Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 24 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

नवाज़ अपनी चूचियों को देखता पाकर अपनी आंके फिर से बंद कर ली और आपने पल्लू चुकी पर ठीक कर लिया.. .अब नवाज़ ने आपने पेअर उसके झंगो पर हिलना बंद किया हुआ था..

मेरे पैरो की मालिश करो न

तब वो उसको देख के स्माइल करते हुई गर्दन हां मई हिलाते है





फिर उसके पेअर पाई तेल डालके मालिश करने लगी

और वो सोचने लगी..

इसमे इतनी हिम्मत कहा से आ गयी जो मेरे थेइस पाई ऐसे करने की.. आरती के मैं मई चल रही बातो से बेखबर नवाज़ आरती को निहारने लगा.. और आरती अपनी सोच मई थी.. पहले और अब उसके सोच मई फरक हुआ था नवाज़ को लेके..

तभी नवाज़ कहता है..

यार मेरे यहाँ पाई भी मालिश कर दे.. यहाँ भी दर्द है..

ऐसा कह के आपने झांग के लुंड के साइड वाले part पाई हाट रखता है..

तब आरती उसको देखके कहते है

नहीं मई नहीं करुँगी वह

क्यों.. कुछ नहीं होगा

नहीं करुँगी

ारे कुछ नहीं होगा.. डर मत..

मई नहीं डर्टी किसी को

फिर क्या शर्मा रही है क्या

तब आरती कुछ नहीं कहती

तब नवाज़ उसके पैरो पाई हाथ रख के वह मालिश करने लगा.. तब आरती उसको देखने लगी तब मालिश करते हुई उसकी साड़ी उप्पर करने laga..tab आरती जुख के एक हाट से साड़ी पकड़ लेते है तब नवाज़ कुछ देर वही मालिश करने लगा.. कुछ देर बाद आरती आपने हाट साड़ी से हटा लेती है..

नवाज़ अब फिर से धीरे धीरे आपने हाट साडी के साथ उप्पर कर रहा था .... ये देख कर आरती की धड़कने तेज होने लगी thi..use खुद पता नहीं चल रहा था की वो नवाज़ का विरोद करे या यहाँ से उठ के चली जाये या यही ऐसे hi बैठे रहे और जो हो रहा था उसे होने दे.. ….आरती को अब एक एक पल आज भरी लग रहा था …

उसके पेअर दबाते हुई वो धीरे धीरे ऊपर जाने लगा .. उसके कड़क हाथ आपने कोमल पैरो पर महसूस करके उसके बदन मई आग लगाने लगी ..अब वो उसके पिंडलियों तक पहुँच चूका था ..

जैसे hi नवाज़ का हाथ उसके पिंडलियों पाई पहुंचा तब आरती के मू से सिसकारी निकली ..

Shhhhhhhhhhhhssssssssss….

नवाज़ की उंगलिया को आपने पिंडलियों पर महसूस करके आरती का शरीर कंपनी लगा ..वो अब उसके पिंडलियों पर मालिश करने laga.aarti के की आँखे अब बंद हो गयी थी ..

नवाज़ ने अब थोड़े हिमायत दिखाई और अपनी लम्बी उंगलिया उसके घुटने तक ले गया .. साड़ी के अंदर से .. क्यों की आरती उसकी साड़ी उप्पर नहीं करने दे रही .. उसने साड़ी पकड़ राखी थी ..और उसके घुटनो के निचले साइड सहलाने लगा ..

Aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh… nawazzzzzzzzzzzzzzz….

उसकी सिसक ये बता रही थी की आरती को नवाज़ से कोई आपत्ति नहीं है .. उसके मालिश से .. आरती के ऐसे रिएक्शन का मतलब समाज के नवाज़ ने उसकी टांग को उठाकर अपनी झांग पर रख लिया . और मालिश करने लगा .. जैसे जैसे उसकी उंगलिया उप्पर जाने लगी उसके घुटनो से ... एक अजीब से तपापि का अहसास हो रहा था ..आरती को ..

तब नवाज़ कहता है

तेल की बोतल दो

मुझे नहीं करने तेल से मालिश

करके तो देखो

तब तेल की बोतल स्माइल करते हुई आरती नवाज़ को देती है ...





तब उसके पेअर पाई तेल डालके नवाज़ आरती के पैरो की मालिश करने लगा ..अब दोनों की नांगी टाँगे आपस मई घर्षण सा करने लगी ..नवाज़ जिस अंदाज़ मई उसके पैरो की मालिश कर रहा था ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनों ट्रैन मई बैठे है और दोनों के शरीर आगे पीछे हो रहे थे ..

कैसे लग रहा है रानी

धत बेशरम !!!!

पर आगे कुछ नहीं कहा ..तब नवाज़ ने आपने एक हाट उसके झंगो तक ले गया ..

तब उसका हाट पकड़ कर के आरती ने कहा ..

अच्छा बच्चू .. मुझसे hi चालाकी ...

ऐसा कहके उसका हाट पकड़ लेती है ..

तब उसका पेअर पकड़ के आपने और खिंच लेता है ..

ये क्या कर रहे हो

ऐसा कहा पर ज्यादा गुस्सा नहीं किया ..

तब उसके साडी दोनों पैरो से पीछे करने लगा ..घुटनो तक किया .. और फिर वह मालिश करने लगा ..आज पता नहीं उसके अंदर ये हिम्मत कहा से आ रही थी .. पर जो भी हो रहा था उससे आरती को बहुत मजा आ रहा था .. उसके मैं की इच्छा मनो पूरी हो रही थी ..

लेकिन तब उसे नवाज़ की आवाज़ आयी

अरे मेमसाब ji…tune क्यों कहा मेरे मई विश्वास नहीं है .. इतना भी अविश्वास ठीक नहीं है. ..

नवाज़ की बात आरती के कानो में पड़ते hi न चाहते हुए भी उसने नवाज़ की तरफ देखा और वो बोली





तुम काम hi ऐसे करते हो की विश्वास करना मुश्किल हो जाता है ..

ाचा ऐसा क्या किया मैंने

तुम नहीं पता

नहीं न तुम hi बताओ

अब वो उसकी मालिश करने लगा ..

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi करो .. नवाज़ ..

मज़ा आ रहा है

तब उसकी और देख के स्माइल करती है





हाँ

तब वो जरा ज्यादा जोर से मालिश करने लगा

आह्हः जरा धीरे …

और अपनी आँखे बंद कर लेती है

तुम्हारा अफेयर नीता से होते हुई तुमने वंदना से अफेयर किया

तुम किसने कहा

आँखे खोल के कहते है

मैंने आपने आँखों से देखा है

आँखों देखा हुआ हर बार सच नहीं होता .. कभी कभी आँखे भी धोका देते है

इस मई कैसे धोका

जब मेरा वंदना से अफेयर सुरु हुआ तब नीता से मेरा चक्कर नहीं था

मतलब नीता से बाद मई अफेयर किया तुमने

सही पकड़े हो

हे भगवन !!! मतलब पहले वंदना फिर नीता

हाँ रानी

तब उसको जोर से मरती है

No रानी समजे .. मई तुम प्यार से बाते कर रही हु इसका मतलब ये नहीं की उसका तुम फायदा उठा लोगे

ऐसा उसको देखते हुई कान पाई के बाल उप्पर करते हुई कहते है





तेरे हाट की वाच बहुत अच्छी है.. पसंद आयी मुझे..

