Adultery Manhoos se mahan tak - Page 18 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 136



अगली सुबह मैं कॉलेज जाने क लिए जल्दी उठा मगर माँ मुझसे पहले hi उठ कर चली गयी थी. मैं जल्दी से तैयार हुआ और नीचे आ गया. किचन से माँ ने आवाज़ देकर खाना खा कर जाने को कहा और मेरा खाना लगा दिया. माँ नाहा चुकी थी मगर उसके बाल अभी भी गीले थे . जब वो मेरे पास मुझे नाश्ता देने आयी तो उनके जिस्म से आती महक मेरी साँसों में घुटने लगी. माँ मुझे खाना देकर शर्माती हुई फिर से किचन में चली गयी . शायद उन्होंने भी नोट कर लिया था क मैं ऑंखें बंद कर क उनकी खुशबु ले रहा हूँ. मैं नाश्ता कर रहा था क बाबा भी तैयार हो कर आ गए. मुझे नाश्ता करता देख कर वो मेरे पास hi बैठ गए और बातें करने लगे. मैंने जल्दी से नाश्ता किया और जैसे hi मैं निकलने लगा माँ मेरे पास आयी और मुझे गले से लगा लिया. एक बार फिर से उनकी महक मुझे उत्तेजित करने लगी और अपने आप मेरे हाथ उनके जिस्म पर कास गए. माँ ने भी अपने स्तन ज़ोर से मेरी छाती से लगा दिए . मेरे हाथ उनकी पीठ से फिसल कर उनके कूल्हों की तरफ hi जा रहे थे क मुझे बाबा का ख्याल आया और मैं जल्दी से पीछे हैट गया . माँ का हल भी कुछ मेरे जैसा hi था और उनकी आँखों में भी मुझे अपने लिए चाहत दिख गयी.

गौरी ममी : इस बार टाइम से घर आना मैंने कोई बहाना नहीं सुन्ना .

अमित : इस बार टाइम से hi आऊंगा मैं और इस बार की तरह hi दोनों रत यहीं रहूँगा

मेरे इस तरह कहने से माँ क चेहरे पर स्माइल आ गयी और उन्होंने नज़रें झुका ली . मैंने जल्दी से बाबा से आशीर्वाद लिया और जाने hi लगा था क कामिनी ममी और दीपिका ममी भी कमरों से बहार आ गयी . मैं उनसे भी मिला और जल्दी आने का कह कर बाइक पर सवार हो कर निकल गया कॉलेज क लिए.

कैंटीन में आज हम सब साथ बैठे थे और हमारा ग्रुप अब एक बड़ा ग्रुप बन चूका था इस लिए सब से ज्यादा रौनक हमारे hi टेबल्स पर थी . हर कोई मौजूद था सिवाए शीना क. शिवानी ने बताया क वो कॉलेज में hi है और अभी आ जाएगी .

कल्पना : तो गाइस क्या कहते हो आप सब , कोई प्लान किया जाये मूवी का?

मीनल : फैंटास्टिक आईडिया , ी ऍम इन और मोहित भी .

कल्पना : वो तो मुझे पता hi है तोता मैना साथ में hi जायेंगे अकेले में चोंच किस से लड़ाओगे ?

मीनल : तू भी लड़ा ले न किसी क साथ चोंच ऐसे जलती क्यों है?

कल्पना : मुझे शीना नहीं ऐसे और वैसे भी मैं इंसान hi ठीक हूँ hi hi hi

शिवानी : सही है यार बड़े दिनों से कॉलेज से बंक नहीं किया , चलते हैं कहीं बहार. शीना भी न नहीं करेगी. शालू तुम क्या कहती हो?

शालू : मैं भी तैयार हूँ अगर सब चल रहे हो तो.

नेहा दीदी : पर यार ऐसे लेक्चर मिस कर क जाना ठीक नहीं , मेरा मतलब आज वीक का पहला hi दिन है और तुम लोग प्लान बना रहे हो मूवी का . अभी कल hi तो संडे निकल कर गया है.

कल्पना : क्या संडे , सो बोरिंग . मैं तो सारा दिन बोर होती रही फिर राधा क पास जा कर कुछ टाइम पास हुआ. एन्जॉय तो सबके साथ hi होता है और फिर संडे को सब मिल कहाँ लेट हैं. ये जनाब तो गाओं भाग जाते हैं सैटरडे को hi.

राधा : अमित को घर भी तो जाना होता है न जहाँ सब उसका इंतज़ार कर रहे होते हैं और पिछली बार तो ये मेरी वजह से जा भी नहीं पाया था .

अमित : ऐसा क्यों कहती हो ? तुम्हारी वजह से hi तो मुझे वो मिला जो अभी तक नहीं मिला था . इतनी सेवा मेरी कभी नहीं हुई थी

मेरा इशारा दिव्या मौसी की तरफ था जो राधा भी समझ गयी थी.

कल्पना : लगता है तुम्हे हॉस्पिटल जाने में कुछ ज्यादा hi मज़ा आया है. वैसे कहीं कोई चक्कर तो नहीं चला किया हॉस्पिटल में hi ?

राधा : अमित ऐसा नहीं है , वो तो किसी को देखता भी नहीं.

राधा की इस बात से रीमा मेरी आँखों में देखते हुए स्माइल करने लगी. जैसे कह रही हो क ये सब झूठ है. वहीँ शिवानी की स्माइल भी कुछ ऐसी hi थी.

कल्पना : बात कहाँ से कहाँ चली गयी फिर से, अब मूवी का बताओ . मैं तो जाना चाहती हूँ भाई और तुम्हे तो चलना hi पड़ेगा वर्ण तुम्हारे बिना ये लोग भी जाने नहीं वाले

अमित: अब मैं इसमें क्या कह सकता हूँ. मैं तो साथ hi हूँ तुम सब क.

कल्पना : तो रीमा राधा और नेहा दीदी आप लोग अपना फैसला सुनाई जल्दी .

रीमा : मैं तैयार हूँ

राधा : दीदी चलो न आप , आपको अकेले छोड़ कर जाना मुझे ाचा नहीं लगेगा.

राधा की मासूमियत भरी इल्तिजा को नेहा दीदी मन नहीं कर पायी और हाँ कह दी. राधा मन की कितनी साफ़ थी और सबको साथ रख कर चलती थी.

नेहा दीदी : ाचा ठीक है मगर ज्यादा देर नहीं होनी चाहिए.

कल्पना : क्या दीदी आप भी ? सब साथ हैं तो किस बात का दर?

मोहित : दीदी आप क्यों चिंता करती हैं ? आपको घर तो यही छोड़ क आएगी न लेडी ब्रूस ली .

कल्पना : ोये तू चुप कर वर्ण चोंच तोड़ दूंगी.

राधा : पर शीना दीदी तो आयी नहीं अभी तक उन्हें ऐसे अकेला छोड़ कर जाना ाचा नहीं लगता. उन्हें भी बुला लो.

शिवानी : मैं फ़ोन करती हूँ उसे.

शिवानी ने शीना को फ़ोन लगाया और उससे बात की .

शिवानी : वो आ रही है 5 मिनट्स में .

कल्पना : तो चलो 12 बजे वाला शो मिल hi जायेगा अभी टाइम है .

हम सब पार्किंग की तरफ चल दिए और शीना भी उधर hi आ गयी . उसकी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे अभी रो कर आयी है मगर मैंने सबके सामने पुछा नहीं.

कल्पना : मेरी और मोहित की कार में hi आ जायेंगे सारे. सबको अपनी अपनी गाड़ी ले जाने की ज़रूरत नहीं है. वैसे भी सेव एनर्जी एंड लेस्स पोल्लुशण .

अमित : बिलकुल सही .

कल्पना : चलो बैठो जल्दी .

मैं मोहित क साथ उसकी कार में बैठ गया जैसा क हमारा रोज़ का hi काम था . हमारे साथ मीनल तो पक्की थी. राधा भी नेहा दीदी को बोलकर हमारे साथ hi बैठ गयी और रीमा भी . कल्पना क साथ शीना शिवानी शालू और नेहा दीदी बैठ गयी. और सब चल पड़े मूवी देखने.

एक से बढ़कर एक 8 खूबसूरत लड़कियां हमारे साथ थी और इनमे मैं और मोहित hi 2 लड़के थे. सिनेमा पहुँचते hi सब की नज़र इन तितलियों पर अटकने लगी. जहाँ नेहा दीदी और राधा हमेशा की तरह सिंपल सूट में भी कमल की लग रही थी वहीँ शीना शालू मीनल बौर कल्पना जीन्स टॉप में धमाल लग रही थी . रीमा और शिवानी को भी पता था क मैं सिम्पलिसिटी पसंद हूँ तो वो मेरी वजह से अब ज्यादातर सूट hi फेंटिन थी. सब की सब अपने आप में खूबसूरती में कमल थी . सिनेमा में इस समय ज्यादातर कॉलेज क hi लड़के लड़कियां आये हुए थे. जो लड़के अकेले थे वो तो इन खूबसूरत बालाओं को देख hi रहे थे साथी जो लड़के अपनी गफ क साथ थे वो भी इन हसीनाओं को देख कर अपनी लार टपका रहे थे. मैं और मोहित सबके लिए टिकट्स लेने चले गए तो इधर कुछ लड़के जो एक साथ hi आये हुए थे हमारी तितलियों को देख कर कमैंट्स करने लगे. सब साले लाइन मरने में लगे थे. मगर बात जब तक हद से बहार न हो तब तक सब चुप hi रहते हैं. बस ऐसा hi कुछ हमारी हसीनाएं कर रही थी और उन आवारा मजनुओं को भाव न देते हुए अपने में मस्त थी . मैं और मोहित जब टिकट्स लेकर वापिस आये तो मैंने इन मुस्टंडों को गन्दी नज़र इन सब को ताड़ते हुए पाया. राधा ने मुझे उन लोगों की तरफ गुस्से से देखते हुए पाया तो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर चलने को कहा. अब राधा क आगे मैं भला कहाँ गुस्से में रह सकता हूँ इस लिए चुपचाप चल दिया सबके साथ. हमारी टिकट्स एक hi रौ में थी तो बैठने में आसानी थी. अभी मूवी शुरू होने में टाइम था और हॉल भी इतना भरा हुआ नहीं था . सब से कार्नर में मीनल और मोहित बैठ गए जैसे की पहले hi हमें पता था . उसके बाद शीना शिवानी और शालू बैठ गयी और फिर कल्पना राधा रीमा और मैं. मैं खुद hi सबसे बहार बैठा था क इस तरफ से कोई भी लड़का छेड़छाड़ न कर सके रीमा क साथ.

कल्पना : यार हमने तो कुछ खाने को लिया hi नहीं. सब अपना अपना बताओ क क्या खाओगे ?

राधा : रहने दो न बाद में खा लेंगे.

कल्पना : थोड़ा हल्का फुल्का तो खा hi सकते हैं यार. ाचा छोडो मैं खुद hi ले आती हूँ. कोई चलेगा मेरे साथ ?

अमित : मैं चलता हूँ चलो .

हम दोनों हॉल से बहार आये और सबके लिए कोल्ड ड्रिंक्स और पॉपकॉर्न ले लिए. जब हम वापिस आये तो रीमा मेरी चेयर पर बैठी थी और राधा स्माइल क साथ मुझे देख रही थी. रीमा और राधा की स्माइल देख कर मुझे समझ नहीं आ रहा था क ये राधा का आईडिया है या रीमा का पर जो भी था ाचा था. रीमा क साथ वाली सीट पर भी एक लड़की अपने बर्फ क साथ बैठी थी. मैं दोनों क बीच में बैठ गया. जैसे hi मूवी शुरू होने को हुई तो साडी लाइट्स ऑफ hi गयी और हॉल में पूरा अँधेरा हो गया. हम सब कोल्ड ड्रिंक क साथ पॉप कॉर्न का मज़ा लेते हुए मूवी देखने लगे. ये रोमांटिक + एक्शन मूवी थी. मैंने अपना डायन हाथ में रीमा का हाथ पकड़ा तो वो भी स्माइल करते हुए मेरी बाज़ू अपने साइन से लगते हुए मेरे साथ सात कर बैठ गयी . उसका सर मेरे कंधे से सारा हुआ था. इधर दूसरी तरफ राधा जो अभी मूवी देख रही थी उसकी नज़र इस तरफ नहीं थी . रीमा मेरे हाथ जो अपने दोनों हाथों में थामे मुझे अपने प्यार का एहसास करवा रही थी. मैं भी उसके साथ उसका प्यार फील कर रहा था. कुछ hi देर में जब एक एक्शन सन आया तो राधा घबराकर मेरी बाजु के साथ चिपक गयी.

अमित : क्या हुआ राधा ?

राधा : कुछ नहीं मैं वो मूवी

अमित : तो फाइट देख कर दर गयी थी तुम . ये तो सब नकली है और तुम घबरा रही हो ?

राधा : मुझे दर लगता है ये सब देख कर.

अमित : जस्ट रिलैक्स ये सब असली नहीं होता.

राधा : हम्म्म

राधा मासूमियत से ऐसे hi मेरी बाजु को अपने साथ लगाए बैठी रही और मैंने भी उसे ऐसे बैठने दिया. अब मेरे एक तरफ रीमा मुझसे सटी बैठी थी और दूसरी तरफ राधा . धीरे धीरे राधा ने भी मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया. फिल्म में जब एक रोमांटिक सन आया और हीरो ने हेरोइन को किश किया तो रीमा को देखते हुए मेरा दिल उसे किश करने का होने लगा मगर इधर राधा की भी पकड़ मेरी बाज़ू पर मजबूत हो गयी और मुझे उसकी कोमलता का एहसास अपनी बाज़ू पर होने लगा . मैंने राधा की तरफ देखा तो हमारी नज़रें मिली. राधा की आँखों में मुझे अलग hi कशिश नज़र आ रही थी जो मुझे अपनी तरफ खिंच रही थी. इससे पहले क मैं उन नज़रों क जादू में खो जाता मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने हड़बड़ा कर अपना मोबाइल निकला और देखा तो ये डॉ रीना का फ़ोन था. मैंने जल्दी से कॉल काट दी क्यूंकि यहाँ बात तो कर नहीं सकता था ऊपर से सब डिस्टर्ब होते. मैंने डॉ रीना को बाद में कॉल करने का मैसेज कर दिया . नाम की जगह मैंने सिर्फ डॉ लिखा था इस लिए राधा और रीमा ने भी कुछ नहीं पूछा. इंटरवल तक ऐसे hi हम तीनो एक दूसरे से जुड़ कर बैठे रहे.

इंटरवल होते hi सब उठ कर फ्रेश होने चले गए . मोहित और मीनल की हालत देख कर hi पता चल रहा था क उन्होंने मूवी देखने की बजाये अपनी hi मूवी प्ले की है. सभी गर्ल्स एक साथ बाथरूम की तरफ चली गयी और मैं मोहित एक तरफ . मुझे तो जाना नहीं था तो मैं बहार hi खड़ा हो गया. तभी मेरी नज़र शीना पर पड़ी जो शायद अंदर गयी hi नहीं थी और एक तरफ कड़ी थी . शीना को अकेला देख कर मैं उसके पास चला गया .

अमित : तुम गयी नहीं उनके साथ ?

शीना : नहीं मुझे ज़रूरत नहीं थी . तुम भी तो बहार hi हो.

अमित : हाँ मुझे भी ज़रूरत नहीं थी . एक बात पूछ सकता हूँ तुमसे?

शीना : तुम्हे कुछ भी पूछने क लिए इजाज़त की ज़रूरत नहीं है .

अमित: जब तुम पार्किंग में आयी थी तो तुम्हारी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे तुम रो कर आयी हो, क्या मैं इसकी वजह जान सकता हूँ ?

शीना : तुमने ये भी नोट कर लिया? और तो किसी का ध्यान नहीं गया था इस बात पर. तुम सच में बहुत अचे हो अमित थैंक यू वैरी मच . अगर तुम न बताते तो मैं कभी जान hi न पति क मोंटी कितना गलत है. तुम नहीं जानते क उसने परायों क साथ साथ अपनों को भी नहीं छोड़ा. मुझे खुद से नफरत हो गयी है जब से अपनी आँखों से उसकी काली करतूतें देखि हैं. तुम्हारा जितना भी शुक्रिया ऐडा करूँ वो काम है. तुमने बहुत सी मासूम ज़िंदगियाँ बचाई हैं. अब मैं भी एक अछि इंसान बन कगाया दिखाउंगी.

शीना की बातों से मुझे लगा क कहीं उसे रुपाली क बारे में पता तो नहीं चल गया. पर इस बारे में मैं सवाल भी तो नहीं पूछ सकता था. हो सकता है लैपटॉप में से कुछ ऐसा निकल आया हो जिससे उसे पता चल गया हो.

अमित : मैंने बस वही किया जो एक दोस्त क नाते मुझे करना चाहिए था. मैंने शालू से वडा किया था क मैं उसे इस नरक से निकलूंगा. तुम अछि हो इसी लिए तुम मोंटी की बुराई जानने पर खुद उसे गलत कह रही हो. मुझे यकीन है क तुम और भी अछि बन कर दिखाओगी. वैसे मेरे सवाल का जवाब तुमने अभी भी नहीं दिया.

शीना : मैं आज किसी से मिलने गयी थी जो मेरे दिल क बहुत करीब थी कभी मगर वक़्त ने मुझे उनसे जुड़ा कर दिया था. आज इतने सैलून बाद फिर से उनसे मिली तो अपने आप को रोक न सकीय.

तभी मुझे कुछ लड़कों क कमैंट्स सुनाई दिए . असल में मैं शीना से बात करता हुआ एक साइड में चला गया था और जब बाथरूम से शालू बहार आयी तो वही लड़के जो पहले भी कमैंट्स कर रहे थे वो शालू को कमैंट्स करने लगे.

लड़का 1 : आये हेट क्या ज़बरदस्त माल है आगे पीछे दोनों बम्पर बड़े बड़े और मजबूत लग रहे हैं . मज़ा आ जायेगा टक्कर मरने में.

लड़का 2 : लगता है कोई सर्विस करने वाला नहीं है साथ में , क्यों न हम hi ये नेक काम कर दें.

मुझे उनकी बातें सुन कर गुस्सा आ गया . इससे पहले क मैं उन 5 लड़कों की तरफ बढ़ता शीना मुझसे पहले hi वहां पहुँच गयी और गुस्से से उन लड़कों को उनकी औकात बताते हुए बोली.

शीना : घर में माँ बहिन है तो उसे भी बुलवा लो सर्विस मैं करवा देती हूँ हिजड़ो. बड़ा शोक है लड़कियां ताड़ने का ? नंगा कर क सड़क पर दौड़ाउंगी एक मिनट में साडी हेकड़ी निकल जाएगी.

शीना की बात सुन कर जहाँ शालू शर्मिंदगी से बहार आ कर अब कॉन्फिडेंस से शीना क साथ कड़ी हो गयी थी वहीँ उन सब छछूंदरों की झांटे hi सुलग गयी थी. शीना का इस तरह शालू को डिफेंड करना मुझे बहुत ाचा लगा पर उन लड़कों ने अपनी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त न करते हुए शीना पर हमला बोल दिया.

लड़का 1 : हरामज़ादी रांड कहीं की मुझे नंगा करेगी तू ? अभी तुझे बताता हूँ .

इतना कह कर वो लड़का जैसे hi शीना की तरफ बड़ा तो शीना ने करारा थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया. ये थप्पड़ इतना करारा था क सबकी नज़रें उसी तरफ घूम गयीं. या लड़के क मुँह पर शीना क हाथ का नक्शा बन गया था .

शीना : कुत्ते अपनी औकात में रह बोलै न. वर्ण वो हल करुँगी क साडी उम्र पछतायेगा.

लड़का 2 : देख क्या रहे हो उठालो साली को.

‘ तडडडडक ‘ जैसे hi दूसरा लड़का आगे बड़ा तो एक ज़बरदस्त किक उसके मुँह पर लगी और वो ज़मीन पर औंधे मुँह गिरा ख़ाक छान रहा था. ये कल्पना थी हमारी लेडी ब्रूस ली जिसके एक hi वॉर से वो लड़का धराशायी हो गया था.

कल्पना : माँ क दूध पिया है तो हाथ लगा कर दिखाओ, अपने पाऊँ पर चल कर नहीं जा पाओगे.

इससे पहले की ये झगड़ा और बढ़ता सिक्योरिटी वालों ने आकर उन 5 लड़कों को बहार का रास्ता दिखा दिया.

शालू : थैंक्स शीना तुम मेरे लिए उन सब से भीड़ गयी.

शीना : मैंने कहा था न तुम अब से मेरी दोस्त hi नहीं बहिन भी हो . तुम्हारे लिए हर वक़्त रेडी रहेगी ये शीना . थैंक्स कल्पना तुम वाकई बहुत स्ट्रांग हो.

कल्पना : थैंक्स कैसा ? अपनी दोस्त छुम बहनो क लिए क्या इतना भी नहीं कर सकती ? शालू शीना और कल्पना तीनो एक दूसरे क गले लग गयी. बाकि सब भी उन्हें देख रहे थे और फिर इस भावुक पलों क साथ फिर से सब अंदर अपनी अपनी सीट पर आ गए. एक तरफ राधा बैठी थी इस लिए मैं रीमा क साथ कुछ कर नहीं पर रहा था पर रीमा मेरे हाथ को अपने हाथों में लिए मुझसे से सात कर बैठी रही और राधा भी दर क मरे मेरे साथ hi लगी रही.

मूवी ख़तम होने क बाद हम सब बहार आये तो वही लड़के सामने खड़े हमारा hi इंतज़ार कर रहे थे. अब उनके साथ कुछ और लड़के भी थे. इतने लोगों को सामने देख कर जहाँ सब लड़कियां दर गयी वहीँ कल्पना हमारी लेडी ब्रूस ली फिर से आगे आ गयी और उसके साथ शीना भी.

लड़का 1 : पकड़ो साली को आज इसे दिखता हूँ हमसे टकराने का अंजाम.

कल्पना : लगता है एक बार में तुम्हे शांति नहीं मिली . किसी बहुत बड़े हरामी की औलाद है तू. चल अजा तुझे बताती हूँ.

जैसे hi एक लड़का आगे बड़ा कल्पना ने उसे ज़ोरदार पंच मर कर गिरा दिया. ये देख कर सब लड़के एक साथ टूट पड़े . और कल्पना भी अपने हाथ पाऊँ चलने लगी. मगर एक साथ हमला कर देने से वो 3-4 लड़कों को hi मर पति थी क उसके हाथ पाऊँ उन लोगों ने पकड़ लिए. मोहित और शीना ने भी कल्पना का साथ देते हुए उन लड़कों पर हमला किया पर वो एक एक क साथ hi उलझ सके . मैं जो कल्पना की पावर देख रहा था अब मुझे लगा क मुझे उसकी मदद करनी चाहिए .

लड़का 2 : अब बोल साली , बहुत उछाल रही थी चल तेरी गर्मी निकलता हूँ.

वो लड़का कल्पना की छाती पर हाथ डालने hi लगा था क मैंने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया और उसे उठा कर नीचे पटक दिया . वो ज़ोर से कराहने लगा . जैसे hi दूसरे ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो उसे भी मैंने उठा कर पटक दिया.

कल्पना : ले आ गया तेरा जीजा अब बोल क्या बोल रहा था साले .

कल्पना क हाथ पाऊँ छूट ते hi अब वो फिर से उनकी ठुकाई करने लगी और मैंने भी एक एक कर क धोबी पताका दिया . 5-7 मिनट्स में hi सब धराशायी हो कर निचे पड़े कराह रहे थे. कल्पना में फिर से उस लड़के को पकड़ कर घसीटा और उसके मुँह पर पाऊँ रखते हुए कहा.

कल्पना : असली मर्द क्या होता है पता चल गया न ? अगर अभी भी शक है तो भेज देना घर से किसी को . लड़कियों को चीज़ समझता है न कुत्ते ? कसूर तेरा नहीं तेरी माँ का है जिसने तेरा जैसा हरामी पैदा क्या है. अभी तो ट्रेलर था अभी फिल्म बाकि है.

इतना कह कर कल्पना ने अपनी जेब से फ़ोन बहार निकला और दूर जा कर किसी को फ़ोन करने लगी. जैसे hi वो हमारे पास वापिस आयी तो नेहा दीदी चलने को कहने लगी जबकि राधा मेरे हाथ देख रही थी क कहीं मुझे चोट तो नहीं लगी . सब कार्स में बैठने लगे. इस बार कल्पना ने मुझे अपने साथ कार में बैठने को कहा तो मुझे उसके साथ बैठना पारा और शालू नेहा दीदी मेरी जगह आ गयी . हमारे पार्किंग से बहार निकलते निकलते पुलिस की 2 गाड़ियां उधर पहुँच गयी और उन लड़कों को उठा कर वो लोग गाड़ियों में डालने लगे. हम सब वापिस चल कॉलेज को निकल गए.

शीना : वह कल्पना , मुझे तो पता hi नहीं था यार क तुम इतनी पावरफुल फाइटर हो. और क्या मस्त डायलाग मारा था ‘ ले आ गया तेरा जीजा ‘

शिवानी : एक बात तो बता ये तूने अमित को उनका जीजा क्यों कहा ? बहिन तो तू खुद बन रही थी?

कल्पना : शरमाते हुए ) वो वो क्या दीदी आप भी मेरी तंग खींचने लगी .

कल्पना ने एक नज़र मुझे देखा और फिर से सामने देखने लगी .

शालू : जो भी हो , मूवी से ज्यादा तुम्हारा एक्शन देखने में मज़ा आया. एंड यू बोथ शीना ने और तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया.

कल्पना : दीदी हम सब फ्रेंड्स हैं और फ्रेंडशिप में no थैंक्स.

अमित : एक बात तो बताओ तुमने फ़ोन किसे किया था ? इतनी जल्दी पुलिस भी आ गयी उनको पकड़ने क लिए.

कल्पना : पापा को किया था और किसे करुँगी .

अमित : तुम्हारे पापा पुलिस में हैं क्या ?

कल्पना : नहीं तो , हाँ उनकी पुलिस में चलती है. अब उनकी एक लौटी बेटी क साथ कोई बदतमीज़ी करेगा तो वो इतना तो करेंगे hi न .

शीना : लगता है तुम्हारे पापा कोई बहुत बड़ी हस्ती हैं जो इतनी चलती है उनकी .

कल्पना : मेरे लिए वो hi सब कुछ हैं.

शिवानी : वैसे करते क्या हैं तुम्हारे पापा ?

कल्पना : लोक सेवा .

शीना : इसका क्या मतलब?

कल्पना : क्या दीदी आप तो सवाल पे सवाल पूछे जा रही हैं . ऐसा लग है जैसे मेरी रिमांड ली जा रही है.

इतने में हम कॉलेज पहुँच गए . पीछे पीछे hi दूसरी कार भी पहुँच गयी . छुट्टी का टाइम हो गया था तो कल्पना राधा और नेहा दीदी को लेकर जाने लगी तभी राधा मेरे पास आ गयी.

राधा : तुम नहीं चल रहे साथ? आज तुमने हमारे यहाँ आना है न रहने क लिए .

अमित : वो मैंने बताया न क आज मुझे कुछ काम है . रत को एक फंक्शन पर जाना है तो लेट हो जाऊंगा . वैसे भी मेरे कपडे मोहित क घर पड़े हैं . इस लिए कल hi आऊंगा वर्ण मौसी ऐसे रत को कहीं जाने नहीं देंगी.

राधा : मगर जाना कहा है तुम्हे ? माँ कल से तुम्हारे लिए पता नहीं क्या क्या तैयारियां कर रही है.

अमित : प्लीज मौसी को मन लेना , मैं कल पक्का आ जाऊंगा. आज किसी तरह उन्हें मन लो

राधा : बात पूरे हफ्ते की हुई थी ऐसे तो एक दिन काम हो गया न

राधा ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा . बिलकुल बच्चों की तरह शिकायती लहजे में कह रही थी.

अमित : कोई बात नहीं तुम नोट कर लो . इसे फिर किसी हफ्ते में एडजस्ट कर लेंगे .

राधा : कल पक्का आओगे न ?

अमित : पक्का , प्रॉमिस .

राधा : ाचा तो फिर मैं चलूँ ?

अमित : ठीक है अब तुम जाओ.

इसके बाद राधा कल्पना और नेहा दीदी क साथ चली गयी . जबकि रीमा और शालू शीना क साथ उसकी कार में गयी . शालू को शीना क साथ देख कर मुझे ाचा लगा . और फिर मोहित भी मीनल क साथ चला गया . मैं चूँकि बाइक पर आया था तो मैंने भी अपनी बाइक उठायी तभी यद् आया क डॉ रीना से बात तो की नहीं. मैंने डॉ रीना को फ़ोन लगा दिया.

डॉ रीना : कहाँ हो मर ? फ़ोन hi अटेंड नहीं कर रहे थे.

अमित : मैं ज़रा अपने दोस्तों क साथ था.

डॉ रीना : दोस्त या गफ?

अमित: लगता है आप भूल गयी क मेरी गफ नहीं है.

डॉ रीना : ज्यादा दिन अकेले नहीं रहोगे तुम

अमित : मतलब ?

डॉ रीना : आ अब इतने हैंडसम हो तो कोई न कोई पकड़ hi लेगी तुम्हे. वैसे शाम को जाना है मेरे साथ यद् तो है न ?

अमित : जी बिलकुल , आप बोलो कितने बजे चलना है?

डॉ रीना : एक घंटे की ड्राइव है यहाँ से तो 8 बजे तक चलते हैं. मेरी कार में hi चलेंगे . मुझे बता दो तुम्हे कहाँ से पिक करूँ?

अमित : ठीक है , मैं आपको एड्रेस सेंड कर देता हूँ.

डॉ रीना : ाचा ठीक है , और हाँ , आने में शायद देर भी हो सकती है . कोई प्रॉब्लम तो नहीं न?

अमित : कोई बात नहीं .

डॉ रीना : ाचा ठीक है शाम को मिलती हूँ ज़रा पेशेंट चेक कर लूँ.

अमित : ok bye.

उसके बाद मैं मोहित क घर चला गया . आंटी मुझे देख कर बहुत खुश हुई उन्हें लगा था क मैं आज नहीं आऊंगा. हमने साथ में लंच किया और अपने कमरे में चला गया रेस्ट करने. आंटी को मैंने बता दिया था क मैं रत में मैरिज पर जाने वाला हूँ. थोड़ा बहुत उन्होंने भी सवाल किये और जाने की परमिशन दे दी. कुछ देर सोने क बाद शाम को मैं स्टेडियम चला गया. अब कम्पटीशन में ज्यादा वक़्त नहीं था तो मैंने प्रैक्टिस शुरू करना hi ठीक समझा . नीरज ने कोच सर को मेरे बारे में बता दिया था तो वो भी नाराज़ नहीं थे. इतने दिनों बाद मैं स्टेडियम आया था तो ज्यादा ज़ोर नहीं लगाया और उसके बाद मैं मंजू म से मिलने उनके घर चला गया.

बाइक की आवाज़ सुनते hi मम ने दरवाज़ा खोल दिया. मैं जब दरवाज़े पर पहुंचा तो सामने मंजू म एक T-shirt और लोअर पहने कड़ी थी. उनके चेहरे पर एक दिलकश स्माइल थी. चेहरा देख कर मैं समझ गया क वो बहुत खुश हैं. जैसे hi मैं घर क अंदर दाखिल हुआ तो मम कूद कर मेरी गॉड में चढ़ गयी और अपने पाऊँ मेरी कमर पर बांध लिए. मंजू मेरी गर्दन को दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे होंठ चूसने लगी. ये सब अचानक हुआ था . कुछ सेकण्ड्स में मैं भी संभाला और मम क होंठों को चूमते हुए उन्हें दीवार से लगा दिया. मम वीलडली किश कर रही थी और अभी तक न खुद कुछ बोली थी न मुझे कुछ बोलने दिया था . जैसे hi हम दोनों की सांसे उखाड़ने लगी तो हमने किश तोडा.

अमित : हहहहह , आज क्या बात है ? आप इतनी एग्रेसिव क्यों हैं ?

मंजू म : एग्रेसिव नहीं ी ऍम हैप्पी और मैं अपनी ख़ुशी अपनी जान से बाँट रही हूँ ‘ उम्मम्मम उम्म्म्माःह्ह्ह’

अमित : पर बात क्या है कुछ बताएंगी ?

मंजू म : पहले मैं अपनी जान को जी भर क प्यार तो कर लूँ फिर बताती हूँ. आखिर इसकी वजह भी तो तुम हो. ‘ उम्मम्मम्मम’

मंजू मम फिर से मुझे किश करने लगी . किश करते हुए मम ने मेरी T-shirt खिंच कर निकल दी और मेरे नंगे सीने से लिपट कर किश करने लगी. मैं मम को लिए ऐसे hi सोफे पर आ कर बैठ गया और मंजू म मेरी दोनों साइड घुटनो क बल मेरी गॉड में बैठी थी. मेरा लैंड अकड़ कर सलामी देने लगा था जो मंजू म को अपनी छूट कर महसूस हो रहा था . जल्दी से मम ने उठ कर अपना लोअर पेंटी समेत घुटनो तक किया और मेरा लैंड भी खुद मेरे लोअर से बहार निकलने क बाद अपने थूक से लैंड का सूपड़ा चिकना करते हुए फिर से मेरी गॉड में बैठ गयी और सुपडे को छूट पे से कर क एक डैम से बैठ गयी

मंजू म : aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh कक्कक्कक्कक्स उम्मम्मम्मम्म ी लव आईटी. ी लव यू जान . यू अरे माय लकी चार्म. उम्म्म्म ओह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह

मंजू म खुद hi अपने बूब्स मसलती हुई मेरे लैंड पर उछलने लगी. मैंने भी मम की T-shirt उतर दी और उनके बूब्स को खिंच कर ब्रा से बहार निकल कर किश करने लगा.

करीब 20 मिनट्स तक मैंने मंजू म को अलग अलग पोजीशन में प्यार किया . मंजू म की छूट 3 बार अपना पानी बहा चुकी थी और लास्ट में मैंने भी अपना पानी निकल दिया. मंजू म मेरी नंगी छाती से लिपट कर आराम कर रही थी.

अमित : अब बताएंगी आप इतनी एक्ससिटेड क्यों थी ?

मंजू म : तुम्हारी वजह से

अमित : मेरी वजह से? वो कैसे ?

मंजू म : यू अरे माय लकी चार्म . जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आये हो ज़िन्दगी hi बदल गयी है. अब तो लग रहा है जैसे वो हर ख़ुशी जो मुझसे रूठ गयी थी वो वापिस मेरे तक आ रही है.

अमित : मैं कुछ समझा नहीं .

मंजू म : पता है आज क्या हुआ ?

अमित : बताइये

मंजू म : आज कॉलेज में शीना मुझसे मिलने आयी थी. वो मेरे गले लगी और देर तक रोटी रही. वो बार बार मुझसे माफ़ी मांग रही थी. सच में वो बदल गयी है और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है . भैया और बिट्टू क बाद मैंने उन्ही बच्चों में तो खुद को बिजी किया था या यूँ कहो इन बच्चों क सहारे hi मैं खुद को संभल पायी थी मगर वक़्त ने मुझसे इनसे दूर कर दिया था और देखो अब फिर से वो मेरे पास आ गए.

अमित : ये बिट्टू कौन है ? पहले तो कभी नहीं बताया आपने ?

मंजू म: मेरा भतीजा बिट्टू पन्नू भैया का बीटा. बहुत क्यूट था और मैं उसे बहुत प्यार करती थी. मैंने hi उसका ये नाम रखा था. मेरे लिए तो वो मेरा खिलाना था जिससे मैं घंटों खेला करती थी . मगर एक एक्सीडेंट में सब ख़तम हो गया.

इतना कहते हुए मंजू म की आँखों में पानी आ गया तो मैंने उनकी आँखों. को साफ़ करते हुए अपने सीने से कास दिया

अमित : जो कुछ हो चूका उसे यद् मत कीजिये सिवाए दुःख क कुछ नहीं मिलेगा. आज जो सामने है उसे प्यार कीजिये. शीना से क्या बात हुई आपकी?

मंजू म : वो फिर से मुझे घर चलने को कह रही थी और ये भी कह रही थी क वो मुझे बहुत मिस करती है. वो यहाँ मुझसे मिलने आने की परमिशन मांग रही थी

अमित : तो क्या कहा आपने?

मंजू म: मैंने कह दिया क जब चाहे आ सकती हो पर उसके माँ बाप और मोंटी नहीं आने चाहिए .

अमित : और

मंजू म : और रुपाली भाभी से भी मैं मिलना चाहती हूँ और उनकी दोनों बेटियों से भी. ी ऍम सो हैप्पी . तुम ने फिर से मेरी ज़िन्दगी में खुशियां भर दी हैं . कभी मुझे खुद से अलग मत करना .

अमित : कभी भी नहीं , हाँ कहूं आप मुझसे दूर न हो जाना अपने रिश्तेदारों क आते hi.

मंजू म : गंभीर लहजे में ) दुबारा कभी ऐसा सोचना भी मत. ये सब तुम्हारी वजह से hi तो हुआ है वर्ण वो तो पहले भी यहीं थे. मैं सब को छोड़ सकती हूँ पर तुम्हे नहीं .

मंजू म को सीरियस होता देख मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगा .

अमित : ी लव यू . ाचा अब मुझे जाना है . आज एक फंक्शन पर जाना है तो जल्दी जाना होगा अभी तैयार भी होना है जाकर.

मंजू म : यहीं तैयार हो जाओ न? कपडे तो हैं तुम्हारे यहीं पर .

अमित : मैरिज फंक्शन है तो सोच रहा हूँ उस हिसाब क कपडे पहन कर जॉन . कपडे मोहित क घर पर पड़े हैं तो वहां जाना hi होगा.

मंजू म : तो काम से काम यहाँ मेरे साथ नाहा तो सकते हो न?

अमित : लगता है अभी मन नहीं भरा आपका ?

मंजू म : तुमसे तो कभी भी मन नहीं भर सकता .

अमित : तो चलो फिर साथ में नहाते हैं पर यद् रखना मुझे जल्दी जाना है .

मंजू म : ठीक है .

फिर मैंने मंजू म और अपने जिस्म पर मौजूद आखिरी कपडे भी उतरे और हम दोनों बाथरूम में नंगे हो कर एक दूसरे को नहलाने लगे. मम क चिकने गदराये हुए बदन को मसलने में फिर से लैंड अकड़ गया . अगर मुझे जाना न होता तो एक और राउंड वहीँ पर उन्हें पेल देता पर चूँकि डॉ रीना को वडा किया था तो मैं भी लेट नहीं होना चाहता था . इस लिए जल्दी से नाहा कर दूसरे कपडे पहने और मंजू म को किश करने क बाद मोहित क घर वापिस चला गया. आंटी ने मेरे लिए कुछ ब्लेजर वगैरह लिए थे जो मैंने कभी पहने नहीं थे . उन्हें में से एक पेहेन कर मैं रेडी हो गया . जब मैं तैयार हो कर निचे आया तो आंटी मेरी तारीफ करने लगी . और मुझसे लिपट कर मेरे छरहरे और होंठों पर ढेर सरे किश कर दिए . उधर 8 बजने से पहले hi डॉ रीना की कॉल आ गयी.

डॉ रीना : रेडी हो ?

अमित : मैं तो रेडी हूँ पर लगता है आप रेडी नहीं हुई अभी .

डॉ रीना : मैं भी रेडी hi हूँ. वैसे तो मुझे मेकअप वगैरह करना ाचा नहीं लगता पर आज तुम साथ जा रहे हो तो थोड़ा टाइम लगाना पड़ा . बस 10 मिनट्स में मैं पहुँच रही हूँ तुम बहार आ जाना .

अमित : ठीक है आप आ जाओ.

आंटी: कब तक आओगे और जा किसके साथ रहे हो?

अमित : वो डॉ रीना हैं न उनके साथ. उनके घर वाले जा नहीं सकते थे तो उन्होंने मुझे चलने को कहा . उनकी फ्रेंड की मैरिज है . अब उनहोंने मेरा इतना ख्याल रखा था इतना तो मैं कर hi सकता हूँ.

आंटी : कहीं वो तुम पर फ़िदा तो नहीं हो गयी ?

अमित : ऐसी बात नहीं है . वो मुझे अपना दोस्त समझती हैं बस.

आंटी : दोस्ती से hi प्यार शुरू होता है . वैसे वो तो है भी खूबसूरत . अगर बात बने तो बना लो.

अमित : नहीं ऐसा कुछ नहीं है.

आंटी : ाचा वापिस कब तक आओगे?

अमित : अब ये तो पता नहीं क्यूंकि जाना दूर है . हाँ देर तो हो hi जाएगी .

आंटी : ठीक है मुझे बता ज़रूर देना कब तक आना है .

अमित : जी ठीक है .



हमारी बातें चल hi रही थी क फिर से मेरा फ़ोन बजा. डॉ रीना की hi कॉल थी मतलब क वो बहार आ चुकी थी. मैंने आंटी से गले मिल कर इजाज़त ली और बहार निकल गया जहाँ डॉ रीना कार में बैठी मेरा इंतज़ार कर रही थी.
 
अपडेट 137



जब मैं घर से बहार आया तो सामने कार में डॉ रीना मजूद थी. मैं साइड दूर खोल कर अंदर बैठ गया और जब मैंने डॉ रीना को देखा तो देखता hi रह गया. हर वक़्त सिंपल सी रहने वाली डॉ रीना आज बम लग रही थी. ब्लैक कलर क ओने पीेछे लॉन्ग गाउन में वो कमल लग रही थी. सफ़ेद दूध सा गोरा रंग काळा कपड़ों में बिजलियाँ गिरा रहा था. ऊपर से खुले कर्ली बाल लाल लिपस्टिक और हलके मेकअप क साथ वो किसी को भी अपना दीवाना बनाने क लिए काफी थी. मुझे अपनी तरफ ऐसे अवाक् सा देखते हुआ पाकर वो शर्मा गयी.

डॉ रीना : ऐसे क्या देख रहे हो ? पहली बार देख रहे हो क्या ?

अमित : पहली बार hi देख रहा हूँ. आप पहले hi इतनी खूबसूरत थीं और आज तो क़यामत लग रही हैं. ी . ी ऍम सॉरी वो मुँह से निकल गया . बूत यू अरे लुकिंग गॉर्जियस.

डॉ रीना : शरमाते हुए ) थैंक्स , वैसे तुम भी आज कमल क लग रहे हो . इन कपड़ों में तो बिलकुल फिल्मी हीरो लग रहे हो .

अमित : कहीं भी आपके मुकाबले में नहीं हूँ . आज तो लोगों का कतल करने वाली हैं आप .

डॉ रीना : इतनी भी तारीफ मत करो मेरी. ये तो बस तुम्हारी वजह से तैयार हुई हूँ वर्ण मुझे शीना नहीं है.

अमित : मेरी वजह से ?

डॉ रीना : वो वो अब तुम साथ जा रहे हो तो मैंने सोचा अगर सिंपल बन कर गयी तो लोग कहेंगे क कैसी लड़की को साथ ले आया अपने .

अमित : पर मुझे वहां कौन जनता है ? अलबत्ता अब लोग इतना ज़रूर कहेंगे क हूर क साथ लंगूर आ गया.

डॉ रीना : मुँह न तोड़ दूंगी जो ऐसा कहेगा. तुम क्या हो ये मैं जानती हूँ और कोई जाने या न जाने. अब चलें ? हमें बहुत दूर जाना है .

अमित : चलिए मैडम अब तो सब आपके हाथ में hi है. वैसे भी ड्राइव अपने करनी है मैं तो बस बैठ कर आपको देखूंगा.

डॉ रीना : स्माइल ) सिर्फ देखोगे ? बात नहीं करोगे?

अमित : वो तो कर hi रहा हूँ. वैसे आपके तो सब दोस्त आएंगे वहां , कोई न कोई आपको पसंद कर क पर्पस कर hi देगा.

डॉ रीना : मुँह बनाते हुए ) मुझे किसी की परवाह नहीं है. तुम अपनी बात करो.

अमित : मैं क्या बात करूँ मैं तो बस आपकी बात करूँगा.

डॉ रीना : आज पता चला क तुम फ़्लर्ट भी करते हो.

अमित : मैं शायर तो नहीं , मगर ऐ हसीं ,,

जबसे देखा मैंने तुझको मुझको शायरी आ गयी.

डॉ रीना : नीस सांग , सुना है मैंने.

अमित : अब शायरी तो मुझे आती नहीं तो बस यही कर सकता हूँ.

डॉ रीना : ी लिखे आईटी , मुझे भी ये पसंद है.

अमित : तो कुछ आप भी सुनाओ.

डॉ रीना : मैं ??

अमित : क्यों आप नहीं सुना सकती ? मेरे लिए कुछ तो सुना दीजिये

कुछ देर डॉ रीना चुप कुछ सोचती रही और फिर गुनगुनाने लगी.

डॉ रीना : चाहा तो बहुत न चाहें तुझे ,

चाहत पे मगर कोई ज़ोर नहीं.

दिल hi तो है तुम पे आ hi गया

दिल का कोई कसूर नहीं.

गाने गेट हुए बिच बिच में डॉ रीना मुझे देख लेती और जब हमारी नज़रें मिलती वो स्माइल करती हुई सामने देखने लगती .

अमित : वह आप तो इतना ाचा गति हैं. पहले पता होता तो इतने दिन हॉस्पिटल में रहा आप क साथ अंताक्षरी hi खेल लेता.

डॉ रीना : चलो जो वक़्त बीत गया उसकी क्या बात करनी . फ़िलहाल तुम भी कुछ सुनाओ.

हम दोनों ऐसे hi बातें करते एक दूसरे को सांग सुनते करीब 1 घंटे में शादी वाली जगह पहुँच गए. ये आबादी से दूर एक बहुत बड़ा फार्महाउस टाइप पैलेस था जो दूर से अँधेरे में जगमगा रहा था . बड़ी बड़ी गाड़ियां देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता था क ये अमीर लोगों का फंक्शन है. पार्किंग में गाडी कड़ी करने क बाद जब हम कार से बहार निकले तो एक बार फिर से मेरी नज़र डॉ रीना पर जैम गयी. अब वो मेरे सामने कड़ी किसी सुपर मॉडल जैसी लग रही थी. घुटनो क नीचे से गाउन में एक साइड में कट सा था जिसमे से उनकी नंगी गोरी तंग झलक दिखा रही थी . हाइट कुछ ज्यादा लग रही थी आज मतलब उन्होंने हील पहनी हुई थी. और जब वो चल कर मेरे पास आयी तो उनकी चल से ये कन्फर्म भी हो गया. मॉडल जैसे रैंप पर चलती हैं ऐसे hi वो मटक मटक कर चल रही थी.

डॉ रीना : क्या हुआ ? फिर से अब ऐसे क्यों देखे जा रहे हो?

अमित : अब क्या करूँ मैं खुद को रोक hi नहीं प् रहा देखने से. आप कहीं से भी डॉ तो लग hi नहीं रही .

डॉ रीना : तो क्या लग रही हूँ ?

अमित : सुपर मॉडल या ये कहले को फिल्म की हेरोइन , नहीं नहीं आप तो मिस वर्ल्ड लग रही हैं.

डॉ रीना : है है है कमल हो तुम भी , पता नहीं क्या क्या ख़िताब दिए जा रहे हो. अब चले यान अभी कुछ और भी बनाना है ?

अमित : अब मैं क्या करूँ ? जो देख रहा हूँ वो बोल रहा हूँ.

डॉ रीना : ाचा ठीक है अब अंदर चल क शादी अटेंड कर लें या यही खड़े रहना है ?

अमित : चलिए !

मैं पलट कर आगे बढ़ने लगा तो डॉ रीना ने मुझे रोका.

डॉ रीना : अब ऐसे जाओगे क्या ?

अमित: मतलब?

डॉ रीना : हम दोनों यहाँ साथ में आये हैं न ? तो सबको पता भी तो चलना चाहिए .

अमित : तो फिर कैसे चलना है?

डॉ रीना : ऐसे , अब चलो

डॉ रीना ने मेरी बगल से हाथ निकल कर मेरी एक बाज़ू पकड़ी और अपने एक हाथ में अपना छोटा सा ब्लैक पर्स और हम आगे बाद गए. मुझे ये सब अलग लग रहा था एक अजीब सी एक्ससिटेमेंट फील हो रही थी . हम जैसे hi लॉन में एंटर हुए तो सब सबकी नज़रें डॉ रीना पर hi जैम गयी . मेरी तरह उनका भी मीटर जाम हो रहा था डॉ रीना को देख कर.

अमित : देखिये सब आपको देख रहे हैं.

डॉ रीना : मुझे क्या? मैं किसी को नहीं देख रही.

अमित : हम जैसे चल रहे हैं लोग गलत समझ लेंगे.

डॉ रीना : तुम लोगों क बारे में hi सोचते रहते हो ? मुझे किसी की परवाह नहीं. एंड ी ऍम हैप्पी विथ यू .

हम चलते हुए कुछ आगे गए तो 3-4 लड़के जो डॉ रीना क hi हम उम्र होंगे और 2 लड़कियां आपस में खड़े बातें कर रहे थे. जैसे hi उनकी नज़र डॉ रीना पर गयी तो उनकी बातें रुक गयी और सब डॉ रीना को hi देखने लगे. वो दोनों लड़कियां डॉ रीना को देख कर उनसे मिलने आगे बड़ी जबकि उन लड़कों की आँखों में हवस साफ़ नज़र आ रही थी.

लड़की 1 : hi रीना ! व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज. आखिर तुम आ hi गयी. और क्या लग रही हो यार बिलकुल हॉट.

लड़की 2 : सच में यार , तुम्हे तो कभी ऐसे देखा hi नहीं कभी . तुम तो पहले hi सबसे ज्यादा खूबसूरत थी और आज सबसे ज्यादा हॉट लग रही हो.

डॉ रीना : शरमाते हुए ) ऐसा कुछ नहीं है . और मैं आती कैसे नहीं ? मेरी दोस्त की शादी है. वैसे तुम लोग कैसी हो ? कहाँ होती हो जा कल?

लड़की 1 : भाई हम दोनों hi अछि हैं और यहीं इसी शहर में एक hi हॉस्पिटल में साथ में हैं. अपने तरुण का hi तो हॉस्पिटल है. हम सब तो साथ में hi हैं बस तुम hi किसी से नहीं मिलती . पता है तरुण आज भी तुम्हे कितना मिस करता है . देखो अभी भी तुम्हारी hi तरफ देख रह है. वो यहाँ सिर्फ तुम्हारे लिए hi आया है.

डॉ रीना : तुम लोगों को और कोई बात करनी है या मैं जॉन?

लड़की 2 : क्या यार तू भी , आखिर उसमे कमी क्या है? हैंडसम है डॉ है पैसे वाला है. सब कुछ तो है और तुम्हे प्यार भी करता है. फिर भी तुम ऐसे उसे इग्नोर करती आयी हो शुरू से.

डॉ रीना : एनफ यार , वो क्या है मैं अचे से जानती हूँ. प्यार व्यार कुछ नहीं उसे बस लड़कियां चाहिए. कॉलेज में उसके कहाँ कहाँ अफेयर थे सब पता है मुझे .

लड़की 1 : वो तो पुराणी बात हो गयी वैसे भी ये सब तो चलता है .

डॉ रीना : मैं जॉन ?

लड़की 2 : ाचा छोड़ , ये बता ये हैंडसम कौन है?

डॉ रीना : वो ....

लड़की 1 : बर्फ है क्या ? हमसे नहीं मिलवाओगी? देखने में तो सॉलिड लग रहा है. क्या हीरो जैसी बॉडी है.

डॉ रीना : शरमाते हुए ) वो मेरा ाचा दोस्त है .

लड़की 2 : मतलब अभी शुरुआत हुई है रिश्ते की . तुम्हे देख कर तो लग रहा है तुम्हे उसे पसंद करती हो . पर्पस किया या नहीं?

डॉ रीना : शरमाते हुए ) क्या यार , छोडो कोई और बात करो

लड़की 1 : ाचा अब हमें उससे मिलवा तो दे . काम से काम हाथ तो मिला लें और तुम कुछ मिलने नहीं डौगी.

डॉ रीना : और कुछ सोचना भी मत . अमित , इनसे मिलो ये है रहा और ये केंजल. हम सब साथ में hi पड़े हैं . और मेरी तरह ये भी डॉ हैं.

अमित : नमस्ते जी

रहा : नमस्ते ? मैं कोई बेहेन जी टाइप लड़की हूँ क्या ? अभी तो अछि भली हूँ यार मन क रीना से काम हूँ पर इतनी भी काम नहीं.

