Adultery Kundali Bhagya - Page 28 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 197

में और जूही स्टेडियम के गयम में हमारा वर्कआउट कर रहे थे, स्टेडियम में तो पानी भरा था तो हम ने ट्रेडमिल पर hi दौड़ लगायी, हमारा ये सब चल hi रहा था की मेरे फ़ोन पर कॉल आया, मेने देखा तो भार्गवी मैडम का था.

शिव : Hello.

भार्गवी : कैसे हो? (प्यार से)

शिव : गयम में हु, वर्कआउट चल रहा है. (मेने भी बहोत प्यार से कहा)

भार्गवी : अच्छा सुनो एक बात केहनी थी.

शिव : कहिये न, आप कब से इजाजत मांगने लगी?

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Ijajat नहीं मांग रही, बता रही हु, हमारी बात हुई थी न, वो वॉचमन के लिए.

शिव : है, कोई मिला?

भार्गवी : वॉचमन तो नहीं है, पर मेरे पास एक और आईडिया है, क्या तुम पुलिस स्टेशन आ शक्ति हो?

शिव : अभी मुझे अधघंता लगेगा.

भार्गवी : कोई बात नहीं, मुझे भी टाइम लगेगा.

शिव : ठीक है, आता हु. (मेने फ़ोन रख दिया)

जूही : किसका फ़ोन था? (मेने उसको बता दिया) ध्यान से देख परख कर रखना जो भी हो.

शिव : भार्गविमडम कह रही है तो सोच समाज कर hi कह रही होंगी.

जूही : ठीक है. (फिर हमारा वर्कआउट चला, मेने जूही को घर छोड़ा और में पुलिस स्टेशन चला गया)

भार्गवी : (मुझे देख कर स्माइल के sath)Aao. (में उनके सामने बेथ gaya)To हो गयी कसरत? (में बस muskuraya)Tum जो वॉचमन के लिए कह रहे थे न, तो मेरे पास एक सुझाव है (में उन्हें देख रहा tha)Ek कांस्टेबल है, गौरव, एक साल से इस पुलिस स्टेशन में है, अच्छा लड़का है, उसको थोड़ी दिक्कत है, वो अकेला hi है तो खाना बनाना और अकेले रहने में दिक्कत है. (में गौर से सुन रहा था) मेने उस से बात की और कहा की वो अगर तुम्हारे वह रहने चला आता है तो तुम्हारी प्रॉब्लम भी सोल्वे हो जाएगी और उसकी भी.

शिव : में कुछ समजा नहीं.

भार्गवी : उसकी खाने वगैरह की प्रॉब्लम सोल्वे हो जाएगी और तुम्हारा भी काम हो जायेगा.

शिव : आप कहना चाहती है की उसको अनाथाश्रम में रहना है?

भार्गवी : अनाथाश्रम में तो नहीं, पर क्या बहार उसका इंतजाम कर शक्ति हो? जैसे बहार एक रूम बनवा दो. (में सोच में पद गया, फिर सोच कर मेने kaha)Uske लिए तो मुझे अनाथालय के ट्रस्टी से बात करनी पड़ेगी, क्यों की जमीं तो उनकी hi है.

भार्गवी : ये बस मेरा सुझाव है, मन न न मन न तुम्हारी मर्जी है. लड़का सीधा है, इसलिए मेने कहा, क्यों की में जानती हु की वह लड़कीअ है, और ये सरकारी नौकरी में है तो ऐसा वैसा करने से पहले वो अपनी नौकरी का जरूर सोचेगा, मुझे लगता है की वो बेस्ट ऑप्शन है.

शिव : आपने सोचा होगा तो मुझे कुछ कहने की जरुरत नहीं है, पर दिक्कत है रहने की, में कुछ सोचता हु.

भार्गवी : और किसी को रखते है तो तुम्हे पैसे भी देने पड़ेंगे, इसको पैसे देने की जरुरत नहीं है, बस उसके रहने का इंतजाम कर देना है और खाना वगैरह की तो कोई दिक्कत नहीं होगी तुम्हे.

शिव : में बात करता हु.

भार्गवी : पहले में उस से मिलवाती हु तुम्हे. (उन्होंने किसी को आवाज दी और गौरव को बुलवाया, एक सिंपल सा लड़का था वो, उसने आ कर मैडम को सलूट kiya)Gaurav, ये शिव है, मेने तुम्हे बताया था न.

गौरव : (मेरी और देख कर मुस्कुराते hue)Namaste.

शिव : नमस्ते.

भार्गवी : गौरव, मेरी शिव से बात हुई है, और मेने भी तुम्हे बताया था, तुम्हारे रहने के लिए कुछ इंतजाम होता है तो फिर आगे देखते है.

गौरव : जी मैडम. मेने आपको तो बताया था, नौकरी करना और फिर घर में सब काम करना, थोड़ा मुश्किल हो जाता है, और आप नौकरी का तो जानते hi है, कभी भी आना पड़ता है. में आगे चलकर मेरी माँ को भी बुलाना चाहता हु, पर थोड़े ढंग की जगह मिले तब बुलाऊ न. अभी में दो लड़को के साथ एक रूम में रहता हु, और हमारे वह अभी क्वार्टर का भी इंतजाम नहीं है. (मेरी और देख kar)Aapko मेरी वजह से कोई परेशानी नहीं होगी.

शिव : मेरा नाम शिव है, मुझे आप मात कहिये. (उसने मुस्कुरा कर है में शिर हिलाया, मेने उसको hi kaha)Mene मैडम को बताया, पहले मुझे अनाथालय के ट्रस्टी से बात करनी होगी, उसके बाद hi में कोई फैसला ले पाउँगा.

गौरव : ठीक है. (फिर वो मैडम की इजाजत ले कर सलूट मर के चला गया)

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Aur ? कुछ लोगे?

शिव : मान तो है, पर जगह ठीक नहीं है. (मेने मुस्कुराते हुए धीरे से कहा)

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Achchha, ऐसा क्या चाहिए?

शिव : चाहिए तो बहोत कुछ, पर अगर मुँह मीठा भी हो जाये तो भी चलेगा.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Uske लिए भी घर hi आना पड़ेगा.

शिव : ठीक है तो फिर घर hi आता हु.

भार्गवी : में फ़ोन करती हु. (उसने शरमाते हुए कहा, फिर में वह से निकल गया)

घर पहुंच कर मेने सबको ये बताया, सब को मेरे फैसले पर भरोसा था, मेने ट्रस्टी से बात की और सब बताया, तो उन्होंने भी मुझे hi देखने के लिए कहा. मेने उन्हें बताया की काम खर्चे में सब हो जायेगा तो उन्होंने हामी भर दी. फिर मेने पवनसीर को फ़ोन किया और उनसे इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा की घर आ जाओ. तभी स्नेहा मैडम ने फ़ोन ले लिया और कहा की खाना यही खाना. मेने घर सबको बता दिया. मेने भार्गवी मैडम को फ़ोन किया तो उन्होंने कहा की उनको एक काम है तो अभी वो फ्री नहीं है, तो फिर में पवनसीर के घर hi चला गया.

में उनके घर पहुंच गया, स्नेहमड़ाम ने hi दरवाजा खोला, मुझे देख कर वो मुस्कुरायी, और मुझे अंदर आने को कहा, पवनसीर हॉल में hi बैठे थे तो वो कुछ और नहीं बोली,

पवनसीर : कैसे हो?

शिव : अच्छा हु सर, आप कैसे है?

पवनसीर : में भी अच्छा hi हु, और सब ठीक न?

शिव : है सर.

पवनसीर : है, वैसे भी शिकायते आणि काम हो गयी है, तो सब ठीक hi है. (उन्होंने हस्ते हुए कहा, उनका इस्सर जहान्वी की और था, में बस muskuraya)To अब आगे क्या प्लान है?

शिव : फ़िलहाल तो तैयारियां चल रही है, देखते है आगे क्या होता है.

पवनसीर : सब अच्छा hi होगा, अब बताओ क्या कह रहे थे तुम? (तबतक स्नेहमड़ाम पानी ले कर आ गयी, उन्होंने मुझे पानी दिया और खुद पवनसीर के बाजु में बेथ गयी, पानी पिने के बाद मेने गिलास वही टेबल पर रख दिया)

शिव : वो हमारा गेट है उसके पास एक रूम जैसा बनवाना है, (फिर मेने उन्हें सब विस्तार से बताया)

पवनसीर : तो दिक्कत क्या है, बनवालो, में सब अर्रंगे करवाडेटा हु. पर मेरी सलाह मनो तो सिर्फ रूम नहीं पर अंदर एक छोड़ा किचन जैसा भी बनवा लो, ताकि भविस्य में भी वो काम लगे.

शिव : जैसा आपको ठीक लगे. पर खर्चा कितना होगा?

पवनसीर : देख रही हो (स्नेहा की और देख kar)Kharcha पूछ रहा है? (स्नेहा भी मुस्कुरायी, में बस उन्दोनो को देख रहा tha)Tum उसकी चिंता मात करो, हो जायेगा सब.

शिव : पर सर?

पवनसीर :मेने कहा न हो जायेगा सब, में अपनी जेब से भी सब करवा सकता हु पर तुम फ़िक्र मत करो, मुझे भी सब अपनी जेब से देने की जरुरत नहीं पड़ेगी, में देख लूंगा सब. कल से hi में काम सुरु करवाडेटा हु. और तुम hi देखलेना सब. साइट पर जाने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी.

शिव : थैंक यू सर.

पवनसीर : देख रही हो, थैंक यू कह रहा है. (स्नेहा की और देख कर वो फिर बोले) अरे भाई, थैंक यू किस लिए, पार्टनर बनाया है तो इतना तो कर hi सकता हु, और वैसे भी सूर्यदेवजी से भी मेरी बात हो गयी है, जल्द hi कंस्ट्रक्शन भी सुरु हो रहा है, तो लगे हटो यहाँ भी सब इंतजाम हो जायेगा, तुम फ़िक्र मात करो. चलो यार भूख भी लगी है, खाना कहते है. हम खाने बेथ गए, स्नेहमड़ाम ने जबरदस्ती बहोत कुछ खिला दिया, फिर में वह से घर के लिए निकल गया.

में गया तो लतादिदी और गायत्रीदिदी बिना मैडम के साथ hi बैठे थे, विएना और रंजन पढ़ाई कर रही थी, मेने सरितादिदी को भी बुलवालिया और उन्हें सब बता दिया. मेने फिर से ट्रस्टीशिर को भी फ़ोन कर के बता दिया.

बिना : (नाराज होते hue)Mujse नहीं कह सकते थे, में बनवा देती.

शिव : मुझे भी कहा पता था, मेने तो सबसे ऐसे hi बात की थी, पर सब सेट हो गया.

बिना : तुम सब मेरा इतना ख्याल रखते हो तो मेरा भी कुछ फ़र्ज़ है न, अगर कोई भी जरुरत हो तो मुझसे कह सकते हो. (वो अभी भी नाराज थी, खास कर के मुझसे)

सरिता : ले भाई, तेरी मैडम तो तुजसे नाराज हो गयी, अब तू hi मन, हमे तो काम है तो हम जाते है. (कहते हुए वो मुस्कुराते हुए बहार चली गयी, लता और गायत्री भी साथ चली गयी)

शिव : (सब चले गए थे, हम दोनों hi अकेले the)Kyu नाराज हो रही है आप?

बिना : तुम मेरे लिए इतना करते हो तो अगर तुम्हे कोई दिक्कत है तो मुझसे नहीं कह सकते थे, मेने तुम्हे पहले भी कहा था की मेरे पास पैसे है, खुद के, कहा था की नहीं?

शिव : (उनके पास बैठते hue)Kaha था, पर यहाँ कहा मुझे पैसे निकलने पद रहे है, सब अपने आप hi हो रहा है. और उस सब की आप टेंशन छोड़िये, आप अपनी तबियत का सोचिये.

बिना : में ठीक हु, मेरी डॉक्टर से भी बात हुई थी, तो उन्होंने कल मुझे चेकउप के लिए भी बुलवाया है, में भी ऐसे पड़े पड़े बोर हो गयी हु.

शिव : थोड़ा सयम कर लेती तो इतना सहना नहीं पड़ता न. (मेने धीरे से कहा)

बिना : (वो शर्मा गयी, उसने दरवाजे की और देखा, फिर थोड़ी रिलैक्स हुई, फिर मेरी और शिकायत भरी नजरो से देखते hue)Kyu तुम्हारी इच्छा नहीं थी?

शिव : ऐसा मेने कब कहा, पर में आपको दिक्कत में नहीं देख सकता, इसलिए कह रहा था.

बिना : कुछ नहीं हुआ है, सब ठीक है, डॉक्टर ने भी कहा था की कर सकते है, बस थोड़ा ध्यान से.

(उसने शरमाते हुए कहा, हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, थोड़ी देर बाद वो boli)Aaj यही सो जाओ न.

शिव : पागल हो गयी हो क्या?

बिना : प्लीज, कुछ नहीं करुँगी, बस मेरे साथ सो जाओ. (में सोच में पद gaya)Please.

शिव : ठीक है, में कुछ करता हु. (वो खुस हो gayi)Par आज नहीं, कल डॉक्टर के पास जायेंगे, वो क्या कहती है, उसके बाद.

बिना : सच्ची कुछ नहीं करुँगी.

शिव : फिर भी ऐसे अचानक में नहीं आ शक्ति, क्या कहूंगा सबको. कल पक्का यही सोऊंगा.

बिना : प्रॉमिस.

शिव : है, प्रॉमिस.

फिर में रंजन वाले कमरे में गया, वो दोनों भी पढ़ रही थी तो में भी पढ़ने बेथ गया. काफी रात हो गयी थी, तो फिर हम सोने लगे. में एक बार बहार निकला और सब जगह चेक कर ली. आज सरितादिदी मैडम के साथ सोई थी, लता और गायत्री दीदी हॉल में सोई हुई thi,par जैसे hi आहात हुई लतादिदी जग गयी, मुझे देख कर पूछने लगी,

लता : क्या हुआ शिव? (आवाज से गायत्रीदिदी भी मेरी और देखने लगी)

शिव : कुछ नहीं, बॉस ऐसे hi चेक करने आया था, आप सोई नहीं?

लता : बस सो hi रहे थे.

शिव : में भी आ जाऊ?

लता : यहाँ तुजे नींद नहीं आएगी.

शिव : आप भी तो सोती हो, में अभी आया. (कहते हुए में गया और अपना बिस्तर लेने लगा)

रंजन : कहा जा रहा है?

शिव : लता और गायत्रीदिदी के साथ सोने.

रंजन : क्यों? यही सो जा न.

शिव : आज में उनके साथ सोऊंगा. (रंजन थोड़ी मायूस हुई पर बोली कुछ नहीं, में अपना बिस्तर ले कर वह चला गया, मेने साइड में बिस्तर लगा दिया और लता की तरफ सोने लगा तो गायत्रीदिदी मुझे मायूसी से देखने लगी, लता ने ये देख लिया)

लता : तू बिच में hi सो जा. (में फिर बिच में hi सो गया, एक और से लता ने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उनकी और देखा तो वो मुस्कुरायी फिर उन्होंने आंखे बंद कर दी, मेने गायत्रीदिदी की और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, मेने उनका हाथ पकड़ लिया तो वो भी मुस्कुरायी, फिर उन्होंने भी आंखे बंद कर ली, तुम तीनो सोने लगे)

वही दूसरी और कृपाली अपने घर पहुंच गयी थी, वो और उसका पति भी बिस्तर पर थे, उसका पति मोबाइल में कुछ कर रहा था.

कृपाली : क्या कर रहे हो?

वशिष्ठ : कुछ नहीं बस ऐसे hi.

कृपाली : डॉक्टर ने कहा था की इन दिनों हमें साथ रहना चाहिए.

वशिष्ठ : आज में थक गया हु.

कृपाली : पर हम साथ नहीं रहेंगे तो फिर बच्चा कैसे होगा?

वशिष्ठ : इतने समय से तो साथ रह hi रहे थे न, क्या हो गया बच्चा? (उसने झुंझलाते हुए कहा)

कृपाली : हम कब साथ रहे, कब नहीं, हमने कभी ध्यान नहीं दिया, पर अब जब डॉक्टर ने कहा है तो फिर आपको क्या दिक्कत है.

वशिष्ठ : में थक गया हु कहा न.

कृपाली : क्या आपको बच्चा नहीं चाहिए?

वशिष्ठ : चाहिए, पर अभी मेरा मूड नहीं है, और वैसे भी तुम्हे आता जाता तो कुछ है नहीं, बस खोल के लेती रहना है.

कृपाली : ऐसा क्यों कह रहे हो, इतना तो सब करती हु.

वशिष्ठ : अगर करना है तो फिर करो म्हणत, चुसो मेरा लुंड, अगर खड़ा हो गया तो करता हु में फिर.

(कृपाली को कैसे भी बच्चा चाहिए था, उसको इस तरह लुंड चूसना अच्छा नहीं लगता था, पर फिर भी उसने कई बार किया था, आज उसकी मजबूरी थी तो वो उठी और अपने पति के पैरो के पास बेथ गयी)

कृपाली : इसको निकालिये तो सही.

वशिष्ठ : जो करना है खुद hi कर लो. (करअपलि को बहोत गुस्सा आ रहा था पर उसने अपने आपको शांत किया और उसका लेहंगा उतरा और लुंड को बहार निकला, वो बिलकुल मुरझाया हुआ था, उसने चद्दर से उसको साफ़ किया और मुँह बिगड़ते हुए लुंड को अपने मुँह में भर लिया, थोड़ी देर की म्हणत से लुंड खड़ा होने लगा, गरम मुँह के एहसास से वशिष्ठ भी गर्म होने लगा. वो उठा और कृपाली को लेता दिया और उसके गाउन को ऊपर कर दिया, वो नंगी hi थी निचे से, उसने लुंड छूट पर सेट किया और अंदर दाल दिया, कृपाली बस देख रही थी, वशिष्ठ ने धक्के लगाने सुरु कर दिए, कृपाली अपनी छूट में लुंड को महसूस कर रही थी, लुंड थोड़ी देर में और कड़क होने लगा, उसके पति ने उसके होठो को चूसना सुरु किया, वो भी गर्म होने लगी थी, उसने अपने पति को बाहोंमे भर लिया, की तभी उसका पति हांफ ने लगा और उसने अपना वीर्य उसकी योनि में छोड़ दिया, वो उसको अपनी और खींचने लगी और नीचे से धक्के लगाने का प्रयास करने लगी) हो गया मेरा, अब क्यों खिंच रही हो muje.(Krupali कुछ नहीं बोली बस ऐसे hi लेती रही, वशिष्ठ उसके ऊपर से उठ गया और साइड में लेट gaya,Krupali ने अपने पैरो को अपने पेट से लगा लिया ताकि छूट थोड़ी ऊपर उठ jaye)Ye क्या कर रही हो?

कृपाली : डॉक्टर ने कहा था की ऐसे लेती रहना ताकि वीर्य अंदर रहे. (वशिष्ठ कुछ नहीं बोलै, वो चद्दर खींच कर सो गया, थोड़ी देर बाद कृपाली उठी, उसने अपनी योनि से बहार निकल रहे वीर्य को देखा, फिर उसको पास में पड़े टिश्यू पपएर से साफ़ किया और बाथरूम चली गयी, जब वो लौटी तो उसका पति सो चूका था, वो भी लेट गयी, उसकी आँखों में नींद नहीं थी, उसको शिव की याद आ गयी, उसको फिर से अपने पिछवाड़े में चुभते लुंड की याद आ गयी, वैसे भी वो गरम तो थी hi, तो वो अपनी छूट को सहलाने लगी, और अंदर ऊँगली डालने लगी. वो शिव के लुंड के एहसास से बहोत ज्यादा उत्तेजित हो रही थी, थोड़ी hi देर में उसका पानी भी निकल गया, और वो हांफ ते हुए लेती रही, जब उसको होश आया तो उसको पछतावा होने लगा, वो उठी और फिर बाथरूम में गयी और नाहा ली ताकि शरीर की गर्मी शांत हो जाये, नहाने के बाद आ कर वो सो गयी.

सुबह उठ कर में कसरत के लिए चला गया, जब वापस आया तो कुछ मजदूर आये हुए थे, उसमे भोली और झुमरी भी थे, पवनसीर भी आये हुए थे, में उनके पास चला गया. उन्होंने मुझे सब संजय, उन्होंने सोच समाज कर सब प्लान डीडे किया हुआ था, मेने हामी भर दी, उन्होंने मजदूरों को कुछ इंस्ट्रक्शन दिए, और नाप कर सब जगाय लाइनिंग कर दी, वो अपना काम करने लगे, मुझे स्कूल जाना था तो में अंदर चला गया और नाहा कर तैयार हो गया. जब स्कूल से वापस लौट रहे थे तो संयम मेरे साथ में थी, आज वो ज्यादा hi खुल कर बहाव कर रही थी, उसका हाथ बैग की वजह से छुप गया था तो उसने अपना हाथ झंघ की बजाये साइड लुंड के पास hi रख दिया था.

शिव : क्या कर रही हो?

संयम : (भोली बनते hue)Kya कर रही हु?

शिव : रास्ता है, सीधी बैठो.

संयम : सीधी तो बैठी हु, क्या हुआ? (वो मान hi मान मुस्कुरा रही थी, जब से शिव ने उसकी छूट को छठा था वो हर वक़्त उसको hi याद कर रही thi)Ghar चलो न.

शिव : क्यों?

संयम : बॉस ऐसे hi.

शिव : नहीं, घर पर काम चल रहा है, मुझे जाना होगा.

संयम : कैसा काम? (मेने उसे सब बता diya)Oh!, फिर कब आओगे?

शिव : क्यों?

संयम : मुझसे मिलने, और किस लिए?

शिव : तो अभी क्या तुम्हारे बहुत से मिल रहा हु. ?

संयम : बहोत गंदे हो तुम, तुम्हे पता है, फिर भी मुझे डाट रहे हो. (उसने मुँह टेढ़ा किया)

शिव : देखो संयम...

संयम : मुझे कोई ज्ञान नहीं लेना है, जब देखो तब समजते रहते हो, में क्या छोटी बच्ची हु.

शिव : इतनी भी बड़ी नहीं हो गयी तुम.

संयम : है जैसे तुम तो बहोत बड़े हो गए हो न.

शिव : मेरी बात ललग है.

संयम : क्या अलग है, तुम लड़के हो इस लिए, मुझे अपने बारे में सोचने का अधिकार नहीं है, है न?

शिव : तुम समाज नहीं रही हो संयम.

संयम : में सब समझती हु, मुझे साइड कर रहे हो, पता है मुझे.

शिव : ऐसा नहीं है.

संयम : ऐसा hi है. (उसका घर भी आ गया था, मेने बाइक वह रोकी तो वो उतर गयी) में जानती हु की में तुम्हे पसंद नहीं हु, में जा रही हु, कल से मुझे छोड़ने भी मात आना, में देख लुंगी अपना.

(वो वह से चली गयी, में बस उसको जाते देखता रहा, जब वो गायब हो गयी तो में अपने घर की और निकल गया)

में पंहुचा तो सब खाना खाने बैठे हुए the,mene देखा की जहा जहा पवनसीर ने नीसाण बनाये थे वह गड्ढे खोद रहे थे, मेने दूसरे मजदूरों से बात की और उनको पूछा, वो सब मुझे जानते थे और में उन्हें, फिर में भोली और झुमरी के पास गया, वो दोनों खा रही थी,

शिव : कुछ चाहिए क्या तुम्हे?

भोली : चाहिए तो, पर तुम कहा दे रहे हो. (कहते हुए दोनों हुस्ने लगी, में झेप गया)

शिव : जब देखो तब, तुम्हारे दिमाग में यही चलता रहता है. (मेने उसको प्यार से डांटा)

भोली : आप बड़े साहब जो हो गए हो, हम जैसे छोटे लोगो से कहा वास्ता रक्खोगे.

शिव : में कोई बड़ा साहब नहीं हु, और तुम्हे ऐसा लगता है तो किसी बड़े साहब को कह कर देख लेना और फिर देखना वो तुम्हे छोटा समझता है की नहीं.

भोली : इसलिलिये तो तुम पर दिल आया है, पर तुम्हे hi कोई कदर नहीं है.

शिव : जब देखो तब वही कहती रहती है, अंदर बेथ कर खाना है तो अन्दर भी बेथ सकती है. (मेने बात बदलने के इरादे से कहा)

भोली : दीदी ने कहा था, पर हम यही ठीक है.

शिव : ठीक है, में आता हु.

कह कर में भी अंदर चला गया, खाना खाया फिर बिना मैडम को पूछा की उन्हें कब जाना है, तो उन्होंने कहा की दो बजे, तो में उन्हें ले कर हॉस्पिटल चला गया. बाइक पर बैठाया तह तो आहिस्ता hi चला रहा था, हम दोनों हॉस्पिटल पहुंच गए, नाम लिखवा कर हमारी बरी का इंतजार करने लगे, आस पास कई महिलाये थी जो प्रेग्नेंट थी, कई यो के पेट काफी उभरे हुए थे, में उन्हें गौर से देख रहा था.

बिना : क्या देख रहे हो?

शिव : नहीं कुछ नहीं.

बिना : में भी ऐसी हो जाउंगी, फिर शायद तुम्हे अच्छी न लागु. (उन्होंने आहिस्ता से कहा)

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो.

बिना : बच्चा होने के बाद औरते मोती भी हो जाती है, और शरीर में कई बदलाव आ जाते है.

शिव : तो?

बिना : कुछ नहीं. (वो बस मुस्कुरायी)

शिव : आप मुझे हर हल में अच्छी hi लगोगी, तो ऐसे फालतू की बाते मात सोचिये. (बिना बस मुस्कुरायी, फिर हमारा नंबर भी आ गया, वो अंदर चली गयी में बहार वेट करने लगा)

डॉक्टर :कैसी है आप?

बिना : अच्छी हु. (फिर वो सब चेक उप करने लगी, उसके बाद फिर से दोनों केबिन में बैठे थे)

डॉक्टर : सब अच्छा है, अब तो कोई पैन नहीं है न?

बिना : नहीं मैडम.

डॉक्टरों : ठीक है, में दवाइया लिख रही हु वो चालू रखियेगा.

बिना : एक बात पूछ नई थी. (बिना को संकोच हो रहा था)

डॉक्टर : है पूछिए? (बिना संकोच कर रही thi)Are पूछिए न?

बिना : वो ...क्या..

डॉक्टर : इतना संकोच क्यों कर रही है आप?

बिना : Nahi...wo में कह रही thi....kya हम साथ रह सकते है न?

डॉक्टर : (मुस्कुराते hue)Patidev मान नहीं रहे क्या?

बिना : (शर्मा gayi)Nahi, वो तो कुछ नहीं कहते, वो मुझे hi... (उसने नज़ारे झुका ली)

डॉक्टर : है भाई, मान तो होगा hi, अब जिसके पति का इतना बड़ा होगा उसको मान तो होगा hi(Unhone हस्ते हुए कहा, बिना बहोत शर्मा gayi)Reh सकती हो, पर ध्यान से, ज्यादा इंटेंस सेक्स मत करना.

बिना : जी. (बिना बहोत शर्मा रही थी)

डॉक्टर : होता है, इस समय हॉर्मोंसे ज्यादा एक्टिवटे हो जयते है तो स्वाभाविक है, इसमें शरमानेवाली बात नहीं है.

बिना बहोत खुस थी, वो बहार निकल गयी, बहार hi मेडिकल स्टोर था तो वह से दवाइया ले ली, फिर दोनों घर की और निकल गए.

शिव : (मेने शीशे से देखा की वो मुस्कुरा रही है तो मेने puchha)Kya हुआ, क्या कहा डॉक्टर ने?

बिना : (वो बहोत शर्मा रही थी, फिर धीरे से boli)Sab ठीक है, बचे का डेवलोपमेन्ट भी अच्छा है. (फिर थोड़ा रुक कर boli)Doctor कह रही थी की हम साथ रह सकते है.

शिव : रह सकते है मतलब? (मेने शीशे में देखते हुए कहा, पर वो बहोत शर्मा गयी थी )ओह! वैसे. (मेने मुस्कुरा कर कहा, बिना और शर्मा गयी) पर आपको नहीं लगता की हमे कुछ दिन एहतियात बरतनी चाहिए.

बिना : (मायूसी se)Hmmmm. (उनके चेहरे पर मायूसी दिख रही थी, में कुछ बोलै नहीं, हम वापस घर पहुंच गए, मेने देखा की वह जहान्वी की गाडी थी, पर वो कही दिखी नहीं, हम दोनों अंदर गए, ऑफिस सेआवाजे आ रही थी तो में वही गया, मैडम अपने कमरे में चली गयी)

लता : लो, शिव भी आ गया. (मुझे देखते हुए वो बोली, मेने देखा की जहान्वी एक कुर्शी पर बैठी हुई थी)

शिव : आप कब आयी?

जहान्वी :तुम तो आये नहीं, पवनजी से बात हुई थी तो उन्होंने बताया था की तुम्हारे वह काम चल रहा है, तो देखने आ गयी, तुम तो बताओगे नहीं कुछ मुझे. (वो हलकी नाराजगी से बोली)

शिव : (दूसरी चेयर पर बैठते hue)Nahi, ऐसी बात नहीं है, सब अचानक तय हो गया तो बताने का मौका hi नहीं मिला.

जहान्वी : लता ने बताया की हॉस्पिटल गए हो, इसलिए कुछ नहीं बोल रही. (उन्होंने जैसे मुझे डाटा, मेने लता की और देखा, वो बस मुस्कुरायी)

लता : आप लोग बाते कीजिये में जाती हु. (वो चली गयी)

जहान्वी : तो अभी कुछ दिन तो दिखोगे नहीं वह.

शिव : वह क्या काम चल रहा है?

जहान्वी : वो तो चल hi रहा है, पर तुम्हारा दिल नहीं लगेगा न वह.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो आप?

जहान्वी : (वो भोली की बात करना चाहती थी पर कुछ सोच कर नहीं boli)Aise hi कह रही थी, तुम्हारे वह काम चल रहा है तो तुम्हे यही की चिंता लगी रहेगी न इस लिए कह रही थी.

शिव : ऐसी बात नहीं है, और वैसे भी यहाँ कुछ ज्यादा खास नहीं है, बस छोटा सा hi तो काम है.

जहान्वी : में घर hi जा रही थी, सोचा की मिलती चालू.

शिव : जी.

जहान्वी : ठीक है, में जाती हु, अगर मिलना हो तो फ़ोन करना.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो आप?

जहान्वी : बस ऐसे hi. (वो जिस तरह से मुझे देख रही थी लग रहा था जैसे बहोत कुछ कहना चाहती थी)

शिव : कल आता हु साइट पर.

जहान्वी : सच?

शिव : है, वैसे भी यहाँ तो खुदाई hi चलेंगे अभी, सामान वगैरह आना होगा तब hi देखना होगा.

जहान्वी : (खुस होते hue)Me इंतजार करुँगी. (में बस मुस्कुराया, फिर हम बहार आ गए, फिर वो चली गयी, मेरा भी टाइम हो रहा था तो में भी स्टेडियम की और निकल गया)

यहाँ आज भार्गवी और काव्य मिल गयी थी, दोनों काव्य के ऑफिस में बैठी हुई थी. इधर उधर की बाते करने के बाद काव्य ने सीधा hi सवाल किया.

काव्य : एक बात पुछु अगर बुरा न मनो तो?

भार्गवी : तुम कबसे तकल्लुफ करने लगी, पूछो न जो पूछना है.

काव्य : शिव के बारे में क्या सोचा है?

भार्गवी : किस बारे में पूछ रही हो?

काव्य : तुम्हारे और शिव के रिलेशन के बारे में पूछ रही हु. (भार्गवी गौर से काव्य को देखने लगी, क्या जवाब दे वो सोचने लगी, पहले तो वो समझने की कोशिस करने लगी की वो पूछ क्या रही है?)

भार्गवी : क्या पूछना चाहती हो, खुल कर पूछो.

काव्य : इतना तो सीधा सवाल किया है मेने, मुझे सब पता है.

भार्गवी : पता तो मुझे भी बहोत कुछ है, इसीलिए तो कह रही हु की जो भी पूछ न है सीधे सीधे पूछो.

काव्य : मुझे पता है की तुम्हारे और शिव के बिच सम्बन्ध है, उसी के बारे में पूछ रही हु.

भार्गवी : शिव ने बताया?

काव्य : क्या फर्क पड़ता है?

भार्गवी : इस लिए पूछ रही हु की अगर शिव ने बताया है तो फिर वो तुम पर विस्वास करता होगा, तभी वो ऐसी बात बताएगा, इसलिए मेरे लिए ये जान न जरुरी है की शिव ने बताया या किसी और ने. वैसे भी मुझे किसी का दर नहीं है, बस ये बाटे में इतना जल्दी खुलने का एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी.

काव्य : है शिव ने बताया.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)To फिर पूछ क्यों रही हो?

काव्य : में पूछ नहीं रही हु, शायद तुमने मेरा सवाल सही से सुना नहीं, मेने ये नहीं पूछा की तुम्हारे और शिव के बिच रिलेशन है की नहीं, मेने ये पूछा की तुमने आगे का क्या सोचा है?

(भार्गवी गौर से काव्य को देख ने लगी फिर बोली)

भार्गवी : तुमने क्या सोचा है? (दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे और एक दूसरे को समझने की कोशिस कर रहे थे)
 
अपडेट 198

काव्य और भार्गवी आपस में शिव के बारेमे बात कर रही थी, वो दोनों hi थोड़ी असंजस में थी की कितना कहे और कितना छुपाये, दोनों अपने अपने क्षेत्र की माहिर खिलाडी थी, और दुनिया देख चुकी थी, भार्गवी अभी अभी पूछे गए सवाल के बारे में सोच रही थी, काव्य ने पूछा था की उसने क्या सोचा है, वो खुद कई दिनों से इस सवाल का जवाब धुंध रही थी, अभी दोनों एक दूसरे को देख रहे थे की काव्य की मम्मी सरबत ले कर वह आयी. भार्गवी के सोच पर कुछ देर के लिए विराम लगा.

भार्गवी : नमस्ते आंटी.

आंटी : नमस्ते बीटा, कैसी हो तुम?

भार्गवी : अच्छी हु, आप कैसी है, आपकी तबियत तो ठीक है न, और अंकल?

आंटी : अब तबियत का क्या है, नरम गरम चलता रहता है, अंकल भी ठीक hi है, बस इसकी चिंता लगी रहती है, और कुछ नहीं.

काव्य : आप फिर से सुरु मात हो जाना.

आंटी : तुम hi बताओ बेटी, क्या में कहती रहती हु की शादी कर ले तो क्या गलत कहती हु में, जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे फिर लड़के मिलना भी मुश्किल हो जाता है, कब तक ऐसे बिना शादी के बैठी रहेगी. क्या में कुछ गलत कह रही हु?

भार्गवी : आप सही कह रही हो आंटी. (अपना समर्थन मिलते देख आंटी खुस हो गयी)

आंटी : तो फिर, समजाओ इसको भी कुछ.

भार्गवी : आप सही कह रही हो आंटी की काव्य को शादी कर लेनी चाहिए, पर ऐसा भी तो कोई मिलना चाहिए जो उसको खुस भी रख सके, और जो इसकी आज़ादी को भी न छीने.

आंटी : इसमें कैसी आज़ादी छीन जाती है? क्या लड़कीअ शादी नहीं करती.

भार्गवी : करती है आंटी, पर आप तो काव्य को जानती hi है, इतनी म्हणत कर के वो इस मक़ाम पर पहुंची है, अगर इसको आप घर गृहस्ती तक सिमित करना चाहोगी तो क्या ये उचित होगा? तो ये फैसला सोच समाज कर लेना होगा, और ऐसा लड़का ढूँढना पड़ेगा जो आगे जा कर भी इसके प्रोफ़ेस्सिओं को न रोके.

आंटी : हमारे समाज की यही परंपरा है की लड़कीअ hi घर संभल टी है, अब ऐसा तो हो नहीं सकता की कोई लड़का आये और घर संभाले, और ऐसे लड़के को क्या कोई एक्सेप्ट करेगा?

भार्गवी : मेने कब ऐसा कहा, पर सोच समाज कर फैसला लेना पड़ता है, वर्ण मुझे hi देख लीजिये, मेने भी शादी कर्ली थी, क्या हुआ फिर, वो चाहते थे की में सब कुछ छोड़ कर घर में hi राहु, क्या ये मुमकिन है, मेने कितनी म्हणत की है इस मुकाम तक पहुंचने के लिए, इतनी पढ़ाई की है, क्या ये सब ऐसे hi व्यर्थ जाने दू.

आंटी : तुम आज कल की लड़कीओ का कुछ समाज नहीं आता, क्या करना चाहती हो पता नहीं.

भार्गवी : हम अपना खुद का वजूद तलाश रही है आंटी, क्या हमारा हाई वजूद है की हमें लड़को के सहारे hi रहना होगा, में मानती हु की बच्चे और घर भी जरुरी है, पर हम क्या करे?

आंटी : ये एक काम थी क्या? इसको समजते समजते मेरा दिमाग काम करना बंद कर देता है, और अब तुम मुझसे सवाल कर रही हो, तुम्हे शादी भी करनी है और घर पर भी नहीं बैठना है, तुम्हे पता भी है की कितनी दिक्कते होती है, अगर दोनों बहार रहोगे तो बच्चो का क्या होगा, क्या उन्हें दुसरो के सहारे छोड़ डोज? ऐसे तो तुम कभी घर नहीं बसा पाओगे, अकेले रह जाओगे, और ये तुम्हे अभी समाज नहीं आएगा, जब उम्र के आखरी पड़ाव पर होंगे तब तुम्हारे पास अपना कहनेवाला कोई नहीं होगा तब जेक मेरी बात समाज में आएगी. अभी तो तुम जवान हो, शरीर में ताकत है, पर ये हमेशा नहीं रहनेवाली, उम्र का एक मुकाम ऐसा भी आएगा जब तुम्हे किसी के सहारे की जरुरत पड़ेगी, और जो अपना होता है वो अपना होता है, किसी गैर को चाहे कितना भी प्यार दो, वो उतना पाना नहीं बन पता जो तुम्हारे खून के रिश्ते का होता है.

काव्य : आपके खून के रिस्तो वालो को में रोज़ कोर्ट में लड़ते झगड़ते देखती हु मम्मी.

आंटी : होंगे कुछ लोग, पर क्या सब ऐसे होते है, तू खुद बता, में तेरी माँ हु और ये भी मेरी बेटी जैसी hi है, और जितना में इसको (भार्गवी) जानती हु ये भी दिल की बहोत अच्छी है, अगर कभी ऐसा मौका आया तो ये भी मुझे अपनी माँ की तरह रख सकती है, पर क्या जिस तरह से तू (काव्य) मुझसे प्यार करती है उस तरह से क्या ये कर पायेगी? (काव्य और भार्गवी दोनों एक दूसरे का मुँह ताकने लगे, बात कड़वी थी पर सच थी)

काव्य : पर आपको किसने कहा की में शादी नहीं करुँगी.

आंटी : शादी करने की भी एक उम्र होती है, अगर चालीस की साल में शादी करोगी तो बच्चे कब होंगे, और जब वो बच्चा बड़ा होगा तब तुम कितने की हो जाओगी, तुम माँ नहीं दादी लगोगी, समाज hi नहीं आता तुम्हे कुछ.

काव्य : (मुस्कुराते हुए कड़ी हुई और अपनी मम्मी को गले लगते hue)Aap चिंता मात करो, में जल्दी शादी कर लुंगी, आप अभी जाओ, हम कुछ इम्पोर्टेन्ट डिस्कस कर रहे है.

आंटी : अब इस से इम्पोर्टेन्ट क्या हो सकता है?

काव्य : आप जाओ न.

आंटी : ठीक है, जाती हु, मेरा फ़र्ज़ था तुम्हे संजना, आगे जो तुम्हे ठीक लगे. (बड़बड़ाते हुए वो बहार चली गयी)

काव्य : सॉरी यार, वो हमेशा मेरी शादी के पीछे पड़ी रहती है.

भार्गवी : वो कुछ गलत भी नहीं कर रही, उनकी बात सोलह आना सही है. कभी कभी में खुद दुखी हो जाती हु, क्या करू कुछ समाज नहीं आता.

काव्य : बात घूम फिर कर फिर से वही आ कर अटक गयी है “शिव”.

भार्गवी : तुम क्या सोच रही हो?

काव्य : वही जो तुम सोच रही हो. (उसने मुस्कुरा के कहा)

भार्गवी : ये वकीलों वाली भासा मेरे साथ प्रयोग मात करो, सीधे सीधे बताओ की क्या सोच रही हो?

काव्य : सवाल मेने पहले पूछा था, फिर भी अगर तुम में हिम्मत नहीं है तो में hi जवाब दे देती हु.

भार्गवी : में उस से शादी करना चाहती हु. (भार्गवी ने सीधे सीधे बोल hi दिया) और ये मेने उस से भी कहा है.

काव्य : ग्रेट, में भी कुछ ऐसा hi सोच रही हु.

भार्गवी : तो क्या हम दोनों उसके लिए एक दूसरे से लड़ेंगे? (काव्य है पड़ी) है क्या रही हो, अभी तुम कुछ नहीं जानती, यहाँ सर में और तुम नहीं है, और भी है.

काव्य : जानती हु.

काव्य : अब इसमें हम क्या कर सकते है, शादी मुझे भी करनी है और तुम्हे भी करनी है, दोनों शादी कर नहीं सकते.

भार्गवी : तो फिर?

काव्य : इसी का तो हल निकलना है, सोचते है कुछ. वैसे भी अभी वो 21 का हुआ नहीं, तो अभी न में शादी कर सकती हु न तुम, देखते है आगे क्या होताहै.

भार्गवी : तुम्हे अजीब नहीं लगता ये सब.

काव्य : क्या?

भार्गवी : यही की में तुम्हारे बारे में जानती हु, तुम मेरे बारेमे जानती हो फिर भी हमे शिव पर गुस्सा नहीं आ रहा, और दोनों ऐसे रस्ते को एक्सेप्ट भी कर रही है.

काव्य : इसमें अजीब कुछ भी नहीं, आज कल जितनी भी प्रोफेशनल लड़कीअ है, जो चाहे किसी भी प्रोफ़ेस्सिओं में हो, वो अक्सर शादीशुदा आदमीओ को hi पसंद करती है, एक तो उम्र और दूसरा लाइफ की स्टेबिलिटी, उन्हें कोम्प्रोमाईज़ करना hi पड़ता है.

भार्गवी : पर न ये शादी सुदा है न स्टेबल.

काव्य : हमारी बात अलग है, हम उस मुकाम पर है जहा हमे लाइफ की स्टेबिलिटी के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना है, हम खुद उसके लिए सक्षम है. सो जस्ट वेट एंड वाच.

भार्गवी : ये मात सोचना की में तुम्हारे लिए उसको छोड़ दूंगी. (भार्गवी ने चेताया)

काव्य : (मुस्कुराते हुए उसके गले में बहे दाल दी, वो कुर्शी पर बैठी thi)Na में ऐसा करुँगी न करने दूंगी, तुम टेंशन मात लो, कोई तो तरीका होगा जिस से न मेरा दिल टूटे न तुम्हारा.

भार्गवी : ऐसा कैसे मुमकिन है, उसके लिए तो हम दोनों को शादी करनी पड़ेगी. और ये मुमकिन नहीं है, कानून इसकी इजाजत नहीं देता.

काव्य : में जानती हु, और यही मेरा काम है, कानून की बरिकीओ में से रास्ता निकलना hi मेरा पेशा है, सोचती हु कुछ.