अच्छी hi होंगे न.. मेरे प्यारे पति ने मुझे गिफ्ट दे थी.. मेरे बर्थडे पर

कब था तेरा बर्थडे

तुजे क्या करना है उससे

अब बर्थडे भी नहीं जान सकता क्या..

नहीं हरगिज़ नहीं





बड़ी अड्डा के साथ कहते है

क्यों

मेरे मर्ज़ी

अच्छा

हाँ जी

कहा फायदा उठाया मैंने

उसके पिंडलियों को जोर से दबाते हुई कहता है

आह्ह्ह्ह ..फिर ये रानी क्या है

गलती से मिस्टेक हो गयी

आगे से ऐसे मिस्टेक हुई तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा

और आँख बंद कर लेती है

जब नवाज़ ने देखा की आरती ने आँखे बांध किये हुई है तब वो आपने हाथ उसके साड़ी के अंदर डालता है .. तब आरती आँखे झट से खोलती है और उसका हाट पकड़ लेती है पर कहती कुछ नहीं तब नवाज़ उसकी साडी दोनों पैरो पर से पकड़ के उप्पर करने लगा .. वो सोच रहा था आरती विरोद नहीं कर रही है तो यही मौका है इस की साड़ी उप्पर कर के इसकी झांग की मालिश कर दू ..पर नवाज़ के ऐसे करने से आरती को बहुत बड़ा झटका लगा ..

कमीने

ऐसा कह के उठ कड़ी हुई





और फिर गुस्सा दिखते हुए उसे कहने लगी

मैंने कहा था न फिर से मिस्टेक हुई तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा

तब नवाज़ कहता है

अरे आरती तुम हमेशा मुझसे गुस्सा क्यों होती हो एक बार थोड़ा सोच के हमसे दोस्ती भी कर लीजिये न..

कभी नहीं…

क्यों

क्यों की तुम्हारा इरादा गलत है…

मेरा इरादा जाने बिना तुम कैसे कह सकती हो की मेरे इरादे गलत hai..ho सकता है दोस्ती करने के बाद तुम को हम सही भी लगे

नहीं लगेगा

ाचा सोच लो एक बार दोस्ती काबुल तो करके देखो दोस्त के साथ एक हमसफ़र भी बन सकता हु जो तुम जन्नत की सैर करा सकता है ..और पसंद न आये तो छोड़ do…hahaha

तुम्हारा अब ज्यादा हो रहा है
 
नहीं लगेगा

ाचा सोच लो एक बार दोस्ती काबुल तो करके देखो दोस्त के साथ एक हमसफ़र भी बन सकता हु जो तुम जन्नत की सैर करा सकता है ..और पसंद न आये तो छोड़ do…hahaha

तुम्हारा अब ज्यादा हो रहा है....

वो जाने दो .. तुमने मेरे इतनी अच्छी मालिश की ... उसके लिए तहे दिल से धनवाद ....

तब आरती उसे गौर से देखने लगी ..





पर कहा कुछ नहीं उसने

एक और काम करो मेरे लिए

अब क्या बचा है

मुझे एक बार नहलाओ दो

मई क्या तुम्हारे अब्बा की नौकर हु.. जो तुम हर बार नहलाओ

नहीं आप तो हमारी प्यारी मेमसाब हो

तब उसकी और देखते हुई स्माइल करते हुई शर्मा जाती है..





प्यारे मेमसाब .. और मई

हाँ नहीं तो कोण

वंदना

वो कहा की मेमसाब

मुखिया की बेटी है वो

कहा का मुखिया.. बड़े मालिक के वजह से मुखिया बना हुआ है वो

बहुत कुछ पता है तुम

हाँ पता तो है हमें बहुत कुछ

तब आरती उसको देखते है

नहलाओ न एक बार

बिलकुल नहीं

तेल तुमने लगाया तो निकलना भी तुम hi पड़ेगा न

तब हस्ते हुई कहती है

ये अच्छा है तुम्हारा.. पहले कहते हो मेरे बॉडी को तेल लगगे मालिश करो और बाद मई कहते हो तुमने तेल लगाया है तो तुम hi निकालो

तब नवाज़ हँसाने लगा..

फिर नहलाओगे न

क्या कर सकती हु.. हुकुम तो मानना hi पड़ेगा न

तब नवाज़ उसके पास जाता है . . और उसको कुछ संजय आये उससे पहले उसके कमर के पीछे हाट दाल के उसे आपने से सत्ता लेता है..





ouchhhhhhhhhhh..

हुकुम नहीं मेरे प्यारे मेमसाब को रिक्वेस्ट है

बदमाश तू फिरसे स्टार्ट हो gaya..sharam नहीं आती तुझे अपने मालकिन के साथ ऐसा करते हुई

और आपने कमर पाई नवाज़ ने जो हाथ था वो हाथ हटाने लगी आपने एक हाट पीछे डालके पर उसकी पकड़ बहुत पक्की थी .. आरती आपने नाज़ुक हाथ से वो हाथ हटा नहीं पायी ..

कोण मेमसाब मई तोह अपनी फ्रेंड से बात कर रहा हूँ

इस बात पे आरती है देती है

अच्छा बच्चू मेरे साथ मस्ती करेगा तू

करना तो चाहता हु पर तू करने कहा दे रही है

ऐसा कह के आपने छथि उसके आम को टच करके आपने चेहरा उसके चहरे के बहुत करीब लेक उसको किश करने वाला था





तब वो चेहरा पीछे कर के कहती है

फिर ये क्या है

ये तो बस सुरवात है

अच्छा जी

आरती ु र लुकिंग हॉट एंड सेक्सी

अच्छा जी तुम अपनी मालकिन

प्यारी मालकिन

तब स्माइल करते हुई कहते है

हाँ हाँ पता है .. तुम्हारी प्यारे मालकिन..

आरती अपने हसीं चेहरे पे अदा के साथ एक कातिल मुस्कराहट लाते हुए नवाज़ की आखो मई देखती है... और कहते है ..





अब तुम हॉट एंड सेक्सी लग रही है

हाँ जी मेरे प्यारी मालकिन

लगता है वंदना से जी भर गया है

ऐसा नहीं है

क्या ??

जरा छीलते हुई कहती है .. अभी भी उसके कमर पाई नवाज़ का हाथ था .. और वो आरती को चिपक के खड़ा था ..

मतलब नहीं

क्या नहीं

आरती को इतने देर तक नवाज़ के मू से बदबू तो आ रही थी पर वो ये शो नहीं करना कहती thi....par अब कण्ट्रोल से बहार हो गया है ..

मुझे चोर दो .. मुझे बदबू आ रही है

कैसे बदबू

मुझे क्या मालूम .. तुम्हारे मू से आ रही है ..

तंबाकू की हो सकती है

हाँ हो सकती है

तेरा पति नहीं खता क्या

नहीं .. उन क्या आपने जैसा समजा है क्या

नहीं तेरा पति है तो स्पेशल hi होगा

हटो पीछे ..मुझे आदत नहीं ऐसे बदबू की

ऐसा कह के उसके छथि पाई आपने दोनों हाथ रख के जोर से पुश करती है और उसके कब्जे से दूर होती है ..
 
नहीं तेरा पति है तो स्पेशल hi होगा

हटो पीछे ..मुझे आदत नहीं ऐसे बदबू की

ऐसा कह के उसके छथि पाई आपने दोनों हाथ रख के जोर से पुश करती है और उसके कब्जे से दूर होती है ..

