Adultery Kundali Bhagya - Page 20 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 133

मुझे यकीं नहीं हो रहा था अभी जो कुछ भी हुआ था. मेने आंटी के साथ सेक्स कर लिया था. वो कितनी अच्छी है, वो मेरे साथ कितना अच्छा सलूक करती है, मेने उनका वो रूप देखा था, जिसमे ममता था, मेरे लिए प्यार था. पर आज जो कुछ भी हुआ वो कुछ अलग hi था. अब में इतना तो समझने लगा था की हर औरत आउट मर्द की कुछ जरूरते होती है, शारीरिक तौर पर भी उन्हें कुछ चाहिए होता है. किसी की माँ हो भाई हो बहन हो या कोई भी रिश्ते में हो हर कोई मर्द और औरत भी होते है, चाहे वो हर किसी के साथ उस तरह से नहीं रहते पर कभी न कभी कही न कही वो उस सम्बन्ध से रहते hi है. और उसमे कुछ गलत भी नहीं है, क्यों की अगर ये चाहत ये सम्बन्ध न होते तो दुनिया कब की ख़तम हो गयी होती. मुझे आंटी का ऐसा करना कुछ भी गलत नहीं लगा, वो भी एक औरत है और अगर उन्होंने ऐसा कुछ कर लिया तो वो बुरी नहीं बन गयी. मुझे उनका चेहरा याद आ रहा था, सेक्स के दौरान उनके चेहरे पर एक अलग hi नूर था, वो कितना आनंदित थी, यही सब सोचते हुए में साइट पर चला गया. में काफी लेट पंहुचा था, सब खाना खा कर फिर से काम में लग गए थे. मेने देखा की जहान्वी मैडम की गाडी पड़ी हुई है, हो शक्ति है की वो ऑफिस नुमा माकन में हो, पर में चलते हुए अंदर की और चला गया, कुछ मकानों में दो चार दो चार लोग काम कर रहे थे, में एक माकन के पास से गुजरा तो मुझे झुमरी ने आवाज दी तो में उस और चला गया. वह दूसरे भी लोग काम कर रहे थे, कमली भी थी. में उनसे बात कर रहा था की भोली भी आ गयी. मेने उन्हें काम करने को कहा और में दूसरी जगहों पर भी घूम कर मुआइना करने लगा. थोड़ी देर बाद पिंकेशभाई मुझे ढूंढते हुए आये.

पिंकेशभाई : तुम यहाँ हो?

शिव : क्या हुआ पिंकेशभाई?

पिंकेशभाई : कुछ नहीं, वो जहान्वी मैडम तुम्हे बुला रही है.

शिव : क्यों?

पिंकेशभाई : मुझे क्या पता, कई बार तुम्हारे बारेमे पूछ चुकी है?

शिव : ठीक है में जाता हु.

मेरी समाज में नहीं आ रहा था की उनकी प्रॉब्लम क्या है, क्यों की अगर साइट के बारेमे कुछ भी जानकारी लेनी हो तो वो मुझसे बेहतर पिंकेशभाई बता शक्ति है, तो मुझसे बात चित का तो कोई मतलब hi नहीं है, में चलते हुए उस माकन में पंहुचा, ऊपर के मेल पर ऑफिस जैसा था वह कुर्शी पर वो बैठी हुई थी. ब्लू जीन्स और काळा रंग की चुस्त t-shirt में बैठी हुई थी, बालो की छोटी बाँध रक्खी थी, खूबसूरत तो वो थी hi साथ में भरा हुआ जिस्म था उनका, स्तन भी काफी बड़े थे, जिस पर नजर चली hi जाये.

शिव : में आ शक्ति हु?

जहान्वी : (वो बैठी बैठी कुछ सोच hi रही थी, शिव की और देख kar)To आगये तुम? (उनका टाउन ऐसा था की जैसे मेरा मज़ाक उदा रही हो)

शिव : जी, कहिये क्यों बुलाया था?

जहान्वी : ये कोई वक़्त है आने का?

शिव : देखिये मैडम, में पहले भी बता चूका हु, टाइम के बारे में मेरी बात पवनसीर से हो चुकी है, फिर बार बार आप क्यों उस टॉपिक पर बात करती है?

जहान्वी : अकड़ तो देखो साहब की, जब मर्जी आना, जब मर्जी जाना, मेरी समाज में ये नहीं आता की तुम आते क्यों हो अगर काम नहीं करना है तो.

शिव : वो में और पवनसीर देख लेंगे, आप को क्या दिक्कत है वो बताइये.

जहान्वी : तुम समझते क्या हो अपने आपको, ये कोई तरीका है मुझसे बात करने का, मात भूलो की में कौन हु.

शिव : मुझे सब पता है, में ऐसे hi काम करूँगा, मेरी ये समाज में नहीं आ रहा है की इतनी साडी साइट पर काम चल रहा है आप को इसी साइट में क्यों इतनी दिलचस्पी है?

जहान्वी : ये मेरी मर्जी है, तुम पूछनेवाले कोण होते हो, मेरी मर्जी में यहाँ औ या कही और जाऊ, में हर जगह का काम देखती हु, मुझे सिर्फ तुम्हारा hi काम पसंद नहीं आ रहा है. में पापा से कहनेवाली हु की वो तुम्हे निकल दे, वैसे भी तुम करते क्या हो जो तुम्हे यहाँ बुलाया जाये.

शिव : आपको जो करना है वो करिये, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर और कोई काम न हो तो में जाऊ.

जहान्वी : (कड़ी हो कर वो मेरे सामने कड़ी हो गयी और मेरा गिरेबान पकड़ kar)Tumhari हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ इस लहजे में बात करने की.

शिव : देखिये मैडम, मेरा गिरेबान छोड़ दीजिये.

जहान्वी : क्या कर लोगे, अगर नहीं छोड़ा तो, मरोगे मुझे, लम्बे चौड़े हो तो तुम्हे ये लगता है की तुम मुज पर हाथ उठाओगे.

शिव : मेने ऐसा कुछ भी नहीं कहा, आप अपने आप hi बोल रही है, मेने बस इतना कहा की मेरा गिरेबान छोड़ दीजिये.

जहान्वी : नहीं छोड़ती, क्या कर लेगा. (वो मेरा गिरेबान और खींचते हुए मेरी आँखों में देख रही थी, मुझे भी गुस्सा आ रहा था, मेने उनका हाथ छुड़ाना छः तो वो और जोर से मेरे गिरेबान को पकड़ ने लगी, पतानहीं वो क्यों इतनी जिद कर रही थी)

शिव : छोड़ दीजिये मैडम, में आखरी बार कह रहा हु.

जहान्वी : नहीं छोड़ती. (मेने उनका हाथ पकड़ा हुआ था, अगर में ज्यादा जोर करता तो मेरा शर्ट भी फैट जाता क्यों की उन्होंने मजबूती से पकड़ा हुआ था, मुझे क्या हुआ की मेने अपना हाथ छोड़ा और उनके शिर के पीछे के बाल पकड़े और सीधा उनके होठो पर टूट पड़ा, उनके होतो को जोर जोर से चूसने laga)(Jhanvi अचानक हुए हमले से हड़बड़ा गयी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की ये लड़का ऐसा भी कुछ करेगा, वो उसके होठो को बुरी तरह से चूस रहा था, उसने शिव को धक्का देना सुरु किआ, पर उसने उसे बहोत मजबूती से पकड़ा था, वो अपना मुँह हटाना चाहती थी पर उसने उसके बालो को भी मजबूती से पकड़ा हुआ tha)(wo मुझे धक्का दे रही थी मतलब उन्होंने मेरा गिरबान छोड़ दिया था, मेने उन्हें छोड़ दिया तो वो दो कदम पीछे हैट गयी, वो हांफ रही थी, उन्होंने गुस्से से मुझे देखा)

जहान्वी : (चिल्लाते hue)Tumhari हिम्मत कैसे हुई कमीने.

शिव : ज्यादा चिल्लाइये नहीं. सब पूछेंगे की क्या हुआ तो क्या कहेंगी आप की शिव ने ये किआ.

जहान्वी : कमीने, तुजे क्या लगता है की में तुजे छोड़ दूंगी, तू रुक में बताती हु की अब तेरी क्या हालत होती है. (वो गुस्से में वह से चली गयी, में वही खड़ा सोच रहा था, मुझे भी लगा की मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, पर गुस्से में जो होना था वो हो गया था, अगर उन्होंने पुलिस कम्प्लेन कर दी तो, में सच में दर गया, में जनता था की उसका बाप मला है, में अपने आपको डांटने लगा, ये सब पहले नहीं सोच सकता था, खैर अब जो हो गया था उसे तो में बदल नहीं सकता, मुझे ये भी पता था की भार्गवी मैडम भी बहार है, और होती तो भी कुछ नहीं कर शक्ति, क्यों की कानून में लड़कीओ को कुछ ज्यादा hi पावर दी हुई है, में अपना शिर पकड़ कर वही बेथ गया)

यहाँ बड़े से हॉल में एक आदमी कुछ कागजो को देख रहा था और साथ में कुछ गिनती कर रहा था, भगवे कलर का चोला पहना हुआ था, गले में रुद्राक्ष की माला और हाथ में भी रुद्राक्ष का ब्रासलेट पहना हुआ था, कपल पर चन्दन का लपे और बिच में एक बड़ा सा तिलक लगा हुआ था. सामने उदयसिंह, उनकी पत्नी कामना देवी, साथ में चंद्रभान सिंह और नर्मदादिवि भी बैठी हुई है, ममता, बिना और पद्मा साथ में बैठे हुए है. बिना का पति जिग्नेश भी बैठा हुआ है. पृथ्वीसिंह नहीं आया था. सब की निगाहे बाबा पर hi थी. बड़ी मुस्किलो से उन्हें मन कर चंद्रभान उन्हें ले आया था. काफी देर से वो वह बिछी कुन्डलीओ में से देख देख कर एक कागज पर सब लिख रहे थे और बाकि सब उन्हें hi देख रहे थे. आखिर कार उन्होंने सब देखने के बाद अपनी आंखे बंद की और किसी गहे सोच में दुब गए. कामनादेवी ने नर्मदेवी की और देखा, दोनों कुछ बोले तो नहीं पर उनके चेहरे पर परेशानी साफ़ दिख रही थी. बीचमे बोलने की हिम्मत किसीमे नहीं थी, उदयसिंह को इन सब पर कोई भरोसा नहीं था, पर अपनी पत्नी की जिद के चलते वो यहाँ आया था. पृथ्वीसिंह ने साफ़ साफ़ मन कर दिया था, वैसे भी वो किसी काम से बहार था. करीब दस मिनट बाद बाबा ने आंखे खोली और सब की और देखा. हाथ जोड़ कर कामनादेवी ने hi बात सुरु की

कामनादेवी : क्या बात है बाबाजी?

बाबा : आप चिंतित मात होईये, वैसी कोई बात नहीं है, में किसी और बात के लिए चिंतित हु, जहा तक में समाज प् रहा हु, जो बुरा समय था वो बिट चूका है, अब आपके घर में खुशिया लौटनेवाली है, पर उसके लिए एक अनुष्ठान करना पड़ेगा.

कामनादेवी : कैसा अनुष्ठान बाबाजी?

बाबा : सबकी सुधि के लिए एक अनुष्ठान करना पड़ेगा, इस अनुष्ठान के बाद आप सब के ऊपर जो काळा साये है वो हैट ते जायेंगे.

कामनादेवी : तो कीजियेना, हम तैयार है.

बाबाजी : ये इतना भी आसान नहीं है, इस अनुष्ठान के लिए आपके पुरे परिवार को एक साथ भाग लेना होगा.

कामनादेवी : तो इसमें दिक्कत क्या है, हम सब भाग लेंगे.

बाबाजी : आप मेरी बात को समाज नहीं रही है, सब से मेरा मतलब है सब, आपका पूरा परिवार, आप आपके पुत्र, आपकी बहु, आपकी पूर्ति, जितने भी आपके ससुर के पुत्र पुत्रिया है और उनके पुत्र, पुत्रिया बहु सब.

कामनादेवी : (ये सुन कर वो सोचमे पद gayi)Par बाबाजी, सब तो मुमकिन नहीं है, कुछ लोग हमारे साथ नहीं रहते, और कुछ कई दिक्कतों के चलते यहाँ नहीं आ शक्ति.

बाबाजी : में सब जनता हु की आप क्या कहना चाहती है, पर अगर ये अनुष्ठान करना है तो सबकी हजारी जरुरी है.

उदयसिंह : ये मुमकिन नहीं है, जिन्हे मेने घर से निकल दिया है उन्हें में वापस नहीं बुला सकता और जो मर चुके है उन्हें भी में नहीं बुला सकता.

बाबाजी : देखिये जन्मान, मेरा कर्त्तव्य था की आप को बता दू, अब करना न करना आपकी मर्जी पर है.

उदयसिंह : (कुछ सोच kar)Ek बार मान भी लेते है की में उन्हें बुला लौ, पर जो मर चुके है उन्हें कैसे बुला शक्ति है, और कुछ लोग अस्पताल में बिस्तर पर है, आप रहने दीजिये.

बाबाजी : जैसी आपकी मर्जी जजमान, मेरा कर्त्तव्य था बताना मेने बता दिया.

ममता और बिना बिना कुछ बोले सब सुन रही थी, बिना का ससुराल था तो वो कुछ बोल नहीं शक्ति थी, वो कैसे बताती की इन सब की जरुरत नहीं है, वो आलरेडी माँ बन ने वाली है. वो बस चुप चाप सुन रही थी. पर ममता से न रुका गया.

ममता : इस सब की कोई जरुरत नहीं है, इन सब से कुछ नहीं होता, जो होता है वो सब उपरवाले की मर्जी से hi होता है.

नर्मदादेवी : तुम बिच में मात बोलो, जब तुम्हे कुछ पता hi न हो तो बिच में नहीं बोलना चाहिए.

ममता : आप नहीं जानती कुछ मम्मी, ये सब से कुछ फर्क नहीं पड़ता, आप किस ज़माने में जी रही हो? कोई जरुरत नहीं है इन सब चीजों की. (बाबाजी मुस्कुराये) आप क्यों मुस्कुरा रहे है, आपको लटगा है आप सब जानते है?

नर्मदादेवी : ये क्या बदतमीजी है ममता, इससे माफ़ कर दीजिये बाबाजी, ये अभी नादाँ है. (बाबाजी फिर मुस्कुराये)

ममता : में कोई नादाँ नहीं हु, और न कोई छोटी बच्ची हु जो में ये समाज नहीं सकती.

नर्मदादेवी : चुप हो जाओ.

ममता : पर मम्मी...

नर्मदादेवी : चुप हो jao(Thoda सख्ती से कहा)

बाबाजी : शांत हो जाइये, तुम सही कह रही हो बेटी, में कुछ नहीं जनता, जो कुछ करता है वो इस्वर hi करता है, में तो बस समझने की कोशिस करता हु, और सब समाज सकू इतना बड़ा भी नहीं हो gaya(Babaji में शांत लहजे में कहा) अगर में तुम्हारे बारेमे कुछ बताऊ तो कोई दिक्कत है तुम्हे?

ममता : Achchha,kya बताएँगे?

बाबाजी : क्या तुम चाहती हो की में सबके सामने बता दू?

ममता : है है, बता दीजिये, में भी तो सुनु की आप क्या बताना चाहते है.

बाबाजी : (भगवन का नाम लेते hue)Shiv, शिव. अगर तुम चाहती हो की में सबके सामने बताऊ तो जैसी शिव की मर्जी. (बाबाजी के मुँह से शिव का नाम सुन कर वो अंदर तक कैंप गयी, हलाकि बाबाजी ने सिर्फ भगवन शिव का जाप किया था, पर फिर भी वो अंदर तक हिल गयी thi)(Babaji ने बिना की और देखते hue)Tumhare मान भी ऐसे hi कई सवाल है, है न पुत्री. (बिना कुछ भी बोले बगैर बाबाजी की और देखने lagi)Shiv की कृपा से तुम भी इन सब में विस्वास नहीं करती है न? (बिना अंदर से कैंप रही थी, बाबाजी ने जिस तरह से शिव की कृपा कहा था वो थोड़ी भयभीत दिख रही thi)Bhaybhit होने की आवस्यकता नहीं है पुत्री, में कोई नादान नहीं हु जो किसी के भी उकसाने पर कुछ भी बोल दू, जिस तरह तुम दोनों पर शिव की कृपा है उस तरह मुज पर भी भोले शम्भू की कृपा है, में ऐसा वैसा कुछ भी नहीं बोलता.

नर्मदादेवी : बाबाजी आप क्या बात कर रहे है हमें कुछ भी समाज नहीं आ रहा.

बाबाजी : माताजी, में आपकी बहु और पुत्री से अकेले में कुछ वार्तालाप करना चाहता हु, अगर आप सबकी अनुमति हो तो.

नर्मदादेवी : इसमें अनुमति कैसी बाबाजी, आप जैसा कहेंगे. (ममता se)Babaji को उस कमरे में ले जाओ, जाओ बहु.

बाबाजी : किसी कमरेमे नहीं, हम आपके मंदिरवाले कक्ष में जायेंगे.

नर्मदादेवी : जी बाबाजी, बीटा उन्हें मंदिरवाले कमरे में ले जाओ.

ममता : (अंदर तक हिल गयी thi)Aiye बाबाजी. (वो तीनो मंदिरवाले कक्ष में चले गए, सब उन्हें देख रहे थे, खास करके पद्मा, वो भी इस खंडन की बहु थी, पर फिर भी बाबाजी ने उसे नहीं बुलाया था, वो सोच रही थी की आखिर इन दोनों से क्या बात करनी होंगी, पर वो कुछ बोल नहीं पायी, वो तीनो मंदिर के सामने बैठे हुए दिख रहे थे पर वो दूर थे तो उनकी बाते नहीं सुनाई दे रही थी)

बाबाजी : तो बेटी आपको प्रश्न है इस अनुष्ठान को ले कर, है na?(Mamta कुछ नहीं बोली) तुम्हे लगता है की में ये अनुष्ठान संतान प्राप्ति के लिए कर रहा हु है न? (वो अभी भी कुछ नहीं बोली) तुम्हे ये लगता है की इसकी कोई आवस्यकता नहीं है क्यों की तुम पहले से hi मातृत्व प्राप्त कर चुकी हो. (ममता बुरी तरह से चौंक गयी, क्यों की अभी तक उसने यहाँ किसी को भी ये बात नहीं बताई thi)(Beena की और देख kar)Aur तुम्हे भी यही लग रहा है क्यों की वैसी hi परिस्थिति तुम्हारी है, हैना पुत्री. (बिना की आंखे चौड़ी हो गयी, उसने ममता को देखा, ममता उसे hi देख रही थी, दोनों को आश्चर्य था. ममता सोच रही थी की भाभी भी माँ बन ने वाली है, और बिना सोच रही थी की ममता भी माँ बन ने वाली है) इसमें इतना आश्चर्य करने के जरुरत नहीं है, मेने कहा न की भोले शम्भू की कृपा से में भी कुछ कुछ समाज सकता हु. अब तुम दोनों को ये प्रश्न होगा की अगर मुझे पता है की शैतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान करने की जरुरत नहीं है तो फिर में ये अनुष्ठान कर क्यों रहा हु, है न. (दोनों आंखे फाडे बाबाजी को देख रही थी, बाबाजी मुस्कुराये) में ये अनुस्तान इन बालको के पिता के लिए कर रहा हु. (बिना ने सोचा की बाबाजी जिग्नेश की बात कर रहे है और ममता ने सोचा की वो उसके पति चंद्रपाल की बात कर रहे hai)(Babji फिर muskuraye)Kuchh बोलोगी नहीं पुत्री? (उन्होंने ममता की और देख कर कहा, ममता ने बीणाभाभी को देखा, वो अभी भी मान ने को तैयार नहीं थी)

ममता : बाबाजी, मेरे पति को चोट लगी है, पर वो ठीक है, और उनके लिए मेरे घरवाले और वो भी सरे के सरे, इनको अनुष्ठान करने की क्या जरुरत है?

बाबाजी : (मुस्कुराये, फिर बिना की और देखा )तुम्हे कुछ नहीं कहना पुत्री?

बिना : में क्या कहु बाबाजी, अगर आप जिग्नेश के लिए कुछ करना चाहते है तो में क्या कह शक्ति हु.

बाबाजी : (उनकी मुस्कान गहरी हो gayi)Dekho बीटा, में इस तरह की बात कहना तो नहीं चाहता, पर मुझे उसके लिए कहना पड़ेगा, उसने बहोत कुछ सहा है, उसने कभी किसीका कुछ नहीं बिगाड़ा पर फिर भी उसको बहोत कुछ सहना पड़ा है, मुझे खुद पर यकीं नहीं हुआ था, पर जब मेने यहाँ शुभसंकेत पढ़े तो मुझे यकीं हो गया की मेरा अनुमान सत्य था. भगवन की कृपा से वो सहीसलामत है, पर भी भी उसके ऊपर से पूरी तरह से खतरा टाला नहीं है, तो में उसके लिए hi ये अनुष्ठान करना चाहता हु. (बिना और ममता दोनों के चेहरे पर लाखो उलझाने थी, उन्हें कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था की बाबाजी क्या बोल रहे है)

ममता: बाबाजी आप क्या बोल रहे है, मुझे कुछ भी समाज में नहीं आ रहा है, क्या मेरे पति पर कोई खतरा है?

बाबाजी : में इस बच्चे के बाप की बात कर रहा हु. (ममता कैंप रही थी, बाबाजी क्या बोल रहे थे वो समाज रही थी, पर फिर भी वो विस्वास नहीं कर प् रही थी, अभी भी उसे यकीं था की बाबाजी को ये पता नहीं होगा की उसके होनेवाले बच्चे का बाप शिव है, उसकी आवाज लड़खड़ा गयी, पर फिर भी उसने अपना बचाव kiya)Me भी तो वही कह रही हु, मेरे पति के बारे में. (बाबाजी मुस्कुराये)

बाबाजी : (बिना को देख kar)Ye अनुष्ठान तुम्हारे होनेवाले बच्चे के बाप के लिए भी है.

बिना : जी बाबाजी.

बाबाजी : तुम नहीं पूछो गई की किसके लिए? (बिना अंदर से थार थार कैंप रही थी, पता नहीं पर ये राज़ अगर ममता के सामने खुल गया तो क्या होगा, वो ये सोच सोच कर hi परेशान थी, वो इतनी घबरा रही थी की मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा था, पर वो चुप भी तो नहीं रह शक्ति थी)

बिना : आप जिग्नेश की hi बात कर रहे है न? (उसकी हालत ऐसी हो गयी थी की वो अभी रो देगी, क्यों की जिस तरह से बाबाजी बात कर रहे थे उसे यकीं हो गया था की बाबाजी सब जानते है, कैसे वो उसे नहीं पता था पर इतना तो वो समाज गयी थी की बाबाजी जिग्नेश की बात तो कर hi नहीं रहे है, पर वो ममता की वजह से अपना बचाव कर रही थी)

बाबाजी : तुम दोनों को लग रहा होगा की मुझे तुमसे अकेले में बात करनी चाहिए थी, है न (दोनों दरी हुई नजरो से बाबाजी को देख रही thi)Kyu बेटी (ममता se)tum तो कह रही थी की सबके सामने मुझे बात करनी चाहिए और यहाँ सिर्फ तुम्हारी भाभी है फिर भी तुम्हारे चेहरे पर दर है. (ममता ने नज़ारे झुका ली) में तुम्हे डरा नहीं रहा हु पुत्री, और तुम्हे डरने की जरुरत भी नहीं है, मेने खास वजह से तुम दोनों को साथ में बुलाया है. में चाहता हु की तुम्हारा जो राज़ है वो तुम दोनों को पता हो. (दोनों नज़ारे झुकाये बैठी हुई थी, दोनों में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी की वो नज़ारे उठाये) मेरी और देखो पुत्री, दोनों. (दोनों ने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपनी नजर उठायी) अब में जो बता रहा हु वो ध्यान से सुनो. मेने कहा की में इस होनेवाले बच्चे के पिता के लिए ये अनुष्ठान करना चाहता हु तो वो अलग अलग नहीं है, वो एक hi इंसान है. (बिना और ममता को यकीं नहीं हो रहा था की बाबाजी क्या कह रहे है, उनकी सांसे तेज तेज चलने लगी थी)

ममता : (रुवासी आवाज me)Ye क्या कह रहे है आप बाबाजी?

बाबाजी : शांत रहो पुत्री, जो सच है वो hi कह रहा हु, जिसका अंश तुम्हारे गर्भ में पल रहा है (बिना को देख कर) उसीका ाँस तुम्हारे गर्भ में भी है. (वह सन्नाटा फ़ैल गया, न बाबाजी बोल रहे थे न वो दोनों, थोड़ी देर बाद बाबाजी ने hi मौन तोडा) में ज्यादा खुल कर तो नहीं बताऊंगा, पर तुम दोनों एक hi सूत्र से जुडी हुई हो, और तुम दोनों को hi उसकी ताकत भी बन न है. अभी फ़िलहाल इस से ज्यादा में कुछ नहीं बता पाउँगा. तुम दोनों यही बैठो, भगवन शिव के चरणों में, अपने मान को शांत करो. और है, ये राज़ अपने तक hi रखना, अभी किसी को भी कुछ भी बताने की आवस्यकता नहीं है. में चलता हु. (बाबाजी बहार आ गए)

कामनादेवी : (उसको भी मिर्ची लगी थी, क्यों की बाबाजी नर्मदा की बहु और बेटी को अपने साथ ले गए थे, उसकी बहु को नहीं बुलाया था, पर वो कुछ बोली नहीं) क्या हुआ बाबाजी, हमे भी तो कुछ पता चले.

बाबाजी : माताजी, मुझे जो कहना था वो में कह चूका हु. मेने कहा था की अगर ये अनुष्ठान करना है तो सब को साथ होना hi पड़ेगा, आप प्रयत्न कीजिये, फिर जैसी शिव की मर्जी. में चलता हु. (बाबाजी वह से चले गए)

उदयसिंह : अब सब क्लियर है, में तो पहले से hi कह रहा था की इन सब बातो का कोई मतलब नहीं है, में सिर्फ तुम्हारी वजह से यहाँ सब बकवास सुन ने आ गया था. अब तो सबको पता चल गया न की ये मुमकिन नहीं है.

चंद्रभान : आप कहना क्या चाहते है भाईसाहब.

उदयसिंह : तुमने सुना न वो बाबा क्या बोलके गया, तुम्हे क्या लगता है की योगेंद्र और उसकी बीवी यहाँ आ पाएंगे, और सबको लेन को बोल रहा था वो, उसे नहीं पता की एक तो आलरेडी मार चूका है, वो कहा से आएगा, उसने काबा की बेटी, बीटा, बहु सब चाहिए. मेरी बेटी मार चुकी है मेरे लिए, में उसको नहीं बोलनेवाला.

चंद्रभान : अगर मर चुकी है और कोई रिस्ता नहीं है तो फिर उसे मेरी बेटी क्यों कह रहे है?

उदयसिंह : (गुस्से से देखता hai)Muje कोई बहेश नहीं करनी, में जा रहा हु (अपनी पत्नी को देखते hue)Tum चल रही हो की नहीं (कामनादेवी कुछ न बोली, क्यों की उन्हें रुकना था, किसी भी तरह इस गुत्थी को सुलझाना था.) ठीक है, अगर तुम्हे रुकना है तो रुको फिर, अपने आप आ जाना, में जा रहा हु. (वो गुस्से में वह से चला गया)

वही दूसरी और ज़ोयायन्तय कड़ी थी, वो अभी भी शिव के बारेमे और जो कुछ भी हो चूका था उस बारे में सोच रही थी, जो खुमार था वो अब उतर चूका था, जो सेक्स दिमाग पर चढ़ गया था वो उतर चूका था, अब वो महसूस कर रही थी की वो दो बच्चो की माँ थी और उम्र में कही ज्यादा तजुर्बेकार थी, उसे ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था, उसे बच्चो के बिच नहीं आना चाहिए था. वो थोड़े उदास मान से अपने कमरे की और बढ़ी जहा उसकी बेटी नाज़िआ उलटी हो कर लेती हुई थी, वो जानती थी की ऐसा उल्टा लेटने का क्या कारन था. उसे अपनी बेटी की चिंता होने लगी, वो उसके पास गयी और उसके शिर पर हाथ फिरते हुए पूछने लगी.

अम्मी : क्या ज्यादा दर्द हो रहा है बेटी?

नाज़िआ : (हल्का मुस्कुराते hue)Nahi ामी, थोड़ा है.

अम्मी : गरम पानी का शेक करना है वह?

नाज़िआ : (उसे जरुरत तो थी पर ऐसे अम्मी के सामने बताना उसे बुरा लग रहा tha)Nahi अम्मी में ठीक हु.

अम्मी : क्या ठीक हु, तुजे पता है की वो कितना बड़ा है, फिर भी उसे वह लेने की क्या जरुरत थी?

नाज़िआ : आपने देखा था ammi?(Zoya को रीलीज़ हुआ की उसने खुद अपनी पोल खोल दी है)

अम्मी : नहीं, वो मेरे कहने का मतलब, वो तू ऐसे लेती है तो, मेने सोचा...

नाज़िआ : (सीधी हुई, और बिस्तर पर बेथ गयी, बैठने में उसे दर्द हुआ जो उसके चेहरे पर भी छलक आया, फिर सँभालते हुए उसने अपनी अम्मी का हाथ pakada)Ammi, आप यहाँ बैठो, मेरा पास (उसने खिंच कर अम्मी को अपने पास बिठा diya)Ammi आपको सफाई देने की कोई जरुरत नहीं है, में बहार आयी थी, मेने बाथरूम से आती आवाजे सुनी thi.(Usko पसीना आने लगा, वो दर के मरे कड़ी हो गयी) अम्मी, आप दर क्यों रही है, मुझे नहीं पता की वो सब कैसे हुआ, आपने ऐसा क्यों किआ, या शिव ने ऐसा क्यों किआ, में समझना भी नहीं चाहती, मुझे पता है की कुछ भी मुमकिन है, और सबकी अपनी निजी वजह होती है, यकीं मनो अम्मी मुझे कोई गिला शिकवा नहीं है, न में आपको गलत समझती हु. (ज़ोया ने डरते डरते अपनी बेटी को dekha)Ammi आपको डरने की या शर्मिंदा होने की कोई जरुरत नहीं है.

अम्मी : (थोड़ी हिम्मत बटोर kar)Nahi बेटी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, मुझे अपने आप पर सयम रखना चाहिए था.

नाज़िआ : क्यों अम्मी?

अम्मी : क्यों क्या, में दो बड़ी बड़ी लड़कीओ की अम्मी हु, किसी की बीवी हु, मुझे सोभा देता है क्या, जो गलत है वो गलत है.

नाज़िआ : वो अम्मी आपका सोचना है, और वो आपका फैसला है, आपने जो किआ वो भी और आगे आप जो करोगी या नहीं करोगी, ये सब आपका फैसला है, पर एक बात याद रखियेगा, में आपके साथ हु, किसी भी परिस्थिति में, मुझे पता नहीं है की आपके और अब्बू के बिच क्या चल रहा है, उसके चलते या सिर्फ ऐसे hi, किसी भी वजह से आपने ये किआ है, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, में आपको गलत नहीं समझती, में भी एक औरत हु, में समाज सकती हु आपको. तो अपने दिल में कोई गुबार मत रखियेगा.

अम्मी : तो मेरी बेटी अब बड़ी हो गयी है.

नाज़िआ : है अम्मी, एक उम्र के बाद लड़कीअ बड़ी हो hi जाती है, अब मुझे आप अम्मी नहीं, मेरी दोस्त लगती हो, मेरी सहेली हो आप, आपने मुझे हर जगह सहारा दिया है, हर जगह मेरी मदद की है, अपने अम्मी से ज्यादा मेरी सहेली का रोले ऐडा किआ है, आप ये मात समझना की में आपके अहसान के चलते आपसे ऐसा कह रही हु, पर में अब समझती हु की, हर किसी की अपनी निजी जिंदगी होती है, अपनी निजी ख्वाहिसे होती है, आपने अपनी निजी ख्वाहिस पूरी कर ली तो आप बुरी नहीं बन गयी, आप अभी भी मेरी प्यारी अम्मी और अब मेरी प्यारी सहेली भी हो. (वो अपनी अम्मी के गले लग गयी)

अम्मी : (उसकी पीठ सहलाते hue)Par बीटा ये अच्छा थोड़ी न लगता है, वो तेरे साथ भी और मेरे साथ भी.

नाज़िआ : एक बात कहु, आप बुरा मत मान न, मुझे तो ऐसा लग रहा है की जल्द hi तीसरी भी आनेवाली है.

अम्मी : (नाज़िआ को दूर हटा कर उसका चेहरा देखते hue)Ye क्या कह रही है तू, क्या tu....(Wo तो बोल भी नहीं प् रही थी)

नाज़िआ : है में संयम की hi बात कर रही हु.

अम्मी : क्या बकवास है ये, वो अभी बच्ची है, और शिव ऐसा कैसे कर शक्ति है, वो भी दुसरो की तरह hi निकला, जहा लड़की देखि वही...

नाज़िआ : क्या अम्मी आप भी, क्या आपको शिव ऐसा लगा, क्या उसने आपके साथ जबरदस्ती की?

अम्मी : नहीं, पर ऐसे सबके साथ वो थोड़ी न सम्बन्ध बना सकता है, तेरी और मेरी बात अलग है, संयम की बात अलग है, उसे अभी शादी भी करनी है, अगर उसने संयम को ख़राब कर दिया तो उसको दिक्कत हो सकती है.

नाज़िआ : अम्मी, इसमें शिव की गलती नहीं है, और अभी उनके बिच ऐसा वैसा कुछ है भी नहीं, पर जैसा में संयम की आँखों में देखती हु, वो बता रही हु, शिव उसे वैसे नहीं देखता, पर संयम शिव को वैसे देखती है.

अम्मी : नहीं, तुम्हे शिव से बात करनी होगी, उसे कह की वो संयम के साथ ऐसा वैसा कुछ न करे.

नाज़िआ : शिव कुछ नहीं करेगा, जो कुछ करेगी वो संयम करेगी, जहा तक मुझे लग रहा है.

अम्मी : तो समजा उसे, समजा की ये सब गलत है, शादी से पहले ये सब वो नहीं कर शक्ति.

नाज़िआ : क्यों नहीं कर शक्ति, क्या सब ठेका लड़कीओने hi ले रक्खा है?

अम्मी : में कुछ नहीं जानती, जो समाज में चल रहा है, वो hi चलता है, अगर वो हमारे मजहब का होता तो में उन दोनों की शादी भी करवा देती.

संयम : किसकी शादी की बात हो रही है (वो आंखे मलते हुए रूम में दाखिल हुई, अभी अभी वो नींद से जगी थी)

नाज़िआ : तेरी शादी की (नाज़िआ ने चुटकी ली)

संयम : मेरी शादी? मुझे नहीं करनी शादी वादी, अभी मुझे बहोत पढ़ना है, उसके बाद नौकरी. तो अभी इन सब को दिमाग से निकल hi दो.

नाज़िआ : (नाज़िआ फूल मज़ाक के मूड में thi)Achchha, में तो अम्मी को बता रही थी की संयम की शादी शिव से करदेते है.

संयम : (चहकते hue)Kya?

नाज़िआ : देखो अम्मी, इसका चेहरा तो देखो, मेने कहा था न.

संयम : Ammiiiiiiiiii.

अम्मी : ये सब मज़ाक नहीं है नाज़िआ, ऐसे मज़ाक में भी मात बोलो.

नाज़िआ : सॉरी अम्मी.

अम्मी : जा पानी गरम कर के थोड़ी देर सिकाई कर ले, दर्द काम हो जायेगा.

संयम : क्या हुआ आप को?

अम्मी : कुछ नहीं हुआ है, तू जा और अपनी पढ़ाई कर.

(फिर वह सब अपने अपने काम में लग गए)
 
अपडेट 134

स्वर्ण ने वैस्वी को उदास देखा था, वो दूर थी पर फिर भी उसे लगा शायद उसकी आँखों में ासु चालक आये है, वो दौड़ते हुए सीधे अपने रूम में घुस गयी थी, उसे अपनी नानन्द की चिंता होने लगी, पता नहीं वह क्या हुआ था, अपना काम निपटा के सीधी वो उसके रूम की तरफ गयी, उसने दरवाजा खोलना चाहा पर अंदर से बंद था, उसने दरवाजा खत खतया.

स्वर्ण : वैसवीईई, वाईईईइसवीईईई. दरवाजा क्यों बंद किया है? वैसवीईई, सुन रही हो मुजीई. (वैस्वी कोई जवाब नहीं दे रही थी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वैस्वीी जवाब दो, Vaiswiiiiiii(Par अंदर से कोई जवाब नहीं आ रहा tha)Vaiswi जवाब दो प्लीज, अगर तुमने जवाब नहीं दिया तो मुझे सब को बुलाना पड़ेगा, प्लीज जवाब दो, वैश्विइइइइइइ देखो मेरा दिल घबरा रहा है वैश्विइइइइइइइइ. (उसे दरवाजा अंदर से खोलने की आवाज आयी, तुरंत उसने दरवाजा अंदर की तरफ धकेला, और वो अंदर चली गयी. वैस्वी दीवाल से लग कर कड़ी थी और रो रही थी, पर उसको सही सलामत देख कर स्वर्ण को चैन आया, सो फ़ौरन उसके पास गयी और उसको गले से लगा liya)Kya हुआ वैस्वी, रो क्यों रही हो, में कितना दर गयी थी पता है? (वैस्वी और रोने lagi)Chup हो जाओ वैस्वी, क्यों रो रही हो, क्या हुआ वह?

वैस्वी : (रट hue)Muje शादी नहीं करनी.

स्वर्ण : तो कोण करा रहा है, क्या अभी से उस बात को ले कर रो रही हो.

वैस्वी : आज वो हमारे घर तक आ गया, वो मम्मी के सामने मुझे ले गया, ये सब क्या बताता है, मुझे उस से शादी नहीं करनी भाभी. (वो फिर रोने लगी)

स्वर्ण : शांत हो जा बच्चे, में हु न, में तेरे साथ हु, तू चिंता मात कर, कुछ नहीं hoga.(Wo उसे सांत्वना देती रही, और उसका असर भी हुआ, थोड़ी देर बाद वैस्वी शांत होने लगी, उसका चेहरा पोछते हुए) ऐसे क्यों रो रही है, कुछ नहीं होगा, कोई तेरी मर्जी के बगैर शादी नहीं करेगा, में हु तेरे साथ, में तेरे भैया से भी बात करुँगी, तू टेंशन मत ले.

वैस्वी : वो मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता, मुझे नहीं करनी है उस से शादी.

स्वर्ण : तो नहीं होगी, तू चिंता मात कर.

वैस्वी : वो बोल रहा था, की मेरी मर्जी हो की न हो, मेरी शादी उस से hi होगी.

स्वर्ण : कुछ नहीं होगा, में हु न.

वैस्वी : भाभी ये वर्जिन क्या होती है?

स्वर्ण : (अचानक ऐसे सवाल से स्वर्ण को आश्चर्य hua)Aisa क्यों पूछ रही है?

वैस्वी : वो बोल रहा था की में वर्जिन हु, इस लिए वो मुझसे शादी करना चाहता है, बताओ न भाभी, ये वर्जिन क्या होता है?

स्वर्ण : वो पागल है, ऐसी भी कोई बात करता है, तू छोड़ उस बात को.

वैस्वी : बतावा भाभी, में कैसे वर्जिन हु?

स्वर्ण : तू अभी उस बात की टेंशन मात ले, अभी तू छोटी है, वक़्त आने पर सब पता चल जायेगा.

वैस्वी : में छोटी नहीं हु, अगर छोटी होती तो क्या मेरी शादी की बात होती. बतावा भाभी.

स्वर्ण : (उसने ध्यान से वैस्वी को देखा, उसने कभी वैस्वी से ऐसी वैसी बात नहीं की थी, पर उसको लगा की उसे बात करनी hi होगी, अगर बड़े hi बच्चो को सही ज्ञान नहीं देंगे तो उन्हें पता कैसे chalega.)Tu सेक्स के बारे में क्या जानती है?

वैस्वी : (ऐसे सवाल से वो शर्मा gayi)Ye क्या सवाल है भाभी?

स्वर्ण : ऐसे तो तू कह रही है की वर्जिन क्या है तुजे पता नहीं है, और सेक्स का नाम सुन कर शर्मा रही है, मेरी तो समाज में नहीं आ रहा.

