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बिना ने सुखदेवजी से बात करने के लिए उन्हें फ़ोन लगाया था, इतने दिनों से वो शिव के वह थी, और बिस्तर पर थी तो उसके दिमाग से hi निकल गया था, आज जैसे hi उसको याद आया उसने फ़ोन लगा दिया था, उसको शिव के बारे में जान न था.
बिना : Hello.
सुखदेव : यस.
बिना : जी में क्सक्सक्स सहर से (अपने ससुराल का सहर बता कर) बिना बोल रही हु, चन्द्रभानजी की बहु.
सुखदेव : नमस्ते बेटी, कैसी हो.
बिना : में ठीक हु, आप कैसे है?
सुखदेव : में भी ठीक हु, कहो कैसे कॉल किया.
बिना : मुझे आपसे कुछ पूछना था, में सोच रही थी की आपसे पेर्सनली मिलूंगी.
सुखदेव : ऐसी क्या बात है जो फ़ोन पर नहीं हो सकती. कोई विशेष बात है क्या?
बिना : में जब से शादी कर के यहाँ आयी हु मुझे कुछ जानकारी पता hi नहीं थी, कुछ समय पहले hi मुझे योगेंद्र अंकल के बारे में पता चला, तब तक तो मुझे पता भी नहीं था की मेरे चाचा ससुर भी है.
सुखदेव : है, वो क्यों बताएँगे. (उसने दुखी स्वर में कहा)
बिना : मेने सुना है वो आपके पास है, और ऐसा भी सुना है की उनकी तबियत भी ठीक नहीं है.
सुखदेव : (अफ़सोस जताते hue)Uska होना भी कोई होना है, कितने साल हो गए, वो बिस्तर पर hi है, बस सासे चल रही है.
बिना : और चंडीरिका आंटी?
सुखदेव : वो भी कुछ वैसी hi हालत में है, उनका भी होना न होना एक जैसा hi है. पर एक बात समाज में नहीं आयी, इतने सालो में तो किसी ने कोई खेर खबर नहीं ली, आज अचानक तुम्हे इन सब में क्यों दिलचस्पी हुई है?
बिना : मुझे पता hi नहीं था अंकल, अब जब पता चला है तो उनके बारे में जान ने की इच्छा हुई, आखिर वो और हम एक परिवार hi है न.
सुखदेव : जो उसके अपने है उन्हें तो कभी नहीं लगा की वो उनके अपने है, और तुम बहार से आयी हुई हो फिर भी तुम्हे फ़िक्र हो रही है.
बिना : उन्हें हुआ क्या है अंकल,.
सुखदेव : योगेंद्र तो पिछले कई सालो से कोमा में है, और भाभी अपने होश में नहीं है. बस यु कह सकते है की दोनों जिन्दा है, बाह यही तसल्ली है.
बिना : पर वो इन हालत में क्यों है?
सुखदेव : ये तो तुम्हे अपने घरवालों से पूछना चाहिए. (उन्होंने टॉन्ट में कहा)
बिना : मेने पूछा था, पर कोई कुछ नहीं बता रहा. या तो उन्हें जानकारी hi नहीं है.
सुखदेव : वो क्यों बताने लगे, सबने मिल कर पाप जो किया है.
बिना : सब से आपका क्या मतलब है अंकल, क्या मेरे ससुर भी?
सुखदेव : चुप रहना भी एक तरह से गुनाह hi है बेटी.
बिना : पर ये सब हुआ कैसे है अंकल.
सुखदेव : ये सब बात फ़ोन पर नहीं हो सकती बेटी.
बिना : में समझती हु, और इसीलिए में मिलना चाहती हु.
सुखदेव : फ़िलहाल तो में बहार हु, शायद अगले हफ्ते वापस आऊंगा, उसके बाद आ जाओ, वासे भी तुमसे मुलाकात हुई नहीं है, बस उस दिन पहलीबार hi मिला था, इस बहाने जान पहचान हो जाएगी.
बिना : जरूर अंकल, पर फिर भी क्या में एक सवाल पूछ सकती हु?
सुखदेव : है पूछो?
बिना : उनका एक बीटा भी है न?
सुखदेव : (एक आह सी निकल गयी उनके मुँह se)Hai नहीं था. (उनका गाला भी भर आया)
बिना : है, वही, पर मेने सुना है की उसकी lash........(Wo आगे बोल hi न सकीय)
सुखदेव : उस से क्या होता है, वो महज तीन साल का था, जिस पानी में बड़े बड़े नहीं बच सकते वह एक छोटे से बच्चे की क्या बिसात. (उनकी आवाज से लग रहा था की वो बहोत दुखी है और कभी भी रो सकते है, वो थोड़ी देर खामोश हो गए, बिना को भी लग रहा था की ये बात फ़ोन पर नहीं कर सकते, पर फिर भी उसको जान न था)
बिना : उसकी कोई फोटो है आपके पास?
सुखदेवी : (अपने आपको सँभालते hue)Tumhe क्यों जान न है ये सब, में नहीं याद करना चाहता उन मनहूस पालो को. (उन्होंने थोड़े गुस्से से कहा) जो भी जान न है वो उदयसिंह से पूछो. (उसने हलके गुस्से से कहा, बिना एक पल के लिए खामोश हो गयी)
बिना : में समझती हु अंकल, आप बहोत दुखी है.
सुखदेव : तुम क्या संजोगी, तुम्हे अंदाजा भी नहीं है की मेने क्या खोया है. (वो गुस्सा थे की रो रहे थे समाज नहीं आ रहा था)
बिना : अंकल, प्लीज सम्भालिये अपने आपको.
सुखदेव : में फ़ोन रख रहा हु, हम बाद में बात करेंगे.
बिना : सुनिए.....
सुखदेवजी ने फ़ोन रख दिया था, पर फिर भी बिना hello hello कर रही थी, वो थोड़ी देर फ़ोन को देखती रही, उसको भी लग रहा था की ऐसी बाते फ़ोन पर अच्छे से नहीं हो पायेगी, वो सोचने लगी की कैसे उनसे मिला जाये और मिलना जरुरी भी था, भले आज पूरी बात नहीं हो पायी थी पर बात की शुरुआत तो हो hi गयी थी. सुखदेवजी का इतना भावुक होना भी उसे समाज नहीं आया, वो समाज रही थी की वो उनके दोस्त है पर फिर भी इस बात को इतने साल हो गए है, अब तक तो उन्हें अपने आपको संभल लेना चाहिए था, ये बात उसकी समाज से बहार थी की आखिर ऐसी क्या बात है जिस की वजह से उनके वो जख्म अभी भी हरे hi है. अगर वो अपने दोस्त की फॅमिली के लिए दुखी है तो भी वो इस कदर क्यों दुखी है, वो काफी देर तक बेथ कर सोचती रही पर उसको कुछ भी समाज नहीं आ रहा था, इन सभी सवालो के जवाब सिर्फ और सिर्फ सुखदेवजी hi दे सकते थे, तो उनसे मिलना जरुरी था, आखिर ये शिव की जिंदगी से भी जुड़ा हुआ था, कैसे भी कर के उसको ये पता करना hi पड़ेगा, अभी भले hi वो गुस्सा है या दुखी है पर फिर भी वो दोबारा जरूर मिलेगी और और उनसे साडी सच्चाई जान कर रहेगी. फ़िलहाल तो वो कुछ नहीं कर सकती थी तो वो शाम के खाने की ऐयारी करने लगी. शिव और जूही भी आ गए, थोड़ी देर उनसे बात की, फिर शिव भी चला गया.
रात को खाने के बाद में बैठा था और फ़ोन देख रहा था की मुझे जहान्वी का मश्ग आया, मेने मश्ग खोला तो लिखा था
जहान्वी : पापा मन कर रहे है. (वैसे तो मुझे भी लगा था की वो मानेंगे नहीं.)
शिव : कॉल करसकती है? (पांच सेकंड में hi उनका फ़ोन आ गया, मेने कॉल रिसीव kiya)Hello.
जहान्वी : हम्म्म्म.
शिव : क्या हुआ?
जहान्वी : मेने कहा तो सही, पापा मन कर रहे है.
शिव : ये तो अच्छी बात है न. (मेने थोड़ा रिलैक्स हो कर कहा)
जहान्वी : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Achchhi बात है? वो कैसे?
शिव : वैसे भी आपको मेरे साथ काम नहीं करना था, तो आपके लिए तो अच्छी hi बात है न. (मेने हलके अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा)
जहान्वी : मजाक मात करो, I’m सीरियस.
शिव : जरुरी नहीं की कोई एक बार में hi मान जाये, वैसे क्या कहा उन्होंने.
जहान्वी : उनसे ज्यादा तो वो छछूंदर कूद रहा था, वो hi मन करवा रहा था. (उसने थोड़े गुस्से से कहा)
शिव : (मेरी समाज में नहीं आया की वो किसकी बात कर रही hai)Kiski बात कर रही है?
जहान्वी : मिक्की और किसकी. वो hi पापा को भड़का रहा था, पता नहीं आज कहा से टाइम पर घर पर आ गया था, वैसे तो रोज़ बहार hi रहता है, आज hi आना था उसको भी.
शिव : पर आप ज्यादा अपसेट क्यों हो रही हो, क्या आपको सच में मेरे साथ काम करना है?
जहान्वी : शिव, मजाक नहीं.
शिव : में कहा मजाक कर रहा हु, में सीरियसली hi पूछ रहा हु. वैसे आपकी बातो से तो लग रहा है की आप काम करना चाहती है, पर क्यों ये समाज नहीं आ रहा. वैसे तो में आपको पसंद नहीं हु. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)
जहान्वी : तुम्हारे पसंद होने न होने से क्या होता है, में इस प्रोजेक्ट की एहमियत समझती हु, ये प्रोजेक्ट मुझे मेरे कर्रिएर में बहोत काम देगा, इसका हिस्सा बन न मेरे लिए फायदेमंद होगा.
