अपडेट 32
जैसे hi पीरियड ख़तम हुआ, वैस्वी संयम को पूछने लगी और यहाँ ये दोनों भी मुझसे पूछने लगे. संयम ने और मेने शार्ट में सब उनको बता दिया. शाम को जब छुट्टी हुई तो संयम और वैस्वी पार्किंग में कड़ी थी. संयम की निगाये शिव को ढूंढ रही थी.
वैस्वी : किसे धुंध रही हो?
संयम : शिव को?
वैस्वी : क्यों?
संयम : अगर वो लड़का फिर आ गया तो, शिव साथ होगा तो मुझे दर नहीं लगेगा. तू होती तो तुजे पता चलता, एक एक झापड़ पड़ते hi उन लड़को की हालत ख़राब हो गयी थी. शिव दिखने के कितना सीधा लगता है पर जब वो मेरे लिए लड़ रहा था तब तुजे देखना था. उन लड़को की मर की भी उस पर कोई असर नहीं हो रही थी, और उसकी मर से उनको दिन में टारे नजर आ गए होंगे. शिव कितना स्ट्रांग है न.
वैस्वी : अंदर hi अंदर जल भून रही थी, जिस तरह से संयम, शिव के बारे में बाते कर रही थी उस से उसे लगने लगा था की पक्का संयम, शिव पर मर मिटी है. पता नहीं पर ये उसे अच्छा नहीं लग रहा था. वैसे तो उसे शिव से कोई लेना देना नहीं था, ऐसा नहीं था की वो शिव को पसंद करती थी, पर जैसे समिमने hi बताया था की शिव उसे देखता है तो उसे लगने लगा था की शिव उसे पसंद करता है. ये सोच कर उसे अंदर hi अंदर ख़ुशी मिल रहे थी. और अभी जैसे संयम, शिव के बारेमे बाते कर रही है उस से उसे लगने लगा था की वो शिव को छीन लेगी.
शिव, महेश और हर्ष तीनो साथ में स्कूल से बहार आ रहे थे, संयम और वैस्वी दोनों ने ये देखा. दोनों की निगाहे शिव पर hi थी, संयम तो दीवानी हो कर शिव को देख रही थी, और ये देख कर वैस्वी जल रही थी. जब शिव और उसके दोस्त नजदीक ए तो
वैस्वी : (संयम se)Me निकलती हु.
संयम : (उसका हाथ पकड़ते hue)Rook na.(Shiv की और देखते hue)Shiiiiv (उसने प्यार से शिव को pukara)(Mene संयम की और dekha)tum मेरे साथ चलोगे? अगर वो लड़के फिर आये तो.
शिव : (मुझे भी उसकी बात सही लगी) है ठीक hai(Mahesh और हर्ष की और देखते hue)Me इसके साथ hi निकलता हु.
महेश : हम भी तुम लोगो के साथ hi चलते है. अगर वो लोग फिर आ गए तो.
शिव : इसकी जरुरत नहीं.
हर्ष : क्या जरुरत नहीं. अगर वो ज्यादा लोगो को लेकर आया तो.
वैसे तो मुझे फर्क नहीं पड़नेवाला था पर मेने बहेश नहीं की क्यों की वो ठीक कह रहा था, इतना ज्यादा भी वरकॉन्फिडेंट होना ठीक नहीं. वो दोनों भी साइकिल पे थे और में महेश के पीछे बेथ गया. संयम को ये अच्छा नहीं लगा, पर वो क्या कहती. हम सब साथ में वह से निकले और वैस्वी अपने स्कूटर पर निकल गयी. हमने संयम को उसके इलाके में छोड़ा और वो दोनों मुझे छोड़ने मेरे घर तक आये. सच में मुझे अच्छे दोस्त मिल गए थे. में फ्रेस हुआ कपडे बदले और गयम चला गया. जब मदन सर और सब चले गए तो में सब ठीक कर रहा था तो स्नेहा मैडम आ gayi.Ab में स्नेहमड़ाम से अच्छी तरह से खुल चूका था. मुझे ये भी पता था की वो क्यों आयी है तो बिना शर्माए मेने उनकी जमकर ली. वो भी खुसी खुसी अच्छी चूड़ी और फिर मुझे छोड़ने अनाथालय भी आयी. रात को सोते वक़्त मेने दीदी से पूछा.
