Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 23 - SexBaba
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Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

अपडेट 33

PART - 9 (ा) ( दीप्ति )

राजमहल , पिछली रात 1 ऍम

राजा जबर सिंह को रात को खबर मिली की आर्यन हेलीकाप्टर से आश्रम के पास वाले गाओं तक गया था . आश्रम पे डकैतों ने हमला किया था आर्यन की टीम ने सब आश्रम वालों को बचा लिया और रानी मिरदुला का कहीं कुछ पता नहीं चला .

राजा जबर सिंह को मालूम हो गया उसके आदमीओ को आर्यन ने मरवा के रानी मिरदुला को अपने कब्जे में ले लिया है . उसकी यह चल विफल रही तो झुंझला कर अपने कक्ष में इधर उधर टहलता हुआ अपनी आकृ योजना को अमल में लाने का पूरा मैं बना जायजा लेने के लिए निकल गया किसी से मिलने .

रात्रि के 2 बजे वह राजमहल के बहार गुप्त जगह अपनी गुप्त योजना के कारन हेतु बुलाये हुए एक बहोत बड़े तांत्रिक और एक ओझा बाबा से मिलने आ पहुंचा था .

दोनों hi अपनी सकती उपयोग करके भी आर्यन तक न पहुंच सके थे . जब उन दोनों को भी जीवन नाशी शक्ति का अहसास हुआ तो पता न लगा पाए कोण सी शक्ति थी जोह सबकी ऊर्जा खींच रही थी .

तांत्रिक ने कहा," महाराज में गलत नहीं कहूंगा लेकिन यह जोह आर्यन नाम का लड़का आप बता रहे हो वह कोई सिद्ध पुरुष है . दूसरा उसकी माँ सारू भी किसी शक्ति से सुरक्षित है उन्ह दोनों तक में पहुंचने में विफल हुआ लेकिन कोई 2 बहोत बड़ी शक्तियां अलवर के राजमहल में आज शाम से उपस्थित हैं".

राजा जबर सिंह ने जब ओझा से पुछा तो उसका जवाब था ," महाराज मेरी विद्या किसी को भी वश में करने वाली है और जादू मंतर से में एक अदृश्य सेना बनाकर हमला भी कर सकता हूँ लेकिन दोनों hi विफल हुए आर्यन तक पहुंचे से पहले hi मेरा वार नष्ट हो गया. आज तक मेरे वार से कोई नहीं बच पाया लेकिन यह लड़का अद्भुत शक्ति का स्वामी लगता है जिसको हम टुच्चा समझने की भूल कर रहे थे . उससे निपटने के लिए हमको अपनी साड़ी शक्ति का फिरसे घोर आघात करना होगा ".

राजा जबर सिंह ," आप दोनों समझ नहीं रहे हो में दिव्या तलवार और अकल्पनीय विशाल ख़ज़ाने की बात कर रहा हूँ जोह राजा पृथ्वीराज चौहान के समय से पहले का होगा . अगर आर्यन उसको लाने में सफल भी होता है जोह उसको करना hi पड़ेगा लेकिन वह हमारा होना चाहिए उसका क्या ? ...... अगर वह दिव्या तलवार वह धारण कर लिया फिर हमारी जीत कैसे होगी ? ....... हमको हर हाल में दिव्या तलवार को उससे चीन होगा ".

तांत्रिक ," हमारे पास दो hi राष्टीय हैं या तो ुष लड़के को रोका जाए या उसके दोनों हासिल करने के बाद चीन लिया जाए" ....... है है है है ...... यह युक्ति कैसी है महाराज .

ओझा ," मुझे भी यही युक्ति सही लगती है परन्तु वह लड़का बहोत शक्तिशाली प्रतीत होता है ुष पर कोई भी काली शक्ति का वार विफल तो दूर नजदीक भी हम नहीं पहुंच पा रहे हैं ".

राजा जबर सिंह ," पर स्वयंवर में कई राजा और उनके योद्धा राजकुमारी दीप्ति के साथ विवाह के लिए लड़ेंगे . हम को फायदा तभी होगा जब वह सब मारे जाये या पराजित होकर हमारे गुलाम होने चाहिए ".

तांत्रिक ," िश में कोनसी बड़ी बात है कल हम दोनों आपको अपनी साधना की शक्ति से दो ऐसे योद्धा देंगे जिनपर कोई अस्त्र शास्त्र का असर नहीं होगा ना hi किसी तंत्र मंतर का , बलशाली इतने की सामने वाले का बल सोहक कर उसको शक्तिहीन कर दे, दोनों अजय होंगे " .

ओझा उत्साहित होकर बोलै ," में उनके अंदर अपने अनुष्ठान के जप से ऐसे शक्ति दाल दूंगा की उनके पास अदृश्य हथियार और कवच होगा जिसको कोई देख नहीं सकता न hi कोई बढ़ पायेगा ".

राजा जबर सिंह के चेहरे पे कुटिल मुस्कान आ गयी और ताव में बोलै," मुझे वह आर्यन की माँ सारू भी चाहिए सिर्फ एक बार hi क्यों न हो बस उसको किसी भी हाल में भोगना है , आप दोनों चाहो तो उसकी किसी भी कुवारी भें का सरीर भोग सकते हो बस उसकी सगी भें अनीता (अणि) को मेरे लिए छोड़ देना उन्ह दोनों माँ बेटी को में अपनी एक साथ अपनी रानियां बनूँगा दिव्या तलवार हाथ में होते hi फिर दोनों के साथ एक बिस्तर पर सुहागरात है है है है ".......

सारू के मदमस्त जिस्म और सुंदरता याद करके राजा जबर सिंह का लुंड भी टाइट हो गया और अणि के मादक जिस्म और कुवारी योनि का सोचकर के hi झड़ने की कगार पे आ गया .

तांत्रिक और ओझा उसकी मैं की सिथि समझ गए तब तांत्रिक बोलै ," राजा शभ अभी िंह सबका वक़त नहीं है आपकी विजय के बाद उसके परिवार की सब स्त्री और लड़कियों का भोग भी करेंगे . आपके लिए खाश औषदि भी है जिसको खाकर आप 10 औरशन से एक साथ सम्भोग कर सकते हो ".

राजा जबर सिंह भी उनको पूरी तयारी का कहकर, उन दोनों से विदा लेकर चला गया. तैयार हो जा आर्यन तेरा सबकुछ चीन लूंगा में .

जबर सिंह के जाते hi दोनों एक दुसरे को देख के दरवानी हसी है दिए और एक सेकंड से भी काम समय में दोनों के सरीर एक दुसरे में समां कर एक अलग hi व्यक्ति में बदल गए जोह लम्बी जटाधारी सर के बाल और लम्भी दादी वाला भभूत लपेटे खूंखार डरावने तांत्रिक में बदल गया .

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तांत्रिक

त्रिलोचन प्रधान, यही नाम था उसका , बहोत hi दुष्ट और कई सिद्दी प्राप्त करने वाला , खुद को आसुरी काली शक्तियों का भक्त मान सब असुरों और सेहतान की पूजा करता था .

6 फट 6 इंच लम्बा काला भूसंद, लाल लाल बड़ी आंखें जैसे नशे में रहती थी. काली खुदरी त्वचा और सरीर से उठने वाली बदबू से ऐसा प्रतीत होता सालों से नहीं नहाया है.

सरीर पे एक काला घांचा बंधा था पूरा सरीर बालों से ढाका हुआ . हाथ पेअर में ताबीज़ बंधे थे . गले में मोठे मोठे रउदारक्ष की माला के बिच एक बच्चों की खोपड़ी की भी माला थी .

त्रिलोचन इंडिया के असम प्रान्त का रहने वाला था , उम्र यही 55-60 साल के बिच होगी . उसने तांत्रिक की विद्या कामाख्या देवी के मंदिर में सीखने की शुरवात की थी पर उम्र के साथ उसका झुकाव काली और शैतानी ताकत की सिद्धि की तरफ हो गया. इश्वरिये शक्ति पाने के लिए जहाँ साड़ी उम्र बीत जाती है वहीँ बुरी और काली शक्ति कुछ सालों में बधाई जा सकती हैं .

कभी साधु के भेस में कभी तांत्रिक का भेस धारण कर त्रिलोचन पूरा हिंदुस्तान की ख़ाक छान दिया था जहाँ उसको पता चलता वहां जो शक्ति मिलेगी उसको हासिल कर लेता . कुवारी लड़कियों और नयी भयता स्त्री के साथ उसके परिवार और पति के सामने अमानवीय जबरदस्ती सम्भोग करना उसको अद्भुत आनंद प्रदान करता फिर उनको मार के उनके लहू और अंग का सेवन करता . खुद को चांडाल और नरभक्षी में तब्दील कर उसको लगता की उसकी शक्तियां और ज्यादा बढ़ रही हैं .

ख़ज़ाने और दिव्या तलवार दोनों दिव्या शक्तियां थी वह उनको तो हासिल करने से रहा लेकिन अगर राजा जबर वह हासिल कर ले और राजा पे उसका कण्ट्रोल हो तोह वो उससे बड़े से बड़ा काम अपना गुलाम बना के करवा सकता है .

त्रिभुवन ने अपनी सिद्धि से अपनी आत्मा को साध लिया था यह उसको लगता था पर वह सिर्फ आत्मा का सिर्फ एक हिस्सा भर था , अपनी तंत्र मंतर की शक्ति से अपने 12 रूप भी धार सकता था .

जोह जीवट पुरुष आत्मा को साध ले उनको मोक्ष मिल जाता है और उसकी आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है मगर िश मूरख को कोण समझाए .

इश्कि मुलाकात 7 साल पहले राजा जबर सिंह से हुयी थी , त्रिलोचन तांत्रिक की सिद्धि देख तब उसने खजाने और दिव्या तलवार के बारे में जीकर कर उसको हासिल करने की बात की थी .

ुष समय त्रिलोचन तांत्रिक ने एक अनुष्ठान कर दीप्ति को अपने कण्ट्रोल में करने की कोशिश की तोह खुद मरते मरते बचा .

जैसे hi उसका सबसे शक्तिशाली मंतर दीप्ति को लगा वह तो थोड़ी डिअर के लिए बेहोश हो गयी पर एक अदृश्य आग बरसती तलवार लिए दानव आकर नरपिचसणी ने इसको पूरी पार्थवी पर भटकने और छिपने को मजबूर कर दिया .

त्रिलोचन खाते पीते, उठते बैठते, अपनी साधना में लीं होते hi नरपिचसणी की खतरनाक थक्के की आवाज और उसके नाम लेकर गुर्राना ,उसका पीछा hi नहीं छूट रहा था सारे मंतर और उसकी सिद्धि फ़ैल हो गयी . 3-4 बार भिड़ा भी तो मार मार के अदमरा करके खून पीकर छोड़ देती .

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नरपिचसणी

कुछ दिनों बाद बस उसकी प्रजेंस hi डर के मारे कई बार तो त्रिलोचन का पिशाब भी निकल देती न hi उसकी कोई शक्ति काम आती . जितना डरता उतना डरती .

एक साल बाद ुष नरक से बतर दिन जेह्लने पर जब नरपिचसणी ने पीछा छोड़ा तब पता चला वह ुशी का सबसे सक्तिसाली मंतर दीप्ति से टकरा के नरपिचसणी का रूप धारण कर लिया और उसको hi एक साल से मूरख बना ुशी पे वार करता जान की दुश्मन दिखाई देती . त्रिलोचन समझ गया था राजकुमारी दीप्ति बहोत बड़ी दिव्या आत्मा है ुष्पे वार अपनी मौत को दावत देना है .

6 साल की कड़ी तपस्या और साधना के बाद उसको दो चीज़ गायत हुयी पहली दीप्ति के अंदर ुष दिव्या तलवार की शक्ति है जोह पुरुष उसको छू दिया उसकी मिर्तु निश्चित है चाहे वह कोई दिव्या पुरुष hi क्यों न हो , कोई जादू मंतर किया तोह खुद पे hi उल्टा असर होगा .

दूसरी बात दीप्ति hi तलवार और ख़ज़ाने की रक्षक है जबतक उसका वररिस नहीं आएगा कोई दिव्या तलवार और ख़ज़ाने को हासिल नहीं कर सकता दीप्ति के रहते हुए .

त्रिलोचन जब 7 साल बाद राजा जबर सिंह से फिर उसके महल में मिला तोह उसने तलवार की कुछ सच्चाई बताई की वह उसकी मदद करेगा हासिल करने में तोह राजा जबर सिंह ने भी बता दिया की दीप्ति hi भविष्वाणी के हिसाब से ुष वररिस को खोज देगी.

आर्यन की खबर मिलते hi राजा जबर सिंह ने स्वामी त्रिलोचन को सूचना भिजवा उनसे मिला को कहा और त्रिलोचन उसको ओझा भैरवनाथ को भी साथ मिलने को कहा .

मतलब त्रिलोचन ने अपने दो सरीर बना दिए एक तांत्रिक और दूसरा ओझा का. जबर सिंह को लगता वह दोनों वास्तव में उसकी मदद करेंगे .

तांत्रिक त्रिलोचन ने अब अपना सबसे कठोर अनुष्ठान शुरू कर दिया था जोह सुबह 5 बजे तक चलने वाला था .

उधर राजा जबर सिंह को खबर मिली की आर्यन लौट आया है फार्महाउस पे .

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आर्यन सुबह 5:30 बजे दीप्ति और अर्जुन के साथ एक प्राचीन शिव मंदिर के पास निकला और भगवन भोलेनाथ के दर्शन कर बहार आया तोह अणि वहां आकर राजकुमारी दीप्ति को अपने साथ राजमहल ले गयी .

आर्यन 6 बजे अर्जुन के साथ फार्महाउस पहुंचा सीधा रानी मृदुला से मिलने .

वहां उसकी टीम और बिना सब परेशां से लग रहे थे .

आर्यन को देखकर बिना और डॉक्टर उसके पास आये तोह डॉक्टर बोलै ," आर्यन सर मिरेकल हो गया वह लेडी बिलकुल ठीक हो गयी है उसको मैंने नींद का इंजेक्शन दिया है वह बार बार आपका पेट नाम "मेरा माहि" "मेरा माहि" चिल्ला रही थी फिर वाइल्ड होने लगी गुस्से से बड़ी मुश्किल से हमने उसपर काबू पाया ".

बिना ," आर्यन सर ( सर बिना सबके सामने बोलती थी ) , मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा चमत्कार नहीं देखा रानी मिरदुला बिलकुल जवान लड़की की तरह दिख रही है ".

आर्यन हसकर ," मैंने तोह डॉक्टर शभ से पहले hi कहा था शॉक लगेगा सुबह तक, अच्छा में मिल लेता हूँ ".

तभी नर्स दौड़ी हुयी आयी ," डॉक्टर पेशेंट को होश आ गया "...... डॉक्टर भी हैरान था की आधे घंटे में कैसे पेशेंट की आँख खुल गयी .

आर्यन और बाकी सब जब रूम में पहुंचे तोह आर्यन भी रानी मिरदुला को देखकर शॉकेड हो गया .

रानी मिरदुला की नज़र जैसे hi आर्यन पे पड़ी तोह बीएड से उठने लगी रोटी हुए ," मेरे माहि तू कहाँ चला गया था भूउउउउ भूउउउउउउ ".

आर्यन आगे बढ़कर उसको संभाला तोह किसी छोटी बच्ची तरह लिपट के रोने लगी .

आर्यन को भी विश्वास नहीं हुआ यह कैसे हो गया वह संजीवनी का बीज पुनर सवस्थ करसकता है अर्ध मिरित सरीर को लेकिन चिरयौवन रूप प्रदान कर देगा उसको अंदजा नहीं था की किसी उमरदार व्यक्ति या औरत पे भी इसका वही असर होगा जैसे जवान के साथ हो पर रानी मिरदुला किसी अप्सरा सी सुन्दर और चेहरे पे दीखता तेज़ उसको 18-19 साल की जवान लौंडिया बना देगा यह उसने भी नहीं सोचा था .

रानी मिरदुला रोटी ," माहि मेरे बेटे यह लोग मुझे यहाँ कैद रखकर तुझसे दूर करना चाहते हैं ".

माहि को बीटा सुनकर सब शॉकेड हो गए पर आर्यन तो अभी भी शॉकेड से सोच रहा था मेरी माँ इतनी जवान कैसे हो गयी .

तब बड़े गुरूजी ने कहा की विचलित न हो पुत्र तुम्हारे उपचार ने चिर यौवना में बदल दिया है लक्ष्मी को, तुम चाहो तोह सबसे यह बात छुपा सकते हो की यह रानी मिरदुला है लेकिन कुछ लोग तो पहचान hi लेंगे ".

आर्यन ," गुरूजी में अपनी माता को कोई कष्ट नहीं होने दूंगा ,समय के अनुसार सबको बता दूंगा की एहि रानी मिरदुला हैं ".

आर्यन ने मिरदुला के आंसूं पहुंचे और बोलै ," मैया तुझे भूख लगी होगी में कुछ खाने को मांगता हूँ ".

सब को इशारा किया बहार जाने का . बिना से एक काढ़े वाला जूस बना के लाने को कहा और कोई ाची सी ड्रेस जोह मिरदुला को ठीक आये .

सबके जाते hi आर्यन ने अपने से लिपटी रानी मिरदुला को गॉड में उठा के बीएड पे लिटा दिया और उसके बालों में हाथ फेरते हुए माथा चूम के देखा तो मिरदुला भी आर्यन के फेस को टच कर खुश होती हुयी बोली ," माहिया तू इतना गोरा कैसे हो गया रे ".

(* माहिया = महार्यं का पेट नाम था सब उसके सेज माहिया hi बुलाते थे जैसे िश जनम में माहि. माहिया का कलर बिलकुल काला था पर काढ़ काठी आर्यन जैसी hi थी . )

आर्यन हसकर ," जैसे तू जवान हो गयी है में भी गोरा हो गया िश जनम में ".

मिरदुला ने अपने सरीर को छूकर देखा फिर आर्यन का सर निचे कर उसको अपने सीने पे रख हाथ उसके बालों में फिरा के बोली," में कितने सालों से तेरा इंतज़ार कर रही थी पर तू आया क्यों नहीं , मेरी 2 बेटियां भी हैं, तेरी दो भेने है , एक तोह बहोत छोटी है दूसरी अभी ***** साल की होगी सुचित्रा नाम है . महाराज भी नहीं दिखे ".

मिरदुला दोनों जनमो की यादों को मिक्स करके बात कर रही थी , उसके पिछले जनम का माहिया से जुडी हर बात याद था बाकी नहीं .

आर्यन ने सर उठा के सीधा होकर बीएड पे बैठा और मिरदुला का सर अपनी गॉड में रख के उसके बाल पे हाथ फेरता बोलै," तुझे बहोत बातें और सच्च नहीं पता बस इतना जान ले तू 21 साल से सोई थी अब जाएगी है . तू मेरी मैया (माँ) है यह बात तू और में जानते हैं . तेरी दोनों बेटियां जवान हो गयी हैं बड़ी की तोह विवाह के बाद एक जवान बेटी भी है और छोटी की शादी होने वाली है उसका स्वयंवर है आज "....... फिर आर्यन ने उसको आधे घंटे 21 साल की पूरी स्टोरी सुना दी यह भी दीप्ति उससे प्रेम करती है और वह भी आर्यन को दिव्या तलवार का वररिस मानती है .

मिरदुला कभी दुखी कभी खुस कभी आंसूं कभी मोह पे मुस्कान यह hi संवेदना उसके चेहरे पे मौसम की तरह आ जा रही थी .

आर्यन ने कहानी ख़तम की तो दूर खोल के अणि , मीणा , सारू और डॉ अंजू, डॉ सलोनी अंदर आये .

एक जवान लड़की को आर्यन की गॉड में अपना सर को सीने से लगाए बैठा देखकर चौंक गए .

रानी मिरदुला , हाइट 5'11"फट , वट करीब अभी 50 से काम hi लग रहा था , धमकता चेहरे उजला रंग रंगत , दिलनशी कजरारी आंखें , ऊँचा माथा , लम्बी नाक , गुलबाई रसभरे होंठ , तीखी थोड़ी लम्बी सूरहैड़ार गर्दन , दोनों पहाड़ की तरह ताने वक्ष , सुत्वा पेट , निचे कटाव में पहले पुष्ट नितम्ब , घेरि नाभि और नाभि के निचे दोनों लम्बी टाँगिआन के जोड़ पे बिलकुल कावेरी लड़की की तरह बांध झांघें , गूरे गूरे दूध जैसे प्यार ........ साक्षात आश्मान से उत्तरी हुयी कोई स्वर्ग की देवी लग रही थी .

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मिरदुला अस यंग गर्ल

सारू ने आगे बढ़कर उसके प्यार चुहये तोह डर गयी तब आर्यन ने मिरदुला के कान में कुछ कहा तोह आंखें बड़ी कर सारू को उठाकर उसके गले लग गयी .

सारू को आज अपने पिछले जनम के प्यार का िश जनम में माझी मिल गया था यानी रानी मिरदुला उसकी सास थी पर देखने में उल्टा hi था दोनों की उम्र बदल गयी थी . सारू को इतना अच्छा लग रहा था की कोई तो समझेगा की सारू ने अपने सेज बेटे से क्यों जिस्मानी समभंद बना लिए यह कोई पाप नहीं है बल्कि कड़वा सच्च है की वह दोनों पिछले जनम के सच्चे प्रेमी हैं .

मीणा ने अणि के कान में कहा ," अणि यह तोह तुझसे भी सुन्दर हो गयी है देखा नहीं तेरे भाई के तोपची का अहसास उसकी गॉड में बैठकर ले रही थी ".

अणि भी हसकर ," मीणा दीदी , एक बार शिकारी भूल जाये की शिकार नहीं करना आप नहीं भूलती फिर यह दोनों माँ बीटा से ज्यादा hi थे पिछले जनम में भूल गयी क्या ".

आर्यन ने डॉ अंजू और डॉ सलोनी से परिचय करवाया बस रानी मिरदुला को अपनी पुराणी जूनियर कहकर मिलवाया जोह सदमे ( डिप्रेशन) में थी अब रिकवर कर रही , मम्मी को देख उनको अपनी बेटी समझ रही है .

दोनों ने चेकउप किया और कुछ मेडिसिन लिखी की बस यह खानी है . डॉ अंजू ने कहा कभी अकेला मत रहने दो नहीं तोह डिप्रेशन होगा . दोनों माहिर डॉक्टर थी दोनों समझ गयी आर्यन कुछ चुप्पा रहा है पर उसने दोनों को आँखों से इशारा कर दिया था की बाद में बता दूंगा.

आर्यन ने मिरदुला की जिम्मेदारी सारू को दी क्योंकि उसको पता था मम्मी hi उसकी सही देखभाल कर सकती है .

तीनो से अकेले में बात हुयी तोह सारू ने कहा वह जानती है रानी मिरदुला hi मेरी सास थी . अणि और मीणा ने भी कहा वह जानते थे मिरदुला के बारे में . आर्यन नाराज़ हुआ उसको पहले क्यों नहीं बताया .

अणि ," गुरूजी ने मन किया था और भाई आप अब भी भूल रहे हो वह दीप्ति की माँ है यानि प्रेजेंट में . वह आपका पास्ट थी ी रेस्पेक्ट तहत लेकिन ुष रिश्ते को प्रेजेंट में मत खींचो ".

मीणा ," हाँ आर्यन , अणि ने ठीक hi कहा में भी एहि कहूँगी तू अपनी पिछले जनम की माँ से मिल लिया है अब उसको अपने बच्चों के पास जाने दो जोह िश जनम के हैं. तुम्हारे पास कितनी माँ , मम्मियां है और दीप्ति सुचित्रा की यह अकेली माँ है जोह 21 साल से उनसे दुर्र है ".

आर्यन थोड़ा निराश होकर ," वह तो ठीक है पर में कैसे भूल जॉन की वह मेरी मैया (माँ) है ".

अणि ," भाई एक बार उसको देख और किसी एंगल से यह तेरी मैया दिखती है . तेरी क्या यह तोह महिमा की मैया भी नहीं लग रही हाँ मम्मी ( सारू) जरूर इसकी मैया लग रही हैं ...... hi hi hi hi hi ...... दीप्ति से भी 4 साल छोटी लग रही है कुछ करना पड़ेगा पर यहाँ नहीं ".

आर्यन ," नहीं नहीं तू कुछ मत कर में संभल लूंगा "...... आर्यन को अणि की पावर का पता था की पता नहीं क्या कर दे.

सारू ," अणि सही कह रही आर्यन , मिरदुला माजी को अणि को नार्मल करने दे फिर उनको अपनी दोनों बेटियों के पास जाने दो फिर जब तुम्हारा मैं हो मिल लेना अपनी मैया से लेकिन दीप्ति से शादी होने के बाद hi बताना की वह तुम्हारी पिछले जनम की माँ थी नहीं तोह सब तुमको भाई भें बनाकर शादी न रोक दे ".

अणि हसकर ," don't वोर्री भाई में इनको 40 साल की उम्र की कर देती हूँ फिर किसीको साख भी नहीं होगा और दीप्ति से आपकी शादी भी होगी ".

आगे की प्लानिंग करते सब राजमहल पहुंचे .......

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सुबह के 8 बजे .......

पूरा राजमहल आज राजशी रंग ढंग की तरह सजा था , फूलों से लेकर कालीन तक , शामियाने से लेकर डोरशंस तक झूमर से लेकर फानूस तक सब रॉयल और रॉय रेड कलर में सजावट था, रॉय रेड अलवर का शाही रंग है .

अलवर के क़िले और राजमहल के मुख दवार पे अलवर रियासत के झंडे जिसपे काले घोड़े का अक्ष लाल रंग के झंडे पे छापा था हर जगह लहरा रहे थे .

क़िले के मैं गेट से 3 कम दुर्र अंदर एक बड़े से स्टेडियम को प्रतियोगिता मैदान या यह कहो योद्धा का एरीना सा बना दिया गया था . हर तरफ सैनिक की पोषक में शाही सैनिक और दुसरे काली यूनिफार्म में राजमहल की पर्सनल सिक्योरिटी थी .

लेकिन डार्क नेवी ब्लू कलर में इंडिया की टॉप प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी में से एक जोह दिल्ली बेस्ड थी , उसको हिरे किया गया था . हर चप्पे पे चप्पे पे गन्स और लेटेस्ट ग़ज़्ज़ातेस से लेश गार्ड्स टेनान्ट थे .

इतनी टाइट सिक्योरिटी और क़िला बंदी देखकर लगता जैसे यहाँ विप्स का जमवाड़ा होने वाला है . राजा त्रिभुवन सिंह ने स्वयंवर पे hi 400 करोड़ खर्च किया था और सिक्योरिटी पे hi कुछ 70 करोड़ खर्चा आया था. वैरी हिघटिच लेटेस्ट तकनीक के सब सिक्योरिटी अर्रंगेमेन्ट्स किये गए.

इतना जबरदस्त इंतज़ाम देकर आर्यन की फॅमिली , राजा जबर सिंह भी ॉश्चारिये चकित थे जबकि बाकी सब रजवाड़ों ने राजा त्रिभुवन सिंह की भूरी भूरी प्रशंसा की ताकि किसी के साथ न इंसाफ़ी न हो कोई बेमानी न करे .

हर हिस्से को ड्रोन और कैमरा से निगहरानी राखी जा रही थी . किसी को भी बिना पास और हाथ पे सील लगे अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था .

राजा और रॉयल फॅमिली के लिए अलग से मैं गेट पे एंट्री बना दी गयी थी पर चेकिंग उनकी भी स्वाम अलवर के मंत्री hi कर रहे थे स्पेशल सिक्योरिटी टीम के साथ .