वैस्वी : शर्म तो आएगी न भाभी, मेने फिल्मो में देखा है, हीरो हीरोइने कैसे एक दूसरे के साथ किश और सब करते है, उसी को सेक्स बोलते है na?(Swarna मुस्कुराने लगी, वो समाज गयी की उसकी नानन्द को कुछ नहीं पता hai)Aap मुस्कुरा क्यों रही हो भाभी. मेने तो सुना है की लड़का लड़की सेक्स करते है, और फिल्मो में तो लड़का लड़की यही करते है, तो वो hi सेक्स हुआ न. (स्वर्ण हसने लगी, उसने देखा की दरवाजा खुला है तो वो उठी और दरवाजा बंद कर aayi)Kya हुआ भाभी, आपने दरवाजा क्यों बंद कर दिया?

स्वर्ण : क्यों की ऐसी बाते सबके सामने नहीं की जाती. तू जो समाज रही है वो सेक्स नहीं है पगली.

वैस्वी : तो?

स्वर्ण : अब में तुजे कैसे संजो, आज कल के लड़के लड़कीओ को सब पता होता है, और तू इतनी बड़ी हो गयी फिर भी समाज नहीं आता.

वैस्वी : सबको ऐसे hi पता चल्जता है क्या, कभी न कभी किसीने किसीने तो संजय होगाणा. मुझे जितना पता था वो मेने बता दिया.

स्वर्ण : तेरे साथ जो हादसा हुआ था, उस वक़्त वो लड़के क्या करने की कोशिस कर रहे थे?

वैस्वी : उस बात को मुझे याद मात दिलाइये, वो बहोत गंदे लोग है.

स्वर्ण : पर यही सचाई है, वो लोग तुम्हारे साथ सेक्स करने की कोशिस कर रहे थे.

वैस्वी : है, वो गंदे लोग, मुझे यहाँ वह छू रहे थे, वो तो शिव आ गया, वर्ण वो लोग मेरे साथ पता नहीं क्या करते?

स्वर्ण : क्या करते?

वैस्वी : वो hi तो पता नहीं है.

स्वर्ण : उसके बाद तू शिव के साथ भी थी, उसने कुछ किआ था क्या?

वैस्वी : (शिव का जीकर होते hi उसके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Ha, उसने मेरा बहोत ख्याल रक्खा था.

स्वर्ण : ख्याल रक्खा था, मतलब क्या किआ था?

वैस्वी : मुझे शर्म आ रही है भाभी, में वो सब नहीं बता शक्ति.

स्वर्ण : क्या खाक शर्म आ रही है, मुझे पता है उसने कुछ नहीं किआ, अगर उसने कुछ किआ होता तो आज तू मुझसे ये सब न पूछ रही होती.

वैस्वी : आप कहना क्या चाहती है भाभी?

स्वर्ण : अब में तुजे कैसे संजो, ये मेरी भी समाज में नहीं आ रहा है.

वैस्वी : सीधे सीधे समझाइये न, ये गोल गोल सवाल क्यों कर रही है?

स्वर्ण : (झुंझलाते hue)Tere निचे क्या है?

वैस्वी : (पीछे घूम कर अपने निचे देखते hue)Kya है?

स्वर्ण : पागल, वह नहीं यहाँ, जहा से तू पेशाब करती है. (अब वो थोड़ी चीड़ से बोल रही थी, ये वैस्वी पे चीड़ नहीं थी पर उसे ऐसी बाते करनी पद रही थी उस बात की चीड़ थी)

वैस्वी : ये क्या बोल रही हो bhabhi(Vaiswi बहोत शर्मा गयी थी)

स्वर्ण : लड़को के पास वह क्या होता है पता है?

वैस्वी : (वो और शर्माने lagi)Ha भाभी, उसका चित्र भी था, हमारी किताब में.

स्वर्ण : तो लड़का अपना वो, लड़की की उस जगह में डालता है उसे सेक्स कहते है. (स्वर्ण एक साँस में बोल गयी, और हांफ ने लगी)

वैस्वी : (उसे समाजमे तो आया की भाभी ने क्या बोलै, पर उसको यकीं नहीं हुआ, उसके चेहरे पर कन्फूसिओं साफ़ दिख रही थी, पर वो बोली कुछ नहीं, वो अपनी भाभी को देख रही थी)

स्वर्ण : और जिस लड़की ने कभी सेक्स न किआ हो वो लड़की और लड़का दोनों वर्जिन कहलाते है. अब और कुछ मात पूछना. (बोलते बोलते वो हांफ रही थी)

वैस्वी : पर भाभी....

स्वर्ण : बस वैस्वी, अभी और नहीं. मुझे कितनी शर्म आ रही है, तुजसे ऐसी बाते करते हुए, तुम्हे पता भी है.

वैस्वी : पर भाभी, अगर मुझे कुछ पता न हो तो मुझे किस से पूछना चाहिए?

स्वर्ण : (वो शांत होने लगी, थोड़ी देर बाद वो वैस्वी का शिर सहलाते hue)Me समझती हु, पर क्या करू, ऐसी बाते लोग नहीं करते है, तो ये सब बाते करने में झिझक होती है.

वैस्वी : मुझे ये तो पता था की शादी के बाद सब सेक्स करते है, पर करते क्या है वो पता नहीं था, मुझे ये समाजमे नहीं आ रहा की अगर सब करते है तो उन्हें पहली बार पता कैसे चलता है की क्या करना है?

स्वर्ण : तेरी बात सही है, सबको किसी न किसी तरीके से पता चल hi जाता है, कभी लड़का पहले समाज जाता है, कभी लड़की समाज जाती है, फिर वो दूसरे को सीखा hi देता है, ये सब कुदरती है. दोस्तों और सहेलिओ में अक्सर ऐसी बाते हो जाती है और सबको ये पता चल hi जाता है.

वैस्वी : मेरी भी सहेलिया हे, पर हमारे बिछ तो कभी ऐसी बाते नहीं हुई भाभी.

स्वर्ण : अभी तुम सब नादाँ हो, जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, तुम्हारा शरीर hi तुम्हे सब सीखा देता है. मुझे गुस्सा अपने सास ससुर पर आ रहा है, मेरी नादाँ फूल जैसी ननद को अभी से इन सुब में उलझा रहे है. तू उन सब पर ध्यान मात दे, तू अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा, इन सब को तो में देख लुंगी.

वैस्वी : अपनी शादी पर आप वर्जिन थी भाभी?

स्वर्ण : (वो चौंक gayi)Ye क्या बेहूदा सवाल पूछ रही हो?

वैस्वी : ऐसा क्या पूछ लिया मेने, एक सीधा सा सवाल पूछा है.

स्वर्ण : नहीं, मेने और तेरे भैया ने शादी से पहले hi सब करलिया था, अब खुस.

वैस्वी : (अपनी भाभी को गले लगते hue)Aap बहोत अच्छी हो भाभी, पर ये मात समझना की में आपको छोड़ दूंगी, मुझे कुछ भी जान न है तो में आपसे hi पूछूँगी सामजी.

स्वर्ण : (उसको कास के गले लगते hue)Thik है.

जहान्वी पुरे रस्ते गाड़ी में शिव पर गुस्सा होती रही, जब पापा की ऑफिस के आगे गाड़ी रुकी तो वो थोड़ी देर अंदर hi बैठी रही, जिस तरह से शिव ने उसके साथ बदतमीजी की थी वो न जाने क्या काया सोच रही थी, पहले सोचा की पापा को बता कर पुलिस कम्प्लेन कर दे. पर फिर उसका दिल नहीं मान रहा था, कही न कही उसे शिव पसंद आ गया था, वो बहार रह रही थी तो एक दो लोगो के साथ उसके रिलेशन रह चुके थे, शारीरिक रिलेशन भी वो बना चुकी थी, पर जब से इंडिया आयी थी तब से उसने कोई रिलेशन नहीं बनाये थे, वैसे भी उसके पापा की इतनी धक् थी की कोई भी उसके साथ आगे बढ़ने की सोच भी नहीं सकता था. विदेश में उसको रोकनेवाला या टोकनेवाला कोई नहीं था, पांच साल तक वो विदेश में रही थी, वह के कल्चर के हिसाब से वो वह सब कुछ कर चुकी थी, वैसे भी वह वो आम बात थी. जिस तरह से शिव ने उसको पकड़ कर किश किआ था वो अंदर तक हिल गयी थी, पहले तो उसको इस बात का गुस्सा था की उसने इस तरह की हिम्मत करने की जुर्रत कैसे की, पर जैसे जैसे वो सोच रही थी उसका गुस्सा शांत हो रहा था, जिसतरह से शिव ने उसे किश किआ था, आज तक ऐसा अनुभव उसे नहीं हुआ था, शिव के सामने वो अपने आप को एक कमजोर लड़की महसूस कर रही थी, जिस ताकत से शिव ने उसे पकड़ा था उस ताकत के सामने वो अपने आपको बेबस महसूस कर रही थी. भले hi शिव ने उसके साथ जबरदस्ती की थी पर फिर भी वो उस एहसास के चलते बावली हो रही थी, उसके होठ तक दुःख रहे थे, बार बार उसका ध्यान अपने होठो की और जा रहा था. उसने गाड़ी के शीशे में अपने आपको देखा, उसने अपने होठो को देखा, सब ठीक था, पता नहीं पर उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी. वो मुस्कुराती हुई ऑफिस में दाखिल हुए. अंदर उसके पापा और प्रकाशराओ बैठे हुए थे.

जहान्वी : Hello पापा, नमस्ते अंकल.

कमलनाथ : आओ बेटी, तुम यहाँ?

जहान्वी : वह कोई काम नहीं था, सब सही चल रहा था तो में वापस आ गयी.

कमलनाथ : ठीक है तुम बैठो, या घर जाना है तो घर चली जाओ.

जहान्वी : नहीं पापा, घर जा कर क्या करुँगी, में यही बैठी हु.

कमलनाथ : ठीक है (प्रकाशराओ की और देख कर) प्लान तो तुम्हारा बढ़िया है, उसको भी पता चले की हमसे टकराने का क्या अंजाम होता है.

प्रकाशराओ : मेने सब सेट करदिया है, ऑफिस में कागजात भी सेट करदिये है, अब उन्हें बेघर होने से कोई नहीं बचा सकता, उसने हमारे काम में तंग अदायी है तो उसको इसका फल तो मिलना hi चाहिए. वैसे भी वो सरकारी जमीं है, तो हम किसी न किसी प्रोजेक्ट के बहाने उसे खली कारवाही देंगे.

जहान्वी : किसकी बात कर रहे हो आप पापा?

कमलनाथ : कुछ नहीं बेटी, एक लड़के ने हमारे काम में तंग अदायी थी तो उसका hi फल उसे दे रहे है.

जहान्वी : मेरी समाज में नहीं आया पापा, किसकी बात कर रहे है आप?

कमलनाथ : तुम्हे इसमें पड़ने की जरुरत नहीं है, तुम इन सब से दूर hi रहो. (प्रकाशराओ से) तुम वह नोटिस भिजवाने का प्रबंध करो.

प्रकाशराओ : ठीक है. थोड़ा बबल होगा, पर आप है तो फिर सब संभल लेंगे.

थोड़ी देर दूसरे कामो के बारे में वह चर्चा चलती रही, फिर वो तीनो वह से निकल गए.

शाम को ममता और बिना दोनों एक कमरे में बैठी हुई थी, दोनों के बिच ख़ामोशी छायी हुई थी, दोनों में से कोई भी बोलने को तैयार नहीं थी, या कैसे बोले वो समाज में नहीं आ रहा था. बाबाजी के जाने के बाद भी यही हल था, वह पद्मा भी आ गयी थी, दोनों को खामोश बैठे देख उसने पूछा था

पद्मा : क्या हुआ ममता, आप दोनों ऐसे क्यों बैठी हो, क्या कहा बाबाजी ने? (इस सवाल से दोनों hi हड़बड़ा गयी, दोनों ने एक दूसरे को देखा पर कोई जवाब नहीं दिया) ऐसा क्या कह दिया बाबाजी ने की आप दोनों hi खामोश हो गयी हो, क्या मुझे भी नहीं बता शक्ति आप. (बिना se)Bhabhi आप hi बता दीजिये, आखिर ऐसी क्या बात थी जो बाबाजी आप दोनों को अकेले यहाँ ले आये?

बिना : ऐसी कोई बात नहीं है पद्मा, वो ममतादिदी इनसब में मानती नहीं तो उनको hi सब समजा रहे थे. (उसने जिस तरह से हिचकिचाते हुए जवाब दिया, पद्मा को संतुस्ती नहीं हुई)

पद्मा : कोई बात नहीं भाभी, आप बताना नहीं चाहती तो मात बताओ, वैसे भी papaji(Sasur) की वजह से आप मुज पर भी भरोसा नहीं करती, में समाज शक्ति हु, उनके कर्मो की सजा hi तो मिल रही है सबको.

बिना : (उसका हाथ पकड़ते hue)Beth यहाँ, मेने कहा न ऐसी कोई बात नहीं है, वो तो बस समजा रहे थे, और कुछ नहीं.

पद्मा : जैसे आप मुझे समजा रहे है भाभी, में कोई नादाँ बच्ची नहीं हु, में सब समझती हु, कोई ऐसी बात है जो आप मुझे बताना नहीं चाहती, कोई बात नहीं, जब नशीब hi ख़राब हो तो कोई क्या कर शक्ति है, भले मेरे ससुर जैसे भी हो, या मेरे पति भी, पर में वैसी नहीं हु भाभी, मुझे हमारे परिवार की चिंता है, और रही बात बाबाजी ने क्या कहा तो कभी न कभी वो सामने आ hi जायेगा. में चलती हु. (वो उठ कर जाने लगी)

बिना : सुनो तो, पद्मा (पर वो न रुकी, वो बहार चली गयी, बिना भी उठ कर बहार निकल आयी और ममता भी)

कामनादेवी : क्या कह रहे थे बाबाजी? (उन्होंने बिना की और देख कर पूछा)

बिना : कुछ नहीं बड़ी माजी, वो बस इस अनुष्ठान का महत्व समजा रहे थे. (कामनादेवी भी समाज गयी की वो बात को घुमा रही है)

कामनादेवी : अब आगे क्या करना है भाई साहब, वो तो इन सब में साथ देनेवाले है नहीं.

चंद्रभान : भाभी, और कोई तो दिक्कत नहीं है, सब आ जायेंगे, सिर्फ योगेंद्र का परिवार औरआपकी एक बेटी जो...

कामनादेवी : तो फिर ये सब कैसे होगा?

चंद्रभान : में एक बार सुखदेवजी से बात कर के देखता हु, अगर वो सब ठीक हो गया तो फिर आपकी बेटी को मिलने का सोचते है.

कामनादेवी : वो नहीं मानेंगे, वो अपनी बेटी का मुँह भी नहीं देखना चाहते.

चंद्रभान : में समझता हु, पर अगर वंस आगे बढ़ाना है तो फिर कुछ न कुछ तो करना hi पड़ेगा, वर्ण क्या करेंगे वो? आप समजके देख लीजिये, अगर वो जाना नहीं चाहते तो हम दोनों चले जायेंगे.

कामनादेवी : ठीक है भाईसाहब, अब हम भी चलते है, जो हो आप खबर कर देना.

उसके बाद साब अपने अपने कमरों में चले गए थे. ममता और बिना दोनों अपने अपने कमरों में बेथ कर सोच रही थी.

बिना : (मान me)Babaji ने जो कहा था वो कैसे मुमकिन है, उन्होंने कहा था की मेरे और ममतादिदी के गर्भ में पल रहे संतान का बाप एक hi है, ये कैसे मुमकिन है, वो किस की बात कर रहे थे, क्या वो ये समाज रहे है की मेरे और ममता दीदी के अंदर जिग्नेश का बच्चा है, नहीं वो ऐसी बात नहीं कर शक्ति, वो सब कुछ जानते है, अगर उन्होंने कहा है तो वो शिव की hi बात कर रहे है, पर ये कैसे मुमकिन है, शिव कब ममतादिदी से मिला, मेरा तो शिर घूम रहा है, उनसे बात किये बगैर इस बात का खुलासा नहीं हो शक्ति, पर कैसे बात करू, क्यों की उनसे पूछने पर मुझे ये बताना पड़ेगा की मेरे गर्भ में पल रहा बच्चा शिव का है, वो क्या सोचेगी मेरे बारे में. पर अगर मेरे गर्भ में शिव का बच्चा है तो उनके भी गर्भ में शिव का hi बच्चा है, उन्होंने भी अपने पति के अलावा किसी और से सम्बन्ध रक्खे है, कैसे पुछु, क्यों की अगर बाबाजी की बात गलत निकली और ममतादिदी के सम्बन्ध शिव से न हुए तो मेरा राज़ सामने आ जायेगा, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा. (दूसरी और ममता भी ऐसा hi सोच रही थी)

जब वो अपने कमरे से बहार निकली तो सामने उसे ममतादिदी दिख गयी, दोनों एक दूसरे के सामने थी पर दोनों की नज़ारे झुक गयी थी. कुछ पल वह सन्नाटा था, दोनों एक दूसरे से नज़ारे मिलाने से कटरा रही थी. आखिर ममता ने hi चुप्पी तोड़ते हुए कहा.

ममता : भाभी, (फिर थोड़ी देर ख़ामोशी) भाभी, मुझे बात करनी है.

बिना : हम्म्म्म, मेरे कमरे में चलते है.

ममता : ठीक है (दोनों कमरे में तो आ गयी थी, पर दोनों खामोश बैठी थी, बात कैसे सुरु करे वो समाज में नहीं आ रही थी) भाभी, क्या बाबाजी ने जो कहा वो सच हो शक्ति है (ममता सोच समाज कर अपने शब्द रख रही थी) आप का ....भाभी मुझे माफ़ कीजियेगा, में ऐसा आपसे पूछ रही हु पर पूछना जरुरी है, आप माँ बन ने वाली हो? (बिना ने एक बार अपनी नानन्द को देखा, फिर नज़ारे झुका कर है में शिर हिलाया)

बिना : आप भी?

ममता : है भाभी.

बिना : (अपनी नानन्द की आँखों में देखते hue)Pata नहीं हम आगे क्या बात करेंगे, पर इस वक़्त ये सोच कर की आप माँ बन ने वाली हो मुझे बहोत खुसी है, आखिर कर आप के जीवन में ये खुसी आ hi गयी. (उसने अपनी नानन्द का हाथ पकड़ते हुए ये कहा था)

ममता : (अपनी भाभी का प्यार वो महसूस कर रही thi)Muje भी बहोत खुसी हो रही है भाभी, की आप भी माँ बन ने वाली हो. (बिना को गले लगते hue)Bahot बहोत बधाई हो आपको.

बिना : आपको भी दीदी. (दोनों की आँखों में आंसू बह निकले, आखिर क्यों न हो, इतने बरसो बाद, इतना कुछ सुन ने के बाद आखिर उनके नशीब में ये खुसी आयी थी, गले लगे हुए hi)Didi ये बच्चा, जीजाजी का नहीं है न?

ममता : आपका बच्चा भी भाई का नहीं है न?

बिना : (अपने नानन्द की चुटकी लेते हुए) ये क्या बोल रही है, में तो सोच रही थी की तूने अपने hi भाई के साथ...

ममता : भाभीईईई, (फिर जवाब देते hue)Mera बच्चा किसका है मुझे पता है, और अगर आपका और मेरा बच्चा एक hi इंसान का है तो वो भाई तो नहीं हो सकता. पर भाभी, ये हुआ कैसे?

बिना : क्या पूछना छह रही है तू?

ममता : मेरा मतलब है की वो आपको कैसे मिला?

बिना : देखिये दीदी, अगर हमे सब क्लियर करना है तो हमे ये झिझक छोड़नी होगी, अभी तक तो हमे ये भी पता नहीं है की जो बाबाजी ने कहा वो सच है की नहीं, मुझे ये पता नहीं है की आपका बच्चा किसका है न आपको पता है की मेरा बच्चा किसका है.

ममता: सच कह रही है आप. आप बताइये, ये बच्चा किसका है?

बिना : आप बताइये.

ममता : आप को दर लग रहा है न की अगर बाबाजी के कहे अनुसार हमारा बच्चा एक hi इंसान का न हुआ तो, मुझे भी वही दर लग रहा है, पर अब इतने राज़ खुल चुके है तो हमे एक दूसरे पर भरोसा करना hi होगा. ठीक है, में पहले बता देती हु, मेरी कोख में पल रहे बच्चे का baap...(Wo कुछ पल रुकी, दोनों की धड़कने बढ़ चुकी thi)....Shiv है. (बिना के चेहरे पर आश्चर्य उभर आया था) आपका भीईई (अपनी भाभी का चेहरा hi बता रहा था की उनका भी उसी का है) आप कैसे जानती हो शिव को?

बिना : वो मेरे सहर में hi रहता है, पर आप कैसे जजती हो उसको?

ममता : वो मेरी नानन्द का दोस्त है, वो उसके साथ हमारे घर आया था, कोई कैंप के लिए.

बिना : आप जूही की बात कर रही है?

ममता :है, वो hi तो मेरी नानन्द है, आप जानती है न उसे?

बिना : नहीं, मुझे सच में नहीं पता.

ममता : अरे है, मुझे याद आया, आपकी शादी में वो नहीं आयी थी, वो अपनी दौड़ को ले कर किसी कॉम्पिटिशन में गयी हुई थी, वो अक्सर बहार hi रही है. कभी उसका हमारे घर यहाँ भी आना नहीं हुआ. अक्सर कोई भी फंक्शन होता तो में, वो और मेरे सास ससुर hi आये है. और सच कहु तो आज तक मेरी भी ऐसी बात नहीं हुई की मुझे भी पता चले की आप किस सहर में नौकरी कर रही हो, अक्सर फंक्शन की वजह से मिलना होता था और उस दौड़ा दौड़ी में एक दूसरे के बारे में निजी बाटे खुल कर हो hi नहीं पायी. मुझे बस इतना पता था की आप किसी दूसरे सहर में नौकरी कर रही हो, पर कभी ऐसी जरुरत नहीं पड़ी की पुछु की आप किस सहर में नौकरी कर रही हो.

बिना : ये कितनी अजीब बात है न, में इतने टाइम से जूही को जानती हु और मुझे पता hi नहीं है की वो मेरी नानन्द की नानन्द है.

ममता : सच कहती हो भाभी, सब अपने अपने में इतना लगे रहते है की उन्हें दुसरो के बारे में जान ने की जैसे जरुरत hi नहीं है. कितना अजीब है न भाभी. पर आप शिव से कैसे मिली. (ये सुन कर बिना के चेहरे पर परेशानी दिखने लगी) क्या हुआ भाभी, कोई परेशानी है?

बिना : वो सुन कर पता नहीं तू क्या सोचेगी मेरे बारेमे, यही सोच कर दिल दर जाता है.

ममता : (बिना का हाथ पकड़ कर) हम दोनों एक hi कस्ती पर सवार है भाभी, जिन परिस्थितिओ से हम गुजरे है उस से बहार निकलने के लिए जो कुछ भी हो सकता था हमने किआ है, आप अपने दिल पर कोई बोझ मत रखो, क्यों की मेने भी तो उसीसे सम्बन्ध बनाये है न. जो भी हो, आप कुजे खुल कर बता शक्ति हो.

बिना : वो मेरे स्कूल में पढता है. (बोल कर बिना ने नज़ारे झुका ली)

ममता : (वो समाज गयी की वो उसका स्टूडेंट है और उसी के साथ उनके सम्बन्ध है तो उन्हें बुरा लग रहा hai)To क्या हुआ भाभी, बतावा भाभी सब कैसे हुआ?

बिना : फिर तुजे भी बताना पड़ेगा सब.

ममता : जरूत बताउंगी भाभी, अब तो हम सहेलिया है, है न?

बिना : ऐसे देखा जाये तो हम सौतन बन गयी है.

ममता : सच कहा भाभी आपने (दोनों खिल खिला कर है पड़ी, दोनों एक दूसरे की राज़दार जो बन गयी थी, दोनों एक दूसरे को बहोत नजदीक महसूस कर रही थी, दोनों ने अपनी अपनी कहानी सुननी सुरु कर दी, कभी कभी एक दूसरे का मज़ाक उदा कर वो हुस भी रही थी, दोनों जैसे पक्की सहेलिया बन गयी थी)

दूसरी और वैस्वी भी अब ठीक थी, अपनी भाभी से बात कर के वो खुद को बेहतर महसूस कर रही थी, पर भाभी ने जो बताया था वो सुन कर उसके मान में और कई सवालो ने जन्म ले लिया था, उसने पढ़ाई के दौरान कई बार सुना था की फर्टिलिसशन का प्रोसेस होता है और उस दौरान स्पर्म और ओवा (एग) का मिलान होता है, उसने लड़के और लड़कीओ के निजी अंगो का डायग्राम भी ड्रा किआ था, वो लड़की थी पर फिर भी खुद उसको hi वो लड़कीओ वाला डायग्राम समाज में नहीं आया था, वह लड़को का पेनिस भी ड्रा किआ हुआ था, उसे देख कर पता नहीं उसको एक अजीब सा एहसास हुआ था, उसने उस चित्र को अपनी उंगलिओ से छुआ भी था, उसका पूरा शरीर किसी खास एहसास से भर गया था. पर फिर भी वो सब किताबी ज्ञान था, और टीचर भी मर्यादा की वजह से कुछ खुल कर नहीं समजा सके थे. पर जब आज भाभी ने कहा की लड़को का वो अंग लड़कीओ की योनि में अंदर डाला जाता है तो उस को आश्चर्य हुआ था. अक्सर नहाते वक़्त उसने अपनी योनि साफ़ की थी, कई बार कुछ ज्यादा देर तक भी वो साफ़ करती रहती थी, क्यों की ऐसा करना उसे अच्छा लगता था. एक दो बार उसकी ऊँगली वह छेड़ में भी चली गयी थी तो उसे वह दर्द का एहसास हुआ था., तो फिर उसने कभी वह ऊँगली अंदर नहीं डाली थी. आज जब भाभी ने बताया तो उसे समाज नहीं आ रहा था की जहा ऊँगली भी अंदर नहीं जाती वह लड़को का वो पेनिस कैसे अंदर जाता होता, वो कैसा होता होगा, उसने कई बच्चो का ढेकहा था जो तक़रीबन उसकी ऊँगली जैसा hi होता था तो शायद वो अंदर चला जाता होगा. अभी वो निचे से नंगी हो कर ायना ले कर अपनी योनि को देख रही थी, उसके होठो को फैला कर वो उस छेड़ का मुआइना कर रही थी, वह छूने से शरीर में अजीब तरंगे दौड़ रही थी, वह छूने से अंदर से कुछ चिप छिपा भी निकल रहा था, उसने जांचने के लिए उसे अपने नाक के पास ले जाकर सुंघा भी था, अजीब सी महक आ रही थी. थोड़ी देर जब उसने अपने छेड़ को सहलाया तो उसे इतना अच्छा लगा की उसकी आंखे भी बंद हो गयी थी. आज पहली बार इतने ध्यान से वो अपनी योनि को देख रही थी. उसके मान में कई सवाल आ रहे थे, पर उसे समाज नहीं आ रहा था की वो किस से पूछे. भाभी उसे बता सकती थी पर उसने महसूस किआ था की वो भी शर्मा रही थी और वो खुद भी झिझक रही थी.

उसको शिव के साथ बिताये पल याद आने लगे, उसे किश करते वक़्त कैसे शिव के हाथ उसके स्तन पर पहुंच गए थे, उसको कितना अच्छा लग रहा था, उस वक़्त उसे निचे भी कुछ चुभता महसूस हुआ था पर उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था, पर उसे वो सब कुछ बहोत अच्छा लगा था. उसकी शिव से मिलने की इच्छा और तीव्र हो रही थी. उसने मान बना लिया की कैसे भी करके कल शिव के साथ वो एकांत में मिलेगी.

संयम बार बार मुस्कुरा रही थी, जब नाज़िआ आप ने कहा था की उसकी और शिव की शादी की बात कर रहे है तो एक पल के लिए उसका दिल hi रुक गया था, पर जब उन्होंने कहा की मज़ाक कर रहे है तो जैसे दिल में एक दर्द भी उठा था. वो शिव को याद कर रही थी, वो कैसे उसके साथ चिपक कर बेथ टी थी वो एहसास वो याद कर रही थी, उसके साथ यु चिपक के बैठना उसे बहोत अच्छा लगता था, उसे एहसास हो रहा था की वैस्वी उसको लाइन दे रही है, ये देख कर उसके अंदर जलन हो रही थी, वो वैस्वी और शिव का होने देना नहीं चाहती थी, वो उस से पहले शिव के साथ जुड़ जाना चाहती थी. वो शिव समाज कर तकिये को अपनी बाहोंमे भरे मुस्कुरा रही थी.
 
अपडेट 135

जहान्वी आज बहोत खुस थी, आज उसे जल्दी से साइट पर जाना था, काल जिस तरह से शिव ने उसे किश किआ था, उसे लग रहा था की आज बात आगे बढ़ शक्ति है, उसने आज सुबह बुटीपॉर्लर का भी आपपोंतमेंत ले लिया था. फेसिअल और दूसरी सब चीजे करवाई थी. वैसे देखा जाये तो उसे गुस्सा होना चाहिए था, पर वो गुस्सा नहीं थी, है अभी उन दोनों के बिच ऐसा कुछ होने की सम्भावना काम hi थी, क्यों को वो इतनी जल्दी तो अपने हथियार डालनेवाली नहीं थी, पर जो कुछ भी हो, वो अंदर से रोमांचित थी, आज वो कुछ अलग तरीके से शिव के बारेमे सोच रही थी. वो मान hi मान सोच रही थी की कैसे वो शिव से बात करेगी, कैसे उसे डाँटेगी, कैसे उसको उकसाएगी, बस यही सब उसके मान में चल रहा था.

वही शिव के मान में काल जहान्वी मैडम से हुई उस बात को लेकर टेंशन भी थी, क्यों की वो समाज सकता था की अगर जहान्वी मैडम ने कोई कदम उठाया तो वो परेशानी में आ शक्ति है. लतादिदी ने पूछा भी था की कोई परेशानी है क्या, तो उसने बात को ताल दिया था. जब वो संयम को लेने पंहुचा तो वैस्वी और नाज़िआदिदी के साथ संयम भी कड़ी हुई थी, जब वो उनकी और जा रहा था तो उसने महसूस किआ की तीनो की तीनो उसे एक खास नजर से देख रही थी, तीनो अपने अपने नजरिये से उसे देख रही थी, तीनो को किसी और की उपस्थिति का जैसे बहन hi नहीं था. नाज़िआ दीदी बड़ी प्यारी मुस्कान के साथ उसे देख रही थी वही संयम और वैस्वी थोड़ी शर्मायी सी उसको देख रही थी, तीनो के मान में क्या चल रहा है वो उसे पता नहीं था.

नाज़िआ दीदी से औपचारिक बात करने के बाद में स्कूटर पर बेथ गया तो संयम रोज़ के मुताबित मुझसे सात कर बेथ गयी, उसके छोटे छोटे संतरे मेरी पीठ पर अपना असर दिखने लगे, जब वैस्वी पीछे बैठी तो वो और भी सात कर बेथ गयी, उसका हाथ मेरे लुंड के बहोत hi नज़दीक था, कमर की बजाये उसने मेरी झंघ पर अपना हाथ रक्खा था, उसके कड़क स्तन का एहसास और साथ में उसका हाथ, मेरे लुंड में हरकत होनी सुरु हो गयी थी, पर में अपने आप को संभालना चाहता था तो मेने ध्यान आगे की तरफ hi रक्खा और नाज़िआ दीदी को bye बोल कर स्कूटर आगे बढ़ा दिया. थोड़ी hi देर बाद मुझे एहसास हुआ की संयम के हाथ ने थोड़ी ज्यादा hi सख्ती से मेरी झंघ को पकड़ा है, रस्ते में आये कुछ गड्ढो के बाद तो मुझे लगा जैसे उसका हाथ मेरे लुंड की और ज्यादा खिसक गया है, मुझे लगा की वो परिस्थितिओ का फायदा उठा कर मेरे लुंड को महसूस करना छह रही है, थी तो वो अबुध बाला hi, वो इतनी ज्यादा हिम्मत तो नहीं कर प् रही थी की मेरे लुंड को पकड़ ले, पर फिर भी वो कुछ ज्यादा hi आगे बढ़ रही थी. थोड़ी hi देर में हम स्कूल पहुंच गए. दोनों निचे उतरी तो में स्कूटर को पार्क कर के अपने बैग को इस तरह से पकड़ कर उनकी और गया जिस से मेरा उठा हुआ लुंड उन्हें न दिखाई दे. मेरे दोनों दोस्त भी आ गए, उनसे बात करते करते मेरी हालत में सुधर हुआ और मेरा लुंड सामान्य होने लगा. हम सब स्कूल में चले गए, बिना मैडम कुछ दिनों से छुट्टी पर थी तो दूसरी टीचर आयी और अटेंडेंस के बाद पढ़ाई सुरु हो गयी. रेसस्स के दौरान वैस्वी ने सबसे नजर बचके मेरे हाथ में एक कागज का टुकड़ा पकड़ाया. जब में बाथरूम में गया तो वह मेने उसे खोल कर देखा तो उसमे लिखा था की “ स्कूल के बाद में तुम्हे लेने तुम्हारे घर आउंगी, तुम्हारे घर से थोड़ी दुरी पर में तुम्हारा इंतजार करुँगी”. जब हम वापस लौटे तो मेने उसकी और देखा तो उसने बहोत प्यारी स्माइल दी. ये लड़की भी पता नहीं क्यों मेरी मुस्किलो को और बढ़ा रही थी. वैसे तो मुझे उस से मिलना अच्छा लगता था, आखिर था तो में लड़का hi, अगर कोई लड़की तुम्हे सामने से नौटा देती है तो अच्छा hi लगता है, पर आगे चल कर सब ज्यादा उलझ जायेगा, ये सोच कर कभी कभी दिल चाहता है की कदम यही रोक दू. स्कूल के बाद जब हम वापस निकले तब भी संयम वैसे hi बैठी. जब वैस्वी ने बताया की वो मुझे छोड़ने मेरे घर तक आ रही है तो फिर से संयम जल भून गयी, पर वो कुछ कह न शक्ति. हम दोनों वह से निकले तो वैस्वी भी खिसक कर आगे आ गयी और मुझसे साथ कर बेथ गयी. मेने कुछ न कहा, क्यों की वो मान ने वाली तो थी नहीं.

वैस्वी : आधे घंटे बाद में आती हु, तुम बहार आ जाना.

शिव : पर क्यों, कहा जाना है?

वैस्वी : ऐसा क्यों कह रहे हो तुम, क्या तुम्हे मुझसे मिलने की चाहत नहीं है?

शिव : ऐसी बात नहीं है, पर वैसे भी हम रोज़ तो स्कूल में मिलते hi है न, तो फिर यु अलग से क्यों मिलना है?

वैस्वी : पता नहीं किस बेवकूफ से पला पड़ा है मेरा, और कोई लड़का होता तो मेरी ये बात सुन कर हवा में उड़ रहा होता, और तुम हो की इंकार कर रहे हो.

शिव : में इंकार नहीं कर रहा हु, में तो बस पूछ रहा था. ठीक है, में आ जाऊंगा.

उसने मुझे घर छोड़ा और फिर मेने जल्दी जल्दी खाना खाया, और दीदी को बोल कर निकल गया की काम है. बहार निकल कर में रस्ते पर थोड़ा hi चला था की वो मुझे आती दिखाई दी. स्कूल के कपड़ो से अलग उसने जीन्स ,वैसे भी वो भरी हुई थी, तो ये टाइट जीन्स उस पर बहोत जांच रहा था, वो बहोत खूबसूरत दिख रही थी. ऊपर से मुझे देख कर उसके चेहरे की स्माइल उसे और खूबसूरत बना रही थी. में भी मुस्कुराया, उसने मेरे आगे स्कूटर खड़ा किआ, और वो निचे उतर गयी, मेने स्कूटर लिया तो वो दोनों और पेअर करते हुए बेथ गयी. मुझे लगा की पीछे कुछ कर रही थी तो मेने पीछे मुड़कर देखा तो वो स्कार्फ़ से अपना मुँह बांध रही थी, थोड़ी देर बाद मेने देखा तो उसने सिर्फ आंखे छोड़ कर सारा मुँह धक् दिया था. में समाज सकता था की वो खुद को छुपा रही है, उसके ऐसा करने से मुझे भी अजीब सी फिलिंग होने लगी, वो छुप छुप कर मुझसे मिलने आयी थी.

वैस्वी खुद बहोत रोमांचित हो रही थी, आज पहलीबार वो घर से जूथ बोल कर ऐसे किसी को मिलने आयी थी. उसने घर पर बोलै था को वो सहेली के घर जा रही है, स्कूल का काम है ऐसा उसने बहाना बनाया था. जब वो सुनती थी की कोई लड़का और कोई लड़की ऐसे मिलते है तो उसे वो सब फालतू लगता था, पर आज वो खुद इस तरह किसी के साथ मिलने जा रही थी, वो बार बार मुस्कुरा रही थी.

शिव : कहा जाना है?

वैस्वी : कोई ऐसी जगह ले चलो जहा सिर्फ हम दोनों hi हो.

शिव : ऐसी कोनसी जगह है?

वैस्वी : मुझे क्या पता, वह कैंप में कैसे पेड थे, वैसी कोई जगह यहाँ नजदीक में हो तो वह चलो. (में सोचने लगा, तभी मुझे याद आया की स्टेडियम के पीछे ऐसे पेड़ो से घिरी हुई जगह है. मेने उस और स्कूटर मोड़ दिया, स्टेडियम से पीछे की और जो रास्ता जाता था वह मेने स्कूटर मोड़ दिया. आखिर कार हम दोनों वह पहुंच गए, पेड़ो के बिच कोई रास्ता तो था नहीं, ऊबड़खाबड़ रस्ते से मेने स्कूटर अंदर ले लिया, अंदर पेड़ो के बिच जा कर एक जगह मेने स्कूटर रोक दिया. वो निचे उतरी, मेने भी स्कूटर को स्टैंड किआ, उसने अपना दुपट्टा खोल्दिया और अपने पर्स में रख दिया. वो आस पास देखने लगी, वह सिर्फ पंछीओ की आवाजे आ रही थी, वह से रास्ता भी नहीं दिख रहा था, तो कोई उन्हें देख नहीं सकता था, वो देख कर उसके चेरे पर इत्मीनान के भाव छलक aaye)Achchhi जगह है, पहले आये हो कभी. (में उसे hi देख रहा था, जैसे hi उसकी नजर मुज पर पड़ी वो शर्मा गयी, और मुस्कुराते हुए निचे देखने लगी)

शिव : नहीं, अब बताओ, तुम्हे क्यों ऐसी जगह मिलना था, और ऐसी क्या बात करनी थी. (वो मेरी और देखने लगी, उसके चेहरे पर थोड़ी नाराजगी थी)

वैस्वी : शिव तुम जानबुज कर अनजान बन रहे हो या सच में तुम बुद्धू हो?

शिव : कहना क्या चाहती हो तुम?

वैस्वी : एक लड़की तुमसे मिलने ऐसी जगह आयी है तो क्यों आयी होगी?

शिव : मुझे क्या पता तुम्हारे दिल में क्या चल रहा है.

शिव : देखो वैस्वी, मेने तुमसे पहले भी कहा है की...

वैस्वी : है मुझे पता है, की तुम अलग हो, में अलग हु, हम दोनों का कोई मेल नहीं है, वगैरह वगैरह. तुम थकते नहीं हो क्या? मेने तुमसे कहा न की सब भूल जाओ, और न में कुछ समझना चाहती हु, मुझे तुम अच्छे लगते हो, में सब से जूथ बोल कर छुपते छुपाते तुमसे ऐसे मिलने आयी हु और तुम हो की वही बकवास बाते ले कर बेथ रहे हो. मुझे वो सब नहीं सुन न है. तुमने कभी फिल्मे नहीं देखि क्या, हीरो और हेरोइन ऐसी सुंसम जगह पर क्यों मिलते है?

शिव : (मेने भी सोचा की मेरा काम था उसे संजना, पर जब वो कुछ समझना hi नहीं चाहती तो फिर में क्या करू, वैसे भी वो एक खूबसूरत लड़की थी, अगर वो खुद छह रही है की हम दोनों के बिछ कुछ हो तो में क्यों पीछे हेतु, तो मेने मुस्कुरा कर kaha)Kya करते है? और तुमसे किसने कहा की में हीरो हु और तुम हेरोइन.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Wo तो हम है hi, वैसे भी तुम तो मेरे हीरो hi हो, क्यों की तुमने मुझे गुंडों से बचाया था, है ये अलग बात है की तुम मुझे अपनी हीरोइन नहीं समझते.

