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कॉलेज में आज ज्यादा तर स्टूडेंट्स मुझे गौर से देख रहे थे . कल की घटना की वजह से मैं सबकी नज़रों में आ गया था मगर ये भी ाचा हुआ क सचाई जल्द hi सामने आ गयी वर्ण कॉलेज में रहना मेरे लिए मुश्किल हो जाता . पहले 2 लेक्चर लगाने क बाद जब मई और मोहित फ्री लेक्चर में कैंटीन की तरफ जा रहे थे तो एक लड़के ने आ कर मुझे बताया क प्रोफ वरिंदर ने मुझे उनके ऑफिस में बुलाया है. मैं तुरंत प्रोफ वरिंदर क ऑफिस की और चल पड़ा मोहित को मैंने कैंटीन में रुकने को कहा. प्रोफ ने मुझे ऑफिस में बिठाया और अपनी बात केहनी शुरू की
अब आगे-
प्रोफ व्: आओ बैठो अमित कैसे हो ?
अमित : ठीक हूँ सर आपने मुझे बुलाया था?
प्रोफ व् : हाँ तुमसे एक काम है. मगर पहले ये बताओ कल से आज तक किसी ने तुमसे कोई बात करने की कोशिश तो नहीं की जो भी कल कॉलेज में हुआ उसके रिलेटेड
अमित : नहीं सर ऐसी तो कोई बात नहीं हुई मगर बात क्या है?
प्रोफ व् : बात तो कोई खास नहीं है बस कल से प्रिंसिपल सर को बोर्ड क कुछ डायरेक्टर्स इस केस को रफा दफा करने और शिवानी को छोड़ने को कह रहे हैं.
अमित : तो सर ने क्या कहा?
प्रोफ व् : वो कभी नहीं मानेंगे मैं अछि तरह जनता हूँ उनको. हमारे प्रिंसिपल बहुत इंसाफ पसंद इंसान हैं. अगर उन पर ज्यादा दबाव बनाया गया तो वो रिजाइन करना पसंद करेंगे बजाये क उनके आगे झुकने क. और मुझे नहीं लगता क कॉलेज बोर्ड उनको रिजाइन करने देगा क्यूंकि आज कॉलेज का जो इतना नाम है उसके पीछे प्रिंसिपल साहब का बहुत बड़ा हाथ है. उनके होते hi यहाँ सब डिसिप्लिन में रह कर पड़े करते हैं वर्ण ये अमीर घरों क बिगड़े शहज़ादे किसी को क्या समझते हैं. इस कॉलेज में बड़े बड़े आईएएस और आईपीएस ऑफिसर्स क बचे पड़ते हैं ऐसे में वो नहीं चाहेंगे क कॉलेज क इतने अचे डिस्कॉपलीनेड प्रिंसिपल रिजाइन करें.
अमित : मगर इस सब में तो उनको काफी मुश्किलों को सामना करना पद सकता है
प्रोफ व् : तुम उसकी चिंता मत करो वो झुकने वालों में से नहीं है. मुझसे ज्यादा उनको कोई नहीं जनता . यहाँ बहुत काम लोगो ये बात जानते हैं क मैं और प्रिंसिपल सर कॉलेज में एक साथ पड़े हैं और अचे दोस्त हैं . अगर कहीं ऐसी कंडीशन आयी क उन्हें रिजाइन करना पड़ा तो उनके साथ मैं भी रिजाइन कर दूंगा. इसी लिए मैं आज तुम्हे किसी से मिलवाना चाहता हूँ जिसकी ज़रूरत तुम्हे पद सकती है.
तभी बहार से किसी ने नॉक किया और अंदर आने की परमिशन मांगी
प्रोफ व् : के इन. आओ आओ नीरज बैठो मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था. इससे मिलो ये है अमित फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है और तुम्हारी तरह hi रेसलिंग का स्टूडेंट है तुम्हारा जूनियर . मैंने इसी क बारे में बात की थी तुमसे
उस लड़के ने आ कर पहले सर क पैन छुए और सर ने उसे मेरे बारे में बताया. मैं और नीरज दोनों एक दूसरे को देख कर छिनक गए .