शिव : दीदी, मैनेजर आया? गुड्डू की कोई खबर?
लतादिदी : नहीं, कोई खबर नहीं.
शिव : ऐसा कैसे दीदी, हमें उसकी खबर लेनी चाहिए.
लतादिदी : में भी चाहती हु, पर क्या कर शक्ति है. वो उसे कहा ले गए है, कोनसे हॉस्पिटल में है कुछ पता नहीं है.
शिव : ये कैसी जिंदगी है न दीदी, अपनों ने हमे छोड़ दिया, न कोई पूछनेवाला न कोई खबरलेनेवाला, हम जीते है या मर गए, किसी को कोई भी परवाह नहीं.
लतादिदी : (मेरे गले में हाथ दाल कर मेरी छाती से अपना शिर चिपकते हुए) में हु न शिव.
शिव : (उन्हें अपनी बहो में कस्ते हुए) है दीदी, तुम hi तो हो, भगवन ने मेरे लिए इस पारी को भेजा है, अगर ये पारी मेरी जिंदगी में न आती तो पता नहीं मेरा क्या होता. ी लव यू दीदी.
लतादिदी : ी लव यू तो शिव, तेरे जीवन में मुझे भेजा है या मेरे जीवन में तुजे भेजा है पता नहीं पर जो कुछ भी हुआ उस से मुझे इतना तो पता चल रहा है की कही न कही भगवन मुज पर मेहरबान है, जो तुजे मेरी जिंदगी में भेजा.
हमदोनो ऐसे hi बाते करते हुए सो गए. दूसरे दिन भी जूही मैडम ने मेरी हालत ख़राब कर दी, वो जाम कर मुझे प्रैक्टिस करवा रही थी. वो दिन ऐसे hi गुजर गया. उसके दूसरे दिन में बिना मैडम के घर गया. वो बहोत hi अच्छी थी, और स्कूल से उलट, वो घर में बहोत ज्यादा मिलनसार थी. उन्होंने मुझे कंप्यूटर सीखना सुरु कर दिया. में दोपरह को गया था तो उन्होंने खाना भी कहिल्या. बिना को भी शिव का साथ पसंद आया, हलाकि सेक्स को लेकर उसके दिल में उथल पुथल मची हुई थी, पर उसे शिव के साथ टाइम बिताना अच्छा लगा था. अकेलेपन में जैसे उसे एक सहारा मिल गया था. एक बुरी खबर भी मिली, मैनेजर ने बताया की गुड्डू की मौत हो गयी है. किसी को समाज नहीं आ रहा था की ये कैसे हो सकता है, वो बिलकुल ठीक था और ऐसे अचानक, पर इसका जवाब किसी के पास नहीं था. मैनेजर ने भी गोल गोल जवाब देकर सब को ताल दिया.
रोज की तरह हम सब क्लास में बैठे हुए थे, बिना मैडम आयी और हम सब की हजारी ली.
बिना मैडम : आज से में क्लास के लिए एक मॉनिटर को अप्पोइंट कर रही हु. स्कूल के रूल के अनुसार जिस के मार्क्स सबसे ज्यादा होते है उसे hi क्लास का मॉनिटर बनाया जाता है. (सब मेरी और देखने लगे) और एक सुब मॉनिटर भी होगा जो मैं मॉनिटर की अनुपस्थिति में काम करेगा. तो इस के लिए में शिव को मैं मॉनिटर और वैस्वी को सुब मॉनिटर अप्पोइंट करती हु.
सब स्टूडेंट तालिया बजने लगे, मेने वैस्वी की और देखा तो उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की उसे ये पसंद नहीं आया. और वैसे भी में मॉनिटर नहीं बन न चाहता था. मेरे मॉनिटर न बन ने की दो वजह थी. एक तो में फ्री टाइम में पढ़ नहीं पाउँगा और जिस तरफ से जूही मैडम मुझे एथलीट बनाने के लिए म्हणत कर रही थी में यहाँ इतना टाइम नहीं दे पाउँगा. तो में अपनी जगह खड़ा हुआ.