शिव : चलो इतनी तो अकाल है आपमें.
जहान्वी : आईईईई, मरूंगी जो कुछ ulta-sidha कहा तो, तुम्हे क्या में बेवकूफ लगती हु.
शिव : बिलकुल नहीं, अगर मुझे ऐसा कुछ भी लगता होता तो क्या में आपको काम के लिए पूछता. में सिर्फ मज़ाक कर रहा था, वैसे क्या बात हुई?
जहान्वी : खाने के बाद मेने उनसे बात की तो वो मिक्की भी वही बैठा था, तुम्हारा नाम सुन कर वो इतना भड़क गया की पापा को मुझे काम के लिए मन करने लगा.
शिव : क्यों?
जहान्वी : मुझे क्या पता, वो बस एक hi बात बोल रहा था की तुम्हारे साथ कोई काम न करू.
शिव : आपके पापा ने क्या कहा?
जहान्वी : वो बोलने कहा दे रहा था, बस वो hi अपनी चोंच डूबा रहा था, मम्मी ने भी कहा की अगर ये इतना मन कर रहा है तो फिर मात कर. वो मुझे कुछ बोलने hi नहीं दे रहा था.
शिव : अब ज्यादा अपसेट मात होइए, कल फिर से शांति से बात करना.
जहान्वी : मुझे भी यही लग रहा है.
शिव : अगर मेरी जरुरत हो तो मुझे बुला लेना.
जहान्वी : तुम आओगे पापा से बात करने? (उसने आश्चर्य से कहा)
शिव : क्यों नहीं आ सकता?
जहान्वी : तुम्हे पता है न वो तुमसे कितना चिढ़ते है.
शिव : वो उनकी सोच है, मुझे कोई दर नहीं उनसे बात करने में.
जहान्वी : ठीक है, तो में काल फ़ोन करुँगी तुम्हे.
शिव : है, पर स्कूल के बाद.
जहान्वी : पता है मुझे.
शिव : अच्छा ठीक है, मिलते है फिर कल.
जहान्वी : क्यों, बस काम की hi बात करनी थी?
शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ gayi)To और क्या बात करनी थी?
जहान्वी : मुझे क्या पता, तुम्हे पता होगा.
शिव : मुझे कैसे पता होगा?
जहान्वी : इतनी लड़कीओ को फसाया है तो मेने सोचा की मुज पर भी तरय करोगे. (कहते हुए वो थोड़ा शर्मा रही थी)
शिव : में क्यों किसी को फ़साने लगा.
जहान्वी : ऐसे hi क्या सब है तुम्हारे साथ. सबको कुछ न कुछ उल्टा सीधा बोल कर फसाया hi होगा न.
शिव : मेने किसी को नहीं फसाया, और में फ़ोन रख hi रहा था, आपने hi कहा की कोई और बात करू, क्या आप चाहती है की में आपको फासो. (मेने भी मुस्कुराते हुए पूछा)
जहान्वी : जैसी तुम्हारी फितरत है, तरय तो करोगे hi.
शिव : मुझे कोई तरय नहीं करना.
जहान्वी : क्यों?
शिव : अब मुझे लग रहा है आप मुझे उकसा रही है.
जहान्वी : में कोई उकसा नहीं रही हु, (वो खामोस हो गयी, थोड़ी देर बाद वो boli)Achcha आज वो लड़की क्या कह रही थी?
शिव : कोनसी लड़की?
जहान्वी : वो hi, कैफ़े के बहार.
शिव : आपको कैसे पता की वो मुझसे बात कर रही थी?
जहान्वी : (थोड़ा ऐटिटूड se)Bas पता है, तुम बात को मात घुमाओ, जो पूछा है उसका सही सही जवाब दो.
शिव : वो पूछ रही थी की में किसका इंतजार कर रहा हु.
जहान्वी : तो तुमने क्या कहा?
शिव : में क्या कहता, मेने उस से कहा की में किसी का भी इंतजार करू, उसको क्या?
जहान्वी : तो उसने क्या कहा?
शिव : वो सीधे hi मुझे पूछने लगी की अगर गफ का इंतजार नहीं कर रहे हो, तो वो तैयार है.
जहान्वी : (जलन se)Badi आयी, बर्फ बनानेवाली, कोण थी वो?
शिव : मुझे क्या पता, और वैसे भी आप क्यों गुस्सा हो रही है, मेरी hi बुद्धि भ्रस्ट हो गयी थी जो मेने मन कर दिया, वो खुद चल कर आयी थी, मुझे है कर देना चाहिए था , नहीं? (मेने छेड़ने के िर्रादे से कहा)
जहान्वी : (हलके गुस्से se)|To कर देते, वैसे भी तुम इन सब में एक्सपर्ट जो हो.
शिव : सच में गलती कर दी, आपको क्या लगता है, कल वो मिलेगी (मुझे वैसे तो हसी आ रही थी पर मेने खुद को कण्ट्रोल रक्खा)
जहान्वी : (हलके गुस्से se)Muje क्या पता, तुम hi जाना और देख लेना.
शिव : आप भी आना, अगर वो न आयी तो में बोर हो जाऊंगा.
जहान्वी : तो में टाइम पास हु, क्यों?
शिव : मेने ऐसा कब कहा?
जहान्वी : तुमने ऐसा hi कहा, में फ़ोन रख रही हु, bye. (कह के उसने कॉल काट दिया)
जहान्वी के साथ ऐसे हसी मजाक कर के मुझे बहोत हसी आ रही थी, उसके बाद मेने लता से बात की, मेने उसका हलचल पूछा तो वो शर्मा रही थी, पर वो ठीक थी, फिर में रंजन और विणा के पास गया, वो दोनों पढ़ने बैठी थी, मेरी उनसे भी बात हुई, गायत्रीदिदी और सरिता से भी इधर उधर की बात हुई, फिर में पढ़ने बेथ गया. रात को जब पढ़ाई ख़तम की तब में बहार आया और हर कमरे में देखा तो सब सो गए थे, तो में भी सो गया.
सुबह उठ कर में एक्सेरसिस के लिए चला गया, वह से लौट कर स्कूल चला गया. छोटी रेसस्स में महेश और हर्ष मुझे कैंटीन ले गए, मेने मन किया पर वो नहीं मने. संयम और वैस्वी को मेने बोल्दिया की में कैंटीन जा रहा हु, वो दोनों भी बाथरूम के लिए चली गयी. दोनों चुप चुप चल रही थी, बाथरूम से आने के बाद दोनों जब क्लास की और जाने लगी तो वैस्वी ने संयम को रोका.
वैस्वी : संयम, मुझे कुछ बात करनी है.
संयम : तो बोल न. (उसने नोर्मल्ली hi कहा)
वैस्वी : मुझे शिव से मिलना है.
संयम : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Wo बोल कर तो गया की कैंटीन जा रहा हु, चल कैंटीन चलते है फिर.
वैस्वी : (थोड़ी उल्जन में thi)Waise नहीं. (संयम गौर से वैस्वी को देखने लगी, वैस्वी ने इधर उधर देखा वो सोच रही थी की कहे की न कहे, पर फिर संयम की आँखों में देखते hue)Muje उस से अकेले में मिलना है.
संयम : (वो थोड़ा चौंक गयी की वैस्वी उसको सीधे सीधे hi कह रही है) तो मुझसे क्यों कह रही है, उस से hi बोल. (वो अंदर hi अंदर असहज थी पर उसने चेहरे पर दिखने नहीं दिया)
वैस्वी : तेरे बगैर ये मुमकिन नहीं है.
संयम : में सामजी नहीं.
वैस्वी : हर वक़्त हम साथ hi होते है तो... (उसने बात अधूरी छोड़ दी थी पर संयम समाज रही थी सब)
संयम : मतलब में तुजे खटक रही हु. (संयम ने नाराजगी से कहा)
वैस्वी : (संयम का हाथ पकड़ते hue)Aisi बात नहीं है, (कुछ रुक kar)Tu रोज़ उस से अकेले में मिलती है, मेने कुछ कहा क्या?
संयम : में कब अकेले मिलती हु (संयम ने जूथ बोलै)
वैस्वी : रोज़ तू उसके साथ जाती है तो अकेली hi होती है न.
संयम : हम घर जाते है, रस्ते पर होते है, अकेले कहा हुए.
वैस्वी : फिर भी तुम्हे जो कहना होता है वो कह देती होगी तू.
संयम : ऐसा कुछ नहीं है. (उसने नज़ारे चुराई)
वैस्वी : देख संयम, हमे ये आँख मिचौली खेलना बंद कर देना चाहिए. मुझे पता है, तेरे दिल में क्या है.
संयम : (मजाक में हस्ते hue)Achchha... क्या है?
वैस्वी : तू जानती है, मुझे कोई एतराज नहीं है उस बात से, ये फैसला शिव को लेने देते है की उसको किसके साथ रहना है.
संयम : तुजे जितना भरोसा है उतना hi मुझे भी भरोसा है. (उसने टॉन्ट में कहा)
वैस्वी : तू गलत समाज रही है, जो में कह रही हु वो तू समाज नहीं रही है और ऐसे hi लड़ रही है.
संयम : में कहा लड़ रही हु.
वैस्वी : अपना टोन देख, (शांति se)Dekh संयम, में सीधे सब्दो में कहती हु, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता की तुम्हारे और उसके बिच क्या है, मुझे बस इतना पता है की मुझे बस उसके साथ रहना है.
संयम : तू कहना चाहती है की हम दोनों hi.
वैस्वी : अगर ऐसा है तो ऐसा hi सही, मेने बहोत सोचा है इस बारे में, मुझे पता है की हर लड़की चाहती है की उसका प्रेमी उसका hi हो, पर शायद ये मेरे नसीब में नहीं है, मेने देखा है की जब भी में उसके करीब गयी हु वो मुझसे दुरी बना ने की कोशिस करता है, शायद उसकी वजह तुम हो. (संयम गौर से वैस्वी को देखने lagi)Aise क्या देख रही है, हम दोनों के बिच बहोत कुछ हो चूका है.
