- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
हाँ चलो जल्दी बहुत सारा काम करना है.. तुम्हारी महारानी को आज hi बीमार पड़ना था..
हाँ न आज नहीं पड़ना था बीमार
अब सब काम मुझे hi करना पड़ेगा..
आप चाहे तो मई मदद करता हु आपको किचन मई
नहीं बाबा मई कर लुंगी
क्यों मेमसाब मई सच मई आप का काम हल्का कर दूंगा
तब हसते हुई कहते है

हल्का करोगे क्या पता नहीं पर तुम्हारे वजह से डिले जरूर होगा
अब वो बैडरूम मई पहुँच गए
डिले क्यों होगा मेमसाब
जैसे अब हो रहा है
मतलब मई समजा नहीं
तब मिरर के सामने खड़े होक आपने बॉल खोल देती है और उसको फिर से बंदने लगती है

इतने कैसे बुद्धू हो तुम
मतलब
तब जरा ऐडा के साथ उसको देखते हुई कहते है
मेरे बुद्धू नौकर ऐसे hi बाटे करते रहोगे तो मई काम कैसे जल्दी करुँगी
ऐसे बात है क्या
हाँ जी
तो हम बात नहीं करते
अच्छा जी अब हम से बात नहीं करोगे
आप ने तो कहा न
पर हम दोनों अकेले किचन मई होंगे और एकदूसरे से बात नहीं करेंगे ऐसा हो सकता है क्या
मुश्किल तो लग रहा है
तब गर्दन घुमा के कहते है

मुश्किल तो लग रहा है तो कहते क्यों हो
हाँ नहीं कहना चाहिए
ऐसा कहते हुई आरती जो मिरर के सामने कड़ी थी वह नवाज़ जाता है..
अपने पीछे कोई खड़ा है ऐसे उसे लगा इसलिए वो पलट गयी और नवाज़ को देखने लगी..

दोनों की नजरे मिली कुछ सेकंड के लिए.. फिर आरती ने अपनी नज़र निचे करते हुई कहा..
तुम यहाँ क्यों आये.. तुम लेट जाओ .. मई तुम्हारी मालिश कर देती हु..
यहाँ पाई निचे ..
तब हस्ते हुई कहते है यहाँ पाई नीचे नहीं वह बीएड पाई.. इतना मुलायम बीएड होते हुई तुम नीचे क्यों लटोगे भला
मुझे अच्छा नहीं लग रहा है की मैं आपसे अपनी सेवा करवौ.. आपसे अपने पेअर की मालिश करवौ.. पिट की मालिश karwau..naukar होक मालकिन से ये करवाना..
आरती सोचने लगी अब इससे क्या हो गया अचानक.. अब तक तो मेरे पीछे पड़ा था मेरे मालिश करवावो और अब बोल रहा है मुझे अच्छा नहीं लगता.. ये लड़का कभी मुझे समाज मई आएगा या नहीं.. सच मई ये मुझे पागल कर देगा.. कभी कहेगा ऐसा करो और कभी कहेगा वैसा करो.. पूरा कंफ्यूज किया है इसने तो मुझे.. ये चाहता क्या है मुझसे. .
ऐसे सोचते हुई वो कहते है

अब ये क्या है
मेमसाब आप से मालिश करवाना अच्छा नहीं लगता
क्या तुम मेरे मालिश पसंद नहीं आये क्या
नहीं नहीं आप बहुत अच्छी मालिश करते हो..
फिर रुक कर कहता है
आरती तुम्हारा टच बड़ा सुकून देता है.. तुम्हारे हाथ बड़े चिकने है तुम्हारे फर्श की तरह ..
उसने पहली बार आरती कहा था.. मेमसाब नहीं कहा तह.. और उसपर आरती ने उसे कुछ नहीं कहा और न hi गुस्सा किया..
आरती हसी और बोली
हहै तुम कुछ भी बोलते हो
मेरे ऐसे मालिश इससे पहले किसी ने नहीं की
मतलब पहले तुम्हारी मालिश किसी ने की है
हाँ
किस ने.. आदमी या औरत
बड़ी अदा के साथ वो कहती है