इतना कह कर वो मेरे गले लग कर मुझसे मिली . मैं तो उसके इस तरह मिलने से हैरान हो रहा था. यही केंजल ने भी किया. दोनों देखने में हॉट थी. जाँघों तक की शार्ट ड्रेस में वो कमल लग रही थी मगर डॉ रीना क आगे फीकी थी. मैंने डॉ रीना की तरफ देखा तो उनके चेहरे पर नाराज़गी थी और वो थोड़े गुस्से से अपनी दोनों फ्रेंड्स की तरफ देख रही थी.

केंजल : आप तो वाकई में बहुत सॉलिड हो यार . गयम जाते हो क्या?

अमित : जी मैं रेसलिंग खेलता हूँ.

रहा : वाऊ , तभी इतने सॉलिड हो. वैसे कौन कौन सी रेसलिंग खेल लेते हो ज़रा हमें भी तो बताओ .

रहा ने बड़ी कामुक ऐडा क साथ ये पूछा तो मैं समझ गया उसका इशारा किस तरफ है.

‘ hello रीना , कैसी हो तुम ? इतने सालों बाद तुम्हे देख रहा हूँ. तुम तो पहले से भी हॉट हो गयी हो’ उन चार लड़कों में से एक लड़का जो सूट बूट में और अंदाज़ से रईस लग रहा था डॉ रीना से हाथ मिलाने क लिए आगे बड़ा मगर डॉ रीना ने हाथ नहीं मिलाया .

डॉ रीना : मैं ठीक हूँ , इनसे मिलो ये हैं मेरे बर्फ मर अमित .

डॉ रीना की इस बात पर मैं शॉकेड हो गया और उनकी तरफ देखा तो उनकी नज़रों में एक इल्तिजा थी क मैं चुप रहूं. इस लिए मैंने कुछ भी रिएक्शन नहीं दिया और चुप hi रहा. ज़रूर कोई बात होगी इसके पीछे . मगर वो लड़का जो कुछ देर पहले हवसी नज़रों से डॉ रीना को देख रहा था अब उसके चेहरे पर गुस्सा दिख रहा था . उसने मुझे हाथ मिलाना ज़रूरी नहीं समझा और एक तरफ बाद गया .

रहा : क्या यार , अब बात भी नहीं कर सकती क्या तुम उससे ?

डॉ रीना : मुझे उससे बात करने में कोई इंटरेस्ट नहीं. तुम लोग hi बात करो उससे . चलो अमित ज़रा मैरिड कपल से भी मिल लें.

इतना कहते हुए डॉ रीना मेरा हाथ पकडे मुझे अपने साथ स्टेज की तरफ ले चली.

अमित : ये कौन था ? और आप ने मुझे अपना बर्फ क्यों कहा?

डॉ रीना : इसका नाम तरुण है. हमारे साथ hi था ये भी. मेरे पीछे पड़ा हुआ था तब भी मगर मैंने कभी इसे घास नहीं डाला . बड़ा hi घटिया किस्म का इंसान है. पता नहीं किस किस लड़की से इसका चक्कर था और मुझे कहता था क मुझसे प्यार करता है. मैं तो इसकी शकल तक नहीं देखना चाहती. अभी भी वो इसी इरादे से आया था इस लिए मैंने तुम्हे अपना बर्फ बना कर उसका मुँह बंद करवा दिया. और अभी तुम मेरे बर्फ hi हो समझे. जलने दो उसे देख देख कर.

मैंने पलट कर देखा तो तरुण रहा केंजल सब साथ में खड़े थे और वो तीन लड़के भी . तरुण क हाथ में जैम था और वो कुछ बात करता हुआ गुस्से से हमारी तरफ hi देख रहा था . हम दोनों स्टेज पर गए और डॉ रीना अपनी फ्रेंड से गले मिली और एक शगुन का कार्ड उन्हें देते हुए मुझे भी उससे मिलवाया.

दुल्हन : hi , यू अरे सो हैंडसम . मेरी दोस्त का ख्याल रखना ये बहुत प्यारी है . रीना अब तुम दोनों कब शादी कर रहे हो ? मेरी मनो तो ज्यादा देर मत करो वर्ण कहीं कोई और तुम्हारे बर्फ को चुरा कर न ले जाये .

डॉ रीना शर्मा गयी और फिर से मुझे नज़र उठा कर देखा मगर कुछ कहा नहीं . मैं भी चुप hi रहा चलो डॉ रीना मुझे अपना बर्फ बता रही हैं तो बताने दो. हमने दूल्हा दुल्हन क साथ फोटो खिचवाई और फिर से लॉन में आ गए और एक तरफ सेपरेट टेबल पर अपना डेरा जमा लिया. डॉ रीना किसी और को देख hi नहीं रही थी . उनका सारा ध्यान बस मुझ पर था जबकि मैं बीच बीच में तरुण एंड कंपनी को देख रहा था . कुछ देर बाद वो सब अलग अलग हो गए और तरुण मेरी नज़रों से ओझल हो गया . शायद वो वापिस चला गया था . कुछ देर बाद रहा और केंजल फिर से हमारे पास आ गयीं. वो दोनों बात करते हुए मुझे इशारे भी कर रही थी मगर मैं उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा था . फिर मेरे फ़ोन पर रीमा की कॉल आ गयी तो मैं बात करने क लिए पार्किंग की तरफ चला गया.

उधर मेरे जाते hi केंजल रीना से कहने लगी.

केंजल : रीना तुमने अभी तक अमित से बात नहीं की न ?

रीमा : बस कर लुंगी जब मौका मिलेगा

रहा : वेट करती रहेगी तो कहीं देर न हो जाये तुम्हे? मतलब किसी और ने उसे पता लिया तो? देखने में इतना हैंडसम है अगर तुम मेरी दोस्त न होती तो मैं hi अब तक उसे पर्पस कर देती.

रीना : क्या करूँ यार कई बार सोचा है पर हिम्मत hi नहीं होती.

रहा : मेरी जान हिम्मत नहीं है तो हिम्मत ले ले न

रीना : तुम कहना क्या चाहती हो?

रहा : रुक मैं अभी आयी

इतना कह कर रहा चली गयी और कुछ hi देर में एक जूस का गिलास ले आयी और आते hi रीना को दे दिया.

रहा : उसे पि ले, फिर तुझ में हिम्मत आ जाएगी.

रीना : क्या है इसमें ?

रहा : कुछ नहीं , थोड़ा सा वोडका मिलाया है बस. इसके बाद तुझ में बात करने की हिम्मत आ जाएगी.

रीना : मैं ये नहीं पि सकती.

रहा : कॉमन यार ये सब तो नार्मल बात है . और ज़रा सोच अगर तू अमित से अपनी दिल की बात न कह पायी और वो किसी और का हो गया तो ? क्या तू उसे खोना चाहती है?

रीना : नहीं बिलकुल नहीं

रहा : तो चुपचाप इसे पि ले. तू भी डॉ है और जानती है क थोड़ा सा पि लेने से कुछ नहीं होता.

केंजल : सोच क्या रही है ? रहा बिलकुल ठीक कह रही है. हाँ अगर तुझे अमित नहीं चाहिए तो मैं उससे अपनी बात कर लेती हूँ.

रीना : सोचना भी मत , ाचा ठीक है मैं पि लेती हूँ. आज मैं उससे अपने दिल की बात कर क रहूंगी .

इतना कह कर रीना ने एक hi बार में वो गिलास गले से निचे उतर लिया. सवाद कुछ ज्यादा hi कड़वा था जो अमूमन वोडका का नहीं होता पर रीना ने इस बात ध्यान hi नहीं दिया और पूरा गिलास दवा समझ कर खली करते हुए नीचे रख दिया .

इधर रीमा से बात करते करते मैं पार्किंग में टहलता रहा . कोई 10 मिनट्स बाद मैं वापिस आया तो टेबल पर सिर्फ केंजल बैठी थी और डॉ रीना और रहा दोनों मौजूद नहीं थी .

अमित : रीना कहाँ गयी ?

केंजल : क्यों , रीना नहीं है तो और किसी से बात भी नहीं करोगे? वैसे इतनी भी बुरी नहीं हूँ मैं.

अमित : मैंने कब कहा आप बुरी हैं? पर रीना कहाँ चली गयी?

केंजल : वो रहा क साथ फ्रेश होने गयी है. तुम मेरे पास बैठो .

मैं जैसे hi चेयर पर बैठा तो केंजल अपनी जगह से उठ कर मेरे पास आ गयी और आते hi मेरे साथ चिपकने लगी.

अमित : ये आप क्या कर रही हैं?

केंजल : क्यों ? तुम्हे ाचा नहीं लग रहा क्या? क्या मैं हॉट नहीं हूँ? मुझे तो तुम पहली नज़र में hi पसंद आ गए थे. जब तक रीना नहीं आती मुझे ज़रा कुश्ती खेलना सीखा दो.

अमित : देखिये मुझे ये सब पसंद नहीं . रीना ने देखा तो क्या सोचेगी ? आप ज़रा दूर हटिये.

केंजल दूर हटने की बजाये मेरी गॉड में चढ़ गयी और मुझे किश करने की कोशिश करने लगी . मैंने उसे धक्का दे कर पीछे हटाया और उठ कर खड़ा हो गया.

केंजल : तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है? एक नज़र देखने क लिए लोग मरते हैं मुझ जैसी लड़कियों पर और तुम ऐसे मुझे इग्नोर कर रहे हो.

अमित : मैं उन जैसा नहीं हूँ जो औरत को भोगने क लिए मरते होंगे . औरत तो प्यार क लिए बानी है और जो आप कर रही हैं हे हवस है.

मैं वहां से अग्गे बड़ा और डॉ रीना को कॉल करने लगा. रिंग बजी तो मुझे डॉ रीना क मोबाइल की रिंगटोन बजती हुई सुनाई दी मगर आवाज़ बहुत धीमी थी. मैं आवाज़ की तरफ बड़ा तो नीचे उनका पर्स गिरा पड़ा था. डॉ रीना का पर्स देखते hi मुझे किसी अनहोनी का शक होने लगा. मैं फिर से केंजल की तरफ बड़ा . मेरे हाथ में रीना का पर्स देख कर उसके चेहरे का रंग बदल गया.

अमित : रीना कहाँ है ?

केंजल : बब बताया तो वो वो फ्फ्फ्फरश होने गयी है.

केंजल का ऐसे बड़बड़ाना मेरे शक को पक्का कर गया तो मैंने गुस्से से उसकी गर्दन कास क पकड़ ली.

अमित : मैंने पूछ रीना कहाँ है ? अगर अब भी झूठ बोलै तुम्हारी गर्दन की हड्डी टूट जाएगी.

केंजल का रंग उड़ गया और वो थार थार कम्पनी लगी. उसे लगा क कहीं सचमुच hi मैं उसका गाला न दबा दूँ.

केंजल : वो वो उधर गयी है रहा क साथ.

केंजल ने एक और इशारा किया जहाँ कुछ रूम्स बने हुए थे जो शायद शादी वाले परिवार क साजो सामान क लिए बने होंगे. मैंने केंजल को धक्का देकर गिरा दिया और तेज़ी से दौड़ता हुआ उन रूम्स की तरफ भगा. 4 रूम्स थे इस जगह और चारो hi बंद थे . मैंने दरवाज़े से कान लगा कर सुनने की कोशिश की तो एक रूम क अंदर से कुछ धीमी आवाज़ें आ रही थी . मैंने इस दरवाज़े को खटखटाया.

रहा : कौन है ?

ये आवाज़ रह की थी जो मैं पहचान गया . मतलब रीना भी यहीं है

अमित : जल्दी से दरवाज़ा खोलो

रहा : कौन हो तुम ? जाओ यहाँ से . मैं कपडे बदल रही हूँ.

अमित : मैंने कहा दरवाज़ा खोलो .

रहा : तुम्हे शर्म नहीं आती ? एक लड़की को इस हालत में दरवाज़ा खोलने को कह रहे हो .

जब रहा ने इतना कहने क बाद भी दरवाज़ा न खोला तो

मैंने थोड़ा पीछे हटके अपना पूरा ज़ोर लगते हुए दरवाज़े क लॉक वाली जगह पर पाऊँ से ठोकर मरी और दरवाज़ा का लॉक उखाड़ गया जिसके साथ hi दरवाज़ा खुल गया. अंदर का नज़ारा देखते hi मेरी आँखों में खून उतर आया. अंदर रहा नंगी थी और उसके साथ तरुण और उसके साथी जो लगभग नंगे hi थे. बीएड पर डॉ रीना पड़ी थी और तरुण उसके ऊपर लेता उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा था. डॉ रीना क कपडे अस्त व्यस्त थे और उसे देख कर लग रहा था क वो होश में नहीं है. मगर फिर भी वो तरुण को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश कर रही थी. मैं कमरे में घुसा और रहा क मुँह पर एक ज़ोरदार तमाचा मारा . वो सूखे पेड़ की तरह दीवार से टकरा कर ज़मीन पर गिरी और उसके मुँह से खून आने लगा. ये देख कर जैसे hi एक लड़का मेरी तरफ बड़ा मैंने साइड में टेबल पर पड़ा फूलदान उठा के उसके सर पर दे मारा और उसके सर से खून की धरा बहने लगी . उसे एक तरफ गिरते हुए मैंने आगे बड़ा तो एक और मेरी तरफ बड़ा जिसके अंडे मैंने एक किक से फोड़ते हुए उसे पकड़ कर दीवार में दे मारा. तीसरे वाला तो देख कर hi पीछे हटने लगा मगर मैंने उसे भी पकड़ कर उठाया और पास पड़े कांच क टेबल पर पटक क मारा. कांच टूटा मगर आवाज़ उस लड़के क मुँह से आयी और ज़ोर दर चीख क साथ वो कराहने लगा. अब बीएड पर रीना क ऊपर तरुण hi रह गया था जो अपने साथियों की हालत देख कर एक साइड में पड़े अपने कपड़ों की तरफ पलटा . उसने अपने कपड़ो में से रिवॉल्वर निकली पर उसके पलटने से पहले मैंने उसकी बाजु पकड़ कर मरोड़ दी और एक ज़ोर का झटका दिया . ‘ तदककक ‘ की एक आवाज़ आयी और उसकी बाजु अपने जोड़ से हैट गयी . मैंने उसे भी हवा में उठाया और अपने घुटने पर उसकी कमर दे मरी. ( ये कुश्ती में एक खतरनाक दांव है तो रीढ़ की हड्डी को हिला देता है और कहीं ज्यादा चोट लग जाये तो आदमी बीएड से उठने क लायक नहीं रहता).

एक ज़ोर दर चीख तरुण क मुँह से भी निकली और मैंने उसे साइड में फेंक दिया. रिवॉल्वर अब दूर जा गिरी थी. अब मैं डॉ रीना की तरफ बड़ा और उसे बीएड से उठने में मदद की .

अमित : आप ठीक तो हैं ?

डॉ रीना : ममु मममुझे कककया हऊआआ? तट तू त्तुम्म्म ककहां चले गए थे?

डॉ रीना होश में नहीं थी शायद उन्हें कोई नशा दिया गया था . मैंने उन्हें सहारा देकर खड़ा किया और उनके कपडे ठीक किये . डॉ रीना से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था तो मैंने उन्हें गॉड में उठा लिया . वो भी मेरे गले में अपनी बाँहों कर हर दाल कर मुझसे चिपक गयी और मेरे गले पर किश मरने लगी .

डॉ रीना : ी लुब्ब्ब यौऊ . उम्म्म्माः ी लुब्ब्ब ोूउउ. तुम हम्म्म भी मुझसे पयाल करते हो न

अमित :आप होश में नहीं हैं . चलिए घर चलते हैं .

डॉ रीना : जहाँ छहहाहे ले चलो ी लुब्ब्ब यू . ी ऍम योर्स .

डॉ रीना फिर से मुझे चूमने लगी और मैं उन्हें गॉड में लिए बहार की तरफ चल दिया. कैच लोग इसी तरफ आ रहे थे जिन्होंने शायद चीख सुन ली होगी उन लोगों की. मैं सबको दर किनार करता हुआ आगे बाद गया. डॉ रीना का पर्स मेरे पास hi था . मैंने उसमे कार की चाबी निकली और डॉ रीना को कार में पिछली सीट कर लिया दिया. डॉ रीना लगातार बस मुझे किश hi करती आयी थी जब तक क मैंने उन्हें सीट पर नहीं लेता दिया. अब मुश्किल ये थी क कार कौन चलाये ? डॉ रीना होश में नहीं थी और मुझे पूरी प्रैक्टिस नहीं थी . अब आधी रत में यहाँ रुक भी तो नहीं सकते थे. मैंने भगवन को यद् किया और ड्राइवर सीट पर बैठ कर कार को स्टार्ट किया. जो कुछ मैंने सीखा था उसे दिमाग में बिठाते हुए मैंने कार को धीरे धीरे चलना शुरू किया और फिर हम चल निकले . रत की वजह से एक तो ट्रैफिक नहीं था ऊपर से हम शहर से बहार थे. यहाँ से हमारा शहर दूर था और मैं धीरे कार चलता आगे बाद रहा था. डॉ रीना आराम से सोने की बजाये बार बार उठ कर पीछे से hi मेरे गले में बांहों का हर दाल कर चूमने लग जाती और बार बार ी लव की ृत्त लगाए थी. मैं जैसे तैसे करता 1 घंटे का सफर डेढ़ घंटे में कर क शहर में वापिस पहुंचा तो अब मुझे ये नहीं समझ आ रही थी क ऐसी हालत में डॉ रीना को लेकर जॉन कहाँ?

ऐसी हालत में देख कर उनके घरवाले परेशां होते . और मोहित क घर तो ले जाना सही नहीं था . होटल जाना भी बदनामी का कारन बन सकता था . तो ऐसे में मुझे अपने फ्लैट पर जाना hi ठीक लगा . जिसकी चाबी मैं अपने पास hi रखे हुए था इतने दिनों से. बाइक की चाबी क साथ फ्लैट की चाबी रखने से अब वो हमेशा मेरी जेब में hi रहती थी. मैंने कार को फ्लैट की तरफ मोड़ ली . रत क सादे 12 बज रहे थे जब मैं फ्लैट पर पहुंचा . डॉ रीना को गॉड में लिए जब मैं फ्लैट में जा रहा था तो वो तब भी मेरे गले से लगी मुझे किश किये जा रही थी . फ्लैट में आकर मैंने उन्हें बीएड पर लिटा दिया . वो मुझे छोड़ने को तैयार नहीं थी और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी .

डॉ रीना : ी लव यू अमित उम्म्म मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी उम्म्म्म

अमित : मैं कहीं नहीं जा रहा आप आराम से सो जाइये

डॉ रीना : मुझे नहीं पता मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी .

डॉ रीना फिर से मेरे गले लग कर मेरे ऊपर hi चढ़ गयी . वो होश में नहीं थी पर फिर भी मासूम और क्यूट लग रही थी . मैंने भी उन्हें सुलाने क लिए उनके साथ कुछ देर लेटने का सोचा और अपने ऊपर ऐसे hi लिटाये हुए उन्हें थपकी देते हुए सुलाने लगा. मेरे ऊपर लेते लेते पता नहीं वो कब सो गयी और मुझे भी पता नहीं लगा कब मैं भी सो गया .

सुबह सब से पहले आँख रीना की hi खुली शायद व्हिस्की की वजह से ऐसा हुआ. जब उसकी आंख खुली तो उसने खुद को अमित क ऊपर लेते हुए पाया. एक पल तो उसे यकीन hi नहीं हुआ क वो सच में अपने सपनो क राजकुमार क ऊपर सो रही थी या ये सपना है. अगर ये सपना है तो वो इस सपने को और जीना चाहती थी इस लिए अमित क ऊपर से उठने की बजाये वो मुस्कुराते हुए बस उसे देख रही थी जो आराम से सोया पड़ा था. रीना को अमित से प्यार था और वो ये सोच कर गयी थी क वो शादी में अमित को पर्पस करेगी . उसे लगा क शायद उसने अमित को रत में पर्पस कर दिया है इस लिए अमित उसके साथ hi सो रहा है. उसने जब रूम को देखा तो पाया क ये उसका घर नहीं है . मतलब अमित उसे अपने घर ले आया है. पर दोनों ने रत वाले कपडे hi पहने हुए थे तो इसका मतलब और कुछ नहीं हुआ . यानि अमित ने उसका फायदा नहीं उठाया . अमित क चेहरे पर अपनी लिपस्टिक क निशान देख कर वो जैसे खुद hi शर्मा गयी . मगर उसे यद् नहीं था क रत को दोनों में क्या हुआ है . उस घटना का एहसास पाने क लिए रीना ने अमित क होंठों पर फिर से अपने होंठ रख दिए और धीरे धीरे उन्हें चूमने लगी . अमित नींद में शायद कोई सपना देख रहा था या ये एक रिएक्शन था क वो भी रीना क होंठ चूमने लगा. कुछ पल रीना मदहोशी में बस इस प्यार भरे चुम्बन का आनंद लेती रही. जब नींद में hi अमित क हाथ उसके कूल्हों पर पहुंचे तो उसके जिस्म में सिहरन सी हुई पर उसने उसे तो के की ज़रा भी कोशिश न की और अमित क हाथों की सख्ती उसके नरम कूल्हों पर बढ़ती गयी. रीना मदहोश होती जा रही थी पर अमित की नींद खुल गयी और उसने ऑंखें खोलते hi देखा क वो जिसे किश कर रहा है वो रीना है जो ऑंखें बंद किये अमित की छाती पर लेती हुई थी. अमित ने घबरा कर जल्दी से किश तोड़ी और रीना को अपने ऊपर से पलट कर बीएड पर डाला और झटके से खड़ा हो गया. रीना का तो मनो सपना hi टूट गया और जब उसने ऑंखें खोली अमित बीएड से नीचे खड़ा था.

अमित : ी ऍम सॉरी मैं नींद में पता नहीं क्या कर रहा था . आप ठीक तो हैं ? अब तबियत कैसी है आपकी ?

रीना को तो समझ hi नहीं आया क अमित किस बारे में बात कर रहा है और उसने किश क्यों तोड़ दी? कितना मज़ा आ रहा था दोनों को. रीना की ज़िन्दगी का ये पहला किश था. एक अद्भुत एहसास उसे मिल रहा था जो बिच में hi रह गया.

डॉ रीना : हम्म्म्म हहहह हाँ हाँ मैं ठीक हूँ . पर मुझे हुआ क्या है ?

अमित : आप को यद् नहीं रत में क्या हुआ था शादी में ?

डॉ रीना : क्या हुआ था ?

अमित : यद् कीजिये , मैं फ़ोन सुनने बहार गया था उसके बाद क्या हुआ था ?

रीना अपने दिमाग पर ज़ोर देने लगी क रत में क्या हुआ था . तभी उसे एहसास हुआ क उसका सर दर्द से फटा जा रहा है. शरीर क कुछ और हिस्सों पर भी अब उसे दर्द महसूस हो रहा था जैसे अपने स्तनों पर और कुछ जलन अपने कन्धों गर्दन और जांघों पर भी हो रही थी. उसे यद् आया क रहा ने उसे जूस में वोडका दी थी और उसके बाद उसका सर भरी होता चला गया. जब उसे बैठना मुश्किल हो रहा था तो रहा उसे रेस्ट करने का कह कर अपने साथ एक रूम में ले गयी थी जहाँ तरुण और उसके दोस्त थे. रीना ने वहां से वापिस आने की कोशिश की पर वो खुद को संभल नहीं प् रही थी और तरुण ने उसे बीएड पर गिरा कर उसके साथ ज़बरदस्ती करनी शुरू कर दी थी . ये सब यद् आते hi उसे गुस्सा आ गया और आँखों से पानी बहने लगा.

डॉ रीना : रहा ने जूस में कुछ मिला कर दिया था और मैं होश खो बैठी थी. फिर तरुण ने मेरे साथ ......

अमित : शांत , शांत हो जाइये . कुछ नहीं हुआ है आपके साथ. शुक्र है क मैं टाइम पर पहुँच गया था. ाचा हुआ आप मुझे साथ ले गयी थी वर्ण वो लोग आपके साथ .

मैंने रीना को अपने साथ लगा कर उसे सांत्वन देते हुए चुप करवाया.

डॉ रीना : थैंक्स अमित तुम ने मुझे उन सब से बचा लिया . आखिर उसने अपना घटिया पैन दिखा hi दिया. तुम नहीं होते तो पता नहीं क्या होता मेरा?

अमित : कुछ नहीं होता , अचे लोगों क साथ ाचा hi होता है .

डॉ रीना : नहीं अमित , यहाँ अशोक क साथ भी बुरा होते देखा है मैंने. इंसान की शकल में यहाँ भेड़िये घूमते हैं और अकेली औरत को पाकर उसे नोच लेते हैं .

रीना कुछ यद् करते हुए ऐसा कह रही थी. जो अमित ने पद लिया था उसके चेहरे से.

अमित : पर आपके साथ ऐसा नहीं हुआ. क्यूंकि आप बहुत अछि हैं और दूसरों की मदद करती हैं. अब वो सब छोड़िये उन कमीने लोगों को सजा रत में hi देदी थी मैंने जिन्होंने आपके साथ गलत करने की कोशिश की पर मैं आपसे नाराज़ हूँ.

डॉ रीना : घबराते हुए ) मैंने क्या किया ?

अमित : क्या किया ? एक तो आप होश में नहीं थी और पता नहीं क्या क्या कहे जा रही थी . ऊपर से मुझे कार भी अचे से चलनी नहीं अति और आप मुझे रस्ते भर ड्राइव करने नहीं दे रही थी.

डॉ रीना : सॉरी मुझे पता hi नहीं क ये सब कैसे हुआ.

अमित : चलिए छोड़िये. पहले उठ कर जल्दी से तैयार हो जाइये. मैं अपनी कॉफ़ी का इंतज़ाम करता हूँ. आपके घर वाले भी परेशां होंगे . रत भर से आप बहार हैं घर से.

डॉ रीना : ओह माय गॉड , माँ परेशां होंगी . मेरा फ़ोन कहाँ है?

अमित : शायद गाड़ी में hi रह गया . आप फ्रेश हो जाइये मैं तब तक फ़ोन और कॉफ़ी दोनों ले कर अत हूँ.

इतना कह कर मैं अपने जुटे पहन कर बहार निकलने लगा क डॉ रीना ने मुझे रोका.

डॉ रीना : एक मिनट , ऐसे hi जाओगे क्या ?

अमित : मतलब ?

डॉ रीना ने मुझे अपने पास बुलाया और मुझे बाथरूम में ले जा कर मेरा चेहरा दिखाया. मैंने शीशे में अपना चेहरा देखा तो लिपस्टिक क निशान लगे हुए थे. मैंने डॉ रीना की तरफ देखा तो वो शर्मा गयी .

अमित : यही सब आप कर रही थी रत को .

मैंने अपना चेहरा साफ किया और बहार निकल गया जबकि डॉ रीना बस शर्मा रही थी.

डॉ रीना ( मन में ) काश मैं होश में होती तो अपने दिल की बात भी कर लेती. पर मैंने कुछ भी न कहा हो ऐसा हो नहीं सकता . कहीं तुम मुझसे छुपा तो नहीं रहे ?

मैं फ्लैट से बहार आया और पहले कार से अपना ब्लेजर और हम दोनों क मोबाइल बहार निकले . अभी 6 hi बज रहे थे. मैंने अपना मोबाइल चेक किया तो राधा क कुछ मेस्सगेस आये हुए थे और रीमा क भी . साथ hi रीमा और आंटी की मॉस्कल्स आयी हुई थी. मैंने बाद में रिप्लाई करने का सोचा और पहले कॉफ़ी का इंतज़ाम करने निकल गया. कॉफ़ी ता खैर इतनी सुबह कहाँ मिलनी थी. मैंने दूध hi ले लिया क्यूंकि चाय कॉफ़ी का सामान तो मैं पहले hi फ्लैट में रख गया था कुछ दिन पहले जब आया था. दूध लेकर मैं वापिस आया तो तब तक डॉ रीना फ्रेश हो चुकी थी और खिली खिली लग रही थी.

अमित : आप थोड़ी देर वेट करो मैं कॉफ़ी बना कर लता हूँ.

डॉ रीना : तुम्हे कॉफ़ी बनानी अति है ? मैं बना देती हूँ.

अमित : आप क हाथ की तो कितनी बार पि चूका हूँ आज आप मेरे हाथ की पि कर देखिये. वैसे इतनी भी बुरी नहीं बनता मैं.

इतना कह कर मैंने जल्दी से इंडक्शन चूल्हे पर कॉफ़ी बनानी शुरू कर दी. और तब तक डॉ रीना मेरे पास hi आ कर कड़ी हो गयी.

डॉ रीना : सुबह सुबह हस्बैंड क हाथो से कॉफ़ी पिने से सारा दिन ाचा निकलता है. तुम्हारी वाइफ बहुत लकी होगी .

अमित : अब ये तो ज़रूरी नहीं क हर बार मैं hi बनाऊं. मुझे भी तो ाचा लगेगा न जब कोई प्यार से मुझे जगाये और अपने हाथ से कॉफ़ी पिलाये.

डॉ रीना : वैसे आज क बारे में क्या ख्याल है ? मॉर्निंग कैसी हुई?

डॉ रीना की बात से मुझे यद् आया क मैं नींद में उन्हें किश कर रहा था . मेरी नज़रें जब डॉ रीना से मिली तो उन्होंने शर्मा कर नज़रें झुका ली.

अमित : वो सब नींद में वो ी ऍम सॉरी

डॉ रीना : मैंने पुछा मॉर्निंग कैसी रही ? क्या ऐसी hi मॉर्निंग पसंद है तुम्हे ?

अमित : पर आपके साथ मैंने गलती से कर दिया वो सब

डॉ रीना : मेरे सवाल का सीधा जवाब नहीं दे सकते क्या ?

अमित : अछि रही

मैंने जल्दी से जवाब दे कर बात ख़तम करने की कोशिश की.

डॉ रीना : अब और भी अछि कर देती हूँ अपने हाथों से तुम्हे कॉफ़ी पीला कर . तुम्हारा सपना पूरा हो जायेगा .

मैं शॉकेड हो गया डॉ रीना की इस बात पर . कल रत वो जो कुछ नशे में कह रही थी मुझे वो भी यद् आने लगा . इसका मतलब वो मुझे सच में प्यार करती हैं . इतने में कॉफ़ी बन गयी और मैंने उसे कप्स में डाला.

अमित : ये लीजिये आपकी कॉफ़ी और ये आपका मोबाइल . पहले इसे देख लीजिये .

डॉ रीना ने अपना मोबाइल देखा तो उसमे बहुत साडी मॉस्कल्स थी . उनका चेहरा फिक्रमंद हो गया और उन्होंने जल्दी से कॉल लगा दी.

डॉ रीना : hello , हाँ माँ मैं ठीक हूँ.

माँ :————-

डॉ रीना : वो कल रत देर हो गयी थी तो अपनी सहेली क घर hi रुक गयी थी .

माँ : —————-

डॉ रीना : मोबाइल गाड़ी में hi भूल गयी थी माँ ी ऍम सॉरी . मैं बस थोड़ी देर में घर आ रही हूँ.

माँ : —————-

डॉ रीना : ठीक है माँ छोटी को भी बता दीजियेगा, bye

इतना कह कर डॉ रीना ने फ़ोन काट दिया .

अमित : क्या हुआ ?

डॉ रीना : माँ परेशां हो रही थी मेरे घर न आने से और ऊपर से मैंने कोई फ़ोन भी नहीं उठाया न मैसेज का जवाब दिया

अमित : मेरी भी गलती है , काम से काम मैसेज का रिप्लाई तो कर सकता था मैं.

डॉ रीना : ाचा हुआ जो नहीं किया वर्ण वो फिर से फ़ोन करती तो क्या जवाब देते?

अमित : ये भी सही है . चलिए अब कफ लीजिये वर्ण ठंडी हो जाएगी.

डॉ रीना : कॉफ़ी पिटे हुए ) नीस , बहुत अछि बानी है .

अमित : आप जैसी तो नहीं है काम hi है.

डॉ रीना : तुम कहो तो रोज़ अपने हाथों की कॉफ़ी पीला दिया करुँगी तुम्हे.

अमित : फिर तो पक्का पेशेंट बन कर आपके पास रहना पड़ेगा .

डॉ रीना : उसकी क्या ज़रूरत है ? क्या वैसे साथ नहीं रह सकते ?

अमित : ाचा ये सब छोड़िये , और किसी का फ़ोन नहीं आया क्या आपके फ़ोन पर?

डॉ रीना : हाँ आये तो हुए हैं कई नोन और कई अननोन no. से मिस कॉल्स , क्यों ?

अमित : कुछ नहीं , मैंने सोचा रत की रिपोर्ट अगर मिल जाती तो?

डॉ रीना : वो बाद में देख लुंगी मैं . सुबह सुबह मैं वो सब डिसकस नहीं करना चाहती .

उसके बाद हमने साथ में कॉफ़ी पि और फिर वापिस निकलने लगे तो डॉ रीना क पाऊँ में जुटे नहीं थे . उनके संदल वहीँ छूट गए थे शादी वाली जगह .

डॉ रीना : कोई चप्पल वगैरह है क्या यहाँ ?

अमित : चप्पल तो नहीं है कोई . आप एक काम कीजिये मेरी पीठ पर चढ़ जाइये.

डॉ रीना : स्माइल ) सच में ?

अमित : हाँ , आप तो वैसे भी फूलों सी हलकी तो हैं.

डॉ रीना : तुम्हे कैसे पता ?

अमित : रत को उठा कर हो लाया था अपनी बाँहों में.

डॉ रीना ( शरमाते हुए ) सच में ?

अमित : अब जल्दी कीजिये मुझे भी कॉलेज जाना है और आपको हॉस्पिटल .

डॉ रीना : इस ड्रेस में मैं तुम्हारी पीठ पर नहीं चढ़ सकती .



डॉ रीना की बात भी सही थी . उनकी टंगे इस ड्रेस में ज्यादा नहीं खुल सकती थी तो मैंने उन्हें फिर से अपनी गॉड में उठा लिया और वो मेरे गले में बहन दाल कर मंद मंद मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी . मैंने उन्हें ऐसे hi गॉड में लिए कार तक लाया और उन्हें ड्राइवर सीट पर बिठाया . फिर हम दोनों चल पड़े वापिस और वो मुझे मोहित क घर क बहार छोड़ कर मुस्कुराते हुए चली गयी .
 
अपडेट 138



घर आया तो आंटी योग कर रहे थे. मुझे घर आया देख कर वो मेरे पीछे पीछे मेरे कमरे में आ गए .

आंटी : कहाँ थे रत भर ? फ़ोन तक नहीं उठाया मेरा , क्या कर रहे थे ? लगता है रत काफी रंगीन कर क आये हो?

अमित : ऐसी बात नहीं है. असल में रत को एक प्रॉब्लम हो गयी थी.

फिर मैंने साडी बात उन्हें बताई . जिसे सुन कर उन्हें भी भी बुरा लगा.

आंटी : मुझे तुम पर गर्व है . तुम सच में खास हो . हर किसी की मदद कर रहे हो. मुझे लगता है अब वो डॉ भी खुद को रोक नहीं पायेगी तुम्हे प्यार करने से . जैसे मैं खुद को रोक नहीं पति

इतने कह कर आंटी मुझे किश करने लगी और खुद hi मेरे हाथ अपने बूब्स पर रख कर प्रेस करने लगी . सुबह का टाइम था और ऐसे बिना किसी दर क आंटी मेरे साथ शुरू हो गयी पर मुझे दर था कहीं कोई देख न ले इस लिए मैंने किश तोड़ कर उन्हें खुद से अलग किया .

अमित : खुद को सम्भालिये , अगर कोई आ जाता तो ?

आंटी : कोई नहीं अत , तेरे अंकल घर पर नहीं और मोहित अभी सो रहा है.

अमित : फिर भी ये टाइम ठीक नहीं है. मुझे नहाना भी है और कॉलेज क लिए तैयार भी होना है. और आज दिव्या मौसी क घर रहने जा रहा हूँ मैं. कुछ कपडे और ज़रूरत का सामान ले जाऊंगा मैं साथ hi कॉलेज जाते वक़्त.

आंटी : क्या एक बार तुम मुझे प्यार नहीं कर सकते ?

अमित : अभी टाइम नहीं है, मैं बीच में टाइम निकल कर आपको प्यार करने आ जाऊंगा आप चिंता मत करो.

आंटी : ठीक है . तुम नाहा कर तैयार हो जाओ मैं तुम्हारे लिए बैग पैक कर देती हूँ.

मैं नहाने चला गया और आंटी ने मेरे लिए बैग पैक कर दिया . मोहित भी उठ कर तैयार हो गया और हम लोगों ने साथ में नाश्ता किया . मेरा कपड़ों वाला बैग मोहित ने कार में रख लिया और मैं आंटी से गले मिलने क बाद अपनी बाइक पर कॉलेज निकल गया .

रोज़ की तरह 2 लेक्चर अटेंड करने क बाद हम सब तीसरे लेक्चर में कैंटीन में बैठे हुए थे. और हमारा हंसी मज़ाक चल रहा था .

मीनल : कल तो मूवी देखने का मज़ा hi आ गया .

कल्पना : तुम दोनों मूवी देखि hi कहाँ जो मूवी का मज़ा आया तुम्हे ?

कल्पना की इस बात पर मोहित और मीनल ने एक दूसरे को देखा और मुस्कुराने लगे .

शिवानी : भाई मुझे तो कल्पना की लाइव परफॉरमेंस सबसे अछि लगी .

नेहा दीदी : कल्पना सच में बहादुर है इसी लिए तो हमें दर नहीं होता इसके साथ होते .

कल्पना : आप को डरने की ज़रूरत भी नहीं है दीदी . मैं तो कहती हूँ थोड़ा बहुत हाथ पाऊँ चलन आप सब भी सीख लो.

अमित : एक्साक्ट्ली, मैं भी थी चाहता हूँ. आप सब काम से काम अपनी रक्षा करने क काबिल तो हों. क्या पता कब ज़रूरत पद जाये ? और हर वक़्त कोई पास मदद करने वाला हो ये ज़रूरी तो नहीं.

राधा : मुझे तो पूरा यकीन है क जब भी मैं किसी मुश्किल में हूँगी तुम ज़रूर आओगे. उस दिन भी मैं तुम्हे hi यद् कर रही थी हालाँकि तुम वहां से कोसों दूर थे फिर भी तुम मुझे बचने आ hi गए.

शीना : सच में तुम्हारी बॉन्डिंग बहुत मजबूत है . देखा है मैंने और महसूस भी किया है.

नेहा दीदी : ये दोनों बचपन से hi ऐसे हैं . बिलकुल मेरी दोनों मौसियों की तरह.

कल्पना : तो इसका मतलब ये इनहेरिटेड है.

नेहा दीदी : हाँ .

अमित : राधा , ये सही है क मैं तुम्हे कुछ होने नहीं दे सकता पर अगर मैं तुम तक पहुँच hi नहीं पौन तो ? या मुझे कुछ ....

कल्पना : उस दिन की सजा भूल गए क्या ? आगे कुछ बोलै तो देख लेना

कल्पना की इस बात पर राधा क चेहरे पर स्माइल आ गयी जैसे उसके मन की बात कल्पना ने कह दी हो.

अमित : मेरा मतलब है क अगर मैं कभी तुम तक न पहुँच सकूँ तो ? तुम्हे कल्पना से ट्रेनिंग लेनी चाहिए . और उस दिन मैं वहां पहुँच तो इसमें रीमा का भी बहुत बड़ा हाथ है .

रीमा : मैंने तो बस वही किया जो मुझे करना चाहिए था.

शीना : सच में रीमा तुमने सही किया. वर्ण बहुत कुछ गलत हो जाता.

कल्पना : अरे यार तुम लोग ये किस तरफ चल पड़े . हम यहाँ हसने और खुश रहने क लिए इकठ्ठा होते हैं और तुम लोग सीरियस हो रहे हो.

मीनल : सही कहा , कल का दिन बहुत ाचा रहा . मैं तो कहती हूँ का हमे ऐसे बंक मरते रहना चाहिए.

नेहा दीदी : तो पड़े कौन करेगा ?

शीना : पर मैंने पहले hi कहा था क मैं सबको पार्टी दूंगी वो भी मेरे फार्म हाउस पर तो उसके लिए पहले hi सोच लेना क कैसे करना है. बंक करना है या आफ्टर कॉलेज .

अमित : भाई मेरा तो अगले हफ्ते कम्पटीशन है और मैंने इतने दिनों से प्रैक्टिस तक नहीं की . इस लिए अब कम्पटीशन तक मैं कहीं नहीं जाने वाला.

शीना : तो पार्टी कम्पटीशन क बाद कर लेंगे . वैसे भी तुम दोनों जीत कर आओगे तो मज़ा डबल हो जायेगा .

अमित : मेरा तो अब मुश्किल hi है , हाँ कल्पना ज़रूर जित कर आएगी इसकी मैं गारंटी लेता हूँ.

कल्पना : तुम्हारा क्यों मुश्किल है? अचे भले हो तुम . ऐसे नेगेटिव न सोचो. कल सब ने देखा है ट्रेलर

शीना : मैंने तो दूसरी बार देखा कल. सच कहूं तो पहले वाला ज्यादा hi खतरनाक था.

कल्पना : फिर तो मिस कर दिया मैंने , काश मैं भी वहां होती .

अमित : कोई फिल्म चल रही है क्या ? चलो अब टाइम हो रहा है .

तभी बेल्ल बज गयी और सब उठ कर अपनी अपनी क्लास में जाने लगे. हम जब क्लास में जा रहे थे तो मैंने शालू को साइड में बुलाया. मैं उसे पहले भी नोट कर रहा था क वो मुझसे कोई बात करना चाहती है .

अमित : बताओ मैडम क्या बात है ? तुम कुछ कहना छह रही थी मुझसे ?

शालू : तुम्हे कैसे पता ?

अमित : कब से देख रहा हूँ तुम मुझे देख रही हो. कुछ तो बात होगी .

शालू : हाँ , वो मैं चाहती हूँ क तुम एक बार मेरे घर आओ .

अमित : तुमसे कहा तो था क मैं आऊंगा .

शालू : मैं कहना चाहती हूँ क क्या तुम कल आ सकते हो ?

अमित : बात क्या है ?

शालू : तुम बस कल आ जाना बाकि वहीँ पर तुम्हे पता चल जायेगा.

अमित : ाचा ठीक है , कब आना है ?

शालू : 10 बजे

अमित : फिर तो कॉलेज से बंक करना पड़ेगा. कोई ज़रूरी बात है ?

शालू : हम्म्म

अमित : ठीक है तो फिर मैं आ जाऊंगा.

शालू : और एक बात

अमित : कहो

शालू : किसी को मत बताना

अमित : मगर , ाचा ठीक है

उसके बाद हम अपनी क्लास में चले गए. बाकि क लेक्चर ख़तम होने क बाद जब हम सब पार्किंग में इकट्ठे हुए तो राधा मेरे पास आ गयी .

राधा : आज तुम्हे मेरे साथ चलना hi पड़ेगा . मैं कोई बहाना नहीं सुनने वाली . अगर आज कोई आना की की तो फिर मैं माँ से कह दूंगी क तुम जान बुझ कर नहीं आ रहे.

राधा ने नाराज़ होते हुए कहा तो मुझे हंसी आ गयी .

अमित : मतलब आज मुझे घर लेकर hi जाओगी तुम .

राधा : हाँ , चुपचाप चलो वर्ण देख लेना तुम .

कल्पना : ये क्या बात हो रही है मुझे भी बताओ.

राधा : कल से इसे हमारे घर रहने आना था मगर ये नहीं आया और आज भी अगर ये नहीं गया तो मैं इससे बात नहीं करुँगी .

कल्पना : ो मेरी बार्बी डॉल तू न नाराज़ मत हुआ कर. इसे तो हम किडनैप कर भी ले चलेंगे.

मोहित : उसकी ज़रूरत नहीं है. ये देखो ये घर से hi बैग लेकर आया था जाने क लिए. बस ऐसे hi एक्टिंग कर रहा है.

मोहित ने कार से मेरा बैग निकल कर दिखाया तो राधा क चेहरे पर रौनक आ गयी. उसने जल्दी से मोहित क हाथ से बैग छीन लिया जिसे देख कर सब क चेहरे पर हंसी आ गयी .

राधा : तुम पहले से hi तयारी कर क आये थे?

अमित : सर हिलाते हुए ) हम्म्म

राधा : तो फिर पहले क्यों नहीं बताया ? घर चली फिर बताती हूँ तुम्हे . चलो बाइक निकालो अपनी मैं तुम्हे साथ लेकर hi चलूंगी .

अमित : तुम कार में चली जाओ , बैग पकड़ कर बैठा नहीं जायेगा.

राधा : वो मैं देख लुंगी तुम बाइक निकालो.

मैंने अपनी बाइक निकल कर स्टार्ट की और बाकि सब भी अपनी अपनी कार में बैठ कर चल दिए. बुलेट स्टार्ट होते hi राधा मेरे पीछे बैठ गयी. एक हाथ से बैग को थामे दूसरा हाथ मेरे पेट पर रख कर वो बैठ गयी और हम चल पड़े घर की और .

राधा : माँ बहुत खुश होगी तुम्हे देख कर. वैसे वो थोड़ा नाराज़ भी है क कल तुम नहीं आये . कितना कुछ बना कर रखा था कल उन्होंने तुम्हारे लिए और तुम आये नहीं .

अमित : मौसी नाराज़ तो नहीं हैं न ?

राधा : पता नहीं , कल थोड़ा नाराज़ लग रही थी मगर आज सुबह मुझे कह कर भेजा था क मैं तुम्हे साथ लेकर आऊं. वैसे वो नाराज़ हों भी तो तुम उन्हें मन लोगे मैं जानती हूँ.

अमित : वो कैसे ? मुझे तो दर लग रहा है कहीं वो मुझे कान नीचे बजा hi न दें.

राधा : मेरी पीठ पर मरते हुए ) ऐसा कब किया उन्होंने ? अगर पहले कभी किया भी होगा तो वो पुराणी बात हो गयी. अब तो वो तुम्हे कुछ कह hi नहीं पाएंगी . बहुत प्यार करती है माँ तुमसे. वो तो बस एक पर्दा था एक धुल थी उनके मन पर जो हैट गयी है.

अमित : जनता हूँ , मैंने मौसी क अंदर प्यार महसूस किया है. जब वो मुझे गले लगाती हैं तो मुझे भी उनकी फीलिंग महसूस होती है.

राधा : गले लगाने से तुम किसी की भी फीलिंग समझ लेते हो ?

अमित : पता नहीं , पर तुम क्यों पूछ रही हो ?

राधा : ऐसे hi .

बातें करते हमे पता भी न चला क कब हम घर पहुँच गए. घर पहुँचते hi राधा भाग कर दरवाज़े की बेल्ल बहाने लगी तो उससे पहले hi दरवाज़ा खुल गया और सामने दिव्या मौसी कड़ी थी.

राधा : आपको कैसे पता चला क मैं आयी हूँ.

दिव्या मौसी : अमित की बाइक की आवाज़ से , मुझे पता था आज तू इसे साथ लेकर hi आएगी.

राधा : कैसे नहीं लती , पहली बार तो ये यहाँ रहने आया है.

मैं बाइक को स्टैंड पर लगा कर मौसी क पास आया और उनके पाऊँ चुने लगा तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया. क्या बताऊँ दोस्तों , सच में दिल को इतना सुकून मिला क जैसे मैं अपनी माँ से hi गले मिल रहा हूँ. कुछ देर दिव्या मौसी मुझे ऐसे hi अपने गले लगाए कड़ी रही.

राधा : माँ अब अंदर तो आने दो इसे कहीं बहार से न भाग जाए.

दिव्या मौसी : ऐसे कैसे भाग जायेगा? अब मैं इसे कहीं नहीं जाने दूंगी. कल भी नहीं आया अभी उसका हिसाब भी लेना है. चल अंदर.

अमित : मौसी जी कल क लिए सॉरी , वो मैंने किसी से वडा किया था तो जाना पड़ा वर्ण मैं ऐसा नहीं करता.

दिव्या मौसी : कोई बात नहीं , मुझे ख़ुशी है क तुम अपने वेड का सम्मान करते हो.

इतना कह कर मौसी ने एक तरफ होते हुए हमे अंदर आने दिया और दरवाज़ा बंद कर क हमारे साथ hi अंदर आ गयी. राधा मेरा बैग लेकर एक कमरे में चली गयी जो शायद मेरे लिए तैयार किया गया था . मौसी हम दोनों क लिए पानी ले आयी . राधा जल्दी से वापिस आ कर मेरे साथ hi बैठ गयी जबकि दिव्या मौसी किचन में घुस गयी.

राधा : आज मैं बहुत बहुत बहुत खुश हूँ . मुझे यकीन नहीं हो रह क तुम यहाँ हो हमारे घर .

अमित : यकीन क्यों नहीं हो रहा ? यहीं तो हूँ तुम्हारे सामने . अब और कैसे यकीन आएगा तुम्हे?

राधा : मुझे तो ऐसा लग रहा है क मैं सपने में hi हूँ.

अमित : तो क्या सपने में भी यही सब देखती हो ? कुछ और भी देख लिया करो.

मेरे इस सवाल पर राधा ख़ामोशी से मेरी नज़रों में देखने लगी

राधा ( मन में ) तुम्हारे सिवा और कुछ दीखता hi कहाँ है जो कुछ और देखूं. जब से सपने देखने शुरू किये हैं कभी कुछ और देखा hi नहीं.

अमित : क्या हुआ चुप क्यों हो गयी?

राधा : मेरे सपने हैं मैं जो मर्ज़ी देखूं. तुम्हे तो मेरा कोई सपना अत नहीं होगा?

अमित : मुझे सपने आते hi कहाँ हैं. पहले कभी कभी आ जाते थे मगर अब तो वो भी नहीं आते और अब मैं उन सपनो को यद् भी नहीं करना चाहता.

राधा : सीरियस होते हुए) ऐसे कौन से सपने आते थे जो तुम यद् भी नहीं करना चाहते ?

अमित : बस थे कुछ मेरी ज़िन्दगी क काले अँधेरे ख्वाब जो कभी मैं खुद भी नहीं समझ सका क क्यों आते थे?

राधा : क्या मुझे भी नहीं बताओगे ?

अमित : जो चीज़ दुःख दे उसे यद् नहीं करना चाहिए राधा , और मैं नहीं चाहता क इन बातों को सोच कर तुम भी दुखी हो. वो सिर्फ ख्वाब थे जो बस दर और तकलीफ क कभी मुझे कुछ और नहीं देते थे. तब मैं भगवन से यही हाथ जोड़ता था क मुझे कोई ख्वाब न आये और सच कहूं तो मैंने अपनी नींद भी इसी दर से काम की थी फिर धीरे धीरे अखाड़े में जाने लगा और ये आदत बन गयी.

राधा : नाम आँखों से ) तुमने बहुत तकलीफ सही है न ? मैं महसूस कर सकती हूँ तुम्हारा दर्द. सच कहूं तो बचपन से तुम्हे अकेला देख कर मुझे भी ाचा नहीं लगता था मगर ...

‘ अब कोई दुखी नहीं होगा मेरे बचो. मैं hi गलत थी जो इतने साल मैंने अपने बेटे को खुद से दूर रखा ‘ ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जो पता नहीं कब हमारे पास आ कर कड़ी हो गयी थी और हमारी बातें सुन रही थी. उनकी आँखों में भी मेरे लिए आंसू थे . हाथ में पकड़ी खाने की प्लेट साइड में रखते हुए उन्होंने मुझे गले से लगा लिया. मुझे अपने चेहरे पर उनके आंसूओ की बूंदे गिरती महसूस हुई तो मैंने उनके आंसू पोंछे.

अमित : आप क्यों रो रही हैं मौसी ? मैं तो बस ऐसे hi बातें कर रहा था. आप मत रोइये मुझे आपकी आँखों में ये आंसू अचे नहीं लगते.

दिव्या मौसी : तू कितना अकेला था ये मैं समझ hi नहीं पायी . जब तुम्हे मेरी ज़रूरत थी मैं तेरे पास नहीं थी. दामिनी भी मुझसे नाराज़ होगी क मैंने तुम्हे उस वक़्त प्यार क्यों नहीं दिया जब तुम्हे सबसे ज्यादा ज़रूरत थी. मैं बहुत बुरी हूँ , बहुत बुरी हूँ. मुझे माफ़ करदे मेरे बचे . अपनी इस मौसी को माफ़ करदे .

अमित : ऐसा मत कहो मौसी , आप बुरी नहीं हैं . आप तो सब से अछि हैं. आप मुझे कितना प्यार करती हैं मैं जनता हूँ. और माँ आपसे नाराज़ कैसे हो सकती है ? आप तो उनकी जान थी न ? मुझे माँ तो यद् नहीं पर वो भी आप से ज्यादा प्यार नहीं का पति मुझे.

