Adultery Raj-- hero of the family - Page 77 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

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पास्ट तवो इयर्स….

प्लेस ….पूनम विलेज..

“पूनम …पूनम….”

पूनम ने एक नज़र देखा और वापस एल्बम को सीने से लगाकर बैठ गयीईइ”

रणवीर सिंह “बेटी ऐसे कब तक rahegi…kya मू दिखाऊंगा तेरे बापू को उपस्कर jaakar….jo तूने बोलै जैसा तूने कहा वो सब किया न”

पूनम ने फिर भी कुछ नहीं कहा …

“वो मर चूका ह poonam….kab तक उसका इंतज़ार करेगी सपने पापा का सपना पूरा करना ह तुझे”

अबकी बार पूनम ने पलटकर देखा और एक तक देखती रही उसकी आँखों मई तेज़ गुसा और नफरत थी फिर वापस खिड़की से बहार देख कर बोली “वो आएगा…. जरूर आएगा…”

रणवीर सिंह पलटकर बस डॉ साब यही कंडीशन दिन रात रहती ह यही दो सब्द कहती ह…. खाना कहती ह सोती ह पर ये खिड़की और ये एल्बम दूर हो जाये तोह पागलो की तरह करने लगती ह….”

डॉ “हम्म्म इनको गहरा स्ट्रोक यानि धक्का लगा ह और उस इंसिडेंट यानि घटना को ये मैंने को तैयार नहीं ह जो इनके साथ हुवी ह इसीलिए जब आप जो ये मन्ना नहीं चाहती ह उसके अपोजिट कहते ह ये पागलो की तरह बेहवे करती h…is तरह के स्ट्रोक्स मई पेशेंट या तोह धीरे धीरे पूरी तरह मेन्टल हो जाता ह …या उसी कंडीशन मई हमेशा रह जाता ह जो इनके साथ h….aur ये दोनों हे कंडीशन बहुत ख़राब होती h….kyoki इस कंडीशन मई वो कोई भी गलत कदम उठा लेता ह”

रणवीर सिंह “इसका कोई तोह इलाज होगा डॉ ”

डॉ “इन्हे कुछ वक़्त के लिए बहार घूमने लजाईये नयी जगह देखेंगी तोह उम्मीद जग सकती h…maine काफी पेटेंट्स को देखा ह जिनपर नयी जगह का असर पॉजिटिव आया ह पर जोर जबरदस्ती नहीं …या जिसकी वजह से ये सब हुवा ह वो सामने ए तोह हे ये तीख हो सकती ह”

रणवीर “जी थैंक यू सो मच सर मैं जल्द हे इसे कंही अछि जगह घूमने ले जाता हु क्यों दूसरी वजह पूरी हो ये मुमकिन नहीं ह ”

फिर डॉ से और काफी बाते हुवी और वो जरुरी बाते बता कर चला गया …और अंदर ऊपर बने रूम मई पूनम राज की फोटो देखने lagi….uske पास ऐसे बहुत से एल्बम थे जिनमे सिर्फ राज की फोटो थी उसके कहते हुवे की चलते हुवे की हँसते हुवे की बात करते हुवे की हर तरह की फोटो उसने खिंच कर एल्बम मई संजो कर राखी हुवी thi….aur यही उसकी दीवानगी दिखता था की किस हद तक वो राज से प्यार करती h….manisha का दर बिलकुल सही था की अगर पूनम की शादी कंही और करने की सोची तोह वो मर जाएगीइ….

शार्ट फलेश बैक…

अब से कुछ एक साल और 11 महीने पहले रात के वक़्त पूनम room…poonam ने सुनील जो वैलेंटाइन राइडर बना हुवा था उसका कलर पकड़ा हुवा था

“मिल गए वो कान्हा ह बताओ न”

वैलेंटाइन राइडर “वो अभी तक नहीं मिला ह”

पूनम “उन्होंने कहा था मुझसे… आपसे जो मांगूंगी आप मुझे लाकर डोज…”

वैलेंटाइन राइडर “मैं दिन रात उसे हे ढूंढ रहा हु और तुमसे किया वडा मैं हर हाल मई पूरा करूँगा बस न्तेज़ार करो “

पूनम “इंतज़ार वही तोह कर रही हु आप चले जाओ और वो मिलजाए तब हे मुझे अपनी सकल दिखाना”

वैलेंटाइन राइडर तोह चला गया और उसी वक़्त से पूनम हर दिन हर रात राज के आने की उम्मीद मई खिड़की के पास बैठी रहने लगी…

करंट टाइम दिल्ली …

सुनील बंगलो…

सुनील “कॉफ़ी लोगी”

कृति “तुम सच मई स्मार्ट बहुत स्मार्ट हो गए हो यार… टालल हैंडसम एंड अफ़्कौर्से रिच …ओह्ह्ह सहित यू अरे माय बॉस आल्सो”

सुनील “शुतुप ok बहुत हो गया तुम्हारा हम दोस्त हे तीख ह और वैसे भी ये कंपनी पैसा सब राज का था मतलब ह”

कृति “ok ok वैसे एक बात बता नकचढ़ी गुसैल जिद्दी ऋचा सच मई इतनी चेंज हो गयी पहले से सॉरी बोल रही hu……aur ऊपर से रियली वो अब तुम्हारी बहन भी हो गयी h…matlb तुम्हारी एक बहन ैप ह …और एक विद्या ग्रुप की ओनर ह और वाइफ सिंह ग्रुप की मालकिन और फादर कप्तान सिंघनिया एक्सपोर्ट इम्पोर्ट किंग और पूनम उसके फादर सरपंच मतलब तुम तोह इंडिया की टॉप हो यार और भी कुछ बचा ह तोह बता दो क्योकि दिन मई तुम कुछ और होतो हो और रात मई कुछ और….”

सुनील “तू फिर सुरु हो गयी”

कृति हँसते हुवे “ तोह और क्या करू इंडिया आने के बाद मिले तुम दोनों एक बार भी मुझसे तू तोह फिर भी कॉल कर लेता ह वो भी कांसे पर उन जनाब को तोह भाव खाने से हे फुर्सत हे नहीं ह मतलब लड़किया भी फ़ैल ह उनके आगे भाव खाने मई”

सुनील “बस कर यार गलती मंटा हु”

कृति “चलो फिर सॉरी बोलो'

सुनील “ok मेरी माँ सॉरी सॉरी ाचा कंपनी मई सब कैसा ह”

कृति “वही सेल बूढ़े ठरकी लड़की दिखी नहीं की उसके साथ सोने की सोचने लगते ह मन तोह करता ह सालो का काट दू पर फिर सोचती हु तीख ह ….देख कर खुस होने दो काम जो निकलवाना ह”

सुनील “बहुत चेंज हो गयी हो”

कृति “ओह hello तुम्हारे लिए अभी वही हु समझे ….क्या होने वाला था मेरे साथ अगर तुम दोनों न होते तोह सायद आज भी उन्दोनो की …”

सुनील “ जो नहीं हवस उसे भूल जाओ …वैसे मुझे जो काम था वो हो गया ह चलो अब हमे मंडावा जाना ह राज के गाँव वंही हे तुम्हे सब पता लग जायेगा”

कृति “अभी”

सुनील “वंहा सब ह तुम्हे कोई दिकत नहीं होगी”

कृति “चुप करो अपने घर पर क्या दिकत होगी …मैं माँ पापा को इन्फॉर्म कर देती हु फिर जेनिफर को अंदर बुला कर “

जेनिफर “Hello सुनील सर”

सुनील “कैसी हो जेन्नी दोनों भाई परेशां तोह नहीं करते ह न”

Jennifer(alita) “नहीं सर अपने और राज सर ने तोह लाइफ सटले कर दी हमारी वर्ण मैच और माइक के लिए दर हे लगा रहता था”

सुनील “तुम्हे बहुत अछि हिंदी आगयी h…good और हम सब एक परिवार ह न तोह फिर हमे एक दूसरे की केयर करनी हे h…tum भी चलो साथ मई तुमने भी एक दिन की भी लीव नहीं ली ह अब तक”

जेनिफर “नहीं सर मम की एब्सेंस मई मैं कुछ वक़्त हैंडल कर लुंगी ोथेरविसे मम पर बहुत जायदा प्रेशर हो जायेगा और आगे फ़िनलैंड जाना ह मैच और माइक ने कहा था” ये कहते हे उसे याद आया की मैच और माइक ने टॉप सीक्रेट रखने को कहा था

सुनील “वो क्यों”

जेनिफर “ वंहा की लैंड ह उसे सेल करना ह तोह लास्ट टाइम होमटाउन देख लुंगी”

सुनील “ ok…lets जो कृति”

कृति बहार आयी तोह श्वेता वाली मॉडिफाइड सुव कड़ी थी जो सुनील खुद लेकर आया था…

कृति “कूल नीस ओने”

सुनील “श्वेता की ह मेरी नहीं …और देती भी नहीं ह किसी को भी पता नहीं इस बार कैसे दे दी मुझे”

कृति कितना टाइम लगेगा

सुनील “4 तो 5 ऑवर हाईवे हूपर से विप नंबर और साईरन ह ”

कृति ने कार के अंदर बैठते हे मिनी फ्रिज खोला तोह कोल्ड ड्रिंक और बेयर के कैन मिल गए…

वंही शामे टाइम उत्तरप्रदेश राज के रूम मई…

अभय “भाभी राज कैसे मिला आपको”

ऋचा “ok मैं बताउंगी पर तुम ये बताओ ये सब हुवा कैसे क्योकि मुझे किसी ने कुछ नहीं बताया इनफैक्ट बात ये ह की ऐसा लगता ह जैसे बहुत कुछ छिपाया जा रहा ह हमसे”

शेरदिल “िलिये छिपाया गया क्योकि अगर दिव्या मसि से आपको पता लगता तोह आप कसीसे रियेक्ट करती और वो राज को अपना सागा बीटा मानती ह इसलिए वो ये बर्दास्त नहीं कर पति …इसलिए आप दोनों जब भी मंडावा आयी तोह सभी बहार मिले …….और सब आप दोनों को तभी मंडावा मिले जब नानी ख़तम हुवी….”

ऋचा “तुम अभी भी बहुत कुछ छिपा रहे हो अगर सच मई भाभी मानते हो तोह बताओ”

तभी पीछे से दिव्या भी आगयी और बोली “छिपाने से कोई फ़ायदा नहीं ह हम दोनों को पता था की घर पर जरूर कुछ बहुत बुरा हुवा ह और तुम सब ये हमसे छिपा रहे हो …मनीषा की शादी मई तुम्हारा सोनाली जोगिन्दर bhaiya,abhay,shweta,kavita और शिवानी का न होना कप्तान भैया भाभी और दीपिका का भी न होने इन सब बातो ने मेरे यकीं को पुख्ता कर दिया था की जरूर बहुत कुछ बुरा हुवा ह पर आज तक किसी ने सच नहीं बताया ह' हम दोनों को

शेरदिल कुछ दिएर चुप रहा और बोलै “ जब मेरी आंखे पूरी तरह खुली मैं हिमाचल प्रदेश गुरूजी के आश्रम मई था मेरे हाथ मई इन्फेक्शन फ़ैल गया था और सरीर पर कितने झख्म थे पता नहीं बचने की उम्मीद भी नहीं thi…maine अज्जू से सब पूछा उसने बताया की मनीषा के पापा रंजन ने हे साडी रंजिश रची thi….kaptaan अंकल ने रिश्तेदारी की वजह से उन्हें घर ले ए और नानी ने उन्हें सब सच बता diya…aur रंजन सहदेव मां का पुराण आर्म्स का साथी था जो उस वक़्त साथ मई काम करता था मतलब पुराण गद्दार था उसे दर लग गया isliye…usne डेथ हेलो के साथ मिलकर मुम्बई …दिल्ली …..मंडावा और राज पर एक साथ अटैक kiya…sab अपनी जगह उलझे हुवे the….aur चूक हुवी साडी कप्तान अंकल की जल्दबाज़ी की वजह se…ranjan को किसी की परवाह नहीं थी उसने तोह दीपिका पर भी डेथ हेलो के साथी से अटैक करवाया जिसे अभय ने अपनी जान देकर बचाया….”

दिव्या और ऋचा का तोह रंग उड़ गया की अभय मर गया …वो बोलती उसे पहले हे अभय आगे बोलै “मुझे बोलने दीजिये वर्ण मैं बता नहीं पाउँगा और इस अटैक से पहले शिवानी जी जो की डेथ हेलो यानि अपूर्व सिंह की असलियत पता करने की कोसिस कर रही थी उसे usne(apoorav सिंह) ने किडनैप कर लिया और साथ हे राज की फ्रेंड सिमरन जो डेथ हेलो के प्लान या अंडरवर्ल्ड के आने वाला अटैक की इनफार्मेशन देती थी उसे भी किडनैप कर लिया ….और अंत मई राज की टीचर फ्रेंड रजनी मम जो उसका सपोर्ट करती थी उसे भी uthaliya…taki राज यानि निर्वाण से अपने भाई की मौत और अपने गुरु की मौत का बदला ले सके और उसको मेंटली इतना तोड़ दे की वो भी दर्द मई तड़पे और टिल टिल मरे उसने कोसिस यही करि की तीनो को मरने के बाद बाकियो के मरने का भी लाइव दिखायेगा राज को isliye…wo उन तीनो को लेकर राज के पास तब आया जब राज अकेला था और उस वक़्त मित्युदूत कविता और मनीषा भाभी की सेफ्टी के लिए उनके साथ गए हुवे थे …और पीछे राज भाई और पूनम अकेली thi…usne उस वक़्त हमला किया और उनकी आँखों के सामने हे उसने तीनो को मर दिया…..” इतनी बात बताते वक़्त शेर का जिगरा रखने वाला शेर भी रो पड़ा था…. “और पता ह मनीषा भाभी ने आकर बताया की भाई और पूनम बहुत खुस थे उस दिन भाई खाना बनानेवाले थे पूनम केलिए” पर सब उल्टा हो गया मैंने कहा था उन्हें की आप अकेले मत रहना मैं चलता हु न …..और कहता था की बस कुछ वक़्त सबके साथ प्यार के लिए जी लू यार इतना हे चाहिए ह मुझे फिर क्या पता जिंदगी हो न ho…aur देखो सब के लिए दो साल से मारा हुवा हे माने बैठे हुवे ह इन्हे आप नहीं जानती ह की सब पर क्या बिट रही h…ek जो अपने देवर दोस्त के प्यार को तरस रही ह तोह सोनाली भाभी ने इनके नाम की चुडिया सिन्दूर सब लगा रखा ह और बिना फेरे हे राज को अपना पति मान चुकी h…aur पूनम” शेरदिल ने एक बार ऋचा को देखा और बोलै “वो तोह राज के जाने से पूरी तरह अपनी सुध बुध खो चुकी ह ….2साल से एक खिड़की से बहार तक ताकि लगाकर बैठी ह की वो आएगा….”

दिव्या और ऋचा ने जैसे जैसे साडी सचाई सुनी तोह वो भी रो पड़ी…

शेरदिल “आप जानना चाहती थी न मंडावा मई क्या हुवा तोह suniye…ranjan ने दिल्ली हरियाणा पंजाब से चांटे हुवे सरे गुंडों को इकहहट्टा किया और हवेली पर हमला करने के लिए ले आया वो हवेली के हर मेंबर को मर देना चाहता था ताकि कोई दुश्मन बाकि न रहे… पर श्रुती भाभी ने अपनी जान पर खेल कर खेतो मई भागकर नानाजी तक इनफार्मेशन पहुचायी… और फिर एक भयंकर लड़ाई पुरे मंडावा मई हुवी थी जिसमे गाँव के 20 से जायदा आदमी मरे gaye…sirf हमारे परिवार केलिए गाँव की इज़्ज़त keliye….ajay श्रुति नानाजी घर के हर छोटे बड़े ने लड़ाई लड़ी यंहा तक की जानवी ने भी दिखा दिया की वो भी बात जब परिवार पर आएगी तो वो भी भी मारने और मरने को तैयार रहेगी वो भी लड़ी इतनी से उम्र मई फौलाद का जिगरा लेकर ladi….sab मरे जाते पर राज भाई ने पहले हे राजीव अंकल और मैच और माइक के साथ गन से लेस्स आदमी भेज दिए थे जो पहले हे तैयार थे इस अटैक के लिए और सही वक़्त का वेट कर रहे थे और लास्ट मोमेंट पर जब सब हवेली की बौंदरयंसी घुस गए तोह वो आगये और हम बच गए….”