नीरज : तुम यहाँ ? मैं कब से तुम्हे ढूंढ रहा हूँ . तुम एक बार भी मुझसे मिलने नहीं ए दोबारा ? मैंने डॉ से भी पूछा था मगर उनके पास भी तुम्हारे रिलेटेड कोई इनफार्मेशन नहीं थी. थैंक्स यार अगर उस दिन तू नहीं अत तो पता नहीं मेरा क्या होता.
प्रोफ व् : क्या तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो ?
नीरज : जनता तो नहीं था मगर अब जान गया हूँ. अभी आप hi ने इसका नाम बताया . सर ये वही है जिसने उस दिन मुझे उन लड़कों से बचाया था मगर ये मुझे हॉस्पिटल में छोड़ कर पता नहीं कहाँ गायब हो गया.
नीरज वही लड़का था जिसे मैंने कॉलेज रोड पर गुंडों से बचाया था और हॉस्पिटल में छोड़ कर मैं निकल गया था. नीरज क चहरे पर चोट का निशान अभी भी था और सर क बाल भी छोटे छोटे थे शायद इलाज क दौरान डॉ ने कटे होंगे.
अमित : वो बात ये थी क डॉ ने मुझे कहा था ये पुलिस केस है और उन्होंने पुलिस को भी फ़ोन कर दिया था. मुझे ये दर था क अगर कहीं मेरा नाम किसी केस में आ गया तो मेरे घर वाले मुझे शहर पड़ने आने नहीं देंगे इसी लिए मैं निकल गया था. और इसी वजह से मैं हॉस्पिटल तुमसे मिलने नहीं आया . वैसे अब तुम कैसे बो ?
नीरज : मैं बिलकुल ठीक हूँ और आज से प्रैक्टिस शुरू करने वाला हूँ. शाम को स्टेडियम में एक साथ एक्ससरसीसे करेंगे
प्रोफ व् : चलो ये तो ाचा हुआ तुम पहले hi एक दूसरे को जानते हो अब मुझे तुम्हारी टेंशन नहीं . नीरज तुम्हारी मदद करेगा अगर कोई भी मुश्किल कभी आयी तो
नीरज : आप चिंता मत कीजिये सर अमित का तू मुझ पर पहले hi एहसान है . इसी की वजह से मैं आज सही सलामत हूँ. मैं हमेशा इसका साथ दूंगा. और अमित तुम्हे भी डरने की ज़रूरत नहीं है. मोंटी मुझे अछि तरह जनता है पहले भी मैंने उसकी अछि तरह एक बार सेवा की थी. जब उसे पता चलेगा क तुम मेरे दोस्त हो तो वो खुद hi पीछे हैट जायेगा.
प्रोफ व् : मैं चाहता हूँ तुम एक दूसरे को अछि तरह समझ लो और एक दूसरे की ताकत बनना . तुम दोनों hi मेरी नज़र में अचे खिलाडी और स्टूडेंट हो . इस कॉलेज का नाम रोशन करना और हमेशा साथ रहना
अमित : ऐसा hi होगा सर हम भाइयों की तरह एक दूसरे का साथ देंगे
नीरज : मैं हमेशा इसे छोटे भाई की तरह अपने साथ रखूँगा.
प्रोफ व् : अब तुम लोग जा सकते हो मैं भी ज़रा प्रिंसिपल सर से मिल कर आता हूँ.