शिव : हेरोइन ऐसी होती है क्या (मेने भी मजाक में कहा और उसे ऊपर से निचे तक देखा) हेरोइन तो कितनी खूबसूरत होती है, और उसका फिगर भी कितना सेक्सी होता है, तुम जैसी मोती नहीं होती (मैंने उसे मोती ऐसे hi कहा था, वो बिलकुल मोती नहीं थी, है वो भरे हुए बदन की जरूर थी, भरा हुआ गोल चेहरा, उसके स्तन भी भरे हुए थे और साथ में उसके कूल्हे भी, मेने बस उसे छेड़ने के इरादे से कहा था)

वैस्वी : (उसके चेहरे पर उदासी आ गयी) क्या में सचमे मोती हु? (अचानक उसके चेहरे पर छायी मायूसी मुझे बिलकुल अच्छी नहीं लगी, में उसके पास गया और उसका हाथ पकड़ा)

शिव : क्या यार तुम भी, मज़ाक भी नहीं समझती, में बस तुम्हे छेड़ रहा था.

वैस्वी : (मेरी आँखों में देखते hue)Muje पता है तुम जूथ बोल रहे हो, में जानती हु की संयम के सामने में मोती हु, वो कैसी पतली है.

शिव : मेने कहा न की में मज़ाक कर रहा था, है संयम के मुकाबले तुम्हारा शरीर ज्यादा भरी है पर इसका मतलब ये नहीं की तुम मोती हो, तुम्हारा शरीर एक परिपक्व लड़की जैसा है और तुम्हारा चेहरा एक मासूम सी बच्ची जैसा, और सच कहु तो तुम ऐसी hi अच्छी लगती हो, मुझे तो आजभी वो दिन याद हे जब मेने तुम्हे पहली बार देखा था, मुज पर गुस्सा करते हुए, उस वक़्त भी तुम ,ुजे बहोत खूबसूरत लगी थी.

वैस्वी : (वो मुस्कुराते हुए शर्मा gayi)Tum सच बोल रहे हो न?

शिव : है बाबा, सच बोल रहा हु, मेने तो बस मज़ाक किआ था.

वैस्वी : तो में मोती नहीं हु न?

शिव : दूर से तो लगता है, पास से पता नहीं. (मेने ऐसे मुँह बना कर कहा, जैसे में कंफ्यूज हु, और वैसे भी वो मुझसे मिलने ऐसे hi तो नहीं आयी थी, हम दोनों के बिछ दो बार किश हो चुकी थी, तो मेने भी आगे बढ़ने का फैसला किआ, पर हद में रह कर)

वैस्वी : (उसने भी सवालिए नजरो से मुझे dekha)Kehna क्या चाहते हो?

शिव : यही की, कपड़ो के ऊपर से तो लगता है, पर पता तब चलेगा जब तुम्हे छू कर देखु. (मेरी बात से वो शर्मा गयी)

वैस्वी : (शरमाते hue)Itni बार तो मुझे छुआ है तुमने.

शिव : (अनजान बनते hue)Mene कब छुआ तुम्हे?

वैस्वी : (उसने मुझे हलके से मुक्का mara)Juthe, पूरी रात तो मुझसे चिपक कर सोये थे, और फिर दूसरे दिन भी कैसी कैसी परिस्थि में मुझे देखा है, क्या में नहीं जानती.

शिव : (माहौल कुछ रोमांटिक सा हो गया था) मेने उसके कमर के पीछे से हाथ डालते हुए अपनी तरफ खिंचा, वो शर्माती हुई मुझसे सात गयी, और मुस्क़ुरते हुए मेरी आँखों में देखने लगी) उस समय बात अलग थी, उस वक़्त मज़बूरी थी, पर इस वक़्त सहमति है, वो उस वक़्त का छूना और इस वक़्त का छूना अलग बात है (वो मेरी आँखों में मुस्कुराते हुए प्यार से देख रही thi)Tumhe क्या लगरहा है, में सही कह रहा हु न.

वैस्वी : (उसने हां में शिर हिलाया, शिव के ऐसे पकड़ने से उसकी धड़कने तेज हो गयी थी, उसकी छाती ऊपर निचे हो रही thi)Haaa शिईयिव. (उसने जैसे हफ्ते हुए कहा) यहाँ सब अलग लग रहा है, आज तुमने पहली बार मुझे सामने से पकड़ा है, पिछली दोनों बार मेने hi तुम्हे पकड़ा था, (उसने शरमाते हुए kaha)tumhari जैसी मर्जी हो मुझे छू कर देख शक्ति हो में मन नहीं karungi(Uski सांसे भरी हो चुकी थी, मेरा भी हल वैसा hi था, सिर्फ उसे पकड़ने से hi मेरा लुंड खड़ा होने लगा था, शायद वो भी महसूस कर रही थी, वो पूरी तरह से समर्पित थी, हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, मेरे सामने वो छोटी थी, भले hi दुसरो के मुकाबले वो ऊँची थी.

शिव : तुम hi कह रही हो, फिर मात कहना की मेने बदतमीजी कर दी.

वैस्वी : (मुस्कुराते हुए) मुझे पता है तुम इतने सीधे नहीं हो जैसे दीखते हो, तुम्हारी भोली सूरत संयम को बेवकूफ बना शक्ति है, मुझे नहीं, में तुम्हे अच्छे से जानती हु.

शिव : अच्छा ऐसा क्या जानती हो? (मेने उसे और अपनी और खिंचा)

वैस्वी : (शरमाते हुए) वह जंगल में जब हम ...(वो हिचकिचाई) वो toilet...(Wo फिर दो पल रुक गयी) तब तुम कैसे मुझे वैसी हालत में देख रहे थे, बेशरम.

शिव : लड़का हु, नज़र चली गयी थी, और कुछ तो नहीं किआ था न.

वैस्वी : (शिव को प्यार से देखते हुए) इसीलिए तो आज तुम्हारे साथ हु, उस वक़्त तुमने मेरा फायदा नहीं उठाया, शायद इसीलिए में तुम पर इतना भरोसा करने लगी. पर तुम वैसे क्यों देख रहे थे, आईटी इस बाद मैनर्स.

शिव : अब क्या करू, दिल मान hi नहीं रहा था, वैसे भी तुम इतनी खूबसूरत और आकर्षक हो, में अपने आपको काबू में नहीं रख पाया था.

वैस्वी : (शर्मा रही थी, पर साथ में उसे अच्छा लग रहा था की शिव उसकी और आकर्षित है, ऐसी बातो से वो गरम भी हो गयी थी, उसे ये भी समाज आ रहा था की शिव भी उत्तेजित हो चूका है, वो अपनी छूट के ऊपर के भाग पर वो चुबता हुआ अंग महसूस कर प् रही थी, जब भाभी ने कहा था की लड़के अपना वो अंग लड़की की योनि में डालते है तब उसे आश्चर्य हुआ था, पर इस वक़्त उसे ऐसा लग रहा था की उसे वो अंग अपनी उस खास जगह पर छूटा तो अच्छा होता, पर शिव इतना लम्बा है की उसका वो अंग, उसके पेट के निचे और योनि से ऊपर चुभ रहा था, ऐसा पहली बार हो रहा था तो उसे शर्म भी आ रही थी, वो बस उसे महसूस कर रही थी, उसकी योनि में कुछ हो रहा था, वह कुछ गिला गिला भी लग रहा था उसे) ऐसी क्या खास बात थी वह जो तुम अपने आपको रोक नहीं पाए और ऐसी बदतमीजी कर बैठे.

शिव : वो में तुम्हे समजा नहीं शक्ति, पता नहीं तुम लड़कीओ में वह ऐसा क्या खास होता है जो नज़र वही चली जाती है, और ऊपर से तुम्हारे जैसी लड़की हो तो अपने आपको रोक पाना मुश्किल होता है.

वैस्वी : (शरमाते हुए) तो फिर रोका किसने है, तुम जो चाहे वो देख शक्ति हो. (उसकी वो शर्मीली मुस्कान बहोत कुछ कह रही थी)

में निचे उसके चेहरे की और झुकने लगा, वो आनेवाले पालो के लिए जैसे तैयार थी, जब में ज्यादा नज़दीक पंहुचा तो उसने आंखे बंद कर दी, उसकी सांसे तेज हो चुकी थी, उसके पंखुड़ी जैसे होठ कैंप रहे थे, उसका भरा हुआ नाजुक बदन मेरी आगोश में था, वो अपन चेहरा ऊपर उठाये हुए थी, मेने अपने होठ उसके होठो से सत्ता दिए,





उसने फ़ौरन अपने हाथ से मेरे शर्ट को अपनी मुठी से भींच दिया, हम दोनों किश करने लगे, वो मेरे होठो को चूस रही थी, में उसके नरम गुलाबी पंखुडिओ से होठो को चूस रहा था, हमारे मुँह खुल गए, उसके मुँह के मीठे रास उसके होठ और ज्यादा स्वादिस्ट हो चुके थे, हमारी जीभ भी आपस में उलझने लगी, मेने उसे पीठ से पकड़ते हुए कास लिया था, उसने भी मुझे कास लिया, में उसकी पीठ सहलाने लगा, वो मेरी पीठ पर अपना हाथ घुमा रही थी, उसके नाख़ून मेरी पीठ में लग रहे थे, जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था, में आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ निचे ले जाने लगा, मेरे हाथ उसके कूल्हे के नजदीक पहुंच गए, मेने और निचे हाथ ले जा कर उसके एक कूल्हे को सहलाया, उस भरे हुए गोले को छूटे hi मेरे अंदर करंट दौड़ने लगा, में उन गोलों को दबाते हुए सहलाने लगा, पता नहीं इनमे ऐसी क्या खास बात ोति है जो इन्हे छूटे हुए शरीर में ऊर्जा बढ़ जाती है)





वैस्वी : उम्मम्मम उम्मम्मम उम्मम्मम (वो मेरे कूल्हों को सेहला और दबा रहा था, ये किस तरह का एहसास था, में पागल हो रही थी, मेरी धड़कने उफान पर थी, सांसे तो जैसे बे काबू थी, वो जैसे जैसे मेरे कूल्हों को मसल रहा था, एक अजीब सा आनंद मेरे अंदर भरता जा रहा था, उसके होठ बड़ी बे दर्दी से मेरे होठो को चूस रहे थे, मुझे कोई परवाह नहीं थी, मेरे अंदर हजारो चींटिया रेंग रही थी, शरीर में जैसे छोटे छोटे विस्फोट हो रहे थे, वो मेरे कूल्हों की दरार में अपना हाथ फिरने लगा, उईईईईई माआ ये कैसा एहसास है, शहहहहह में पागल न हो जाऊ, मेरी सांसे इतनी बेकाबू हो गयी थी की सिर्फ नाक से सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, मेने अपना मुँह हटा लिया और उस से चिपक गयी और अपना मुँह खोल कर जोर जोर से सांसे लेने लगी, वो मेरी पीठ को और मेरे कूल्हों को सहलाते हुए दबा रहा था, में भी उस से लिपट रही थी, ये कितना आनंद दायक एहसास है में बयां नहीं कर शक्ति, उपरसे मेरी योनि वाली जगह पर उसका वो अंग पहुंच गया था और मुझे वह चुभ रहा था, मुझे लग रहा था की मेरी योनि से निकलते रास से मेरी पंतय पूरी भीग गयी है, जैसे जैसे वो चुभन हो रही थी, मेरी योनि पिचकने और फूलने लगी थी, वह से कुछ तेजी से निकल रहा था, मुझे वो गीले पैन का एहसास हो रहा था , पर वो छुबन मुझे इतनी अच्छी लग रही थी की में अपनी योनि को उस कड़क अंग पर दबा रही thi)Shhhhh ओह शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह में पागल हो जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, शह्ह्हह्ह्ह्ह ये कैसा एहसास है शिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (में भी अपने बस में नहीं था, में सयम में रहना चाहता था पर में आगे बढ़ता hi जा रहा था, में दोनों हाथो से उसके कूल्हों को मसल रहा था, वो मुझे रोक नहीं रही थी, मेने जीन्स के अंदर हाथ डालने लगा पर वो टाइट था, मेरा हाथ अंदर नहीं जा रहा था, में हाथ आगे ले गया और जीन्स के बटन को खोलने लगा.)

वैस्वी : यहॉ कोई आएगा तो नहीं न शिव?

शिव : (वो दर रही थी की कोई आ न जाये, पर वो मुझे मन नहीं कर रही थी, में उसको एक बड़े पेड़ के तने के पास ले गया, में उसके आगे था और पेड़ उसके पीछे, वो पूरी तरह छिप गयी थी, मेने उसके जीन्स का बटन खोल दिया, और चैन को भी नीचे सरका दिया, अब मेने अपना हाथ पीछे से अंदर डाला, पंतय की वजह से आधा नंगा कुल्हा मेरे हाथ में था, उस गरम गरम एहसास से में और उत्तेजित होने लगा, मेरा हाथ सीधे उसकी स्किन से टच हो रहा था, में उसे मसलने लगा, वैस्वी भी मुज से चिपक रही थी, उसकी आहे मुझे बे काबू बना रही थी.)

वैस्वी : शह्ह्ह्ह शिईयिव शहहहहह शहहहहह (में पंतय में साइड से हाथ दाल कर गरम गरम कूल्हों मसलने laga)Ohhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. मुझे अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह. (थोड़ी देर बाद मेने हाथ बहार निकला, झाड़ के तने से मेने उसे सत्ता दिया, वो मुझे देखने लगी, मेने फिर उसके रसीले होतो को चूसा, फिर दूर हो कर उसके स्तन को देखने लगा, वो मेरी आंखोमे देख रही थी, उसकी आँखों में देखते हुए मेने अपना हाथ बढ़ाया और उसके पुष्ट स्तन हलके से दबाया, वो भरे हुए कड़क स्तन the(Vaiswi की आंखे बंद हो gayi)Shhhhhhh शीइइइइइव. (में पागल हो रही थी, वो मेरे स्तन दबा रहा था, उसके ऐसा करने से मेरे अंदर अगन ज्वाला भड़क रही थी, वो मेरे निप्पल वाले भाग को मसलते हुए मेरे स्तन को सेहला रहा था, में बस आंखे बंद किये हुए उसका मज़ा ले रही थी, मेरी कमर का भाग और आगे होने लगा और में उसकी कमर पकड़ कर उसके कड़क अंग को अपनी और खींचने लगी,) (वो मुझसे और चिपकने लगी, वो मुझे अपनी और खिंच रही थी जिस से हमारे बिच जगह नहीं बची थी, उसके स्तन दबाने में मुझे दिक्कत हो रही थी. हम दोनों खड़े थे तो मेने उसे kaha)Vaisu.

वैस्वी : (मदहोशी me)Hmmmmmm.

शिव : निचे बेथ जाये?

वैस्वी : (वैस्वी बहोत शर्मा gayi)Hmmmmmm.

शिव : (मेने उसे बहार किआ और खुद तने का सहारा ले कर निचे बेथ गया, और उसे अपनी गोद में बैठा दिया, वो इतनी शर्मा रही थी की वो मुझसे दूर hi नहीं हो रही थी, वो मेरे गले लगी रही, वो मेरे लुंड के ऊपर बैठी हुई thi)Kya हुआ वैस्वी?

वैस्वी : ऐसे नहीं शिव, अभी जो कहा था वही कह के मुझे बुलाओ.

शिव : क्या कहा था मेने?

वैस्वी : वैसु. (मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी) तुम मुझे इसी नाम से बुलाया करो.

शिव : सबके सामने भी?

वैस्वी : (कुछ पल वो खामोश हो gayi)Ha.

शिव : तो सबको पता चल जायेगा की हमारे बिच क्या चल रहा है.

वैस्वी : मुझे कोई परवाह नहीं है शिव, में तुमसे सचमे प्यार करती हु, मुझे कोई परवाह नहीं की कोण क्या सोचेगा या किसको पता चलता है. (उसकी बात सुन कर मेरा सहारा नशा गायब हो गया, वो जिस तरह से मेरे गले लगी हुई थी, में उसकी पीठ सहलाने लगा, पर अब और कुछ नहीं कर रहा tha)Kya हुआ शिव, रुक क्यों गए?

शिव : वैस्वी.

वैस्वी : (वो दूर हुई और मेरे होतो पर हाथ रखते hue)Vaiswi नहीं वैसु.

शिव : तुम समाज नहीं रही हो वैसु, तुम मेरे बारेमे कुछ भी नहीं जानती, अगर में आगे बढ़ा तो वो तुम्हारे साथ धोखा होगा. मेरी लाइफ इतनी सिंपल नहीं है.

वैस्वी : (उसने मासूमियत से puchha)Kisi और से प्यार करते हो?

शिव : तुम समाज नहीं रही हो वैसु, ये इतना आसान नहीं है, मेरे ऊपर बहोत साडी जिम्मेदारियां है, मेरे साथ बहोतसारी लड़कीअ जुडी हुई है. में तुमसे जूथ नहीं कहूंगा.

वैस्वी : एक बात पुछु, सच सच बताना, तुम्हे जो भी सबसे प्यारा है उसकी कसम है तुम्हे. (वो थोड़ी देर मुझे देखती रही) क्या तुम मुझसे प्यार करते हो? (वो बड़ी चाहत से मेरी आँखों में अपने सवाल का जवाब धुंध रही थी, में सोचने लगा, क्यों की ऐसा नहीं था की वो मुझे पसंद नहीं थी, वो जिस तरह से मुज पर भरोसा कर रही थी, वो जितना प्यार करती थी, सब उसकी आँखों में दिख रहा था, अब कोई तुमसे ऐसे प्यार करेगा तो उस पर प्यार आना लाज़मी है, वो मेरी परेशानी भी समाज रही थी) मुझे लगता है की अभी तुम कंफ्यूज हो शिव, कोई बात नहीं, अभी के अभी तुम्हे जवाब देने की कोई जरुरत नहीं है, तुम मनो या न मनो, तुम्हारा प्यार में तुम्हारी आँखों में महसूस कर शक्ति हु, अगर प्यार न होता, अगर मेरी परवाह न होती तो तुम रुकते नहीं, इस सुमसान वीराने में तुम जो चाहे वो कर शक्ति थे, पहले में शायद येसब नहीं समझती थी, पर अब मेरे दिमाग में सब क्लियर है. में समाज शक्ति हु की एक लड़के और लड़की के बिछ किस तरह के सम्बन्ध होते है, अगर तुम वैसा कुछ करते तो में तुम्हे मन भी नहीं करती शिव, में सचमे तुमसे प्यार करती हु, जिस तरह तुम्हारी कई उलझने है, वैसे hi मेरी जिंदगी में भी उलझने है, पता नहीं हमारा मिलान होगा या नहीं, पर में वो सब सोच कर इन लम्हो को नहीं खोना चाहती, सच कहु तो में पूरी जिंदगी तुम्हारी हो कर रहना चाहती हु शिव, पर मेरी इस बात से अपने दिल पर मलाल मत रक्खो, क्यों की अभी कई साल पड़े है, न तुम अभी ये जिम्मेदारी उठा सक्ते हो न में, पर प्यार तो कर hi शक्ति हो, रही बात हमारे हमेशा के लिए एक होने की तो अगर ऐसा न भी हुआ तो में तुम्हे दोष नहीं दूंगी, सच कहु तो में वो सब सोचना hi नहीं चाहती शिव, में बस इतना जानती हु की में तुमसे प्यार करती हु. तो ये सब सोचना बंद करो और मुझसे प्यार करो.

शिव : वैसु (मेने उसे कास के गले लागलिया, वो मेरे ऊपर बैठी हुई थी, वो मेरे गले लगी हुई थी, पर मेरा लुंड शांत हो रहा था, में सिर्फ उसके प्यार को महसूस कर रहा था, पता नहीं मेरी कुंडली में क्या लिखा हुआ है, क्या मेरा भाग्य है, हर कोई मेरे साथ इस प्यार के धागे से बांधता जा रहा है, मेरी समाज में कुछ भी नहीं आ रहा की में क्या करू, ऐसा कोई भी नहीं जिसे में नाराज़ करू, पता नहीं क्या होगा mera)Kyu करती हो इतना प्यार?

वैस्वी : पता नहीं, बस हो गया. (वो नाराजगी से मेरी और देखने लगी) मेने कहा की में प्यार करती हु तो इतना टेंशन में क्यों आ गए?

शिव : किसने कहा की में टेंशन में हु?

वैस्वी : (शरमाते hue)Wo जो मुझे चुभ रहा था न, वो अब नहीं चुभ रहा (में उसकी बात समाज रहा था तो में मुस्कुराया) प्यार करती हु तो उस तरह से छूने का, मुझे वैसे देखने का हक़ दिया है मेने तुम्हे, तो मुझे देख कर ऐसे ठन्डे नहीं हो शक्ति तुम. (वो नटखट, मुझे उकसा रही थी)

शिव : (मुस्कुराते हुए) सच सच बताओ वैसु, तुम कैसी हो? कभी नटखट, तो कभी समझदार तो कभी, सेक्सी, क्या रूप है तुम्हारा?

वैस्वी : में सब हु शिव, जैसी में दुनिया के सामने हु, उस से बिलकुल अलग हु तुम्हारे sath.(Hum दोनों बिना कोई बातचीत किये ऐसे hi काफी देर वह बैठे रहे, वो सुकून से मेरे ऊपर बैठी थी, में उसको हलके सेहला रहा था, वो आंखे बंद किये हुए मेरे साइन पर अपन शिर रख कहर बैठी रही,





काफी देर हो गयी थी तो मेने कहा)

शिव : अब हमे चलना चाहिए वैसु.

वैस्वी : में नहीं जाना चाहती शिव, मुझे ऐसे hi रहना है, ऐसे hi तुम्हारी बाहोंमे रहना है.

शिव : (में उसको गॉड में लिए हुए hi खड़ा हो गया, वो पूरी तरह से मुझसे लिपटी हुई thi)Chalo वर्ण हमे ढूंढते हुए सब आ जायेंगे.

वैस्वी : (मुझे कस्ते hue)Tum कितने ताकतवर हो शिव, मुझे पूरी गॉड में उठाये हुए हो, बचपन के बाद पहली बार है की किसी ने मुझे ऐसे गॉड में उठाया है.

शिव : ठीक है, में हमेशा तुम्हे गॉड में उठाऊंगा, पर भी चलते है, मुझे भी साइट पर जाना है. (वो निचे उतर गयी, अपने आपको सही किआ, दोबारा हमदोनो ने किश की पर ये सेक्स वाली किश नहीं थी, हम दोनों वह से निकल गए, वो मुझे साइट पर छोड़ गयी)

में चल कर अंदर जा रहा था तो मुझे बालकनी में कड़ी जहान्वी दिखी, हमारी नज़ारे टकराई, वो मुझे देख रही थी, कल की बात का उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं दिख रहा था, और अभी तक और कुछ हुआ भी नहीं था, तो मुझे रहत महसूस हो रही थी, पर में अब और कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था, तो मेने नजर घुमाई और सीधा आगे बढ़ने लगा.

जहान्वी : शिव (उन्होंने हलकी आवाज में मुझे पुकारा, में रुक गया, और उन्हें देखते हुए कहा)

शिव :जी मैडम.?

जहान्वी : ऊपर आओ, मुझे काम है.

शिव : (में कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता tha)Panch मिनट मैडम, में अभी आया. (ये कह कर में आगे बढ़ गया, पता नहीं पर मुझे लग रहा था की अगर उन्होंने अकेले में मेरे ऊपर कोई इल्जाम लगा दिया तो में फास सकता हु, एक बार तो में बच गया, पर उनके मान में क्या चल रहा हो क्या पता, वह से में अंदर गया और पिंकेशभाई को ढूंढने लगा, एक जगह पर सब काम कर रहे थे तो वही खड़े वो मुझे मिल गए)

शिव : Hello Pinkeshbhai.(Waha काम करते हुए सबने मुझे देखा, मेने भी उन पर एक नज़र डाली)

पिंकेशभाई : ओह शिव, आ गए तुम, मैडम से मिले?

शिव : नहीं, अभी अभी आया हु.

पिंकेशभाई : मिल लो उनसे, कई बार वो पूछ चुकी है.

शिव : कोई काम था क्या उन्हें?

पिंकेशभाई : मुझे क्या पता, मुझे कुछ नहीं बताया, मेने पूछा भी था.

शिव : क्या काम हो शक्ति है?

पिंकेशभाई : इसमें इतना सोचने की क्या बात है, मिल लो, पता चल जायेगा.

शिव : चलिए, साथ में चलते है.

पिंकेशभाई : मेरा क्या काम.

शिव : अरे चलिए न, वैसे भी कोई खास बात तो होगी नहीं, कुछ साइट के बारे में hi पूछना होगा, कुछ ऐसा वैसा पूछ लिया तो आप होंगे तो सपोर्ट रहेगा.

पिंकेशभाई : अरे इतना डरते क्यों हो तुम, ठीक है चलो. (अब में उन्हें क्या बता ता की क्या मामला है, हम दोनों ऑफिस में गए, मैडम ने मुझे देखा, फिर पिंकेशभाई को, उनके चेहरे से hi पता चल रहा था की पिंकेशभाई का आना उन्हें अच्छा नहीं लगा था)

शिव : Hello मैडम, गुड आफ्टरनून. जी कहिये, क्यों बुलाया था?

जहान्वी : (उसके दिमाग में तो पहले और hi कुछ था, पर पिंकेश को देख कर उसका पारा थोड़ा बढ़ चूका था, उसने चिढ़ते हुए kaha)Aaj भी लेट? ये तुम्हारा रोज़ का हो चूका है.

शिव : (जवाब तो में भी दे शक्ति था, क्यों की मुझे उनकी कोई पड़ी तो थी नहीं, पर फिर भी मेने शांत रहना hi सही समजा) सॉरी मैडम, पर पिंकेशभाई तो थे hi न, वैसे भी मेरे आने न आने से काम में तो कोई फर्क नहीं परनेवाला था.

जहान्वी : तो फिर आते hi क्यों हो?

शिव : वो आप पवनसीर से पूछ लीजियेगा. (फिर मेने सलीके से hi puchha)Aur कोई काम मैडम?

जहान्वी : (उन्होंने गुस्से से मेरी और dekha)Nahi.

शिव के जाते hi, जहान्वी गुस्से में हांफ रही थी, वो क्या क्या सोच कर आयी थी, और यहाँ कुछ और hi हो रहा था, उसने सोचा की कुछ टाइम बाद वो फिर से उसको बुलाएगी, वो बहार निकली और घूम कर सब का काम भी देखने लगी, मजदूर भी सब काम करने लगे, उसकी वजह से लड़कीअ भी अपना अपना काम कर रही थी. में सबके बिछ से हटा hi नहीं तो उन्हें और कोई मौका नहीं मिला. छूटने में आधा घंटा बाकि था की मेरे फ़ोन पर फ़ोन आया, मेने देखा तो भार्गवी मैडम का फ़ोन था. में भी सरप्राइज था, मेने फ़ौरन फ़ोन उठा लिया.

शिव : Hello मैडम.

भार्गवी : कहा हो तुम?

शिव : जी साइट पर.

भार्गवी : ठीक है, में तुम्हे लेने आती हु.

शिव : आप वापस आ गयी? (मुझे आश्चर्य हो रहा था)

भार्गवी : है, सुबह hi लौटी हु.

शिव : क्या हुआ उन लड़को का?

भार्गवी : तुम तो मेरे बॉस की तरह पूछ रहे हो.

शिव : अरे नहीं मैडम, मेने तो बस ऐसे hi पूछ लिया था.

भार्गवी : मेने भी ऐसे hi कहा था, तुम तुको में आती हु, फिर आराम से बात करते है.

शिव : ठीक है, आइये. (उन्होंने फ़ोन रखदिया, जहान्वी भी वही कड़ी थी तो मेने उनसे कहा) मुझे जाना होगा.

जहान्वी : देर से आना और जल्दी जाना, आते hi क्यों ho(Unhone जिस टोन में कहा था वह खड़े सब मेरी और देखने लगे)

शिव : पुलिस लेने आ रही है तो जाना पड़ेगा (मेने इस तरह कहा था जैसे पुलिस मुझे गिरफ्तार करने आ रही हो)

जहान्वी : इसी लायक हो तुम. मुझे भी वही करना चाइये था.

शिव : (में उन्हें देखने laga)To जाऊ?

जहान्वी : लात साहब जो हो, तुम्हे कौन रोक शक्ति है. (बोलते हुए वो वह से निकल गयी, जैसे hi वो निकली, पिंकेशभाई मेरे पास आये)

पिंकेशभाई : पुलिस क्यों आ रही है तुम्हे लेने?

शिव : (मेने मुस्कुराते हुए kaha)Aap सोच रहे हो वैसे नहीं आ रही है, वो तो बस ऐसे hi मुझे लेने आ रही है, पहचान है.

पिंकेशभाई : ओह अच्छा, तो मैडम से ऐसे क्यों कहा. (में मुस्कुराया) तुम भी घंट हो, (वह दुसरो ने भी मेरी बात सुनी, लड़कीओ के चेहरे पर जहा चिंता थी वह अब मुस्कान थी)

में वह से बहार निकला, तभी मुझे पुलिस के जीप अंदर आती हुई दिखाई दी. में उस और बढ़ गया, मेने देखा की जहान्वी भी बालकनी में आ कर देख रही थी, मेने उनकी और देखा और जीप में बेथ गया, जीप रिवर्स में वापस निकल गयी.
 
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अपडेट 136

बिना ससुराल में थी तो वो अपना फ़र्ज़ निभा रही थी और घर के काम काज में लगी हुई थी, ममता ने मदद करने को कहा पर उसने मन कर दिया.

बिना : आप बैठिये, में कर लुंगी.

ममता : में अकेले अकेले बेथ कर क्या करुँगी, मुझे आपके साथ hi अच्छा लग रहा है, आपको अकेले अकेले काम करते देख मुझे अच्छा नहीं लग रहा, अगर मेने भी हाथ बता दिया तो क्या हो जायेगा?

बिना : तुम अपने मायके में हो, तो उसका मज़ा लो, काम तो साडी ज़िन्दगी करना hi है.

ममता : मेरा मायका है तो क्या हुआ, में अपने घर में भी तो सब काम करती हु, और वैसे भी पहले की बात अलग थी, तब आप मेरी भाभी थी, तो में हक़ से आपसे काम करवा शक्ति थी.

बिना : (में जानती थी की वो किस और बात को ले जा रही है, वैसे भी मुझे उनके साथ बात करना अच्छा लग रहा था, और वो जो बात कर रही थी वो भी मुझे सुन न अच्छा लग रहा था, वो hi तो एक थी, जो ये बात जानती है, तो में मुस्कुरा रही थी, फिर भी मेने अनजान बनते हुए kaha)Ye क्या कह रही है आप, क्या में आपकी भाभी नहीं हु अब.

ममता : (उसकी भाभी को पीछे से बाहोंमे लेते hue)Wo तो है hi, पर साथ में मेरी प्यारी सौतन भी तो बाण गयी हो, तो उस रिश्ते से तो हम बराबर हुई न.

बिना : (उसकी मुस्कान चौड़ी हो gayi)Shhhhh आहिस्ता, कोई सुन लेगा तो तो क्या कहेगा.

ममता : में बेवकूफ थोड़ी न हु, आस पास कोई नहीं है, मेने सब देख कर hi बोलै है.

बिना : फिर भी, हमे ऐसे खुले में ऐसी बाते नहीं बोलनी चाहिए.

ममता : ठीक है भाभी, पर भाभी एक बात समाज में नहीं आयी, जैसा की बाबाजी ने कहा था, ये बात तो सच साबित हुई, की हम दोनों की कोख में एक hi इंसान का अंश है, पर बाबाजी ये अनुष्ठान इन बच्चो के बाप के लिए करना चाहते है, इसका मतलब तो ये हुआ की वो शिव के लिए अनुष्ठान करना चाहते है, और वो ये भी बता रहे थे की अभी उसके ऊपर से खतरा टाला नहीं है, इसका क्या मतलब है, और दूसरी बात, उसके लिए अनुष्ठान करने के लिए हमारे परिवार के सब सदस्य की क्या जरुरत है?

बिना : आप सच कह रही है, ये तो मेरी भी समाज में नहीं आ रहा, पर एक बात तो तय है, की शिव पर खतरा है, वो क्या खतरा है, और क्यों hai?(Dono के चेहरेपर चिंता के बदल मंडरा रहे थे)

ममता : भाभी, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा, पर एक बात कहु, शायद आपको अजीब लगे, मेने जब पहली बार शिव को देखा था तो मुझे ऐसा लगा था की में उसे जानती हु, मेने उसे कही देखा है.

बिना : वो कैसे, आप उस से कहा मिली थी पहले?

ममता : नहीं मिली थी, मेने उस से भी पूछा था, मेने जूही से भी पूछा था, और जैसा उन्होंने बताया, वो कभी इस तरफ नहीं आया था, और में भी कभी उस तरफ नहीं गयी थी, तो ये संभव नहीं है की में उस से कभी मिली हो.

बिना : (मुस्कुराते hue)Ho शक्ति है की वो आपके पिछले जनम का प्रेमी या पति हो.

ममता : (वो भी मुस्कुरा uthi)Ha ये हो शक्ति है, इस लिहाज से तो आपको भी वैसा लग्न चाहिए था, क्यों आप पिछले जनम में उसकी कोई नहीं थी.

बिना : पता नहीं, पर पहले के ज़माने में राजा की कई रनिया होती थी, तो हो शक्ति है की हम दोनों hi उसकी रनिया हो.

ममता : (दोनों को ऐसी बातो से मज़ा आ रहा था) पिछले जनम की क्या बात करती हो आप, हम तो इस जनम में भी उसकी रनिया बन गयी. और जहा तक मुझे लगता है की सिर्फ हम दोनों hi नहीं है, हमारी और भी सौतने है.

बिना : (बिना को भी इसका अंदाजा तो था hi, पर वो अपनी नानन्द से जान न चाहती thi)Kyu ऐसा क्यों लगा आपको?

ममता : पहले नंबर पर तो आप hi हो, मुझे नहीं पता था की आप भी उसके साथ जुडी हुई हो, पर निकली न, और दूसरी तो मेरी नानन्द hi है, उसका भी उसके साथ कुछ चल रहा है.

बिना : ये क्या कह रही है आप?

ममता : सच कह रही हु, मेने उन दोनों को किश करते हुए भी देखा है, पर जहा तक मुझे लगता है मेरी नानन्द hi उसके पीछे है, वो तो उसको रोकता है.

बिना : ऐसा क्यों?

ममता : क्यों की और भी कोई होगी जिसकी वजह से वो उसे रोक रहा होगा.

बिना : तो उस से बात कर के क्लियर कर, ऐसे तो तेरी नानन्द की जिंदगी खरब हो शक्ति है.

ममता : क्यों ख़राब हो शक्ति है?

बिना : अगर उन दोनों ने शारीरिक सम्बन्ध बना लिए तो आगे चल कर जूही को दिक्कत हो शक्ति है न.

ममता : मुझे तो ऐसा नहीं लगता, आज कल तो लोग इन बातो को कोई महत्व नहीं देते, पहले का जमाना और था, आपने सुना है की किसी ने इस वजह से अपनी शादी तोड़ी हो की उसकी बीवी पहले से hi कुवारी नहीं थी, और ऐसा हो हो hi नहीं शक्ति, आज कल कई लड़कीअ शादी से पहले hi सब कुछ कर चुकी होती है, फिर भी ऐसा कोई किस्सा सुन ने को नहीं मिलता. और वो दोनों समझदार है, और रही बात जूही की तो वो काफी मातुरे है, वो अपनी जिंदगी के फैसले अपने आप hi लेती है, और अभी उनकी उम्र hi क्या है, अभी कुछ सालो तक तो वो शादी करेंगे नहीं, आगे की आगे देखेंगे.

बिना : सच कहती है आप, आज कल की लड़कीअ इस बात को कटाई नहीं मानती की शादी तक कुवारी रहे, और लड़को को भी इस बात की कोई परवाह नहीं होती, क्यों की लड़के भी कई बार वो सब कर चुके होते है. तो इसका मतलब है की वो आधिकारिक तौर पर तो नहीं पर निजी तौर पर हमारी hi शौतन है. (दोनों मुस्कुराने लगी) और एक भी है.

ममता : वो कौन?

बिना : वो भी शादी सुदा है, मेरे पास को साबुत तो नहीं है, न मेने उन्हें देखा है, पर जिस तरह का वो शिव के साथ बर्ताव करती है, में समाज शक्ति हु, वैसे भी हम औरते दूसरी औरत का मान पढ़ hi शक्ति है. स्नेहा नाम है उसका, काफी खूबसूरत है.

ममता : उसको क्या जरुरत पद गयी अगर वो शादी शुदा है, सेक्स के लिए तो उसने नहीं फसाया शिव को?

बिना : नहीं मुझे तो नहीं लगता, मुझे लगता है की उसकी भी कहानी हमसे मिलतीजुलती है, शादी के कई बरसो बाद भी उसे कोई बच्चा नहीं है, तो शायद उस वजह से हो.

ममता : तब तो यक़ीनन वो भी माँ बन ने वाली होंगी.

बिना : ये कैसे कह शक्ति है आप?

ममता : हमारा शेर है hi ऐसा, वो किसी पर चढ़े और वो गाभिन न हो ऐसा तो हो hi नहीं शक्ति. (दोनों फिर खिलखिलाकर है पड़ी)

बिना : Sher....(Fir दोनों ने हाथ पर ताली दी और हसने लगी)

ममता : शेर hi तो है, जिसकी कई शेरनिअ होती है, और वो सब को संभल लेता है.

बिना : सच कहा आपने.

ममता : हमारी गाड़ी दूसरे ट्रैक पर चली गयी, तो सवाल ये है की आखिर शिव है कोण? उसके लिए हमारे परिवार को क्यों अनुष्ठान करना है?

बिना : पता नहीं, अगली बार बाबाजी से बात होगी तो उनसे hi पूछ शक्ति है, घर में तो किसी से पूछ नहीं शक्ति, वर्ण हमे शिव के बारेमे बताना पड़ेगा की हम उसे कैसे जानते है. और घर वालो को थोड़ी न पता है की ये अनुष्ठान हमारे होनेवाले बच्चे के बाप यानि शिव के लिए किआ जा रहा है, वो तो यही समझते है न की ये अनुष्ठान हमारे पातियो के लिए किआ जा रहा है.

ममता : पर भाभी आपको कभी कभी नहीं लगता की हमने अपने अपने पातियो को धोखा दिया है.

बिना : पहले लगा था पर अब नहीं लगता, क्यों की ये उनकी किस्मत है, अगर वो हमे बच्चा दे पते तो हमे ऐसा कुछ करने की जरुरत hi नहीं पड़ती, क्यों की ये बात तो तय है की न तुम में कोई दोष है न मुज में, तो फिर दोष उनमे है तभी तो वो हमे बच्चा नहीं दे पाए.

ममता : सच कहती है आप, और पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लगता है की शिव का इस घर से कोई न कोई तो सम्बन्ध है hi, वर्ण जिस तरह से माँ ने कहा था की हमे किसी और से भी संतान नहीं हो शक्ति तो फिर अब हम कैसे माँ बन ने वाली है.

बिना : एक और तो लगता है की ये सब अन्धविश्वास है, क्यों की कुदरत अपना काम करती है, पर अगर ये सिर्फ अन्धविश्वास है तो फिर बाबाजी को हमारे और शिव के बारेमे कैसे पता, उन्हें कैसे पता की हमारी कोख में एक hi इंसान का बच्चा है?

ममता : मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा, बेहतर है की हम इस सवाल को वक़्त पर hi छोड़ दे.

बिना : सही कहा आपने.





फिर वो दोनों अपने आपने काम में लग गयी. यहाँ में और भार्गवी मैडम साइट से निकले, जैसे hi हम निकले पहला सवाल मेरा था

शिव : क्या हुआ मैडम, वो लोग पकड़े gaye?(Wo अभी जीन्स और शर्ट में थी, खाखी वर्दी नहीं पहनी थी उन्होंने, ऊपर से चस्मा पहन रक्खा था तो वो बहोत प्रभावशाली लग रही थी, मेरे सवाल से उन्होंने मेरी और देखा और मुस्कुरायी)

भार्गवी : है, बिल में छुपे थे, पर पुलिस से कैसे बच सकते है, धुंध निकलल उन्हें. सुबह से वही सब भगा दौड़ी चल रही थी, उनके घरवाले पुलिस स्टेशन में आये हुए थे, मिन्नतें कर रहे थे की उन्हें छोड़ दे, वो नादाँ है, बच्चे है वगैरह वतैराह. सच में लोग कुछ करने से पहले कुछ सोचते नहीं, उनके घरवालों पर क्या बीतेगी, उनके maa-baap क्या क्या होगा, दो लड़के तो अपने माँ बाप की एकलौती संतान है, maa-baap ये सोच कर लड़के पैदा करते है की वो उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगा, और बच्चे बड़े हो कर ऐसे काम कर लेते है, हमे भी दुःख होता है पर क्या करे कानून तो कानून है. उन्होंने कानून का भांग किआ है तो सजा तो मिलेगी. कल के अख़बार में सब आएगा, क्यों की पत्रकार लोगो को भी मसाला मिल चूका है, तो आखर की कल हेड लाइन्स होगी. वो सब छोडो, तुम कैसे हो, और घर पर सब?