दिव्या “इतना सब हुवा और हमे भनक तक नहीं लगने दी हमे किसी ने बताना जरुरी नहीं समझा क्यों ”

शेरदिल “अपने भी तोह आज तक किसी को नहीं बताया की भाई जिन्दा ह आखिर क्यों ह जवाब आपके पास नहीं न उनकी तड़प उनका दर्द आपको भी तोह नहीं दिखा …..”

दिव्या क्या बोले उसे समाज नहीं ारः था….

ऋचा “अहसान राज की कंडीशन बहुत ख़राब थी ..योगी बाबा गुरूजी के सताये तब उन्होंने हे हमसे वचन लिया था इसलिए माँ ने नहीं बताया और हमारी शादी भी उन्होंने हे करवाई थी जबकि उन्होंने कहा था की राज जब तीख हो जायेगा वो इस शादी और जो वक़्त साथ बिताया ह सब भूल jayega…sirf इसलिए नहीं bataya”ye कहते कहते वो फफक फफक कर रो पद

दिव्या “मत रो मेरी बची राज को मैं मानूगी तेरी माँ के रहते तेरे साथ अन्याय नहीं होगा तूने एकपत्नी से बढ़कर उसकी सेवा की ह सब जानते हुवे भी”

ऋचा दिव्या के गले लग कर रो पड़ी…

शेरदिल ने आगे बढ़ कर ऋचा के दोनों हाथो को पकड़कर कहा “मैं आपके साथ हु भाभी आप टेंशन मत लो तीख हो जाने के बाद ये नहीं मन तोह उठा उठा के पटकूंगा जबरदस्ती मनाऊंगा”

ऋचा “नहीं अहसान प्यार और रिश्ते दिल से मने जाते ह मुझे यकीं ह एक दिनप्यार से जीत हे लुंगी इन्हे”

शेरदिल “मित्युदूत अंकल ने जो मुझे बताया वो हे सच ह न”

ऋचा “है वो हे सच ह पर इसके इलावा भी ह जो तुम्हे जानना चाहिए ..की क्यों हमने शादी ki…inse मेरा मिलना होगा ये योगी बाबा ने पहले हे बता दिया था और कहा भी था की जानको खतरा होगा और पहला विवाह तुम्हारा हे होगा पर पहला हक़ सोनाली दी को milega…..aur ये सब पहले से लिखा हुवा h…bus तुम्हे इंतज़ार करना ह और जब राज मिले तुम्हे राज से शादी करनी ह और जैसा उनने कहा वही हुवा …ये बुरी हालत मई हमे मिले इनके सरीर पर गांव हे गांव थे सर पर गहरी चोट थी …बचना बहुत मुश्किल था ….पर ऊपर वाले की दया से बच गए फिर बहुत पहले एक बार दादा जी ने बताया था की विद्या की आखरी ीचा थी की उनका परिवार उन्हें माफ़ करदे तोह हम यंहा आगये इनके ननिहाल ताकि सब जान सकू और अभी कुछ वक़्त पहले हे मुझे पता लगा की नानाजी तोह खुद विद्या ko.maaf न कर पाने से दुखी ह …और अब तोह उनकी हालत बहुत ख़राब ह उनपर कुंडों जो एक हफ्ते पहले आया था और जो तुमसे अभी लड़ना चाहता था बलराम वो राज के मां की लड़की सिम्मी से शादी करना चाहता ह सिर्फ अपनी बेज़्ज़ती की वजह से जो की विद्या माँ और सहदेव पापा की वजह से उन्हें मिली ह”

शेरदिल जो अभी तक सीरियस आँखों मई आन्सुऊ थे वो बोलै “क्या कहा जो अभी आया था उसका बाप कुंडों …आप सूरे हो”

ऋचा “है वही ह …बस राज तीख हो जाये”

शेरदिल अपने आंसू पौंछकर एक बार लेते हुवे राज को देखा और बोलै “मतलब ाप्ये कहना चाहती ह की आप राज भाई को कुंदन नाम की मुसीबत के लिए लायी ह”

दिव्या “है वो सही तोह कह रही पर तुम इतने हैरान क्यों हो”

शेरदिल मन मई “हैरान मई अगर बता दू आप दोनों को सचाई तोह बेहोश हो jayengi…kundan साला उसे तोह ये तौरतूरे कर रहे ह उसके तोह अंजार पुंजर तोड़ने सुरु कर दिए ह उसकी तोह हालत ऐसी ह की …जोर लगये तोह आवाज को छोड़ बाकी सभी छेद से सब बहार अत ह…”

दिव्या “तुम क्या सोच रहे हो”

शेरदिल “कुछ नहीं ….मैं साथ हु आपके” फिर मनमै “क्या ख़ाक साथ हु मैं साला वो बूढ़ा जिन्दा हे नहीं रहेगा इसके तीख होने tak…aur ये भी वाह भाई वाह क्या एक्टिंग ह इनकी पागल हो जाऊंगा मैं ऐसे तोह मेरी एक दिनमे ये हालत ह तोह मित्युदूत अंकल की क्या होती होगी ऊपर से बेनस्टॉकेश इनके नए तौरतूरे के तरीके ”

शेरदिल “भाभी मुझे लगता ह अगर इनपर अभी भी खतरा ह तोह इन्हे आप पहले की तरह सबसे छिपकर रखे”

ऋचा “है माँ इन्हे मैं वापस ले जाती हु और जरुरत की हर मेडिसिन और इंस्ट्रूमेंट्स भी”

दिव्या “तुम सही कहती हो ये पुलिस वाले परेशां करते रहेंगे कब तक मैं इनसे भी निपट लुंगी”

वंही …

सुनील और कृति बायत कर रहे थे ..

कृति “बता भी दो कबसे नाटक लगा रखे ह इतना तोह हम लड़किया भी नहीं करती ह”

सुनील “बस थोड़ी और दिएर की बात हे तोह हम पहुंचने वाले ह न फिर जो पूछना सुन्ना चाहती हो सबके जवाब मिल जायेंगे”

कृति “मुझे सबसे मिलना ह स्पेशलय दादाजी से”

सुनील “मिल लेना …वैसे ये बताओ की तुम्हे कुछ मिला”

कृति कुछ बोलती उसे पहले हे उसका मोबाइल रिंग करने लगा जो जेनिफर यानि ालिता का था ..

कृति “यस जेन्नी”

जेनिफर “मम बड़प पार्टी लीडर ने मन कर दिया ह साथ देने से …”

कृति के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और बोली “ ी क्नोव ये होना tha….ok तोह न्यूज़ मई इनफार्मेशन दाल दो की विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स अपने नए और पुराने सभी हॉस्पिटल नेक्स्ट थ्री मोनथस मई bindup(samet रही ह) कर रही ह और उसके 3 दिन बाद सिंह ग्रुप का बिज़नेस भी हिमाचल प्रदेश शिफ्ट कर रही h…aur फिर स्टील किंग वर्मा जी और फिर राइस और शुगर इंडस्ट्रीज के बुएरस को परचेस करने से रोक दो फिर देखूंगी इनकी हालत…”

जेनिफर “ ok मम …बूत इसका इम्पैक्ट हमारे बिज़नेस पर भी होगा मम”

कृति “जेन्नी no ओने हुर्ट्स फॅमिली यू क्नोव वैरी वेल जस्ट दो आईटी …एक महीने मई इस पूरी गवर्नमेंट को खंगालकर दूंगी और ये रुमार उदा दो की उप गवर्नमेंट के नेगेटिव वीडियोस सिम्मेंट्स ट्रेंडिंग मई ला दो हर जगह उप गोवेर्मेंट इन लोस्स और कंगाल होने वाली ह न्यूज़ ट्रेंड करवाओ और ओप्पोसिओं को कांटेक्ट करलो ये सब करने से पहले उनके एग्री होते हे फिर ये एक्शन प्लान इम्प्लीमेंट कर देना ok”

जेनिफर “ यस मम”

सुनील “व्हाट हैपेंड”

कृति “नथिंग”

सुनील “ी क्नोव यू ok स्कूल टाइम से जनता हु तुम्हे”

कृति “ok ok दिव्या माँ के हॉस्पिटल मई वंहा का लीडर मतलब कोई बाहुबली ह कुंदन सिंह जिसने हॉस्पिटल मई परेशानी की हलकी उनके बॉडी गॉर्डस ने भगा दिया पर पुलिस भी इन्वॉल्व थी”

जैसे सुनील ने ये सुना वो गुसाई से फैट पड़ा “क्या दिव्या माँ को परेशां किया राज मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा मैं उसे जान से हे मार दूंगा वैसे भी पिछले हिसाब बाकी ह”

कृति “कूल कूल …अभी पूरी बात सुनी न तुमने उसे बर्बाद कर देंगे तोह सोचो कितने हे लोग होंगे उस साई बदला लेने वाले वो कैसे उसे मरेंगे …इंसान को जान से मर देने मई वो सुकून नहीं ह जो उसको तड़पता देखने मई ह”

सुनील इस बार कृति को देखता रह गया और उसे अपनी तरफ घूरता देख कृति बोली ऐसे मत देख यार “मैंने बहुत डिफरेंट टाइप्स की क्लासेस ली ह जिनमे किसी को कैसे माइंडेड ली ब्रेकडाउन कर सकते हो से लेकर motivation…face reading…symbols अंडरस्टैंडिंग ेट्स ेट्स”

सुनील “तुम हो क्या …मतलब उस दिन वो एक हेल्प और उसके बदले तुम”

कृति “अब तुम सुरु हो गए…”

दोनों मंडावा मई एंटर हुवे तोह..

कृति “वो यार यंहा तोह बहुत साडी हवेलिया ह और उन्दोनो को देखो नई मैरिड कपल्स ह एंड वेडिंग ड्रेस इस साऊल एंड डिफरेंट”

सुनील “वो राजस्थानी वेडिंग ड्रेस ह पोषक वीमेन के लिए और बृजेश मेंस के लिए…”

कृति “मुझे पहननी ह”

सुनील “बहुत हावी होती ह डाब जाओगी”

कृति “नौपे”

सुनील “मतलब सिंह ग्रुप की चेपेर्सन को ऐसे बचो की तरह दुनिया ने करते देख लिया न तोह वायरल हो जाएगी न्यूज़”

कृति क्यूट सा फेस बना कर “प्लीज प्लीज मुझे चाहिए”

सुनील “ok मंगवा दूंगा बस जो पसंद ए ले लेना पहले हवेली चले”

कृति के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आगयी आखिर अति भी क्यों न उसे राज के बचने के बाद से जो एआईएम और वजह मिली थी उसमे उसने खुद को पूरी तरह झोंक दिया tha…aur खुद के लिए उसने सोचना हे छोड़ दिया पर आज अपने दोस्त सुनील के सथाउर अपने क्रश राज से मिलने की ख़ुशी मई वो सब भूल सी गयी थी की वो वर्ल्ड की टॉप कम्पनीज मई से एक की चेयरपर्सन ह…

सुनील और कृति सुव से जैसे हे बहार ए तोह कृति का स्वागत फूलो और आरती से हुवा ..उसने सुनील की तरफ देखा तोह

सुनील “फॅमिली मेंबर का स्वागत ऐसे हे होता ह यंहा और जो तुम डाइटिंग करती हो न वो भूल जाओ”

कृति की आंखे नाम हो और आरती होती हे तुरंत सबके बिच खड़े जगमाल के पाँव चुवे और उनके गले लग गयी…

जगमाल सिंह “ये क्या कृति बेटी रो रही ह अब आप आम लड़की नहीं रही हो”

कृति “मैं बस कृति हु दादाजी मुझे कोई खास नहीं बनना h…sirf कृति”

जगमाल सिंह जोर से हंसपदी और बोले “है है है ….तीख तीख पर अब आप रोना बंद करे “

कृति ने जल्दी से अपने आंसू पौंछे पर फिर भी आँखों सी निकल रहे थे …

सुप्रिया “मैं मिलवाती हूबेटी तुम्हे सबसे”

कृति अपने आंसू पौंछकर “नहीं सुप्रिया चची बिलकुल भी नहीं मैं खुद pahchanugi….aur एक एक करके सबके नाम बताती gayii…phir लास्ट मई श्वेता के काफी दिएर गले लगी रही

श्वेता “चल तुझे kisi.se मिलती हु और रोना बंद कर आयी ह तबसे से रो रही ह”

कृति “यार कोसिस कर रही हु …पर इतने साल बाद तुझसे सबसे मिली हु मुझे सब जानना ह ok और तू कुछ नहीं छुपाएगी …सुनील ने कुछ नहीं बताया ह बोल रहा था वंहा चलकर पता लग जायेगा वंहा पूछ लेना…”

श्वेता “ ok सब बता दूंगी सुरु से लेकर एन्ड तक दूंगी…”

कृति और श्वेता ऊपर रूम मई आगये जंहा सोनाली बचो के साथ लेती हुवी thi…aur सोनाली को देखते हे

कृति “ये तोह मिस सोनाली ह”

श्वेता “अब मिस से मिसेस निर्वाण हो गयी ह और ये राज के दो जुड़वाँ बचे ह”

कृति को शॉक सा लगा और सिर्फ 2 सेकंड केलिए उसके एक्सप्रेशन चेंज हुवे पर उसने खुद पर किसी तरह कण्ट्रोल कर लिया …और फिर मुस्कराती हुवी सोनाली के पास आगयी…

कृति “क्या मैं”

सोनाली “है”

कृति ने एक बचो को गोदी मई उठा लिया ….

सोनाली तुम दोनों यंहा बैठो “इनदोनो बदमाशों को खिलाओ मैं जब तक निचे जाकर तुम्हारे लिए नास्ता लसतिहुँ और उस गधे से पूछती वो समानलेकर आया इनदोनो का”

श्वेता कृति से “सुनील भाई ने दिल्ली से सामान लिया था बचो का”

कृति “नहीं”

श्वेता “तोहफिर भाई पिटेगा आज भाभी से”

कृति “सच मई”

श्वेता “सच मई उन्होंने कहा था की जयपुर से क्या मंगवाने मई दिल्ली जा रहा हु लेकर आजाऊंगा और देखो वो नहीं लेकर ए”

निचे….

सोनाली सुनील को धुनते हुवे सीधे मनीषा के रूम के पास पहुंची …और दूर पर नॉक किया और 3 सेकंड बाअद अंदर आगयी

“सुनील कान्हा ह”

मनीषा के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और उसने अलमीरा की तरफ इशारा किया

सोनाली “बहार अजा नहीं तोह मैं आयी तोह बहुत मार खायेगा”

सुनील अपनी बत्तीसी दिखता हुवा अलमीरा के अंदर से घुटनो के बल बहार aya..wo घुटने से खड़ा भी नहीं हुवा था की सोनाली ने उसके कान पकड़ कर मरोड़ दिए…

“आयईईईई दर्द होता ह”

“तोह काम क्यों करता ह सीईओ बना घूमता रहता ह ..पता नहीं किसी गधे ने तुझे ये टैग दिया था यंगेस्ट सीईओ ऑफ़ india…responsiblity नाम की चीज नहीं h….ek काम बोलै था वो भी नहीं हुवा”

“दीदी वो ले लिया था भूल गया”

“भूल गया” इतना सुनते हे एक थपड पड़ा सर पर

मनीषा “आप चाचा हो उन दोनों के आप से ये उम्मीद नहीं थी …चलो भाभी” इतना कह मनीषा भी सोनाली के साथ चली गयी….