भार्गवी : (वो कड़ी हो गयी, और काव्य को देखने लगी, फिर मुस्कुरा के उसको गले से लगा liya)Sach कह रही हो तुम, पता नहीं क्यों पर अजीब नहीं लग रहा, अपने hi प्रेमी की प्रेमिका के गले लग रही हु, वो भी प्यार से. (दोनों है पड़ी)

यहाँ में घर पहुंच गया था, जूही भी मेरे साथ hi थी, पहले हम उसके घर गए थे, आज वो काफी मूड में थी तो हम दोनों ने जम कर प्यार किया था, वो भी तो एक एथलीट थी और हमारा खु कुछ ज्यादा hi उबाल मरता है, वो काफी खुस थी, घर पर वो भी मदद करने लगी, और फिर हम सबने साथ में खाना खाया, बीनमदं भी आज हमारे साथ बहार hi बैठी थी. उसके बाद जूही और में बात कर रहे थे.

जूही : यार एक खुस खबरि है पर थोड़ी साद भी.

शिव : क्या?

जूही : खुस खबरि ये है की हमे ट्रेनिंग मिलेगी और हमे जाना होगा, पर दुःख की बात ये है की हमारे कैंप अलग अलग होंगे, लड़कीओ के लिए उन्होंने अलग कैंप रक्खा है.

शिव : तो इसमें दुखवाली क्या बात है, कुछ दिनों की hi बात है, और इस से तुम ज्यादा कन्सन्ट्रटे कर पाओगी.

जूही : में तुम्हारे साथ hi ठीक हु, क्या में मेहनत नहीं करती. (उसने मुँह फुलाया)

शिव : मेरा ये मतलब नहीं है, तुम टेंशन मात लो, सब सही हो जायेगा.

उसके बाद हमारी कुछ देर बात हुई, फिर वो घर चली गयी. में बिना मैडम के कमरे में गया, वो मुझे देखने लगी, उनकी आँखों में चाहत थी. में बहार निकला, रंजनवाले कमरे में गया, वो दोनों पढ़ रही थी, में थोड़ी देर उनके साथ बैठा और उनसे बात की, फिर अपनी किताबे लेने लगा.

रंजन : कहा जा रहा है?

शिव : वो कुछ समझना था तो मैडम के पास जा रहा हु.

रंजन : जल्दी वापस आना.

शिव : (प्यार से डट ते hue)So जा चुप चाप. (उसने मुँह टेढ़ा मेधा किया, मुझे हसी आ gayi)Nautanki. (उसने जीभ निकल कर मुझे chidhaya)Dekhta हु, पर देर हो जाये तो जगती मत रहना, सुबह स्कूल भी जाना है. (मेने प्यार से कहा तो वो मुस्कुराने लगी, विणा भी मुस्कुरायी, में वह से बिना मैडम के कमरे मचला गया)

बिना : ये क्या ले आये?

शिव : बहाना तो चाइये, और वैसे भी बहाने से ज्यादा जरुरत भी है. आज कल पढ़ाई का बहोत नुकसान हो रहा है. लगता नहीं इस बार टॉप कर पाउँगा.

बिना : तुम जिस रह पर जा रहे हो वह पढ़ाई का नुकसान तो होगा hi, जितना हो सके तरय करना, और क्या कह सकती हु. (फिर में और वो पढ़ने लगे, थोड़ी देर बाद लतादिदी वह आयी, मुझे वह पढता देख वो मुस्कुरायी, फिर निचे बिस्तर लगाने लगी)

शिव : हमे टाइम लगेगा लता, तुम डिस्टर्ब होगी, थक भी गयी होंगी, तो में यहाँ सो जाऊंगा, तुम मेरी जगह सो जाओ.

लता : (मुस्कुराते hue)Thik है. (कहते हुए वो चली गयी, ऐसे लता से जूथ बोलना मुझे अच्छा नहीं लगा, पर में भी क्या कर सकता था)

शिव : में आया. (कह कर में बहार निकल गया, मेने देखा की लता पानी पि रही थी, में वह चला गया और उनको पीछे से पकड़ लिया, वो दर गयी, थोड़ा पानी उनपर भी गिर गया, मुझे देख कर)

लता : क्या हुआ? (उसने प्यार से पूछा)

शिव : आओ मेरे साथ. (में उन्हें खींचने लगा, तो उन्होंने गिलास रख दिया और मेरे पीछे पीछे चल पड़ी, में उन्हें ऊपर छत पर ले गया)

लता : (वो शर्माने lagi)Yaha क्यों लाये हो?

शिव : तुम नाराज तो नहीं हो?

लता : में क्यों नाराज होने लगी? और किस बात के लिए नाराज हो?

शिव : मेने वह रुकने के लिए तुम से जूथ कहा था.

लता : तुमने जूथ नहीं कहा था, वैसे भी तुम्हे पढ़ना था.

शिव : पढ़ना भी था पर...

लता : (मेरा मेह पर हाथ रखते hue)Safayi देने की जरुरत नहीं है, में सब समझती हु.

शिव : तुम इतनी अच्छी क्यों हो?

लता : अब जैसी हु वैसी हु.

शिव : इतनी भी अच्छी मात रहा करो, किसी दिन कोई तुम्हारी कीमती चीज़ चुरा कर ले गया तो क्या करोगी.

लता : तुम कोई चीज़ नहीं हो शिव, जो कोई मुझसे चुरा ले जायेगा. वो चाहे तो भी मुझसे तुम्हे जुड़ा नहीं कर पायेगा. (मेने लता को गले से लगा लिया, वो भी मेरी बहो में खो सी गयी, थोड़ी देर हम वैसे hi rahe)Ab चलो भी.

शिव : रुको न थोड़ी देर.

लता : नहीं, चलो. (कहते हुए वो मुझे खिंच कर निचे ले जाने लगी, फिर वो मुस्कुरायी और अपने कमरे में चली गयी, में भी अपने कमरे में चला गया, मेने देखा की बिना मैडम ने अपने कपडे बदल लिए थे, वो एक गाउन पहने हुए थी, मुझे देख कर वो मुस्कुरायी पर बोली कुछ नहीं, में फिर से किताब ले कर निचे बेथ गया)

बिना : अब तो कही नहीं जानेवाले हो न? (उसने प्यार से पूछा, मेने सिर्फ न में गर्दन हिलायी, उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया, और चिटकनी भी लगा दी, में देख रहा था की उनका गाउन उनसे चिपका हुआ था और उनके कूल्हों को स्पस्ट दिखा रहा था, वह पंतय की लाइन भी दिख रही thi)(Beena ने पीछे मुद कर देखा तो शिव उसके कूल्हों को देख रहा था, उसके शरीर में अजीब सी झनझनाहट दौड़ गयी, वो बोली कुछ नहीं, बस बिस्तर पर आ कर बेथ गयी और शिव को देखने लगी, फिर boli)Waha निचे क्यों बैठे हो, ऊपर आ जाओ. (बिना को अब शिव जैसे अपना लगता था, कोई भी हिचकिचाहट नहीं थी, वो उठी और शिव के बाजु में जा कर बेथ गयी, है थोड़ी दुरी पर थी, पर बस कुछ सन्ति metre)Kya पढ़ रहे हो? (मेने उन्हें किताब दिखाई, वो भी समझती थी की पढ़ाई भी कितने जरुरी है और अभी घर में सब जग रहे थे तो वो मेरे साथ पढ़ाई के रिलेटेड hi बात करने लगी और मुझे समजने भी लगी, ऐसे hi करीब आधा एक घंटा गुजर गया, वो मेरे बिस्तर पर hi लेट गयी, में वैसे hi पढ़ रहा tha,thodi देर बाद वो boli)Kab तक पढोगे? (उनकी आवाज़ में एक्सेस अपील थी, में तो कब से समाज रहा था पर में इस मौके को जितना ताल सकता था टालने की कोशिस कर रहा था, पर मुझे समाज आ रहा था की वो नहीं मन ने वाली, मेने किताब बंद कर दी)

शिव : आपको निचे नींद नहीं आएगी.

बिना : (मुझे देखते hue)Aaj में यही सोनेवाली हु. तुम्हारे साथ. (में उठा और लाइट बंद कर दी और एक नाईट लाइट जला दी, और बिस्तर पर आ gaya)Tum ऐसे तो नहीं सोते. (उनका इस्सर मेरे कपड़ो की और था, मेने सरे कपडे उतरदिये सिवाय अंडरवियर के, और उनकी बगल में उनकी बायीं और लेट गया),( बिना करवट ले कर उसको देखने लगी) (वो मुझे देख रही थी तो मेने भी उन्हें देखा, हमदोनो की आंखे मिली हुई थी, उनके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की उनका इरादा क्या है, वो मेरे होठो की और बढ़ने लगी, मेने उन्हें रोक दिया, वो मुझे देखने लगी)

शिव : कुछ दिन रुक जाओ.

बिना : सब ठीक है शिव, डॉक्टर ने भी बोलै है.

शिव : पर फिर भी हमे एहतियात बरतनी चाहिए.

बिना : में कहा कुछ कर रही हु, बस साथ में तो सोये है. (बिना ने जूथ बोलै) कुछ मात करना बस, पर प्यार तो कर शक्ति है न.

शिव : हम्म्म. (वो खुस हो गयी और फिर से मेरे नजदीक आने लगी, मेने रोका नहीं, हम दोनों के हॉट मिल गए, वो मेरे होठो को चूसने लगी, और अपना पेअर मेरे ऊपर कर दिया, और एक हाथ से मुझे अपनी और खींचने लगी, वो वाइल्ड होती जा रही थी, में शांत hi रहा)

बिना : (उन्होंने किश तोड़ी और नारजगीसे मुझे देखने लगी और boli)Tum क्यों नहीं कर रहेहो?

शिव : कर तो रहा हु.

बिना : तुम कुछ नहीं कर रहे हो, में hi कर रही हु.

शिव : आप समाज नहीं रही हो.

बिना : में सब समाज रही हु, कुछ नहीं होगा, में कह रही हु न (कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपने स्तन पर रख दिया, में उन्हें देखने लगा तो वो boli)Please. (मेने हलके हलके स्तन दबाना सुरु kiya)Shhhhh हा ऐसे hi शहहहहह (वो फिर से मुझे किस करने लगी, में भी उन्हें किश करने लगा और साथ में उनके स्तन दबाने लगा, अभी में गाउन के ऊपर से hi स्तन दबा रहा था, उन्होंने अपने गाउन को थोड़ा निचे सरका दिया ताकि उनका स्तन नंगा हो जाये, मेरा हाथ हैट गया तो उन्होंने फिर से मेरे हाथ को पकड़ा और अपने नंगे स्तन पर रख दिया, में उन नरम स्तन को दबाने लगा, उनसे बर्दास्त नहीं हुआ तो उन्होंने किश तोड़ दी और जोर जोर से सासे लेने lagi)Shhhhh हहआआ शहहहहह फूऊऊऊ, शह्ह्ह्ह fuuuuuuu.(Me उनके स्तन से खेलने लगा और निप्पल को मसलने laga)Shhhh हआ ऐसे hi शहहहहह (उन्होंने दूसरे स्तन को भी आज़ाद कर दिया, में उसको भी मसल ने laga)Isse चुसो शिव. (वो मेरा शिर पकड़ कर अपने स्तन की और ले जाने लगी, मेने उनके स्तन के निप्पल को अपने मुँह में भर liya)Shhhhhh हाआआआ ऐसे hi शिव शहहहहह. (में बाये हाथ से स्तन दबा रहा था और मुँह से चूस रहा था )शह्ह्ह्ह शीइइइइव (वो मेरे बालो को नोच रही thi)Shhhhhh, तुमने क्या जादू कर दिया है सीईव शहहह में रह नहीं सकती शह्ह्ह्हह्ह. (उन्होंने मेरे हाथ पर हाथ रक्खा जो उनके स्तन पर था, और उसे निचे ले जाने लगी, में समाज रहा था पर कुछ नहीं बोलै, उन्होंने मेरे हाथ को अपनी योनि पर रख दिया और उसे दबाने के लिए मेरे हाथ को दबाने लगी, मेरे हाथ पर गर्म योनि का एहसास हो रहा था, मेने योनि को दबाते हुए sehlaya)Shhhhhh शिईयिव, में क्यों ऐसी हो गयी हु शहहहहह, पहले तो कभी मुझे ऐसा महसूस नहीं हुआ था शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (मेने दरार को kureda)Shhhhh शीइइइइइव. (वो अपने गाउन को खींचने लगी, गाउन ऊपर होने लगा, आखिर कर गाउन पंतय पर से हैट गया, अब मेरा हाथ उनकी पंतय पर था, पंतय गीली हो गयी थी और चिप छिपी भी हो गयी थी, जिस से पता चल रहा था की वो कितनी गरम है)

शिव : मैडम. (मेने उन्हें रोकने के इरादे से कहा)

बिना : (मदहोशी me)Madam नहीं शिव शह्ह्ह्ह में तुम्हारीयी बीनाआ हूउउउउ. शह्ह्ह्हह्ह हआ. (कहते हुए उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ा और अपनी पंतय को पकड़ कर उसके अंदर दाल दिया, अब मेरा हाथ नंगी छूट पर था, छूट पर बाल नहीं थे और छूट पूरी चिकनी हो चुकी थी, पंतय भी भीग चुकी थी, शायद डॉक्टर के पास जानेवाली थी इस लिया, मेने एक ऊँगली छूट के छेड़ में दाल दी, छूट पूरी गर्म भट्ठी बानी हुई thi)Shhhhh शीइइइइइव (कहते हुए वो मेरे होठो को चूसने lagi)Ummm उम्म्म ummmmm.(Wo अपनी कमर भी हिला रही थी, और साथ में अपने हाथ को बढ़ा कर मेरे लुंड को पकड़ लिया जो पहले से तना हुआ था, मेने उनके हाथ को पकड़ लिया)

शिव : नहीं मैडम. (उन्होंने मेरे कंधे को जोर से काट लिया, इतनी जोर से की वह दांतो के नीसाण बन gaye)Ahhhhhh. क्या कर रही हो?

बिना : (हलके गुस्से se)Agar एक बार और मैडम कहा न तो खून निकल दूंगी. यहाँ तुम्हारी मैडम लेती हुई है क्या? (उन्होंने गुस्से से मुझे घुरा, मुझे हसी आ gayi)Has क्या रहे हो, में मैडम हु? (में फिर muskuraya)Daat तोड़ दूंगी जो दोबारा मैडम बोले तो.

शिव : ठीक है, पर वह नहीं. (मेने उनके हाथ को हटते हुए कहा)

बिना : मेरी जो मर्ज़ी होगी में करुँगी, जितनी चिंता तुम्हे है उस से कही ज्यादा फ़िक्र है मुझे, में पागल नहीं हु. (कहते हुए उन्होंने मेरे अंडरवियर में अपना हाथ दाल दिया और नंगे लुंड को पकड़ liya)Ye मेरा है और मेरी जो मर्ज़ी होगी में करुँगी, कहते हुए उन्होंने मुझे धक्का दिया और में सीधा लेट गया, वो बेथ गयी और अपने गाउन को पूरा निकल दिया, वो अब सिर्फ पंतय में थी, उन्होंने मेरे अंडरवियर को भी निकल दिया, और खुद की पंतय भी निकल दी, अब दोनों पुरे नंगे थे, उन्होंने लुंड को हाथ में ले लिया और हलके से dabaya)Isine पागल किया हुआ है (कहते हुए वो झुकी और मेरे लुंड को मुँह में भर लिया)

शिव : शहहहहह (मेरी भी आंखे बंद हो गयी, मेरा लुंड उनके गर्म मुँह में था, वो उसे जोरो से चूस रही thi)Shhhhhh आहिस्ता. (मुझे दर्द होने लगा, वो अपने डाट गधा रही थी, मेने शिर ऊपर कर के देखा तो वो जोर जोर से चूस रही थी, उनके कूल्हे मेरी और थे और रास टपकती छूट मुझे दिख रही थी, मेने हाथ बढ़ाया और छूट की दरार में ऊँगली घुमाई, उन्होंने झटका खाया और मेरी और मुस्कुरा के देकने लगी, फिर वो थोड़ी खिसकी और अपनी योनि को मेरे सामने कर दी, में उनके कूल्हे सहलाते हुए फैलाये और छूट और गांड के छेड़ को देखने लगा, छूट से तो रास टपक रहा था, मेने ऊँगली अंदर दाल दी )

बिना : उम्मम्मम्हहह. ुम्मःहहहहह. (बिना को बहोत अच्छा लगने लगा, वो लुंड को जोरो से चूसने lagi)Shhhhhh शिईयिव, तुमने पागल बनादिया है मुझे शह्ह्ह्ह (थोड़ी देर बाद उसने अपने पेअर शिव के ऊपर कर दिया और उसके ऊपर आ गयी और अपनी छूट उसके मुँह के सामने कर दी), (मेने छूट को देखा, वह से रास की नदी बह रही थी, मेने अपना मुँह वह लगा दिया,





वो जोरो से मेरे लुंड को चूसने लगी, मेने छूट में ऊँगली फिर दाल दी और अंदर बहार करते हुए चूसना सुरु कर diya)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइइव, (वो मेरे लुंड पर अपना चेहरा घिसने लगी, वो जिस तरह की हरकते कर रही थी में समाज गया की वो झड़ने वाली है, में जोर जोर से छूट को चूसने laga)Shhhhh शीइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह रुको में झाड़ जाउंगी (वो मेरे ऊपर लेट गयी, मुझे दिक्कत हो रही थी ऊँगली अंदर बहार करने में पर मेने ऊँगली करना जारी रक्खा तो वो उठ गयी)

शिव : क्या हुआ?

बिना : ऐसे नहीं शिव, मुझे ऐसे नहीं झड़ना. (वो मुझे उठाने लगी, और खुद बिस्तर पर लेट गयी और मुझे अपने ऊपर खिंच लिया)

शिव : आज रहने दीजिये. (में दर रहा था)

बिना : आराम से करना, कुछ नहीं होगा. (कहते हुए उन्होंने मेरा लुंड पकड़ा और अपनी छूट पर लगा दिया, पर में वैसे hi रहा तो उन्होंने मेरी कमर पर अपने पेअर लपेट लिए और मुहे अपनी और खींचने लगी, मेरे लुंड का सूपड़ा उनकी गर्म छूट में चला गया, उन्होंने अपने होठो को डाट से काट लिया)

शिव : दर्द hua?(Unhone ना में गर्दन हिलायी, और मुहे और जोर से खींचने लगी, आखिर मेरा लुंड और अंदर चला गया)

बिना : शह्ह्ह्हह्ह, तुम नहीं संजोगे Shiv,shhhhhh कितना अच्छा लगता है जब ये अंदर जाता है. (वो अपनी कमर हिला कर लुंड को अंदर बहार करने लगी, में वैसे hi रुका रहा tha)Shhhh करो न शिव, (उन्होंने झुंझलाते हुए कहा, में उनके ऊपर झुक गया)

शिव : क्यों इतनी बेसबर हो रही हो?

बिना : तुम नहीं संजोगे शिव, मुझे भी शर्म आती है पर में नहीं रह सकती, मेने डॉक्टर से भी पूछा था तो उन्होंने कहा की इस वक़्त मेरे हॉर्मोन्स ज्यादा एक्टिव है इस लिए मुझे ये सब हो रहा है. आहिस्ता आहिस्ता करो शिव, ज्यादा अंदर मत डालना. (मेने उनकी बात मानते हुए धक्के लगाने सुरु कर दिए पर लुंड को ज्यादा अंदर नहीं कर रहा था, वो मेरे होठो को चूसने लगी, और मेरी पीठ को सहलाने लगी, मुझे खिंच कर अपने गले लगा लिया और boli)Tumne मुझे गन्दा बना दिया है, कितनी गन्दी हरकते करने लगी हु में.

शिव : अच्छा, इसका भी इल्जाम मेरे शिर.

बिना : (मुस्कुराते hue)Ha, (कहते हुए वो मुस्कुराने लगी, फिर अपने अंदर आते जाते लुंड को महसूस करने lagi)Shhhhhh कितना अच्छा लग रहा है शिव.

शिव : क्या अच्छा लग रहा है?

बिना : (मुस्कुराते hue)Jo तुम कर रहे हो.

शिव : क्या कर रहा हु?

बिना : (मुस्कुरायी, और मेरे कान में धीरे से boli)Chudayi. (वो और गरम होने लगी थी, उनकी सासे फूल रही thi)Shhhh फूऊ शहहह फूऊऊऊ.

शिव : किसकी चुदाई? (में उन्हें और गरम कर देना चाहता था ताकि वो जल्दी झाड़ जाये)

बिना : मेरी चुदाई, शह्ह्ह्ह फूऊ शह्ह्ह्ह फूऊऊऊ.

शिव : आपकी छूट बहोत गर्म है?

बिना : आपकी नहीं तेरी कहो शिव.

शिव : तुम्हारी छूट बहोत गर्म है बिना.

बिना : मेरे शिव, शह्ह्ह्ह मेरी छूट भी तुम्हारे लिए hi है शह्ह्ह्ह, उसे तुम्हारा बड़ा लुंड बहोत पसंद है शिव शह्ह्ह्हह्ह छोड़ो मुझे शहहहहह. (वो बहोत गर्म महसूस कर रही thi)Shhhhhh थोड़ा जल्दी करो शिव.





(मेने ध्यान से जल्दी जल्दी करना शुरू कर diya)Shhhhhh, कितना मज़ा आता है शिव शह्ह्ह्ह तुम बहोत अच्छे हो शह्ह्ह्ह, में तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती शिव शहहहहह, मुझे ऐसे hi प्यार करते रहना शहहहहह( आखिर वो झड़ने hi lagi)Ahhhhhh shhhhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiiv. (झटके कहते हुए वो शांत हो गयी, मेने उन्हें वैसे hi लेते रहने दिया.)

बिना : (वो शांत हो गयी थी, उसका पानी निकल गया था, वो शिव से चिपक कर वैसे hi लेती रही, कड़क लुंड अभी भी उसकी छूट में महसूस हो रहा था, वो जानती थी की शिव अभी शांत नहीं हुआ, तो वो शिव को देखने लगी, जैसे कह रही हो की रुक क्यों गए, जो करना है कर लो, पर शिव ने कुछ नहीं किआ, वो बस उसको प्यार से देख रहा था)

शिव : (उनका चेहरा सहलाते hue)Ab अच्छा लगा? (बिना शर्मा गयी, मेने उन्हें अपने शाइन से लगा लिया, वो भी प्यार से चिपक गयी, उसने अपने पैरो को शिव ऊपर दाल दिया, और अपनी कमर हिलने lagi)Kya कर रहे हो?

बिना : अभी तुम्हारा नहीं हुआ है.

शिव : उसकी जरुरत नहीं है, वो अभी शांत हो जायेगा.

बिना : पर मेरे रहते तुम बाकि रह जाओ मुझे कैसा लगेगा?

शिव : उसकी चिंता मात करो, जब आप एकदम ठीक हो जाओगी तब सब वसूल कर लूंगा. (वो अपनी छूट को मेरे लुंड पर दबाने lagi)Kya कर रहे हो?

बिना : कर लो न, कुछ नहीं होगा.

शिव : मेने कहा न की जरुरत नहीं है, और अब ज्यादा आगे बढ़ी तो एक झापड़ लगा दूंगा.

बिना : मुझे मरोगे? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : मणि नहीं तो सच में मरूंगा.

बिना : (उसने अपनी कमर हिला दी और लुंड एक बार अंदर बहार हो gaya)Shhhhhhh.

शिव : तुम मानती क्यों नहीं हो, मार खाओगी अब.

बिना : (वो मुस्कुराने lagi)Ab आये न लाइन पर, जब देखो तब आप आप करते रहते हो, अब मैडम नहीं लग रही जो ऐसे तू तड़क से डाट रहे हो.

शिव : (मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ)

बिना : अब मुँह क्यों लटका रहे हो, मुझे तो अच्छा लग रहा है जो तुम मुझसे ऐसे बात करते ho(Me उठने लगा तो उन्होंने पकड़ liya)Kar लो न.

शिव : न बोलै न.

बिना : (शरमाते hue)Agar चाहो तो पीछे कर लो. (उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया था)

शिव : वक़्त आने पर वो भी कर लूंगा, पर अभी उठने दो.

बिना : ऐसे hi रहो न, अच्छा लगता है मुझे.

शिव : ऐसे hi सोने का इरादा है क्या?

बिना : मुझे कोई एतराज नहीं. (मेने उन्हें देखा, फिर साइड में हो गया, वो चिपकी हुई hi थी तो लुंड अंदर hi था, में समाज रहा था उनकी फीलिंग, तो मेने उनके कूल्हों को पकड़ा और अपनी और दबाया तो लुंड और थोड़ा अंदर चला गया)

बिना : शहहहहह शीइइइइइइव.

शिव : अब इस से ज्यादा नहीं, अब सो जाओ.

बिना : (वो उसका प्यार देख कर मुस्कुरा उठी, कोई मर्द इस मोड पर रुक सकता है तो समाज जाना चाहिए की उसको कितना प्यार है उस से और कितनी परवाह है उसकी, उसने शिव की छाती को चूमा और boli)I लव यू, शिव.

शिव : लव यू तू. अब सो जाओ. (बिना मुस्कुराती हुए उस से लिपटी रही और सोने लगी, दोनों का मान बेकाबू था पर बच्चे के खातिर दोनों ने अपने आप पर कण्ट्रोल किआ, कब दोनों सो गए पता hi नहीं चला)

सुबह जब में उठा तो वो मुझसे ऐसे hi नंगी चिपकी हुई थी पर लुंड छूट से बहार था, मेने उनके खूबसूरत चेहरे को देखा और हलके से चूमा, फिर उन्हें हटाने लगा तो वो जाग गयी.

शिव : सब ठीक तो है न? (मुझे चिंता हो रही थी)

बिना : (मुस्कुराते hue)Sab ठीक है.

शिव: ठीक है, सो जाओ, में जा रहा हु. (वो मुस्कुरायी और मेरे गाल पर किस किया और अपने आप को चद्दर से धक् लिया और फिर सो गयी. में बहार निकला और फ्रेश हो कर कपडे बदलने अपने रूम में गया तो वह विणा और रंजन hi सो रहे थे, दोनों के फ्रॉक ऊपर हो चुके थे और दोनों की पंतय भी दिख रही थी, मेने उन पर चद्दर दाल दी और कपडे पहन कर निकल गया, जूही तैयार hi थी, हम दोनों निकल गए. जब वापस आया तो मजदूर आ चुके थे, मेने उनसे बात की, आज भी खुदाई hi होनेवाली थी, फिर में अंदर चला गया, तैयार हो कर स्कूल के लिए निकल गया, थोड़ी देर बाद पेओन ने आ कर मुझे प्रिंसिपल सर का मश्ग दिया की मुझे रेसस्स में उनसे मिलना है. अब मेरी और देखने लगे.

महेश : क्या हुआ है?

शिव : मुझे क्या पता?

टीचर : शहहह साइलेंस. (हम ने और कोई बात नहीं की, में रेसस्स में प्रिंसिपल सर से मिलने चला गया)

शिव : मई ी के इन सर?

प्रिंसिपल : शिव!, आ जाओ.

शिव : आपने बुलाया था शिव.

प्रिंसिपल : है, बैठो. (में बेथ gaya)School को एक आर्गेनाइजेशन की और से लेटर आया है, उन्होंने एथलेटिक रमतो का आयोजन किया है, वो चाहते है की हम भी अपने खिलाडी भेजे, लेवल हाई है तो किसी और को तो में भेज नहीं सकता, तुम hi इस काबिल हो. तीन दिन का प्रोगाम है, इस लिए तुम्हे पूछने के लिए बुलाया था, क्या जाओगे तुम?

शिव : कब है सर?

प्रिंसिपल : अगले हफ्ते.

शिव : ठीक है में पूछ कर बताता हु.

प्रिंसिपल : किसको पूछ कर?

शिव : जूही मैडम को पूछना पड़ेगा सर, वो बता रही थी की मुझे कैंप के लिए भी जाना है.

वरुणसीर : (अंदर आते hue)Meri बात हो गयी है उस से, तुम जा सकते हो, और ऐसे कॉम्पिटिओं तुम्हे और मदद करेंगे, यही सब तुम्हे आगे ले जाने के लिए मदद करेंगे, तुम्हारे रिकॉर्ड ऑफिसियल होंगे, जो आगे चल कर तुम्हारे hi काम आएंगे.

शिव : जी सर (मेने उठ कर उनके पेअर छुए, उन्होंने मेरी पीठ थप थपाई)

वरुणसीर : तुम नहीं जानते शिव, हमारा देश एथलेटिक्स में बहोत पीछे है, मुझे पूरा यकीं है की तुम बहोत आगे जाओगे, बस म्हणत चालू रखना.

शिव : जी सर.

में इजाजत ले कर बहार निकल गया, मेने अपने दोस्तों को भी बता दिया क्यों की वो मुझे पूछ रहे थे की प्रिंसिपल ने क्यों बुलाया है. जब स्कूल से छूटे तो मेने संयम को चिढ़ाया.

शिव : आज तो तुम वैस्वी को छोड़ने जा रही हो न?

वैस्वी : (उसको कुछ पता hi नहीं tha)Muje तो संयम ने कुछ नहीं बताया, में छोड़ देती हु. (उसने सहजता से कहा) तुम कहा जा रहे हो?

शिव : में तो घर hi जा रहा हु, पर किसी ने कहा था की वो अपना खुद देख लेगी, पर मेरे साथ नहीं आएगी. (संयम मुझे खा जाने वाली नजरो से देखने लगी)

वैस्वी : (वो सब समाज गयी और मुस्कुराने lagi)Me छोड़ देती हु.

संयम : कोई जरुरत नहीं है, में रिक्शा से चली जाउंगी.

शिव : अब ज्यादा नाटक मात कर, बेथ. (वो अपना मुँह टेढ़ा मेधा करते हुए बेथ गयी, मेने सबको bye कहा और बाइक बढ़ा दी . उसने मेरे पेट पर अपने नाख़ून गधा diye)Ahhh, क्या कर रही हो?

संयम : में क्या कर रही हु (कहते हुए उसने नाख़ून पर जोर और बढ़ा दिया)

शिव : आअह्ह्ह, चुभते है.

संयम : चुभने दो.

शिव : क्यों मुझे परेशान कर रही हो, मेने तो वही कहा जो तुमने कहा था.

संयम : हमारे बिच की बात सबके सामने करने की क्या जरुरत थी. (उसने नाराजगी से कहा)

शिव : सब दोस्त hi तो थे.

संयम : फिर भी, हमारे बिच की बाते सिर्फ हम दोनों के लिए hi है, अब अगर किसी और के सामने की न तो नाख़ून नहीं दातो से काट लुंगी. (में मुस्कुराने लगा, मेने उसको उसके घर के पास ड्राप किया.

संयम : चलो न घर. (उसने बहोत प्यार से कहा, उसके इरादे उसके चेहरे पर साफ़ झलक रहे थे, पर मुझे काम था)

शिव : मेने तुम्हे बताया न की घर पर काम चल रहा है, मुझे जाना होगा.

संयम : (मायूस होते hue)Kab आओगे फिर?

शिव : जल्द hi आता हु.

संयम : ठीक है, bye. (उसने बहोत प्यार से कहा)

शिव : इतने प्यार से मात बात किया करो यार. (मेने मुस्कुरा के कहा, तो वो शर्मा गयी और मुस्कुराती हुई चली गयी, मेने ऊपर देखा जैसे उपरवाले से पूछ रहा था की क्या करू?)

फिर अपने घर की और निकल गया. घर पंहुचा तो जहान्वी वही थी, और पत्थर, ईंटे, रेट, और बहोत कुछ वह आ चूका था, मेने बाइक लगायी और जहान्वी के पास गया.

शिव : आप यहाँ?

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Pawansir ने कहा था, बोल रहे थे की शिव घर होगा नहीं और पिंकेश को निजी काम के लिए बोल नहीं सकते तो मुझे पूछ रहे थे तो में आ गयी.

शिव : आपके पापा डांटेंगे.

जहान्वी : में देखलूँगी वो सब.

शिव : आओ न अंदर, धुप में क्यों कड़ी है?

जहान्वी : कब से छाव में hi थी, अभी hi आयी हु बहार. (मेने देखा की भोली मुझे घर रही थी, मेने उसको मुस्कुरा के देखा तो वो भी मुस्कुरायी, में और जहान्वी अंदर गए, मेने उनके लिए एक चेयर रक्खी)

शिव : आप बैठिये, में कपडे बदल कर आता हु. (में पहले बिना मैडम के कमरे में गया, वो बैठी हुई थी और कुछ पढ़ रही thi)Kaisi हो आप?

बिना : (शरमाते hue)Sab ठीक है. (कह कर वो मुस्कुरायी) कितनी फ़िक्र करते हो?

शिव : क्यों आपको नहीं है?

बिना : (धीरे se)Tumse भी ज्यादा, पर मुझे इसका भी ख्याल रखना है और इसके बाप का भी. (कहते हुए वो शर्मा गयी, मेने उनके माथे पर किश किया)

शिव : खाना खाया?

बिना : है, दवाई भी खा ली.

शिव : ठीक hai.(Kehte हुए में बहार निकला और रंजनवाले रूम में जा कर कपडे बदल लिए, जब में बहार आया तो बिना मैडम भी वही थी)

लता : खाना निकल दू? (जहान्वी वही थी तो मेने सोचा की अभी खाना ठीक नहीं hai)Nahi रहने दो, बाद में खा लूंगा.

जहान्वी : बाद में क्यों, मुझे तो बहोत भूख लगी है, सुबह ठीक से नास्ता भी नहीं किया था.

शिव : आप???

जहान्वी : मेने तो लता को बोल दिया था की में भी खाउंगी, अगर तुम्हे नहीं खिलाना तो कोई बात नहीं. (उसने जैसे मायूसी का नाटक किया)

शिव : पर आप ये खाना????

जहान्वी : क्या में इंसान नहीं हु, कोई जनवरोवाला खाना कहती हु में? (उसने नाराज होने का नाटक किया, में मुस्कुराया भी मेरे साथ बेथ गयी, हम दोनों खाना खाने लगे, विणा और रंजन भी आ गयी, वो भी बेथ गयी)

फिर हम बहार आये और वह हो रहे काम को देखा, खुदाई ऑलमोस्ट ख़तम होने को थी, आज के डिम में खुदाई कम्पलीट हो जनि थी. वैसे तो हमारी बात हुई थी पर फिर भी मेने कहा.

शिव : साइट पर जाना है?

जहान्वी : (इस सवाल से वो शर्मा गयी)

शिव : (उसका शर्माना उसकी है thi)Bike पर चलेंगी? (उसने मुस्कुराते हुए है कहा, मेने बाइक निकली, वो पीछे बेथ गयी, मेने बाइक आगे बाधादि)
 
अपडेट 199

शिव बाइक चला रहा था, जहान्वी पीछे बैठी थी, बैठे बैठे hi मुस्कुरा रही थी, उसने अपने नैल्पोलिस किये हुए बड़े नाख़ून वाले हाथ से शिव का कन्धा पकड़ रक्खा था,, उसका मान तो था की शिव की कमर पर या उसकी झंघ पर हाथ रक्खे, पर उसको शर्म भी आ रही थी, इस लिए उसने कंधे पर hi हाथ रक्खा हुआ था. वैसे वो इतनी नजदीक बैठी थी की उसके स्तन कभी कभी शिव की पीठ से रगड़ खा जाते थे, ये रगड़ उसके अंदर एक हलचल पैदा कर रही थी, उसके निप्पल भी कड़क हो गए थे, उसने शरमाते हुए शिव को मिरर से देखा तो उसके चेहरे पर भी मुस्कराहट थी जो बता रही थी की शिव को भी उसके स्तन का एहसास है, पर वो फिर भी पीछे नहीं हुई, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, साथ में उसके दिमाग में ये भी चल रहा था की आज तो शायद सब कुछ होगा, आज शिव को पता चल जायेगा की वो कुवारी नहीं है, वो कैसे शिव को बताएगी, की वो पहले भी किसी के साथ सो चुकी है, शिव उसके बारे में क्या सोचेगा, यही सब उसके दिमाग में फिर घूमने लगा, रास्तो पर थोड़े थोड़े गढ्ढे भी थे, तो वो कभी जोर से शिव को पकड़ लेती थी, शायद शिव को उसके नाख़ून भी चुभ रहे होंगे, पर वो दर जाती थी तो क्या कर सकती थी. ऐसे hi दोनों साइट पर पहुंच गए.

जब उसने अपने पापा की गाड़ी वह देखि तो उसको आश्चर्य हुआ, तभी उसके पापा और प्रकाश अंकल एक माकन से बहार आये और ऑफिस की और आने लगे, उनकी भी निगाहे उन पर पद चुकी थी, शिव ने अपनी बाइक ठीक उसके पापा की कार के बगल में hi रोकी, वो निचे उतर गयी, तब तक वो दोनों भी चल कर उनके पास पहुंच चुके थे, वो अपने पापा की आँखों में सवाल स्पस्ट देख रही थी, उसको भी थोड़ा असहज लग रहा था.

जहान्वी : पापा! आप यहाँ?

कमलनाथ : है, मेने सोचा की एक बार साइट को देख लू, और भी थोड़ा काम था तो आये थे हम. (शिव पर एक नजर दाल kar)Tum कहा से आ रही हो? और तुम्हारी कार कहा है?

जहान्वी : पापा, वो... (अपने आप को सँभालते hue)Wo अनाथाश्रम में काम चल रहा है तो पवनजी ने रिक्वेस्ट की थी तो में वह चली गयी थी थोड़ी देर. (थोड़ा रुक कर) यहाँ आना था और शिव भी आ रहा था, रस्ते ख़राब हो गए है तो में इसके साथ hi आ गयी. (जैसे तैसे उसने सफाई दी)

कमलनाथ : (शिव की और देखा, फिर जहान्वी की aur)Aisa क्या काम था वह?

जहान्वी : वो एक रूम वह बनवा रहे है और कुछ सामान वह आनेवाला था, ये स्कूल में था तो पवनजी ने मुझे कहा की जा कर देख लू, वो हमारे पार्टनर है तो में कैसे उन्हें मन करती.

कमलनाथ : हम्म्म. अभी में यहाँ हु तो अगर तुम्हे घर जाना हो तो जा सकती हो.

जहान्वी : क्यों पापा, वैसे भी घर जा कर क्या करुँगी?

कमलनाथ : (वो सोच में पद गया, क्यों की वो अपनी बेटी के यहाँ रहते कुछ कर नहीं सकता था, तो सोच कर bola)Aaj एक क्लाइंट ानीला है, उस से मुलाकात करनी है, में नहीं चाहता की तुम यहाँ रुको तो घर चली जाओ.

जहान्वी : ऐसा क्यों पापा, अगर क्लाइंट आ रहा है तो में भी मिल लुंगी, वैसे भी में यहाँ काम सिखने तो आती हु.

कमलनाथ : वो थोड़ा टेढ़ा आदमी है, (फिर कुछ सोच कर) ठीक है, पर अगर मुझे सही लगा तो hi में तुम्हे बुलाऊंगा, वर्ण ऑफिस में मात आना.

जहान्वी : (उसको कुछ समाज नहीं आया पर फिर भी उसने kaha)Thik है पापा. (कहते हुए वो उस और जाने लगी जहा काम चल रहा था, उसने बस एक बार शिव को देखा) (मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा था, क्या क्या सोचते हुए हम दोनों यहाँ आये थे और यहाँ कुछ अलग hi माहौल बन गया था, उन्होंने अपनी बेटी को ऑफिस में आने से मन किया था तो में भी जहान्वी के पीछे पीछे जाने लगा तो कमलनाथ ने मुझे रोका)

कमलनाथ : तुम ठहरो,. (में रुक गया, जहान्वी ने भी एक बार मेरी और और एक बार अपने पापा की और देखा फिर वो आगे बढ़ गयी, वो भी उदास थी की वो क्या क्या सोच कर आयी थिए और यहाँ क्या हो gaya)(Kamalnath शिव की और देख kar)Gadi में कुछ सामान पड़ा है वो ऊपर ले कर आओ.

शिव : जी. (वो दोनों अंदर चले गए, मेने कार की पिछली सीट पर कुछ सामान देखा तो में उसको लेने लगा, मेने देखा की वह शराब की एक बोतल थी, कुछ पैकेट्स थे, सिगरेट भी thi,mene सारा सामान , लिया और ऑफिस में आ गया, मैं चेयर पर कमलनाथ बैठे हुए थे और सामने प्रकाश रओ बैठे हुए थे)

कमलनाथ : (मेरी और देख kar)Waha रख दो. (उन्होंने वह टेबल की और इस्सर किया, मेने सारा सामान वह रख diya)(Kamalnath को वैसे तो बहोत चीड़ आ रही थी शिव पर, वो उसकी लड़की को घुमा रहा था, पर वो कुछ बोल नहीं रहा था, वैसे भी वो सिर्फ उसके पीछे बेथ कर hi आयी थी तो क्या कहता). क्या काम चल रहा है तुम्हारे वह? (उसने ऐसे hi पूछा)

शिव : वो एक रूम बनवराहे है, सिक्योरिटी के लिए.

कमलनाथ : पैसे कोण दे रहा है, पवन?

शिव : नहीं, कुछ पैसे ट्रस्टीशिर दे रहे है और कुछ पैसे डोनेशन से लेनेवाले है.

कमलनाथ : अच्छा मांग रहे हो, (प्रकाशराओ की और देख kar)Hamare एक्सेंट से भी कुछ पैसे डोनेट कर दो, वैसे भी इन बेचारो के पास क्या hi होगा. (उन्होंने जिस तरह से बोलै और जिस तरह के उनके हावभाव थे, मुझे गुस्सा आया पर में कुछ नहीं बोलै)

प्रकाशराओ : (वो भी व्यंग से muskuraya)Thik है, में पवन से बात करता हु.

कमलनाथ : (शिव की और देख kar)Aur भी कुछ चाहिए तो मान लेना, हिचकिचाना नहीं, वैसे भी maa-baap तो है नहीं तुम लोगो के, ऐसे मांग मांग कर hi तो गुजरा करना पड़ता होगा. (में क्या बोलता, बात कड़वी थी पर सच hi थी) शराब पिटे हो?

शिव : जी नहीं सर.

कमलनाथ : शर्माओ मात, अगर पिटे हो तो बोलो.

शिव : जी नहीं सर, में नहीं पिता.

कमलनाथ : है कहा से पि सकते हो, खाने के लिए hi मुस्किलसे पैसे मिलते होंगे वो भी मांग कर, तो शराब तो बहोत दूर की बात है. पेग बनाना आता है?

शिव : नहीं सर. (वैसे भी मुझे समाज नहीं आया, क्यों की कभी पि hi नहीं थी)

कमलनाथ : में सिखाता हु. वो बोतले उठाओ. (मेने बोतल उठा ली) खोलो. (में खोलने laga)Aise नहीं, लाओ मेरे पास. (मेने उनके हाथ में बोतले दी, उन्होंने ढक्कन के पास से उसका सील निकला फिर थोड़ा निचे से ठोका और फिर ढक्कन khola)Aise खोलते है.

शिव : वैसे भी ये बुरी चीज है, तो इसको सिखने का कोई मतलब नहीं, और खिलाड़िओ के लिए ये वैसे भी अच्छी नहीं. (कमलनाथ कुछ नहीं बोलै, बस मुस्कुराया)

कमलनाथ : अंदर गिलास रक्खे है, फ्रिज से आइस और पानी ले आओ. (में ले आया) गिलास में दो आइस क्यूब डालो, है, फिर शराब डालो, (में डालने laga)Bas. (में रुक गया) वैसे hi दूसरा गिलास भी भर दो. (मेने वैसे hi kiya)Ab थोड़ा पानी डालो. (पेग तैयार थे, मेने उन्हें दे diye)(Kamalnath शिव को उसकी औकात दिखा रहा था, प्रकाश रओ भी मुस्कुराते हुए सब देख रहा था, कमल नाथ ने एक डिश में चखना निकलने के लिए भी कहा, मेने वो भी निकल दिया, वो जिस तरह से मुझे कह रहे थे मुझे लग रहा था की वो मुझे अपनी औकात दिखा रहे थे, पर इसमें कुछ गलत भी नहीं था, में उनके वह काम करता था तो मुझे क्या दिक्कत होती, उन्दोनो ने गिलास टकरा कर आपस में चियर्स किआ और पिने लगे, में वही खड़ा था, थोड़ी देर बाद मेरी और देख kar)To तुम खिलाडी हो?

