- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,779
अपडेट 233
राज हीरो ऑफ़ थे फॅमिली
“बैटल फॉर रिवेंज 2
ी साइड no no no"
फलेश बैक …
डेथ हेलो से फाइट होने के बाद जब ऋचा दीपू का ट्रीटमेंट करके मित्युदूत को उसके पास छोड़कर गयी ..उसके बाद…
मित्युदूत घुटनो के बल पास बैठा huva…bahut दुखी था और दीपू को हे देखे जा रहा था “मास्टर आप बहुत छोटे थे जब आपकी माँ ने हमे आपका प्रोटेक्टर बनाया … उन्हें कहा था की हमेशा आपकी रक्षा करे पर ये सरीर उम्र के साथ कमजोर होता जा रहा h….hume पता था ये वक़्त आएगा पर उम्मीद थी की आप जब तक पूरी तरह तैयार हो jayenge…har बार आपकी बात मणि और आपको घायल होते देखा h…aur आज आपकी दूसरी माँ दिव्या को आपकी जरुरत ह वो आपके बिना पल पल अंदर हे अंदर टूट टी जा रही ह और अब तोह आपके पिता का दुश्मन भी उनके पीछे लग गया h…..ap अगर सब सून रहे ह …तोह ये वक़्त आपके सोने का नहीं ये वक़्त आपके जागना का ह और दुश्मनो पर अपना कहर भरसाने का h…ap क्या सोचते ह मुझे पता नहीं ह इस तरह के नींद के इंजेक्शन अपने ट्रेनिंग मई बहुत लिए ह apne…Nirwan परिवार के नायक को आना हे होगा …राज को जागना हे hogaa…..Apke पापा और माँ का दुश्मन हमारे पास सुभे के सूरज के साथ आने हे वाला h….apko जागना होगा मास्टर ये लड़ाई आपकी ह….” मित्युदूत पिछले कई दिएर से यही बात कर रहा था और उसे पता हे नहीं लगा की उसकी बाते कब कुछ मिनट्स से घंटो मई बदल गयी…
तभी ….उसे अपने पीछे आवाज सुनाई दी और उसने अपनी सोर्ड निकल ली …पर पीछे मुड़कर वो हैरानी से देख छोङकर बोलै tuuu…..tu यंहा क्यों ह तुझे दिव्या जी के पास होना चाहिए था न…
मित्युदूत 2 “मुझे अभी दिव्या जी का इमरजेंसी सिग्नल मिला था जब मैं बलराम और उसकी फौज का पीछा कर tha…maine तुम सब से कांटेक्ट करने की कोसिस की पर सिग्नल जाम की वजह से कांटेक्ट नहीं हुवा”
मित्युदूत 1 “ kyaaa….kyaaa हुवा जल्दी बता”
मित्युदूत 2 “वो खतरे मई ह उनके बॉडी गॉर्डस भी कोई जवाब नहीं दे रहे ह”
मित्युदूत 1 “यंहा भी लड़ई होगी ये तय ह मेरा मास्टर के पास होना जरुरी h..r”
मित्युदूत 2 “मैं बस तुझे यही बताने आया था मैंने अज्जू से कहा ह वो ट्रेस करके मुझे बता देगा और सुनील को बताने से और मैसेज करने से मन कर दिया ह मैंने ”
मित्युदूत 1 “ याद रखना मास्टर की माँ ह वो उन्हें कुछ नहीं होना चाहिए ह एक माँ को खो चुके ह और अगर अब दिव्या को कुछ हुवा तोह ये पूरी तरह टूट जायेंगे… सबको मार देना भले हे चाहे उन्हें बचते वक़्त कुढ़ की जान हे क्यों न दांव पर लगनी पड़े पर दिव्या को कुछ नहीं होना चाहिए ह समाज गया”
मित्युदूत 2 “तीख ह मैं जाता हु अलविदा मेरे भाई क्या पता दुबारा मिलकात हो न हो”
मित्युदूत 1 “अलविदा और शान से लड़ना और हो सके तोह जिन्दा वापस आना”
तभी उन्हें पीछे से आवाज आयी “जब दुस्मनी मेरी ह तोह मेरे बिना हे जाओगे” दोनों आवाज सुनकर चौंक गए और पलटकर एक साथ घुटनो पर बैठकर बोले “मास्टर”
राज “ कितना वक़्त हो गया”
मित्युदूत्स दोनों हड़बड़ा गए सीधे सवाल से पर मित्युदूत 2 बोलै “मास्टर पहले हमे जाना होगा मैं बाद मई समझा दूंगा …”
मित्युदूत 1 “ नहीं आप रेस्ट करिये आपको कंही नहीं जाना ह”
राज गुसाई से घूरने लगा और मित्युदूत को दिखाई दी राज की आँखों मई निर्वाण की घुसाई की आग की लपटाइ और वो चुप हो गया …राज ने इधर उधर देखा और उसे दिखाई दिया कौन मई रखा “कुल्हाड़ा” उसने आगे बढ़ उसे उठाया और अपनी पीठ मई टांग लिया और मित्युदूत 2 के साथ गाँव से बहार चिप कर चुप चाप निकल गया …और गाँव से बहार कड़ी थी मित्युदूत 2 की स्पेशल यंहा की मॉडिफाइड बाइक और दोनों सवार हो गए राज ने गाँव के बहार निकलते हुवे बहुत सरे आदमियों को देखा पर बोलै कुछ नहीं…. मित्युदूत 2 की बाइक स्क्रीन पर एक जीपीएस लोकेशन शो होने लगी जो 40 कम दूर की दिखयी दे रही थी उनकी करंट लोकेशन से…
और मित्युदूत ने तुरंत भागी दी बाइक को उस तरफ पीछे बैठा राज इधर उधर देख कर पहचाने की कोसिस कर रहा था की वो कान्हा h…par उसे रह रह कर दिमाग मई झटके लग रहे थे ..और कभी उसकी आंखे नार्मल होती और कभी गुसाई से भड़क उठती …जैसेवो अंदर हे अंदर जल रहा हो ….काफी दिएर बाद बाइक एक फार्महाउस के बहार रुकी …
मित्युदूत 2 “मास्टर क्या हुवा आप तीख ह”
राज “मैं तीख हु पता नहीं बस सर कभी कभी फटने लगता ह अब बताओ क्या हुवा ह”
मित्युदूत 2 “दिव्या माँ की लोकेशन यंहा शो हो रही ह जो की नहीं होनी चाहिए इसका मतलब वो यंहा खतरे मई ह और जबरदस्ती उन्हें यंहा लाया गया ह”
कुछ दिएर पहले इसी फार्म हाउस मई …
“अरे आराम से आराम लाओ हमारी मेहमान ह देखना नाजुक चमड़ी ह …कंही चील न जाये ..”
दिव्या “ओह्ह तुम हो.. ..तोह बाप बीटा और माँ इस हद तक आगये”
बलराम माँ “पहचानती हो मुझे”
दिव्या “तुम्हे कौन नहीं जनता ह तुमने तोह तुम्हारे पति से जायदा गंदे और घिनोने काम किये ह वो तोह मरता हे ह सिर्फ पर तूने तोह छियई बोलते हुवे भी शर्म अति ह मुझे यंहा क्यों लायी ह तुझे बहुत महंगा पड़ेगा ये सब”
बलराम माँ “ ओह्ह इतने तेवर सच mai….mujhe महंगा padega….kya करे जब तुम जैसी धमकी देने लगे तोह हमे हमारी औकात तोह बतानी हे पड़ती ह न”
दिव्या टेडी मुस्कान के साथ “औकात दिख रही ह तेरी इतने आदमियों के साथ ह सेवा तोह तेरी अछि हे हो रही ह यही औकात ह तेरी”
दिव्या की टोन सुनकर और उसका मतलब समाज कर कुंदन की वाइफ ने एक थपड उसे जड़ दिया और अपने हाथ से उसके बल पकड़कर बोली …साली …इनके आगे फेंक दिया तोह कुटिया से जयादा बुरा हल होगा तेरा गईं भी नहीं पायेगी कितने छाडे कितने उतरे सामजी इसलिए मू सोचकर हे खोलना”
दिव्या “गुसाई से उसे देखने लगी …उसकी आँखों मई नफरत साफ़ दिख रही थी”
बलराम माँ पलटकर “ बांध दो साली को और जायदा छू चपड़ करे तोह नंगी करके लटका देना और फिर भी नहीं मने तोह साली को तब तक रगड़ो जब तक दर्द से इसकी चीखे बंद न हो जाये और अकाल तीखाने न अजय…”
दिव्या नफरत से उसे देखती रही पर बोली कुछ नहीं क्योकि उसे पता था की मदद तोह अति हे होगी इसलिए अभी सेफ रहना जरुरी था”
बलराम माँ “शादी करके बलराम भी यही आएगा उस कुटिया डॉ को लेकर …देखना कोई कमी न हो हो स्वागत मई”
आदमी “ठकुराइन सब तयारी ह अपने आदमी चारो तरफ फैले हुवे ह फार्म हाउस के अंदर तोह पक्षी बी पर नहीं मर पायेगा …दारू …लड़किया नाचने वाली सब बस कुछ दिएर मई आजाएंगी रात को जश्न जैसा अपने कहा ह वैसा हे होगा”
ये सब सुन कुंदन की वाइफ मुस्कराने लगी और मू मई दूसरा पान डालकर चबाने लगी और दो जाने उसके पेअर दबाने लगे…
बहार ….
राज के दिमाग मई निर्वाण गुसाई से फैट रहा था और रह रह कर वो राज को गुसा दिला रहा था…
मित्युदूत 2 एक तरफ इशारा करके “मास्टर दिव्या जी को आप अंदर बचने जाईये मैं इनका धयान अपनी तरफ खिंच दूंगा…” इतना कह वो फार्म हाउस की तरफ देखने लगा और जब राज की तरफ से रिप्लाई नहीं आया तोह उसने राज की तरफ देखा तोह चौंक गया और बोलै “ कान्हा गए”
इधर राज के दिमाग मई निर्वाण के गुसाई से और अपनी माँ की जान को खतरे मई जानकार गुसाई से जल रहा tha…aur वो सीधा गेट की तरफ भगा …और एक जम्प के साथ एक पेअर गेट पर और फिर दूसरा रखा और सीधा उड़ता हुवा निचे फार्म हाउस के अन्दर लैंड हुवा…. और उसको ऐसे अंदर लैंड करते देख कर गॉर्ड कर रहे कई सरे आदमियों ने घेर लिया….
“कौन ह बे तट….”