रात को कविता ममता रिफत सोनाली श्वेता मनीषा रूफटॉप पर बैठे निचे बैठे हुवे the….aur बचे और जानवी सुप्रिया के पास सो रहे थे

कृति “श्वेता बताएगी मुझे अब राज कान्हा ह”

पर श्वेता क्या बोलती उसने सबकी तरफ देखा …

मनीषा ने रिफत और ममता अजय को खाना तैयार करने के लिए निचे भेज दिया “राज के बारे मई जानना चाहती हो”

श्वेता “है”

मनीषा “राज कान्हा ह जिन्दा ह या नहीं किसी को नहीं पता ह बस एक उम्मीद ह की वो आएगा ..”

कृति हैरानी से “ये आप क्या कह रही”

मनीषा “जो सच ह फिर हर बात पूरी बताती चली गयी…”

कृति को तोह अब भी यकीं नहीं हो रहा था वो सोच रही थी की सायद मज़ाक कर रहे ह

सोनाली “यही सच ह मुझ पर और बड़े पापा पर हमला हुवा था …जिसमे लगभग मर हे गए थे hum…par श्वेता न वक़्त रहते बिच मई आकर हमे बचा लिया…

कृति पीछे मुड़कर सुनीलको ढूंढने लगी उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था और अब उसका दिल घबराने लगा था उसने तुरंत श्वेता का हाथपाकद लिया पर नीची गर्दन करके बैठी श्वेता की आंख की आंसू की बुँदे जो उसके हाथ पर गिरी उसने कृति को यकीन दिल दिया और उसका दिल को गहरा धक्का सा लगा …उसके आँखों के आगे साडी बाटे घूमने लगी जो राज के साथ बितायी थी सब कुछ ….कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था …बचो के आने पर जो ख़ुशी का माहौल बना था वो फिर से ढक मई डूब गया था…

कृति “फिर सुनील ने मुझे बताया क्यों नहीं”

मनीषा “क्योकि उसे यकीं ह की राज जिन्दा ह वो जब तक प्रूफ नहीं देख लेगा जब तक उसे ढूंढता रहेगा”

कृति क्या हे बोलती उसके सपने उसकी उम्मीद उसकी ख़ुशी सब टूट गयी thi….jis उम्मीद जिन सपनो के साथ वो आयी थी वो सब कांच की तरह टूट कर बिखर गए थे….

निचे जगमाल सिंह रूम….

जगमाल सिंह “है नरपत उस din…mere ऊपर का वार अली के बेटे शेरदिल ने अपने ऊपर ले लिया था …मैं भी घायल हो चूका था और बेहोश गया था …bheema…ko गोलिया लगी थी पर कुछ करम अचे किये थे मैंने जो उसे कुछ नहीं हुवा और शेरदिल को भी कुछ नहीं हुवा…. लड़ाई ख़तम होते हे हम लोगो को तुरंत सीकर हॉस्पिटल भर्ती कराया गया और एक टीम जयपुर से तुरंत रातो रात आगयी thi…main एक महीने तक लगभग बेहोश सा हे रहा …और भीमा को तीख होने मई 6 महीने लग gaye……aur मुझे एक महीने बाद पता लगा …की क्या हुवा था राज के साथ जबकि बाकी सबको कविता अनु और मनीषा ने एते हे बता दिया tha…wo दिन नरपत बहुत दुख भरा था ….बिलकुल उदयपुर मई जो हुवा उसकी तरह …और जब मैंने राज की दादी को कहा की अब तोह तुम खुस हो वो मनहूस सहदेव की आखिरी निशानी भी चली गयी तोह वो ये सदमा बर्दास्त न कर पायी और वो भी मेरा साथ छोड़कर चली गयीईइ… पता नहीं ऐसा क्या ह जिसके लिए ये सब हो रहा ह …मुझे तोह कुछ नहीं चाहिए न पैसा न शोरत बस सुकून और मेरा परिवार चाहिए …”

नरपत “बाबूजी आप उदास मत होईये अब हम मिलकर बदला लेंगे ….”

वंही ऊपर रूम मई…

मनीषा ने कृति को अपने बाप की साडी बाटे बताई जो उसने की

कृति “मनीषा भाभी आपकी गलती नहीं h…ap खुद को दोष मत दीजिये अपने बहुत बलिदान दे दिया ह”

मनीषा “खास पहले पता चल जाता”

कृति “फिर पता कैसे चला मतलब अपने कहा की श्रुति ने इन्फॉर्म किया पर ये कैसे पता लगा की वो हे मां ह”

सोनाली “मसिने बताया मैं एक मंथ बाद होश मई ayi…tab मुझे चीफ सर ने सब बताया राज के बारे मई छोड़कर …और मैंने सुनील को बताने के लिए कॉल lagaya…aur उसी दिन सुनील मनीषा और अनु को छोड़ने मुम्बई आया हुवा tha…tab उसने कॉल अटेंड किया”

फलेश बैक….

इन कार…

सुनील” Hello”

सोनाली “सुनील रंजन हे मां ह”

सुनील “क्या कह रही हो आप आराम से बोलिये आपकी तबियत ख़राब ह”

सोनाली “ स्तूपित रंजन मनीषा के पापा हे मां ह वो हे गद्दार ह”

कार मई इतनी शांती थी की मोबिल से तेज़ आयी आवाज मनीषा ने भी सुनली और मोबिल छीनकर अपने हाथ मई ले लिया और बोली “क्या कहा अपने राज जिस मां को धुंध रहा ह वो मेरे पापा ह”

सोनाली “मनीषा वह…”

मनीषा “आप जो सच ह वो बोलिये …वैसे भी मैं श्रुति की बाते सून चुकी हु और वही जवाब लेने जा रही हु अपने बाप के पास”

सोनाली “है मैंने खुद सब खुद जाकर कन्फर्म किया ह की वो हे मां ह और श्रुती ने कहा वो भी सच ह वो मेरे और चीफ सर के कहने पर हे तुम्हारे पापा के पीछे मिशन पर thi…bus इंतज़ार था कन्फर्मेशन का जो की मिल चूका ह सॉरी मनीषा”

कॉल कट हो गया था पर मनीषा की आँखों मई आंसू थे तोह मुठिया कसी हुवी थी…

सुनील “आप जो डीएड करेंगी वो मंजूर ह मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं ह”

मनीषा ने गुसाई से सुनील को देखा और बोली “ सिखयात मुझे ह …वो मेरा बाप नहीं ह …और न हो सकता ह ….”

अनु “भाभी”

मनीषा “उसे कोई हाथ नहीं लगाएगा …उसे मैं खुद मरूंगी …”

सुनील “वो मुम्बई पोर्ट के अपने सेक्टेट बेस से निकलने की तयारी कर रहा ह”

मनीषा “अनु को ड्राप कर सीधे वंही लेचलो ….”

अनु “ मैं भी चलूंगी”

मनीषा गुसाई से “नहीं जितना कहा उतना करो और आंटी का धयान रखो”

अनु “तीख ह भाभी”

अनु को ड्राप करते हे सुनील ने हथियार सीट की बैक साइड से nikale….aur बोलै आपको कौनसा चाहिए

मनीषा एक लॉन्ग नाइफ को उठाकर बस ये बहुत ह”

सुनील ने कान मई लगे अपने एअर मई आगे पीछे चल रही टीम से कहा “ जो लोकेशन सेंड करि ह इसे सेट करो और जो इमेज डिस्प्ले हो रही ह उसे कोई कुछ नहीं करेगा”

तीनो कार्स सीधा पोर्ट की तरफ जाने लगी जंहा पहुंचने मई 2 ऑवर लगने वाले थे वंही रंजन इतना सब हो जाने के बाद भी सबके जिन्दा बच जाने पर घबराया हुवा था क्योकि एते वक़्त उसने अपनी वाइफ को भी मार दिया था और आज सुभे से निकलने की तयारी मई था रात को पर अज्जू उसपर श्रुती के कहने के बाद से हे नज़रे जमाये हुवे था….

प्लेस -मुंबई पोर्ट…

सुनील सबको समझा रहा tha….aur मनीषा ने कुर्ते और सलवार मई कड़ी अपने बालो की पोनी टेल को टाइट कर रही थी और हाथ नाइफ पर कैसे हुवे थे..

सुनील मनीषा से “25 त्रिनेड बॉडी गार्ड ह दस मिनट लगेंगे”

मनीषा ने बस है मई गर्दन हिला दी…

और सुनील के इशारा मिलते हे उसकी टीम सीलेंसर गन के साथ अंदर घुस गयी और एक एक करके सबको मरती गयी….

मनीषा गुसाई से बस पीछे इंतज़ार कर रही थी…..

सुनील 10 मिनट बाद “ क्लियर ह अंदर एक आदमी ह बस”

मनीषा तेज़ी से अंदर चलती हुवी आयी और कुछ मिनट्स बाद एक रूम के बहार rooki….janha सुनील ने ईशर kiya…toh एक ने मिनी बम लगा दिया दूर पर मनीषा कड़ी रही तोह सुनील ने पीछे खिंच लिया ….बूम और धड़ाम की आवाज के साथ दूर टूट कर निचे गिरा ….अंदर बैठा रंजन भी गन निकलकर खड़ा हुवा पर अपने सामने सुनील और टीम को गन निकलकर तैयार देखा तोह उसकी गन निचे हो गयी…

सुनील “गन इस तरफ फेंक दो वर्ण”

मनीषा “नाहीइ कोई कुछ नहीं कहेगा अज्ज इन्हे सिर्फ ये और मैं”

रंजन “बेटी तुम”

मनीषा “तू तोह जगत मां ह बाप तोह तू हो नहीं सकता ….छोड़ ये सब सिर्फ तू और मैं …वडा ह मुझे मारदे और तुझे यंहा से जिन्दा जाने देंगे कोई हाथ नहीं लगाएगा”

उसकी बात पूरी होते हे रंजन के साथ खड़े होते आदमी के सर पर गोली लगी….

मनीषा हाथ मई पकडे नाइफ को दूर फेंक kar”ye ले हथियार भी फेंक दिया …अजा चाहे धोखे से मर्दे …क्या हुवा हिला nahi….darta ह एक लड़की से”

रंजन “darta…jsb मैंने किसी को भी नहीं छोड़ो धोखा देने और मरने मई तोह तुझे मरने मई क्या दिकत होगी”

मनीषा “यही यही रूप ह तेरा इसलिए तुझसे मैं नफरत करती थी सिर्फ माँ की वजह से हंसकर कभी बोल लेती thi…sochti थी जैसा भी ह बाप ह मेरा पर तू तोह सांप ह जिसने अपनी हे बेटी की खुशिया चीन ली”

रंजन ने आगे मनीषा के बाल पकड़ लिए और बोलै “मुझे सिर्फ पैसे और पावर से प्यार ह”

मनीषा “ने उसके हाथ की उंगलिया जिनसे बाल पकडे हुवे था उन्हें एक ेककर रंजन की आँखों मई देखते हुवे खोलना सुरु किया और फिर हाथ को घूमते हुवे धीरे धीरे मरोड़ना सुरु कर दिया …रंजन को हुवा दर्द तोह एक साइड किक मनीषा ने उसके मू पर दे मरी …रंजन गिरा घूमकर निचे….

मनीषा “तुझे धोखे से मरने मई मज़ा अत ह पर पता ह मुझे मेरे देवर ने तड़पना सिखाया ह …और आज तुझे दिखाउंगी की एक लड़की सपने दोस्त अपने देवर अपने प्यार के लिए क्या कुछ कर सकती h….wo अपनी नफरत मई क्या कर सकती ह …..”

रंजन “कुटिया मुझ पर हाथ उठती h”ye कह कर एक पंच उसके मू पर मारा मनीषा की नाक से खुलने लगा पर वो रंजन को देखती रही और बदले मई शामे उसकी नाक पर पूरी ताकत से पंच mara….ranjan पीछे जाकर टकराया …मनीषा आगे उसे उठाने बढ़ी तोह रंजन ने गाला पकड़ लिया…

मनीषा “बस यही अत ह” इतना कह राइट लेग की दोनों घुटनो पर मरी और रंजन घुटनो पर agaya…aur फिर दिए पंचेस पर पंचेस उसके मू पर और छीकते हुवे बोली “वो एक हे तोह लड़का आया था मेरी जिंदगी मई मेरा दोस्त बनकर फिर क्यों….” मनीषा के पंचेस ने रंजन का बुरी तरह जगह से फोड़ दिया था और पल पल मनीषा गुसाई मई पागल होती जा रही थी… “सिर्फ तेरी वजह से मैंने उसे खोया फिर पलटकर इधर उधर कुछ ढूंढने लगी उसे नहीं मिला तोह…

सुनील “बस बहुत हुवा तुम्हारस”

मनीषा ने उसे गुसाई से देखा और फिर एक बॉडीगॉर्ड से बोली “मुझे एसिड चाहिए कार की बत्त्र्य मई होता ह न जाओ लेकर ao…aur बाकि तुम चार इसे रस्सी से बांध दो

सुनील “ राज यंहा होता तोह वो ये नहीं चाहता”

मनीषा जोर से हँसते हुवे बोली “वो यंहा होता तोह कहता भाभी बहुत ाचा इसलिए आप दूर रहो”

सुनील को मनीषा की आँखों मई पागल पैन दिख गया tha….aur समाज गया था की अब उसे रोकना बेकार ह.

मनीषा ने एसिड की बोतल को हाथ मई लिया और रंजन की पीठ पर मामूली सा गिरा दिया रंजन जोर से फड़फड़ाने लगा ….

मनीषा “तू छीकता क्यों नहीं h..oh तेरा तोह मू बंद ह ..पर तू अब ऐसे हे चीखेगा तेरे इस सीक्रेट बेस पर”

10 दिन बाद

सुनील “मनीषा”

मनीषा नशे मई धूत चेयर पर बैठी हुवी बोलो “हूउउ”

सुनील “चलो बहुत हुवा अब”

मनीषा नशे मई हे “कान्हा चालू …माँ जिसे इस हरमि ने मारा दिया ….दोस्त bhai..sab जिसे मानती थी उसे भी इस हरमि ने मरवा दिया अब कान्हा जाउंगी main…ap jao…main इस हरमि को तब तक तड़पती रहूंगी तब तक ये मर नहीं जाता ह आप जाओ”

सुनील ने एक बार सामने की तरफ देखा जंहा “रंजन झांझीर से बंधा हुवा था और हाथ पेअर सब पर जले हुवे थे साइड मई नमक मैच पड़ी हुवी thi…jinda था या मर गया ये भी नहीं पता था पुरे रूम मई बॉटल्स बिखरी हुवी थी …

सुनील से ये सब देखा नहीं जा रहा था …वो खुद बहुत गुसाई मई था सब कुछ करके वो फ्री होकर मनीषा और अनु को सेफ छोड़कर राज की तलाश मई पूरी तरह निकलने वाला tha….usai राज की बात याद आने lagi…jo उसने कही थी… “यार मनीषा मुझे तेरे लिए बहुत पसंद ह वो बहुत नेक दिल लड़की h…main उसे भाभी मान चूका हु वो तेरा दादाजी सबका बहुत ख्याल रखेगी वो हीमत बनेगी हमारे परिवार की और मैं राहु या न राहु उसे तू कभी दुख मत पहुंचने देना वडा कर यार”

सुनील “वडा ह भाई बस …जो तू बोलेगा वो मंजूर पर शादी एक हे करूँगा समझा” इतना कह दोनों एक साथ हंस पड़े…

सुनील के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कराहट आगयी और उसने आगे बढ़ मनीषा को गोदी मई उठाया…

मनीषा “छोड़ो मुझे …अभी इस कुत्ते को और तड़पना ह ये चीखता ह तोह मुझे लगता ह मेरा राज मुझे याद करता ह”

पर सुनील ने मनीषा को नहीं छोड़ा और दादाजी को कॉल कर साडी बात बता दी और दादाजी ने शादी का पूरा इंतज़ाम कर दिया …कप्तान सिंघानिया को सुनील ने खुद बुलाने से मन कर दिया…

तोह शादी की बात से नाराज कविता और श्वेता ने जैम कर हंगामा किया और मनीषा को बहुत खरी खोटी सुनाई तोह सुनील ने दोनों को दांत दिया जिसकी वजह से बात यंहा तक बढ़ गयी की लाख समझने पर भी दोनों नहीं रुकी और दिल्ली agayiii…aur वंही रहने लगी दादाजी ने भी कुछ वक़्त अकेले उन्हें रहने दिया जोगिन्दर की निगरानी मई

कुछ वक़्त बाद सोनाली को मनीषा ने मंडावा आने के बाद सुप्रिया और शेरदिल की माँ के साथ मिलकर सचाई बता डीई जिसकी वजह से सोनाली को रोकना मुश्किल हो गया और नौबत ये आयी की नींद के इंजेक्शन तक देने पद गए और कुछ दिन बाद सुनील भी वैलेंटाइन राइडर बनकर निकल गया राज को ढूंढने के लिए ……

कृति “इतना सब हो गया”

सुनील जो दूर के पास खड़ा था वो बोलै “इस्लियेतुम्हेँ नहीं बताया क्योकि तुम्हे ढूँढना ह की उस कंपनी मई क्या राज़ दफ़न ह इसीलिए तुम्हे सबसे छिपा कर यंहा लाया क्योकि दुश्मन कौन ह हमे पता नहीं ह यही सब हुवा ह और फिर हमे पता चलता ह की राज के जुड़वाँ बचे h…ao तुम्हे कुछ जरुरी चीजे दिखता हु जो तुम्हे वंहा ढूंढनी ह”

कृति सुनील के साथ बहार चली गयी toh…manisha सोनाली के गले लग गयी…

सोनाली “तू हीमत क्यों हारती ह वो जिन्दा ह मुझे पूरा भरोसा ह …और उस दिन मंदिर मई भी योगी बाबा ने कहा था मुझसे की …राज पर संकट आएगा …और उसकी रह मुश्किल होगी पर तुम विस्वास मत खोना …”

मनीषा “2 साल हो गए ह कब आएगा”

सोनाली “मेरा दिल कहता ह वो बहुत जल्द आएगा …..”

