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माहि वो जाने के बाद दूर क्लोज करने वाली hi थी तब उसे ये आवाज आ जाते है.. वो फ़ौरन दूर बंद करते हुई एक नज़र बहार की तरफ दूर थोड़ा ओपन करके देखते है तब पूर्वी को करीम पकड़ रखा था और उसके गर्दन को किश कर रहा था..

साला रात भर मजे करने के बाद भी इसकी भूक अभी भी है क्या

उन्दोनो की तरफ देखते हुई माहि ऐसा मैं में कहती है
बहार भले hi इस वक़्त कोई नहीं था मगर पूर्वी के दिल में जैसे तूफ़ान सा उठा हुआ था....... उसकी सांसें ज़ोरों से चल रही थी जिससे उसके बूब्स तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थे ....... आज पूर्वी पूरी क़यामत बनकर करीम के सामने आयी thi......usne रेड रंग की साडी पहनी हुई था और ब्लैक कलर का ब्लाउज ..........बल उसके खुले हुए थे ........ चेहरे पर हल्का मेकउप भी tha.......kul मिला जुलकर वो आज करीम पर बिजली गिरा रही थी........
उसके दोनों हाथ पूर्वी के बालों पर घूम रहे they.......wo बहुत आहिस्ता से पूर्वी के बालों को सेहला रहा tha.....uski लातें संवर रहा tha.....wahin पूर्वी अपनी आँखें धीरे से बंद कर लेती हैं और जो कुछ अब होने वाला था वो शायद अब खुद को तैयार कर रही thi.......waqt मनो थम सा गया tha......dono के.. पूर्वी और माहि के.. दिल की धड़कनें पूरे उफान पर thi......sansein पल पल बेकाबू हो चले थे........
तुम आज बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो इन सर्जरी में ........आज क्या मुझपर बिजली गिराने का इरादा हैं........
माहि - हाउ रोमांटिक❤❤
करीम अपने होंठ पूर्वी के गार्डन पर हौले से रख देता हैं और बहुत आहिस्ता से वहां चूमता हैं......

पूर्वी के मुँह से ज़ोरों की सिसकारी फुट पड़ती हैं.....
ahhhhhhhhhhhaaaaaaaa.. करीम ……. चोर दो……
लजात से उसकी दोनों आँखें एक बार बंद हो चुकी thi.......wahin दिल की रफ़्तार और ज़ोरों से बढ़ती जा रही थी....... और इधर बड़े आराम से माहि उन्दोनो का रोमांस देख रही थी..

और इस बार करीम अपने दोनों हाथ पूर्वी के कमर पर हौले से रख देता hain......magar अपने होंठों को पूर्वी के गार्डन पर से नहीं hatata........wahin पूर्वी बस खामोश कड़ी thi........dheere धीरे उसका साबरा का बांध टूटा जा रहा था..
wo..........assssssssssssss.....hhhhh.......bua जी अन्दर है .. वो किसी भी वक़्त बहार आ सकती है..
पूर्वी जवाब में धीरे से इतना hi बोल पति हैं ...... वहीँ करीम अपने दोनों हाथ हौले से ऊपर की तरफ सरकने लगता hain......purvi के दोनों बूब्स के taraf.......aur इससे पहले पूर्वी कुछ समझती वो कसकर पूर्वी के दोनों बूब्स को अपने कठोर हाथों में थम लेता हैं और ज़ोर से उसके दोनों बूब्स को मसल देता hain.....wahin पूर्वी के मुँह से ज़ोरों से सिसकारी फुट पड़ती hain.............wo फ़ौरन अपने दोनों हाथ करीम के हाथों पर रख देती हैं और उसके के हाथों को हटाने की कोशिश करती hain.......aur बड़े रोमांटिक अंदाज़ मई कहते है..

aaaaaaaaaaaaaahhhhh.........nahin करीम .........अभी नहीं......... यहाँ कोई आ जायेगा… घर में सब लोग है..
और पूर्वी अपने दोनों हाथों से करीम के हाथों को अपने बूब्स से हटा देती hain......wahin करीम कुछ नहीं कहता और यु hi पूर्वी से चिपका रहता hain.............kuch सोचकर वो धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.........
बगल वाले रूम में चलते है
ऐसा कहके पूर्वी के हूंतो को आपने हूंतो के बच्च लेके चूसने लगता है..

पूर्वी भी उसका साथ देते है और उसके हूंतो को चूसने लगाती है.. थोड़ी देर चूसने के बाद पूर्वी उसे पीछे धक्का देते है..
अभी नहीं.. बाद में..
ऐसा कहके पूर्वी वह से निचे भाग जाती है.. ये देख के माहि दूर बंद कर के अन्दर आ जाती है..
कमीना कही का.. हमेशा इसे यही चाहिए…
करीम और पूर्वी के जाते hi माहि तुरंत अपने बैडरूम का दूर बंद करती हैं और अपने बिस्टेर पर जाकर दुबारा से सोचने लगती हैं…...

आज वो सुबह से hi बहुत बेचैन thi…..aaj ऐसा पहली बार उसके साथ ये सब कुछ हो रहा था……. एक तो उसे कल रात भरी पड़ी थी मगर अब तो ऐसा लग रहा था जैसे एक एक पल किसी सदी के बारबार गुजर रहा हो……
माहि एक बार फिर से अपने ख्यालों में गम थी...……

हाँ मैंने करीम का देखा था....... उसका वो पूरा खड़ा हो गया tha…….us दिन मैंने उसे दूर से देखा था.. इस से पहले दो बार देखा था .. लेकिन पास से तो उसका वो बहुत बड़ा hain…….baap re……kaise पेण्ट में किसी तम्बू की तरह तना हुआ tha…..aisa लग रहा था मनो अभी पेण्ट फाड् कर बहार निकल padega.....mujhe मालूम हैं की वो उस वक़्त वो मेरे hi तरफ देखकर खड़ा हुआ था .. वो कितने जोर से पूर्वी को कल फ़क कर रहा था ………काश ये नज़ारा मैं और नज़दीक से देखते और उनकी बाते सुन पति……...……
ये सब सोचकर माहि की छूट एक बार फिर से गीली होने लगती है ........एक तरफ वो अपने आप को समझा रही थी वहीँ दूसरी तरफ वो आपने आप को करीम के लिए तैयार भी कर रही thi..........kuch तो बात थी उसमें जो पल पल उसे अपनी ओरे खींच रही थी.....
इस वक़्त माहि की छूट पूरी तरह से गीली thi……use समझ में नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे मगर इस तरह से बहकना ाची बात थोड़ी न thi…….wo सबसे पहले अपने साँसों को अपने बस में करने की कोशिश करती हैं ….. मगर आज शायद उसके बस में कुछ भी न tha……wo बड़े डियर तक बिस्टेर पर लेते हुए एक तुक चाट की ओरे देख रही थी.......

माहि -हे भगवान् ये मुझे क्या होता जा रहा hain…..main फिर से बहक रही hoon….kya मुझे ये सब शोभा dega……agar मैंने एक टेलर के साथ ये सब किया to…..nahin नहीं इसकी इज़ाज़त तो खुद मेरा ज़मीर भी मुझे नहीं dega…..chahe जो भी हो जाये मुझे अपनी लक्समन रेखा नहीं लांघनी हैं ……… मुझे अपने मर्यादा में hi रहना है .
माहि अपने आप से हर पल संघर्ष कर रही thi……kabhi वो अपने आप को समझा रही थी तो कभी करीम की बाँहों में अपने आप को महसूस कर रही थी……. कल रात के सपने की तरह ..
माहि बेचैन thi......usey समझ में नहीं आ रहा था की वो जो कुछ सोच रही हैं क्या वो सही हैं ....... मगर कहते हैं न अगर हवस सर पर चढ़कर तांडव करे तो उसके आगे दिमाग भी बेबस हो जाता hain......kya सही हैं और क्या गलत फिर कुछ फर्क नहीं पड़ता ....... कुछ ऐसा hi हाल इस वक़्त माहि का था ...... वो अब इस हवस की आग में पल पल जल रही thi........use किसी भी हाल में अपनी प्यास बुझानी थी चाहे वो एक टेलर hi क्यों न हो......
फिर वो सोचने लगाती है..

नहीं नहीं.. ये सब ठीक नहीं है ..अब कुछ भी हो जाये पानी सर से ऊपर हो गया है… मई अब उसके सामने hi नहीं jaunge..jo भी हो जय.. . फिर वो मनीष को फ़ोन लगाती है... उसने तै किया था की मनीष को बुलाके उसके साथ अभी चली जाती हु.. फिर जब तक ये गन्दा इंसान इस घर में है तब तक भैय्या के घर नहीं आती हु.. पर मनीष का फ़ोन नहीं लगता है.. फिर वो कहती है..
जब जरूरत होती है तब मनीष का फ़ोन कभी नहीं लगता है...
वो मनीष पे गुस्सा हो जाती है.. और थोड़े देर बाद आपने आप पर गुस्सा हो जाती है.. सुबह मनीष साथ चलने को बोल रहा था तब उसके साथ गयी होती तो ये नौबत hi नहीं होती..
माहि की टाँगे बुरी तरह से chip-chipa रही थी. उसने सोचा की नाहा लिया जाये वर्ण ये गन्दा एहसास मुझे पुरे दिन बार परेशां करता रहेगा.
नहाने को जाने के बजे वो सोचने लगी..
अब मनीष का फ़ोन नहीं लग रहा है. मई घर तो आपने कार से जा सकते hu…Par ……. कही वो निचे हुआ तो ? नहीं वो गया होगा… और बहार तो बहुत सरे लोग होंगे.. फिर भी … मई क्या करू.. नीचे जाऊ या नहीं… वो घर गया होगा की नहीं…
नहीं….. नहीं …वो भहर hi होगा…
माहि ने अपने आप hi सवाल किया और अपने आप hi उसका जवाब दे दिया. पर फिर भी एक बार कन्फर्म कर लेना ठीक रहेगा. वो बाहर है या नहीं … पर …कही उसने गन्दी हरकत मेरे साथ शुरू कर दी तो ?
काफी देर तक माहि खुद से सवाल जवाब करती रही.
तब कुछ सोच कर उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है..

ये मनीषा भी न.. कहा मर गयी है.. फ़ोन भी नहीं लग रहा है..
एक का चलना न चलना एक बराबर था माहि के लिए अब. पर जब वीर्य के सुख जाने से उसकी चुभन माहि के जांघो पर तेज होने लगी तो माहि से रहा नहीं गया…. उसने जल्दी से अपने दूसरे कपडे अलमारी से निकल liye.aur वो पहन कर दूर ओपन करके बहार चली गयी .. और सीडिया उतर कर नीचे गयी तो उसे और एक जोर का धक्का लगा.. सामने का नज़ारा देख के..
करीम ने पूर्वी का हाथ पकड़ा था और पूर्वी उससे दूर जाने की कोशिश कर रही थी.. नहीं न करीम.. तुम संजो न.. बहार सब लोग है और हम यहाँ करेंगे तो सबको पता चलेगा..
नहीं पता चलेगा मेरे रानी.. बहुत धीरे से करूँगा मेरे रानी..
ऐसा कह के उसको अपनी बहो मई खिंच लेता है और उसके गाल को चूमता है..

तब माहि कहते है..
कमीना साला.. इससे बस सेक्स सेक्स और सेक्स चाहिए..
इधर पूर्वी स्माइल करते हुई पूर्वी कहती..
तुम और धीरे से..
हाँ रानी धीरे से करूँगा .. मैं जा न
नहीं बहार पापा और अरुण है. दोनों मई से एक को भी भन्न भी लगे तो वो दोनों हम दोनों को मार hi डालेंगे..
कुछ पता नहीं चलेगा उन्दोनो मादरचोदो को
तब माहि गुस्से मई कहते है..
पूर्वी ये कमीना भैय्या और अरुण को गली दे रहा है और तुम उसे कुछ नहीं कह रही हो
पूर्वी उसकी आँखों मई देखते हुई कहती है..
तुम क्यों रिस्क ले रहे हो..
रिस्क है तो इश्क़ है
इसपर पूर्वी स्माइल करती है..
मई वैसे भी तुम्हारी hi हु.. तुम्हारे बच्चे की अम्मी बनाने जा रही हु.. तुम जहा चाहे वह और जब चाहे तब मुझे प् सकते हो फिर ये सब क्यों..
मुझे तुम अब इस वक़्त पाना है.. तुम्हारे ससुर और पति के होते हुई..
पर क्यों
मेरे इच्छा
तब पूर्वी कुछ नहीं कहती है.. तब माहि इधर से कहती है..
पूर्वी अब क्या करोगे..
क - मेरे इच्छा के खातिर इतना नहीं करोगे पूर्वी .. मेरे प्यार के लिए.. मेरे लिए
तब पूर्वी बड़ी रोमांटिक अंदाज मई कहते है..
तुम्हारे लिए और तुम्हारे प्यार के लिए अपनी जान भी दे सकते हु.. ये क्या बड़ी चीज़ है..
ऐसा कह के पूर्वी करीम को किश
करने लगते है..