जोह स्वयंवर में भाग लेने वाला हैं उनके लिए स्पेशल काउंटर बांया था जहाँ पे कंप्यूटर में पहले hi नाम , पता , फोटो और रियासत सब लिस्ट में था बस कन्फर्म किया जा रहा था .

उनको वहां से पहले एक स्पेशल कक्ष में ले जाय जाता फिर अपने सब कपडे और हथियार वहीँ देकर एक डैम नुदे एक फुल बॉडी स्कैन करवाना होता .

उसके बाद एक सक इंजेक्शन ( सबक्यूटेनियस) के थ्रू आपके राइट वृस्त के वाच पहने की जगह में स्किन के अंदर एक ट्रांसलूसेंट थिक पाली जेल इंजेक्ट किया जाता ताकि आप की हर मूवमेंट एक्सएक्ट लोकेशन कण्ट्रोल रूम में स्क्रीन पे दिखती रहे . एक छोटा सा टेप बैच दिया था जिसके अंदर माइक्रोचिप फिट थी और वह आपके चेस्ट पे चिपका के आपकी हार्ट बीट और पल्स नोट करती .

दोनों में से एक भी आउट ऑफ़ स्क्रीन हुयी आप प्रतियोगिता से बहार .

उसके बाद हथियार कक्ष में आप कोई भी अस्त्र जैसे तलवार , भला , गदा , तीर धनुस , फरसा , त्रिशूल , कुल्हाड़ी कुछ भी चुन सकते हैं .

अंदर कारपेट और फूलों से रास्ता कवर किया गया था , गेट के अंदर 12 हाथी 2 रौ में दोनों तरफ खड़े थे कालीन बिछे रस्ते पे जोह वहां से मेहमान गुजरते वह गुलाब जल का छिड़काव और पुष्प की वर्षा उन्ह पर करते .

हाथिओं से आगे बढ़कर 200 मीटर की दूरी पर 72 हॉर्सेज का शाही बंद था जोह अपनी धुन सुना के मेहमानो को स्वागत करता की आप अलवर रियासत के राजमहल के प्रायंगान में हैं .

बंद से 50 मीटर की दूरी पे ओंठों की सवारी आपका इंतज़ार कर रही थी . सबको एक एक ुण्ठ पे बिठा जाता जोह शाही पोषक और आभूसन से सजे धजे थे ....... उन्ह पे बिठा के आपको स्टेडियम के एंट्री गेट पे छोड़ा जाता .

आर्यन की फॅमिली को लगने लगा कहीं ज़ू में तोह नहीं आ गए क्योंकि आगे एक तरफ ऑस्ट्रिच और दूसरी तरफ मोरर के बाड़े थे . उसके बाद कई पक्षी और जंगल के जंगली जानवरों के बड़े थे .

यह सब राजकुमारी दीप्ति ने गॉड लिए हुए थे जोह जंगल में अनाथ हो गए थे . दीप्ति की एक वाइल्ड लाइफ सविओर संस्था थी जिसमे जंगली जानवरों को अडॉप्ट कर बड़ा किया जाता फिर वसख होने पे वापस वाइल्डलाइफ में जंगल में छोड़ दिया जाता . कई जानवर तो विदेश से भी लाये गए थे जोह कभी वापस hi नहीं गए.

अलवर के लोकल और टूरिस्ट लोगों को यहाँ घूमने का बस एक 5 रूपये का टिकट पास लेना होता इतने सुन्दर जंगल के जीव जंतु को निकट से देखने के लिए .

ुण्ठ पे बिठा के 2 कम दुर्र एक बड़े से स्टेडियम के बहार छोड़ा जाता जहाँ राजा त्रिभुवन सिंह का महामंत्री सबका स्वागत करते खड़ा था .

शाही पोषक में 18 दासियाँ हर विप अतिथियों को एक गुलदश्ता और शीतल पेय गिलास में देती .

स्टेडियम के एंट्री पे आपको अपना एंट्रीपास और सील दोनों सिक्योरिटी वालों को दिखानी होती . तीन तरह के पास थे , सिल्वर , गोल्ड एंड रॉयल .

स्लिवर पास = अलवर की जनता जोह आज भी राजा प्रथा को मानती थी , उनकी बाकायदा लिस्ट बना के सीक्रेट इनविटेशन दिया गया था . इनका नंबर सबसे ज्यादा था . करीब 18000 से ऊपर संख्या होगी .

गोल्ड पास = रॉयल फॅमिली , उनके मित्र , बिजनेसमैन और मंत्री की फॅमिली के लिए था . इसी केटेगरी में आर्यन की फॅमिली थी बस 4** को छोड़कर (गीता, मीणा , नेहा एंड डॉली ) . गोल्ड केटेगरी में 4000 के करीब नंबर में गेस्ट थे .

** यह चरों राजकुमारी दीप्ति के साथ उसकी सहेली बनकर स्वयंवर के उसके पोडियम ( मंच ) पे रहने वाली थी दीप्ति की स्पेशल रिक्वेस्ट पे . दीप्ति यहाँ भी अपनी 4 सौतें का दिल जीतने से नहीं चुकी .

रॉयल पास = किसी सल्तनत , रियासत या देश के राजा या राजकुमार , रानियां और राजकुमारी के लिए था , उनके साथ सिर्फ एक पर्सनल बॉडी गार्ड अल्लोव था . रॉयल पास का नंबर करीब 1200 के करीब था .

स्टेडियम को लाइट्स और फूलों से सज्य गया था सबकी सीट के नंबर अलग अलग पोडियम केटेगरी वाइज थे .

राजा त्रिभुवन के सिंघासन वाले पोडियम के राइट साइड कौंसिल का पोडियम और रॉयल पोडियम था .

लेफ्ट साइड राजकुमारी दीप्ति का पोडियम था और उसके साइड गोल्ड केटेगरी का 2 पोडियम बने थे और 3रद गोल्ड पोडियम रॉयल पोडियम के तरफ था .

बाकी सारे पोडियम सिल्वर केटेगरी के थे.

आज कोई 25 हज़ार लोगों का हज़म राजकुमारी दीप्ति के स्वयंवर के लिए योग्य वर की प्रतिस्पर्धा देखने को वकुल हो रहा था .

तभी 9 बजे राजा त्रिभुवन सिंह की शाही सवारी उन्ह घोड़े के बंद के पीछे स्टेडियम में एंटर की , माइक पे अनाउंसमेंट के साथ सबको खड़ा होने को कहा गया .

राजा त्रिभुवन सिंह के अपनी दोनों रानी संगीता और जमुना के 8 घोड़ों के विशाल रथ से उतारते hi जय जय के नारे पूरे स्टेडियम की एरीना में गूज गए.

राजा त्रिभुवन सिंह अपनी दोनों रानियों के साथ अपने राजा वाले मंच के सिंघासन पे विराजमान हुए तब शोर थमा .

फिर एक 4 घोड़े के रथ स्टेडियम में एंटर करते hi अनाउंसमेंट हुआ राजा जबर सिंह अपनी 3 रानियों के साथ पधारे उनको भी राजा त्रिभुवन सिंह के लेफ्ट साइड बने सिंघासन पे विराजमान होना था .

वह कौंसिल के चेयरमैन थे और राजकुमारी दीप्ति के बड़े भाई . फिर राजगुरुजी , रघुभार सिंह भी पधारे .

आखिर में जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था जोह आज के िश स्टेडियम िश स्वयंवर की शान थी , जिसको आज अपने लिए वर चुनकर ुष वीर को शूरवीर बना देना था उसकी एंट्री हुयी .

"राजकुमारी दीप्ति सिंह "

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सब कुर्सी से खड़े हो गए , उनके रथ को 4 ब्लैक घोड़े खींच रहे थे जिसको वह खुद चला के ला रही थी .

सर से पाओ तक एक योद्धा की ड्रेस पहने बस सर पे राजकुमारी का मुक्त था राइट साइड के खुले पे लटकी थी एक तलवार . पूरे बाल खुले हुए देखते hi समां बांधता था यह दृश्य ...... विश्वसुंदरी , नीली आँखों वाली , 6 फट लम्बी छरहरी काय , गोरी चिट्टी बिलकुल दूध की तरह सफ़ेद , चेहरे का तेज़ बता रहा था जोह लाल कलर सा लिया था जवालामुखी की ओसमा के कारन पर अब वाइट कलर से मिलकर अलग hi गूरे रंग का पिंकिश टिंच दे रहा था .

पूरा एरीना 4 शेरोन ( अफ्रीकन लायन ) की धाड़ से गूंज गया जोह राजकुमारी के रथ के पीछे पीछे आ रहे थे. उनके पीछे राजकुमारी के शाही 40 बोडीगार्ड्स की टोली भी 20 मीटर दूर पे एंट्री की .

राजकुमारी का ऐसा रूप देख साडी जनता hi जोश से उन्माद हो गयी , "राजकुमारी दीप्ति की जय " .

" राजकुमारी दीप्ति की जय " , शेर की धाड़ और दीप्ति की जय के नारून से स्टेडियम गूंज गया . राजगुरुजी और रघुभार सिंह को राजमहल में बानी प्राचीन तस्वीर याद आ गयी जोह दीप्ति और उसके शेरोन से मेल कहती थी बस एक शेर ज्यादा था .

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दीप्ति ने हाथ जोड़कर सबका चरों और झुकार अभिवादन किया . रथ से उतर कर अपने चरों शेरोन के पास जा उनके सर पे हाथ फिरा के अपने पोडियम पे चढ़ गयी उसके पीछे पीछे 4 शेर भी जा रहे थे .

सबके सरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी की यह असली hi शेर हैं क्या जोह राजकुमारी के इशारों पे कंट्रोल्ड हैं. जबकि अलवर की जनता जानती थी राजकुमारी को सभी पसु पक्षी से कितना प्यार है . कोई भी जानवर कितना hi हिंसक हो राजकुमारी दीप्ति के प्यार के सामने वह भी अपनी हिंसकता छोड़ देता .

राजकुमारी ने एक बार फिर अपने सिंघासन पे बैठने से पहले अपने सब बड़ो को हाथ जोड़कर नमन किया और बेथ गयी और चरों शेर उसके प्यारों के पास कालीन पे .

सबको पता चल रहा था जिसको वह नाजुक से राजकुमारी समझ रहे थे वह कोई मामूली लड़की नहीं किसी वीरंगा की तरह रानी लक्ष्मीबाई लग रही थी .

सबसे ज्यादा तोह राजा त्रिभुवन , रानी संगीता और जमुना चकित थे की दीप्ति ने स्पेशल शाही पोषक न पहनकर एक योद्धा की ड्रेस क्यों पहनी है .

रानी जमुना से रुका न गया उन्होंने अपनी चुनरी जो सर पे थी उसको उतार के दीप्ति के पास जा उसके सर पे दाल के गले तक कवर कर दी की वह कमसे काम अपना सर ढके , दीप्ति भी अपनी छोटी मम्मी का प्यार देखकर मुस्करा दी .

दीप्ति के सिंघासन के पीछे उसकी चरों सौतन भी दीप्ति को देखकर खुश भी थी और शॉकेड भी . यह रूप बाकी तीनो से छिपा था मीणा से नहीं और न hi गोल्ड पोडियम में बैठी अणि से जोह सिर्फ राजा जबर सिंह को hi घोर रही थी जो ललचाई नज़रों से सारू और अणि को घूर रहा था .

अणि को बड़े गुरूजी ने रोका न होता तो आज िश राजा जबर सिंह की कौंसिल में एक भी पुरुष जीवट नहीं होता .

मीणा ने अणि के मस्तिष्क में कहा ," सबर कर अणि यह तेरा नहीं आर्यन का शिकार है सही समय पे मरेगा बस जबतक बर्दास्त कर ".

दीप्ति का ऐसा रूप देखकर जहाँ कई राजाओं और राजकुमारों के पसीने छूट गए वहीँ सब उसकी सुंदरता से घायल हुए भी बैठे थे . आज उसका यह रूप सबको आकर्षित कर रहा था की मौत को गले लगा लो मेरे लिए तो भी काम है .

____________________________

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आर्यन योद्धा की अपनी ड्रेस में डार्क रेड एंड ब्लैक में एक हॉक डिज़ाइन का हेलमेट हाथ में लिया जो उसको अजीब सा लगा पर उसको यह कहकर एक सैनिक ने दिया की राजगुरुजी ने भिजवा है जो सबसे अलग दिख रहा था .

उसने भी मन नहीं किया जब करीब 125 योद्धा ड्रेस्ड और अपना हथियार और शील्ड लिए स्टेडियम में एंटर किये तो हर तरफ तालियों की गूँज सुनाई दी .

आर्यन ने कोई ढाल नहीं ली की स्पीड काम करेगी .

सबको स्टेडियम में एक टुकड़ी की तरह बीचों बिच खड़े योद्धों में कई जोड़ी आंखें बस आर्यन को दूध रही थी लेकिन अणि और मीणा के अल्वा कोई आर्यन को पहचान नहीं पा रहा था क्योंकि वह बिच में वह गरुड़ मुकुट सा पहने खड़ा था .

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गरुड़ शिरस्त्राण ( हेलमेट )

आर्यन को शुरू में वह बहोत भरी लगा जैसे 2 क्विंटल का वजन उसके सर पे रखा हो पर 1 मं बाद बिलकुल हल्का सा लगने लगा जैसे कुछ सर पे hi न हो .

आर्यन खुद 7 फट का होगा लेकिन यहाँ तोह लड़ने वालों की हट 6' फट से ऊपर hi होगी और 2 योद्धा तोह 8'6" फट के सबसे लम्बे चौड़े अलग hi नज़र आ रहे थे , योद्धा की ड्रेस भी उनके लिए छोटी hi लग रही थी .

यह दोनों तांत्रिक त्रिलोचन के भेजे छदम योद्धा नहीं अपितु खुद त्रिलोचन आर्यन का सामने आ गया था अपने दो विशाल मानव रूप धार कर और यही वह भूल कर गया की उसको आर्यन के सामने नहीं आना चाहिए था .

त्रिलोचन भी कहाँ जानता था वह आया नहीं बुलाया गया ???

गरुड़ शिरस्त्राण को देख राजा त्रिभुवन , जबर सिंह , रघुभार सिंह और जोह ुष हेलमेट के बारे में जानते थे उनकी आंखें hi नहीं फटी हुयी थी बल्कि चेहरे से भी पसीना आ चूका था . आज तक जिसने वह पहने की कोशिश की वह उसके कसाव से hi सर फटने से मर गया .

लेकिन सब ॉश्चारिये थे की यह काल कोठरी से खुनी गरुड़ शिरस्त्राण बहार कैसे आया और इश्को पहनकर कोण खड़ा है जोह मारा तो नहीं है सबके साथ चल के आया है और अभी तक कुछ नहीं हुआ असंभव .

लेकिन धीरे धीरे जान रहे थे जोह समझदार थे की असंभव को hi संभव करने दिव्या तलवार का वररिस आया है .

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अपडेट 33

PART - 9 (बी) (दीप्ति)

अब तक ...........

आर्यन खुद 7 फट का होगा लेकिन यहाँ तोह लड़ने वालों की हट 6' फट से ऊपर hi होगी और 2 योद्धा तोह 8'6" फट के सबसे लम्बे चौड़े अलग hi नज़र आ रहे थे , योद्धा की ड्रेस भी उनके लिए छोटी hi लग रही थी .

यह दोनों तांत्रिक त्रिलोचन के भेजे छदम योद्धा नहीं अपितु खुद त्रिलोचन आर्यन का सामने आ गया था अपने दो विशाल मानव रूप धार कर और यही वह भूल कर गया की उसको आर्यन के सामने नहीं आना चाहिए था .

त्रिलोचन भी कहाँ जानता था वह आया नहीं बुलाया गया ???

गरुड़ शिरस्त्राण को देख राजा त्रिभुवन , जबर सिंह , रघुभार सिंह और जोह ुष हेलमेट के बारे में जानते थे उनकी आंखें hi नहीं फटी हुयी थी बल्कि चेहरे से भी पसीना आ चूका था . आज तक जिसने वह पहने की कोशिश की वह उसके कसाव से hi सर फटने से मर गया .

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गरुड़ शिरस्त्राण

लेकिन सब ॉश्चारिये थे की यह काल कोठरी से खुनी गरुड़ शिरस्त्राण बहार कैसे आया और इश्को पहनकर कोण खड़ा है जोह मारा तो नहीं है सबके साथ चल के आया है और अभी तक कुछ नहीं हुआ असंभव .

लेकिन धीरे धीरे जान रहे थे जोह समझदार थे की असंभव को hi संभव करने दिव्या तलवार का वररिस आया है .

अब आगे ............

अनाउंसमेंट होने पे सब 125 योद्धा ने मैदान में राजा त्रिभुवन सिंह को घुटने पे बैठकर प्रणाम किया . राजा ने अपना हाथ उठा के उनको खड़े होने का सिग्नल दिया .

राजा त्रिभुवन सिंह ने माइक पे बोलना शुरू किया : में अलवर रियासत का राजा त्रिभुवन सिंह आप सभी राज्यों के राजा , रानी , राजकुमारों , राजकुमारिओं का स्वागत मेरी और मेरी जानता की तरफ से करता हूँ .

में अपने राजगुरुजी और राजा रघुभार सिंह की आज्ञा लेकर अपनी पुत्री राजकुमारी दीप्ति सिंह के स्वयंवर के सुभारम्भ का एलान करता हूँ . जोह भी योद्धा मेरी पुत्री के मैं को अपनी वीरता , चपलता , बूढी और बल से जीत लेगा वह राजकुमारी दीप्ति की इच्छा से उनसे विवाह और साथ hi अलवर के राजसिंहासन का उत्तराधिकारी होगा , साथ hi राजपूताना कौंसिल के नेक्स्ट चेयरमैन बनने का भी राजकुमारी के साथ बराबर का हकदार होगा" .

25,000 से ज्यादा की भीड़ के हर व्यक्ति को लगा राजा त्रिभुवन सिंह तो एक योद्धा जोह जीतेगा उसको दहेज के रूप में अपना सबकुछ नौछावर कर दे रहा हो .

पर अभी तो किसी को ज्ञात नहीं था की यह कोई प्रतियोगिता नहीं बल्कि खुनी खेल खेला जाने वाला था .

महामंत्री ने खड़े होकर घोसना की आज 4 चरण में प्रतिस्पर्धा होगी . पहला चरण घुड़सवारी का होगा जिसमे 25 घुड़सवार को एक साथ दौड़ के जो प्रथम 10 घुड़सवार िश मेडेन में 15 चक्कर पहले लगा डेगने वही विजेता होगये . हर चक्कर पे आखिरी घुड़सवार बहार हो जायेगा . घुड़सवारी करते हुए अपनी प्रतिद्वंदी पे अकर्मण या युद्ध के लिए ललकार भी सकते हैं परन्तु शर्त वह hi हर चक्कर पे आखिरी घुड़सवार बहार. तोह िश तरह 2ंद चरण में 10 योद्धा hi आगे जायेंगे हर ग्रुप से.

फिर होगी तलवार बाजी जिसमे हर 10 योद्धा को हमारे 50 सैनिक से लड़ना होगा सिर्फ उनको निहथा करके सबको हराना होगा नहीं तोह बहार चाहे एक योद्धा बचे या सारे . इश्से आपके नेत्रवत की परीक्षा होगी की आप अकेले या सबको मिलकर जीत सकते हैं .

3रद चरण में आपके सामने 2 खूंखार जानवरो से सामना होगा चयन आपका होगा . एक गेंदा या एक शेर को हराना होगा .

4तह राउंड में निहथे हमारे 10 शूरवीर सैनिक योद्धा को हराना होगा . अगर यह सब चरण पार करके एक से ज्यादा योद्धा पार करते हैं तो राजकुमारी दीप्ति जी के पास विक्लप होगा किसी एक को वर वह चुनती हैं या नहीं .

स्वयंवर -------

(1) घुड़सवारी

(2) तलवार बाजी

(3) गेंदा या शेर से योध

(4) निहथे 10 हथियार बांध योद्धा को हराना.

________________________

आर्यन को तो बस राजकुमारी दीप्ति अपने चार शेरोन के साथ कभी निवस्तर जंगल में बैठी हुयी, कभी कपडे पहने दिखाई देती .

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राजकुमारी दीप्ति सिंह

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राजकुमारी दीप्ति भी आर्यन की और देखकर फूली न समां रही थी आखिर उसको खुसी हुयी की उसके माहि ने गरुड़ शिरस्त्राण को आसानी से धारण कर hi लिया .

गरुड़ शिरस्त्राण को दीप्ति hi काल कोठरी से निकाली थी जब उससे जुडी कहानी का गायत हुआ की किसी महँ योद्धा की अमानत को िश लिए यहाँ सबसे छुपा के रखा है की इसका कोई वरन नहीं कर सकता .

जिसने हिम्मत की वह जीवट hi नहीं रहा . हेलमेट पहनते hi वह सजीव सा हो जाता और पहने वाले का सर वीचैट कर देता , न कोई आग न कोई अस्त्र शास्त्र का असर हेलमेट पर होता था .

दीप्ति ने जब हाई कॉलेज की छुट्टी में तलवार बाजी के अभ्यास में हेलमेट पहनकर तलवार बाज़ी सीखने वाले सेनापति के सामने आयी तो उनके पसीने छूट गए , राजा त्रिभुवन सिंह से लेकर 2 रानियां भी विचलित होती वहां अभ्यास चैत्र में आये तो दीप्ति को गरुड़ शिरस्त्राण पहने कुशलता से 4 सैनिकों के साथ अभ्यास करते देखे तो हैरान थे .

राजा त्रिभुवन सिंह ने जल्दी से दीप्ति से हेलमेट उतरवा के काल कोठरी में पहुंचवा दिया की कभी दीप्ति उसको ढूंढ न सके . दीप्ति के पूछने पे दोनों रानियों ने उसको चुप करा के कभी जीकर न करने की कसम खिलाई .

जब राजगुरुजी को यह बात पता चली तो उन्हों ने कहा ," चितना न करो वॉश पहली बात राजकुमारी दीप्ति कोई साधारण युवती नहीं है . गरुड़ शिरस्त्राण को धारण कर उसने अपनी hi मुक्ति का मार्ग खोला है . जिसको कोई 2500 साल से धारण नहीं कर पाया यह ुष महार्यं का हेलमेट है जोह उसको उसकी माता लक्ष्मी( प्रेजेंट की रानी मिरदुला) ने भगवन विष्णु की पूजा करके नंदनगरी के मंदिर के पुजारी से प्राप्त किया था . महार्यं के अल्वा इसको कोई नहीं पहन सका और उसके दुश्मन शैतान सिंह ने जब उसको मार के इसको पहने की कोशिश की तो मौत के काल के मोह में समां गया . शैतान सिंह की आत्मा अभी भी भटक रही होगी " .

रानी संगीता ," गुरूजी मेरी बेटी दीप्ति तो छोटी सी है अभी 10तह hi पास किया है अगर उसको कुछ हो जाता हम अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाते. ुष हेलमेट को कहीं समुन्दर में बहा दो या जमीन के अंदर कहीं गाड़ दो ताकि वह उसको ढूंढ न पाए. दीप्ति को अब में तलवार बाजी और यह अस्त्र शास्त्र नहीं सीखने दूंगी ".

राजगुरुजी ने चेहरे पे मोहक मुस्कान लाते हुए कहा ," पुत्री संगीता दूसरी बात सुनकर तुमको अच्छा लगेगा , दीप्ति के सपने का राजकुमार या यह कहलो दिव्या तलवार का वररिस ुष हेलमेट को धारण करेगा क्योंकि दीप्ति के सर पे विराजमान होकर अपने स्वामी की लिए स्त्री का चयन कर लिया यानी दीप्ति का माहि hi उसको समय चक्र से मुक्ति दिलवेगा ".

रानी जमुना ," लेकिन गुरूजी अभी वह माहि नाम का साक्ष होगा कहाँ ?"

राजगुरुजी ," इश्क जवाब तो दीप्ति hi खोज पायेगी समय आने पर वह अपने प्रेमी को जरूर पहचान लेगी ".

दीप्ति ने कल राजमहल आते hi ुष गरुड़ शिरस्त्राण को आँख बांध करके याद किया की तो वह उसके सामने प्रकट हो गया . गरुड़ शिरस्त्राण जबसे काल कठोरी में बंद था उसको दीप्ति अकेले में याद करके पहनकर अपनी तलवार बाजी का अभयास करती सबसे छुपा के .

हेलमेट को वरन करने वाला उसका स्वामी होता है और दीप्ति को खुद उसने स्वामिनी चुना था जब पहली बार कौथल से दीप्ति ने उसको पहना था .

राजकुमारी दीप्ति एक कौसल योद्धा , अत्यंत शक्तिशाली, बाज सी फुर्ती वाली और तेज़ दिमाग़ की युवती है जिसका ज्ञान सिर्फ राजगुरुजी को है. उन्ही के द्वारा उसने यह हेलमेट आर्यन को भेंट करवाया जो ुशी का था बस दीप्ति ने उसको संभल के रखा .

दीप्ति शक्ति और ताकत में आर्यन की जुड़वाँ भें Dimple-Payal से काम नहीं है लेकिन उसको कभी जरुरत hi नहीं पड़ी शक्ति उसे करने के . दीप्ति पे वार करना उल्टा अपनी मौत को दवात देना था यह बहोत लोग भुगत चुके थे .

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दीप्ति ने अपने किडनैप होने पे भी डिफेंड नहीं किया उसको जयपुर में अहसास हो चूका था की माहि काफी नज़दीक hi है और वह उसको बचने जरूर आएगा जोह उससे मिलने का आसान तरीका था . हेलमेट को समरण कर जब सामने देखा तो उसको चुकार उसकी गरम ऊष्मा महसूस कर उसको लग गया माहि जल्दी hi उसके सामने होगा . माहि का अहसास, इसी गरुड़ शिरस्त्राण ने दीप्ति को कार्य था की वह अत्यंत नजदीक है .

राजकुमारी दीप्ति शक्तिशाली योद्धा और दिव्या कन्या है यह बात बड़े गुरूजी , निशांक गुरूजी , रानी विजयलमक्शी और राजकुमारी मीनालोचनि जानते थे बस आर्यन hi मुर्ख सा बन उसको कोमल राजकुमारी एक नाजुक सी लड़की की तरह ट्रीट करता .

प्रेमी का प्यार किसको अच्छा नहीं लगता, उसका केयर करना, उसकी अपने लिए फ़िक्र प्यार के अहसास को दिल की घेरे तक महसूस होता है तो कितना सकूं अपनी रूह तक महसूस होता होगा . दीप्ति ने यह बात आर्यन से छुपाई थी पर वह भी कभी दीप्ति से कुछ पुछा hi नहीं .

आज राजकुमारी दीप्ति के स्वयंवर में आर्यन को दीप्ति का अलग रूप , अलग रुतबा और अलग सख्सियत से ruba-ru होना पद रहा था .

आर्यन एक बार सोचा भी की क्या वह राजकुमारी दीप्ति के लायक है भी या नहीं लेकिन दिल से आवाज आयी यह तय करने वाला में कोण होता हूँ . उसने खुद मुझे चुनकर इतना बड़ा सम्मान दिया की मुझे अपने स्वयंवर में भाग लेने का मौका दिया .