उधर …

पूनम… “कब आओगे तुम”

हॉस्पिटल मई ऋचा “उठ जाओ तुम्हारी नीचू बुला रही ह ाजाओ न ”

तोह राज के अंदर एक अलग हे जुंग चल रही थी ….उसके उनकंसियस मंद और क्योंकिओस मंद की यदि एक दूसरे से कनेक्ट हो रही थी अचानक राज को बचपन का एक चेहरा दिखाई दिया और कुछ दूसरी यदि दिखने लगी और वो बीएड पर जोर से हिलने लगा….. पर अचानक वो कनेक्शन टूट गया…… और राज शांत हो gaya….richa बहार की तरफ जोर से चिल्लाती हुवी भागी.....

“Dr.....Dr …डॉ ..”

आज के लिए इतना हे …..
 
लिटेराल्ल्य इतना टाइम लग गया एडिटिंग मई बहुत टाइम लग गया
 
इग्नोर मर्दो उसे नहीं पता ह अभी कर्रिएर की वैल्यू ....अभी पापा के होटल मई ह na....mouka गईं कर हे मिलता ह ....और अपडेट की बात तोह अभी भी मुझे यकीं ह इस मंथ लास्ट दो अपडेट दूंगा एक तोह सैटरडे को मिल जायेगा जो मेघा अपडेट ह और अगला इस मंथ के लास्ट तक आजायेगा...

हटर्स को अवॉयड मारो ....दोनों अपडेट 6 क वर्ड्स होंगे ....
 
अपडेट 229

Yudh-The फर्स्ट movement…part ओने

रात के वक़्त …7 साये इंडिया मैं समुन्द्र के रस्ते एंटर huve…toh सामने 3 सुव उनका वेट कर रही थी और वो 7 साये बिना कुछ बोले तीनो सुव मई बैठ gaye….aur सुव रुकी एक दूर सूनसान बड़े से बंगलो के अंदर…

आदमी “आप सभी के लिए साडी फैसिलिटी यंहा मौजूद ह “

ुंसयो मई से एक ने कहा “तुम जा सकते हो” और ए हुवे आदमी के जाने के बाद…

टट्टूवाला एक शख्स “तुम्हे याद ह न उस इंसान रुपी कीड़े को बाद मई मार सकते हो फिलहाल हमारा काम उन बचो को ढूँढना ह…”

टट्टूवाला शख्स जो उप मई था “पता ह मुझे बार बार याद करने की जरुरत नहीं ह तुम्हे”

टट्टूवाला शख्स “जरुरी ह क्योकि इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए ह वर्ण डिप्टी कमांडर के गुसाई से बच नहीं पाएंगे और तुम्हारी वजह से हम भी उनके गुसाई का सीकर हो जायेंगे समझे”

टट्टूवाला शख्स जो उप मई था उसने कुछ नहीं कहा …तोह पहले वाला दुबारा बोलै … “ये मैप ह और इस लोकेशन से वो जो भी थे बचे के साथ उप से दिल्ली …Uttrakhand…hariyana…rajasthan…jharkhand …bihar…aur…. मध्यप्रदेश …जाने की हे पॉसिब्लिटी h…aur सबसे जायदा पॉसिब्लिटी हरियाणा पंजाब और मध्य प्रदेश की हे ह इसलिए वंहा के जो हमारे कॉन्टेक्ट्स इतने सालो से हमने रख रखे ह उन्हें पूरी तरह लगाओ…”

टट्टूवाला शख्स जो उप मई था “तुम क्या करोगे”

पहला टट्टूवाला शख्स “मैं उन बचे की डिटेल उत्तराखंड के हर हॉस्पिटल से nikalunga…aur फिर उस साई जुड़े सबकी मुझे यकीं ह की जैसा तुमने बताया वो शख्स उस परिवार को जनता ह …और मुझे पता ह की वो कीड़े जो भी थे उनका पता लग जायेगा और तब मैं बताऊंगा उन्दोनो कीड़ो को उनकी औकात …2-2 के ग्रुप मैं हो जाओ और अब हम तभी मिलेंगे जब बचे मिल जायेगे आज की रात आराम करो ”इतना कह वह भी आराम करने चला गया..

वंही आज 5 दिन बाद…..

ऋचा मित्युदूत से “आपको अब जाना चाहिए”

मित्युदूत “मास्टर को खतरा ह अपने देखा न वंहा क्या हुवा था वो लोग चुप नहीं बैठेंगे”

ऋचा “ahsaan(sherdil) यंहा h…aur फिर नानाजी मामाजी सब ह”

मित्युदूत “खतरा आपको भी ह इसलिए मेरा यंहा रहना जरुरी ह आप समाज नहीं रही”

ऋचा “नहीं ..इनके इलाज के लिए बहुत सी चीजे मुझे करनी होती ह …इसीलिए अहसान को भी नानाजी के यंहा हे रूकवाऊंगी”

मित्युदूत “तीख ह मैं गाँव के बहार हे रहूँगा”

ऋचा “और आप एबीखरी बांके न रहे मैं आपके रहने के लिए कुछ करवाती हु”

मित्युदूत गर्दन है मई हिलाकर चला गया

वंही 3 दिन pahle…hospital मई…

कुंदन वाइफ “क्या मतलब ह आपका की इनके पैरो की उंगलिया फ्रैक्चर ह पर कैसे घर घर पर पहरा ह और कोई अंदर नहीं आया था ”

डॉ “इनका बप 170 पहुंच चूका ह जो पिछले 72 घंटो से बना हुवा ह जिसका मतलब ह या तोह ये बहुत डरे हुवे ह या गुसाई मई ह और जिसने भी ये किया ह ….यंहा देखिये छोटी सी ऊँगली मई भी 2 फ्रैक्चर ऊपर से दर्द के वक़्त ये चीक भी नहीं पाए और वो सारा दर्द खून बनकर आँखों मई जमा हो गया h…maine अपनी लाइफ मई ऐसा केस नहीं देखा ह इनका हर बॉडी part ok ह पर बोल नहीं सकते h…dard ह पर जाता नहीं सकते ह”

कुंदन ने पीछे से उसका गाला एक हाथ से पकड़ लिया और जोर से दबाते हुवे बोलै “फिर तू डॉ किसलिए ह जब तुझे समाज नहीं ारः ह …ले जाओ इस कचरे को और हॉस्पिटल से बहार फेंक दो क्या और ाचा डॉ ह यंहा”

बलराम की माँ “तुम बाप बेटे को गुसाई के सिवाए कुछ नहीं अत ह” …और डॉ को पकड़ रहे आदमियों से “तुम सब छोड़ो रे डॉ को” डॉ तोह छूट ते हे जल्दी से कुंदन की वाइफ के पास आगया और बोलै “ मैंने ये कहा मुझे समाज नहीं आयी प्रॉब्लम पर और डॉ ह जो समाज सकते ह और मैं कुछ के नाम भी जनता हु जो हमे ठाकुर साब की प्रॉब्लम को समजा सकेंगे…”

बलराम माँ “तोह आप उन्हें बुलवाइए अगले महीना सुरु होने से पहले मैं चाहती हु ये अपने पैरो पर खड़े हो जाये क्योकि बलराम की शादी ह …”

डॉ “ जी मैं अभी उन्हें कांटेक्ट करता हु”

अब रूम मई बलराम और उसकी माँ हे थे तोह बलराम की माँ ने कहा “तुमने पता किया किसकी कार ह और कान्हा से आयी थी वो कार”

बलराम “वो कार सबसे आखिर मई विद्या हॉस्पिटल के चौराहे पर नज़र आयी थी और उसके बाद से अब तक गायब h..matlab दिखाई नहीं दी ह किसी भी कक्तव मई या अपने आदमियों को”

बलराम माँ “कंही इनसब मई उस लड़के का हाथ तोह नहीं जिस साई तुम्हारा जगदा हुवा था”

बलराम “गया था माँ वो कोमा मई ह और रिपोर्ट भी सही ह …”

बलराम माँ “ नहीं बलराम जरूर कुछ गड़बड़ ह उस छोकरे और उस डॉ क्या नाम था है दिव्या उसका कुछ तोह हाथ ह …”

बलराम “माँ उस पर हाथ डालना इतना आसान नहीं ह …जब से विद्या ग्रुप ने उत्तरप्रदेश से हॉस्पिटल हटा कर उत्तराखंड और हिमाचल मई शिफ्ट होने की बात कही ह ..सबकुछ उथल पुथल हो गया h…logo ने नरेबाअज़ी सुरु कर दी ह और जो विरोधी थे उन्हें बोलने का मौका मिल गया h…abhi डरा धमका कर कुछ कंट्रोल किया हुवा h….par आगे बात बढ़ेगी”

बलराम माँ “ दुनिया से कितने हे लोग गायब हो जाते ह इसे भी करवा दो डांगे का नाम देकर मरवा दो सर्कार अपनी ह पुलिस अपनी ह कितने हे लोग ह जो इल्जाम अपने नाम पर ले लेंगे”

बलराम गहरी सोच मई सोचते हुवे “सही कहा माँ हो सकता ह ये तीख ह मैं अभी मिर्ज़ापुर और गाज़ीपुर से अपने आदमी बुलवाता हु”

बलराम माँ “अरे ऐसे नहीं वो एक लड़की और थी न उस दिन उसके साथ पहले उसे तीखाने लगाओ …उसे उठवा लो दिव्या अपने आप काबू मई ajayegi…dono बार वही मिली थी न तुम्हे”

बलराम “है वो उसकी मू बोली बेटी ह मैंने पता करवा ह agar…wo हाथ लग गयी तोह ये मामला निपट जायेगा और फिर उसे आसानी से निपटा देंगे …तू सच मई बहुत खतरनाक ह माँ”

बलराम “तेरे बाप ऐसे हे बाहुबली नहीं बना ह समझा एक औरत अपने दिमाग से अचे अचे को जमीं मई मिला देती h..pata कर वो छोकरी हॉस्पिटल से कब बहार अति ह उसके पास कौन कौन रहता ह और मैं पंडित जी और तुम्हारे चाचा को तरीके पाकी करने के लिए तुम्हारे ससुर के यंहा भेजती हु पंडित ने शादी की डेट निकल ली होगी अब तक ”

बलराम है बोलकर बहार आगया और फ़ोन मिलाने लगा..

वंही राज ननिहाल ..


उमेद सिंह “ये दीपू बेहोश कैसे हो गया”

ऋचा “पता नहीं नाना जी कब तक होश आएगा इन्हे पर इनकी जान को कोई खतरा नहीं ह”

राज मां “और ये कौन ह”

ऋचा “ ये अहसान ह और सब इन्हे शेरदिल कहते ह और ये सहदेव पापा की मू बोली बहन और अली के बेटे ह”

राज मां “जैसा नाम वैसी बॉडी बिलकुल शेर की तरह”

ऋचा “और एक रिक्वेस्ट ह नानाजी”

उमेद सिंह “रिक्वेस्ट ….तुम बोलो बस”

ऋचा “इनके रहने की “

ऋचा की बात पूरी होने से पहले हे उमेद सिंह बोल उठे “ये हमारे साथ हमारे घर रहेगा ये पराया थोड़ी हे ह” और फिर पलटकर “एक काम करो गजेंद्र वो गाँव के बहार जो माकन की चाबियां ह वो भी ऋचा बेटी को दे दो”

ऋचा “ थैंक यू नानाजी बस एक बार ये तीख हो जाये और ये कुछ महीने निकल जाये बस फिर सब तीख हो जायेगा”

शेरदिल मनमै “भाभी सच मई बहुत भोली ह ये कुछ महीने की बात कर रही ह मुझे तोह दर लगा रहता ह की पता नहीं कौनसी रात को जग कर इनका क्या करने का मूड हो जाये या अल्लाह भाभी की हिफाजत करना”

उमेद सिंह “ाचा तुम रेस्ट करो मैं खाना भिजवाता हु आज तुम थकी हुवी हो “

ऋचा “तीख ह नाना जी”

उमेद सिंह “और है तुम्हारी तीनो देव रनिया नाराज ह एक दिन का बोलकर इतने दिन लगा दिए”

ऋचा “तोह आप खाना लेकर उन तीनो को हे भेज देना वो आजाएंगी मन भी लुंगी और अहसान को उनके साथ हे भेज दूंगी”

उमेद सिंह “ये ाचा रहेगा”

उमेद सिंह और गजेंद्र बहार निकले तोह

गजेंद्र “अब क्या होगा राज तोह तीख नहीं हुवा ह और एक या दो महीनो मई कभी भी शादी के लिए वो लोग आसक्ति ह”

उमेद सिंह “गज्जू भगवन पर विस्वास रखो हमने कुछ करम बुरे किये ह तोह अचे करम भी बहुत किये ह …ऊपर वाला कभी गलत नहीं करेगा हमारे साथ और अगर सिम्मी की शादी उस खंडन मई लिखी ह तोह तुम और मैं कुछ नहीं कर पाएंगे इसमे”

गजेंद्र क्या बोलते वो बस नीची गर्दन करके रह गए ….शाम के वक़्त तीनो खाना लेकर पहुंची

डिम्पी “भाभी bhabhiii…”chillate हुवे घर मई एंटर huvi…aur उसके पीछे दोनों जनि भी चिल्लाती हुवी आयी

ऋचा “शांत शांत शांत”

सिम्मी “शांति गयी चूल्हे मई तेल लेने फटा फैट सब क्लियर करो और वो कान्हा छिपे हुवे ह मूवी देखने जाने वाले थे शॉपिंग करने पर जाने वाले थे हमारे साथ”

शेरदिल “भाभी पानी पिलाओ पहले इन्हे ताकि दिमाग ठंडा हो इनका वर्ण ये बोलने नहीं देंगी”

तीनो ने एक साथ शेरदिल की तरफ खा जाने वाली निघाओ से देखा और फिर इग्नोर मार दिया

ऋचा “उनकी तरफ मत देखो मेरे साथ औ …” और फिर ऋचा ने अंदर ले जा कर ट्रीटमेंट की झूटी कहानी बनाकर उन्हें बता दी…

नित्ति “हमारे भाई को ये क्या हो गया”

डिम्पी “ दीपू भैया उठो न प्लीज”

सिम्मी “ भैया प्लीज उठ जाओ”

शेरदिल जो बैठा हुवा ये सब देख रहा था वो फिर बोलै “कोसिस करती रहो बहनो की बाते वो जल्दी सुनता ह क्या पता चमत्कार हो जाये और ये खड़ा हो जाये”

नित्ति “तुम कौन हो तब से देखरही हु पातर पातर कर रहे हो बिच मई”

ऋचा 'nittiiii…aisa नहीं बोलते ह वो आपके बड़े भाई h….ap हमसे दीपू के बारे मई पूछती थी उनकी लाइफ स्कूल कॉलेज के बारे मई …इनसे पूछो इन्हे सब पाटा ह”

सिम्मी “भाई हमरे”

ऋचा “है ये आपके शेरदिल भाई …और ट्रस्ट में ये अपनी बहनो का बहुत ख्याल रखते ह”

डिम्पी “सच मई”

ऋचा “सच मई आप इन्हे अपने साथ ले जाओ ये आपके साथ हे रहेंगे और कल आप तीनो फिर से अजना अपने दीपू भैया से बात करने अभी रात हो गयी ह न ”

तीनो ने एक साथ है मई गर्दन हिलायी और शेरदिल के साथ पैदल हे घर की तरफ चलने lagi….raste मई डिम्पी जो सबसे चंचल थी वो बोली “आप सच मई हमारे भाई लगते हो हमे तोह दीपू भैया की फॅमिली के बारे मई न के बराबर पता ह”

शेरदिल “आप तीनो दीपू की बहने हो और इसीलिए आप मेरी भी बहन हुवी भाभी ने बताया था न कोई सक ह”

नित्ति “नहीं नहीं वो हमे भैया के बारे मई पता नहीं ह न भाभी भी कुछ बताती नहीं ह बस टलती रहती ह आप बताओगे हमे उनके बारे मई”

शेरदिल “पर प्रॉमिस करो टॉप सीक्रेट रहेगी हमारे बिच की बाते”

तीनो एक साथ प्रॉमिस प्रॉमिस कसम से हम किसी को नहीं बताएंगी….

