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मैं आगे बाद कर मौसी क पौन छुए तो मौसी ‘ जीते रहो’ कह क साइड में हो गयी. मैंने माँ और बाबा क पाऊँ छुए . माँ ने मुझे गले से लगा लिया और बाबा ने भी आशीर्वाद दिया. उसके बाद मैंने रीता मौसी और रजनी मौसी से भी आशीर्वाद लिया. दोनों मौसा और कारन को छोड़ कर सब मौजूद थे. निधि दीदी नैना दीदी नेहा दीदी करुणा दीदी चरों ने सूट hi पहने हुए थे. शायद फॅमिली फंक्शन की वजह से नैना दीदी और करुणा दीदी ने सूट पेहेन लिए होंगे. निधि दीदी ने हमेशा की तरह मुझे गले लगाया और मेरे सर पर प्यार से हाथ फेरा.
निधि : कैसा है मेरा प्यारा भाई?
अमित : ाचा हूँ दीदी आप कैसी हैं?
निधि : तुम्हारे सामने हूँ देख लो .
नैना : मिल गया वक़्त आने का ?
नैना दीदी आज राधा क बाद सबसे ज्यादा बन थान क आयी थी. खास तरह का मेक उप स्टाइलिश हेयर और बहुत hi मधुर खुशबु जो किसी खास किस्म क सेंट की थी.
अमित : मुझे तो आना hi था आप जो आ रही थी.
मेरी बात पर नैना दीदी शर्मा गयी . उनके साथ करुणा दीदी भी कड़ी थी जो गुस्से से मुँह फुलाए कभी मुझे देखती कभी दूसरी तरफ .
अमित : लगता है कोई बहुत गुस्से में है ?
करुणा : हँ ....
अमित : तौबा तौबा लगता है गर्मी से कहीं आग लगने वाली है.
करुणा : मुझसे बात मत करो तुम
अमित : आप hi से तो बात कर रहा हूँ और किस्से कर रहा हूँ
करुणा : मैंने कहा मुझसे बात मत करो . कभी भूले से भी यद् तक नहीं करते न फ़ोन न मैसेज और अब चले आये मुँह उठा क . सब से मिलते हो सिवाए मेरे
अमित : लगता है मेरी प्यारी प्यारी दीदी मुझसे नाराज़ है . कोई बात नहीं मैं जल्दी आपको शॉपिंग करवाने ले क जाऊंगा फिर तो आप खुश हो जाएँगी न?
करुणा : इतनी आसानी से नहीं मैंने वाली मैं . शॉपिंग क साथ मूवी भी दिखानी होगी और होटल में डिनर भी और आइस क्रीम भी
करुणा दीदी की बात पर मेरे साथ साथ नैना दीदी नेहा दीदी और निधि दीदी भी हसने लगी.
दिव्या मौसी : अब और किसका इंतज़ार कर रही हो चलो केक काटो पहले hi देर हो गयी है.
दिव्या मौसी ने बात करते हुए फिर मेरी तरफ गुस्से से देखा. राधा केक काटने क लिए कड़ी हो गयी और एक बार मेरी तरफ देखा जैसे कुछ कह रही हो. सब बहनो ने उसे घेर लिया और कैंडल बुझा दी उसने . शुरू हो गया सबका गण हैप्पी बर्थडे तो यू . सब विश करने लगे राधा को. राधा ने केक कटा और सबसे पहले दिव्या मौसी को खिलाया . उसके बाद बरी बरी से सबने उसे खिलाया और राधा भी सबको अपने हाथ सी खिलाती. सबसे लास्ट में मेरी टर्न आयी तो एक बार फिर राधा ने मेरी उंगली अपने दातों में दबा ली. और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. जब राधा ने मेरे मुँह में केक डाला तो मैंने भी उसकी उंगली को काट लिया. राधा एक डैम से चिहुंक पड़ी
राधा : एआईईईई
दिव्या मौसी : क्या हुआ ? इतनी भी अकाल नहीं तुम में क किसी का हाथ नहीं काट ते. आज उसका जन्मदिन है और तुम उसे कुत्तों की तरह काटने लग गए.
रजनी मौसी: दिव्या ! ये तुम क्या कह रही हो. होश में तो हो तुम ? ज़रा सा मज़ाक hi तो किया है उसने
राधा : माँ आप क्यों अमित को दांत रही हैं उसने तो बस मज़ाक किया था.
रीता मौसी : दिव्या तुम्हे बच्चों की छोटी छोटी शरारतों पर ध्यान नहीं देना चाहिए आखिर ये सब हमारे अपने हैं और तुम बिना वजह इतना गुस्सा कर रही हो.
मुझे ाचा माहि लगा जिस तरह दिव्या मौसी मेरे ऊपर भड़की और फिर सबका मूड भी ख़राब होने लगा. मैं नहीं चाहता था क मेरी वजह से राधा की बर्थडे पार्टी का सत्यानाश हो इस लिए मैंने बात को घूमने की कोशिश की.
अमित : क्या आप सब भी मेरी मौसी क पीछे पद गए हो. तो क्या हुआ उन्होंने कुछ कह भी दिया तो. आखिर मेरी सबसे प्यारी मौसी हैं मेरी माँ की शामे तो शामे कॉपी . मुझे इनकी बात का कभी बुरा नहीं लगता.
मेरे मुँह से ये सुन कर पता नहीं दिव्या मौसी को क्या हुआ क वो अंदर कमरे में चली गयी. रीता मौसी जल्दी से उनके पीछे गयी और राधा भी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क अब मैंने क्या कर दिया.
गौरी ममी : बीटा दिव्या की बात का गुस्सा मत करना वो राधा से बहुत प्यार करती है इस लिए बस उसकी ज़रा स तकलीफ पर भी वो घबरा जाती है.
अमित : नहीं माँ मैंने गुस्सा नहीं किया पर शायद मेरी वजह से सबका मूड ख़राब हो गया है मैं चलता हूँ माँ कल मिलूंगा आपसे.
विजय मां : ऐसे नहीं बीटा . ाचा नहीं लगता क तू ऐसे बिना खाये पिए चला जाये दिव्या को बुरा लगेगा.
बाबा क कहने पर मैं रुक तो गया पर एक डैम से माहौल ख़राब हो गया था पार्टी का.
अंदर कमरे में रीता मौसी दिव्या मौसी को समझा रही थी महार दिव्या मौसी रोए जा रही थी.
रीता : क्या हुआ तुझे दिव्या ? तू क्यों रो रही है ? देख आज राधा का जन्मदिन है और तू इस तरह रो कर उसे भी रुलाना चाहती है ?
दिव्या : मैं क्या करूँ दीदी मैं क्या करूँ . उसे कहो यहाँ से चला जाये , चला जाये यहाँ से मैं उसकी कुछ नहीं हूँ वो क्यों बार बार मेरे सामने आ कर मुझे दामिनी की यद् दिलाता है ? पहल उसके बाप ने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद करदी अब ये मुझे चैन से रहने भी नहीं दे रहा.
रीता : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दिव्या . वो हमारी दामिनी का बीटा है . और वो तुझे कितना प्यार करता है. देख कैसे सबके सामने कह रहा है क तू उसकी सबसे प्यारी मौसी है उसकी माँ की हम शक्ल . वो तुम में दामिनी को देख रहा है अपनी माँ को और तुम हो की उससे इतनी नफरत करती हो?
दिव्या : तो क्या करूँ ? वो भी अपने बाप जैसा hi निकलेगा दामिनी जैसा नहीं बन सकता वो . आखिर बाप का खून hi सर चढ़ कर बोलता है माँ का दूध कभी बाप क खून पर भरी नहीं हो पता.
रोटा : मुझे समझ नहीं आती तू पवन से इतनी नफरत क्यों करती है ? वो तो कितना ाचा था उसने hi तो तेरी शादी करवाई थी फिर भी तू क्यों उससे नफरत करती है? अब तो वो इस दुनिया में भी नहीं है अगर उसने कुछ गलत किया भी था तो अब उसे भूला दे. ये अमित है पवन नहीं. ये हमारी दामिनी का बीटा है . क्या तुझे उसमे दामिनी नज़र नहीं आती ?
दिव्या : कैसे नज़र नहीं आएगी ? आँखें तो उसी की हैं न. जब भी उसकी आँखों में देखती हूँ तो लगता है जैसे दामिनी को देख रही हूँ मगर चेहरा तो बाप पर hi जा रहा है न. और देख लेना ये भी उसके जैसा hi निकलेगा.
रीता : दिव्या ज़रूरी नहीं क बीटा बाप पर hi जाये जनम तो वो माँ क hi पेट से लेता है न . तूने शायद कभी देखने की कोशिश hi नहीं की उसे . वो बिलकुल दामिनी जैसा है. सबसे प्यार करता है सबकी इज़्ज़त करता है सबको खुश रखता है. देख उसकी वजह से आज हमारे मायके में कितनी रौनक है. भैया भी सर उठा कर चलते हैं. और अपनी सब बहनो से कोटना प्यार करता है. पूछना कभी राधा से क रोज़ अमित उससे और नेहा से मिलता है क नहीं? नेहा तो मुझे बताती रहती है उसके बारे में. मेरी बात मन तू उसपर थोड़ा भरोसा कर देखना तुझे सिर्फ दामिनी का hi एहसास होगा .
