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PART - 9 (ा) ( दीप्ति )
राजमहल , पिछली रात 1 ऍम
राजा जबर सिंह को रात को खबर मिली की आर्यन हेलीकाप्टर से आश्रम के पास वाले गाओं तक गया था . आश्रम पे डकैतों ने हमला किया था आर्यन की टीम ने सब आश्रम वालों को बचा लिया और रानी मिरदुला का कहीं कुछ पता नहीं चला .
राजा जबर सिंह को मालूम हो गया उसके आदमीओ को आर्यन ने मरवा के रानी मिरदुला को अपने कब्जे में ले लिया है . उसकी यह चल विफल रही तो झुंझला कर अपने कक्ष में इधर उधर टहलता हुआ अपनी आकृ योजना को अमल में लाने का पूरा मैं बना जायजा लेने के लिए निकल गया किसी से मिलने .
रात्रि के 2 बजे वह राजमहल के बहार गुप्त जगह अपनी गुप्त योजना के कारन हेतु बुलाये हुए एक बहोत बड़े तांत्रिक और एक ओझा बाबा से मिलने आ पहुंचा था .
दोनों hi अपनी सकती उपयोग करके भी आर्यन तक न पहुंच सके थे . जब उन दोनों को भी जीवन नाशी शक्ति का अहसास हुआ तो पता न लगा पाए कोण सी शक्ति थी जोह सबकी ऊर्जा खींच रही थी .
तांत्रिक ने कहा," महाराज में गलत नहीं कहूंगा लेकिन यह जोह आर्यन नाम का लड़का आप बता रहे हो वह कोई सिद्ध पुरुष है . दूसरा उसकी माँ सारू भी किसी शक्ति से सुरक्षित है उन्ह दोनों तक में पहुंचने में विफल हुआ लेकिन कोई 2 बहोत बड़ी शक्तियां अलवर के राजमहल में आज शाम से उपस्थित हैं".
राजा जबर सिंह ने जब ओझा से पुछा तो उसका जवाब था ," महाराज मेरी विद्या किसी को भी वश में करने वाली है और जादू मंतर से में एक अदृश्य सेना बनाकर हमला भी कर सकता हूँ लेकिन दोनों hi विफल हुए आर्यन तक पहुंचे से पहले hi मेरा वार नष्ट हो गया. आज तक मेरे वार से कोई नहीं बच पाया लेकिन यह लड़का अद्भुत शक्ति का स्वामी लगता है जिसको हम टुच्चा समझने की भूल कर रहे थे . उससे निपटने के लिए हमको अपनी साड़ी शक्ति का फिरसे घोर आघात करना होगा ".
राजा जबर सिंह ," आप दोनों समझ नहीं रहे हो में दिव्या तलवार और अकल्पनीय विशाल ख़ज़ाने की बात कर रहा हूँ जोह राजा पृथ्वीराज चौहान के समय से पहले का होगा . अगर आर्यन उसको लाने में सफल भी होता है जोह उसको करना hi पड़ेगा लेकिन वह हमारा होना चाहिए उसका क्या ? ...... अगर वह दिव्या तलवार वह धारण कर लिया फिर हमारी जीत कैसे होगी ? ....... हमको हर हाल में दिव्या तलवार को उससे चीन होगा ".
तांत्रिक ," हमारे पास दो hi राष्टीय हैं या तो ुष लड़के को रोका जाए या उसके दोनों हासिल करने के बाद चीन लिया जाए" ....... है है है है ...... यह युक्ति कैसी है महाराज .
ओझा ," मुझे भी यही युक्ति सही लगती है परन्तु वह लड़का बहोत शक्तिशाली प्रतीत होता है ुष पर कोई भी काली शक्ति का वार विफल तो दूर नजदीक भी हम नहीं पहुंच पा रहे हैं ".
राजा जबर सिंह ," पर स्वयंवर में कई राजा और उनके योद्धा राजकुमारी दीप्ति के साथ विवाह के लिए लड़ेंगे . हम को फायदा तभी होगा जब वह सब मारे जाये या पराजित होकर हमारे गुलाम होने चाहिए ".
तांत्रिक ," िश में कोनसी बड़ी बात है कल हम दोनों आपको अपनी साधना की शक्ति से दो ऐसे योद्धा देंगे जिनपर कोई अस्त्र शास्त्र का असर नहीं होगा ना hi किसी तंत्र मंतर का , बलशाली इतने की सामने वाले का बल सोहक कर उसको शक्तिहीन कर दे, दोनों अजय होंगे " .
ओझा उत्साहित होकर बोलै ," में उनके अंदर अपने अनुष्ठान के जप से ऐसे शक्ति दाल दूंगा की उनके पास अदृश्य हथियार और कवच होगा जिसको कोई देख नहीं सकता न hi कोई बढ़ पायेगा ".
राजा जबर सिंह के चेहरे पे कुटिल मुस्कान आ गयी और ताव में बोलै," मुझे वह आर्यन की माँ सारू भी चाहिए सिर्फ एक बार hi क्यों न हो बस उसको किसी भी हाल में भोगना है , आप दोनों चाहो तो उसकी किसी भी कुवारी भें का सरीर भोग सकते हो बस उसकी सगी भें अनीता (अणि) को मेरे लिए छोड़ देना उन्ह दोनों माँ बेटी को में अपनी एक साथ अपनी रानियां बनूँगा दिव्या तलवार हाथ में होते hi फिर दोनों के साथ एक बिस्तर पर सुहागरात है है है है ".......
सारू के मदमस्त जिस्म और सुंदरता याद करके राजा जबर सिंह का लुंड भी टाइट हो गया और अणि के मादक जिस्म और कुवारी योनि का सोचकर के hi झड़ने की कगार पे आ गया .
तांत्रिक और ओझा उसकी मैं की सिथि समझ गए तब तांत्रिक बोलै ," राजा शभ अभी िंह सबका वक़त नहीं है आपकी विजय के बाद उसके परिवार की सब स्त्री और लड़कियों का भोग भी करेंगे . आपके लिए खाश औषदि भी है जिसको खाकर आप 10 औरशन से एक साथ सम्भोग कर सकते हो ".
राजा जबर सिंह भी उनको पूरी तयारी का कहकर, उन दोनों से विदा लेकर चला गया. तैयार हो जा आर्यन तेरा सबकुछ चीन लूंगा में .
जबर सिंह के जाते hi दोनों एक दुसरे को देख के दरवानी हसी है दिए और एक सेकंड से भी काम समय में दोनों के सरीर एक दुसरे में समां कर एक अलग hi व्यक्ति में बदल गए जोह लम्बी जटाधारी सर के बाल और लम्भी दादी वाला भभूत लपेटे खूंखार डरावने तांत्रिक में बदल गया .
तांत्रिक
त्रिलोचन प्रधान, यही नाम था उसका , बहोत hi दुष्ट और कई सिद्दी प्राप्त करने वाला , खुद को आसुरी काली शक्तियों का भक्त मान सब असुरों और सेहतान की पूजा करता था .
6 फट 6 इंच लम्बा काला भूसंद, लाल लाल बड़ी आंखें जैसे नशे में रहती थी. काली खुदरी त्वचा और सरीर से उठने वाली बदबू से ऐसा प्रतीत होता सालों से नहीं नहाया है.
सरीर पे एक काला घांचा बंधा था पूरा सरीर बालों से ढाका हुआ . हाथ पेअर में ताबीज़ बंधे थे . गले में मोठे मोठे रउदारक्ष की माला के बिच एक बच्चों की खोपड़ी की भी माला थी .
त्रिलोचन इंडिया के असम प्रान्त का रहने वाला था , उम्र यही 55-60 साल के बिच होगी . उसने तांत्रिक की विद्या कामाख्या देवी के मंदिर में सीखने की शुरवात की थी पर उम्र के साथ उसका झुकाव काली और शैतानी ताकत की सिद्धि की तरफ हो गया. इश्वरिये शक्ति पाने के लिए जहाँ साड़ी उम्र बीत जाती है वहीँ बुरी और काली शक्ति कुछ सालों में बधाई जा सकती हैं .
कभी साधु के भेस में कभी तांत्रिक का भेस धारण कर त्रिलोचन पूरा हिंदुस्तान की ख़ाक छान दिया था जहाँ उसको पता चलता वहां जो शक्ति मिलेगी उसको हासिल कर लेता . कुवारी लड़कियों और नयी भयता स्त्री के साथ उसके परिवार और पति के सामने अमानवीय जबरदस्ती सम्भोग करना उसको अद्भुत आनंद प्रदान करता फिर उनको मार के उनके लहू और अंग का सेवन करता . खुद को चांडाल और नरभक्षी में तब्दील कर उसको लगता की उसकी शक्तियां और ज्यादा बढ़ रही हैं .
ख़ज़ाने और दिव्या तलवार दोनों दिव्या शक्तियां थी वह उनको तो हासिल करने से रहा लेकिन अगर राजा जबर वह हासिल कर ले और राजा पे उसका कण्ट्रोल हो तोह वो उससे बड़े से बड़ा काम अपना गुलाम बना के करवा सकता है .
त्रिभुवन ने अपनी सिद्धि से अपनी आत्मा को साध लिया था यह उसको लगता था पर वह सिर्फ आत्मा का सिर्फ एक हिस्सा भर था , अपनी तंत्र मंतर की शक्ति से अपने 12 रूप भी धार सकता था .
जोह जीवट पुरुष आत्मा को साध ले उनको मोक्ष मिल जाता है और उसकी आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है मगर िश मूरख को कोण समझाए .
इश्कि मुलाकात 7 साल पहले राजा जबर सिंह से हुयी थी , त्रिलोचन तांत्रिक की सिद्धि देख तब उसने खजाने और दिव्या तलवार के बारे में जीकर कर उसको हासिल करने की बात की थी .
ुष समय त्रिलोचन तांत्रिक ने एक अनुष्ठान कर दीप्ति को अपने कण्ट्रोल में करने की कोशिश की तोह खुद मरते मरते बचा .
जैसे hi उसका सबसे शक्तिशाली मंतर दीप्ति को लगा वह तो थोड़ी डिअर के लिए बेहोश हो गयी पर एक अदृश्य आग बरसती तलवार लिए दानव आकर नरपिचसणी ने इसको पूरी पार्थवी पर भटकने और छिपने को मजबूर कर दिया .
त्रिलोचन खाते पीते, उठते बैठते, अपनी साधना में लीं होते hi नरपिचसणी की खतरनाक थक्के की आवाज और उसके नाम लेकर गुर्राना ,उसका पीछा hi नहीं छूट रहा था सारे मंतर और उसकी सिद्धि फ़ैल हो गयी . 3-4 बार भिड़ा भी तो मार मार के अदमरा करके खून पीकर छोड़ देती .