शेरदिल “क्या जानना चाहती हो तुम तीनो पूछो मुझर जितना पता होगा वो बताऊंगा”

नित्ति “उनकी शादी से पहले गफ थी”

ये सून कर शेरदिल के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी..

सिम्मी “आप मुस्कुरा क्यों रहे ह बताईये न”

शेरदिल “मुस्कुरा इसलिए रहा हु क्योकि गफ तोह एक भी नहीं ह पर है उनके पीछे कितनी पागल ह ये पता नहीं ह …पर है वाइफ जरूर दो होंगी एक से तोह तुम मिल हे चुकी हो और दूसरी मंडावा मई ह जो बिना फेरो के हे राज की वाइफ बन गयी ह…”

तीनो हैरानी से एक साथ “दो वाइफ”

शेरदिल “है और दूसरी वाली भाभी तोह बहुत खतरनाक ह राज भाई की भी धुलहई कर देती ह मतलब सबकी कर देती ह मेरी नहीं की ह क्योकि मैं पंगे नहीं लेता हु उनसे ”

तीनो “इतनी खतरनाक अपने होने वाले पति को भी पिट दे …और देवर को भी”

शेरदिल “मोबाइल ह न उस पर सर्च कर सोनाली वर्मा”

नित्ति “सोएसिअल ह क्या वो”

शेरदिल “तुम सर्च करो तोह सही सब पता लग जायेगा”

नित्ति ने अपना मोबाइल निकला और सर्च किया उसके बाद शेरदिल को दिखती हुवी “यंहा तोह ये ये आरही ह दो एक्ट्रेस और दो मॉडल और फेमस अफसर सोनाली मैडम”

शेरदिल “है ये फेमस officer…yahi ह तुम्हारी दूसरी होने वाली भाभी तुम्हारी सोनाली मैडम”

और बस ये सुनते हे …लगा झटका तीनो को और मू खुला रह गया…

नित्ति “आप मज़ाक कर रहे ह न इनका और वो भी अफेयर इम्पॉसिबल लड़के तोह कोसो दूर भागते ह इनके इंटरव्यूज और कारनामे न्यूज़ पेपर मई पढ़े ह मैंने इनका अफेयर no नेवर”

शेरदिल “तुम्हे यकीं नहीं ह”

तीनो एक साथ “बिलकुल भी नहीं इनके लिए तोह मान हे नहीं सकती ह हम”

शेरदिल “ऋचा भाभी की मू बोली बहन भी ह बताया नहीं उन्होंने तुम्हे …

अब दुबारा लगा 449 वाट का झटका तीनो को और तीनो की ऐसी सकल देख “रूको मैं कुछ दिखता हु तब यकीं आजायेगा” इतना कह उसने अपना मोबाइल निकला और गल्लारी मई जाकर इमेजेज मई से एक इमेज निकल कर दिखायी सुर बोलै “खुद देख लो”

तीनो ने इमेज को देखा तोह चौंक गयी क्योकि वो इमेज खेत वाले घर की थी और सोनाली राज का एक तरफ से बाजु पकडे हुवे कंधे पर सर टिकाये हुवी थी तोह दूसरी तरफ पूनम और मनीषा और आगे ऋचा कविता श्वेता सुनील और सब बैठे हुवे थे

सिम्मी “ बेलीवे नहीं हो रहा ह”

डिम्पी “है यार मतलब मम का क्रश हमारा दीपू भाई ह”

शेरदिल “और इंट्रेस्टिंग बात ये ह की सबको डरने वाली खुद दीपू के सामने नयी दुल्हन की तरह रहती h…aisa मैंने सुना ह देखा nahi”sherdil ने सबके खुले मू को देखा तोह हंस पड़ा और बोलै “तुम तीनो मू तोह बंद करलो”

नित्ति “वो और और उनकी गफ भी होंगी पहले”

शेरदिल “गफ तोह नहीं ह ..पर सुनील बता रहा था की बहुत लड़किया इवन टीचर मॉडल्स भी पीछे पड़ी हुवी थी”

सिम्मी कुछ बोलने वाली हे थी की …आवाज आयी…

“नमस्ते भाभीजी”

और ये सुनते हे सिम्मी का मू बन गया …और बोली “जल्दी चलो”

शेरदिल “कौन ह ये और तुम दर क्यों रही हो इनसे”

सिम्मी “आप चलो बस jaldi”simmi और डिम्पी जल्दी से शेरदिल को पकड़कर चलने लगी तोह फिर से आवाज आयी…

“ोये तू कौन ह बे जो भाभी का हाथ पकड़ रखा ह हाथ chod….bhabhi सिर्फ बलराम भाई की”

शेरदिल कुछ बोलता उसे पहले हे सिम्मी गुसाई से “हद मई रहो तुम लोग समझे”


सॉरी भाभी आप तोह बुरा मान गयी …आप जा सकती ह पर इसने हाथ कैसे पकड़ा आपका”

शेरदिल “और नहीं हाथ पकडे राखु तोह…”

“तोह तेरे को हम लोग बताएँगे की भाभी को जो छूटा ह उसका क्या होता ह”

डिम्पी “चलो भाई ये सब रोज ऐसे हे करते ह गाँव मई भी और कॉलेज मई भी”

शेरदिल हाथ छुड़वा कर “बात तोह करने दो क्या पता समाज हे जाये ….मेरी बात मैंने जब जब बात करि ह सामने वाला समाज जाता ह” इतना कह वो उनके पास गया और चारो को एक बार देखा…

चारो मई से एक बोलता उसे पहले हे शेरदिल का हाथ किसी हंटर की तरह गाल पर पड़ा और अगले पल वो जमीन पर फड़फड़ा रहा था…. बाकि ने अपने दोस्त को देखा और शेरदिल को कुछ बोलते उसे पहले हे तीन बार और शेरदिल का हाथ घूमा और बाकि तीन भी जमीन पर फाड् फाड़ा रहे थे….

शेरदिल वापस तीनो के पास आकर “बोलै था न मेरे समझने पर समाज जायेंगे देखो बेचारे जमीन पर गिरे हुवे गलती मान कर माफ़ी मांग रहे ह”

अब तीनो क्या बोलती उन्हें समाज नहीं रहा था पर नित्ति को कहा चुप रहने वाली थी वो बोल गयी “ऐसे बात करते हो क्या आप”

शेरदिल “हमेशा से परिवार के इलावा आज सबसे जायदा बात तुम तीनो से हे की ह और इन जैसे से ऐसे हे बात करता हु बल्कि आज रहम किया ह वैसे ये शादी का क्या मामला ह”

डिम्पी ने शार्ट मई साडी बात बता डीई…

शेरदिल मन मई “तोह इन्हे नहीं पता ह की राज सहदेव मां और विद्या ममी का लड़का ह”

सिम्मी “जिंदगी आगे नरक ह मेरी पर काम से काम बाकि ये सब तोह खुस रहेंगी ये सोच कर हे खुस हु मैं और जब बर्दास्त नहीं होगा तब मर जाउंगी ज़हर खाकर”

सिम्मी की बात सून डिम्पी और नित्ति भी भावुक हो गयी सिम्मी दोनों से दो साल बड़ी थी पर तीनो बहाने से जायदा दोस्तों की तरह रही थी…

शेरदिल. “नॉट बाद आईडिया तोह ाचा ह तुम्हारा पर क्या ह की तुम्हारी किस्मत मई कुछ और लिखा ह…..”

सिम्मी “मतलब”

शेरदिल “वक़्त बता dega…acha बाते हे करोगी बहुत भूक लगी ह …देखा नहीं अभी कितना समझाना पड़ा था मुझे बहुत थक गया हु मैं”

शेरदिल की बात सून तीनो का भी मूड तीख हो गया और वो भी मुस्कराने lagi…par इस बात से बेखबर की कल उनके घर क्या होने वाला था….

नेक्स्ट डे मॉर्निंग …

उमेद सिंह “अरे आज सरे कान्हा चले गए”

अंदर से बहार गजेंद्र सिंह की वाइफ और उनकी बहन अति हुवी “बाबूजी वोडोनो बहार गए ह गाँव और खेत घूमने और तीनो महारानियाँ सो रही ह अभी भी मैं लाती हु आपकी छाए”

उमेद सिंह “नहीं रहने दो गाँव मई राजुए के यंहा काम ह वंही पी लूंगा” इतना कह वो भी गाँव मई चले गए…

वंही गाँव की तरफ करो का पूरा काफिला एक साथ ारः था जिसमे बलराम का बड़ा भाई बैठा हुवा था जो शादी का कार्ड लेकर ारः था…

तोह वंही ऋचा राज के पास बैठी हुवी उसे बाते कर रही थी… “पता ह राज …जब मुझे अहसास हुवा की मैं स्कूल मई क्या खो चुकी हु …मेरी उम्मीद हे टूट चुकी thi…phir मुझे पता लगा की मेरी और तुम्हारी शादी तोह बचपन मई हे फिक्स हो चुकी thi…tab मुझे लगा की भगवन छठा ह की तुम और मैं एक हो …और मैंने सोच लिया की तुम्हे अपनी अंतिम सांस तक अपने प्यार से manaungi…jabki पता ह की तुम मुझे कभी अपनाओगे nahi……par फिर भी मेरी मांग मई सिन्दूर तुम्हारे नाम का हे lagega…main सुहागन तुम्हारे नाम की हे रहूंगी…”

ऋचा रोज ऐसे हे घंटो राज से अपनी खुदकी साडी बाते अकेले करती रहती thi….aur अभी भी वो अपना स्विट्ज़रलैंड के सफर के बारे मई बता रही थी की उसका मोबाइल रिंग होने laga….usne कॉल उठाया… “hello”

सामने से मित्युदूत “इनफार्मेशन मिली ह की सिम्मी की शादी के लिए कुंदन का भाई डेट फिक्स करने ारः ह

ऋचा “ok” इतना कहकर उसने कॉल कट कर दिया और फिर राज की तरफ देख कर बोली “पता ह राज आपको अपनी बहनो से बहुत प्यार ह न …ऐसी हे तीन मासूम बहने और ह आपकी जिनका कोई भाई नहीं h….aur आज उन्हें सबसे जायदा उनके भाई की हे जरुरत ह …क्या आप नहीं जायेंगे अपनी बहनो की मदद के liye…mujhe पता ह आप मेरी साडी बाते सून सकते h…agar सिम्मी के साथ कुछ गलत हुवा तोह विद्या माँ जंहा भी होंगी वंहा से ये देख कर आपको माफ़ नहीं करेंगी…….” ऋचा सब एक सांस मई बोलती गयी पर उसने नोटिस नहीं किया राज की उंगलिया हिल रही thi…..richa साडी बाते बोलकर उमेद सिंह के घर की तरफ चली गयी…

वंही राज के दिमाग के अंदर ….एक दर्शिया चल रहा था जंहा एक शख्स को घेरे हुवे बहुत से लोग एक ड्रेस मई मास्क पहने हुवे खड़े थे….

शख्स “निर्वाण जब तक नहीं मरेगा जब तक तुम सब का नमो निशान नहीं मिटा देगा”

सामने से काळा कपडे पहना हुवा एक शख्स आगे आया aur….bola “अब तू बहुत कमजोर ह निर्वाण …तेरा सब कुछ हमने चीन लिया …तेरा बाप मारा गया तेरी माँ तड़प तड़प कर mari…aur तेरी माशूक़ा का तोह सोच भी नहीं सकता ह की कितना बुरा हाल हुवा और ….तेरा दोस्त तेरे परिवार को बचता हुवा मर gaya….tujhse जुड़े हर वफादार को हमने मार दिया और अब तू मरेगा …इतना कह उसने इशारा किया तोह एक साथ हज़ारो तीर उसपर बरस पड़े .. निर्वाण के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो अपनी हाथ मई पकड़ी सोर्ड को राउंड राउंड इतनी तेज़ी से घूमने लगा की हर तीर काट ता गया और उसे छू भी नहीं paya….tabhi राज जो लेता हुवा था उसे झटका लगा …और अब उसे दिखाई दिया की वो शख्स 10 साल का ह और एक औरत की गोद मई लेता हुवा …

शख्स “माँ मैं ऐसे नहीं रह सकता हु आपकी गोद मई”

औरत “बेटे निर्वाण आप अभी छोटे ह आपको नहीं पता ह की आप पर कितनी बड़ी जिमेदारी ह…”

शख्स “माँ मुझे सिर्फ आपका बीटा बनना ह अब तुम सो जाओ”

…तभी राज की यादाश मई अलग सन सन आया…

जंहा वो शख्स घुटनो के बल रो रहा था .उसके सामने हज़रो घर जल रहे the….aur उस आग मई से उसकी माँ जलती हुवी भगति हुवी आरही thi…wo शख्स उठकर माँ की तरफ bhaga…par पास पहुंचने से पहले हे उसकी माँ जलकर हवा मई गायब हो gayiii…….raj की आँखों से आंसू निकलने लगे….

वंही करो का काफिला गाँव के बिच से होता हुवा उमेद सिंह के भवन के आगे आकर rooka….jismai से 40 के आस पास लोग हाथ मई थालिया और गिफ्ट्स लेकर उतरे और सबसे आखिर मई उतरा कुंडों का बड़ा भाई भवानी सिंह……

भवानी सिंह ने हाथ का इशारा किया तोह सरे गिफ्ट्स और थालिया लेकर सब अंदर आगये….