पर बात पूरी होती उसे पहले उसके मू पर पड़ा था राज का पंच और उसका नाक टूट गया और वो हवा मई उडाता हुवा पीछे गिरा और साथ हे मू से टूट कर गिरे आगे के कई दन्त”
अपने साथी की ऐसी हालत देख खड़े आदमियों ने भी राज पर अटैक कर दिया …
राज ने एक के वॉर को डॉज किया और उसके पेट मई घुटने की मरी जिसका प्रेशर इतना था की पीठ से रीद की हठी बहार निकल आयी और वो आदमी कई फ़ीट ऊपर की तरफ उछला और बाकि उसे ऐसे ऊपर कई फ़ीट उछलता देख रूक गए …और उसे ऊपर से निचे गिरते और फिर बिना हिले डुले पड़ा देख सदमे मई चले गए पर वो कुछ सोचते तब तक एक राउंड किक आकर उनके मू पर पड़ी और उन्हें हुवा तेज़ दर्द और वो दर्द उन्हें वापस अपनी दुनिया मई ले aya….awaje सुनकर और भी गुंडों हाथो मई डंडे रोड और धारधार हथियार लिए आगये …..राज ने अपने सामने बचे हुवे एक की गर्दन को पकड़ा और दूसरे हाथ से कान के निचे तेज़ झनातेदार थपड मारा और उसे साइड मई धकेल कर सबको देखते हुवे कुछ बोलने वाला हे था की फिर से सर मई दर्द उठा और उसकी आंखे वापस गुसाई से जलने लगी …राज को ऐसे सर हिलाते देख 2 जाने जल्दी से उसे मरने ए पर अपने हथियार से वो वॉर करते उसे पहले हे उन्हें दिखाई दी राज की लाल आंखे और चेहरे पर भयानक मुस्कान और हाथ मई दिखाई दिया धीरे धीरे बड़ा होता हुवा कुल्हाड़ा जिसका साइज देख हे उनके पसीने निकलने लगे वो पीछे होते उसे पहले हे उनकी आँखों मई आया खोफ्फ्फ और उनकी गर्दन धड़ से अलग हो गयी और फिर राज ने खून को देखा …और उसका दिमाग नार्मल हो गया उसने फिर से अपने सर को हिलाया …उसे फिर से अपने सर को हिलता देख भीड़ मई से कोई आगे नहीं बढ़ा तोह भीड़ को चीयर कर एक 6.5 फिट का लम्बा चौड़ा पहलवान आगे आया ….और राज की तारा बढ़ उसके कंधे को पकड़ लिया ….अपने कंधे पर हाथ देख राज ने सामने देखा और एक झटके से हाथ को झटका और उसकी पकड़ से आज़ाद हो कर एक राउंड काट ते हुवे प उसके पीछे आया और कमर से पकड़कर उसे ऊपर उठाकर अपने पीछे बानी हुवी सीमेंट की चौकी पर जोर से पटक दिया ….पहलवान दर्द से बिलबिलाया हे था की राज ने उसके पेअर के दोनों पंजो को मरोड़ दिया ….और फिर सबकी तरफ देख कर अपने कुल्हाड़े को साइड पटकते हुवे बोलै “चलो ाजाओ”
पर तभी पीछे से मित्युदूत कंफ्यूज होता हुवा आया और बोलै “Nirwaaa…i mean…master हमे गाँव भी पहुंचना ह”
राज ने कन्फूसिओं से देखा…
मित्युदूत “सुनील को आपकी जरुरत ह हमे इन्हे जल्दी मरना होगा फिर बताता हु”
राज ने है मई गर्दन हिलायी
मित्युदूत “ आप अंदर जाईये इन्हे मैं संभालता हु”
राज “तीख ह और वो अपने कुल्हाड़े को पीछे टेंगा कर अंदर की तरफ bhaga…par सामने कई जाने आगये ….
पर राज अब मित्युदूत के कुछ बाते बताने और सुनील का नाम लेने से समाज गया था की मटर सीरियस ह उसने बिना वक़्त गंवाए हे अपने सामने वालो तीन मई से एक को टारगेट किया और दिया पेट मई पूरी तगत से पंच और उसके वार के बाद वो गुंडा सिर्फ सीधा निचे ऐसे हे पेट पकडे गिर गया और फिर दिया दूसरे की गर्दन पर उसके पंच से बचते हुवे किक और वो बस एक साइड सीधा लुढ़क गया और फिर पीछे खड़े की चेस्ट पर भाग कर दी अपने घुटने की और उसकी चेस्ट की हड़िया अंदर धंस गयी टूट कर ….और एक जो नाइफ से वार कर रहा था उसके हाथ को रोक कर उसके नाइफ को उसके हे सीने मई घुसा दिया और ये देख बचे हुवे दो दर से कंपनी लगे …तोह राजने एक को सिर्फ हाथ से मरने का डराया जिसे बचने के लिए वो पीछे भगा तोह दीवार से टकरा कर खुद हे बेहोश गया और बचा एक वो खुद हे दर से हिलता डुलता बेहोश हो गया….
राज …अंदर पंहुचा तोह ….बड़े से हॉल मई दिव्या सामने हे बंधी हुवी थी और एक तरफ गाल लाल हो रखे the…jisai देख राज का गुसा अपने चरम पर पहुंच gaya….aur उसका सरीर गुसाई से कंपनी लगा…
वंही साइड मई बड़े से सोफे पर बैठी कुंडों की वाइफ… अपने खास बॉडीगॉर्ड पहलवानो से अपनी टंगे और कंधे दबवा रही thi…wo बोली … “कौन ह तू जो मौत के मू मई चला आया ह”
पर अब राज राज कान्हा रहा tha…uska दिमाग और निर्वाण आपस मई जुड़ चुके थे और वो बेचारी क्या जाने की जो सामने गुसाई से काँप रहा था अगर उसके बारे मई वो जानती तोह कुछ कहने से पहले हे कंही दूर भाग जाती पर उसके पंडित ने सायद दर से सुबह मुहरत उसकी समस्या को दूर करने का नहीं उनकी मौत का निकला हुवा tha…abhi वो और कुछ कहने के लिए मु खोलती एक हवा का तेज़ झोंखा उसके पास आगया और उसके पहलवान बॉडीगॉर्ड कुछ करते उसे पहले हे एक थपड उसे अपने गाल पर पड़ा …और वो वो सोफे समेत उलटी होकर पीछे गिरे ….अगले 2 मिनट तोह उसे कुछ समाज हे नहीं आया की क्या हुवा और फिर धीरे धीरे होश आने पर उसने देखा की उसके आदमी उसे जगा रहे ह …और हुवा उसे बहुत तेज़ दर्द गाल पर जिसकी वजह से उसकी दर्द से तेज़ आअह्ह्ह निकल गयी और वो बोली जाओ उस कुत्ते हरामी को इतना मारो की कोई हड्डी सलामत न रहे . ..
इधर से दिव्या भी चीखी “इतना तोडना की ये दर्द से चीक चीक कर मर जाये”
दिव्या की चीक सून जंहा कुंदन की वाइफ गुसाई से तिलमिला गयी तोह वंही राज अगले हे पल एक पहलवान के आँखों के आगे आकर सीधे उसके अंडो को पकड़ लिया और अपने हाथो से हे ताकत से मसल दिया और वो पहलवान इतना तेज़ चीखा की आवाज से सबकी हालत ख़राब हो गयी और फिर राज ने उसके गले पर दिया एक पंच जिसे उसकी आवाज भी बंद हो गयी और वो बस निचे पड़ा दर्द से इधर उधर होता रहा बाकि बचे पहलवान बॉडीगॉर्ड्स राज की तरफ भागे तोह राज ने भी एक जम्प के साथ एक कोहनी की दी एक के सर मई और वो बस जिन्दा लाश की तरह भागता हुवा सीधा टेबल पर गिरा और गिरा रह gaya…ab बचे तीन पहलवानो ने एक साथ राज को घेर लिया …एक ने पकड़ने की कोसिस की तोह राज ने साइड हटकर दी उसकी कमर मई किक की और वो आगे जाकर फर्श पर गिरा इसका फायदा उठाकर दूसरा राज के तीख पीछे से आया तोह राज ने बैक फ्लिप लेकर किक जड़ी उसके सर और बिना रुके एक पंच एक घुटने पर फिर दूसरा दूसरे घुटने पर और उसके झुकते हे एक पंच जबड़े पर दिया …और पहलवान चारो खाने चित हो gaya..ab आखिर बचा हुवा राज उसके पास लेफ्ट राइट मूव करते हुवे गया और एक किक उसकी पसलियों पर मरी और हडियो के टूटने की आवाज और दर्दसे एक साइड झुकते हे दी एक किक उसके मू पर और वो पहलवान पीछे की तरफ कई फ़ीट दूर जाकर gira….ab राज कुंदन की वाइफ की तरफ bhada…toh कुंडों की वाइफ चिकि “आगे मत भड़ना वर्ण तू मरेगा”
पर उसने इतना हे कहा था की तड़क तड़क तड़क उसके दोनों गलो पर बेहिसाब थपड पड़े ..और उसका मू कुछ हे पालो मई सूजकर नीला और कला होने laga….par राज यही नहीं रूका और उसके बाल पकड़कर उसे घसीट ते हुवे जोर से दिव्या की तरफ फेंका और फिर दिव्या को खोलकर तुरंत गले लगा लिया और अपनी गोदी मई हे उठा लिया तभी मित्युदूत भी कमिश्नर के साथ अंदर पहुंच गया …
दिव्या बस राज को निहारे जा रही थी…
राज “इस कुटिया को बहार लेकर औ और उधर एक कुत्ता और ह देखना सो कौन ह”
कमिश्नर उस तरफ देख कर “ये तोह कुंदन ठाकुर ह”
राज “ये ऐसा हो गया ह इसे भी ले औ”
Mityudoot”hume गाँव पहुंचना ह वंहा आपके मां की लड़की की शादी जबरदस्ती बलराम के साथ हो रही ह और वंहा खतरा भी ह”
कमिश्नर “है मुझे अज्जू से यंहा की लोकेशन मिली ह और ओप्पोसिशन पार्टी के आदमी भी मदद के लिए आगये ह …अब ये गुंडा राज ख़तम होने का वक़्त ह”
कुंदन और उसकी बीवी को बाँध कर सब चल पड़े गाँव की तरफ…
फलेश बैक एंड्स..
करंट टाइम…
राज ने अंतितोड़े निकली और सुनील को दे दी और उसके चेहरे परलगे खून को पौंछकर बलराम को अपनी खुनी आँखों से देखा ….
बलराम चाचा “कोई बात नहीं भतीजे इनकी दहकती राग हमारे पास भी ह ये दिख रही ह डॉक्टरनी इसकी माशूका ह इसके रहते ये कुछ नहीं karega…”ye कहकर उसने ऋचा के बाल पकड़कर मू ऊपर किया… और ये देखती हे एक भाई का खून क्यों नहीं खोलता वो भड़क उठा ….
सुनील “तू मेरे हाथ हे मरेगा बूढ़े कसम ह मुझे राखी की तेरी मौत बहुत बहुत भयानक होगी ….” माहौल को बुरी तरह गर्माता देख कमिश्नर बिच मई बोलै”
कमिश्नर “मंत्री जी आप स्टेट के मिनिस्टर ह अगर ये सब हुवा तोह पुलिस भी चुप नहीं बैठेगी हमे आप दोनों की दुश्मनी से मतलब नहीं ह पर निर्दोष न मरे इसलिए ये लड़ाई इनदोनो परिवारों के बिच हो तोह तीख ह मामला हम दबा देंगे और सब यही ख़तम क्या कहते ह आप”
मिनिस्टर को भी मामले की गम्बिरता समाज आगयी thi…wo सोच मई पद गया तब दूसरी पार्टी का लीडर बोलै “ है हम भी सहमत ह वर्ण हम भी लड़ने के लिए तैयार ह भले हे चाहे लाशे बिच जाये”
कानून मंत्री “छोटे ठाकुर आप क्या कहते ह ….”
