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वैस्वी बेथ के पढ़ रही थी, तभी उसके मोबाइल की टोन बजी, उसने फ़ौरन मोबाइल देखा तो शिव का मश्ग था, वो खुस हो गयी,
वैस्वी : टाइम मिल गया (टॉन्ट मरते हुए)
शिव : सॉरी वो देखा नहीं था, वैसे सूरज आज किस और निकला था वो देखना भूल गया था, पूरब में hi निकला था न?
वैस्वी : (मुस्कुरा uthi)Nahi पश्चिम में.
शिव : तभी सोचु की आज तुमने कैसे याद कर लिया.
वैस्वी : बड़े आये, क्या में याद नहीं करती?
शिव : मुझे कैसे पता चलेगा?
वैस्वी : मेने सुना है की जब कोई किसी को याद करता है तो उसको पता चल जाता है?
शिव : वो कैसे?
वैस्वी : उसको हीचिकि आती है.
शिव : पर मुझे तो कोई हिचकी नहीं आयी.
वैस्वी : कोई और भी याद कर रहा होगा न, इस लिए क्रॉस कनेक्शन हो जा रहा होगा.
शिव : मुझे तो कोई याद नहीं करता.
वैस्वी : जूते कही के, मुझे पता है कोण याद करता होगा?
शिव : (उसको भी मज़ा आ रहा tha)Kon?
वैस्वी : वही जिसके घर मिलने गए थे तुम.
शिव : (में सोच में पद गया की इसको कैसे पता चला की में संयम के घर गया था, तो मेने अनजान बनते हुए puchha)Me किसके घर गया था?
वैस्वी : कल गए थे न तुम, भूल गए.
शिव : (मेने रहत की साँस ली, ये कल की बात कर रही थी, तो में फिर मज़ाक के मूड में आ गया )में तो किसी के घर नहीं गया था.
वैस्वी : जूते, एक नंबर के जूते हो तुम.
शिव : अच्छा चलो मान लिया की गया था तो क्या हुआ, काम था तो गया था.
वैस्वी : ऐसा क्या काम था?
शिव : वो कल मुझे उनके साथ जाना है न इस्सलिये?
वैस्वी : कहा जाना है?
शिव : इतना क्यों टाइप करवा रही हो, बात करनी है तो सीधे सीधे कॉल करो न.
वैस्वी : नहीं, ऐसे hi ठीक है, ऐसे किसी को आवाज नहीं जाती.
शिव : क्यों दर लगता है?
वैस्वी : दर तो नहीं लगता पर क्या जरुरत है, और तुम बात मात बदलो, बताओ कहा जा रहे हो?
शिव : नाज़िआदिदी के ससुराल.
वैस्वी : वह क्यों?
शिव : है कुछ काम.
वैस्वी : स्कूल नहीं आनेवाले हो?
शिव : नहीं, स्कूल तो आऊंगा, दोपहर को जाना है शायद.
वैस्वी : अच्छा ठीक है, बाद में बात करती हु, कोई बुला रहा है muje.Bye.
शिव : Bye.
में सोचने लगा की इसको क्या हो गया, तभी फिर मश्ग की टोन बजी, मेने देखा तो ये जहान्वी का मश्ग था.
जहान्वी : Hi
शिव : Hi
जहान्वी : क्या कर रहे हो?
शिव : कुछ नहीं, कहिये?
जहान्वी : कुछ नहीं, बस ऐसे hi.
शिव : हम्म्म.
जहान्वी : एक बात कहु?
शिव : कहिये, इसमें पूछनेवाली क्या बात है?
जहान्वी : अभी जब में सोच रही थी तो मुझे लगा की मेने कुछ ज्यादा hi कर दिया, ेम्बरके फील कर रही हु.
शिव : किस बात के लिए?
जहान्वी : वो गाड़ी सिखाते हुए में जैसे बेथ गयी थी, मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, तुम क्या सोच रहे होंगे मेरे बारेमे, की कैसी लड़की है.
शिव : (मान में, बेथ गयी तब नहीं सोचा अब सोच रही ho)Aap तो सीखा hi रही थी न, में क्यों और कुछ सोचु.
जहान्वी : नहीं, फिर भी, में ऐसे कैसे बेथ सकती थी, तुम क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे में.
शिव : (Juth)Me कुछ नहीं सोच रहा हु, मेने तो यही सोचा की आप मुझे गाड़ी सीखा रही थी, और कुछ नहीं.
जहान्वी : थैंक्स यार, पता नहीं में क्या क्या सोच रही थी, मुझे बहोत गिलटी फील हो रहा था.
शिव : आप ऐसा वैसा कुछ मात सोचिये, मुझे तो खुसी है की मुझे आपने गाड़ी सिखाई, आपने वैसा किआ तभी तो मुझसे गाड़ी चली, वर्ण बंद hi हो जा रही थी.
जहान्वी : (जहान्वी को बहोत अच्छा laga)Thik है तो फिर कल मिलते है.
शिव : सॉरी, में कल नहीं आ रहा.
जहान्वी : क्यों?
शिव : भर जाना है, एक सोशल काम है.
जहान्वी : (दुखी हो kar)Ohhhh!
शिव : परसो, आ जाऊंगा.
जहान्वी : (दुखी हो गयी thi)Hmmm.
शिव : थकी है, तो मिलते है फिर, bye.
जहान्वी : Bye.
उसे शिव से बात करके अच्छा लगा, वर्ण वो जब से आयी थी तब से सोच रही थी की उसने कुछ ज्यादा hi कर दिया, हलाकि उसको बहोत अच्छा लगा था पर फिर उसे लगा की शायद उसने जल्द बजी कर दी, ऐसे कैसे वो किसी की भी गॉड में जा के बेथ गयी, वो उसे चालू लड़की समाज रहा होगा, ये सोच सोच कर hi वो बेचैन थी. आखिर कर उसने मश्ग कर hi दिया tha,call करने की तो उसकी हिम्मत hi नहीं हुई थी.
रंजन : यहाँ अकेले अकेले क्या कर रहा है, चल निचे दीदी बुला रही है.
शिव : है चल.
रंजन : क्या कर रहा था?
शिव : कुछ नहीं, तू दिमाग मात ख़राब कर, चल.
रंजन : है है, में hi तो दिमाग ख़राब करती हु, तू तो बहोत सीधा है न.
शिव : चल अब.
आज में अकेले hi सोया था, मेने सोचा की लता को बुला लू पर फिर सोचा की सोने दो. सुबह उठ कर में स्कूल चला गया. आज दोपहर को जाना था. नाज़िआ दीदी ने भी याद दिलाया, तो मेने कहा की फ़ोन पर बात कर लेंगे और सीधा में बस स्टेशन hi चला आऊंगा. संयम मेरे पीछे बेथ गयी और वैस्वी उसके पीछे. हम स्कूल चले गए, बिना मैडम का क्लास सुरु हुआ, वो कभी कभी मुझे देख रही थी, पर जैसे hi में देखता वो अपनी नज़ारे घुमा लेती थी. खरी और तो कुछ खास हुआ नहीं, हम लोग स्कूल से घर चले गए, वैस्वी मुझे छोड़ने आना चाहती थी पर मेने मन कर दिया, और में घर चला गया. मेने पहले hi बता दिया था की आज में बहार जा रहा हु, तो फटाफट खाना खाया और तैयार हो कर कुछ कपडे ले कर में निकल गया. विस्व भी हमारे वह से कोई रिक्शा तो जल्दी मिलती नहीं थी में चलने लगा, थोड़ी दूर पंहुचा hi था की सामने से मुझे पुलिस जीप में भार्गवी मैडम जाती दिखाई दी, उनकी भी मेरे ऊपर नजर पड़ी तो उन्होंने गाड़ी रोक दी. में उनके पास चला गया.
भार्गवी : सवारी किस और चली?
शिव : (मुस्कुराते हुए) बस स्टेशन जा रहा था.
भार्गवी : आ जाओ, छोड़ देती हु. (में भी उनके बाजु में बेथ गया, उन्होंने गाड़ी चला di)To कहा जा रहे हो?
शिव : क्सक्सक्स सहर.
भार्गवी : क्यों? (मेने उन्हें बता दिया) ओह! कब वापस आओगे?
शिव : कल.
भार्गवी : मेरी याद नहीं आती क्या? (उन्होंने हलकी नाराजगी से कहा)
शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?
भार्गवी : तो और क्या कहु, न फ़ोन, न मिलने आये.
शिव : (उनका हाथ जो स्टेयरिंग पर था मेने उस पर हाथ रख diya)Aisa कुछ नहीं है, थोड़ा बिजी था और वैसे भी आप भी तो बिजी hi रहती हो.
भार्गवी : (मुस्कुराते हुए शिव को dekha)Ab काम hi ऐसा है तो क्या करू, पर फ़ोन तो कर शक्ति हो न, या कमसे काम मश्ग hi कर दो.
शिव : सॉरी, आ कर मिलता हु.
भार्गवी : मिलने को नहीं कह रही, में जानती हु तुम कितने बिजी रहते हो, पर कभी कभी मेरे भी ख्याल आना चाहिए न.
शिव : सॉरी यार, आ कर पक्का मिलता हु.
भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Yaar???
शिव : क्यों कुछ गलत कहा क्या?
भार्गवी : नहीं ! तुम्ही तो हो जो मुझसे ऐसे बात कर शक्ति हो, इसीलिए तो मिस करती हु तुम्हे. जल्दी आना. (हम बस अड्डे पहुंच गए थे तो उन्होंने मुझे बहार ड्राप करते हुए कहा, अगर पब्लिक प्लेस न होता तो पक्का हम दोनों किश कर लेते, हम दोनों ने hi ये महसूस किआ था, वो हल्का शर्मा gayi)Bye, जल्दी आना.
शिव : Bye, मिलते है. (वो मुस्कुराते हुए चली गयी)
में बस स्टेशन में चला गया. बुस्तातिओं बड़ा था, और चारो और लोग और बसे थी, में प्लेटफार्म पर नाम पढ़ते हुए उस सिटी जानेवाले प्लेटफार्म को ढूंढने लगा, जैसे hi मुझे वो मिला में उन तीनो को ढूंढने लगा, मेने देखा की एक जगह तीन लड़कीअ बुर्के में कड़ी थी, मेने ये भी देखा की वो थोड़ी उनकंफर्टबले लग रही थी. तभी मेरा ध्यान गया की दो लड़के उनके आस पास घूम रहे थे, वैसे तो ये पब्लिक प्लेस था तो वो और तो कुछ कर नहीं रहे थे, बस यहाँ से वह और वह से यहाँ घूम रहे थे, पर नज़र उन तीनो पर hi थी. में समाज गया की क्या चल रहा है, में फ़ौरन उस और गया, वैसे भी मुझे पता नहीं था की ये संयम लोग hi है की नहीं, पर बुर्के में थी तो अंदाजा लगाया. में उनके नजदीक पंहुचा.

शिव : संयम?? (संयम ने अपना बुरका हटाया, उसके चेहरे पर हलकी गब्रहत थी, जो मुझे देख कर जाने लगी)
संयम : कहा रह गए थे? (उसने हलकी शिकायत की)
शिव : टाइम से तो आ गया (कहते हुए मेने उन लड़को की और देखा तो वो मुझे खा जानेवाली नजरो से देख रहे थे) एक मिनट. (कहते हुए में उन दोनों की और बढ़ा तो वो थोड़े घबराने लगे, वो दोनों मुझे hi देख रहे थे, में उनके नजदीक pahucha)Excuse में. (मुझे देखते हुए वो दोनों हैट गए, उनके पीछे वाले स्टाल से मेने दो पानी की बोतल ली और पैसे दिया, वो दोनों मुझे hi देख रहे थे, वैसे भी इतने लम्बे लड़के को देख उनकी सिटी पित्ती गम थी, मेने पानी की बोतल का ढक्कन खोला और पानी का एक घूंट piya)Kya हुआ? (वो दोनों मेरी और देख रहे थे तो मेने पूछा)
एक लड़का : क क कुछ नहीं भाई, (दूसरे लड़के ko)E चल, अपनी बस दूसरे प्लेटफार्म पर होगी, यहाँ नहीं है.