मई भला आदमी से क्यों अपनी मालिश करवावो.. मई क्या चक्का हु के
चीई कुछ भी गंदे बोलते हो तुम
आरती को ये सब बातें कही न कही अच्छी लगने लगी थी.. इन सब बातो से उसको गुस्सा आना चाहिए था उल्टा वो शर्मा रही थी इन सब बातो से और उसे मज़ा भी आ रहा तह
आरती मेमसाब तुम.. आप..
कहो कहो.. तुम्हारा जो दिल चाहे कहो.. तुम कहो.. या आप कहो.. या मेमसाब कहो या आरती कहो.. भला तुम कोण रोकने वाला है और तुम किस से रुकने वाले हो..
आरती तुम बहोत अच्छी हो दिल की भी और शरीर से भी.. इस पुरे गाँव मई.. गाँव मई क्या पुरे डिस्ट्रिक्ट मई मैंने आपसे ज़ादा सुन्दर लड़की कभी नहीं देखि
काफी अच्छा तरय है..
और ाअपना साडी का पल्लू ठीक करती है.. उसने देखा था नवाज़ की नज़र कहा है..

तरय नहीं मार रहा हु सच कह रहा हु
सच और तुम
तब थोड़ा आगे आता है और उसके हाट आपने हातो मई लेता है..
सच मई आरती तुम बहुत खूबसूरत हो
तब आपने हाट उसके हातो से हटा लेते है
आरती नहीं.. आरती मेमसाब कहो
अभी तो कहा न तुम कुछ भी kaho..aarti कहो या आरती मेमसाब
अब कह रही हु न आरती मेमसाब कहो
तुम लेडीज लोंगो को संजना बहुत मुश्किल है
फिर भी लेडीज लोंगो के पीछे पड़े रहते हो
आरती मेमसाब जो आराम मुझे वंदना की मालिश से नहीं मिला या नीता के मालिश से नहीं मिला था. वो आराम आपकी मालिश से मिला मुझे. आप बहुत अचे मालिश करते हो मेमसाब
नवाज़ के ऐसे कहने से आरती उसकी और गुस्से से देखती है

मतलब उन्दोनो ने तुम्हारी मालिश की थी
हाँ की थी
तुमने नहीं कहा मुझे
क्यों की तुमने पूछा नहीं
उनसे मालिश करवा ली और फिर मुझसे भी मालिश करवा रहे हो
हाँ क्यों तुम कुछ आपत्ति है क्या
तब आरती नाराज़ होक कहती है

आपत्ति होगी भी तो भी अब किस को कहु
मुझे
मुझे कुछ नहीं कहना है तुम
आरती अब गुस्सा हो गयी थी नवाज़ से.. कुछ देर दोनों शांत रहे.. एकदूसरे को चोरी छुपे देखने लगे.. उसकी नज़र नवाज़ के लुंड के उभर पर जा रही थी और नवाज़ की नज़र आरती के बूब्स पर.. दोनों गरम हो रहे थे पर नवाज़ के दिल में डर था और आरती के दिल में शर्म थी.. अब नवाज़ को साबरा नहीं हो रहा तह
मेमसाब
तब आरती गुस्से मई कहती है
तुम चाहते क्या हो मुझसे.. अभी तक कह रहे थे मालिश करो मेरे.. अब मैंने कुछ हद तक तुम्हारे मालिश की और कुछ बाकि है.. और अब कह रहे हो मुझसे मालिश करवाना अच्छा नहीं लगता..
नहीं नहीं वो बात नहीं है..
फिर..
आप एक मालकिन हो और मई एक नौकर हु
अब वो उसको इमोशनल ब्लैकमेल करने लगा
ये क्या इससे पहले तुम पता नहीं था.. मालिश करवाने से पहले
हाँ पता तह..
फिर तब नहीं बोलै अब बोल रहे हो
वो उस टाइम सोचे नहीं थे..
अब सोचे हो
हाँ मालकिन
तो क्या सोचा
यही की आप मालकिन और मई नौकर.. और मालकिन से नौकर की मालिश अच्छा नहीं लगता.. अगर नौकर ने मालकिन की मालिश की होते तो समाज सकते है
तब चहरे पर स्माइल लेट हुई आरती कहती है

