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अपडेट 23
रंजन ने मुझे लकडिया काटने को कहा था, मुझे गयम भी जाना था तो में जल्दी जल्दी लकडिया काट रहा था. और रंजन उसे इकठ्ठा कर के एक जगह रख रही थी. लकडिया काट ते हुए भी मेरी नजर बार बार उसकी और जा रही थी, और वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. में नहीं जनता पर मुझे अब लड़कीओ को देख कर कुछ कुछ होने लगता था, और वैसे भी रंजन और में बहोत कुछ कर चुके थे तो उसे देख कर मेरे अंदर कुछ कुछ हो रहा था. (रंजन भी बार बार उसे देख रही थी, उसका दिल भी मचल रहा था)

जैसे hi काम ख़तम हुआ में उसके पास गया, वो अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी रही और मुस्कुराने लगी, मेने उसका चेहरा उठाया तो वो जाट से मुझसे लिपट गयी, (रंजन कब से अपने आप को रोके हुए थी, पर अब उसका भी बांध टूट hi gaya)mene उसका चेहरा उठाया और उसके होठो को हलके से चूमा पर वो तो मुज पे टूट hi पड़ी. उसकी भावनाओ को समझते हुए मेने भी उसके होठो को चूसना चालू कर दिया. एक दूसरे को बहो में भर कर हम किश करने में लगे हुए थे. मेरी उत्तेजना भर रही थी तो में उसके रसीले छोटे आम जैसे दोनों बूब्स को मसलते हुए उसके होठो को गिला करने लगा. (रंजन मदहोस सी होने लगी, उसकी छूट ने उठे हुए लुंड की चुभन को पहचान लिया और वो अपनी छूट शिव के लुंड पे रगड़ने लगी. दोनों इस खेल का आनंद ले रहे थे.) मेरा दिल कर रहा था उसके कच्ची चुचिओ को नंगा देखने का तो में उसकी कुर्ती को ऊपर उठाने लगा. (रंजन ने जैसे hi महसूस किआ की शिव उसकी कुर्ती उठा रहा है तो उसने किश को रोका और शिव को देखने लगी, उसका दिल भी यही चाहता था पर फिर भी उसे लड़कीओ वाली शर्म आ hi जाती थी. ) उसे ऐसे मुझे देख ते देख में भी रुक गया और उसे देखने लगा.
शिव : (मेरी आवाज उत्तेजना में कैंप रही thi)Muje देखना है, देखु?
रंजन : (शिव के प्यार भरे प्रस्ताव को सुन रंजन अपना शिर साइड में घुमा कर मुस्कुराते हुए) hmmm(Wo कैसे अपने आशिक़ के प्रस्ताव को मन कर शक्ति थी, आखिर उसका भी दिल तड़प रहा था इन सब के लिए)
(उसकी सहमति पते hi में उसका कुरता ऊपर उठाने लगा. पहले उसकी पतली सी कमर बेपर्दा हुई, अब में समाज रहा था की स्नेहा मैडम के मुकाबले वो कितनी छोटी कमर थी. ये एक लड़की थी और वो औरत. उसकी नाभि का वो खड़ा देख मेरे लुंड ने ठुमका मारा. रंजन बड़ी मदहोशी में मुझे देख रही थी, मेने हलके से उसके होठ पर किश किआ और उसकी कमर को सहलाने लगा, मेने कुर्ती और ऊपर उठादि और उसकी कच्छी चुचिओ को देखने लगा.

new canaan country school
स्नेहा मैडम के मुकाबले ये भी बहोत छोटी थी पर रंजन का शरीर पतला था और उसके मुकाबले उसकी चूचिया काफी बड़ी लग रही थी, एकदम तानी हुई चूचिया और उसके ऊपर का पूरी तरह तना हुआ निप्पल देख मेरे अंदर अजीब सी हलचल होने लगी , निप्पल के आस पास में छोटा सा घेरा बना हुआ था. में काफी उत्तेजित हो रहा था इस कठोर चुचिओ को देख कर जो पूरी तरह तानी हुई थी में अपनी उंगलिओ से निप्पल को चुने लगा तो रंजन की सांसे तेज होने लगी और उसके चुके भी ऊपर निचे होने लगे. मेने एक चुकी को अपने हाथो में भरलीआ और दबाने लगा.
