड़ी रहती है…

इसपर मनीष और करीम दोनों हँसाने लगे..

माहि – तुम चुप करो… Karim...mai भैय्या को पूछ के hi रहूंगी अब..

मनीष- ारे मत पूछना… मैंने तो ऐसे hi कहा था..

माहि – मेरे साथ मजाक …

ऐसा कहके माहि मनीष को प्यार से मुक्का मारथी है.. मनीष उसके हाट को पकड़ के आपने बहो मई भर लेता है..

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जब ये दोनों एक दूसरे के बहो मई थे तब करीम माहि को देखता है तो माहि भी उसे देख लेती है.. और सोचती है की करीम को दिखा दू की मेरा और मेरे हस्बैंड के बीच मई कितना प्यार है .. ये मई अब करीम को दिखती हु.. ऐसा सोच के वो करीम की तरफ देखती है .. करीम उसके hi तरफ देख रहा था.. मनीष की पिट करीम की तरफ थी..

माहि मनीष के हूंतो पाई आपने हूंठ रख कर उसको किश करने लगाती है…





मनीष करीम है ऐसे उसे धीरे से कहता है .. लेकिन माहि सुन नहीं रही थी.. मनीष माहि को पीछे धकेल देता है.. और कहता है

मनीष- माहि पागल हो गयी हो क्या.. थोड़ा साबरा तो करो .. आसपास लोगो को तो देखो…

मगर माहि को करीम को दिखाना था की उसका और उसके हस्बैंड के बीच मई की सेक्सुअल लाइफ कितने अच्छे है.. ताकि वो उसका पीछा चोरे…

लेकिन माहि को पता hi नहीं था की करीम ने मनीष के बारे मई सब कुछ पता लगा लिया था .. वो शाय नेचर का है.. वो हमेशा माहि के साथ सेक्स करते वक़्त शाय नेचर की वजह से माहि को अच्छे से सटिस्फी नहीं कर पता था.. .. करीम ने माहि के ड्राइवर को दारू पिलाकर सब पता किया था..

करीम- साहब जी शर्माओ मत.. आपने मैडम की अच्छे से ले लो… मई अब यहाँ से चला जाता हु..

माहि को अब मनीष पाई बहुत गुस्सा आ रहा था .. करीम को दिखाना था उसे मेरा और मेरे हस्बैंड के बीच मई का pyar..lekin मनीष ने उसके पुरे प्लान पर पानी फेर दिया था..

अब करीम वह से आपने घर चला गया था…

दूसरे दिन सुबह माहि बालकन्या मई कड़ी थी.... ...





करीम जैसे hi माहि को देखता है वैसे hi माहि दर जाती है.. और आपने आप को कहती है..

आ गया सुबह सुबह... मेरा दिमाग खाने के लिए... सुबह सुबह इसका मू देखा है .. अब मेरा दिन कैसा जायेगा.. हे.. बहगवां मुझे बचा ले इस बूढ़े से .. आज.. आज मई घर भी नहीं जा सकती मनीष भी नहीं है वह पे.. फिर वो डरकर अन्दर भाग जाती है... करीम हसता है...

थोड़े hi देर मई करीम अन्दर आ जाता है.. माहि को वो सब तरफ देखता है .. लेकिन माहि उसको कही नहीं मिलती है.. वो उसे ढूंढते हुई बंगलो के पीछे वाले गार्डन मई जाता है .. वह उसे माहि दिख जाती hai..Mali को माहि पानी कैसे डालते है वो सिका रही थी.. अब करीम वह आ जाता है.. और माहि के बगल में खड़ा हो जाता hai..Mahi एक बार उसे देखते है..





आ गए सुबह सुबह यहाँ.. दूसरा कोई काम hi नहीं है..

काहाम्म्म्मम्म्म्म... hi तो करने आया हु .. यहाँ पे ..aaaaaaaaaaaaapppp..kkkaaaaaaa... बहहहहहहहाभीजी..

करीम ने ऐसे कहते hi उसके तरफ एक बार फिर से देखते है और स्माइल देते है..





न जाने क्यों उसे करीम की ये बात उसे अच्छे लगी thi...aur फिर से वो माली को समजने लगाती है.. करीम थोड़े देर तक ऐसे hi देखता है..

करीम- भाभी जी आप गलत बता रहे हो..

माहि करीम को गऊसे से देखती है …





और जोर से कहती है..

हम गलत बता रहे है..

हाँ.. भाभी जी..

माली- नहीं काका .. भाभी जी सही बता रही है..

करीम माली पाई गुस्सा हो जाता है..

करीम- तुम तो चुप hi हो जाओ.. गुडबुक.. तुम माली किसने बनाया .. मुझे यही ताजूब होता है…

इसपर माहि हसती है..





उसके बाल उसके चहरे पर उड़ रहे थे हवा की वजह से.. वो उस वजह से सेक्सी लग रही थी..

करीम- तुम तो पेड को पानी भी डालने नहीं आता है..

माहि गुस्से से कहती है ..





तो तुम सीखा दो न.. उससे.. तुम तो काफी अच्छे से आटा होगा न.. इतने बात कर रहे हो तो..

है भाभीजी .. हमें पेड को पानी भी डालने आता है.. और फल भी कहानी आता है… पक्का हुआ फल कैसे कहते है ये हम से बेहतर कोई नहीं जनता है..

इसपर माहि स्माइल करती है..





फिर करीम माहि के हातो से पाइप लेता है .. और पेड़ को अच्छे सी पानी देने लगता है.. और माली को समजने लगता है.. की पानी कैसे देते है.. कोनसे पेड को कितना पानी देना है.. छोटे पेड को कितना देर और बड़े पेड को कितना देर.. फिर आम के पेड़ के पास जाता है .. - माहि वह दूर खड़ा रहके देखते है..





वो भी हँसाने लगता hai..fir वो माली को कहता है..

आम के पेड को थोड़ा ज्यादा देर तक पानी देना पड़ता है.. ताकि हमें जल्दी और अच्छे आम खाने को मिल जाये.. और माहि के तरफ देखकर हाथो से इशारे से कहता है.. इतने बड़े बड़े आम होने चाहिए..

माहि धीरे से कहती hai…uski और देखते हुई..





बत्तमीज़ कही का..

करीम – भाभी जी कुछ कहा आपने ..

माहि उसकी और देखते हुई कहती है ..





कुछ नहीं कहा.. तुमसे कह के क्यों आफत मोल लू मई..

मई क्या आफत हु क्या भाभी जी..

नहीं तो क्या???

मई समाज नहीं…

मुझे नहीं पता…

फिर वो माली को कहता है..

तू सिर्फ देखेगा hi क्या…

इसपर माहि हसती है..





करीम- ले पाइप आपने हाथो मई और आम को अच्छे से पानी दे जरा.. मई जरा गोल गोल पक्के हुई आम को नज़दीक से देखके आता हु..

माली को कुछ समाज नहीं आता है..

माली- कोने आम.. काका..

माहि हँसाने लगाती है..

करीम- तुजे नहीं समाज मई आएगा.. तू अब तक बच्चा है..

ऐसा कहके माहि के पास चला जाता है..

करीम- तो आप क्या कह रही थी मैडम जी..

..

माहि- कुछ भी तो नहीं..

करीम उसके आम की तरफ देख के कहता है..

आप के आम तो बड़े गोल गोल है.. काफी रसेले होंगे…

चुप कर बदमाश..

अब इसमे क्या बदमाशी है भाभी जी..

लगता है तू 2 दिन पहले का मार भूल गया है.. फिर से एक बार भैय्या को बताना पड़ेगा..

मार की याद मत दिला तू अब मुझे..

तूने मुझे क्या कहा..

तू कहा..

मतलब अब तुम पे से तू पे आ गया है तू..

हाँ.. कोई प्रॉब्लम है तो बता..

ऐसा कह के माहि का हाथ धीरे से पकड़ लेता है..

हाट चोर मेरा … तेरे हिम्मत कैसे हुई मेरा हाथ पकड़ने की.. मैंने थोड़ा प्यार से क्या बात कर ली तू तो मुझे रेस्पेक्ट देना भूल गया और मेरा हाथ भी पकड़ने लगा है..

अब गुस्सा मत हो बुलबुल..

मई कोई तुम्हारी बुलबुल नहीं हु.. उस तेरे सिमरन बुलबुल के पास चले जाओ ..

वो अब यहाँ नहीं है.. 2-3 दिनों से नहीं मिल रहे है..

तुम्हारे जैसे गंवार से कोण मिलाना चाहेगा..

शहर से बहार गयी है इसलिए मिल नहीं रही है.. एक बार हम जिसको पकड़ लेते है वो आसानी से हमसे दूर नहीं जाता है..

हाँ.. पता है.. पता है.. अपनी खुदकी ज्यादा तारीफ मत करो… मेरा हाट चोर दो..

वो तो नहीं छोड़ूंगा..

मार खायेगा फिर..

तेरे जैसे फटका आइटम से मार खा न कोण नहीं चाहेगा..

बतमीज़ …

ऐसा बोल के माहि करीम को जोर से आगे धकेल देते है… वो माली पे जा गिरता है.. हड़बड़ी मई माली के हाथ से पाइप करीम की तरफ होते है.. और करीम के बदन पानी से भीग जाता है…

करीम- पेड को पानी तो डालने नहीं आता है ..और मुझे भीगा रहा है माली..

माहि इसपर हँसाने लगाती है..

माली- काका आप hi मुज पे आकर गिर गए इस वजह से हड़बड़ी मई पाइप आप की तरफ हो गया.. ..

फिर माली के हाथो से करीम पाइप लेके उसको भिगोने लगता है..

माली- नहीं नहीं काका..

और वो भागते हुई माहि के तरफ होने लगता है.. थोड़ा बाजु मई.. करीम माली को भिगोने लगता है .. तब माहि हँसाने लगती है..

आप क्यों है रही हो भाभी जी..

ऐसा कह के पाइप माहि की तरफ करने लगता है..

माहि- नहीं नहीं.. करीम…

करीम- क्यों हम पाई बहोत हसी आ रही थी क्या आप को मैडम जी..

माहि- नहीं हसूँगी..

करीम- फिर भी थोड़ा तो भीगना पड़ेगा hi न.. आप के वजह से मई भीग गया हु..

माहि- नहीं नहीं.. करीम.. मई अभी नहाके आये हु..





ऐसा कहके पानी से बचाने की कोशिश करती है..

करीम- तो क्या हुआ एक बार फिर से नाहा लो आप..

ऐसा कह के करीम माहि पे पानी डालने लगता है..



ये क्या कर दिया.. ऐसा उसे कहते है.. माहि पानी से पूरी तरह से है गयी थी..





थोड़े देर बाद माली पे पानी डालने लगता है तो मेरे पैसे भीग गए ऐसे बोल के वो वह से भाग जाता है..

फिर से माहि की तरफ देखता है..

नहीं नहीं करीम..





पर करीम कहा रुकने वाला था.. वो उसपे फिर से पानी डालने लगता है..





थोड़े देर पानी डालने के बाद करीम रुख जाता है.. तब माहि उसकी और देखता है..





उसका भीगा हुआ बदन बहुत सेक्सी लग रहा था..

मत डालो न पानी... करीम प्ल्ज़ मत डालो न.. मई भीग गयी हु पूरी .. बीमार पद जाउंगी अब ..

हमारे होते हुई तुम भीमर कैसे पड़ोगे .. मेरे बुलबुल..

तुम मेरे बात नहीं सुननी है न डालो कितना पानी डालना है डालो.. और आपने मन की कर लो..

तब करीम फिर से उसपर पानी डालने लगता है..





अब करीम माहि के पास आ रहा था...

पानी से मैं नहीं बार गया क्या जो मेरे नज़दीक आ रहे हो..

अब मई आपने बुलबुल को आपने बहो मई लेने चाहता हु..

नहीं .. कभी नहीं..

करीम थोड़ा आगे आते hi माहि कहती है..

मई ऐसा होने नहीं दूंगी...

ऐसा कहके वो जोर से बंगलो मई भाग जाती है...

पर करीम उसका पीछा करके उसको हॉल मई hi पकड़ लेता है... और अपनी बहो मई ले लेता है..

नहीं करीम ..चोर दो मुझे..

मई अपनी बुलबुल को गले लगाना चाहता हु..

नहीं प्ल्ज़ चोर दो न..

ठीक है चोर देता हु..

ऐसा कह के माहि को चोर देता है... माहि थोड़ा पीछे हैट जाती है.. लेकिन इतना अच्छा मोखा मई आपने हाथो से कैसे जाने दे सकता हु..

और एक बार फिर से जोर से आपने बहो मई बीच लेता है..

अभी तो चोर दो न .. मुझे लगा तो लिया न.. गले ..

अब मई आपने बुलबुल की पप्पी लेना चाहता हु..

कभी नहीं…

हाँ.. लूंगा तो जरूर .. ऐसा कहके आपने हूंठ माहि के हूंतो के पास ले जाता है..

मई भैय्या को बता दूंगी..

बता दो…

उस तुम्हारे सिमरन के पास जाओ न.. मुझे क्यों परेशां कर रहे हो..

अब इस बंगलो मई हु तो बुलबुल यहाँ की तो होनी च्चिए न..

यहाँ तुम्हारे सिमरन बुलबुल को बुला लो न..

तुम्हारे जैसे हॉट बुलबुल होते हुई उसको क्यों बुला लो..

फिर यहाँ दूसरे किसी को ढूंढ लो..

तुम्हारे लता भाभी को ले लू क्या..

कुछ भी करो..

वैसे इस बंगलो की सभी रंडियो को छोड़ चूका हु .. अब बस तू hi बचे है..

चुप कर कुछ भी मत बोलो..

माहि का इतना कहा था की किसी भूके कुत्ते की तरह करीम माहि पर जपत पड़ा और माहि के गर्म होंठो पर आपने हूंठ रख दिए.. और उसे जोरो से पिसते हुई बड़बड़ाने लगा..

Uummmmmmm…i..love.. यू.. मेरी माहि बुलबुल..