शिव : घर पर सब अच्छे है, में भी ठीक हु, वैसे मुझे आपकी जरुरत तो पद गयी थी, में फ़ोन भी करनेवाला था, पर फिर सोचा की क्यों परेशान करू.

भार्गवी : क्यों, ऐसा क्या हो गया था?

शिव : छोड़िये न, हो गया था कुछ. (हम दोनों उनके घर पहुंच गए थे, उन्होंने गाड़ी पार्क की और फिर उन्होंने घर खोला और हम दोनों अंदर गए)

भार्गवी : बताओ भी, ऐसा क्या हो गया था की तुम्हे मेरी जरुरत पड़ी?

शिव : कैसे बताऊ, (कुछ पल में रुका) एक गलती हो गयी थी, गुस्से में मेने एक लड़की को किश करदिया था, मुझे लगा वो कम्प्लेन करदेगी.

भार्गवी : (उसको आश्चर्य hua)Ladki को किश, मतलब जबरदस्ती, किसको?

शिव : मला की लड़की, जहान्वी.

भार्गवी : तुम पागल हो गए हो क्या?

शिव : सॉरी, मेने कहा न की मुझसे गलती हो गयी थी.

भार्गवी : एक बात समाज लो शिव, कानून सबके लिए बराबर होता है, कोई सामान्य लड़की भी अगर फरियाद करती है तो भी हम एक्शन लेते है, और ये तो मला की लड़की थी, आज सुबह से में पुलिस स्टेऑन में हु, पर इस बारेमे मुझे कुछ नहीं पता, इसका मतलब है उसने कोई कम्प्लेन नहीं की है, पर ये बेवकूफी है शिव.

शिव : में समझता हु, पर उस वक़्त मुझे गुस्सा आ गया था, वो बर्ताव hi ऐसा कर रही थी. फिर बाद में मुझे एहसास हुआ की मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था. (वो पानी ले आयी, मेने पानी पिया, उन्होंने भी पिया, फिर वो मेरे पास hi बेथ गयी)

भार्गवी : तुम जानते हो शिव, तुम पर कितनी जिम्मेदारियां है, और अगर तुम पर फिर होती है तो तुम्हारे कर्रिएर पर भी असर पद शक्ति है.

शिव : में समझता हु, पर हो गया था.

भार्गवी : ये तो अच्छा है की उसने कोई कम्प्लेन नहीं की, हो शक्ति है की वो तुम्हे पसंद करती हो.

शिव : मुझे तो नहीं लगता, वो ऐसे hi सब पर चिल्लाती रहती है, और मुज पर तो उनको खास लगाव है, जैसे hi मुझे देखती है उनको जैसे सुनाने का मौका मिल जाता है.

भार्गवी : दूर रहा करो उस से.

शिव : में तो दूर hi रहता हु, वो मुझे बुला बुला कर सुनती है.

भार्गवी : छोडो उसे, तो बस इसीलिए मुझे याद कर रहे थे?

शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप, रोज़ तो आपको मश्ग करके आपका हाल चल पूछ ता था, फ़ोन भी किआ था.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Me तो मज़ाक कर रही थी, सोचा कोई बाहरवाली आ कर तुम्हे सुना रही है तो फिर में क्यों न सुनौ.

शिव : (में समाज गया की वो मेरी खिंचाई कर रही है तो में भी bola)Achchha, वो बाहरवाली तो फिर आप?

भार्गवी : (वो मुस्कुराने लगी, वो ऐसे देख रही थी जैसे कोई शरारती bachcha)Muje क्या पता?

शिव : मेने थोड़ी न कहा, आपने hi कहा तो आपको hi पता होगा न.

भार्गवी : तुजे जो समजना है समाज (उनके चेहरे की मुस्कराहट देख में भी मूड में आ गया था, मेने उनकी टाइट जीन्स में कैद झंघ पर हाथ रक्खा और उसे हलके से दबाते हुए कहा)

शिव : में तो अपना फयदा hi सोचूंगा, अगर वो बाहरवाली हुई तो फिर आप घरवाली हुई.

भार्गवी : (उसकी मुस्कराहट और चौड़ी हो gayi)Tuje पता भी है की घरवाली क्या होती है?

शिव : (में हाथ को और ऊपर ले गया जिस से मेरा अंगूठा उनकी छूट वाले भाग को छूने laga)Ha पता है, घरवाली जिस पर तुम्हारा पूरा हक़ होता है, उसके साथ आप जो चाहे कर शक्ति है.

भार्गवी : (में भी कितने दिनों से भरी हुई थी, उसका ऐसे मेरी छूट को छूना अच्छा लग रहा था, उस से ज्यादा वो जिस हक़ से मेरे साथ ये सब कर रहा था वो मुझे और अपना लगने लगा tha)Achchha, क्या करेगा तू (वो मुझे निमंत्रण दे रही थी, तो में और उनके नजदीक गया और थोड़ा उनकी और घूम गया, मेरा हाथ झंघ पर से उठा कर उनके पेट पर ले गया और उसे सहलाने लगा, उन्होंने एक बार शुकुन से आंखे बंद की फिर मेरी और मुस्कुराके देखने लगी)

शिव : जो भी मेरी मर्जी होगी वो सब करूँगा (में हाथ थोड़ा ऊपर ले गया, जिस से मेरा हाथ उनकी स्तन की गोलाई को छूने लगा, उनकी भी सांसे तेज होने लगी थी)

भार्गवी : (उसके ऐसे छूने से में गर्म होने लगी thi)Maat भूल की में पुलिसवाली हु.

शिव : तो होंगी अपने पुलिस ठाणे में, यहाँ नहीं हो.

भार्गवी : तो यहाँ कोण हु में? (मुझे भी बहोत अच्छा लग रहा था इस तरह बात करना, शिव hi तो था जिसके साथ में इतना खुल कर बात कर शक्ति थी, तभी तो जैसे hi में फ्री हुई पहला ख्याल मुझे शिव का hi आया, ऐसा नहीं था की मेने सेक्स का सोचा था पर मुझे एहसास था की कुछ भी हो सकता है, वैसे भी मेरा मान भी कर रहा था, अब माहौल भी उसी तरफ hi इस्सर कर रहा था)





शिव : (मेने हाथ को पूरा स्तन पर रख दिया, और उसे हलके हलके दबाते हुए सहलाने लगा, उनकी आंखे मदहोश हो रही thi)Wohi जो आपने कहा, घरवाली. (वो फिर मुस्कुरा उठी, में उनके चेहरे की और बढ़ा और उनके होठो पर किश करने लगा)

भार्गवी : (मेने भी साडी झिझक छोड़ कर उसको बहो में भर लिया, जिस तरह से वो मुज पर हक़ जाता रहा था, बिना झिझक मेरे स्तन दबा रहा था, मुझे अच्छा लग रहा था, उसके ऐसा करने से मेरे अंदर रक्त का बहाव तेज हो गया था, सांसे तेज चलने लगी थी, उसके हाथो की सख्ताई बढ़ती जा रही थी, वो मेरे स्तन को थोड़ी ताकत से दबा रहा था, हम दोनों किश में दुबे हुए थे, उसका हाथ मेरे शर्ट के बटन खोलने लगे, मुझे कोई परवाह नहीं थी, वो एक एक करके शेयर बटन खोलता गया, आखिर कर उसके हाथ मेरे ब्रा में कैद अधनंगे स्तन को मसलने लगे,





मेने उसे अपनी और खींचते हुए तीव्रता से किश करना सुरु कर दिया, उसने किश तोड़ी और मेरे गले को चाटने लगा, में आंखे बंद किये हुए उसके स्पर्श का मज़ा लेने लगी, वो मेरे स्तन के खुले हिस्से को चाट रहा था, और साथ में मेरे स्तन को मसल रहा था, मेरे बदन की गर्मी बढ़ती जा रही थी, मेने खुद अपने शर्ट को निकल दिया और उसके शर्ट के बटन भी खोलने लगी, उसका शर्ट भी निकल दिया, और उसकी बनियान भी. उसका मजबूत शरीर मेरी बाहोंमे था, में उसको अपनी उंगलिओ से छू कर उसका एहसास करने लगी, उसने मेरे स्तन से ब्रा को निचे खिसकाया और मेरे निप्पल को अपने मुँह में भर लिया, उसके गरम मुँह का एहसास होते hi मेरी सिस्किअ निकलने लगी, में उसके बालो को सहलाते हुए उसे मेरे निप्पल को चूसने के लिए उत्साहित कर रही थी, वो बरी बरी मेरे दोनों निप्पल को चूस रहा tha)Shhhhh शह्ह्ह्हह्ह शहहह हा शह्ह्ह्ह हा शहहह haaa(Mere मुँह से लगातार सिस्किअ निकल रही थी, मेरा हाथ उसके लुंड को ढूंढने लगा, जैसे hi वो कड़क लुंड मेरे हाथ में आया में उसे मसलने लगी, उसको छूटे hi मेरी छूट में नदिया बहने लगी, मेरी कमर में कम्पन होना सुरु हो गया था, वो मेरी हालत समाज रहा था, उसने मेरे जीन्स का बटन खोल दिया और चैन भी, वो थोड़ा मुझसे दूर हुआ और सोफे से खड़ा हो गया और मेरा जीन्स निकलने लगा, मेने उसके चेहरे को देखा तो वो मुस्कुराया, मुझे शर्म आने लगी, में अपनी छूट को छुपाने लगी, उसने बिना किसी झिझक के मेरे जीन्स को निकल दिया, पंतय में कैद अपनी छूट को में छुपा रही थी, मुझे पता था की उस से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है क्यों की में खुद hi अपनी टंगे खोल दूंगी, पर फिर भी शर्म तो आती है न. वो भी अपना पंत निकलने लगा, उसने अंडरवियर भी निकल दी, वो पूरा नंगा हो चूका था, उसका वो कड़क लुंड सीधा मेरी तरफ hi था, में उसको बड़े प्यार से देखने लगा, मुझे उसे छूना था, पकड़ना था, पर लड़की की शर्म बीचमे आ रही थी, वो मेरी नजरो से सब समाज रहा था, वो मेरे नजदीक आया और मेरे हाथ को पदक कर अपने लुंड की और ले जाने लगा, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मेरी हालत पर मुस्कुरा रहा था, में शर्मा गयी और नज़ारे झुका दी, उसने मेरे हाथ में लुंड थमा दिया, में लुंड को देखते हुए उसे सहलाने लगी, मुझे पता था की वो मुझे hi देख रहा होगा, मुझे शर्म आ रही थी पर में इस लुंड को नहीं छोड़ सकती थी, उसके समोहनमे में गिरफ्तार थी, लुंड को हाथ में पकड़ने से मेरे सरीर में तरंगे दौड़ रही थी, में उस बड़े लुंड को आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी, उसके लुंड के छेड़ से रास की बुँदे निकल रही थी. लुंड काफी गरम था, जैसे जैसे में सेहला रही थी, सुपडे की चमड़ी आगे पीछे हो रही थी, और सूपड़ा और मेरा हाथ दोनों उस चिपचिपे रास से भीगने लगे थे. मेरी छूट में कुछ कुछ हो रहा था, में उसकी नजर बचा के अपने हाथ को अपनी छूट के पास ले गयी और उसे सहलाने लगी, मेरी पंतय भीग चुकी थी.)

शिव : इससे मुँह में लीजियेना मैडम.

भार्गवी : (जैसे hi उसने कहा मेने उसकी और देखा, पर फिर शर्म के मरे नजर झुक गयी, चाहती तो में भी थी उस लुंड को अपने मुँह मेलेना, पर शर्म और झिजक दोनों आड़े आ रही थी, उसका मैडम कहना भी मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, में सिर्फ हिलाये जा रही थी, वो और नजदीक आया और मेरे शिर को पकड़ कर अपने लुंड की और ले जाने लगा, में अपने शिर पर जोर दे कर दूर हो रही थी)

शिव : क्या हुआ मैडम?

भार्गवी :अभी थोड़ी देर पहले घरवाली बोल रहा था, और अब मैडम, मैडम ये सब नहीं करती. (मेने बिना उसकी और देखे hi कहा, क्युकी उसकी और देखने में शर्म आ रही थी)

शिव : (उनकी बात सुनकर में मुस्कुराया, अब में समझने लगा था, की लड़कीअ जिसे अपना मानती है उसे hi छोड़ने देती है, और मैडम मुझे ये सब करने दे रही थी मतलब वो मुझे अपना मानती है तो भले में उन्हें बहार नाम से न बुलाऊ पर यहाँ तो में बोल hi शक्ति था, मैंने उसी लहजे में kaha)Achchha तो मेरी भार्गवी मैडम को में मैडम कहु वो अच्छा नहीं लग रहा, तो में क्या कहु? अच्छा ठीक है, भार्गविजई मेरा लुंड चूसिये न (वो निचे देख कर मुस्कुरा रही thi)Ya ये कहु की भार्गवी डार्लिंग मेरा लुंड चूसिये.

भार्गवी : (वो भी मुस्कुरा uthi)Ye सब इतना खुल के बोलने की जरुरत नहीं है, बेशरम.

शिव : (मुस्कुराते hue)Bhargavi उसे चुसो न, अपने गरम गरम मुँह में लो न.

भार्गवी : (मुझे सच में अच्छा लग रहा था, इंस्पेक्टर में बी प्रोफ़्फेसिओं थी, पर थी तो एक लड़की hi, वो मुज पर हक़ करे वो मुझे भी पसंद था, में उसके नजदीक खिसकी और लुंड को एक बार देखा, फिर अपना मुँह खोल कर उस बड़े से सुपडे को अपने मुँह में भर लिया, सुपडे पर लगा नमकीन स्वाद मेरे मुँह में भर गया, मेरी आंखे बंद हो गयी, में बड़े चाव से उस लुंड को चूसने लगी, जीभ से चाटने लगी, वो सबसे स्वादिस्ट था मेरे लिए, में उसे चूस रही थी, उस से खेल रही थी, कभी हिला रही थी)





शिव : अपने हाथ को क्यों कास्ट दे रही है, में हु न.

भार्गवी : (वो क्या बोलै मुझे समाज नहीं आया, उसने अपना लुंड मेरे मुँह से निकल लिया, में समाज ने की कोशिस कर रही थी, वो मेरी पंतय निकलने लगा, मेने कोई विरोध नहीं किआ, उसने मुझे सोफे पर लेता दिया, और फिर से अपने लुंड को मेरे मुँह के पास करते हुए अपने मुँह को मेरी छूट पर लगा दिया और उसे चाटने लगा, में शर्मा गयी, क्यों की में समाज गयी थी की उसको पता था की में अपनी छूट सेहला रही थी, जैसे जैसे वो मेरी छूट को चाट रहा था, मेरी सिस्किअ निकलने lagi)Shhhhh ह्ह्ह्हह्हआआ शह्ह्हह्ह्ह्ह ह्ह्हह्हआआ (वो मेरी छूट को फैला कर अंदर अपनी जीभ दाल रहा था, मेने अपने पेअर और फैला दिया ताकि उसे आसानी हो और उसकी जीभ और अंदर तक जाये, वो अपना काम कर रहा था, मेने भी उसके लुंड को फिर से अपने मुँह में भर लिया, वो मेरी छूट चूस रहा था, और में उसका लुंड, दोनों को मज़ा आ रहा था और दोनों मज़ा दे रहे थे. हम दोनों का ये खेल काफी देर तक चला, वो खड़ा होने लगा तो में समाज गयी की अब वक़्त आ गया है, वैसे भी अब मुझे उसका लुंड अपने अंदर चाहिए था. उसने मुझे सोफे पर सीधा बिठाया और मेरी टंगे फैला दी, मेने शर्म से अपना चेहरा घुमा लिया)

शिव : मेरी और देखिये भार्गवी.

भार्गवी : (मुझे शर्म तो आ रही थी, पर फिर भी मेने उसकी और देखा)

शिव : अब शर्मा न छोड़िये

भार्गवी : (उसने मेरी ब्रा भी निकल दी, अब में पूरी नंगी थी, मुझे देख कर उसका लुंड झटके मर रहा था, जिसे देख कर मुझे शर्म भी आ रही थी और साथ में अच्छा भी लग रहा था, वो नजदीक आया और लुंड को मेरी छूट पर घिसने लगा, छूट के बाल पूरी तरह से भीग चुके थे, वो मेरे छेड़ पर अपने सुपडे को घिस रहा tha,)Shhhhh हा शह्ह्ह्ह शहहहहह (मेरी नजर लुंड पर hi थी, में बड़ी उत्सुकता से अपने छेड़ में घुसने का इंतजार कर रही थी, पर जब उसने अंदर न डाला तो मेने उसकी और देखा, जब में लुंड को देख रही थी वो कब से मुझे hi देख रहा था, में शर्मा गयी, वो मुस्कुराया)

शिव : अंदर जाने का इंतजार कर रही थी? (में शर्मा gayi)Kahiye न, अंदर जाने du(Me उसका नटखट पैन समाज रही थी, मेने भी मुस्कुरा कर है में गर्दन हिलायी, वो मुस्कुराया और लुंड को मेरे छोटे से छेड़ पर रख दिया, मेरी हसी गायब हो चुकी थी, में फिर से लुंड को देखने लगी, जैसे hi उसने जोर लगाया, मेरा छेड़ फैलने लगा और पक करके सूपड़ा अंदर चला गया, मुझे हल्का दर्द हुआ





, वो मेरे स्तन सहलाने लगा, मेने उसकी और देखा, वो मेरी केयर कर रहा था, उसे पता था की मुझे दर्द होगा, उसकी यही बात अच्छी थी, चुदाई के दौरान वो मेरा अच्छे से ख्याल रखता था, में मुस्कुरायी और फिर से अपने छेड़ में घुसे लुंड को देखने लगी, वो आहिस्ता आहिस्ता अंदर जाने लगा, मेरी छूट फैलती गयी, जब आधे से ज्यादा लुंड अंदर चला गया तो वो धीमी रफ़्तार से अंदर बहार करने लगा, मेने देखना बंद कर दिया और आंखे बंद कर के उस बड़े लुंड को अपनी छूट में महसूस करने लगी, वो जैसे जैसे मुझे छोड़ रहा था मेरी सिस्किअ निकल रही थी)

भार्गवी :शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : (मैडम की गरम गरम छूट में मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था, मैडम की छूट इतना रास बहा रही थी की मेरा लुंड भीग चूका था, आधे से ज्यादा लुंड छूट रास से भीगा हुआ था, बाकि का सूखा था, मैडम की छूट को महसूस करते हुए में उन्हें छोड़ रहा था, और उनकी गरम आहे मुझे और उत्साहित कर रही थी, थोड़ी hi देर में मेरे धक्के बढ़ गए, और मैडम की आहे भी, आहिस्ता आहिस्ता मेरा पूरा लुंड छूट में समां गया था, अब पुरे लुंड से में मैडम को छोड़ रहा था, मेने मैडम को देखा तो वो जैसे पुरे नशे में धुत लग रही थी, उनकी आंखे भी बोजिल लग रही थी, वो लगातार आहे भर रही थी)





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भार्गवी : शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : अच्छा लग रहा hi भार्गवी?

भार्गवी : (जैसे तैसे मेने अपनी पलकों को उठाया, मेरी पलके भी नहीं खुल रही थी, पता नहीं ये कैसा नशा tha)Haaaaa शह्ह्ह्हह्ह बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह तुम बहोत अच्छे हो शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (उसका लुंड मुझे सच में बहोत मज़ा दे रहा था, पता नहीं अभी भी क्यों दर्द होता था, पर इस मज़े के लिए तो में हर दर्द सहने को तैयार थी, वो लगातार मुझे छोड़ रहा था, उसका पूरा लुंड अब मेरी छूट में था, में सिर्फ लेती रही, वो मुझे जोर जोर से छोड़ रहा था, मेरे स्तन को मसल रहा था, मेने हाथ ऊपर uthaye)Shiiiiiiiiv शह्ह्ह्ह मुझे किश करो शिव शहहहहह (वो झुका और मेरे होठो को चूसने लगा, में बावली हो कर उसके होठो पर टूट पड़ी, उसके धक्के बहोत तेज चल रही thi)Ummm उम्म्म उम्म्म ummmm(Mera रक्त स्पीड से बह रहा था, वो लगातार अपनी कमर हिला कर अपने लुंड को गहराई तक थोक रहा था, मुझसे बर्दास्त करना मुश्किल हो गया था, में झाड़नेवाली थी. मुझसे सांसे भी नहीं ली जा रही थी, मेने अपना मुँह हटा लिया, में मुँह और नाक दोनों से जोर जोर से सांसे लेने lagi)haaa हआ हा मेरा होने वाला है हआ हआ तुम बहोत जोर से कर रहे हो शिव हआ हआ हा में झाड़नेवाली हु शहहहहह मुम्मीईई शह्ह्हह्ह्ह्ह हआ हआ हआ हआ (आखिर वो पल आ गया, मेरा शरीर अकड़ गया, में बर्दास्त नहीं कर पायी, मेने अपने पैरो से उसे जकड लिया, और मेरा बांध टूट गया, पूरी तरह से में उस से चिपक गयी)

शिव : (मैडम झाड़ रही थी, उन्होंने अपने पेअर से मुझे इतनी जोरो से जकड लिया था की में हिल भी नहीं पर रहा था, तो में रुक गया और उन्हें अपने स्खलन का आनंद लेने दिया, थोड़ी देर तक वो हांफती रही, आखिर वो शांत होने लगी, उनकी पकड़ काम हुई, जैसे उनमे ताकत hi न बची हो, उन्होंने मुझे छोड़ दिया और टंगे और हाथ फैला कर लेती रही. अभी उन्हें छोड़ना ठीक नहीं था, क्यों की वो ठंडी हो चुकी थी, मेने लुंड बहार निकला और फिर से उनकी टंगे फैला कर छूट को चाटने लगा.





भार्गवी : (में आंखे बंद किये हुए उसकी जीभ को महसूस कर रही थी, पर जैसे मुजमे कोई उत्तेजना hi नहीं बची थी, वो लगातार मेरी छूट चाट ते हुए मेरे स्तन को दबा रहा था, उसके चाटने से में फिर से गरम होने lagi)Shhhhhhh shhhhhhhhhhh.(Usne मुझे खड़ा किआ और टेबल के सहर खड़ा करके मेरी छूट के साथ लुंड घिस रहा था





वो और थोड़ी देर मेरी छूट से खेलता रहा, अब में पूरी गर्म हो चुकी थी, उसने मुझे सोफे के सहारे घोड़ी बना दिया, में अपनी छूट उसके सामने किये हुए फिर से छोड़ने का इंतजार करने लगी, मेरी कमर को पकड़ कर उसने मुझे अपनी और खिंचा और फिर से लुंड को मेरी छूट में उतर दिया, में फिर से सिसक उठी)





शिव : (मैडम अपने कूल्हे फैलाये मेरे सामने थी, मेरा लुंड उनकी छूट में उतर चूका था, जैसे जैसे में उन्हें छोड़ रहा था, थप थप की आवाजों के साथ उनके कूल्हे थिरक रहे थे, लड़की को छोड़ना अध्भुत आनंद होता है, और अगर भार्गवी जैसे लड़की हो तो आनंद और भी बढ़ जाता है, वो एक पावरफुल महिला थी, फिर भी वो मेरे लुंड पर कूद रही थी, ये सोच कर hi एक अलग तरह का आनंद मिलता है, में तेज तेज धक्को से उन्हें फिर से छोड़ने लगा. मेने उन्हें खड़े खड़े भी छोड़ा, दीवाल के सहारे भी छोड़ा, सोफे पकड़ कर झुकाये हुए भी छोड़ा, निचे जमीं पर लेता कर भी छोड़ा, वो और दो बार झड़ी, आखिर कर मेने भी अपना लावा उनकी छूट के अंदर hi भर दिया. थोड़ी देर तो हमे सँभालने में लगी, वो जमीं पार्लेटी हुई थी, उनकी छूट से सफ़ेद वीर्य बह रहा था, में सोफे से तक लगाए बैठा था, वो अपनी अधखुली आँखों से मुझे hi देख रही थी, आखिर वो उठने लगी, उनसे उठा भी नहीं जा रहा था तो मेने उन्हें सहारा दिया, तो वो मेरे सेने से लग कर बेथ गयी, मेने उनकी पीठ सहलाते हुए puchha)Maza आया? (उन्होंने मेरी और देखा और मुस्कुरायी, बोली कुछ नहीं पर हलके से मेरे होठ पर किश किआ, तभी मेरी नजर मोबाइल पर गयी, उसमे लाइट हो रही थी, मतलब किसी का फ़ोन आ रहा था, फ़ोन मेने साइलेंट करदिया था तो रिंग नहीं बजी थी, मेने देखा तो जूही का फ़ोन था, मेने फ़ोन उठाया)

शिव : Hello

जूही : क्या hello, कब से फ़ोन कर रही हु, कहा हो तुम? (वो मुझे डांटने लगी, भार्गवी मैडम नजदीक hi थी तो उन्हें भी सब सुनाई दे रहा था, वो मुस्कुराने लगी)

शिव : क्यों क्या हुआ?

जूही : क्या हुआ के बच्चे, मोबाइल में घडी भी होती है, टाइम क्या हो रहा है पता है, कितने फ़ोन किये मेने, तुम्हारा इंतजार कर के में स्टेडियम भी आ गयी, कहा हो तुम?

शिव : (हड़बड़ाते hue)Me आ रहा हु, बस थोड़ी देर में पहुंच जाऊंगा.

जूही : जल्दी आओ (बोल कर उसने फ़ोन काट diya)(Meri हालत ख़राब थी, जिसे देख कर मैडम मुस्कुरा रही थी)

भार्गवी : तुम िस्ससि लायक हो, दन्त पड़नी hi चाहिए तुम्हे.

शिव : क्या आप भी, आपकी hi वजह से मुझे दन्त पड़ी है.

भार्गवी : मेरी वजह से क्यों? क्या तुम मेरे साथ करना नहीं चाहते थे?

शिव : (उनका गाल चुम kar)Mera कहने का वो मतलब नहीं था, आप को देख कर में बाहेक जाता हु इसीलिए दोष तो आपका hi हुआ न, और आपके साथ ये सब करने के लिए तो में कितनी भी दन्त खा शक्ति हु. पर अभी मुझे जाना होगा, वर्ण वो मेरी जान ले लेगी.

भार्गवी : लगता है बहोत डरते हो उस से.

शिव : (कपडे पहनते hue)Jaise आपसे डरता हु, वैसे hi उस से डरता हु.

भार्गवी : मतलब वो भी है तुम्हारी जिंदगी में.

शिव : (मेने उनकी और देखा, उनके कहने का अर्थ में समाज रहा था, में उनके पास गया और प्यार से उनके गाल पर हाथ रक्खा और kaha)Ha है, वो भी है. (मेने इतने नर्वस हो कर कहा था जैसे मेने उन्हें धोखा दिया है) इस बारे में में आपसे बाद में बात करूँगा, न में आपको धोखा दे रहा हु, न उसको, मेरे लिए वो जितनी इम्पोर्टेन्ट है आप भी उतनी hi इम्पोर्टेन्ट है, पर में ये परिस्थिति नहीं बदल शक्ति, आप अकेली मेरी जिंदगी में नहीं है, और भी है.

भार्गवी : (उसके दिल में थोड़ा दर्द तो हुआ था)

शिव : प्लीज भार्गवी, मुझे संजो, अगर मुझे छुपाना होता तो में कह देता की मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है उस से, पर मेने ऐसा नहीं कहा, हम इत्मीनान से बात करेंगे इस बारे में, फिर आपको जो ठीक लगे वैसा फैसला करना. अगर आपको सजा भी देनी हो तो मुझे मंजूर रहे गई. (उनके चेहरे पर मायूसी थी) आपको क्या लगता है, मुझे ये समाज नहीं है की हमारे बिच सिर्फ जिस्मानी सम्बन्ध hi नहीं है, में समझता हु की हम दिल से जोड़े हुए है, पर मेरी मजबूरी है की आप अकेली नहीं है. जूही भी अकेली नहीं है, और भी है, पर उसके लिए आपको मुझे सुन न होगा, समझना होगा.

भार्गवी : (वो समझदार थी, और जिंदगी के उतर चढाव देख चुकी thi)Me समझती हु, हम बाद में बात करेंगे, अभी तुम जाओ, और है बाइक ले जाओ. (मेने चाबी ली और उनके माथे पर किश किआ और वह से निकल गया)

भार्गवी ने दरवाजा बंद किआ, वो अभी भी पूरी नंगी थी, उसकी छूट से वीर्य बह कर उसके पैरो को भिगो रहा था, वो बाथरूम में गयी, घुटने मोड़ कर वो निचे बैठी और उसकी छूट से मूत निकलने लगी, वो आंखे बंद किये मूतने का आनंद लेने लगी, जब मूतना ख़तम हुआ तो उसने निचे देखा तो अभी भी वह वीर्य टपक रहा था, पानी ले कर उसने अपनी छूट को साफ़ किआ, फिर शावर के निचे कड़ी हो गयी, खयालो में तो शिव hi था, पता नहीं पर जूही के बारे में सुन कर उसे अच्छा नहीं लगा था, जैसे उसे लग रहा था की शिव पर उसकी का अधिकार है. पर ज्यादा सोचने पर उसे लगा की शिव की उम्र और उसकी उम्र में अंतर है, और उसकी अभी अपनी जिंदगी है, वो उसकी जिंदगी तो कण्ट्रोल नहीं कर शक्ति. इतने टाइम से वो शिव को जानती थी, वो अच्छा लड़का है, वो महज सेक्स के लिए तो किसी से सम्बन्ध नहीं बनाएगा. शावर लेने के बाद उसने ड्रावर से एक गोली निकली और खा ली. जिस तरह से शिव उसे छोड़ता था अगर एहतियात न बरती जाये तो यक़ीनन वो माँ बन जाएगी. पर अभी ये मुमकिन नहीं था तो गोली खाना hi बेहतर था. वो ऐसे hi नंगी बिस्तर पर गयी और सो गयी, क्यों की वो काफी थक गयी थी.

में जब स्टेडियम पंहुचा तो जूही ने मेरी वाट लगा दी, मुझे डांटने लगी.

जूही: कहा थे तुम, प्रैक्टिस का भी ख्याल नहीं है, अपने आपको बड़े तोपची समझने लगे हो क्या जो प्रैक्टिस से छुट्टी कर रहे हो, ऐसा hi हाल रहा तो जित चुके तुम कॉम्पिटिओं. फ़ोन भी नहीं उठा रहे थे, कहा थे तू?

शिव : सॉरी यार, वो भार्गवी मैडम से मिलने गया था, वो वैस्वी के साथ बदतमीजी करनेवाले लड़के पकड़े गए है तो मिलने गया था.

जूही : सॉरी के बच्चे, बोल कर नहीं जा शक्ति थे, में hi पागल हु जो तुम्हारी इतनी फ़िक्र करती हु. जाओ जहा रहना है रहो, जिस से मिलना है मिलो, मुझे क्या.

शिव : सॉरी कहा न, तुम्हे डांटना है तो घर चल कर दन्त लेना, यहाँ सबके सामने क्यों दन्त रही हो.

जूही : (उसको भी एहसास हुआ की वो गुस्से में कहा सुरु हो गयी थी, सब उन्हें hi देख रहे the)Thik है, चलो अब प्रैक्टिस पर ध्यान दो.

फिर हम प्रैक्टिस करने लगे. में बाइक ले कर आया था तो हम अलग अलग वापस जानेवाले थे, पर उसने कहा की घर चलो. हम दोनों उसके घर पहुंच गए, जैसे hi हम अंदर गए वो मुझे किश करने लगी, में ऐसे hi खड़ा रहा, वो मुझे किश कर रही थी. जब उसे लगा की में किश नहीं कर रहा हु तो वो अलग हुई और मुझे देखने लगी. में भी उसे hi देख रहा था.

जूही : सॉरी यार, वो सब के सामने मेने दन्त दिया.

शिव : एक तो दन्त टी हो फिर सॉरी बोलती हो. (में बस नाटक कर रहा था, में उस से नाराज नहीं था)

जूही : सॉरी कहा न, पर जब तुम फ़ोन नहीं उठाते तो मेरी धड़कने बढ़ जाती है, मुझे लगता है की कही तुम किसी मुसीबत में तो नहीं हो. फ़िक्र होने लगती है मुझे, अब तुम्ही बताओ में क्या करू.

शिव : (उसका प्यार देख कर में पिघल गया और मेने उसे बहो में भर लिया और उसे किश करने लगा, वो तो जैसे इसीका इंतजार कर रही थी, वो भी मुझसे लिपट गयी और मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर हम दोनों एक दूसरे के होठ चूसते रहे, फिर अलग हुए, अभी भी एक दूसरे की बहो में hi the)Me नाटक कर रहा था, में भला तुमसे नाराज हो शक्ति हु, तुम्हारी जितनी मर्जी हो मुझे दन्त सकती हो, सबके सामने भी.

जूही : (वो मुस्कुराने lagi)Tumne तो मुझे डरा hi दिया था, में तुम्हारी नाराजगी एक पल भी नहीं बर्दास्त कर शक्ति. (उसने फिर मुझे किश किआ) अच्छा बताओ क्यों मिलने गए थे?

शिव : मेने कहा न की वो लोग पकड़े गए है तो बस मिलने गया था.

जूही : मुझे ऐसा क्यों लगता है की तुम उनके ज्यादा करीब हो.

शिव : तो क्या नहीं होना चाहिए, उन्होंने हर बार मेरी मदद की है.

जूही : तो कोई इतना करीबी नहीं बन जाता.

शिव : कहना क्या चाहती हो, सीधे सीधे कहो.

जूही : कुछ नहीं, छोडो उस बात को. में दूध बनती हु.

शिव : नहीं रहने दो आज, वैसे भी में सुबह से घर से बहार हु तो घर पर भी दन्त पड़नेवाली है.

जूही : (मुस्कुराते hue)Tum इसी लायक हो, में भी लता से बोलनेवाली हु की इससे ज्यादा छूट न दे.

शिव : बड़ी आयी, शिकायत करने वाली, तुम अपना देखो, मेरे फत्ते में तंग अदने की जरुरत नहीं है.

जूही : क्यों नहीं है, में तो ादौंगी, तुम्हे जो करना है कर लो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है में चलता हु.

जूही : (मेरा गिरेबान पकड़ते hue)Thodi देर रुक जाओ न.

शिव : थोड़ी देर रुक गया तो ज्यादा देर रुकना पड़ेगा, ये बिल्ली मुझे छोड़नेवाली थोडिना है.

जूही : जब जानते हो तो फिर क्यों ऐसा कर रहे हो, रुक जाओ न.

शिव : आज नहीं, काल अच्छी मिलूंगा, ठीक है.

जूही : प्रॉमिस. (उसने हाथ आगे बढ़ाया, मेने उसका हाथ थमा और उसके होठ पर एक किश किआ)

शिव : पक्का प्रॉमिस.

फिर में वह से घर चला गया. जैसा मेने सोचा था वह भी मुझे दन्त hi पड़ी. पर कोई मुझसे ज्यादा देर नाराज तो रह नहीं sakta.Mene सबको मन लिया.

दूसरे दिन में स्कूल के लिए निकला. संयम और वैस्वी मुझे मिल गयी, आज कुछ अलग hi था, वैस्वी की निगाहे तो जैसे बदल hi गयी थी, वो बड़े हक़ से मुझे देख रही थी, उसे कोई परवाह नहीं थी की कोई क्या सोचेगा. संयम बैठती उस से पहले hi वो मेरे पीछे बेथ गयी.

संयम : इ इ, वह क्यों बैठी, ये मेरी जगह है.

वैस्वी : रोज तो तू बैठती है, आज में बेथ गयी.

संयम : नहीं, में hi वह बेठुंगी, तू पीछे हैट.

वैस्वी : में नहीं हटने वाली.

नाज़िआदिदी : ये क्या बच्चो की तरह लड़ रहे हो, एक दिन वो बेथ गयी तो क्या हो गया, तू पीछे बेथ जा. (उन्होंने संयम से कहा)

संयम : पर रोज़ में बैठती हु न दीदी.

नाज़िआदिदी : तो क्या हो गया, शिव तुम दोनों का दोस्त है, उसको भी तो चांस दे.

संयम नाराजगी से पीछे बेथ गयी, मेने गाड़ी चला दी, थोड़ी दूर जाने के बाद संयम में साइड से झुक कर देखा.

संयम : उसको ऐसे पकड़ के क्यों बैठी है, थोड़ा दूर बेथ.

वैस्वी : क्यों, तू रोज़ ऐसे hi तो बैठती है, मेने कुछ कहा तुजे.

संयम : वो मेरा दोस्त है, में बेथ सकती हु, तू नहीं.

वैस्वी : वो मेरा भी hai.(Usne दोस्त सब्द का इस्तेमाल नहीं किआ, और में समाज रहा था की वो क्यों ऐसा नहीं बोली, पर संयम ने ये नोटिस नहीं किआ)

संयम : वो पहले मेरा दोस्त है, क्या कहते हो शिव?

शिव : ये क्या लगा रक्खा है तुम दोनों ने, क्या बच्चो के जैसे लड़ रहे हो?

संयम :तो कहो न की तुम hi मेरे दोस्त हो, इस से पहले.

वैस्वी : है वो पहले तेरा hi दोस्त है, अब खुस? (शिव को पकड़ते हुए उसके कान में, मेरा तो बॉयफ्रेंड है, और मुस्कुराने लगी)
 
अपडेट 137

संयम की ामी अपना काम निपटा कर बैठी हुई थी. हसनभाई काम के सिलसिले में निकल चुके थे. नाज़िआ किचन में काम कर रही थी. अपना काम निपटा कर जब वो बहार निकली तो अपनी अम्मी को किसी सोच में खोये हुए पाया. वो सामने सोफे पर बैठी फिर भी उसकी अम्मी का ध्यान नहीं टुटा.

नाज़िआ : क्या हुआ ामी, क्या सोच रही हो?

ज़ोया : (चौंकते hue)Kkk कुछ नहीं beti.(Achanak हुई आवाज से चौंक गयी, वो शिव को याद कर रही थी, जो कुछ हुआ था वो उस ख्याल से बहार नहीं निकल पायी थी, वो अक्सर hi इस सोच में दुब जाती थी की जो हुआ वो गलत हुआ या सही, उसने एक माँ की और बीवी की मर्यादा को लांघा था, तो अक्सर ये जहँ में आ hi जाता था की वो गलत है, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए, पर वो उस पल के आनंद से भी इंकार नहीं कर शक्ति थी, ऐसा तो नहीं था की वो सेक्स की भूखी थी, पर अब उम्र के कारन या इतने साल होने जाने के कारण, कही न कही उसके पति का उसके प्रति आकर्षण नहीं रहा था, हलाकि वो अभी भी खूबसूरत थी, पर उम्र अपना काम करती है, उसकी बेतिया भी उसी की तरह खूबसूरत थी, और उसे नाज़ था अपनी बेटिओ पर, पर कही न कही वो अपने जीवन में उस एहसास को मिस कर रही थी, अक्सर वो अपने आपको इस बात से तसल्ली देती की अब उम्र ढल चुकी है, दो दो जवान बेतिया है, अब उसे इन सब से दूर रहना चाहिए, पर कभी कभी शरीर की जरुरत उसके मन मस्तिक पर हावी हो जाती थी. उस दिन अपनी hi बेटी को सेक्स करते देख उसकी भी भावनाये जाग गयी और वो ये कदम उठा बैठी थी, पर ज्यादा सोचने पर उसे लग रहा था की उसने गलत किआ है, और तो और, उसकी बेटी तक को पता चल गया था की उसकी अम्मी ने ऐसा काम किआ है, वो अपनी बेटी से पहले की तरह नहीं बात कर पति थी)

नाज़िआ : जूथ मत बोलो ामी, मेने देखा है की अक्सर आप किन्ही खयालो में खो जाती हो, और मेने ये भी नोटिस किआ है की ये सब उस दिन के बाद hi हो रहा है, में सही कह रही हु न? (ज़ोया क्या जवाब देती, क्यों की उसकी बेटी का अनुमान बिलकुल सही था, वो अपनी नज़ारे झुकाये बैठी रही, नाज़िआ उठ कर उनके पास बेथ गयी) क्या बात है ामी, मुझे नहीं बताओगी.

ज़ोया : (उसकी आँखों में आंसू छलक aaye)Nazia, मुज से गलती हो गयी, मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, में अपनी नई नज़रो में गिर गयी हु, में तेरी नज़रो में गिर गयी हु.

