Adultery Manhoos se mahan tak - Page 11 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 87



मैं आगे बाद कर मौसी क पौन छुए तो मौसी ‘ जीते रहो’ कह क साइड में हो गयी. मैंने माँ और बाबा क पाऊँ छुए . माँ ने मुझे गले से लगा लिया और बाबा ने भी आशीर्वाद दिया. उसके बाद मैंने रीता मौसी और रजनी मौसी से भी आशीर्वाद लिया. दोनों मौसा और कारन को छोड़ कर सब मौजूद थे. निधि दीदी नैना दीदी नेहा दीदी करुणा दीदी चरों ने सूट hi पहने हुए थे. शायद फॅमिली फंक्शन की वजह से नैना दीदी और करुणा दीदी ने सूट पेहेन लिए होंगे. निधि दीदी ने हमेशा की तरह मुझे गले लगाया और मेरे सर पर प्यार से हाथ फेरा.

निधि : कैसा है मेरा प्यारा भाई?

अमित : ाचा हूँ दीदी आप कैसी हैं?

निधि : तुम्हारे सामने हूँ देख लो .

नैना : मिल गया वक़्त आने का ?

नैना दीदी आज राधा क बाद सबसे ज्यादा बन थान क आयी थी. खास तरह का मेक उप स्टाइलिश हेयर और बहुत hi मधुर खुशबु जो किसी खास किस्म क सेंट की थी.

अमित : मुझे तो आना hi था आप जो आ रही थी.

मेरी बात पर नैना दीदी शर्मा गयी . उनके साथ करुणा दीदी भी कड़ी थी जो गुस्से से मुँह फुलाए कभी मुझे देखती कभी दूसरी तरफ .

अमित : लगता है कोई बहुत गुस्से में है ?

करुणा : हँ ....

अमित : तौबा तौबा लगता है गर्मी से कहीं आग लगने वाली है.

करुणा : मुझसे बात मत करो तुम

अमित : आप hi से तो बात कर रहा हूँ और किस्से कर रहा हूँ

करुणा : मैंने कहा मुझसे बात मत करो . कभी भूले से भी यद् तक नहीं करते न फ़ोन न मैसेज और अब चले आये मुँह उठा क . सब से मिलते हो सिवाए मेरे

अमित : लगता है मेरी प्यारी प्यारी दीदी मुझसे नाराज़ है . कोई बात नहीं मैं जल्दी आपको शॉपिंग करवाने ले क जाऊंगा फिर तो आप खुश हो जाएँगी न?

करुणा : इतनी आसानी से नहीं मैंने वाली मैं . शॉपिंग क साथ मूवी भी दिखानी होगी और होटल में डिनर भी और आइस क्रीम भी

करुणा दीदी की बात पर मेरे साथ साथ नैना दीदी नेहा दीदी और निधि दीदी भी हसने लगी.

दिव्या मौसी : अब और किसका इंतज़ार कर रही हो चलो केक काटो पहले hi देर हो गयी है.

दिव्या मौसी ने बात करते हुए फिर मेरी तरफ गुस्से से देखा. राधा केक काटने क लिए कड़ी हो गयी और एक बार मेरी तरफ देखा जैसे कुछ कह रही हो. सब बहनो ने उसे घेर लिया और कैंडल बुझा दी उसने . शुरू हो गया सबका गण हैप्पी बर्थडे तो यू . सब विश करने लगे राधा को. राधा ने केक कटा और सबसे पहले दिव्या मौसी को खिलाया . उसके बाद बरी बरी से सबने उसे खिलाया और राधा भी सबको अपने हाथ सी खिलाती. सबसे लास्ट में मेरी टर्न आयी तो एक बार फिर राधा ने मेरी उंगली अपने दातों में दबा ली. और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. जब राधा ने मेरे मुँह में केक डाला तो मैंने भी उसकी उंगली को काट लिया. राधा एक डैम से चिहुंक पड़ी

राधा : एआईईईई

दिव्या मौसी : क्या हुआ ? इतनी भी अकाल नहीं तुम में क किसी का हाथ नहीं काट ते. आज उसका जन्मदिन है और तुम उसे कुत्तों की तरह काटने लग गए.

रजनी मौसी: दिव्या ! ये तुम क्या कह रही हो. होश में तो हो तुम ? ज़रा सा मज़ाक hi तो किया है उसने

राधा : माँ आप क्यों अमित को दांत रही हैं उसने तो बस मज़ाक किया था.

रीता मौसी : दिव्या तुम्हे बच्चों की छोटी छोटी शरारतों पर ध्यान नहीं देना चाहिए आखिर ये सब हमारे अपने हैं और तुम बिना वजह इतना गुस्सा कर रही हो.

मुझे ाचा माहि लगा जिस तरह दिव्या मौसी मेरे ऊपर भड़की और फिर सबका मूड भी ख़राब होने लगा. मैं नहीं चाहता था क मेरी वजह से राधा की बर्थडे पार्टी का सत्यानाश हो इस लिए मैंने बात को घूमने की कोशिश की.

अमित : क्या आप सब भी मेरी मौसी क पीछे पद गए हो. तो क्या हुआ उन्होंने कुछ कह भी दिया तो. आखिर मेरी सबसे प्यारी मौसी हैं मेरी माँ की शामे तो शामे कॉपी . मुझे इनकी बात का कभी बुरा नहीं लगता.

मेरे मुँह से ये सुन कर पता नहीं दिव्या मौसी को क्या हुआ क वो अंदर कमरे में चली गयी. रीता मौसी जल्दी से उनके पीछे गयी और राधा भी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क अब मैंने क्या कर दिया.

गौरी ममी : बीटा दिव्या की बात का गुस्सा मत करना वो राधा से बहुत प्यार करती है इस लिए बस उसकी ज़रा स तकलीफ पर भी वो घबरा जाती है.

अमित : नहीं माँ मैंने गुस्सा नहीं किया पर शायद मेरी वजह से सबका मूड ख़राब हो गया है मैं चलता हूँ माँ कल मिलूंगा आपसे.

विजय मां : ऐसे नहीं बीटा . ाचा नहीं लगता क तू ऐसे बिना खाये पिए चला जाये दिव्या को बुरा लगेगा.

बाबा क कहने पर मैं रुक तो गया पर एक डैम से माहौल ख़राब हो गया था पार्टी का.

अंदर कमरे में रीता मौसी दिव्या मौसी को समझा रही थी महार दिव्या मौसी रोए जा रही थी.

रीता : क्या हुआ तुझे दिव्या ? तू क्यों रो रही है ? देख आज राधा का जन्मदिन है और तू इस तरह रो कर उसे भी रुलाना चाहती है ?

दिव्या : मैं क्या करूँ दीदी मैं क्या करूँ . उसे कहो यहाँ से चला जाये , चला जाये यहाँ से मैं उसकी कुछ नहीं हूँ वो क्यों बार बार मेरे सामने आ कर मुझे दामिनी की यद् दिलाता है ? पहल उसके बाप ने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद करदी अब ये मुझे चैन से रहने भी नहीं दे रहा.

रीता : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दिव्या . वो हमारी दामिनी का बीटा है . और वो तुझे कितना प्यार करता है. देख कैसे सबके सामने कह रहा है क तू उसकी सबसे प्यारी मौसी है उसकी माँ की हम शक्ल . वो तुम में दामिनी को देख रहा है अपनी माँ को और तुम हो की उससे इतनी नफरत करती हो?

दिव्या : तो क्या करूँ ? वो भी अपने बाप जैसा hi निकलेगा दामिनी जैसा नहीं बन सकता वो . आखिर बाप का खून hi सर चढ़ कर बोलता है माँ का दूध कभी बाप क खून पर भरी नहीं हो पता.

रोटा : मुझे समझ नहीं आती तू पवन से इतनी नफरत क्यों करती है ? वो तो कितना ाचा था उसने hi तो तेरी शादी करवाई थी फिर भी तू क्यों उससे नफरत करती है? अब तो वो इस दुनिया में भी नहीं है अगर उसने कुछ गलत किया भी था तो अब उसे भूला दे. ये अमित है पवन नहीं. ये हमारी दामिनी का बीटा है . क्या तुझे उसमे दामिनी नज़र नहीं आती ?

दिव्या : कैसे नज़र नहीं आएगी ? आँखें तो उसी की हैं न. जब भी उसकी आँखों में देखती हूँ तो लगता है जैसे दामिनी को देख रही हूँ मगर चेहरा तो बाप पर hi जा रहा है न. और देख लेना ये भी उसके जैसा hi निकलेगा.

रीता : दिव्या ज़रूरी नहीं क बीटा बाप पर hi जाये जनम तो वो माँ क hi पेट से लेता है न . तूने शायद कभी देखने की कोशिश hi नहीं की उसे . वो बिलकुल दामिनी जैसा है. सबसे प्यार करता है सबकी इज़्ज़त करता है सबको खुश रखता है. देख उसकी वजह से आज हमारे मायके में कितनी रौनक है. भैया भी सर उठा कर चलते हैं. और अपनी सब बहनो से कोटना प्यार करता है. पूछना कभी राधा से क रोज़ अमित उससे और नेहा से मिलता है क नहीं? नेहा तो मुझे बताती रहती है उसके बारे में. मेरी बात मन तू उसपर थोड़ा भरोसा कर देखना तुझे सिर्फ दामिनी का hi एहसास होगा .

दिव्या : मगर दीदी

रीता : मैंने कहा न तू बस एक बार उसको अपने गले लगा कर तो देख अगर तुझे दामिनी का एहसास न हो तो कहना. वो बहुत प्यारा है दिव्या . तुमने देखा नहीं अब तो कामिनी भी उससे कितना प्यार करने लगी है . एक बार तू भी सब कुछ भूल कर उसे गले लगा ले . उसे सर्फ तेरा प्यार चाहिए दिव्या फिर देखना वो तुझे कितना खुश रखेगा.

राधा दरवाज़े क पास कड़ी अपनी माँ और मौसी की बात सुन रही थी . उसने उनको बिलकुल भी अपना एहसास तक नहीं होने दिया इस उम्मीद में क शायद उसे कुछ पता चल सके क उसकी माँ अमित से नफरत क्यों करती है. दोनों की बातें सुनते हुए उसे इतना तो पता चल गया था क उसकी माँ अमित से सिर्फ इस लिए नफरत करती है क्यूंकि उसके पापा ने कुछ ऐसा किया है जिसकी वजह से उसकी माँ को दुःख पहुंचा है. मगर और कुछ ज्यादा उसे पता नहीं चल सका . जब उसने देखा क माँ और मौसी बहार आने लगी हैं तो वो पहले hi बहार हो गयी.

रीता : ोये बदमाश इधर आ चल अपनी मौसी से अछि तरह मिल ले.

मैं मौसी की बात सुन कर उनके पास चला गया दिव्या मौसी उनके पास hi कड़ी थी.

रीता मौसी : चल अब देख क्या रही है लगा ले इसे गले .

सब हमारी तरफ hi देख रहे थे जैसे भारत पाकिस्तान में कोई समझौता होने जा रहा हो. दिव्या मौसी पहल मेरी तरफ देख माहि रही थी मगर जैसे hi उनकी नज़र मेरी नज़र से मिली दिव्या मौसी की आँखों से आंसू बहने लगे . और उन्होंने कास क मुझे गले लगा लिया. मौसी क इस तरह मुझे गले लगाने से पता नहीं क्यों पर मेरी आँखों से भी आंसू बहने लगे. मैं समझ नहीं प् रहा था ऐसा क्यों हो रहा है. दिव्या मौसी रोये जा रही थी और इतनी ज़ोर से मुझे अपने गले लगाए हुए थी क मनो मुझे आखिरी बार मिल रही हो. तभी रजनी मौसी रीता मौसी और माँ भी जल्दी से पास आ गयी और मौसी को चुप करवाने लगी. मुझे भी रोटा हुआ देख कर माँ ने मुझे गले लगा लिया. माँ ने प्यार से मुझे संभल लिया . मैंने जब देखा तो सबकी ऑंखें भीगी हुई थी . रजनी मौसी दिव्या मौसी को एक माँ की तरह गले लगा कर चुप करवा रही थी. माहौल बहुत hi गंभीर हो गया था. ऐसा लग hi नहीं रहा था क जन्मदिन की पार्टी हो ये तो किसी की शोक सभा लग रही थी.

रीता : दोनों माँ बीटा एक जैसे हैं रो रो कर कीचड़ कर दिया है . अछि भली राधा की जन्मदिन की पार्टी मानाने ए और ये दोनों हैं क खुद भी रो रहे हैं और दूसरों को भी रुला रहे हैं . दोनों को एक कमरे में बंद कार्डो अचे से रो लेने दो उनको हम पार्टी करते हैं चलो लड़कियों गण बजाना लगाओ.

रीता मौसी भी ऐसी बातें करती हैं ये मुझे नहीं पता था. करुणा दीदी लगता है मौसी पर hi गयी हैं. मौसी का इशारा मिलते hi नैना दीदी और करुणा दीदी ने माहौल बनाने क लिए म्यूजिक लगा दिया . नैना दीदी और करुणा दीदी ज़बरदस्ती दिव्या मौसी को खिंच कर नाचने लगी. दिव्या मौसी पहले मन कर रही थी मगर रीता मौसी भी उनके साथ मिल गयी और देखते देखते रजनी मौसी और माँ भी शामिल हो गयी. करुणा दीदी ने फिर राधा को भी खिंच लिया और नैना दीदी मुझे खींचते हुए ले गयी.

रीता मौसी ने अपनी सूझबूझ से माहौल को पलट कर रख दिया. दिव्या मौसी ने जल्दी hi बस करदी और वो सबको खाने पिने का सामान सर्वे करने लगी. रीता मौसी और रजनी मौसी भी साथ लग गयी . धीरे धीरे डांस करने वाले हम चार hi रह गए . नैना दीदी करुणा दीदी मैं और राधा . नेहा दीदी और निधि दीदी माँ और मौसी का साथ देने लगी.

गौरी ममी : कितने अचे लग रहे हैं सब हस्ते खेलते ?

रीता : सही कहा .

रजनी मौसी : दिव्या तुझे क्या हो गया था ? तू क्यों ऐसे अचानक रोने लगी थी ?

दिव्या मौसी : पता नहीं दीदी बस अपने आप hi वो

रीता मौसी : मैं बताती हूँ दीदी. दिव्या को दामिनी की यद् आ गयी थी. अमित की ऑंखें बिलकुल दामिनी जैसी हैं न बस इसी लिए खुद को रोक नहीं पायी .

दिव्या मौसी : ऐसा कुछ नहीं है वो अपने बाप जैसा hi है

रीता मौसी : तू फिर शुरू हो गयी. सच सच बता जब तूने उसे गले लगाया तो तुझे दामिनी का एहसास हुआ क नहीं ?

दिव्या मौसी : ( उसकी ऑंखें बिलकुल दामिनी जैसी हैं उनमे देखते hi मुझे दामिनी नज़र आने लगी थी. और जब उसे गले लगाया तो सचमुच मुझे दामिनी का hi एहसास हो रहा था मगर मैं कैसे भूल जॉन उसके बाप ने मेरे साथ क्या क्या किया है. पूरी बाप जैसी शकल है जब उसका चेहरा देखती हूँ तो उसका बाप यद् आ जाता है . मेरी ज़िन्दगी नरक बना कर रख दी उसने ) उसकी ऑंखें दामिनी जैसी हैं तो इसका मतलब ये तो नहीं क अब वो दामिनी की जगह ले लेगा.

रजनी मौसी : छोटी तू कब समझेगी इस बात को ? उसे तेरे प्यार की ज़रूरत है उसे प्यार से अपने गले लगा जैसे उसे बचपन में तू प्यार किया करती थी . क्या यद् नहीं तुम्हे वो दिन जब तू दामिनी से कहा करती थी क अमित तेरा बीटा है . वो तो छोटा सा मासूम था जब दामिनी उसे अकेला छोड़ गयी . हम तुम्हे तब भी समझती रही और आज भी कह रही हूँ मैं क उसे तेरा प्यार चाहिए फिर देख वो तुझे कितना खुश रखेगा.

दिव्या मौसी : मैं अभी आयी

इतना कह कर दिव्या मौसी निकल गयी उनमे से क्यूंकि वो और नहीं सुन्ना चाहती थी अमित क बारे में कहीं उनका इरादा न बदल जाये.

रजनी मौसी : जो भी कहो आज दिव्या को देख कर लग रहा है क ये भी धीरे धीरे पिघल जाएगी.

रीता मौसी : सही कहा सिर्फ अमित hi दिव्या को पहले जैसी दिव्या बना सकता है. दिव्या मने या न मने मैंने महसूस किया था क जब वो अमित को गले लगा क रो रही थी तब ज़रूर उसे दामिनी का hi एहसास हो रहा होगा. होगा भी क्यों नहीं बिलकुल अपनी माँ जैसा hi तो है ये. हाँ इसने उतनी शरारतें नहीं की.

गौरी ममी: मैं तो दर गयी थी जब इन्होने बताया क उन्होंने अमित को सबकुछ बता दिया है. दिल ये सोच कर दर रहा था क कहीं ये पवन जी की बाकि फॅमिली को ढूंढ़ने न निकल जाये पर शुक्र है क ये इतना समझदार तो है क सब बातें समझता है.

रजनी मौसी : नाम मत लो उनका . वो कोई फॅमिली नहीं है . ऐसे लोगों से इंसान अकेला ाचा. मैं उनका साया भी नहीं पड़ने दूंगी हमारे बचे पर .

रीता मौसी : वैसे भैया ने बताया hi क्यों उसको ? पहले तो आप दोनों ने hi मन किया था न

गौरी ममी : मैंने भी पूछा था इनसे तो कहने लगे अब वो बड़ा हो गया है और चीज़ों को अछि तरह समझने लगा है. हम कब तक उससे ये बात छुपा सकते हैं ? कल को कोई और उसे दामिनी क बारे में बताये या वो किसी बात को गलत समझ बैठे तो फिर वो हमसे दूर भी जा सकता है . इस लिए उन्होंने उसे सब बता दिया

रजनी मौसी : वैसे एक तरह से ाचा hi किया वर्ण कब तक हम उससे झूठ बोलते ?

गौरी ममी : मैं बहुत खुश हूँ क वो इतना समझदार है. बिलकुल अपने माँ बाप पर गया है. घर में अब सब बिलकुल सही है अब तो जल्द hi दीपिका और फिर कामिनी भी माँ बन जाएँगी और घर फिर से चहकने लगेगा.

रीता मौसी : भाई मन्ना पड़ेगा अमित तो जादूगर है . उसके पास ऐसी जादू की छड़ी ( लैंड ) है जिसने कामिनी पर भी जादू कर दिया वर्ण पहले कितना गुस्सा करती रहती थी और अब देखा है उसे ? ऐसे करती है जैसे अमित उसके लिए सब कुछ हो. ऐसी छड़ी जिसके पास भी होगी दुनिया तो उसकी गुलाम हो hi जाएगी ( काश मेरे पास भी ऐसा जादूगर होता )

इधर ये तीनो बातों में लगी थी और उधर मैं सबके साथ डांस कर रह था. आखिर मैं थक कर रेस्ट करने क लिए बैठ गया. मेरा दिमाग अभी भी दिव्या मौसी की तरफ hi था एक तरफ तो वो इतना गुस्सा दिखती हैं और दूसरी तरफ आज उनका मेरे गले लग कर ऐसे रोना ? समझ नहीं आ रहा था क आखिर उनके अंदर चल क्या रहा है. क्या बाबा ने जो बताया वो वाकई में सही है? मैं अपने ख्यालों में खोया था क मेरे फ़ोन की घंटी बजी मैंने देखा तो नैना दीदी का फ़ोन था . मैंने नज़र उठा कर देखा तो वो कहीं नज़र नहीं आ रही थी. सब मौजूद थी सिवाए उनके. मैंने तुरंत फ़ोन उठा लिया.

नैना : छत पर आ जाओ ( फ़ोन कट )

अमित : ( दीदी मुझे ऊपर क्यों बुला रही हैं ? सब यहीं मौजूद हैं फिर क्यों बुला रही हैं )

मैं सब से नज़र बचा कर सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर चला गया. छत पर लाइट नहीं थी मगर फिर भी चाँद की वजह से थोड़ी बहुत रौशनी थी. मैं दीदी को ढूंढ़ने लगा अचानक किसी ने मुझे पीछे से पकड़ कर घुमा कर दिवार से लगा दिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैं समझ गया ये नैना दीदी hi हैं और उनका साथ देते हुए मैं भी उनके होंठ चूसने लगा . नैना दीदी कभी मेरे ऊपर वाले होंठ को अपने होंठों में लेकर चुस्ती कभी निचे वाले होंठ को. मैं भी उनका पूरा साथ दे रहा था. हमारा किश वाइल्ड होता जा रहा था. मैंने मस्ती में कब दीदी क उभर अपनी गिरफ्त में ले लिए मुझे भी पता माहि चला. दीदी पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ा बल्कि वो मेरे सर क बालों में हाथ चलती हुई अपनी एक तंग उठा कर मुझसे रगड़ती हुई मेरे ऊपर हावी होने की कोशिश करने लगी. मैंने भी अपना एक हाथ निचे ले जा कर उनकी उठी हुई तंग को सहारा देने क लिए उनके गोल मुलायम चूतड़ पर हाथ रख कर उन्हें अपने साथ कास लिया. दीदी मेरे मुँह में अपनी ज़ुबान डालने लगी और कभी मेरी ज़ुबान अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. दीदी इतनी हॉट हैं मैं सोच भी नहीं सकता था . यौन खुली छत पर घर में सबके होते हुए इतनी ज़बरदस्त किसिंग मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था. मैं किश करते हुए एक हाथ से उनका एक संतरा दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो बड़े बड़े चूतड़ मसल रहा था. नैना दीदी क उभर कैसे हुए थे और उनके चूतड़ मुलायम थे. मगर परफेक्ट शेप में थे. इतनी हॉट किसिंग से मेरा लैंड पूरा अकड़ चूका था और जीन्स में मुझे परेशानी होने लगी थी. दीदी तो रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी मगर मेरे दिल में दर भी था क कहीं कोई हमें ढूंढता हुआ ऊपर आ गया तो क्या होगा. इस लिए मैंने किश ख़तम की और दीदी को खुद से दूर हटाया.

अमित : कण्ट्रोल .... कण्ट्रोल कीजिये खुद पर

नैना : नहीं हो रहा . इतने दिनों बाद तो मिल रहे हो फिर पता नहीं कब मिलोगे?

अमित : सब घर में है अगर कोई आ गया तो ?

नैना : कोई नहीं आएगा

अमित : मतलब ?

नैना : मतलब कोई आया तो पता चल जायेगा

अमित : मगर आप ऐसे यूँ अचानक ये सब ?

नैना : तुमने खुद hi तो कहा था तुम्हे किश चाहिए तो मैं भला कैसे तुम्हारी बात पूरी न करती.

अमित : मैंने तो मज़ाक किया था.

नैना : तो कैसा लगा मज़ाक का जवाब?

अमित : लगता है मज़ाक करते रहना hi सेहत क लिए ाचा है.

सीढ़ियों पर किसी आहत से मैं चौकन्ना हो गया. मैं जल्दी से सीढ़ियों में आया तो करुणा दीदी ऊपर hi आ रही थी.

करुणा : तुम ऊपर क्या कर रहे हो चलो जल्दी निचे आओ सब तुम्हारी वेट कर रहे हैं.

अमित : आप चलिए मैं आ रहा हूँ.

करुणा दीदी क पीछे पीछे मैं भी नीचे आ गया मगर मुझे दर था क कहीं मेरी हालत से किसी को अंदाज़ा न हो जाये इस लिए पहले बाथरूम जा कर खुद को सेट किया. सब खाने क लिए बैठ गए थे मैं भी बाबा की बगल में बैठ गया और हम सब डिनर करने लगे नैना दीदी भी खुद को सेट करने क बाद आ गयी थी और वो करुणा दीदी क साथ बैठ कर डिनर करने लगी. राधा खाना कहते हुए बार बार मेरी तरफ hi देख रही थी. मेरी जब भी नज़र उस पर पड़ती तो वो शर्मा कर नज़र झुका लेती . वहीँ नैना दीदी और करुणा दीदी से जब नज़र मिलती तो वो मेरी नज़रों से नज़र मिला कर देखने लगती.

खाना खाने क बाद मैंने माँ बाबा से पूछा क उनका क्या प्लान है. बाबा ने बताया क वो आज दिव्या मौसी क यहाँ रुकेंगे और कल सुबह रीता मौसी क यहाँ नाश्ता करेंगे उसके बाद दोपहर को वो मोहित क घर आ सकते है और फिर रत रजनी मौसी क घर रह कर अगले दिन वापिस. मैंने उनको कहा क मैं दोपहर को उन्हें रीता मौसी क घर से लेने आ जाऊंगा . सबसे मिलने क बाद मैं घर वापिस आ गया . दिव्या मौसी फिर मुझसे नहीं मिली वापिस आते वक़्त खैर धीरे धीरे उनके बारे में भी पता चल hi जायेगा. राधा बहुत खुश थी और मेरे जाने पर भी ऐसे देख रही थी जैसे मुझे जाने न देना चाहती हो. नैना दीदी क चहरे पर दिलकश स्माइल थी जो अक्सर प्रेमिका क चहरे पर होती है प्रेमी से मिलने क बाद . करुणा दीदी भी गहरी नज़रों से मुझे देख रही थी.

घर आ कर मैंने आंटी को बता दिया क कल माँ और बाबा लंच पर आएंगे तो आंटी ने भी खा क तुम्हारे अंकल भी सुबह आ जायेंगे घर . मैंने आंटी को गुड नाईट किश दी और अपने कमरे में आकर बीएड पर लेट गया आज मैं थकावट महसूस कर रहा था. और दिव्या मौसी की वजह से भी दिमाग परेशां सा था. पता नहीं कब उनके बारे बारे में सोचते सोचते मुझे नींद आ गयी. अगल दिन कॉलेज में कैंटीन में बैठ भी मैं दिव्या मौसी क बारे में सोच रहा था . मोहित मीनल और रीमा बार बार मुझे पूछ रहे थे मैं क्या सोच रहा हूँ पर मैं उन्हें क्या बताता ? इस लिए उनकी बात को ताल रहा था. इतने में राधा भी कैंटीन में आ गयी और मुझे देख कर शायद उसे भी समझ आ गयी क मैं कुछ परेशां हूँ .

राधा : अमित क्या एक मिनट क लिए बहार आओगे मुझे तुमसे ज़रूरी बात करनी है?

मैं राधा क साथ कैंटीन से बहार आ गया.

राधा : तुम माँ की वजह से परेशां हो न? मैं माफ़ी मांगती हूँ माँ की तरफ से.

अमित : अरे ये तुम क्या कह रही हो राधा ? वो मेरी मौसी हैं मैं उनकी बात का बुरा क्यों मानूंगा? मैं बस इस बात को सोच सोच क परेशां हूँ क वो मुझे गले लगा कर क्यों रो रही थी?

राधा : माँ ऐसी hi है . वो अकेले में रोटी रहती है और मौसी ( दामिनी ) को बहुत यद् करती है. मुझे नहीं पता क वो तुम पर गुस्सा क्यों करती है पर कल देखा न वो तुम्हे गले लगा कर कैसे रो रही थी. इसका मतलब है क वो अंदर से तुम्हे प्यार भी बहुत करती हैं. शायद मौसी क चले जाने से वो ऐसी हो गयी हैं ( माँ तुम्हारे पापा की वजह से तुमसे नफरत करती है मैं तुम्हे माहि बात सकती. मगर वो ऐसे क्यों करती हैं मैं पता लगा कर रहूंगी )

अमित : राधा बाबा ने मुझे बताया क माँ की हर चीज़ उनकी हर यद् मौसी क पास है . तो क्या तुम मुझे मेरी माँ की वो यादें उनकी चीज़ें उनकी तस्वीरें दिखा सकती हो?

राधा : माँ ने वो सब एक कमरे में रखा है और उसपर हमेशा टाला लगा कर रखती हैं. मुझे भी अंदर जाने नहीं देती. जब कभी माँ बहुत उदास होती है तो घंटों अंदर hi बंद रहती है.

अमित : क्या तुमने कभी नहीं देखा क अंदर क्या है?

राधा : मुझे ठीक से यद् नहीं मैं काफी साल पहले अंदर गयी थी . उस कमरे में माँ और मौसी की तस्वीरें उनका सामान है लेकिन माँ ने मुझे कुछ भी देखने नहीं दिया और मुझे लेकर बहार आ गयी. माँ ने मुझे अंदर जाने से मन कर रखा है . इस लिए मैंने भी कभी अंदर जाने की कोशिश नहीं की क्यूंकि मैं उन्हें दुःख नहीं पहुँचाना चाहती . मैंने माँ को कई बार रत रत भर रट देखा है अमित वो बहुत दुखी अंदर से शायद इसी लिए वो ऐसी हैं.

अमित : मौसी को किस चीज़ का दुःख है क्या तुम जानती हो ?

राधा : माँ की ज़िन्दगी में मेरे इलावा और कुछ भी नहीं है . मैंने कभी उन्हें हस्ते हुए नहीं देखा . पापा साल बाद कुछ दिनों क लिए आते हैं और उसमे भी वो माँ को टाइम नहीं देते न hi मेरे साथ टाइम बिताते हैं. और कभी कभी तो एते hi नहीं. मौसी भी पहले दूसरे शहरों में रहती थीं इस लिए उनसे भी मिलना नहीं होता था अब तो चलो वो इस शहर में हैं तो कभी कभी कोई आ जाता है. लेकिन इतने साल माँ ने अकेले गुज़ारे हैं. मां कभी कभी कुछ देर क लिए मिलने आ जाते हैं और माँ को कुछ न कुछ दे जाते हैं. माँ ने मुझे बहुत म्हणत से पला है. वो खुद म्हणत करती हैं लोगों क कपडे स्टिच करती हैं और मां भी कभी कभी ज़बरदस्ती कुछ माँ कुछ देते रहते हैं. माँ ने अकेले साडी ज़िन्दगी गुज़र दी है और लगता है क उन्हें अकेलेपन से hi प्यार हो गया है. पापा ने कभी उनको प्यार दिया hi नहीं. बस एक घर ले कर दे दिया है. कभी दिल किया तो कुछ पैसे भेज दिए वर्ण वो भी नहीं. मुझे जन्मदिन पर एक फ़ोन तक नहीं करते . शायद उन्हें भी हमारी ज़रूरत नहीं.

राधा की बातें सुन कर मुझे भी दुःख होने लगा क दिव्या मौसी ने कितने दुःख उठाये होंगे अकेले रह कर . कैसे उन्होंने राधा को पल पास कर बड़ा किया. दिव्या मौसी अकेली दुःख सहते सहते ऐसी हो गयी है शायद . बाबा ने बताया था क बचपन में वो शरारती और नटखट थी . लेकिन आज का उनका ये रूप देख कर लगता hi नहीं क कभी उन्होंने ज़िन्दगी में हसना सीखा भी होगा. राधा भी इसी लिए ऐसी चुपचाप रहने वाली बन गयी है क्यूंकि उसने अपनी माँ को हमेशा उदास देखा है. मगर मौसा मौसी क साथ ऐसा क्यों किया? आखिर कोण इंसान अपनी फॅमिली को ऐसे अकेला छोड़ कर जा सकता है? लोग पैसा कमाने बहार जाते हैं ये बात समझ में अति है पर मौसा तो पैसा भी नहीं भेज रहे इसकी क्या वजह हो सकती है. कुछ तो है जो कोई नहीं जनता और वो सब दिव्या मौसी को hi पता है. मगर वो किसी को बताएंगी नहीं. मुझे खुद hi पता लगाना होगा. राधा ने जिस कमरे क बारे में बताया है शायद उसमे कुछ सबूत हो और मेरी माँ की यादें भी तो हैं वहां. मुझे उस कमरे में जाना होगा.

राधा : क्या सोच रहे हो?

अमित : कुछ नहीं . मौसी ने अकेले इतने दुःख सही और कभी किसी को बताया तक नहीं. अकेलापन hi उनके दुःख का कारन है और हमें उनका ये अकेलापन दूर करना होगा.

राधा : मुझे नहीं लगता ये कभी हो पायेगा. एक औरत क लिए उसका पति उसका प्यार hi सबकुछ होता है और जब वो hi उसका साथ नहीं देता तो फिर उस औरत को कैसी ख़ुशी मिल सकती है?

अमित : कुछ भी हो राधा मौसी चाहे कितना भी मुझसे नाराज़ हो या गुस्सा करें मैं उनको फिर से हसने क लिए मजबूर कर दूंगा उन्हें खुश रहना सिखाऊंगा. बाबा ने कहा था क मौसी माँ से बहुत प्यार करती थी और उनके साथ मिलकर सबको तंग किया करती थी मैं अपनी वही दिव्या मौसी वापिस ले कर आऊंगा जो कही खो गयी है.

राधा : ( खुश होते हुए )तुम सच में ऐसा करोगे ? तुम सच में माँ को हसना सिखाओगे ? तुम सच में माँ को खुशियां डोज ? अगर ऐसा हुआ तो मैं तुम्हे

अमित : इनाम बाद में देना पहले मेरी बात सुन लो . इस काम में तुम्हे भी मेरा साथ देना होगा. और हो सकता है मौसी इस बात पर गुस्सा भी हो . तो क्या तुम मेरा साथ डौगी ?

राधा : मैं माँ को खुश देखने क लिए कुछ भी करुँगी .

अमित : फिर ठीक है. वैसे मुझे इनाम में क्या मिलेगा?

राधा : ( तुम्हे मैं अपना दिल अपनी आत्मा अपना सब कुछ दे दूंगी .) वो तुम्हे वक़्त आने पर पता चल जायेगा.

अमित : ठीक है तो अब तुम मौसी क बारे में हर चीज़ पर ध्यान देना शुरू कर दो और मुझे बताती रहा करो . मैं चाहता हूँ तुम मुझे उनके बारे में सब कुछ बताओ.

राधा : जैसा तुम कहो.

अमित : वैसे कल क्या क्या मिला फिर गिफ्ट में ?