संयम : (वो कहा पीछे रहनेवाली thi)Hamare बिच भी बहोत कुछ हो चूका है.
वैस्वी : में समाज सकती हु, इसलिए कही बार सोचा की में हैट जाऊ, पर में नहीं कर सकती, सॉरी. (वैस्वी के चेहरे पर दुःख था, जिसे देख कर संयम को भी बुरा लगा)
संयम : सच कहु तो मेने भी तरय किया था. (उसके चेहरे पर भी दुःख था)
वैस्वी : मुझे लग रहा है की वो हम दोनों के बिच कंफ्यूज है, तो उसको टाइम देते है, तब तक हम अपने अपने तरीके से उसके साथ टाइम बिताते है.
संयम : वो कैसे?
वैस्वी : दोनों एक दूसरे की हेल्प करेंगे तो उस से मिलना आसान हो जायेगा, वर्ण न तुजे तेरे घर से इजाजत मिलेगी, न मुझे मेरे घर से, हम दोनों एक दूसरे का नाम ले कर बहार भी निकल सकते है.
संयम : (हस्ते hue)Matlab, तू और में साथ में जायेंगे.
वैस्वी : है मात, एक तो वैसे hi इतनी टेंशन हो रही है, (थोड़ी देर रुक kar)Koi रास्ता निकालेंगे.
संयम : (रेसेस ख़त्म होने की बेल्ल बज gayi)Chal अभी तो क्लास में जाना है. (चलते chalte)Kitna अजीब है न, हम दोनों सहेलिया एक hi लड़के के साथ.
वैस्वी : (वो भी muskurayi)Ajeeb तो है, पर मेने रील्स में भी देखा है, आजकल होता है ये सब.
संयम : सच में? मुझे तो मोबाइल इतना मिलता नहीं.
वैस्वी : है यार, मुझे भी पहले अजीब लगा था की ऐसा कैसे हो सकता है, पर देख, आज हम दोनों उसी मोड़ पर है. (दोनों क्लास में एंटर होनेही वाले थे की सामने से शिव और उसके दोस्त आते दिखे तो वो रुक गयी)
संयम : हो गया तुम लोगो का? (हर्ष की और देख कर)
हर्ष : कभी कभी हमें भी टाइम दे दिया करो, हम दोस्तों को भी टाइम चाहिए होता है.
संयम : तो ले जाना पाने घर, हमने कब मन किया है. क्यों वैस्वी? (कहते हुए वो दोनों है पड़ी)
हर्ष : ये hi नहीं आता है, मेने तो कितनी बार बोलै है. (उतने में टीचर भी आ गए तो हम अंदर चले गए और अपनी अपनी जगह पर बेथ गए, दो पहर में रेसस्स में हम सब साथ में बैठे हुए थे)
महेश : चलो न यार, एक दिन सब पिक्चर चलते है. (हर्ष ने भी कहा)
हर्ष : है यार, मज़े करेंगे.
संयम : मुझे नहीं आने देंगे.
वैस्वी : मुझे भी नहीं आने देंगे.
शिव : मुझे भी बहोत काम है, में भी नहीं आ पाउँगा.
हर्ष : तुजे क्या काम है?, तू तो बोल रहा था की वो नौकरी छोड़ रहा है.
शिव : में नौकरी नहीं करता था. मेरे जो पार्टनर है उनकी साइट थी तो वह काम देखता था, अब दूसरी साइट चालू कर रहे है तो उसका सब देखना है.
हर्ष : तेरा भी अजीब है यार, यहाँ हम लोगो को ये पढ़ाई hi बूज लगती है, उसको करते करते hi दम निकल जाता है और तू है की इतना सब भी करलेता है.
संयम : वो तुम्हारी तरह नहीं है.
हर्ष : तू तो बोल hi मत छिपकली की दम.
संयम : क्या बोलै तुमने (वो घुटनो के बल कड़ी हो गयी और मरने का एक्शन करने lagi)Ek लगाउंगी न तो समाज आएगा.
शिव : तुम लोग लड़ो मात यार. (ये हसी मज़ाक तो अब आम था)
वैस्वी : कोनसा काम चालू कर रहे हो. (उसने बहोत शांति से पूछा)
शिव : वो एक फैक्ट्री का काम है.
महेश : फैक्ट्री का काम है मतलब? क्या करेगा तू?
शिव : हमारी कंपनी एक फैक्ट्री का कंस्ट्रक्शन कर रही है.
महेश : मतलब तुम लोग एक पूरी फैक्ट्री बनाओगे.
संयम : और नहीं तो क्या, तुम्हारी तरह मक्खिया नहीं मर रहा वो. (महेश बोलने वाला hi था पर वो चुप रहा)
शिव : है.
वैस्वी : तो फिर वो रेस?
शिव : वो भी चालू hi है, अभी सायद कुछ दिनों के लिए बहार भी जाना पड़ेगा.
वैस्वी : कितने दिन?
शिव : शायद महीना.
वैस्वी : फिर पढ़ाई?
हर्ष : उसको पढ़ाई की क्या जरुरत है? (संयम बोलनेवाली थी पर शिव ने उसको रोका)
शिव : जरुरत है भाई. (वैस्वी की और देख kar)Dekhte है, पर पढ़ाई भी करनी पड़ेगी hi.
ये रेसस्स भी ख़त्म हो गयी, हम सब क्लास में चले गए. स्कूल से निकलने के बाद जब हम पार्किंग में पहुंचे तो संयम और वैस्वी खड़े थे. वो दोनों कुछ बात कर रही थी, हमे देख कर वो चुप हो गयी, फिर हम अपने अपने घर की और निकल गए. रस्ते में मेने संयम से पूछा,
शिव : ऐसी क्या बात कर रही थी दोनों?
संयम : तुजे क्या, ये हम दोनों की बात है.
शिव : में तो ऐसे hi पूछ रहा था, दोनों बहोत गंभीर थी तो मुझे लगा की कोई प्रॉब्लम है, इस लिए पूछा.
संयम : प्रॉब्लम तो है, पर हम दोनों सुलजालेंगी.
शिव :ऐसी क्या प्रॉब्लम है, मुझे बताओ, में भी कुछ मदद कर दूंगा.
संयम : तू hi प्रॉब्लम है, तू क्या सुलझाएगा?
शिव : में समजा नहीं.
संयम : छोड़ न वो, चल घर चल.
शिव : नहीं चल सकता, मुझे कही जाना है.
संयम : ये तेरा हर वक़्त का नाटक है, थोड़ा भी टाइम नहीं निकल सकता. (उसने रूठते हुए कहा)
शिव : हस्ते हुए, तू थोड़ी देर में मानेगी क्या?
संयम : जब कुछ न मिल रहा हो तो थोड़े से काम चलना पड़ता है. (उसने मायूसी से कहा, में उसका चेहरा मिरर में देख रहा था)
शिव : अच्छा चल आता हु, पर ज्यादा नहीं रुकूंगा.
संयम : (खुस होते hue)Tu चल तो सही. (वो बहोत खुस थी, में उसके घर चला गया, अंदर गए तो आंटी थी, मेने उनको नमस्ते किया, उन्होंने भी हल्का झिझकते हुए नमस्ते kaha)Chal में तुजे वो किताब दे देती हु. (मेने आंटी की और देखा तो वो कुछ नहीं बोली, संयम मुझे खींचते hue)Chal न, कब से कह रहा था की देर हो रही है तो अब देर नहीं हो रही. (आंटी वापस किचन की और मुद गयी, वो मुझे खिंच कर ऊपर ले गयी, जैसे hi हम उसके रूम में गए उसने अपना बैग बिस्तर पर फैका और सीधी मुझसे लिपट ते हुए मुझे किश करने लगी,

मेने भी उसको कमर से पकड़ लिया और उसको किश करने लगा, वो बहोत गरम हो रही थी, अब इतनी गर्म लड़की मुझे किश करेगी तो में कैसे पीछे रहता, मेने अपने हाथ उसकी शर्ट से अंदर डेल और उसके स्तन को ब्रा के ऊपर से hi दबाया.)

उम्मंहहह ुम्मःहःहः ummmhhhh)Wo मेरे होठो को जोर जोर से चाटने लगी) मेने हाथ निचे किये और उसके कूल्हों को पकड़ लिया और मसल दिया, उसने किश तोड़ी और मेरे गले लगी rahi)Shhhhhhh शीइइइइइइइव. मुझसे नहीं रहा जा रहा यार.

शिव : (मेने उसके स्कर्ट हो थोड़ा ऊपर किया और उसकी पंतय के ऊपर से hi उसके कूल्हों को सहलाने laga)Kya हो रहा है जो रहा नहीं जा रहा. (कहते हुए में उसके कूल्हे मसलने लगा)
समयम : शह्ह्ह्ह पतानहीं क्या हो रहा है, मुझे हर पल तुम्हारी याद आती है शह्ह्ह्हह्ह, मेने पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, जिस दिन से तूने वह छुआ है में रोज़ तुजे याद करती हु.
शिव : (उसके कूल्हों को मसलते hue)Kaha छुआ है?
संयम : वह आगे.
शिव : (उसकी छूट पर हाथ रखते हुए मेने छूट को sehlaya)Yaha?