नाज़िआ : किसने कहा ामी, आप मेरे लिए वही प्यारी ामी हो, मेरे दिल में आप के लिए वही इज्जत है, आप ऐसा क्यों सोच रही हो?

ज़ोया : मुझे अपनी मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए थी.

नाज़िआ : देखो अम्मी, आप अपने दिल से ये बोझ उतर दो, पहले मुझे भी सोक लगा था, पर ठन्डे दिमाग से सोचने पर पाया की जरूर कोई न कोई वजह रही होगी, में आपको बरसो से जानती हु, बच्ची थी तब की बात अलग है पर बड़ी होने के बाद भी मेने आपका व्यव्हार देखा है, आप कभी गलत नहीं हो शक्ति, भले hi वो मेरे अब्बू है, पर मुझे ऐसा लगता है की गलती कही न कही अब्बू की hi होगी. शायद अब वो आपके साथ वो सब नहीं करते होंगे, है न? चाहे वजह जो भी रही हो, पर में आपको गलत नहीं मानती, आपने कोई गुनाह नहीं कर दिया, आपने कुछ पल अपनी खुशियों का ख्याल किआ, इसमें कुछ भी गलत नहीं है, अभी भी आपने अब्बू के लिए नास्ता बनाया, उनके साथ बेथ कर बाटे की, उनका ख्याल रक्खा, सब तो करती है आप, तो क्या आपको दो पल खुशिओ का भी अधिकार नहीं. में आपको एक बेटी की नज़र से नहीं, एक औरत की नज़र से देखती हु, और आप मुझे कही से भी गलत नहीं लगती, और में इस्सलिये नहीं कह रही की में खुद उस रस्ते पर चल रही हु, बल्कि में उस रस्ते पर इसीलिए हु, क्यों की में उसे गलत नहीं मानती. हमे भी हक़ है, हम किसी की जागीर नहीं है, हम भी एक अलग इंसान है, जीते जागते इंसान, जिनकी खुद की मर्ज़ी होती है, कुछ अरमान होते है. आप अपने दिल पर कोई बोझ मात रक्खो, मुझे सिर्फ ये बताओ, की अपने अपनी मर्ज़ी से सब किआ था न, उसने कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी. (ज़ोया ने सिर्फ न में शिर हिलाया) आपको मज़ा तो आया था न? (ऐसे सवाल से वो चौंकते हुए अपनी बेटी को देखने लगी, उसकी मुस्कराहट देख वो शर्मा गयी, नाज़िआ की मुस्कराहट भी चौड़ी थो गयी) आपका चेहरा hi बता रहा है, और वैसे भी में उसे जानती हु, वो कितना मज़ा देता है, उसके लिए तो में हर हद पर कर शक्ति हु. आप फालतू सब सोचना बंद कीजिये, में तो ये सोच कर परेशान हु की जब वो अबकी बार आएगा तो क्या होगा, वो मेरे पास आएगा की आपके पास.

ज़ोया : तुजे शर्म नहीं आती, मुझसे ऐसी बात करते हुए?

नाज़िआ : (अपनी ामी का गाल चूमते hue)Nahi आती, अब आप मुझे अपनी सहेली लगती हो अम्मी.

ज़ोया : (जेथे गुस्से के sath)Badi आयी सहेली वाली, मरूंगी तब पता चलेगा.

नाज़िआ : अगर मुझे हाथ भी लगाया तो में अपने दूसरेवाले सौहार से कह दूंगी, फिर देखने वो आपकी कैसे बजायेगा.

ज़ोया : ये कुछ ज्यादा hi हो रहा है नाज़िआ, अपनी ामी से कोई ऐसे बात करता है.

नाज़िआ : छोडो न ामी, मेरी सहेली बन जावा, पक्किवली, अब मुझे भी आपके जैसे सहेली की जरुरत है और आपको भी ज़ोयबेगम. क्यों की आगे चल कर आपको अगर उसके साथ कुछ करना है तो मुझे अपने कॉन्फिडेंस में लेना जरुरी है. वर्ण ऐसे तो आप कुछ भी नहीं कर पाओगी.

ज़ोया : मरूंगी में तुजे, और मुझे कुछ भी नहीं करना, जो हो गया वो हो गया, अब में दोबारा वो गलती नहीं करुँगी. एक hi गलती के लिए देख तो कितना सुना रही है, न बाबा में दोबारा कोई गलती नहीं करुँगी.

नाज़िआ : ये तो वक़्त hi बताएगा, क्यों की उस से दूर रहना आसान नहीं. (वो खिलखिलाती हुए अपने कमरे की और बढ़ गयी)

ज़ोया : (वो अपनी बेटी को हस्ते हुए देखने लगी, जब वो चली गयी तब वो दोबारा सोचमे पद गयी, और बाद बढ़ाने लगी) कामिनी कह तो सच hi रही है, पर नहीं, अब दोबारा नहीं, में अपने आपको और निचे नहीं गिरा सकती, पता नहीं wo(Shiv) मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा, में इतनी बड़ी हो कर भी उसके साथ वो सब कर बैठी, मुझे तो अपने आप पर hi गुस्सा आ रहा है.

हम सब रेसस्स में नास्ता करने बैठे थे, वो दोनों वाशरूम गयी थी तो में हर्ष और महेश पहले से बैठे थे, जब वो आयी तो संयम दौड़ कर मेरे साइड में बेथ गयी, मेरे बाजु में महेश बैठा हुआ था तो वैस्वी सामने बेथ गयी, उसका चेहरा बता रहा था की उसे अच्छा नहीं लगा, वही संयम के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी. सब ने अपना अपना टिफ़िन खोल दिया, मेने देखा की वैस्वी नज़ारे झुकाये खा रही थी, खा क्या रही थी, बस सबको दिखा रही थी की वो खा रही है. महेश कुछ बाते कर रहा था पर न मेरा ध्यान था न वैस्वी का. वो पराठे ले कर आयी थी.

शिव : वैस्वी, (उसने नज़ारे उठा कर मुझे देखा) एक टुकड़ा मुझे भी दो. (उसने फिर नज़ारे झुका ली, पर पराठा नहीं दिया, संयम ने भी देखा, की उसने पराठा नहीं दिया)

संयम : (मेरी और अपना टिफ़िन सरकते हुए) लो ये पोहे खाओ, स्वादिस्ट है, है न हर्ष?

हर्ष : है, बहोत मस्त है.

शिव : (में पोहे खाने लगा, फिर मेने kha)Vaiswi, दो न (उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, तभी मुझे याद aaya)Vaisu, दो न मुझे. (ये सुन कर hi उसके चेहरे पर जैसे हजारो बल्ब जगमगा उठे, उसका चेरा मुस्कुराने लगा, उसने चमकती आँखों से मुझे देखा, और मुस्कुराते हुए अपना पूरा टिफ़िन मेरी और खिसका दिया.

संयम : क्या कहा तूने? (वो आश्चर्य से पूछने लगी)

शिव : (पराठा कहते hue)Kya कहा? (में अनजान बना)

संयम : नहीं तूने कुछ कहा, है न महेश?

महेश : मुझे नहीं पता, शायद वो पराठा मांग रहा था.

संयम : वो तो मांग रहा था, पर उसने और भी कुछ कहा.

शिव : अब बाल की खाल मात निकल, और खाना खा, पता नहीं सुबह से सुरु हो गयी है, छोटी छोटी बातो पर झगड़ने लगी है.

संयम : में झगड़ने लगी हु, और छोटी छोटी बाते, में बेवकूफ नहीं हु समजे.

शिव : अरे खा न यार, क्यों बात को बढ़ा रही है, ले खा (उसने पराठा उसकी और बढ़ाया, संयम ने देखा की ये पराठा जो वो खा रहा था वो hi उसका जूठा पराठा था, उसने एक बार शिव को देखा, वो ज्यादा बात को बढ़ाना नहीं चाहती थी, उसने सोचा की बाद में बात करुँगी, उसने पराठे को अपने दन्त से काट लिए और खाने लगी, उसने देखा की शिव भी उसका जूठा पार्था खाने लगा, उसको बहोत अच्छा लगा, थोड़ी देर बाद रेसस्स ख़तम हुई, सब क्लास में चले गए)

संयम : (जब वो दोनों बेंच पर बैठी, संयम ने धीमी आवाज में kaha)Usne तुम्हे वैसु कहा था न?

वैस्वी : (उसकी और देख kar)Muje नहीं पता.

संयम : तुजे क्या लगता है, में बेहरी हु.

वैस्वी: कहा होगा, तो?

टीचर : संयम, बाटे बंद करो और किताब निकालो.

संयम : जी मैडम.

वो फिर कुछ न बोली, पर उसका शिर घूम रहा था, वो सोचने लगी की आखिर शिव नेउसे वैस्वी की जगह वैसु क्यों कहा, क्या वो दोनों इतना नजदीक आ गए है. वो अंदर hi अंदर जलने लगी. वो किसी भी कीमत पर शिव को खोना नहीं चाहती थी. जब छुट्टी हुई तो शिव वही स्कूटर के पास खड़ा था, वो दोनों वाशरूम से लौट रही थी, वो दौड़ी और स्कूटर पर बीचवाली सीट पर बेथ गयी. वैस्वी मुस्कुराने लगी, में भी मुस्कुराया.

संयम : तुम दोनों मुज पर है रहे हो न?

शिव : तुम हरकते hi ऐसी कर रही हो.

संयम : क्यों, मेने क्या गलत किआ, सुबह वो भी ऐसे पहले बेथ गयी थी, तब तो तुम नहीं हसे थे.

शिव: ठीक है बाबा, अब लड़ना बंद करो, और चलो. (हम तीनो बेथ गए और मेने स्कूटर बढ़ा दिया)

संयम : मुझे लगता है, की अब तुम मेरे दोस्त नहीं हो.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?

संयम : तुमने रेसस्स में वैस्वी को वैसु कहा था, अब ये मात कहना की मेने गलत सुना था.

शिव : कहा था, तो?

संयम : मतलब वो तुम्हारे करीब है, मुझसे भी ज्यादा, है न?

शिव : ऐसा कुछ भी नहीं है, मेने तो बस मज़ाक में कह दिया था, वो पराठे नहीं दे रही थी तो बस मेने उसे छेड़ा था. (वैस्वी भी संयम को पकड़ कर बैठी थी तो उसका हाथ शिव और संयम के बिच में था, उसने शिव की पीठ में अपने नाख़ून गढ़ाए, शिव ने झटका खाया, में सोचने लगा की कहा फास gaya)Tum hi मेरी पक्की दोस्त हो, वो तो बाद में आयी. (वैस्वी ने फिर नाख़ून मरे, शिव ने फिर जतका खाया) पर संयम, तुम्हे भी समझना होगा, वो भी तो अब दोस्त है, तो हम सब को साथ में मिल कर रहना चाहिए, है की नहीं.

संयम : हम्म्म्म. (हम संयम के घर के पास पहुंच गए, वैस्वी उतरी, संयम भी उतरी, में भी उतरने लगा.)

वैस्वी : तुम बैठे रहो, में छोड़ देती हु तुम्हे.

संयम : तुम्हे रोज़ रोज़ उस और कोनसा काम होता है?

वैस्वी : मुझे कोई काम नहीं है आज, में बस इससे छोड़ने जा रही हु.

संयम : क्यों?

वैस्वी : (स्कूटर पर बैठते hue)Kyu क्या, अब वो भी तो दोस्त है, तो वो चल कर जाये अच्छा लगता है, मुझे कहा उसे उठा कर ले जाना है, पांच मिनट देर से जाउंगी. तुम चलो शिव, Bye (संयम से कहा)

संयम : Bye (वो दोनों को जाते हुए देख रही थी, उसे अच्छा नहीं लग रहा था पर वो इसमें कुछ नहीं कर शक्ति थी, वो ऐसे hi मायूस घर पहुंची, नाज़िआ दीदी ने दरवाजा खोला, वो बिना उनकी और देखे अंदर दाखिल हो गयी और ऊपर चली गयी, जब थोड़ी देर बाद भी वो खाने के लिए नहीं उतरी तो नाज़िआ उसके कमरे में गयी)

नाज़िआ : खाना नहीं खाना क्या?

संयम : नहीं खाना (उसने झुंझलाते हुए कहा)

नाज़िआ : क्या हुआ, क्यों नहीं खाना?

संयम : मेने कहा न, नहीं खाना, आप जाओ.

नाज़िआ : (उसका शिर सहलाते hue)Kya हुआ संयम, मुझे नहीं बताएगी.

संयम : कुछ नहीं हुआ आप, मुझे अच्छा नहीं लग रहा, बस.

नाज़िआ : किसी से लड़ाई हुई? (वो कुछ न boli)Shiv से लड़ाई हुई (वो फिर भी कुछ न boli)Thaher, में उसको फ़ोन लगाती हु.

संयम : उसको फ़ोन करने की कोई जरुरत नहीं है, अब वो मेरा दोस्त नहीं है.

नाज़िआ : क्या कह रही है तू, ऐसा क्या हो गया?

संयम : वो अब वैस्वी का दोस्त है, मेरा नहीं.

नाज़िआ : क्या, शिव ने ऐसा कहा?

संयम : नहीं.

नाज़िआ : तो फिर, अपने आप hi सब सोच लिया. मुझे बता क्या हुआ है?

संयम : मुझे लगता है की वो और वैस्वी ज्यादा क्लोज हो गए है.

नाज़िआ : ऐसा नहीं है, वो भी उसकी दोस्त है, और तू भी, और शिव को में जानती हु, वो ऐसा नहीं करेगा. और अगर उन दोनों की अच्छी बन रही है तो भी उसने तुजसे थोड़ी न दोस्ती ख़तम कर्ली है.

संयम : नहीं, पर मुझे अच्छा नहीं लग रहा.

नाज़िआ : पागल, ऐसा होता है, हम लड़कीओ को ये आदत होती है, सब कुछ हमें हमारे लिए hi चाहिए, पर कभी कभी सबकुछ नहीं मिलता, उसे बाँटना भी पड़ता है. और ऐसा तो नहीं हो सकता की कोई किसी एक का hi दोस्त बन कर रहे, कई दोस्त होते है, आज तुजे ऐसा लग रहा है की वो उसे इम्पोर्टेंस देता है, कल उसे ऐसा लगेगा की वो तुम्हे इम्पोर्टेस दे रहा है. जेएलओसी होती है कभी कभी, पर उसके साथ जगहद कर तू अपना रिस्ता मत ख़राब कर, सामजी. चल अब खा ले, सब ठीक हो जायेगा. (बेहला फुसला कर वो उसे खाने के लिए ले गयी)

वैस्वी : (जैसे hi वो दोनों निकले वैस्वी ने शिव की कमर में अपने नाख़ून घडते hue)Wo ज्यादा खास है तुम्हारे लिए, में नहीं हु है.

शिव : ोुछ!, तुम्हारे नाख़ून लग रहा है. उसे बुरा लग रहा था तो मेने कह दिया.

वैस्वी : और मुझे बुरा लगेगा उसका क्या?

शिव : अगर तुम दोनों ऐसे hi जगद्ति रही न तो तुम दोनों से hi बात नहीं करूँगा. (उसकी बात का असर हुआ और वैस्वी ने शिव को छोड़ दिया)

वैस्वी : मुझसे क्यों बात नहीं करोगे, मेने क्या किआ?

शिव : वो पहले से मेरी दोस्त है, अचानक तुम्हे ज्यादा इम्पोर्टेंस दूंगा तो उसे बुरा तो लगेगा.

वैस्वी : दोनों को बुरा न लगे इस लिए दोने के साथ रहोगे तुम?

शिव : तुम दोनों दोस्त हो तो दोनों के साथ hi रहूँगा न.

वैस्वी : में तेरी दोस्त नहीं हु समजे, में तेरी गर्लफ्रेंड हु, तो मेरा हक़ ज्यादा है.

शिव : (हम घर पर पहुंच गए the)Ye बच्चो जैसी हरकते बंद करो तुम दोनों, चलो bye.

वैस्वी : Sorry(Usne कान पकड़ते हुए कहा) (आज फिर से रंजन और विणा आ रही थी, उनकी नज़र जैसे hi शिव पर पड़ी, रंजन ने विणा को खिंच कर साइड में कर दिया, और दोनों छुप कर देखने लगी)

शिव : कोई बात नहीं, bye.

वैस्वी : क्या bye, अपनी गर्लफ्रेंड को कोई ऐसे bye करता है?

शिव : तुम्हारे शिर से ये फिल्मो का बहुत उतरो, ये फिल्म नहीं है, अगर किसी ने देख लिए तब पता चलेगा.

वैस्वी : (आसपास देखते hue)Yaha कोण है, और में वो लाम्बीवली किश थोड़ी न मांग रही हु, छोटीवाली भी chalegi(Wo नटखट सी मुस्कान के साथ बोली)

शिव : (मेने मुस्कुराते हुए, उसके होठो पर हलकी सी किश ki)Bye.

वैस्वी : (उसने भी फिर से सामने किश ki)Bye. (एक दो बार पलट कर देखते हुए वो चली गयी, में भी अंदर चला गया)

विणा : ये तो वो hi लड़की है.

रंजन : है, उस दिन भी ये दोनों किश कर रहे थे.

विणा : मेने नहीं सोचा था की शिव ऐसा होगा, वो तुम्हे धोखा दे रहा है.

रंजन : (वो दोनों चलते हुए घर की और जाने लगी) क्यों, अगर वो तुम्हारे साथ करता तो धोखा नहीं होता. (विणा सोचमे पद गयी)

विणा : तुजे बुरा नहीं लग रहा.

रंजन : वैसे तो बुरा लग्न चाहिए, पर तू जानती है की वो कितना हंसों है, उसके पीछे कई लड़कीअ पड़ी रहती होगी, वो मुझे अच्छे से प्यार करता है, मेरे लिए वही काफी है. और भी से क्या सोचना. उसको भी मज़े करने दे. (दोनों ऐसे hi बाते करते हुए घर पहुंच गयी)

खाना खाने के बाद जब में हाथ धो रहा था, रंजन मेरे करीब आयी, उसका भी खाना ख़तम हो चुकता तो वो भी हाथ धोने आयी थी.

रंजन : बड़ी किश बीस हो रही है, वो भी खुले आम.

शिव : (मेने उसकी और dekha)Kya बोल रही है?

रंजन : वो स्कूल वाली लड़की को जब तू किश कर रहा था न, वो सब देखा मेने.

शिव : (में उलझन से उसे देखने लगा)

रंजन : थोड़ा ध्यान रक्खा कर, ऐसे सड़क पर कोण किश करता है.

शिव : वो यार वो (में क्या संजो मेरी समाजमे नहीं आ रहा था)

रंजन : जस्ट चिल यार, मेने तो बस इस लिए कहा की आज मेने देखा है, कल कोई और देखेगा. (में महसूस कर रहा था की उसको बुरा लग रहा है)

शिव : सॉरी यार, मेने उसे कहा भी पर वो मान नहीं रही थी.

रंजन : अगर इतनी जरुरत थी तो मुझे कर लेता, मेने किसी चीज के लिए तुजे मन किआ है क्या?

शिव : (में उसके कहने का मतलब समाज रहा था) जैसा तू सोच रही है, वैसा नहीं है यार, में उस चीज के लिए वो सब नहीं कर रहा था. तुजे क्या लगता है, मेने हवस पूरी करने की लिए तेरे साथ ये सब किआ है? (वो मेरी और देख रही थी) तू जानती है सब कुछ, अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता की कोई क्या सोचेगा इस्सलिये में तुमसे ये बात कह रहा हु, में सिर्फ और सिर्फ लतादिदी के साथ hi ये सम्बन्ध बनाना चाहता था, अगर सिर्फ सेक्स की बात होती तो वो मेरे लिए काफी है, में रोज़ उनके साथ कर शक्ति हु, और वो भी मेरे साथ खुस रहती, है की नहीं, और अगर किसी को कोई आपत्ति होती तो में उन्हें ले कर कही चला जाता, कर शक्ति था की नहीं? (वो मुझे देख रही थी) बोल कुछ, में सही कह रहा हु की नहीं? (उसने सिर्फ है में शिर हिलाया) तो फिर मेने तेरे साथ क्यों किआ? क्यों की मुझे लगा की तू भी मुझसे प्यार करती hai,me तुजे निराश नहीं कर शक्ति था, ऐसा कहना भी गलत hi होगा की मेने सिर्फ तुम पर तरस खा कर तुम्हारे साथ रिलेशन बनाये, तू भी मुझे अच्छी hi लगती है, तो मेने तेरे साथ वैसे सम्बन्ध बना लिए, वैसे hi सरितादिदी और गायत्रीदिदी ने भी मुझसे सम्बन्ध बनाये, में सबको खुस रखने का प्रयत्न करता हु, है की नहीं (वो लगातार मुझे देख रही थी) न मेने तेरे साथ कोई जबरदस्ती की न और किसी के साथ, वैसे भी हम अनाथो को प्यार काम hi नशीब होता है, अगर कोई प्यार करता है तो में भी उसको प्यार देता हु, मुझे नहीं लगता की में कुछ गलत कर रहा हु.

सरितादिदी : तुम दोनों क्या गुसुर पुसुर कर रहे हो?

शिव : नहीं कुछ नहीं दीदी, हम तो बस ऐसे hi बात कर रहे थे.

सरितादिदी : तुम्हारे चेहरे देख कर तो नहीं लग रहा की तुम दोनों ऐसे hi बात कर रहे हो, कोई परेशानी है क्या? तू बता रंजन, कुछ किआ क्या इसने?

रंजन : नहीं दीदी, सच में, हम ऐसे hi बात कर रहे थे, स्कूल और पढ़ाई की.

सरितादिदी : स्कूल में कोई परेशानी है क्या?

रंजन : नहीं दीदी, कोई परेशानी नहीं है, और वैसे भी ये हैना, सबको सम्भालनेवाला, ये सबकुछ संभल लेगा, हैना शिव? (में मुस्कुराया, और वह से चला गया)

सरितादिदी : कोई गंभीर बात तो नहीं थी न?

रंजन : नहीं दीदी, ऐसा वैसा कुछ नहीं था, हम सच में ऐसे hi बात कर रहे थे.

सरितादिदी : ठीक है, अगर कोई बात हो तो मुझे भी बता शक्ति हो.

रंजन : आप सब hi तो मेरे अपने हो, और किस को बताउंगी, ऐसी वैसी कोई बात नहीं है.

में वह से निकल कर सोचने लगा, कल भार्गवी आज रंजन. दूसरे किसी के साथ सम्बन्ध होने से इनको परेशानी है, ये सब इतना भी सरल नहीं है, कभी कभी लगता है में सबके साथ धोखा कर रहा हु, अब क्या करू वो भी समाज नहीं आ रहा. में बहार निकला तो मेरी नज़र बाइक पर पड़ी, जो में कल ले आया था, मेने सोचा की वो लौटा देता हु. मेने भार्गवी मैडम को फ़ोन किआ. थोड़ी देर रिंग जाने के बाद उन्होंने फ़ोन उठाया.

भार्गवी : है शिव?

शिव : सॉरी, डिस्टर्ब तो नहीं किआ?

भार्गवी : नहीं, ऐसी कोई बात नहीं, बोलो?

शिव : वो बाइक लोटनी थी तो फ़ोन किआ, क्या घर रख du(Mene ये सोच कर कहा की वो पुलिस स्टेशन में होंगी)

भार्गवी : में घर पर hi हु, और मुझे उसकी जरुरत नहीं है, अपने पास रखनी है तो रख शक्ति हो.

शिव : घर पर? पुलिस स्टेऑन नहीं गयी?

भार्गवी : गयी थी, सुबह सब निपटा कर आधे दिन की छुट्टी ले कर आयी हु. इतना दिनों से थक गयी थी तो सोचा थोड़ा आराम कर लू.

शिव : ठीक है, में आता हु.

भार्गवी : मेने कहा न, बाइक की कोई जल्दी नहीं है.

शिव : नहीं, मुझे आपसे बात भी करनी है.

भार्गवी : ठीक है, आ जाओ.

निर्मला देवी : बहु, तुम कब जानेवाली हो?

बिना : कल मजी, कल तक की छुट्टी ली थी, परसो से स्कूल जाना है, क्यों पूछ रही थी आप?

निर्मलादेवी : हम भी आनेवाले है, तेरे ससुरजी और कामनादिदी भी आनेवाले है.

बिना : वो क्यों मजी?

निर्मलादेवी : औसतन के लिए सब को बुलाना है ऐसा बाबाजी ने कहा था, तेरे सहर में तेरी एक नानन्द रहती है, उस से मिलना है.

बिना : मेरे सहर में, कभी इस बात का झिकर नहीं हुआ.

निर्मलादेवी : वो उदयसिंह भाईसाहब की लड़की है, बहार पढ़ने को भेजा था, वह किसी से प्रेम विवाह कर लिया था, तो भाईसाहब ने रिस्ता तोड़ दिया. ये सब तेरी शादी के पहले की बात है, हमने तो कभी कोई खबर नहीं ली थी, पर अब जब ये संकट आया है, तो फिर तेरे ससुरजी ने खोज खबर निकलवाई तो पता चला की वो तुम्हारे सहेरे में hi है, तो मिलना पड़ेगा.

बिना : कोण है वो माजी?

निर्मलादेवी : तू मिलेगी तो पता चल जायेगा, वैसे भी तू कहा जानती होंगी, में तेरे ससुर को कह देती हु की कल सुबह जल्दी निकल जायेंगे, दोपहर तक पहुंच जायेंगे, तो मिल भी लेंगे, ताकि शाम तक वापस निकल शेक.

बिना : ऐसा क्यों कह रही है मजी, रात आप मेरे घर रुक जाइएगा, सुबह आराम से निकल न.

निर्मलादेवी : उनसे बात करती हु, देखते है क्या प्रोग्रमम बनता है. ममता भी आ जा रही है.

बिना : है, हमारी बात हुई थी. (हिचकिचाते हुए) माजी, एक बात पुछु, अगर बुरा न मने तो?

निर्मलादेवी : पूछो न बीटा, इसमें पूछनेवाली क्या बात है.

बिना : हमारी फॅमिली में ऐसे कितने लोग है जिन्हे में नहीं जानती, मेरा मतलब है की ऐसे लोग जो हमारे सबसे करीबी है.

निर्मलादेवी : (उसकी और प्यार से देखते hue)Tu किनको जानती है?

बिना : हमारा घर है, और जहा तक मुझे पता है, बड़े चाचाजी उनका एक बीटा, पृथ्वीभाईसहब, पद्मा, अबतक जो मुझे पता था की उनकी एक बेटी है कृपाली, अब आप बता रही है की दूसरी भी बेटी है. और मान्सिबुआ, उनकी दो बेश्या अंजलि और पारवती.

निर्मलादेवी : इनके अलावा तुम्हारे एक और चाचा ससुर है, योगेंद्र चाचा और चन्द्रिका चची, तुम्हारे पापा को तो पता है सब, और उनका एक बीटा था शिवांश.

बिना : था मतलब, ये तीनो अब नहीं है?

निर्मलादेवी : योगेंद्र और चन्द्रिका तो जिन्दा है, पर न के बराबर, उनका बीटा शिवांश अब इस दुनियामे नहीं है. जिसकी वजह से तो ये सब हो रहा है.

चंद्रभान : (तभी आवाज आती hai)Kaha हो भाग्यवान?

निर्मलादेवी : तेरे ससुर आ गए, तू खाना लगा. (जोर se)Ayiiiiiiii.

बिना : (माजी तो चली गयी पर मेरे मान में कई सवाल छोड़ गयी, उन्होंने जो बताया था वो मुझे इतने सालो में पता नहीं चला था, न कभी मेरे घर में इस तरह की बात हुई थी, शायद मेरे पापा ने मुझे इस लिए नहीं बताया होगा क्यों की maa-baap के लिए तो हम बच्चे hi होते है, उन्हें नहीं लगा होगा की ये सब मेरे जान ने की जरुरत है, और सही भी था, मुझे क्या लेना देना था, पर जब अब सबके जीवन पर इसका प्रभाव पद रहा था तो ये सब हो रहा था, अब पूरा परिवार इकठ्ठा होनेवाला था, तभी बहार से माजी की आवाज आई तो में खाना लगाने लगी.)
 
अपडेट 138

में भार्गवी मैडम के घर पंहुचा, मेने बाइक पार्क की और अंदर चला गया. मैडम सोफे पर बैठी हुई थी और कोई औरत थी जो वह पोछा लगा रही थी. मैडम ने हाफ पंत और t-shirt पहन रक्खा था, उनको ऐसे देख कर hi मेरी धड़कने बढ़ गयी, उनकी गोरी गोरी लम्बी टंगे देख hi मेरी हालत ख़राब होने लगी, मेने उस औरत की और देखा तो वो अपना काम कर रही थी.

भार्गवी: आओ शिव, (उनकी आवाज सुन कर मेने उनकी और देखा, वो मुस्कुरा रही थी, में अपनी नज़ारे झुकाये अंदर चला गया, और सोफे पर बेथ गया.

औरत : पानी लौ बीबीजी?

भार्गवी : नहीं, आप पोछा कीजिये, में ले आती हु. (वो उठी और अंदर गयी, मेरी निगाहे उनकी मटकती गांड पर टिक गयी, सच में उनका हुस्न ला जवाब था. मेने उस औरत की और देखा तो वो अपने काम में hi थी, मैडम अंदर चली गयी, जब वो वापस आयी तो मेने अपनी निगाहो को संभाला और में उनके चेहरे को hi देख रहा था, वो मुस्कुरायी, मेने पानी लिया और पिया, वो गिलास वही रख कर बेथ गयी) है कहो, क्या कहना था.

शिव : (मेने उस औरत की और देखा) कुछ नहीं, में तो बस बाइक देने आया था.

भार्गवी : (वो समाज गयी की वो अकेलेमें बात करना चाहता hai)Chalo, बहार लॉन में बैठते है. (वो उठी और बहार जाने लगी, में भी उनके पीछे पीछे चला गया, वह लकड़ी का बना सोफे रक्खा हुआ था, वो बाड़ेवाले सोफे पर बैठी, उनकी बगल में जगह थी, पर वो औरत अंदर थी तो में अलग कुर्शी पर hi बैठा) वह क्यों बैठे, यहाँ बैठो.

शिव : नहीं में ठीक हु.

भार्गवी : अगर इतना दूर बैठोगे तो मुझे जोर से बात करनी पड़ेगी, समाज रहे हो न. (में समाज गया की वो जोर से बात करना नहीं चाहती ताकि वो औरत सुन ले, में उठा और उनके नजदीक बैठा पर दुरी बना कर, वो मुस्कुरायी) अच्छा डिस्टेंस बनके रखना है.

शिव : जरुरी है, उसकी दो वजह है. (अब हम दोनों आहिस्ता से बोल रहे थे ताकि हम दोनों hi सुन सके)

भार्गवी : दो वजह? वो क्या है?

शिव : एक तो आप मुझसे नाराज़ है, और दूसरी की अआप्की समाज में एक इज्जत है, में नहीं चाहता की मेरी वजह से कोई आप पर ऊँगली उठाये.

भार्गवी : (उसको प्यार से देखते हुए)

शिव : अब ऐसे क्यों देख रहे हो?

भार्गवी : तुम्हे समझने की कोशिस कर रही हु.

शिव : अगर समाज जाओ तो मुझे भी समजा देना की में कैसा हु (हम दोनों मुस्कुराये)

भार्गवी : तुमने जूही के बारे में मुझसे छुपाया क्यों?

शिव : मेने छुपाया? में क्यों छुपाऊंगा.

भार्गवी : हमारे बिच जो कुछ हुआ, उसके बाद तो तुम्हे बताना चाहिए था न, की तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी है.

शिव : अच्छा, क्यों बताना चाहिए था?

भार्गवी : क्यों क्या, मेरे साथ भी रिस्ता रख रहे हो और उसके साथ भी, तुम्हे ये गलत नहीं लगता.

शिव : मेरा उसकेसाथ रिस्ता, आपसे भी पहले का है.

भार्गवी : (उसको देखते hue)Agar ऐसा था तो फिर मेरे साथ क्यों रिस्ता बनाया.

शिव : में बता दूंगा, पर पहले आप मुझे बताइये, आपने मेरे साथ वैसे सम्बन्ध क्यों बनाया?

भार्गवी : मेने बनाया? तुमने बनाया.

शिव : जैसे की आप कोई दूध पीती बच्ची हो (भार्गवी ने घर कर देखा) अब ऐसे मात घुरिये, मुझे बताइये की आपने क्यों रिस्ता बनाया?

भार्गवी : मेरे पे इल्जाम मत लगाओ, तुम ने hi वो सब किआ था.

शिव : उस बारे में हमारी बात हो चुकी है, वो गलती से हुआ था, मेने बताया भी था.

भार्गवी : वो में बाहेक गयी थी.

शिव : मतलब आपको वो सब करना था.

भार्गवी : ारी, तुम तो मुझे hi दोषी बना रहे हो.

शिव : में दोषी नहीं बना रहा, में बता रहा हु की अगर मेने गलती की है तो अपने भी की है, जो भी हुआ वो हम दोनों की सहमति से हुआ था, मेने कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी.

भार्गवी : में मानती हु, पर अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड थी तो फिर तुम्हे मेरे साथ वो सब नहीं करना था.

शिव : शायद सही कह रही है आप, पर उस वक़्त मुझे लगा था की आपको जरुरत है, और ये मत कहियेगा की में जूथ बोल रहा हु, मुझे जो भी कहिये पर कमसे काम अपने आपसे तो जूथ मात hi बोलना.

भार्गवी : (उन्होंने बेहद नरम आवाज में kaha)Ha थी मुझे जरुरत, पर ऐसी यही जैसी तुम समाज रहे हो, मुझे लगा था की तुम मुझे पसंद करते हो, मेरी और आकर्षित हो.

शिव : वो तो में अभी भी हु, और आपको पसंद न करे वो तो बेवकूफ hi होगा.

भार्गवी : पर अगर जूही से तुम्हारा रिस्ता था तो फिर तुम्हे आगे नहीं बढ़ना चाहिए था.

शिव : उस वक़्त मुझे आपकी खुसी दिख रही थी, आपकी जानकारी के लिए बता दू की मेरे और जूही के बीच शारीरिक सम्बंद अभी उस हद तक नहीं पहुंचे.

भार्गवी : मतलब क्या है तुम्हारा, वो करने नहीं दे रही थी तो मेरे साथ कर लिया.

शिव : (में मुस्कुराया) मेरे कई लोगो के साथ शारीरिक सम्बन्ध है.

भार्गवी : ये क्या बकवास कर रहे हो तुम, मतलब तुम सबका इस्तेमाल करते हो?

शिव : आपको लगा था की मेने आपका इस्तेमाल किआ, आप सेक्स और प्यार दो no का मतलब तो अच्छे से समझती होगी, क्या आपको लगा की हमारा रिसा सेक्स का है?

भार्गवी : अगर ऐसा होता तो मुझे इतना दुःख नहीं होता शिव, पर कही न कही मुझे लगा था की हमारे बिच और भी कुछ है, इसीलिए में हर्ट हुई हु.

शिव : अगर मेने आपको हर्ट किआ है तो में माफ़ी चाहता हु, पर मेरा इरादा वैसा बिलकुल नहीं था, और अगर आपको अभी भी लगता है की में गलत हु तो आप मुझसे रिस्ता तोड़ शक्ति है.

भार्गवी : (आँखों में आंसू छलक aaye)Iska मतलब तो यही हुआ न की तुम्हे मुझसे कोई लगाव नहीं है?

शिव : मेने ऐसा कब कहा?

भार्गवी : अगर लगाव होता तो तुम मौसे दूर जाने की बात करते?

शिव : में आपसे दूर जाने की बात नहीं कर रहा, पर जैसा मेने कहा की मेरी जिंदगी में और भी लोग है, और यकीं मानिये, में किसी को नहीं छोड़ सकता.

भार्गवी : तो सबको साथ रक्खो गए? (उसने ासु पोछते हुए कहा)

शिव : वो मुझे नहीं पता, पर में क्या करू वो भी समाज में नहीं आ रहा.

भार्गवी : ये सब तुम मुझे पहले भी बता शक्ति थे न.

शिव : क्या बताता की सॉरी, मेरे सम्बन्ध और लोगो के साथ भी है तो आप मेरे साथ सेक्स के बारेमे मात सोचिये. (रट रट वो मुस्कुरायी) क्या आपको पता था की हमारे बिच ये सब हो जायेगा, वो पल hi ऐसा था की अचानक हो गया सब. और मेने या आपने कोई प्लान किआ था? चलो अब तो पता चल गया है आपको, तो अब आप मेरे और आपको भविष्य के बारे में क्या देखती है.

भार्गवी : (अपनी नज़ारे झुका के) वो hi तो, एक तो इतने छोटे हो तुम, पता नहीं क्या हो गया था मुझे जो तेरे साथ hi ये सब कर बैठी, अकाल पर पत्थर पद गए थे (मेरी और देख कर वो मुस्कुरायी) तुम कह रहे हो की जूही के अलावा भी और है, कोण कोण है?

शिव : वो में नहीं बता शक्ति.

भार्गवी : क्यों?

शिव : अगर में आपके बारे में उनको बताऊ तो?

भार्गवी : (एक पल शिव की और देख कर सोचती रही, फिर boli)Bata सकते हो.

शिव : क्या सच में? आपको ऐसा नहीं लगेगा की मेने आपकी इज्जत उछली?

भार्गवी : यही तो तुम गलती कर रहे हो, जो चोरी छुपी किआ जाये वही पाप होता है, अगर में सिर्फ सेक्स के लिए hi सोचती तो में चाहती की तुम किसी को न बताओ, क्यों की उस से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, उस वक़्त में इतना hi सोचती की मेरी जरुरत तो पूरी हो रही है न, और शायद ऐसे लोग दुसरो के साथ सेक्स करने से भी नहीं चूकते, तू नहीं तो और सही, ये रवैया होता है उनका. पर अगर में तुम्हारी जिंदगी से जुडी हु तो तुम्हारी जिंदगी से जुडी हुई दूसरी लड़कीओ को भी तो पता होना चाहिए की वो जिसके साथ जुडी हुई है उस से कोई और भी जुड़ा हुआ है. क्यों की अगर बाद में उन्हें पता चलेगा तो उन्हें दुःख hi होगा. अगर तुम चाहते हो की तुम्हारा रिस्ता लम्बा चले तो तुम्हे अपने रिश्ते के प्रति ईमानदार तो होना hi चाहिए.

और जैसा तुमने कहा की अभी तक तुमने जूही के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाये तो उसे पहले ये बताओ की तुम किनके साथ जुड़े हुए हो, फिर से फैसला करने दो की वो क्या चाहती है.

शिव : पर अगर वो फिर भी जुड़ना छाए तो?

भार्गवी : तो न तुम कुछ कर शक्ति हो न में. पर जैसे तुमने उसे बताया वैसे hi तुम्हे हम सबको भी बताना चाहिए.

शिव : आप जैसा कह रही है वो सुन ने में तो अच्छा लग रहा है पर अगर सोचो किसी को ये बात पसंद नहीं आयी, और हमारे सबके रिश्ते के बारे में जान ने के बाद उसने सबको बता दिया तो, बदनामी तो फिर भी होगी.

भार्गवी : ये सब बखेड़ा खड़ा करने से पहले ये सब सोचना था, अब अगर सबसे रिस्ता रखने का दम दिखाया है तो उसे निभाने का और सबके सामने अपनाने का भी दम रक्खो. (उनकी बात सुन कर में इतना रिलैक्स फील कर रहा था की मेने उन्हें गले लगा लिया और उनके गाल पर किश कर दिया, उन्होंने मुझे दन्त ते हुए दूर dhakela)Ye क्या कर रहे हो, दूर हटो, वो है अभी घर में.

शिव : अभी तो कह रही थी की सबके सामने अपनाने का दम रक्खो.

भार्गवी : मेने ये कहा की अगर ऐसा होता है तब, तुम खुद ढिंढोरा मात पिता, और वैसे भी तुम छह कर भी किसी को अपना नहीं शक्ति.

शिव : वो क्यों?

भार्गवी : क्यों की अभी तुम इक्कीस के नहीं हो, हमारा संविधान तुम्हे इजाजत नहीं देता की तुम किसी को अपनाओ. तो अभी सबसे छुपा कर hi रक्खो, उसके बाद सब सोचेंगे.

शिव : वो कब जानेवाली है? (मेने उस औरत के बारे में पूछा)

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए puchha)Wo क्यों?

शिव : मुझे आपको किश करना है.