दूसरा लड़का : ह हह हां, मुझे भी ऐसा hi लग रहा है. (वो दोनों भागे, किसी से टकरा भी गए, पर जैसे तैसे भागे वह से, में वापस आया उन तीनो के पास और एक बोतल उनको दी)

नाज़िआ ने मुस्कुराते हुए अपना पर्दा हटाया और बोतल ले ली. संयम भी खुस लग रही थी, मेने आंटी की और देखा तो सिर्फ उनकी आंखे दिख रही थी, जैसे hi हमारी नजर मिली उन्होंने नज़ारे झुका ली.

शिव : बस कबतक आनेवाली है?
नाज़िआ : आती hi होगी. (उसने पानी पि कर बोतल अपनी ामी की और बधाई तो उन्होंने गर्दन हिला कर न कहा, तो उन्होंने संयम को दे दी, उसने एक दो घूंट पिए)
शिव : कैसे आये आप लोग?
नाज़िआ : रिक्शा से आ गए थे. (तभी बस आती दिखाई दी) लो बस भी आ गयी, तुम जल्दी से ऊपर जा कर सीट रोको.
शिव : (मेने आंटी की और देख kar)Aunty अपना बैग दीजिये. (उन्होंने शिर झुका कर मुझे बैग दे दी, और में बस की और लपका, भीड़ ज्यादा थी, जैसे तैसे में अंदर घुसा, मेने एक डबल सीट पर एक बैग रक्खा, पीछे वाली सीट पर एक आदमी आलरेडी बेथ गया था तो मेने उसके पीछेवाली सीट पर दूसरा मेरा बैग रख दिया, लोग अंदर चढ़ने लगे तो में उन सीटों पे बैठने से मन करने लगा, थोड़ी देर बाद वो तीनो भी अंदर आयी, मेने सीट दिखते हुए kaha)Wo सीट है. (नाज़िआ को शिव के साथ बैठना था, पर उसे पता था की ऐसे वो नहीं बेथ सकती तो वो उस सीट पर बेथ गयी, पीछे hi संयम थी, वो कड़ी रही)
नाज़िआ : बेथ न, पीछे सब खड़े है (वो शिव की और देखते हुए मायूस हो कर बेथ गयी)
ज़ोया : (जब उसने देखा की उसकी दोनों बेतिया बेथ गयी है और उसको शिव के साथ बैठना है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वैसे भी वो अपनी बेटिओ को तो नहीं कह सकती थी की शिव के साथ बेथ जाये, भले hi उसे पता था की शिव और नाज़िआ में क्या सम्बन्ध है, पर बहार की दुनिया के लिए तो वो अनजान hi थे, और वैसे भी अगर किसी पहचानवाले ने देखा तो भी ये सही नहीं लगेगा, उसका बैठना hi सही था, शिव पीछे खिसक गया तो वो अपनी नज़ारे झुकाये, उस सीट पर चली गयी और खिडक़ीवाली सीट पर बेथ गयी, शिव ने बैग ऊपर रक्खी और वो भी बेथ गया, उसके शरीर में भी टारे हिल रही थी, वैसे भी सीट इतनी बड़ी नहीं होती, दो लोगो को सात कर hi बैठना पड़ता है. जैसे hi उसे आंटी की बाजु टच हुई वो भी हिल गया, पर अपने आपको संभाला, खैर हम सब बेथ गए, नाज़िआ ने पीछे मुद कर देखा और मुस्कुरायी, ज़ोया ने अपनी नज़ारे झुका ली. थोड़ी देर ऐसे hi गुजरा, गर्मी लग रही थी, पर क्या कर शक्ति थे, थोड़ी देर में कंडक्टर और ड्राइवर आ गए, और बस डेपो से बहार निकली. हवा चलने लगी तो थोड़ी रहत हुई, मेने फिर पानी पिया)
शिव : आप पानी पीयेगी (अचानक मेरे मान में ख्याल आया) सॉरी, ये जूठी है, में वो बोतल मँगवाडु? (वो कुछ नहीं बोली, बस ना में गर्दन हिला दी, मेने ढक्कन बंद कर दिया, बस अब सिटी से बहार निकलने लगी थी, हवा चलने से अच्छा लग रहा था, रस्ते भी अच्छे थे तो बस स्पीड में चलने लगी.)
ज़ोया : (शिव के साथ ऐसे बैठने से उसको अजीब लग रहा था, भले hi उसने पेअर दूसरी और कर लिए थे पर कमर और हाथ आपस में टच हो hi जाते थे, जब भी उसका हाथ टच होता तो ज़ोया को रोम रोम खड़ा हो जाता था, वो चुप थी पर उसके दिमाग में बहोत कुछ चल रहा था, शिव ने उसके साथ जो चुदाई की थी वो बार बार उसको याद आ रही थी, उसे इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव की और देखने से भी कटरा रही थी.)
शिव : आपको गर्मी नहीं लग रही (उनके बुर्के की और देख कर कहा, जोया ने एक पल शिव को देखा, दोनों की आंखे आपस में मिली, उसने फिर नज़ारे झुका ली और न में गर्दन हिलायी, फिर हम दोनों चुप हो गए, बस पूरी भरी हुई थी, पर कोई खड़ा नहीं था, सबको जगह मिल गयी थी, करीब आधा घंटा गुजर गया)
ज़ोया : (उसको पानी पीना था, पर वो कैसे कहे वो समाज में नहीं आ रहा था, थोड़ी देर वो बैठी रही पर फिर सोचा की इसमें क्या है, तो उसने आहिस्ता से kaha)wo, पानी...
शिव : (आवाज में उसे बारे बार सुनाई नहीं दिया, पर इतना पता चला की आंटी ने कुछ कहा) क्या? कुछ कहा क्या आपने.? (ज़ोया कुछ न बोली फिर खामोस हो गयी, शिव ने आस पास देखा तो सब अपने अपने में बिजी थे, ज़ोया का हाथ उसके पास hi था तो उसने हलके से उनके हाथ को पकड़ liya)(Zoya घबरा गयी, और शिव को देखने लगी, शिव मुस्कुराया, उसने आस पास देखा तो कोई देख नहीं रहा था तो उसको रहत हुई, शिव के ऐसे हाथ पकड़ ने से उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी थी, वो अपना हाथ छुड़ाने लगी, शिव ने भी हाथ छोड़ दिया, और उनके नज़दीक जा कर आहिस्ता से kaha)Kya हुआ, आप इतना क्यों शर्मा रही है? (ज़ोया से कुछ बोलै नहीं गया, वो बस अपनी नज़ारे झुकाये बैठी rahi)Apna चेहरा दिखाइए न, देखो संयम और नाज़िआ ने भी अपना पर्दा हटा दिया है. (ज़ोया ये जानती थी, पर उसने जान बुज कर नहीं हटाया था, शिव ने फिर उसके हाथ को पकड़ा तो वो कैंप गयी पर इस बार उसने अपना हाथ नहीं छुड़ाया) आप उनकंफर्टबले हो रही हो तो में आगे चला जाऊ? (वो क्या बोलती, पर जवाब तो देना hi था, तो उसने सिर्फ न में गर्दन hilayi)Aapne कुछ कहा था अभी? क्या कहा था?
ज़ोया : पानी. (बस इतना hi बोल पायी)
शिव : आगे से बोतल मँगवाडु?
ज़ोया : (उसने ना में गर्दन हिलायी)
शिव : मेरी जूठी है, चलेगी? (शिव ने मुस्कुराते हुए कहा तो ज़ोया शर्मा गयी, पर बोली कुछ नहीं, शिव ने हाथ छोड़ा और ढक्कन खोल कर बोतल badhayi)Lijiye. (ज़ोया ने ले ली, वैसे भी पानी पिने के लिए उसे पर्दा हटाना hi था, वो चाहती तो पर्दा ऊपर कर के भी पि सकती थी, पर उसने वैसा नहीं किआ, उसने पर्दा खोल दिया, वो जानती थी की शिव उसको hi देख रहा है, वैसे भी आज वो अपनी बेटी के ससुराल जा रही थी तो हल्का मेकअप किआ हुआ था, बड़ी आँखों पर काजल भी लगाया था) (मेने उनके चेहरे को देखा तो देखते hi रह गया, काजल लगी आंखे बहोत सुन्दर लग रही थी, और चेहरे पर हल्का मेकअप था और साथ में हलकी लिपस्टिक भी लगी हुई थी, मुझे सही में लगा की चेहरे को छुपाना लाज़मी hi था, वर्ण हर कोई देखता rehta)(Zoya जानती थी की शिव उसे hi घर रहा है, उसको पानी भी गले से उतरना मुश्किल हो रहा था, पर जैसे तैसे उसने पानी पिया और बोतल वापस दे दी, शिव ने बोतल बंद की, वो खिड़की से बहार की और देख रही थी) अपना चेहरा वापस छुपा लीजिये. (शिव ने आहिस्ता से कहा) (ज़ोया को समाज नहीं आया, अभी तो वो चेहरा खोलने के लिए कह रहा था, उसने शिव को देखा) सॉरी पर आप इतनी खूबसूरत लग रही हो की लोग आपको hi घूरेंगे, आप वापस चेहरा धक् लो. (ज़ोया शर्मा गयी और अपना मुँह पर हाथ की बंद मुट्ठी रखते हुए बहार देखने लगी और मुस्कुराने lagi)Sach कह रहा हु (मेने मुस्कुराते हुए कहा, फिर कुछ सोच कर मेने kaha)Aap मुझसे क्यों गभरा रही हो? आपको अच्छा नहीं लगा क्या? (ज़ोया की हसी गायब हो गयी, वो बहार को देख रही thi)Agar आपको पसंद नहीं तो में आपसे बात नहीं करूँगा, आप फ़िक्र मात कीजिये, पर सच कहु तो मुझे तो बहोत अच्छा लगा था. (पता नहीं में ये कैसे बोल गया, मेने उनके चेहरे को देखा तो वो अपना चेहरा बहार देखते हुए छुपा रही थी, वो कुछ नहीं बोली, और वैसे भी में कोई जोर जबरदस्ती तो करता नहीं था, पर उस दिन सचमे मुझे बहोत मज़ा आया था, उनका शरीर सबके मुकाबले भरा हुआ था, सब नाजुक कलिओ जैसी थी जबकि ये मुझे अपने मुकाबले की लग रही थी) कुछ तो जवाब दीजिये.
ज़ोया : (उसने आहिस्ता से फुसफुसाते हुए kaha)Koi सुनलेगा शिव, ये जगह नहीं है ऐसी बात करने के लिए.