में तो कोई राजकुमार भी नहीं हूँ और न hi किसी छोटी सी रियासत का राजा या मंत्री ...... रियासत क्या में तो एक साधरण से किसान च. हरी सिंह का पोता हूँ. वह बात अलग है चौदर्य माधव सिंह मेरे बापू और माँ रति देवी ने मुझे महापंचयत का मालिक बनाया और माँ ने अपना बिज़नेस मेरे नाम कर दिया .

राजकुमारी दीप्ति की तोह में प्यार की धुल के बराबर भी नहीं हूँ . आज सब सिर्फ उसकी एक जलक के लिए खुद को मारने पे भी उतरो हो गए .

वह राजकुमारी hi नहीं अलवर की भावी महारानी और सारे राजपूताना की शान कौंसिल की नयी चेयरपर्सन होगी .

में यदि जीत भी गया तो ुष पढ़ सम्मान के लायक नहीं हूँ बस में राजकुमारी दीप्ति से प्यार करता हूँ सिर्फ उसी के लिए लडूंगा मुझे कुछ नहीं चाहिए न कोई सिंघासन न चैरमानशिप न खज़ाना न दिव्या तलवार वह सब राजकुमारी दीप्ति का है बस में उसको प्यार करता हूँ उसको अपनी अर्धांगी बनुगा अगर वह चाहेगी तो . मुझे उसकी बस जान बचानी है बाकी सब उसका है .

आर्यन के अंतर्द्वंद को तब विराम मिला जब एक सैनिक ने उसको अपनी तलवार से चुकार हिलाया तो 10 मीटर उछाल के दूर जा गिरा सबको हैरान परेशां देख आर्यन भी उसकी तरफ बढ़कर जा के उसको उठाया ," तुम ठीक तो हो ?"

हुआ यह आर्यन बस अपनी सोच में गम पिछले 20 मं से अपनी जगह से हिल hi नहीं रहा था .

तभी 10-12 शाही सैनिक ने उसको घेर लिया तब आर्यन को अहसास हुआ की वह अभी भी बिच मैदान में खड़ा है जबकि बाकी योद्धा एक किनारे बने पोडियम पे बैठे हैं और पहले ग्रुप के मैदान के दौड़ रेखा पे 25 घोड़े की दौड़ के लिए घोड़े पे सवार हैं यानी प्रथम चरण शुरू होने वाला है .

आर्यन का जब उन्ह सैनिकों के लीडर ने गाला पकड़ना चाहा तो वह भी हाथ लगते hi उससे 10 मीटर दूर उछाल के गिरा . अपने साथी की यह हालत देखकर बाकी सब ुष पे हमले का स्टान्स ले लिए और आर्यन को लगा कहीं कोई जादू मंतर तो नहीं कर रहा पर जब उसका हेलमेट एक बार को उसके सर पे कसके फिर ढीला हुआ तो आर्यन को लगा की उसने हेलमेट पहना है .

अपना हेलमेट उतर के वह अभी कुछ बोलता की एक सैनिक ने तलवार से हमला किया तो आर्यन ने उसका वार हेलमेट पे लिया और तनननननन की तेज़ कान फोड़ आवाज के साथ वह सैनिक बिजली के झटके खाता 25 मीटर दूर गिरा और डैम तोड़ दिया .

आर्यन को बगैर मौका दिए स्टेडियम के ऊपर मंडराते 4 सिक्योरिटी ड्रोन्स उसके ऊपर आ गए 2 पे कैमरा और 2 पर गन फिक्स्ड थी जिसका टारगेट आर्यन था .

आर्यन को शाही सैनिक , स्पेशल सिक्योरिटी वाले कुल मिलकर 50 आर्म्स सिक्योरिटी वालों ने घेर लिया. सबकी तलवार और गन्स का टारगेट वही था और उसको घुटने के बल जमीन पे बैठकर अपने हाथ सर के पीछे बांधने को कहा की यह लास्ट वार्निंग है .

आर्यन ने चरों और देख के हेलमेट को निचे ग्राउंड पे रख अपना सर निचे कर घुटने पे बेथ के सर के पीछे दोनों हाथ रख मुजरिम की तरह हो गया .

अभी कोई उसको छूटा उससे पहले महामंत्री ने वहां आकर सबको रोक के कहा,' यह क्या कर रहे हो ?"

महामंत्री को सब बतया गया तो उसने आर्यन को कुटिल मुस्कान से देखकर कहा," तुम िश पर्तिस्पर्धा से बहार किये जाते हो बंधी बना लो इसको " .

आर्यन चुप hi रहा और उसको बंधी बना के एक तरफ मैदान के किनारे रखे लोहे की मोती सलाखें वाले पिंजरे में दाल दिया गया जंजीर से बाँध के उसका हेलमेट भी वही पिंजरे में फ़ेंक दिया .

चूँकि आर्यन ने रूल तोडा था तो उसको डिसक्वालिफ़िएड किया गया .

रति देवी का पूरा परिवार शॉक में था आर्यन की होने वाली पत्नियां भी दुखी थी और अणि का गुस्सा बढ़ रहा था पर वह चाहा के भी कुछ नहीं कर पा रही थी .

मीणा शांत थी बेबस सी , उसको अपना भाई आज फिर हारता नज़र आ रहा था .

मगर एक खेमे में जैसे खुसी का माहौल था वह थी राजपूताना कौंसिल वाले जिनके सामने उनका सबसे बड़ा दुश्मन और दीप्ति का चुना हुआ दिव्या तलवार का सो कॉल्ड वररिस hi सबसे पहले बहार हो गया .

राजा जबर सिंह की खुसी का ठिकाना न था की आर्यन अब दीप्ति के स्वयंवर को नहीं जीत सकता लेकिन दिव्या तलवार और खज़ाना उसको दीप्ति की जान बचने के लिए लाना hi होगा, जिसकी मालकिन होगी दीप्ति और उसके साथ विवाह कर उसके hi दोनों योद्धा में से एक के द्वारा हासिल करेगा दिव्या तलवार और बहुमूल्य खज़ाना .

रघुभार सिंह ने राजगुरुजी की तरफ निरशा से देखा तो वह भी परेशां थे . सब को इतना मजबूर देखकर ठकुरियन रूपा , सुचित्रा की आँखों में आंसूं आ गए .

रति अपने मान में आँख बंद करके बोली ," महादेव मेरा माहि इतना कमजोर और बेबस कैसे हो गया क्या मेरी आराधना अधूरी hi रह गयी ? क्या मुझे आज सबके सामने सर झुका के यहाँ से जाना होगा ? "

सारू ने मैं में बड़े गुरूजी को याद करके कहा ," मेरा सुहाग , मेरा गरूर बनाये रखना गुरूजी ".

आर्यन की बहेनो , मम्मीयों का रूकर बुरा हाल था . साड़ी खुशियां जैसे चीन गयी हो .

उधर राजा त्रिभुवन सिंह के खेमे में भी सब निराश नज़र आ रहे थे .

रानी जमुना ," राणा सा आप कुछ करते क्यों नहीं िश में आर्यन की क्या गलती है . वह तो ुष गरुड़ शिरस्त्राण की वजह से हुआ होगा ".

राजा त्रिभुवन सिंह निराश सवार में ," नियम सबके लिए एक है रानी सा और आर्यन को क्या जरुरत थी उसको पहने की , हमने उसको छुपा के hi रखा था फिर इसको यह हेलमेट मिला कैसे. किसने इश्को बहार निकला हमारी तो कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है ".

रानी संगीता दुखी सवार में ," अब दीप्ति का क्या होगा, उसकी जान कोण बचेगा ? "

जहाँ आर्यन के चाहने वालों में मायूसी और बेबसी थी वहीँ एक चेहरा पे सकती बढ़ती जा रही थी जब उससे रुका न गया तो उठ कड़ी हुयी ......

राजकुमारी दीप्ति कड़ी हुयी अपने सिंघासन से और एक हाथ आगे की तो जैसे कर्णभेदी ड्रिलिंग मशीन की सी आवाज पिंजरे से आने लगी जिस में आर्यन कैद था kattttttttttttrrrrr kattttttttttrrrrtt kattttttttttrrrrrrrrr

गरुड़ शिरस्त्राण जोह आर्यन के पास hi पड़ा था लोहे की सलाखें काट रहा था जोह 5 सेक् से भी काम समय में काट के आर्यन की बेदी काट पिंजरे को ताश नाश कर सीधा राज कुमारी दीप्ति के हाथ में उड़ता हुआ किसी फुटबॉल की तरह आकर रखा था .

आर्यन के फ्री होते hi सैनिक और गार्ड्स उसकी तरफ बढे तो दीप्ति ने जोरसे धाड़ मारते हुए कहा ," रुक्खक्क्क्क जाओ सब अपनी जगह पे नहीं तो किसी के धड़ पे सर नहीं होगा " .

एक सैनिक जोह आर्यन को पकड़ने वाला था दीप्ति की तलवार ने उसका सर काट दिया जोह उसने 80 मीटर की दुरी से अपनी मियां से निकाल के मारी थी .

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ऐसा वार कोई योद्धा भी नहीं कर सकता था जोह दीप्ति ने किया सिर्फ सेक् भर में . सर पहले जमीन पे और धाड़ खून का फुवारा छोड़ता धम्म से गिरा . तलवार जमीन में सीढ़ी गाड़ी थी क्योंकि दीप्ति ने 16 मीटर पोडियम की हाइट से तलवार पहनकी थी.

अविशार्निये प्रहार तलवार बाजी का किसी ने भी न आज तक देखा होगा . सबके मोह खुले रह गए और जोह सैनिक ,गार्ड्स आर्यन की तरफ बढे थे वह अपनी साथी की सर कटी लाश देखकर hi भयभीत हो गए और मारने वाला भी कोण राजकुमारी दीप्ति सिंह .

सब तरफ सनता चा गया दीप्ति के चरों शेर खड़े होकर उसके पीछे निचे उतर आये पोडियम से . एक को इशारा की तो वह जाकर तलवार अपने दांतों में दबा के खींच लिया जमीन से जैसे रोज का काम हो और दीप्ति के पास ले आया .

दीप्ति ने महामंत्री की तरफ देखा तो वह दौड़ा दौड़ा आया उसके विस्तार से अपनी तवार का ब्लेड साफ़ करती हुए उसको hi घूर रही थी .

महामंत्री की भी फटी हुयी थी उसको पता था आर्यन कोण है दीप्ति के लिए .

दीप्ति ने उसको 1 मं कुछ बोलै जोह वो सर झुके सुनता रहा फिर वापस मुड़कर आर्यन की तरफ देखि जोह मुस्करा रहा था .

दीप्ति ने प्यार से मुस्करा के गरुड़ शिरस्त्राण को उसकी तरफ उछाल दिया जिसको आर्यन ने कैच कर लिया .

महामंत्री ने माइक निकाल के ों किया और बोलै ," राजकुमारी दीप्ति ने सबको यह सन्देश दिया है यह वीरों की प्रतियोगिता है िश में कोई काम प्रकर्मी नहीं है , िश योद्धा ने एक बार राजकुमारी दीप्ति की जान बचाई थी तो आज उसका बदला चूका के वह इसको चमदान देते हुए िश प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने की अनुमति देती हैं ".

राजकुमारी की घोसना सुनकर जैसे स्टेडियम की भीड़ में जोश सा आ गया की राजकुमारी दीप्ति कोई मामूली लड़की नहीं है यह सब योद्धा भी इसके सामने कुछ नहीं जब सबने उसकी तलवार और उसका हेलमेट वाला प्राकर्म देखा .

राज कुमारी दीप्ति ," यह गरुड़ शिरस्त्राण हमने अपनी जान के ावेज में खुश होकर महार्यं सिंह नाम के िश योद्धा को तोहफा दिया था . यह हेलमेट कोई आम हेलमेट नहीं है इसको आजतक सिर्फ एक योद्धा ने पहना था और आज िश योद्धा ने . हम यह एलान करते हैं की अब यह महार्यं हमारी तरफ से प्रतिस्पर्धा करेगा . हम भी जानते हैं यहाँ कितने शूरवीर राजा और राजकुमार अपने पीठों या किराये के टट्टू बना के स्वयंवर की प्रतिस्पर्धा में भाग लेने भेजे हैं ताकि हमसे विवाह कर सके . में ुशी वीर के गले में वर माला डालूंगी जोह जीतेगा और उसके मालिक ने बिच में आने की कोशिश की तो मेरी तलवार और मेरे यह चार दोस्त ( शेरोन की तरफ इशारा करके) आज पहली बार किसी रजवाड़े के खून को भी चख लेंगे ".

राजा जबर सिंह ने जब खड़े होकर कुछ कहना चाहा तो दीप्ति ने हाथ जोड़कर कहा ," राजा जबर सिंह जी आप मेरे दादा सा ( बड़े भाई ) हैं आपसे निवेदन है आप बिच में न पड़े , हाँ जिसको भी अपने माँ के दूध या राजपूताना खून पे गर्व है तो शान से योद्धा की तरह लड़ो हमारे खून में मकरी नहीं वीरता भरी है जिसको हमसे विवाह करने से पहले साबित करना होगा ".

राजकुमारी दीप्ति के कड़क भासन से सबके परसनो पे विराम सा लगा दिया और खुद चल दी शान से अपने पोडियम की तरफ .

जय जय के नारे और शेरोन की धाड़ ने जाता दिया की सच्च में बहादुरी का प्रतीक है राजकुमारी दीप्ति , राजसिंघषण की असली महारानी और राजपूताना कौंसिल की असली शान होगी जब चेयरमैन बनेगी .

आर्यन बस ठगा सा अपने को महसूस कर रहा था यह वही राजकुमारी दीप्ति है पैर आज वह प्रेमिका वाले रूप में नहीं सच्ची विरंगा के रूप में थी .

सबसे ज्यादा चैन तो आर्यन के परिवार और रति को आया की दीप्ति ने उनकी इज्जत रख ली और आर्यन को कोसते हुए मैं में बोली बस लड़ वालो िश से अपना दिमाग़ भी नहीं लगा सकता था क्या .

राजकुमारी दीप्ति ऊपर आकर बैठी तो राजा जबर सिंह ने कहा ," राजकुमारी ऐसे तो खून की नदिया बहा देंगे यह सब " .

दीप्ति हसकर ," आप भी तो यही चाहते हैं की हमारी शादी के मंडप पे खून की नदिया बहिये , कटे हुए सर चरों तरफ बिखरे पड़े हो और चील कौंए उनकी आंखें नोच के खा रहे हों ".

दीप्ति का जवाब सुनकर राजा जबर सिंह हड़बड़ा गया तब दीप्ति ने कहा ," आप मेरे मामाजी के बेटे हैं और मेरे बड़े भाई आपने हमारे पिताजी महाराज के साथ मिलकर मेरा स्वयंवर रखा मैंने सर माथे लिया लेकिन आर्यन अभी कुछ किया नहीं है तब आपके 2 सैनिक मारे गए अगर उसने वार करने शुरू कर दिए तो यहाँ देकने वाले गिनती में 100 लोग भी नज़र नहीं आएंगे ...... आपकी किराये की सिक्योरिटी और नपुंसक सैनिक कुछ नहीं कर पाएंगे . वह सिर्फ मेरे लिए चुप है नहीं तो आप के और िंह रजवाड़ों के तटों को पता नहीं लगता कोण जिन्दा है कोण मर गया . आप कर लें कोशिश पर डैम लगा के करना अब वह दुबारा मौका नहीं देगा . वैसे भी में क्यों आपको समझा रही हूँ आप ने hi सब खुद से किया है ".

राजा जबर सिंह कुछ बोलने लगा तो रघुभार सिंह ने कहा ," जबर शांत बैठो और राजकुमारी दीप्ति को हक़ है आर्यन का बचाव करने का सुकर मनो उसने गरुड़ शिरस्त्राण तुम्हारे सर की तरफ नहीं फेंका , अब चुप बैठो या यहाँ से जा सकते हो ".

जबर सिंह अपना सा मोह लेकर रह गया , मैं में सोचा," ुध लो अभी तो खेल शुरू हुआ है...... पहले िश बुड्ढे की hi गर्दन ुढूंगा दिव्या तलवार मिलने पे ".

राजगुरुजी हसने लगे और रघुभार सिंह की आँखों में गुस्सा था , मीणा ,अणि के साथ राजगुरुजी और रघुभार सिंह को भी जबर सिंह के मैं की आवाज अपने मस्तिक में सुनाई दी .

अणि मैं में भाई अब किसी को मौका मत देना आज यह स्टेडियम इनके गंदे खून का दरिया बना होना चाहिए .

2 जोड़ी आंखें अपने चेहरा दुपट्टे से ढके हुए सजल नेत्रों से अपनी छोटी बेटी और उसका प्राकर्म देकर बार बार आंसूं पहुंचती . यह थी रानी मिरदुला जोह सारू के पीछे बैठी थी .

सारू ने उसको पहले hi उसकी बड़ी बेटी सुचित्रा और धेवती रूबी को इशारे करके दिखा दिया था की वह दोनों कोण है जोह राजकुमारी के पोडियम पे बैठी थी .

मगर दीप्ति को देख एक माँ के सीने में जैसे सेलेब सा आ गया जिसको वह दूध भी न पीला सकीय . उसकी छातियों तक वह पीड़ा दिल की घेरे तक महसूस हुयी . मगर दीप्ति का अंदाज़ उसका बाँकपन देख माँ का सीना गर्व से फूल गया उसने एक शेरनी को अपनी कोख से जनम दिया . उसके 21 साल का त्याग बेकार नहीं गया .

जब आर्यन को देखि तो ुश्कि छाती पे अहसास हुआ की उसके पिछले जनम का बीटा अभी दूध पि कर हटा हो और मैदान में जाकर योद्धा बनकर खड़ा है .

ईश्वर की कैसी विडम्बना थी की दोनों ने उसकी कोख से जनम लिया एक ने 2500 साल पहले और दूसरी ने 21 साल पहले .

दोनों जनम के बच्चे आमने सामने खड़े थे , दोनों की आँखों में एक दुसरे के लिए सच्चे प्रेमी वाला प्यार झलकता था . रानी मिरदुला भी भगवन से शिकयत कर रही थी की उसको पिछले जनम का क्यों याद है अगर ऐसा न होता तो अच्छा था .

मगर 'माहिया' के मोह से 'मैया' सुन्ना उसके लिए सबसे सुखद स्वर होता था , वह महार्यं के बिना नहीं रह सकती और दीप्ति, सुचित्रा को उसको माँ कहने का हक़ न दे तो वह एक माता नहीं कुमाता कह लाएगी.

रति थोड़ा गुस्से से ," आर्यन किसी को भी मत छोड़ना यह सब हरामजादे स्वयंवर नहीं मौत का खेल खेलने आये हैं ".

डॉ अंजू ," दीदी आप थोड़ा कण्ट्रोल रखो सब आपको hi देख रहे हैं और भूलो मत आर्यन कभी मात खाने वालों में से नहीं है फिर दीप्ति ने जो किया उससे तो एहि लगता है वह बहोत शक्तिशाली है इतनी दूर से तलवार मार के ुष सैनिक की गर्दन hi उदा दी और यह मुकत ( हेलमेट ) कुछ रहस्मयी लग रहा है ".

गरिमा ," नानी माँ, भाई कितना डैशिंग लग रहा है मुझे पता है मेरा भाई hi जीतगा लेकिन आज मान गयी गीता मौसी ने दीप्ति दीदी को अपनी छोटी भें कैसे बना लिया . गीता मौसी को मीणा दीदी न पकड़ती तो मैदान में hi सबको मार देती ".

सारू ," दीप्ति जानती है की आर्यन उसके दिल न दुखे इशलिये कुछ नहीं किया नहीं तो वह सब धुल चाट रहे होते . दीप्ति ने पक्का परमिशन दे दी है की उसकी तरफ से चुत है ".

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आर्यन भी योद्धा वाले पोडियम में जाकर बेथ गया तो सब उसको घूर रहे थे . दो राजकुमारों ने आर्यन से पुछा की उसने राजकुमारी की जान बचाई थी क्या तो आर्यन ने हाँ कहा . और हेलमेट का पुछा तो बोलै वह भी गिफ्ट hi मिला .

तीसरा राजकुमार बोलै ," राज कुमारी से तुम्हारा क्या चक्कर है ?"

आर्यन स्माइल से ," प्रेम करते हैं हम एक दुसरे से ".

जोह बाकी सब उन्ह तीनो की बात सुन रहे थे वह भी उनकी तरफ देखे जबकि मैदान में घुड़सवारी जारी थी .

पहला राजकुमार ," फिर यह स्वयंवर करके क्यों सबको बुलवा दिया ?"

आर्यन हसकर ," में राजपूत नहीं हूँ इशलिये मुझे जीत कर साबित करना होगा की में hi राजकुमारी के लायक हूँ ".

2ंद राजकुमार ," फिर तो मुश्किल है , में यहाँ इशलिये आया था राजकुमारी दीप्ति मुझे पसंद है फिर मैं त्रिनेड योद्धा हूँ लेकिन यहाँ तो मामला hi उल्टा है . तुमको क्या लगता तुम जीत भी जाओगे तो यह तुम्हारी शादी आसानी से कर देंगे राजकुमारी से ".

3रद राजकुमार आर्यन से बोलै ," भाई क्या नाम है तेरा चल जोह भी नाम है, वह जो वहां दोनों राजा बैठने हैं एक त्रिभुवन सिंह और दूसरा राजकुमारी का ममेरा भाई जबर सिंह दोनों बहोत काइयाँ और धूर्त हैं . तुझे राजकुमारी ने बचा लिया मेरी मान तो खिशक ले नहीं तो मुझे लगता है तुझे मरवाने के लिए hi स्वयंवर रखा है".

तीनो राजकुमार समझदार hi लगे आर्यन को पर उनको आर्यन लम्बा चौड़ा तो लग रहा था पर जीतने वाला नहीं .

लेकिन बाकी योद्धा ने सोच लिया की पहले िश आफत की जड़ राजकुमारी के पयेदे आर्यन को hi ख़तम करना होगा .

घुड़सवारी रेस का पहला समूह मैदान का चक्कर लगते hi आखिरी 2 घुड़सवार मारे गए . नेक्स्ट राउंड में भी एक घायल होकर बहार हो गया .

पहले 10 नंबर वाले जीते घोसित हुए . ऐसे hi टोटल 40 योद्धा चुन लिए गए हर समूह की प्रतिस्पर्धा की जीत के बाद . अब तक 12 मर चुके थे और 23 घायल थे .

राजा जबर सिंह के दो योद्धा यानी त्रिलोचन के दोनों रूप वाले , 1सत और 3रद ग्रुप में अंतिम 50 में 2ंद राउंड में पहुंच गए थे और उनका पूरा केन्देर बस आर्यन hi था .

आर्यन का आखिरी समूह के साथ नंबर आया तो आर्यन ने एक हाथ में तलवार पकड़ी और घोड़े के कान में उसकी भासा में बोलै ," गिरा मत दियो यार तुझे पम्पस घास (स्पेशल ग्रास) खिलूँगा".

घोडा भी हिनहिना के बोलै ," अच्छा तू भी बोल सकता है , पक्का खिलेगा न बाद में मुकेरगा तो नहीं , देख ले बिच रस्ते खड़ा हो जाऊंगा हिन् हिन् हिन् ".

आर्यन ने अपनी पोषक की जेब से 10-12 बादाम निकाल के घोड़े को खिलाया ," देख बस तू मेरे प्यार और लगाम खींचने का इशारा समझ जाना अगर जीता तो तुझे अपना शाही घोडा बनुगा राजकुमारी से शादी करने के बाद और एक घोड़ी भी तेरी खुद की पर्सनल दिलवा दूंगा " .

घोडा खुश होकर ," तू बहोत चापलूस है में राजकुमारी से तेरी शिकयत कर दूंगा ".

आर्यन हसकर ," ाचा बीटा तुझे राजकुमारी ने भेजा है ...... चल ठीक है मुझे क्या में तो तेरे भले की बात कर रहा था वैसे सोच क्या राजकुमारी तुझे घोड़ी दिलवागी वह भी पर्सनल . देख ले में मर्द हूँ और एक मर्द hi मर्द की इच्छा को समझ सकता है वैसे तेरा नाम क्या है ? वर्जिन लगता है तू ?"

घोडा आर्यन का हाथ चाट कर गर्व से बोलै ," चेतक नाम है मेरा में राजकुमारी का स्पेशल शाही घोडा हूँ पर सच्ची घोड़ी दिलवाएगा न बस राजकुमारी को मत बताना ".

आर्यन ने उसकी गर्दन सेहला के कहा ," चेतक भाई सोच क्या रहे हो मर्दों की बात मर्दों में रेहनी चाहिए , एक चक्कर लगा लेते हैं जिससे आसानी हो ".

आर्यन और घोड़े चेतक की बात सुन्न मीणा और अणि खूब हास्य तब मीणा ने कहा ," राजकुमारी जी आपके घोड़े ने पाला बदल लिया है ".

दीप्ति पलट के पीछे देखि ," क्या मतलब मीणा दीदी ?"

मीणा ," चेतक तुम्हारा घोडा है न उसको आर्यन ने एक घोड़ी से दोस्ती करने का लालच देकर पता लिया है ".

दीप्ति हैरानी से ," आपको कैसे पता चेतक मेरे घोड़े का नाम है ".

मीणा ," सामने देखो ".

आर्यन उसके पोडियम के निचे चेतक की पीठ पे दोनों प्यार पे खड़े होकर झुकार सलाम किया और फिर चेतक पे बेथ दौड़ गया जहाँ रेस शुरू होनी थी . सबने देखा की आर्यन ने कितना ाचा घोड़े पे खड़े होकर दौड़ा के करतब दिखाया फिर राजकुमारी का सुक्रिया अदा किया .

राजा त्रिभुवन और दोनों रानियों के साथ महामंत्री भी चकित था की राजकुमारी ने अपना घोडा चेतक आर्यन को दिया रेस के लिए .

लेकिन कोण जानता था की आज सुबह दीप्ति ने आर्यन के घोड़े अर्जुन पे बेथ के कितना लम्बा सफर तय किया , फिर अर्जुन को अपना देवर भी बोल दिया और दीप्ति सोचते हुए रेस के बाद िश चेतक की खबर लुंगी .

( राजकुमारी दीप्ति भी जानवरो से बात कर सकती है आर्यन को यह राज पता चला चेतक से बात करके लेकिन अर्जुन से बात न कर उसने आर्यन से अपनी यह खूबी छिपाये राखी )

दीप्ति स्वयंवर शुरू होते hi आर्यन को सरप्राइज पे सरप्राइज दे रही थी जोह उसको दीप्ति का कायल कर रहा था . दीप्ति सर्वगुण सम्पन लग रही थी यह बात मीणा hi तो कहती थी दीप्ति सुंदरता और दिलेरी में अणि और दिल से सारू मम्मी जैसी है इशलिये वह गीता के लिए डर्टी थी . दीप्ति के लिए न जाने कितनो की लाश गिरेगी यह भी सच्च hi कहा था मीणा ने .

लेकिन गीता , डॉली और नेहा खुद दीप्ति की फैन होती जा रही थी . सौतन अच्छी लगने लगे यह भी बुरा सिग्न होता है ???

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हार्ट हार्ट
 
महीना भर नहीं हुआ है बस अपडेट किसी पर्सनल वजह से नहीं दे पा रहा हूँ ......

अपडेट देने में थोड़ा टाइम और लगेगा मय्बे एक वीक . शांत मैं से अपडेट दूंगा ताकि आपको भी पढ़ने में मजा आये .....

थोड़ा इंतज़ार और कर लीजिए .

धयानवाद ?
 
दोस्तों बस 2-3 दिन और दो मुझे , स्टोरी वहीँ से hi चलेगी बस थोड़ा पर्सनल रेअसोंस की वजह से अटक गया हूँ...