मेरे ऐसा कहने से दिव्या मौसी क आंसू और भी तेज़ हो गए और मुझे ज़ोर से अपने गले लगा कर वो मुझे बेतहाशा चूमने लगी .

दिव्या मौसी : अब मैं कभी तुझे दामिनी की कमी महसूस नहीं होने दूंगी बीटा . मैं दामिनी से कहती थी क तू मेरा बीटा है और मैंने hi तुझे खुद से दूर कर दिया

अमित : आप ऐसे खुद को दुखी मत कीजिये मौसी . अब मैं आ गया हूँ न , अब कभी मैं आपसे दूर नहीं जाऊंगा.

बड़ी मुश्किल से दिव्या मौसी क आंसू रुके पर साथ hi उनकी ममता की बारिश मुझ पर बरसने लगी. वो खुद मुझे अपने हाथों से खाना खिलने लगी. पता नहीं क्या क्या बना क रखा था उन्होंने मेरे लिए. वो प्यार से खिलाती है रही थी और मैं बस उन्हें देखता हुआ खा रहा था. राधा बेचारी तो बस चुप चाप हम दोनों को देख रही थी.

अमित : बस बस मौसी पेट भर गया और नहीं खाया जायेगा.

दिव्या मौसी : ऐसे कैसे नहीं खाया जायेगा? इतने हत्ता कट्टा पहलवान है और बस इतनी से hi बस ? ये सब तुझे खाना पड़ेगा समझे . क्या मेरे हाथों का खाना ाचा नहीं लगा?

अमित : ाचा कैसे नहीं लगेगा ? इतना प्यार जो है इस खाने में पर आप तो पूरे हफ्ते का खाना एक बार में खिला रही हो मुझे .

दिव्या मौसी : इसे जल्दी से ख़तम कर फिर तेरे लिए खीर भी लेकर आती हूँ.

अमित : बस बस मौसी खीर बाद में खा लूंगा अभी मेरी बस हो गयी है. मुझे शाम को स्टेडियम भी जाना प्रैक्टिस क लिए . अगर ऐसे hi खाऊंगा तो पेट पकड़ कर बैठना पड़ेगा.

दिव्या मौसी : ाचा ठीक बस ये एक और खा ले बाकि बाद में खा लेना. और रत क लिए मैंने गाजर का हलवा भी बना कर रखा है तेरे लिए.

जैसे तैसे मैंने खाना ख़तम किया पर मेरी हालत पतली हो गयी थी कहते कहते. पेट गले तक भर गया था . दिव्या मौसी को तो मैंने साथ में hi खिला दिया था और राधा ने भी खाना खा लिया था . मौसी ने मुझे कमरे में आराम करने का बोलै और खुद किचन में चली गयी काम करने. मैं अपने कमरे में गया तो पीछे पीछे राधा भी आ गयी और मेरा बैग लेकर खुद hi मेरे कपडे सेट कर क रख दिए अलमारी में. मैं अपना पेट पकड़ कर बैठा तो राधा को मेरी हालत देख कर हंसी आ गयी.

अमित : ऐसे है क्यों रही हो ? एक तो मेरी हालत ख़राब कर दी है मौसी ने खाना खिला खिला कर ऊपर से तुम मज़े ले रही हो.

राधा : हे हे हे मुझे क्यों कहते हो ? ये तो माँ बेटे क बिच की बात है , मैं कुछ नहीं कर सकती . हाँ मज़े ज़रूर ले सकती हूँ.

अमित : मज़े की बची मेरी हालत बुरी है और तुम है रही हो. हए मेरा पेट .

राधा : दर्द हो रही है क्या ?

अमित : सांस लेने की भी जहा नहीं बची अब तो

राधा : तो किसने कहा था इतना खाने को? मन कर देते .

अमित : तुमने देखा नहीं , मौसी तो सुनने को भी तैयार नहीं थी.

राधा : रुको मैं कुछ लती हूँ .

राधा जल्दी से दवा ले आयी और मुझे पीने को कहा. मैंने भी जल्दी से उसे पि लिया .

राधा : अब आराम करो थोड़ी देर में पेट हल्का हो जायेगा. किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो आवाज़ दे देना .

इतना कह कर राधा मुझे देखती हुई चली गयी और मैं बिस्टेर पर लेट गया . कुछ hi पलों में पेट की अकड़न थोड़ी काम हुई तो मैं ऑंखें बंद कर क लेट गया . मेरी आंख अभी लगी hi थी क मुझे अपने ऊपर पानी की बुँदे गिरती हुई महसूस हुई. मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो दिव्या मौसी मेरे पास बैठी मेरा सर सेहला रही थी और उनकी आँखों से आंसू मेरे चेहरे पर गिर रहे थे.

अमित : मौसी क्या हुआ ? आप फिर से रोने लगी.

दिव्या मौसी : कुछ नहीं बस ऐसे hi आँखों में आंसू आ गए . तुम्हे सोया हुआ देख कर मुझसे रहा नहीं गया. तुम लेटो आराम करो मैं बस जा hi रही थी.

अमित : ऐसे नहीं मौसी जी . आप दुखी रहेंगी तो मुझे क्या ाचा लगेगा . अगर आप मेरे आने से बार बार ऐसे दुखी हो रही हैं तो मैं चला जाऊंगा.

दिव्या मौसी : ख़बरदार जो फिर जाने की बात की तो . तू कहीं नहीं जायेगा. मैं तुझे कहीं नहीं जाने दूंगी. ले अब मैं नहीं रोटी , तू चुप चाप लेट यहाँ पर.

दिव्या मौसी ने जल्दी से अपनी ऑंखें साफ की और मुझे झिडकते हुए लेटने को कहा . मैं भी उनकी गॉड में सर रख कर लेट गया तो प्यार से मेरा सर सहलाने लगी. उनके हाथों का वो जादू था या उनकी ममता क मुझे पता hi नहीं चला कब मैं नींद की वादियों में खो गया.

मेरी आंख मेरे फ़ोन की रिंगटोन से खुली. मैंने उठने की कोशिश की तो मुझे अपने सर पर कुछ भर सा महसूस हुआ . दिव्या मौसी मेरा सर गॉड में रखे हुए hi सो गयी थी और मेरे सर क ऊपर hi वो खुली हुई थी. मैंने सावधानी से उठने की कोशिश की मगर फिर भी दिव्या मौसी की नींद टूट हो गयी.

दिव्या मौसी : तू उठ गया बेटे ? मैं तेरे लिए चाय लती हूँ.

इतना कह कर दिव्या मौसी उठ कर रूम से बहार चली गयी और मैंने अपना फ़ोन जो फिर से बज रहा था उसे उठाया . ये डॉ रीना की कॉल थी.

अमित : hello डॉ साहिबा. इस वक़्त कैसे यद् किया?

डॉ रीना : फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे मेरा कब से तरय कर रही हूँ .

अमित : वो असल में मैं सो गया था.

डॉ रीना : ओह ी ऍम सॉरी मैंने तुम्हे डिस्टर्ब कर दिया .

अमित : नहीं नहीं ऐसी बात नहीं . बल्कि ाचा hi किया वर्ण मैं ऐसे hi सोया रहता और प्रैक्टिस से छुट्टी हो जाती . कोई काम था क्या ?

डॉ रीना : बिना काम क फ़ोन नहीं कर सकती क्या ? मुझे तुमसे मिलना है . बोलो कब तक आ सकते हो?

अमित : अभी तो प्रैक्टिस पर जाना है उसके बाद ट्यूशन . आप कब तक हैं हॉस्पिटल में?

डॉ रीना : जब तक तुम कहो. मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगी .

अमित : ठीक है फिर मैं 7 बजे क बाद आ जाऊंगा आपके पास .

डॉ रीना : ठीक है , यद् से आ जाना .

अमित : आ जाऊंगा.

मैंने फ़ोन रखा तो साथ hi दिव्या मौसी चाय ले आयी . हम दोनों ने साथ में चाय पि और उसके बाद मैं कपडे बदल कर मौसी को बताकर स्टेडियम क लिए निकल गया. स्टेडियम में नीरज क साथ आज मैंने थोड़ी बहुत प्रैक्टिस अचे से की और फिर मंजू म क घर चला गया .

मंजू म क घर जाते जाते मैंने सोचा क पहले डॉ रीना से hi मिल लेता हूँ खामखाह वो मेरा वेट करती रहेंगी देर तक . उन्हें ड्यूटी से घर भी तो जाना होता है . मैंने बाइक उधर घुमा दी. जैसे hi मैंने डॉ रीना क केबिन का दरवाज़ा खोला तो वो सामने बैठी कोई रिपोर्ट देख रही थी. मुझे सामने देख कर वो अपनी जगह से उठी और दौड़ते हुए मेरे गले लग गयी. मुझे तो समझ नहीं आया क बात क्या है. डॉ रीना कस क मेरे साइन से लग कर कड़ी थी.

डॉ रीना : तुम आ गए ? ी ऍम सो हैप्पी , थैंक यू , थैंक यू वैरी मच. ी लो......

डॉ रीना अपनी बात कहते कहते बीच में hi रुक गयी.

अमित : बात क्या है ? मुझे कुछ बताएंगी क हुआ क्या है? ये थैंक यू किस लिए कह रही हैं आप ?

डॉ रीना : कल रत क लिए

अमित : मतलब ?

डॉ रीना : मुझे तो यद् भी नहीं था क रत क्या कुछ हुआ था वहां. आज जब मेरी फ्रेंड का फ़ोन आया तो मुझे पता चला क तुमने तरुण और उसके साथियों की जैम कर धुलाई की है. मेरी फ्रेंड बता रही थी क तरुण तो बिस्टेर पर पद गया है . उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आयी है. काम से काम 6 महीने बीएड पर hi रहेगा. और बाकि सब भी हॉस्पिटल में हैं. रहा का भी असली रूप सबके सामने आ गया . हमारे आने क बाद वहां सबको पता चल गया क वो सब मिलकर क्या करने वाले थे मेरे साथ. मेरी फ्रेंड की फॅमिली ने खुद उन सब क खिलाफ F.I.R करवा दी है. वो मुझसे माफ़ी मांग रही थी और तुम्हारे बारे में पूछ रही थी.

डॉ रीना ने साडी कहानी एक hi सांस में सुना दी क हमारे बाद क्या हुआ वहां पर.

अमित : क्या पूछ रही थी आपकी फ्रेंड?

डॉ रीना : पूछ रही थी क दुबारा कब मिलवा रही हो जीजा जी से

इतना कह कर डॉ रीना शर्मा गयी . मुझे उनके शर्म से लाल होते गाल देख कर शरारत सूझी और उनके मज़े लेते हुए मैं कहा.

अमित : तो क्या कहा आपने साली साहिबा को क कब मिलवाना है जीजा जी से .

मेरे इतना कहते hi डॉ रीना ख़ुशी और हैरानी से मेरी आँखों में देखने लगी .

अमित : ऐसे क्या देख रही हैं आप ? अब आपने उन्हें ऐसा कहा है तो मैं इसमें क्या कर सकता हूँ? और बोलिये झूठ .

डॉ रीना : तो इसे सच बना दो न

अमित : क्या ????? क्या कहा आपने ?

डॉ रीना : मम मैंने कहा सच बता दो न. फिर वो मुझ पर हँसेगी . यही चाहते हो न तुम?

अमित : मैं भला ऐसा क्यों चाहूंगा? मैं किसी को आप पर हसने थोड़े hi दूंगा.

डॉ रीना : तो मतलब तुम मेरे साथ उससे मिलने को रेडी हो ?

अमित : अब क्या मिलाना ज़रूरी है ?

डॉ रीना : हाँ हाँ ज़रूरी है बहुत ज़रूरी है . वो अपने जीजा से मिलना चाहती है तो मैं मन कैसे कर दूँ? मैं उसे कल hi बुला लेती हूँ .

अमित : ो hello मैडम हुआ क्या है आपको ? अभी अभी उसकी मैरिज हुई है. कुछ दिन तो उसे अपने पति क साथ रहने दीजिये . अभी तो उन्हें हनीमून पर जाने दो आप . खामखाह कबाब में हड्डी क्यों बन रही हैं?

डॉ रीना : वो मैं ... ाचा मैं उसे कह दूंगी क जब वो ठीक समझे तो बता दे फिर हम मिल लेंगे. वैसे थैंक्स तुम नहीं जानते वो तरुण कितना घटिया इंसान था . कॉलेज में भी मेरे पीछे पड़ा रहा था . पता नहीं कैसे कैसे कितनी बार मुझे उसने पर्पस किया था मगर मैं उसकी सचाई जानती थी इस लिए उससे दूर hi रहती थी. ाचा किया जो तुमने उसे ऐसी सजा दी.

अमित : वैसे काम तो वो अपनी फ्रेंड्स भी नहीं थी. वो दोनों बराबर शामिल थी इस प्लान में उसके साथ. एक आपको उसके पास ले गयी और दूसरी मुझे उलझा कर रखना चाहती थी.

डॉ रीना : अब सबको उनकी सचाई भी पता चल गयी है तो कोई मुँह नहीं लगाने वाला उनको भी. वैसे एक और बात है

अमित : क्या ??

डॉ रीना : माँ को पता चल गया है कल जो कुछ हुआ.

अमित : वो कैसे ?

डॉ रीना : मैं अपनी फ्रेंड से बात कर रही थी तो मुझे और hi नहीं चला क माँ पास में कड़ी सब सुन रही थी . फिर जब उन्होंने साडी सचाई पूछी तो मैंने भी बता दिया.

अमित : फिर तो आपकी माँ बहुत नाराज़ हुई होंगी .

डॉ रीना : नाराज़ तो हुई मगर वो इस बात से ज्यादा नाराज़ हैं क मैं उस लड़के को घर नहीं ले कर जिसने मुझे उन भेड़ियों से बचाया.

अमित : तो फिर आपने क्या कहा?

डॉ रीना : क्या कहती ? मैं तो ये कह कर गयी थी क मैं सहेली क साथ जा रही हूँ और अब ये बताती क मैं तुम्हारे साथ गयी थी और रत भी तुम्हारे साथ थी वो क्या सोचती ? मैंने उनसे यही कहा है क वो लड़का जब मिलेगा तो मैं मिलवा दूंगी आपसे.

अमित : मतलब अब आपकी माँ से भी मिलना पड़ेगा?

डॉ रीना : क्यों ? कोई प्रॉब्लम है क्या ? मैं तुम्हे अपने घर लेकर चलूंगी और माँ और छोटी बहिन से मिलवाउंगी .

अमित : रहने दीजिये न , वो क्या सोचेंगी मेरे बारे में ?

डॉ रीना : वो तो कह रही थी क मैं आज hi तुम्हे घर लेकर आऊं. पर मैंने ये कह कर मन कर दिया क मैं तुम्हारा नाम पता नहीं जानती . इस लिए अभी तुम खुद को प्रेपर कर लो फिर मेरे साथ चलना माँ से मिलने .

अमित : ये तो आप मुझे मुश्किल में दाल रही हैं.

डॉ रीना : कोई मुश्किल नहीं है. मेरी माँ बहुत अछि है . इन फैक्ट सब से अछि है. वो बहुत खुश होंगी तुमसे मिल कर और तुम्हे भी ाचा लगेगा देख लेना.

अमित : चलो देखते हैं आंटी जी क्या कहती हैं. अब कोई और बात करनी है या मैं जॉन ?

डॉ रीना : क्या थोड़ी देर और नहीं रुक सकते मेरे पास ?

अमित : अब ऐसे आप पूछेंगी तो मन कौन कर पायेगा ? पर मुझे ट्यूशन भी तो जाना है.

डॉ रीना : ाचा ठीक है एक कप कॉफ़ी तो पि सकते हैं साथ ? फिर तुम चले जाना .

उसके बाद हमने साथ में कॉफ़ी पि और कुछ इधर उधर की बातें की. कोई आधा घंटा और मैं उनके पास रुका और फिर चल दिया मंजू म की तरफ.

रोज़ की तरह बाइक की आवाज़ से hi मंजू म ने दरवाज़ा खोल दिया और मैंने भी अंदर जाते hi उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया मगर जल्दी से उन्होंने मुझे खुद से अलग कर दिया. मुझे इस सब की उम्मीद नहीं थी पर मेरे कुछ बोलने से पहले hi अंदर आवाज़ आयी

‘ कौन है बुआ ?’

मुझे ये आवाज़ जनि पहचानी लगी . अब मुझे समझ आया क मंजू म ने क्यों ऐसे मुझे खुद से अलग किया था . ाचा हुआ अंदर जो भी था उसने देखा नहीं. बुआ कहने का मतलब तो यही था क अंदर मम की भतीजी है. अब ये कौन है मैं अंदाज़ा hi लगा रहा था क वो हमारे सामने आ गयी . मैं उसे देख कर शॉकेड hi हो गया.



अमित : तुम ???
 
अपडेट 139



मेरे सामने शीना कड़ी थी जिसकी मैं यहाँ उम्मीद नहीं कर रहा था .और शीना का भी हल कुछ मेरे जैसा hi था शायद उसे नहीं पता था क मैं मम क पास ट्यूशन पड़ने अत हूँ.

शीना : अमित ! ! तुम यहाँ ?

अमित : वही तो मैं भी पूछ रहा हूँ? तुम यहाँ कैसे ?

शीना : मेरी बुआ का घर है , मैं तो यहाँ आ hi सकती हूँ. पर तुम यहाँ कैसे ?

अमित : मैं मम क पास पड़ने अत हूँ.

शीना : तुमने कभी बताया hi नहीं क तुम बुआ क पास पड़ते हो. मुझे तो लगा था क क्लास में hi तुम शायद बुआ क फेवरेट स्टूडेंट हो.

मंजू म : असल में अमित कॉलेज से भी पहले से hi मुझे मिला था. और फिर जब इसे क्लास में देखा तो ाचा लगा. इसे थोड़ी इंग्लिश ने गाइडेंस की ज़रूरत थी तो मैंने इसे यहीं पर हेल्प करना शुरू कर दिया .

शीना : कॉलेज से पहले कैसे मिले थे आप?

मंजू म : असल में अमित मुझे मार्किट क पास मिला था जब कुछ गुंडों ने चाकू की नोक पर मुझसे लूटपाट की कोशिश की थी . तब इसने hi मुझे बचाया था और खुद घायल हो गया था. फिर जब कॉलेज में इसे देखा तो इसका शुक्रिया ऐडा करने क लिए इसे घर ले आयी थी . पहले तो इसने मौका hi नहीं दिया था . बस फिर तब से ये मेरी ज़िन्दगी का एक खास हिस्सा बन गया है . जब कोई नहीं था तब इसने मुझे सहारा दिया और देखा अब मेरे पास तुम लोग फिर से वापिस आ गए. हे इस रियली लकी फॉर में.

शीना : अमित तू सच में बहुत अचे हो. पता नहीं किस मिटटी क बने हो जो हर किसी को अपना बनाते जा रहे हो. मुझ पर तो एहसान किया hi था मेरी बुआ पर भी कर दिया. और न जाने किस किस पर तुम एहसान कर चुके हो.

अमित : किसी की मदद करना है हाँ नहीं होता शीना. इंसान hi इंसान क काम अत है. ज़िन्दगी में हम हो भी करते हैं वो पलट कर हम तक ज़रूर अत है . इस लिए हमेशा दूसरों क साथ ाचा hi करना चाहिए .

मंजू म: देखा कितने अचे विचार हैं इसके. कभी कभी तो ऐसे लगता है जैसे .....

शीना : जैसे ?

मंजू म : नाम ऑंखें ) कुछ नहीं तुम दोनों बातें करो मैं कॉफ़ी बना कर लायी.

मंजू म जल्दी से किचन में चली गयी पर मैंने उनकी आँखों में आयी नमी देख ली थी . मम क जाते hi शीना मुस्कुराती हुई मुझे बैठने का इशारा करती हुई खुद मेरे सामने सोफे पर बैठ गयी.

शीना : सच में यार तुम अलग hi मिटटी क बने हो. मैंने पूरी ज़िन्दगी में ऐसा कोई शख्स नहीं देखा जो बिना मतलब क सब की मदद कर रहा है. बुआ की ख़ुशी देख कर पता चलता है क वो तुम्हे अपना मानती हैं. इस नाते तो मेरे साथ भी तुम्हारा क्लोज रिलेशन हुआ न ?

अमित : वो तो वैसे भी है. दोस्ती से ाचा और क्या रिश्ता हो सकता है दुनिया में.

शीना : चली ये भी ाचा हुआ क पता चल गया तुम यहीं आते हो . अब तो कॉलेज क बहार भी मिलने का मौका मिलता रहेगा.

अमित : तुम्हारी बुआ का घर है तुम जब चाहे आ सकती हो .

‘ बिलकुल , शीना तुम अब आती रहना मुझे भी ाचा लगेगा और रुपाली भाभी को भी लेकर आना साथ में उन दोनों को भी ‘

मंजू म हमारे लिए कॉफ़ी ले कर आ गयी. और फिर हम सब बातें करते हुए कॉफ़ी पिने लगे. आज कुछ पड़े तो हुई नहीं बस बातें hi करते रहे. शीना तो अब हर रोज़ आने का कह रही थी जिस पर मंजू म भी खुश थी मगर अंदर से उन्हें भी ये चिंता ज़रूर होगी क मेरे साथ वो अकेले में वक़्त कैसे बिताएंगी. खैर उसके बाद मैं इजाज़त लेकर दिव्या मौसी क घर की तरफ निकल गया.

कुछ hi देर में मैं वापिस मौसी क घर पहुंचा तो बुलेट की आवाज़ सुनते hi राधा ने दरवाज़ा खोल दिया . राधा मुस्कुराती हुई मेरे स्वागत में कड़ी थी. जैसे hi मैं घर क अंदर आया तो वो दौड कर पानी का गिलास ले आयी. पानी पिटे हुए मैं अंदर आया तो मौसी भी किचन से निकल कर मेरे पास आ गयी .

दिव्या मौसी : आ गए बीटा ? चलो पहले नाहा लो . और बताओ मुझे तुम अभी क्या लोगे? भाभी से भी पूछा है मैंने पर तुम भी बता दो क क्या क्या लेते हो तुम डाइट में?

अमित : डाइट में ?

दिव्या मौसी : अब तुम खिलाडी हो तो खान पान उस हिसाब hi तो लेते होंगे. मुझे सब बता दो एक बार फिर मैं खुद ध्यान रखूंगी. राधा ने बताया है क अगले हफ्ते तुम्हारा कम्पटीशन है. मैं नहीं चाहती क कोई कमी रह जाये .

अमित : अरे मौसी आप ऐसे hi चिंता कर रही हैं. मैं कुछ अलग नहीं खता. वैसे भी आप जैसे प्यार से मुझे पेट भर भर कर खिल रही हैं और कुछ खाने की जगह hi कहाँ बचेगी.

दिव्या मौसी : चल अब पहले नाहा क आ मैं देखती हूँ खुद hi क क्या देना है.

मैं अपने कमरे में गया और बैग को साइड में रख कर नहाने क लिए कपडे देखने लगा तो राधा भी मेरे पास आ गयी.

राधा : मैंने कपडे बाथरूम में रख दिए हैं . तुम नाहा लो.

अमित : तुम्हे क्या ज़रूरत थी ? मैं कर लेता न खुद hi.

राधा : तो क्या हुआ अगर मैंने कर दिया तो?

अमित : ाचा ठीक है मैं अब नाहा कर अत हूँ.

मैं नाहा कर कपडे बदल कर वापिस आया तो दिव्या मौसी ने मुझे दूध का गिलास पकड़ा दिया.

दिव्या मौसी : लो ये दूध ख़तम करो पहले. मैंने इसमें बादाम भी दाल दिए हैं. सुबह से अब नाश्ता माखन परांठों क साथ और फिर दूध . फिर दोपहर का खाना और शाम को दूध . रात क खाने में जो तुम खाना चाहो बता दिया करो. वैसे जितना मुझे पर है तुम्हारी पसंद का hi बनाउंगी.

अमित : मौसी जी मैं सब खा लेता हूँ ऐसे कुछ खास बनाने की ज़रूरत नहीं है.

दिव्या मौसी : वो मैं देख लुंगी . ाचा तुम दोनों बैठो मैं खाना बना कर आयी .

दिव्या मौसी फिर से किचन में चली गयी और रह गए मैं और राधा .

राधा : तो अब बताओ कहाँ गए थे?

अमित : यहाँ से पहले स्टेडियम फिर मंजू म क और फिर यहाँ वापिस.

राधा : हम्म्म , मंजू म भी तुम्हे काफी मानती हैं. इसी लिए तो स्पेशल तुम्हे पड़ती हैं.

अमित : हाँ वो बहुत अछि हैं. पता नहीं क्या है पर मुझे हमेशा लगता है जैसे उनसे मेरा कोई खास रिश्ता है. शायद पिछले जनम का हो.

राधा : मैंने भी सुना है वो बहुत अछि हैं. रीमा बता रही थी क वो उनकी बुआ हैं. क्या तुम पहले से जानते थे ये?

अमित : नहीं , बाद में पता चला था मगर वो मोंटी क पापा यानि अपने भाई से दूर अकेली hi रहती हैं. मैंने महसूस किया है उनकी बातों से क उन्होंने बहुत दुःख झेला है ज़िन्दगी में . इसी लिए मैं भी कुछ वक़्त उनके साथ बिता कर उनका मन बेहला देता हूँ. वैसे उन्होंने तो मुझे अपना भाई बना लिया था अब भी कुछ ऐसा hi है.

राधा : इस हिसाब से तो तुम शीना और रीमा क मां हुए न.

अमित : अब ज्यादा लम्बी छोड़ी रिश्तेदारी मत बनाओ तुम.

राधा : ाचा चलो मेरे साथ मैं तुम्हे अपना कमरा दिखती हूँ.

राधा मुझे अपने कमरे में ले गयी और मुझे अपना कमरा दिखने लगी.

राधा : तुम्हे एक चीज़ दिखाऊं ?

अमित : क्या ?

राधा : खुद hi देख लो .

राधा ने अपनी अलमारी से एक एल्बम निकल कर मुझे दी. मैंने जब देखना शुरू किया तो हैरान रह गया. इसमें मेरे बचपन से लेकर अब तक की कई साडी तस्वीरें थी. ये वो तस्वीरें थी जिसके बारे में न मुझे पता था न कहीं मैंने देखि थी. स्पेशलय अपनी माँ क साथ. तस्वीरें देखते देखते मैं हैरान हो रहा था. ऐसा लग रहा था मेरी पूरी ज़िन्दगी कुछ तस्वीरों में समां गयी हो.

अमित : ये सब तुम्हे कहाँ से मिली ?

राधा : पसंद आयी ?

अमित : बहुत बहुत ज्यादा. पर तुम्हे ये कहाँ से मिली ये तो बताओ.

राधा : तुम्हारे बचपन वाली तो माँ की एल्बम से ली थी मैंने . और उसके बाद वाली ममी की एल्बम से कुछ मौसी की एल्बम से और कुछ मैंने खुद भी खींची थी . पापा से स्पेशलय कैमरा मंगवाया था मैंने. और ये तो उसी मोबाइल से ली हैं जो तुमने ले कर दिया है.

अमित : तुमने मेरे लिए इतनी म्हणत की ? मगर क्यों ?

राधा : तुम भी अजीब हो एक तो तुम्हारे लिए इतनी म्हणत की है और ऊपर से तुम तारीफ करने की बजाये सवाल पूछ रहे हो. मैंने ये तस्वीरें इस लिए इकठ्ठा की थी क तुम्हे देख सकूँ. वैसे तो तुमसे मिलना होता नहीं था तो इसी तरह तुम्हे देख लेती थी. जब कभी मां क घर जाती तो तुम्हारी जो भी नै तस्वीर होती थी वो ले आती थी बिना किसी को बताये.

अमित : तुम इतना मिस करती थी तो बात क्यों नहीं करती थी जब भी अति थी? उल्टा हमेशा गुस्सा दिखती थी.

राधा : कैसे करती ? मैं माँ को दुखी नहीं करना चाहती थी . तब माँ तुमसे बात नहीं करती थी और मुझे भी मन किया था . लेकिन अब मैं बहुत खुश हूँ. अब सब ठीक है और देखो तुम हमारे घर पर हो. पता है मैं हमेशा भगवन से यही दुआ मांगती थी क किसी तरह माँ तुम्हे अपना ले और तुम इस घर में आ सको. देर से hi सही पर उसने मेरी सुन ली.

राधा की बातें सुन कर मेरा भी मन भर आया. वो बचपन से hi मेरी इतनी परवाह करती थी और मैं सोचता था क वो मुझसे नफरत करती है . पर मेरा दिल इस बात को कभी भी मंटा नहीं था क राधा मुझसे नफरत करती है. क्यूंकि उसकी आँखों में हमेश चेहरे से अलग भाव नज़र एते थे मुझे .

राधा : जानते हो जब भी तुम्हे अकेला देखती थी न तो मेरा बड़ा दिल होता था क तुमसे बात करूँ पर मैं मजबूर थी. और फिर घर आ कर मैं अकेले में बैठ कर रोया करती थी .

अमित : तुम क्यों रोटी थी पागल , एक बात बताऊँ

राधा : हम्म्म

अमित : तुम चाहे जैसे भी मुझे गुस्सा दिखती थी पर मेरा दिल हमेशा कहता था क तुम मुझसे नफरत नहीं करती हो. और आज देखो सचाई मुझे पता चल hi गयी.

राधा : अभी और भी बहुत कुछ है जो तुम्हे नहीं पता . क्या तुम्हारे दिल ने कभी कुछ और नहीं कहा तुमसे ?

राधा ने बड़ी संजीदगी से मेरी आँखों में देखते हुए ये कहा तो मुझे समझ नहीं आया क वो किस बारे में बात कर रही है पर उसकी नज़रों की कशिश मुझे उसकी तरफ खिंच रही थी. राधा क चुप होते hi एक ख़ामोशी सी च गयी थी हम दोनों में और मैं जैसे खुद को बंधा हुआ महसूस कर रहा था . हम दोनों अभी भी एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे क बहार से मौसी की आवाज़ आयी . खाना बन गया था.

अमित : लो खाना बन गया , चलो पहले खाना कहते हैं.

दिव्या मौसी ने फिर से खाना में बहुत साडी चीज़ें बना ली थी और साथ में गाजर का हलवा खीर भी. एक बार फिर से मुझे खाने क बाद राधा से दवा लेकर कहानी पड़ी . रत को सोने से पहले कुछ देर राधा और फिर दिव्या मौसी मेरे पास बैठ कर बातें करती रही और फिर एक बार मैं दिव्या मौसी की गॉड में सर रख कर सो गया . अगली सुबह मैं जल्दी उठ गया और छत पर जा कर एक्सरसाइज करने लगा. मैं ऊपर छत पर पसीना बहा रहा था क दिव्या मौसी मुझे कमरे में न पाकर मुझे ढूंढती हुई ऊपर आ गयी .

दिव्या मौसी : तुम यहाँ हो ? मैं तो दर गयी थी क पता नहीं तुम बिना बताये कहाँ चले गए. तुम्हारी बाइक बहार कड़ी देखि तो लगा क तुम यहीं कहीं हो. बड़ी जल्दी उठ जाते हो सुबह ?

अमित : शुरू से आदत जो है . सोचा छत पर थोड़ी एक्सरसाइज hi कर लूँ.

दिव्या मौसी : शाबाश बहुत अचे , ाचा तुम एक्सरसाइज करो मैं तुम्हारे लिए दूध गरम करती हूँ. अभी कितनी देर और करने वाले हो ?

अमित : बस मौसी जी हो hi गया समझो .

दिव्या मौसी : अछि बात है , नीचे अजय फिर .

दिव्या मौसी क जाने क कुछ देर बाद मैं भी नीचे आ गया . राधा अभी तक सो रही थी शायद. दिव्या मौसी ने मुझे दूध का गिलास दिया और खुद नहाने चली गयी . मैंने सोचा तब तक राधा को hi जगा देता हूँ. जब मैं राधा क कमरे में गया तो वो पिंक कलर क नाईट सूट में टेडी बेयर को गले से लगाए किसी मासूम पारी सी लग रही थी सोते हुए . मैं कुछ देर उसे देखता रहा . उसके चेहरे पर बालों की एक लत बिखरी पड़ी थी जो मुझे अछि नहीं लग रही थी . मैंने पास जा कर उसके बल चेहरे से हटाए तो उसकी खूबसूरती को देखता हुआ मैं सोचने लगा क वो कितनी खूबसूरत है . पता नहीं कौन खुश नसीब होगा जिसके नसीब में राधा होगी. ये बात पता नहीं कैसे मेरे दिमाग में आयी पर इस बात से जैसे मैं खुद को hi कोसने लगा. मेरा हाथ अभी राधा क कोमल गलों पर hi था क नींद में hi राधा ने कुनमुनाते हुए अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया . और मेरी कलाई को अपनी बाजु में लपेट ते हुए अपने सीने से लगाने लगी तो मैंने जल्दी से अपना हाथ खिंचा . जिससे वो थोड़ा हिल गयी और उसकी नींद टूट गयी. राधा ने आंख खोल कर मुझे देखा और फिर से आँख बंद कर ली. मुझे लगा वो शायद अभी भी नींद में है मगर एक बार फिर से उसने आँखें खोली और मुझे अछि तरह देखने क बाद फिर से ऑंखें बंद कर ली . राधा ये क्या कर रही थी मुझे समझ नहीं आ रहा था.

अमित : राधा उठ भी जाओ देखो क्या टाइम हो रहा है ?

राधा ने फिर से ऑंखें खोली और मुझे गौर से देखने लगी .

राधा : ये सच में तुम hi हो न या मैं अभी भी ख्वाब देख रही हूँ ?

अमित : अब उठ भी जाओ या पानी डालूं तुम्हारे ऊपर.

राधा : तो ये सच में तुम हो? मुझे लगा मैं अभी भी वो सपना ......

अमित : कौन सा सपना ?

राधा : कुछ नहीं , तुम मुझे जगाने आये माँ किधर है ?

अमित : मौसी नहाने गयी हैं मैंने सोचा तब तक तुम्हे जगा दूँ.

राधा : मुझे बहुत ाचा लगा . आज तो मेरा दिन बेस्ट जाने वाला है.

अमित : वो क्यों ? कोई ख्वाब देखा है क्या ? या कोई खास दिन है आज ?

राधा : ऐसा hi है कुछ . तुमने चाय वगैरह कुछ लिया या नहीं ? मैं बना देती हूँ.

अमित : मौसी ने दूध का गिलास दे दिया था. अब तुम उठो और तैयार हो जाओ.

इतना कह कर मैं कमरे से बहार निकलने लगा तो राधा बोली.

राधा : क्या ऐसे hi मुझे रोज़ नींद से जगाने आओगे तुम ?

अमित : सोच लो ? अगर तुम एक बार नहीं उठी तो पानी की बाल्टी भी दाल दूंगा.

राधा : मुझे मंज़ूर है पर तुम्हे ऐसे hi रोज़ मुझे जगाना होगा.

राधा मेरी आँखों में देखती स्माइल करते हुए बाथरूम में चली गयी . उसके बाद मैं भी अपने कमरे में आ गया . तब तक मौसी ने नाहा लिया था और फिर मैं भी नाहा कर तैयार हो गया. नाश्ते में मौसी ने आलू क परांठे माखन क साथ खिलाये और साथ में लस्सी. नाश्ता कर क हम कॉलेज जाने क लिए रेडी हो गए तभी बहार कार का हॉर्न बजा.

राधा : लगता है कल्पना आ गयी.

अमित : ठीक है तुम उसके साथ कार में जाओ मैं बाइक से अत हूँ.

राधा : बिलकुल नहीं , तुम भी हमारे साथ hi चलोगे.

अमित : मगर मुझे एक काम से कहीं जाना भी है थोड़ी देर क लिए तो मुझे बाइक चाहिए .

राधा : तो ठीक है मैं कल्पना को मन कर देती हूँ . मगर जाउंगी तो मैं तुम्हारे साथ hi.

इतना कह कर राधा बहार चली गयी और कल्पना को बता दिया क हम बाइक पर आ रहे हैं. जब तक मैं बहार आया राधा कल्पना को सब बता चुकी थी.

कल्पना : ो मिस्टर इंडिया कभी क्लास में भी रह लिया करो . आज कहाँ जाना है तुमने ?

अमित : अरे अभी तो आ रहा हूँ कॉलेज . बाद में जाना है थोड़ी देर क लिए.

कल्पना : चलो ठीक है हम चलते हैं तुम लोग आओ अपनी फटफटिया पर.

इतना कह कर कल्पना नेहा दीदी क साथ चली गयी. मैंने भी बाइक स्टार्ट की और राधा को साथ लेकर निकल गया.

राधा : एक बात कहूं ?

अमित : कहो

राधा : कितना ाचा होता न तुम रोज़ मुझे यूँ hi बाइक पर बिठा कर कॉलेज ले कर जाते फिर लेकर आते.

अमित : क्यों ? कल्पना क साथ तुम्हे ाचा नहीं लगता क्या? वैसे भी कार में जाना ज्यादा सेफ और आरामदायक है .

राधा : मुझे कार में बैठने की कोई ीचा नहीं है . वो तो तुमने कहा था इस लिए मैं मन नहीं कर पायी . मुझे तो तुम्हारे साथ बाइक पर ज्यादा ाचा लगता है.

अमित : वो क्यों?

राधा : वो इस लिए क एक तो बाइक पर खुली हवाओं में उड़ना ाचा लगता है दूसरा तुम साथ हो तो चलने क लिए म्हणत भी नहीं करनी पड़ती .

अमित : तो कार में कौन सा तुम्हे खुद म्हणत करनी पड़ती है?

राधा : मुझे बस बाइक पसंद है वो भी तुम्हारे साथ.

अमित : ाचा अगर मैं बाइक क बजाये कार में आऊं तो क्या फिर तुम साथ नहीं बैठोगी ?

राधा : अगर तुम कार में आओगे तो फिर वो भी पसंद है . पर अभी तो तुम बाइक पर हो न. जब तुम कार लेने क काबिल हो जाओगे तो मैंने तुम्हारे साथ कार में भी चलूंगी. जहाँ चाहे ले जाना पर तुम्हे मुझे कार में बैठकर लेकर जाना पड़ेगा ( डोली में )

अमित : तो ठीक है . जिस दिन मैं कार लाऊंगा न सबसे पहले तुम्हे hi बिठाऊंगा.

बातें करते करते हम कॉलेज पहुँच गए और सब से मिल कर हम अपनी अपनी क्लास में चले गए . पहला लेक्चर अटेंड करने क बाद मैं मोहित को बता कर निकल गया क मुझे किसी से मिलना है . शालू ने मन किया था तो मैंने उसका ज़िकर करना ठीक नहीं समझा. मैं ठीक 10 बजे शालू क घर क सामने खड़ा था. जैसे hi मैंने बेल्ल बजे तो शालू ने दरवाज़ा खोला और मैं उसे देखता hi रह गया.

शालू ने लाल रंग का टाइट फिटिंग का सूट पहना हुआ था और खुले बल जो आज कर्ली किये हुए थे उसपे बहुत hi जाँच रहे थे. आँखों में काजल की धार उसकी आँखों को और भी आकरषक बना रही थी. गोर गाल जो कुछ गुलाबी लग रहे थे और होंठों पर लाल लिपस्टिक जैसे उसे शराब क प्याले बना रही थी. कानो में पतली सी बालियान और नक् पर एक चमकदार बारीक सा नोज पिन. एक बार तो मैं हैरान परेशां सोचने लगा क ये सच में शालू hi है या कोई और. मुझे अपनी तरफ इस तरह देखते हुए पाकर शालू ने hi मेरी तन्द्रा तोड़ी .

शालू : अब यहीं खड़े रहोगे या अंदर भी आगे?

अमित : यू अरे लुकिंग सो ब्यूटीफुल शालू. मुझे पता hi नहीं था क तुम इतनी खूबसूरत हो . रियली यू अरे लुकिंग गॉर्जियस. तुम तो इस लाल सूट में दुल्हन सी लग रही हो.

शालू : शरमाते हुए ) दुल्हन hi तो बनूँगी .

अमित : क्या कहा?

शालू : कुछ नहीं आओ अंदर बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ .

मैं अंदर सोफे पर बैठ गया और शालू मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी.

अमित : पानी पिटे हुए ) तो क्या है मुझसे जो तुमने किसी से ज़िकर भी करने से मन किया था ?

शालू : मैं तुमसे कुछ चाहती हूँ अमित .

अमित : कहो क्या काम है ?

शालू : वो मैं , वो ...

अमित : कहो भी , ऐसे शर्माओ मत

शालू : मैं ..... मैं तुमसे .... मैं तुमसे एक बार प्यार करना चाहती हूँ

अमित : क्याआ ?????? ये तुम क्या कह रही हो?

इतना कह कर मैं जगह पर खड़ा हो गया.

शालू : प्लीज एक बार मेरी बात तो सुन लो.

अमित : मुझे लगता है तुम अभी होश में नहीं हो. हम फिर इस बारे में बात करेंगे.

शालू : मैं पूरे होशो हवास में हूँ . क्या मेरी एक बार बात नहीं सुनोगे ?

अमित : कहो क्या कहना चाहती हो?

शालू : मुझे पता है ये तुम्हे ाचा नहीं लगेगा पर मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ . मुझ जैसी लड़की क मुँह से ऐसी बात तुम्हे अछि नहीं लग रही होगी आखिर एक वैश्य hi तो हूँ मैं.

अमित : ऐसा मत कहो, कौन कहता है क तुम वैश्य हो? जो कुछ तुम्हारे साथ हुआ वो अत्याचार था . इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी .

शालू : बात तो एक hi है न. मेरे इस जिस्म को कइयों ने नोचा और इस्तेमाल किया. इस लिए मुझ जैसी लड़की को प्यार का हल कहाँ होगा? पर सच कहूं तो इस पर मेरा भी इख़्तियार नहीं. ज़िन्दगी में पहली बार किसी से प्यार कर बैठी थी भोलापन या बेवक़ूफ़ कहो . बिना किसी की सचाई जाने और उसकी बहुत बड़ी कीमत चुके है मैंने. मुझे लगा था प्यार व्यार कुछ होता hi नहीं और फिर तुम आये जिसने आते hi मेरी ज़िन्दगी बदल कर रख दी. मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था मैं कभी इस नरक से बहार आ पाऊँगी . पर तुम्हे वो कर दिखाया जो शायद कोई भी नहीं कर सकता था. तुमने मेरी ज़िन्दगी क सरे दुःख सरे कांटे एक hi बार में चुन लिए . अब मैं आज़ाद हूँ और एक नयी ज़िन्दगी की शुरुआत करने को कहा था न तुमने ? मैं ये शुरुआत तुम्हारे नाम से करना चाहती हूँ और ये साडी ज़िन्दगी तुम्हारे लिए जीना चाहती हूँ. तुम मेरे लिए मेरे भगवन मेरे देवता हो. और कहते हैं देवता को कभी जूते फल फूल नहीं चढ़ाये जाते. और मैं तो खुद जूठी हो चुकी हूँ. पर मेरे पास और कुछ नहीं है जो मैं तुम्हारे चरणों में चढ़ा सकूँ. मुझ पर एक और एहसान कर क क्या तुम मुझे स्वीकार करोगे ? मैं तुमसे साडी ज़िन्दगी का साथ नहीं मांग रही . हालाँकि ये खुदगर्ज़ दिल यही चाहता है मगर क्या तुम मुझे प्यार क कुछ पल नहीं दे सकते ? मैं तुम्हे आत्मा से फील करना चाहती हूँ . तुम चाहे तो दुबारा कभी मुझे हाथ भी मत लगाना पर सिर्फ एक बार क्या तुम मुझे नहीं भोग सकते? मैं सैर ज़िन्दगी अब तुम्हारी hi रहूंगी चाहे जहाँ भी रहूं. पर तुम्हे कभी दुबारा फाॅर्स नहीं करुँगी अगर तुम चाहो तो तुम्हारे लिए मैं कहीं भी कभी कुछ भी करुँगी पर सिर्फ एक बार मेरी ये ख्वाहिश पूरी कर दो. कहते हैं मरने वाले आखिरी ीचा ज़रूरी पूछी जाती है. इसे मेरी भी आखिरी ीचा समझ कर पूरी कार्डो मैं साडी ज़िन्दगी तुमसे कभी कुछ नहीं मांगूंगी. प्लीज मुझे अपने प्यार क थोड़े से पल दे दो प्लीज .

इतना कह कर शालू रोटी हुई मेरे पैरों में गिर गयी और मैंने उसे जल्दी से उठाया. उसकी बातों ने उसके दर्द को बयां कर दिया था. अंदर वो कितना टूट चुकी थी ये मुझे पता था पर उसके दिल में मेरे लिए क्या है ये मुझे पता नहीं था. शालू क दर्द से मेरी ऑंखें भी नाम पद गयी थी और मैं भला कैसे उसे इस तरह रोने देता आखिर क्या उसे इतना भी हक़ नहीं था क वो अपनी ज़िन्दगी में कुछ पल अपनी मर्ज़ी से जी सके? शालू ने तो मुझे अपना देवता hi कह दिया था . क्या उसके लिए मैं इतना भी नहीं कर सकता ? आखिर वो कुछ पल hi तो मांग रही थी न की साडी ज़िन्दगी. शालू जैसी इनोसेंट लड़की क साथ जो कुछ हुआ था वो किसी सदमे से काम नहीं था फिर भी वो सब सेहती अपने पिता की खातिर ज़िंदा रही . बहुत बड़ी कीमत चूका कर उसने अपने पिता क लिए इस नरक को स्वीकार किया था. अब उसकी ज़िन्दगी में फिर से बदलाव आया थो तो क्या एक नयी शुरुआत क लिए मैं उसकी इतनी सी ख्वाहिश भी न पूरी करूँ? आखिर इसमें हर्ज़ hi क्या है? किसी को प्यार देने से कुछ गलत तो नहीं हो जाता. मैंने शालू को अपने सीने से लगा लिया और उसे चुप करवाते हुए कहा.

अमित : ऐसा मत कहो शालू ऐसा मत कहो . तुम मन और आत्मा से किसी भी लड़की से ज्यादा पवित्र हो. तन को मैला दुनिया कर सकती है मगर मन अपने विचारों से साफ़ या मैला होता है. और तुम अंदर से कितनी साफ़ हो ये मैं जनता हूँ. मेरी नज़र में तुम्हारी इज़्ज़त बहुत ज्यादा है. तुमने ये सोचा भी कैसे क तुम्हे प्यार का हक़ नहीं है ? तुम तो बानी hi प्यार क लिए हो. वो इंसान थे hi नहीं जिन्होंने तुम्हारे साथ इतना गलत किया. तुम मुझे इतना सम्मान देती हो ये जान कर मुझे खुद पर गर्व हो रहा है. तुम जैसी लड़की तो किस्मत से hi मिल सकती है किसी को. मैं चाहता हूँ तुम अपनी ज़िन्दगी किसी क साथ नए सिरे से शुरू करो. मेरी ज़िन्दगी में पहले hi रीमा आ चुकी है इस लिए मैं किसी और को तो वो जगह नहीं दे सकता. हाँ तुम्हारी ीचा ज़रूर पूरी कर सकता हूँ और एक वडा भी, क कभी भी तुम्हे मेरी ज़रूरत होगी तो मैं इंकार नहीं करूँगा. जब तक तुम्हे कोई साथी नहीं मिलता तुम्हारा मुझ पर पूरा हक़ होगा.

शालू आंसू बहती आँखों में भी मुझे देख कर जैसे खुश हो उठी.

शालू : सच !!! तुम मुझे प्यार करोगे? ो अमित मुझे सम्भालो कहीं ये दिल इतनी ख़ुशी बर्दाश्त करके धड़कना hi न बंद कर दे. तुमने जो कहा है वो मेरे लिए ख्वाब से काम नहीं है. मैं साडी ज़िन्दगी सिर्फ तुम्हे hi चाहूंगी तुम्हे hi पूजूंगी. और कोई भी कभी भी तुम्हारी जगह नहीं ले सकेगा.

अमित : नहीं शालू ऐसा मत कहो . तुम्हारे पिता क भी कुछ सपने होंगे . क्या तुम उनके सपने पूरे नहीं करोगी? वो भी तुम्हे हर पिता की तरह डोली में बिठा कर विदा करना चाहते होंगे . उनकी ख़ुशी क लिए तुम्हे किसी न किसी का हाथ तो थामना पड़ेगा न.

शालू : वो सब बाद की बात है. अगर तुम कहोगे तो ये भी कर लुंगी पर मैं मन से तुम्हे अपना सब कुछ मन चुकी हूँ और अब जा तन पर भी तुम्हारा नाम लिख लेना चाहती हूँ. मैं अब पूरी की पूरी सिर्फ तुम्हारी हूँ और प्लीज मुझसे ये अधिक कर मत चिन्ना.

अमित : जैसी तुम्हारी ीचा , पर मैं यही चाहूंगा क तुम खुश हल ज़िन्दगी जियो और अपनी अलग ज़िन्दगी शुरू करो.

शालू : फ्यूचर किसने देखा है अमित ? मैं अपना आज तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ और जब तक भी मैं ज़िंदा हूँ तुम hi मेरे सब कुछ रहोगे . कल को मुझे किसी क साथ शादी करनी भी पड़ी तब भी तुम hi मेरे लिए पहले स्थान पर रहोगे. अब मुझे जल्दी से अपनी बना लो . ये हर श्रृंगार मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए hi किया है. मैं आज तुम्हारी दुल्हन बनना चाहती थी . जानती हूँ तुम्हारे साथ मेरी शादी नहीं हो सकती पर सुहाग रत की ख्वाहिश तो पूरी हो सकती है न ?

अमित : तो तुम्हे मेरे साथ सुहाग रत माननी है? तो फिर कहाँ से शुरू करें?

शालू मेरे ऐसा पूछने से शर्मा गयी और नज़रें झुका ली.

शालू : जैसे आप चाहें ?

अमित : आप ? ये तुम से आप कैसे ?

शालू : सुहाग रत तो लगी क साथ hi होती है न? और आप ने मुझे स्वीकार किया तो मैं अब आपको वही सम्मान दूंगी न.

अमित : एक प्रेमिका की तरह भी तो मुझसे प्यार कर सकती हो ? मुझे वही ज्यादा ाचा लगेगा.

शालू : जैसा तुम कहो. मैं वैसी hi बनने को तैयार हूँ.

अमित : तो दरवाज़ा बंद कर लें?

शालू : शरमाते हुए ) मैंने पहले hi कर दिया है. अब तुम मुझे मेरे कमरे में ले चलो अपनी बाँहों में उठा कर.

मैंने शालू को अपनी गॉड में उठा लिया और उसके रूम की तरफ चल पड़ा. शालू क बदन से अलग hi खुशबु आ रही थी . उसने खुद को पूरी तरह से तैयार किया था. उसके नाज़ुक से बदन को फूलों की तरह मैं अपनी गॉड में लेकर उसके कमरे में आ गया . कमरे की सजावट देख कर एक पल क लिए मैं ठहर गया. रूम में धीमी रौशनी थी . पार्डन से धक् कर दिन में भी जैसे अँधेरा कर रखा था और बीएड पर गुलाब की पत्तियां बिखरी पड़ी थी . एक भीनी भीनी सी खुशबु पूरे कमरे को महका रही थी जो माहौल को और भी मादक बना रही थी.

अमित : तुमने पहले से hi सब तयारी कर राखी थी ? तुम्हे पता था क मैं मन जाऊंगा इस सब क लिए?

शालू : मुझे तुम पर भरोसा था क तुम मेरी ख्वाहिश ज़रूर पूरी करोगे. तुम किसी का दिल तोड़ hi नहीं सकते कभी.

मैंने शालू को बीएड क पास ले जा कर आराम से बीएड पर लिटा दिया और कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया . अब कमरे में रौशनी और भी काम हो गयी थी और शालू सिमट कर बैठ गयी थी. उसने दोनों पाऊँ जोड़ कर घुटने बेंड करते हुए अपना सर घुटनो पर टिका लिया . बिलकुल जैसे दुल्हन सुहाग सेज पर बैठी हो. शालू वैसे तो बिंदास रहती थी पर आज शर्म से गाड़ी जा रही थी. मैं उसके पास बैठ गया और उसकी थोड़ी पर हाथ रख कर उसका चेहरा ऊपर किया तो उसकी नज़रें अभी भी नीची थी. सच मच शालू बहुत hi खूबसूरत थी शायद उसकी ये खूबसूरती hi उसकी दुश्मन बन गयी थी जो मोंटी जैसा दरिंदा उसकी ज़िन्दगी में आ गया.

अमित : शालू मेरी तरफ देखो.

शालू ने धीरे धीरे अपनी पलकें उठायी और मेरी तरफ देखा. मगर नज़रें मिलते hi फिर से वो शर्मा गयी .