शिव : (उनकी बात सही थी, पर आज hi तो मुझे ऐसे अकेले मिली थी तो मेने पूछ लिया था) सॉरी, बस एक बात का जवाब दे दीजिये, आप नाराज़ हो मुझसे? (उन्होंने एक बार मेरी और देखा, फिर नज़ारे झुका कर ना में गर्दन हिलायी, मुझे सुकून मिल गया, में भी शांति से बेथ गया, बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी)
मेने आगे देखा तो नाज़िआदिदी और संयम आपस में बात कर रहे थे, आगे एक कपल बैठा था, जो शांति से बैठे हुए थे, मेरी बाजूवाली सीट पर एक छोटी लड़की और उसकी मम्मी बैठे हुए थे, पीछे की और एक दो औरते बैठी हुई थी. पाना नहीं में ये सब क्यों देख रहा था, शायद मेरे दिमाग में कुछ चल रहा था जो में भी समाज नहीं प् रहा था, मेने आंटी को देखा तो वो बहार की तरफ देख रही थी और शायद किसी सोच में डूबी हुई थी. मुझसे रहा नहीं जा रहा था, तो मेने अपने पैर के पंजी को उनकी और खिकया, थोड़ी hi देर में मेरा पेअर उनके पेअर के पास पहुंच गया, बूट पहना था तो और कुछ न कर पाया पर मेने पेअर उनसे सत्ता दिया, मेने उनके चेहरे को देखा तो चिहरे पर हलकी परेशानी दिखी मुझे पर वो बहार hi देख रही थी. मेने आपने पेअर वापस खिंच लिया, में सीधा हुआ और हल्का सा उनकी और झुका, में उनके बाजु से सात गया था, उन्होंने आस पास नज़र दौड़ाई, फिर शांत हो गयी, देख वो बहार hi रही थी. (ज़ोया उसकी हरकते समाज रही थी, पर ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे उसे पता hi न हो) मेरे मान में जो चल रहा था उसकी वजह से मेरे लिंग में तनाव आने लगा था, मेने सोचा की ये जगह सही नहीं है, पर दिल मान hi नहीं रहा था, मुझे एक युक्ति सूजी, मेने अपना बैग ऊपर से उतरा और अपनी गॉड में रख दिया, अब अगर बाजु से कोई देखता तो भी उसे कुछ दिखाई नहीं देता. (ज़ोया चुप चाप ये सब देख रही थी, उसकी भी धड़कने तेज तेज चल रही थी, पतानहीं पर उसके अंदर भी रोमांच था, वो बस दर रही थी, पर अंदर उथल पुथल मची हुई थी. इतने दिनों से उसने सोच लिया था की वो शिव के साथ और कुछ नहीं करेगी, और वो अपने आपको सँभालने की कोशिस में लगी हुई थी, वो बस यही दिखा रही थी जैसे उसे कुछ पता न हो, थोड़ी देर बाद शिव ने उसके हाथ पर हाथ रख दिया, उसका शरीर कैंप रहा था, पर उसने कोई हरकत नहीं की, उसने अपनी बेटिओ की और देखा जो आपस में बाते कर रही थी, वो फिर बहार देखने लगी, शिव हलके हलके उसके हाथ को सेहला रहा था, वो उसकी ऊँगली ो से खेल रहा था, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, ये सब रोमांच तो वो जैसे भूल hi गयी thi.)(Unka हाथ सहलाते हुए मेरी नजर उनके चेहरे पर hi थी, वो शांत बैठी थी या दिखावा कर रही थी, जो भी हो वो विरोध नहीं कर रही थी तो मेरी हिम्मत बढ़ रही थी, मेने अपना हाथ उठाया और उनकी झंघ पर रख दिया, उनकी आंखे बंद हुई पर फिर वो बहार को देखने लगी, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मेने कभी इस तरह की हरकत नहीं की थी तो दिल दर भी रहा था, पर कुछ था जो मुझे रोमांचित कर रहा था, में थोड़ी देर ऐसे hi बैठा रहा, फिर हलके से मेने अपनी उंगलिओ पर दबाव बढ़ाया और छोड़ दिया, मेरी नजर आंटी पर hi थी, वो ऐसे बेहवे कर रही थी जैसे उन्हें कुछ पता hi न हो, अपने बाये हाथ को में उनकी झांघो के बिच ले गया तो उनकी झंगे आपस में सटने लगी, मेरा हाथ उनकी छुटवाले भाग से थोड़ी hi दुरी पर था, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी की में ऐसा वैसा कुछ करू. मेरी धड़कने बढ़ चुकी थी, मेरी और ज्यादा हिम्मत नहीं हुई तो मेने अपना हाथ हटा लिया. उन्होंने हलके से मुझे देखा फिर वापस बहार देखने लगी. (ज़ोया को दर लग रहा था पर जब शिव ने हाथ वापस खिंच लिया तो उसको अच्छा नहीं लगा और उसकी नजर अपने आप उसकी और चली गयी जैसे कह रही हो की हाथ क्यों हटा लिया, उसको भी अच्छा लग रहा था, उसे शर्म भी आ रही थी की कैसे वो एक नौजवान लड़के को अपने शरीर के साथ खेलने दे रही थी, पर उसको अपने आपमें इस तरह से देखते हुए देख उसे भी अच्छा लग रहा था, उसे लग रहा था की अभी भी उसमे कोई तो बात है जो ये नौजवान लड़का उसकी और आकर्षित हो रहा है, वर्ण अब वो समझने लगी थी की वो बुजुर्ग होने लगी है)
फिर शिव ने ऐसी कोई हरकत नहीं की, एक और तो उसे बुरा लग रहा था पर फिर उसे अच्छा भी लग रहा था की शिव उसके साथ सेक्स कर चूका है फिर भी वो अपने जज्बातो को काबू किये हुए है, वो चाहता तो बहोत कुछ कर सकता था, शायद वो उसे रोकती भी नहीं, पर उसने ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं की, थोड़ी देर बाद शिव ने जब उसका हाथ पकड़ा और उसकी उंगलिओ में अपनी उंगलिअ फसायी तो उसने भी उसका हाथ थम लिया, जैसे अपनी सहमति जाता रही हो, वो देख बहार रही थी पर उसका सारा ध्यान शिव की हरकतों पर था. (जब आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा तो मुझे सुकून महसूस हुआ, मेने उनकी और देखा तो वो हलके हलके मुस्कुरा रही थी, पर मेरी और देख नहीं रही थी, एक्सप्रेस बस थी तो वो सीधे हमारे स्टेशन पर hi रुकी. मेने उनका हाथ छोड़ दिया, जब बुस्रुकि तो में उठा और आगे चला गया, हम सब उतर गए थे, जब ुम बहार आये तो एक आदमी भाग के आया, करीब 27-28 साल का था, दिखने में अच्छा भी था, उसके चेहरे पर खुसी जैसे सामना नहीं रही थी. ये करीम था, नाज़िआ का शोहर.
करीम : अस्सलाम अलैकुम.
नाज़िआ, आंटी, संयम : व आलेकुम s-salam. (करीम मेरी और देखने लगा)
शिव : नमस्ते.
करीम : नमस्ते.
ज़ोया : ये शिव है, इसके आबू आ नहीं सके तो उन्होंने इससे भेज दिया.
करीम : आइये आइये, लाइए में बैग ले लेता हु (उसने वो बैग ले लिया जो नाज़िआ ने उठाया हुआ था, हम को वो एक और ले जाने लगा, वो अच्छा था, दिखने में और स्वाभाव में भी पर नाज़िआदिदी के सामने थोड़ा फीका था, वो अपनी कार ले कर आया था, वो तीनो पीछे बेथ गए ,इ आगे उनके साथ बेथ गया, वो गाड़ी चलने लगे) और, कोई दिक्कत तो नहीं हुई न?
आंटी : नहीं बीटा, शिव ने सीट ले ली थी, सब आराम से हो गया.
करीम : चलो अच्छा है, वैसे अब्बू आ नहीं पाए तो मुझे कह देते, में लेने आ जाता.
आंटी : उसकी जरुरत नहीं थी, हम ाही गए न.
करीम : वैसे ये शिव, यही नाम बताया न, है कोण?
आंटी : वैसे तो ये संयम के साथ पढता है, पर इसके अब्बू इसको बहोत मानते है, हमें भी इसीपर भरोसा है, तो इसीको ले आये, क्यों आपको अच्छा नहीं लगा?
करीम : नहीं नहीं अम्मी, ये क्या बोल रही है, में तो बस ऐसे hi कह रहा था. और सुनाई ये आपकी तबियत कैसी है? और संयम कैसी चल रही है पढ़ाई?
ऐसे hi बाते करते करते हम उनके घर पहुंच गए, सोसाइटी में घर था इनका, दो मंजिला घर था, सब मुस्लिम परिवार hi रह रहे थे ऐसा लग रहा था, जब हम वह पहुंचे तो नाज़िआदिदी की सास और नानन्द बहार hi कड़ी थी, गाड़ी की आवाज सुन कर अभी अभी बहार आयी थी. वैसे तो उनका और नाज़िआ का कई बार झगड़ा हो चूका था, घर के कामो को ले कर और उसके बच्चे न होने पर, पर अब बात अलग थी, अब वो माँ बन ने वाली थी तो दोनों ने उसका मुस्कुराते हुए स्वागत किआ.
Hafiza(Saas) : (नाज़िआ ने झुक कर अदब kia)Jiti रहो बेटी, खुस कर दिया तुमने, आओ आओ अंदर आओ, कैसी है संयम, (ज़ोया ko)Aaiye आइये. (वह कड़ी इनायत जो नाज़िआ की ननद थी वो गाड़ी से निकले लम्बे से नौजवान को देख रही थी, वो सबको सलाम कर रही थी पर निगाहे शिव पर थी.)

में सबको देख रहा था, मुझे ावक्वार्ड लग रहा था, ऐसे भी कद की वजह से सब मुझे देखते रहते है और ऊपर से मेरा नाम सुन कर नाज़िआ के पति ने भी मुझे आश्चर्य से देखा था, मुझे भी लगने लगा की मेने गलती कर दी, अंकल को मुझे नहीं भेजना चाहिए था, पर वो भी क्या करते, उन्हें थोड़ी न पता था की मेरे और सबके क्या सम्बन्ध है, संयम, नाज़िआ और आंटी को तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी क्यों की वो मुझसे इतना परिचित थी, पर सबको संजना थोड़ा मुश्किल था, में महसूस कर रहा था की आस पास के घर के लोग भी बहार निकल आये थे और वो हमें hi देख रहे थे. करीम मेरे साथ hi था, तो सब औरते अंदर चली गयी, करीम और में आखिर में अंदर गए, आगे हॉल में करीम के पापा बैठे हुए थे, मुझे दिखा कर करीम बोले.
करीम : ये शिव है, इनका फॅमिली फ्रेंड है, आबू आ नहीं पाए तो हिफाजत के लिए इन्हे भेज diya.(Waise तो उसको ये सही नहीं लग रहा था पर वो अपनी ससुराल की बेइज्जती नहीं करना चाहता था तो अपने आबू को जैसे समजा रहा था, वही अंदर भी यही हालत थे, नाज़िआ की सास पूछ रही थी)
हाफ़िज़ा : ये लड़का कोण है, पहले कभी देखा नहीं (ज़ोया समझती थी की ये मामला कितना नाज़ुक है, वैसे भी वो शिव को इसलिए hi साथ में लायी थी क्यों की वो किसी और पर भरोसा नहीं कर शक्ति थे, वो असंजस में थी की क्या कहे, नाज़िआ थोड़ी कॉंफिडेंट थी तो उसने hi जवाब दिया)
नाज़िआ : अम्मी, ये शिव है, वैसे तो ये संयम के साथ स्कूल में पढता है, पर बहोत hi नेक है, संयम को कुछ लड़के स्कूल के रस्ते में परेशान करते थे, एक दिन उन्होंने संयम का रास्ता रोका था,
शिव उसी वक़्त वह से गुजर रहा था, उसने उन लड़को की न सिर्फ धुलाई की बल्कि रोज़ इसको और इसकी सहेली को हिफाज़त से स्कूल पहुँचता है, आबू और ामी तो इसे अपना बीटा hi मानते है. (ज़ोया ने जब ये सुना की ‘बीटा’ तो उसकी नजर झुक गयी, पर नाज़िआ जो कह रही थी वो सही hi tha)(Uski नानन्द इनायत वही कड़ी थी, वैसे भी उसको शिव पसंद आया था, वो एक तलाक सुदा थी, किसी कारन से उसका तलाक हो गया था और वो अपने मायके में hi थी, शिव के बारेमे जान कर उसकी उत्सुकता बढ़ी)
इनायत : मतलब, उसने उस लड़के को मारा था?