अब माहि के चहरे का रंग बदलने लगा tha..aab किश करते हुई hi करीम ने माहि का एक हाथ पकड़कर आपने लौड़े पे रख दिया .. तो माहि उछाल पड़ी..
 
करीम के इस हरकत का मकसद माहि अच्छे से समाज चुके थी.. उसे अपनी ख़ुशी और शर्म छुपाने मई बहुत मुश्किल हो रही थी.. माहि आपने चहरे पर अपनी प्यारी हसी लेट हुई कहती है..

करीम ..तुम .. बहोत बदमाश होते जा रहे हो..

तुम भी मेरे साथ बदमाश हो जाओ फिर.. मेरे बुलबुल..

मुझे नहीं बनाना है..

करीम ने फिर से माहि का हाथ आपने हाथ मई लेकर उसमे आपने बड़ा लौड़ा दिया और उसे हौले से दबा diya..jaise कोई उसे इशारा कर रहा हो..

एक बार फिर से माहि चौंक गयी.. इतना बड़ा लौड़ा आपने हाट मई पकड़ के माहि की तो सांस hi रुक गयी.. उसे उम्मीद नहीं थी की करीम इतने जल्दी ये सबकुछ करेगा.. लेकिन वो मंत्रमुग्ध होकर करीम के लौड़े को देखने लगी..

तेरे पति से बड़ा है न..

माहि ने हाँ मई गर्दन हिला थी..

माहि के तरफ से ये पहला पॉजिटिव रिस्पांस था करीम को.. माहि को भी समाज नहीं आया की उसने कब हाँ मई गर्दन हिला दी.. करीम का लौड़ा देखकर माहि के हूंठ लरज गए थे..

ये सब जान कर करीम ने एक बार फिर से माहि को अपनी और खिंचा और आपने गले से लगा लिया.. एक पल के लिए माहि ठिठकी और अगले hi पल आपने हाथो से करीम को जकड लिया.. करीम को उसके चुबते हुई निप्पल्स आपने छाती पे महसूस हो रहे थे.. वो माहि के गर्दन को बेतहाशा चूमने लगा.. करीम के ऐसे चूमने से माहि तो पागल से हो gayi..shyad ये पहला मोखा था जब कोई उसे ऐसा चुम रहा था.. मनीष जैसे शाय नेचर वाले बन्दे कभी भी माहि को ऐसा चूमा नहीं होगा.. माहि के मू से तेज हुंकारे निकलने लगी thi..jor जोर से सांसे मू के रस्ते बहार आने लगी थी..

करीम ने उसके चहरे को पकड़ा और उसके हूंतो पर आपने हूंठ रख दिए..

ummmmmmmmmmmm….





क्या मीठा यहसास था वो.. करीम ने आज तक बहुत साडी लेडी को चूमा था .. पर ऐसा येअहसास उसको पहली बार मिला था.. सिमरन और माहि के मिठास मई काफी ान्तर tha..ye हूंठ एकदम नरम और गर्म थे.. और साथ मई बेतहाशा मीठे..

उसके हूंतो को चोर कर माहि के आँखों मई करीम देखने लगा..

माहि को रहा नहीं गया..

क्या..

मुझे नहीं लगा था.. ऐसे ठीके फटका आइटम के हूंतो मई इतने मिठास होंगी..

चल हाथ बेशरम… कुछ भी बोलता है..

फिर से करीम ने माहि के हूंतो को सूचक करना शुरू कर दिया.. वो भी आपने पूरी ताकत से.. करीम माहि के हूंठ को चूसने लगा..





अपनी आदत के अनुसार करीम के हाथ माहि के आम पर पहुँच गए.. आपने दोनों हाथ मई उसके दोनों आम को पकड़ कर जोर से उसको करीम ने मसल दिया..

Aaaaaaaaaahhhhhhhaaaa….. mummmmmmmmiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…. Marrrrr..gayiiiiiiiiiiiiiiiiii….. धीरीईए.. कर नाहा… कामिनीईईई… दर्द हो रहहहहहहहाआआआ.. है…

माहि की आवाज इतनी तेज थी की उप्पर रूम मई माहि की लता भाभी को भी पहुँच सकती थी..

गली देते है रांड…

ऐसा कहके करीम ने फिर से उसके दोनों आम के निप्पल को पक्कड़ के और जोर से मसल दिया.. वैसे hi माहि जोरसे चीला उठी…..

आआआआह्ह्ह्हआआ…. स्स्सस्स्स्सोरररररररररययययययययय……………….

पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़… Karimmmmmmmmmm… dhireeeeeeeeee.. दबाओ….

ये हुई न बात…

तुम बहुत चालू हो करीम..

अब करीम ने धीरे धीरे अपनी उंगलियों मई माहि के निप्पल को लेकर उसके साथ खेलने लगा.. साथ hi साथ उसके हूंतो का रास भी पीना उसने जारी रखा..

और तभी करीम को अचानक माहि के गांड का ख्याल आया.. कल उसकी गांड देख कर वो पागल हो गया tha..khayal आते hi एकदम से करीम के दोनों हाँथ माहि के पिछवाड़े पहुँच गए.. और वो उन्हें बुरी तरह से मसलने लगे…

अब इसके पीछे पड़े हो क्या..

माहि ने ऐसा कहा लेकिन उसको मसलने से मन नहीं किया..

हाँ .. मेरी बुलबुल…

माहि आपने निप्पल करीम के छथि में चुभती हुई अपनी गगांद करीम से मसलवाने लगी थी अब.. आज माहि को पहली बार बहुत मज़ा आ रहा tha..iss मज़े को वो पूरी तरह से एन्जॉय कर रही थी..

अचानक करीम ने आपने दोनों हाथ माहि के स्कर्ट के अन्दर दाल दिए पीछे से.. उसके नंगी गांड महसूस करने के लिए.. उसके नाज़ुक स्किन पर करीम का मोटा हाथ का स्पर्श माहि को अन्दर तक कंपकंपा गया.. इस वजह से अब माहि करीम की किश करने लगी …

ोाहूओ.. माहि…. मेरी बुलबुल… पहले क्यों नहीं किया .. ऐसा किश.. कितने वक़्त से मई रहा देख रहा था… ओह्होऊ.. मेरी बुलबुल.. i..lovee.. यौऊ..

करीम को माहि ने ये सब किया तो बहुत ख़ुशी हो रही थी.. उसे लग रहा था ..अब मई इस बड़े घर का मालिक hi हु.. यहाँ मुझे कोई रोक नहीं सकता.. एक तरफ पूर्वी.. दूसरे तरफ लता और अब माहि… लेकिन ऐसा नहीं था..

करीम की हिम्मत अब बाद गयी थी.. करीम ने धीरे धीरे उसका शर्ट उप्पर करना शुरू कर diya..wo उसके आम को नंगा दलहन चाहता था.. उसको आपने मू मई लेना चाहता था.. उसके निप्पल को चुना चाहता था..

तभी माहि को जाने क्या हो गया की या यु कहिये की उसको होश आ गया की वो क्या कर रही है… उसने झट से करीम को पीछे धकेल दिया.. करीम फिर से उसको आपने बहो मई लेना चाहता था इसलिए वो उसके पास आ गया.. उसको आपने बहो मई लेने लगा .. की माहि ने उसको एक जोरदार तमशा जड़ दिया.. उसके तमाचे की आवाज सुनकर 2-3 नौकर वह आ गए.. उसमे कान्तिशीथ का एक ख़ास नौकर था

खास नौकर - ... क्या हुआ.. मेमसाब..

मेरे तरफ बुरी नज़र से देख रहा था..

तब वो नौकर करीम को मरता है...

बाकि के नौकरो को कह के करीम को बहोत मरता है..

खास नौकर- यहाँ काम करना है तो ठीक से काम करो.. वर्ण जान से मार दूंगा... यहाँ किसी लेडीज के साथ अगर बुरा बर्ताव किया या गन्दी नज़र से देखा तो तेरी जान ले लूंगा...

करीम-.. मैडम की कोई गलतफैमी हुई है.. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया..

मुझे सीखा रहा है क्या हरमखोर..

ऐसा कहके एक बार वो नौकर करीम को मरने लगता है..

माहि- जाने दो ..चोर दो इससे… इतने बार माफ़ करते है.. अब तुम लोग यहाँ से चले जाओ..

सब वह से चले जाते है.. माहि करीम को देख के हसते है..

देख सिर्फ मैंने अदा hi बताया.. अगर मैंने पूरा बताया होता की तूने मेरे बॉडी को टच किया तो ये भैय्या का P.A. आज तुजे जान से मार देता... समजे... मेरे साथ खेल मत... आजम बहुत बुरा होगा...

करीम- मई तुजे छोड़ूंगा नहीं..

माहि- इतना मार कहानी के बाद भी तुजे ाकल नहीं आयी क्या हरामखोर...

तेरे छूट के खातिर ऐसा मार मई दस बार खाऊंगा... मेरे चामक चालो..

ऐसा कहके करीम हसता है... माहि वह से जाने लगाती है...

माहि- मई क्या करू इस हरामखोर का...

करीम- बस अपनी छूट दे दे एक बबर मुझे...

माहि- बस कर हरामखोर..

ऐसा कहके एक बबर करीम को जोरसे थप्पड़ लगाती है.. और वह से जाने लगाती है .. तभी वह लता आती है..

लता - क्या चल रहा है..

माहि- कुछ नहीं..

ऐसा कह के माहि वह से चली जाती है..

लता- तुम पे का गुस्सा इसका अभी तक नहीं गया क्या..





करीम- नहीं गया ऐसा लगता है..

वो चोर आजा इधर.. ऐसा कहके उसको आपने बहो मई करीम ले लेता है.

ारे चोरो .. माहि अभी यहाँ hi है .. वो देख लेगी..

वो क्या देखेगी .. वो तो निचे देखकर उप्पर जा रही है .. आपने कमरे मई..

पीछे घूम के देख लिया तो गरबर्ग हो जायेगे बाबा ..

ऐसा कहके लता करीम के बहो से दूर हैट जाते है… माहि एक बार पीछे घूम के देखते है ..

तब तब लता करीम से दूर हैट चुकी थी ..और वो दूर से करीम से बाते कर रही थी… माहि वो देख के आपने रूम मई चली जाती है.. और आपने कपडे निकलने लगाती है.. उसे आपने आप पर घिन आ रही थी.. क्यों मैंने आपने बॉडी को उस बूढ़े को चुनने दिया.. क्यों उसको किश करने दिया .. और बाद मई तो मैंने hi उसको किश किया.. ये क्या हो गया था मुझे.. ये मनीष के साथ बेवफाई है.. मुझे ऐसा करना नहीं चाहिए था..

ये सोचते हुई माहि अपने बिस्तर पर चारो चीत हो कर लेट गयी और अपनी आँखे बंद कर ली..

उसका दिल बोहोत जोरो से धड़क रहा tha..uske माथे पर पूरा पसीना आ गया था.. वो समज नहीं पा रही थी वो पसीना था या करीम ने डाला हुआ पानी था.. वैसे पानी थो अभी तक सुख जाना चाहिए tha..aur उसकी छूट पूरी तरह से गीली हो कर बराबर रिसाव कर रही थी..

माहि सोचने lagi..ye मेरी जिंदगी में पहली बार हुआ था की मैंने किसी को इस तरह से आपने पास आने दिया था.. और आपने आप को चुने दिया tha..kiss करने दिया था.. बूब्स को दबाने दिया था.. मनीष ने कई बार बूब्स दबाने के कोशिश की थी पर ये सब करने का मेरा जरा भी मन नहीं होता था इन्फेक्ट मुझे ये सब बोहोत गन्दा लगता था.. लेकिन मैंने आज ये सब होने दिया.. या यु कहिये की मैंने ये सब करने दिया..

आज जो कुछ भी मैंने अपने घर में अपने साथ होने दिया ये सब गलत है.. लेकिन ये सब करते वक़्त मेरे हालत बोहोत ख़राब हो गयी थी.. मेरे दोनों टांगो के बीच मेरे पुसी के रास की chip-chipahat मुझे हो रही thi..aur मुझे उत्तेजित किये जा रही थी..

ये सब माहि सोच रही थी.. फिर उसने आपने आप को कहा.. ये सब गलत है.. मई ये सब आगे से होने नहीं दूंगी.. फिर वो बाटरूम मई गयी .. फ्रेश हो गयी .. बहार आकर सदी पहन ली.. ..थोड़े शांत रहती है.. उसको किसी चीज़ की शर्म आ जाती है.. और वो आँखे बंद कर लेते है..

isshhhhhhhhhhh... ये बुद्धा मुझे पाकर hi छोड़ेगा .. ऐसा लग रहा है..

लेकिन मैंने अभी अभी तै किया है.. अब आगे और कुछ नहीं.. फिर भी मेरे दिमाग में से ये जा क्यों नहीं रहा है..

फिर माहि आपने हल्का सा मेकअप करती है.. और बिस्टेर पर बैठ जाती है.. ये सब सोच कर और भीगने की वजह से माहि का सर दर्द बहुत कर रहा था.. तो उसने सोचा .. एक बार कफ पि लेते हु.. ये सोचकर वो कफ बनाने के लिए आपने रूम से बहार आते हुई निचे सिढीयोंसे उतारकर किचन की तरफ जाने लगी.. वो सोचती है खुद बनती हु या पद्मा को बोलती हु.. यही सोचकर वो सिढीयोंसे उतारकर किचन की तरफ जाने लगी की उसको बाजु वाले कमरे से आवाजे सुनाये देने लगी…

aaaaaaaaaaaaahhhhhhh…….

आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…

… किसी औरत के मुंह से तेज तेज आवाज सुन कर माहि चौंक गयी..