िश फोरम पे एक स्टोरी रीड करता हूँ चंपा बस उससे पे कमैंट्स नहीं कर पाटा .....

इतना पेशेंस के साथ आपने सपोर्ट किया है बस थोड़ा टाइम और दो आपकी सब इच्छा पूरी कर दूंगा ....

धयानवाद
 
अपडेट 33

PART - 9 © (दीप्ति स्वयंवर)

अब तक.......

आर्यन और घोड़े चेतक की बात सुन्न मीणा और अणि खूब हास्य तब मीणा ने कहा ," राजकुमारी जी आपके घोड़े ने पाला बदल लिया है ".

दीप्ति पलट के पीछे देखि ," क्या मतलब मीणा दीदी ?"

मीणा ," चेतक तुम्हारा घोडा है न उसको आर्यन ने एक घोड़ी से दोस्ती करने का लालच देकर पता लिया है ".

दीप्ति हैरानी से ," आपको कैसे पता चेतक मेरे घोड़े का नाम है ".

मीणा ," सामने देखो ".

आर्यन उसके पोडियम के निचे चेतक की पीठ पे दोनों प्यार पे खड़े होकर झुकार सलाम किया और फिर चेतक पे बेथ दौड़ गया जहाँ रेस शुरू होनी थी . सबने देखा की आर्यन ने कितना ाचा घोड़े पे खड़े होकर दौड़ा के करतब दिखाया फिर राजकुमारी का सुक्रिया अदा किया .

राजा त्रिभुवन और दोनों रानियों के साथ महामंत्री भी चकित था की राजकुमारी ने अपना घोडा चेतक आर्यन को दिया रेस के लिए .

लेकिन कोण जानता था की आज सुबह दीप्ति ने आर्यन के घोड़े अर्जुन पे बेथ के कितना लम्बा सफर तय किया , फिर अर्जुन को अपना देवर भी बोल दिया और दीप्ति सोचते हुए रेस के बाद िश चेतक की खबर लुंगी .

( राजकुमारी दीप्ति भी जानवरो से बात कर सकती है आर्यन को यह राज पता चला चेतक से बात करके लेकिन अर्जुन से बात न कर उसने आर्यन से अपनी यह खूबी छिपाये राखी )

दीप्ति स्वयंवर शुरू होते hi आर्यन को सरप्राइज पे सरप्राइज दे रही थी जोह उसको दीप्ति का कायल कर रहा था . दीप्ति सर्वगुण सम्पन लग रही थी यह बात मीणा hi तो कहती थी दीप्ति सुंदरता और दिलेरी में अणि और दिल से सारू मम्मी जैसी है इशलिये वह गीता के लिए डर्टी थी . दीप्ति के लिए न जाने कितनो की लाश गिरेगी यह भी सच्च hi कहा था मीणा ने .

लेकिन गीता , डॉली और नेहा खुद दीप्ति की फैन होती जा रही थी . सौतन अच्छी लगने लगे यह भी बुरा सिग्न होता है ???

अब आगे ........

1सत चरण ( घुड़सवारी )

चेतक पे सवार आर्यन अपने हेलमेट पहने सीटी बजते सबसे लास्ट में दौड़ लगता हुआ आगे बढ़ता है तो पहले hi दो घुड़सवार योद्धा ुष्पर हमला करते है बारी बारी दोनों के वार तलवार से रोक के वह चेतक को लेफ्ट प्यार की एड लगा स्पीड बढ़ता है जहाँ दो काम रफ़्तार में ुशी के अपने बर्बर आने का इंतज़ार में थे .

चेतक की लगाम अपने दनिये हाथ से अपने दांतों में दबा के उसको खींचता है तो हलकी स्पीड काम होते hi एक का वार जोह तलवार से हुआ बैएँ तरफ से उसका वही हाथ काट दिया और दनिये तरफ वाले योद्धा ने नुकीले भले से उसके सीने को निष्णा बांया तो हवा में उठकर भाले के वार को नाकाम करते हुए ..... भले समेत इतनी जोरसे खिंचा की वह घोड़े समेत उसकी तरफ खींचा चला आया और तलवार का वार गर्दन खच्च से काटकर लेफ्ट प्यार की किक उसकी छाती पे जड़ दी .

वार इतना तेज़ था 10 मीटर रेस पट्टी से मैदान के बिच धड़ गिरा और सर फुटबॉल की तरह हवा में कुछ दिएर बाद मैदान पे गिरा पर उसका घोडा अब भी दौड़ रहा था अपने मालिक को खो कर.

पीछे वाले योद्धा और जोह आगे दौड़ रहे थे सबने दोनों की ऐसी दुर्गति देखि और आर्यन के सटीक वार ने सबको हतप्रद कर दिया . मतलब साफ़ था घुड़सवारी के साथ तलवार और ताकत से भरपूर था आर्यन . उसपे एक साथ hi वार करना होगा .

पहले राउंड पूरा करते हुए पीछे वाले भी हमला करते डर रहे थे और आगे वालों में से 4 ने एक साथ हमले की योजना बना ली थी .

जब अपने से 20 मीटर आगे चल रहे 4 योद्धा की स्पीड काम होने लगी तो आर्यन भी त्यार hi था पर पीछे 10 मीटर की दुरी वालों ने अपनी स्पीड बढ़ा ली . आर्यन को घेरा जा रहा था 2 आगे 2 पीछे और एक एक साइड में और वार एक साथ .

घुड़सवारी में इसको "घातु वार" कहते हैं , घोडा भी मारा जाता है . आर्यन कभी ऐसे लड़ा नहीं था पर उसने पढ़ा था , पर घोडा मर गया तो आप भी अपनी मौत hi समझो सब घेर के मारते हैं .

मोह से लगाम निकाल आर्यन हिन् हिना के चेतक को बतया की यह तुझपर पहला हमला करेंगे पर तू इसी स्पीड में दौड़ना बस जगह दीखते hi यूँ hi आगे न बढ़ना क्योंकि यह तेरी गर्दन नहीं पेट फाड़ने के चक्कर में होंगे .

चेतक हिन् हिना के बोलै ," तू मुझे मरवाने लाया है , में तेरी बातून में आया hi क्यों , राजकुमारी को भी मुझसे प्यार नहीं जो मरवाने भेज दिया" .

आर्यन जोरसे हिनहिना के बोलै ," बस 10 सेक् इसी स्पीड पे अकेला दौड़ना में तुझे छोड़ रहा हूँ" .

चेतक घबरा के ," साला बड़ा कमीना निकला मौत के टाइम मुझे गच्चा दे गया यह कायर क्या राजकुमारी से शादी करेगा".

आर्यन ने िश घातु वार को तोड़ने के लिए पहले साइड वालों पे अटैक न करके बड़ी फुर्ती से अपने दोनों प्यारों के बल पीठ पे बेथ, चेतक के पीछे छलांग लगाई कलमन्दी करते हुए और पिछले एक योद्धा की गर्दन और दूसरे का धड़ बिच से काट के उनके घोड़े पे प्यार टिका के पल बहार पूरा जोर लगा चेतक के राइट साइड वाले गुड़सवार योद्धा पे कूद गया तलवार आर पार कर उसका धड़ ऊपर तक सर तक पहाड़ के अगले योद्धा पे कोढ़ा .

चेतक ने जब 4 सेक् के समय में आर्यन को अगले को हवा में काट के दुसरे पे कूदते देखा तो उसकी आंखें बड़ी hi नहीं हो गयी बल्कि खून भाते काटते हुए सरीर और सर के साथ देखा . खून के कुछ चित्रेय ुष्पर भी पड़े . भले उसने जंग नहीं लड़ी थी पर यह जुंग से काम नहीं लग रहा था .

आर्यन की उछाल के साथ ुष मारे गए योद्धा का घोडा जमीन में गढ़ता सा दिखा इतनी फाॅर्स उसकी गर्दन पे लगा के राइट वाले घुड़सवार योद्धा का हाथ काट उसका भला हाथ समेत चेतक hi राइट साइड वाले बचे योद्धा की छाती के आर पार कर दिया . एक पल की दिआरी होती तो वह राइट साइड वाला योद्धा चेतक का पेट भाले से फाड़ने वाला था .

ुष घोड़े के घुड़सवार की गर्दन काट आर्यन सीधा चेतक पे कूड़ा तो चेतक को भी लगा किसी ने 250 कग का आदमी उसके ऊपर फेंका हो अभी कमर hi टूट जाती .

10 सेक् का यह सन जैसे सब आँखों में भी कैद नहीं कर पाए होंगे पर दर्शकों में उत्तेजना और भय की लहर दौड़ गयी क्या योद्धा है राजकुमारीजी का . हर वार हर मूव असाधारण था , आजतक किसी ने देखा hi नहीं होगा .

कमाल तो तब हुआ जब आगे दौड़ते योद्धा आपस में न लड़ पीछे मुड़कर क्या हो रहा था उसको देख के hi डर गए थे रेस में दौड़ते हुए .

यह बन्दर की तरह कूद कर हाथी के पाऊँ की तरह लैंड कर घोड़े समेत hi जमीन में धसा दिया सबको मार के..... 2ंद राउंड कम्पलीट नहीं हुआ और 8 योद्धा सहीद नहीं हुए काट चीयर दिए गए और चेतक पर बेथ जैसे hi आर्यन ने एड लगा के स्पीड बधाई बस दर्शकों में एक hi नाम की चीख गूँज गयी ारयणणणणणण ारयणणणणणण जिसकी शुरवात अणि ने की थी .

चेतक का गाला खुश्क सा हो गया था और अब उसको आर्यन नाम के अपने ऊपर बैठे योद्धा से डर लग रहा था . मगर आर्यन ने थपकी देकर उसको सबसि दी और स्पीड बढ़ा दी .

चेतक को अपनी तरफ तेज़ी से आते ुष्पर बैठे आर्यन को देख सब योद्धा ने भी स्पीड बढ़ा दी सिर्फ 4 को छोड़कर जो अपने भले और तलवार लिए त्यार थे . मगर अब िश राउंड में आर्यन ने जिसका 2ंद लास्ट योद्धा का हाथ काट के भला मारा था उसका भला उसके हाथ में था .

आर्यन उनके नजदीक पहुंचा तो 10 मीटर की दूरी पे चेतक को दौड़ पट्टी पे इधर उधर करके दौड़ने लगा , चेतक को अब इतना तो विश्वास हो गया था यह ससुरा मुझे मरने तो नहीं देगा जीतने तक भाड़ में गयी इसकी दी हुयी घोड़ी में अकेला वर्जिन hi ठीक .

आर्यन को देखा देखि वह भी इधर उधर पोजीशन से उसके आगे आ के उसको ब्लॉक करने की कोशिश कर रहे थे पर अगले 3 राउंड इसी चूतियापे में चले गए , मगर हर कोई आर्यन को मजा लेते देख रहे थे और तभी वह हुआ जोह किसे ने नहीं सोचा था .

इधर उधर आगे पीछे दौड़ने में एक टाइम ऐसा आया जिसका आर्यन को इंतज़ार था , उसने हाथ पीछे कर उछाल के दोनों प्यारों पे चेतक पे खड़ा होकर भला इतनी स्पीड से मारा 4 योद्धा की पीठ को छेड़ता एक के बाद एक दिल उसकी चेस्ट गार्ड फाड़ता सबसे अगले वाले घोड़े के सर के बाल को काटता चला गया और स्टेडियम की गोल देवार में 1 मीटर तक भला धंस गया और चेतक की स्पीड शामे थी बाकी के घोड़े की काम तो सबकी गर्दन उदा के चेतक पे बेथ गया .

7तह hi राउंड हुए थे 12 योद्धा को आर्यन अपनी घुड़सवारी , तेज़ी और हुनर दिखा चूका तो जोह सबके रोंगटे खड़े करने वाले सन थे .

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सारू की तो खुसी का ठिकाना न था उसको पिछले जनम का युद्ध चेत्रे याद आ गया जब सबको हरा के महार्यं ने उसको जीता था . दोनों करतब वही थे पर उससे भी सटीक . आर्यन हर बीत ते पल के साथ सारू की आत्मा पे जैसे अपने प्रेम का छिड़काव करता पिछले जनम को तृप्त सा करता जा रहा था वहीँ रानी मिरदुला तो अपने बेटे की िश जनम में बलहारी लेने से अपने को रोक न सकीय.

रति देवी के चेहरा जैसा चटान की तरह मजबूत हो गया आखिर उसका माहि सही टाइम पे अब सबका काल लग रहा था, जितने गर्व से रानी मिरदुला की छाती तानी हुयी थी उससे कई गुना ज्यादा गर्व से रति विश्वास और प्रेम से अपने माहि को देख रही थी जैसे ललकार रही हो है दम तो उतरो मैदान में यह मेरा माहि है .

मीणा और आर्यन की बाकी बहेनो को गर्व हो रहा था की यह है उनका भाई उनके परिवार का अंगरक्षकः .

राजकुमारी दीप्ति बस अपने प्रीतम माहि को प्रसंसा की दृष्टि से निहार रही थी .

राजपूताना खेमा और रजवाड़े खेमे में मिले जुले भाव थे पर आर्यन की चाप सबके दिल पे बन चुकी थी की वह असाधारण क्यों है .

राजा जबर सिंह भी एक बार को दहसत में आ गया था पर यह सरीरक ताकत उसके योद्धा के आगे कुछ भी साबित नहीं करती .

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अपनी तरफ आर्यन को तेज़ी से बढ़ते देख जब सब योद्धा डरने लगे तब योद्धा दीर्घा में बैठे तांत्रिक त्रिलोचन के दोनों योद्धा रूप एक मंतर पढ़कर आर्यन की तरफ दूसरा उन्ह योद्धा की तरफ पहनका .

आर्यन तक पहुंचे से पहले वह नष्ट हो गया पर आर्यन पलट के ुष मंतर पहनने वाले की तरफ देहका और मुस्करा के आँख मार दिया पर दुसरे मंतर ने अपना काम किया..... वह सब 12 योद्धा थोड़े आगे अपने घोड़े पे दूंगी स्पीड से जाते हुए 10तह राउंड को कम्पलीट करने की लाइन से पलट के आर्यन की दिशा में मुद गए .

आर्यन अपने से 50 मीटर की दूरी पे खड़े उन्ह 12 योद्धा को एक साथ देख के समझ गया की उन्ह योद्धा को सँहोइत कर ुष्पर हमला करवाने का प्रयास है तो उसने भी चेतक की गति रोक के कहा ," अब तू यही खड़ा रह बस अपनी जगह से मत हिलना में देख लूंगा.

चेतक डरते हुए ," पर इनके घोड़े की नज़र मुझपर hi जमी है जैसे मैंने इनकी माँ छोड़ दी हो ".

आर्यन ने प्यार से उसकी गर्दन थप थप्पी ," नहीं चौड़ी तो छोड़ देना पर आगे मत निकलना सब मरने hi आ रहे हैं" .

रेस कहाँ सीधा न होकर उलटी दिशा की हो गयी पर आर्यन ने एक बार उनके नजदीक आने पे चेतक के दोनों प्यार उठा के उसकी पीठ पे खड़ा होकर छलांग लगा दी, एक एक वार में hi योद्धा क्या उसके घोड़े की गर्दन कटती और दौड़ पट्टी पे धड़ के साथ सर जमा होने लगे और लास्ट 24तह योद्धा का सर काट उसके घोड़े की गर्दन काट उसकी बॉडी का सहारा लेकर सीधा चेतक पे कूड़ा .

चेतक को लगा आज मेरी कमर गयी पर 10 सेक् से भी काम समय में सामने पड़ी 12 योद्धा और घोड़ों की लाशों के ढेर से उसको उनके ऊपर कूड़ा और दौड़ा दिया तलवार उठा के और अकेला hi 15 चक्कर कम्पलीट किया बस उन्ह दोनों साढ़े 8 फट ऊँचे योद्धा को घूरते हुए जोह योद्धा दीर्घा से उसका वह कमाल देखे जोह सब दर्स्कोन को 10 सेक् में दिखा और तांत्रिक त्रिलोचन को सिर्फ 3 सेक् में .

वह आर्यन की निगाह में आ चूका था. मगर उसने भी ठान लिया आर्यन को हराना hi होगा नहीं तो दीप्ति के साथ सबका दिल जीत लेगा .

आर्यन के लाइन क्रॉस करते hi जोरसे घंटा बजा और रति वाले विप पोडियम का हल्ला जैसे सब तरफ फेल गया , राजा त्रिभुवन और दोनों रानियां भी अपने को न रोक सके शोर करने में . वहीँ राजगुरुजी और रघुभार सिंह के चेहरे पे स्माइल और आत्मविश्वास लौट आया था .

दोनों ने देखा काली सकती का जादू आर्यन के खिलाफ उसे किया गया पर सब उसकी शक्ति के आगे विफल रहा .

राजा जबर सिंह ने महामंत्री को बुला के उसके कान में कुछ कहा तो वह पलट के राजकुमारी दीप्ति की तरफ देखा जिसने न में गर्दन हिला दी .

महामंत्री ने जबर सिंह के कान में कुछ कहा तो वह राजकुमारी की तरफ देखा तो मुस्करा के दीप्ति ने सर झुका के कुटिल स्माइल जबर सिंह को दी .

उसका भेद खुल चूका था पर बाकी सबकी निगाह भी ुशी पे थी तो खड़ा होकर बोलै," आर्यन सच्चा वीर पुरुष है राजकुमारी दीप्ति , बहुत hi शानदार पर्दशन रहा सब उसको hi मरना चाहते थे पर वह जीत गया".

राजकुमारी दीप्ति ," दाऊ सा यह तो आप और पिताजी महाराज hi निर्णय लेंगे , िश्मे में क्या बोल सकती हूँ बस मैंने उसको अपने योद्धा भर का नाम दिया है. आपका योद्धा मारा गया या अभी भी छल से जीतने की कोशिश करेगा ".

जबर सिंह भी बस दांत भींच के रह गया .

रानी संगीता ," देखो दीप्ति तुम्हारा योद्धा और घोडा सही सलामत है , दोनों तुमको प्रणाम कर रहे है "..... और हसने लगी .

रानी संगीता और जमुना के दिल में क्या छूट तक में हलचल थी जबसे सुना था घोड़े के साइज से बड़ा है आर्यन का लुंड एक बार में hi बच्चा दे देगा छूट फटने के साथ ...... उसमे बच्चे का बीज भी आ जायेगा इतनी उत्तेजना hi काम न हो रही थी .

उधर राजा जबर सिंह की तीनो रानिओं को भी मीणा खबर करवा चुकी थी दीप्ति का स्वयंवर जीतकर आर्यन hi उनकी कूख भी हरी कर देगा .

आर्यन और चेतक ने राजकुमारी दीप्ति के पोडियम के निचे खड़े सर झुकए उसका अभिवादन किया तो उसने खुश होकर हाथ उठा के जोड़ दिए .

राजकुमारी दीप्ति का हाथ उठते hi पूरा स्टेडियम आर्यन की जय जय में गूज गया.

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2ंद चरण ( तलवार बाजी )

दूसरा चरण स्वयंवर की प्रतियोगिता में जहाँ 4 समहू में 10-10 योद्धा थे वहीँ आर्यन 5तह समूह में अकेला था और उसको अकेले को निहथे करने थे 50 सैनिक .

सैनिकों को निहथे करना वह भी 50 वस 10 योद्धा आसान hi था पर सब मिलकर लाडे तब न . 1सत समूह में सिर्फ 4 योद्धा 2ंद समूह में अकेला तांत्रिक त्रिलोचन 3रद समूह में 6 योद्धा और 4तह समूह फिर अकेला त्रिलोचन का ओझा रुपी योद्धा जीत गए थे .

अब लास्ट बारी थी आर्यन की और सामने थे 50 योद्धा .

आर्यन ने सोच लिया यह दीप्ति के सैनिक है नहीं मरूंगा बस थका के बेहाल कर दूंगा . आर्यन ने अपनी तलवार मैदान में गाडी और कमर की पति लूसे की तो कोई समझ hi पाया पर उसने सीधा 50 सैनिक की तरफ दौड़ लगाई तो सबने तलवार भले और तीर कमान संभल लिए .

आर्यन उनके करीब 10 मीटर आकर ललकार के बोलै डरपोक, नपुंसक और 90 डिग्री का टर्न ले उनकी तरफ पीठ करके दौड़ने लगा . कई सैनिक उसकी ललकार सुनकर उसके पीछे दौड़ने लगे और कुछ दूसरी तरफ से घेरने लगे . पर जैसे भी कोई सैनिक उसके पास आकर वार करता दौड़ते हुए आर्यन उसको डॉज अपनी स्पीड या चपलता से आगे बढ़ जाता 10 मं में आर्यन बस गोल गोल इधर उधर घूम के चक्कर लगता रहा पर हाथ नहीं आया , तीर भी पहनके , भाले भी मारे तलवार का वार सब मिस हो गए एन्ड वक़्त पे दिशा चेंज करके निकल जाता .

भीड़ में उमाड़ और हसी बढ़ती जाती और अपने hi कई सैनिक घायल कर दिए आपस में hi आर्यन पे वार करके . मगर सबको एक जहह ेख्ता होता देख और उन्ह दोनों दैत्याकार के योद्धा के द्वारा मंतर पढता देख फिर से मुस्करा के आँख मारा की यह तू ने मरवा दिए .

सबने मैदान के बिच ेखते होकर जैसे आर्यन को ललकारा तो जमीन पे गाड़ी अपनी तलवार उठा के उनकी तरफ लपका .

2 पंक्ति में उसके चरों ओरे सब फेल गए , जोह 10 सेक् पहले थके थे अब ऊर्जावान हो उठे . आर्यन एक मं शुरुवात के बस डिफेंड करता उनको अपने करीब नहीं आने दिया .

तीर और भले के वार को फुर्ती से काट देता बस एक सर उठा के दीप्ति की तरफ देखा जिसने सर झुका के आज्ञा hi दे दी हो मुस्करा के .

कुछ ख़ास लोग hi दोनों की आँखों आँखों का इशारा समझ पाए पर अगले पल स्मरसल्टिंग से लेकर जिमनास्टिक्स के सारे करतब अपनी तलवार उसे करते उन्ह जादुई सैनिक के हाथ काटता चला गया हर वार विफल और जोह टच होने के कगार पे हो वह हेलमेट झेल के दुर्र फ़ेंक देता ..... 2 मं में सब के सब 50 सैनिक हाथ काटते जमीन पे पड़े थे.

सबके अस्तर पकड़ के आर्यन उनके सरीर से अलग कर के तोड़ दिया . माया hi थी तांत्रिक त्रिलोचन की सबको वह नहीं दिखा जोह आर्यन ने किया बस हाथ से छूटे अस्त्र hi सैनिक के सबको दिखे और उनके अस्तर को आर्यन अपनी तलवार से काट दिया था .

मगर वह यहाँ भी रुका तलवार के घुमते वार से योद्धा एरीना में लगे कालीन को उठा के उन्ह सब सैनिक पे फ़ेंक के उनके सारे टूटे अहस्तार शास्त्र से किनारे जमीन में बींद के सबको धक् के बंदी बना के उनके ऊपर खड़ा होकर तलवार आश्मान की तरफ करके राजकुमारी के पोडियम के सामने फ़ेंक के गाड़ दिया .

पूरे स्टेडियम में हवा का ठंडा सार्ड सा झोंका सबको महसूस हुआ और अणि ने जब कड़ी होकर ताली बजानी शुरू की तो सब उसको फॉलो hi किये .

तलवार बाजी और निहथे करके अकेले सब सैनिक को बंदी बना देना कितना अद्भुत नज़ारा था .

ारयणणणणणण नाम फिर से गूंज गया और सबके चेहरे पे खुसी थी की जोह पहले तांत्रिक त्रिलोचन की वजह से गायब थी पर बाकी कोई देख नहीं पाया उसकी काली विद्या को .

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3रद चरण ( गेंदा या बबरशर )

तीसरा चरण स्टार्ट हुआ महामंत्री के कहते hi और दो बड़ी क्रेन ने स्टेडियम में एंटर किया तो सबके होश उड़ गए .

दोनों क्रेन में बड़े बड़े पिंजरे में एक में गोल्डन और सिल्वर कलर की शील्ड वाला 4 फ़ीट लम्बे पाने नाक का सींघ लिए विशाल गेंदा और दुसरे में एक बाबर शेर जोह शामे गोल्डन सिल्वर शील्ड से कवर्ड था .

दोनों hi जानवर अपने भाई बंधू से दो गुना साइज के थे .

जहाँ अब राजा जबर सिंह के चेहरे पे मुस्कान सी आ गयी वहीँ दीप्ति से नज़र मिली तो दीप्ति और जहरीली मुस्कान देकर दो सख्स की तरफ देखि .

यह कोई और नहीं आर्यन की जुड़वाँ भें Dimple-Payal थी . दोनों राजा जबर सिंह के खूंखार पालक थे और उनको असीम ताकत तांत्रिक त्रिलोचन ने अपने हर मन्त्रित कवच के साथ देकर विशाल कर दिया था .

देखकर पिंजरे में कैद hi गांड पहात रही थी अगर बहार आ गए तो क्या कहर बरपा देंगे .

लेकिन योद्धा एरीना में बैठे 13 में से 10 योद्धा का मूट hi निकलने वाला था. माँ छुड़ई स्वयंवर इनको कोण हरा सकता है और लार की जगह मोह से खून टपक रहा है .

महामंत्री ने अनाउंसमेंट की अब अगले 13 योद्धा को मौका दिया जायेगा पर 10 तो सीट से खड़े होकर hi स्वयंवर का भासिकार कर दिए .

यह मौत के विशाल काये जानवरो को कोण काबू कर पायेगा सायद यह राजकुमारी दीप्ति का योद्धा .

बात जब बढ़ी तो राजकुमारी ने महामंत्री के कान में कुछ कहा तोह पलट के बोलै ," राजकुमारीजी का कहना है की आप चाहो तो 10 एक साथ उन्ह में से एक को काबू करो मेरा योद्धा अकेला दोनों को एक साथ काबू करेगा तभी जीता मन जायेगा ".

अब तोह और ज्यादा हाय हल्ला था तब महामंत्री ने कहा ," यह दोनों राजा जबर सिंह जी के यहाँ से उन्ही के द्वारा लाये गए हैं तोह सोचना मत की राजकुमारीजी के योद्धा को कोई लाभ है".

जब बाकी सब ने आर्यन से मश्वरा किया तो उसने बोलै मुझे अब अकेले hi लड़ना पड़ेगा राजकुमारी जी अनाउंसमेंट करवा चुक्की हैं.

तब त्रिलोचन का एक योद्धा बोलै ," में तुम्हारे साथ रेडी हूँ " .

दूसरा बोलै ," में नहीं लड़ पाउँगा ".

जब फाइनल अनाउसमेंट के बाद बोलै गया की एक तरफ 11 योद्धा ुष गेंदे से लड़ेंगे तब महामंत्री की दूसरी अनाउसमेंट सुनकर सबके प्राण hi निकल गए की आर्यन दोनों से लड़ेगा .

आर्यन ने पलट के राजा त्रिभुवन सिंह की तरफ देखा तोह वह घबरा गया और हाथ से इशारा राजकुमारी दीप्ति की तरफ किया . आर्यन ने जब दीप्ति की तरफ देखा तो उसकी आँखों की भासा में कहा इनसे जीत के दिखाओ .