Oooohhooo...Matlab तुम अब मेरे मालिश करना चाहते हो
नहीं.. पर हो जाये तो
मुझे क्या बुद्धू समाज के रखा है क्या
नहीं आप कहा से बुद्धू नहीं लगती आप तो बहुत स्मार्ट हो ब्यूटीफुल हो
तुम फिर से शुरू हो गए
नहीं मेमसाब
नहीं मेमसाब सचमे आप बहोत सुन्दर हो
तब नखरा करते हुई कहती है

तुम न सुन्दर लेडी दिखी की फिसल जाते हो
किसने कहा
कहने की क्या जरुरत है
नहीं मेमसाब आप सच मई बहुत सुन्दर हो
अच्छा मई तुमको अब सुन्दर लग रही हु
अब नहीं पहले से
पहले से कब.. नीता के पहले से या वंदना के पहले से
तब थोड़ा स्माइल करते हुई कहता है
उनके पहले से नहीं बाद मई
आरती स्माइल करते हुई कहते है
लगा hi मुझे
अब उनके बाद मई hi मैंने आप को पहली बार देखा.. और जब से देखा है तब से आप हमें भ गयी
अच्छा जी.. अब तक कह रहे थे आप सुन्दर हो अब कह रहे हो भ गयी हो मुझे .. पल पल तुम्हारे वर्ड्स चेंज हो रहे है..
अब अगर सामने रम्बा और क्या कहते है..
मुझे क्या पता क्या कहते है
वो इंद्रदेव की अप्सरा.. स्वर्ग की अपसरा ..
तब आरती कहती है
इंद्रदेव की अप्सरा तो बहुत थी.. रम्बा, उर्वशी , मेनका
आप उन सब का मिक्सचर हो
तब आरती पहले शर्मा गयी ..

और बाद मई हँसाने लगे
बाते बनाने मई माहिर हो
मई बाते नहीं बना रहा मेरी रम्बा और उर्वशी
तब आरती कहते है
मेनका नहीं क्या
हाँ मेनका भी
तब आरती शर्मा गयी

ारे मेरी मेमसाब तो शरमाते हुवे और भी खूबसूरत लग रही है. नजर न लगे किसी की.
क्या नवाज़ तुम भी न. मैं इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ. जितना तुम तारीफ कर रहे हो.
ये तो मैं डीडे करूँगा न की तुम कितनी खूबसूरत हो. तुम्हे थोड़ी न पता है इसके बारे में.
तब नवाज़ की और देखते है.. और बड़ी अड्डा के साथ कहती है

ये क्या बात हुई भला. ख़ूबसूरती मेरी है और मुझे hi पता नहीं की मैं कितनी खूबसूरत हूँ.
हाँ नहीं पता तुम्हे की तुम कितनी खूबसूरत हो. कभी मेरी नजर से देखो तो पता चले.
आरती शरमाते हुई कहती है

क्या नवाज़.. मुझे तुम्हारे इरादे नेक नहीं लग रहे हैं. अपनी मेमसाब से hi फ्लिर्टिंग कर रहे हो. ये अच्छी बात नहीं है नवाज़ . मैं नीता से और पापा जी से शिकायत कर दूँगी.
नवाज़ मुंह बनाकर कहता है
लो जी अब ख़ूबसूरती की तारीफ करना भी गुनाह हो गया है. सही कहते हैं लोग सच बोलने वालो की कोई कदर hi नहीं हैं हमारे समाज में. और अगर तुम्हारी फ्रेंड यहाँ होती तो मैं उसके साथ भी यही करता . अब जब तक तुम्हारी फ्रेंड नहीं है तब तक तुम hi उनकी जगह ले लो.
अपनी जीभ होंठों पर घूमते हुई आरती कहती है..
ये क्या बोल रहे हो तुम . मैं नीता की जगह कैसे ले सकती हूँ. तुम भी न कुछ भी बोलते रहते हो. मैं मालकिन हूँ तुम्हारी .. तुम्हारे छोटे मालिक की बीवी
नवाज़ हँसते हुई कहता है
तो मैंने कब कहा की तुम मेरी बीवी हो..
धत बेशरम कुछ भी कहते हो
ऐसा कह के वो शर्माकर पलट गयी