शिव : (सेल को पता था फिर भी पूछ रहा tha)Ji सर.

कमलनाथ : तुम्हे क्या लगता है, क्या हासिल कर लोगे तुम?

शिव : पता नहीं सर, पर कोशिस करना मेरा फ़र्ज़ है.

कमलनाथ : (व्यंग से मुस्कुराते hue)Koi नहीं पूछता ऐसे लोगो को, चने के भाव बिकते है ऐसे लोग, सर्कार सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती है इन्हे. (में क्या बोलता, में चुप रहा) क्रिकेट विकेट खेलते तो कुछ होता भी, पर इन सब से कुछ नहीं होनेवाला. (में बस सुन रहा था) पर उसके लिए भी अच्छी कोचिंग जाना पड़ता है, और तुम्हारे लिए मुश्किल है, तुम ठहरे अनाथ, कोण तुम्हारे पीछे पैसे बर्बाद करेगा, क्यों की कोचिंग जाने के बाद भी कोई गारंटी नहीं है की तुम अच्छे खिलाडी बन hi जाओगे. छोडो ये सब और काम पर ध्यान दो, शायद कुछ भला हो जाये. (उन्होंने अपना गिलास ख़तम कर दिया, तभी उनके फ़ोन पर कॉल aaya)Hello...ha साइट पर hi हु, में लोकेशन भेजता हु,... ठीक है. (मेरी और देख kar)Tum जाओ, फिर बुलाता हु तुम्हे.

में वह से निकल गया, पता नहीं क्या क्या ज्ञान दे रहा था मुझे, में वह गया जहा जहान्वी कड़ी थी और पिंकेश भी था वह पर. जहान्वी मुझे बहार ले गयी.

जहान्वी : क्या कर रहे थे, कुछ कह रहे थे क्या पापा?

शिव : नहीं, वो मुझसे पेग बनवा रहे थे.

जहान्वी : क्या? वो शराब पि रहे है यहाँ?

शिव : उनकी जगह है, वो जो चाहे करे.

जहान्वी : पर तुमसे ये सब क्यों करवा रहे थे?

शिव : उनका नौकर जो हु.

जहान्वी : क्या बकवास कर रहे हो, वैसे भी तुम यहाँ नौकरी नहीं करते, चले जाते वह से, क्या फर्क पड़ता है. (जहान्वी को बिलकुल अच्छा नहीं लगा था)

शिव : छोड़िये न, क्या फर्क पड़ता है. थोड़ा सा काम करने में क्या लूट जाता है.

जहान्वी : में उनसे बात करती हु.

शिव : रहने दीजिये, वो क्लाइंट आनेवाला है वह, फ़ोन आया था. (हम ऐसे hi बात कर रहे थे की वह दो कार आयी, हम दूर थे वह से, पिछली कार में से दो लोग दौड़ते हुए आये और आगेवाली कार का दरवाजा खोला, उसमे से सिगार पिता हुआ एक व्यक्ति बहार निकला लग भाग 50 के आस पास का होगा वो, दूर से hi उसके गले में पहनी बड़ी सी सोने की चैन दिख रही थी, उसने एक बार इधर उधर देखा, गाड़ी में से दूसरे तीन लोग भी निचे उतर गए थे, उसके आदमी सरे हट्टे काटते थे, उन दो लोगो के साथ वो व्यक्ति अंदर ऑफिस में दाखिल हो गया.

व्यक्ति : तो यहाँ मेरे पैसो से पार्टी चल रही है.

कमलनाथ : आइये आइये रघुवीरजी, ये सब आपकी खातिरदारी के लिए hi मंगवाया है. (कमलनाथ ने खड़े होते हुए कहा, उसने रघुवीर से हाथ मिलाया और उन्हें वह सोफे पर बैठने के लिए कहा, उसके दोनों आदमी दरवाजे पर hi खड़े थे) बैठिये. (उसने एक और गिलास लिया और अपने हाथो से एक पेग बना कर उसकी और बढ़ाया, रघुवीर ने गिलास ले लिया) आपने आने की तकलीफ क्यों की, हमारी बात फ़ोन पर हो तो गयी थी.

रघुवीर : (गिलास में से एक सिप लगते hue)Baat हुए भी 10 दिन हो गए है.

कमलनाथ : में कोशिस कर hi रहा हु, थोड़ा आगे पीछे हो जाता है, सरकारी काम है.

रघुवीर : वो हमारा लुकआउट नहीं है, ये सब तुम्हे देखना है, हमे नहीं, हमने पैसे दिए मतलब हमारा काम होना चाहिए.

कमलनाथ : थोड़े दिनों में वो जमीं आपकी हो जाएगी, आप फ़िक्र मात कीजिये.

रघुवीर : तुम जानते हो की में तुम्हारी बात सुन भी लूंगा पर वो नहीं सुनेगा, जानते हो न.

कमलनाथ : उनको बिच में लेन की क्या जरुरत है, वैसे भी आपका काम हो गया hi संजो.

जहान्वी चलते हुए ऑफिस के पास आ गयी थी तो में भी उसके पीछे पीछे आ गया था. वह खड़े दो आदमीओ ने हमे रोका, तीसरा आदमी कार के पास खड़ा था.

जहान्वी : (तीखे स्वर me)Muje अंदर जाना है.

आदमी : नहीं जा सकती, अंदर मीटिंग चल रही है.

जहान्वी : जानती हु, कमलनाथ मेरे पापा है. (शायद वो आदमी जनता था तो उसने जाने दिया, पर मुझे रोक diya)Ye मेरे साथ hi है, यहाँ काम करता है. (उसने हम दोनों को अंदर जाने दिया, हम ऊपर पहुंचे तो दरवाजे पर खड़े दो आदमीओ ने हमारा रास्ता रोका)

आदमी : इ लड़की, कहा घुस रही हो.

जहान्वी : तुम होते कोण हो मुझे रोकने वाले, पापाआ, पपायआ.

कमलनाथ : जहान्वी??? (उस आदमी ko)Meri बेटी है, आने दो. (उसने हमारा रास्ता छोड़ दिया, हम दोनों अंदर दाखिल हुआ)

जहान्वी :पापा.

कमलनाथ : (झुंझलाते hue)Tum क्यों आयी, मेने कहा था न की जरुआत होगी तो बुलाऊंगा.

जहान्वी : ऐसे कैसे क्लाइंट है ये, इनके आदमी मुझे hi अंदर नहीं आने दे रहे थे. (जहान्वी ने थोड़े गुस्से से कहा)

रघुवीर : तो ये तुम्हारी बेटी है. (उसने जहान्वी को ऊपर से निचे तक देखते हुए कहा)

कमलनाथ : जी, ये भी काम सिख रही है तो यहाँ है. (फिर जहान्वी की और देख kar)Tum जाओ अभी.

रघुवीर : इसे भी रहने दीजिये, वैसे भी ये सिख रही है तो उसको भी समाज में आना चाहिए न की किस तरह काम होता है, (शिव की और देख kar)Ye लड़का कोण है?

कमलनाथ : ये यहाँ काम करता है.

रघुवीर : तो इसको बहार भेजो, नौकरो का क्या काम यहाँ.

जहान्वी : ये नौकर नहीं है, ये यही रहेगा. (रघुवीर ने कमलनाथ की और देखा और व्यंग से मुस्कुराया, उसकी हसी बहोत कुछ कह रही थी, कमलनाथ को गुस्सा तो बहोत आया पर क्या बोलता)

रघुवीर : ठीक है, रहने दो, मुझे क्या फर्क पड़ता है. (उसने गिलास से एक सिप और लिया) है तो कमलनाथ, या तो हमारा काम करो या फिर पैसे लौटाओ, क्या करना चाहते हो तुम?

कमलनाथ : आपका काम हो जायेगा, बस कुछ दिनों की महोलट दीजिये.

रघुवीर : समय hi तो नहीं है, इतने समय तो हमने वेट किया अब कितना वेट करे. मुझे लगता है तुमसे ये काम नहीं होगा, तुम पैसे लौटा दो.

कमलनाथ : उसकी जरुरत नहीं पड़ेगी, हो जायेगा काम मेने कहा न.

रघुवीर : लगता है लिए हुए पैसे खर्च हो गए है. (उसने कुटिल मुस्कान के साथ कहा)

कमलनाथ : ऐसी बात नहीं है, पैसे लौटना कोई बड़ी बात नहीं है, पर जब उसकी जरुरत hi नहीं तो फिर क्यों लौटना, और आप जानते है मेरे अलावा ये काम और कोई नहीं कर सकता.

रघुवीर : ये तुम्हारी ग़लतफहमी है, पैसो से क्या नहीं हो सकता.

जहान्वी : किस काम की बात हो रही है पापा?

कमलनाथ : तुम चुप रहो कहा न.

रघुवीर : तेरे बाप ने एक जमीं हमारे नाम करने के लिए पैसे लिए है, अब वो जमीं हमारे नाम करवाने में वक़्त लगा रहा है.

जहान्वी : आप इस तरह से मेरे पापा से बात नहीं कर सकते, वो कह रहे है न की आपका काम हो जायेगा.

रघुवीर : (मुस्कुराते hue)To करे न, मेने कहा रोका है.

जहान्वी : पापा, आप ऐसे लोगो से काम hi क्यों करते है, दे दीजिये इनके पैसे वापस.

कमलनाथ : तुम चुप रहोगी थोड़ी देर. (रघुवीर की और देख कर) आप थोड़े समय की महोलट दे दीजिये, हो जायेगा सब. सरकारी काम है, थोड़ा आगे पीछे होता है.

रघुवीर : (वैसे भी उसको जहान्वी की बातो से थोड़ा गुस्सा आ गया tha)Muje कुछ नहीं सुन न, तुम पैसो का इंतजाम करो. (उसने थोड़े गुस्से से कहा)

जहान्वी : पापा आप इसकी बात क्यों सुन रहे है, पैसे मुँह पर मारिये और दफा कीजिये.

रघुवीर : ै लड़की, तू क्या समाज रही है, यहाँ छोटी मोती बात हो रही है, 10 क्रोडे लौटने है तेरे बाप को, समाज रही है कुछ, अभी बच्ची है तू, सही कहता था तेरे बाप, तेरा यहाँ कोई काम नहीं है, और वैसे भी लड़कीओ की अकाल घुटनो में होती hai,tu चुप hi रह तो अच्छा है.

शिव : (वैसे तो मुझे कोई लेने देना नहीं था पर जिस तरह से उसने जहान्वी से बात की मुझे गुस्सा आ gaya)Aap इस तरह से बात मत कीजिये.

रघुवीर : (खड़े होते hue)Ab तू मुझे सिखाएगा की कैसे बात करनी चाहिए, निकल बहार यहाँ से. (उसने गुस्से से मुझे कहा, फिर कमलनाथ की और गया और उसका गिरेबान पकड़ kar)Ab तो तू अभी hi पैसे लौटाएगा.

जहान्वी : छोड़ उन्हें. (अपने बाप की बेइज्जती पर वो चुप न रह सकीय और उसने आगे बढ़ कर रघुबीर को धक्का दे दिया, वो दो कदम दूर गया)

रघुवीर : साली मुज पर हाथ उठती है, कहते हुए वो आगे बढ़ा और जहान्वी की और झपटा तो में बिच में आ गया, मेने और कुछ किया नहीं पर सिर्फ सामने खड़ा हो gaya)(Raghuvir ने अपने आदमीओ की और dekha)Salo, यहाँ खड़ा रहने के लिए आये हो. (वो दोनों आगे बढे और एक ने जहान्वी को पकड़ लिया और दूसरे ने मुझे, वैसे भी में कोई बखेड़ा नहीं करना चाहता था तो में बस खड़ा raha)(Kamalnath की और देख कर गुस्से me)Ab तू पैसे अभी लौटाएगा, वार्ना तेरी इस बेटी की में यही फाड़ दूंगा. (अभी उसका बोलना ख़तम भी नहीं हुआ था की उसके मुँह पर एक लात पड़ी, और वो निचे गिर गया, मेने जोर से उस आदमी के घुटने पर भी लात मरी जिसने मुझे पकड़ रक्खा था, उसने मुझे छोड़ दिया और कराहते हुए निचे बेथ गया, ये देख कर दूसरे आदमी ने जहान्वी को छोड़ा और मेरी और लपका पर में तैयार था और मेने जोर से उसके चेहरे पर गहहुसे मारा तो उसको दिन में टारे दिख गए)

जमीं पर पड़े रघुवीर को विश्वास hi नहीं हो रहा था की अभी क्या हो गया, वो खड़ा हुआ और अपने कोट में रक्खी हुई पिस्तौल निकल ली और मेरी और तान दी.

रघुवीर : तूने मुझे लात मरी सेल. (अभी वो गोली चलनेवाला hi था की मेने टेबल पर रखे पेपर वेट को उनके हाथ पर डेमरा, उनके हाथ से पिस्तौल छूट गयी, पर गोली चल गयी, ये तो गनीमत थी की गोली किसी को लगी nahi)Aahhhhh (उसने अपना हाथ पकड़ लिया, में गया तेजी से लपका और पिस्तौल उठा ली और उसीकी पिस्तौल को उसके hi कनपट्टी पर लगा दी, गोली की आवाज सुन कर निचे से वो तीन आदमी भी ऊपर आ गए थे)

शिव : वही रुक जाओ. ( अपने बॉस की कनपट्टी पर लगी पिस्तौल की वजह से वो रुक गए. सब हैरानी से मुझे देख रहे थे, में भी समाज रहा था की क्या हो गया है, पर इस तरह से बात बिगड़ जाएगी)

शिव : (शांत होते hue)Dekhiye रघुवीर जी, लड़ाई झगड़े से कोई फायदा होनेवाला नहीं है. बात कर के भी मसाला सुलझाया जा सकता है. (रघुवीर गुस्से से घर के उस लड़के को देखने लगा) (मेने कमलनाथ की और देख कर kaha)Sir, क्या आपको लगता है की इनका काम हो जायेगा?

कमलनाथ : (वो भी सदमे में था, अचानक उसको होश aaya)H हां, मेने सब सेट कर दिया है, कुछ दिनों में हो जायेगा, मेने कितनो को hi इस काम के लिए पैसे दे दिए है.

शिव : (उन्होंने हमारा अनाथालय हथियाने की कोश्शि की थी इस लिए मुझे शक hua)Kya ये इल्लीगल काम है?

कमलनाथ : नहीं, बिलकुल नहीं, पर सिस्टम hi ऐसा हो गया है की ऊपर से निचे तक सबको पैसे देने पड़ते है.

शिव : तो इनका काम सूरे हो जायेगा न.

कमलनाथ : है, जल्द hi हो जायेगा.

शिव : (रघुवीर की और देख कर) सर, मैडम अभी छोटी है, वो ये सब नहीं समझती, अपने पापा के साथ इस तरह के व्यव्हार से वो भड़क गयी, नादानी में गलती कर गयी, पर आप तो समाज दर है (मेने उनके शिर से पिस्तौल दूर ki)Sorry, मेने भी आप को मार दिया, पर सब अचानक हो गया.

रघुवीर : (मेरी और गुस्से से देखते hue)Samja रहे हो की धमका रहे हो? (मेरे हाथ में पिस्तौल को देख कर वो बोले)

शिव : सॉरी सर, में बस समजा रहा tha(Mene पिस्तौल उनको वापस की, ये खतरनाक भी हो सकता था पर मेने रिस्क लिया, उन्होंने पिस्तौल मेरे हाथ में से ली और मेरे hi शिर पर लगा दी)

रघुबीर : हो तो तुम भी बच्चे hi, अपने हाथ में आयी बजी गवा दी तुमने.

शिव : (शांति se)Nahi सर, ये सब ऐसे नहीं सुलझ सकता, और सच कहु तो अभी भी ये बजी में अपनी और कर सकता हु, पर ऐसे हल नहीं निकलेगा. इस लिए कह रहा हु. (रघुवीर अचंबित था इस लड़के की शांति से, उसने अभी थोड़ी देर पहले hi उस लड़के की स्फूर्ति देखि थी और ताकत भी, एक लात ने hi उसके जैसे आदमी को दिन में टारे दिखा दिए थे, उसने पिस्तौल अपनी जेब में रख दी)

रघुवीर : (मुस्कुराते hue)Bahadur हो, और स्फुर्तीले भी. साथ में समाज दर भी हो. आओ बैठो. (उन्होंने मुझे अपने पास बिठाया, उनकी नाक से खून निकल रहा था तो मेने अपना रुमाल निकला और उनकी और बढ़ाया, वो कुछ नहीं बोले तो मेने बहते खून को साफ़ किया और उसे दबा दिया, वो मुस्कुराया)

शिव : सॉरी सर. (मेने फिर से उनकी माफ़ी मांगी)

रघुवीर : (अपने आदमीओ ko)Tum लोग जाओ. (एक आदमी लंगड़ाता हुआ और एक आदमी अपना चेरा दबाता हुए वह से बहार चला गया, रघुवीर फिर muskuraya)Dikhte बच्चे हो पर हो नहीं, क्या नाम है तुम्हारा.

शिव : जी शिव.

रघुवीर : कमलनाथ, सोच कर तो कुछ और hi आया था, पर इस लड़के की खातिर तुम्हे समय दे रहा हु, दिल खुस करदिया इसने, बहोत समय बाद ऐसा दिलेर देखा है.. (उसने अपना गिलास उठाया और एक hi घुट में बाकि शराब पि gaya)(Jhanvi की और देख kar)Sorry बेटी, मुझे वैसे सब्द इस्तेमाल नहीं करने चाहिए थे, मेरा सच में ऐसा िर्रादा नहीं था, बस में धमकी दे रहा था. जब पैसो की लेनदेन का मामला होता है तो लोगो के साथ सख्ती बरतनी पड़ती है.

जहान्वी : मुझे भी माफ़ कर दीजिये अंकल, मेने भी आपको धक्का दे दिया.

रघुवीर : कोई बात नहीं बेटी, वैसे भी आजकल ऐसी बहादुर लड़कीअ कहा मिलती है जो अपने बाप की गुस्ताखी में एक शब्द नहीं सुन सकती. (कमलनाथ की और देख kar)Kamalnath तुम नशिबवाले हो जो ऐसी बेटी के बाप हो. ठीक है, दी तुम्हे महलात, पर जल्द hi काम निपटाओ. (कहते हुए वो बहार निकल गया, कमलनाथ और प्रकाशराओ भी पीछे पीछे बहार निकले. हम दोनों भी निचे गए, देखा तो मजदूर और पिंकेशभाई भी वह खड़े थे, शायद उन्होंने भी गोली की आवाज सुनी थी. रघुवीर अपने आदमीओ के साथ वह से निकल गया, हम सब वापस फिर से ऑफिस में आये)

कमलनाथ : (सोफे पर बैठते हुए एक लम्बी सास छोड़ी और गिलास में थोड़ी दारू डाली और पेग बनाया और एक hi सास में पि गया. में और जहान्वी खड़े थे, प्रकसराओ भी सामने बेथ गया था, जहान्वी की और देख kar)Ab क्या कहु तुमसे, मेने मन किया था न तुम्हे यहाँ आने से, तुम नहीं जानती धंधे में कैसे कैसे लोग होते है, अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो?

जहान्वी : अगर मुझे बुसिनेस्स करना है तो मुझे भी अलग अलग तरह के कई लोग मिलेनेगे, उनसे कैसे निपटना है मुझे भी समझना hi होगा.

कमलनाथ : (प्रकाशराओ की और देख कर) कस मेरा बीटा ऐसा होता.

जहान्वी : क्या में आपकी बेटी हु तो कोई दिक्कत है आपको?

कमलनाथ : (मुस्कुराते hue)Nahi, पर तुम सदा तो मेरे साथ रहनेवाली नहीं हो न, चली जाओगी किसी दिन.

जहान्वी : (उनके पास बेथ ते hue)Me सदा आपके पास hi रहूंगी.

कमलनाथ : (मुस्कुरा ke)Kass ऐसा हो सकता.

जहान्वी : आप शिव को कुछ नहीं कहेंगे?

कमलनाथ : (शिव की और देख kar)Sach कहु तो ये मुझे समाज hi नहीं आता. फिर भी थैंक यू.

शिव : नहीं सर, इसमें थैंक यू कैसा, में आपके यहाँ काम करता हु, ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

कमलनाथ : (फिर muskuraya)Isiliye कह रहा था की तुम मुझे समाज नहीं आते, मेरे वह हजारो लोग काम करते है, पर ऐसा तो मेने नहीं देखा कभी. खैर छोडो ये सब, चलो प्रकाशराओ, घर चलते है. (कहते हुए वो खड़ा हुआ और साथ में प्रकाशराओ भी खड़ा हो gaya)(Jhanvi की और देख kar)Chalo तुम भी चलो.

जहान्वी : आप जाइये, मुझे अभी अपनी कार भी लेने जाना है.

कमलनाथ : ठीक है, (कहते हुए वो बहार चला गया, साथ में प्रकाशराओ भी, दोनों कार में बेथ गए और कार आगे बढ़ा di)Kya है ये लड़का?

प्रकाशराओ : आप इतना क्यों भाव दे रहे है उसे, वैसे भी वो अनाथ है, आवारा तो होगा hi, और ऐसे आवारा लोग hi ऐसे होते है.

कमलनाथ : (मुस्कुराते hue)Tu भी न एक नंबर है.

इधर जहान्वी सोफे पर बेथ गयी, में खड़ा था.

जहान्वी : खड़े क्यों हो बैठो. (में सामने सोफे पर बैठने लगा तो उसने kaha)Waha क्यों बेथ रहे हो, यहाँ बैठो. (अपने बाजु की जगह पर इस्सर करते हुए वो बोली तो में उठ कर वह बेथ गया, उसने मेरी बाजु पकड़ li)Kyu किया ये सब?

शिव : क्या किया?

जहान्वी : उसने मेरे बारेमे गलत बात पूरी भी नहीं की थी की तुमने उसे मार दिया, क्यों?

शिव : (वो बहोत प्यार से मुझे देख रही thi)Isme क्या, में कैसे बर्दास्त कर सकता हु की कोई मेरे सामने तुम्हे ऐसा कुछ कहे. (जहान्वी मुस्कुरायी और सीधी बेथ गयी और एक गिलास में व्हिस्की डालने लगी, फिर बर्फ और फिर पानी) ये क्या कर रही हो?

जहान्वी : आज मूड हो रहा है, वैसे भी कभी कभी चलता है. (कहते हुए उसने एक सिप भरी और अपनी आंखे बंद कर के शिर हिलाया)

शिव : (उनका चेहरा देख कर hi लगा की उनको स्वाद पसंद नहीं hai)Kya हुआ?

जहान्वी : (मुँह बिगड़ते hue)Swad कड़वा है. (कहते हुए प्लेट से एक वफर उठायी और मुँह में रक्खी)

शिव : अगर इतना बुरा है तो फिर पि क्यों रही है?

जहान्वी : बस ऐसे hi (कहते हुए वो मुस्कुरायी और फिर से एक सिप लिया और फिर मुँह बिगाड़ा और एक वफर अपने मुँह में डाली) पिस्तौल देख कर तुम्हे दर नहीं लगा?

शिव : उतना समय hi नहीं था की कुछ सोचु, बस हो गया जो होना था.

जहान्वी : पापा सच hi कह रहे थे, तुम समाज में नहीं आते. (कह कर वो मुस्कुरायी)

शिव : अब मुस्कुरा क्यों रही है?

जहान्वी : तो और क्या करू, अच्छे अच्छा की पिस्तौल सामने देख कर फैट जाती है, और तुमने बिना एक पल गवाए उसके हाथ में पपरवेइट दे मारा. (वो ऐसे hi बाते कर रही थी और साथ में सिप लगा रही थी, थोड़ी देर के बाद उसके ऊपर नशा हावी होने लगा, उसने शिव को देखा, उसके चेहरे से मुस्कान गायब थी, उसने दूसरा पेग बनाया और पिने लगी, वो चुप थी और कुछ सोच रही थी)

शिव : क्या हुआ, क्या सोच रही है? (वो कुछ नहीं बोली और दो चार और सिप पि gayi)Kya बात है, परेशान दिख रही हो?

जहान्वी : में अच्छी लड़की नहीं हु शिव.

शिव : (मुझे हसी आ gayi)Daru पीती हो इस लिए?

जहान्वी : (वो बिलकुल नहीं hasi)Isliye नहीं.

शिव : तो?

जहान्वी : ी ऍम नॉट वर्जिन. (उन्होंने नज़ारे झुकाये हुए hi कहा)

शिव : तो ?

जहान्वी : (उसने शिव को आश्चर्य से देखा, वो उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिस करने lagi)Tumhe कोई फर्क नहीं पड़ा?

शिव : और ये फर्क किस लिए पड़ना चाहिए?

जहान्वी : क्या तुम्हारे दिल में मेरे लिए कुछ भी नहीं है? (उसके चेहरे पर उदासी छलक आयी)

शिव : (में भी सीरियस हो गया था, क्यों की ये एक सेंसेटिव मुद्दा था, उनकी आँखों में मुझे सब साफ़ नजर आ रहा था और में उस से बचना चाहता tha)Aap जो सोच रही है वो मुमकिन नहीं है.

जहान्वी : (वो ऐसे मुस्कुरायी जैसे मेरा मज़ाक उदा रही ho)Achchha, में क्या सोच रही हु?

शिव : वो में...

जहान्वी : जो हमारे बिच पहले हुआ है, फिर वो क्या tha?(Me चुप रहा, बोलता भी तो क्या bolta)Wo लड़की, क्या नाम है, है भोली, वो वर्जिन है तो अच्छी है, है न?

शिव : बात यहाँ भोली की नहीं है, और आपके वर्जिन होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, ये आपकी लाइफ है, आप जैसे चाहे जिए, और आपका वर्जिन होना या न होना आपके करैक्टर का सर्टिफिकेट नहीं है.

जहान्वी : (अपना गिलास रख कर मेरी बाह से कास के लिपट ते hue)Me तो यही सोच कर परेशान थी की जब तुम्हे पता चलेगा की में वर्जिन नहीं हु तो पता नहीं तुम मेरे बारेमे क्या सोचोगे, इसलिए उस दिन मेने तुम्हे आगे बढ़ने से रोका था, पर में अब दूर नहीं रह सकती शिव.

शिव : यही प्रॉब्लम है, मेरी जिंदगी पहले से ुलजी हुई है, आप कह रही है की आप वर्जिन नहीं है तो अच्छी नहीं है, में भी वर्जिन नहीं हु, तो फिर में भी अच्छा नहीं हुआ न. (जहान्वी गौर से शिव को देखने लगी)

जहान्वी : कोण है वो?

शिव : एक नहीं है. (मेने बस इतना कहा, वो थोड़ी देर मुझे देखती रही, फिर उसने अपना बाकि बचा गिलास उठाया और एक hi घुट में सारा पि गयी).
 
अपडेट 200

जहान्वी को ये जान कर थोड़ा शोक hi लग गया जब शिव ने कहा की उसके सम्बन्ध एक से नहीं है.

जहान्वी : क्या मतलब है की एक नहीं है?

शिव : वही जो आप समाज रही हो.

जहान्वी : अगर ऐसा था तो फिर मेरे साथ वो सब क्या था?

शिव : मेने गुस्से में आपको किश कर दिया था, पर फिर सिचुएशन ऐसी होती गयी की इतना आगे बढ़ गए, पर अभी भी वक़्त है, हम इतना भी आगे नहीं बढे की रुक न सके. (जहान्वी को समाज नहीं आ रहा था की क्या कहे, अगर शिव उसकेसाथ आगे बढ़ा होता तो वो उसको झापड़ भी मर देती पर यहाँ तो वो खुद hi पीछे हैट रहा था और उसको ये बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लग रही थी)

जहान्वी : कोण है वो सब? क्या अभी भी तुम्हारे उनके साथ सम्बन्ध है की, फिर एक को भोगा और उसको छोड़ दिया, उसके बाद दूसरी पता ली. (उसने घूरते हुए कहा)

शिव : ऐसा नहीं है, मेने किसी को नहीं छोड़ा है, और न वो मुझे छोड़ रही है.

जहान्वी : एक बार अपनी साड़ी करतूत उन्हें बता दो, वैसे hi वो छोड़ देगी. (जहान्वी को अब गुस्सा आ रहा था शिव पर)

शिव : मेने किसी को भी धोखा नहीं दिया है, मेने उन्हें बता दिया है.

जहान्वी : (उसको यकीं नहीं हो रहा था) जूथ बोल रहे हो तुम, मुझे भी फसा रहे हो तुम.

शिव : में जूथ नहीं बोल रहा, और न आपको फसा रहा हु, अगर में चाहता तो आपके साथ ये सब पहले hi कर चूका होता, और आप मन भी नहीं करती.

जहान्वी : मार न देती जो मेरे साथ ये सब किया होता तो, पता नहीं में क्या क्या सोच रही थी, मेरे किसी के साथ सम्बन्ध थे उस वजह से में कितना गिलटी फील कर रही थी की में कही तुम्हे चीट न कर दू, और यहाँ तुम हो जो लगे हुए हो, खामखा में तुमसे इम्प्रेस हुई जा रही थी, तुम्हारे सामने कपडे उतर दिए थे मेने, और जब निचे आगे बढ़ने से मन कर दिया तो तुम कितनी आसानी से मान गए थे, करुणा भी तैयार है फिर भी तुम ने उसके साथ कुछ भी नहीं किया, क्या समाजु में इन सब को, अगर इतने लोगो के साथ सम्बन्ध थे तो फिर करुणा के साथ भी कर लेते, क्या फर्क पद जाता?

शिव : यही तो में कह रहा हु, की अगर मेरे पास इतनी है तो फिर क्या जरुरत है मुझे आपके पास आने की या करुणा के पास जाने की, वैसे भी उसके साथ जो कुछ भी हुआ वो भी आपकी वजह से hi हुआ.

जहान्वी : (जहान्वी सब जानती थी, वैसे भी उसको करुणा की बात में कोई इंट्रेस्ट नहीं था, उसको तो अपने और शिव के सम्बन्ध की पड़ी थी) मेरे बारे में क्या सोचते हो तुम?

शिव : क्या पूछना चाहती हो आप? सीधा सीधा पूछिए?

जहान्वी : उस दिन इसी रूम में मेरे साथ थे तुम, हम इतना आगे बढ़ चुके थे की अगर तुम थोड़ी भी जबरदस्ती करते तो में मन नहीं करती, फिर क्यों नहीं किया था?

शिव : मेने कहा न, वैसे भी मेरी जिंदगी इतनी ुलजी हुई है, में और उलझाने नहीं चाहता था.

जहान्वी : तो में उलझन हु तुम्हारे लिए.

शिव : आप गलत तरीके से ले रही है बात को.

जहान्वी : में बिलकुल सही तरीके से ले रही हु, और जब इतना के साथ छल कर hi रहे थे तो मुझे क्यों छोड़ दिया? कर लेते मेरे साथ भी छल.

शिव : मेने कोई छल नहीं किया है, न उनके साथ न आपके साथ.

जहान्वी: ये छल hi है, इतना के साथ एक साथ सम्बन्ध बना कर साबित क्या करना चाहते हो तुम.

शिव : मुझे कुछ साबित नहीं करना, में बस जुड़ता चला गया सबके साथ, जितना हो सकता था मेने खुद को और उन्हें रोका पर...

जहान्वी : खुद को बड़ा स्मार्ट समझते हो न जो लड़कीअ बिछ जाती है तुम्हारे सामने. (जहान्वी को सच में गुस्सा आ रहा था, उसने क्या क्या सोचा था और क्या हो रहा था)

शिव : (में उन्हें समजा रहा था और वो मुज पर गुस्सा किये जा रही थी) मुझे धोखेबाज कह रही हो, चलो मान लिया में हु दोखेबाज, पर आप क्या सोच कर मेरे साथ ये सब कर रही थी? न में आपकी उम्र का हु, न आप का और मेरा कोई मेल है, में एक अनाथ लड़का hi हु, तो आप भी मेरा इस्तेमाल hi कर रही थी न. (जहान्वी ने गुस्से से मुझे देखा, उनकी आँखों में गुस्सा भरा पड़ा था, पर तभी उनकी आँखों में ासु आ गए, आयसु आँखों से बहार छलक aaye)(Jhanvi को खुद को भी लग रहा था की वो क्यों आगे बढ़ रही थी, वो सही hi तो कह रहा था की आखिर वो क्यों उसके साथ आगे बढ़ना चाहती थी, इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं था उसके पास तो उसके ासु छलक आये थे, उसने दोनों हाथो से अपना चहेरा छुपा liya)(Muje बुरा लग रहा था की मेने उन्हें रुला दिया, में उन्हें शांत करना छटा था, में उनकी और बढ़नेही वाला था की दरवाजे पर दस्तक हुई, मेने देखा तो वह पिंकेशभाई खड़े थे. (पिंकेश अभी अभी आया था, उसको पता नहीं था की अंदर क्या सन चल रहा है, वो तो बस किसी काम से आया था)

जहान्वी : (पिंकेश को देख कर, गुस्से me)Kya है?

पिंकेश : (हड़बड़ा गया, उसको समाज नहीं आया की क्या कहे, मैडम की आँखों में ासु थे, टेबल पर शराब रक्खी हुई थी, वो कभी मैडम को तो कभी शिव को देख रहा था, मैडम का गुस्सा देख कर उसको लगा की वो गलत वक़्त पर आ गया तो वो उलटे पॉ भागने laga)Kuchh नहीं, में जाता हु. (कह कर वो बहार निकल gaya)(Jhanvi को जैसे कोई फर्क hi नहीं पड़ा, उसने फिर से गिलास में दारू भरनी सुरु ki)(Pinkeshbhai के आने से मुझे ध्यान गया की दरवाजा खुला hi था, वैसे उसकी जरुरत नहीं थी पर मेने खड़े हो कर दरवाजा बंद कर दिया)

जहान्वी : (हलके गुस्से me)Darwaja क्यों बंद कर रहे हो? (मेने कोई जवाब नहीं दिया और उनके बाजु में बाथ गया, और वो गिलास उठनेवाली थी तो मेने रोक diya)Chhodo मुझे. (उन्होंने गुस्से से कहा)

शिव : आप नहीं पियेंगी.

जहान्वी : मुज पर हुकुम मत चलाओ, भूलो मात की में यहाँ की मालकिन हु, न की तुम.

शिव : किस बात का गुस्सा है तुम्हे (में सीधे तू पर आ गया, उसने मुझे गुस्से से देखा) आखिर किया क्या है मेने? अगर में दोखेबाज होता तो बिना कुछ बोले सब कुछ कर चूका होता अब तक, और खुसी खुसी सब करवा रही होती तुम.

जहान्वी : यू ba....(Bolte बोलते वो रुक गयी और गिलास उठाने लगी पर फिर भी मेने नहीं उठाने दिया, उन्होंने अपनी आंखे बंद कर ली और निचे देखने लगी, मुझे दिख रहा था की वो अपने गुस्से को काबू कर रही थी)

शिव : है हु में बास्टर्ड, और ये तुम्हे कहने की जरुरत नहीं है, मेरी किस्मत ने ये लिखदिया है, और किस बात का गुस्सा आ रहा है तुम्हे, मेने सच बता दिया इस बात का, अब तो तुम सच जानती हो, है न, चलो में अभी भी तुम्हारे साथ आगे बढ़ रहा हु, अगर इतना hi गुस्सा है तो चिल्लाओ और रोक कर दिखाओ मुझे. (कहते हुए मेने उनके चहेरे को मेरी और घुमा दिया और उनके होठो पर अपने होठ रख दिए और जोरो से चूसने लगा, वो मुझे धक्का दे रही थी, थोड़ी देर मेने जबरदस्ती से किश किआ फिर छोड़ दिया, वो मुझे गुस्से से देखने लगी और अपने होठ को उलटे हाथ से पोछने लगी, थोड़ी देर में और वो एक दूसरे को देखते रहे, पर न वो कुछ बोली न chillayi)Kya हुआ, चिल्लाओ, बुलाओ सबको. (वो गुस्से से मुझे घूरने लगी) गुस्सा आ रहा है? अब तो पता है न की में धोखेबाज हु, तो फिर चिल्लाती क्यों नहीं? (वो गुस्से से बस जोर जोर से सासे ले रही थी) ऐसे मात घूरो मुझे, वैसे भी तुम्हे देख कर कुछ हो जाता है, अगर कुछ कर दिया तो फिर मुझे दोष मात देना. (वो बस मुझे घर रही थी )न कहा न ऐसे मात घूरो. (वो फिर भी घूरती रही तो मेने फिर से उनके होठो को चूसना सुरु कर दिया, वो मुझे फिर धकेलने लगी पर अब जोर बहोत काम था, कभी कभी वो मुझे खिंच भी लेती थी ऐसा लग रहा था, में भी बस ऐसे hi किश कर रहा था तो उत्तेजित नहीं हुआ था में, पर वो जैसे जैसे शांत हो रही थी मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी, मेरे लुंड में हरकत होने लगी, मेने उनके होठो को छोड़ा और उनकी आँखों में देखा) गुस्सा करो (पर वो बस मेरी आँखों में देख रही थी और हांफ रही थी) अगर गुस्सा नहीं करोगी तो फिर कुछ हो जायेगा में बता रहा हु. (वो फिर कुछ नहीं बोली तो मेने अपना हाथ कमर से ऊपर बढ़ाया और उनके स्तन को हाथो में भर लिया और साथ में होठो पर झुकने लगा, उनकी आंखे पहले से hi बंद हो गयी और वो शांति से मुझे किश करने दे रही थी, मेने उन्हें सोफे पर लेता दिया तो वो लेट गयी और में अपनी कोहनी के बल साइड से लेट कर उनके होठो का रास पिने लगा, जैसे जैसे वो मधुर स्वाद मेरे मुहमे घुल रहा था मेरे लुंड में और कड़ा पाना आता जा रहा था, मेरा हाथ उनके स्तन के साथ अब कमर को भी सहलाने लगा, मेने फिर किश तोड़ी और उनको देखा, वो बस आँखे बंद कए हुए लेती थी,





उनके होठ मेरे थूक से साणे हुए थे, मेने धीरे से kaha)Ankhe खोलो. (उन्होंने आँखे खोली, हम दोनों की आंखे चार हुई, में अभी भी उनका पेट सेहला रहा था, और फिर से हाथ को स्तन पर ले गया और उसे सहलाने लगा, पर वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती रही) आखिर चाहती क्या हो तुम? न गुस्सा कर रही हो न चिल्ला रही हो, अगर ऐसे चलता रहा न तो फिर कुछ हो जायेगा, सच कह रहा हु. (वो फिर भी कुछ नहीं बोल रही थी, मेरा भी तापमान बढ़ रहा था, वो स्कर्ट और शर्ट पहने हुई थी, मेने स्कर्ट पर से उनकी छूट वाले भाग पर हाथ रख दिया, मुझे पता था की वो भड़क जाएँगी पर वो शांत रही, मेने हलके से छूट पर हाथ दबाया तो मुझे छूट के आकर का स्पस्ट आभास होने लगा, मेरे खून में बहाव बढ़ने लगा, मेरा लुंड भी पूरी तरह से कड़क हो गया, मेने स्कर्ट ऊपर कर दिया तो उनकी पंतय बहार आ गयी, मेने देखा तो उनकी गोरी गोरी झांघो के बिच सफ़ेद पंतय मुझे दिख रही थी, मेने उनकी आँखों में देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, उनकी आँखों में देखते हुए मेने पंतय पर हाथ रख दिया, पंतय पर गिला पैन साफ़ महसूस हो रहा था, मेने हलके से सहलाया तो उनकी आंखे आधी बंद हुई पर फिर वो मुझे देखने lagi)Agar इतना गुस्सा आ रहा है तो फिर ये गीली क्यों हो रही है. (उन्होंने अपना चेहरे घुमा liya)Tum लड़कीओ को समझना सच में मुश्किल है. कहते हुए मेने स्कर्ट वापस धक् दिया, मान तो बहोत कर रहा था पर इस वक़्त ये ठीक नहीं था, उनका गुस्सा भी जायज था, जैसे hi मेने स्कर्ट वापस थक दिया उन्होंने मेरी और देखा, जैसे मुझे समझने की कोशिस कर रही हो, में खड़ा होने लगा, उनकी बाजु से निकल कर में सोफे से बहार निकल आया और खड़ा हो गया, वो अभी भी मुझे hi देख रही थी) अब क्या देख रही हो, कुछ नहीं कर रहा में, में निचे जा रहा हु, जब जाना हो तो मुझे बुला लेना. (कहते हुए में वह से बहार निकल गया)

जहान्वी अभी भी सोफे पर वैसे hi लेती थी, वो समाज नहीं प् रही थी की क्या कहे, एक और तो उसको लग रहा था की ऐसे इंसान से क्या सम्बन्ध बनाना जो पहले से दुसरो के साथ सम्बन्ध बनाये हुए है, पर दूसरी और उसको लग रहा था की वो दुसरो जैसा नहीं है, जहा उसका पहला बॉयफ्रेंड उसको अपने दोस्तों के साथ छुड़वाना चाहता था वही शिव के सामने वो लेती हुई थी फिर भी उसने कुछ नहीं किया था, वैसे भी वो कबसे यही देख रही थी की शिव उसके साथ क्या करता है, क्या उसको सिर्फ एक जिस्म चाहिए, पर नहीं शिव ऐसा नहीं था, अगर उसको जिस्म hi चाहिए होता तो वो उसकी भावनाओ को अनदेखा कर के उसको भोग सकता था, पर उसने वैसा नहीं किया, वो क्या करे समाज नहीं आ रहा था. एक बार वो फिर सोचने लगी की आखिर उसको शिव से चाहिए क्या?

में निचे गया, वह पिंकेशभाई से मिला पर वो मुझसे नज़ारे चुरा रहे थे, और अपने काम में ध्यान दे रहे थे, में समाज रहा था, मेने भी ऐसी वैसी कोई

मैंने भी उसे बारे में कोई बात नहीं की. आधे घंटे तक मैंने जानवी का फ़ोन का वाते किया पैर वह नहीं आया तो फिर मैं hi फिर से ऑफिस में चला गया वह सोफे पैर बैठी कुछ सोच रही थी.

शिव: जाना नहीं है यही रहने का इरादा है क्या ( एक बार मेरी और देखा पैर कोई जवाब नहीं दिया) मुझे प्रैक्टिस के लिए भी जाना है.

जानवी: झुंझलाते हुए तुम्हें जाना है तो जाओ मैंने पकड़ कर नहीं रखा है वह नाराजगी से बोली मैं उसके नजदीक गया और सोफे पैर बैठ गया

शिव: अखिल प्रॉब्लम क्या है तुम्हारी जैसे तुम्हारी मर्जी थी मैंने तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं किया फिर क्या दिक्कत है तुम्हें.

जहान्वी: गुस्से से खड़े होते हुए ठीक है चलो तुम्हें जाना है न तो चलते हैं मैं अभी भी बैठा था जब मैं खड़ा नहीं हुआ तो उसने मेरी और देखा क्या हुआ चलो

शिव: उसको खींचकर वापस होकर मिटते हुए आखिर तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है मुझे कुछ बताओगी तो समझ में आएगा.