नरपिचसणी
कुछ दिनों बाद बस उसकी प्रजेंस hi डर के मारे कई बार तो त्रिलोचन का पिशाब भी निकल देती न hi उसकी कोई शक्ति काम आती . जितना डरता उतना डरती .
एक साल बाद ुष नरक से बतर दिन जेह्लने पर जब नरपिचसणी ने पीछा छोड़ा तब पता चला वह ुशी का सबसे सक्तिसाली मंतर दीप्ति से टकरा के नरपिचसणी का रूप धारण कर लिया और उसको hi एक साल से मूरख बना ुशी पे वार करता जान की दुश्मन दिखाई देती . त्रिलोचन समझ गया था राजकुमारी दीप्ति बहोत बड़ी दिव्या आत्मा है ुष्पे वार अपनी मौत को दावत देना है .
6 साल की कड़ी तपस्या और साधना के बाद उसको दो चीज़ गायत हुयी पहली दीप्ति के अंदर ुष दिव्या तलवार की शक्ति है जोह पुरुष उसको छू दिया उसकी मिर्तु निश्चित है चाहे वह कोई दिव्या पुरुष hi क्यों न हो , कोई जादू मंतर किया तोह खुद पे hi उल्टा असर होगा .
दूसरी बात दीप्ति hi तलवार और ख़ज़ाने की रक्षक है जबतक उसका वररिस नहीं आएगा कोई दिव्या तलवार और ख़ज़ाने को हासिल नहीं कर सकता दीप्ति के रहते हुए .
त्रिलोचन जब 7 साल बाद राजा जबर सिंह से फिर उसके महल में मिला तोह उसने तलवार की कुछ सच्चाई बताई की वह उसकी मदद करेगा हासिल करने में तोह राजा जबर सिंह ने भी बता दिया की दीप्ति hi भविष्वाणी के हिसाब से ुष वररिस को खोज देगी.
आर्यन की खबर मिलते hi राजा जबर सिंह ने स्वामी त्रिलोचन को सूचना भिजवा उनसे मिला को कहा और त्रिलोचन उसको ओझा भैरवनाथ को भी साथ मिलने को कहा .
मतलब त्रिलोचन ने अपने दो सरीर बना दिए एक तांत्रिक और दूसरा ओझा का. जबर सिंह को लगता वह दोनों वास्तव में उसकी मदद करेंगे .
तांत्रिक त्रिलोचन ने अब अपना सबसे कठोर अनुष्ठान शुरू कर दिया था जोह सुबह 5 बजे तक चलने वाला था .
उधर राजा जबर सिंह को खबर मिली की आर्यन लौट आया है फार्महाउस पे .
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आर्यन सुबह 5:30 बजे दीप्ति और अर्जुन के साथ एक प्राचीन शिव मंदिर के पास निकला और भगवन भोलेनाथ के दर्शन कर बहार आया तोह अणि वहां आकर राजकुमारी दीप्ति को अपने साथ राजमहल ले गयी .
आर्यन 6 बजे अर्जुन के साथ फार्महाउस पहुंचा सीधा रानी मृदुला से मिलने .
वहां उसकी टीम और बिना सब परेशां से लग रहे थे .
आर्यन को देखकर बिना और डॉक्टर उसके पास आये तोह डॉक्टर बोलै ," आर्यन सर मिरेकल हो गया वह लेडी बिलकुल ठीक हो गयी है उसको मैंने नींद का इंजेक्शन दिया है वह बार बार आपका पेट नाम "मेरा माहि" "मेरा माहि" चिल्ला रही थी फिर वाइल्ड होने लगी गुस्से से बड़ी मुश्किल से हमने उसपर काबू पाया ".
बिना ," आर्यन सर ( सर बिना सबके सामने बोलती थी ) , मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा चमत्कार नहीं देखा रानी मिरदुला बिलकुल जवान लड़की की तरह दिख रही है ".
आर्यन हसकर ," मैंने तोह डॉक्टर शभ से पहले hi कहा था शॉक लगेगा सुबह तक, अच्छा में मिल लेता हूँ ".
तभी नर्स दौड़ी हुयी आयी ," डॉक्टर पेशेंट को होश आ गया "...... डॉक्टर भी हैरान था की आधे घंटे में कैसे पेशेंट की आँख खुल गयी .
आर्यन और बाकी सब जब रूम में पहुंचे तोह आर्यन भी रानी मिरदुला को देखकर शॉकेड हो गया .
रानी मिरदुला की नज़र जैसे hi आर्यन पे पड़ी तोह बीएड से उठने लगी रोटी हुए ," मेरे माहि तू कहाँ चला गया था भूउउउउ भूउउउउउउ ".
आर्यन आगे बढ़कर उसको संभाला तोह किसी छोटी बच्ची तरह लिपट के रोने लगी .
आर्यन को भी विश्वास नहीं हुआ यह कैसे हो गया वह संजीवनी का बीज पुनर सवस्थ करसकता है अर्ध मिरित सरीर को लेकिन चिरयौवन रूप प्रदान कर देगा उसको अंदजा नहीं था की किसी उमरदार व्यक्ति या औरत पे भी इसका वही असर होगा जैसे जवान के साथ हो पर रानी मिरदुला किसी अप्सरा सी सुन्दर और चेहरे पे दीखता तेज़ उसको 18-19 साल की जवान लौंडिया बना देगा यह उसने भी नहीं सोचा था .
रानी मिरदुला रोटी ," माहि मेरे बेटे यह लोग मुझे यहाँ कैद रखकर तुझसे दूर करना चाहते हैं ".
माहि को बीटा सुनकर सब शॉकेड हो गए पर आर्यन तो अभी भी शॉकेड से सोच रहा था मेरी माँ इतनी जवान कैसे हो गयी .
तब बड़े गुरूजी ने कहा की विचलित न हो पुत्र तुम्हारे उपचार ने चिर यौवना में बदल दिया है लक्ष्मी को, तुम चाहो तोह सबसे यह बात छुपा सकते हो की यह रानी मिरदुला है लेकिन कुछ लोग तो पहचान hi लेंगे ".
आर्यन ," गुरूजी में अपनी माता को कोई कष्ट नहीं होने दूंगा ,समय के अनुसार सबको बता दूंगा की एहि रानी मिरदुला हैं ".
आर्यन ने मिरदुला के आंसूं पहुंचे और बोलै ," मैया तुझे भूख लगी होगी में कुछ खाने को मांगता हूँ ".
सब को इशारा किया बहार जाने का . बिना से एक काढ़े वाला जूस बना के लाने को कहा और कोई ाची सी ड्रेस जोह मिरदुला को ठीक आये .
सबके जाते hi आर्यन ने अपने से लिपटी रानी मिरदुला को गॉड में उठा के बीएड पे लिटा दिया और उसके बालों में हाथ फेरते हुए माथा चूम के देखा तो मिरदुला भी आर्यन के फेस को टच कर खुश होती हुयी बोली ," माहिया तू इतना गोरा कैसे हो गया रे ".
(* माहिया = महार्यं का पेट नाम था सब उसके सेज माहिया hi बुलाते थे जैसे िश जनम में माहि. माहिया का कलर बिलकुल काला था पर काढ़ काठी आर्यन जैसी hi थी . )
आर्यन हसकर ," जैसे तू जवान हो गयी है में भी गोरा हो गया िश जनम में ".
मिरदुला ने अपने सरीर को छूकर देखा फिर आर्यन का सर निचे कर उसको अपने सीने पे रख हाथ उसके बालों में फिरा के बोली," में कितने सालों से तेरा इंतज़ार कर रही थी पर तू आया क्यों नहीं , मेरी 2 बेटियां भी हैं, तेरी दो भेने है , एक तोह बहोत छोटी है दूसरी अभी ***** साल की होगी सुचित्रा नाम है . महाराज भी नहीं दिखे ".
मिरदुला दोनों जनमो की यादों को मिक्स करके बात कर रही थी , उसके पिछले जनम का माहिया से जुडी हर बात याद था बाकी नहीं .
आर्यन ने सर उठा के सीधा होकर बीएड पे बैठा और मिरदुला का सर अपनी गॉड में रख के उसके बाल पे हाथ फेरता बोलै," तुझे बहोत बातें और सच्च नहीं पता बस इतना जान ले तू 21 साल से सोई थी अब जाएगी है . तू मेरी मैया (माँ) है यह बात तू और में जानते हैं . तेरी दोनों बेटियां जवान हो गयी हैं बड़ी की तोह विवाह के बाद एक जवान बेटी भी है और छोटी की शादी होने वाली है उसका स्वयंवर है आज "....... फिर आर्यन ने उसको आधे घंटे 21 साल की पूरी स्टोरी सुना दी यह भी दीप्ति उससे प्रेम करती है और वह भी आर्यन को दिव्या तलवार का वररिस मानती है .
मिरदुला कभी दुखी कभी खुस कभी आंसूं कभी मोह पे मुस्कान यह hi संवेदना उसके चेहरे पे मौसम की तरह आ जा रही थी .
आर्यन ने कहानी ख़तम की तो दूर खोल के अणि , मीणा , सारू और डॉ अंजू, डॉ सलोनी अंदर आये .
एक जवान लड़की को आर्यन की गॉड में अपना सर को सीने से लगाए बैठा देखकर चौंक गए .
रानी मिरदुला , हाइट 5'11"फट , वट करीब अभी 50 से काम hi लग रहा था , धमकता चेहरे उजला रंग रंगत , दिलनशी कजरारी आंखें , ऊँचा माथा , लम्बी नाक , गुलबाई रसभरे होंठ , तीखी थोड़ी लम्बी सूरहैड़ार गर्दन , दोनों पहाड़ की तरह ताने वक्ष , सुत्वा पेट , निचे कटाव में पहले पुष्ट नितम्ब , घेरि नाभि और नाभि के निचे दोनों लम्बी टाँगिआन के जोड़ पे बिलकुल कावेरी लड़की की तरह बांध झांघें , गूरे गूरे दूध जैसे प्यार ........ साक्षात आश्मान से उत्तरी हुयी कोई स्वर्ग की देवी लग रही थी .
मिरदुला अस यंग गर्ल
सारू ने आगे बढ़कर उसके प्यार चुहये तोह डर गयी तब आर्यन ने मिरदुला के कान में कुछ कहा तोह आंखें बड़ी कर सारू को उठाकर उसके गले लग गयी .
सारू को आज अपने पिछले जनम के प्यार का िश जनम में माझी मिल गया था यानी रानी मिरदुला उसकी सास थी पर देखने में उल्टा hi था दोनों की उम्र बदल गयी थी . सारू को इतना अच्छा लग रहा था की कोई तो समझेगा की सारू ने अपने सेज बेटे से क्यों जिस्मानी समभंद बना लिए यह कोई पाप नहीं है बल्कि कड़वा सच्च है की वह दोनों पिछले जनम के सच्चे प्रेमी हैं .
