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घर पहुँचते hi माँ मुझे देख कर खुश हो गयी. और मुझे गले लगा लिया . बाबा घर पर hi थे . मुझे देख कर दीपिका ममी भी खुश हो गयी. मैं सब से मिला और कामिनी ममी को भी उनके रूम में जा कर मिला. थोड़ी देर में hi अजय मम और कमलेश मां भी आ गए . कुछ देर मैंने अपने बेटे क साथ भी खेला और फिर सब ने मिल कर खाना खाया . मैंने फ़ोन पर दिव्या मौसी और राधा से भी बात की और अपनी कुशलता बताई. रीमा शालू शिवानी से भी मेरी बात हुई. कल्पना ने भी कुछ मेस्सगेस भेजे थे नार्मल शायरी क पर मैंने उसके जवाब में सिर्फ एक जोके hi सेंड किया. उसके बाद मैं बीएड पर लेट कर माँ क बारे में सोचने लगा . सब का सोने का टाइम हो चूका था अब किसी भी वक़्त माँ आ सकती थी. मैं उनके साथ कैसे शुरुआत करूँ इसी बात को लेकर मैं सोच रहा था. माँ खुद तो शुरुआत करने नहीं वाली इस लिए करना तो मुझे hi था. तभी एक बात दिमाग में आयी क जब माँ सब कुछ जानते हुए भी कर hi रही है और यही वो चाहती है तो मैं अपने अंदर से दर को छोड़ कर खुद hi पहल कर दूँ. वो क्या कहेंगी. बस मैंने यही सोच कर अपने कमरे की लाइट पूरी बंद को और कपडे उतर कर बीएड पर लेट कर माँ का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर में hi कुछ आहत हुई तो मैं समझ गया क माँ आ गयी है. जैसे hi वो दरवाज़ा खोलने लगी मैं उठ कर पहले hi दरवाज़े क पास पहुँच गया.
जैसे hi माँ दरवाज़ा खोल कर अंदर आयी तो अँधेरे में उसे मेरे करीब होने का पता न चला. पर उसके कुछ बोलने से पहले hi मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. माँ मेरे इस तरह अचानक उनको बाँहों में भर लेने से सकते में आ गयी और मुझे खुद से दूर हटाने की कोशिश करने लगी पर मैं नहीं रुका और उनके होंठ चूसने लगा. थोड़ी hi देर में माँ का विरोध काम हो गया और उनके हाथ खुद hi मेरे सर पर आ गए . अब माँ भी किसिंग में रिस्पांस करने लगी . माँ को साथ देते हुए देख कर मैंने अपना एक हाथ उनके बड़े बड़े स्तनों पर रख दिया और उन्हें दबाने लगा. माँ मचलने लगी और उनकी पकड़ मेरे सर पर और भी मजबूत हो गयी. वो मस्ती में मेरे बल खींचने लगी और मेरे होंठ अपने डेंटन में दबाने लगी. मैंने अपना दूसरा हाथ अब उनके मस्त बड़े बड़े चूतड़ों पर रख दिया और उन्हें भी मसलने लगा. माँ की गर्मी और बाद गयी और वो मेरे साथ चिपकने लगी. मैंने उन्हें दीवार से लगा दिया और किश करता हुआ उनकी गर्दन पर आ गया. माँ क होंठ आज़ाद होते hi अब वो सिसकियाँ लेने लगी.
गौरी ममी: उम्मम्मम कक्कक्कक्स उम्मम्मम उफ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स
माँ कुछ बोल नहीं रही थी पर आज मैंने सोच लिया था क उन्हें बुलवा क hi रहूँगा. मैंने उनकी सदी का पल्लू सीने से हतय और सदी खोलने लगा. माँ ने भी मेरा साथ दिया और सदी उनके बदन से उतर कर निचे गिर गयी. मैंने माँ क ब्लाउज को भी खोल दिया और अगले hi पल वो भी ज़मीन पर था. मैंने हाथ नीचे ले जा कर उनके पेटीकोट का नाडा खोल दिया और वो भी उनके पाऊँ में जा गिरा. अब माँ भी मेरी तरह नंगी थी. ब्रा और पेंटी वो पहले hi उतर कर आयी थी. मैं उन्हें नंगी कर क जैसे hi उनके साथ लगा तो उन्हें भी मेरे निर्वस्त्र होने का एहसास हुआ स्पेशलय जब मेरा लैंड उनके योनि भाग क पास टकराया. माँ क मुँह से फिर से सिसकी निकल गयी.
गौरी ममी : उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स उम्मम्मम्म
मैंने माँ को अपने सीने से लगा लिया और उनको अपनी बाँहों की गिरफ्त में लेने क बाद उनकी पीठ पर अपने हाथ चलता हुआ उनकी गांड तक पहुँच गया. दोनों चूतड़ों को अपने हाथों में ले कर मैं मसल मसल कर दबाने लगा. जब मैं उनके चूतड़ों को दबाता तो वो उनकी छूट मेरे लैंड क साथ और भी ज्यादा चिपक जाती. माँ सिर्फ सिसकियाँ ले रही थी. मैंने अपनी एक उंगली उनकी गांड में दाल दी तो वो उछाल पड़ी.
गौरी ममी : उईईईईई कक्ककक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह
मैंने फिर से उनके होंठों को अपने होंठों में जकड लिया और वो भी मुझे किश करने लगी. मैंने उनका भी एक हाथ अपने हाथ में पकड़ा और नीचे ले जा कर अपना लैंड उनके हाथ में थमा दिया. पहले तो उन्होंने हाथ पीछे खिंच लिया पर फिर से मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपना लैंड थमा दिया. और उन्हें हाथ खींचने नहीं दिया . धीरे धीरे माँ भी रंग में आ गयी अपनी मुठी बंद कर क उसने मेरा लैंड अपनी गिरफ्त में ले लिया. अब माँ धीरे धीरे मेरा लैंड मसलने लगी और किसिंग भी ज़ोरदार करने लगी . ये सब अँधेरे में हो रहा था इस लिए माँ साथ दे रही थी पर अब इस अटक से पर्दा उठाना था तो मैंने हाथ बड़ा कर रूम की लाइट ों कर दी. एक डैम कमरे में लाइट हो जाने से माँ को झटका लगा और उन्होंने तुरंत मुझे छोड़ दिया और अपने हाथों से अपने उरोज और छूट को ढकती हुई नीचे बैठ गयी . माँ को इस सब की उम्मीद नहीं थी. वो सर झुका कर बैठ गयी पर अब मुझे उनकी इस शर्म को ख़तम करना था.
अमित : रुक क्यों गयी माँ ? कब तक ऐसे अँधेरे में चुपचाप करती रहोगी ? जब सब करना hi है तो हक़ से करो. वैसे भी किसी और से ज्यादा आपका हक़ है मुझ पर. मुझे ाचा नहीं लगता ऐसे आप छुप कर किसी अपराधी की तरह मुझसे प्यार करने आती हैं. अगर आप सच में hi मुझसे ये प्यार चाहती हैं तो हल से करिये. मैं नहीं चाहता क आप अपनी इच्छाओं को दबाकर जियें. अब जो भी होगा वो खुली आँखों से रौशनी में होगा.
मेरी बात सुनने क बाद भी माँ कुछ बोली नहीं पर उन्होंने नज़र उठा कर मुझे देखा . वो अभी भी खुद को रोक रही थी . मैंने उनकी दुविधा को समझा और हाथ बड़ा कर उन्हें खड़ा कर दिया . वो अपने हाथों से अपना खज़ाना छुपा रही थी. पर मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा.
अमित : अगर आप मुझे खुद को सौंप hi चुकी हैं तो फिर इस शर्म की जंजीर को भी तोड़ दीजिये. मैं आपकी हर ीचा पूरी करने की कोशिश करूँगा.
इतना कह कर मैंने माँ क कंकपते होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा. माँ बट सी बानी रही . मैंने उनके दोनों हाथ अपने हाथों में लिए और उँगलियों में उंगलियां फसते हुए उन्हें दीवार से लगा दिया. माँ अभी मेरा साथ नहीं दे रही थी पर मैं उनके होंठ चूसने लगा. साथ hi मैंने अपने लैंड को उनके योनि भाग पर रगड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में hi माँ मेरे होंठ चूसने लगी. मैंने उन्हें मुँह में अपनी जीभ दाल दी और उनकी जीभ क साथ अपनी जीभ मिलाने लगा. माँ का एक पाऊँ उठ गया और वो उसे मेरी तंग से रगड़ने लगी. माँ फिर से गरम होने लगी थी पर उन्होंने ऑंखें बंद कर ली थी. मैंने माँ क हाथ छोड़ कर उनके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया. माँ अब मेरी गर्दन सर और पीठ पर मस्ती में अपने हाथ चलने लगी साथ hi वो अपनी कमर भी खुद हिलने लगी . मैंने माँ का हाथ पकड़ा और उसे अपने लैंड पर रख दिया पर माँ ने हाथ हटा लिया.
अमित : पकड़ो न माँ ये तुम्हारे लिए hi तो है. अब शर्माना छोड़ भी दो.
माँ ने ऑंखें बंद hi राखी और बोली कुछ नहीं. मैंने माँ का हाथ अपने लैंड पर दबाये रखा तो धीरे धीरे उनकी पकड़ हाथ पर मजबूत हो गयी . मुझे ख़ुशी हुई क वो अब साथ देने लगी हैं पर वो ऑंखें नहीं खोल रही थी और न अभी तक कुछ बोली थी. मैंने झुक कर उनके रसीले आम की तरह लटक रहे एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया. हालाँकि वो इतना बड़ा था क मुँह में तो आ नहीं सकता था पर जितना हो सका मैंने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया. दूसरे वाले को मैंने हाथ में ले क मसलना शुरू कर दिया. अपने एक हाथ को मैंने माँ की योनि पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. इससे माँ की गर्मी और बाद गयी हर उन्होंने भी मेरे लैंड को ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया. उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी जिन्हे वो मुँह पर हाथ रख कर दबाने की कोशिश कर रही थी.
गौरी ममी : कक्कक्कक्स उनममममम ओह्ह्ह्ह उम्मम्मम आह्हः उनमममममम
एक आम को निचोड़ने क बाद मैंने दूसरे को चूसना शुरू कर दिया . माँ क हलके भूरे नीपल अब अकड़ चुके थे मैंने उनके निप्पल खींचने शुरू कर दिए. माँ की उत्तेजना और बढ़ती गयी. उनकी छूट पानी पानी हो रही थी और वो ज़ोर ज़ोर मेरा लैंड रगड़ रही थी. माँ सिसकियाँ लिए जा रही थी पर बोल नहीं रही थी . मैं दोनों स्तनों क साथ खेलने क बाद या के मांसल जिसम को चूमता हुआ नीचे जाने लगा. छूट क पास कुछ बाल थे मैंने उनके बालों को सहलाया और बालो क पीछे छिपी रास बहती छूट सामने आ गयी . आज पहली बार मैं रौशनी में उनकी छूट देख रहा था. बड़ी hi प्यारी थी , होंठ थोड़े से खुले और मोठे मोठे थे. मैंने छूट की फांकों को उँगलियों से खोलना चाहा तो माँ ने आगे हाथ रख दिया. मैंने उनके हाथ को चूमा और साइड हटा दिया. छूट की डंके खुलते hi अंदर का गुलाबी हिस्सा नज़र आने लगा.
अमित : आपकी छूट बहुत प्यारी है माँ पर ये बल मुझे यहाँ अचे नहीं लग रहे. इतना कह कर मैंने अपने होंठ छूट क होंठों से भिड़ा दिए तो माँ का जिसम लरज गया .
गौरी ममी : आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्कक्स उफ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम
मैंने माँ की एक तंग उठा कर अपने कंधे पर लटका ली. उन्होंने सहारा लेने क लिए अपने हाथ मेरे सर पे रख लिए . अब वो एक तंग पर कड़ी थी और दूसरी मेरे कंधे पर लटकाये वो मेरे सर का सहारा लिए अपनी छूट चूसै का मज़ा ले रही थी. मैंने अपनी एक उंगली उनकी छूट में घुसा कर अंदर बहार करनी शुरू कर दी और साथ hi अपनी जीभ को भी छूट में घुसा दिया.