अब ये टॉवल ले लो और जेक नाहा लो .. बिठ्डाय बॉय ..

ऐसा कह के टॉवल और सोप उसको देके दूसरा टॉवल और सोप लेके खुद दूसरे बाथरूम मई जाने लगी ..

नहलाओगे नहीं

तब बाथरूम मई जाते हुई पलट के देखते हुई कहते है.. स्माइल करते हुई..





एक दिन मई hi सब चाहते हो .. तेल की मालिश भी करू और नहलाओ भी .. चलो जाओ बहार वाले बाथरुम मई ..

ऐसा कह के बाथरूम का दूर बंद करते है .. और इधर नाराज़ मैं से नवाज़ बहार वाले बाथरूम मई चला जाता है ..थोड़े देर बाद नवाज़ बाथ करके बैडरूम मई आता है .. अभी तक आरती की बाथ नहीं हुई थी .. कुछ 4-5 मिनट बाद वो बाथरूम से टॉवल में hi बाहर आ जाती है..





तब नवाज़ को आरती के भीगे बदन का नज़ारा देखने को मिल जाता hai…dono एक दूसरे को देखने लगते है .. तब खुद को संभालते हुई आरती पलट के बाथरूम मई जाती है और कहती है ..

नवाज़ तुम थोड़े देर बहार जाऊ .. मुझे साड़ी पहननी है

तब नवाज़ बहार चला जाता है ..

थोड़ी देर बाद नवाज़ फिर से अंदर जाने के लिए बैडरूम के दूर पाई खड़ा हुआ .. तब आरती अंदर मिरर के सामने खड़े होक बाल टॉवल से पांच रही थी ..बाल सामने करते हुई ..





आरती अब तक बाथरूम से आकर कपडे चेंज कर चुकी थी उसने इस वक़्त एक नयी साडी पहन चुकी विथ टाइट स्लीवलेस ब्लाउज के साथ .. और मिरर के सामने खड़े होक आपने मेकअप कर रही थी और थोड़े बहुत भीगे बाल थे उन पॉंच भी रही थी ..अब उसको नवाज़ के आने का इंतजार था.... जिसके लिए वो अभी साझ धज के बड़े सेक्सी साड़ी पहन राखी थी.... उसे नवाज़ नज़दीक आने के बाद उसके बदबू भी आती थी पर वही दूसरी तरफ उसके दिल मई एक बेचैनी भी थी नवाज़ के आने की....... वो इस वक्त अकेली थी घर mai.....Usko थोड़ा दर भी था इस बात ka.......par उसे पता नहीं था नवाज़ कब से उसे घर रहा है .. उसे देख रहा है ..

इधर नवाज़ उसे देख रहा था .. आरती को देखते हे उसका दिल तेजी से धड़क उठता है...... आरती का गोरा मखमली बदन देखते हे उसके मुँह मई पानी आ जाता है..... और उसका लौड़ा ांडरपांत मई अकड़ जाता है ......वो अपने काले मोटे हूंठ पर अपनी जीब फेरते हुए अपना लौड़ा अंडरपैंट के उप्पर से एडजस्ट करता है .. और उसका बदन देखने लगता है ..नवाज़ आरती की नंगी पीठ और कमर देख रहा था ... उसका मन कर रहा था की जाके उसको पीछे से जहापात ले.. पर नवाज़ खुद पे कण्ट्रोल करता है... उसे दर था की कही उसने ऐसे वैसे हरकत कर दी और बड़े शेठ ने उसको घर से निकल दे दिया तो जो नजारा देखने को मिल रहा है वो भी नहीं मिलेगा.....

इधर आरती नवाज़ के बारे मई सोच कर आपने बाल संवर रही थी .. तभी नवाज़ कहता है

हो गयी तैयार

आरती का दिल जोरसे धड़कने लगता है नवाज़ की आवाज se...wo मुस्कुराती हुए गर्दन घुमा के नवाज़ की और देखने लगती है …

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वो भी अब नवाज़ की आखो मई देखने लगी .. वो उसकी आँखों मई देखते है ......

नवाज़ उसे जिस तरह से देख रहा था मनो उसे खा hi जायेगा ये देख कर आरती हैरान रह जाती है और उसका दिल भी जोर से धड़कने लगता hai...wo भी अब नवाज़ की आखो मई देखने लगी .. वो उसकी आँखों मई देखते हुए कहती है ......

दिन भर क्या ऐसा hi रहना है क्या .. कपडे नहीं पहनने क्या ..

कैसे पहने कपडे .. कपडे तो मेरे तेरे पास है

मई क्या लेके बैठी हु क्या तुम्हारे कपडे .. वह बीएड पाई है .. जेक पहन लो

शुक्रिया ..

वेलकम वेलकम

कह कर हँसाने लगी और वो अपनी सेक्सी अदा के साथ मुस्कुराती हुए पीछे मूढ़ कर नवाज़ को देखते हुई बैडरूम के दूसरे कार्नर मई जाने लगी ......

नवाज़ आरती की इस अदा का दीवाना हो गया.... आरती ने उससे पागल कर दिया था... उसके अंदर की सोई हुई हवस और बाद जाती hai....aur वो आरती को देखते हुई बैडरूम के अंदर आने लगता hai....aarti अपनी कमर मटकते हुए आगे चल रही थी और उसकी गोरी मखमली पीठ और सेक्सी मुलायम बहार को निकली हुई 38 इंच की बड़ी गांड इस वक्त नवाज़ की आखो के सामने थी..... उसकी बड़ी मटकती गांड ने तोह नवाज़ के होश उदा दिए थे..

अब आरती बाथरूम मई गयी थी .. और इधर नवाज़ कपडे पहनने लगा था ..

2-3 मिनट बाद ..

अब नवाज़ ने कपडे पहने थे .. और आरती बाथरूम मई से आके उसके सामने कड़ी थी..





और नवाज़ उसके खूबसूरत से बदन को देखते हुई मोबाइल पाई गण लगता है

तेरे लिए संजाति संवारती हु

तब आरती गुस्से से उसे देखते है

अब मैंने क्या किया

ये गाना क्यों लगाया

अब गण लगाने पर भी पाबन्दी है क्या

तब आरती हस्ती और कहती है





मुझे सब पता है

क्या पता है

ऐसा कह के उसके पास आने लगा ..

मेरे पास क्यों आ रहे हो

तुम क्या पता है ये जानने के लिए

दूर से क्या पता नहीं कर सकते

दूर से मज़ा नहीं आता

तब हस्ते हुई कहती है

अब क्या पता करने मई भी तुम मज़ा चाहिए

हाँ हर चीज़ मई मुझे मज़ा चाहिए .. नहीं तो

नहीं तो क्या

नहीं तो मज़ा नहीं आता

और दोनों हँसाने लगे
 
मुझे सब पता है

क्या पता है

ऐसा कह के उसके पास आने लगा ..

मेरे पास क्यों आ रहे हो

तुम क्या पता है ये जानने के लिए

दूर से क्या पता नहीं कर सकते

दूर से मज़ा नहीं आता

तब हस्ते हुई कहती है

अब क्या पता करने मई भी तुम मज़ा चाहिए

हाँ हर चीज़ मई मुझे मज़ा चाहिए .. नहीं तो

नहीं तो क्या

नहीं तो मज़ा नहीं आता

और दोनों हँसाने लगे

कैसा लग रहा है तुम मालिश और नहाने के बाद

तब आरती के चूचियों पर नज़र गड़कर कहता है





अब बहुत अच्छा लग रहा है... बहुत अच्छा दिख रहा है नज़ारा.