रंजन : शीइइइइइव, ahhhhh.(Mene रंजन को देखा और अपना मुँह झुका कर एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा.) आठ शिवववव... शह्ह्ह्ह, धीरी. आयी, इतनी जोर से नहीं, शह्ह्ह्ह (वो मेरे सर के बालो को नोचने लगी और मेरे शिर को अपनी चुकी पे दबाने लगी. में समाज नहीं प् रहा था की उसे दर्द हो रहा है की मज़ा आ रहा hai)Aah ...mmmmm....ohhhh Shiv...haaaaa...shhhh शिव आहिस्ता शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है शिव shhhhh...aahhhh ....

(वो मेरे सर को सहलाने लगी, में उसकी चुकी को चूस रहा था तो मेरा शिर निचे झुका हुआ था और मेरी नजर उसकी छूट वाले भाग पर पड़ी, मेने अपना एक हाथ बढ़ाया और उसकी छूट पे रख दिया और उसे दबाने laga)Oooomaaaa, एआईईईई शिव ....आआह्ह्ह्ह क्या कर रहे होऊ. वह नहीं शिव शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह में मर जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह shiiiiiiiiv(Muje कपडे के ऊपर से उसकी छूट की दरार का आभास हो रहा था तो में उसे अपनी एक ऊँगली से उस दरार को सहलाने laga)Shiv अह्ह्ह ऐसा न karo...shiiiiii...mujse सेहन नहीं हो रहा शहहह अह्ह्ह्हह्हह मुझे कुछ हो रहा है shiv....(Thodi hi देर में मुझे अपनी ऊँगली पे गीलापन महसूस होने लगा, में अपनी ऊँगली को और अंदर दबाते हुए रगड़ने लगा. रंजन की कमर आगे पीछे हिलने लगी, वो मेरे बालो को बड़ी सख्ती से खींचने लगी. में दोनों चुचिओ के निप्पल को बरी बरी चूस रहा था. मेने अपना हाथ उसकी छूट से हटाया और उसकी पजामी के अंदर डालने लगा) ओह्ह्ह शिव मात करो, आठ मुझे कुछ हो रहा hai(Usne मुझे रोका नहीं ,में अपना हाथ अंदर डालने लगा सपाट चिकनी कमर के बाद मुझे कुछ बालो का एहसास हुआ, में उन बालो को सहलाते हुए आगे बढ़ा तो फिर छूट के होठो का एहसास हुआ, उसकी दरार में ऊँगली फिरते हुए मेने उसकी छूट को नंगी hi दबोच लिए.) शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव ऐसा मूत करो अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह मुझे कुछ हो रहा है शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, ओह्ह्ह्हह शीइइइइइव ahhhhh(MecChut की दरार को अपनी उंगलीसे सहलाने लगा और साथ में दबाव भी बढ़ने लगा जिस से ऊँगली छूट की फैंको को फैलाकर दरार के ुंदेरतक चालीगयी. मेरी ऊँगली को उसकी छूट का छेद मिलचुका था. वो रास से पूरी ररहा भीगा हुआ था और छूट के मुकाबले वो भाग बहोत hi ज्यादा गरम था. मेरी भी उत्तेजना बहोत बढचुकि थी. में उस गरम छेड़ को ऊँगली से कुरेद ने लगा. रंजन ने अपनी छूट को आगे की और कर दिया, अपनी छूट के छेड़ पर शिव की ऊँगली को महसूस करने पर उसकी छूट में चींटिया रेंगने लगी थी, वो इस एहसास से पागल हो रही थी, उसे ऐसा लग रहा था की वो ऊँगली उसके छेड़ में चली जाये इस लिए वो अपनी छूट को आगे धक्के दे रही thi)Shhhhhhh शिव्व्व अह्ह्ह क्या कर रहे हो, शठ में पागल हो जाउंगी शहहहहह शिईयिव अह्ह्ह्हह्हह अंदर डालो न शिव शहहहहह (उसकी कमर अपने आप hi झटके देने लगी थी की मेरी ऊँगली उस छोटे से छेद में थोड़ी अंदर चली hi गयी. वो जगह इतनी छोटी थी की मेरी ऊँगली पर छूट का छल्ला में साफ महसूस कर रहा था) (खुमारी में रंजन ने ऊँगली तो डलवा ली पर उसे अपनी छूट के छेड़ में थोड़ा दर्द महसूस हुआ पर उसके सामने मज़ा और बढ़ गया था).