जानवी :अभी मेरा बात करने का मूड नहीं है चलो फिर बात करेंगे.

मैंने भी अभी बात को इतना ठीक नहीं समझा मैं खड़ा हो गया वह भी कड़ी हो गई हम दोनों बहार निकले मैंने बाइक चालू की वह मुझसे थोड़ी दुरी बनाकर बैठ गई मैं कुछ नहीं बोलै हम वहां से निकल गए और अनाथ आश्रम पहुँच गए. वहां उतारते hi वह अपने कर की और जाने लगी.

शिव: कहाँ जा रही है?

जहान्वी:( बिना मेरी और देखें) घर.

शिव: शायद कुछ दिनों के लिए मैं बहार जाने वाला हूँ तो साइट पैर नहीं ा पाउँगा( उसने मूड कर मेरी और देखा पैर बोली कुछ नहीं फिर घूम कर अपने कर में बैठकर चली गई)

जो काम चल रहा था मैंने थोड़ी देर उसको देखा फिर अंदर चला गया. शाम को वहां से स्टेडियम चला गया.

शाम को प्रकाश रओ अपने घर पहुंचा उसकी बीवी आकर उसके पास सोफे पैर बैठ गई.

संध्यादेवी: क्या हुआ किन ख्यालों में दुबे हो?

प्रकाश रओ: एक नंबर का गुंडा है वह.

संध्या: किसकी बात कर रहे हो आप.

प्रकाश रओ: वह जो तुम्हारी बेटी के साथ स्कूल में पढता है शिव.

संध्या :क्यों ऐसा क्या हो गया?

प्रकाश रओ एक नंबर का गुंडा है वह. वैश्वि के साथ दो राते रुका था. वैश्वि हमसे कुछ छुपा तो नहीं रही न कहाँ है वह.

संध्या: देवी अपने कमरे में hi है.

प्रकाश रओ:( जोर से आवाज़ लगते हुए) वैश्वि ू वैश्वि. ( वैश्वि ने आवाज़ सुनी किचन में काम कर रही स्वर्ण ने भी आवाज़ सुनी, वैश्वि कमरे से बहार आयी)

वैश्वि: हाँ पापा?

प्रकाश रओ: निचे आओ? ( वैश्वि निचे ा गई स्वर्ण को भी कुछ अजीब लगा इसलिए वह भी वहां ा गई) ( प्रकाश रओ ने अपनी बीवी की और देख कर कहा) पूछो इससे उस कमीने ने इसके साथ ऐसा वैसा कुछ किया तो नहीं न?

वैश्वि:( उसको कुछ समझ नहीं आया. ) क्या बात कर रहे है आप?

प्रकाश रओ: वह शिव, उसने तुम्हारे साथ कुछ किया तो नहीं? ( अपनी बीवी की और देखकर) पूछो इससे तुम्हारी बेटी अभी पवित्र है न? ( अपने पापा के मुंह से शिव का नाम सुनकर वैश्वि चौक गई और जिस तरह की बात उसके पापा ने की थी यह सुनकर उसकी आँखों में आंसू ा गए)

साधना: यह क्या बोल रहे हैं आप?

प्रकाश रओ: वह एक नंबर का गुंडा है मारपीट करना उसका काम है आज तो उसने मेरे सामने Hi एक आदमी पैर पिस्तौल लगा दी थी. ऐसे लड़के के साथ तुम्हारी बेटी जंगल में अकेली रही थी. उसकी वजह से hi तो यह कमलनाथ जी के बेटे के साथ शादी करने से मन तो नहीं कर रही? अगर ऐसा है कण खोल कर सुन लो अगर तुम्हारे मन में ऐसा कोई भी विचार है तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. ( ऐसी बातें सुनकर वैश्वि रोने लगी वैश्वि को रोटा देख स्वर्ण उसके पास ा गई और उसको शांत करने लगी वो अपनी भाभी के गले लग गई)

संध्या देवी: यह क्या बोले जा रहे हैं आप?

प्रकाश रओ: एकदम सही कह रहा हूँ. लोगों से लड़ाई करना मारपीट करना यह तो उसके लिए आम बात है. अगर इसने उसके साथ कोई भी सम्बन्ध रखे तो मैं इसकी जान ले लूंगा.

संध्या देवी: आप नशे में कुछ भी बोल रहे हैं( वैश्वि की और देखकर तुम जाओ बेटी अपने कमरे में, स्वर्ण इसे अपने कमरे में ले जाओ. ( स्वर्ण वैश्वि को अपने कमरे में ले गई) आप यह क्या anap-sanap बक रहे हैं, कोई अपनी बेटी से इस तरह से बात करता है, चलिए, आपने ज्यादा पि ली है सो जाइये आप. ( संध्या देवी अपने पति को कमरे में ले गई)

वहां अपने कमरे में वैश्वि रो रही थी स्वर्ण उसे शांत करने की कोशिश कर रही थी थोड़ी देर समझने के बाद वह शांत हो गई. पैर रात के खाने के वक़्त भी वह निचे नहीं आई, संध्या देवी ने स्वर्ण को उसका खाना उसके कमरे में ले जाने के लिए कहा. सुवर्ण के द्वारा बहुत समझने पर वैस्वीने ने थोड़ा खाना खा लिया. स्वर्ण उसको खाना खिला कर वहां से चली गई वैश्वि अब अपने कमरे में अकेली थी उसको अपने पापा की बातें यद् ा रही थी उसको अपने पापा पैर बहुत गुस्सा ा रहा था. उसने अपना फ़ोन उठाया और शिव को कॉल किया.

मैं खाना खाकर अभी कमरे में Hi आया था की मेरे मोबाइल की रिंग बजी मैंने देखा तो वैश्वि का कॉल था. मैंने फ़ोन उठाया

शिव: hello( सामने से कोई आवाज़ नहीं आई) hello( तभी मैंने सामने से रोने की आवाज़ सुनी) वैश्वि hello वैश्वि.

वैश्वि:( रट हुए) hello.

शिव: क्या हुआ क्यों रो रही हो? ( वह और रोने लगी) क्या हुआ कुछ बताओ तो? ( वह बस रोटी जा रही थी मुझे उसकी चिंता होने लगी) वैश्वि बात तो करो क्या हुआ? ( उसने रट रट अपने पापा के साथ हुई साडी बात बता दी) तो क्या हुआ, उन्हें जो लगा उन्हें सोचने दो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.

वैश्वि :पैर मुझे फर्क पड़ता है. वह कितना जानते है तुम्हें वह कैसे तुम्हारे बारे में ऐसा बोल सकते हैं.

शिव: मतलब उन्होंने जो मेरे बारे में कहा उसके लिए तुम्हें बुरा लग रहा है और उन्होंने जो तुम्हारे बारे में कहा उसके लिए तुम्हें कोई बुरा नहीं लग रहा.

वैश्वि: उन्होंने जो मेरे बारे में कहा कहने दो उन्हें वैसे भी यह एक न एक दिन तो सच होना Hi है. अभी ाजाओ मेरे घर मैं अभी उनकी बात सच कर देती हूँ.

शिव: तुम सच में पागल हो ,ऐसी बातों को अपने दिल पैर मत लगाओ और शांति से सो जाओ.

वैश्वि: सच कह रही हूँ ा जाओ घर.

शिव : पागल सो जाओ अभी.

वैश्वि: ी लव यू. ोूंठा.

शिव: ी लव यू तू. कल मिलते है.

वैश्वि: बात करो न थोड़ी देर. ( मैंने थोड़ी देर उससे बात की उसका मन हल्का हो गया फिर उसने फ़ोन रख दिया)

Aawaj:Kis से बातें चल रही थी?( मैंने पीछे मुड़कर देखा तो बिना मैडम थी )

शिव : नहीं कोई नहीं बस ऐसे hi.

बिना: अच्छा तो बस ऐसे hi बातों में ी लव ु बोल देते हो. ( मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ मैंने आस पास ध्यान नहीं रखा था, मैं सोचने लगा की अब मैं क्या बताऊँ) नहीं बताना चाहते तो कोई बात नहीं. ( वह नाराज होकर जाने लगी, मैंने उनका हाथ पकड़ लिया क्यूंकि कमरे में हमारे आलावा कोई नहीं था)

शिव: वह वैश्वि थी.

बिना: (आश्चर्य से) मैंने सोचा जूही होगी. ( मैं चुप रहा बोलता तो भी क्या बोलता).

रंजन: क्या बातें हो रही है? मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया?

बिना: नहीं मैं इससे बस यही कह रही थी की अब मुझे घर जाना चाहिए अब ठीक हूँ मैं.

रंजन: क्यों आपको हमारे साथ अच्छा नहीं लगता?

बिना: (हँसते हुए) अच्छा क्यों नहीं लगेगा पैर हमेशा के लिए तो यह नहीं रह सकती न.

लता:( अंदर आते हुए) आप हमेशा हमारे साथ रहो तो भी हमें कोई दिक्कत नहीं है बस आपको देखना है की आपको रहना है की नहीं.

बिना: (लता को गले लगते हुए) मुझे कोई दिक्कत नहीं है पैर मेरी वजह से यहाँ सब परेशां हो रहे हैं इस बेचारे को तो अपना कमरा तक छोड़ना पड़ा है.( उन्होंने मेरी और इशारा करते हुए कहा)

शिव: ऐसा कुछ नहीं है आपको ठीक लगे तो आप चली जाना पैर अभी नहीं अभी कुछ दिन आप यही रुक रही है.

लता: (मुस्कुराते हुए) लो बस हो गया फैसला. चलिए अपने कमरे में चलते हैं. ( वह दोनों कहाँ से चली गई मैं सोचने लगा की अब मैडम से क्या बात करूँगा वैसे भी जो भी है उन्हें बताना तो है hi) .

स्टेडियम में, जूही और मैंने बहुत ज्यादा hi प्रैक्टिस की थी इसलिए पूरा बदन दर्द कर रहा था तो मैं जल्दी hi सो गया. दूसरे दिन भी, सुबह मैंने और जूही ने अच्छे से प्रैक्टिस की. उसके बाद मैं वहां से स्कूल चला गया. आज हर्ष और महेश दोनों कैंटीन में गए थे तो मैं शमीम और वैश्वि hi थे.
 
अपडेट 201

में, संयम और वैस्वी तीनो रेसस्स में बैठे हुए थे, वैस्वी को शिव से बात करनी थी तो वो रास्ता तलाश रही थी, और सोच में दुबे रहने की वजह से वो चुप थी, संयम अपनी hi धुन में थी, वो शिव से बात कर रही थी.

संयम : आज अम्मी ने तुम्हारे लिए खास ये नास्ता बनाया है. (मेने मुस्कुरा कर उसे देखा और नास्ते को देखा, मेने वैस्वी को देखा तो वो कुछ सोच में डूबी लगी मुझे.

शिव : क्या हुआ, किस सोच में डूबी हो. (वैसे तो में जनता था की वो क्या सोच रही होगी, हमारी कल रात बात जो हुई थी, पर मेने उसको संजय था तो मेने सोचा की शायद वो समाज गयी होगी, पर अभी उसको सोच में डूबा देख कर मेने जान न चाहा.

वैस्वी :(उसने शिव को देखा और फिर संयम को देखा, उसकी समाज में नहीं आ रहा था की क्या kahe)Muje तुमसे बात करनी है. (आखिर वैस्वी ने कह hi diya)(Mene एक बार संयम की और देखा, वो भी वैस्वी को ध्यान से देख रही थी)

शिव : तो कहो न, इसमें सोचनेवाली क्या बात है.

वैस्वी : अकेले में कहना है. (संयम को ये सुन कर एक जतका सा लगा, उसकी खास सहेली उस से छुपा कर कुछ बात करना चाहती थी, उसने एक बार शिव को देखा फिर वो कड़ी हो गयी)

संयम : (नाराजगी से) तुम दोनों बाते करो में जाती हु. (मुझे पता था की उसको बुरा लग रहा है पर इस सिचुएशन में क्या बोलता. वो वह से चली गयी)

शिव : ऐसी क्या बात है?

वैस्वी : आओ मेरे साथ. (कहते हुए वो कड़ी हो गयी, में भी खड़ा हो gaya)Mere पीछे आओ. (कहते हुए वो चलने लगी, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था तो में भी उसके पीछे पीछे चलने लगा, वो स्कूल के गलियारे से होते हुए पीछे की और गयी, वह बाथरूम था, कुछ लड़कीअ भी कड़ी थी वह, लड़को का बाथरूम थोड़ी दुरी पर था, वो बढ़ती चली गयी, मेने देखा की सब लड़के और लड़कीअ अपने में मस्त है, वो चलते हुए थोड़ी दुरी पर चली गयी, स्कूल की बॉउंड्री वह ऊँची थी पर वह एक लोहे का छोटा दरवाजा बना हुआ था, वो ुको खोल कर बहार निकल गयी, पीछे की तरफ पेड और झाडिया थी को कोई वह नहीं जाता था, मने कुछ पल वेट किया, किसी का ध्यान नहीं था, तो में भी उस दरवाजे से बहार चला गया, वो वही दीवाल के सहारे कड़ी थी)

शिव : यहाँ क्यों लायी हो? (वो कुछ नहीं बोली, और मेरे होठो पर किश करते हुए मुझसे लिपट गयी, में समझने की कोशिस कर रहा था और वैसे hi खड़ा रहा, उसने मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी कमर पर लपेटा तो मेने उसको बहो में भर लिया पर फिर भी में समझने की कोशिस कर रहा था, थोड़ी देर बाद वो अलग हुई, और मुझे देखने लगी, में उसके चेरहे को देख कर समझने की कोशिस कर रहा था) क्या हुआ, आज अचानक ऐसे, यहाँ?

वैस्वी : मुझे वो सब करना है शिव. (में उसकी बात समाज रहा था)

शिव : देखो वैस्वी, तुम...

वैस्वी : मुझे कुछ नहीं सुन न, न कुछ समझना है, मुझे वो सब करना है.

शिव : है, पर कहा, ऐसे hi तो हम कही भी नहीं कर सकते. (मेने बस उसको उलझने के लिए hi कहा था)

वैस्वी : वो मुझे नहीं पता, (कुछ सोच kar)mere घर आ जाओ.

शिव : तुम क्यों इस तरह से बेहवे कर रही हो, हमारी कल बात हुई थी न, तुम ख़म खा बात को अलग रारीके से ले रही हो, तुमने hi कहा था न की तुम्हारे पापा ने शराब पि थी, बोल दिया होगा नशे में.

वैस्वी : भले hi उन्होंने नशे में बोलै था, पर वो बात उनके दिल में थो है न, और जब उन्होंने मान hi लिया है तो फिर यही सही, मेने तो तुमसे वैसे भी कहा है, तुम hi भाग रहे हो.

शिव : में भाग नहीं रहा हु, और वो सब करना क्यों है तुम्हे, क्या फर्क पद जायेगा उस से.

वैस्वी : वो सब मुझे नहीं पता, मुझे बस इतना पता है की ी लव यू.

शिव : ठीक है, हम शांति से उसके बारे में बात करेंगे, अभी चलो यहाँ से , किसी ने देख लिया तो तुम्हारी खामखा बदनामी हो जाएगी.

वैस्वी : हो जाने दो, जिसको पता चलता है चलने दो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.

शिव : अभी तुम गुस्से में ये सब बोल रही हो, अभी चलो यहाँ से, रेसस्स भी ख़तम होनेवाली है.

वैस्वी : तुम मुझसे प्यार करते हो न? (उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा)

शिव : तुम्हे पता है, फिर क्यों पूछ रही हो?

वैस्वी : ऐसी नहीं, अगर है तो कहो.

शिव : मेने कहा तो है तुमसे.

वैस्वी : तो आज फिर से कहो.

शिव : Ok बाबा, ी लव यू, बस.

वैस्वी : किश करो मुझे. (पता नहीं क्या क्या चल रहा था उसके दिमाग में, में उसे देख रहा tha)Karo. (मुझे सोच में डूबा देख उसने फिर कहा, में झुका और उसके होठो को चूमने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रखदिया और उसे दबाने का इस्सर करने लगी, मेने उसके भरे हुए स्तन को दबा दिया, उसने सीधे मेरे लुंड को पकड़ लिया और उससे दबाने लगी, लुंड तो वैसे भी खड़ा हो गया था, थोड़ी डरे किश करने के बाद वो हांफ ने लगी और किश तोड़ कर मुझे देखने लगी, और मुस्कुराते हुए boli)Tumse अच्छा तो ये है, तुरंत अपनी फीलिंग जाहिर तो कर देता है. (उसने हल्का शरमाते हुए मेरे लुंड को दबाते हुए कहा)

शिव : तुम बहोत बिगड़ रही हो. (मेने भी मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : तुमने बिगाड़ा है मुझे, कब आओगे?

शिव : में देखता हु, वैसे भी मुझे अभी एक कॉम्पिटिओं के लिए जाना है, तो कुछ दिन नहीं हु यहाँ.

वैस्वी : तो आने के बाद?

शिव : ठीक है बाबा, चलो अब यहाँ से. (मेने दरवाजे से अंदर देखा तो वह कोई भी नहीं था, शायद रेसस्स ख़तम हो गयी थी, मेने सुना hi नहीं था, हम दोनों अंदर गए)

वैस्वी : रेसस्स ख़तम हो गयी?

शिव : लगता तो ऐसा hi है.

वैस्वी : अब क्या होगा?

शिव : क्यों अभी तो कह रही थी की जिसको पता चलता है चले, अब क्या हुआ?

वैस्वी : में तो बस ऐसे hi पूछ रही थी, चलो, मुझे क्या, जिसको जो लग्न है वो लगे. (में थोड़ा टेंशन में था, सब क्लास में स्टूडेंट्स चले गए थे, हम दोनों अंदर गए, और हमारी क्लास में पहुंचे, वह टीचर आलरेडी आ गए थे.

शिव : मई ी कॉम इन टीचर. (सारा क्लास हम दोनों को देखने लगा)

टीचर : कहा गए थे?

शिव : वो मैडम, वो, इसको पेट में दर्द हो रहा था, तो में उसके साथ था, में पूछ रहा था की अगर घर जाना है तो परेशन ले लो.

टीचर : (चिंतित हो kar)Kya हुआ तुम्हे? (वैस्वी कुछ नहीं बोली, बस अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी रही, टीचर भी एक औरत थी तो उन्हें लगा की शायद लड़कीओ वाला प्रॉब्लम hoga)Agar घर जाना है तो जा सकती हो.

वैस्वी : नहीं, अब ठीक है. (उसने बस इतना hi कहा)

टीचर : ठीक है बैठो. (संयम दोनों को बहोत ध्यान से देख रही थी, वैस्वी उसके पास आके बेथ गयी पर उसने बात नहीं की, टीचर का पढ़ना सुरु हो गया, जब स्कूल चुटी तो भी संयम अकेले अकेले hi बहार जाने लगी)

वैस्वी : रुको तो दो मिनट. (वो रुकी नहीं और जाने लगी, वैस्वी ने जैसे तैसे अपना बैग पैक किया और उसके पीछे dodi)Samim, रुक न यार.

संयम : मुझसे क्या बात करनी है, जाओ शिव से बात करो.

वैस्वी : तू भी न, यार होती है कुछ बाटे, तुजे तो सब पता है, क्यों बुरा मान रही है?

संयम : ऐसी क्या बात करनी थी जो मेरे सामने नहीं कर सकती थी?

वैस्वी : सच में सुन न हिअ तुजे?

संयम : है.

वैस्वी : तो सुन, मुझे उस से पूछ न था की वो मेरे साथ वो सब कर कर रहा है? (संयम का मुँह खुला का खुला रह गया, उसको यकीं नहीं हो रहा था की वैस्वी ऐसी बात ऐसे खुल कर कर degi)(Vaiswi मुस्कुराते hue)Bas कह दी न तुम्हे बात, अब तू hi बता, ऐसी बात में तेरे सामने कहती.

संयम : तो उसने क्या कहा?

वैस्वी : उसन इ कहा की अभी उसको कॉम्पिटिओं के लिए जाना है, आने के बाद. (उसने शरमाते हुए कहा) (संयम को शिव पर गुस्सा आ रहा था पर वो बोली कुछ नहीं, तभी उन्हें शिव और उसके दोस्त आते दिखे) चल आज में तुम्हे घर छोड़ देती हु.

संयम : नहीं में शिव के साथ hi जाउंगी.

वैस्वी : क्यों तुजे भी पूछ न है कुछ (उसने छेड़ते हुए संयम को कहा)

संयम : तुजे क्या लगता है?

वैस्वी : मुझे तो यही लगता है की तू भी पूछनेवाली है.

संयम : है में भी पुछलूँगी, तुजे कोई दिक्कत. (उसने भी थोड़ा ऐटिटूड से कहा, वप तीनो भी वह पहुंच गए थे तो उनकी बात बिच में hi रुक गयी)

शिव : क्या बाते हो रही है? (मेने बस ऐसे hi पूछा)

संयम : तुम्हारे काम की नहीं है, क्यों हमारी कोई प्राइवेट बात नहीं हो सकती? (उसने हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : भड़क क्यों रही हो? मेने तो बस ऐसे hi कहा था.

संयम : बाइक निकालो, देर हो रही है. (उसने फिर नाराजगी से कहा)

शिव : जो हुकुम महारानी. (सब हसने लगे, मेने बाइक निकली और वो पीछे बेथ गयी, अपने दोस्तों को bye बोलै मेने, वैस्वी खास तरीके से मुझे देख रही थी, उसका चेहरा बहोत कुछ कह रहा था, उसको भी bye बोल के हम निकल गए, जैसे hi स्कूल की भीड़ काम हुई संयम पीछे चिपक गयी, और अपनी छाती का एहसास करवाने लगी)

संयम : क्या हुआ था दोपहर को?

शिव : (अनजान बनते hue)Kya हुआ था? (उसका हाथ जो मेरी झंघ पर था, उसने सीधे hi मेरे लुंड को दबा diya)Aaaouchh क्या कर रही हो?

संयम : सीधी तरह से बताओ, क्या हुआ था?

शिव : कोई खास बात नहीं थी, वो उसके घर में कुछ प्रॉब्लम हो गयी थी तो उसको बताना था.

संयम : (संयम जानती थी की शिव जिउत बोल रहा hai)Sach कह रहे हो?

शिव : है, यार.

संयम : ऐसी क्या बात थी जो उसको तुम्हे बतानी थी.

शिव : थी यार, छोड़ना उस बात को. उसकी पर्सनल बात थी.

संयम : उसकी पर्सनल बात वो तुजे बता सकती है, मुझे नहीं. (उसने मुँह टेढ़ा कर के नाराजगी से कहा)

शिव : अब इसमें में क्या कहु, तू भी तो अपनी पर्सनल बात मुझसे करती है, तो क्या में उसको बता दू.

संयम : तेरी मर्ज़ी, तुजे जो बताना है बता दे. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. (मुझे समाज आ रहा था की अब ये खेल और खतरनाक होता जा रहा है, सब खुल कर बहार आना चाहती है)

शिव : तू जानती है में ऐसा नहीं करूँगा. (संयम बस मुस्कुरायी) जैसे में तेरी बात उसको नहीं बताता वैसे hi उसकी बात तुजे नहीं बताता, और वैसे भी तुम दोनों दोस्त हो, अगर ऐसी बात है तो आपस में बात करलो.

संयम : तो में बता दू की तुमने मुझे वह छुआ था. (उसने मौके पे चौका मर दिया, में हड़बड़ा गया, में हड़बड़ा गया, पर फिर संभल कर कहा)

शिव : मुझे कोई एतराज नहीं है, वैसे भी एक न एक दिन तो पता चलना hi है.

संयम : अगर बात सामने आ गयी तो फिर क्या करेगा तू, मुझे छोड़ेगा की उसको? (उसका घर आ गया था तो मेने बाइक रोकी, मेरे चेरहे पर एक दुविधा थी, मुझे भी अब समाज आने लगा था की ये सब तो एक न एक दिन होना है है)

शिव : इसीलिए में तुम्हे रोकता हु, समाज रही है न तू.

संयम : में क्यों रुकू, अगर रोकना है तो उसे रोक. (कहते हुए वो अपने घर की और जाने लगी, में वही खड़ा उसे जाता देख रहा था, आगे जा कर वो पीछे मुड़ी और मुस्कुरायी और bye का इस्सर किया, में भी मुस्कुराया और वह से निकल गया)

मेरी भी समाज में नहीं आ रहा था की क्या होगा, किसको क्या कहु समाज hi नहीं आ रहा था, मेने भी सब उपरवाले पर छोड़ दिया और घर पहुंच गया, काम चल रहा था, मेने वह बात की, आज खुदाई ख़तम हो जनि थी, उन्हें भी जल्दी थी क्यों की अगर बारिश आ जाती तो प्रॉब्लम हो जाती. में अंदर गया और कपडे बदल कर खाने बेथ गया. खाना खाने के बाद में उठा hi था की जूही आ गयी.

जूही : अकेले अकेले?

शिव : तुम भी बेथ जाओ.

जूही : नहीं मेने खा लिया है. (फिर हम दोनों बिना मैडम के कमरे में गए, वो कुछ पढ़ रही थी) कैसी हो भाभी?

बिना : तेरी भाभी नहीं हु (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)

जूही : तो फिर क्या हो? (जूही ने भी आंखे नाचते हुए कहा, जिस तरह से जूही ने कहा था वो झेप गयी)

बिना : तुम्हे जो कहना है कहो, आओ बैठो.

शिव : दवाई खा ली आपने?

बिना : है, लता ने टाइम से खिला दी थी.

शिव : इसीलिए कह रहा था की यही रुको, पर आपको पता नहीं क्यों घर जाना है.

बिना : जाना तो पड़ेगा hi, हमेसा तो नहीं रह सकती.

शिव : आप दोनों अलग अलग क्यों रहती हो, ऐसा है तो साथ में रह लो, वैसे भी अब तो इससे भी बहार जाना पड़ेगा तो वैसे भी माकन खली hi रहनेवाला है.

जूही : (मुस्कुराते hue)Tumhe यकीं है की में सेलेक्ट हो जाउंगी?

शिव : वो तो होना hi है.

बिना : सच hi कह रहा है ये, तुम मेरे साथ hi आ जाओ, वैसे भी कितने दिन तो मेरे साथ hi रही.

जूही : ठीक है, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, बोलो कब ट्रांसफर करू.

बिना : ये मुझे घर जाने दे तब.

शिव : मेरे वापस आने के बाद.

जूही : मेने हम दोनों की टिकट बुक करवा दी है.

शिव : तुम क्यों आ रही हो? वह तुम्हारा कॉम्पिटिओं नहीं है, स्कूल का है.

जूही : पता है muje,par में आ रही हु. (में उसे मन कर रहा था पर वो नहीं मणि, आखिर कर बिना मैडम ने कहा की ले जा तो फिर मुझे मन न पड़ा, आज में साइट पर नहीं गया, जहान्वी भी साइट पर नहीं आयी थी, जानबुज कर वो किसी और काम के लिए चली गयी थी. दोपहर को, आगे काम चल रहा था वह थोड़ी देर सबके साथ बैठा, फिर घर में आ गया था, सब आराम कर रहे थे, मेने किताब ली और बीनमदं वाले कमरे में चला गया, वो भी लेतीहुई थी तो में वापस जाने लगा)

बिना : (आहत सुन कर उसने आँखे खोली तो शिव वापस जा रहा tha)Ruko. (में रुक गया) वापस क्यों जा रहे हो?

शिव : आप आराम कीजिये, में तो बस ऐसे hi आया था.

बिना : (बैठते हुए) में तो बस ऐसे hi लेती थी, वैसे भी पूरा दिन आराम hi करती रहती हु तो नींद कहा आएगी (कहते हुए वो खिसक गयी और मेरे लिए जगह बना दी, में भी बेथ गया, किताबको देखते hue)Kya पढ़ रहे हो. (मेने किताब dikhayi)Thik है तुम पढ़ो. (मेने किताब खोली और किताब में देखने लगा, वो मुझे देख रही थी तो मेने उनकी और देखा)

शिव : क्या हुआ?

बिना : ये वैस्वी का क्या चक्कर है, मुझे तो लगा था की तुम और जूही...

शिव : बाते सब उलझ रही है, में आपको समजता हु (केथे हुए मेने उन्हें मेरे और वैस्वी के बारे में बता दिया)

बिना : (वो कुछ देर सोचने lagi)To फिर तुमने क्या सोचा है?

शिव : क्या सोचु में? बात सिर्फ इतनी सी hi नहीं है.

बिना : कहना क्या चाहते हो तुम?

शिव : आप को सब सुन कर मुझसे नफ़रत हो जाएगी. (मेने मायूसी से कहा)

बिना : पागल हो तुम, मुझे क्यों नफ़रत होगी, वैसे भी तुम्हारा और मेरा भी कहा वैध है, वो भी तो अवैध सम्बन्ध hi केहतायेगा न. में कहा दूध की धूलि हु जो में किसी के ऊपर इलजाम लगाउंगी. (उन्होंने मायूसी से कहा)

शिव : आप को हमारे सम्बन्ध पर पछतावा हो रहा है क्या?

बिना : पागल हो क्या? पहले मुझे ऐसा लगता था पर सब तरह से सोचने के बाद मुझे लग रहा है की जो हो रहा है अच्छा hi हो रहा है, अब इसको मेरा भाग्य कहु या कुछ और पर जो है सो है. न तुमने मुझे बहकाया न कोई जबरदस्ती की, जो कुछ किया मेने अपनी मर्ज़ी से किया, फिर तुम्हे कैसे कुछ कह सकती हु. और मेरी बात अलग है, और उनकी बात अलग है, में छह कर भी तुमसे जुड़ नहीं सकती पर वो तुमसे जुड़ना चाहेगी, फिर क्या करोगे?

शिव : मेने भी उनसे यही कहा है, पर कोई कुछ समझने को तैयार hi नहीं है, आप hi बताओ की में क्या करू?

बिना : अब में इसमें क्या कहु, तुम्हारे भाग्य में क्या लिखा है ये न तुम जानते हो न में, तुमने किसी को भी अँधेरे में नहीं रक्खा है फिर जो उनका भाग्य. (वो अपने आपको थोड़ा सही करने लगी तो में समाज गया की उनको लेटना है तो मेने कहा)

शिव : आप लेट जाओ.

बिना : नहीं में ठीक हु.

शिव : मेने कहा न लेट जाओ. (मेने थोड़ी सख्ती से कहा तो वो मुस्कुरायी और लेट गयी)

बिना : बहोत हुकुम चलने लगे हो. (मुस्कुराते हुए वो बोली)

शिव : ऐसा नहीं है. (कहते हुए में थोड़ा नजदीक खिसका और उनके शिर पर हाथ रख दिया और हलके से सहलाने लगा, उन्होंने मुस्कुरा के मुझे dekha)so जाओ अब थोड़ी देर. (उन्होंने भी आंखे बंद कर ली, मेने थोड़ी देर शिर सहलाया तो वो सो गयी, में वैसे hi वह थोड़ी देर पढता रहा, फिर शाम को वह से स्टेडियम चला गया. वह जूही ने सिर्फ हलकी फुलकी कसरत करने को hi कहा, और थोड़ी दौड़ करवाई)

जब में घर पंहुचा तो काव्य मैडम आयी हुई थी, वो थोड़ी देर वह रुकी, अकेले मिलने का तो कोई मौका नहीं मिला, वैसे भी वो बिना मैडम का हल चल पूछने आयी थी, फिर वो चली गयी, जूही भी खाने के लिए यही आ गयी थी, रात को उसने सारा कार्यक्रम सबको बता दिया की हम कब जानेवाले है और कब आनेवाले है. उसने ये भी बताया की उसने घर शिफ्ट करने के लिए कह दिया है, तो वह से आने के बाद वो घर शिफ्ट कर लेगी. रात को भी में वही बीनमदं वाले कमरे में hi पढ़ने बेथ गया, लतादिदी आयी हमे देख कर वो वापस जाने लगी तो मेने उनको भी वही रुकने को कहा. रात हम तीनो साथ में सोये पर किसी ने कुछ भी नहीं क्या.

ऐसे hi वो दिन भी आ गया जब मुझे और जूही को निकलना था, हम दोनों बस से निकल गए, रिज़र्व सीट थी तो परेशानी नहीं हुई, तुम दोनों बेथ gaye,par ऊंचाई की वजह से लोग हम दोनों को घर रहे थे पर हमने उन्हें निगलेक्ट किया, हमे देख कर कोई भी कह देता की हम दोनों कपल है, थोड़ी देर बातो के बाद जूही ने अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ लिया, मेने आस पास देखा तो सब अपने में व्यस्त थे, जब मेने जूही को देखा तो वो सररत से मुस्कुरा रही थी, मेने कुछ नहीं कहा, आगे के सफर के दौरान वो वैसे hi मेरा हाथ पकड़ कर रही. तीन घंटे का hi सफर था तो हम वह पहुंच गए, सबसे पहले हम स्टेडिम गए और वह रजिस्टर काउंटर पर मिले, वह मेने अपने डाक्यूमेंट्स और स्कूल का लेटर जमा करवाया, उन्होंने हमे एक फॉर्म दिया जिसको हमने वह फिलुप कर दिया, हमने प्रैक्टिस के लिए कहा तो उन्होंने हमे शाम को आने का वक़्त दे दिया, वह खिलाड़िओ के रहने का भी इंतजाम था पर जूही मेरे साथ थी तो हम दोनों वह साथ नहीं ठहर सकते थे, तो हमने वह पूछ कर नजदीक में hi एक होटल धुंध लिया. हमने रेसेपशन पर रूम के लिए पूछा तो उन्होंने हमसे हमारी ईद मांगी और वह रहने का रीज़न, सब फॉर्मलिटीज करने के बाद उन्होंने हमे एक कमरा दे दिया.

कमरे में पहुंच कर में सीधे बाथरूम में गया और फ्रेस हुआ, मेरे बाद जूही भी बाथरूम में चली गयी, में बिस्तर पर लेट गया, और आंखे बंद कर ली, थोड़ी देर बाद मुझे बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आयी तो मेने आंखे खोली, वो भी हाथ मुँह धो कर फ्रेस हो कर आयी थी, उसने मुझे देखा तो में उसको hi देख रहा था, वो थोड़ी शर्मा गयी, फिर आ कर मेरे बगल में hi लेट गयी.

जूही : (प्यार से) नींद आ रही है क्या?

शिव : नहीं, बस ऐसे hi आंखे बंद की थी. (मेने उसको अपनी आगोस में ले लिया तो वो भी मेरी आगोस में आ गयी, पर थोड़ा शर्मा रही थी)

जूही : (प्यार se)Thodi देर आराम कर लो, फिर स्टेडियम जायेंगे.

शिव : तुम्हारे साथ आराम hi है (कहते हुए मेने उसको अपनी आयगोष में लिया और उसके होठो को चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से उसके जीन्स में कैसे हुए नितम्बो को सहलाने लगा)

जूही : शहहह अभी नहीं (कहते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया)

शिव : क्यों?

जूही : न कहा न, अभी नहीं.

शिव : पर क्यों?

जूही : रात को.

शिव : रात को फिर कर लेंगे. (कहते हुए मेने उसको अपनी और खिंचा तो उसने फिर मुझे रोक दिया)

जूही : न कहा न,

शिव : क्यों तड़पा रही हो?

जूही : (मसूकूरते hue)Tumse ज्यादा में तड़प रही हु, पर मुझे अच्छा लग रहा है, तुम्हारे लिए तड़प, तुम्हारे प्रति और प्यार पैदा कर रही है.

शिव : (मुझे पता था की वो कुछ नहीं करने देगी, तो मेने बात को बदला) कभी कभी सोचता हु, हम दोनों क्यों मिले?

जूही : (मेरी छाती पर हाथ घूमते hue)Kyu ऐसा क्यों कह रहे हो?

शिव : इस लिए की तुम्हारे मिलने से तो मेरा फायदा hi हुआ है पर मेरी वजह से तुम्हारा घटा हो रहा है.

जूही : कहना क्या चाहते हो?

शिव : यही की मेरी वजह से तुम्हारा कितना खर्चा हो जाता है.

जूही : तो क्या हुआ, और वैसे भी में ये सब तुमसे hi वसुलुंगी. (वो मुस्कुराते हुए मुझे देखते हुए बोली)

शिव : वो कैसे?

जूही : वो में देख लुंगी, अभी आराम करो. (कहते हुए उसने अपना शिर फिर से मेरी छाती पर रख दिया)

हमने दो घंटे आराम किया फिर हम वह से तैयार हो कर बैग में कपडे ले कर स्टेडियम पहुंच गए, वह कई लड़के लड़कीअ आये हुए थे, कुछ लोग घूम रहे थे तो कुछ प्रिपरेशन कर रहे थे.

शिव : तुम स्कूल में होती तो तुम भी पार्टिसिपेट करती न.

जूही : में ये सब कर चुकी हु, अब तुम्हारी बरी है, वैसे तो यहाँ जितना तुम्हारे लिए आसान है पर फिर भी कोई कसार मात छोड़ना, तुम्हारी कॉम्पिटिओं यहाँ इन सब से नहीं है, तुम्हारी कपिशम देश के उन चुनिंदा लोगो के साथ होगी जो कई सालो से मेहनत कर रहे है, और क्या पता यहाँ भी तुम्हारे जैसे hi कोई हो जो अपने सपने साकार करने निकला हो, तो किसी भी रेस को हलके में मात लेना.

शिव : जी कोच साहिबा.

जूही : (मुस्कुराते hue)Me कोच नहीं हु तुम्हारी, बस बता रही हु, ऐसे कपिशंस के रिकॉर्ड hi तुम्हे तुम्हारी मंज़िल के करीब ले जायेंगे.

उसकी बात सही थी, हमने ऐसी hi एक्सेरसिस और कसरत की जिस से शरीर गरम हो, हमने ज्यादा स्ट्रेससवाली कसरत नहीं की, न hi हमने वह कोई रेस लगायी, हमने बस जॉगिंग जैसे hi रेस लगायी. कुछ लड़कीअ मुझे देख रही थी पर मेने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, वैसे hi कई लड़के जूही को भी ताड़ रहे थे, पर उसके चेरे से hi लग रहा था की ुको उनकी कोई पड़ी नहीं है, अँधेरा होने लगा तो हम फिरसे होटल आ गए, वह आ कर हम फ्रेस हुए, कपडे बदले और फिर एक रेस्टोरेंट चले गए. हम एक टेबल पर बेथ गए, हमने आर्डर कर दिया.

शिव : तुम वैस्वी और संयम को तो जानती हो न?

जूही : अगर कुछ खास न हो तो मुझे उनके बारे में कोई बात नहीं करनी है शिव. (मेने उसको ध्यान से देखा पर वो नार्मल hi थी)

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?

जूही : में जानती हु वो तुम्हे पसंद करती है, और ये भी जानती हु की तुम भी उन्हें पसंद करते हो, कैसे ये पता नहीं, शायद दोस्त हो या उस से ज्यादा भी.

शिव : तो तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता.

जूही : क्यों फर्क पड़ेगा, में जानती हु तुम्हे, और में जानती हु हमारे रिश्ते को, मेने तुम्हे पहले भी कहा है की में तुम्हे किसी बंधन में नहीं रखना चाहती, में खुद तुमसे बांध नहीं सकती, फिर तुम्हे क्यों रोकू. छोडो उनकी बात को, वो तुम्हे देखना है, है अगर कोई खास बात हो तो मुझे बताओ. (वेटर खाना रख कर गया, तुम दोनों चुप हो गए, वो मेरी और अपनी प्लेट में खाना निकलने लगी, में उसको देख रहा tha)Kya देख रहे हो? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : में तुमलोगो को समाज नहीं प् रहा हु.

जूही : समझने की जरुरत भी नहीं है, खाना खाओ. (कहते हुए वो मुस्कुरायी और खाना खाने लगी, मेने भी खाना खाना सुरु कर दिया, मेरे चेहरे को देखते hue)Kyu इतना सोचते हो, जो होगा देखा जायेगा, अभी एन्जॉय करो लाइफ को, पता नहीं कल मेरे जैसी कितनी hi मुसीबतो को झेलना पड़े तुम्हे. (कहते हुए वो मुस्कुरायी)

शिव : अजीब हो तुम. (कहते हुए में भी खाना खाने लगा, हमने खाना ख़तम किया और हम बहार निकले, रस्ते में हमने आइसक्रीम खायी, फिर हम होटल पहुंच गए.
 
अपडेट 202

होटल में रूम में आ कर hi जूही ने शिव की और देखा, उसको लग रहा था की अंदर जाते hi शिव उसको पकड़ लेगा, पर शिव शांति से जा कर बीएड पर बेथ गया, वो वही कड़ी रह कर उसको देख रही थी.

शिव : (में जनता था की वो क्या सोच रही है पर में भी उसको तड़पने के मूड में tha)Kya हुआ, वह क्यों कड़ी हो? (उसने न में गर्दन हिलायी, उसके चेहरे पर मायूसी दिखने लगी पर मेने अपने आपको कण्ट्रोल किआ, क्यों की उसकी उदासी में नहीं देख सकता था, उसने अपने बैग से कपडे निकले और रात को पहन ने वाले कपडे ले कर बाथरूम में चली गयी, में मुस्कुराया, मेने अपने कपडे निकले और पूरा नंगा हो गया, में भी बाथरूम के दरवाजे की और गया, मुझे लगा दरवाजा बंद होगा, पर हैंडल घूमने से दरवाजा खुल गया, वो पूरी नंगी शावर के निचे कड़ी थी, पानी उसके ऊपर गिर रहा था तो पानी के शोर की वजह से उसने दरवाजा खुलने की आवाज शायद नहीं सुनी थी, में आहिस्ता से अंदर गया और उसको देखने लगा,





वो पूरी तरह से नंगी थी और अपने स्तन को साफ़ कर रही थी, पर ऐसा लग रहा था जैसे वो उसको मसल रही है, में शांति से खड़ा उसको देख रहा था, उसको एहसास hi नहीं था की में वह हु, थोड़ी देर बाद वो अपनी छूट साफ़ करने लगी, उसकी लम्बी लम्बी उंगलिया उसकी छूट को सेहला रही थी, ऊँगली के दबाव से उसके छूट के होठ साइड में हो गए और ऊँगली दरार में धस गयी, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो बंद थी, मेरा लुंड उस नज़ारे को देख कर ठुमके मरने लगा)

शिव : ये क्या कर रही हो? (अचानक हुई आवाज से वो दर गयी और प्लाट कर उसको देखने लगी, और अपने आपको छुपाने लगी, पर जब उसने शिव को अपने तने हुए लुंड के साथ नंगा देखा तो वो शर्मा गयी और घूम गयी, ताकि शिव उसकी छूट को न देख सके, पर ये तो शिव के लिए और अच्छा हो गया था, उसके चौड़े कूल्हे उसके सामने the)(Me उसके नजदीक गया और उसके कूल्हों के बिच अपने लुंड को लगते हुए उसके स्तन पकड़ लिए और अपनी और खिंच liya)(Is सुखद एहसास से जूही शर्मा भी गयी और मुस्कुरा भी उठी, यही तो वो चाहती थी, और इन्ही लम्हो में खोने के लिए hi तो वो यहाँ आयी थी, उसका कोई कॉम्पिटिओं नहीं था, अगर शिव उसको टूट कर भी प्यार करे तो वो बिस्तर पर पड़ी रहने को भी तैयार थी,





वो इस सुखद एहसास में इतनी खो सी गयी थी, उसकी तन्द्रा तब टूटी जब शिव ने उसकी कान की लो को चूसते हुए kaha)Kya कर रही थी?