आर्यन तो खुद लड़ना नहीं चाहता था क्योंकि दोनों उनको मार के उनकी लुगाई की तस्वीर नज़र आ रही थी और दोनों फीमेल थी जिनको पूँछ उठा के आज से नहीं कई दिनों से वह सपनो में छोड़ रहा था कभी गेंदा बनकर कभी शेर , बहोत hi बाहियात सपने Dimple-Payal की पावर की वजह से उसको आने लगये थे .

िश शेर, गेंदे को मार hi दूंगा लेकिन तब क्या होगा सब उसको समझेगी की में एनिमल बैस्टियलिटी की तरफ सँहोइत हो गया हूँ . डेली एक शेरनी की फिर एक इतनी भरी भरकम गंदी की पूँछ उठा के छोड़ता हूँ सपनो में .

( * यह वही सपने थे जोह आर्यन को परेशां करते थे Dimple-Payal से मिलान के बाद शक्ति मिलने से )

आर्यन मन्ना नहीं कर पा रहा था पर दोनों उसको hi देख के गुररररररररर रहे थे और नथुने से निकलती हवा बस एक hi बात दर्शा रही थी बस खुला छोड़ दो फिर बताता हूँ .

पहले 10 योद्धा के साथ त्रिलोचन का ओझा रुपी योद्धा को जैसे hi गेंदे के पिंजरे सामने खड़े हुए और पिंजरे का मोटा लोहे जा गेट खोला गया ...... वह जंगली पसु जिससे शेर से लेकर हाथी की भी गांड पहात टी हो उसको कोण रुक पाटा .

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11 योद्धा ुष खूंखार जानवर जिसको एक दैत्ये गेंदा hi कह सकते हो , के सामने थे और जैसे उसको कोई अनदेखी शक्ति नियतरिर्त कर रही हो .

अपनी नथुनों की फुंकार से गरम हवा किसी हाइड्रोलिक पंप की तरह जब मदिआं की ज़मीन से तकरारती तो धुल उड़ती .

तांत्रिक त्रिलोचन एक योद्धा का रूप धारण किये निश्चिंत सा योद्धा एरीना में बहार बैठा कुछ मैं में मंतर पढ़ रहा था और उसका दूसरा ओझा रूप वाला योद्धा मैदान में जैसे बाकी 10 योद्धा को उकसा रहा था की हमको इसको मिलकर काबू करना होगा .

जमीन पे अपने अगले दूनो ताकतवर प्यार से खुरच के गेंदे ने बता दिया की वह त्यार हैं अकर्मण के लिए और 30-40 फट दूर खड़े उन्ह योद्धा की तरफ गर्जन करता अपने 4 फट लम्बे सींग आगे किये उनकी दिशा में दौड़ लगा दी .

सब योद्धा डरते हुए भी भले और तलवार लिए जैसे उसके hi पास आने का इंतज़ार करते दो पंक्ति में 4 फट की दुरी पे खड़े थे और ओझा योद्धा उनके बिच में सबसे पीछे .

पहले hi अपने खूंखार वार से गेंदा ने तेज़ी से दौड़ते हुए एक योद्धा का सींग से सीना भेद दिया और एक को अपने पैरों से कुचल दिया . बाकी सबके वार बस उसके कवच तक को hi छु पाए . ओझा का भी ताकतवर तलवार का वार उसकी गर्दन पर एक खरोंच hi बना पाया .

पलट के उसने फिर 3-4 बार उनकी तरफ दौड़ दौड़ के वार किये पर गेंदा तो जैसे अभेद hi साबित हुआ और उसने 8 योद्धा मार दिए थे 2 घायल कर दिए थे . ओझा अब अकेला एक तलवार और भला लिए बस ुष गेंदे के अकर्मण का वेट कर रहा था .

बहार बैठा त्रिलोचन अपने मंतर पढ़ के ुष गेंदे को अब ओझा के सामने झुकने के प्रयास में था पर वह उसको कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था .

उसको अहसास हुआ जैसे वह उसके नियतारन में न हो और तेज़ दौड़ के साथ जोर की तकार ओझा को लगी तो वह 20 फट दूर उछाल के गिरा . गेंदा एक पल के लिए रुका और ुष ओझा के तलवार से बचता अपना सींग उसकी छाती के पार कर दिया .

ओझा को सींग पे उठाये उसने सर हिलाकर इतनी जोरसे फेंका की उसका मिर्यत सरीर त्रिलोचन के आगे 5 फट की दूरी पे पड़ा था . उसको विश्वास hi नहीं हो रहा था जोह जानवर उसके सैम मोहन में था वह अचानक इतना हिंसक कैसे हो गया और उसके नियतरं से बहार .

अब गेंदा ने सीधा बाबर शेर के पिंजरे पे अटैक कर सीढ़ी तकार मारी तो पिंजरे का गेट उसकी 3 टक्कर में मुद गया और बबरशर भी अब आजाद था . दोनों जानवर ने पब्लिक का रुख किया और तेज़ी से बढ़ते हुए अपने सबसे नज़दीक दरसाख दीर्घा में चललाह hi लगा दी.

शोर और डर के कारन दर्शक दीर्घा में अफरा तफरी मच गयी पर दोनों किसी को नुक्सान पहुंचते उससे पहले hi आर्यन ने उनके पीछे पहुंच के दोनों की एक एक पिछली टांग अपने दोनों हाथों से पकड़ी और उछाल के दोनों को मैदान के बिच फ़ेंक दिया .

गेंदा तो कलमन्दी मारता मैदान के दुसरे साइड दीवार से जा के टकरा के रोका पर बबरशर , बिल्ली के खानदान से था एक hi पलटी के बाद अपने पंजे जमीन में गदा के बैलेंस कर लिया और खड़ा भी हो गया .

बबरशर ने अब नौजवान बलिष्ट योद्धा जोह की आर्यन था उसकी तरफ देखा तो क्रोध से अपना मोह ऊपर करके धाड़ दिया gurrrrrrrrrrrrrrh ...... पूरा स्टेडियम क्या उसके अस्स पास के 3-4 कम तक धाड़ की आवाज सुनाई दी....... पर उधर आर्यन एक तलवार और शील्ड लिए जैसे दोनों के इंतज़ार में था .

गेंदा थोड़ा सर हिल्ला के खड़ा हुआ और उधर बबरशर ने दौड़ लगा आर्यन पे चललाह लगा उसपर वार किया तोह शील्ड और तलवार से खुद को बच्या पर उसकी ढाल टूट गयी बबरशर के नाख़ून से .

आर्यन भी समझ गया यह दोनों ऐसे नहीं मानेगे दोनों को सबक शिखना पड़ेगा बहोत गरूर है इनको अपनी ताकत पे पर जैसे hi बबरशर पलटा आर्यन ने उछाल के घूंसा उसके बाइये तरफ चेहरे पे जड़ दिया पर उसके पंजों ने आर्यन का योद्धा वाला ड्रेस और ब्रैस्ट शील्ड पहाड़ दिया .

बबरशर को तारे नज़र आ गए वह पल बहार के लिए बेहोस सो हो गया पर आर्यन ने अपना ऊपर का फटा शील्ड और ड्रेस उतर के फ़ेंक दिया ....... पूरा स्टेडियम जोह दम सादे सब देख रहा था आर्यन को , उनकी निगाह ुष गेंदे पे थी जोह पूरी ताकत से उसकी तरफ अपना सर 45 डिग्री पे झुका और अपना सींग जमीन के समान्तर करते उसकी नंगी पीठ को निशाना बने बढ़ रहा था......

मगर आर्यन ुष 2.5 टन के जानवर की दौड़ से जमीन hi नहीं हवा में भी कम्पन ( वाइब्रेशन) महसूस कर सकता था .

अब उसने अपना गरुड़ शिरस्त्राण हेलमेट भी उतर के पहनक दिया दीप्ति की तरफ जिसको उसने हवा में कैच कर अपनी जांघ पे रख लिया .......

बबरशर अपनी चणीक मूर्छा के बाद खड़ा हो गया और सर हिला के अपने सामने नरम ताजा मार्श देखा पर उधर से गेंदा जोह आर्यन से सिर्फ 20 मीटर की दूरी पे पूरी वेघ से हमला कर दिया था वह भी दिखा ......

दोनों को सही मौका लगा पर आर्यन अब थोड़ा पीठ बेंड कर उन्ह दोनों के इंतज़ार में था ...... उधर भीमकाय गेंदे की स्पीड 50 km/hr टच कर गयी और इधर बबरशर ने अपनी जगह से 14 फट लम्बी झलग लगा दी आर्यन के ऊपर .......

दोनों के वार में सेकंड के दसवे हिस्से से काम समय न था पर यह दोनों की भूल hi साबित हुयी ...... आर्यन ने बबरशर का राइट पंजा और गेंदे का 4 फट लम्बा सींग को एक दुसरे में पिरो दिए ......

बबरशर के राइट पंजा के गेंदे का सींग 6 इंच तक पार कर गया और बबरशर के 5 इंची नुकीले नाख़ून ुष सींग पे काश गए ...... आर्यन दोनों के वार की संधी सा करता हुआ अपनी पीठ के बाल जमीन पे पीठ टिका के दोनों की निचे से छाती पे दिल के सामने प्यार से वार किया और अपने से दूर उछाल दिया ......

दोनों उससे 20 मीटर दूर पीछे गिरे और बेहोश हो गए थे ...... मगर गेंदे और बबरशर की स्पीड उनको एक दोनों से लिपटे हुए मैदान की जमीन से रगड़ते हुए घसीट के 30 मीटर दूर स्टेडियम की दिवार तक ले जाने के बाद hi रुकी ..... जहाँ दोनों टकराये तो दिवार देह गयी थी .

दोनों उठ hi नहीं पाए पर उनसे पहले ुनःपर वार करने वाला ...... नीली आंखें, लम्बे वेवी बाल , दूध की तरह गोरा चिट्टा और इतनी बलिष्ट सुन्दर तन्न का मालिक उनकी तरफ पलट के खड़ा हो गया और अपनी तलवार उठा उनकी तरफ पैदल hi बढ़ने लगा ......

1 कदम वह 1 सेक् में तय करता जब उनकी तरफ जा रहा था तोह दोनों बीस्ट को हिलता डुलता न देख सबके चेहरे पे जैसे खुसी दौड़ आयी हो ...... ारयणणणणणण ारयणणणणणण ...... नाम hi गूँज रहा था पूरे स्टेडियम में .....

त्रिलोचन की आँख खोलकर या आँख बांधकर के सब शक्तियां और मंतर फ़ैल हो गए थे .....

आर्यन को ऐसा आगे बढ़ता देख राजकुमारी दीप्ति को डर लग गया की आर्यन उन्ह दोनों जानवर को मारने जा रहा है ...... उसने वह हेलमेट आर्यन की तरफ पहनकर अपनी तरफ ध्यान खींचना चाहया पर उनसे लपक के भी बगल में लगा लिया पर देखा नहीं .......

दीप्ति को जानवर से बहोत प्यार था पर अपने प्रीतम के हाथो दो की हत्या वह कैसे देख सकती थी , उसने अपने चरों शेरोन को आर्यन को रोकने के लिए भेजा तोह सब आर्यन और उन्ह दोनों निर्जीव से पड़े हिंसक पसु और आर्यन के सामने आकर धाड़ के रुके तो आर्यन ने उनको उनकी hi तरह धाड़ के समझा दिया की साइड हो जायो नहीं मारूंगा ......

दीप्ति के चरों शेर भी आर्यन को सर झुका के उसके दोनों साइड हो पीछे पीछे चलने लगये ...... स्टेडियम से लेकर विप, राजशी , खेमे में उत्सा था अब आगे क्या ......

आर्यन ने बबरशर का पंजा गेंदे के सींग से निकाल अपनी लेफ्ट पेअर से पोषक पहाड़ के पट्टी सी बंधी जहाँ से खून टपक रहा था और फिर दोनों के सर पे हाथ रख के आँख बांध करके कुछ बोलै जोह किसको नहीं पता चला पर Dimple-Payal ने ताली मारी की आर्यन सीख रहा है .

(उनको एक hi बात का डर था की आर्यन िंह दोनों से लड़ने के लिए अपनी उनसे मिली शक्ति का इस्तेमाल कर गेंदा या शेर न बन जाए )

जैसे hi आर्यन ने दोनों का सर बारी बारी चूमा दोनों गुर्राते और नथुने फाड़ते हुए खड़े हुए ...... पर अगला सन बेमिसाल hi था दोनों आर्यन के पेअर चाट रहे थे ......

यह कोई जादू का सन नहीं था न कोई चम्तकारी बस आर्यन को पिछले 2-3 घंटे से पसंद नापसंद करने वाले भी उसके फैन hi होते जा रहे थे और जोह कुछ 10-15 योद्धा जोह अभी घायल जिन्दा थे वह भी दोनों राजाओं को कोष रहे थे की राजकुमारी दीप्ति के लिए यह आर्यन कहाँ से लायक नहीं सिर्फ जाती और ुचि शान के लिए कितने परिवार बर्बाद करवा दिए .

महार्यं महार्यं महार्यं महार्यं ...... बस यही नाम गूँज रहा था और वह चलता हुआ राजकुमारी दीप्ति के समय खड़ा होकर अभिवादन में सर झुका दिया .

जब उसने गेंदे और बबरशर के सर पे हाथ फेर के कुछ कहा तो दोनों ने राजकुमारी दीप्ति के आगे अपनी गर्दन झुका के सम्मान प्रकट किया . राजकुमारी दीप्ति अपने सिंघासन से कड़ी होकर निच्चे आयी और दोनों के सर और चेहरे पे हाथ फिरा के तांत्रिक त्रिलोचन की तरफ गुस्से से देखि तो वह भी एक बार सेहम hi गया था .

राजकुमारी दीप्ति ," माहि ुष नीच को मत छोड़ना , उसके पाप का घड़ा भर गया है .

आर्यन सर झुके hi बोलै ," जैसी आपकी इच्छा राजकुमारी जी मगर बदले में मुझ किश चाहिए उसको मारने के बाद पूरी िश सभा के सामने "..... है है है है .....

राजकुमारी दीप्ति भी मुस्करा के ," आप उसको तड़पा तड़पा के मारो , वह बहरूपिया है तोह संभल कर . किश आपको मिल जाएगी सही समय पर अभी स्वयंवर ख़तम नहीं हुआ है और जोह अब योद्धा आएंगे वह न जिन्दा हैं न मुर्दा ".

दीप्ति पलट के वापस अपने सिंघासन पे बेथ गयी और उसके चरों शेर भी उसके साथ बेथ गए . दीप्ति ने जब चरों से पुछा तुम्हने आर्यन को रोका क्यों नहीं ? पर उनका जवाब सुनकर वह भी हिल गयी की ऐसे कैसे हो सकता है .

शेर ने दीप्ति से कहा ," राजकुमारी जी वह मनुष्य आप सबको दिख रहा है पर हम जानवरो को उसका असली रूप दिखा जब हमने उसको रोका , उसके दो सर हैं एक गेंदे का और दूसरा शेर का . बाकी धड़ मनुष्य का है . वह हमारे प्राचीन भगवन का रूप हैं जोह हज़रों साल बाद अब नज़र आया है. हमारे भगवन महार्यं को कोई भी जंगली जानवर नहीं हरा सकता, सब उनको प्रणाम hi करेंगे और वही उन्दोनो गेंदे , बबरशर ने किया ".

राजकुमारी दीप्ति ," इसका मतलब आर्यन में दोनों की शक्ति है ?"

शेर ," शक्ति नहीं वह अवतार हैं हमारे भगवन के , उनको कोई पराजित नहीं कर सकता . इसका सबूत आपको थोड़ी डिअर में मिल जायेगा , खबर आग की तरह सब जंगली जानवरों पक्षी में फैल गयी होगी ".

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आर्यन बबरशर को सहारा देता योद्धा दीर्घा तक गेंदे के साथ लाया तो तांत्रिक त्रिलोचन को देखकर बबरशर आर्यन को बोलै ," महाराज मुझे आएगा दिज्ये में इसको मार के अभी खा जाओं".

गेंदा ," नहीं महाराज मुझे इसका सीने फाड़ना है मुझे आएगा दिज्ये ".

आर्यन मुस्करा कर ," नहीं यह मेरा शिकार है नहीं तो राजकुमारी दीप्ति मुझे चुम्मी नहीं देगी "...... दोनों hi बस आँखों में हास्य तो आर्यन भी हसने लगा .

महामंत्री ने खड़े होकर जब राजकुमारी की बात आगे कही तो सब ॉश्चारिये से उसकी घोसना का मैं hi मैं विरोध किये ........ " महार्यं सिंह तीसरे चरण भी जीतने के बाद सिर्फ एक चरण दूर है स्वयंवर जीतने से . राजकुमारी दीप्ति जी ने 10 योद्धा के साथ एक सेष योद्धा ( त्रिलोचन ) को भी महार्यं के खिलाफ लड़ने का मौका दिया है . महार्यं निहथा होगा और 11 योद्धा को हराना होगा यहाँ तक एक दुसरे को मौत के घात भी उतार सकते हैं . विजेता को राजकुमारी दीप्ति वह हार खुद पहनकर अपना वर चुन लेंगी ".

सब तरफ खुसर फुसर हो रही थी पर सबको विश्वास था की आर्यन hi जीतेगा जोह अकेला hi दोनों जानवरो तक अपना पालतू बना लिया .

तांत्रिक त्रिलोचन भी क्रोध में था उसका ओझा वाला रूप सच्च में hi मारा गया . ओझा के मरते hi उसकी शक्ति भी 1/4तह घाट गयी थी पर उससे बड़ी बात ओझा के मरने के बाद उसकी शक्ति तांत्रिक त्रिलोचन के अंदर वापस आणि चाहिए थी पर ऐसा हुआ नहीं .

तांत्रिक त्रिलोचन को ज्ञात हो गया कोई बड़ी शक्ति उसको रोकने की कोशिश कर रही है पर वह गलत था . आर्यन के वहां मजूद होने से दोनों जानवरो पे से उसका सम्मोहन तो टूट hi गया पर आर्यन के रहते उनपर कोई तंत्र मंतर की शक्ति काम नहीं करि ऊपर ुष्पर हमला कर दोनों की अकाल ठिकाने आयी की वह तो अपने देवता पे hi हमला कर दिए .

आर्यन को हस्ता देख तांत्रिक त्रिलोचन क्रोध से बोलै ," तुझे राजकुमारी बच्चा रही है इशलिये अकड़ रहा है और यह दोनों मेरे पालतू जानवर को हरा के बड़ा शर्मा बन रहा है . तू नहीं जानता में क्या बाला हूँ चहुँ तो एक सेक् में तुझे ख़तम कर दूँ पर नहीं अब तुझे मुकाबले में मार के hi खज़ाना , तलवार और राजकुमारी दीप्ति मेरी होगी और तेरी जितनी माँ..........

आर्यन ने उसको पूरा बोलने नहीं दिया और एक जबरदस्त पंच ुष सादे 8 फट लम्बे योद्धा रुपी तांत्रिक त्रिलोचन की नाक पे जड़ दिया और वह बेहोश होकर जैसे hi जमीन पे गिरा तो इतनी जोरसे लात मारी की वह मीठी में रगड़ता हुआ मैदान के बिच 20 मत दूर आकर गिरा .

पूरे स्टेडियम में जैसे हल्ला की काट गया की आर्यन ने तो वह योद्धा hi मार दिया जोह उसके साथ hi योद्धा दीर्घा में था.

पर आर्यन ने गेंदे को बोलै," जा उठा उसे अभी बेहोश hi किया है , राजकुमारी दीप्ति अभी मेरी हुयी नहीं है पर मेरी माँ बहेनो के बारे में कोई कुछ बोलै तोह जीवित नहीं रहेगा इसको भी 15-20 मं अभी और जिंदगी के देता हूँ ".

गेंदा भी बबरशर को आँख मार के बड़ी मतवाली चाल चलता ुष तांत्रिक की तरफ बढ़ा तो सबकी नज़र ुष्पे hi थी की यह पक्का मरने जा रहा है पर वह तो जैसे कुछ और hi मूड में था . पहले अपनी छोटी सी पूँछ उठा के तांत्रिक त्रिलोचन के सरीर पे गोबर किया फिर उसके चेहरे पे मूतने लगा ...... बहनचोद जलालत की भी हद हो गयी पूरा स्टेडियम हसने लगा पर आर्यन की सीटी की आवाज सुन्न अपने सर को मस्त हिलता मतवाली चाल में वापस आ गया और उसके पास खड़ा हो गया . hi hi hi hi ......

आर्यन ," अबे मैंने तुझे होश में लाने को कहा था उसको सड़ने को नहीं , पर अच्छा काम किया . चलो तुम लोग आराम से देखो अब िंह योद्धा की अशी की तसि , साले भूतों की सेना बना लिया यह राजा जबर और त्रिभुवन ".

4तह चरण ( निहथा योद्धा )

सामने 10 योद्धा अलवर की सैनिक पोषक में तलवार , भाले और गदा लिए बिच मदिआं में खड़े हो गए और महामंत्री ने अनाउंसमेंट करते हुए कहा ," महार्यं आप ऐसे किसी को मार नहीं सकते मुकाबले से पहले ".

आर्यन ने हाथ खड़ा करके कहा ," अभी मारा नहीं है बस बेहोश hi किया है मगर इसने अब एक भी गाली दी तो में भूल जाऊंगा यह या आप सब कोण है ".

तांत्रिक त्रिलोचन भी गेंदे के पिशाब की दुर्गंद और गोबर की बधबू को अपने नाक में तीव्र स्मेल आते hi सर झटक के खड़ा हुआ और अपने को साफ़ करते हुए आर्यन की तरफ बढ़ा तो महामंत्री ने मिछ पे बोलै ," रुक जाओ योद्धा तुम आखिरी बच्ये हो और गाली गोलुन्च छोड़कर एक बेहतरीन योध कौशल का पर्दशन कर स्वयंवर जीतने के सुनहरे मौके को मत गवा देना. तुम तीसरे चरण में बहार थे तब भी राजकुमारी ने मौका दिया है जीतने का . अगली घंटी के बाद मुक़ाबला शुरू जोह जीता वही विजेता होगा ".

तांत्रिक त्रिलोचन ने राजा जबर सिंह की तरफ पानी से अपना मोह साफ़ करते हुए देखा तो उसने भी अगूंठा दिखा के लड़कर जीतने को इशारा किया .

राजकुमारी दीप्ति की तरफ तांत्रिक त्रिलोचन ने देखा तोह वह उसको नफरत से घूर रही थी यही हाल अणि , सारू और मीणा का था . दीप्ति अपने मैं में ," तू यहाँ आया नहीं त्रिलोचन बल्कि लाया गया है , तू जिसके सामने खड़ा है वह तेरे एक एक पाप की सजा देगा ".

सारे 10 के 10 योद्धा आर्यन को मिर्त्ये पिसाच लग रहे थे...... 10 इंसानो को मार के उनके अंदर अपनी आत्मा के 10 अंश तांत्रिक त्रिलोचन ने दाल दिए थे रात में तांत्रिक शक्ति से . ओझा के मरने से जहाँ त्रिलोचन की शक्ति काम हो गयी थी वहीँ इन्हे अपनी शक्ति दाल जैसे वह अब अपनी आधी ताकत के साथ hi उनके आगे खड़ा बस आर्यन को घूर रहा था जैसे एक hi मकसद हो उसको मार देना.

विनाश काले विपरीत भुधि , कहाँ तो वह आर्यन को स्वयंवर जीता के खज़ाना और दिव्या तलवार हासिल करने में मदद करने आया था ताकि बाद में जबर सिंह के थ्रू इस्तेमाल कर सके दुनिया को गुलाम करने में....... पर हर चरण में आर्यन की जीत उसको अपने आप को निच्चा दिखती चली गयी ....... अगर वह खुद न आता तोह सब उसके हिसाब से होता पर वही बात उसकी मानसिक इस्थिति पे लागु होती थी तू आया नहीं लाया गया वह भी मरने के लिए .

राजा जबर सिंह के लिए आखिरी मौका था की उसका योद्धा( तांत्रिक) आर्यन को हरा के स्वयंवर जीत जाये पर योद्धा तो आर्यन को मार के उसकी साड़ी औरतें को अपनी रांड बनने की फिराक में था .

आर्यन ने अपना गरुड़ शिरस्त्राण ( हेलमेट ) पहना और बारे चेस्ट hi अपनी तलवार उठा के आँख बांध कर के एक मंतर पढ़ दिया , स्टेडियम की चार दीवारी पे एक अदृश्य रेखा सी बन गयी पिसाच और भूत को पकड़ने के लिए कहीं भाग न सके.

साले 10 पिसाच एक साथ पकड़ लूंगा िश त्रिलोचन की तो आत्मा सूखा सूखा के मरूंगा . आज अपनी आत्मा से खेलने वाला तांत्रिक खुद एक शिकारी के सामने खड़ा था जोह न जाने कितने अनगिनत भूत और भूतनी पकड़ के पिटारे में बांध कर चूका था .

तांत्रिक उसको मारने के चक्कर में था और आर्यन दर्दरनक सजा दे देकर उसकी रूह सूखने में .

4तह चरण का आगाज की गति बजते hi आर्यन अपनी तलवार दीप्ति के सिंघासन की तरफ उछाल दी जोह उसके पैरों के आगे आकर गड गयी निहथा वह 10 पिसाच योद्धा और तांत्रिक त्रिलोचन के सामने था .

चार योद्धा ने उसको घेर के वार किया पहला वार गदा का उसने किक से रोक तो तंत्र की आवाज आयी ...... 2रे के तलवार के वार वाले हाथ पे बचाव करते हुए मुक्का जड़ उसके हाथ से तलवार गिरा दी और तीसरे के भाले के नोके पकड़ अपनी तरफ खींच के अपना हेलमेट से उसकी छाती पे टक्कर मार 4तह वाले की गर्दन उखाड़ के अपना मोह खोल उसकी आत्मा को पी गया .......

सबकुछ 2 सेक् में हुआ पर तांत्रिक त्रिलोचन को ऐसा लगा कोई उसकी शक्ति को सूख लिया हो ....... मगर आर्यन कहाँ रुकने वाला था हाथ में पकडे सर को त्रिलोचन की तरफ उछाल के उसने गदा वाले का हाथ उखाड़ के कंधे से त्रिलोचन की तरफ फ़ेंक दिया और मार कर उसकी की आत्मा पी गया ......

दो हिस्से त्रिलोचन की आत्मा के जब ओझा की आत्मा से आर्यन के पेट में मिले तब त्रिलोचन की केवल गांड hi नहीं फटी साथ में रूह भी कांप गयी ....... यह आर्यन चीज़ क्या है अब उसकी समझ से बहार था पर उसके पेट में अपनी आत्मा के तीन हिस्सों को अशीन तड़पता महसूस कर उसको भी पसीना आने लगा .......

तांत्रिक की किसी विधि में यह संभव hi नहीं कोई आदमी आत्मा को निगल के अपने पेट में कैद कर ले ....... फिर तोह 3, 4 से लेकर हर पिसाच योद्धा से निहत्ये योध करता पूरी स्टेडियम के दरसक को दिख रहा था पर पिसाच की आत्मा भी पीकर अपने पेट में कैद कर रहा है वह सिर्फ कुछ hi शक्तिशाली लोग hi देख पा रहे थे......

अणि और मीणा के लिए भी यह नया hi तरीका था आर्यन का भूत पिसाच कैद करने का पर अब सब तरफ दस योद्धा की लाशें और उनके टुकड़े hi पड़े थे और त्रिलोचन डर के आर्यन पे वार पे वार करता पर वह हस्ता हुआ उसके वार से बचाव कर उसको चिड़ा रहा था......