राधा : कल तो बहुत कुछ मिला . शायद मेरी होश में ये पहला बर्थडे है जो इतनी अछि तरह मनाया गया है. सब क सब मौजूद थे मुझे तो सबको एक साथ देख कर hi मेरा गिफ्ट मिल गया.

राधा ने एक एक करके सबका बता दिया जो उसे गिफ्ट में मिला.

अमित : तो तुम्हे किसका गिफ्ट सब से ज्यादा पसंद आया?

राधा : तुम्हारा

अमित : मेरा कौन सा वाला ?

राधा : जो कल तुमने सरप्राइज पार्टी दी मेरे बर्थडे की वो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया . वो किसी भी गिफ्ट से बढ़कर है मेरे लिए. मैं कल का दिन कभी नहीं भूलूंगी.

अमित : मतलब वो गिफ्ट जो मैंने दिए वो पसंद नहीं आये?

राधा : मैंने ऐसा कब कहा? वो भी मुझे बहुत पसंद आये . सिर्फ तुमने मेरी ज़रूरत का ध्यान रखा और मुझे जिसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी वो तुमने दिया. माँ को मैंने सरे गिफ्ट खोलने क बाद तुम्हारा दिया हुआ मोबाइल दिखाया तो माँ ने पूछा था क किसने दिया. मैंने कह दिया बड़े मां ने दिया है तो माँ मां से पूछने चली गयी. मैं तो हैरान हूँ क मां ने भी कह दिया क हाँ ये मैंने दिया है . तभी मैं समझ गयी क तुमने hi मां से कहा होगा . माँ मन कर रही थी और वापिस देना चाहती थी मगर मां ने सख्ती से ये कहते हुए मन कर दिया क राधा घर से बहार जाती है तो उसकी खैर खबर लेने क लिए इसकी ज़रूरत है. बस फिर क्या था माँ को मन्ना पड़ा.

अमित : और वो बैग?

राधा : ये क्या तुम्हे नज़र नहीं आ रहा? मैंने कल hi इसमें अपना सामान दाल दिया था और पुराण बैग फेंक दिया. माँ को बता दिया क मेरी सहेली ने दिया है.

अमित : अब मुझे सहेली बना दिया तुमने ? शर्म करो मेरा जेंडर तो चेंज मत करो

मेरे इस जोके पर राधा हसने लगी

राधा : है है है वैसे आईडिया ाचा है माँ पूछेगी तो मैं कह दूंगी उसका नाम अमिता है.



मुझे भी राधा की इस बात पर हंसी आ गयी. उसके बाद हमने कुछ देर और बातें की और लेक्चर की बेल्ल बज गयी. मैंने राधा को बता दिया था क आज मुझे जल्दी जाना है क्यूंकि बाबा को मोहित की फॅमिली से मिलवाना जो था. मोहित क साथ मैंने एक और लेक्चर अटेंड किया और फिर हम कॉलेज से निकल गए रीता मौसी क घर . मोहित ने सब के पाऊँ छुए . माँ और बाबा को लेकर हम कार में मोहित क घर आ गए जहाँ अंकल आंटी लंच पर माँ बाबा का इंतज़ार कर रहे थे .
 
अपडेट आज रत को दूंगा भाई लोगो . आज काम से बहार गया था . अभी घर लौटा हूँ.
 
अपडेट 88



मैं और मोहित माँ बाबा को को जब घर लेकर आये तो इतने बड़े घर को देख कर दोनों खुश हो रहे थे. मोहित ने दरवाज़ा खोला तो अंकल आंटी हल में hi सोफे पर बैठे हुए थे. हमें अत देख कर दोनों अपने जगह पर खड़े हो गए माँ बाबा का स्वागत करने क लिए . हम जैसे hi अंकल क पास पहुंचे तो वो बाबा को बड़े गौर से देखने लगे जैसे क पहचानने की कोशिश कर रहे हो.

अंकल : विजय भैया ?

विजय मां : आप ?

अंकल ने आगे बाद कर बाबा क पाऊँ छू लिए और बाबा ने उनको पकड़ कर उठाया.

विजय मां : आप कौन हैं ? मैंने आपको कहीं देखा है मगर यद् नहीं आ रहा?

अंकल : कैसे यद् आएगा ? इतने सालों बाद तो देख रहे हैं . मैं राघव हूँ पवन का दोस्त ‘ रघु ‘

बाबा ने अंकल को गले लगा लिया. मैं अंकल क मुँह से पापा का नाम सुन कर हैरान हो रहा था . इसका मतलब अंकल पापा क दोस्त हैं. दोनों भाइयों की तरह गले मिल रहे थे और अंकल की आँखों में ख़ुशी क आंसू आ गए. आंटी ने भी अंकल की बात से पहचान लिया और आगे बाद कर बाबा क पाऊँ छुए और फिर दोनों ने माँ क भी पाऊँ छुए. माँ और बाबा में अब उन्हें पहचान लिया था.

अंकल : सोचा नहीं था इतने सैलून बाद फिर आप से मुलाकात होगी.

विजय मां : तुम कहाँ थे इतने साल एक बार भी तुमने मिलने आने की कोशिश नहीं की .

अंकल : किस मुँह से अत आपके पास मैं तो उसको आखिरी बार देख भी न पाया था जिसने हमेशा एक भाई की तरह मुझे ज़िन्दगी में आगे बढ़ने में मदद की. मैं तो शर्मिंदा हूँ आप से भी और अपने दोस्त से भी क मैं उसको आखिरी बार कन्धा भी न दे पाया . मैं जब टूर से लौटा तो दूसरों से hi पता चला था क क्या हुआ. मुझे किसी ने खबर तक नहीं की थी. आज भी मैं खुद को कॉस्टा हूँ क काश मैं टूर पर न गया होता.

विजय मां : इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है. जब जो होना है हो क रहता है. अगर हमारे बस में होता तो क्या हम वो सब होने देते?

अंकल : आप नहीं जानते भैया आज भी दिल इस बात पर शर्मिंदा है क जिसने मुझे इतना कुछ दिया मैं उसके लिए कुछ नहीं कर पाया. आखिरी बार उसको देख तक नहीं पाया. क्या मुँह ले कर उसके पास जाऊंगा मैं ? जब वो पूछेगा क आखिरी बार मुझे कन्धा तक न देने आये तो क्या कहूंगा?

अंकल ने बात करते करते रोना शुरू कर दिया और बाबा उन्हें चुप करवाने लगे. अंकल की वजह से आंटी की आँखों में भी आंसू आ गए थे और माँ भी आंटी को गले लगाए हुए थी.

विजय मां : खुद को सम्भालो अब तुम बचे नहीं हो. वैसे भी तुम्हारी तो इसमें कोई गलती नहीं है. रही बात पवन से मिलने की तो वो मैं अभी मिला देता हूँ.

बाबा की बात सुनते अंकल आंटी समेत मैं और मोहित भी हैरान हो गए क बाबा ये क्या कह रहे हैं.

विजय मां : अमित इधर आओ

मैं बाबा क पास चला गया.

विजय मां : देखो इसे , क्या तुम्हे पवन नज़र नहीं आ रहा ?

अंकल मुझे हैरानी से देखने लगे . वो कभी मुझे कभी बाबा को देखते.

विजय मां : अब भी नहीं पहचाना? ये अमित है पवन और दामिनी का बीटा .

इतना सुनते hi अंकल झटके से खड़े हो गए और मुझे कास के अपने सीने से लगा लिया. अंकल की आँखों से आंसू लगातार बहते जा रहे थे और वो मुझे बार बार चूमते हुए अपने सीने में कास लेते.

अंकल : तू मेरे यार का बीटा है ? तू मेरे यार की निशानी है ? मैंने तुझे पहचाना क्यों नहीं ? तुम्हे देखते hi मुझे लगा था क मेरा यार मेरे सामने आ गया और मैं समझ hi नहीं पाया क तू उसी का अंश है. तू कहाँ था अब तक ? भगवन तेरा लाख लाख शुक्रिया तूने मेरे दोस्त की अमानत लौटा कर मुझ पर एहसान किया है. मैं अपनी साडी दौलत देकर भी इसका मॉल नहीं चूका सकता. देख पवन देख तेरा बीटा कितना बड़ा हो गया. बिलकुल तेरे जैसा दीखता है . मैं कितना नासमझ था जो इसे पहचान नहीं पाया . मुझे माफ़ करना मेरे यार मैं तेरी दोस्ती का फ़र्ज़ ऐडा नहीं कर पाया . मैं तेरे बेटे को प्यार नहीं दे पाया. मगर अब मैं इसे वो सब दूंगा जो इसे मिलना चाहिए था . आज से ये सब तेरा है मेरे बेटे . मेरा सब कुछ तेरा है. विजय भैया आप ने मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है. मेरे यार की अमानत को आप ने आज मुझे लौटा कर मुझे खरीद लिया है खरीद लिया है आपने मुझे. ो मेरे बेटे तू मेरे सामने था और मैं तुझे पहचान hi नहीं पाया.

विजय मां : हौसला कर राघव हौसला कर देख ज़रा इसे गौर से है क नहीं पवन और दामिनी की झलक इसमें ? अब दिल छोटा मत करना . अमित क रूप में वो दोनों आज भी हमारे बीच हैं. ये तेरा पवन भी है और मेरी दामिनी भी .

अंकल : मैं आपका एहसान कैसे उतरूंगा भैया. ये बिलकुल मेरे यार जैसा hi है बिलकुल पवन की जवानी की हूबहू तस्वीर. मगर ऑंखें

अमित : माँ जैसी हैं

अंकल : मेरा बीटा

आंटी : मुझे नहीं मिलने देंगे मेरे बेटे से ?

अंकल आंटी की बात सुनकर मुझे अपने सीने से अलग किया और फिर आंटी ने मुझे मुझे माथे पर चूमते हुए गले से लगा लिया. दिल हमेशा यही कहता था क तुमसे हमारा कोई पुराण सम्बन्ध है मगर हम hi समझ नहीं पाए. बिलकुल दामिनी जैसी hi ऑंखें हैं तेरी. वो मेरी बहिन जैसी थी बहुत प्यार था हम दोनों में.

अंकल : भैया मैंने तो सुना था क कोई नहीं बचा था उस एक्सीडेंट में.

विजय भैया: असल में हमने किसी को नहीं बताया था. जब मैं एक्सीडेंट वाली जगह पर पहुंचा था तो एक आदमी ने अमित को मेरी गॉड में सौंपा था. उसने बताया क एक्सीडेंट में अमित बच गया था क्यूंकि दामिनी ने इसे अपनी गॉड में ले रखा था. और उसने इसे कुछ नहीं होने दिया. गाड़ी में आग लगाने पहले उस आदमी ने अमित को बहार निकल लिया. और तुम तो जानते hi हो वो लोग पवन क साथ कैसे थे ? आखिरी बार बस शकल दिखने hi ए थे शमशान में . मैं भला कैसे उन लोगों क हाथ सौंप देता इस नन्ही सी जान को?

अंकल : काश वो आदमी मुझे मिल जाये मैं उसे सर आँखों पर बिठा लूँ. ाचा किया आपने जो अमित क बारे में किसी को नहीं बताया . वो लोग तो इंसान कहलाने क लायक नहीं हैं. मैं तो

विजय मां : राघव मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.

अंकल की बात बीच में hi काट कर बाबा अंकल को साइड में ले गए.

विजय मां: देख राघव मैं नहीं चाहता क उन लोगों क बारे में अमित को कुछ भी पता चले . उन घटिया लोगों का साया भी मैं अपने बेटे पर नहीं पड़ने दूंगा. तू मेरी विनती मन लेना इसे कभी उनके बारे में नहीं बताना .

अंकल : पर भैया वो कमीने लोग पवन की म्हणत की कमाई पर सांप बन कर कुंडली मरे बैठे हैं और गुलछर्रे उदा रहे हैं . क्या आप नहीं चाहते अमित को उसके पिता की विरासत मिले. जिस चीज़ पर इसका हक़ है उसपर वो मौज उदा रहे हैं.

विजय मां : देख राघव मेरे लिए ये hi पवन और दामिनी की दौलत और जायदाद है. पैसे की हमें कोई ज़रूरत नहीं है भगवन का दिया सब है. तू क्या चाहता है जिस दौलत की वजह से उन्होंने पवन क साथ इतना गलत किया फिर उसी दौलत क चक्कर में वो अमित क साथ भी वो सब करें? देख तू समझदार है मेरी बात को समझ . अमित hi हमारे लिए सब कुछ है. हमें क्या लेना उन घटिया लोगों से जिन्होंने ये भी जानने की कोशिश नहीं की क कोई ज़िंदा भी बचा या नहीं.

अंकल : ठीक है भैया जैसा आप चाहे . मैं इसे कभी उनके बारे में नहीं बताऊंगा और न hi उनके पास जाने दूंगा.

इधर आंटी मुझे गले लगाती मुझसे बातें करती मुझे चूमती . मोहित जो कब से ये सब ड्रामा देख रहा था उसने भी आंटी को पीछे हटाकर मुझे गले लगा लिया. हालाँकि उसे भी मेरी तरह कुछ यद् नहीं होगा पर उसे इतना तो पता चल गया था क मैं उसके डैड क सबसे खास दोस्त का बीटा हूँ और उसका तो खास दोस्त मैं पहले hi था तो अब हमारी दोस्ती डबल पक्की हो गयी थी. माँ और आंटी ने अपनी गीली ऑंखें साफ़ की और शुरू हो गया पुराणी बरिन का सिलसिला. इसी बीच रानी ने hi सबके लिए खाना लगाया. खाना टेबल पर लगते hi आंटी और माँ ने सबको खाना परोसा. अंकल ने मुझे अपने पास बिठा लिया तो दूसरी तरफ आंटी बैठ गयी . दोनों बरी बरी से मुझे अपने हाथों से निवाला खिलते. खाना खाने क बाद बातों का सिलसिला यूँ hi चलता रहा. फिर चाय पीने क बाद माँ बाबा ने जाने की इजाज़त मांगी तो अंकल आंटी उन्हें रोकने लगे . मगर बाबा ने बता दिया क उन्हें बड़ी मौसी क यहाँ जाना है

अंकल : भैया ऐसा नहीं हो सकता क आप सबको यहीं बुला लें ? हम भी सब से मिल लेंगे.

विजय मां: तीनो बहने इसी शहर में हैं जब चाहो मिल लेना अमित तुम्हे उनसे मिलवा देगा. रही बात हम भाइयों की तो उसके लिए गाओं आना पड़ेगा क्यूंकि हूँ अभी यहाँ नहीं आ सकते दोनों बहुएं ( ममियां ) माँ बनने वाली हैं.

अंकल : ये बहुत अछि बात है . फिर तो सब एक साथ इकठे होंगे इस ख़ुशी क मौके पर . पता नहीं कोई मुझे पहचानेगा भी या नहीं?

विजय मां : कैसे नहीं पहचानेगा? एक तू hi था जो पवन क इतना करीब था. चल तू भी तुम्हे मिला देता हूँ रजनी और उसकी फॅमिली से.

आंटी : ऐसे नहीं भैया . हम सबको यहीं पर इन्विते करेंगे . एक छोटा सा फंक्शन ऑर्गेनिसे कर क सब को इन्विते करते हैं किसी दिन.

अंकल : रमा बिलकुल ठीक कह रही है . हम सबको यहीं पर बुला लेंगे मगर अजय और कमलेश तो अभी आ नहीं पाएंगे न ?

आंटी : भाभी कितनी देर खुशखबरी में?

गौरी ममी : दीपिका को एक महीना और कामिनी क अभी हैं 3 महीने.

आंटी : तो ऐसा करते हैं दीपिका क बाद hi फंक्शन रख लेंगे कामिनी को तो देर लगेगी.

विजय मां : अरे तुम लोग खामखा चिंता कर रहे हो. उस सब में टाइम है . हमारी बहने तो यहीं हैं न जब चाहो उनसे मिल लो.

अंकल : ठीक है भैया पर हम खली हाथ नहीं मिलेंगे किसी से इस लिए आज का रहने देते हैं. आप उनसे मिल लीजिये हम बाद में मिल लेंगे. आज मैं अपने बेटे से दिल खोल कर बातें करना चाहता हूँ. इतने सैलून बाद मिला है आज तो मैं इसे अपनी दोस्ती क किस्से सुनाऊंगा.

विजय मां : ठीक है तो अब हमें इजाज़त दो

अंकल ने फिर एक बार बाबा को रोकने की कोशिश की मगर बाबा ने मन कर दिया तो अंकल ने मोहित को भेज दिया माँ और बाबा को रजनी मौसी क घर छोड़ने क लिए. इधर अंकल मुझे ले कर बैठ गए . कभी मुझसे मेरे बचन क बारे में पूछते कभी अपनी और पापा की बातें करने लगते कभी आंटी अपनी और माँ की बातें करती . बातों बातों में आज की प्रैक्टिस से भी छुट्टी हो गयी और ट्यूशन से भी. मम का फ़ोन आया तो मैंने उठाया नहीं क्यूंकि मुझे तो अपने माँ बाप क बारे में hi बातें सुन कर ाचा लग रहा था. अंकल ने मुझे उनकी शादी तस्वीरें दिखाई. और भी बहुत साडी तस्वीरें जो उनकी और पापा की यादें थी. दोनों बेस्ट फ्रेंड थे. अंकल आंटी ने बताया क कैसे उनकी शादी भी पापा ने hi करवाई थी . अंकल क फॅमिली में कोई नहीं था और आंटी की फॅमिली से बात करने पापा hi गए थे दादा जी को लेकर. दोनों की लव मैरिज थी और मैरिज से पहले भी पापा दोनों को मिलवाया करते थे. मेरी माँ से भी आंटी की बहुत अछि दोस्ती थी और दोनों बहनो की तरह hi रहती थी. अंकल ने बताया क वो पहले नौकरी किया करते थे और मेरे पापा ने hi उनको खुद से पैसे देकर ये बिज़नेस शुरू करवाया था. और आज अंकल उन्ही की बदौलत बुलंदियों पर हैं. अंकल ने और भी बहुत सरे किस्से सुनाये और मैं बस मन लगाकर सुनता रहा . मुझे ऐसे लग रहा था क जैसे सब कुछ मेरी आँखों क सामने hi फिल्म की तरह चल रहा हो. अंकल की बातों से इतना तो पता चल गया क मेरे पापा बहुत अचे इंसान थे और दूसरों की हमेशा मदद किया करते थे. मुझे गर्व हो रहा था क मेरे माँ बाप इतने अचे थे जो हर कोई उनकी तारीफ करता है.

मोहित माँ बाबा को मौसी क घर छोड़ कर आ गया. अंकल आंटी देर रत तक मुझसे बातें करते रहे इस बीच मुझे एक अननोन no. से कॉल आ रही थी मगर मैंने अटेंड नहीं की. रत 11 बजे जाकर अंकल आंटी ने मुझे सोने की इजाज़त दी मगर मेरा दिल तो अभी भी भरा माहि था उनकी बातों से . पर अब वो भी थक चुके थे और मुझे भी सुबह कॉलेज जाना था तो मैं अपने कमरे में चला गया. आज मेरे दिल को बहुत सुकून मिल रहा था. ऐसा लग रहा था क मैं अपनों में hi हूँ. जैसे मैं अपने hi घर में हूँ. मैं बीएड ओर लेता माँ पापा क बारे में hi सोच रहा था क एक बार फिर से उस अननोन no. से फ़ोन आया . मैं कितनी बार पहले भी उसे इग्नोर कर चूका था तो सोचा उठा कर देख hi लूँ क कौन है.

अमित : hello . कौन है?

???? : इतनी देर फ़ोन उठाने में ? कहाँ बिजी थे ?

अमित : राधा तुम ? ये किस no. से कॉल कर रही हो?

राधा : तुम्हारे गिफ्ट किये फ़ोन से पहला फ़ोन तो तुम्हे करना था न. इस लिए कब से फ़ोन कर रही हूँ और वक तुम हो क फ़ोन hi नहीं उठा रहे.

अमित : सॉरी मैं अंकल आंटी क साथ उनकी बातें सुन रहा था इस लिए फ़ोन नहीं उठा रहा था. तुम्हे पता है मोहित क पापा मेरे पापा क बेस्ट फ्रेंड निकले . आज बाबा जब घर आये तो अंकल ने उन्हें पहचान लिया और फिर अंकल आंटी ने मुझे कितना प्यार किया मुझे ढेर साडी बातें की. मेरे पापा क बारे में माँ क बारे में. मैं आज बहुत खुश हूँ . ऐसा लग रहा है जैसे मैं आज अपने घर आ गया हूँ. मैं बता नहीं सकता राधा क मुझे कैसा फील हो रहा है.

राधा : सच !! ये तो बहुत अछि बात है . मैं समझ सकती हूँ तुम्हे कितनी ख़ुशी हो रही है मैं फील कर सकती हूँ. शायद इसी लिए मेरा दिल बार बार तुमसे बात करने को रहा था मगर लगता है मैंने तुम्हे डिस्टर्ब कर दिया

अमित : अरे ऐसा नहीं है . मैं अब अपने कमरे में हूँ

राधा : तो तुम अब हॉस्टल में हो ?

अमित : ( क्या करूँ सच बताऊँ क नहीं ) वो आज लेट हो गया था तो मोहित क घर hi रुक गया था. वैसे थैंक्स

राधा : वो किस लिए?

अमित : तुमने सबसे पहले मुझे कॉल किया.

राधा : था का तो मुझे कहना चाहिए जो तुमने मेरा लिए इतना कुछ किया . वैसे मैंने तो सोच लिया था क जब तक तुमसे बात माहि कर लेती मैं किसी और को फ़ोन नहीं करुँगी.

अमित : ाचा ये बात है ? मगर ऐसा क्यों ? अगर मैं फ़ोन hi न उठता तो तुम किसी को फ़ोन करती?

राधा : बिलकुल भी नहीं. सबसे पहले मैं तुमसे hi बात करना चाहती थी . क्यूंकि ये मेरा पहला फ़ोन है और ( मैं सिर्फ तुमसे hi बात करना चाहती हूँ . पता नहीं क्यों पर मेरा तुम्हारे इलावा किसी से बात करने को दिल hi नहीं करता )

अमित : और ?

राधा : और ये क ये तुमने गिफ्ट किया है इस किये पहला फ़ोन तो तुम्हे hi करना था न.

अमित : राधा एक बात मैंने सब से छुपाई है पर आज मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ बुरा तो नहीं मानोगी?

राधा क दिल की धड़कने तेज़ हो गयी क अमित क्या कहने जा रहा है ? कहीं ये उसी क बारे में तो नहीं ? अमित क्या कहेगा ? यही सोच कर राधा सोच में पद गयी और बात का जवाब भी माहि दिया

अमित : राधा ?

राधा : हम्म्म कहो क्या कहना है

अमित :मैंने सब से झूठ कहा था क मैं हॉस्टल में रहता हूँ. असल में मैं मोहित क घर hi रहता हूँ. वो मुझे हॉस्टल से अपने घर ले आया था अपनी कसम दे कर. मैं उसकी बात ताल नहीं सका और किसी को इस लिए नहीं बताया क सब बुरा मानते क उनके होते हुए मैं मोहित क घर क्यों रह रहा हूँ.

राधा : ओह्ह्ह्हह ये बात थी. मैंने समझा तुम

अमित : तुमने क्या समझा?

राधा : कुछ नहीं. वैसे ये तो तुमने सही किया क तुमने मोहित की कसम का मान रखा पर तुम मुझे पहले भी तो बता सकते थे तो अब क्यों बता रहे हो?

अमित : पता नहीं पर मुझे ाचा नहीं लग रहा था क मैं तुमसे ये बात छुआपुन . इसी लिए बता दिया. कल को तुम्हे किसी और से पता चलता तो तुम्हे बुरा लगता.

राधा : हम्म तुमने सही कहा. और मुझे ख़ुशी है क तुमने मुझे इस काबिल समझा जो सबसे पहले मुझे बता रहे हो.

अमित : वैसे तुम्हे मेरा no. कहाँ से मिला?

राधा : दीदी से लिया था. ाचा अब मुझे फ़ोन बंद करना होगा वर्ण माँ गुस्सा करेंगी वो अभी कमरे में आने वाली हैं . गुड नाईट

अमित : गुड नाईट स्वीट ड्रीम्स

राधा : यू तू

राधा से बात कर क मुझे ाचा लग रहा था. पता माहि क्यों पर मैंने उसे सचाई बता दी जो अभी तक मैंने किसी को नहीं बताई थी सिवाए माँ बाबा और दीपिका ममी कामिनी ममी क. शायद माँ बाबा अब सब को बता hi देंगे. अब मैं ये सोच hi रहा था क नैना दीदी का फ़ोन आ गया.

अमित : लगता है नींद नहीं आ रही थी जो इतनी रत को फ़ोन किया.

नैना : मुझे तुमसे बात नहीं करनी मैं तुमसे गुस्सा हूँ

अमित : अरे ये क्या बात हुई ? ( खुद hi फ़ोन कर रही है और खुद hi कह रही है बात नहीं कर ी ) मैना ऐसा क्या किया जो आओ गुस्सा हो रही हैं.

नैना : तुम मोहित क घर पर रह रहे थे इतने दिनों से और बताया भी नहीं. तुम हमारे साथ भी तो रह सकते थे.

अमित : वो मैं बताने वाला था बस समझ नहीं आ रहा था कैसे बताऊँ . मुझे पता था आप गुस्सा करेंगी . इसी लिए हिम्मत नहीं हो रही थी. मैं तो हॉस्टल में hi रह रहा था मगर मोहित मुझे अपनी कसम देकर अपने घर ले आया . अब आप hi बताओ क आप ये चाहती हैं क मैं दोस्तों की नज़र में झूठा बन जॉन? क्या आप चाहेंगी सब मुझे झूठा कहें?

नैना : मैंने ऐसा कब कहा ? कोई तुम्हे झूठा कहे ये मैं कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती. मुझे कल मौसी पर भी गुस्सा आ गया था कब उन्होंने तुम्हे ऐसे गुस्से से बोलै था.

अमित : मौसी तो अपनी हैं मुझे उनकी बात क गुस्सा नहीं है और आप भी मत करो. मुझे पता था और कोई मेरी बात समझे न समझे पर आप समझ जाएँगी.

नैना : मैं तो समझ गयी पर बाकि सबको क्या समझाओगे ? सब को गुस्सा है जब से मां ने बताया क तुम मोहित क साथ रहते हो. वैसे मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है क मोहित क पापा तुम्हारे पापा क बेस्ट फ्रेंड हैं. मां बता रहे थे कैसे अंकल आंटी ने तुम्हे प्यार दिया जब उन्हें पता चला क तुम उनके बेस्ट फ्रेंड क बेटे हो.

अमित : अब आप गुस्सा तो नहीं हैं न?

नैना : गुस्सा तो मैं फिर भी हूँ. कल तुमने छत पर क्या किया मेरे साथ? और उसके बाद एक बार भी बात नहीं की फ़ोन पर

अमित : मैंने क्या किया ? वो तो आप hi ने किया जो किया

नैना : ज्यादा बनो मत. मैंने तो सिर्फ किश किया था वो भी इस लिए क तुमने कहा था.

अमित : मैंने भी तो किश hi किया था

नैना : और जो तुम्हारे हाथ मेरे यहाँ वहां घूम रहे थे वो ? तुम्हे ज़रा भी शर्म नहीं आयी वो सब करते हुए

( नैना दीदी जान बुझ कर मुझे ये सब कह रही थी वर्ण मज़ा तो वो भी ले रही थी )

अमित : ाचा गलती से हो गया . आज क बाद कभी नहीं करूँगा और किश भी नहीं करूँगा आपको.

नैना : मैंने ऐसा कब कहा ?

अमित : मतलब आपको वो सब करने में मज़ा आया और आप चाहती हैं मैं फिर से करूँ.

नैना : मेरा मतलब है तुम किश कर सकते हो मगर और कहीं हाथ नहीं लगाओगे.

अमित : मैं तो कुछ भी नहीं करूँगा जो करेंगी आप hi करेंगी.

नाना : तुम बड़े गंदे हो . तुम चाहते हो मैं लड़की हो क सब करूँ और तुम सिर्फ मज़े लो.

अमित : अगर मैंने कुछ किया तो आप फिर से नाराज़ हो जाएँगी.

नैना : मैं कब नाराज़ हुई थी?

अमित : तो फिर ये सब ड्रामा किस लिए?

नैना : जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती .

दीदी से कुछ देर ऐसी hi प्यार भरी नोक झोक चलती रही . वो मुझसे गुस्सा थी मगर उन्हें पता भी नहीं चला कब उनका गुस्सा गायब हो गया. चलो इनका तो ख़तम हुआ अब मुझे चिंता हो रही थे बाकि सब कैसे रियेक्ट करेंगे सबसे ज्यादा तो करुणा दीदी hi थी जो गुस्सा दिखा सकती हैं . खैर उनको भी मन hi लूंगा . मैं सोने की कोशिश में था क मेरे रूम का दरवाज़ा किसी ने आहिस्ते से खोला और मेरे नज़दीक आ कर खड़ा हो गया. मैंने अँधेरे में पहचानने की कोशिश की तो मुझे लगा क शायद ये आंटी हैं. मगर आज जो कुछ हुआ उसके बाद उनका इस तरह आना मैं एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था. मुझे लगा था क शायद वो अब मेरे साथ पहले जैसे रिलेशन रखना नहीं चाहेंगी. और आज तो अंकल भी घर पर hi हैं. अब जब आंटी को पता है क मैं उनके पति क बेस्ट फ्रेंड का बीटा हूँ , उनकी बहिन जैसी सहेली का बीटा हूँ , उनके बेटे जैसा hi हूँ तो वो कैसे मेरे साथ वो सब करेंगी.

आंटी : अमित क्या तुम जग रहे हो?

अमित : आंटी आप उस वक़्त ? आइये बैठिये . मैं लाइट जलाता हूँ.

आंटी : नहीं लाइट मत जलाओ ऐसे hi रहने दो. मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती हूँ मगर समझ नहीं आ रहा कैसे कहूं?

अमित : प्लीज आंटी ! मैं कोई पराया तो नहीं . अब तो आप मेरे लिए पहले से भी खास हो गयी हैं इस लिए जो भी कहना है बेजिझक कहिये.

आंटी : अब जब पता चल गया है तुम पवन और दामिनी क बेटे हो तो मुझे खुद पर घिन आ रही है क मैंने तुम्हारे साथ कैसे वो सब

इतना कहते हुए hi आंटी की रुलाई छूट गयी. और मैंने उन्हें अपने गले से लगा लिया. मैं उनको चुप करवाने लगा. आंटी मेरे साइन से लगी धीमी आवाज़ में रो रही थी.

आंटी : मैं बहुत बुरी हूँ . ये मैंने क्या कर दिया. मैं शर्म से मरी जा रही हूँ . तुम क्या सोचते होंगे क तुम्हारी आंटी कैसी है.

अमित : चुप ! चुप हो जाइये . ऐसा वैसा कुछ नहीं सोचूंगा मैं. आप पहले भी मेरी आंटी थी और अब भी मेरी आंटी हैं. पहले आप मेरे बेस्ट फ्रेंड की माँ थी इस लिए मैं आपकी दिल से इज़्ज़त करता था और मेरा यकीन करिये मैंने सिर्फ आप की ख़ुशी क लिए वो सब किया था क्यूंकि आप को ज़रूरत थी प्यार की और सहारे की वर्ण आप शायद गलत रास्ता इख़्तियार करती. और मैं ऐसा हरगिज़ नहीं चाहता था . आप ने को ह गलत नहीं किया आंटी औरत की अपनी ज़रूरतें होती हैं जिनका पूरा होना ज़रूरी होता है. मैं आपसे बिलकुल भी नाराज़ नहीं और न hi आपको गलत समझ सकता हूँ बल्कि अब तो आप मेरे लिए और भी ज्यादा खास हो गयी हैं क्यूंकि आप मेरी माँ की सहेली हैं , मेरे पापा क बेस्ट फ्रेंड की वाइफ हैं. मैं आपके दुःख में आपका साथ दे सका ये तो मेरे लिए फख्र की बात है. मुझे परवाह नहीं क दुनिया की नज़र में ये सही है या गलत पर मुझे इतना पता हैं मैंने आपके ज़ख़्मी दिल पर प्यार का जो मलहम लगाया है वो किसी पुण्य से काम नहीं है. मेरी नज़र में आपकी रेस्पेक्ट पहले से भी बाद गयी है काम नहीं हुई. और रही बात हमारे बिच क रिश्ते की वो सब वैसे hi रहेगा जब तक आप चाहेंगी.

आंटी : तुम सच कह रहे हो ? तुम्हे बुरा नहीं लगा मेरी वजह से ?

अमित : पहले तो नहीं लगा मगर अब लग रहा है.

आंटी : ????

अमित : क्यूंकि आप क इस प्यारे से चहरे पर मैं ये दुःख दर्द की तस्वीर नहीं देखना चाहता. अब आप अपने आंसू पोंछिये . और अगर इज़ाज़त हो तो आपको थोड़ा प्यार भी कर लूँ?

मैंने आंटी की थोड़ी पर हाथ लगा कर उनका चेहरा ऊपर उठाते हुए पूछा तो आंटी क चहरे पर मुस्कान आ गयी.

आंटी : बिलकुल नहीं . जब तक तुम्हारा कम्पटीशन नहीं हो जाता मैं वेट करुँगी . तब तक तुम भी खुद पर काबू रखना .

