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PART -3 (दीप्ति)
आर्यन को रति ने बहार भेजा तोह आर्यन बोलै," आप थोड़ी बाद नाहा लेना पहले जरूरी बात कर लेते हैं".
दोनों बहार आये तोह गीता और मीणा एक दुसरे को छेद रहे थे.... आर्यन ने जाकर मीणा का गाल चूमा फिर गीता को किसी किया और उसके पास बैठकर बोलै ," मीणा कॉफ़ी आर्डर कर दे सबके लिए ".
रति भी सोफे पे बेथ गयी तब आर्यन बोलै," माँ मीटिंग में सब अपनी बात बोलेंगे तब तुम चुप रहना जब सब फाइनल हो जाये तब लास्ट मोमेंट पे डील कैंसिल कर देना ".
रति ॉश्चारिये से आर्यन को देखकर," अगर डील कैंसिल hi करनी थी तोह में जयपुर क्यों आयी हूँ? "
आर्यन हसकर ," एक्साक्ट्ली , अब मेरी माँ ने सही क्वेश्चन किया , हम सब जयपुर क्यों आये ?..... क्यों गीता रानी हम सब जयपुर क्या करने आये हैं िश से ाचा तोह हम दिल्ली में hi थे? ".
गीता और रति दोनों आर्यन का मोह ताकने लगी ...... मीणा भी इण्टरकॉम से आर्डर कर आर्यन के बगल में बेथ गयी.
मीणा ," नानी माँ तोह बिज़नेस डील के लिए आयी हैं और गीता दीदी अपनी फ्रेंड दीप्ति से मिलने , करेक्ट ".
आर्यन ने मीणा की नाक पकड़ के हिलायी," रॉंग, मेरी प्यारी भेना बात कुछ और है , अब चूँकि बात मुझसे रिलेटेड है तोह बोल दो हम मिलकर कुछ सलूशन निकालेंगे ".
गीता ने आर्यन को देखा ," दीप्ति भी तुझसे प्यार करती है और शादी करना चाहती है , मुझे भी वह ाची लगी फिर ख़ज़ाने को ढूंढ कर hi हम उसके प्राण बचा सकते हैं इशलिये तुझे जल्दी जयपुर बुलाने के लिए में यहाँ आ गयी ताकि दीप्ति को भी ाचे से जान सकूँ और फिर मुझे लेने तू पक्का आएगा यह विश्वास था".
आर्यन सीरियस होकर ," चलो मान लिया दीप्ति की जान खतरे में है और में उसकी जान बचा दूंगा लेकिन उसके लिए शादी करनी जरूरी तोह नहीं ".
गीता ," नहीं ,सच्चे दिल से एक दुसरे को अपना कर hi तुम दोनों ुष ख़ज़ाने और तलवार तक पहुंच सकते हो नक़्शे की मदद से ऐसा बड़े गुरूजी ने मुझे सपने में बताया था ".
मीणा ," लेकिन भाई तुझे दीप्ति को एक्सेप्ट करने में इतनी दिक्कत क्या है ?".
आर्यन ," पहली बात वह हमारे खानदान के बारे में कुछ नहीं जानती , दूसरा वह मुझे भी कहाँ जानती है और तीसरा ुष तलवार से उसके अपनों का खून में भीगूंगा सबसे पहले, उसके बाप की गर्दन उदा दूंगा जिसने मेरी चंदा रानी को मारने की कोशिश की "...... आर्यन थोड़ा गुस्सा में बोलै.
मीणा ," कोशिश तोह कईओं ने की और उसने भी की है लेकिन वह छू भी नहीं पाए फिर भाई हम ने भी तोह उसके आदमी मार काट के ुष को सबक सीखा तोह दिया hi है न और दीप्ति की जान बचा के तुमने उसके घरवालों को बेमोल खरीद लिया है ".
रति भी समझते हुए," देख आर्यन कोई भी लड़की कैसे यह देख पायेगी की उसका होने वाले पति ने उसके बाप को मार दिया, में जानती हूँ ुष राजा ने गलत किया है फिर भी उसको मारने के बात दिल से निकाल दे".
गीता भी थोड़ा सीरियस होकर," देख में जानती हूँ तू उसको माफ़ नहीं करेगा दीप्ति से मिलकर मुझे उससे अपनापन सा लगा, वह अच्छी लड़की है इशलिये में मान गयी देख मीणा और माँ ( रति) से तेरी शादी के लिए मैंने कभी मन नहीं किया यह दोनों भी तुझसे शादी कर रही हैं लेकिन दीप्ति की बात मान नई पड़ेगी मेरे लिए".
आर्यन कुछ सोचकर ," ठीक है फिर तुमको भी किसी और को भी अपनाना पड़ेगा मेरे लिए".
गीता सपाट लहजे में बोली ," सारू दीदी के लिए में कभी सपने में भी ना नहीं बोल सकती फिर उनकी वजह से तू दीप्ति की जान बचा सकता है मगर तू ने मुझे खुद क्यों नहीं बताया ".
सारू का नाम सुनकर आर्यन और रति चौंक गए इसको किसने बताया तब मीणा बोली," सारू मम्मी और मुझे सब सच बताना hi पड़ा गीता दीदी को और अब इनको भी कोई ऐतराज़ नहीं".
रति तोह सबसे ज्यादा सदमे में थी दीप्ति और सारू के लिए गीता इतनी आसानी से कैसे मान गयी ......
मीणा ," आर्यन एक बात हमेशा याद रखना अगर कभी किसी भी लड़की को गीता दीदी ने तुमसे शादी करने से मन किया तोह यह बात तुमको मान नई होगी ".
आर्यन बहोत खुश होकर ," अपनी चंदा रानी के लिए कुछ भी, गीता तुम को मम्मी के लिए कोई दिक्कत नहीं है यह बात जानकार में कितना खुश हूँ बता नहीं सकता. तू कुछ भी कभी भी कुछ भी मांग लेना में मन नहीं करूँगा "...... गीता को बाँहों में खींच लिया और उसका माथा और दोनों गाल को चूमा.
तभी बेल्ल बजी तोह नीला ( डॉ अंजू की पर्सनल बॉडी गार्ड) कॉफ़ी लेकर आयी थी ...... उसकी ड्यूटी थी कोई भी बहार का आदमी hi क्या परिंदा भी पर नहीं मरेगा िश फ्लोर पैर ...... 10 गार्ड्स बस िश फ्लोर को अंदर से और 10 दूसरी आसपास की बिल्डिंग से स्नाइपर गन लिए गार्ड कर रहे थे.
कॉफ़ी पीते हुए आर्यन बोलै," तुम सबकी हाँ के बाद में दीप्ति का हाथ उसके बाप से मांग लूंगा पैर एक शर्त पे की पहले मेरी शादी गीता से होगी उसके बाद hi किसी और से ".
मीणा हसकर," और भी शर्तें बता तू , पहले दीप्ति से खुले दिल से मिल फिर तेरी शर्तें हम भी देखते हैं, वह नाम की hi नहीं दिल की भी राजकुमारी है ".
रति भी हसकर ," मीणा सच्च hi बोल रही बहोत ाची नेचर है उसकी तुझे बहोत पसंद आएगी लेकिन पहले मेरी मीटिंग और डील का तोह कुछ कर मेरा बहोत ज्यादा लोस्स हो जायेगा, बहोत इन्वेस्टमेंट टाक पे लगा हुआ है ".
आर्यन हसकर ," एक काम करो िश डील की एक कॉपी रीता डार्लिंग ( आर्यन की छोटी मामी) को अमेरिका भेजो अभी ,फिर देहको सब तुम्हारे हक़ में होगा और हाँ डील लास्ट मोमेंट पे hi कैंसिल करना".
रति अभी भी थोड़ा हिचकिचा रही थी पर उसको पता था आर्यन एक पैसा भी वास्ते नहीं करता वह पक्का कोई दूसरा प्लान भी बनाया होगा .
कॉफ़ी पीकर गीता और रति रेडी होने चले गए मीटिंग के लिए तब मीणा बोली ,"में दीप्ति को तेरे पास भेजती हूँ, यहाँ से जाने से पहले उसको प्रोपोज़ जरूर कर देना ".