ारे मई ऐसा नहीं कह रहा हु
तो
बता रहा हु
क्या बता रहे हो
यही की तुम मेरे बीवी नहीं हो.. तुम तो मेरे मालकिन हो.. मेरे ब्यूटीफुल.. सेक्सी.. हॉट.. मालकिन हो. और मैं भला कैसे इतने सुन्दर मालकिन को किसी और की होने दूंगा.. मई तुम किसी और की नहीं होने दूंगा. तुम सिर्फ मेरी हो. सिर्फ मेरी मालकिन ...
नवाज़ ने इंदिरेक्टली आरती से बहुत कुछ कह दिया. जिसे आरती अच्छी तरह समझ रही थी लेकिन नवाज़ को लग रहा था की आरती को कुछ भी पता नहीं चल रहा है. नवाज़ की इस बात पर आरती ने कोई रिएक्शन नहीं दिया. बल्कि खिलखिलाकर हंसने लगी और नवाज़ से बोली.

तुमसे बहस करने में कोई नहीं जीत सकता .. इसलिए मैं भी मान hi लेती हूँ की मैं तुम्हारे hi हूँ. .. तुम्हारी hi मालकिन.. किसी और की नहीं..
पर अब तुम्हारे इस मालकिन को तुम्हारे सेवा करने का मौका दे दो..
हाँ क्यों नहीं
पर उससे पहले आपने मालकिन की एक सेवा कर दो..
बोलिये क्या सेवा करू
मुझे पानी पीला दीजिए. मुझे बहुत प्यास लगी है.
पहले बार आरती ने नवाज़ को रेस्पेक्ट देके दीजिये कहा था.. दो नहीं कहा tha..hamesha वो आपने पति को दीजिये कहती थी या आपने ससुर को.. इस घर मई वो उन दोनों के अलावा किसी को दीजिये ऐसे रेस्पेक्ट देखे बात नहीं करती थी.. नवाज़ तीसरा आदमी था जिसको आरती रेस्पेक्ट देखे बात ककर रही ी
आरती की बात सुनकर नवाज़ ने मुस्कुराते हुई कहा
ठीक है पिलाता हु
ऐसा कह के आरती के बैडरूम से किचन मई चला गया .. किचन में आकर पानी का गिलास मई पानी लेकर फिर से बैडरूम मई आया..
अब जब नवाज़ पानी लेन किचन मई गया तो आरती मिरर के सामने गयी .. हल्का सा उसने मेक उप किया .. ब्रश से अच्छे से चेहरा क्लीन किया ..उसके मेकअप बॉक्स मई से लक्मे की क्रीम निकली ..जल्दी से चहरे पर लगाए .. .. फिर हलके से लिपस्टिक लगाए.. ेएलइनेर लगाया .. .. आपने बाल ठीक तक किये .. फिर अपनी साड़ी ठीक की .. फिर वह एक अच्छा सा बॉडी स्प्रे उसे किया..
अब हालत ये थी की नवाज़ कह चूका था की आरती से मालिश ठीक नहीं लगती पर इधर आरती खुद अब नवाज़ की मालिश करना चाहा रही थी.. उसके लिए वो ये सब तयारी कर रही थी.. नवाज़ के चुंगुल मई अब वो पूरी तरह से आ गयी थी.. लघबघ उसने उसे बोतल मई उतर दिया था..
उधर जब नवाज़ किचन मई था तब वो यही सोच रहा था अब इस रांड को तो बोल चूका हु मालिश करना ठीक नहीं है पर अगर सच मई इसने मेरे मालिश नहीं की तो इतना अच्छा मौका हाट से चला जायेगा.. अब इस वक़्त वैसे घर मई कोई नहीं है.. नीता नहीं है. बुद्धा कहा बहार गया है और छोटा तो दिल्ली मई है.. इतना अच्छा मौका इसको छोड़ने के लिए नहीं मिलेगा .. अब मई क्या करू.. जोश जोश मई मैंने ये क्या कर दिया..
यही सोचते हुई वो अब बैडरूम मई दाखिल हो चूका था
हाँ न आज नहीं पड़ना था बीमार
अब सब काम मुझे hi करना पड़ेगा..
आप चाहे तो मई मदद करता हु आपको किचन मई
नहीं बाबा मई कर लुंगी
क्यों मेमसाब मई सच मई आप का काम हल्का कर दूंगा
तब हसते हुई कहते है