आंटी ने आर्डर देते हुए कहा और मुझे किश कर कमरे से बहार चली गयी. मैं आंटी क बारे में सोचने लगा . आखिर उनका इसमें कसूर hi क्या है ? कोई भी औरत अपने पति से प्यार hi तो चाहती है. अगर पति उसे वक़्त नहीं देगा तो बेचारी कहाँ जाएगी? अंकल को आंटी को वक़्त देना चाहिए तभी आंटी को सही मायने में संतुष्टि मिल सकती है. मेरे साथ सेक्स कर क उनको शारीरिक सुख तो मिलता है मगर एक औरत को असली मानसिक सुख उसके पति क प्यार से hi किल्टा है वर्ण एक अपराध की भावना हमेशा मन में रहती है . अगर वो औरत चरित्रहीन हो तो उसे कोई फरक नहीं पड़ता और वो एक से अनेक मर्दों क साथ सेक्स कर क अपनी हवस शांत करती है मगर एक चरित्रवान औरत कभी किसी पराया मर्द की तरफ नहीं देखती. आंटी एक चरित्रवान औरत थी इस किये उन्होंने चुप चाप अपने पति की बेरुखी को बर्दाश्त किया मगर कभी किसी दूसरे मर्द से रिश्ता नहीं रखा. ये तो रानी और लोकु की वजह से आंटी की भावनाएं भड़क गयी और वो खुद पर काबू नहीं रख पायी. मुझे यकीन है अगर वो किसी बहरी मर्द या लोकु क साथ hi वो सब कर लेती तो शायद अंदर से टूट कर बिखर जाती मगर मैंने उन्हें कभी ऐसा फील नहीं होने दिया क वो सिर्फ ज़रूरत की वास्तु हैं . मैंने उनके दिल पर अपने प्यार और स्नेह से मलहम लगाया इस लिए वो अब मुझे इतना चाहने लगी हैं. आंटी क बारे में सोचते सोचते मैं कब सो गया पता hi नहीं चला .

अगले दिन मंजू म जब क्लास में आयी तो मुझे देखते hi उनके चहरे पर गुस्सा और नाराज़गी झलकने लगी. मैं समझ गया क कल मैंने उनकी कॉल अटेंड नहीं की इस लिए गुस्सा होंगी . मुझे उनको वापिस कॉल करनी चाहिए थी. मैं मम की तरफ पहले स्माइल करते हुए देखा मगर उन्होंने नज़रें फेर लीन फिर मैंने अपने कान पकड़ते हुए सॉरी कहा तो मम ने फिर भी गुस्सा नहीं छोड़ा . मैं समझ गया क मम कुछ ज्यादा hi गुस्सा हैं अब तो कुछ स्पेशल करना होगा उनका गुस्सा ख़तम करने क लिए. लेक्चर ख़तम होने क बाद मैं मम क पीछे गया उनसे बात करने क लिए मगर उन्होंने मेरी कोई बात नहीं सुनी. अब तो ट्यूशन पर जा कर hi मानना पड़ेगा. खैर मैं मोहित क साथ कैंटीन में चला गया. रीमा हमेशा की तरह अपनी खूबसूरती से सबकी नज़रों को रोशन करती हुई मीनल क साथ मेरे पास आ कर बैठ गयी.

रीमा : hi . कैसे हो आप ?

अमित : आप ?

रीमा : सॉरी . कैसे हो तुम ?

अमित : मैं ाचा हूँ मगर लगता नहीं क ज्यादा देर ाचा रह पाउँगा .

रीमा : वो क्यों ?

अमित : अब रोज़ रोज़ तुम ऐसे बिजलियाँ गिरती हुई मेरे सामने आ कर बैठोगी तो मैं कब तक बच पाउँगा?

रूम : ( मैं तो चाहती हूँ क तुम मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह दे दो ताकि मुझे भी वो जन्नत नसीब हो जिसे लोग मुहब्बत कहते हैं. पता नहीं तुम कब समझोगे मेरे जज़्बात . ज़िन्दगी में पहली बार किसी को देख कर इस दिल ने बगावत की है मुझसे और अब मैं अपने दिल क हाथों मजबूर हुई जाती हूँ)

अमित : पता है रीमा तुम्हारी ऑंखें इतनी खूबसूरत हैं क देखने वाला बस इनमे देखते हुए hi खुद को खो बैठे. ऐसा लगता है क तुम मुँह से काम आँखों से ज्यादा बोलती हो.

रीमा : ( तो समझ लो न जो मैं कहना चाहती हूँ. तुम्हारे सामने मेरी ज़ुबान तो मेरा साथ दे hi नहीं पति काम से काम मेरी आँखों की hi इल्तिजा कबूल करलो )

मीनल : क्या बात है ? आज बड़े रोमांटिक हो रहे हो ? इरादे तो ठीक हैं न ? मुझे लगता है अंकल आंटी ने कल तुम्हे कुछ ज्यादा hi प्यार दे दिया है जो आज तुम लुटाते hi फिर रहे हो . मगर मेरी फ्रेंड का ध्यान रखना कहीं बेचारी का दिल मत तोड़ देना.

अमित : अरे ये तुम क्या कह रही हो ? कोई पागल hi होगा जो इतनी हसीं लड़की का दिल तोड़ेगा . देख लेना इसे इसका परफेक्ट मैच मिलेगा .

रीमा : ( मेरे लिए तो तुम hi मेरे परफेक्ट मैच हो . प्लीज मुझे अपना लो मेरा दिल अब सिर्फ तुम्हारा है. )

अमित : वैसे लगता है आज तुम्हारी फ्रेंड की तबियत ठीक नहीं या फिर इसे मेरी बात अछि नहीं लग रही. इतनी देर से मैं बात कर रहा हूँ और ये है क कुछ बोल hi नहीं रही .

रीमा : मैं कब नाराज़ हूँ मैं बात कर तो रही हूँ .

मेनका : ो मैडम लगता है ख्यालों में hi बात कर रही थी तुम हमने तो कोई आवाज़ नहीं सुनी.

रीमा को मेनका की बात से यद् आया क वो तो अपने दिल में hi अमित से बात कर रही थी और ज़ुबान से खामोश थी. रीमा को इस बात पर हसीं आ गयी और फिर एक बार उसने अमित की नज़र से नज़र मिलायी.

अमित : सच सच कहना तुम्हे मेरी बातों का बुरा तो नहीं लगता न? देखो अगर गुस्सा करती हो तो बता देना मैं दोबारा तुम्हे तंग नहीं करूँगा.

रीमा : मुझे तो तुम्हारी बातें बहुत अछि लगती हैं . बिलकुल सच्ची और अछि बातें करते हो तुम वैसे तारीफ क लिए शुक्रिया .

हम बातें कर रहे थे क राधा और नेहा दीदी भी आ गए और हमारे साथ बैठ गए. राधा ने मुझसे हाथ मिलाया और एक दिल काश मुस्कान उसके चहरे पर थी.

नेहा : कोंग्रटुलतिओन्स अमित तुम्हे इतने सैलून बाद तुम्हारे खोये हुए अंकल मिल गए.

मोहित : खोये हुए अंकल नहीं खोया हुआ एटा मिल गया पापा को . अब तो ये मेरी जगह ले लेगा है है है

मोहित की बात ओर सबके चहरे पर हसीं आ गयी.

अमित : थैंक्स दीदी मैं वाकई बहुत खुश हूँ. आओ गुस्सा तो नहीं हैं न ?

नेहा : मैं क्यों गुस्सा हूँगी?

अमित : वो हॉस्टल वाली बात पर

नेहा : नहीं मैं गुस्सा नहीं हूँ . मैं समझती हूँ और राधा ने भी मुझे बता दिया है. मगर इस बात पर नाराज़ ज़रूर हूँ क यहाँ होते हुए भी तुम हमारे यहाँ माहि आते . मेरी छोडो घर आओगे तो पता चलेगा करुणा तुम्हे छोड़ने वाली नहीं और माँ भी नाराज़ हैं.

अमित : इस बात पर मैं भी सोच रहा हूँ क क्या करूँ.

राधा : ज्यादा सोचने की ज़रूरत नहीं है . कोई भी तुमसे ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकता . मैं जानती हूँ वो जल्द hi मन जाएँगी.

नेहा : तुम्हे बड़ा पता है ? बताओ वो कैसे मन जाएँगी जल्दी ?

राधा : बस ऐसे hi . अमित से कोई जायदा देर नाराज़ रह hi नहीं सकता . देखा नहीं माँ भी किसे

अमित : काश वो भी मन जाएँ.

राधा : वो भी मन जाएँगी . इसी लिए तो उस दिन वो सब हुआ . मुझे पता है उनके दिल में तुम्हारे लिए प्यार है

मोहित : ये सब क्या चल रहा है कोई हमें भी बताओ हम भी यहीं हैं.

अमित : कुछ नहीं यार अब सबको पता चल गया है क मैं हॉस्टल में नहीं तुम्हारे साथ रह रहा हूँ तो सब गुस्सा हो रहे हैं क मैं उनके पास क्यों नहीं रहा .

मोहित : ये तो तेरी अपनी कड़ी की हुई प्रॉब्लम है किसने कहा था हॉस्टल में जाने को.

अमित : चुप ड्रामेबाज तेरी वजह से मैं इस चक्कर में फसा हूँ . ाचा भला हॉस्टल में रहने आया था.

राधा : तुम ऐसे hi चिंता कर रहे हो मैंने कहा न कोई तुमसे ज़्यादा देर नाराज़ रह hi नहीं सकता .



बातें करते हुए लेक्चर समाप्ति की बेल्ल बज गयी और सब अपनी अपनी क्लास में चले गए. शाम को आज फिर प्रैक्टिस से लेट hi फ्री हुआ क्यूंकि अब सब जायदा पसीना बहाने लगे थे. पसीने की वजह से आज मैं कुछ ज्यादा hi भीग गया था क्यूंकि बारिश का सीजन शुरू हो चूका था जिसकी वजह से हमीदित्य बाद गयी थी और ऐसे मौसम में क्या हल होता है आप जानते hi होंगे. प्रैक्टिस क बाद जब मैं मम क घर पहुंचा तो मेरा वेलकम उनके गुस्से ने hi किया.
 
अपडेट 89



“ किस्से मिलने आये हो ? “ दरवाज़ा खोलते hi मंजू मम ने मुझसे पुछा . मम गुस्से में हैं ये तो मैं जनता hi था इस लिए मैं उनकी बात पर मुस्कुराने लगा

मंजू म : ऐसे दन्त क्या दिखा रहे हो ? बताओ किस्से मिलने आये हो ?

अमित : मैं अपनी दीदी से मिलने आया हूँ.

मंजू म : यहाँ कोई तुम्हारी दीदी नहीं रहती , मैं तुम्हे नहीं जानती.

अमित : ओहो इतना गुस्सा , ाचा ी ऍम सॉरी मैं कल आपका फ़ोन नहीं उठा पाया .

मंजू म : मैंने कहा न मैं तुम्हे नहीं जानती . कौन हो तुम?

अमित : ाचा तो अब आप मुझे जानती भी नहीं . वैसे आपको बता दूँ क कल मेरे माँ और बाबा ए हुए थे और कल मैं उनके साथ hi था . इसी लिए मैं फ़ोन नहीं उठा पाया था. मगर मैं आपको ये सब क्यों बता रहा हूँ. आप तो मुझे जानती hi नहीं. मैं तो अपनी दीदी को मानाने आया था वो मुझसे नाराज़ हो गयी हैं. मैं चलता हूँ अगर मेरी दीदी मिले तो उन्हें कहना क मैं कभी उन्हें भूल सकता हूँ क्या बस कल आ नहीं पाया और उस वक़्त माहौल hi कुछ ऐसा था क बात नहीं कर पाया . ाचा मां bye bye.

इतना कह कर जैसे hi मैं पलटा तो मम ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे रोका.

मंजू म : क्या जाने क लिए hi ए थे ? तुम तो यहाँ अपनी दीदी को मानाने आये थे न ? तो ऐसे कैसे वापिस जा सकते हो ? मैं hi बेवकूफ हूँ इतना भी नहीं समझी क तुम्हे कोई काम भी हो सकता है . क्या करूँ तुमने आदत दाल दी है न अब तुमसे मिले बिना चैन नहीं अत और जब तक तुमसे बात न करलूं ऐसा लगता है जैसे कोई कमी सी है. मुझे माफ़ कार्डो मैं बिना वजह तुमसे गुस्सा हो रही थी .

अमित : प्लीज दीदी ऐसा मत कहो . गलती मेरी है मुझे आपको बता देना चाहिए था .

मंजू म : चलो छोडो इस बात को अब अंदर भी आ जाओ क दरवाज़े पर hi खड़े रहोगे ?

अमित : पर आप ने खुद hi तो कहा आप मुझे जानती नहीं तो मैं कैसे अंदर आ सकता हूँ?

मंजू म : अंदर आ रहे हो या लगाऊं कण क नीचे एक? एक तो खुद hi गलती करता है ऊपर से तंग करता है.

मैं मम क साथ अंदर आ गया . पसीने की वजह से मुझे अजीब सा चिपचिपा पैन लग रहा था जिस वजह से मुझसे आराम से बिठा भी नहीं जा रहा था .

मंजू म : जाओ पहले नाहा लो कितने भीगे हुए हो पसीने में . पता नहीं बैठे कैसे हो?

अमित : नहीं मैं ठीक हूँ. वैसे भी मेरे पास कपडे नहीं हैं और मैं नहीं चाहता क उस दिन क जैसे फिर आप मेरा मज़ाक उड़ाएं.

मंजू म : ज्यादा बातें मत बनाओ चुपचाप नाहा लो. मैंने कहा था न कपडे ले कर आना पर तुम्हे तो कोई बात समझ hi नहीं आती. अब जा कर पहले नाहा लो वर्ण मैं आज तुम्हारी पिटाई कर दूंगी.

अमित : आप पिटाई करलो वो मंज़ूर है मगर मैं कपडे नहीं उतरने वाला.

मंजू म : तुम्हे समझ नहीं अत एक बार . जाओ जा कर नाहा लो तुम्हे कपडे मिल जायेंगे.

अमित : पर आपके कपडे मुझे नहीं आएंगे

मंजू म : तुम जाते हो क नहीं

मैं मम की बात मंटा हुआ नहाने क लिए बाथरूम में घुस गया और जब नाहा कर बहार निकला तो बीएड पर एक T-shirt और लोअर पड़ा था. मैंने उठा कर पहन लिया तो बिलकुल मेरे hi साइज का था. मैंने जैसे hi कपडे पहने तो मम मेरे सामने आ कर कड़ी हो गयी.

मंजू म : फिटिंग ठीक है न?

अमित : बिलकुल मेरा hi साइज तो है ये . ये आप लेकर आयी हैं मगर आपको कैसे पता मेरे साइज का?

मंजू म : मेरे भाई क बारे में मुझे नहीं पता होगा तो किसे पता होगा ? उस दिन तेरे कपडे धोते वक़्त देख लिया था मैंने साइज और परसों मार्किट से तेरे लिए कुछ कपडे ले आयी थी. ये टैग भी निकल ले कपड़ो से मैंने उतरे नहीं थे सोचा पहले तू चेक करले

मैंने कपड़ो से लगे टैग उतर दिए.

अमित : वैसे आपको ये सब करने की क्या ज़रूरत थी ?

मंजू म : तू मेरे लिए कर सकता है तो क्या मैं नहीं कर सकती? वैसे भी तू hi तो अत है इस घर में मेरे इलावा तो कभी ज़रूरत पड़े तुम्हे तो उसका भी इंतज़ाम होना चाहिए क नहीं. तू तो अपने कपडे लेन से रहा सोचा मैं hi ले आऊं. उस अलमारी में रखे हैं तेरे कपडे जब ज़रूरत हो ले लेना . तेरी ज़रूरत की हर चीज़ मैं ले कर आयी हूँ . इस घर को भी लग्न चाहिए क मेरा भाई भी यहाँ रहता है अब मैं अकेली नहीं हूँ . अब ये दीवारें मुझे डरा नहीं सकती . अब अँधेरे मुझे निगल नहीं सकते. अब ये घर मुझे काटने को नहीं दौड़ेगा .

मंजू मम बात करते करते भावुक हो गयी और उनका गाला भर गया जैसे इससे पहले क वो रो दे अपनी तन्हाई को यद् करते करते मैंने उन्हें बाजु से पकड़ कर हिलाया.

अमित : होश में आइये दीदी क्या हुआ आपको ? ऐसी बातें क्यों कर रही हैं ?

मंजू म मेरे सीने में मुँह छुपा कर सिसकियाँ लेने लगी . मुझसे उनकी ये हालत देखि नहीं जा रही थी . मैं उनको प्यार से सहलाता हुआ उनको शांत करने लगा.

अमित : आखिर बात क्या है जो आप इस तरह इतनी भावुक हो रही हैं ? क्या मुझसे कोई गलती हो गयी ?

मंजू म : तुमसे गलती नहीं हुई अमित तुमसे नहीं . शायद मैं hi भूल गयी थी क मुझे रहना तो अकेले hi है और तुमसे कुछ ज्यादा hi उम्मीद लगा बैठी थी. 2 दिन तुम नहीं थे तो ऐसे लग रहा था जैसे ये दीवारें मुझे डरा रही हो जैसे अँधेरा मुझे निगल जायेगा जैसे ये घर मुझे खा जायेगा. पहले कभी ऐसा नहीं होता था . मैंने आदत दाल ली थी खुद को अकेला रखने की मगर जब से तुम आये हो तुम्हारे साथ रहते हुए जैसे मैं अपनी ज़िन्दगी की इस हकीकत को भुला बैठी थी और इन 2 दिनों में वो सब डरावने साये की तरह मेरे सामने आ कर खड़ा हो गया.

अमित : मुझे नहीं पता था क मेरी एक छोटी स भूल से आप को इतनी तकलीफ होगी . गलती मेरी है मुझे आपको ऐसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए था . मैं समझ सकता हूँ आपने कैसे वक़्त कटा होगा. मगर एक बात आप भी गाँठ बांध लो क आप अकेली नहीं हैं. जब तक मैं ज़िंदा हूँ आपको कभी अकेला नहीं छोडूंगा. मैं मंटा हूँ क मुझे गाओं जाना होता है और कभी किसी और वजह से भी जाना पद सकता है ओर इसका मतलब ये हरगिज़ नहीं क मैं आपसे दूर हूँ. आप मेरे साथ बिताया वक़्त भी तो यद् कर सकती हैं न? और अगर फिर भी दिल न लगे तो फ़ोन कर सकती हैं. मगर ऐसे मैं आपको डरा हुआ या मायूस नहीं देखना चाहता.

मंजू म : दो दिन तुम नहीं थे तो तुम्हारी बातें hi तो यद् करती रही मैं अकेले बैठ कर . वैसे फ़ोन भी इसी लिए hi किया था खैर तुम भी बिजी थे तो कोई बात नहीं हो जाता है कभी कभी . मुझे hi समझना चाहिए

अमित : कोई ज़रूरत नहीं कुछ समझने की . मैं आगे से कभी ऐसा नहीं करूँगा काम से काम आपको बता तो सकता hi हूँ अगर बात न भी कर सकता हूँ तो. वैसे थैंक्स इनके लिए.

मैंने T-shirt और लोअर दिखते हुए कहा. उसके बाद मम ने कॉफ़ी बनाई और फिर वो मुझे पड़ने लगी. पड़ने क बाद भी काफी देर मैं उनसे बातें करता रहा और फिर कल आने का बोल कर निकल गया. घर पर अंकल को न पाकर मैंने आंटी से पूछा तो उन्होंने कहा उन्हें कोई ज़रूरी काम यद् आ गया था इस लिए वो चले गए मगर कल रत आ जायेंगे. मैंने मोहित और आंटी क साथ डिनर किया और अपने कमरे में चला गया. रोज़ रत आंटी मेरे लिए दूध लती थी और आज भी जैसे hi वो दूध ले कर आयी तो मैंने उन्हें एक भरपूर किश दिया जिससे वो शर्माने लगी. मैं जनता था दिल तो उनका भी कर रहा होगा मगर उन्होंने भी मेरी बात को यद् रखते हुए मुझे कम्पटीशन तक रुकने को कहा. मुझे आंटी का मेरी बात की परवाह करना ाचा लगा. दिल तो किया इसी बात पर उन्हें एक बार तसल्ली से प्यार करूँ मगर फिर खुद को कण्ट्रोल किया.

अगले दिन फ्री लेक्चर में राधा जब मुझसे मिलने आयी तो नेहा दीदी को साथ न पाकर मैंने राधा से उनके बारे में पूछा .

अमित : आज दीदी कहाँ हैं?

राधा : दीदी आज किसी असाइनमेंट को कम्पलीट कर रही हैं. ( तुम्हे कैसे बताऊँ मुझे नेहा दीदी ने मन किया है . एक दिल कहता है बता दूँ मगर ये नेहा दीदी भी न , पता नहीं क्यों बताने भी नहीं देती )

अमित : तुम कुछ परेशां लग रही हो सब ठीक तो है न ?

राधा : ह ह हआ सब ठीक है वो मैं सोच रही थे क कल संडे है क्या तुम हमारे घर आ सकते हो? ( खुद को सम्भालो राधा अमित को शक हो गया तो फिर बताना hi पड़ेगा )

अमित : पक्का कोई बात नहीं है न ? वैसे कल संडे है तो मैं गाओं जाऊंगा शायद आज hi निकल जॉन.

राधा बात करते हुए कुछ सोच रही थी जिस क कारन मुझे लगा क वो कुछ छुपा रही है मगर मैंने ज्यादा ज़ोर नहीं दिया सोचा क अगर कोई बात हुई तो खुद hi बता देगी . लेक्चर ख़तम होने तक मैं कैंटीन में मोहित मीनल राधा और रीमा क साथ बातें करता रहा और कैंटीन की चाय विथ पकोड़ा एन्जॉय किया. आज आसमान में बदल छाए हुए थे और ठंडी हवा भी चल रही थी. रौशनी काम होने की वजह से मौसम कुछ रोमांटिक सा हो रहा था जिसके कारन कॉलेज में कपल यहाँ वहां बैठे हुए थे और कुछ एकांत में सब से छुप कर अपना गुप्त कार्यक्रम भी कर रहे होंगे. मोहित भी मीनल को लेकर निकल गया ऐसे में मेरा भी दिन नहीं हुआ क लेक्चर अटेंड करूँ . राधा तो मिस नहीं करती थी पता नहीं कैसे अब फ्री लेक्चर में कैंटीन में बैठने लगी थी वर्ण उसे तो लाइब्रेरी का hi पता था. मैं अकेला जाकर ठंडी हवा का मज़ा लेता हुआ ग्राउंड क साथ लगे पेड़ों की छाँव में आँखें मूँद कर बैठ गया . मुझे बैठे अभी थोड़ी देर hi हुई थी क मेरे कानो में एक मीठे मधुर आवाज़ पड़ी .

“ कितना सुहाना मौसम है न ? ऐसे मौसम में नेचर की इस खूबसूरती को छोड़ कर किताबी पड़े पड़ना बिलकुल भी सही नहीं लगता. ऐसा मौसम तो इंसान को कुदरत की ममता का एहसास दिलाता है और दिल को प्यार से भर देता है. “

मैं आवाज़ तो पहचान hi गया था और आवाज़ की दिशा में देखा तो ये वही थी .’ रीमा ‘

अमित : बिलकुल ठीक कहा तुमने . ऐसी बहारें रोज़ रोज़ कहाँ मिलती हैं? तो तुम आज लेक्चर मिस कर रही हो ? मैंने तो सोचा था क तुम भी किताबों में घुसी रहती होगी.

रीमा : सोचा आज मैं भी इस मौसम का मज़ा लूँ.

अमित : ऐसे मज़ा कहाँ मिलेगा . मज़ा तो वो लोग ले रहे हैं जिनके अपने अपने पार्टनर हैं. देखो ज़रा कॉलेज का नज़र आज ऐसा लग रहा है जैसे कोई खास मुहूर्त हो प्यार करने का. शायद इसी लिए मोहित और मीनल भी निकल लिए . तुम भी अपने लिए देख लो कोई अगर मज़ा लेना है तो.

रीमा : ( मैं तो देख hi रही हूँ पता नहीं तुम कब समझोगे और मुझसे कहा भी नहीं जाता क मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ ) ज़रूरी नहीं क मैं जिसे पसंद करूँ वो भी मुझे करे?

अमित : मुझे नहीं लगता क ऐसा पागल भी होगा कोई जो तुम जैसे हीरे को ठुकरा दे.

रीमा : थैंक्स तारीफ करने क लिए पर मुझे लगता है क मैं जिसे प्यार करती हूँ वो मुझे समझना hi नहीं चाहता और मुझसे कभी बोलै नहीं जायेगा.

अमित : मेरी मनो तो सीधा सीधा कह दो . वर्ण सोचते हुए वक़्त निकल जायेगा और तब तक क्या पता वो किसी और क साथ निकल ले.

रीमा : पर वो कहता है क उसे इंटरेस्ट नहीं है .

अमित : अजीब इंसान है जो तुम जैसी पारी को देख कर भी ऐसी बात कह सकता है.

रीमा : तुम hi तो कहते हो ऐसा . रोज़ मुझे देखते भी हो सामने .

अमित : मैं तो .. एक मिनट तुमने क्या कहा अभी ( मुझे यद् आया क रीमा ने कहा क मैं hi कहता हूँ ऐसा )

रीमा : वो मैंने कहा तुम भी तो कहते हो ऐसे

अमित : मेरी बात छोडो . वैसे है कौन वो लड़का तुम कहो तो मैं कोई मदद करूँ तुम्हारी .

रीमा : तुम मेरी मदद करोगे ?

अमित : तुम उस लड़के क बारे में बताओ फिर मैं कुछ करता हूँ.

रीमा : तुम उसे जानते हो

अमित : मैं जनता हूँ ? कौन है वो ? मैं तो कुछ hi लोगों को जनता हूँ और उनमे से किसी को तुम्हारे साथ कभी मैंने देखा तो नहीं. फिर भी तुम नाम बताओ मैं करता हूँ कुछ

रीमा : वैसे तुम्हारे ख्याल में अगर तुम उस लड़के की जगह होते तो तुम मुझे एक्सेप्ट कर लेते?

अमित : लो इसमें भी कोई पूछने वाली बात है? तुम जैसी अप्सरा को भला कोई कैसे ठुकरा सकता है . तुम जिसको भी मिलोगी उसकी तो लाइफ बन जाएगी.

रीमा : मगर वो तो पता नहीं किस मिटटी का बना है मेरी आँखों में जो उसके लिए प्यार है वो समझता hi नहीं.

अमित : शायद अँधा होगा वो या फिर न समझ तुम एक बार डायरेक्ट बोलो तो उसे

रीमा : मैं डर्टी हूँ कहीं उसकी दोस्ती से भी हाथ न धो बैठूं. इस तरह काम से काम उसके साथ बैठ कर बातें तो कर लेती हूँ अगर उसने मुझसे बात करना hi बंद कर दिया तो मैं क्या करुँगी.

अमित : तुम तो बिना वजह टेंशन ले रही हो. दुनिया में लड़कों की कमी है क्या ? हज़ारों मिल जायेंगे

रीमा : पर उसके जैसा नहीं मिलेगा. मैं उसे खोना नहीं चाहती. मेरी ज़िन्दगी में अब उसके सिवा कोई दूसरा नहीं आ सकता.

अमित : ऐसी क्या खास बात है उसमे क तुम यूँ दीवानी हो रही हो? मेरी मनो तो खुद को सम्भालो . एक बार उससे अपने दिल की बात कह दो अगर समझदार होगा ता मन जायेगा और अगर वो न करे तो तुम कोई और देख लेना.

रीमा : नहीं मैं उसके सिवा किसी और क बारे में सोचूंगी भी नहीं अगर वो नहीं मिला तो अकेले ज़िन्दगी गुज़र दूंगी मगर किसी और की नहीं हूँगी.

अमित : तो मामला इश्क़ का है. वैसे मैं जान सकता हूँ क तुम्हे ये बीमारी कैसे लगी?

रीमा : तुम मेरा मज़ाक उदा रहे हो?

अमित : मैं क्यों मज़ाक उड़ाऊंगा? दुनिया में इश्क़ को रोग hi तो कहा जाता है जिसकी कोई दवा नहीं. और इस रोग से कोई बचा भी नहीं. जिसे लग गया फिर वो दुनिया से गया . मैं दुआ करूँगा क तुम्हे तुम्हारी मंज़िल मिले . तुम जैसा फूल मुरझाना नहीं चाहिए वर्ण ये इश्क़ की हुस्न से बेवफाई होगी. वैसे मुझे बताओ क मैंने कैसे तुम्हारी मदद करूँ?

रीमा : तुम सोचो क वो लड़के तुम्ही हो . जैसे तुम कहते रहते हो क तुम्हे इंटरेस्ट नहीं है वो भी ऐसे hi कहता है. और ये भी सोचो क शामे तुम्हारे जैसी hi कंडीशन है हर तरह से. मन लो क तुम hi वो लड़के हो जिससे मैं प्यार करती हूँ तो क्या तुम मुझे एक्सेप्ट करोगे? मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और तुम्हारे सिवा किसी और क बारे में सोच भी नहीं सकती . मुझे रत दिन उठते बैठते सोते जागते हर जगह बस तुम hi नज़र आते हो . मेरा दिल बस तुम्हारा hi नाम लेकर धड़कता है . प्लीज मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह देदो मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती.

रीमा क इस तरह पर्पस करने से मैं उसे देखता hi रह गया. उसके एक एक वर्ड में उसका प्यार और उसकी तड़प झलक नज़र आ रही थी. रीमा की आँखों में सचाई थी . पता नहीं वो किस लड़के को चाहती है मगर उसकी चाहत सच्ची है इतना तो मैं समझ hi गया था. मगर उसने कहा था क मैं खुद को उस लड़के की जगह समझ कर जवाब दूँ. अगर सचमुच मैं hi वो लड़का होता तो मैं क्या जवाब देता मतलब है क मेरी ज़िन्दगी में पहले hi मंजरी आ चुकी थी जो मुझे अकेला छोड़ कर चली गयी और अब नैना दीदी भी मुझसे प्यार की आस लगाए बैठी थी. इसके इलावा दीपिका ममी कामिनी ममी और रमा आंटी भी तो थी . मगर प्यार की बात करूँ तो मंजरी को मैं कभी भूल नहीं सकता और मैं जनता क लव स्टोरी की हैप्पी एंडिंग मूवीज में hi होती हैं रियल में तो लव की एंडिंग बिस्तर पर हो जाती है और स्टोरी आगे चले या न चले ये बाद की बात है. मगर रियल लव अब कहाँ देखने को मिलता है और जिनको रियल लव हो जाता है उनको सिर्फ दर्द मिलता है.

रीमा अपनी बातें कहने क बाद मेरी तरफ आस लगाए बैठी थी क मैं क्या जवाब देता हूँ और मैं कोई फैसला नहीं कर प् रहा था. रीमा को इंकार कर क मैं उसका दिल भी नहीं दुखाना चाहता था ऐसे में वो टूट जाएगी. जितनी तड़प उसने मुझे महसूस करवा दी थी उसके बाद तो रीमा को इंकार करने का मतलब hi नहीं था और मैं ये hi चाहता था क वो लड़का भी बस रीमा को है करदे वैसे भी रीमा तो सचमुच इतनी खूबसूरत है क कोई मन कर hi नहीं सकता.

अमित : तुम्हारे एक एक शब्द में सचाई है रीमा और तुम्हारी आँखें तुम्हारे दिल का दर्द बयां कर रही हैं . मैं भगवन से प्रार्थना करता हूँ क वो तुम्हे तुम्हारा प्यार दे दे. वो लड़का सचमुच लकी है तुम जिसे प्यार करती हो.

रीमा : मैंने तुमसे जवाब माँगा था और तुम अब बात घुमा रहे हो

अमित : वो लड़का तुम्हे इंकार नहीं करेगा रीमा अगर वो ऐसा करता है तो समझ लेना क उसके सीने में दिल नहीं है और वो पहले hi मर चूका है.

इतना कहते hi मैं उठ कर चला गया बिना रीमा की तरफ देखे. मैं खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा था . रीमा की नज़रों में वो प्यार मुझे मजबूर कर रहा था और मैं भावनाओं में कहीं बह न जॉन इससे पहले hi मैं उठ कर चला आया . शायद रीमा को इससे बुरा लगा होगा मगर थोड़ी देर बाद वो खुद hi संभल जाएगी.

वहीँ रीमा की आँखों में आंसू आ गए थे आज उसने अपना दिल अपनी मुहब्बत क सामने खोल कर रख दिया और उसने इतनी बेरुखी से उसको अकेला छोड़ दिया. जाते हुए एक बार भी पलट कर नहीं देखा . काम से काम एक आस तो छोड़ जाता उसके दिल में क वो उसको कभी न कभी अपना लेगा. रीमा से कण्ट्रोल नहीं हो रहा था और धीरे धीरे उसके आंसू हिचकियों क साथ बहने लगे. आज ज़िन्दगी में पहली बार उसने किसी से अपना हाल दिल कहा और उसने ऐसे ठुकरा दिया. रीमा दौड़ती हुई अपनी कार की तरफ गयी और घर चली गयी.

मैं रीमा की बातों से इतना विचलित हो गया था क समझ नहीं आ रहा था क कहाँ जॉन और क्या करूँ . मुझे अंदर से ये दर सत्ता रहा था क कहीं रीमा जिस लड़के की बात कर रही है कहीं मैं वो hi तो नहीं. रीमा ने क्यों कहा क मैं खुद को वो लड़का समझूँ . उसने क्यों कहा क उसके हालत मेरे जैसे हैं ऐसा मैं मन लूँ. रीमा ने किस तरह सीधा मुझे hi पर्पस कर दिया उस लड़के की जगह मन कर. ये सब से सिंपल तरीका होता है अपने दिल की बात कहने का क अगर सामने वाला गुस्सा कर भी ले तो बाद में ये कहा जा सकता है क वो कोई और है तुम नहीं. या ये भी हो सकता है क वाकई में कोई लड़का hi हो. पर आज ताज उसने किसी और का ज़िकर भी तो नहीं किया न मैंने किसी को उसके साथ देखा है. शायद मीनल को इस बारे में कुछ पता हो. मैं मीनल से hi बात करूँगा. पर अब तो वो मोहित क साथ कहीं प्यार भरे पल गुज़र रही होगी. दोनों को इतने अचे मौसम में डिस्टर्ब करना सही नहीं होगा.