मीणा ने अणि के कान में कहा ," अणि यह तोह तुझसे भी सुन्दर हो गयी है देखा नहीं तेरे भाई के तोपची का अहसास उसकी गॉड में बैठकर ले रही थी ".
अणि भी हसकर ," मीणा दीदी , एक बार शिकारी भूल जाये की शिकार नहीं करना आप नहीं भूलती फिर यह दोनों माँ बीटा से ज्यादा hi थे पिछले जनम में भूल गयी क्या ".
आर्यन ने डॉ अंजू और डॉ सलोनी से परिचय करवाया बस रानी मिरदुला को अपनी पुराणी जूनियर कहकर मिलवाया जोह सदमे ( डिप्रेशन) में थी अब रिकवर कर रही , मम्मी को देख उनको अपनी बेटी समझ रही है .
दोनों ने चेकउप किया और कुछ मेडिसिन लिखी की बस यह खानी है . डॉ अंजू ने कहा कभी अकेला मत रहने दो नहीं तोह डिप्रेशन होगा . दोनों माहिर डॉक्टर थी दोनों समझ गयी आर्यन कुछ चुप्पा रहा है पर उसने दोनों को आँखों से इशारा कर दिया था की बाद में बता दूंगा.
आर्यन ने मिरदुला की जिम्मेदारी सारू को दी क्योंकि उसको पता था मम्मी hi उसकी सही देखभाल कर सकती है .
तीनो से अकेले में बात हुयी तोह सारू ने कहा वह जानती है रानी मिरदुला hi मेरी सास थी . अणि और मीणा ने भी कहा वह जानते थे मिरदुला के बारे में . आर्यन नाराज़ हुआ उसको पहले क्यों नहीं बताया .
अणि ," गुरूजी ने मन किया था और भाई आप अब भी भूल रहे हो वह दीप्ति की माँ है यानि प्रेजेंट में . वह आपका पास्ट थी ी रेस्पेक्ट तहत लेकिन ुष रिश्ते को प्रेजेंट में मत खींचो ".
मीणा ," हाँ आर्यन , अणि ने ठीक hi कहा में भी एहि कहूँगी तू अपनी पिछले जनम की माँ से मिल लिया है अब उसको अपने बच्चों के पास जाने दो जोह िश जनम के हैं. तुम्हारे पास कितनी माँ , मम्मियां है और दीप्ति सुचित्रा की यह अकेली माँ है जोह 21 साल से उनसे दुर्र है ".
आर्यन थोड़ा निराश होकर ," वह तो ठीक है पर में कैसे भूल जॉन की वह मेरी मैया (माँ) है ".
अणि ," भाई एक बार उसको देख और किसी एंगल से यह तेरी मैया दिखती है . तेरी क्या यह तोह महिमा की मैया भी नहीं लग रही हाँ मम्मी ( सारू) जरूर इसकी मैया लग रही हैं ...... hi hi hi hi hi ...... दीप्ति से भी 4 साल छोटी लग रही है कुछ करना पड़ेगा पर यहाँ नहीं ".
आर्यन ," नहीं नहीं तू कुछ मत कर में संभल लूंगा "...... आर्यन को अणि की पावर का पता था की पता नहीं क्या कर दे.
सारू ," अणि सही कह रही आर्यन , मिरदुला माजी को अणि को नार्मल करने दे फिर उनको अपनी दोनों बेटियों के पास जाने दो फिर जब तुम्हारा मैं हो मिल लेना अपनी मैया से लेकिन दीप्ति से शादी होने के बाद hi बताना की वह तुम्हारी पिछले जनम की माँ थी नहीं तोह सब तुमको भाई भें बनाकर शादी न रोक दे ".
अणि हसकर ," don't वोर्री भाई में इनको 40 साल की उम्र की कर देती हूँ फिर किसीको साख भी नहीं होगा और दीप्ति से आपकी शादी भी होगी ".
आगे की प्लानिंग करते सब राजमहल पहुंचे .......
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सुबह के 8 बजे .......
पूरा राजमहल आज राजशी रंग ढंग की तरह सजा था , फूलों से लेकर कालीन तक , शामियाने से लेकर डोरशंस तक झूमर से लेकर फानूस तक सब रॉयल और रॉय रेड कलर में सजावट था, रॉय रेड अलवर का शाही रंग है .
अलवर के क़िले और राजमहल के मुख दवार पे अलवर रियासत के झंडे जिसपे काले घोड़े का अक्ष लाल रंग के झंडे पे छापा था हर जगह लहरा रहे थे .
क़िले के मैं गेट से 3 कम दुर्र अंदर एक बड़े से स्टेडियम को प्रतियोगिता मैदान या यह कहो योद्धा का एरीना सा बना दिया गया था . हर तरफ सैनिक की पोषक में शाही सैनिक और दुसरे काली यूनिफार्म में राजमहल की पर्सनल सिक्योरिटी थी .
लेकिन डार्क नेवी ब्लू कलर में इंडिया की टॉप प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी में से एक जोह दिल्ली बेस्ड थी , उसको हिरे किया गया था . हर चप्पे पे चप्पे पे गन्स और लेटेस्ट ग़ज़्ज़ातेस से लेश गार्ड्स टेनान्ट थे .
इतनी टाइट सिक्योरिटी और क़िला बंदी देखकर लगता जैसे यहाँ विप्स का जमवाड़ा होने वाला है . राजा त्रिभुवन सिंह ने स्वयंवर पे hi 400 करोड़ खर्च किया था और सिक्योरिटी पे hi कुछ 70 करोड़ खर्चा आया था. वैरी हिघटिच लेटेस्ट तकनीक के सब सिक्योरिटी अर्रंगेमेन्ट्स किये गए.
इतना जबरदस्त इंतज़ाम देकर आर्यन की फॅमिली , राजा जबर सिंह भी ॉश्चारिये चकित थे जबकि बाकी सब रजवाड़ों ने राजा त्रिभुवन सिंह की भूरी भूरी प्रशंसा की ताकि किसी के साथ न इंसाफ़ी न हो कोई बेमानी न करे .
हर हिस्से को ड्रोन और कैमरा से निगहरानी राखी जा रही थी . किसी को भी बिना पास और हाथ पे सील लगे अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था .
राजा और रॉयल फॅमिली के लिए अलग से मैं गेट पे एंट्री बना दी गयी थी पर चेकिंग उनकी भी स्वाम अलवर के मंत्री hi कर रहे थे स्पेशल सिक्योरिटी टीम के साथ .
जोह स्वयंवर में भाग लेने वाला हैं उनके लिए स्पेशल काउंटर बांया था जहाँ पे कंप्यूटर में पहले hi नाम , पता , फोटो और रियासत सब लिस्ट में था बस कन्फर्म किया जा रहा था .
उनको वहां से पहले एक स्पेशल कक्ष में ले जाय जाता फिर अपने सब कपडे और हथियार वहीँ देकर एक डैम नुदे एक फुल बॉडी स्कैन करवाना होता .
उसके बाद एक सक इंजेक्शन ( सबक्यूटेनियस) के थ्रू आपके राइट वृस्त के वाच पहने की जगह में स्किन के अंदर एक ट्रांसलूसेंट थिक पाली जेल इंजेक्ट किया जाता ताकि आप की हर मूवमेंट एक्सएक्ट लोकेशन कण्ट्रोल रूम में स्क्रीन पे दिखती रहे . एक छोटा सा टेप बैच दिया था जिसके अंदर माइक्रोचिप फिट थी और वह आपके चेस्ट पे चिपका के आपकी हार्ट बीट और पल्स नोट करती .
दोनों में से एक भी आउट ऑफ़ स्क्रीन हुयी आप प्रतियोगिता से बहार .
उसके बाद हथियार कक्ष में आप कोई भी अस्त्र जैसे तलवार , भला , गदा , तीर धनुस , फरसा , त्रिशूल , कुल्हाड़ी कुछ भी चुन सकते हैं .
अंदर कारपेट और फूलों से रास्ता कवर किया गया था , गेट के अंदर 12 हाथी 2 रौ में दोनों तरफ खड़े थे कालीन बिछे रस्ते पे जोह वहां से मेहमान गुजरते वह गुलाब जल का छिड़काव और पुष्प की वर्षा उन्ह पर करते .
हाथिओं से आगे बढ़कर 200 मीटर की दूरी पर 72 हॉर्सेज का शाही बंद था जोह अपनी धुन सुना के मेहमानो को स्वागत करता की आप अलवर रियासत के राजमहल के प्रायंगान में हैं .
बंद से 50 मीटर की दूरी पे ओंठों की सवारी आपका इंतज़ार कर रही थी . सबको एक एक ुण्ठ पे बिठा जाता जोह शाही पोषक और आभूसन से सजे धजे थे ....... उन्ह पे बिठा के आपको स्टेडियम के एंट्री गेट पे छोड़ा जाता .
आर्यन की फॅमिली को लगने लगा कहीं ज़ू में तोह नहीं आ गए क्योंकि आगे एक तरफ ऑस्ट्रिच और दूसरी तरफ मोरर के बाड़े थे . उसके बाद कई पक्षी और जंगल के जंगली जानवरों के बड़े थे .
यह सब राजकुमारी दीप्ति ने गॉड लिए हुए थे जोह जंगल में अनाथ हो गए थे . दीप्ति की एक वाइल्ड लाइफ सविओर संस्था थी जिसमे जंगली जानवरों को अडॉप्ट कर बड़ा किया जाता फिर वसख होने पे वापस वाइल्डलाइफ में जंगल में छोड़ दिया जाता . कई जानवर तो विदेश से भी लाये गए थे जोह कभी वापस hi नहीं गए.
अलवर के लोकल और टूरिस्ट लोगों को यहाँ घूमने का बस एक 5 रूपये का टिकट पास लेना होता इतने सुन्दर जंगल के जीव जंतु को निकट से देखने के लिए .
ुण्ठ पे बिठा के 2 कम दुर्र एक बड़े से स्टेडियम के बहार छोड़ा जाता जहाँ राजा त्रिभुवन सिंह का महामंत्री सबका स्वागत करते खड़ा था .
शाही पोषक में 18 दासियाँ हर विप अतिथियों को एक गुलदश्ता और शीतल पेय गिलास में देती .
स्टेडियम के एंट्री पे आपको अपना एंट्रीपास और सील दोनों सिक्योरिटी वालों को दिखानी होती . तीन तरह के पास थे , सिल्वर , गोल्ड एंड रॉयल .
स्लिवर पास = अलवर की जनता जोह आज भी राजा प्रथा को मानती थी , उनकी बाकायदा लिस्ट बना के सीक्रेट इनविटेशन दिया गया था . इनका नंबर सबसे ज्यादा था . करीब 18000 से ऊपर संख्या होगी .