भार्गवी : मेने अभी तुम्हे माफ़ नहीं किआ है, मेने सिर्फ बाते शेयर की है, अभी तक न में ये जानती हु की वो सब कोण है, न वो जानती है की में भी उनकी तरह तुम्हारा शिकार हुई हु. (उन्होंने मुस्कुराते हुए जिस अंदाज में कहा में भी मुस्कुराया) एक बात तो पक्की है, एक नंबर के कमीने हो तुम, भोली भली लड़कीओ का फायदा उठाते हो.

शिव : है जैसे मेने आपका फायदा उठा लिया, आपके साथ जबरदस्ती की.

भार्गवी : है गलती तो मेरी भी है, भगवन ने इतनी भोली शकल जो दी है तुम्हे, कोई नहीं सोच सकती की उसके पीछे तुम्हारा ये रूप है.

शिव : (उनका हाथ पकड़ kar)Me आप को सबकुछ बताऊंगा, पर जैसे आपने इजाजत दी है की में उन्हें आपके बारेमे बता शक्ति हु, वैसे hi मुझे उनकी भी इजाजत लेनी पड़ेगी.

भार्गवी : तुम्हे लगता है ये सब इतना आसान है, मार पड़नेवाली है तुम्हे समाज लो.

शिव : हो सकता है, पर मुझे पता है, मेने किसी का इस्तेमाल नहीं किआ है, न मेने किसी का बुरा चाहा है, फिर भी अगर वो नाराज है तो में सजा भी भुगतने को तैयार हु. शुरुआत में जूही से hi करता हु, (में खड़ा हो गया) वैसे भी आज मुझे उस से मिलने जाना है. में फिरसे बाइक ले जाता हु, वैसे भी अब ये मेरी hi है. स्टेडियम के बाद शाम को आता हु. Bye, लव यू.

भार्गवी : (उन्होंने मुस्कुरा कर kaha)Ab ज्यादा मक्खन मात लगा, Bye.

मेरे दिमाग में वही सब चल रहा था, मुझे लगा की मुझे सबको सब कुछ बता देना चाहिए, फिर उनका फैसला है की वो क्या सोचती है. में जूही के घर पंहुचा, बेल बजायी तो थोड़ी देर बाद उसने दरवाजा खोला, वो भी शार्ट पहने हुई थी और ऊपर खुला शर्ट पहना हुआ था, उसके चेहरे से hi लग रहा था की वो सो रही थी.

शिव : सॉरी, डिस्टर्ब तो नहीं किआ?

जूही : (मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींचते hue)Bada आया सोररीवाला, अंदर आ. (में अंदर गया, उसने दरवाजा बंद कर diya)Betho में पानी लती हु.

शिव : रहने दो, अभी नहीं चाहिए.

जूही : (हम दोनों एक hi सोफे पर बेथ gaye)Akhir आ hi गए, मुझे लगा था की आज भी कोई बहाना बना डोज.

शिव : मेने प्रॉमिस जो किआ था, और तुम्हे कब लगा की में बहाने बनता हु, जो होता है वो hi तोबाटा देता हु.

जूही : कितने दिन बाद हम ऐसे मिल रहे है न. (उसने मेरी आँखों में देख कर मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो, रोज़ तो मिलते है. और रोज़ तुम मुझे किश भी करती हो, करती हो की नहीं.

जूही : है, पर वो सब कुछ पालो के लिए होता है, ऐसे इत्मीनान से कहा समय मिलता है.

शिव : न तुम रोज़ इतना समय निकल शक्ति तो न में, क्यों की हम दोनों का लक्ष्य है, और हमे उसके लिए अभी बहोत म्हणत भी करनी है. सच कहता हु, तुम मेरी जिंदगी में आयी तब से जैसे मेरी जिंदगी बदल गयी, मेने कई बार कहा भी है पर फिर भी कहता हु, थैंक यू.

जूही : वो तो में भी कह शक्ति हु, क्यों की तुम्हारे आने से hi में फिर से किसी मंजिल की और बढ़ रही हु, तो तुम्हारा भी थैंक यू. (हम दोनों मुस्कुराये, उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा) ये सूखा सूखा थैंक यू अच्छा नहीं लगा (वो जिस ऐडा से कहे रही थी में उसकी बात समाज रहा था, में मुस्कुराया और उसकी तरफ खिसका और उसको किश करने लगा,





वो तो जैसे तैयार hi थी, वो भी मुझे किश करने लगी, हम दोनों उस एहसास में डूबने लगे, दोनों एक दूसरे के होठो का रास निचोड़ने लगे, जुबान से जुबान टकराने लगी, दोनों की सांसे फूलने लगी, मेने उसको सोफे पर लेता दिया और उसको किश करने लगा,





वो पूरी तरह से लिपट कर मेरे होठो को चूस रही थी, हम दोनों किस में दुब गए थे, तभी मुझे याद आया की में यहाँ क्यों आया हु, मेने किश तोड़ी, उसको और किश करनी थी, वो मुझे खींचने लगी, मेने उसे रोक दिया और सीधा हो कर बेथ गया, उसे कुछ समाज नहीं आया, उसके चेहरे पर कई सवाल एक साथ उभर आये. उसने भी बैठते हुए पूछा) क्या हुआ, रुक क्यों गए.

शिव : तुम जानती हो तुम मेरी जिंदगी में कितनी इम्पोर्टेन्ट हो.

जूही : (थोड़ा चिढ़ते hue)Muje सब पता है, अब फिर से सुरु मत हो जाओ, कितना अच्छा मूड बन रहा था और तुम्हे ये सब फिर से बाटे करनी है.

शिव : ये जरुरी है जूही, हम दोनों की जिंदगी के लिए जरुरी है.

जूही : (थोड़ा रूखे स्वर se)Kya जरुरी है?

शिव : यही की तुम मेरे बारे में जानो.

जूही : में सब जानती हु, जितना जान न था वो मेने जान लिया है.

शिव : क्या जानती हो?

जूही : मेने कहा न, जो मेरे लिए जरुरी है वो सब.

शिव : फिर भी, बताओ क्या जानती हो?

जूही : तुम पूछना क्या छह रहे हो, क्या बताना है तुम्हे? (उसने चिढ़ते हुए कहा)

शिव : तुम्हारे अलावा भी मेरी जिंदगी में और भी लोग है.

जूही : में जानती हु, और कुछ?

शिव : मेरे उनके साथ वैसे वाले सम्बन्ध है.

जूही : जानती हु, और कुछ?

शिव : तुम जानती हो? (ये मेरे लिए शॉकिंग tha)Kaise?

जूही : मेरा भी दिमाग है, आंखे है और कान भी, में कोई बेवकूफ नहीं हु.

शिव : तुम क्या जानती हो?

जूही : तुम्हे क्यों बताना है ये सब, क्या लेना देना उनका हमारी जिंदगी में.

शिव : तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता उस से? (मेने सवाल पूछा)

जूही : नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ता.

शिव : कल जेक वो बोले की शिव, तुम जूही से रिस्ता मात रक्खो वर्ण में हमारा रिस्ता तोड़ दूंगी.

जूही : (उसके चेहरे पर गभरहट थी, वो मुझे देखने lagi)Tum ऐसा करोगे?

शिव : एक बार सोचो की हम दोनों के बिच रिस्ता है, और तुम्हे किसी लड़की के बारे में पता चले, तो तुम मुझे क्या कहोगी, यही न की या तो उस से रिसता रक्खो या मुझसे? (वो मुझे देखने लगी)

जूही : पर वो लड़कीअ थोड़ी न है, वो शादीशुदा औरते है.

शिव : तुम किसकी बात कर रही हो?

जूही : स्नेहा... बिना madam...(Usne हिचकिचाते हुए कहा) aur....(wo बोलते बोलते रुक गयी)

शिव : तुम कैसे जानती हो ये सब? और .... तीसरा कोण.

जूही : स्नेहा का पक्के से पता है, पर बिना मैडम के बारे में यकीं है, पक्का नहीं पता.

शिव : और... तीसरा...

जूही : छोडो न वो सब, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है अगर तुम्हारे उनके साथ सम्बन्ध है भी तो.

शिव : (उसकी बातो पर गौर करते hue)Achchha, तो तुम्हे लगता है की शादीशुदा है तो तुम्हे क्या hi खतरा, और अगर में कहु की लड़की भी है तो.

जूही : कोण लड़की?

शिव : है, पर अभी मुद्दा है की तुम बिना जाने मेरे साथ रिस्ता नहीं बनाना चाहोगी. है न?

जूही : (थोड़ी देर वो खामोश rahi)Tumne कहा था की तुम मुझसे प्यार करते हो, कहा था न?

शिव : है कहा था, और सच है ये.

जूही : तो फिर?

शिव : प्रॉब्लम hi यही है जूही, मुझे समाज में hi नहीं आ रहा है की में क्या करू, जितनी वो इम्पोर्टेन्ट है उतनी तुम भी हो, उसके साथ भी मेरे शारीरिक सम्बन्ध है, तो में तुम्हारे साथ ये नहीं कर शक्ति, में तुम्हे धोखा नहीं दे शक्ति. (वो खामोश हो गयी, वो शिर निचे किये हुए आंखे बंद कर के सोच रही थी)

जूही : तुम कह रहे हो की तुम्हारे उसके साथ शरीक सम्बन्ध है तो वो तुम्हारी प्रायोरिटी है, मेरे साथ नहीं है तो तुम मुझे छोड़ सकते हो (बोलते बोलते उसकी आँखों में आंसू आ गए)

शिव : नहीं छोड़ शक्ति, वही तो समजा रहा हु में, मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा.

जूही : मतलब अगर वो भी रहना चाहे और में भी, तो दोनों को रक्खो गए?

शिव : मुझे नहीं पता, में नहीं जनता.

जूही : उसको पता है मेरे बारे में?

शिव : एक को पता है.

जूही : (उसने आश्चर्य से मेरी और देखा, और मुझे सोफे पर गिरते हुए मेरी छाती पर बेथ गयी) एक को पता है, मतलब कितनी है?

शिव : अभी तो इतना hi बता सकता हु की एक से ज्यादा है.

जूही : कोण है वो?

शिव : वो में नहीं बता शक्ति, अभी फ़िलहाल, बाद में बता दूंगा. जैसे मेने उनको तुम्हारे बारेमे नहीं बताया, क्यों की में तुम्हे बदनाम नहीं कर शक्ति, वैसे भी उनको भी.

जूही : ज्यादा अच्छे बन ने की कोशिस मात करो, ये सब करने से पहले नहीं सोचा था?

शिव : हम दोनों के बिछ जो भी हुआ क्या वो प्लानिंग से हुआ था, तुम्हे पता है मेने तुम्हे कितनी बार रोका, अपने दिल पर हाथ रख कर कहो, मेने तुम्हे रोका की नहीं.

जूही : और में बेवकूफ समाज रही थी की तुम भोले हो, नादाँ हो जो ये सब नहीं समझते इस लिए घबरा रहे हो, और मुझे अब पता चल रहा है की तुम तो खिलाडी हो.

शिव : तुम्हे लगता है की मेने तुम्हारे साथ कोई खेल खेला है?

जूही : में वो बात नहीं कर रही हु, में कह रही हु की तुम लड़की से मतलब मुझसे इस्सलिये दूर भाग रहे थे की तुम्हे सेक्स के बारेमे कुछ नहीं पता, पर मुझे क्या पता था की तुम तो सेक्स के मास्टर हो. (मेरे नजदीक आ कर मेरी आँखों में देख कर कहने लगी) तुम्हे क्या लगता है की तुम मुझे छोड़ शक्ति हो? (में उसको देख कर समझने की कोशिस कर रहा था, वो मुझे देख कर मुस्कुरायी, मुझे समाज में नहीं आ रहा था की वो मुस्कुरा क्यों रही है, मेरे चेहरे को देख कर वो हसने लगी, मेरी समाजमे नहीं आ रहा था की वो है क्यों रही है, उसका दिमाग तो ठीक है न, फिर वो झुकी और मेरे होतो पर किश करने लगी, में शॉकेड था, में उसकी हरकतों को समझने की कोशिस कर रहा था, फिर वो थोड़ी ऊपर हुई और मेरी आँखों में देखने लगी) तुम छोड़ने की बात कर रहे हो, तुम चाहो तो भी मुझे पकड़ नहीं शक्ति. (में अपने दिमाग पर जोर दे कर समझने की कोशिस कर रहा था, मुझे लगा उसने कहा की ‘पकड़ नहीं शक्ति’, उसका डायलॉग होना चाहिए था की तुम मुझे छह कर भी छोड़ नहीं सकते, में उसे देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा tha)Tumne सही सुना, मेने वही कहा, तुम मुझे छह कर भी पकड़ नहीं शक्ति, में भी तुम्हे छह कर भी पकड़ नहीं शक्ति.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो (मेने शांति से कहा, मुझे समाज आ गया था की वो ठीक है, और जो बोल रही है वो सोच समाज कर बोल रही है)

जूही : खिलाडी बन ने के लिए, हम लड़कीओ को बहोत कुछ देव पर लगाना पड़ता है, बहोत लोगो से लड़ना पड़ता है, हमारी लाइफ तुम लड़को की तरह आसान नहीं होती, जैसे तुम एक खिलाडी बन गए, तो सही समय पर शादी कर शक्ति हो, बच्चे पैदा कर शक्ति हो, पर हम नहीं कर शक्ति, क्यों की शादी की तो बच्चे पैदा करने पड़ते है, और बच्चे पैदा किए तो शरीर फिर वैसा काम नहीं देता, तो एथलीट छह कर भी ये सब नहीं कर शक्ति. (उसका दर्द उसके चेहरे पर छलक रहा था) मुझे पता है, आज नहीं तो काल तुम मुझे छोड़ hi देते, क्यों की एक आगे के बाद तुम्हे भी लगता की तुम्हे शादी करलेनी चाइये, तुम चाहते की में घर सँभालु, अपना खेल छोड़ दू. और अगर में मन करती तो तुम मुझे वैसे भी छोड़ देते. (उसके चेहरे की उदासी में देख न पाया, मेने उसको गले से लगा लिया)

शिव : पागल में ऐसा कुछ भी नहीं कहूंगा, में कभी तुम्हे खेल से दूर नहीं कर शक्ति. (थोड़ी देर वो मेरे गले लगी रही, में उसकी पीठ सेहला रहा था, फिर उसने ऊपर हो कर मेरी और देखा और मुस्कुरायी)

जूही : भले तुम न चाहते, पर मुझे भी तो चाहत होती, की में भी तेरे बच्चे पैदा करू. ये सब इतना आसान नहीं है शिव.

शिव : तो तूने क्या सोचा था, हमारे सम्बन्ध के बारे में.

जूही : यही की, जितने साल तेरे साथ गुजरू, प्यार से गुजरू, और ऐसा तो था नहीं की तू कल शादी कर रहा था, अभी कई साल है, और मेरी समाज में ये नहीं आ रहा, तुजे क्या जरुरत पद गयी ये सब बताने की, चलने देता जैसा चल रहा था.

शिव : पर ये तो धोखा होता न?

जूही : तू क्या समझता है, सब पागल है, बेवकूफ है, सबको पता है की जिंदगी के फैसले ऐसे नहीं लिए जाते, आज परिस्थितिया अलग होती है, कुछ सालो बाद अलग होती है, जो चीज अभी नहीं होनी है उसके बारे में अभी से क्या सोचना, जो होगा वो होगा. और ऐसी कैसी लड़की से सम्बन्ध बनालिये है तूने की वो ये सब समजा रही है तुजे, कोई बुद्धि तो नहीं फंसा ली. (में muskuraya)Aur नहीं तो क्या, आज कल कितनी hi लव सटोरिया बनती है टूट टी है, लड़की को भी पता होता है की क्या हो शक्ति है, उसे भी पता होता है की वो अपने माँ बाप को दुखी नहीं कर शक्ति, फिर भी सम्बन्ध बनती है, तू तो लड़का है, तुजे क्या पड़ी है इतनी, कर लेता मेरे साथ जो करना है, कोई जबरदस्ती तो नहीं कर रहा था, में hi आयी थी तेरे पास.

शिव : (हस्ते hue)Pagal है क्या तू?

जूही : है, पूरी पागल हु, और तू फत्तू, सामने से इतने मौके दे रही हु और तू है की अपना मुँह धोने जा रहा है. (मुझे बहोत हसी आ रही thi)Has क्या रहा है, मेने कुछ गलत कहा क्या, लड़को को मौका चाहिए, चढ़ जाते है, और लड़कीअ भी दूध की धूलि नहीं होती, उन्हें भी बहोत खुजली होती है, क्या फालतू की बात कर रहा है, है कोण जो तुजे ये सब समजा रही है, में यकीं से कह शक्ति हु की वो कोई बुद्धि hi होगी. क्यों की जवान लड़कीअ ये सब नहीं सोचती. अब वो वक़्त गया जब लड़कीअ गे (काऊ) बांके रहती थी. अब हम अपनी मान की करती है. और कई लड़कीअ तो सिर्फ सेक्स करने hi तेरे पास आएगी, दूसरे दिन चली भी जाएगी. तो क्या तू सबको अपनी साडी गर्लफ्रेंड की लिस्ट दिखता फिरेगा.

शिव : वो तो में भी समझता हु, में भी बेवकूफ नहीं हु, पर वो सब तेरे जैसी नहीं होती, तू खास है, में तेरा दिल नहीं दुख सकता. और मेरा ऐसे किसी के साथ सम्बन्ध बनाना भी ठीक नहीं होता, अगर तेरी बात करे, जैसे तू है और तेरे रहते में किसी और के साथ करू तो वो तेरे साथ धोखा हुआ न.

जूही : (फिर से मुझे किश करती hai)Me जानती हु, पर तू लड़का है, में लड़की हु, तुज में और मुजमे फर्क तो है, और ये फर्क कुदरत ने बनाया है, और कुछ लोगोने, लड़का किसी के भी साथ करे तो किसी को कोई मतलब नहीं होता, दुसरो की बात छोडो, लड़की खुद उसको माफ़ कर देती है, वही अगर लड़की करे तो जैसे पूरा जहाँ ख़तम हो गया, ऐसा नहीं है की ये सोच सिर्फ लड़को की है, यही सोच लड़कीओ की भी है, तो लड़कीअ सयम से रहती है, और में भी पागल नहीं हु जो तेरे साथ ये सब करती हु, हम लड़कीओ को लड़को की पहचान होती है, हमे पता होता है की कोण कितने तक साथ देगा, किसको हमारे जिस्म की भूख है और किसको हमारी. मुझे तुज पर भरोसा है तभी तुम्हारे साथ हु, समजे. अब बोल, कब कर रहा है मेरे साथ. (उसने नटखट सी स्माइल के साथ कहा)

शिव : (में मुस्कुराया) तेरी सुई वही अटकी है, पर मेरा जवाब अभी भी वो hi है, पहले कॉम्पिटिओं जीतो, फिर.

जूही : (नखरे se)Ha, तू तो कहेगा hi, तेरे पास कहा लड़कीओ की कमी है, तू भी बिना किसी के साथ किये रहे तो तुजे पता चले. (में है पड़ा) है क्या रहा है, में अब नहीं इंतजार करनेवाली.

शिव : ठीक है (थोड़ा गंभीर होते हुए) में फिर भी तुजे एक बार सबके बारेमे बताना चाहूंगा, पर उस से पहले मुझे उनसे भी बात करनी होगी, क्या में तेरे बारेमे उनको बता सकता हु?

जूही : क्या बताना है, वैसे भी तूने कुछ किआ तो नहीं फिर क्या बताएगा, ये बताएगा की में भी तेरी गर्लफ्रेंड hu?(Mene है में शिर हिलाया, वो भी सीरियस हो gayi)Agar किसी ने बोलै की मेरे साथ रिस्ता तोड़ दे तो तू मुझे छोड़ेगा तो नहीं न? (मेने ना में शिर हिलाया, उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ gayi)Fir ठीक है, तुजे जो कहना है वो कह. अगर मिलवाना है तो मिलवा भी देना. (मेने उसे गले लगा लिया, वो फिर से सरारती अंदाज में बोली) अब तो थोड़ा कुछ कर ले.

शिव : सब करूँगा, तब तू hi कहेगी की मात कर दुःख रहा है, पर अभी नहीं, अभी मुझे सिर्फ तेरा प्यार महसूस करना है. (वो भी कुछ न बोली, बस मेरे ऊपर लेती रही, में उसके लम्बे शरीर की गर्माहट और नर्माहट को महसूस करते हुए उसकी पीठ सहलाता रहा, करीब पंद्रह मिनट बाद वो बोली)

जूही : आज साइट पर नहीं गया.

शिव : नहीं, मान नहीं था.

जूही : ये पहलीबार सुन रही हु, कुछ हुआ है क्या?

शिव : वह एक पागल है, मला की बेटी है, हर वक़्त मुझे कुछ न कुछ सुनती रहती है, मुझे उस से नहीं उलझना.

जूही : तो छोड़ क्यों नहीं देता, वैसे भी अब कुछ समय बाद तुजे कुछ दिनों के या महीनो के लिए जाना पड़ेगा, तब तो तुजे छोड़नी hi है.

शिव : पवन सर को भी पता है, वो कह रहे है की तुजे जब भी टाइम मिले तुजे जाना है, उनकी वजह से hi में जाता हु.

जूही : छोड़ उसे, चल में दूध बनती हु, फिर स्टेडियम चलते है.

उसके बाद हमने दूध पिया और बाइक पे hi स्टेडियम चले गए. स्टेडियम से मेने जूही को छोड़ा, वो मुझे अंदर आने को बोल रही थी पर मेने प्यार से मन किआ, और में भार्गवी मैडम के घर चला गया. मेने सोचा की बाइक दे कर फिर घर चला जाऊंगा.
 
अपडेट 139

आज दो पहर को जब me(Jhanvi) घर से निकलने के लिए तैयार हो के नास्ता कर रही थी, मिक्की तैयार हो कर निचे आया. मम्मी ने उसे नास्ता करने के लिए कहा तो उसने मन कर दिया, तो मुम्मी ने गुस्से से उसे नंस्ता करने को बोलै तो वो मुँह बना के नास्ता करने बेथ गया.

जहान्वी : कैसा चल रहा है?

मिक्की : तुजे क्या, तू अपना देख. (चिढ़ते हुए जवाब दिया)

जहान्वी : मेने बस ऐसे hi पूछा, चीड़ क्यों रहा है?

मिक्की : मेरी मर्जी, तू अपना काम कर न.

जहान्वी : वैस्वी से जगहदा हुआ है क्या?

मिक्की : तुजे बोलै न अपना देख, मेरा में देख लूंगा, और उसकी क्या औकात की वो मेरे से झगड़ा करे.

जहान्वी : ऐसे कैसे बोल रहा है, तुजे पता है न घर में क्या बात चल रही है?

मिक्की : है पता है, तो क्या उसको शिर पे बिठाऊ?

जहान्वी : जब उसके साथ बात करता है तो बहोत शैलीके से करता है, और भी उसके बारे में ऐसे बोल रहा है.

मिक्की: मेने बोलै न, तू अपना देख, और वैसे भी मछली को फ़साने के लिए चारा डालना पड़ता है.

जहान्वी : कितना कमीना है तू, तुजे शर्म नहीं आती?

मिक्की : में ऐसा hi हु, और तू कोई सटी सावित्री नहीं है, इतने साल विदेश रह कर आयी है, अब मेरा मुँह मात खुलवा, सामजी.

जहान्वी : (नास्ता छोड़ के खड़े होते hue)Mummy में जा रही हु. (बोल कर में वह से निकल गयी) (बड़बड़ाती hai)Kaise कैसे लोग है, भाई न होता तो एक सेकंड बात न करती, इन्हे लगता है लड़की उनके पैरो की जुटी है, माय फुट!, (सोच kar)Bechari वैस्वी, भगवन बचाये उसे. (में वह से निकल गयी) कहा जाऊ, अभी से साइट पर जाने का मतलब नहीं है, वैसे भी janab(Shiv) तो अपने टाइम से आएंगे, आएंगे की नहीं वो भी पता नहीं. (Maan)Par तू क्यों उसके लिए इतना मरी जा रही हे, उसने तो तेरे साथ बदतमीजी की थी, तुजे तो उसे थप्पड़ मरना चाहिए था. (में ) पहले तो वही सोचा था, पर क्या करू में कर नहीं पायी, पहली बार तो ऐसा लड़का मिला है, कोई दर नहीं था उसे की में कोण हु, बस थापक से किश कर दिया, और किस तरह से, अभी भी उसके होठ महसूस हो रहे है. (मान) तो बात कर उस से (Me)Kaise करू, वैसे भी वो अकेला मिलता नहीं, और में क्यों उसके सामने झुकू, में कहा और वो कहा. (Maan)To फिर उसे दन्त टी क्यों है? (Me)wo मेरा एम्प्लोयी है, में क्यों झुकू (Maan)Agar घोड़ी बन ने के लिए झुकना है तो ऐसे थोड़ा तो झुकना पड़ेगा (चेहरे पर मुस्कान आ gayi)(Me)Bakwas मात कर, में ऐसा वैसा कुछ नहीं चाहती (मान) मत भूल, में तेरा मान हु, में सब जानती हु. (Me)Chal चुप. (में मुस्कुराते हुए ऑफिस पहुंच गयी, जब में अंदर दाखिल हुई तो)

प्रकाश रओ : मेने सब बात कर ली, है, उसने सब चेक कर लिया है, कुछ साल पहले जब वो हादसा हुआ था जिसमे रेवेन्यू ऑफिस जल गयी थी, उसमे कई रिकॉर्ड नष्ट हो चुके है, गोवेर्मेंट ने नोटिस भी जारी किआ था की सबको दोबारा अपने अपने रजिस्ट्रेशन चेक करवाने है, और अगर नहीं है तो अपने दस्तावेज दिखा कर फिर से रजिस्ट्रेशन कर देना है. इतने साल में उस जमीं का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है.

जहान्वी : (उन दोनों ने मेरी और देखा, में चुप चाप वह बेथ गयी)

मला : पर उस से हमारा क्या फायदा होगा?

प्रकाशराओ : आज की तारीख में उस जमीं की कीमत करोडो में है.

मला : पर फिर भी, उस से हमें तो फायदा नहीं होगा, क्यों की जिस जमीं का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता वो जमीं सर्कार की हो जाती है.

प्रकाशराओ : एक्साक्ट्ली, और वो जमीं हम सर्कार से ऑक्शन में खरीद लेंगे, जैसा करते आये है, आपके होते हुए कोण बोली लगाएगा.

मला : पर अगर दस्तावेज मिल गए तो?

प्रकसराओ : तो उनकी किस्मत, पर मुझे नहीं लगता की वो है, क्यों की इतनेसलो में कोई तो आता. यहाँ तक की उन्होंने टैक्स भी नहीं भरा है, क्यों की जमीं का रजिस्ट्रेशन hi नहीं है तो ऑफिस किसको टैक्स के लिए बोलती. और जो मैनेजर था, उसके बारे में तो सबको पता है, वो तो अपनी जेब भरता होगा.

मला : ठीक है, उस अफसर को पैसे भिजवा दो, और कहो की कारवाही आगे बढ़ाये.

प्रकाशराओ : आप या में जा नहीं सकते, और पैसो का मामला है, ऊपर से रिश्वत का तो वो किसी और से पैसे लेगा नहीं. (मेरी और देख kar)Ek काम करते है, जहान्वी के हाथ भिजवाडेते है.

जहान्वी : (मेरा नाम सुन कर में choki)Kis बारे में बात कर रहे है अंकल?

प्रकाशराओ : एक जमीं का मामला है, वैसे भी तुम सब सिखने hi तो आती हो, तो तुम्हे भी पता होना चाहिए की इस धंधे में क्या क्या होता है. फ़िलहाल तो तुम्हे बस ये बुनकले ऑफिस में दे आना है, बाकि बात में उनसे फ़ोन पर कर लूंगा.

जहान्वी : कोनसी जमीं के लिए?

मला : तुम्हे वो जान ने की जरुरत नहीं है, तुम्हे जो बोलै गया है वो करो, और अगर नहीं करना तो बोल दो तो और रास्ता सोचे.

जहान्वी : नहीं, मुझे क्या प्रॉब्लम है, बस पैसे hi तो पहुंचने है, में दे दूंगी. (अंकल ने मुझे एक चिट्ठी दी जिस पर अफसर का नाम और ऑफिस का एड्रेस लिखा हुआ था, में निकलने लगी, तब मेने सुना)

प्रकाशराओ : अब उसे पता चलेगा की हमसे पन्गा कितना भरी पड़ता है, हमारे मुँह से निवाला छीन ने की कोशिस करि है न, अब घर से जायेगा तब पता चलेगा.

वैसे भी मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा था, तो में वह से निकल गयी, ऑफिस जा कर उन अफसर से मिली और पैकेट दे कर साइट चली गयी. काफी इंतजार किआ पर आज वो नहीं आया, मुझे समाज में नहीं आ रहा था की वो नौकरी कर रहा है की क्या, कोई उसे कुछ कहता नहीं, ऐसी तो क्या खास बात है उसमे की पवनजी उसकी हर बात मानते है, में यहाँ वह घूम रही थी, बालकनी में भी कड़ी रही, मेरी नजर बार बार गेट की और hi चली जाती थी, मेरी खुद समाज में नहीं आ रहा था की में ऐसा क्यों कर रही थी. शायद मेरे मान की बात सही थी, मुझे hi घोड़ी बन न है, वैसे भी काफी समय हो गया है, शायद में भी उसकी तरफ अत्त्रक्टेड हु. पर ये सब होगा कैसे वो तो मेरी भी समाज में नहीं आ रहा, क्यों की में जब भी उसके पास जाती हु मेरे अंदर का ऐटिटूड बहार आ जाता है, मुझे गवारा नहीं की में उसके सामने झुकू, वैसे भी यहाँ कितनी साडी बंदिशे है, पापा के नाम की वजह से सब यहाँ जानते है, तो ऐसा वैसा तो में कर नहीं शक्ति, बहार कोई बन्दिस नहीं थी. (तभी मान भी कूद pada)Are वह, तू तो ऐसे बोल रही है, जैसे हर रोज़ चुदवाती थी. (Me)Shut उप, मंद योर लैंग्वेज, तुम्हे पता है की में वैसी नहीं हु, पर कभी कभी तो चलता है, और वैसे भी पता नहीं मुझे क्यों करना है, कुछ पल के मज़े के लिए अपनी इज्जत क्यों उतरनी है. (पता नहीं में पूरा दिन क्या उटपटांग सोचती रही, पर वो महाशय नहीं आये, थक हर कर में घर चली गयी)

में (शिव) भार्गवी मैडम के घर पंहुचा, दरवाजा खत खतया तो उन्होंने hi दरवाजा खोला, अभी भी वो शार्ट में hi थी, मेरी नजर फिर वही चली गयी, उनकी गोरी गोरी झंघे मुझे आकर्षित कर रही थी.

भार्गवी : अब देखलिया हो तो अंदर भी आ जाओ. (मेने ऊपर देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, में झेप गया, में शिर झुकाये अंदर चला गया, में आस पास देखने लगा) कोई नहीं है.

शिव : (में फिर पकड़ा गया था) नहीं, में तो ऐसे hi देख रहा था. (में सोफे पर बेथ गया)

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए वो मेरी बगल में hi बैठी, और अपने पेअर मोड़ कर सोफे पर ले liye)Rehne दे, तेरी सकल hi बता रही है की तू क्या सोच रहा है.

शिव : में क्या सोच रहा हु, में तो बस देख रहा था, ताकि मेरे मुँह से ऐसी वैसी कोई बात न निकले जिस से आपकी शान में कोई गुस्ताखी हो.

भार्गवी : बड़ा आया मेरा ख्याल करनेवाला. (उसे बहोत अच्छा लग रहा था, पर वो ऐसे hi उसे छेड़ रही थी) तो, क्या हुआ?

शिव : किसका क्या हुआ?

भार्गवी : मतलब हवा निकल गयी, जूही को कुछ न बोल पाए.

शिव : ओह! उसका, आपको क्या लगता है, मेने कहा होगा की नहीं?

भार्गवी : (सोचने की एक्टिंग करते हुए, वैसे तो उसे यकीं था की कहा होगा) नहीं. अगर बतादिया तो पोल न खुल जाएगी, फिर सबको घुमाओगे कैसे.

शिव : (गंभीरता se)Kya आपको सचमे लगता है की में सबको घुमा रहा हु?

भार्गवी : ऐसे मुँह बनाने की जरुरत नहीं है, मुझे पता है तुमने कहा होगा, क्या कहा उसने?

शिव : वो आपसे बिलकुल उलटी है, उसने जो कहा वो आप सुनोगी तो गुस्सा हो जाओगी.

भार्गवी : (आश्चर्य se)Aisa क्या कहा, जरा में भी तो सुनु. (मेने संक्षिप्त में सब बता diya)Oh! ऐसा कहा उसने, उसे पता था की तुम किसकी बात कर रहे हो?

शिव : नहीं, मेने आपका नाम नहीं बताया, में पहले देखना चाहता था की सिर्फ ये जान ने से की मेरा किसी और के साथ भी सम्बन्ध है, वो क्या कहती है, खामखा आपको बदनाम क्यों करू.

भार्गवी : (उसका गाल खींचते hue)Bada ख्याल है तुजे मेरा (फिर कुछ सोच kar)Waise तूने सही किआ, अपने दिमाग से तू चला, पर क्या में बुद्धि हु जो उसने ऐसा कहा, उस से ज्यादा दुनिया देखि है मेने.

शिव : (मेने भी खिंचाई ki)Wo hi तो वो कह रही थी, वैसे भी बुद्धियो ने hi तो ज्यादा दुनिया देखि होती है. (वो मुझे मरने लगी तो में हसने लगा)

भार्गवी : (मरते hue)Me बुद्धि हु, है.

शिव : अरे, पर मेने थोड़ी न कहा है.

भार्गवी : आज कल की लड़कीओ को हो क्या गया है, सीरियस hi नहीं है किसी बात पर.

शिव : (फिर छेड़ते hue)Dekha आपने भी मन न की आप आज कल की नहीं है.

भार्गवी : (फिर मरते hue)Lagta है तू आज पिटेगा मेरे हाथ se.(Thodi देर वो मुझे मरती रही, में हस्ता रहा, फिर वो शांत हुई) वैसे उसकी बात भी सही है, ऐसा तो है नहीं की कोई भी लड़की तेरे सामने हसेगी या तो लाइन देगी और तू जा कर बोलेगा, की देखिये, ऐसे मात देखो मुझे, मेरी बहोतसारी गिर्ल्फ्रिएड है. (वो भी हसने लगी)

शिव : ये आईडिया सही है, में एक बोर्ड बनवलेता हु, जिस से कोई देखेगी hi नहीं.

भार्गवी : (फिर मारा muje)Fir मज़ाक, (में है पड़ा, थोड़ी देर बाद वो फिर गंभीर हो गयी) सच तो ये है की में hi पागल हु, ये सम्बन्ध बनाने से पहले मुझे ये तो सोचना चाहिए था की इस सम्बन्ध की कोई मंजिल नहीं है.

शिव : (मेने भी आवाज बदल कर गंभीर मुँह बना कर kaha)Achhaaaa, तो फिर क्यों बनाया.

भार्गवी : (फिर मारा muje)Kyu की में गाढ़ी हु, फिसल गयी अपनी भावनाओ में, बिना सोचे समजे.

शिव : सवाल फिर वही आ कर खड़ा हो जाता है, क्या हमे इससे यही रोक देना chahiye?(Unhone मेरी और घर कर देखा, में मुस्कुराया, वो मेरा गाला पकड़ कर मेरे ऊपर चढ़ने लगी)

भार्गवी : मान करता है की मार दू तुजे (में लेट गया और वो मेरे पेट पर बेथ गयी)

शिव : अब क्यों मार रही है मुझे, मेने कुछ गलत पूछा क्या? (मेने भोली सूरत बना कर कहा)

भार्गवी : में तेरी तरह नहीं हु, अब सम्बन्ध बनाये है तो फिर झेल मुझे, में छोड़नेवाली नहीं हु तुजे.

शिव : क्यों नहीं छोड़नेवाली हो? (उन्होंने मेरी आंख में देखा, फिर झुक कर मेरे होठ पर एक छोटी किश की, और मुस्कुरायी)

भार्गवी : (मेरे शाइन पर उन्होंने अपना शिर रख दिया, और बड़े प्यार से boli)Kyu की दिल आ गया है मेरा, अब तेरा क्या प्रॉब्लम है तू जाने, मुझे कोई लेना देना नहीं, पर में नहीं छोड़नेवाली तुजे, जिसको जो करना है करे.

शिव : में किसी और के साथ करू फिर भी?

भार्गवी : है, पर ध्यान रखना, नए बखेड़े मात खड़े करना.

शिव : क्या में बखेड़े खड़े करता हु?

भार्गवी : है, तू hi करता है, तुजे बड़ा शौक है किसी के फाटे में तंग अदने की, वो अपना देख लेगी, तुजे क्या जरुरत है.

शिव : वो में नहीं कर शक्ति, अगर में देखता हु की किसी को मेरी जरुरत है तो में पीछे नहीं हैट शक्ति.

भार्गवी : तो फ्री बनाते जाना फ़ौज. (में मुस्कुराया, इस वक़्त उनका अलग hi रूप था, वो सिर्फ एक लड़की थी, बस एक प्यारी लड़की)

शिव: ठीक है देखते है, फ़िलहाल तो मुझे घर जाना है.

भार्गवी : क्यों? दोपहर से तो मेरे पैरो की और घर घर के देख रहे हो, अब क्या हो गया?

शिव : देखिये, मुझे उकसाइए मात, वैसे भी मेने कैसे अपने आपको कण्ट्रोल किआ है, मुझे hi पता है.

भार्गवी : (मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी झंघ पर रखते हुए, उन्होंने बड़े सेक्सी तरीके से कहा) किसने कहा है कण्ट्रोल करने को (वो बहोत कामुक लग रही थी, वो मेरे होठो पर झुक गयी और मुझे किश करने लगी, मेरे भी हाथ उनकी मसल झंघ को सहलाने लगे, और फिर उनके नितम्ब पर पहुंच गए, लुंड मेरा पूरा खड़ा हो गया, और कूद रहा था, जिसका एहसास उनको हो चूका था तो वो थोड़ा और नीचे खिसकी और अपनी छूट वाले भाग को सेट कर के मेरे लुंड पर रगड़ने लगी, माहौल में गर्मी बहोत बढ़ चुकी थी, लुंड बहोत ज्यादा कड़क हो चूका था, वो मेरे होठो को अच्छे से निचोड़ रही थी, और में भी, में ऊपर उठा और बैठने लगा पर वो किश तोड़ hi नहीं रही थी, में खड़ा हो गया और उन्हें अपनी गॉड में उठा कर बैडरूम में ले गया, मेने उन्हें बीएड पर रक्खा पर वो मुझे छोड़ hi नहीं रही थी, उनके हाथ मेरी गर्दन में फंसे हुए थे, मेने जोर दे कर उन्हें छुड़ाया.

शिव : (वो मुझे गुस्से से देखने लगी, में muskuraya)Kapade तो निकलने दो (वो शर्मा गयी, में अपने कपडे निकलने लगा तो वो उलटी घूम गयी और अपने कपडे निकलने लगी, में उनकी और भी देख रहा था, उन्होंने अपने सरे कपडे निकल दिए, वो पूरी नंगी हो चुकी थी, उनकी बेदाग पीठ मेरी और थी और उनके नितम्ब की घाटी भी दिख रही थी, उनको ऐसी अवस्था में देख मेरा लुंड कूदने लगा, में उनके नजदीक गया और उनके गोर बदन को सहलाने लगा, उनके कंधे और पीठ को सहलाने लगा तो वो थोड़ा पीछे हुई.

भार्गवी : (उसके छूने से मेरे बदन में तरंगे दौड़ रही थी, उसका हाथ मेरे शरीर पर घूम रहा था, में और उत्तेजित हो गयी और पीछे की और झुकी तो उसका वो कड़क अंग मेरे पीठ पर चुभने लगा, उसका एहसास होते hi मेरी छूट से नदिया बहने लगी, उसके हाथ मेरे स्तन पर पहुंच गए, वो उन्हें दबाते हुए मसल रहा था, उसके मजबूत हाथ में मेरे नाजुक से स्तन पीस रहे था, मेरे निप्पल को भी वो बेदर्दी मसल रहा था, दर्द के साथ मज़े से में सिस्किअ लेने लगी, और अपनी पीठ को उसके कड़क लुंड पर रगड़ने लगी, मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, में घूम गयी और उसके लुंड को अपने मुँह में ले लिया, शर्म तो बहोत थी पर में विवश थी, में उस कड़क लुंड को अपने मुँह में भर कर चूसने लगी, मुझे उसका लुंड बहोत पसंद था, वो मोटा लुंड मेरे मुँह को पूरा भर देता था, पर उसकी मोटाई और लम्बाई मुझे और पागल बना रही थी, अपनी भावनाओ में बह कर मेने लुंड को अपने मुँह में तो ले लिया था पर फिर एहसास हुआ की मेने क्या कर लिया है, मेने शरमाते हुए उसकी और देखा तो वो मुस्कुरा रहा था, में और शर्मा गयी, पर में लुंड को नहीं छोड़ शक्ति थी, तो में उसको चुस्ती रही, उसकी मुस्कराहट अब गायब थी, उसका चेहरा बता रहा था की मेरा लुंड चूसना उसे कितना अच्छा लग रहा है, में जोर जोर से उसका लुंड चूसने लगी और साथ में उसके चेहरे को भी देख रही थी, वो आहे भर रहा था, जो मुझे और जोश दिला रहा था, में उसके लुंड को चाट टी तो कभी चुस्ती तो कभी हिलती, और उसके चेहरे पर आये आनंद को देख रही थी)

शिव : (उनके गरम मुँह में मेरा लुंड पिघल रहा था, उनका शिर सहलाते hue)Bahot जल्दी है आपको.