आरती अनजान बनाने का नाटक करते हुई उसके सामने खड़े होक अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुई कहते है

कौन सा नज़ारा ... यहाँ तो कोई नज़ारा तो है नहीं.

अरे आरती रानी कमरे का नज़ारा…. मैं बोलै कमरे का नज़ारा बहुत अच्छा दिख रहा है... अब..

तब उसकी और देखते हुई कहते है





अब तक अच्छा नज़ारा नहीं था क्या कमरे का

आरती के ऐसे कहने के बाद नवाज़ उसकी चूचियों को देखने laga..uski चूचियों को देखते हुई कहता है..

पहले भी अच्छा था पर पहले से अच्छा अब लग रहा है

ऐसा कह के उसके नज़दीक जाता है तब आरती पलट जाती है .. गर्दन निचे कर के





एक्चुअली आरती समझ गयी की नवाज़ उसकी चूचियों के बारे में बात कर रहा हैं. ..इसलिए वो शर्मा गयी थी .. वो नवाज़ का सामना नहीं करना चाहा रही थी ..

फिर आरती चली जाती है.... बैडरूम मई छोटा सा फ्रीज था वह ..फ्रीज़ के पास जाने के बाद आरती झुक कर फ्रीज़ मई से कोल्ड ड्रिंक्स बोतल निकलने लगती है .....झुकने की वजा से उसकी गांड बहार को आ रही thi....use देख के नवाज़ कहता है ..

स्स्स्सस्स्स्स मन तो कर रहा है इस को पकड़ कर यही छोडूं लेकिन साला लफड़ा हो जायेगा....

ये लो नवाज़ कोल्ड ड्रिंक्स ..प्यास लगी होगी न तेरे को...

नवाज़ मैं मई कहता है

प्यास तो लगी है मुझे आरती rani...bas एक बार तू मेरे निचे आजा फिर मैं मेरी प्यास जमकर भुजङ्गा...

नवाज़ बोतल ले लेता है ..

मां गए तुम को आरती ..माय डिअर मेमसाब ....तुम कितने फ़िक्र है मेरे .. मेरे मैं की बात तूने कैसे जान ली ..

शरमाते हुई कहते है...

मानना तो पड़ेंगे हे ...

पर एक hi बोतल

तो क्या हुआ .. एक बोतल मई से हम पि नहीं सकते क्या

हाँ पि सकते है न रानी

ऐसा कहते हुई नवाज़ आपने मू से कोल्ड ड्रिंक ओपन करता है और पीने लग्गा .और फिर नवाज़ ने उससे अपनी जूठी कोल्ड ड्रिंक उसके सामने कर दी और उसकी आँखों में देखने लगा. आरती ये सब देख रही थी. आरती भी नवाज़ की आँखों में देखने लगी





उसके आँखों मई देखते हुई उसके हाथ से बोतल ली और नवाज़ को देखती हुई पीने लगी.

आरती ने थोड़ी सी कोल्ड ड्रिंक पी और नवाज़ की और देखते हुई एक मेढक सी स्माइल दी. नवाज़ का मैं कर रहा था के जैसे अभी उससे पकड़ के उसके होंठ चूसे दे.

अब्ब आरती और नवाज़ बरी बरी कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे . आरती आज नवाज़ के साथ बोहोत एन्जॉय कर रही थी . ये उसकी ज़िन्दगी के नए सफर की शुरुवात थी. दोनों बातचीत करने लगे .. कोल्ड ड्रिंक पिटे हुई ..

तब आरती कहती है..

एक बात कहु तुम नवाज़

बुंडस्ट कहो रानी .. पूछ क्यों रही हो

तुम पहले से काफी चेंज हो गए हो

क्यों तुम ऐसा क्यों लगता है

क्यों की तुम अब मेरे नज़र से नज़र मिला कर नहीं देख रहे हो.. सच कहा न

ऐसा नवाज़ की आँखों मई देखते हुई कहते है

नहीं .. नज़र से नज़र मिलाये तो क्या हो जायेगा ..

हम लड़कियों की नज़र तुम लड़कों से तेज़ होती है तुम लड़के तो हमारे सामने हार hi जाते हो

ऐसा

हाँ जी

तो हो जाये एक बार नज़र से नज़र की तसल

हाँ क्यों नहीं .. मई क्या डर्टी हु क्या

नज़ारे मिला रही हो पर उसके बाद जो होगा तब मुझे मत बोलना

क्या करोगे .. मई तुम्हारे आँखों मई देखूंगी तुम जो करना है करो

प्ल्ज़ मुझसे नज़ारे मत मिलाओ..

क्यों

तुम पता नहीं मुझे क्या होता है जब तुम मुझे देखते हो तब

क्या होता है

बहुत कुछ

और क्या करोगे जब मई तुम्हारे आँखों मई देखूंगी तब

मई क्या करूँगा मई तो बेहोश हो जाता हु तुम देख के

बेहोश होते हो मुझे देख के

हां

मुझे नहीं लगता

कही मुझसे गलती हो गयी तो

गलती करने से पहले थोड़े न पता होता है की अब गलती हो जाएँगी

क्या पता

ऐसा बोल के उसके कमर के पीछे हाट दाल के उसको आपने बहो मई ले लेता है ..





और उसके गर्दन को किश करने वाला था तब आरती कहती है

चलो पीछे हटो जी

बोल के उसको पीछे धकेल देती है ..

आरती के लिए ये डबल शॉक था .. पहले उसके कमर को पकड़ा और फिर गर्दन पर होंठ रखे .. ये अच्छा हुआ उसने नवाज़ को पीछे धकेल दिया नहीं तो वो उसके गर्दन को चुम hi लेता ..
 
तभी आरती का मोबाइल बजता है.. मोबाइल देखके आरती कहते है..

अब ये कोण है

किसका है

कोण है पता नहीं.. अननोन नंबर है

क्या??

आरती ने क्या बोलै नवाज़ को समाज नहीं आया

नया नंबर है

उठा न फिर.. उतने के बाद hi पता चलेगा कोण है

मई अननोन नंबर उठाती नहीं

उठा उठा मेरे होते हुई किस का डर

ऐसे कह रहे हो जैसे कही के डॉन हो

और हसने लगे और उधर फ़ोन की जानते बजने लगी.. तब कहते है .. उसे देखते हुई..





अब तुम कह रहे हो तो उठा लेती हु

और कॉल उठा लेते है..

मेमसाब मई हरिया.. वो बड़े साहब ने कहा आप को कॉल करने को

हाँ बोलो

वो आपने बॉक्स निचे रखवा दिए क्या

नहीं

मई तो यहाँ खेत से निकल रहा हु.. अब तक नहीं निकले तो मुझे आकर निकलकर ले जाने मई बहुत देरी होगी न मेमसाब..

ठीक है तुम आ जाओ तब तक हम निचे रखवा देते है

हम ??

हाँ ..मई और नवाज़ ..

ठीक है फिर मई आता हु मेमसाब

फ़ोन रखते hi आरती नवाज़ को कहती है

चलो उप्पर के बॉक्स निचे रखवा देते है

हाँ चलो

वो अब हाल मई आ गए थे ..