शिव : एक्सक्यूज़ में, मैडम.
बिना मैडम : है बोलो शिव.
शिव : मुझे माफ़ कीजिये, पर में मॉनिटर नहीं बनना चाहता. में शायद टाइम नहीं दे पाउँगा. मेरे ख्याल से वैस्वी hi बेस्ट है इसके लिए. तो आप उसे hi मॉनिटर बनादिजिये. वो इंटेलिजेंट भी है और ये सब अच्छे से संभल शक्ति hai.(Vaiswi को पहले तो झटका सा लगा पर फिर वो अपनी तारीफ सुन कर इतराने लगी)
बिना मैडम : ठीक है, अगर तुम बनना hi नहीं चाहते तो यही सही रहेगा. तो ये तय रहा की क्लास की मैं मॉनिटर वैस्वी होगी, तुम सुब मॉनिटर तो बनोगे न की वो भी नहीं बन न चाहते.
शिव : वो में बाण शक्ति हु. वैसे भी वैस्वी कभी एब्सेंट तो रहती नहीं, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं hai.(Shiv की बात सुन कर वैस्वी अंदर hi अंदर मुस्कुराने लगी, सब ने उसके लिए तालिया बजायी तो वो और खुस हो गयी)
पुरे दिन की भगा दौड़ी के बाद रात को जब में रंजन और विणा के कमरे में में पढ़ने गया तो देखा विणा सोई होइ थी.
शिव : ये क्यों सो गयी है?
रंजन : कब से लिखने का होमवर्क मिला था तो लिख रहे थे तो थक गयी और सो गयी.
शिव : और तुम नहीं थकी?
रंजन : तुम आनेवाले थे, इसलिए नहीं सोई.
शिव : ठीक है अगर थक गयी हो तो सो जाओ, में चलता हु. (रंजन ने मेरा हाथ पकड़लिया)
रंजन : बैठो न थोड़ी देर. (में उसकी बात सुन कर बेथ गया)
शिव : रंजन एक बात समाज में नहीं आयी.
रंजन : किस बारे में बात कह रहे हो.
शिव : वो गुड्डू के बारे में. ऐसे कैसे उसके साथ ये सब हो गया.
रंजन : सही कह रहे हो. मुझे भी समाज नहीं आया. उसे देख कर ऐसा नहीं लगता था की उसके साथ ये सब हो जायेगा.
शिव : ऐसा क्या हो गया था उसे, क्या तुम कुछ जानती हो.
रंजन : नहीं, में ज्यादा तो कुछ नहीं जानती पर तुम सरितादिदी से पूछ लेना, शायद उन्हें पता होगा.
शिव : ऐसा तुम्हे क्यों लगता है?
रंजन : उस दिन, जब गुड्डू की तबियत ख़राब हुई थी उसे से पहले उन्होंने hi गुड्डू को कोई दवाई दी थी.
शिव : उन्होंने दवाई दी थी तो उनको पता होगा. ठीक है में उनसे बात करलूँगा. ठीक है तुम आराम करो में चलता hu.(Me उठनेलगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसे सवालिया नज़रो से देखा तो वो शर्मा गयी, मेने मुस्कुराते hue)To इसीलिए जाग रही thi.(Wo शरमाते हुए मेरे गले लग गयी. मेने भी उसे अपनी बहो में भर लिया, पता नहीं ऐसा क्यों होता था पर थोड़ी hi देर में सिर्फ गले लगने से hi में गरम होने लगा और मेरा लुंड खड़ा होने लगा, वो भी गरम हो गयी थी)
राजा

शरमाते hue)Me दरवाजा बंद कर देती हु.
शिव : पागल हो गयी हो, कोई आएगा और दरवाजा बंद मिला तो?
रंजन

वो मुस्कुराते हुए गयी और दरवाजा बंद करके आ gayi)Jise जो सोचना है सोचे, अगर दीदी मारेगी तो मार भी खा लुंगी.