गौरी ममी : आआआअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स आअह्ह्ह्हह उम्मम्मम्मम
माँ मज़े की वादियों में खोटी जा रही थी. उनकी पकड़ मेरे सर पर और मजबूत हो गयी और वो मेरे मुँह को अपनी छूट पर दबाने लगी .
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म आह्हः कक्कक्स aaaaiaiiiiiiiiii
माँ और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पायी और वो झटके लेती पानी छोड़ने लगी. मैंने भी उनका पानी वास्ते नहीं होने दिया और सारा पि गया. पानी निकलते hi माँ ढीली पड़ने लगी उनसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था पर मैंने उन्हें नहीं छोड़ा और उनकी छूट को चाट ता हुआ फिर से गरम करने लगा. माँ अब मेरे कंधे से अपनी तंग नीचे उतरना छह रही थी पर मैं उन्हें ऐसा करने नहीं दे रहा था . मैं उनकी छूट को अछि तरह चूसने क बाद अब अपने कंधे पर राखी उनकी जांघ को चूमने लगा. कितना मुलायम बदन था माँ का. मगर माँ ने ज्यादा देर मुझे ऐसा करने न दिया और ज़बरदस्ती अपनी तंग मेरे कंधे से निचे कर दी. मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी ऑंखें खुली हुई थी और वो मुझे hi देख रही थी. जैसे hi हमारी नज़रें मिली तो उन्होंने चेहरा घुमा लिया. माँ ने फिर से लाइट बंद करने क लिए हाथ बढ़ाया तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया .
अमित : नहीं माँ आज नहीं , आज कोई पर्दा नहीं . मैं आपके इस खूबसूरत बदन को जी भर क देखना चाहता हूँ .
मेरी इस बात से माँ ने एक सिसकी भरी और ऑंखें बंद कर ली. मैंने उनको गॉड में उठा लिया और बीएड पर ले गया . बीएड पर लिटाने क बाद मैं पीछे हैट कर उनके पूरे बदन का अवलोकन करने लगा. सर से पाऊँ तक माँ का जिस्म नायब था . गोरा दूध सा रंग और मांसल शरीर कहीं से भी एक्स्ट्रा फैट नहीं थी. बड़े बड़े बूब्स हलके भूरे निप्पल्स क साथ. पेट थोड़ा सा मांसल था पर इतना नहीं कर बहार लटके मगर इतना ज़रूर था क उनकी नाभि गहरी नज़र आ रही थी. पेट क नीचे काले बाल जो उनके गोर बदन पर अचे भी लग रहे थे पर मुझे वो जगह चिकनी पसंद थी. उसके नीचे का हिस्सा माँ की जाँघों में छिप गया था क्यूंकि उन्होंने अपनी दोनों टंगे कास क आपस में मिलायी हुई थी. यहाँ से आगे उनकी गोरी चिकनी जांघें और नीचे बहार को झांक रहे उनके चूतड़ जांघों से पाऊँ तक गोरी टंगे जहाँ बालों का रेशा तक न था और पाऊँ क तखनो क पास उनकी वो पायल जो हमेशा चलते वक़्त मधुर झंकार बजती थी . और फिर वो सुन्दर पाऊँ लाल नेल पोलिश क साथ अपनी खूबसूरती को और भी बढ़ाते हुए. इन पाऊँ को मैं हमेशा छूटा रहा हूँ और अब इन्ही पाऊँ को उठाने वाली जगह पहुँच चूका था.
अमित : आप सच में बहुत खूबसूरत हैं माँ , आपका ये बदन वाकई में बेमिसाल है.
माँ ने जब महसूस किया क मैं उन्हें ताड़ रहा हूँ तो उनके हाथ फिर से उनके स्तनों पर आ गए और टंगे समेत कर पेट से लगा ली और करवट लेकर मेरी तरफ पीठ कर ली. ऐसा करने से उनकी गोरी सफ़ेद पीठ मेरे सामने आ गयी और नीचे उनके बड़े बड़े चूतड़ जो करवट क बल होने से और भी बड़े लग रहे थे. मुझसे और रुका नहीं गया और मैंने सीधा उनके चूतड़ों में मुँह फसा दिया. मैं उनके दोनों चूतड़ों को मसलता हुआ चुम रहा था. माँ एक हाथ से मेरे सर को दूर हटने की कोशिश कर रही थी पर मैंने कहा अब रुकने वाला था . मैंने माँ की गांड को चाटने क साथ काटना भी शुरू कर दिया और माँ सिसकने लगी. मैंने माँ को पलटा दिया और अब पेट क बल लेती थी. मैं उनके चूतड़ फैला फैला कर चूमने चाटने लगा. उनकी टांगों क ऊपर बैठ कर माँ उनके उनकी गांड क मज़े ले रहा था और वो बिस्टेर में मुँह दबाये सिसक रही थी. मैंने उनके दोनों चूतड़ों को पकड़ कर फैलाया तो उनकी गांड का छेड़ मेरे सामने आ गया. हलके भूरे रंग का छोटा सा छेड़ बता रहा था क यहाँ आज तक किसी ने दस्तक नहीं दी है. मैंने तुरंत उस दरवाज़े पर झुकते हुए अपनी जीभ वह लगा कर दस्तक दे दी.
गौरी ममी : आआआहहहहहह cccccccccccc उम्मम्मम्मम
माँ ने फिर से हाथ पीछे लेकर मुझे हटाने की कोशिश की पर मैं नहीं रुका और जीभ को अंदर डालने की कोशिश करने लगा. माँ लगातार सिसक रही थी . फिर मैंने अपनी एक उंगली गीली कर क उनकी गांड में घुसा दी. गांड तो पहले से hi टाइट थी ऊपर से माँ ने उसे और टाइट कर लिया मुझे अपनी उंगली उनकी गांड में फस्ती हुई महसूस हुई.
गौरी ममी : कक्कक्क्स नाहीईईई उम्मम्मम
ये पहला शब्द था जो उनके मुँह से निकला. पर मैं कहाँ रुकने वाला था.
अमित : क्यों नहीं माँ ? आप क जिस्म का एक एक हिस्सा सिर्फ प्यार करने क लिए बना है. मैं आपके हर हिस्से पर अपने प्यार से मोहर लगाऊंगा.
इतना कह कर मैंने फिर से उनके चूतड़ चाट ता उनकी गांड में उंगली अंदर बहार करने लगा. उंगली पहले फास फास कर जा रही थी पर मैं अपना थूक इस्तेमाल कर क उनकी गांड चिकनी करता रहा और फिर मेरी उंगली आसानी से अंदर बहार होने लगी. उसके बाद मैं उनकी जाँघों को चूमता हुआ उनके पाऊँ की तरफ बढ़ने लगा. माँ लगातार सिसकियाँ छोड़ रही थी. माँ क पाऊँ क पास पहुँच कर मैंने पाऊँ चुम लिए तो फिर से माँ ने तेज़ सिसकी ली.
उनकी पायल को भी चूमा मैंने और उनके दोनों पाऊँ जोड़ कर घुटनो से उनकी टंगे मोड़ते हुए ऊपर किये. मैंने दोनों पाऊँ क तलवे कहते जिससे माँ सिसकती जा रही थी.
अमित : इन दोनों पाऊँ में मेरी जन्नत पहले भी थी और आज भी है. मैं आपका एहसान तो चूका नहीं सकता पर आपको इतना प्यार ज़रूर दूंगा क आपके मन क कोना कोना भर जाये. पर मैं चाहता हूँ क आप एक प्रेमिका की तरह मेरा साथ दें. उसके बिना ये मिलान अधूरा रहेगा.
मैंने उनके पाऊँ की उँगलियों को मुँह में ले कर चूसा और फिर उन्हें पलट कर सीधा कर दिया. अब पाऊँ से चूमता हुआ मैं ऊपर जाने लगा और उनकी योनि पर पहुँच गया जो अभी नज़र नहीं आ रही थी. मैंने उनकी दोनों टाँगें फैला दी इस बार उन्होंने ज़ोर नहीं लगाया और आराम से टंगे फैला दी. मैं फिर से उनकी छूट पर झुका और छूट को चाटने लगा. माँ फिर से गरम हो चुकी थी और उनकी छूट पनिया गयी थी. छूट चाट ते हुए मैंने छूट में उंगली घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. माँ सिसकियाँ लेती हुई फिर से मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. पर इस बार मैं उनका पानी नहीं निकलना चाहता था. इस लिए छूट को छोड़ कर ऊपर बाद गया और उनके बूब्स पर आ गया . दोनों बूब्स को चूमते मसलते हुए मैंने अपना लैंड छूट पर रगड़ना शुरू कर दिया. माँ भी गर्मी बर्दाश्त नहीं कर प् रही थी और खुद hi अपनी टंगे उठा कर मेरी कमर पर लपेट ली और कमर उठा कर लैंड को अनादर लेने की कोशिश करने लगी . पर मैं ऐसा नहीं करना चाहता था . माँ ने हाथ नीचे ले जा कर मेरा लैंड हाथ में लिया और खुद hi छूट पर से किया पर मैंने धक्का नहीं मारा. वो मेरी कमर को पाऊँ से कैंची बंधे नीचे को दबाने लगी पर मैंने फिर भी लैंड छूट में घुसने नहीं दिया. माँ मेरा सर ज़ोर ज़ोर से अपने बूब्स पर दबाने लगी और उनकी बेताबी बता रही थी क वो अब लैंड को अंदर लेना छह रही हैं . पर अभी तक वो मुझसे बोली नहीं थी . और मैं अब उन्हें बुलवा कर hi रहने वाला था.
गौरी ममी : अब बस भी करो , दाल दो न अंदर
अमित : क्या दाल दूँ
गौरी ममी : तुम्हे क्या है मैं जो कह रही हूँ.
अमित : आप जब तक नहीं बताएंगी मैं कुछ नहीं करूँगा .
गौरी ममी : मुझे शर्म आती है और मत तड़पाओ मुझे.
अमित : यही शर्म तो निकालनी है माँ, अब और पर्दा मुझे बर्दाश्त नहीं , या तो आप खुल कर मेरा साथ दें या फिर ये सब यहीं बंद कर दें.
माँ कुछ देर खामोश रही.
अमित : तो आप नहीं बोलेंगी ? ठीक है फिर आप अपने कपडे पहन लें.
इतना कह कर मैं उनके ऊपर से उठने लगा तो उन्होंने मुझे अपनी गिरफ्त से निकलने नहीं दिया.
गौरी ममी : तू जो चाहता है वो मैं नहीं कर सकती बीटा. ये सब गलत है .
अमित : प्यार करना कभी गलत नहीं होता माँ. आपको मेरी ज़रूरत है और मैं भी आपको वही प्यार देना चाहता हूँ मगर बिना किसी शर्मिंदगी क. मुझे पता है आप मेरे और ममी क बारे में भी जानती हैं. जब वो खुल कर मुझसे प्यार कर सकती हैं तो आप क्यों नहीं? आपका तो मुझ पर सबसे ज्यादा हक़ है.
गौरी ममी : मैंने हमेशा तुम्हे अपना बीटा मन है इस लिए ये सब
अमित : मैं हमेशा आपका बीटा hi रहूँगा माँ. और आपको हर ख़ुशी देना मेरा फ़र्ज़ है. मैं आपके साथ ये सब करना नहीं चाहता था पर पहले ये सब तकदीर से हुआ और बाद में आपकी मर्ज़ी से . मगर अब ये हम दोनों क अपनी प्रेम से होना चाहिए . मैं चाहता हूँ आप खुल क वो सब करें हो आप क दिल में है. मैं वडा करता हूँ आपकी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा.