तुम चलो उप्पर मई पापा को पुचके आयति हु कोनसे बॉक्स निकलने है ..

जल्दी आओ ..

जी ..

आरती ऐसा कहके आपने ससुर को कॉल लगाती है और नवाज़ उप्पर चला जाता है.. .. उप्पर वाले रूम मई बॉक्स थे जो उतरने थे ..

कुछ 10 मिनट बाद आरती उप्पर आती है .. वो उप्पर आती है तब नवाब उप्पर रूम के बड़े बीएड पर टंगे फैलाके सोया था.. दूर की तरफ नवाज़ की गांड थी.. आरती की पहले नज़र उसपर hi गयी

तुम तो किसी नवाब जैसे सो रहे हो ..

तब नवाज़ गर्दन घुमा के आरती को देखता है तब वो स्माइल करते हुई उसे hi देख रही थी ..





उसे देखते हुई नवाज़ कहता है

अब हमारी प्यारी मेमसाब इस रियासत की महारानी है तो उनके रियासत के हम नवाब बन गए ..

तब स्माइल करते हुई कहते है .. बड़े अड्डा के साथ





नवाब साहब उठ जाओ .. बॉक्स निचे उतरने है ..

उठा लो फिर महारानी साहिबा

अब क्या तुम उतना भी पड़ेगा क्या

नवाब कहा खुद से उठता है .. पता नहीं है क्या नवाब को उनके बेगम या दासी उठाती है

तब स्माइल करते हुई कहते है

न मई तुम्हारी बेगम हु न दासी .. और मैंने नवाब क्या कह दिया खुद को क्या सच का नवाब समाज रहे हो क्या

तब हाट उप्पर उतके कहती है

उठा लो न .. अग्रवाल रियासत की महारानी

तब नखरे से कहते है

बिलकुल नहीं ..

क्यों भला

मई क्या बुद्धू हु क्या .. तुम्हारी प्लानिंग नहीं जानती क्या

मेरे कोई प्लानिंग नहीं है अग्रवाल खंडन की बहु

ये नया क्या है .. अग्रवाल खंडन की बहु

नहीं हो क्या

तब बीएड पाई जहा नवाज़ सोया था वह थोड़ा जुख के कहती है..





हु न .. ये मंगलसूत्र नहीं दिख रहा है क्या .. ये अग्रवाल खंडन की निशानी है .. अरविन्द अग्रवाल ने मुझे पहना है .. 7 फेरो के साथ .. हज़ारो लोगो के सामने
 
अग्रवाल खंडन की एकलौती बहु

हां हु

अगर तू मजे पैट जाये तो क्या मई अग्रवाल रियासत का नवाब बन सकता हु क्या





सपना अच्छा है

ऐसा एक्शन करते हुई कहते है तब नवाज़ उसका हाट पकड़ के खुंचाने का तरय करता है तब वो झट से पीछे हैट जाती है

और डांस और एक्शन करते हुई कहते है





प्लान अच्छा था पर ुंफोरटूनटेली फ़ैल हो गया .. बच्चू मई भी आरती अग्रवाल हु ..

अरे रानी ऐसा कोई प्लान नहीं था पर तू इतने नज़दीक आये तो रहा नहीं गया

ाचा तुमसे रहा नहीं गया .. और मई नज़दीक आयी ..

नहीं तो क्या ..

मई जानती थी तुम्हारा ऐसा hi कोई प्लान है

सच मई प्लान नहीं था

वो जाने दो वो उठ जाओ ..

उतने का मैं नहीं हो रहा है

अब मेरे नवाब साहब का मान नहीं कर रहा है

हां महारानी .. साहिबा ..

या बेगम साहिबा कहु

तब आरती शर्मा जाती है





धत बेशरम कुछ भी बोलते हो

महारानी साहिबा सच मई मैं नहीं हो रहा है .. कुछ ऐसा करो न जिस से उतने का मैं हो जाये

तो क्या डांस करू

ये अच्छा आईडिया है

नौटंकी मत करो चुपचाप ुतो

ठीक है ुटालो

तब नखरा करते हुई कहते है

ताकि तुम मुझे खिंच लो

ऐसा कुछ नहीं करूँगा .. तुम्हारी कसम

मेरे झूठी कसम मत खाओ

नहीं खाऊंगा

ऐसा कह के हाट ऊपर उठा के कहता है

उठा लो ..

ऐसे क्यों रहे हो जी

एक बार उठा लो

कुछ नहीं करोगे न

बिलकुल नहीं

कुछ प्लान नहीं पाक रहा है न तुम्हारे दिमाख मई

नहीं है

तब ठीक है

ऐसा कह के आरती एक हाट से बीएड के साइड को पकड़ लेती है और दूसरे हाट से नवाज़ का हाट को पकड़ के आरती वो हाट खींचने लगी … उसे उतने के लिए ..
 
अब नवाज़ अधलेटा खड़ा था एक हैट आरती ने पकड़ा तह ..और उसका हाट खींचने लगी ..पर नवाज़ उठा नहीं रहा था..

उठ जाओ न जी .. क्यों परेशां कर रहे हो ..

खिंच न जरा जोर से .. खाना खाया नहीं क्या

तुमने कहा खाने दिया

...

मैंने कब मन किया

तुम्हारे मालिश के चक्कर मई ध्यान hi नहीं रहा

कुछ नहीं मई अब आपने हटो से अपनी रानी को खाना खिलाऊंगा

तब शर्माके कहते है

कोई जरुरत नहीं है.. तुम उठ जाओ तो बड़ी मेहरबानी होगा मुज पर

तो खींचो जोर से

हां खिंच रही हु

ऐसा बोल के जोर से खींचते है .. आरती के जोर से खींचते hi नवाज़ जोर से आरती की और खिंचा चला जाता है और आरती पर गिर जाता है .. आरती नवाज़ का वेट सम्बल नहीं पति और वो पीछे वाल पाई गिरती है ..नवाज़ को लेके .. अब उनके मू एक दूसरे के बहुत क्लोज थे ऑलमोस्ट उसने आरती को किश किया था





मतलब होंटो को होंठ टच हुई थे





तब आरती मू दूसरी तरफ कर लेती है

सॉरी रानी ..वो पता hi नहीं चला.. तुमने बहुत जोर से जो खिंचा ..

आपने तो बोलै था न जी .. जोर से खींचो ..

नवाज़ को उसने पहली बार आप कहा तह

हाँ पर तूने बहुत जोर से खिंचा तो मेरा बैलेंस बिगड़ गया ..

तब आरती नवाज़ की और देखते हुई गर्दन हिला कर हूँ कहते है..





तब नवाज़ आरती के आँखों मई देखते हुई कहता है

नज़दीक से तू और hi खूबसूरत लग रही हो

आरती कुछ नहीं बोलती बस निचे को देखने लगती है ..निचे देखते हुई कहते है..