भार्गवी : (वो इतनी गर्म थी की हांफ रही थी, लुंड बहार निकल kar)Ha है (फिर से लुंड अपने मुँह में भर लिया, वो कभी मुझे देख रही थी पर ज्यादातर वो मेरे लुंड को देखते हुए उसे पूरा मुँह में भर के चूसने की कोशिस कर रही थी, वो क्यों इतनी गरम हो गयी थी मुझे समाज नहीं आ रहा था, पर उनके द्वारा ऐसे लुंड चूसने से मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, थोड़ी देर बाद मेने उनके मुँह से लुंड निकला तो वो फिर मुझे घर के देखने लगी, उनको मेरा लुंड निकल लेना पसंद नहीं आया था, में मुस्कुराया और उन्हें बीएड पर लेता दिया. वो अपनी छूट छुपाने के लिए अपनी टंगे आपस में जोड़ दी. और अपनी छूट पर हाथ रख दिया.)

शिव : उसे क्यों छुपा रही है, अपने पेअर फैलाइये. (वो मुझे देखने lagi)Apane पेअर फैलाइये वर्ण में कुछ नहीं करूँगा, (उन्होंने मेरी और देखा, वो मेरे चेहरे को समझने की कोशिस कर रही थी, में गंभीर hi था, उन्होंने अपना चेहरे दूसरी और कर लिया और हिचकिचाते हुए अपने पेअर failaye)Apana हाथ हटाइये (हाथ जो छूट पर था, उसे भी उन्होंने हिचकिचाते हुए हटा दिया, मेने उनकी छूट को देखा, वो गोरी गोरी छूट के होठ फुले हुए थे, काळा बालो से घिरी छूट देख मेरा लुंड कूदने लगा, छूट के होठ आपस में चिपके हुए थे) अपनी भोश खोल कर दिखाओ. (वो मुझे आश्चर्य से देखने लगी, मेने फिर गंभीरता से hi कहा) अगर आगे बढ़ना है तो दिखाओ मुझे. (वो मुज पर हुकुम चला रहा था, भला में कैसे उसके सामने ये सब करती, पर वो मेरी छूट को hi देख रहा था, और उसके चेहरे से लग रहा था की अगर मेने उसका कहना नहीं मन तो वो नहीं करेगा, मेरे बदन में कामाग्नि भरी हुई थी, तो मेने विवश हो कर अपनी टंगे और रैलाई और दोनों हाथो की मदद से अपनी छूट के होठो को फैलाया, मुझे इतनी शर्म आ रही थी की में दूसरी और देख रही थी, पर ऐसा करना मुझे अंदर से रोमांचित कर रहा था, में खुद अपनी छूट फैला कर उसे दिखा रही थी, शर्म ज्यादा आ रही थी की उत्तेजना ज्यादा थी में समाज नहीं प् रही थी, मेने आँखों के कोनो से उसे देखा तो वो मुझे देख मुस्कुरा रहा था, में शर्म से गाढ़ी जा रही thi)Kitni सेक्सी लग रही है आप, खुद मेरे सामने अपनी भोश खोल कर बैठी है.

भार्गवी : (हकलाते hue)Sssharm नहीं आती तुम्हे, मुज पर ऐसे हुकुम चला रहे हो.

शिव : नहीं आती जान, में तुम्हारा कामुक रूप देखना चाहता हु, वाकई तुम बहोत ज्यादा सेक्सी लग रही हो, मेरा तो मान कर रहा है की अभी अपना लुंड तुम्हारी भोस में दाल दू.

भार्गवी : (ऐसी बात सुन कर उसके अंदर अजीब सी हलचल हो रही थी) छी कितना गन्दा बोलते हो तुम, शर्म नहीं आती मेरे सामने ऐसा बोलते हुए?

शिव : (में बैठा और उनकी छूट को नजदीक से देखने laga)Nahi आती जान, (मुझे अपनी छूट के नजदीक देख कर उन्होंने फिर होठ छोड़ दिए और छूट को ढकने का प्रयास करने lagi)Apane हाथ अच्छे से रक्खो, होठो को फैला कर रक्खो.

भार्गवी : (में उत्तेजना से कैंप रही थी) मुझे शर्म आ रही है शिव, थोड़ा तो लिहाज करो.

शिव : किसका लिहाज करू, आपकी उम्र का?

भार्गवी : मेने ऐसा कब कहा, क्या में जयदा बड़ी हु?

शिव : नहीं, आप प्यारी सी गुड़िया हो, इसीलिए कह रहा हु, अपनी भोश के होठो को फैलाओ, मुझे देखना है और चेतना भी है.

भार्गवी : तुम बहोत गंदे ho(Kehte कहते उन्होंने होठो को फैला दिया)

शिव : और अच्छे से. (मेने कड़क आवाज में कहा)

भार्गवी : (नखरे se)Muj पर हुकम मात चलाओ, अंदर घुसना है क्या?

शिव : (मुस्कुराते hue)Wo तो घुसूंगा hi, पर अभी उसका स्वाद लेना चाहता हु (मेने छूट पर जीभ चलायी, वो सिसकने लगी, में छूट पर टूट पड़ा, वो अपनी टंगे फैला कर अपनी छूट चटवा रही थी, )





भार्गवी : (वो जोर जोर से आवाज करते हुए सिसकिया ले रही thi)Shhhhhhh शह्ह्ह्हह्ह (वो अपनी कमर उचक कर अपनी छूट मेरे मुँह पर दबा रही थी, उस से रहा नहीं जा रहा था, उसने अपने हाथ छोड़े और शिव के शिर को पकड़ कर अपनी छूट पर दबाने लगी) शह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह खा जाओ उसे शहहहहह कितना मज़ा शहहहहह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्ह खा जाओ उसे, मुजसे रहा नहीं जा रहा शह्ह्ह्ह सीईव शहहहहह मुझसे नहीं रहा जा रहा शह्ह्हह्ह्ह्ह, मेने भी देर करना सही नहीं समजा, में सही से बेथ गया और लुंड को छूट पर लगाया, मेने उनकी और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, मेने लुंड को छूट पर रगड़ा तो उनके चेहरे के भाव बदलने लगे, थोड़ी देर रगड़ने के बाद वो boli)Shhhhh क्यों तड़पा रहे हो शिव, अंदर डालो न, शह्ह्ह्ह मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. में सही से बैठा और लुंड को छेड़ पर लगाया, छडे में थोड़ा सा सूपड़ा अंदर चला गया था, मेने उनकी और देखा तो वो बेसब्री से इंतजार कर रही थी, मेने धक्का मारा तो लुंड आधे से ज्यादा अंदर चला gaya)Aaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiii, (मेने एक और धक्का mara)Ooomaaaaaaaa (मेने आखरी धक्का मारा और पुरे लुंड को अंदर उतर diya)Shhhhhh मार गयी शह्ह्ह्हह्ह (में उनके ऊपर झुका और उन्हें किश करने लगा, वो मुझसे लिपट गयी और मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझे किश करने lagi(Mene कमर हिलना सुरु कर दिया, उसने सांस लेना दूभर हो रहा था तो उन्होंने मुँह हटा लिया)





अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह आईई शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह ahhhhh(Pure कमरे में उनकी आवाजे गूंज रही थी) उस संकरी गुफा में लुंड अंदर बहार हो रहा था, में स्तन को चूसने लगा और धक्के लगाने laga)Ahhhhh, अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह (में लगातार उन्हें छोड़ रहा tha)Aahhhh सीईव ऐसे hi शह्ह्ह्ह मुझे बहोत मज़ा आ रहा है शहहहहह और करो शहहहहह और करो शह्ह्ह्हह्ह shhhhh(Abhi पढ़ मिनट hi हुए थे, में तेज तेज धक्को से छोड़ रहा था, वो मुझे और जोर से अपनी और खिंच रही थी, मेने उनकी टंगे उठा दी और जोर जोर से धक्के लगाने लगा, जिस से लुंड बच्चे दानी से टकरा रहा tha)Aiiii आईईईई अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह आईईईई आईईईई ओफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह आईईईई (वो मुझसे पूरी ताकत से लिपट गयी और अपनी छूट को मेरे लुंड पर दबा दिया और झटके खाने लगी, में रुक गया, वो मुझसे लिपट कर थोड़ी देर झटके कहती रही फिर शांत हो गयी, उनकी पकड़ ढीली पद गयी तो में थोड़ा ऊपर उठा और उन्हें देखने लगा, पूरा चेहरा लाल हो चूका था, मेरा लुंड पूरा छूट में घुसा हुआ था, मेने उनकी टंगे छोड़ी तो उन्होंने खुद hi उसे मेरी कमर में लपेट दी)

शिव : अच्छा लगा?

भार्गवी : हआ, (वो मुझे किश करने लगी)

भार्गवी : (थोड़ी देर बाद मेरी और देखते hue)Kya में बुद्धि हु? मेरा मतलब है की में बहोत बड़ी हु तुम्हारे लिए?

शिव : (सच में उनके दिल पर वो बात लग गयी थी, में muskuraya)Pagal हो क्या, उसका ये मतलब नहीं था.

भार्गवी : पर वो तो अभी छोटी है, मुझसे भी ज्यादा जवान है, तुम्हे उसके साथ ज्यादा मज़ा आएगा.

शिव : पागल, ऐसा कुछ नहीं है, आप भी उतनी hi सुन्दर और जवान हो, और उस से ज्यादा तजुर्बेकार भी.

भार्गवी : तू प्यार करता है न मुझसे?

शिव : है करता हु.

भार्गवी : हमेशा मेरे साथ रहेगा न?

शिव : आपको कोई शक है?

भार्गवी : नहीं, बस पूछ रही हु.

शिव : वो सब बाटे छोड़िये और मज़े आपके मज़े लेने दीजिये.

भार्गवी : (वो फिर muskurayi)Mere साथ ये करने में तुजे मज़ा आ रहा है न?

शिव : है, मुझे आपको छोड़ने में बहोत मज़ा आ रहा है.

भार्गवी : मरूंगी में तुम्हे, कितना गन्दा लगता hai(Mene फिर से अपनी कमर हिलना सुरु कर दिया, उनकी मखमली छूट की गर्मी मेरे लुंड को महसूस हो रही थी, में फिर से धक्के लगाने लगा)

भार्गवी : (मेरे चेहरे को सहलाते hue)Tuje मेरे साथ करना अच्छा लग रहा है न? शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह. (में कुछ नहीं बोलै, वो मेरा चेहरा सहलाने lagi)Batana, मुझे ch...(Wo hichkichayi)mmuje cho...d..na shhhhhhhhhhhhhh (में उनसे चिपक गया तो उन्होंने मुझे अपनी बहो में भर liya)Shhhhhh मुझे शहहह छोड़ना अच्छा लग रहा है तुजे शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : हा जान, ऐसे hi ये खड़ा नहीं हो जाता मेरा. तुम्हारे छूटे hi वो कड़क हो जाता है मतलब तुम मुझे बहोत पसंद हो.

भार्गवी : (ये सुन कर जैसे मुझे सुकून मिला, मेने मुस्कुराते हुए उसके बाल सहलाते हुए उसके बलिस्त शरीर को अपनी आगोश में लिया और kaha)Agar वो न होती तो तू दोपहर में hi सुरु हो जाता, है न?

शिव : (उनके गले को किश करते हुए) है, जान.

भार्गवी : मुझे पता था, और वो hi सोच सोच कर में दो पहर से गरम थी, में कितनी बेशब्री से तेरा इंतजार कर रही थी, में तेरे बगैर नहीं रहपाउंगी शिव.

शिव : जरुरत भी नहीं है. (में उनके स्तन चूसने लगा)

भार्गवी : शहहहहह शह्ह्ह्ह खा जा मुझे शह्ह्ह्ह पूरी खा जा शहहह कितना तड़पती हु में शहहहहह पता नहीं क्या हो गया है मुझे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह (में जोर जोर से उन्हें छोड़ने laga)Shhhhh आह्हः और जोर से शहहहहह ख़तम करदे उसे शह्ह्ह्ह हमेशा तंग करती है शह्ह्ह्हह्ह मार उसे शह्ह्ह्ह फाड् दे शह्ह्ह्ह किस्स्सा hi ख़तम कर दे उसका शह्ह्ह्ह माआआ. (में रुक गया और उन्हें देखने लगा)

शिव : हो क्या गया है आपको? मेने कहा न की में आपको छोड़ के कही नेह जाऊंगा.

भार्गवी : (वो muskurayi)Muje बस ऐसे hi छुड़वाना है आज, में सब सीमाएं तोड़ देना चाहती हु, नहीं बानी रहना मुझे अच्छी, आज अच्छे से मुझे छोड़ तू, तेरे इस बड़े लुंड की दीवानी हो चुकी हु में, जब तू मुझे छोड़ता है तो मुझे कितना अच्छा लगता है में बयां नहीं कर शक्ति, अब रुक क्यों गया कर न. छोड़ अपनी जान को, चाहे जान भी निकल जाये, मुझे कोई परवाह नहीं है. (वो सच में पागल हो चुकी थी, वो क्या बोल रही थी उन्हें hi नहीं पता था, पर भी मेने चुदाई में ध्यान केंद्रित किआ, थोड़ी hi देर में पुरे कमरे में शोर गूंजने लगा, पूरा कमरा ाहो और चीखो से गूंजने लगा, घमासान चुदाई होने लगी, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, उन्होंने मुझे ढका दिया और मेरे ऊपर चढ़ गयी, मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी योनि पर सेट किआ और बेथ गयी, उनके चेहरे के भाव बढ़ले, उन्होंने मेरी और देखा तो में मुस्कुराया, सो शर्मा गयी , और मेरे ऊपर लेट गयी, उनका नरम शरीर अपना सुखद एहसास देने laga)Has क्या रहे हो, मुझे वो बहोत अच्छा लगता है शिव, तुम्हारा वो बहोत कड़क रहता है, (वो अपनी कमर हिला के लुंड पर कूदने lagi)Shhhhh शहहहहह कितना मस्त है वो शहहहहह बड़ा भी बहोत है शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे वह बहोत अच्छा लग रहा है शिव. शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : कहा जान?

भार्गवी : (मुझे चूमने लगी पर अपनी कमर हिलना जारी rakkha)Waha अंदर शहहहहह मेरी योनि में शह्ह्ह्ह तुम्हारा लललूण्ड शह्ह्ह्हह्ह कितना मज़ा देता hai(Wo काफी गरम हो चुकी थी, वो जोर जोर से मेरे लुंड पर अपनी योनि को मार रही थी, में उनके कूल्हे मसल रहा था और निचे से भी धक्के लगा रहा tha)Oooo मा शहहहहह मुझे बहोत मज़ा आ रहा है शहहहहह और छोड़ो शह्ह्ह्ह जोरसे छोड़ो शहहह और जोर से जान शह्ह्ह्हह्ह में झाड़नेवाली हु शहहहहह mumiiiiiiiiii शह्ह्हह्ह्ह्ह में में.... बोलते बोलते वो फिर झाड़ गयी) में उनके नरम शरीर को सेहला रहा था, थोड़ी देर वो हांफ टी रही, फिर उन्होंने मेरी और देखा, मुझे पीछे से करो. (में समझने की कोशिस कर रहा था, पीछे से मतलब कहा, वो उठी और घोड़ी बन गयी, अपने कूल्हे फैला कर उन्होंने अपनी छूट के होठ failaye)Shhhhhh दाल दो शिव शह्ह्ह्ह जल्दी. (में समाज गया की वो क्या चाहती है, मेने लुंड छूट पर लगाया और फिर से अंदर उतर diya)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह ahhhhhhh(Unhone पीछे मुद के मुझे dekha)Tumhara बहोत बड़ा है शिव शह्ह्ह्हह्ह मुझे बहोत अच्छा लगता है, शहहहहह तुम्हे ऐसे करना पसंद है न जान.?





शिव : (सच में वो कामुकता की देवी लग रही थी, उनके भरे हुए कूल्हे और भरी हुई झांघो को पकड़ कर में उन्हें छोड़ रहा tha)Shhhh हा जाएं तुम कमल हो शहहहहह, तुम्हारी भोस मेरे लुंड को बहोत मज़ा दे रही है.

भार्गवी : मुझे भी तुम्हारा लुंड बहोत मज़ा दे रहा है, छोड़ो मुझे शह्ह्ह्हह्ह जैसे मर्ज़ी हो छोडो शह्ह्ह्हह्ह में तुम्हारी हु शिव शह्ह्ह्हह्ह में तुम्हारी हु शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह हां हआ ऐसे hi शह्ह्ह्हह्ह और जोर से शह्ह्ह्ह मुझे तुम बहोत अच्छे लगते हो शह्ह्ह्ह और जोर से शहहहहह.

(में जोर जोर से छोड़ रहा था तो वो आगे लुढ़क गयी, पर में उन्हेऐसे hi उलटी लेते हुए भी छोड़ रहा था, वो मेरे निचे दबी हुई thi)Shhhhhh अह्हह्ह्ह्ह मुझे बहोत मज़ा आ रहा है शहहहहह ऐसे hi जान शह्ह्ह्ह.

(मेरे धक्को से पूरा बीएड हिल रहा था, उनके कूल्हों के बिच से मेरा लुंड उनकी छूट की धज्जिया उडा रहा था, वो गर्म गर्म सिसीकीअ ले रही थी, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित थी, वो अपनी छूट पीछे से मेरे लुंड पर मार रही थी, थोड़ी देर बाद मेने उन्हें सीधा किआ और फिर से लुंड छूट में दाल दिया, उन्होंने अपनी टंगे पकड़ ली, में दे धना धन धक्के मर रहा था. चीखो और सिसकीओ से सारा माहौल गरम था, उनके स्तन ऊपर निचे हिल रहे थे, आखिर मेरे भी होने वाला था, वो भी अपने चरम पर थी, मेरे लगातार धक्को से वो स्खलित हो गयी और तभी मेने लुंड बहार निकला और उनके पुरे शरीर पर अपनी पिचकारियां मरने लगा, वो मेरे लुंड से निकलती पिचकारिओ को देख रही थी, थक कर वो लेट गयी, थोड़ी देर हम ऐसे hi आंख बंद कर के लेते रहे, थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे देखा, में साइड में लेता था, हम दोनों मुस्कुराये, दोनों के चेहरे पर संतुस्ती थी.

भार्गवी : (मेरी और नशीली आँखों से देखते hue)Tumhare साथ जितना मज़ा आता है न की में कह नहीं sakti(Apane शरीर पर बिखरे वीर्य को देखते hue)Pura गन्दा कर दिया मुझे.

शिव : चलिए, आज साथ में नाहा लेते है.

भार्गवी : वह तुम मुझे नहाने डोज?

शिव : आप चाहती है की में आपको सिर्फ नहाने दू. (उन्होंने मुस्कुरा कर ना में इस्सर किआ) तो फिर. (में उठा और उनको उठा कर बाथरूम में ले गया, पहले शावर चला कर उनको साफ़ करने लगा, में उनके स्तन को और छूट को रगड़ रगड़ कर साफ़ कर रहा था, मेरा लुंड फिर खड़ा हो गया, वो भी गर्म हो चुकी थी, वो मेरे लुंड को पकड़ कर सहलाने लगी, मेने उन्हें देखा तो वो नटखट सा मुस्कुरायी, मुझे देखते हुए वो दिवार की तरफ घूमी और वह एक हाथ रख कर अपने कूल्हे बहार निकल कर कड़ी हो गयी, और मेरे सामने देख कर मुस्कुराने लगी, उन्होंने एक हाथ से अपना कुल्हा साइड में किआ और मुझे अपनी छूट दिखने लगी, में नज़दीक गया तू लुंड को छूट पर लगते हुए अंदर उतर दिया, फिर हमारा खेल सुरु हो गया, शोवे के पानी में फिर से मेने उन्हें रगड़ रगड़ के छोड़ा, फिर से उनकी चीखे और ाहो से बाथरूम भर गया, मेने उन्हें झुका कर, खड़े खड़े, गॉड में उठा कर, हर तरीके से छोड़ा, वो आनंद में चीखती रही. आखिर कर टॉवल लपेट कर हम दोनों बहार आ गए. (मेने टाइम देखा तो 8:30 हो रहे थे.)

भार्गवी : (मुझे टाइम देखते हुए देख kar)Me आ रही हु तुम्हे छोड़ने.

शिव : अच्छा छोड़ने (मेने मुस्कुरा कर छोड़ने सब्द पर भर देते हुए कहा)

भार्गवी : (अपने कपडे पहनते hue)Waise नहीं, घर छोड़ने, समजे.

शिव : ऐसे वक़्त में आप एक अलग hi व्यक्ति बन जाती हो.

भार्गवी : सच कहते हो तुम, तुम्हे देख कर मुझे लगता है की में भी तुम्हारे जितनी hi हु, और मुझे अच्छा लगता है, में इस भार्गवी को तो जैसे खो hi चुकी थी. मुझे सचमे कोई फर्क नहीं पद रहा की तुम्हारे किसके साथ सम्बन्ध है, जो भी हो तुम मेरे साथ रहना, में तुम्हारा हमेशा ख्याल रक्खूंगी.

शिव : (छेड़ते hue)Matlab घरवाली बन कर.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Ha, घरवाली बन कर. वैसे भी मेरा घरवाले बहोत चालू है, तो उसे संभालना तो पड़ेगा. (वो हसने लगी, तो में फिर उनके पास गाय और उनके स्तन दबाने लगा, वो सिसकने लगी, और धमकी देने lagi)Chhod दो मुझे, वर्ण में फिर सुरु हो जाउंगी.

शिव : क्यों थकी नहीं?

भार्गवी : में नहीं थकती, अगर चाहो तो यही रुक जाओ, पूरी रात साथ दूंगी. जब तक मान करे करना, बोलो है मंजूर.

शिव : बिलकुल मंजूर है डार्लिंग, पर आज नहीं. (मेने उनके गाल पर किश किआ)

भार्गवी : पर तुम्हारा वो तो फिर से खड़ा हो गया है (वो मुस्कुरायी)

शिव : तुम हो hi ऐसी, उसमे उसका कोई दोष नहीं है.

भार्गवी : शिव, सदा मुझे ऐसे hi प्यार करना (कहते हुए वो मेरे गले लग गयी) में जानती हु की में कुछ ज्यादा hi मांग रही हु, जो भी लड़कीअ तुम्हारे जीवन में है वो भी उतनी hi इम्पोर्टेन्ट होगी, पर कोई न कोई रास्ता निकल लेंगे. और वैसे भी अभी से सोचना बेकार है, पहले तुम शादी के लायक तो हो जाओ. (मुझे देख के वो मुस्कुराने लगी, फिर थोड़ा सीरियस हो kar)Me एक रिश्ते को तो बचा नहीं पायी थी, पर में इस रिश्ते को टूटने नहीं दूंगी शिव. तुम डोज न मेरा साथ. (वो फिर मेरी बाहोंमे समां गयी)

शिव : क्यों इतना इन्सिक्युरे फील कर रही हो, में हु न.

भार्गवी : दर तो लगता है न शिव, मेने जूही को तो देखा है, वो बहोत खूबसूरत है, और पता नहीं कोण कोण है, पर इतना तो यकीं है की वो भी किसी अप्सराओ से काम नहीं होंगी.

शिव : तो आप किसी अप्सरा से काम थोड़ी न हो. (अपनी तारीफ सुन कर वो फिर कास के मेरे गले लग gayi)Chalo वर्ण दीदी डाँटेगी.

हम दोनों बाइक से hi निकल गए, अँधेरा था तो वो मेरी कमर में हाथ दाल के किसी बीवी की तरह hi बैठी. और पटिआला सूट पहन कर hi आयी थी. हम दोनों घर पहुंचे, मेने बाइक पार्क की और लॉक किआ.

भार्गवी : लॉक क्यों कर रहे हो?

शिव : आज मेरे साथ hi खा लो, सिंपल hi होगा, पर खा लो.

भार्गवी : (उसका हाथ पकड़ kar)Tumhare साथ तो सब कुछ पकवान के बराबर है. (हम दोनों अंदर आ गए, जैसे hi हम अंदर आये लतादिदी की नजर मुज पर पड़ी, वो घबराई सी मेरी और आने लगी, पर मैडम को देख कर रुक गयी, उनके चेहरे से मुझे पता चल गया की कुछ गड़बड़ है, में उनके पास पहुंच गया)

शिव : क्या हुआ दीदी? (वो मैडम की और देखने लगी) क्या हुआ दीदी, आप घबराई हुई क्यों हो? (सरितादिदी और गायत्रीदिदी भी वह आ गयी)

लतादिदी : वो वो, आज दोपहर को कोई आदमी आया था, वो कह रहा था की हमारा आश्रम गैर कानूनी है.

शिव : में समजा नहीं दीदी, गैर कानूनी मतलब?

लतादिदी : सरिता, वो लिफाफा ले आ तो. (शारिता दीदी ऑफिस में गयी और एक लिफाफा ले आयी, वो मुझे देने लगी पर भार्गवी मैडम ने वो ले लिया और उसे देखने लगी, वो पढ़ रही थी तो में थोड़ी देर चुप रहा, जैसे hi उन्होंने पढ़ना ख़तम किआ मेने पूछा)

शिव : क्या लिखा है?

भार्गवी : रेवेनुए डिपार्टमेंट की नोटिस है, उन्होंने कहा है की ये सरकारी जमीं है, अगर आपके पास कोई साबुत है की ये जमीं आपकी है तो 7 दिनों में कागजात जमा करवादो.

शिव : पर ये जमीं तो जम्नदासजी की है न, ये अनाथाश्रम भी उनका hi है.

भार्गवी : हमे वो कागजात दिखने होंगे.

शिव : वो कागजात किसके पास होंगे?

भार्गवी : शायद जम्नदासजी के पास.

शिव : पर वो तो अब इस दुनिया में नहीं है.

भार्गवी : तो उनके परिवार में किसी के पास.

शिव : काव्यजि ने पहले भी उनसे बात की थी, उनको बोलता हु. चलिए उनके घर चलते है. (वैसे भी सब घबराये हुए थे)

भार्गवी : है ठीक है चलो, पहले फ़ोन कर लेते है.

शिव : (मेने फ़ोन लगाया)

काव्य : (शिव का फ़ोन देख कर उसकी धड़कने बढ़ गयी, उसने धड़कते दिल से फ़ोन uthaya)Hello.

शिव : में शिव बोल रहा हु. आपसे मिलना है, आप घर पर है?

काव्य : (उसकी आवाज में घबराहट थी जो वो पहचान gayi)Kya हुआ शिव, कोई गड़बड़ हुई है?

शिव : में आपको मिलकर समजता हु.

काव्य : ठीक है, आ जाओ.

शिव : दीदी, आपलोगोंने खाना खाया?

लतादिदी : नहीं, सब टेंशन में थे.

शिव : आप लोग शांति से खाना खा लीजिये, कुछ नहीं होगा, में देखता हु. चलिए मैडम.

हमदोनो बहार आये और काव्यजि के घर की और निकल पड़े. दोनों चुप थे, क्यों की समाज नहीं आ रहा था. भार्गवी मैडम ने मेरे कंधे पर हाथ रखा.

भार्गवी : टेंशन मात लो, सब ठीक हो जायेगा. (में कुछ नहीं बोलै, हम काव्याज्जी के घर पहुंच गए)

काव्यजि : (दरवाजा खोला तो सामने शिव और भार्गवी दोनों the)Aap दोनों साथ में, कोई गंभीर समस्या है क्या? आओ अंदर आओ. (हम अंदर गए और बेथ गए, मेने उन्हें वो लिफाफा दिया, उन्होंने पढ़ा) तो इसमें टेंशन लेने की क्या बात है, डॉक्यूमेंट दिखा देंगे तो सब ठीक हो जायेगा.

शिव : आपको जम्नदासजी के बेटे का नंबर पता है न, तो उनसे बात कर लीजिये.

काव्यजि : (अपनी घडी देखते हुए) इस वक़्त बात करना सही नहीं होगा, में कल सुबह बात कर लुंगी. वैसे भी उनकी जमीं है तो कागजात तो होंगे hi, उसमे टेंशन लेनेवाली कोनसी बात है. जहा तक मुझे याद है, इस डिपार्टमेंट की ऑफिस जल गयी थी, उसके बाद में उन्होंने अख़बार में भी इस्तिहार दिया था, पर उसको काफी समय हो गया, मेरी ये समाज में नहीं आ रहा की इतने समय बाद ये नोटिस की क्या जरुरत पद गयी.

भार्गवी : उस पहलेवाले मैनेजर को शायद पता हो.

काव्यजि : हो शक्ति है.

भार्गवी : आप कल बात कीजिये, अगर कुछ नहीं होता तो फिर में उस से बात करुँगी, वो अभी जिस जेल में है, वह मेरी पहचान है.

काव्यजि : मेरी भी इस डिपार्टमेंट में पहचान है, कल ऑफिस में फ़ोन कर के पता करती हु की आखिर माजरा क्या है. (में उन्दोनो को देख रहा था, मेरे चेहरे पर टेंशन देख kar)Tum क्यों इतना टेंशन ले रहे हो, में हु न, में देख लुंगी. ये रूटीन प्रोसेस है, चिंता मात करो. पर आप दोनों साथ में?

भार्गवी : है वो, ये बाइक ले गया था तो देने आया था, में उसको छोड़ने गयी थी की ये पता चला.

काव्यजि : खाना खाया?

शिव : नहीं, हम घर hi पहुंचे थे की ये पता चला, तो हम सीधा यही आ गए, अब घर जा कर खाएंगे.

काव्यजि : खाएंगे मतलब?

भार्गवी : में भी वही खानेवाली थी.

काव्यजि : में भी अकेली hi हु, मुझे नहीं खिलाओगे शिव?

शिव : में कहा मन कर रहा हु, चलिए आप भी. पर हम बाइक से आये है.

काव्यजि : में कार ले लेती हु, में और भार्गवी जी कार में आते है, तुम बाइक ले lo.(Car चलते हुए) एक बात पुछु, बुरा तो नहीं मानेगी?

भार्गवी : पूछिए न, इसमें बुरा मान ने वाली क्या बात है?

काव्यजि : आप और शिव, काफी क्लोज है, है न?

भार्गवी : (कुछ पल सोचा) क्यों आप नहीं है?

काव्यजि : (वो भी खामोश हो गयी, फिर संभल kar)Ha वो क्लाइंट है, तो जान पहचान है.

भार्गवी : आप क्या हर क्लाइंट के वह खाना खाने जाती है?

काव्यजि : आप कहना क्या चाहती है?

भार्गवी : कुछ नहीं, जैसे आपने मुझे पूछा, में भी पूछ रही थी. और कुछ नहीं.

फिर दोनों hi कुछ नहीं बोली. दीदी दोनों को देख कर हैरान हुई, मेने उन्हें कहा की ये दोनों यही खाना खायेगी.

लतादिदी : पर शिव.

काव्यजि : तुम क्यों टेंशन लेती हो, जो होगा वही खा लेंगे.
 
अपडेट 140

हम सब खाने बेथ गए, मेरे बाजु में भार्गवी मैडम बेथ गयी और उनके बाजुमें काव्यजि. काव्य शिव के साथ बैठना चाहती थी, पर भार्गवी उसके साथ थी तो वो उसके साथ बेथ गयी, उसका मान किआ की वो दूसरी साइड जेक बेथ जाये, पर उसे ये थी नहीं लगा तो वो भार्गवी के साथ बेथ गयी, उसका बहोत दिल कर रहा था की वो शिव के साथ बैठे. उसने शिव के साथ सेक्स किआ था उसके बाद वो आज उस से मिली थी, बहोत बार मान किआ की उस से बात कर, उसे बुला ले, पर अभी भी वो उतनी खुल नहीं पायी थी, वो अक्सर वो याद करती रहती थी जो उन दोनों के बिच सेक्स के दौरान हुआ था, वो गरम भी हो जाती थी, क्यों की ये पहली बार था की उसने सेक्स किआ था, इतने सालो में उसे कभी लगा नहीं था की वो सेक्स करे, ऐसा भी नहीं था की उसने सोचा नहीं, पर कभी वैसा माहौल hi नहीं बना न कोई मिला. पर वो शिव के साथ ये सब कर चुकी थी, आज भी जब शिव आया तो उसका मान किआ की जेक उस से गले लग जाये, उसको किश करे, पर भार्गवी साथ में थी तो उसने अपनी भावनाओ पर काबू रखा. वो शिव को देख कर एक नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही थी, और उस बात को वो छुपाने की कोशिस कर रही थी, क्यों की किसी को नहीं पता था की उसने सेक्स किआ है. एक अजीब तरह का उसे लग रहा था, उसे शिव से शर्म भी आ रही थी और साथ में उसे उसके साथ रहना भी था. वो कभी कभी शिव को चुपके से देख लेती थी.

लतादिदी : आप लोग खाने आये और में कुछ अच्छा खिला नहीं प् रही हु.

भार्गवी : तुम क्यों ये सोच रही हो, मुझे कोई फर्क नहीं पद रहा, और खाना खाना होता है, मुझे तो अच्छा लग रहा है. वैसा hi है जो में घर पे कहती हु.

लतादिदी : फिर भी, आप मेहमान हो, और इतने बड़े लोग हो, मुझे अच्छा नहीं लग रहा.

काव्य : तुम ख़म खा hi दुखी हो रही हो, भार्गविजई सही कह रही है, हम भी यही कहते है, कभी कभार एक दो चीजे जयदा होती है, वर्ण तो रोज़ यही खाना होता है.

लतादिदी : है, पर हमारे यहाँ इतना ज्यादा खाना बनता है तो हम छह कर भी वैसा कुछ नहीं बना सकते, अलग अलग तरह की सब्जिया भी नहीं बना सकते.

भार्गवी : शिव, तू hi समजा, हम सहूलियत से है, हम ऐसे hi थोड़ी न खाने आये है, खाना खाना था, दावत पर थोड़ी न आये है, क्यों काव्यजि.

काव्यजि : सही कहा, ऐसे खाने से hi पेट भरता है, बाकि तो सब जीभ के स्वाद के लिए होता है.

(रंजन और विणा भी कहते हुए बाते सुन रही थी, और एक दूसरे को देख भी रही थी, काव्य की नजर से ये छुप न सका तो उसने पूछा) तुम दोनों ये आँखों आँखों में क्या बात कर रही हो? (उन्होंने रंजन की और देख कर बोलै था)

रंजन : (हड़बड़ाते hue)M में तो कुछ भी नहीं बोली.

काव्यजि : मुझे पता है तुम कुछ नहीं बोली, पर ये तुम्हारी आंखे है न, वो बहोत कुछ बोलती है, बताओ क्या सोच रही हो?

रंजन : हमारी लतादिदी है न, वो बहोत अच्छी है, वो हमेशा ऐसी सिचुएशन में घिर जाती है, पहले कभी इतने बड़े लोगो को यहाँ खाने आते देखा नहीं न, पर अब तो लगता है आदत डालनी hi चाहिए उनको.

लतादिदी : ऐसा क्यों बोल रही है तू?

रंजन : और नहीं तो क्या दीदी, आपको नहीं लगता की अब हमारे यहाँ बड़े बड़े लोग आने लगे है, और ऐसे नहीं, पर सब अपना समाज कर hi आ रहे है, क्यों शिव? (शिव के मुँह में निवाला था तो वो कुछ न बोलै)

सरिता : ये तो अच्छी बात है न, और ये सब इसकी वजह से hi hai(Shiv की और इस्सर कर के) इतने बड़े बड़े लोगो से जान पहचान बना ली है की हम सोच भी नहीं सकते.

काव्यजि : अरे भाई, हम इंसान नहीं है क्या, थोड़े पैसे आ जाने से क्या कोई इंसान नहीं रहता?

रंजन : ऐसी बात नहीं है मैडम...

काव्यजि : में कोई मैडम नहीं हु, और अगर हु भी तो वो काम में, यहाँ नहीं हु.

रंजन : तो फिर में आपको दीदी बुला सकती हु (काव्य ने मुस्कुरा कर सहमति जताई) है तो दीदी, में ये कह रही थी की सब पैसेवालों को ये नहीं लगता, कई ऐसे लोग होते है जिन्हे लगता है की वो अलग है, और ज्यादातर ऐसे hi लोग होते है, सब आपके जैसे अच्छे थोड़ी न होते है.

शिव : ये बात तो इसने सही कही, मैडम, आप है, भार्गविजई है, और भी लोग है, पता नहीं मुझे इतने अच्छे लोग क्यों मिले है.

रंजन : तूने सुना नहीं शिव, मैडम नहीं दीदी बोल, उन्हें ये पसंद नहीं (ये बोलते हुए रंजन ने मुस्कुराते हुए काव्यजि की और देखा, उसकी आँखों में एक नॉटी स्माइल थी)

शिव : वो तेरे लिए दीदी है, मेरे लिए नहीं, मेरी तो वो मैडम hi है, और तू ज्यादा चपड़ चपड़ मात कर, खाना खा. (काव्य अंदर hi अंदर शर्मा गयी, उसने अपने चेहरे पर वो शर्म न आ जाये उसका पूरा प्रयत्न किआ, पर रंजन की नजरो ने पहचान लिया, सरिता भी समाज रही थी)

सबने खाना ख़तम किआ. कुछ देर फिर अनाथ आश्रम की बाते चली. तक़रीबन 11 बज रहे थे.

भार्गवी : अब मुझे चलना चाहिए, बहोत टाइम हो गया है. और है लता, जब भी मेरा मान करेगा में आ जाउंगी, तुम अच्छा खाना बनती हो.

लता : जी मैडम, जब भी आपका दिल करे.

भार्गवी : काव्यजि ने कहा न, हम बहार मैडम है, मुझे भी तुम दीदी कह शक्ति हो. (उन्होंने लता का हाथ पकड़ कर कहा)

लता: जी दीदी, आपका hi घर है, अगर कुछ स्पेशल भी खाना हो तो बोल देना, में बना दूंगी. अब अगर आपने दीदी बोलने का हक़ दिया है तो मुज पर भी आप अधिकार जाता सकती है.

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए उसे गले लगाया) ठीक है, याद रखूंगी. (काव्य की और देख कर) आप का क्या प्रोग्राम है.

काव्य : है, में भी थोड़ी देर में निकलूंगी hi, मुझे थोड़ी बात करनी है. (काव्य, शिव से अकेले मिलने का मौका तलाश रही थी)

भार्गवी : ठीक है, तो में निकलती हु, (फिर उन्होंने सब को bye कहा, वो बहार निजकली तो में और काव्यजि भी बहार आ गए, वो बाइक पर बेथ गयी, पटिआला सूट में बाइक पर वो कमल लग रही थी, पूरी देसी गर्ल लग रही थी. वो हम दोनों को bye बोल के निकल गयी)

शिव : (अभी बहार हम दोनों hi थे, बहार का बल्ब जल रहा था, वह नजदीक hi उनकी कार भी पार्क थी) जी कहिये, क्या बात करनी थी? (वो मेरे सामने देखने लगी, में उनकी आँखों में देख कर समझने की कोशिस कर रहा था, मुझे लगा था की उन्हें अभी जो अनाथालय की गड़बड़ हुई है उसके सम्बंधित कोई बात करनी होगी, पर उनकी आँखों में कुछ और hi दिख रहा था, में समाज गया, वो अभी पर्सनल है, तो मेरा चेहरा भी अब बदल गया, मेरी आँखों में भी प्यार आ गया और में मुस्कुराया) (शिव के चेहरे के बदले भाव देख कर में शर्मा गयी, वो मुझे उस नजर से नहीं देख रहा था, पर उसको समाज आ गया था की में अभी वकील नहीं काव्य हु, हम दोनों सेक्स कर चुके थे तो वो मुझे बहोत अपना सा लग रहा था, और अब उसके चेहरे पर भी मेरे लिए वही अपनत्व का भाव था, पता नहीं क्यों मुझे शर्म आ गयी, मेने नज़ारे झुका ली) ओह! तो प्राइवेट बात करनी थी. (में उनके करीब गया तो उन्होंने दर के मारे दरवाजे और पुरे अनाथालय को देखा) अभी सब काम में व्यस्त होंगे. (उसकी बात से में फिर शर्मा गयी)

काव्य : फिर क्यों नहीं आये? (उन्होंने नज़ारे झुकाये मुस्कुराते हुए सवाल किआ)

शिव : में आना चाहता था, पर आपको पता hi है मेरा.