संयम : शहहहहह हआ शिव वह. (में उसकी छूट सहलाने लगा तो सिसकिया लेने lagi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह. (मेने उसका स्कर्ट ऊपर किया और उसकी छूट को पंतय के ऊपर से hi पकड़ लिया)

शहहहहह शीइइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मुझे कुछ हो रहा है सीईव शह्ह्ह्ह करते रहो वह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (में लगातार उसकी छूट मसलता रहा, वो गर्म गर्म सिसकिया ले रही thi)Ander हाथ डालो न शिव. (मेने भी उसकी पंतय में हाथ दाल दिया, वह छूट के बालो का एहसास हो रहा था, साथ में छूट के नरम होठो का एहसास, मेरा लुंड भी कूदने लगा, मेने दरार में ऊँगली firayi)Shhhhhh शीइइइइव शहहहहह ये क्या हो रहा है मुझे)
निचे ज़ोया रह देख रही थी की वो दोनों कब निचे आये और वो उन्हें सरबत दे, पर थोड़ी देर लग गयी तो उसको कुछ शक हुआ, वो बिना आवाज किये ऊपर जाने lagi)(Waha में संयम की छूट को सेहला रहा था, वो अपनी कमर झटका रही थी, उसने पंत के ऊपर से hi मेरा लुंड पकड़ लिया और उसको दबाने लगी) शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है यार. (में लगातार छूट सेहला रहा था, अचानक hi वो झटके कहते हुए झड़ने lagi)Shhhhhh शीइइइइइइव. (बहार ज़ोया पहुंच चुकी थी, उसको समझते देर न लगी की अंदर क्या हो रहा है, उसको गुस्सा आने लगा, वो सोच hi रही थी की अंदर जा कर दोनों को डाट दे)
शिव : शह्ह्ह्ह, तुमने उसको इतना जोरसे क्यों पकड़ा है? छोडो दर्द हो रहा है.
संयम : पता नहीं.... वो मुझे बहोत अच्छा लगता है.... , जिस दिन से उसको देखा है में रोज़ उसको याद करती हु. (अचानक मेरे दिमाग में आया की मेने इसको कब दिखाया)
शिव : तुमने ये कब देखा?
संयम : जब तुम ामी के साथ वो सब कर रहे थे. (संयम मदहोशी में सब सच बोल गयी)
शिव : कब?
संयम : आप के ससुराल में shhhhhhhhhh. (में उसको देखने लगा, मेने छूट से हाथ हटा लिए, उसने आंखे खोली, उसको एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी है, वो मुझे देख रही थी और समझने की कोशिस करने लगी की में क्या सोच रहा हु)
शिव : तुम्हे पता था?
संयम : (अपनी गर्दन झुका ke)Haaa.
शिव : तो फिर तुमने क्यों कुछ कहा नहीं.
संयम : (मेरी आँखों में देखते hue)Kya कहती, उस वक़्त तो इतना गुस्सा आया था की मान कर रहा था की सबको बता दू.
शिव : तो फिर बताया क्यों नहीं?
संयम : क्या बताती, अगर बतादेति तो तुम्हारी और अम्मी की hi बेइज्जती होनी थी. नुकसान तो मेरा hi होना था.
शिव : सॉरी यार वो सब हो गया.
संयम : अब सॉरी कहने से क्या फायदा, और अब वो बात पुराणी हो चुकी है, अगर मेने तुम्हे माफ़ न किया होता तो क्या उसके बाद में तुम्हारे साथ होती. (बहार कड़ी ज़ोया की आँखों से ासु बह रहे थे, माँ के तौर पर उसको अपनी बेटी के लिए चिंता थी तो वो ऊपर आयी थी, पर यहाँ मामला उल्टा hi हो गया था, वो खुद गुनेहगार हो चुकी थी, वो वापस लौट hi रही थी की उसके कानो में शिव की बात पड़ी)
शिव : तुमने आंटी से बात की? (ज़ोया जाते जाते रुक गयी)
संयम : उनसे भी क्या बात करती? उनपर भी गुस्सा थी, अब्बू को सब बताना चाहती थी में, पर फिर मेने अम्मी की तड़प महसूस की, भले hi में नादाँ हु पर ित्नीभी नहीं की समाज न सकू, मुझे समाज है की वो क्यों तड़प रही है, कई बार मेने उनकी और अब्बू की लड़ाई सुनी है. शायद वो भी इस मज़े के लिए भावनाओ में बह गयी.
शिव : (मेरी अभी भी समाज में नहीं आ रहा था की जब उसको पता था तो उसने गुस्सा क्यों नहीं kiya)Tumhe उनपर या मुज पर गुस्सा नहीं आ रहा?
संयम : गुस्सा कर के भी क्या हासिल होगा, अब इतना तो समाज सकती हु की तुम वैसे नहीं हो, अगर तुम हवस के पुजारी होते तो यहाँ में तुम्हे इतनी मिन्नतें न कर रही होती, तुम्हे इतने मौके दिए फिर भी तुम दूर न भाग रहे होते, इतना तो समाज में आता है की तुमने कोई जबरदस्ती तो नहीं की होगी, जो भी हुआ है वो तुम दोनों की मर्जी से हुआ है. अगर में उन्हें अम्मी के तौर पर देखु तो गुस्सा आता है, पर फिर लगता है की वो भी एक औरत है, अगर कुछ पल खुसी प् ली तो क्या गुनाह कर दिया उन्होंने.
शिव : (उसको गले लगते hue)Sorry यार. ी ऍम रॉय सॉरी.
संयम : अब सॉरी बोल के क्या फायदा, जो होना था वो तो हो गया.
शिव : अब तू समाज रही है न की में क्यों तुमसे दूर रह रहा हु, मेरी जिंदगी ऐसे hi ुलजी हुई है, में नहीं चाहता की तुम भी उसमे उलझ कर रह जाओ.
संयम : अब बहोत देर हो चुकी है शिव. में उलझ चुकी हु, अब छह कर भी तुम मुझे अलग नहीं कर पाओगे.
शिव : क्या मतलब है तुम्हारा?
संयम : छोडो न ये सब, पता नहीं कैसे मेरे मुँह से निकल गया, अच्छा खासा मूड ख़राब हो गया.
शिव : क्या चाहती थी तुम? (मेने मुस्कुराते हुए उसकी लग हटते हुए कहा)
संयम : सब कुछ.
शिव : सॉरी डिअर, पर वो सब में अभी तुम्हे नहीं दे सकता.
संयम : क्यों?
शिव : इतना तो में समाज गया हु की तुम समझदार हो, सब कुछ सोच समाज कर कर रही हो, पर फिर भी अभी कुछ और वक़्त दो अपने आप को, और मुझे भी.
संयम : यही तुम गलती कर रहे हो, समझदार होने से कुछ नहीं होता, क्या अम्मी समझदार नहीं है, फिर भी उन्होंने गलती कर दी न, वैसे तो तुम भी समाज दर हो, फिर भी गलती करते hi हो न. (अब यहाँ रुकना ज़ोया को सही नहीं लगा, वो बिना कोई आवाज किये अपने कमरे में लौट गयी, पर ासु नहीं थम रहे थे उसके)
शिव : अब में चलता हु.
संयम : (उसका शर्ट पकड़ ते hue)Thodi देर रुक जाओ न.
शिव : निचे आंटी है, वो क्या सोचेगी.
संयम : अभी भी तुम्हे उनकी फ़िक्र है? अगर वो मुझे कुछ कहेंगी तो क्या में चुप रहूंगी?
शिव : पागल मात बनो, अगर उन्हें पता चला की तुम जानती हो तो वो अपनी hi नजर में गिर जाएँगी, मेहरबानी कर के उन्हें कुछ मात बताना.
संयम : उसमे मेरा क्या फायदा. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)
शिव : मर जाएगी, देखा है न तुमने मेरा?
संयम : जा जा, किसी और को डरना, में नहीं डरनेवाली. (उसने भी इतराते हुए कहा)
शिव : अजीब हो तुम भी, पर सच में बहोत प्यारी हो.
संयम : अगर इतनी hi प्यारी लगती तो सिर्फ मुझसे प्यार करते, इसलिए मक्खन मात लगाओ. मुझे सब समाज आ रहा है. में और वैस्वी तुम्हारी hi बात कर रहे थे स्कूल में. कैसे तुम हम दोनों को उल्लू बना रहे हो.
शिव : अगर पता है की में उल्लू बना रहा हु तो फिर भगा क्यों नहीं देती मुझे.
संयम : यही तो प्रॉब्लम है, दिमाग सब समझता है पर ये दिल नहीं मान रहा.
शिव : तुमलोगो को समजना नामुमकिन है. चल अब में चलता हु.
संयम : फिर कब मिलेगा? (उसका शर्ट खींचते हुए)
शिव : मिलूंगा, पर इतना hi, समाज रही हो न?
संयम : वो में देखलूँगी. (उसने सरारती मुस्कान से कहा) वैसे वो भी तड़प रही है तुजसे मिलने के लिए.
शिव : कोण?
संयम : वैस्वी और कौन, वो तुजसे अकेले में मिलना चाहती है, मेरी मदद मांग रही थी.
शिव : तो तूने क्या कहा?
संयम : और क्या कहती, मदद करने का वडा कर दिया. (वो मुस्कुराते हुए boli)Wo भी तड़प hi रही है.
शिव : न मुमकिन है, सच में. (मेने शिर हिलाया)
संयम : जाते जाते एक किस तो करता जा, कुछ सुकून मिलेगा दिल को. (मेने उसकी आँखों में देखा, वह सिर्फ प्यार hi था, में झुकता चला गया और उसके नरम होठो को किश किया)
शिव : (थोड़ी देर baad)Chal अब. (हम दोनों निचे आये, आंटी नहीं दिखी हमे)
संयम : अम्मीईईई. (ज़ोया ने अपने ासु पोछे और बोली)
ज़ोया : है बेटीइ.
संयम : अम्मीय शिव जा रहा है.
ज़ोया : (वो अपने रूम से बहार नहीं aayi)Ha ठीक है.
संयम : (उसने अपने कंधे उंचकाये)
शिव : ठीक है, bye.
में वह से निकल गया, मेरे दिमाग में संयम की बात घूम रही थी, उलझने बढ़ती hi जा रही थी. में घर पहुंच गया, मेरे घर पर भी काम चल रहा था तो थोड़ी देर वह देखा, फिर खाना खाया. मेने जहान्वी को भी मश्ग कर दिया की क्या हुआ?. तो उसका रिप्लाई भी आ गया की उनके ऑफिस आ जाऊ. मेने लता को बोलै और वह से निकल गया.