शिव : (मुस्कुराते hue)Lagta है इरादे ठीक नहीं tumhare.(Wo शर्मा गयी और मेरे गले लग गयी, मेने उसको बहो में भरा और उसकी पीठ सहलाने लगा, वो भी मेरी पीठ को सहलाने लगी. मेने अपने हाथ निचे ले जाते हुए उसके दोनों कूल्हों को पकड़ लिया और मसलने लगा, वो मेरे गले को चूमने लगी, उसकी सांसे तेज होने लगी थी. उसने घुटनो तक की फ्रॉक पहनी थी तो मैंने उसे ऊपर उठाया तो वो निचे से नंगी थी, उसके नंगे चुत्तड़ो को पकड़ते hi मेरे लुंड ने झटका खाया.) लगता है पूरी तयारी करके बैठी हो.
रंजन : शह्ह्ह्ह हा, (मेरे बालो को पकड़ते हुए मेरे होठो को चूमने लगी, नशीली आवाज me)Muje तुम्हारे साथ बहोत अच्छा लगता है शिव, मुझे ऐसे hi प्यार करो शिव.
शिव : पर विणा?
रंजन : वो सो चुकी है, तुम उसकी चिंता मत करो.( पर विणा जाग रही थी) मुझे प्यार करो shiv(Maine उसके नंगे चुत्तड़ो को मसल दिया, गोल आकर के छोटे चुत्तड़ मेरे हाथ में समां गए, वो नरम नरम एहसास मेरे अंदर उत्तेजना भरने लगे )हआ ऐसे hi, शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह सीईव shhhhhh.(Mene उसके चुत्तड़ो को दबाते हुए, उसके गले और चुचिओ को चूमने laga.)(Ranjan इस खुमारी से भरने लगी, उसे और ज्यादा मज़ा चाहिए था) आआआह, शह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्ह शीइइइइइव पीछे फ्रॉक की चैन है उसे खोल do.(Mene पीछे चैन को टटोला और उसे निचे सरका दी, फ्रॉक ढीला हो गया तो उसने खुद आगे से निचे कर दिया जिस से उसके कड़क चुके मेरे सामने आगये. मेरी आँखों में लाल डोरे उतर आये, मेने उसके चेहरे को देखा तो उसकी भी यही हालत थी, मेने झुकते हुए एक निप्पल को अपने मुहमे भर लिया और उसे चूसने लगा, उसके संतरे के आकर के स्तन पर छोटा सा निप्पल था, में अपनी झिबह से उस से खेलने laga.)Ohhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह मुझे बहोत अछ्हा लग रहा है मुझे कुछ हो रहा है शिव shhhhhh(Wo अपनी छूट वाले भाग को आगे करके लुंड पर रगड़ने लगी. मेरे कान को अपने दांतो से काट ते हुए, मेरे लुंड को पकड़ liya)isse निकालो न शिव, मुझे देखना hai(Mene विणा की और dekha)Uski चिंता मत करो, वो नहीं jagegi(Mene पजामा, अंडरवियर समेत निचे शार्क दिया, मेरा लुंड उछाल कर बहार आ गया, वो अपनी पलके जपकाये बिना उसे देख रही थी, उसके चेहरे से लग रहा था उसे यकीं नहीं हो रहा था. मैंने उसका हाथ पकड़ा तो उसने मेरी और देखा, जैसे hi हमारी नज़ारे टकराई वो शर्मा गयी, में उसका हाथ खींच कर मेरे लुंड की और ले जाने लगा तो वो थोड़ा दर रहित hi, वो अपना हाथ पीछे खिच्च रही थी)
शिव : (प्यार से )अभी तो देखने को मचल रही थी और अब दर रही हो.
रंजन : ये कितना बड़ा है शिव.
शिव : अपने हाथ में पकड़ो, ये कटेगा nahi.(Wo थोड़ी संभल गयी थी, मेने उसका हाथ पकड़ कर लुंड पर रखा तो उसने अपने हाथ से उसे हलके से थम लिया, वो उसे दबा कर चेक कर रही थी, उसने मेरी और dekha)Kaisa laga(Wo शर्मा gayi)Ab अगर दर लग रहा है तो उसे वापस दाल du.(Usne शरमाते हुए न में गर्दन हिलायी, वो मेरे बाजु में कड़ी थी और निचे देखते हुए मेरे लुंड को टटोल रही थी. मेने वापस उसके चुत्तड़ो पर अपना हाथ रख दिया और उसे दबाने लगा, (रंजन बड़े गौर से लुंड को हर जगह छू कर, दबाकर चेक कर रही थी, उसने ऊपर की चमड़ी को भी निचे खिसका कर चेक किया, आज पहली बार वो लुंड को इतने करीब से देख रही थी, उसकी छूट में सरसराहट होने लगी थी, वो उस गरम और कड़क डंडे को हाथ में थामे पागल हो रही thi)Kya देख रही हो इतना गौर से.
