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सुबह जल्दी उठने की आदत क कारन मैं जल्दी जाग गया . कमरे में वाल क्लॉक पर नज़र पड़ी तो 6 बज चुके थे . दिन का उजाला कमरे में फ़ैल रहा था. मेरी नज़र साथ में लेती हुई मंजू म पर पड़ी तो वो पेट क बल लेती हुई थी. एक तरफ को किया हुआ चेहरा जब मैंने देखा तो उनके उस मासूम और सुन्दर मुखड़े को देख कर मुझे उन पर प्यार आ गया और खुद बा खुद झुकते हुए मैंने उनके गालों पर किश कर दिया . वो वैसे hi सोई रही. मैंने उनके बल एक तरफ किये तो उनकी नंगी पीठ मेरे सामने आ गयी . दूध सा सफ़ेद रंग था मम का और कोमलता माखन जैसी. मैंने उनकी पीठ पर भी 4-5 किश जड़ दिए. वो थोड़ी सी कसमसाई और अपना एक घुटना मोड़ते हुए तंग को थोड़ा साइड को खोल दिया. इस तरह करने से उनकी गांड ऊपर को उभर आयी और एक साइड का पहाड़ कुछ ज्यादा hi बड़ा नज़र आने लगा. मैं खुद को रोक नहीं पाया और उनके दोनों खरबूजे अपने हाथों से थम कर दबाने लगा. बड़े hi नरम चूतड़ थे मम क . सचमुच वो पूरी की पूरी खूबसूरती का शाहकार थी जो अब मेरी थी. मुझे अपने आप पे रश्क होने लगा. चूतड़ों की खूबसूरती का इनाम देने क लिए मैंने उन्हें भी झुक कर चुम लिया और अपने हाथ से उनकी जांघों और कमर को सहलाने लगा.
‘ सुबह सुबह फिर शुरू हो गए , अभी रत को इतना दर्द दे कर चैन नहीं मिला ? लगता है ये तुम्हे कुछ ज्यादा hi पसंद हैं’
शायद मेरी छेड़ छड़ ने मम को उठने क लिए मजबूर कर दिया था. उन्होंने मुझे अपने चूतड़ों पर किश करते हुए देख कर ये कहा.
अमित: क्या करूँ आपका ये हुस्न मुझे मजबूर कर रहा है क मैं आपसे प्यार करूँ. और अब फिर से दर्द नहीं होगा मगर मैं अभी कुछ करने वाला नहीं. कॉलेज भी तो जाना है. और रही इनकी बात तो ये इतने खूबसूरत है क कोई भी मर्द इनकी तरफ खींचा चला आएगा. उन्हें देखते hi मेरे अंदर गर्मी बढ़ने लगती है.
मंजू म : मतलब तुम्हारी पहले से hi आँख थी इन पर? मैं नहीं करने दूंगी वहां कुछ यद् रखना. ये बहुत नाज़ुक हैं इतनी आसानी से नहीं मिलने वाले
अमित: सोच लो एक तरफ आप कहती हैं क आप पूरी की पूरी मेरी हैं और दूसरी तरफ मन भी कर रही हैं ?
मंजू म : मन कब किया ? मैंने तो इतना कहा क इतनी आसानी से नहीं दूँगी
अमित: मतलब आप देंगी तो चलो अभी शुरुआत कर देते हैं
मंजू म : अरे अरे कुछ तो तरस खाओ मुझ पर . अभी आगे का दर्द ख़तम नहीं हुआ और पीछे से भी भेदना चाहते हो ये खूंटा गाड़ कर.
मुझे उनकी इस बात पर हंसी आ गयी. मैं तो बस मज़ाक कर रहा था उनके साथ मगर वो दर hi गयी.
अमित : है है है . आप तो दर गयी. चिंता मत करो मैं आपकी सहमति क बिना कुछ नहीं करूँगा चाहे तो आप मन कर दें मैं फाॅर्स नहीं करूँगा
मंजू म : तुम कितने अचे हो , मेरी ीचा का सम्मान करते हो इसी लिए तो तुम पर इतना प्यार अत है मगर मुझे तुम्हारा खुद पर अधिकार जाताना ज्यादा ाचा लगता है. तुम ये सब अधिकार से कर सकते हो मैं मन नहीं करुँगी.
अमित: मगर मुझे सिर्फ आपकी ख़ुशी चाहिए
मंजू म : और मेरी ख़ुशी तुम्हारी ख़ुशी में है
इतना कह कर मंजू म ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर किश शुरू कर दी. 2-3 मिनट्स तक अच्छी तरह होंठ चूस कर वो मुझसे अलग हुई. मैं भी उनको सीधा करते हुए उनकी छूट पर नज़र डाली तो सूजन कुछ काम लग रही थी मगर अभी भी छूट क होंठ बड़े बड़े लग रहे थे .
अमित: अब दर्द कैसा है यहाँ पर?
मंजू म : अब ठीक है मगर हल्का हल्का महसूस हो रहा है अंदर भी.
अमित : बीएड से उठ कर ज़रा चल क देखिये
मंजू म जैसे hi चलने को हुई तो उनको थोड़ा दर्द हुआ मगर वो आहिस्ता आहिस्ता पाऊँ फैलाकर चल प् रही थी.
अमित: आज आप आराम कीजिये ऐसी हालत में बहार जाना सही नहीं . मुझे अभी जाना होगा सुबह की एक्सरसाइज पर भी जाना है और फिर घर .
मंजू म : क्या आज छुट्टी नहीं कर सकते तुम? मैं चाहती हूँ तुम मेरे पास रहो.
अमित : ऐसी बात है तो कैंसिल कर देता हूँ आज कॉलेज जाना . लो मैं बैठ गया यहीं आपके पास
मैंने फिर से बीएड पर बैठते हुए कहा.
मंजू म : चलो उठो कैसे तैयार रहते हो छुट्टी करने क लिए . मैं तो बस देख रही थी तुम क्या कहते हो. टेस्ट शुरू होने वाले हैं अब कोई छुट्टी नहीं. जाओ अब मगर कॉलेज क बाद सीधा मेरे पास आना . मेरा अकेले में दिल नहीं लगेगा.
मैंने मंजू म को बाँहों में भर कर उन्हें किश किया .
अमित : सीधा यहीं आऊंगा मगर आप भी अपना ख्याल रखना . खाना बहार से hi मंगवा लेना और कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है .
मैंने किश किया और कपडे पेहेन कर एक बार फिर मम को किश किया . गाउन पेहेन कर वो मुझे दरवाज़े तक छोड़ने आयी. जाने से पहने एक बार उन्होंने मुझे कास क ऐसे गले लगाया जैसे पत्नी पति क कहीं दूर जाने से पहले गले मिलती है . मुझे उनके दिल की हालत का पता चल रहा था क वो मुझे खुद से दूर नहीं करना चाहती . मगर मुझे भी तो जाना होगा वैसे भी मैं उन्हें थोड़ा स्ट्रांग बना hi दूंगा क वो इतना भी कमज़ोर न बने. मैं सीधा ग्राउंड में गया और एक्सरसाइज क बाद मोहित क घर. ज्यादा टाइम नहीं था तो जल्दी से तैयार हो कर नाश्ता किया. आंटी मुझसे बात करना चाहती थी मगर मोहित भी वहां था तो वो चुप रही . नाश्ता कर क हम दोनों दोस्त कॉलेज निकल गए.
चन्दर्कांता म का लेक्चर लगाने क बाद अगले 2 लेक्चर फ्री थे तो मैं मोहित और कल्पना को साथ ले कर कैंटीन में आ गया. तभी मुझे शिवानी की कॉल आने लगी . कॉलेज टाइम पर शिवानी कॉल क्यों कर रही है मुझे लगा कोई ज़रूरी बात होगी . मैंने साइड में जा कर कॉल अटेंड की
शिवानी : कहाँ गायब रहते हो कल से कितनी कॉल की उठाते नहीं हो . क्या बात है ?
अमित : सॉरी यार वो कल कहीं ज़रूरी काम में फसा हुआ था. तुम बताओ क्या बात है
शिवानी : देखो मैं ज्यादा बात तो नहीं कर सकती क्यूंकि मुझे जाना होगा इस वक़्त वाशरूम में आयी हूँ बात करने क लिए . मोंटी कुछ प्लान कर रहा है पर उसने अभी तक शीना से भी इस बारे में बात नहीं की है. इतना ज़रूर है क वो तुम्हारे साथ साथ तुम्हारी बहनो को भी नुकसान पहुँचाने वाला है.
शिवानी की बात सुनते hi मेरा दिमाग घूम गया. अपनी तो मुझे परवाह नहीं थी मगर नेहा दीदी और राधा को नुकसान पहुँचाने वाली बात पर मेरा खून खौल गया. एक पल में hi मेरा दिमाग गरम हो गया.
अमित: गुस्से में ) इस कुत्ते की मौत आयी है शायद . अगर उसने नेहा दीदी या राधा की तरफ गन्दी नज़र डाली तो ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दूंगा उसे .
शिवानी : खुद को काबू में रखो. वो क्या करने वाले हैं अभी तो हमें ये भी पता नहीं . तुम बस अलर्ट रहना बाकि मुझे जैसे hi पता चलता है मैं बता दूंगी .
अमित: थैंक्स शिवानी मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगा
शिवानी : मार कहानी है क्या ? मैं एहसान नहीं कर रही प्यार करती हूँ तुमसे और तुम्हारे लिए इतना तो कर hi सकती हूँ. वैसे मुझे तुम्हारी बहुत यद् आती है मगर मिल नहीं प् रही .
अमित: चिंता न करो किसी दिन साडी कसार निकल दूंगा और इस बार कार में नहीं बीएड पर मिलेंगे
शिवानी : चुप बेशरम कहीं क . ाचा अब मैं चलती हूँ . ी लव यू उम्म्माह bye bye
उसके बाद शिवानी ने कॉल कर दी मगर मेरा दिमाग ख़राब हो गया था. मैंने तुरंत शालू को फ़ोन लगाया . उसने फ़ोन काट दिया और 1 मिनट बाद hi उसकी कॉल आ गयी
शालू : तो आ गयी मेरी यद्? मुझे लगा तुम भूल गए मुझे
अमित: तुम्हे कैसे भूल सकता हूँ बस तुम्हारा काम पूरा होने तक मैं तुमसे दूर हूँ. वैसे मैंने कॉल इस लिए किया है क मुझे मदद की ज़रूरत है.
शालू : मदद ? क्या हुआ है ? मुझे बताओ मैं जो कर सकती हूँ करुँगी
अमित: मोंटी मेरी बहनो को नुकसान पहुँचाने की कोई चल चलने वाला है तुम मुझे पता कर क बताना अगर तुम कर सको तो.
शालू : क्या ? उस कुत्ते की नज़र अब तुम्हारी बहनो पर है. मैं आज से hi नज़र रखूंगी अगर कुछ भी पता चला तो बताउंगी . वैसे तुम खुद भी अलर्ट रहना और उन्हें भी कह देना.