वो समाज गयी की ये आवाजे किस तरह की hai..wo आवाज को सुनते hi उस कमरे की तरफ भड़ते हुए उसके दिमाग में कई सवाल उठ रहे थे .. कोण हो सकता है.. किसी माइड और नौकर हो सकता है.. या.. या.. वो कमीना बुद्धा हो सकता है क्या.. किसी माइड के साथ.. हाँ हो सकता है.. बाकि नौकर सब बहार है मतलब यही कमीना hoga…wo है hi इतना कमीना.. उसको कोई भी चल सकती है.. माइड हो या मालकिन .. उसे तो सिर्फ पुसी चाहिए.. काली हो या गोरी.. इससे उसको कुछ फरक नहीं पड़ता है .. उससे तो सिर्फ सेक्स.. सेक्स.. और सेक्स.. चाहिए… हे वांट्स ओनली फ़क.. फूकिंग… एंड फूकिं… बास्टर्ड कही ka..lekin इस वक़्त तो सिर्फ पद्मा hi अकेले माइड है घर मई.. मतलब पद्मा के साथ ये बुद्धा.. लेकिन पद्मा ऐसे नहीं है… क्या पता.. फिर वो थोड़े देर शांत रहती है.. और उसके मू से आवाज निकलती है… हेबेई… गॉड.. ऐसा नहीं हो सकता .. मई जो सोच रही हु वो हो hi नहीं सकता.. मतलब निचे भाभी थी.. वो अभी थोड़े देर पहले भाभी से बाते कर रहा था.. मतलब भाभी निकली तो.. ऐसा नहीं हो sakta..bhabhi ऐसा नहीं कर सकती.. भाभी भैय्या को देखा नहीं दे सकती .. मन की भाभी उसकी साइड ले रही थी… मन की भाभी और भैय्या मई आगे डिफरेंस hai..lekin ये भी कहा यंग है.. ये भी भैय्या के आगे का hi है.. फिर भी.. नहीं नहीं मई अब ज्यादा सोचूंगी नहीं.. वह जा के देखूंगी की वह कोण है..

lekin..kya इस तरह उस कमरे की तरफ जाना सही है.. क्या मैं इस तरह वो जो कुछ कर रहा है किसी के साथ वो देखकर सही कर रही हु.. अभी माहि ये सब सोच hi रही थी की अंदर कमरे से आती हुई आवाज ने उसके होश hi उदा कर रख दिया..

आआह्ह्ह… uuuuiii…mmaaa….. धीरीईई… धीररररीई…. एआईईईई….. मररररर…. गयी…. धीरी सीईई दबाओ न………..

ईई… ये आवाज तो भाभी की है… मतलब यहाँ भाभी करीम के साथ अंदर है.. अंदर से आ रही आवाजे सुन कर माहि के दिल की धड़कने भाड़ गयी.. उसके चेहरे पर बुरी तरह से पसीना आ गया था.. उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या करू क्या नहीं..

पहले माहि ने सोचा की जोर से भाभी को आवाज लगा कर आवाज दू.. पर फिर पता नहीं उसके दिल में आया की देखु तो सही अन्दर क्या हो रहा है..

दरवाजे के पास आ कर माहि कान लगा कर उनके सिसकारियां लेने की आवाज सुन ने लगी..

ाःह.. उम्म्म… काहाररिममम… धीरीई… धीरी.. करो आप का बोहोत बड़ा है अह्ह्ह..

क्यों भोसड़ी की तेरे पति का क्या छोटा है… ?

हाँ करीम आप के लैंड का आधा भी नहीं है..

तभी तेरी छूट एक डैम मक्कन मलाई है.. तेरा पति कितनी दफा लेता है तेरी..

वो साले का तो अब खड़ा भी नहीं होता.. वो क्या छोड़ेगा मुझे.. आह्ह्ह्ह…. आप के जैसा लैंड अपनी छूट में लेकर मुझे इतनी खुसी हो रही है जिसे मैं बता नहीं सकती..

माहि - की कैसी गन्दी गन्दी बाते कर रहे है.. भाभी..

आआह्ह्ह्ह… तेजजज… ऑर्डर तेजज अब मैं झड़ने वाली हु रुकना मत करीम रुकना मत और तेजजजजज…. से..

अंदर की आवाज सुन कर माहि का दिमाग पूरा खररब हो चूका था.. उन आवाजों को सुन कर उसका पूरा गाला सुख सा गया था..

अंदर से आ रही आवाजे माहि को बैचैन करने लगी.. उन आवाजों को सुन कर उसके दोनों पेअर कपङे लगे.. उसको समझ नहीं आरहा था की यहाँ पर रुक कर ये सब सुनु या आवाज लगा कर उन को रोकू.. या फिर बिना कुछ कहे अपने कमरे में वापस आ जाऊ.. एक अजीब सी बेचैन कर देने वाली इस्थिति ने माहि को घेर लिया था.. कुछ भी समझना बोहोत मुश्किल होता जा रहा था..

माहि अभी अपनी hi सोच में डूबी थी की अंदर से आ रही आवाज ने उसका ध्यान तोड़ दिया..

लता तेरी नानन्द तो एक डैम मस्त माल है.. उसका पति तो जैम कर मजे लेता होंगे..?

एआइइइइ…. धीरे धीरे दबाओ न Karim..dard होता है.. उसके पीछे अब पड़े हो क्या … मुजसे मान भर गया क्या…

ऐसा नहीं है… लता ..रांड…

हाँ ये बात तो है.. माहि तो बोहोत सूंदर है.. उसका पति मजे लेता है या नहीं ये तो पता नहीं है.. मनीष भैय्या बहुत शाय नेचर के है…

वो दोनों ज्यादातर यही रहते है.. तो तूने कभी देखा होगा की उन दोनों की चुदाई..

..एक दो बार कमरे की बहार से आवाजे सुनी थी .. बॉस..

आवाज सुनकर कैसे लगा.. था..

मतलब..

मनीष माहि की चुदाई कैसे किए होगी.. मेरे जैसे ताबडतोब या यूँ hi..tumare पति जैसे.. ऐसे वैसे नार्मल चुदाई…

करीम .. तुम्हारे जैसे चुदाई कोई भी नहीं कर सकता ..आवाजे सुनकर तो ऐसा लग रहा था की माहि की चुदाई जबरदस्त वाली नहीं थी..

ोू गॉड.. ये क्या हो रहा है.. ये बुद्धा मेरे बारे में सब पूछता जा रहा है.. और भाभी भी उसे मजे ले कर सब कुछ बताये जा रही है..

उन दोनों की बाते सुन कर माहि का खून खोले जा रहा था..

आअह्ह्ह्ह…. इसको भी चुसो न… एक hi आम को कितनी देर तक चुसोगे..

लता ने आम कहते hi माहि के चहरे पर हलकी से हसी आ जाती है.. थोड़े देर पहले करीम ने जो उसके आम की तरफ देखते हुई उसकी तारीफ की थी उसकी याद माहि को आ जाती है..

लता ने कहते hi करीम उसका दुसार आम आपने मू मई झट से लेता है और उसके निप्पल को काटता है..

uuiiii….maaaa…. करीम धीरे न… मई लता हु .. माहि नहीं..

बहार माहि गुस्सा हो जाती है..

भाभी मई आप के जैसे नहीं हु..

अच्छा लता तुझे क्या लगता है मनीष माहि की छूट hi छूट मरते होंगे या गांड भी..?

ऊह्ह्ह्ह.. गॉड ये बुद्धा क्या पूछ रहा है..

लता- क्यों..

उसकी गांड बहुत मस्त है.. बहुत मटकाके अपनी गांड चलती है..

मयययय गॉड.. इसकी नज़र मेरे बुम्प पर भी है .. साला कमीना.. भाभी के साथ सेक्स कर रहा है और तारीफ मेरे कर रहा है..

फिर माहि सोचते है दरवाजे के बहार से दिखाए नहीं दे सकता .. सुनाई दे सकता hai..mai एक काम करती hu..mai ये तो देख लून की ये दोनों दिखाई किस जगह से दे रहे है..

यही सोच कर माहि इधर उधर जगह देखने लगी ताकि अंदर का जो कुछ चल रहा है दिख जाये.. इधर उधर देखते हुए माहि एक डैम खिड़की के पास आ गयी.. जो किस्मत से खुली हुई थी.. माहि ने खिड़की का दरवाजा हल्का सा खोल कर अंदर झाँक कर देखा तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी.. लता एक डैम नंगी बिस्तर पर लेती हुई थी.. और करीम उसके ऊपर चढ़ कर उसके नवल को किश कर रहा था और अपने एक हाथ से उसके एक आम को दबा रहा था और दूसरा हाथ नीचे की तरफ लता की छूट के ऊपर था.. बिस्तर पर लेती अपनी नंगी भाभी को माहि देखे hi जा रही थी.. माहि ने किसी औरत को एक डैम नंगा पहली बार देखा था.. कुछ पल के लिए तो माहि के निगाहें अपनी भाभी के नंगे जिस्म पर जैम गयी.. वो सोचने लगी भाभी के दोनों बूब्स… नहीं नहीं.. आम.. बिलकुल मेरे जैसे hi बड़े बड़े है.. जिनके साथ इस वक़्त करीम खेल रहा था.. करीम के खेलने से उसके दोनों आम एक डैम तन कर हिमालय पर्वत की तरह खड़े हो गए थे.. वो सोचते है भाभी के निप्पल ..मेरे तरह hi पिंक कलर के है.... लता के निप्पल अब पेंसिल की नोक के जैसे एक डैम शख्त हो गए थे..

तब लता की बात से माहि का धन टूट गया …

पता नहीं करीम …पर माहि अपनी गांड में शायद hi मनीष भैय्या का लैंड लेती हो..

तब माहि सोचने lagi..Ye दोनों एक डैम पागल हो गए है.. अनल सेक्स भी कोई करने की चीज है..

अब करीम लता को आपने बहो मई उतके लेता और उसे किश करने लगता है... .. उन दोनों को इस तरह देख कर और उनकी बाते सुन कर माहि की हालत ख़राब होने लग गयी थी.. उसके छूट ने कब रिसना शुरू कर दिया उसे पता hi नहीं चला..

उसके छूट से बेहटा हुआ पानी धीरे धीरे करके बेहटा हुआ उसके झांघो तक आ गया..

आअह्ह्ह……. करीम… मार डालोगे क्या.. आराम से दबाओ न .. माहि कही जग न जाये… और निचे न आ जाये..

उसके नवल को किश करता है .. और कहता है

अरे दर मत ..वो उप्पर आपने कमरे मई hogi..aaram कर रही होगी.... उसके चक्कर में तू अपने मजे क्यों ख़राब कर रही है..

वो आराम नहीं करती .. हमेशा घूमती रहती है..

वो अब 1-2 घंटे आराम hi करेंगे.. घूमेंगे नहीं..

तुम कैसे पता..

उसको मैंने ऐसा मसाला है की अब वो इतने जल्दी निचे नहीं आएंगे..

मतलब तूने उसपे भी हाट दाल दिया है..

माहि- हे भगवन.. ये बुद्धा भाभी को क्या बता रहा है.. मई कही की न रहूंगी..

तूने देखा नहीं .. उसका बदन पूरा भीगा हुआ था..

हाँ ..देखा तो था.. लेकिन ज्यादा ध्यान नहीं दिया था.. क्या किया उसके साथ..

पानी से भिगो दिया .. और बाद मई किश किया और उसके आम को दबा दिया..

माहि- हे भगवन.. मई तो गयी अब..

लता- मतलब तू बहुत आगे गया .. उसके साथ तो..

अब करीम उसके आम को छोड़ कर थोड़ा सा नीचे को खिसक गया और उसकी दोनों टांगो के बीच में आ कर बैठ गया.. वो उसके जिस्म पर खिसकता हुआ नीचे की तरफ गया था जिस कारन माहि को उसका लुंड नहीं दिखाई दिया.. उसका मुंह खिड़की की तरफ hi था.. माहि इस बात का पूरा ध्यान रख रही थी की कही वो उसे देख न ले.. पर माहि को उसका लुंड देखे का बड़ा मन कर रहा था.. क्युकी लता ने जैसा आवाज करते हुए कहा था की करीम तुम्हारा तो बोहोत बड़ा है, इस लिए माहि देखना चाहती थी की उसका लैंड कितना बड़ा है..

माहि- करीम .. का लुंड देखना hi पड़ेगा.. भाभी जो कह रही है इतना बड़ा है..

लुंड शब्द माहि के दिमाग में लता की बात सुन सुन कर आया था.. उन दोनों के मुंह से lund-choot sun-sun कर माहि को मजा आने लगा था..

वो उसकी टांगो के बीच में आकर उसकी दोनों टांगो को उसके घुटनो से मोड़ कर उसके मुंह की तरफ कर दिया.. और उसकी छूट को देखने लग गया.. थोड़ी देर देखने के बाद उसने अपने एक हाथ को उसकी छूट के ऊपर ले कर फिरना शुरू कर दिया.. लता अपनी योनि पर करीम का हाथ महसूस करते hi बुरी तरह से मचल उठी.. और जोर जोर से सिसकारियां मुंह से निकलने लगी..

Ssssssshhhhhh…….uuuummmm………..aaaaahhhhhh……………

अंदर का सन देख कर माही की हालत बिगड़ते जा रही थी.. उसका गाला सूखा जा रहा था.. और दोनों पेअर बुरी तरह से kanp-kapa रहे थे.. उसे अपने दोनों पैरो के बीच बोहोत कमजोरी महसूस होने लगी थी.. इतनी उत्तेजित तो वो आज तक मनीष के साथ सेक्स करते हुए नहीं हुई थी जितनी अंदर का सन देख कर हो गयी थी..

इसी उत्तेजना के कारन कब उसके छूट ने अपना पानी बहा दिया.. पानी छोड़ते हुए उसने अपनी दोनों आँखे बंद कर ली थी और खिड़की के दूर को कास कर पकड़ लिया था, उसके छूट से निकले पानी जो उसके जांघो पर लगा हुआ था, उसे बड़ा अजीब सा फील हो रहा था.. वो पानी छूट जाने से थोड़ा लाडखा गयी जिस कारन खिड़की का दरवाजा बंद हो गया..