( मेरी ऊँगली थोड़ी सी hi अंदर थी, मुझे अपनी ऊँगली पे पड़ने वाले दबाव से लग रहा था की वो छेड़ बहोत hi छोटा है, में अपनी ऊँगली को जल्दी जल्दी आगे पीछे करने laga.)(Ranjan अपने अंदर इतना कुछ महसूस कर रही थी की उस से रहा नहीं जा रहा था, वो शिव को पकड़ने के लगी पर उसके हाथ में शिव का लुंड आ गया, अपने हाथ में इतने सख्त डंडे को महसूस कर के वो पागल सी होने लगी, वो जोर से लुंड को दबाने लगी ोोोोीीी मा, शिवववव में मर जाउंगी शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे बहोत कुछ हो रहा है, शिव में पागल हो jaungi....Aahhhh shivvvvv...aiiiiiii.(Meri ऊँगली और आगे नहीं जा रही थी तो में बस उतनी hi ऊँगली से जल्दी जल्दी आगे पीछे करने laga.)Shivvvv आठ मुज से रहा नहीं जा रहा ,,, अह्ह्ह्ह शिव मूत दूंगी आह्ह्ह्ह ....आईईईई आअह्ह्ह्ह शिव ममममम मेरा मूत निकल जायेगा सीईव रुको आअह्ह्ह्हह मेरा निकल जायेगा शीइइइइइइव (और वो झटके कहती हुई झड़ने लगी, उसे रहा नहीं गया तो वो शिव से कास के लिपट गयी, और उसने शिव की कलाई भी पकड़ ली, उसकी छूट से रास की बौछार होने लगी. शिव का पूरा हाथ भीग गया)( रंजन ने मेरी कलाई पकड़ ली थी तो में रुक गया.)
(रंजन जोर जोर से सांसे ले रही थी और वो शिव को अपने अंदर खिंच लेना चाहती हो ऐसे लिपटी हुई थी,) (वही थोड़ी दुरी पर कड़ी विणा ये खेल कब से देख रही थी, वो अपनी आंखे फाडे कबसे ये कामलीला देख रही थी, उसे भी अपनी छूट से बेहटा रास महसूस हो रहा था जो उसकी झांघो से बह रहा था, वो अपनी झंघे आपसमे रगड़ रही थी. जब उसने देखा की दोनों शांत खड़े है कुछ कर नहीं रहे है तो वो बिना आवाज किये वह से लौट गयी.) जब रंजन अपना पूरा रास बहचुकि तो उसे अपनी स्थिति का बहन हुआ, वो शर्म से भर गयी, उसे एंटी शर्म आ रही थी की वो सोच रही थी की वो शिव से कैसे नज़ारे मिलाएगी. पर ऐसे वो कबतक कड़ी रहती, उसने अपना चेहरा उठाया और शिव को देखा जो उसकी hi आँखों में देख रहा था. वो शर्म से सिंहर उठी, पर नज़ारे झुकाने की बजाये वो शिव के होठो पे टूट पड़ी. शिव भी उसके होठो का रसपान करने लगा. उतने में दूर से सरिता दीदी की आवाज आयी जो उन्हें पुकार रही थी.
सरितादिदी : (सरिता को भी आभास था तो वो दूर से hi पुकार रही thi)Shiiiiiiv, राजाआं. हो गया क्या तुम्हारा. (सरिता जान बुज कर ऐसा बोली थी, ये वाक्य लकडिओ के काम के लिए भी था और उनके काम के लिए भी tha)(Shiv और रंजन, दोनों पहले थोड़ा घबरा गए पर जल्द hi शिव ने सँभालते हुए उन्हें जवाब दिया.
शिव : है दीदी, हो गया है, अभी आते है.
सरितादिदी : ठीक hai.(Wo चली गयी)
शिव : (उसकी आँखों में देखते hue)Tumhe बुरा तो नहीं लगा मेने तुम्हे वह छुआ तो.?
रंजन : (शरमाते हुए अपनी नज़ारे झुकाते हुए अपनी गर्दन न में हिलने लगी. उसका चेहरा बता रहा था की वो बहोत खुस thi)Tum पहले जाओ में थोड़ी देर में आती हु.