हल्का करोगे क्या पता नहीं पर तुम्हारे वजह से डिले जरूर होगा
अब वो बैडरूम मई पहुँच गए
डिले क्यों होगा मेमसाब
जैसे अब हो रहा है
मतलब मई समजा नहीं
तब मिरर के सामने खड़े होक आपने बॉल खोल देती है और उसको फिर से बंदने लगती है

इतने कैसे बुद्धू हो तुम
मतलब
तब जरा ऐडा के साथ उसको देखते हुई कहते है
मेरे बुद्धू नौकर ऐसे hi बाटे करते रहोगे तो मई काम कैसे जल्दी करुँगी
ऐसे बात है क्या
हाँ जी
तो हम बात नहीं करते
अच्छा जी अब हम से बात नहीं करोगे
आप ने तो कहा न
पर हम दोनों अकेले किचन मई होंगे और एकदूसरे से बात नहीं करेंगे ऐसा हो सकता है क्या
मुश्किल तो लग रहा है
तब गर्दन घुमा के कहते है

मुश्किल तो लग रहा है तो कहते क्यों हो
हाँ नहीं कहना चाहिए
ऐसा कहते हुई आरती जो मिरर के सामने कड़ी थी वह नवाज़ जाता है..
अपने पीछे कोई खड़ा है ऐसे उसे लगा इसलिए वो पलट गयी और नवाज़ को देखने लगी..

दोनों की नजरे मिली कुछ सेकंड के लिए.. फिर आरती ने अपनी नज़र निचे करते हुई कहा..
तुम यहाँ क्यों आये.. तुम लेट जाओ .. मई तुम्हारी मालिश कर देती हु..
यहाँ पाई निचे ..
तब हस्ते हुई कहते है यहाँ पाई नीचे नहीं वह बीएड पाई.. इतना मुलायम बीएड होते हुई तुम नीचे क्यों लटोगे भला
मुझे अच्छा नहीं लग रहा है की मैं आपसे अपनी सेवा करवौ.. आपसे अपने पेअर की मालिश करवौ.. पिट की मालिश karwau..naukar होक मालकिन से ये करवाना..
आरती सोचने लगी अब इससे क्या हो गया अचानक.. अब तक तो मेरे पीछे पड़ा था मेरे मालिश करवावो और अब बोल रहा है मुझे अच्छा नहीं लगता.. ये लड़का कभी मुझे समाज मई आएगा या नहीं.. सच मई ये मुझे पागल कर देगा.. कभी कहेगा ऐसा करो और कभी कहेगा वैसा करो.. पूरा कंफ्यूज किया है इसने तो मुझे.. ये चाहता क्या है मुझसे. .
ऐसे सोचते हुई वो कहते है

अब ये क्या है
मेमसाब आप से मालिश करवाना अच्छा नहीं लगता
क्या तुम मेरे मालिश पसंद नहीं आये क्या
नहीं नहीं आप बहुत अच्छी मालिश करते हो..
फिर रुक कर कहता है
आरती तुम्हारा टच बड़ा सुकून देता है.. तुम्हारे हाथ बड़े चिकने है तुम्हारे फर्श की तरह ..
उसने पहली बार आरती कहा था.. मेमसाब नहीं कहा तह.. और उसपर आरती ने उसे कुछ नहीं कहा और न hi गुस्सा किया..
आरती हसी और बोली
हहै तुम कुछ भी बोलते हो
मेरे ऐसे मालिश इससे पहले किसी ने नहीं की
मतलब पहले तुम्हारी मालिश किसी ने की है
हाँ
किस ने.. आदमी या औरत
बड़ी अदा के साथ वो कहती है