इधर पूर्वी का किश देखते हुई माहि कहते है..
कमीने ने पूर्वी को रेडी कर hi लिया.. इस वक़्त भैया और अरुण के होते हुई.. मानना पड़ेगा सेल को.. इतने बड़े घर के बहु को.. मला साहब के बहु को आपने इशारे पाई नचा रहा है साला.. अब देखने मई मज़ा आएगा.. ये सेल कहा करेंगे.. हाल मई भैय्या और अरुण बैठे है.. किचन मई भाभी और माइड नास्ता बना रही है.. हाल और किचन मई के बीच की ये छोटी से जगह.. किसी रूम मई जायेंगे या या करेंगे..
सदी मत उतरो .. वैसे hi करो..
अच्छा रानी
वो बड़े हौले से आपने नरम होंठों से ुको चूसने लगती हैं.......

माहि (मन में)- ये क्या हो गया है पूर्वी को ...इस गंदे बूढ़ा ड्राइवर के साथ chiiii…kya कर रही है.. पूर्वी कैसे पागलों की तरह इस्सस गंदे आदमी को किश कर रही thi....chiii....
यही सब माहि के मन में आ रहा था… तभी पूर्वी ने किश थोड़ा और करीम के पेण्ट की ज़िप निचे कर दी और उसके ज़िप मई हाथ दाल के उसके लुंड को बहार निकला.. इस वक़्त पूर्वी के हाथ में करीम का लुंड tha.........wo किसी एक्सपर्ट की तरह आपने छूट छुड़वाने की तैयारी कर रही थी........
ये देख के माहि का मुँह पूरा खुल गया था..... वो वहीँ ज़ोरों से उछाल पड़ती हैं ....... उसका दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था....... उधर करीम पूर्वी को इशारा करता हैं और अगले hi पल पूर्वी बिना वक़्त गंवाए अपनी साड़ी पेटीकोट के साथ उप्पर करती है खड़े खड़े hi और एक हाट से अपने पंतय निचे कर देती है.. और फिर करीम का लुंड आपने छूट पर रख देती है तभी करीम एक करारा ढाका मरता हैं जिससे उसका लुंड का सूपड़ा पूर्वी की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस जाता hain.....agle hi पल वहीँ पूर्वी इस बार ज़ोरों से चिल्ला पड़ती hain......waar इतना ज़बरदस्त था की पहले hi ढ़ाके में करीम का लुंड करीब 4 इंच तक अंदर चला गया था......
पूर्वी के मुँह से इस बार ooooooooooo..............mmmmmmmmmmmmmmmm..........uuuuuuuuuu........mmmmm.......mmmmmmmmmmmmm......yyyyyyyyyyyyy...........ki आवाज़ फुट पड़ती हैं और वो वहीँ अपने दोनों हाथों से करीम के कमर को कसकर पकड़ कर मसलने लगती हैं......... करीम कुछ डियर तक यु hi रुका रहता हैं मगर पूर्वी की बेचैनी अब भी कम नहीं हो रही thi.....dard की वजह से उसके आँखों में आंसूओं आ गए थे....... माहि बड़े प्यार से उन्दोनो का ये खेल देख रही थी..
धीरे न मेरे राजा
धीरे तो कर रहा हु
माहि वहीँ चुप चाप ये सब देखकर मुस्कुरा रही thi......wo भी अब तक बहुत गरम हो चुकी थी.........
तब बड़े प्यार से पूर्वी एक चपपट करीम के गाल पर मरती है..
ये धीरे है क्या..
तब क्रीम इस बार और एक जोरदार धक्का मरता है.. पूर्वी इस बार अपनी सिसकारी नहीं रोक पति और वहीँ aaaaaaaaaaaaaa..........mmmmmm.uuuuuuuuuuuuu..mmmmmmm.........mmmmmmmmmmmm......yyyyyyyyyyyy........karte हुए हाफने लगती हैं.......
ऐसा धीरे चलेगा क्या..
तब इधर माहि कहते है..
कमीना
उधर पूर्वी कहते है
चलेगा.. ऐसे hi धीरे धीरे करो..
म - ये भी कोई काम नहीं है.. इससे शयद ऐसा hi पसंद है..
तब करीम उसके नवल को किश करता है...

और एक दो जोरदार धक्के पूर्वी को लगता है.. इस वक़्त पूर्वी के दोनों हाथ करीम के कमर को बड़ी hi बेदर्दी से मसल रहे थे ..........बिना पूर्वी की कोई परवाह किये करीम अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ाने लगता है..
करीम उसे अपनी बहो मई उठा लेता है और वाल से उसे सटके तेज़ी से उसे छोड़ते हुई अपनी जीभ फेर रहा था उसके गर्दन पर.. पूर्वी भी अपनी गांड ऊपर नीचे हिलने लगती hain.......alge hi पल करीम अपनी एक ऊँगली हौले से पूर्वी की गांड में दाल देता हैं और अपना जीभ फिर से धीरे धीरे चलने लगता hain.......Karim अपनी ऊँगली ज़्यादा अंदर नहीं करता ............. वो अब हौले हौले से उसे छोड़ रहा था और साथ मई अपना हाथ चला रहा था .. वहीँ जीभ से उसके गर्दन को चाट भी रहा था .....ये सिलसिला भी ज़्यादा देर तक नहीं चलता क्यों की करीम उसके गांड मई एक साथ 2 उंगली जोर से डालता है ऊँगली अंदर जाते hi पूर्वी एक बार ज़ोरों से चीक पड़ती हैं....... पूर्वी चीखते हुए ठंडी पढ़ जाती hain.......aab उसके जिस्म में जान बिलकुल नहीं बची थी.....
करीम उसके बालों पर अपना हाथ फेर रहा था .......करीब 2 मिनट तक ऐसे hi चुप चाप पूर्वी करीम के ऊपर पड़ी रहती हैं ...... अब करीम कभी उसके बूब्स को चूसता तो कभी उसके होंठों को बड़े प्यार से चूम leta.......karim बार बार उसके सर पर बड़े प्यार से हाथ फेर रहा tha.......udher करीम कुछ पल तक यु hi अपना लुंड पूर्वी के छूट में रहने देता हैं और बरी बरी से कभी उसकी निप्पल्स को तो कभी उसके नरम होंठों को चूमने लगता हैं.............
ये देख के माहि कहते है..

हाउ रोमांटिक❤❤
.. कितना केयरिंग है ये बुद्धा.. सेल तो पता है औरत की कैसे केयर करनी चाहिए... और एक मेरे मनीषा.. कुछ भी पता नहीं है उसे.. न कामसूत्र पता है.. न औरत को कैसे कुश रखते है ये पता नहीं है..
फिर मायूस होते हुई कहती है.

मेरे मनीषा कब बनोगे तुम करीम जैसे.. पैसा hi सबकुछ नहीं होता.. प्यार.. सेक्स भी कुछ चीज़ होते है..
थोड़े डियर बाद पूर्वी का दर्द कुछ कम होता हैं......... तब वो करीम को फिर से किश करने लगती है.. अब करीम तुरंत अपना लुंड पूरा बहार निकलता हैं और इस बार बिना समय गंवाए वो तेज़ी से अपना लुंड एक hi बार में पूरा अंदर दाल देता hain......is बार पूर्वी वहीँ फिर से ज़ोरों से चिल्ला पड़ती है...............
ये देख के माहि कहते है..
इन् दोनों को लगता है भैय्या और अरुण का जरा सा भी डर नहीं है.. जोरो से इन् दोनों की चिल्लम चली चल रही है..
....दर्द से उसका बुरा हाल tha......wo अभी भी वहीँ तड़प रही thi.........purvi अभी भी वहीँ दर्द से सिसक रही थी.......
करीब 5 मिनट के बाद पूर्वी काफी नार्मल होती hain........aab उसका दर्द काफी हुड्ड तक कम हो चूका tha.........jab पूर्वी का दर्द काफी कम हो जाता हैं तो करीम धीरे धीरे कमर चलने लगता हैं........ पूर्वी भी कमर हिलने लगती है.. करीम को लगता है ये लाइन पाई आ गयी है ये जानकर अगले hi पल करीम बिना एक पल गंवाए अपने कमर को धीरे धीरे बहार की ओरे पुश करता हैं और फिर एक और करारा ढाका मरता हैं अगले hi पल पूर्वी फिर से वहीँ ज़ोरों से चीख पड़ती hain.......idher माहि चुप चाप बैठ हुई उनकी चुदाई देख रही थी........
अब धीरे धीरे करीम के धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी thi.......karim अपना लुंड तेज़ी से चला रहा था........
अब पूर्वी एक अंदर की आग भी अब धीरे धीरे बढ़ने लगी thi.......aab कमरे में उन दोनों की आहें गूँज रही thi.........jaise जैसे करीम के ढाकों की रफ़्तार तेज़्ज़ होती जा रही थी वैसे वैसे पूर्वी की सिसकारी भी भड़ती जा रही थी...... करीम के हर ढाकों से उसका पूरा बदन दाहक उठता.. पूर्वी के साथ माहि का भी.. उसके हर धक्के के साथ उसका लुंड पूरा पूर्वी के छूट में समां जाता तो कभी बहार निकल padta.......Purvi अपने छूट के दानों को तेज़ी से उसके लुंड पर रगड़ रही थी और अपनी कमर को तेज़ी से आगे पीछे कर रही thi…ye सिसलिला ज़्यादा देर तक नहीं चलता और बस चाँद मिनटों में करीम ज़ोरों से aaaaaaaaaaaaaaa ...............ssssssssssssss....karte हुए झरने लगता हैं वहीँ पूर्वी भी ज़ोरों से चिल्ला पड़ती hain....uska भी हो गया था....
अब इस वक़्त कमरे में बिलकुल सनाटा tha.......koi किसी से बोल नहीं रहा tha....bus उनकी सांसें hi सुनाई दे रही thi..........kareeb 10 मिनट तक वो दोनों ऐसे hi शांत वह बैठे रहते है.. और कुछ समय बाद पूर्वी अपनी जगह से उठती हैं.. और अपनी साडी ठीक करती है.
क्यों मेरी जान ......ाची लगी न ये चुदाई........
हाँ मेरे राजा..
तेरे हस्बैंड और ससुर के घर मई होते हुई मेरे साथ चुदाई करते हुई मज़ा आया न
हाँ
दर लगा
नहीं
अब रोज करोगे ऐसे चुदाई
तब माहि इधर से कहते है..
अब तो तुम्हें लाइसेंस मिल hi गया है ......अब जब दिल करे करीम का लुंड अपने छूट में ले लेना पूर्वी ........ अब कहे का दार और कहे का टेंशन..
क - मेरे हर्र सुबह मुझे ऐसे hi चाहिए पूर्वी.. सुबह फ्रेश हो जायेंगे मेरे हर रोज..
पूर्वी का चेहरा शर्म से और भी लाल पढ़ गया था....... करीम के बात से..
इधर माहि कहते है..
सुबह क्या शीयम.. रात.. फ्रेश करो न.. पूर्वी जो तुम्हारे बाप का माल है..
अब तीनो कुछ देर ऐसे hi खामोशी से वह खड़े रहे ..
क - बोलो न करोगे न मेरे हर सुबह फ्रेश पूर्वी
तब पूर्वी शर्माकर फ़ौरन अपने जगह से तुरंत दूसरे कमरे में भागने लगती है.. तब करीम उसका हाथ पकड़ लेता है
करीम- रुक जा मेरीए नखरे waliii...ek किश तो देती जाए..
किश की बात से पूर्वी शर्मा जाती है....