अमित : क्या हुआ ? ऐसे शर्मा क्यों रही हो?

शालू : मुझे कुछ हो रहा है. मुझे बहुत शर्म आ रही है.

अमित : अब तो हमारे बीच शर्म क लिए कोई जगह नहीं होने चाहिए.

इतना कह कर मैं शालू क ऊपर झुका और उसके कोमल मदभरे होंठों को अपने होंठों की पकड़ में कैद करते हुए उनका रास चुराने लगा. शालू भी मेरा साथ देने लगी और उसके हाथ भी मेरे सर क पीछे कास गए जैसे क मेरे थे. धीमे धीमे प्यार से शुरू हुआ चुम्बन जैसे जैसे गहरा होता जा रहा था हमारा किश करना भी वाइल्ड होता जा रहा था . मुँह क अंदर से हम दोनों की जीभ भी अब आपस में गले मिल रही थी. साँसों उखाड़ने से हमने अपने किश ख़तम की तो अब शालू का चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चूका था. ज़ोर ज़ोर से साँस लेने की वजह से उसके बूब्स भी फूल कर ऊपर निचे हो रहे थे . मेरे साथ नज़रें मिलते hi फिर से शालू शर्माने लगी तो मैंने एक बार फिर उसके होंठों को अपनी गिरफ्त में ले लिया पर इस बार शालू ने मुझ पर हावी होते हुए मेरी जीभ अपने होंठों में पकड़ कर चुसनी शुरू कर दी. किश करते हुए अब शालू मेरी बाँहों में समां गयी थी और मैं उसे बीएड पर लिटाते हुए उसके ऊपर लेट गया. शालू का नाज़ुक कोमल बदन मेरे कसरती बदन क निचे सब गया था और उसके कोमल अंग मेरी छाती क नीचे पीस रहे थे जिससे उसकी साँसे भरी होने लगी थी. मैंने उसकी दिक्कत को महसूस किया और पलट कर उसको अपने ऊपर कर लिया. मेरे हाथ उसकी पीठ से फिसल ये हुए उसके कूल्हों पर चले गए और उसके नरम गद्देदार कूल्हों को मसलते हुए मैं उसका मज़ा लेने लगा. शालू का बदन सही मायने में गदराया हुआ था . कहीं से भी ज्यादा फैट नहीं थी और उसके खास आने जैसे बूब्स और कूल्हे सही आकर में थे जो किसी को भी उसका दीवाना बना देते. शालू क गोल मटोल कोमल कूल्हों को दबाने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी शालू का हल भी कुछ ऐसा hi था. सांस लेने क लिए फिर से हमने होंठ अलग किये पर इस बार शालू शर्माने की बजाये खुद कमांड करने लगी. होंठों को चूमने क बाद वो मेरे चेहरे को भरपूर चूमने क बाद मेरी गर्दन पर किश करने लगी. क्या बताऊँ दोस्तों शालू का ये अंदाज़ सबसे कातिल था वो मेरे कण की लो को डेंटन में हलके से दबाने क बाद मेरी गर्दन पर किश करने क साथ साथ लव बाईट भी कर रही थी. शालू क इस तरह करने से मेरे अंदर सिहरन सी होने लगी थी. गर्दन से नीचे आते हुए शालू ने मेरी T-shirt को उतरने की कोशिश की तो मैंने खुद अपनी T-shirt उतर कर एक तरफ रख दी. शालू मेरी छोड़ी मांसल छाती को तारीफी निगाहों से देखती हुई अपने हाथों से अछि तरह महसूस करने लगी और फिर से टूट पड़ी. किश करते हुए इस बार वो मेरे निप्पल्स को भी चूस रही थी . शालू की हर ऐडा मुझे मदहोश करती जा रही थी. मेरी कमर तक आने क बाद जब वो मेरी बेल्ट खोलने लगी तो मैंने उठ कर उसकी कमीज उतरने की कोशिश जो उसने खुद hi जल्दी से उतर दी. कमीज क उतारते hi उसका गोरा बदन मेरे सामने आ गया . उसके मस्त बड़े बड़े स्तन जो काम से काम 36 क होंगे लाल ब्रा में कैद मेरे सामने थे. मेरी नज़र उसके उरोजों पर hi जैम गयी थी जिसे देख कर उसे शर्म आ गयी . मैंने शालू क बीएड पर गिरते हुए उसको चूमना शुरू किया उसी की तरह उसके कान की लौ को अपने होंठों में लेकर चूमते हुए हलके हलके बाईट किये तो एक सिसकी उसके मुँह से निकल गयी

शालू : उनममममम कक्कक्कक्स उम्म्म

मैंने उसकी गर्दन पर दन्त गदा दिए तो उसकी पकड़ मेरी पीठ पर मजबूत हो गयी और साथ hi सिसकियाँ भी

शालू : उफ्फफ्फ्फ़ उम्म्म्म कक्कक्स आआआह्ह्ह्हह्ह लव में जाननं बाईट में उम्मम्मम्म

मैंने शालू को अपनी बाँहों में भर कर थोड़ा ऊपर उठाते हुए उसकी पीठ पर हाथ ले जा कर उसकी ब्रा क हुक खोले और उसकी मदमस्त चुचों को कैद से आज़ाद कर दिया. कैद से छूट ते hi उसके कबूतर फड़फड़ाते हुए बहार आ गए. क्या मस्त चूचियां थी शालू की पूरी गोल और उनके ऊपर हलके ब्राउन निप्पल बहुत hi मस्त लग रहे थे. मैंने जल्दी से दोनों चुचों को अपने हाथों में पकड़ लिया और उनकी नरमी को महसूस करता हुआ मैं धीरे धीरे उन्हें दबाने लगा

शालू : उनममममम कक्कक्कक्कक्स आआअह्हह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स लव में जाएं प्यार करो इन्हे . ये सिर्फ तुम्हारे लिए हैं कक्कक्कक्कक्स

अमित : तुम बहुत खूबसूरत हो शालू . बिलकुल किसी संगमरमर की तराशी हुई मूरत की तरह

शालू : ये मूरत सिर्फ तुम्हारे लिए hi है जान . तुम hi मेरे तन मन क मालिक हो. मुझे प्यार करो इस तरह मुझे प्यार करो क मुझे ज़िन्दगी से कोई शिकवा न रहे .

अमित : तुम प्यार क लिए hi बानी हो शालू भगवन तुम्हे वो हर ख़ुशी दे जो किसी को मिलनी चाहिए

शालू : मेरे भगवन सिर्फ तुम हो अमित मुझे अपनी दासी बना लो. उम्मम्मम्मम्म आआअह्हह्ह्ह्ह

मैंने उसके उरोज को कुछ ज्यादा ज़ोर से दबा दिया तो उसके मुँह से एक कराह निकल गयी. मैंने झुक कर एक स्तन को मुँह में लिया और उसे आम की तरह चूसने लगा. शालू कसमसा रही थी और बीएड शीट को अपने हाथों से अस्त व्यस्त करती वो लगातार सिसक रही थी. एक स्तन को अछि तरह चूसने क बाद मैं दूसरे को भी मुँह में ले कर प्यार करने लगा और उसके निप्पल्स को भी अपने डेंटन में दबा कर जीभ से उसे कुरेदने लगा. शालू की सिसकियाँ और तेज़ हो गयी. उरोजों को प्यार करने क बाद मैं उसके स्पॉट पेट पर किश करते हुए मैं उसकी नाभि को भी जीभ से छेड़ने लगा. उसके बाद मैंने उसकी सलवार का नाडा खोला और उसकी सलवार को खींचने लगा तो शालू ने खुद अपनी कमर ऊपर कर क सलवार को उतरने दिया. सलवार क नीचे लाल पेंटी में उसका खज़ाना कैद था . पेंटी क निचले हिस्से में कुछ गीलापन आ चूका था जो इस बात का गवाह था क वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी . टंगे उठा कर सलवार को उसके पाऊँ से अलग करते hi उसकी लम्बी गोरी टंगे मेरे सामने आ गयी . उसकी जांघें भरपूर गदरायी हुई थी और केले क तने क सामान गोरी चिकनी थी. गोर पाऊँ लाल नेलपॉलिश लगी होने से और भी खूबसूरत लग रहे थे. और उसके ऊपर पायल जो फिसल कर पिंडलियों तक आ गयी थी. ये सब मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था. मैंने उसके पाऊँ को पकड़ कर चूमने लगा तो राधा ने अपने पाऊँ खिंच लिए .

शालू : ऐसा मत करो , मैं इस काबिल नहीं हूँ . मैं तो बस तुम्हारे कदमो में रहना चाहती हूँ और तुम मेरे पाऊँ चुम रहे हो

अमित : तुम मेरे पाऊँ में नहीं मेरे दिल में रहोगी हमेशा . तुम सर से पाऊँ तक बस प्यार क hi काबिल हो . अगर मुझसे प्यार करती हो तो मुझे भी प्यार करने दो.

मैंने फिर से उसके पाऊँ पकडे और उन्हें चूमने लगा. पाऊँ से शुरू हो कर मैं किश करता हुआ उसकी पिंडलियों को चूम कर जांघों तक पहुँच गया . जांघों को दबा दबा कर मैं मसल रहा था और उन पर दांत भी गदा रहा था . शालू बस बीएड पर पड़ी मचल रही थी और सिसकियाँ ले रही थी. उसकी पेंटी पहले से भी गीली हो गयी थी. किश करता हुआ जब मैं जांघों की जड़ों तक पहुंचा तो उसकी पेंटी को दोनों सिरों से पकड़ कर मैंने उतरना चाहा तो शालू ने अपनी जांघें भींच ली. मगर मेरी इन्सिस्ट करने पर उसने अपनी कमर को हल्का सा उठाया और उसकी पेंटी उसके पाऊँ से निकलते हुए मैंने उसकी खुशबु को सुंघा जिसे देख कर शालू ने शर्मा कर चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.

शालू की पेंटी से आ रही मादक खुशबु सीधा मेरी सांसो में घुल कर मेरी उत्तेजना को दुगना करने लगी.

शालू ने अपनी जांघों को फिर से बंद कर लिया था. मैंने उसकी जांघों को पकड़ कर खोला और उसकी छूट मेरे सामने आ गयी . बालों का कोई नमो निशान तक नहीं था छूट पर शायद शालू ने आज hi इसकी सफाई की होगी . छूट क होंठ थोड़े खुले हुए थे जो बता रहे थे क उसकी काफी चुदाई हो चुकी है. मगर फिर भी उसकी छूट की हालत ख़राब नहीं थी. हलके भूरे रंग क होंठ अंदर से निकल रहे काम रास से भीगे हुए थे. मैंने छूट पर झुकते हुए जैसे hi उस पर होंठ रखने की कोशिश की तो शालू ने मेरा सर पकड़ लिया .

शालू : नहीं प्लीज वहां नहीं, ये जगह बहुत लोग गन्दी कर चुके हैं . मैं नहीं चाहती तुम इसे चूमो. प्लीज मैं हाथ जोड़ती हूँ.

अमित : जो कुछ हुआ वो तुम्हारी पिछली ज़िन्दगी थी आज से तुम्हारी नै ज़िन्दगी शुरू हो रही है और ये ज़िन्दगी सिर्फ प्यार से भरी होगी. मैंने तुम्हारे बदन क हर हिस्से को प्यार कर क ये साबित करना चाहता हूँ क तुम में कोई खोट नहीं है .

मेरी इस बात से शालू की आँखों में हलकी नमी आ गयी और वो बस मुझे देखती रही. मैं उसकी आँखों में देखते हुए उसकी छूट पर झुका और अपने होंठ उसकी छूट से लगा दिए.

शालू : कक्ककक्कक्स तुम सच में इस दुनिया क नहीं लगते तुम कोई और hi हो . मैं आज धन्य हो गयी क तुम मेरी ज़िन्दगी में आये कक्ककक्कक्स आह्ह्ह्हह मेरी हर साँस बस तुम्हारी है मेरे सरताज . जैसे चाहो मुझे प्यार करो कक्ककक्कक्स उम्मम्मम्म

मैंने उसकी छूट को चूमते चूसते अपनी एक उंगली भी उसकी छूट में चलनी शुरू कर दी . मेरी जीभ जैसे hi उसकी छूट क डेन पे लगी तो वो विबरते होने लगी और उसकी छूट का बांध टूटने लगा

शालू : आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स आआअह्हह्ह्ह्हह आज तक कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ आआह्ह्ह्हह ककक मैं हवाओं में उड़ रही हूँ कक्कक्क्स उम्मम्मम आआह्ह्ह्हह मैं. गयी मेरे मालिक आआह्ह्ह्हह मैं गईइइइइइ आआअह्हह्ह्ह्ह

इसके साथ hi शालू की छूट से नदी बहने लगी और उसकी छूट से बेहटा हुआ कामर्स बीएड शीट को भिगोने लगा .

शालू का बदन अब ढीला पद गया था और वो लम्बी लम्बी साँसे ले कर खुद को नार्मल करने की कोशिश कर रही थी. जैसे hi उसकी साँसे संभाली तो उसने नशीली आँखों से मुझे देखा और बोली

शालू : मेरी ज़िन्दगी का ये आब्से ाचा पल है. आज तक किसे ने वहां हाथ तक नहीं लगाया था और आज तुमने वहां पर अपने प्यार की मोहर लगा दी. तुम सच में दिल से प्यार करते हो और अब मैं भी तुम्हे प्यार करना चाहती हूँ.

इतना कह कर शालू जल्दी से उठी और मुझे धक्का दे कर बीएड पर गिराने क बाद उसने जल्दी से मेरी बेल्ट खोली और जीन्स का बटन खोलने क बाद उसने मेरी पेण्ट खींचनी शुरू कर दी और खुद मैंने उसकी मदद की. पेण्ट क साथ hi शालू ने मेरा अंडरवियर भी उतर दिया और जैसे hi अंडरवियर उतरा मेरा फनियर नाग झूलता हुआ उसके सामने आ गया . शालू की आँखें हैरत से बड़ी हो गयी. मनो कोई अजूबा देख लिया हो.

अमित : क्या हुआ ? ऐसे क्या देख रही हो?

शालू : ये असली है ? मैंने आज तक इतना बड़ा किसी का नहीं देखा . इसके आगे तो सब बचे हैं. तुम सच में असली मर्द हो. ये आसानी से नहीं जाने वाला .

अमित : दर लग रहा है क्या ?

शालू : दररर ? कैसा दर ? तुम्हारे साथ तो मैं सब से सुरक्षित महसूस करती हूँ. रही बात इसकी तो ये मेरा है . इसे मैं आज इतना प्यार करुँगी क जो कभी कोई न कर सके .

इतना कह कर शालू ने अपने दोनों हाथों में मेरा लैंड थमा और सुपडे को अपने होंठो में कैद कर लिया . शालू को शायद इस सब में महारत थी और वो मुझ पर अपना जादू चला रही थी. मेरी आँखों में देखते हुए शालू सुपडे को अपने होंठों में जकड़े अपनी जीभ से अंदर hi अंदर छेड़ रही थी . वो लैंड क छेड़ में अपनी जीभ फसा रही थी जो मुझे पागल बना रहा था. शालू की हर ऐडा जान लेवा थी. धीरे धीरे उसने मेरा लैंड अपने मुँह में लेना शुरू किया और अपने गले तक ले कर कुछ सेकंड रोका और फिर बहार निकल लिया . इतने में hi उसकी सांस अटक गयी थी और ऑंखें बहार आ गयी थी. लैंड को बहार निकलते hi वो खांसने लगी

शालू : ाख़ूऊणंन्न ाख़ूऊऊऊणंन्न ह्म्मम्म्म्म अखुनण ाख़ूऊउन्न्नन . उफ्फ्फ्फ़ बहुत बड़ा है ये और मोटा भी . पूरा मुँह खोलना पड़ता है.

इससे पहले क मैं कुछ बोलता फिर से शालू ने मेरा लैंड मुँह में ले लिया . इस बार वो अपना सर ऊपर निचे करती मेरे लैंड को मुँह में अंदर बहार कर रही थी. मैं मज़े में पागल होता जा रहा था. मेरे हाथ अपने आप शालू क सर पर पहुँच गए और उसके सर को दबा कर मैं अपनी कमर उठा कर अपना लैंड और ज्यादा उसके मुँह में घुसाने लगा तो उसने मेरी जांघों को दबाते हुए मुझे ऐसा करने से रोका . जैसे hi मैंने अपनी पकड़ ढीली की तो वो ज़ोर ज़ोर से सांस लेते हुए खांसने लगी.

अमित : ी ऍम सॉरी शालू मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था

शालू : अखुनण ाख़ूऊणं कोई बात नहीं तुम्हे अखुनण ाल्हूओं माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं . तुम जैसे चाहे वैसे मेरे साथ करो मुझे ाचा लगेगा.

शालू फिर से मेरा लैंड चूसने लगी. वो पूरी कोशिश कर रही थी अपनी म्हणत से मेरे नलके पानी निकलने की पर उसे पता नहीं था क ये साधारण मलका नहीं है . यहाँ म्हणत ज्यादा लगती है. कुछ देर बाद वो खुद hi थक गयी और लैंड को मुँह से बहार निकल दिया

शालू : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ कक्कक्क्स मेरा तो मुँह दुखने लगा है अब . बहुत स्टैमिना है तुम में , अब तक तो 2 बार हो गया होता कोई भी और होता तो.

अमित : तुम स्पेशल हो शालू तो तुम्हे प्यार भी स्पेशल hi मिलना चाहिए न.

इतना कह कर मैंने शालू को किश करते हुए लिटा दिया और उसकी जांघों क बीच अपनी पोजीशन बना कर उसकी कमर क नीचे एक तकिया रखा और अपने लैंड को उसकी छूट पर रगड़ने लगा.

शालू : अब और बर्दाश्त नहीं होता प्लीज इसे अंदर कर क मुझे अपनी बना लो. कक्कक्कक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह

मैंने भी देर करना ठीक नहीं समझा और लैंड को थोड़ा सा पुश करते हुए सूपड़ा शालू की छूट में घुसा दिया . शालू को ज्यादा तकलीफ नहीं हुई . शालू नशीली आँखों से मेरी नज़रों में देख रही थी. मैंने फिर से पुश करते हुए एक धक्का मारा तो आधा लैंड अंदर धंस गया और इस बार शालू क चेहरे पर शिकन साफ़ नज़र आ रही थी. दर्द को सहते हुए भी शालू इसे ज़ाहिर नहीं कर रही थी और मुझे और अंदर करने को आँखों hi आँखों में कह रही थी . लैंड अब आधे से थोड़ा ज्यादा अंदर हुआ तो मुझे छूट की कसावट अपने लैंड पर बढ़ती हुई महसूस हुई यानि इससे आगे छूट खुली हुई नहीं थी . मैंने लैंड को सुपडे तक बहार निकल कर एक तेज़ प्रहार किया और लैंड छूट क अंदर का संकरा भाग भी खोलता हुआ लगभग पूरा अंदर घुस गया. मगर इस धक्के को शालू भी बर्दाश्त न कर पायी और उसके मुँह से चीख निकला hi गयी.

शालू : आआअह्हह्ह्ह्ह माआआआ आयआईईई .

अमित : बस हो गया शालू अब और दर्द नहीं होगा

शालू : आआअह्हह्ह्ह्हह कक्कक्क्स तुम रुको मत मैं इसे पूरा लेना चाहती हूँ कक्कक्स

शालू में बड़ी हिम्मत थी जो दर्द क बावजूद मुझे बहार निकलने को कहने क बजाये पूरा डालने को कह रही थी. मैंने भी उसकी बात मानते हुए लैंड को थोड़ा बहार किया और आखिरी ज़ोरदार धक्के क साथ जो थोड़ा बहुत लैंड बहार रह गया था वो भी अंदर घुसा दिया.

शालू : आइइइइइइइइइ माआआ आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ऐसा लग रहा है जैसे चाकू घुसा दिया है.

मैंने शालू क ऊपर झुक कर उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और उसको किश करते हुए उसकी चीखों को बंद कर दिया . जब वो थोड़ी शांत हुई तो मैंने अपना लैंड हल्का सा बहार निकल और फिर से अंदर किया . शालू क मुँह से हलकी कराह निकली . मैंने शालू क ऊपर से उठाते हुए सीधा बैठ कर अपनी कमर धीरे धीरे हिलनी शुरू कर दी और शुरू हो गयी हमारी प्यार भरी चुदाई. कुछ hi पलों में छूट ने खुद को लैंड क हिसाब से एडजस्ट किया और लैंड अब आराम से अंदर बहार होने लगा. शालू भी रंग में आ गयी और खुद hi अपनी कमर उठाने लगी.

शालू : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म कॉमन फ़ास्ट फ़ास्ट और तेज़ करो उम्मम्मम तुम बहुत अचे हो ऐसे hi मुझे प्यार करो . मैंने कभी ऐसे फील नहीं किया जो आज कर रही हूँ उनममम. और ज़ोर से करो आज सच में मुझे लग रहा है ये मेरी सुहाग रात है . आअह्हह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह

अमित : तुम बहुत अछि हो शालू तुम बहुत खूबसूरत हो . मैं खुश हूँ क तुम्हे मेरी वजह से ख़ुशी मिली .

शालू : आअह्ह्ह अह्ह्ह्हह मैं साडी ज़िन्दगी ऐसे hi तुम्हारा प्यार चाहती हूँ . बोलो करोगे न मुझे ऐसे hi प्यार आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह और ज़ोर से आआह्ह्ह्ह बोलो करोगे न मुझे प्यार .

अमित : तुम जब भी कहोगी मैं तुम्हे प्यार करूँगा शालू तुम प्यार क लिए hi बानी हो तुम बहुत अछि हो

शालू : शालू नहीं मैं तुम्हारी दासी हूँ गुलाम हूँ आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म जब चाहो जहाँ चाहो मुझे प्यार कर लेना मैं कभी आआअह्हह्ह्ह्ह मन नहीं करुँगी . कक्कक्क्स

अब हमारी चुदाई पूरे ज़ोर शोर से चल रही थी और बीएड भी हिलने लगा था. मगर शालू शायद पोजीशन बदलना चाहती थी इस लिए उसने मुझे धक्का दे कर गिरा दिया और खुद मेरे लैंड पर बैठ कर अपनी कमर तेज़ तेज़ हिलने लगी. शालू शायद फिर से चरम कर पहुँच रही थी. वो खुद hi अपने बूब्स मसलती हुई कमर तेज़ी से हिलने लगी और एक चीख मरते हुए उसका बदन अकड़ गया और झटके लेते हुए वो मेरे छाती पर गिर गयी .

शालू : आआअह्हह्ह्ह्ह माआआआ मैं गइईईई . आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

शालू की छूट से बहुत सर गरम पानी निकल जो मुझे अपने लैंड पर महसूस हुआ और फिर वो बेहटा हुआ मेरे अंडकोषों से बेडशीट पर गिरने लगा. शालू बेसुध मेरे ऊपर गिरी लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी.

मैंने उसे बीएड पर पलट दिया और उसे घुटनो पर करते हुए खुद उसके पीछे घुटनो और आकर अपना लैंड फिर से उसकी छूट में डालने क लिए एक धक्का मारा . आधा लैंड एक hi बार में अंदर चला गया .

शालू : आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स तुम्हारा हुआ नहीं अभी तक ?

अमित : नहीं

शालू : आराम से आआह्ह्ह्हह मैं 2 बार हो चुकी हूँ और तुम अभी भी लगे हो.

मैंने उसकी बात का जवाब देने क बजाये दूसरे धक्के में पूरा लैंड जड़ तक छूट में पेल दिया और उसकी कमर को थामे अपनी गाड़ी चला दी . शालू क मदमस्त तरबूज़ मेरे धक्कों से थिरक रहे थे . उसके कूल्हों को ऐसे देख कर मेरा मन उसकी गांड मरने को होने लगा और मैंने उसके गांड क छेद में उंगली घुसाने लगा .

शालू : आआह्ह्ह कक्कक्क्स उनमममम तुम्हे वहां पसंद है ? आअह्ह्ह्हह उम्म्म्म जहाँ चाहो तुम्हे पूरी छूट है करलो अपनी मर्ज़ी कक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi करो और ज़ोर से करो .

शालू फिर से रंग में आने लगी और खुद hi अपनी कमर पीछे को धकेलने लगी. शायद मेरे द्वारा उसकी गांड को कुरेदना उसे एक्साइट कर रहा था. शालू ने अपनी गांड मरने की इजाज़त देकर मेरी मुराद पूरी कर दी थी . उसकी गांड क छेड़ से मैं समझ गया था क वो पहले से खुला हुआ है पर छूट की तरह उसमे इतना बड़ा लैंड तो गया नहीं था इस लिए मेरे हिसाब से टाइट hi था. मैंने धक्के मरते हुए लैंड को छूट से बहार निकल लिया और उसकी गांड क सुराख़ पर रख कर ज़ोर दिया . लैंड छूट रास से भीगा हुआ था और गांड का सुराख़ भी खुला हुआ था तो लैंड को अंदर घुसने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई मगर शालू को दर्द होने लगा . और जैसे hi मैंने थोड़ा ज़ोर लगा कर धक्का मारा तो उसके मुँह से फिर से चीख निकली पर उसने मुझे रोका नहीं . मैं ेझुक कर उसके लायक रहे बूब्स प्रेस करने शुरू कर दिए और कुछ देर बाद लैंड को बहार निकलते हुए आखिर जानदार धक्का मर कर जड़ तक लैंड गांड में उतर दिया. शालू इस धक्के को संभल नहीं पायी और बीएड पर गिरने लगी मगर मैंने उसे गिरने नहीं दिया.

शालू : आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह aaaaaaiiiiiiiiii रुक जाओ बहुत दर्द हो रहा है प्लीज थोड़ी देर रुक जाओ.

अमित : बस हो गया मेरी जान पूरा चला गया है अब और दर्द नहीं होगा.

मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर शालू की छूट को मसलना शुरू कर दिया और उसका दर्द काम होते hi धक्के पेलने शुरू कर दिए . थोड़ी hi देर में शालू खुद hi कमर पीछे ठेलती मुझे तेज़ धक्के मरने को कहने लगी.

शालू : आआआहहहहह उम्म्म्म ऐसे hi और ज़ोर से मारो और तेज़ करो . तुम्हारा ये मुसल बहुत बड़ा है शायद मेरे लिए hi ये इतना बड़ा बनाया है . वर्ण कोई और मुझे ये प्यार बहार दर्द नहीं दे पता आआह्ह्ह्हह उम्म्म्म और तेज़ करो.

शालू इतनी मस्त हो चुकी थी क पता नहीं क्या क्या बाके जा रही थी . वो खुद hi एक हाथ से अपनी छूट मसल रही थी और एक बार से उसने बिस्तर अपने कामर्स से भिगोना शुरू कर दिया . मैं भी अब और ज्यादा कण्ट्रोल नहीं कर पाया और उसकी गांड में लैंड जड़ तक घुसा कर अपना पानी निकलने लगा. मैं शालू के ऊपर गिर गया था और वो मेरा भर न संभल पायी जिसे हम दोनों औंधें मुँह बिस्टेर पर गिर पड़े. हम दोनों क बदन पसीने से भर गए थे. कुछ देर तक हम अपनी साँसे सँभालते रहे . और जब हमारी साँसों का शोर थमा तो मैं शालू क ऊपर से उठने लगा .

शालू : थोड़ी देर रुक जाओ न ऐसे hi . मुझे ये पल जी लेने दो . पता नहीं कब नसीब में तुम्हारा ये प्यार हो. हो भी या नहीं?

अमित : ऐसा मत कहो . मैं तुम्हे कभी मन नहीं करूँगा . मगर फिर भी ये कभी कभी hi होना चाहिए .

शालू : सच !!! तुम फिर से मुझे प्यार करोगे ? मैं इंतज़ार करुँगी . अभी ऐसे hi मेरे ऊपर पड़े रहो. तुम बहुत भरी हो पर फिर भी ाचा लग रहा है.

मैं कुछ देर उसके ऊपर ऐसे hi लड़ रहा पर मुझे वापिस कॉलेज भी जाना था तो मैं शालू क ऊपर से उठ गया . मेरे उठते hi लैंड उसकी गांड से बहार आ गया. गांड का मुँह ऐसे खुला पड़ा था जैसे गांड नहीं कोई पाइप हो. मैं उठ कर बाथरूम में गया और खुद को फ्रेश कर क वापिस आ गया. शालू अभी भी वैसे hi पड़ी थी. मुझे तैयार होता देख कर वो भी उठने लगी तो उसके मुँह से फिर से कराह निकल गयी.

शालू : आआअह्ह्ह्ह कक्कक्स

अमित : क्या हुआ ?

शालू : कुछ नहीं , आगे पीछे दोनों तरफ से दर्द हो रही है . लगता है कल भी छुट्टी करनी पड़ेगी. मुझे ज़रा बाथरूम तक ले चलोगे?

मैंने शालू को गॉड में उठा लिया और उसे बाथरूम तक ले गया. शालू मेरी बाँहों में झूलती मुझे फिर से चूमने लगी. उसके होंठों से अब साडी लिपस्टिक गायब हो चुकी थी. शालू को मैंने कमोड पर बिठा दिया और खुद बहार आ गया. शालू खुद hi फ्रेश हो कर धीरे धीरे पाऊँ फैला कर चलती हुई वापिस आ गयी. एक ढीला सा लोअर और T-shirt पहन कर वो मुझे बहार दरवाज़े तक छोड़ने आयी .

अमित : ाचा तो नहीं लग रहा तुम्हे ऐसे दर्द में छोड़ कर जाना पर मुझे जाना होगा .

शालू : मुस्कुराते हुए ) मैं ठीक हूँ. ये दर्द भी मुझे ाचा लग रहा है . तुम मेरी परवाह मत करो.

इतना कह कर शालू ने मुझे फिर से बाँहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगी. मैं भी उसका साथ देने लगा और अनजाने में मेरे हाथ उसकी गांड तक चले गए . जैसे hi उसकी गांड मैंने दबाई वो कराह उठी .

शालू : आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स

अमित : सॉरी वो गलती से

शालू ( मेरे होंठो पर उंगली रखते हुए ) no सॉरी , ी ऍम फीलिंग ब्लेस्ड. मुझे इंतज़ार रहेगा क कब तुम दुबारा मुझे ये प्यार भरा दर्द देते हो. अब जाओ क इससे पहले मैं फिर से तुम्हे रोक लूँ.

अमित : अपना ख्याल रखना और रेस्ट करना. मिलते हैं कल कॉलेज में. थैंक्स फॉर सुच ा ब्यूटीफुल मोमेंट्स

शालू : थैंक्स तो यू फिर मेकिंग माय लाइफ हैप्पी



शालू ने मुस्कुराते हुए मुझे विदा किया और मैं वापिस कॉलेज क लिए निकल गया .
 
अपडेट 140



मैं जब कॉलेज पहुंचा तो छुट्टी होने में अभी वक़्त था . इस लिए मैं अपने ब्लॉक का पास गार्डन में hi बैठ गया . कुछ hi देर में बेल्ल बजी तो मोहित और कल्पना मुझे आते हुए दिखाई दिए . मैं जल्दी से उन क पास चला गया

कल्पना : ोये किधर रहता है तू? क्लास में न जाना तेरी आदत बन गयी है.

अमित : अरे यार ज़रूरी काम था मुझे .

कल्पना : पता हैं तेरे ज़रूरी काम, कोई न कोई पन्गा दाल क मुसीबत में फास जाता है.

अमित : ऐसा कुछ नहीं है . किसी से मिलना था इस लिए गया था.

मोहित : बीटा आज तेरी सहमत आने वाली है.

अमित : क्यों?

कल्पना : क्यों क्या ? कैंटीन में तू एब्सेंट था आज और इसी बात पर सब तुझसे नाराज़ हो रहे थे

अमित : पर इसमें नाराज़ होने वाली बात क्या है?

मोहित : कुछ नहीं यार वो रीमा और राधा किसी बात पर नाराज़ हैं तेरे न आने से. कोई बात हुई थी क्या तेरी उनसे ?

अमित : नहीं , बल्कि राधा को तो मैंने बताया था क मुझे काम से जाना है थोड़ी देर क लिए .

कल्पना : चलो अब खुद hi देख लेना

इतने में शीना और शिवानी भी आ गयी हमारे पास .

शीना : आज किधर थे तुम ? एक तो लेक्चर होता है कैंटीन वाला ऊपर से तुम उसे भी मिस कर देते हो. बाँदा क्लास में आये न आये कैंटीन में तो आये काम से काम .

शिवानी : लगता है तुम्हारी मशरूफियत दूसरे hi कामो में बढ़ती जा रही है.

अमित : अरे क्या तुम सब मेरी टांग खींचने में लगे हो . अब ज़रूरी काम हो तो जॉन भी न कहीं. चलो उन लोगों को भी देखने ज़रा.

हम सब बातें करते हुए साइंस ब्लॉक में पहुँच गए . कुछ देर क बाद हमारी बाकि की टीम भी हमारे पास आ गयी . जैसा की कल्पना और मोहित ने बताया था राधा और रीमा ने मुँह फुलाया हुआ था. रीमा मुझसे कैसे नाराज़ हो रही है ये मुझे समझ नहीं आ रहा था . राधा की तो चलो कोई टेंशन नहीं थी , वो मुझसे ज्यादा देर नाराज़ रह hi नहीं सकती .

अमित : कैसी हो रीमा ?

रीमा : हहहहह

अमित : क्या हुआ तुम नाराज़ क्यों हो ? और राधा तुम्हे क्या हुआ है?

राधा : तुम तो कह रहे थे थोड़ी देर में आ जाओगे और अब आ रहे हो. तुम्हे नहीं पता क एक तो लेक्चर होता है जब सब एक साथ होते हैं.

अमित : सॉरी यार मुझे कहाँ पता था क इतनी देर लग जाएगी वहां . मैं तो थी सोच कर गया था क जल्दी आ जाऊंगा पर देर हो गयी .

नेहा दीदी : ये तू न रोज़ रोज़ क्लासेज बंक करने लगा है न देख लेना तेरे रिजल्ट पे असर पड़ेगा इसका.

अमित : वो मैं देख लूंगा , पर इन दोनों ने मुँह क्यों फुला रखा है?

मीनल : खुद hi पूछ लो . शायद कोई काम था तुमसे इस लिए ये नाराज़ हैं .

अमित : ऐसा क्या काम था मुझसे ?

रीमा : तुम्हे कौन सा परवाह होती है किसी की ? चलो अब घर चलते हैं .

रीमा मुझे नाराज़गी से देखती हुई आगे बाद गयी और राधा भी उसके साथ आगे चल पड़ी. ये देख नेहा दीदी हसने लगी .

अमित : अब आप क्यों हंस रही हैं?

नेहा दीदी : तेरी शकल देख कर हंसी आ रही है. चिंता मत कर ये सब तुझे करने क लिए hi कर रही हैं.

नेहा दीदी ने ये धीरे से कहा था . मतलब क ये सब इनकी मिली भगत थी मुझे सताने क लिए .खैर हम सब पार्किंग एरिया में आ गए और सब लोग अपनी सवारी में सवार होने लगे. राधा भी नेहा दीदी और कल्पना क पास कड़ी थी मगर अभी कार में बैठी नहीं थी .

अमित : ाचा फिर कल मिलते हैं bye bye. मैंने राधा को बैठने क लिए नहीं कहा और बाइक को किक मर जैसे hi आगे बढ़ने लगा वो दौड़ कर सामने आ गयी.

राधा : कहाँ जा रहे हो? मुझे कौन लेके जायेगा ?

अमित : तुम तो मुझसे नाराज़ हो न तो मेरे साथ थोड़ा जाओगी. कल्पना और नेहा दीदी क साथ चली जाओ.

राधा : नाराज़ हूँ तो मन नहीं सकते ? और किसने कहा क मैं तुम्हारे साथ नहीं जाउंगी? मैं तो तुम्हारे साथ hi जाउंगी , तुम्हारा क्या पता घर क लिए निकालो और पहुँच जाओ कहीं और.

इतना कह कर राधा खुद hi बाइक पर बैठ गयी और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहने लगी.

राधा : इसका मतलब ये मत समझना क मैं नाराज़ नहीं हूँ. मैं अब भी नाराज़ हूँ.

मुझे राधा की इस बात पर हंसी आने लगी थी पर मैंने खुद को कण्ट्रोल किया. सब बरी बरी से निकल गए . रीमा ने जाते हुए मुझे देखा पर नकली गुस्सा दिखते हुए फिर से मुँह बना लिया . अब तो मुझे पता चल hi गया था क ये सब ड्रामा है तो मैंने भी इसे दिल पर नहीं लिया . सब के साथ हम चल दिए घर को.

राधा मेरे साथ सात कर बैठी तो थी पर मुझसे बात नहीं कर रही थी . मैंने उसे मानाने की कोशिश की मगर वो फिर भी अपनी जगह अदि रही शायद दोनों ने सोच रखा था क क्या करना है. घर पहुँच कर दिव्या मौसी ने हमें लंच करवाया और फिर रेस्ट करने हम अपने अपने कमरे में चले गए . रीमा और राधा की नाराज़गी दूर करने क लिए मैं सोच रहा था क क्या किया जाये तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया. कुछ देर की नींद क बाद दिव्या मौसी ने hi मुझे उठाया और चाय का कप थमा दिया .

दिव्या मौसी : तुम दोनों में कोई बात हुई है क्या ?

अमित : क्या हुआ ?

दिव्या मौसी : आज राधा सोई भी नहीं और बार बार तुम्हारे कमरे में चक्कर मर रही थी जब तुम सो रहे थे तो. अभी मैंने उसे कहा क तुम उठ गए तो साथ में चाय पिटे हैं मगर देखो अभी अपने कमरे में मुँह फुलाया बैठी है.

अमित : ोोू ाचा , आप चिंता मत करो मौसी . वो थोड़ी नाराज़ है , आज मैं फ्री लेक्चर में उससे मिला जो नहीं. कोई बात नहीं उसकी नाराज़गी दूर कैसे करनी है मैं जनता हूँ. मौसी जी मैं राधा को बहार ले कर जॉन तो आपको ऐतराज़ तो नहीं ?

दिव्या मौसी : मुझे क्यों ऐतराज़ होगा? मुझे तो ख़ुशी होगी , वो अपने आप बहार तो जाती नहीं और न hi उसकी कोई ऐसी दोस्त है. हाँ अब कल्पना नेहा क साथ कुछ हसने खेलने लगी और वो एक और लड़की पहले कई बार आयी थी क्या नाम था उसका ????

अमित : रीमा ?

दिव्या मौसी : हाँ रीमा , वो भी अछि लड़की है . बस यही लड़कियां इतने सैलून में मैंने देखि हैं यहाँ इस घर में. इनके इलावा तो बस तुम hi हो जिसकी ये परवाह करती है तभी तो तुमसे नाराज़ हो रही है.

अमित : जनता हूँ मौसी क वो मुझे सबसे ाचा दोस्त मानती है. और आज मैं इसे शॉपिंग पर ले जाने वाला हूँ आप इसे बताना नहीं. आज मैं जल्दी वापिस आ जाऊंगा फिर इसे लेकर जाऊंगा .

दिव्या मौसी : ठीक है पर टाइम से आ जाना ज्यादा देर नहीं करना.

अमित : आप उसकी चिंता मत करो.

चाय क बाद मैं तैयार हुआ निकल गया स्टेडियम क लिए . स्टेडियम में पसीना बहाने क बाद मैं मंजू म को फ़ोन पर अपने न आने का बता कर सीधा दिव्या मौसी क घर वापिस चला गया. राधा अभी भी अपने कमरे में थी. मैंने जाकर अपने कपडे बदले और राधा क पास गया.

अमित : चलो राधा हमें कहीं जाना है.

राधा : मुझे कहीं नहीं जाना तुम बात मत करो मुझसे .

अमित : ाचा बात नहीं करता पर साथ तो चलो. मौसी से पूछ लिया है मैंने.

राधा : कहाँ जाना है?

अमित : वो तुम्हे पता चल जायेगा.

राधा : चलो मैं तैयार hi हूँ.

राधा सच में तैयार hi थी. मेकअप तो वो करती नहीं थी और सूट वो पहले hi चेंज कर क दूसरा पहन चुकी थी. मैंने दिव्या मौसी से आज्ञा ली और राधा को पीछे बैठा कर निकल पड़ा. कुछ hi देर में हम एक बड़े से मॉल में थे.

राधा : हम यहाँ क्यों आये हैं?

अमित : क्रिकेट खेलने. अरे शॉपिंग करने आये हैं .

राधा : मुझे नहीं करनी कोई शॉपिंग.

अमित : मुझे करनी है तुम बस साथ दो मेरा . वो तो कर सकती हो या वो भी नहीं करोगी?

राधा : बिलकुल नहीं .

अमित : ाचा तो ठीक है मैं किसी और क साथ कर लेता हूँ शॉपिंग.

राधा : तो मुझे क्यों लेकर आये थे?

अमित : तुमने खुद hi तो कहा क नहीं करनी शॉपिंग और मदद भी नहीं करोगी तो मैं क्या करूँ? तुम मॉल घूमो मैं शॉपिंग करता हूँ . मुझे पता था तुम ऐसे नहीं मानोगी इस लिए मैंने पहले hi इंतज़ाम कर लिया था.

राधा : कैसा इंतज़ाम

रीमा : hi राधा कैसी हो ?

राधा : रीमा तुम यहाँ ?

रीमा : इसी से पूछो , इसने कहा क तुमने बुलाया है तो मैं आ गयी. पर तुम इसके साथ कैसे आ गयी ? मुझे बुला लेती .

राधा ( मेरी तरफ देखते हुए ) तो ये प्लान था . हम इससे खुश नहीं होने वाले मिस्टर .

अमित : अजीब लड़कियां हो यार तुम दोनों. शॉपिंग क नाम पर तो लड़कियों की बत्तीसी बहार आ जाती है और तुम लोगों क चेहरे पर स्माइल तक नहीं है. इससे ाचा मैं किसी और क साथ आ जाता.

राधा : आकर तो दिखाओ किसी और क साथ

रीमा : लगता है ज्यादा hi लड़कियों का भूत सवार है तुम पर तभी तो कॉलेज से गायब रहते हो.

अमित : अब शॉपिंग करोगी या झगड़ा ?

रीमा : क्या कहती हो राधा पहले शॉपिंग कर लें ? झगड़ा तो बाद में भी हो जायेगा.

राधा : ठीक है . और तुम हमारे साथ hi रहना इधर उधर गए तो देख लेना.

अमित : चलिए मेम साहब नौकर कहीं और कैसे जा सकता है?

मेरे इतना कहने पर दोनों क चेहरे पर स्माइल आ गयी और हम चल दिए शोप्पिंग करने . रीमा को मैंने फ़ोन पर पहले hi मन लिया था और उसे राधा क लिए शॉपिंग में हेल्प करने क लिए बुलाया था. राधा और रीमा एक आउटलेट में गयी जहाँ ब्रांडेड ड्रेसेस थी और मॉडर्न क साथ साथ सिंपल ड्रेसेस भी थी पर यहाँ वो ुनस्तित्चेद नहीं बल्कि सब रेडीमेड कपडे थे. राधा को मैंने कभी ऐसे ड्रेसेस में देखा नहीं था शायद वो ऐसे पहनती नहीं थी . मैं राधा को इन आधुनिक परिधानों में देखना चाहता था. रीमा क पास ऐसे ड्रेसेस की अछि कलेक्शन थी और इसी लिए वो हेल्प अचे से कर सकती थी .

राधा : यहाँ तो सुइट्स है hi नहीं मैं शॉपिंग क्या करूँ ?

अमित : यहीं शॉपिंग करनी है तुम्हे और आज ये ड्रेसेस तुम अपन लिए सेलेक्ट करोगी . रीमा तुम्हे गाइड करेगी

रीमा : हाँ राधा चलो मैं तुम्हे सेलेक्ट करवाती हूँ कुछ अचे और सिंपल ड्रेसेस

राधा : पर मैं ऐसे कपडे नहीं पहनती

अमित : नहीं पहनती थी पर अब से पहनोगी. इसमें कुछ गलत नहीं है राधा , सिंपल क साथ साथ हे अचे और नए ज़माने क भी हैं. और मैं चाहता हूँ तुम इन ड्रेसेस में ज़माने क साथ चलो . जल्दी से अब अपने लिए शॉपिंग करो तुम दोनों . रीमा तुम्हे पता है न क्या करना है ?

रीमा : मैं अपनी सहेली को अछि तरह जानती हूँ तुम अपनी चिंता करो. हमने अभी तुम्हे माफ़ नहीं किया है और आज शॉपिंग कर क तुम्हारी जेब खली करने वाले हैं.

अमित : करो करो जितनी चाहे करो no प्रॉब्लम.

मैं यहीं हूँ पास में . जब फ्री हो जाओ तो बता देना.

मैं दोनों को वहीँ छोड़ कर उस आउटलेट से बहार आया और मॉल में घूमने लगा. एक शोरूम बहुत hi सुन्दर साड़ियां रंगी हुई थी जिन्हे देख कर मुझे दिव्या मौसी का ख्याल आ गया तो सोचा उनके लिए भी सदी ले लूँ . मैंने डिस्प्ले में तंगी 3 साड़ियां hi निकलवा ली क्यूंकि मुझे कौन सा इसकी नॉलेज थी. अपने कार्ड से पेमेंट करने क बाद राधा और रीमा का पास आया तो वो अभी भी शॉपिंग में लगी थी. रीमा राधा क लिए ड्रेसेस सेलेक्ट कर रही थी. रीमा ने जब 5-6 ड्रेसेस सेलेक्ट करवा दिए तो उसने राधा को तरय करने को कहा. राधा ट्रायल रूम में गयी तो मैंने रीमा का हाथ थम लिया

रीमा : हटो पीछे , मेरे लिए तो टाइम होता hi नहीं तुम्हारे पास. बहार तो मिलते नहीं और कॉलेज में भी गायब रहते हो. बस इतना hi प्यार है?

अमित : अपने दिल पर हाथ रख कर पूछो क क्या इतना hi प्यार है ?

रीमा : बड़े तेज़ हो , दिल तो तुम्हारी साइड लेगा न . तुम्हारा जो हो चूका है. पर मैं कहाँ जॉन?

अमित : उधर

मैंने ट्रेल रूम्स की तरफ इशारा करते हुए कहा.

रीमा : उधर क्यों ? वहां तो राधा गयी है.

अमित : उसके साथ वाले ट्रेल रूम में. चलो और ये ड्रेस भी लेलो तरय करने क लिए .

रीमा : मगर .....

अमित : चुपचाप चलो बातें बाद में.

मैं रीमा को लेकर उस ट्रेल रूम क पास आ गया . ये ट्रेल रूम्स पीछे की तरफ कार्नर में थे . 4 ट्रेल रूम में से 2 बंद थे और 2 खुले. एक में राधा थी अब पता नहीं किस्मे. मैंने इधर उधर देखा और रीमा को लेकर एक ट्रेल रूम में घुस गया. रीमा जैसे hi कुछ बोलने लगी मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. पहले तो वो समझ न पायी अचानक जो कुछ भी हुआ पर फिर वो भी मेरा साथ देने लगी. रीमा बड़े प्यार से मेरे होंठों पर अपने कोमल होंठ रख कर इतनी कोमलता से अपना एहसास करवा रही थी क मैं सब भूल कर बस उस एहसास में खोता चला गया. जिस खेल की शुरुआत मैंने की थी अब वो पूरी तरह से रीमा क हाथ में आ चूका था. मैं तो बस ऑंखें बंद किये इस सुखद एहसास में डूबा हुआ था क रीमा ने मुझे सीधा हवाओं से ज़मीन पर उतारते हुए अपने होंठ अलग कर लिए . मैंने शिकायत से उबली तरफ देखा तो वो बोली .

रीमा : राधा यहीं है और तुम ये सब कर रहे हो. अगर उसको पता चल गया तो?

मैंने रीमा को कमर से पकड़ कर कास क अपने साथ चिपका लिया और कहा

अमित : प्यार भी करती हो और डर्टी भी हो? अभी तो कह रही थी क मैं प्यार नहीं करता और अभी दूर हटने को कह रही हो.

रीमा: मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है चाहे तुम सबके सामने मुझे अपनी बाँहों में लेलो. मैं तो पूरी दुनिया क सामने चीख चीख कर कहने को तैयार हूँ क ी लव यू . दर तो तुम्हे hi है अपनी बहनो से.

अमित : ाचा तो तुम्हे दर नहीं है ?

रीमा : उन्हेंनननन

अमित : तो फिर रुकने की क्या ज़रूरत है

इतना कह कर मैंने फिर से रीमा क मदभरे होंठ अपनी गिरफ्त में ले लिए . रीमा मेरे बालों में हाथ चलते हुए मेरी बाँहों में झूलती हुई किश कर रही थी तभी हमें राधा की आवाज़ सुनाई दी और हमने किश तोड़ी .

राधा : रीमा क्या तुम अंदर हो ? प्लीज बताओ न?

रीमा : हाँ मैं अंदर हूँ एक ड्रेस तरय कर रही थी .

रीमा (धीमी आवाज़ में ) अब की करें ? राधा बहार कड़ी है . मरवा दिया न तुमने. उसे पता चल गया तो क्या कहूँगी मैं ?

अमित ( धीमी आवाज़ में ) कह देना क मुझसे प्यार कर रही थी.

रीमा ( धीमी आवाज़ में ) ाचा तो ये बात है अभी लो.

रीमा : राधा अमित यहीं है

रीमा क इतना कहते hi मेरी बत्ती गुल हो गयी. मैंने तो सोचा था रीमा मज़ाक कर रही है पर इसने तो सच में बोल दिया. इतना कह कर रीमा मेरी आँखों में देखती हुई मुस्कुराने लगी . वो मेरी हालत पर है रही थी और मेरा डैम निकला जा रहा था. मैंने उसे गर्दन न में हिलाकर ऐसा न करने को कहा.

राधा : क्या कहा , अमित यहाँ है , कहाँ है वो ? मुझे तो नहीं दिख रहा.

रीमा मुस्कुराती हुई आँखों से पूछ से रही थी क बता दूँ और मैं हाथ जोड़ कर मन कर रहा था.

रीमा : मेरा मतलब है वो यहीं कहीं कोई ड्रेस देख रहा होगा तुम उसे ढूंढो मैं अभी आयी.

राधा : ाचा जल्दी आओ मैं उसे देखती हूँ.

रीमा : तो अब बोलो ? देखनी है मेरी हिम्मत?

अमित : मुझे माफ़ करो तुमने तो मरवा hi दिया था. मैं जाता हूँ तुम जल्दी से आ जाओ

रीमा : अभी कहाँ चले अभी तो और मज़ा आएगा प्यार करने में.

रीमा ने मुझे अपनी बाँहों में भरने की कोशिश की तो मैं जल्दी से बहार निकल गया पीछे से रीमा क हसने की आवाज़ मुझे सुनाई दे रही थी . मैं जल्दी से वहां से निकला और सीधा राधा क पास चला गया जो मुझे hi खोज रही थी .

राधा : कहाँ थे तुम मैं कब से तुम्हे देख रही हूँ?

अमित : मैं बस यहीं था , तुमने ड्रेस लिए नहीं?

राधा : ले लिए हैं , ये देखो.

अमित : ये सब तुमने चेक कर लिए न ?

राधा : हाँ कर लिए .

अमित : रीमा कहाँ है?

राधा : वो भी ड्रेस तरय करने गयी है .

इतने में रीमा भी वापिस आ गयी . और हम काउंटर की तरफ चल दिए. काउंटर पर सेल्स गर्ल ने बिल बनाया तो राधा ने मुझे एक साइड में आने को कहा.

राधा : ये लो कुछ पैसे माँ ने दिए थे और कुछ मेरी सेविंग्स हैं. मैंने सुन लिया था जब तुम माँ से कह रहे थे क तुम मुझे शॉपिंग पर ले जाने वाले हो. इतने पैसे तो होंगे नहीं तुम्हारे पास .

अमित : तो तुम ड्रामा कर रही थी ? और तुम्हे किसने कहा क मेरे पास पैसे नहीं हैं ? ये सब अपने पास रखो और चुपचाप चलो .

हमारे आने से पहले hi रीमा अपने कार्ड से पेमेंट करने लगी तो मैंने उसे रोक दिया.

अमित : ये शॉपिंग मेरी तरफ से है. अपना कार्ड अपने पास रखो.

रीमा : एक hi बात है , मैं दे देती हूँ न.

अमित : अगर तुमने पैसे दिए तो मैं कभी दुबारा तुम्हारे साथ नहीं आऊंगा.

रीमा को उसका कार्ड वापिस करने क बाद मैंने अपना कार्ड सेल्स गर्ल को दिया और पेमेंट की. रीमा ने राधा को 5 ड्रेस सेलेक्ट करवाए थे और अपने लिए 2 जिसमे से एक मैंने hi किया था. काउंटर पर मैंने साडी वाले शॉपर भी रखवाए थे जो सेल्स गर्ल ने हमें दिए तो राधा ने कहा.