मई भला आदमी से क्यों अपनी मालिश करवावो.. मई क्या चक्का हु के
चीई कुछ भी गंदे बोलते हो तुम
आरती को ये सब बातें कही न कही अच्छी लगने लगी थी.. इन सब बातो से उसको गुस्सा आना चाहिए था उल्टा वो शर्मा रही थी इन सब बातो से और उसे मज़ा भी आ रहा तह
आरती मेमसाब तुम.. आप..
कहो कहो.. तुम्हारा जो दिल चाहे कहो.. तुम कहो.. या आप कहो.. या मेमसाब कहो या आरती कहो.. भला तुम कोण रोकने वाला है और तुम किस से रुकने वाले हो..
आरती तुम बहोत अच्छी हो दिल की भी और शरीर से भी.. इस पुरे गाँव मई.. गाँव मई क्या पुरे डिस्ट्रिक्ट मई मैंने आपसे ज़ादा सुन्दर लड़की कभी नहीं देखि
काफी अच्छा तरय है..
और ाअपना साडी का पल्लू ठीक करती है.. उसने देखा था नवाज़ की नज़र कहा है..

तरय नहीं मार रहा हु सच कह रहा हु
सच और तुम
तब थोड़ा आगे आता है और उसके हाट आपने हातो मई लेता है..
सच मई आरती तुम बहुत खूबसूरत हो
तब आपने हाट उसके हातो से हटा लेते है
आरती नहीं.. आरती मेमसाब कहो
अभी तो कहा न तुम कुछ भी kaho..aarti कहो या आरती मेमसाब
अब कह रही हु न आरती मेमसाब कहो
तुम लेडीज लोंगो को संजना बहुत मुश्किल है
फिर भी लेडीज लोंगो के पीछे पड़े रहते हो
आरती मेमसाब जो आराम मुझे वंदना की मालिश से नहीं मिला या नीता के मालिश से नहीं मिला था. वो आराम आपकी मालिश से मिला मुझे. आप बहुत अचे मालिश करते हो मेमसाब
नवाज़ के ऐसे कहने से आरती उसकी और गुस्से से देखती है

मतलब उन्दोनो ने तुम्हारी मालिश की थी
हाँ की थी
तुमने नहीं कहा मुझे
क्यों की तुमने पूछा नहीं
उनसे मालिश करवा ली और फिर मुझसे भी मालिश करवा रहे हो
हाँ क्यों तुम कुछ आपत्ति है क्या
तब आरती नाराज़ होक कहती है

आपत्ति होगी भी तो भी अब किस को कहु
मुझे
मुझे कुछ नहीं कहना है तुम
आरती अब गुस्सा हो गयी थी नवाज़ से.. कुछ देर दोनों शांत रहे.. एकदूसरे को चोरी छुपे देखने लगे.. उसकी नज़र नवाज़ के लुंड के उभर पर जा रही थी और नवाज़ की नज़र आरती के बूब्स पर.. दोनों गरम हो रहे थे पर नवाज़ के दिल में डर था और आरती के दिल में शर्म थी.. अब नवाज़ को साबरा नहीं हो रहा तह
मेमसाब
तब आरती गुस्से मई कहती है
तुम चाहते क्या हो मुझसे.. अभी तक कह रहे थे मालिश करो मेरे.. अब मैंने कुछ हद तक तुम्हारे मालिश की और कुछ बाकि है.. और अब कह रहे हो मुझसे मालिश करवाना अच्छा नहीं लगता..
नहीं नहीं वो बात नहीं है..
फिर..
आप एक मालकिन हो और मई एक नौकर हु
अब वो उसको इमोशनल ब्लैकमेल करने लगा
ये क्या इससे पहले तुम पता नहीं था.. मालिश करवाने से पहले
हाँ पता तह..
फिर तब नहीं बोलै अब बोल रहे हो
वो उस टाइम सोचे नहीं थे..
अब सोचे हो
हाँ मालकिन
तो क्या सोचा
यही की आप मालकिन और मई नौकर.. और मालकिन से नौकर की मालिश अच्छा नहीं लगता.. अगर नौकर ने मालकिन की मालिश की होते तो समाज सकते है
तब चहरे पर स्माइल लेट हुई आरती कहती है