भवानी सिंह “ठाकुर उमेद सिंह कहा ह बहार औ”

आवाज सून कर नौकर आकर “जी ठाकुर साब बहार गाँव मई गए ह”

भवानी सिंह “जाओ उसे बुला कर लाओ जल्दीबोलो भवानी सिंह ए ह”

नौकर ने पीछे मुड़कर देखा जंहा गजेंद्र की वाइफ और उसकी बहन अंदर से झांक रही थी…

भवानी सिंह दोनों को कुटिल मुस्कान के साथ देखकर “अरे तुम तोह गजेंद्र की बीवी हो बहुत सुना ह तुम्हारे बारे मई यंहा औ जरा … अरे घबराओ मत यंहा औ”

गजेंद्र की वाइफ घबराने lagi…aur उसने अपनी बहन का हाथ कसकर पकड़ लिया…

भवानी सिंह “है है है घबरा और शर्मा दोनों रही ह ये तोह …अब तुम नहीं होगी तोह हमे आना पड़ेगा…”

ये सुनते हे वो और घबराने लगी …तोह पीछे से आवाज आयी … “कहते ह बुढ़ापे मई तोह अचे अचे सुधर जाते ह पर यंहा तोह बुढ़ापे मई जवानी चढ़ रही ह”

सभी के बिच से ऋचा बोलते हुवे आगे आयी …. भवानी सिंह ने पीछे मुड़कर ऋचा को देखा और बोलै “लगता ह बहुत गर्मी ह तुझमे”

ऋचा “मेरी गर्मी भुजने वाला तोह ह मेरे पास पर लगता ह तुम्हारे पास नहीं ह इसलिए तोह बेतिया भी तुझे हवस का सामान नज़र आने लगी ह”

भवानी सिंह “लड़की जबान को लगाम दे नहीं तोह और पता नहीं तू जरूर इन सबका सामान बन जाएगी और ये तुझे नोच नोचकर तेरा क्या हाल करेंगे तू सोच भी नहीं सकती ह”

ऋचा “बस यही तोह अत ह …बातो से न जित पाओ तोह हाथ चलाओ …इसलिए तेरी बीवी तुझे पास तक नहीं आने देती होगी”

भवानी सिंह गुसाई से भर उठा तभी उसके काँमे उसके आदमी ने कुछ कहा जिसे सून कर उसने ऋचा को dekha…aur बोलै “ चल ाचा ह आज कार्ड देने ए ह दहेज़ मई तुझे लेकर जायेंगे”

अब सिम्मी डिम्पी और नित्ति भी ऋचा के पास आकर ऋचा को पकड़कर कड़ी हो गयी…

ऋचा “दहेज़ …मई मुझे ….है है है है है” ऋचा खिल खिलाकर जोर से हंस पड़ी और बोली … “मुझे ले जाने के लिए तेरे ये बाराती काम ह ठाकुर ….”

सबके बिच से सबको धक्का देते हुवे शेरदिल और गजेंद्र अंदर भागते हुवे आगये …

शेरदिल “क्या हुवा भाभी”

ऋचा “कुछ नहीं बुढ़ापे मई दिमाग सटक गया ह बोल रहा कार्ड देने ए ह और दहेज़ के मई मुझे लेकर जायेंगे आज”

शेरदिल गुसाई से “हाथ लगाकर दिखा जिसमे दम ह खुदा कसम इन हाथ से चीयर कर फाड़ दूंगा”

भवानी सिंह “ऐसा ह हम थोड़े आदमी दूसरे किसम के ह हम बहुदारी से जायदा दिमाग और चाल कपट का प्रयोग करते ह और तुम जैसे लोगो को तोह हम पल मई तोड़ देते ह बताये कैसे ऐसे” इतना कह उसने गन निकली और ऋचा की तरफ करदी …ये देख शेरदिल तुरंत ऋचा के आगे आगया

भवानी सींग “बाबू और भी ह पास मई” ये कह गन पॉइंट सिम्मी डिम्पी और नित्ति की तरफ कर दिया…

शेरदिल और गजेंद्र गुसाई से देखने लगे ..

भवानी सिंह “चलो पहलवान घुटनो पर औ …वर्ण हम टिकट काटना सुरु कर देंगे”

गजेंद्र “भवानी सिंह तुम ये गलत कर रहे हो”

भवानी सिंह “हम तोह टाइम पास कर रहे थे हमारे इन बचे लोगो का तुम्हारी ये झाँसी की रानी पता नहीं कान्हा से आगयी …प्रधान बन कर ….अब सजा तोह मिलेगी …चल पहलवान दुबारा नहीं बोलूंगा समझा …आज तोह डॉ मेरे साथ जाएगी और मैं डॉ डॉ खेलूंगा”

ऋचा शेरदिल के आगे से आगे आगयी…

शेरदिल “नहीं भाभी बिलकुल भी नहीं”

ऋचा “कुछ नहीं होगा अभी इन्हे सेफ रखना जरुरी ह”

गजेंद्र “ठाकुर उसे छोड़ दे वर्ण भले हे मैं मर जाऊ तू भी मरेगा”

भवानी सिंह “धमकी ले वो भी मुझे” इतना कह उसने फायर कर दिया और गोली सीधी गजेंद्र के कंधे मई लगी…

सिम्मी डिम्पी और नित्ति …सब एक साथ गजेंद्र की तरफ छीकते हुवे भागी…

भवानी सिंह “कार्ड देकर ……” फिर जोर से “अगले मैश की 1 तरीके को बारात आएगी बोल देना ठाकुर से तयारी रखे वर्ण सब औरतो को उठा ले जायेंगे और डॉ तू चलेगी या और पटाखे फोड़ू …”

ऋचा “तू सोच भी नहीं पायेगा तेरे साथ क्या होगा” इतना कह वो भवानी की तरफ बढ़ गयी…

सिम्मी नित्ति डिम्पी “मत जाओ भाभी”

गजेंद्र “रूक जाओ बेटी ये रक्षास ह”

ऋचा “इतिहास गवा ह रामायण मई राम जी ने धरम की रक्षा करि तोह महाभारत मई श्री कृष्ण ने …और आज के युग मई भी ह वो जो स्त्री के मान सामान की रक्षा करता ह”

भवानी सिंह “सून रहे हो बे तुम लोग डॉ साहिबा का ज्ञान डॉ तोह बहुत पातर पातर करती ह”

भवानी सिंह जैसे हे हाथ पकड़ने के लिए हाथ भदया तोह …उसके पास से उसके दो आदमी उड़ते हुवे आगे गए ….और आवाज आयी… “बूढ़े कान्हा ह तू”

भवानी सिंह ने पीछे मुड़कर देखा तोह राज सबके बिच से आगे ारः था सबको देखते हुवे और शेरदिल को देखते हे “तू yanha…kanha ह वो बूढ़ा …आज शादी ह वो आया क्यों नहीं”

शेरदिल “आज किसी की शादी नहीं ह निडर …मतलब देरपु”

निर्वाण “दीपू अब ये कौन ह और शादी नहीं ह तोह फिर नींद मई कौन मदद के लिए बोल रहा था” तभी उसकी नज़र ऋचा पर गयी जो उसके साइड मई कड़ी thi…aur बोलै “फिर से तू …” पर उसे आगे बोलै नहीं और क्योकि ऋचा की आँखों मई आंसू थे जो राज को अपने सामने देख कर आगये the…phir भवानी सिंह की तरफ देखकर “तू कौन ह”

गजेंद्र “वो कुंदन के बड़े भाई भवानी ठाकुर ह”

निर्वाण “तू उस बूढ़े कुंदन का भाई”

भवानी सिंह ने तुरंत गन उसकी तरफ करदी …

ये देख निर्वाण के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और भवानी के फायर करने से पहले हे उसके पास पहुंच कर गन चीन ली

शेरदिल मन मई “ये इतना फ़ास्ट कैसे हो गया ह”

निर्वाण ने भवानी को गले से पकड़कर ऊपर उठालिया …उसके आदमी उसे छुड़ाने ए तोह शेरदिल तेज़ी से आगे की तरफ भगा और दोनों हाथो से कई को धक्का देते हुवे दोनों को पीछे की तरफ उछाल दिया….

निर्वाण ने भवानी को गर्दन से छोड़ा और एक पंच उड़के कंधे पर मारा और हडियो के चटकने की आवाज आयी …वो गिरने लगा …तोह निर्वाण ने उसे पकड़ लिया और दुबारा सीधा कर दूसरे कंधे पर पंच मारा …

“ये तोह तुझे होगा दर्द अब तू चाहे टेबलेट ले या कुछ काम नहीं होगा परररर मज़ा नहीं आया …इतना कह उसके निचे की गोलिया लपकड ली और ताकत से मसल दी …

“अब तीख ह अब तू जब भी हिलेगा और मुटेगा तुझे याद आएगी मेरी” फिर पलट कर शेरदिल को देख कर “क्या बताया था”

शेरदिल मन मई “यार ये फिर सुरु हो गया अब अगर बात नहीं मणि तोह मुज पर गरम हो जायेगा और फिर दी एक के रिब्स पे प्रेशर से किक और दूसरे की गर्दन के बिच mai…mara पंच

निर्वाण “गुड कंटिन्यू” और पलट कर सिम्मी नित्ति और डिम्पी की तरफ देखकर तुम मई से कोई मेरे लिए कॉफ़ी लेकर औ


नित्ति “मैं लाती हु भैया”

निर्वाण ने एक आंख ऊपर उठाकर नित्ति को देखा और फिर वापस शेरदिल की तरफ देख कर “एक भी ऐसा नहीं बचना चाहिए ह जिसकी हड़िया इस धरती का डॉ जोड़ पाए”

शेरदिल पलटकर “धरती का डॉ न जोड़ पाए क्या कहना चाहते हो आप …”

निर्वाण “हर बात तुम सब को करके हे दिखानी पड़ती ह” फिर खड़ा होकर पास गया शेरदिल पर पीछे से हमला करने आरहे दो मई से एक को पकड़ा और दूसरे की बैक मई घुटने की मरी …और पकडे हुवे आदमी को दिखते हुवे बोलै

“ये एल्बो जॉइंट ह अगर टूट जाये तोह जुड़ जायेगा अगर ट्विस्ट करके राउंड घुमा दो तोह इस जॉइंट मई जिंदगी भर पैन रहेगा और ये कभी पर्फेक्ट्ली वर्क नहीं करेगा ऐसे …” ये कहकर पकडे हुवे की दोनों हाथो की एल्बो को साइकिल के पैदल की तरह राउंड घुमा दिया और वो शख्स दर्द मई बुरी तरह चीकने laga…phir तेज़ी से घूमकर दूसरे आदमी को पकड़कर “ये इधर ये गर्दन की नस इधर धयान से देख ये वाली नहीं ये वाली अगर ये न दिखे तोह जोर से चांटा मरना दिखने लगेगी इसे पकड़कर खिँचङो ऐसे अब ये अगले 6 महीने तक बुरी तरह दर्द मई गर्दन कैसे भी हिलायेगा इसे मेरी याद आएगी और ये दर्द मई तड़फड़ायेगा समझे”

इधर उनमे से एक आदमी ने कार मई बैठे बैठे बलराम को चुपके से कॉल लगा कर साडी घटना सुना डीई…

निर्वाण “40 के आस पास ह तोड़ दाल और याद रखना मुझे खून खराबा पसंद नहीं h…kyoki खून देख कर मेरे अंदर का हैवान जग जाता ह और फिर उसी बहुत खून चाहिए होता ह”

शेरदिल मन मई “साला ये तौरतूरे तीख ह खून खराबा पसंद नहीं खुद ने निर्वाण बन कर क्या क्या काण्ड किये ह सब भूल gaye….upar आज कल इसकी बाते समाज नहीं अति ह रक बार मई”

निर्वाण की नज़र सिम्मी पर गयी तोह बोलै“ इन सब मई से तुम सबसे जायदा उदास क्यों हो क्या नाम क्या ह तुम्हारा”

ऋचा पास आकर “उसका नाम सिम्मी ह”

ऋचा के बोलते हे निर्वाण भड़क गया और आँखों मई अंगारे लिए पास आकर उसकी आँखों मई घूरता हुवा बोलै “लड़की मुझसे दूर रहा कर वर्ण वो भी तुझे बचा नहीं पायेगा”

इतने मई नित्ति कॉफ़ी लेकर “भैया आपकी स्ट्रांग कॉफ़ी”

निर्वाण “है तुम सिम्मी तुम सबसे जयदा दुखी क्यों हो”

सिम्मी रोने लगी पर निर्वाण ने कुछ नहीं कहा ..

सिम्मी रट हुवे “क्योकि मेरी जबरदस्ती शादी हो रही ह…” फिर भवानी की तरफ हाथ करके “उसके भाई ह कुंदन वो हमारे परिवार से पुराणी दुस्मनी का बदला ले रहा h…aur मुझे पता ह मेरी जिंदगी को नरक बना कर वो दादाजी पापा सबको ढक देकर खुस होगा”

निर्वाण जोर जोर से हसने लगा …..

सिम्मी “क्या ये सब आपको मज़ाक लग रहा ह”

निर्वाण “नहीं मेमोरी को तीख कर रहा tha…toh वो तुम हो …”फिर भवानी की तरफ चलने लगा जो दीवार के सहर पड़ा हुवा गुसाई से सबको देख रहा था

निर्वाण ने उसके पेअर को पकड़ा और घसीट कर सिम्मी की तरफ लेकर आया ….और उसके आगे पटक दिया और बोलै “पता ह एक बार मैं एक जंगल मई tha….aur मुझे सबसे ताकतवर जानवर का सीकर करना था जो ये साबित करता की मैं कबीले के एग्जाम मई पास हो चूका हु”

सिम्मी धयान से देखने लगी निर्वाण की तरफ…

निर्वाण “और मैंने कभी जानवर का सीकर नहीं किया था … पर उस दिन या तोह मैं जिन्दा बहार अत या फिर अत हे नहीं जंगल से”

सिम्मी “फिर अपने क्या किया”

निर्वाण “मैंने सीकर किया”

सिम्मी “किसका”

निर्वाण “अपने दर का क्योकि वही तोह मुझे हरा रहा tha…jab पता था मुझे की जिन्दा एक हे बचेगा तोह. मैंने सोच लिया मैं मारा तोह मर कर मरूंगा”

सिम्मी “फिर क्या हुवा”

निर्वाण “मैंने सबसे टक्र्वार जानवर को मारा”

सिम्मी “शेर को”

निर्वाण “नहीं”

नित्ति “फिर किसी”

निर्वाण “भेडियो के झुण्ड के राजा को …जो सबसे चालक तेज़ होता ह उस रात भेडियो के पुरे झुण्ड को मारा होना दर्द भूलकर अंत तक लड़ता रहा …”

तीनो और ऋचा निर्वाण को देखती रही …

निर्वाण “तुम्हे इसलिए बताया जब ऐसी नौबत ए की मरना या मरना ह तोह पहले मारो ….या उसके साथ तब तक लड़ो जब तक कोई एक न मर जाये …” फिर गजेंद्र की तरफ देख कर “बेटी ह wo…aur जब कोई बुरी नज़र उठाये तब ऐसे” फिर गजेंद्र के घुटने को पकड़कर मरोड़ते हुवे “ऐसे दर्द देते ह” फिर दूसरी घुटने को भी तोड़ कर “अब तू बिलकुल तीख लग रहा ह ….

भवानी सिंह “तू और ये सब बचेंगे नहीं”

निर्वाण “शादी के कार्ड को पास की थाली से उठाकर ….शादी तोह 7 दिन बाद की हे h..matlb एक तारिक की …गुड वापस जा इलाज kara…teri मौत आज नहीं hogii…tumhari मौत का तमशा तोह दुनिया देखेगी …”

इतना कह वो खड़ा हुवा हे था की उमेद सिंह भीतेज़ी से अंदर आगये उनके चेहरा पूरा पसीने से भरा हुवा था….

शामके वक़्त …

शेरदिल उल्टा लटका हुवा था और उसकी हालत बुरी हो राखी थी….

निर्वाण “उल्टा लटकने से ब्लड सर्कुलेशन सही रहता ह और साथ हे लेग स्ट्रांग होंगे तुम्हारे”

शेरदिल “मैं मरने वाला हु”

निर्वाण “जब आँखों से खून निकलना सुरु होगा तब मरेगा अब पुशअप्स लगते रह 50 हे हुवी ह 100 करनी ह”

कुछ दिएर baad…mobile मई रिंग हुवी…

शेरदिल “कॉल तोह पिक कर लो”

निर्वाण ने कॉल उठायी…

सामने से “शेरदिल गाँव मई तुमने जो किया ह …वो सब बलराम को पता लग गया ह …और उन्हें ये भी पता लग गया ह की ऋचा बेटी यंहा h….usne गाज़ीपुर और मिर्ज़ापुर से जितने आदमी बुलाये थे वो सब अब गाँव की तरफ आएंगे कितने दिएर मई ये पता नहीं ह abhi…aur ये भी पता चला ह की लोकल पुलिस का सपोर्ट भी उन्हें मिला हुवा ह….