शिव : (मेने भी मुस्कुरा कर kaha)Thik hai(Mene रंजन को गले लगाया तो वो भी उस से कास के लिपटगाई, शिव ने उसके गाल पर एक पप्पी दी) जल्दी आना
रंजन ने शरमाते हुए हामी भरी, फिर में वह से निकलकर अंडर चला गया. रंजन अपनी हालत दुरस्त करने लगी. आज उसे बड़ा मज़ा आया था. वो मुस्कुरा रही थी और अपनी छूट को पोछ कर साफ कर रही थी. उसके छूट के रास से आगे का भाग पूरी तरह से भीग गया था. जैसे तैसे उसने अपने आपको ठीक किआ और वो भी अंदर चली गयी, उसकी हालत ऐसी थी की वो सबके सामने नहीं आना चाहती थी तो सबसे बच कर सीधे अपने रूम में घुस गयी. उसने कपडे बदले और बहार चली आयी.
रंजन किसी से बात किये बिना अपने काम में लग गयी. काम करते हुए उसकी आंखे बार बार शिव पे जा रही थी और जब उसकी नज़ारे मिलती तो वो शर्म से मुस्कुराते हुए अपनी नज़ारे निचे कर लेती थी. विणा बड़े गौर से उन्दोनो को hi देख रही थी.
शिव : सुनो Ranjan.(Ranjan ऊपर से निचे तक कैंप गयी, उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी की शिव उस से अभी बात करेगा) कल तुम और विणा तैयार रहना, में तुम्हे स्कूल लेने आऊंगा, फिर वही से यूनिफार्म लेने जाएँगी.
रंजन : (वो बोलने की स्थिति में नहीं thi)Hmmmm.
शिव : (विणा की और देख kar)Thik hai(Usne भी है में गर्दन हिलायी)
मुझे अब जाना था तो में वह से गयम के लिए निकल गया. गयम में सब की एंट्री करवाने के बाद में भी एक्सरसाइज करने लगा. जब छूटने में दस मिनट बाकि थे तो में कसरत वाले कमरे से बहार निकला, जैसे hi में बहार आया तो मेरी नज़र अंडर आती हुई स्नेहा मैडम पर पड़ी.
रंजन ने मुझे लकडिया काटने को कहा था, मुझे गयम भी जाना था तो में जल्दी जल्दी लकडिया काट रहा था. और रंजन उसे इकठ्ठा कर के एक जगह रख रही थी. लकडिया काट ते हुए भी मेरी नजर बार बार उसकी और जा रही थी, और वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. में नहीं जनता पर मुझे अब लड़कीओ को देख कर कुछ कुछ होने लगता था, और वैसे भी रंजन और में बहोत कुछ कर चुके थे तो उसे देख कर मेरे अंदर कुछ कुछ हो रहा था. (रंजन भी बार बार उसे देख रही थी, उसका दिल भी मचल रहा था)

जैसे hi काम ख़तम हुआ में उसके पास गया, वो अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी रही और मुस्कुराने लगी, मेने उसका चेहरा उठाया तो वो जाट से मुझसे लिपट गयी, (रंजन कब से अपने आप को रोके हुए थी, पर अब उसका भी बांध टूट hi gaya)mene उसका चेहरा उठाया और उसके होठो को हलके से चूमा पर वो तो मुज पे टूट hi पड़ी. उसकी भावनाओ को समझते हुए मेने भी उसके होठो को चूसना चालू कर दिया. एक दूसरे को बहो में भर कर हम किश करने में लगे हुए थे. मेरी उत्तेजना भर रही थी तो में उसके रसीले छोटे आम जैसे दोनों बूब्स को मसलते हुए उसके होठो को गिला करने लगा. (रंजन मदहोस सी होने लगी, उसकी छूट ने उठे हुए लुंड की चुभन को पहचान लिया और वो अपनी छूट शिव के लुंड पे रगड़ने लगी. दोनों इस खेल का आनंद ले रहे थे.) मेरा दिल कर रहा था उसके कच्ची चुचिओ को नंगा देखने का तो में उसकी कुर्ती को ऊपर उठाने लगा. (रंजन ने जैसे hi महसूस किआ की शिव उसकी कुर्ती उठा रहा है तो उसने किश को रोका और शिव को देखने लगी, उसका दिल भी यही चाहता था पर फिर भी उसे लड़कीओ वाली शर्म आ hi जाती थी. ) उसे ऐसे मुझे देख ते देख में भी रुक गया और उसे देखने लगा.