आर्यन ने मीणा का गाल चूमा ," यह कुछ जल्दी नहीं होगा मीणा डार्लिंग ".
मीणा ," देख पर्पस न भी करना लेकिन उसको अहसास जरूर दिला देना की वह साड़ी रात तेरे प्यार और तुझसे मिलने के लिए तड़पे ".
आर्यन ," उससे क्या होगा ?" अपने मैं में ( अब इसको क्यों बताये की में दीप्ति से ज्यादा तड़प रहा हूँ मिलने के लिए लेकिन यह कैसे हो सकता है , आज सिर्फ दूसरी मुलाकात hi हुयी है और अजीब से बेचैनी है )
मीणा ने आर्यन के गाल पे अपनी जीभ से चटकारा मारा सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ..... " सुहागरात को जल्दी मिलान के लिए रेडी हो जाएगी ".
आर्यन हसकर ," अभी ुष में टाइम है पहले गीता ....."
मीणा ," नहीं तुमको दीप्ति से शादी तोह करनी hi होगी लेकिन सबसे सीक्रेट रखकर फिर गीता से महापंचयत में शादी करने के बाद विधिवत शादी कर सकते हो दीप्ति से , कैसे सब होगा में बाद में बाटूंगी तू बस दीप्ति पे फोकस कर , में सबको शॉपिंग पे ले जाउंगी और जयपुर भी घुमा दूंगी ".
आर्यन कुछ सोचकर ," देख मीणा तुझ में भी तोह कई पावर्स हैं तोह एक काम करना िश अणि की बच्ची की पावर को न्यूट्रल कर देना नहीं तोह दीप्ति मेरी सुहागरात आज hi करवा देगी..... में दीप्ति के सच्चे प्यार का खालिस (पुरे) अहसास महसूस करना चाहता हूँ ताकि उसको दिल से अपना सकूँ".
मीणा हसकर ," नहीं अणि कुछ नहीं करेगी उसको सबक मिल गया है, में दीप्ति को भेजती हूँ ". ( अपने मैं में, िश घड़ी को अभी भी नहीं पता इश्कि खुद hi अपनी माँ छोड़ने पे इसको उसकी पावर मिल गयी है, अब कोई जादू क्या तंत्र मंतर , यग्न या काली सकती िश पे असर नहीं करेगी )
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आर्यन दुसरे वाशरूम में जाकर फ्रेश होकर बहार आया तोह रति उसके लिए 3 पीेछे सूट और तय निकाल के बीएड पे रख के नहाने चली गयी थी ..... आर्यन फ़ोन पे रीता से अमेरिका बात करते हुए अपने कपड़े उतर के अंडरवियर बनियान में इधर से उधर टहल रहा था .....
तभी दूर रिंग हुयी तोह टॉवल लपेट के बैडरूम से बहार आ सुईठे का दूर खोला फ़ोन पे बात करते हुए ..... सामने दीप्ति को देखकर ," एक मं. बाद में कॉल करता हूँ ".
दीप्ति
दीप्ति भी आर्यन को सिर्फ टॉवल और बनियान में देखकर हड़बड़ा गयी..... अपनी नज़र झुका के शर्मा के बोली," गीता दीदी ने बुलाया था , वह कहाँ हैं?"....... आर्यन समझ गया मीणा ने भेजा होगा उसने बात घुमा दी....
आर्यन हसकर ," तोह बहार क्यों कड़ी हो अंदर आयो "...... दीप्ति थोड़ा झिझक के साथ अंदर आयी तोह आर्यन ने दूर लॉक किया फिर बोलै ," क्या तुम मेरी सूट पहने में हेल्प करोगी , अभी एक बिज़नेस मीटिंग में माँ के साथ जाना है ".
दीप्ति की धड़कन तोह पहले से hi बढ़ी हुयी थी ऊपर से आर्यन ने जब हेल्प करने का ऑफर दिया तोह कैसे मन कर सकती है अपने सपनो के राजकुमार को ...... दीप्ति ने सर झुका के कहा ," जी कहिये में आपकी क्या मदद करूँ ".
आर्यन ," में सूट दाल के आता हूँ फिर आप तय में क्नॉट लगा देना , आप बैठिये कड़ी क्यों हैं "....... दीप्ति सोफे पे बेथ गयी और आर्यन अंदर बैडरूम में जाकर शर्ट और सूट पेण्ट डाला फिर गले में तय बिना बंधे दाल लिए और सोचा चलो आज दीप्ति से hi तय की क्नॉट लगवाता हूँ बहोत मजा आएगा .
दीप्ति सोफे पे बैठी अपने हाथों को आपस में रगड़ रही थी बेचैनी के कारन आगे क्या होगा , क्या में उनको ाची नहीं लगती ..... बात तोह ऐसे करते हैं जैसे मुझे बरसो से जानते हों पर न मुझे गले लगते हैं न प्यार भरी बातें करते हैं ...... वैसे आज मेरी तारीफ भी की , हाथ भी अपने हाथ में लिए , गीता दीदी को कितनी पशनातेली किश किया था काश मुझे भी करते.... ुष दिन भी बोले थे तुम बहोत सूंदर हो ....... भगवन जल्दी hi मेरे प्यार की जोत उनके दिल में जला दे , दोनों हाथ जोड़कर ऊपर वाले से प्राथना की .
आर्यन ," क्या हुआ इतना सीरियसली क्या मांग रही हो भगवन से , मुझे नहीं बाँटोगी ".
दीप्ति ने आँख खोल के आर्यन को देखा और मुस्करा के बोली ," नहीं ऐसी कोई बात नहीं है और यह आपने किस तरह से सूट पहना है "...... और मंद मंद मुस्कारने लगी .....
आर्यन भी हसकर," मैंने सोचा अगर मेरे पहने में कुछ कमी रही तो फिर कपडे खोलने पड़ेंगे िश लिए ऐसे hi आ गया अब आगे आपकी बारी ".
दीप्ति स्माइल के साथ ," ठीक है फिर पहले शर्ट इन कीजिए और सूट की जैकेट के बटन भी लगा लीजिए "...... आर्यन वैसे hi करता है पर उसको लगा दीप्ति पास नहीं आ रही है कुछ करना पड़ेगा ......
लेकिन दीप्ति तोह आर्यन की हॅंडसमेनेस्स में खोयी थी , वह उसके चेहरे के एक एक अंग को अपने मैं मंदिर में बसा रही थी ...... नीली बड़ी बड़ी आंखें , ऊँचा माथा , वेवी ब्लैक हेयर , गूरे गाल , पिंकिश आकर्षक लिप्स , लम्भी नाक , डिम्प्लेड चीन , बलिस्त लम्बी गर्दन , चौड़ा सीना , पुष्ट कंधे , 7फट के करीब हट ....... कितना सूंदर है उसके सपनो का राजकुमार ...... ुष सपने वाली मूरत से भी ज्यादा हैंडसम.....
आर्यन ," अब तय तो आपको hi क्नॉट करनी होगी".
दीप्ति ने आर्यन को देखा तोह उसने जांभोज के आधी शर्ट इन की थी और सूट जैकेट के आधे बटन ऊपर निचे लगा लिए थे ...... दीप्ति हसकर उसके पास पहुंची ," आपको तोह कपडे पहना भी नहीं आता , क्या मुझे इज्जाजत है ".
आर्यन ने सर हिलाकर कहा ," येह व्हाई नॉट ?".
दीप्ति ने अपनी चुनरी एक साइड अपनी कमर पे कासी और आर्यन की शर्ट पेण्ट से भर निकाल उसकी पेण्ट का हुक खोल पहले हाथ से चरों तरफ से अंदर डाली तभी आर्यन ने दोनों हाथ उसके कंधे पे रखे तोह उसने नज़र उठा के आर्यन को घूरा .....