प- प्लसस अब जानी दोऊ मुझी करिमम ...और तुम्हारा होगया है न .. तुम भी यहाँ से चले जाओ अब ....
करीम- चला jaunga...pehle अपने इस बुड्ढे आशिक़ को एक किश तो देदे…
पूर्वी शर्म से लाल होगयी थी यूँ बूढ़ा आशिक़ बोलने से...
पूर्वी - चोरोऊ न...
उतना बोलकर ओह करीम के हाथ से अपना हाथ चुरा कर भाग जाती है bahar...jati हैं ....... वैसे आज उसकी चाल में भी काफी बदलाव आ गया tha.........mahi उसे देखकर बस मुस्कुराती रहती हैं..

पूर्वी जाते hi करीम अपना लुंड मसलते हुए....
करीम- है मेरिइइइ जाएं मज़ा आज्ञा तेरे sath...ab तो तू सिर्फ मेरी hai...aur किसी की भी नहीं...
करीम फिर पलट कर जाने लगता है.. वो हॉल मई पहुँच जाता है.. वह उसे अरुण दिखता hai..wo सोफे पाई बैठ कर किसी से बात कर रहा था.. उसकी पिट करीम की तरफ थी..
करीम - साला नामर्द कही ka...meri पूर्वी रानी से दूर hi रहना तू....
और वह रुक कर अरुण की तरफ देखते हुई थूकता है.... अरुण बिजी था बात करने मई तो उसे कुछ पता नहीं chala...par माहि समाज जाते है..
वो गुस्से से उसकी तरफ देखते हुई कहते है..

कमीना इस के बीवी के साथ मज़ा कर रहा है और उसपर तुक रहा hai..Harami कही का..
फिर करीम चला जाता Hai...servent क्वार्टर्स में और सो जाता hai...idhr माहि फ्रेश होने के लिए आपने कमरे मई चली जाती hai..kamre मई आते hi वो
लेट जाती है बीएड पर...

ये भगवान् ये क्या था.. मैंने ये क्या देख लिया.. मैं हमेशा उससे दूर भागना चाहती हु उतनी hi उसके नज़दीक जाती हु.. मई क्या करू.. ये सब उस कामिनी के वजह से हुआ..
कोण कामिनी माहि..
कोण?? पूर्वी और कोण..
उसकी क्या गलती है..
गलती तो सब उसकी तो है..
ये सब वो बीएड पाई लेते लेते सवाल जवाब कर रही थी.. आँखे बंद कर कर ये बातचीत खुद से वो कर रही थी.

उसने उसके साथ वह ये सब नहीं किया होता तो मई देखने नहीं जाती और न hi ये मेरे हालत न होती..
तब वो खुद से कहते है..
बात तो तेरे सही है पर..
पर क्या..
तब हस्ते हुई कहते है..

उसकी चल ढल तो करीम ने बदल दी..
तुम क्या करना है माहि उससे..
क्यों?? मई उसकी बुआ हु.. मुझे उसकी फ़िक्र होंगे न.. ??
हां हाँ सही बात है..
तभी उसे एक बात याद आती है..
ओह्ह गॉड.. !! ये पूर्वी ने क्या कर दिया..
क्या हुआ..
जल्दबाजी मई वो आओ न पंतय पहना भूल गयी.. उसके पंतय वह hi है.. ये भगवान् किस ने उसकी पंतय वह देख ली और किस को पता चला करीम वह गया था तो पूर्वी की लाइफ बर्बाद होगी..
मई ऐसा नहीं होने दूंगी..
ऐसा कह के माहि वह जाने के लिए भागने लगते hai..aur उसी जगह पहुँच जाते है और पूर्वी की पंतय ढूंढने लगते hai..tab उसे पूर्वी की पंतय दिखते है.. वो उसे उतने के लिए जुखाते है तब उसे पंतय के बाजु मई उसे करीम के कुछ सफ़ेद झट और उसके बगल मई पूर्वी के छूट से निकला रास और करीम का वीर्य दिख जाता है..
ये सब देख के माहि खुद से कहते है..
अच्छा हुआ मई यहाँ आ गयी.. ये सब देख के पूर्वी का सम्बन्ध करीम से है ये किसी को पता चल जाता.. और फिर..
वो उसकी पंतय उठा लेती है और हॉल मई आकर एक गन्दा सा कपडा लेके अनडू का वीर्य साफ़ कर देते है.. ताकि किसी को कुछ पता न चले.. और बाथरूम मई जाकर वह पूर्वी की पंतय दाल देती है..
थोड़े डियर बाद जब वो वापस अपने कमरे में आता हैं तो उस वक़्त उसके चेहरे पर एक अलग hi चमक दिखाई दे रही थी.......

फिर वो आपने कपडे निकल लेती है और उन्हें ले कर बात रूम में चली गयी. एक कमरे से बहार निकलने के बाद तो गर्मी जैसे अपने चरम पर थी. बाथरूम के अंदर जाते hi माहि ने जल्दी से अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.
माहि ने शावर ों kiya..uske शरीर पर ठंडा ठंडा पानी गिरना शुरू हो गया ..

माहि अपनी टांगो को रगड़ रगड़ कर साफ़ करने लगी ..जहा जहा उसके छूट का रास बह बह कर उसकी जांघो पर जैम गया था. .. वह उसने साफ़ कर दिया..
जैसे जैसे पानी उसके जिस्म पर गिरता जा रहा था उसके दिल को कुछ रहत मिल रही थी. पर अगले hi पल फिर से वही एहसास माहि को अपने नितम्बो पर होने लगा. ...जैसा कल रात के सपने में उसने माहि को पकड़ लिया था तब हुआ था.
शरीर पर पानी गिरने के बाद माहि का पूरा जिस्म बुरी तरह से दाहक उठा. उस एहसास ने न जाने माहि पर क्या जादू सा कर दिया था. उसका हाथ अपने आप hi उसके नितम्बो पर आ गया. माहि ने अपने नितम्बो को छू कर देखा और सच में वो एक डैम रुई की जैसे मुलायम थे. तभी माहि को करीम के चुने की बात याद आने लगी तो उसके चेहरे पर अपने आप हंसी आ गयी. और वो गण गुनगुनाने लगती है..
मेरे पिया गए रंगून
किया है वह से टेलीफोन
तुम्हारी याद सताती है
जिया में आग लगाती है..
पर इससे माहि के बदन में एक अजीब किस्म की खुमारी, एक अजीब किस्म का नशा चढ़ता जा रहा था.
जाने क्या हो गया था माहि को की माहि खुद hi जरा जरा सी बात को सोच कर hi अपने आप बहकती जा रही थी और इसी कारन न चाहते हुए भी उसके छूट ने एक बार फिर से बहना शुरू कर दिया था.
अपनी छूट के रिसाव से माहि के चेहरे पर एक मुस्कान आ gayi..mahi कड़ी हुई थी पर उसके छूट ने रिसाव करना जैसे hi शुरू किया माहि के टांगो ने जवाब दे दिया. और वो नीचे फर्श पर hi बैठ गयी .. नीचे बैठ ते के साथ hi कब उसका हाथ उसके छूट पे चला गया माहि को समाज भी नहीं आया.. उसके हाथ और छूट में जंग कहु या दोस्ती, जो शुरू हुआ उसने तो माहि को रोमांच की नयी ऊंचाई पर ले जा कर खड़ा कर दिया.
जब रोमांच का वो दौर थमा तो माहि का हाथ उसके छूट रास में पूरा का पूरा दुब चूका था. माहि ने जल्दी से पानी से अपना हाथ और अपनी छूट को साफ़ करने लगी….
तभी बहार से आती हुई आवाज ने माहि को बुरी तरह से चौकने पर मजबूर कर दिया.. बहार से वही गण गुनगुनाने की आवाज आ रही थी..
मेरे पिया गए रंगून....
नहीं नहीं बाथरूम..
ठुमरी याद सताती है..
जिया में आग लगाती है..
और गुनगुनाने वाला वही था.. करीम..
सेल ने सब सुन लिया…
माहि बड़बड़ाये..
माहि की तो साँसे hi अटक गयी उसकी आवाज सुन कर. उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे और क्या नहीं.. ये तो बहार hi खड़ा हुआ है और ये मुझे देख रहा है या सुन रहा है ... कुछ पता नहीं चल रहा है.. हे भगवान्.... क्या करू... माहि ने जल्दी से काढ़े हो कर अपने कपडे उठाये और उन्हें पहनना शुरू कर दिया...
और झट से बाथरूम में जो छोटी विंडो थी वह देखने लगी .. लेकिन बहार कोई नहीं था.. आवाज दूसरे तरफ से आ रहा थी..
अच्छा हुआ वो उस तरफ है.. उसने कुछ नहीं देखा सिर्फ ..सुना..
माहि को इससे थोड़ी रहत मिली..
जब तक आवाज स्टॉप नहीं हुई तब तक माहि बाटरूम मई रही.. आवाज स्टॉप हों ेके बाद माहि वैसे hi सोचते हुई झट से आपने बैडरूम में आयी ..बैडरूम में आके उसने सबसे पहले बैडरूम का दूर देखा .. उसे लगा शयद वो बैडरूम में आ गया है .. और वह से वो सुन रहा है.. पर वो न hi बैडरूम में था और न hi बैडरूम का दूर ओपन था.. फिर उसने सब विंडोज बंद कर दिए.. और सोचते सोचते hi सो गयी..

उसे रूम में खाना मंगाया उसने और रात देर में मनीष को बुलाकर उसके साथ आपने घर चली गयी.. उसने थम लिया था की वो अब करीम के सामने नहीं आएंगे.. इसलिए नेक्स्ट 4-5 दिन वो आपने भैय्या के घर आती नयी है..
कुछ 4-5 दिन बाद कंठीशत को कुछ कागज़ पे माहि के सिग्न करने थे और दूसरे दिन कुछ पूजा करने थी .. इस लिए माहि को कंठीशत ने बुला लिया था.. माहि मन नहीं कर पायी.. उसे लगा शयद अब करीम घर पे नहीं होगा… वैसे hi हुआ .. माहि जब आयी तब करीम घर पे नहीं था.. उसने 1 नौकर से पूछा तो उसने बता दिया की 2-3 दिन से चाचा नहीं आ रहे है.. माहि को बहुत रहत मिली.. जो फॉर्मेलिटी थी वो माहि ने पूरी कर दी … थोड़ा आराम करने के बाद दूसरे दिन जो पूजा थी उस पूजा के लिए उनकी जो पुराणी मुर्तिया थी वो देखने उस रूम में चली गयी.. वो मुर्तिया साफ़ थी .. पर माहि को वो क्लीनिंग पसंद नहीं आये.. इस वजह से वो क्लींनिंग करने लगी..
मूर्ति माहि क्लीन कर रही थी तब करीम आता है..
मुझे नहीं लग रहा था की माहि मैडम भी काम करती है..
तब मूर्ति हाथ मई पकड़ कर करीम को देखती है और स्माइल देने लगते है.. न कहते हुई hi..

उसे hi नहीं पता चला की करीम को देख के उसके फेस पर स्माइल कब आ गयी.. ..
है .. है.. पता है ज्यादा मस्का मत मारो..
काम क्या है वो बता दो..
काम कुछ नहीं है माहि मैडम .. सिर्फ हलचल पूछने आया हु..
माहि करीम की तरफ देखने लगाती है..

मतलब तुम ऐसे hi आये हो..
हां..
फिर वो दोनों एक दूसरे को देखने लगे
क्या मई आपको कुछ मदद करो..
नहीं कोई जरूरत नहीं है.. मई कर लुंगी..
वो तो पता है आप कर लोगी.. लेकिन हमारी हेल्प लोगी तो आपको hi आसानी hi होगी..
पता है..
ऐसा कह के वह रूम मई एक मिरर था वह जेक अपने कान के बलि ठीक करने लगी..

तब करीम उसे देखने लगा.. ये माहि ने जानबूझकर किया था या वो चाहती थी उसका ध्यान उसकी तरफ जाये ये वो खुद hi नहीं जानती थी..
पता है तो आप हमारी हेल्प क्यों नहीं लेते..
तो क्या हेल्प करोगे मेरे.
जो आप कहो...
माहि थोड़े देर सोचते है.. इससे में आपने पास आना नहीं देना चाहती.. पर वो बक्सा तो ये उतर सकता है..
फिर कहती है..
वो ऊपर वाले शेल्फ मई जो सामान है न वह तक हमारा हाथ नहीं पहुँच पा रहा है.. क्या तुम वो निकला लोगे..
है क्यों nahi...aise कहके वो माहि के सामने आके खड़ा हो जाता है..
हम यहाँ खड़े हो जय क्या..
हां..
आप को कोई दिक्कत नहीं है न..
माहि हास्के कहते है..