हम दोनों सर क ऑफिस से बहार आ गए . नीरज मुझे अपने साथ कैंटीन में ले आया. मोहित मीनल क साथ कैंटीन में hi बैठा हुआ था. नीरज को कॉलेज में हर कोई जनता था रस्ते में जो कोई भी मिला वो उसे बुला कर hi गया. कैंटीन में नीरज क आते hi कई लड़के उठ कर स्पेशलय उससे मिलने ए और नीरज ने सबको मुझसे भी मिलवाया और सब को यही बताया क ये मेरा छोटा भाई है. मोहित भी ये सब देख कर हैरान हो रहा था. मैं नीरज को मोहित क पास hi ले गया
अमित : नीरज भैया ये है मोहित . हम दोनों एक hi क्लास में है और ये मेरा एक मात्रा दोस्त है कॉलेज में.
और मोहित ये हैं नीरज भैया हमारे सीनियर हैं और ये भी रेसलिंग खेलते हैं
नीरज : hello मोहित तुम अमित क दोस्त हो सो आज से तुम मेरे भी दोस्त हो
मोहित : शुक्रिया भैया
मोहित ने मीनल को नीरज से इंट्रोडस करवाया और फिर हमने कोल्ड ड्रिंक पीनी शुरू की.
मोहित : यार वो तेरी कौसिन्स तुमसे मिलने क लिए आयी थी मैंने उनको बोलै था क तुम प्रोफ से मिलने गए तो शायद अब वो वापिस क्लास में चली गयी होंगी तुम उनसे मिल लेना
अमित : क्या कह रही थी वो
मोहित : कहा तो कुछ नहीं बस तेरे बारे में hi पूछ रही थी.
मीनल : वो इस वक़्त लाइब्रेरी में होंगी क्यूंकि लेक्चर तो फ्री है
अमित : चलो कोई बात नहीं बाद में मिल लूंगा .
नीरज : अमित तुझे मेरे साथ मेरे घर चलना होगा
अमित : कोई खास बात है क्या?
नीरज : मेरे माँ डैड तुमसे मिलना चाहते हैं. पता है उन्होंने तुम्हे कितना ढूँढा वो तुम्हारा शुक्रिया ऐडा करना चाहते हैं क तुमने मेरी जान बचाई .
अमित : इसमें कोण स बड़ी बात है . आप उनको बोल देना थैंक्स की कोई ज़रूरत नहीं मैं उनके बेटे जैसा hi हूँ.
नीरज : जो भी कहना है तू खुद hi बोल देना मिल कर. बस इतना सुन ले क तू मेरे साथ मेरे घर चल रहा है आज.
अमित : हम फिर किसी दिन चलेंगे न आप के घर
नीरज : एक बार बोल दिया तो बोल दिया आज hi चलना है. अब कोई बहाना नहीं
मैं मोहित की तरफ देखने लगा क क्या करूँ
नीरज : उसकी तरफ क्या देख रहा है? वो भी तो साथ में चलेगा
मोहित : अरे भाई मुझे बीच में मत घसीटो मुझे एक बहुत ज़रूरी काम है आप दोनों चले जाओ
अमित : ठीक है तो फिर मैं नीरज भैया क साथ उनके घर हो आऊंगा मगर मैं घर कैसे आऊंगा ?
नीरज : वो मैं देख लूंगा
उसके बाद लेक्चर की बेल्ल बज गयी मैं मोहित क साथ लेक्चर अटेंड करने चला गया और नीरज अपने दोस्तों से मिलने चला गया. हम दोनों ने एक दूसरे क no. एक्सक्स्चंगे किये . नीरज ने मुझे छुट्टी क वक़्त पार्किंग में मिलने लो कहा और चला गया.