शिव : (मेरी आवाज उत्तेजना में कैंप रही thi)Muje देखना है, देखु?
रंजन : (शिव के प्यार भरे प्रस्ताव को सुन रंजन अपना शिर साइड में घुमा कर मुस्कुराते हुए) hmmm(Wo कैसे अपने आशिक़ के प्रस्ताव को मन कर शक्ति थी, आखिर उसका भी दिल तड़प रहा था इन सब के लिए)
(उसकी सहमति पते hi में उसका कुरता ऊपर उठाने लगा. पहले उसकी पतली सी कमर बेपर्दा हुई, अब में समाज रहा था की स्नेहा मैडम के मुकाबले वो कितनी छोटी कमर थी. ये एक लड़की थी और वो औरत. उसकी नाभि का वो खड़ा देख मेरे लुंड ने ठुमका मारा. रंजन बड़ी मदहोशी में मुझे देख रही थी, मेने हलके से उसके होठ पर किश किआ और उसकी कमर को सहलाने लगा, मेने कुर्ती और ऊपर उठादि और उसकी कच्छी चुचिओ को देखने लगा.

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स्नेहा मैडम के मुकाबले ये भी बहोत छोटी थी पर रंजन का शरीर पतला था और उसके मुकाबले उसकी चूचिया काफी बड़ी लग रही थी, एकदम तानी हुई चूचिया और उसके ऊपर का पूरी तरह तना हुआ निप्पल देख मेरे अंदर अजीब सी हलचल होने लगी , निप्पल के आस पास में छोटा सा घेरा बना हुआ था. में काफी उत्तेजित हो रहा था इस कठोर चुचिओ को देख कर जो पूरी तरह तानी हुई थी में अपनी उंगलिओ से निप्पल को चुने लगा तो रंजन की सांसे तेज होने लगी और उसके चुके भी ऊपर निचे होने लगे. मेने एक चुकी को अपने हाथो में भरलीआ और दबाने लगा.
रंजन : शीइइइइइव, ahhhhh.(Mene रंजन को देखा और अपना मुँह झुका कर एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा.) आठ शिवववव... शह्ह्ह्ह, धीरी. आयी, इतनी जोर से नहीं, शह्ह्ह्ह (वो मेरे सर के बालो को नोचने लगी और मेरे शिर को अपनी चुकी पे दबाने लगी. में समाज नहीं प् रहा था की उसे दर्द हो रहा है की मज़ा आ रहा hai)Aah ...mmmmm....ohhhh Shiv...haaaaa...shhhh शिव आहिस्ता शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है शिव shhhhh...aahhhh ....

(वो मेरे सर को सहलाने लगी, में उसकी चुकी को चूस रहा था तो मेरा शिर निचे झुका हुआ था और मेरी नजर उसकी छूट वाले भाग पर पड़ी, मेने अपना एक हाथ बढ़ाया और उसकी छूट पे रख दिया और उसे दबाने laga)Oooomaaaa, एआईईईई शिव ....आआह्ह्ह्ह क्या कर रहे होऊ. वह नहीं शिव शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह में मर जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह shiiiiiiiiv(Muje कपडे के ऊपर से उसकी छूट की दरार का आभास हो रहा था तो में उसे अपनी एक ऊँगली से उस दरार को सहलाने laga)Shiv अह्ह्ह ऐसा न karo...shiiiiii...mujse सेहन नहीं हो रहा शहहह अह्ह्ह्हह्हह मुझे कुछ हो रहा है shiv....