काव्य : (थोड़े रूठे स्वर me)Jab कोई मुसीबत आती है तभी मेरी याद आती है, है न?

शिव : ऐसी बात नहीं है, पर पढ़ाई, गेम और नौकरी, सब देखना पड़ता है न.

काव्य : मुझे याद करते थे? (मुस्कुराते हुए, नज़ारे झुकाये hi उन्होंने पूछा)

शिव : इसमें कोई पूछनेवाली बात है.

काव्य : उठे हो तुम, एक बार भी फ़ोन किआ, मश्ग किआ उस दिन के बाद. कैसी हु, क्या कर रही हु, कभी हल चल hi लिया? (काव्य खुद नहीं समाज प् रही थी, वो कैसा बेहवे कर रही है, क्या वो उसकी बीवी है? या फिर गर्लफ्रेंड?)

शिव : क्यों, मेने दूसरे दिन भी आपको पूछा था न?

काव्य : वो hi तो कह रही हु, उसके बाद कभी फिर पूछा?

शिव: सॉरी, आगे से ध्यान रखूँगा.

काव्य : (मेरी आँखों में देख कर) जबरदस्ती मात करना, अगर सच में मेरा ख्याल आये तो hi करना.

शिव : एक मिनट रुको (वो अनाथालय के अंदर चला गया, मेरी कुछ समाज में नहीं आया, में कड़ी कड़ी दरवाजे को देख रही थी, और समझने की कोशिस कर रही thi)(Me अंदर गया, देखा तो सब काम में लगे हुए थे, मेने दीदी को kaha)Didi हम यही आस पास जरा टहल रहे है, उन्हें अनाथालय के बारेमे बात करनी है.

लतादिदी : इसमें कहने आने की क्या जरुरत है.

शिव : मेने इसलिए कहा की हमे आगे देखो न तो आप चिंता न करो, इस्सलिये कहा.

लतादिदी : सब के सब काम में लगे हुए है, कोण बहार आएगा.

शिव : नहीं, मेने सिर्फ बताया.

लतादिदी : है ठीक है. (में फिर बहार चला आया)

काव्य : क्या हुआ? क्यों अंदर गए थे?

शिव : (उनका हाथ पकड़ते hue)Chaliye?

काव्य : (उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ कर कही ले जाने लगा तो में कैंप गयी, दर नहीं था, पर एक अजीब सी फीलिंग थी, वो मुझे खिंच कर ले जा रहा tha)Kaha ले जा रहे हो? (वह कोई भी नहीं था, फिर भी मेने धीरे से कहा, जैसे मुझे पता हो की हम कोई चोरी करने जा रहे है)

शिव : (मुस्कुराते hue)Kahi भगा के नहीं ले जा रहा, बस चलते चलते बात करते है, में वही बताने गया था, की हम बहार चलते चलते बात कर रहे है, अगर कोई बहार आया और हमे न देखा तो सोचमे पद जायेगा, इस लिए में कहने गया था.

काव्य : (मेरा शरीर कंपनी लगा, क्या वो यहाँ ऐसे खुले में मेरे साथ कुछ करेगा, पता नहीं एक दर लगने लगा, जैसे कोई चोरी करने जा रही हो) यहाँ नहीं शिव, ऐसे नहीं. (में रुक गयी, वो मेरी और देखने लगा और मुस्कुराया)

शिव : खा नहीं जाऊंगा, पर किसीने आपके साथ हाथ पकड़े भी देखा तो क्या सोचेगा, में अपने लिए नहीं आपके लिए सोच रहा हु, मुझे आपकी इज्जत की फ़िक्र है. हम सिर्फ बात कर रहे है, अब आ जाइये. (अजीब सी फीलिंग थी ये, में उसके साथ चलने लगी, वो मेरा हाथ पकड़ कर चल रहा था, इस और ज्यादा उजाला नहीं था, खिड़किओं से आती रौशनी thi)Ab बोलिये, क्या कह रही थी आप?

काव्य : (मेने उसकी और देखा, वो बिलकुल नार्मल था, वो बस मेरे साथ हाथ पकड़ कर चल रहा था, मुझे इतना अच्छा लग रहा था, में मुस्कुरायी) कुछ नहीं, बस इतना कह रही थी की अगर तुम्हे दिल से लगे तो hi मुझे याद करना, कॉल करना या मश्ग करना, कोई जबरदस्ती नहीं है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Me पागल थोड़ी न हु, आप को इग्नोर करने की गलती थोड़ी न कर शक्ति हु. मेरे सरे केस तो आप hi हैंडल कर रही है. (मेरी बात सुन कर वो रुक गयी, में भी रुक गया, वो मुझे देखने लगी)

काव्य : तो सिर्फ इस्सलिये तुम मुझसे बात करोगे (उनके चेहरे पर दर्द उमड़ आया)

शिव : (में उनके नजदीक गया, अब हम दोनों आमने सामने the)Aapko क्या लगता है?

काव्य : (में हलकी रौशनी में चमकती उन आँखों को समझने की कोशिस कर रही थी, वो बस मुस्कुरा रहा था, वो और मेरे नजदीक आया, में दर गयी, में आस पास देखने लगी, कोई देख तो नहीं रहा, पर वह कोई नहीं था, मेने फिर उसकी आंखोमे देखा, उसने मेरी कमर में हाथ दाल कर मुझे अपनी और खिंचा, मेरी धड़कने तेज हो गयी थी, मुझे पसीना आने लगा था, मेरी सांसे भी उखड रही thi)K कक कोई आ जायेगा? (में बस इतना hi बोल पायी)

शिव : आप मजाक भी नहीं समझती, में मज़ाक कर रहा था, आपको मेरा केस लड़ना है की नहीं वो आपकी मर्ज़ी है, पर हमारा ये सम्बन्ध बना है वो अलग है. (में उनको किश करने के लिए झुकने लगा)

काव्य : (मेरी हालत ख़राब हो रही थी, में भी चाहती थी की वो किश करे, पर दर लग रहा था, ऐसा कुछ मेने पहले कभी किआ नहीं था, पहली बार में ऐसे किसी लड़के के साथ ऐसे खुले में भी, और कोई देख न ले उसका भी दर लग रहा था, में कुछ बोल भी नहीं प् रही थी, बस आँखों से उसे देख कर बिनती कर रही थी, पर वो रुका नहीं और मेरे होठो को चूमने लगा, उस प्यारे से एहसास से में भर गयी और अपनी आंखे बंद कर के उसे अपनी आगोश में लेने लगी, वो मेरे होठो को चूस रहा था, और में भी अपने आप को रोक नहीं पायी, में उस से लिपट गयी और उसके होठो को चूसने लगी, कुछ देर हम किश करते रहे, एक दूसरे को बहो में लिए हम एक दूसरे को देख रहे थे, उसका कड़क अंग मुझे महसूस हो रहा था, मेरा गीलापन भी मुझे महसूस हो रहा tha)Ghar चलो न. (मेरी बात सुन कर वो muskuraya)Has क्यों रहे हो? तुम्हारा भी मान कर रहा है न?

शिव : आपको कैसे पता? (वो शर्मा गयी)

काव्य : (शरमाते hue)Tum जानते हो की मुझे कैसे पता hai(Meri आँखों में देखते हुए रिक्वेस्ट se)Chalo न. (में देख रहा था की वो गरम हो चुकी है, सेक्स का स्वाद वो चख चुकी थी, उनकी आँखों में साफ़ दिख रहा था, की अभी वो क्या चाहती है)

शिव : अभी नहीं आ शक्ति, क्या कहूंगा?

काव्य : (रिक्वेस्ट करते hue)Koi भी बहाना बना देना, प्लीज चलो न. (पतानहीं में क्यों इतनी पागल हो रही थी, मेरे शरीर में कुछ हो रहा था, उसके छूने से उसके किश करने से में अपने आप में नहीं थी, मेने कभी पहले ासिए अनुभव नहीं किआ था, मुझे वो सब करना था.

शिव : (में उनकी हालत समाज रहा था, उनको सेक्स चाहिए था, तभी मेरे दिमाग में आईडिया aaya)Me उन्हें एक पेड़ की और ले जाने लगा.

काव्य : कहा ले जा रहे हो. (वो कुछ नहीं बोलै, वो मुझे एक पेड़ के पास ले गया और तने के सहारे मुझे खड़ा कर दिया, मुझे दर भी लग रहा था, में आसपास देख रही thi)Yaha नहीं शिव, कोई देख लेगा.

शिव : (दर तो मुझे भी लग रहा था, सब अंदर hi है, और किसी को पता चल गया तो? मेने सोचा था की मैडम से थोड़ा रोमांस कर के उनका पानी निकलडूँगा तो वो शांत हो जाएगी, चुदाई तो अभी पॉसिबल नहीं थी, वैसे भी वो गरम हो चुकी थी तो उनके सामने बेथ गया और उनकी साड़ी ऊपर उठाने लगा)

काव्य : (शिव को अपनी साड़ी उठाते देख वो दर gayi)Nahi शिव, यहाँ नहीं.

शिव : कोई नहीं आएगा, और में कुछ कर नहीं रहा हु, बस आप चुप रहिये, में जो कर रहा हु करने दीजिये.

काव्य : (मेने कोई जवाब नेह दिया, वैसे भी मुझे कुछ हो रहा था, मुझे भी वो सब करना था, वो मेरी साड़ी उठाने लगा, मुझे शर्म भी आ रही थी, में आस पास देखने लगी)

शिव : (अजीब परिस्थिति थी, रोमांच भी हो रहा था, हलकी रौशनी में उनके गोटी भरव्दार पेअर बे पर्दा हो रहे थे, मेने साड़ी थोड़ी ऊपर उठायी तो उनकी मांसल झंघे मेरे सामने थी, मेने अपना हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा)

काव्य : (मेरी सिसकी निकलनेवाली थी, मेने एक हाथ से अपना मुँह दबा दिया, वो मेरी झंघ पर हाथ से सेहला रहा था, मेरी सांसे बे काबू हो रही थी, ऐसी जगह पर ये सब करवाने से घबराहट के साथ साथ रोमांच भी हो रहा था, छुप चुपके करने का एक अलग hi मज़ा होता है जिसका एहसास मुझे हो रहा था. वो मेरी झांग सेहला रहा था, उसके हाथ ऊपर की और बढ़ते जा रहे थे, मेरी धड़कन और गर्मी बढ़ती जा रही थी, उसका हाथ मेरी योनि तक पहुंच गया, वो अंगूठेसे दबाते हुए सहलाने laga)Ummmmmmmm, उम्मम्मम (मेरी घुटी घुटी सी आवाज निकल रही थी)

शिव : (उनकी फूली हुई छूट की वजह से पंतय गीली हो चुकी थी, वो चिकनाहट पंतय के बहार तक महसूस हो रही थी, मेरा लुंड भी कूद रहा था, छूट के रास की महक मेरे नाक में जा रही थी, कुछ पल सहलाने के बाद में थोड़ा नजदीक गया और छूट की गंध सूंघने लगा)

काव्य : (कितनी बेशर्म हो चुकी थी में, ऐसे खुले में अपनी साड़ी उठाये थी, और वो मेरी योनि से आती गंध को सूंघ रहा था, ये सब गन्दा था, पर मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मेने अपने पेअर थोड़े खोल्दिए, पता नहीं मुझे क्या हो रहा था, वो और नजदीक खिसका और मेरी योनिवाले भाग पर चाटने लगा, में अपने होठो को रगड़ने लगी, सांसे बेकाबू हो रही थी, वो जैसे जैसे चाट रहा था, में बहक रही थी, मेरा एक हाथ मेरे शाइन पर भी चलने लगा, मेरा पूरा ध्यान उसकी चटाई पर केंद्रित था, मुझे आस पास की कोई परवाह नहीं रही थी, में हलके हलके अपने स्तन दबाने लगी, हलकी आवाज me)Shhhhhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह. (में धीमी आवाज में सिसक रही thi)Shiiiiiv शहहहहह (मेरा मान शिव को कह रहा था, पंतय निकल दो, उतर दो उसे, पर शर्म और झिझक से में कह नहीं पायी, पर वो मेरे दिल की बात समाज गया, वो मेरी पंतय निकलने लगा, मुझे शर्म तो आ रही थी पर मेने रोका नहीं उसे, उसने पंतय निकालनी चाही पर पेअर फैले होने की वजह से निचे खिशक नहीं रही थी, में थोड़ी सीधी हुई और अपने पेअर नजदीक लाये, उसने पंतय निचे उतर दी, उसने मेरी और देखा, मेने शर्मा के नज़ारे फेर ली, वो मेरी योनि के बाल पर हाथ घूमते हुए उसे छूने लगा, और अंगूठे से दरार को सहलाने लगा, रास बहोत ज्यादा निकल रहा था जो वो अंगूठे से पूरी दरार पर फैला रहा था)

शिव : पेअर खोलो.

काव्य : (उसने कहा तो मेने उसकी और देखा, वो मुस्कुराया तो में फिर शर्मा गयी, में दूसरी और देखने लगी, कितना अजीब लग रहा था, में अपने hi निजी अंग को उसके सामने खोल रही थी, हिचकिचाहट तो थी पर मेने पेअर खोल दिए, वो मेरी नंगी योनि सहलाते हुए देख रहा था, मेरे अंदर अजीब सी गुदगुदी हो रही थी, बेशर्मो की तरह में अपनी hi योनि उसके सामने परोक्ष कर कड़ी थी, पर ये सब कही न कही मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, वो मेरी योनि के बको को खिसका के योनि के होठो को फैलाकर अंदर देखने की कोशिस कर रहा था, वो वह छू रहा था तो मेरे अंदर तरंगे उठ रही थी, वो मेरी योनि को देख रहा था तो में उसे देख रही थी, वो योनि की और बढ़ा और उसे चाटने लगा, जैसे जैसे वो चाट रहा था मेरी हालत ख़राब हो रही thi)Shhhh शहहहहह शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह (में उसका शिर सहलाने लगी और अपने पेअर ज्यादा फ़ैलाने lagi)Shhhhhh shhhhh(Uski जीभ मेरी योनि के छेड़ में जा रही थी तो मेरी सिस्किअ बेकाबू हो रही थी, में और पेअर फैला कर उसे रास्ता दे रही थी ताकि वो और अंदर जा सके)

शिव : (फूली हुई छूट मुझे अंदर खिंच रही थी, उस से निकलता रास मुझे स्वादिस्ट लग रहा था, में छेड़ को चाट रहा था और साथ में उस सेंसटिव डेन को भी चूस रहा था, उनकी सिस्किअ बता रही थी की वो काफी गर्म है, में चाहता था की वो झाड़ जाये, वो अपनी छूट को मेरे मुँह पर दबा रही थी, में और उसे चाट रहा था, पर थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे शिर को धकेलना सुरु किआ, में समाज गया की वो झाड़ जाएगी, पर वो मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूर हटा रही थी, तो मेने ऊपर देखा, उन्होंने अपनी नजर फेर li)Kya हुआ, करने दीजिये मुझे.

काव्य : (में कैसे कहु मुझे समाज नहीं आ रहा था, शर्म भी आ रही थी, पर हिचकिचाते हुए मेने kaha)Wo, वो करो. (उनकी बात मेरी समाजमे नहीं आयी)

शिव : क्या?

काव्य : (में शर्म से गाढ़ी जा रही थी, पर मजबूर थी, मेने फिर kaha)Wo ....अंदर डालो. (इतना बोलते बोलते तो में हांफ रही थी)

शिव : (में समाज गया की वो छोड़ना चाहती है, पर जगह और टाइम सही नहीं tha)Yaha? (मेने आस पास देखते हुए कहा)

काव्य : मुझे नहीं पता, पर प्लीज वो करो, अभी. (ये उनकी उत्तेजना बोल रही थी, में खड़ा हुआ, में उन्हें संजना चाहता था)

शिव : यहाँ ठीक नहीं है, कोई देख लेगा.

काव्य : (वो मेरी आँखों में देखने lagi)Me कुछ नहीं जानती, मुझे वो चाहिए, प्लीज. (ज्यादा बहस करना मुझे ठीक नहीं लगा, मेने आस पास एक नजर डाली फिर अपनी ज़िप खोल दी, और लुंड बहार निकल लिया, वो मेरे लुंड को बड़े चाव से देखमे लगी, मेने उनका हाथ पकड़ और लुंड की और ले जाने लगा, वो हिचकिचाई, पर फिर लुंड पकड़ liya)(Maan में : शहहहहह कितना गरम है ये, एकदम कड़क, में पागल हो रही हु) (में उसे पकड़ कर दबा कर देखने लगी, उसको पकड़ने से मेरी उत्तेजना बहोत ज्यादा बढ़ गयी थी, उसके आगे का भाग चिकना हो रहा था, उसका रास मेरे हाथ को भिगोने लगा)

शिव : थोड़ा चूस लीजिये, ताकि ये गिला हो जाये.

काव्य : (मेने उसकी और देखा, वो उसे चूसने को बोल रहा था, अजीब लग रहा था, पर अभी में कुछ भी करने को तैयार थी, में शरमाते हुए झुकी, वो अंग मेरे नजदीक था, उसकी गंध मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी, डरते हुए मेने जीभी निकली और उस लाल लाल भाग को हलके से टच किआ, उसका नमकीन स्वाद मेरे मुँह में घुलने लगा, अजीब सी फीलिंग थी, उसने चूसने को कहा था, मेने अपना मुँह खोला और अपने होठो को उस लाल भाग पर लगाया, अजीब लग रहा था, पर बुरा नहीं था, में होठो को और फैलाती गयी और आगे होते हुए उस गरम डंडे को अपने मुँह में ले जाने लगी, ये अजीब एहसास था, पर में उसे और अंदर करती गयी, उसका स्वाद मेरे मुँह में घुलने लगा, मेने थोड़ी देर उसे अपने मुँह में रक्खा और फिर उसे चूसने का प्रयास करने लगी, उतने में शिव ने मेरा शिर एक हाथ से पकड़ा और उसे अपने अंग पर दबाया तो वो मेरे गले तक पहुंच गया,





मेने अपना शिर पीछे खींचा, तो शिव ने उसे फिर दबा दिया, दो तीन बार ऐसा हुआ, फिर उसने मेरा शिर छोड़ दिया)

शिव : बस, अब पेड़ का सहारा ले कर झुक जाइये. (उन्होंने मेरी और देखा, फिर हिचकिचाते हुए घूम गयी, और पेड़ का सहारा ले लिया, मेने पीठ को दबा कर उन्हें और झुकने का इस्सर किआ तो वो और झुक गयी, उनके बड़े बड़े कूल्हे मेरे सामने थे,





पर साड़ी वापस निचे हो गयी थी, मेने साड़ी उठायी और कमर तक ले गया, हलकी रौशनी में चमकते गोर गोर कूल्हे मेरे सामने थे, मेने पीछे से छूट को टटोला, और अपने लुंड को वह लगा दिया, वो अपने आप hi और झुक गयी, उनकी छूट पर मेरा लुंड था, मेने अंदर दबाया तो सूपड़ा हल्का सा फंसा, फिर अंदर चला गया, उन्होंने फ़ौरन एक हाथ से अपना मुँह दबा दिया, और हल्का सा करहि, ये उनका दूसरी बार hi था तो में समाज सकता था, पर में इसमें कुछ नहीं कर शक्ति था, में अपना दबाव बढ़ता गया और लुंड अंदर उतरता रहा. आधा लुंड अंदर चला गया तो में रुक गया, मेने उनके कूल्हों को सहलाते हुए puchha)Aap ठीक हो, (उन्होंने बिना मेरी और देखे हां में शिर हिलाया)

काव्य : (दर्द तो हो रहा था, पर में उसे ये बताना नहीं चाहती थी, मुझे वो कड़क अंग, मेरे अंदर बहोत अच्छा लग रहा था, भले थोड़ा दर्द हो रहा था, पर मुझे वो सब करना था, तो में ऐसे hi रही, मेने कभी सोचा नहीं था की में इस अवस्था में भी होउंगी, निचे से नंगी, अपने कूल्हे निकले में झुकी हुई थी, और छह रही थी की वो मेरी योनि में वो अंग अंदर डेल, पता नहीं क्यों मुझे वो चाहिए था, वो समझदार था, वो कुछ पल रुक गया था, और मेरे कूल्हे सेहला रहा था, में थोड़ी नार्मल हुई, मेने महसूस किआ की अब वो अंग मेरी योनि में थोड़ा थोड़ा आगे पीछे हो रहा है, में दोनों हाथ टिकाये फिर से अच्छे से कड़ी हो गयी, वो अंदर बहार करने लगा, उसका वो बहोत मोटा था, मेरी योनि बहोत फ़ैल गयी थी, जैसे जैसे वो अंग अंदर बहार हो रहा था मेरी सिस्किअ निकल रही थी जिसे में होठो को दन्त से दबा कर रोकने का प्रयास कर रही थी, वो जैसे जैसे जटके मार रहा था, वो अंग और अंदर जा रहा था, मेरे मुँह पर दर्द से ज्यादा उस अंग की वजह से उत्तेजना थाई, में धक्को से हिल रही थी, पर मेरा ध्यान उस अंग को महसूस करने में hi था, में भूल चुकी थी की में किसी खुली जगह पर ये सब कर रही थी, अभी मुझे कोई परवाह नहीं थी, में बस उस अंग को महसूस कर रही थी जो मेरी योनि को फैलते हुए अंदर बहार हो रहा था, कितना अजीब ये खेल है, अगर कोई मुझे इस अवस्था में देखे तो मेरा क्या हाल हो, पर मुझे अभी उसकी कोई परवाह नहीं थी, वो मेरी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहा था और में हलके हलके सिसकते हुए मज़े को महसूस कर रही थी)

शिव : (में कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था की मैडम मेरे साथ ऐसे होंगी, उनके बड़े बड़े कूल्हे बहोत आकर्षक थे, मेरा लुंड उनकी छूट में अंदर बहार हो रहा था,





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में उनके कूल्हे मसलते हुए उनके गांड के छेड़ को देख रहा था, वो सिकुड़ ता और फ़ैल रहा था. मेने एक नजर आस पास डाली, वह सन्नाटा था, खिड़किओं की हलकी रौशनी थी वह, मेने उन्हें छोड़ने में ध्यान केंद्रित किआ, उनकी छूट बहोत टाइट थी, अंदर की देवल भी ज्यादा सख्त थी, मुझे ऐसे लग रहा था जैसे हड्डीओं के बिच मेरा लुंड फंसा हुआ है, में छूट की उस अकड़ को ढीला कर रहा था, मेने अपनी स्पीड बढ़ा दी थी, में चाहता था की वो जल्दी झाड़ जाये, उनकी कमर पकड़ कर में धक्के लगा रहा था, मेरा मान बहोत कुछ करने को कर रहा था पर भी सही समय नहीं था.)

काव्य : (उसके धक्के बहोत तेज हो चुके थे, मुझे दर्द भी हो रहा था, पर मुझे उसकी परवाह नहीं थी, वो कड़क अंग, मेरी योनि की दीवारों को अच्छे से रगड़ रहा था, एक जगह ऐसी भी थी जाया वो मुझे बहोत ज्यादा महसूस हो रहा था, में उसके धक्को को महसूस कर के सिसक रही थी, में और झुक रही थी ताकि वो और अंदर जाये, मुझे कोई परवाह नहीं थी की वो मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा, मुझे बस वो अंग hi महसूस हो रहा था,





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में इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी की में अब थोड़ी ज्यादा सिसक रही thi)Shhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह. (ऐसा कुछ देर चलता रहा, अब में ज्यादा भर गयी थी, मेरे अंदर से कुछ निकलने को बेताब था, में उस अनुभव को जानती थी, में उस अनुभव को पहले महसूस कर चुकी thi,)Shhhhh सीईव शह्ह्ह्हह्ह जल्दी करो शह्ह्ह्ह जल्दी शिव शह्ह्ह्ह और जल्दी शह्ह्ह्हह्ह. (में समाज गया था की वो अपने चरम पर है, में और जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगा, थोड़ी hi देर में वो हलके से chillayi)Aiiiiiiiiiiiiii शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह बससससस शह्ह्ह्हह्ह बससससस shhhhhhhhhhh. (मेने थोड़े और धक्के मरे और में रुक गया, वो अपना मुँह दबाये हांफ रही थी, कुछ पल बाद मेने लुंड निकल लिया, जैसे hi लुंड निकला वो निचे बेथ गयी, उनकी आंखे बंद थी और वो हांफ रही थी. मेने जैसे तैसे लुंड को अंदर किआ और ज़िप बंद करि, और उनके पास बेथ गया, और उन्हें झेलने लगा, उन्होंने आंखे खोली और मुझे देखा, और फिर शर्मा गयी, एक मिनट बाद वो फिर शरमाते हुए कड़ी हुई और फिर पेड़ पकड़ कर पीछे घूम गयी, में मुस्कुराया और उन्हें पकड़ कर मेरी और घुमाया, वो मुझे देखने लगी)

शिव : अभी सही वक़्त नहीं है.

काव्य : (शरमाते hue)Abhi तुम्हारा नहीं हुआ है न?

शिव : कोई बात नहीं.

काव्य : नहीं, क्कोई बात नहीं, तुम कर लो.

शिव : उसकी जरुरत नहीं है, आपको अच्छा लगा? (वो शर्मा gayi)Achchha लगा की नहीं?

काव्य : (शरमाते हुए muskurayi)Hmmmmm.

शिव : अब चलिए यहाँ से, कोई देख न ले हमें.

काव्य : (उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया, और मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद मेरी आंखोमे देखते hue)Thank यू शिव.

शिव : मेरा भी थैंक यू, मुझे भी बहोत मज़ा आया.

काव्य : (मेरे साइन से लगते hue)Juthe, तुम्हारा तो हुआ hi नहीं.

शिव : तो क्या हुआ, जितना भी हुआ, उसमे मज़ा आया.

काव्य : (मेरी और देख kar)Sachiii.

शिव : सच्चीई. (वो मुस्कुरायी, मेने उनके कपडे जटके ताकि कुछ लगा हो तो निकल जाये, मेने उन्हें पंतय दी, वो शर्मा gayi)Pehan लीजिये. (वो बहोत शर्मा गयी)

काव्य : तुम उधर घूम जाओ.

शिव : अभी तो मेने सब कुछ देखा है.

काव्य : तो क्या हुआ, अभी मुझे शर्म आ रही है, उधर देखो. (में मुस्कुराते हुए दूसरी और घूम गया, उन्होंने पंतय पहन ली और हम आगे की और चले gaye)Tum चिंता मात करना, में कल जानकीदास के लड़के से बात कर लुंगी, तुम चिंता मात करो, कागजात उनके पास होंगे.

शिव: पर अगर न मिले तो?

काव्य : ऐसा क्यों सोचते हो, जरूत होंगे, और अगर न मिले तो फिर देखते है. में तुम्हे फ़ोन करके बता दूंगी. (हम बात करते करते आगे चले आये) अब में निकलती हु. कल स्कूल के बाद फ़ोन कर लेना या घर आ जाना. वैसे भी तुम अधूरे रह गए हो. (उन्होंने नटखट सी स्माइल दी)

शिव : ठीक है, अगर जल्दी फ्री हो गया तो आ जाऊंगा. (वो गाड़ी में बेथ गयी, और गाड़ी चालू कर di)Bye.

काव्य : (दरवाजे की और देख kar)Thoda नजदीक से bye करो. (में मुस्कुराया और उनके नजदीक गया और हलके से उनके होठ पर किश किआ, वो muskurayi)Bye.

वो वह से निकल गयी. में अंदर आया तो उसी वक़्त रंजन और विणा छत से उतर रही थी, मुझे जिस तरह से वो दोनों देख रही थी मुझे शक हुआ की शायद इन्होने कुछ देखा है, पर रंजन कुछ बोली नहीं तो में भी सीधा अपने रूम में चला गया. वैसे तो मुझे फ़िक्र थी की आगे क्या होगा, पर अभी कुछ भी मेरे हाथ में नहीं था, तो में पढ़ने बेथ गया. पढ़ाई में भी मान नहीं लग रहा था तो में बिस्तर पर लेट गया, कब मुझे नींद आ गयी मुझे पता नहीं चला. सुबह उठा, अपना नित्यक्रम किआ और स्कूल के लिए निकल गया. जब में पंहुचा तो वैस्वी और संयम मेरा वेट कर रही थी. Hi hello हुआ और में स्कूटर पर बेथ गया. फिर दोनों में खिंच तन सुरु हो गयी की कोण मेरे पीछे बैठेगा, मेरा दिमाग पहलेसे hi ख़राब था.

शिव : ये क्या लगा रक्खा है तुम दोनों ने, एक काम करो, तुम दोनों hi जाओ, जैसे तुम पहले जाती थी, में अपने आप आ जाऊंगा. (में स्कूटर से उतरा और अपना बैग लिए वह से दौड़ते हुए निकल गया,) (संयम और वैस्वी दोनों बूत बानी शिव को जाता हुआ देखती रह गयी)

नाज़िआ : अब लड़ो दोनों (उन्होंने टॉन्ट मारा)

संयम : इसने hi सुरु किआ सब, में hi बैठती थी न रोज़, अब इसको क्या हो गया है जो इसे बैठना है.

नाज़िआ : क्यों, शिव तुम्हारी मिल्कियत है क्या, वो उसका भी दोस्त है, तो उसको भी बैठने दे कभी. (वैस्वी तो अभी भी शिव की और hi देख रही थी, उसकी आँखों में हलकी सी नमी आ गयी thi)Ab दोनों यही कड़ी रहोगी या स्कूल भी जाओगी. (वैस्वी se)Tum तो समझदार हो, जाओ और उसे मनाओ.

संयम : ये समझदार है और में बेवकूफ, है न? मुझे नहीं जाना स्कूल. (ये कहते हुए वो अपना बैग ले कर घर की और चल दी)

नाज़िआ : आरी, सुन तो (वो आवाज लगाती रही, पर वो नहीं रुकी और आगे बढ़ती रही) वैस्वी, तुम जाओ, लगता है वो आज स्कूल नहीं जाएगी. (वैस्वी कुछ नहीं बोली, वो स्कूटर पर बैठी और शिव की और चल दी, नाज़िआ भी घर की और चल di)Ye लड़की भी न पागल है, इतनी छोटी बात पर कोई जगद्ता है.

वैस्वी : (वो शिव के पास पहुंच गयी थी, शिव दौड़ते हुए जा रहा tha)Shiiiiiv. (मेने वैस्वी की और देखा, वो अकेली थी)

शिव : (दौड़ते हुए hi)Samim कहा है?

वैस्वी : वो नहीं आयी, घर चली गयी. तुम बेथ जाओ.

शिव : मुझे नहीं बैठना, में ऐसे hi ठीक हु.

वैस्वी : रुको तो, इसमें मेरी क्या गलती है?

शिव : न तुम्हारी गलती है, न उसकी, मेरी hi गलती है. अब से में ऐसे hi जाऊंगा, पहले जैसे तुम दोनों जाती थी, वैसे hi जाया करो. (वैस्वी ने शिव के आगे स्कूटर रोक दिया तो शिव भी रुक गया)

वैस्वी : (आँखों से आंसू छलक आये) तुम मुझे बताओ, मेरी क्या गलती है, क्या मेरा मान नहीं करता तुम्हारे साथ बैठने को, क्या वो hi हर बार बैठेगी.

शिव : इसीलिए में कह रहा हु की मुझे आना hi नहीं है, न में रहूँगा न ये जगहदा होगा, में कई दिनों से तुम दोनों के बिच की खिंच तन देख रहा हु.

वैस्वी : पर इसमें मेरी गलती कहा है, तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो, क्या मेरा मान नहीं करता, में जानती हु की वो भी तुम्हारी फ्रेंड है, तो में उसे बैठने देती हु न, उसे भी समझना पड़ेगा.

शिव : अभी ये बहस का टाइम नहीं है, स्कूल के लिए लेट हो रहे है, तुम जाओ, में आता हु.

वैस्वी : मतलब तुम मेरे साथ नहीं आओगे?

शिव : नहीं, मुझे इस झगड़ेमे पड़ना hi नहीं है.

वैस्वी : अगर तुम नहीं बैठे तो में स्कूल नहीं आउंगी.

शिव : वो तुम्हारी मर्जी है, में लेट हो रहा हु तो में जाता हु.

वैस्वी देखती रह गयी और शिव वह से दौड़ते हुए निकल गया, वो आँखों में आंसू लिए उसे जाता देखती रही. जब वो दूर चला गया तो उसने स्कूटर चालू किआ और घर की और चली गयी. जब वो घर पहुंची तो उसे देख कर उसकी मम्मी और भाभी दोनों को आश्चर्य हुआ.

मम्मी : क्यों वापस आ गयी, क्या हुआ?

वैस्वी : मुझे पेट में दर्द हो रहा था तो में वापस आ गयी. (कहते हुए वो अपने रूम की और चली गयी)

मम्मी : आरी सुन तो, क्या हुआ? (वो चिल्लाती रही पर वैस्वी नहीं ruki)Pata नहीं क्या हुआ है, कुछ बताये तो समाज में आये. अगर डॉक्टर के पास जाना है तो भी समाज में आये.

स्वर्ण : आप चिंता मात कीजिये, में बात करती हु.

मम्मी : है पूछ उसको, पता नहीं क्या हो गया है आज कल की लड़कीओ को, सीधे मुँह जवाब hi नहीं देती.

स्वर्ण : (उसके रूम के पास गयी तो दरवाजा अंदर से बंद था, दरवाजा खत खटते hue)Vaiswiiiii, दरवाजा खोल तो (अंदर से कोई जवाब नहीं aaya)Sun टूवू, दरवाजा खोल, मम्मी चिंता कर रही है, अगर तूने दरवाजा नहीं खोला तो वो आ जाएगी, मुझसे तो बात कर. (थोड़ी देर में अंदर की कुण्डी खुलने की आवाज आयी, पर दरवाजा नहीं खुला, स्वर्ण ने धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया, उसने देखा की वैस्वी बीएड की और गयी और उलटी हो कर लेट गयी, वो उसके पास gayi)Kya हुआ, कहा दुःख रहा है?

वैस्वी : मेने कहा न, आप जाओ, थोड़ी देर में ठीक हो जायेगा.

स्वर्ण : मेरी और देख कर बात कर, बता मुझे, पेट में दर्द है की कोई और बात है (वो कुछ नहीं बोली) मिक्की ने तो कुछ नहीं किआ (वो कुछ नहीं बोली.) तीखे, नहीं बताना तो मात बता, पर इतना बता दे की तू ठीक है न, डॉक्टर को बोलनेवाली तो कोई बात नहीं है न?

वैस्वी : नहीं, वैसी कोई बात नहीं है.

स्वर्ण : ठीक है, तू आराम कर, अगर किसी चीज की जरुरत हो तो बोल देना. (वो चली गयी, मम्मी को भी बता दिया की डॉक्टर वाली कोई बात नहीं है, पेट में थोड़ा सा दर्द है, उसकी मम्मी भी समझती थी की लड़कीओ को कभी कभी ऐसा होता है, उधर संयम की अम्मी भी यही सब पूछ रही थी)

नाज़िआ : कुछ नहीं ामी, उसकी तबियत नासाज़ है, तो वो स्कूल नहीं गयी, वो ठीक है, आप चिंता मात कीजिये.

अम्मी : इस लड़की का भी कुछ समाज नहीं आता.

9 बजे के आस पास काव्य ने जानकीदास के बेटे को फ़ोन लगाया, क्यों की अब वो hi ट्रस्टी था.

काव्य : Hello, में काव्य बोल रही हु, में क्सक्सक्स सहर से बोल रही हु.

ट्रस्टी : जी कहिये, क्या काम था?

काव्य : शायद आपने मुझे पहचाना नहीं, में और शिव आपके ऑफिस आये थे.

ट्रस्टी : है याद आया, वकील साहिबा.

काव्य : जी, में अधिवक्ता काव्य बोल रही हु.

ट्रस्टी : जी, कहिये मैडम, क्या काम था?

काव्य : मेने इस लिए फ़ोन किआ था की यहाँ एक इशू हो गया है, जानकीदास अनाथालय जो की आपके पिताजी का है, उसकी जमीं की रजिस्ट्रेशन का मामला है, यहाँ के रिकॉर्ड के मुताबिक उसका रजिस्ट्रेशन वापस करवाना है.

ट्रस्टी : ऐसा क्यों?

काव्य : कुछ साल पहले, यहाँ की ऑफिस जल गयी थी, उस वक़्त कुछ रिकॉर्ड भी जल गए थे, तो गोवत ने ये प्रोसीजर फिर से की थी, पता नहीं आपको क्यों नहीं मालूम, हो सकता है की उस मैनेजर ने आपको इन्फॉर्म न किआ हो.

ट्रस्टी : नहीं, मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं है.

काव्य : कोई बात नहीं, पर जो दस्तावेज किये होंगे, उसकी कॉपी चाहिए होंगी.

ट्रस्टी : Dastaveeeeej.....(Kuchh पल शांति छायी रही, जैसे वो कुछ सोच रहे ho)Kavyaji, एक बात कहु, सचमे मुझे उस दस्तावेज के बारे में नहीं पता है, इतने सालो में मेने कभी देखे नहीं है, पता नहीं पिताजी ने वो कहा रक्खे है, में ढूंढने की कोशिस करता हु.

काव्य : जी ठीक है, आप देखलीजिये, और मुझे इन्फॉर्म जरूर कर दीजियेगा.

ट्रस्टी : जी ठीक है.

ट्रस्टी की बातो से काव्य की चिंता बढ़ गयी. बहोत सालो पहले की बात है तो शायद उनको पता न भी हो. इतने सालो से ये अनाथालय है तो ऐसा तो नहीं हो सकता की उसके कागजात न हो, पर उस समय जानकीदास ने किस तरया ये सब किआ था वो तो वो hi बता सकते थे. वो इस्वर से प्राथना करने लगी की कागजात मिल जाये.

इधर बिना और उसके ससुराल वाले सिटी में आ चुके थे, सुआबाह जल्दी सफर सुरु किआ था तो आते आते दोपहर हो गयी थी. सब थक गए थे तो बिना उन्हें अपने घर ले आयी थी. सब फ्रेस हो गए थे और बैठे थे. उसके सास –ससुर, और बड़ी चाचीजी और पद्मा भी आयी थी.

चंद्रभान : (घर को देखते hue)Beta ये हमें अच्छा नहीं लगा, आप इतने छोटे से घर में रहते हो, आपको अपनी हैसियत के हिसाब से घर लेना चाहिए था.

बिना : जी, पर में इतना hi अफ़्फोर्ड कर सकती हु, और बड़ा घर होता तो उसे में अकेले तो संभल नहीं सकती, तो ये hi ठीक है.

चंद्रभान : सँभालने की बात तो समाज में आती है, पर ऐसा क्यों कह रही हो की अफ़्फोर्ड नहीं कर सकती, हमारे पास पैसो की कमी है क्या?

बिना : में जितना कमेटी हु, उस हिसाब से hi रहती हु पापा.

निर्मलादेवी : हमने तो तुमसे कई बार कहा की क्या जरुरत है नौकरी करने की, क्या कमी है हमारे घर में?

बिना : ऐसी बात नहीं है माजी, में पैसो के लिए थोड़ी न नौकरी करती हु, में पढ़ी लिखी हु और अपना ज्ञान बात रही हु, इसीलिए तो टीचर बानी हु.

चंद्रभान : (निर्मलादेवी कुछ बोलने जा रही थी पर वो बीचमे hi bolpade)Chalo कोई नहीं, जैसा तुम्हे ठीक लगे, हम भी तुम्हारी भावनाओ की कदर करते है.

बिना : खाना बना दू maji?(Nirmaladevi ने अपने पति की और देखा)

चंद्रभान : नहीं बीटा, ये चाय नास्ता किआ वो अभी के लिए बहोत है, बिटिया के घर जा रहे है, उसके बाद देखते है.

बिना : पर जाना कहा है पापा?

चंद्रभान : मेने पता करवाया है, वो कंस्ट्रक्शन के बुसिनेस्स में है, उनको फ़ोन लगता हु, उनसे बात करके फिर चलते है. (वो फ़ोन लगाने लगे)
 
हैप्पी विशेष फॉर 2024 तो आल फ्रेंड्स.

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