जब माँ फिर से चुप रही तो मैंने उनकी बाँहों को खोल दिया और उनके पाऊँ को भी अपनी कमर से हटा कर उठने लगा तो माँ ने मेरा हाथ पकड़ लिया.
गौरी ममी : ऐसे छोड़ कर जायेगा? प्यार नहीं करेगा मुझे ?
मैंने माँ की तरफ देखा तो वो मेरी hi आँखों में देख रही थी. हम दोनों की नज़रें मिली मगर इस बार उनहोंने न नज़र झुकाई और न मुँह फेरा.
अमित : मैं कैसे जा सकता हूँ ? आपकी एक आवाज़ पर आपके पास hi हूँ मैं . पर अब आपको खुल कर वो सब करना होगा जो आप करना चाहती हैं.
गौरी ममी : तो तूने फैसला कर लिया है तुझे बेशरम बना क छोड़ेगा?
अमित : प्यार में शर्म क लिए कोई जगह नहीं है माँ.
गौरी ममी : माँ नहीं , मुझे मेरे नाम से बुलाओ, माँ बन कर मैं वो सब नहीं कर सकती जो तू कह रहा है.
अमित : अगर आप ऐसा hi चाहती हैं तो आपकी ख़ुशी क लिए मुझे ये भी मंज़ूर है पर सिर्फ इन्ही पलों में.
गौरी ममी : मैं भी यही चाहती हूँ .
अमित : तो शुरू करें गौरी , हमारी प्रेम मिलान की रत.
गौरी ममी : आआह्ह्ह्ह फिर से मुझे मेरे नाम से बुलाओ
अमित : गौरी
गौरी ममी : कब से तुम्हारे मुँह से अपना नाम सुन्ना चाहती थी मैं. आज मुझे ऐसे प्यार करो क सब भूल जॉन मैं . जब से तुम्हे दीपिका क साथ देखा है मैं खुद को रोक नहीं प् रही थी . मैं भी वो सब महसूस करना चाहती हूँ जो दीपिका महसूस कर रही थी. वो शांति वो ख़ुशी जो उसके चेहरे पर मैंने देखि थी मुझे भी वो चाहिए.
माँ मेरे गले लग कर अपने दिल की बात बता रही थी और मैंने भी उन्हें सहलाते हुए कहा
अमित : उससे भी ज्यादा hi मिलेगा . बस आप मेरा साथ देना.
गौरी ममी : जैसा चाहोगे वैसा साथ दूंगी बस आज मेरी अधूरी ीचा पूरी कर दो.
अमित : अब कोई ीचा अधूरी नहीं रहेगी आपकी. और सिर्फ आज hi नहीं हमेशा क लिए.
इतना कह कर मैंने माँ को बीएड पर लिटा दिया और. उन्हें किश करने लगा . माँ भी मेरे गले में बहन डेल बराबर साथ दे रही थी . किश करते हुए अब माँ खुद hi मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी ज़ुबान को भी चूसने लगी. किश करने क बाद मैं उनकी गर्दन को चूमता हुआ उनके स्तनों तक आया तो एक बार नज़र भर क उनके मस्त उरोजों को देखा.
अमित : आप क ये दूध क कलश बहुत hi दिलकश हैं. जी करता है इन्हे खा जॉन
गौरी ममी : तो खा जाओ न रोका किसने है, ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi हैं. इन्हे प्यार करो.
मैंने उनका एक स्तन मुँह में लिया और दूसरे को मसलने लगा. माँ और भी ज्यादा सिसकियाँ लेती हुई मेरे सर को अपने स्तनों पर दबाने लगी.
गौरी ममी : हम्म्म उनममम ककक ऐसे hi प्यार करो उम्म्म मैं कब से इन पलों क लिए तड़प रही थी कक्कक्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ और ज़ोर से करो ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi हैं. खूब प्यार करो उम्म्म्म ककक इन्हे दूध से भर दो और फिर मेरा दूध पीना जो मैं कभी तुम्हे पीला नहीं पायी.
अमित : इनको दूध से भर कर मैं hi इनमे से दूध भी पियूँगा , आपकी हर ीचा पूरी करूँगा मैं.
मैंने कुछ देर दोनों स्तनों को मसल मसल क बरी बरी से पिया . दोनों चूचे मसलने से लाल हो चुके थे. उसके बाद मैंने उनकी कभी में अपनी जीभ घुसा कर उन्हें और उत्तेजित करने लगा. इससे माँ छटपटाने लगी.
गौरी ममी : उफ्फ्फ्फ़ ये क्या कर रहे हो कक्कक्क्स उम्म्म्म करते रहो ुकम्म्म कक्कक्स
नाभि को प्यार करने क बाद मैं उनकी छूट पर आ गया और फिर से छूट को चाटने लगा. माँ मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी.
गौरी ममी : आआअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ये क्या कर रहे हो ऐसा भी कोई करता है
अमित : आपको ाचा नहीं लग रहा क्या ?
गौरी ममी : बहुत ाचा लग रहा है , अब पता चला दीपिका क्यों इतना पागल रहती है तुम्हारे लिए . उम्म्म्म कक्कक्क्स करते रहो.
अमित : क्या वो सब करना चाहती हैं आप जो दीपिका ममी करती है मेरे साथ
गौरी ममी : हम्म्म्म सब कुछ
माँ के इतना कहते hi मैं उनके ऊपर घूम गया और 69 पोजीशन में उनके ऊपर आ गया . अब मेरा मुँह माँ की छूट क ऊपर था और मेरा लैंड उनके मुँह क ऊपर . अपने सामने मेरा झूलता हुआ लैंड देख कर माँ की तो बोलती बंद हो गयी. पर मैंने उनके मुँह पर लैंड रगड़ना शुरू कर दिया . वो लैंड को मुँह में जाने से रोकने क लिए अपना मुँह इधर उधर कर रही थी.
अमित : क्या हुआ ? प्यार करो न इसे भी जैसे दीपिका ममी करती है , आपको भी मज़ा आएगा.
गौरी ममी : मैंने ऐसा कभी नहीं किया .
अमित : अब सब कुछ भूल जाइये. मेरे साथ खुल कर मज़ा लीजिये एक प्रेमिका की तरह . आप जो कभी किया नहीं है अब वो सब कीजिये और मज़ा लीजिये.
मैंने फिर से लैंड उनके मुँह पर रगड़ा तो माँ ने लैंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और सुपडे पर अपने होंठ लगा कर एक किश कर दी. मुझे इतना मज़ा आया क मैंने उनकी छूट में जीभ घुसा दी और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. माँ को भी मेरे ऐसा करने से मज़ा आया और मज़े में उन्होंने सुपडे को मुँह में ले लिया. लैंड क मुँह में जाते hi मैंने लैंड को दबाते हुए उनके मुँह में और अंदर तक घुसा दिया . माँ ने जल्दी से मेरी जांघों को दबा कर उठाया और मुँह से लैंड बहार निकल दिया.
गौरी ममी : अखुनण अखुनण अखुनण ये क्या अखुनण अखुनण कर रहे थे अखुनण
अमित : सॉरी वो मुझे इतना मज़ा आया क बर्दाश्त नहीं हुआ .
मैं माँ क ऊपर से हैट गया और उन्हें साँस लेने दी. माँ ने मुझे अपने लिए चिंता करते देखा तो वो मुस्कुराती हुई मेरे ऊपर आ गयी और खुद hi मेरे लैंड को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया .
अमित : आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स आप कमल हैं
गौरी ममी : सररूपप्प्प श्रुणुपपप सृपपप उम्म्म्म कमल तो तुम हो . सच में इस सब में अलग hi मज़ा है जो आज तक मुझे पता hi नहीं था. सरररूउप सर्र्रउपपपप उम्म्म
माँ अपनी मर्ज़ी से जितना हो सकता था उतना लैंड मुँह में अंदर बहार कर रही थी. मैं हाथ बड़ा कर उनके बाल पकड़ कर उनका मुँह बीच बीच में लैंड पर दबाने लगा. माँ को ऐसे अपना लैंड चूसते हुए देख कर मुझे अपने अंदर उत्तेजना का ज्वालामुखी उठता महसूस हो रहा था. जब और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उनको बीएड पर लिटा दिया और खुद उनकी टांगों क बीच में आकर लैंड को छूट पर सेट कर क एक धक्का मर दिया. लैंड छूट में आधा चला गया
गौरी ममी : आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स तुम्हारा ये बहुत बड़ा है , हर बार दर्द देता है. पिछली बार तो तुमने मुझे चलने लायक नहीं छोड़ा था.
अमित : आपको पसंद नहीं है क्या?
गौरी ममी : पसंद न होता तो क्या खुद hi इसे अंदर लेने की कोशिश करती ?
अमित : जनता हूँ कैसे हॉस्पिटल में आप इसके ऊपर बैठ कर दर्द से छटपटा रही थी.
गौरी ममी : तुम जग रहे थे?
अमित : हम्म्म
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह तो उसी दिन क्यों नहीं कर दिया सब ? इतने दिन क्यों इंतज़ार करवाया ? आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह
अमित : इंतज़ार तो आप ने करवाया , मैं चाहता था आप खुद मुझसे बात करें. पिछली बार भी इसी लिए मैंने वो सब उस तरीके से किया था. पर फिर भी आप चुप रही.
गौरी ममी : ाःह ाःह उम्म्म्म कक्कक्स आअह्ह्ह क्या करती तुमसे बात करने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी. आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः ाःह ऐसे hi करो आअह्ह्ह आअह्ह्ह पिछली बार जैसे तुमने किया था वैसे कभी नहीं हुआ था मेरे साथ. तुमने तो सुहाग रत यद् करवा दी थी. इतना दर्द तो तब भी न हुआ था. ाःह आअह्ह्ह aahhhhhhhhhhhhhhhh
माँ की इस बात पर मुझे जोश आ गया और मैंने सुपडे तक खींच कर पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक घुसा दिया जो अब तक आधा hi अंदर बहार हो रहा था.
गौरी ममी : आआअह्ह्ह्हह मार डाला सीसीसी आआआअह्ह्ह्हह आराम से नहीं कर सकते क्या आअह्ह्ह्हह उस दिन भी ऐसे hi कर रहे थे तुम ककक आआआईईई जान निकल डोज
अमित : कण्ट्रोल नहीं हो रहा आप की बातें मुझे और गरम कर रही हैं
गौरी ममी : कहीं जान hi न निकल देना आआह्ह्ह्ह एक तो इतना बड़ा मुसल लिए फिरते हो ऊपर से ऐसे करते हो ककक आआह्ह्ह्ह सच में बहुत बड़ा है अंदर पेट तक जा कर लगता है
माँ की बातें मुझे गरम कर रही थी और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी. माँ भी कुछ देर बाद खुद hi कमर हिला कर मज़े लेने लगी .
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः उम्म्म्म ऐसे hi करते रहो मज़ा आ रहा है उम्म्म आआह्ह्ह्ह
अमित : अभी तो और भी मज़ा आएगा.
इतना कह कर मैंने माँ को करवट क बल किया और उनके पीछे लेट कर उनकी एक तंग उठा कर घुटने क नीचे से हाथ निकल कर उनका एक चुका पकड़ लिया और लैंड घुसा कर धक्के पेलने लगा.
गौरी ममी : आअह्ह्ह उम्म्म्म आअह्ह्ह्ह ये सब कहाँ से सीखा तुमने आअह्ह्ह आअह्ह्ह कैसे कैसे तरीके से कर रहे हो
अमित : क्या कर रहा हूँ ?
गौरी ममी : यही हो कर रहे हो आअह्ह्ह आअह्ह्ह उम्म्म करते रहो
अमित : ज़रा खुल क बताओ न क्या कर रहा हूँ गौरी
गौरी ममी : आआह्ह्ह आह्हः फिर से कहो आआह्ह्ह अह्ह्ह्हह
अमित : बताओ तो क्या कर रहा हूँ गौरी
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मुझे छोड़ रहे हो आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह एआईईईई मैं गईइइइइइइइ आअह्हह्ह्ह्ह
मेरे मुँह से अपना नाम सुन कर माँ इतनी गरम हो गयी क खुद hi अपनी छूट मसलते हुए झटके लेती झड़ने लगी . मुझे भी उनकी बातों ने गरम कर दिया था अब मैं भी अपना पानी निकलना चाहता था तो मैंने जल्दी से उन्हें घुटनो क बल किया और पीछे आ कर एक hi झटके में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया.