मैंने बाकि क लेक्चर अटेंड किये और फिर मोहित क साथ साइंस ब्लॉक में चला गया. हम दोनों मीनल और राधा क वेट कर रहे थे क लेक्चर की बेल्ल बजते hi राधा मीनल और नेहा दीदी एक साथ आती हुई नज़र आयी
नेहा दीदी : ये सब क्या ड्रामा था ? उस लड़की ने%
कॉलेज में आज ज्यादा तर स्टूडेंट्स मुझे गौर से देख रहे थे . कल की घटना की वजह से मैं सबकी नज़रों में आ गया था मगर ये भी ाचा हुआ क सचाई जल्द hi सामने आ गयी वर्ण कॉलेज में रहना मेरे लिए मुश्किल हो जाता . पहले 2 लेक्चर लगाने क बाद जब मई और मोहित फ्री लेक्चर में कैंटीन की तरफ जा रहे थे तो एक लड़के ने आ कर मुझे बताया क प्रोफ वरिंदर ने मुझे उनके ऑफिस में बुलाया है. मैं तुरंत प्रोफ वरिंदर क ऑफिस की और चल पड़ा मोहित को मैंने कैंटीन में रुकने को कहा. प्रोफ ने मुझे ऑफिस में बिठाया और अपनी बात केहनी शुरू की
अब आगे-
प्रोफ व्: आओ बैठो अमित कैसे हो ?
अमित : ठीक हूँ सर आपने मुझे बुलाया था?
प्रोफ व् : हाँ तुमसे एक काम है. मगर पहले ये बताओ कल से आज तक किसी ने तुमसे कोई बात करने की कोशिश तो नहीं की जो भी कल कॉलेज में हुआ उसके रिलेटेड
अमित : नहीं सर ऐसी तो कोई बात नहीं हुई मगर बात क्या है?
प्रोफ व् : बात तो कोई खास नहीं है बस कल से प्रिंसिपल सर को बोर्ड क कुछ डायरेक्टर्स इस केस को रफा दफा करने और शिवानी को छोड़ने को कह रहे हैं.
अमित : तो सर ने क्या कहा?
प्रोफ व् : वो कभी नहीं मानेंगे मैं अछि तरह जनता हूँ उनको. हमारे प्रिंसिपल बहुत इंसाफ पसंद इंसान हैं. अगर उन पर ज्यादा दबाव बनाया गया तो वो रिजाइन करना पसंद करेंगे बजाये क उनके आगे झुकने क. और मुझे नहीं लगता क कॉलेज बोर्ड उनको रिजाइन करने देगा क्यूंकि आज कॉलेज का जो इतना नाम है उसके पीछे प्रिंसिपल साहब का बहुत बड़ा हाथ है. उनके होते hi यहाँ सब डिसिप्लिन में रह कर पड़े करते हैं वर्ण ये अमीर घरों क बिगड़े शहज़ादे किसी को क्या समझते हैं. इस कॉलेज में बड़े बड़े आईएएस और आईपीएस ऑफिसर्स क बचे पड़ते हैं ऐसे में वो नहीं चाहेंगे क कॉलेज क इतने अचे डिस्कॉपलीनेड प्रिंसिपल रिजाइन करें.
अमित : मगर इस सब में तो उनको काफी मुश्किलों को सामना करना पद सकता है
प्रोफ व् : तुम उसकी चिंता मत करो वो झुकने वालों में से नहीं है. मुझसे ज्यादा उनको कोई नहीं जनता . यहाँ बहुत काम लोगो ये बात जानते हैं क मैं और प्रिंसिपल सर कॉलेज में एक साथ पड़े हैं और अचे दोस्त हैं . अगर कहीं ऐसी कंडीशन आयी क उन्हें रिजाइन करना पड़ा तो उनके साथ मैं भी रिजाइन कर दूंगा. इसी लिए मैं आज तुम्हे किसी से मिलवाना चाहता हूँ जिसकी ज़रूरत तुम्हे पद सकती है.
तभी बहार से किसी ने नॉक किया और अंदर आने की परमिशन मांगी
प्रोफ व् : के इन. आओ आओ नीरज बैठो मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था. इससे मिलो ये है अमित फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है और तुम्हारी तरह hi रेसलिंग का स्टूडेंट है तुम्हारा जूनियर . मैंने इसी क बारे में बात की थी तुमसे
उस लड़के ने आ कर पहले सर क पैन छुए और सर ने उसे मेरे बारे में बताया. मैं और नीरज दोनों एक दूसरे को देख कर छिनक गए .