बिना ने सुखदेवजी से बात करने के लिए उन्हें फ़ोन लगाया था, इतने दिनों से वो शिव के वह थी, और बिस्तर पर थी तो उसके दिमाग से hi निकल गया था, आज जैसे hi उसको याद आया उसने फ़ोन लगा दिया था, उसको शिव के बारे में जान न था.
बिना : Hello.
सुखदेव : यस.
बिना : जी में क्सक्सक्स सहर से (अपने ससुराल का सहर बता कर) बिना बोल रही हु, चन्द्रभानजी की बहु.
सुखदेव : नमस्ते बेटी, कैसी हो.
बिना : में ठीक हु, आप कैसे है?
सुखदेव : में भी ठीक हु, कहो कैसे कॉल किया.
बिना : मुझे आपसे कुछ पूछना था, में सोच रही थी की आपसे पेर्सनली मिलूंगी.
सुखदेव : ऐसी क्या बात है जो फ़ोन पर नहीं हो सकती. कोई विशेष बात है क्या?
बिना : में जब से शादी कर के यहाँ आयी हु मुझे कुछ जानकारी पता hi नहीं थी, कुछ समय पहले hi मुझे योगेंद्र अंकल के बारे में पता चला, तब तक तो मुझे पता भी नहीं था की मेरे चाचा ससुर भी है.
सुखदेव : है, वो क्यों बताएँगे. (उसने दुखी स्वर में कहा)
बिना : मेने सुना है वो आपके पास है, और ऐसा भी सुना है की उनकी तबियत भी ठीक नहीं है.
सुखदेव : (अफ़सोस जताते hue)Uska होना भी कोई होना है, कितने साल हो गए, वो बिस्तर पर hi है, बस सासे चल रही है.
बिना : और चंडीरिका आंटी?
सुखदेव : वो भी कुछ वैसी hi हालत में है, उनका भी होना न होना एक जैसा hi है. पर एक बात समाज में नहीं आयी, इतने सालो में तो किसी ने कोई खेर खबर नहीं ली, आज अचानक तुम्हे इन सब में क्यों दिलचस्पी हुई है?
बिना : मुझे पता hi नहीं था अंकल, अब जब पता चला है तो उनके बारे में जान ने की इच्छा हुई, आखिर वो और हम एक परिवार hi है न.
सुखदेव : जो उसके अपने है उन्हें तो कभी नहीं लगा की वो उनके अपने है, और तुम बहार से आयी हुई हो फिर भी तुम्हे फ़िक्र हो रही है.
बिना : उन्हें हुआ क्या है अंकल,.
सुखदेव : योगेंद्र तो पिछले कई सालो से कोमा में है, और भाभी अपने होश में नहीं है. बस यु कह सकते है की दोनों जिन्दा है, बाह यही तसल्ली है.
बिना : पर वो इन हालत में क्यों है?
सुखदेव : ये तो तुम्हे अपने घरवालों से पूछना चाहिए. (उन्होंने टॉन्ट में कहा)
बिना : मेने पूछा था, पर कोई कुछ नहीं बता रहा. या तो उन्हें जानकारी hi नहीं है.
सुखदेव : वो क्यों बताने लगे, सबने मिल कर पाप जो किया है.
बिना : सब से आपका क्या मतलब है अंकल, क्या मेरे ससुर भी?
सुखदेव : चुप रहना भी एक तरह से गुनाह hi है बेटी.
बिना : पर ये सब हुआ कैसे है अंकल.
सुखदेव : ये सब बात फ़ोन पर नहीं हो सकती बेटी.
बिना : में समझती हु, और इसीलिए में मिलना चाहती हु.
सुखदेव : फ़िलहाल तो में बहार हु, शायद अगले हफ्ते वापस आऊंगा, उसके बाद आ जाओ, वासे भी तुमसे मुलाकात हुई नहीं है, बस उस दिन पहलीबार hi मिला था, इस बहाने जान पहचान हो जाएगी.
बिना : जरूर अंकल, पर फिर भी क्या में एक सवाल पूछ सकती हु?
सुखदेव : है पूछो?
बिना : उनका एक बीटा भी है न?
सुखदेव : (एक आह सी निकल गयी उनके मुँह se)Hai नहीं था. (उनका गाला भी भर आया)
बिना : है, वही, पर मेने सुना है की उसकी lash........(Wo आगे बोल hi न सकीय)
सुखदेव : उस से क्या होता है, वो महज तीन साल का था, जिस पानी में बड़े बड़े नहीं बच सकते वह एक छोटे से बच्चे की क्या बिसात. (उनकी आवाज से लग रहा था की वो बहोत दुखी है और कभी भी रो सकते है, वो थोड़ी देर खामोश हो गए, बिना को भी लग रहा था की ये बात फ़ोन पर नहीं कर सकते, पर फिर भी उसको जान न था)
बिना : उसकी कोई फोटो है आपके पास?
सुखदेवी : (अपने आपको सँभालते hue)Tumhe क्यों जान न है ये सब, में नहीं याद करना चाहता उन मनहूस पालो को. (उन्होंने थोड़े गुस्से से कहा) जो भी जान न है वो उदयसिंह से पूछो. (उसने हलके गुस्से से कहा, बिना एक पल के लिए खामोश हो गयी)
बिना : में समझती हु अंकल, आप बहोत दुखी है.
सुखदेव : तुम क्या संजोगी, तुम्हे अंदाजा भी नहीं है की मेने क्या खोया है. (वो गुस्सा थे की रो रहे थे समाज नहीं आ रहा था)
बिना : अंकल, प्लीज सम्भालिये अपने आपको.
सुखदेव : में फ़ोन रख रहा हु, हम बाद में बात करेंगे.
बिना : सुनिए.....
सुखदेवजी ने फ़ोन रख दिया था, पर फिर भी बिना hello hello कर रही थी, वो थोड़ी देर फ़ोन को देखती रही, उसको भी लग रहा था की ऐसी बाते फ़ोन पर अच्छे से नहीं हो पायेगी, वो सोचने लगी की कैसे उनसे मिला जाये और मिलना जरुरी भी था, भले आज पूरी बात नहीं हो पायी थी पर बात की शुरुआत तो हो hi गयी थी. सुखदेवजी का इतना भावुक होना भी उसे समाज नहीं आया, वो समाज रही थी की वो उनके दोस्त है पर फिर भी इस बात को इतने साल हो गए है, अब तक तो उन्हें अपने आपको संभल लेना चाहिए था, ये बात उसकी समाज से बहार थी की आखिर ऐसी क्या बात है जिस की वजह से उनके वो जख्म अभी भी हरे hi है. अगर वो अपने दोस्त की फॅमिली के लिए दुखी है तो भी वो इस कदर क्यों दुखी है, वो काफी देर तक बेथ कर सोचती रही पर उसको कुछ भी समाज नहीं आ रहा था, इन सभी सवालो के जवाब सिर्फ और सिर्फ सुखदेवजी hi दे सकते थे, तो उनसे मिलना जरुरी था, आखिर ये शिव की जिंदगी से भी जुड़ा हुआ था, कैसे भी कर के उसको ये पता करना hi पड़ेगा, अभी भले hi वो गुस्सा है या दुखी है पर फिर भी वो दोबारा जरूर मिलेगी और और उनसे साडी सच्चाई जान कर रहेगी. फ़िलहाल तो वो कुछ नहीं कर सकती थी तो वो शाम के खाने की ऐयारी करने लगी. शिव और जूही भी आ गए, थोड़ी देर उनसे बात की, फिर शिव भी चला गया.
रात को खाने के बाद में बैठा था और फ़ोन देख रहा था की मुझे जहान्वी का मश्ग आया, मेने मश्ग खोला तो लिखा था
जहान्वी : पापा मन कर रहे है. (वैसे तो मुझे भी लगा था की वो मानेंगे नहीं.)
शिव : कॉल करसकती है? (पांच सेकंड में hi उनका फ़ोन आ गया, मेने कॉल रिसीव kiya)Hello.
जहान्वी : हम्म्म्म.
शिव : क्या हुआ?
जहान्वी : मेने कहा तो सही, पापा मन कर रहे है.
शिव : ये तो अच्छी बात है न. (मेने थोड़ा रिलैक्स हो कर कहा)
जहान्वी : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Achchhi बात है? वो कैसे?
शिव : वैसे भी आपको मेरे साथ काम नहीं करना था, तो आपके लिए तो अच्छी hi बात है न. (मेने हलके अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा)
जहान्वी : मजाक मात करो, I’m सीरियस.
शिव : जरुरी नहीं की कोई एक बार में hi मान जाये, वैसे क्या कहा उन्होंने.
जहान्वी : उनसे ज्यादा तो वो छछूंदर कूद रहा था, वो hi मन करवा रहा था. (उसने थोड़े गुस्से से कहा)
शिव : (मेरी समाज में नहीं आया की वो किसकी बात कर रही hai)Kiski बात कर रही है?
जहान्वी : मिक्की और किसकी. वो hi पापा को भड़का रहा था, पता नहीं आज कहा से टाइम पर घर पर आ गया था, वैसे तो रोज़ बहार hi रहता है, आज hi आना था उसको भी.
शिव : पर आप ज्यादा अपसेट क्यों हो रही हो, क्या आपको सच में मेरे साथ काम करना है?
जहान्वी : शिव, मजाक नहीं.
शिव : में कहा मजाक कर रहा हु, में सीरियसली hi पूछ रहा हु. वैसे आपकी बातो से तो लग रहा है की आप काम करना चाहती है, पर क्यों ये समाज नहीं आ रहा. वैसे तो में आपको पसंद नहीं हु. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)
जहान्वी : तुम्हारे पसंद होने न होने से क्या होता है, में इस प्रोजेक्ट की एहमियत समझती हु, ये प्रोजेक्ट मुझे मेरे कर्रिएर में बहोत काम देगा, इसका हिस्सा बन न मेरे लिए फायदेमंद होगा.
शिव : चलो इतनी तो अकाल है आपमें.