गौरी ममी : आआअह्ह्ह्हह मर डाला आआआअह्ह्ह्हह कक्कक्स
मैं माँ की कमर थामे लगातार ज़ोरदार धक्के पेलने लगा और कुछ hi पलों में मेरे सबर का बांध भी टूट गया. लैंड को जड़ तक अंदर घुसा कर मैंने माँ क ऊपर hi गिर गया और उनकी छूट में पानी छोड़ने लगा.
अमित : आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स आप बहुत गरम हो माँ
गौरी ममी : माँ नहीं गौरी , तुम्हारी गौरी .
अमित : गौरी तुम बहुत hi गरम हो इतनी जल्दी मेरा कभी नहीं होता.
गौरी ममी : तुम्हारे लिए कैसी भी बन जाउंगी , अब तुम hi मेरे सब कुछ हो. मेरे बचे क बापू.
गौरी ममी ने इतना कहा तो मैं उन्हें किश करने लगा और वो भी गर्दन घुमा कर मेरा साथ देने लगी . कुछ देर बाद जब हम दोनों की साँसे संभाली तो माँ बीएड से उतर कर बाथरूम में चली गयी. जब वो वापिस आयी तो उनको देख कर फिर से मुझे कुछ होने लगा. वो आकर मेरे साथ बिस्टेर पर लेट गयी.
गौरी ममी : क्या देख रहे हो?
अमित : आप बहुत हॉट हो. फिर से आपको प्यार करने का दिल हो रहा है.
गौरी ममी : साडी रत क्या यही कुछ करना है?
अमित : साडी ज़िन्दगी कर सकता हूँ अगर आप साथ दे तो.
गौरी ममी : शरमाते हुए ) मैं तो तुम्हे मन कर hi नहीं सकती .
अमित : तो करे शुरू ?
इतना कह कर मैंने फिर से उन्हें बाँहों में ले लिया और किश करने लगा . माँ भी मेरा गरम जोशी से साथ देने लगी. बस फिर क्या था हो गया शुरू एक और राउंड. इस बार उन्होंने खुद hi मेरा लैंड मुँह में ले कर खड़ा किया और मेरे ऊपर बैठ कर घुड़सवारी भी की.
गौरी ममी : ाःह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है उम्म्म आठ आअह्ह्ह
अमित : खुल कर मज़े लो गौरी मैं तुम्हे हर मज़ा दूंगा.
माँ मेरे लैंड पर उछाल थी थी और मैं उनके उछाल कूद करते दूध दबा रहा था. माँ मस्ती में खुद hi अपने बल खोल रही थी . जब माँ उछाल उछाल कर थक गयी तो मैंने उन्हें बिस्टेर से निचे कड़ी कर क घोड़ी बना लिया . पीछे आ कर मैंने एक hi झटके में लैंड छूट में पेल दिया .
गौरी ममी : आआह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स एक hi बार में पेल देते हो आअह्ह्ह्ह दर्द होता है पर मज़ाआआ आअह्ह्ह मज़ा भी अत है ऐसे hi करो उम्म्म आअह्ह्ह्हह
माँ बीएड की पुष्ट की पकड़ कर झुकी हुई थी और मैं उनके लटक रहे आम पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मर रहा था . मैंने माँ को और झुकाते हुए उनकी एक तंग बीएड पर रखवा दी जिससे उनकी गांड और बहार निकल आयी . गांड देख कर मेरा मन फिर से मचलने लगा . क्या गांड थी मुझे अब माँ की गांड मारनी थी कैसे भी कर क. मैंने उनकी गांड में उंगली घुसा दी.
गौरी ममी: आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स ये कर रहे हो कक्कक्क्स वहां क्यों कर रहे हो?
अमित : गौरी तुम्हारी ये गांड बहुत मस्त है मुझे अपनी गांड मरने डौगी .
गौरी ममी : वहां भी भला कोई करता है क्या? आह्हः अह्ह्ह वहां मैंने कभी नहीं किया और तुम्हारा इतना बड़ा जायेगा कैसे
अमित : चला जायेगा जैसे दीपिका ममी क गया था तुम्हारे अंदर भी चला जायेगा. बस मुझे अपनी गांड मरने दो वर्ण मुझे चैन नहीं मिलेगा.
गौरी ममी : वहां बहुत दर्द होगा मैं कैसे लुंगी
अमित : एक hi बार दर्द होगा जैसे पहली बार आगे होता है बस . प्लीज मुझे अपनी गांड मरने दो न .
गौरी ममी : इतना hi दिल है तो आआह्ह्ह्बा आअह्ह्ह मर लेना कक्कक्स मैं मन कैसे कर सकती हूँ और ज़ोर से करो .
मैंने माँ को बीएड क सिरे पर घुटनो क बल होने को कहा और वो हो गयी . माँ को और ज्यादा पीछे को बेंड करते हुए उनकी गांड को पूरी तरह मैंने बहार निकल लिया और उनकी छूट से लैंड निकल कर गांड क छेड़ पर लगा दिया . लैंड छूट रास से भीगा हुआ था . इस लिए मैंने तेल लगाना ज़रूरी नहीं समझा और सूपड़ा छेड़ पर लगा कर एक हाथ से लैंड को थामे ज़ोर से पुश कर दिया. माँ की गांड बहुत टाइट थी सूपड़ा घुसते hi मुझे भी परेशानी हुई पर माँ क मुँह से तो चीख hi निकल गयी .
गौरी ममी : आयआईईईई मर गयी कक्कक्स. ाझह्ह्ह
मैंने रुकने की बजाये लगातार लैंड पर दबाव बनाये रखा और धीरे धीरे सरकता हुआ 5 इंच तक लैंड गांड में घुस गया. पर इतने में माँ की बुरी हालत हो गयी.
गौरी ममी : मायआ एआइइइइ निकल लो बहुत दर्द हो रहा है. एआईईईई कक्कक्स आआआह्ह्ह्हह्ह
अमित : बस अब दर्द नहीं होगा , अब तो घुस गया है .
मैंने कुछ देर माँ क स्तनों को दबाया और एक हाथ से उनकी छूट को मसलता रहा. थोड़ी देर में hi उनका कराहना सिसकियों में बदल गया तो मैंने आहिस्ता से लैंड बहार निकलना शुरू किया . माँ की गांड लैंड को पूरी तरह से जकड़े हुए थी. मैंने सुपडे तक लैंड बहार किया और फिर से अंदर करने लगा. मैं ये सब बहुत धीरे धीरे कर रहा था जिससे माँ को ज्यादा दर्द न हो. साथ में मैं माँ की छूट सहलाता रहा. थोड़ी देर में जब माँ कुछ नार्मल हुई तो मैंने भी स्पीड तेज़ करदी.
गौरी ममी : आअह्ह्ह ाःह आअह्ह्ह आराम से करो दर्द है ाः आअह्ह्ह आअह्ह्ह
अमित : अब कभी दर्द नहीं होगा . ये सिर्फ पहली बार का hi दर्द है . आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह तुम बहुत टाइट हो गौरी बड़ा मज़ा आ रहा है.
मैं धक्के मरता हुआ बीच बीच में लैंड थोड़ा थोड़ा कर क और अंदर घुसता जा रहा था और न को पता भी न चला. जब आखिर का 2 इंच रह गया तो मैं एक ज़ोरदार धक्का मर कर पूरा लैंड गांड में थोक दिया. माँ ने एक बार फिर ज़ोर से चीख मरी पर मैं उनके ऊपर झुक कर उनकी पीठ चूमने लगा और कुछ देर में वो फिर से नार्मल हो गयी. माँ की टाइट गांड मरने में मुझे इतना मज़ा आया क ज्यादा देर खुद को मैं रोक न पाया और उनकी गांड में अपना पानी निकल दिया . इस राउंड में भी माँ 3 बार झाड़ चुकी थी और गांड चुदाई में तो उनको दर्द भी काफी हुआ इस लिए मैंने उसके बाद उन्हें ज्यादा परेशां नहीं किया और उनको अपनी बाँहों में लिए ऐसे hi सो गया.
सुबह माँ की कराह से मेरी आँख खुली . मैंने देखा तो माँ बीएड से नीचे उतर कर चलने की कोशिश कर रही थी पर उन्हें दर्द हो रहा था. मैंने जल्दी से उठ कर उन्हें सहारा दिया और उनको बीएड पर बिठाया मगर वो फिर से कराह उठी.
गौरी ममी : आआआह्ह्ह्ह आईईईई मर गयी
माँ एक साइड को करवट क बल बीएड पर लेट गयी. मैं समझ गया क उनको गांड में दर्द हो रहा है. रत में तो हम ऐसे hi सो गए थे मगर अब उनकी गांड अकड़ गयी थी.
अमित : आप लेट जाओ माँ आपको दर्द हो रहा है
गौरी ममी : किसे लेट जॉन सबके उठने का टाइम हो रहा है और मुझे चाय नाश्ते का भी देखना है . तुमने तो सत्यांश मर दोउ मेरा. न बैठा जा रहा है न चला जा रहा है. क्या जवाब दूंगी सबको?
अमित : सॉरी माँ पर आप इस हालत में नहीं हैं क कोई काम करें. आप बस आराम करेंगी . बाथरूम में गिरने का बहाना कर दी . नाश्ते का कोई बात नहीं कोई और इंतज़ाम कर लेंगे आप पहले मेरे साथ आओ.
मैंने माँ को गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया और पानी गरम करने क लिए गीज़र चला दिया. थोड़ी देर में पानी कुछ गरम हुआ तो मैंने माँ की गांड की सिकाई गरम पानी से की जिससे कुछ अकड़न काम हुई. अब माँ ठीक से कड़ी हो प् रही थी पर दर्द अभी भी था .
अमित : अब कैसा लग रहा है माँ?
गौरी ममी : अब कुछ ठीक हूँ बीटा पर दर्द अभी भी है. चल अब मुझे ज़रा नहाने दे. तू बहार जा .
अमित : नहीं माँ आप से नहीं होगा आप यही कड़ी रही मैं नेहला देता हूँ.
गौरी ममी : नहीं तू रहने दे
अमित : चुप बस
मैंने माँ को शावर की नीचे खड़ा किया और फिर उन्हें नहलाने लगा. साबुन से अछि तरह रगड़ कर मैंने उन्हें नहलाया. जैसे बचपन में वो मुझे नहलाती थी. माँ मुझसे शर्मा रही थी पर माँ को रगड़ते हुए फिर से मेरा लैंड खड़ा हो गया.
गौरी ममी : अब बस कर चल मुझे कपडे दे मेरे .
अमित : थोड़ी देर और नहाते हैं न माँ
गौरी ममी : नहीं बस अब मुझे कपडे दे दे.
मैंने माँ को एक बार नहीं में भर कर गले लगाया और अपने खड़े लैंड को उनकी जांघों क बीच दे कर छूट क ऊपर रगड़ दिया . माँ क मुँह से सिसकी निकल गयी . पर उन्होंने मुझे अब बहार जाने क लिए धकेल दिया . सही भी था ये वक़्त सही नहीं था क्या पता कौन उठ कर आ जाये . मैंने माँ को तौलिये से साफ़ किया और उनको कपडे पहनने में भी मदद की उसके बाद वो धीरे धीरे चलती हुई नीचे चली गयी और थोड़ी देर बाद hi उनकी कराहने की आवाज़ आयी. मैं समझ गया वो ड्रामा कर रही हैं . मुझे अभी नींद आ रही थी इस लिए मैं फिर से कपडे पहन कर सो गया .