आर्यन ने अपनी नज़र निचे कर ली जैसे सॉरी बोल रहा हो लेकिन हाथ नहीं हटाए ..... दीप्ति ने आर्यन के झुके सर देखते हुए उसकी पेण्ट का हुक बंद किया और बेल्ट भी लगाई निच्चे नज़र करके तब आर्यन अपना सर उठा उसके चेहरे को देख रहा था कितनी सूंदर है , बिलकुल गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ हैं...... मैं कर रहा चूम लूँ इज्जाजत हो तोह .....
दीप्ति ," हाँ हैंण्ण्ण्न ......."
आर्यन हड़बड़ा के ," तुम ने सुन्न लिया क्या?"...... दीप्ति उसकी आँखों में देखते हुए ," आपने कुछ बोलै था क्या ".
आर्यन ," नहीं नहीं , में क्या बोलूंगा ".
दीप्ति मैं में मुस्कारते हुए ," बोलना तोह आपको hi पड़ेगा वह भी आज hi नहीं तो में आपसे बहोत दुर्र चली जाउंगी ".
आर्यन भी उसकी आँखों में देख रहा था , दोनों जैसे खो से गए थे तभी आर्यन ने दीप्ति को अपने पास करना चाहया अपने दोनों हाथों से जो उसके कंधे पे थे ....... दीप्ति जैसे होश में आयी और अपना हाथ उसके सीने पे रख दिया एक कदम आगे होकर ," अब तय की क्नॉट लगा देती हूँ ".
आर्यन भी खुद को सँभालते हुए अपने दोनों हाथ उसके कंधे से हटा लिया और थोड़ा सीरियस सा हो गया तब दीप्ति ने पहले जैकेट के बटन बंद किये फिर उसकी शर्ट के कालर खड़े करते हुए तय की लेंथ चेक करते हुए बोली," आप जानते हैं आप पहले पुरुष हैं जोह हम को चुने के बाद भी जिन्दा हैं ".
आर्यन ," हाँ बताया तोह था आपने ुष दिन लेकिन अगर आपको बुरा लगा तोह में नहीं चुहुन्गा ".
दीप्ति तय की क्नॉट बनाते हुए बोली," हमने कब कहा हमको बुरा लगा ?" ....... और नज़ारे उठके आर्यन की आँखों में देखि जैसे कह रही हो छू लो मुझे जी भर के कभी मन नहीं करुँगी.
आर्यन भी उसको तैसे करते हुए ," डर लगता है कहीं मेरा हाथ लगने से आपकी सुंदरता मैली न हो जाये? "...... आर्यन भी उसकी झील सी नीली बड़ी बड़ी आँखों में देख रहा था और दीप्ति के दोनों हाथों पे अपने हाथ रख दिया ......
दीप्ति ने क्नॉट लगा दी थी और जोह हाथ तय पे थे उनको आर्यन ने अपनी हाथों की ग्रिफत में ले लिया था....... दोनों फिर से खो गए पर िश बार दीप्ति ने एक कदम और आगे बाध्य और अब आर्यन से सिर्फ 2 इंच की दुरी पर कढ़ी थी ......
आर्यन ने अपना एक हाथ हटा के जैसे hi दीप्ति की कमर पे रखा , वह बस तड़प के उसके गले में बाहें दाल झूल सी गयी , अह्हह्ह्ह्ह Mahiiiiiiiiiiiii , आर्यन का दूसरा हाथ भी उसकी पतली कमर पे कास गया और उसको अपनी आगोश में बांध लिया .......
सायद इसी को कहते हैं दो आत्मा का बर्षों के बाद आलिंगन , ना जाने क्या रिश्ता था दोनों का लेकिन इसका अहसास बहोत घेरा था ...... दीप्ति अपने प्रीतम की बाँहों में जैसे प्रफुलित होकर रू दी, ऐसा लगा रेगिस्तान में सैकड़ों बरसो बाद बारिश हुयी हो..... दीप्ति ुष दिन भी आर्यन के गले लगी थी पर आज अहसास कुछ और था ..... आज आर्यन ने खुद उसको बाँहों में लिया था ......
समय जैसे रुक सा गया था , दोनों एक दुसरे को सेहला रहे थे पर दोनों के आधार ( लिप्स) खामोश थे ...... जुबान की जरुरत इंसानो को होती है दो सच्चे प्रेमियों को नहीं , वह तोह अपनी बातें एक दुसरे के दिल की धड़कन सुनकर hi समझ जातें हैं...... सायद यही है खालिस सोना ( पुरे गोल्ड) जैसा सच्चा प्रेम होता है न कोई चल कपट न कोई दुवेश .... बस प्यार hi प्यार बेसुमार....
दीप्ति को रोटी देख आर्यन ने उसकी पीठ से अपने हाथ हटा के उसके चेहरे को पकड़ के पीछे किया और बड़े प्यार से उसके आंसूं पहुंचा ," रोने से िंह आँखों की शोखियाँ क्यों ख़तम कर रही हो जबकि यह तोह किसी मिरघनैनी की चंचलता जैसी हमेशा सूंदर दिखनी चाइये मेरी बस एहि खाविश है ".
आर्यन ने अपने होंठो से उसके गरम माथे को चूमा तोह दीप्ति का पूरा सरीर कांप गया उसकी आंखें बांध हो गयी िश प्यार की अनुभूति से , आर्यन ने फिर उसकी दोनों पलकों को बारी बारी चूमा ," दीप्ति आप बहोत सूंदर हो, दुनिया की सबसे खूबसूरत परियों की राजकुमारी हो में तुमको ....... "
टिंग टोंग टिंग टोंग ...... दूर बेल्ल बजी तोह दोनों होश में आये और रति जोह छुपकर बैडरूम के दूर के पीछे से दोनों का प्रेम प्रसंग देख रही थी सोची , अब hi गति बजनी थी आर्यन बस अपने प्यार का इजहार करने वाला था ...... आर्यन ने दीप्ति से अलग होकर दूर खोला तोह गीता एक सूंदर ड्रेस में अंदर आयी और दीप्ति को देखकर बोली ," तू यहाँ क्या कर रही है और तेरी आंखें क्यों लाल है , िशने तुझे रुलाया है क्या अब बताती हूँ इश्को "......
दीप्ति झट से ," नहीं दीदी इन्होने कुछ नहीं कहा बस आँख में कुछ कचरा चला गया था "......आर्यन भी हताश होकर िश चंदा रानी को भी अभी आना था .......
आर्यन ने गीता की कमर में हाथ दाल के उसके पीछे से चिपट के कहा ," हमको तोह आपके हुस्न ने hi घायल कर दिया है चंदा रानी "..... पुछःह पहुछठ.....
गीता को ाचा तोह लगा पैर दीप्ति के सामने वह अपना रॉब बना के रखने वाली थी ," अच्छा अच्छा ठीक है जैड़ा मस्का मत मार और सबके सामने जब देखो मुझसे चिपक जाता है अभी शादी नहीं हुयी है "...... वह दीप्ति को दिखा रही थी आर्यन उसकी ऊँगली पे नाचता है .....
आर्यन ने दीप्ति को देखकर कहा," आप hi बतिये दीप्तिजी , क्या अपनी होने वाली घरवाली को प्यार करना अपराध है ".
दीप्ति भी आर्यन की आँखों में देखते हुए," अपराध तोह नहीं है लेकिन िकान्त में अपने प्यार का इजहार करना चाहिए ".
आर्यन भी उसको देखते हुए गीता का गाल चूमकर दीप्ति को देखा जैसे उसको किश किया हो ," वह क्या है न हम आशिक थोड़ा दुसरे किस्म के हैं अकेले में तोह टूट के प्यार करेंगे तब तोह कोई शिकयत नहीं होगी न ".
गीता ने भी आर्यन का गाल चूमा," अब छोड़ मुझे बड़ी मुश्किल से मेकअप किया है ख़राब हो जायेगा ".
आर्यन से अलग हो दीप्ति से बोली ," दीप्ति में तोह आर्यन के साथ मीटिंग में जा रही हूँ , तुम मीणा के साथ शॉपिंग पे चली जायो नहीं तोह बोर हो जायेगी ".
दीप्ति ," नहीं दीदी में वापस जाउंगी , मुझे भी आज किसी से मिलना है"...... यह बात उसने आर्यन को देख के कही .....