जहान्वी : आईईईई, मरूंगी जो कुछ ulta-sidha कहा तो, तुम्हे क्या में बेवकूफ लगती हु.
शिव : बिलकुल नहीं, अगर मुझे ऐसा कुछ भी लगता होता तो क्या में आपको काम के लिए पूछता. में सिर्फ मज़ाक कर रहा था, वैसे क्या बात हुई?
जहान्वी : खाने के बाद मेने उनसे बात की तो वो मिक्की भी वही बैठा था, तुम्हारा नाम सुन कर वो इतना भड़क गया की पापा को मुझे काम के लिए मन करने लगा.
शिव : क्यों?
जहान्वी : मुझे क्या पता, वो बस एक hi बात बोल रहा था की तुम्हारे साथ कोई काम न करू.
शिव : आपके पापा ने क्या कहा?
जहान्वी : वो बोलने कहा दे रहा था, बस वो hi अपनी चोंच डूबा रहा था, मम्मी ने भी कहा की अगर ये इतना मन कर रहा है तो फिर मात कर. वो मुझे कुछ बोलने hi नहीं दे रहा था.
शिव : अब ज्यादा अपसेट मात होइए, कल फिर से शांति से बात करना.
जहान्वी : मुझे भी यही लग रहा है.
शिव : अगर मेरी जरुरत हो तो मुझे बुला लेना.
जहान्वी : तुम आओगे पापा से बात करने? (उसने आश्चर्य से कहा)
शिव : क्यों नहीं आ सकता?
जहान्वी : तुम्हे पता है न वो तुमसे कितना चिढ़ते है.
शिव : वो उनकी सोच है, मुझे कोई दर नहीं उनसे बात करने में.
जहान्वी : ठीक है, तो में काल फ़ोन करुँगी तुम्हे.
शिव : है, पर स्कूल के बाद.
जहान्वी : पता है मुझे.
शिव : अच्छा ठीक है, मिलते है फिर कल.
जहान्वी : क्यों, बस काम की hi बात करनी थी?
शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ gayi)To और क्या बात करनी थी?
जहान्वी : मुझे क्या पता, तुम्हे पता होगा.
शिव : मुझे कैसे पता होगा?
जहान्वी : इतनी लड़कीओ को फसाया है तो मेने सोचा की मुज पर भी तरय करोगे. (कहते हुए वो थोड़ा शर्मा रही थी)
शिव : में क्यों किसी को फ़साने लगा.
जहान्वी : ऐसे hi क्या सब है तुम्हारे साथ. सबको कुछ न कुछ उल्टा सीधा बोल कर फसाया hi होगा न.
शिव : मेने किसी को नहीं फसाया, और में फ़ोन रख hi रहा था, आपने hi कहा की कोई और बात करू, क्या आप चाहती है की में आपको फासो. (मेने भी मुस्कुराते हुए पूछा)
जहान्वी : जैसी तुम्हारी फितरत है, तरय तो करोगे hi.
शिव : मुझे कोई तरय नहीं करना.
जहान्वी : क्यों?
शिव : अब मुझे लग रहा है आप मुझे उकसा रही है.
जहान्वी : में कोई उकसा नहीं रही हु, (वो खामोस हो गयी, थोड़ी देर बाद वो boli)Achcha आज वो लड़की क्या कह रही थी?
शिव : कोनसी लड़की?
जहान्वी : वो hi, कैफ़े के बहार.
शिव : आपको कैसे पता की वो मुझसे बात कर रही थी?
जहान्वी : (थोड़ा ऐटिटूड se)Bas पता है, तुम बात को मात घुमाओ, जो पूछा है उसका सही सही जवाब दो.
शिव : वो पूछ रही थी की में किसका इंतजार कर रहा हु.
जहान्वी : तो तुमने क्या कहा?
शिव : में क्या कहता, मेने उस से कहा की में किसी का भी इंतजार करू, उसको क्या?
जहान्वी : तो उसने क्या कहा?
शिव : वो सीधे hi मुझे पूछने लगी की अगर गफ का इंतजार नहीं कर रहे हो, तो वो तैयार है.
जहान्वी : (जलन se)Badi आयी, बर्फ बनानेवाली, कोण थी वो?
शिव : मुझे क्या पता, और वैसे भी आप क्यों गुस्सा हो रही है, मेरी hi बुद्धि भ्रस्ट हो गयी थी जो मेने मन कर दिया, वो खुद चल कर आयी थी, मुझे है कर देना चाहिए था , नहीं? (मेने छेड़ने के िर्रादे से कहा)
जहान्वी : (हलके गुस्से se)|To कर देते, वैसे भी तुम इन सब में एक्सपर्ट जो हो.
शिव : सच में गलती कर दी, आपको क्या लगता है, कल वो मिलेगी (मुझे वैसे तो हसी आ रही थी पर मेने खुद को कण्ट्रोल रक्खा)
जहान्वी : (हलके गुस्से se)Muje क्या पता, तुम hi जाना और देख लेना.
शिव : आप भी आना, अगर वो न आयी तो में बोर हो जाऊंगा.
जहान्वी : तो में टाइम पास हु, क्यों?
शिव : मेने ऐसा कब कहा?
जहान्वी : तुमने ऐसा hi कहा, में फ़ोन रख रही हु, bye. (कह के उसने कॉल काट दिया)
जहान्वी के साथ ऐसे हसी मजाक कर के मुझे बहोत हसी आ रही थी, उसके बाद मेने लता से बात की, मेने उसका हलचल पूछा तो वो शर्मा रही थी, पर वो ठीक थी, फिर में रंजन और विणा के पास गया, वो दोनों पढ़ने बैठी थी, मेरी उनसे भी बात हुई, गायत्रीदिदी और सरिता से भी इधर उधर की बात हुई, फिर में पढ़ने बेथ गया. रात को जब पढ़ाई ख़तम की तब में बहार आया और हर कमरे में देखा तो सब सो गए थे, तो में भी सो गया.
सुबह उठ कर में एक्सेरसिस के लिए चला गया, वह से लौट कर स्कूल चला गया. छोटी रेसस्स में महेश और हर्ष मुझे कैंटीन ले गए, मेने मन किया पर वो नहीं मने. संयम और वैस्वी को मेने बोल्दिया की में कैंटीन जा रहा हु, वो दोनों भी बाथरूम के लिए चली गयी. दोनों चुप चुप चल रही थी, बाथरूम से आने के बाद दोनों जब क्लास की और जाने लगी तो वैस्वी ने संयम को रोका.
वैस्वी : संयम, मुझे कुछ बात करनी है.
संयम : तो बोल न. (उसने नोर्मल्ली hi कहा)
वैस्वी : मुझे शिव से मिलना है.
संयम : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Wo बोल कर तो गया की कैंटीन जा रहा हु, चल कैंटीन चलते है फिर.
वैस्वी : (थोड़ी उल्जन में thi)Waise नहीं. (संयम गौर से वैस्वी को देखने लगी, वैस्वी ने इधर उधर देखा वो सोच रही थी की कहे की न कहे, पर फिर संयम की आँखों में देखते hue)Muje उस से अकेले में मिलना है.
संयम : (वो थोड़ा चौंक गयी की वैस्वी उसको सीधे सीधे hi कह रही है) तो मुझसे क्यों कह रही है, उस से hi बोल. (वो अंदर hi अंदर असहज थी पर उसने चेहरे पर दिखने नहीं दिया)
वैस्वी : तेरे बगैर ये मुमकिन नहीं है.
संयम : में सामजी नहीं.
वैस्वी : हर वक़्त हम साथ hi होते है तो... (उसने बात अधूरी छोड़ दी थी पर संयम समाज रही थी सब)
संयम : मतलब में तुजे खटक रही हु. (संयम ने नाराजगी से कहा)
वैस्वी : (संयम का हाथ पकड़ते hue)Aisi बात नहीं है, (कुछ रुक kar)Tu रोज़ उस से अकेले में मिलती है, मेने कुछ कहा क्या?
संयम : में कब अकेले मिलती हु (संयम ने जूथ बोलै)
वैस्वी : रोज़ तू उसके साथ जाती है तो अकेली hi होती है न.
संयम : हम घर जाते है, रस्ते पर होते है, अकेले कहा हुए.
वैस्वी : फिर भी तुम्हे जो कहना होता है वो कह देती होगी तू.
संयम : ऐसा कुछ नहीं है. (उसने नज़ारे चुराई)
वैस्वी : देख संयम, हमे ये आँख मिचौली खेलना बंद कर देना चाहिए. मुझे पता है, तेरे दिल में क्या है.
संयम : (मजाक में हस्ते hue)Achchha... क्या है?
वैस्वी : तू जानती है, मुझे कोई एतराज नहीं है उस बात से, ये फैसला शिव को लेने देते है की उसको किसके साथ रहना है.
संयम : तुजे जितना भरोसा है उतना hi मुझे भी भरोसा है. (उसने टॉन्ट में कहा)
वैस्वी : तू गलत समाज रही है, जो में कह रही हु वो तू समाज नहीं रही है और ऐसे hi लड़ रही है.
संयम : में कहा लड़ रही हु.
वैस्वी : अपना टोन देख, (शांति se)Dekh संयम, में सीधे सब्दो में कहती हु, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता की तुम्हारे और उसके बिच क्या है, मुझे बस इतना पता है की मुझे बस उसके साथ रहना है.
संयम : तू कहना चाहती है की हम दोनों hi.
वैस्वी : अगर ऐसा है तो ऐसा hi सही, मेने बहोत सोचा है इस बारे में, मुझे पता है की हर लड़की चाहती है की उसका प्रेमी उसका hi हो, पर शायद ये मेरे नसीब में नहीं है, मेने देखा है की जब भी में उसके करीब गयी हु वो मुझसे दुरी बना ने की कोशिस करता है, शायद उसकी वजह तुम हो. (संयम गौर से वैस्वी को देखने lagi)Aise क्या देख रही है, हम दोनों के बिच बहोत कुछ हो चूका है.