रंजन : ये कितना लम्बा और मोटा है शिव, ये अंदर कैसे जाता hoga.(Wo भावनाओ में बह कर बोल गयी थी)
शिव : (हस्ते hue)Kaha जाता है ye.(Mere सवाल से उसे एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी, उसने मेरी और देखा और शर्मा गयी, तो मेने फिर puchha)Kaho न कहा जाता है.
रंजन : (शरमाते हुए मेरे शाइन पर अपना शिर टिका kar)Tum जानते हो फिर क्यों पूछ रहे हो.
शिव : तुम्हे कैसे पता की में जनता हु, मुझे तो कुछ भी पता नहीं है.
रंजन : (मेरी और देख कर नखरे से,) ज्यादा भोले मत बनो, में तुम्हारी सब करतूत जानती हु. मुझे पता है तुम सब करचुके हो.
शिव

उसकी बात सुन कर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, ये कैसे जानती है और क्या जानती hai)Kya जानती हो?
रंजन : वो सब छोडो, पर क्या ये अंदर चला जाता है. मेरी तो बहोत छोटी है.
शिव : (छेड़ते hue)Kya छोटी है.
रंजन : (वो उत्तेजना में लाल टमाटर जैसी हो गयी thi)Shiiiiiv, तुम जानते हो में किसकी बात कर रही हु, (थोड़ा सीरियस हो kar)Kaho न शिव क्या ये अंदर चला जायेगा.
शिव : इस के लिए तो मुझे देखना होगा की तुम्हारा छेड़ कितना है. Dekhu?(Wo शर्मा गयी फिर मुस्कुरायी और अपनी गर्दन है में hilayi,)Mene कब रोका है तुम्हे, जो देखना है देख लो( में भी मुस्कुराया और उसे देखते हुए उसके होठो को चूमा, मेरी भी उत्तेजना से सांसे तेज चल रही थी, में अपने घुटनो पर बेथ गया, वो मुझे बड़े गौर से देख रही थी, मेने नज़ारे निचे की और उसका फ्रॉक आगे से उठाया.)
इससे pakado(Ranjan ने फ्रॉक थम लिया, और अपनी छूट को थोड़ा आगे कर दिया, उसे भी इस खेल में बहोत उत्तेजना हो रही थी, वो भी अपनी छूट में हो रही सरसराहट को शांत करना चाहती थी)( मेरे सामने बहोत hi उत्तेजक और दिलकस नज़ारा था, रंजन की झंघे पतली थी, पतली मतलब दुबली नहीं थी, झांघो के बिच में हलके बालो से सजी छूट थी. छूट के बालो के निचे की चमड़ी भी दिख रही थी. छूट से रास बहने के वजह से एक जगह से वो चिपचिपी दिख रही थी. में भी सच में मोहित हो गया था. मदहोशी में hi मैंने अपना हाथ बढ़ाया और हलके से छूट के बालो को सहलाया)
रंजन : Shhhhhhh(Usne अपनी छूट औरतअगे कर दी और अपनी टंगे फैला दी, मैंने सहलाते हुए अंगूठे से दरार को सहलाया तो दरार पूरी गीली हो गयी, मेरा लुंड ठुमके मर रहा था, वो छूट को देख कर कूद रहा था, थोड़ा दबाव बनाते हुए पूरी दरार को अंगूठे से सेहलाहा तो पूरी दरार चुतरस से भीग gayi)Shhhh, अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह आईईईई अह्ह्ह्हह shiiiiiiv(Mene उसे देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, उसकी आँखों में उत्सुकता थी की में अब क्या करूँगा, मैंने उसकी छूट की पंखुड़ियों को दोनों अंगूठो की मदद से फैलाया, छूट पर दाना दिख रहा था पर छेड़ नहीं, मैंने छूट पर फंक mari)Ahhhh शीइइइइइइव, शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो, में पागल हो जाउंगी.