आर्यन ," चंदा रानी , तू जा के माँ की रेडी होने में हेल्प कर में दीप्तिजी को मीणा के पास छोड़ देता हूँ मुझे अणि से भी बात करनी है ".
गीता अंदर बैडरूम में गयी तोह आर्यन भी अपना सेलफोन उठा के दीप्ति के साथ सुईठे से बहार आया ," तोह आप हमारा इंतज़ार करेंगी ".
दीप्ति निगाह निचे रखे हुए," आप को किसने कहा , हम क्यों इंतज़ार करेंगे?".
आर्यन ने दीप्ति का हाथ पकड़ के चूमा ," आपकी आंखें तोह एहि कहती हैं, में जरूर आऊँगा बस थोड़ी डिअर होगी सू मत जाना "...... दीप्ति बस शर्मा गयी ..... दिल में कितनी खुसी थी बस वह hi जानती थी .....
दूसरे सुईठे में मीणा के पास दीप्ति को छोड़कर आर्यन, अणि के सुईठे में गया तोह अणि अपनी सेकेटरी और 2 अफसर को इंस्ट्रक्शंस दे रही थी ..... वह भी सूट पेण्ट में सच में बिज़नेस वुमन लग रही थी....
आर्यन बिना डिस्टर्ब किये उसके बैडरूम में चला गया और अपना फ़ोन निकाल बिना को बोलै मुझे दीप्ति के फार्महाउस का पूरा नक्शा, सिक्योरिटी कामर्स और कण्ट्रोल रूम की डिटेल्स भेजो और स्पेशलय दीप्ति , सुचित्रा और ठकुरियन रूपा के रूम्स की एव्री डिटेल्स एंट्री , एग्जिट और विंडोज की सही पोजीशन" .
बिना को भी अंदाज़ा हो गया था आर्यन पक्का वहां कुछ सेटअप करने जायेगा... उसने बस आधा घंटा माँगा ..... फिर आर्यन अपने सिक्योरिटी टीम से ुष होटल की अपडेट ली जहाँ कम से मीटिंग और डिनर था .....
15 मं बाद अणि अपने बैडरूम में आयी और आर्यन के गाल पे किश करके बोली," नॉट बाद , काली की खुसबू ले hi ली "..... है है है है .....
आर्यन ने उसका गोरा गाल अपनी जीभ से छठा उसको चिढ़ाने के लिए तोह अणि मोह फूल के ," अह्ह्ह्हह चींईईई गन्दा भाई , तुझे कितना बार बोलै है गीली किसी मत किया कर ..... ुककककहहहहह..... "
आर्यन ने हसकर दूसरा गाल भी चाट लिया , अणि अपनी नाक पे मक्खी भी न बैठने दे पर आर्यन तो चाट लेता था जब उसको परेशां करना हो ...... अणि, आर्यन को पीछे धकेल वाशरूम भागी ," बहोत गंदे हो आप मुझे फिर फेस वाश करना होगा ".....
आर्यन ," ाचा हम निकल रहे हैं वहीँ मिलते हैं होटल में मीटिंग पे ".
आर्यन बहार आया तोह अणि का लैपटॉप रखा था ड्राइंग हॉल की सोफे टेबल पे ..... कोई नहीं था झट से लैपटॉप खोल पासवर्ड दाल 5 मं. में कई फाइल्स अपने मोबाइल पे ट्रांसफर कर लैपटॉप बंद कर सीधा बहार निकल गया ...... ?????
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उधर राजा रघुभार सिंह* भी हिमालय से आशाराम पहुंच चूका था, उसकी भें रानी मिरदुला के निर्जीव सरीर में अब सांस तेज़ी से दौड़ रही थी और हाथ प्यारों में भी कभी कभी हरकत होती , आँखों की पुतली भी बांध पलकों में घूमती थी .......
अपनी भें को देखकर आँखों में आसूं आ गए फिर खुश डिअर उसके पास बेथ राजगुरुजी के साथ उनकी कुटिया में आ गए ......
जल पान ग्रेह करने के बाद रघुभार सिंह बोले ," गुरूजी मिरदुला को आंशिक चेतना hi महसूस हो रही है जबकि भविष्वाणी के हिसाब से जब दिव्या तलवार की अंग ( कन्या यानी दीप्ति ) को उसका वररिस स्पर्श करेगा तोह मिरदुला से श्राप हैट जायेगा फिर ऐसा क्यों नहीं हुआ ".
राजगुरुजी ," वॉश रघुभार , इश्को दो कारन मुझे लगते हैं ...... पहला दीप्ति और आर्यन अभी एक दुसरे के प्रेमी नहीं बने हैं दूसरा 20 साल निर्जीव सरीर है तोह चेतना लौटने में वक़त लग सकता है ".
रघुभार ," गुरूजी आप ने बताया की यह लड़का आर्यन बड़े गुरूजी का चेला हैं ऐसा आपके गुरूजी ( निशांक गुरूजी) ने बताया है "......
राजगुरुजी ," मेरे गुरूजी तोह अंतर आत्मा में लीं हो गए हैं बस उनका प्रतिबिम्ब hi मुझसे संपर्क करता है , उन्हों ने बताया था यह आर्यन यानि पूरा नाम चौदर्य महार्यं सिंह है अपने पूर्वज महार्यं का पुनर अवतार है बड़ा असाधारण बालक है , दीप्ति को अकेला 150 से ज्यादा गुंडा बदमाश से बचा के ले आया ..... बस देखा मैंने भी नहीं है ".
रघुभार सिंह चौंक के ," वह राजपूत नहीं है फिर कैसे वररिस हो गया तलवार और ख़ज़ाने का ?"
राजगुरुजी मुस्करा के," वॉश पुण्यं आत्मा जाती , वर्ण , लिंग, वेश से ऊपर होती हैं फिर जब बड़े गुरूजी का चेला है तोह हम सब उसके सामने कुछ भी नहीं ..... में आज भी बड़े गुरूजी के दर्शन के लिए प्रतीक्षा कर रहा हूँ और आर्यन सिर्फ 20 साल की उम्र में उनसे सिक्ष्य भी ले लिया ...... तुम hi बताओ क्या मेरा या तुम्हारा उसके सामने अस्तिव्त है , हम दोनों तोह उसके प्यार की धुल भी नहीं ..... अब बोलो क्या वह वररिस है की नहीं ?"
राजा रघुभार सिंह भी राजगुरुजी का तर्क सुनकर चुप हो गया, बात तोह सत्य hi है जोह दिव्या तलवार और ख़ज़ाने का वररिस होगा वह कोई मामूली आदमी तोह नहीं हो सकता और ऊपर से उसने दीप्ति को छूकर समय चाकर शुरू किया है तोह पक्का वही वररिस है ......
थोड़ी डिअर बात करके रघुभार सिंह आश्रम से पास के गाओं जाकर अपने पुत्र राजा जबर सिंह** को कॉल लगा के बता दिए वह वापस लौट आएं हैं और जल्द से जल्द आशाराम आने को कहा और चौदर्य महार्यं सिंह की पूरी जनम कुंडली निकालने को कहा .....
राजा रघुभार सिंह भी वही गलती कर रहा था जोह राजा त्रिभुवन सिंह ने की थी आर्यन को एक दूसरी जाती का कैसे राजपूताना ख़ज़ाने और दिव्या तलवार का वररिस हो सकता है ????
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*राजा रघुभार सिंह , रानी मिरदुला के बड़े भाई, और राजपूताना साही ( रॉयल) कौंसिल के एक्स हेड , अभी सन्यासी हो गए हैं. आगे 70 यरस .
**राजा जबर सिंह , राजा रघुभार सिंह का बीटा ..... प्रेजेंट कौंसिल हेड, आगे 47 यरस , 3 बीवियां हैं पर अभी तक निशांतन है ..... बहोत घंडी और लालची है , ख़ज़ाने के पीछे कुत्ते की तरह पड़ा है पैर किसी को ज्ञात नहीं है जल्दी hi अपना रंग दिखायेगा ......