मुझे कोई दिक्कत नहीं है .. वैसे तुम आलरेडी मेरे पास आके खड़े हो चुके हो और अब पूछ रहे हो..
करीम माहि को देखने लगता है..
तो क्या पीछे जेक पहले आपकी परमिशन लेते है और फिर आपके पास आके खड़ा हो जाते है..
माहि उसके तरफ देख के हसती है और कहती है..
कोई जरूरत नहीं है.. तुम वो स्टूल लो और फिर उसपे चढ़ के वो सामान निचे उतर दो...
आप उस स्टूल को थोड़ा पकड़ो.. नहीं तो बैलेंस गड़बड़ हो जायेगा..
माहि है मई गर्दन हिलाते है.. सामान करीम निचे माहि के हाथ मई देता hai..aur जब माहि वो निचे रखने के लिए जुख जाते है तब करीम उसके तरफ देखता है .. 2-3 बार ऐसे hi होता है.. एक बार माहि देखते है..
आपने काम पे ध्यान दो.. इधर उधर देखो मत ..
काम पे तो ध्यान दे रहा हु..
काम वर्ड पे स्ट्रेस देता है.. इसपर माहि हसती है..
पता है तुम कोनसे काम पे ध्यान दे रहे हो...
क्या करे मैडम... मजबूरी hai...aap तो हमे अच्छे से जानते hi हो...
मई तो तुम अच्छे से जानते हु..
का करे मैडम.. एक औरत से हमारा कुछ होता नहीं है न... तो कभी कभी इधर उधर देखना पड़ता है..
माहि स्माइल देते हुई कहती है..
बक्वज मत करो ...
फिर से करीम माहि को देखने लगता है..
मुझे पता था.. इसलिए तो मई तुम्हारी हेल्प नहीं ले रही थी..
तो हेल्प लेने से आपका क्या बिगड़ जायेगा..
तुम जो ऐसे देख रहे हो न... इस वजह से बिगड़ जायेगा..
क्या बिगड़ जायेगा...
मुझे नहीं पता..
एक बात कहो
माहि झट से बोलती है
बोलो..
फिर माहि सोचते है.. मैंने जल्दबाजी में क्या कह दिया .. ये कुछ गन्दा बोल पड़ा तो
आज तो तू एक नंबर माल लग रही है...
मुजसे बात करनी है तो अच्छी लैंग्वेज मई बात करो.. ऐसे घटिया लैंग्वेज मई मत बात करो...
ठीक है डार्लिंग...
मई कोई तुम्हारी डार्लिंग नहीं हु...
नहीं इतना सज धज के.. तैयार हुई हो.. इसलिए कहा..
तो अच्छी तरीके से भी बोल सकते थे..
कहा जा रही हो इतना सज धज के
तुमसे मतलब...
अब मुजसे hi मतलब रखना पड़ेगा .... मनीष से... नहीं...
बंद करो.. तुम्हारी बक्वज..
सॉरी मनीष नहीं मनीषा से मतलब नहीं मुजसे hi रखना पड़ेगा...
चुप हो जाओ..
ऐसा गुस्सा दिखाके कहती है लेकिन हलकी सी स्माइल उसके चहरे पर आ जाती है

क्या यार मनीष कहो या मनीषा.. वैसे बीच वाले को क्या कहते है... जो किस काम का नहीं होता..
माहि चहरे पर थोड़ी स्माइल लती है..
माहि आपने आप को कहती है.. वो तो सपना था.. उसमे इसने मनीष को मनीषा कहा था.. फिर इसको कैसे पता लगा …
करीम उसके पास आटा है.. कमर पाई हाथ रखता है...
.... और आपने फेस माहि के गुलाभी हूंतो के पास ले जाता है.. ..और एक हाथ उसके आम पर धीरे से रखता है.. अब वो माहि को किश करने वाला hi था ककी माहि बोल पड़ती है...
नहीं.. ये ठीक नहीं है..
कुछ नहीं होगा..
ऐसा कहके उसके गाल को हाथ लगता है.. माहि के आँखे बंद हो जाती है..
नहीं होगा मेरी रानी.....
प्ल्ज़ समाज करो...
करीम उसके एक आम पे आपने एक हाथ धीरे से उप्पसार से घुमा रहा था...
एक किश धो न माहि...
नाहीइ... ये ठीक नहीं है...
एक किश और ज्यादा कुछ नाहीइ....
माहि हसती है... कातिल स्माइल के साथ ....

तभी बहार कान्तिशीथ ावजह देता है...
माहि तुम कहा हो ...
आयी भैय्या
इस भड़वे को अभी आना था क्या...
माहि हस्ती है...
माहि करीम को धक्का ढके वह से भाग जाती है..
दूसरे दिन फंक्शन होता है ..(वह करीम ने माहि को कैसा सडके किया ये आप पहले hi पद चुके हो..)
पार्टी से घर आने के बाद माहि ये सब याद करने लगाती है.. कैसे पार्टी में करीम ने उसको सडके किया.. कैसे सिमरन के वह विबरेटर रख कर सिमरन को तड़पाया और वो मुझे दिखाकर मुझे कैसे चिपक गया..
ये सब माहि बीएड पाई पिट के बल लेट कर सोचने लगाती है …

वो खुद को hi कहने लगाती है ये कैसे हो गया.. इतने बड़े गलती मुजसे कैसे हो गयी.. ये तो मई कभी भी नहीं चाहती थी.. फिर मेरे हाथ से ऐसा कैसा हो गया.. ये सोचते हुई माहि आपने आँखे बंद कर लेती है……
माहि की आँखें अब बंद थी पर दिमाग बेचैन!

माहि समझ नहीं पा रही थी की क्या करे. उसके अंदर की पतिव्रता नारी कह रही थी की ये सब ठीक नहीं है पर उसके अंदर की अतृप्त कामना की मूर्ती कह रही थी की थोड़ा सा मज़ा तू भी ले ले माहि. फिर शायद ऐसा मौका मिले न mile.aise सोचने की वजह से hi उसके दिल की धड़कने तेज़ हो गयी. उसकी साँसे तेज़ होने लगी. उसके निप्पल हार्ड हो रहे थे और ब्लाउज टाइट होने लगी. अपने जाँघों के बीच भी माहि को एक अजीब सेंसेशन हो रहा था. कुछ कुछ वैसा hi जैसा कुछ पल पहले पार्टी में करीम सी बूब्स दबाने के बाद हुआ था. पर मनीष के साथ सेक्स के वक़्त से अबकी बार वो सेंसेशन और तीव्र था. शायद इसलिए की वो घर परिवार, समाज के बंधन से मुक्त होना चाहती थी . माहि अपने जाँघों के बीच से ृस्टि गीलापन को मह्शूश कर सकती थी. वो अपने जांघ को फैला कर अपनी छूट को कुछ आज़ादी देना चाहती थी. पर वो तो बीएड पे पिट के बल लेते हुई थी.. कैसे करे .. वही वो सोच रही थी..
अब माहि के मैं में उथल पुथल हो रही थी. वो सोच रही थी वो मनीषा की अच्छी खासी बीवी बनके रहे या करीम की raand…mahi यही सोचने लगाती है.. कुछ पल पहले माहि के आँखों के सामने लास्ट 15 डेज का नज़ारा आ चूका था.. वो सब पल याद करके माहि को एक अजीब से सुकून मिला था.. वो अब याद करने लगी थी ..कैसे करीम ने सिमरन मैडम को गैलरी में सेक्स किया था.. फिर माइड पद्मा को और फिर पूर्वी को… और पार्टी से पहले मुझे उसने किश करने का तरय कैसे किया था… बाद में पार्टी में मुझे कैसे सडके किया.. मेरे बॉडी के हर हिस्से पर कैसे उसके हाथ चल रहे थे.. ये सब याद करके माहि के चहरे पर हलकी से स्माइल याद आ जाती है..
माहि आपने आप को कहती है.. आँखे बंद करते हुई..
कैसे देख रहा था मेरे बूब्स को वो पार्टी में.. और गर्दन में तो उसने हद hi कर दी.. मेरे बूब्स पर हाथ रख diye..aur उसको जोर से दबाने लगा.. मनीष ने ऐसा कभी भी नहीं किया था.. फिर वो मेरे गर्दन को किश करने लगा.. और फिर बाते करते हुई मुजसे लिपट गया.. बहुत चालू है करीम.. लिपट कर मेरे पुरे बक्सीडे पे हाथ घूमने लगा.. और मययययय.. गूदड़.. मेरे अस्स पर भी उसने हाथ रख दिया.. अच्छा हुआ मैंने उसे धक्का दे दिया..
फिर थोड़े देर बाद उसने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और कंधे को सहलाने लगा .... और फिर उसने खंड से होते हुई आगे आपने हाट डालके मेरे ब्लाउज से ब्रा की स्ट्रिप्स को थोड़ा बहार निकल दिया .. ..
इस वक़्त उसकी उंगली मेरे ब्रा की स्ट्रिप्स पर थी.. उस वक़्त में उसके हाथो का स्पर्श फील कर रही थी...... मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा tha......shayad ज़िन्दगी में ऐसा पहला दफा अनुभव था मेरे लिए …मुझे कुछ नया रोमांच सा लग रहा था उस वक़्त.....
वो मुझे कह रहा था..
कितना मुलायम हैं मैडम जी आपका का jism.....kisi फूलों की तरह najuk........aisa लगता हैं जैसे मैं कोई हसीं सपना देख रहा हूँ......
उसके ऐसे कहने से मई शर्मा गयी थी ..
मेरे बदन के साथ खेल रहा था और मुझे कह रहा तह
तुम अच्छा नहीं लग रहा है क्या मैडम जी..
मैंने नाहीइ bola…to वो कहने लगा..
फिर मन क्यों नहीं कर रही हो..
सचमुच मैं मन क्यों नहीं कर रही थी उसे ..अगर मैंने मन भी किया होता तो क्या वो रुख jata..aur कितनी बेशर्मी से कह रहा था मुझे ..
मई किसी भी खुबसुआरत औरत की बात को मन नहीं करता.
और फिर बेशरम होक मेरे सामने hi .. गांड... छूट.. ऐसे वर्ड उसे करने लगा.. मैंने कुछ नहीं कहा ये जानकर वो मुझे कहने लगा..
मई तुम एक बार छोड़ना चाहता हु.. ..
ऐसा कह के मेरा एक हाथ आपने हातो मई थम लिया उसने .. उसके ऐसे करने से एक बार फिर से मेरे जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गयी ......और वो हाथ करीम झट से मेरे बूब्स पर ले गया और बड़े हलके हाथों से .. मेरे hi हातो से मेरे hi बूब्स पर फिरने लगा ..... और धीरे धीरे मेरे दोनों निप्पल्स को मेरे दोनों हाथों में लेकर उसे मसलना शुरू किया उसने ....... उसके इस हरकत से मेरे जिस्म उस वक़्त किसी आग के भत्ते की तरह तप रहा था .....
और फिर तो उसने हद hi कर दी.. मुझे इस की उम्मीद नहीं थी.. वो ये करेगा ये मैंने कभी सोचा hi नहीं tha..usne झट से अपने एक हाथ मई मेरा एक हाथ थम लिया और उसी हाथ को नीचे ले जेक मेरे छूट पर रखकर मेरे एक उंगली धीरे से अंदर दाल दे ...... सदी के उप्पर से … ( माहि वो उंगली अब आपने आँखि के सामने लती है )
उस वक़्त मेरे आँखे लज्जत से बंद हो गयी थी.. और मेरे मुँह से एक सिसकारी फुट पड़ी .....
ये कहते हुई माहि आपने एक हाथ आपने नाजुक से बूब्स पर रख देती है ..और धीरे से उसे दबा देती है… तब उसके मू से हलकी सी आवाज निकल पड़ती है..
aaaaaaaaahhhhhhaaaaaaaaaaaaaaa…
उस वक़्त उसका वो बड़ा सा हत्यार मेरे अस्स से पूरी तरह से सत्ता हुआ था......... इसलिए मई कुछ कर नहीं पा रही थी.. फिर उसने उसका मुँह मेरे गार्डन के एकदम करीब लाया ......और झट से अपने होंठ मेरे गार्डन पर रखकर बहुत धीरे से चूम लिया ......
( ऐसा कह के माहि ने आपने दूसरा हाथ आपने छूट के उप्पर रख दिया)
aaaaaaaaa..ssssssssssssssss......
मेरे शोल्डर को किश करने लगा और बड़ी बेशरमी से मुझे कहने लगा..