गोल्ड पास = रॉयल फॅमिली , उनके मित्र , बिजनेसमैन और मंत्री की फॅमिली के लिए था . इसी केटेगरी में आर्यन की फॅमिली थी बस 4** को छोड़कर (गीता, मीणा , नेहा एंड डॉली ) . गोल्ड केटेगरी में 4000 के करीब नंबर में गेस्ट थे .
** यह चरों राजकुमारी दीप्ति के साथ उसकी सहेली बनकर स्वयंवर के उसके पोडियम ( मंच ) पे रहने वाली थी दीप्ति की स्पेशल रिक्वेस्ट पे . दीप्ति यहाँ भी अपनी 4 सौतें का दिल जीतने से नहीं चुकी .
रॉयल पास = किसी सल्तनत , रियासत या देश के राजा या राजकुमार , रानियां और राजकुमारी के लिए था , उनके साथ सिर्फ एक पर्सनल बॉडी गार्ड अल्लोव था . रॉयल पास का नंबर करीब 1200 के करीब था .
स्टेडियम को लाइट्स और फूलों से सज्य गया था सबकी सीट के नंबर अलग अलग पोडियम केटेगरी वाइज थे .
राजा त्रिभुवन के सिंघासन वाले पोडियम के राइट साइड कौंसिल का पोडियम और रॉयल पोडियम था .
लेफ्ट साइड राजकुमारी दीप्ति का पोडियम था और उसके साइड गोल्ड केटेगरी का 2 पोडियम बने थे और 3रद गोल्ड पोडियम रॉयल पोडियम के तरफ था .
बाकी सारे पोडियम सिल्वर केटेगरी के थे.
आज कोई 25 हज़ार लोगों का हज़म राजकुमारी दीप्ति के स्वयंवर के लिए योग्य वर की प्रतिस्पर्धा देखने को वकुल हो रहा था .
तभी 9 बजे राजा त्रिभुवन सिंह की शाही सवारी उन्ह घोड़े के बंद के पीछे स्टेडियम में एंटर की , माइक पे अनाउंसमेंट के साथ सबको खड़ा होने को कहा गया .
राजा त्रिभुवन सिंह के अपनी दोनों रानी संगीता और जमुना के 8 घोड़ों के विशाल रथ से उतारते hi जय जय के नारे पूरे स्टेडियम की एरीना में गूज गए.
राजा त्रिभुवन सिंह अपनी दोनों रानियों के साथ अपने राजा वाले मंच के सिंघासन पे विराजमान हुए तब शोर थमा .
फिर एक 4 घोड़े के रथ स्टेडियम में एंटर करते hi अनाउंसमेंट हुआ राजा जबर सिंह अपनी 3 रानियों के साथ पधारे उनको भी राजा त्रिभुवन सिंह के लेफ्ट साइड बने सिंघासन पे विराजमान होना था .
वह कौंसिल के चेयरमैन थे और राजकुमारी दीप्ति के बड़े भाई . फिर राजगुरुजी , रघुभार सिंह भी पधारे .
आखिर में जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था जोह आज के िश स्टेडियम िश स्वयंवर की शान थी , जिसको आज अपने लिए वर चुनकर ुष वीर को शूरवीर बना देना था उसकी एंट्री हुयी .
"राजकुमारी दीप्ति सिंह "
सब कुर्सी से खड़े हो गए , उनके रथ को 4 ब्लैक घोड़े खींच रहे थे जिसको वह खुद चला के ला रही थी .
सर से पाओ तक एक योद्धा की ड्रेस पहने बस सर पे राजकुमारी का मुक्त था राइट साइड के खुले पे लटकी थी एक तलवार . पूरे बाल खुले हुए देखते hi समां बांधता था यह दृश्य ...... विश्वसुंदरी , नीली आँखों वाली , 6 फट लम्बी छरहरी काय , गोरी चिट्टी बिलकुल दूध की तरह सफ़ेद , चेहरे का तेज़ बता रहा था जोह लाल कलर सा लिया था जवालामुखी की ओसमा के कारन पर अब वाइट कलर से मिलकर अलग hi गूरे रंग का पिंकिश टिंच दे रहा था .
पूरा एरीना 4 शेरोन ( अफ्रीकन लायन ) की धाड़ से गूंज गया जोह राजकुमारी के रथ के पीछे पीछे आ रहे थे. उनके पीछे राजकुमारी के शाही 40 बोडीगार्ड्स की टोली भी 20 मीटर दूर पे एंट्री की .
राजकुमारी का ऐसा रूप देख साडी जनता hi जोश से उन्माद हो गयी , "राजकुमारी दीप्ति की जय " .
" राजकुमारी दीप्ति की जय " , शेर की धाड़ और दीप्ति की जय के नारून से स्टेडियम गूंज गया . राजगुरुजी और रघुभार सिंह को राजमहल में बानी प्राचीन तस्वीर याद आ गयी जोह दीप्ति और उसके शेरोन से मेल कहती थी बस एक शेर ज्यादा था .
दीप्ति ने हाथ जोड़कर सबका चरों और झुकार अभिवादन किया . रथ से उतर कर अपने चरों शेरोन के पास जा उनके सर पे हाथ फिरा के अपने पोडियम पे चढ़ गयी उसके पीछे पीछे 4 शेर भी जा रहे थे .
सबके सरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी की यह असली hi शेर हैं क्या जोह राजकुमारी के इशारों पे कंट्रोल्ड हैं. जबकि अलवर की जनता जानती थी राजकुमारी को सभी पसु पक्षी से कितना प्यार है . कोई भी जानवर कितना hi हिंसक हो राजकुमारी दीप्ति के प्यार के सामने वह भी अपनी हिंसकता छोड़ देता .
राजकुमारी ने एक बार फिर अपने सिंघासन पे बैठने से पहले अपने सब बड़ो को हाथ जोड़कर नमन किया और बेथ गयी और चरों शेर उसके प्यारों के पास कालीन पे .
सबको पता चल रहा था जिसको वह नाजुक से राजकुमारी समझ रहे थे वह कोई मामूली लड़की नहीं किसी वीरंगा की तरह रानी लक्ष्मीबाई लग रही थी .
सबसे ज्यादा तोह राजा त्रिभुवन , रानी संगीता और जमुना चकित थे की दीप्ति ने स्पेशल शाही पोषक न पहनकर एक योद्धा की ड्रेस क्यों पहनी है .
रानी जमुना से रुका न गया उन्होंने अपनी चुनरी जो सर पे थी उसको उतार के दीप्ति के पास जा उसके सर पे दाल के गले तक कवर कर दी की वह कमसे काम अपना सर ढके , दीप्ति भी अपनी छोटी मम्मी का प्यार देखकर मुस्करा दी .
दीप्ति के सिंघासन के पीछे उसकी चरों सौतन भी दीप्ति को देखकर खुश भी थी और शॉकेड भी . यह रूप बाकी तीनो से छिपा था मीणा से नहीं और न hi गोल्ड पोडियम में बैठी अणि से जोह सिर्फ राजा जबर सिंह को hi घोर रही थी जो ललचाई नज़रों से सारू और अणि को घूर रहा था .
अणि को बड़े गुरूजी ने रोका न होता तो आज िश राजा जबर सिंह की कौंसिल में एक भी पुरुष जीवट नहीं होता .
मीणा ने अणि के मस्तिष्क में कहा ," सबर कर अणि यह तेरा नहीं आर्यन का शिकार है सही समय पे मरेगा बस जबतक बर्दास्त कर ".
दीप्ति का ऐसा रूप देखकर जहाँ कई राजाओं और राजकुमारों के पसीने छूट गए वहीँ सब उसकी सुंदरता से घायल हुए भी बैठे थे . आज उसका यह रूप सबको आकर्षित कर रहा था की मौत को गले लगा लो मेरे लिए तो भी काम है .
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आर्यन योद्धा की अपनी ड्रेस में डार्क रेड एंड ब्लैक में एक हॉक डिज़ाइन का हेलमेट हाथ में लिया जो उसको अजीब सा लगा पर उसको यह कहकर एक सैनिक ने दिया की राजगुरुजी ने भिजवा है जो सबसे अलग दिख रहा था .
उसने भी मन नहीं किया जब करीब 125 योद्धा ड्रेस्ड और अपना हथियार और शील्ड लिए स्टेडियम में एंटर किये तो हर तरफ तालियों की गूँज सुनाई दी .
आर्यन ने कोई ढाल नहीं ली की स्पीड काम करेगी .
सबको स्टेडियम में एक टुकड़ी की तरह बीचों बिच खड़े योद्धों में कई जोड़ी आंखें बस आर्यन को दूध रही थी लेकिन अणि और मीणा के अल्वा कोई आर्यन को पहचान नहीं पा रहा था क्योंकि वह बिच में वह गरुड़ मुकुट सा पहने खड़ा था .
गरुड़ शिरस्त्राण ( हेलमेट )
आर्यन को शुरू में वह बहोत भरी लगा जैसे 2 क्विंटल का वजन उसके सर पे रखा हो पर 1 मं बाद बिलकुल हल्का सा लगने लगा जैसे कुछ सर पे hi न हो .
आर्यन खुद 7 फट का होगा लेकिन यहाँ तोह लड़ने वालों की हट 6' फट से ऊपर hi होगी और 2 योद्धा तोह 8'6" फट के सबसे लम्बे चौड़े अलग hi नज़र आ रहे थे , योद्धा की ड्रेस भी उनके लिए छोटी hi लग रही थी .
यह दोनों तांत्रिक त्रिलोचन के भेजे छदम योद्धा नहीं अपितु खुद त्रिलोचन आर्यन का सामने आ गया था अपने दो विशाल मानव रूप धार कर और यही वह भूल कर गया की उसको आर्यन के सामने नहीं आना चाहिए था .
त्रिलोचन भी कहाँ जानता था वह आया नहीं बुलाया गया ???
गरुड़ शिरस्त्राण को देख राजा त्रिभुवन , जबर सिंह , रघुभार सिंह और जोह ुष हेलमेट के बारे में जानते थे उनकी आंखें hi नहीं फटी हुयी थी बल्कि चेहरे से भी पसीना आ चूका था . आज तक जिसने वह पहने की कोशिश की वह उसके कसाव से hi सर फटने से मर गया .
लेकिन सब ॉश्चारिये थे की यह काल कोठरी से खुनी गरुड़ शिरस्त्राण बहार कैसे आया और इश्को पहनकर कोण खड़ा है जोह मारा तो नहीं है सबके साथ चल के आया है और अभी तक कुछ नहीं हुआ असंभव .
लेकिन धीरे धीरे जान रहे थे जोह समझदार थे की असंभव को hi संभव करने दिव्या तलवार का वररिस आया है .