अच्छा जी

और फिर आरती धीरे से चेहरा ऊपर उतके उसकी तरफ देखते है.. तब उसके जो बाल के 2 लत जो उसके आँखों पाई आये थे वो नवाज़ उप्पर लेता है .. और वाल पाई दोनों हाथ उसके दोनों साइड से रखता है .. उसका चेहरा आरती के चहरे के बहुत करीब लता है





उसके इतने करीब आने से आरती की साँसे जोरो से चलने लगी ..वो एक साड़ी मई थी .. वो उससे hi देख रहा था ..रूम के अँधेरे मई बल्ब की लाइट मैं नवाज़ को आरती और खूबसूरत लग रही थी ..उस हलके से लाइट मई आरती का बदन और निखार कर दिख रहा था ..आरती कुछ नहीं कह रही थी बस नवाज़ को देखे जा रही थी .. और इधर नवाज़ आगे बढ़ाने से डर रहा था ..वो आपने आप से मैं मई कहता है ..

क्यों डर रहा है नवाज़ .. देख नहीं रहे हो तूने उसके होंटो की पप्पी ली पर उसने ज्यादा गुस्सा नहीं किया .. वो तो जल्दबाज़ी मई हुआ पर अब तू उसके इतने करीब खड़ा है पर वो तुजे कुछ नहीं कह रही है ..क्या सोच रहा है नवाज़ तू .. कुछ कर .. इस रांड को किसी तरह आपने निचे ला और वो भी अभी .. क्यों की घर मई इस वक़्त कोई भी नहीं है .. ऐसा मौका कभी नहीं मिलेगा तुम .. बाद मई हरिया आएगा .. .. बड़े मालिक आएंगे .. उसको तेरे प्यार मई मदहोश कर और छोड़ दाल इससे ... फिर तेरे मज़ा hi मज़े है .. इतना करारा माल रोज छोड़ने को मिलेगा और उप्पर पैसा भी तू रोज इससे निकल सकता है .. तेरा पूरा कर्ज़ा इस रांड के जरिये तू उतर सकता है ..

ये दोनों ऐसे खड़े थे और आपने सोचविचार मई दुबे थे तभी एक छिपकली जोर से आरती के पैरो के पास गिर जाती है ..

एक्चुअली वो रूम कोई ज्यादा उसे नहीं करता था ..जब वो दोनों उस वाल पाई गिर जाते है तब उसे वाल के उप्पर साइड एक तस्बीर फ्रेम मई तंगी राखी थी ..ये छिपकली उसके पीछे hi थी .. ये दोनों वाल पाई जोर से गिराने की वजह से छिपकली बहार आ जाती है और उप्पर जाने लगती है तब वो निचे गिरती है ..

छिपकली की वजह से आरती बहुत गभरा जाती है ..और बिना कुछ सोचे नवाज़ से लिपाप्त जाती है ..





आरती अग्रवाल .. दीपक अग्रवाल की बहु और इस बड़े हवेली की मालकिन .. गाँव की सबसे बड़े फॅमिली की बहु एक गंदे बदसूरत लफड़ेबाज़ नौकर से लिपटी थी बिना कुछ सोचे.. एक छिपकली से दर kar....ab सन ये था के आरती का गोरा कोमल सा बदन नवाज़ से लिप्त हुवा था....

इतनी जवान खूबसूरत ाव्रत को खुद से चिपका हुवा पाकर नवाज़ का लौड़ा जैसे और खुंखार हो गया tha....nawaz का बदन रूम की गर्मी की वजह से अब थोड़ा गीला हो चूका था ...नवाज़ का शर्ट कुछ हद तक गिला हुआ था .. ....आरती दर की वजह से नवाज़ से लिपट ज़रूर गयी थी लेकिन उसने गलती कर दी thi....aab इसे आरती की बदकिस्मती कहे या नवाज़ की kismat....jo नहीं होना चाहिए था वो अब हो चूका था और अब आगे और न होने वाला क्या होगा ये भगवन को hi पता था ..
 
इतनी जवान खूबसूरत औरत को खुद से चिपका हुवा पाकर नवाज़ का लौड़ा जैसे और खुंखार हो गया था .... नवाज़ का बदन रूम की गर्मी की वजह से अब थोड़ा गीला हो चूका था ... नवाज़ का शर्ट कुछ हद तक गिला हुआ था .. ....आरती दर की वजह से नवाज़ से लिपट ज़रूर गयी थी लेकिन उसने गलती कर दी thi....aab इसे आरती की बदकिस्मती कहे या नवाज़ की kismat....jo नहीं होना चाहिए था वो अब हो चूका था और अब आगे और न होने वाला क्या होगा ये भगवन को hi पता था ..

नवाज़ आरती के अचानक यूँ लिपटने से सम्भलने के बाद अब आरती के जिस्म को खुद पर महसूस करने लगता है ... उसकी छाती में आरती के बड़े चुके धंसे हुए the....aur नवाज़ के गीले कपड़ों की वजह से आरती के निप्पल्स जो टाइट हो गए थे जो नवाज़ को चुभ भी रहे the....nawaz अब आरती को जोरसे कास लेता है...





वो अभी भी दरी हुई थी इसलिए आरती अभी भी लिपटी हुई thi....Usko बहो मई लेके नवाज़ मैं मई कहता है ..

आह्ह्ह्ह क्या बदन है तेरा आरती रानी ..अब जाकर हाथ लगी है तू mere....kabse तेरे जवान जिस्म पर मेरी नज़र थी और मेरे लौड़े को बोहत तड़पाया है तेरी छूट ने .... उसका बदला लेने का वक़्त आ गया है....

आरती अभी भी आंख बांध किये हुई थी .. उसे ये सब का ख्याल नहीं tha....nawaz का लौड़ा अब आगे से आरती की छूट पर साड़ी के ऊपर से दस्तक दे रहा था जैसे कह रहा हो जल्दी दरवाज़ा खोल मुझे अंदर आना hai....aarti के दोनों हाथ नवाज़ की कमर के इर्द गिर्द थे और नवाज़ के हाथ आरती के पीठ par...ab वो आरती की पीठ पर अपने हाथ फेरने लगता hai....aarti की मुलायम गोरी स्किन पर उसको खुरदुरे हाथ फेरने में मज़ा आ रहा था....

वो जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता tha....use पता था आरती को अपने निचे लेन का इससे ाचा मौक़ा उसे नहीं मिलने wala....aarti की पीठ पाई हाथ फेरने से अब वो होश में आ रही thi...ab उसे अहसास होता है के नवाज़ के हाथ उसकी पिट पाई है और वह वो आपने हाट फेरने लगा था.. वह हाट फेरने से अब आरती के दिल की धड़कन और तेज़ हो जाती है....

अब आरती अपनी ऑंखें खोल चुकी थी .... तभी उसे और एक झटका लगता है के उसके आगे एक लोहे जैसी चीज़ टकरा रही है ...आरती को ये जानने में देरी नहीं लगती के वो क्या है ... आरती के शरीर में अजब सी लहर गुज़रती hai....wo नवाज़ के बहो मैं से हटना चाहती थी लेकिन पता नहीं क्यों उसका शरीर उसका साथ नहीं दे रहा था....

तब उसे फिर अहसास होता है के नवाज़ के हाथों का दबाव उसकी पि पर और सख्त हो चूका है....

आरती - आआह्ह्ह्ह....

चुके तो उसके वैसे भी नवाज़ की छाती से दबे पड़े the....upar से वो दोनों पुरे भीगे हुई थे..... मतलब नवाज़ का शर्ट भीगा था और अब उसको चिपकने की वजह से आरती का ब्लाउज भी भीग गया था .. आरती की सिसकारियों की आवाज़ नवाज़ ने सुनी थी और उसके चेहरे पर घिनौनी स्माइल भी थी के आरती ने अभी तक रेसिस्ट नहीं किया tha....aarti रेसिस्ट करने की हालत में थी भी नहीं....