संयम : (वो कहा पीछे रहनेवाली thi)Hamare बिच भी बहोत कुछ हो चूका है.
वैस्वी : में समाज सकती हु, इसलिए कही बार सोचा की में हैट जाऊ, पर में नहीं कर सकती, सॉरी. (वैस्वी के चेहरे पर दुःख था, जिसे देख कर संयम को भी बुरा लगा)
संयम : सच कहु तो मेने भी तरय किया था. (उसके चेहरे पर भी दुःख था)
वैस्वी : मुझे लग रहा है की वो हम दोनों के बिच कंफ्यूज है, तो उसको टाइम देते है, तब तक हम अपने अपने तरीके से उसके साथ टाइम बिताते है.
संयम : वो कैसे?
वैस्वी : दोनों एक दूसरे की हेल्प करेंगे तो उस से मिलना आसान हो जायेगा, वर्ण न तुजे तेरे घर से इजाजत मिलेगी, न मुझे मेरे घर से, हम दोनों एक दूसरे का नाम ले कर बहार भी निकल सकते है.
संयम : (हस्ते hue)Matlab, तू और में साथ में जायेंगे.
वैस्वी : है मात, एक तो वैसे hi इतनी टेंशन हो रही है, (थोड़ी देर रुक kar)Koi रास्ता निकालेंगे.
संयम : (रेसेस ख़त्म होने की बेल्ल बज gayi)Chal अभी तो क्लास में जाना है. (चलते chalte)Kitna अजीब है न, हम दोनों सहेलिया एक hi लड़के के साथ.
वैस्वी : (वो भी muskurayi)Ajeeb तो है, पर मेने रील्स में भी देखा है, आजकल होता है ये सब.
संयम : सच में? मुझे तो मोबाइल इतना मिलता नहीं.
वैस्वी : है यार, मुझे भी पहले अजीब लगा था की ऐसा कैसे हो सकता है, पर देख, आज हम दोनों उसी मोड़ पर है. (दोनों क्लास में एंटर होनेही वाले थे की सामने से शिव और उसके दोस्त आते दिखे तो वो रुक गयी)
संयम : हो गया तुम लोगो का? (हर्ष की और देख कर)
हर्ष : कभी कभी हमें भी टाइम दे दिया करो, हम दोस्तों को भी टाइम चाहिए होता है.
संयम : तो ले जाना पाने घर, हमने कब मन किया है. क्यों वैस्वी? (कहते हुए वो दोनों है पड़ी)
हर्ष : ये hi नहीं आता है, मेने तो कितनी बार बोलै है. (उतने में टीचर भी आ गए तो हम अंदर चले गए और अपनी अपनी जगह पर बेथ गए, दो पहर में रेसस्स में हम सब साथ में बैठे हुए थे)
महेश : चलो न यार, एक दिन सब पिक्चर चलते है. (हर्ष ने भी कहा)
हर्ष : है यार, मज़े करेंगे.
संयम : मुझे नहीं आने देंगे.
वैस्वी : मुझे भी नहीं आने देंगे.
शिव : मुझे भी बहोत काम है, में भी नहीं आ पाउँगा.
हर्ष : तुजे क्या काम है?, तू तो बोल रहा था की वो नौकरी छोड़ रहा है.
शिव : में नौकरी नहीं करता था. मेरे जो पार्टनर है उनकी साइट थी तो वह काम देखता था, अब दूसरी साइट चालू कर रहे है तो उसका सब देखना है.
हर्ष : तेरा भी अजीब है यार, यहाँ हम लोगो को ये पढ़ाई hi बूज लगती है, उसको करते करते hi दम निकल जाता है और तू है की इतना सब भी करलेता है.
संयम : वो तुम्हारी तरह नहीं है.
हर्ष : तू तो बोल hi मत छिपकली की दम.
संयम : क्या बोलै तुमने (वो घुटनो के बल कड़ी हो गयी और मरने का एक्शन करने lagi)Ek लगाउंगी न तो समाज आएगा.
शिव : तुम लोग लड़ो मात यार. (ये हसी मज़ाक तो अब आम था)
वैस्वी : कोनसा काम चालू कर रहे हो. (उसने बहोत शांति से पूछा)
शिव : वो एक फैक्ट्री का काम है.
महेश : फैक्ट्री का काम है मतलब? क्या करेगा तू?
शिव : हमारी कंपनी एक फैक्ट्री का कंस्ट्रक्शन कर रही है.
महेश : मतलब तुम लोग एक पूरी फैक्ट्री बनाओगे.
संयम : और नहीं तो क्या, तुम्हारी तरह मक्खिया नहीं मर रहा वो. (महेश बोलने वाला hi था पर वो चुप रहा)
शिव : है.
वैस्वी : तो फिर वो रेस?
शिव : वो भी चालू hi है, अभी सायद कुछ दिनों के लिए बहार भी जाना पड़ेगा.
वैस्वी : कितने दिन?
शिव : शायद महीना.
वैस्वी : फिर पढ़ाई?
हर्ष : उसको पढ़ाई की क्या जरुरत है? (संयम बोलनेवाली थी पर शिव ने उसको रोका)
शिव : जरुरत है भाई. (वैस्वी की और देख kar)Dekhte है, पर पढ़ाई भी करनी पड़ेगी hi.
ये रेसस्स भी ख़त्म हो गयी, हम सब क्लास में चले गए. स्कूल से निकलने के बाद जब हम पार्किंग में पहुंचे तो संयम और वैस्वी खड़े थे. वो दोनों कुछ बात कर रही थी, हमे देख कर वो चुप हो गयी, फिर हम अपने अपने घर की और निकल गए. रस्ते में मेने संयम से पूछा,
शिव : ऐसी क्या बात कर रही थी दोनों?
संयम : तुजे क्या, ये हम दोनों की बात है.
शिव : में तो ऐसे hi पूछ रहा था, दोनों बहोत गंभीर थी तो मुझे लगा की कोई प्रॉब्लम है, इस लिए पूछा.
संयम : प्रॉब्लम तो है, पर हम दोनों सुलजालेंगी.
शिव :ऐसी क्या प्रॉब्लम है, मुझे बताओ, में भी कुछ मदद कर दूंगा.
संयम : तू hi प्रॉब्लम है, तू क्या सुलझाएगा?
शिव : में समजा नहीं.
संयम : छोड़ न वो, चल घर चल.
शिव : नहीं चल सकता, मुझे कही जाना है.
संयम : ये तेरा हर वक़्त का नाटक है, थोड़ा भी टाइम नहीं निकल सकता. (उसने रूठते हुए कहा)
शिव : हस्ते हुए, तू थोड़ी देर में मानेगी क्या?
संयम : जब कुछ न मिल रहा हो तो थोड़े से काम चलना पड़ता है. (उसने मायूसी से कहा, में उसका चेहरा मिरर में देख रहा था)
शिव : अच्छा चल आता हु, पर ज्यादा नहीं रुकूंगा.
संयम : (खुस होते hue)Tu चल तो सही. (वो बहोत खुस थी, में उसके घर चला गया, अंदर गए तो आंटी थी, मेने उनको नमस्ते किया, उन्होंने भी हल्का झिझकते हुए नमस्ते kaha)Chal में तुजे वो किताब दे देती हु. (मेने आंटी की और देखा तो वो कुछ नहीं बोली, संयम मुझे खींचते hue)Chal न, कब से कह रहा था की देर हो रही है तो अब देर नहीं हो रही. (आंटी वापस किचन की और मुद गयी, वो मुझे खिंच कर ऊपर ले गयी, जैसे hi हम उसके रूम में गए उसने अपना बैग बिस्तर पर फैका और सीधी मुझसे लिपट ते हुए मुझे किश करने लगी,

मेने भी उसको कमर से पकड़ लिया और उसको किश करने लगा, वो बहोत गरम हो रही थी, अब इतनी गर्म लड़की मुझे किश करेगी तो में कैसे पीछे रहता, मेने अपने हाथ उसकी शर्ट से अंदर डेल और उसके स्तन को ब्रा के ऊपर से hi दबाया.)

उम्मंहहह ुम्मःहःहः ummmhhhh)Wo मेरे होठो को जोर जोर से चाटने लगी) मेने हाथ निचे किये और उसके कूल्हों को पकड़ लिया और मसल दिया, उसने किश तोड़ी और मेरे गले लगी rahi)Shhhhhhh शीइइइइइइइव. मुझसे नहीं रहा जा रहा यार.

शिव : (मेने उसके स्कर्ट हो थोड़ा ऊपर किया और उसकी पंतय के ऊपर से hi उसके कूल्हों को सहलाने laga)Kya हो रहा है जो रहा नहीं जा रहा. (कहते हुए में उसके कूल्हे मसलने लगा)
समयम : शह्ह्ह्ह पतानहीं क्या हो रहा है, मुझे हर पल तुम्हारी याद आती है शह्ह्ह्हह्ह, मेने पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, जिस दिन से तूने वह छुआ है में रोज़ तुजे याद करती हु.
शिव : (उसके कूल्हों को मसलते hue)Kaha छुआ है?
संयम : वह आगे.
शिव : (उसकी छूट पर हाथ रखते हुए मेने छूट को sehlaya)Yaha?