खिड़की का दरवाजा बंद होने की आवाज से माहि ने अपने आप को संभाला और फुर्ती के साथ खिड़की से दूर हो गयी.. खिड़की से हैट कर कुछ देर बाद जब माहि ने दोबारा खिड़की के अंदर झाँक कर देखा तो करीम ने लता की दोनों टाँगे हवा में उठा राखी थी और उसकी छूट पर अपना मुंह लगा रखा था…

kariiiiiiimmmm…sshhhhh…. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh…….. मेईयरररररररर…. राजजज्जजज…

औरर जोर सीईईई… औरर जोर सीईईई छतो खा जूऊऊ िसेसीईई … ये तुम्हारी है…. चबा दू…. रुकना मत्तत्ततत्तत…

माहि- भाभी क्या पागल हो गयी है क्या.. पुसी को छठा रही है.. और उस बूढ़े को मेरे राजा कह रही है.. मेरे भैय्या के साथ नाइंसाफी है ये तो...

करीम बिलकुल डोगग्य स्टाइल से कुत्ते की तरह लता की छूट को चाट रहा था.. और लता भी पूरी मस्ती के साथ अपने दोनों हाथो से उसके सर को पकड़ कर अपनी छूट पर दबाये चले जा रही थी.. करीम को इस तरह देख कर माहि को जरा भी नहीं लगा की उसने उसको देख लिया होगा.. क्युकी जिस तरह से लता के साथ लगा हुआ था उसे देख कर तो लग रहा था की उसने खिड़की की तरफ ध्यान hi नहीं दिया..

करीम को लता की छूट चाटता हुआ देख कर माहि मन में hi कहा ….

छी कितना गन्दा आदमी है वह भी कोई मुंह लगाने की जगह है ?

थोड़ी देर में में लता की सिसकारियां भरी आवाजे और भी तेजी के साथ आणि शुरू हो गयी, और उसका पूरा बदन अकड़ना शुरू हो गया.. उसने करीम का सर पकड़ कर अपनी छूट पर कास कर दबा लिया और जोर जोर से कककककककाआररिम मैंनं gayyyyyyyyyyiiiiiii करते हुए शांत हो गयी..

करीम जब उसकी दोनों टांगो के बीच में से उठ कर खड़ा हुआ और माहि की नजर उसके लिंग पर गयी तो माहि का मुंह खुला का खुला रह गया.. और उसका हाथ आपने मू पाई चला गया.. आपने आप से बड़बड़ाने लगी..

करीम का ling..isko लिंग नहीं लुंड या लौड़ा वर्ड hi एक डैम सही hai..kitana बड़ा है.. कितना मोटा है.. और कितना कला है.. गन्दा भी है..

.. उसका तना हुआ लुंड देख कर माहि हैरत में पद गयी की क्या सच में लुंड इतना बड़ा और मोटा भी हो सकता है, जैसा इस बूढ़े का है.. करीम ने अपने दोनों हाथ लता के दोनों उरोज पर जमा दिए..

करीम- लता एक बात कहु .. माहि की बस एक बार मिल जाये कसम से मजा आ जाये..

ऐसा कह कर उसने जोर जोर से उसके दोनों उरोजों को मसलना शुरू कर दिया..

लता – करीम .. धीरे बोलो कही माहि तेरे बात न सुन ले..

लता ने लेट कर मस्ती भरे अंदाज में करीम के बालो में हाथ फिरते हुए कहा..

अरे सुन लेने दे उसे भी तो पता चले की कोई है जो उसकी छूट के दीदार का बेसब्री से इन्तजार कर रहा है..

ऐसा कहते हुए उसने बैठे बैठे hi अपने एक हाथ में अपना लुंड ले लिया.. .. और आपने लुंड पर हाथ फिरने laga..wo अपने लुंड पर इस तरह से हाथ फिर रहा था जैसे उसने माहि को देख लिया हो और उसे hi अपना लुंड दिखा रहा हो..

थोड़ी देर औरर उसने लता के आम को मसला और लता को बैठा दिया और अपने लुंड को उसके मुंह की तरफ ले जाने लगा..

लता करीम का लुंड आपने हाथ मई लेते है..

लता – ये लुंड हमेशा खड़ा hi रहता है क्या..

करीम- तुम और तुम्हारी छूट को देखते hi लुंड खड़ा होता है और तुम्हारी और कीचा आता है

लता- मेरे छूट … या माहि की छूट..

माहि इधर शर्मा जाती है..

माहि- आप मज़े ले लो na.bhabhi.... मुझे क्यों बीच मई खिंच रही हो..

और सोचने लगाती है ..भाभी कितनी खुशनसीब है की उनको इतना अच्छा और बड़ा पेनिस आपने हाथ मई लेने को मिल रहा है…

लता आपने चहरे पर स्माइल लेट हुई उसके लुंड को चाटने लगाती है... और कहती है..

लता- यह लुंड माहि की छूट और नंगेपन का दीवाना hai….Mahi का पति देखो

कुछ करता नहीं माहि के साथ…

हरामी कुत्ता कही ka..isi लिए मेरे ननद .. माहि .. मेरे प्यारे करीम से .. प्यार करने lagegi..dekho करीम … तुम्हारा लुंड भी तुम्हारे जैसे hi चालू है.. अब लता के छूट से इसका मैं भर गया है ऐसे लग रहा है.. इसलिए माहि का नाम सुनते hi कितना खुस हो गया है.. अपनी लाल चोर रहा है.. अब मेरे छूट का क्या होगा.. उसका ध्यान कोण रखेगा..

ऐसा कहते हुई लता ने आपने मू मई करीम का लौड़ा ले लिया..

लता – अब तेरे इस लौड़े की तरह माहि भी खुसी के मारे धीरे धीरे तुमसे छुड़ाने के लिए तैयार हो jayenge..khusi खुसी में माहि अब तुम्हारे सामने नंगी भी हो जाएगी और चुदाई के लिए आसानी से तैयार हो jayenge..wah रे Mahi..tum सच में काम देवी हो.. मुजसे मेरा करीम चीन लिया तुमने..

करीम- डर मत .. तेरा भी ध्यान रखूँगा…

माहि को तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की उसकी भाभी ऐसा कुछ कहेगे और करीम के लुंड को अपने मुंह में ले लेगी.. खिड़की पर खड़े हुए माहि सब देख रही थी.. माहि को समझ में नहीं आ रहा था की ये दोनों इतनी गन्दी तरह से सेक्स कैसे कर रहे है..

लता - एक बात बता दो ..

तुम माहि की गांड अछि लगाती है या छूट..

माहि- ये क्या पूछ रही हो भाभी

माहि की गांड देखकर हमारा लुंड खड़ा हो जाता है…

फिर पहले उसकी गांड मरेंगे या छूट..

अगर हमे चांस मिल जाये तो पहले उसके गांड में लुंड को गुसाद देंगे .. बहुत गांड मरूंगा uski..kuttiya की तरह..

लता- बहुत चिलायेगी वो..

छिलने दो..

लता बोली ह्यूमेन तो अपनी गांड खोल के रख दी hai..jab जाहे अपनी बिना लिसेंसेकि पिस्तौल दाल दो..

करीम- तुम्हारी भी मरूंगा .. लेकिन पहले माहि की..

लता- ठीक है..

करीम- देखो उसके पति के पास लाइसेंस वाली पिस्तौल hai..fir भी डालता नहीं

लता - मूरख है.. पति तो तुम्हारे जैसा chahiye..hamesha बजा देने वाला.. तुम

न वक़्त देखते हो, न jagah..tumare जैसा 24 घंटे प्यार करने वाला पति चाहिए …

लता की पीठ माहि के आँखों के आगे आ जाने के कारन अब उसे केवल करीम का फेस hi दिखाई पद रहा था.. थोड़ी देर लता ने उसके लुंड को अपने मुंह में लेकर चूसा और फिर वापस सीधे हो कर लेट गयी.. करीम अब दोबारा उसकी टांगो के बीच में आ गया और उसकी दोनों टांगो को उसकी छाती से मोड़ कर उसने अपने लुंड को हाथ में लेकर हिलाया, वो इस तरह से हरकत कर रहा था जैसे की माहि को जानबूझ कर दिखा रहा हो.. अपने लुंड को हिलाते हुए उसने अपने लुंड को लता की छूट पर रख दिया..

उसने जैसे hi अपने लुंड को लता की छूट पर रखा.. वैसे hi माहि का दिल फुल स्पीड के साथ धड़कने लग गया.. उसके दिमाग में यही ख्याल आ रहा था की क्या भाभी इस लुंड को अपनी छूट के उस छोटे से छेद में ले पायेगी ? क्या ये लुंड सच में भाभी के छूट के अंदर जायेगा.. और हर बार उसका दिमाग उसे न में आंसर देता..

करीम ने अपने लुंड को छूट पर टिकाया और सीधे अपनी नजर सामने खिड़की पर जहा माहि कड़ी हुई थी वह देखने लग गया.. माहि को यूँ इस तरह करीम को खिड़की पर देखने की उम्मीद नहीं थी इस लिए वो पूरी तरह से खिड़की पर आ कर उनका गन्दा खेल देख रही थी.. एक पल के लिए उन दोनों की नजर एक दूसरे से टकराई औरर उसने माहि तरफ देख कर वही गन्दी सी स्माइल पास कर दी..

करीम को अपनी तरफ देख कर माहि की हालत ख़राब हो गयी.. उसका मन बुरी तरह से दर की चपेट में आ गया.. उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या करू क्या नहीं.. अभी माहि कुछ और सोचती इस से पहली hi लता की दर्द भरी आवाज ने उसका ध्यान तोड़ दिया..

Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh……………. Marrrrrrrrrrrrrrrrrrr…… gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…….. बहार निकालूऊऊऊ…..

मैं मर gayiiiiiiiiiiiiiii….Lata दर्द से बुरी तरह तड़प रही थी उसने बिस्तर की चादर अपने दोनों हाथो से कास कर पकड़ राखी थी और अपनी आँखे बंद कर ली थी.. माहि की नजर जब लता से हैट कर वापिस करीम पर गयी तो वैसे hi करीम माहि को देख कर मुस्कुरा रहा था.. उसके चेहरे पर वो हंसी देख कर माहि का खून खोल उठा.. माहि को देखते हुए hi वो थोड़ा पीछे की तरफ हुआ और वापस एक धक्का लगा दिया.. लता फिर दर्द से कराह उठी.. वो धक्के लता की छूट में लगा रहा था पर एक तक देखे माहि की तरफ जा रहा था..

उसने लता को बिस्टेर पर लिटा दिया और उसको छोड़ने लगा.. माहि को भी पता नहीं उस वक़्त क्या हो गया था जो वो वह से नहीं हटी थी.. थोड़ी hi देर में लता की चींखे काम हो गयी और वो मजे से सिसकारियां निकलने लग गयी..

लता के मुंह से चीखे और उसकी सिसकारियां सुन कर माहि की छूट ने न चाहते हुए भी फिर से रिसना शुरू कर दिया था.. माहि से अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था .. इसलिए वो वह से हैट कर अपने कमरे में आ गयी और अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया…

अब माहि अपनी कमरे मई आखर बीएड पे लेट gayi..aur सोचने लगी ... कितना बड़ा है .. उस भड़वे का.. साला कितना कमीना है.. मुझे लगा मज़ाक कर रहा है मुजसे.. मुजसे उसने कहा था ..तेरे भाभी को पता लू क्या.. और तू हाँ नहीं बोलती तो.. मुझे लगा ऐसा hi बोल रहा है.. लेकिन उसने तो भाभी को पता hi liya..muje तो लगता है ये पहले से भाभी का और उसका चक्कर है... इसलिए तो भाभी हमेशा उसके hi साइड लेते रहती है.. उसदिन भैय्या उसको मार रहे थे तब भाभी ने उसे बचा लिया था.. नहीं तो भैय्या उसे मार hi डालते थे.. मुझे क्या करना है.. भाभी कुछ भी करे.. कही जक क्यों न मारे.. वैसे उसने आपने मू कला तो किया hi है.. वैसे भाभी को पटना था तो किसी यंग , डैशिंग , स्मार्ट हैंडसम बन्दे को पटती.. इस बूढ़े के चक्कर मई भाभी कैसे आ गयी.. जाने दो मुझे क्या करना है..

ये सब सोचते हुई उसके आँख लग गयी... थोड़े देर बाद उसके आँखों के सामने एक तस्वीर आती hai..wo सोई हुई है ..आपने बैडरूम मई ..और करीम उसके पीछे से उसके सामने आटा है.. करीम का चेहरा उसके आँखों के सामने है.. और वो किश करने के लिए आपने काळा हूंठ उसके गुलाभी हूंतो के पास लता है.. तभी माहि की आँख खुल जाती है.. वो पलट जाती है.. वो आपने आप पे हँसाने लगाती है.. और आपने आप से कहने लगाती है..

क्या ये सपना था.... मई तो सोई भी नहीं तो सपना कैसे.. आँख लग गयी थी ..तो सपना भी होगा na..sapne पाई किस का बस चलता है… उसमे मई क्या कर सकती हु..

फिर थोड़ी देर शांत रहने के बाद कहती hai..ye आदमी तो मुझे नींद मई भी नहीं चोर रहा है.. मेरे पीछे hi पड़ा है.. और मई भी इस काळा घटिया आदमी को आपने सपने मई कैसे देख सकती हु..

माहि ने थोड़े देर सोचना बंद किया.. फिर जब फिरसे सोचना सुरु किया तब फिर से उसके दिमाग में वही आ रहा tha..Ye बुद्धा तुजे नहीं छोड़ेगा माहि.... ये अब तेरे लेके hi रहेगा... तेरे लता भाभी जैसे hi तेरे भी लेगा.. तेरे लता भाभी कह hi रही थी न माहि.. तू अब उससे धीरे धीरे प्यार करने lagegi..nahi नहीं ऐसे नहीं hoga..agar ये एक्चुअल हुआ तो.. माहि तू ये क्या सोच रही है.. ये कैसे तू सोच सकती है.. तू मनीष की वाइफ है.. तू एक इज़्ज़तदार घर की बेटी और दूसरे इज़्ज़तदार घर की बहु है.. ये तू सोच भी कैसे सकती है.. ये कभी नहीं हो सकता .. ये मई कभी होने नहीं दूंगी ..

फिर माहि ने अपनी आँखें बंद कर ली.