घर पहुँचते hi माँ मुझे देख कर खुश हो गयी. और मुझे गले लगा लिया . बाबा घर पर hi थे . मुझे देख कर दीपिका ममी भी खुश हो गयी. मैं सब से मिला और कामिनी ममी को भी उनके रूम में जा कर मिला. थोड़ी देर में hi अजय मम और कमलेश मां भी आ गए . कुछ देर मैंने अपने बेटे क साथ भी खेला और फिर सब ने मिल कर खाना खाया . मैंने फ़ोन पर दिव्या मौसी और राधा से भी बात की और अपनी कुशलता बताई. रीमा शालू शिवानी से भी मेरी बात हुई. कल्पना ने भी कुछ मेस्सगेस भेजे थे नार्मल शायरी क पर मैंने उसके जवाब में सिर्फ एक जोके hi सेंड किया. उसके बाद मैं बीएड पर लेट कर माँ क बारे में सोचने लगा . सब का सोने का टाइम हो चूका था अब किसी भी वक़्त माँ आ सकती थी. मैं उनके साथ कैसे शुरुआत करूँ इसी बात को लेकर मैं सोच रहा था. माँ खुद तो शुरुआत करने नहीं वाली इस लिए करना तो मुझे hi था. तभी एक बात दिमाग में आयी क जब माँ सब कुछ जानते हुए भी कर hi रही है और यही वो चाहती है तो मैं अपने अंदर से दर को छोड़ कर खुद hi पहल कर दूँ. वो क्या कहेंगी. बस मैंने यही सोच कर अपने कमरे की लाइट पूरी बंद को और कपडे उतर कर बीएड पर लेट कर माँ का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर में hi कुछ आहत हुई तो मैं समझ गया क माँ आ गयी है. जैसे hi वो दरवाज़ा खोलने लगी मैं उठ कर पहले hi दरवाज़े क पास पहुँच गया.
जैसे hi माँ दरवाज़ा खोल कर अंदर आयी तो अँधेरे में उसे मेरे करीब होने का पता न चला. पर उसके कुछ बोलने से पहले hi मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. माँ मेरे इस तरह अचानक उनको बाँहों में भर लेने से सकते में आ गयी और मुझे खुद से दूर हटाने की कोशिश करने लगी पर मैं नहीं रुका और उनके होंठ चूसने लगा. थोड़ी hi देर में माँ का विरोध काम हो गया और उनके हाथ खुद hi मेरे सर पर आ गए . अब माँ भी किसिंग में रिस्पांस करने लगी . माँ को साथ देते हुए देख कर मैंने अपना एक हाथ उनके बड़े बड़े स्तनों पर रख दिया और उन्हें दबाने लगा. माँ मचलने लगी और उनकी पकड़ मेरे सर पर और भी मजबूत हो गयी. वो मस्ती में मेरे बल खींचने लगी और मेरे होंठ अपने डेंटन में दबाने लगी. मैंने अपना दूसरा हाथ अब उनके मस्त बड़े बड़े चूतड़ों पर रख दिया और उन्हें भी मसलने लगा. माँ की गर्मी और बाद गयी और वो मेरे साथ चिपकने लगी. मैंने उन्हें दीवार से लगा दिया और किश करता हुआ उनकी गर्दन पर आ गया. माँ क होंठ आज़ाद होते hi अब वो सिसकियाँ लेने लगी.
गौरी ममी: उम्मम्मम कक्कक्कक्स उम्मम्मम उफ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स
माँ कुछ बोल नहीं रही थी पर आज मैंने सोच लिया था क उन्हें बुलवा क hi रहूँगा. मैंने उनकी सदी का पल्लू सीने से हतय और सदी खोलने लगा. माँ ने भी मेरा साथ दिया और सदी उनके बदन से उतर कर निचे गिर गयी. मैंने माँ क ब्लाउज को भी खोल दिया और अगले hi पल वो भी ज़मीन पर था. मैंने हाथ नीचे ले जा कर उनके पेटीकोट का नाडा खोल दिया और वो भी उनके पाऊँ में जा गिरा. अब माँ भी मेरी तरह नंगी थी. ब्रा और पेंटी वो पहले hi उतर कर आयी थी. मैं उन्हें नंगी कर क जैसे hi उनके साथ लगा तो उन्हें भी मेरे निर्वस्त्र होने का एहसास हुआ स्पेशलय जब मेरा लैंड उनके योनि भाग क पास टकराया. माँ क मुँह से फिर से सिसकी निकल गयी.
गौरी ममी : उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स उम्मम्मम्म
मैंने माँ को अपने सीने से लगा लिया और उनको अपनी बाँहों की गिरफ्त में लेने क बाद उनकी पीठ पर अपने हाथ चलता हुआ उनकी गांड तक पहुँच गया. दोनों चूतड़ों को अपने हाथों में ले कर मैं मसल मसल कर दबाने लगा. जब मैं उनके चूतड़ों को दबाता तो वो उनकी छूट मेरे लैंड क साथ और भी ज्यादा चिपक जाती. माँ सिर्फ सिसकियाँ ले रही थी. मैंने अपनी एक उंगली उनकी गांड में दाल दी तो वो उछाल पड़ी.
गौरी ममी : उईईईईई कक्ककक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह
मैंने फिर से उनके होंठों को अपने होंठों में जकड लिया और वो भी मुझे किश करने लगी. मैंने उनका भी एक हाथ अपने हाथ में पकड़ा और नीचे ले जा कर अपना लैंड उनके हाथ में थमा दिया. पहले तो उन्होंने हाथ पीछे खिंच लिया पर फिर से मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपना लैंड थमा दिया. और उन्हें हाथ खींचने नहीं दिया . धीरे धीरे माँ भी रंग में आ गयी अपनी मुठी बंद कर क उसने मेरा लैंड अपनी गिरफ्त में ले लिया. अब माँ धीरे धीरे मेरा लैंड मसलने लगी और किसिंग भी ज़ोरदार करने लगी . ये सब अँधेरे में हो रहा था इस लिए माँ साथ दे रही थी पर अब इस अटक से पर्दा उठाना था तो मैंने हाथ बड़ा कर रूम की लाइट ों कर दी. एक डैम कमरे में लाइट हो जाने से माँ को झटका लगा और उन्होंने तुरंत मुझे छोड़ दिया और अपने हाथों से अपने उरोज और छूट को ढकती हुई नीचे बैठ गयी . माँ को इस सब की उम्मीद नहीं थी. वो सर झुका कर बैठ गयी पर अब मुझे उनकी इस शर्म को ख़तम करना था.
अमित : रुक क्यों गयी माँ ? कब तक ऐसे अँधेरे में चुपचाप करती रहोगी ? जब सब करना hi है तो हक़ से करो. वैसे भी किसी और से ज्यादा आपका हक़ है मुझ पर. मुझे ाचा नहीं लगता ऐसे आप छुप कर किसी अपराधी की तरह मुझसे प्यार करने आती हैं. अगर आप सच में hi मुझसे ये प्यार चाहती हैं तो हल से करिये. मैं नहीं चाहता क आप अपनी इच्छाओं को दबाकर जियें. अब जो भी होगा वो खुली आँखों से रौशनी में होगा.
मेरी बात सुनने क बाद भी माँ कुछ बोली नहीं पर उन्होंने नज़र उठा कर मुझे देखा . वो अभी भी खुद को रोक रही थी . मैंने उनकी दुविधा को समझा और हाथ बड़ा कर उन्हें खड़ा कर दिया . वो अपने हाथों से अपना खज़ाना छुपा रही थी. पर मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा.
अमित : अगर आप मुझे खुद को सौंप hi चुकी हैं तो फिर इस शर्म की जंजीर को भी तोड़ दीजिये. मैं आपकी हर ीचा पूरी करने की कोशिश करूँगा.
इतना कह कर मैंने माँ क कंकपते होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा. माँ बट सी बानी रही . मैंने उनके दोनों हाथ अपने हाथों में लिए और उँगलियों में उंगलियां फसते हुए उन्हें दीवार से लगा दिया. माँ अभी मेरा साथ नहीं दे रही थी पर मैं उनके होंठ चूसने लगा. साथ hi मैंने अपने लैंड को उनके योनि भाग पर रगड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में hi माँ मेरे होंठ चूसने लगी. मैंने उन्हें मुँह में अपनी जीभ दाल दी और उनकी जीभ क साथ अपनी जीभ मिलाने लगा. माँ का एक पाऊँ उठ गया और वो उसे मेरी तंग से रगड़ने लगी. माँ फिर से गरम होने लगी थी पर उन्होंने ऑंखें बंद कर ली थी. मैंने माँ क हाथ छोड़ कर उनके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया. माँ अब मेरी गर्दन सर और पीठ पर मस्ती में अपने हाथ चलने लगी साथ hi वो अपनी कमर भी खुद हिलने लगी . मैंने माँ का हाथ पकड़ा और उसे अपने लैंड पर रख दिया पर माँ ने हाथ हटा लिया.
अमित : पकड़ो न माँ ये तुम्हारे लिए hi तो है. अब शर्माना छोड़ भी दो.
माँ ने ऑंखें बंद hi राखी और बोली कुछ नहीं. मैंने माँ का हाथ अपने लैंड पर दबाये रखा तो धीरे धीरे उनकी पकड़ हाथ पर मजबूत हो गयी . मुझे ख़ुशी हुई क वो अब साथ देने लगी हैं पर वो ऑंखें नहीं खोल रही थी और न अभी तक कुछ बोली थी. मैंने झुक कर उनके रसीले आम की तरह लटक रहे एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया. हालाँकि वो इतना बड़ा था क मुँह में तो आ नहीं सकता था पर जितना हो सका मैंने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया. दूसरे वाले को मैंने हाथ में ले क मसलना शुरू कर दिया. अपने एक हाथ को मैंने माँ की योनि पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. इससे माँ की गर्मी और बाद गयी हर उन्होंने भी मेरे लैंड को ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया. उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी जिन्हे वो मुँह पर हाथ रख कर दबाने की कोशिश कर रही थी.
गौरी ममी : कक्कक्कक्स उनममममम ओह्ह्ह्ह उम्मम्मम आह्हः उनमममममम
एक आम को निचोड़ने क बाद मैंने दूसरे को चूसना शुरू कर दिया . माँ क हलके भूरे नीपल अब अकड़ चुके थे मैंने उनके निप्पल खींचने शुरू कर दिए. माँ की उत्तेजना और बढ़ती गयी. उनकी छूट पानी पानी हो रही थी और वो ज़ोर ज़ोर मेरा लैंड रगड़ रही थी. माँ सिसकियाँ लिए जा रही थी पर बोल नहीं रही थी . मैं दोनों स्तनों क साथ खेलने क बाद या के मांसल जिसम को चूमता हुआ नीचे जाने लगा. छूट क पास कुछ बाल थे मैंने उनके बालों को सहलाया और बालो क पीछे छिपी रास बहती छूट सामने आ गयी . आज पहली बार मैं रौशनी में उनकी छूट देख रहा था. बड़ी hi प्यारी थी , होंठ थोड़े से खुले और मोठे मोठे थे. मैंने छूट की फांकों को उँगलियों से खोलना चाहा तो माँ ने आगे हाथ रख दिया. मैंने उनके हाथ को चूमा और साइड हटा दिया. छूट की डंके खुलते hi अंदर का गुलाबी हिस्सा नज़र आने लगा.
अमित : आपकी छूट बहुत प्यारी है माँ पर ये बल मुझे यहाँ अचे नहीं लग रहे. इतना कह कर मैंने अपने होंठ छूट क होंठों से भिड़ा दिए तो माँ का जिसम लरज गया .
गौरी ममी : आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्कक्स उफ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम
मैंने माँ की एक तंग उठा कर अपने कंधे पर लटका ली. उन्होंने सहारा लेने क लिए अपने हाथ मेरे सर पे रख लिए . अब वो एक तंग पर कड़ी थी और दूसरी मेरे कंधे पर लटकाये वो मेरे सर का सहारा लिए अपनी छूट चूसै का मज़ा ले रही थी. मैंने अपनी एक उंगली उनकी छूट में घुसा कर अंदर बहार करनी शुरू कर दी और साथ hi अपनी जीभ को भी छूट में घुसा दिया.