साला रात भर मजे करने के बाद भी इसकी भूक अभी भी है क्या

उन्दोनो की तरफ देखते हुई माहि ऐसा मैं में कहती है
बहार भले hi इस वक़्त कोई नहीं था मगर पूर्वी के दिल में जैसे तूफ़ान सा उठा हुआ था....... उसकी सांसें ज़ोरों से चल रही थी जिससे उसके बूब्स तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थे ....... आज पूर्वी पूरी क़यामत बनकर करीम के सामने आयी thi......usne रेड रंग की साडी पहनी हुई था और ब्लैक कलर का ब्लाउज ..........बल उसके खुले हुए थे ........ चेहरे पर हल्का मेकउप भी tha.......kul मिला जुलकर वो आज करीम पर बिजली गिरा रही थी........
उसके दोनों हाथ पूर्वी के बालों पर घूम रहे they.......wo बहुत आहिस्ता से पूर्वी के बालों को सेहला रहा tha.....uski लातें संवर रहा tha.....wahin पूर्वी अपनी आँखें धीरे से बंद कर लेती हैं और जो कुछ अब होने वाला था वो शायद अब खुद को तैयार कर रही thi.......waqt मनो थम सा गया tha......dono के.. पूर्वी और माहि के.. दिल की धड़कनें पूरे उफान पर thi......sansein पल पल बेकाबू हो चले थे........
तुम आज बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो इन सर्जरी में ........आज क्या मुझपर बिजली गिराने का इरादा हैं........
माहि - हाउ रोमांटिक❤❤
करीम अपने होंठ पूर्वी के गार्डन पर हौले से रख देता हैं और बहुत आहिस्ता से वहां चूमता हैं......

पूर्वी के मुँह से ज़ोरों की सिसकारी फुट पड़ती हैं.....
ahhhhhhhhhhhaaaaaaaa.. करीम ……. चोर दो……
लजात से उसकी दोनों आँखें एक बार बंद हो चुकी thi.......wahin दिल की रफ़्तार और ज़ोरों से बढ़ती जा रही थी....... और इधर बड़े आराम से माहि उन्दोनो का रोमांस देख रही थी..

और इस बार करीम अपने दोनों हाथ पूर्वी के कमर पर हौले से रख देता hain......magar अपने होंठों को पूर्वी के गार्डन पर से नहीं hatata........wahin पूर्वी बस खामोश कड़ी thi........dheere धीरे उसका साबरा का बांध टूटा जा रहा था..
wo..........assssssssssssss.....hhhhh.......bua जी अन्दर है .. वो किसी भी वक़्त बहार आ सकती है..
पूर्वी जवाब में धीरे से इतना hi बोल पति हैं ...... वहीँ करीम अपने दोनों हाथ हौले से ऊपर की तरफ सरकने लगता hain......purvi के दोनों बूब्स के taraf.......aur इससे पहले पूर्वी कुछ समझती वो कसकर पूर्वी के दोनों बूब्स को अपने कठोर हाथों में थम लेता हैं और ज़ोर से उसके दोनों बूब्स को मसल देता hain.....wahin पूर्वी के मुँह से ज़ोरों से सिसकारी फुट पड़ती hain.............wo फ़ौरन अपने दोनों हाथ करीम के हाथों पर रख देती हैं और उसके के हाथों को हटाने की कोशिश करती hain.......aur बड़े रोमांटिक अंदाज़ मई कहते है..

aaaaaaaaaaaaaahhhhh.........nahin करीम .........अभी नहीं......... यहाँ कोई आ जायेगा… घर में सब लोग है..
और पूर्वी अपने दोनों हाथों से करीम के हाथों को अपने बूब्स से हटा देती hain......wahin करीम कुछ नहीं कहता और यु hi पूर्वी से चिपका रहता hain.............kuch सोचकर वो धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.........
बगल वाले रूम में चलते है
ऐसा कहके पूर्वी के हूंतो को आपने हूंतो के बच्च लेके चूसने लगता है..

पूर्वी भी उसका साथ देते है और उसके हूंतो को चूसने लगाती है.. थोड़ी देर चूसने के बाद पूर्वी उसे पीछे धक्का देते है..
अभी नहीं.. बाद में..
ऐसा कहके पूर्वी वह से निचे भाग जाती है.. ये देख के माहि दूर बंद कर के अन्दर आ जाती है..
कमीना कही का.. हमेशा इसे यही चाहिए…
करीम और पूर्वी के जाते hi माहि तुरंत अपने बैडरूम का दूर बंद करती हैं और अपने बिस्टेर पर जाकर दुबारा से सोचने लगती हैं…...

आज वो सुबह से hi बहुत बेचैन thi…..aaj ऐसा पहली बार उसके साथ ये सब कुछ हो रहा था……. एक तो उसे कल रात भरी पड़ी थी मगर अब तो ऐसा लग रहा था जैसे एक एक पल किसी सदी के बारबार गुजर रहा हो……
माहि एक बार फिर से अपने ख्यालों में गम थी...……

हाँ मैंने करीम का देखा था....... उसका वो पूरा खड़ा हो गया tha…….us दिन मैंने उसे दूर से देखा था.. इस से पहले दो बार देखा था .. लेकिन पास से तो उसका वो बहुत बड़ा hain…….baap re……kaise पेण्ट में किसी तम्बू की तरह तना हुआ tha…..aisa लग रहा था मनो अभी पेण्ट फाड् कर बहार निकल padega.....mujhe मालूम हैं की वो उस वक़्त वो मेरे hi तरफ देखकर खड़ा हुआ था .. वो कितने जोर से पूर्वी को कल फ़क कर रहा था ………काश ये नज़ारा मैं और नज़दीक से देखते और उनकी बाते सुन पति……...……
ये सब सोचकर माहि की छूट एक बार फिर से गीली होने लगती है ........एक तरफ वो अपने आप को समझा रही थी वहीँ दूसरी तरफ वो आपने आप को करीम के लिए तैयार भी कर रही thi..........kuch तो बात थी उसमें जो पल पल उसे अपनी ओरे खींच रही थी.....
इस वक़्त माहि की छूट पूरी तरह से गीली thi……use समझ में नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे मगर इस तरह से बहकना ाची बात थोड़ी न thi…….wo सबसे पहले अपने साँसों को अपने बस में करने की कोशिश करती हैं ….. मगर आज शायद उसके बस में कुछ भी न tha……wo बड़े डियर तक बिस्टेर पर लेते हुए एक तुक चाट की ओरे देख रही थी.......

माहि -हे भगवान् ये मुझे क्या होता जा रहा hain…..main फिर से बहक रही hoon….kya मुझे ये सब शोभा dega……agar मैंने एक टेलर के साथ ये सब किया to…..nahin नहीं इसकी इज़ाज़त तो खुद मेरा ज़मीर भी मुझे नहीं dega…..chahe जो भी हो जाये मुझे अपनी लक्समन रेखा नहीं लांघनी हैं ……… मुझे अपने मर्यादा में hi रहना है .
माहि अपने आप से हर पल संघर्ष कर रही thi……kabhi वो अपने आप को समझा रही थी तो कभी करीम की बाँहों में अपने आप को महसूस कर रही थी……. कल रात के सपने की तरह ..
माहि बेचैन thi......usey समझ में नहीं आ रहा था की वो जो कुछ सोच रही हैं क्या वो सही हैं ....... मगर कहते हैं न अगर हवस सर पर चढ़कर तांडव करे तो उसके आगे दिमाग भी बेबस हो जाता hain......kya सही हैं और क्या गलत फिर कुछ फर्क नहीं पड़ता ....... कुछ ऐसा hi हाल इस वक़्त माहि का था ...... वो अब इस हवस की आग में पल पल जल रही thi........use किसी भी हाल में अपनी प्यास बुझानी थी चाहे वो एक टेलर hi क्यों न हो......
फिर वो सोचने लगाती है..

नहीं नहीं.. ये सब ठीक नहीं है ..अब कुछ भी हो जाये पानी सर से ऊपर हो गया है… मई अब उसके सामने hi नहीं jaunge..jo भी हो जय.. . फिर वो मनीष को फ़ोन लगाती है... उसने तै किया था की मनीष को बुलाके उसके साथ अभी चली जाती हु.. फिर जब तक ये गन्दा इंसान इस घर में है तब तक भैय्या के घर नहीं आती हु.. पर मनीष का फ़ोन नहीं लगता है.. फिर वो कहती है..
जब जरूरत होती है तब मनीष का फ़ोन कभी नहीं लगता है...
वो मनीष पे गुस्सा हो जाती है.. और थोड़े देर बाद आपने आप पर गुस्सा हो जाती है.. सुबह मनीष साथ चलने को बोल रहा था तब उसके साथ गयी होती तो ये नौबत hi नहीं होती..
माहि की टाँगे बुरी तरह से chip-chipa रही थी. उसने सोचा की नाहा लिया जाये वर्ण ये गन्दा एहसास मुझे पुरे दिन बार परेशां करता रहेगा.
नहाने को जाने के बजे वो सोचने लगी..
अब मनीष का फ़ोन नहीं लग रहा है. मई घर तो आपने कार से जा सकते hu…Par ……. कही वो निचे हुआ तो ? नहीं वो गया होगा… और बहार तो बहुत सरे लोग होंगे.. फिर भी … मई क्या करू.. नीचे जाऊ या नहीं… वो घर गया होगा की नहीं…
नहीं….. नहीं …वो भहर hi होगा…
माहि ने अपने आप hi सवाल किया और अपने आप hi उसका जवाब दे दिया. पर फिर भी एक बार कन्फर्म कर लेना ठीक रहेगा. वो बाहर है या नहीं … पर …कही उसने गन्दी हरकत मेरे साथ शुरू कर दी तो ?
काफी देर तक माहि खुद से सवाल जवाब करती रही.
तब कुछ सोच कर उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है..

ये मनीषा भी न.. कहा मर गयी है.. फ़ोन भी नहीं लग रहा है..
एक का चलना न चलना एक बराबर था माहि के लिए अब. पर जब वीर्य के सुख जाने से उसकी चुभन माहि के जांघो पर तेज होने लगी तो माहि से रहा नहीं गया…. उसने जल्दी से अपने दूसरे कपडे अलमारी से निकल liye.aur वो पहन कर दूर ओपन करके बहार चली गयी .. और सीडिया उतर कर नीचे गयी तो उसे और एक जोर का धक्का लगा.. सामने का नज़ारा देख के..
करीम ने पूर्वी का हाथ पकड़ा था और पूर्वी उससे दूर जाने की कोशिश कर रही थी.. नहीं न करीम.. तुम संजो न.. बहार सब लोग है और हम यहाँ करेंगे तो सबको पता चलेगा..
नहीं पता चलेगा मेरे रानी.. बहुत धीरे से करूँगा मेरे रानी..
ऐसा कह के उसको अपनी बहो मई खिंच लेता है और उसके गाल को चूमता है..