दिव्या : मगर दीदी
रीता : मैंने कहा न तू बस एक बार उसको अपने गले लगा कर तो देख अगर तुझे दामिनी का एहसास न हो तो कहना. वो बहुत प्यारा है दिव्या . तुमने देखा नहीं अब तो कामिनी भी उससे कितना प्यार करने लगी है . एक बार तू भी सब कुछ भूल कर उसे गले लगा ले . उसे सर्फ तेरा प्यार चाहिए दिव्या फिर देखना वो तुझे कितना खुश रखेगा.
राधा दरवाज़े क पास कड़ी अपनी माँ और मौसी की बात सुन रही थी . उसने उनको बिलकुल भी अपना एहसास तक नहीं होने दिया इस उम्मीद में क शायद उसे कुछ पता चल सके क उसकी माँ अमित से नफरत क्यों करती है. दोनों की बातें सुनते हुए उसे इतना तो पता चल गया था क उसकी माँ अमित से सिर्फ इस लिए नफरत करती है क्यूंकि उसके पापा ने कुछ ऐसा किया है जिसकी वजह से उसकी माँ को दुःख पहुंचा है. मगर और कुछ ज्यादा उसे पता नहीं चल सका . जब उसने देखा क माँ और मौसी बहार आने लगी हैं तो वो पहले hi बहार हो गयी.
रीता : ोये बदमाश इधर आ चल अपनी मौसी से अछि तरह मिल ले.
मैं मौसी की बात सुन कर उनके पास चला गया दिव्या मौसी उनके पास hi कड़ी थी.
रीता मौसी : चल अब देख क्या रही है लगा ले इसे गले .
सब हमारी तरफ hi देख रहे थे जैसे भारत पाकिस्तान में कोई समझौता होने जा रहा हो. दिव्या मौसी पहल मेरी तरफ देख माहि रही थी मगर जैसे hi उनकी नज़र मेरी नज़र से मिली दिव्या मौसी की आँखों से आंसू बहने लगे . और उन्होंने कास क मुझे गले लगा लिया. मौसी क इस तरह मुझे गले लगाने से पता नहीं क्यों पर मेरी आँखों से भी आंसू बहने लगे. मैं समझ नहीं प् रहा था ऐसा क्यों हो रहा है. दिव्या मौसी रोये जा रही थी और इतनी ज़ोर से मुझे अपने गले लगाए हुए थी क मनो मुझे आखिरी बार मिल रही हो. तभी रजनी मौसी रीता मौसी और माँ भी जल्दी से पास आ गयी और मौसी को चुप करवाने लगी. मुझे भी रोटा हुआ देख कर माँ ने मुझे गले लगा लिया. माँ ने प्यार से मुझे संभल लिया . मैंने जब देखा तो सबकी ऑंखें भीगी हुई थी . रजनी मौसी दिव्या मौसी को एक माँ की तरह गले लगा कर चुप करवा रही थी. माहौल बहुत hi गंभीर हो गया था. ऐसा लग hi नहीं रहा था क जन्मदिन की पार्टी हो ये तो किसी की शोक सभा लग रही थी.
रीता : दोनों माँ बीटा एक जैसे हैं रो रो कर कीचड़ कर दिया है . अछि भली राधा की जन्मदिन की पार्टी मानाने ए और ये दोनों हैं क खुद भी रो रहे हैं और दूसरों को भी रुला रहे हैं . दोनों को एक कमरे में बंद कार्डो अचे से रो लेने दो उनको हम पार्टी करते हैं चलो लड़कियों गण बजाना लगाओ.
रीता मौसी भी ऐसी बातें करती हैं ये मुझे नहीं पता था. करुणा दीदी लगता है मौसी पर hi गयी हैं. मौसी का इशारा मिलते hi नैना दीदी और करुणा दीदी ने माहौल बनाने क लिए म्यूजिक लगा दिया . नैना दीदी और करुणा दीदी ज़बरदस्ती दिव्या मौसी को खिंच कर नाचने लगी. दिव्या मौसी पहले मन कर रही थी मगर रीता मौसी भी उनके साथ मिल गयी और देखते देखते रजनी मौसी और माँ भी शामिल हो गयी. करुणा दीदी ने फिर राधा को भी खिंच लिया और नैना दीदी मुझे खींचते हुए ले गयी.
रीता मौसी ने अपनी सूझबूझ से माहौल को पलट कर रख दिया. दिव्या मौसी ने जल्दी hi बस करदी और वो सबको खाने पिने का सामान सर्वे करने लगी. रीता मौसी और रजनी मौसी भी साथ लग गयी . धीरे धीरे डांस करने वाले हम चार hi रह गए . नैना दीदी करुणा दीदी मैं और राधा . नेहा दीदी और निधि दीदी माँ और मौसी का साथ देने लगी.
गौरी ममी : कितने अचे लग रहे हैं सब हस्ते खेलते ?
रीता : सही कहा .
रजनी मौसी : दिव्या तुझे क्या हो गया था ? तू क्यों ऐसे अचानक रोने लगी थी ?
दिव्या मौसी : पता नहीं दीदी बस अपने आप hi वो
रीता मौसी : मैं बताती हूँ दीदी. दिव्या को दामिनी की यद् आ गयी थी. अमित की ऑंखें बिलकुल दामिनी जैसी हैं न बस इसी लिए खुद को रोक नहीं पायी .
दिव्या मौसी : ऐसा कुछ नहीं है वो अपने बाप जैसा hi है
रीता मौसी : तू फिर शुरू हो गयी. सच सच बता जब तूने उसे गले लगाया तो तुझे दामिनी का एहसास हुआ क नहीं ?
दिव्या मौसी : ( उसकी ऑंखें बिलकुल दामिनी जैसी हैं उनमे देखते hi मुझे दामिनी नज़र आने लगी थी. और जब उसे गले लगाया तो सचमुच मुझे दामिनी का hi एहसास हो रहा था मगर मैं कैसे भूल जॉन उसके बाप ने मेरे साथ क्या क्या किया है. पूरी बाप जैसी शकल है जब उसका चेहरा देखती हूँ तो उसका बाप यद् आ जाता है . मेरी ज़िन्दगी नरक बना कर रख दी उसने ) उसकी ऑंखें दामिनी जैसी हैं तो इसका मतलब ये तो नहीं क अब वो दामिनी की जगह ले लेगा.
रजनी मौसी : छोटी तू कब समझेगी इस बात को ? उसे तेरे प्यार की ज़रूरत है उसे प्यार से अपने गले लगा जैसे उसे बचपन में तू प्यार किया करती थी . क्या यद् नहीं तुम्हे वो दिन जब तू दामिनी से कहा करती थी क अमित तेरा बीटा है . वो तो छोटा सा मासूम था जब दामिनी उसे अकेला छोड़ गयी . हम तुम्हे तब भी समझती रही और आज भी कह रही हूँ मैं क उसे तेरा प्यार चाहिए फिर देख वो तुझे कितना खुश रखेगा.
दिव्या मौसी : मैं अभी आयी
इतना कह कर दिव्या मौसी निकल गयी उनमे से क्यूंकि वो और नहीं सुन्ना चाहती थी अमित क बारे में कहीं उनका इरादा न बदल जाये.
रजनी मौसी : जो भी कहो आज दिव्या को देख कर लग रहा है क ये भी धीरे धीरे पिघल जाएगी.
रीता मौसी : सही कहा सिर्फ अमित hi दिव्या को पहले जैसी दिव्या बना सकता है. दिव्या मने या न मने मैंने महसूस किया था क जब वो अमित को गले लगा क रो रही थी तब ज़रूर उसे दामिनी का hi एहसास हो रहा होगा. होगा भी क्यों नहीं बिलकुल अपनी माँ जैसा hi तो है ये. हाँ इसने उतनी शरारतें नहीं की.
गौरी ममी: मैं तो दर गयी थी जब इन्होने बताया क उन्होंने अमित को सबकुछ बता दिया है. दिल ये सोच कर दर रहा था क कहीं ये पवन जी की बाकि फॅमिली को ढूंढ़ने न निकल जाये पर शुक्र है क ये इतना समझदार तो है क सब बातें समझता है.
रजनी मौसी : नाम मत लो उनका . वो कोई फॅमिली नहीं है . ऐसे लोगों से इंसान अकेला ाचा. मैं उनका साया भी नहीं पड़ने दूंगी हमारे बचे पर .
रीता मौसी : वैसे भैया ने बताया hi क्यों उसको ? पहले तो आप दोनों ने hi मन किया था न
गौरी ममी : मैंने भी पूछा था इनसे तो कहने लगे अब वो बड़ा हो गया है और चीज़ों को अछि तरह समझने लगा है. हम कब तक उससे ये बात छुपा सकते हैं ? कल को कोई और उसे दामिनी क बारे में बताये या वो किसी बात को गलत समझ बैठे तो फिर वो हमसे दूर भी जा सकता है . इस लिए उन्होंने उसे सब बता दिया
रजनी मौसी : वैसे एक तरह से ाचा hi किया वर्ण कब तक हम उससे झूठ बोलते ?
गौरी ममी : मैं बहुत खुश हूँ क वो इतना समझदार है. बिलकुल अपने माँ बाप पर गया है. घर में अब सब बिलकुल सही है अब तो जल्द hi दीपिका और फिर कामिनी भी माँ बन जाएँगी और घर फिर से चहकने लगेगा.