बलराम “मंजूर ह ये दो परिवारों के बिच की ह तोह हम खुद निपटेंगे मंत्री जी आप हैट जाये अपने पार्टीवोर्केर्स के साथ इनसे मैं और मेरे आदमी निपटेंगे ..”फिर जोर से चीख कर मेरी माँ और पापा को छोड़ दो पहले”
राज “लेछोड दिया …” फिर कमिश्नर से “सर आप भी वंहा से ऋचा और बाकि सबको ले जाये ….ये लड़ाई हम दो भाई लड़ेंगे आज”
कमिश्नर “पर ये बहुत सरे ह”
राज के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और तभी मित्युदूत हथोड़ा भी लेकर आगया और सुनील को दे दिया ….
राज “कुल्हाड़ा और हथोड़ा….”
कमिश्नर की टीम मेंबर्स ऋचा सुर बाकी सबको लेकर मंडप से एक तरफ आगये और जंहा सबको काफी दिएर कोसिस करने पर वो होश मई ले ए थे…
अब सिर्फ एक तरफ राज और सुनील खड़े थे तोहक बलराम और उसकी बची हुवी सेना……
बलराम “बस दो लडोगो हमारे इतने सरो के साथ बस अब यही तमाशा बाकि रह गया था” ये कहते वक़्त वो हसने लगा तोह उसके पीछे खड़े आदमी भी हसने लगे….”
तब आवाज ghunjiiii“Nahi तीन…..” फिर कुछ पल बाद एक तेज़ आवाज और ayi“nahi चार” फिर कुछ पल बाद दो और बड़ी भरी भयानक आवाज आवाज आयी “नहीं 6”और अभी सब सोच मई हे थे की दो लास्ट आवाज एक साथ आयी “नहीं 8” और एक के बाद एक sherdil…..rajeev और मैच और माइक और दोनों मित्युदूत आकर राज और सुनील के साइड मई खड़े हो gaye…aur सब के हाथ मई भरी भरकम हथियार थे….
राज ने सबको इतने वक़्त बाद देखा तोह उसके चेहरे पर मुस्कराहट आगयी की इतने वक़्त बाद भी उसके दोस्त भाई उसके साथ कंधे से कंधे मिलकर खड़े थे…..
राज बलराम की तरफ इशारा करके “ये मेरा सीकर ह”
सुनील “और वो बूढ़ा और उसके साथदोनो मेरे”
शेरदिल “तोह फिर बाकि सरे हमारे ह”
मैच माइक “ओह या”
और सबसे पहले भगा सुनील अपने हथोड़े से दिया घुमाकर सबसे आगे वाली की चेस्ट पर वो जितनी तेज़ी से आया था उतनी हे तेज़ी से वापस उड़ते हुवे अपने पीछे आरहे साथियो को लेकर गिरा और फिर दी लेफ्ट लेग की दूसरे की चेस्ट पर और उसे सीधा जमीन पर पटक diya……aur उठाकर अपना हथोड़ा दिया निचे पड़े के सर पर और उसके सर फटा तरबूज की तरह और खून हवा मई उड़ कर दूर तक गिरा और ये सीन देख कर तोह नेता लोगो के साथ खड़े वर्कर भी काँप गए ……और यही हाल वंहा कड़ी पुलिस की टीम का था …जिनके पास जोगिन्दर और चीफ भी पहुंच गए थे …
कमिश्नर “सर ये”
चीफ “तुम्हे बरसो पुराण वो किस्सा याद ह न जब तुम बाद मई यंहा डूएटी के दौरान ए थे”
कमिश्नर “है सर उसे कैसे भूल सकता हु कितनी पुलिस फाॅर्स लगी थी खुद पं को इंस्ट्रक्शंस देने पढ़ गए थे…”
चीफ “ जो सामने वो शख्स दिख रहा तुम्हे”
कमिश्नर “ वो जो हाथ मई बड़ी सी कुहाड़ी लेकर अब तक खड़ा ह”
चीफ “है वही उसकी पहचान जानते हो”
कमिश्नर “नहीं कौन ह वो”
चीफ “वो कौन ह …wo…uska बीटा ह जिसकी वजह से तुम्हारी पहले यंहा डूएटी लगी थी”
और ये सून कर कमिश्नर के सरीर मई झुरझारी दौड़ गयी ..और वो धीरे से बोलै “ये उनका बीटा ह”
चीफ “है और तुम मेरे भरोसे के लोगो मई से एक हो इसलिए इसकी दूसरी पहचान भी ह”
अब कमिश्नर की हालत और ख़राब हुवी और वो पूछा और वो क्या ह सर
चीफ के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और उसके कान मई धीरे से बोले “निर्वाण”
और कमिश्नर के होश उड़ गए ….
इधर इनका बोलना हुवा और उधर से राज का चीखना हुवा “ बलराम” और वो आगे बढ़ा और बिच मई आरहे सबको अपने कुल्हाड़े के एक हे वार से चीरता गया उसके हाथ मई वो भरी भरकम कुल्हाड़ा भी ऐसा लग रहा था की जैसे बचो का हल्का फुल्का खिलौना हो ….इधर बलराम जो पीछे खड़ा था वो भी आवाज सुनकर राज को देखने लगा…
तोह इधर बेहोश होने की वजह से मैच माइक शेरदिल और खूंखार हो गए the…mech के हाथ मई उसके दोनों धारधार हथियार थे जिनको वो ऐसे चला रहा था की हर वॉर मई किसी का हाथ कटा तोह किसी के पेट मई से बड़ा सा घाव से खून के फंव्वारे …और माइक के हाथ हे इतने बड़े थे की खुले हाथ जिसे भी लग रहे थे वो सीधा जमीं पर गिरता तोह बेहोश होता या सायद ऊपर हे पहुंच जाते तोह राजीव भी बराबर तकर देते हुवे हाथ मई पकड़ी रोड से सर पर तोह घुटने पर हे वार कर सबको घायल कर रहा था पर इनसे जायदा खूंखार शेरदिल था जो लड़ाई के बिच मई बेहोश होने की वजह से गुसाई से जल रहा था ….वो सबके बिच जोर से चीखा “ या अली मदद” और अपने हथोड़े जैसा हाथ दिया एक के मू पर उसके हथोड़े की हाथ की पावर से उसकी गर्दन हे टूट gayii…phir दूसरे के कान को पकड़ा और उसका कान हे उखड दिया …और फिर से चीखा और एक को गले से पकड़कर उसके मू पर अपने सर को जोर जोर से मार मार कर उसको जान से हे मार दिया उसे घेर कर खड़े सरे गुंडे दर गए …पर शेरदिल आज शेर से जायदा खूंखार हो गया tha…usne सामने खड़ा मई से एक की चेस्ट पर एक किक मरी और भीडको साइड हटाता हुवा पीछे जाकर gira…..toh फिर अपने लेग को उठाकर एक के मू पर फुल पावर से किक मरी तोह वो कितनी पलटिया हवा मई खता हुवा गिरा किसी को समाज नहीं और फिर अपना भये हाथ का पंच एक के सर पर मारकर उसके सर को हे निचे धंसा diya….aur फिर जोर से ढाहड़ामे laga…aur उसकी दहाड़े किसी घायल खूंखार शेर से भी भयंकर थी उसके अगले कई वार ने किसी के मू के जबड़े तोड़े तोह किसी की पसलिया ….
इधर सुनील सबको अपने हथोड़े से तोड़ता हुवा बलराम के चाचा के पास पहुंच गया तोह बलराम के चाचा के दोनों बॉडी गॉर्ड पीछे से आगे आगये …
सुनील ने अपनी खूंखार नज़रो से उसे घूरा और फिर दोनों बॉडीगॉर्ड्स को देखा जिन्होंने उसकी बहन को चुवा था
सुनील “तेरी मौत के लिए क्या कहा था याद ह न ….”
बलराम का चाचा थोड़ा सा घबराया और बॉडी गॉर्डस से बोलै मार डालो इसे
सुनील हथोड़ो को साइड मई रख कर “एक बार मई मार दिया तोह फिर सुकून कैसे मिलेगा” इतना कह उसने एक बॉडीगॉर्ड के वार को ब्लॉक किया और दूसरे के वार को डॉज किया और निचे घुटने पर बैठ एक के घुटने पर कोहनी का वार किया और कड़क की आवाज के साथ एक सांड जैसा बॉडीगॉर्ड निचे गिरा तोह फिर घुटने की दी उसके मू पर …और फिर दूसरे के वार से बचा फिर अगले एक और आरहे वार से बचा और एक जम्प के साथ उसके एक साइड के कंधे पर अपनी कोहनी की दी और उसकी कंधे की हदी तोड़ डाली जिसे उठे दर्द से वो चीखा भयंकर …फिर भी दर्द को सहनकरते हुवे उसने लात मरी तोह सुनील ने भी अपनी कोहनी को आगे कर दिया दुबारा फिर से एक हड्डी टूटी और वो चीखा ….
सुनील ने दोनों के पीछे खड़े चाचा की तरफ देखा ….और फिर दोनों मई से एक बॉडीगॉर्ड के हाथ को पकड़कर …बोलै …मौत तोह तुझे इस जनम मिलेगी नहीं और जो मिलेगा वो ह सिर्फ दर्द” इतना कह उसने उसके हाथो की उंगलिया फिर कलाई फिर कोहनी की फिर बाजु की हड्डी और गर्दन तक उसके हाथ की साडी हड्डिया तोड़ दी …और वो बॉडीगॉर्ड दर्द से चीक चीक कर बेहोश हे हो गया ….
सुनील की नज़र पीछे खड़े चाचा पर हे थी जो पीछे खिसक रहा था….
सुनील “तुजे आज कोई नहीं बचा सकता ह बूढ़े मेरे हाथो से” इतना कहते कहते वो दूसरे बॉडी गॉर्ड की भी उंगलिया कलाई और फिर कोहनी हाथ की साडी हड़िया तोड़ता गया…
इधर राज का कुल्हाड़ा सबके चीरता फाड़ता जा रहा tha…..aur अपने आदमियों के पीछे खड़ा बलराम गुसाई से राज को देख रहा था…. उसने अपने आदमियों को साइड किया और राज की तरफ भड़ने लगा तोह राज भी तेज़ी से उसकी तरफ भड़ने laga…aur दोनों आमने सामने पहुंचे तोह राज ने हाथ मई पकड़ा कुल्हाड़ा साइड मई फेंक दिया ….