शालू से बात कर क मैंने कॉल काट दी. शालू को मोंटी क कई कॉन्टेक्ट्स का पता था इस लिए शिवानी क मुकाबले मुझे शालू ज्यादा सही लगी ऐसे वक़्त में मदद क लिए मगर मोंटी भी शायद किसी क सामने कोई बात नहीं करेगा वर्ण उसने शीना को बता दिया होता. मुझे और भी कुछ सोचना होगा . फिर मैंने नीरज को कॉल लगा दी.
नीरज : हाँ भाई इस वक़्त कॉल कर रहे हो सब ठीक तो है न ?
अमित: भैय्या एक प्रॉब्लम हो गयी है. मुझे किसी दोस्त से पता चला है क मोंटी प्लान बना रहा है मेरी बहनो क साथ कुछ करने का.
नीरज : गुस्से में ) इसकी तो , तू चिंता मत कर छोटे भाई मेरे होते ऐसा नहीं हो सकता . अगर इसने कोई पन्गा लिया तो पैरों पर खड़ा नहीं हो पायेगा . तू चिंता मत कर वो मेरी भी बहने हैं.
अमित: मुझे आपसे यही उम्मीद थी भैय्या . आप फिर भी अपने दोस्तों से भी बात कर लेना.
नीरज : तू चिंता मत कर मैं अभी बात करता हूँ .
इसके बाद हमने एक होने काट दिया. अब मैं सोचने लगा क मोंटी कैसे नुकसान पहुंचा सकता है राधा और नेहा दीदी को ? कॉलेज में तो नीरज भैया उनके दोस्त हैं मैं हूँ मोहित है ज़रूर वो बहार hi कुछ करेगा. मुझे दोनों क बारे में कुछ सोचना होगा. वो दोनों स्कूटी पे अति हैं ऐसे में कहीं बहार वो पहले की तरह किसी को भेज कर या खुद उन्हें परेशां न करे या फिर कुछ और करेगा? जब तक उसके प्लान का पता नहीं चल जाता मुझे खुद नज़र रखनी चाहिए. मैं अपनी सोच में डूबा था क कल्पना और मोहित भी मेरे पास आ गए . मुझे टेंशन में देख कर उन्हें पता चल गया क कोई गंभीर मसला है
मोहित : क्या बात है ? तू टेंशन में क्यों है?
कल्पना : बात क्या है ? इतनी देर से बहार हो किसका फ़ोन था ?
अमित : यार वो मोंटी राधा और नेहा दीदी को कोई नुकसान पहुँचाना चाहता है मुझसे बदला लेने क लिए . मुझे समझ नहीं आ रही क क्या किया जाये ?
मोहित : क्या ? उसकी माँ की , तू टेंशन मत ले. सेल को थोक देते हैं पहले hi . फिर कुछ करने की सोचेगा भी नहीं.
कल्पना : ऐसे कैसे थोक डोज? अगर कुछ किया तो कॉलेज से निकल दिए जाओगे. पहले पता तो चले वो करना क्या चाहता है. फिर उसे तरीके से हैंडल कर लेंगे. जो भी करना होगा कॉलेज क बहार . पर मैं यही कहूँगी क पहले पता करो वो करने क्या वाला है वर्ण वो पलट कर फिर वॉर करेगा इस लिए ाचा रहेगा रेंज हाथ पकड़ो और उसे ऐसी सजा मिले क दोबारा कुछ करने क लायक hi न रहे.
अमित: मुझे इस बात की परवाह नहीं है. मैं बस इस बात से दर रहा हूँ क कॉलेज में तो हम सब हैं . यहाँ वो हिम्मत नहीं करेगा मगर कॉलेज क बहार घर आते जाते कहीं वो उन दोनों को कहीं रस्ते में घेर कर कुछ करेगा तो हम को पता चलने से पहले कुछ हो गया तो ?
कल्पना : बस इतनी सी बात ? इसकी जिम्मेदारी मैं लेती हूँ. उन दोनों को कॉलेज से घर लेन ले जाने मैं खुद जाउंगी अपनी कार में बस तुम उनसे बात कर लो.
अमित: एक बात और , वो दोनों जल्दी घबरा जाती हैं इस लिए उनके सामने कोई इस बारे में बात नहीं करेगा.
कल्पना : तो फिर मानेंगी कैसे? तुम खुद hi समझाना उन्हें कैसे समझाना है.
अमित : वो मैं देखता हूँ बस तुम उनका ख्याल रखना प्लीज
कल्पना : प्लीज कहने की ज़रूरत नहीं है. हम दोस्त हैं और दोस्त hi दोस्तों क काम एते हैं. वैसे भी जो कुछ सीखा है उसका इस्तेमाल रियल लाइफ में करने का इससे ाचा मौका कहाँ मिलेगा . तुम फ़िक्र न करो आज से उनकी साडी टेंशन मैं लेती हूँ . तुम बस बेफिक्र रहो.
अमित : थैंक यू वैरी मच कल्पना मैं तुम्हारा एहसान.....
कल्पना : दूँ क्या एक रख क ? दोस्ती में एहसान नहीं होते . हाँ दोस्तों को फीस ज़रूर देनी पड़ती है दोस्ती की. चलो कुछ खिलाओ अब कब से वेट कर रहे थे तुम्हारा कैंटीन में.
मुझे कल्पना पर बड़ा गर्व महसूस हुआ क वो कितनी अच्छी है और मुझे अपना ाचा दोस्त मानते हुए मेरी टेंशन अपने सर ले रही है. अगर राधा और नेहा दीदी कल्पना क साथ रहेंगी तो निश्चय hi वो सुरक्षित रहेंगी . हम तीनो कैंटीन में आ गए. कुछ hi देर में बेल्ल बज गयी और राधा मीनल नेहा दीदी क साथ कैंटीन में आ गयी .
अमित : ाचा हुआ आप आ गयी. देखो न दीदी आपकी वजह से मुझे सबकी बातें सुन्नी पद रही हैं. अब आप hi कुछ करो.
नेहा दीदी : बात क्या है क्या हुआ है ? कौन बातें कर रहा है?
नेहा दीदी क साथ साथ राधा मीनल मोहित और कल्पना भी हैरान हो गए क मैं क्या बात करने इस वाला हूँ .
अमित : मैं मोहित क साथ कार में अत हूँ और आप दोनों स्कूटी पर बस इसी लिए सब ये कह रहे हैं क मैं कैसा भाई हूँ क खुद कार में घूमता हूँ और मेरी बहने स्कूटी पे आती हैं. मुझे ये ाचा नहीं लग रहा
नेहा दीदी : ये तो सरासर गलत बात है . कौन कह रहा है ये ? तुम कौन सा अपनी कार में एते हो वो तो तुम्हारे दोस्त की है. अगर तुम्हारे पास अपनी हो तो फिर हम भी कार में आएँगी . मगर ऐसा नहीं है तो तुम क्यों चिंता करते हो.
राधा : दीदी ठीक कह रही हैं. जब तुम कार लोगे तो हम भी कार में तुम्हारे साथ बैठ कर घूमेंगी और मैं आगे बैठूंगी तुम्हारे साथ देख लेना
राधा ने मेरी आँखों में देखते हुए बड़े हक़ से ये कहा.
अमित: मगर मुझे ाचा नहीं लग रहा क आप इस तरह अकेली स्कूटी पे आती हैं. कहीं कभी कोई प्रॉब्लम हो गयी तो? मुझे दर लगता है इस लिए मैंने फैसला किया है क आप दोनों कार से आया करेंगी अब.
नेहा दीदी : ये नहीं हो सकता. कार हमारे बस की नहीं है और तुम्हे भी इस बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है
मैं क्या बात कर रहा हूँ अब तक मोहित और कल्पना भी समझ चुके थे इस लिए अब वो भी बीच में कूद पड़े .
मोहित : अमित ठीक कह रहा है दीदी . मैं भी तो आपका भाई हूँ. जैसा अमित वैसा मैं कल से आप दोनों को मैं लेने आऊंगा .
नेहा दीदी : थैंक्स मोहित पर ये ठीक नहीं है. तुम हमारे भाई जैसे हो पर लोग गलत समझेंगे वैसे भी कार की ज़रूरत नहीं है हमें.
कल्पना : ी एग्री विथ नेहा दीदी. लड़का होने की वजह लोग गलत समझेंगे मगर लड़की हो तो फिर कोई गलत नहीं समझेगा.
नेहा दीदी : तुम कहना क्या चाहती हो?
कल्पना : यही क कल से मैं आप दोनों को लेने आउंगी और आप मन नहीं करेंगी क्यूंकि मैं नहीं चाहती क मेरे दोस्त की बहने ऐसे स्कूटी पर आएं. एक तो इससे आपकी और अमित की इंसल्ट करेंगे क घटिया लोग और दूसरा आप कार में आएँगी तो किसी तरह की कोई परेशानी का दर भी नहीं रहेगा.
नेहा दीदी : पर
अमित : पर वॉर कुछ नहीं दीदी . क्या आप चाहती हैं क आपके भाई को बातें सुन्नी पड़े?
नेहा दीदी : बिलकुल नहीं
अमित : तो कल से आप कल्पना क साथ hi आएंगी और राधा तुम्हे तो कोई ऐतराज़ नहीं?
राधा : मेरी वजह से कोई तुम्हे कुछ कहे मैं ऐसा होने नहीं दूँगी. पर माँ शायद राज़ी न हो
कल्पना : आंटी से मैं बात करुँगी . तो हो गया फाइनल . कल मैं सुबह आप दोनों को लेने आउंगी आप मुझे अपने घर का एड्रेस समझा दो .
इस तरह एक मुश्किल तो हल हो गयी मगर अब मोंटी का हल तो करना पड़ेगा मगर कल्पना की बता भी सही थी पहले मोंटी क प्लान क बारे में जानना ज़रूरी था. इसी तरह हम कैंटीन में बैठे बातें करते रहे जब तक क बेल्ल नहीं बज गयी .
दूसरी तरफ D.P. इंटरनेशनल का ऑफिस जो शहर की सबसे बड़ी कंपनी है जिसकी कई फैक्ट्रीज और ऑफिस हैं अलग अलग शहरों में और फॉरेन में भी इनके ऑफिस हैं. ये मोंटी क डैड बलजीत राइ की कंपनी है. मोंटी क डैड तो खुद इतना बिजी रहते हैं क उनका पता नहीं होता वो कहाँ हैं . कई बार तो कई कई हफ्ते वो फॉरेन में hi बिता कर आते हैं . ऐसे में उनका स्टाफ hi सब कुछ संभालता है और उनके ऊपर उनके भरोसेमंद मैनेजर्स हैं जो पूरी ईमानदारी से काम करते हैं क्योंकि वो जानते हैं क उनका मालिक कितना खतरनाक इंसान है जो गलती होने पर क्या हल कर सकता है. रजनी मौसी की बेटी निधि भी इसी ऑफिस में जॉब करती है.