रीता मौसी : भाई मन्ना पड़ेगा अमित तो जादूगर है . उसके पास ऐसी जादू की छड़ी ( लैंड ) है जिसने कामिनी पर भी जादू कर दिया वर्ण पहले कितना गुस्सा करती रहती थी और अब देखा है उसे ? ऐसे करती है जैसे अमित उसके लिए सब कुछ हो. ऐसी छड़ी जिसके पास भी होगी दुनिया तो उसकी गुलाम हो hi जाएगी ( काश मेरे पास भी ऐसा जादूगर होता )
इधर ये तीनो बातों में लगी थी और उधर मैं सबके साथ डांस कर रह था. आखिर मैं थक कर रेस्ट करने क लिए बैठ गया. मेरा दिमाग अभी भी दिव्या मौसी की तरफ hi था एक तरफ तो वो इतना गुस्सा दिखती हैं और दूसरी तरफ आज उनका मेरे गले लग कर ऐसे रोना ? समझ नहीं आ रहा था क आखिर उनके अंदर चल क्या रहा है. क्या बाबा ने जो बताया वो वाकई में सही है? मैं अपने ख्यालों में खोया था क मेरे फ़ोन की घंटी बजी मैंने देखा तो नैना दीदी का फ़ोन था . मैंने नज़र उठा कर देखा तो वो कहीं नज़र नहीं आ रही थी. सब मौजूद थी सिवाए उनके. मैंने तुरंत फ़ोन उठा लिया.
नैना : छत पर आ जाओ ( फ़ोन कट )
अमित : ( दीदी मुझे ऊपर क्यों बुला रही हैं ? सब यहीं मौजूद हैं फिर क्यों बुला रही हैं )
मैं सब से नज़र बचा कर सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर चला गया. छत पर लाइट नहीं थी मगर फिर भी चाँद की वजह से थोड़ी बहुत रौशनी थी. मैं दीदी को ढूंढ़ने लगा अचानक किसी ने मुझे पीछे से पकड़ कर घुमा कर दिवार से लगा दिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैं समझ गया ये नैना दीदी hi हैं और उनका साथ देते हुए मैं भी उनके होंठ चूसने लगा . नैना दीदी कभी मेरे ऊपर वाले होंठ को अपने होंठों में लेकर चुस्ती कभी निचे वाले होंठ को. मैं भी उनका पूरा साथ दे रहा था. हमारा किश वाइल्ड होता जा रहा था. मैंने मस्ती में कब दीदी क उभर अपनी गिरफ्त में ले लिए मुझे भी पता माहि चला. दीदी पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ा बल्कि वो मेरे सर क बालों में हाथ चलती हुई अपनी एक तंग उठा कर मुझसे रगड़ती हुई मेरे ऊपर हावी होने की कोशिश करने लगी. मैंने भी अपना एक हाथ निचे ले जा कर उनकी उठी हुई तंग को सहारा देने क लिए उनके गोल मुलायम चूतड़ पर हाथ रख कर उन्हें अपने साथ कास लिया. दीदी मेरे मुँह में अपनी ज़ुबान डालने लगी और कभी मेरी ज़ुबान अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. दीदी इतनी हॉट हैं मैं सोच भी नहीं सकता था . यौन खुली छत पर घर में सबके होते हुए इतनी ज़बरदस्त किसिंग मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था. मैं किश करते हुए एक हाथ से उनका एक संतरा दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो बड़े बड़े चूतड़ मसल रहा था. नैना दीदी क उभर कैसे हुए थे और उनके चूतड़ मुलायम थे. मगर परफेक्ट शेप में थे. इतनी हॉट किसिंग से मेरा लैंड पूरा अकड़ चूका था और जीन्स में मुझे परेशानी होने लगी थी. दीदी तो रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी मगर मेरे दिल में दर भी था क कहीं कोई हमें ढूंढता हुआ ऊपर आ गया तो क्या होगा. इस लिए मैंने किश ख़तम की और दीदी को खुद से दूर हटाया.
अमित : कण्ट्रोल .... कण्ट्रोल कीजिये खुद पर
नैना : नहीं हो रहा . इतने दिनों बाद तो मिल रहे हो फिर पता नहीं कब मिलोगे?
अमित : सब घर में है अगर कोई आ गया तो ?
नैना : कोई नहीं आएगा
अमित : मतलब ?
नैना : मतलब कोई आया तो पता चल जायेगा
अमित : मगर आप ऐसे यूँ अचानक ये सब ?
नैना : तुमने खुद hi तो कहा था तुम्हे किश चाहिए तो मैं भला कैसे तुम्हारी बात पूरी न करती.
अमित : मैंने तो मज़ाक किया था.
नैना : तो कैसा लगा मज़ाक का जवाब?
अमित : लगता है मज़ाक करते रहना hi सेहत क लिए ाचा है.
सीढ़ियों पर किसी आहत से मैं चौकन्ना हो गया. मैं जल्दी से सीढ़ियों में आया तो करुणा दीदी ऊपर hi आ रही थी.
करुणा : तुम ऊपर क्या कर रहे हो चलो जल्दी निचे आओ सब तुम्हारी वेट कर रहे हैं.
अमित : आप चलिए मैं आ रहा हूँ.
करुणा दीदी क पीछे पीछे मैं भी नीचे आ गया मगर मुझे दर था क कहीं मेरी हालत से किसी को अंदाज़ा न हो जाये इस लिए पहले बाथरूम जा कर खुद को सेट किया. सब खाने क लिए बैठ गए थे मैं भी बाबा की बगल में बैठ गया और हम सब डिनर करने लगे नैना दीदी भी खुद को सेट करने क बाद आ गयी थी और वो करुणा दीदी क साथ बैठ कर डिनर करने लगी. राधा खाना कहते हुए बार बार मेरी तरफ hi देख रही थी. मेरी जब भी नज़र उस पर पड़ती तो वो शर्मा कर नज़र झुका लेती . वहीँ नैना दीदी और करुणा दीदी से जब नज़र मिलती तो वो मेरी नज़रों से नज़र मिला कर देखने लगती.
खाना खाने क बाद मैंने माँ बाबा से पूछा क उनका क्या प्लान है. बाबा ने बताया क वो आज दिव्या मौसी क यहाँ रुकेंगे और कल सुबह रीता मौसी क यहाँ नाश्ता करेंगे उसके बाद दोपहर को वो मोहित क घर आ सकते है और फिर रत रजनी मौसी क घर रह कर अगले दिन वापिस. मैंने उनको कहा क मैं दोपहर को उन्हें रीता मौसी क घर से लेने आ जाऊंगा . सबसे मिलने क बाद मैं घर वापिस आ गया . दिव्या मौसी फिर मुझसे नहीं मिली वापिस आते वक़्त खैर धीरे धीरे उनके बारे में भी पता चल hi जायेगा. राधा बहुत खुश थी और मेरे जाने पर भी ऐसे देख रही थी जैसे मुझे जाने न देना चाहती हो. नैना दीदी क चहरे पर दिलकश स्माइल थी जो अक्सर प्रेमिका क चहरे पर होती है प्रेमी से मिलने क बाद . करुणा दीदी भी गहरी नज़रों से मुझे देख रही थी.
घर आ कर मैंने आंटी को बता दिया क कल माँ और बाबा लंच पर आएंगे तो आंटी ने भी खा क तुम्हारे अंकल भी सुबह आ जायेंगे घर . मैंने आंटी को गुड नाईट किश दी और अपने कमरे में आकर बीएड पर लेट गया आज मैं थकावट महसूस कर रहा था. और दिव्या मौसी की वजह से भी दिमाग परेशां सा था. पता नहीं कब उनके बारे बारे में सोचते सोचते मुझे नींद आ गयी. अगल दिन कॉलेज में कैंटीन में बैठ भी मैं दिव्या मौसी क बारे में सोच रहा था . मोहित मीनल और रीमा बार बार मुझे पूछ रहे थे मैं क्या सोच रहा हूँ पर मैं उन्हें क्या बताता ? इस लिए उनकी बात को ताल रहा था. इतने में राधा भी कैंटीन में आ गयी और मुझे देख कर शायद उसे भी समझ आ गयी क मैं कुछ परेशां हूँ .
राधा : अमित क्या एक मिनट क लिए बहार आओगे मुझे तुमसे ज़रूरी बात करनी है?
मैं राधा क साथ कैंटीन से बहार आ गया.
राधा : तुम माँ की वजह से परेशां हो न? मैं माफ़ी मांगती हूँ माँ की तरफ से.
अमित : अरे ये तुम क्या कह रही हो राधा ? वो मेरी मौसी हैं मैं उनकी बात का बुरा क्यों मानूंगा? मैं बस इस बात को सोच सोच क परेशां हूँ क वो मुझे गले लगा कर क्यों रो रही थी?
राधा : माँ ऐसी hi है . वो अकेले में रोटी रहती है और मौसी ( दामिनी ) को बहुत यद् करती है. मुझे नहीं पता क वो तुम पर गुस्सा क्यों करती है पर कल देखा न वो तुम्हे गले लगा कर कैसे रो रही थी. इसका मतलब है क वो अंदर से तुम्हे प्यार भी बहुत करती हैं. शायद मौसी क चले जाने से वो ऐसी हो गयी हैं ( माँ तुम्हारे पापा की वजह से तुमसे नफरत करती है मैं तुम्हे माहि बात सकती. मगर वो ऐसे क्यों करती हैं मैं पता लगा कर रहूंगी )
अमित : राधा बाबा ने मुझे बताया क माँ की हर चीज़ उनकी हर यद् मौसी क पास है . तो क्या तुम मुझे मेरी माँ की वो यादें उनकी चीज़ें उनकी तस्वीरें दिखा सकती हो?