और उसको पिछले बात याद आ गयी.. एक दिन माहि ने करीम को ुंदरपनत पाई देखा था.. उसका टेंट बना हुआ लौड़ा देखा tha..tab झट से माहि वह से हैट गयी और एक चेयर पे जेक बैठ गयी .. उसके आँखों के सामने बार बार बुड्ढे के ुंदरपनत पर बना टेंट जो माहि ने देखा था वो आ रहा था. उस दिन माहि सोचा था की वो आखिर है क्या? पेनिस hi है या कुछ और? और अगर पेनिस hi है तो इतना बड़ा पेनिस आखिर दीखता कैसा है? क्या सभी पेनिस बड़े होते है, सिर्फ मनीष का hi छोटा है? क्या सिर्फ करीम का hi अकेले का पेनिस इतना बड़ा है.. शयद इस बूढ़े का hi अकेले का hi पेनिस इतना बड़ा है.. अगर इसका पेनिस इतना बड़ा है तो इसको बुद्धा कैसे बोलेंगे.. वो तो मेरे मनीष से भी डबल साइज का लगा रहा था उस दिन .. मनीष अगर यंग है तो ये बुद्धा डबल यंग है.. है ये हो सकता है.. इस्सलिये आज से उसको बुद्धा नहीं बोलना होगा.. क्या बोलू .. करीम.. हां.. ये ठीक रहेगा..

ओह्ह्ह! क्या मई सही सोच रही हु.. अगर मई सही सोच रही हु तो क्या इस बुड्ढे के बच्चे की माँ बनाना मेरे किस्मत में लिखा है.. बूढ़े का नहीं करीम के बच्चे की माँ.. और मई…

ऐसा कहते हुई हँसाने लगी..





और कहने लगी..

ये कैसे हो सकता है.. मई इतनी आमिर और वो गरीब.. फिर कैसे पॉसिबल है.. माहि प्यार मई कुछ भी पॉसिबल.. … हीईई.. मई मर जावा.. मुझे सोचते हुई भी कितने शर्म आ रही है.. ..प्यार और उस बूढ़े के साथ .. और माहि करेंगे.. कभी भी नहीं..

… मगर मैंने ऐसा कैसे उस दिन सोचा था .. ये पाप है.. मई मनीष को धोका कैसे दे सकते हु.. ऐसा कैसे मैंने सोचा था…

पर फिर मैंने थान लिया था जी इस करीम के पंत में बना टेंट क्या है ? देखना पड़ेगा .. कल जब वो मिलेगा तो देखूंगी.. और दूसरे दिन जब करीम घर आया था तो मई चुपके से उसे देख रही थी.. वो लता भाभी से बात कर रहा था . मैंने चुपके से उसके पंत की तरफ देखा.. उसका क़ुतुब मीनार अपनी पूरी ऊंचाइयों पर उसके पंत मई हिल रहा था. उस दिन मुझे क्या हुआ मैंने चुपके से उसका.. उसका नहीं उसके टेंट का.. ारे नहीं .. उसके टेंट वाले पेनिस का.. अरे नहीं.. बुद्धू .. माहि.. तुम्हारे करीम के लौड़े का फोटो निकला था.. मेरे करीम का .. नहीं नहीं करीम किसी एक का नहीं है.. सबका है.. सिमरन का.. लता भाभी का.. और बहुत सरे का .. और माहि आज से तेरा भी.. नहीं nahi..mera नहीं और हँसाने लगी..

फिर माहि मोबाइल निकल के वो फोटो देखने लगी.. फिर माहि वही बात याद करने लगी .. जब फिरसे मैंने उसे देखा तो कैसे की मुझे पता नहीं उसकी नज़र मेरे पर गयी.. मैंने झट से अपनी आँखें बंद कर ली और साइड मई चुप gayii..my god…Ye तो लुंड hi है. इतना बड़ा? हे भगवान्! मनीष का मिर्च है, और ये तो पूरा कद्दू है. इतना बड़ा अंदर जायेगा? मेरी तो छूट hi फैट जाएगी? और उसने मुझे देख भी लिया.. की मई उसे चुप के देख रही हु… अब क्या होगा.. क्या उसने मुझे फोटो निकलते हुई देखा.. अभी तो इस को मौका मिल गया.. मुझे छेड़ने के liye…ye बुद्धा अब कहेगा बहुत भोली बनती हो.. और मुझे चुप चुपके देख रही ho..ye तो पहले से hi एक नंबर का हरामी hai.mai वैसे hi थोड़े देर वह चुप गयी.. फिर न जाने मुझे क्या सुजा.. मई ने फिर से उसको देखने लगी.. अब वो भाभी से बात करते हुई आपने पेनिस को पंत के उप्पर से हिला रहा tha..aur भाभी भी उसे बात कर रही है.. भाभी को समाज नहीं आ रहा है क्या.. भाभी ने अभी तक कैसे नहीं देखा की ये क्या कर रहा hai..bahbhi उसके पास से जल्दी निकल जाओ नहीं तो ये तुम भी नहीं छोड़ेगा.. अगर बुड्ढे ने.. sorry..sorryy.. करीम ने मुझे उसको देखते हुए देख लिया तो मेरे बारे में क्या सोचेगा? मेरी शादी भी हो चुकी है. ये ठीक नहीं रहेगा. चुप चाप यहाँ से जाने की कोशिश करती हूँ.. और मई वह से चली गयी.. उस दिन मुझे लगा की भ्भी को कैसे पता नहीं चल रहा है वो क्या कर रहा है ..पर आज मुझे पता चल गया की भाभी को तो इसने पहले से hi पता लिया hai..mai hi नासमज थी..

उस दिन मैंने जो थान लिया था वो आज मैंने कर दिखाया था.. करीम का पूरा नेकेड पेनिस.. नहीं नहीं.. लुंड देख लिया.. ऐसा कहके वो शर्मा जाती है.. ये मई क्या सोच रही हु.. ये सही नहीं है.. थोड़े देर बाद उसने आपने उसकी नजर जब सामने लगे ड्रेसिंग टेबल पर लगे मिरर पर गयी तो.. कमरे के अंदर तुबे लाइट की सफ़ेद रौशनी पूरी तरह से फैली हुई थी … वो आपने आप को देख कर सोचने लगी.. लाल रंग की साड़ी में मेरा रूप कितना सुन्दर लग रहा है.. अगर कोई मुझे ऐसा अभी देखता तो उसे लगता की जैसे गुलाब का फूल खिला हुआ हो..

फिर वो अपने बीएड से उठ कर मिरर के सामने जा कर कड़ी हो गयी और खुद को शीशे में निहारने लग गयी.. उसने शीशे के आगे खड़े हो कर अपना हाथ अपने कंधे पे रखा और अपनी साड़ी का पल्लू सरका दिया.. दूसरे hi पल शीशे में खुद को देख कर उसकी आँखे अपने आप शर्म से झुक गयी.. आज पहली बार उसने शीशे में खुद को इस नजर से देखा था.. क्युकी उस समय उसके दिमाग में बूढ़े के कहे शब्द गूँज रहे थे की माहि क्या माल है… क्या दिखती है वो, यही सब सोच कर माहि शीशे में खुद को निहारने लग गयी.. इस नजर से तो उसने अपने आप को अब तक कभी नहीं देखा था.. वो सोचने लगी ..जब भी मनीष मुझे शीशे के आगे तैयार होते हुए देखता था तब कई बार उसने कहा .. माहि आज तो तुम बोहोत hi क़यामत लग रही हो..

वो सोचने lagi..ye ब्लाउज और उस में कैद मेरे दोनों बूब्स और उसके नीचे मेरी गोर रंग की नवल.. हीई.. मई मर java..ye सब सोच कर उसके होंठो पर अपने आप hi मुस्कराहट आ गयी..

उसने एक बार फिर से शीशे में अपने दोनों आम को देखा.. और आपने आप को कहने lagi..mere ये दोनों बूब्स ऐसे लग रहे थे जैसे दो हिमालय पर्वत गर्व के साथ अपना सर उठाये खड़े हुए हो.. अपने आम देखते hi लता भाभी के दोनों नंगे आम उसके आँखों के आगे आ गए और वो अपने आम की तुलना उसके आम से करने लगी.. जिसमे उसने खुद को hi जीता हुआ पाया..

अपने दोनों बूब्स को भाभी से बड़ा और गोलाई और शेप देख कर उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कराहट आ गयी.. फिर उसने आपने एक हाथ अपने नंगे पेट पर फिरते हुए अपने दायी तरफ के बूब्स पे रखा तो उसके आँखे अपने आप hi बंद होने लग गयी, और उसका हाथ उसके बूब्स पर दबता चला गया..

उस दिन पहली बार उसने अपने आप को इस अंदाज में छुआ था और उन्हें छूटे hi माहि को ऐसा लगा की आज उसके अंदर जो रोमांच पैदा हुआ है वैसा रोमांच तो मनीष के चुनें और दबाने और मुंह में लेकर चूसने से भी नहीं आया था.. वो सोचने लगी आज न जाने कोण सा नशा मेरे ऊपर सवार हो गया है.. ये सोचते हुई वो आपने दया हाथ का दवाब उसके बूब्स पर धीरे धीरे भेदने लग गयी..

वो नशा उस पर इस कदर भरी होता चला गया की उसने अपने ब्लाउज के बताने को खोलना शुरू कर दिया.. वो सोचने लगी शादी के इतने सालो बाद भी मुझे सेक्स का नशा इतना नहीं चढ़ा था जितना इस वक़्त चढ़ रहा है .. एक एक करके उसने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए और उसे उतर कर बीएड पर फेंक दिया.. वो मिर्रेर में देख कर कहने lagi..red कलर की ब्रा के अंदर मेरी दोनों मोठे मोठे बूब्स जैसे खुद मुझ पर hi कहर बरसा रही है.. ब्रा उसकी छाती पर एक डैम कैसा हुआ था जिसकी वजह से उसके दोनों आम आधे से ज्यादा बहार निकल कर आ रहे थे.. शीशे में खुद को देख कर फिर उसके चेहरे पर गर्वान्वित मुस्कान आयी.. वो आपने आप को कहने लगी.. लता भाभी के बूब्स मुझसे छोटे भी है और इतने गोर भी नहीं है ..जबकि मेरे बूब्स उनसे बड़े और ढूढ़ की तरह गूरे है..

यही कहकर माहि नेअपने दोनों हाथो से अपने दोनों आम को एक बार कास कर दब्बाय और फिर अपने दोनों हाथ पीछे अपनी पीठ पर ले जा कर ब्रा का हुक खोल दिया.. अपने हाथ का स्पर्श अपनी पीठ पर पड़ते hi फिर से उसके पुरे बदन में रोमांच की एक लहार सी दौड़ गयी और उसके दोनों घुटनो में कंपन खोना शुरू हो गया..

ब्रा का हुक खुलते hi उसके दोनों आम खुल कर उसके सामने आ गए.. अपने बूब्स को देख कर ..एक तरफ इस तरह से देख कर उसे शर्म आ रही थी पर दूसरी तरफ उसे गर्व भी भी हो रहा था की उसके बूब्स भाभी से बड़े और सुन्दर है.. फिर माहि ने अपने दोनों बूब्स को अपने हाथो में भर लिया और उन्हें हलके हलके दबाने लग गयी..

अपने हाथो से बूब्स को हल्का हल्का दबाते hi उसके मुंह से एक ठंडी आह निकल गयी.. जिस कारन उसकी टांगो के बीच उसके छूट ने और भी तेजी के साथ बहना शुरू कर दिया था.. अपनी टांगो के बीच नमी का अहसास होते hi उसका ध्यान अपने शरीर के नीचले हिस्से की तरफ गया.. रोमांच के सागर में गोते लगाने और छूट के लगातार बहने के कारन उसकी दोनों टाँगे एक दूर से चिपक सी गयी थी.. दोनों टांगो के बीच में पकड़ ऐसी थी की उसकी छूट से उठने वाली चाहत को वो अंदर hi बाँध कर रखना चाहती हो.. यही सोच कर उसके हाथो का दवाब उसके बूब्स पर भी सख्त होता चला गया..

ये सब सोचते हुई माहि ने अपनी साड़ी को फ़ौरन अपने शरीर से अलग किया और बीएड के ऊपर फेंक दिया.. साड़ी को उतरने के बाद उसने धीरे धीरे अपने पेटीकोट को इस तरह से अपने जिस्म से अलग किया जैसे कोई बोहोत मुश्किल काम कर रही हो.. हलके हाथ से माहि ने अपना पेटीकोट भी उतर कर बीएड की तरफ उछाल कर फेंक दिया..

अब उसके शरीर पर सिर्फ एक पिंक कलर की पंतय थी.. माहि ने जब पंतय में शीशे के अंदर खुद को निहारा तो शर्म से उसके दोनों हाथ अपने आप चेहरे पर आ गए.. पंतय ने उसके छूट को तो ढंक लिया था पर उसके आजु बाजू जो हलके हलके बाल थे जिन्हे कुछ दिन पहले hi मनीष ने साफ़ करने को कहा था.. उगे हुए थे.. वो आपने आप से कहने लगी.. मनीष को पुसी के ऊपर बाल जरा भी अच्छे नहीं लगते थे.. कल hi सेक्स करते समय उन्होंने कहा था की “माहि तुम्हारे बाल फिर से बड़े हो गए है .. उसे जल्दी से साफ़ कर दो.. पर मैंने मनीष को कुछ कहा नहीं था.. . फिर मई आज क्यों सोच रही हु बालो के बारे मई.. मुझे तो मेरे पुसी पर बाल अच्छे लगते है न.. और करीम के वह भी तो कितने बाल थे.. मई थो बाल साफ़ करती हु.. वो थो वह कितना गन्दा रखता है.. फिर मैंने वह बाल थोड़े ज्यादा रख दिए तो क्या प्रॉब्लम hai..Mahi तेरे नज़र का जवाब नहीं.. इतने दूर से तूने देखा करीम के वह के बाल क्लीन है या गंदे ... क्या करू .. करीम के लौड़े पर से मेरी नज़र हैट hi नहीं रही थी..