इधर साइड से थोड़ी दूर से देख रहे ठाकुर साब और गाजरंदरा सिंह की भी मुठिया कासी हुवी थी तोह सिमरन और ऋचा भी देख दोनों को हे देख रही thi…sabki अपनी फीलिंग्स और इमोशंस चल रहे थे जंहा ठाकुर साब मन मई बोल रहे थे की “मार डालो इसे दीपू बहुत दुःख दिया ह इसने और इसके बाप ने आज जिन्दा मत छोड़ना “
तोह गजेंद्र सिंह सिम्मी के बाप थे उनकी आँखों मई आंसू थे क्योकि आज उन्हें इस रक्षास से छूटकर मिलने वाला था तोह …सिम्मी की आँखों मई खुसी के आंसू थे की उसका भी भाई ह जो उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ सकता ह जिसके रहते उसे डरने की जरुरत नहीं ह …तोह ऋचा की नज़र एक बार राज की तरफ तोह एक बार शेरदिल और सुनील की तरफ thi….ek भाई के होने का फर्ज निभा रहा था तोह दूसरा देवर होने का ह…
इधर चारो तरफ भीड़ हे भीड़ थी …जंहा कुंदन और बलराम के नारे लग रहे थे दूसरी तरफ से मार डालो मार डालो के नारे लग रहे the….raj और बलराम को आमने सामने देख उनके आसपास के गुंडे भी रूक गए और दोनों को देखने लगे ….
और पहला वार किया बलराम ने राज ने उसके हाथ के वार को रोका और उसके हाथ को पकड़कर उसे अपने ऊपर से उठाकर दूसरी साइड मई निचे पातकडिया….
“चल उठ जा कुस्ती मई हड्डिया तोड़ने का बहुत शोख ह न”
बलराम भी एक झटके से सीधा खड़ा हो गया पर खड़े होते हे राज ने उसके एक बाजु को पकड़ा और दुबारा उठाकर निचे पटक दिया ….बलराम गुस्सी से जमीन पर हाथ मरकर खड़ा हुवा अपने दोनों हाथ को राज के हाथो की तरफ कर दिया और …दोनों के पंजे एक दूसरे के हाथ मई फंस गए दोनों एक दूसरे को धक्का देने लगे …राज की चेस्ट के ऊपर जो गांव बना हुवा था वंहा से खून निकल कर टी शर्ट को भीगा चूका था …बलराम ने अपने एक हाथ को छुड़ाया और राज की उसी चोट पर जोर से धक्का मारा …जिसे रोज की अहह निकल gayiii…par राज को ऐसे गांव का दर्द कान्हा रोकने वाला था वो तुरंत दर्द पर काबू पते हुवे बलराम के सामने खड़ा हुवा और बोलै “सोचा था ईमानदारी से लड़ाई होगी पर तू लायक हे नहीं ह” इतना कह उड़ने एक किक साइड से दी उसके चेहरे पर और फिर दिया पंच उसकी चेस्ट पर वो गिरा अपने पीछे खड़े साथियो पर और उसके गिरते हे उसके साथी आगे ए तोह शेरदिल भी आगया और बोलै इन्हे मैं देखता हु तू मार सेल को और शेरदिल टूट पड़ा बलराम के गुंडों पर …और घायल शेर के सामने जंगली कुत्ते आज कान्हा तिखने वाले थे उसने चीरना फाड़ना सुरु कर दिया इधर राज ने बलराम के ारहए पंच के वार को रोका और उसके पेट मई दी घुटने की और वो झुखा निचे तोह एक पंच दिया उसके जबड़े पे वो हवा मई उछाला तोह उसकी एक टांग को पकड़कर उसे घूमकर साइड मई फेंक दिया…
इधर बलराम के चाचा ने सुनील को अपनी तरफ एते देखते हे अपनी गन निकल ली और उसके चेहरे पर मुस्कराहट आगयी पर वो हंसकर मू फाड़ता उसी पहले हे अगले हे पल एक खंजर उसकी गन वाली कलाई मई धंसा हुवा था…
“बूढ़े ये खेल 10साल की उम्र से खेलतः हुवा ारः हु इतना कह वो टेक्सी से आगे बढ़ा और चाचा को सब गोल घूमता हुवा फिखायी दिया और जब उसे होश आया तोह वो जमीं पर निचे गिरा हुवा tha…wo चीखा जोर se…huva ये था की सुनील ने उसे हवा मई उठाकर राउंड घूमते हुवे जमीं पर जोर से पटका था जिसकी वजह से कई सेकण्ड्स तक चाचा की चेतना गड़बड़ा गयी थी…. और चाचा के दर्द से कराहते हे सुनील ने दिया अपने शूज उसके पिछवाड़े के बिछे मई और चाचा और जोर से चीखा फिर सुनील ने हाथ से उसकी गुड्डी को पकड़कर उसे ऊपर उठाया और दी घुटने की रीद की हड्डी पर चाचा हवा मई उछाल कर दुबारा पिछवाड़े के बल गिरा और बिना पानी की मछली की तरह तड़फड़ाने लगा…
सुनील “अभी तोह सुरुवात ह” इतना कह उसने उसे अपने कंधे प् उठा और डंडे को तोड़ते ह वैसे दिया झटका और चाचा को उठाकर निचे पटक दिया और चाचा इतना चीखा की दर्द से उसका मूट निकल गया ..
सुनील “अब डॉ भी तुझे जोड़ नहीं पायेगा” फिर उसके हाथ को इतनी पर ट्विस्ट किया की ये समझना मुस्की हो गया था की ये हुवा तोह हुवा कैसे ….चाचा को बेहोश देख उसने एक बार राज की तरफ देखा जो बलराम से लड़ रहा था….
राज “चल uth”par बलराम के उठते हे राज ने अपना घुटना जम्प के साथ उसके मू पर मारा तोह वो मू से खून थूकता हुवा निचे जमीं पर गिर gaya…phir वो कुंदन की तरफ भाड़ा और उसे और बलराम को पैरो से पकड़कर घसीट ते हुवे अपने नाना के पास ले आया और सामने पटक diya…toh इधर से सुनील ने चाचा को लेकर पटक दिया …
राज “मेरी माँ और पापा आपसे बहुत बार माफ़ी मांगने ए पर अपने माफ़ नहीं किया …मान सकता हु आप गुसा थे पर इतने सालो तक अरे पत्थर भी पिगल जाता ह …और वो तोह आपकी सपनी बेटी थी न …एक बाप इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता ह…….”
राज के हर सब्द तीर की तरह चूब रहा था ठाकुर साब के दिल मई…
राज “ आज आपको संकट से निकल कर मैंने अपने माँ की ीचा को पूरा कर दिया ह वो चाहती थी की आप हमेशा खुस रहे आज से आपको कोई दिकत नहीं होगी …..इतना कह उसने कुंदन की गर्दन मरोड़ दी और यही हाल उसने बलराम का किया ….और फिर सुनील ने भी चाचा की गर्दन को तोड़ दी…
राज चलो अब काम ख़तम हुवा उसके कदम उठे हे थे किसी ने पीछे से आयकर उसे अपनी बांहो से जकड लिया …और बोली “नहीं भाई आप हमे छोड़कर ऐसे नहीं जा सकते ho…main अपने भ्सी को अब दूर नहीं जाने दूंगी”
राज ने धीरे से पीछे से सिम्मी को आगे लाया और बोलै …मैं तुमसे कभी दूर नहीं हु एक बहन को जब भी जरुरत पड़ेगी ये भाई आएगा ये वचन ह मेरा”
तोह ठाकुर साब भी बोले “बीटा दीपू हमे भी तुमसे बात करनी ह तुम्हारी माँ के बारे मई रूक जाओ”
सुनील ने भी कंधे पर हाथ रख कर कहा “आज की बात ह रूक जा”
और राज के है बोलते हे सब खुस हो गए सिवाए एक के जो राज की बेरुखी से बहुत दुखी थी पर उसने कुछ नहीं बोलै …इधर चीफ और जोगिन्दर ने सब कुछ संभल लिया और मंत्री भी कुछ नहीं बोलै क्योकि सामने का सन देख सब डरे हुवे थे अब ओप्पोसिशन का पलड़ा भरी था इसलिए मौत का दर सबको चुप करने के लिए काफी था ऊपर से कमिश्नर का खोफ्फ़ की पुलिस भी अब सपोर्ट नहीं करेगी मंत्री ने तुरंत हे स्तीफा दे दिया और सर्कार गिर गयी ……
इधर शामे डे नाईट मई….
काफी दिएर राज और ठाकुर उमेद सिंह ने खूब साडी बाते करि ….और खाने के वक़्त हे बहार ए…. कुछ वक़्त पहले हे अंदर जाने से मैच और माइक ने रविंदर सिंह के बारे मई राज को बता दिया tha…raj रूम से एते हे खाने की टेबल पर बैठा तब …सुनील “वो टिकट्स बुक हो गयी ह” ये सून ऋचा के कान खड़े हो गए तब उसने सुनील को देखा..