राधा : माँ ने वो सब एक कमरे में रखा है और उसपर हमेशा टाला लगा कर रखती हैं. मुझे भी अंदर जाने नहीं देती. जब कभी माँ बहुत उदास होती है तो घंटों अंदर hi बंद रहती है.
अमित : क्या तुमने कभी नहीं देखा क अंदर क्या है?
राधा : मुझे ठीक से यद् नहीं मैं काफी साल पहले अंदर गयी थी . उस कमरे में माँ और मौसी की तस्वीरें उनका सामान है लेकिन माँ ने मुझे कुछ भी देखने नहीं दिया और मुझे लेकर बहार आ गयी. माँ ने मुझे अंदर जाने से मन कर रखा है . इस लिए मैंने भी कभी अंदर जाने की कोशिश नहीं की क्यूंकि मैं उन्हें दुःख नहीं पहुँचाना चाहती . मैंने माँ को कई बार रत रत भर रट देखा है अमित वो बहुत दुखी अंदर से शायद इसी लिए वो ऐसी हैं.
अमित : मौसी को किस चीज़ का दुःख है क्या तुम जानती हो ?
राधा : माँ की ज़िन्दगी में मेरे इलावा और कुछ भी नहीं है . मैंने कभी उन्हें हस्ते हुए नहीं देखा . पापा साल बाद कुछ दिनों क लिए आते हैं और उसमे भी वो माँ को टाइम नहीं देते न hi मेरे साथ टाइम बिताते हैं. और कभी कभी तो एते hi नहीं. मौसी भी पहले दूसरे शहरों में रहती थीं इस लिए उनसे भी मिलना नहीं होता था अब तो चलो वो इस शहर में हैं तो कभी कभी कोई आ जाता है. लेकिन इतने साल माँ ने अकेले गुज़ारे हैं. मां कभी कभी कुछ देर क लिए मिलने आ जाते हैं और माँ को कुछ न कुछ दे जाते हैं. माँ ने मुझे बहुत म्हणत से पला है. वो खुद म्हणत करती हैं लोगों क कपडे स्टिच करती हैं और मां भी कभी कभी ज़बरदस्ती कुछ माँ कुछ देते रहते हैं. माँ ने अकेले साडी ज़िन्दगी गुज़र दी है और लगता है क उन्हें अकेलेपन से hi प्यार हो गया है. पापा ने कभी उनको प्यार दिया hi नहीं. बस एक घर ले कर दे दिया है. कभी दिल किया तो कुछ पैसे भेज दिए वर्ण वो भी नहीं. मुझे जन्मदिन पर एक फ़ोन तक नहीं करते . शायद उन्हें भी हमारी ज़रूरत नहीं.
राधा की बातें सुन कर मुझे भी दुःख होने लगा क दिव्या मौसी ने कितने दुःख उठाये होंगे अकेले रह कर . कैसे उन्होंने राधा को पल पास कर बड़ा किया. दिव्या मौसी अकेली दुःख सहते सहते ऐसी हो गयी है शायद . बाबा ने बताया था क बचपन में वो शरारती और नटखट थी . लेकिन आज का उनका ये रूप देख कर लगता hi नहीं क कभी उन्होंने ज़िन्दगी में हसना सीखा भी होगा. राधा भी इसी लिए ऐसी चुपचाप रहने वाली बन गयी है क्यूंकि उसने अपनी माँ को हमेशा उदास देखा है. मगर मौसा मौसी क साथ ऐसा क्यों किया? आखिर कोण इंसान अपनी फॅमिली को ऐसे अकेला छोड़ कर जा सकता है? लोग पैसा कमाने बहार जाते हैं ये बात समझ में अति है पर मौसा तो पैसा भी नहीं भेज रहे इसकी क्या वजह हो सकती है. कुछ तो है जो कोई नहीं जनता और वो सब दिव्या मौसी को hi पता है. मगर वो किसी को बताएंगी नहीं. मुझे खुद hi पता लगाना होगा. राधा ने जिस कमरे क बारे में बताया है शायद उसमे कुछ सबूत हो और मेरी माँ की यादें भी तो हैं वहां. मुझे उस कमरे में जाना होगा.
राधा : क्या सोच रहे हो?
अमित : कुछ नहीं . मौसी ने अकेले इतने दुःख सही और कभी किसी को बताया तक नहीं. अकेलापन hi उनके दुःख का कारन है और हमें उनका ये अकेलापन दूर करना होगा.
राधा : मुझे नहीं लगता ये कभी हो पायेगा. एक औरत क लिए उसका पति उसका प्यार hi सबकुछ होता है और जब वो hi उसका साथ नहीं देता तो फिर उस औरत को कैसी ख़ुशी मिल सकती है?
अमित : कुछ भी हो राधा मौसी चाहे कितना भी मुझसे नाराज़ हो या गुस्सा करें मैं उनको फिर से हसने क लिए मजबूर कर दूंगा उन्हें खुश रहना सिखाऊंगा. बाबा ने कहा था क मौसी माँ से बहुत प्यार करती थी और उनके साथ मिलकर सबको तंग किया करती थी मैं अपनी वही दिव्या मौसी वापिस ले कर आऊंगा जो कही खो गयी है.
राधा : ( खुश होते हुए )तुम सच में ऐसा करोगे ? तुम सच में माँ को हसना सिखाओगे ? तुम सच में माँ को खुशियां डोज ? अगर ऐसा हुआ तो मैं तुम्हे
अमित : इनाम बाद में देना पहले मेरी बात सुन लो . इस काम में तुम्हे भी मेरा साथ देना होगा. और हो सकता है मौसी इस बात पर गुस्सा भी हो . तो क्या तुम मेरा साथ डौगी ?
राधा : मैं माँ को खुश देखने क लिए कुछ भी करुँगी .
अमित : फिर ठीक है. वैसे मुझे इनाम में क्या मिलेगा?
राधा : ( तुम्हे मैं अपना दिल अपनी आत्मा अपना सब कुछ दे दूंगी .) वो तुम्हे वक़्त आने पर पता चल जायेगा.
अमित : ठीक है तो अब तुम मौसी क बारे में हर चीज़ पर ध्यान देना शुरू कर दो और मुझे बताती रहा करो . मैं चाहता हूँ तुम मुझे उनके बारे में सब कुछ बताओ.
राधा : जैसा तुम कहो.
अमित : वैसे कल क्या क्या मिला फिर गिफ्ट में ?
राधा : कल तो बहुत कुछ मिला . शायद मेरी होश में ये पहला बर्थडे है जो इतनी अछि तरह मनाया गया है. सब क सब मौजूद थे मुझे तो सबको एक साथ देख कर hi मेरा गिफ्ट मिल गया.
राधा ने एक एक करके सबका बता दिया जो उसे गिफ्ट में मिला.
अमित : तो तुम्हे किसका गिफ्ट सब से ज्यादा पसंद आया?
राधा : तुम्हारा
अमित : मेरा कौन सा वाला ?
राधा : जो कल तुमने सरप्राइज पार्टी दी मेरे बर्थडे की वो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया . वो किसी भी गिफ्ट से बढ़कर है मेरे लिए. मैं कल का दिन कभी नहीं भूलूंगी.
अमित : मतलब वो गिफ्ट जो मैंने दिए वो पसंद नहीं आये?
राधा : मैंने ऐसा कब कहा? वो भी मुझे बहुत पसंद आये . सिर्फ तुमने मेरी ज़रूरत का ध्यान रखा और मुझे जिसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी वो तुमने दिया. माँ को मैंने सरे गिफ्ट खोलने क बाद तुम्हारा दिया हुआ मोबाइल दिखाया तो माँ ने पूछा था क किसने दिया. मैंने कह दिया बड़े मां ने दिया है तो माँ मां से पूछने चली गयी. मैं तो हैरान हूँ क मां ने भी कह दिया क हाँ ये मैंने दिया है . तभी मैं समझ गयी क तुमने hi मां से कहा होगा . माँ मन कर रही थी और वापिस देना चाहती थी मगर मां ने सख्ती से ये कहते हुए मन कर दिया क राधा घर से बहार जाती है तो उसकी खैर खबर लेने क लिए इसकी ज़रूरत है. बस फिर क्या था माँ को मन्ना पड़ा.
अमित : और वो बैग?
राधा : ये क्या तुम्हे नज़र नहीं आ रहा? मैंने कल hi इसमें अपना सामान दाल दिया था और पुराण बैग फेंक दिया. माँ को बता दिया क मेरी सहेली ने दिया है.
अमित : अब मुझे सहेली बना दिया तुमने ? शर्म करो मेरा जेंडर तो चेंज मत करो
मेरे इस जोके पर राधा हसने लगी
राधा : है है है वैसे आईडिया ाचा है माँ पूछेगी तो मैं कह दूंगी उसका नाम अमिता है.
मुझे भी राधा की इस बात पर हंसी आ गयी. उसके बाद हमने कुछ देर और बातें की और लेक्चर की बेल्ल बज गयी. मैंने राधा को बता दिया था क आज मुझे जल्दी जाना है क्यूंकि बाबा को मोहित की फॅमिली से मिलवाना जो था. मोहित क साथ मैंने एक और लेक्चर अटेंड किया और फिर हम कॉलेज से निकल गए रीता मौसी क घर . मोहित ने सब के पाऊँ छुए . माँ और बाबा को लेकर हम कार में मोहित क घर आ गए जहाँ अंकल आंटी लंच पर माँ बाबा का इंतज़ार कर रहे थे .