हार्ट हार्ट हार्ट
PART - 9 (ा) ( दीप्ति )
राजमहल , पिछली रात 1 ऍम
राजा जबर सिंह को रात को खबर मिली की आर्यन हेलीकाप्टर से आश्रम के पास वाले गाओं तक गया था . आश्रम पे डकैतों ने हमला किया था आर्यन की टीम ने सब आश्रम वालों को बचा लिया और रानी मिरदुला का कहीं कुछ पता नहीं चला .
राजा जबर सिंह को मालूम हो गया उसके आदमीओ को आर्यन ने मरवा के रानी मिरदुला को अपने कब्जे में ले लिया है . उसकी यह चल विफल रही तो झुंझला कर अपने कक्ष में इधर उधर टहलता हुआ अपनी आकृ योजना को अमल में लाने का पूरा मैं बना जायजा लेने के लिए निकल गया किसी से मिलने .
रात्रि के 2 बजे वह राजमहल के बहार गुप्त जगह अपनी गुप्त योजना के कारन हेतु बुलाये हुए एक बहोत बड़े तांत्रिक और एक ओझा बाबा से मिलने आ पहुंचा था .
दोनों hi अपनी सकती उपयोग करके भी आर्यन तक न पहुंच सके थे . जब उन दोनों को भी जीवन नाशी शक्ति का अहसास हुआ तो पता न लगा पाए कोण सी शक्ति थी जोह सबकी ऊर्जा खींच रही थी .
तांत्रिक ने कहा," महाराज में गलत नहीं कहूंगा लेकिन यह जोह आर्यन नाम का लड़का आप बता रहे हो वह कोई सिद्ध पुरुष है . दूसरा उसकी माँ सारू भी किसी शक्ति से सुरक्षित है उन्ह दोनों तक में पहुंचने में विफल हुआ लेकिन कोई 2 बहोत बड़ी शक्तियां अलवर के राजमहल में आज शाम से उपस्थित हैं".
राजा जबर सिंह ने जब ओझा से पुछा तो उसका जवाब था ," महाराज मेरी विद्या किसी को भी वश में करने वाली है और जादू मंतर से में एक अदृश्य सेना बनाकर हमला भी कर सकता हूँ लेकिन दोनों hi विफल हुए आर्यन तक पहुंचे से पहले hi मेरा वार नष्ट हो गया. आज तक मेरे वार से कोई नहीं बच पाया लेकिन यह लड़का अद्भुत शक्ति का स्वामी लगता है जिसको हम टुच्चा समझने की भूल कर रहे थे . उससे निपटने के लिए हमको अपनी साड़ी शक्ति का फिरसे घोर आघात करना होगा ".
राजा जबर सिंह ," आप दोनों समझ नहीं रहे हो में दिव्या तलवार और अकल्पनीय विशाल ख़ज़ाने की बात कर रहा हूँ जोह राजा पृथ्वीराज चौहान के समय से पहले का होगा . अगर आर्यन उसको लाने में सफल भी होता है जोह उसको करना hi पड़ेगा लेकिन वह हमारा होना चाहिए उसका क्या ? ...... अगर वह दिव्या तलवार वह धारण कर लिया फिर हमारी जीत कैसे होगी ? ....... हमको हर हाल में दिव्या तलवार को उससे चीन होगा ".
तांत्रिक ," हमारे पास दो hi राष्टीय हैं या तो ुष लड़के को रोका जाए या उसके दोनों हासिल करने के बाद चीन लिया जाए" ....... है है है है ...... यह युक्ति कैसी है महाराज .
ओझा ," मुझे भी यही युक्ति सही लगती है परन्तु वह लड़का बहोत शक्तिशाली प्रतीत होता है ुष पर कोई भी काली शक्ति का वार विफल तो दूर नजदीक भी हम नहीं पहुंच पा रहे हैं ".
राजा जबर सिंह ," पर स्वयंवर में कई राजा और उनके योद्धा राजकुमारी दीप्ति के साथ विवाह के लिए लड़ेंगे . हम को फायदा तभी होगा जब वह सब मारे जाये या पराजित होकर हमारे गुलाम होने चाहिए ".
तांत्रिक ," िश में कोनसी बड़ी बात है कल हम दोनों आपको अपनी साधना की शक्ति से दो ऐसे योद्धा देंगे जिनपर कोई अस्त्र शास्त्र का असर नहीं होगा ना hi किसी तंत्र मंतर का , बलशाली इतने की सामने वाले का बल सोहक कर उसको शक्तिहीन कर दे, दोनों अजय होंगे " .
ओझा उत्साहित होकर बोलै ," में उनके अंदर अपने अनुष्ठान के जप से ऐसे शक्ति दाल दूंगा की उनके पास अदृश्य हथियार और कवच होगा जिसको कोई देख नहीं सकता न hi कोई बढ़ पायेगा ".
राजा जबर सिंह के चेहरे पे कुटिल मुस्कान आ गयी और ताव में बोलै," मुझे वह आर्यन की माँ सारू भी चाहिए सिर्फ एक बार hi क्यों न हो बस उसको किसी भी हाल में भोगना है , आप दोनों चाहो तो उसकी किसी भी कुवारी भें का सरीर भोग सकते हो बस उसकी सगी भें अनीता (अणि) को मेरे लिए छोड़ देना उन्ह दोनों माँ बेटी को में अपनी एक साथ अपनी रानियां बनूँगा दिव्या तलवार हाथ में होते hi फिर दोनों के साथ एक बिस्तर पर सुहागरात है है है है ".......
सारू के मदमस्त जिस्म और सुंदरता याद करके राजा जबर सिंह का लुंड भी टाइट हो गया और अणि के मादक जिस्म और कुवारी योनि का सोचकर के hi झड़ने की कगार पे आ गया .
तांत्रिक और ओझा उसकी मैं की सिथि समझ गए तब तांत्रिक बोलै ," राजा शभ अभी िंह सबका वक़त नहीं है आपकी विजय के बाद उसके परिवार की सब स्त्री और लड़कियों का भोग भी करेंगे . आपके लिए खाश औषदि भी है जिसको खाकर आप 10 औरशन से एक साथ सम्भोग कर सकते हो ".
राजा जबर सिंह भी उनको पूरी तयारी का कहकर, उन दोनों से विदा लेकर चला गया. तैयार हो जा आर्यन तेरा सबकुछ चीन लूंगा में .
जबर सिंह के जाते hi दोनों एक दुसरे को देख के दरवानी हसी है दिए और एक सेकंड से भी काम समय में दोनों के सरीर एक दुसरे में समां कर एक अलग hi व्यक्ति में बदल गए जोह लम्बी जटाधारी सर के बाल और लम्भी दादी वाला भभूत लपेटे खूंखार डरावने तांत्रिक में बदल गया .
तांत्रिक
त्रिलोचन प्रधान, यही नाम था उसका , बहोत hi दुष्ट और कई सिद्दी प्राप्त करने वाला , खुद को आसुरी काली शक्तियों का भक्त मान सब असुरों और सेहतान की पूजा करता था .
6 फट 6 इंच लम्बा काला भूसंद, लाल लाल बड़ी आंखें जैसे नशे में रहती थी. काली खुदरी त्वचा और सरीर से उठने वाली बदबू से ऐसा प्रतीत होता सालों से नहीं नहाया है.
सरीर पे एक काला घांचा बंधा था पूरा सरीर बालों से ढाका हुआ . हाथ पेअर में ताबीज़ बंधे थे . गले में मोठे मोठे रउदारक्ष की माला के बिच एक बच्चों की खोपड़ी की भी माला थी .
त्रिलोचन इंडिया के असम प्रान्त का रहने वाला था , उम्र यही 55-60 साल के बिच होगी . उसने तांत्रिक की विद्या कामाख्या देवी के मंदिर में सीखने की शुरवात की थी पर उम्र के साथ उसका झुकाव काली और शैतानी ताकत की सिद्धि की तरफ हो गया. इश्वरिये शक्ति पाने के लिए जहाँ साड़ी उम्र बीत जाती है वहीँ बुरी और काली शक्ति कुछ सालों में बधाई जा सकती हैं .
कभी साधु के भेस में कभी तांत्रिक का भेस धारण कर त्रिलोचन पूरा हिंदुस्तान की ख़ाक छान दिया था जहाँ उसको पता चलता वहां जो शक्ति मिलेगी उसको हासिल कर लेता . कुवारी लड़कियों और नयी भयता स्त्री के साथ उसके परिवार और पति के सामने अमानवीय जबरदस्ती सम्भोग करना उसको अद्भुत आनंद प्रदान करता फिर उनको मार के उनके लहू और अंग का सेवन करता . खुद को चांडाल और नरभक्षी में तब्दील कर उसको लगता की उसकी शक्तियां और ज्यादा बढ़ रही हैं .
ख़ज़ाने और दिव्या तलवार दोनों दिव्या शक्तियां थी वह उनको तो हासिल करने से रहा लेकिन अगर राजा जबर वह हासिल कर ले और राजा पे उसका कण्ट्रोल हो तोह वो उससे बड़े से बड़ा काम अपना गुलाम बना के करवा सकता है .
त्रिभुवन ने अपनी सिद्धि से अपनी आत्मा को साध लिया था यह उसको लगता था पर वह सिर्फ आत्मा का सिर्फ एक हिस्सा भर था , अपनी तंत्र मंतर की शक्ति से अपने 12 रूप भी धार सकता था .
जोह जीवट पुरुष आत्मा को साध ले उनको मोक्ष मिल जाता है और उसकी आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है मगर िश मूरख को कोण समझाए .
इश्कि मुलाकात 7 साल पहले राजा जबर सिंह से हुयी थी , त्रिलोचन तांत्रिक की सिद्धि देख तब उसने खजाने और दिव्या तलवार के बारे में जीकर कर उसको हासिल करने की बात की थी .
ुष समय त्रिलोचन तांत्रिक ने एक अनुष्ठान कर दीप्ति को अपने कण्ट्रोल में करने की कोशिश की तोह खुद मरते मरते बचा .
जैसे hi उसका सबसे शक्तिशाली मंतर दीप्ति को लगा वह तो थोड़ी डिअर के लिए बेहोश हो गयी पर एक अदृश्य आग बरसती तलवार लिए दानव आकर नरपिचसणी ने इसको पूरी पार्थवी पर भटकने और छिपने को मजबूर कर दिया .
त्रिलोचन खाते पीते, उठते बैठते, अपनी साधना में लीं होते hi नरपिचसणी की खतरनाक थक्के की आवाज और उसके नाम लेकर गुर्राना ,उसका पीछा hi नहीं छूट रहा था सारे मंतर और उसकी सिद्धि फ़ैल हो गयी . 3-4 बार भिड़ा भी तो मार मार के अदमरा करके खून पीकर छोड़ देती .