मैं अपने hi ख्यालों में खोया पैदल hi कॉलेज से घर की तरफ चल पड़ा . देखते देखते बदल जो कब से छाये हुए थे वो अचानक बरसने लगे . मैं ऐसे hi बारिश में चलता रहा. इस बारिश से मेरा गहरा नाता है . जब भी ये आती है तो कुछ न कुछ साथ लेकर अति है. कभी अचे कभी बुरे इसने दोनों hi रंग दिखाए हैं. और आज एक बार फिर से इसने मुझे सोचने क लिए अकेला छोड़ दिया था. मैं यूँ hi अकेला चलता घर आ गया . पता नहीं कितना टाइम लगा पर मैं घर पहुँच गया और थोड़ी देर बाद hi मोहित भी आ गया . वो मुझसे नाराज़ हो रहा था क मैं बिना बताये घर आ गया. मैंने सोचा क मोहित से बात कर क मीनल से पूछूं रीमा क बारे में फिर मैंने सोचा क मंडे को कॉलेज में hi आराम से बात कर लूंगा वैसे भी ये मेरी सोच hi तो थी हो सकता है मैं गलत hi हूँ.

आज सैटरडे था तो मैं सोच रहा था आज मैं गाओं जाऊंगा मगर मेरी साडी प्लानिंग एक फ़ोन कॉल ने बदल दी. लंच क बाद जब मैं रेस्ट कर रहा था तो मुझे रीता मौसी का फ़ोन आ गया.

रीता मौसी : कहाँ हो इस वक़्त ?

अमित : पाए लागु मौसी मैं इस वक़्त कमरे में हूँ.

रीता मौसी : जीते रहो. ये तुमने ठीक नहीं किया अब घर आओगे तो बात करुँगी . मैंने ये कहने क लिए फ़ोन किया है क आज तुम गाओं नहीं जाओगे . मैंने भैया भाभी से बात कर ली है आज शाम तुम सीधा हमारे घर आ जाना. रत यहीं रहना और कल टाइम मिला तो गाओं जाना.

अमित : पर मौसी

रीता मौसी : मैं कोई बहाना नहीं सुनने वाली. चुप चाप शाम को आ जाना अब रखती हूँ

इतना कह के मौसी ने कॉल काट दी. मैं तो सोच रहा था आज गाओं जाऊंगा मगर अब मौसी क घर जाना पड़ेगा. माँ ने इजाज़त कैसे दे दी? शायद बाबा ने दी हो . जो भी हो अब हुकम तो मन्ना पड़ेगा. चल बीटा तैयार होजा मौसी और करुणा दीदी तेरी अचे से क्लास लेने वाली हैं.

आज मैंने सोचा था क ट्यूशन की बजाये घर जाऊंगा मगर अब जब मौसी क यहाँ hi जाना है तो ट्यूशन क बाद hi जाऊंगा. प्रैक्टिस से आज मैंने टाइम से hi छुट्टी कर ली और फिर ट्यूशन चला गया. आज मम का मूड ठीक था तो आज नार्मल डेज की तरह hi पड़े कर रहा था मगर आज भी मम ने पहले मुझे नहाने को कहा. अब तो जैसे मेरे लिए ये आर्डर hi बन गया था क पहले आ कर मौन नहाऊं और मम ने आज भी मेरे लिए नया लोअर T-shirt रख दिया. ट्यूशन क बाद हम ने साथ में कॉफ़ी पि.

मंजू म : अमित किसी दिन थोड़ा टाइम निकल सकते हो मेरे लिए?

अमित : रोज़ तो अत हूँ आपके पास आप हुकम कीजिये क्या करना है.

मंजू म : ज्यादा कुछ नहीं बस मैं सोच रही थी किसी दिन तुम्हारे साथ थोड़ा घूम लूँ और कुछ शॉपिंग भी हो जाएगी.

अमित : हम्म मतलब हॉलिडे पैकेज ? ठीक है मैं कल तो नहीं चल सकता मगर जल्द hi हम पूरा दिन शहर घूमेंगे और शॉपिंग क साथ मूवी भी देखने जायेंगे.

मंजू म : अरे इतना कुछ नहीं करना है बस थोड़ी स शॉपिंग और बस थोड़ी सी आउटिंग. इस शहर में रहते हुए आज तक इसे देखा नहीं. सोचा तुम्हारे साथ इसे भी देख लूँ.

अमित: क्या करना है क्या नहीं ये तो उसी दिन देखेंगे पर इतना कह देता हूँ उस दिन मेरी हर बात माननी पड़ेगी आपको ये पहले hi बता देता हूँ मैं.

मंजू म : ाचा बाबा जैसा तुम कहो पर ध्यान रखना कहीं किसी ने देख लिया तो कॉलेज तक बात न पहुँच जाये फिर किस किस को जवाब देती फिरंगी?

अमित : आपको डरने की ज़रूरत नहीं है. जब हम दिल से एक दूसरे को अपना मानते हैं तो दुनिया की परवाह क्यों करें. वैसे भी हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे जो आप ऐसा सोच रही हैं. अपने मन से ये दुनिया का दर आप निकल क्यों नहीं देती. आपको हमारा रिश्ता प्यारा है दुनिया की बातें?

मंजू म : ठीक है बाबा जो आज्ञा . कभी कभी लगता है क मैं नहीं तुम मेरे टीचर हो. कितनी समझदारी की बातें करते हो.

अमित : इतना भी नहीं हूँ . ाचा अब मैं चलता हूँ .

उसके बाद मैं घर गया और आंटी को बता कर रीता मौसी क घर चला गया. घर पर सभी मौजूद थे . नेहा दीदी करुणा दीदी मौसी और मौसा जी. मैंने मौसी और मौसा जी क पाऊँ छुए. करुणा दीदी तो मुँह फुलाए कड़ी थी और मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी. मुझे देखते hi मौसा जी खुश हो गए और अपने पास बिठा लिया बातें करने क लिए. पता नहीं कितने दिनों बाद उनसे मिलना हुआ था मुझे तो यद् भी नहीं.

मौसा जी : और बीटा कैसे चल रहा है कॉलेज ? तुम तो इतने बड़े हो गए हो और पूरे हीरो लगते हो. लगता है गयम भी जाते हो तभी इतनी अछि सेहत बना राखी है.

रीता मौसी : अब तो इतना बड़ा हो गया है क झूठ बोलने लग गया है. अब इसके लिए हम पराया हो गए हैं और पराया अपने हो गए हैं. 3-3 मौसियां शहर में हैं और ये हॉस्टल क बहाने किसी और क घर में रह रहा है. इसे किसी की परवाह hi कहाँ है.

अमित : मौसी जी गलती हो गयी वो असल में मोहित मुझे अपनी कसम देकर हॉस्टल से घर ले गया था और अब तो वो अपने hi निकल ए हैं न अंकल पापा क बेस्ट फ्रेंड हैं.

रीता मौसी : वो तो अब पता चला है न मगर पहले तो नहीं पता था न. तुमने एक बार भी नहीं सोचा हम पर क्या बीतेगी. मैं तो तेरे हॉस्टल रहने क भी खिलाफ थी मगर इस लिए चुप रह गयी क कहीं इससे तेरी कॉलेज की पड़े या प्रैक्टिस जो तू करने जाता है वो डिस्टर्ब न हो मगर अब तो ये सब जान कर गुस्सा आ रहा है तुम पर.

मैं कान पकड़ कर मौसी क सामने खड़ा hi गया और उठक बैठक लगाने लगा. बचपन में मौसी कभी मेरी किसी बात पर गुस्सा हो जाती तो ऐसे hi मुझसे उठक बैठक लगवाती थी . मेरा इस तरह करने से मौसी का सारा गुस्सा फुर्र हो गया और उन्होंने मुहे आगे बाद कर गले लगा लिया. मौसी प्यार से मेरे माथे को चूमती मुझे अपने साइन से लगा कर बोली

रीता मौसी : बचा माहि है अब तू . पर ऐसी हरकतें क्यों करता है क जिससे गुस्सा आये? क्या तुझे अपने मौसी से प्यार नहीं ? मैं भी तो तेरी माँ जैसी हूँ क्या मेरा दिल नहीं करता क मेरा बीटा मेरे पास रहे ? मगर तुझे तो परवाह hi नहीं किसी की. सारा प्यार बस अपनी ममियों क लिए है तेरे पास.

करुणा : क्या माँ इतना ाचा लग रहा था ये बन्दर उठक बैठक लगता हुआ आपने बीच में hi रोक दिया. इसे सजा तो मिलनी चाहिए इसने जो किया है. खुद को समझता क्या है हर जगह अपनी मर्ज़ी करता है. और तो और सबके पास जाता है बस हमारा hi घर इसे नज़र नहीं अत. नैना दीदी क यहाँ कितनी बार चला गया दिव्या मौसी क यहाँ भी चला गया और यहाँ ? इसे तो कोई परवाह नहीं हमारी.

अमित : लो मैं फिर से कान पकड़ लेता हूँ और तब तक उठक बैठक लगाऊंगा जब तक आप न बस करने को कहें. मगर इतना सुन लीजिये क मैंने कभी फरक नहीं किया. जितना मेरे लिए बड़ी मौसी और दिव्या मौसी हैं उतनी hi रीता मौसी भी. और रही बात आपकी तो आप और नैना दीदी मेरे लिए एक जैसी hi हैं.

मैंने कान पकड़ कर उठक बैठक लगाना फिर शुरू कर दिया.

रीता मौसी : चल अब जाने दे बस भी कर आ गया है न अब . उसे रुकने को बोल दे अब. अमित बस कर अब

अमित : नहीं मौसी जब तक करुणा दीदी नहीं कहती मैं नहीं रुकूंगा.

मौसा जी : बीटा अब जाने दे बात को

नेहा दीदी : छोटी अब ये ज्यादा हो रहा है . वो सबकी परवाह करता है और उसने मुझे खुद कहा था वो हमारे यहाँ भी आएगा वो तो राधा क बर्थडे की वजह से दिव्या मौसी क घर पहले चला गया था वर्ण यहीं अत. अब रोक दे उसे वर्ण ये लगा रहेगा.

करुणा : रुक जाओ बन्दर कहीं क . पर मैं इतनी आसानी से नहीं छोड़ने वाली . यद् है न तुमने वडा किया था मूवी और शॉपिंग का.

अमित : अछि तरह यद् है . तो अब आप नाराज़ तो नहीं मुझसे ?

करुणा: तुमसे नाराज़ कैसे रह सकती हूँ मैं.

इतना कह कर करुणा दीदी उछाल कर मेरे गले लग गयी और मुझे अपनी बाँहों में कास लिया. करुणा दीदी क ऐसा करते hi सब क चहरे पर मुस्कराहट आ गयी. करुणा दीदी बच्चों जैसी हरकतें करती थी मगर सबका दिल लगा कर रखती थी. नेहा दीदी तो काम hi बात किया करती थी.

रीता मौसी : मुझसे कितना कुछ कह रही थी क ये करुँगी वो करुँगी और अब देखो कैसे चिपकी पड़ी है अपने भाई से. अब कहाँ गया गुस्सा वो नाराज़गी ?

करुणा : क्या माँ आप भी . ये इतना क्यूट है क इस पर गुस्सा करना भी चहुँ तो कर नहीं पति वो तो बस इसे थोड़ा दिखाना भी था न क इसने क्या किया है. वर्ण मैं इससे नाराज़ हो सकती हूँ भला.

रीता मौसी ने मेरे लिए आज खास तौर पर खाना तैयार किया था . हम सब बातें करते हुए खाना खाने बैठ गए और नेहा दीदी मौसी क साथ सबको खाना परोसने लगी. खाने क बाद मौसी जी तो सोने चले गए . मगर हम मिल कर बातें करते रहे. कुछ देर बाद मौसी भी बर्तन साफ करने चली गयी नेहा दीदी उनकी मदद करने.

करुणा : तो आखिर मिल hi गया टाइम तुम्हे. आज रत मैं तुम्हे सोने नहीं दूंगी. आज जी भर क बातें करुँगी. और कल हम मूवी देखने जायेंगे फिर शॉपिंग.

अमित : पर दीदी कल तो मुझे गाओं भी जाना है.

करुणा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना . मां ने परमिशन दी है न तो कल रहने दो गाओं जाना. कल बस मूवी और शॉपिंग .

अमित : माँ नाराज़ होंगी

करुणा : नहीं होंगी वैसे भी अभी तो मां ममी तुमसे मिल कर गए हैं.

अमित : ठीक है पर मैं एक बार कल उनसे फ़ोन पर बात करूँगा अगर उन्होंने आने को कहा तो कल का प्रोग्राम कैंसिल.

करुणा : मैं खुद तुम्हारी बात करवाउंगी देख लेना वो मन नहीं करेंगे.

मौसी और नेहा दीदी भी बर्तन समेत कर आ गयी और हम सब बैठ कर बातें करने लगे . उसके बाद एक एक कर के मौसी और नेहा दीदी सोने चली गयी मगर करुणा दीदी तो जैसे आज सोना hi नहीं चाहती थी. मौसी ने ऊपर क कमरे में मेरा बिस्तर लगा दिया था. मैं जब सोने का कहा तो करुणा दीदी मुझसे बातें करती हुई मेरे साथ मेरे कमरे में hi चली आयी. पता नहीं क्या क्या बातें करती जा रही थी. शायद मेरे उनके घर रुकने से एक्साइट थी यान फिर कुछ लड़कियां होती hi ऐसे हैं. खैर जैसे तैसे कर क जब मेरी हिम्मत जवाब दे गयी तो मैं लेट गया और करुणा दीदी ने भी मेरी हालत समझते हुए मुझे आराम करने दिया और मुझे गुड नाईट कह कर चली गयी.



रत में किसी पहर मेरी आँख खुल गयी. मुझे प्यास लगी थी . जब मैंने देखा तो पास में पानी नहीं रखा था शायद मौसी भूल गयी होंगी या उन्होंने किसी को कहा और वो भूल गयी. मैं पानी पिने क लिए नीचे आया और जब पानी पि कर वापिस जाने लगा तो मुझे सिसकियों की आवाज़ सुनाई दी. ये आवाज़ फीमेल थी. आवाज़ सुनते hi मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मैं न चाहते हुए भी आवाज़ का पता लगाने चल पड़ा. हालाँकि घर में सिर्फ मौसा मौसी क कमरे से hi ऐसी आवाज़ आ सकती है क्यूंकि वो दोनों हस्बैंड वाइफ हैं. मगर मौसा जी तो जल्दी सो गए थे तो इस समय ऐसी आवाज़ का क्या मतलब. मुझे देखना था ये आवाज़ किसकी है. क्यूंकि घर में 3-3 फीमेल थी. मैं दबे पाओ आवाज़ की दिशा में चल पड़ा .
 
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मैं आवाज़ का पीछा करते हुए दरवाज़े तक पहुंचा . दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था मैं अंदर झांक कर देखा तो मेरी हलक खुश्क हो गयी. सामने बीएड पर रीता मौसी बिलकुल नंगी लेती अपनी टंगे खोल कर छूट में उंगली कर रही थी. मैं तो मौसी को इस हालत में देख कर शॉकेड हो गया . मैंने कभी सोचा भी नहीं था मेरी मौसी ऐसी भी हो सकती है. मैंने हमेशा जिन्हे साडी में देखा था आज वो मेरे सामने मादरजात नंगी थी. जो शर्म और मर्यादा का अंचल ौडे रहती थी इस समय वो बेशर्मी और वासना की नंगी तस्वीर नज़र आ रही थी. मौसी बीएड पर मौसा जी क बगल में लेती हुई थी और अपनी जंघे पूरी खोल कर घुटने मोड़ कर हवा में उठाये हुए तेज़ी से छूट में उंगली करती हुई सिसकियाँ ले रही थी. मौसी का दूध सा गोरा बदन हलकी रौशनी में साफ़ मज़ार आ रहा था. मौसी का जिस्म मांसल था बिलकुल परफेक्ट शेप में कहीं से भी जिस्म पर एक्स्ट्रा फैट नहीं थी . जिस्म की चर्बी हर जगह सही मात्रा में थी जो उनके खूबसूरत जिस्म को और भी कातिलाना बना रही थी. हवा में लहराते उनके गोर पाऊँ जिनके ऊपर पायल पाऊँ की खूबसूरती बढ़ाने क साथ एक आदर्श घरेलु स्त्री की परिचायक थी. उसके ऊपर गोरी मुलायम पिंडलियाँ . पिंडलियों क ऊपर मखमली मांसल जांघें और जांघों क जोड़ में उनकी खूबसूरत छूट जो उंगली करने क कारन साफ नज़र तो नहीं आ रही थी मगर मौसी क जिस्म की खूबसूरती से लग रहा था वो भी उसी क अनुपात ने खूबसूरत होगी. टाँगे उठी होने क कारन मौसी क कूल्हे नज़र आ रहे थे जो बेदाग थे. कपड़ो क ऊपर से hi मौसी क कूल्हे इतने बड़े नज़र आते थे क देखने वालो की नज़रे अपनी तरफ आसानी से खींच लेते थे. कमर क ऊपर मौसी का पेट था जो मांसल था मगर लटका हुआ नहीं था. घर क कामकाज खुद hi करने की वजह से या शायद मौसी अपना ध्यान रखती होंगी जिस क कारन वो मोती नहीं थी मगर मादकता से भरी हुई थी. पेट क ऊपर मौसी क बड़े बड़े रसीले आम की तरह झूल रहे चुके और चुचों पर ब्राउन निप्पल किसी अंगूर क दाने जितने बड़े . मौसी की ऑंखें मस्ती में बंद थी और मैं मौसी क जिस्म क तिलिस्म में कैद हुआ बस आँखें फाड़े देख रहा था.

मौसी की हाथ की गति जिस क्रम में बाद रही थी उसी क्रम में उनकी सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी मगर उनके करीब सो रहे मौसा जी जैसे इस दुनिया से कहीं और गायब हुए पड़े थे. मौसी को देखते हुए कब मेरा लैंड लोहे की रोड बन कर खड़ा हो गया मुझे पता भी नहीं चला. मौसी को इस तरह देखना गलत था पर पता नहीं क्यों मैं वहां से खुद को हटा नहीं प् रहा था . एक अलग तरह की कशिश मुझे वहां से हिलने नहीं दे रही थी. मेरे पाऊँ जैसे जैम गए थे. कब मेरा एक हाथ मेरे लैंड पर जा कर उसे मसलने लगा मुझे भी पता नहीं चला. मैं मौसी को देखने में खोया हुआ था क मौसी अपने चरम पर पहुँच गयी और एक तेज़ सिसकी क साथ झटके लेते हुआ उनका बदन ढीला पड़ने लगा. मौसी ने चरम सुख प् लिया था. और उनका हाथ भी अब रुक गया था. मौसी क रिलैक्स होते hi मैं भी नींद से जगा और अपनी जगह से हैट गया. मौसी क चहरे पर एक मुस्कान थी जो शायद संतुष्टि की थी. मगर मेरा हल बुरा कर दिया था इस घटना ने . मैं तुरंत किचन में जाकर फिर से पानी पिने लगा. पूरी बोतल ख़तम होने क बाद भी जैसे प्यास नहीं बुझ रही थी. अंदर आग भड़क उठी थी मगर मैं खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा था.

मैं अभी किचन में पानी पि कर खुद को कण्ट्रोल कर रहा था क मौसी भी किचन में आ गयी और मुझे सामने देख कर वो शॉकेड हो गयी. मौसी इस वक़्त निघ्त्य में थी

रीता मौसी : अमित तू तू तुम इस वक़्त यहाँ?

मौसी की ज़ुबान लड़खड़ा रही थी. शायद वो इस बात से दर रही होगी क अभी कुछ देर पहले वो जो कर रही थी अपने कमरे में कहीं वो मैंने देख तो नहीं लिया. मैं मौसी की परेशानी को समझ रहा था . मगर मौसी को देखते हुए मुझे उनका वही माँगा जिस्म जो अभी मैंने कुछ देर पहले देखा था वो अब मेरी आँखों फिर से नज़र आने लगा. मैं मौसी क चुके निघ्त्य क ऊपर से घूरने लगा . निघ्त्य का गाला खुला होने की वजह से चुचों क बीच की लकीर नज़र आ रही थी. मौसी मुझसे नज़रें नहीं मिला प् रही थी और मेरी नज़रें उनके बूब्स से मिली हुई थी.

अमित : वो प्यास लगी थी मौसी और कमरे में पानी नहीं था तो पानी पिने चला आया . मगर आप क्या कर रही थी इस वक़्त ? आपको तो पसीना आ रहा है.

मेरे इस सवाल से मौसी और हड़बड़ा गयी . उन्हें समझ नहीं आ रहा था क वो क्या जवाब दें.

रीता मौसी : मु मु मुझे भी प्यास लगी थी गर्मी बहुत है न

मौसी किस गरमी की बात कर रही थी मैं समझ रहा था . मगर फ़िलहाल उनके कहने का मतलब मौसम से था.

अमित : हाँ गर्मी तो वाकई बहुत है इस लिए तो पानी निकल रहा है . मेरा मतलब पसीना निकल रहा है.

मेरी बात से मौसी और घबरा गयी क मैंने पानी क्यों कहा. मैं मौसी को और तंग न करता हुआ अपने कमरे में लौट गया और मौसी वहीँ कड़ी सोचती रह गयी. आँखों से नींद उड़ गयी थी मौसी क खूबसूरत जिस्म का नज़ारा देख कर और जिस्म भी गरम हो गया था इस लिए मैं बाथरूम में जा कर नहाया और गर्मी कुछ हद तक ठंडा कर क वापिस आ कर बिस्टेर पर लेट गया. कब नींद आयी यद् नहीं.

सुबह मुझे लगा मैं सपने में किसी क होंठ चूस रहा हूँ शायद रत को जो देखा उसका असर होगा. मैं किश करता हुआ उस औरत को अपने ऊपर लिटा कर उसकी गांड मसलने लगा. ाएहा क्या खूबसूरत एहसास था. होंठों का रास पीते हुए नरम मुलायम चूतड़ दबाना और मेरी छाती पर दो नरम मुलायम आम अपनी कोमलता का एहसास करवाते हुए. मुझे छाती पर उस नरम एहसास क साथ उनके नोकीले पैन का भी एहसास हो रहा था. मज़े से किश करता हुआ और गांड मसलता हुआ मैंने अपने अकड़े हुए लैंड को छूट में घुसाने की कोशिश करता हुआ अपनी कमर उठाने लगा . गांड को दबाकर अपनी कमर से ऊपर की तरफ ज़ोर लगते हुए मैं जैसे उस औरत / लड़की क शरीर में छूट को न पाकर जैसे अपने लैंड से hi ड्रिल करना चाहता था. जब लैंड कहीं न घुस पाया तो मैंने पुरे ज़ोर से उसकी गांड मसल दी और होंठो को गुस्से से काट दिया क्यूंकि लैंड अकड़ कर फटने को था और घुसाने क लिए सुराख़ नहीं मिल रहा था तभी मेरी आँख एक थप्पड़ से खुली.

करुणा : पागल जानवर कहीं क .

करुणा दीदी अपने होंठ साफ़ कर रही थी. और गुस्से से मुझे देखती हुई नीचे चली गयी. मैं तो शॉकेड हो गया . आखिर ये हुआ क्या? मैं तो सपने में वो सब कर रहा था . फिर दीदी ने मुझे थप्पड़ क्यों मारा? दीदी होंठो पर हाथ से क्या ? ो तेरी कहीं सपना देखते हुए मैंने दीदी क होंठ तो नहीं काट दिए? मगर सपने में तो वो मेरे ऊपर थी और मैं उसकी गांड मसल रहा था. कहीं दीदी क साथ मैं वो सब नहीं कर रहा था? मर गए अब मैं दीदी क सामने कैसे जाऊंगा ? उनसे नज़रें कैसे मिलाऊँगा? कहीं दीदी ने मौसी को बता दिया तो? कहीं बाबा और माँ को पता चल गया तो ? नहीं नहीं मुझे दीदी से माफ़ी मांगनी होगी . मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ वो मेरी बहिन है. मैं अभी उनके पास जाकर माफ़ी मांगता हूँ. मैं तुरंत बिस्टेर से उठा और नीचे गया . हॉल में कोई नहीं था मगर किचन से आवाज़ आ रही थी इस लिए मैं सीधा किचन में hi चला गया.

किचन में गया तो सामने मौसी रत वाली निघ्त्य में hi कड़ी चाय बना रही थी. शेल्फ की तरफ झुकी होने क कारन मौसी की गांड बहार को निकली हुई थी. इस तरह से मौसी की गांड और भी बड़ी लग रही थी जिसे देखते hi मैं उसी में खो गया. मैं भूल गया मैं किस लिए आया था अब बस मेरा पूरा ध्यान मौसी की गांड में hi था . कब मौसी ने मेरी तरफ देखा और क्या उन्होंने महसूस किया मुझे तो अंदाज़ा भी नहीं था. पर मौसी की आवाज़ से मैं हकीकत में वापिस लौटा.

रीता मौसी : उठ गए बीटा ? मैं चाय ले कर बस तुम्हे जगाने hi आने वाली थी. ाचा हुआ तुम उठ गए. कुछ चाहिए था क्या?

मौसी अभी तक वैसे hi कड़ी थी बल्कि चाय क बर्तन में देखते हुए वो और झुक गयी जिससे उनकी गांड और उभर आयी और मेरा लैंड सुबह सुबह जिस मीठे एहसास से अकड़ कर खड़ा था फिर वैसे hi अकड़ गया. मुझे फिर से मौसी का नंगा जिस्म नज़र आने लगा. मेरे अंदर गर्मी बढ़ती जा रही थी और लैंड था क मुझे चैन से रहने नहीं दे रहा था . लोअर क अंदर hi फिर से तम्बू बन गया था. ऐसा महसूस हो रहा था क नसें फट जाएँगी लैंड की. मौसी ने मुझसे क्या बात की थी मुझे क्या जवाब देना है मुझे कुछ नहीं पता था . बस मछली की आँख की तरह मेरा लक्षय इस वक़्त मौसी को उभरी हुई बड़ी गांड थी.

रीता मौसी : कुछ चाहिए था क्या बीटा? जो चाहिए बोल दो ?

मुझे लगा जैसे मौसी पूछ रही हैं क आँखों से जो देख रहे हो एक बार अपने मुँह से उसको मांग लो मैं मन नहीं करुँगी.

अमित : न न नहीं मौसी म मम मैं तो बस आपको देखने आया था.

रीता मौसी : देखलो अछि तरह से तेरी मौसी वैसी hi है

मौसी क कहने का मतलब है क देखलो गांड वैसी hi है जैसे रत को देखि थी. मौसी ने गांड को इतना उभर कर मुझे दिखा दिया क अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था . अगर इस वक़्त भी मौसी रत की तरह कपड़ो क बिना होती तो अभी अभी क लैंड को छूट में पेल देता.

अमित : आप तो वाकई में कमल हो

मैं गांड को देख कर hi उसकी तारीफ करने में लगा था मौसी की बातों का सही जवाब देना तो जैसे इस वक़्त मुझे समझ hi नहीं आ रहा था.

रीता मौसी : क्या कमल हूँ ? अब तो बड़ी हो रही हूँ . लगता है सुबह सुबह मौसी का मज़ाक उड़ने का दिल कर रहा है तेरा .

अमित : कमल करती हो मौसी कोई अँधा भी बता सकता है क आप किसी जवान लड़की से काम नहीं.

रीता मौसी : ाचा मज़ाक है . अँधा भला कैसे बताएगा किसी क बारे में? इसका मतलब तू मेरा मज़ाक उदा रहा है.

अमित : मौसी मेरा कहने का मतलब था क अंधे इंसान हाथों से महसूस कर क बता सकते हैं न. और मुझे यकीन है क आपका एहसास अंधों को भी बता देगा क आप जवान हो और रही आँखों वालों की बात तो जिसके पास आँखें हैं वो आपको देख कर कभी यकीन नहीं करेगा क आपके बचे इतने बड़े हो सकते हैं.

रीता मौसी : है है है है लगता है सुबह सुबह मौसी की खिचाई करने का मन है तेरा . कोई और नहीं मिला तुझे ?

अमित : क्या मौसी मैं तो सच hi कह रहा हूँ अब आप मेरा मज़ाक उदा रही हो.

रीता मौसी : ाचा चल इधर आ ज़रा वो ऊपर से डिब्बा उतर दे मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा ऊपर.

मैं ऊपर देखा तो शेल्फ पर डिब्बों में एक डिब्बा पड़ा था जो मौसी को चाहिए था मगर मौसी का हाथ पहुँच नहीं रहा था मगर मौसी पंजों पर कड़ी हो कर उसे उतरने की कोशिश कर रही थी लेकिन उनका हाथ पूरी तरह उस पर पहुँच माहि प् रहा था. मैं डिब्बा उतरने क लिए मौसी क पीछे से hi ऊपर हाथ कर क वो डब्बा उठाने लगा तो मुझे अपने लैंड पर नरम सा एहसास हुआ . मैंने नीचे देखा तो मेरा लैंड जो लोअर में तन कर खड़ा था वो मौसी क फूटबालों क बीच जा लगा था. मौसी पंजों पर कड़ी थी और थोड़ा सा झुकी हुई पोजीशन में थी जिससे उनकी गांड बहार निकली हुई थी. मेरा लैंड उनके चूतड़ों क बीच जा लगा पर उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया. मैंने लगा क वो गुस्सा करेंगी पर जब उनकी तरफ से कोई रिएक्शन न हुआ तो मेरा लैंड मेरे दिमाग पर हावी हो गया और मैंने साडी सोच समझ एक तरफ रखते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ करते हुए अपना लैंड मौसी क चूतड़ों में और आगे घुसा दिया. मुझे लगा क अब मौसी कोई रिएक्शन देंगी पर मौसी ने पीछे मुद कर भी नहीं देखा . मुझे लगा मौसी को भी शायद मज़ा आ रहा है इस लिए मैंने थोड़ा पीछे हो कर अपने घुटने मोड़ते हुए अपनी पोजीशन सेट की और लैंड को छूट क निशाने पर ला कर अंदर घुसाने क लिए धीरे से धकेल दिया. मेरा लैंड दोनों चूतड़ों क जोड़ में से घिसता हुआ आगे निकल गया . मौसी की निघ्त्य ढीली सी थी जिस वजह से लैंड बिना रोक टोक छूट से रगड़ खता हुआ आगे तक चला गया. मौसी क मुँह से हलकी सी सिसकी निकली जैसे क वो इस आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही हों. मगर मौसी ने न पीछे देखा न मुझे रोका. मैंने फिर से एक बार पीछे हो कर लैंड को फिर आगे धकेला और इस बार मैंने मौसी को पूरा शेल्फ क साथ दबा दिया . मौसी क बड़े बड़े नरम चूतड़ मेरे लैंड क इर्द गिर्द डाब कर फ़ैल गए. मौसी और ऊपर उठ गयी शायद उनके पंजे फर्श से उठ गए थे और खुद को गिराने से बचने क लिए उन्होंने अपना एक हाथ नीचे शेल्फ पर रख दिया .

रीता मौसी : सससससस कक्कक्कक्स क्या कर रहा है बीटा ? डिब्बा उतर दे .

अमित : वही तो उतर रहा हूँ मौसी पर हाथ ( लैंड ) अचे से पहुँच नहीं रहा

रीता मौसी : ज़रा अचे से कर न देख पहुँच तो रहा है .

मुझे लगा मौसी भी मेरे लैंड की बात कर रही है . लगता है मौसी भी बहुत गरम हैं , मौसा जी मौसी क साथ कुछ करते नहीं होंगे तभी तो रत को मौसी उंगली कर रही थी.

अमित : पहुँच तो रहा है पर ऐसे बात नहीं बनेगी .

मैंने फिर से कमर को पीछे कर क दोबारा पहले जैसे पूरा धकेल कर मौसी को दबा दिया.

रीता मौसी : कक्कक्क्स तो कैसे बात बनेगी ? जल्दी कर पानी उबाल रहा है.

गैस पर चाय का पानी उबाल रहा था . अब पता नहीं मौसी चाय की बात कर रही था या अपनी. मैंने डिब्बा उतरने क बहाने फिर से 3/4 बार ऐसे hi किया तो मौसी का जिसम अकड़ गया और वो पूरी विबरते होने लगी. ककक कक्कक्स करती हुई मौसी ने अपना मुँह अपने हाथ से बंद कर लिया और झटके कहती हुई वो ढीले पद गयी. मैं समझ गया मौसी का काम हो गया इसका मतलब वो अपने hi पानी की बात कर रही थी. मौसी का पानी निकल गया इस लिए उनसे खड़ा रह पाना मुश्किल हो रहा था और वो निचे बैठ गयी. मेरा लैंड वैसे hi अकड़ कर खड़ा था. तभी बहार से किसी क कदमो की आवाज़ आयी

नेहा : माँ अभी तक चाय नहीं बानी?

नेहा दीदी बात करती हु किचन में आ गयी . सामने मैं खड़ा था और मौसी नीचे बैठ के खुद को संभल रही थी उनकी ऑंखें बंद थी और चहरे पर पसीना था. मौसी को बड़ी बड़ी सांस लेते देख कर नेहा दीदी को मौसी की चिंता हुई और वो जल्दी से मौसी क पास आकर उनको पकड़ कर बैठ गयी .

नेहा : क्या हुआ माँ आप ठीक तो हैं?

रीता मौसी : ह है हाँ मैं ठीक हूँ वो बस गर्मी से चक्कर सा आ गया था . बीटा ज़रा पानी देना एक गिलास .

नेहा दीदी ने जल्दी से मौसी को पानी दिया. मैं अपना खड़ा हुआ लैंड एडजस्ट करने लगा कहीं किसी की नज़र न पद जाये.

नेहा दीदी : आप मुझे कह देती मैं बना लेती चाय. आप क्यों अपनी तबियत ख़राब कर रही हैं?

रीता मौसी : मुझे क्या हुआ बेटी मैं तो बिलकुल ठीक हूँ. अछि भली अमित से बात कर रही थी क पता नहीं कैसे.

नेहा : आप जाइये मैं चाय बना कर लई हूँ.