एक जवान खूबसूरत शादीशुदा ाव्रत को अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द वो भी एक नौकर के सख्त शरीर का अहसास अपने मुलायम बदन पर होना .... वो नहीं जानती थी के ये सब कहाँ से शुरू हुआ ... सामने से उसे नवाज़ का बड़ा लौड़ा लगातार झटके दे रहा था जैसे आरती की छूट को उकसा रहा हो के डैम है तो अपना दरवाज़ा kholo.....insab में आरती को खुद hi पता नहीं चला के कब उसकी छूट गीली हो गयी ....
 
एक जवान खूबसूरत शादीशुदा ाव्रत को अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द वो भी एक नौकर के सख्त शरीर का अहसास अपने मुलायम बदन पर होना .... वो नहीं जानती थी के ये सब कहाँ से शुरू हुआ ... सामने से उसे नवाज़ का बड़ा लौड़ा लगातार झटके दे रहा था जैसे आरती की छूट को उकसा रहा हो के डैम है तो अपना दरवाज़ा खोलो ..... इनसब में आरती को खुद hi पता नहीं चला के कब उसकी छूट गीली हो गयी ….

इधर नवाज़ बहुत खुश था .. एक जवान शादीशुदा औरत इस हालत में वो भी उसकी बाँहों men....usne कभी सोचा भी नहीं tha....lekin वो कहते हैं न कभी कबर ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड् कर देता है…

कुछ ऐसा hi नवाज़ को मिल रहा था यहाँ इस वक़्त ... आरती जैसे इतने बड़े घर की जवान खूबसूरत बहु उसके बाँहों मैं और क्या चाहिए एक गरीब नौकर को.... नवाज़ अब अपने हाथ धीरे धीरे करते हुई आरती की नंगे गोर पिट पर ले जाता है...





अपने गोर और नाज़ुक पिट पर नवाज़ के काळा खुरदुरे हाथ महसूस करते hi आरती की सिसकारी निकलती है....

अह्हह्ह्ह्ह नन्नाआआववववज़्ज़्ज़्ज़.....

साँस जोरसे लेने की वजह से उसके चुके ऊपर निचे होने लगे थे जो नवाज़ के छथि मई गड़े थे जिस वजह से नवाज़ उसे महसूस कर रहा tha..uske मम्मी को महसूस करके नवाज़ को ऐसा लगा जैसे उसकी छाती में दो रसगुल्ले दबा दिए गए हो एक साथ... आरती की ऑंखें बंद थे .. वो कोई विरोध नहीं कर रही थी ..

नवाज़ मैं मई कहता है

कहा बहुत मस्त लग रहे है इस के मम्मी.. लगता है मेरी किस्मत आज ज़्यादा hi अच्छी hai....sali आरती रानी मुझसे ऐसे लिपट रही है जैसे की मई उसका यार हु या मई साहब हु .. मेरे लौड़े ने इसकी छूट की गर्मी महसूस किए हुई है अब मैं इसे ऐसा hi जाने नहीं दे sakta....isko आज छोड़ hi दूंगा ..

वो कोई विरोध नहीं कर रही है ये देख के और ये सब सोच कर नवाज़ कसके उसको दबा देता है....

आआह्ह्ह्ह

आरती को अब तक पता नहीं चल रहा था की क्या हो रहा है पर उसके कसके दबाने से वो होश मई आ गयी .. उसे पता चल गया की नवाज़ उसके साथ क्या कर रहा है और क्या करना चाहता है ..अब तक वो खुद के कण्ट्रोल में नहीं थी लेकिन उसे पता चल जाता है के वो ऐसे hi कड़ी रही तो आगे क्या होगा ...नवाज़ के हाथ धीरे धीरे किदार जा रहे hain…wo ऑंखें खोल देती है ...झट से नवाज़ की पकड़ से निकल कर पीछे हो जाती है और खड़े हो जाती hai…Nawaz को समझ नहीं आया के ये अचानक आरती को क्या हुवा की मेरे पकड़ से निकल गयी …

पीछे हटाने के बाद आरती वही कड़ी रही ..वो अब तक पलटी नहीं थी .. उसकी आँखे बंद थी इस वक़्त .. उसके होश उड़े हुई थे.. नवाज़ के ऐसे करने से .. वो ये सब रोकना तोह चाहती थी लेकिन उसका शरीर उस वक़्त उसका साथ नहीं दे रहा था…

अब उसने आँखे खोली और नवाज़ को गुस्से से देखने लगी .





अब इस वक़्त बोहत हॉट नज़ारा tha....blouse गीला होने की वजा से उसके चुचों का शेप अचे से दिख रहा था और ब्रा का कलर bhi....itne गोर बदन की जवान ाव्रत इस वक़्त भीगे ब्लाउज में एक कमीने नौकर के सामने कड़ी थी गुस्से मई पर वो कमीना नौकर उसके गुस्से को नहीं देख रहा था बल्कि अपनी मालकिन के गोर गोर बदन को देख रहा था

भीगने की वजह से उसकी ब्लाउज से उसकी ब्रा साफ़ दिख रही thi...nawaz ने पूरी ज़िन्दगी में इतना शानदार नज़ारा नहीं देखा tha…ek 21 साल का कला नौकर और एक 24 साल की गोरी जवान औरत .... जो उसकी मालकिन है वो एक दूसरे को देखे जा रहे थे ..

जब से नवाज़ इस घर में आया था तबसे आरती में सबसे ज़्यादा 2 चीज़ें उसे भाई thi...ek उस की बड़ी गांड और दूसरे उस के बड़े बड़े chuche...ab इस हालत में आरती को देख कर खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पढ़ा था..

..

तभी उसकी और देखते हुई आरती कहते है..





ये तुम क्या कर रहे थे नवाज़ ?? तुमको शर्म नहीं आयी मेरे साथ ऐसा करते हुई....

इतना बोलकर आरती अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करने लगती है..

क्या कर रहा था कुछ भी तो नहीं ..

ऐसा वो कमीने स्माइल के साथ कहता है ..इतना बोलकर वो आरती के नज़दीक पहुँच जाता है ..

अच्छा जी

और उसकी और देखते हुई कहती है ..





कुछ भी नहीं किया क्या ..

नहीं न जी

ऐसा बोलकर नवाज़ उसकी कमर के पीछे हाट डालकर कसकर आरती को अपनी और खिंच लेता है.... और आरती उसे चिपक जाती है ..





आरती की मम्मी इससबार जोर से नवाज़ के छथि मई धस जाते है

ोूछह

बुरा सा मू करके कहते है..





आरती को अपनी छूट पर नवाज़ का रोड जैसे कला लौड़ा महसूस होता है और उसके जिस्म में झटका सा लगता hai....uske साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था इससे पहले... अपनी पूरी शादी शुदा ज़िन्दगी मैं उसने ऐसा कभी फील नहीं किया था .... नवाज़ का कला लौड़ा तो वैसे भी उसकी पंत में बड़ा सा तम्बू बनाये हुई खड़ा था....

आरती के पति का लुंड तो करीबन 4 -5 इंच का होगा ..और नवाज़ का काफी बड़ा था .. नवाज़ का कला लौड़ा तो वैसे भी उसकी पंत में बड़ा सा तम्बू बनाये हुई खड़ा tha….jise खुद पर महसूस करके आरती उसके शरीर में अजब सा महसूस होता है..