यही सोचकर उसके छूट के ऊपर जो हलके हलके बाल थे वो छूट के पानी से गीले हो कर चिपक गए थे.. उसके छूट से रास अब भी बराबर निकल रहा था.. न जाने माहि को क्या हुआ और माहि ने एक हाथ को ले जा कर अपनी पुसी के ऊपर रख दिया और पुसी की लकीर पर जो बाल बिखर से गए थे उन्हें अलग कर दिया.. बालो को सही करके वो अपनी पुसी को सहलाने लगी, थोड़ी देर पुसी को सहलाने से hi उसके घुटनो ने जवाब दे दिया.. दोनों पेअर बुरी तरह से kanp-kanpane लगे और पुसी ने झटके लेते हुए पानी छोड़ दिया…

पर अगले hi पल अपने रूप का जलवा देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गयी और उसको खुद पर hi प्यार आने लग गया.. अपनी खूबसूरती को आज पहली बार उसने जाना था की वो क्या है..

वो सोचने लगाती hai..meri हिघ्त, मेरे mote-mote गोल उरोज, पतली कमर और भरे हुए अस्स.. नहीं नहीं गांड… केले के तने के जैसी दो lambi-lambi गोरी टाँगे और उनके बीच में मेरी छोटे बालो से ढकी हुई पुसी… नहीं नहीं छूट.. इसको देख कर तो कोई भी मुझे पर फ़िदा हो जायेगा .. लता भाभी और सिमरन मैडम तू मेरे सामने कुछ भी नहीं है.. ये सब सोच कर उसको खुद पर गर्व होने लगा था..

इन सब चीजों में उसको जो एक चीज ख़राब लग रही थी वो थे उसके छूट के ऊपर chhote-chhote उगे घने बाल.. ये सोच कर उसका हाथ अपने आप दोबारा से उसके छूट के ऊपर आ गया.. छूट के ऊपर के बाल बुरी तरह से गीले हो कर chip-chipa रहे थे..

वो आपने आप से कहने lagi..aaj पहली बार सही मायनो में मैंने जाना है की छूट को गिला होने किसे कहते है.. आज मुझे पहली बार पता चला था की क्यों मनीष मुझे इतना प्यार करते है.. क्यों सुबह उठते hi मेरी छूट पर किश करते है.. क्यों वो रोज सेक्स करने के लिए इतने उतावले रहते है.. सब सोच कर मेरे चेहरे पर फिर से शर्मीली मुस्कराहट आ गयी.. और ये सब अहसास मुझे मेरे करीम ने दिलाया hai..mera करीम .. नहीं तो क्या उस चैनल द्क्प सिमरन का करीम .. या उस हरामी लता का करीम.. दोनों को शर्म कैसे नहीं आती आपने पति को धोका देते हुई.. उन दोनों को क्या कमी है.. जो वो इतना गन्दा काम कर रही है और आपने शेठदन का नाम ख़राब कर रही है.. लता को तो शर्म आणि चाहिए.. उसका पति मला है.. और वो रंगरलिया मन रही है एक नौकर से.. मुझे ये सब भैय्या को बताना hi पड़ेगा..

लेकिन मई ये क्या सोच रही हु.. उन्दोनो ने जो गलती की वो मई करने जा रही हु.. लेकिन ये गलती है क्या..

उसके घुटनो में अब बोहोत तेज दर्द हो रहा था और अब खड़ा होना उसके लिए बोहोत मुश्किल होता जा रहा था इस लिए वो शीशे के सामने से उठ कर अपने बीएड पर आ गयी, बीएड पर आ कर अपनी दोनों टांगो को फैला लिया. टांगो को फ़ैलाने से उसकी छूट पूरी तरह से खुल गयी और कमरे में एक की ठंडी ठंडी हवा का अहसास उसे अपनी छूट के अंदर हो रहा था.

उसका हाथ उसकी छूट तक आ गया और धीरे धीरे ऊपर नीचे सहलाने लगी, थोड़ी देर छूट को सहलाने के बाद उसका हाथ वह था जहा मनीष का लिंग अंदर बहार होता था. उसको लिंग hi कहेंगे न .. वो थोड़ा hi करीम के जैसा लौड़ा है.. ऐसा कहके वो हँसाने लगी.. अपने छूट का छेड़ मिल जाने से उसकी एक ऊँगली अपने आप उस छेद के अंदर चली गयी. ऊँगली अंदर करते hi वो पुरे जोश में आ गयी थी और उसके मुंह से मादक सिसकारियां निकलना शुरू हो गयी जैसे अभी थोड़ी देर पहले लता के मुंह से सुनी थी.

aaaaaaahhhhhhhhhhaaaaa….

Kkkkkkkkkkkkkkk…………….rrrrrriiiiiiii……..mmmmmmmmmmmmmmmmmmmm……

ये मई क्या बोल रही हु……..

मनीष जल्दी आओ न.. और मेरी आग शांत करो..

जोश में आते hi माहि ने अपनी गर्दन को एक ऐडा के साथ झटका और फिर से खुद को शीशे में देखा. बीएड के ऊपर पड़ा उसका जिस्म उसे उस समय दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज लग रहा था. उसके बिखरे हुए बाल उसके कंधे से होकर उसके आम को, जो चाट की तरफ सीना तने हुए थे, धक् रहे थे. जोश और एक की ठंडक के अहसास के कारन दोनों निप्पल्स टाइट हो गए थे.

दोनों खुली हुई टाँगे और उनके बीच माहि की ृस्टि हुई गीली छूट, और छूट के ऊपर उसे सहलाता हुआ उसका हाथ. इस नज़ारे को देख कर माहि जोश और रोमांच की साडी सीमाएं तोड़ कर उसमे खोटी चली गयी और पहली बार उसके हाथ और छूट की जंग सी छिड़ गयी. मुंह से लम्बी लम्बी सिसकारियां निकलने लगी जो धीरे धीरे तेज होती चली जा रही थी …

आआआह्ह्ह्हह्हआआआआ….

Manishhhhhhhhhhhhhhhhh…….

Yeeeeeeeeeee mujeeeeeeeeee…

Kyaaaaaaaaaaaaaa.. हो rahaaaaaaaaaaaaa… है…………

ुस्सस्स्स्स करमजली नई… mujeeeeeeeeeee… क्याआआआआ कर diyaaaaaaaaaaaa… उस haramiiiiiiiiiii… लता नेईईई… अगर वो आज करीम से चुदती नहीं …और मई करीम का वो बड़ा सा कला लुंड देखती नहीं तो मेरी ये हालत नहीं होती………

Karimmmmmmmmmmmm …….

नाहीइइइइइइ ……. Nahiiiiiiiiiiii…

मनिष्ठ्हहह मुझे Karimmmmmmmmmmmm … के लुंड ने पगला बना दिया है रे… अपनी माहि को बचाओगे नहीं क्या.. उस हरामी करीम से… नहीं तो वो तुम्हारी माहि को खा जायेगा… जैसे उसने उस मादरचोद सिमरन और हरामी लता को खा चूका है.. अपनी माहि को बचाव… मनिष्ठ्हहहहह..

और थोड़ी देर बाद hi उसका शरीर अकड़ता चला गया और उसके मुंह से निकलने वाली सिसकारियां बंद हो गयी..

जोश और रोमांच का तूफ़ान जब थमा तो उसके पुरे जिस्म में जरा भी जान बाकी नहीं थी. उसकी साँसे बुरी तरह से उखड रही थी. मनीष के साथ सेक्स करने के बाद भी माहि ने खुद को कभी इतना कमजोर नहीं महसूस किया था. पुरे बदन में आज जो रोमांच की लहर उठी थी आज तक नहीं उठी थी.

आज अपने हाथो से खुद को इस तरह संतुष्ट करके माहि को ऐसा लग रहा था जैसे उसने सेक्स का मजा आज पहली बार लिया था. उसके छूट से बेहटा हुआ पानी, बहते हुए उसके नितम्ब तक आ गया था. माहि ने अपने आप को शीशे में देखा और खुद को देख कर मुस्कुरा उठी. थोड़ी देर बीएड पर पड़े अपने नंगे जिस्म को शीशे में देखने के बाद आँखे बंद कर के लेट गयी.

बीएड पर लेते हुए उसके दिमाग में कई सारे सवाल चले रहे थे. एक तरफ तो उसे बोहोत आनंद की प्राप्ति का एहसास हो रहा था और दूसरा तरफ उसे अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था की वो ये सब क्या और क्यों कर रही है. क्या वो भी उस लता और सिमरन की तरह के गन्दी हो गयी है ह. ? वो सोचने lagi..kyu उसने ये सब किया.

थोड़ी देर बाद जब माहि ने आँख खोल कर देखा तो खुद को इस हालत में देख कर उसे खुद पर बोहोत गुस्सा आया और साथ hi उस लता और करीम पर भी. वो मन hi मन उन दोनों को कोसने लग गयी. वो कहने लगी ..लता की हिम्मत कैसे हुई की आपने घर में ये सब उलटी सीढ़ी हरकत करने की. यही सब सोचते हुए माहि ने जल्दी जल्दी से अपने कपडे पहने जो नशे की सी हालत में इस तरह से उतर के फेंक दिए थे जैसे की ये उसके शरीर पर बोहोत बड़ा बोझ हो.

उसका गाला पूरा सुख गया था और उसे पानी की प्यास लगी थी.. वो अपने कमरे से निकल कर किचन में पानी पीने के लिए चल दी. अभी भी वो दोनों उसे कमरे मई थे.. बाते कर रहे थे.. दोनों है रहे थे.. उनकी हसी की आवाज माहि के कानो मई पद रही थी.. पर माहि ने उदार ध्यान नहीं दिया और किचन में आ कर माहि ने पानी पिया.

माहि ने पानी पिया और वही किचन मई दिंनिंग टेबल के पास बैठ गयी… वो कुछ सोच रही थी… कुछ 5-10 मिनट ऐसे hi चले गए…

उधर करीम उस रूम से बहार आ गया और लता थकन की वजह से सो गए थे.. करीम को बहोत जोरो की भूक लगी थी और प्यास भी.. वो किचन की तरफ जाने लगा.. पानी पिने के लिए तब उसे रस्ते मई पद्मा दिख जाती है..

वो सोचता है अब इसको hi कुछ खाने के लिए देने को बोलता हु..

पद्मा को देखते hi वो कहता है..

कहा मर रही है आज कल..

यही हु ..तेरा ध्यान कहा है मेरे पास.. तू तो अब पूर्वी बहुरानी का आशिक़ बना हुआ है तो हम गरीब को भूल गया है..

पद्मा ने ऐसे कहते hi करीम उसको आपने बहो मई ले लेता है..

तुजे कैसे बुल सकता हु रांड..

भूल hi गया है.. मालकिन इतनी खूबसूरत मई नहीं हु और जवान भी नहीं हु.. और मालकिन जैसे तेरेको पैसे भी मई दे नहीं सकते हु.. न..

उसके कमर को आपने एक हाथ मई पकड़ लेता है..

बोर मत कर .. ारे तेरे पूर्वी रांड कहा है आजकल दिखती hi नहीं है..

मेरे नहीं तेरे रांड है वो चैनल …

पद्मा को उठा के हाल मई के सोफासेट पाई बिठा देता है और किश करने लगता है..

अपनी मालकिन को चैनल और रांड बोल रही है ..तू..

आपने नौकर से जो चुद जाये उसको चैनल और नहीं तो क्या सतिसवित्री बोलू क्या..

ऐसा बोलके उसको आपने और खिंच लेती hai..aur उसको आपने कहते को लगा लेते है.. करीम के गले मई आपने दोनों हाथ दाल देते है..

हाँ .. वो तो सही है.. वो तो मेरी रांड hi है..

आपने करीम की रांड मतलब मेरे भी रांड..

कहा है वो आजकल.. 8-10 दिनों से उसको मिला hi नहीं हु मई..

मिलेगा भी कैसे अब तू उसे.. तेरा तो काम हो गया है ..अब उसके पास.. से.. अब किस के पीछे पड़ा है..

माहि ..
 
क्या.. तू तो बहुत चालू निकला रे.. कान्तिशीथ के घर के साथ मनिश्शेत के घर पे भी हाथ साफ़ करने का इरादा है क्या..

आपने हाथ साफ़ करने का इरादा नहीं होता है.. सिर्फ लौड़ा साफ़ करता हु.. उसके बाद हाथ तो आपने आप साफ़ हो hi जाता है..

जरा सम्बलके ..वो बहुत कड़क है..

वो चोर बता ..पूर्वी कहा है आजकल..

ारे वो कुछ दिन मइके गयी थी.. कल hi रात को आयी है.. अब डॉक्टर के पास गयी है.. बहुत उलटिया कर रही थी सुबह आज.. लगता है तेरे बच्चे की माँ बनाने वाले है… वो..

चुप कर कमीने.. इतने जल्दी कैसे माँ बन सकती है.. मैंने तो उसे 2-3 बार hi छोड़ा है.. इतने जल्दी कैसे माँ बन सकती है.. उसको तो और बहुत छोड़ना है..

तू छोड़ता hi है ऐसे की कोई भी 1-2 चुदाई मई माँ बन जाये.. और तेरा ये घोड़े जैसा लुंड तो कमल hi है.. ारे तेरे पूर्वी रांड है न सचमुच मई माँ बनेगी इससे..

ारे .. उसको तो और छोड़ना था मुझे..

छोड़ न ..किसने मन किया है.. अब तो सुरुवात है.. सातवे महीने तक तू छोड़ सकता है..

वो तो है… जाने दो वो .. मुझे बहुत भूख लगी है .. कुछ खाने को दे न..

मेरे छूट खा न.. बहुत दिनों से तूने इससे खाया नहीं है.. मई थो तुम अपनी छूट खिळणे के लिए हमेशा रेडी रहती हु..

चुप कर कमीने.. मुझे खाने के लिए कुछ दे फिर तेरे छूट खाऊंगा मई..

अच्छा .. मेरे करीम को कुछ कहानी को देते हु.. तू यहाँ hi रुख मई किचन से कुछ बनके लेट हु ..

ऐसा कह के पद्मा किचन की तरफ जाने लगाती है.. किचन मई माहि को देखते hi पीछे आ जाती है..