मैं आगे बाद कर मौसी क पौन छुए तो मौसी ‘ जीते रहो’ कह क साइड में हो गयी. मैंने माँ और बाबा क पाऊँ छुए . माँ ने मुझे गले से लगा लिया और बाबा ने भी आशीर्वाद दिया. उसके बाद मैंने रीता मौसी और रजनी मौसी से भी आशीर्वाद लिया. दोनों मौसा और कारन को छोड़ कर सब मौजूद थे. निधि दीदी नैना दीदी नेहा दीदी करुणा दीदी चरों ने सूट hi पहने हुए थे. शायद फॅमिली फंक्शन की वजह से नैना दीदी और करुणा दीदी ने सूट पेहेन लिए होंगे. निधि दीदी ने हमेशा की तरह मुझे गले लगाया और मेरे सर पर प्यार से हाथ फेरा.
निधि : कैसा है मेरा प्यारा भाई?
अमित : ाचा हूँ दीदी आप कैसी हैं?
निधि : तुम्हारे सामने हूँ देख लो .
नैना : मिल गया वक़्त आने का ?
नैना दीदी आज राधा क बाद सबसे ज्यादा बन थान क आयी थी. खास तरह का मेक उप स्टाइलिश हेयर और बहुत hi मधुर खुशबु जो किसी खास किस्म क सेंट की थी.
अमित : मुझे तो आना hi था आप जो आ रही थी.
मेरी बात पर नैना दीदी शर्मा गयी . उनके साथ करुणा दीदी भी कड़ी थी जो गुस्से से मुँह फुलाए कभी मुझे देखती कभी दूसरी तरफ .
अमित : लगता है कोई बहुत गुस्से में है ?
करुणा : हँ ....
अमित : तौबा तौबा लगता है गर्मी से कहीं आग लगने वाली है.
करुणा : मुझसे बात मत करो तुम
अमित : आप hi से तो बात कर रहा हूँ और किस्से कर रहा हूँ
करुणा : मैंने कहा मुझसे बात मत करो . कभी भूले से भी यद् तक नहीं करते न फ़ोन न मैसेज और अब चले आये मुँह उठा क . सब से मिलते हो सिवाए मेरे
अमित : लगता है मेरी प्यारी प्यारी दीदी मुझसे नाराज़ है . कोई बात नहीं मैं जल्दी आपको शॉपिंग करवाने ले क जाऊंगा फिर तो आप खुश हो जाएँगी न?
करुणा : इतनी आसानी से नहीं मैंने वाली मैं . शॉपिंग क साथ मूवी भी दिखानी होगी और होटल में डिनर भी और आइस क्रीम भी
करुणा दीदी की बात पर मेरे साथ साथ नैना दीदी नेहा दीदी और निधि दीदी भी हसने लगी.
दिव्या मौसी : अब और किसका इंतज़ार कर रही हो चलो केक काटो पहले hi देर हो गयी है.
दिव्या मौसी ने बात करते हुए फिर मेरी तरफ गुस्से से देखा. राधा केक काटने क लिए कड़ी हो गयी और एक बार मेरी तरफ देखा जैसे कुछ कह रही हो. सब बहनो ने उसे घेर लिया और कैंडल बुझा दी उसने . शुरू हो गया सबका गण हैप्पी बर्थडे तो यू . सब विश करने लगे राधा को. राधा ने केक कटा और सबसे पहले दिव्या मौसी को खिलाया . उसके बाद बरी बरी से सबने उसे खिलाया और राधा भी सबको अपने हाथ सी खिलाती. सबसे लास्ट में मेरी टर्न आयी तो एक बार फिर राधा ने मेरी उंगली अपने दातों में दबा ली. और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. जब राधा ने मेरे मुँह में केक डाला तो मैंने भी उसकी उंगली को काट लिया. राधा एक डैम से चिहुंक पड़ी
राधा : एआईईईई
दिव्या मौसी : क्या हुआ ? इतनी भी अकाल नहीं तुम में क किसी का हाथ नहीं काट ते. आज उसका जन्मदिन है और तुम उसे कुत्तों की तरह काटने लग गए.
रजनी मौसी: दिव्या ! ये तुम क्या कह रही हो. होश में तो हो तुम ? ज़रा सा मज़ाक hi तो किया है उसने
राधा : माँ आप क्यों अमित को दांत रही हैं उसने तो बस मज़ाक किया था.
रीता मौसी : दिव्या तुम्हे बच्चों की छोटी छोटी शरारतों पर ध्यान नहीं देना चाहिए आखिर ये सब हमारे अपने हैं और तुम बिना वजह इतना गुस्सा कर रही हो.
मुझे ाचा माहि लगा जिस तरह दिव्या मौसी मेरे ऊपर भड़की और फिर सबका मूड भी ख़राब होने लगा. मैं नहीं चाहता था क मेरी वजह से राधा की बर्थडे पार्टी का सत्यानाश हो इस लिए मैंने बात को घूमने की कोशिश की.
अमित : क्या आप सब भी मेरी मौसी क पीछे पद गए हो. तो क्या हुआ उन्होंने कुछ कह भी दिया तो. आखिर मेरी सबसे प्यारी मौसी हैं मेरी माँ की शामे तो शामे कॉपी . मुझे इनकी बात का कभी बुरा नहीं लगता.
मेरे मुँह से ये सुन कर पता नहीं दिव्या मौसी को क्या हुआ क वो अंदर कमरे में चली गयी. रीता मौसी जल्दी से उनके पीछे गयी और राधा भी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क अब मैंने क्या कर दिया.
गौरी ममी : बीटा दिव्या की बात का गुस्सा मत करना वो राधा से बहुत प्यार करती है इस लिए बस उसकी ज़रा स तकलीफ पर भी वो घबरा जाती है.
अमित : नहीं माँ मैंने गुस्सा नहीं किया पर शायद मेरी वजह से सबका मूड ख़राब हो गया है मैं चलता हूँ माँ कल मिलूंगा आपसे.
विजय मां : ऐसे नहीं बीटा . ाचा नहीं लगता क तू ऐसे बिना खाये पिए चला जाये दिव्या को बुरा लगेगा.
बाबा क कहने पर मैं रुक तो गया पर एक डैम से माहौल ख़राब हो गया था पार्टी का.
अंदर कमरे में रीता मौसी दिव्या मौसी को समझा रही थी महार दिव्या मौसी रोए जा रही थी.
रीता : क्या हुआ तुझे दिव्या ? तू क्यों रो रही है ? देख आज राधा का जन्मदिन है और तू इस तरह रो कर उसे भी रुलाना चाहती है ?
दिव्या : मैं क्या करूँ दीदी मैं क्या करूँ . उसे कहो यहाँ से चला जाये , चला जाये यहाँ से मैं उसकी कुछ नहीं हूँ वो क्यों बार बार मेरे सामने आ कर मुझे दामिनी की यद् दिलाता है ? पहल उसके बाप ने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद करदी अब ये मुझे चैन से रहने भी नहीं दे रहा.
रीता : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दिव्या . वो हमारी दामिनी का बीटा है . और वो तुझे कितना प्यार करता है. देख कैसे सबके सामने कह रहा है क तू उसकी सबसे प्यारी मौसी है उसकी माँ की हम शक्ल . वो तुम में दामिनी को देख रहा है अपनी माँ को और तुम हो की उससे इतनी नफरत करती हो?
दिव्या : तो क्या करूँ ? वो भी अपने बाप जैसा hi निकलेगा दामिनी जैसा नहीं बन सकता वो . आखिर बाप का खून hi सर चढ़ कर बोलता है माँ का दूध कभी बाप क खून पर भरी नहीं हो पता.
रोटा : मुझे समझ नहीं आती तू पवन से इतनी नफरत क्यों करती है ? वो तो कितना ाचा था उसने hi तो तेरी शादी करवाई थी फिर भी तू क्यों उससे नफरत करती है? अब तो वो इस दुनिया में भी नहीं है अगर उसने कुछ गलत किया भी था तो अब उसे भूला दे. ये अमित है पवन नहीं. ये हमारी दामिनी का बीटा है . क्या तुझे उसमे दामिनी नज़र नहीं आती ?
दिव्या : कैसे नज़र नहीं आएगी ? आँखें तो उसी की हैं न. जब भी उसकी आँखों में देखती हूँ तो लगता है जैसे दामिनी को देख रही हूँ मगर चेहरा तो बाप पर hi जा रहा है न. और देख लेना ये भी उसके जैसा hi निकलेगा.
रीता : दिव्या ज़रूरी नहीं क बीटा बाप पर hi जाये जनम तो वो माँ क hi पेट से लेता है न . तूने शायद कभी देखने की कोशिश hi नहीं की उसे . वो बिलकुल दामिनी जैसा है. सबसे प्यार करता है सबकी इज़्ज़त करता है सबको खुश रखता है. देख उसकी वजह से आज हमारे मायके में कितनी रौनक है. भैया भी सर उठा कर चलते हैं. और अपनी सब बहनो से कोटना प्यार करता है. पूछना कभी राधा से क रोज़ अमित उससे और नेहा से मिलता है क नहीं? नेहा तो मुझे बताती रहती है उसके बारे में. मेरी बात मन तू उसपर थोड़ा भरोसा कर देखना तुझे सिर्फ दामिनी का hi एहसास होगा .