रीता मौसी जल्दी से उठी और एक नज़र मुझे देख कर शरमाते हुए किचन से चली गयी . जाने से पहले उन्होंने मेरे लैंड की तरफ देखा जैसे कुछ कहना चाहती हो. मैंने भी अपने लैंड की तरफ ध्यान दिया तो मेरे लोअर पर भी एक छोटा सा दाग नज़र आ रहा था . शायद मौसी क पानी की वजह से या लैंड क प्रेकम की वजह से लगा होगा. मैं भी तुरंत निकल गया कहीं नेहा दीदी कोई सवाल जवाब माँ शुरू कर दें. मैं भाग कर सीधा बाथरूम में घुस गया और कपडे उतर कर शावर क नीचे खड़ा हो गया. अभी जो कुछ हुआ मैं उसके बारे में सोचने लगा. मुझे समझ नहीं आ रही थी क मैं कैसे वो सब कर गया ? मौसी मेरी माँ की बड़ी बहिन है और मेरी माँ जैसी है मैं कैसे उनके साथ ऐसा कर सकता हूँ. और मौसी ने एक बार भी मुझे कुछ नहीं कहा. आखिर क्यों ? कहीं मौसी को पता तो नहीं चल गया क मैंने रत को उन्हें उस हालत में देखा था ? या शायद मेरे इस तरह उनके पीछे लगने से वो अपने आप पर कण्ट्रोल नहीं कर पायी क्यूंकि वो तो पहले hi तरसी हुई हैं. जो भी हो मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था वो मेरी मौसी हैं. अगर वो मुझसे नाराज़ हो गयी तो ? मैं खुद को कोस्टा हुआ नाहा धो कर रेडी हो गया. करुणा दीदी तो पहले hi मुझ पर गुस्से थी . इस लिए वो मेरे साथ अब बहार तो जाएँगी नहीं इस लिए मैं भी जल्दी से गाओं निकल जाता हूँ. यही सोच कर मैं रेडी हुआ और अपने कपडे समेत कर अपना बैग लिए निचे आ गया.

नेहा दीदी : अरे तू कहा चला इतनी सुबह ? मैं तेरे लिए चाय लेकर कमरे में गयी और तू था नहीं और अब तैयार हो कर किधर जा रहा है?

नेहा दीदी की आवाज़ सुन कर करुणा मौसी भी आ गयी.

करुणा : ऐ दुफर किधर जा रहा है तू ? तूने वडा किया था न क आज मुझे मूवी सिखाएगा और शॉपिंग भी . चुप चाप बैग साइड में रख दे वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

मैं तो सोच रहा था क करुणा दीदी मुझसे नाराज़ होंगी मगर उनके ऐसे बेहवे से मुझे झटका लगा. इसका मतलब मैं गलत सोच रहा था . यानि क मैंने दीदी क साथ कोई हरकत नहीं की वो सब सपने में hi था . पर दीदी अपने होंठो पर हाथ क्यों रखे थी.

“ कौन कहाँ जा रहा है इतनी सुबह “ मौसा जी बहार से आ गए ये बात करते हुए . शायद दरवाज़े पर hi होंगे जब दीदी बात कर रही थी.

करुणा : देखो न पापा इसने वडा किया था क ये आज मुझे मूवी दिखने ले कर जायेगा और शॉपिंग भी करवाएगा और देखो सुबह सुबह भाग रहा है चोरों की तरह.

मौसा जी : क्या हुआ बीटा इतनी सुबह कहाँ जा रहे हो ? क्या दिल नहीं लगा हमारे यहाँ ?

अमित : मौसा जी ऐसी बात नहीं मैंने सोचा क जल्दी से निकल हटा हूँ ता की गाओं जल्दी पहुँच कर सब से मूल लूँ फिर वापिस भी आना है.

करुणा : कोई ज़रूरत नहीं है गाओं जाने की मैंने कहा था न मां ममी से बात कर ली है मैंने. अब छुओ चाओ बैग रखो साइड में मैं भी तैयार हो क आयी फिर नाश्ता साथ में करते हैं.



इतना कह कर करुणा दीदी तैयार होने चली गयी. मौसा जी मुझे लेकर बातें करने बैठ गए और नेहा दीदी ने मुझे चाय दी. इसी दौरान मौसी भी तैयार हो कर आ गयी और किचन में काम पर लग गयी. नेहा दीदी उनकी मदद क लिए किचन में चली गयी. आधे घंटे में मौसी ने आलू क परांठे तैयार कर दिए. उन्हें पता था क मुझे आलू क परांठे बहुत पसंद हैं. हम नाश्ता करने बैठे तो करुणा दीदी भी तैयार हो कर आ गयी. मैं तो उन्हें देखता hi रह गया. क्या लग रही थी. पिंक टॉप जो पूरा टाइट फिटिंग का था जिसमे से उनके बड़े बड़े आम पूरी शेप में नज़र आ रहे थे . पूरे गोल आकर जैसे क टेनिस की बोल हो मगर इनका आकर उससे बड़ा था. टॉप क साथ दीदी ने स्किन ब्लू जीन्स पहनी हुई थी. जीन्स भी ऐसे लग रही थी जैसे खींच कर उनकी बॉडी पर अलग स्किन चढाई हो जिससे उनकी कमर और कूल्हे अपना सही आकर बता रहे थे. करुणा दीदी ने बाल खुले छोड़े हुए थे. मैं तो करुणा दीदी को सर से पाऊँ तक देख रहा था. कुछ देर एक जगह रुक कर वो अपना जलवा दिखने क बाद मेरे पास वाली चेयर पर hi बैठ गयी. उनके चहरे पर एक कातिल मुस्कान थी जैसे मुझे चारो खाने चित करने क बाद वो मुझ पर है रही हो.
 
भाई लोग आज की लीव लगा दो यार आज मैं अपडेट लिख नहीं पाया . अब लिख रहा हूँ कल अपडेट कर दूंगा अगर कम्पलीट कर पाया तो
 
अपडेट 91



मैं तो करुणा दीदी को देखता हुआ भूल hi गया था क मुँह में निवाला भी है जो मुझे खाना है . दीदी मेरे पास बैठ कर मेरी इस हालत का मज़ा लेती हुई है रही थी सर झुका कर.

नेहा : ध्यान कहाँ है तेरा देख परांठा ठंडा हो रहा है. ये ले गरमा गर्म . और कुछ चाहिए तो बता ?

नेहा दीदी ने मेरी प्लेट में परांठा रखते हुए कहा. मौसी परांठे बना रही थी और नेहा दीदी हम को परोस रही थी. नेहा दीदी क ऐसा कहने से मैंने खुद को संभल और खाना खाने लगा. थोड़ी देर में हम ने नाश्ता कर लिया. नाश्ते क बाद चाय आ गयी और हम बैठ कर चाय पीने लगे . मौसी भी अब नेहा दीदी क साथ बैठ कर नाश्ता करने लगी. सुबह क इंसिडेंट क बाद अब तक मेरी और मौसी की नज़रें नहीं मिली थी . मैं सोच रहा था क मौसी का सामना किसे करूँ वो मेरे बारे में क्या सोच रही होगी? मौसी इस वक़्त सदी में थी और हमेशा की तरह उनका चेहरा चमक रहा था . खाना कहते जब मौसी ने मेरी तरफ देखा तो एक पल क लिए हमारी नज़रें मिली . जहाँ मैं अपराधबोध से नज़रें झुकाने लगा तो वहीँ मौसी क चहरे पर मुस्कान थी. मैं जल्दी से निकल जाना चाहता था पर हाथ में चाय पकड़ी हुई थी तो बस चाय पर hi फोकस करने लगा और जल्दी जल्दी चाय ख़तम की.

करुणा : चलें ?

अमित : चलिए . दीदी आप नहीं चलेंगी?

नेहा : मुझे अपना असाइनमेंट तैयार करना है तुम जाओ.

रीता मौसी : ठहरो . मुझसे पैसे ले कर जाओ.

अमित : नहीं मौसी उसकी ज़रूरत नहीं है .

रीता मौसी : चुप रहो. अभी तुम कॉलेज में हो तो तुम्हे पैसों की ज़रूरत ज़्यादा पद सकती है. सुनिए ! ज़रा अमित को पैसे दे दीजिये आपकी लाड़ली तो इसकी जेब खली करवा देगी .

मैं मन करता रहा पर फिर भी मौसी ने मौसा जी से पैसे लेकर मेरी जेब में दाल दिए .

रीता मौसी : करुणा ध्यान रखना तुम बड़ी हो अमित को ज्यादा तंग मत करना और बहार जा कर कोई शरारत मत करना. और शाम होने से पहले मुझे तुम दोनों घर चाहिए.

करुणा : ok मदर इंडिया हम टाइम से आ जायेंगे. चलो अब जल्दी वर्ण यहीं दोपहर हो जाएगी.

अमित : ाचा मौसी चलते हैं हम जल्दी लौट आएंगे.

मैं मौसी क पाऊँ छूने लगा तो मौसी ने मुझे गले लगा लिया और मेरी गाल पर एक किश करदी.

मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मेरी नज़रों में देख कर मुस्कुरा रही थी. उनकी आँखों की भाषा मैं समझ नहीं पर रहा था. मौसी मौसा का आशीर्वाद लेने क बाद हम घर से निकल पड़े . आज भी बदल बने हुए थे और बारिश की सम्भावना थी. दीदी मेरे पीछे लड़कों की तरह दोनों तरफ टंगे कर क बैठी मेरी छाती और पेट पर अपनी बहन कैसे मुझसे चिपक कर बैठी थी. ब्रा में कैद दीदी क चुके मेरी पीठ में चुभ रहे थे. दीदी ने मेरी गर्दन क पास hi अपना चेहरा लगा रखा था.

करुणा : आज मौसम कितना रोमांटिक है न ? दिल करता है क इस मौसम में हम दोनों लॉन्ग ड्राइव पर चलें कितना मज़ा आएगा न?

अमित : मौसम तो ाचा है मगर बारिश भी हो सकती है. वैसे आप मेरे साथ hi क्यों जाना चाहती हैं ? लड़कियां तो अपने बर्फ क साथ जाती हैं न?

करुणा : तेरा दिमाग तो ठीक है न? कोई भाई अपनी बहिन को ऐसा कहता है क्या?

अमित : सॉरी दीदी

करुणा : सॉरी की ज़रूरत नहीं है. वैसे तूने ठीक hi कहा लड़कियां अपने बर्फ क साथ जाती हैं और मेरे लिए तो तू hi मेरा बर्फ है . इस लिए मैं तेरे साथ hi तो जाउंगी.

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं? मैं आपका भाई हूँ.

करुणा : भाई छुम बर्फ . तू क्या चाहता है क मैं बहार लड़कों क साथ घूमती फिरूं और घरवालों की इज़्ज़त नीलम करूँ? इस लिए मैंने तो सोच लिया है तू hi मेरा बर्फ है . मुझे तुम पर ट्रस्ट है . तू कभी मुझे धोखा नहीं देगा और हर तरह से मुझे एन्जॉय करने का मौका देगा. बर्फ किस लिए बनाये जाते हैं घूमने गिरने मूवी देखने शॉपिंग करने और एन्जॉय करने क लिए. तो वो सब तो मैं तेरे साथ भी तो कर सकती हूँ न ? फिर मुझे किसी और बर्फ बनाने की क्या ज़रूरत है. तू है न मेरा बर्फ छुम भाई.

अमित : पर दीदी घूमने फिरने और ऐसे एन्जॉय करने तो ठीक है मगर

करुणा : मगर क्या

अमित : गफ बर्फ क बीच जो प्यार होता है जो मस्ती होती है वो तो भाई क साथ नहीं हो सकती न.

करुणा : तुझे बड़ा पता है मस्ती का. लगता है तूने कॉलेज में गफ बना राखी है कोई?

अमित : ऐसी बात नहीं है पर कॉलेज में रोज़ देखता हूँ तो इस लिए बात की.

करुणा : क्या क्या देखा है ज़रा मुझे भी तो बता?

दीदी मेरा मज़ा लेने की कोशिश कर रही थी.

अमित : कुछ नहीं देखा. वैसे भी कॉलेज में कोई थोड़ा hi कुछ करेगा.

करुणा : चलो इतना तो पैट चला क तुझे भी नॉलेज है क लड़का लड़की क्या करते हैं. वैसे तूने कितना कुछ किया है?

अमित : मतलब ?

करुणा : मतलब क किश क इलावा क्या क्या किया है तूने ?

करुणा दीदी की बात से मैं हड़बड़ा गया क दीदी मेरे साथ ये कैसी बातें कर रही हैं. मैंने तो कहा था क मेरी गफ नहीं फिर दीदी मुझसे ये सवाल क्यों पूछ रही हैं.

अमित : आ आए आप कहना क्या चाहती हैं?

करुणा : मुझे सब पता है . मैंने देखा तू कितने अछि तरह से किश करता है . और देख क लगता नहीं क तू इसमें नया है . ज़रूर और भी कहीं बहुत कुछ करता होगा वैसे भी तू इतना दमदार है किसी न किसी क बैठे तो चढ़ hi गया होगा . ( इतना तगड़ा हथियार जिसे भी नज़र आ गया वो तुझे हमेशा क लिए अपने साथ बांध लेगी और तेरे आगे पीछे घूमती रहेगी.)

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं ? मैंने कब किसी को किश किया ? आप किसकी बात कर रही हैं?

करुणा : इतने भोले मत बनो . मैं नैना दीदी की बात कर रही हूँ . उस दिन राधा क जन्मदिन पर मैं जब तुम्हे बुलाने आयी थी तो मैंने सब देख लिया था. किस तरह तुम नैना दीदी को किश कर रहे थे. वैसे सच सच बता नैना दीदी क इलावा और किस किस क साथ किया है तूने ये सब? और नैना दीदी क साथ कहाँ तक पहुंचा है?

करुणा दीदी की बात सुन कर मेरी तो हालत पतली हो गयी. मैं एक डैम से ब्रेक लगा कर बाइक रोक ली. करुणा दीदी को पता चल गया मतलब हमारा सीक्रेट ओपन हो गया. दीदी क्या सोच रही जोगी एक भाई होकर कैसे मैं अपनी बैगन क साथ वो सब कर सकता हूँ. दीदी की नज़र में अब मेरी क्या इज़्ज़त रह गयी. और ऊपर से नैना दीदी भी अब बदनाम हो जाएगी. अगर करुणा दीदी ने किसी को बता दिया तो क्या होगा? करुणा दीदी जब नैना दीदी से पूछेंगी तब वो तो शर्मिंदगी से मर जाएँगी. मुझे करुणा दीदी को समझाना होगा. उन्हें मानना होगा क वो सब इसका ज़िक्र किसी क साथ न करें. मगर मैं करुणा दीदी को क्या बताऊँ क वो सब क्या था ? नैना दीदी ने तो कहा था क करुणा दीदी को वो संभल लेंगी मगर अब तो करुणा दीदी को सब पता चल हुआ है अब क्या करेंगी वो?

करुणा : क्या हुआ सांप सूंघ हुआ क्या? मेरी बात का जवाब क्यों नहीं दे रहा और ये बाइक क्यों रोक दी तूने?

अमित : डी डी दीदी वो वो . ी ऍम सॉरी दीदी प्लीज मुझे माफ़ कार्डो . मैं होश में नहीं था और मैंने उस दिन दीदी को किश कर दिया . मैंने उनसे माफ़ी मांग ली है प्लीज आप भी मुझे माफ़ कार्डो और ये बात किसी को मत बताना वर्ण दीदी की बदनामी होगी. मुझे अपनी परवाह नहीं है पर मैं नहीं चाहता क दीदी पर कोई बात आये.

( मैंने सारा इलज़ाम अपने ऊपर ले लिया क करुणा दीदी नैना दीदी पर शक न करें . मेरे ऐसा करने से नैना दीदी सेफ हो जाएँगी. अब सिर्फ मैं hi दोषी रहूँगा करुणा दीदी की नज़र में. )

करुणा : ( तो मुझे उल्लू बनाने की कोशिश कर रहा है . कोई बात नहीं बच्चू मैं भी तुझे बताती हूँ ) तो तूने ज़बरदस्ती दीदी को किश की थी? अगर ये बात मैंने किसी को बता दी तो पता है क्या होगा ? तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आयी दीदी क साथ वो सब करते हुए?

दीदी की बातों से तो मेरी हालत पतली हो गयी . अब मैं कैसे उनका सामना करुणा कैसे उन्हें मानों मुझे समझ नहीं आ रहा था.

अमित : दीदी पता नहीं वो सब कैसे हो गया ? मैं अपने होश में नहीं था आप तो जानती हैं मौसी ने उस दिन मुझे कैसे डांटा था तो मैं गुस्से में था मुझे कुछ होश नहीं था मैं क्या कर रहा हूँ और जब होश आया तो मैंने माफ़ी भी मांगी.

करुणा : तो क्या दीदी ने तुझे माफ़ कर दिया? मगर तू मौसी पर गुस्सा था तो दीदी क साथ वो सब कैसे कर दिया? वैसे तुझे देख कर लगता तो नहीं क तू गुस्से में वो सब कर रहा था.

अमित : मैं सच कह रहा हूँ दीदी वो सब पता नहीं कैसे हो गया प्लीज आप मुझे माफ़ कर दीजिये .

करुणा : वैसे नैना दीदी ने तो कोई गुस्सा नहीं दिखाया था. उनके चहरे पर तो ख़ुशी थी मतलब उन्हें मज़ा आया होगा. वैसे तूने इतनी अछि किश करनी कहाँ से सीखी मुझे सच सच बता.

दीदी तो पीछे hi पद गयी और उन्हें नैना दीदी वाली बात पर भी गुस्सा नहीं आ रहा था. मगर उनके इस सवाल का क्या जवाब दूँ . मुझे तो ये सब दीपिका ममी ने सिखाया है वही मेरी गुरु हैं पर उनका नाम कैसे बता सकता हूँ.

अमित : वो दीदी स्कूल में एक लड़की थी जिसके साथ मैंने पहली बार किश किया था मगर अब कोई नहीं है.

करुणा : झूठ . अब नैना दीदी है न जिसके साथ तू किश करता है.

अमित : नहीं दीदी वो तो बस गलती से . प्लीज माफ़ कार्डो न दीदी . बस एक बार माफ़ कार्डो आगे से गलती नहीं होगी.

करुणा : एक शर्त पर माफ़ करुँगी

अमित : मुझे आपकी हर शरत मंज़ूर है प्लीज बस आप माफ़ कार्डो

करुणा : सोच ले अगर मेरी बात नहीं मणि तो मैं ये बात .....

अमित : मैं आपकी हर बात मानूंगा आप जो भी कहेंगी वो करूँगा.

करुणा : चल ठीक है अब बाइक चला हम लेट हो रहे हैं और टेंशन मत ले . आज सारा दिन तू मेरे साथ मेरा बर्फ बन क रहेगा और मैं जो भी कहूँगी वो तुझे करना होगा वर्ण फिर सोच लेना.

अमित : पर दीदी

करुणा : मैंने कहा न जो भी मैं कहूँगी वो करना होगा. तुम मेरे बर्फ हो आज और मुझे अपनी गफ की तरह hi ट्रीट करोगे अब चलो जल्दी मुझे शो मिस नहीं करना.

मैंने फिर से बाइक स्टार्ट की और निकल पड़ा. करुणा दीदी फिर से मेरे साथ चिपक गयी और मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबाने लगी. दीदी ने मेरी गर्दन पर अपने होंठ लगा कर हलके से किश कर दिया जिससे मेरी रिड की हड्डी तक हलचल हुई मैंने दीदी की तरफ मुद कर देखा तो वो मुस्कुरा रही थी.

करुणा : आगे देख कर बाइक चलाओ कहीं गिरा मत देना.

मैं चुपचाप बाइक चलने लगा और दीदी वैसे hi मुझसे चिपक कर बैठी रही. थोड़ी देर में hi हम सिनेमा पहुँच गए और मैंने जा कर टिकट्स ले लिए . हम हॉल में अपनी जगह ओर जा कर बैठ गए . अभी ज्यादा टाइम नहीं हुआ था और मौसम सुहाना होने की वजह से ज्यादातर कपल hi शो देखने आये थे. दीदी मेरे साथ सत्कार बैठी थी. फिल्म शुरू होने क बाद धीरे धीरे कुछ कपल एक दूसरे से चोंच लड़ने लगे जैसे वो मूवी देखने नहीं बस अपनी मूवी एन्जॉय करने आये हों. करुणा दीदी तो बस ऐसे hi कपल्स की और देख रही थी और मैं चुपचाप ऑंखें स्क्रीन पर लगाए बैठा था. दीदी शायद इस माहौल में गरम हो रही थी उन्होंने मेरी बाजु अपनी छाती से कास ली और मुझे उनके नरम मुलायम बूब्स अपनी बाज़ू क इर्द गिर्द महसूस होने लगे. मैंने एक बार दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी . मेरी नज़रें दीदी से मिली तो मुझे उनकी आँखों में एक प्यास नज़र आयी. मैं तुरंत अपनी नज़रें फिर से स्क्रीन पर लगा दी. इस बीच मूवी में एक हॉट सन आ गया हीरो हेरोइन क बीच और दीदी जो पहले hi गरम हो रही थी इससे उनकी गर्मी और भड़क उठी. दीदी ने मेरा चेहरा अपनी और घुमाया और मेरे होंठो से अपने होंठ लगा दिए. मैं शॉकेड हो गया और खुद को पीछे कर लिया.

अमित : दीदी आप ये क्या कर रही हैं.

करुणा : शहहहहह आज तुम मेरे बर्फ हो और मैं तुम्हारी गफ . यद् है न तुमने कहा था तुम मेरी हर बात मानोगे.

अमित : पर मैं ये सब कैसे कर सकता हूँ आपके साथ.

करुणा : जैसे तूने नैना दीदी क साथ किया था. मुझे भी वो सब फील करना है जो लड़कियां अपने बर्फ क साथ करती हैं और तू मुझे वो सब फील करवाएगा.

अमित : मैं ये सब नहीं कर सकता

करुणा : तो तू चाहता है क मैं घर ले बता दूँ नैना दीदी क बारे में?

अमित : आप मुझे ब्लैकमेल कर रही हैं?

करुणा : तू जो मर्जी समझ ले . जैसे तेरे लिए नैना दीदी हैं वैसे hi मैं भी हूँ. तो तू मेरे साथ ये पर्तिअलिटी कैसे कर सकता है? क्या तू सिर्फ नैना दीदी से प्यार करता है मेरे साथ नहीं?

अमित : दीदी आप ये कैसी बातें कर रही हैं?

करुणा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना किश में अमित ी लव यू प्लीज किश में . मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए जब से तुमने मुझे छुआ है मुझे हर वक़्त बस तुम्हारा hi एहसास अपने बदन पर होता रहता है. प्लीज अमित किश में

अमित : मैंने कब छुआ है आपको आप क्या बात कर रही हैं.

करुणा : वो गाओं की नदी में no तूने मेरे साथ मस्ती की थी क्या वो तुझे यद् नहीं? मुझे तो हर वक़्त तुम्हारा एहसास अपने नाज़ुक अंगों पर होता रहता है.

अमित : ( इसका मतलब उस दिन नदी में करुणा दीदी थी जो मेरे साथ वो सब छेड़छाड़ कर रही थी और मैं सोच रहा था क शायद वो नैना दीदी होंगी जो मुझे पर्पस कर दिया. अब क्या करुणा अगर मैंने दीदी की बात नहीं मणि तो ये नैना दीदी वाली बात बता देंगी. ) तो आप ने उस दिन मेरे साथ नदी वो सब क्यों किया था?

करुणा : क्या करती बाइक पर बैठे जब मैंने गलती से तुझे वहां से पकड़ लिया था और तूने भी मेरे साथ मस्ती की थी तो मुझे लगा तू मुझे पसंद करता है और मेरे साथ मज़े करना चाहता है. बस इसी लिए मैंने वो सब किया क्यूंकि मज़े तो मैंने भी लेना चाहती थी और मेरा तो बर्फ भी नहीं है.

अमित : तो आप बर्फ बना लेती कोई?

करुणा : मैंने कहा न मैं किसी को बर्फ नहीं बनाने वाली . तू हो मेरा बर्फ है बस. अब मुझे किश करो बातों में टाइम वास्ते मत करो.

दीदी ने फिर से मेरे सर क पीछे हाथ रख कर मुझे अपनी तरफ झुकाया और किश करने लगी. इस बार मैंने भी दीदी क किश का जवाब दिया और उनके होंठ अपने होंठो में भर लिए. दीदी क नरम लबों का एहसास बहुत hi मज़ेदार था. मैं उनके रास भरे होंठों को चूमता हुआ इतना मगन हो गया क उनके होंठ अपने होंठो में भर कर चूसने लगा. कभी ऊपर वाला तो कभी नीचे वाला मैं बरी बरी से दोनों होंठों का रास चूस रहा था. दीदी क हाथ मेरी गर्दन पर चल रहे थे और मेरे हाथ भी दीदी की पीठ पर चले गए. हम दोनों किश करने में इतना मगन हो गए क ऑंखें बंद कर क बस इस अद्भुत एहसास का आनंद ले रहे थे. मैंने तो पहले भी कई बार किश किया था मगर करुणा दीदी का ये पहला किश था. उनका तो बुरा हल होने लगा उनकी सांस उखाड़ने लगी. उनका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा और जिस्म कम्पनी लगा . मैंने उनकी हालत को समझते हुए किश तोड़ दिया . किश ख़तम होते hi दीदी ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगी जैसे किसी ने उनकी सांस hi रोक दी हो. ज़ोर से सांस लेने से दीदी क बड़े बड़े आम ऊपर निचे हो रहे थे. उनकी ऑंखें बंद थी और मैं उनकी हालत को ठीक करने क लिए उनको अपनी बाँहों में लेकर उनके माथे पर किश करने लगा. दीदी की सांस जब संभाली तो वो ऑंखें खोल कर मेरी तरफ देखने लगी. जैसे पूछ रही हो क ये सब क्या था और तुम्हे कुछ क्यों नहीं हुआ?

अमित : आपका पहली बार है न ? इस लिए आप सांस रोक कर किश कर रही थी इसी लिए ऐसा हुआ. रिलैक्स.

करुणा दीदी फिर से मेरे साथ चिपक गयी और मेरे गलों पर किश कर दिया.

करुणा : ये कैसा एहसास था ? मुझे लग रहा था मैं किसी और hi दुनिया में हूँ. अब पता चला ये सब देखने में जितना मज़ेदार है करने में उससे भी ज्यादा मज़ेदार है. तुम मुझे फिर से किश करो न मैं इसे और अछि तरह से करना चाहती हूँ.

करुणा दीदी ने फिर से मेरी तरफ अपने होंठ किये तो मैंने इस बार खुद hi उनके होंठों का रास पीन लगा . पहले क मुकाबले इस बार दीदी की हालत ठीक थी और इस बार किश भी लम्बी चली मगर इस बार हॉल की लाइट्स जल उठी और मैंने किश तोड़ दी. स्क्रीन पर देखा तो इंटरवल हो गया था. मैंने करुणा दीदी की तरफ नज़र की तो वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी . उनके सँभालने क बाद हम दोनों कैफेटेरिया में आ गए और खाने क लिए स्नैक्स लेने लगे तो दीदी वाशरूम चली गयी. वापिस आ कर कुछ देर हूँ स्नैक्स कहते हुए मूवी देखने लगे पर दीदी बार बार मुझे hi देख रही थी. जैसे hi हम स्नैक्स से फ्री हुए दीदी ने मेरा चेहरा पकड़ कर घुमाया और मेरे होंठो पर टूट पड़ी . दीदी बहुत वीलडली मुझे किश करने की कोशिश कर रही थी. किश करते हुए दीदी अपने सीट से उठ कर मेरी गॉड में आ गयी . मेरी कमर की दोनों तरफ घुटने टिकते हुए वो मेरे ऊपर बैठ गयी और मेरे सर को पूछे से पकड़ कर मेरे होंठ जैसे चूस चूस मर उखाड़ने में लग गयी. पता नहीं दीदी में कितनी आग थी मैं बस उनका साथ दे रहा था जबकि वो मेरे ऊपर हावी थी. अब गेम को अपने हाथ में लेने क लिए मैंने अपना एक हाथ उनकी छाती पर रख दिया. एक बार क लिए दीदी की स्पीड में थोड़ा पॉज आया. मैंने उनकी दाएं उभर को अपने पंजे में कास लिया. दीदी एक बार तो सिहर गयी. उनका वो नरम उभर मेरे हाथ की पकड़ से कुछ बहार hi था पर मैंने उन्हें धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया. दीदी ढीली पड़ती गयी और अब गेम मेरे हाथ में आ गयी. मैंने दूसरा हाथ भी उनके दूसरे उभर पर रख दिया और दोनों को दबाने लगा दीदी ने अपना जिस्म ढीला छोड़ दिया और अपना सर मेरे कंधे पर रख कर मेरी गर्दन पर अपने होंठ लगा दिए. दीदी की दोनों चूचियां रूई की तरह नरम थी मगर मेरे दबाने से अब उनमे सख्ती आने लगी. दीदी क साथ ये सब करते हुए कब मेरा लैंड खाद हो गया मुझे पता hi नहीं चला . मेरा लैंड पेण्ट में फूल कर टाइट हो चूका था और दीदी की छूट पर उसकी सख्ती दीदी भी महसूस कर रही होगी. दीदी क जिस्म में फिर से जैसे ताकत आ गयी . उनकी चूचियां एक डैम कठोर हो गयी और वो अपनी छूट मेरे लैंड पर दबाने लगी. दीदी ने मेरी गर्दन पर अपने दांत गदा दिए और फिर थोड़ा ऊपर हो कर फिर से किश करने लगी. इस बार फिर से दीदी हावी होने की कोशिश कर रही थी और मेरी जीब को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. मैंने भी एक हाथ नीचे ले जाकर दीदी क चूतड़ों ओर रख दिया और उन्हें मसलने लगा. इस पोजीशन और जीन्स की वजह से उनकी गांड कुछ ज्यादा hi टाइट थी इस लिए चूतड़ मसाले नहीं जा रहे थे तो मैंने चूतड़ों पर हाथ घुमाये हुए अपनी उंगलियां नीचे से उनकी छूट पर दबा दी. इस तरह करने से जैसे दीदी को पुश मिला और उनकी स्पीड और तेज़ हो गयी. मैंने हाथ ऊपर ले जाते हुए उनके टॉप क अंदर घुसा दिया और उनकी नंगी पीठ पर घूमने लगा. दीदी का पूरा बदन hi कोमल था. मेरे हाथ उनकी ब्रा की पत्तियों पर लगे तो मैंने टॉप क अंदर से हाथ आगे ले आया. अब मेरे हाथ टॉप क अंदर ब्रा में कैसे हुए उभारों पर थे. दीदी क नंगे बूब्स पर मेरी उंगलियां जब लगी तो दीदी अपनी छूट को मेरे लैंड पर ज़ोर से दबा कर कमर आगे पीछे करने लगी. मैंने दूर हाथ भी टॉप क अंदर घुसा दिया और बूब्स मसलने लगा. मेरी पकड़ दोनों बूब्स पर और भी ज्यादा हो गयी और दीदी की कमर भी तेज़ चलने लगी. दीदी ने किश तोड़ दिया और गर्दन पीछे को गिरा दी. एक डाक उनका जिस्म चरम पर पहुँच कर रुक गया और अपनी सिसकियाँ अपने होंठ कास कर दबाकर छुपाने लगी. उनका जिस्म झटके लेते हुए ढीला पद गया और मेरे कंधे पर सर रख कर वो हांफने लगी. मैंने उनके टॉप से हाथ निकल कर उनकी पीठ को सहलाने लगा और उनको नार्मल करने लगा. 10 मिनट दीदी इसी तरह मेरे ऊपर निर्जीव सी पड़ी रही. जब उनकी साँसे पूरी तरह नार्मल हो गयी तो मैंने उन्हें अपने ऊपर से उठाने की कोशिश की.

अमित : दीदी अब आराम से अपनी सीट पर बैठ जाइये वर्ण लोग क्या कहेंगे वैसे भी मूवी ख़तम होने वाली होगी.

दीदी चुपचाप अपनी सीट पर खिसक गयी मगर उन्हें थोड़ी प्रॉब्लम हो रही थी.

करुणा : मुझे वाशरूम जाना है.

दीदी ने बस इतना hi कहा. मैं समझ गया क उन्होंने अभी अभी अपना पानी निकला है जिस वजह से उनकी पेंटी गीली हो गयी होगी और उनसे बैठा नहीं जा रहा होगा. मैंने बिना कुछ बोले उनका हाथ पकड़ा और उन्हें ले कर वाशरूम की तरफ चल दिया. दीदी भाग कर लेडीज टॉयलेट में घुस गयी. कोई 10 मिनट्स बाद दीदी वापिस आयी और हम वहां से निकल कर बहार आ गए क्यूंकि हमने कौन सा मूवी देखनी थी. बहार दोपहर क वक़्त hi शाम जैसा माहौल बना हुआ था बादलों की वजह से. मैंने दीदी से घर चलने को कहा तो उन्होंने पहले शॉपिंग करने का कहा. दीदी अब ज्यादा बात नहीं कर रही थी. वो बस मेरे साथ चिपक कर बैठी हुई थी. मैं दीदी को लेकर एक मॉल में चला गया शॉपिंग करवाने . दीदी ने अपने लिए कुछ टॉप देखे मगर फाइनल मेरी पसंद से लिया. दीदी सिनेमा से आने क बाद अब काम बात कर रही थी और बार बार शर्मा जाती थी मेरी तरफ देख कर जैसे नै नै दुल्हन शर्माती है. मुझे उनका ये रूप भी पसंद आ रहा था . जबकि पहले हमेशा वो बिंदास रहती थी. टॉप लेने क बाद मैंने दीदी को एक वाइट स्कर्ट दिलवाया हालाँकि दीदी मन कर रही थी पर मैंने अपनी मर्ज़ी से उन्हें स्कर्ट दिलवाया और उन्होंने भी ज्यादा नखरा नहीं किया . उसके बाद दीदी ने मुझे रुकने को कहा और खुद एक शॉप में चली गयी मैंने देखा तो वो लेडीज उन्देर्गर्मेन्ट्स की शॉप थी. मैं समझ गया वो अपने लिए ब्रा पेंटी लेने गयी होंगी इस लिए मैं भी कुछ देर इधर उधर घूमने लगा. मैं घूमता हुआ एक गर्ल्स कलेक्शन देखने लगा तो मुझे पास में hi शीना नज़र आयी वो भी शॉपिंग कर रही थी. मैं साइड में हो गया तभी उसके साथ एक और लड़की नज़र आयी जिसे देख कर मेरा दिमाग ख़राब हो गया. मुझे यकीन नहीं हो रहा था क ये शीना क साथ घूम रही है और अगली बात जो मेरे कानो में पड़ी उसने तो मुझे झटका hi दे दिया.