उसको पीछे आते हुई देखकर करीम कहता है..

क्या हुआ.. पीछे क्यों आ गयी…

तेरे नयी रांड .. वह है..

कोण .. कोण.. माहि .. क्या..

कैसे चेहरा खुल गया है तेरा माहि का नाम सुनते hi .. बहुत कमीना है सेल तू…

वो तो हु… मई अब जाता हु..

ारे तेरे को तो भूख लगी थी न.. खाना खा न था न ..तुजे..

अब उसके हाथ का बना hi खाना खता हु…

उसके हाथ का खाना या.. उसके छूट का खाना..

और दोनों हँसाने लगते है..

जा जा अन्दर तू.. अब तू थोड़ा hi रुकने वाला है..

हाँ अब मई जाता हु..

ऐसा कह के करीम किचन की और जाने लगता hai…Udhar किचन मई बैठ कर माहि पानी पी रही थी.. पानी पीने के बाद माहि के दिमाग में ये ख्याल आ गया की उस कमरे में एक बार और देखना चाहिए की वो दोनों अब क्या कर रहे है. फिर उसके मन ने अपने आप hi जवाब दिया की नहीं.. अनहि उसे उस तरफ नहीं जाना चाहिए. क्यों नहीं जाना चाहिए.. मैं व्यस्क हु शादी शुदा hu.aakhir ये मेरे माँ बाप का घर है.. मेरा भी उतना हक़ बनता है की जितना भैय्या का.. इस घर मई क्या क्या हो रहा है वो मुझे देखना चाहिए..

अगर मैंने ये सब देख भी लिया तो कोई पाप तो नहीं कर दिया. उसके दिमाग मई अपने आप hi सवाल जवाब पैदा होने लगे थे .

उसका मन नहीं मान रहा था ये जाने बिना की क्या करीम अब भी कमरे में भाभी के साथ वो कर रहा है या उसने बंद कर दिया होगा. यही सोच कर माहि दबे कदमो के साथ किचन से निकल कर किचन के दूर तक आ जाती hai..fir कुछ सोच कर वापिस किचन मई आ कर बैठ जाती है...

उसके जहाँ में बार बार करीम का मोटा लम्बा लुंड दिखाई देने लगा. वो सोचने लगाती है क्या लुंड इतना लम्बा भी हो सकता है.? और भाभी ने उसके पुरे लुंड को अपनी पुसी के अंदर ले लिया. भाभी को दर्द नहीं हुआ होगा क्या.. हुआ तो था.. इसलिए तो वो चिल्ला उठी थी.. यही सब उसके दिमाग में बार बार चल रहा था. फिर वो आपने आप को कहने लगी..

की मैं ये सब क्या बेकार की बात सोच रही हु. और चाहे कुछ भी हो जाये मैं अब इस करीम को एक पल के लिए भी यहाँ नहीं रहने दूंगी.. मेरे पास तो उसे कतए नहीं आने dunge..iss घर से उसे निकल दूंगी… और.. और…

फिर वो आपने आप को कहती है..

और क्या माहि.. और क्या..

और ये की मई भैय्या को क्या कहूँगी..

जो देखा वो बता न..

क्या…….. मई कैसे कहूँगी भैय्या को की आप की वाइफ उस करीम के साथ सेक्स करती है.. बहीय्या कैसे मनेनेगे.. मुझे कुछ नया hi सोचना पड़ेगा.. भाभी को पता न चले इसका मुझे ध्यान रखना पड़ेगा..

यही करती हु मई..

थोड़े देर तक माहि बैठ कर यही सोचते है .. ऐसा सोचने से उसका सर फिरसे दर्द करने लगा था.. माहि सोचते है की कॉफ़ी पि ली जय.. उससे थोड़ा फ्रेश हो जाउंगी मई.. और सिरदर्द चला भी जायेगा…

ये सोच कर वो कॉफी बनाने लगाती है.. उसके बक्सीडे किचन के दूर के सामने थी .. तब तक दूर के पास करीम आ जाता है..

मुझे भी चाय बना दे ..

माहि पीछे घूम के देखते है तो सामने करीम को देख कर डर जाती है.. ….माहि ने बिना कुछ बोले उसकी तरफ घूर कर देखा.





इतने देर तक किचन मई बैठ के वो यही सोच रही थी की अगर करीम सामने जब भी आ जायेगा तो मई उसका सामना कैसे करुँगी.. क्यों की वो जो लता भाभी के साथ सेक्स कर रहा था तब मैंने उन देख लिया था और मुझे देखकर वो भाभी को जोरजोर से सेक्स करने लगा था.. अब मई उसका सामना कैसे करुँगी..

थोड़े देर पहले वो जो सोच रही थी वो सिचुएशन अब उसके सामने आ गयी थी.. वो अब सोचने लगाती है.. हे गॉड.. अब मुझे बचा ले इस ज़ालिम से.. ये कुछ न कुछ उलटी सीधी हरकत करेगा… मई क्या करू अब..

वो कैसे तो आपने आप मई हिम्मत लाठी है .. और गुस्से मई कहती है..

मई क्या तेरे बाप की नौकर हु..

करीम किचन के अन्दर आ जाता है..

चाय बनाने मई .. नौकर और मालिक कहा से आ गया है..

हाउ डरे यू… की तुमने मुझे चाय बनाने को कहा..

क्यों गली देते है.. रांड…

मुजसे बात करनी है तो अच्छी लैंग्वेज मई बात करो.. ऐसे घटिया लैंग्वेज मई मत बात करो...

जो औरत अपनी भाभी किसी गैर मर्द से चुद रही है वो अगर देख लेती है ..और आपने भाभी को कुछ कहती नहीं है उसको रांड नहीं तो क्या कहेंगे..

मंद योर लैंग्वेज .. करीम..

ok.. बाबा.. अब नहीं कहूंगा..

ठीक hai…Waise माहि एक बात पुछु ..तेरे को वो सब देख कर मजा आया की नहीं. ?

करीम ने अपनी बत्तीसी फाड़ते हुए कहा.

करीम की बात सुनकर माहि गबरा गयी .. आज तक उसने खुद को कभी इतना असहाय महसूस नहीं किया था जितना की उस वक़्त कर रही thi.Uski बात सुन कर माहि का मन तो ऐसा कर रहा था की इसकी बत्तीसी तोड़ दो घूँसा मार कर पर कर कुछ भी नहीं सकती थी क्युकी गलती उसकी hi थी जो माहि ने उसे खिड़की से खड़े हो कर देखा था और इसी कारन उसने माहि को देख लिया था. वो सोचते है न मैं उसे खिड़की से देखती न वो ये सब मुझसे कहने की हिम्मत करता.

माहि सोचने लगी लेकिन बोल कुछ नहीं पायी.. करीम किचन मई और थोड़ा अन्दर आ गया..

माहि jiiiiiiiiiiii……… आपने बताया नहीं आप को कैसा लगा ? मेरे बड़े काळा लुंड से आपके प्यारी लता भाभी और इस घर की मालकिन लता महरा को छोड़ते हुई.. देखकर..

बत्तमीज आदमी.. आपने हद मई रहो.. बेहवे प्रॉपरलय.. यू अरे टॉकिंग विथ माहि… मई कोई लता नहीं हु.. समजे.. ज्यादा सहनपट्टी की तो मुजसे बुरा कोई नहीं होगा..

क्या कर लोगी …

भैय्या को बता दूंगी.. तुम्हारी शिकायत भैय्या को कर दूंगी…

कोण सी वाली शिकायत करोगी मेरी जान….?

मई कोई तुम्हारी जान नहीं हु.. वो लता भाभी है ..तुम्हारी जान है.. उसको hi अपनी जान कहो..

करीम अब उसके और पास आ गया था.. माहि उसको hi देखने लगी थी.. आँखों मई आँखे डालकर.. थोड़े देर आँखे खोलते फिर बंद करते ..

क्या सिखयात करोगे अपनी भैय्या से.. यही की करीम मुझे एक बार अपनी छूट देने को कह रहा है या आपकी बीवी लता को करीम ने छोड़ा है.. वो मैंने अपनी आँखों से देखा है.. वो देखते हुई मुझे बहोत मज़ा आया..

जब करीम ने इस लफ्ज़ो मई ये कहा तब माहि का मुंह खुला का खुला रह गया. और उसके मू से मीय गॉडडडडडड… निकल गया..

माहि के पास अब बोलने को कुछ नहीं था. माहि सिर्फ उसकी तरफ घूरते हुए रह गयी..

वैसे माहि ..तुजे पता है क्या...

माहि जाहत से कहते है

क्या..

कितने जल्दी है रांड तुजे मेरे बात सुनाने की..

िसब्बर जब करीम ने उसे रांड कहा तो माहि ने कुछ नहीं कहा.. और उसकी तरफ गुस्से से देखा भी नहीं .. सिर्फ निचे देखने lagi..aur अपनी आड़ के साथ हल्का सा मुस्कुराने लगी..

जब मई लता को छोड़ रहा था तब तुजे इमेजिन करके hi छोड़ रहा था..

करीम ने ऐसे कहते hi माहि उसके तरफ आचर्य से देखने लगी.. लेकिन गुस्सा नहीं था उसके चहरे पर.. प्यार था उसके आँखों मई और चहरे पर.. अब करीम की डेरिंग थोड़े बाद गयी थी .. उसदिन करीम ने लुंगी पहने हुई thi..usne अपनी लुंगी के ऊपर से hi अपने लुंड को मसलते हुए कहा …

मुझे अब तुजे छोड़ना है..

करीम की आवाज सुन कर माहि अपने खयालो की दुनिया से बहार आयी. वो सोचती है ये आदमी ऐसे कसिए मुजसे कह सकता है.. मैंने उसको प्यार से देखा इस वजह से.. उसको गुस्सा नहीं किया इस वजह से .. उसको अब फिर से करीम का गुस्सा आ रहा tha..lekin कर कुछ नहीं पा रही थी..

न चाहते हुए भी माहि की नजर उसकी लुंगी की तरफ चली गयी जिसमे से उसका लुंड लगभग टेंट की शकल बनाये हुए था. माहि की निगाहें जैसे कुछ पल कके लिए वही अटक कर रह गयी. उसकी लुंगी में उसका लुंड जिस तरह से झटके ले रहा था. उससे माहि का तो गाला सूखने लग गया उस सब को देख कर माहि ने जब देखा की वो उसके निगाहो की तरफ hi देख रहा है तो माहि ने फ़ौरन वह से अपनी नजर हटा ली.

ऐसे क्या देख रही है माहि भाभी जी… आप hi का है. चाहो तो हाट लगा कर देख लीजिये जी आप की hi सेवा के लिए है. अभी अभी आपकी लता भाभी की सेवा की है अब इस चैनल माहि भाभी की सेवा करने के लिए रेडी है..

ऐसा कहते हुए उसने अपनी लुंगी अपने लुंड के ऊपर से हटा दी. जिस कारन उसका लुंड किसी सांप की तरह से फनफनाता हुआ बहार निकल आया.

इतना बड़ा लुंड वो भी इतने पास से देख कर माहि की तो जैसे साँसे hi अटक गयी थी.

उसकी इस अप्रतीयशित हरकत से माहि बुरी तरह had-bada गयी. और lag-bhag हकलाते हुए उस से कहा

…ये क्या bad-tameeji है.? अपनी हद में रहो. यहाँ पर तुम अपने काम से काम रखो और मेरे से फालतू की बात करने या इस तरह की कोई भी गन्दी हरकत करने की जरूरत नहीं है. दफा हो जाओ यहाँ से..

माहि ने उसे गुस्से से तिलमिलाते हुए कहा.

मुझे पता है की तू बताएगी नहीं.. लेकिन मेरा लुंड देखकर .. और जैसे मैंने तेरे उस रांड भाभी को छोड़ा था.. वो देखकर तुजे बहुत मज़ा आया होगा.. और आपने रूम मई जाकर मुट्ठ भी मारी होंगी.. तुम रंडिया जो अपनी छूट मई उंगली करती हो न ..उस तरह की मुट्ठ मारी होगी न रांड.. तूने.. मेरे लुंड को याद करके.. तेरे उस बहदवे पति के तो याद नहीं किये होगी तूने.. करती भी कैसे .. मेरे जैसा लुंड उसका नहीं होगा न.. अनहि तो तू मेरा लुंड देखकर आपने मू पर हाथ नहीं रखती न.. मेरा लुंड तुजे पसंद आया था.. छूट मई उंगली डालते वक़्त यही कहा होगा तूने.. करीम आ जाओ ..और मुझे छोड़ दो.. और अपनी रांड बना दो… सच मई इस घर के तू मेरे 3 ऋ रांड बनेगे अब..

चुप करो अपनी बकवास..

माहि को सच में उसकी ऐसे बातो पर इतना गुस्सा आ रहा था की मन कर रहा था की अभी इस के गाल पर एक चांटा खींच कर मार दू. इसे जरा भी तमीज नहीं है लड़कियों से कैसे बात करते है. वो फिर आपने आप से कहती है ..पर बात तो साला सही कर रहा था.. है कमीना लेकिन मैं की बात जनता है हरामी..

क्या माहि.. तब तू छुप छुप कर देख रहे थी और जब मैं तेरे सामने इसे दिखा रहा हु तो तू नखरे कर रहे है.

उसने आपने लुंड ुंदरपनत के बहार निकलते हुई कहा.. अब उसके लुंड का सूपड़ा पूरी तरह से माहि के आँखों के सामने आ गया था.

अभी माहि कुछ और कहती या सुनती इस से पहले करीम ने माहि को आपने सीने से चिपका लिया… माहि को कुछ समाज नहीं आ रहा था की क्या करू और क्या न करू..

. उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी की माहि छह कर भी कुछ नहीं कर प् रही थी. माहि ने अपनी तरफ से पूरी कोसिस की उसकी कैद से आजाद होने के लिए पर उसकी बांहो की गिरफ्त से जरा भी hil-dul न सकीय.

उसे अपनी गिरफ्त में लिए हुए hi उसने अपना मुंह माहि के चेहरे की तरफ ले आया.





और माहि के गाल को जबरदस्ती किश किया…

उसके गाल को चूमने के बाद वो कहने लगा..