दिव्या : मगर दीदी
रीता : मैंने कहा न तू बस एक बार उसको अपने गले लगा कर तो देख अगर तुझे दामिनी का एहसास न हो तो कहना. वो बहुत प्यारा है दिव्या . तुमने देखा नहीं अब तो कामिनी भी उससे कितना प्यार करने लगी है . एक बार तू भी सब कुछ भूल कर उसे गले लगा ले . उसे सर्फ तेरा प्यार चाहिए दिव्या फिर देखना वो तुझे कितना खुश रखेगा.
राधा दरवाज़े क पास कड़ी अपनी माँ और मौसी की बात सुन रही थी . उसने उनको बिलकुल भी अपना एहसास तक नहीं होने दिया इस उम्मीद में क शायद उसे कुछ पता चल सके क उसकी माँ अमित से नफरत क्यों करती है. दोनों की बातें सुनते हुए उसे इतना तो पता चल गया था क उसकी माँ अमित से सिर्फ इस लिए नफरत करती है क्यूंकि उसके पापा ने कुछ ऐसा किया है जिसकी वजह से उसकी माँ को दुःख पहुंचा है. मगर और कुछ ज्यादा उसे पता नहीं चल सका . जब उसने देखा क माँ और मौसी बहार आने लगी हैं तो वो पहले hi बहार हो गयी.
रीता : ोये बदमाश इधर आ चल अपनी मौसी से अछि तरह मिल ले.
मैं मौसी की बात सुन कर उनके पास चला गया दिव्या मौसी उनके पास hi कड़ी थी.
रीता मौसी : चल अब देख क्या रही है लगा ले इसे गले .
सब हमारी तरफ hi देख रहे थे जैसे भारत पाकिस्तान में कोई समझौता होने जा रहा हो. दिव्या मौसी पहल मेरी तरफ देख माहि रही थी मगर जैसे hi उनकी नज़र मेरी नज़र से मिली दिव्या मौसी की आँखों से आंसू बहने लगे . और उन्होंने कास क मुझे गले लगा लिया. मौसी क इस तरह मुझे गले लगाने से पता नहीं क्यों पर मेरी आँखों से भी आंसू बहने लगे. मैं समझ नहीं प् रहा था ऐसा क्यों हो रहा है. दिव्या मौसी रोये जा रही थी और इतनी ज़ोर से मुझे अपने गले लगाए हुए थी क मनो मुझे आखिरी बार मिल रही हो. तभी रजनी मौसी रीता मौसी और माँ भी जल्दी से पास आ गयी और मौसी को चुप करवाने लगी. मुझे भी रोटा हुआ देख कर माँ ने मुझे गले लगा लिया. माँ ने प्यार से मुझे संभल लिया . मैंने जब देखा तो सबकी ऑंखें भीगी हुई थी . रजनी मौसी दिव्या मौसी को एक माँ की तरह गले लगा कर चुप करवा रही थी. माहौल बहुत hi गंभीर हो गया था. ऐसा लग hi नहीं रहा था क जन्मदिन की पार्टी हो ये तो किसी की शोक सभा लग रही थी.
रीता : दोनों माँ बीटा एक जैसे हैं रो रो कर कीचड़ कर दिया है . अछि भली राधा की जन्मदिन की पार्टी मानाने ए और ये दोनों हैं क खुद भी रो रहे हैं और दूसरों को भी रुला रहे हैं . दोनों को एक कमरे में बंद कार्डो अचे से रो लेने दो उनको हम पार्टी करते हैं चलो लड़कियों गण बजाना लगाओ.
रीता मौसी भी ऐसी बातें करती हैं ये मुझे नहीं पता था. करुणा दीदी लगता है मौसी पर hi गयी हैं. मौसी का इशारा मिलते hi नैना दीदी और करुणा दीदी ने माहौल बनाने क लिए म्यूजिक लगा दिया . नैना दीदी और करुणा दीदी ज़बरदस्ती दिव्या मौसी को खिंच कर नाचने लगी. दिव्या मौसी पहले मन कर रही थी मगर रीता मौसी भी उनके साथ मिल गयी और देखते देखते रजनी मौसी और माँ भी शामिल हो गयी. करुणा दीदी ने फिर राधा को भी खिंच लिया और नैना दीदी मुझे खींचते हुए ले गयी.
रीता मौसी ने अपनी सूझबूझ से माहौल को पलट कर रख दिया. दिव्या मौसी ने जल्दी hi बस करदी और वो सबको खाने पिने का सामान सर्वे करने लगी. रीता मौसी और रजनी मौसी भी साथ लग गयी . धीरे धीरे डांस करने वाले हम चार hi रह गए . नैना दीदी करुणा दीदी मैं और राधा . नेहा दीदी और निधि दीदी माँ और मौसी का साथ देने लगी.
गौरी ममी : कितने अचे लग रहे हैं सब हस्ते खेलते ?
रीता : सही कहा .
रजनी मौसी : दिव्या तुझे क्या हो गया था ? तू क्यों ऐसे अचानक रोने लगी थी ?
दिव्या मौसी : पता नहीं दीदी बस अपने आप hi वो
रीता मौसी : मैं बताती हूँ दीदी. दिव्या को दामिनी की यद् आ गयी थी. अमित की ऑंखें बिलकुल दामिनी जैसी हैं न बस इसी लिए खुद को रोक नहीं पायी .
दिव्या मौसी : ऐसा कुछ नहीं है वो अपने बाप जैसा hi है
रीता मौसी : तू फिर शुरू हो गयी. सच सच बता जब तूने उसे गले लगाया तो तुझे दामिनी का एहसास हुआ क नहीं ?
दिव्या मौसी : ( उसकी ऑंखें बिलकुल दामिनी जैसी हैं उनमे देखते hi मुझे दामिनी नज़र आने लगी थी. और जब उसे गले लगाया तो सचमुच मुझे दामिनी का hi एहसास हो रहा था मगर मैं कैसे भूल जॉन उसके बाप ने मेरे साथ क्या क्या किया है. पूरी बाप जैसी शकल है जब उसका चेहरा देखती हूँ तो उसका बाप यद् आ जाता है . मेरी ज़िन्दगी नरक बना कर रख दी उसने ) उसकी ऑंखें दामिनी जैसी हैं तो इसका मतलब ये तो नहीं क अब वो दामिनी की जगह ले लेगा.
रजनी मौसी : छोटी तू कब समझेगी इस बात को ? उसे तेरे प्यार की ज़रूरत है उसे प्यार से अपने गले लगा जैसे उसे बचपन में तू प्यार किया करती थी . क्या यद् नहीं तुम्हे वो दिन जब तू दामिनी से कहा करती थी क अमित तेरा बीटा है . वो तो छोटा सा मासूम था जब दामिनी उसे अकेला छोड़ गयी . हम तुम्हे तब भी समझती रही और आज भी कह रही हूँ मैं क उसे तेरा प्यार चाहिए फिर देख वो तुझे कितना खुश रखेगा.
दिव्या मौसी : मैं अभी आयी
इतना कह कर दिव्या मौसी निकल गयी उनमे से क्यूंकि वो और नहीं सुन्ना चाहती थी अमित क बारे में कहीं उनका इरादा न बदल जाये.
रजनी मौसी : जो भी कहो आज दिव्या को देख कर लग रहा है क ये भी धीरे धीरे पिघल जाएगी.
रीता मौसी : सही कहा सिर्फ अमित hi दिव्या को पहले जैसी दिव्या बना सकता है. दिव्या मने या न मने मैंने महसूस किया था क जब वो अमित को गले लगा क रो रही थी तब ज़रूर उसे दामिनी का hi एहसास हो रहा होगा. होगा भी क्यों नहीं बिलकुल अपनी माँ जैसा hi तो है ये. हाँ इसने उतनी शरारतें नहीं की.
गौरी ममी: मैं तो दर गयी थी जब इन्होने बताया क उन्होंने अमित को सबकुछ बता दिया है. दिल ये सोच कर दर रहा था क कहीं ये पवन जी की बाकि फॅमिली को ढूंढ़ने न निकल जाये पर शुक्र है क ये इतना समझदार तो है क सब बातें समझता है.
रजनी मौसी : नाम मत लो उनका . वो कोई फॅमिली नहीं है . ऐसे लोगों से इंसान अकेला ाचा. मैं उनका साया भी नहीं पड़ने दूंगी हमारे बचे पर .
रीता मौसी : वैसे भैया ने बताया hi क्यों उसको ? पहले तो आप दोनों ने hi मन किया था न
गौरी ममी : मैंने भी पूछा था इनसे तो कहने लगे अब वो बड़ा हो गया है और चीज़ों को अछि तरह समझने लगा है. हम कब तक उससे ये बात छुपा सकते हैं ? कल को कोई और उसे दामिनी क बारे में बताये या वो किसी बात को गलत समझ बैठे तो फिर वो हमसे दूर भी जा सकता है . इस लिए उन्होंने उसे सब बता दिया
रजनी मौसी : वैसे एक तरह से ाचा hi किया वर्ण कब तक हम उससे झूठ बोलते ?
गौरी ममी : मैं बहुत खुश हूँ क वो इतना समझदार है. बिलकुल अपने माँ बाप पर गया है. घर में अब सब बिलकुल सही है अब तो जल्द hi दीपिका और फिर कामिनी भी माँ बन जाएँगी और घर फिर से चहकने लगेगा.