नाज़िआ : वो अकेला नहीं था, उस लड़के के साथ में उसके दो दोस्त और भी थे, उसके बाद भी वो दोबारा गुंडों को लेकर भी आया था, चार पांच गुंडे थे, उन सबको इसने मारा था, उसके बाद कभी वो लोग दिखाई नहीं दिए.
हाफ़िज़ा : (वो समाज रही थी की ये लोग उस पर बहोत भरोसा कर रहे है, पर सोसाइटी की दूसरी औरते भी वह कड़ी थी, तो जान बुज कर उसने puchha)Par बेटी वो गैर जाट का है, आप उसे क्यों लाये?
नाज़िआ : आप खुद hi मिल लो आपको पता चल जायेगा (वैसे भी वो जानती थी की शिव उसको दीदी कह कर hi बुलाता है तो उसको कॉन्फिडेंस था, उसने शिव को आवाज लगायी) शीइइइइइइव, शीइइइइइव.
शिव : (जो बहार बैठा था और करीम और उसके अब्बू की आँखों का सामना कर रहा था, उसने नाज़िआ की आवाज़ सुनी, तो अपनी आदत के मुताबित hi वो bola)Ha डीडीईई. (जब उसने दीदी बोलै तो आगे बैठे मर्दो ने और अंदर बैठी औरतो ने भी ये सुना, सबके चेहरे पर संतोष था)
नाज़िआ : जरा अंदर तो आना. (शिव ने करीम और उसके अब्बू की और देखा)
अकरम (नाज़िआ का ससुर): है है, जाओ बीटा, तुम तो घर के hi हो. (शिव भी उठ कर अंदर गया, अंदर सब औरते उसे hi देख रही थी, वैसे भी वो लम्बा चौड़ा और मासूम दिखनेवाला hi था तो औरतो को तो पसंद आना hi था)
शिव : है दीदी??? (उसने जिस सरलता और नर्माहट से कहा था, सब औरतो के दिल में वो बस चूका था)
नाज़िआ : अम्मी तुमसे मिलना चाहती थी, इस लिए बुलाया (अपनी सास की और इस्सर करके वो बोली, इतनी औरतो के बिच अपने आपको प् कर वो शर्माने लगा, उसकी इस शर्म से सबके चेहरे पर मुस्कान आ गयी)
हाफ़िज़ा : (मुस्कुराते hue)Aao आओ, शर्मा क्यों रहे हो, सब घर के hi है, में तो बस पूछ रही थी की तुम कोण हो, तुम तो बड़े शर्मीले हो. शर्मा क्यों रहे हो, अपना hi घर संजो.
शिव : जी आंटी. (उसने नज़ारे झुका के जवाब दिया)
इनायत : (वो तो जैसे दीवानी हुई जा रही थी, उसने शिव की खिंचाई करने का मौका लपक liya)Bhabhi आप जूथ बोल रही हो, इन्हे देख कर लगता नहीं की इन्होने गुंडों को मारा भी होगा. (शिव ने इनायत की और देखा, उसे पता नहीं था की यहाँ क्या बात हुई, उसने फिर से शर्मा के अपनी नज़ारे झुका ली)
नाज़िआ : शिव एक एथलीट भी है, देश के लिए दौड़ने की प्रैक्टिस कर रहा है, बीचेमे न्यूज़ चैनेलो में भी आया था जब इसने बहोत बड़े बाइक चोरो के गिरोह को पकड़वाया था. पुलिस अफसर से ले कर पॉलिटिशंस तक पहचान है इसकी)
करीम : (बहार से वो सब सुन रहा tha)Ha याद आया, कुछ समय पहले आपके सहर की न्यूज़ आयी थी, उस टाइम बस ऐसे hi न्यूज़ देखि थी तो याद नहीं रहा. है मेने इससे देखा था, वैसे भी इनकी हिघ्त की वजह से ये सब में अलग दिख जाते है, मेरा भी ध्यान गया था, पर मुझे क्या मालूम था की ये आपकी पहचान के है.
नाज़िआ : (उसके दिल का सारा बोझ उतर गया था, वैसे भी शिव से कोई इम्प्रेस न हो वो हो नहीं सकता था) जी, ये वही है. (सबकी बाटे सुन कर शिव शर्मा रहा था और नज़ारे झुकाये खड़ा था)
इनायत : भाभी, आपके भाई को देख कर लगता नहीं की ये इतने कारनामे कर चुके है, देख कर तो लगता है की कोई डांटेगा तो भी ये रोने लगेंगे.
नाज़िआ : (मान में : अगर ये ऊपर चढ़ गया न तो पता चलेगा की कोण रोटा hai)Ye ऐसा hi है, दीखता बहोत सरल है और ये है भी, बिना वजह ये किसी को परेशान नहीं करता.
अकरम : (जैसे बड़े लोगो का इंट्रेस्ट होता है वैसे hi puchha)Iske वालिद क्या करते है?
नाज़िआ : (हलके दुःख के sath)Iske वालिद नहीं है अब्बू, ये यतीम है, यतीम खाने में रहता है. (शिव के चेहरे पर कोई फर्क नहीं पड़ा, अब उसको इन बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता था, वो बस नज़ारे झुकाये हलके से मुस्कुरा रहा था क्यों की सब उसकी बाते कर रहे थे)
हाफ़िज़ा : या खुदा, ये क्या जुल्म किआ है, ऐसा बीटा तो चिराग ले कर ढूंढने से भी न मिले, अल्लाह के आगे घुटने घिस जाये तब जेक ऐसी औलाद मिलती है. (करीम भी काफी इम्प्रेस था, वो उठा और शिव के बाजु में खड़ा हो गया, उसके कंधे पर हाथ रख के)
करीम : सो साद बरोथेर, यकीं नहीं होता. (उसने दिलासा दिया)
शिव : नहीं जीजाजी, मुझे कोई शिकायत नहीं है, में खुस हु अपनी जिंदगी से, इतने लोग मेरे साथ है, कैसे में अन्यथा हुआ.
अकरम : सही कह रहे हो बीटा, तुम बाटे करो, करीम बीटा, शाम की तयारी के लिए हमे बाजार भी जाना है. (उन्होंने याद दिलाया)
करीम : है आबू, (शिव की पीठ थप तपते hue)Tum बाते करो, हमे थोड़ा काम है. (अपनी ामी ko)Hum जा रहे है अम्मी.
हाफ़िज़ा : ठीक है बीटा. (शिव ko)Ander आ जाओ बीटा, ये लोग हमारे लिए तौफे लाये है वही दिखा रहे थे.
शिव : आप लोग देखिये, में बहार बैठा हु.
नाज़िआ : बहार अकेले अकेले क्यों बैठोगे, यही खड़े रहो, या बैठना है? पानी पिया की नहीं?
इनायत : सॉरी भाभी, मेरे दिमाग से hi निकल गया, में अभी लती हु, आप सबको मिलने की खुसी में सब भूल गयी.
नाज़िआ सबके बिहेवियर नोट कर रही थी, ये सब ऐसे नहीं थे जैसे अभी दिख रहे थे, कितना फर्क आ गया था सब में, सिर्फ इसीलिए की अब वो माँ बन ने वाली है, और ये सब मुमकिन हुआ था शिव की वजह से, उसने प्यार से शिव की और देखा, शिव ने भी उसे देखा, वो मसुकुराई तो शिव भी मुस्कुराया. तभी इनायत सबके लिए पानी ले आयी, ट्रे में रक्खे गिलास वो सबको देने लगी, उसने शिव को भी दिया, उसे देखने के लिए उसे अपनी गर्दन ऊपर करनी पड़ती थी, वो भोत प्यार से मुस्कुरा रही थी. (मेने देखा की वो कुछ ज्यादा hi प्यार से देख रही है, वैसे भी वो खूबसूरत थी, काजल लगी बड़ी बड़ी आँखों से वो मुझे देख रही थी, लिपस्टिक लगे होठ मुस्कुरा रहे थे, रंग भी गोरा hi था. वो ऐसे देख रही थी तो मेने अपनी नज़ारे झुका ली)
शिव का ऐसे शर्माना, इनायत को बहोत अच्छा लग रहा था, उलटे सुलटे कोई विचार नहीं थे बस उसको शिव अच्छा लगा था, वो उसको शरमाते हुए देख कर और मुस्कुरा रही थी. उसने फिर से सबसे खली गिलास लिए और अंदर रख आयी. अंदर सब बिस्तर पर बैठे थे और कुछ खड़े थे, वैसे भी नाज़िआ अच्छी थी तो सब उसको पसंद करते थे तो, काफी लोग आये हुए थे. रूम तक़रीबन भरा हुआ था, शिव को अजीब लग रहा था पर वैसे भी बहार वो अकेला क्या करता तो वही खड़ा रहा.
इनायत सब रख कर वापस आयी और शिव के नजदीक hi कड़ी हो गयी. वो शिव पर जैसे लट्टू हो रही थी, अंदर क्या चल रहा है उसे उस से कोई मतलब नहीं था, वो बस शिव के नजदीक कड़ी थी, शिव तो लम्बा था तो उसे अंदर देखने में कोई दिक्कत नहीं थी. इनायत की एक सहेली भी वह थी तो वो उसके साथ कड़ी हो गयी, पीछे hi शिव खड़ा था तो उसने एक बार मुस्कुरा के शिव को देखा. सबके लिए लाये हुए कपडे और दूसरी गिफ्ट दिखाई जा रही थी. इनायत और शिव के बिछ कुछ कम का hi डिस्टेंस था, अचानक इनायत पीछे हुई तो वो शिव से टकरा गयी, उसने ये जानबुज कर नहीं किआ था, बा अंदर देखने के लिए थोड़ी हिली तो ये हो गया था, उसने शर्मा के शिव को देखा और मुस्कुरायी.
शिव को उस गद्देदार मसल अंग का एहसास हुआ पर वो शांत रहा, उसकी नजर एक बार भरे हुए कूल्हों पर गयी भी पर उसने नजर हटा ली. सब लोग देखने में hi बिजी थे. इनायत से ये अनजाने में हो गया था पर अब उसका दिल धक् धक् करने लगा था, बात वो वो अपनी दोस्त से कर रही थी, और अंदर देख भी रही थी पर अभी हुआ स्पर्श उसके मान मस्तिक में छाप चूका था. उसका मान किआ की फिर वो करे, पर उसको दार लग रहा था. थोड़ी देर बाद उसका दिल नहीं माना, और इस बार वो जान बुज कर थोड़ी पीछे हुई, उसके गद्दे दर कूल्हे शिव से टकराये, वो फिर आगे हो गयी. उसने शिव की और देखा और ऐसा मुँह बनाया जैसे कह रही हो की सॉरी गलती से हो गया.
मेने सोचा की थोड़ा पीछे हो जाता हु, पर फिर दिलने कहा की क्या जरुरत है, में थोड़ी न कुछ कर रहा हु. में वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद फिर से वो हल्का सा पीछे हुई, अब मुझे लगने लगा की ये जान बुज कर कर रही है, मेरा क्या जाता था, में वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद फिर से उसके नरम कूल्हे मुझसे टकराये, मेने सबकी और देखा तो सब बिजी hi थे. मेरे लुंड में हलकी अकड़न आणि सुरु हो गयी थी.