निधि ऑफिस में कासुअल फुल स्लीव शर्ट और ग्रे पेंट्स पहनती थी. जैसा की आप जानते hi हैं क निधि मॉडल जैसी दिखती है तो इसकी वो ज़बरदस्त फिगर ऐसी कासुअल ड्रेस में और भी कातिल लगती है . गोरा सफ़ेद रंग और ऐसी टाइट फिटिंग्स ऊपर से जान लेवा फिगर 36-28-36 . हाइट भी अच्छी है. देखने वाले तो पागल होंगे hi मगर निधि इतनी रिज़र्व है क कभी उसने किसी क साथ कोई रिलेशन रखा hi नहीं और न hi वो किसी को घास डालती है. मगर लोगों की नज़रें तो वो रोक नहीं सकती. ऐसे लोग तो हर जगह भरे पड़े हैं जो खूबसूरत लड़कियों को हासिल करने क लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं .
निधि : मई ी के इन सर ?
मैनेजर : यस निधि प्लीज के इन. तुम्हे मेरे केबिन में आने क लिए पूछने की ज़रूरत नहीं. ये रुके दुआरों क लिए है
निधि : थैंक यू सर बूत आईटी इस मैनर्स . सर ये प्रोजेक्ट फाइल आपने मंगवाई थी.
मैनेजर : फाइल को एक तरफ रखते हुए ) प्लीज सीट डाउन निधि. क्या हम कुछ देर बात कर सकते हैं ?
निधि : सर मुझे एक इम्पोर्टेन्ट रिपोर्ट फाइनल कर क फॉरेन क ऑफिस में भेजनी है . बॉस की सेक्रेटरी का फ़ोन आया था .
मैनेजर : ok , वैसे शाम को फ्री हो तुम ?
निधि : no सर मुझे फॅमिली क साथ कहीं जाना है. सर मई ी जो नाउ ?
मैनेजर : ok यू मई जो
निधि पलट कर बहार जाने लगी तो मैनेजर की नज़र उसकी जानलेवा मटकती गांड पर hi टिक गयी. वो तब तक देखता रहा जब तक क वो नज़रों से दूर नहीं हो गयी. उसे ये भी ध्यान नहीं आया क दरवाज़ा बंद क्यों नहीं हुआ. जब की दरवाज़ा पर उसका एक जूनियर दरवाज़े को एक साइड से रोक कर खड़ा था क्यूंकि उसको पता था क मैनेजर की नज़र कहाँ पर है. मन hi मन वो भी खुश हो रहा था. जब मैनेजर की नज़रों से निधि ओझल हुई तो उसका ध्यान जूनियर पर गया. जूनियर दरवाज़ा बंद करता हुआ अंदर आ गया. दोनों काफी सैलून से साथ थे तो एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे और अच्छी टोनिंग भी थी इनमे.
मैनेजर : यार ये लड़की क्या चीज़ है . इसे देखता हूँ तो खून उबले खाने लगता है. 3 महीने हो गए इस यहाँ लेकिन अभी तक साली हाथ भी नहीं लगाने देती .
जूनियर: सर बच कर जाएगी कहाँ , एक न एक दिन आप के नीचे आना hi पड़ेगा इसे भी. मगर जल्दी कीजिये सर कहीं बॉस आ गए तो वो ले उड़ेंगे इसे .
मैनेजर : तुम ठीक कहते हो. उस ठरकी की नज़र पद गयी तो फिर वो hi इसका सारा रास चूस लेगा. चाल देख कर तो लगता है क अभी कच्ची काली है . इससे पहले क बॉस की नज़र पड़े ये मेरे नीचे आणि चाहिए . बड़ा मज़ा आएगा इसे फूल बनाने में. जब जब इसे देखता हूँ खुद पर काबू नहीं रहता , साला अब तो सपने भी इसके एते हैं.
जूनियर : क्या सर आप भी कैसी बातें करते हैं. आप तो सब क सीनियर हैं आपके लिए भला क्या मुश्किल है. पकड़ लीजिये किसी दिन.
मैनेजर : समझा कर ऐसे ज़बरदस्ती नहीं कर सकते बात बिगड़ गयी तो करियर ख़राब हो जायेगा. कई बार टच तो करने की कोशिश की है मगर साली करंट मरती है. बहुत शरीफ लगती है आसानी से काबू नहीं आएगी.
जूनियर : किसी दिन ले जाइये न सर अपने साथ बिज़नेस टूर पे मीटिंग का बहाना कर क . फिर होटल में कर देना काम इसका भी जैसे पिछली वाली का किया था.
मैनेजर : तरय कर चूका हूँ साली मानती नहीं बहार जाने को . ज्यादा फाॅर्स किया तो रिजाइन देने की बात करने लगी थी . कुछ और तरय करता हूँ. जो भी हो इसे मैं अपने नीचे तो ला कर रहूँगा.
जूनियर : आपकी किस्मत अछि है सर जो बॉस 4 महीने से यहाँ ए hi नहीं . ाचा मौका है उनके आने से पहले झंडा गाड़ दो.
मैनेजर : तुम ठीक कह रहे हो . बॉस क आने से पहल hi करना होगा. फ़िलहाल तो वो अभी फॉरेन चले गए हैं . एक डेढ़ महीना तो गोरी चमड़ी का मज़ा लेंगे वहां . तब तक मैं इसे शीशे में उतर hi लूंगा.
जूनियर : बेस्ट ऑफ़ लक सर मेरे लिए कोई काम हो तो मुझे भी बताना . और सर काम होने क बाद मुझे भी भूल मत जाइएगा
मैनेजर : तुझे कैसे भूल सकता हूँ . तू तो मेरा यार है . बस एक बार इसके मज़े ले लूँ फिर तुझे भी पूरा मौका दूंगा मज़े करने का.
दोनों आपस में बातें करते हुए हसने लगे .
कॉलेज से छुट्टी होने क बाद कल्पना नेहा दीदी और राधा क पीछे पीछे उनका घर देखने चली गयी और मैं मोहित मीनल क साथ घर को निकल गया . घर आते hi मैं बिना लंच किये बाइक उठा कर मंजू म क घर की तरफ निकल गया . मोहित ने रोकना भी चाहा मगर मैं बहाना बना कर निकल गया. मुझे उनकी भी चिंता थी क पता नहीं उन्होंने कुछ खाया भी होगा या नहीं. मैंने रास्ते में होटल से लंच पैक करवाया और उनके घर पहुँच गया . बेल्ल बजने से पहले hi दरवाज़ा खुल गया और सामने मंजू म गाउन में hi कड़ी थी. उनके चेहरे पर दिलकश स्माइल थी. मेरे कुछ कहने से पहले hi उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींचा और दरवाज़ा बंद कर क मेरे गले लग गयी .
मंजू म : इतनी देर कैसे हो गयी आने में ? कॉलेज से घंटा भर पहले छुट्टी गयी थी न फिर भी देर से आये . पता है मैं कब से तुम्हारी रह देख रही हूँ?
मंजू म का इस तरह मेरा बेकरारी से मेरा इंतज़ार करना और यूँ मुझे गले लगाना मुझे बड़ा ाचा लगा
अमित: तो मेरा इंतज़ार हो रहा था. वो क्या है न मोहित क साथ पहले घर गया और बाइक उठा कर सीधा इधर hi आ गया रस्ते में लंच पैक करवा कर ले आया . खाना तो खाया नहीं होगा अपने ?
मंजू म : तुम्हारे बिना कैसे खा लेती? ाचा किया जो ले आये मैंने भी बनाया नहीं था सोचा था बहार लंच करने जायेंगे चलो ये भी ाचा हुआ.
अमित : अब तबियत कैसी है ?
मंजू म : अब ठीक हूँ . सारा दिन आराम जो किया.
अमित : वो तो नज़र आ रहा है . अभी तक गाउन में hi हो.
मंजू म : तुम्हारा लाया हुआ है और तुमने खुद hi तो पहनाया था सुबह . इसमें मुझे तुम्हारा एहसास हो रहा था इस लिए नहाने क बाद फिर से पहन लिया.
अमित: मतलब क जो मैं पहनाउंगा आप वो hi पहनेंगी. और अगर मैं आपको कपड़ों क बिना hi रखना चहुँ तो ?
मंजू म : धत्त बदमाश बेशरम कुछ तो शर्म करो .
अमित: आपके साथ बेशरम बन कर प्यार करना चाहता हूँ क्या आप नहीं करने देंगी?
मंजू म : तुम्हे रोका है क्या किसी ने?
अमित : तो फिर अब उतर दीजिये इसे
मंजू म : मैं नहीं उतरूंगी खुद hi उतर लो
अमित: चलिए पहले खाना खा लेते हैं सुबह से कुछ खाया तो होगा नहीं आपने
मंजू म : नहीं बस जूस पिया था
अमित : पता था मुझे आप ऐसा hi करेंगी. अब जल्दी से खाना कहते हैं बाएं बाद में.
मैंने मम क होंठो पर किश किया और किचन में जाने लगा तो मम ने खुद मेरे हाथ से खाना पकड़ लिया और मुझे बैठने का कह कर किचन में चली गयी . मैं सोफे पर बैठ हुआ था क मम खाना एक प्लेट में दाल कर ले आयी
अमित : ये क्या एक hi प्लेट ? आपकी प्लेट कहाँ है?
मंजू म : मैं तुम्हारे साथ hi खाउंगी और तुम्हे अपने हाथों से खिलाऊंगी .
अमित : ये तो और भी ाचा है.
मम ने प्लेट टेबल पर राखी और मेरे साथ बैठ गयी . मम अपने हाथ से निवाला बना कर मुझे खिलने लगी तो मैंने हाथ रोक पकड़ लिया
मंजू म : क्या हुआ?
अमित : ऐसे नहीं, मेरी गॉड में बैठ कर खिलाओ मुझे .
मंजू म : नॉटी बॉय !!
मम उठ कर मेरी जांघ पर बैठ गयी और मुझे अपने हाथ से खाना खिलने लगी. मैंने उनके हाथ से निवाला खाया और फिर अपने हाथ से निवाला बना कर उन्हें खिलाया . मम प्यार भरी नज़रों से मुझे देखने लगी और उनकी आँखों में पानी आ गया.
अमित : क्या हुआ ? आप की आँखों में आंसू ?
मंजू म : ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. इतना प्यार मुझे कभी नहीं मिला . इससे पहले सिर्फ मेरे भैया hi मुझे हाथ से खाना खिलते थे कभी कभी प्यार से . मगर जैसे तुम खिला रहे हो ऐसे कभी नहीं खाया .
अमित : मतलब
मंजू म : मुझे जिस तरह गॉड में बिठा कर खिला रहे हो ऐसे सिर्फ पति का hi हक़ होता है . और मेरे हस्बैंड में कभी ऐसे मुझे प्यार किया hi नहीं था.