रीता मौसी : भाई मन्ना पड़ेगा अमित तो जादूगर है . उसके पास ऐसी जादू की छड़ी ( लैंड ) है जिसने कामिनी पर भी जादू कर दिया वर्ण पहले कितना गुस्सा करती रहती थी और अब देखा है उसे ? ऐसे करती है जैसे अमित उसके लिए सब कुछ हो. ऐसी छड़ी जिसके पास भी होगी दुनिया तो उसकी गुलाम हो hi जाएगी ( काश मेरे पास भी ऐसा जादूगर होता )
इधर ये तीनो बातों में लगी थी और उधर मैं सबके साथ डांस कर रह था. आखिर मैं थक कर रेस्ट करने क लिए बैठ गया. मेरा दिमाग अभी भी दिव्या मौसी की तरफ hi था एक तरफ तो वो इतना गुस्सा दिखती हैं और दूसरी तरफ आज उनका मेरे गले लग कर ऐसे रोना ? समझ नहीं आ रहा था क आखिर उनके अंदर चल क्या रहा है. क्या बाबा ने जो बताया वो वाकई में सही है? मैं अपने ख्यालों में खोया था क मेरे फ़ोन की घंटी बजी मैंने देखा तो नैना दीदी का फ़ोन था . मैंने नज़र उठा कर देखा तो वो कहीं नज़र नहीं आ रही थी. सब मौजूद थी सिवाए उनके. मैंने तुरंत फ़ोन उठा लिया.
नैना : छत पर आ जाओ ( फ़ोन कट )
अमित : ( दीदी मुझे ऊपर क्यों बुला रही हैं ? सब यहीं मौजूद हैं फिर क्यों बुला रही हैं )
मैं सब से नज़र बचा कर सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर चला गया. छत पर लाइट नहीं थी मगर फिर भी चाँद की वजह से थोड़ी बहुत रौशनी थी. मैं दीदी को ढूंढ़ने लगा अचानक किसी ने मुझे पीछे से पकड़ कर घुमा कर दिवार से लगा दिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैं समझ गया ये नैना दीदी hi हैं और उनका साथ देते हुए मैं भी उनके होंठ चूसने लगा . नैना दीदी कभी मेरे ऊपर वाले होंठ को अपने होंठों में लेकर चुस्ती कभी निचे वाले होंठ को. मैं भी उनका पूरा साथ दे रहा था. हमारा किश वाइल्ड होता जा रहा था. मैंने मस्ती में कब दीदी क उभर अपनी गिरफ्त में ले लिए मुझे भी पता माहि चला. दीदी पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ा बल्कि वो मेरे सर क बालों में हाथ चलती हुई अपनी एक तंग उठा कर मुझसे रगड़ती हुई मेरे ऊपर हावी होने की कोशिश करने लगी. मैंने भी अपना एक हाथ निचे ले जा कर उनकी उठी हुई तंग को सहारा देने क लिए उनके गोल मुलायम चूतड़ पर हाथ रख कर उन्हें अपने साथ कास लिया. दीदी मेरे मुँह में अपनी ज़ुबान डालने लगी और कभी मेरी ज़ुबान अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. दीदी इतनी हॉट हैं मैं सोच भी नहीं सकता था . यौन खुली छत पर घर में सबके होते हुए इतनी ज़बरदस्त किसिंग मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था. मैं किश करते हुए एक हाथ से उनका एक संतरा दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो बड़े बड़े चूतड़ मसल रहा था. नैना दीदी क उभर कैसे हुए थे और उनके चूतड़ मुलायम थे. मगर परफेक्ट शेप में थे. इतनी हॉट किसिंग से मेरा लैंड पूरा अकड़ चूका था और जीन्स में मुझे परेशानी होने लगी थी. दीदी तो रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी मगर मेरे दिल में दर भी था क कहीं कोई हमें ढूंढता हुआ ऊपर आ गया तो क्या होगा. इस लिए मैंने किश ख़तम की और दीदी को खुद से दूर हटाया.
अमित : कण्ट्रोल .... कण्ट्रोल कीजिये खुद पर
नैना : नहीं हो रहा . इतने दिनों बाद तो मिल रहे हो फिर पता नहीं कब मिलोगे?
अमित : सब घर में है अगर कोई आ गया तो ?
नैना : कोई नहीं आएगा
अमित : मतलब ?
नैना : मतलब कोई आया तो पता चल जायेगा
अमित : मगर आप ऐसे यूँ अचानक ये सब ?
नैना : तुमने खुद hi तो कहा था तुम्हे किश चाहिए तो मैं भला कैसे तुम्हारी बात पूरी न करती.
अमित : मैंने तो मज़ाक किया था.
नैना : तो कैसा लगा मज़ाक का जवाब?
अमित : लगता है मज़ाक करते रहना hi सेहत क लिए ाचा है.
सीढ़ियों पर किसी आहत से मैं चौकन्ना हो गया. मैं जल्दी से सीढ़ियों में आया तो करुणा दीदी ऊपर hi आ रही थी.
करुणा : तुम ऊपर क्या कर रहे हो चलो जल्दी निचे आओ सब तुम्हारी वेट कर रहे हैं.
अमित : आप चलिए मैं आ रहा हूँ.
करुणा दीदी क पीछे पीछे मैं भी नीचे आ गया मगर मुझे दर था क कहीं मेरी हालत से किसी को अंदाज़ा न हो जाये इस लिए पहले बाथरूम जा कर खुद को सेट किया. सब खाने क लिए बैठ गए थे मैं भी बाबा की बगल में बैठ गया और हम सब डिनर करने लगे नैना दीदी भी खुद को सेट करने क बाद आ गयी थी और वो करुणा दीदी क साथ बैठ कर डिनर करने लगी. राधा खाना कहते हुए बार बार मेरी तरफ hi देख रही थी. मेरी जब भी नज़र उस पर पड़ती तो वो शर्मा कर नज़र झुका लेती . वहीँ नैना दीदी और करुणा दीदी से जब नज़र मिलती तो वो मेरी नज़रों से नज़र मिला कर देखने लगती.
खाना खाने क बाद मैंने माँ बाबा से पूछा क उनका क्या प्लान है. बाबा ने बताया क वो आज दिव्या मौसी क यहाँ रुकेंगे और कल सुबह रीता मौसी क यहाँ नाश्ता करेंगे उसके बाद दोपहर को वो मोहित क घर आ सकते है और फिर रत रजनी मौसी क घर रह कर अगले दिन वापिस. मैंने उनको कहा क मैं दोपहर को उन्हें रीता मौसी क घर से लेने आ जाऊंगा . सबसे मिलने क बाद मैं घर वापिस आ गया . दिव्या मौसी फिर मुझसे नहीं मिली वापिस आते वक़्त खैर धीरे धीरे उनके बारे में भी पता चल hi जायेगा. राधा बहुत खुश थी और मेरे जाने पर भी ऐसे देख रही थी जैसे मुझे जाने न देना चाहती हो. नैना दीदी क चहरे पर दिलकश स्माइल थी जो अक्सर प्रेमिका क चहरे पर होती है प्रेमी से मिलने क बाद . करुणा दीदी भी गहरी नज़रों से मुझे देख रही थी.
घर आ कर मैंने आंटी को बता दिया क कल माँ और बाबा लंच पर आएंगे तो आंटी ने भी खा क तुम्हारे अंकल भी सुबह आ जायेंगे घर . मैंने आंटी को गुड नाईट किश दी और अपने कमरे में आकर बीएड पर लेट गया आज मैं थकावट महसूस कर रहा था. और दिव्या मौसी की वजह से भी दिमाग परेशां सा था. पता नहीं कब उनके बारे बारे में सोचते सोचते मुझे नींद आ गयी. अगल दिन कॉलेज में कैंटीन में बैठ भी मैं दिव्या मौसी क बारे में सोच रहा था . मोहित मीनल और रीमा बार बार मुझे पूछ रहे थे मैं क्या सोच रहा हूँ पर मैं उन्हें क्या बताता ? इस लिए उनकी बात को ताल रहा था. इतने में राधा भी कैंटीन में आ गयी और मुझे देख कर शायद उसे भी समझ आ गयी क मैं कुछ परेशां हूँ .
राधा : अमित क्या एक मिनट क लिए बहार आओगे मुझे तुमसे ज़रूरी बात करनी है?
मैं राधा क साथ कैंटीन से बहार आ गया.
राधा : तुम माँ की वजह से परेशां हो न? मैं माफ़ी मांगती हूँ माँ की तरफ से.
अमित : अरे ये तुम क्या कह रही हो राधा ? वो मेरी मौसी हैं मैं उनकी बात का बुरा क्यों मानूंगा? मैं बस इस बात को सोच सोच क परेशां हूँ क वो मुझे गले लगा कर क्यों रो रही थी?
राधा : माँ ऐसी hi है . वो अकेले में रोटी रहती है और मौसी ( दामिनी ) को बहुत यद् करती है. मुझे नहीं पता क वो तुम पर गुस्सा क्यों करती है पर कल देखा न वो तुम्हे गले लगा कर कैसे रो रही थी. इसका मतलब है क वो अंदर से तुम्हे प्यार भी बहुत करती हैं. शायद मौसी क चले जाने से वो ऐसी हो गयी हैं ( माँ तुम्हारे पापा की वजह से तुमसे नफरत करती है मैं तुम्हे माहि बात सकती. मगर वो ऐसे क्यों करती हैं मैं पता लगा कर रहूंगी )
अमित : राधा बाबा ने मुझे बताया क माँ की हर चीज़ उनकी हर यद् मौसी क पास है . तो क्या तुम मुझे मेरी माँ की वो यादें उनकी चीज़ें उनकी तस्वीरें दिखा सकती हो?