राज “ok”
ऋचा “कान्हा के लिए सुनील”
राज “ तुम माँ के साथ वापस दिल्ली जा रही हो…”
ऋचा गुसाई “तुम मुझे आर्डर मत दो और तुम सुनील कान्हा जा रहे हो बताओ मुझे”
सुनील “वो”
राज “अपने काम से काम रखो”
ऋचा “मैं वंही रख रही हु समझे कोई कंही नहीं जायेगा”
राज “हम जायेंगे”
ऋचा “No”
राज “यस”
टेबल पर बैठे सब दोनों को देख रहे थे…
ऋचा “ ी साइड No no no मीन्स no”
राज गुसाई से “तुममममम माँ इसे लेकर आप दिल्ली जा रही हो”
ऋचा “माँ को क्यों बिच मई लेट हो मेरी तरफ देख कर बोलो “
राज टेबल पर से गुस्सी से खड़ा हो गया और चला गया ..उसे ऐसे जाते देख ऋचा के आंसू निकल पड़े …और वो बोली “मैं तोह बस इनकी भलाई के लिए हे बोली हु अभी भी खतरा ह इन्हे बड़ी मुश्किल से जिन्दा बचे ह ये”
दिव्या “मत रो मेरी बची …और फिर सुनील की तरफ घूरकर तू क्या देख रहा ह जा उसे समझा
सुनील घबराकर “जी है मैं समझता हु इतना कह वो राज के पीछे चला गया जंहा राज आसमान को घूर रहा था…
सुनील “क्या देख रहा ह”
राज “वडा किया ह पूनम से उसको उसकी खुसिया लाकर दूंगा बिन माँ बाप के रहना तू और मैं अचे से जानते ह फिर वो क्यों रहे उसे तोह उसकी खुसिया मिलनी चाहिए न”
सुनील क्या बोलता क्योकि राज की बात भी सही थी…
राज “और माँ पापा के बारे मई तोह वो हे बता पाए गए न की क्या हुवा था akhir….isliye उन्हें छुड़ाना जरुरी ह”
सुनील “तू आराम कर हम परसो चलेंगे मैं उन्हें समझाता हु”
राज धीरे से कुढ़ से मैं ारः हु आपको छुड़ाने ….चाहे कितनी हे मुसीबते हो कितनी हे सलाखे हो आप तक मैं जरूर पहुँचूँगा ये मेरा वडा ह …
इधर ऋचा “ी साइड no no no सुनील मुझे बहन मानते हो तोह उसे समझाओ”
सुनील “एक काम करो मारो तुम दोनों मेरी गर्दन काट दो इधर तू no no no की रत लगाए बैठी ह उधर उसके लॉजिक सही भी ह तू बता मैं क्या करू”
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का और बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का
राज हीरो ऑफ़ थे फॅमिली
“बैटल फॉर रिवेंज 2
ी साइड no no no"
फलेश बैक …
डेथ हेलो से फाइट होने के बाद जब ऋचा दीपू का ट्रीटमेंट करके मित्युदूत को उसके पास छोड़कर गयी ..उसके बाद…
मित्युदूत घुटनो के बल पास बैठा huva…bahut दुखी था और दीपू को हे देखे जा रहा था “मास्टर आप बहुत छोटे थे जब आपकी माँ ने हमे आपका प्रोटेक्टर बनाया … उन्हें कहा था की हमेशा आपकी रक्षा करे पर ये सरीर उम्र के साथ कमजोर होता जा रहा h….hume पता था ये वक़्त आएगा पर उम्मीद थी की आप जब तक पूरी तरह तैयार हो jayenge…har बार आपकी बात मणि और आपको घायल होते देखा h…aur आज आपकी दूसरी माँ दिव्या को आपकी जरुरत ह वो आपके बिना पल पल अंदर हे अंदर टूट टी जा रही ह और अब तोह आपके पिता का दुश्मन भी उनके पीछे लग गया h…..ap अगर सब सून रहे ह …तोह ये वक़्त आपके सोने का नहीं ये वक़्त आपके जागना का ह और दुश्मनो पर अपना कहर भरसाने का h…ap क्या सोचते ह मुझे पता नहीं ह इस तरह के नींद के इंजेक्शन अपने ट्रेनिंग मई बहुत लिए ह apne…Nirwan परिवार के नायक को आना हे होगा …राज को जागना हे hogaa…..Apke पापा और माँ का दुश्मन हमारे पास सुभे के सूरज के साथ आने हे वाला h….apko जागना होगा मास्टर ये लड़ाई आपकी ह….” मित्युदूत पिछले कई दिएर से यही बात कर रहा था और उसे पता हे नहीं लगा की उसकी बाते कब कुछ मिनट्स से घंटो मई बदल गयी…
तभी ….उसे अपने पीछे आवाज सुनाई दी और उसने अपनी सोर्ड निकल ली …पर पीछे मुड़कर वो हैरानी से देख छोङकर बोलै tuuu…..tu यंहा क्यों ह तुझे दिव्या जी के पास होना चाहिए था न…
मित्युदूत 2 “मुझे अभी दिव्या जी का इमरजेंसी सिग्नल मिला था जब मैं बलराम और उसकी फौज का पीछा कर tha…maine तुम सब से कांटेक्ट करने की कोसिस की पर सिग्नल जाम की वजह से कांटेक्ट नहीं हुवा”
मित्युदूत 1 “ kyaaa….kyaaa हुवा जल्दी बता”
मित्युदूत 2 “वो खतरे मई ह उनके बॉडी गॉर्डस भी कोई जवाब नहीं दे रहे ह”
मित्युदूत 1 “यंहा भी लड़ई होगी ये तय ह मेरा मास्टर के पास होना जरुरी h..r”
मित्युदूत 2 “मैं बस तुझे यही बताने आया था मैंने अज्जू से कहा ह वो ट्रेस करके मुझे बता देगा और सुनील को बताने से और मैसेज करने से मन कर दिया ह मैंने ”
मित्युदूत 1 “ याद रखना मास्टर की माँ ह वो उन्हें कुछ नहीं होना चाहिए ह एक माँ को खो चुके ह और अगर अब दिव्या को कुछ हुवा तोह ये पूरी तरह टूट जायेंगे… सबको मार देना भले हे चाहे उन्हें बचते वक़्त कुढ़ की जान हे क्यों न दांव पर लगनी पड़े पर दिव्या को कुछ नहीं होना चाहिए ह समाज गया”
मित्युदूत 2 “तीख ह मैं जाता हु अलविदा मेरे भाई क्या पता दुबारा मिलकात हो न हो”
मित्युदूत 1 “अलविदा और शान से लड़ना और हो सके तोह जिन्दा वापस आना”
तभी उन्हें पीछे से आवाज आयी “जब दुस्मनी मेरी ह तोह मेरे बिना हे जाओगे” दोनों आवाज सुनकर चौंक गए और पलटकर एक साथ घुटनो पर बैठकर बोले “मास्टर”
राज “ कितना वक़्त हो गया”
मित्युदूत्स दोनों हड़बड़ा गए सीधे सवाल से पर मित्युदूत 2 बोलै “मास्टर पहले हमे जाना होगा मैं बाद मई समझा दूंगा …”
मित्युदूत 1 “ नहीं आप रेस्ट करिये आपको कंही नहीं जाना ह”
राज गुसाई से घूरने लगा और मित्युदूत को दिखाई दी राज की आँखों मई निर्वाण की घुसाई की आग की लपटाइ और वो चुप हो गया …राज ने इधर उधर देखा और उसे दिखाई दिया कौन मई रखा “कुल्हाड़ा” उसने आगे बढ़ उसे उठाया और अपनी पीठ मई टांग लिया और मित्युदूत 2 के साथ गाँव से बहार चिप कर चुप चाप निकल गया …और गाँव से बहार कड़ी थी मित्युदूत 2 की स्पेशल यंहा की मॉडिफाइड बाइक और दोनों सवार हो गए राज ने गाँव के बहार निकलते हुवे बहुत सरे आदमियों को देखा पर बोलै कुछ नहीं…. मित्युदूत 2 की बाइक स्क्रीन पर एक जीपीएस लोकेशन शो होने लगी जो 40 कम दूर की दिखयी दे रही थी उनकी करंट लोकेशन से…
और मित्युदूत ने तुरंत भागी दी बाइक को उस तरफ पीछे बैठा राज इधर उधर देख कर पहचाने की कोसिस कर रहा था की वो कान्हा h…par उसे रह रह कर दिमाग मई झटके लग रहे थे ..और कभी उसकी आंखे नार्मल होती और कभी गुसाई से भड़क उठती …जैसेवो अंदर हे अंदर जल रहा हो ….काफी दिएर बाद बाइक एक फार्महाउस के बहार रुकी …
मित्युदूत 2 “मास्टर क्या हुवा आप तीख ह”
राज “मैं तीख हु पता नहीं बस सर कभी कभी फटने लगता ह अब बताओ क्या हुवा ह”
मित्युदूत 2 “दिव्या माँ की लोकेशन यंहा शो हो रही ह जो की नहीं होनी चाहिए इसका मतलब वो यंहा खतरे मई ह और जबरदस्ती उन्हें यंहा लाया गया ह”
कुछ दिएर पहले इसी फार्म हाउस मई …
“अरे आराम से आराम लाओ हमारी मेहमान ह देखना नाजुक चमड़ी ह …कंही चील न जाये ..”
दिव्या “ओह्ह तुम हो.. ..तोह बाप बीटा और माँ इस हद तक आगये”
बलराम माँ “पहचानती हो मुझे”
दिव्या “तुम्हे कौन नहीं जनता ह तुमने तोह तुम्हारे पति से जायदा गंदे और घिनोने काम किये ह वो तोह मरता हे ह सिर्फ पर तूने तोह छियई बोलते हुवे भी शर्म अति ह मुझे यंहा क्यों लायी ह तुझे बहुत महंगा पड़ेगा ये सब”
बलराम माँ “ ओह्ह इतने तेवर सच mai….mujhe महंगा padega….kya करे जब तुम जैसी धमकी देने लगे तोह हमे हमारी औकात तोह बतानी हे पड़ती ह न”
दिव्या टेडी मुस्कान के साथ “औकात दिख रही ह तेरी इतने आदमियों के साथ ह सेवा तोह तेरी अछि हे हो रही ह यही औकात ह तेरी”
दिव्या की टोन सुनकर और उसका मतलब समाज कर कुंदन की वाइफ ने एक थपड उसे जड़ दिया और अपने हाथ से उसके बल पकड़कर बोली …साली …इनके आगे फेंक दिया तोह कुटिया से जयादा बुरा हल होगा तेरा गईं भी नहीं पायेगी कितने छाडे कितने उतरे सामजी इसलिए मू सोचकर हे खोलना”
दिव्या “गुसाई से उसे देखने लगी …उसकी आँखों मई नफरत साफ़ दिख रही थी”
बलराम माँ पलटकर “ बांध दो साली को और जायदा छू चपड़ करे तोह नंगी करके लटका देना और फिर भी नहीं मने तोह साली को तब तक रगड़ो जब तक दर्द से इसकी चीखे बंद न हो जाये और अकाल तीखाने न अजय…”
दिव्या नफरत से उसे देखती रही पर बोली कुछ नहीं क्योकि उसे पता था की मदद तोह अति हे होगी इसलिए अभी सेफ रहना जरुरी था”
बलराम माँ “शादी करके बलराम भी यही आएगा उस कुटिया डॉ को लेकर …देखना कोई कमी न हो हो स्वागत मई”
आदमी “ठकुराइन सब तयारी ह अपने आदमी चारो तरफ फैले हुवे ह फार्म हाउस के अंदर तोह पक्षी बी पर नहीं मर पायेगा …दारू …लड़किया नाचने वाली सब बस कुछ दिएर मई आजाएंगी रात को जश्न जैसा अपने कहा ह वैसा हे होगा”
ये सब सुन कुंदन की वाइफ मुस्कराने लगी और मू मई दूसरा पान डालकर चबाने लगी और दो जाने उसके पेअर दबाने लगे…
बहार ….
राज के दिमाग मई निर्वाण गुसाई से फैट रहा था और रह रह कर वो राज को गुसा दिला रहा था…
मित्युदूत 2 एक तरफ इशारा करके “मास्टर दिव्या जी को आप अंदर बचने जाईये मैं इनका धयान अपनी तरफ खिंच दूंगा…” इतना कह वो फार्म हाउस की तरफ देखने लगा और जब राज की तरफ से रिप्लाई नहीं आया तोह उसने राज की तरफ देखा तोह चौंक गया और बोलै “ कान्हा गए”
इधर राज के दिमाग मई निर्वाण के गुसाई से और अपनी माँ की जान को खतरे मई जानकार गुसाई से जल रहा tha…aur वो सीधा गेट की तरफ भगा …और एक जम्प के साथ एक पेअर गेट पर और फिर दूसरा रखा और सीधा उड़ता हुवा निचे फार्म हाउस के अन्दर लैंड हुवा…. और उसको ऐसे अंदर लैंड करते देख कर गॉर्ड कर रहे कई सरे आदमियों ने घेर लिया….
“कौन ह बे तट….”