हार्ट हार्ट हार्ट
PART -3 (दीप्ति)
आर्यन को रति ने बहार भेजा तोह आर्यन बोलै," आप थोड़ी बाद नाहा लेना पहले जरूरी बात कर लेते हैं".
दोनों बहार आये तोह गीता और मीणा एक दुसरे को छेद रहे थे.... आर्यन ने जाकर मीणा का गाल चूमा फिर गीता को किसी किया और उसके पास बैठकर बोलै ," मीणा कॉफ़ी आर्डर कर दे सबके लिए ".
रति भी सोफे पे बेथ गयी तब आर्यन बोलै," माँ मीटिंग में सब अपनी बात बोलेंगे तब तुम चुप रहना जब सब फाइनल हो जाये तब लास्ट मोमेंट पे डील कैंसिल कर देना ".
रति ॉश्चारिये से आर्यन को देखकर," अगर डील कैंसिल hi करनी थी तोह में जयपुर क्यों आयी हूँ? "
आर्यन हसकर ," एक्साक्ट्ली , अब मेरी माँ ने सही क्वेश्चन किया , हम सब जयपुर क्यों आये ?..... क्यों गीता रानी हम सब जयपुर क्या करने आये हैं िश से ाचा तोह हम दिल्ली में hi थे? ".
गीता और रति दोनों आर्यन का मोह ताकने लगी ...... मीणा भी इण्टरकॉम से आर्डर कर आर्यन के बगल में बेथ गयी.
मीणा ," नानी माँ तोह बिज़नेस डील के लिए आयी हैं और गीता दीदी अपनी फ्रेंड दीप्ति से मिलने , करेक्ट ".
आर्यन ने मीणा की नाक पकड़ के हिलायी," रॉंग, मेरी प्यारी भेना बात कुछ और है , अब चूँकि बात मुझसे रिलेटेड है तोह बोल दो हम मिलकर कुछ सलूशन निकालेंगे ".
गीता ने आर्यन को देखा ," दीप्ति भी तुझसे प्यार करती है और शादी करना चाहती है , मुझे भी वह ाची लगी फिर ख़ज़ाने को ढूंढ कर hi हम उसके प्राण बचा सकते हैं इशलिये तुझे जल्दी जयपुर बुलाने के लिए में यहाँ आ गयी ताकि दीप्ति को भी ाचे से जान सकूँ और फिर मुझे लेने तू पक्का आएगा यह विश्वास था".
आर्यन सीरियस होकर ," चलो मान लिया दीप्ति की जान खतरे में है और में उसकी जान बचा दूंगा लेकिन उसके लिए शादी करनी जरूरी तोह नहीं ".
गीता ," नहीं ,सच्चे दिल से एक दुसरे को अपना कर hi तुम दोनों ुष ख़ज़ाने और तलवार तक पहुंच सकते हो नक़्शे की मदद से ऐसा बड़े गुरूजी ने मुझे सपने में बताया था ".
मीणा ," लेकिन भाई तुझे दीप्ति को एक्सेप्ट करने में इतनी दिक्कत क्या है ?".
आर्यन ," पहली बात वह हमारे खानदान के बारे में कुछ नहीं जानती , दूसरा वह मुझे भी कहाँ जानती है और तीसरा ुष तलवार से उसके अपनों का खून में भीगूंगा सबसे पहले, उसके बाप की गर्दन उदा दूंगा जिसने मेरी चंदा रानी को मारने की कोशिश की "...... आर्यन थोड़ा गुस्सा में बोलै.
मीणा ," कोशिश तोह कईओं ने की और उसने भी की है लेकिन वह छू भी नहीं पाए फिर भाई हम ने भी तोह उसके आदमी मार काट के ुष को सबक सीखा तोह दिया hi है न और दीप्ति की जान बचा के तुमने उसके घरवालों को बेमोल खरीद लिया है ".
रति भी समझते हुए," देख आर्यन कोई भी लड़की कैसे यह देख पायेगी की उसका होने वाले पति ने उसके बाप को मार दिया, में जानती हूँ ुष राजा ने गलत किया है फिर भी उसको मारने के बात दिल से निकाल दे".
गीता भी थोड़ा सीरियस होकर," देख में जानती हूँ तू उसको माफ़ नहीं करेगा दीप्ति से मिलकर मुझे उससे अपनापन सा लगा, वह अच्छी लड़की है इशलिये में मान गयी देख मीणा और माँ ( रति) से तेरी शादी के लिए मैंने कभी मन नहीं किया यह दोनों भी तुझसे शादी कर रही हैं लेकिन दीप्ति की बात मान नई पड़ेगी मेरे लिए".
आर्यन कुछ सोचकर ," ठीक है फिर तुमको भी किसी और को भी अपनाना पड़ेगा मेरे लिए".
गीता सपाट लहजे में बोली ," सारू दीदी के लिए में कभी सपने में भी ना नहीं बोल सकती फिर उनकी वजह से तू दीप्ति की जान बचा सकता है मगर तू ने मुझे खुद क्यों नहीं बताया ".
सारू का नाम सुनकर आर्यन और रति चौंक गए इसको किसने बताया तब मीणा बोली," सारू मम्मी और मुझे सब सच बताना hi पड़ा गीता दीदी को और अब इनको भी कोई ऐतराज़ नहीं".
रति तोह सबसे ज्यादा सदमे में थी दीप्ति और सारू के लिए गीता इतनी आसानी से कैसे मान गयी ......
मीणा ," आर्यन एक बात हमेशा याद रखना अगर कभी किसी भी लड़की को गीता दीदी ने तुमसे शादी करने से मन किया तोह यह बात तुमको मान नई होगी ".
आर्यन बहोत खुश होकर ," अपनी चंदा रानी के लिए कुछ भी, गीता तुम को मम्मी के लिए कोई दिक्कत नहीं है यह बात जानकार में कितना खुश हूँ बता नहीं सकता. तू कुछ भी कभी भी कुछ भी मांग लेना में मन नहीं करूँगा "...... गीता को बाँहों में खींच लिया और उसका माथा और दोनों गाल को चूमा.
तभी बेल्ल बजी तोह नीला ( डॉ अंजू की पर्सनल बॉडी गार्ड) कॉफ़ी लेकर आयी थी ...... उसकी ड्यूटी थी कोई भी बहार का आदमी hi क्या परिंदा भी पर नहीं मरेगा िश फ्लोर पैर ...... 10 गार्ड्स बस िश फ्लोर को अंदर से और 10 दूसरी आसपास की बिल्डिंग से स्नाइपर गन लिए गार्ड कर रहे थे.
कॉफ़ी पीते हुए आर्यन बोलै," तुम सबकी हाँ के बाद में दीप्ति का हाथ उसके बाप से मांग लूंगा पैर एक शर्त पे की पहले मेरी शादी गीता से होगी उसके बाद hi किसी और से ".
मीणा हसकर," और भी शर्तें बता तू , पहले दीप्ति से खुले दिल से मिल फिर तेरी शर्तें हम भी देखते हैं, वह नाम की hi नहीं दिल की भी राजकुमारी है ".
रति भी हसकर ," मीणा सच्च hi बोल रही बहोत ाची नेचर है उसकी तुझे बहोत पसंद आएगी लेकिन पहले मेरी मीटिंग और डील का तोह कुछ कर मेरा बहोत ज्यादा लोस्स हो जायेगा, बहोत इन्वेस्टमेंट टाक पे लगा हुआ है ".
आर्यन हसकर ," एक काम करो िश डील की एक कॉपी रीता डार्लिंग ( आर्यन की छोटी मामी) को अमेरिका भेजो अभी ,फिर देहको सब तुम्हारे हक़ में होगा और हाँ डील लास्ट मोमेंट पे hi कैंसिल करना".
रति अभी भी थोड़ा हिचकिचा रही थी पर उसको पता था आर्यन एक पैसा भी वास्ते नहीं करता वह पक्का कोई दूसरा प्लान भी बनाया होगा .
कॉफ़ी पीकर गीता और रति रेडी होने चले गए मीटिंग के लिए तब मीणा बोली ,"में दीप्ति को तेरे पास भेजती हूँ, यहाँ से जाने से पहले उसको प्रोपोज़ जरूर कर देना ".