जूही : शह्ह्ह्ह, तुम्हारा इंतजार. (जूही जो पहले से hi गरम थी, ऊपर से शिव उसके कड़क सैंट्रो जैसे स्तन को मसल रहा था और अपने लुंड को कूल्हों के बिच धक्का दे रहा था, लुंड भी ठीक गांड के छेड़ पर लगा हुआ था)

शिव : जूथ मात बोलो, मेने देखा तुम कुछ और कर रही थी. (शिव ने ये फुसफुसाते हुए कहा, उसकी सासो की गर्मी से जूही और पिघलने लगी)

जूही : (वो समाज गयी की शिव उसकी छूट सहलाने को ले कर कह रहा hai)Wo भी रो रही थी तुम्हारे लिए, शहहहहह तो में शांत कर रही थी उसको.

शिव : (अपने हाथ को जो जूही की कमर पर था उसको छूट पर ले जा कर sehlaya)Kyu रो रही थी? (गले पर और कान पर किश करते हुए)

जूही : शहहहहह शीइइइइव, शह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव ने एक ऊँगली उसकी छूट में दाल दी जो पहले से चिकनी हो रही thi)Shhhh ahhhhhhhhhh शीइइइइव. (शिव ने छूट में ऊँगली अंदर बहार करना सुरु किया तो उसने अपने पेअर और फैला दिए)

शिव : कहो न क्यों रो रही थी वो?

जूही : शह्ह्ह्ह उसको इंतजार था किसी चीज़ का. (गर्म सासे छोड़ते हुए जूही बोली)

शिव : मेने तो दोपहर को hi बोलै था, तुम hi मन कर रही थी.

जूही : (गर्म गर्म सासे छोड़ते hue)To क्यों मणि मेरी बात, कर लेते जो करना चाहते थे.

शिव : तो फिर मन क्यों कर रही थी.

जूही : तुम्हे दिखा रही थी की जब खाना सामने हो और खाने को न मिले तो कैसा लगता है, तुमने hi मन किया हुआ है, की रोज़ रोज़ नहीं करना है, इसलि लिए में रुक जाती हु, पर में ऐसे hi तड़प जाती हु जब तुम मेरे पास होते हो.

शिव : (गर्म गर्म छूट में ऊँगली अंदर बहार हो रही थी, छेड़ काफी कैसा हुआ था, लग hi नहीं रहा था की में इस छेड़ को अपने लुंड से खोल चूका hu)Tumhari छूट कितनी टाइट है जूही.

जूही : (वो एकदम से शर्मा गयी, शिव ने एकदम खुल कर कहा tha)Aise कोई बोलता है, बेशरम.

शिव: अब जो है वही बोलूंगा न, मेने पूछा था की क्यों रो रही है ये तो तुमने कहा था की उसको किसी चीज़ का इंतजार है, अगर पुछु की किस चीज़ का इंतजार है तो क्या कहोगी तुम?

जूही : (वो बहोत गरम हो गयी थी क्यों की, एक तो शिव उसके स्तन को और उसके निप्पल को मसल रहा था, और दूसरा उसकी छूट में ऊँगली कर रहा था, और तीसरा उसका लुंड उसके गांड के छेद पर लगा हुआ था और वह भी लुंड में से निकल रहे चिपचिपे रास की वजह से गांड का छेड़ चिकना हो रहा था जिस से लुंड अब उसके छेड़ को फैला रहा था, उसने ऐसा अनुभव नहीं किया था पर वो बोली कुछ नहीं, क्यों की उसको भी अच्छा लग रहा था.) में क्यों कुछ बोलूंगी, तुम्हे पता है की उसको क्या चाहिए. (उसने शरमाते हुए kaha)(Mera लुंड गांड के छेड़ पर लगा था, और उस गर्म छेड़ का एहसास भी मेरे लुंड पर हो रहा था, अगर जोर से धक्का मरता तो वो वह अंदर चला जाता, पर मुझे अभी इतना जल्दी कुछ नहीं करना था, जूही सच hi कह रही थी की तड़प, चाहत को और गहरा कर देती है.)

शिव : मुझे कैसे पता चलेगा, जब तक तुम नहीं बताओगी.

जूही : (मुस्कुराते hue)Me तुम्हारी तरह बेशरम नहीं हु, जो ऐसे कहूँगी.

शिव : अगर कहोगी नहीं तो मुझे कैसे पता चलेगा, और अगर पता नहीं चला तो फिर वो तुम्हे दूंगा कैसे?

जूही : (उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर ऐसी बाते उसको बहोत अच्छी लग रही थी, शिव hi तो था जिसके साथ वो ऐसी बाते कर सकती thi)Tumhe पता है. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : नहीं, मुझे सच में नहीं पता.

जूही : (शरमाते hue)Abhi जो गलत छेड़ में घुसने की कोशिस कर रहा है न, वो उसको चाहिए. (उसने शर्मीली मुस्कान के साथ कहा)

शिव : (अनजान बनते hue)Kiski बात कर रही हो?

जूही : (शर्मा गयी, वो जानती थी की शिव उसके मुँह से क्या बुलवाने की कोशिस कर रहा है, पर वो बोली नहीं, वो थोड़ी आगे हो गयी और उस लुंड को अपने कूल्हों से बहार निकल दिया, उसने तिरछी नजरो से उस लुंड को देखा, उसके शरीर में चींटिया रेंग ने लगी, वो एक भरपूर जवान लड़की थी जिसके खून में काफी उबाल था, कड़क तने हुए लुंड की नशे भी दिख रही थी, ऐसे दुमदार लुंड को देख कर वो कैसे दूर रह सकती थी, उसने अपने हाथ में लुंड को पकड़ लिया और सहलाते हुए बोली) ये चाहिए. (वैसे भी उसको बहोत शर्म आ रही थी)





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शिव : इसका कोई नाम तो होगा?

जूही : (शरमाते हुए लुंड को सेहला रही thi)Muje नहीं पता. (पर उसकी मुस्कराहट बहोत कुछ कह रही thi)(Muje पता था वो ऐसे नहीं बोलने वाली तो मेने उसको छोड़ दिया और घूम गया और शावर के निचे खड़ा हो कर खुद को भिगोने laga)(Juhi भी घूम गयी, शिव दूसरी और देख रहा था, वो जानती थी की वो नाराज नहीं है, बस नाटक कर रहा है, वो भी उसके पीछे जा कर छिपा गयी और अपने कड़क स्तन के निप्पल को उसकी पीठ पर रगड़ने लगी, शिव के साथ इस तरह की हरकत उसको बहोत अच्छी लग रही थी, वो पूरी नंगी थी पर उस बात की उसको शर्म तक नहीं थी, अपने स्तन रगड़ते हुए वो शिव के पैट पर और छाती पर अपना हाथ घूमने लगी, और प्यार से boli)Kya सुन न चाहते हो?

शिव : (जूठी नाराजगी se)Kuchh नहीं.

जूही : अच्छा सच में कुछ नहीं सुन न चाहते? (कहते हुए वो उसके लुंड को पकड़ कर सहलाने लगी)

शिव : (उसके ऐसे छूने से लुंड कूदने लगा था, उसके स्तन मेरी नंगी पीठ पर अपना असर दिखा रहे the)Nahi. (जूही जानती थी की शिव को कितना मजा आ रहा है, तो वो एक हाथ से उसकी छाती पर अपने नाख़ून से निप्पल को कुरेदने लगी और साथ में लुंड को सहलाने lagi)Shhhhhh. (मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, वो अपने नाजुक हाथो से मेरे लुंड से खेल रही थी, मेने अपना हाथ पीछे किया और उसकी छूट को सहलाने laga)(Juhi के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी, वो अपनी कमर हिलाते हुए उसको दिखने लगी की उसको भी मज़ा आ रहा है, पर अभी वो जानती थी की शिव को क्या सुन न है, उसको वैसे तो शर्म आ रही थी पर फिर भी वो बोली)

जूही : तुम्हे पता है शिव, मेरे हाथ में अभी क्या है? (शिव ने मुद कर जूही को देखा, वो शरमाते हुए उसको देख रही thi)(Me और उत्तेजित हो रहा था, मेने एक ऊँगली उसकी छूट में दाल दी, वह की गर्मी मेरी ऊँगली को पिघलने lagi)Shhhhhhhhh. (जूही की आँखे बांधो गयी, थोड़ी देर वो दोनों एक दूसरे को मज़ा देते रहे)

शिव : (मुझसे रहा नहीं जा रहा था, में सीधा हो गया और उसको कूल्हे से पकड़ कर अपने से चिपका लिया, वो मुस्कुराने लगी, मेने उसके होठो को जोरो से चूस लिया और उसके कूल्हों को मसलने laga)Bol न, चुप क्यों हो गयी?





जूही : शह्ह्ह्हह्ह (उसने फिर से लुंड को थम लिया और उसको खींचने लगी जैसे उखड hi देगी, और शिव भी उसके कूल्हों को जोरो से मसल रहा था, दोनों बहोत उत्तेजित थे, आखिर कार जूही ने शरमाते हुए kaha)Luuund. (मेरे कानो में जैसे लावा जा रहा था और मेरे लुंड में उबाल आ रहा था)

शिव : फिर से कहो. (मेने गर्म सासे छोड़ते हुए कहा)

जूही : (वो देख रही थी की शिव काफी उत्तेजित हो रहाहै तो वो फिर से boli)Luuund.

शिव : तुजे लुंड चाहिए?

जूही : (शर्मा गयी, उसके चेहरा कामुकता से भर गया.) है शिव.

शिव : ऐसे नहीं, कहो मुझे लुंड चाहिए.

जूही : है शिव, मुझे लुंड chahiye.(uska चेहरा शर्म से लाल हो गया था)

शिव : कहा चाहिए?

जूही : शह्ह्ह्हह्ह, मेरी छूट मई. शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में भी उत्तेजित हो रहा था तो मेने उसको पलट दिया, वो दीवाल को पकड़ कर थोड़ा झुक गयी, उसके कूल्हे मेरे सामने थे, मेने उसको जोरो से मसल diya)Aaahhhhh शहहहहह.

शिव : (मेने ऊँगली उसकी छूट में दाल di)Yaha चाहिए?

जूही : हाआआ. (मेने लुंड छूट पर लगाया तो वो और झुक गयी, में लुंड को छूट पर रगड़ने लगा तो जूही तड़प uthi)Shhhhhhh दाल दो अंदर शिव. शहहह एक बार दाल दो. (मेने लुंड को दबा दिया तो लुंड छूट को फैलता हुआ अंदर घुस gaya)Shhhhhhh Shiiiiiiiiiiiiv. (हलके दर्द के साथ आनंद से जूही भर gayi)Bahot बड़ा है एईई, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (में दो पल रुक gaya)Tumhe अच्छा लगता है?

जूही : हाआआआ बहोत अच्छा लगता है ये.

शिव : मुझे अभी भी यकीं नहीं होता की में तुम्हे छोड़ता हु जूही, और अभी भी मेरा लुंड तुम्हारी छूट में है.

जूही : (उसने मुद कर शिव को देखा, उसका चेहरा कामुकता से लाल tha)Aisa क्यों?

शिव : पता नहीं, (मेने अपने लुंड को देखा जो उसकी नाजुक सी छूट को फैलाये हुए अंदर था, मेने उसको सही से पकड़ा और लुंड आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने लगा)

जूही : शहहहहह शीइइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह, बहोत ाचाहहए लग रहा है यार. (मुझे भी उसकी छूट में मज़ा आ रहा था, उसकी छोटी से संकरी छूट मेरे लुंड को जकड रही थी)

शिव : तुम्हारी छूट का छेड़ अभी भी छोटा है जूही. (मेने धक्के मरते हुए कहा)

जूही : तुम्हारे लिए hi है ये, शह्ह्हह्ह्ह्ह तुम hi छोड़ सकते हो इसे.





शिव : क्या कहा तुमने?

जूही : (उसने अपने कामुक हो चुके चेहरे से पीछे देखा और फिर boli)Tum hi मुझे छोड़ सकते हो शिव, शह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh मेरी छूट तुम्हारे लिए hi है shhhhhhhhhh. (शिव धक्के लगा रहा था, वो पहले से काफी गर्म थी तो वो जल्दी hi झड़ने की और बढ़ने lagi)Shhhhh जोर से छोड़ो मुजीब शहहहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (मुझे समाज आ गया की वो झड़ने वाली hai)Itna जल्दी झाड़नेवाली हो?

जूही : शहहहहह, कब से में यही छह रही थी शिव, जब से यहाँ आने का पता चला है में हर पल इसी बारे में सोच रही थी, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह, जोर से डार्लिंग शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह जोर से शह्ह्हह्ह्ह्ह (जूही को दर्द भी हो रहा था पर उसे अच्छे से छोड़ना tha)Shhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह, में झाड़नेवाली हु सीईव शहहहहह (शिव ने अपनी स्पीड बढ़ा di)ahhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह (लुंड झाड़ तक अंदर चला गया tha)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह में गयी अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (कहते हुए वो अपनी कमर को झटके देने लगी, और अपना पानी छोड़ने लगी, मेने भी लुंड पूरा अंदर दाल दिया और रुक गया, वो थोड़ी देर झटके कहती रही मेने लुंड बहार निकल दिया, वो वही फर्श पर बेथ गयी और अपनी सासे दुरुस्त करने lagi)(Juhi आंखे बंद किये हुए अपने ओर्गास्म का आनंद लेने लगी, थोड़ी देर बाद उसने आँखे खोली तो शिव खः था और उसको hi देख रहा था, उसकी नजर उसके लुंड पर भी पड़ी जिसने अभी अभी उसको मज़ा दिया था, वो सीधी हुई और उसने लुंड को पकड़ लिया और हिलने लगी, कुछ दिनों पहले वो कुवारी थी और अब उसको इस अंग से प्यार हो गया था, जो मज़ा उसको इस अंग से मिलता था उसकी कोई तुलना hi नहीं थी, वो अच्छे से बेथ गयी और लुंड को अपने मुँह में भर liya)(wo मेरे लुंड को चूस रही थी, उसके गर्म मुँह में मुझे मज़ा आने लगा, ऊपर शावर चल रहा था और निचे वो मेरे लुंड को चूस रही थी, उस से खेल रही थी.)





(जूही फिर से गर्म होने लगी, वो लुंड को जितना हो सके अपने गले में उतर रही थी, लुंड को चूसना उसको बहोत अच्छा लग रहा tha)(wo इतनी जोरो से चूस रही थी की मुझे लगा की में उसके मुँह में hi झाड़ जाऊंगा, में उसको दूर करने लगा तो नाराजगी से मुझे देखने लगी)

शिव : तुम्हारे मुँह में झाड़ जाउगा यार.

जूही : सच में? (उसने एक दो पल सोचा और boli)Shiv आज मेरे मुँह में hi झाड़ो.

शिव : क्या, क्यों?

जूही : मुझे भी सब महसूस करना है शिव, मुझे सब करना है तुम्हारे sath.(Kehte हुए उसने फिर से लुंड को मुँह में भर लिया और जोरो से चूसने लगी, उसने अपने दोनों हाथ मेरे कूल्हे पर लगा दिए और लुंड को चूसने लगी, साथ में अपने नाख़ून मेरे कूल्हों में गढ़ने लगी, में बता नहीं सकता मुझे कितना मज़ा आ रहा था, में पहली बार किसी के मुँह में झड़ने जा रहा था, वो लगातार मेरे लुंड को चूस रही थी, मेने भी उसके शिर को पकड़ कर धक्के लगाने लगा, जूही ने एक बार शिव की और देखा पर वो आंखे बंद कए हुए hi धक्के लगा रहा था, तो उसने रोका नहीं)

शिव : जुहीईई शहहहहह में झाड़नेवाला हु. (जूही कहा कुछ बोल सकती थी, वो बस लुंड को अपने मुँह में फूल रहा महसूस कर रही थी और अचानक उसके गले में गर्म रास की बरसात होने लगी,





अजीब लग रहा था पर वो जानती थी की शिव को कितना मज़ा आ रहा होगा तो वो खुस थी, थोड़ी देर बाद शिव रुक गया, कुछ रस उसके गले में भी चला गया था, जब शिव ने अपना लुंड बहार निकला तू उसने अपने मुँह से वीर्य को हथेली पर थूक दिया और उसको देखने लगी, अज्जेब था पर उसको कुछ गन्दा नहीं लगा, उसने शिव को देखा जो उसको hi देख रहा था, उसने प्यारी सी स्माइल दी उसको, और पानी से अपने हाथ से वीर्य को साफ़ क्या और फिर कड़ी हो गयी, दोनों के होठ आपस में मिल गए, थोड़ी देर दोनों एक दूसरे को चुम रहे थे.





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जूही : (जब दोनों अलग हुए तो जूही ने puchha)Maza आया माय लव.

शिव : तुम सच में कमल हो जूही. (वो मुस्कुरायी और फिर से उसको चूमने लगी, फिर से दोनों किश में खो गए, थोड़ी देर बाद दोनों अलग हुए)

जूही : (मुस्कुराते hue)Ab नाहा भी लो. (वो अलग हुई और शावर बंद किया और साबुन ले कर अपने ऊपर लगाने लगी, जब उसने लगा लिया तो उसने मुझे साबुन दिया और मेने भी अपने ऊपर लगाया, दोनों अपने अपने शरीर को साफ़ कर रहे थे, मेने उसको देखा, हम दोनों की नज़ारे टकराई, वो शर्मा गयी, वो ऐडा से अपने शरीर को सेहला रही थी,





जिसे देख कर मेरे लुंड में फिर से तनाव आने लगा, जिसको उसने भी देखा और मुस्कुराने lagi)Ye क्यों फिर से खड़ा हो रहा है?

शिव : (में उसके नजदीक गया और उसको अपनी बहो में भरते hue)Ab अगर तुम ऐसे पूरी नंगी मेरे सामने रहोगी तो फिर ये तो खड़ा होगा hi.

जूही : (मुस्कुराते hue)Aisa क्यों?

शिव : क्यों की तुम बहोत हॉट हो मेरी जान. (कहते हुए मेने उसके कूल्हों को मसल दिया और उसको उठा लिया,





वो भी मेरे ऊपर चढ़ गयी और फिर से हम दोनों किश करने लगे, थोड़ी देर हमारी हॉट किसिंग चली, जब होठ अलग हुए तो वो बोली)

जूही : इतनी अच्छी लगती हु तुम्हे?

शिव : है, बहोत अच्छी लगती हो मुझे.

जूही : अगर सिर्फ मेरे साथ जीवन बिताना होता तो बिता पते? (मेने उसकी आँखों में देखा, उसने बहोत गहरी बात पूछी थी, मेने भी सच्चाई से जवाब दिया)

शिव : है जूही, अगर सिर्फ तुम hi होती तो भी में अच्छे से जीवन बिता लेता. (वो मुझसे लिपट गयी)

जूही : डरो मात, में किसी कको छोड़ने को नहीं कहूँगी, क्यों की में जानती हु की जिस सच्चाई से तुम मुझसे जुड़े हो उसी सच्चाई से तुम उनसे भी जुड़े हो, हर कोई अकेले hi काफी है तुम्हारे लिए, पर शायद तुम्हारे भाग्य में कुछ और है, तभी िटनीसारी तुमसे जुड़ चुकी है.

शिव : ी लव यू जान.

जूही : ी लव यू तू माय बेबी (उसने फिर मेरे होठो को चूमा और फिर boli)Par इसका ये मतलब नहीं की अपनी लिस्ट बढ़ाते जाओ, अगर सेक्स तक की बात है तो तुम्हे आज़ादी है, पर उस से आगे मत बढ़ा करो. (उसने चिंता जताई)

शिव : में समझता हु, और में जितना हो सके दूर रहने की कोशिस करता हु, पर पता नहीं कुछ न कुछ उल्टा सुलटा हो hi जाता है. तुम यकीं नहीं करोगी पर कुछ तो इतना करीब थी की बस अंदर डालने की देरी थी, फिर भी मेने अपने आप को रोक लिया था.

जूही : में जानती हु तुम्हे, इसीलिए तो तुम पर भरोसा करती हु, आगे फिर जैसा भाग्य. अब ज्यादा परेशान मात हो, जो होगा देखा जायेगा, फ़िलहाल तो ये मेरा वक़्त है, (कहते हुए वो, फिसल कर निचे उतरी और मेरे साबुन लगे लुंड को सहलाने लगी, मेने भी उसकी छूट को सहलाया,





हम दोनों एक दूसरे के अंगो को मसलने लगे, थोड़ी देर बाद हम दोनों ने शावर से साबुन को साफ़ किया, वो फिर से मेरे लुंड से खेलने लगी और में उसके कूल्हों को सहलाने लगा, दोनों की खून गरम थे, तो फिर से चुदाई का मौसम खिलने लगा, ) यहाँ लेट जाओ. (उसने शरमाते हुए कहा, में निचे फर्श पर लेट gaya,wo खुद मेरे ऊपर आ गयी और अपनी छूट को मेरे मुँह पर रख दिया)





(जूही को अजीब लग रहा था पर उसको पता था की इन सब में कितना मज़ा आता है, और वो शिव hi था जिसके साथ वो ये सब कर सकती थी, वो अपनी कमर हिलने लगी और शिव के होठो पर अपनी छूट के होठो को रगड़ने लगी) शहहहहह छतो इसे शिव (उसने गर्म सासे छोड़ते हुए कहा तो मेने भी जीभ निकली और उसकी छूट को चाटने laga)Shhhhhhh माय बेबी शह्ह्हह्ह्ह्ह अच्छे से छतो इससे शह्ह्ह्हह्ह बहोत मज़ा आता है yaar(Kehte हुए वो मेरे लुंड को सहलाने लगी) इससे देख कर पता नहीं कुछ होता है मुझे. (कहते हुए वो उसको चूमने और चाटने लगी, हम दोनों ने थोड़ी देर एक दूसरे को खुस किया, वो भी काफी गर्म हो गयी थी और में भी)

वो मेरे ऊपर से कड़ी हो गयी, और लुंड की तरफ बेथ गयी, और अपनी छूट को लुंड पे रगड़ने लगी. में उसके चेहरे को देख रहा था, वो कामुकता से लाल हो चूका था. उसने लुंड को पकड़ा और अपनी छूट के छे पर सेट किया और फिर आहिस्ता से उस पर बैठने लगी, उसके चेहरे पर फिर से एक बार हल्का दर्द छलक आया.

शिव : आराम से, क्या जल्दी है?

जूही : (रोने जैसी सकल se)Tum नहीं संजोगे बेबी, मेरे अंदर क्या क्या होता है मुझे hi पता है. (उसने आहिस्ता आहिस्ता पूरा लुंड अंदर ले लिया और पूरी मेरे लुंड पर बेथ गयी, और मेरी छाती पर लेट गयी और गहरी गहरी सासे लेने laagi)Kitna बड़ा है यार ye.(Me उसकी पीठ सहलाने लगा, मुझे भी उसकी गर्म गर्म छूट अपने लुंड पर कस्ती महसूस हो रही थी, पर मेने उसको रिलैक्स होने दिया, थोड़ी देर बाद उसने अपनी कमर हिलायी, छूट में चिकना रास बहना फिर एक बार सुरु हो गया,





मेने उसके कूल्हों को पकड़ा और उसको निचे से धक्के लगाने लगा, वो मेरी छाती पर लेती गर्म गर्म सासो के साथ सिसकिया लेने lagi)Shhhhh फूऊ शह्ह्ह्ह फूऊऊऊ ी लव यू जान, यू लव में सो बेऔतिफुल्ली (में धक्के लगाने laga)Yes बेबी शह्ह्हह्ह्ह्ह फ़क में शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फ़क में बेबी shhhhhhhhhhhh. (में उसको धक्के लगाने laga)Yes माय लव शहहहहह फ़क में शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह, योर कॉक इस अमेजिंग shhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhhh. (में लगातार उसको छोड़ रहा था, वो बहोत गर्म हो गयी थी, वो खुद ऊपर हो गयी और खुद hi मेरे ऊपर कूदने lagi)Shhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्हह्ही लव योर कॉक शहहहहह ahhhhhhhhhh. (में बेथ गया, मेरा लुंड अभी भी उसकी छूट में hi था, वो भी सही से बेथ गयी और फिर ऊपर कूदने lagi)Shhhhh यस फ़क में डार्लिंग शहहह फ़क में.





शिव : अपनी भासा में भोलो मेरी जान.

जूही : (उसने एक बार शिव की आँखों में देखा और फिर मुस्कुरायी और उसके गाल को और चेहरे को चूमते hue)Chodo मुझे शहहहहह शहहहहह, तुम्हारा लुंड मुझे बहोत अच्छा लगता है शह्ह्ह्हह्ह. (कहते हुए वो कूदने लगी, वो जोर जोर से कूद रही थी और काफी गर्म हो गयी थी, मुझे लगने लगा की वो फिर से झाड़नेवाली hai)Chodo शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह

(वो अपनी छूट में जाते हुए लुंड को देख कर और ज्यादा गर्म हो रही थी, और खुद hi धक्के लगा रही thi)Kitna अजीब है शहहह पहले वह जगह hi नहीं थी और अब वो कैसे अंदर चला गया है शिव. (में उसकी कमर को पकड़ कर उसको धक्के लगाने laga)Tumne मेरी छूट पसंद है न शिव?

शिव : हा, बहोत पसंद है, क्यों की वो तुम्हारी छूट है. (में उसको पकड़ के धक्के लगा रहा था)

जूही : यू लव में न बेबी?

शिव : यस डार्लिंग, ी लव यू.

जूही : ी लव यू तू मेरी जान. (कहते हुए वो मेरे गले से लिपट गयी और मुझे चूमते हुए ऊपर निचे कूदने lagi)Shhhhh में झाड़नेवाली हु शिव शहहहहह इतस अमेजिंग फीलिंग शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह यस बेबी शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह. (कुछ पल धक्को के बाद वो जोर से चिपक गयी और अपना पानी मेरे लुंड पर उड़ेलने lagi)Shhhhhhh माय लव शह्ह्ह्हह्ह यू अरे अमेजिंग शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने उसको खड़ा किया और दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया, वो भी समाज रही थी तो वो दीवाल पर लगे पाइप को पकड़ कर झुक गयी,





मेने लुंड उसकी छूट में उतर diya)Shhhhhhh, आराम से जाएं. (मेने कोई जवाब नहीं दिया और उसकी कमर पकड़ कर उसको अपने लुंड की और खिंच लिया, पूरा लुंड अंदर चला gaya)Ahhhhhh. (उसने मेरी और देखा, उसका चेहरा रोने जैसा होगया था, में फिर से हलके हलके धक्के लगाने लगा, थोड़ी hi देर में उसकी फिर से सिसकिया निकलने lagi,)shhhhhh अह्ह्ह्ह शहहहहह शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : यू अरे आल्सो अमेजिंग माय डार्लिंग, यू हैवे ा बेटिफुल बॉडी.

जूही : (उसने मुस्कुरा के dekha)It’s योर्स माय लव, it’s आल योर्स. (में उसको पकड़ के जोर जोर से धक्के लगाने laga)Ahhhh शहहह यस शहहह अह्ह्ह्ह यस शह्ह्ह्हह्ह फ़क में शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह यस.





super deduper

(में लगातार उसको छोड़ रहा था, कभी कमर पकड़ कर तो कभी उसके स्तन मसलते हुए)





अंदर hi झड़ना शिव. ी ऍम इन सेफ पीरियड.

शिव : अरे यू सूरे?

जूही : यस माय लव, ी वांट तो फील एवरीथिंग. शह्ह्हह्ह्ह्ह छुम इनसाइड में शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह. (उसकी बात सुन कर जैसे मेरा लुंड और कड़क हो गया और में जोर जोर से धक्के लगाने laga)(Us फुले हुए लुंड को जूही अपनी छूट में अच्छी तरह से महसूस कर रही थी, लगातार वो उसकी बच्चे दानी को ठोकर मर रहा था, इस अध्भुत अनुभव से वो और कामुक हो रही थी और जोर जोर से आवाजे निकल रही thi)Shhhhhh फइलल में बेबी, भर दो मुझे शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्शह्ह्ह्हह्ह. (मेने धक्के मरे और अपना लावा उसकी छूट में दाल diya)Shhhhhh इतस अमेजिंग (अपने अंदर निकलते लावा को महसूस करते हुए जूही भी झड़ने लगी,





जब शिव ने अपना लुंड बहार निकला तो उसने झुक कर अपनी छूट को देखा जहा से सफ़ेद तरल टपक रहा था, उसने अपना हाथ बढ़ाया और अपनी छूट से निकलते तरल को अपने हाथ पर ले कर देखने लगी, वो सीधी हुई और दीवाल के सहारे कड़ी हो गयी और शिव को अपनी और खिंच कर उसके लुंड को हिलने लगी, जैसे उसके अंदर का सारा पानी निकलना चाहती हो. फिर वो निचे बेथ गयी और लुंड को चाट चाट कर साफ़ करने लगी.)

थोड़ी देर बाद मेने उसको खड़ा किया और शावर चालू कर दिया, हम दोनों ने एक दूसरे को साफ़ किया, वो मुस्कुरा रही थी. उसके चेहरे की मुस्कान उसकी संतुस्ती दिखा रही थी.

शिव : मज़ा आया? (उसने शरमाते हुए है कहा, नहाने के बाद हमने एक दूसरे को पोछा और फिर हम नंगे hi बैडरूम में आ गए, उसको देख कर फिर से मेरा लुंड खड़ा होने लगा तो मेने उसको पीछे से पकड़ लिया.

जूही : क्या कर रहे हो, अब नहीं.

शिव : क्यों?

जूही : क्यों क्या, अभी अभी तो किया है (वो घूम गयी और मेरा चेहरा सहलाने लगी)

शिव : एक बार और.

जूही : मुझे पता है की तुम नहीं थकनेवाले, और में भी वैसी hi हु, अगर पूरी रात करोगे तो भी साथ दूंगी, पर आज नहीं, कल तुम्हारा कॉम्पिटिओं है.

शिव : वो तो में जीत hi जाऊंगा.

जूही : अपने पर भरोसा अच्छी बात है, पर मेने कहा था न की ज्यादा वरकॉन्फिडेंट मात होना.

शिव : ऐसा नहीं है, में कर लूंगा, मुझे पता है. (जूही प्यार से मुस्कुरायी) अच्छा अगर में जीत गया तो क्या डौगी.

जूही : सबकुछ तो तुम्हे दे चुकी हु, अब और क्या चाहिए?

शिव : (उसको अपने गले लगा कर उसके कूल्हे दबाते हुए उसके गांड के छेड़ को सहलाते hue)Ye.

जूही : (वो शर्मा gayi)Gande कही के, अभी वो नहीं मिलनेवाला, इतने छोटे कॉम्पिटिओं के लिए ये बहोत बड़ा इनाम है. (उसने मुस्कुरा कर kaha)Ha पर अगर ये कॉम्पिटिओं में ावल आये तो जब तक तुम चाहो में ये दूंगी. (कहते हुए उसने मेरा हाथ अपनी छूट पर रख दिया) जितनी बार चाहो, उतनी बार.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thak तो नहीं जाओगी? (मेने मुस्कुरा के कहा)

जूही : अगर तुम एथलीट हो तो में भी हु, भूलो मात, जितना तुम्हारा खून गर्म है उतना hi मेरा भी उबलता है, समजे.

शिव : Ok माय प्रिंसेस, डील दोने. (मेने उसको अपनी गोदी में उठाया और बिस्तर पर लेता दिया, में भी बाजु में लेट गया, वो मेरे ऊपर अपने पेअर दाल कर मुझसे चिपक gayi)Ye चीटिंग है यार, अभी तो मन कर रही थी.

जूही : (नटखट सा मुस्कुराते hue)Isme चीटिंग कैसी, क्या में ऐसे सो भी नहीं सकती. (मेरा लुंड खाद अहोने लगा फिर से, वो मुस्कुरायी और मेरे गाल को किस करते हुए boli)Control करो थोड़ा, जैसे में की हुई हु. (मेने उसको खिंच कर अपने से चिपका लिया, मेरा लुंड उसकी छूट को छू रहा था, पर मेने और कुछ नहीं किया और बस ऐसे hi लेता raha)(Juhi को भी लुंड महसूस हो रहा था, अगर शिव जरा भी आगे बढ़ता और उसकी छूट में लुंड दाल देता तो वो बिलकुल मन नहीं करती, वो तो खुद तड़प रही थी उसके लुंड के लिए, पर थोड़ी देर के बाद भी शिव ने कुछ नहीं किया, शिव उसकी बात मान रहा था, ये उसके लिए बहोत बड़ी बात थी, एक लड़का ऐसी परिस्थिति में भी उसकी कही बात को महत्व देता था, उसने शिव के गाल पर किश कर लिया और अपनी आंखे बंद कर दी.

दोनों गर्म थे तो जल्दी नींद नहीं आयी,





दोनों एक दूसरे को थोड़ी थोड़ी देर मेसेहला लेते थे और खुद को कण्ट्रोल कर रहे थे, पर आखिर कर दोनों सो गए. वैसे भी दोनों को सुभह जल्दी उठने की आदत थी तो जूही पहले उठ गयी, अभी भी वो नंगी hi थी, उसको अपनी परिस्थिति पर शर्म भी आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था, उसने महसूस किया की शिव का लुंड भी थोड़ा जगा हुआ है, उसका भी दिल मचल रहा था पर उसने अपने आपको संभाला और बाथरूम में चली गयी. सुबह के सरे काम नपता कर जब वो तौलिया लपेट कर बहार आयी तो शिव जग रहा था पर अभी लेता हुआ था, वो उसको ऊपर से निचे तक देखने लगा, उसको बहोत अच्छा लगा, वो शर्माने लगी. पर फिर अपने आपको सँभालते हुए वो मिर्रोर की और चली गयी.

जूही : अब उठ भी जाओ. (शिव उठ कर उसकी और आने लगा तो वो muskurayi)Bathroom उस और है मिस्टर, पहले नाहा लो. (शिव भी मुस्कुराया और बाथरूम में घुस गया, जूही शरमाते हुए खुद को सवारने लगी, आज उसका कॉम्पिटिओं तो नहीं था तो वो रेगुलर कपडे hi लायी थी, उसने एक ब्लैक टीशर्ट और ब्लू जीन्स पहन लिया, बाल खुले hi छोड़ दिए थे, जब शिव बाथरूम से बहार आया तो वो रेडी हो चुकी थी. शिव बहार आ कर जैसे रुक गया और उसको देखने लगा, उसके ऐसे देखने से वो फिर शर्मा गयी, जब वो वही खड़ा रहा तो वो शर्मा के boli)Aise क्या देख रहे हो, तैयार हो जाओ, जाना नहीं है क्या?

शिव: जाना तो है (कहते हुए आया और उसको पूछे से पकड़ लिया)

जूही : (जूथ मुठ का रूत ते hue)Kya कर रहे हो? छोडो मुझे.

शिव : (जोरो से अपनी बहे कसते hue)Nahi छोड़ सकता. (कहते हुए उसके गले में एक किश कर ली, जहा से इत्र की कुस्बू आ रही थी)

जूही : हमे जाना है, छोडो न प्लीज.

शिव : (उसको अपनी और घूमते hue)You अरे सो बेटिफुल.

जूही : (शरमाते hue)Sach?

शिव : एकदम सच. (कहते हुए में उसके होठो की और झुका तो उसने मुझे रोक दिया)

जूही : अभी नहीं शिव, जल्दी से तैयार हो जाओ, में दूध और नास्ता मंगवाती हु, हमे देर हो रही है. (शिव उसकी आँखों में देख रहा था, मान तो उसका भी बहोत था पर उसको पता था की ये सिंपल किश से रुकेगा नहीं, और वो देर नहीं करना चाहती थी, उसने बहोत प्यार से kaha)Please. (शिव ने भी उसकी बात मणि और उसको छोड़ diya)Good बॉय. (कहते हुए उसके बालो को सहलाया और वो फ़ोन उठा कर आर्डर करने लगी, शिव भी तैयार होने लगा, तबतक उसने जरुरी सामान बैग में भर लिया, नास्ता कर के दोनों स्टेडियम की और निकल गए)

हम वह पहुंचे तो वह भी काफी भीड़ थी, बहोत सरे लोग आये हुए थे, अपने बच्चो के साथ उनके maa-baap और उनके घरवाले भी आये हुए थे, हम दोनों अंदर गए, में अंदर चला गया, और जूही स्टेडियम में चली गयी. अंदर लाकर रूम में मेने कपडे बदले, पास के hi लाकर में भी एक लड़का कपडे बदल रहा था, हमने एक दूसरे को hello कहा.

लड़का : Hi, मेरा नाम दुर्वेश है.

शिव : में शिव हु.

दुर्वेश : कोनसी इवेंट में भाग ले रहे हो?

शिव : 100मत एंड 200मत रेस.

दुर्वेश : बच gaya.(Usne मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : (में भी मुस्कुराया) ऐसा क्यों कह रहे हो.

दुर्वेश : इतने लम्बे हो तो मेने सोचा की कही मेरी लॉन्ग जम्प की इवेंट में न हो, वर्ण अपना पत्ता तो कट hi था.

शिव : ऐसा कुछ नहीं है भाई, सबकी अपनी अपनी म्हणत होती है.

फिर हम दोनों वह से बहार आ गए, सब खिलाडी ग्राउंड में इकठ्ठा हुए थे, और सब बैठे हुए लोग अपने अपने खिलाडी को चीयर कर रहे थे, बहोत शोर था स्टेडियम में, मुझे पता था की जूही कहा बैठी है, तो मेने उसको देख कर हाथ हिलाया, उसने भी खड़े हो कर हाथ हिलाया.

दुर्वेश : गर्लफ्रेंड? (मेने मुस्कुरा कर है कहा, उसके बाद थोड़ी देर में अनाउंस हुआ, कुछ मुख्या अतिथि आये हुए थे तो उनका भसान चला, फिर इवेंट चालू हो गयी, काफी लोग आये हुए थे तो रेस भी टुकड़ो में होनेवाली थी, आठ आठ प्लेयर दौड़नेवाले थे, पहले राउंड में जब मेरी रेस हुए तो में अच्छे मार्जिन से जीत गया, वैसे hi दुसरो का भी राउंड चला, मेरी नजर सबके टाइमिंग पर भी थी, पर मेरी टाइमिंग बेस्ट थी, ऐसे hi सरे राउंड चले और में फाइनल तक पहुंच गया) (कुछ लड़के आपस में बात कर रहे थे)

लड़का1 : उसको देखा, बहोत फ़ास्ट है.

लड़का2 : फ़ास्ट होने से क्या होता है, जितना तो मुझे hi है.

लड़का1 : वो कैसे?

लड़का2 : मेरे पास एक प्लान है, अगर तू साथ दे तो.

लड़का1 : वो कैसे?

लड़का2 : तुजे तो पता है की में तुजसे फ़ास्ट हु, तो तू तो जितने से रहा, और वो काफी फ़ास्ट है तो उसके रहते न तू जीत सकता है न में.

लड़का1 : प्लान क्या है वो बता.

लड़का2 : अगर तू उसको गिरा दे तो वो रेस से बहार हो जायेगा, और में जीत जाऊंगा.

लड़का1 : पर वो मुझे भी डिसक्वालिफाई कर देंगे.

लड़का2 : क्या फर्क पड़ता है, वैसे भी तू जीतनेवाला है नहीं, हमारी दोस्ती के लिए तू इतनभी नहीं कर सकता?

लड़का1 : चल ठीक है, पर अगर वो मेरे साइड में आया तो hi में करपाउंगा, वैसे भी अगर दूर हुआ तो लाइन तो बदल नहीं सकता.

लड़का2 : ठीक है, फिर जैसी उसकी किस्मत.

वो दोनों इस तरह से अपना प्लान बना रहे थे, और में जूही के पास खड़ा अपनी गेम की बात कर रहा था, वो भी सब नोट कर रही थी तो मुझे समजा रही थी.
 
अपडेट 203

एक और कुछ लड़के शिव को गिराने की योजना बना रहे थे, वही दूसरी और इस से बेखबर शिव और जूही अपनी बाटमे लगे हुए थे, वो किस तरह से दौड़ना है, उसकी योजना बना रहे थे, ऐसा तो कुछ नहीं था जो शिव पहली बार सिख रहा हो, पर फिर भी वो ध्यान से सब सुन रहा था, और अपने आपको मेंटली तैयार भी कर रहा था, जिस तरह का उसने प्रदर्सन किया था, सबकी निगाहो में वो आ hi गया था, और लोगो की उम्मीदे भी बढ़ गयी थी, सब उसके लिए अनजान थे पर फिर भी इस वक़्त लोगो की जबान पर उसका नाम आ गया था, जो दौड़ में भाग ले रहे थे उनके दिल में शिव के नाम का दर था तो वही दूसरे लोगो को शिव hi जित ता दिखाई दे रहा था. हम बाटे कर रहे थे की वह दुर्वेश आया. उसजे आने से हमारी बातचीत रुक गयी.

दुर्वेश : और भाई, कैसा रहा तुम्हारा?

शिव : अब तक तो सब ठीक है, फाइनल रेस में हु में.

दुर्वेश : बहोत बढ़िया भाई, में भी फाइनल तक तो पहुंच hi गया. (उसने खुस होते हुए कहा, और जूही की और देख kar)Namaste भाभीजी. (जूही पहली बार किसी के मुँह से ये सब्द अपने लिए सुन रही थी, उसका चेहरा शर्म और खुसी से पूरा लाल हो गया, उसने शरमाते हुए नमस्ते kaha)Kya मेने कुछ गलत कह दिया. (दुर्वेश ने जूही को इतना शरमाते हुए देखा तो उसको लगा की उसने कुछ ज्यादा hi कह दिया था, पर उसको जो सही लगा वो उसने कहा था, पर इस सवाल से जूही और शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका ली) सॉरी अगर मेने कुछ गलत कहा हो तो.

शिव : कुछ गलत नहीं कहा तूने, पर किसीने पहली बार ऐसा कहा है इसलिए वो शर्मा रही है.

दुर्वेश : (उसने रहत की सास ली की उसने कुछ गलत नहीं कहा tha)To भाभी दाल लो आदत, अब हमारे भाई के साथ रिस्ता किया है तो फिर हमतो भाभी hi कहेंगे न. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, जूही को इतना अच्छा भी लग रहा था, और शर्म भी आ रही थी, किसी ने उसका नाम इसतरहा से शिव के साथ जोड़ा था, उसने शरमाते हुए शिव को देखा, क्यों की शिव ने भी उसको रोका नहीं था, ऊपर से उसको बढ़ावा hi दिया था, और ये बात उसको बहोत अच्छी लगी थी की शिव ने सबके सामने अपने रिश्ते को छुपाया नहीं)

शिव : तू छोड़ ये सब, क्या स्कोर है तेरा ये बता.

दुर्वेश : 7 म जम्प लगा चूका हु, अब देखते है क्या होता है. तुम्हारा क्या हुआ.

शिव : मेने भी 100म 11 सेक् में कम्प्लीट किया है, देखते है अब क्या होता है.

दुर्वेश : करलेगा तू, लम्बा जो है.

शिव : लम्बा तो तू भी है, क्या कहती जो जूही. (जूही ने है में शिर हिलाया)

जूही : 11 सेक्, लड़कीओ के मुकाबले सही है, में खुद 11.90 सेक् लेती हु, पर लड़को के हिसाब से तुम्हे इस बार जोर लगाना पड़ेगा, तुम्हे नेशनल की बराबरी करनी है, न की यहाँ कॉम्पिटिओं की.

दुर्वेश : आप भी एथलीट हो?

शिव : है भाई, स्टेट क्लियर कर चुकी है, ये तो स्कूल का कॉम्पिटिओं था इस लिए वो पार्टिसिपेट नहीं कर रही, पर नेशनल में वो पार्टिसिपेट करेगी.

दुर्वेश : में भी यही सोच रहा था की इतनी लम्बी है भाभी और लगती भी एथलीट hi है, बढिये है भाई, अच्छी जोड़ी है दोनों की. (कुछ याद आने par)Ek बात बतानी थी भाई.