राधा : ये हमारे नहीं हैं , आपको गलती लग रही है.

अमित : ये हमारे hi हैं , इनमे मौसी क लिए साड़ियां हैं जो मैंने ली हैं .

राधा : खुश होते हुए ) सच में ! पर तुम्हे तो इसके बारे में पता hi नहीं होगा.

अमित : तो क्या हुआ ? सेल्समेन बताने क लिए hi तो होते हैं.

राधा बस मुस्कुरा कर मुझे देख रही थी. उसकी आँखों की चमक बता रही थी क वो कितनी खुश है. शोरूम से निकल कर हम मॉल में hi बने रेस्टोरेंट में चले गए और वहां अपने लिए पिज़्ज़ा आर्डर किया कोल्ड ड्रिंक क साथ.

अमित : तो अभी भी कोई नाराज़गी है तो बताओ तुम दोनों .

रीमा : मुझे तो मेरी फीस मिल गयी मैं तो नाराज़ नहीं.

रीमा ने बात ख़तम कर क मुझे आंख मर दी और स्माइल करने लगी. फीस का मतलब था जो हमने किश की थी.

राधा : कैसी नाराज़गी ? वो सब तो ....

राधा / रीमा : तुम्हे कैसे पता ?

अमित : बस पता चल गया. मैं जनता हूँ क तुम मुझसे नाराज़ नहीं हो सकती .

मैंने राधा से ये कहते हुए रीमा से भी नज़रें मिला ली तो दोनों hi मुस्कुरा दी. पिज़्ज़ा कहने क बाद अब पन्गा ये था क बाइक पर इतना सामान पकड़ कर बैठना मुश्किल था इस लिए मैंने राधा को रीमा क साथ चलने को कहा पर राधा मेरे साथ hi चलने का कहने लगी . मगर फिर मेरे समझने पर मन भी गयी क रीमा को अकेले जाना पड़ेगा उनके hi घर की तरफ वैसे भी मैं तो पीछे पीछे आने hi वाला था . राधा बात मानते हुए रीमा क साथ कार में बैठ गयी और मैं उनके पीछे पीछे हो लिया . कुछ देर में hi हम घर पहुँच गए . दिव्या मौसी रीमा को देख कर बहुत खुश हुई

दिव्या मौसी : अरे बेटी तुम !! कहाँ रह गयी थी इतने दिनों से ? क्या आंटी से मिलने का मन नहीं हुआ कभी ?

रीमा : बस आंटी जी अब तो आती hi रहूंगी , मैंने भी आपको बहुत मिस किया .

रीमा और राधा क हाथों में शॉपिंग बैग देख कर दिव्या मौसी हैरान होने लगी .

दिव्या मौसी : ये क्या इतने सरे बैग , पूरी दुकान ले आयी हो क्या ? मैंने कहा था न क ज्यादा खर्चा मत करवाना उससे.

राधा : माँ इसी से पूछो मैंने कुछ नहीं किया .

अमित : मौसी जी इतना भी कुछ नहीं लिया . आप इस बारे में कुछ मत सोचिये

दिव्या मौसी : चलो बचो तुम लोग बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय बनती हूँ.

रीमा : नहीं आंटी मैं लेट हो चुकी हूँ इस लिए मुझे जाना होगा . प्लीज मैं फिर कभी पि लुंगी . वैसे भी अभी हम खा पि कर hi तो आये हैं.

दिव्या मौसी ने भी ज्यादा ज़ोर नहीं दिया क्यूंकि रीमा की बात भी सही थी . अँधेरा हो चूका था. रीमा दिव्या मौसी और राधा से मिल कर जाते जाते मुझे आँखों से hi इशारा कर के मुस्कुराती हुई चली गयी. रीमा क जाने क बाद हम फिर से हॉल में आ गए जहाँ सरे शॉपिंग बैग रखे हुए थे.

राधा : माँ ये तुम्हारे लिए ली हैं अमित ने .

दिव्या मौसी : क्या है इसमें ?

राधा ने तीनो शॉपर जिनमे साड़ियां थी वो मौसी को थमा दिए तो वो भी उन्हें खोल कर देखने लगी. राधा अपने शॉपर ले कर अपने रूम में चली गयी . सदी देखते hi दिव्या मौसी की आँखों में नमी आ गयी. एक तरफ आँखों में आंसू और दूसरी तरफ होंठों पर मुस्कान . एक अलग hi मिश्रण दिव्या मौसी क चेहरे पर नज़र आ रहा था जो मुझे समझ नहीं आ रहा था.

दिव्या मौसी : ये तू मेरे लिए लाया है ? क्या ज़रूरत थी तुम्हे ये सब लेने की?

अमित : आप खुद hi तो कहती हैं न क मैं आपका बीटा हूँ तो क्या एक बेटे को अपनी माँ क लिए ये सब लेने का हक़ नहीं है?

दिव्या मौसी की आबखों अविरल धरा बहने लगी और उन्होंने मुझे कास क अपने सीने से लगा लिया. दिव्या मौसी अपने जज़्बात रोक नहीं प् रही थी .

दिव्या मौसी : तुझे पूरा हक़ है , तू hi तो मेरा बीटा है. मुझे इतनी खुशियां मत दे बीटा क मैं ख़ुशी से hi मर जॉन .

दिव्या मौसी ने अपनी सदी को पकडे तेजी से अंदर का रुख किया और अपने उस कमरे में घुस गयी जहाँ वो किसी को नहीं जाने देती थी . मैंने उन्हें रोकना चाहा पर उससे पहले hi दरवाज़ा बंद हो चूका था. मैं उनके पीछे गया पर दरवाज़ा लॉक था. मैंने के होल से अंदर देखा तो मौसी सदी को अपने सीने से लगाए आंसू बहती हुई रोये जा रही थी. फिर उन्होंने एक तरफ पड़ी एक तस्वीर को अपने सीने से लगा दिया और उससे कुछ बात करती हुई और भी ज्यादा रोने लगी. मुझसे उनका ये रोना देखा नहीं जा रहा था. मैंने दरवाज़ा खटखटाने का सोचा तो उससे पहले hi एक हाथ मेरे कंधे पर जैम गया . मैंने पीछे देखा तो ये राधा hi थी . शायद वो जानती थी क अंदर क्या चल रहा होगा .

राधा : उन्हें अकेला छोड़ दो अमित , उन्हें रोने दो.

अमित : ऐसे कैसे रोने दूँ ? और तुम जानती हो क वो तो रही हैं तो तुम कुछ करती क्यों नहीं ?

राधा : मैं क्या कोई भी कुछ नहीं कर सकता. ये वो जगह है जहाँ वो और मौसी की यादें हैं. मैंने बचपन से माँ को ऐसे hi आंसू बहते देखा है . माँ की तकदीर शायद आंसुओं से hi लिखी गयी है. मौसी तो कब की चली गयी पर माँ आज भी उसी मोड़ पर कड़ी है जहाँ वो मौसी से अलग हुई थी. वो खुद को उनसे अलग कर hi नहीं पायी. न वो किसी को कैच कहती है और न किसी को अपनी इस दुनिया में आने देती है. उनके इस दुःख इस दर्द का कोई इलाज नहीं है. इसी लिए मैं कोशिश करती हूँ क कभी उन्हें मेरी वजह से दुःख न हो . क्यूंकि वो पहले hi इतना दुःख झेल चुकी हैं क और दुःख वो बर्दाश्त नहीं कर पायेगी . वो मेरे सामने मुस्कुराने का सिर्फ दिखावा करती है पर मैं अछि तरह जानती हूँ क मौसी क बाद वो कभी हंसी hi नहीं होगी . जब ज़िन्दगी hi जीने की तमन्ना न हो तो ख़ुशी क क्या मायने हो सकते हैं ?

राधा की बातें सुन कर मुझे और भी बुरा लगने लगा क मौसी कितनी अकेली हैं , उसके इस दुःख को बाँटने वाला कोई भी नहीं. मौसा भी कभी उनके साथ नहीं रहे जो क इस दर्द में उनका सहारा बन सकते थे. दिव्या मौसी का दर्द अब मेरी आँखों से बहने लगा तो राधा ने मेरी आँखों को साफ़ किया .

राधा : तुम क्यों रो रहे हो ? ये आंसू सिर्फ हम माँ बेटी क लिए हैं . तुम इन्हे अपनी आँखों में मत लाओ. अगर तुम भी ऐसा करोगे तो कोई कैसे खुश हो पायेगा?

अमित : तुम ठीक कहती हो राधा , मैं दिव्या मौसी क इस दर्द को उनके दिल से निकल कर रहूँगा. वो मेरी माँ से बहुत प्यार करती थी न? तो अब उनका बीटा hi मौसी को इस दर्द से आज़ादी देगा.

मेरी बात सुन कर राधा भी नाम आँखों क साथ मुस्कुरा दी. और मुझे अपने साथ अपने कमरे में ले गयी . राधा मेरे मूड को ाचा करने क लिए अपनी ड्रेसेस दिखने लगी. मेरा दिमाग इस वक़्त बस दिव्या मौसी क बारे में hi सोच रहा था तो मैं बस बेमन हूँ हाँ hi करता रहा. कुछ देर बाद दिव्या मौसी भी कमरे से बहार आ गयी और किचन में जा कर खाना बनाने लगी. उसके बाद हमने साथ में खाना खाया और कुछ देर बातें करने क बाद अपने अपने कमरों में वापिस चले गए. राधा भी समझ गयी थी क मैं मौसी क hi बारे में सोच रहा हूँ . मैं बीएड पर लेता भी बस मौसी की ज़िन्दगी क बारे में सोचता रहा . कितनी अकेली थी वो, मेरी माँ क साथ उनका कितना गहरा लगाव था जो आज तक वो उनसे अलग नहीं हो पायी और उन्हें वो सहारा भी न मिला जो इस दर्द से उन्हें निजात दे पता . मुझे बस एक hi चीज़ अब नज़र आ रही थी क कैसे भी मैं दिव्या मौसी क दिल से इस दर्द को बहार निकल दूँ . मैं यही सब सोचता करवटें बदल रहा था. जब मुझसे और बर्दाश्त न हुआ तो मैं उठ कर बहार आ गया . घर में एक डैम शांत थी . मैंने चुपके से दिव्या मौसी क कमरे का दरवाज़ा खोला तो वो आराम से सो रही थी. मैं चुपचाप उनके बीएड क पास चला गया और उन्हें एक बार निहारा . उनके चेहरे पर एक शांति थी मगर उस शांत चेहरे क पीछे का दर्द मैं देख चूका था. मैं वहीँ उनके पाऊँ क पास ज़मीन पर बैठ गया और उनके पाऊँ दबाने लगा . मेरे ऐसा करते hi मौसी उठ गयी

दिव्या मौसी : अमित ! तुम ये सब क्या कर रहे हो बीटा उठो वहां से.

दिव्या मौसी ने मेरे हाथ पकड़ते हुए मुझे ऐसा करने से रोका .

अमित : नहीं माँ ये तो मेरा हक़ है मुझसे मेरा हक़ मत छीनो. सुना है माँ क चरणों में स्वर्ग होता है , मुझे इस स्वर्ग से दूर मत करो.

दिव्या मौसी उठ कर बैठ चुकी थी और वो स्नेह से मेरे सर पर हाथ फिरने लगी .

दिव्या मौसी : इतना भी प्यार मत दे मुझे क तेरी आदत पद जाये , जब तू चला जायेगा तो मैं खुद को कैसे समझा पाऊँगी?

अमित : मैं कहीं नहीं जा रहा , अब से मैं आपके पास hi रहूँगा.

दिव्या मौसी : जाना तो पड़ेगा न बाकि सब भी तुम्हे उतना hi प्यार करते हैं , उनका भी हक़ है तुम पर .

अमित : अभी तो मुझे खुद से दूर मत कीजिये .

दिव्या मौसी : दूर तो मैं तुम्हे कर भी नहीं सकती मेरे बेटे.

अमित : तो अब से मैं कभी आपकी आँखों में आंसू नहीं देखना चाहता. आप ऐसे आंसू बहती हैं तो मुझे ाचा नहीं लगता .

दिव्या मौसी : वो तो अपने आप निकल आते हैं मैं क्या करूँ?

अमित : एक बात पूछूं माँ

दिव्या मौसी : पूछ न तुझे मन किसने किया है

अमित : क्या आप मुझे मेरी माँ से नहीं मिलवाएंगी ?

दिव्या मौसी : मैं कैसे मिलवा सकती हूँ तुझे बीटा वो तो अब हम सब को छोड़ कर जा चुकी है.

अमित : नहीं वो कहीं नहीं गयी, वो तो आज भी आपके साथ हैं. आपने उन्हें उस कमरे में बंद कर रखा है न जहाँ आप किसी को जाने नहीं देती.

दिव्या मौसी ख़ामोशी से मेरी तरफ देखे जा रही थी.

अमित : क्या मुझे माँ से नहीं मिलवाएंगी जैसे आप मिलती हैं उनसे जब भी आपका दिल करे.

दिव्या मौसी की ऑंखें फिर से बहने लगी मगर वो कुछ बोल नहीं रही थी.

अमित : आप फिर से आंसू बहाने लगी . ाचा रहने दीजिये. मुझे नहीं मिलना उनसे.

दिव्या मौसी : ऐसे कैसे नहीं मिलना? वो तेरी माँ है . मुझे पता है तू उसके बारे में सब जानना चाहता है और तुझे किसी ने मेरे hi कहने पर कभी कुछ बताया नहीं था. मैंने तेरे साथ ाचा नहीं किया न? चल तुझे तेरी माँ से मिलती हूँ चल मेरे साथ.

इतना कह कर दिव्या मौसी मुझे अपने साथ उसी कमरे में ले गयी जहाँ वो किसी को जाने नहीं देती थी. कमरे को अंदर से देख कर मैं हैरान भी हो रहा था और खुश भी . हर तरफ बस मेरी माँ और मौसी की तस्वीरें और उनकी यादों क प्रतिक अलग अलग सामान पड़ा था. कुछ खिलने गुड्डियां एक तरफ अलमारी भी थी जो शायद ऐसे hi सामान से भरी होगी. सब तरफ नज़र दौड़ते हुए मैं अंदाज़ा लगा प् रहा था क बचपन से लेकर उनके आखिरी समय तक की हर यद् यहाँ मौजूद थी किसी न किसी रूप में.

दिव्या मौसी : ले मिल ले अपनी माँ से . देखले दामिनी तेरा बीटा तुझसे मिलने आया है. हमारा बीटा आया है.

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.

.

उधर शीना आज भी अपनी मंजू बुआ क घर मौजूद थी . उसे अमित का इंतज़ार था मगर अमित आज आया hi नहीं . वो अंदर से उसके न आने से निराश तो थी मगर उसने ज़ाहिर नहीं किया .

शीना : बुआ आज आपका स्टूडेंट नहीं आया?

मंजू म : हाँ उसे कुछ काम था फ़ोन आया था उसका . तुम्हे कुछ काम था उससे क्या ?

शीना : नहीं तो वो तो मैं ऐसे hi पूछ रही थी. वैसे बुआ चची आप को यद् कर रही थी . वो आपसे मिलना चाहती हैं .

मंजू : तो उन्हें यहाँ ले आना , तुम्हे तो पता है न मैं वहां नहीं जाने वाली . मेरा उस घर से कोई नाता नहीं है.

शीना : होना भी नहीं चाहिए , पहले मैं समझ नहीं पायी थी क आप क्यों हम लोगों से अलग रहती हैं और पापा से इतना नाराज़ हैं मगर अब मुझे पता चल गया है क मोंटी की तरह पापा भी अचे इंसान नहीं हैं.

मंजू : तू ये सब क्यों कह रही है ? क्या पता चला है तुझे ?

शीना : कक कुछ नहीं बुआ बस वो मोंटी क बिगड़ने में उनका hi तो हाथ है न तो इसके ज़िम्मेदारी उनकी hi हुई न?

मंजू : बिलकुल , बच्चों को ाचा बुरा उनके पेरेंट्स की सीख hi तो बनती है. वैसे और भी बहुत कुछ गलत किया है तेरे पापा ने बहुत से लोगों क साथ पर वो सब छोड़ . ये बता क बड़ी भाभी को पता है मेरे बारे में ?

शीना : वो घर में होती hi कहाँ हैं जो उनसे बात हो. उन्हें तो बस अपनी पार्टीज hi नज़र आती हैं .

मंजू : ऐसे मत कहो वो तुम्हारी माँ है.

शीना : ाचा होता क मैं भी रुपाली चची की बेटी होती. आप तो घर से निकल कर आज़ाद हो गयी पर रुपाली मौसी ने क्या क्या झेला होगा उस घर में ज़रा सोच कर देखिये. काश क मैं सब ठीक कर सकती .

मंजू : जो बीत चूका उसे तो कोई भी नहीं बदल सकता पर आने वाला वक़्त तो संवारा जा सकता है . तू रुपाली भाभी और अपनी दोनों बहनो को साथ लेकर आना .

शीना : ज़रूर लाऊंगी बुआ.

उधर मोंटी अपना इलाज करवाने क लिए जर्मनी जा चूका था . घर पर बिना बताये वो चला गया था और वहां से जाकर विदेश में टूर पर निकले हुए अपने बाप तक मैसेज भिजवा दिया था मैनेजर क ज़रिये . मोंटी का बाप मोंटी को कभी अय्याशी से नहीं रोकता था क्यूंकि वो अकेला hi तो वारिस था इतने बड़े बिज़नेस का.

मोंटी का बाप बलजीत राइ इस वक़्त अपनी कंपनी क यूरोप में एसोसिएट क यहाँ गया हुआ था . पिछले 15 दिन से बलजीत यहीं पर था अपना बिज़नेस टूर ख़तम करने क बाद.

बलजीत : जो भी कह यार ये गोरी चमड़ी वाली उतना मज़ा नहीं देती जितना अपने देश की घरेलु औरतें . ये तो बस खुल कर करने की वजह से hi मणि जातो हैं वर्ण जो मज़ा घरेलु औरत को मसलने में अत है वो इनके साथ कहाँ.

सामने सोफे पर hi बलजीत की कंपनी की इस मुल्क में सेल्स देखने वाला ये उसका दोस्त जो कहीं ज्यादा पुराण और गहरा दोस्त था दोनों क लिए पेग बनाते हुए फ़ोन पर अपने और बलजीत क लिए काम उम्र की एस्कॉर्ट्स को बुला रहा था रत भर क लिए .

आदमी : सही कहा तूने यार , जो नशा देसी शराब में है वो इस अंग्रेजी में कहाँ. पर तू तो साला पता नहीं कितनी लड़की और औरतें अब तक छोड़ चूका है . साला घर की औरतें तक न छोड़ी तूने.

ये आदमी बलजीत को शायद कहीं ज्यादा अचे से जनता था . और बलजीत भी जैसे एक दोस्त की तरह hi उसका साथ दे रहा था बिना किसी घमंड या अकड़ क.

बलजीत : अब क्या करूँ यार कोई सुन्दर माल सामने आ जाये तो मन फिसल जाता है . तू लूँ सा काम है सेल . यहाँ पर पूरी मोह ले रहा है . वैसे है कहाँ तेरी वो रॉय ? जब से आया हूँ उसे नहीं देखा.

आदमी : सेल किसी को तो छोड़ दे , अपने पेरेंट्स क घर गयी है बच्चों को लेकर . कह रही थी अगर तुम यहाँ रहोगे तो वो इस घर में नहीं रहेगी . ऐसा क्या कर दिया था तूने उसके साथ जो इतना नाराज़ है ?

बलजीत : कुछ नहीं यार वो पिछली बार नशे में उसे पकड़ लिया था बस उसे गुस्सा आ गया . आदमी : बहनचोद ये इंडिया नहीं है जहाँ कुछ भी करलो. यहाँ कुछ उल्टा सीधा किया न तो तेरे साथ मैं भी गया समझ.

बलजीत : क्या साल तू भी यहाँ रह कर फत्तू हो गया है. ाचा भला था वही पर.

आदमी : होना पड़ता है भाई यहाँ पैसा काम नहीं अत पकडे जाने पर . और वैसे भी यह औरत की पहले सुनते हैं. 10 साल से इसके साथ hi रह रहा हूँ और देख कोई मुश्किल नहीं न hi शादी की है. यही तो फायदा इन मुल्कों में . अपने तो गले में घंटी बंद देते हैं साडी ज़िन्दगी क लिए मरने तक.

बलजीत : मोंटी भी यहाँ आ गया है यूरोप में. अभी जर्मनी में है. टाइम मिले तो मिल लेना उससे भी. पता नहीं क्या करने आया है यहाँ . कॉलेज छोड़ कर स्वारगर्दी कर रहा है .

आदमी : तूने कौन सा नौकरी करवानी है उससे . इतना बड़ा कारोबार कौन संभालेगा? सब उसका hi तो है. उसे कह देना यहीं आ जाये मुझसे जाया नहीं जायेगा वहां. वैसे मुझे तो पूरा यकीन है तेरी तरह गोरी चमड़ी hi उधेड़ने आया होगा है है है

बलजीत : बातें hi करेगा या किसी को बुलाएगा भी .

तभी दूर पर नॉक होती है .

आदमी : ले आ गयी तेरी परियां कर ले मज़े .



उस आदमी ने दरवाज़ा खोला तो 2 पतली सी हलकी उम्र की गोरी लड़कियां एस्कॉर्ट सर्विस का कार्ड दिखते हुए अंदर आ गयी . जिन्हे देख कर बलजीत और उस आदमी क मुँह में पानी आ गया . अब रत भर वो दोनों मिलकर इन बालाओं को भोगने वाले थे. जल्दी से जाम ख़तम करते हुए उन लड़कियों को अपने साथ चिपकाए उनके नाज़ुक अंगों को सहलाता उनका मज़ा लेने लगा.
 
अपडेट 141



दिव्या मौसी मुझे बचपन से लेकर अपनी शादी तक क किस्से बड़े चौ से सुनती रही और मैं भी उनके चेहरे पर आयी ख़ुशी को देख कर खुश होता हर किस्सा मंत्रमुग्ध सा सुनता रहा. दिव्या मौसी अपने सुनहरे पलों को सुनते वक़्त ऊंटनी खुश लग रही थीं जैसे क वो अभी भी उन्ही यादों में hi वो ख़ुशी महसूस करती हैं जो हकीकत में उन्हें बाद में कभी नसीब नहीं हुई . अपनी माँ क बारे में सुन कर मुझे भी बड़ी ख़ुशी मिल रही थी . एक एक तस्वीर दिखती हुई मुझे भी उन यादों का सफर करवा रही थी जिन पर वो सिर्फ माँ क साथ रही थी हमेशा . दिव्या मौसी जैसे किसी और hi दुनिया में पहुँच गयी थी. एक एक यद् को उन्होंने ऐसे बयां किया क जैसे वो मेरी आँखों क सामने hi हो रहा हो. ऐसी दीवानगी तो मैंने न कभी देखि न सुनी थी. ऐसे लग रहा था क जैसे इन यादों को सहेजना hi उनकी ज़िन्दगी एक मात्रा काम था. दिव्या मौसी बताती गयी और मैं सुनता गया हम दोनों की hi आँखों में एक पल नींद न आयी और कब सुबह का उजाला घर में फैलने लगा हमें भी पता न चला. मेरा मोबाइल सुबह क अलार्म से जब बजने लगा तो हमें वक़्त का ध्यान आया.

दिव्या मौसी : ये क्या सुबह हो गयी ? देख बातों hi बातों में पता भी नहीं चला क वक़्त क्या हो गया है. मैंने अपने साथ तेरी भी नींद ख़राब कर दी

अमित : सच कहूं तो मौसी जी नींद का तो एहसास भी न हुआ मुझे . आप ने तो सब कुछ ऐसे बताया क मुझे सब अपनी आँखों क सामने होता हुआ महसूस हो रहा था. आप सच में दोनों एक दूसरे क सब से ज्यादा करीब थी. इसी लिए आपने माँ क जाने क बाद अपने लिए जीना hi छोड़ दिया .

दिव्या मौसी : साद ) जीना उसी क साथ तो सीखा था. हम दो कहाँ थीं , समझ लो क दो जिसका एक जान थी. जब जान hi जिसम से जुड़ा हो गयी तो रह hi क्या गया पीछे? अगर राधा की ज़िम्मेदारी न होती तो मैं भी उसी क साथ चली जाती.

अमित : और मौसा जी का क्या ? क्या आप उन्हें प्यार नहीं करती?

मेरी इस बात पर दिव्या मौसी क चेहरे पर मनो कोई भाव hi न आया जैसे इस बात का कोई मतलब hi न था.

दिव्या मौसी : सब की अपनी ज़िन्दगी होती है बीटा , ज़रूरी नहीं क हर किसी क मन में प्यार हो .

अब तुम कुछ देर सो जाओ. नहीं तो तबियत ख़राब हो जाएगी .

इतना कह कर मौसी ने मुझे अपने साथ उठाया और कमरे से बहार आ कर फिर से उसे बंद कर दिया . मौसी मुझे सोने का कह कर खुद भी अपने कमरे में चली गयी. मगर मैं सोच में पद गया. मौसा जी की बात पर मौसी ने जो कहा वो कुछ और बयां कर रहा था. दूसरी बात क साडी रत उन्होंने मुझे छोटे छोटे किस्से सुनाये मगर अपनी और माँ की शादी क पहले तक क. कमरे में कहीं भी मेरे पापा या उनकी फॅमिली में से किसी की कोई तस्वीर नहीं थी. मैंने भी इस बारे में सवाल पूछ कर उन्हें दुखी करना ठीक नहीं समझा. अभी 5 बजे थे तो कुछ देर मैंने भी नींद लेना ठीक समझा और बीएड पर लेट ते hi मुझे नींद आ गयी .

मैं बीएड पर सोया पड़ा था क मुझ पर किसी ने पानी दाल दिया और मैं हड़बड़ा कर उठ गया.

‘ उठो कुम्भकर्ण , कॉलेज नहीं जाना क्या ? या रोज़ क्लास से गायब होने का ठेका ले रखा है ? टाइम देखो कितना हो गया है. ‘

ये आवाज़ कल्पना की थी जिसके पीछे नेहा दीदी और राधा भी आ गयी थी कमरे में. पानी की वजह से नींद तो मेरी भी उड़ गयी थी पर सामने कल्पना को देख कर मैं हैरान हो रहा था. मुझे इस बात का ख्याल भी नहीं था क मैं इस वक़्त अपने बिस्टेर पर हूँ और बाबू रओ जी सुबह की सलामी दे रहे थे . मगर कल्पना की नज़र जब वहां गयी तो उसने शर्म से नज़रें झुका ली .

कल्पना : जल्दी से रेडी हो कर आओ हम बहार hi हैं. चलो दीदी चलो राधा.

कल्पना अपने साथ दोनों को ले गयी मगर उसकी नज़रों का इशारा मैं भी समझ चूका था इस लिए कुछ कहने क बजाये खुद को hi छुपा रहा था. अगर नेहा दीदी और राधा में से कोई देख लेती तो क्या समझती? कल्पना क्या सोच रही होगी मुझे ऐसे इस हालत में देख कर ? खैर मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस गया. जल्दी से बदन गिला करके फ्रेश हो कर मैं. वापिस आ गया मगर टाइम हो रहा था तो तीनो लड़कियां चली गयी थी कॉलेज. मैं जल्दी से कपडे पहनने लगा और तैयार हो कर हॉल में आ गया .

दिव्या मौसी : अरे अरे कहाँ जा रहे हो ? नाश्ता तो कर लो.

अमित : मौसी जी लेट हो जाऊंगा पहले hi देर हो चुकी है.

दिव्या मौसी : अब एक लेक्चर तो मिस होगा hi तो काम से काम नाश्ता तो करलो.

मैंने मौसी की बात मानते हुए नाश्ता किया और निकल गया . सेकंड लेक्चर शुरू होने से पहले मैं कॉलेज पहुँच गया था और सीधा क्लास में चला गया जहाँ मंजू म अभी आये hi थे. नींद तो पूरी हुई कहाँ थी इस लिए आँखें अभी भी बोझिल लग रही थी . साथ वाली रौ में हमेशा की तरह कल्पना बैठी थी और मुझे देख कर स्माइल कर रही थी मगर आज कुछ शर्म भी थी उसके चेहरे पर जो वो बार बार नज़रें चुरा रही थी . खैर लेक्चर ख़तम हुआ और हम चल पड़े कैंटीन की तरफ.

मोहित : अबे क्या हुआ रत को सोया नहीं था जो अभी भी नींद में है ?

अमित : हाँ यार सुबह hi सोया था 5 बजे क बाद और फिर 9 बजे उठ गया.

कल्पना : ी ऍम सॉरी मुझे पता नहीं था वर्ण मैं ऐसा नहीं करती .

मोहित : अब तुमने क्या किया है ?

अमित : कुछ नहीं इसने बस मुझे नींद से जगाया है . और तुम्हे माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है . दोस्तों का इतना हक़ तो होता hi है. वैसे भी अगर नहीं उठती तो कॉलेज से छुट्टी हो जाती.

मीनल को अत हुआ देख कर मोहित तेज़ कदमो से उसकी तरफ बाद गया तो कल्पना आहिस्ता से बोली

कल्पना : सॉरी मैंने तुम्हारे बैडरूम आ कर ऐसे तुम्हे वो .... मुझे पता नहीं था ऐसा कुछ होगा .

अमित : क्या ऐसा कुछ ?

कल्पना : शरमाते हुए ) कुछ नहीं

पहले तो मैं समझा नहीं क वो किस बारे में बात कर रही है लेकिन जब मुझे यद् आया तो मुझे हंसी आ गयी. हम कैंटीन तक पहुँच hi गए थे और जब मेरी नज़र सामने से आ रही रीमा पर पड़ी तो उसे देख कर मेरी धड़कन hi तेज़ हो गयी. क्या लग रही थी, लॉन्ग स्कर्ट क साथ टॉप पहने खुले बालों क साथ वो क़यामत लग रही थी मगर ये क्याआ ?? उसके साथ उसके जैसी एक और हूर भी आ रही थी शामे लॉन्ग स्कर्ट और टॉप में . रीमा से अब मेरा ध्यान हैट कर उस हसीना पर चला गया . ये तो रीमा से भी ज्यादा कातिल लग रही थी और जब मैंने उसका चेहरा देखा तो मुँह खुला का खुला रह गया. ये कोई और नहीं राधा थी . राधा को पहली बार मैं ऐसे कपड़ों में देख रहा था. सचमुच क़यामत लग रही थी. रीमा और राधा दोनों बराबर चलती हुई मेरे सामने आ कर रुकी तो मेरी हालत देख कर शर्माने लगी.

राधा : शरमाते हुए) ऐसे क्या देख रहे हो?

अमित : ये तुम hi हो न राधा ? या मैं सपने में हूँ ?

नेहा दीदी : लग तो ऐसे hi रहा है क तुम नींद में हो अभी तक. चलो अब अंदर या यही खड़े रहना है .

अमित : सच में राधा तुम इस ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही हो.

राधा क गाल टमाटर की तरह लाल हो गए मेरे मुँह से ऐसे अपनी तारीफ सुन कर.

मीनल : बिलकुल सही कहा , मैं तो खुद हैरान हो गयी थी इसे देख कर .

हम बातें करते हुए अपने अड्डे पर बैठ गए . इतने में शीना और शिवानी भी आ गयी और उनके साथ शालू भी थी. शालू आज आएगी मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी. तीनो ने आते hi राधा की तारीफ शुरू कर दी. वैसे तो रीमा भी बहुत खूबसूरत लग रही थी पर राधा ने ऐसी ड्रेस पहली बार पहनी थी तो उसका लुक आज अलग hi लग रहा था जिस वजह से ऐसा हो रहा था.

शीना : राधा यू अरे लुकिंग गॉर्जियस यार

शिवानी : एक्साक्ट्ली राधा तो आज पहचान में hi नहीं आ रही . वैसे रीमा भी कुछ काम नहीं लग रही .

शालू : दोनों hi कमल की लग रही हैं जैसे दोनों बहने hi हों.

कल्पना : ये सब कमल इन जनाब का है. दोनों को कल शॉपिंग करवा कर दी है और हमें किसी ने पूछा तक नहीं .

मीनल : सच में ?? यार ये तो फायदे में रह गयी और एक मैं हूँ कोई पूछता भी नहीं

मोहित : ऐसे कैसे नहीं पूछता , तुम कहो तो अभी चलते हैं न शॉपिंग पर

कल्पना : तुम दोनों तो रहने hi दो , थिस इस नॉट फारे अमित , मतलब ये तो पर्तिअलिटी है न. काम से काम मुझे तो बुला लेते . मतलब अब जो बिंदास रहता है उसकी वैल्यू नहीं और जो नाराज़ होता है उसकी झट से सुनी जाती है.

अमित : अरे तुम तो नाराज़ हो गयी , ाचा तुम्हे भी शॉपिंग करवा दूंगा किसी दिन बस . इसके लिए नाराज़ होने की ज़रूरत नहीं है तुम्हे. वैसे भी नेहा दीदी भी तो रहती हैं अभी.

शीना : हमने कौन से पाप कर लिए जो हमारा नाम नहीं लिया .

शिवानी : बिलकुल , हम भी तो कुछ हैं या नहीं ?

अमित : लगता है मेरी जेब तुम सब मिल के खली करवाने वाली हो. चलो ये hi सही , किसी दिन तुम सब को लेकर चलूँगा और शालू तुम भी चलना . तुम्हारे बगैर नहीं जायेगा कोई

कल्पना : और नहीं तो क्या , आपको भी चलना होगा. और मुझे भी ऐसे ड्रेस चाहिए . देखो दोनों कितनी खूबसूरत लग रही हैं इन ड्रेस में.

अमित : ये तो रीमा की चॉइस है

रीमा : इसमें कौन सी बड़ी बात है ये तो बस ऐसे hi . राधा पर ये ज्यादा अचे लग रहे हैं .

राधा : अमित ठीक कह रहा है तुम्हारी चॉइस अछि है. मैं तो कभी ये सब ढूंढ भी न पति .

अब सब लड़कियां शॉपिंग क बारे में hi बात करती रही और मैं बस रीमा और राधा को देखता रहा. रीमा मेरे सामने बैठी थी तो मैंने टेबल क नीचे से अपने पाऊँ से उसके पाऊँ को सहलाना शुरू किया . मगर वो देख hi नहीं रही थी . जब मैंने उसकी स्कर्ट को थोड़ा ऊपर उठाते हुए उसकी पिंडली तक अपना पाऊँ लगाया तो रीमा क साथ राधा भी हिल गयी . रीमा से अब मेरी नज़र मिली तो मुझे देख कर वो शर्मा गयी जबकि उसके साथ बैठी राधा पहले hi शर्मा कर चेहरा झुकाये बैठी थी. थोड़ी देर बाद बेल्ल हो गयी और हम सब अपनी क्लास में वापिस चले गए . कॉफ़ी पिने से अब कुछ होश आ गयी थी मुझे. बाकि सब लेक्चर ख़तम होने क बाद हम सब साइंस ब्लॉक में चले गए और इधर उधर की बातों में लगे रहे. शालू जब मेरे पास आयी तो मैंने चुपके से उससे पूछा

अमित : तुम्हे आज रेस्ट करना चाहिए था तुम क्यों आ गयी ?

शालू : इतनी भी प्रॉब्लम नहीं थी मुझे . वैसे भी अगर नहीं आती तो तुमसे कैसे मिलती. मुझे सबके साथ ाचा लगता है. घर पर बैठ कर बोर होने से ाचा है तुम सब क साथ रहूं.

अमित : तुम खुश तो हो न मेरा मतलब कल तुम्हे मेरी वजह से दर्द भी हुआ और मैं ऐसे तुम्हे छोड़ कर चला आया .

शालू : कल का दिन मेरी ज़िन्दगी का सबसे ाचा दिन था. मैं ये कभी नहीं भूलूंगी. और तुमने मुझे कोई दर्द नहीं दिया. वो सब तो प्यार की निशानी था.

कल्पना : यहाँ अकेले में क्या बातें कर रहे हो आप ? अब बताओ मुझे शॉपिंग कब करवाओगे?

अमित : ो मेरी लेडी डॉन जल्दी hi तुम्हे और बाकि सब को शॉपिंग करवा दूंगा थोड़ा सबर रखो. शालू से भी अभी इसी बारे में बात कर रहा था .

कल्पना : गुड , दीदी आप भी मेरे साथ hi चलना और बिलकुल भी रेशम नहीं करना . इसकी जेब तो मैं खली करवा क रहूंगी.

शीना : मुझे मत भूल जाना , मेरे बगैर गए तो ाचा नहीं होगा कह देती हूँ.

अमित : क्या यार तुम सब बार बार ऐसे क्यों कह रही हो ? मैंने कहा न क सब को लेकर जाऊंगा . अगर यकीन नहीं है तो ये लो मेरे कार्ड और खुद hi चले जाओ.

शीना / शिवानी / शालू / कल्पना : न्यूऊऊ

शीना : बात पैसों की नहीं है साथ चलने की है. पैसे तो यहाँ सबके पास hi हैं. हमें बस तुम्हारे साथ जाना है.

कल्पना : करेक्ट . लो वो सब भी आ गए

उधर से साइंस टीम भी आ गयी. सब मिल कर पार्किंग में पहुँच गए. राधा मेरे पास आ गयी तो मैंने कहा

अमित : राधा तुम कार में चली जाओ कहीं तुम्हारी ड्रेस ख़राब न हो जाये .

राधा : मैं तो तुम्हारे साथ hi जाउंगी , सुबह भी मुझे ाचा नहीं लगा था ऐसे तुम्हारे बगैर आना. ये ड्रेस मैंने स्पेशलय तुम्हे दिखने क लिए hi पहना था और तुम सोते रहे.

अमित : तुम वाकई में इस ड्रेस में और भी खूबसूरत लग रही हो. देखा नहीं सब ने कितनी तारीफ की तुम्हारी.

राधा : ये सब तुम्हारी hi वजह से है. और इसी लिए मैं तुम्हारे साथ hi जाना चाहती हूँ. तुम्हारे ली हुई ड्रेस पहन कर तुम्हारे साथ न जॉन ये कोई अछि बात है ? अगर ड्रेस को कुछ हुआ भी तो तुम नई दिला देना.

अमित : ठीक है जैसे तुम कहो .

राधा मुस्कुराती हुई मेरे पीछे बैठ गयी और मेरे कंधे पर हाथ रख लिया . सब एक एक कर क निकल गए. कॉलेज से थोड़ा दूर जाते hi राधा ने अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया.

अमित : राधा आज तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो इन कपड़ों में तो कॉलेज क लड़के तो आज तुम्हे hi देख रहे होंगे. कैंटीन में तो मैंने भी ये नोट किया था.

राधा : मुझे किसी से क्या ? कोई देखता है तो देखे. मैं किसी को नहीं देखती.

अमित : मतलब तुम्हे कोई पसंद नहीं?

राधा : तुम जो हो

अमित : मतलब

राधा : तुम्हे ाचा लगेगा मैं किसी और को देखूं ?

अमित : मैंने ये कब कहा

राधा : तो पूछ क्यों रहे हो ? और कोई बात करो

तभी एक लम्बी सी कार हमारे बराबर चलने लगी. मैंने इस कार को कॉलेज से निकलते वक़्त भी देखा था मगर शीशे काळा होने की वजह से पता नहीं था क अंदर कौन है . बराबर चलते चलते जब उस कार का शीशा नीचे हुए तो अंदर वाले को देख कर मैं हिल गया. ये मेघा थी शीना मोंटी की माँ. वो मुझे hi देख रही थी. उसने मुझे देखते हुए इशारा किया तो मैंने न में गर्दन हिलायी. उसने फिर राधा को देखा और आगे निकल गयी. मुझे समझ में नहीं आ रहा था अब क्या करूँ. ये तो मेरे पीछे यहाँ तक पहुँच गयी. इतने दिनों से मैं उसका फ़ोन नहीं उठा रहा था इस लिए शायद वो यहाँ आ गयी. क्यूंकि उसे पता था मैं यहीं पड़ता हूँ.

राधा : कौन थी ये आंटी ? और तुम्हे ऐसे क्यों देख रही थी.

राधा क सवाल का अब मैं क्या जवाब देता ?

अमित : मुझे क्या पता कौन थी , मैं नहीं जनता?

राधा : तो वो तुम्हे इशारा क्यों कर रही थी?

अमित : क्या पता ? तुम क्यों टेंशन ले रही हो? अगर पूछना है तो चलूँ क्या उसके पीछे ?

राधा : नहीं रहने दो , हम सीधा घर चलते हैं .

राधा ने तो इतना कह कर बात ख़तम कर दी पर मुझे ये सब ठीक नहीं लग रहा था . अगर मेघा ऐसे hi मेरे पीछे आती रहेगी तो पता नहीं क्या हो. मुझे इसका हल करना hi होगा . उसे एक बार मिलना hi होगा . यही सोचता मैं बाइक चलता रहा और हम घर आ गए .

दिव्या मौसी : आ गए तुम दोनों.

राधा : हाँ माँ अब जल्दी से खाना लगा दो

दिव्या मौसी : रुक पहले मुझे तेरी नज़र उतरने दे. आज इतनी प्यारी लग रही हो कहीं किसी की नज़र hi न लग गयी हो.

इतना कह कर मौसी किचन से मिर्ची ले आयी और राधा की नज़र उतरने लगी .

राधा : क्या माँ आप भी , मुझे किसी की नज़र नहीं लगेगी.

दिव्या मौसी : तू चुप रह , आज तू कितनी प्यारी लग रही है तुझे खुद भी नहीं पता . तू भी इधर आ तेरी भी नज़र उतर दूँ

अमित : अब मुझे कोई क्यों नज़र लगाएगा ?

दिव्या मौसी : चुप कर क सीधा खड़ा हो जा. तू जितना लोगों की मदद करता है न तुझे तो हर कोई नज़र लगा देगा.

राधा : सही कहा माँ वो कार वाली आंटी भी घूर घूर क देख रही थी इसे

दिव्या मौसी : कार वाली आंटी ? कौन कार वाली आंटी ?

अमित : कुछ नहीं मौसी ऐसे hi कोई सड़क पर चलते हुए हमें देख रही थी और ये पता नहीं क्या क्या सोचती है.

राधा : तुम नज़र उतरो माँ , वैसे भी हर कोई लड़की इसे hi देखती रहती है.

दिव्या मौसी : देखेगी hi , हीरा है मेरा बीटा.

राधा : और मैं ?

दिव्या मौसी : तुम तो मेरी ज़िन्दगी का अनमोल खज़ाना हो.

राधा : हीरा तो ख़ज़ाने क साथ hi रहता है न माँ. मतलब हमें भी साथ में रहना चाहिए .

दिव्या मौसी ने एक पल राधा को देखा और फिर किचन में चली गयी . राधा अपने रूम में चली गयी और मैं अपने रूम में. मैंने दरवाज़ा बंद कर क फ़ौरन मेघा को फ़ोन लगाया जो उसने दूसरी hi रिंग पर उठा लिया.

मेघा : तो आ hi गयी यद्. देख लो तुमने क्या जादू कर दिया है क तुम्हारे पीछे पीछे घूम रही हूँ.

अमित : तुम मेरे पीछे क्यों आयी ? किसी को पता चल जाता तो ?

मेघा : तो क्या करती तुम तो अब फ़ोन भी नहीं उठाते मेरा. एक तो पहले मुझे अपना दीवाना बना दिया है और अब मुझसे मिलते भी नहीं हो. वैसे अब पता चला मुझे क तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे. इतनी अछि गफ जो मिल गयी है तो अब मुझे क्यों यद् करोगे .

अमित : बकवास बंद करो वो मेरी गफ नहीं है

मेघा : बची नहीं हूँ मैं, जैसे वो बैठी थी वैसे सिर्फ गफ hi बैठती है. ाचा वो सब छोडो तुम अपनी पर्सनल लाइफ में जो मर्ज़ी करो मुझे परवाह नहीं, मुझे बस तुम अपना थोड़ा सा टाइम दे दिया करो. कल मुझे मेरे फ्लैट पर मिलने आना और अगर न आये तो फिर मैं कॉलेज hi आ जाउंगी बाद में मत कहना.

अमित : ठीक है मैं आ जाऊंगा पर अब दोबारा ऐसे मेरे पीछे मत आना .

इतना कह कर मैंने बात ख़तम की और फ़ोन बंद कर दिया. अब तो मेघा से मिलने जाना hi पड़ेगा ये सोचते हुए मैं कमरे से बहार आया . दिव्या मौसी लंच लगा रही थी और हम सब ने मिल कर लंच किया .

उधर रीता मौसी क घर जब कल्पना नेहा को छोड़ने गयी तो कारन पहले से hi उनका वेट कर रहा था. कुछ दिनों से ये रोज़ की आदत हो गयी थी. कारन किसी न किसी बात का बहाना कर क इस वक़्त घर आ hi जाता था . उसे पता था क कल्पना इस वक़्त आती है नेहा दीदी को छोड़ने . नेहा दीदी ने तो इस बात पर गौर hi न किया पर कल्पना इसे इग्नोर नहीं कर रही थी. वो बिंदास ज़रूर थी पर उसके साथ hi इंटेलीजेंट भी थी. वो हर पर गौर करती थी.

नेहा : आज तो बड़े हैंडसम लग रहे हो कारन क्या बात है?

कारन : बस ये तो ऐसे hi मैं अपने दोस्त को छोड़ने आया था तो इधर आ गया .

कल्पना : ाचा दीदी अब मैं चलती हूँ.

कारन : अरे आप बहार से hi चली जाएँगी क्या ? अंदर आइये मौसी तो कब से आपका वेट कर रही हैं.

नेहा : माँ क्यों वेट कर रही है? चल अजा कल्पना थोड़ी देर माँ से भी मिल ले.

कल्पना : ाचा दीदी मैं ज़रा कार साइड में लगा कर आती हूँ.

नेहा : अजा कारन बहार क्यों खड़ा है?

कारन : दीदी आप चलो , मैं कल्पना को लेकर अत हूँ.

नेहा अंदर चली गयी और कारन कल्पना क पास चला गया हो कार को पार्क कर क बहार निकल रही थी. वो दरवाज़ा बंद कर क जैसे hi पलटी तो कारन उसके बेहद करीब खड़ा था जिस वजह से वो टकराते टकराते बची .

कल्पना : आप यहाँ ?

कारन : मैंने सोचा आपको अकेले छोड़ना ाचा नहीं लगता आप हमारी मेहमान हैं.

कल्पना : ऐसी कोई बात नहीं , रीता आंटी मुझे अपनी बेटी hi मानती हैं और नेहा दीदी करुणा दीदी भी बहनो की तरह hi हैं. मैं ऐसा नहीं सोचती कुछ भी

कारन : तुम बहुत अछि हो कल्पना , जितनी खूबसूरत तुम खुद हो उतना hi सुन्दर तुम्हारा दिल भी है. इसी लिए तो मैं तुम्हे सब से ज्यादा पसंद करता हूँ

कल्पना : ये आप क्या कह रहे हैं ?

कारन : क्या कहा मैंने ? मैं तो बस इतना hi कहा क मैं तुम्हे पसंद करता हूँ . क्या तुम्हे मैं ाचा नहीं लगता?

कल्पना : देखिये आप मेरे लिए भी भाई जैसे हैं . मैं उसी नज़र से देखती हूँ आपको. प्लीज आप ऐसी बातें मत कीजिये.

कारन : देखो कल्पना तुम बहुत अछि हो और खूबसूरत भी और हर लड़की को एक प्यार करने वाला तो चाहिए hi होता है न. जहाँ तक मुझे पता चला है तुम्हारी लाइफ में कोई लड़का नहीं है. हम दोनों की जोड़ी बहुत अछि रहेगी . मैं तुम्हे बहुत खुश रखूँगा. तुम एक बार हाँ कार्डो.

कल्पना : सख्ती से ) देखिये मैं आपसे इज़्ज़त से बात कर रही हूँ क्यूंकि आप मेरे दोस्त क कजिन हैं वर्ण ऐसी बदतमीज़ी करने वाले का मैं मुँह तोड़ देती हूँ. और किसने कहा क मेरी ज़िन्दगी में कोई लड़का नहीं है? मेरी ज़िन्दगी में आलरेडी एक लड़का है . आप अपने लिए कोई और देखिये.

कारन : तुम झूठ बोल रही हो मैं जनता हूँ क कोई लड़का नहीं है. देखो मुझमे कोई कमी है क्या जो तुम ऐसा कह रही हो ? कई लड़कियां मेरे आगे पीछे मंडराती हैं मगर मुझे सिर्फ तुम पसंद हो. एक बार हाँ कह दो तो तुम्हे खुश रखूँगा .

कल्पना : जो आपके आगे पीछे मंडराती हैं

उन्ही से क्यों नहीं करते ऐसी बातें ? . मुझे माफ़ करो और मेरा पीछा छोडो. मेरी लाइफ आलरेडी एक लड़का है

कारन : ऐसे नहीं , पहले मुझे नाम बताओ उस लड़के का. मुझे पता है तुम बस झूठ बोल रही हो.

कल्पना : नाम जानना है ? उसके बाद तो दोबारा ऐसी हरकत नहीं करोगे आप ?

कारन : तुम नाम बताओ उसका

कालापन : ठीक है तो सुनो , वो अमित है जिसे मैं पसंद करती हूँ. अब हटो और जाने दो मुझे .

कारन : क्या ?? तुम उसे पसंद करती हो ? है क्या उसमे जो तुम उसे पसंद करती हो? गाओं देहात से आया है , अत जाता कुछ है नहीं . कहाँ तुम शहर की हाई सोसाइटी की लड़की कहाँ वो गाओं का देसी . तुम जैसी लड़की क साथ वो ऐसे लगेगा जैसे हूर क साथ लंगूर.

कल्पना : मंद योर लैंग्वेज यू , अब तक मैं सिर्फ इस लिए चुप थी क तुम अमित क कजिन हो. अब अगर एक लफ्ज़ भी उसके खिलाफ कहा न तो यहीं अभी इसी वक़्त मर मर क भुर्ता बना दूंगी. तुम खुद को समझते क्या हो ? हो क्या तुम ? अरे उसके पाऊँ क जुटे क बराबर भी नहीं हो तुम . गाओं देहात से आया है बस यही जानते हो ? उसमे जो खूबियां हैं उसकी आधी भी तुम में हो न तो तुम्हे ऐसे किसी को कुछ कहने की ज़रूरत न पड़े , लड़की खुद hi तुम्हारे आगे अपना दिल रख दे. क्या कहा था तुमने क उसे कुछ अत जाता नहीं ? उससे ज्यादा संस्कार तो किसी में मैंने देखे भी नहीं . हर लड़की को प्रोटेक्ट करता है वो अपनी बहनो से hi पूछ लो जा कर. मुझे हैरानी हो रही है क तुम उसके कजिन हो. जिसे तुम ऐरा गैर समझ रहे हो न कोई भी लड़की उसके कदमो में अपना सब कुछ कुर्बान कर देगी और तुम उसे ऐसे घटिया बोल कर खुद को ाचा साबित करना चाहते हो. जाओ अपना रास्ता नापो , अगर दुबारा मेरे सामने ऐसी वैसी कोई बात की तो मैं भूल जाउंगी क तुम उसके कजिन हो.

कारन तो पहले hi अमित से जलता था और कालापन की ऐसी जाली कटी बातों से वो अपनी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त नहीं कर पाया और गुस्से में आ कर कल्पना का हाथ पकड़ लिया.

कारन : खुद को समझती क्या हो हाँ ? उसके लिए मेरी इंसल्ट कर रही है उस दो टेक क आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

कारन ने तैश में आ कर गलती कर दी. शायद उसे पता नहीं था क कल्पना जुडो प्लेयर है . जैसे hi उसने कल्पना की कलाई पकड़ी और अमित क बारे में कुछ बोलने लगा . कल्पना ने अपनी कोहनी का मजबूत वॉर उसके जबड़े क नीचे कर दिया और कारन एक पल में hi होश गवा बैठा .

कल्पना : गुस्से में ) मैंने कहा था न एक लफ्ज़ भी उसके खिलाफ मत बोलना . अभी इतने में hi छोड़ कर जा रही हूँ अगर दोबारा ऐसी हरकत की तो अंजाम और भी बुरा होगा .

कारन कल्पना क एक वॉर से hi खुद को संभल न पाया था और पीछे गिर गया . कल्पना गुस्से से अपनी कार में बैठी और धुल उड़ाती हुई निकल गयी . कार की आवाज़ से नेहा बहार आयी तो देखा कल्पना जा चुकी है और कारन अपने जबड़े को मसल रहा था कपड़ों पर धुल बता रही थी क वो नीचे गिरा है अभी. नेहा दीदी को ये अजीब लगा क कल्पना तो अभी अंदर आने वाली थी और अब बहार से hi चली गयी .