अमित: आज क बाद आप अपने हस्बैंड का ज़िकर भी नहीं करना. पता नहीं वो कैसा आदमी था जिसने इतनी खूबसूरत बीवी को प्यार नहीं किया. मैं होता तो इतना प्यार करता क प्यार करने की कोई जगह hi नहीं बचती
मंजू म : अब तो हो न तुम . मैं कभी ज़िकर नहीं करुँगी अपने एक्स हस्बैंड का अब से तुम hi मेरे सब कुछ हो.
मम ने एक बार फिर से मुझे किश किया . मैंने भी उनको पूरा रिस्पांस दिया .
अमित : ऐसे तो खाने का और भी मज़ा आ रहा है. एक बाईट पर एक किश , ाचा है.
ऐसे hi प्यार से हम एक दूसरे को खाना खिलते हुए किश करते रहे. मंजू म से जितना भी प्यार कर रहा था उतना hi ज्यादा प्यार करने को दिल करता था.
अमित: अब मैं चलूँ ?
मंजू म : अभी तो ए अब कहाँ जाओगे ? मैं कहीं नहीं जाने दूंगी तुम्हे.
अमित: जाना तो होगा न . आंटी को क्या जवाब दूंगा? कल रत भी घर से बहार था रोज़ रोज़ ऐसे बहार रहूँगा तो बात घर तक पहुँच जाएगी.
मंजू म : ऐसा नहीं हो सकता क तुम मेरे साथ hi रहो? पता है इतनी अच्छी नींद मुझे कभी नहीं आयी जितनी कल रत तुम्हारी बाँहों में आयी मुझे.
अमित : वो तो आणि hi थी कल इतनी म्हणत जो की थी . कहो तो आज भी कल जैसे म्हणत करें?
मंजू म : बदमाश ! घूम फिर क उसी बात पर आ जाते हो. अभी बताती हूँ तुम्हे
मम एक पल क लिए कड़ी हुई और मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने सोफे पर रख कर मेरी गॉड में बैठ गयी और मेरे होंठों पर टूट पड़ी. इसी क साथ हम एक दूसरे होंठो को चूमने चाटने और करने लगे. मेरा एक हाथ गाउन क अंदर घुस कर उनके बूब्स पर पहुँच गया जो अंदर से निर्वस्त्र थे दूसरा हाथ मैंने उनकी नंगी जांघ से अंदर को खिसकते हुए उनके बड़े और मुलायम बट पर रख दिया . बूब्स की तरह वो भी निर्वस्त्र था यानि क गाउन क निचे कुछ नहीं पहना था मम ने. मम मेरे गले में बहन डेल मुझे किश कर रही थी और मैंने उनके होंठो का रास पिता हुआ उनके बूब्स और बट क साथ खेल रहा था. मेरा लैंड इतने में hi खड़ा हो गया था जिसका एहसास मम को हो गया होगा. मम अपनी कमर को मेरे लैंड पर दबाते हुए हिलने लगी यानि की अपनी छूट मेरे लैंड पर रगड़ने लगी. हम दोनों की सांस उखाड़ने लगी तो मम ने किश तोडा वो ज़ोर से हांफ रही थी. हम दोनों की नज़रें मिली तो उनकी आँखों में एक नशा सा दिखा मुझे.
मंजू म : अब बोलो , जाओगे मुझे छोड़ कर ?
अमित : ऐसे रोकेगी तो कैसे जा पाउँगा. वैसे नीचे का क्या हल है? वो इतनी जल्दी ठीक हो गयी ?
मंजू म : खुद hi देख लो.
मैंने ऐसे hi बैठ बैठे मम को साइड में सोफे पर लिटा दिया और नीचे बैठ कर उनकी टांगों को खोल कर छूट को देखने लगा.
अमित : सो ब्यूटीफुल!!!!
मम की छूट देखते hi मेरे मुँह से अपने आप तारीफ निकल आयी क्यूंकि मम की छूट एक डैम साफा चक थी. बालों का कहीं कोई नमो निशान नहीं था. छूट थोड़ी गोली हुई थी मगर छूट क होंठ फूले हुए भी प्यारे लग रहे थे. बिलकुल गुलाबी आभा बिखेर रही थी और बाकि का सारा हिस्सा दूध सा सफ़ेद था.
अमित : ये कब किया ?
मंजू म : तुमने hi तो कहा था तुम्हे वहां बल पसंद नहीं तो आज मैंने इसे अच्छी तरह साफ़ कर दिया ताकि तुम इसे फिर से प्यार कर सको .
अमित : ये कितनी प्यारी है इसे तो साडी उम्र प्यार करूँगा मैं.
इतना कह कर मैंने उनकी छूट पर एक किश कर दिया.
मंजू म : आअह्ह्ह्ह cccccccccc उनमममम ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi है . तुम जैसा चाहोगे वैसा पाओगे इसे. बस इसे यूँ hi प्यार करते रहना.
अमित : हमेशा करूँगा मगर अभी इसे रेस्ट की ज़रूरत है.
इतना कह कर मैं सीधा हो गया तो उनके पाऊँ में लटक रही पायल ने मुझे रोक लिया. मैंने हवा में झूल रहे उनके पाऊँ को हाथों में लिया और पायल क ऊपर से उनके तखनो पर किस किया.
अमित: इस पायल की खूबसूरती आपके पाऊँ में आकर बाद गयी है और आपके पाऊँ जैसे सम्पूर्ण हो गए हैं सुंदरता में बस इन पर थोड़ी लाल पोलिश लग जाये तो और भी अचे लगेंगे.
मंजू म : मैं अब से तुम्हारे लिए सजूंगी संवारूंगी . मैं एक खली तस्वीर हूँ जैसे चाहे रंग भर दो मुझ में.
अमित : मैं सिर्फ एक hi रंग जनता हूँ और वो है प्यार का रंग . बस उसी रंग से रंग दूंगा आपको
मैंने मंजू मम क दोनों पाऊँ एक साथ पकडे और उन पर किश किया.
मंजू म : तुम्हे पायल की आवाज़ बहुत पसंद है न ? मेरे भैया भी पायल की आवाज़ को बहुत पसंद करते थे. भाभी भैया क लिए स्पेशलय पायल पेहेन कर hi रहती थी हर वक़्त. मैं भी तुम्हारे लिए हमेशा उन्हें पेहेन कर रखूंगी.
अमित: पता नहीं क्यों पर ये सच है मुझे उसकी आवाज़ बहुत अच्छी लगती है . ये सीधा मेरे दिल में उतर जाती है . इसी लिए तो मैं ये लाया था आपके लिए . आपके सुने पाऊँ मुझे अचे नहीं लगते थे.
मंजू म : तुम्हारे दिल में जो जो भी बात हो वो मुझे बता दिया करो . मैं वो हर काम करुँगी जिससे तुम्हे ख़ुशी मिले. तुम्हे प्यार कर क मेरे दिल को क्या सुकून मिलता है मैं ये बयां नहीं कर सकती.
हम बात कर hi रहे थे क मेरा मोबाइल बजने लगा. मैंने देखा तो नैना दीदी की कॉल आ रही थी. मैंने एक नज़र मम की तरफ देखा तो वो मेरे मोबाइल पकड़ लेने से नाराज़ हो रही थी. उनके साथ प्यार भरी बातें बीच में hi रुक गयी थी. मगर मैंने उन्हें सॉरी का इशारा किया और कॉल अटेंड की.
नैना दीदी : बेशरम बेहया ज़ालिम इंसान अपने आप तो तुम्हे मेरी यद् आती नहीं ? एक बार भी अपने आप फ़ोन नहीं करते . शर्म तो नहीं आती न ? उस दिन क बाद मैं क बार भी मिलने नहीं आये. बस इतना hi प्यार था मुझसे ?
मैंने जवाब देने से पहले मम की तरफ देखा वो अभी भी वैसे hi मुझे देख रही थी जैसे वो इंतज़ार कर रही हो फ़ोन बंद होने का. मैंने उन्हें इशारे से बताया क मेरी कजिन का फ़ोन है तब तक आप कॉफ़ी बना लो. मम मेरी बात समझ कर सोफे से उठी और किचन में चली गयी.
नैना दीदी : जवाब दो चुप क्यों हो गए ?
अमित: सॉरी दीदी आप तो जानती हैं मैं गाओं गया था. टाइम नहीं मिल प् रहा मगर ऐसा मत समझना क मैं आपसे प्यार नहीं करता. आपकी जो जगह मेरे दिल में है वो मैं बता नहीं सकता शब्दों से.
नैना दीदी : पता है मुझे कहाँ कहाँ रहते हो सब खबर रखती हूँ. मगर तुम्हारा दिल नहीं करता मुझसे प्यार करने को? पता है उस दिन क बाद मुझे तुम्हारी कितनी यद् आती रहती है और तुम हो क दोबारा मिले नहीं अभी तक. मेरा दिल फिर से प्यार करने को कितना मचल रहा है मैं बता नहीं सकती.
अमित: थोड़ा सबर रखिये जैसे hi वक़्त मिलेगा मैं खुद hi आपको फिर से वहां ले चलूँगा.
नैना दीदी : अब तो वहां जाने की ज़रूरत भी नहीं है. वो तो पहली बार की वजह से जाना पड़ा था . अब तो तुम किसी दिन रत रुक जाना हमारे यहाँ . घर पर hi कर लेंगे.
अमित: घर पर रिस्क लेना ठीक नहीं
नैना दीदी: वो सब मैं देख लुंगी तुम जल्दी से आ जाओ बस .
अमित : ठीक है मैं गाओं जाने से पहले एक बार आऊंगा मगर रिस्क मत लेना.
नैना दीदी : मैंने कहा न तुम चिंता मत करो मैंने सब सोच रखा है. तुम बस आ जाओ.
उसके बाद कुछ देर और हमने बातें की फिर कॉल कट कर दी. इतने में मंजू म कॉफ़ी ले आये. कॉफ़ी भी एक hi बड़े मग में ले क ए थे मम और मैं उनका मतलब समझ गया. हमने एक hi मग में कॉफ़ी पि और बीच बीच में किश कर क एक दूसरे क होंठों का स्वाद भी कॉफ़ी में मिलाया.
अमित: अब मुझे जाना होगा. शाम को एक बार फिर आऊंगा ट्यूशन पड़ने . आपके स्टूडेंट्स भी आने वाले होंगे आप भी तैयार हो जाइये.
मंजू म : क्या आज रत फिर से नहीं रुक सकते तुम?
अमित: नहीं , आप समझने की कोशिश करो. रोज़ रोज़ ऐसे बहार रहूँगा तो शायद मेरा आना hi बंद हो जाये क्या आप ऐसा चाहती हैं?
मंजू म : नहीं नहीं , ऐसा नहीं होने दूंगी मैं. ठीक है तुम जाओ मगर शाम को जल्दी आ जाना और डिनर साथ में करेंगे आज. इतना तो कर सकते हो न?
अमित: ठीक है , तैयार रहिएगा. अब चलता हूँ.
मन ने आगे बाद कर मुझे किश किया और कस क मुझसे गले लग गयी . मैंने भी उन्हें अपनी आगोश में ले क प्यार किया और बाइक ले कर घर वापिस आ गया.