शिव : तुम्हारा छेड़ नहीं दिख रहा?
रंजन : (अपनी और टंगे रैलते hue)Ab दिखा?
शिव : (मेने देखा , पर छेद कहा है बस वही दिख रहा था कितना है वो नहीं) ऐसे खड़े खड़े नहीं दिख रहा, निचे लेट jao.(Ranjan भी काफी उत्तेजित हो गयी थी, उसने हामी भरी और वह बिस्तर पर लेट गयी, मेने उसकी टंगे फैलाई और उसके सामने बेथ गया, रंजन को देखा तो वो अपना शिर उठाये मुझे देख रही थी, जब में उसे देख रहा था तो उसने मुस्कुराते हुए मुझे पूछा ‘ क्या hua?’)Mast है ये.
रंजन : (वो शर्मा गयी), तुम्हे अच्छी लगी शिव?
शिव : है यार, छोटी सी है.
रंजन : तुम्हारे लिए hi है ये Shiv.(Muje सच में उसकी इस बात पर बहोत प्यार आया) अब देखो न use.(Maine झुक कर उसकी छूट के होठो को फैलाया, छेड़ वाकई में बहोत छोटा था. मेने छूट को फैलाया और उस गुलाबी छेड़ को हलके हलके से सहलाया, रंजन के पुरे शरीर से एक कम्पन गुजर गया, उसने अपना शिर निचे रख दिया और अपनी आंखे बंद कर li)Shhhhhhh अह्ह्ह्ह shiiiiiiiiiiv(Maine अपने अंगूठे पर थूक लगाया और उसे उस छेद पर रगड़ने लगा, रंजन ने अपना शिर उठाया और मुझे देखा पर कहा कुछ नहीं, वापस वो अपना शिर टिकाये लेट गयी और छत को टांकते हुए अपनी छूट पर शिव के अंगूठे से हो रहे अद्भुत आनंद का एहसास लेने लगी,) (में छूट को सेहला रहा था और उसमे से रास निकलते hi जा रहा था, मेरा अंगूठा भी उस छेद के लिए बड़ा दिख रहा था, वाकई में छूट बहोत छोटी थी, आस पास के बल छूट रास से भीग गए थे, में उस छेड़ को टटोलना चाहता था तो मैंने अपनी ऊँगली छेद पर घुमाई जिस से ऊँगली छूट रास से चिकनी हो गयी. मेने हलके से उसे छेड़ पर दबायी तो ऊँगली छेड़ को फ़ैलाने लगी और थोड़ी अंदर चली gayi)Aaaaiiiiiiiii शह्ह्ह्हींईईईई,
शिव : (मेने डरते हुए रंजन को dekha)Dard हो रहा है?
रंजन : है शिव, थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है. (वो चिंता से मेरी और देख रही thi)Tumhari ऊँगली से दर्द हो रहा है तो वो कैसे जायेगा शिव?.
शिव : (मेने ऊँगली निकल ली और उसके बाजु में लेट गया, उसको बहो में भर kar)Par तुम्हे वो क्यों डलवाना है.
रंजन : (मुझे अपनी बहो में भर kar)Kyu की सब यही करते है. मुझे भी करना है शिव, तुम्हारे साथ.
शिव : और दर्द?
रंजन : मैंने सुना है की वो एक बार तो होता hi है, तो सेह लुंगी. तू कर ले.
शिव : पागल, अभी नहीं ,अभी में ज्यादा जानता नहीं हु तो पहले थोड़ी जानकारी ले लू, फिर बाद में करेंगे. अगर कुछ उल्टा सीधा करदिया और तुजे कुछ हो गया तो. इस से अच्छा है पहले थोड़ी जानकारी ले ली जाये.