(Thodi hi देर में मुझे अपनी ऊँगली पे गीलापन महसूस होने लगा, में अपनी ऊँगली को और अंदर दबाते हुए रगड़ने लगा. रंजन की कमर आगे पीछे हिलने लगी, वो मेरे बालो को बड़ी सख्ती से खींचने लगी. में दोनों चुचिओ के निप्पल को बरी बरी चूस रहा था. मेने अपना हाथ उसकी छूट से हटाया और उसकी पजामी के अंदर डालने लगा) ओह्ह्ह शिव मात करो, आठ मुझे कुछ हो रहा hai(Usne मुझे रोका नहीं ,में अपना हाथ अंदर डालने लगा सपाट चिकनी कमर के बाद मुझे कुछ बालो का एहसास हुआ, में उन बालो को सहलाते हुए आगे बढ़ा तो फिर छूट के होठो का एहसास हुआ, उसकी दरार में ऊँगली फिरते हुए मेने उसकी छूट को नंगी hi दबोच लिए.) शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव ऐसा मूत करो अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह मुझे कुछ हो रहा है शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, ओह्ह्ह्हह शीइइइइइव ahhhhh(MecChut की दरार को अपनी उंगलीसे सहलाने लगा और साथ में दबाव भी बढ़ने लगा जिस से ऊँगली छूट की फैंको को फैलाकर दरार के ुंदेरतक चालीगयी. मेरी ऊँगली को उसकी छूट का छेद मिलचुका था. वो रास से पूरी ररहा भीगा हुआ था और छूट के मुकाबले वो भाग बहोत hi ज्यादा गरम था. मेरी भी उत्तेजना बहोत बढचुकि थी. में उस गरम छेड़ को ऊँगली से कुरेद ने लगा. रंजन ने अपनी छूट को आगे की और कर दिया, अपनी छूट के छेड़ पर शिव की ऊँगली को महसूस करने पर उसकी छूट में चींटिया रेंगने लगी थी, वो इस एहसास से पागल हो रही थी, उसे ऐसा लग रहा था की वो ऊँगली उसके छेड़ में चली जाये इस लिए वो अपनी छूट को आगे धक्के दे रही thi)Shhhhhhh शिव्व्व अह्ह्ह क्या कर रहे हो, शठ में पागल हो जाउंगी शहहहहह शिईयिव अह्ह्ह्हह्हह अंदर डालो न शिव शहहहहह (उसकी कमर अपने आप hi झटके देने लगी थी की मेरी ऊँगली उस छोटे से छेद में थोड़ी अंदर चली hi गयी. वो जगह इतनी छोटी थी की मेरी ऊँगली पर छूट का छल्ला में साफ महसूस कर रहा था) (खुमारी में रंजन ने ऊँगली तो डलवा ली पर उसे अपनी छूट के छेड़ में थोड़ा दर्द महसूस हुआ पर उसके सामने मज़ा और बढ़ गया था).( मेरी ऊँगली थोड़ी सी hi अंदर थी, मुझे अपनी ऊँगली पे पड़ने वाले दबाव से लग रहा था की वो छेड़ बहोत hi छोटा है, में अपनी ऊँगली को जल्दी जल्दी आगे पीछे करने laga.)(Ranjan अपने अंदर इतना कुछ महसूस कर रही थी की उस से रहा नहीं जा रहा था, वो शिव को पकड़ने के लगी पर उसके हाथ में शिव का लुंड आ गया, अपने हाथ में इतने सख्त डंडे को महसूस कर के वो पागल सी होने लगी, वो जोर से लुंड को दबाने लगी ोोोोीीी मा, शिवववव में मर जाउंगी शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे बहोत कुछ हो रहा है, शिव में पागल हो jaungi....Aahhhh shivvvvv...aiiiiiii.(Meri ऊँगली और आगे नहीं जा रही थी तो में बस उतनी hi ऊँगली से जल्दी जल्दी आगे पीछे करने laga.)Shivvvv आठ मुज से रहा नहीं जा रहा ,,, अह्ह्ह्ह शिव मूत दूंगी आह्ह्ह्ह ....आईईईई आअह्ह्ह्ह शिव ममममम मेरा मूत निकल जायेगा सीईव रुको आअह्ह्ह्हह मेरा निकल जायेगा शीइइइइइइव (और वो झटके कहती हुई झड़ने लगी, उसे रहा नहीं गया तो वो शिव से कास के लिपट गयी, और उसने शिव की कलाई भी पकड़ ली, उसकी छूट से रास की बौछार होने लगी. शिव का पूरा हाथ भीग गया)( रंजन ने मेरी कलाई पकड़ ली थी तो में रुक गया.)