10 मं के िश लुका चुप्पी वार से बचता हुआ आर्यन जैसे उसको ललकार रहा था आजा आजा ले ले अपनी आत्मा ले ले अपनी शक्ति ....... आज तुझे सब के दुःख सबकी चीख पुकार अपने अंदर सुनाई देगी याद कर ले कितनी लड़कियों और औरत की ज़िंदगी से खेला उनको उनके परिजन के सामने इज्जत लुटा है याद कर ....... है है है है है है ...... याद कर ......

अपने पेट पे हाथ रख आर्यन ने जैसे hi अपना पेट दब्या वैसे hi त्रिलोचन को अपनी जवानी से अबतक हर चीक पुकार हर किसी का दर्द महसूस होने लगा .....

आर्यन ने अब उसके तलवार लिए सीधे हाथ पे मुक्का और जांघ पे घुटना उछाल के मारा तो त्रिलोचन लड़खड़ा के चीखिआ निकलता गिरा अह्हह्ह्ह्ह मरररररर गया ....... उसको आर्यन अपने चरों और घूमता यमराज नज़र आ रहा था ......

त्रिलोचन ने दर्द पे काबू पा सबसे ध्यान हटा वहां से गायब होने का मंतर पढ़ा तो वह हिल भी नहीं पाया ...... आर्यन हसकर उसके टूटे पेअर पे एक लात जड़कर बोलै ," भाग...... भाग न ...... आज तू नहीं भाग सकता तुझे मौत तोह यहीं मिलेगी पर तुझे थोड़ा गिफ्ट दे देता हूँ". आर्यन ने उसके बाल पकड़ के ऊपर उठा के अपना मोह खोला तो त्रिलोचन ने अपनी कमर से एक मंतर वाला खंज़र उसके सीने पे मारा तो तड़कककककक की आवाज से आर्यन के सीने से टकरा के वह टूट गया ....... त्रिलोचन को लगा उसने किसी लोहे की मोती दिवार पे खंज़र मारा हो .......

आर्यन ने मुस्करा के आँख मारी ," तुझे आजतक सिर्फ मदारी और ढोंगी मिले होंगे आज तुझे पहली बार तेरा बाप मिला है चल बीटा मोह खोल तुझे तेरी रूह से पूरा जोड़ देता हूँ ".

आर्यन ने उसकी गर्दन अपने बगल में दबा के उसको मोह भींच के खोल , 10 पिसाच के साथ ओझा की आत्मा और शक्ति के ांश उसके सरीर में भेज दिया ...... आर्यन उसको छोड़ा तोह बस चीखिआ जा रहा था पर दर्द नहीं उसकी शक्तियां hi उसको अंदर से काट रही थी और वह पागल सा हुआ हर ुष प्राणी के दर्द और यतीन महसूस कर रहा था जोह उसने आजतक दी थी .......

मौत अलग चीज़ होती है जिससे इंसान के सरीर से आत्मा परमात्मा को खोजती है पर यह त्रिलोचन के साथ जोह हो रहा था वह था अपनी hi आत्मा के 11 हिस्से बचे हुए हिस्से को सूख के एक दुसरे को ख़तम कर रहे थे और हर पल नरक से बुरा यातना के सम्मान मिर्त्युलोक ( धरती ) पे hi हो रहा था ......

बड़े गुरूजी , निशांक , अणि , मीणा , सारू और राजकुमारी दीप्ति के साथ राजगुरुजी और रघुभार सिंह भी यह दृश्य देख रहे थे और ुष असहनीय यातना की कल्पना भी नहीं कर सकते थे.

यह कोई तंत्र विद्या नहीं है थी न hi कोई शक्ति का वार , यह तो खुद hi अपने वजूद को ख़तम करने वाली पर्किर्या थी जोह किसी ने आजतक नहीं देखि थी .......

सच्च में अब सबको डर लग रहा था पर त्रिलोचन की चीखिआ को सवाभाविक दिखने के लिए आर्यन उसको मार मार के पटक भी रहा था जिससे साड़ी भीड़ को लग गया की आर्यन जीत hi गया है ......

पर एक आदमी राजपूताना कौंसिल वाले मंच पे मूट दिया था ुष दर्द को महसूस करके और उसकी चिकियन भी तांत्रिक त्रिलोचन की निर्जीव सरीर और सुण्या सी विलीन होती आत्मा के साथ hi रुकी ....... यह था जबर सिंह जिसपर तांत्रिक त्रिलोचन का आशीर्वाद था जोह मोह लुंड गांड से निकल रहा था ......

त्रिलोचन मार चूका था और उसको उठा के आर्यन ने राजकुमारी दीप्ति के पोडियम के निचे मैदान में फ़ेंक दिया ......

महार्यं महार्यं महार्यं महार्यं महार्यं महार्यं

बस एहि नाम गूंज रहा था और राजकुमारी दीप्ति खुसी से अपना सिंघासन छोड़कर दौड़ती हुयी सीडी से निचे उतरती आर्यन की तरफ दौड़ गयी बिना किसी की परवा किये ....... त्रिलोचन की लाश पे प्यार रखती वह आर्यन की तरफ बढ़ गयी .......

मैदान के बिच में दो प्रेमी खड़े थे एक दुसरे के सामने , पूरा स्टेडियम जैसे ताली की गड़गड़हट , जय जय के नारे और सीटियों से गूँज गया ....... आर्यन का गरुड़ शिरस्त्राण खुद अपने हाथ से उतार के आर्यन के राइट गाल को चूम के उसकी बाँहों में समां गयी .......

दीप्ति ," मुझे आपने आज अपनी दासी बना लिया मेरे स्वामी में आपकी राह कितने सालों से देख रही थी ....... आज से मेरी रूह भी आपकी हो गयी मेरे माहि मेरी जान पे सिर्फ आपका hi अधिकार है ".

आर्यन ने उसका सर चूम के कहा," पलट के देखो मेरी जान दीप्ति सब हमको hi देख रहे हैं . में हमेशा तुम्हारा था तुम्हारा रहूँगा बस जीवनसाथी बनकर न की तुम्हारा मालिक . हम बर्बर के हैं दीप्ति जहाँ सिर्फ प्रेम hi प्रेम होगा ".

दीप्ति को जब अपने कंधे पे किसी और के हाथ का अहसास हुआ तोह पलट के देखि तो सुचित्रा हाथ में एक वरमाला लिए उसको दी ...... आर्यन के और अपने परिवार सहित पूरे स्टेडियम के सामने मिछ पे बोली ," में िश स्वयंवर के विजेता श्री महार्यं सिंह को आज से अपना जीवनसाथी चुनती हूँ और इश्के गावह आप सब हैं ".

दीप्ति ने आगे बढ़कर आर्यन के गले में स्वयंवर की वरमाला दाल के अपना जीवनसाथी चुन लिया ....... आश्मान से फूलों की वर्षा हो रही थी हेलीकाप्टर के दवारा ......... पर आर्यन को अब उसके पूरे परिवार ने घेर के चूमियों से दोनों गाल गीले कर दिए.

आज एक नहीं ना जाने कितने पापी दुनिया से कुछ कर गए मगर दो दिल को जुड़ने से रोक न सके ....... Aryan-Deepti का प्यार आज परवाने चढ़ hi गया .

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
धयानवाद भाई लोग की आप सबको अपडेट पसंद आया.

नेक्स्ट अपडेट भी जल्दी hi दूंगा बस 1-2 दिन में ....

कीप रीडिंग एंड पोस्टिंग योर व्यूज एंड कमैंट्स ों थे स्टोरी.
 
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नेक्स्ट अपडेट मंडे नाईट तक .....
 
अपडेट 33

PART 10 ( लास्ट part) ( दीप्ति )

अब तक.......

दीप्ति ने आगे बढ़कर आर्यन के गले में स्वयंवर की वरमाला दाल के अपना जीवनसाथी चुन लिया ....... आश्मान से फूलों की वर्षा हो रही थी हेलीकाप्टर के दवारा ......... पर आर्यन को अब उसके पूरे परिवार ने घेर के चूमियों से दोनों गाल गीले कर दिए.

आज एक नहीं ना जाने कितने पापी दुनिया से कुछ कर गए मगर दो दिल को जुड़ने से रोक न सके ....... Aryan-Deepti का प्यार आज परवाने चढ़ hi गया .

अब आगे ........

जब आर्यन के घरवालों ने चूमने के बाद उसको अपने से अलग किया तो आर्यन ने सीटी बजा के चेतक को अपने पास बुला दीप्ति को ुष्पर बिठा के खुद उसके पीछे बेथ स्टेडियम के 3 चक्कर आराम से लगते हुए दोनों ने अपना हाथ हिलाते हुए सबका अभिवादन स्वीकार किया ......

पूरा स्टेडियम को जैसे राजकुमारी दीप्ति और नए भावी राजा चौदर्य महार्यं सिंह पे नाज़ हो रहा था ..... वीरता , मर्दानगी और दिलेरी से भरपूर यह सुन्दर नौजवान हक़ीक़त में स्वर्णगुन सम्पन है नए राजा बनने के लिए .

लेकिन अब महामंत्री ने मिछ लिए आर्यन का पूरा परिचय यह बता के दिए

" आप सिर्फ बहादुर hi नहीं ुष शख्सियत को देख रहे हैं जोह एक 40 गाओं की महापंचयत का मालिक , मैडम रतिदेवी जोह इंडिया की बिज़नेस टाइकून हैं उनके बिज़नेस एम्पायर का अकेला ओनर और ीत दिल्ली , मिट अमेरिका का टोपर, इंजीनियरिंग ग्रेजुएट के साथ 22 अलग अलग डिग्री लिए हुए है . महार्यं से मिलने के लिए गोवत को भी टाइम लेना पड़ता है वह इतना बिजी रहता है . राजकुमारी दीप्ति को पहली नज़र में आर्यन से प्यार हो गया था और आर्यन ने भी दिल से अपना सर झुका के राजकुमारी का प्यार अपना लिया था ...... स्वयंवर सिर्फ राजा त्रिभुवन सिंह और राजा जबर सिंह ने इशलिये रखा गया की सब राजपूताना रजवाड़ों में भी हर व्यक्ति यह जान ले की आपकी राजकुमारी ने सही शूरवीर का चुनाव किया है और इसके आप आज घाव बन गए हैं". "धयानवाद ".

पूरा स्टेडियम ताली , सीटी , जय जय कार के नारों से गूंज गया ...... आर्यन और दीप्ति दोनों राजा त्रिभुवन सिंह के पोडियम के सामने चेतक से उतर कर जब ऊपर जाकर हाथों में हाथ थामे राजगुरुजी , रघुभार सिंह और राजा ,2 रानियों को सर झुका के अभिवादन किये तो सब अपनी खुसी न रोक पाए सबकी नाम आंखें उनको बता रही थी वह कितने खुश हैं .

राजा त्रिभुवन सिंह ने आर्यन को गले लगा के अपने किये की दिल से माफ़ी मांगी और आर्यन ने भी लगभग माफ़ hi कर दिया दीप्ति के लिए पर सजा तो डायरेक्टली इंदिरेक्ट्ली मिलेगी hi यह मीणा और अणि से बेहतर कोण जानता था . अब समय आ गया था गीता का अपने असली खंडन के अलवर राज्य के पास रखे ख़ज़ाने पे अपना अधिकार लेने का ...... महामंत्री ने शाही भोज का एलान कर सबको स्टेडियम के पास बने विशाल भोजन पंडालों में जाने का ागढ़ किया.

रजवाड़ों और विप लोगों का राजमहल के प्रांगण में शाही भोज की व्यवस्था की गयी थी पर 55 से ज्यादा परिवार तो अपने योद्धा या राजकुमार को िश स्वयंवर में मौत की भेंट छाडे उनकी बॉडी के साथ विलाप और वापसी की तयारी कर चुके थे .

आर्यन के साथ राजकुमारी दीप्ति सिंह से भी एक नफरत जैसी उनके दिल में थी पर विरोध करने का समर्थ न था . आर्यन ने स्वयंवर की सब शर्तें और बढ़ें अपने प्राकर्म से पूरी की थी जोह अप्रतिहासिक था ..... वह सच्चा शूरवीर बनकर विजेता घोसित हुआ .

दीप्ति जब आर्यन को अपने साथ रथ में 4 शेरोन के साथ ुष जंगली जानवरों वाले एरिया से गुजरी तोह सब जंगली जानवरों और पक्षिओं के शोर करते हुए दोनों के आगे नतमस्तक थे ..... आर्यन ने अपनी चिर परचित अंदाज़ में रथ से उतर हर बाड़े के सामने से गुजरते हुए पसु पक्षी की भासा में बात की और सबने उसको अपना महाराज कहकर सम्भोदित किया जिसपर आर्यन ने कहा अगली बार मिलने नहीं आऊँगा अगर मुझे अपना दोस्त नहीं मन तोह में भी बस आप सबके जैसा हूँ पर राजा नहीं .

राजकुमारी दीप्ति रथ में जब अपने शेरोन की तरफ देखि तो उनके लीडर ने कहा ," राजकुमारी जी वह हम सबके देवता का रूप हैं और अप्प स्वयं hi देख लीजिए सब उनका क्यों सम्मान करते हैं ".

दीप्ति की जितनी विशेस्ता आर्यन को स्वयंवर के मैदान में पता चली उससे ज्यादा उसको आर्यन की गायत हुयी ..... वह उसकी कल्पना से भी परे था , दीप्ति को विश्वास होता जा रहा था वह उसको दिव्या तलवार से मुकत करवा देगा पर क्या यह इतना आसान था ????

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कहीं बहोत दूर धरती की सतह के निच्चे आज जब एक विशाल अँधेरी जगह में सुनहरी सी रौशनी सतह में और एक इंच घेरि धंसी तोह दूर तक फैले विशाल खजाने में भी हलचल हुयी ...... चन्नण चन्नण सोने के सिक्के और जवाहरात की आवाज से 3 फैन वाली 60 मीटर लम्बी और 2 मीटर मोती उदार वाली नंगीं की 6 आंखें खुल गयी जोह 800 साल से सोई हुयी थी ..... उसके 3 फैन के ऊपर लगी मणि भी जागृत होकर चमकने लगी .

"विशाखा" यही नाम था उसका , वह िश दुनिया की नहीं थी बल्कि पातलाल से बहार आयी ुष रौशनी से मोहित थी और उसको िश रौशनी से भरपूर दिव्या तलवार से अँधा प्यार सा हो गया था पिछले 1800 साल से ...... पिछली बार 800 साल पहले जब एक राजपूत राजकुमार िश तलवार के लिए आया तो साबुत निगल गयी थी ...... इसका मतलब अब कोई नया इसको पाने आया है ...... है है है है है .......

"में इंतज़ार में हूँ , बहोत सालों बाद भोजन भी करुँगी पर तलवार में हलचल क्यों हुयी ".....??????

अपने पोस्टिव चेंज कर वह दिव्या रौशनी वाली तलवार से लिपट के खजाने के ऊपर आँख मूंढ कर फिरसे सू गयी ........

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आर्यन जब राजकुमारी के साथ राजमहल पहुंचा तोह 5 रानियों ( 2 दीप्ति की मम्मी और 3 भाभी ) ने उसका बारी बारी ारता किया बहोत शरमाते और छेड़ते हुए ...... दीप्ति ने उल्टा हाथ पकड़ा था आर्यन का पर उसका सीधा हाथ की एक एक ऊँगली मीणा , गीता , डॉली, नेहा और अगूंठा सारू ने पकड़ा जाने के लिए पर सच्च तोह कुछ और hi था .

राजकुमारी दीप्ति को महल के अंदर ले जाया गया त्यार होने के लिए पर आर्यन को अभी कुछ रसमो के लिए वहीँ रोक दिया गया .....

राजा त्रिभुवन सिंह , रानी संगीता और रानी जमुना ने अपने हाथ से आर्यन के जुटे उतरवा चौकी पे बिठा के प्यार धोये जिसका वोह विरोध किया पर राजगुरुजी ने कहा ," बीटा उनको अपना हक़ निभाने दो ".

दोनों रानियां प्यार धू काम सहेला ज्यादा रही थी अपनी चाहुलबाजी से ..... उनके बाद राजा जबर सिंह की तीनो रानियों ने भी आर्यन के प्यार धोने का अपने अधिकार बताया तोह राजगुरुजी ने सहर्ष उनको भी रश्म निभाने का मौका दिया .....

अणि पीछे कड़ी अपनी कुटिल मुस्कान लिए सब देख रही थी , आर्यन ने उसको और बाकी बहेनो के साथ रति , डॉ अंजू , डॉ सलोनी , ठकुरियन रूपा , अपनी दोनों बच्चों के साथ उनकी माँ कविता और बबिता को भी अपने साथ रहने का कहा.

बिना जोह पीछे दूर कड़ी थी उसको आवाज देकर पास बुलाया और बोलै लीड तू करेगी मेरी माँ ( रति) के साथ , मेरी माँ का सम्मान नहीं तोह कोई मेरे लिए कुछ भी नहीं .

राजमहल में बिना के साथ रति सबसे आगे उसके पीछे सब जब सिंघषण के सामने पहुंचे आर्यन का पूरा परिवार hi जैसे वह ीखता हो गए तीनो गाओं से और आर्यन के सब क्लोज रिलेटिव्स रति ने सुबह hi बुलवा लिए थे जोह अब कमसे काम 120 से ज्यादा होंगे ......

( जीकर उनका hi होगा जिनका रोले हैं , यानी आर्यन के इंडिया में जितने रिलेटिव्स थे मलेस फ्रेमलेस सब थे बस उसके डैडी राज सिंह नहीं थे और चाचा की फॅमिली नहीं थी )

पूरे सजे राजमहल में अणि बस एक hi सख्स को ढून्ढ रही थी की गलती से नज़र आ जाये राजा जबर सिंह पर वह तोह खुद होस्पिटलिज़्ड था जिसका उसको भी पता था हरामजादे बस एक बार मेरे सामने आ जा जल्दी से अपना नाटक ख़तम करके .

जब महामंत्री ने अनाउंसमेंट की आर्यन के परिवार के और अभिवादन की तोह पूरा खचा खच्च भरा राजदरबार उनके सम्मान में खड़ा हो गया ..... रजवाड़ों , राजा , रानियां को छोड़कर .

जब महामंत्री ने राजकुमारी दीप्ति के विवाह का प्रस्ताव रखा तोह गीता ने आगे भड़कर जोरसे कहा ," यह विवाह नहीं हो सकता जबतक में हाँ न बोलूं ".....

उसकी आवाज इतनी तेज़ थी राजमहल में मजूद 130-140 लोग एक साथ खामोश हो गए ...... जोह गीता को नहीं जानते थे वह खुसर पुसार करने लगे पर दीप्ति के परिवार वालों को जैसे लखवा hi मार गया ..... वह सब जानते थे की गीता कोण है ? आर्यन की होने वाली बीवी , अगर उसने मन किया तोह दीप्ति जिन्दा नहीं रह पायेगी अब तोह 24 घंटे hi बचे हैं समयचक्र पूरा होने में .

रति को भी अंदजा नहीं था गीता ऐसा करेगी पर दोनों, मीणा और अणि , के चेहरे पे कुटिल मुस्कान थी . आर्यन को पता था गीता यह अवसर नहीं जाने देगी आज उसकी ठाकुर और राजपूतों के लिए नफरत आगे आ hi गयी और मौका भी उसके हाथ में था सबको जलील करेगी .

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राजकुमारी दीप्ति

राजकुमारी दीप्ति जोह अब एक रॉयल परिधान में दुल्हन बानी हुयी अपना घूंघट किये अपनी सीट पे बैठी थी कड़ी हुयी गीता की गुस्से भरी आवाज सुनकर और उसकी तरफ दौड़ के आगये आ उसके चरण पकड़ लिए तब गीता ने गुस्से से कहा," दीप्ति तुझे मैंने छोटी भें माना है तो चुपचाप अपनी जगह वापस चली जा अगर आर्यन से सच्चा प्यार किया है, नहीं तो भूलने की आदत दाल ले अगर मेरे बिच में आयी तोह ....... और तुम सब िश दरबार में बैठे लोग सुन्न लो कोई बिछ में नहीं बोलेगा , यह तुम्हारी राजकुमारी भी मेरे आर्यन ने स्वयंवर में जीती हुयी है , वह सिंघासन भी और राजपूताना कौंसिल की चैरमानशिप भी यह याद रखना नहीं तोह जोह गेंदा और बबरशर तुमने स्वयंवर में भेजा था अब आर्यन के पालतू हैं एक इशारे में सबको चीयर पहाड़ देंगे ".

रति सोचने लगी यह गीता मेरे सारे डाइलोगे मार देगी तो में क्या बोलूंगी पर अभी इतना गुस्सा क्यों हो रही है यह चंडी देवी , कहीं हम सबकी पोल्ल न खोल दे ( हम सब आर्यन के रिलेशन्स हैं और कई साड़ी बीवियां और बच्चे )..... इसको रोकना होगा .

मीणा ने आगे बढ़कर दीप्ति को उठा के उसके कान में कहा ," गीता दीदी को मत रोक दीप्ति , तेरा हक़ तुझे जरूर मिलेगा पर उससे पहले दीदी को अपने हक़ की बात करने दे "....... बिचारि अपनी नाम आँखों से आर्यन को देखि घूंघट से तोह उसने भी नज़रिए झुका ली .

दीप्ति के घूंघट में आँखों में आसूं आ गए पर बिचारि अपने को समेटे जब अपनी सीट पे बैठी और महामंत्री ने अपने सैनिकों को गीता की तरह इशारा किया तोह 20 सैनिक एक साथ उसको आगे खड़े होकर उसको घेर लिए .

आर्यन आगये बढ़ता उससे पहले hi मीणा ने उसको रोका ," आज नहीं आज उसका दिन है वह नफरत उसकी आज ख़तम हो जाएगी बस तू चुप रह भाई और बस सुहागरात की तयारी कर ".

रति और सब डर रहे थे पर जब सबने आर्यन की तरफ देखा तो उसने पलकें झपका के इशारा किया शांत रहो .....

महामंत्री ," देखो लड़की तुम , कुंवर महार्यं की रिस्तेदार हो पर यह मत भूल जायो की कहाँ कड़ी हो , राज्यसभा में खड़े होकर राजा शभ के दरबार में ऊँची आवाज में बात करने वाला का सर काट दिया जाता है ...... अभी सबसे माफ़ी मांग लो बच जायेगी ".

गीता ने हस्ते हुए दो तलवार ताने सैनिक को उछाल के लात मारी और उनके गिरते hi तलवार उठा बाकी सबकी तरफ देख के कहा ," सालों ठाकुरों के नपुंसक सैनिक आयो आज मैंने भी तुम्हारी जीवन लीला ख़तम न करदी तोह में भी रति देवी की बेटी गीता चंडी देवी नहीं "......

रति चिल्ला के ," जान से मत मरना गीता बस हाथ प्यार hi तोडना " ...... लो जब माँ hi ऐसी हो तोह औलाद को कोण रोकेगा.

जबतक कोई और रोकता तबतक गीता ने सबके तलवार से निहथे करते हुए मार मार के हाथ प्यार तोड़ दिए , पर अब आर्यन और उसकी फॅमिली को 100 से ज्यादा सैनिक और सिक्योरिटी वालों ने बन्दूक और तलवार के निशाने पे घेर लिया था और अणि ने अदृश्य शील्ड सब पे लगा दी.

बस गीता बहार थी पर जब ुष्पर फायरिंग की तो हर गोली उसको छू कर निचे गिरती क्योंकि आज उसकी धरती पावर वाली शील्ड अपने आप hi एक्टिवटे हो गयी , पर जितने भी गिरे हुए सैनिक थे उनके हथियार लेकर पहनकर कूद के एक एक को मार के हड्डी पसली तोड़ रही थी ...... 10 मं तक यह चंडी देवी का तांडव देख सबके मोह hi सील गए पर सब अविशानिये था.

आधे लोग अपनी सीट के पीछे दुबक गए और राजा , रानियों , राजकुमारी के बोडीगार्ड्स उनके सामने ढाल बनकर खड़े मरने को त्यार थे पर मारने को नहीं दीप्ति के कहने पे .......

एक एक को मार तोड़ के गीता सीधा राजा त्रिभुवन सिंह के सामने कड़ी हो गयी और उसके बोडीगार्ड्स के कपड़ों से हाथ में ली खून से सनी तलवार पहुंचते हुए बोली," बस इतना hi डैम है राजा त्रिभुवन तेरे में और सैनिक बुला ले फिर भी तू मुझे तो नहीं मार सकता क्योंकि मैंने एक शेरनी का दूध पिया है और तेरा तू जाने, जी तोह करता है तुझे अभी जान से मार दूँ पर ुष लड़की ( दीप्ति की तरह तलवार करके ) को छोटी भें माना है उसकी वजह से बच्च गया आज फिर तू ...... मगर सजा तोह तुझे मिलेगी , अभी सबके सामने तुझे मेरी माँ रति देवी के चरण में सर रखकर भीख मागणी पड़ेगी अपनी और दीप्ति की जिंदगी की , अब तेरी बारी है ".

गीता ने तलवार घुमा के ऊपर लटके झूमर पे निशाना लगा दिया और पल भर में राजशृंगासन और आर्यन के परिवार के बिच गिरा और फूट गया ....

हर तरफ कांच hi कांच था .....

सारे राजदरबार के झूमर में यह सबसे विशाल था , करीब एक टन का होगा पर राजमहल के कालीन पे गिर फूट के कांच का ढेर लग गया , गोल्डन और सिल्वर की ताने लोहे के साथ मुद के पड़ी थी ...... पूरा राजमहल आज बस मूक दरसक बना गीता को देख रहा था , आर्यन सबको बलसाली लगा पर यह बॉब कट , सावली सी , मरदाना स्टाइल सी, दिखने वाली राजकुमारी दीप्ति की हंसकाल लड़की कुछ ज्यादा भयानक लग रही थी गोलियों का भी असर नहीं हुआ सायद बुलेट प्रूफ पहनी है .

गीता धधकार ," मीणा मेरी माँ के लिए सिंघासन बनो आज सब ठाकुरों की तरफ से माफ़ी यह कुत्ता त्रिभुवन मांगयेगा नहीं तोह इसकी गांड में लोहा बहार दूंगी "....... गालियां सुनकर भी कोई रिएक्शन दूसरी तरफ से नहीं था क्योंकि चंडी देवी इधर से उधर टहल सबको घूर रही थी चरों ओरे देखकर.

मीणा ने गंभीर होकर बोलै ," जिंतलू हुंकारटीइ "...... ( यह अफ्रीकन ट्राइबल लैंग्वेज का आर्डर था मोरफानखी सिंघासन बनो ) ...... मोरफानक मीणा hi बनती थी ......

तीन लोगों की बॉडी में जल्दी से रिएक्शन हुआ अपनी कबीले की राजकुमारी मीणा के आदेश का और 5 सेक् बाद अजीब hi मंजर था सब मोह फाड़े देखते रह गए ..... आर्यन घुंटनो पंजों पे उल्टा झुका सर उठा लिया और Dimple-Payal ने एक एक अपनी टांग उसकी गर्दन पे लपेटी दूसरी एक एक घुटने पे लपेट के जोड़ दी और दोनों हाथ कारपेट पे लगा दिए एक दुसरे की तरफ करके चेयर के हाथे जैसे बना दिए अपने सरीर से और मीणा कूद के अपनी पीठ उनकी तरफ करके आर्यन की गर्दन पे बेथ गयी सर झुके ......

ह्यूमन चेयर और इतनी विशाल सबके लिए ॉश्चारिये था पर वास्तिविकता तोह रति देवी के ुष्पर बैठकर गीता द्वारा सबको होश में लायी ......