पर बात पूरी होती उसे पहले उसके मू पर पड़ा था राज का पंच और उसका नाक टूट गया और वो हवा मई उडाता हुवा पीछे गिरा और साथ हे मू से टूट कर गिरे आगे के कई दन्त”
अपने साथी की ऐसी हालत देख खड़े आदमियों ने भी राज पर अटैक कर दिया …
राज ने एक के वॉर को डॉज किया और उसके पेट मई घुटने की मरी जिसका प्रेशर इतना था की पीठ से रीद की हठी बहार निकल आयी और वो आदमी कई फ़ीट ऊपर की तरफ उछला और बाकि उसे ऐसे ऊपर कई फ़ीट उछलता देख रूक गए …और उसे ऊपर से निचे गिरते और फिर बिना हिले डुले पड़ा देख सदमे मई चले गए पर वो कुछ सोचते तब तक एक राउंड किक आकर उनके मू पर पड़ी और उन्हें हुवा तेज़ दर्द और वो दर्द उन्हें वापस अपनी दुनिया मई ले aya….awaje सुनकर और भी गुंडों हाथो मई डंडे रोड और धारधार हथियार लिए आगये …..राज ने अपने सामने बचे हुवे एक की गर्दन को पकड़ा और दूसरे हाथ से कान के निचे तेज़ झनातेदार थपड मारा और उसे साइड मई धकेल कर सबको देखते हुवे कुछ बोलने वाला हे था की फिर से सर मई दर्द उठा और उसकी आंखे वापस गुसाई से जलने लगी …राज को ऐसे सर हिलाते देख 2 जाने जल्दी से उसे मरने ए पर अपने हथियार से वो वॉर करते उसे पहले हे उन्हें दिखाई दी राज की लाल आंखे और चेहरे पर भयानक मुस्कान और हाथ मई दिखाई दिया धीरे धीरे बड़ा होता हुवा कुल्हाड़ा जिसका साइज देख हे उनके पसीने निकलने लगे वो पीछे होते उसे पहले हे उनकी आँखों मई आया खोफ्फ्फ और उनकी गर्दन धड़ से अलग हो गयी और फिर राज ने खून को देखा …और उसका दिमाग नार्मल हो गया उसने फिर से अपने सर को हिलाया …उसे फिर से अपने सर को हिलता देख भीड़ मई से कोई आगे नहीं बढ़ा तोह भीड़ को चीयर कर एक 6.5 फिट का लम्बा चौड़ा पहलवान आगे आया ….और राज की तारा बढ़ उसके कंधे को पकड़ लिया ….अपने कंधे पर हाथ देख राज ने सामने देखा और एक झटके से हाथ को झटका और उसकी पकड़ से आज़ाद हो कर एक राउंड काट ते हुवे प उसके पीछे आया और कमर से पकड़कर उसे ऊपर उठाकर अपने पीछे बानी हुवी सीमेंट की चौकी पर जोर से पटक दिया ….पहलवान दर्द से बिलबिलाया हे था की राज ने उसके पेअर के दोनों पंजो को मरोड़ दिया ….और फिर सबकी तरफ देख कर अपने कुल्हाड़े को साइड पटकते हुवे बोलै “चलो ाजाओ”
पर तभी पीछे से मित्युदूत कंफ्यूज होता हुवा आया और बोलै “Nirwaaa…i mean…master हमे गाँव भी पहुंचना ह”
राज ने कन्फूसिओं से देखा…
मित्युदूत “सुनील को आपकी जरुरत ह हमे इन्हे जल्दी मरना होगा फिर बताता हु”
राज ने है मई गर्दन हिलायी
मित्युदूत “ आप अंदर जाईये इन्हे मैं संभालता हु”
राज “तीख ह और वो अपने कुल्हाड़े को पीछे टेंगा कर अंदर की तरफ bhaga…par सामने कई जाने आगये ….
पर राज अब मित्युदूत के कुछ बाते बताने और सुनील का नाम लेने से समाज गया था की मटर सीरियस ह उसने बिना वक़्त गंवाए हे अपने सामने वालो तीन मई से एक को टारगेट किया और दिया पेट मई पूरी तगत से पंच और उसके वार के बाद वो गुंडा सिर्फ सीधा निचे ऐसे हे पेट पकडे गिर गया और फिर दिया दूसरे की गर्दन पर उसके पंच से बचते हुवे किक और वो बस एक साइड सीधा लुढ़क गया और फिर पीछे खड़े की चेस्ट पर भाग कर दी अपने घुटने की और उसकी चेस्ट की हड़िया अंदर धंस गयी टूट कर ….और एक जो नाइफ से वार कर रहा था उसके हाथ को रोक कर उसके नाइफ को उसके हे सीने मई घुसा दिया और ये देख बचे हुवे दो दर से कंपनी लगे …तोह राजने एक को सिर्फ हाथ से मरने का डराया जिसे बचने के लिए वो पीछे भगा तोह दीवार से टकरा कर खुद हे बेहोश गया और बचा एक वो खुद हे दर से हिलता डुलता बेहोश हो गया….
राज …अंदर पंहुचा तोह ….बड़े से हॉल मई दिव्या सामने हे बंधी हुवी थी और एक तरफ गाल लाल हो रखे the…jisai देख राज का गुसा अपने चरम पर पहुंच gaya….aur उसका सरीर गुसाई से कंपनी लगा…
वंही साइड मई बड़े से सोफे पर बैठी कुंडों की वाइफ… अपने खास बॉडीगॉर्ड पहलवानो से अपनी टंगे और कंधे दबवा रही thi…wo बोली … “कौन ह तू जो मौत के मू मई चला आया ह”
पर अब राज राज कान्हा रहा tha…uska दिमाग और निर्वाण आपस मई जुड़ चुके थे और वो बेचारी क्या जाने की जो सामने गुसाई से काँप रहा था अगर उसके बारे मई वो जानती तोह कुछ कहने से पहले हे कंही दूर भाग जाती पर उसके पंडित ने सायद दर से सुबह मुहरत उसकी समस्या को दूर करने का नहीं उनकी मौत का निकला हुवा tha…abhi वो और कुछ कहने के लिए मु खोलती एक हवा का तेज़ झोंखा उसके पास आगया और उसके पहलवान बॉडीगॉर्ड कुछ करते उसे पहले हे एक थपड उसे अपने गाल पर पड़ा …और वो वो सोफे समेत उलटी होकर पीछे गिरे ….अगले 2 मिनट तोह उसे कुछ समाज हे नहीं आया की क्या हुवा और फिर धीरे धीरे होश आने पर उसने देखा की उसके आदमी उसे जगा रहे ह …और हुवा उसे बहुत तेज़ दर्द गाल पर जिसकी वजह से उसकी दर्द से तेज़ आअह्ह्ह निकल गयी और वो बोली जाओ उस कुत्ते हरामी को इतना मारो की कोई हड्डी सलामत न रहे . ..
इधर से दिव्या भी चीखी “इतना तोडना की ये दर्द से चीक चीक कर मर जाये”
दिव्या की चीक सून जंहा कुंदन की वाइफ गुसाई से तिलमिला गयी तोह वंही राज अगले हे पल एक पहलवान के आँखों के आगे आकर सीधे उसके अंडो को पकड़ लिया और अपने हाथो से हे ताकत से मसल दिया और वो पहलवान इतना तेज़ चीखा की आवाज से सबकी हालत ख़राब हो गयी और फिर राज ने उसके गले पर दिया एक पंच जिसे उसकी आवाज भी बंद हो गयी और वो बस निचे पड़ा दर्द से इधर उधर होता रहा बाकि बचे पहलवान बॉडीगॉर्ड्स राज की तरफ भागे तोह राज ने भी एक जम्प के साथ एक कोहनी की दी एक के सर मई और वो बस जिन्दा लाश की तरह भागता हुवा सीधा टेबल पर गिरा और गिरा रह gaya…ab बचे तीन पहलवानो ने एक साथ राज को घेर लिया …एक ने पकड़ने की कोसिस की तोह राज ने साइड हटकर दी उसकी कमर मई किक की और वो आगे जाकर फर्श पर गिरा इसका फायदा उठाकर दूसरा राज के तीख पीछे से आया तोह राज ने बैक फ्लिप लेकर किक जड़ी उसके सर और बिना रुके एक पंच एक घुटने पर फिर दूसरा दूसरे घुटने पर और उसके झुकते हे एक पंच जबड़े पर दिया …और पहलवान चारो खाने चित हो gaya..ab आखिर बचा हुवा राज उसके पास लेफ्ट राइट मूव करते हुवे गया और एक किक उसकी पसलियों पर मरी और हडियो के टूटने की आवाज और दर्दसे एक साइड झुकते हे दी एक किक उसके मू पर और वो पहलवान पीछे की तरफ कई फ़ीट दूर जाकर gira….ab राज कुंदन की वाइफ की तरफ bhada…toh कुंडों की वाइफ चिकि “आगे मत भड़ना वर्ण तू मरेगा”
पर उसने इतना हे कहा था की तड़क तड़क तड़क उसके दोनों गलो पर बेहिसाब थपड पड़े ..और उसका मू कुछ हे पालो मई सूजकर नीला और कला होने laga….par राज यही नहीं रूका और उसके बाल पकड़कर उसे घसीट ते हुवे जोर से दिव्या की तरफ फेंका और फिर दिव्या को खोलकर तुरंत गले लगा लिया और अपनी गोदी मई हे उठा लिया तभी मित्युदूत भी कमिश्नर के साथ अंदर पहुंच गया …
दिव्या बस राज को निहारे जा रही थी…
राज “इस कुटिया को बहार लेकर औ और उधर एक कुत्ता और ह देखना सो कौन ह”
कमिश्नर उस तरफ देख कर “ये तोह कुंदन ठाकुर ह”
राज “ये ऐसा हो गया ह इसे भी ले औ”
Mityudoot”hume गाँव पहुंचना ह वंहा आपके मां की लड़की की शादी जबरदस्ती बलराम के साथ हो रही ह और वंहा खतरा भी ह”
कमिश्नर “है मुझे अज्जू से यंहा की लोकेशन मिली ह और ओप्पोसिशन पार्टी के आदमी भी मदद के लिए आगये ह …अब ये गुंडा राज ख़तम होने का वक़्त ह”
कुंदन और उसकी बीवी को बाँध कर सब चल पड़े गाँव की तरफ…
फलेश बैक एंड्स..
करंट टाइम…
राज ने अंतितोड़े निकली और सुनील को दे दी और उसके चेहरे परलगे खून को पौंछकर बलराम को अपनी खुनी आँखों से देखा ….
बलराम चाचा “कोई बात नहीं भतीजे इनकी दहकती राग हमारे पास भी ह ये दिख रही ह डॉक्टरनी इसकी माशूका ह इसके रहते ये कुछ नहीं karega…”ye कहकर उसने ऋचा के बाल पकड़कर मू ऊपर किया… और ये देखती हे एक भाई का खून क्यों नहीं खोलता वो भड़क उठा ….
सुनील “तू मेरे हाथ हे मरेगा बूढ़े कसम ह मुझे राखी की तेरी मौत बहुत बहुत भयानक होगी ….” माहौल को बुरी तरह गर्माता देख कमिश्नर बिच मई बोलै”
कमिश्नर “मंत्री जी आप स्टेट के मिनिस्टर ह अगर ये सब हुवा तोह पुलिस भी चुप नहीं बैठेगी हमे आप दोनों की दुश्मनी से मतलब नहीं ह पर निर्दोष न मरे इसलिए ये लड़ाई इनदोनो परिवारों के बिच हो तोह तीख ह मामला हम दबा देंगे और सब यही ख़तम क्या कहते ह आप”
मिनिस्टर को भी मामले की गम्बिरता समाज आगयी thi…wo सोच मई पद गया तब दूसरी पार्टी का लीडर बोलै “ है हम भी सहमत ह वर्ण हम भी लड़ने के लिए तैयार ह भले हे चाहे लाशे बिच जाये”
कानून मंत्री “छोटे ठाकुर आप क्या कहते ह ….”