नेहा : कारन क्या हुआ तुम्हे ये तुम्हारे मुँह पर क्या है और तुम्हारे कपडे क्यों गंदे हो गए ? ये कल्पना कहाँ चली गयी तुम तो उसे लेने ए थे न?

कारन : वो आआह्ह्ह वो चली गयी उसे जाना था कहीं . मैं भी चलता हूँ दीदी बाद में मिलता हूँ .

नेहा : पर अंदर माँ तुम्हारा इंतज़ार कर रही है खाने पर .

कारन : बाद में आऊंगा मैं मुझे ज़रूरी जाना है.

इतना कह कर कारन बिना कोई और बात सुने अपनी बाइक लेकर चला गया . मगर नेहा कड़ी इस बारे में सोचने लगी की हो न हो कुछ तो हुआ है जो कल्पना ऐसे चली गयी वर्ण वो तो ऐसी नहीं है.

इधर दोपहर की नींद लेने क बाद जब मौसी ने मुझे जगाया तो अब सब ाचा लग रहा था. जो सर में पहले भरी पैन था वो हर गया था. दिव्या मौसी मेरे पास बैठी थी और आज चाय राधा बना कर लायी अपने हाथों से .

राधा : गरमा गरम चाय , ये लीजिये राधा क हाथों की स्पेशल चाय . लीजिये मर अमित और ये लीजिये माता श्री आपके लिए भी.

अमित : तुम्हे क्या हुआ है ? ये सब ?

राधा : लो एक तो स्पेशल अपने हाथों से चाय बना कर पीला रही हूँ और ऊपर से सवाल कर रहे हो.

दिव्या मौसी : ठीक तो कह रहा है वो , कभी देखा जो नहीं उसने तुम्हे ऐसे काम करते हुए.

राधा : तो क्या मैं काम नहीं करती ? आप खुद hi तो किचन में घुसने नहीं देती मुझे .

दिव्या मौसी : मेरे होते तुझे काम करने की ज़रूरत hi क्या है?

अमित : क्यों नहीं है मौसी जी ? कल को इसकी शादी होगी तो क्या खिलाएगी ये अपने ससुराल वालों को ? पति तो बेचारा भूखा hi मर जायेगा. आप एक काम करना इसके लिए कोई बावर्ची hi ढून्ढ लेना आप जो इसे खुद बना कर खिला सके.

राधा : देखा माँ क्या कह रहा है ये ? आप इसे hi खाना बनाना सीखा दो . मुझे नहीं सीखना तो.

दिव्या मौसी : बस बस तुम दोनों ये क्या बातें करने लगे. मेरी बची को वक़्त आने पर मैं सब सीखा दूंगी .

राधा : नहीं अब आप इसे hi सिखाओ , वैसे भी मुझे तो डॉ बनना है तो किचन का काम इसे hi सिखाओ.

अमित : मैं क्यों सीखूं ? और मेरे काम सिखने से तुम्हे क्या ?

राधा : तुम्हे काम आएगा तो मेरा hi फायदा है न.

अमित : वो कैसे ?

दिव्या मौसी : चाय ठंडी हो जाएगी तुम दोनों की बहसबाजी में . चलो पहले चाय पियो.

अमित : चाय पिटे हुए ) वह मौसी जी ये चाय तो बिलकुल आप जैसी बनाई है राधा ने . कहीं आप ने हो तो नहीं बनाई थी?

राधा : देखा माँ ये फिर से शुरू हो गया

दिव्या मौसी : नहीं बीटा ये राधा ने hi बनायीं है. हाँ मैं इसे बता ज़रूर रही थी क क्या डालना है और कब क्या करना है

अमित : है है है है मतलब हाथ राधा क थे पर बना आप hi रही थी .

राधा : माआ तुम भी इसके साथ मिल गयी . देख लेना शादी क बाद मैं तुम्हे hi अपने साथ ले जाउंगी फिर करती रहना साडी उम्र सेवा.

ऐसे हंसी मज़ाक क साथ हमने चाय पि और मैं निकल गया स्टेडियम की और. अब मैं अचे से प्रैक्टिस करने लगा था हालाँकि पहले जैसी ले अभी नहीं आयी थी. पर फिर भी काफी बाद तक इम्प्रूव था . स्टेडियम से फ्री हो कर मैं मंजू म क घर की तरफ हो लिया . आज भी शीना की कार बहार कड़ी थी तो मैं समझ गया वो यहीं है. बाइक की आवाज़ सुनते hi दरवाज़ खुल गया . मगर आज दरवाज़ा शीना ने खोला था.

शीना : आ गए तुम , हम सब कब से तुम्हारी वेट कर रहे थे.

अमित : हम सब कौन ?

शीना : पहले अंदर तो आओ .



शीना ने मुझे अंदर आने का रास्ता दिया . मैं जैसे hi अंदर आया तो सोफे पर मंजू म क साथ बैठे शख्स को देख कर मेरे कदम वहीँ जैम गए .
 
अपडेट 142



सामने सोफे पर मंजू म क साथ रीमा और रुपाली बैठी थी. शीना का तो मुझे पता था और रीमा और उसकी माँ ऐसे यहाँ आ जाये hi ये मैं इतनी जल्दी एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था . मुझे देखते hi मंजू म मेरी तरफ बड़ी जबकि रुपाली मुझे देख कर असमंजस में थी. रीमा क चेहरे पर तो मुस्कान तैर गयी थी.

मंजू म : अरे आ गए तुम , भाभी यही है जिसके बारे में मैं बता रही थी. इसी की वजह से मेरी ज़िन्दगी में खुशियां वापिस आयी हैं. इसे मैं कहूं मैं खुद नहीं जानती पर हे इस लकी फॉर में. अमित , मीट माय भाभी रुपाली रीमा की माँ.

अमित : नमस्ते आंटी .

( मैंने ऐसे hi ज़ाहिर किया क मैं पहली बार रुपाली से मिल रहा हूँ और उसने भी वैसे hi किया )

रुपाली : खुश रहो , बहुत तारीफ सुनी थी तुम्हारी आज मिलना हो hi गया . शीना ने बताया था क कैसे तुमने उसे बचाया था. रीमा भी बहुत तारीफ करती है तुम्हारी.

‘ अरे किसकी तारीफ हो रही है माँ मुझे भी बताओ ‘

ये आवाज़ अंदर से आ रही किसी लड़की की थी जो शायद रीमा की सिस्टर थी. मुझे ये आवाज़ जनि पहचानी लगी और जब वो सामने आयी तो हम दोनों hi एक दूसरे को देख कर हैरान हो गए. ये आवाज़ डॉ रीना की थी.

डॉ रीना : शॉकेड ) अमित तुम !!!!!

अमित : शॉकेड ) आप !!!

मंजू म : तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो?

डॉ रीना / अमित : हाँ

मंजू म : मगर कैसे ?

डॉ रीना : मैं बताती हूँ . माँ मैंने तुम्हे जिस लड़के का बताया था न वो यही है. इसी ने मुझे उस दिन शादी में बचाया था.

अब बरी थी रीमा क शॉक होने की. वो हैरानी से कभी मुझे कभी अपनी बहिन को देख रही थी.

रुपाली : तो वो तुम थे जिसने मेरी बची को बचाया . तुम सच में बहुत अचे हो.

इतना कह कर रुपाली तेजी से मेरे पास आयी और मुझे गले से लगा लिया.

रुपाली : थैंक यू वैरी मच तुमने बहुत बड़ा एहसान किया है हम पर. सच में वो देवी hi है जिसने तुम जैसे बेटे को जनम दिया है. तुम ने मेरी दोनों बच्चियों की मदद की और मेरी इस प्यारी से ननद को भी नई ज़िन्दगी दी. और मुझे .... मुझ पर भी तुमने एहसान किया . थैंक यू वैरी मच बीटा.

अमित : इसमें एहसान कैसे आंटी , मैंने वही किया जो करना चाहिए था. आप ऐसा कह कर मुझे शर्मिंदा कर रही हैं.

शीना : आज एक और कारनामा सामने आ गया तुम्हारा. हम सब पर तुमने कोई न कोई एहसान किया है. यू अरे सुच ान अमेजिंग गाए.

डॉ रीना : मुझे कोई बताएगा और कौन कौन सी बात मुझे पता नहीं है ?? हम्म्म

शीना : दीदी आपसे तो बात होती नहीं है पर रीमा सब जानती है. अमित ने hi मुझे बचाया था जब कुछ गुंडों में मुझे और राधा को किडनैप कर लिया था.

डॉ रीना : तो वो दूसरी लड़की तुम थी?

शीना : आप जानती हैं ?

डॉ रीना : हाँ वो हमारी बात हुई था न तो बातों बातों में ये बात बताई थी इसने.

शीना : मैं तो बहुत शर्मिंदा हूँ दीदी , कभी कभी खुद को hi गलियां देने का मन होता है क मैं मोंटी की बहिन हूँ. उसने इसकी बहिन क साथ क्या करना चाहा और इसने फिर भी मुझे बचाया.

डॉ रीना : शॉकेड ) क्याआ ???? वो मोंटी था जिसने ??

मेरी तरफ देखते हुए ) तो वो लड़का मोंटी था ???

अब इस बात में डॉ रीना क्या पूछ रही थी ये सिर्फ मैं hi जनता था. और अब डॉ रीना कैसे बेहवे करेंगी मुझे ये समझ नहीं आ रहा था क्यूंकि उनके दिए हुए इंजेक्शन से मैंने उनके hi कजिन को नामर्द बना दिया. मैंने सिर्फ हाँ में गर्दन हिलायी और डॉ रीना क चेहरे पर गुस्सा आ गया . अब इस बात को कोई और नहीं जनता था सिवाए रुपाली क जो बिलकुल भी नाराज़ नहीं थी इस बात से. मगर वो भी नहीं जानती थी क उसकी अपनी बेटी का हाथ भी इसमें है.

मंजू म : कमल है , तुम हम सब से hi जुड़े हुए हो और हमें hi नहीं पता . अब आओ यहाँ सब क साथ बैठो. मैं कुछ खाने पीने को लती हूँ.

मैं डॉ रीना की तरफ अभी भी देख रहा था जहाँ पर भाव बदल रहे थे मगर वो मेरी तरफ नहीं देख रही थी. तभी उनका फ़ोन बजा और वो बात करने क बाद हॉस्पिटल जाने का कह कर निकल गयी .

रुपाली : बीटा तुम्हारे माँ डैड से भी मिलवाओ कभी हमें. मैं उनसे मिलना चाहूंगी जिन्होंने तुम जैसा संस्कारी बीटा पैदा किया है.

अमित : जनम देने वाले माँ बाप तो अब दुनिया में नहीं है पर जिन्होंने अपना बीटा बना कर पला है उनसे कभी आपको ज़रूर मिलवाऊंगा .

रुपाली : ओह ी ऍम सॉरी , पलने वाले भी कुछ काम तो नहीं होंगे जिन्होंने ऐसे संस्कार दिए हैं.

मंजू म : ये लो कॉफ़ी पियो . अमित को मेरे हाथ की कॉफ़ी पसंद है . ये रोज़ पड़ने अत है तो हम कॉफ़ी ज़रूर पिटे हैं.

मंजू म सबके लिए कॉफ़ी ले आयी थी .

मंजू म : भाभी अब तो आप आती रहना मुझे ाचा लगेगा . अब आप सब मिलने आये हैं तो लग रहा है क मेरा भी परिवार है.

रुपाली : अब तो आती hi रहूंगी . और इसी बहाने अमित से भी मिल लिया करुँगी.

मंजू म : शीना रीमा तुम दोनों कुछ बोल क्यों नहीं रही ?

शीना : मैं तो ये सोच रही हूँ बुआ क कैसा इत्तिफ़ाक़ है . अमित ने आप पर मुझ पर दीदी पर एहसान किये और हम सब एक hi परिवार से हैं .

रीमा : दीदी इसने तो और भी कइयों पर एहसान किया है . लिस्ट बहुत लम्बी है इसके कारनामो की.

मंजू म : किसकी बात कर रही हो रीमा ?

शीना : वो कॉलेज में कुछ दोस्त हैं जिन पर इसने एहसान किये हैं.

अमित : मैं सिर्फ वही करता हूँ जो मुझे सही लगता है. आप इसे एहसान मत कहिये . मदद करना इंसान का फ़र्ज़ है सो मैंने की और फिर मुझे तो मदद मिल जाती है बदले में.

रुपाली : ये तुम्हारा बड़प्पन है क तुम बिना किसी लालच क हर किसी की मदद कर देते हो. तुमने जो कुछ भी किया है इसके लिए अगर कभी मैं कुछ कर सकूँ तुम्हारे लिए तो ज़रूर करुँगी .

अमित : इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. शीना रीमा और रीना मेरी दोस्त हैं. दोस्तों पर एहसान नहीं होते और मंजू म तो मुझे भाई मानती हैं तो कहीं से भी कोई एहसान नहीं.

रुपाली : सब क साथ रिश्ता बना लिया और मैं ? मेरे साथ तो रिश्ता नहीं है न ? तो मेरे ऊपर जो एहसान किया वो ? क्या उसके लिए भी मुझे कुछ नहीं करना चाहिए ?

मंजू म : आप पर क्या एहसान किया है इसने भाभी ?

रुपाली : वो वो मेरी 2-2 बेटियों की मदद को बचाया है इसने और शीना तो कितना बदल भी गयी है. ये क्या एहसान नहीं मुझ पर?

मंजू म : छोडो भाभी ऐसा मत सोचो. ये अब हमारा अपना hi है. इसने बताया न के मैंने इसे भाई बनाया है तो भूल जाओ सब. और तुम लोग अब कॉफ़ी पि लो वर्ण ठंडी हो जाएगी.

कॉफ़ी क बाद मैं ज्यादा देर नहीं रुका क्यूंकि मैं उनकी आपस की बातों में केन्डर नहीं बनना चाहता था. शीना और रीमा मुझसे बात करना चाहती थी पर सब क सामने ऐसे बात करना भी शक पैदा कर देता. मैं मंजू म क घर से निकला तो मुझे डॉ रीना का ख्याल आया . वो थोड़ी गुस्से में लगी थी, मैंने सोच क्यों न उनसे एक बार बात कर ली जाये. ये सोच कर मैं सीधा हॉस्पिटल चला गया. डॉ रीना शायद किसी पेशेंट को देखने गयी थी तो मैं उनके केबिन में उनका वेट करने लगा. थोड़ी देर में वो जैसे hi वापिस आयी तो मुझे देखते hi एक जगह रुक गयी . मैं भी अपनी जगह पे खड़ा हो गया .

डॉ रीना : तो तुमने वो इंजेक्शन मोंटी को लगा दिया?

अमित : हम्म्म्म

डॉ रीना : तुम जानते हो तुमने क्या किया ?

अमित : उसकी थी सजा थी वर्ण वो पता नहीं कितनो की ज़िन्दगी बर्बाद करता . मैंने उसे ज़िंदा छोड़ दिया इतना hi काफी है.

मैंने इतना कह कर डॉ रीना की तरफ देखा तो वो लगभग उछलती हुई मेरे गले लग गयी. मैं तो हैरान हो गया क उन्हें तो गुस्सा होना चाहिए था और वो खुश हो रही है.

डॉ रीना : तुम नहीं जानते तुमने क्या किया है. मैं जानती थी वो कितना गलत है पर छह कर भी कुछ कर नहीं सकती थी. तुमने उसे जो सजा दी है वो मैं कभी दे नहीं पति पर तुमने बिलकुल सही किया है.

अमित : आप ये क्या कह रही हैं ? वो आपका तो आपका भाई है.

डॉ रीना : भाई नहीं है वो , भाई क नाम पर कलंक है. उसकी गन्दी नज़र हर किसी पर रहती थी और उसने ...... वो इसी लायक था.

अमित : आप कोई बात छुपा रही हैं? आप चाहें तो बता सकती हैं मुझे

डॉ रीना ( मन में ) अब कैसे बताऊँ क मैंने उसे मेरी hi माँ क साथ दरिंदगी करते देखा है. मैं इसी लिए उस घर में रहना पसंद नहीं करती. दोनों बाप बेटों की गिद्ध सी नज़र मैंने कई बार देखि है मेरी माँ मेरी बहिन और मुझ पर भी. एक को तुमने सजा दे कर हमें बचा तो लिया पर दूसरा अभी भी है. काश क भगवन उसे भी सजा दे उसके कर्मो की.

अमित : आप चुप क्यों हो गयी ? चलिए छोड़िये. अपनी जगह पर बैठ जाइये वर्ण किसी ने ऐसे देख लिया तो क्या सोचेगा?

डॉ रीना : हो किसी को सोचना है सोच लेने दो. आज मैं बहुत खुश हूँ.

अमित : आप ने कभी बताया नहीं क शीना और रीमा आपकी बहने हैं?

डॉ रीना : अब मुझे क्या पता था क तुम उनको जानते होंगे. मैंने तो ऐसे hi बात नहीं की. तुमने जो किया है उसके बाद मेरे दिल में तुम्हारी इज़्ज़त और भी बाद गयी है.

( मन में ) अब तो मैं तुम्हारे साथ hi अपनी ज़िन्दगी बिताना चाहती हूँ. अब इस दिल पर तुम्हारा नाम लिख गया है . किसी और क बारे में कभी सोच भी नहीं सकती मैं.

अमित : ाचा अब मैं चलता हूँ.

डॉ रीना : इतनी जल्दी क्या है ? एक कप कॉफ़ी तो पि सकते हैं न साथ में?

अमित : अभी अभी पि कर आया हूँ मंजू म क हाथ की.

डॉ रीना : एक कप मेरे साथ भी पि लो प्लीज.

अमित : ये प्लीज कहने की ज़रूरत क्या है? दोस्त मानती हैं तो हक़ से कहिये. चलिए मंगाइये जल्दी से.

डॉ रीना : स्माइल ) मैं अभी मंगवाती हूँ.

उसके बाद एक एक कप कॉफ़ी हमने साथ में पि और कुछ बातों क बाद मैंने विदा ली और घर आ गया. घर पर दिव्या मौसी किचन में काम कर रही थी . मैं अपने रूम में जा कर नाहा कर फ्रेश हो गया और फिर कुछ देर बाद मौसी ने खाने की आवाज़ दे दी. आज खाना राधा परोस रही थी तो मैंने मज़े लेते हुए कहा.

अमित : तो राधा भी किचन का काम सिखने लगी है.

राधा : खुद hi तो कह रहे थे मुझे काम नहीं अत. अब कर रही हूँ तो तब भी बातें कर रहे हो.

अमित : ाचा है सिख लो , काम से काम अपने पति को तो खाना खिला hi लोगी .

राधा : तुम्हे खिला रही हूँ न , ये सब तुम्हारे लिए hi सुख रही हूँ ज्यादा बातें मत बनाओ.

अमित : मेरे लिए ? मुझ पर इस मेहरबानी की वजह ? कहीं फिर से शॉपिंग पर तो नहीं जाना तुम्हे?

राधा : वो तो मैं वैसे भी जा सकती हूँ . मुझे पता है तुम मुझे इंकार नहीं कर सकते.

अमित : तुम्हे कैसे पता मैं इंकार नहीं कर सकता ?

राधा : बस पता है.

अमित : मौसी क्या कर रही हैं अब किचन में?

‘ आ गयी मैं भी , बस ज़रा सामान समेत रही थी’

दिव्या मौसी अपनी सदी क पल्लू से अपना चेहरा पोछती हमारे पास आ गयी .

दिव्या मौसी : देखा कैसे काम कर रही है मेरी बेटी. ज़िद कर रही थी क मुझे भी काम करना है. मैंने मन किया तो कहने लगी क तुमने इसे कहा है. ये सलाद इसी ने कटा है और सभी बनाने में भी हाथ बाँट रही थी. चल आज अब तू भी बैठ जा क सब क बाद बैठेगी .

राधा : माँ पहले आप दोनों खाओ मैं परोसती हूँ .

अमित : ो मैडम बास भी करो , एक hi दिन में सब करोगी क्या? आओ बैठो साथ में.

राधा : ाचा बैठती हूँ पर पहले तुम शुरू करो.

मैंने खाना शुरू किया तब कहीं राधा हमारे साथ बैठी. कहते वक़्त भी राधा का ध्यान अपने खाने में काम और मेरी तरफ ज्यादा था. रोटी सब्जी ख़तम होने से पहले hi राधा दाल देती. दिव्या मौसी राधा को ऐसे देख कर खुश भी हो रही थी और खामोश भी थी जैसे कुछ सोच रही हो. खाना खाने क बाद राधा दिव्या मौसी क साथ किचन में बर्तन समेटने में लग गयी और मैं अपने रूम में आ गया . मैंने फ़ोन देखा तो रीमा क मेस्सगेस आये हुए थे. मैंने उसे फ़ोन करना hi बेहतर समझा. वैसे तो जब से मैं यहाँ आया था रीमा से फ़ोन पर बात नहीं करता था क कहीं मौसी या राधा सुन न लें.

रीमा : घर पर नहीं हो क्या ?

अमित : मैं तो घर पर hi हूँ , पर तुम ऐसे क्यों पूछ रही हो?

रीमा : खुद hi तो कह रहे थे क जब तक यहाँ हो फ़ोन पर बात नहीं कर सकते .

अमित : वो मौसी और राधा किचन में हैं तो थोड़ी देर क लिए सोचा बात कर hi लेता हूँ.

रीमा : शुक्रिया शुक्रिया . तो दीदी को भी जानते हो तुम , मुझे बताया भी नहीं. बड़ी तारीफ कर रही थी दीदी और मुझे पता भी नहीं था क वो तुम हो .

अमित : मुझे कहाँ पता था क वो तुम्हारी बहिन है. मैं तो खुद हैरान हो गया था उन्हें देख कर.

रीमा : अन्य व्य जो भी हुआ ाचा hi हुआ. पता है माँ क्या कह रही थी.

अमित : क्या कह रही थी ?

रीमा : माँ कह रही थी क तुम बहुत अचे हो और तुम जैसे लड़के का साथ जिस लड़की को मिलेगा वो कितनी किस्मत वाली होगी.

अमित : तो तुमने कुछ नहीं कहा?

रीमा : क्या कहती ? क आपकी बेटी को उसका साथ मिल चूका है और वो आपका होने वाला दामाद है ??

अमित : तो बता देती न

रीमा : इतनी हिम्मत नहीं है मुझमे. तुम में है तो खुद बात कर लेना उनसे . वैसे मुझे नहीं लगता वो मन करेंगी. वो तुमसे बहुत इम्प्रेस हैं.

अमित : तुम तो खुश हो न

रीमा : बहुत बहुत बहुत खुश. पता है आज सब कितने खुश थे. बुआ क साथ इतने सैलून बाद आज हम सब मिले . माँ तो बहुत खुश थी और दीदी भी . मैं तो सब से छोटी थी ज्यादा नहीं जानती पर दीदी और माँ क साथ बुआ का बहुत प्यार था शुरू से. और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ . ी ऍम सो हैप्पी

अमित : तो फिर मुझे मेरा इनाम क्यों नहीं दिया अभी तक.

रीमा : इनाम चाहिए ?

अमित : हम्म्म

रीमा: muaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh . ये लो इनाम

अमित : फ़ोन पर ? मुझे तो रियल में चाहिए .

रीमा : वो भी मिल जायेगा. माबदौलत तुम पर बहुत खुश हैं. इस लिए जो चाहोगे मिलेगा.

अमित : फिर तो मैं तुम्हारी पूरी बॉडी पर किश करना चाहूंगा .

रीमा : यू !!!!! और कुछ नहीं सूझता तुम्हे? जाओ मैं बात नहीं करती तुमसे.

अमित : अभी तो कह रही थी जो चाहो मिलेगा और अब मन कर रही हो.

रीमा : मुझे क्या पता था तुम ऐसी चीज़ मांग लोगे. गंदे , चेटर

अमित : अब चीटिंग तो तुम कर रही हो . अगर नहीं करनी तो ठीक है . मुझे भी कुछ नहीं चाहिए .

रीमा : मैं अपने कपडे नहीं उतरने वाली . कपड़ों क ऊपर से करना हो तो कर लेना .

अमित : मुझे नहीं करना कुछ भी.

रीमा : नाराज़ हो गए ??

अमित : नहीं , कोई और बात करो.

रीमा : ाचा ठीक है मैं ऊपर से अपनी T-shirt उतर सकती हूँ.

अमित : कोई और बात करो .

रीमा : तो तुम ऐसे नहीं मानोगे? ाचा ठीक है जब कहीं अकेले में मिलेंगे तो मैं तुम्हे तुम्हारा इनाम दे दूंगी. मगर तुम कुछ नहीं करोगे .

अमित : क्या सच में तुम कपडे उतरेगी.

रीमा : गंदे , ऐसे क्यों बोलते हो ? मुझे शर्म आ रही है.

अमित : शर्म आ रही है तो फिर कैसे करोगी ?

रीमा : मुझे नहीं पता तुम खुद hi कर लेना.

अमित : अगर मैंने कुछ और भी कर दिया तो

रीमा : यू !!!! बेशरम गंदे जाओ मैं बात नहीं करती bye.

इतना कह कर रीमा ने फ़ोन काट दिया . वो कुछ ज्यादा hi शर्मा रही थी और मैं भी उसके मज़े ले रहा था. रीमा ने फ़ोन काटने क थोड़ी देर बाद गुड नाईट का मैसेज किया और साथ में ी लव यू बेशरम भी लिखा था . मैसेज पद कर मुझे हंसी आ गयी और मैंने भी उसे ी लव यू तू का मैसेज कर दिया . थोड़ी देर बाद राधा और मौसी दोनों hi मेरे पास आ गयी . राधा क हाथ में मेरे लिए दूध का गिलास था और उसके पीछे hi मौसी भी थी.

राधा : ये ली गरमा गरम दूध पि लो.

अमित : यार तुम तो आज से hi एक डैम बदल रही हो. कहीं कल को पेन की जगह बेलन hi न पकड़ लेना , पता चले मैडम आंसर शीट पर खाने की रेसिपी hi लिख कर आ गयी .

राधा : मज़े ले रहे हो न मेरे , कोई बात नहीं बच्चू सब का हिसाब लुंगी देख लेना .

दिव्या मौसी : ठीक hi तो कह रहा है. तुम धीरे धीरे सिख लेना सब , इतनी जल्दी क्या है ?

राधा : देखा था न अपने क्या कह रहा था ये ? अब तो मैं सब काम सिख कर hi रहूंगी. वर्ण ये hi कल को शिकायत करेगा आपसे .

दिव्या मौसी : बस बस ज्यादा बात नहीं , उसे दूध पिने दे और तू भी अपना दूध पि कर अब आराम करो जा कर.

राधा : क्या माँ !! थोड़ी देर बातें करते हैं न . अभी मुझे नींद नहीं आ रही .

दिव्या मौसी : टाइम से सोयेगी नहीं तो फिर सुबह उठा नहीं जायेगा.

राधा : उसकी चिंता नहीं है. ये है न सुबह मुझे उठाने की ज़िम्मेदारी इसकी है .

दिव्या मौसी : तो उससे काम ले रही है. जब वो नहीं होगा तब क्या करेगी ?

राधा : तब तो आप हो hi न मदर इंडिया . वैसे भी हम कहाँ देर तक जागते हैं .

दिव्या मौसी : ठीक है ठीक है, चल अब दूध पियो और बातें करलो जब तक.

दूध पिने क बाद मौसी और राधा दोनों चले गए और मैं भी लेट गया. थोड़ी देर बाद दिव्या मौसी फिर से कमरे में आयी और मेरे पास hi बैठ कर मेरा सर सहलाने लगी. मैं अभी ऑंखें बंद कर क लेता hi था तो फिर से उठ गया.

अमित : मौसी आप?

दिव्या मौसी : लेते रहो , मैं तो बस देखने hi आयी थी क तुम सो गए या नहीं.

अमित : आप भी मेरे साथ hi सो जाइये न इधर.

दिव्या मौसी : नहीं तुम आराम से सो जाओ मैं अपने कमरे में सो जाउंगी.

अमित : कब तक अकेली रहेंगी आप ?

मेरी इस बात पर दिव्या मौसी क चेहरे क भाव बदल गए और वो मेरी आँखों में देखने लगी .

अमित : कब तक आप अकेले रह कर खुद को सजा डौगी ? क्या आपको नहीं लगता क आपको भी जीना चाहिए. आप ने तो ज़िन्दगी से ऐसे मुँह फेर रखा है जैसे आप जी नहीं रही बस सजा काट रही हैं. आप दिखावे क लिए मुस्कुराती तो हो पर आपकी आँखों में ये सूनापन मैं अछि तरह से जनता हूँ. आप माँ से बहुत प्यार करती थी ये सब जानते हैं . पर क्या ये सही है क आप ने उनके जाने क बाद जीना hi छोड़ दिया ? क्या माँ आपको ऐसी हालत में देख कर खुश होगी ? वो आपकी जान थी और आप उनकी , क्या वो अपनी जान को ऐसे अकेले रोटा देख कर ज़िन्दगी से हरा हुआ देख कर शांति से रह पति होंगी?

मेरी बातें सुन कर दिव्या मौसी की ऑंखें भर आयी और आंसू फिर से अपनी सीमा लाँघ कर नीचे गिरने लगे.

दिव्या मौसी : उसके सिवा और था hi क्या मेरी ज़िन्दगी में मेरे पास? अगर राधा मेरी गॉड में न होती तो मैं भी उसी दिन मर जाती.

अमित : आप ऐसा कैसे सोच सकती हैं? माँ को गए इतने साल हो गए फिर भी आप आज तक दुखी हैं. तो क्या वो आपके ऐसा करने से खुश होती? आपको तो उनकी ज़िन्दगी भी जीनी थी , वो सब कुछ देखना था जो कभी उन्होंने सोचा होगा. मगर आप सिर्फ रोटी रही.

दिव्या मौसी : तो क्या करती ? कौन था मेरे पास जिसके लिए मैं खुश होती ? एक पति मिला उसने भी कभी मुझे समझने की कोशिश तक नहीं की दो प्यार क बोल तक नहीं बोले मेरे साथ . कौन था मेरे आंसू पोछने वाला? दामिनी खुद तो चली गयी मुझे छोड़ गयी अकेला रोने क लिए.

इतना कह कर दिव्या मौसी रोटी हुई उठ कर जाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.

दिव्या मौसी : छोडो मेरा हाथ

अमित : नहीं , अब और नहीं , मैं आपको उस कमरे में खुद को कैद करने नहीं दूंगा. आप को उन बेजान चीज़ों में अपनी बहिन नज़र आती है और आपके सामने जो ज़िंदा निशानी है उसकी वो नज़र नहीं आती ? क्या वहीँ आपको माँ का एहसास होता है मेरे साथ नहीं? कल तक कोई नहीं था आपके आंसू पोंछने वाला पर मैं आपको रोने नहीं दूंगा.

इतना कह कर मैंने मौसी को खींच कर अपने गले लगा लिया.

अमित : आपको फिर से मुस्कुराना होगा फिर से जीना होगा. यही मेरी माँ भी चाहती है और मैं भी.

दिव्या मौसी पहले मुझसे अलग होने की कोशिश करती रही पर फिर एक डैम से उनका रीना बहुत ज्यादा हो गया और मुझे कास कर गले लगते हुए वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी.

दिव्या मौसी क रोने की आवाज़ सुन कर राधा भी भगति हुई आयी मगर हमें इस तरह देख कर वो भी दरवाज़े पर hi कड़ी हो गयी . इस नज़ारे को देख कर उसकी आँखों में भी आंसू थे और मेरी भी. राधा वहीँ से हमें देखती रही और मेरे साथ नज़र मिलते hi उसकी आँखों में एक ख़ुशी नज़र आयी. वो चुपचाप अपनी ऑंखें साफ करती हुई वापिस लौट गयी.

अमित : रो लीजिये जितना चाहे रो लीजिये माँ पर आज क बाद मैं आपको सिर्फ हस्ते हुए hi देखना चाहता हूँ. क्या आप अपने बेटे क लिए , अपनी बहिन क लिए फिर से नहीं जियेंगी ? ज़रा सोचिये आपको रोटा देख कर मुझ पर राधा पर और मेरी माँ पर क्या बिट टी होगी. अब आप कभी नहीं रोयेंगी. मैं आपको वो हर ख़ुशी दूंगा जिसकी आप हक़दार थी मगर आपको नहीं मिली. मौसा जी ने आपको चाहे न समझा हो पर हम आपको समझते हैं और आपको अब कभी रोने नहीं देंगे . आपको उन बेजान चीज़ों से बहार आ कर जीना hi होगा. उस कमरे की कैद से आपको आज़ाद होना hi होगा.

दिव्या मौसी : रट हुए )मैं दामिनी को कभी नहीं छोड़ सकती , मैं उसके बिना नहीं जी सकती .

अमित : कौन कह रहा है क आप उन्हें भूल जाओ? मैं भी तो जी रहा हूँ न अपनी माँ को खोकर. क्या आप उनकी जगह नहीं ले सकती? क्या आप मुझमे अपनी बहिन को नहीं देख सकती? क्या मैं आपको प्यारा नहीं हूँ ?

दिव्या मौसी : ऐसा मत कहो ? तुम तो मेरी दामिनी का अंश हो . उसका वजूद तुम में है.

अमित : तो फिर आप मुझे रीता देखना चाहती हैं ? अपनी बहिन को रोटा हुआ देखना चाहती हैं ?

दिव्या मौसी : रट हुए ) नहीं मैं दामिनी को रोटा हुआ नहीं देख सकती . वो भी कभी मुझे रोने नहीं देती थी.

अमित : तो फिर आपको उनकी कसम क अब आप फिर से खुश रहेंगी फिर से जियेंगी. मैं आपको वही प्यार दूंगा जो मैं उनको देता . आपको अपनी ज़िन्दगी भी जीनी है और मेरी माँ की भी. बोलिये आप करेंगी न ऐसा ? आप खुश रहेंगी न ? फिर जियेंगी न ?

दिव्या मौसी: हाँ मेरे बचे मैं तुझे दोनों का प्यार दूंगी . मैं तेरे लिए और राधा क लिए जिऊंगी. मैं तुम दोनों को बहुत प्यार दूंगी. मैं दामिनी क लिए जियूँगी. मुझे माफ़ करदे बीटा इतने साल मैं तुझसे दूर रही . तेरे साथ खुद को भी दुःख देती रही.

दिव्या मौसी पीछे हैट कर मेरी आँखों में भी आंसू देखे तो मेरी ऑंखें साफ़ करते हुए कहने लगी.

दिव्या मौसी : तू क्यों रोटा है ? मेरे आंसू पांच रहा था और खुद रो रहा है.

अमित : मैं कहाँ रो रहा हूँ माँ ये तो तुम्हारी बहिन की hi ऑंखें हैं जो आंसू रोक नहीं प् रही .

दिव्या मौसी ने फिर से मुझे कास क गले लगा लिया.

दिव्या मौसी : हाँ ये मेरी बहिन की hi ऑंखें हैं इसी लिए रो रही हैं. और तेरे अंदर जो दिल है न वो भी मेरी बहिन का hi है. इसी लिए तूने मेरा वो दर्द महसूस किया जो कोई नहीं कर पाया. ये सिर्फ दामिनी hi कर सकती थी. मैं अब कभी नहीं रोउंगी. मैं अपनी बहिन की अटका को दुखी नहीं करुँगी. तू सच में मेरी दामिनी का hi अक्स है और मैं तुझे कुछ और hi समझती रही. मैं अब तेरे लिए जिऊंगी मेरे बेटे सिर्फ तेरे लिए. तू जो कहेगा वही करुँगी . तू कभी मुझे अकेला मत छोड़ना . मैं तेरी हर बात मानूंगी.

इतना कह कर दिव्या मौसी ने मेरे चेहरे पर अपने प्यार की बारिश करते हुए अनेको चुम्बन दे दिए जिसमे सिर्फ उनकी ममता थी. मैंने भी उनके आंसू साफ़ किये और हम एक दूसरे क गले लगे कितनी देर तक ऐसे hi बैठे रहे और जाने कब मैं मौसी की गॉड में सो गया और आज वो भी सब कुछ भुला कर चैन से सोई . कमरे क बहार राधा तब तक कड़ी रही जब तक क हम बातें कर रहे थे. और फिर वो भी अपने कमरे में जा कर सो गयी अपने दिल में एक ख़ुशी लिए अपनी आँखों में कुछ सपने लिए.

सुबह मेरी आंख खुली तो दिव्या मौसी मेरे साथ hi सो रही थी. उनका एक हाथ मेरे सर पर hi था. ज़माने भर की मासूमियत उनके चेहरे पर झलक रही थी. मगर चेहरे पर आंसुओं क दाग भी नज़र आ रहे थे शायद वो मेरे सोने क बाद भी रोई होंगी . दिव्या मौसी को देख कर मैं फिर से उनकी ज़िन्दगी क बारे में सोचने लगा. मैंने मन में इरादा कर लिया क उनके चेहरे पर हंसी वापिस ला कर hi रहूँगा. मुझे उन्होंने अपनी और मेरी माँ की सुनहरी यादें तो बताई थी पर अब वक़्त था उनकी ज़िन्दगी की किताब क उन काले पन्नों को खोलने का जो शायद उन्होंने किसी को भी नहीं बताये थे. मैंने झुक कर उनके माथे पर एक किश किया और खुद फ्रेश होने चला गया. उसके बाद मैंने थोड़ी देर एक्सरसाइज की . इतने में मौसी भी उठ गयी और मेरे पीछे पीछे दूध का गिलास लिए ऊपर आ गयी . दूध पिटे हुए भी वो प्यार से मेरे सर पर हाथ फिर रही थी. उनके प्यार और स्नेह से मैं भी खुश था अंदर से पर अब उनको ख़ुशी देने क लिए उनके अंदर से मैं हर वो दर्द निकलना चाहता था जो उन्हें आगे नहीं बढ़ने दे रहा था.

दिव्या मौसी : जल्दी उठ गया था तो मुझे भी जगा देता.

अमित : आप इतने सुकून से सो रही थी क मेरा दिल hi नहीं किया आपको उठाने का.

दिव्या मौसी : सच कहा तुमने , बरसों बाद मुझे ऐसी सुकून की नींद आयी है. मुझे सोते हुए ऐसा hi लग रहा था जैसे मैं दामिनी क साथ हूँ. और जानते हो मैंने सपने में भी उसे देखा.

अमित : अच्छा !!!! क्या कह रही थी माँ?

दिव्या मौसी : वही जो तुम कह रहे थे कल रत. वो भी मुझे खुश रहने और ज़िन्दगी जीने को कह रही थी. आज से पहले मैं हमेशा जब भी उसे सपने में देखती थी तो पुराणी यादें hi आती थी या फिर उसकी भरी हुई ऑंखें जैसे वो भी दुखी हो. पर कल रत मैंने उसके चेहरे पर ख़ुशी देखि. और मुझे भी उसने ऐसे hi खुश रहने को कहा.

अमित : और क्या कहा माँ ने ?

दिव्या मौसी : और ये क मेरे बेटे का ख्याल रखना कहीं मैं तुम्हे भी अपने साथ रुलाती न रहूं. चल अब नीचे आजा मैं भी तब तक नाहा लेती हूँ और उस महारानी को भी जगा दूँ.

अमित : नहीं मौसी जी उसे मैं जगाउंगा . उसने मेरी ड्यूटी जो लगायी है.

दिव्या मौसी : ाचा ठीक है तुम उसे जगाओ और मैं तैयार हो कर नाश्ता लगाती हूँ.

दिव्या मौसी मुस्कुराती हुई नीचे चली गयी और मैं भी उनके पीछे पीछे निचे आ गया. मौसी नहाने चली गयी और मैं आ गया राधा को जगाने. राधा हमेशा की तरह अपनी मासूमियत क साथ सपनो में खोयी हुई थी. उसे ये मासूमियत और खूबसूरती दिव्या मौसी से hi मिली थी. मैंने कुछ देर उसे देखा और फिर उसके कोमल गलों पर अपना हाथ रख कर उसे आवाज़ दी.

अमित : राधा उठ जाओ , देखो सुबह हो गयी .

एक बार आवाज़ देने से वो न उठी तो मैंने फिर से उसके गाल सहलाते हुए उसे आवाज़ दी.

अमित : राधा देखो सुबह हो गयी है उठ जाओ. कॉलेज भी जाना है.

राधा : उनममममम सोने दो न माँ

इतना कह कर राधा ने मेरा हाथ अपने चेहरे क नीचे दबा लिया. एक बार तो दिल किया क उसके ऐसे hi सोने दूँ . वो इतनी प्यारी लग रही थी क उठाने का दिल hi नहीं कर रहा था पर कॉलेज भी तो जाना था.

अमित : राधा देखो हम कॉलेज क लिए लेट हो जायेंगे उठो जल्दी से वर्ण मैं पानी दाल दूंगा फिर तुम्हारे ऊपर.

राधा ने इतना सुनते hi ऑंखें खोल ली और मुझे देखने लगी. बिना कुछ बोले वो बस मेरी आँखों में देख रही थी और मैं भी ख़ामोशी से उसे देख रहा था. पता नहीं क्या उसकी नज़रों में था पर वो जैसे कुछ कह रही थी. फिर वो एक डैम से उठी और मेरे गले लग गयी . ये सब इतनी जल्दी हुआ क मुझे समझ में hi नहीं आया. पर ये एहसास बहुत खास था. हम दोनों hi खामोश थे और मैं उसे महसूस कर रहा था. उसका वो कोमल एहसास मुझे जैसे अपने साथ बांध रहा था और मेरी ऑंखें अपने आप बंद हो गयी और पता नहीं कब मेरे हाथ उसकी पीठ पर चले गए . उसकी खुशबु मेरी सांसो में घुल रही थी. पता नहीं ये क्या कशिश थी जिसने मुझे पत्थर की तरह जड़ कर दिया था . न राधा कुछ बोल रही थी न मैं पर हमारी धड़कने जैसे तेज़ होती जा रही थी. ज़ुबान खामोश थी और दिल बात कर रहे थे. मुझे एक अटूट निर्मल प्रेम का एहसास होने लगा था. और मैं खोता चला गया उस प्यार क अथाह सागर में .

राधा : थैंक यू वैरी वैरी मच . तुमने माँ को सहारा दिया . उसे हमेशा से इसकी ज़रूरत थी . मेरे साथ तो वो कभी अपना दुःख बाँट टी hi नहीं पर तुमने उनके ज़ख़्मी दिल को छू लिया है . प्लीज मेरी माँ को हसना सीखा दो उसे फिर से जीना सीखा दो. ये सिर्फ तू hi कर सकते हो. वो तुम्हे दिल से प्यार करती हैं. मुझे पता है तुम मेरे लिए ये ज़रूर करोगे . करोगे न?

अमित : हाँ राधा , मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ और दिव्या मौसी तो फिर भी मेरे माँ जैसी hi हैं. मैं उन्हें अब कभी दुखी नहीं होने दूंगा और न hi तुम्हे.

राधा : तुम्हारे होते मैं किसे दुखी हो सकती हूँ. तुम बस हमेशा मेरे पास रहना.

हम दोनों ऐसे hi गले लगे हुए थे क बहार से अति मौसी क कदमो की आवाज़ से हम अलग हुए. राधा का चेहरा टमाटर की तरह गुलाबी से लाल हो रहा था और एक ख़ुशी उसकी आँखों में थी पर जैसे hi हमारी नज़रें मिली उसने शर्मा कर नज़रें फेर ली.

राधा : लगता है माँ तैयार हो गयी है अब तुम भी नाहा लो .

अमित : हाँ वो मैं , मैं बस तुम्हे hi जगाने आया था . तुम भी तैयार हो जाओ .

इतना कह कर मैं कमरे से बहार आने लगा तो पीछे राधा की आवाज़ आयी

राधा : थैंक यू फॉर थिस लवली मॉर्निंग.

मैंने एक बार पीछे मुद कर उसे देखा तो वो शर्मा कर जल्दी से बाथरूम में घुस गयी. मैं भी उसकी इस मुस्कराहट से मुस्कुराता हुआ अपने कमरे में आ गया . उसके बाद हम दोनों hi तैयार हो गए . राधा ने आज भी नयी ड्रेस पहनी थी . ये एक वाइट और पिंक कॉम्बिनेशन का डिज़ाइनर सूट था हो अक्सर हाई सोसाइटी की लड़कियां पहनती थी. राधा जब इस ड्रेस में मेरे सामने आयी तो मैं उसे देखता hi रह गया. राधा मेरी हालत पर फिर से मुस्कुराने लगी .

दिव्या मौसी : अरे वह !! मेरी बेटी तो कल से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही है . इधर आ पहले कला टिका लगा दूँ वर्ण किसी की नज़र लग जाएगी तुझे.

दिव्या मौसी ने अपनी आँख क काजल से एक कला टीका राधा क कण क पीछे लगा दिय और उसकी बालाएं लेने लगी.

दिव्या मौसी : ऐसे और कितने ड्रेस लिए हैं तूने ? देख कर तो लग रहा है बहुत मेहेंगे होंगे. पैसे काम तो नहीं पड़े थे?

राधा : वो पैसे तो इसने लिए hi नहीं जो अपने दिए थे.

दिव्या मौसी : तो इसका मतलब तुमने इसकी साडी जेब खली कर दी?

अमित : अरे क्या मौसी आप भी , ऐसा कुछ नहीं है . वैसे भी बाबा ने और अजय मां जी ने बहुत सरे पैसे दाल रखे हैं मेरे कहते में. कॉलेज एडमिशन क पैसे तो ऐसे hi बच गए थे और अपना जेब खरच भी तो इस्तेमाल नहीं होता. तो फिर इसका इस्तेमाल मैं अपनों पर तो कर hi सकता हूँ न. वैसे भी राधा का भी हक़ है उन पैसों पर.

राधा : देखा माँ , इसकी जेब पर मेरा हक़ है , मैं जो चाहे करूँ. वैसे भी ये सब ड्रेस पेहेन कर मैंने इसके साथ hi तो जाना है.

दिव्या मौसी : बस बस , वो तो रोकेगा नहीं तुझे पर तुम को खुद सोचना चाहिए . चलो अब दोनों बैठो मैं नाश्ता लगाती हूँ.

मौसी ने हमें गरमा गरम परांठे कहिल्यै. नाश्ता करने क बाद हम कॉलेज क लिए निकल गए . हमेशा की तरह राधा मेरे साथ लग कर बैठी थी और उसका हाथ मेरे पेट पर hi था. हम दोनों बातें करते हुए कॉलेज पहुँच गए . पार्किंग में hi मोहित और मीनल मिल गए और हमारे पीछे पीछे hi कल्पना और नेहा दीदी भी आ गए. आज मुझे मेघा से भी मिलना था और ये सब मुझसे नाराज़ न हो इसके लिए इनके साथ भी रहना था. मेघा ने मुझे 11 बजे बुलाया था तो मैंने सोचा क कैंटीन की क्लास क बाद hi जाऊंगा. थोड़ी देर वो मेरा इंतज़ार कर hi लेगी.

दूसरी तरफ सुबह जब कल्पना नेहा को लेने उसके घर गयी तो नेहा ने कार में कल्पना से कल की घटना क बारे में पुछा.

नेहा : कल्पना , कल तुम बहार से क्यों चली गयी थी ? हम सब तुम्हारा अंदर इंतज़ार कर रहे थे और तुम अंदर आने का कह कर बहार से hi चली गयी?

कल्पना : वो वो पापा की कॉल आ गयी थी , उन्हें मुझसे काम था तो मुझे वापिस जाना पड़ा.

नेहा : सच बोल रही हो ?

कल्पना : हह हाँ दीदी मैं झूठ क्यों बोलूंगी? आपको ऐसा क्यों लग रहा है ?

नेहा : वो इस लिए क एक तो तुम अचानक से चली गयी और दूसरा कारन की हालत बता रही थी क कुछ हुआ है . देखो कल्पना मैं तुम्हे अपनी बहिन मानती हूँ और मुझे पता है क तुम भी मुझे बहिन hi मानती हो. तो फिर मुझे सच बताओ. अगर कारन ने कोई बदतमीज़ी की है तो मुझे पता होना चाहिए ताकि ऐसा दोबारा न हो .

कल्पना : जाने दीजिये दीदी , वैसे भी उसे जवाब मिल गया था. ऐसे बात बढ़ाने से क्या फायदा? मैं बात नहीं करना चाहती जिससे आपको भी दुःख पहुंचे और बाकि सब को भी .

नेहा : देख कल्पना, मुझे तुम्हारा सम्मान भी उतना hi ज़रूरी है जितना क अपना. अगर तुम मुझे सच नहीं बताओगी तो कल से मैं तुम्हारे साथ नहीं आउंगी कार में.

कल्पना : अगर आपकी यही मर्ज़ी है तो सुनिए . कल कारन ने मुझे पर्पस किया था . मैंने कई बार ये नोट किया था क वो मुझे दूसरी नज़र से देखते हैं और रोज़ किसी न किसी बहाने से आते हैं. कल आपके अंदर जाते hi वो मुझे रोक कर खड़ा हो गया और मुझसे फ्रेंडशिप करने क लिए कहने लगा. मैंने उन्हें टालने क लिए कह दिया क मेरा बर्फ है. और जब उसने लड़के का नाम पुछा तो मैंने अमित का नाम ले दिया. मुझे लगा था क अमित का नाम सुनते वो पीछे हैट जायेंगे पर वो तो अमित क बारे में भी गलत बोलने लगे. मुझे गुस्सा आ गया ऊपर से उसने मेरा हाथ पकड़ लिया था तो मैंने गुस्से में एक धार दिया. ी थिंक हे इस साइको , जैसे वो अमित क बारे में बोल रहा था वो शायद नफरत करता है अमित से. क्या ऐसा कुछ हुआ है दोनों क बीच जिस वजह से वो ऐसे कर रहा है?

नेहा : क्याआ ??? इतना कुछ हो गया और तूने बताना ठीक नहीं समझा? कारन से मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी. मैं आज hi बात करती हूँ माँ से.

कल्पना : रहने दो दीदी इसी लिए मैं नहीं बता रही थी. छोटी सी बात का इशू बन जायेगा दीदी. और जब अमित को पता चलेगा तो फिर क्या होगा ? मैं नहीं चाहती क उस तक बात पहुंचे.

नेहा : तुझे इस बात की टेंशन है क अमित को बुरा लगेगा , और जो मुझे बुरा लग रहा है? वैसे भी कल को कोई और बात हो गयी तो ? फिर अमित को पता लगा तो ? क्या वो तब नाराज़ नहीं होगा ?

कल्पना : क्या दीदी आप भी, कुछ नहीं होगा. कुछ हुआ तो मैं हूँ न सब ठीक कर लुंगी. वैसे कल क प्रसाद से मुझे नहीं लगता वो दोबारा गलती करेगा. और अमित को कैसे पता चलेगा जब तक उसे कोई बताएगा नहीं ?

नेहा : पर मुझे ये ठीक नहीं लग रहा. मुझे शर्म आ रही है क उसने ऐसा किया. एक भाई गर्व से सर ऊँचा कर रहा है और एक शर्मिंदा कर रहा है.

कल्पना : छोड़िये दीदी आप क्यों दिल पर लेती हैं? अमित है न सर ऊँचा करने क लिए , आप बस उसके बारे में सोचिये .



नेहा : वो hi तो मेरा सच्चा भाई है. वो मुझे बहुत प्यार करता है. काश वो रियल बरोथेर होता मेरा. कारन पता नहीं क्यों ऐसा कर रहा है ? उसे तो अमित क बारे में कुछ गलत नहीं कहना चाहिए काम से काम . तू ठीक कहती है इस बारे में मैं अमित से बात नहीं करुँगी पर कारन से मैं ज़रूर पूछूँगी क उसने ऐसा क्यों किया और अमित क बारे में वो गलत क्यों बोलै. ...
 
भाई आज सारा दिन लिख नहीं पाया और पिछले 2 घंटे से थोड़ा थोड़ा कर क लिख रहा हूँ. अपडेट वैसे तो शार्ट में निपट सकता था पर कुछ अपडेट बिना मसाले क चले गए थे तो इस बार तड़का ज्यादा लगा रहा हूँ. सिर्फ एक hi चीज़ से अपडेट का मज़ा नहीं आएगा इस लिए दूसरे फ्लेवर भी डालने पड़ेंगे. तो अब अपडेट बड़ा hi होगा न . कोशिश करूँगा क पूरा कर सकूँ पर आप सब कल पर hi उम्मीद रखो .
 
अपडेट 143



कैंटीन की गपशप क बाद सब अपनी अपनी क्लास में जाने लगे तो मैंने राधा से कह दिया क मैं काम से बहार जा रहा हूँ अगर टाइम से न आ पाया तो कल्पना क साथ चली जाना.