Oooohhooo...Matlab तुम अब मेरे मालिश करना चाहते हो
नहीं.. पर हो जाये तो
मुझे क्या बुद्धू समाज के रखा है क्या
नहीं आप कहा से बुद्धू नहीं लगती आप तो बहुत स्मार्ट हो ब्यूटीफुल हो
तुम फिर से शुरू हो गए
नहीं मेमसाब
नहीं मेमसाब सचमे आप बहोत सुन्दर हो
तब नखरा करते हुई कहती है

तुम न सुन्दर लेडी दिखी की फिसल जाते हो
किसने कहा
कहने की क्या जरुरत है
नहीं मेमसाब आप सच मई बहुत सुन्दर हो
अच्छा मई तुमको अब सुन्दर लग रही हु
अब नहीं पहले से
पहले से कब.. नीता के पहले से या वंदना के पहले से
तब थोड़ा स्माइल करते हुई कहता है
उनके पहले से नहीं बाद मई
आरती स्माइल करते हुई कहते है
लगा hi मुझे
अब उनके बाद मई hi मैंने आप को पहली बार देखा.. और जब से देखा है तब से आप हमें भ गयी
अच्छा जी.. अब तक कह रहे थे आप सुन्दर हो अब कह रहे हो भ गयी हो मुझे .. पल पल तुम्हारे वर्ड्स चेंज हो रहे है..
अब अगर सामने रम्बा और क्या कहते है..
मुझे क्या पता क्या कहते है
वो इंद्रदेव की अप्सरा.. स्वर्ग की अपसरा ..
तब आरती कहती है
इंद्रदेव की अप्सरा तो बहुत थी.. रम्बा, उर्वशी , मेनका
आप उन सब का मिक्सचर हो
तब आरती पहले शर्मा गयी ..

और बाद मई हँसाने लगे
बाते बनाने मई माहिर हो
मई बाते नहीं बना रहा मेरी रम्बा और उर्वशी
तब आरती कहते है
मेनका नहीं क्या
हाँ मेनका भी
तब आरती शर्मा गयी

ारे मेरी मेमसाब तो शरमाते हुवे और भी खूबसूरत लग रही है. नजर न लगे किसी की.
क्या नवाज़ तुम भी न. मैं इतनी भी खूबसूरत नहीं हूँ. जितना तुम तारीफ कर रहे हो.
ये तो मैं डीडे करूँगा न की तुम कितनी खूबसूरत हो. तुम्हे थोड़ी न पता है इसके बारे में.
तब नवाज़ की और देखते है.. और बड़ी अड्डा के साथ कहती है

ये क्या बात हुई भला. ख़ूबसूरती मेरी है और मुझे hi पता नहीं की मैं कितनी खूबसूरत हूँ.
हाँ नहीं पता तुम्हे की तुम कितनी खूबसूरत हो. कभी मेरी नजर से देखो तो पता चले.
आरती शरमाते हुई कहती है

क्या नवाज़.. मुझे तुम्हारे इरादे नेक नहीं लग रहे हैं. अपनी मेमसाब से hi फ्लिर्टिंग कर रहे हो. ये अच्छी बात नहीं है नवाज़ . मैं नीता से और पापा जी से शिकायत कर दूँगी.
नवाज़ मुंह बनाकर कहता है
लो जी अब ख़ूबसूरती की तारीफ करना भी गुनाह हो गया है. सही कहते हैं लोग सच बोलने वालो की कोई कदर hi नहीं हैं हमारे समाज में. और अगर तुम्हारी फ्रेंड यहाँ होती तो मैं उसके साथ भी यही करता . अब जब तक तुम्हारी फ्रेंड नहीं है तब तक तुम hi उनकी जगह ले लो.
अपनी जीभ होंठों पर घूमते हुई आरती कहती है..
ये क्या बोल रहे हो तुम . मैं नीता की जगह कैसे ले सकती हूँ. तुम भी न कुछ भी बोलते रहते हो. मैं मालकिन हूँ तुम्हारी .. तुम्हारे छोटे मालिक की बीवी
नवाज़ हँसते हुई कहता है
तो मैंने कब कहा की तुम मेरी बीवी हो..
धत बेशरम कुछ भी कहते हो
ऐसा कह के वो शर्माकर पलट गयी