सुबह जल्दी उठने की आदत क कारन मैं जल्दी जाग गया . कमरे में वाल क्लॉक पर नज़र पड़ी तो 6 बज चुके थे . दिन का उजाला कमरे में फ़ैल रहा था. मेरी नज़र साथ में लेती हुई मंजू म पर पड़ी तो वो पेट क बल लेती हुई थी. एक तरफ को किया हुआ चेहरा जब मैंने देखा तो उनके उस मासूम और सुन्दर मुखड़े को देख कर मुझे उन पर प्यार आ गया और खुद बा खुद झुकते हुए मैंने उनके गालों पर किश कर दिया . वो वैसे hi सोई रही. मैंने उनके बल एक तरफ किये तो उनकी नंगी पीठ मेरे सामने आ गयी . दूध सा सफ़ेद रंग था मम का और कोमलता माखन जैसी. मैंने उनकी पीठ पर भी 4-5 किश जड़ दिए. वो थोड़ी सी कसमसाई और अपना एक घुटना मोड़ते हुए तंग को थोड़ा साइड को खोल दिया. इस तरह करने से उनकी गांड ऊपर को उभर आयी और एक साइड का पहाड़ कुछ ज्यादा hi बड़ा नज़र आने लगा. मैं खुद को रोक नहीं पाया और उनके दोनों खरबूजे अपने हाथों से थम कर दबाने लगा. बड़े hi नरम चूतड़ थे मम क . सचमुच वो पूरी की पूरी खूबसूरती का शाहकार थी जो अब मेरी थी. मुझे अपने आप पे रश्क होने लगा. चूतड़ों की खूबसूरती का इनाम देने क लिए मैंने उन्हें भी झुक कर चुम लिया और अपने हाथ से उनकी जांघों और कमर को सहलाने लगा.
‘ सुबह सुबह फिर शुरू हो गए , अभी रत को इतना दर्द दे कर चैन नहीं मिला ? लगता है ये तुम्हे कुछ ज्यादा hi पसंद हैं’
शायद मेरी छेड़ छड़ ने मम को उठने क लिए मजबूर कर दिया था. उन्होंने मुझे अपने चूतड़ों पर किश करते हुए देख कर ये कहा.
अमित: क्या करूँ आपका ये हुस्न मुझे मजबूर कर रहा है क मैं आपसे प्यार करूँ. और अब फिर से दर्द नहीं होगा मगर मैं अभी कुछ करने वाला नहीं. कॉलेज भी तो जाना है. और रही इनकी बात तो ये इतने खूबसूरत है क कोई भी मर्द इनकी तरफ खींचा चला आएगा. उन्हें देखते hi मेरे अंदर गर्मी बढ़ने लगती है.
मंजू म : मतलब तुम्हारी पहले से hi आँख थी इन पर? मैं नहीं करने दूंगी वहां कुछ यद् रखना. ये बहुत नाज़ुक हैं इतनी आसानी से नहीं मिलने वाले
अमित: सोच लो एक तरफ आप कहती हैं क आप पूरी की पूरी मेरी हैं और दूसरी तरफ मन भी कर रही हैं ?
मंजू म : मन कब किया ? मैंने तो इतना कहा क इतनी आसानी से नहीं दूँगी
अमित: मतलब आप देंगी तो चलो अभी शुरुआत कर देते हैं
मंजू म : अरे अरे कुछ तो तरस खाओ मुझ पर . अभी आगे का दर्द ख़तम नहीं हुआ और पीछे से भी भेदना चाहते हो ये खूंटा गाड़ कर.
मुझे उनकी इस बात पर हंसी आ गयी. मैं तो बस मज़ाक कर रहा था उनके साथ मगर वो दर hi गयी.
अमित : है है है . आप तो दर गयी. चिंता मत करो मैं आपकी सहमति क बिना कुछ नहीं करूँगा चाहे तो आप मन कर दें मैं फाॅर्स नहीं करूँगा
मंजू म : तुम कितने अचे हो , मेरी ीचा का सम्मान करते हो इसी लिए तो तुम पर इतना प्यार अत है मगर मुझे तुम्हारा खुद पर अधिकार जाताना ज्यादा ाचा लगता है. तुम ये सब अधिकार से कर सकते हो मैं मन नहीं करुँगी.
अमित: मगर मुझे सिर्फ आपकी ख़ुशी चाहिए
मंजू म : और मेरी ख़ुशी तुम्हारी ख़ुशी में है
इतना कह कर मंजू म ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर किश शुरू कर दी. 2-3 मिनट्स तक अच्छी तरह होंठ चूस कर वो मुझसे अलग हुई. मैं भी उनको सीधा करते हुए उनकी छूट पर नज़र डाली तो सूजन कुछ काम लग रही थी मगर अभी भी छूट क होंठ बड़े बड़े लग रहे थे .
अमित: अब दर्द कैसा है यहाँ पर?
मंजू म : अब ठीक है मगर हल्का हल्का महसूस हो रहा है अंदर भी.
अमित : बीएड से उठ कर ज़रा चल क देखिये
मंजू म जैसे hi चलने को हुई तो उनको थोड़ा दर्द हुआ मगर वो आहिस्ता आहिस्ता पाऊँ फैलाकर चल प् रही थी.
अमित: आज आप आराम कीजिये ऐसी हालत में बहार जाना सही नहीं . मुझे अभी जाना होगा सुबह की एक्सरसाइज पर भी जाना है और फिर घर .
मंजू म : क्या आज छुट्टी नहीं कर सकते तुम? मैं चाहती हूँ तुम मेरे पास रहो.
अमित : ऐसी बात है तो कैंसिल कर देता हूँ आज कॉलेज जाना . लो मैं बैठ गया यहीं आपके पास
मैंने फिर से बीएड पर बैठते हुए कहा.
मंजू म : चलो उठो कैसे तैयार रहते हो छुट्टी करने क लिए . मैं तो बस देख रही थी तुम क्या कहते हो. टेस्ट शुरू होने वाले हैं अब कोई छुट्टी नहीं. जाओ अब मगर कॉलेज क बाद सीधा मेरे पास आना . मेरा अकेले में दिल नहीं लगेगा.
मैंने मंजू म को बाँहों में भर कर उन्हें किश किया .
अमित : सीधा यहीं आऊंगा मगर आप भी अपना ख्याल रखना . खाना बहार से hi मंगवा लेना और कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है .
मैंने किश किया और कपडे पेहेन कर एक बार फिर मम को किश किया . गाउन पेहेन कर वो मुझे दरवाज़े तक छोड़ने आयी. जाने से पहने एक बार उन्होंने मुझे कास क ऐसे गले लगाया जैसे पत्नी पति क कहीं दूर जाने से पहले गले मिलती है . मुझे उनके दिल की हालत का पता चल रहा था क वो मुझे खुद से दूर नहीं करना चाहती . मगर मुझे भी तो जाना होगा वैसे भी मैं उन्हें थोड़ा स्ट्रांग बना hi दूंगा क वो इतना भी कमज़ोर न बने. मैं सीधा ग्राउंड में गया और एक्सरसाइज क बाद मोहित क घर. ज्यादा टाइम नहीं था तो जल्दी से तैयार हो कर नाश्ता किया. आंटी मुझसे बात करना चाहती थी मगर मोहित भी वहां था तो वो चुप रही . नाश्ता कर क हम दोनों दोस्त कॉलेज निकल गए.
चन्दर्कांता म का लेक्चर लगाने क बाद अगले 2 लेक्चर फ्री थे तो मैं मोहित और कल्पना को साथ ले कर कैंटीन में आ गया. तभी मुझे शिवानी की कॉल आने लगी . कॉलेज टाइम पर शिवानी कॉल क्यों कर रही है मुझे लगा कोई ज़रूरी बात होगी . मैंने साइड में जा कर कॉल अटेंड की
शिवानी : कहाँ गायब रहते हो कल से कितनी कॉल की उठाते नहीं हो . क्या बात है ?
अमित : सॉरी यार वो कल कहीं ज़रूरी काम में फसा हुआ था. तुम बताओ क्या बात है
शिवानी : देखो मैं ज्यादा बात तो नहीं कर सकती क्यूंकि मुझे जाना होगा इस वक़्त वाशरूम में आयी हूँ बात करने क लिए . मोंटी कुछ प्लान कर रहा है पर उसने अभी तक शीना से भी इस बारे में बात नहीं की है. इतना ज़रूर है क वो तुम्हारे साथ साथ तुम्हारी बहनो को भी नुकसान पहुँचाने वाला है.
शिवानी की बात सुनते hi मेरा दिमाग घूम गया. अपनी तो मुझे परवाह नहीं थी मगर नेहा दीदी और राधा को नुकसान पहुँचाने वाली बात पर मेरा खून खौल गया. एक पल में hi मेरा दिमाग गरम हो गया.
अमित: गुस्से में ) इस कुत्ते की मौत आयी है शायद . अगर उसने नेहा दीदी या राधा की तरफ गन्दी नज़र डाली तो ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दूंगा उसे .
शिवानी : खुद को काबू में रखो. वो क्या करने वाले हैं अभी तो हमें ये भी पता नहीं . तुम बस अलर्ट रहना बाकि मुझे जैसे hi पता चलता है मैं बता दूंगी .
अमित: थैंक्स शिवानी मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगा
शिवानी : मार कहानी है क्या ? मैं एहसान नहीं कर रही प्यार करती हूँ तुमसे और तुम्हारे लिए इतना तो कर hi सकती हूँ. वैसे मुझे तुम्हारी बहुत यद् आती है मगर मिल नहीं प् रही .
अमित: चिंता न करो किसी दिन साडी कसार निकल दूंगा और इस बार कार में नहीं बीएड पर मिलेंगे
शिवानी : चुप बेशरम कहीं क . ाचा अब मैं चलती हूँ . ी लव यू उम्म्माह bye bye
उसके बाद शिवानी ने कॉल कर दी मगर मेरा दिमाग ख़राब हो गया था. मैंने तुरंत शालू को फ़ोन लगाया . उसने फ़ोन काट दिया और 1 मिनट बाद hi उसकी कॉल आ गयी
शालू : तो आ गयी मेरी यद्? मुझे लगा तुम भूल गए मुझे
अमित: तुम्हे कैसे भूल सकता हूँ बस तुम्हारा काम पूरा होने तक मैं तुमसे दूर हूँ. वैसे मैंने कॉल इस लिए किया है क मुझे मदद की ज़रूरत है.
शालू : मदद ? क्या हुआ है ? मुझे बताओ मैं जो कर सकती हूँ करुँगी
अमित: मोंटी मेरी बहनो को नुकसान पहुँचाने की कोई चल चलने वाला है तुम मुझे पता कर क बताना अगर तुम कर सको तो.
शालू : क्या ? उस कुत्ते की नज़र अब तुम्हारी बहनो पर है. मैं आज से hi नज़र रखूंगी अगर कुछ भी पता चला तो बताउंगी . वैसे तुम खुद भी अलर्ट रहना और उन्हें भी कह देना.