निर्वाण “तीख ह सून लिया maine”itna कह कॉल कट कर दिया तोह मित्युदूत खुद से “क्या ये मास्टर की आवाज थी क्या वो जग गए ह”

निर्वाण “चलो”

शेरदिल “कान्हा”

निर्वाण “इस धरती पर लोग बातो से नहीं मानते ह और वो जो ब्लैक कलर की बड़ी सी डबल फेस कुल्हाड़ी ह वो ले लेना”

तू बे continued…..part तवो इन मॉर्निंग बिफोर 9 ऍम उसकी एडिटिंग बाकी ह..
 




बहुत बड़ा अपडेट ह 3क के लगभग सुभे एडिट करके पोस्ट karunga...ab एडिटिंग करने की हीमत नहीं बची ह...
 
अपडेट 229 युद्ध part तवो "कुल्हाड़ा" कुछ दिएर मई एडिटिंग सुरु होगी
 
अपडेट 229

युद्ध part 2 “कुल्हाड़ा”

शेरदिल तुरंत सीधा होकर निचे उतर गया …. और निर्वाण के साथ बहार जाने लगा..

निर्वाण ने शेरदिल को इशारा किया…

शेरदिल “भाभी आप भी साथ चलिए”

ऋचा ने निर्वाण को घूरकर देखा पर अपनी जगह से हिली नहीं

शेरदिल “प्लीज भाभी”

फिर भी ऋचा नहीं हिली तोह निर्वाण आगे बढ़ा और उसके सामने खड़ा हो गया पर ऋचा बिना डरे उसके सामने उसे देखती हुवी कड़ी रही…

निर्वाण इर्रिटेट हुवे “आईटीआई सी ह तू” फिर गर्दन साइड मई घुमाई और शेरदिल की तरफ देखा

शेरदिल ने गर्दन इस तरह हिलायी जैसे बोल रहा हो मैं क्या कर सकता हु….

निर्वाण ने अपने माथे पर हाथ फेरा और फिर ऋचा को उठाकर अपने कंधे पर दाल लिया…

ऋचा “चुम्म्म”

पर निर्वाण कुछ नहीं बोलै और शेरदिल के साथ उमेद सिंह के घर की तरफ चल दिया

रात को ऋचा को अपने कंधे पर डाले …उमेद सिंह और बाकि सब जो अभी भी आज जो हुवा उसके बारे मई हॉल मई बैठे बाते कर रहे थे खड़े होकर राज की तरफ देखने लगे और सबने सोचा दोनों के बिच जगदा हो गया ह सायद…. निर्वाण ने सबको अपनी तरफ घूरते हुवे देखा तोह ऋचा को एक तरफ रखे सोफे पर धीरे से पटक दिया ….

उमेद सिंह “ क्या बात ह दीपू बीटा जगदा हो गया ह ऋचा बेटी से”

निर्वाण “वो सुभे जिसे गोली लगी थी वो कान्हा ह”

उमेद सिंह “अपने रूम मई“

निर्वाण “सिम्मी से तुम मुझे उसके पास ले चलो”

सिम्मी ने है मई गर्दन हिलायी और निर्वाण को गजेंद्र के रूम मई ले गयी…

निर्वाण ने गजेंद्र को देखा और bola…hathiyaar ह ..

गजेंद्र सोच मई पद गए ..

निर्वाण “क्या मैंने दूसरे गृह की भासा मई कहा h…..jo समाज नहीं आया क्या हथियार ह”

गजेंद्र “तलवार और दोनाली और कुल्हाड़ी बरछी यही सब ह”

निर्वाण “दोनाली चला कौन कौन सकता ह”

गजेंद्र “पापा और मैं और नौकर हमारा“

निर्वाण “तीख h”itna कह गहेन्द्र के जिस साइड गोली लगी थी वंहा दो तीन जगह दबाया और बोलै “अब आपको दर्द काम होगा और दो पैन किलर पानी मई घोल कर कर तैयार हो जाईये जो भी हमारे इलावा घर के पास दिखे बिना झिझके यंहा माथे पर शूट कार्डो..”

उमेद “हुवा क्या ह”

सिम्मी जो निर्वाण की बात सुभे सून कर बड़ा फैसला कर चुकी थी वो बोली “मुझे भी चलनी अति ह जो आएगा सबसे पहली गोली मैं हे चलूंगी मैं अभी सरे हथियार ले आती हु मुझे पता ह कान्हा रखे हुवे ह”

निर्वाण बाकि औरतो से “और तुम सब हर खिड़की हर गेट के आगे भरी चीजे रख दो ..और पानी की बाल्टियां सबकुछ भर लो ताकि आग लगे तोह भुजा सको”

उमेद सिंह “हो जायेगा घर की चार दीवारी हम तीनो संभल lenge”phir नौकर से जाओ सिम्मी के साथ और साडी बंदूके और हथियार छठ से लेकर हर जगह लगा दो”

नौकर “जी” बोलकर” सिम्मी के साथ चला गया

निर्वाण पलट कर ऋचा से “वो तुम्हारे लिए आरहे ह”

ऋचा के चेहरे पर मुस्कान आगयी क्योकि उसे पता लग गया की निर्वाण जो चाहता ह वो उसे मिला नहीं ह अभी तक यानि फुल कंट्रोल…

तभी वंहा मित्युदूत agaya…aur अपने सामने लम्बे चोदे आदमी को देख कर सब चौंक गए और अगले हे पल जो हुवा उसे देख वो सब फिर हैरान हो gaye…kyoki मित्युदूत घुटनो पर बैठ गया और मास्टर बोल उठा…..

नित्ति “मास्टर”

सिम्मी “मास्टर”

डिम्पी “मास्टर”

उमेद सिंह “ऋचा की तरफ सवालिया आँखों से देखने लगे”

मित्युदूत “मास्टर”

निर्वाण गुसाई से उसे देखने लगा

मित्युदूत “मास्टर वेपन जो अपने कहे थे इतना कह उसने बैग आगे रख दिया..

निर्वाण ने बैग खोलकर देखा तोह उसके चेहरे पर मुस्कराहट आगयी….

वंही बलराम अपने आदमियों से “याद रहे कोई सबूत नहीं सब फेस कवर करलो और हाथ मई ग्लप्स पहन कर जाना मुझे वो डॉ चाहिए ह ये ह उसकी photo…thakur के घर न मिले तोह पूरा गाँव छान मरना और है उसके साथ एक आदमी और होगा उसकी गर्दन काट कर साथ लेन वाली गैंग को 20 लाख नगद इनाम मिलेगा जाओ और दुबारा याद दिलाडु उस कुटिया डॉ को कुछ मत करना वी जिन्दा चाहिए ह….”

सब ने एक साथ जोर से हां कहा और अलग अलग गाड़ियों से निकल पड़े ….ऐसा लग रहा था जैसे किसी नेता की रैली निकल रही हो …

वंही कानपुर कमिश्नर ऑफिस ..

कमिश्नर “बलराम जी मैं बैठा हु न आप कीजिये अपना काम बस सबूत मत छोड़ना आप तोह जानते हे इनदिनों क्या हालत ह” कमिश्नर ने ये कहकर कॉल कट हे किया था की सामने से कमिश्नर की वर्दी पहने हुवे एक आदमी एंटर हुवा और बोलै “जितना संभालना था संभल लिया अपने अब आत्म चिंतन के दिन ह apke…officers अरेस्ट करो इन्हे”

कमिश्नर “मैं कमिश्नर हु”

सामने से “थे आप ये रहा आपका सस्पेंशन लेटर और ये अरेस्ट लत्तेर ओका बाकि आप अपने लिए वकील को बुला सकते ह ले जाओ इन्हे और है याद रखना सिर्फ एक हे कॉल कर सकते हो आप देखना तीख जगह करो वर्ण बाद मई मौका नहीं मिलेगा तुम्हे पहले भी कॉल पर वार्निंग मिली थी न”

कमिश्नर के जाते हे नए ए कमिश्नर ने अपने पास खड़े ैप से कहा …सभी मॉर्निंग 7ऍम मीटिंग रूम मई चाहिए ह

ैप “यस सर”

ैप के जाते हे सभी ैप के ऑफिस लैंड लाइन और मोबाइल्स मई रिंग बजने लगनी रात को हे पुलिस महकमा जैसे जग सा गया…

कमिश्नर ने कुछ दिएर बाद चीफ को कॉल मिलाया

दिल्ली चीफ “पहुंच गए हो”

कमिश्नर “सर अपने हे पहुंचाया ह यंहा तक”

चीफ “तुम्हारी ईमानदारी ने पहुंचाया ह तुम्हे इस पोस्ट tak…ab सुनो वंहा विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल की ओनर दिव्या निर्वाण और ऋचा गोस्वामी ह उनको कुछ नहीं होना चाहिए ह पॉलिटिकली प्रेशर बिल्ड हो चूका ह जल्दी हे जनता सड़क पर आजायेगी हाई अलर्ट पर रख दो पुलिस को और तुम्हारे जो भरोसे के इंस्पेक्टर या ैप ह उसे अभी हे हॉस्पिटल भेज कर दिव्या से मिलने को कहो ….नहीं रूको मेरे पास डिटेल आगयी ह दिव्या हॉस्पिटल हे मिलेगी तोह तुम खुद मिल लेना पर एक टीम ऋचा की सेफ्टी के लिए भेज दो चाहे अभी या जल्दी मॉर्निंग मई …और वो लड़की याद रखना विजय कोई आम लड़की नहीं ह वो जिसकी बहन और जिस परिवार की होने वाली बहु ह वो बहुत पॉवरफुल और खतरनाक ह …इसलिए कोई लापरवाही नहीं उन्होंने पुलिस डिपार्टमेंट की हमेशा मदद की ह…. उस लड़की को खरोच भी आयी तोह कितना खून खराबा होगा तुम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हो”

कमिश्नर “मैं समाज गया सर मैं अपने खास अफसर को भेजू गए”

इतना कह कॉल कट हो gaya…aur उसने ैप को वापस बुलाया ….

कमिश्नर “क्सक्सक्स गाँव मई कोई उमेद सिंह ठाकुर ह”

ैप “सर उन्हें कौन नहीं जनता ह कभी सबसे पॉवरफुल हुवा करते थे पर ठाकुर कुंदन सिंह ने उन्हें सबसे कमजोर कर दिया ह”

कमिश्नर “ाचा उनके यंहा ऋचा गोस्वामी नाम की लड़की रहती ह उसकी सेफ्टी का खास धयान रखना ह …खास तुम्हारे ट्रस्ट वाली टीम को लो और सुभे हे वंहा फ़ैल जाओ कुछ भी गड़बड़ दिखे या लड़की को खतरा हो तोह शूट कार्डो बाकि मैं संभल लूंगा ….और एक बार पहले मिल कर कांटेक्ट नंबर दे देना”

ैप “यस सर”

कमिश्नर “कोई चूक नहीं विजय ये समाज लो डायरेक्ट upàr से आर्डर ह अब तुम जा सकता हो टाइम काम ह तुम्हारे पास”

विजय “मैं मैनेज कर लूंगा सब”

कमिश्नर इस बात से बेखबर था की जलजला तोह आज रात हे ऋचा के पास पहुंचने वाला था ….

इधर निर्वाण ….भवन से 100 मीटर आगे रोड के बीचो बिच बैठा इंतज़ार कर रहा tha….toh शेरदिल और मित्युदूत दोनों दूसरे रास्तो मई इंतज़ार कर रहे the….wanhi छठ के ऊपर सिम्मी गजेंद्र और नौकर हाथ मई दोनाली लेकर तैयार थे तोह घर के चौक मई उमेद सिंह खुद गन लिए बैठे हुवे the….gaanv मई बिलकुल सन्नाटा पसरा हुवा था जैसे तूफ़ान के आने से पहले की शांति

और उन सबका इंतज़ार ख़तम हुवा 3 बजे जब एक के बाद एक गाड़िया गाँव के बहार आकर रुकी…

सिम्मी गाँव के बहार खूब साडी गाड़ियों की लाइट देख कर “वो आगये ह”

निचे सबने आवाज सुनी तोह ..

ऋचा के चेहरे पर बेचैनी और घबराहट दिखने लगी ….उसे ऐसा देख नित्ति और डिम्पी ने दोनों तरफ से उसे गले लगा लिया और सुम्मी की माँ बोली “ तू दर मत भगवन सब ाचा करेगा हमारी वजह से तू भी फंस गयी बेटी… मैंने बाबूजी को कहा था की ऋचा बेटी को इन सबसे दूर रखो”

ऋचा “दोनों पैरो को हिलाते और उंगलियों मोड़ते हुवे बोली “मुझे दर मेरा नहीं ह और न हमारा ह मामी …और न हे दर दीपू के लिए ….”

उसकी बात सून चारो उसे देखने लगी…

ऋचा “मुझे दर ह उन सब के liye….kyoki उन्हें पता नहीं की वो किस साई लड़ने आरहे ह ….अगर उन्हें पता होता ह उनके सामने खड़ा शख्स कौन ह तोह वो नाम सुनकर हे उलटे पाँव भाग जाते या नाम सुनकर हे खोफ्फ़ से मर जाते ….अब यंहा इतना खून बहेगा की कई सालो तक तोह इस धरती को प्यास नहीं lagegi…”richa की बात सून सब चौंक gayi….toh बहार मू पर कपडा bandhe….muu को ढके हुवे हाथ मई तलवार सरिये चुरा रोड लिए हुवे आदमी सीधे उमेद सिंह के घर की तरफ हे आरहे थे पुरे गाँव मई कुछ हे घर की लाइट जल रही थी sirf……wo लोग आपस मई इशारा करते हुवे आगे ए हे थे की उनकी नज़र सामने रोड के बिच मई बैठे निर्वाण की पर padi….aur उनमे से कुछ ने आपस मई बात करि और कुछ लोग दूसरी तरफ से घर की तरफ जाने लगे तोह बाकी दूसरी तरफ से जाने lage…Nirwana ने एक नज़र सबको देखा और खड़ा हो gaya….aur अपनी चेयर के पीछे से निकला उसने ीोना हथियार जो मित्युदूत उसके कहने पर बनवा कर तैयार कर रखा था कुल्हाड़ा…. जिसका हाथ हे 4 फुट लम्बा और ब्लेड्स दोनों तरफ आधी आधी फुट बहार निकली हुवी thi….wo उसे घसीट ते हुवे उनकी तरफ बढ़ा और बोलै “आत्मा अजर ह अमर ह सरीर का क्या ह ये तोह मिटटी का पुतला ह मीठी मई मिल जायेगा”

सामने जो गुंडे खड़े थे वो मिर्ज़ापुर की दो गैंग से थे ….और जो बाकि दोनों तरफ गए थे वो गाज़ीपुर दो गैंग से थे….

मिर्ज़ापुर गैंग से ek“Tum साला पंडित हो क्या बे जो ज्ञान पेल रहे हो”

उसने इतना बोलै हे था की वो कुल्हाड़ा उड़ते हुवे आकर उसके सीने मई लगा और भरी होने की वजह से वो उड़ता हुवा पीछे वाले कई आदमियों को भी लेकर गिरा…. सब एक पल के लिए कई कदम पीछे खिसक गए ….निर्वाण ने अगसी बढ़ अपना कुल्हाड़ा उसके सीने से निकला… तोह गैंग का लीडर “बहनचोद को मारा रे इसी की गर्दन लानी लानी ह हमे”

पर आज उन्हें नहीं पता था वो किस के हाथे चढ़ गए h…nirwana ने एकबार फिर पूरी ताकत से कुल्हाड़ा घुमाया तोह चार गर्दन झटके से हवा मई कट कर हवा मई उड़ gayiii…….sabne तुरंत उसे घेर लिया और कई ने एक साथ हाथ मई पकडे चाकू फेंक कर वार kiya….jismai से एक निर्वाण को लगा पर निर्वाण ने देखा तक नहीं और निचे झुक कर फिर कुल्हाड़ा घुमाया तोह एक दो तीन चार पांच जानो के पेअर काट कर निचे गिरे और शांत वातावरण मई चीक पुकार मच gayiii….fir निर्वाण ने घूमकर आगे सामने खड़े वाले के पेट मई मरी तोह वो भीड़ के धकेलता हुवा पीछे गिरा और गिरते हे सिधार नरक पहुंच gaya….Nirwana रूका नहीं और एक जम्प के साथ गोल घूमते हुवे कुल्हाड़ा इतनी तेज़ी से घुमाया की किसीको कुछ समाज नहीं आया क्या करे और किसी का हाथ कोई दो भागो मई तोह किसी की गर्दन जमीं पर आकर giri…sab दर से गए…

निर्वाण “नरक मई हे तुम्हारा वास होगा”

तोह दूसरी तरफ घर के पीछे शेरदिल और मित्युदूत ने भी फाइट सुरु कर di…aur उनसे एक जाना बच कर घर की तरफ आया तोह सिम्मी ने छठ से दोनाली उस पर फायर कर दी….