आर्यन ने मीणा का गाल चूमा ," यह कुछ जल्दी नहीं होगा मीणा डार्लिंग ".
मीणा ," देख पर्पस न भी करना लेकिन उसको अहसास जरूर दिला देना की वह साड़ी रात तेरे प्यार और तुझसे मिलने के लिए तड़पे ".
आर्यन ," उससे क्या होगा ?" अपने मैं में ( अब इसको क्यों बताये की में दीप्ति से ज्यादा तड़प रहा हूँ मिलने के लिए लेकिन यह कैसे हो सकता है , आज सिर्फ दूसरी मुलाकात hi हुयी है और अजीब से बेचैनी है )
मीणा ने आर्यन के गाल पे अपनी जीभ से चटकारा मारा सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ..... " सुहागरात को जल्दी मिलान के लिए रेडी हो जाएगी ".
आर्यन हसकर ," अभी ुष में टाइम है पहले गीता ....."
मीणा ," नहीं तुमको दीप्ति से शादी तोह करनी hi होगी लेकिन सबसे सीक्रेट रखकर फिर गीता से महापंचयत में शादी करने के बाद विधिवत शादी कर सकते हो दीप्ति से , कैसे सब होगा में बाद में बाटूंगी तू बस दीप्ति पे फोकस कर , में सबको शॉपिंग पे ले जाउंगी और जयपुर भी घुमा दूंगी ".
आर्यन कुछ सोचकर ," देख मीणा तुझ में भी तोह कई पावर्स हैं तोह एक काम करना िश अणि की बच्ची की पावर को न्यूट्रल कर देना नहीं तोह दीप्ति मेरी सुहागरात आज hi करवा देगी..... में दीप्ति के सच्चे प्यार का खालिस (पुरे) अहसास महसूस करना चाहता हूँ ताकि उसको दिल से अपना सकूँ".
मीणा हसकर ," नहीं अणि कुछ नहीं करेगी उसको सबक मिल गया है, में दीप्ति को भेजती हूँ ". ( अपने मैं में, िश घड़ी को अभी भी नहीं पता इश्कि खुद hi अपनी माँ छोड़ने पे इसको उसकी पावर मिल गयी है, अब कोई जादू क्या तंत्र मंतर , यग्न या काली सकती िश पे असर नहीं करेगी )
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आर्यन दुसरे वाशरूम में जाकर फ्रेश होकर बहार आया तोह रति उसके लिए 3 पीेछे सूट और तय निकाल के बीएड पे रख के नहाने चली गयी थी ..... आर्यन फ़ोन पे रीता से अमेरिका बात करते हुए अपने कपड़े उतर के अंडरवियर बनियान में इधर से उधर टहल रहा था .....
तभी दूर रिंग हुयी तोह टॉवल लपेट के बैडरूम से बहार आ सुईठे का दूर खोला फ़ोन पे बात करते हुए ..... सामने दीप्ति को देखकर ," एक मं. बाद में कॉल करता हूँ ".
दीप्ति
दीप्ति भी आर्यन को सिर्फ टॉवल और बनियान में देखकर हड़बड़ा गयी..... अपनी नज़र झुका के शर्मा के बोली," गीता दीदी ने बुलाया था , वह कहाँ हैं?"....... आर्यन समझ गया मीणा ने भेजा होगा उसने बात घुमा दी....
आर्यन हसकर ," तोह बहार क्यों कड़ी हो अंदर आयो "...... दीप्ति थोड़ा झिझक के साथ अंदर आयी तोह आर्यन ने दूर लॉक किया फिर बोलै ," क्या तुम मेरी सूट पहने में हेल्प करोगी , अभी एक बिज़नेस मीटिंग में माँ के साथ जाना है ".
दीप्ति की धड़कन तोह पहले से hi बढ़ी हुयी थी ऊपर से आर्यन ने जब हेल्प करने का ऑफर दिया तोह कैसे मन कर सकती है अपने सपनो के राजकुमार को ...... दीप्ति ने सर झुका के कहा ," जी कहिये में आपकी क्या मदद करूँ ".
आर्यन ," में सूट दाल के आता हूँ फिर आप तय में क्नॉट लगा देना , आप बैठिये कड़ी क्यों हैं "....... दीप्ति सोफे पे बेथ गयी और आर्यन अंदर बैडरूम में जाकर शर्ट और सूट पेण्ट डाला फिर गले में तय बिना बंधे दाल लिए और सोचा चलो आज दीप्ति से hi तय की क्नॉट लगवाता हूँ बहोत मजा आएगा .
दीप्ति सोफे पे बैठी अपने हाथों को आपस में रगड़ रही थी बेचैनी के कारन आगे क्या होगा , क्या में उनको ाची नहीं लगती ..... बात तोह ऐसे करते हैं जैसे मुझे बरसो से जानते हों पर न मुझे गले लगते हैं न प्यार भरी बातें करते हैं ...... वैसे आज मेरी तारीफ भी की , हाथ भी अपने हाथ में लिए , गीता दीदी को कितनी पशनातेली किश किया था काश मुझे भी करते.... ुष दिन भी बोले थे तुम बहोत सूंदर हो ....... भगवन जल्दी hi मेरे प्यार की जोत उनके दिल में जला दे , दोनों हाथ जोड़कर ऊपर वाले से प्राथना की .
आर्यन ," क्या हुआ इतना सीरियसली क्या मांग रही हो भगवन से , मुझे नहीं बाँटोगी ".
दीप्ति ने आँख खोल के आर्यन को देखा और मुस्करा के बोली ," नहीं ऐसी कोई बात नहीं है और यह आपने किस तरह से सूट पहना है "...... और मंद मंद मुस्कारने लगी .....
आर्यन भी हसकर," मैंने सोचा अगर मेरे पहने में कुछ कमी रही तो फिर कपडे खोलने पड़ेंगे िश लिए ऐसे hi आ गया अब आगे आपकी बारी ".
दीप्ति स्माइल के साथ ," ठीक है फिर पहले शर्ट इन कीजिए और सूट की जैकेट के बटन भी लगा लीजिए "...... आर्यन वैसे hi करता है पर उसको लगा दीप्ति पास नहीं आ रही है कुछ करना पड़ेगा ......
लेकिन दीप्ति तोह आर्यन की हॅंडसमेनेस्स में खोयी थी , वह उसके चेहरे के एक एक अंग को अपने मैं मंदिर में बसा रही थी ...... नीली बड़ी बड़ी आंखें , ऊँचा माथा , वेवी ब्लैक हेयर , गूरे गाल , पिंकिश आकर्षक लिप्स , लम्भी नाक , डिम्प्लेड चीन , बलिस्त लम्बी गर्दन , चौड़ा सीना , पुष्ट कंधे , 7फट के करीब हट ....... कितना सूंदर है उसके सपनो का राजकुमार ...... ुष सपने वाली मूरत से भी ज्यादा हैंडसम.....
आर्यन ," अब तय तो आपको hi क्नॉट करनी होगी".
दीप्ति ने आर्यन को देखा तोह उसने जांभोज के आधी शर्ट इन की थी और सूट जैकेट के आधे बटन ऊपर निचे लगा लिए थे ...... दीप्ति हसकर उसके पास पहुंची ," आपको तोह कपडे पहना भी नहीं आता , क्या मुझे इज्जाजत है ".
आर्यन ने सर हिलाकर कहा ," येह व्हाई नॉट ?".
दीप्ति ने अपनी चुनरी एक साइड अपनी कमर पे कासी और आर्यन की शर्ट पेण्ट से भर निकाल उसकी पेण्ट का हुक खोल पहले हाथ से चरों तरफ से अंदर डाली तभी आर्यन ने दोनों हाथ उसके कंधे पे रखे तोह उसने नज़र उठा के आर्यन को घूरा .....