शालू से बात कर क मैंने कॉल काट दी. शालू को मोंटी क कई कॉन्टेक्ट्स का पता था इस लिए शिवानी क मुकाबले मुझे शालू ज्यादा सही लगी ऐसे वक़्त में मदद क लिए मगर मोंटी भी शायद किसी क सामने कोई बात नहीं करेगा वर्ण उसने शीना को बता दिया होता. मुझे और भी कुछ सोचना होगा . फिर मैंने नीरज को कॉल लगा दी.
नीरज : हाँ भाई इस वक़्त कॉल कर रहे हो सब ठीक तो है न ?
अमित: भैय्या एक प्रॉब्लम हो गयी है. मुझे किसी दोस्त से पता चला है क मोंटी प्लान बना रहा है मेरी बहनो क साथ कुछ करने का.
नीरज : गुस्से में ) इसकी तो , तू चिंता मत कर छोटे भाई मेरे होते ऐसा नहीं हो सकता . अगर इसने कोई पन्गा लिया तो पैरों पर खड़ा नहीं हो पायेगा . तू चिंता मत कर वो मेरी भी बहने हैं.
अमित: मुझे आपसे यही उम्मीद थी भैय्या . आप फिर भी अपने दोस्तों से भी बात कर लेना.
नीरज : तू चिंता मत कर मैं अभी बात करता हूँ .
इसके बाद हमने एक होने काट दिया. अब मैं सोचने लगा क मोंटी कैसे नुकसान पहुंचा सकता है राधा और नेहा दीदी को ? कॉलेज में तो नीरज भैया उनके दोस्त हैं मैं हूँ मोहित है ज़रूर वो बहार hi कुछ करेगा. मुझे दोनों क बारे में कुछ सोचना होगा. वो दोनों स्कूटी पे अति हैं ऐसे में कहीं बहार वो पहले की तरह किसी को भेज कर या खुद उन्हें परेशां न करे या फिर कुछ और करेगा? जब तक उसके प्लान का पता नहीं चल जाता मुझे खुद नज़र रखनी चाहिए. मैं अपनी सोच में डूबा था क कल्पना और मोहित भी मेरे पास आ गए . मुझे टेंशन में देख कर उन्हें पता चल गया क कोई गंभीर मसला है
मोहित : क्या बात है ? तू टेंशन में क्यों है?
कल्पना : बात क्या है ? इतनी देर से बहार हो किसका फ़ोन था ?
अमित : यार वो मोंटी राधा और नेहा दीदी को कोई नुकसान पहुँचाना चाहता है मुझसे बदला लेने क लिए . मुझे समझ नहीं आ रही क क्या किया जाये ?
मोहित : क्या ? उसकी माँ की , तू टेंशन मत ले. सेल को थोक देते हैं पहले hi . फिर कुछ करने की सोचेगा भी नहीं.
कल्पना : ऐसे कैसे थोक डोज? अगर कुछ किया तो कॉलेज से निकल दिए जाओगे. पहले पता तो चले वो करना क्या चाहता है. फिर उसे तरीके से हैंडल कर लेंगे. जो भी करना होगा कॉलेज क बहार . पर मैं यही कहूँगी क पहले पता करो वो करने क्या वाला है वर्ण वो पलट कर फिर वॉर करेगा इस लिए ाचा रहेगा रेंज हाथ पकड़ो और उसे ऐसी सजा मिले क दोबारा कुछ करने क लायक hi न रहे.
अमित: मुझे इस बात की परवाह नहीं है. मैं बस इस बात से दर रहा हूँ क कॉलेज में तो हम सब हैं . यहाँ वो हिम्मत नहीं करेगा मगर कॉलेज क बहार घर आते जाते कहीं वो उन दोनों को कहीं रस्ते में घेर कर कुछ करेगा तो हम को पता चलने से पहले कुछ हो गया तो ?
कल्पना : बस इतनी सी बात ? इसकी जिम्मेदारी मैं लेती हूँ. उन दोनों को कॉलेज से घर लेन ले जाने मैं खुद जाउंगी अपनी कार में बस तुम उनसे बात कर लो.
अमित: एक बात और , वो दोनों जल्दी घबरा जाती हैं इस लिए उनके सामने कोई इस बारे में बात नहीं करेगा.
कल्पना : तो फिर मानेंगी कैसे? तुम खुद hi समझाना उन्हें कैसे समझाना है.
अमित : वो मैं देखता हूँ बस तुम उनका ख्याल रखना प्लीज
कल्पना : प्लीज कहने की ज़रूरत नहीं है. हम दोस्त हैं और दोस्त hi दोस्तों क काम एते हैं. वैसे भी जो कुछ सीखा है उसका इस्तेमाल रियल लाइफ में करने का इससे ाचा मौका कहाँ मिलेगा . तुम फ़िक्र न करो आज से उनकी साडी टेंशन मैं लेती हूँ . तुम बस बेफिक्र रहो.
अमित : थैंक यू वैरी मच कल्पना मैं तुम्हारा एहसान.....
कल्पना : दूँ क्या एक रख क ? दोस्ती में एहसान नहीं होते . हाँ दोस्तों को फीस ज़रूर देनी पड़ती है दोस्ती की. चलो कुछ खिलाओ अब कब से वेट कर रहे थे तुम्हारा कैंटीन में.
मुझे कल्पना पर बड़ा गर्व महसूस हुआ क वो कितनी अच्छी है और मुझे अपना ाचा दोस्त मानते हुए मेरी टेंशन अपने सर ले रही है. अगर राधा और नेहा दीदी कल्पना क साथ रहेंगी तो निश्चय hi वो सुरक्षित रहेंगी . हम तीनो कैंटीन में आ गए. कुछ hi देर में बेल्ल बज गयी और राधा मीनल नेहा दीदी क साथ कैंटीन में आ गयी .
अमित : ाचा हुआ आप आ गयी. देखो न दीदी आपकी वजह से मुझे सबकी बातें सुन्नी पद रही हैं. अब आप hi कुछ करो.
नेहा दीदी : बात क्या है क्या हुआ है ? कौन बातें कर रहा है?
नेहा दीदी क साथ साथ राधा मीनल मोहित और कल्पना भी हैरान हो गए क मैं क्या बात करने इस वाला हूँ .
अमित : मैं मोहित क साथ कार में अत हूँ और आप दोनों स्कूटी पर बस इसी लिए सब ये कह रहे हैं क मैं कैसा भाई हूँ क खुद कार में घूमता हूँ और मेरी बहने स्कूटी पे आती हैं. मुझे ये ाचा नहीं लग रहा
नेहा दीदी : ये तो सरासर गलत बात है . कौन कह रहा है ये ? तुम कौन सा अपनी कार में एते हो वो तो तुम्हारे दोस्त की है. अगर तुम्हारे पास अपनी हो तो फिर हम भी कार में आएँगी . मगर ऐसा नहीं है तो तुम क्यों चिंता करते हो.
राधा : दीदी ठीक कह रही हैं. जब तुम कार लोगे तो हम भी कार में तुम्हारे साथ बैठ कर घूमेंगी और मैं आगे बैठूंगी तुम्हारे साथ देख लेना
राधा ने मेरी आँखों में देखते हुए बड़े हक़ से ये कहा.
अमित: मगर मुझे ाचा नहीं लग रहा क आप इस तरह अकेली स्कूटी पे आती हैं. कहीं कभी कोई प्रॉब्लम हो गयी तो? मुझे दर लगता है इस लिए मैंने फैसला किया है क आप दोनों कार से आया करेंगी अब.
नेहा दीदी : ये नहीं हो सकता. कार हमारे बस की नहीं है और तुम्हे भी इस बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है
मैं क्या बात कर रहा हूँ अब तक मोहित और कल्पना भी समझ चुके थे इस लिए अब वो भी बीच में कूद पड़े .
मोहित : अमित ठीक कह रहा है दीदी . मैं भी तो आपका भाई हूँ. जैसा अमित वैसा मैं कल से आप दोनों को मैं लेने आऊंगा .
नेहा दीदी : थैंक्स मोहित पर ये ठीक नहीं है. तुम हमारे भाई जैसे हो पर लोग गलत समझेंगे वैसे भी कार की ज़रूरत नहीं है हमें.
कल्पना : ी एग्री विथ नेहा दीदी. लड़का होने की वजह लोग गलत समझेंगे मगर लड़की हो तो फिर कोई गलत नहीं समझेगा.
नेहा दीदी : तुम कहना क्या चाहती हो?
कल्पना : यही क कल से मैं आप दोनों को लेने आउंगी और आप मन नहीं करेंगी क्यूंकि मैं नहीं चाहती क मेरे दोस्त की बहने ऐसे स्कूटी पर आएं. एक तो इससे आपकी और अमित की इंसल्ट करेंगे क घटिया लोग और दूसरा आप कार में आएँगी तो किसी तरह की कोई परेशानी का दर भी नहीं रहेगा.
नेहा दीदी : पर
अमित : पर वॉर कुछ नहीं दीदी . क्या आप चाहती हैं क आपके भाई को बातें सुन्नी पड़े?
नेहा दीदी : बिलकुल नहीं
अमित : तो कल से आप कल्पना क साथ hi आएंगी और राधा तुम्हे तो कोई ऐतराज़ नहीं?
राधा : मेरी वजह से कोई तुम्हे कुछ कहे मैं ऐसा होने नहीं दूँगी. पर माँ शायद राज़ी न हो
कल्पना : आंटी से मैं बात करुँगी . तो हो गया फाइनल . कल मैं सुबह आप दोनों को लेने आउंगी आप मुझे अपने घर का एड्रेस समझा दो .
इस तरह एक मुश्किल तो हल हो गयी मगर अब मोंटी का हल तो करना पड़ेगा मगर कल्पना की बता भी सही थी पहले मोंटी क प्लान क बारे में जानना ज़रूरी था. इसी तरह हम कैंटीन में बैठे बातें करते रहे जब तक क बेल्ल नहीं बज गयी .
दूसरी तरफ D.P. इंटरनेशनल का ऑफिस जो शहर की सबसे बड़ी कंपनी है जिसकी कई फैक्ट्रीज और ऑफिस हैं अलग अलग शहरों में और फॉरेन में भी इनके ऑफिस हैं. ये मोंटी क डैड बलजीत राइ की कंपनी है. मोंटी क डैड तो खुद इतना बिजी रहते हैं क उनका पता नहीं होता वो कहाँ हैं . कई बार तो कई कई हफ्ते वो फॉरेन में hi बिता कर आते हैं . ऐसे में उनका स्टाफ hi सब कुछ संभालता है और उनके ऊपर उनके भरोसेमंद मैनेजर्स हैं जो पूरी ईमानदारी से काम करते हैं क्योंकि वो जानते हैं क उनका मालिक कितना खतरनाक इंसान है जो गलती होने पर क्या हल कर सकता है. रजनी मौसी की बेटी निधि भी इसी ऑफिस में जॉब करती है.