“ दीदी मेरा मन नहीं है शॉपिंग का आप कीजिये मैं बहार हूँ “ इतना कहते हुए रीमा शीना क पास से बहार निकल गयी.

शीना : क्या यार छोटी पता नहीं तुझे क्या हो गया है बिलकुल बोरिंग हो गयी है तू.

तो ये दोनों बहने हैं और इतनी बड़ी बात आज तक मुझे पता नहीं थी . रीमा ने इतनी बड़ी बात मुझसे छुपाई. उसे तो सब पता था क मेरी मोंटी और शीना से क्या बात है फिर भी उसने मुझसे छुपाया. और तो और मीनल ने भी नहीं बताया मुझे रीमा पर गुस्सा आने लगा और मीनल भी मुझे दोषी नज़र आने लगी . मुझे लगा क ज़रूर ये भी कोई इनकी चल hi होगी रीमा मुझे अपने प्यार क जल में फसा कर ज़रूर मेरा कुछ बुरा करने की फ़िराक में होंगे. इसी लिए रीमा उस दिन ऐसे बात कर रही थी. पहली चल फ़ैल हो गयी तो अब अपनी बहिन को भेज दिया थू है इन लोगों पर. रीमा ने ये ाचा नहीं किया . मैं तो समझा था क ये अछि लड़की है मगर ये भी उन्ही में से एक निकली. अब तो कोई शक की गुंजाईश hi नहीं रह गयी थी. कोई भी लड़की अपने भाई बहिन क दुश्मन क साथ दोस्ती कर hi नहीं सकती और ये मेरे साथ प्यार का खेल खेलने वाली थी. पहले तो मीनल से पूछूंगा क अगर वो जानती थी तो उसने बताया क्यों नहीं या फिर वो भी नहीं जानती थी. मैं सोच सोच कर गुस्से में पागल हो रहा था. आज मेरे दिल पर ठेस लगी थी कहीं न कहीं मैं रीमा को दिल से पसंद करने लगा था मगर अब तो मुझे उससे नफरत होने लगी. मैं जल्दी से वहां से बहार निकल गया . मगर बहार निकलते hi रीमा सामने कड़ी मिल गयी. मुझे देख कर वो शॉकेड हुई मगर फिर वो चहरे पे स्माइल लती हुई मेरी तरफ बड़ी तो मैं उसे गुस्से से देखता हुआ निकल गया. सामने से करुणा दीदी भी अति हुई दिखाई दी.

करुणा : कहाँ चला गया था तू? मैं कब से तुझे ढून्ढ रही हूँ.

अमित : चलो दीदी टाइम बहुत हो गया है अब घर चलते हैं .

दीदी ने मेरे चहरे पर गुस्सा देखा तो चुपचाप मेरे साथ चल पड़ी. मैंने बाइक निकली और दीदी को पीछे बिठा कर घर की तरफ निकल पड़ा . मैं चुपचाप बाइक चला रहा था तो दीदी ने hi बात शुरू की.

करुणा : क्या हुआ अमित तुम मुझसे नाराज़ हो?

अमित : नहीं दीदी ऐसी तो कोई बात नहीं

करुणा : तो फिर ये गुस्सा

अमित : आप पर नहीं है. किसी और पर है . किसी ने मुझसे झूठ बोलै था और आज मुझे सच पता चल गया है. बस इसी लिए गुस्सा आ रहा है.

करुणा : मुझे नहीं बताएगा कौन है वो?

अमित : आओ उसे नहीं जानती कॉलेज फ्रेंड है.

करुणा : लड़की है ?

अमित : दीदी आप भी क्या सोचती रहती hain.aisi कोई बात नहीं है. आप बताइये आप क्या लेने गयी थी बाद में?

करुणा : थी कोई ज़रूरी चीज़ जो तूने ख़राब कर दी थी

अमित : मैंने क्या ख़राब किया मुझे भी तो बताओ ? जहाँ तक मुझे यद् है ऐसी तो कोई चीज़ नहीं जो मैंने ख़राब की हो.

करुणा : है एक चीज़.

अमित : अब बता भी दो दीदी वर्ण मैं आपसे नाराज़ हो जाऊंगा

करुणा : तू क्यों नाराज़ हो जायेगा ? नाराज़ तो मुझे होना चाहिए तेरी वजह से मेरी चीज़ ख़राब हुई.

अमित : अब बता रही हैं या नहीं?

मैंने थोड़ा गुस्से से कहा

करुणा : ाचा बाबा गुस्सा मत हो. वो जो कपड़ों क अंदर से पेहेनते हैं वो जागरण हो गयी थी.

अमित : कपड़ों क अंदर से तो ब्रा पेहेनते हैं मगर मैंने उसे तो कुछ नहीं किया.

करुणा : धत बे शर्म कैसे सीधा नाम लेता है. और भी कुछ पेहेनते हैं बस वो ख़राब हो गयी थी.

अमित : ाचा तो आप उसकी बात कर रही हैं. मगर मैंने कब उसे ख़राब किया?

करुणा : और किसने किया ? तूने hi वो सब किया न जिससे मैं इतनी एक्साइट हो गयी क वो गीली हो गयी.

अमित : मज़ा तो आप ले रही थी ऊपर बैठ कर और अब मुझ पर इलज़ाम लगा रही हैं . मुझे तो दर था क कहीं आप मेरे कपडे न फाड़ दें तो मैं बहार कैसे अत.

दीदी ने मेरी पीठ पर मुक्का मारा.

करुणा : बे शर्म कहीं का. तेरे हाथ कहाँ घूम रहे थे ? इतनी नरम जगह कोई ऐसे मसलता है क्या अभी तक दर्द कर रहे हैं. मज़े तो तू ले रहा था मुझे गॉड में बिठा कर भला मुझे कहाँ पता था क ये सब होता है.

दीदी मेरे मज़े ले रही थी जबकि उन्हें सब पता था.

अमित : ाचा आप तो दूध पीती बची हैं जिसे कुछ नहीं पता. अब मैंने दूध पकड़ लिए तो गुस्सा कर रही हैं. आप हो को तो मुझे बर्फ बनाना था और मज़े करने थे अब मैंने आपकी बात मन ली तो अब मुझ ओर गुस्सा हो रही हैं . ठीक है ये एक दिन की hi डील थी अब ये डील ख़तम हुई.

करुणा : ऐसे कैसे ख़तम ? अब तू मेरा पक्का वाला बर्फ है और मैं जब भी कहूँगी मुझसे मिलने आना होगा . मैं अब तुमसे दूर नहीं रह पाऊँगी. मुझे पता है तू नैना दीदी क साथ उस दिन ज़बरदस्ती नहीं कर रहा था और तुम दोनों बर्फ गफ की तरह रहते हो. दीदी ने मुझे बता दिया था.

अमित : तो आप नाटक कर रही थी मेरे साथ?

करुणा : तो क्या तू नहीं नाटक कर रहा था? जैसे नैना दीदी को तू प्यार करता है उसी तरह मुझे भी तो थोड़ा सा प्यार दे सकता है न. मैं भी तो तेरी बहिन hi हूँ जैसे नैना दीदी हैं तो मेरे साथ नाइंसाफी क्यों? देख अमित मैं भी तुझे दिल से चाहती हूँ जैसे दीदी चाहती हैं और मुझे यकीन है दीदी को इससे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी क्यूंकि हम दोनों जानती हैं क इस रिश्ते की कोई मंज़िल नहीं है. पर फिर भी हम दोनों हो तुम्हे प्यार करना चाहती हैं तो क्या तू अपना थोड़ा सा प्यार हमें नहीं दे सकता ? तूने जैसे नैना दीदी को एक्सेप्ट कर लिया है वैसे hi मुझे भी थोड़ी सी जगह अपने दिल में देदे. मैं सच कहती हूँ मैंने कभी किसी लड़के को इस नज़र से नहीं देखा पर पता नहीं क्यों तुम्हारे आगे मैं अपना दिल हर बैठी. प्लीज मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह देदो अमित मैं तुम्हे कभी किसी बात क लिए फाॅर्स माहि करुँगी. मैं कभी तुम्हारी लाइफ इंटरफारे नहीं करुँगी. प्लीज

दीदी की आवाज़ भरी हो गयी. मुझे ये सब ाचा नहीं लग रहा था. मैं जनता हूँ क ये गलत है पर कहते हैं न एक कतल की सजा फांसी है तो चाहे 10 भी कतल कर लो सजा तो एक hi रहेगी. इसी तरह एक बार मैं जो पाप कर hi चूका हूँ तो एक और करने से क्या हो जायेगा. वैसे भी नैना दीदी और करुणा दीदी आपस में अछि दोस्त भी हैं तो एक को प्यार देकर दूसरी को इंकार करना सचमुच नाइंसाफी hi होगी. सिनेमा हॉल में जो कुछ हो चूका है उसके बाद तो करुणा दीदी को इस तरह इंकार करना किसी भी सूरत में सही नहीं होगा. इस लिए मैंने फैसला कर लिया क मैं करुणा दीदी को वो ख़ुशी दूंगा जो वो मुझसे चाहती हैं.

अमित : तो आपको भी मुझसे प्यार है ? और आप चाहती हैं क मैं आपको एक बर्फ गफ वाला प्यार दूँ. मगर मुझे नहीं लगता क आप उसके काबिल हैं.

करुणा : तुम कहना क्या चाहते हो?

अमित : यही क मुझे रोने धोने वाली गफ नहीं चाहिए. आप अब जैसे रो रही हैं कल भी ऐसे hi रोयेंगी तो इस लिए मैं आपको गफ माहि बना सकता हाँ अगर आप पहले जैसे हस्ती मुस्कुराती रहें तो मुझे मंज़ूर है.

इतना सुनते hi दीदी ने मुझे कस क पकड़ लिया और मेरी गर्दन को चूमने चाटने लगी

करुणा : ी लव यू ी लव यू ी लव यू तुम सच मच कितने अचे हो अब देखना मैं खुद भी हस्ती रहूंगी और तुझे भी हसाऊँगी . तू जैसा कहेगा वैसा कहूँगी मैं तुझे इतना प्यार दूँगी इतना प्यार दूँगी क तू सब भूल जायेगा.

अमित : इतना भी मत हसियेगा अकेले में क लोग पागल कहें . मुझे पागल गफ नहीं चाहिए. और हाँ घर वालों को भी हसाईयेगा .

करुणा : क्या कहा पागल . अभी तुझे बताती हूँ क मैं कितनी पागल हूँ .

दीदी मेरा गाला दबाने लगी और मैं भी एक्टिंग करने लगा क जैसे सचमुच मेरी सांस रुक रही हो जब की वो सिर्फ एक्टिंग कर रही थी.

अमित : ुँहू उठाऊ उह्ह्हूऊओ मेरी सांस

करुणा : ( दर कर ) क्या हुआ तुझे मैं तो मज़ाक कर रही थी. प्लीज बता तुझे क्या हुआ.

अमित : अभी तो कुछ नहीं हुआ मगर लगता है एक दिन हो जायेगा. आज पहले hi दिन गाला दबा रही हैं आगे पता नहीं क्या क्या दबा देंगी.

करुणा : ाचा तो ये बात है अभी बताती हूँ क मैं क्या क्या दबा सकती हूँ.

इतना कह कर दीदी ने मेरे लैंड को पेण्ट क ऊपर से पकड़ कर दबा दिया जिससे बाइक का संतुलन बिगड़ने लगा.

अमित : दीदी क्या कर रही हो हम गिर जायेंगे . छोड़िये इसे छोड़िये

करुणा : अब बोल दबाऊं क्या?

अमित : नहीं नहीं प्लीज छोड़िये

करुणा : टेंशन मत ले मैं इसे कुछ माहि होने दूंगी अब ये मेरा है. इसे तो मैं प्यार करुँगी.

अमित : आप सच मच पागल हो

करुणा : है मैं पागल हूँ तेरे प्यार में पागल हूँ तेरे लिए पागल हूँ. तू मेरा जणू है मेरा शोना

दीदी फिर से मेरी गर्दन पर किस करने लगी और अपनी जीभ मेरी गर्दन पर चलने लगी.

अमित : दीदी प्लीज हम रोड पर हैं कण्ट्रोल योरसेल्फ

करुणा : क्या करूँ कण्ट्रोल नहीं हो रहा पता नहीं तुमने कोण सा जादू चला दिया है.

ऐसे hi शरारत करते हम घर पहुँच गए और दीदी उछलती कूदती हिरणी की तरह अंदर चली गयी . उनको ऐसे खुश देख कर मुझे भी ाचा लगा सचमुच छोटी बच्चियों की तरह करती हैं करुणा दीदी भी. जो भी हो करुणा दीदी जहाँ भी जाती हैं खुशियां और हसी बिखेर देती हैं . मैं भी तो मॉल में रीमा को देख कर गुस्से में आ गया था मगर कैसे दीदी ने मेरा सारा गुस्सा काफूर कर दिया .मैं बाइक स्टैंड पर लगा कर अंदर चला गया. शाम हो रही थी मौसी ने चाय क साथ पकोड़े बना लिए. मौसी ने साफ कह दिया क आज भी मुझे यहीं रुकना है और सुबह मैं यहीं से कॉलेज चला जॉन. मगर मैं इस बात से दर रहा था क कहीं रत में कुछ गड़बड़ न हो जाये क्यूंकि सुबह भी मेरा मौसी क साथ और फिर करुणा दीदी क साथ जो सन हो गया था उससे मुझे दर था क कहीं रत में इससे आगे बात न बाद जाये जिसके लिए मैं अभी तैयार नहीं था. भगवन ने भी मेरी आवाज़ सुन ली और मुझे अंकल का फ़ोन आ गया.

अंकल : अमित कहाँ हो तुम इस वक़्त ?

अमित : नमस्ते अंकल . मैं इस वक़्त रीता मौसी क घर हूँ.

अंकल : तो आज गाओं नहीं गए ? अछि बात है तुम ऐसा करो अभी घर आ जाओ मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है . क्या तुम आ सकते हो?

अमित : मैं अभी अत हूँ अंकल .

मैंने अंकल से बात कर क कॉल कट की और मौसी को बता दिया क मैं वापिस जा रहा हूँ.



मौसी मुझे मन करे रही थी मगर मैंने उन्हें बता दिया क अंकल को मुझसे ज़रूरी काम है. न चाहते हुए भी मौसी ने मुझे परमिशन दे दी मगर उनके चहरे से साफ ज़ाहिर था क उन्हें मेरा जाना ाचा नहीं लग रहा. करुणा दीदी भी नाराज़ हो रही थी मगर मैं समझा दिया क जाना ज़रूरी है. मैं सब से मिल कर मोहित क घर वापिस आ गया .
 
भाई अपडेट लिख रहा हूँ अगर कम्पलीट हुआ तो पोस्ट करूँगा वर्ण कल
 
अपडेट 93



घर आने पर आंटी मुझसे थोड़ा नाराज़ हुई क मैं बिना बताये कहाँ चला गया था शायद वो सोच रही थी क मैं अंकल ने जो मेरे नाम प्रॉपर्टी की है उसकी वजह से कहीं गया हूँ मगर मुझे नार्मल देख उन्होंने इस बारे में बात नहीं की. आंटी को बताकर में प्रैक्टिस क लिए निकल गया. आज प्रैक्टिस पर लये गया था तो यहाँ से भी देर से फ्री हुआ और मंजू म क घर भी देर से पहुंचा . पर मम ने कुछ नहीं कहा क्यूंकि उनको भी पता था क कॉम्पीटीशन की वजह से मैं एक्स्ट्रा म्हणत कर रहा हूँ. मम ने आज कॉलेज न आने क पूछा तो मैंने बता दिया क ज़रूरी काम से गया था अचानक जाना पड़ा इस लिए बता नहीं पाया . अब तो जैसे रूटीन hi बन गयी थी क पहले मैं मम क घर आ कर नाहटा था फिर पड़े . मम से कोई खास बात नहीं हुई . मम शॉपिंग पर जाना चाहती थी और मैंने भी सोचा था संडे को टाइम निकल लूंगा पर नहीं निकल सका . मम ने तो कुछ नहीं कहा पर मैंने सोच लिया क अब जिस दिन भी टाइम मिला ये काम ज़रूर करूँगा. रत का खाना खा कर मैं बीएड पर लेता शिवानी क साथ आगे बढ़ने पर सोच रहा था . एक दिल कह रहा था क मुझे ये नहीं करना चाहिए एक दिल कह रहा था क शालू क लिए ये करना hi होगा, उसने मेरे लिए कितना बड़ा जोखिम लिया और अगर वो समय पर न अति तो इसी शिवानी की वजह से मैं आज कहाँ होता. इतने दिनों से मैं शालू से न मिला था न बात की थी . मैं सोच रहा था क उसकी प्रॉब्लम सोल्वे करने क बाद hi उससे मिलूं अगर मैं पहले उससे बार बार मिला और कहीं किसी ने देख लिया तो उसके लिए मुश्किल हो सकती है. शिवानी की माँ की वजह से मैं शिवानी क साथ कुछ ऐसा वैसा करने से दर रहा था क कहीं इससे उनको धक्का न लगे . वो मुझे बीटा मानती हैं और उन्हें मेरे बारे में पता चला तो? शिवानी की देख कर लगता है क वो फॉरवर्ड लड़की है यानि क वो पहले भी किसी न किसी से फिजिकल हो चुकी होगी ऐसे में उसे कोई खास फरक नहीं पड़ेगा पर फिर भी मन कहीं न कहीं संकुचित सा हो रहा था क कहीं मेरे हाथों किसी का बुरा न हो जाये . मैं अपने hi ख्यालों में खोया था क आंटी दूध का गिलास ले कर आ गयी. वो कब आयी मुझे पता भी नहीं चला. मुझे सोच में दूना देख कर वो मेरे पास hi बैठ गयी और मेरे माथे पर हाथ रखा.

आंटी : क्या सोच रहे हो?

अमित : आंटी आप कब आयी ?

आंटी : जब तुम अपने ख्यालों में खोये हुए थे. क्या सोच रहे थे जो तुम्हे मेरे आने का भी पता नहीं चला?

अमित : कुछ नहीं आंटी बस ऐसे hi

आंटी : अगर तुम मुझे अपना समझते hi तो शेयर कर सकते हो शायद मैं कोई मदद कर सकूँ ?

अमित : आंटी आप मेरे लिए कितनी खास हो क्या ये साबित करने की ज़रूरत है? अंकल और आप मेरे माता पिता की तरह hi तो हैं. मैं एक उलझन में हूँ बस उसी क बारे में सोच रहा हूँ.

आंटी : अगर मुझे बताओ तो शायद कोई हल बता दूँ

अमित : एक दोस्त की मदद करनी है जिसने मुश्किल वक़्त में मेरी मदद की थी पर लग रहा है शायद इस वजह से किसी और क साथ बुरा हो जायेगा . एक तरफ दोस्ती का फ़र्ज़ है दूसरी तरफ इंसानियत.

आंटी : हम्म्म क्या इससे किसी का कोई ऐसा नुकसान हो रहा है जो उसके लिए खतरनाक है?

अमित : शायद नहीं पर उसे बुरा लगेगा और फिर मैं खुद की नज़र में गिर जाऊंगा .

आंटी : और अगर तुमने अपने दोस्त की मदद न की तो ?

अमित : तब भी मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाउँगा

आंटी : अगर तुम्हे पता है क तुम्हारे इस काम से किसी का कोई नुकसान नहीं हो रहा और सिर्फ तुम्हे ये दर है क वो क्या सोचेगा या तुम्हे तुम्हारी सेल्फ रेस्पेक्ट ऐसा करने नहीं दे रही है तो तुम्हे एक बार अपने दिल से ये बात सोचनी चाहिए क तुम्हारे लिए दोस्ती इम्पोर्टेन्ट है या सेल्फ रेस्पेक्ट. और एक बात मैं तुम्हे बता दूँ क सेल्फ रेस्पेक्ट को बचने से भी तुम खुद को माफ़ नहीं कर पाओगे क्यूंकि जिस दोस्त ने मुश्किल वक़्त में तुम्हारा साथ दिया था अगर तुम उसके लिए कुछ न कर ोये तो ये बात भी साडी उम्र तुम्हे चैन से जीने नहीं देगी. तुम जो करना चाहते हो उससे तुम्हारी सेल्फ रिस्पेक्ट जा सकती है. मगर दोस्त की मदद न करने से तुम्हारा ज़मीर तुम्हे कभी माफ़ नहीं करेगा. सेल्फ रेस्पेक्ट पर चोट हो तो कुछ देर बाद इंसान उस बात को भुला देता है मगर ज़मीर अगर घायल हो जाये तो वो साडी उम्र चैन से रहने माहि देता. तुम किसी की नज़रों में गिरने से बचने क लिए अपनी नज़रों में गिर जाओगे और ज़रा सोचो क अपने उस दोस्त का सामना कभी कर पाओगे आज जिसकी मदद करने में तुम इतना सोच रहे हो. सच्ची दोस्ती तो वो है जिसमे हम अपने फायदा नुकसान भूल कर अपने दोस्त क लिए क लिए कोई भी कीमत चुकाने क लिए तैयार हों.

अमित : आप ठीक कह रही हैं आंटी मैं किसी की नज़र में गिर जाऊंगा इससे कोई फरक नहीं पड़ेगा किसी को मगर मैं दोस्त की मदद न कर क अपनी नज़रों में hi गिर जाऊंगा जो मुझे कभी चैन से रहने नहीं देगी. आपने मुझे सही रास्ता दिखा दिया है आंटी शुक्रिया.

मैंने आंटी को गले लगा लिया और उनके गलों पर एक किश कर दी.

आंटी : बस ? इतनी सा hi इनाम मिलेगा?

मैंने आंटी क सर क पीछे हाथ रखे और उनके होंठो पर होंठ रख कर एक लम्बी स्मूच दे दी .

आंटी : बस ? इतना ...

अमित : कम्पटीशन क बाद आपको इतना इनाम दूंगा क अगले दिन बीएड से उठ नहीं पाएंगी

मेरी बात से आंटी शर्मा गयी

आंटी : धत्त ! अब दूध पि ले मैं चलती हूँ और अब आराम से सो जाना.

आंटी मुहे किश कर क चली गयी और मैं दूध पि कर लेट गया . आंटी ने बिलकुल सही कहा था दोस्ती क लिए फायदा नुकसान नहीं देखा जाता . एक पल में hi आंटी मेरे सरे सोच विचार ख़तम कर दिए और मुझे समझ फैसला लेने में आसानी हो गयी. शिवानी की नज़र में अगर मैं गिर भी गया तो कोई बात नहीं पर शालू की मदद हर हल में करूँगा. वैसे भी शिवानी का इससे कोई नुकसान तो नहीं होने वाला. मैं चैन से सो गया क्यूंकि अब मेरी शंका दूर हो चुकी थी.

अगले दिन पहले लेक्चर में मैं फिर क्लास क बहार था क्यूंकि कल न आने की वजह से चंद्रकांता म ने मुझे बहार निकल दिया था जबकि मोहित को वार्निंग देकर छोड़ दिया. पता नहीं मम को मुझसे क्या प्रॉब्लम है. खैर मंजू म ने मुझे क्लास में बिठाया. फ्री लेक्चर में आज मीनल अकेली hi आयी थी कैंटीन में क्यूंकि उसे भी रीमा पर गुस्सा था क उसने उससे ये बात छुपाई थी क वो शीना मोंटी की बहिन है. सुबह कॉलेज एते वक़्त मीनल ने कहा था क वो रीमा से दोस्ती तोड़ लेगी . मीनल मैं और मोहित कैंटीन में बैठे हुए थे की रीमा भी आ गयी. मैं रीमा को देख कर अपनी जगह से उठ कर बहार निकल गया. रीमा से मैं बात भी करना नहीं चाहता था . जबकि रीमा मेरे इस बेहेवियर से हैरान हो रही थी. शायद मीनल ने अभी रीमा को नहीं बताया था. मैं बहार आया तो सामने से राधा और नेहा दीदी भी आ रही थी और मुझे देखते hi मेरे पास आ गयी. दोनों के चहरे पर टेंशन देख कर मुझे लगा क दोनों किसी प्रॉब्लम में हैं.

अमित : क्या बात है दीदी आप दोनों टेंशन में क्यों हैं?

नेहा : नहीं तो ऐसी कोई बात नहीं है

राधा : दीदी अब तो बता.......

नेहा : मैंने खा न कोई बात नहीं है. और बता तुम्हारा कम्पटीशन कब है?

अमित : मेरा कम्पटीशन तो कल है पर आप मुझसे क्या छुपा रही हैं ?

नेहा : ऐसी कोई बात नहीं है . भला मैं तुमसे क्या छुपाउंगी

अमित : आप झूठ बोल रही हैं आपके चहरे पे साफ नज़र आ रहा है क आप बात छुपा रही हैं और ज़रूर कोई बड़ी बात है जो आप टेंशन में हैं. राधा तुम बताओ क्या बात है

राधा : दीदी बता दो प्लीज

नेहा : ऐसी कोई बात नहीं है बस वो मैं अपना असिगनमेंट पूरा नहीं कर पायी तो मुझे पनिशमेंट मिले अब इस बात क लिए क्या हम टीचर्स से लड़ेंगे?

अमित : बात कुछ और है दीदी अगर आप मुझे अपना भाई मानती हैं तो बता दीजिये वर्ण आपकी मर्ज़ी

नेहा : ये तू क्या कह रहा है अमित ? भगवन जनता है मैंने हमेशा दिल से तुझे अपना मन है. ऐसी बातें कर क मेरा दिल मत तोड़ो. तू जानना चाहता है न क्या बात है तो ठीक है मैं बताउंगी पर पहले कल तू मुझे कॉम्पीटीशन जीत क दिखा फिर मैं तुझे बताउंगी और वडा कर तब तक तू इस बारे में न सोचेगा न पूछेगा . मैं खुद तुझे बताउंगी. और राधा तू भी इसे कुछ नहीं बताएगी जब तक मैं न कहूं

दीदी ने इतना कह कर मेरी ज़ुबान बंद कर दी पर दिमाग में ये बात घूमने लगी क आखिर दीदी किस वजह से परेशां हैं. राधा बताना चाहती थी पर दीदी ने बताने नहीं दिया. ज़रूर कोई बड़ी बात होगी वर्ण दीदी राधा को नहीं रोकती. लेक्चर ख़तम होने तक हम इधर उधर को बातें करते रहे पर मैं देख रहा था क राधा दीदी पर इस बात से नाराज़ लग रही थी क उन्होंने ने राधा को बात नहीं करने दी. खैर इसके इलावा कॉलेज में कोई खास बात नहीं हुई. मीनल और रीमा में क्या बहुत हुई ये मुझे नहीं पता थी और न hi मीनल ने इस बारे में मुझे कुछ बताया . मेरा मंद अपने hi सोच विचार में उलझा था तो मैंने भी नहीं पुछा.

आज शिवानी को अपने पापा क साथ कहीं जाना पद गया किसी ज़रूरी काम से तो उसका फ़ोन आ गया क वो आज नहीं आ पायेगी. उसके लिए वो सॉरी फील कर रही थी पर मैंने उसे समझाया क हम कल परसों में फिर मिल लेंगे.

शाम को प्रैक्टिस करते वक़्त कोच सब ने कल सचेडूले समझा दिया. उन्होंने बताया क बॉयज कॉलेज में कम्पलीशन होंगे और हमें 10 बजे से पहले वहां पहुंचना है. वो हमें वहीँ मिलेंगे. नीरज ने पेरी पीठ थपथपाते हुए कहा क ये मेरे लिए आसान होगा और कल वो खुद मुझे ले कर जायेगा घर से पिक कर क. आज प्रैक्टिस पर ज्यादा टाइम लगा और कोच साहब क लेक्चर ने भी टाइम लिया तो मैं कुछ ज्यादा hi देरी से मम क घर पहुंचा.

मंजू म : आज इतनी देर से आये हो कहाँ रह गए थे ?

अमित : कल कम्पटीशन है तो कोच साहब ने थोड़ा ब्रीफिंग की जिससे टाइम लगा.

मंजू म : तो रहने देते आज

अमित : मुझे आपके हाथों मर थोड़ा कहानी थी छुट्टी कर क

मंजू म: ऐसी भी कोई बात नहीं है. तुम जस्ट बता दिया करो . गुस्सा तब अत है जब बिना बताये गायब हो जाते हो.

अमित : फिर भी मुझे ाचा नहीं लगता अगर बिना आपसे मिले घर चला जाता तो. मुझे पैट आप कहें ता न कहें पर आप मेरा इंतज़ार करती हैं.

मंजू म : वो तो करुँगी hi . मेरी ज़िन्दगी तुम्हारे सिवा और है hi कौन.

मंजू म जिस संजीदगी से मेरे साथ बात करती थी मैं हर बार उनकी मायूसी को महसूस कर क उनके दर्द को फील करने लग जाता. वो मेरे कहने से अब थोड़ा बहुत हसने लगी थी और मेरे साथ खुश रहती थी मगर एक औरत को प्यार की ज़रूरत होती है जो उसे उसका पार्टनर hi दे सकता है शायद मंजू म को भी उसी की ज़रूरत थी मगर उन्होंने तो जैसे इस बारे में सभी रस्ते बंद कर दिए थे. उनके अतीत में जो ज़ख़्म थे वो उन्हें इस तरफ आगे बढ़ने hi नहीं देते थे. खैर आज मम ने पड़े नहीं करवाई और मेरे साथ बस बातें की. कल क लिए उन्होंने मुझे बेस्ट ऑफ़ लक कहा और मैं घर आ गया. आज अंकल भी घर पर थे और उन्हें भी पता था क मेरा कम्पटीशन है इस लिए आज डिनर पर वो मुझे ये hi समझते रहे कम्पलीशन क बारे में बिलकुल भी मत सोचना इससे इंसान नर्वस हो जाता है. उन्होंने ने मुझे खुद पर भरोसा रखने और अपनी hi क्षमता पर पार पाने की सलाह दी . यानि की खुद अपने hi रिकॉर्ड को तोड़ कर नए रिकॉर्ड बनाना और उन्हें भी तोडना बस यही सफलता का मूल है. मुझे रह रह कर नेहा दीदी का चेहरा यद् आ रहा था और मन में इस बात की चिंता थी क कहीं वो किसी मुसीबत में न हो फिर सोचा क ऐसी क्या बात हो सकती है . जो भी हो उन्होंने कहा था क कम्पटीशन क बाद बता देंगी. इस लिए ाचा यही होगा मैं अभी सिर्फ कॉम्पीटीशन क बारे में hi सोचूं . मैं मन से साडी चिंताओं को दूर हटा कर आराम से सो गया.

अगले दिन सुबह मैं रूटीन से एक्ससरसीसे कर क घर आ गया और नाश्ता किया. आंटी अंकल ने मुझे आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी. मैंने गाओं फ़ोन कर क सब से बात की और उनसे भी आशीर्वाद लिया. मंजू म ने भी मुझे खुद फ़ोन पर बेस्ट ऑफ़ लक कहा और इसी तरह नैना दीदी करुणा दीदी से भी बात हुई. राधा ने भी मुझे फ़ोन कर क बीट ऑफ़ लक कहा. उसका फ़ोन करना मुझ ाचा लगा आज कितने दिनों बाद उसने मुझे फ़ोन किया था. आज मैंने कॉलेज तो जाना नहीं था इस लिए मैंने मोहित को कह दिया क वो अकेला चला जाये पर उसने कहा क ो मेरे साथ चलेगा. नीरज मुझे लेने आ गया और हम तीनो एक साथ बॉयज कॉलेज में चले गए.

बॉयज कॉलेज हमारे कॉलेज से छोटा था और देखने में भी उतना बढ़िए नहीं था. नीरज ने बताय क यहाँ क लड़के गुंडागर्दी क लिए मशहूर हैं और नीरज पर हमला भी इन्होने hi किया था . हमारे कॉलेज से अलग अलग गेम्स में पार्टिसिपेट करने क लिए लड़के पहुँच रहे थे. यहाँ कम्पटीशन में हमारे शहर क सब कॉलेज क स्टूडेंट्स ने आना था तो अछि खासी भीड़ नज़र आ रही थी. हमारे कॉलेज की तरफ से सब गेम्स क कोच और प्रोफ व् पहुँच चुके थे . हमने जा कर उनको रिपोर्ट किया .

प्रोफ व् : तुम आ गए अमित शाबाश मुझे तुमसे बहुत उम्मीदें हैं और मैं जनता हूँ तुम इसे ैसिलय जीत जाओगे इस लिए सिर्फ खेल पर ध्यान देना और किसी बात पर नहीं .

नीरज : आप ने ठीक कहा सर अमित आसानी से कवर करेगा. मैं कोच साहब क साथ इसपर खास ध्यान रखूँगा.

प्रोफ व् का इशारा क्या था नीरज समझ गया था पर मुझे पता नहीं था. बाद में नीरज ने बताया क यहाँ क बॉयज चीटिंग करने में माहिर हैं इस लिए तुम्हे सिर्फ गेम पर ध्यान देना है और चौकन्ना रहना है.

मोहित : अरे वो देख ये तो मोंटी है न . ये यहाँ क्या कर रहा है?

मोहित ने एक तरफ इशारा किया जहाँ मोंटी और उसके दोस्त कुछ लड़कों से बात कर रहे थे.

अमित : है तो वही पर ये फर्स्ट ईयर वालों क लिए क्यों आएगा ? चलो हमें क्या तू छोड़ उसको

नीरज : ये तो रेसलिंग वाले लड़के hi हैं फाइनल वाले. इन्होने hi तो मुझ पर हमला किया था. मोंटी क्यों इनसे मिलने आया है?

मैंने गौर किया तो उनमे 2 लड़कों को मैं पहचान गया . ये वही थे जो उस दिन नीरज को मरने वालों में शामिल थे. मोंटी का इनके साथ क्या कनेक्शन है ? कहीं नीरज पर हमला मोंटी की साज़िश तो नहीं?

अमित : तो क्या तुम पर मोंटी ने करवाया था ?