नवाज़ अब अपने हाथ आरती की पिट पर लेजाता है और हलके हलके वह दबाने लगता है...

अह्ह्ह्हह्हह...

आरती की सिसकारी निकलने लगती है .. नवाज़ के कठोर हाथ जो उसकी पिट को दबा रहे थे.... आरती की नरम और कोमल पिट अपने हाथों में फील करके नवाज़ से रहा नहीं जा रहा था और वो अब एकदम जोरसे दबने लगता है उस की पिट को ....

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह नवाज़ चुरो मुजीई अह्ह्ह्ह यी ठीककक नाहीइ हैई अह्ह्ह्ह....

लेकिन नवाज़ सुनने के मूड में नहीं लग रहा tha…aarti जैसी जवान खूबसूरत औरत को अपनी बाँहों में पाकर ऐसा होना लाज़मी था भी एक नौकर के लिए.... नवाज़ जैसे नौकर के लिए..

इधर आरती नवाज़ के यूँ करने से दर जाती है और उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगती और आखिर कर वो कामयाब भी हो जाती है और थोड़ा दूर हो जाती है नवाज़ के तरफ फेस करते हुई और कड़ी हो जाती है.. उसे बहुत शर्म आ रही थी और बुरा भी लग रहा था के नवाज़ उसके साथ ऐसा कर रहा था उस वजह से ....तभी वो देखती है के नवाज़ उसके तरफ आ रहा hain....tab आरती पीछे होने लगती है .....

तब आपने पल्लू को अपनी छथि पर पूरा कवर करते हुई उसको देखते हुई कहती है ..





नवाज़ यी ..यी.. क्या कर रही हो...??

क्या ??

क्या क्या क्या ?? मेरे तरफ क्यों आ रहे हो..

आरती ....... एक बात बोलू .......

तब आरती नवाज़ की तरफ देखते हैं.. उसे शायद पता था की नवाज़ क्या खाने वाला है फिर भी उसने कहा

हाँ कहो

और एक बार फिर से लुम्बी लुम्बी सांस लेने लगी ..... अपने धड़कनों को काबू करने लगती हैं .....मगर न hi उसके धड़कने अब काबू में थे ..... और न hi साँसे...........

तू सच में बहुत खूबसूरत हैं ..... मैंने तेरे जैसी खूबसूरत औरत इससे पहले कभी नहीं देखि ......

इतना कहकर नवाज़ धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ आरती ये सुनते hi शर्मा जाती है लेकिन वो अपने चेहरे से जाहिर नहीं करती और अपनी गर्दन निचे कर लेती है....





तू मुझे बहुत ाची लगती हैं आरती ..

तब गर्दन उप्पर करके आरती नवाज़ को देखने लगी और आरती धीरे से बोल पड़ी ......

कितनी अच्छी

इतनी ाची की मैं बता नहीं सकता...

आरती के बदले हुई रूप को देख कर नवाज़ खुश हुआ ..

सच कह रहे हो ना...... या ऐसे hi बोल रहे हो ....

ऐसे hi मई क्यों बोलूंगा और वो भी तुजे

मई तुम अच्छी लगती हो .. तो नीता के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है .. तुम्हे नीता कैसी लगती हैं..... वो भी तो तुम ाची hi लगती होगी .... हैं ना

आरती ताना मरती हुई कहती है और नवाज़ की तरफ अजीब नज़रो से देखने लगी… .वहीँ नवाज़ कुछ देर तक चुप रहा ..... वो ाचे से जनता था की आरती को उसका और नीता का सब कुछ पता है .. पर फिर भी वो आरती को नाराज़ नहीं करना चाहा रहा था ..

तेरे आगे वो कुछ भी नहीं है..... तेरे से किसी का कोई मुक़ाबला नहीं ..... तू बेजोड़ hain............main तो बस उसके साथ टाइम पास करता हूँ ..... बस .... वो मुझे ज़्यादा पसंद नहीं है .....

सफाई देते हुए नवाज़ बोल पड़ता है ...... वही आरती बड़े गौर से नवाज़ की आँखों में आँखे डेल उसे देख रही थी ...... शायद वो उसका झूठ पकड़ना चाहती हो............

अगर वो तुम पसंद नहीं है फिर भी तुम उसके साथ अपना जिस्मानी सम्बन्ध कायम किये हुई हो ..... हैं ना ..... अगर वो तुम पसंद होती तो तुम क्या करते........

आरती थोड़ी चिढ़ते हुई नवाज़ की तरफ गुस्से से देखने लगती है ..
 
तेरे आगे वो कुछ भी नहीं है ..... तेरे से किसी का कोई मुक़ाबला नहीं ..... तू बेजोड़ hain............main तो बस उसके साथ टाइम पास करता हूँ ..... बस .... वो मुझे ज़्यादा पसंद नहीं है .....

सफाई देते हुए नवाज़ बोल पड़ता है ...... वही आरती बड़े गौर से नवाज़ की आँखों में आँखें डेल उसे देख रही थी ......





शायद वो उसका झूठ पकड़ना चाहती हो......

अगर वो तुम पसंद नहीं है फिर भी तुम उसके साथ अपना जिस्मानी सम्बन्ध कायम किये हुई हो ..... हैं ना ..... अगर वो तुम पसंद होती तो तुम क्या करते........

आरती थोड़ी चिढ़ते हुई नवाज़ की तरफ गुस्से से देखने लगती है ..





वहीँ नवाज़ एक शब्द भी नहीं कहता और बस खामोश रहता हैं .... और उसे देखने लगता है ..अब आरती भी कुछ नहीं कहती वो भी नवाज़ को देखने लगी ..अब नवाज़ अपने चेहरे पर थोड़ी सी उदासी लेट हुई धीरे से बोल पड़ता हैं...

तू भी जानती है की वो मुझे ज्यादा पसंद नहीं है ..वो तो मेरे जरुरत पूरी करते है इसलिए मई उसके साथ हु

इस पर आरती कुछ नहीं कहती और सीरियस होती हुई नवाज़ के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगी ......





आरती टकटकी लगाए नवाज़ के चेहरे को पड़ने की लगातार कोशिश कर रही थी .....आरती के चेहरे पर थोड़ी नाराज़गी थी ..... कुछ देर की चुप्पी के बाद वो बोल पड़ती है..

ाचा तो तुम्हारे हिसाब से औरते बस जरूरते पुरे करने के लिए हैं ...... हैं ना .......

उसकी नाराज़गी देखते हुई नवाज़ चुप हो जाता हैं ..... वो जनता था की ज़रा सी बात बिगड़ी तो इतना मस्त हाट मई लगभग आया हुआ माल उसके हाथों से निकल जायेगा ..... और वो आरती जैसी माल को कभी सपने में भी खोना नहीं चाहता था …. इसलिए वो बात बदलते हुई कहता है ..

वैसे एक बात बोलू..... आरती .. तू साड़ी में बेहद हसीं लगती हैं ...... तू हमेशा साड़ी hi पहना कर ............

तब उसकी और देखते हुई कहते है





अच्छा . .. तू जनता नहीं मई हमेशा साड़ी hi पहनती हु ..साड़ी के अलावा तूने मुझे किसी दूसरे ड्रेस मई देखा है क्या

हाँ देखा है न . .. निघ्त्य मई
 
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