निधि ऑफिस में कासुअल फुल स्लीव शर्ट और ग्रे पेंट्स पहनती थी. जैसा की आप जानते hi हैं क निधि मॉडल जैसी दिखती है तो इसकी वो ज़बरदस्त फिगर ऐसी कासुअल ड्रेस में और भी कातिल लगती है . गोरा सफ़ेद रंग और ऐसी टाइट फिटिंग्स ऊपर से जान लेवा फिगर 36-28-36 . हाइट भी अच्छी है. देखने वाले तो पागल होंगे hi मगर निधि इतनी रिज़र्व है क कभी उसने किसी क साथ कोई रिलेशन रखा hi नहीं और न hi वो किसी को घास डालती है. मगर लोगों की नज़रें तो वो रोक नहीं सकती. ऐसे लोग तो हर जगह भरे पड़े हैं जो खूबसूरत लड़कियों को हासिल करने क लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं .
निधि : मई ी के इन सर ?
मैनेजर : यस निधि प्लीज के इन. तुम्हे मेरे केबिन में आने क लिए पूछने की ज़रूरत नहीं. ये रुके दुआरों क लिए है
निधि : थैंक यू सर बूत आईटी इस मैनर्स . सर ये प्रोजेक्ट फाइल आपने मंगवाई थी.
मैनेजर : फाइल को एक तरफ रखते हुए ) प्लीज सीट डाउन निधि. क्या हम कुछ देर बात कर सकते हैं ?
निधि : सर मुझे एक इम्पोर्टेन्ट रिपोर्ट फाइनल कर क फॉरेन क ऑफिस में भेजनी है . बॉस की सेक्रेटरी का फ़ोन आया था .
मैनेजर : ok , वैसे शाम को फ्री हो तुम ?
निधि : no सर मुझे फॅमिली क साथ कहीं जाना है. सर मई ी जो नाउ ?
मैनेजर : ok यू मई जो
निधि पलट कर बहार जाने लगी तो मैनेजर की नज़र उसकी जानलेवा मटकती गांड पर hi टिक गयी. वो तब तक देखता रहा जब तक क वो नज़रों से दूर नहीं हो गयी. उसे ये भी ध्यान नहीं आया क दरवाज़ा बंद क्यों नहीं हुआ. जब की दरवाज़ा पर उसका एक जूनियर दरवाज़े को एक साइड से रोक कर खड़ा था क्यूंकि उसको पता था क मैनेजर की नज़र कहाँ पर है. मन hi मन वो भी खुश हो रहा था. जब मैनेजर की नज़रों से निधि ओझल हुई तो उसका ध्यान जूनियर पर गया. जूनियर दरवाज़ा बंद करता हुआ अंदर आ गया. दोनों काफी सैलून से साथ थे तो एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे और अच्छी टोनिंग भी थी इनमे.
मैनेजर : यार ये लड़की क्या चीज़ है . इसे देखता हूँ तो खून उबले खाने लगता है. 3 महीने हो गए इस यहाँ लेकिन अभी तक साली हाथ भी नहीं लगाने देती .
जूनियर: सर बच कर जाएगी कहाँ , एक न एक दिन आप के नीचे आना hi पड़ेगा इसे भी. मगर जल्दी कीजिये सर कहीं बॉस आ गए तो वो ले उड़ेंगे इसे .
मैनेजर : तुम ठीक कहते हो. उस ठरकी की नज़र पद गयी तो फिर वो hi इसका सारा रास चूस लेगा. चाल देख कर तो लगता है क अभी कच्ची काली है . इससे पहले क बॉस की नज़र पड़े ये मेरे नीचे आणि चाहिए . बड़ा मज़ा आएगा इसे फूल बनाने में. जब जब इसे देखता हूँ खुद पर काबू नहीं रहता , साला अब तो सपने भी इसके एते हैं.
जूनियर : क्या सर आप भी कैसी बातें करते हैं. आप तो सब क सीनियर हैं आपके लिए भला क्या मुश्किल है. पकड़ लीजिये किसी दिन.
मैनेजर : समझा कर ऐसे ज़बरदस्ती नहीं कर सकते बात बिगड़ गयी तो करियर ख़राब हो जायेगा. कई बार टच तो करने की कोशिश की है मगर साली करंट मरती है. बहुत शरीफ लगती है आसानी से काबू नहीं आएगी.
जूनियर : किसी दिन ले जाइये न सर अपने साथ बिज़नेस टूर पे मीटिंग का बहाना कर क . फिर होटल में कर देना काम इसका भी जैसे पिछली वाली का किया था.
मैनेजर : तरय कर चूका हूँ साली मानती नहीं बहार जाने को . ज्यादा फाॅर्स किया तो रिजाइन देने की बात करने लगी थी . कुछ और तरय करता हूँ. जो भी हो इसे मैं अपने नीचे तो ला कर रहूँगा.
जूनियर : आपकी किस्मत अछि है सर जो बॉस 4 महीने से यहाँ ए hi नहीं . ाचा मौका है उनके आने से पहले झंडा गाड़ दो.
मैनेजर : तुम ठीक कह रहे हो . बॉस क आने से पहल hi करना होगा. फ़िलहाल तो वो अभी फॉरेन चले गए हैं . एक डेढ़ महीना तो गोरी चमड़ी का मज़ा लेंगे वहां . तब तक मैं इसे शीशे में उतर hi लूंगा.
जूनियर : बेस्ट ऑफ़ लक सर मेरे लिए कोई काम हो तो मुझे भी बताना . और सर काम होने क बाद मुझे भी भूल मत जाइएगा
मैनेजर : तुझे कैसे भूल सकता हूँ . तू तो मेरा यार है . बस एक बार इसके मज़े ले लूँ फिर तुझे भी पूरा मौका दूंगा मज़े करने का.
दोनों आपस में बातें करते हुए हसने लगे .
कॉलेज से छुट्टी होने क बाद कल्पना नेहा दीदी और राधा क पीछे पीछे उनका घर देखने चली गयी और मैं मोहित मीनल क साथ घर को निकल गया . घर आते hi मैं बिना लंच किये बाइक उठा कर मंजू म क घर की तरफ निकल गया . मोहित ने रोकना भी चाहा मगर मैं बहाना बना कर निकल गया. मुझे उनकी भी चिंता थी क पता नहीं उन्होंने कुछ खाया भी होगा या नहीं. मैंने रास्ते में होटल से लंच पैक करवाया और उनके घर पहुँच गया . बेल्ल बजने से पहले hi दरवाज़ा खुल गया और सामने मंजू म गाउन में hi कड़ी थी. उनके चेहरे पर दिलकश स्माइल थी. मेरे कुछ कहने से पहले hi उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींचा और दरवाज़ा बंद कर क मेरे गले लग गयी .
मंजू म : इतनी देर कैसे हो गयी आने में ? कॉलेज से घंटा भर पहले छुट्टी गयी थी न फिर भी देर से आये . पता है मैं कब से तुम्हारी रह देख रही हूँ?
मंजू म का इस तरह मेरा बेकरारी से मेरा इंतज़ार करना और यूँ मुझे गले लगाना मुझे बड़ा ाचा लगा
अमित: तो मेरा इंतज़ार हो रहा था. वो क्या है न मोहित क साथ पहले घर गया और बाइक उठा कर सीधा इधर hi आ गया रस्ते में लंच पैक करवा कर ले आया . खाना तो खाया नहीं होगा अपने ?
मंजू म : तुम्हारे बिना कैसे खा लेती? ाचा किया जो ले आये मैंने भी बनाया नहीं था सोचा था बहार लंच करने जायेंगे चलो ये भी ाचा हुआ.
अमित : अब तबियत कैसी है ?
मंजू म : अब ठीक हूँ . सारा दिन आराम जो किया.
अमित : वो तो नज़र आ रहा है . अभी तक गाउन में hi हो.
मंजू म : तुम्हारा लाया हुआ है और तुमने खुद hi तो पहनाया था सुबह . इसमें मुझे तुम्हारा एहसास हो रहा था इस लिए नहाने क बाद फिर से पहन लिया.
अमित: मतलब क जो मैं पहनाउंगा आप वो hi पहनेंगी. और अगर मैं आपको कपड़ों क बिना hi रखना चहुँ तो ?
मंजू म : धत्त बदमाश बेशरम कुछ तो शर्म करो .
अमित: आपके साथ बेशरम बन कर प्यार करना चाहता हूँ क्या आप नहीं करने देंगी?
मंजू म : तुम्हे रोका है क्या किसी ने?
अमित : तो फिर अब उतर दीजिये इसे
मंजू म : मैं नहीं उतरूंगी खुद hi उतर लो
अमित: चलिए पहले खाना खा लेते हैं सुबह से कुछ खाया तो होगा नहीं आपने
मंजू म : नहीं बस जूस पिया था
अमित : पता था मुझे आप ऐसा hi करेंगी. अब जल्दी से खाना कहते हैं बाएं बाद में.
मैंने मम क होंठो पर किश किया और किचन में जाने लगा तो मम ने खुद मेरे हाथ से खाना पकड़ लिया और मुझे बैठने का कह कर किचन में चली गयी . मैं सोफे पर बैठ हुआ था क मम खाना एक प्लेट में दाल कर ले आयी
अमित : ये क्या एक hi प्लेट ? आपकी प्लेट कहाँ है?
मंजू म : मैं तुम्हारे साथ hi खाउंगी और तुम्हे अपने हाथों से खिलाऊंगी .
अमित : ये तो और भी ाचा है.
मम ने प्लेट टेबल पर राखी और मेरे साथ बैठ गयी . मम अपने हाथ से निवाला बना कर मुझे खिलने लगी तो मैंने हाथ रोक पकड़ लिया
मंजू म : क्या हुआ?
अमित : ऐसे नहीं, मेरी गॉड में बैठ कर खिलाओ मुझे .
मंजू म : नॉटी बॉय !!
मम उठ कर मेरी जांघ पर बैठ गयी और मुझे अपने हाथ से खाना खिलने लगी. मैंने उनके हाथ से निवाला खाया और फिर अपने हाथ से निवाला बना कर उन्हें खिलाया . मम प्यार भरी नज़रों से मुझे देखने लगी और उनकी आँखों में पानी आ गया.
अमित : क्या हुआ ? आप की आँखों में आंसू ?
मंजू म : ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. इतना प्यार मुझे कभी नहीं मिला . इससे पहले सिर्फ मेरे भैया hi मुझे हाथ से खाना खिलते थे कभी कभी प्यार से . मगर जैसे तुम खिला रहे हो ऐसे कभी नहीं खाया .
अमित : मतलब
मंजू म : मुझे जिस तरह गॉड में बिठा कर खिला रहे हो ऐसे सिर्फ पति का hi हक़ होता है . और मेरे हस्बैंड में कभी ऐसे मुझे प्यार किया hi नहीं था.