शिव : है बोल न.

दुर्वेश : कुछ लड़के थे जो बात कर रहे थे, में पास में hi खड़ा था, वैसे तो मुझे समाज नहीं आया, पर वो लोग किसी को गिराने की बात कर रहे थे.

शिव : किस इवेंट में है दोनों.

दुर्वेश : वो तो पता नहीं, क्यों की मेरा भी इवेंट चल रहा था तो मेने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, पर उनकी बातो से लगा की वो शायद दौड़ में hi है.

शिव : दौड़ में भी कई इवेंट है, कहा है वो लड़के. (दुर्वेश आजुबाजु देखने लगा, पर वो लड़के दिखे नहीं)

दुर्वेश : अभी तो दिख नहीं रहे है.

शिव : होंगे यार, और वैसे भी इस तरह की हरकत उनके लिए hi खतरनाक है, डिकलीफ़ी हो सकते है वो

दुर्वेश: जनता हु, पर वो डिसक्वालिफाई होगा साथ में वो भी तो होगा जिसके साथ वो ऐसा करेगा. (तभी लॉन्ग जम्प का अनाउंस hua)Muje जाना होगा. (वो हमें bye कह कर निकल गया)

जूही : कोण हो सकते है वो?

शिव : होंगे यार.

जूही : तुम ध्यान रखना.

शिव : ठीक है. (थोड़ी देर बाद हमारा भी अनाउंस हुआ तो में जूही को bye बोल कर निकल गया)

हम सब ट्रैक पर आ गए थे, बरी बरी सबका नाम अनाउंस हुआ, में अपने आप को तैयार करने लगा. (वह वो लेक भी खड़े थे, और उनकी खुशनसीबी कहो की शिव की बदनसीबी, वो लड़का साथ में hi था, पर शिव उस से बेखबर था, उन दोनों ने आपस में आँखों hi आँखों में इस्सर भी किया). रेफरी ने पोसिसों लेने को कहा, मेने एक बार जूही की और देखा, उसने अपना तुम उठाया, मेने पोसिसिओं ली, रेफरी ने गेट, कहा, सेट कहा और जैसे hi फायर हुआ में दौड़ पड़ा, पर तभी मेरे पेअर में किसी का हाथ लगा, मुझे तेज दर्द हुआ और में थोड़ा लड़खड़ा गया की तभी दूसरी बार फायर हुए, रेस रोक दी गयी थी, मेने अपने पेअर में देखा तो वह से खून निकल रहा था, और एक लड़का पीछे ट्रैक पर गिरने के बाद खड़ा हो रहा था. अचानक हुई घटना से सब स्तब्ध थे और सबकी नजर हम पर थी. (दरअसल हुआ ये था की जैसे hi शिव ने दौड़ना सुरु किया तो एक कदम दौड़ने के बाद वो लड़का शिव पर गिरने लगा पर शिव तेज था तो वो आगे निकल गया था तो उस लड़के का हाथ उसके पेअर को लगा, और उसके नाख़ून की ववजह से शिव को पेअर में चोट लगी और लहू बहने लगा, पर शिव आगे निकल गया था तो वो गिरा नहीं था)

जूही ने जब शिव को अपना पेअर पकड़ कर ट्रैक पर बैठते देखा तो उसकी सासे hi थमने लगी, वो कूद कर वह जाना चाहती थी पर वो ऐसा नहीं कर सकती थी, वो बस दिल थामे शिव को देख रही थी, जिसके चेरहे पर दर्द था, कुछ रेफरी और गार्ड वह आ गए और दोनों को देखने लगे, शिव के पेअर से खून निकल रहा था तो वह तुरंत डॉक्टर को बुलाया और उसने फर्स्ट अिध करना सुरु कर दिया. किसी को कुछ समाज नहीं आ रहा था तो रेफरी ने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया और उस वीडियो की फुटेज देखने को कहा, भले hi इतना बड़ा कॉम्पिटिओं नहीं था पर वह भी कामर्स तो थे hi, उतने नहीं थे पर थे. रेफ़्रिएस के द्वारा वीडियो देखने पर पता चला की उस लड़के ने जान बुज कर शिव पर छलांग लगायी थी, दूसरी इवेंट के लोग भी वह आ गए थे क्यों की सब तक खबर पहुंच चुकी थी. दुर्वेश ने देखा की शिव की फर्स्ट अिध की जा रही है तो वो वह पहुंच गया, पर गार्ड ने उसको रोका.

दुर्वेश : वो मेरा दोस्त है. शिईयिव, शीइइइइइव. (गार्ड ने भी देखा की वो उसका दोस्त है तो उसको जाने diya)Kya हुआ शिव.

शिव : पता नहीं, वो लड़का पीछे गिर गया और मुझको यहाँ चोट लगी. (शिव ने इस्सर किया उस और दुर्वेश ने देखा तो वो चौंक गया)

दुर्वेश : ये वही लड़के है शिव, ये hi प्लान बना रहे थे. (वह खड़े रेफरी और डॉक्टर ने भी ये सुना)

रेफरी : किस बारे में बात कर रहे हो तुम?

दुर्वेश : (इससरए से बताते hue)Wo दोनों लड़के आपस में प्लान बना रहे थे की किसी को गिरना है. (रेफरी ने उन दोनों को बुलवाया, वो दोनों भी वह आ गए)

रेफरी : क्या यही दोनों थे?

दुर्वेश : है सर, यही दोनों थे. (दोनों लड़को के चेहरे पर बारे बजे हुए थे, वो लड़का जो कूड़ा था उसको तो पता था की उसको डिसक्वालिफाई कर सकते है, पर वो कबसे यही कह रहा था की उसका बैलेंस बिगड़ गया था, उसने जानबुज कर नहीं किया था, जबकि वो दूसरा लड़का तो शांत hi था, जैसे उसका कोई लेना देना hi नहीं था, पर जब दुर्वेश ने उन दोनों को पहचान लिया और ये बात कही तो वो भी दर गया)

लड़का 2 : नहीं सर, ये जूथ बोल रहा है, इसमें मेरा कोई लेनादेना नहीं है.

रेफरी :(लड़के 1 की और देख kar)Sach सच बताओ, वार्ना में तुम्हे इस टूर्नामेंट से hi नहीं किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से बन कर दूंगा. (बात को बढ़ता देख वो लड़का भी दर गया)

लड़का 1 : सॉरी सर, मेरी गलती हो गयी, इसिने मुझे कहा था, मुझे माफ़ कर दीजिये. (वो रोने लगा)

रेफरी : कॉम्पिटिओं जितने के लिए तुम ऐसा हथकंडे अपनाओगे, शर्म आणि चाइये तुम्हे, अगर जितना hi चाहते हो तो ज्यादा म्हणत करो, इस रेस से तो तुम दोनों बहार हो hi, और आगे के लिए में तुम्हारी शिकायत कर रहा हु, वो जो भी निर्णय लेंगे वो तय करेगा तुम्हारा भविष्य.

लड़का1 और लड़का 2 :(रट hue)Please सर , माफ़ कर दीजिये, ऐसी गलती फिर नहीं करेंगे.

रेफरी : अभी तुम अपनी जगह पर जाओ. (शिव की और देख कर डॉक्टर se)Kaisi हालत है इसकी.

डॉक्टर : दो नाख़ून थोड़े जोर से लगे है, दर्द तो रहेगा अभी.

रेफरी : (शिव की और देख kar)Kya करना चाहोगे तुम?

शिव : में दौडूंगा सर.

रेफरी : ठीक है, अपनी जगह पर जाओ. (में भी चलते हुए अपनी जगह पर पंहुचा, पेअर में दर्द तो हो रहा था, पर मेने अपने आपको संभाला, मेने उन दोनों की और देखा तो उन्होंने नज़ारे झुका ली, थोड़ी देर बाद रेफरी आया और उन दोनों के सामने खड़े रह कर बरी बरी उन्हें रेड कार्ड दिखा दिया, वो दोनों रेस से बहार हो gaye.)(Mene जूही की और देखा तो वो दरी हुई दिख रही थी, मेने उसकी और तुमसुप कर के उसको कहा की सब ठीक है)

फिर से रेस स्टार्ट हुई, मेने अपनी, पोसिटिव ली, पेअर में थोड़ा दर्द था पर मेने अपने मान को शांत किया और पूरा ध्यान दौड़ पर केंद्रित किया, रेस सुरु हुई, मेने पूरी ताकत से दौड़ लगा दी, अगले 11 सेक् में रेस कम्प्लीट हो गयी, में फर्स्ट hi आया था इसमें कोई शक नहीं था पर में अपने टाइम को देख रहा था, पुरे स्टेडियम में शोर गूंज रहा था, पेअर में पट्टी लगे होने के बावजूद में फर्स्ट आया था तो लोगो के सेंटीमेंट्स भी मुझसे जुड़ गए थे, थोड़ी देर बाद रिजल्ट देक्लैर हुआ तो मेने रेस 10.65 सेक् में कम्प्लीट की थी. में जूही के पास गया तो उसने पहले hi पूछा.

जूही : तुम ठीक हो?

शिव : है में ठीक हु.

शाम ढलते ढलते सरे इवेंट ख़त्म हो गए थे, दुर्वेश अपने इवेंट में गोल्ड लाया था और मेने भी दोनों इवेंट में गोल्ड जीते थे. हम तीनो साथ में थे, वो मेरे गले लगा.

दुर्वेश : कोंग्रटुलतिओन्स भाई.

शिव : तुम्हे भी.

दुर्वेश : चलो पार्टी करते है आज.

फिर हम सब वह से एक रेस्टारेंट गए, वह हमने साथ खाना खाया, उसने हमे अपने बारे में बताया, वो भी एक सामान्य परिवार से आता था, पर जब उसने मेरे बारे में सुना तो वो शॉकेड था. वो हर समय जूही को भाभी hi कह रहा था और जूही भी उसका अच्छे से ख्याल रख रही थी, शायद उसको भी ये सब सुन न अच्छा लग रहा था, हम सबने अच्छा टाइम बिताया. फिर वो वह से चला गया. में और जूही बैठे थे,

शिव : क्या बात है, बहोत खुस लग रही हो. (जूही मुस्कुरायी, उसकी मनमोहक मुस्कराहट बहोत कुछ कह रही थी, जब वो कुछ नहीं बोली तो मेने kaha)Kya हुआ हमें भी बताओ.

जूही : कुछ नहीं, बस ऐसे hi. (उसको बहोत शर्म आ रही थी तो वो कुछ नहीं बोली) फिर हम वह से निकले, हम होटल आ गए, आज हम यही रुकने वाले थे. मेने बरी बरी सबको फ़ोन किया और उन्हें अपनी कामियाबी बताने लगा, सब बहोत खुस थे.

जूही तो और ज्यादा खुस थी, शिव फ़ोन पर बाटे कर रहा था तो वो बाथरूम चली गयी, उसको पता था की आज शिव से वादा है, अगर न भी होता तो भी वो शिव के साथ रहनेवाली hi थी, पर वडा तो वडा था, वो बहोत शर्मा रही थी, उसने अच्छे से नहाया, अपने शरीर को धोते वक़्त भी उसके शरीर में सरसराहट हो रही थी, वैसे भी वो नयी नयी शरीर सुख भोग रही थी तो वैसे भी एक्सिटमेंट थी और ऊपर से शिव था, तो उसको और एक्सिटमेंट होती थी. वो नहायी और सिर्फ तौलिया लपेट कर hi बहार आयी, शिव किसी से बात कर रहा था तो वो अपने बाल सूखने लगी, पर उसको देख कर शिव ने जल्दी से बात ख़तम की, ये देख कर वो और शर्माने लगी, फ़ोन रख कर वो सीधा उसके पास hi आया.

जूही : (शरमाते hue)Pehle नाहा लो. (वो किसी नयी दुल्हन की तरह शर्मा रही थी, मेरा मान तो नहीं तह अपर में बाथरूम में चला गया और जल्दी से नाहा कर बहार आ गया, जब में लौटा तो जूही चद्दर ओढ़े लेती हुई thi)(Juhi को वैसे hi बहोत शर्म आ रही थी, पर फिर भी वो बिना किसी भी वस्त्र के लेती हुई थी, शिव भी सिर्फ तौलिया लपेट कर hi आया था, और जिस तरह से वो उसको देख रहा था वो शर्माने भी लगी और मुस्कुराने भी लगी)

शिव : अभी से चद्दर दाल ली, आज तो मुझे सोना hi नहीं है.

जूही : (ये सुन कर वो और शर्मा gayi)Pagal.(wo बस इतना hi बोली.

शिव : चद्दर क्यों डाली है, (कहते हुए मेने चद्दर खिंच दी तो वो पूरी तरह से नंगी थी, में बस देखता hi रह गया)

जूही इसके लिए तैयार नहीं थी, उसने सोचा नहीं था की शिव ऐसे चद्दर हटा देगा, वो पूरी नंगी लेती थी तो शर्मा गयी और अपने आपको छुपाते हुए वो उलटी घूम गयी. उसके उभरे हुए सख्त कूल्हों को देख कर मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया, मेने अपना टॉवल फेंक दिया और सीधे उसके कूल्हों को पकड़ ते हुए उसपर टूट पड़ा. थोड़ी देर नखरे करने के बाद वो भी पुरे मूड में आ गयी और फिर सुरु हो गया युद्ध, एक प्लेअसुरबले युद्ध.









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काफी रात तक, हम दोनों ने जैम कर चुदाई की, सच में वो बेमिसाल है, और ताकतवर भी, वो मेरा पूरा साथ दे रही थी और खुद भी एन्जॉय कर रही थी, हलाकि उसकी भी हालत पतली हो जाती थी पर उसने पूरा मेरा साथ दिया, हम दोनों ऐसे hi नंगे सो गए, सुबह जब दरवाजे पर दस्तक हुई तो में जगा, मेने टाइम देखा तो 9 बज गए थे. जूही की भी नींद टूट गयी, वो अलसायी हुई जगी और बोली,

जूही : कोण है सुबह सुबह, सोने भी नहीं देते.

शिव : नौ बज गए है, (कहते हुए मेने उस पर चद्दर डाली और टॉवल लपेट कर दरवाजे पर gaya)Kon?

लड़की : सर, साफ़ सफाई के लिए आयी हु.

शिव : एक मिनट. (मेने जूही की और देखा तो वो उठ गयी और तौलिया ले कर बाथरूम में चली गयी, कल पूरी रात उसको छोड़ा था पर फिर भी उसको ऐसे ननगा देख कर फिर से लुंड में तनाव आने लगा, पर तबतक वो बाथरूम में घुस चुकी थी, मेने अपने आपको संभाला और दरवाजा खोला, हाथ में सामान लिए एक लड़की कड़ी थी, करीब 30-32 साल की थी वो, रंग थोड़ा सावला था, पर दिखने में काफी अच्छी थी वो, मेने दरवाजा पूरा खोला नहीं था तो वो मुझे देखने लगी और बोली)

लड़की : सॉरी सर, पर मुझे सफाई करनी है और चद्दर वगैरह बदलना है. (अंदर रूम की हालत क्या थी मुझे पता था)

शिव : ठीक है. (कहते हुए मेने दरवाजा खोला और फटाफट बिखरे कपडे समेटने लगा, उसमे मेरे और जूही के कपडे थे.) (वो लड़की भी पूरी जवान थी और सब समाज भी रही थी, उसे पता था की यहाँ एक लड़का और लड़की रुके हुए थे, बाथरूम में से पानी की आवाज आ रही थी मतलब वो लड़की अंदर थी)

लड़की : रहने दीजिये सर, में करदेती हु. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : नहीं, वो में कर देता हु.

लड़की : (शरमाते hue)Koi बात नहीं सर, मुझे आदत है, आप बैठिये, में ठीक कर देती हु. (वैसे तो मुझे शर्म आ रही थी पर जो था वो था, मेने वह पड़ी टीशर्ट पहनी और बिस्तर पर बेथ गया, वो लड़की सब साफ़ करने लगी और सब ठीक से रखने lagi)(Ladki सब काम कर रही थी और साथ में सोच भी रही थी, कितना खूबसूरत लड़का है और कितना मजबूत भी है. पुरे रूम में ये गंध मुझे उत्तेजित कर रही है, जो लड़की बाथरूम में है वो कितनी नशिबवाली है, लगता है पूरी रात जैम कर चुदाई हुई है, वो ये सब सोच रही थी और साथ में कभी कभी शिव को भी देख लेती थी, उसने सब ठीक कर दिया, और तभी वो लड़की भी बहार आ gayi)(Juhi ने देखा की एक लड़की hi है जो साफ़ कर रही है तो वो तौलिया लपेटे hi बहार आ gayi)(Use देख कर वो लड़की पालक झपकना hi भूल गयी और मान में बोली, कितनी खूबसूरत है ये, और ऐसे मर्द को ऐसी hi लड़की संभल सकती है, क्या खूब जोड़ी है दोनों ki)(Juhi अपने बैग से कपडे निकलने लगी और उसको ले कर वापस बाथरूम में चली गयी, लड़की ने भी जल्दी जल्दी सब काम निपटाया और मुस्कुराते हुए वह से चली गयी)

थोड़ी देर बाद जूही भी बहार आ गयी, उसने आस पास देखा,

जूही : गयी वो?

शिव : है गयी.

जूही : तुमने उसको रोका क्यों नहीं, थोड़ी देर बाद आने को कह देते. (नाराज होते hue)Kya सोच रही होगी वो?

शिव : उसको जो सोचना है सोचने दो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. में नाहा लेता हु. (कहते हुए वो बाथरूम में चला गया)

उसके बाद मेने और जूही ने नास्ता किया और फिर हम दोनों अपने सहर के लिए निकल गए. जूही बहोत खुस थी, उसको हल्का हल्का दर्द था पर वो भी उसको बहोत अच्छा लग रहा था, वो बस में भी शिव के कंधे पर शिर रख कर बैठी थी, कई लोग देख भी रहे थे पर उसने इग्नोर कर दिया.

शिव : क्या कर रही हो, सब देख रहे है.

जूही : देखने दो, में कुछ गलत तो नहीं कर रही, बस थकन है तो शिर रख कर बैठी हु.

शिव : कॉम्पिटिओं मेरा था और थक तुम गयी हो? (मेने मुस्कुराते हुए kaha)(Juhi शर्मा गयी, उसके सामने एक बार फिर कल रात जो कुछ हुआ था वो सब याद आ गया, वो जिस तरह से शिव के साथ कर रही थी वो सोच कर hi उसको शर्म आ रही thi)Kya हुआ जवाब नहीं दिया?

जूही : छेड़ो मात मुझे, तुम्हे पता है क्यों थक गयी हु. (उसने शरमाते हुए कहा, मेने भी उसको ज्यादा छेड़ा नहीं, वैसे भी लोग आसपास थे तो ऐसी बाटे ज्यादा नहीं हो सकती थी, मेने उसको सोने दिया, थक तो में भी गया था तो मेने भी झपकी ले ली)

हम दोनों अपने सहर आ गए, हम सीधे अनाथालय hi गए. दोपहर ढल चुकी थी, मेने रस्ते से hi मिठाई ले ली थी, वह सब काम भी कर रहे थे, तो सबको मिठाई खिलाई, शाम को भार्गविजई और काव्यजि भी आये, फिर पवनसीर और स्नेहमड़ाम भी आयी. वो भी मिठाई ले कर आये थे, सब खुस थे.

पवनसीर : कल छुट्टी है न तुम्हारी?

शिव : क्या हुआ सर?

पवनसीर : वैसे तो खास नहीं है, एक क्लाइंट के साथ मीटिंग है, सूर्यदेवजी का प्रोजेक्ट चालू कर रहे है तो सप्लायर से मिलना है, अब तुम भी सब समझने लगे हो तो साथ में होते तो अच्छा रहता.

शिव : जी सर, वैसे तो छुट्टी है पर इनसे छुट्टी है की नहीं पता नहीं. (कहते हुए मेने जूही की और इस्सर किया और उसको देखने लगा, मेरी बात से सब उसकी और देखने लगे तो वो शर्मा गयी)

पवनसीर : क्या कहती हो जूही, इजाजत है? (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)

जूही : मुझे कोई एतराज नहीं है सर, में तो इसको इसलिए कहती रहती हु की अब कॉम्पिटिओं टोघट होता जायेगा, तो प्रैक्टिस तो करनी चाइये न, नेशनल लेवल के लिए भी इसको ज्यादा प्रैक्टिस की जरुरत है, आगे चल कर इंटरनेशनल भी खेलना है इससे.

बीनमदं : इसको क्यों, तुजे नहीं खेलना?

जूही : पता नहीं, वो बहोत ऊँचा लेवल हो जायेगा शायद. ये कर लेगा, मुझे ऐसा लगता है.

शिव : तुम भी कर hi लोगी, मुझे भी पता है की इसके लिए ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी.

पवनसीर : अरे भाई, मेने सिर्फ कल की बात की थी, और तुम दोनों तो कहा से कहा पहुंच गए.

स्नेहमड़ाम : अगर गोआल ऊँचा रखेंगे तभी तो मेहनत में जान आएगी.

भार्गवी : में भी एग्री करती हु, अगर गोआल बड़ा रखो तो hi उसको पाने की ेहमियात पता चलती है, और शरीर में एक ऊर्जा मिलती है.

पवनसीर : मेने सुना है की खिलाड़िओ को लोग स्पोंसर भी करते है, ऐसी कई कंपनी है जो उभरते खिलाड़िओ को स्पोंसर कर के उन्हें उनका मुकाम हासिल करने में मदद करते है.

जूही : करते है, पर उसके लिए हमे नेशनल तो कमसे काम पर करना होगा.

काव्य : हम सब है न, कर लोगे तुम दोनों.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kabhi कभी तो टेंशन होने लगती है मुझे.

काव्य : (मुस्कुराते hue)wo क्यों?

शिव : आप को नहीं लगता की आप लोग कुछ ज्यादा hi एक्सपेक्टेशन रख रहे है.

भार्गवी : तुम में वो पोटेंशियल है तभी तो हम आशा रखते है, अगर न होती तो कोई भी ये नहीं कहता, क्यों सही कहा न मेने. (उन्होंने लता की और देख कर कहा, लता ने बस है में षिर हिलाया)

ऐसे hi हमारी बाते चलती रही, आखिर कर निर्णय हुआ की में उनके साथ कल जा रहा हु. रात को वैस्वी का फ़ोन भी आया, संयम का भी फ़ोन आया था, आंटी ने भी बात की, उसके बाद स्वर्णजी का भी फ़ोन आया, जूही ने अपने घर भी फ़ोन लगाया तो मंतभाभी से भी बात हुई, ऐसे hi कब रात हो गयी पता hi नहीं चला. थकन थी तो रात को कब सो गया पता hi नहीं चला.

सुबह में तैयार हो रहा था की तभी स्नेहमड़ाम का फ़ोन आया.

शिव : Hello?

स्नेहमड़ाम : (प्यार से) उठ गए?

शिव : कब का, एक घंटा कसरत भी कर आया हु. सर तैयार हो गए?

स्नेहमड़ाम : कहा, अभी जगाया है, अभी बाथरूम में गए है, अच्छा सुनो, मेने इसलिए फ़ोन किया था की मेने तुम्हारा भी नास्ता बना दिया है, तो नास्ता यही करना.

शिव : लता भी कब से वही कर रही थी, शायद उसने भी नास्ता बनादिया है.

स्नेहमड़ाम : अब में क्या कहु.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है, थोड़ा यहाँ करूँगा, थोड़ा वह.

स्नेहमड़ाम : वो तो करना hi पड़ेगा, ठीक है में इंतजार करती हु, जल्दी आना.

में बहार निकला तो देखा की लता कुछ बना रही थी, में गया और उसको पीछे से पकड़ लिया. (लता जानती थी की ऐसा सिर्फ शिव hi कर सकता है तो वो मुस्कुराने लगी)

लता : हो गए तैयार.

शिव : है, क्या बना रही हो?

लता : कुछ नहीं बस रोटी बना रही थी, और कुछ खाना है?

शिव : नहीं, एक hi रोटी बना न, स्नेहमड़ाम का भी फ़ोन आया था की उन्होंने भी नास्ता बनाया है.

लता : (मुस्कुराते हुए) ठीक है.

सरिता : ये क्या हो रहा है? (हमने चौंक कर उनकी और देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, लता शर्मा कर मेरा हाथ छुड़ाने लगी, पर मेने नहीं छोड़ा)

शिव : तुम्हे क्या, में जो चाहे करू. (मेने भी मुस्कुरा के कहा)

सरिता : (वो भी नजदीक आ gayi)Mene कहा रोका है, पर हम भी क़तर में है. (कहते हुए वो मुस्कुरायी तो मेने लता को छोड़ा और उन्हें गले लगा लिया, वो भी मेरे गले लग gayi)Ha, अब मिली ठंडक.

शिव : (उनके माथे पर चूमते hue)Jyada नाटक मत किया करो.

सरिता : क्यों न करू, हक़ है मेरा, क्यों लता. (लता बस मुस्कुरायी, उसने एक रोटी और थोड़ी सब्जी एक प्लाट में nikali)Bas एक hi रोटी?

लता : स्नेहदीदी ने भी नास्ता बनाया है, तो बाकि वह करेगा.

सरिता : है भाई, इनको कहा कमी है. (कहते हुए वो मुस्कुरायी)

मेने ज्यादा बहस नहीं की और नास्ता कर के वह से निकल गया. स्नेहमड़ाम ने hi दरवाजा खोला, मुझे देख कर उन्होंने मुझे अंदर लिया और मेरे गले लग गयी.

शिव : (डरते hue)Kya कर रही हो?

स्नेहा : डरो मात, वो रूम में है, कपडे पहन रहे है. अब इतने दिनों बाद मिले हो तो गले भी न लागु. (कहते हुए उन्होंने मेरे होठो पर हलके से चुम लिया, फिर उन्होंने मुझे डाइनिंग टेबल पर बैठने को कहा और वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर में पवनसीर भी आ गए, हमने नास्ता किया और उनकी कार से हम निकल गए)

शिव : किनसे मिलना है? (वो गाड़ी ड्राइव कर रहे थे)

पवनसीर : मर. वशिष्ठ, सुप्लिएर है, काम बड़ा है तो हमे जयदा सुपलिएर चाहिए होंगे, वैसे बड़ा सप्लायर है. (फिर उन्होंने मुझे उनके बारे में काम के बारे में सब बताया, रास्ता लम्बा था तो मेने भी ड्राइव कर लिया, ऐसे hi हम वह पहुंच गए, उनकी ऑफिस में संडे की छुट्टी थी, पर दो चार लोग आये हुए थे, जब पेओन ने जा कर उन्हें बताया तो वो खुद हमे लेने आये)

वशिष्ठ : Hello मर. पवन, ी म वशिष्ठ.

पवनसीर : Hello, हे इस माय पार्टनर शिव.

वशिष्ठ : Hello मर. शिव. (उन्होंने मुझसे भी हाथ मिलाया, फिर वो हमे अपने केबिन में ले गए, एक सोफे पर हम बैठे और एक पर वो, फिर मेरी और देख kar)Ek बात कहु, अगर बुरा न मने तो?

पवनसीर : कहिये.

वशिष्ठ : ये आपके पार्टनर (मेरी और देख kar)apke रिलेटिव है क्या?

पवनसीर : ऐसा क्यों कह रहे है?

वशिष्ठ : मुझे ये कुछ ज्यादा hi छोटे लगे, मेरा मतलब है की स्कूलगोइंग बॉय की तरह, सॉरी अगर मेने कुछ गलत कहा हो तो.

पवनसीर : ये स्कूल में hi पढता है.

वशिष्ठ : तो फिर ये आपका partner....samaj में नहीं आया.

पवनसीर : ये एक लम्बी कहानी है, बस इतना समाज लीजिये, ये जो प्रोजेक्ट हम करने जा रहे है वो इसकी वजह से hi मुमकिन हुआ है.

वशिष्ठ : That’s ग्रेट, इतनी काम उम्र में इन्होने यहाँ तक पहुंच कर अचंबित कर दिया.

पवनसीर : (मुस्कुरा kar)Ab काम की बात करे?

वशिष्ठ : काम की बाते तो होती रहेगी, पहले थोड़ा चाय नास्ता तो कर लीजिये. अब आप ए है तो हम ऐसे तो जाने नहीं देंगे, डील अपनी जगह होती है पर मेहमान नवाजी का मौका हम कैसे छोड़ सकते है. (उन्होंने अपने पेओन को आर्डर दिया तो वो नास्ता और चाय ले आया)

पवनसीर : ये चाय नहीं पिता.

वशिष्ठ : ओह! सो सॉरी, लस्सी चलेगी? (मेने है में शिर हिलाया तो उन्होंने पेओन को लस्सी लेन को कहा, नास्ता वगैरह करने के बाद फिर से हम काम की बात पर आ गए, वो हमे मीटिंग रूम में ले गए और वह लगे स्क्रीन पर हमे सब दिखने लगे, साथ में हमे प्राइस लिस्ट की कॉपी भी दी, उनका सारा बिसिन्स इन्होने संजय, वो ये बता रहे थे की वो हमारी डिमांड को कैसे फुलफिल करेंगे, मेने प्राइस लिस्ट चेक की, मुझे कुछ कीमते थोड़ी ज्यादा लगी, मेने पवनसीर को बताया, पर धीमी आवाज me)Any प्रॉब्लम मर. पवन?

पवनसीर : इसको कुछ प्राइस ज्यादा लग रही है, वही बता रहा था.

वशिष्ठ : सर क्वालिटी है तो फिर प्राइस भी होगी hi.

शिव : में क्वालिटी मटेरियल की hi बात कर रहा हु, जो प्राइस आपने लगायी है वो तो आपसे छोटा सुपलिएर भी इस डैम पर हमे दे देगा, फिर आप जैसे बड़े सुप्लिएर के पास आने का क्या मतलब.
 
अपडेट 204

वशिष्ठ का दिमाग ख़राब हो रहा था, वैसे भी वो परेशान था, उसके बिज़नेस का ज्यादातर हिस्सा उसके ससुर की फ़ैक्ट्रोरी पर निर्भर था, और आयेदिन उसको इसके लिए सुन न पड़ता था, उसकी कोई इज्जत hi नहीं थी, इसलिए वो इस चंगुल से निकलने के लिए किसी और के साथ बड़ी डील करना चाहता था, उसको ये मौका पवन के रूप में मिला था, पर शिव की बातो से उसको ये डील सांक्ले होती नजर आ रही थी, फिर भी उसने अपने आप पर सयम रक्खा और शांति से जवाब दिया.

वशिष्ठ : अभी तुम छोटे हो, बिज़नेस की बाटे समाज नहीं पाओगे, लोग अक्सर काम दाम लगाकर फिर माल में या फिर क्वांटिटी में गाफला करते है, हमारे साथ आपको ऐसी कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी, जब आप इतना बड़ा प्रोजेक्ट कर रहे है तो क्वालिटी का भी आपको ध्यान रखना hi होगा, क्या कहते है पवनजी.

पवनसीर : बात आपकी ठीक है, पर जो शिव कह रहा है वो भी ठीक hi है, अभी जो हमारी साइट चल रही है वह का ये इंचार्ज है और फ़िलहाल लेटेस्ट प्राइस एंड अपडेट पर इसकी hi नजर है तो में इसकी बात को भी नजर अंदाज नहीं कर शक्ति. (इस बात पर काफी बहेश चली, आखिर हर मान कर वशिष्ठ ने बिच का रास्ता निकला)

वशिष्ठ : ठीक है, में देख कर आपको बताता हु की में इसमें क्या कर सकता हु.

शिव : ठीक है आप अपने हिसाब से जो कर सकते है वो हमे बताइये, तब तक हम भी दूसरे सप्लायर से मीटिंग कर के उनका भी क्वाताशन देखलेते है.

वशिष्ठ : (उसको ये डील कैंसिल होती नजर आ रही थी, पर ऐसे एकदम वो कुछ भी निर्णय नहीं ले सकता था, उसको टाइम तो चाहिए hi था, तो उसने निराश हो कर kaha)Thik है, आपको जैसा ठीक लगे, फिर भी में कहूंगा की में क्वालिटी की गारंटी देता हु, और चाहे तो पेमेंट क्रेडिट भी बढ़ा सकता हु, आप सोच लीजिये.

पवनसीर : (खड़े होते hue)Thik है मर. वशिष्ठ, आप अपना प्रपोजल हमे दीजिये, हम गौर करेंगे. (फिर उन दोनों ने हाथ मिलाया, मेने भी हाथ मिलाया, पर मुझसे हाथ मिलते हुए उनका व्यव्हार रुखा hi था, में समाज सकता था पर हम भी बिज़नेस hi कर रहे थे, तो हम भी अपना नफा नुकसान तो देखंगे hi. हम दोनों वह से निकल गए, हम अपनी कार में वापस चल दिए)

पवनसीर : क्या तुम्हे सचमे लगता है की उनकी प्राइस ज्यादा थी?

शिव : (मुस्कुराते hue)Itni भी ज्यादा नहीं थी, मेने तो बस प्रयास किया है, देखते है कितना फायदा होगा है.

पवनसीर : (मुस्कुराते hue)Businessman बनते जा रहे हो शिव.

शिव : जब बिज़नेस करना है तो बन न hi पड़ेगा.

पवनसीर : (वो भी मुस्कुराये, फिर कुछ सोचते hue)Ek बात और शेयर करनी थी. (में उन्हें गुजर से देखने लगा) मेरी सूर्यदेवजी से भी बात हुई थी, वो जल्द से जल्द ये प्रोजेक्ट कम्प्लीट करना चाहते है, और ऐसा है तो हमे और मैनपावर और दूसरे इंस्टूमेंट्स की जरुरत पड़ेगी, में सोच रहा था की एक बार कमलनाथजी से बात कर लू.

शिव : क्या बात करेंगे aap?(Mene जान ने के इरादे से पूछा)

पवनसीर : यही की अगर वो चाहे तो हमारे साथ पार्टनरशिप में आ शक्ति है.

शिव : क्या आपको लगता है की वो आपके साथ पार्टनरशिप करेंगे, वो इस प्रोजेक्ट को हथियाने के लिए क्या कुछ नहीं किये है, जहा वो आपको अपना सपोर्टर समाज रहे थे वह वो आपके सपोर्टर बन ने को राज़ी होंगे?

पवनसीर : लगता तो नहीं पर एक बार बात करने में क्या जाता है, वर्ण और कोई रास्ता धुंधलेंगे.

शिव : मेरे दिमाग में एक रास्ता है, अगर वो सीधे तौर पर हमसे न जुड़ना चाहे तो हम झन्वीजी को प्रपोजल दे सकते है, वो इंटेलिजेंट है, और खुद अपने दम पर कड़ी होना चाहती है, अगर वो हमारे साथ जुड़ती है तो फिर कमलनाथजी भी हमारे काम में कोई रोड़ा नहीं डालेंगे.

पवनसीर : आईडिया तो अच्छा है, पर क्या जहान्वी इस बात के लिए तैयार होंगी?

शिव : में बात करके देखता हु, अगर मांगयि तो ठीक है वर्ण में कहदूँगा की ये बात तो सिर्फ मेने hi कही थी, आपका कोई लेना देना नहीं है.

पवनसीर : स्मार्ट हो. (हम दोनों ऐसे hi बाते करते हुए अपने सहर की और जा रहे थे)

वशिष्ठ ने ऑफिस मबैठ कर अपने प्रपोजल को फिर से स्टडी किया और वो क्या कर सकता है वो सोचने लगा, घर से उसकी बीवी का दो तीन बार फ़ोन आ गया था, उसने डाट के उसको बार बार फ़ोन करने से भी मन कर दिया. आखिर कार उसने फिर से क्वाताशन बना कर मेल कर दिया और उसके बाद अपने घर चला गया. खाने का टाइम बिट गया था, वो जा कर सोफे पर बेथ गया, तभी उसकी बीवी को पता चला की वो आ गया है तो वो भी वह आ गयी. (उसकी बीवी यानि कृपाली)

कृपाली : खाना लगा दू?

वशिष्ठ : जीना हराम करदिया है तुमने, क्या कब से खाना खाना कर रही हो, बार बार ऑफिस में भी फ़ोन किये जा रही हो, समाज नहीं आता एक बार में, एक तो वैसे hi तुम्हारे बाप ने जीना हराम कर रक्खा है और ऊपर से तुम, तुम दोनों बाप बेटी ने बर्बाद करदिया है मुझे. (वो जोर से चिल्लाया, तो कृपाली रोने लगी, वशिष्ठ की आवाज सुन कर उसके माँ बाप भी बहार आ गए)

दामिनिदेवी : क्या हुआ बीटा, क्यों चिल्ला रहा है?

वशिष्ठ : छुट्टी के दिन भी में ऑफिस में काम करने गया था और ये है की बार बार फ़ोन किये जा रही है, घर कब आ रहे हो, घर कब आ रहे हो. वह में ऑफिस सँभालु की इसको.

दामिनिदेवी : क्यों परेशान करती रहती है मेरे बेटे कोक समाज नहीं आता की वो काम कर रहा है. (कृपाली और रोने लगी)

राघवेंद्रसिंह : (कृपाली का ससुर, वैसे तो उसकी चलती नहीं थी पर फिर भी उसने kaha)Are खाने के लिए hi तो पूछ रही थी, उसको भी तुम्हारी फ़िक्र होती है न, और ऊपर से वो भी भूखी है, तुम्हारा इंतजार कर रही है.

वशिष्ठ : तो क्या मेने कहा था की भूखी रहे, खा लेती. (उसने गुस्से से कहा)

दामिनिदेवी : (चिंता se)Tumhe भूख नहीं लगी बीटा?

वशिष्ठ : मेने ऑफिस में नास्ता किया था, एक क्लाइंट के साथ मीटिंग थी, एक बहोत बड़ी डील करने गया था.

दामिनिदेवी : हो गयी डील?

वशिष्ठ : जब तक ये मनहूस है तो कहा से होगी डील, धंधे में इसका बाप परेशान करता है और घर में ये, दोनों मिल कर मार डालो मुझे. (उसने गुस्से से कृपाली को कहा)

राघवेंद्रसिंह : (बात को उलटी दिशा में जाता देख उसने फिर से ट्रैक पर laya)Kyu क्या हुआ बीटा, क्या दिक्कत हो गयी, किसके साथ डील थी?

वशिष्ठ : एक बहोत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट था, बात लगभग तय hi थी, मुझे लगा था की आज वो फाइनल hi करने आये है, पर वह भी एक बेवकूफ था, समाज नहीं आता की लोग एक बच्चे को कैसे अपना पार्टनर बना लेते है, और तो और उस स्कूल जाते हुए लड़के की बात मानते है, क्या हम घास काट ते है, इतने सालो से बिज़नेस कर रहे है, हमे समाज नहीं है की कैसे क्या डील होती है. वह इतनी इम्पोर्टेन्ट बात चल रही थी, में दोबारा कॉन्ट्रैक्ट बना रहा था और ये है की बार बार फ़ोन पे फ़ोन किये जा रही है, कब आओगे, कब आओगे, क्यों आना है, क्या ऐसा आसमान टूट पड़ा जो घर आना है. (उसने फिर गुस्से से कहा)

राघवेंद्रसिंह : इस्पे क्यों चिल्ला रहे हो, अच्छा ये बताओ, कहा से आये थे वो लोग?

वशष्ट : (कुछ सोच kar)XXX सहर से, वह वो कोई बड़ी फैक्ट्री का प्रोजेक्ट कर रहे है.

राघवेंद्रसिंह : (जैसे उसको कुछ याद आय ho)Krupalibahu की बहन भी तो उसी सहर में रहती है, और उसके ससुर का भी कंस्ट्रक्शन का hi बिज़नेस है न, उस दिन वो आये थे तो बात हुई थी वह.

वशिष्ठ : तो उस से क्या फर्क पड़ता है? (उसने झुंझलाते हुए कहा)

राघवेंद्रसिंह : अरे, अगर जान पहचान हो तो डील आसान रहती है, आखिर बिज़नेस में एक दूसरे पर भरोसा भी तो करना होता है.

वशिष्ठ : वो पहली बार hi तो आयी थी वह, और ऐसी कोई जानपहचान नहीं हुई थी मेरी, ऐसे कैसे में उनसे बात कर सकता हु?

राघवेंद्रसिंह : तुम बात मात करना, बहु अपने हिसाब से बात कर लेगी, वो सिर्फ जॉब पहचान निकलेगी, अगर कुछ लगता है तो फिर तुम बात करना (कृपाली की और देख कर प्यार se)Karogi न बहु? (कृपाली ने अपने ासु पोछते हुए हां में शिर हिलाया, वैसे भी अगर उसके पति का कुछ अच्छा होता है तो फिर उसको क्या दिक्कत hai)Kon थे वो लोग, जरा नाम पता, उनकी फर्म का नाम, जरा डिटेल तो देना.

वशिष्ठ : कोई क्सक्सक्स फर्म थी, उसके ओनर का नाम पवन क्सक्सक्स था. (कृपाली को अभी कुछ ध्यान नहीं आया, वैसे वो शायद पवन से मिली भी थी, पर याद नहीं आया कुछ)

राघवेंद्र : बहु ये सब लिख लो, ताकि याद रहे. बीटा एक कागज और पेन तो देना उसको.

वशिष्ठ : (अपनी बैग से पेन और कागज निकलते hue)Is से कोई फर्क नहीं पड़नेवाला.

राघवेंद्र : तू क्यों इतना नेगेटिव सोचता है, (वशिष्ठ ने सब लिखवा diya)Kuchh छूट तो नहीं गया? तू कह रहा था की कोई बच्चा भी था वह.

वशिष्ठ : है, क्या नाम था उसका, है शिव, आप यकीं नहीं करोगे, वो भी स्कूल में पढता है, और उसको अपना पार्टनर बनाया है, पता नहीं उस पवन में कोई दिमाग है की नहीं, ये तो डील इतनी बड़ी थी तो मुझे उनकी बात मन नई पद रही थी, वर्ण इतने छोटे लड़के को अपना पार्टनर बनानेवाले आदमी से क्या बिज़नेस करना.

कृपाली : (शिव का नाम सुन कर वो चौंकी, पर जौरी नहीं की ये वही शिव ho)Aapne शिव कहा?

वशिष्ठ : है. (उसने झुंझलाते हुए कहा)

कृपाली :कैसा दीखता था वो? मेरा मतलब है क्या वो लम्बा था? (उसने डरते हुए पूछा)

वशिष्ठ : (आश्चर्य se)Ha.

कृपाली : लगभग छे साढ़े छे फिट का? (उसने फिर कहा क्यों की वो कंफर्म करना चाहती थी)

वशिष्ठ : (और आश्चर्य से )हआ. (उसने गौर से कृपाली को देखा)

राघवेंद्रसिंह : तुम जानती हो बेटी?

कृपाली : है में मिली थी, दीदी के जान पहचान में है वो, पर वो तो अनाथ है, अनाथालय में रहता है, वो कैसे बिज़नेस पार्टनर हो सकता है?

वशिष्ठ : अरे है, पवनजी ने बताया था की वो अनाथ है, में अपनी hi बात में था तो मेने ध्यान नहीं दिया, मतलब एक अनाथालय में रहनेवाला कैसे बिज़नेस पार्टनर हो सकता है, पार्टनरशिप तो बराबरवालों में होती है, वो अन्थालय में रहता है तो उसके पास पैसे भी नहीं होंगे, फिर वो कैसे बिज़नेस पार्टनर हो सकता है?

राघवेंद्र : तुजे क्या उन सब से, बहु तू बात कर के देख और पता कर, क्या ये वही है?

कृपाली : जी बाबूजी. (उसने स्वर्ण को फ़ोन लगाया, hi hello के बाद उनसे puchha)Didi, ये शिव कंस्ट्रक्शन के बुसिनेस्स में है क्या?