तब माहि कहते है..
कमीना साला.. इससे बस सेक्स सेक्स और सेक्स चाहिए..
इधर पूर्वी स्माइल करते हुई पूर्वी कहती..
तुम और धीरे से..
हाँ रानी धीरे से करूँगा .. मैं जा न
नहीं बहार पापा और अरुण है. दोनों मई से एक को भी भन्न भी लगे तो वो दोनों हम दोनों को मार hi डालेंगे..
कुछ पता नहीं चलेगा उन्दोनो मादरचोदो को
तब माहि गुस्से मई कहते है..
पूर्वी ये कमीना भैय्या और अरुण को गली दे रहा है और तुम उसे कुछ नहीं कह रही हो
पूर्वी उसकी आँखों मई देखते हुई कहती है..
तुम क्यों रिस्क ले रहे हो..
रिस्क है तो इश्क़ है
इसपर पूर्वी स्माइल करती है..
मई वैसे भी तुम्हारी hi हु.. तुम्हारे बच्चे की अम्मी बनाने जा रही हु.. तुम जहा चाहे वह और जब चाहे तब मुझे प् सकते हो फिर ये सब क्यों..
मुझे तुम अब इस वक़्त पाना है.. तुम्हारे ससुर और पति के होते हुई..
पर क्यों
मेरे इच्छा
तब पूर्वी कुछ नहीं कहती है.. तब माहि इधर से कहती है..
पूर्वी अब क्या करोगे..
क - मेरे इच्छा के खातिर इतना नहीं करोगे पूर्वी .. मेरे प्यार के लिए.. मेरे लिए
तब पूर्वी बड़ी रोमांटिक अंदाज मई कहते है..
तुम्हारे लिए और तुम्हारे प्यार के लिए अपनी जान भी दे सकते हु.. ये क्या बड़ी चीज़ है..
ऐसा कह के पूर्वी करीम को किश

इधर पूर्वी का किश देखते हुई माहि कहते है..
कमीने ने पूर्वी को रेडी कर hi लिया.. इस वक़्त भैया और अरुण के होते हुई.. मानना पड़ेगा सेल को.. इतने बड़े घर के बहु को.. मला साहब के बहु को आपने इशारे पाई नचा रहा है साला.. अब देखने मई मज़ा आएगा.. ये सेल कहा करेंगे.. हाल मई भैय्या और अरुण बैठे है.. किचन मई भाभी और माइड नास्ता बना रही है.. हाल और किचन मई के बीच की ये छोटी से जगह.. किसी रूम मई जायेंगे या या करेंगे..
सदी मत उतरो .. वैसे hi करो..
अच्छा रानी
वो बड़े हौले से आपने नरम होंठों से ुको चूसने लगती हैं.......

माहि (मन में)- ये क्या हो गया है पूर्वी को ...इस गंदे बूढ़ा ड्राइवर के साथ chiiii…kya कर रही है.. पूर्वी कैसे पागलों की तरह इस्सस गंदे आदमी को किश कर रही thi....chiii....
यही सब माहि के मन में आ रहा था… तभी पूर्वी ने किश थोड़ा और करीम के पेण्ट की ज़िप निचे कर दी और उसके ज़िप मई हाथ दाल के उसके लुंड को बहार निकला.. इस वक़्त पूर्वी के हाथ में करीम का लुंड tha.........wo किसी एक्सपर्ट की तरह आपने छूट छुड़वाने की तैयारी कर रही थी........
ये देख के माहि का मुँह पूरा खुल गया था..... वो वहीँ ज़ोरों से उछाल पड़ती हैं ....... उसका दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था....... उधर करीम पूर्वी को इशारा करता हैं और अगले hi पल पूर्वी बिना वक़्त गंवाए अपनी साड़ी पेटीकोट के साथ उप्पर करती है खड़े खड़े hi और एक हाट से अपने पंतय निचे कर देती है.. और फिर करीम का लुंड आपने छूट पर रख देती है तभी करीम एक करारा ढाका मरता हैं जिससे उसका लुंड का सूपड़ा पूर्वी की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस जाता hain.....agle hi पल वहीँ पूर्वी इस बार ज़ोरों से चिल्ला पड़ती hain......waar इतना ज़बरदस्त था की पहले hi ढ़ाके में करीम का लुंड करीब 4 इंच तक अंदर चला गया था......
पूर्वी के मुँह से इस बार ooooooooooo..............mmmmmmmmmmmmmmmm..........uuuuuuuuuu........mmmmm.......mmmmmmmmmmmmm......yyyyyyyyyyyyy...........ki आवाज़ फुट पड़ती हैं और वो वहीँ अपने दोनों हाथों से करीम के कमर को कसकर पकड़ कर मसलने लगती हैं......... करीम कुछ डियर तक यु hi रुका रहता हैं मगर पूर्वी की बेचैनी अब भी कम नहीं हो रही thi.....dard की वजह से उसके आँखों में आंसूओं आ गए थे....... माहि बड़े प्यार से उन्दोनो का ये खेल देख रही थी..
धीरे न मेरे राजा
धीरे तो कर रहा हु
माहि वहीँ चुप चाप ये सब देखकर मुस्कुरा रही thi......wo भी अब तक बहुत गरम हो चुकी थी.........
तब बड़े प्यार से पूर्वी एक चपपट करीम के गाल पर मरती है..
ये धीरे है क्या..
तब क्रीम इस बार और एक जोरदार धक्का मरता है.. पूर्वी इस बार अपनी सिसकारी नहीं रोक पति और वहीँ aaaaaaaaaaaaaa..........mmmmmm.uuuuuuuuuuuuu..mmmmmmm.........mmmmmmmmmmmm......yyyyyyyyyyyy........karte हुए हाफने लगती हैं.......
ऐसा धीरे चलेगा क्या..
तब इधर माहि कहते है..
कमीना
उधर पूर्वी कहते है
चलेगा.. ऐसे hi धीरे धीरे करो..
म - ये भी कोई काम नहीं है.. इससे शयद ऐसा hi पसंद है..
तब करीम उसके नवल को किश करता है...

और एक दो जोरदार धक्के पूर्वी को लगता है.. इस वक़्त पूर्वी के दोनों हाथ करीम के कमर को बड़ी hi बेदर्दी से मसल रहे थे ..........बिना पूर्वी की कोई परवाह किये करीम अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ाने लगता है..
करीम उसे अपनी बहो मई उठा लेता है और वाल से उसे सटके तेज़ी से उसे छोड़ते हुई अपनी जीभ फेर रहा था उसके गर्दन पर.. पूर्वी भी अपनी गांड ऊपर नीचे हिलने लगती hain.......alge hi पल करीम अपनी एक ऊँगली हौले से पूर्वी की गांड में दाल देता हैं और अपना जीभ फिर से धीरे धीरे चलने लगता hain.......Karim अपनी ऊँगली ज़्यादा अंदर नहीं करता ............. वो अब हौले हौले से उसे छोड़ रहा था और साथ मई अपना हाथ चला रहा था .. वहीँ जीभ से उसके गर्दन को चाट भी रहा था .....ये सिलसिला भी ज़्यादा देर तक नहीं चलता क्यों की करीम उसके गांड मई एक साथ 2 उंगली जोर से डालता है ऊँगली अंदर जाते hi पूर्वी एक बार ज़ोरों से चीक पड़ती हैं....... पूर्वी चीखते हुए ठंडी पढ़ जाती hain.......aab उसके जिस्म में जान बिलकुल नहीं बची थी.....
करीम उसके बालों पर अपना हाथ फेर रहा था .......करीब 2 मिनट तक ऐसे hi चुप चाप पूर्वी करीम के ऊपर पड़ी रहती हैं ...... अब करीम कभी उसके बूब्स को चूसता तो कभी उसके होंठों को बड़े प्यार से चूम leta.......karim बार बार उसके सर पर बड़े प्यार से हाथ फेर रहा tha.......udher करीम कुछ पल तक यु hi अपना लुंड पूर्वी के छूट में रहने देता हैं और बरी बरी से कभी उसकी निप्पल्स को तो कभी उसके नरम होंठों को चूमने लगता हैं.............
ये देख के माहि कहते है..

हाउ रोमांटिक❤❤
फिर मायूस होते हुई कहती है.

मेरे मनीषा कब बनोगे तुम करीम जैसे.. पैसा hi सबकुछ नहीं होता.. प्यार.. सेक्स भी कुछ चीज़ होते है..
थोड़े डियर बाद पूर्वी का दर्द कुछ कम होता हैं......... तब वो करीम को फिर से किश करने लगती है.. अब करीम तुरंत अपना लुंड पूरा बहार निकलता हैं और इस बार बिना समय गंवाए वो तेज़ी से अपना लुंड एक hi बार में पूरा अंदर दाल देता hain......is बार पूर्वी वहीँ फिर से ज़ोरों से चिल्ला पड़ती है...............
ये देख के माहि कहते है..
इन् दोनों को लगता है भैय्या और अरुण का जरा सा भी डर नहीं है.. जोरो से इन् दोनों की चिल्लम चली चल रही है..
....दर्द से उसका बुरा हाल tha......wo अभी भी वहीँ तड़प रही thi.........purvi अभी भी वहीँ दर्द से सिसक रही थी.......
करीब 5 मिनट के बाद पूर्वी काफी नार्मल होती hain........aab उसका दर्द काफी हुड्ड तक कम हो चूका tha.........jab पूर्वी का दर्द काफी कम हो जाता हैं तो करीम धीरे धीरे कमर चलने लगता हैं........ पूर्वी भी कमर हिलने लगती है.. करीम को लगता है ये लाइन पाई आ गयी है ये जानकर अगले hi पल करीम बिना एक पल गंवाए अपने कमर को धीरे धीरे बहार की ओरे पुश करता हैं और फिर एक और करारा ढाका मरता हैं अगले hi पल पूर्वी फिर से वहीँ ज़ोरों से चीख पड़ती hain.......idher माहि चुप चाप बैठ हुई उनकी चुदाई देख रही थी........
अब धीरे धीरे करीम के धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी thi.......karim अपना लुंड तेज़ी से चला रहा था........
अब पूर्वी एक अंदर की आग भी अब धीरे धीरे बढ़ने लगी thi.......aab कमरे में उन दोनों की आहें गूँज रही thi.........jaise जैसे करीम के ढाकों की रफ़्तार तेज़्ज़ होती जा रही थी वैसे वैसे पूर्वी की सिसकारी भी भड़ती जा रही थी...... करीम के हर ढाकों से उसका पूरा बदन दाहक उठता.. पूर्वी के साथ माहि का भी.. उसके हर धक्के के साथ उसका लुंड पूरा पूर्वी के छूट में समां जाता तो कभी बहार निकल padta.......Purvi अपने छूट के दानों को तेज़ी से उसके लुंड पर रगड़ रही थी और अपनी कमर को तेज़ी से आगे पीछे कर रही thi…ye सिसलिला ज़्यादा देर तक नहीं चलता और बस चाँद मिनटों में करीम ज़ोरों से aaaaaaaaaaaaaaa ...............ssssssssssssss....karte हुए झरने लगता हैं वहीँ पूर्वी भी ज़ोरों से चिल्ला पड़ती hain....uska भी हो गया था....
अब इस वक़्त कमरे में बिलकुल सनाटा tha.......koi किसी से बोल नहीं रहा tha....bus उनकी सांसें hi सुनाई दे रही thi..........kareeb 10 मिनट तक वो दोनों ऐसे hi शांत वह बैठे रहते है.. और कुछ समय बाद पूर्वी अपनी जगह से उठती हैं.. और अपनी साडी ठीक करती है.
क्यों मेरी जान ......ाची लगी न ये चुदाई........
हाँ मेरे राजा..
तेरे हस्बैंड और ससुर के घर मई होते हुई मेरे साथ चुदाई करते हुई मज़ा आया न
हाँ
दर लगा
नहीं
अब रोज करोगे ऐसे चुदाई
तब माहि इधर से कहते है..
अब तो तुम्हें लाइसेंस मिल hi गया है ......अब जब दिल करे करीम का लुंड अपने छूट में ले लेना पूर्वी ........ अब कहे का दार और कहे का टेंशन..
क - मेरे हर्र सुबह मुझे ऐसे hi चाहिए पूर्वी.. सुबह फ्रेश हो जायेंगे मेरे हर रोज..
पूर्वी का चेहरा शर्म से और भी लाल पढ़ गया था....... करीम के बात से..
इधर माहि कहते है..
सुबह क्या शीयम.. रात.. फ्रेश करो न.. पूर्वी जो तुम्हारे बाप का माल है..
अब तीनो कुछ देर ऐसे hi खामोशी से वह खड़े रहे ..
क - बोलो न करोगे न मेरे हर सुबह फ्रेश पूर्वी
तब पूर्वी शर्माकर फ़ौरन अपने जगह से तुरंत दूसरे कमरे में भागने लगती है.. तब करीम उसका हाथ पकड़ लेता है
करीम- रुक जा मेरीए नखरे waliii...ek किश तो देती जाए..
किश की बात से पूर्वी शर्मा जाती है....

प- प्लसस अब जानी दोऊ मुझी करिमम ...और तुम्हारा होगया है न .. तुम भी यहाँ से चले जाओ अब ....
करीम- चला jaunga...pehle अपने इस बुड्ढे आशिक़ को एक किश तो देदे…
पूर्वी शर्म से लाल होगयी थी यूँ बूढ़ा आशिक़ बोलने से...
पूर्वी - चोरोऊ न...
उतना बोलकर ओह करीम के हाथ से अपना हाथ चुरा कर भाग जाती है bahar...jati हैं ....... वैसे आज उसकी चाल में भी काफी बदलाव आ गया tha.........mahi उसे देखकर बस मुस्कुराती रहती हैं..