बलराम “मंजूर ह ये दो परिवारों के बिच की ह तोह हम खुद निपटेंगे मंत्री जी आप हैट जाये अपने पार्टीवोर्केर्स के साथ इनसे मैं और मेरे आदमी निपटेंगे ..”फिर जोर से चीख कर मेरी माँ और पापा को छोड़ दो पहले”
राज “लेछोड दिया …” फिर कमिश्नर से “सर आप भी वंहा से ऋचा और बाकि सबको ले जाये ….ये लड़ाई हम दो भाई लड़ेंगे आज”
कमिश्नर “पर ये बहुत सरे ह”
राज के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और तभी मित्युदूत हथोड़ा भी लेकर आगया और सुनील को दे दिया ….
राज “कुल्हाड़ा और हथोड़ा….”
कमिश्नर की टीम मेंबर्स ऋचा सुर बाकी सबको लेकर मंडप से एक तरफ आगये और जंहा सबको काफी दिएर कोसिस करने पर वो होश मई ले ए थे…
अब सिर्फ एक तरफ राज और सुनील खड़े थे तोहक बलराम और उसकी बची हुवी सेना……
बलराम “बस दो लडोगो हमारे इतने सरो के साथ बस अब यही तमाशा बाकि रह गया था” ये कहते वक़्त वो हसने लगा तोह उसके पीछे खड़े आदमी भी हसने लगे….”
तब आवाज ghunjiiii“Nahi तीन…..” फिर कुछ पल बाद एक तेज़ आवाज और ayi“nahi चार” फिर कुछ पल बाद दो और बड़ी भरी भयानक आवाज आवाज आयी “नहीं 6”और अभी सब सोच मई हे थे की दो लास्ट आवाज एक साथ आयी “नहीं 8” और एक के बाद एक sherdil…..rajeev और मैच और माइक और दोनों मित्युदूत आकर राज और सुनील के साइड मई खड़े हो gaye…aur सब के हाथ मई भरी भरकम हथियार थे….
राज ने सबको इतने वक़्त बाद देखा तोह उसके चेहरे पर मुस्कराहट आगयी की इतने वक़्त बाद भी उसके दोस्त भाई उसके साथ कंधे से कंधे मिलकर खड़े थे…..
राज बलराम की तरफ इशारा करके “ये मेरा सीकर ह”
सुनील “और वो बूढ़ा और उसके साथदोनो मेरे”
शेरदिल “तोह फिर बाकि सरे हमारे ह”
मैच माइक “ओह या”
और सबसे पहले भगा सुनील अपने हथोड़े से दिया घुमाकर सबसे आगे वाली की चेस्ट पर वो जितनी तेज़ी से आया था उतनी हे तेज़ी से वापस उड़ते हुवे अपने पीछे आरहे साथियो को लेकर गिरा और फिर दी लेफ्ट लेग की दूसरे की चेस्ट पर और उसे सीधा जमीन पर पटक diya……aur उठाकर अपना हथोड़ा दिया निचे पड़े के सर पर और उसके सर फटा तरबूज की तरह और खून हवा मई उड़ कर दूर तक गिरा और ये सीन देख कर तोह नेता लोगो के साथ खड़े वर्कर भी काँप गए ……और यही हाल वंहा कड़ी पुलिस की टीम का था …जिनके पास जोगिन्दर और चीफ भी पहुंच गए थे …
कमिश्नर “सर ये”
चीफ “तुम्हे बरसो पुराण वो किस्सा याद ह न जब तुम बाद मई यंहा डूएटी के दौरान ए थे”
कमिश्नर “है सर उसे कैसे भूल सकता हु कितनी पुलिस फाॅर्स लगी थी खुद पं को इंस्ट्रक्शंस देने पढ़ गए थे…”
चीफ “ जो सामने वो शख्स दिख रहा तुम्हे”
कमिश्नर “ वो जो हाथ मई बड़ी सी कुहाड़ी लेकर अब तक खड़ा ह”
चीफ “है वही उसकी पहचान जानते हो”
कमिश्नर “नहीं कौन ह वो”
चीफ “वो कौन ह …wo…uska बीटा ह जिसकी वजह से तुम्हारी पहले यंहा डूएटी लगी थी”
और ये सून कर कमिश्नर के सरीर मई झुरझारी दौड़ गयी ..और वो धीरे से बोलै “ये उनका बीटा ह”
चीफ “है और तुम मेरे भरोसे के लोगो मई से एक हो इसलिए इसकी दूसरी पहचान भी ह”
अब कमिश्नर की हालत और ख़राब हुवी और वो पूछा और वो क्या ह सर
चीफ के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और उसके कान मई धीरे से बोले “निर्वाण”
और कमिश्नर के होश उड़ गए ….
इधर इनका बोलना हुवा और उधर से राज का चीखना हुवा “ बलराम” और वो आगे बढ़ा और बिच मई आरहे सबको अपने कुल्हाड़े के एक हे वार से चीरता गया उसके हाथ मई वो भरी भरकम कुल्हाड़ा भी ऐसा लग रहा था की जैसे बचो का हल्का फुल्का खिलौना हो ….इधर बलराम जो पीछे खड़ा था वो भी आवाज सुनकर राज को देखने लगा…
तोह इधर बेहोश होने की वजह से मैच माइक शेरदिल और खूंखार हो गए the…mech के हाथ मई उसके दोनों धारधार हथियार थे जिनको वो ऐसे चला रहा था की हर वॉर मई किसी का हाथ कटा तोह किसी के पेट मई से बड़ा सा घाव से खून के फंव्वारे …और माइक के हाथ हे इतने बड़े थे की खुले हाथ जिसे भी लग रहे थे वो सीधा जमीं पर गिरता तोह बेहोश होता या सायद ऊपर हे पहुंच जाते तोह राजीव भी बराबर तकर देते हुवे हाथ मई पकड़ी रोड से सर पर तोह घुटने पर हे वार कर सबको घायल कर रहा था पर इनसे जायदा खूंखार शेरदिल था जो लड़ाई के बिच मई बेहोश होने की वजह से गुसाई से जल रहा था ….वो सबके बिच जोर से चीखा “ या अली मदद” और अपने हथोड़े जैसा हाथ दिया एक के मू पर उसके हथोड़े की हाथ की पावर से उसकी गर्दन हे टूट gayii…phir दूसरे के कान को पकड़ा और उसका कान हे उखड दिया …और फिर से चीखा और एक को गले से पकड़कर उसके मू पर अपने सर को जोर जोर से मार मार कर उसको जान से हे मार दिया उसे घेर कर खड़े सरे गुंडे दर गए …पर शेरदिल आज शेर से जायदा खूंखार हो गया tha…usne सामने खड़ा मई से एक की चेस्ट पर एक किक मरी और भीडको साइड हटाता हुवा पीछे जाकर gira…..toh फिर अपने लेग को उठाकर एक के मू पर फुल पावर से किक मरी तोह वो कितनी पलटिया हवा मई खता हुवा गिरा किसी को समाज नहीं और फिर अपना भये हाथ का पंच एक के सर पर मारकर उसके सर को हे निचे धंसा diya….aur फिर जोर से ढाहड़ामे laga…aur उसकी दहाड़े किसी घायल खूंखार शेर से भी भयंकर थी उसके अगले कई वार ने किसी के मू के जबड़े तोड़े तोह किसी की पसलिया ….
इधर सुनील सबको अपने हथोड़े से तोड़ता हुवा बलराम के चाचा के पास पहुंच गया तोह बलराम के चाचा के दोनों बॉडी गॉर्ड पीछे से आगे आगये …
सुनील ने अपनी खूंखार नज़रो से उसे घूरा और फिर दोनों बॉडीगॉर्ड्स को देखा जिन्होंने उसकी बहन को चुवा था
सुनील “तेरी मौत के लिए क्या कहा था याद ह न ….”
बलराम का चाचा थोड़ा सा घबराया और बॉडी गॉर्डस से बोलै मार डालो इसे
सुनील हथोड़ो को साइड मई रख कर “एक बार मई मार दिया तोह फिर सुकून कैसे मिलेगा” इतना कह उसने एक बॉडीगॉर्ड के वार को ब्लॉक किया और दूसरे के वार को डॉज किया और निचे घुटने पर बैठ एक के घुटने पर कोहनी का वार किया और कड़क की आवाज के साथ एक सांड जैसा बॉडीगॉर्ड निचे गिरा तोह फिर घुटने की दी उसके मू पर …और फिर दूसरे के वार से बचा फिर अगले एक और आरहे वार से बचा और एक जम्प के साथ उसके एक साइड के कंधे पर अपनी कोहनी की दी और उसकी कंधे की हदी तोड़ डाली जिसे उठे दर्द से वो चीखा भयंकर …फिर भी दर्द को सहनकरते हुवे उसने लात मरी तोह सुनील ने भी अपनी कोहनी को आगे कर दिया दुबारा फिर से एक हड्डी टूटी और वो चीखा ….
सुनील ने दोनों के पीछे खड़े चाचा की तरफ देखा ….और फिर दोनों मई से एक बॉडीगॉर्ड के हाथ को पकड़कर …बोलै …मौत तोह तुझे इस जनम मिलेगी नहीं और जो मिलेगा वो ह सिर्फ दर्द” इतना कह उसने उसके हाथो की उंगलिया फिर कलाई फिर कोहनी की फिर बाजु की हड्डी और गर्दन तक उसके हाथ की साडी हड्डिया तोड़ दी …और वो बॉडीगॉर्ड दर्द से चीक चीक कर बेहोश हे हो गया ….
सुनील की नज़र पीछे खड़े चाचा पर हे थी जो पीछे खिसक रहा था….
सुनील “तुजे आज कोई नहीं बचा सकता ह बूढ़े मेरे हाथो से” इतना कहते कहते वो दूसरे बॉडी गॉर्ड की भी उंगलिया कलाई और फिर कोहनी हाथ की साडी हड़िया तोड़ता गया…
इधर राज का कुल्हाड़ा सबके चीरता फाड़ता जा रहा tha…..aur अपने आदमियों के पीछे खड़ा बलराम गुसाई से राज को देख रहा था…. उसने अपने आदमियों को साइड किया और राज की तरफ भड़ने लगा तोह राज भी तेज़ी से उसकी तरफ भड़ने laga…aur दोनों आमने सामने पहुंचे तोह राज ने हाथ मई पकड़ा कुल्हाड़ा साइड मई फेंक दिया ….