नरपिचसणी
कुछ दिनों बाद बस उसकी प्रजेंस hi डर के मारे कई बार तो त्रिलोचन का पिशाब भी निकल देती न hi उसकी कोई शक्ति काम आती . जितना डरता उतना डरती .
एक साल बाद ुष नरक से बतर दिन जेह्लने पर जब नरपिचसणी ने पीछा छोड़ा तब पता चला वह ुशी का सबसे सक्तिसाली मंतर दीप्ति से टकरा के नरपिचसणी का रूप धारण कर लिया और उसको hi एक साल से मूरख बना ुशी पे वार करता जान की दुश्मन दिखाई देती . त्रिलोचन समझ गया था राजकुमारी दीप्ति बहोत बड़ी दिव्या आत्मा है ुष्पे वार अपनी मौत को दावत देना है .
6 साल की कड़ी तपस्या और साधना के बाद उसको दो चीज़ गायत हुयी पहली दीप्ति के अंदर ुष दिव्या तलवार की शक्ति है जोह पुरुष उसको छू दिया उसकी मिर्तु निश्चित है चाहे वह कोई दिव्या पुरुष hi क्यों न हो , कोई जादू मंतर किया तोह खुद पे hi उल्टा असर होगा .
दूसरी बात दीप्ति hi तलवार और ख़ज़ाने की रक्षक है जबतक उसका वररिस नहीं आएगा कोई दिव्या तलवार और ख़ज़ाने को हासिल नहीं कर सकता दीप्ति के रहते हुए .
त्रिलोचन जब 7 साल बाद राजा जबर सिंह से फिर उसके महल में मिला तोह उसने तलवार की कुछ सच्चाई बताई की वह उसकी मदद करेगा हासिल करने में तोह राजा जबर सिंह ने भी बता दिया की दीप्ति hi भविष्वाणी के हिसाब से ुष वररिस को खोज देगी.
आर्यन की खबर मिलते hi राजा जबर सिंह ने स्वामी त्रिलोचन को सूचना भिजवा उनसे मिला को कहा और त्रिलोचन उसको ओझा भैरवनाथ को भी साथ मिलने को कहा .
मतलब त्रिलोचन ने अपने दो सरीर बना दिए एक तांत्रिक और दूसरा ओझा का. जबर सिंह को लगता वह दोनों वास्तव में उसकी मदद करेंगे .
तांत्रिक त्रिलोचन ने अब अपना सबसे कठोर अनुष्ठान शुरू कर दिया था जोह सुबह 5 बजे तक चलने वाला था .
उधर राजा जबर सिंह को खबर मिली की आर्यन लौट आया है फार्महाउस पे .
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आर्यन सुबह 5:30 बजे दीप्ति और अर्जुन के साथ एक प्राचीन शिव मंदिर के पास निकला और भगवन भोलेनाथ के दर्शन कर बहार आया तोह अणि वहां आकर राजकुमारी दीप्ति को अपने साथ राजमहल ले गयी .
आर्यन 6 बजे अर्जुन के साथ फार्महाउस पहुंचा सीधा रानी मृदुला से मिलने .
वहां उसकी टीम और बिना सब परेशां से लग रहे थे .
आर्यन को देखकर बिना और डॉक्टर उसके पास आये तोह डॉक्टर बोलै ," आर्यन सर मिरेकल हो गया वह लेडी बिलकुल ठीक हो गयी है उसको मैंने नींद का इंजेक्शन दिया है वह बार बार आपका पेट नाम "मेरा माहि" "मेरा माहि" चिल्ला रही थी फिर वाइल्ड होने लगी गुस्से से बड़ी मुश्किल से हमने उसपर काबू पाया ".
बिना ," आर्यन सर ( सर बिना सबके सामने बोलती थी ) , मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा चमत्कार नहीं देखा रानी मिरदुला बिलकुल जवान लड़की की तरह दिख रही है ".
आर्यन हसकर ," मैंने तोह डॉक्टर शभ से पहले hi कहा था शॉक लगेगा सुबह तक, अच्छा में मिल लेता हूँ ".
तभी नर्स दौड़ी हुयी आयी ," डॉक्टर पेशेंट को होश आ गया "...... डॉक्टर भी हैरान था की आधे घंटे में कैसे पेशेंट की आँख खुल गयी .
आर्यन और बाकी सब जब रूम में पहुंचे तोह आर्यन भी रानी मिरदुला को देखकर शॉकेड हो गया .
रानी मिरदुला की नज़र जैसे hi आर्यन पे पड़ी तोह बीएड से उठने लगी रोटी हुए ," मेरे माहि तू कहाँ चला गया था भूउउउउ भूउउउउउउ ".
आर्यन आगे बढ़कर उसको संभाला तोह किसी छोटी बच्ची तरह लिपट के रोने लगी .
आर्यन को भी विश्वास नहीं हुआ यह कैसे हो गया वह संजीवनी का बीज पुनर सवस्थ करसकता है अर्ध मिरित सरीर को लेकिन चिरयौवन रूप प्रदान कर देगा उसको अंदजा नहीं था की किसी उमरदार व्यक्ति या औरत पे भी इसका वही असर होगा जैसे जवान के साथ हो पर रानी मिरदुला किसी अप्सरा सी सुन्दर और चेहरे पे दीखता तेज़ उसको 18-19 साल की जवान लौंडिया बना देगा यह उसने भी नहीं सोचा था .
रानी मिरदुला रोटी ," माहि मेरे बेटे यह लोग मुझे यहाँ कैद रखकर तुझसे दूर करना चाहते हैं ".
माहि को बीटा सुनकर सब शॉकेड हो गए पर आर्यन तो अभी भी शॉकेड से सोच रहा था मेरी माँ इतनी जवान कैसे हो गयी .
तब बड़े गुरूजी ने कहा की विचलित न हो पुत्र तुम्हारे उपचार ने चिर यौवना में बदल दिया है लक्ष्मी को, तुम चाहो तोह सबसे यह बात छुपा सकते हो की यह रानी मिरदुला है लेकिन कुछ लोग तो पहचान hi लेंगे ".
आर्यन ," गुरूजी में अपनी माता को कोई कष्ट नहीं होने दूंगा ,समय के अनुसार सबको बता दूंगा की एहि रानी मिरदुला हैं ".
आर्यन ने मिरदुला के आंसूं पहुंचे और बोलै ," मैया तुझे भूख लगी होगी में कुछ खाने को मांगता हूँ ".
सब को इशारा किया बहार जाने का . बिना से एक काढ़े वाला जूस बना के लाने को कहा और कोई ाची सी ड्रेस जोह मिरदुला को ठीक आये .
सबके जाते hi आर्यन ने अपने से लिपटी रानी मिरदुला को गॉड में उठा के बीएड पे लिटा दिया और उसके बालों में हाथ फेरते हुए माथा चूम के देखा तो मिरदुला भी आर्यन के फेस को टच कर खुश होती हुयी बोली ," माहिया तू इतना गोरा कैसे हो गया रे ".
(* माहिया = महार्यं का पेट नाम था सब उसके सेज माहिया hi बुलाते थे जैसे िश जनम में माहि. माहिया का कलर बिलकुल काला था पर काढ़ काठी आर्यन जैसी hi थी . )
आर्यन हसकर ," जैसे तू जवान हो गयी है में भी गोरा हो गया िश जनम में ".
मिरदुला ने अपने सरीर को छूकर देखा फिर आर्यन का सर निचे कर उसको अपने सीने पे रख हाथ उसके बालों में फिरा के बोली," में कितने सालों से तेरा इंतज़ार कर रही थी पर तू आया क्यों नहीं , मेरी 2 बेटियां भी हैं, तेरी दो भेने है , एक तोह बहोत छोटी है दूसरी अभी ***** साल की होगी सुचित्रा नाम है . महाराज भी नहीं दिखे ".
मिरदुला दोनों जनमो की यादों को मिक्स करके बात कर रही थी , उसके पिछले जनम का माहिया से जुडी हर बात याद था बाकी नहीं .
आर्यन ने सर उठा के सीधा होकर बीएड पे बैठा और मिरदुला का सर अपनी गॉड में रख के उसके बाल पे हाथ फेरता बोलै," तुझे बहोत बातें और सच्च नहीं पता बस इतना जान ले तू 21 साल से सोई थी अब जाएगी है . तू मेरी मैया (माँ) है यह बात तू और में जानते हैं . तेरी दोनों बेटियां जवान हो गयी हैं बड़ी की तोह विवाह के बाद एक जवान बेटी भी है और छोटी की शादी होने वाली है उसका स्वयंवर है आज "....... फिर आर्यन ने उसको आधे घंटे 21 साल की पूरी स्टोरी सुना दी यह भी दीप्ति उससे प्रेम करती है और वह भी आर्यन को दिव्या तलवार का वररिस मानती है .
मिरदुला कभी दुखी कभी खुस कभी आंसूं कभी मोह पे मुस्कान यह hi संवेदना उसके चेहरे पे मौसम की तरह आ जा रही थी .
आर्यन ने कहानी ख़तम की तो दूर खोल के अणि , मीणा , सारू और डॉ अंजू, डॉ सलोनी अंदर आये .
एक जवान लड़की को आर्यन की गॉड में अपना सर को सीने से लगाए बैठा देखकर चौंक गए .
रानी मिरदुला , हाइट 5'11"फट , वट करीब अभी 50 से काम hi लग रहा था , धमकता चेहरे उजला रंग रंगत , दिलनशी कजरारी आंखें , ऊँचा माथा , लम्बी नाक , गुलबाई रसभरे होंठ , तीखी थोड़ी लम्बी सूरहैड़ार गर्दन , दोनों पहाड़ की तरह ताने वक्ष , सुत्वा पेट , निचे कटाव में पहले पुष्ट नितम्ब , घेरि नाभि और नाभि के निचे दोनों लम्बी टाँगिआन के जोड़ पे बिलकुल कावेरी लड़की की तरह बांध झांघें , गूरे गूरे दूध जैसे प्यार ........ साक्षात आश्मान से उत्तरी हुयी कोई स्वर्ग की देवी लग रही थी .
मिरदुला अस यंग गर्ल
सारू ने आगे बढ़कर उसके प्यार चुहये तोह डर गयी तब आर्यन ने मिरदुला के कान में कुछ कहा तोह आंखें बड़ी कर सारू को उठाकर उसके गले लग गयी .
सारू को आज अपने पिछले जनम के प्यार का िश जनम में माझी मिल गया था यानी रानी मिरदुला उसकी सास थी पर देखने में उल्टा hi था दोनों की उम्र बदल गयी थी . सारू को इतना अच्छा लग रहा था की कोई तो समझेगा की सारू ने अपने सेज बेटे से क्यों जिस्मानी समभंद बना लिए यह कोई पाप नहीं है बल्कि कड़वा सच्च है की वह दोनों पिछले जनम के सच्चे प्रेमी हैं .