राधा : कौन से काम जाते रहते हो तुम? स्टडी का क्या ? और मुझे तुम्हारे साथ hi जाना है.

अमित : यार कह रहा हूँ न क आ जाऊंगा पर टाइम ज्यादा भी लग सकता है . अगर न आ पाया तो कल्पना क साथ hi चली जाना . आना तो मैंने घर hi है.

राधा : ाचा ठीक है पर कोशिश करना जल्दी आने की.

राधा को समझने क बाद मैं मोहित को बता कर बहार निकल गया. अभी मैं पार्किंग में hi था क मेघा का फ़ोन आ गया.

मेघा : कहा हो अभी तक पहुंचे नहीं? मैं कब से इंतज़ार कर रही हूँ.

अमित : आ रहा हूँ रस्ते में हूँ. लगता है कुछ ज्यादा hi आग लगी है?

मेघा : पूछो मत क्या हाल है . जल्दी से आ जाओ , आज तुम्हे ऐसे hi नहीं जाने दूंगी . साडी कसार निकलूंगी.

अमित : मैं भी आज तुम्हारी साडी कसार निकल क hi वापिस आऊंगा.

इतना कह कर मैंने फ़ोन बंद किया और मन में सोचा आज इसकी ऐसी चुदाई करूँगा क फिर कभी नाम न ले. मैं बाइक उठा कर निकल गया और रस्ते में कंडोम क साथ वियाग्रा की टेबलेट भी ले ली. आधे घंटे में मैं मेघा क फ्लैट पर पहुँच गया. मैंने बेल्ल बजे तो दरवाज़ा मेघा ने हो खोला. मेघा आज भी मॉडर्न ड्रेस में थी जो उसकी तइस तक hi थी. दरवाज़े से अंदर आते hi उसने दरवाज़ा लॉक कर दिया और मैंने उसकी गांड को दबा दिया .

मेघा : आआह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स जल्दी में हो क्या ?

अमित : जल्दी तो नहीं पर तुम ऐसी भड़कीली ड्रेस में सामने आओगी तो कण्ट्रोल कैसे होगा?

मेघा : कण्ट्रोल करनी की ज़रूरत hi क्या है. मैं भी आज खुल क मज़े लेना चाहती हूँ और तुम्हे भी आज खूब मज़े आने वाले हैं.

अमित : वो कैसे?

मेघा : तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है.

अमित : कैसा सरप्राइज?

मेघा : मैंने कहा था न तुम्हे एक और गिफ्ट में मिलेगी , आज तुम्हारे लिए मैं अपनी खास दोस्त को लती हूँ. वो भी मेरी तरह बहुत गरम है पर वो बहार कहीं नहीं जाती तो मैंने सोचा उसका भी कल्याण कर hi दूँ. उसे खुश कर दिया तो जो कहोगे मिलेगा.

अमित : कौन है वो?

मेघा : खुद hi देख लेना , यहीं पर है अभी सामने आ जाएगी. तुम बताओ कुछ लो गए पहले ? म्हणत जो करनी है फिर.

अमित : ले आओ कुछ भी.

मेघा : जूस लती हूँ तुम्हारे लिए ड्रिंक तो तुम लेते नहीं.

इतना कह कर मेघा अपनी गांड मटकती हुई किचन में चली गयी और मैंने अपनी जेब से वियाग्रा टेबलेट निकल कर मुँह में रख ली. मेघा मेरे लिए जूस ले आयी और मैंने जूस क साथ टेबलेट निगल ली.

मेघा : और कुछ लोगे ?

अमित : बस ये जूस तो गया अब तुम्हारा जूस निकलता हूँ.

मेघा : मैं भी तुम्हारा जूस पियूँगी. अपनी फ्रेंड को बुलाऊँ ?

अमित : मेरी जान पहले मेरा लैंड तो चूस कर खड़ा करो. तुम्हारी फ्रेंड को तभी तो दर्शन होंगे जिसके लिए वो आयी है.

मेघा : सही कहा .

इतना कह कर मेघा घुटनो क बल ज़मीन पर बैठ गयी और मेरी ज़िप खोल कर अंदर हाथ दाल कर उसने मेरा लैंड बहार निकल लिया . लैंड को देखते hi बिना देरी किये वो भूखी बिल्ली की तरह झपट पड़ी और लैंड मुँह में ले लिया . लैंड अभी सोया हुआ था मगर उसके मुँह में जाते hi उसमे तनाव आने लगा. मेघा किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह लैंड को मुँह में अंदर तक ले कर चूस रही थी और जल्द hi लैंड पूरे तनाव में आ गया. अब मेघा की हलक में लैंड लगने लगा पर फिर भी वो उसे पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी मगर जा नहीं प् रहा था . मैंने उसकी मदद क लिए उसका सर पकड़ कर दबा दिया जिससे लैंड उसकी हलक में फास गया और उसकी सांस उखाड़ने लगी . कुछ सेकंड दबा कर रखने क बाद मैंने उसे छोड़ तो वो ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी . उसकी आँखों से पानी बहने लगा था और मुँह लाल हो गया था.

मेघा : अल्हणन अखुन्णन अल्हणन ुह्ह्ह्हह्ह ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मार डालोगे ाखुउन्नन अखुन्णन क्या ?

अमित : मरने hi तो आया हूँ , आगे पीछे दोनों तरफ से.

मेघा ने फिर से लैंड मुँह में लिया और कुछ देर चूसने क बाद बहार निकल दिया. मेघा कड़ी हो कर अंदर की तरफ जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी गॉड में खिंच लिया .

मेघा : आअह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो ? मैं अपनी फ्रेंड को बुलाने जा रही थी .

अमित : ऐसे नहीं , अपने कपडे उतरो पहले .

मेघा ने मेरी बात मानते हुए एक झटके में अपना ओने पीेछे ड्रेस उतर दिया. ड्रेस क निचे उसने डिज़ाइनर ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी. पेंटी तो इतनी महीन थी क पीछे से गांड क अंदर hi घुसी हुई थी. मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मरे और ज़ोर से मसल दिया .

मेघा : आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्क्स तुम्हे कुछ ज्यादा hi पसंद है ये .

अमित : तुम्हारी ये गांड है hi इतनी मस्त क रहा नहीं जाता .

मेघा : मर लेना इसे भी. जैसे चाहो करो कक्कक्कक्कक्स आज तो दो दो छूट हैं तुम्हारे पास और गांड भी. पूरा निचोड़ दूंगी तुम्हे आज .

अमित : ये तो वक़्त hi बताएगा तुम मुझे निचोड़ती हो या मैं तुम्हारी चीखने निकलता हूँ.

मेघा : लगता है काफी जोह में हो फिर तो मज़ा आएगा. मुझे तो वाइल्ड चुदाई hi पसंद है.

मैंने मेघा की ब्रा को खिंच कर निकल दिया अब वो सिर्फ पेंटी में थी और उसके बड़े बड़े 38 साइज क बूब पाणिनि गुब्बारों की तरह नाचने लगे. मेघा गांड मटकती हुई अपनी फ्रेंड को बुलाने चली गयी और मैंने भी अपनी पेण्ट अंडरवियर निकल कर साइड में रख दिया और साथ hi फ़ोन को साइलेंट कर दिया .

कुछ hi पलों में मेघा अपने साथ एक लेडी को लेकर वापिस मेरे सामने आ गयी . ये औरत भी देखने में अछि थी . उम्र को 40-45 क बीच की होगी और गोरा रैंड अचे नैन नक्श . पेट बिलकुल भी बहार नहीं था. बूब्स भी मेघा जितने और गांड भी लगभग 40 होगी. वो इस समय एक वाइट लॉन्ग स्कर्ट में थी और ऊपर से डिज़ाइनर कमीज वो भी वाइट में. मैंने उसे सर से पाऊँ तक देखा और उसने भी मुझे देख मगर अगले hi पल वो जैसे शर्मा गयी और मेघा को देखने लगी.

मेघा : यही है मेरा हीरो, अमित . ऐसी सर्विस करता है क पूछो मत. आज तुम्हारी भी अचे से सर्विस कर देगा. यकीन मनो तुम्हारी ऐसी चुदाई न कभी हुई होगी न होगी . अमित ये है मेरी सबसे खास सहेली लेना . बहुत प्यासी है बेचारी आज इसे बताओ क असली चुदाई होती क्या है.

लेना थोड़ी शर्मा रही थी . मेघा की सहेली और शर्माना ? ये बात समझ में नहीं आयी पर जो भी था वो रज़ामंद लग रही थी यानि रुपाली की तरह वो ज़बरदस्ती नहीं आयी थी. अब देखने अछि लग रही थी और खुद तैयार भी थी तो मैंने भी सोच लिया क इसका भी कल्याण कर hi दिया जाये.

अमित : अगर इसे सच में चुदाई का मज़ा लेना है तो ये दूर क्यों कड़ी है ? ज़रा इसे बताओ क इसे क्या करना है.

मेघा : आओ लेना शर्माने से कुछ नहीं होगा . वैसे भी यहाँ और कौन है हमारे सिवा?

मेघा उसका हाथ पकड़ कर मेरे पास आ गयी . लेना अभी भी थोड़ी झिझक रही थी तो मेघा ने उसकी शर्म दूर करने क लिए घुटनो क बैठ कर मेरा लैंड अपने मुँह में ले लिया. लेना ने जैसे मेघा को मेरे लैंड क साथ मज़े लेते देखा तो लैंड को देख कर उसकी ऑंखें बड़ी बड़ी हो गयी. मैंने भी देख लिया क वो लैंड को देख कर हैरान हो रही है. अब वो मेरे पास में hi कड़ी थी और मुझ पर भी मेघा की अदाओं और टेबलेट का असर हो रहा था तो मैंने भी हाथ आगे बड़ा कर उसकी स्कर्ट को धीरे धीरे ऊपर उठाना शुरू कर दिया. मेरी इस हरकत पर वो हिल गयी और मेरी तरफ देखने लगी. मैंने अपना हाथ नहीं रोका और एक तरफ से उसकी स्कर्ट घुटनो से ऊपर तक उठा दी. स्कर्ट एक तरफ से ऊपर उठते hi उसकी गोरी टाँगें नज़र आने लगी . मैंने दूसरा हाथ उसकी नंगी जांघों पर रख दिया. लेना क मुँह से सिसकी निकल गयी.

लेना : ccccccccccccc

मैं लेना की जांघों को मसलते हुए अपना हाथ उसके नरम कूल्हों पर ले गया. लेना ऑंखें बंद किये सिसकियाँ रोकने की कोशिश कर रही थी . उसके नरम और बड़े नितम्ब छूने भर से मुझे मज़ा मिल रहा था . मेघा ज़ोर शोर से मेरे लैंड को मुँह में ले कर चूस रही थी और मैं लेना को मसल रहा था. लेना को खिंच कर मैंने अपने ऊपर गिराया तो वो मेरे ऊपर गिरती हुई सोफे पर आ गयी. मैंने उसकी गर्दन क पीछे हाथ दाल कर उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए. पहले तो उसने अपने होंठ दबा लिए पर मैंने भी उसको चार्ज करने क लिए अपना एक हाथ उसके स्तनों पर रख दिया. उसके बूब्स नरम और मुलायम थे. मैंने एक हाथ से उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया . फिर भी जब लेना ने किश करना शुरू नहीं किया तो मैंने उसके चुचों को ज़ोर से दबा दिया . लेना को दर्द हुआ और उसके होंठ खुल गए . मैंने उसके नीचे वाले होंठ को अपने होंठों में जकड लिया और चूसने लगा. लेना भी ऑंखें बंद किये बस मुझे ऐसा करने दे रही थी. फिर धीरे धीरे वो भी मेरा साथ देने लगी . बरी बरी से मैंने उसके दोनों होंठ चूसे और फिर अपनी जीभ उसके मुँह में दाल दी. मेरे इस तरह करने से अब वो गरम होने लगी थी और अब वो भी मेरी जीभ चूसने लगी. इधर मेघा लॉलीपॉप की तरह मेरा लैंड चूस रही थी और मुँह क अंदर से hi अपनी ज़ुबान मेरे लैंड क छेद पर लगा रही थी. साथ hi वो मेरे अंडकोष भी सेहला रही थी. वियाग्रा का असर मेरे लैंड क साथ दिमाग पर भी होने लगा था. लैंड की नसें फूल गयी थी और दिमाग की सिकुड़ गयी थी. मैं कुछ सोचने की हालत से बहार होता जा रहा था.

मैंने मेघा को अपने लैंड से हटाया और लेना को सोफे पर गिरते हुए उसके पाऊँ उठा दिए. पाऊँ ऊपर होने से स्कर्ट कमर तक चढ़ गयी और उसकी गोरी गोरी नंगी टंगे मेरे सामने आ गयी . उसकी जांघें मांसल थी जिन्हे मैं मसलने लगा . मैंने उसकी वाइट पेंटी को खिंच कर निकल दिया. पेंटी उतारते hi उसकी छूट मेरे सामने आ गयी . छूट पर काळा बल थे जो इस बात का सबूत थे क वो अपनी छूट का खास ध्यान नहीं रखती या फिर उसकी छूट का ध्यान रखने वाला कोई है नहीं. छूट क होंठ कुछ ज्यादा खुले नहीं थे मतलब क उसकी चुदाई ज्यादा नहीं होती होगी. मैंने उसकी छूट क ऊपर से बल साइड कर क छूट क होंठ खोले तो अंदर से गुलाबी पैन नज़र आने लगा. मैंने एक साथ दो उंगलियां उसकी छूट में दाल दी

लेना : कक्कक्क्स उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्कक्स

लेना शायद बहुत छुडासी थी. छूट में उंगली जाने से hi वो तड़पने लगी थी. मैंने उसके चेहरे को देखा तो वो बस ऑंखें बंद किये अपने बूब्स खुद hi मसल रही थी. मैंने मेघा क बल पकड़ कर उसका सर लेना की जांघों में दे दिया और उसका मुँह लेना की छूट पर लगा दिया. मेघा मेरा इशारा समझ गयी और लेना की छूट चाटने लगी.

लेना : आआह्ह्ह्हह्ह ककक आआह्ह्ह्हह उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स

मेघा क छूट चाटने से लेना मचलने लगी . उसे देख कर लग रहा था क अभी वो पानी निकल देगी . मैं मेघा क पीछे आया , वो अपने घुटनो पर झुकी हुई लेना की छूट चाट रही थी जिससे उसकी गांड बहार को निकली हुई थी. पेंटी तो पहले hi गांड क अंदर घुसी पड़ी थी. मैंने उसके दोनों चूतड़ मसलते हुए उसकी पेंटी खिंच कर उसके घुटनो पर कर दी और अपने लैंड को उसकी छूट पर सेट कर क रगड़ने लगा.

मेघा : उम्म्म्म कक्कक्क्स सरूप सर्र्रउपपप सारररऊऊप्प्प उम्म्म आआह्ह्ह्ह फ़क में डाल दो इसे मेरी छूट में प्लीज फ़क में उम्म्म साररूअप्प साररूपप्प्प.

मेघा छूट चाट ते हुए मुझे छोड़ने को कह रही थी . मैंने भी लैंड का सूपड़ा छूट में फसा कर उसके कन्धों को दोनों हाथों से दबाते हुए ज़ोरदार धक्का मारा और लैंड एक hi बार में जड़ तक छूट में जा घुसा.

मेघा : aaaaaaiiiiiiiiiii मार दियाआआ मादरचोद aaaaaaaaaaaa . फट्ट्ट्ट गईइइइइइइइ आआआआ

मैंने मेघा क दर्द की परवाह न करते हुए सुपडे तक लैंड बहार खिंचा और फिर से जड़ तक पेल दिया .

मेघा : आयआईइइइइइइइ आआआह्ह्ह्ह मार डालोगे क्या आआआअह्ह्ह्ह आराम से करो अअअअअअराम से

अमित : क्यों चैनल अब क्या हुआ तुझे तो ऐसी hi चुदाई चाहिए थी न ले और ले

इतना कह कर मैंने फिर से ज़ोरदार धक्का मारा और मेघा फिर से चिल्लाई . लेना ऑंखें खोल कर मेघा को चिल्लाते हुए देख रही थी और कभी मुझे . मैंने मेघा क कंधे पकडे हुए ज़ोरदार धक्के मरने शुरू कर दिए और मेघा लगातार चीखती रही. मैं जनता था उसे इतना दर्द नहीं हो रहा जितना वो दिखा रही है. मैंने मेघा का सर फिर से लेना की छूट पर लगा दिया और उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मरते हुए उसकी चुदाई करने लगा. मेरे धक्कों से मेघा पूरी हिल रही थी जिससे उसकी जीभ लेना की छूट में अंदर बहार हो रही थी साथ hi उसका मुँह छूट पर बार बार टकरा रहा था. लेना को भी चुदाई का मज़ा आने लगा इस तरह और जल्दी hi उसका पानी मेघा क मुँह में निकलने लगा.

लेना : आआह्ह्ह्ह ककक आअह्ह्ह कक्कक्स आअह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ आआह्ह्ह्हह उम्म्म्म

लेना अपने बूब्स खुद hi मसलती हुई झटके कहती अब ठंडी होने लगी पर मैं बिना रुके मेघा को पेल रहा था. मैंने मेघा की गांड पर थप्पड़ मर कर अपना लैंड बहार निकल लिया उसे लेना क ऊपर से हटाया. लेना मदहोश होकर ऑंखें बंद किये पड़ी थी . मैंने उसकी टाँगें फैला कर बीच में पोजीशन ली और छूट पर लैंड को रगड़ा. लेना अभी भी ऑंखें बंद किये पड़ी थी. मैंने छूट में लैंड का सूपड़ा फसाया और धक्का मर दिया . छूट लैंड क मुकाबले टाइट थी पर मेरा लैंड छूट को खोलता हुआ 4 इंच तक अंदर घुस गया. छूट अभी झड़ी थी तो अंदर से गीली थी इस लिए लैंड को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई पर लेना की ऑंखें ऐसे खुल गयी जैसे लैंड की जगह घुसा दिया हो.

लेना : आअह्ह्ह्हह मायआ आराम से करो आआह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है कक्कक्कक्स

अमित : इसी दर्द में तो मज़ा आएगा डार्लिंग . तुम्हारी छूट में आज क बाद दर्द नहीं होगा . इसे हमेशा क लिए खोल दूंगा मैं.

इतना कह कर मैंने हल्का सा लैंड पीछे खींचा और एक और दमदार धक्का पेल दिया. 7 इंच तक लैंड अब छूट में समां चूका था . शायद लेना क अंदर इतना मोटा लैंड पहले नहीं गया था . इस लिए उसे बेहद दर्द हो रहा था. मुझे अपने लैंड पर उसकी छूट की कसावट महसूस हो रही थी.

लेना : आआआहहहहहहह प्लीज रुक जाओ आआह्ह्ह्हह्ह रुक जाओ मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज आआह्ह्ह्हह मेघा तुम hi कहो न इसे आअह्ह्ह्ह थोड़ी देर रुकने क लिए .

अमित : ये क्या कहेगी ये तो मेरी रंडी है . चिंता मत करो तुम्हे मरने नहीं दूंगा बस थोड़ी देर में तू खुद hi मुझे ज़ोर से करने को कहोगी.

मैंने अपने हाथ लेना क बूब्स पर रखे जो अभी भी कपड़ों में कैद थे. उसके बूब्स दबाते हुए मैंने लैंड को थोड़ा सा पीछे कर क फिर से ज़ोरदार आखिरी धक्का मारा और पूरा लैंड लेना की छूट को चीरता हुआ जड़ तक समां गया. ये धक्का लेना की छूट की कैपेसिटी से कहीं ज्यादा ताकतवर था क्यूंकि उसकी छूट इतना कभी नहीं खुली थी. छूट ने लैंड को पूरी तरह जकड लिया था . स्पेशलय आगे वाला हिस्सा तो जैसे पाइप में फास गया था ऐसा लग रहा था.

लेना : आआआह्ह्ह्हह्ह मारा डाला साले आआह्ह्ह्ह बाप का माल समझा है क्याआ ाआईईईई मेरी छूट आआअह्ह्ह्हह.

लेना दर्द क मरे छत पता रही थी. और मुझे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी. पर मैं कहा उसके हटाए हटने वाला था. मैं कुछ देर रुक कर उसके चुके मसलता रहा जिससे उसका कराहना कुछ काम हुआ . मेघा भी अब हमारे करीब आयी तो मैंने उसे लेना क ऊपर झुका दिया. मेघा ने देख लिया था क मैंने पूरा लैंड घुसा दिया है.

मेघा : बस बस लेना हो गया , देखो पूरा चला गया है अब तुम्हे सिर्फ मज़ा आएगा.

लेना : मज़ाआ ??? साली दर्द से मेरी जान निकल रही है और तू मज़े की बात कर रही है आआआहहहहहहह लगता है अपने पाऊँ पर नहीं जा पाऊँगी मैं वापिस आआअह्हह्ह्ह्ह

लेना क पाऊँ मैंने कन्धों पर रखे और अपने लैंड को हलके हलके हिलना शुरू कर दिया. मेघा भी अब लेना क बूब्स मसलती हुई उसके होंठों पर किश करने लगी . मैंने मेघा की छूट में 2 उंगलियां घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. साथ hi मैं लेना की छूट में लैंड को अंदर बहार कर रहा था. मैं एक साथ दोनों को छोड़ रहा था . थोड़ी देर में hi छूट में लैंड की जगह बन गयी और अब लैंड रवानी से छूट में जाने लगा. मैं लेना की गोरी चिकनी टांगों को चूमता हुआ उसकी छूट में लैंड पेल रहा था और मेघा लेना क होंठ चुस्ती हुई अपनी छूट में मेरी उँगलियों का मज़ा ले रही थी . अब मैंने पोजीशन बदलने का सोचा और लेना की छूट से लैंड बहार निकल लिया .

मेघा को मैंने लेना क ऊपर से हटाया और लेना को खड़ा कर दिया. लेना की टाँगे कम्पनी लगी तो वो फिर से बैठ गयी .

लेना : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स मुझसे तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा , जलन हो रही है कक्कक्क्स

अमित : अभी सब ठीक हो जायेगा डार्लिंग ज़रा होंसला रखो.

मैंने उसकी कमीज को किनारे से पकड़ा और उतरने लगा . लेना ने अपने हाथ उठाकर मेरी मादा की और अगले hi पल उसकी कमीज फर्श पर पड़ी थी. लेना क वाइट ब्रा में कैद दूध से गोर चूचे कमल क लग रहे थे. मैंने उसके बूब्स दोनों हाथों में पकड़ कर मसलने शुरू कर दिए .

लेना : आअह्ह्ह्हह कक्कक्स आराम से करो दर्द होता है कक्कक्स

मैंने ब्रा में से चूचे खिंच कर बहार निकल लिए. गोर गोर चूचूं पर गुलाबी निप्पल बहुत बढ़िया लग रहे थे. लेना क बूब्स अब कुछ टाइट हो चुके थे और निप्पल भी अकड़ चुके थे. मैंने उसके एक निप्पल को अपने होंठों में पकड़ लिया और दूसरे को अपने अंगूठे से दबाने लगा. इतने में मेघा फिर से मेरा लैंड चूसने बैठ गयी. लेना को अब मज़ा आ रहा था और वो मेरा मुँह अपनी छाती पर दबा रही थी . उसने खुद hi अपनी ब्रा को खोल कर निकल दिया . अब वो ऊपर से नंगी थी . जब की मैंने अभी तक T-shirt नहीं उतरी थी . लेना ने मेरी T-shirt को किनारे से पकड़ कर उतरना शुरू किया और मैंने भी T-shirt को निकल दिया. मेरी छोड़ी छाती और मजबूत कंधे देख कर लेना की आँखों की चमक बाद गयी और वो मेरी छाती पर अपने हाथ चला कर मेरी ताकत का अंदाज़ा लगाने लगी . मैंने लेना क होंठों पर फिर से किश की और फिर उसके बूब्स बरी बरी से चूसने लगा. लेना अब मस्त हो चुकी थी . मैंने कुछ देर उसके बूब्स चूसे और फिर उसकी स्कर्ट को उसकी टांगों से निकल कर उसे भी पूरा नंगा कर दिया. अब हम तीनो hi पूरी तरह नंगे थे. मैंने लेना को खड़ा किया और सोफे की बच साइड ले कर सोफे पर झुका दिया . ऐसा मैंने इस लिए किया क वो अपने पैरों पर कड़ी नहीं रह सकती थी ज्यादा देर. मैंने लेना को झुका कर उसकी छूट पर लैंड सेट लिया और ज़ोरदार धक्का पेल दिया . एक बार फिर लेना कराह उठी हालाँकि लैंड अभी पूरा नहीं गया था. मैंने उसकी कमर को थम कर एक और धक्का मर कर पूरा लैंड अंदर पेल दिया . लेना फिर से करहि मगर जल्दी hi वो मेरे धक्कों से मस्त होने लगी. मेघा उसके सामने hi सोफे पर लेट कर अपनी छूट के उंगली करने लगी. मैं लेना को ताबड़तोड़ धक्के पेलता हुआ उसके लटक रहे दूध मसल रहा था. लेना अब मज़े में सिसकियाँ लेने लगी और मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

लेना : उनममम आआअह्ह्ह्हह हममममुफफ्फ आआअह्ह्ह्ह हम्म्म्म ऐसे hi करो आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आज तक इतना मज़ा कभी नहीं मिला आआह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्हह तुम सही थी मेघा ये सच मच घोडा hi है हम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ ऐसे hi करो कक्कक्स ऐसा लग रहा है छूट में मूसल दाल रखा है . अह्ह्ह्हम्म आअह्ह्ह्हम्म्म्म मेरे पति ने कभी मुझे इतना मज़ा नहीं दिया जितना तुम दे रहे हो कक्कक्स उम्म्म्म

मेरे तेज़ धक्कों से लेना की पूरी बॉडी हिल रही थी और उसके चूतड़ तो ऐसे थिरक रहे थे जैसे वाइब्रेशन पर लगे हो. लेना की गांड देख कर मेरा मन उसकी गांड मरने को होने लगा. मैंने अपनी उंगली उसकी गांड में डाली तो गांड का सुराख़ कुछ खुला हुआ लग रहा था. मैंने उसकी गांड में उंगली अंदर बहार करनी शुरू की तो वो उसकी सिसकियाँ और भी तेज़ हो गयी.

लेना : आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्क्स आअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो आअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्ह

इसके साथ hi लेना झड़ने लगी और उसकी टंगे कम्पनी लगी . मुझे लैंड पर उसकी छूट से गरम पानी का शावर महसूस हो रहा था . शायद गांड को छेड़ने से वो ज्यादा एक्साइट होती होगी इसी लिए एक डैम से पानी निकल गया उसका. लेना से खड़े होना मुश्किल हो रहा था. मैंने उसे धक्का दे कर पूरा सोफे क साथ चिपका दिया और लैंड को छूट से निकल कर उसकी गांड में डालने लगा.

लेना : ये क्या कर रहे आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

लेना की बात ख़तम होने से पहले hi उसके मुँह से चीख निकल गयी क्यूंकि मैंने लैंड को उसकी गांड में घुसा दिया था. लैंड तो पहले hi उसके छूट रास से चिकना था और गांड पहले hi खुली हुई थिंक्स लिए ज्यादा मुश्किल न हुई . मगर लैंड क मुकाबले गांड थी बहुत टाइट इस लिए मुझे लैंड किसी शिकंजे दे दस्ता हुआ लग रहा था. अभी 2 इंच hi लैंड अंदर गया था क लेना चीखने लगी पर मैं रुका नहीं और लगातार ज़ोर लगते हुए लैंड को अंदर पुश करता गया . करीब 6 इंच तक लैंड सरक गया मगर इतने में hi लेना की बुरी हालत हो गयी थी.

लेना : आआह्ह्ह्हह्ह बहार निकालो आअह्हह्ह्ह्ह आइइइइइइ मैं नहीं ले सकती तुम्हारा इतना बड़ा प्लीज बहार निकल लो आआह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट मार्लो जितनी चाहे पर वहां से निकल लो आआअह्ह्ह्हह ाआईईईई माआआआ

मैंने उसकी परवाह न करते हुए लैंड को पीछे खिंचा और पूरा अंदर घुसा दिया. लेना ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी और मेघा लेना की चीख सुन कर इतनी एक्साइट हो गयी क अपनी कमर उठा उठा कर उंगली करते हुए उसने अपना पानी निकल दिया . पूरा लैंड अंदर घुसने क बाद मैं लेना क ऊपर झुक कर उसकी पीठ पर चूमने किश करने लगा और साथ hi उसके बूब्स दबाने लगा. लेना की गांड में मेरा लैंड इतना टाइट फिट हो गया था क हिलने की भी जगह नहीं थी और वो लगातार कराह रही थी.

लेना : बहुत दर्द हो रहा है बहार निकल लो आआह्ह्ह प्लीज बहार निकल लो इसे.

अमित : बस हो गया मेरी रानी अब तो पूरा जा चूका है. और तुम तो ऐसे नखरा कर रही हो जैसे पहली बार ले रही हो गांड में. तुम्हारी गांड तो पहले hi खुली हुई लग रही है.

लेना : मेरे भड़वे पति ने hi मेरी गांड मर मर क खोली है आआह्ह्ह्हह तुम्हारा बहुत बड़ा है प्लीज मुझ पर थोड़ा रेशम करो उफ्फ्फफ्फ्फ़ आआह्ह्ह

अमित : बस अब तो गया जितना दर्द होना था अब तुम्हे मज़ा hi आएगा . बस थोड़ा बर्दाश्त कर लो.

मैंने धीरे धीरे अपना लैंड आधा बहार निकला और उतने से hi हलके धक्के मरने लगा. कुछ देर लेना कराहती रही पर फिर उसकी कराहटें सिसकियों में बदल गयी . मैंने भी अब अपना लैंड सुपडे तक बहार लेकर अंदर करना शुरू कर दिया था. जब लेना ने अपनी कमर हिलायी तो मैं समझ गया अब लाइन क्लियर है और वो भी मज़ा लेना चाहती है तो मैंने भी अपनी स्पीड बड़ा दी. अब लेना खुद अपनी गांड पीछे को धकेलने लगी थी.

लेना : मार मेरी गांड मार ऐसे hi ककक ुकम्म्म और ज़ोर से मर आअह्ह्ह्हह तू hi सच माँ मर्द है उस भड़वे को तो बस अपना प् ी निकलना अत है कक्कक्स आआअह्ह्ह्हह और तेज़ कर न आआह्ह्ह्हह्ह आज मिला है असली मज़ा .

अमित : तुम्हारी गांड बहुत मज़ेदार है रानी मज़ा आ रहा है मरने में

लेना : ऐसे hi मरते रहो ुह्ह्हह्ह उम्म्म्म ऐसे hi मारो जब मेरी गांड मरने का दिल करे बुला लेना मैं आ जाउंगी ह्म्मम्म्म्म ह्म्म्मम्म आआह्ह्ह्हह्ह मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गयी कक्कक्कक्स ऐसे hi करो

मैंने लेना की धमाकेदार चुदाई कर रहा था और वो भी मज़े से छुड़वा रही थी. साथ में लेना अपनी छूट में खुद hi उंगली भी कर रही थी और एक बार फिर से उसकी छूट पानी बहाने लगी. इतने मेघा हमारे पास आ कर घुटनो के बल बैठ कर मेरी कमर पर हाथ चला रही थी. मैंने लेना की गांड से लैंड बहार निकला और मेघा को लेना क साथ सोफे पर झुकाते हुए उसकी गांड में भी लैंड घुसा दिया. मेघा ज़ोर से चीखी पर थोड़ी देर में hi वो मज़े से सिसकने लगी. मैं मेघा क चूतड़ों पर ज़ोर ज़ोर से थप्पड़ मरता हुआ उसकी गांड मर रहा था और अपनी छूट सेहला रही थी.

मेघा : आआह्ह्ह्हह आआएकी छोडो मुझे क्या कर रहे हो मर डालोगे क्या aaaaaaaaaa हटो जानवर मत बनो ाआईईई माआआ बचाओ मुझे

अमित : अब क्या हुआ रंडी तुझे तो ऐसी hi चुदाई पसंद है न ले और ले.

मैं मेघा पर बिना कोई तरस किये धुआंधार चुदाई कर रहा था. इतनी ज़ोरदार चुदाई से उसकी छूट ने पानी बहाना शुरू कर दिया तो मैंने उसे वहीँ ज़मीन पर उल्टा लिया कर उसकी गांड में लैंड दाल कर धक्के मरने लगा. मेघा को ज़मीन पर रगड़ लगने से दर्द होने लगा पर मैं कहा सुनने वाला था मैं तो बस एक hi धुन में लगा था . मुझे अपना पानी निकलने क सिवा और कुछ नज़र नहीं आ रहा था . लेना तो पहले hi पास्ट पड़ी हुई थी उसकी हिम्मत नहीं हुई पास आ ने की और मैं मेघ की चटनी बनता गया. करीब एक घंटे तक मैंने दोनों को छोड़ा और फिर जब मेरा पानी निकलने का टाइम आया तो मैंने मेघा की हलक में लैंड घुसा कर सारा पानी उसके गले में उतर दिया . मेघा तो दर्द और दर्दनाक चुदाई से कराह रही थी . मैंने कुछ देर रेस्ट करने क बाद फ्रेश हो कर अपने कपडे पहने और दोनों को ऐसे hi छोड़ कर निकल गया.

कॉलेज की छुट्टी का टाइम तो बीत चूका था इस लिए सीधा दिव्या मौसी क घर को hi चला गया. रस्ते में अब मैं इस बात पर सोच में था क गोली क असर में मैंने कुछ ज्यादा तो नहीं कर दिया पर फिर सोचा मेघा क लिए ये ज़रूरी भी था शायद अब वो मुझे दोबारा परेशां न करे. मैं घर पहुंचा तो पहले hi राधा ने दरवाज़ा खोल दिया. मैं जैसे hi उसके पास पहुंचा तो वो मुँह फुला कर अंदर चली गयी. मैं समझ गया वो मेरे लेट आने से नाराज़ है.

दिव्या मौसी : आ गए बीटा ? कहाँ रह गए थे? चल आ बैठ मैं खाना लगाती हूँ.

अमित : आप ने खा लिया खाना मौसी ?

दिव्या मौसी : बीटा भूखा हो तो माँ कैसे खा सकती है? और इस महारानी ने भी नहीं खाया है. नाराज़ है तुमसे .

इतना कह कर मौसी किचन में चली गयी और मैं राधा क पास.

अमित : खाना क्यों नहीं खाया तुमने ?

राधा : मुझे भूख नहीं है .

अमित : भूख क्यों नहीं है ? ी ऍम सॉरी , मुझे पता है तुम मेरे लेट आने से नाराज़ हो. मैं क्या करता ? वहां देर हो गयी मुझे.

राधा : मैंने तुम्हे कितने फ़ोन किये तुमने फ़ोन तक नहीं उठाया मेरा . इतना भी क्या बिजी थे

मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकला और देख राधा क बहुत सरे मिस कॉल थे. मैंने फ़ोन साइलेंट किया था और वापिस ृंगेर ों करना भूल गया.

अमित : ओह सॉरी मैं भूल hi गया , वहां फ़ोन साइलेंट किया था न. ाचा देखो गुस्सा छोडो और साथ में खाना कहते हैं.

राधा : मुझे भूख नहीं है.

अमित : तो ठीक है मैं भी खाना नहीं खाऊंगा.

राधा : कैसे नहीं खाओगे ? मैं भी देखती हूँ कैसे नहीं कहते.

दिव्या मौसी : कौन नहीं खायेगा? चुपचाप इधर बैठो दोनों और खाना खाओ.

दिव्या मौसी ने खाना टेबल पर लगते हुए कहा. और मेरे साथ राधा भी टेबल पर आ गयी. मेरे बैठते hi राधा ने खाने की प्लेट मेरे आगे रख दी.

राधा : चलो खाना शुरू करो .

दिव्या मौसी : है है है अभी कैसे गुस्से में थी क बात नहीं करेगी और अब खाना खिला रही है.

राधा : तो क्या भूखा रखना चाहती हैं आप इसे ? चलो तुम खाना खाओ देख क्या रहे हो.

मुझे राधा को इस तरह करते देख कर अंदर से हंसी आ रही थी. अभी वो गुस्से में कुछ कह रही थी और अभी खुद ज़बरदस्ती मुझे खाना खिला रही थी. मैंने खाना शुरू किया तो राधा भी साथ वाली चेयर और बैठ कर खाना खाने लगी जबकि दिव्या मौसी भी राधा को देख कर है रही थी . खाना खाने क बाद राधा अपने कमरे में चली गयी और मैं भी अपने कमरे में आ गया . दिव्या मौसी किचन में चली गयी बर्तन साफ़ करने . मैंने कपडे चेंज किये और राधा क कमरे में चला गया . राधा बीएड पर लेती हुई थी .

अमित : तो राजकुमारी जी नाराज़ हैं मुझसे.

राधा : हहहहह

अमित : ओह्ह्ह तो मैडम अब बात भी नहीं करना चाहती . ठीक है अगर तुम मुझसे बात hi नहीं करना चाहती तो मैं चला जाता हूँ.

मैं इतना कह कर पीछे मुड़ने लगा था क राधा ने जल्दी से मेरा हाथ पकड़ लिया.

राधा : ख़बरदार जो जाने की बात की तो. एक तो खुद गुस्सा दिलाते हो ऊपर से धमकी देते हो चले जाने की . क्या मुझे नाराज़ होने का भी हक़ नहीं ? मानाने की बजाये तुम ऐसे मुँह मोड़ रहे हो.

मैंने राधा को देखा तो ऐसे लग रहा था क अभी रो देगी. उसकी आँखों से एक आंसू बहार आया तो मुझसे सहा नहीं गया. मैंने उसकी आंख से वो आंसू साफ करते हुए कहा.

अमित : ये क्या राधा ? तुम .... मैं तो मज़ाक कर रहा था. मैं भला तुम्हे छोड़ कर जा सकता हूँ?

राधा : तो अभी क्या कह रहे थे? कोई भी हमारे साथ नहीं रहता , कोई भी नहीं . और अब तुम भी ऐसा कह रहे हो .

अमित : ी ऍम सॉरी राधा मुझे माफ़ कर दो. मैं तो बस मज़ाक कर रहा था. मुझे नहीं पता था तुम ऐसे दुखी हो जाओगी . तुम्हे पता है न मैं तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं देख सकता. मेरी hi गलती है मैंने पहले तुम्हे नाराज़ किया और मानाने की बजाये फिर से तुम्हे नाराज़ कर दिया . प्लीज माफ़ कर दो मुझे . तुम जो चाहे सजा देदो मुझे पर नाराज़ मत हो. ये लो मैं खुद hi कान पकड़ लेता हूँ.

मैं अपने दोनों कण पकड़ लिए पर राधा अभी भी वैसे hi थी . फिर मैंने कण पकड़े हुए उठक बैठक लगनी शुरू कर दी.

अमित : एक दो तीन चार पांच .......

मैं कान पकडे उठक बैठक करता रहा . तभी राधा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उसने आगे बाद कर मेरे हाथ पकड़ लिए.

राधा : बस करो अब, पहले ऐसी बातें करते hi क्यों हो?

अमित : गलती हो गयी , वो मज़ाक मज़ाक में गलत बोल गया . अब ऐसा नहीं कहूंगा दुबारा. तुम नाराज़ तो नहीं हो न अब?

राधा : तुमसे नाराज़ रह कहाँ सकती हूँ मैं? पर तुम्हे ऐसे hi नहीं छोड़ने वाली मैं.

अमित : चलो आज शाम को फिर से शॉपिंग करने चलते हैं तैयार रहना.

राधा : स्माइल ) अभी तो शोप्पिंग करवाई है तुमने अब फिर से ?

अमित : तो क्या हुआ? वैसे भी पैसे मैं तो खर्च कर नहीं पता , काम से काम तुम hi खर्च कर लो.

राधा : कई ज़रूरत नहीं , पैसे संभल कर भी रखना चाहिए . बुरे वक़्त क लिए. अभी तुम आराम करो फिर जाना भी है तुमने स्टेडियम में. शाम को देखते हैं क्या करना है .

अमित : अब नाराज़ तो नहीं हो न ?

राधा : स्माइल ) अब जाओ भी , जाकर आराम करो.

मैंने राधा क कमरे से बहार निकल कर अपने कमरे में आ गया. और राधा बीएड पर लेती मुस्कुराने रही थी कुछ सोचते हुए .

राधा ( मन में ) बुद्धू , मानना भी नहीं अत. कितनी परवाह करता है मेरी फिर भी पता नहीं कहाँ कहाँ भटकता रहता है. तुम्हे हमेशा क लिए अपने पास रख लुंगी देख लेना .

शाम को दिव्या मौसी ने मुझे जगाया और मेरे लिए चाय ले आयी.

दिव्या मौसी : ये ले चाय पि ले जल्दी से वर्ण ठंडी हो जाएगी.

अमित : मौसी आप ने अभी तक उन सदियों में से एक भी नहीं पहनी , क्या आपको पसंद नहीं आयी वो ?

दिव्या मौसी : पसंद ? बहुत पसंद हैं मुझे , आखिर मेरा बीटा इतने प्यार से जो लेकर आया है.

अमित : तो फिर अभी तक आपने पहन कर दिखाई क्यों नहीं?

दिव्या मौसी : बीटा वो इतनी अछि साड़ियां हैं उन्हें घर पे कैसे पहन सकती हूँ? वो तो किसी फंक्शन में पहनूंगी.

अमित : क्या मौसी आप भी, फंक्शन जब होगा तब और ले लेंगे. आप ये तो पहन कर दिखाओ. मुझे भी तो पता चले मेरी मौसी उन सदियों में कैसी लगती है.

दिव्या मौसी : ाचा ठीक है दिखा दूंगी तुझे.

अमित : दिखा दूंगी नहीं दिखाना पड़ेगा. मेरे वापिस आने पर आप सदी में होनी चाहिए. और हाँ आज रत का डिनर हम बहार hi करेंगे.

दिव्या मौसी : क्यों ? मेरे हाथ का खाना ाचा नहीं लगता तुझे?

अमित : आपके हाथ क खाने से ाचा तो और कोई खाना हो hi नहीं सकता मौसी जी. पर मैं चाहता हूँ आप इस चार दीवारी से बहार भी निकलें. आज आपकी किचन से छुट्टी है. शाम को तैयार रहना आप . मैं 7 बजे तक वापिस आ जाऊंगा.

दिव्या मौसी : पर बीटा ....

अमित : मैं कुछ नहीं सुनने वाला. आप बस तैयार रहना और राधा को भी कह देना क तैयार रहे.

राधा : मैं तो सबसे पहले तैयार हो जाउंगी तुम बस टाइम से आ जाना कहीं फिर से देर से आये तो देख लेना.

राधा शायद दरवाज़े पर कड़ी हमारी बात hi सुन रही थी और मुस्कुराती हुई हमारे पास आ कर बैठ गयी .

दिव्या मौसी : ाचा ठीक है . जैसा तुम कहो पर हम 3 एक साथ जायेंगे कैसे?

अमित : राधा क पास स्कूटी है न. आप मेरे साथ बैठ जाना.

राधा : मैं इतनी रत को स्कूटी नहीं चलने वाली.

अमित : तो फिर कैसे जायेंगे? मैं मोहित को बुला लेता हूँ वो कार ले आएगा .

राधा : नहीं , हम तीनो hi जायेंगे बस. मैं मैनेज कर लूंगी .

अमित : चलो ठीक है फिर. शाम को 7 बजे.

इतना कह कर मैं तैयार हो कर निकल गया. स्टेडियम में प्रैक्टिस क बाद मैं मंजू म क घर गया ट्यूशन क लिए. और रोज़ की तरह आज भी शीना वहीँ थी. अब तो ये उसकी भी पक्की रूटीन हो गयी थी. पड़े क साथ साथ बातें करते हुए एक घंटा बीत गया. मैं भी लेट नहीं होना चाहता था और मंजू म को बोलकर 7 बजे से पहले hi निकल आया .

मैं घर पहुंचा तो दरवाज़ा राधा ने hi खोला. वो इस समय एक और नए लाये हुए ड्रेस में थी और बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. रॉयल ब्लू कलर की इस डिज़ाइनर ड्रेस में उसका गोरा रंग मनो और भी ज्यादा गोरा लग रहा था. मैं तो एक पल मुँह खोले उसे देखता hi रह गया. राधा मुझे इस तरह घूरता देख कर शर्मा गयी. उसके गुलाबी गाल अब लाल होने लगे.

राधा : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो

राधा : शरमाते हुए ) अंदर भी आ जाओ क यहीं खड़े रहोगे?

इतना कह कर राधा शर्माती हुई जल्दी से अंदर चली गयी . सामने से दिव्या मौसी नई सदी में चलती हुई मेरे पास आ गयी. मैं तो मौसी को देखता hi रह गया . कितनी खूबसूरत लग रही थी वो. हमेश सिंपल सी दिखने वाली दिव्या मौसी आज खूबसूरती की नई परिभाषा बन कर सामने कड़ी थी. उन्होंने आँखों में काजल माथे पर बिंदिया क साथ हल्का मेकअप भी क्या हुआ था . ब्राइडल रेड कलर की ये सदी मनो उनके लिए hi बानी थी. हाथों में आज कंगन क साथ चूड़ियां भी पहन ली थी मौसी ने जो उनके इस रूप को जैसे और भी निखार रही थी.

दिव्या मौसी : लो देख लो , यही देखना था न तुम्हे ? यही है तुम्हारी दी हुई सदी. अछि लग रही हूँ?

अमित : अछि नहीं बहुत अछि . ये सदी आप क ऊपर और भी अछि लग रही है. आप हमेशा ऐसे क्यों नहीं रहती? आज तो आप राधा से भी 21 hi लग रही हैं.

दिव्या मौसी : स्माइल ) हैट पागल , कैसी बातें करता है.

अमित : सच कह रहा हूँ मौसी , आज आप सच में बहुत खूबिलग रही हैं. आप हमेशा ऐसे hi रहा कीजिये .

दिव्या मौसी : अब ज्यादा बातें मत कर . देख हम दोनों तैयार हैं अब तू भी जल्दी से तैयार हो जा.

अमित : मैं बस 5 मिनट में तैयार हो कर आया .

इतना कह कर मैं जल्दी से कमरे में भगा और तैयार होने लगा. जल्दी से कपडे बदल कर हाथ मुँह धोकर मैं बहार आ गया . रद्द और दिव्या मौसी हॉल में hi थी.

अमित : तो चलें ?

राधा : चलो .

राधा ने अपनी स्कूटिब्कि चाबी ली और दरवाज़े लॉक कर क हम बहार आ गए . दिव्या मौसी मेरे साथ मेरे साथ बैठने वाली थी . मैंने बाकि स्टार्ट की पर राधा की स्कूटी स्टार्ट नहीं हो रही थी.

अमित : क्या हुआ राधा जल्दी करो.

राधा : मैं क्या करूँ ये स्टार्ट नहीं हो रही है.

अमित : रुको मैं देखता हूँ.

मैंने जा कर राधा की स्कूटी को स्टार्ट करने की कोशिश की पर वो स्टार्ट होने का नाम hi नहीं ले रही थी. 10 मिनट मैं लगा रहा पर बात नहीं बानी .

दिव्या मौसी : रहने दो बीटा लगता है ये स्टार्ट नहीं होगी. हम टैक्सी कर लेते हैं.

अमित : बिलकुल नहीं , मैं अभी मोहित को बुला लेता हूँ.

राधा : नहीं , ऐसे ाचा लगेगा क्या हम सब तैयार खड़े हैं और उसे ऐन मोके पर बुलाना. वो क्या सोचेगा? क ज़रूरत पड़ी तो यद् किया. हम तीनो बाइक पर hi चलते हैं .

अमित : पर बाइक पर तीनो कैसे बैठेंगे ?

राधा : क्यों ? 3 लड़के बैठ सकते हैं तो हम क्यों नहीं ?

अमित : अरे लड़कों की बात और होती है . वो लेडीज की तरह थोड़ी बैठते हैं.

राधा : बस इतनी सी बात , तुम बाइक चलाओ मैं बीच में लड़कों की तरह बैठ जाउंगी. पीछे माँ बैठ जाएगी आराम से.

अमित : ऐसा नहीं हो सकता .

राधा : क्यों नहीं हो सकता ? अब जल्दी करो हम ऐसे hi जायेंगे देखो पहले hi देर हो चुकी है.

अमित : मैं टैक्सी बुला लेता हूँ.

राधा : अब तुम चल रहे हो या नहीं? मैं नहीं जाने वाली टैक्सी में .

दिव्या मौसी : अब तुम लोग चलोगे या यहीं बहस करोगे ?

राधा : देखो न माँ ये बात नहीं मन रहा. स्कूटी स्टार्ट नहीं हो रही . मैंने कहा क मैं आप दोनों क साथ बाइक पर एडजस्ट कर लुंगी और ये है क मंटा नहीं.

दिव्या मौसी : पर बेटी हम दोनों कैसे बैठेंगे पीछे?

राधा : बैठ जायेंगे माँ, मैं बिच में लड़कों की तरह बैठ जाउंगी. आप इसे कहो क चले.

दिव्या मौसी : चलो बीटा अगर ये कह रही है तो चलो.

दिव्या मौसी की बात मन कर मैंने बाइक फिर से स्टार्ट की . राधा मुस्कुराती हुई लड़कों की तरह दोनों तरफ टंगे कर क बैठ गयी और उसके पीछे दिव्या मौसी . मैं आगे को सरक गया था क परेशानी न हो दोनों को. पर राधा भी मेरे साथ आगे सरक गयी और मेरी पीठ से पूरी सात कर उसने अपने दोनों हाथों को मेरे छाती पर रख लिया . राधा क कोमल जिस्म को मैं अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था . मुझे ये अजीब भी लग रहा था और ाचा भी. खैर मैंने संभल कर बाइक चलता हुआ दोनों को लेकर निकल पड़ा.

राधा ( मन में ) मेरा आईडिया काम कर hi गया, ाचा हुआ मैंने पेट्रोल निकल दिया था . हे हे हे

अँधेरा हो रहा था और रोड पर लाइट्स ों हो चुकी थी . थोड़ी देर में hi मैं दोनों को लिए एक होटल में पहुँच गया. बाइक से उतारते hi राधा मेरी एक तरफ हो गयी और मेरा हाथ थम लिया जबकि दूसरी तरफ दिव्या मौसी थी . जहाँ राधा खिलती हुई काली थी वहीँ दिव्या मौसी गुलाब . हमारे अंदर जाते hi सबकी नज़रे राधा और दिव्या मौसी पर hi अटक गयी . राधा को तो जैसे किसी की भी परवाह थी hi नहीं वो बस मेरे साथ hi चिपक कर चल रही थी जबकि दिव्या मौसी ने नोट कर लिया था क लोग उन्हें घूर रहे हैं और वो उनकंफर्टबले होने लगी. हम एक कार्नर में टेबल पर जा कर बैठ गए और यहाँ भी दोनों मेरे साइड में थी. मैंने दिव्या मौसी को उनकंफर्टबले देखा तो उनसे पूछा.

अमित : क्या बात है मौसी ? आप कुछ उनकंफर्टबले लग रही हैं .

दिव्या मौसी : यहाँ सब लोग हमें hi घूर रहें हैं बीटा मुझे ाचा नहीं लग रहा . हम कहीं और चलें?

अमित : जहाँ भी जायेंगे यही सब होगा , जानती हैं क्यों ?

दिव्या मौसी : नहीं , पर ऐसा क्यों ?

अमित : क्यूंकि आप इतनी हसीं लग रही हैं क हर किसी की नज़र आप पर जाएगी hi

दिव्या मौसी : धत्त ! क्या तू भी बार बार एक hi बात कर रहा है. अब ये कोई उम्र है मेरी? . अमित : किसी से भी पूछ कर देख लीजिये अभी पता चल जायेगा. और दुसरज बात , आप घर से बहार निकलती नहीं हैं न तो आपका ऐसा लग रहा है जबकि ये सब नार्मल बात है. आप किसी की परवाह मत कीजिये बस अपने में मस्त रहिये कोई कुछ नहीं करेगा आपको.

राधा : बिलकुल सही , और अगर किसी ने कुछ किया तो अमित है न . अचे से समझा देगा. मैं तो इसके होते किसी बात की परवाह करती hi नहीं आप भी ऐसा hi करो.

उसके बाद दिव्या मौसी कुछ नार्मल हुई. और वेटर आर्डर लेने आ गया. मैंने दिव्या मौसी और राधा से पूछ पर वो तो कुछ बता hi नहीं रही थी तो मैंने hi आर्डर किया . खाना खाने क बाद हम होटल से निकल गए .

दिव्या मौसी : चलो बीटा अब घर चलते हैं . बहुत देर हो गयी है.