रंजन : मुझे इंतजार rahega.(Mere होठ को चुम कर) अभी वो मत कर पर ऊपर ऊपर से तो कर शक्ति है न शिव, मुज से रहा नहीं जा रहा है, मेरे अंदर बहोत कुछ हो रहा hai.(Mene उसे देखा तो वो शर्मा भी रही थी और एक छह थी उसकी आँखों में,
में उसके ऊपर होने लगा और उसे अपनी बाहोंमे ऐसे भरा की मेरा वजन मेरी कोहनिओ पर हो, उसकी टंगे फैली हुई थी तो मेरा लुंड उसकी छूट पर लग गया. वो मुज से लिपटने लगी, मेने उसके होठो को चूसना सुरु किआ और लुंड उसकी छूट पर रगड़ने लगा. वो मुझे और कास के बहो में जकड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह अह्ह्ह सीईव कितना अच्छा लगता है न ये sab(Wo अपनी कमर हिलाते हुए छूट को लुंड से रगड़ने लगी मेने उसके चुकी को मसलते हुए निप्पल को अपने मुँह में ले liya)Shhhhhh शठ शहहह शठ अह्ह्ह्हह शिईयिव मुझे कुछ हो रहा hai.(Me उठा और उसे भी बैठाया, में उसका फ्रॉक निकल ने लगा तो उसने खुद पूरा फ्रॉक निकल दिया, वो पूरी नंगी हो चुकी थी. मेने भी अपने कपडे निकले और नंगा हो गया. में विणा के बारे में तो जैसे भूल hi गया था. में उसकी टंगे फैलाई और अपने लुंड को छूट पर रखदिया, वो मेरी आंखोमे देख रही थी, मेरा लुंड छूट को लग कर ऊपर की और निकला हुआ था, उसने अपनी टंगे भी मेरी कमर पर लपेट ली और अपनी छूट मेरे लुंड पर रगड़ने लगी.) ओह्ह्ह्ह शीइइइइव करो न, कितना मज़ा आ रहा hai(Wo अपनी कमर चला रही थी में भी अपनी कमर चलते हुए लुंड को छूट पर घिसने laga(Mene उसकी हाथ की उंगलिओ में अपनी उंगलिया फास्यी और उसके दोनों हाथ को ऊपर की और कर दिया, उसकी बगल में भी बल उगे हुए थे, उसके श्री पर बल मुझे उत्तेजित कर रहे थे, मेने उन्हें चाटने लगा तो उसे गुदगुदी होने लगी, मनें अपने मुँह से उसके शरीर को रगड़ते हुए उसकी चुचिओ से खेलने लगा, उसकी लगातार निकलती ाहो से में और उत्तेजित हो रहा था. लुंड को घिसते हुएमे एक निप्पल को चूसने लगा , वो नागिन से बलखा रही थी) शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह सीईव मुझे बहोत कुछ हो रहा hai(Thodi छूट पर लुंड घिसने के बाद में उसके चुचिओ से लेकर पेट को चूमते चाट ते उसकी छूट तक पहुंच गया, उसकी पतली कमर लहरा रही थी, मेने उसकी टंगे फैलाई और अपने हॉट छूट पे रख दिए,) शीइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhh(Mene उसकी पूरी छूट को अपने होतो में भर लियाऔर छूट के होठो को चूसने लगा, उसके डेन को भी चूसा) अह्ह्ह्ह शहहह सीईव ये क्या कर रहे हो में पागल हो जाउंगी, (उसकी छूट का राशिला पानी चाटने में मुझे बहोत आनंद आ रहा था, जैसे जैसे उसके छेड़ कोजिबह से कुरेद रहा था वह से और रास निकल रहा tha)shhhh अह्ह्ह्ह मुझे बहोत कुछ हो रहा है शिव, अह्ह्ह्ह शिव मुझे तुम्हारा पकड़ना है शहहहहह( उसकी बात सुन कर में उसके बाजु में लेट गया और उसकी टंगे फैलते हुए उसकी छूट को अपनी और खींच लिया और उसे चूसने लगा, (रंजन इस खेल से बहोत आनंदित थी, अपने सामने लुंड को देख कर वो अपना चेहरा लुंड से रगड़ने लगी और उसे चाटने लगी, उसे ये लुंड इस वक़्त दुनिया की सब चीजों से ज्यादा प्यारा लग रहा था, उसने लुंड को पकड़ लिया और उसकी चमड़ी निचे खिसकायी और उस लाल लाल सुपडे पर अपनी जीभ फिरने lagi.