गौरी ममी : आआआअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स आअह्ह्ह्हह उम्मम्मम्मम
माँ मज़े की वादियों में खोटी जा रही थी. उनकी पकड़ मेरे सर पर और मजबूत हो गयी और वो मेरे मुँह को अपनी छूट पर दबाने लगी .
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म आह्हः कक्कक्स aaaaiaiiiiiiiiii
माँ और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पायी और वो झटके लेती पानी छोड़ने लगी. मैंने भी उनका पानी वास्ते नहीं होने दिया और सारा पि गया. पानी निकलते hi माँ ढीली पड़ने लगी उनसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था पर मैंने उन्हें नहीं छोड़ा और उनकी छूट को चाट ता हुआ फिर से गरम करने लगा. माँ अब मेरे कंधे से अपनी तंग नीचे उतरना छह रही थी पर मैं उन्हें ऐसा करने नहीं दे रहा था . मैं उनकी छूट को अछि तरह चूसने क बाद अब अपने कंधे पर राखी उनकी जांघ को चूमने लगा. कितना मुलायम बदन था माँ का. मगर माँ ने ज्यादा देर मुझे ऐसा करने न दिया और ज़बरदस्ती अपनी तंग मेरे कंधे से निचे कर दी. मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी ऑंखें खुली हुई थी और वो मुझे hi देख रही थी. जैसे hi हमारी नज़रें मिली तो उन्होंने चेहरा घुमा लिया. माँ ने फिर से लाइट बंद करने क लिए हाथ बढ़ाया तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया .
अमित : नहीं माँ आज नहीं , आज कोई पर्दा नहीं . मैं आपके इस खूबसूरत बदन को जी भर क देखना चाहता हूँ .
मेरी इस बात से माँ ने एक सिसकी भरी और ऑंखें बंद कर ली. मैंने उनको गॉड में उठा लिया और बीएड पर ले गया . बीएड पर लिटाने क बाद मैं पीछे हैट कर उनके पूरे बदन का अवलोकन करने लगा. सर से पाऊँ तक माँ का जिस्म नायब था . गोरा दूध सा रंग और मांसल शरीर कहीं से भी एक्स्ट्रा फैट नहीं थी. बड़े बड़े बूब्स हलके भूरे निप्पल्स क साथ. पेट थोड़ा सा मांसल था पर इतना नहीं कर बहार लटके मगर इतना ज़रूर था क उनकी नाभि गहरी नज़र आ रही थी. पेट क नीचे काले बाल जो उनके गोर बदन पर अचे भी लग रहे थे पर मुझे वो जगह चिकनी पसंद थी. उसके नीचे का हिस्सा माँ की जाँघों में छिप गया था क्यूंकि उन्होंने अपनी दोनों टंगे कास क आपस में मिलायी हुई थी. यहाँ से आगे उनकी गोरी चिकनी जांघें और नीचे बहार को झांक रहे उनके चूतड़ जांघों से पाऊँ तक गोरी टंगे जहाँ बालों का रेशा तक न था और पाऊँ क तखनो क पास उनकी वो पायल जो हमेशा चलते वक़्त मधुर झंकार बजती थी . और फिर वो सुन्दर पाऊँ लाल नेल पोलिश क साथ अपनी खूबसूरती को और भी बढ़ाते हुए. इन पाऊँ को मैं हमेशा छूटा रहा हूँ और अब इन्ही पाऊँ को उठाने वाली जगह पहुँच चूका था.
अमित : आप सच में बहुत खूबसूरत हैं माँ , आपका ये बदन वाकई में बेमिसाल है.
माँ ने जब महसूस किया क मैं उन्हें ताड़ रहा हूँ तो उनके हाथ फिर से उनके स्तनों पर आ गए और टंगे समेत कर पेट से लगा ली और करवट लेकर मेरी तरफ पीठ कर ली. ऐसा करने से उनकी गोरी सफ़ेद पीठ मेरे सामने आ गयी और नीचे उनके बड़े बड़े चूतड़ जो करवट क बल होने से और भी बड़े लग रहे थे. मुझसे और रुका नहीं गया और मैंने सीधा उनके चूतड़ों में मुँह फसा दिया. मैं उनके दोनों चूतड़ों को मसलता हुआ चुम रहा था. माँ एक हाथ से मेरे सर को दूर हटने की कोशिश कर रही थी पर मैंने कहा अब रुकने वाला था . मैंने माँ की गांड को चाटने क साथ काटना भी शुरू कर दिया और माँ सिसकने लगी. मैंने माँ को पलटा दिया और अब पेट क बल लेती थी. मैं उनके चूतड़ फैला फैला कर चूमने चाटने लगा. उनकी टांगों क ऊपर बैठ कर माँ उनके उनकी गांड क मज़े ले रहा था और वो बिस्टेर में मुँह दबाये सिसक रही थी. मैंने उनके दोनों चूतड़ों को पकड़ कर फैलाया तो उनकी गांड का छेड़ मेरे सामने आ गया. हलके भूरे रंग का छोटा सा छेड़ बता रहा था क यहाँ आज तक किसी ने दस्तक नहीं दी है. मैंने तुरंत उस दरवाज़े पर झुकते हुए अपनी जीभ वह लगा कर दस्तक दे दी.
गौरी ममी : आआआहहहहहह cccccccccccc उम्मम्मम्मम
माँ ने फिर से हाथ पीछे लेकर मुझे हटाने की कोशिश की पर मैं नहीं रुका और जीभ को अंदर डालने की कोशिश करने लगा. माँ लगातार सिसक रही थी . फिर मैंने अपनी एक उंगली गीली कर क उनकी गांड में घुसा दी. गांड तो पहले से hi टाइट थी ऊपर से माँ ने उसे और टाइट कर लिया मुझे अपनी उंगली उनकी गांड में फस्ती हुई महसूस हुई.
गौरी ममी : कक्कक्क्स नाहीईईई उम्मम्मम
ये पहला शब्द था जो उनके मुँह से निकला. पर मैं कहाँ रुकने वाला था.
अमित : क्यों नहीं माँ ? आप क जिस्म का एक एक हिस्सा सिर्फ प्यार करने क लिए बना है. मैं आपके हर हिस्से पर अपने प्यार से मोहर लगाऊंगा.
इतना कह कर मैंने फिर से उनके चूतड़ चाट ता उनकी गांड में उंगली अंदर बहार करने लगा. उंगली पहले फास फास कर जा रही थी पर मैं अपना थूक इस्तेमाल कर क उनकी गांड चिकनी करता रहा और फिर मेरी उंगली आसानी से अंदर बहार होने लगी. उसके बाद मैं उनकी जाँघों को चूमता हुआ उनके पाऊँ की तरफ बढ़ने लगा. माँ लगातार सिसकियाँ छोड़ रही थी. माँ क पाऊँ क पास पहुँच कर मैंने पाऊँ चुम लिए तो फिर से माँ ने तेज़ सिसकी ली.
उनकी पायल को भी चूमा मैंने और उनके दोनों पाऊँ जोड़ कर घुटनो से उनकी टंगे मोड़ते हुए ऊपर किये. मैंने दोनों पाऊँ क तलवे कहते जिससे माँ सिसकती जा रही थी.
अमित : इन दोनों पाऊँ में मेरी जन्नत पहले भी थी और आज भी है. मैं आपका एहसान तो चूका नहीं सकता पर आपको इतना प्यार ज़रूर दूंगा क आपके मन क कोना कोना भर जाये. पर मैं चाहता हूँ क आप एक प्रेमिका की तरह मेरा साथ दें. उसके बिना ये मिलान अधूरा रहेगा.
मैंने उनके पाऊँ की उँगलियों को मुँह में ले कर चूसा और फिर उन्हें पलट कर सीधा कर दिया. अब पाऊँ से चूमता हुआ मैं ऊपर जाने लगा और उनकी योनि पर पहुँच गया जो अभी नज़र नहीं आ रही थी. मैंने उनकी दोनों टाँगें फैला दी इस बार उन्होंने ज़ोर नहीं लगाया और आराम से टंगे फैला दी. मैं फिर से उनकी छूट पर झुका और छूट को चाटने लगा. माँ फिर से गरम हो चुकी थी और उनकी छूट पनिया गयी थी. छूट चाट ते हुए मैंने छूट में उंगली घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. माँ सिसकियाँ लेती हुई फिर से मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. पर इस बार मैं उनका पानी नहीं निकलना चाहता था. इस लिए छूट को छोड़ कर ऊपर बाद गया और उनके बूब्स पर आ गया . दोनों बूब्स को चूमते मसलते हुए मैंने अपना लैंड छूट पर रगड़ना शुरू कर दिया. माँ भी गर्मी बर्दाश्त नहीं कर प् रही थी और खुद hi अपनी टंगे उठा कर मेरी कमर पर लपेट ली और कमर उठा कर लैंड को अनादर लेने की कोशिश करने लगी . पर मैं ऐसा नहीं करना चाहता था . माँ ने हाथ नीचे ले जा कर मेरा लैंड हाथ में लिया और खुद hi छूट पर से किया पर मैंने धक्का नहीं मारा. वो मेरी कमर को पाऊँ से कैंची बंधे नीचे को दबाने लगी पर मैंने फिर भी लैंड छूट में घुसने नहीं दिया. माँ मेरा सर ज़ोर ज़ोर से अपने बूब्स पर दबाने लगी और उनकी बेताबी बता रही थी क वो अब लैंड को अंदर लेना छह रही हैं . पर अभी तक वो मुझसे बोली नहीं थी . और मैं अब उन्हें बुलवा कर hi रहने वाला था.
गौरी ममी : अब बस भी करो , दाल दो न अंदर
अमित : क्या दाल दूँ
गौरी ममी : तुम्हे क्या है मैं जो कह रही हूँ.
अमित : आप जब तक नहीं बताएंगी मैं कुछ नहीं करूँगा .
गौरी ममी : मुझे शर्म आती है और मत तड़पाओ मुझे.
अमित : यही शर्म तो निकालनी है माँ, अब और पर्दा मुझे बर्दाश्त नहीं , या तो आप खुल कर मेरा साथ दें या फिर ये सब यहीं बंद कर दें.
माँ कुछ देर खामोश रही.
अमित : तो आप नहीं बोलेंगी ? ठीक है फिर आप अपने कपडे पहन लें.
इतना कह कर मैं उनके ऊपर से उठने लगा तो उन्होंने मुझे अपनी गिरफ्त से निकलने नहीं दिया.
गौरी ममी : तू जो चाहता है वो मैं नहीं कर सकती बीटा. ये सब गलत है .
अमित : प्यार करना कभी गलत नहीं होता माँ. आपको मेरी ज़रूरत है और मैं भी आपको वही प्यार देना चाहता हूँ मगर बिना किसी शर्मिंदगी क. मुझे पता है आप मेरे और ममी क बारे में भी जानती हैं. जब वो खुल कर मुझसे प्यार कर सकती हैं तो आप क्यों नहीं? आपका तो मुझ पर सबसे ज्यादा हक़ है.
गौरी ममी : मैंने हमेशा तुम्हे अपना बीटा मन है इस लिए ये सब
अमित : मैं हमेशा आपका बीटा hi रहूँगा माँ. और आपको हर ख़ुशी देना मेरा फ़र्ज़ है. मैं आपके साथ ये सब करना नहीं चाहता था पर पहले ये सब तकदीर से हुआ और बाद में आपकी मर्ज़ी से . मगर अब ये हम दोनों क अपनी प्रेम से होना चाहिए . मैं चाहता हूँ आप खुल क वो सब करें हो आप क दिल में है. मैं वडा करता हूँ आपकी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा.