Simmi“Pahli गोली बोलै था मैं हे चलाऊंगी”

गजेंद्र अपनी बेटी को देखता रह गया…

निचे गन की और चीखो की आवाज सुनकर ऋचा “मौत का तांडव सुरु हो चूका ह वो किसी को नहीं छोड़ेगा”

डिम्पी “कौन नहीं छोड़ेगा भाभी आप बोलती क्यों नहीं हो”

ऋचा नीची गर्दन किये हुवे “मैं चाहती थी की ये कुछ महीने शांति से निकल जाये फिर सब तीख हो जायेगा पर अब”

नित्ति “पर अब क्या भाभी साफ़ साफ़ बोलती क्यों नहीं हो”

ऋचा “वो जीत गया ….मैंने देखा था उसकी आँखों मई”

डिम्पी “कौन जीत गया”

ऋचा गुसाई से “निर्वाण निर्वाण निर्वाण जीग गया और मेरा दीपू गया”

बहार …निर्वाण क्रूर मुस्कान के “ डरो मत ये लो फेंक दिया अब ाजाओ” कुल्हाड़े को दूर देख अब जैसी हे दो गुंडे एक साथ ए तोह निर्वाण ने उन मई से एक की रोड के वार को रोका और उसके हाथ मई पकड़ी रोड को चीन लियाऔर मुस्कुराता हुवे उसकी आँखों के आर पासर कर दिया तोह दूसरे की रिब्स पर एक किक मरी ….और वो टेड़ा उड़ता हुवा साइड मई गिरा….

गैंग का लीडर “ तू तोह हैवान ह साला सबको काट दिया …..”

निर्वाण “सबको नहीं” इतना कह वो इतनी तेज़ी से मूव हुवा और अपने आगे खड़े गुंडे की गर्दन झटके मई मरोड़ दी और उलटी घुमा di…phir राउंड घूमकर एक किक दूसरे को मरी उसकी गर्दन भी टूट कर साइड मई झूल गयी….

लीडर ने जल्दी से गन निकली जिसे वो इतनी मार काट देख साथ लाया ह भूल हे गया था और जल्दी से निर्वाण पर फायर कर दी…

निर्वाण ने साइड मई खड़े आदमी को अपने आगे ले लिया और मुस्कुराकर बोलै … “मौत सुकून ह …सांसारिक परेशानिया से मुक्ति का रास्ता ह तू क्यों लोभ करता ह”

और उस आदमी को लीडर के ऊपर हे फेंक दिया लीडर साइड होकर खुद को बचा लिया और दुबारा से फायर करने के लिए सामने देखा हे था की एक घुटना उसके पेट मई लगा और वो 10 फीत्से जायदा दूर जाकर गिरा “कमजोर सरीर लगता ह अब मुझे खुद काढ़ा बनाना पड़ेगा अपने लिए ” फिर बाकि सबकी तरफ मुदा और कोई समझता उसे पहले हे भीड़ मई घूस गया… और किसी की गर्दन टूटी तोह किसी का घुटना तोह किसी का कन्धा निर्वाण का एक एक वॉर किसी हथोड़े की तरह सब पर पढ़ रहा था फिर निर्वाण अपने कुल्हाड़े के पास आया और उसे उठा लिया… “मित्यु हे दर्द से मुक्ति ह” उसकी बात सून जिनका जो भाग सकते थे वो अपनी जान बचाकर वापस भाग खड़े हुवे और जो नहीं भाग पाए वो खूफ से कुछ तोह हार्ट अटैक से हे मर

इधर मित्युदूत ने अपनी तलवार निकलरखि थी और बेदर्दी से मार रहा था तोह ऊपर से बाउंड्री के पास जो भी अत उसे गजेंद्र और नौकर और सिम्मी मार गिरते …और जो अंदर घूस जाता उसकी खोपड़ी उमेद सिंह फाड़ देते …

पीछे भवन के शेरदिल ने अभी तक हथियार नहीं उठाया और हाथ से चीरफाड़ तोड़ मरोड़ रहा था ..पर फिर भी काफी गुंडे मित्युदूत और शेरदिल से बचकर बॉउंड्री मई घूस गए और कुछ ने उमेद सिंह को घेर लिया और गर्दन पर धारधार हथियार रख दिया….

इधर गोलियों की आवाजे सुनकर गाँव के लोग लोग घरो की छठ पर तोह कुछ लेथ लेकर बहार देखने के लिए आने लगे

इधर निर्वाण …. अपने चारो तरफ लाशो को देख कर “मित्यु से नया जीवन नया सरीर मिलता ह” इतना कह उसने अपना 4 फ़ीट लम्बा कुल्हाड़ा उठाया और भवन की तरफ चल दिया….

तोह भवन मई “बन्दूक निचे फेंको वर्ण इस बूढ़े को यही मार देंगे ….सिमी और गजेंद्र ने एक दूसरे को देखा और गन निचे फेंक डीई… “अब उस डॉ को बहार भेज दो बाकि हमे किसी से मतलब नहीं ह हम वापस चले जायेंगे और मैं एक बार हे बोलूंगा…” ये आवाज अंदर ऋचा ने भी सुनी…

डिम्पी “अब क्या होगा”

ऋचा “ये भी मरेगा अगर इसकी आवाज उसने सुनी ह तोह वो अत हे होगा”

और उसकी बात सही भी हुवी निर्वाण उन सबके पीछे चुप चाप आकर खड़ा हो चूका tha…aur उसके चेहरे पर थी खून की प्यास

“डॉ तू बहार अति ह या मैं इस बूढ़े को मरकर पूरा घर जला दू”

निर्वाण “वो नहीं आएगी तू चाहे घर जला या खुद जल”

अभी वो सरे पीछे हे मूड थे की निर्वाण ने एक को बिच मई से एक हे झटके मई कुल्हाड़ा से चीयर दिया ये देख सबकी फटी रह गयी और कुछ तोह वापस भागने लगे …अब निर्वाण उमेद सिंह के गले पर चाकू लगा रखा था उसकी तरफ बढ़ा ….

“आगे बढ़ा तोह बूढ़ा जायेगा”

निर्वाण “अरे नहीं पीछे से वार नहीं”

गुंडे ने जल्दी से पीछे देखा और उसे समाज आया की उसे झूट बोलै गया तोह उसने चाकू चला दिया …पर ये क्या चाकू हिल भी नहीं पर रहा tha….usne आगे देखा तोह निर्वाण चाकू पकडे मुस्कुरा रहा था …उसने एक झटके मई उसे चाकू समेत उमेद सिंह के पीछे से आगि लाकर पटक दिया और चाकू को चीन कर उसकी पेट मई घुसा कर घुमा दिया ….

“सब मोह माया ह” और कुछ जो अभी नहीं भागे तोह उन्हें एक एक वार मई काट ता gaya…ye देख उमेद सिंह जो अब तक सुना था उसे आज देख वो भी दर से गए the…par मन मई एक ख़ुशी भी थी की अब उनका परिवार बच जायेगा ूंशैतानो से

फिर निर्वाण उमेद सिंह से “गाँव के समशान मई सबको जलवा do…aur जितनी जल्दी हो ये सब करो पैसो का लालच दो”

उमेद सिंह सुभे के 5 बज गए ह मैं करवाता हु तुम आराम करो इतना कह उसने गजेंद्र को निचे आने को कहा …पर ऊपर सिम्मी फ्रीज़ सी हो गयी थी क्योकि उसने देखा था की कैसे राज ने जिन्दा आदमी को चीयर कर दो टुकड़े कर दिय था और बाकि को कैसे फाड़ा tha….aur जो बच गए थे वो सब वापस भागने लगे और बलराम को भी सब बता दिया था की क्या हुवा ह…

वंही निर्वाण अभी भी भवन के मैं गेट के पास कुल्हाड़ा लिए हुवे बैठा था और शेरदिल और मित्युदूत उसके पास खड़े the…aur बाकि सब भी आंगन मई आगये थे इधर गाँव वाले ठाकुर उमेद सिंह की मदद कर रहे थे उन सब पर ठाकुर उमेद सिंह ke…tabhi पुलिस की गाड़िया आगयी और उतरा ठाणे का पुलिस इंस्पेक्टर…

इंस्पेक्टर “चलो चलो ठाकुर एंड फॅमिली सबको गिरफ्तार करो”

पर निर्वाण के हाथ मई इतनी बड़ी कुल्हाड़ा देख पुलिस वाले आगे हे नहीं बढे

निर्वाण “सरकारी टुकड़ा लाया ह”

इंस्पेक्टर “वररेंट क्या ह न बीटा ये ले और सबूत भी ह पुलिस फाॅर्स भी रही होगी”

निर्वाण “पता ह मेरी दुनिया मई भी एक मेयर था वो भी रिस्वत लेता था एक दिन किसी नई रात को उसके पुरे परिवार को जिन्दा काट दियाछोटे छोटे टुकड़े किये जिन्दा हालत मई हे पर तूने रिस्वत थोड़ी ली होगी तू तोह ईमानदार ह”

इंस्पेक्टर थूक निगलते हुवे “डरा रहा ह बीटा सीधी तरह चल वर्ण पुलिस फाॅर्स आहे रही ह”

निर्वाण “ाचा जुर्म क्या ह”

इंस्पेक्टर “ हत्या और मारपीट का इस घर मई मारपीट हुवी ह और हुलिया तुमसे मिलता हुवा बताया गया ह और अभी खून की खबर मिली ह की ठाकुर के घर खून खराबा हुवा ह और सबूत तुमपर लगा और इस कुल्हाड़ी मतलब कुल्हाड़े पर लगा ताज़ा खून ह”

निर्वाण “कितने जानो का”

अब इंस्पेक्टर की हालत भी पतली हो गयी और बोलै मतलब

निर्वाण “कितने खून क्योकि लाश तोह यंहा एक भी दिख नहीं रही ह लगता तुमने होमवर्क अचे से नहीं किया ह मैं बताता हु पूरा शमशान लाशो से भरा हुवा ह”

इंस्पेक्टर घबरा गया और रवोल्वर पर हाथ को कास लिया

तभी पुलिस के साईरन की आवाज और आने लगी और तीन बोलेरो आकर रुकी …

इंस्पेक्टर “ले बीटा आगयी फाॅर्स”

पर हुवा उसकी उम्मीद के विपरीत…. उतरा उसमे से ैप विजय जिसे देख इंडपेक्टर की भी हालत अब पूरी तरह ख़राब हो गयी …

ैप “क्या बात ह इंस्पेक्टर”

इंस्पेक्टर ने साडी बात बताई तोह विजय ने खींचकर उसे चांटा mara..aur बोलै “तेरी कुंडली अलग से निकली ह मैंने यंहा न कुछ हुवा न किसी ने कुछ देखा ह समझा और अगर मुझे पता लगा तोह …तू और तेरा परिवार दुनिया से गायब हो जायेगा समझा चल निकल …” फिर पलट कर प्लीज ऐसे डॉ ऋचा को बुला दीजिये मुझे उनसे जरुरी काम ह…

ऋचा पीछे से आकर “मैं हु ऋचा”

विजय “नीस तू मीट यू मम मेरी पोस्टिंग इसी एरिया मई हुवी ह ये मेरे कांटेक्ट नंबर ह कभी भी जरुरत हो बताईयेगा और डोंट वोर्री आगे से कोई पुलिस बिच मई या आपको परेशां नहीं करेगी मैं चलता हु इतना कह वो जाने लगा तोह”

निर्वाण “ 1 तारिक को आंख कान डाब बंद रखना बस”

विजय “हो जायेगा मदद चाहिए हो तोह बताईयेगा”

निर्वाण के चेहरे पर मुस्कान थी पर उसके जाते हे चली गशयी और वो पलटकर बोलै “बलराम के नंबर ह क्या”

गजेंद्र मेरे पास ह मोबिल निकलकर ये लो…

निर्वाण कॉल लगता उसे पहले हे गजेंद्र का मोबाइल रिंग करने लगा ….

निर्वाण ने कॉल उठाया ..सामने से “मुझे बस वो डॉ चाहिए थी ..पर अब तुम सब maroge…mere आदमियों को मार कर गलती कर दी तुमने अब मैं खुद आऊंगा और फुरि तयारी से आऊंगा तेरी बेटी को तोह उठाकर ले जाऊंगा हे साथ मई तेरे खंडन का भी नामोनिशान मिटा दूंगा”

निर्वाण “पता ह इस धरती पर यही दिकत ह कोई भी बातो से बात नहीं मंटा h…aur हतैयारी से आना क्योकि आने के बाद जिन्दा वापस कोई नहीं जायेगा…”

बलराम “1तारिक का इंतज़ार कर बस तू मैं ारः हु” ये कह कर बलराम ने कॉल कट कर दिया और दूसरा नंबर डायल किया पर सामने से आवाज आयी “बीप के बाद अपना मैसेज छोड़ दे”

और बलराम ने मैसेज छोड़ दिया और खुद से बोलै …. ताकत का घमंड ह न अब दिखाऊंगा ताकत …और अपने मोबाइल मई जितने भी कांटेक्ट थे सबको उसने लगा दिया …और सबको कॉल करने के बा डी चीक कर बोलै “सबके सामने तुझे marunga…..aur तू अपनी आँखों से सबकी मौत देखेगा”

इधर निर्वाण ने मित्युदूत से बोलै “अभी जो अफसर आया था उसके पास से सिग्नल जम्मर माइंस का इंतेज़ाम करो”

मित्युदूत “मास्टर ये सब मैं करलूँगा”

निर्वाण पलटकर सिम्मी की तरफ देख कर “मेरी माँ थी विद्या..” इतना कह वो चला गया

पर ऋचा पीछे शॉक मई चली gayi…..aur बहुत सरे सवाल दिमाग मई खड़े हो गए….

वंही इन सबसे अलग ….

योगी बाबा के पास गुरूजी बैठे हुवे थे…

योगी बाबा “स्कोर्पियन ट्राइब पूरी तरह नहीं आसक्ति ह उनकी मज़बूरी ह …इस दुनिया के कुछ नियम ह पुत्र”

गुरूजी “मेरे लिए क्या आगया ह”

योगी बाबा “तुम तयारी करते रहो क्योकि एक वक़्त आएगा जब निर्वाण …विद्या और सहदेव के लिए ladega….tab उसे तुम्हारी जरुरत पड़ेगी अभी वो वक़्त आया नहीं ह पुत्र …”

गुरूजी “पर मुझे खबर मिली ह की स्कोर्पियन ट्राइब से सुनील का सामना हुवा ह”

योगी बाबा “hmm”phir पलटकर पुत्र अभय

अभय तुरंत योगी बाबा के पास आगया …

योगी बाबा ने कुछ दिएर आंखे बंद करि और फिर आंखे खोलकर बोले “मिलान का संजोग बन रहा ह पिता का पुत्री से पत्नी का पति se…par संकट के बदल भी ह …तुम्हे पुत्र” फिर अभय को सब समझते गए… और फिर गुरूजी से “सभी और आग को उन सबके पीछे लगाए रखो

गुरूजी “जो आगया”

इतना कह अभय और गुरजी दोनों अलग अलग निकल गए ….

आज के लिए इतना हे ….

 
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