कोण था जोह िश दृश्य को पाछा पाए, यह कोई साधारण लोग नहीं है जोह स्वयंवर भी जीत लिए और अब शादी भी अपनी शार्टिओं पे करेंगे ......

लेकिन आज आर्यन के परिवार के लिए भी कुछ नया था ..... गीता ," यह है मेरी असली माँ और माफ़ी मांग , िशने तेरी मदद की और तू हमे hi निगलने की चक्कर में था , अगर मेरी माँ ने तुझे माफ़ कर दिया तोह त्रिभुवन तेरी बेटी को सौतन भी बना लुंगी नहीं तो जीती औरत क्या होती है यह तू भी अच्छी तरह से जानता होगा , जाएगी तोह हमारी हवेली hi पर सब तुझपर थूकेंगे और कोई बिच में आया तोह तो ुष लड़की को देख ले अनीता सिंह नाम है उसका , आर्यन की सगी भें और मौत की देवी ...... एक भी जिन्दा नहीं बचेगा तेरे राज्य में ".

राजा त्रिभुवन सिंह के तोह पुरखे तक याद करा दिए िश सो कॉल्ड दीप्ति की बड़ी दीदी गीता ने , पर रानी संगीता ने हिम्मत करके कहा ," गीता बेटी ऐसे हमारी बेजिटि करवा के तुम हमारे अपने लिए प्यार सम्मान को गाली नहीं दे रही हो, हमने तुमको भी दीप्ति की बड़ी भें मान लिया था फिर क्यों? ".

गीता हस्ते हुए ," है है है है बहोत खूब रानी साहिबा , अगर कोई दीप्ति को मौत के घात उतरने के लिए 500 गुंडे भेजे उसके साथ उसके परिवार वालों को भी जिन्दा जलने के लिए तब भी यही जवाब होता आपका , यह आपका पति कुत्ते के भेस में गीदड़ है....... हरामजादा मुझे और आर्यन को मरने के लिए अपने 500 आदमी मेरे नपुंसक मां और चाचा से मिलकर मारने भेजा पर मार न सका ..... अह्ह्ह्हह थूऊऊऊ है तुम हिजड़ों ठाकुर की औलादों पे ...... आ जायें मार के दिखो मुझे , यह मेरी असली माँ रति देवी और उसके चार यह असली शेर शेरनी के आगये टिक hi नहीं पयोगे क्योंकि तुम कायर hi नहीं झूटी शान के लालची कुत्ते हो ..... मुझे तोह मर hi जाना था जब पैदा हुयी पर िश मेरी देवी जैसी माँ ने मुझ जैसी अनाथ को पला , सगी माँ से भी ज्यादा प्यार देकर अपना दूध पीला के बड़ा किया ...... आज तक मुझे दूसरी जाती का होने का अहसास नहीं होने दिया पर तुम सौर को फिर भी चैन नहीं है , मुझे तोह आजतक पता नहीं चलने दिया की मेरा अपना कुत्तों से भी गया गुजरा परिवार है , पर आज का स्वयंवर और तुम सबकी चापलूसी देखकर एक बात पता चल गयी तुम जोह अपनी बेटी या औरत का सम्मान नहीं कर सकते तोह तुम्हारा दर्जा तो बहोत hi गलीच hi है ...... त्रिभुवन आखिरी मौका देती हूँ माफ़ी मांग ले नहीं तोह ुष जबर सिंह के साथ तू भी मुफ्त में मारा जायेगा मेरे इक इशारे पे आज hi , दीप्ति की सबसे बड़ी खुशियों वाले दिन ".

जिसको समझना था वह समझ गए की गीता ने त्रिभुवन को दीप्ति आर्यन के रिश्ते के लिए माफ़ कर दिया पर किसकी को तोह कुछ बोलना hi था..... दोनों रानियां बगैर कांच की परवा किये सीधे दौड़ के रति के पेअर पकड़ ली की उनके सुहाग को माफ़ कर दे ......

त्रिभुवन भी रू hi रहा था इतनी डिअर से जलील होते हुए पर जब राजा रघुभार सिंह ने हाथ उसके कंधे पे रख के इशारा किया तोह रोटा हुआ सीधा अपना मुकुट भी रति देवी के चरणों में रख दिया रोटी हुए .......

रति ने झट से उसको हाथ पकड़ के खड़ा किया और बोली ," राजा त्रिभुवन सिंह जी , में यह कभी नहीं चाहती की आप जैसे राजा का सर किसी के आगे झुके पर में अपनी बेटी की बात न ताल सकीय , आप दिल से अच्छे hi लगे पर कुछ काली धुल की पार्टिएं आपके दिल को धक् ली थी और किसी भी नए मजबूत रिश्ते की शुरुवात कपट से नहीं विश्वास से बनती है ".

रति ने उसका मुकत अपने हाथ से लेकर त्रिभुवन को पहना दिया और बोली ," में यहाँ न आपका तखत , न ताज , न शौरत लेने आयी थी , में तोह बस ुष प्यारी सी आपकी सूंदर बेटी दीप्ति का हाथ मांग ने आयी थी ...... अभी भी वह hi चाहिए अगर आप दिलसे आर्यन को उसको लायक समझते हो तोह बाकी भगवन का दिए सबकुछ है मेरे पास".

रति चरों जुड़वाँ कबीले वालों को उठने को कहा , आर्यन और उसकी तीनो जुड़वाँ भेने खड़े हो गए आसान मुद्रा से , रति ने फिर सबकी तरफ देखकर कहा ," मेरे लिए मेरा परिवार मेरा गरूर है और मेरे परिवार की शान मेरा वररिस आर्यन है और यह hi मेरे परिवार का अंगरक्षक है ".

राजा त्रिभुवन सिंह ने रोटी हुए ," गीता बेटी मुझे माफ़ कर देना अपनी मरूद में मैंने बहोत बुरा किया पर एक बाप की इल्तज़ा है मेरी बेटी को अपना लो ".

गीता ," राजा शभ , दीप्ति की शादी आर्यन से होगी पर मेरी शादी के बाद एहि आपकी सजा है , दीप्ति आपके पास आर्यन की अमानत बनकर रहेगी ".

आर्यन भी गीता की बात सुनकर सोच में पद गया की यह चंदा रानी क्या बोल रही है आज तोह दीप्ति की साथ सुहागरात माननी थी .......

मीणा उसके मैं में ," एक लाडू फूट गया बस चुप रहना नहीं तो दूसरा भी फूट जायेगा , गीता सही करेगी ".

तभी गीता ने बिना को इशारा किया तोह वह बहार जाकर 2 मं बाद लौटी तो चार गार्ड्स गीता के सेज चाचा और मां को लेकर राजदरबार में आ गए ....

1) ठाकुर सूरज भान ( गीता का सागा चाचा )....

2) ठाकुर बहनो प्रताप ( गीता के छोटा मां )

राजा त्रिभुवन सिंह जिसको रति ने अपना आश्वासन देकर उसकी राजगद्दी पे बैठने को कहा और खुद भी अपने परिवार के लिए राखी गयी सीटों पे बेथ गयी थी फिर से खड़ा हो गया ......

राजा त्रिभुवन सिंह ने गीता की तरफ देखा तोह खड़ा होकर बोली ," राजा शभ जब मेरी कोई गलती नहीं थी तब मुझे saja-e-mout दी आपने...... अब इनके अपराध का क्या दंड देंगे ?"

राजा त्रिभुवन सिंह भी बस बेबस सा नज़र आया की क्या बोले , पर राजा रघुभार सिंह बोले ," त्रिभुवन यह दोनों कोण हैं?? ...... और गीता बेटी क्या बोल रही है ?"

राजगुरुजी बड़े प्यार से बोले ," यह हैं वह दोनों जोह गीता बेटी को जनम से अब तक मारना चाहते हैं पर मार न पाए उसकी माँ रति देवी की वजह से ".

राजा रघुभार सिंह ने तलवार एक सैनिक से ली उनकी तरफ बढे तोह राजगुरुजी बोले ," रघुभार , यह गीता के अपराधी हैं सजा भी वह hi देगी ".

रघुभार सिंह ने भी गीता और राजा त्रिभुवन सिंह की तरफ देख तलवार ुष सैनिक को वापस करके अपनी जगह बेथ के बोले ," ऐसे साँपों को जिन्दा रहने का कोई अधिकार नहीं ".

राजगुरुजी ," बोलो गीता बेटी , तुम्हने त्रिभुवन को माफ़ी दिलवा दी , इनका अपराध बहोत बड़ा है . क्या सजा दिलवाना चाहोगी ?"

गीता अपनी जगह से कड़ी होकर दोनों को सामने जाकर देखकर हसी और बोली," महाराज में तोह अब अपने चाचाजी और मामाजी से पहली बार मिली हूँ , तोह इनको मेरी सरन में छोड़ दिया जाए जान पहचान भी हो जाएगी ...... हाँ में अपना मालिकाना हक़ दिखते हुए जोह आप सब अब जान गए हैं...... अपने खानदान का खज़ाना वापस मांगती हूँ जोह आपके पास सुरक्षित रखा है ".

राजा त्रिभुवन सिंह ने खड़े होकर हाथ जोड़कर कहा ," गीता बेटी , आज में तुमसे सच्चे दिल से माफ़ी मांग अपनी दूसरी बड़ी बेटी मानता हूँ...... दीप्ति की बड़ी भें की तरह और ुष ख़ज़ाने के लिए कुछ नियम शर्तें हैं जोह तुमको नहीं आर्यन को निभानी होंगी ".

राजा त्रिभुवन सिंह ने सबके सामने गीता को अपने सेज चाचा और मां को सजा के लिए अनुमति दे दी और आर्यन को गीता के पुरखों के ख़ज़ाने के लिए उसका मंगतेर मान के खोलने की इजाज़त भी दे दी .

दरबार में आर्यन को राजकुमारी दीप्ति के साथ बैठने को कहा गया अपनी पोषक चेंज करके ...... आर्यन को ठकुरियन सुचित्रा ( दीप्ति की बड़ी भें ) अपने साथ लेजाकर शाही पोषक पहने को दी.

आर्यन पहले बाथरूम में फ्रेश हुआ और एक टॉवल पहनकर बहार आया तोह मीणा वहां सुचित्रा के साथ कड़ी थी ..... सुचित्रा को आर्यन की तरफ प्यार से घूरता देख मीणा ने उसके कान में कहा ," मामीजी आप का hi बीटा है बस कल तक का वेट करो आपके पास hi सोयेगा जोह चाहे ले लेना ...... अब मिलकर उसको राजकुमार बना देते हैं ".

मीणा तोह ये बोलकर आगे बढ़ गयी पर सुचित्रा शॉक में hi थी , वह भी जानती थी मीणा से कुछ छिपा नहीं होगा पर शर्म से आगे नहीं बढ़ पायी और सर झुकए कड़ी रही ....... मीणा ने आवाज देकर बोलै ," मामीजी यह पगड़ी पे मोरफानखी कैसे लगते हैं? ...... जरा हेल्प करो न ".

सुचित्रा भी अपने होश में आते हुए सपनो से मुस्करा के आगे बढ़ी और आर्यन को शाही पोषक में देख जैसे मातर्मुग्ध सी होकर अपनी सजल नेत्रों से काजल का टिका उसके कान के पीछे लगा के बोली ," मेरे बेटे को किसी की नजर न लगये ".

मीणा हसकर ," अभी भी बीटा , यह कुछ भी करवा लेता है बीटा और लाडला बनकर ..... hi hi hi hi ..... बस बच के रहना मामीजी ".

सुचित्रा भी हसकर ," यह हमारी आपस की बात है और तू भी मेरी बेटी hi है समझी चल रेडी कर वहां सबको भूक लगी है एक बार आर्यन को दीप्ति के साथ बिठाकर राजगुरुजी कुछ परं करवाने वाले हैं ".

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उधर राजदरबार में साड़ी रानियां रति के पास बेथ के उससे माफ़ी मांग रही थी और गीता बस रति की गॉड में सर रखे जमीन पे बैठी थी और रति उसके बालों में हाथ फेर रही थी ......

रानी संगीता ," रति माजी आज गीता के लिए हम सबको बुरा लगा पर आर्यन अगर शेर है तोह गीता बेटी भी शेरनी से काम नहीं , अलवर के राजदरबार को हिला के रख दिया और मार तुड़ाई कोई लड़की भी ऐसे कर सकती है आज पता चला ".

रानी जमुना ," दीदी आप भूल रही हो दीप्ति और गीता बेटी दिखती hi नहीं एक सी hi हैं बस कलर के अल्वा पर आज मुझे लग गया दीप्ति सदा खुश रहेगी अपनी बड़ी भें गीता के साथ ".

रति भी मुस्करा के बोली ," मैंने गीता को ऐसा बांया है इसको कोई भी टच नहीं कर सकता, बस थोड़ा गुस्सा ज्यादा है िश्मे पर मेरी बेटी से अच्छी कोई नहीं "...... और गीता का माथा चूमि .

सारू के बगल में बैठी रानी मिरदुला जोह अभी भी अपना चेहरा दुपट्टे से ढक्की थी बस सब देखते हुए भी अपने परिवार से अनजान बानी हुयी थी आर्यन की कसम की वजह से ...... सारू ने बस सबको अपनी क्लोज फ्रेंड करके hi परिवार से मिलवाया था .

राजगुरुजी ," क्यों त्रिभुवन कुछ कमी तोह नहीं लग रही आर्यन के परिवार से मिलकर , मैंने इशलिये कहा था आर्यन से पहले उसकी फॅमिली को अपना लो ...... यह कोई साधारण परिवार नहीं है आर्यन की वजह से और िश परिवार के हर सदाश में आर्यन की जान बस्ती है पर आज वह तुम्हे hi नहीं हमको भी ऐसा अचम्बा देने वाला है की हम उसका ऋण नहीं चूका पाएंगे , मुझे अंदजा है पर कितना सत्य है पता नहीं ".

राजा त्रिभुवन सिंह ," गुरूजी में माफ़ी मांगता हूँ आप दोनों से , अब में भी यह सिंघासन Aryan-Deepti को देकर आपके आश्रम में रहकर अपनी गलतियों का परस्चित करना चाहता हूँ ".

राजा रघुभार सिंह ," वह तुमको करना hi होगा पर गुरूजी , मिरदुला कब ठीक होगी उसको तोह दिव्या तलवार के वररिस आर्यन के आने के बाद ठीक हो जाना था ...... वहां आश्रम से भी में कुछ मानसिक संपर्क नहीं कर प् रहा हूँ ".

राजगुरुजी ," अभी आर्यन दीप्ति को वचन तोह लेने दो उसके बाद hi मिरदुला को भी होश आ जाना चाहिए ".

राजा त्रिभुवन सिंह ," आज छोटी माँ ( रानी मिरदुला ) यहाँ होती तोह मेरी भी परेशानी काम होती , मैंने अपनी दोनों छोटी बहेनो से सच्च छुपा के रखा ".

राजा रघुभार सिंह ," वह सच्च छुपा रहना चाहिए जबतक अवसक न हो और यह जबर कोनसा नाटक कर रहा है वह पोडियम पे पहले मूट के फिर उलटी करके बेहोस होकर ".

राजगुरुजी ," कभी कभी बुराई हमको अंदर तक निगल लेती है , जबर जल्दी hi ठीक होकर वापिस आएगा तुम चिंता न करो ".

राजा रघुभार सिंह ," मेरी बाला से वह कुछ भी करे, इतनी नीच सोच भी कोई बीटा रख सकता है क्या ?"

राजगुरुजी ," रघुभार , तुमने अपनी ज़िंदगी के अच्छे वर्ष हिमालय पे गुजरे दीप्ति आर्यन के विवाह के बाद वापस लौट जाना तुम विचलित नहीं होगये".

राजा रघुभार सिंह ," बस एक बार मेरी छोटी लाड़ली भें ठीक होकर मेरी कलाई पे आखिरी बार राखी बाँध दे में कभी कर्मभूमि की तरफ देखूंगा भी नहीं ....... आज भी बस अपनी छोटी भें को सही सलामत देखने की छह खींच लायी "..... ????

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राजदरबार में एक हाथ मीणा ने और दूसरा सुचित्रा ने पकड़ा हुआ था जब आर्यन ने प्रवेश किया ....... ऐसा लगा कोई देवता hi स्वर्गलोक से चला आ रहो हो .....

राजशी पोषक जोह हलके महरूम सफ़ेद कलर में थी उसके गूरे रंग और नीली आँखों को मैच कर रही थी , महरूम कलर की पगड़ी पे लगा मोरफानक उसके माथे को हल्का सा धक् के चन्दन के तिलक की शोभा बढ़ा रही थी ...... सब अपनी जगह से आर्यन को देखकर खड़े हो गए पर औरतों और लड़कियों का बुरा हाल था ...... बस अणि मुस्करा रही थी भाई के जादू से कोई नहीं बच सकता .

अणि ने आगये बढ़कर सुचित्रा के कान में कुछ कहा और आर्यन का हाथ थमा, दोनों भेने मीणा और अणि ने उसको दीप्ति के बगल में बिठा दिया .... रसम की बारी आयी तोह राजगुरुजी ने बोलै यह रसम लड़की की माँ और लड़के की माँ hi करती है तोह दोनों रानियां यहाँ आ जाए और सारू बेटी भी ......

आर्यन ने मीणा को इशारा किया तोह रानी मिरदुला का हाथ पकड़ सारू के साथ स्टेज पे बढ़ने लगी ......

आर्यन ," गुरूजी में दीप्ति का हाथ अपने हाथ में तभी लूंगा जब इनकी सगी माँ मेरे हाथ में देंगी ".

दीप्ति ने घूंघट से आर्यन को देखा जैसे यह क्या बेहूदा मजाक है पर एक औरत को जब ऊपर चढ़ा के सारू और मीणा भी आर्यन के साइड कड़ी हो गयी तब अणि ने आगये आकर रानी मिरदुला के चेहरे से नकाब उतर दिया .......

अणि तेज़ आवाज में बोली ," यह हैं रानी मिरदुला िश अलवर राज्य की महारानी और राजपूताना कौंसिल की असली चेयरमैन ".

सारे के सारे स्तब्ध हो गए एक 35-36 साल की 6 फट लम्भी सुंदरता बिखरती खूबसूरत औरत चेहरे पे साड़ी मुस्कान लिए कड़ी थी ...... महारानी मिरदुला!!!!!! महारानी मिरदुला !!!!! जीवट हैं ......

सब जैसे शॉक में hi थे पर रानी मिरदुला ने सबसे पहले राजगुरुजी के प्यार छुए तोह उन्होंने आर्यन की तरफ देखकर नाम आँखों से कहा ," सौभाग्शाली राहों पुत्री , आज मेरी तपस्या सफल हो गयी".

राजा रघुभार सिंह अपनी छोटी भें को देख के जैसे सदमे में hi था और जल्दी से उसको उठा के रोटी हुए गले लगा लिया ," मेरी मिर्दु ये तू है विस्वाश नहीं होता मेरी लाड़ली भेना तू इतने दिन तक कुन अचेत थी , देख आज तेरे भाई खुसी में hi प्राण न छोड़ दे ".

रानी मिरदुला रूट हुए ," भैया , आपकी भें आज सिर्फ आर्यन की वजह से जीवट है नहीं तोह में कबकी मर्डर चुकी होती , आप से मिलकर आज में फिर से अपने आप को जिन्दा महसूस कर रही हूँ ".

राजा त्रिभुवन सिंह , रानी संगीता , रानी जमुना भी बारी बारी मिले पर अब दो बेटी की आँखों में आसूं की जलधारा थी, जब आर्यन ने दीप्ति के आसूं पहुंचे के कहा ," दीप्ति यह तुम्हारी असली माँ हैं जोह तुम्हारे जनम के बाद से ारधमिर्त्यु की स्टेज में गुरूजी के आश्रम में थी . में hi इनको कल लेकर आया हूँ और आप खुद देख लो सुचित्रा मामीजी एहि आपकी माँ हैं ".

सुचित्रा रोटी हुए ," इतना बड़ा झूट मुझे आज तक बोलै गया , में तुम्हे कभी माफ़ नहीं करुँगी भैया ( त्रिभुवन) "...... और रोटी हुए रानी मिरदुला के गले लगी ...... दोनों की करूँ हिरदय जैसे पहात पड़ा हो पूरा राजदरबार उनकी रोटी बिलखती आवाज से गूंज गया .......

दीप्ति रू रही थी पर सदमे में थी , इतनी पावरफुल होकर भी उसको पता नहीं चला उसकी माँ जिन्दा है पर 1% भी अपनी माँ मिरदुला की मेमोरी उसके दिमाग़ में नहीं थी ......

दीप्ति बस खड़े होकर अपने दोनों मम्मी रानी संगीता और जमुना के गले लग गयी ," मेरी बस दो hi माँ हैं और बाकी किसी को में नहीं जानती कोण क्या है ".

सच्च hi तोह था , जिस बेटी ने अपनी माँ का स्पर्श भी याद नहीं उसको कैसे अपना ले जबकि रानी संगीता और रानी जमुना ने उसको जनम से अभी तक पाल पॉश के अपनी बेटी की hi तरह बड़ा किया था ...... कहते हैं जनम देने वालों से पालने वाला बड़ा होता है .

सबने समझया पर दीप्ति ने मिरदुला को अपनी माँ नहीं मन ....... तब आर्यन बोलै 3 बजने वाले हैं आपकी यह रसमें ख़तम नहीं हो रही है तोह भोजन कर लें .......

राजगुरुजी ," बीटा तुम्हने एक माँ को वापस तोह ला दिया पर राजकुमारी की भी जिद्द है की वह मिरदुला को माँ नहीं मानती यह रसम दोनों रानियां करेंगी".

आर्यन कुछ सोचकर ," चलो फिर रानी मिरदुला को में अपनी पिछले जनम की माँ मानता हुआ िश रसम के लिए त्यार हूँ , क्यों दीप्ति अब तोह कोई इतराज नहीं की मेरी नयी माँ यह रसम निभाए ".

रति , डॉ अंजू को सारू ने सच्च बता दिया की रानी मिरदुला hi दीप्ति की असली माँ है तोह रति ने भी बोलै ," मेरी और सारू की रसम भी रानी मिरदुला जी निभाएंगी ".

रति ने मिरदुला को आर्यन के साइड रखा और दीप्ति के साथ दोनों रानियां कड़ी थी ...... तभी एक बड़े से सोने के पात्र में गंगाजल के अंदर दोनों का हाथ पकड़ के संगीता, जमुना और मिरदुला ने घुरवे धागे से रोटी रोटी बांध दिए ......

राजगुरुजी ने सुलोक का उच्चारण करके आर्यन को बताया ," महार्यं , राजकुमारी दीप्ति आज से तुम्हारे विवाह के लिए वधु चुनी जाती है ".

आर्यन ने हसकर बोलै ," थोड़ी रूटदु है पर में काम चला लूंगा "....... दीप्ति ने दुसरे हाथ पे रूट हुए जब हलके से मारा ...... सब हसने लगे.

दीप्ति से भी एहि पुछा गया तब उसने गीता की तरफ देखा तोह उसने पलकें झपका के हाँ का इशारा किया ...... तब दीप्ति ने कहा ," में आज से इनको वर मानते हुए हर पतिव्रता की तरह इनकी पत्नी का दावित्ये निभाऊंगी ".

फिर दोनों ने अगूंठी एक दुसरे को पहनकर रिश्ता पक्का किया ...... जब दीप्ति के प्यार चुने के बारी आयी तोह रति के आगये आर्यन ने रानी मिरदुला को खड़ा करके बोलै ," शुरवात मेरी सबसे नयी माँ से करिये राजकुमारी जी "..... hi hi hi hi .....

कैसे रोक पाती बिचारि दीप्ति जैसे hi झुकी रानी मिरदुला के प्यार चुनने के लिए उसने रोककर उसको उठा लिया और गले लगा लिया ....... बस ऐसे रोने की धाड़ें दीप्ति, रानी मिरदुला और सुचित्रा की बहोत दूर तक गूंज रही थी ...... दीप्ति ने आर्यन के परिवार के सब बड़ों के प्यार चुकार आशीर्वाद लिया .....

आर्यन अपने परिवार को लेकर शाही भोजन के लिए निकल गया क्योंकि वधु पक्ष वाले तोह अभी भारत मिलाप में लगये थे ...... राजगुरुजी ने रघुभार सिंह को कहा ," यह सच्च में दिव्या पुरुष है रघुभार जोह हम सबको जोड़ गया , मुझे अब कोई चिंता नहीं ".

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राजा जबर सिंह ने तांत्रिक त्रिलोचन के सब दर्द और तड़प अपने मस्तिक तक महसूस किये जब आर्यन उसको तड़पा तड़पा के मार रहा था ...... जब तांत्रिक त्रिलोचन hi नहीं झेल पाया तोह जबर सिंह कैसे इतनी पीड़ा सेह पाटा , पिसाब निकलते हुए , उलटी भी कर दिया और कपड़ों में टट्टी भी कर दिया ...... जब सहन न हुआ तोह बेहोश हो गया ......

उसके मंत्री और बॉडी गार्ड उसको तुरंत वहां से हॉस्पिटल के लिए ले गए , राजा रघुभार सिंह ने सबको अपने स्थान पे बैठने को कहा की जबर से बाद में मिल लेना पहला राजकुमारी के स्वयंवर के विजेता को बधाई भी तोह देना है .

हॉस्पिटल में एक घंटे बाद जब जबर सिंह को होश आया तो वह डर के फिर बेहोश हो गया ...... जबर सिंह के बीमार होने की खबर उसकी तीनो रानियों से चुप्पै गयी .

अणि ने अपने एक सुनहरी योद्धा को याद कर के बोलै ," ुष कुत्ते जबर सिंह को अब उठा के hi यहाँ लाना , हर पल उसकी बेजिटि और जलील करना है ".

सुनहरी योद्धा ने जबर को होश में ला उसको सामान कर दिया ..... पर धूर्त धूर्त hi होता है , वह फिर से रेडी होकर हॉस्पिटल से अपने खाश मंत्री और सैनिक के साथ अपने गुप्त अड्डे पे पहुंचा.

जबर सिंह की भी किस्मत धनि होने वाली थी आर्यन दीप्ति के दिव्या तलवार और खज़ाना के लिए जाने के बाद ????

कोई पूरी जीती बाजी आर्यन की हार में बदलने को त्यार था ????

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट 34 हार्ट हार्ट हार्ट

PART - 1

शाही भोजन आर्यन ने अपनी परिवार के साथ किया ....... सब बहोत खुश थे , आखिर उनके परिवार के अंगरक्षक, माहि ने शुरवात में थोड़ी बेवकूफी की पर जब उसने एक बार स्वयंवर की प्रतिस्पर्धा में भाग लिया तोह अपने बाहुबल और चतुराई से अपने दुश्मनों का भी दिल जीत लिया . जोह आर्यन को मिलता उसकी तारीफ करता की वह राजकुमारी दीप्ति के लिए सच्चा जीवनसाथी है और बेस्ट ऑफ़ लक , कोंग्रटुलतिओन्स कहते . दूसरी बात यह विप्स और रजवाड़े भी आर्यन की नज़र में अपनी गुड विल भी बना रहे थे .

राजकुमारी दीप्ति के लिए योग्य वर के रूप में आर्यन सबसे सफल प्रतिभागी योद्धा बनकर पूरी जानता का दिल जीत लिया.