नीरज : वो ऐसा नहीं कर सकता . उसे मुझसे क्या दुश्मनी होगी. इन लोगों की मेरे साथ पर्सनल प्रॉब्लम है क्यूंकि मैंने इनको हराया था. वो जो रेड T-shirt में है ये इस कॉलेज का रेसलिंग सबसे बढ़िए प्लेयर है और लास्ट कॉम्पीटीशन में इसे मैंने हरा दिया था बस उसी वजह से इसने हमला किया था.

अमित : तो तुमने कुछ किया क्यों नहीं ?

नीरज : तुम्हे क्या लगता है मैंने इसे कुछ नहीं कहा? अछि तरह सेवा की थी इसकी भी बस मैं इनकी तरह गुंडागर्दी नहीं करता. पर कुछ तो बात ज़रूर है आखिर ये मोंटी इसके साथ क्या बात कर रहा होगा. ऐसे करो तुम दोनों कोच साहब क पास जाओ मैं अभी अत हूँ.

अमित : आप कहाँ चले?

नीरज : चिंता मत करो . यहाँ कुछ दोस्त हैं मेरे उनसे मिल कर आया.

नीरज चला गया अपने दोस्तों से मिलने और हम कोच साहब क पास आ गए. इस कॉलेज में हमारे कॉलेज की तरह सुविधाएं नहीं थी पर फिर भी अर्रंगेमेन्ट्स सरे किये हुए थे. 11 बजे साडी फॉर्मलिटीज पूरी होने क बाद कम्पटीशन शुरू हो गए. सब गेम्स अलग अलग जगह पर एक साथ शुरू हो गए थे. सब प्लेयर्स फर्स्ट ईयर क होने क कारन कोई ज्यादा गड़बड़ वाला काम नहीं था. नीरज अपने दोस्तों से मिल कर वापिस आ गया. उसके चहरे पर कुछ चिंता नज़र आ रही थी उसने आते hi कोच साहब से इस बारे में बात की जब मैंने उससे पुछा तो उसने इतना hi कहा क तुम बस ध्यान से खेलना और चौकन्ना रहना . मुझे लगा वो कुछ छुपा रहा है पर मैंने इस बात पर ध्यान देने की बजाये अपने कपडे निकल कर कस्टम पेहेन लिए और तैयार हो गया.

वेट केटेगरी क हिसाब से कम्पटीशन शुरू हो गए मोहित और नीरज मेरे साथ hi बैठे रहे . मेरी टर्न लास्ट में थी क्यूंकि मैं सबसे हैवी वेट केटेगरी में था. 1 बजे क करीब मेरी टर्न आयी हम चार कॉलेजेस में से 4 hi प्लेयर थे मैंने अपने सामने वाले प्लेयर को आसानी से मत दे दी . मेरी तरह बॉयज कॉलेज क लड़के ने भी अपने सामने वाले को हरा दिया और लास्ट ने हमारा आपस में कम्पटीशन था. जब मैंने उस लड़के को देखा तो मुझे यद् आया क ये लड़का तो सुबह मोंटी क साथ खड़े लड़कों में शामिल था. देखने में भैंसे जैसा था भरी भरकम. नीरज ने मुझे अलर्ट रहने को कहा . रेफ़री क सीरी बजाते hi हमारा मैच शुरू हो गया. वो लड़का सिर्फ देखने hi भरी नहीं था उसमे ताकत भी बहुत थी और चहरे से गुंडा टाइप लग रहा था. मगर मैं भी कहाँ काम था . मैं तो गाओं की मिटटी में तैयार देसी सांड था. उसने जैसे मेरी उँगलियों में उंगलियां फसकर मेरे हाथ मरोड़ने की कोशिश की मैंने एक डैम से पूरा नीचे झुक कर उसके हाथ hi उलटे कर दिए जिससे उसकी उंगलियां मुद गयी. ये सब इतनी फुर्ती में हुआ क उसे समझ नहीं आयी. उसका टारगेट शायद मेरी उंगलियां तोडना hi रहा होगा वर्ण ऐसे वो नहीं करता क्यूंकि इस फॉर्मेट में तो तो हाथ की गृप गर्दन पर राखी जाती है. मगर ये देसी फॉर्मेट उसने इस्तेमाल कर क क्लियर कर दिया क वो सिर्फ लड़ने आया है. मेरी जगह कोई और होता तो बचना मुश्किल था. पर मैंने फुर्ती से उसकी उंगलियां उलटी मरोड़ कर उसे ऊपर उठाने की कोशिश की तो उसके मुँह से एक तेज़ कराह निकली जिसकी वजह से रेफ़री ने सिटी मर कर हमें रोका. और इस तरह न करने की वार्निंग दी. कोच सर भी हैरान परेशां देख रहे थे. वहीँ वो रेड T-shirt वाला लड़का जिसने नीरज पर हमला किया था वो भी उस लड़के को कुछ इंस्ट्रक्शंस देने लगा.

रेफ़री ने फिर से सिटी बजा कर मैच शुरू करवाया तो इस बार उस लड़के ने मेरी गर्दन पर hi गृप बनाई शायद उसे समझ आ गयी होगी क यहाँ देसी स्टाइल से बात नहीं बनेगी. मैंने भी उसकी गर्दन पर गृप टाइट की तो उसने एक डैम से मेरी बाजु मरोड़ कर पीछे आते हुए मेरे घुटने क पीछे से अपनी यदि को ज़ोर से मारा और मेरा घुटना नीचे लग गया . वो यही नहीं रुका उसने लगातार 3-4 बार ज़ोर से अपनी यदि मेरे घुटने की बक्सीडे ओर मरी जिससे मेरे घुटने में तेज़ दर्द होने लगा और मेरे मुँह से भी कराह निकल गयी.

“ फ़ाउल “ रेफ़री ने एक डैम से सिटी मर कर उसे दूर हटाने की कोशिश की नगर जाते जाते वो फिर से मेरे घुटने को दबा गया.

कोच : तुम ठीक तो हो अमित ? तुम्हारा घुटना कैसा है?

अमित : दर्द हो रहा है ओर मैं ठीक हूँ.

नीरज : मैंने कहा था चौकन्ना रहना. क्या तुम कंटिन्यू कर सकते हो?

अमित : इतस ok भैया इतनी भी नहीं लगी.

नीरज : अब उसे मौका मत देना और ध्यान से ये मैच खेलने नहीं तुम्हे चोट पहुँचाने आया है.

मैं नीरज की बात का मतलब समझ गया ज़रूर मोंटी ने hi कहा होगा. मैंने अपने घुटने की थोड़ी बहुत मूवमेंट की और फिर से रेडी हो गया. उस लड़के को भी वार्निंग दे दी गयी थी. इस बार सिटी बजते hi उस लड़के ने मेरी गर्दन पर गृप करने की बजाये मेरी तंग पर हमले किया. और जिस घुटने पर उसने पहले हमला किया था उसी घुटने को पकड़ कर उसने दबाते हुए मुझे गिराने की कोशिश की. मुझे भी अंदेशा था क वो ऐसी hi चल चलेगा इस लिए मैं तैयार था जैसे hi उसने मेरी तंग पकड़ी मैंने पोजीशन सँभालते हुए पहले उसे ब्लॉक किया और अपना पूरा ज़ोर लगा कर उसे पीछे धकेल कर गिरते हुए अपना वही घुटना उसकी छाती पर ज़ोर से दे मारा. मेरे धक्का देने से पहले वो पीछे को गिरा और मेरे घुटने क ज़ोरदार वॉर से उसकी छाती में तेज़ दर्द हुआ. मैंने बिना उसे मौका देते हुआ जल्दी से उसको पलटा और उसकी कमर को दोनों बाजुओं से जकड़ते हुए उसे उठाकर पीछे को पटक दिया. मैंने 3 बार लगातार उसे ऐसे hi पटका. उसका वेट जायदा होने की वजह से वो अपने hi बॉडी वेट की वजह से ज्यादा चोट खा गया और मैंने आखिरी दो चलते हुए उसकी कमर और पेट को ज़ोर से दबोचते हुए उसे जकड कर लेट गया. पहले घुटने का वॉर फिर उठाकर पटकने से उसकी बॉडी में जो पैन उठी थी उसका फायदा उठाते हुए मैंने उसे जिस तरह पटका उससे वो ज्यादा देर इसे बर्दाश्त नहीं कर पाया और गिव उप कर गया. उसके गिव उप करते hi नीरज और मोहित शोर मचाते उछालते हुए मेरे साथ गले लग गए.

नीरज : शाबाश ! मैं जनता था तू इसे आसानी से हरा देगा . ये सेल सोचते हैं क कोई नया लड़का है आसानी से काबू में आ जायेगा उन्हें क्या पता तू इन सब का बाप है.

मोहित : शाबाश मेरे यार तूने कमल कर दिया एक hi वॉर में धुल छठा दी.

कोच : वेल दोने माय बॉय. पर ये सब तूने कहाँ से सीखा . ऐसे लग रहा hi क प्रोफेशनल और देसी रेसलिंग का कॉम्बिनेशन है.

अमित : जी सर वो hi तो है . सब आपका आशीर्वाद और नीरज भैया की गाइडेंस है .

मेरा मैच ख़तम होते hi रेसलिंग क मुकाबले ख़तम हो गए. मगर बाकि अभी चल रहे थे. मुझे फर्स्ट प्राइज गोल्ड मैडल मिला कम्पटीशन अभी 4 बजे तक चलने थे मगर हम फ्री हो गए थे. बॉयज कॉलेज क वो लड़के हो नीरज क दुश्मन थे वो हमें घूर घूर कर देख रहे थे. कोच साहब ने भी नोट कर लिया वो नहीं कहते थे क कोई झगड़ा हो तो उन्होंने हमें वापिस चले जाने को कहा और खुद हमें बहार तक छोड़ने आये साथ में ये भी कह दिया क कल सुबह टाइम से कॉलेज आ जाना कल प्रिंसिपल सर सबसे मिलेंगे. हम तीनो वहां से वापिस निकल पड़े.

मोहित : भैया एक बात तो बताओ आपको नहीं लगता वो अमित पर जान बुझ कर ऐसे हमला कर रहा था ?

नीरज : लगता क्या है ? मैं तो पहले hi जनता था.

नीरज की बात से हम दोनों शॉकेड हो गए और नीरज को देखने लगे.

मोहित : आप जानते पहले से जानते थे?

नीरज : मैंने जब कहा था क मैं अपने दोस्तों से मिलने जा रहा हूँ तो मैं यही पता लगाने गया था. मोंटी को देख कर मुझे शक हो गया था इसी लिए मैंने अपने दोस्त से पता लगाने को कहा. उसने उनकी बातें उनके पास खड़े हो कर सुन ली . मोंटी ने उन लोगों अमित को गेम में घायल करने को कहा था इसी लिए तो उसने पहले इसकी उंगलियां और फिर घुटने पर हमला किया.

मोहित : इस मोंटी को तो देख लेंगे. गुंडे बुलाने लगा अब

नीरज : तुम लोग शांत रहो . मोंटी की शिकायत भी को तो कुछ साबित नहीं होगा इस लिए शांत रहो जब वो कोई गलती करेगा तो फिर उसे सबक सिखाएंगे . एक डैम से कुछ किया तो हम hi गलत साबित होंगे और प्रिंसिपल सर का तो तुम्हे पता है वो इनडिस्कॉपलीने बर्दाश्त नहीं करते.

अमित : आप ठीक कह रहे हो भाई . हमें शांत hi रहना होगा पर जिस दिन इसने गलती की पहले मैं अचे से इसकी धुलाई ज़रूर करूँगा.

मोहित : हम दोनों करेंगे . उसने तुम पर हाथ डाला है तो मैं कैसे पीछे रह सकता हूँ.

नीरज : दोनों नहीं तीनो . मैं भी तो साथ में हूँ तुम लोगों क मुझे क्यों भूल गए. चलो अभी पहले पार्टी करते हैं आज की जीत क नाम.

मोहित : बिलकुल आज की जीत क नाम.

हम तीनो पहले रेस्टोरेंट गए और वहां से खा पीकर मौज उड़ाते हुए घर गए. नीरज तो मुझे अपने घर ले जाना चाहता था पर मैंने फिर किसी दिन आने का बोल दिया. घर आ कर मोहित ने जब आंटी को बताया क मैं जीत कर आया हूँ तो वो भी खुश हो गयी और मुझे गले लगा लिया. मोहित ज़रा सा दूर था तो आंटी ने मेरे कान में कहा

आंटी : इस जीत का इनाम तुम्हे आज रत में मिलेगा तैयार रहना.



आंटी मेरे कण में ये बात कह कर पीछे हैट गयी और मेरी आँखों में देखते हुए मुस्कुराने लगी. अंकल घर पर नहीं थे मगर फ़ोन पर hi उनसे बात हो गयी वो भी मेरी इस जीत से बहुत खुश थे. मैंने माँ बाबा को फ़ोन पर बताया तो वो भी बहुत खुश हुए फिर मैंने सब को बताया अब hi मुझे बधाई देने लगे. फिर एक एक कर क मैंने नैना नेहा करुणा राधा रीता मौसी रजनी मौसी निधि दीदी शिवानी शालू सब को बताया . सब खुश थे शिवानी ने आज मिलने का पुछा तो मैंने कल का कह दिया. नैना और करुणा दीदी तो मुझसे मिलने को कहने लगी पर मैंने सैटरडे का बोलै . आज मैंने कॉलेज में पहला कम्पटीशन जीत कर अपनी गेम की शुरुआत करदी थी जिसकी वजह से मेरी एडमिशन हुई थी इस कॉलेज में. मोहित ने मीनल को बताया और चुपके से मेरी बात उससे करवा दी उसने भी मुझे बधाई दी और पार्टी मांगने लगी. सब से बात करते करते काफी टाइम लग गया और ख़ुशी भी बहुत हो रही थी सब को मेरी जीत पर खुश देख कर . इतनी देर मैं बातों में hi डूबा था क मुझे पाने घुटने की दर्द का एहसास hi नहीं था जैसे hi फ्रेश होने मैं अपने रूम में गया तो नहाते वक़्त घुटने की दर्द उभर कर सामने आ गयी. मिठे भैंसे ने पूरे ज़ोर से हमला किया था स लिए अब दर्द ज्यादा महसूस हो रहा था. यहाँ तक hi अब घुटने पर वज़न डालने से दर्द महसूस होने लगा था. इस लिए मैंने दायीं तंग पर काम वजन दाल रहा था. सोचा पैन किलर खा कर कुछ देर आराम करता हूँ तो मैं दवा खा कर लेट गया और पता hi न चला कब मेरी आँख लग गयी.
 
अपडेट 94



मैं आराम से सो रहा था क फ़ोन बजने से मेरी आँख खुली . मैंने देखा तो मंजू म का फ़ोन था. फ़ोन उठाने से पहले hi कट गया. मैंने टाइम देखा तो 5 बज चुके थे . 2 घंटे की नींद से काफी ाचा महसूस hi रहा था . मैं उठ कर बाथरूम जाने लगा तो घुटने में फिर से दर्द महसूस हुआ. शायद ये दर्द अभी कुछ दिन रहेगा खैर इस खेल में तो ऐसी चोटें लगती रहती हैं. मैं फ्रेश होकर रेडी होने लगा तो यद् आया आज कोच साहब ने शाम का छुट्टी का कहा था इसका मतलब आज फ्री हूँ. तो क्यों न शिवानी को बुला लूँ पर उसे तो मैंने मन कर दिया था. मोबाइल देखा तो यद् आया मंजू म ने कॉल की थी शायद उन्हें काम होगा ? मंजू म को तो मैंने शॉपिंग पर ले जाने का भी कहा था , आज फ्री हूँ तो क्यों न मम को शॉपिंग hi करवा दूँ? ये बात दिमाग में आते hi मैंने फैसला कर लिया क आज यही करता हूँ. मैंने फ़ौरन मम को फ़ोन मिलाया.

मंजू म : कहाँ हो ? फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे? क्या बना तुम्हारे मैच का?

अमित : अरे अरे इतने सरे सवाल एक साथ. जब आपका फ़ोन आया मैं सो रहा था इस लिए उठा नहीं पाया. और मैच का फैसला मैं आपको मिल कर बताऊंगा . आप अगर ट्यूशन पड़ा रही हैं तो बच्चों को छुट्टी दे दीजिये और तैयार हो जाइये हमें कहीं जाना है. मैं 20 मिनट में पहुँच रहा हूँ तब तक आप तैयार हो जाइये और जल्दी कीजिये बाये.

मंजू म : सुनो ...

मैंने उनके कुछ कहने से पहले hi फ़ोन काट दिया. मैंने भी अचे कपडे पहने यानि की अपनी जीन्स और T-shirt . नीचे आया तो आंटी हॉल में hi थे शायद वो भी अभी रेस्ट कर क उठे थे. मैंने आंटी को बता दिया क मैं किसी काम से बहार जा रहा हूँ और डिनर कर क hi आऊंगा. आंटी तो हैरान थी क आज प्रेक्टिस की बजाये मैं इस तरह तैयार हो क कहाँ जा रहा हूँ. मगर मैंने नीरज से मिलने का बहाना बना दिया और बाइक ले कर सीधा मम क घर पहुँच गया. मैंने बेल्ल बजायी तो मम ने दरवाज़ा खोला . मम ने आज पिंक सूट पहना था जिसमे वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. मैं उनको सर से पाऊँ तक देखने लगा तो मम ने मुझे यूँ घूरता प् कर मुझे अंदर आने को कहा.

मंजू म : क्या बात है आज प्रैक्टिस करने नहीं जाना था? और तुमने बताया नहीं क कम्पटीशन का क्या बना और मुझे कहाँ लेकर जाने वाले हो?

अमित : बस बस बस कितने सवाल पूछती हैं आप ? आज कम्पलीशन था तो प्रैक्टिस से छुट्टी है . और आज का मैच मैं जीत गया हूँ इसी ख़ुशी में सोचा आज आपकी शॉपिंग भी करवा दूँ और आज साथ में बहार खाना भी खाएंगे अगर आपको ऐतराज़ न हो तो. वैसे इस पिंक सूट में आज आप बिलकुल पिंक रोज लग रही हैं.

मेरी बात सुनते hi मम क चहरे पर शर्म की लाली आ गयी और एक बार तो वो किसी लड़की की तरह शर्मा कर निचे देखने लगी मगर खुद को सँभालते हुए अगले hi पल बोली.

मंजू म : ये फ़्लर्ट कॉलेज में hi किया करो समझे मेरे साथ ये सब नहीं चलेगा.

अमित : लो इसमें फ़्लर्ट कैसा ? मैंने तो जो सच है वो hi कहा है. मुझ पर यकीन न हो तो देख लेना आज अकेले बहार जा कर कोई न कोई आपको पर्पस कर hi देगा तब आपको पता चलेगा

मंजू म : बस बस ये बातें किसी और से कहना तुम बैठो मैं 2 मिनट्स में आयी.

मैं सोफे पर बैठ गया और मम अंदर रूम में चली गयी और कोई 10 मिनट्स में आयी. मम जब वापिस आयी तो मैंने गौर किया क वो हल्का मेकअप कर क आयी थी हालाँकि उन्हें ज़रूरत बिलकुल भी नहीं थी इसकी क्यूंकि वो तो पहले hi इतनी खूबसूरत थी.

मंजू म : चलें ?

अमित : चलिए पर इतना ध्यान रखियेगा क आज कहीं झगडे न हो जाएँ आपकी वजह से

मंजू म : अब मर खाने का इरादा है क्या? चुपचाप चलो

इतना कहते हुए भी मम क चहरे पर स्माइल थी जैसे उनको मेरी बातें सुन कर मज़ा आ रहा था. मैंने बहार निकल कर पुछा बाइक से जाना है कर पर तो मम ने साफ कह दिया क बाइक पर hi जाना है . कार से ट्रैफिक प्रॉब्लम होती है. सचाई तो ये थी क वो मेरे साथ बाइक पर बैठना ज्यादा पसंद करने लगी थी. मैं मम को पीछे बिठा कर मॉल पहुँच गया. मम ने अपने लिए कुछ कपडे देखने थे. वो एक बढ़िए डिज़ाइनर कलेक्शन वाले स्टोर में मुझे ले गयी. मैं देख कर खुश हो रहा था क अब वो सदी क इलावा अपनी पसंद से hi कड़े लेने आयी थी. मम जो भी सूट सेलेक्ट करती पहले मुझसे पूछती और मैं उनको यस और no कहता.

अमित : आप हर सूट मुझे दिखा कर hi क्यों सेलेक्ट करती हैं ? आपको अपनी पसंद से लेने चाहिए .

मंजू म : मुझे शॉपिंग करना नहीं अत . इसी लिए तो तुम्हे साथ लायी हूँ क तुम देख कर बता सको क कौन सा ाचा लगेगा मुझ पर. वैसे भी तो ये सब तुमने hi देखने हैं तो तुम्हारी पसंद क hi होने चाहिए न.

मंजू म तो ऐसे कर रही थी जैसे मैं उनका पति हूँ और वो मेरी बीवी जैसे बीवी अपने पति को रिझाने क लिए hi उसकी मर्ज़ी क काम करती है. मम क बार बार मुझे इस तरह सूट दिखने से सेल्स गर्ल ने समझा क शायद हम कपल हैं और उसने ऐसी बात कह दी क मम का चेहरा शर्म से लाल हो गया.

सेल्स गर्ल : मम आपके हस्बैंड की पसंद बहुत अछि है ये सूट आप पर वाकई में बहुत ाचा लगेगा एंड ी म सूरे क जो अपने पहना हुआ है ये भी इनकी hi चॉइस होगी. आपकी जोड़ी बहुत अछि है .

वैसे तो हम दोनों में आगे डिफरेंस बहुत था पर मम को देख कर उनकी आगे का अंदाज़ा लगाना मुश्किल था और मेरी भरी भरकम पहलवानी बॉडी की वजह से मैं अपनी उम्र से बड़ा लगता था. सेल्स गर्ल को आगे का अंदाज़ा नहीं हुआ होगा और मम की इस तरह बार बार मुझसे पूछने की वजह से वो मुझे मम का हस्बैंड समझ बैठी. अब लेडीज में मैं क्या बोलता पर मम भी इतनी शर्मा रही थी क वो बोल नहीं प् रही थी

मंजू म : असल में मेरे हस्बैंड ......

सेल्स गर्ल : आपके हस्बैंड आपकी बहुत केयर करते होंगे मैं समझ सकती हूँ . सर को देख क कोई भी कह सकता है क वो आपसे बहुत प्यार करते हैं. इनकी आँखों में आपके लिए प्यार और केयर नज़र आती है. यू अरे सो लकी

मम तो शायद सेल्स गर्ल को बताना चाहती थी क मैं उनका हस्बैंड नहीं पर सेल्स गर्ल ने पहले hi अपनी चोंच खोल दी. और मम उसकी बात से और भी ज्यादा शर्मा गयी. मम ने अपने लिए 3-4 सूट सेलेक्ट कर लिए थे इस लिए उन्होंने जल्दी से निकलना hi सही समझा वर्ण वो सलेसगिरल पता नहीं और क्या क्या कह देती. पर मैं इस बात से हैरान था क मम ने उसे सख्ती से कहा क्यों नहीं क मैं उनका हस्बैंड नहीं. हमने वो सूट पैक करवाए और उनके स्टोर क hi टेलर को सुइट्स की फिटिंग करवाने को बोल दिया क्यूंकि सूट तो रेडीमेड hi थे बस साइज क हिसाब से सेटिंग करनी थी. उन्होंने एक घंटे में सूट रेडी करने को बोलै तो हम तब तक मॉल घूमने का सोच कर स्टोर से बहार निकल आये.

अमित : आपने उसे बताया क्यों नहीं क मैं आपका हस्बैंड नहीं ?

मंजू म : चुप करो पहले hi उसने मुझे इतना ेम्बरके कर दिया . वो तो मुझे बोलने hi नहीं दे रही थी. मैंने भी इस लिए जल्दी जल्दी जान छुड़ाई . वैसे भी उसके समझने से क्या फरक पड़ता है.

अमित : वैसे उसकी भी गलती नहीं है . आपको देख कर तो कोई भी यही समझेगा क हम दोनों कपल हैं .

मंजू म : उसका दिमाग ख़राब था जो वो ऐसे बोल रही थी. वर्ण हम दोनों की आगे में कितना फरक है उसे पता चल जाये तो बेहोश हो कर गिर जाएगी.

अमित : वही तो मैं कह रहा हूँ. क इतना फरक होने क बाद भी पता नहीं चलता क्यूंकि आपकी आगे का कोई अंदाज़ा लगा hi नहीं सकता. आप तो अभी भी कॉलेज गोइंग गर्ल लगती हैं

मंजू म : मुस्कुरा कर ) पता है , तुम और तुम्हारी बातें.

अमित : शरत लगा लीजिये मैं अभी प्रूफ कर देता हूँ.

मंजू म : अगर नहीं कर सके तो ? सोच लो फिर मैं कुछ भी करने को कह सकती हूँ . मंज़ूर है?

अमित : मुझे तो मंज़ूर है . अगर मैं जीता तो फिर आपको मेरी बात माननी होगी.

मंजू म : मंज़ूर है ( अब बताती हूँ बच्चू शरत तो मैं hi जीतूंगी फिर तेरी ज़ुबान हमेशा क लिए बंद कर दूंगी हर वक़्त सताता रहता है )

मंजू म : चलो अब बताओ सबूत कैसे करोगे ?

अमित : ( कुछ देर सोच कर ) वहां देखिये वो 2 लड़के खड़े हैं. आप उनके पास अकेली जा कर कड़ी हो जाइये अगर उन्होंने आपको घुरा या आप पर कमेंट किया तो मैं जीता वर्ण आप

मंजू म : ( वो तो कॉलेज स्टूडेंट्स hi लग रहे हैं. वो भला क्यों मुझे कमेंट करने लगे ) चलो देखते हैं मगर तुम भी आसपास रहना.

अमित : चिंता मत कीजिये मैं पास में hi रहूँगा .

मंजू म चलती हुई उन लड़कों क थोड़ा नज़दीक जा कर कड़ी हो गयी. मैं भी उनसे थोड़ा डिस्टेंस पर खड़ा हो गया. मुझे पक्का यकीन था क वो लड़के कमेंट ज़रूर करेंगे पर एक दर भी था कहीं वो कोई गलत हरकत न कर दें. वो लड़के मैडम को घर कर देख रहे थे और उनकी नज़रें मैडम क बदन क हर हिस्से को घर रही थी जिसे देख कर मुझे उन पर गुस्सा आने लगा और खुद पर भी क मैंने मम को उनके पास क्यों भेजा.

लड़का 1 : देख यार क्या माल है , अगर इसे पता लें तो बात बन जाये.

लड़का 2 : सही कह रहा है यार , पिंक सूट में पिंकिश लग रही है . इसे तो बीएड पर मसलने का मन कर रहा है. मेकअप से तो लग रहा है क अभी इसकी शादी नहीं हुई चल हम hi खता खोल लेते हैं.

लड़का 3 : तुम बाद में आना सको पहले मैं जाता हूँ अगर बात बन गयी तो मिल कर मौज करेंगे.

मुझे उन लड़कों की बातों से गुस्सा आ रहा था . पता नहीं मम को उनकी आवाज़ सुनाई दे रही थी या नहीं. फिर एक लड़का मम क पास गया और उनसे बात करने लगा.

लड़का 3 : hello मिस क्या यहाँ अकेली हैं? अगर आपको ऐतराज़ न हो तो मैं आपको कंपनी दे सकता हूँ. वैसे बुरा न मानिये पर आप बहुत खूबसूरत हैं . क्या मेरे साथ कॉफ़ी पीना पसंद करेंगी.

उस लड़के की बातों से मम क चहरे पर टेंशन आने लगी . मुझे लगा कहीं मम गुस्से से उसे कुछ कह न दें वैसे भी शरत तो पूरी हो hi गयी थी इस लिए मैं जल्दी से मम क पास चला गया.

मंजू म : सॉरी मैं अकेली नहीं हूँ.

इतना कहते हुए मम ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

लड़का 3 : इतस ok मम

इतना कह कर वो लड़का वापिस चला गया और हूँ उनसे दूर जाने लगे तो फिर से उनकी बातें हमारे कानो में पड़ी.

लड़का 2 : क्या हुआ ये लड़का कौन है उसके साथ?

लड़का 3 : और कौन होगा देखा नहीं कैसे हाथ पकड़ रही है बर्फ hi होगा

मैंने उनकी ये बात सुन ली तो मम ने भी ज़रूर सुनी होगी पर उन्होंने ये ज़ाहिर नहीं किया. और हम चलते हुए उनसे दूर निकल गए.

अमित : तो हो गया फैसला ? मैं जीत गया. देखा कैसे वो लड़के आप को घूर रहे थे और उस लड़के की बातें तो आप ने सुन hi ली वैसे क्या कहा रहा था?

मंजू म : दिमाग ख़राब हैं उन लोगों क . उनको इतना भी नज़र नहीं आ रहा क मैं उनसे कितनी बड़ी हूँ. मेरा दिल कर रहा था एक थप्पड़ उसके मुँह पर लगा दूँ. साडी स्मार्टनेस निकल जाती बहार. कसूर उनका नहीं है मम आप हो hi इतनी खूबसूरत जो भी आपको देखेगा आप क पीछे लग hi जायेगा. मैं शरत जीत गया. अब आपको मेरी बात माननी होगी

मंजू म : ऐसे कैसे जीत गए तुम. वो लड़के तो लफंगे थे जो हर किसी को ऐसे hi कमेंट करते होंगे उनकी तो ये रोज़ की आदत होगी. कीवी जेनुइन आदमी कहे तो मैं मन भी लूँ.

अमित : क्या मतलब मन भी लूँ? क्या कोई जेनुइन आदमी आपसे दोस्ती करने को पूछेगा ता आप मन जाएँगी?

मंजू म : वैरी फनी ! तुम्हे ऐसा लगता है ? मैं तो तारीफ की बात कर रही हूँ.

अमित : मेरी तो आओ मन नहीं रही क्या मैं जेनुइन नहीं हूँ?

मंजू म : तुम बातें मत बनाओ अगर शरत जितनी है तो साबित करो वर्ण मैं जीत गयी.

अमित : ाचा चलो ठीक है. वैसे स्टोर का सेल्स मन कैसा रहेगा? वो तो लफंगा नहीं होगा.

मंजू म : वो तो सामान बेचने क लिए झूठी तारीफ करते hi रहते हैं उनकी छोडो

अमित : ऐसे तो आप हर बात पर कोई न कोई एक्सक्यूज़ देती रहेंगी. आप चीटिंग कर रही हैं अब आप हर मन लीजिये.

मंजू म : मैं कोई चीटिंग नहीं कर रही . चलो ठीक है देखते हैं क्या कहता है सेल्स मन. अगर उसने कोई गलत बात की तो तुम हर मन लेना.

अमित : आप मेरे साथ चलिए फिर वो कोई गलत बात माहि करेगा.

मंजू म : चलो कहना चलना है?

अमित : चलिए इसी मैं चले चलते हैं. आप की तो हर कोई तारीफ hi करेगा.

हम दोनों जिस स्टोर क बहार खड़े थे उसी में घुस गए. मम मेरे क्लोज थी जिससे लग रहा था क हम साथ में hi हैं. हम जब अंदर गए तो एक बार तो मम क पाऊँ ठिठक गए. और अंदर का नज़ारा देख कर मैं भी रुक गया. ये लेडीज उन्देर्गर्मेन्ट्स का स्टोर था. जिसमे निघटिएस मक्सी ब्रा और पैंतीस स्टेचू क ऊपर डिस्प्ले कर राखी थी. ये सब देख कर एक बार तो हम दोनों शर्मा गए क कैसे हम ऐसी शॉप में एक साथ आ गए. अंदर आने से पहले देखना चाहिए था. मम मुझसे नज़रें चुरा रही थी और मुझे भी समझ नहीं आ रहा था क क्या करुणा तभी एक सेल्स गर्ल हमारे पास आ गयी.

सेल्स गर्ल : आइये सर वेलकम वेलकम मम . कहिये क्या दिखाऊं ? हमारे पास हर तरह की वैरायटी आपको मिल जाएगी . और सब इम्पोर्टेड है . सर आप क साथ आएं हैं तो मतलब आप इनकी पसंद का hi लेंगी आइये मैं आपको दिखती हूँ . हमारे पास ज्यादातर लेडीज अकेली hi अति हैं . ऐसा काम hi होता है को वो अपने हस्बैंड क साथ ाएँ . आप अपने हस्बैंड क साथ आयी हैं तो मतलब आप दोनों में बॉन्डिंग काफी स्ट्रांग है. आप मुझे अपनी चॉइस बता दीजिये तो मैं आपको दिखा देती हूँ जो आप क लिए ाचा रहेगा.

सेल्स गर्ल ने अपना काम कर दिया था मगर ऐसे स्टोर में मेरे साथ होने से मम शर्मा रही थी. शायद वो जल्दी से बहार जाना चाहती हो पर ऐसा करना भी सही नहीं होगा वर्ण सेल्स गर्ल क्या सोचेगी ? मम उसको ये भी नहीं कह सकती थी क मैं उसका हस्बैंड नहीं क्यों की शरत जो लगी थी और वो शरत हर भी गयी थी. मम सोच रही थी क वो क्या करें क्या नहीं. मैंने उनकी ये टेंशन दूर करते हुए सेल्स गर्ल से कहा.

अमित : मम को इनकी पसंद का कुछ दिखा दीजिये.

सेल्स गर्ल : सर आप साथ में नहीं आएंगे ? आखिर आपकी पसंद भी तो मम ने देखनी होगी .

सेल्स गर्ल की इस बात पर तो मम और ज्यादा शर्माने लगी.

अमित : इतस ok इन्हे अपनी पसंद का hi लेने दीजिये .

आप ( मम ) जाइये इनके साथ और नए ड्रेस क कलर्स क मैचिंग सेट ले लीजिये.