वैस्वी बेथ के पढ़ रही थी, तभी उसके मोबाइल की टोन बजी, उसने फ़ौरन मोबाइल देखा तो शिव का मश्ग था, वो खुस हो गयी,
वैस्वी : टाइम मिल गया (टॉन्ट मरते हुए)
शिव : सॉरी वो देखा नहीं था, वैसे सूरज आज किस और निकला था वो देखना भूल गया था, पूरब में hi निकला था न?
वैस्वी : (मुस्कुरा uthi)Nahi पश्चिम में.
शिव : तभी सोचु की आज तुमने कैसे याद कर लिया.
वैस्वी : बड़े आये, क्या में याद नहीं करती?
शिव : मुझे कैसे पता चलेगा?
वैस्वी : मेने सुना है की जब कोई किसी को याद करता है तो उसको पता चल जाता है?
शिव : वो कैसे?
वैस्वी : उसको हीचिकि आती है.
शिव : पर मुझे तो कोई हिचकी नहीं आयी.
वैस्वी : कोई और भी याद कर रहा होगा न, इस लिए क्रॉस कनेक्शन हो जा रहा होगा.
शिव : मुझे तो कोई याद नहीं करता.
वैस्वी : जूते कही के, मुझे पता है कोण याद करता होगा?
शिव : (उसको भी मज़ा आ रहा tha)Kon?
वैस्वी : वही जिसके घर मिलने गए थे तुम.
शिव : (में सोच में पद गया की इसको कैसे पता चला की में संयम के घर गया था, तो मेने अनजान बनते हुए puchha)Me किसके घर गया था?
वैस्वी : कल गए थे न तुम, भूल गए.
शिव : (मेने रहत की साँस ली, ये कल की बात कर रही थी, तो में फिर मज़ाक के मूड में आ गया )में तो किसी के घर नहीं गया था.
वैस्वी : जूते, एक नंबर के जूते हो तुम.
शिव : अच्छा चलो मान लिया की गया था तो क्या हुआ, काम था तो गया था.
वैस्वी : ऐसा क्या काम था?
शिव : वो कल मुझे उनके साथ जाना है न इस्सलिये?
वैस्वी : कहा जाना है?
शिव : इतना क्यों टाइप करवा रही हो, बात करनी है तो सीधे सीधे कॉल करो न.
वैस्वी : नहीं, ऐसे hi ठीक है, ऐसे किसी को आवाज नहीं जाती.
शिव : क्यों दर लगता है?
वैस्वी : दर तो नहीं लगता पर क्या जरुरत है, और तुम बात मात बदलो, बताओ कहा जा रहे हो?
शिव : नाज़िआदिदी के ससुराल.
वैस्वी : वह क्यों?
शिव : है कुछ काम.
वैस्वी : स्कूल नहीं आनेवाले हो?
शिव : नहीं, स्कूल तो आऊंगा, दोपहर को जाना है शायद.
वैस्वी : अच्छा ठीक है, बाद में बात करती हु, कोई बुला रहा है muje.Bye.
शिव : Bye.
में सोचने लगा की इसको क्या हो गया, तभी फिर मश्ग की टोन बजी, मेने देखा तो ये जहान्वी का मश्ग था.
जहान्वी : Hi
शिव : Hi
जहान्वी : क्या कर रहे हो?
शिव : कुछ नहीं, कहिये?
जहान्वी : कुछ नहीं, बस ऐसे hi.
शिव : हम्म्म.
जहान्वी : एक बात कहु?
शिव : कहिये, इसमें पूछनेवाली क्या बात है?
जहान्वी : अभी जब में सोच रही थी तो मुझे लगा की मेने कुछ ज्यादा hi कर दिया, ेम्बरके फील कर रही हु.
शिव : किस बात के लिए?
जहान्वी : वो गाड़ी सिखाते हुए में जैसे बेथ गयी थी, मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, तुम क्या सोच रहे होंगे मेरे बारेमे, की कैसी लड़की है.
शिव : (मान में, बेथ गयी तब नहीं सोचा अब सोच रही ho)Aap तो सीखा hi रही थी न, में क्यों और कुछ सोचु.
जहान्वी : नहीं, फिर भी, में ऐसे कैसे बेथ सकती थी, तुम क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे में.
शिव : (Juth)Me कुछ नहीं सोच रहा हु, मेने तो यही सोचा की आप मुझे गाड़ी सीखा रही थी, और कुछ नहीं.
जहान्वी : थैंक्स यार, पता नहीं में क्या क्या सोच रही थी, मुझे बहोत गिलटी फील हो रहा था.
शिव : आप ऐसा वैसा कुछ मात सोचिये, मुझे तो खुसी है की मुझे आपने गाड़ी सिखाई, आपने वैसा किआ तभी तो मुझसे गाड़ी चली, वर्ण बंद hi हो जा रही थी.
जहान्वी : (जहान्वी को बहोत अच्छा laga)Thik है तो फिर कल मिलते है.
शिव : सॉरी, में कल नहीं आ रहा.
जहान्वी : क्यों?
शिव : भर जाना है, एक सोशल काम है.
जहान्वी : (दुखी हो kar)Ohhhh!
शिव : परसो, आ जाऊंगा.
जहान्वी : (दुखी हो गयी thi)Hmmm.
शिव : थकी है, तो मिलते है फिर, bye.
जहान्वी : Bye.
उसे शिव से बात करके अच्छा लगा, वर्ण वो जब से आयी थी तब से सोच रही थी की उसने कुछ ज्यादा hi कर दिया, हलाकि उसको बहोत अच्छा लगा था पर फिर उसे लगा की शायद उसने जल्द बजी कर दी, ऐसे कैसे वो किसी की भी गॉड में जा के बेथ गयी, वो उसे चालू लड़की समाज रहा होगा, ये सोच सोच कर hi वो बेचैन थी. आखिर कर उसने मश्ग कर hi दिया tha,call करने की तो उसकी हिम्मत hi नहीं हुई थी.
रंजन : यहाँ अकेले अकेले क्या कर रहा है, चल निचे दीदी बुला रही है.
शिव : है चल.
रंजन : क्या कर रहा था?
शिव : कुछ नहीं, तू दिमाग मात ख़राब कर, चल.
रंजन : है है, में hi तो दिमाग ख़राब करती हु, तू तो बहोत सीधा है न.
शिव : चल अब.
आज में अकेले hi सोया था, मेने सोचा की लता को बुला लू पर फिर सोचा की सोने दो. सुबह उठ कर में स्कूल चला गया. आज दोपहर को जाना था. नाज़िआ दीदी ने भी याद दिलाया, तो मेने कहा की फ़ोन पर बात कर लेंगे और सीधा में बस स्टेशन hi चला आऊंगा. संयम मेरे पीछे बेथ गयी और वैस्वी उसके पीछे. हम स्कूल चले गए, बिना मैडम का क्लास सुरु हुआ, वो कभी कभी मुझे देख रही थी, पर जैसे hi में देखता वो अपनी नज़ारे घुमा लेती थी. खरी और तो कुछ खास हुआ नहीं, हम लोग स्कूल से घर चले गए, वैस्वी मुझे छोड़ने आना चाहती थी पर मेने मन कर दिया, और में घर चला गया. मेने पहले hi बता दिया था की आज में बहार जा रहा हु, तो फटाफट खाना खाया और तैयार हो कर कुछ कपडे ले कर में निकल गया. विस्व भी हमारे वह से कोई रिक्शा तो जल्दी मिलती नहीं थी में चलने लगा, थोड़ी दूर पंहुचा hi था की सामने से मुझे पुलिस जीप में भार्गवी मैडम जाती दिखाई दी, उनकी भी मेरे ऊपर नजर पड़ी तो उन्होंने गाड़ी रोक दी. में उनके पास चला गया.
भार्गवी : सवारी किस और चली?
शिव : (मुस्कुराते हुए) बस स्टेशन जा रहा था.
भार्गवी : आ जाओ, छोड़ देती हु. (में भी उनके बाजु में बेथ गया, उन्होंने गाड़ी चला di)To कहा जा रहे हो?
शिव : क्सक्सक्स सहर.
भार्गवी : क्यों? (मेने उन्हें बता दिया) ओह! कब वापस आओगे?
शिव : कल.
भार्गवी : मेरी याद नहीं आती क्या? (उन्होंने हलकी नाराजगी से कहा)
शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?
भार्गवी : तो और क्या कहु, न फ़ोन, न मिलने आये.
शिव : (उनका हाथ जो स्टेयरिंग पर था मेने उस पर हाथ रख diya)Aisa कुछ नहीं है, थोड़ा बिजी था और वैसे भी आप भी तो बिजी hi रहती हो.
भार्गवी : (मुस्कुराते हुए शिव को dekha)Ab काम hi ऐसा है तो क्या करू, पर फ़ोन तो कर शक्ति हो न, या कमसे काम मश्ग hi कर दो.
शिव : सॉरी, आ कर मिलता हु.
भार्गवी : मिलने को नहीं कह रही, में जानती हु तुम कितने बिजी रहते हो, पर कभी कभी मेरे भी ख्याल आना चाहिए न.
शिव : सॉरी यार, आ कर पक्का मिलता हु.
भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Yaar???
शिव : क्यों कुछ गलत कहा क्या?
भार्गवी : नहीं ! तुम्ही तो हो जो मुझसे ऐसे बात कर शक्ति हो, इसीलिए तो मिस करती हु तुम्हे. जल्दी आना. (हम बस अड्डे पहुंच गए थे तो उन्होंने मुझे बहार ड्राप करते हुए कहा, अगर पब्लिक प्लेस न होता तो पक्का हम दोनों किश कर लेते, हम दोनों ने hi ये महसूस किआ था, वो हल्का शर्मा gayi)Bye, जल्दी आना.
शिव : Bye, मिलते है. (वो मुस्कुराते हुए चली गयी)
में बस स्टेशन में चला गया. बुस्तातिओं बड़ा था, और चारो और लोग और बसे थी, में प्लेटफार्म पर नाम पढ़ते हुए उस सिटी जानेवाले प्लेटफार्म को ढूंढने लगा, जैसे hi मुझे वो मिला में उन तीनो को ढूंढने लगा, मेने देखा की एक जगह तीन लड़कीअ बुर्के में कड़ी थी, मेने ये भी देखा की वो थोड़ी उनकंफर्टबले लग रही थी. तभी मेरा ध्यान गया की दो लड़के उनके आस पास घूम रहे थे, वैसे तो ये पब्लिक प्लेस था तो वो और तो कुछ कर नहीं रहे थे, बस यहाँ से वह और वह से यहाँ घूम रहे थे, पर नज़र उन तीनो पर hi थी. में समाज गया की क्या चल रहा है, में फ़ौरन उस और गया, वैसे भी मुझे पता नहीं था की ये संयम लोग hi है की नहीं, पर बुर्के में थी तो अंदाजा लगाया. में उनके नजदीक पंहुचा.

शिव : संयम?? (संयम ने अपना बुरका हटाया, उसके चेहरे पर हलकी गब्रहत थी, जो मुझे देख कर जाने लगी)
संयम : कहा रह गए थे? (उसने हलकी शिकायत की)
शिव : टाइम से तो आ गया (कहते हुए मेने उन लड़को की और देखा तो वो मुझे खा जानेवाली नजरो से देख रहे थे) एक मिनट. (कहते हुए में उन दोनों की और बढ़ा तो वो थोड़े घबराने लगे, वो दोनों मुझे hi देख रहे थे, में उनके नजदीक pahucha)Excuse में. (मुझे देखते हुए वो दोनों हैट गए, उनके पीछे वाले स्टाल से मेने दो पानी की बोतल ली और पैसे दिया, वो दोनों मुझे hi देख रहे थे, वैसे भी इतने लम्बे लड़के को देख उनकी सिटी पित्ती गम थी, मेने पानी की बोतल का ढक्कन खोला और पानी का एक घूंट piya)Kya हुआ? (वो दोनों मेरी और देख रहे थे तो मेने पूछा)
एक लड़का : क क कुछ नहीं भाई, (दूसरे लड़के ko)E चल, अपनी बस दूसरे प्लेटफार्म पर होगी, यहाँ नहीं है.