पूर्वी जाते hi करीम अपना लुंड मसलते हुए....
करीम- है मेरिइइइ जाएं मज़ा आज्ञा तेरे sath...ab तो तू सिर्फ मेरी hai...aur किसी की भी नहीं...
करीम फिर पलट कर जाने लगता है.. वो हॉल मई पहुँच जाता है.. वह उसे अरुण दिखता hai..wo सोफे पाई बैठ कर किसी से बात कर रहा था.. उसकी पिट करीम की तरफ थी..
करीम - साला नामर्द कही ka...meri पूर्वी रानी से दूर hi रहना तू....
और वह रुक कर अरुण की तरफ देखते हुई थूकता है.... अरुण बिजी था बात करने मई तो उसे कुछ पता नहीं chala...par माहि समाज जाते है..
वो गुस्से से उसकी तरफ देखते हुई कहते है..

कमीना इस के बीवी के साथ मज़ा कर रहा है और उसपर तुक रहा hai..Harami कही का..
फिर करीम चला जाता Hai...servent क्वार्टर्स में और सो जाता hai...idhr माहि फ्रेश होने के लिए आपने कमरे मई चली जाती hai..kamre मई आते hi वो
लेट जाती है बीएड पर...

ये भगवान् ये क्या था.. मैंने ये क्या देख लिया.. मैं हमेशा उससे दूर भागना चाहती हु उतनी hi उसके नज़दीक जाती हु.. मई क्या करू.. ये सब उस कामिनी के वजह से हुआ..
कोण कामिनी माहि..
कोण?? पूर्वी और कोण..
उसकी क्या गलती है..
गलती तो सब उसकी तो है..
ये सब वो बीएड पाई लेते लेते सवाल जवाब कर रही थी.. आँखे बंद कर कर ये बातचीत खुद से वो कर रही थी.

उसने उसके साथ वह ये सब नहीं किया होता तो मई देखने नहीं जाती और न hi ये मेरे हालत न होती..
तब वो खुद से कहते है..
बात तो तेरे सही है पर..
पर क्या..
तब हस्ते हुई कहते है..

उसकी चल ढल तो करीम ने बदल दी..
तुम क्या करना है माहि उससे..
क्यों?? मई उसकी बुआ हु.. मुझे उसकी फ़िक्र होंगे न.. ??
हां हाँ सही बात है..
तभी उसे एक बात याद आती है..
ओह्ह गॉड.. !! ये पूर्वी ने क्या कर दिया..
क्या हुआ..
जल्दबाजी मई वो आओ न पंतय पहना भूल गयी.. उसके पंतय वह hi है.. ये भगवान् किस ने उसकी पंतय वह देख ली और किस को पता चला करीम वह गया था तो पूर्वी की लाइफ बर्बाद होगी..
मई ऐसा नहीं होने दूंगी..
ऐसा कह के माहि वह जाने के लिए भागने लगते hai..aur उसी जगह पहुँच जाते है और पूर्वी की पंतय ढूंढने लगते hai..tab उसे पूर्वी की पंतय दिखते है.. वो उसे उतने के लिए जुखाते है तब उसे पंतय के बाजु मई उसे करीम के कुछ सफ़ेद झट और उसके बगल मई पूर्वी के छूट से निकला रास और करीम का वीर्य दिख जाता है..
ये सब देख के माहि खुद से कहते है..
अच्छा हुआ मई यहाँ आ गयी.. ये सब देख के पूर्वी का सम्बन्ध करीम से है ये किसी को पता चल जाता.. और फिर..
वो उसकी पंतय उठा लेती है और हॉल मई आकर एक गन्दा सा कपडा लेके अनडू का वीर्य साफ़ कर देते है.. ताकि किसी को कुछ पता न चले.. और बाथरूम मई जाकर वह पूर्वी की पंतय दाल देती है..
थोड़े डियर बाद जब वो वापस अपने कमरे में आता हैं तो उस वक़्त उसके चेहरे पर एक अलग hi चमक दिखाई दे रही थी.......

फिर वो आपने कपडे निकल लेती है और उन्हें ले कर बात रूम में चली गयी. एक कमरे से बहार निकलने के बाद तो गर्मी जैसे अपने चरम पर थी. बाथरूम के अंदर जाते hi माहि ने जल्दी से अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.
माहि ने शावर ों kiya..uske शरीर पर ठंडा ठंडा पानी गिरना शुरू हो गया ..

माहि अपनी टांगो को रगड़ रगड़ कर साफ़ करने लगी ..जहा जहा उसके छूट का रास बह बह कर उसकी जांघो पर जैम गया था. .. वह उसने साफ़ कर दिया..
जैसे जैसे पानी उसके जिस्म पर गिरता जा रहा था उसके दिल को कुछ रहत मिल रही थी. पर अगले hi पल फिर से वही एहसास माहि को अपने नितम्बो पर होने लगा. ...जैसा कल रात के सपने में उसने माहि को पकड़ लिया था तब हुआ था.
शरीर पर पानी गिरने के बाद माहि का पूरा जिस्म बुरी तरह से दाहक उठा. उस एहसास ने न जाने माहि पर क्या जादू सा कर दिया था. उसका हाथ अपने आप hi उसके नितम्बो पर आ गया. माहि ने अपने नितम्बो को छू कर देखा और सच में वो एक डैम रुई की जैसे मुलायम थे. तभी माहि को करीम के चुने की बात याद आने लगी तो उसके चेहरे पर अपने आप हंसी आ गयी. और वो गण गुनगुनाने लगती है..
मेरे पिया गए रंगून
किया है वह से टेलीफोन
तुम्हारी याद सताती है
जिया में आग लगाती है..
पर इससे माहि के बदन में एक अजीब किस्म की खुमारी, एक अजीब किस्म का नशा चढ़ता जा रहा था.
जाने क्या हो गया था माहि को की माहि खुद hi जरा जरा सी बात को सोच कर hi अपने आप बहकती जा रही थी और इसी कारन न चाहते हुए भी उसके छूट ने एक बार फिर से बहना शुरू कर दिया था.
अपनी छूट के रिसाव से माहि के चेहरे पर एक मुस्कान आ gayi..mahi कड़ी हुई थी पर उसके छूट ने रिसाव करना जैसे hi शुरू किया माहि के टांगो ने जवाब दे दिया. और वो नीचे फर्श पर hi बैठ गयी .. नीचे बैठ ते के साथ hi कब उसका हाथ उसके छूट पे चला गया माहि को समाज भी नहीं आया.. उसके हाथ और छूट में जंग कहु या दोस्ती, जो शुरू हुआ उसने तो माहि को रोमांच की नयी ऊंचाई पर ले जा कर खड़ा कर दिया.
जब रोमांच का वो दौर थमा तो माहि का हाथ उसके छूट रास में पूरा का पूरा दुब चूका था. माहि ने जल्दी से पानी से अपना हाथ और अपनी छूट को साफ़ करने लगी….
तभी बहार से आती हुई आवाज ने माहि को बुरी तरह से चौकने पर मजबूर कर दिया.. बहार से वही गण गुनगुनाने की आवाज आ रही थी..
मेरे पिया गए रंगून....
नहीं नहीं बाथरूम..
ठुमरी याद सताती है..
जिया में आग लगाती है..
और गुनगुनाने वाला वही था.. करीम..
सेल ने सब सुन लिया…
माहि बड़बड़ाये..
माहि की तो साँसे hi अटक गयी उसकी आवाज सुन कर. उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे और क्या नहीं.. ये तो बहार hi खड़ा हुआ है और ये मुझे देख रहा है या सुन रहा है ... कुछ पता नहीं चल रहा है.. हे भगवान्.... क्या करू... माहि ने जल्दी से काढ़े हो कर अपने कपडे उठाये और उन्हें पहनना शुरू कर दिया...
और झट से बाथरूम में जो छोटी विंडो थी वह देखने लगी .. लेकिन बहार कोई नहीं था.. आवाज दूसरे तरफ से आ रहा थी..
अच्छा हुआ वो उस तरफ है.. उसने कुछ नहीं देखा सिर्फ ..सुना..
माहि को इससे थोड़ी रहत मिली..
जब तक आवाज स्टॉप नहीं हुई तब तक माहि बाटरूम मई रही.. आवाज स्टॉप हों ेके बाद माहि वैसे hi सोचते हुई झट से आपने बैडरूम में आयी ..बैडरूम में आके उसने सबसे पहले बैडरूम का दूर देखा .. उसे लगा शयद वो बैडरूम में आ गया है .. और वह से वो सुन रहा है.. पर वो न hi बैडरूम में था और न hi बैडरूम का दूर ओपन था.. फिर उसने सब विंडोज बंद कर दिए.. और सोचते सोचते hi सो गयी..

उसे रूम में खाना मंगाया उसने और रात देर में मनीष को बुलाकर उसके साथ आपने घर चली गयी.. उसने थम लिया था की वो अब करीम के सामने नहीं आएंगे.. इसलिए नेक्स्ट 4-5 दिन वो आपने भैय्या के घर आती नयी है..
कुछ 4-5 दिन बाद कंठीशत को कुछ कागज़ पे माहि के सिग्न करने थे और दूसरे दिन कुछ पूजा करने थी .. इस लिए माहि को कंठीशत ने बुला लिया था.. माहि मन नहीं कर पायी.. उसे लगा शयद अब करीम घर पे नहीं होगा… वैसे hi हुआ .. माहि जब आयी तब करीम घर पे नहीं था.. उसने 1 नौकर से पूछा तो उसने बता दिया की 2-3 दिन से चाचा नहीं आ रहे है.. माहि को बहुत रहत मिली.. जो फॉर्मेलिटी थी वो माहि ने पूरी कर दी … थोड़ा आराम करने के बाद दूसरे दिन जो पूजा थी उस पूजा के लिए उनकी जो पुराणी मुर्तिया थी वो देखने उस रूम में चली गयी.. वो मुर्तिया साफ़ थी .. पर माहि को वो क्लीनिंग पसंद नहीं आये.. इस वजह से वो क्लींनिंग करने लगी..
मूर्ति माहि क्लीन कर रही थी तब करीम आता है..
मुझे नहीं लग रहा था की माहि मैडम भी काम करती है..
तब मूर्ति हाथ मई पकड़ कर करीम को देखती है और स्माइल देने लगते है.. न कहते हुई hi..

उसे hi नहीं पता चला की करीम को देख के उसके फेस पर स्माइल कब आ गयी.. ..
है .. है.. पता है ज्यादा मस्का मत मारो..
काम क्या है वो बता दो..
काम कुछ नहीं है माहि मैडम .. सिर्फ हलचल पूछने आया हु..
माहि करीम की तरफ देखने लगाती है..

मतलब तुम ऐसे hi आये हो..
हां..
फिर वो दोनों एक दूसरे को देखने लगे
क्या मई आपको कुछ मदद करो..
नहीं कोई जरूरत नहीं है.. मई कर लुंगी..
वो तो पता है आप कर लोगी.. लेकिन हमारी हेल्प लोगी तो आपको hi आसानी hi होगी..
पता है..
ऐसा कह के वह रूम मई एक मिरर था वह जेक अपने कान के बलि ठीक करने लगी..

तब करीम उसे देखने लगा.. ये माहि ने जानबूझकर किया था या वो चाहती थी उसका ध्यान उसकी तरफ जाये ये वो खुद hi नहीं जानती थी..
पता है तो आप हमारी हेल्प क्यों नहीं लेते..
तो क्या हेल्प करोगे मेरे.
जो आप कहो...
माहि थोड़े देर सोचते है.. इससे में आपने पास आना नहीं देना चाहती.. पर वो बक्सा तो ये उतर सकता है..
फिर कहती है..
वो ऊपर वाले शेल्फ मई जो सामान है न वह तक हमारा हाथ नहीं पहुँच पा रहा है.. क्या तुम वो निकला लोगे..
है क्यों nahi...aise कहके वो माहि के सामने आके खड़ा हो जाता है..
हम यहाँ खड़े हो जय क्या..
हां..
आप को कोई दिक्कत नहीं है न..
माहि हास्के कहते है..