अमित: आज क बाद आप अपने हस्बैंड का ज़िकर भी नहीं करना. पता नहीं वो कैसा आदमी था जिसने इतनी खूबसूरत बीवी को प्यार नहीं किया. मैं होता तो इतना प्यार करता क प्यार करने की कोई जगह hi नहीं बचती
मंजू म : अब तो हो न तुम . मैं कभी ज़िकर नहीं करुँगी अपने एक्स हस्बैंड का अब से तुम hi मेरे सब कुछ हो.
मम ने एक बार फिर से मुझे किश किया . मैंने भी उनको पूरा रिस्पांस दिया .
अमित : ऐसे तो खाने का और भी मज़ा आ रहा है. एक बाईट पर एक किश , ाचा है.
ऐसे hi प्यार से हम एक दूसरे को खाना खिलते हुए किश करते रहे. मंजू म से जितना भी प्यार कर रहा था उतना hi ज्यादा प्यार करने को दिल करता था.
अमित: अब मैं चलूँ ?
मंजू म : अभी तो ए अब कहाँ जाओगे ? मैं कहीं नहीं जाने दूंगी तुम्हे.
अमित: जाना तो होगा न . आंटी को क्या जवाब दूंगा? कल रत भी घर से बहार था रोज़ रोज़ ऐसे बहार रहूँगा तो बात घर तक पहुँच जाएगी.
मंजू म : ऐसा नहीं हो सकता क तुम मेरे साथ hi रहो? पता है इतनी अच्छी नींद मुझे कभी नहीं आयी जितनी कल रत तुम्हारी बाँहों में आयी मुझे.
अमित : वो तो आणि hi थी कल इतनी म्हणत जो की थी . कहो तो आज भी कल जैसे म्हणत करें?
मंजू म : बदमाश ! घूम फिर क उसी बात पर आ जाते हो. अभी बताती हूँ तुम्हे
मम एक पल क लिए कड़ी हुई और मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने सोफे पर रख कर मेरी गॉड में बैठ गयी और मेरे होंठों पर टूट पड़ी. इसी क साथ हम एक दूसरे होंठो को चूमने चाटने और करने लगे. मेरा एक हाथ गाउन क अंदर घुस कर उनके बूब्स पर पहुँच गया जो अंदर से निर्वस्त्र थे दूसरा हाथ मैंने उनकी नंगी जांघ से अंदर को खिसकते हुए उनके बड़े और मुलायम बट पर रख दिया . बूब्स की तरह वो भी निर्वस्त्र था यानि क गाउन क निचे कुछ नहीं पहना था मम ने. मम मेरे गले में बहन डेल मुझे किश कर रही थी और मैंने उनके होंठो का रास पिता हुआ उनके बूब्स और बट क साथ खेल रहा था. मेरा लैंड इतने में hi खड़ा हो गया था जिसका एहसास मम को हो गया होगा. मम अपनी कमर को मेरे लैंड पर दबाते हुए हिलने लगी यानि की अपनी छूट मेरे लैंड पर रगड़ने लगी. हम दोनों की सांस उखाड़ने लगी तो मम ने किश तोडा वो ज़ोर से हांफ रही थी. हम दोनों की नज़रें मिली तो उनकी आँखों में एक नशा सा दिखा मुझे.
मंजू म : अब बोलो , जाओगे मुझे छोड़ कर ?
अमित : ऐसे रोकेगी तो कैसे जा पाउँगा. वैसे नीचे का क्या हल है? वो इतनी जल्दी ठीक हो गयी ?
मंजू म : खुद hi देख लो.
मैंने ऐसे hi बैठ बैठे मम को साइड में सोफे पर लिटा दिया और नीचे बैठ कर उनकी टांगों को खोल कर छूट को देखने लगा.
अमित : सो ब्यूटीफुल!!!!
मम की छूट देखते hi मेरे मुँह से अपने आप तारीफ निकल आयी क्यूंकि मम की छूट एक डैम साफा चक थी. बालों का कहीं कोई नमो निशान नहीं था. छूट थोड़ी गोली हुई थी मगर छूट क होंठ फूले हुए भी प्यारे लग रहे थे. बिलकुल गुलाबी आभा बिखेर रही थी और बाकि का सारा हिस्सा दूध सा सफ़ेद था.
अमित : ये कब किया ?
मंजू म : तुमने hi तो कहा था तुम्हे वहां बल पसंद नहीं तो आज मैंने इसे अच्छी तरह साफ़ कर दिया ताकि तुम इसे फिर से प्यार कर सको .
अमित : ये कितनी प्यारी है इसे तो साडी उम्र प्यार करूँगा मैं.
इतना कह कर मैंने उनकी छूट पर एक किश कर दिया.
मंजू म : आअह्ह्ह्ह cccccccccc उनमममम ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi है . तुम जैसा चाहोगे वैसा पाओगे इसे. बस इसे यूँ hi प्यार करते रहना.
अमित : हमेशा करूँगा मगर अभी इसे रेस्ट की ज़रूरत है.
इतना कह कर मैं सीधा हो गया तो उनके पाऊँ में लटक रही पायल ने मुझे रोक लिया. मैंने हवा में झूल रहे उनके पाऊँ को हाथों में लिया और पायल क ऊपर से उनके तखनो पर किस किया.
अमित: इस पायल की खूबसूरती आपके पाऊँ में आकर बाद गयी है और आपके पाऊँ जैसे सम्पूर्ण हो गए हैं सुंदरता में बस इन पर थोड़ी लाल पोलिश लग जाये तो और भी अचे लगेंगे.
मंजू म : मैं अब से तुम्हारे लिए सजूंगी संवारूंगी . मैं एक खली तस्वीर हूँ जैसे चाहे रंग भर दो मुझ में.
अमित : मैं सिर्फ एक hi रंग जनता हूँ और वो है प्यार का रंग . बस उसी रंग से रंग दूंगा आपको
मैंने मंजू मम क दोनों पाऊँ एक साथ पकडे और उन पर किश किया.
मंजू म : तुम्हे पायल की आवाज़ बहुत पसंद है न ? मेरे भैया भी पायल की आवाज़ को बहुत पसंद करते थे. भाभी भैया क लिए स्पेशलय पायल पेहेन कर hi रहती थी हर वक़्त. मैं भी तुम्हारे लिए हमेशा उन्हें पेहेन कर रखूंगी.
अमित: पता नहीं क्यों पर ये सच है मुझे उसकी आवाज़ बहुत अच्छी लगती है . ये सीधा मेरे दिल में उतर जाती है . इसी लिए तो मैं ये लाया था आपके लिए . आपके सुने पाऊँ मुझे अचे नहीं लगते थे.
मंजू म : तुम्हारे दिल में जो जो भी बात हो वो मुझे बता दिया करो . मैं वो हर काम करुँगी जिससे तुम्हे ख़ुशी मिले. तुम्हे प्यार कर क मेरे दिल को क्या सुकून मिलता है मैं ये बयां नहीं कर सकती.
हम बात कर hi रहे थे क मेरा मोबाइल बजने लगा. मैंने देखा तो नैना दीदी की कॉल आ रही थी. मैंने एक नज़र मम की तरफ देखा तो वो मेरे मोबाइल पकड़ लेने से नाराज़ हो रही थी. उनके साथ प्यार भरी बातें बीच में hi रुक गयी थी. मगर मैंने उन्हें सॉरी का इशारा किया और कॉल अटेंड की.
नैना दीदी : बेशरम बेहया ज़ालिम इंसान अपने आप तो तुम्हे मेरी यद् आती नहीं ? एक बार भी अपने आप फ़ोन नहीं करते . शर्म तो नहीं आती न ? उस दिन क बाद मैं क बार भी मिलने नहीं आये. बस इतना hi प्यार था मुझसे ?
मैंने जवाब देने से पहले मम की तरफ देखा वो अभी भी वैसे hi मुझे देख रही थी जैसे वो इंतज़ार कर रही हो फ़ोन बंद होने का. मैंने उन्हें इशारे से बताया क मेरी कजिन का फ़ोन है तब तक आप कॉफ़ी बना लो. मम मेरी बात समझ कर सोफे से उठी और किचन में चली गयी.
नैना दीदी : जवाब दो चुप क्यों हो गए ?
अमित: सॉरी दीदी आप तो जानती हैं मैं गाओं गया था. टाइम नहीं मिल प् रहा मगर ऐसा मत समझना क मैं आपसे प्यार नहीं करता. आपकी जो जगह मेरे दिल में है वो मैं बता नहीं सकता शब्दों से.
नैना दीदी : पता है मुझे कहाँ कहाँ रहते हो सब खबर रखती हूँ. मगर तुम्हारा दिल नहीं करता मुझसे प्यार करने को? पता है उस दिन क बाद मुझे तुम्हारी कितनी यद् आती रहती है और तुम हो क दोबारा मिले नहीं अभी तक. मेरा दिल फिर से प्यार करने को कितना मचल रहा है मैं बता नहीं सकती.
अमित: थोड़ा सबर रखिये जैसे hi वक़्त मिलेगा मैं खुद hi आपको फिर से वहां ले चलूँगा.
नैना दीदी : अब तो वहां जाने की ज़रूरत भी नहीं है. वो तो पहली बार की वजह से जाना पड़ा था . अब तो तुम किसी दिन रत रुक जाना हमारे यहाँ . घर पर hi कर लेंगे.
अमित: घर पर रिस्क लेना ठीक नहीं
नैना दीदी: वो सब मैं देख लुंगी तुम जल्दी से आ जाओ बस .
अमित : ठीक है मैं गाओं जाने से पहले एक बार आऊंगा मगर रिस्क मत लेना.
नैना दीदी : मैंने कहा न तुम चिंता मत करो मैंने सब सोच रखा है. तुम बस आ जाओ.
उसके बाद कुछ देर और हमने बातें की फिर कॉल कट कर दी. इतने में मंजू म कॉफ़ी ले आये. कॉफ़ी भी एक hi बड़े मग में ले क ए थे मम और मैं उनका मतलब समझ गया. हमने एक hi मग में कॉफ़ी पि और बीच बीच में किश कर क एक दूसरे क होंठों का स्वाद भी कॉफ़ी में मिलाया.
अमित: अब मुझे जाना होगा. शाम को एक बार फिर आऊंगा ट्यूशन पड़ने . आपके स्टूडेंट्स भी आने वाले होंगे आप भी तैयार हो जाइये.
मंजू म : क्या आज रत फिर से नहीं रुक सकते तुम?
अमित: नहीं , आप समझने की कोशिश करो. रोज़ रोज़ ऐसे बहार रहूँगा तो शायद मेरा आना hi बंद हो जाये क्या आप ऐसा चाहती हैं?
मंजू म : नहीं नहीं , ऐसा नहीं होने दूंगी मैं. ठीक है तुम जाओ मगर शाम को जल्दी आ जाना और डिनर साथ में करेंगे आज. इतना तो कर सकते हो न?
अमित: ठीक है , तैयार रहिएगा. अब चलता हूँ.
मन ने आगे बाद कर मुझे किश किया और कस क मुझसे गले लग गयी . मैंने भी उन्हें अपनी आगोश में ले क प्यार किया और बाइक ले कर घर वापिस आ गया.