आर्यन ने अपनी नज़र निचे कर ली जैसे सॉरी बोल रहा हो लेकिन हाथ नहीं हटाए ..... दीप्ति ने आर्यन के झुके सर देखते हुए उसकी पेण्ट का हुक बंद किया और बेल्ट भी लगाई निच्चे नज़र करके तब आर्यन अपना सर उठा उसके चेहरे को देख रहा था कितनी सूंदर है , बिलकुल गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ हैं...... मैं कर रहा चूम लूँ इज्जाजत हो तोह .....
दीप्ति ," हाँ हैंण्ण्ण्न ......."
आर्यन हड़बड़ा के ," तुम ने सुन्न लिया क्या?"...... दीप्ति उसकी आँखों में देखते हुए ," आपने कुछ बोलै था क्या ".
आर्यन ," नहीं नहीं , में क्या बोलूंगा ".
दीप्ति मैं में मुस्कारते हुए ," बोलना तोह आपको hi पड़ेगा वह भी आज hi नहीं तो में आपसे बहोत दुर्र चली जाउंगी ".
आर्यन भी उसकी आँखों में देख रहा था , दोनों जैसे खो से गए थे तभी आर्यन ने दीप्ति को अपने पास करना चाहया अपने दोनों हाथों से जो उसके कंधे पे थे ....... दीप्ति जैसे होश में आयी और अपना हाथ उसके सीने पे रख दिया एक कदम आगे होकर ," अब तय की क्नॉट लगा देती हूँ ".
आर्यन भी खुद को सँभालते हुए अपने दोनों हाथ उसके कंधे से हटा लिया और थोड़ा सीरियस सा हो गया तब दीप्ति ने पहले जैकेट के बटन बंद किये फिर उसकी शर्ट के कालर खड़े करते हुए तय की लेंथ चेक करते हुए बोली," आप जानते हैं आप पहले पुरुष हैं जोह हम को चुने के बाद भी जिन्दा हैं ".
आर्यन ," हाँ बताया तोह था आपने ुष दिन लेकिन अगर आपको बुरा लगा तोह में नहीं चुहुन्गा ".
दीप्ति तय की क्नॉट बनाते हुए बोली," हमने कब कहा हमको बुरा लगा ?" ....... और नज़ारे उठके आर्यन की आँखों में देखि जैसे कह रही हो छू लो मुझे जी भर के कभी मन नहीं करुँगी.
आर्यन भी उसको तैसे करते हुए ," डर लगता है कहीं मेरा हाथ लगने से आपकी सुंदरता मैली न हो जाये? "...... आर्यन भी उसकी झील सी नीली बड़ी बड़ी आँखों में देख रहा था और दीप्ति के दोनों हाथों पे अपने हाथ रख दिया ......
दीप्ति ने क्नॉट लगा दी थी और जोह हाथ तय पे थे उनको आर्यन ने अपनी हाथों की ग्रिफत में ले लिया था....... दोनों फिर से खो गए पर िश बार दीप्ति ने एक कदम और आगे बाध्य और अब आर्यन से सिर्फ 2 इंच की दुरी पर कढ़ी थी ......
आर्यन ने अपना एक हाथ हटा के जैसे hi दीप्ति की कमर पे रखा , वह बस तड़प के उसके गले में बाहें दाल झूल सी गयी , अह्हह्ह्ह्ह Mahiiiiiiiiiiiii , आर्यन का दूसरा हाथ भी उसकी पतली कमर पे कास गया और उसको अपनी आगोश में बांध लिया .......
सायद इसी को कहते हैं दो आत्मा का बर्षों के बाद आलिंगन , ना जाने क्या रिश्ता था दोनों का लेकिन इसका अहसास बहोत घेरा था ...... दीप्ति अपने प्रीतम की बाँहों में जैसे प्रफुलित होकर रू दी, ऐसा लगा रेगिस्तान में सैकड़ों बरसो बाद बारिश हुयी हो..... दीप्ति ुष दिन भी आर्यन के गले लगी थी पर आज अहसास कुछ और था ..... आज आर्यन ने खुद उसको बाँहों में लिया था ......
समय जैसे रुक सा गया था , दोनों एक दुसरे को सेहला रहे थे पर दोनों के आधार ( लिप्स) खामोश थे ...... जुबान की जरुरत इंसानो को होती है दो सच्चे प्रेमियों को नहीं , वह तोह अपनी बातें एक दुसरे के दिल की धड़कन सुनकर hi समझ जातें हैं...... सायद यही है खालिस सोना ( पुरे गोल्ड) जैसा सच्चा प्रेम होता है न कोई चल कपट न कोई दुवेश .... बस प्यार hi प्यार बेसुमार....
दीप्ति को रोटी देख आर्यन ने उसकी पीठ से अपने हाथ हटा के उसके चेहरे को पकड़ के पीछे किया और बड़े प्यार से उसके आंसूं पहुंचा ," रोने से िंह आँखों की शोखियाँ क्यों ख़तम कर रही हो जबकि यह तोह किसी मिरघनैनी की चंचलता जैसी हमेशा सूंदर दिखनी चाइये मेरी बस एहि खाविश है ".
आर्यन ने अपने होंठो से उसके गरम माथे को चूमा तोह दीप्ति का पूरा सरीर कांप गया उसकी आंखें बांध हो गयी िश प्यार की अनुभूति से , आर्यन ने फिर उसकी दोनों पलकों को बारी बारी चूमा ," दीप्ति आप बहोत सूंदर हो, दुनिया की सबसे खूबसूरत परियों की राजकुमारी हो में तुमको ....... "
टिंग टोंग टिंग टोंग ...... दूर बेल्ल बजी तोह दोनों होश में आये और रति जोह छुपकर बैडरूम के दूर के पीछे से दोनों का प्रेम प्रसंग देख रही थी सोची , अब hi गति बजनी थी आर्यन बस अपने प्यार का इजहार करने वाला था ...... आर्यन ने दीप्ति से अलग होकर दूर खोला तोह गीता एक सूंदर ड्रेस में अंदर आयी और दीप्ति को देखकर बोली ," तू यहाँ क्या कर रही है और तेरी आंखें क्यों लाल है , िशने तुझे रुलाया है क्या अब बताती हूँ इश्को "......
दीप्ति झट से ," नहीं दीदी इन्होने कुछ नहीं कहा बस आँख में कुछ कचरा चला गया था "......आर्यन भी हताश होकर िश चंदा रानी को भी अभी आना था .......
आर्यन ने गीता की कमर में हाथ दाल के उसके पीछे से चिपट के कहा ," हमको तोह आपके हुस्न ने hi घायल कर दिया है चंदा रानी "..... पुछःह पहुछठ.....
गीता को ाचा तोह लगा पैर दीप्ति के सामने वह अपना रॉब बना के रखने वाली थी ," अच्छा अच्छा ठीक है जैड़ा मस्का मत मार और सबके सामने जब देखो मुझसे चिपक जाता है अभी शादी नहीं हुयी है "...... वह दीप्ति को दिखा रही थी आर्यन उसकी ऊँगली पे नाचता है .....
आर्यन ने दीप्ति को देखकर कहा," आप hi बतिये दीप्तिजी , क्या अपनी होने वाली घरवाली को प्यार करना अपराध है ".
दीप्ति भी आर्यन की आँखों में देखते हुए," अपराध तोह नहीं है लेकिन िकान्त में अपने प्यार का इजहार करना चाहिए ".
आर्यन भी उसको देखते हुए गीता का गाल चूमकर दीप्ति को देखा जैसे उसको किश किया हो ," वह क्या है न हम आशिक थोड़ा दुसरे किस्म के हैं अकेले में तोह टूट के प्यार करेंगे तब तोह कोई शिकयत नहीं होगी न ".
गीता ने भी आर्यन का गाल चूमा," अब छोड़ मुझे बड़ी मुश्किल से मेकअप किया है ख़राब हो जायेगा ".
आर्यन से अलग हो दीप्ति से बोली ," दीप्ति में तोह आर्यन के साथ मीटिंग में जा रही हूँ , तुम मीणा के साथ शॉपिंग पे चली जायो नहीं तोह बोर हो जायेगी ".
दीप्ति ," नहीं दीदी में वापस जाउंगी , मुझे भी आज किसी से मिलना है"...... यह बात उसने आर्यन को देख के कही .....