दूसरा लड़का : ह हह हां, मुझे भी ऐसा hi लग रहा है. (वो दोनों भागे, किसी से टकरा भी गए, पर जैसे तैसे भागे वह से, में वापस आया उन तीनो के पास और एक बोतल उनको दी)

नाज़िआ ने मुस्कुराते हुए अपना पर्दा हटाया और बोतल ले ली. संयम भी खुस लग रही थी, मेने आंटी की और देखा तो सिर्फ उनकी आंखे दिख रही थी, जैसे hi हमारी नजर मिली उन्होंने नज़ारे झुका ली.

शिव : बस कबतक आनेवाली है?
नाज़िआ : आती hi होगी. (उसने पानी पि कर बोतल अपनी ामी की और बधाई तो उन्होंने गर्दन हिला कर न कहा, तो उन्होंने संयम को दे दी, उसने एक दो घूंट पिए)
शिव : कैसे आये आप लोग?
नाज़िआ : रिक्शा से आ गए थे. (तभी बस आती दिखाई दी) लो बस भी आ गयी, तुम जल्दी से ऊपर जा कर सीट रोको.
शिव : (मेने आंटी की और देख kar)Aunty अपना बैग दीजिये. (उन्होंने शिर झुका कर मुझे बैग दे दी, और में बस की और लपका, भीड़ ज्यादा थी, जैसे तैसे में अंदर घुसा, मेने एक डबल सीट पर एक बैग रक्खा, पीछे वाली सीट पर एक आदमी आलरेडी बेथ गया था तो मेने उसके पीछेवाली सीट पर दूसरा मेरा बैग रख दिया, लोग अंदर चढ़ने लगे तो में उन सीटों पे बैठने से मन करने लगा, थोड़ी देर बाद वो तीनो भी अंदर आयी, मेने सीट दिखते हुए kaha)Wo सीट है. (नाज़िआ को शिव के साथ बैठना था, पर उसे पता था की ऐसे वो नहीं बेथ सकती तो वो उस सीट पर बेथ गयी, पीछे hi संयम थी, वो कड़ी रही)
नाज़िआ : बेथ न, पीछे सब खड़े है (वो शिव की और देखते हुए मायूस हो कर बेथ गयी)
ज़ोया : (जब उसने देखा की उसकी दोनों बेतिया बेथ गयी है और उसको शिव के साथ बैठना है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वैसे भी वो अपनी बेटिओ को तो नहीं कह सकती थी की शिव के साथ बेथ जाये, भले hi उसे पता था की शिव और नाज़िआ में क्या सम्बन्ध है, पर बहार की दुनिया के लिए तो वो अनजान hi थे, और वैसे भी अगर किसी पहचानवाले ने देखा तो भी ये सही नहीं लगेगा, उसका बैठना hi सही था, शिव पीछे खिसक गया तो वो अपनी नज़ारे झुकाये, उस सीट पर चली गयी और खिडक़ीवाली सीट पर बेथ गयी, शिव ने बैग ऊपर रक्खी और वो भी बेथ गया, उसके शरीर में भी टारे हिल रही थी, वैसे भी सीट इतनी बड़ी नहीं होती, दो लोगो को सात कर hi बैठना पड़ता है. जैसे hi उसे आंटी की बाजु टच हुई वो भी हिल गया, पर अपने आपको संभाला, खैर हम सब बेथ गए, नाज़िआ ने पीछे मुद कर देखा और मुस्कुरायी, ज़ोया ने अपनी नज़ारे झुका ली. थोड़ी देर ऐसे hi गुजरा, गर्मी लग रही थी, पर क्या कर शक्ति थे, थोड़ी देर में कंडक्टर और ड्राइवर आ गए, और बस डेपो से बहार निकली. हवा चलने लगी तो थोड़ी रहत हुई, मेने फिर पानी पिया)
शिव : आप पानी पीयेगी (अचानक मेरे मान में ख्याल आया) सॉरी, ये जूठी है, में वो बोतल मँगवाडु? (वो कुछ नहीं बोली, बस ना में गर्दन हिला दी, मेने ढक्कन बंद कर दिया, बस अब सिटी से बहार निकलने लगी थी, हवा चलने से अच्छा लग रहा था, रस्ते भी अच्छे थे तो बस स्पीड में चलने लगी.)
ज़ोया : (शिव के साथ ऐसे बैठने से उसको अजीब लग रहा था, भले hi उसने पेअर दूसरी और कर लिए थे पर कमर और हाथ आपस में टच हो hi जाते थे, जब भी उसका हाथ टच होता तो ज़ोया को रोम रोम खड़ा हो जाता था, वो चुप थी पर उसके दिमाग में बहोत कुछ चल रहा था, शिव ने उसके साथ जो चुदाई की थी वो बार बार उसको याद आ रही थी, उसे इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव की और देखने से भी कटरा रही थी.)
शिव : आपको गर्मी नहीं लग रही (उनके बुर्के की और देख कर कहा, जोया ने एक पल शिव को देखा, दोनों की आंखे आपस में मिली, उसने फिर नज़ारे झुका ली और न में गर्दन हिलायी, फिर हम दोनों चुप हो गए, बस पूरी भरी हुई थी, पर कोई खड़ा नहीं था, सबको जगह मिल गयी थी, करीब आधा घंटा गुजर गया)
ज़ोया : (उसको पानी पीना था, पर वो कैसे कहे वो समाज में नहीं आ रहा था, थोड़ी देर वो बैठी रही पर फिर सोचा की इसमें क्या है, तो उसने आहिस्ता से kaha)wo, पानी...
शिव : (आवाज में उसे बारे बार सुनाई नहीं दिया, पर इतना पता चला की आंटी ने कुछ कहा) क्या? कुछ कहा क्या आपने.? (ज़ोया कुछ न बोली फिर खामोस हो गयी, शिव ने आस पास देखा तो सब अपने अपने में बिजी थे, ज़ोया का हाथ उसके पास hi था तो उसने हलके से उनके हाथ को पकड़ liya)(Zoya घबरा गयी, और शिव को देखने लगी, शिव मुस्कुराया, उसने आस पास देखा तो कोई देख नहीं रहा था तो उसको रहत हुई, शिव के ऐसे हाथ पकड़ ने से उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी थी, वो अपना हाथ छुड़ाने लगी, शिव ने भी हाथ छोड़ दिया, और उनके नज़दीक जा कर आहिस्ता से kaha)Kya हुआ, आप इतना क्यों शर्मा रही है? (ज़ोया से कुछ बोलै नहीं गया, वो बस अपनी नज़ारे झुकाये बैठी rahi)Apna चेहरा दिखाइए न, देखो संयम और नाज़िआ ने भी अपना पर्दा हटा दिया है. (ज़ोया ये जानती थी, पर उसने जान बुज कर नहीं हटाया था, शिव ने फिर उसके हाथ को पकड़ा तो वो कैंप गयी पर इस बार उसने अपना हाथ नहीं छुड़ाया) आप उनकंफर्टबले हो रही हो तो में आगे चला जाऊ? (वो क्या बोलती, पर जवाब तो देना hi था, तो उसने सिर्फ न में गर्दन hilayi)Aapne कुछ कहा था अभी? क्या कहा था?
ज़ोया : पानी. (बस इतना hi बोल पायी)
शिव : आगे से बोतल मँगवाडु?
ज़ोया : (उसने ना में गर्दन हिलायी)
शिव : मेरी जूठी है, चलेगी? (शिव ने मुस्कुराते हुए कहा तो ज़ोया शर्मा गयी, पर बोली कुछ नहीं, शिव ने हाथ छोड़ा और ढक्कन खोल कर बोतल badhayi)Lijiye. (ज़ोया ने ले ली, वैसे भी पानी पिने के लिए उसे पर्दा हटाना hi था, वो चाहती तो पर्दा ऊपर कर के भी पि सकती थी, पर उसने वैसा नहीं किआ, उसने पर्दा खोल दिया, वो जानती थी की शिव उसको hi देख रहा है, वैसे भी आज वो अपनी बेटी के ससुराल जा रही थी तो हल्का मेकअप किआ हुआ था, बड़ी आँखों पर काजल भी लगाया था) (मेने उनके चेहरे को देखा तो देखते hi रह गया, काजल लगी आंखे बहोत सुन्दर लग रही थी, और चेहरे पर हल्का मेकअप था और साथ में हलकी लिपस्टिक भी लगी हुई थी, मुझे सही में लगा की चेहरे को छुपाना लाज़मी hi था, वर्ण हर कोई देखता rehta)(Zoya जानती थी की शिव उसे hi घर रहा है, उसको पानी भी गले से उतरना मुश्किल हो रहा था, पर जैसे तैसे उसने पानी पिया और बोतल वापस दे दी, शिव ने बोतल बंद की, वो खिड़की से बहार की और देख रही थी) अपना चेहरा वापस छुपा लीजिये. (शिव ने आहिस्ता से कहा) (ज़ोया को समाज नहीं आया, अभी तो वो चेहरा खोलने के लिए कह रहा था, उसने शिव को देखा) सॉरी पर आप इतनी खूबसूरत लग रही हो की लोग आपको hi घूरेंगे, आप वापस चेहरा धक् लो. (ज़ोया शर्मा गयी और अपना मुँह पर हाथ की बंद मुट्ठी रखते हुए बहार देखने लगी और मुस्कुराने lagi)Sach कह रहा हु (मेने मुस्कुराते हुए कहा, फिर कुछ सोच कर मेने kaha)Aap मुझसे क्यों गभरा रही हो? आपको अच्छा नहीं लगा क्या? (ज़ोया की हसी गायब हो गयी, वो बहार को देख रही thi)Agar आपको पसंद नहीं तो में आपसे बात नहीं करूँगा, आप फ़िक्र मात कीजिये, पर सच कहु तो मुझे तो बहोत अच्छा लगा था. (पता नहीं में ये कैसे बोल गया, मेने उनके चेहरे को देखा तो वो अपना चेहरा बहार देखते हुए छुपा रही थी, वो कुछ नहीं बोली, और वैसे भी में कोई जोर जबरदस्ती तो करता नहीं था, पर उस दिन सचमे मुझे बहोत मज़ा आया था, उनका शरीर सबके मुकाबले भरा हुआ था, सब नाजुक कलिओ जैसी थी जबकि ये मुझे अपने मुकाबले की लग रही थी) कुछ तो जवाब दीजिये.
ज़ोया : (उसने आहिस्ता से फुसफुसाते हुए kaha)Koi सुनलेगा शिव, ये जगह नहीं है ऐसी बात करने के लिए.