(रंजन जोर जोर से सांसे ले रही थी और वो शिव को अपने अंदर खिंच लेना चाहती हो ऐसे लिपटी हुई थी,) (वही थोड़ी दुरी पर कड़ी विणा ये खेल कब से देख रही थी, वो अपनी आंखे फाडे कबसे ये कामलीला देख रही थी, उसे भी अपनी छूट से बेहटा रास महसूस हो रहा था जो उसकी झांघो से बह रहा था, वो अपनी झंघे आपसमे रगड़ रही थी. जब उसने देखा की दोनों शांत खड़े है कुछ कर नहीं रहे है तो वो बिना आवाज किये वह से लौट गयी.) जब रंजन अपना पूरा रास बहचुकि तो उसे अपनी स्थिति का बहन हुआ, वो शर्म से भर गयी, उसे एंटी शर्म आ रही थी की वो सोच रही थी की वो शिव से कैसे नज़ारे मिलाएगी. पर ऐसे वो कबतक कड़ी रहती, उसने अपना चेहरा उठाया और शिव को देखा जो उसकी hi आँखों में देख रहा था. वो शर्म से सिंहर उठी, पर नज़ारे झुकाने की बजाये वो शिव के होठो पे टूट पड़ी. शिव भी उसके होठो का रसपान करने लगा. उतने में दूर से सरिता दीदी की आवाज आयी जो उन्हें पुकार रही थी.
सरितादिदी : (सरिता को भी आभास था तो वो दूर से hi पुकार रही thi)Shiiiiiiv, राजाआं. हो गया क्या तुम्हारा. (सरिता जान बुज कर ऐसा बोली थी, ये वाक्य लकडिओ के काम के लिए भी था और उनके काम के लिए भी tha)(Shiv और रंजन, दोनों पहले थोड़ा घबरा गए पर जल्द hi शिव ने सँभालते हुए उन्हें जवाब दिया.
शिव : है दीदी, हो गया है, अभी आते है.
सरितादिदी : ठीक hai.(Wo चली गयी)
शिव : (उसकी आँखों में देखते hue)Tumhe बुरा तो नहीं लगा मेने तुम्हे वह छुआ तो.?
रंजन : (शरमाते हुए अपनी नज़ारे झुकाते हुए अपनी गर्दन न में हिलने लगी. उसका चेहरा बता रहा था की वो बहोत खुस thi)Tum पहले जाओ में थोड़ी देर में आती हु.
शिव : (मेने भी मुस्कुरा कर kaha)Thik hai(Mene रंजन को गले लगाया तो वो भी उस से कास के लिपटगाई, शिव ने उसके गाल पर एक पप्पी दी) जल्दी आना
रंजन ने शरमाते हुए हामी भरी, फिर में वह से निकलकर अंडर चला गया. रंजन अपनी हालत दुरस्त करने लगी. आज उसे बड़ा मज़ा आया था. वो मुस्कुरा रही थी और अपनी छूट को पोछ कर साफ कर रही थी. उसके छूट के रास से आगे का भाग पूरी तरह से भीग गया था. जैसे तैसे उसने अपने आपको ठीक किआ और वो भी अंदर चली गयी, उसकी हालत ऐसी थी की वो सबके सामने नहीं आना चाहती थी तो सबसे बच कर सीधे अपने रूम में घुस गयी. उसने कपडे बदले और बहार चली आयी.
रंजन किसी से बात किये बिना अपने काम में लग गयी. काम करते हुए उसकी आंखे बार बार शिव पे जा रही थी और जब उसकी नज़ारे मिलती तो वो शर्म से मुस्कुराते हुए अपनी नज़ारे निचे कर लेती थी. विणा बड़े गौर से उन्दोनो को hi देख रही थी.
शिव : सुनो Ranjan.(Ranjan ऊपर से निचे तक कैंप गयी, उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी की शिव उस से अभी बात करेगा) कल तुम और विणा तैयार रहना, में तुम्हे स्कूल लेने आऊंगा, फिर वही से यूनिफार्म लेने जाएँगी.
रंजन : (वो बोलने की स्थिति में नहीं thi)Hmmmm.
शिव : (विणा की और देख kar)Thik hai(Usne भी है में गर्दन हिलायी)
मुझे अब जाना था तो में वह से गयम के लिए निकल गया. गयम में सब की एंट्री करवाने के बाद में भी एक्सरसाइज करने लगा. जब छूटने में दस मिनट बाकि थे तो में कसरत वाले कमरे से बहार निकला, जैसे hi में बहार आया तो मेरी नज़र अंडर आती हुई स्नेहा मैडम पर पड़ी.