आर्यन ," चंदा रानी , तू जा के माँ की रेडी होने में हेल्प कर में दीप्तिजी को मीणा के पास छोड़ देता हूँ मुझे अणि से भी बात करनी है ".
गीता अंदर बैडरूम में गयी तोह आर्यन भी अपना सेलफोन उठा के दीप्ति के साथ सुईठे से बहार आया ," तोह आप हमारा इंतज़ार करेंगी ".
दीप्ति निगाह निचे रखे हुए," आप को किसने कहा , हम क्यों इंतज़ार करेंगे?".
आर्यन ने दीप्ति का हाथ पकड़ के चूमा ," आपकी आंखें तोह एहि कहती हैं, में जरूर आऊँगा बस थोड़ी डिअर होगी सू मत जाना "...... दीप्ति बस शर्मा गयी ..... दिल में कितनी खुसी थी बस वह hi जानती थी .....
दूसरे सुईठे में मीणा के पास दीप्ति को छोड़कर आर्यन, अणि के सुईठे में गया तोह अणि अपनी सेकेटरी और 2 अफसर को इंस्ट्रक्शंस दे रही थी ..... वह भी सूट पेण्ट में सच में बिज़नेस वुमन लग रही थी....
आर्यन बिना डिस्टर्ब किये उसके बैडरूम में चला गया और अपना फ़ोन निकाल बिना को बोलै मुझे दीप्ति के फार्महाउस का पूरा नक्शा, सिक्योरिटी कामर्स और कण्ट्रोल रूम की डिटेल्स भेजो और स्पेशलय दीप्ति , सुचित्रा और ठकुरियन रूपा के रूम्स की एव्री डिटेल्स एंट्री , एग्जिट और विंडोज की सही पोजीशन" .
बिना को भी अंदाज़ा हो गया था आर्यन पक्का वहां कुछ सेटअप करने जायेगा... उसने बस आधा घंटा माँगा ..... फिर आर्यन अपने सिक्योरिटी टीम से ुष होटल की अपडेट ली जहाँ कम से मीटिंग और डिनर था .....
15 मं बाद अणि अपने बैडरूम में आयी और आर्यन के गाल पे किश करके बोली," नॉट बाद , काली की खुसबू ले hi ली "..... है है है है .....
आर्यन ने उसका गोरा गाल अपनी जीभ से छठा उसको चिढ़ाने के लिए तोह अणि मोह फूल के ," अह्ह्ह्हह चींईईई गन्दा भाई , तुझे कितना बार बोलै है गीली किसी मत किया कर ..... ुककककहहहहह..... "
आर्यन ने हसकर दूसरा गाल भी चाट लिया , अणि अपनी नाक पे मक्खी भी न बैठने दे पर आर्यन तो चाट लेता था जब उसको परेशां करना हो ...... अणि, आर्यन को पीछे धकेल वाशरूम भागी ," बहोत गंदे हो आप मुझे फिर फेस वाश करना होगा ".....
आर्यन ," ाचा हम निकल रहे हैं वहीँ मिलते हैं होटल में मीटिंग पे ".
आर्यन बहार आया तोह अणि का लैपटॉप रखा था ड्राइंग हॉल की सोफे टेबल पे ..... कोई नहीं था झट से लैपटॉप खोल पासवर्ड दाल 5 मं. में कई फाइल्स अपने मोबाइल पे ट्रांसफर कर लैपटॉप बंद कर सीधा बहार निकल गया ...... ?????
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उधर राजा रघुभार सिंह* भी हिमालय से आशाराम पहुंच चूका था, उसकी भें रानी मिरदुला के निर्जीव सरीर में अब सांस तेज़ी से दौड़ रही थी और हाथ प्यारों में भी कभी कभी हरकत होती , आँखों की पुतली भी बांध पलकों में घूमती थी .......
अपनी भें को देखकर आँखों में आसूं आ गए फिर खुश डिअर उसके पास बेथ राजगुरुजी के साथ उनकी कुटिया में आ गए ......
जल पान ग्रेह करने के बाद रघुभार सिंह बोले ," गुरूजी मिरदुला को आंशिक चेतना hi महसूस हो रही है जबकि भविष्वाणी के हिसाब से जब दिव्या तलवार की अंग ( कन्या यानी दीप्ति ) को उसका वररिस स्पर्श करेगा तोह मिरदुला से श्राप हैट जायेगा फिर ऐसा क्यों नहीं हुआ ".
राजगुरुजी ," वॉश रघुभार , इश्को दो कारन मुझे लगते हैं ...... पहला दीप्ति और आर्यन अभी एक दुसरे के प्रेमी नहीं बने हैं दूसरा 20 साल निर्जीव सरीर है तोह चेतना लौटने में वक़त लग सकता है ".
रघुभार ," गुरूजी आप ने बताया की यह लड़का आर्यन बड़े गुरूजी का चेला हैं ऐसा आपके गुरूजी ( निशांक गुरूजी) ने बताया है "......
राजगुरुजी ," मेरे गुरूजी तोह अंतर आत्मा में लीं हो गए हैं बस उनका प्रतिबिम्ब hi मुझसे संपर्क करता है , उन्हों ने बताया था यह आर्यन यानि पूरा नाम चौदर्य महार्यं सिंह है अपने पूर्वज महार्यं का पुनर अवतार है बड़ा असाधारण बालक है , दीप्ति को अकेला 150 से ज्यादा गुंडा बदमाश से बचा के ले आया ..... बस देखा मैंने भी नहीं है ".
रघुभार सिंह चौंक के ," वह राजपूत नहीं है फिर कैसे वररिस हो गया तलवार और ख़ज़ाने का ?"
राजगुरुजी मुस्करा के," वॉश पुण्यं आत्मा जाती , वर्ण , लिंग, वेश से ऊपर होती हैं फिर जब बड़े गुरूजी का चेला है तोह हम सब उसके सामने कुछ भी नहीं ..... में आज भी बड़े गुरूजी के दर्शन के लिए प्रतीक्षा कर रहा हूँ और आर्यन सिर्फ 20 साल की उम्र में उनसे सिक्ष्य भी ले लिया ...... तुम hi बताओ क्या मेरा या तुम्हारा उसके सामने अस्तिव्त है , हम दोनों तोह उसके प्यार की धुल भी नहीं ..... अब बोलो क्या वह वररिस है की नहीं ?"
राजा रघुभार सिंह भी राजगुरुजी का तर्क सुनकर चुप हो गया, बात तोह सत्य hi है जोह दिव्या तलवार और ख़ज़ाने का वररिस होगा वह कोई मामूली आदमी तोह नहीं हो सकता और ऊपर से उसने दीप्ति को छूकर समय चाकर शुरू किया है तोह पक्का वही वररिस है ......
थोड़ी डिअर बात करके रघुभार सिंह आश्रम से पास के गाओं जाकर अपने पुत्र राजा जबर सिंह** को कॉल लगा के बता दिए वह वापस लौट आएं हैं और जल्द से जल्द आशाराम आने को कहा और चौदर्य महार्यं सिंह की पूरी जनम कुंडली निकालने को कहा .....
राजा रघुभार सिंह भी वही गलती कर रहा था जोह राजा त्रिभुवन सिंह ने की थी आर्यन को एक दूसरी जाती का कैसे राजपूताना ख़ज़ाने और दिव्या तलवार का वररिस हो सकता है ????
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*राजा रघुभार सिंह , रानी मिरदुला के बड़े भाई, और राजपूताना साही ( रॉयल) कौंसिल के एक्स हेड , अभी सन्यासी हो गए हैं. आगे 70 यरस .
**राजा जबर सिंह , राजा रघुभार सिंह का बीटा ..... प्रेजेंट कौंसिल हेड, आगे 47 यरस , 3 बीवियां हैं पर अभी तक निशांतन है ..... बहोत घंडी और लालची है , ख़ज़ाने के पीछे कुत्ते की तरह पड़ा है पैर किसी को ज्ञात नहीं है जल्दी hi अपना रंग दिखायेगा ......
हार्ट हार्ट हार्ट