ारे मई ऐसा नहीं कह रहा हु
तो
बता रहा हु
क्या बता रहे हो
यही की तुम मेरे बीवी नहीं हो.. तुम तो मेरे मालकिन हो.. मेरे ब्यूटीफुल.. सेक्सी.. हॉट.. मालकिन हो. और मैं भला कैसे इतने सुन्दर मालकिन को किसी और की होने दूंगा.. मई तुम किसी और की नहीं होने दूंगा. तुम सिर्फ मेरी हो. सिर्फ मेरी मालकिन ...
नवाज़ ने इंदिरेक्टली आरती से बहुत कुछ कह दिया. जिसे आरती अच्छी तरह समझ रही थी लेकिन नवाज़ को लग रहा था की आरती को कुछ भी पता नहीं चल रहा है. नवाज़ की इस बात पर आरती ने कोई रिएक्शन नहीं दिया. बल्कि खिलखिलाकर हंसने लगी और नवाज़ से बोली.

तुमसे बहस करने में कोई नहीं जीत सकता .. इसलिए मैं भी मान hi लेती हूँ की मैं तुम्हारे hi हूँ. .. तुम्हारी hi मालकिन.. किसी और की नहीं..
पर अब तुम्हारे इस मालकिन को तुम्हारे सेवा करने का मौका दे दो..
हाँ क्यों नहीं
पर उससे पहले आपने मालकिन की एक सेवा कर दो..
बोलिये क्या सेवा करू
मुझे पानी पीला दीजिए. मुझे बहुत प्यास लगी है.
पहले बार आरती ने नवाज़ को रेस्पेक्ट देके दीजिये कहा था.. दो नहीं कहा tha..hamesha वो आपने पति को दीजिये कहती थी या आपने ससुर को.. इस घर मई वो उन दोनों के अलावा किसी को दीजिये ऐसे रेस्पेक्ट देखे बात नहीं करती थी.. नवाज़ तीसरा आदमी था जिसको आरती रेस्पेक्ट देखे बात ककर रही ी
आरती की बात सुनकर नवाज़ ने मुस्कुराते हुई कहा
ठीक है पिलाता हु
ऐसा कह के आरती के बैडरूम से किचन मई चला गया .. किचन में आकर पानी का गिलास मई पानी लेकर फिर से बैडरूम मई आया..
अब जब नवाज़ पानी लेन किचन मई गया तो आरती मिरर के सामने गयी .. हल्का सा उसने मेक उप किया .. ब्रश से अच्छे से चेहरा क्लीन किया ..उसके मेकअप बॉक्स मई से लक्मे की क्रीम निकली ..जल्दी से चहरे पर लगाए .. .. फिर हलके से लिपस्टिक लगाए.. ेएलइनेर लगाया .. .. आपने बाल ठीक तक किये .. फिर अपनी साड़ी ठीक की .. फिर वह एक अच्छा सा बॉडी स्प्रे उसे किया..
अब हालत ये थी की नवाज़ कह चूका था की आरती से मालिश ठीक नहीं लगती पर इधर आरती खुद अब नवाज़ की मालिश करना चाहा रही थी.. उसके लिए वो ये सब तयारी कर रही थी.. नवाज़ के चुंगुल मई अब वो पूरी तरह से आ गयी थी.. लघबघ उसने उसे बोतल मई उतर दिया था..
उधर जब नवाज़ किचन मई था तब वो यही सोच रहा था अब इस रांड को तो बोल चूका हु मालिश करना ठीक नहीं है पर अगर सच मई इसने मेरे मालिश नहीं की तो इतना अच्छा मौका हाट से चला जायेगा.. अब इस वक़्त वैसे घर मई कोई नहीं है.. नीता नहीं है. बुद्धा कहा बहार गया है और छोटा तो दिल्ली मई है.. इतना अच्छा मौका इसको छोड़ने के लिए नहीं मिलेगा .. अब मई क्या करू.. जोश जोश मई मैंने ये क्या कर दिया..
यही सोचते हुई वो अब बैडरूम मई दाखिल हो चूका था



















