मेरे ऐसा कहने से मम ने मेरी तरफ देखा जैसे मेरी बात पर गुस्सा कर रही हो पर वो शांत रही और सेल्स गर्ल उन्हें अपने साथ ले गयी. मैं स्टोर से बहार जाने लगा क एक तरफ एक स्टेचू पर बहुत hi सुन्दर गाउन डिस्प्ले किया हुआ था. उसे देख कर मुझे लगा क ये मंजू मम पर बहुत ाचा लगेगा वैसे भी वो सिंपल था और फिटिंग और डिज़ाइन में ाचा था. मैं उसको देखने लगा तो एक सेल्स गर्ल मेरे पास आ गयी . उस सेल्स गर्ल ने मुझे बताया क ये इम्पोर्टेड गाउन है और बहुत कम्फर्टेबले है. मैंने उसे पैक करने को कह और उसकी पेमेंट कार्ड से कर दी . मम को शायद अभी टाइम लग्न था तो मैं बहार आ गया गाउन को पैक करवा कर. कोई 20 मिनट्स बाद मम भी आ गयी और आते hi मुझे गुस्से से देखने लगी.

अमित : क्या हुआ ऐसे क्यों देख रही हैं आप ?

मंजू म : तुम्हे यही एक जगह मिली थी ? पता है मुझे कितनी शर्म आ रही थी अंदर तुम्हारे साथ . मैं कभी किसी मेल को साथ लेकर नहीं गयी ऐसी जगह.

अमित : अब मुझे क्या पता था क स्टोर किस चीज़ का है . मैं तो बाद सीधा अंदर घुस गया आप को भी तो पता है. और इसमें इतनी भी गुस्सा कर इ वाली कौन सी बात है? मैं तो बहार आ गया था न.

मंजू म: वो सेल्स गर्ल तुम्हारे सामने कैसे ... और तुम ने क्या कहा “ मम को इनकी पसंद का दिखा दो “ जैसे सचमुच तुम ........

अमित : अब इसमें मैंने क्या गलत कह दिया? क्या उसे ये कहता क दीदी को दिखा दो? इससे उसे पता चल जाता मैं आपका हस्बैंड नहीं भाई हूँ तो फिर वो क्या सोचती? अब आप बहाने मत बनाइये आप शरत हर गयी हैं.

मंजू म : ठीक है ठीक है . तुमसे तो शरत लगा कर मैंने मुसीबत मोल ले ली . अब और नहीं. बताओ मुझे क्या करना है?

अमित : ये मैंने आपके लिए एक ड्रेस लिया है इसे चुपचाप रख लीजिये और कुछ नहीं.

मंजू म : तुमने इसे क्यों लिया ? मैंने ले तो लिया है पहले hi इतना कुछ. इसमें है क्या?

अमित : घर जा कर देख लीजियेगा . वैसे अपने कपड़ों क हिसाब से सेट ले लिए न ?

मंजू म : हाँ मैंने के लिए हैं . क्या कहा तुमने ?

मेरी बात का मतलब समझते hi मम मुझे ऑंखें दिखने लगी. उन्हें समझ आ गयी क मैं ब्रा पेंटी की बात कर रहा हूँ.

अमित : सॉरी पर मैंने इस लिए पुछा क फिर बाद में आपको दोबारा आना पड़ेगा अभी तो हम यहीं पर हैं.

मंजू म : ज्यादा स्मार्ट मत बनो एक तो पहले hi मुझे इतनी शर्म आ रही है.

अमित : मेरे साथ आपको शर्म आ रही है ? ठीक है आज क बाद मैं आपके साथ नहीं आऊंगा शॉपिंग करने.

मंजू म : तुम्हारे साथ नहीं वो बस सेल्स गर्ल ने जो कुछ कहा तुम्हारे सामने उसकी वजह से .

अमित : क्यों ? आप तो पहले भी वो सब लेती होंगी न अपने लिए तो फिर मेरे साथ क्या प्रॉब्लम हो गयी? कोई कुछ भी समझे पर आप तो जानती हैं न हम क्या हैं. अगर आप फिर भी ऐसे शर्माएंगी तो मैं समझूंगा आप मुझसे शर्म कर रही हैं. दुनिया में और भी तो बहिन भाई होंगे न जो ऐसे एक साथ शॉपिंग करते होंगे. वैसे भी हैं तो वो भी कपडे hi फिर इसने ऐसा क्यों शर्माना मैंने कौन सा देख रहा था क आप ने क्या लिया क्या नहीं अगर फिर भी आप ऐसे शर्माएंगी तो मैं दोबारा नहीं आऊंगा.

मंजू म : ाचा ठीक है मैं नहीं शर्माउंगी तुम गुस्सा मत करो.

फिर हमने जो पहले सूट लिए थे उनको कलेक्ट कर क मॉल से निकल गए. मम क पास 4-5 शॉपिंग बैग हो गए थे तो पहले हम सारा सामान घर छोड़ने आये और दिर निकल गए डिनर करने. आज भी हमने डिनर एक अलग होटल में किया . आज क मैच की जीत का जश्न मैंने मम क साथ कुछ इस तरह मनाया क उनकी शॉपिंग की फरमाइश भी पूरी हो गयी और डिनर कर क पार्टी भी हो गयी. घर आ कर मम ने मेरा ख़रीदा हुआ शॉपिंग बैग जब ओपन किया तो उसमे गाउन देख कर वो मेरी तरफ देखने लगी.

अमित : क्या हुआ आपको पसंद नहीं आया? मैंने सोचा क घर में पहनने क लिए ठीक रहेगा. स्टेचू ओर लगा ये इतना ाचा लग रहा था तो सोचा आप पर ये और भी ाचा लगेगा. अगर पसंद न हो तो चेंज करवा लीजियेगा पर ये आपको रखना होगा. आपने वडा किया था.

मंजू म : तुम्हे क्या ज़रूरत थी ये सब लेने की?

अमित : बस दिल किया तो ले लिया. इसमें सोचने वाली कौन सी बात है ? वैसे भी आज की जीत की ख़ुशी में मैंने आपको तोहफा दिया है अब आप इसे पेहेन कर देख लीजिये. मैं चलता हूँ

मंजू म : रुको अपना तोहफा देख कर hi जाना अब मैं अभी आयी.

मम वो गाउन ले कर अंदर चली गयी और थोड़ी देर में hi गाउन पहने मेरे सामने कड़ी थी. मम पर वाकई वो गाउन बहुत प्यारा लग रहा था जैसे वो उन्ही क लिए बना हो. ये 2 पीेछे सेट था . पहल एक लॉन्ग निघ्त्य जो पाऊँ तक थी और पूरी स्लिम फिट उसके ऊपर एक गाउन था जिसको बांधने क लिए स्ट्रिप्स भी थी पर मम ने उसे खुला छोड़ा हुआ था. मैं मम को सर से पाऊँ तक देख रहा था

मंजू म : कैसी लग रही हूँ?

अमित : बहुत hi खूबसूरत . ये तो आप पर बहुत जाँच रहा है. पैसे वसूल हो गए . फिटिंग भी एक डैम परफेक्ट है.

मंजू म : है बिलकुल सही फिटिंग है मेरे hi साइज की और कम्फर्टेबले भी है. सिंपल भी है ाचा भी है थैंक्स फॉर आईटी. मैंने सोचा पहन कर दिखा hi दूँ वर्ण तुम सोचोगे क मैंने एक्सेप्ट नहीं किया.

अमित : वैसे आज आपने इसके साथ और भी कुछ लिया था वो भी पहन कर दिखा दीजिये

मम ने सोचा मैं ब्रा पेंटी की बात कर रहा हूँ तो वो मुझे मरने को डोडी

मंजू म : बदमाश तुझे शर्म नहीं आती ऐसी बात करते हुए

अमित : अरे अरे इसमें कौन स गलत बात है ? सूट दिखने को hi तो बोल रहा हूँ. आप क्या समझी ?

मेरी बात समझते हुए मम को अपनी गलती का एहसास हुआ. और वो शर्मा गयी , गुस्सा तो पहले भी वो बनावटी hi दिखा रही थी.

मंजू म : मैंने सोचा की तुम?

अमित : क्या सोचा आपने ? वैसे जो सोचा आप चाहे तो वो भी दिखा सकती हैं.

मेरी इस बात से मम फिर मुझे मरने डोडी और इस बार मैं उठ कर बहार को भाग गया क्यूंकि इस बार मम पक्का मुझे मरने वाली थी. मेरी बात से मम क चहरे पर शर्म की लाली आ गयी थी पर मैं घर से बहार निकल गया और मम दरवाज़े तक आ कर रुक गयी. मैं मम को bye bye करता हुआ निकल गया और वो भी मुझे मुस्कुरा कर bye करने लगी.

मम क घर से मैं सीधा मोहित क घर वापिस आ गया. अंकल घर नहीं आये थे और मोहित शायद कमरे में जा चूका था. आंटी बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही थी क्यूंकि आज मैं उनको खुश करने वाला था और वो भी मुझे इनाम देने वाली थी.

आंटी : आ गए तुम जाओ जा कर फ्रेश हो लो फिर मेरे कमरे में आ जाना तुम्हारे अंकल आज घर पर नहीं और मोहित को मैंने सुला दिया है.

मैं आंटी की बात का मतलब समझ गया क मोहित को नींद की गोली दे दी हैं उन्होंने और वो मेरे लिए पूरी तैयार हैं. मैं आंटी को एक किश देकर अपने रूम में चला गया और फ्रेश हो कर कपडे चेंज कर क आंटी क रूम में आ गया. आंटी बीएड पर चादर ले कर लेती हुई थी.

आंटी : दरवाज़ा बंद कर क कपडे उतर कर इधर आ जाओ.

मैंने अपने कपडे एक झटके में उतरे और पूरा नंगा हो कर आंटी साथ चादर में घुस गया. चादर में घुसते hi पता चल गया क आंटी अंदर से पूरी नंगी हैं. आंटी ने मुझ पर हमला करते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी. आंटी कितने दिनों से प्यासी थी इस बात का वो मुझे एहसास करवा रही थी . आंटी मेरे ऊपर आ गयी और किश करते हुए एक हाथ से मेरा लैंड मसलने लगी. मैंने भी उनके बूब्स को मसलता हुआ एक हाथ से उनकी गांड मसलने लगा. आंटी क मसलने से लैंड जल्दी hi खड़ा हो गया और आंटी अपनी छूट मेरे लैंड पर रगड़ने लगी. मैंने आंटी को पलट कर नीचे ले लिया और उनके बूब्स पर आकर उनको चूसने लगा. आंटी अपनी कमर उठा उठा कर अपनी छूट मेरे साथ रगड़ने लगी. बूब्स सूचक करने क बाद मैं उनके पेट पर किश करता हुआ उनकी छूट पर आ गया. आंटी की छूट एक डैम चिकनी थी शायद आज hi उन्होंने इसे मेरे लिए तैयार किया था. मैंने एक बार उनकी छूट को देखा और अपने होंठ उनकी गोरी चिकनी छूट पर लगा दिए.

‘ आअह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स उम्म्म्म तुम कितने अचे हो ककक ‘ आंटी मज़े में अपनी कमर उठती और रोने हाथो से मेरे सर को छूट पर दबती. मैं लगातार उनकी रसभरी छूट को चुस्त जा रहा था. मैं उनकी गहरी छूट से पानी को चूस कर बहार निकलने में लग गया. आंटी इतने दिनों से मेरे साथ ये सब करने क लिए तरस रही थी उनसे ये सब बर्दाश्त नहीं हो रहा था. आंटी अपनी छूट को बार बार ऊपर उठाने लगी और जल्दी hi उनका बाँध टूट गया

‘ आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह ककक ऐसे hi ओह्ह्ह और तेज़्ज़ज़ तुम जादूगर हो कक्कक्स उम्म्म्म और तेज़ मैं गयी मेरा निकलने वाला है आआअह्हह्ह्ह्ह ककक आह्ह्ह्हह्ह ो godddddddddd......

इसके साथ hi आंटी का पानी निकल गया और मैंने भी उनकी आखरी बूँद तक बहार निकल ली उनकी छूट से . आंटी एक डैम ढीली पद गयी जैसे उनके जिस्म से जान निकल ली हो पर ऐसे कैसे चलेगा मुझे आंटी को फिर से चार्ज करना होगा. मैंने फिर से आंटी की छूट चाट कर गरम करने लगा . 2 मिनट्स उनकी छूट चाटने क बाद मैंने पोजीशन ली और अपना लैंड एक हाथ से पकड़ कर उनकी छूट पर रगड़ने लगा. जब आंटी ने अपनी छूट को हिलना शुरू किया तो मैं समझ गया क अब वो तैयार हैं तब मैंने एल्म की छूट में हलके से पुश कर के अपने लैंड का सूपड़ा अंदर घुसा दिया. आंटी क मुँह से एक सिसकी निकली. मैंने आंटी की टैंगो को अपने कन्धों पर रखा और उनके ऊपर झुक गया जिससे उनकी कमर थोड़ी उठ गयी. अब लैंड छूट पर बिलकुल सही पज़िशन में था. मैंने उनके दोनों आम हाथों में पकड़ते हुए एक ज़ोरदार धक्का मारा जिससे मेरा लैंड आधे से ज्यादा एक बार में hi छूट क अंदर घुस गया.

‘ आआह्ह्ह्हह माआआ मर्डरर गयीईइ जब भी अंदर जाता है फाड़ hi देता है कक्कक्स आआह्ह्ह’ आंटी मेरे इस पहले hi धक्के से कराह उठी थी. मैंने उतने hi लैंड से धक्के लगाने शुरू कर दिए ताकि आंटी कुछ संभल जाएँ.

‘ मैं क्या करूँ आंटी आपकी छूट hi ऐसी है हर बार टाइट hi लगती है चाहे कितनी भी इसकी चुदाई करलूं ‘

‘ ककक आह्ह्ह्ह उम्म्म्म ऐसे hi ककक आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म मेरी छूट क्या करे तेरा लैंड hi इतना बड़ा है क अंदर लेने में छूट की बस हो जाती है ककक उम्म्म आअह्ह्ह आअह्ह्ह ऐसे hi शाबाश उम्म्म.

मैंने लगातार धक्के लगता हुआ आंटी क बूब्स ज़ोर से मसल रहा था. आंटी भी अपनी कमर हिलने लगी जिसका मतलब था क छूट ने लैंड को एडजस्ट कर लिया है तो मैंने सुपडे तक लैंड बहार खींच कर ज़ोरदार धक्का मरते हुए पूरा लैंड जड़ तक घुसा दिया

‘ एआईईईई माआआ माअररररर डाललल्लाहा फैट गयी मेरी आआआआह्ह्ह्ह कुछ तो रेहम दिखे करो आआह्ह्ह्ह क्या इसी लिए पाऊँ छूटे हो क इतनी बेदर्दी से छूट फाड् सको सीसीसी आआअह्ह्ह्हह सारा दिन जलन होती रहती है बाद में आआह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह कक्कक्स’

मैं आंटी की बातों से और गरम होने लगा मैंने उनके होंठो को किश करते हुए आधे लैंड से उनकी चुदाई करने लगा . आंटी ने ज्यादा समय नहीं लिया और अपनी कमर हिला कर मेरे धक्कों का जवाब देने लगी. मैं सीधा हो गया और उनकी टैंगो को पूरा फैला कर उनकी छूट क डेन को एक हाथ से मसलता हुआ तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा

‘ आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह. ककक ुकम्म्मन आआह्ह्ह्ह ऐसे hi और तेज़ शाबाश और तेज़ तुम hi मुझसे प्यार करते हो और किसी को तो परवाह hi नहीं मेरी शाबाश ऐसे hi और ज़ोर लगाओ उम्म्म्म कक्कक्स फाड़ दो फ़ायद दो मेरी छूट साडी गरमी निकल दो इसकी आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह तुम्हे पता है क कैसे औरत को खुश किया जाट है उम्म्म तुम रोज़ ऐसे hi मेरी चुदाई किया करो मुझे अपनी रखैल बना लो आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह जहाँ कहोगे वहीँ छोडूंगी जैसे कहोगे वैसे करुँगी मुझे हमेशा अपने लैंड का पार्षद देते रहना आआह्ह्ह्ह हहहह मेरा होने वाला है आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह aaahhhhhhhhhhhhhhaaaaaa’

इसी क साथ आंटी का बदन अकड़ गया और उन्होंने अपनी छूट उठा कर पूरा लैंड जड़ तक अंदर लेते हुए अपना गरम पानी मेरे लैंड पर छोड़ना शुरू कर दिया. आंटी झटके लेते हुए ठंडी पद गयी पर मेरा अभी टाइम दूर था. मैंने आंटी को करवट क बल लिटा कर खुद उनके पीछे लेट गया और उनकी तंग को अपने हाथ से पकड़ कर उठाते हुए पीछे से छूट में लैंड पहने लगा. आंटी जल्दी hi फिर से गरम होने लगी और गरम होते hi मुझे चित लिटा कर मेरा लैंड अपनी छूट में लेते हुए मेरे ऊपर बैठ कर उछलने लगी. आंटी कभी उछलती कभी अपनी कमर गोल गोल घूमने लगती. आंटी मस्ती में खुद hi अपने बाल नोचने लगती कभी अपने चुके खुद hi मसलने लगती. जल्दी hi फिर एक बार आंटी का पानी निकल गया और मेरे लैंड पर गरम पानी का शावर छोड़ दिया.

मेरा काम सभी नहीं हुआ था और आंटी शायद कुछ ज्यादा hi प्यासी थी जो जल्दी जल्दी अपना पानी निकले जा रही थी. आंटी अपना पानी निकलने क बाद मेरे ऊपर गिरी पड़ी थी तो मैंने उनको पलट कर बीएड पर लिटा दिया. मैंने उनको बीएड पर कुटिया बनाया और उनके पीछे अपनी पोजीशन ले कर छूट में लैंड घुसाने लगा तो आंटी ने मुझे रोक दिया.

आंटी : रुको ज़रा

अमित : आंटी पर मेरा अभी नहीं हुआ है.

आंटी : जानती हूँ पर आज मैं तुम्हे इनाम देना चाहती हूँ तुम्हारी जीत पर.

अमित : इनाम बाद में दे लेना मुझे अभी अपना पानी निकलना है.

आंटी : वो भी साथ में हो जायेगा आज मैं तुम्हे इनाम में अपनी गांड देना चाहती हूँ. आज तक कभी राघव ने भी मेरी गांड नहीं मरी बिलकुल सील है. मैंने सोचा आयी की सील राघव ने तोड़ी थी तो पीछे की सील तुम तोड़ो.

अमित : पर इससे आपको बहुत दर्द होगा मैं नहीं करूँगा पीछे से

आंटी : मुझे पता है तुम्हे मेरी गांड बहुत पसंद है और ये मेरी इच्छा है क तुम मेरी गांड खोलो. पहली बार में तो छूट में भी दर्द होता hi है तुम मेरी परवाह मत करो मैं बर्दाश्त कर लुंगी वैसे भी तुम मुझे ज्यादा दर्द होने नहीं डोज. अब जाओ उस ड्रेसिंग टेबल में क्रीम पड़ी होगी वो ले आओ जिससे ज्यादा दर्द नहीं होगा

अमित : आंटी आप एक बार फिर सोच लो

आंटी : मैंने कहा न तुम बस उतना करो जितना कहा है और ये आंटी आंटी क्या लगा रखा है कितनी बार कहा है अकेले में मुझे मेरे नाम से बुलाया करो

अमित : अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो ठीक है तैयार हो जाओ अपनी गांड मरवाने क लिए रमा डार्लिंग.

मैं ड्रेसिंग टेबल से क्रीम ले आया और आंटी की गांड पर थप्पड़ मर कर उनको तैयार होने का सिग्नल दिया. आंटी की बात बिलकुल सच थी मुझे उनकी गांड बहुत पसंद थी . उनकी गांड परफेक्ट शेप में थी. बड़े बड़े और गोल चूतड़ पीछे को बहार निकले हुए. योग करने की वजह से उनकी गांड टाइट और जानलेवा थी. मैंने अपनी उंगली से क्रीम लगा कर उनकी गांड में घुसनी शुरू कर दी. पहले तो उंगली अंदर लेने में उनके मुँह से सिसकी निकल गयी मगर फिर धीरे धीरे मैंने अपनी 2 उंगलियां भी उनकी गांड में घुसनी शुरू कर दी. क्रीम की वजह से गांड का छेद नरम और चिकना हो गया था. फिर मैंने अपने लैंड पर अछि तरह क्रीम लगा ली. लैंड तो आंटी की गांड देख कर hi पागल हुआ जा रहा था और उछाल उछाल कर अंदर जाने की डिमांड कर रहा था. मैंने लैंड का उतावलापन शांत करते हुए एक हाथ से लैंड को पकड़ा और आंटी की गांड क छेद पर सेट कर दिया

अमित : आंटी मैं अंदर करने वाला हूँ आप गांड को ढीला छोड़ दो वर्ण दर्द होगा.

मैंने आंटी क गोर मुलायम बड़े बड़े चूतड़ों पर फिर से थप्पड़ मरते हुए लैंड को ज़ोर देते हुए आंटी की गांड में घुसना शुरू कर दिया. क्रीम की वजह से गांड का छेद काफी चिकना हो चूका था जिसकी वजह से लैंड गांड को फैलता हुआ अंदर घुसने लगा . लैंड का सूपड़ा गांड में घुसते hi आंटी क मुँह से एक हलकी चीख निकल गयी.

‘ aaiiiiiiiiii माआआ ‘ आंटी को दर्द हो रहा था पर आंटी दर्द को बर्दाश्त करते हुए मेरा साथ दे रही थी. मैं आंटी को ज्यादा दर्द नहीं देना चाहता था इस लिए मैंने धक्का मरने की जगह लैंड को ज़ोर देकर पुश करना थी ठीक समझा और धीरे धीरे मेरा आधा लैंड आंटी की गांड में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गया. इतना लैंड लेने में hi आंटी क बदन पर कितना पसीना आ गया था जिससे पता चल रहा था क आंटी को कितना दर्द हो रहा है . आंटी का बदन अकड़ गया था. मैंने आंटी की गांड में उतना hi लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. और साथ में हाथ निचे ले जाकर आंटी की छूट क डेन को मसलने लगा. आंटी ने अपने होंठ डेंटन में दबा रखे थे दर्द को बर्दाश्त करने क लिए. चिकनाहट की वजह से मेरा लैंड आराम से अंदर बहार होने लगा और थोड़ी देर में hi लैंड ने गांड में अपनी जगह बना ली. मैंने हलके धक्के मरते हुए अपना लैंड थोड़ा थोड़ा कर क अंदर घुसना शुरू कर दिया. जब भी लैंड कुछ आगे जाता तो आंटी क मुँह से सिसकी निकल जाती. अब सिर्फ 2 इंच hi बहार रह गया था . आंटी को गांड में लैंड ऐसे महसूस हो रहा था जैसे किसी छोटी सी पाइप में फसा रखा हो. आंटी का जिस्म दर्द से बार बार ऐंठ रहा था अपर उन्होंने मुझे एक बार भी बहार निकलने को नहीं कहा. मैंने गांड पर नज़र मरी तो वो लाल हो रही थी और छेड़ क आसपास ऐसी दरारें दिख रही क मनो सुराख़ फट गया हो. मैंने लैंड को सुपडे तक बहार निकला और क्रीम लगा कर फिर से अंदर कर दिया. गांड अभी बहुत टाइट थी जिसे मैंने लैंड क हिसाब खोलना था और इसके लिए स्पीड बढ़ाने की ज़रूरत थी. मैंने धक्कों की स्पीड बड़ा दी इसी क साथ आंटी क मुँह से निकलने वाली आहें भी तेज़ हो गयी. और धीरे धीरे आहें सिसकियों में बदल गयी. लैंड ने गांड में जगह बना ली अब लैंड आराम से अंदर बहार होने लगा और आंटी भी मज़ा लेने लगी. आंटी एक हाथ से छूट रगड़ रही थी मैं आंटी की गांड मरता अपने चरम की और बाद रहा था आंटी भी समझ गयी क मेरा होने वाला है उनका हाथ हुई छूट पर तेज़ चलने लगा.

‘ आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह और तेज़ और तेज़ आआह्ह्ह्हह तुम hi मेरे मालिक हो तुम hi मेरे रहा हो आअह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म ऐसे hi मारो मेरा सब कुछ तुम्हारा है आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह हम्म्म्म ककक जल्दी करो मेरी गांड में जलन हो रही है सीसीसी आअह्ह्ह्ह फ़ायद ड्डूओ उम्म्म्म ‘

‘ मेरा भी होने वाला है रमा तुम्हारी गांड सच मच बड़ी मज़ेदार है जब भी देखता था दिल करता था अभी अंदर दाल दूँ मगर हिम्मत नहीं होती थी आअह्ह्ह ककक आज तुमने मुझे खुश कर दिया ऊह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ‘

‘ मैं तुम्हारी गुलाम हूँ एक बार कह देते तो इतने दिन इंतज़ार न करना पड़ता ककक हम्म्म मेरा सब कुछ तुम्हारा है मेरे राजा जब दिल करे जहाँ दिल करे पेल दिया करो कक्कक्स आआअह्ह्ह्ह मेरी छूट मेरी गांड जो चाहे मर लिया करो आआह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह माआआ मैं गईइइइइइइइइ’

इसके साथ आंटी का पानी निकल गया और उनकी सिसकियों और बातों से मैं भी कण्ट्रोल खोता गया . आंटी की टाइट गांड क आगे मेरा लैंड जवाब दे गया और मैंने आखिरी ज़ोरदार धक्के मरते हुए आखिरी धक्के में जड़ तक लैंड गांड में घुसा दिया. इस धक्के क साथ hi आंटी क मुँह से एक दर्द भरी चीख निकली और मैं पूरा लैंड उनकी गांड में घुसाए उनके ऊपर hi गिर गया. लैंड गांड में पिचकारियां मर कर शांत होने लगा मगर आखिरी बूँद निकलने तक मैंने पाऊँ क पंजे गद्दे ने फसकर पूरा ज़ोर लगाकर लैंड गांड में गड़ाए रखा. आंटी मेरे नीचे पड़ी कराह रही थी मगर मैं उनकी परवाह न करता हुआ अपना लैंड उनकी गांड में खली करता रहा. जब मैं पूरी तरह शांत हुआ तो आंटी की तरफ मेरा ध्यान गया. उनका चेहरा आंसुओं से भर गया था. मैंने जल्दी से उनके आंसू साफ किये मुझे उनकी फ़िक्र होने लगी.

अमित : आंटी आप ठीक तो हैं? सॉरी मुझे पता hi नहीं लगा.

आंटी : मैं ठीक हूँ मेरी चिंता न करो बस आखिरी धक्के में तूने पूरा घुसा कर गांड hi फाड़ दी. ये तो होना hi था अब मुझे ज़रा पैन किलर देदो दराज में से.

मैंने आंटी को पैन किलर दी और सहारा देकर बाथरूम में ले गया उनकी गरम पानी से सिकाई देकर मैं वापिस बीएड पर ला कर लिटा दिया. आंटी मेरी तरफ बड़े प्यार से देख रही थी और अब उनका दर्द भी कुछ काम था. मैंने उनको अपनी तरफ ऐसे देखते हुए पाकर उनसे पूछा

अमित : क्या देख रही हैं?

आंटी : देख रही हूँ तू कितनी केयर कर रहा है. इतनी परवाह करने वाला हस्बैंड जिसको मिलेगा वो तो हमेशा खुश रहेगी. काश राघव भी तेरे जैसे होते

अमित : वो तो मुझसे भी अचे हैं बस उनको इस बात का एहसास करवाना है क बिज़नेस क साथ आप भी उनकी ज़िम्मेदारी हैं और आपको वक़्त देने की ज़रूरत है

आंटी : अब मुझे उनसे कोई शिकवा नहीं अब मुझे तुम्हारा प्यार मिल गया है वैसे भी बाकि सब तो देखते hi हैं बस तुम कभी मुझे अपने से दूर मत करना .

अमित : मैं तो आपके पास hi हूँ जब दिल करे बस बिल दीजिये वैसे मुझे आपसे एक और बात करनी है.

आंटी : कहो

अमित : मुझे लगता है हम रानी क साथ गलत कर रहे हैं बेचारी छुप छुप कर देखती रहती है और तड़पती रहती है

आंटी : मैं जानती हूँ और मैंने तुम्हे पहले भी कहा था क तुम उसका भी ध्यान रखना पर तुमने उसके साथ दोबारा किया hi नहीं. मैंने सोचा शायद तुम उसके साथ नहीं करना चाहते इस लिए दोबारा कहा नहीं.

अमित : ठीक है तो मैं आज उसका पानी निकल कर अत हूँ आप तब तक आराम कीजिये.

आंटी : ठीक है पर उसको पीछे से मत करना वर्ण कल किचन का काम कौन करेगा .

अमित : मैं ध्यान रखूँगा.

उसके बाद मैंने आंटी को एक किश किया और उन्हें चादर ौडकर अपने कपडे पहन कर रानी क कोएर्टर में चला गया . रत का एक बज रहा था हर तरफ शांति थी. मैंने रानी क कमरे का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की तो आराम से खुल गया. मैंने अंदर जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया. रानी आराम से सोई पड़ी थी . वो इस वक़्त भी सदी में hi थी . सोई हुई वो मासूम लग रही थी. मैंने उसके होंठो पर होंठ रख कर हलके से किश किया पर वो नहीं उठी. मैंने उसके पाऊँ की तरफ से सदी को ऊपर करना शुरू कर दिया और उसकी कमर तक ऊपर उठा दिया . इसके लिए मुझे उसकी टंगे भी उठा ी पड़ी मगर वो गहरी नींद में थी तो उठी नहीं. रानी का शरीर कपड़ों क अंदर से दूध सा सफ़ेद था . मैं उसकी मांसल जांघों को छूटा हुआ उसकी छूट तक आया . पेंटी क ऊपर से मैंने उसकी छूट को चूम लिया तो उसके जिस्म में हलकी सी हरकत हुई . मैंने सर उठा कर देखा तो वो अभी भी सो रही थी. मैंने अपने कपडे उतरे और फिर रानी की पेंटी उतरने लगा. रानी अभी भी सो रही थी. मैंने उसकी पेंटी को देखा तो उसमे पानी लगा हुआ था मतलब छूट पानी छोड़ रही थी यानि क रानी जग रही थी पर शर्म क मरे ऑंखें नहीं खोल रही थी. मैंने उसकी छूट को चूमा और उसमे उंगली करने लगा. रानी की छूट पर बाल थे जिसकी वजह से मैंने उसे सिर्फ उंगली कर क hi तैयार करने का सोचा. उंगली करने से रानी क जिस्म में हलचल होने लगी. पर वो अभी सोने की एक्टिंग कर रही थी. मैंने उसकी टंगे छोड़ी कर क बीच में पोजीशन ली मैंने लैंड को छूट पर रगड़ा और थूक से सूपड़ा गिला करते हुए छूट में फसा कर एक हल्का धक्का दिया. 3इंच लैंड छूट में घुस गया. रानी क मुँह से सिसकी निकली मगर अभी भी वो सोने की एक्टिंग कर रही थी. मुझे पता था क उसे कैसे जगाना है इस लिए मैंने खुद को सेट करते हुए उसकी जांघो को फैलाया और ज़ोर से धक्का मर दिया. रानी क मुँह से एक तेज़ कराह निकली और उसकी ऑंखें खुल गयी.

‘ आआआईइइइइइइइ माआआआआ मर्डर गईइइइइइ कक्कक्स ममअअअअ एआइइइइ ‘

अमित : इतनी देर से सोने की एक्टिंग क्यों कर रही थी ?

रानी : ाआईई बाबू जी आपने तू कक्कक्स मर hi डाला कोई इतनी बेरहमी से करता है क्या ककक आह्ह्ह्ह ममअअअ फट गयी. मुझे तो दर था कहीं आप मुझे बिना चोदे न चले जाएँ बस इसी लिए एक्टिंग कर रही थी क कक्कक्स आप जो कर रहे हैं करते रहें.

अमित : मुझे पता है तुम कितनी तड़प रही हो इतने दिनों से इस लिए आज तुम्हारी प्यास बुझाने hi आया हूँ आज

रानी : क्या बताऊँ बाबू जी जब आपको मालकिन क साथ देखती हूँ तो बर्दाश्त नहीं होती ये गर्मी . मैं hi जानती हूँ क मैं कैसे गुज़ारा करती हूँ. जब से आपके साथ किया है तब से हर रत आपके hi सपने देखती हूँ. दया कर क आज मेरी ये आग शांत कर दीजिये.

अमित : आज से तुम्हे तड़पने की ज़रूरत नहीं है जब भी तुमसे बर्दाश्त न हो तो बिना झिझक मेरे कमरे में आ जाया करो . मैं आंटी को बोल दूंगा तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं . मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूँ.

रानी : आपकी बड़ी कृपा होगी आआअह्हह्ह्ह्हह मायआ



रानी की बात पूरी होने से पहले hi मैंने लैंड बहार खिंच कर फिर से एक झटके में पूरा अंदर दाल दिया . रानी फिर से चीखने लगी मगर मैं इस बार नहीं रुका और तेज़ धक्के लगाने लगा. रानी की छूट मेरे लैंड से अभी तक एक बार hi चूड़ी थी इस लिए वो बहुत कासी हुई लग रही थी और मैं उसे धक्के मर कर ढीली करने में लग गया . रानी भी थोड़ी देर में संभल गयी और मेरा साथ देते हुए अपनी कमर उछलने लगी. रानी ने खुद hi अपना ब्लाउज खोल दिया और मैं उसके दूध मसलता हुआ ताबड़तोड़ धक्के मरता उसकी चुदाई करने लगा. मैं एक बार आंटी को अपना पानी दे कर आया था इस लिए इस बार और भी ज्यादा टाइम लगने वाला था . रानी की छूट ने 3 बार बानी बहाया मेरा पानी निकलने तक. और मैंने लास्ट में अपना लैंड निकल कर उसके मुँह में अपना पानी निकला. रानी सारा पानी पि गयी जैसे अमृत हो. रानी की साडी गरमी मेरे लैंड ने निकल दी थी और उसका जिस्म पसीने से भीग गया था. मैं रानी को उसके बिस्टेर पर छोड़ कर अपने कपडे पहन कर वापिस अपने कमरे में आकर लेट गया.
 
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