स्वर्ण : (अचानक शिव की बात सुन kar)Kyu क्या हुआ?

कृपाली : वो इनसे (अपने पति se)milne आपके सहर से कोई पवनजी और शिव आये थे, क्या ये अनाथलेवाला शिव हो सकता है?

स्वर्ण : पवनजी और शिव??? है वो दोनों साथ में hi काम करते है, क्यों क्या हुआ? (कृपाली ने साडी बात बता di)Oh! ऐसा हुआ, ठीक है में बात करती हु. (फिर थोड़ी बात कर के उसने फ़ोन रख दिया)

कृपाली : ये वही है, दीदी कह रही थी की वो बात करेंगी.

राघवेंद्रसिंह : देखा, खामखा चिल्लाता रहता है (वशिष्ठ को देख kar)Baat करेगा तभी तो हल निकलेगा, अब जा खाना खा ले, बहु भी कबसे भूखी है. (वशिष्ठ उठा, और खाने की टेबल पर बेथ गया, वैसे भी अब उसको थोड़ी रहत मिली थी, वही कृपाली फिर से शिव के बारे में सोच रही थी, उसको अभी भी यकीं नहीं हो रहा था की वो शिव जिस से वो मिली थी और ये शिव जो उसके पति से मिला था वो दोनों एक हो सकते है)

हमलोग शाम तक हमारे सहर पहुंच गए थे. पवनसीर मुझे अपने hi घर ले गए, हम सब शरबत पि रहे थे.

पवनसीर : (उन्होंने स्नेहा को साडी बात batayi)Tum यकीं नहीं करोगी स्नेहा, उनका मेल भी आ गया है, रेविसे प्राइस का.

स्नेहा : (खुस हो कर शिव को देखते hue)Matlab ये बिज़नेस में भी अपना दिमाग लगा रहा है. (में मुस्कुराया और फिर मेने कहा)

शिव : उन्होंने प्राइस ड्राप की है, पर मुझे लगता है की हमे एक बार सूर्यदेवजी से भी बात करलेनी चाहिए.

पवनसीर : वो क्यों?

शिव : मेरा ये मन न है की उन्होंने ये प्राइस ड्राप की होगी जो की उनके मुनाफे से काम हो रही होगी, ये हमारा पहला प्रोजेक्ट है, अगर प्राइस की वजह से उन्होंने क्वालिटी में कोम्प्रोमाईज़ किया तो?

पवनसीर : वैसे तो वो हम देख लेंगे, पर सूर्यदेवजी से क्यों बात करनी है?

शिव : मेरा मान न है की इस प्राइस ड्राप से हमे इतना फायदा नहीं मिलनेवाला जितना नुकसान होने की सम्भावना है, अगर सूर्यदेवजी एग्री करते है तो हम पिछले प्राइस पर hi काम करेंगे, वशिस्ठजी के लिए भी ये अनएक्सपेक्टेड होगा और खुस हो कर वो ज्यादा ध्यान देंगे.

पवनसीर : इस से सूर्यदेवजी का कोई लेना देना नहीं है, उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है, अब ये सब हमे सोचना है, अगर हम ऐसा करते है तो वो हमारे मुनाफे से काम होगा. (में भी सोच में पद gaya)(Pawan का भी दिमाग वही सोच रहा tha)Mere ख्याल से तुम सही कह रहे हो, वैसे भी इस से हमे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, पर हम इस प्रोजेक्ट में कोई कमी नहीं छोड़ सकते, में बात करता हु वशिस्ठजी से.

शिव : नहीं अभी नहीं, एक दो दिन बाद करते है, पहले हम भी पूरी तरह से सोच ले.

पवनसीर : देख रही हो (उसने मुस्कुराके स्नेहा को कहा)

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Ha, पक्का बिजनेसमैन बनता जा रहा है. (में शर्मा गया, स्नेहमड़ाम ने मुझे खाने के लिए रोक लिया, में और पवनसीर बैठे थे की स्वर्णजी का फ़ोन आया, में सोच में पद गया की उनका क्यों फ़ोन आया है)

शिव : Hello?

स्वर्ण : Hello, कैसे हो?

शिव : जी ठीक हु. (पवनसीर थे तो में थोड़ा उनकंफर्टबले फील कर रहा था, वैसे तो कोई बात नहीं thi)Kahiye? (मुझे समाज नहीं आ रहा था की उन्होंने फ़ोन क्यों किया है)

स्वर्ण : तुम क्सक्सक्स सहर गए थे?

शिव : (थोड़ा चौंकते hue)Ha, आपको कैसे पता चला? (स्वर्ण ने साडी बात बता दी) ओह ऐसा.

स्वर्ण : में तो बस कंफर्म करना चाहती थी, वैसे जो तुम्हे ठीक लगे वही निर्णय ले सकते हो, में तो बस कह रही थी की वो कृपाली के पति है, आगे तुम जानो, जैसा तुम्हे ठीक लगे.

शिव : में देखता हु, बात करता हु आपसे फिर.

स्वर्ण : किसी के साथ में हो?

शिव : है, पवनसीर के साथ में hi बैठा हु.

स्वर्ण : ठीक है, फिर बाद में बात करते है.

शिव : एक और ट्विस्ट है सर.

पवनसीर : क्या?

शिव : वशिस्ठजी, स्वर्णजी की छोटी बहन के पति है.

पवनसीर : क्या सच में?

शिव : अभी स्वर्ण जी का hi फ़ोन था, कृपाली जी ने उन्हें फ़ोन किया था.

पवनसीर : ये तो अच्छी बात है न, जान पहचान है तो अच्छा रहेगा. मुझे लगता है की तुमने जो सोचा है वो सही hi है, में बात करता हु उनसे.

शिव : आज नहीं काल बात करेंगे. ऐसे ज्यादा इंट्रेस्ट दिखाना भी सही नहीं है, आराम से बात करेंगे.

पवनसीर : ठीक है. (जब स्नेहा आयी तो उन्होंने स्नेहा को भी सब बताया, उसने भी मेरा समर्थन किया)

फिर हम खाना खाने बेथ गए, पवनसीर और स्नेहा साथमे बैठे थे, में उनके सामने बैठा था, जब में खाना खा रहा था तो मेरे पैरो पर मुझे मखमली पेअर का एहसास हुआ, में समाज गया की ये कोण है, मेने स्नेहा की और देखा तो वो ऐसे रियेक्ट कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो, पर उसके होठो की हलकी सी मुस्कान बहोत कुछ कह रही थी, मेने भी खाने पर ध्यान दिया, फिर में वह से घर चला आया. वह हुई कुछ कुछ बाटे मेने घर भी बताई, वो सब भी खुस थे.

रात को सब सोने लगे तो में सोच रहा था की कहा सोउ, आज मौसम भी अच्छा था तो मेने सोचा की छत पर hi सो जाता हु. में बिस्तर ले कर जाने लगा तो रंजन ने भी टोका.

रंजन : कहा जा रहा है?

शिव : छत पर सोने.

रंजन : क्यों? यही सो जा. (उसने जैसे आमंत्रण दिया)

शिव : आज छत पर सोने का मान कर रहा है.

रंजन : में भी चालू? (उसने नटखटपन से कहा, विणा सब देख रही थी, और मुस्कुरा भी रही थी पर बोली कुछ नहीं)

शिव : आज नहीं, आज तुम पढ़ रही हो न, में थक गया हु तो सो जाता हु.

रंजन : (मुस्कुराते hue)Thik है, गूडनिघत. (वो भी समझती थी की हर वक़्त उसको सब कुछ नहीं मिल सकता)

शिव : गूडनिघत. (में बिस्तर ले कर बहार निकला, में जा रहा था की लता पानी ले कर अपने रूम की और जा रही थी. मुझे देख कर उसने भी पूछा)

लता : ये बिस्तर ले कर कहा जा रहा है?

शिव : छत पर सोने.

लता : बारिश हुई तो?

शिव : वापस आ जाऊंगा, पर लगता नहीं की आज बारिश होगी. (फिर कुछ सोच कर) तुम चलोगी.

लता : (पहले तो शर्मा गयी, फिर थोड़ी मायूस हो kar)Beenadidi के साथ सोना है.

शिव : थोड़ी देर के लिए आ जाओ.

लता : देखती हु. (कहते हुए शरमाते हुए रूम में चली गयी, में भी ऊपर चला गया, आसमान में टारे निकले हुए थे, बारिस होने का कोई एस्सार नजर नहीं आ रहा था तो मेने बिस्तर लगा दिया, बिस्तर लगा कर में सब सोचने लगा, एक एक कर के सरे चेहरे मेरे सामने आते गए, में खुद से hi सवाल करने लगा की क्या में सच में इनसे प्यार करता हु, पर जवाब एक hi था, में किसी को भी दुखी या मुसीबत में नहीं देख सकता, और वो भी मुझसे कितना प्यार करती थी, तो मेरा उनसे लगाव ठीक hi था, पर फिर आगे क्या होगा. में इन्ही सब विचारो में खोया था)

वही लता भी बिस्तर में लेट गयी थी, शिव ने उसको ऊपर आने को कहा था, उसको भी ऊपर जाना था, वैसे भी वो शिव के साथ रहने का मौका कैसे छोड़ सकती थी, पर बिना अभी सोई नहीं थी, वो कुछ पढ़ रही थी.

लता : क्या हुआ दीदी, नींद नहीं आ रही क्या?

बिना : पूरा दिन तो तुम मुझे कुछ करने नहीं देती, सोती hi तो रहती हु, फिर कैसे नींद आएगी. क्यों तुम्हे डिस्टर्ब हो रहा है.

लता : नहीं ऐसी बात नहीं है.

बिना : शिव ऊपर सोने गया क्या? (उसने शिव को बिस्तर लिए देखा था)

लता : है.

बिना : वो सिर्फ बिस्तर लिए हुए था, पानी वाणी ले गया की नहीं.

लता : पता नहीं, देखा नहीं मेने.

बिना : जाओ देख लो, रात को पानी पीना होगा तो निचे आयना पड़ेगा, ऐसे में नींद टूट जाएगी.

लता : ठीक है. (लता को तो जो चाहिए था वही मिल रहा था, वो खुस होती हुए उठी और पानी लिया और जल्दी जल्दी ऊपर जाने लगी, पर जैसे hi वो ऊपर पहुंची उसके कदम स्लो हो गए, उसका दिल धड़कने लगा, उसने देखा की शिव बिस्तर पर लेता हुआ है, अँधेरे में ये तो पता नहीं चल रहा था की वो सोया है की जाग रहा है.

शिव : वह क्यों कड़ी हो, आ जाओ. (शिव की आवाज से वो थोड़ा सेहम सी गयी, ये दर नहीं था पर अचानक हुई आवाज से वो कैंप सी गयी, वो शिव के पास पहुंची और लोटा और गिलास वह रख दिया, और उसके साथ बिस्तर में बेथ gayi)Bahot जल्दी आ गयी, मेने सोचा था की टाइम लगेगा. बिना मैडम सो गयी?

लता : नहीं, जाग रही है, कहो क्यों बुलाया? (उसने अपना घाघरा और चुन्नी ठीक करते हुए कहा)

शिव : क्यों बुलाया से क्या मतलब है, मिलना था तुमसे.

लता : (शरमाते hue)Kyu मिलना था? (उसके चेहरे पर मुस्कान फैली हुई थी)

शिव : (लता का हाथ पकड़ कर उसको अपने साथ में लेटते hue)Ab तुमसे मिलने के लिए कोई बहाना थोड़ी न चाहिए. (लता सीधी लेट गयी थी और शिव ने उसके ऊपर घुमाके हाथ रक्खा हुआ था, उसका हाथ अभी उसको टच नहीं कर रहा था, बा घुमाये हुए था)

लता : दीदी जाग रही है, मुझे जल्दी वापस भी जाना है. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : सरिता को बोल देती की वो सो जाये.

लता : ऐसे कैसे बोल सकती थी, मुझे शर्म आती है.

शिव : पर में तो नहीं छोड़नेवाला आज. (कहते हुए मेने उनके ऊपर हाथ रख कर दाहिने स्तन को हलके से दबाया, में उनके बायीं और लेता हुआ था)

लता : शहहहहह (वो सिर्फ एक स्पर्श से hi गैन गण gayi)Muje जाना है.

शिव : (हलके से उस नरम स्तन को सहलाते hue)Chali जाओ, किसने रोका है.

लता : (बेबसी से उसकी आँखों में देखते hue)Jaldi कर लो na.(Unki बात से मुझे हसी आ गयी, मुझे हस्ता देख वो भी शर्मा गयी और मेरे शाइन में अपना मुँह छुपाने लगी)

शिव : क्या हुआ?

लता : मुझे शर्म आ रही है.

शिव : किस बात की शर्म?

लता : पता नहीं. (वो अपने पैरो को आपस में रगड़ रही थी, उसकी सासे तेज चल रही थी, उनकी तड़प मुझे दिख रही थी, मेरा भी लुंड कड़क हो चूका था, मेने उनकी नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए उनकी छूट पर ले गया और उसको sehlaga)Shhhhhhhh.

शिव : (हलके से उसके नरम होठो को चूसा और bola)Time लगेगा.

लता : वो क्या सोचेगी?

शिव : सोचने दो, तुम मेरी हो, हो न?

लता : है शिव, में तुम्हारी hi हु.

शिव : फिर किस बात का दर. है कोई दर? (मेने पूछा)

लता : नहीं शिव, मुझे किसी का दर नहीं.

शिव : बस तो फिर. (कहते हुए मेने उनका घाघरा ऊपर उठा दिया, उनके पेअर नंगे हो गए, मेने देखा तो सफ़ेद पंतय दिख रही थी, मेने उनकी झांघो को सहलाया और फिर हाथ उनकी छूट पर रख दिया जो पहले से भीगी हुई थी)

लता : शहहहहह. (वो मचलने लगी, मने उन्हें पलट दिया और मेरी और कर दिया, वो भी अपना पेअर मेरे ऊपर करते हुए साइड से लेट गयी, मेने उनकी पंतय में हाथ दाल कर उनके कूल्हों को सहलाया, गरम गरम कूल्हे पर हाथ जाते hi मेरा लुंड और कूदने लगा, वो मुझसे लिपटने lagi)Shiiiiiiiiiv. (में उनके गले को चाटने लगा और उनके कूल्हों को मसलने laga)(Shiv सिर्फ अंडरवियर में hi था तो उसका लुंड लता को महसूस होने लगा, वो अपनी कमर हिला कर अपनी छूट को लुंड पर रगड़ने lagi)Shhhh शीइइइइइइइव. (वो उसको अपनी और खींचने लगी, थोड़ी देर बाद शिव ने उसको अलग किया और उसको सीधा लेता दिया, और उसकी चुन्नी निकल दी और उसके ब्लाउज को खोल दिया, वो बस उसको देख रही थी, वो बेथ गया और उसको भी ऊपर कर के उसकी ब्रा को भी खोल दिया और उसका ब्लाउज और ब्रा निकल दिए, फिर से उसको लेता दिया, उसने एक हाथ से अपने स्तन को जैसे ढकने की कोशिस की, पर शिव का ध्यान कही और था, उसने घाघरे का नाडा खो दिया और निचे की और सरक कर उसका घाघरा निकलने लगा, उसने भी अपने कूल्हे उठा कर उसकी मदद की, उसने एक बार पंतय को देखा और उसको भी खिंच कर निकल दिया, वो पूरी नंगी हो चुकी थी, शिव ने भी अपनी अंडरवियर निकल दी और उसके साइड में लेट ते हुए उसके पैरो को खिंच कर उसकी छूट को अपने मुँह के सामने कर लिया और उसपर अपने होठ लगा दिया, उसने अपने पेअर को हवा में उठा दिया ताकि शिव उसकी छूट तक अच्छे से पहुंच जाये, शिव उसकी छूट को चाटने लगा )शह्ह्ह्हह्ह, हाआआ शह्ह्ह्हह्ह हाआआआ. (वो सासे ले रही थी, तभी उसका ध्यान लुंड पर गया, उसने फ़ौरन उस लुंड को पकड़ लिया और आगे खिसकते हुए लुंड को अपने मुँह में भर लिया, गरम गरम लुंड को वो जोरो से चूसने lagi,ek और उसकी छूट को शिव चूस रहा था और दूसरी और वो लुंड चूस रही थी, वो बहोत गर्म हो चुकी थी, थोड़ी hi देर में वो झाड़नेवाली हो गयी तो उसने लुंड बहार निकल लिया और शिव को हटते हुए boli)shhhhhh बस सीईव, में झाड़ जाउंगी.

शिव : तो झाड़ jao(wo फिर से छूट की और बढ़ा, लता ने रोकते हुए कहा)

लता : नहीं, ऐसे नहीं, मेरे ऊपर आ जाओ. (वो सीधे सब्दो में तो न बोली पर उसकोअब छोड़ना था, उसने खिंच कर शिव को अपने ऊपर ले लिया, और उसकी आँखों में देखते hue)Dal दो शिव. (कहते हुए उसने लुंड को छूट के छेड़ पर सेट किया, और दूसरे हाथ से शिव को अपनी और खिंचा, गरम गरम लुंड उसकी छूट को फैलते हुए अंदर उतर gaya)Ahhhhhhh शीइइइइइइव (उसको हल्का दर्द हुआ पर उसने कुछ नहीं कहा, ये जो एहसास था जिसके पीछे वो दीवानी हो गयी थी, उसकी छूट पूरी फ़ैल गयी थी और वो बड़ा सा लुंड उसके अंदर समां रहा था, उसने अपने पेअर और फैला दिए ताकि लुंड और अंदर जा सके, थोड़ी म्हणत के बाद लुंड उसकी बच्चे दानी तक पहुंच गया, वो जोर जोर से सासे लेने लगी, और लुंड को अपने अंदर एडजस्ट करवाने लगी, उसने अपनी टंगे शिव की कमर में लपेट दी और जोर जोर से सासे लेने लगी और शिव की पीठ सहलाने lagi)Shiiiiiiiiiiiiiv.(Kehte हुए वो उसको चूमने लगी, थोड़ी देर बाद शिव ने अपनी कमर पीछे खींची और फिर aage)Shhhhhhhhhh (सिसकी ले कर उसने अपनी सहमति जताई, जिसे सुन कर शिव ने हलके हलके धक्के लगाने सुरु कर diye)Shhhhhh Shiiiiiiiiiiv.

शिव : अब देर नहीं हो रही?

लता : (कामुकता में दुभि हुई आवाज me)Muje कही नहीं जाना शह्ह्ह्हह्ह तुम करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (अपनी छोटी सी छूट को फैलते हुए लुंड को वो महसूस कर रही थी, उसकी छूट की अंदरूनी दीवाल पर लुंड का घरसँ उसको पागल कर रहा था, ये एहसास वो सब्दो में बयां नहीं कर सकती थी, वो बस अपनी आंखे बंद किये हुए उस लुंड को अपने अंदर महसूस कर रही thi)Shhhhhhh छोड़ो मुझे शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह जोर से छोड़ो. (उसकी भावनाये उमड़ रही थी, शिव के धक्को से वो थिरक रही थी, थप थप की आवाज से वो ऊपर निचे हो रही थी, पर वो बस शिव से चिपकी हुई थी और लुंड को अपनी छूट की गेहराइओ तक महसूस कर रही थी, आखिर कर उस से रहा न गया और उसकी छूट ने पानी छोड़ diya)Shhhhhhhhh Shiiiiiiiiiiv (शिव धक्के लगा रहा था पर उस से सहन नहीं हो रहा था, उसको रोकने के लिए वो जीर्ण जोर से चिपक सकती थी चिपक गयी, उसका पानी निकल गया tha)(Me भी रुक गया और उनको झड़ने दिया, अभी मेरा लुंड कड़क उनकी छूट में धसा हुआ था, हम दोनों एक दूसरे को किश कर रहे थे)

बिना : लाताआआ. (बिना मैडम की आवाज से हम दोनों चौंक गए) लाताआए.

लता : (वो दर गयी थी पर जवाब तो देना tha)H ह हा डीडीईई?

बिना : में सो रही हु, देर लगेगी क्या तुमको? (बिना ने सोचा नहीं था की ऊपर क्या हो रहा है, जब लता काफी देर तक न आयी तो उसने सोने से पहले आवाज दे दी थी, वो ऊपर नहीं चाहड़ी थी बस निचे से hi आवाज दी थी)

लता : आईईईई डीडीई, बस दो मिनट. (उसने हड़बड़ाते हुए कहा)

शिव : (धीरे se)Kahi नहीं जाना है, में कह देता हु की तुम यही सो रही हो.

लता : नहीं शिव, (उसने गिड़गिड़ाते हुए kaha)Me आती हु थोड़ी देर में.

शिव : में नहीं जानेदेने वाला.

लता : प्लीज जाने दो मुझे. (उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा, मेने लुंड निकल लिया और साइड में बेथ गया, वो जल्दी से उठी और अपने कपडे पहन ने lagi)Sorry बाबू, में आती हु जल्दी.

शिव : अभी तो कह रही थी की मुझे किसी का दर नहीं, अब क्या हो गया.

लता : मुझे दर नहीं है, पर अच्छा नहीं लगता न. (वो लगातार कपडे पहन रही थी. उन्होंने पुरेकपडे पहन लिए, में नाराज हो रहा tha)Naraj हो गए क्या?

शिव : (नाराजगी se)Nahi बहोत खुस हु.

लता : प्लीज बाबू, आती हु में.

शिव : कोई जरुरत नहीं है. (मेने नाराज होते हुए कहा)

लता : (दोनों और से फास गयी थी, न वो शिव को छोड़ के जाना चाहती थी न वो मन कर सकती थी निचे जाने से, क्युकी शर्म भी एक चीज होती है, आज गर वो उसकी बीवी भी होती तो भी उसको जाना padta)Me आती हु बाबू, संजो न. (शिव कुछ नहीं बोलै, और नंगा hi लेट गया, लता का बिलकुल मान नहीं था जाने का पर वो चली गयी, बिना के दिमाग में भी ऐसा नहीं था की उसने क्या कर दिया है)

बिना : (लता को अंदर आते हुए dekh)Kya हुआ, इतनी देर कैसे हो गयी?

लता : (हड़बड़ाते hue)wo बस बात कर रहे थे.

बिना : तो रुक जाती, मेने तो बस इतना कहने के लिए hi आवाज दी थी की में सो रही हु, तुम्हे देर हो गयी तो मेने सोचा की तुम्हे बोल दू.

लता : नहीं, कोई बात नहीं, में आ hi रही थी. (उसने जूथ बोलै, उसको शिव की चिंता हो रही थी, उसको पता था की वो जल्दी से नहीं जा पायेगी तो वो उठी)

बिना : कहा जा रही हो.

लता : बाथरूम. (वो बस इतना बोली और बहार निकल गयी)

बिना : (लता की हड़बड़ाहट से वो चौंक गयी थी, वो मान में सोचने lagi)Kahi मेने कुछ गलत तो नहीं कर दिया, क्या इन दोनों के बिच कुछ???? क्या पता, अब उसने hi इतना रायता फैला रक्खा है तो मुझे कैसे पता चलेगा की कोण कोण है, कोण नहीं, समाज नहीं आता की क्या कहु. (कहते हुए उसने चद्दर खिंच दी और सोने लगी)

लता : (वो सरिता के पास गयी, वो सो रही थी तो उसको jagaya)Saruuuu.

सरिता : (जागते hue)Kya हुआ लता?

लता : कुछ नहीं, जा छत पर जा.

सरिता : क्यों, छत पर क्या है?

लता : तू जा न, बहोत सवाल करती है तू.

सरिता : ठीक है बाबा, पर कुछ बताएगी तो समाज आएगा न.

लता : अभी कुछ समजने का समय नहीं है, बस तू जा.

सरिता : (वो कड़ी हो चुकी थी, दोनों बहार निकली, गयारती सो रही thi)Kon है ऊपर (वैसे तो उसको अंदेसा हो रहा था पर फिर भी उसने पूछा)

लता : बहुत है जो तेरा इंतजार कर रहा है, कितने सवाल करती है, जा न जो कहा है कर. (सरिता मुस्कुराती हुई ऊपर गयी, ऊपर बिस्तर लगा हुआ tha,uspar लेते शिव को देख कर वो खुस हो गयी, वो भी पूरा नंगा था, सरिता भी अपने कपडे निकलने लगी)

शिव : (आंखे बाद कर के लेता था, आहत सुन कर उसको लगा की लता आयी है, उसने आंखे बंद रख कर hi kaha)Badi जल्दी आ गयी. (शिव ने नाइसे टॉन्ट मारा, वो क्यों इस टन में बात कर रहा है सरिता को समाज नहीं आया, पर वो समाज गयी की लता और शिव के बिच कुछ हुआ है, पर ये वक़्त इन बातो का नहीं था, वो पूरी नंगी हो गयी और शिव की बगल में जा कर लेट गयी और उसके लुंड को पकड़ लिया, लुंड ढीला हो गया था पर अभी भी गिला था, उसको समझते देर न लगी की शिव ने अभी लता के साथ क्या किया है, (में अपने साथ में लेते उस गर्म जिस्म को महसूस कर रहा था, नरम स्तन का एहसास मुझे अपनी बाजु में हो रहा था, और वो मेरा लुंड भी सहलाने लगी थी तो लुंड खड़ा होने लगा)( वही दूसरी तरफ सरिता को लगा की उसको शिव ने hi बुलवाया है.)

सरिता : तू बुलाएगा तो देर कैसे कर सकती थी. (सरितादिदी की आवाज सुन कर में चौंक गया, मेने उनको देखा, वो मुस्कुरा रही थी, में समाज गया की लतादिदी ने hi इन्हे भेजा है, मतलब वो नहीं आएँगी, वो मेरे लुंड को सेहला रही थी) आखिर तुम्हे मेरी याद आ hi gayi.(Usne मुस्कुराते हुए कहा) मेने तो लता को कहा है की साथ में करते है पर वो hi शर्माती है. (वो लगातार मेरे लुंड को सेहला रही thi)Usi का पानी लगा है न इस पर? (वो पूरी नंगी थी और में अधूरा था तो मेने भी उन्हें पलट दिया और सीधा लेता दिया)

शिव : अब बाटे hi करनी है की कुछ और भी करना है?

सरिता : में तो कब से तैयार हु. (कहते हुए उसने लुंड को अपनी छूट के छेड़ पर सेट कर दिया, और लुंड एक hi झटके में अंदर चला gaya)Ahhhhhhhh (वो दर्द से कराह uthi)Maar डालेगा क्या? (में रुक गया)

शिव : सॉरी.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Maafi मात मांग, बस आराम से कर, में यही हु, भागी नहीं जा रही. (मेने उन्हें छोड़ना सुरु कर diya)Shhhhh शह्ह्ह्ह शह्ह्हह्हह्हाईसे hi शह्ह्हह्ह्ह्ह. (थोड़ी देर उन्हें ऐसे छोड़ने के बाद मेने उन्हें घोड़ी बना दिया,) शहहहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ahhhh(Sarita को मज़ा आ रहा था) उनकी पतली कमर पकड़ कर लुंड अंदर बहार कर रहा था, छूट मेरे हिसाब की हो गयी थी, मुझे भी मज़ा आ रहा tha)Shhhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह shhhhhhh(Lagatar दस मिनट छोड़ने से वो झाड़ गयी, मेने लुंड बहार निकल लिया और गांड के छेड़ पर ढेर सारा थूक लगाया, सरिता को पता था की अब क्या होगा, वो अपनी हिम्मत बटोर रही थी, लुंड उसके गांड को फैलते हुए अंदर घुसने laga)Ahhhhhhhh mummiiiiiiiii(Shiv आराम से hi कर रहा था, पर लुंड मोटा था, थोड़ी देर बाद उसका गांड का छेड़ भी ढीला हो गया और लुंड अंदर बहार होने laga)Shhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह( वो करीब एक घंटा रुकी वह, मेने उनको अच्छे से छोड़ा और गांड भी मरी, वो भी बहोत खुस हो गयी, आधी रात को वो भी चली गयी, और में सो गया.

सुबह मेरी नींद नहीं खुली, लता उसको उठाने आयी, शिव चद्दर ओढ़ के सोया था पर उसके लुंड का उभर देख कर लग रहा था की वो नंगा hi था.

लता :शिव उठो. (शिव को हिलाते हुए उन्होंने लगी, शिव थोड़ा अलसाया पर उठा नहीं, उसने चद्दर हटाई तो वो नंगा hi था, उसने एक बार शिव के चेहरे को देखा, उसको पता था की वो नाराज हो गया था तो उसने लुंड को थम लिया और दबाने लगी, उसकी नरम हथेली के स्पर्श से लुंड में तनाव आने लगा, वो झुकी और लुंड को अपने गरम मुँह में भर लिया. मेने जग गया, मेने शिर ऊपर कर के देखा तो लता मेरा लुंड चूस रही थी, में उठ कर बेथ गया और उन्हें देखा, वो मुस्कुरा रही थी, पर मुझे गुस्सा था तो में खड़ा हो gaya,Lata समाज रही थी की वो नाराज़ hai)Kya हुआ, नाराज़ हो?

शिव : नहीं, बहोत खुस हु. (कहते हुए मेने अंडरवियर उठायी और पहन ने लगा, अभी घुटनो तक hi चढ़ाई थी की लता ने मेरा हाथ पकड़ लिया)

लता : क्यों नाराज हो रहे हो, एकदम अचानक हुआ तो में दर गयी थी.

शिव : अब दर नहीं लग रहा. (टॉन्ट मरते हुए में अंडरवियर ऊपर करने लगा तो वो उसको निचे खींचने लगी, मेने गुस्से से देखा और फिर कहा) छोडो, अब दर नहीं लग रहा?

लता : (वो बेबसी से boli)Dar से मेरा मतलब है की शर्म, अब इतनी भी बेशर्म नहीं हो गयी जो सबके सामने वो सब करने लागु, समाज न तू. (लता ने फिर से लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी)

शिव : (उनके हाथ से लुंड छुड़ाते हुए, मेने अंडरवियर पहन लिया) मुझे कुछ नहीं समझना है, कहते हुए दूसरे मेने कपडे भी पहन लिए और बिना उनकी और देखे निचे चला gaya)(Wahi लता की आँखों में ासु छलक आये, वो ऐसा कुछ नहीं करना चाहती थी, वो रात को जाना नहीं चाहती थी पर वो ऐसा नहीं कर सकती थी, क्या वो बेशर्म हो कर कह देती की अभी में कर रही हु, बाद में आती हु. थोड़ी देर बाद वो उठी ासु पोछे और निचे गयी)

शिव बाथरूम में चला गया था, वो उसके लिए नास्ता बनाने लगी, पर उसके चेहरे पर उदासी थी, शिव बहार आया और रूम में चला गया, वो तैयार हो कर बहार आया और स्कूल बैग लिए हुए था, लता नास्ता लिए हुए वह आयी.

शिव : मुझे नहीं करना नास्ता, में जा रहा हु. (लता रोने hi वाली थी, की वह बिना आ गयी)

बिना : क्यों नहीं करना नास्ता? (में क्या जवाब देता, में चुप हो gaya)Chalo बैठो, मुझे भी नास्ता करना है, बाद में दवाई भी कहानी है. (उन्होंने दवाई की बात की तो में पिघल गया और बैग रख कर नास्ता करने बेथ गया, पर में निचे hi देख रहा था) क्या हुआ तुम्हे?

शिव : (मेने अपने आपको शांत kiya)Kuchh नहीं.

बिना : अच्छा सुनो, आज सामान ट्रांसफर करना है.

शिव : इतनी क्या जल्दी है आपको जाने की.

बिना : अब में ठीक हु, और मुझे भी स्कूल ज्वाइन करना है, कब तक ऐसे बैठी रहूंगी. मेरी |जूही से बात हो गयी है, आज दोपहर को टेम्पो आ जायेगा.

शिव : ठीक है. (मेने नास्ता किया और स्कूल के लिए निकल गया. रेसस्स में मुझे प्रिंसिपल सर ने बुलवाया और मुझे बधाई दी और स्कूल में भी अनाउंस किया, जब में वापस क्लास में आया तो सब ने मुझे बधाई दी, स्कूल से छूट ते वक़्त हम दोस्तों में भी यही बात हो रही थी, तभी मुझे याद आया तो मेने महेश और हर्ष को kaha)Yaar दोपहर में फ्री हो?

हर्ष : हमे क्या काम होगा, बोल न.

शिव : वो बिना मैडम के घर सामान शिफ्ट करना है, आ पाओगे?

महेश : क्यों नहीं आएंगे, ऐसा चांस थोड़ी न मिस कर सकते है, मैडम का काम है तो जरूर आएंगे. (में उनका मतलब समाज रहा था, वो मैडम की नजरो में अच्छा बन न चाहते थे)

संयम : में भी आउंगी.

वैस्वी : में भी आउंगी.

सब तैयार थे तो हमने दोपहर को मिलने का टाइम नक्की किया और मेने उनको जूही के घर का एड्रेस दे दिया. फिर में और संयम घर के लिए निकल गए. संयम फिर से चिपक कर बेथ गयी.

शिव : क्या कर रही हो, थोड़ा दूर बैठो, रास्ता है. (संयम थोड़ा पीछे खिसक गयी, कल रात को वो शिव को याद कर रही थी और अपनी मुनिया को सेहला रही थी, जब से शिव ने उसकी मुनिया को छुआ था उसको हर पल वही याद आता था, बार बार उसको यही एहसास होता था की शिव उसकी मुनिया को छू रहा है, उसके शरीर में चिंगारिया छूटने लगती thi)(Mene मिरर से देखा तो वो नाराज दिख रही थी, मेने मुस्कुरा के kaha)Raste पर ये सब अच्छा लगता है क्या. (मेने समजते हुए कहा)

संयम : (उसने मुस्कुराते हुए शिव को देखा और टपक से boli)To घर चलो.

शिव : अभी क्या प्रोग्राम बना, हमे जाना भी है न.

संयम : बस थोड़ी देर. (उसने बिनती की, वो इतना प्यार से कह रही थी की मेने इंकार नहीं किया)

शिव : बस थोड़ी देर. (मेने मुस्कुराते हुए कहा तो वो खुस हो गयी, में सीधे उसके घर बाइक ले गया, जब दरवाजा खुला तो सामने अंकल थे)

हसन अंकल : अरे शिव, कैसे हो.

शिव : अच्छा हु अंकल, आप कैसे है?

हसन अंकल : अच्छा हु, औ अंदर आओ.

शिव : नहीं अंकल, में तो बस इसको छोड़ने आया था.

हसन अंकल : अरे पर अंदर तो आओ, कितने दिन हो गए मिले हुए.

शिव : जी अंकल (कहते हुए में अंडर जाने लगा, अंकल जैसे hi मुड़े मेने संयम को देखा तो उसका चेहरा लटक गया था, मुझे हसी आ गयी और ये उसने देख लिया तो वो अपना मुँह टेढ़ा करने लगी, में अंदर गया)

हसन अंकल : क्या हुआ, है क्यों रहे हो? (उन्होंने मुझे हस्ते हुए देख लिया था, में क्या कहता)

शिव : नहीं कुछ नहीं अंकल, बस एक बात याद आ गयी थी.

हसन अंकल : हमे भी बताओ, हम भी है लेते है.

शिव : (अब में उनको क्या बोलता तो मेने बात बदलने के इरादे से kaha)Koi खास बात नहीं थी, वैसे आज दोपहर को संयम को आना है, अगर आप इजाजत दे तो.

हसन अंकल : वो किस लिए? (वो सोफे पर बेथ चुके थे)

शिव : वैसे कुछ खास नहीं है, वो बिना मैडम है न, हमारी क्लास टीचर, उनके वह थोड़ा सामान सिफत करना है, तो हम सब वह जा रहे है.

हसन अंकल : ये तो अच्छी बात है, ले जाना, वैसे भी तुम हो तो फिर हमे क्या फ़िक्र.

शिव : जी अंकल. (तभी आंटी पानी ले कर आयी) नमस्ते आंटी.

ज़ोया : (थोड़ी हिचकिचाहट se)Namaste.

शिव : (मेने पानी पि liya)Achchha अंकल, में चलता हु.

हसन अंकल : ठीक है.

संयम : मुझे लेने आओगे तुम?

शिव : Ok, आ जाऊंगा.

फिर मेने सब से इजाजत ली और वह से निकल गया. घर पंहुचा तो बिना मैडम तैयार hi थी. हमने खाना खाया, मेरी और लता की एक दो बार नज़ारे मिली पर मेने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, पता नहीं मुझे क्यों गुस्सा था. मेने उन्हें भी बता दिया की मेरे दोस्त सब आनेवाले है, विणा और रंजन भी तैयार हो गयी, खाने के बाद हम सब वह से निकले, बिना मैडम, रंजन और विणा, ऑटो रिक्शा से उनके घर चले गए, में संयम के घर पंहुचा. उसको ले कर में जूही के घर पंहुचा, थोड़ी देर में संयम भी आ गयी और हर्ष और महेश भी आ गए, लगभग सब सामान जूही ने पैक कर दिया था, जो बाकि था उसको भी हम पैक करने लगे, फिर टेम्पो भी आ गया, उसके साथ में दो मजदूर भी थे, तो हमने सारा सामान चढ़ा दिया, टेम्पो निकल गया, में और जूही एक बाइक पर, संयम और वैस्वी उसके स्कूटर पर और महेश और हर्ष जूही के स्कूटर पर सवार थे.

वह हमने सारा सामान भी निचे उतर दिया, टेम्पो चला गया, पर सारा सामान भी सही करना था, तो सबने मिल कर सामान ठीक किया, इन सब भगा दौड़ी में, में वशिष्ठ को फ़ोन करना भूल गया.

हमारी और से कोई भी रिप्लाई न प् कर वो परेशान था. शाम को वो घर पंहुचा तब भी वो उखाड़ा उखाड़ा था, एक बार तो उसने कृपाली को भी डाट दिया. कृपाली कुछ नहीं बोली. वो उसकी प्रॉब्लम समझती थी, उसने सोचा की एक बार सीधे शिव से hi बात कर लू, पर वो काया बात करे उसको समाज नहीं आ रहा था. पर आखिर कर उसने शिव को फ़ोन लगा hi दिया.
 
अपडेट 205

हमने सारा सामान सेट कर दिया था, काफी टाइम हो गया था, सबको भूख भी लगी हुई थी, तो हमने बहार से खाना मंगवाने का सोचा, पर मुझे पता था की घर पर भी खाना बना होगा, पर बिना मैडम यहाँ थी तो फ़ोन भी नहीं कर सकते थे, मुझे महसूस हुआ की मुझे मोबाइल ले hi लेना चाहिए.

जूही : क्या सोच रहा है, जा कर नास्ता ले आ.

शिव : ये खाने का वक़्त भी हो रहा है, और सिर्फ नास्ता करना सही नहीं होगा, वैसे भी मैडम को बहार का खाना नहीं देना है, में सोच रहा था की घर hi चलते है, वैसे भी हमारा खाना तो बना hi होगा, आप सब के लिए जा कर थोड़ा और पका देंगे.

बिना : लता को परेशान करने की जरुरत नहीं है, में कुछ बना देती हु.

शिव : नहीं, आप भी थक गयी होंगी, हम घर hi चलते है. (फिर ये तय हुआ की सब घर hi चलते है, मेने सबको जाने के लिए कहा, बिना मैडम का भी स्कूटर था, तो फिर बिना मैडम और जूही, उनके स्कूटर पर बेथ गए, वैस्वी और संयम उनके स्कूटर पर, महेश और हर्ष ने जूही का स्कूटर ले लिया और में रंजन और विणा बाइक पर बेथ gaye)Aap लोग चलिए हम बाजार होते हुए आते है.

जूही : बाजार क्यों?

शिव : अभी मुझे ख्याल आया की लता से बात कर लू पर वह कोई फ़ोन नहीं है, मैडम थी तब तक प्रॉब्लम नहीं थी, तो में सोच रहा हु की एक मोबाइल ले लेता हु.

जूही : अभी के अभी क्या जरुरत है, कल ले लेना.

शिव : कल कल कर के में भूल जाता हु. आप लोग चलो में फटा फैट ले कर आता हु, वैसे भी महंगा नहीं लेना है. (फिर वो लोग वह से निकल गए, मेने एक मोबाइल लिया और सिम डलवाई और घर आ गया, जूही, संयम और वैस्वी काम में मदद कर रही थी, जाते hi रंजन और विणा भी जुट गयी, मेने मोबाइल कमरे में रक्खा और वह आ गया, मेने मदद करनी चाही तो सबने मन कर दिया. अभी ये सब चल रहा था की मेरे मोबाइल पर कॉल आया, मेने देखा तो कृपालिजी का फ़ोन था, मेरी समाज में नहीं आया की ये फ़ोन क्यों कर रही है? मेने फ़ोन उठालिया) Hello.

कृपाली : Hello. (वो बोल कर खामोस हो गयी)

शिव : Hello,..

कृपाली : (हिचकिचाते hue)Me कृपाली बोल रही हु.

शिव : आपका नंबर है मेरे पास, कहिये?

कृपाली : वो तुमसे कुछ बात करनी थी. (उनकी आवाज में हिचकिचाहट साफ़ महसूस हो रही थी)

शिव : है कहिये न.

कृपाली : (उसको समाज नहीं आ रहा था की क्या कहे, फिर भी वो हिचकिचाते हुए boli)Me ये कह रही थी ki...wo...

शिव : क्या बात है, कुछ परेशानी है kya?(Unki आवाज से मुझे थोड़ी चिंता हुई)

कृपाली : नहीं पर wo....(Thoda रुक kar)Kya स्वर्णादिदी का फ़ोन आया था?

शिव : (मेरे दिमाग की बत्ती जाली, मेने नहीं सोचा था की वो बिज़नेस के रिलेटेड फ़ोन karegi)Ha आया था. (कृपाली चुप हो गयी, वैसे भी अगर फ़ोन आया था और आगे कोई बात नहीं बढ़ी मतलब साफ़ था की शिव और उनके पार्टनर को ये डील मंजूर नहीं थी, उसको शर्मिंदगी महसूस होने लगी)

कृपाली : है, ठीक है, बस यही पूछने के लिए फ़ोन किया था, में रखती हु.

शिव : (तुरंत hi)Rukiye. (कृपाली अपने कान से फ़ोन हटा hi रही थी की वो रुक गयी) क्या आपने डील के लिए फ़ोन किया है? (कृपाली कुछ नहीं boli)Helloooo.

कृपाली : (वो क्या कहे कुछ समाज hi नहीं आ रहा था)

शिव : हलुओ.

कृपाली : (मायूस और धीमी वजाज me)Sun रही हु.

शिव : क्या हुआ, कोई समस्या है.

कृपाली : (उसको लगा की अब बात करनी hi पड़ेगी तो वो boli)Sorry, ये तुमलोगो के बुसिनेस्स का मामला है, मुझे नहीं बोलना chahiye.(Wo थोड़ी देर ruki)Ek बात पुछु, अगर बुरा न मनो तो?

शिव : है पूछिए?

कृपाली : अगर डील में कोई दिक्कत है तो मुझे बता सकते हो, में बात करुँगी उनसे. (वो बहोत सेहमी सेहमी बात कर रही थी, हम पहले hi तय कर चुके थे तो मेने उन्हें खुल कर बता दिया)

शिव : हमारी और से डील में कोई दिक्कत नहीं है, इनफैक्ट हम उस को फाइनल कर चुके है, बस थोड़ा बिजी था तो में बता नहीं पाया, वैसे भी आपका नाम आया तो फिर बात घर की हुई, और घर में नफा नुकसान नहीं देखा जाता, हमने डील करने का सोच hi लिया है. (कृपाली ने जब ये सुना की उसका नाम आते hi डील फाइनल कर दी थी तो उसको बहोत अच्छा लगा)

कृपाली : सच में? (अब उसकी आवाज में खुसी थी)

शिव : इसमें कहने की क्या बात है, वो आपके हस्बैंड है, तो फिर ज्यादा सोचना क्या.