मीणा ने अणि के कान में कहा ," अणि यह तोह तुझसे भी सुन्दर हो गयी है देखा नहीं तेरे भाई के तोपची का अहसास उसकी गॉड में बैठकर ले रही थी ".
अणि भी हसकर ," मीणा दीदी , एक बार शिकारी भूल जाये की शिकार नहीं करना आप नहीं भूलती फिर यह दोनों माँ बीटा से ज्यादा hi थे पिछले जनम में भूल गयी क्या ".
आर्यन ने डॉ अंजू और डॉ सलोनी से परिचय करवाया बस रानी मिरदुला को अपनी पुराणी जूनियर कहकर मिलवाया जोह सदमे ( डिप्रेशन) में थी अब रिकवर कर रही , मम्मी को देख उनको अपनी बेटी समझ रही है .
दोनों ने चेकउप किया और कुछ मेडिसिन लिखी की बस यह खानी है . डॉ अंजू ने कहा कभी अकेला मत रहने दो नहीं तोह डिप्रेशन होगा . दोनों माहिर डॉक्टर थी दोनों समझ गयी आर्यन कुछ चुप्पा रहा है पर उसने दोनों को आँखों से इशारा कर दिया था की बाद में बता दूंगा.
आर्यन ने मिरदुला की जिम्मेदारी सारू को दी क्योंकि उसको पता था मम्मी hi उसकी सही देखभाल कर सकती है .
तीनो से अकेले में बात हुयी तोह सारू ने कहा वह जानती है रानी मिरदुला hi मेरी सास थी . अणि और मीणा ने भी कहा वह जानते थे मिरदुला के बारे में . आर्यन नाराज़ हुआ उसको पहले क्यों नहीं बताया .
अणि ," गुरूजी ने मन किया था और भाई आप अब भी भूल रहे हो वह दीप्ति की माँ है यानि प्रेजेंट में . वह आपका पास्ट थी ी रेस्पेक्ट तहत लेकिन ुष रिश्ते को प्रेजेंट में मत खींचो ".
मीणा ," हाँ आर्यन , अणि ने ठीक hi कहा में भी एहि कहूँगी तू अपनी पिछले जनम की माँ से मिल लिया है अब उसको अपने बच्चों के पास जाने दो जोह िश जनम के हैं. तुम्हारे पास कितनी माँ , मम्मियां है और दीप्ति सुचित्रा की यह अकेली माँ है जोह 21 साल से उनसे दुर्र है ".
आर्यन थोड़ा निराश होकर ," वह तो ठीक है पर में कैसे भूल जॉन की वह मेरी मैया (माँ) है ".
अणि ," भाई एक बार उसको देख और किसी एंगल से यह तेरी मैया दिखती है . तेरी क्या यह तोह महिमा की मैया भी नहीं लग रही हाँ मम्मी ( सारू) जरूर इसकी मैया लग रही हैं ...... hi hi hi hi hi ...... दीप्ति से भी 4 साल छोटी लग रही है कुछ करना पड़ेगा पर यहाँ नहीं ".
आर्यन ," नहीं नहीं तू कुछ मत कर में संभल लूंगा "...... आर्यन को अणि की पावर का पता था की पता नहीं क्या कर दे.
सारू ," अणि सही कह रही आर्यन , मिरदुला माजी को अणि को नार्मल करने दे फिर उनको अपनी दोनों बेटियों के पास जाने दो फिर जब तुम्हारा मैं हो मिल लेना अपनी मैया से लेकिन दीप्ति से शादी होने के बाद hi बताना की वह तुम्हारी पिछले जनम की माँ थी नहीं तोह सब तुमको भाई भें बनाकर शादी न रोक दे ".
अणि हसकर ," don't वोर्री भाई में इनको 40 साल की उम्र की कर देती हूँ फिर किसीको साख भी नहीं होगा और दीप्ति से आपकी शादी भी होगी ".
आगे की प्लानिंग करते सब राजमहल पहुंचे .......
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सुबह के 8 बजे .......
पूरा राजमहल आज राजशी रंग ढंग की तरह सजा था , फूलों से लेकर कालीन तक , शामियाने से लेकर डोरशंस तक झूमर से लेकर फानूस तक सब रॉयल और रॉय रेड कलर में सजावट था, रॉय रेड अलवर का शाही रंग है .
अलवर के क़िले और राजमहल के मुख दवार पे अलवर रियासत के झंडे जिसपे काले घोड़े का अक्ष लाल रंग के झंडे पे छापा था हर जगह लहरा रहे थे .
क़िले के मैं गेट से 3 कम दुर्र अंदर एक बड़े से स्टेडियम को प्रतियोगिता मैदान या यह कहो योद्धा का एरीना सा बना दिया गया था . हर तरफ सैनिक की पोषक में शाही सैनिक और दुसरे काली यूनिफार्म में राजमहल की पर्सनल सिक्योरिटी थी .
लेकिन डार्क नेवी ब्लू कलर में इंडिया की टॉप प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी में से एक जोह दिल्ली बेस्ड थी , उसको हिरे किया गया था . हर चप्पे पे चप्पे पे गन्स और लेटेस्ट ग़ज़्ज़ातेस से लेश गार्ड्स टेनान्ट थे .
इतनी टाइट सिक्योरिटी और क़िला बंदी देखकर लगता जैसे यहाँ विप्स का जमवाड़ा होने वाला है . राजा त्रिभुवन सिंह ने स्वयंवर पे hi 400 करोड़ खर्च किया था और सिक्योरिटी पे hi कुछ 70 करोड़ खर्चा आया था. वैरी हिघटिच लेटेस्ट तकनीक के सब सिक्योरिटी अर्रंगेमेन्ट्स किये गए.
इतना जबरदस्त इंतज़ाम देकर आर्यन की फॅमिली , राजा जबर सिंह भी ॉश्चारिये चकित थे जबकि बाकी सब रजवाड़ों ने राजा त्रिभुवन सिंह की भूरी भूरी प्रशंसा की ताकि किसी के साथ न इंसाफ़ी न हो कोई बेमानी न करे .
हर हिस्से को ड्रोन और कैमरा से निगहरानी राखी जा रही थी . किसी को भी बिना पास और हाथ पे सील लगे अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था .
राजा और रॉयल फॅमिली के लिए अलग से मैं गेट पे एंट्री बना दी गयी थी पर चेकिंग उनकी भी स्वाम अलवर के मंत्री hi कर रहे थे स्पेशल सिक्योरिटी टीम के साथ .
जोह स्वयंवर में भाग लेने वाला हैं उनके लिए स्पेशल काउंटर बांया था जहाँ पे कंप्यूटर में पहले hi नाम , पता , फोटो और रियासत सब लिस्ट में था बस कन्फर्म किया जा रहा था .
उनको वहां से पहले एक स्पेशल कक्ष में ले जाय जाता फिर अपने सब कपडे और हथियार वहीँ देकर एक डैम नुदे एक फुल बॉडी स्कैन करवाना होता .
उसके बाद एक सक इंजेक्शन ( सबक्यूटेनियस) के थ्रू आपके राइट वृस्त के वाच पहने की जगह में स्किन के अंदर एक ट्रांसलूसेंट थिक पाली जेल इंजेक्ट किया जाता ताकि आप की हर मूवमेंट एक्सएक्ट लोकेशन कण्ट्रोल रूम में स्क्रीन पे दिखती रहे . एक छोटा सा टेप बैच दिया था जिसके अंदर माइक्रोचिप फिट थी और वह आपके चेस्ट पे चिपका के आपकी हार्ट बीट और पल्स नोट करती .
दोनों में से एक भी आउट ऑफ़ स्क्रीन हुयी आप प्रतियोगिता से बहार .
उसके बाद हथियार कक्ष में आप कोई भी अस्त्र जैसे तलवार , भला , गदा , तीर धनुस , फरसा , त्रिशूल , कुल्हाड़ी कुछ भी चुन सकते हैं .
अंदर कारपेट और फूलों से रास्ता कवर किया गया था , गेट के अंदर 12 हाथी 2 रौ में दोनों तरफ खड़े थे कालीन बिछे रस्ते पे जोह वहां से मेहमान गुजरते वह गुलाब जल का छिड़काव और पुष्प की वर्षा उन्ह पर करते .
हाथिओं से आगे बढ़कर 200 मीटर की दूरी पर 72 हॉर्सेज का शाही बंद था जोह अपनी धुन सुना के मेहमानो को स्वागत करता की आप अलवर रियासत के राजमहल के प्रायंगान में हैं .
बंद से 50 मीटर की दूरी पे ओंठों की सवारी आपका इंतज़ार कर रही थी . सबको एक एक ुण्ठ पे बिठा जाता जोह शाही पोषक और आभूसन से सजे धजे थे ....... उन्ह पे बिठा के आपको स्टेडियम के एंट्री गेट पे छोड़ा जाता .
आर्यन की फॅमिली को लगने लगा कहीं ज़ू में तोह नहीं आ गए क्योंकि आगे एक तरफ ऑस्ट्रिच और दूसरी तरफ मोरर के बाड़े थे . उसके बाद कई पक्षी और जंगल के जंगली जानवरों के बड़े थे .
यह सब राजकुमारी दीप्ति ने गॉड लिए हुए थे जोह जंगल में अनाथ हो गए थे . दीप्ति की एक वाइल्ड लाइफ सविओर संस्था थी जिसमे जंगली जानवरों को अडॉप्ट कर बड़ा किया जाता फिर वसख होने पे वापस वाइल्डलाइफ में जंगल में छोड़ दिया जाता . कई जानवर तो विदेश से भी लाये गए थे जोह कभी वापस hi नहीं गए.
अलवर के लोकल और टूरिस्ट लोगों को यहाँ घूमने का बस एक 5 रूपये का टिकट पास लेना होता इतने सुन्दर जंगल के जीव जंतु को निकट से देखने के लिए .
ुण्ठ पे बिठा के 2 कम दुर्र एक बड़े से स्टेडियम के बहार छोड़ा जाता जहाँ राजा त्रिभुवन सिंह का महामंत्री सबका स्वागत करते खड़ा था .
शाही पोषक में 18 दासियाँ हर विप अतिथियों को एक गुलदश्ता और शीतल पेय गिलास में देती .
स्टेडियम के एंट्री पे आपको अपना एंट्रीपास और सील दोनों सिक्योरिटी वालों को दिखानी होती . तीन तरह के पास थे , सिल्वर , गोल्ड एंड रॉयल .
स्लिवर पास = अलवर की जनता जोह आज भी राजा प्रथा को मानती थी , उनकी बाकायदा लिस्ट बना के सीक्रेट इनविटेशन दिया गया था . इनका नंबर सबसे ज्यादा था . करीब 18000 से ऊपर संख्या होगी .