शिव : (उनकी बात सही थी, पर आज hi तो मुझे ऐसे अकेले मिली थी तो मेने पूछ लिया था) सॉरी, बस एक बात का जवाब दे दीजिये, आप नाराज़ हो मुझसे? (उन्होंने एक बार मेरी और देखा, फिर नज़ारे झुका कर ना में गर्दन हिलायी, मुझे सुकून मिल गया, में भी शांति से बेथ गया, बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी)
मेने आगे देखा तो नाज़िआदिदी और संयम आपस में बात कर रहे थे, आगे एक कपल बैठा था, जो शांति से बैठे हुए थे, मेरी बाजूवाली सीट पर एक छोटी लड़की और उसकी मम्मी बैठे हुए थे, पीछे की और एक दो औरते बैठी हुई थी. पाना नहीं में ये सब क्यों देख रहा था, शायद मेरे दिमाग में कुछ चल रहा था जो में भी समाज नहीं प् रहा था, मेने आंटी को देखा तो वो बहार की तरफ देख रही थी और शायद किसी सोच में डूबी हुई थी. मुझसे रहा नहीं जा रहा था, तो मेने अपने पैर के पंजी को उनकी और खिकया, थोड़ी hi देर में मेरा पेअर उनके पेअर के पास पहुंच गया, बूट पहना था तो और कुछ न कर पाया पर मेने पेअर उनसे सत्ता दिया, मेने उनके चेहरे को देखा तो चिहरे पर हलकी परेशानी दिखी मुझे पर वो बहार hi देख रही थी. मेने आपने पेअर वापस खिंच लिया, में सीधा हुआ और हल्का सा उनकी और झुका, में उनके बाजु से सात गया था, उन्होंने आस पास नज़र दौड़ाई, फिर शांत हो गयी, देख वो बहार hi रही थी. (ज़ोया उसकी हरकते समाज रही थी, पर ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे उसे पता hi न हो) मेरे मान में जो चल रहा था उसकी वजह से मेरे लिंग में तनाव आने लगा था, मेने सोचा की ये जगह सही नहीं है, पर दिल मान hi नहीं रहा था, मुझे एक युक्ति सूजी, मेने अपना बैग ऊपर से उतरा और अपनी गॉड में रख दिया, अब अगर बाजु से कोई देखता तो भी उसे कुछ दिखाई नहीं देता. (ज़ोया चुप चाप ये सब देख रही थी, उसकी भी धड़कने तेज तेज चल रही थी, पतानहीं पर उसके अंदर भी रोमांच था, वो बस दर रही थी, पर अंदर उथल पुथल मची हुई थी. इतने दिनों से उसने सोच लिया था की वो शिव के साथ और कुछ नहीं करेगी, और वो अपने आपको सँभालने की कोशिस में लगी हुई थी, वो बस यही दिखा रही थी जैसे उसे कुछ पता न हो, थोड़ी देर बाद शिव ने उसके हाथ पर हाथ रख दिया, उसका शरीर कैंप रहा था, पर उसने कोई हरकत नहीं की, उसने अपनी बेटिओ की और देखा जो आपस में बाते कर रही थी, वो फिर बहार देखने लगी, शिव हलके हलके उसके हाथ को सेहला रहा था, वो उसकी ऊँगली ो से खेल रहा था, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, ये सब रोमांच तो वो जैसे भूल hi गयी thi.)(Unka हाथ सहलाते हुए मेरी नजर उनके चेहरे पर hi थी, वो शांत बैठी थी या दिखावा कर रही थी, जो भी हो वो विरोध नहीं कर रही थी तो मेरी हिम्मत बढ़ रही थी, मेने अपना हाथ उठाया और उनकी झंघ पर रख दिया, उनकी आंखे बंद हुई पर फिर वो बहार को देखने लगी, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मेने कभी इस तरह की हरकत नहीं की थी तो दिल दर भी रहा था, पर कुछ था जो मुझे रोमांचित कर रहा था, में थोड़ी देर ऐसे hi बैठा रहा, फिर हलके से मेने अपनी उंगलिओ पर दबाव बढ़ाया और छोड़ दिया, मेरी नजर आंटी पर hi थी, वो ऐसे बेहवे कर रही थी जैसे उन्हें कुछ पता hi न हो, अपने बाये हाथ को में उनकी झांघो के बिच ले गया तो उनकी झंगे आपस में सटने लगी, मेरा हाथ उनकी छुटवाले भाग से थोड़ी hi दुरी पर था, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी की में ऐसा वैसा कुछ करू. मेरी धड़कने बढ़ चुकी थी, मेरी और ज्यादा हिम्मत नहीं हुई तो मेने अपना हाथ हटा लिया. उन्होंने हलके से मुझे देखा फिर वापस बहार देखने लगी. (ज़ोया को दर लग रहा था पर जब शिव ने हाथ वापस खिंच लिया तो उसको अच्छा नहीं लगा और उसकी नजर अपने आप उसकी और चली गयी जैसे कह रही हो की हाथ क्यों हटा लिया, उसको भी अच्छा लग रहा था, उसे शर्म भी आ रही थी की कैसे वो एक नौजवान लड़के को अपने शरीर के साथ खेलने दे रही थी, पर उसको अपने आपमें इस तरह से देखते हुए देख उसे भी अच्छा लग रहा था, उसे लग रहा था की अभी भी उसमे कोई तो बात है जो ये नौजवान लड़का उसकी और आकर्षित हो रहा है, वर्ण अब वो समझने लगी थी की वो बुजुर्ग होने लगी है)
फिर शिव ने ऐसी कोई हरकत नहीं की, एक और तो उसे बुरा लग रहा था पर फिर उसे अच्छा भी लग रहा था की शिव उसके साथ सेक्स कर चूका है फिर भी वो अपने जज्बातो को काबू किये हुए है, वो चाहता तो बहोत कुछ कर सकता था, शायद वो उसे रोकती भी नहीं, पर उसने ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं की, थोड़ी देर बाद शिव ने जब उसका हाथ पकड़ा और उसकी उंगलिओ में अपनी उंगलिअ फसायी तो उसने भी उसका हाथ थम लिया, जैसे अपनी सहमति जाता रही हो, वो देख बहार रही थी पर उसका सारा ध्यान शिव की हरकतों पर था. (जब आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा तो मुझे सुकून महसूस हुआ, मेने उनकी और देखा तो वो हलके हलके मुस्कुरा रही थी, पर मेरी और देख नहीं रही थी, एक्सप्रेस बस थी तो वो सीधे हमारे स्टेशन पर hi रुकी. मेने उनका हाथ छोड़ दिया, जब बुस्रुकि तो में उठा और आगे चला गया, हम सब उतर गए थे, जब ुम बहार आये तो एक आदमी भाग के आया, करीब 27-28 साल का था, दिखने में अच्छा भी था, उसके चेहरे पर खुसी जैसे सामना नहीं रही थी. ये करीम था, नाज़िआ का शोहर.
करीम : अस्सलाम अलैकुम.
नाज़िआ, आंटी, संयम : व आलेकुम s-salam. (करीम मेरी और देखने लगा)
शिव : नमस्ते.
करीम : नमस्ते.
ज़ोया : ये शिव है, इसके आबू आ नहीं सके तो उन्होंने इससे भेज दिया.
करीम : आइये आइये, लाइए में बैग ले लेता हु (उसने वो बैग ले लिया जो नाज़िआ ने उठाया हुआ था, हम को वो एक और ले जाने लगा, वो अच्छा था, दिखने में और स्वाभाव में भी पर नाज़िआदिदी के सामने थोड़ा फीका था, वो अपनी कार ले कर आया था, वो तीनो पीछे बेथ गए ,इ आगे उनके साथ बेथ गया, वो गाड़ी चलने लगे) और, कोई दिक्कत तो नहीं हुई न?
आंटी : नहीं बीटा, शिव ने सीट ले ली थी, सब आराम से हो गया.
करीम : चलो अच्छा है, वैसे अब्बू आ नहीं पाए तो मुझे कह देते, में लेने आ जाता.
आंटी : उसकी जरुरत नहीं थी, हम ाही गए न.
करीम : वैसे ये शिव, यही नाम बताया न, है कोण?
आंटी : वैसे तो ये संयम के साथ पढता है, पर इसके अब्बू इसको बहोत मानते है, हमें भी इसीपर भरोसा है, तो इसीको ले आये, क्यों आपको अच्छा नहीं लगा?
करीम : नहीं नहीं अम्मी, ये क्या बोल रही है, में तो बस ऐसे hi कह रहा था. और सुनाई ये आपकी तबियत कैसी है? और संयम कैसी चल रही है पढ़ाई?
ऐसे hi बाते करते करते हम उनके घर पहुंच गए, सोसाइटी में घर था इनका, दो मंजिला घर था, सब मुस्लिम परिवार hi रह रहे थे ऐसा लग रहा था, जब हम वह पहुंचे तो नाज़िआदिदी की सास और नानन्द बहार hi कड़ी थी, गाड़ी की आवाज सुन कर अभी अभी बहार आयी थी. वैसे तो उनका और नाज़िआ का कई बार झगड़ा हो चूका था, घर के कामो को ले कर और उसके बच्चे न होने पर, पर अब बात अलग थी, अब वो माँ बन ने वाली थी तो दोनों ने उसका मुस्कुराते हुए स्वागत किआ.
Hafiza(Saas) : (नाज़िआ ने झुक कर अदब kia)Jiti रहो बेटी, खुस कर दिया तुमने, आओ आओ अंदर आओ, कैसी है संयम, (ज़ोया ko)Aaiye आइये. (वह कड़ी इनायत जो नाज़िआ की ननद थी वो गाड़ी से निकले लम्बे से नौजवान को देख रही थी, वो सबको सलाम कर रही थी पर निगाहे शिव पर थी.)

में सबको देख रहा था, मुझे ावक्वार्ड लग रहा था, ऐसे भी कद की वजह से सब मुझे देखते रहते है और ऊपर से मेरा नाम सुन कर नाज़िआ के पति ने भी मुझे आश्चर्य से देखा था, मुझे भी लगने लगा की मेने गलती कर दी, अंकल को मुझे नहीं भेजना चाहिए था, पर वो भी क्या करते, उन्हें थोड़ी न पता था की मेरे और सबके क्या सम्बन्ध है, संयम, नाज़िआ और आंटी को तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी क्यों की वो मुझसे इतना परिचित थी, पर सबको संजना थोड़ा मुश्किल था, में महसूस कर रहा था की आस पास के घर के लोग भी बहार निकल आये थे और वो हमें hi देख रहे थे. करीम मेरे साथ hi था, तो सब औरते अंदर चली गयी, करीम और में आखिर में अंदर गए, आगे हॉल में करीम के पापा बैठे हुए थे, मुझे दिखा कर करीम बोले.
करीम : ये शिव है, इनका फॅमिली फ्रेंड है, आबू आ नहीं पाए तो हिफाजत के लिए इन्हे भेज diya.(Waise तो उसको ये सही नहीं लग रहा था पर वो अपनी ससुराल की बेइज्जती नहीं करना चाहता था तो अपने आबू को जैसे समजा रहा था, वही अंदर भी यही हालत थे, नाज़िआ की सास पूछ रही थी)
हाफ़िज़ा : ये लड़का कोण है, पहले कभी देखा नहीं (ज़ोया समझती थी की ये मामला कितना नाज़ुक है, वैसे भी वो शिव को इसलिए hi साथ में लायी थी क्यों की वो किसी और पर भरोसा नहीं कर शक्ति थे, वो असंजस में थी की क्या कहे, नाज़िआ थोड़ी कॉंफिडेंट थी तो उसने hi जवाब दिया)
नाज़िआ : अम्मी, ये शिव है, वैसे तो ये संयम के साथ स्कूल में पढता है, पर बहोत hi नेक है, संयम को कुछ लड़के स्कूल के रस्ते में परेशान करते थे, एक दिन उन्होंने संयम का रास्ता रोका था,
शिव उसी वक़्त वह से गुजर रहा था, उसने उन लड़को की न सिर्फ धुलाई की बल्कि रोज़ इसको और इसकी सहेली को हिफाज़त से स्कूल पहुँचता है, आबू और ामी तो इसे अपना बीटा hi मानते है. (ज़ोया ने जब ये सुना की ‘बीटा’ तो उसकी नजर झुक गयी, पर नाज़िआ जो कह रही थी वो सही hi tha)(Uski नानन्द इनायत वही कड़ी थी, वैसे भी उसको शिव पसंद आया था, वो एक तलाक सुदा थी, किसी कारन से उसका तलाक हो गया था और वो अपने मायके में hi थी, शिव के बारेमे जान कर उसकी उत्सुकता बढ़ी)
इनायत : मतलब, उसने उस लड़के को मारा था?