(Ye सब वो पहले भी देख चुकी थी, सरितादिदी को करते हुए) लुंड से प्यार करते हुए वो लुंड को हिलने लगी,) (मेने अपनी जीभ से छूट के छेद को कुरेद रहा था चाट रहा था, उसके डेन को अपने होठो से दबा रहा tha)Ahhh सीईव ahhhh(Wo अपनी कमर हिलाते हुए मेरे मुँह पर धक्के लगा रही थी, मुझे यकीं नहीं हुआ पर उसने लुंड अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी, उसके छोटे से गरम मुँह में लुंड बड़ी मुश्किल से जा रहा था और वो लुंड चूसने में थोड़ी अनादि भी थी, वो पहलीबार hi तो चूस रही thi,)mmmm, उम्म्म्म ममममम (रंजन को लुंड चूसना बहोत hi अच्छा लग रहा था, पहले उसे अपने मुँह में थोड़ा अजीब लग रहा था पर उसका नमकीन स्वाद उसे पसंद आ रहा था. शिव उसकी छूट को चाट रहा था, अपनी छूट पर हो रहे इस अजीब से एहसास से वो पागल हो रही थी, वो बहोत मस्त हो चुकी थी और अपनी साडी मस्ती वो लुंड पर निकल रही थी, उसका पूरा मुँह फ़ैल गया था पर उसे एक अजीब सा सुकून मिल रहा tha)(Dono अपने अपने काम में लगे हुए थे, विणा को यकीं hi नहीं हो रहा था, इन दोनों की ये क्रिया देख कर, दोनों नंगे थे, रंजन की उसे परवाह नहीं थी पर शिव को ऐसे नंगा देख कर उसकी हालत ख़राब हो चुकी थी, एक नंगा लड़का जिसका बड़ा लुंड पूरी तरह से अकड़ा हुआ था, उसकी छूट से पानी बह कर उसकी कच्ची को गिला कर चूका था. शिव रंजन की छूट को चाट रहा था और रंजन शिव के लुंड को अपने मुँह में लेकर चूस रही thi,Ye दृश्य उसकी कल्पना से परे tha,uski उत्तेजना के मरे हालत बहोत ख़राब हो चुकी थी, उसका हाथ अपने आप hi अपनी छूट पर चला गया था, वो उसे मसल रही थी) मेरे और रंजन का खेल काफी देर तक चला. आखिर में रंजन झटके कहते हुए झड़ने लगी, वो लुंड से गाल चिपकाये शिव से लिपट गयी , उसने अपनी छूट शिव के मुँह पर दबा दी, शिव भी बड़े प्यार से उस बह रहे रास को चाट रहा था, एक अजीब सा आनंद मिल रहा था. जब वो शांत हुई तो मेने उसे सीधा किआ और अपनी बहो में भर लिया, आज पहली बार वो और में पूरी तरह नंगे हो कर एक दूसरे से लिपटे हुए थे. वो पूरी नंगी मेरी बहो में थी और लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी. विणा के बारे में तो हम भूल hi गए थे.
शिव : कैसा लगा?
रंजन : (अपनी नशीली आँखों से मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थी) में बता नहीं शक्ति शिव, इतना मज़ा आता है ये मेने सपने में भी नहीं सोचा था.
शिव : अब मुझे चलना चाहिए.
रंजन : यही रुक जाओ न, मेरे साथ.
शिव

उसका माथा चुम kar)Aaj नहीं पर जल्दी hi रुकूंगा. तुम खुस तो हो न. अब शर्म तो नहीं आ रही.
रंजन

मुस्कुराते हुए शुकुन से मेरी छाती से चिपकते hue)Nahi शिव, पर तुम्हारा तो हुआ hi नहीं. तुम कर लो न, कुछ नहीं होगा मुझे.
शिव : (उसके चेहरे पर आ रहे बालो को ठीक करते hue)Tum उसकी चिंता मत करो. तुम आराम करो.
मैंने कपडे पहने, किताबे ली और में वह से निकल गया. दीदी सो रही थी, तो में उनकी बगल में लेट गया और उन्हें बहो में भर के सो गया.