नीरज : तुम यहाँ ? मैं कब से तुम्हे ढूंढ रहा हूँ . तुम एक बार भी मुझसे मिलने नहीं ए दोबारा ? मैंने डॉ से भी पूछा था मगर उनके पास भी तुम्हारे रिलेटेड कोई इनफार्मेशन नहीं थी. थैंक्स यार अगर उस दिन तू नहीं अत तो पता नहीं मेरा क्या होता.
प्रोफ व् : क्या तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो ?
नीरज : जनता तो नहीं था मगर अब जान गया हूँ. अभी आप hi ने इसका नाम बताया . सर ये वही है जिसने उस दिन मुझे उन लड़कों से बचाया था मगर ये मुझे हॉस्पिटल में छोड़ कर पता नहीं कहाँ गायब हो गया.
नीरज वही लड़का था जिसे मैंने कॉलेज रोड पर गुंडों से बचाया था और हॉस्पिटल में छोड़ कर मैं निकल गया था. नीरज क चहरे पर चोट का निशान अभी भी था और सर क बाल भी छोटे छोटे थे शायद इलाज क दौरान डॉ ने कटे होंगे.
अमित : वो बात ये थी क डॉ ने मुझे कहा था ये पुलिस केस है और उन्होंने पुलिस को भी फ़ोन कर दिया था. मुझे ये दर था क अगर कहीं मेरा नाम किसी केस में आ गया तो मेरे घर वाले मुझे शहर पड़ने आने नहीं देंगे इसी लिए मैं निकल गया था. और इसी वजह से मैं हॉस्पिटल तुमसे मिलने नहीं आया . वैसे अब तुम कैसे बो ?
नीरज : मैं बिलकुल ठीक हूँ और आज से प्रैक्टिस शुरू करने वाला हूँ. शाम को स्टेडियम में एक साथ एक्ससरसीसे करेंगे
प्रोफ व् : चलो ये तो ाचा हुआ तुम पहले hi एक दूसरे को जानते हो अब मुझे तुम्हारी टेंशन नहीं . नीरज तुम्हारी मदद करेगा अगर कोई भी मुश्किल कभी आयी तो
नीरज : आप चिंता मत कीजिये सर अमित का तू मुझ पर पहले hi एहसान है . इसी की वजह से मैं आज सही सलामत हूँ. मैं हमेशा इसका साथ दूंगा. और अमित तुम्हे भी डरने की ज़रूरत नहीं है. मोंटी मुझे अछि तरह जनता है पहले भी मैंने उसकी अछि तरह एक बार सेवा की थी. जब उसे पता चलेगा क तुम मेरे दोस्त हो तो वो खुद hi पीछे हैट जायेगा.
प्रोफ व् : मैं चाहता हूँ तुम एक दूसरे को अछि तरह समझ लो और एक दूसरे की ताकत बनना . तुम दोनों hi मेरी नज़र में अचे खिलाडी और स्टूडेंट हो . इस कॉलेज का नाम रोशन करना और हमेशा साथ रहना
अमित : ऐसा hi होगा सर हम भाइयों की तरह एक दूसरे का साथ देंगे
नीरज : मैं हमेशा इसे छोटे भाई की तरह अपने साथ रखूँगा.
प्रोफ व् : अब तुम लोग जा सकते हो मैं भी ज़रा प्रिंसिपल सर से मिल कर आता हूँ.