राधा : माँ ने वो सब एक कमरे में रखा है और उसपर हमेशा टाला लगा कर रखती हैं. मुझे भी अंदर जाने नहीं देती. जब कभी माँ बहुत उदास होती है तो घंटों अंदर hi बंद रहती है.
अमित : क्या तुमने कभी नहीं देखा क अंदर क्या है?
राधा : मुझे ठीक से यद् नहीं मैं काफी साल पहले अंदर गयी थी . उस कमरे में माँ और मौसी की तस्वीरें उनका सामान है लेकिन माँ ने मुझे कुछ भी देखने नहीं दिया और मुझे लेकर बहार आ गयी. माँ ने मुझे अंदर जाने से मन कर रखा है . इस लिए मैंने भी कभी अंदर जाने की कोशिश नहीं की क्यूंकि मैं उन्हें दुःख नहीं पहुँचाना चाहती . मैंने माँ को कई बार रत रत भर रट देखा है अमित वो बहुत दुखी अंदर से शायद इसी लिए वो ऐसी हैं.
अमित : मौसी को किस चीज़ का दुःख है क्या तुम जानती हो ?
राधा : माँ की ज़िन्दगी में मेरे इलावा और कुछ भी नहीं है . मैंने कभी उन्हें हस्ते हुए नहीं देखा . पापा साल बाद कुछ दिनों क लिए आते हैं और उसमे भी वो माँ को टाइम नहीं देते न hi मेरे साथ टाइम बिताते हैं. और कभी कभी तो एते hi नहीं. मौसी भी पहले दूसरे शहरों में रहती थीं इस लिए उनसे भी मिलना नहीं होता था अब तो चलो वो इस शहर में हैं तो कभी कभी कोई आ जाता है. लेकिन इतने साल माँ ने अकेले गुज़ारे हैं. मां कभी कभी कुछ देर क लिए मिलने आ जाते हैं और माँ को कुछ न कुछ दे जाते हैं. माँ ने मुझे बहुत म्हणत से पला है. वो खुद म्हणत करती हैं लोगों क कपडे स्टिच करती हैं और मां भी कभी कभी ज़बरदस्ती कुछ माँ कुछ देते रहते हैं. माँ ने अकेले साडी ज़िन्दगी गुज़र दी है और लगता है क उन्हें अकेलेपन से hi प्यार हो गया है. पापा ने कभी उनको प्यार दिया hi नहीं. बस एक घर ले कर दे दिया है. कभी दिल किया तो कुछ पैसे भेज दिए वर्ण वो भी नहीं. मुझे जन्मदिन पर एक फ़ोन तक नहीं करते . शायद उन्हें भी हमारी ज़रूरत नहीं.
राधा की बातें सुन कर मुझे भी दुःख होने लगा क दिव्या मौसी ने कितने दुःख उठाये होंगे अकेले रह कर . कैसे उन्होंने राधा को पल पास कर बड़ा किया. दिव्या मौसी अकेली दुःख सहते सहते ऐसी हो गयी है शायद . बाबा ने बताया था क बचपन में वो शरारती और नटखट थी . लेकिन आज का उनका ये रूप देख कर लगता hi नहीं क कभी उन्होंने ज़िन्दगी में हसना सीखा भी होगा. राधा भी इसी लिए ऐसी चुपचाप रहने वाली बन गयी है क्यूंकि उसने अपनी माँ को हमेशा उदास देखा है. मगर मौसा मौसी क साथ ऐसा क्यों किया? आखिर कोण इंसान अपनी फॅमिली को ऐसे अकेला छोड़ कर जा सकता है? लोग पैसा कमाने बहार जाते हैं ये बात समझ में अति है पर मौसा तो पैसा भी नहीं भेज रहे इसकी क्या वजह हो सकती है. कुछ तो है जो कोई नहीं जनता और वो सब दिव्या मौसी को hi पता है. मगर वो किसी को बताएंगी नहीं. मुझे खुद hi पता लगाना होगा. राधा ने जिस कमरे क बारे में बताया है शायद उसमे कुछ सबूत हो और मेरी माँ की यादें भी तो हैं वहां. मुझे उस कमरे में जाना होगा.
राधा : क्या सोच रहे हो?
अमित : कुछ नहीं . मौसी ने अकेले इतने दुःख सही और कभी किसी को बताया तक नहीं. अकेलापन hi उनके दुःख का कारन है और हमें उनका ये अकेलापन दूर करना होगा.
राधा : मुझे नहीं लगता ये कभी हो पायेगा. एक औरत क लिए उसका पति उसका प्यार hi सबकुछ होता है और जब वो hi उसका साथ नहीं देता तो फिर उस औरत को कैसी ख़ुशी मिल सकती है?
अमित : कुछ भी हो राधा मौसी चाहे कितना भी मुझसे नाराज़ हो या गुस्सा करें मैं उनको फिर से हसने क लिए मजबूर कर दूंगा उन्हें खुश रहना सिखाऊंगा. बाबा ने कहा था क मौसी माँ से बहुत प्यार करती थी और उनके साथ मिलकर सबको तंग किया करती थी मैं अपनी वही दिव्या मौसी वापिस ले कर आऊंगा जो कही खो गयी है.
राधा : ( खुश होते हुए )तुम सच में ऐसा करोगे ? तुम सच में माँ को हसना सिखाओगे ? तुम सच में माँ को खुशियां डोज ? अगर ऐसा हुआ तो मैं तुम्हे
अमित : इनाम बाद में देना पहले मेरी बात सुन लो . इस काम में तुम्हे भी मेरा साथ देना होगा. और हो सकता है मौसी इस बात पर गुस्सा भी हो . तो क्या तुम मेरा साथ डौगी ?
राधा : मैं माँ को खुश देखने क लिए कुछ भी करुँगी .
अमित : फिर ठीक है. वैसे मुझे इनाम में क्या मिलेगा?
राधा : ( तुम्हे मैं अपना दिल अपनी आत्मा अपना सब कुछ दे दूंगी .) वो तुम्हे वक़्त आने पर पता चल जायेगा.
अमित : ठीक है तो अब तुम मौसी क बारे में हर चीज़ पर ध्यान देना शुरू कर दो और मुझे बताती रहा करो . मैं चाहता हूँ तुम मुझे उनके बारे में सब कुछ बताओ.
राधा : जैसा तुम कहो.
अमित : वैसे कल क्या क्या मिला फिर गिफ्ट में ?
राधा : कल तो बहुत कुछ मिला . शायद मेरी होश में ये पहला बर्थडे है जो इतनी अछि तरह मनाया गया है. सब क सब मौजूद थे मुझे तो सबको एक साथ देख कर hi मेरा गिफ्ट मिल गया.
राधा ने एक एक करके सबका बता दिया जो उसे गिफ्ट में मिला.
अमित : तो तुम्हे किसका गिफ्ट सब से ज्यादा पसंद आया?
राधा : तुम्हारा
अमित : मेरा कौन सा वाला ?
राधा : जो कल तुमने सरप्राइज पार्टी दी मेरे बर्थडे की वो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया . वो किसी भी गिफ्ट से बढ़कर है मेरे लिए. मैं कल का दिन कभी नहीं भूलूंगी.
अमित : मतलब वो गिफ्ट जो मैंने दिए वो पसंद नहीं आये?
राधा : मैंने ऐसा कब कहा? वो भी मुझे बहुत पसंद आये . सिर्फ तुमने मेरी ज़रूरत का ध्यान रखा और मुझे जिसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी वो तुमने दिया. माँ को मैंने सरे गिफ्ट खोलने क बाद तुम्हारा दिया हुआ मोबाइल दिखाया तो माँ ने पूछा था क किसने दिया. मैंने कह दिया बड़े मां ने दिया है तो माँ मां से पूछने चली गयी. मैं तो हैरान हूँ क मां ने भी कह दिया क हाँ ये मैंने दिया है . तभी मैं समझ गयी क तुमने hi मां से कहा होगा . माँ मन कर रही थी और वापिस देना चाहती थी मगर मां ने सख्ती से ये कहते हुए मन कर दिया क राधा घर से बहार जाती है तो उसकी खैर खबर लेने क लिए इसकी ज़रूरत है. बस फिर क्या था माँ को मन्ना पड़ा.
अमित : और वो बैग?
राधा : ये क्या तुम्हे नज़र नहीं आ रहा? मैंने कल hi इसमें अपना सामान दाल दिया था और पुराण बैग फेंक दिया. माँ को बता दिया क मेरी सहेली ने दिया है.
अमित : अब मुझे सहेली बना दिया तुमने ? शर्म करो मेरा जेंडर तो चेंज मत करो
मेरे इस जोके पर राधा हसने लगी
राधा : है है है वैसे आईडिया ाचा है माँ पूछेगी तो मैं कह दूंगी उसका नाम अमिता है.
मुझे भी राधा की इस बात पर हंसी आ गयी. उसके बाद हमने कुछ देर और बातें की और लेक्चर की बेल्ल बज गयी. मैंने राधा को बता दिया था क आज मुझे जल्दी जाना है क्यूंकि बाबा को मोहित की फॅमिली से मिलवाना जो था. मोहित क साथ मैंने एक और लेक्चर अटेंड किया और फिर हम कॉलेज से निकल गए रीता मौसी क घर . मोहित ने सब के पाऊँ छुए . माँ और बाबा को लेकर हम कार में मोहित क घर आ गए जहाँ अंकल आंटी लंच पर माँ बाबा का इंतज़ार कर रहे थे .