जब माँ फिर से चुप रही तो मैंने उनकी बाँहों को खोल दिया और उनके पाऊँ को भी अपनी कमर से हटा कर उठने लगा तो माँ ने मेरा हाथ पकड़ लिया.
गौरी ममी : ऐसे छोड़ कर जायेगा? प्यार नहीं करेगा मुझे ?
मैंने माँ की तरफ देखा तो वो मेरी hi आँखों में देख रही थी. हम दोनों की नज़रें मिली मगर इस बार उनहोंने न नज़र झुकाई और न मुँह फेरा.
अमित : मैं कैसे जा सकता हूँ ? आपकी एक आवाज़ पर आपके पास hi हूँ मैं . पर अब आपको खुल कर वो सब करना होगा जो आप करना चाहती हैं.
गौरी ममी : तो तूने फैसला कर लिया है तुझे बेशरम बना क छोड़ेगा?
अमित : प्यार में शर्म क लिए कोई जगह नहीं है माँ.
गौरी ममी : माँ नहीं , मुझे मेरे नाम से बुलाओ, माँ बन कर मैं वो सब नहीं कर सकती जो तू कह रहा है.
अमित : अगर आप ऐसा hi चाहती हैं तो आपकी ख़ुशी क लिए मुझे ये भी मंज़ूर है पर सिर्फ इन्ही पलों में.
गौरी ममी : मैं भी यही चाहती हूँ .
अमित : तो शुरू करें गौरी , हमारी प्रेम मिलान की रत.
गौरी ममी : आआह्ह्ह्ह फिर से मुझे मेरे नाम से बुलाओ
अमित : गौरी
गौरी ममी : कब से तुम्हारे मुँह से अपना नाम सुन्ना चाहती थी मैं. आज मुझे ऐसे प्यार करो क सब भूल जॉन मैं . जब से तुम्हे दीपिका क साथ देखा है मैं खुद को रोक नहीं प् रही थी . मैं भी वो सब महसूस करना चाहती हूँ जो दीपिका महसूस कर रही थी. वो शांति वो ख़ुशी जो उसके चेहरे पर मैंने देखि थी मुझे भी वो चाहिए.
माँ मेरे गले लग कर अपने दिल की बात बता रही थी और मैंने भी उन्हें सहलाते हुए कहा
अमित : उससे भी ज्यादा hi मिलेगा . बस आप मेरा साथ देना.
गौरी ममी : जैसा चाहोगे वैसा साथ दूंगी बस आज मेरी अधूरी ीचा पूरी कर दो.
अमित : अब कोई ीचा अधूरी नहीं रहेगी आपकी. और सिर्फ आज hi नहीं हमेशा क लिए.
इतना कह कर मैंने माँ को बीएड पर लिटा दिया और. उन्हें किश करने लगा . माँ भी मेरे गले में बहन डेल बराबर साथ दे रही थी . किश करते हुए अब माँ खुद hi मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी ज़ुबान को भी चूसने लगी. किश करने क बाद मैं उनकी गर्दन को चूमता हुआ उनके स्तनों तक आया तो एक बार नज़र भर क उनके मस्त उरोजों को देखा.
अमित : आप क ये दूध क कलश बहुत hi दिलकश हैं. जी करता है इन्हे खा जॉन
गौरी ममी : तो खा जाओ न रोका किसने है, ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi हैं. इन्हे प्यार करो.
मैंने उनका एक स्तन मुँह में लिया और दूसरे को मसलने लगा. माँ और भी ज्यादा सिसकियाँ लेती हुई मेरे सर को अपने स्तनों पर दबाने लगी.
गौरी ममी : हम्म्म उनममम ककक ऐसे hi प्यार करो उम्म्म मैं कब से इन पलों क लिए तड़प रही थी कक्कक्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ और ज़ोर से करो ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi हैं. खूब प्यार करो उम्म्म्म ककक इन्हे दूध से भर दो और फिर मेरा दूध पीना जो मैं कभी तुम्हे पीला नहीं पायी.
अमित : इनको दूध से भर कर मैं hi इनमे से दूध भी पियूँगा , आपकी हर ीचा पूरी करूँगा मैं.
मैंने कुछ देर दोनों स्तनों को मसल मसल क बरी बरी से पिया . दोनों चूचे मसलने से लाल हो चुके थे. उसके बाद मैंने उनकी कभी में अपनी जीभ घुसा कर उन्हें और उत्तेजित करने लगा. इससे माँ छटपटाने लगी.
गौरी ममी : उफ्फ्फ्फ़ ये क्या कर रहे हो कक्कक्क्स उम्म्म्म करते रहो ुकम्म्म कक्कक्स
नाभि को प्यार करने क बाद मैं उनकी छूट पर आ गया और फिर से छूट को चाटने लगा. माँ मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी.
गौरी ममी : आआअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ये क्या कर रहे हो ऐसा भी कोई करता है
अमित : आपको ाचा नहीं लग रहा क्या ?
गौरी ममी : बहुत ाचा लग रहा है , अब पता चला दीपिका क्यों इतना पागल रहती है तुम्हारे लिए . उम्म्म्म कक्कक्क्स करते रहो.
अमित : क्या वो सब करना चाहती हैं आप जो दीपिका ममी करती है मेरे साथ
गौरी ममी : हम्म्म्म सब कुछ
माँ के इतना कहते hi मैं उनके ऊपर घूम गया और 69 पोजीशन में उनके ऊपर आ गया . अब मेरा मुँह माँ की छूट क ऊपर था और मेरा लैंड उनके मुँह क ऊपर . अपने सामने मेरा झूलता हुआ लैंड देख कर माँ की तो बोलती बंद हो गयी. पर मैंने उनके मुँह पर लैंड रगड़ना शुरू कर दिया . वो लैंड को मुँह में जाने से रोकने क लिए अपना मुँह इधर उधर कर रही थी.
अमित : क्या हुआ ? प्यार करो न इसे भी जैसे दीपिका ममी करती है , आपको भी मज़ा आएगा.
गौरी ममी : मैंने ऐसा कभी नहीं किया .
अमित : अब सब कुछ भूल जाइये. मेरे साथ खुल कर मज़ा लीजिये एक प्रेमिका की तरह . आप जो कभी किया नहीं है अब वो सब कीजिये और मज़ा लीजिये.
मैंने फिर से लैंड उनके मुँह पर रगड़ा तो माँ ने लैंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और सुपडे पर अपने होंठ लगा कर एक किश कर दी. मुझे इतना मज़ा आया क मैंने उनकी छूट में जीभ घुसा दी और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. माँ को भी मेरे ऐसा करने से मज़ा आया और मज़े में उन्होंने सुपडे को मुँह में ले लिया. लैंड क मुँह में जाते hi मैंने लैंड को दबाते हुए उनके मुँह में और अंदर तक घुसा दिया . माँ ने जल्दी से मेरी जांघों को दबा कर उठाया और मुँह से लैंड बहार निकल दिया.
गौरी ममी : अखुनण अखुनण अखुनण ये क्या अखुनण अखुनण कर रहे थे अखुनण
अमित : सॉरी वो मुझे इतना मज़ा आया क बर्दाश्त नहीं हुआ .
मैं माँ क ऊपर से हैट गया और उन्हें साँस लेने दी. माँ ने मुझे अपने लिए चिंता करते देखा तो वो मुस्कुराती हुई मेरे ऊपर आ गयी और खुद hi मेरे लैंड को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया .
अमित : आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स आप कमल हैं
गौरी ममी : सररूपप्प्प श्रुणुपपप सृपपप उम्म्म्म कमल तो तुम हो . सच में इस सब में अलग hi मज़ा है जो आज तक मुझे पता hi नहीं था. सरररूउप सर्र्रउपपपप उम्म्म
माँ अपनी मर्ज़ी से जितना हो सकता था उतना लैंड मुँह में अंदर बहार कर रही थी. मैं हाथ बड़ा कर उनके बाल पकड़ कर उनका मुँह बीच बीच में लैंड पर दबाने लगा. माँ को ऐसे अपना लैंड चूसते हुए देख कर मुझे अपने अंदर उत्तेजना का ज्वालामुखी उठता महसूस हो रहा था. जब और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उनको बीएड पर लिटा दिया और खुद उनकी टांगों क बीच में आकर लैंड को छूट पर सेट कर क एक धक्का मर दिया. लैंड छूट में आधा चला गया
गौरी ममी : आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स तुम्हारा ये बहुत बड़ा है , हर बार दर्द देता है. पिछली बार तो तुमने मुझे चलने लायक नहीं छोड़ा था.
अमित : आपको पसंद नहीं है क्या?
गौरी ममी : पसंद न होता तो क्या खुद hi इसे अंदर लेने की कोशिश करती ?
अमित : जनता हूँ कैसे हॉस्पिटल में आप इसके ऊपर बैठ कर दर्द से छटपटा रही थी.
गौरी ममी : तुम जग रहे थे?
अमित : हम्म्म
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह तो उसी दिन क्यों नहीं कर दिया सब ? इतने दिन क्यों इंतज़ार करवाया ? आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह
अमित : इंतज़ार तो आप ने करवाया , मैं चाहता था आप खुद मुझसे बात करें. पिछली बार भी इसी लिए मैंने वो सब उस तरीके से किया था. पर फिर भी आप चुप रही.
गौरी ममी : ाःह ाःह उम्म्म्म कक्कक्स आअह्ह्ह क्या करती तुमसे बात करने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी. आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः ाःह ऐसे hi करो आअह्ह्ह आअह्ह्ह पिछली बार जैसे तुमने किया था वैसे कभी नहीं हुआ था मेरे साथ. तुमने तो सुहाग रत यद् करवा दी थी. इतना दर्द तो तब भी न हुआ था. ाःह आअह्ह्ह aahhhhhhhhhhhhhhhh
माँ की इस बात पर मुझे जोश आ गया और मैंने सुपडे तक खींच कर पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक घुसा दिया जो अब तक आधा hi अंदर बहार हो रहा था.
गौरी ममी : आआअह्ह्ह्हह मार डाला सीसीसी आआआअह्ह्ह्हह आराम से नहीं कर सकते क्या आअह्ह्ह्हह उस दिन भी ऐसे hi कर रहे थे तुम ककक आआआईईई जान निकल डोज
अमित : कण्ट्रोल नहीं हो रहा आप की बातें मुझे और गरम कर रही हैं
गौरी ममी : कहीं जान hi न निकल देना आआह्ह्ह्ह एक तो इतना बड़ा मुसल लिए फिरते हो ऊपर से ऐसे करते हो ककक आआह्ह्ह्ह सच में बहुत बड़ा है अंदर पेट तक जा कर लगता है
माँ की बातें मुझे गरम कर रही थी और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी. माँ भी कुछ देर बाद खुद hi कमर हिला कर मज़े लेने लगी .
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः उम्म्म्म ऐसे hi करते रहो मज़ा आ रहा है उम्म्म आआह्ह्ह्ह
अमित : अभी तो और भी मज़ा आएगा.
इतना कह कर मैंने माँ को करवट क बल किया और उनके पीछे लेट कर उनकी एक तंग उठा कर घुटने क नीचे से हाथ निकल कर उनका एक चुका पकड़ लिया और लैंड घुसा कर धक्के पेलने लगा.
गौरी ममी : आअह्ह्ह उम्म्म्म आअह्ह्ह्ह ये सब कहाँ से सीखा तुमने आअह्ह्ह आअह्ह्ह कैसे कैसे तरीके से कर रहे हो
अमित : क्या कर रहा हूँ ?
गौरी ममी : यही हो कर रहे हो आअह्ह्ह आअह्ह्ह उम्म्म करते रहो
अमित : ज़रा खुल क बताओ न क्या कर रहा हूँ गौरी
गौरी ममी : आआह्ह्ह आह्हः फिर से कहो आआह्ह्ह अह्ह्ह्हह
अमित : बताओ तो क्या कर रहा हूँ गौरी
गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मुझे छोड़ रहे हो आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह एआईईईई मैं गईइइइइइइइ आअह्हह्ह्ह्ह
मेरे मुँह से अपना नाम सुन कर माँ इतनी गरम हो गयी क खुद hi अपनी छूट मसलते हुए झटके लेती झड़ने लगी . मुझे भी उनकी बातों ने गरम कर दिया था अब मैं भी अपना पानी निकलना चाहता था तो मैंने जल्दी से उन्हें घुटनो क बल किया और पीछे आ कर एक hi झटके में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया.