इधर साइड से थोड़ी दूर से देख रहे ठाकुर साब और गाजरंदरा सिंह की भी मुठिया कासी हुवी थी तोह सिमरन और ऋचा भी देख दोनों को हे देख रही thi…sabki अपनी फीलिंग्स और इमोशंस चल रहे थे जंहा ठाकुर साब मन मई बोल रहे थे की “मार डालो इसे दीपू बहुत दुःख दिया ह इसने और इसके बाप ने आज जिन्दा मत छोड़ना “
तोह गजेंद्र सिंह सिम्मी के बाप थे उनकी आँखों मई आंसू थे क्योकि आज उन्हें इस रक्षास से छूटकर मिलने वाला था तोह …सिम्मी की आँखों मई खुसी के आंसू थे की उसका भी भाई ह जो उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ सकता ह जिसके रहते उसे डरने की जरुरत नहीं ह …तोह ऋचा की नज़र एक बार राज की तरफ तोह एक बार शेरदिल और सुनील की तरफ thi….ek भाई के होने का फर्ज निभा रहा था तोह दूसरा देवर होने का ह…
इधर चारो तरफ भीड़ हे भीड़ थी …जंहा कुंदन और बलराम के नारे लग रहे थे दूसरी तरफ से मार डालो मार डालो के नारे लग रहे the….raj और बलराम को आमने सामने देख उनके आसपास के गुंडे भी रूक गए और दोनों को देखने लगे ….
और पहला वार किया बलराम ने राज ने उसके हाथ के वार को रोका और उसके हाथ को पकड़कर उसे अपने ऊपर से उठाकर दूसरी साइड मई निचे पातकडिया….
“चल उठ जा कुस्ती मई हड्डिया तोड़ने का बहुत शोख ह न”
बलराम भी एक झटके से सीधा खड़ा हो गया पर खड़े होते हे राज ने उसके एक बाजु को पकड़ा और दुबारा उठाकर निचे पटक दिया ….बलराम गुस्सी से जमीन पर हाथ मरकर खड़ा हुवा अपने दोनों हाथ को राज के हाथो की तरफ कर दिया और …दोनों के पंजे एक दूसरे के हाथ मई फंस गए दोनों एक दूसरे को धक्का देने लगे …राज की चेस्ट के ऊपर जो गांव बना हुवा था वंहा से खून निकल कर टी शर्ट को भीगा चूका था …बलराम ने अपने एक हाथ को छुड़ाया और राज की उसी चोट पर जोर से धक्का मारा …जिसे रोज की अहह निकल gayiii…par राज को ऐसे गांव का दर्द कान्हा रोकने वाला था वो तुरंत दर्द पर काबू पते हुवे बलराम के सामने खड़ा हुवा और बोलै “सोचा था ईमानदारी से लड़ाई होगी पर तू लायक हे नहीं ह” इतना कह उड़ने एक किक साइड से दी उसके चेहरे पर और फिर दिया पंच उसकी चेस्ट पर वो गिरा अपने पीछे खड़े साथियो पर और उसके गिरते हे उसके साथी आगे ए तोह शेरदिल भी आगया और बोलै इन्हे मैं देखता हु तू मार सेल को और शेरदिल टूट पड़ा बलराम के गुंडों पर …और घायल शेर के सामने जंगली कुत्ते आज कान्हा तिखने वाले थे उसने चीरना फाड़ना सुरु कर दिया इधर राज ने बलराम के ारहए पंच के वार को रोका और उसके पेट मई दी घुटने की और वो झुखा निचे तोह एक पंच दिया उसके जबड़े पे वो हवा मई उछाला तोह उसकी एक टांग को पकड़कर उसे घूमकर साइड मई फेंक दिया…
इधर बलराम के चाचा ने सुनील को अपनी तरफ एते देखते हे अपनी गन निकल ली और उसके चेहरे पर मुस्कराहट आगयी पर वो हंसकर मू फाड़ता उसी पहले हे अगले हे पल एक खंजर उसकी गन वाली कलाई मई धंसा हुवा था…
“बूढ़े ये खेल 10साल की उम्र से खेलतः हुवा ारः हु इतना कह वो टेक्सी से आगे बढ़ा और चाचा को सब गोल घूमता हुवा फिखायी दिया और जब उसे होश आया तोह वो जमीं पर निचे गिरा हुवा tha…wo चीखा जोर se…huva ये था की सुनील ने उसे हवा मई उठाकर राउंड घूमते हुवे जमीं पर जोर से पटका था जिसकी वजह से कई सेकण्ड्स तक चाचा की चेतना गड़बड़ा गयी थी…. और चाचा के दर्द से कराहते हे सुनील ने दिया अपने शूज उसके पिछवाड़े के बिछे मई और चाचा और जोर से चीखा फिर सुनील ने हाथ से उसकी गुड्डी को पकड़कर उसे ऊपर उठाया और दी घुटने की रीद की हड्डी पर चाचा हवा मई उछाल कर दुबारा पिछवाड़े के बल गिरा और बिना पानी की मछली की तरह तड़फड़ाने लगा…
सुनील “अभी तोह सुरुवात ह” इतना कह उसने उसे अपने कंधे प् उठा और डंडे को तोड़ते ह वैसे दिया झटका और चाचा को उठाकर निचे पटक दिया और चाचा इतना चीखा की दर्द से उसका मूट निकल गया ..
सुनील “अब डॉ भी तुझे जोड़ नहीं पायेगा” फिर उसके हाथ को इतनी पर ट्विस्ट किया की ये समझना मुस्की हो गया था की ये हुवा तोह हुवा कैसे ….चाचा को बेहोश देख उसने एक बार राज की तरफ देखा जो बलराम से लड़ रहा था….
राज “चल uth”par बलराम के उठते हे राज ने अपना घुटना जम्प के साथ उसके मू पर मारा तोह वो मू से खून थूकता हुवा निचे जमीं पर गिर gaya…phir वो कुंदन की तरफ भाड़ा और उसे और बलराम को पैरो से पकड़कर घसीट ते हुवे अपने नाना के पास ले आया और सामने पटक diya…toh इधर से सुनील ने चाचा को लेकर पटक दिया …
राज “मेरी माँ और पापा आपसे बहुत बार माफ़ी मांगने ए पर अपने माफ़ नहीं किया …मान सकता हु आप गुसा थे पर इतने सालो तक अरे पत्थर भी पिगल जाता ह …और वो तोह आपकी सपनी बेटी थी न …एक बाप इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता ह…….”
राज के हर सब्द तीर की तरह चूब रहा था ठाकुर साब के दिल मई…
राज “ आज आपको संकट से निकल कर मैंने अपने माँ की ीचा को पूरा कर दिया ह वो चाहती थी की आप हमेशा खुस रहे आज से आपको कोई दिकत नहीं होगी …..इतना कह उसने कुंदन की गर्दन मरोड़ दी और यही हाल उसने बलराम का किया ….और फिर सुनील ने भी चाचा की गर्दन को तोड़ दी…
राज चलो अब काम ख़तम हुवा उसके कदम उठे हे थे किसी ने पीछे से आयकर उसे अपनी बांहो से जकड लिया …और बोली “नहीं भाई आप हमे छोड़कर ऐसे नहीं जा सकते ho…main अपने भ्सी को अब दूर नहीं जाने दूंगी”
राज ने धीरे से पीछे से सिम्मी को आगे लाया और बोलै …मैं तुमसे कभी दूर नहीं हु एक बहन को जब भी जरुरत पड़ेगी ये भाई आएगा ये वचन ह मेरा”
तोह ठाकुर साब भी बोले “बीटा दीपू हमे भी तुमसे बात करनी ह तुम्हारी माँ के बारे मई रूक जाओ”
सुनील ने भी कंधे पर हाथ रख कर कहा “आज की बात ह रूक जा”
और राज के है बोलते हे सब खुस हो गए सिवाए एक के जो राज की बेरुखी से बहुत दुखी थी पर उसने कुछ नहीं बोलै …इधर चीफ और जोगिन्दर ने सब कुछ संभल लिया और मंत्री भी कुछ नहीं बोलै क्योकि सामने का सन देख सब डरे हुवे थे अब ओप्पोसिशन का पलड़ा भरी था इसलिए मौत का दर सबको चुप करने के लिए काफी था ऊपर से कमिश्नर का खोफ्फ़ की पुलिस भी अब सपोर्ट नहीं करेगी मंत्री ने तुरंत हे स्तीफा दे दिया और सर्कार गिर गयी ……
इधर शामे डे नाईट मई….
काफी दिएर राज और ठाकुर उमेद सिंह ने खूब साडी बाते करि ….और खाने के वक़्त हे बहार ए…. कुछ वक़्त पहले हे अंदर जाने से मैच और माइक ने रविंदर सिंह के बारे मई राज को बता दिया tha…raj रूम से एते हे खाने की टेबल पर बैठा तब …सुनील “वो टिकट्स बुक हो गयी ह” ये सून ऋचा के कान खड़े हो गए तब उसने सुनील को देखा..
राज “ok”
ऋचा “कान्हा के लिए सुनील”
राज “ तुम माँ के साथ वापस दिल्ली जा रही हो…”
ऋचा गुसाई “तुम मुझे आर्डर मत दो और तुम सुनील कान्हा जा रहे हो बताओ मुझे”
सुनील “वो”
राज “अपने काम से काम रखो”
ऋचा “मैं वंही रख रही हु समझे कोई कंही नहीं जायेगा”
राज “हम जायेंगे”
ऋचा “No”
राज “यस”
टेबल पर बैठे सब दोनों को देख रहे थे…
ऋचा “ ी साइड No no no मीन्स no”
राज गुसाई से “तुममममम माँ इसे लेकर आप दिल्ली जा रही हो”
ऋचा “माँ को क्यों बिच मई लेट हो मेरी तरफ देख कर बोलो “
राज टेबल पर से गुस्सी से खड़ा हो गया और चला गया ..उसे ऐसे जाते देख ऋचा के आंसू निकल पड़े …और वो बोली “मैं तोह बस इनकी भलाई के लिए हे बोली हु अभी भी खतरा ह इन्हे बड़ी मुश्किल से जिन्दा बचे ह ये”
दिव्या “मत रो मेरी बची …और फिर सुनील की तरफ घूरकर तू क्या देख रहा ह जा उसे समझा
सुनील घबराकर “जी है मैं समझता हु इतना कह वो राज के पीछे चला गया जंहा राज आसमान को घूर रहा था…
सुनील “क्या देख रहा ह”
राज “वडा किया ह पूनम से उसको उसकी खुसिया लाकर दूंगा बिन माँ बाप के रहना तू और मैं अचे से जानते ह फिर वो क्यों रहे उसे तोह उसकी खुसिया मिलनी चाहिए न”
सुनील क्या बोलता क्योकि राज की बात भी सही थी…
राज “और माँ पापा के बारे मई तोह वो हे बता पाए गए न की क्या हुवा था akhir….isliye उन्हें छुड़ाना जरुरी ह”
सुनील “तू आराम कर हम परसो चलेंगे मैं उन्हें समझाता हु”
राज धीरे से कुढ़ से मैं ारः हु आपको छुड़ाने ….चाहे कितनी हे मुसीबते हो कितनी हे सलाखे हो आप तक मैं जरूर पहुँचूँगा ये मेरा वडा ह …
इधर ऋचा “ी साइड no no no सुनील मुझे बहन मानते हो तोह उसे समझाओ”
सुनील “एक काम करो मारो तुम दोनों मेरी गर्दन काट दो इधर तू no no no की रत लगाए बैठी ह उधर उसके लॉजिक सही भी ह तू बता मैं क्या करू”
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का और बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का