करअपलि : (उसको बहोत अच्छा लग रहा था, की उसकी वजह से ये डील हो रही है, फिर भी उसने कन्फर्म kiya)Agar वो मेरे हस्बैंड न होते तो?

शिव : तो शायद हम सोचते, दूसरे सप्लायर को भी कांटेक्ट करते.

करुअपाली : (ये सुन कर तो जैसे उसकी खुसी का ठिकाना नहीं tha)Kya तुम सच में मेरी hi वजह से ये डील कर रहे हो?

शिव : बिलकुल, आप स्वर्णजी की बहन है, आपको भी में जनता हु, तो फिर बाहरवाले को क्यों फायदा करवाए.

कृपाली : में उनको अभी बताती हु.

शिव : आप मत बताना.

कृपाली : क्यों?

शिव : अगर उन्होंने पूछा की आपकी वजह से हमने क्यों डील की तो क्या जवाब देंगी आप?

कृपाली : (सोचते hue)Baat तो सही है तुम्हारी, पर वो बहोत परेशान है, तो में चाहती हु की उनकी परेशानी काम हो जाये.

शिव : ठीक है, फिर जैसी आपकी मर्जी. वैसे में ऑफिशियली कल उनसे बात कर लूंगा.

कृपाली : ठीक है, में अभी अपने तरीके से बात कर लेती हु (फिर थोड़ा रुक kar)Thank यू.

शिव : अरे नहीं, इसमें थैंक यू की क्या बात है.

कृपाली : नहीं शिव, थैंक यू तो बनता है, तुमने मेरी इज्जत रक्खी है.

शिव : मेने कहा न की घर की बात है.

कृपाली : थैंक यू, bye.

शिव : Bye.

कृपाली बहोत खुस हो गयी, वो सीधे अपने पति के पास गयी, वो लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था.

कृपाली : सुनो.

वशिष्ठ : क्या है? (थोड़ा चिढ़ते हुए)

कृपाली : (वो थोड़ा हिचकिचाई, पर फिर kaha)Meri दीदी से बात हुई, उन्होंने कहा की उनकी शिव से बात हो गयी है, वो डील के लिए राज़ी है, वो आपको कल ऑफिस के टाइम फ़ोन करेंगे.

वशिष्ठ : सच में? (उसके चेहरे पर खुसी थी, पर फिर मायूसी आ गयी)

कृपाली : क्या हुआ, इतनी खुसी की बात बताई फिर मायूस क्यों हो गए?

वशिष्ठ : क्यों की फिर मुझे तुम्हारे घरवालों का एहसान लेना पड़ा.

कृपाली : (पास में बैठते hue)Aap ऐसा क्यों सोचते है, और अगर आपको लगता है की उनकी वजह से ये हुआ है तो क्या आप ने अच्छी डील नहीं दी थी, आप भी एक बिजनेसमैन है, आप hi सोचिये, अगर आपको दो जगह से डील मील रही है और एक आपकी जान पहचान का है तो आप किस से डील करेंगे? (वशिष्ठ को भी बात सही लगी, पर फिर भी उसके मान में थोड़ा रंज तो था hi) आप न ज्यादा मात सोचिये, सब ठीक हो जायेगा. (वैसे भी डील की बात से वो खुस तो था hi)

वशिष्ठ : अच्छा ठीक है.

दूसरी तरफ में, जूही, मेरे दोस्त, सब ने खाना खा लिया, लता, विणा, रंजन और सरिता बाद में कहनेवाले थे. थोड़ी देर बाद सब जाने लगे, तो में भी उनके साथ गया, हमने मैडम का स्कूटर उनके घर रख दिया और फिर में हर्ष और महेश को उनके घर छोड़ आया. जब में घर लौटा तो सब ने खाना खा लिया था. पुरे दिन काम से अब मेरा मान शांत हुआ था, मुझे लता के साथ हुआ हल्का झगड़ा याद आ गया, में सोचने लगा की इसमें लता की क्या गलती है, में hi बेवकूफ था जो रूत गया था, वो एक लड़की है, वो कोई मेरी बीवी नहीं है जो कह दे की वो अपने पति के साथ है, अभी नहीं आएगी, मुझे बुरा लग रहा था, वो कितनी उदास दिख रही थी, मुझे मोबाइल याद आया, में उनके लिए hi लाया था, तो में उन्हें दे कर उन्हें खुस करना चाहता था, तो में बहार आया और उन्हें ढूंढने लगा, मुझे सरिता मिल गयी.

शिव : लता कहा है?

सरिता : वो बच्चोंवाले रूम में है. (में जाने hi लगा था की उन्होंने मुझे roka)Ek बात पुछु?

शिव : है पूछो.

सरिता : तुम दोनों के बिच कुछ हुआ है?

शिव : क्यों क्या हुआ?

सरिता : उसने सुबह से कुछ नहीं खाया.

शिव : क्या? (मुझे जैसे सदमा लगा) क्यों?

सरिता : सुबह तो उसने कहा था की उसका पेट ख़राब है तो वो नहीं खायेगी, तो मेने मान लिया था, पर अभी भी उसने नहीं खाया, और वो सुबह से उदास है, रात को क्या हुआ था. (मेने कोई जवाब नहीं दिया, और में सीधे उस रूम में गया, वह रंजन, विणा और गायत्रीदिदी भी थे, सब बच्चो को सुला रहे थे)

शिव : लता. (मेने आराम से उन्हें आवाज दी, सब मेरी और देखने लगे, लता ने भी मेरी और देखा) यहाँ आना. (वो ऐसे उठी जैसे शरीर में जान hi न हो, आहिस्ता से चलते हुए वो मेरे पास आयी, नज़ारे अभी भी झुकी हुई थी) खाना खाया? (वो कुछ नहीं बोली, बस शिर झुकाये कड़ी थी, सब देख रहे थे पर मुझे कोई परवाह नहीं थी, मेने फिर puchha)Khana खाया? (उन्होंने है में शिर हिलाया) मेरी और देख कर कहो. (उन्होंने शिर नहीं उठाया, मेने उन्हें कंधे से pakada)Meri और देखो. (फिर भी उन्होंने नहीं देखा, मेने उनका शिर पकड़ा और ऊपर उठाया, तो उनकी आंखे बंद थी और कोनो से आंसू निकल रहे थे, मेने तुरंत उन्हें अपने गले से लगा लिया, वो सुबकने लगी)

गायत्री : क्या हुआ? ये रो क्यों रही है? (रंजन और विणा भी सब देख रही थी)

शिव : कुछ नहीं. में बेवकूफ, जरा सी बात पर नाराज हो गया तो इसने सुबह से खाना नहीं खाया है.

गायत्री : क्या? (फिर लता की और देख kar)Mene पूछा भी था की क्यों नहीं खा रही है तो बोली की तबियत ख़राब है. मुझे क्या पता की तुम्हारी वजह से खाना नहीं खा रही है, क्या हुआ था?

शिव : कुछ नहीं. (कहते हुए में उन्हें अपनी आगोश में ले कर ले जाने लगा तो वो नहीं आ रही थी, में सबके सामने उनसे वो सब बाते नहीं करना चाहता था तो मेने उन्हें अपनी गॉड में hi उठा लिया और बहार ले जाने laga)Aap अपना काम करो, में खिला देता हु इसे. (लता अपना शिव मेरी छाती में छुपा रही थी, में उन्हें उठा कर बहार ले आया, बहार सरिता ने भी देखा) खाना निकालो. (मेने उन्हें कहा)

लता : (रट hue)Muje नहीं खाना. (सरिता मुझे देखने लगी)

शिव : तुम खाना निकालो. (उसने फटाफट एक थाली में खाना निकला, मेने लता को निचे उतर दिया, पर वो बेथ नहीं रही थी.

सरिता : पर हुआ क्या है, ये तो बताओ. (उसको समाज नहीं आ रहा था)

शिव : में आपको बाद में समझाऊंगा, अभी आप जाओ, और है ये आज मेरे साथ hi सोनेवाली है.

लता : (रट hue)Muje नहीं सोना है.

शिव :(सरिता फिर मुझे देखने lagi)Tum जाओ, में देखता हु. (सरिता चली गयी), तुम चाहती हो की में सबके सामने बात करू. (उसने पानी से भरी आँखों से मुझे dekha)Sorry बाबा, गलती हो गयी, मुझे वैसा बर्ताव नहीं करना चाहिए था. तुम सही थी, में hi बेवकूफ था, वैसे तो खुद को बहोत समझदार समझता हु पर बेवकूफी कर गया, सॉरी. (मेने कान पकड़ते हुए कहा, तो उन्होंने मेरा हाथ कान से हटड़िया और हलके से muskurayi)Dobara गलती नहीं करूँगा. प्लीज खा लो. (मेने बहोत प्यार से रिक्वेस्ट की, वो मुझे देख रही थी, मेने उनके ासु pochhe)Please. (मेने दोबारा रिक्वेस्ट ki)Chaho तो दो थप्पड़ मर लो (कहते हुए मेने उसका एक हाथ पकड़ा और अपने गाल पर मारने लगा तो उसने अपना हाथ पीछे खिंच लिया)

लता : (रोनी आवाज me)Pehle रुलाओ, फिर मनाओ.

शिव : सॉरी कहा न, सच में गलती हो गयी, अब गुस्सा थूको और खाना खा लो, वर्ण.

लता : वर्ण क्या? (मुँह फूलते हुए वो बोली)

शिव : कल से में भी भूख हड़ताल पर. (वो मुस्कुरायी और अपने ासु पोछने लगी, मेने उन्हें निचे बिठाया तो वो बेथ गयी, में भी बेथ गया, मेने खुद एक निवाला बनाया और उनकी और बढ़ाया, उन्होंने मुँह खोला और निवाला खाने लगी, एक एक कर के में निवाले खिलता गया, अब वो शांत हो चुकी थी, ासु भी थम चुके थे, तभी फिर सरितादिद वह आयी, हम दोनों को ऐसे देख कर वो भी मुस्कुरायी और पानी का गिलास ले कर हमारे पास रख दिया, और वही बेथ गयी)

सरिता : तो सुलह हो गयी. (में उन्हें देखते हुए मुस्कुराया और लता अपनी नज़ारे झुकाते हुए मुस्कुरायी). वैसे किस बात पर लाडे थे? मुझे तो अभी भी यकीं नहीं हो रहा की तुम दोनों लाडे.

लता : हम लाडे नहीं थे. (उसने शिर झुका कर कहा)

सरिता : अगर लाडे नहीं थे तो भूखी क्यों थी पूरा दिन. (वो कुछ नहीं बोली, बस शिर झुकाये रही)

शिव : तुम जाओ न यार, ये हम दोनों की बात है.

सरिता : तुम दोनों चाहो की न चाहो, मुझे तो झेलना hi पड़ेगा, में कही नहीं जानेवाली. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, फिर वो कड़ी हुई और रूम की और जानेलगी, पर जाते जाते फिर ruki)Agar मेरी जरुरत हो तो बुला लेना. (कहते हुए वो अर्थपूर्ण मुस्कुरायी और चली गयी)

लता ने खाना खा लिया, में थाली उठा कर खड़ा होने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया.

लता : में रख देती हु.

शिव : में रख देता हु, (कहते हुए में थाली रख aaya.)aur पानी चाहिए? (मेने पूछा तो उन्होंने न में गर्दन हिलायी, में सब रख कर उनके पास आया और उनकी और हाथ बढ़ाया तो उन्होंने भी अपना हाथ मुझे दे दिया, मेने उन्हें उठा दिया और अपने रूम की और ले जाने laga)(Lata शिव को देख रही थी और उसके पीछे कटी पतंग की तरह जा रही थी, उसने अंदर जा कर लता को अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया, लता सहरमते हुए शिर झुकाये कड़ी रही, शिव ने खुद hi बिस्तर लगाया, जब उसने लता को देखा तो वो उसको hi देख रही thi)Aise क्या देख रही हो, आ जाओ. (बिस्तर की और इस्सर कर के शिव ने कहा, तो वो धीमे कदमो से वह आयी तो शिव ने हाथ पकड़ कर अपनी गॉड में बिठा दिया, और उसकी कमर में हाथ दाल kar)Sorry लता, सच में मुझे लग रहा है की मेने कितनी बड़ी बेवकूफी कर दी थी, तुम सही थी.

लता : अब समाज आ रहा है, उस वक़्त समाज नहीं आ रहा था, ऊपर से मुँह फुला कर बेथ गए थे, पता है कितना रोई हु में.

शिव : सच में सॉरी, पर इसमें रोनेवाली क्या बात थी.

लता : और नहीं तो क्या, ऐसे रूत जाओगे तो में तो मर hi जाउंगी.

शिव : ै, ये मरने वर्ण की बात मात करो.

लता : और नहीं तो क्या, ऐसे मुँह फुला लिया, मुझसे मुँह मोड़ लिया जैसे में तो कोई हु hi नहीं. बीनडीडी ने बुलाया तो क्या कहती में?

शिव : मेरे लिया वो गैर नहीं थी, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी की अगर उन्हें पता भी चलता.

लता : तुम्हारी बात सही है पर उन्होंने मुझसे aisi-waisi कभी बात नहीं की है, में कैसे उनके सामने वैसे बेहवे करती, में समझती हु की तुम्हारे उनके साथ सम्बन्ध है, पर क्या तुमने कभी मेरे बारे में कहा है उन्हें, और कहा है तो भी क्या मुझे ये बताया है? अभी भी हमारे जीवन में एक पर्दा है, और में चाहूंगी की अभी ये पर्दा ढाका hi रहे.

शिव : सच कह रही हो तुम, तुम जान न चाहती हो की मेरे और उनके बिच कैसे सम्बन्ध है?

लता : सब समाज आता है मुझे, ऐसे hi वो यहाँ रहने नहीं आ गयी थी.

शिव : तुम्हे बुरा नहीं लगता?

लता : किस बात का बुरा मनु? तुम समझदार हो, ऐसे hi कोई निर्णय नहीं लिया होगा तुमने, और मुझे ये भी पता है की मुझे तुम कभी नहीं छोड़ोगे, फिर किसलिए बुरा मनु. अगर बात सिर्फ जिस्मानी सम्बन्ध की होती तो यहाँ तुम्हे कोई कमी नहीं है, तुम्हारे इससरए की देरी है, फिर तुम सिर्फ जिस्मानी सम्बन्ध के लिए तो वो सब नहीं कर रहे होंगे.

शिव : सच कहु तो कभी कभी मुझे hi समाज नहीं आता की में क्या कर रहा हु, और में ये भी नहीं मान सकता की मुझे बस ऐसे hi प्यार हो जाता है, ये प्यार है या कुछ और कुछ समाज नहीं आता.

लता : तुम्हारे लिए बहोत साडी है इस लिए तुम कंफ्यूज हो, पर हमारे लिए तुम एक hi हो, तो यक़ीनन में कह सकती हु की कोई भी ऐसी नहीं है जो तुमसे प्यार न करती हो, और उनके प्यार के आगे तुम झुक जाते हो.

शिव : पर क्या ये सही है, ऐसे तो में तुम सबको देखा दे रहा हु.

लता : ये बस नजरिये की बात है, और तुम पहले ऐसे नहीं हो जो इतनी साडी लड़कीओ के साथ सम्बन्ध बनाये हुए हो, इतिहास गवाह है की लोगो को बहोत साडी बीविया होती थी, और आज भी कई लोग होंगे, और तुमने किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं की, फिर क्यों फ़िक्र करते हो, जैसे तुम्हे हक़ है अपनी जिंदगी का फैसला करने का, उस तरह उन्हें भी हक़ है अपनी जिंदगी का फैसला करने का, वो बेवकूफ नहीं है जो सब जानते बजते तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाये हुए है.

शिव : कभी कभी समाज नहीं आता की ये खुस नसीबी है की bad-nasibi.

लता : सब भाग्य का खेल है, तो भाग्य पर छोड़ दो. मुझे तो अपने भाग्य से कोई शिकायत नहीं है. (उसने मुस्कुराते हुए साइड से मुझे देखते हुए कहा)

शिव : (में उसकी बात समाज रहा था पर फिर भी मेने भी मुस्कुराते हुए puchha)Kyu?

लता : क्यों की मेरे भाग्य ने तुम्हे मेरे भाग्य में लिखा है, उसने चाहे जो भी छिना हो मुझसे पर तुम्हे दे कर उसने सब कुछ दे दिया.

शिव : ऐसा क्यों लगता है तुम्हे? (मेने उनका नरम नरम पेट सहलाते हुए कहा)

लता : (इस छुअन से उसके चेहरे पर भी मुस्कान तैरने lagi)Aur नहीं तो क्या, तुम जैसा लड़का मुझे मिला ये क्या खुशनसीबी नहीं है मेरी.

शिव : में तो एक सामान्य सा लड़का हु, ऐसा मुजमे कुछ भी खास नहीं है. (मेने उनकी गर्दन पर किस करते हुए कहा)

लता : ये तुम्हे लगता है, क्या में देख नहीं सकती, कितनी सुन्दर सुन्दर लड़कीअ तेरे साथ के लिए तड़पती है, ऐसे में तू मुझे इतनी एहमियत देता है, ये क्या काम है.

शिव : वो सुन्दर है तो तुम भी काम नहीं हो (कहते हुए मेने उनके दोनों स्तन को हलके से दबाते हुए sehlaya)(Un बड़े बैंजो में अपने छोटे स्तनों को महसूस कर के लता की आंखे बंद हो गयी) तुम स्पेशल हो लता, सुंदरता सिर्फ जिस्म की नहीं होती, उसका मान भी सुन्दर होना चाहिए, और तुम्हारा मान सबसे सुन्दर है, इसका ये मतलब भी नहीं है की तुम्हारा जिस्म सुन्दर नहीं है, वो भी बहोत सुन्दर है.

लता : (अपने माध्यम आकर के स्तन मसाले जाने पर उसके बदन से चिंगारिया छूटने lagi)Kya में सच में तुजे इतनी पसंद हु?

शिव : है, बहोत पसंद हो. (शिव उसका ब्लाउज खोलने लगा तो उसने कोई विरोध नहीं किया, एक एक कर के उसके सरे हुक खुल गए, उसने ब्लाउज को भी निकल दिया, वो अब ब्रा में थी,





और फिर से शिव उसके स्तन मसलने लगा, उसकी सिस्किअ फूटने लगी, और अपने निचे कड़क लुंड को वो महसूस कर रही थी, उसको पता था की अभी थोड़ी देर में वो उसकी छूट में होगा, और यही सोच कर उसकी छूट से पानी फूटने laga)(Lund कड़क होने पर उसको एडजस्ट करना था तो मेने लता को थोड़ा ऊपर उठाया और लुंड को है कर के फिर से बिठा दिया, वो एक दम से शर्मा gayi)Kya हुआ? (वो बस शरमाते हुए मुस्कुरायी और ना में गर्दन हिलायी, जैसे कह रही हो की कुछ नहीं) तुम्हे वो पसंद है? (लता को पता था की शिव उसके लुंड के लिए पूछ रहा था तो उसने शरमाते हुए हां में गर्दन हिलायी, ऐसे hi हमारा थोड़ी देर चलता रहा, मेने उन्हें पूरा नंगा कर दिया और में भी पूरा नंगा हो गया था,





मेने उसकी भीगी छूट में ऊँगली डाली और अंदर बहार करने लगा तो वो जोर जोर से सिस्किअ लेने lagi)Tumhari छूट बहोत गर्म है लता. (लता को ये सुन कर बहोत शर्म आ रही थी पर एक अजीब सी खुसी भी मिल रही थी, अपनी छूट में वो लम्बी ऊँगली अंदर बहार हो रही थी, उसकी छूट और पानी बहा रही थी, आज वो शिव को पूरी तरह तृप्त करना चाहती थी, थोड़ी देर में hi उसको लगा की वो झाड़ जाएगी तो उसने शिव के हाथ को हटा दिया और वो खिसक कर बेथ gayi)Kya हुआ? (ना में गर्दन हिलाते हुए वो घोड़ी बन गयी और शिव के लुंड को अपने हाथ में ले कर हिलने लगी, शिव बैठा हुआ था, सो उसका शिर सहलाने लगा, उसने शिव का चेहरा देखा और फिर लुंड को अपने मुँह में भर लिया, उसका पूरा मुँह फ़ैल रहा था, उसको पता था की अभी ये वैसे hi उसकी छूट को भी फैलाएगा और उसको मज़ा देगा तो उसको इस अंग पर बहोत प्यार आने लगा और वो उसको जोर जोर से चूसने लगी और अपने शिर को आगे पीछे करने लगी, शिव उसके स्तन को सहलाने लगा, थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद उसने शिव को देखा और उसको देखते हुए उसकी गॉड में चढ़ गयी और लुंड को अपनी छूट पर सेट करते हुए वो बैठने लगी, लुंड उसकी छूट को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, एक बार फिर उसके चेहरे पर तनाव उभर आया पर थोड़ी ही देर में लुंड उसकी छूट को फैला चूका था, वो पूरी तरह से लुंड को अपने अंदर समाते हुए बेथ गयी और शिव को अपने गले से लगा लिया)

लता : Shhhhhhhhhhh. (वो उसका गाला और कन्धा चूमने लगी, वो थोड़ी देर वैसे hi रही ताकि उसकी छूट सही से एडजस्ट हो jaye)Me तुम्हे पसंद हु न शिव?

शिव : है, पर ऐसा क्यों पूछ रही हो?

लता : बस ऐसे hi, (फिर वो थोड़ी ऊपर निचे हुई, अब लुंड एडजस्ट हो गया था, और उसको मज़ा आने लगा tha)Aaj में कही नहीं जाउंगी शिव, तेरी जो मर्जी हो वो कर ले. (उसके कान को चाट ते हुए वो बोली)





शिव : (गर्म गर्म छूट मुझे महसूस हो रही थी, वो एकदम कासी हुई थी, में उनके कूल्हे मसल रहा था और उन्हे अपने लुंड पर ऊपर निचे करने laga)Aisi छूट डौगी तो पता है न क्या होगा?

लता : (वो मदहोशी में boli)Shhhhh, जो मर्जी कर ले, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चाहे मार दे मुझे. शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhh.(wo अपनी छूट में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस करते हुए बोली)

शिव : तू मेरी जान है, ऐसे कैसे मरने दू.





लता : (अपनी कमर को धक्का देते हुए लुंड को महसूस कर रही thi)Muje पता है, इसीलिए तो कहती हु की मेरे भाग्य से तू मिला है, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जैसे मर्जी हो कर मेरे साथ, आज पूरी आज़ादी है तुजे, जरा भी रेहम मात करना मुज पर, आज में चाहती हु की तू मुझे जी भर के चोदे.

(वो मदहोश हो कर क्या क्या बोल रही थी उसको hi पता नहीं tha)Shhhhhhh तुजे मेरी छूट अच्छी लगती है न शहहहहह तो अच्छे से छोड़ उसको शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, वो तुजे छोड़ कर भाग गयी थी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सजा दे उसे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह shhhhhhhhhh, कितना बड़ा है तेरा शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइइव, मुझे कभी मात छोड़ना शहहहहह एक पल के लिए भी नहीं shhhhhhhhhhh, में तेरे जिस्म की दुरी तो बर्दास्त कर लुंगी पर नाराज हो कर मुझसे दुरी मात कर लेना, शह्ह्ह्हह्ह में मर जाउंगी तेरे बगैर. (वो जोर जोर से अपनी छूट को लुंड पर मार रही थी, उसको दर्द हो रहा था पर दर्द भी उसको मज़ा दे रहा था, वो जैसे अपने आपको सजा दे रही थी, उसने अपने प्रेमी को नाराज़ किया था, भले hi वो कितनी भी सही थी पर उसने नाराज़ किया tha)Shhhhhhhh शीइइइइइव, शह्ह्ह्हह्ह मुझे अपने निचे लेता कर छोड़ शह्ह्ह्हह्ह, मुझे सजा दे shhhhhhhhhh.

शिव : मेने कहा न आपकी कोई गलती नहीं थी. (वो मुझे अपने ऊपर खींचते हुए निचे लेटने लगी तो में भी उनके ऊपर आ गया, और उनकी छूट को देखा, छोटी सी छूट को फैला कर मेरा लुंड अंदर घुसा हुआ था)

लता : उस पर कोई रहें मात कर शिव, वो दिखती मासूम है शह्ह्ह्ह पर उसने तुम्हे प्यासा छोड़ा था. (उनकी बात सुन कर में उनके ऊपर झुक गया और उनके होठो को अच्छी निचोड़ दिया फिर उनकी आँखों में देखते हुए बोलै)

शिव : मेने कहा न की कोई गलती नहीं थी तुम्हारी.

लता : गलती तो थी, अगर उन्हें पता चल भी जाता तो कोई आसमान नहीं टूटनेवाला था, आखिर एक दिन तो सबको पता चलना hi है, (वो मुझे खींच कर अपनी और खींचने lagi)Shhhhhhh सजा दे मुझे शिव शहहहहह सजा दे.

शिव : में कोई सजा नहीं दे सकता तुम्हे.

लता : तुजे मेरी कसम है शिव.

शिव : (चौंके hue)Ye क्या कह रही हो?

लता : (मेरा चेहरा सेहलते hue)Muje पता है की तू मुझे कोई सजा नहीं देगा, पर में आज छति हु की तू पूरी तरह से तृप्त हो, मुझे कुछ नहीं होगा, आज मुझे ऐसे छोड़ की मेरा शरीर थक जाये. (में जनता था की वो बाहेक रही है, पर उन्होंने अपनी कसम दी थी)

शिव : ठीक है, में करता हु, पर पहले अपनी कसम वापिस लो.

लता : पहले वडा कर की तेरी जैसी मर्ज़ी होगी वैसा करेगा तू.

शिव : ठीक है, पर पहले अपनी कसम वापिस लो.

लता : ठीक है, में अपनी कसम वापस लेती हु, मुझे सजा मत दे पर जैसी तेरी मर्ज़ी हो वैसे मेरे साथ करेगा, कर्जा न?

शिव : (में झुका और उन्हें किश करने लगा और साथ में जोर जोर से धक्के लगाने लगा)

लता : ुम्मम्ह ुम्मम्ह ुम्मम्ह (उसकी छूट में लुंड तेजी से अंदर बहार हो रहा था, धक्के भी तेज थे तो थप थप की आवाजे आ रही थी, उसको दर्द भी महसूस हो रहा था और लुंड उसकी बच्चेदानी के मुँह को ठोकर मर रहा था, पर वो आज अपने मर्द से औरत बन कर छोड़ना चाहती थी, दर्द के बावजूद उसको अजीब सी खुसी मिल रही थी, उस से सास लेना भी मुश्किल हो रहा था, उसने अपना मुँह साइड में कर लिया ताकि शिव के होठो से छूट जाये, और जोर जोर से सासे लेने लगी)





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लता : (तेज ढको से वो झड़ने के करीब पहुंच gayi)Shhhh फूऊ शह्ह्ह्ह फूऊऊऊ शह्ह्ह्ह फूऊऊऊ शहहह फूऊऊऊऊ. आआआ शहहहहह आआआ shhhhhhhhhhh अअअअअअअ शह्ह्ह्हह्ह आआआआ, में झाड़नेवाली हु जाएं शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उनके स्तन को जोरो से चूसते हुए धक्के लगाने लगा, मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा था, उनकी छूट मेरे लुंड को खिंच रही थी, दे दाना दान धक्को से में उन्हें छोड़ने लगा, में थोड़ा ऊपर हो गया और अपने हाथ टिका कर धक्के लगाने लगा)





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अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बसससससस mumiiiiiiiiiiiiii (वो अकड़ गयी और झड़ने लगी, में झुका और चिपक गया उस से तो वो भी मुझसे लिपट गयी और अपनी छूट को मेरे लुंड पर दबा दिया, एक मिनट में रुका रहा, फिर उनकी पकड़ ढीली हुई तो में उठ गया और उन्हें पलट कर घोड़ी बना दिया, और नाइके कूल्हे को चाटने लगा, वह गांड का छेड़ खुल बंद हो रहा था तो मेने उस पर जीभ लगायी और चाटने लगा, मन तो कर रहा था की इसको भी आज छोड़ दू, पर मेने अपने आपको संभाला, में फिर से छूट को चाटने लगा)

लता : (पीछे गर्दन करते hue)Usko क्यों छोड़ दिया?

शिव : किसको? (में जनता था की वो क्या बोल रही है पर में अनजान बना)

लता : जिसे अभी चाट रहा था. मेने कहा न की अपने मान की कर.

शिव : अपने मान की hi कर रहा हु, अभी उसकी बरी नहीं आयी है, जिस दिन उसकी बरी आएगी तब तुमसे पूछूंगा भी नहीं. (कहते हुए मेने लुंड छूट के छेड़ पर लगाया और अंदर दाल दिया, फिर धक्को की बरसात सुरु हो गयी, आज सच में मेने उनके दर्द को थोड़ा दर किनार कर दिया और उन्हें अच्छे से छोड़ने लगा)

लता : (दर्द हो रहा था पर उसको बहोत मज़ा आ रहा tha)Shhhhhh आह्हः अह्ह्ह्ह शहहहहह.





शिव : (उसके उछालते कूदते नितम्ब मुझे और उत्तेजित कर रहे थे)

लता : अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह बहोत बड़ा है ये शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने उन्हें हर तरह से छोड़ा, दो बार में झाड़ा, ओफ़्कौर्से बहार hi, और वो न जाने कितनी hi बात झड़ी थी, जब मेने तीसरी बार उनके पेट पर वीर्य छोड़ा तो वो थक कर चूर हो गयी थी, वो हिल भी नहीं रही थी, में भी बाजु में लुढ़क गया, थोड़ी देर बाद मेने उनके शरीर पर फैला मेरा वीर्य साफ़ किआ वो वो अधखुली आँखों से मुजेदेखने लगी.

शिव : बाथरूम जाना है? (मुझे जाना था इसलिए मेने पूछा, उन्होंने हां में गर्दन हिलायी, मेने अंडरवियर पहना और उन्हें चद्दर से लपेटा और उन्हें गॉड में उठा कर बाथरूम में ले गया, चद्दर हटा कर मेने उन्हें बिठाया तो वो मूतने लगी, में भी मूतने लगा, हम दोनों साथ में hi थे, मुझे उनकी छूट से निकलती मूत की धार दिख रही thi)(Lata को अजीब लग रहा था पर परेसुरे इतना था की उसने कुछ भी नहीं सोचा, पर जैसे hi उसका परेसुररे थोड़ा काम हुआ उसने देखा की शिव भी मूत रहा है तो उसने लुंड को देखा और उसमे से निकलती मूत की धार देखि, पता नहीं पर उसको अच्छा लगा, वो बस देखती hi रही, जब उसका मूतना पूरा हुआ तो वो उठने लगी पर जैसे उसमे ताकत hi नहीं बची थी, वो देवर का सहारा ले कर उठने लगी पर तब तक शिव ने उसको पकड़ लिया और उठा दिया, फिर चद्दर से लपेट कर उसको फिर से कमरे में ले गया, जैसे hi उसने उसको बिस्तर पर लेटाया वो फिर से लिपट गयी, में भी बगल में लेट गया, वो फिर मेरा लुंड सहलाने लगी.

शिव : क्या हुआ, मान नहीं भरा.

लता : सब कुछ भर गया है, पर क्या में इसको छू भी नहीं sakti?,isko पकड़ना अच्छा लगता है मुझे. (उनके छूने से लुंड फिर से जागने लगा था, पर मेने कुछ नहीं किया)

शिव : तुम ठीक हो न?

लता : ऐसा क्यों पूछ रहा है, (थोड़ी देर रुक kar)Me लड़की हु, इस से भी ज्यादा बरसस्त कर सकती हु, तुम्हे क्या लगता है की हम लड़कीअ नाजुक होती है?, बस दिखती वैसी है, उपरवाले ने हमे तुम्हारे जितनी ताकत भले न दी हो पर तुमसे ज्यादा सहने की ताकत दी है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Sach में तुम लड़कीओ को समझना बहोत मुश्किल है.

लता : तो कोशिस भी क्यों करते हो.

शिव : सो जाओ अब.

लता : वही तो कर रही हु. (कहते हुए उसने आंखे बंद कर ली पर लुंड को नहीं छोड़ा, वो इतनी थक गयी थी की थोड़ी hi देर में सो गयी, में भी सो गया)

सुबह उठ कर में फिर से अपने रूटीन में लग गया, स्कूल में बीनमदं भी आयी थी, मेने रेसस्स में उन्हें उनकी तबियत पूछ ली, दोपहर को खाने के बाद मेने जहान्वी को फ़ोन किया.

जहान्वी : Hello. (उसको आश्चर्य हो रहा था की शिव ने उसको फ़ोन किया)

शिव : कहा है आप?

जहान्वी : तुम्हे क्या जरुरत पद गयी, या उनसे मान भर गया? (उसने तना मारा)

शिव : आप कहा की बात कहा ले जा रही है, मेरा उनसे कभी मान नहीं भर सकता, मेने दूसरी बात के लिए फ़ोन किआ था.

जहान्वी : वो तो होगा hi, तुम्हे कहा जरुरत है मेरी. (उसने फिर तना मारा)

शिव : आपकी प्रॉब्लम क्या है, में वैसी बात करू तो भी प्रॉब्लम है, और न करू तो भी प्रॉब्लम है.

जहान्वी : (अपना मुँह टेढ़ामेढ़ा करते hue)Kyu फ़ोन किया?

शिव : मिलना था आपसे?

जहान्वी : किस लिए?

शिव : काम है.

जहान्वी : क्या काम है. (उसने फिर टेढ़ा उत्तर दिया)

शिव : मुझे किश करनी है.

जहान्वी : क्याआ. (में कुछ नहीं bola)Kya कहा तुमने?

शिव : मिलोगी की नहीं ये बताओ.

जहान्वी : कहा?

शिव : (उनकी बात से मुझे हसी आ gayi)Kis लिए मिलना चाहती हो आप, किश के लिए की काम के लिए?

जहान्वी : (झेप गयी, पर थोड़ा संभल कर boli)Jyada ओवर स्मार्ट मात बनो, बताओ कहा मिलना है?

शिव : इसीलिए पूछ रहा था न, की किस लिए मिलना चाहती हो तो जगह सही से बातपौ, किश के लिए हो तो एकांत में और काम के लिए मिलना हो तो फिर पब्लिक प्लेस में. (मेने उनकी खिंचाई की)

जहान्वी : मुझे नहीं मिलना है, किसी भी काम के लिए नहीं. (उसका मान तो बहोत था पर वो बस नखरा कर रही थी)

शिव : आपके hi फायदे की बात है, फिर मात कहना की कहा नहीं था मेने.

जहान्वी : क्या बात है, फ़ोन पर hi बता दो.

शिव : बात फ़ोन पर बतानेवाली नहीं है, मिलना है तो कहो.

जहान्वी : ठीक है, कॉफ़ी शॉप पर आ जाओ.

शिव : सहित, चलो कोई बात नहीं. (मेने जान बुज कर उन्हें छेड़ने के लिए hi ऐसा कहा था)

जहान्वी : (उसने मुस्कुराते हुए फ़ोन रख diya)Nautankibaj, ऐसे hi फसता होगा लड़कीओ को. पर में नहीं फस्नेवाली बच्चू. (फिर वो कड़ी हुई और तैयार होने लगी, लिपस्टिक लगायी और हल्का सा मकूप भी किया, एक मस्त टाइट टॉप और निचे स्कर्ट पहन कर वो अपनी गाडी से कॉफ़ी शॉप के लिए निकल गयी. जब वो वह पहुंची तो शिव आलरेडी वह पहुंच गया था, उसने गाड़ी थोड़ी दूर कड़ी की और शिव को देखने लगी, वो बाइक लिए खड़ा था, वह आती जाती लड़कीअ उसको देख रही थी, इवन अपने बॉयफ्रेंड के साथ वाली लड़कीअ भी उसको देख रही थी, पर वो किसी को नहीं देख रहा था, वो बस रस्ते पर इधर उधर देख रहा था, जैसे उसका इंतजार कर रहा हो, वो थोड़ी देर वह कड़ी रही और शिव को देखती रही, एक दो लड़कीओ ने शिव से बात करने की कोशिस की पर उसने ज्यादा भाव नहीं दिया, उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उसने गाड़ी आगे बधाई और वह पहुंच गयी, उसने गाड़ी पार्क की और शिव की और बढ़ी, शिव उसको ऊपर से निचे तक देख रहा था, वो जानती थी की वो कैसी लगती है तो इतराते हुए थोड़ी और लचक के चलते हुए उसके पास पहुंची.

जहान्वी : Hi.

शिव : Hi. आज साइट पर नहीं गयी?

जहान्वी : मेरी मर्जी. (उसने इत्र का जवाब दिया) कहो क्या काम है?

शिव : यही खड़े रहने का िर्रादा है क्या?

जहान्वी : क्यों, तुम तो कहते थे की तुम मुझे अफोर्ड नहीं कर सकते, रहने दो खामखा खर्चा हो जायेगा तुम्हारा.

शिव : वो तो हो hi जायेगा, पर में जो बात करना चाहता हु वो ऐसे अच्छी नहीं लगेगी, आइये अंदर बैठते है. (जहान्वी अदा से आगे बढ़ गयी, और अंदर जा कर फ्री टेबल ढूंढने लगी, उसने देखा फिर लड़कीअ शिव को देख रही थी वो एक खली टेबल की और बढ़ी और वह बेथ गयी, शिव आ कर उसके सामने बेथ गया, जहान्वी ने एक बार फिर कैफ़े में नजर दौड़ाई, लड़कीअ उसको जलन से देख रही थी, ये देख कर उसको बहोत अच्छा लगा, पर उसने जाहिर नहीं किया, एक वेटर उनके पास आया तो उसने आर्डर दे दिया, फिर शिव को देखते हुए बोली)

जहान्वी : अब बताओ, क्या बात है. (मेने उन्हें सब बता दिया, मेने उन्हें हमारे साथ काम करने के लिए कहा, वो सोच में पद गयी)

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : मुझे पापा से बात करनी पड़ेगी.

शिव : है तो कर लीजिये.

जहान्वी : पर मुझे नहीं लगता की वो मानेंगे.

शिव : में जनता हु, पर बात कर के तो देखिये. शायद मान जाये.

जहान्वी : तुम्हे पता है की ये प्रोजेक्ट तुमने छिना है उनसे, फिर वो क्यों तुम्हारा साथ देंगे.

शिव : मेने उनका साथ नहीं माँगा, मेने आपका साथ माँगा है, ये आपको सोचना है की आप अपने पापा की ऊँगली पकड़ कर hi चल सकती है की खुद भी कुछ कर सकती है.

जहान्वी : पर तुम्हे में नहीं, उनकी मचिनार्य चाहिए.

शिव : आप गलत सोच रही है, ये में किसी और से भी ले सकता हु, और ये आप अच्छी तरह से जानती है, पर में चाहता हु की आप हमसे जुड़े.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)wo क्यों?

शिव : (मजाक me)Shayad मेरा कोई चांस लग जाये?

जहान्वी : वैरी फनी. (फिर रुक kar)me सीरियसली पूछ रही हु.

शिव : भरोसा, मुझे आप पर भरोसा है, काम तो आप अच्छा करती hi है पर काम संभालती भी अच्छा है.

जहान्वी : तो अब तुम मुझे अपने वह काम पर रखना चाहते हो.

शिव : मेरी इतनी औकात नहीं है, में बस आपको अपने साथ चाहता हु. मेरा मतलब है की काम के लिए.

जहान्वी : है, उनसब के लिए तो आलरेडी स्टॉक है तुम्हारे पास. (उन्होंने जिस तरह से कहा मुझे हसी आ गयी, हमने कॉफ़ी पि ली थी, मेने बिल चुकाया और वह से बहार निकल आये)

शिव : थैंक यू फॉर कमिंग.

जहान्वी : अब इतनी भी परायी मात बनाओ की फॉर्मेलिटी करनी पड़े. (उसका मान नहीं कर रहा था जाने का, वो उसके साथ और रहना चाहती थी, पर उसको ये भी खटकता था की वो किसी और के साथ भी है, फिर अचानक उसको कुछ याद aaya)Us दिन के लिए सॉरी.

शिव : (मुझे समाज नहीं आया की वो किस बारेमे बात कर रही hai)Kon से दिन के लिए?

जहान्वी : वो उस दिन मेने तुम्हे वो bas....(Wo बास्टर्ड बोलना चाहती थी पर बोली नहीं) सॉरी यार, वो बस ऐसे hi निकल गया था, मेरा वो मतलब नहीं था.

शिव : अब जो सच है वो तो सच hi है.

जहान्वी : इसीलिए तो सॉरी बोल रही हु, वो तो बस जेनेरली निकलता है वैसे मेरे मुँह से निकल गया था, मेरा सच में वो मतलब नहीं था, (उसने मेरा हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, में देख रहा था की वो सच में गिलटी फील कर रही है)

शिव : मेने बुरा नहीं मन था, भूल जाइये वो सब.

जहान्वी : थैंक यू.

शिव : मेने कहा न भूल जाइये.

जहान्वी : ये थैंक यू था की तुमने मेरी बात का बुरा नहीं माना.

शिव : में क्यों बुरा मानूंगा, में जनता हु आपको, आप कैसी है मुझे पता है. (वो बस मुस्कुरायी)

जहान्वी : ठीक है, में पापा से बात कर के बताती हु. Bye.

शिव : Bye.

वो वह से चली गयी, मेने पवनसीर को फ़ोन किया तो वो बहार थे, मेने उनके साथ वशिस्ठजी के बारे में बात की और कुछ डिस्कस किया, उसके बाद मेने वशिस्ठजी को फ़ोन लगाया.

वशिष्ठ : Hello.

शिव : नमस्ते सर, में शिव बोल रहा हु.

वशिष्ठ : है बोलिये.

शिव : सर, आपसे एक रिक्वेस्ट थी, आप मुझे इस तरह से मात बुलाइये, ये तो पवनसीर की मेहरबानी है की उन्होंने मुझे अपना पार्टनर बनाया, वर्ण में कुछ भी नहीं हु, आप मुझसे तुम कहके बात कीजिये.

वशिष्ठ : ठीक है, पर एक बात कहूंगा, अगर तुम काबिल न होते तो वो तुम्हे अपना पार्टनर नहीं बनाते, कहो कैसे फ़ोन किया.

शिव : सर, हमने डीडे किया है की हम आपके साथ डील करेंगे.

वशिष्ठ : थैंक यू.

शिव : मेरी पवनसीर से बात हो गयी है, वो कागजात तैयार करवा रहे है, शायद दो चार रोज़ बाद में ले कर आ जाऊंगा.

वशिष्ठ : ठीक है, मुझे इंतजार रहेगा.

शिव : Ok सर, फिर मिलते है.

वशिष्ठ : Ok, मिलते है.

उनसे बात करने के बाद मेने कृपालिजी को भी मश्ग कर दिया की मेरी वशिस्ठजी से बात हो गयी है, उनका थैंक यू का भी रिप्लाई आ गया.

शाम को में जूही को लेने बीनमदं के घर चला गया. वो रेडी hi थी. बिना मैडम ने हम दोनों के लिए दूध बनाया, उसके बाद हम वह से स्टेडियम चले गए.

शिव के जाते hi जैसे बिना को कुछ याद आया, उसने अपने पर्स से सुखदेवजी का कार्ड निकला और उन्हें फ़ोन लगाया.

बिना : Hello.

सुखदेव : यस.

बिना : जी में क्सक्सक्स सहर से (अपने ससुराल का सहर बता कर) बिना बोल रही हु, चन्द्रभानजी की बहु.

सुखदेव : नमस्ते बेटी, कैसी हो.

तो बे कंटिन्यू.....
 
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