संयम : शहहहहह हआ शिव वह. (में उसकी छूट सहलाने लगा तो सिसकिया लेने lagi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह. (मेने उसका स्कर्ट ऊपर किया और उसकी छूट को पंतय के ऊपर से hi पकड़ लिया)

शहहहहह शीइइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मुझे कुछ हो रहा है सीईव शह्ह्ह्ह करते रहो वह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (में लगातार उसकी छूट मसलता रहा, वो गर्म गर्म सिसकिया ले रही thi)Ander हाथ डालो न शिव. (मेने भी उसकी पंतय में हाथ दाल दिया, वह छूट के बालो का एहसास हो रहा था, साथ में छूट के नरम होठो का एहसास, मेरा लुंड भी कूदने लगा, मेने दरार में ऊँगली firayi)Shhhhhh शीइइइइव शहहहहह ये क्या हो रहा है मुझे)
निचे ज़ोया रह देख रही थी की वो दोनों कब निचे आये और वो उन्हें सरबत दे, पर थोड़ी देर लग गयी तो उसको कुछ शक हुआ, वो बिना आवाज किये ऊपर जाने lagi)(Waha में संयम की छूट को सेहला रहा था, वो अपनी कमर झटका रही थी, उसने पंत के ऊपर से hi मेरा लुंड पकड़ लिया और उसको दबाने लगी) शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है यार. (में लगातार छूट सेहला रहा था, अचानक hi वो झटके कहते हुए झड़ने lagi)Shhhhhh शीइइइइइइव. (बहार ज़ोया पहुंच चुकी थी, उसको समझते देर न लगी की अंदर क्या हो रहा है, उसको गुस्सा आने लगा, वो सोच hi रही थी की अंदर जा कर दोनों को डाट दे)
शिव : शह्ह्ह्ह, तुमने उसको इतना जोरसे क्यों पकड़ा है? छोडो दर्द हो रहा है.
संयम : पता नहीं.... वो मुझे बहोत अच्छा लगता है.... , जिस दिन से उसको देखा है में रोज़ उसको याद करती हु. (अचानक मेरे दिमाग में आया की मेने इसको कब दिखाया)
शिव : तुमने ये कब देखा?
संयम : जब तुम ामी के साथ वो सब कर रहे थे. (संयम मदहोशी में सब सच बोल गयी)
शिव : कब?
संयम : आप के ससुराल में shhhhhhhhhh. (में उसको देखने लगा, मेने छूट से हाथ हटा लिए, उसने आंखे खोली, उसको एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी है, वो मुझे देख रही थी और समझने की कोशिस करने लगी की में क्या सोच रहा हु)
शिव : तुम्हे पता था?
संयम : (अपनी गर्दन झुका ke)Haaa.
शिव : तो फिर तुमने क्यों कुछ कहा नहीं.
संयम : (मेरी आँखों में देखते hue)Kya कहती, उस वक़्त तो इतना गुस्सा आया था की मान कर रहा था की सबको बता दू.
शिव : तो फिर बताया क्यों नहीं?
संयम : क्या बताती, अगर बतादेति तो तुम्हारी और अम्मी की hi बेइज्जती होनी थी. नुकसान तो मेरा hi होना था.
शिव : सॉरी यार वो सब हो गया.
संयम : अब सॉरी कहने से क्या फायदा, और अब वो बात पुराणी हो चुकी है, अगर मेने तुम्हे माफ़ न किया होता तो क्या उसके बाद में तुम्हारे साथ होती. (बहार कड़ी ज़ोया की आँखों से ासु बह रहे थे, माँ के तौर पर उसको अपनी बेटी के लिए चिंता थी तो वो ऊपर आयी थी, पर यहाँ मामला उल्टा hi हो गया था, वो खुद गुनेहगार हो चुकी थी, वो वापस लौट hi रही थी की उसके कानो में शिव की बात पड़ी)
शिव : तुमने आंटी से बात की? (ज़ोया जाते जाते रुक गयी)
संयम : उनसे भी क्या बात करती? उनपर भी गुस्सा थी, अब्बू को सब बताना चाहती थी में, पर फिर मेने अम्मी की तड़प महसूस की, भले hi में नादाँ हु पर ित्नीभी नहीं की समाज न सकू, मुझे समाज है की वो क्यों तड़प रही है, कई बार मेने उनकी और अब्बू की लड़ाई सुनी है. शायद वो भी इस मज़े के लिए भावनाओ में बह गयी.
शिव : (मेरी अभी भी समाज में नहीं आ रहा था की जब उसको पता था तो उसने गुस्सा क्यों नहीं kiya)Tumhe उनपर या मुज पर गुस्सा नहीं आ रहा?
संयम : गुस्सा कर के भी क्या हासिल होगा, अब इतना तो समाज सकती हु की तुम वैसे नहीं हो, अगर तुम हवस के पुजारी होते तो यहाँ में तुम्हे इतनी मिन्नतें न कर रही होती, तुम्हे इतने मौके दिए फिर भी तुम दूर न भाग रहे होते, इतना तो समाज में आता है की तुमने कोई जबरदस्ती तो नहीं की होगी, जो भी हुआ है वो तुम दोनों की मर्जी से हुआ है. अगर में उन्हें अम्मी के तौर पर देखु तो गुस्सा आता है, पर फिर लगता है की वो भी एक औरत है, अगर कुछ पल खुसी प् ली तो क्या गुनाह कर दिया उन्होंने.
शिव : (उसको गले लगते hue)Sorry यार. ी ऍम रॉय सॉरी.
संयम : अब सॉरी बोल के क्या फायदा, जो होना था वो तो हो गया.
शिव : अब तू समाज रही है न की में क्यों तुमसे दूर रह रहा हु, मेरी जिंदगी ऐसे hi ुलजी हुई है, में नहीं चाहता की तुम भी उसमे उलझ कर रह जाओ.
संयम : अब बहोत देर हो चुकी है शिव. में उलझ चुकी हु, अब छह कर भी तुम मुझे अलग नहीं कर पाओगे.
शिव : क्या मतलब है तुम्हारा?
संयम : छोडो न ये सब, पता नहीं कैसे मेरे मुँह से निकल गया, अच्छा खासा मूड ख़राब हो गया.
शिव : क्या चाहती थी तुम? (मेने मुस्कुराते हुए उसकी लग हटते हुए कहा)
संयम : सब कुछ.
शिव : सॉरी डिअर, पर वो सब में अभी तुम्हे नहीं दे सकता.
संयम : क्यों?
शिव : इतना तो में समाज गया हु की तुम समझदार हो, सब कुछ सोच समाज कर कर रही हो, पर फिर भी अभी कुछ और वक़्त दो अपने आप को, और मुझे भी.
संयम : यही तुम गलती कर रहे हो, समझदार होने से कुछ नहीं होता, क्या अम्मी समझदार नहीं है, फिर भी उन्होंने गलती कर दी न, वैसे तो तुम भी समाज दर हो, फिर भी गलती करते hi हो न. (अब यहाँ रुकना ज़ोया को सही नहीं लगा, वो बिना कोई आवाज किये अपने कमरे में लौट गयी, पर ासु नहीं थम रहे थे उसके)
शिव : अब में चलता हु.
संयम : (उसका शर्ट पकड़ ते hue)Thodi देर रुक जाओ न.
शिव : निचे आंटी है, वो क्या सोचेगी.
संयम : अभी भी तुम्हे उनकी फ़िक्र है? अगर वो मुझे कुछ कहेंगी तो क्या में चुप रहूंगी?
शिव : पागल मात बनो, अगर उन्हें पता चला की तुम जानती हो तो वो अपनी hi नजर में गिर जाएँगी, मेहरबानी कर के उन्हें कुछ मात बताना.
संयम : उसमे मेरा क्या फायदा. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)
शिव : मर जाएगी, देखा है न तुमने मेरा?
संयम : जा जा, किसी और को डरना, में नहीं डरनेवाली. (उसने भी इतराते हुए कहा)
शिव : अजीब हो तुम भी, पर सच में बहोत प्यारी हो.
संयम : अगर इतनी hi प्यारी लगती तो सिर्फ मुझसे प्यार करते, इसलिए मक्खन मात लगाओ. मुझे सब समाज आ रहा है. में और वैस्वी तुम्हारी hi बात कर रहे थे स्कूल में. कैसे तुम हम दोनों को उल्लू बना रहे हो.
शिव : अगर पता है की में उल्लू बना रहा हु तो फिर भगा क्यों नहीं देती मुझे.
संयम : यही तो प्रॉब्लम है, दिमाग सब समझता है पर ये दिल नहीं मान रहा.
शिव : तुमलोगो को समजना नामुमकिन है. चल अब में चलता हु.
संयम : फिर कब मिलेगा? (उसका शर्ट खींचते हुए)
शिव : मिलूंगा, पर इतना hi, समाज रही हो न?
संयम : वो में देखलूँगी. (उसने सरारती मुस्कान से कहा) वैसे वो भी तड़प रही है तुजसे मिलने के लिए.
शिव : कोण?
संयम : वैस्वी और कौन, वो तुजसे अकेले में मिलना चाहती है, मेरी मदद मांग रही थी.
शिव : तो तूने क्या कहा?
संयम : और क्या कहती, मदद करने का वडा कर दिया. (वो मुस्कुराते हुए boli)Wo भी तड़प hi रही है.
शिव : न मुमकिन है, सच में. (मेने शिर हिलाया)
संयम : जाते जाते एक किस तो करता जा, कुछ सुकून मिलेगा दिल को. (मेने उसकी आँखों में देखा, वह सिर्फ प्यार hi था, में झुकता चला गया और उसके नरम होठो को किश किया)
शिव : (थोड़ी देर baad)Chal अब. (हम दोनों निचे आये, आंटी नहीं दिखी हमे)
संयम : अम्मीईईई. (ज़ोया ने अपने ासु पोछे और बोली)
ज़ोया : है बेटीइ.
संयम : अम्मीय शिव जा रहा है.
ज़ोया : (वो अपने रूम से बहार नहीं aayi)Ha ठीक है.
संयम : (उसने अपने कंधे उंचकाये)
शिव : ठीक है, bye.
में वह से निकल गया, मेरे दिमाग में संयम की बात घूम रही थी, उलझने बढ़ती hi जा रही थी. में घर पहुंच गया, मेरे घर पर भी काम चल रहा था तो थोड़ी देर वह देखा, फिर खाना खाया. मेने जहान्वी को भी मश्ग कर दिया की क्या हुआ?. तो उसका रिप्लाई भी आ गया की उनके ऑफिस आ जाऊ. मेने लता को बोलै और वह से निकल गया.




