हम दोनों सर क ऑफिस से बहार आ गए . नीरज मुझे अपने साथ कैंटीन में ले आया. मोहित मीनल क साथ कैंटीन में hi बैठा हुआ था. नीरज को कॉलेज में हर कोई जनता था रस्ते में जो कोई भी मिला वो उसे बुला कर hi गया. कैंटीन में नीरज क आते hi कई लड़के उठ कर स्पेशलय उससे मिलने ए और नीरज ने सबको मुझसे भी मिलवाया और सब को यही बताया क ये मेरा छोटा भाई है. मोहित भी ये सब देख कर हैरान हो रहा था. मैं नीरज को मोहित क पास hi ले गया
अमित : नीरज भैया ये है मोहित . हम दोनों एक hi क्लास में है और ये मेरा एक मात्रा दोस्त है कॉलेज में.
और मोहित ये हैं नीरज भैया हमारे सीनियर हैं और ये भी रेसलिंग खेलते हैं
नीरज : hello मोहित तुम अमित क दोस्त हो सो आज से तुम मेरे भी दोस्त हो
मोहित : शुक्रिया भैया
मोहित ने मीनल को नीरज से इंट्रोडस करवाया और फिर हमने कोल्ड ड्रिंक पीनी शुरू की.
मोहित : यार वो तेरी कौसिन्स तुमसे मिलने क लिए आयी थी मैंने उनको बोलै था क तुम प्रोफ से मिलने गए तो शायद अब वो वापिस क्लास में चली गयी होंगी तुम उनसे मिल लेना
अमित : क्या कह रही थी वो
मोहित : कहा तो कुछ नहीं बस तेरे बारे में hi पूछ रही थी.
मीनल : वो इस वक़्त लाइब्रेरी में होंगी क्यूंकि लेक्चर तो फ्री है
अमित : चलो कोई बात नहीं बाद में मिल लूंगा .
नीरज : अमित तुझे मेरे साथ मेरे घर चलना होगा
अमित : कोई खास बात है क्या?
नीरज : मेरे माँ डैड तुमसे मिलना चाहते हैं. पता है उन्होंने तुम्हे कितना ढूँढा वो तुम्हारा शुक्रिया ऐडा करना चाहते हैं क तुमने मेरी जान बचाई .
अमित : इसमें कोण स बड़ी बात है . आप उनको बोल देना थैंक्स की कोई ज़रूरत नहीं मैं उनके बेटे जैसा hi हूँ.
नीरज : जो भी कहना है तू खुद hi बोल देना मिल कर. बस इतना सुन ले क तू मेरे साथ मेरे घर चल रहा है आज.
अमित : हम फिर किसी दिन चलेंगे न आप के घर
नीरज : एक बार बोल दिया तो बोल दिया आज hi चलना है. अब कोई बहाना नहीं
मैं मोहित की तरफ देखने लगा क क्या करूँ
नीरज : उसकी तरफ क्या देख रहा है? वो भी तो साथ में चलेगा
मोहित : अरे भाई मुझे बीच में मत घसीटो मुझे एक बहुत ज़रूरी काम है आप दोनों चले जाओ
अमित : ठीक है तो फिर मैं नीरज भैया क साथ उनके घर हो आऊंगा मगर मैं घर कैसे आऊंगा ?
नीरज : वो मैं देख लूंगा
उसके बाद लेक्चर की बेल्ल बज गयी मैं मोहित क साथ लेक्चर अटेंड करने चला गया और नीरज अपने दोस्तों से मिलने चला गया. हम दोनों ने एक दूसरे क no. एक्सक्स्चंगे किये . नीरज ने मुझे छुट्टी क वक़्त पार्किंग में मिलने लो कहा और चला गया.
मैंने बाकि क लेक्चर अटेंड किये और फिर मोहित क साथ साइंस ब्लॉक में चला गया. हम दोनों मीनल और राधा क वेट कर रहे थे क लेक्चर की बेल्ल बजते hi राधा मीनल और नेहा दीदी एक साथ आती हुई नज़र आयी
नेहा दीदी : ये सब क्या ड्रामा था ? उस लड़की ने%