नाज़िआ : वो अकेला नहीं था, उस लड़के के साथ में उसके दो दोस्त और भी थे, उसके बाद भी वो दोबारा गुंडों को लेकर भी आया था, चार पांच गुंडे थे, उन सबको इसने मारा था, उसके बाद कभी वो लोग दिखाई नहीं दिए.
हाफ़िज़ा : (वो समाज रही थी की ये लोग उस पर बहोत भरोसा कर रहे है, पर सोसाइटी की दूसरी औरते भी वह कड़ी थी, तो जान बुज कर उसने puchha)Par बेटी वो गैर जाट का है, आप उसे क्यों लाये?
नाज़िआ : आप खुद hi मिल लो आपको पता चल जायेगा (वैसे भी वो जानती थी की शिव उसको दीदी कह कर hi बुलाता है तो उसको कॉन्फिडेंस था, उसने शिव को आवाज लगायी) शीइइइइइइव, शीइइइइइव.
शिव : (जो बहार बैठा था और करीम और उसके अब्बू की आँखों का सामना कर रहा था, उसने नाज़िआ की आवाज़ सुनी, तो अपनी आदत के मुताबित hi वो bola)Ha डीडीईई. (जब उसने दीदी बोलै तो आगे बैठे मर्दो ने और अंदर बैठी औरतो ने भी ये सुना, सबके चेहरे पर संतोष था)
नाज़िआ : जरा अंदर तो आना. (शिव ने करीम और उसके अब्बू की और देखा)
अकरम (नाज़िआ का ससुर): है है, जाओ बीटा, तुम तो घर के hi हो. (शिव भी उठ कर अंदर गया, अंदर सब औरते उसे hi देख रही थी, वैसे भी वो लम्बा चौड़ा और मासूम दिखनेवाला hi था तो औरतो को तो पसंद आना hi था)
शिव : है दीदी??? (उसने जिस सरलता और नर्माहट से कहा था, सब औरतो के दिल में वो बस चूका था)
नाज़िआ : अम्मी तुमसे मिलना चाहती थी, इस लिए बुलाया (अपनी सास की और इस्सर करके वो बोली, इतनी औरतो के बिच अपने आपको प् कर वो शर्माने लगा, उसकी इस शर्म से सबके चेहरे पर मुस्कान आ गयी)
हाफ़िज़ा : (मुस्कुराते hue)Aao आओ, शर्मा क्यों रहे हो, सब घर के hi है, में तो बस पूछ रही थी की तुम कोण हो, तुम तो बड़े शर्मीले हो. शर्मा क्यों रहे हो, अपना hi घर संजो.
शिव : जी आंटी. (उसने नज़ारे झुका के जवाब दिया)
इनायत : (वो तो जैसे दीवानी हुई जा रही थी, उसने शिव की खिंचाई करने का मौका लपक liya)Bhabhi आप जूथ बोल रही हो, इन्हे देख कर लगता नहीं की इन्होने गुंडों को मारा भी होगा. (शिव ने इनायत की और देखा, उसे पता नहीं था की यहाँ क्या बात हुई, उसने फिर से शर्मा के अपनी नज़ारे झुका ली)
नाज़िआ : शिव एक एथलीट भी है, देश के लिए दौड़ने की प्रैक्टिस कर रहा है, बीचेमे न्यूज़ चैनेलो में भी आया था जब इसने बहोत बड़े बाइक चोरो के गिरोह को पकड़वाया था. पुलिस अफसर से ले कर पॉलिटिशंस तक पहचान है इसकी)
करीम : (बहार से वो सब सुन रहा tha)Ha याद आया, कुछ समय पहले आपके सहर की न्यूज़ आयी थी, उस टाइम बस ऐसे hi न्यूज़ देखि थी तो याद नहीं रहा. है मेने इससे देखा था, वैसे भी इनकी हिघ्त की वजह से ये सब में अलग दिख जाते है, मेरा भी ध्यान गया था, पर मुझे क्या मालूम था की ये आपकी पहचान के है.
नाज़िआ : (उसके दिल का सारा बोझ उतर गया था, वैसे भी शिव से कोई इम्प्रेस न हो वो हो नहीं सकता था) जी, ये वही है. (सबकी बाटे सुन कर शिव शर्मा रहा था और नज़ारे झुकाये खड़ा था)
इनायत : भाभी, आपके भाई को देख कर लगता नहीं की ये इतने कारनामे कर चुके है, देख कर तो लगता है की कोई डांटेगा तो भी ये रोने लगेंगे.
नाज़िआ : (मान में : अगर ये ऊपर चढ़ गया न तो पता चलेगा की कोण रोटा hai)Ye ऐसा hi है, दीखता बहोत सरल है और ये है भी, बिना वजह ये किसी को परेशान नहीं करता.
अकरम : (जैसे बड़े लोगो का इंट्रेस्ट होता है वैसे hi puchha)Iske वालिद क्या करते है?
नाज़िआ : (हलके दुःख के sath)Iske वालिद नहीं है अब्बू, ये यतीम है, यतीम खाने में रहता है. (शिव के चेहरे पर कोई फर्क नहीं पड़ा, अब उसको इन बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता था, वो बस नज़ारे झुकाये हलके से मुस्कुरा रहा था क्यों की सब उसकी बाते कर रहे थे)
हाफ़िज़ा : या खुदा, ये क्या जुल्म किआ है, ऐसा बीटा तो चिराग ले कर ढूंढने से भी न मिले, अल्लाह के आगे घुटने घिस जाये तब जेक ऐसी औलाद मिलती है. (करीम भी काफी इम्प्रेस था, वो उठा और शिव के बाजु में खड़ा हो गया, उसके कंधे पर हाथ रख के)
करीम : सो साद बरोथेर, यकीं नहीं होता. (उसने दिलासा दिया)
शिव : नहीं जीजाजी, मुझे कोई शिकायत नहीं है, में खुस हु अपनी जिंदगी से, इतने लोग मेरे साथ है, कैसे में अन्यथा हुआ.
अकरम : सही कह रहे हो बीटा, तुम बाटे करो, करीम बीटा, शाम की तयारी के लिए हमे बाजार भी जाना है. (उन्होंने याद दिलाया)
करीम : है आबू, (शिव की पीठ थप तपते hue)Tum बाते करो, हमे थोड़ा काम है. (अपनी ामी ko)Hum जा रहे है अम्मी.
हाफ़िज़ा : ठीक है बीटा. (शिव ko)Ander आ जाओ बीटा, ये लोग हमारे लिए तौफे लाये है वही दिखा रहे थे.
शिव : आप लोग देखिये, में बहार बैठा हु.
नाज़िआ : बहार अकेले अकेले क्यों बैठोगे, यही खड़े रहो, या बैठना है? पानी पिया की नहीं?
इनायत : सॉरी भाभी, मेरे दिमाग से hi निकल गया, में अभी लती हु, आप सबको मिलने की खुसी में सब भूल गयी.
नाज़िआ सबके बिहेवियर नोट कर रही थी, ये सब ऐसे नहीं थे जैसे अभी दिख रहे थे, कितना फर्क आ गया था सब में, सिर्फ इसीलिए की अब वो माँ बन ने वाली है, और ये सब मुमकिन हुआ था शिव की वजह से, उसने प्यार से शिव की और देखा, शिव ने भी उसे देखा, वो मसुकुराई तो शिव भी मुस्कुराया. तभी इनायत सबके लिए पानी ले आयी, ट्रे में रक्खे गिलास वो सबको देने लगी, उसने शिव को भी दिया, उसे देखने के लिए उसे अपनी गर्दन ऊपर करनी पड़ती थी, वो भोत प्यार से मुस्कुरा रही थी. (मेने देखा की वो कुछ ज्यादा hi प्यार से देख रही है, वैसे भी वो खूबसूरत थी, काजल लगी बड़ी बड़ी आँखों से वो मुझे देख रही थी, लिपस्टिक लगे होठ मुस्कुरा रहे थे, रंग भी गोरा hi था. वो ऐसे देख रही थी तो मेने अपनी नज़ारे झुका ली)
शिव का ऐसे शर्माना, इनायत को बहोत अच्छा लग रहा था, उलटे सुलटे कोई विचार नहीं थे बस उसको शिव अच्छा लगा था, वो उसको शरमाते हुए देख कर और मुस्कुरा रही थी. उसने फिर से सबसे खली गिलास लिए और अंदर रख आयी. अंदर सब बिस्तर पर बैठे थे और कुछ खड़े थे, वैसे भी नाज़िआ अच्छी थी तो सब उसको पसंद करते थे तो, काफी लोग आये हुए थे. रूम तक़रीबन भरा हुआ था, शिव को अजीब लग रहा था पर वैसे भी बहार वो अकेला क्या करता तो वही खड़ा रहा.
इनायत सब रख कर वापस आयी और शिव के नजदीक hi कड़ी हो गयी. वो शिव पर जैसे लट्टू हो रही थी, अंदर क्या चल रहा है उसे उस से कोई मतलब नहीं था, वो बस शिव के नजदीक कड़ी थी, शिव तो लम्बा था तो उसे अंदर देखने में कोई दिक्कत नहीं थी. इनायत की एक सहेली भी वह थी तो वो उसके साथ कड़ी हो गयी, पीछे hi शिव खड़ा था तो उसने एक बार मुस्कुरा के शिव को देखा. सबके लिए लाये हुए कपडे और दूसरी गिफ्ट दिखाई जा रही थी. इनायत और शिव के बिछ कुछ कम का hi डिस्टेंस था, अचानक इनायत पीछे हुई तो वो शिव से टकरा गयी, उसने ये जानबुज कर नहीं किआ था, बा अंदर देखने के लिए थोड़ी हिली तो ये हो गया था, उसने शर्मा के शिव को देखा और मुस्कुरायी.
शिव को उस गद्देदार मसल अंग का एहसास हुआ पर वो शांत रहा, उसकी नजर एक बार भरे हुए कूल्हों पर गयी भी पर उसने नजर हटा ली. सब लोग देखने में hi बिजी थे. इनायत से ये अनजाने में हो गया था पर अब उसका दिल धक् धक् करने लगा था, बात वो वो अपनी दोस्त से कर रही थी, और अंदर देख भी रही थी पर अभी हुआ स्पर्श उसके मान मस्तिक में छाप चूका था. उसका मान किआ की फिर वो करे, पर उसको दार लग रहा था. थोड़ी देर बाद उसका दिल नहीं माना, और इस बार वो जान बुज कर थोड़ी पीछे हुई, उसके गद्दे दर कूल्हे शिव से टकराये, वो फिर आगे हो गयी. उसने शिव की और देखा और ऐसा मुँह बनाया जैसे कह रही हो की सॉरी गलती से हो गया.
मेने सोचा की थोड़ा पीछे हो जाता हु, पर फिर दिलने कहा की क्या जरुरत है, में थोड़ी न कुछ कर रहा हु. में वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद फिर से वो हल्का सा पीछे हुई, अब मुझे लगने लगा की ये जान बुज कर कर रही है, मेरा क्या जाता था, में वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद फिर से उसके नरम कूल्हे मुझसे टकराये, मेने सबकी और देखा तो सब बिजी hi थे. मेरे लुंड में हलकी अकड़न आणि सुरु हो गयी थी.








































