मुझे कोई दिक्कत नहीं है .. वैसे तुम आलरेडी मेरे पास आके खड़े हो चुके हो और अब पूछ रहे हो..
करीम माहि को देखने लगता है..
तो क्या पीछे जेक पहले आपकी परमिशन लेते है और फिर आपके पास आके खड़ा हो जाते है..
माहि उसके तरफ देख के हसती है और कहती है..
कोई जरूरत नहीं है.. तुम वो स्टूल लो और फिर उसपे चढ़ के वो सामान निचे उतर दो...
आप उस स्टूल को थोड़ा पकड़ो.. नहीं तो बैलेंस गड़बड़ हो जायेगा..
माहि है मई गर्दन हिलाते है.. सामान करीम निचे माहि के हाथ मई देता hai..aur जब माहि वो निचे रखने के लिए जुख जाते है तब करीम उसके तरफ देखता है .. 2-3 बार ऐसे hi होता है.. एक बार माहि देखते है..
आपने काम पे ध्यान दो.. इधर उधर देखो मत ..
काम पे तो ध्यान दे रहा हु..
काम वर्ड पे स्ट्रेस देता है.. इसपर माहि हसती है..
पता है तुम कोनसे काम पे ध्यान दे रहे हो...
क्या करे मैडम... मजबूरी hai...aap तो हमे अच्छे से जानते hi हो...
मई तो तुम अच्छे से जानते हु..
का करे मैडम.. एक औरत से हमारा कुछ होता नहीं है न... तो कभी कभी इधर उधर देखना पड़ता है..
माहि स्माइल देते हुई कहती है..
बक्वज मत करो ...
फिर से करीम माहि को देखने लगता है..
मुझे पता था.. इसलिए तो मई तुम्हारी हेल्प नहीं ले रही थी..
तो हेल्प लेने से आपका क्या बिगड़ जायेगा..
तुम जो ऐसे देख रहे हो न... इस वजह से बिगड़ जायेगा..
क्या बिगड़ जायेगा...
मुझे नहीं पता..
एक बात कहो
माहि झट से बोलती है
बोलो..
फिर माहि सोचते है.. मैंने जल्दबाजी में क्या कह दिया .. ये कुछ गन्दा बोल पड़ा तो
आज तो तू एक नंबर माल लग रही है...
मुजसे बात करनी है तो अच्छी लैंग्वेज मई बात करो.. ऐसे घटिया लैंग्वेज मई मत बात करो...
ठीक है डार्लिंग...
मई कोई तुम्हारी डार्लिंग नहीं हु...
नहीं इतना सज धज के.. तैयार हुई हो.. इसलिए कहा..
तो अच्छी तरीके से भी बोल सकते थे..
कहा जा रही हो इतना सज धज के
तुमसे मतलब...
अब मुजसे hi मतलब रखना पड़ेगा .... मनीष से... नहीं...
बंद करो.. तुम्हारी बक्वज..
सॉरी मनीष नहीं मनीषा से मतलब नहीं मुजसे hi रखना पड़ेगा...
चुप हो जाओ..
ऐसा गुस्सा दिखाके कहती है लेकिन हलकी सी स्माइल उसके चहरे पर आ जाती है

क्या यार मनीष कहो या मनीषा.. वैसे बीच वाले को क्या कहते है... जो किस काम का नहीं होता..
माहि चहरे पर थोड़ी स्माइल लती है..
माहि आपने आप को कहती है.. वो तो सपना था.. उसमे इसने मनीष को मनीषा कहा था.. फिर इसको कैसे पता लगा …
करीम उसके पास आटा है.. कमर पाई हाथ रखता है...
.... और आपने फेस माहि के गुलाभी हूंतो के पास ले जाता है.. ..और एक हाथ उसके आम पर धीरे से रखता है.. अब वो माहि को किश करने वाला hi था ककी माहि बोल पड़ती है...
नहीं.. ये ठीक नहीं है..
कुछ नहीं होगा..
ऐसा कहके उसके गाल को हाथ लगता है.. माहि के आँखे बंद हो जाती है..
नहीं होगा मेरी रानी.....
प्ल्ज़ समाज करो...
करीम उसके एक आम पे आपने एक हाथ धीरे से उप्पसार से घुमा रहा था...
एक किश धो न माहि...
नाहीइ... ये ठीक नहीं है...
एक किश और ज्यादा कुछ नाहीइ....
माहि हसती है... कातिल स्माइल के साथ ....

तभी बहार कान्तिशीथ ावजह देता है...
माहि तुम कहा हो ...
आयी भैय्या
इस भड़वे को अभी आना था क्या...
माहि हस्ती है...
माहि करीम को धक्का ढके वह से भाग जाती है..
दूसरे दिन फंक्शन होता है ..(वह करीम ने माहि को कैसा सडके किया ये आप पहले hi पद चुके हो..)
पार्टी से घर आने के बाद माहि ये सब याद करने लगाती है.. कैसे पार्टी में करीम ने उसको सडके किया.. कैसे सिमरन के वह विबरेटर रख कर सिमरन को तड़पाया और वो मुझे दिखाकर मुझे कैसे चिपक गया..
ये सब माहि बीएड पाई पिट के बल लेट कर सोचने लगाती है …

वो खुद को hi कहने लगाती है ये कैसे हो गया.. इतने बड़े गलती मुजसे कैसे हो गयी.. ये तो मई कभी भी नहीं चाहती थी.. फिर मेरे हाथ से ऐसा कैसा हो गया.. ये सोचते हुई माहि आपने आँखे बंद कर लेती है……
माहि की आँखें अब बंद थी पर दिमाग बेचैन!

माहि समझ नहीं पा रही थी की क्या करे. उसके अंदर की पतिव्रता नारी कह रही थी की ये सब ठीक नहीं है पर उसके अंदर की अतृप्त कामना की मूर्ती कह रही थी की थोड़ा सा मज़ा तू भी ले ले माहि. फिर शायद ऐसा मौका मिले न mile.aise सोचने की वजह से hi उसके दिल की धड़कने तेज़ हो गयी. उसकी साँसे तेज़ होने लगी. उसके निप्पल हार्ड हो रहे थे और ब्लाउज टाइट होने लगी. अपने जाँघों के बीच भी माहि को एक अजीब सेंसेशन हो रहा था. कुछ कुछ वैसा hi जैसा कुछ पल पहले पार्टी में करीम सी बूब्स दबाने के बाद हुआ था. पर मनीष के साथ सेक्स के वक़्त से अबकी बार वो सेंसेशन और तीव्र था. शायद इसलिए की वो घर परिवार, समाज के बंधन से मुक्त होना चाहती थी . माहि अपने जाँघों के बीच से ृस्टि गीलापन को मह्शूश कर सकती थी. वो अपने जांघ को फैला कर अपनी छूट को कुछ आज़ादी देना चाहती थी. पर वो तो बीएड पे पिट के बल लेते हुई थी.. कैसे करे .. वही वो सोच रही थी..
अब माहि के मैं में उथल पुथल हो रही थी. वो सोच रही थी वो मनीषा की अच्छी खासी बीवी बनके रहे या करीम की raand…mahi यही सोचने लगाती है.. कुछ पल पहले माहि के आँखों के सामने लास्ट 15 डेज का नज़ारा आ चूका था.. वो सब पल याद करके माहि को एक अजीब से सुकून मिला था.. वो अब याद करने लगी थी ..कैसे करीम ने सिमरन मैडम को गैलरी में सेक्स किया था.. फिर माइड पद्मा को और फिर पूर्वी को… और पार्टी से पहले मुझे उसने किश करने का तरय कैसे किया था… बाद में पार्टी में मुझे कैसे सडके किया.. मेरे बॉडी के हर हिस्से पर कैसे उसके हाथ चल रहे थे.. ये सब याद करके माहि के चहरे पर हलकी से स्माइल याद आ जाती है..
माहि आपने आप को कहती है.. आँखे बंद करते हुई..
कैसे देख रहा था मेरे बूब्स को वो पार्टी में.. और गर्दन में तो उसने हद hi कर दी.. मेरे बूब्स पर हाथ रख diye..aur उसको जोर से दबाने लगा.. मनीष ने ऐसा कभी भी नहीं किया था.. फिर वो मेरे गर्दन को किश करने लगा.. और फिर बाते करते हुई मुजसे लिपट गया.. बहुत चालू है करीम.. लिपट कर मेरे पुरे बक्सीडे पे हाथ घूमने लगा.. और मययययय.. गूदड़.. मेरे अस्स पर भी उसने हाथ रख दिया.. अच्छा हुआ मैंने उसे धक्का दे दिया..
फिर थोड़े देर बाद उसने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और कंधे को सहलाने लगा .... और फिर उसने खंड से होते हुई आगे आपने हाट डालके मेरे ब्लाउज से ब्रा की स्ट्रिप्स को थोड़ा बहार निकल दिया .. ..
इस वक़्त उसकी उंगली मेरे ब्रा की स्ट्रिप्स पर थी.. उस वक़्त में उसके हाथो का स्पर्श फील कर रही थी...... मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा tha......shayad ज़िन्दगी में ऐसा पहला दफा अनुभव था मेरे लिए …मुझे कुछ नया रोमांच सा लग रहा था उस वक़्त.....
वो मुझे कह रहा था..
कितना मुलायम हैं मैडम जी आपका का jism.....kisi फूलों की तरह najuk........aisa लगता हैं जैसे मैं कोई हसीं सपना देख रहा हूँ......
उसके ऐसे कहने से मई शर्मा गयी थी ..
मेरे बदन के साथ खेल रहा था और मुझे कह रहा तह
तुम अच्छा नहीं लग रहा है क्या मैडम जी..
मैंने नाहीइ bola…to वो कहने लगा..
फिर मन क्यों नहीं कर रही हो..
सचमुच मैं मन क्यों नहीं कर रही थी उसे ..अगर मैंने मन भी किया होता तो क्या वो रुख jata..aur कितनी बेशर्मी से कह रहा था मुझे ..
मई किसी भी खुबसुआरत औरत की बात को मन नहीं करता.
और फिर बेशरम होक मेरे सामने hi .. गांड... छूट.. ऐसे वर्ड उसे करने लगा.. मैंने कुछ नहीं कहा ये जानकर वो मुझे कहने लगा..
मई तुम एक बार छोड़ना चाहता हु.. ..
ऐसा कह के मेरा एक हाथ आपने हातो मई थम लिया उसने .. उसके ऐसे करने से एक बार फिर से मेरे जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गयी ......और वो हाथ करीम झट से मेरे बूब्स पर ले गया और बड़े हलके हाथों से .. मेरे hi हातो से मेरे hi बूब्स पर फिरने लगा ..... और धीरे धीरे मेरे दोनों निप्पल्स को मेरे दोनों हाथों में लेकर उसे मसलना शुरू किया उसने ....... उसके इस हरकत से मेरे जिस्म उस वक़्त किसी आग के भत्ते की तरह तप रहा था .....
और फिर तो उसने हद hi कर दी.. मुझे इस की उम्मीद नहीं थी.. वो ये करेगा ये मैंने कभी सोचा hi नहीं tha..usne झट से अपने एक हाथ मई मेरा एक हाथ थम लिया और उसी हाथ को नीचे ले जेक मेरे छूट पर रखकर मेरे एक उंगली धीरे से अंदर दाल दे ...... सदी के उप्पर से … ( माहि वो उंगली अब आपने आँखि के सामने लती है )
उस वक़्त मेरे आँखे लज्जत से बंद हो गयी थी.. और मेरे मुँह से एक सिसकारी फुट पड़ी .....
ये कहते हुई माहि आपने एक हाथ आपने नाजुक से बूब्स पर रख देती है ..और धीरे से उसे दबा देती है… तब उसके मू से हलकी सी आवाज निकल पड़ती है..
aaaaaaaaahhhhhhaaaaaaaaaaaaaaa…
उस वक़्त उसका वो बड़ा सा हत्यार मेरे अस्स से पूरी तरह से सत्ता हुआ था......... इसलिए मई कुछ कर नहीं पा रही थी.. फिर उसने उसका मुँह मेरे गार्डन के एकदम करीब लाया ......और झट से अपने होंठ मेरे गार्डन पर रखकर बहुत धीरे से चूम लिया ......
( ऐसा कह के माहि ने आपने दूसरा हाथ आपने छूट के उप्पर रख दिया)
aaaaaaaaa..ssssssssssssssss......
मेरे शोल्डर को किश करने लगा और बड़ी बेशरमी से मुझे कहने लगा..









































































































