गोल्ड पास = रॉयल फॅमिली , उनके मित्र , बिजनेसमैन और मंत्री की फॅमिली के लिए था . इसी केटेगरी में आर्यन की फॅमिली थी बस 4** को छोड़कर (गीता, मीणा , नेहा एंड डॉली ) . गोल्ड केटेगरी में 4000 के करीब नंबर में गेस्ट थे .
** यह चरों राजकुमारी दीप्ति के साथ उसकी सहेली बनकर स्वयंवर के उसके पोडियम ( मंच ) पे रहने वाली थी दीप्ति की स्पेशल रिक्वेस्ट पे . दीप्ति यहाँ भी अपनी 4 सौतें का दिल जीतने से नहीं चुकी .
रॉयल पास = किसी सल्तनत , रियासत या देश के राजा या राजकुमार , रानियां और राजकुमारी के लिए था , उनके साथ सिर्फ एक पर्सनल बॉडी गार्ड अल्लोव था . रॉयल पास का नंबर करीब 1200 के करीब था .
स्टेडियम को लाइट्स और फूलों से सज्य गया था सबकी सीट के नंबर अलग अलग पोडियम केटेगरी वाइज थे .
राजा त्रिभुवन के सिंघासन वाले पोडियम के राइट साइड कौंसिल का पोडियम और रॉयल पोडियम था .
लेफ्ट साइड राजकुमारी दीप्ति का पोडियम था और उसके साइड गोल्ड केटेगरी का 2 पोडियम बने थे और 3रद गोल्ड पोडियम रॉयल पोडियम के तरफ था .
बाकी सारे पोडियम सिल्वर केटेगरी के थे.
आज कोई 25 हज़ार लोगों का हज़म राजकुमारी दीप्ति के स्वयंवर के लिए योग्य वर की प्रतिस्पर्धा देखने को वकुल हो रहा था .
तभी 9 बजे राजा त्रिभुवन सिंह की शाही सवारी उन्ह घोड़े के बंद के पीछे स्टेडियम में एंटर की , माइक पे अनाउंसमेंट के साथ सबको खड़ा होने को कहा गया .
राजा त्रिभुवन सिंह के अपनी दोनों रानी संगीता और जमुना के 8 घोड़ों के विशाल रथ से उतारते hi जय जय के नारे पूरे स्टेडियम की एरीना में गूज गए.
राजा त्रिभुवन सिंह अपनी दोनों रानियों के साथ अपने राजा वाले मंच के सिंघासन पे विराजमान हुए तब शोर थमा .
फिर एक 4 घोड़े के रथ स्टेडियम में एंटर करते hi अनाउंसमेंट हुआ राजा जबर सिंह अपनी 3 रानियों के साथ पधारे उनको भी राजा त्रिभुवन सिंह के लेफ्ट साइड बने सिंघासन पे विराजमान होना था .
वह कौंसिल के चेयरमैन थे और राजकुमारी दीप्ति के बड़े भाई . फिर राजगुरुजी , रघुभार सिंह भी पधारे .
आखिर में जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था जोह आज के िश स्टेडियम िश स्वयंवर की शान थी , जिसको आज अपने लिए वर चुनकर ुष वीर को शूरवीर बना देना था उसकी एंट्री हुयी .
"राजकुमारी दीप्ति सिंह "
सब कुर्सी से खड़े हो गए , उनके रथ को 4 ब्लैक घोड़े खींच रहे थे जिसको वह खुद चला के ला रही थी .
सर से पाओ तक एक योद्धा की ड्रेस पहने बस सर पे राजकुमारी का मुक्त था राइट साइड के खुले पे लटकी थी एक तलवार . पूरे बाल खुले हुए देखते hi समां बांधता था यह दृश्य ...... विश्वसुंदरी , नीली आँखों वाली , 6 फट लम्बी छरहरी काय , गोरी चिट्टी बिलकुल दूध की तरह सफ़ेद , चेहरे का तेज़ बता रहा था जोह लाल कलर सा लिया था जवालामुखी की ओसमा के कारन पर अब वाइट कलर से मिलकर अलग hi गूरे रंग का पिंकिश टिंच दे रहा था .
पूरा एरीना 4 शेरोन ( अफ्रीकन लायन ) की धाड़ से गूंज गया जोह राजकुमारी के रथ के पीछे पीछे आ रहे थे. उनके पीछे राजकुमारी के शाही 40 बोडीगार्ड्स की टोली भी 20 मीटर दूर पे एंट्री की .
राजकुमारी का ऐसा रूप देख साडी जनता hi जोश से उन्माद हो गयी , "राजकुमारी दीप्ति की जय " .
" राजकुमारी दीप्ति की जय " , शेर की धाड़ और दीप्ति की जय के नारून से स्टेडियम गूंज गया . राजगुरुजी और रघुभार सिंह को राजमहल में बानी प्राचीन तस्वीर याद आ गयी जोह दीप्ति और उसके शेरोन से मेल कहती थी बस एक शेर ज्यादा था .
दीप्ति ने हाथ जोड़कर सबका चरों और झुकार अभिवादन किया . रथ से उतर कर अपने चरों शेरोन के पास जा उनके सर पे हाथ फिरा के अपने पोडियम पे चढ़ गयी उसके पीछे पीछे 4 शेर भी जा रहे थे .
सबके सरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी की यह असली hi शेर हैं क्या जोह राजकुमारी के इशारों पे कंट्रोल्ड हैं. जबकि अलवर की जनता जानती थी राजकुमारी को सभी पसु पक्षी से कितना प्यार है . कोई भी जानवर कितना hi हिंसक हो राजकुमारी दीप्ति के प्यार के सामने वह भी अपनी हिंसकता छोड़ देता .
राजकुमारी ने एक बार फिर अपने सिंघासन पे बैठने से पहले अपने सब बड़ो को हाथ जोड़कर नमन किया और बेथ गयी और चरों शेर उसके प्यारों के पास कालीन पे .
सबको पता चल रहा था जिसको वह नाजुक से राजकुमारी समझ रहे थे वह कोई मामूली लड़की नहीं किसी वीरंगा की तरह रानी लक्ष्मीबाई लग रही थी .
सबसे ज्यादा तोह राजा त्रिभुवन , रानी संगीता और जमुना चकित थे की दीप्ति ने स्पेशल शाही पोषक न पहनकर एक योद्धा की ड्रेस क्यों पहनी है .
रानी जमुना से रुका न गया उन्होंने अपनी चुनरी जो सर पे थी उसको उतार के दीप्ति के पास जा उसके सर पे दाल के गले तक कवर कर दी की वह कमसे काम अपना सर ढके , दीप्ति भी अपनी छोटी मम्मी का प्यार देखकर मुस्करा दी .
दीप्ति के सिंघासन के पीछे उसकी चरों सौतन भी दीप्ति को देखकर खुश भी थी और शॉकेड भी . यह रूप बाकी तीनो से छिपा था मीणा से नहीं और न hi गोल्ड पोडियम में बैठी अणि से जोह सिर्फ राजा जबर सिंह को hi घोर रही थी जो ललचाई नज़रों से सारू और अणि को घूर रहा था .
अणि को बड़े गुरूजी ने रोका न होता तो आज िश राजा जबर सिंह की कौंसिल में एक भी पुरुष जीवट नहीं होता .
मीणा ने अणि के मस्तिष्क में कहा ," सबर कर अणि यह तेरा नहीं आर्यन का शिकार है सही समय पे मरेगा बस जबतक बर्दास्त कर ".
दीप्ति का ऐसा रूप देखकर जहाँ कई राजाओं और राजकुमारों के पसीने छूट गए वहीँ सब उसकी सुंदरता से घायल हुए भी बैठे थे . आज उसका यह रूप सबको आकर्षित कर रहा था की मौत को गले लगा लो मेरे लिए तो भी काम है .
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आर्यन योद्धा की अपनी ड्रेस में डार्क रेड एंड ब्लैक में एक हॉक डिज़ाइन का हेलमेट हाथ में लिया जो उसको अजीब सा लगा पर उसको यह कहकर एक सैनिक ने दिया की राजगुरुजी ने भिजवा है जो सबसे अलग दिख रहा था .
उसने भी मन नहीं किया जब करीब 125 योद्धा ड्रेस्ड और अपना हथियार और शील्ड लिए स्टेडियम में एंटर किये तो हर तरफ तालियों की गूँज सुनाई दी .
आर्यन ने कोई ढाल नहीं ली की स्पीड काम करेगी .
सबको स्टेडियम में एक टुकड़ी की तरह बीचों बिच खड़े योद्धों में कई जोड़ी आंखें बस आर्यन को दूध रही थी लेकिन अणि और मीणा के अल्वा कोई आर्यन को पहचान नहीं पा रहा था क्योंकि वह बिच में वह गरुड़ मुकुट सा पहने खड़ा था .
गरुड़ शिरस्त्राण ( हेलमेट )
आर्यन को शुरू में वह बहोत भरी लगा जैसे 2 क्विंटल का वजन उसके सर पे रखा हो पर 1 मं बाद बिलकुल हल्का सा लगने लगा जैसे कुछ सर पे hi न हो .
आर्यन खुद 7 फट का होगा लेकिन यहाँ तोह लड़ने वालों की हट 6' फट से ऊपर hi होगी और 2 योद्धा तोह 8'6" फट के सबसे लम्बे चौड़े अलग hi नज़र आ रहे थे , योद्धा की ड्रेस भी उनके लिए छोटी hi लग रही थी .
यह दोनों तांत्रिक त्रिलोचन के भेजे छदम योद्धा नहीं अपितु खुद त्रिलोचन आर्यन का सामने आ गया था अपने दो विशाल मानव रूप धार कर और यही वह भूल कर गया की उसको आर्यन के सामने नहीं आना चाहिए था .
त्रिलोचन भी कहाँ जानता था वह आया नहीं बुलाया गया ???
गरुड़ शिरस्त्राण को देख राजा त्रिभुवन , जबर सिंह , रघुभार सिंह और जोह ुष हेलमेट के बारे में जानते थे उनकी आंखें hi नहीं फटी हुयी थी बल्कि चेहरे से भी पसीना आ चूका था . आज तक जिसने वह पहने की कोशिश की वह उसके कसाव से hi सर फटने से मर गया .
लेकिन सब ॉश्चारिये थे की यह काल कोठरी से खुनी गरुड़ शिरस्त्राण बहार कैसे आया और इश्को पहनकर कोण खड़ा है जोह मारा तो नहीं है सबके साथ चल के आया है और अभी तक कुछ नहीं हुआ असंभव .
लेकिन धीरे धीरे जान रहे थे जोह समझदार थे की असंभव को hi संभव करने दिव्या तलवार का वररिस आया है .
हार्ट हार्ट हार्ट