अमित : अभी कहाँ मौसी जी, दुबारा पता नहीं कब मौका मिलेगा अभी तो आइस क्रीम भी कहानी है.

राधा : आइस क्रीम !!!! वो , चलो न माँ मज़ा आएगा.

दिव्या मौसी : मगर बीटा ....

अमित : अब चलिए न मौसी वैसे भी घर जा कर क्या करना है ?

मौसी हमारी बात मन गयी और हम आइस क्रीम पार्लर चले गए. मैंने दोनों को एक जगह बैठने को कहा और खुद आइस क्रीम लेने जा रहा था तो रद्द भी साथ आ गयी .

राधा : मुझे भी साथ जाना है मैं अपनी पसंद की लूंगी देख कर.

अमित : ाचा ठीक है चलो.

हम दोनों आइस क्रीम लेने काउंटर पर आ गए . और जब हम वापिस मौसी की तरफ आ रहे थे तो एक लड़का मौसी से कुछ बात कर रहा था . मौसी को उसकी बातों पर गुस्सा आ रहा था . मुझे ये देखते hi गुस्सा आ गया उसे मैं आइस क्रीम राधा को पकड़ा कर तेज़ी से मौसी की तरफ बाद और उस लड़के को गर्दन से पकड़ लिया.

अमित : क्यों बे ज्यादा चर्बी चढ़ गयी है क्या ? चल आ तेरी चर्बी उतरता हूँ.

वो लड़का देखने में कुछ खास नहीं था बस अचे कपडे पहन कर हीरो बन रहा था . मुझे देखती hi उसका रंग उड़ गया शायद वो मेरी बॉडी देख कर hi दर गया था .

लड़का : सॉरी भैया सॉरी गलती हो गयी. मैं तो बस भाभी से यूँही बात कर रहा था. प्लीज मुझे माफ़ कर दो मैं आपके पाऊँ पड़ता हूँ. भाभी कहिये न भैया से मुझे छोड़ दें. मैं आपसे भी माफ़ी मांगता हूँ.

वो लड़का हाथ जोड़ता हुआ मेरे पाऊँ में गिर गया तो मैंने भी उसे मौसी से माफ़ी मांगने को कहा. वो मौसी क पाऊँ में गिर कर माफ़ी मांगने लगा . मौसी ने भी उसे माफ़ कर दिया और वो उठ कर भाग गया. इतने में राधा भी पास आ चुकी थी. मौसी का मूड थोड़ा ख़राब था मैंने उनका मूड ाचा करने क लिए कहा.

अमित : तो देखा मौसी , मैंने कहा था न कोई आपकी उम्र का अंदाज़ा नहीं लगा सकता . आप राधा की बहिन hi लग रही हैं.

दिव्या मौसी : पागल था वो लड़का अकाल का अँधा. माँ की उम्र की हूँ उसके और वो चहहिं

राधा : वैसे माँ कह क्या रहा था वो ?

दिव्या मौसी : कह रहा था मुझसे फ्रेंडशिप करना चाहता है. बेवक़ूफ़ कहीं का.

अमित : जो भी हो , उसने ये प्रूफ कर दिया क आप कितनी खूबसूरत लग रही हैं. मेरी बात तो आपको सच लग नहीं रही थी.

दिव्या मौसी : अछि तरह जानती हूँ मैं क्या हूँ. तुम दोनों की hi माँ हूँ , आयी बात समझ में और वो मुस्टंडा मुझे तुम्हारी .......

राधा : क्या माँ ?? वाइफ समझ रहा था न है है है है इसमें उस बेचारे की क्या गलती . आपको देख कर हर कोई यही कहेगा.

दिव्या मौसी : तुझे शर्म नहीं आती अपनी माँ क साथ मज़ाक कर रही है. बीटा है ये मेरा और वो पता नहीं क्या क्या बोल गया.

अमित : अब छोड़िये मौसी जी आप बस ये आइस क्रीम खाइये. वैसे आप गुस्से में भी खूबसूरत लगती हैं.

मेरी बात पर राधा हसने लगी और दिव्या मौसी ने गुस्सा दिखने की कोशिश की पर उनके चेहरे पर भी स्माइल आ hi गयी रोकते रोकते.

दिव्या मौसी : घर चल तेरे कान खींचती हूँ

आइस क्रीम खाने क बाद हम घर को निकल पड़े. घर आते hi मौसी अपने कमरे में चली गयी कपडे बदलने और मैं भी अपने कमरे में जा hi रहा था क राधा ने रोक लिया .

राधा : आज मैं बहुत खुश हूँ . पता नहीं कितने सैलून बाद आज माँ ऐसे बहार कहीं गयी है. वो भी अंदर से खुश है और सिर्फ तुम्हारी वजह से . थैंक यू

इतना कह कर राधा ने मेरे गाल पर किश किया और जल्दी से अपने कमरे में भाग गयी .

अमित : ये लड़की भी न

मैं अपने कमरे में आ गया और कपडे बदल कर बीएड पर लेट गया . कुछ देर बाद दिव्या मौसी मेरे पास आ गयी.

दिव्या मौसी : सोया नहीं अभी तक?

अमित : बस आप का hi इंतज़ार कर रहा था . आप खुश तो हैं न?

दिव्या मौसी : खुश कैसे नहीं हूँगी? मेरे बचे खुश तो मैं भी खुश.

अमित : आप हमेशा ऐसे hi खुश रहा कीजिये न. आप आज इतनी अछि लग रही थी क क्या बताऊँ. ऐसे hi आप बन संवर क रहा कीजिये. आप हमेशा सिंपल सी बानी रहती हैं बिलकुल भी ाचा नहीं लगता मुझे.

दिव्या मौसी : तो तू चाहता है रोज़ मैं ऐसे मुश्टण्डों से बातें सुनु हाँ ? देखा न तूने ? ऐसे hi होता है जब बन संवर क रहो. और वैसे भी किसके लिए बनु संवरण ? तेरे मौसा तो होते नहीं यहाँ फिर बन संवर क क्या करना है मैंने?

अमित : एक बात बताइये मौसी ?

दिव्या मौसी : पूछ बीटा

अमित : आप मौसा जी क साथ खुश तो हैं न ?

दिव्या मौसी : ये . ये तू कैसी बातें कर रहा है?

अमित : मैं सिर्फ सच सुन्ना चाहता हूँ मौसी . अगर आप नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं. पर मौसा जी हमेशा बहार hi रहते हैं और आपकी तरफ ध्यान नहीं देते. जब आपको उनकी ज़रूरत थी तब वो आपके साथ नहीं थे. और अब भी जैसे आप जी रही हैं इसका यही मतलब है क सब ठीक नहीं है. मैं आपका बीटा हूँ और मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ. आप चाहें तो वजह बताएं या न बातएं पर मुझे सिर्फ आपकी ख़ुशी चाहिए. मैं आपको हमेशा खुश hi देखना चाहता हूँ चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े .

दिव्या ने अमित की बात का जवाब तो नहीं दिया पर उसका सवाल बहुत गहरा था . इस सवाल का जवाब दिव्या ने कभी अपनी बहनो को भी नहीं दिया था पर अमित ने जैसे उसके ज़ख़्मी दिल को hi छू लिया था. बड़ी मुश्किल से दिव्या ने खुद को रोका और अपनी आँखों तक आ रहे आंसुओं को रोक कर अमित को सीने से लगा लिया.

दिव्या मौसी : तू मेरी इतनी परवाह क्यों करता है ? क्यों करता है बोल ? मैं हमेशा खुश रहूंगी , तू जो आ गया है अब मेरे पास . मैं हमेशा खुश रहूंगी बीटा बस तू कभी अपनी माँ को अकेला मत छोड़ना .

लाख कोशिशों क बाद भी दिव्या की ऑंखें छलक पड़ी और उसकी आँखों से गिरते आंसू अमित क सर पर hi गिरने लगे. अमित समझ गया क दिव्या मौसी शायद उसके सवाल से दुखी हो गयी है मतलब उसका शक सही है. पर फ़िलहाल उसने भी कोई और बात नहीं की और अपनी मौसी क सीने से लगा वो बस उनकी अशांत धड़कनो को महसूस करता रहा.

‘ कब तक ऐसे आंसू बहती रहोगी दिव्या ? ‘

अँधेरे कमरे में बैठ कर रोटी हुई दिव्या क कानो में जब ये आवाज़ पड़ी तो वो चौंक गयी.

दिव्या : कौन है ?

‘ कब तक ऐसे रोटी रहोगी मेरी बहिन? तुझे दुखी देख कर मुझे भी चैन नहीं मिलता . क्या तुम्हे मेरी तड़प महसूस नहीं होती तुझे ऐसे देख कर? ‘

दिव्या : दामिनी ये तू हो ? तुम कहाँ हो दामिनी ? तुम सामने क्यों नहीं आती ? मुझे अकेला छोड़ कर तुम कहाँ चली गयी दामिनी कहाँ चली गयी? मुझे अपने साथ क्यों नहीं ले गयी?

‘ मैं कहीं गयी hi नहीं मेरी बहिन , मैं तो हमेशा से तेरे साथ हूँ , तेरे अंदर हूँ. क्या तूने मुझे कभी महसूस नहीं किया ? पर मैं तुमसे बहुत नाराज़ हूँ. तुम्हे तो मेरे हिस्से की ज़िन्दगी भी जीनी थी और तुमने अपनी भी छोड़ दी. किस लिए ? ऐसा करने से क्या हुआ ? तुमने सिर्फ अपने आप को hi दुःख नहीं दिया बल्कि मुझे भी दुःख दिया है. तू जानती है न हम दोनों क दिल एक थे. फिर तूने कैसे सोच लिया क मैं तेरे दुखी होने से चैन से रह पाऊँगी? मैं तुझे और दुखी नहीं देख सकती दिव्या , और अब तुझे फिर से जीना hi होगा. मैं तुम्हे हर वो ख़ुशी दूंगी जो तुझे मिलनी चाहिए थी. वडा कर तू अब खुश रहेगी . तुझे जीना hi होगा. मेरी ख़ुशी क लिए , बोल तू ऐसा करेगी न? करेगी न मेरी बहिन? ‘

दिव्या : हाँ मैं करुँगी , मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करुँगी . तू बस कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ना . हमेशा मेरे साथ रहना.

‘ मैं हमेशा तेरे साथ हूँ मेरी बहिन, तू हमेशा मुझे अपने साथ महसूस करोगी . मैं तुम्हे हर ख़ुशी दूंगी . तू बस मेरा साथ देना ‘

इस आवाज़ क साथ एक रौशनी का साया दिव्या क सामने प्रकट हुआ और अपना हाथ आगे बढ़ाया . दिव्या उसे देखती रही . तभी उसे साये क चेहरे पर दामिनी की ऑंखें नज़र आने लगी जो उसे hi देख रही थी. दिव्या की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा . उसने जल्दी से उसका हाथ थमा और कड़ी हो कर उसके गले लग गयी . पर ये मजबूत बहन किसी मर्द की थी जिसने उसे कास कर अपनी आगोश में ले लिया. दिव्या को बेचैनी सी महसूस होने लगी और उसकी धड़कन तेज़ हो गयी. उसे अपने शरीर में बदलाव होता महसूस होने लगा. वो साया दिव्या को अपनी बाँहों में लिए उस अँधेरे कमरे से बहार आ गया और सामने बहुत hi खूबसूरत बाग़ था जिसने तरह तरह क फूल थे और इतनी रौशनी क जैसे दिन निकल आया हो. दिव्या की ऑंखें छिन्धिया गयी. साँसों में घुल रही ये महक उसे महका रही थी और वो एक नवयुवती की तरह अपने दिल में नयी उमंगें महसूस कर रही थी. दिव्या को ये अनजान साया किसी प्रेम नगर में ले आया था . ये कोई अलौकिक सब्ज बाघ hi था हो हकीकत में शायद धरती पर हो hi न. ये किसी कवी की कल्पना मात्र था . और ऐसे hi सब्ज बैग कभी दिव्या ने अपने सपनो में देखे थे . खुद को आज अपने सपनो की दुनिया में महसूस कर क वो फूली नहीं समां रही थी. एक तरफ जहाँ उसे दामिनी क साथ होने का एहसास था वही एक मजबूत पुरुष का एहसास भी उसे हो रहा था. दामिनी की आँखों में देखती हुई वो उस मजबूत पुरुष रूपी साये को अपने सीने से लगाने लगी और उसकी धड़कने एक डैम से बहुत तेज़ बाद गयी जब उस साये ने दिव्या क सीने को चुम लिया . दिव्या जो शायद इस एहसास को भूल hi चुकी थी पर एक डैम से उसकी सोई हुयी भावनाएं जाग उठी और वो उसे अपने सीने पर दबाने लगी . एक डैम से दिव्या से ये सब बर्दाश्त न हुआ और उसकी आंख खुल गयी . उसे अपने सीने पर वही एहसास अब भी हो रहा था. जैसे hi उसने देखा तो हैरान हो गयी. अमित उसके सीने से लिप्त सो रहा था और खुद दिव्या उसके सर को अपने सीने से लगाए हुए थी.



दिव्या : ये नहीं हो सकता !!!
 
अपडेट 144



सुबह मेरी आँख खुली तो मैंने बीएड पर खुद को अकेला पाया. मैंने कमरे में नज़र दौड़ाई पर दिव्या मौसी कहीं नहीं थी. मुझे लगा कहीं वो मेरी बात का गुस्सा तो नहीं कर गयी क्यूंकि वो रोज़ मेरे बाद hi तो उठती हैं. और रत को तो वो यहीं थी फिर वो कब गयी यहाँ से? मैं जल्दी से उठा और फ्रेश हो कर ऊपर जाने से पहले दिव्या मौसी क कमरे में गया तो वो वहां सो रही थी. मतलब वो मेरी बात पर नाराज़ हो कर यहाँ आ गयी . खैर मैंने उनको सोने दिया और ऊपर जा कर एक्सरसाइज करने लगा . मैं एक्सरसाइज ख़तम करने वाला था जब मौसी ऊपर आयी और मुझे दूध का गिलास दे कर चली गयी. मैं उनसे बात करना चाहता था पर वो रुकी hi नहीं और नहाने का कह कर चली गयी.

मैं नीचे आया तो राधा को जगाने क लिए उसके रूम में गया. हमेशा की तरह वो मासूम सी पारी की तरह ख्वाबों की दुनिया में खोयी हुई थी. मैंने कुछ देर उसके मासूम चेहरे को निहारा और फिर उसके गाल पर हाथ रख कर उसे जगाया. आज वो पहली आवाज़ से hi उठ गयी.

अमित : गुड मॉर्निंग, आज तो कमल हो गया तुम पहली आवाज़ से hi उठ गयी.

राधा : मैं तो कब से जग रही हूँ.

अमित : तो फिर सोने की एक्टिंग क्यों कर रही थी ?

राधा : क्यूंकि मुझे ाचा लगता है जब तुम ऐसे प्यार से मुझे जागते हो.

अमित : तो ये बात है , वैसे आज जल्दी कैसे उठ गयी?

राधा : आज सैटरडे है न और आज तुम गाओं चले जाओगे . फिर पता नहीं कब आओगे

इतना कहते कहते राधा का चेहरा उदास हो गया .

अमित : अरे तुम उदास क्यों हो रही हो? गाओं जा रहा हूँ विदेश नहीं जा रहा. मंडे को वापिस आ hi जाऊंगा. और फिर रोज़ तो मिलते hi हैं कॉलेज में.

राधा : क्या मिलते हैं ? एक hi लेक्चर साथ होते हो बस. उसमे भी सब साथ में होते हैं तो बात hi नहीं हो पति. क्या ऐसा नहीं हो सकता तुम हमारे साथ hi रहो?

अमित : तुम्हे पता है न ऐसा नहीं हो सकता . मौसी ने फैसला किया था क मैं बरी बरी से सबके साथ रहूँगा. अब मुझे रीता मौसी क घर जाना होगा. नहीं तो वो नाराज़ हो जाएँगी.

राधा : क्या कुछ दिन और नहीं रुक सकते तुम.

अमित : तुम ऐसे क्यों सोचती हो ? मैं तो रोज़ hi तुम्हारे साथ होता हूँ जब कहोगी मिलने घर भी आ जाऊंगा.

राधा : एक दिन

इतना कह कर राधा ने मेरी आँखों में देखा और उसके चेहरे की उदासी उसकी आँखों में प्रार्थना थी मुझे रुकने को कह रही थी . मैं उसे न नहीं कर प् रहा था पर मैं मजबूर था.

अमित : राधा प्लीज तरय तो अंडरस्टैंड, मौसी को बुरा लगेगा. क्या तुम चाहती हो वो मुझसे नाराज़ हो जाएँ?

राधा : ाचा ठीक है , काम से काम आज तो साथ हो hi . ाचा मैं नाहा कर तैयार होती हूँ.

इतना कह कर राधा जल्दी से बाथरूम में घुस गयी पर मुझे लगा क उसकी ऑंखें भर आयी हैं. राधा को मेरा जाना ाचा नहीं लग रहा था. और मुझे उसका इस तरह उदास होना. उसके बाद मैं भी अपने रूम में आ कर तैयार हो गया.

नाश्ते क टेबल पर भी राधा चुप चाप नाश्ता कर रही थी और दिव्या मौसी भी किसी सोच में पड़ी हुई थी. मुझे लगा क वो रत वाली बात पर अभी भी नाराज़ हैं . इतने दिनों में आज पहली बार इतनी शांति से नाश्ता किया था हमने. नाश्ते क बाद राधा और मैं घर से बहार निकले तो मैं राधा को बहार रोक कर अंदर मौसी क पास आया .

दिव्या मौसी : कुछ भूल गए क्या?

अमित : नहीं , मौसी वो ी ऍम सॉरी

दिव्या मौसी : सॉरी ?? किस लिए ?

अमित : मैं जनता हूँ आप कल रत क मेरे सवाल से नाराज़ हैं . मैं कभी दुबारा ऐसी कोई बात नहीं करूँगा.

दिव्या मौसी : तुम्हे किसने कहा मैं नाराज़ हूँ?

अमित : आज आप चुप चुप सी हैं और मैं देख रहा हूँ आप किसी सोच में डूबी हैं.

दिव्या मौसी : तो इस लिए तू ये सोच रहा है ? मैं तो ये सोच रही थी क आज तू चला जायेगा तो हम दोनों माँ बेटी का दिल अब नहीं लगेगा घर में अकेले .

अमित : आप सच में नाराज़ नहीं हैं ?

दिव्या मौसी : मैं अपने बेटे से नाराज़ हो सकती हूँ?

अमित : आप बहुत अछि हैं मौसी . बहुत अछि हैं.

इतना कह कर मैंने दिव्या मौसी क गले से लग गया और उन्हें ज़ोर से भींच लिया.

दिव्या मौसी: अरे बस बस अब देर नहीं हो रही क्या ? देख वो तेरे पीछे hi आ गयी अंदर .

मैंने पीछे पलट कर देखा तो राधा घर क अंदर आ चुकी थी और हमें hi देख रही थी. मैंने मौसी को bye कहा और राधा को साथ लेकर बाइक से कॉलेज क लिए निकल पड़ा . राधा रस्ते में भी खामोश रही बस मेरी बात का काम शब्दों में उत्तर दे देती. आज वो मेरे साथ सात कर भी नहीं बैठी. कॉलेज पहुँचते hi पार्किंग में नेहा दीदी कल्पना दोनों मिल गए. नेहा दीदी ने भी राधा की उदासी की वजह पूछी पर उसने नहीं बताया . उसके बाद हम अपनी अपनी क्लास में चले गए .

फ्री लेक्चर में जब सब कैंटीन में इकठ्ठा हुए तो कल्पना ने शॉपिंग का मुद्दा छेड़ दिया.

कल्पना : ोये मर इंडिया तूने कहा था सबको शॉपिंग करवाएगा पर अभी तक करवाई नहीं .

मीनल : हाँ यार कल फिर संडे है. चलो न आज शॉपिंग करने चलते हैं.

शीना : आज तो चलना hi चाहिए मुझे भी शॉपिंग करनी है.

नेहा दीदी : पर लेक्चर

कल्पना : क्या दीदी आप भी , सैटरडे को कौन सा ज्यादा पड़े होती है. आज चलते हैं न , ये फिर गाओं चला जायेगा और कल फिर से बोरिंग संडे.

सब ने मिल कर जाने का प्रोग्राम फिक्स कर लिया. मैं कहाँ मन करने वाला था.

कल्पना : तो आज मिल कर डाका मरते हैं अमित की पॉकेट पर. क्यों तुम्हे तो प्रॉब्लम नहीं है न?

अमित: मुझे क्या प्रॉब्लम होगी ? चलो अब तुम सब क सामने मेरी कहाँ चलने वाली है. बाँदा हाज़िर है.

शीना : तो चलो चलते हैं.

शालू : तुम लोग जाओ मुझे ज़रा नोट्स तैयार करने हैं.

अमित : बिलकुल नहीं, तुम नहीं गयी तो कोई भी नहीं जायेगा.

शालू : पर मैं

शीना : कॉमन यार चल न, तेरे नोट्स बाद में मिल कर बना लेंगे.

शालू को भी मन्ना पड़ा और फिर पूरी टोली निकल पड़ी मोहित और शीना की कार में सवार हो कर. शॉपिंग मॉल में जाते hi सब लड़कियों ने रौनक बड़ा दी. एक साथ सब की सब एक hi शोरूम में घुस गयी और अपने लिए कपडे देखने लगी. राधा अभी भी चुप चुप थी और नेहा दीदी उसे अपने साथ लिए हुए थी. जबकि सब अपने लिए ड्रेस देख रही थी. मोहित तो मीनल क साथ hi था. शालू को मैंने अकेला देखा तो उसके पास चला गया.

अमित : तुम मन क्यों कर रही थी आने से ?

शालू : वो नोट्स

अमित : नोट्स नहीं बात कुछ और है. वो बताओ मुझे ?

शालू : सब लोग मिलकर शॉपिंग करेंगे तो तुम्हारे लिए मुश्किल होगा न मैनेज करना .

अमित : तो इस लिए तुम मन कर रही थी .

शालू : हम्म्म

अमित : तुम्हे टेंशन लेने की कोई ज़रूरत नहीं है. पैसे हैं मेरे पास और तुम सबसे ज्यादा ड्रेस लोगी वर्ण मैं तुमसे बात नहीं करूँगा .

शालू : पर

अमित : पर वॉर कुछ नहीं . मेरी बात मानोगी या नहीं ?

शालू : तुम्हारी हर बात मेरे लिए हुकुम है मैं मन कर hi नहीं सकती पर

अमित : बस कोई पर वॉर नहीं चलो अब अचे से शॉपिंग करो. और जो भी लेना हो ले लेना . कपडे या कुछ और भी जो तुम्हे चाहिए.

शालू क चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.

शालू : तुम मेरी इतनी परवाह क्यों करते हो मैं तो

अमित : तुम सब से स्पेशल हो और इसके इलावा कुछ भी मत सोचना. चलो अब शॉपिंग करो.

शालू : मेरी एक बात मानोगे?

अमित : कहो

शालू : मैं तुम्हारी पसंद की ड्रेस लेना चाहती हूँ , जो भी तुम्हे पसंद हो.

अमित : ाचा !! चलो ठीक है. एक मेरी पसंद की बाकि अपनी पसंद की.

मैंने शालू क लिए एक डिज़ाइनर सूट सेलेक्ट किया और फिर उसे शॉपिंग करने को कह कर आगे बाद गया. तभी शिवानी ने मुझे इशारे से अपनी तरफ बुलाया.

अमित : कहो क्या बात है?

शिवानी : अब तो तुम मेरी तरफ ध्यान hi नहीं देते. मुझसे नाराज़ हो ?

अमित : नहीं तो , तुम्हे ऐसा क्यों लगा?

शिवानी : कितने दिन हो गए तुम मुझसे मिले hi नहीं अकेले में.

अमित : तुम्हारे सामने hi है , कितना बिजी रहता हूँ.

शिवानी : पता है कितना बिजी हो, एक दिन भी नहीं निकल सकते मेरे लिए? ाचा चलो अब मुझे अपनी पसंद की ड्रेस लेकर दो.

अमित : हम्म तो तुम जैसी खूबसूरत लड़की क लिए ये ह्म्म्मम्म हाँ ये सही रहेगा.

मैंने उसे एक बढ़िया सा पिंक टॉप चूस कर क दिया. अब वो तो मॉडर्न ड्रेसेस पहनने वाली लड़की थी इस लिए मैंने उसके लिए एक टॉप और जीन्स hi सेलेक्ट की . राधा दूर से मुझे देख रही थी जब मैंने शिवानी को टॉप दिया . शिवानी क बाद मुझे कल्पना हाथ पकड़ कर ले गयी .

अमित : कहाँ ले जा रही हो ?

कल्पना : चलो मेरी मदद करो ड्रेस देखने में.

अमित : अब मैं क्या मदद करूँ , तुम तो अपने हिसाब से देख लो.

कल्पना : नहीं , अपने हिसाब से तो हमेशा लेती हूँ. आज मैं तुम्हारी पसंद देखना चाहती हूँ .

अमित : मेरी पसंद तुमसे पसंद नहीं आएगी.

कल्पना : ज्यादा नखरे मत करो , चलो लेकर दो मुझे बढ़िया सा ड्रेस.

मैंने कल्पना क लिए जीन्स टॉप देखने लगा तो उसने मुझे मन कर दिया.

कल्पना : मैंने तुम्हे अपनी मर्ज़ी का लेने को कहा है. ये तो मैं पहनती hi हूँ.

फिर मैंने कल्पना ने क लिए भी एक लॉन्ग स्कर्ट सूट सेलेक्ट किया. कल्पना तो इतने में hi खुश हो गयी. उसके बाद शीना मुझे खिंच कर ले गयी .

शीना : चलो अब मुझे भी एक ड्रेस ले कर दो.

रीमा भी शीना क साथ hi थी जो मेरी हालत और मुस्कुरा रही थी.

अमित : पर तुम तो खुद एक्सपर्ट हो शॉपिंग में , मैं भला क्या करूँ इसमें?

शीना : शॉपिंग तुम्हारी तरफ से है तो ड्रेस भी तुम्हारी पसंद का पहनूंगी.

अमित : वैसे तो तुम हमेशा मॉडर्न ड्रेस में खूबसूरत hi दिखती हो पर अगर सिंपल सूट भी पहनो और भी अछि दिखोगी.

मेरी बात सुन कर शीना क गाल लाल हो गए. रीमा तो मुझे hi देख रही थी.

अमित : रीमा तुम तो अचे अचे सूट पहनती हो न तो शीना की भी मदद कर दो. शीना रीमा की चॉइस को मेरी चॉइस समझ लेना ये जो भी लेकर दे.

रीमा मेरी इस बात से खुश हो गयी क मैंने उसकी पसंद को अपनी पसंद बता दिया . रीमा को शीना क पास छोड़ कर मैं नेहा दीदी क पास गया . राधा चुप चाप उनके पास कड़ी थी और नेहा दीदी उससे कुछ पूछ रही थी

अमित : आप दोनों ने अभी तक कुछ लिया नहीं ?

नेहा दीदी : देखो न ये ऐसे उदास चेहरा बना कर कड़ी है तो मेरा भी दिल नहीं कर रहा कुछ लेने को.

अमित : राधा !! चलो दीदी मैं आप दोनों की मदद करता हूँ.

मैंने नेहा दीदी क लिए एक ड्रेस चूस किया और राधा क लिए भी पर राधा अभी भी उदास थी . मैंने सोचा राधा को खुश करने क लिए मुझे कुछ करना चाहिए . मैंने सब से नज़र बचा क मॉल में एक गिफ्ट शॉप में जाकर एक बढ़िया सा गिफ्ट राधा क लिए पैक करवा लिया. सब अपनी मस्ती में लगे हुए थे और उधर मोहित मीनल को ले कर चेंजिंग रूम में घुस गया. अब अंदर वो दोनों क्या करने वाले थे ये तो पता hi था मगर उनको देख कर मेरा भी मन हुआ तो मैं भी सब से नज़र बचा कर चेंजिंग रूम में चला गया जो खली था. मैंने रीमा को फ़ोन किया और उसे जल्दी से इधर आने को कहा. थोड़ी hi देर में रीमा वहां आ गयी और मैंने उसे उस अंदर ले कर दरवाज़ा बंद कर दिया .

रीमा : क्या कर रहे हो सब यहीं पर हैं, किसी ने देख लिया तो?

अमित : उस दिन तो बड़ा कह रही थी क साडी दुनिया क सामने प्यार कर सकती हो और अब दर रही हो? यहाँ कौन आने वाला है.

रीमा : तो तुम्हे प्यार करना है हाँ , अभी बताती हूँ.

इतना कह कर रीमा ने मेरे सर को दोनों हाथों से थमा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर किश करने लगी. मैं भी रीमा का साथ देने लगा पर रीमा तो मुझ पर भरी पद रही थी. वो कभी निचे वाला तो कभी ऊपर वाला होंठ चूस रही थी . फिर उसने मेरे मुँह में जीभ दाल दी और मेरी जीभ को भी अपने मुँह में ले कर चूसने लगी. रीमा का ये स्टाइल देख कर तो मैं हैरान था मगर मज़ा भी आ रहा था. मैंने एक हाथ उसके उभर पर रखा तो उसका जिस्म लरज गया और एक पल क लिए उसने किश रोक दी . मैंने उसके उभर को हल्का हल्का दबाना शुरू किया तो उसके मुँह से सिसकी निकल गयी. मैंने दूसरा हाथ भी उसके दूसरे बूब्स पर रख दिया तो उसने मेरी आँखों में देखा . उसकी ऑंखें लाल होने लगी थी. रीमा ने कुछ नहीं कहा और फिर से किश करने लगी मगर इस बार उसका किश करना वाइल्ड होता जा रहा था . वो खुद मुझसे चिपक रही थी. मैं तो मज़े की दुनिया में उड़ रहा था. मैंने किश करते करते उसके नरम कूल्हों पर अपने हाथ ले जाकर उसे अपने साथ ज़ोर से चिपका लिया और उसने भी उछाल

कर अपनी टंगे मेरी कमर पर बांध ली.

रीमा : उनमममम उम्मम्मम्म ककक उम्मम्मम

हम दोनों अपनी मस्ती में लगे हुए थे क किसी ने दरवाज़ा खटखटाया .

रीमा : कौन है ?

‘ जल्दी बहार आओ मुझे ड्रेस तरय करना है ‘

ये आवाज़ शीना की थी . आवाज़ सुनते hi रीमा को टेंशन होने लगी.

रीमा : दीदी मैंने अभी कपडे खोले hi हैं आप दूसरे में चली जाओ .

शीना : ाचा ठीक है .

शीना वहां से हटी तो रीमा मुझे देखने लगी .

रीमा : देखा ! अभी पकडे जाते.

अमित : मेरी जान पकड़े तो नहीं गए न. वैसे भी चुप चुप कर प्यार करने में जो मज़ा है वो और कहीं नहीं.

रीमा : तुम्हारे मज़े क चक्कर में सजा न मिल जाये. वैसे इतने उतावले कैसे हो गए तुम ? वैसे तो पास भी नहीं आते हो.

अमित : वो मोहित और मीनल को ट्रायल रूम में जाते देखा तो मुझसे रहा नहीं गया.

रीमा : तो जनाब को दूसरों को देख कर एक्ससिटेमेंट होती है . वैसे एक बात कहूं

अमित : कहो

रीमा : मैं खुद भी तुम्हे बहुत मिस कर रही थी. उस दिन हमने जो किश किया था वो सपनो में भी मुझे यद् अत रहता है . और तुम हो क दुबारा मिले hi नहीं. क्या थोड़ा सा टाइम भी नहीं निकल सकते मेरे लिए ?

अमित : तुम्हे तो पता hi है सब.

रीमा : ाचा एक और बात केहनी थी

अमित : क्या

रीमा : थैंक यू. तुमने दीदी को बचाया. वो तो हर वक़्त जब भी उन्हें टाइम मिले तुम्हारे बारे में hi बात करती हैं .

अमित : बचता कैसे नहीं , बड़ी साली साहिबा जो हैं.

रीमा : आ है है है , बड़े ए साली साहिबा वाले. पहले जानते भी थे क्या तुम उन्हें ? वो तो उस दिन पता चला. वैसे माँ भी बहुत इम्प्रेस हैं तुमसे . कह रही थी क तुम सच में बहुत अचे इंसान हो और किस्मत वाली होगी वो लड़की जिसे तुम मिलोगे.

अमित : तो बता देना था न क तुम hi वो किस्मत वाली हो .

रीमा : इतनी hi हिम्मत है न तो खुद बता देना. मैंने कुछ कहा तो कहीं पड़े बंद कर क शादी न करवा दें.

अमित : वैसे देखने में तो आंटी ऐसे नहीं लगते.

रीमा : वो तो बहुत अछि हैं और मेरे साथ सहेली बन कर रहती हैं. पापा का तो मुझे यद् भी नहीं. माँ ने hi हम दोनों को माँ बाप दोनों का प्यार दिया है.

अमित : वो सच में बहुत अछि हैं. मैं चाहता हूँ क उन्हें मैं कभी निराश न करूँ इस लिए जब कुछ बन जाऊंगा तभी उनसे बात करूँगा हमारे बारे में.

रीमा कास क मेरे गले लग गयी और फिर से किश करने लगी.

रीमा : ी लव यू ी लव यू सो मच. मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ और तुम्हारे सिवा किसी की. है हो सकती. मुझे कभी खुद से अलग न करना.

अमित : कभी नहीं , पर फ़िलहाल होना पड़ेगा कही फिर से कोई आ गया तो?

रीमा : हाँ , रुको मैं देखती हूँ बहार . रीमा ने दरवाज़ा खोल कर बहार देखा और फिर मुझे निकल जाने दिया . उसके बाद मैं फिर से सब क पास आ गया. कल्पना राधा को साथ लिए हुए थी और दोनों क हाथों में कुछ कपडे थे. खैर कोई 2 से 3 घंटे लगा hi दिए सब ने मिल कर . उसके बाद जब पेमेंट की बारे आयी तो शीना ने अपना क्रेडिट कार्ड आगे कर दिया .

अमित : ये क्या कर रही हो?

शीना : एक hi बात है चाहे तुम करो या मैं करूँ .

अमित : इसे वापिस रखो जेब में, ये शॉपिंग मेरी तरफ से थी सबके लिए . इस लिए पैसे भी मैं hi दूंगा.

शीना : पर अमाउंट ज्यादा हो गयी है देखो तो सही .

अमित : तो क्या हुआ? मुझे ज़रूरत होगी तो मांग लूँगा . इसे रखो अपने मास.

शीना ने अपना कार्ड वापिस रख लिया. अमाउंट सच में ज्यादा हो गयी थी. 25000 बिल बन गया था मैंने कार्ड दिया और पेमेंट कर दी. सब ने अपने अपने शॉपिंग बैग लिए और रेस्टोरेंट में चलने लगे. मॉल में hi बने रेस्टोरेंट में सब ने फ़ास्ट फ़ूड का लुत्फ़ लिया और फिर चल पड़े वापिस .

कॉलेज पार्किंग में पहुँच कर फिर से सब एक दूसरे से मिले और सब ने मुझे थैंक्स कहा. राधा फिर उसी मायूसी क साथ मेरे पीछे बाइक पर बैठ गयी. मुझे राधा को यूँ मायूस रहना ाचा नहीं लग रहा था पर क्या कर सकता था. घर पहुँचने पर मौसी ने लंच करवाया. मैंने बता दिया क लंच क बाद मैं निकल जाऊंगा . जिससे राधा और भी निराश हो गयी और बिना कुछ कहे अपने कमरे में चली गयी. मौसी तो बर्तन ले कर किचन में चली गयी पर मेरी जाने वाली बात से चेहरा उनका भी बदल गया था. मैं राधा से बात करने उसके कमरे में गया . राधा बीएड पर तकिये में मुँह छुपाये लेती हुई थी. मैं उसके पास जा कर बीएड पर बैठ गया .

अमित : राधा , तुम कब तक ऐसे उदास रहोगी? तुम्हे पता है न मुझे जाना hi है तो फिर ऐसे क्यों कर रही हो? घर नहीं जाऊंगा तो माँ क्या सोचेगी ? बाबा क्या कहेंगे? छोटे मां , ममी , सब नाराज़ होंगे मुझसे. तुम्हे ाचा लगेगा?

राधा : मैं कब गाओं जाने से मन कर रही हूँ तुम्हे?

राधा ने अभी भी अपना चेहरा नहीं उठाया था और उसकी आवाज़ से लगा क वो तो रही है.

अमित : तो फिर रो क्यों रही हो? देखो तुम्हे पता है न मुझे ाचा नहीं लगता जब तुम्हे दुःख हो.

राधा : तुम कुछ दिन और नहीं रुक सकते हमारे साथ ? पहले hi एक दिन लेट ए थे तुम और आज भी तो गाओं hi रहोगे न? तो यहाँ कितने दिन रुके बस 4 दिन

अमित : राधा देखो समझने की कोशिश करो. तुम चाहती हो मौसी नाराज़ हो मुझसे ? अगर तुम यही चाहती हो तो ठीक है , नहीं जाता मैं वहां. फिर वो मुझसे बात करना छोड़ देंगे सब मुझसे नाराज़ हो जायेंगे तब तुम खुश हो लेना.

राधा मेरी बात पर उठ कर बैठ गयी . वो सचमुच रो रही थी. मैंने उसके आंसू पोछने की कोशिश की तो उसने मेरा हाथ झटक दिया.

राधा : मैं क्या खुश होंगी अगर तुमसे सब नाराज़ होंगे तो ? मैं तुम्हे दुःख दूंगी क्या ? तुमने ऐसा सोचा भी कैसे?

अमित : तो बताओ फिर मैं क्या करूँ? तुम hi बताओ मैं क्या कर सकता हूँ. तुम ऐसे आंसू बहा कर मुझे कसूरवार बना रही हो इन आंसुओं का.

राधा ने खुद hi अपने आंसू साफ किये .

राधा : लो नहीं रोटी मैं , तुम जाओ गाओं . जाओ जहाँ जाना है मैं hi पागल हूँ.

अमित : ऐसा मत कहो राधा . तुम तो सब से प्यारी हो. अगर तुमने खुद को कुछ कहा तो मैं बात नहीं करूँगा.

मैंने राधा क लिया हुआ गिफ्ट उसके आगे किया और कहा.

अमित : ये देखो मैं इसे तुम्हारे लिए लाया था. खोल कर देखो इसे.

राधा ने जल्दी से उसे खोला तो बीच में एक बड़ी hi सुन्दर घडी थी. जिस पर छोटे छोटे नकली डायमंड लगे हुए थे. रौशनी में बहुत अछि चमक दे रही थी और बीच वाला पोर्शन हार्ट शेप का था . राधा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी . उसने हार्ट वाले हिस्से को चूमा और मुझे देखा .

राधा : ये बहुत प्यार है , तुम्हारे दिल की तरह मैं हमेशा इसे अपने पास रखूंगी.

राधा ने इतना कहा और मेरे गले लग गयी. मुझे अभी उसकी बात समझ भी नहीं आयी थी क इस तरह मुझे गले लगा कर मेरी साडी सोच पर hi ब्रेक लगा दी. ऐसा हर बार होता था . जब भी वो मेरे गले लगती मैं सब कुछ भूल जाता था. कुछ देर राधा ने मेरे गले में बहन दाल कर राखी और फिर मेरे गाल

पर किश कर क थैंक यू कहा.

अमित : अब नाराज़ तो नहीं हो न? मुझे तुम्हारा हास्य हुआ चेहरा देख कर जाना है. अगर तुम उदास रहोगी तो मुझे तुम्हारी चिंता लगी रहेगी.

राधा : स्माइल ) मेरी चिंता मत करो , ध्यान से गाओं जाना और जा कर फ़ोन ज़रूर करना.

अमित : ठीक है , और तुम हमेशा ऐसे hi मुस्कुराती रहा करो .

राधा : मेरी मुस्कराहट भी तुमसे hi तो है. तुम होते हो तो है लेती हूँ वर्ण और है hi क्या?

अमित : तुम फिर शुरू हो गयी.

राधा : no , अब उठो वर्ण अँधेरा हो जायेगा.

मैं राधा क साथ अपने कमरे में आ गया. और अपना बैग पैक करने लगा. कपडे तो दिव्या मौसी ने पहले सेट कर क रख दिए थे मैंने जल्दी से बैग पैक किया जिसमे राधा ने भी मदद की. इतने में दिव्या मौसी चाय ले आयी.

दिव्या मौसी : तो हो गयी तयारी ? ये लो चाय पियो .

अमित : बस मौसी जी हो गयी तयारी. आपको क्या ज़रूरत थी कपडे धोने की.

दिव्या मौसी : तो क्या हुआ ? अपने बेटे क कपडे मैं नहीं धो सकती क्या? वैसे भी गाओं गंदे कपडे ले जाता तो भाभी को धोने पड़ते, आज कल वैसे वो बहुत फांसी हुई हैं बेचारी .

अमित : आप कब आएँगी गाओं?

दिव्या मौसी : तुम्हे तो पता है न राधा क कॉलेज का , फिर भी जब फंक्शन होगा न हम ज़रूर आएंगे.

इसके साथ hi बातें करते हुए चाय पीने लगे. चाय ख़तम होने क बाद मैं बैग उठा कर बहार निकलने लगा तो दिव्या मौसी और राधा मेरे साथ hi बहार आने लगे.

अमित : ाचा मौसी चलता हूँ

दिव्या मौसी : फिर कब आओगे बीटा ?

दिव्या मौसी का चेहरा भी अब मुझे उदास लग रहा था और राधा क चेहरे पर मुस्कान थी पर ऑंखें जैसे रो रही हों. मेरा दिल किया क गाओं जाना कैंसिल hi कर दूँ पर वहां जाना भी ज़रूरी थी. मैं कुछ सोच कर दिव्या मौसी क पेअर छुए और उन्हें गले लगा कर उनके गाल को चूम लिया .

अमित : जब कहेंगी आ जाऊंगा माँ बस आप हमेशा खुश रहा कीजिये. मैं चाहे जिसके भी घर रहूं आप जब भी बुलाएंगी आ जाऊंगा.

दिव्या मौसी ने भी मुस्कुराते हुए मेरा माथा चूम लिया.

दिव्या मौसी : जीते रहो बीटा , तुम पास हो तो मैं खुश hi खुश हूँ. ध्यान से जाना.

मौसी क बाद मैं राधा क पास आया उसे साइड से गले लगा लिया.

अमित : खुश रहना और मौसी का ध्यान रखना. मैं जल्दी hi आऊंगा.

राधा कुछ नहीं बोली बस स्माइल करती रही. मैंने अपना बैग वापिस रखते हुए कहा.

अमित : मौसी कपडे तो धो हो दिए हैं अपने तो बैग यहीं रहने देता हूँ . मंडे को यहीं से ले जाऊंगा.

दिव्या मौसी : हाँ एहि ठीक है, इसी बहाने फिर से आ तो जायेगा.

मैंने बैग राधा को पकड़ा दिया और बाइक और बैठ कर निकल गया . राधा और मौसी कड़ी हाथ हिलती रही मेरे नज़र आने तक और फिर अंदर चली गयी . मैं मौसी क घर से निकल कर सीधा मंजू म क घर गया . उनसे मिले बगैर मैं जाना नहीं चाहता था. वैसे भी कितने दिनों से अकेले में उनसे नहीं मिला था. घर क बहार पहुँचते hi मम ने दरवाज़ा खोल दिया. मुझसे देखते hi वो खुश हो गयी.

अमित : आपको पता था मैं आऊंगा ?

मंजू म : मुझे पता था तुम जाने से पहले ज़रूर आओगे. अगर नहीं आते तो मैं नाराज़ हो जाती.

अमित : आपको भला नाराज़ कर सकता हूँ मैं.

मैं जैसे hi अंदर आया मम मेरे गले लग गयी और एक छूती सी किश मेरे होंठों पर कर दी.

मंजू म : आओ अंदर, आज कितने दोनों बाद अकेले में मिल रहे हैं.

हम दोनों हॉल में आ गए और मैं सोफे पर बैठ गया. जैसे hi मंजू म मेरे साइड में बैठने लगी तो मैंने उनकी कमर में हाथ दाल कर अपनी गॉड में बैठा लिया .

मंजू म : बड़े रोमांटिक हो रहे हो , इरादे क्या हैं ?

अमित : इरादे तो नेक हैं , बस जाने से पहले कुछ पल आपके साथ बिताना चाहता था.

इतना कह कर मैंने मंजू म उन कोमल होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूमने लगा. मंजू म भी मेरा साथ देने लगी और मेरे सर को अपने हाथों में थम कर वो मेरे होंठ चूसने लगी.

मंजू म : उम्मम्मम ुम्माआआह्ह्ह्ह मैं कितना तड़प रही थी तुम्हारे लिए ये मैं बता नहीं सकती . हर रोज़ तुम सामने होते थे और मैं तुम्हे प्यार नहीं कर पति थी.

अमित : इसी लिए तो इस वक़्त आया हूँ.

मंजू म फिर से मुझे किश करने लगी और मैं किश करता हुआ उनके स्तन दबाने लगा. मम गरम होती जा रही थी. वो पहले hi इतने दिनों से तरस रही थी इस लिए जल्दी hi गरम हो गयी.

मंजू म : जल्दी से मुझे प्यार करो कहीं शीना न आ जाये .

मैंने मंजू म को अपनी बाँहों में उठे और उनके कमरे में ले गया. मम लोअर और एक खुली सी कमीज पहने हुए थी. कमीज उन्होंने खुद उतर ली और मैंने उनका लोअर पकड़ कर खिंच दिया. मम की पिंक पंतय भी मैंने जल्दी से निकल दी और उनको खिंच कर लेटते हुए उनकी छूट पर किश किया जहाँ हलके बाल आये हुए थे.

अमित : आप ने बाल कितने दिनों से साफ़ नहीं किये?

मंजू म : तुम जो नहीं मिल प् रहे थे तो बल क्यों साफ करती? इस पर सिर्फ तुम्हारा हक़ है.

मैंने उनकी छूट को खोलते हुए अपनी जीभ अंदर दाल दी. मंजू म सिसकने लगी और खुद hi अपनी ब्रा उतर कर अपने बूब्स मसलने लगी. मम की छूट पानी बहाने लगी थी मैंने जल्दी से अपनी पेण्ट और अंडरवियर घुटनो तक किया और लैंड को उनकी छूट में थोड़ा सा घुसा कर उनकी टंगे उठाते हुए ज़ोरदार धक्का मर दिया.

मंजू म : आआआहहहहह कक्कक्कक्स एक hi बार में घुसा देते हो आआअह्ह्ह्ह

अमित : आपको मज़ा नहीं अत?

मंजू म : अत है पर दर्द भी आआअह्ह्ह्हह ककक होता है.

मैंने मम की टंगे पकड़ कर धक्के पेलने शुरू कर दिए और मम खुद hi अपने बूब्स मसलती मज़ा लेने लगी.

मंजू म : उम्म्म्म कक्कक्स आआआहहहहह उम्म्म्म ऐसे hi करो उम्म्म्म कितना तड़पते हो और तेज़ ककक उम्म्म्म

मैंने म को 2 मिनट ऐसे hi छोड़ा फिर उनकी दोनों टंगे एक तरफ कर क उन्हें करवट क बल कर दिया और उनके बड़े बड़े चूतड़ मसलते हुए उनकी छूट मरने लगा . मम की गांड मसलते हुए मैंने एक उंगली उनकी गांड क छेद में दाल दी तो वो मचल उठी और झटके लेती हुई झड़ने लगी .

मंजू म : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह ये क्या आआआअह्ह्ह आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स आअह्ह्ह्ह मममम मैं गयीईइ आआअह्ह्ह्ह

इसके साथ मम की छूट ने बाढ़ तोड़ दिया और पानी बेहटा हुआ बीएड पर आने लगा. गांड को छेड़ने से मंजू म कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड हो गयी थी. उनकी गांड बहुत हो टाइट थी और मेरा भी दिल करने लगा क उनकी गांड में लैंड दाल दूँ पर तभी बहार से गाड़ी की आवाज़ आयी तो मैं समझ गया ये शीना है . मैंने जल्दी से अपने कपडे ठीक किये. मम भी उठने लगी तो मैं उन्हें अपनी बाँहों में उठा कर उनके अटैच्ड बाथरूम में ले गया . और उनके कपडे वहीँ पकड़ा दिए. मैं जल्दी से दरवाज़े की तरफ लपका और बेल्ल बजते hi मैंने दरवाज़ा खोल दिया. सामने शीना hi थी. मुझे देख कर वो भी सरप्राइज हो गयी.

शीना : तुममम ? यहाँ इस वक़्त ? मुझे तो लगा था तुम गाओं चले गए होंगे.

अमित : बस जा hi रहा था सोचा जाने से पहले

मम से मिल लूँ.

शीना : अंदर आते हुए ) बुआ कहाँ हैं? और तुम्हे ये पसीना क्यों आया हुआ है?

अमित : पसीना , ो. हाँ ये पता नहीं कैसे आ गया . और मम शायद अपने रूम में hi हैं मुझे यहाँ बैठने को कह कर वो अंदर गयी हैं.

शीना : कब आये थे तुम ?

अमित : अभी अभी थोड़ी देर हुई. पानी पियोगी?

शीना : ये तो मुझे पूछना चाहिए.

मंजू म ( हमारी तरफ आते हुए) कौन क्या पूछ रहा है?

शीना : अरे आप गयी बुआ ? कुछ नहीं बुआ मैं कह रही थी क ये घर मेरी बुआ का है तो चाय पानी मुझे पूछना चाहिए अमित से और ये खुद मुझसे पूछ रहा है .

मंजू म : तुम्हारी बुआ क साथ ये इसका भी घर है. इस लिए पूछ रहा था. वैसे तुम दोनों बैठो मैं कॉफ़ी बना कर लायी. अमित ने भी जाना है कहीं ये लेट न हो जाये.

मंजू म अपनी हालत ठीक कर क बहार आयी थी जिससे शीना को कोई शक न हुआ. और फिर मंजू म किचन में चली गयी .

शीना : थैंक्स आज तुमने मुझे शॉपिंग करवाई .

अमित : इसमें थैंक्स कैसा? दोस्तों में इतना तो चलता है.

शीना : वैसे अगर मैं तुम्हारे लिए शोप्पिंग करूँ तो तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा ?

अमित : तुम्हे इसकी क्या ज़रूरत है?

शीना : ज़रूरत मुझे नहीं तुम्हे है. आज सबने कुछ न कुछ लिया पर तुमने कुछ नहीं लिया. इस लिए अब मैं तुम्हारे लिए शॉपिंग करुँगी. तुम्हे कोई ऐतराज़ ?

अमित : ऐतराज़ तो नहीं पर पैसे तुम नहीं डौगी.

शीना : ये क्या बात हुई? आज तुमने दिए न , मैंने कुछ कहा?

अमित : पर मुझे ाचा नहीं लगता कोई मेरे लिए ऐसे कुछ करे.

शीना : अजीब आदमी हो , लोग खुश होते हैं और तुम्हे अजीब लगता है. ठीक है तो फिर मैं भी तुम्हारी दी हुई ड्रेस नहीं रखूंगी.

अमित : वो क्यों?

शीना : अगर तुम मेरा दिया कुछ नहीं ले सकते तो मैं भी नहीं लुंगी.

अमित : ाचा ठीक है बाबा, ले लेना तुम पर एक से ज्यादा नहीं.

शीना : वो मैं देखूंगी .

इतने में मंजू म कॉफ़ी ले ए और फिर कॉफ़ी पिटे हुए बातें होने लगी. शीना ने मम को भी बता दिया क आज हम शॉपिंग करने गए थे. मम ने आँखों से इशारा करते हुए पूछा तो मैं बस मुस्कुरा दिया.

अमित : सबसे वडा किया था मैंने क शॉपिंग करवाऊंगा और आज no. लग गया.

मंजू म : मुझे भी शॉपिंग करनी थी तुम लोग मुझे भी बता देते . अब बताओ किस दिन लेकर चलोगे मुझे?

अमित : जब आप कहें .

शीना : मुझे भी साथ ले चलना हम तीनो चलेंगे.

शीना की बात पर मंजू म बेबस चेहरा बनाया तो मुझे हंसी आ गयी.

अमित : ाचा मम अब चलता हूँ .

मंजू म : ध्यान से जाना.

शीना : bye

अमित : bye .



दोनों को bye करने क बाद मैं बाइक ले कर गाओं क लिए निकल गया . आज मुझे माँ क साथ हमारे रिश्ते को आगे बढ़ाना था और हमारे दरम्यान जो ख़ामोशी थी उसे हटाना था. मैं इसी बारे में सोचता हुआ जा रहा था क कैसे उनकी इस ख़ामोशी को ख़तम करूँ ताकि वो भी खुल कर अपनी भावनाओं को स्पष्ट करें .
 
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