गौरी ममी : आआअह्ह्ह्हह मर डाला आआआअह्ह्ह्हह कक्कक्स
मैं माँ की कमर थामे लगातार ज़ोरदार धक्के पेलने लगा और कुछ hi पलों में मेरे सबर का बांध भी टूट गया. लैंड को जड़ तक अंदर घुसा कर मैंने माँ क ऊपर hi गिर गया और उनकी छूट में पानी छोड़ने लगा.
अमित : आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स आप बहुत गरम हो माँ
गौरी ममी : माँ नहीं गौरी , तुम्हारी गौरी .
अमित : गौरी तुम बहुत hi गरम हो इतनी जल्दी मेरा कभी नहीं होता.
गौरी ममी : तुम्हारे लिए कैसी भी बन जाउंगी , अब तुम hi मेरे सब कुछ हो. मेरे बचे क बापू.
गौरी ममी ने इतना कहा तो मैं उन्हें किश करने लगा और वो भी गर्दन घुमा कर मेरा साथ देने लगी . कुछ देर बाद जब हम दोनों की साँसे संभाली तो माँ बीएड से उतर कर बाथरूम में चली गयी. जब वो वापिस आयी तो उनको देख कर फिर से मुझे कुछ होने लगा. वो आकर मेरे साथ बिस्टेर पर लेट गयी.
गौरी ममी : क्या देख रहे हो?
अमित : आप बहुत हॉट हो. फिर से आपको प्यार करने का दिल हो रहा है.
गौरी ममी : साडी रत क्या यही कुछ करना है?
अमित : साडी ज़िन्दगी कर सकता हूँ अगर आप साथ दे तो.
गौरी ममी : शरमाते हुए ) मैं तो तुम्हे मन कर hi नहीं सकती .
अमित : तो करे शुरू ?
इतना कह कर मैंने फिर से उन्हें बाँहों में ले लिया और किश करने लगा . माँ भी मेरा गरम जोशी से साथ देने लगी. बस फिर क्या था हो गया शुरू एक और राउंड. इस बार उन्होंने खुद hi मेरा लैंड मुँह में ले कर खड़ा किया और मेरे ऊपर बैठ कर घुड़सवारी भी की.
गौरी ममी : ाःह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है उम्म्म आठ आअह्ह्ह
अमित : खुल कर मज़े लो गौरी मैं तुम्हे हर मज़ा दूंगा.
माँ मेरे लैंड पर उछाल थी थी और मैं उनके उछाल कूद करते दूध दबा रहा था. माँ मस्ती में खुद hi अपने बल खोल रही थी . जब माँ उछाल उछाल कर थक गयी तो मैंने उन्हें बिस्टेर से निचे कड़ी कर क घोड़ी बना लिया . पीछे आ कर मैंने एक hi झटके में लैंड छूट में पेल दिया .
गौरी ममी : आआह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स एक hi बार में पेल देते हो आअह्ह्ह्ह दर्द होता है पर मज़ाआआ आअह्ह्ह मज़ा भी अत है ऐसे hi करो उम्म्म आअह्ह्ह्हह
माँ बीएड की पुष्ट की पकड़ कर झुकी हुई थी और मैं उनके लटक रहे आम पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मर रहा था . मैंने माँ को और झुकाते हुए उनकी एक तंग बीएड पर रखवा दी जिससे उनकी गांड और बहार निकल आयी . गांड देख कर मेरा मन फिर से मचलने लगा . क्या गांड थी मुझे अब माँ की गांड मारनी थी कैसे भी कर क. मैंने उनकी गांड में उंगली घुसा दी.
गौरी ममी: आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स ये कर रहे हो कक्कक्क्स वहां क्यों कर रहे हो?
अमित : गौरी तुम्हारी ये गांड बहुत मस्त है मुझे अपनी गांड मरने डौगी .
गौरी ममी : वहां भी भला कोई करता है क्या? आह्हः अह्ह्ह वहां मैंने कभी नहीं किया और तुम्हारा इतना बड़ा जायेगा कैसे
अमित : चला जायेगा जैसे दीपिका ममी क गया था तुम्हारे अंदर भी चला जायेगा. बस मुझे अपनी गांड मरने दो वर्ण मुझे चैन नहीं मिलेगा.
गौरी ममी : वहां बहुत दर्द होगा मैं कैसे लुंगी
अमित : एक hi बार दर्द होगा जैसे पहली बार आगे होता है बस . प्लीज मुझे अपनी गांड मरने दो न .
गौरी ममी : इतना hi दिल है तो आआह्ह्ह्बा आअह्ह्ह मर लेना कक्कक्स मैं मन कैसे कर सकती हूँ और ज़ोर से करो .
मैंने माँ को बीएड क सिरे पर घुटनो क बल होने को कहा और वो हो गयी . माँ को और ज्यादा पीछे को बेंड करते हुए उनकी गांड को पूरी तरह मैंने बहार निकल लिया और उनकी छूट से लैंड निकल कर गांड क छेड़ पर लगा दिया . लैंड छूट रास से भीगा हुआ था . इस लिए मैंने तेल लगाना ज़रूरी नहीं समझा और सूपड़ा छेड़ पर लगा कर एक हाथ से लैंड को थामे ज़ोर से पुश कर दिया. माँ की गांड बहुत टाइट थी सूपड़ा घुसते hi मुझे भी परेशानी हुई पर माँ क मुँह से तो चीख hi निकल गयी .
गौरी ममी : आयआईईईई मर गयी कक्कक्स. ाझह्ह्ह
मैंने रुकने की बजाये लगातार लैंड पर दबाव बनाये रखा और धीरे धीरे सरकता हुआ 5 इंच तक लैंड गांड में घुस गया. पर इतने में माँ की बुरी हालत हो गयी.
गौरी ममी : मायआ एआइइइइ निकल लो बहुत दर्द हो रहा है. एआईईईई कक्कक्स आआआह्ह्ह्हह्ह
अमित : बस अब दर्द नहीं होगा , अब तो घुस गया है .
मैंने कुछ देर माँ क स्तनों को दबाया और एक हाथ से उनकी छूट को मसलता रहा. थोड़ी देर में hi उनका कराहना सिसकियों में बदल गया तो मैंने आहिस्ता से लैंड बहार निकलना शुरू किया . माँ की गांड लैंड को पूरी तरह से जकड़े हुए थी. मैंने सुपडे तक लैंड बहार किया और फिर से अंदर करने लगा. मैं ये सब बहुत धीरे धीरे कर रहा था जिससे माँ को ज्यादा दर्द न हो. साथ में मैं माँ की छूट सहलाता रहा. थोड़ी देर में जब माँ कुछ नार्मल हुई तो मैंने भी स्पीड तेज़ करदी.
गौरी ममी : आअह्ह्ह ाःह आअह्ह्ह आराम से करो दर्द है ाः आअह्ह्ह आअह्ह्ह
अमित : अब कभी दर्द नहीं होगा . ये सिर्फ पहली बार का hi दर्द है . आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह तुम बहुत टाइट हो गौरी बड़ा मज़ा आ रहा है.
मैं धक्के मरता हुआ बीच बीच में लैंड थोड़ा थोड़ा कर क और अंदर घुसता जा रहा था और न को पता भी न चला. जब आखिर का 2 इंच रह गया तो मैं एक ज़ोरदार धक्का मर कर पूरा लैंड गांड में थोक दिया. माँ ने एक बार फिर ज़ोर से चीख मरी पर मैं उनके ऊपर झुक कर उनकी पीठ चूमने लगा और कुछ देर में वो फिर से नार्मल हो गयी. माँ की टाइट गांड मरने में मुझे इतना मज़ा आया क ज्यादा देर खुद को मैं रोक न पाया और उनकी गांड में अपना पानी निकल दिया . इस राउंड में भी माँ 3 बार झाड़ चुकी थी और गांड चुदाई में तो उनको दर्द भी काफी हुआ इस लिए मैंने उसके बाद उन्हें ज्यादा परेशां नहीं किया और उनको अपनी बाँहों में लिए ऐसे hi सो गया.
सुबह माँ की कराह से मेरी आँख खुली . मैंने देखा तो माँ बीएड से नीचे उतर कर चलने की कोशिश कर रही थी पर उन्हें दर्द हो रहा था. मैंने जल्दी से उठ कर उन्हें सहारा दिया और उनको बीएड पर बिठाया मगर वो फिर से कराह उठी.
गौरी ममी : आआआह्ह्ह्ह आईईईई मर गयी
माँ एक साइड को करवट क बल बीएड पर लेट गयी. मैं समझ गया क उनको गांड में दर्द हो रहा है. रत में तो हम ऐसे hi सो गए थे मगर अब उनकी गांड अकड़ गयी थी.
अमित : आप लेट जाओ माँ आपको दर्द हो रहा है
गौरी ममी : किसे लेट जॉन सबके उठने का टाइम हो रहा है और मुझे चाय नाश्ते का भी देखना है . तुमने तो सत्यांश मर दोउ मेरा. न बैठा जा रहा है न चला जा रहा है. क्या जवाब दूंगी सबको?
अमित : सॉरी माँ पर आप इस हालत में नहीं हैं क कोई काम करें. आप बस आराम करेंगी . बाथरूम में गिरने का बहाना कर दी . नाश्ते का कोई बात नहीं कोई और इंतज़ाम कर लेंगे आप पहले मेरे साथ आओ.
मैंने माँ को गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया और पानी गरम करने क लिए गीज़र चला दिया. थोड़ी देर में पानी कुछ गरम हुआ तो मैंने माँ की गांड की सिकाई गरम पानी से की जिससे कुछ अकड़न काम हुई. अब माँ ठीक से कड़ी हो प् रही थी पर दर्द अभी भी था .
अमित : अब कैसा लग रहा है माँ?
गौरी ममी : अब कुछ ठीक हूँ बीटा पर दर्द अभी भी है. चल अब मुझे ज़रा नहाने दे. तू बहार जा .
अमित : नहीं माँ आप से नहीं होगा आप यही कड़ी रही मैं नेहला देता हूँ.
गौरी ममी : नहीं तू रहने दे
अमित : चुप बस
मैंने माँ को शावर की नीचे खड़ा किया और फिर उन्हें नहलाने लगा. साबुन से अछि तरह रगड़ कर मैंने उन्हें नहलाया. जैसे बचपन में वो मुझे नहलाती थी. माँ मुझसे शर्मा रही थी पर माँ को रगड़ते हुए फिर से मेरा लैंड खड़ा हो गया.
गौरी ममी : अब बस कर चल मुझे कपडे दे मेरे .
अमित : थोड़ी देर और नहाते हैं न माँ
गौरी ममी : नहीं बस अब मुझे कपडे दे दे.
मैंने माँ को एक बार नहीं में भर कर गले लगाया और अपने खड़े लैंड को उनकी जांघों क बीच दे कर छूट क ऊपर रगड़ दिया . माँ क मुँह से सिसकी निकल गयी . पर उन्होंने मुझे अब बहार जाने क लिए धकेल दिया . सही भी था ये वक़्त सही नहीं था क्या पता कौन उठ कर आ जाये . मैंने माँ को तौलिये से साफ़ किया और उनको कपडे पहनने में भी मदद की उसके बाद वो धीरे धीरे चलती हुई नीचे चली गयी और थोड़ी देर बाद hi उनकी कराहने की आवाज़ आयी. मैं समझ गया वो ड्रामा कर रही हैं . मुझे अभी नींद आ रही थी इस लिए मैं फिर से कपडे पहन कर सो गया .