ये तेरा नाक बहुत तेज है न .. फिर उसके नाक पाई उंगली रख के उसको दबा देता है.. यही ननक सुंघाते हुई तू आयी थी न वह .. अपनी भाभी की छुड़ाए देखने के लिए.. तुजे शर्म नहीं आती मादरचोद..

ऐसा कहके करीम उसको एक जोरदार तमाचा लगता है.. और मन मई कहता है..

मादरचोद तूने बहुत मारा है मुझे और आपने भाई से मुझे बहुत मार भी खिलवाया है.. साली तेरा तो मई चुन चुन के बदला लूंगा..

करीम के मरने से माहि के आँखों मई आंसू आने लगे थे.. रट रट है वो कहने लगी..

मुझे क्यों मारा.. मैंने क्या किया है..

साली रांड.. शर्म नहीं आती तुजे.. अपनी भाभी की चुदाई देखते हुई.. साली मादरचोद.. इतनी छूट की आग है तो बता देती मई आकर बजा deta..roj यही करती है शयद..

नहीं आज गलती से पहली बार देख लिया.. मुझे नहीं पता था .. आप लोग उस रूम मई है.. मई तो निचे पानी पने आयी थी.. आप लोगो का आवाज सुनकर उस रूम के पास आ गयी मई वह..

चैनल झूट बोलते है..

ऐसा कहके करीम उसके गर्दन पकड़ लेता है.. लेकिन वो खांसने लगाती है.. करीम को लगा अब ज्यादा हो गया है इसलिए वो उसको चिर देता है..

तेरा भाई जब लता को छोड़ता है .. तब भी तू देखती है..

तब माहि न मई गर्दन हिलती है..

फिर क्या मेरा लुंड देखने आयी थी..

माहि न मई गर्दन हिलती है...

तो क्या देखने आयी थी... मई कैसे छोड़ता हु ... वो ..

माहि न मई गर्दन हिलती है..

वो जाने दे तूने मुझे चाय बना के नहीं दिया..

माहि निचे देख के न मई गर्दन हिलती है और उसके हूंठ खुल जाते है..

क्यों

मई क्या तेरे नौकर हु..

तू बना रही थी आपने लिए .. साथ मई मुझे भी बना लेते तो तेरा क्या जाता..

मई चाय नहीं पीती ...

तू क्या अब मूत बना रही थी पिने के लिए..

गंदे इंसान .. मई कॉफ़ी बना रही थी..

मई भी पि लेता कॉफ़ी.. मई भूल hi गया .. बड़े लोग चाय नहीं पिटे कॉफ़ी पिटे है..

तुमने मुझे चाय बनाने को बोलै इसलिए कॉफ़ी नहीं बनायीं ..

अब बोल रहा हु न कॉफ़ी बना..

नहीं बनती .. जाओ..

क्यों..

वो तेरे लता से बना ले लो..

वो यहाँ होते तो झट से बना लेते.. तेरे जैसे नखरे नहीं करती..

पता है..

क्या पता है..

कुछ नहीं..

कुछ सोच कर कहते है..

रखो जरा .. बनती हु कॉफ़ी तेरे लिए..

ऐसा कह के माहि करीम के लिए कॉफ़ी बनाने के लिए घूम जाती है.. और खुद की कॉफ़ी ठण्ड हो गयी है ये देख कर दोनों के लिए कॉफी बनती है.. और करीम को दे ते है.. दोनों अब कॉफ़ी पिने लगते है..

कॉफ़ी पिटे पिटे करीम की तरफ देखकर माहि अचानक आँखे बंद कर लेती है और मू थोड़ा अलग hi बना लेती है..

मु ऐसा बना रही हो जैसे तेरे छूट मई लुंड डाला हुआ है..

उसपर माहि हस्ते हुई कहते है..

तुम सीधे तरीके के से बात नहीं कर सकते क्या.. हमेशा बात करते हो तो तुम्हारे मू से गंदे वर्ड hi निकलते है..

तू मु hi ऐसा बना रही हो.. पता है ऐसा मू औरत कब बनती है.. जब बड़ा सा लुंड उसके छोटे से छूट या गांड मई जाता है और उसको ये बर्दास्त करना नहीं होता है तब औरत ऐसा मू बनती है..

पता है..

मतलब तू कुछ याद कर रही थी.. एक तू खुद की चुदाई या मैंने लता के छूट मई लुंड डाला तब की याद कर रही थी..

माहि कुछ नहीं बोलते..

लता ने तो कभी भी ऐसा मू नहीं किया था.. बता क्या याद कर रही थी..

मुझे नहीं मालूम ..

बता न..

नहीं बोलै न.. ऐसे कहते hi करीम माहि के कमर पाई हाथ रख देता है... पहले तो माहि ने करीम का हाथ वह से हटा दिया..

no.. करीम..

कुछ नहीं करूँगा..

क्या कुछ नहीं करूँगा.. मेरे बदन को टच कर रहे हो और बोल रहे हो कुछ नहीं करूँगा..

ारे कमर पाई हाथ रख रहा हु.. थोड़ा hi आम या छूट पर हाथ रख रहा हु...

मुझे पता है.. तुम जैसे लोगो की ये स्टाइल होते है.. लादेस को मदहोश करने के ..

मतलब...

मतलब तुम अच्छे से जानते हो..

ारे बाबा ऐसा कुछ नहीं होगा..

मई सिर्फ वह मालिश करूँगा..

ओनली मालिश न..

हाँ.. ओनली मालिश..

और अब करीम वह उसके कमर पर हाथ रख कर वह पाई रब करने लगता है.. माहि की हालत ख़राब होने लगाती है... वो मदहोश हो रही थे.. वो आपने आँखे बांध कर के आपने होंठ खुद hi काट रही थी.. वह पे रब करते करते करीम आपने हाथ उसके नवल तक ले जाता है..

no.. no.. करीम वह नहीं..

ऐसा कहते हुई उसके आंखे बंद हो जाती है..

कुछ नहीं होगा...

मुझे पता है तुम्हारा इंटेंशन

ऐसा कह के माहि करीम से दूर हैट जाती है.. माहि थोड़ा दूर जेक कड़ी हो गयी … करीम धीरे से उसके पीछे जाता hai..aur उसके कमर के दोनों साइड से हाथ डाला देता है..





हे तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की… छोडो मुझे अभी के अभी..

माहि ने उसकी कैद से आजाद होने के लिए छटपटाते हुए कहा.

उसने इस तरह से पकड़ रहा था की माही के दोनों बांहो में बेहटा हुआ खून सा रुक गया था. उसने उसे पकड़ते हुई आपने चेहरा उसके चहरे के करीब लाया.. उसकी निकलती हुई साँसे माहि को आपने कंधे पर महसूस हो रही थी..





पीठ की तरफ से करीम था इस वजह से माहि को आपने अस्स पर उसका लुंड साफ़ महसूस हो रहा था जिसे महसूस करते hi उसके पुरे शरीर में एक बिजली सी कोंध गयी.

करीम ये ठीक नहीं है..

क्या ठीक नहीं है..

तुम जो कर रहे हो वो..

मई तो कुछ बी नहीं कर रहा हु..

जाओ वह लता के पास..

अचानक उसने अपना एक हाथ पकड़ से हटा कर माहि के गांड पर रख दिया. उसका हाथ अपने अस्स पर महसूस करते hi माहि को एक अजीब से दर के कारन रोंगटे कहते हो गए.

माहि ने उसकी कैद से निकलने की दोबारा कोसिस करते हुए उस से कहा..

छोडो मुझे ये क्या कर रहे हो ?

पर करीम तो अपनी मस्ती में मस्त था.. अपना चेहरा माहि के कान के नजदीक ला कर धीरे से उसके कान में बोलै..

बोहोत मुलायम है. एक डैम रुई के गद्दे के जैसे.

और khil-khila कर हंस दिया

मैं कहती हु अपना हाथ वह से हटा लो. वर्ण इसका नतीजा अच्छा नहीं होगा.

माहि ने लगभग पूरी ताकत से से उसकी पकड़ से निकलने का प्रयास किया और अपने दांत भींचते हुए उस से कहा.

पर उसने माहि की एक नहीं सुनी ..माहि लगातार उस से उसको चोर्ने को कह रही थी लेकिन वो उतनी hi सख्ती के साथ अपने हाथ को उकसे गांड पर चलाये जा रहा था. बारी बारी से उसने माहि के दोनों नितम्बो को मसल कर रख दिया. उसका हाथ माहि के गांड पर आसानी से चल रहा था और उसके गांड को मसले जा रहा था. उसके इस तरह माहि के गांड को मसलने से माहि की साड़ी पूरी तरह से ढीली हो गयी थी.

उसके हाथो से अपने अस्स को इस तरह से मसाले जाना माहि को अंदर hi अंदर कही न कही बड़ा अच्छा सा फील करा रहा था. माहि ने पकड़ से बहार निकलने की कोसिस करना भी बंद सा कर दिया था.. तब उसने भी अपनी पकड़ थोड़े लूसे कर di..usne अब एक हाट कमर पर रखा और दूसरा हाथ हवा मई रखा.. थोड़े देर ऐसा hi रहा ..

थोड़े देर बाद माहि अचनाक से बुरी तरह से काँप उठी.. .





उसने माहि के गांड को मसते मसलते hi साड़ी के ऊपर से गांड की दरार में ऊँगली दाल दी. अपने गांड के बीच में ऊँगली महसूस करते hi माहि का पूरा बदन फिर से thar-thar कांपने लग गया.

तुम हैट रहे हो की नहीं. मैं चिल्ला दूंगी और सब नौकर यहाँ आके फिरसे तुम एक बार मरेंगे..

माहि ने अबकी बार lag-bhag चिल्लाते हुए कहा

बता देना जिसे भी बताना है. पर रांड इसमें नुक्सान तेरा hi होगा.

उसने माहि के कंधे को चूमते हुए कहा. फिर एक बार माहि तड़प उठी..

हर कोई मेरी तरह गांड की मालिश नहीं कर सकता. सोच लो.

Khil-khilate हुए उसने अपनी बात पूरी की.

Shut-up, बंद करो अपनी बेहूदा बकवास. एक तरफ मेरे सामने मेरे भाभी के साथ ये सबकुछ किया और दूसरी तरफ मेरे साथ ये सब कर रहे हो शर्म नहीं आती तुम्हे. ..

किस बात की श्रम..

एक hi घर मई नांद भाभी पे डोले डालते हुई..

मतलब सिर्फ तुजे अकेले को छोड़ता तो तुजे चल जाता क्या..

उसने khil-khilate हुए कहा.

मैंने कहा छोरो मुझे. तुम मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते हो.

माहि ने गुस्से भरी आवाज में उस से कहा.

उसने माहि की साड़ी को उसके गांड के ऊपर से उसके दरार में अंदर की तरफ धकेलते हुए उसने अपनी एक ऊँगली गांड के छेड़ पर ले जा कर टिका दी.

वह से हाट हटा दो ..आज तक किसी ने भी मुझे वह नहीं छुआ है.. यहाँ तक की मेरे पति मनीष ने भी नहीं चुवा है.

तेरा पति चक्का है...

मेरे पति के साथ दोस्ती की और उसको hi ऐसे गंदे वर्ड बोल रहे हो..

वो तो तेरे करीब आने के लिए की थी..

उसकी ऊँगली अपने गुदा द्वार पर महसूस करते hi माहि का शरीर कांपने लग गया.

माहि कमाल की गांड है तेरी एक डैम गजब. तू कह रही है तेरे पति ने नहीं चुवा यहाँ..

हाँ..

चुटिया है wo..aise गांड खेले बिना कोई नहीं रह पता होंगे.. ऐसी मस्तानी मतवाली गांड का मज़ा वो क्या जाने .. एक डैम कातिलाना गांड है तेरी.. मेरी नयी रांड.. .

तुम्हे क्या लेना देना है.. मेरे पति से.. और chup-chaap से मुझे छोड़ दो अगर अपनी भलाई चाहते हो तो.

माहि ने उसे एक बार फिर से चेतावनी देते हुए कहा.

पर उसने माहि की बात को पूरी तरह से उन सुना कर दिया और बराबर उसके गुदा छेड़ को रगड़ना शुरू कर दिया. उसकी इस हरकत पर माहि को बोहोत गुस्सा आ रहा था पर उसकी पकड़ में होने के कारन कुछ कर नहीं प् रही थी. लेकिन धीरे धीरे उसके उसके गुदा छिद्र को रगड़ने से माहि के शरीर में एक अजीब सी हलचल महसूस होने लग गयी. सबसे बड़ा झटका तो माहि को तब लगा जब उसे अपनी दोनों टांगो के बीच में गिला गिला सा महसूस होने लग गया. उसके पीछे वाले छेड़ पर हो रही रगड़ के कारन उसके छूट ने गिला होना शुरू कर दिया था. जिस कारन माहि एक डैम ख़ामोशी के साथ जो कर रहा था उसे करने दे रही थी.

तेरे को मजा तो आ रहा है न माहि.

करीम ने फिर से बेशर्मी से अपनी बत्तीसी फाड़ते हुए कहा. और उसके दोनों हाथ को पीछे लेजके थोड़ा खिंचा..

तुम्हे शर्म आणि चाहिए मेरे साथ ये सब करते हुए.

माहि ने उस से गुस्से भरे अंदाज में कहा.

आ तो बोहोत रही है माहि पर मैं दिल के हाथो बोहोत मजबूर हो गया हु. जब से तुजे देखा तब से तेरे इस कातिल मतवाली गांड का नशा मेरी आँखों से hat’ta hi नहीं है.

Shut-up, चुप रहो

माहि ने उसको गुस्से से कहा. इस दौरान उसने कब माहि के सरीर से अपनी पकड़ ढीली कर ली उसे पता hi नहीं चला था

अचानक उसने कुछ अजीब तरह से माहि के पीछे के छेड़ को इस तरह से रगड़ दिया जिस से माहि के मुंह से खुद बी खुद सिसकारी सी निकल गयी. और वो थोड़ा उछाल कर आगे की तरफ हो गयी
 
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