गीता ने राजदरबार में अपनी शार्टिओं पे दीप्ति से विवाह की अनुमति दे दी और अब उसका विवाह गीता - आर्यन के विवाह के बाद होगा पर रिश्ता पक्का किया गया अगूंठी एक दुसरे को पहना के .

दीप्ति अपनी जनम देने वाली माँ रानी मिरदुला को थोड़ा हिचक और फिर करूँ हिरदये से बिलख के गले मिली . ठकुरियन सुचित्रा , उसकी बेटी रूबी फिर राजा त्रिभुवन सिंह और राजा रघुभार सिंह का परिवार भी रानी मिरदुला को वापस सही सलामत देख के खुसी के आसूं नहीं रोक पाए . आज अलवर राज्य पे से जैसे सब दुःख के बदल छत्त गए थे ....... और िश सबकी वजह थी दिव्या तलवार का वररिस आ गया है आर्यन के रूप में .

राजकुमारी दीप्ति की जीवन रेखा का टाइम निकलता जा रहा था पर सायद उसको अब कोई चिंता न थी ....... उसके परिवार ने आर्यन को उसके लिए एक्सेप्ट कर लिया विधिवत तरीके से फिर राजपूत की जबान और वादों का इतहास गवाह रहा है .

रानी मिरदुला अब राजकुमारी दीप्ति के कक्ष में उसके आलीशान बिस्टेर पे बैठी थी और और उसकी दोनों सगी बेटियां ..... बड़ी बेटी ठकुरियन सुचित्रा और छोटी बेटी दीप्ति उसकी गॉड में सर रखे लेती थी , तीनो को भूख प्यास hi नहीं थी बस आज एक माँ के चैनल में सर चुप्पै उसकी ममता को दिल की घेरे से महसूस कर रही थी ....... मिरदुला के हाथ दोनों को सर को बारी बारी सेहला रहे थे .

पिछले 2 घंटे जैसे थम hi गए तीनो के लिए पर किसी में जैसे हिम्मत hi नहीं थी की राजकुमारी दीप्ति के कक्ष में जाकर तीनो को डिसट्रब करे जबकि कक्ष का द्वार खुला hi था जोह भी बहार से देखता लौट जाता .

राजगुरुजी के कहने पे आर्यन को सूचना देकर उसको तीनो से मिलने के लिया कहा तोह आर्यन ने दवार पे खड़े होकर अंदर का नज़ारा देखकर मैं hi मैं मुस्करा के अपना गाला खांकरा पर कोई रिएक्शन नहीं .

तब आर्यन ने दीप्ति की दोनों दासी से पुछा कितना समय से ये तीनो ऐसे hi हैं ? दासी ने बतया न तीनो ने खाना खाया बस डेढ़ घंटे से ऐसे hi हैं .

आर्यन ने थोड़ा सीरियस होकर कहा ," तुम दोनों दीप्ति की ख़ास हो न तोह जायो तीनो के जूस और कुछ हल्का खाने के लिए खुद अपने हाथ से त्यार करके लायो में इनको माना के नार्मल करता हूँ".

दोनों दासियाँ ," जी कुंवर जी , जैसे आप के आज्ञा "...... दोनों चली गयी तोह आर्यन ने द्वार बांध करते दोनों पहरेदार को कहा किसी को आने मत देना जबतक में द्वार न खोलूं "....... दोनों को पता था वह अपनी भावी राजा का निर्देश सुन्न रहे हैं तोह हाँ में सर झुका दिया.

आर्यन पलट के बोलै ," मैया तू यहाँ बैठी है में तुझे कहाँ कहाँ ढोंढा ". आर्यन के मोह से अपना संबोदन सुन्न रानी मिरदुला झट से दोनों बेटियों को अलग करके बीएड से उतर के आर्यन के गले जा लगी .

रानी मिरदुला रोटी हुए ," माहिया* (माहि) तू कहाँ चला गया था , में बहोत तेरे लिए तड़प रही थी मेरे लाल. मुझे ऐसे छोड़कर यूँ दुर्र न जाया कर मेरा दिल बेथ जाता है ".

(* दोस्तों में आर्यन के पिछले जनम के नाम को भी यहाँ माहि hi लिखूंगा ताकि रीडर्स को कन्फूसिओं न हो .)

आर्यन ने जब दीप्ति और सुचित्रा की तरफ देखा तोह दोनों होश में उनको आंखें फाड़े देख रही थी ...... तब आर्यन ने दोनों को आँख मार के रानी मिरदुला के सर पे किश किया और प्यार से बोलै ," तू अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुयी है माँ और यह दोनों तेरी बेटियों को भी तेरा ख्याल नहीं है जोह तुझे खाने के लिए भी नहीं पूछी ...... बस रू मत नहीं तोह में भी रू दूंगा , तू तोह मेरी पिछले जनम की माँ लगती है न तोह अपने बेटे की बात नहीं मानेगी ".

रानी मिरदुला ने आर्यन की तरफ सर उठा के देखा तोह आर्यन ने उसके आंसूं साफ़ किया और अपनी गॉड में उठा लिया फिर अपनी जुटती उतार बीएड पे बेथ गया और मिरदुला का सर अपनी गॉड में रख के लिटा लिया ," तू आराम कर अभी तेरे लिए जूस और स्नैक्स आ रहा है और तुम दोनों ऐसे क्या घूर रही हो , भूलों मत में hi माँ को वापस लाया हूँ ...... चलो दोनों इधर आयो , सूचि मामी आप यहाँ सर रख लो और तुम दीप्ति िश तरह ताकि अपनी माँ के सनिध में भी रहो ".

सुचित्रा भी आर्यन की राइट तइस पे सर रखकर अपनी माँ के बगल में लिअत गयी तोह दीप्ति को आर्यन हाथ पकड़ के लिटा लिया ," इतना क्यों शर्मा रही है , आजसे तू मेरी ओफ्फिकल होने वाली बीवी है , अपनी माँ के पास लेट जा ".

मिरदुला ने भी हलकी नाम आँखों से दोनों बेटियों के बारी बारी चेहरे चूमि और बोली ," यह मेरा लाल है इसकी कोई बात नहीं ताल सकता , आज मुझे तुम्हारे सामने यह hi जिन्दा करके लाया है , नहीं तोह दीप्ति के पैदा होने के तेज़ से में इसको जनम देते hi मर्डर जाती पर सायद किस्मत ने मुझे अपनी बेटियों को प्यार करने वापस बुला लिया ".

आर्यन ने पहले मिरदुला का माथा चूमा फिर , सुचित्रा का तोह दोनों खुश हो गयी ...... जब दीप्ति की तरह गया तो उसने अपना चेहरा मिरदुला की गर्दन में छुपा लिया पर आर्यन ने उसके कान पे चुनती काटी तो वह चेहरा घुमाई तोह उसके गाल पे किश करता ुंहःहःह बोलै ," माँ तेरी यह छोटी बेटी बहोत मीठी है "..... hi hi hi hi hi .....

दीप्ति शर्म से बीएड से कड़ी हो गयी ," बेशर्म हो पूरे ".

तीनो दीप्ति को देखकर हसने लगे, तब सुचित्रा बोली ," आर्यन अब में तुम्हारी बड़ी साली हूँ , तोह मामी , या माजी , या साली क्या बुल्येगा ?".....

आर्यन ने सर झुका के सुचित्रा का माथा चूमा ," पहले माँ "..... फिर गाल चूमा ," फिर मामीजी " ..... फिर नाक पे चूम के कहा ," लास्ट में सालीजी "....... hi hi hi ....." आप मेरे लिए बहोत स्पेशल हो मामीजी क्योंकि मेरे तीन तीन रिश्ते हैं आपसे ".

मिरदुला ," ाचा में नहीं हूँ और दीप्ति जिससे शादी होने वाली है वह भी स्पेशल नहीं ?".

आर्यन ने दोनों की तरफ देखा ,"नहीं आप मेरी सुचित्रा मामीजी से ज्यादा स्पेशल नहीं हो उसके तीन कारन हैं ...... पहला में इनको सबसे पहले मिला और इन्होने मुझे सिर्फ आधे घंटे में अपना बीटा मान लिया ...... फिर रूपा माजी मेरी माँ की तरह हैं तोह में मामीजी बोलता हूँ और अब दीप्ति से विवाह की वजह से सालीजी भी बन गयी हैं ....... दूसरी बात इनकी वजह से में दीप्ति से मिला और तीसरी बात आपकी िंह दोनों बेटियों की वजह से में आपको बचने आया था".

आर्यन ने देखा दीप्ति का चेहरा थोड़ा मुरझा गया है तोह बोलै ," आप मेरी माँ भी हो और अब सासु माँ भी पर दीप्ति से सिर्फ एक hi रिश्ता बना पुरे लव के बाद वाइफ का ....... काश यह भी मेरी भें होती मीणा की तरह या मौसी गीता की तरह hi hi hi hi ".

तीनो आर्यन को घेर के गिरा लिया और उसको मारने लगी ," बेशर्म , बेहया , कितना गन्दा सोचता है तू "...... आर्यन भी बारी बारी तीनो को गुलगुली करता दो उसको हटती ..... एहि था आर्यन का प्यार और अपनापन जिससे सब उसके रंग में रंग जाते थे ......

आर्यन ने दीप्ति के पूछने पे बतया की कैसे वह रानी मिरदुला से मिला फिर कैसे उनको वापस लेकर ठीक किया बस जीवन नाशी मंतर का छोड़कर ..... दूर पे नॉक हुआ तोह आर्यन ने खोला और दोनों दासियों के साथ मीणा अंदर आयी पूरा खाना लेकर ......

आर्यन ने मीणा को भी तीनो के साथ बिठा के अपने हाथ से खिलाया ...... पूरे राजमहल में सब रिस्तेदार को पता लग गया की आर्यन ने तीनो माँ बेटियों को खाना खिला दिया है ...... अभी शयाम के 6 बजने वाले थे तब मीणा ने आर्यन और दीप्ति को अपने साथ ले गयी गीता के कक्ष में .

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अणि का सुनहरी योद्धा वापस आकर उसको सूचना दे गया की राजा जबर सिंह को उसके ठिकाने पे भेज दिया है . अणि अपने कक्ष में बड़े गुरूजी से संपर्क कर अपने संसय का निवारण कर रही थी .

बड़े गुरूजी ने उसको कुछ निर्देश दिए फिर उसको कुछ न करने का आदेश दिया जबतक स्तिथि विसम न हो जाये क्योंकि आर्यन को hi सब कर्तव्य निभाने हैं . अणि के िश पर्सन पे की वह पातळ लोक में तलवार हासिल कर उसको धारण कर पायेगा क्या ?

बड़े गुरूजी ने कहा ," यह उसकी पहली चुनौती होगी जिसमे उसको सफल होना होगा और तुम या में उसकी कुछ मदद नहीं कर सकते ....... पहली बात हम दोनों की कोई शक्ति वहां काम नहीं करेगी और हमने अपना शक्ति शाली अस्तर वहां जाकर धारण किया तोह तलवार अदृश्य हो जाएगी . दूसरी बात वहां हमको कैद भी कर लिया जायेगा क्योंकि हम बेवजह वहां जायेगे तोह सब शक्तिशाली पातळ लोक के स्वामी वहां आ जायेंगे . आर्यन और दीप्ति अपनी दारोहर लेने वहां जायेंगे तो आशीर्वाद hi मिलेगा और गीता hi उनके लिए अंदर जाने का रास्ता खोलेगी क्योंकि ुश्मे धरती ( एअर्थ ) की शक्ति है पर प्रवेश वह भी नहीं कर पायेगी ...... उसको बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी अपने को बंधी ( प्रिजनर ) सौंप के अगर आर्यन- दीप्ति सफल नहीं हुए यह तुम भी जानती हो महारानी विजयलक्ष्मी ".

अणि ," गुरूजी में अपने भाई आर्यन को नहीं खोना चाहती , बहोत मुश्किल से हमे 2500 साल इंतज़ार किया है ..... मुझे पता है वह बगैर तलवार 6 आत्मा की शक्तियां नहीं संभाल पायेगा ".

बड़े गुरूजी ," धीरज धरो पुत्री , हमको भूलना नहीं चाहिए आर्यन अभी तक हमारी उम्मीद से बढ़कर सब सफल कर रहा है ....... जिस तरह उसने ुष पाखंडी तांत्रिक त्रिलोचन को मारा क्या तुम्हने सोचा था ऐसे कोई मार सकता है फिर Dimple-Payal की दी शक्ति उसको मरने नहीं देगी बस वह रूप न बदल ले फिर पता नहीं कितने दिनों में वापस मानव रूप में आएगा . दीप्ति उसको वहां हारने नहीं देगी बस उसको भी नहीं पता है उसके अंदर ुष दिव्या तलवार की आंशिक शक्ति है . आज रात आर्यन - दीप्ति दोनों का मिलान होना चाहिए स्वेछा से तोह जीत के hi लौटेंगे बस तुम अपना गुस्सा काबू रखना किसी भी परस्तिथि में ".

Ani(V) ने भी कहा ," में आज hi दोनों का गंदर्व विवाह करवा दूंगी सिर्फ गीता की उपस्थिति में फिर दीप्ति ने अबतक सब सही से ज्यादा hi आर्यन का साथ दिया है जितना हम सोच रहे थे ".

बड़े गुरूजी ," वह आर्यन को राजकुमार hi समझती है जिसको 800 साल पहले ुष दिव्या तलवार के लिए खो दी थी अपनी जिद्द पे की उससे विवाह तब hi करेगी जब वह उसके पुरखों की दिव्या तलवार और खज़ाना लेकर आएगा ...... देखो वह बेचारा तोह पहुंच भी गया था पर ुष नागिन विशाखा ने मार के निगल hi लिया था और दीप्ति ुष नागिन से बदला जरूर लेगी पर क्या आर्यन ऐसा होने देगा िश में मुझे संदेह है ".

Ani(V) ," गुरूजी , मीणा दीदी से एक बात तो मुझे पता चली है की प्रेम से बड़ा कुछ नहीं , सारू और आर्यन इतनी जल्दी प्रेमी बन गए , फिर बरसो पुराण प्यार था . मीणा का प्रेम तो अतुल्य है , उसके जितना प्यार करने वाला मैंने कहीं नहीं देखा , हम सबको बदला या अपना करम पूरा करना है पर मीणा को उसका भाई प्रेम का देवता बनना है जिसको हर कोई सिर्फ दिलसे प्रेम hi करे और वह सफल भी हुयी है अबतक ".

बड़े गुरूजी ," में निशांक को वहां भेज रहा हूँ गंदर्व विवाह वह hi करवा सकता है बस तुम आर्यन से बात करना पर उसको कुछ बताने की जरुरत नहीं वह दिव्या तलवार खुद अपने मालिक की परीक्षा ले रही है "....... दोनों की कुछ और बातें हुयी उसके बाद अणि जाकर मीणा सा मिली और उसको पूरी बात बातये.

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सारू अपने साथ कविता , बबिता के साथ महिमा और राहुल को लेकर अंदर पहुंची दीप्ति के कक्ष में तोह मिरदुला, सुचित्रा , रानी संगीता और जमुना बैठी बातें कर रही थी ..... सारू ने जाकर रानी मिरदुला के प्यार चुहये तोह उसने गले लगा लिया क्योंकि वह जानती थी सारू उसकी पिछले जनम में बहु थी ...... लेकिन जैसे hi उसकी निघा महिमा पे पड़ी तोह वह सारू को साइड कर महिमा की तरफ बढ़ी तो महिमा कुलच्चे मारते हुए बबिता को बोली ," मैया...... मेरी मैया......" ..... और बबिता की गॉड से उतर ," मैया !!! ...... मैया !!!!..... "

मिरदुला ने महिमा को उठा लिया रोटी हुए चुम्बन की झड़ी लगा दी महिमा के गाल पे पर वह इतनी तेज़ आवाज में मैया मैया बोल रही थी की सब हैरान थे ..... यह छोटी सी बच्ची तो अभी 4 घंटे पहले जिन्दा हुयी औरत को कैसे जानती है जिसका यह hi गायत था की 21 साल पहले मर्डर चुकी है .

अब तोह बबिता भी घबरा गयी कहीं मेरी बेटी पे किसी बुरी आत्मा का साया तो नहीं पर सारू ने उसको कान में बोलै ," यह भी इसको माहि hi समझ रहीं हैं ".

मिरदुला ने गॉड में कक्ष के कालीन में एक कोने पे निचे बेथ के महिमा को उसको कहने पे दूध पिलाने लगी ..... मेरा माहि ..... पूछ पूछ ..... मेरा लाल मेरा माहि ......

कविता को आज पहली बार इर्षा हुयी की कोई राहुल को नहीं देखा पर वह भी उसकी गॉड से उतर मिरदुला के पास जा उसके गॉड में लिअत दूसरा सतांन से दूध पीने लगा पर यह क्या सच्च में दूध आ रहा था ...... यह क्या चमत्कार था?

कविता ने कहा ," सारू दीदी आज मुझे पहली बार राहुल के लिए बुरा लगा की महिमा की वजह से ुष्पर कोई ध्यान नहीं देता पर में गलत थी , देखो वह सगी माँ न होकर भी भेद भाव न कर पायी ".

सारू हसकर ," तुझे पता नहीं है पर मैंने देखा है महिमा के दोनों भाई राहुल और वसु उसको फॉलो करते हैं पता है क्यों क्योंकि वह भी चाहते हैं उनकी भें उनको लीड करे और तीनो बच्चों का प्यार देखो महिमा अपने साथ दोनों भाइयो के लिए पहले मांग लेती है . तुम तीनो लकी हो जिनको इतने प्यारे बच्चे मिले और देखा जाये तोह तुम तीनो इतनी स्ट्रांग थी पर घर घरस्थी में पइसस कर सबके लिए बेमोल सी हो गयी थी पर आज तुम्हारे hi बच्चे तुमको समझ क्या अपने परिवार में ऊँचा दर्जा दिलवाये ....... जैसे माहि ने मुझे 21 साल पहले दिलाया मेरी कूख से जनम लेकर नहीं तोह उसको जग्गू दीदी ( मीणा की मम्मी ) की कूख से जनम लेना चाहिए था और मीणा को मेरी ..... hi hi hi hi ".

सारू की एक एक बात रानी मिरदुला को छोड़कर 5 दूसरी औरशन पे अलग hi असर की ...... जहाँ कविता और बबिता का सीना गर्व से फूल गया वहीँ ठकुरियन सुचित्रा , रानी संगीता और रानी जमुना को अब ऐसे hi बच्चे आर्यन से चाहिए थे. रानी मिरदुला 20 मं बाद दोनों को गॉड में लेकर उठी अपनी ड्रेस सही करके और बोली ," सारू यह दोनों माहि के बच्चे बिलकुल उसके जैसे हैं ".

महिमा और राहुल भी उसके गाल चूम के मैया मैया बोलो ...... प्यार अपनी परिभासा ढूंढ hi लेता है , मिरदुला के 21 वर्ष का त्याग hi उसको अब एक से एक खुशियां दे रहा था पर उसको भी नहीं पता था यह खुशियां कुछ hi पलों बाद कितना दुःख देकर जाने वाली हैं. उसके सेज की उसकी जड़ काटने में लगये थे ????

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आर्यन ने आगे बढ़कर गीता को अपनी बाँहों में उठा के गाल चूमना तोह दीप्ति जैसे शर्मा गयी ...... पर अभी तोह जैसे सबका नंबर आना था . गीता के माथे पे चूम के ," आज कल गुस्सा ज्यादा hi आता तुझे चंदा रानी ".

गीता ने आर्यन के लिप्स पे किश करके कहा," जब तू पास हो तोह प्यार भी बहोत आता है "...... hi hi hi hi ...... आर्यन के एक तरफ से डॉली और दूसरी तरफ से नेहा भी लिपट गयी तोह गीता हसकर उसकी गॉड से उतर के बोली ," पहले िंह दोनों को संभल दोनों बहोत बेचैन हैं ".

आर्यन ने मुस्करा के दोनों के गाल चूमे ," अरे यह दोनों तोह मेरी स्वीट बेबी हैं ".

डॉली ने आर्यन को गाल पे किश करके कहा ," भाई थोड़ा अकेले में मिलना है आपसे " ...... इतना हलके से फुसफुसा के कान की lol चुम ली . आर्यन ने भी गर्दन हिला सहमति जाता दी की बाद में बात करेंगे .

मीणा ने दूर लॉक कर दिया और अणि ने शील्ड बना दी . अब सब बात गुप्त hi होने वाली थी . सब अपनी अपनी जगह पे बेथ गए पर डॉली तो थी hi चुलबुली वह आर्यन की गॉड में बैठी जबकि मीणा भी आर्यन के साइड hi बैठी थी .

गीता ," डॉली बीटा , अभी सीरियस बात है ढंग से साइड में बैठो "...... डॉली मैं मार के साइड होने लगी तोह आर्यन ने उसको उठा के बीएड पे उसके प्यार ऊपर कर उसको लिएतने को कहा और उसका सर अपनी गॉड में रखवा लिया .

दीप्ति , गीता एक साथ और नेहा, अणि एक साथ बैठे थे . अणि ने बात आगे राखी," जैसे की हम सब जानते हैं हम यहाँ क्यों आये हैं , दीप्ति भाभी की जान की रक्षा करने और दिव्या तलवार को ढूंढ ने . यह स्वयंवर ने हमको अपने मकसद से थोड़ी डिअर के लिए रोका जरूर है पर इसकी वजह से सबके मोह सील गए हैं . अब कोई भाई और भाभी के रिश्ते पे ऊँगली नहीं उठा सकता और दोनों का लक्ष वही hi रहेगा दिव्या तलवार को पाना ".

गीता बिच में टोकते हुए ," अणि यह बार बार भाभी मत बोल दीप्ति को , एक तोह अटपटा लग रहा और दूसरा यह शरमाते हुए पता नहीं अपनी चुन्नी चाबते हुए कुछ सुन्न भी रही है या नहीं ".

दीप्ति ने झट से चुन्नी छोड़ गीता का हाथ पकड़ लिया," नहीं दीदी में सब ध्यान से सुन्न रही हूँ "...... उसकी ऐसी प्रतिकिर्या पे सब हसने लगे .

अणि मुस्करा के ," आप दोनों का हो गया है तोह आगे बोलूं ..... हाँ तोह सबसे एहम बात यह है दिव्या तलवार को तभी खोजा जा सकता है जब आप दोनों एक दुसरे से सच्चे दिल से एक दुसरे को जीवनसाथी माने शादी करके और उसके बाद अपने सफर पे निकलें . आप दोनों को आगे बढ़ने के लिए गीता मौसी की जरुरत होगी क्योंकि इनके पास hi धरती ( एअर्थ ) की पावर है ".

सब अणि की बातें सुन्न सोच में डूब गए तब मीणा ने खामोसी तूड़ी ," लेकिन दीप्ति से शादी की बात तोह गीता दीदी ने ताल दी है अपनी शादी होने तक ?"

गीता ने दीप्ति के सर पे हाथ फेर के कहा ," शादी सबके लिए ताली है पर वास्तिविकता में आज hi होगी , गंदर्व विवाह , में करवाउंगी पर यह बात सीक्रेट hi रहेगी ...... सबके लिए दीप्ति बस आर्यन की मंगेतर होगी समझ गए सब ".

आर्यन ," यह सब करना जरुरी है क्या ? में ऐसे hi तलवार ले आऊँगा बस दीप्ति को साथ ले जाना पड़ेगा नक़्शे की वजह से ".

मीणा ने कुटिल मुस्कान बिहकरते हुए आर्यन को आँख मार के कहा ," शादी और सुहागरात की रसम पूरी किये बिना तुम दोनों आगे नहीं बढ़ पुञे ".

दीप्ति की तोह गंदर्व विवाह और सुहागरात की बात से धड़कन बढ़ने लगी थी ...... पर डॉली तोह जैसे बिफर hi पड़ी ," भाई में भी आज आपसे शादी करुँगी "...... सब उसको hi ऐसे घूरने लगये की यह कोई मदारी का खेल है क्या .

अणि मुस्करा के ," डॉली यह तुमको सब मजाक लग रहा है , जरा देखो ुष लड़की ( दीप्ति ) की तरफ जिसके सर पर मौत मंडरा रही है और वह किसी मौज मस्ती के लिए कर रही यह सब , उसके भाग में यह पीड़ा उसको जनम से मिली है , तुम तो अंदजा भी नहीं लगा सकती उसने क्या क्या सेः है . अगर भाई तलवार नहीं खोज पाया समय चाकर की अवधि से पहले तोह जीवन सिर्फ 24 घंटे का भी सेष नहीं है उसके पास "....... अणि ने हस्ते हुए बात कही थी और ख़तम सीरियस नोट पे की , सबको उसकी बात जैसे डरा hi गयी थी .

मीणा ," डॉली , हम भी भाई से तभी शादी कर सकते हैं जब तक दीप्ति की नहीं हो जाती और तुम्हने वादा किया था आर्यन से की तुम कामयाब बनकर hi उससे शादी करोगी , भूल गयी ".

आर्यन ने अपनी छोटी भें का साथ दिया और बोलै ," डॉली सबसे समझदार है उसको अपना एआईएम पता है क्यों बेबी ?" ...... उसका गाल चूम लिया .

डॉली भी आर्यन का हाथ पकड़ के चूम ली ," यस भाई जैसे आप कहो , एंड सॉरी में एक्ससिटेमेंट में बोल गयी . दीप्ति आप मेरी फ्रेंड हैं , यार बस माफ़ कर देना ".

आर्यन ," मीणा में तुम सबसे झूट नहीं बोलूंगा पर दीप्ति से मुझे पहली hi नज़र में प्यार हो गया और दीप्ति का कहना है वह मुझे तबसे प्यार करती है जबसे उसको प्यार का मतलब पता है फिर क्यों विवाह की जरुरत है ? "

गीता का जैसे सबर hi टूट गया ," ारयणणणणणण..... दीप्ति को उसका हक़ उसकी मांग में सिन्दूर भरके hi ले सकते हो और यह बिना शादी जोह सुहागरात मैंने के सपना देख रहा है न उसको अपनी गांड में ठोस ले , ठरकी कहीं का . मेरी छोटी भें दीप्ति बिना सिन्दूर और मंगलसुतृ के हाथ भी लगने देगी ".

गीता का गुस्सा और खीज ने सबको चौंका hi दिया था और आर्यन बस अपना सा मोह लेकर बेथ गया . तब मीणा ने कान में कहा ," इशलिये बोली थी चुप रहना नहीं तोह सुहाग रात से भी जायेगा ".

मीणा थोड़ा संभल के बोली ," गीता दीदी आप ठीक hi दांत रही हो पर यह विवाह की बात नानी माँ और सारू मम्मीजी को भी पता होनी चाहिए . हाँ एक बात और हम में से सिर्फ गीता दीदी hi विवाह सम्पन करेंगी और कोई नहीं जायेगा ".

मीणा ने सारू को कॉल कर अपने साथ रति को बुला लाने को कहा बगैर किसी को बताये .

अणि ," में और दीप्ति जी चलते हैं अब और हाँ भाई मुझसे मिलकर जाना "..... अणि अभी रति को देख अपना मूड ऑफ नहीं करना चाहती थी और दीप्ति सबसे ओड नई मेंबर थी बाकी सबके लिए .

आर्यन ने अणि को रोकना चाहा तोह उसने तर्क दिया यह आप सबके बिच की बात है और हम दोनों का जाना hi सही रहेगा . रति और सारू कक्ष में आयी तोह सबको सीरियसली बैठा देखा तब मीणा ने पूरी बात बता दी की क्या क्या निर्णय लिया गया है .

सारू ने घंभीरता से कहा ," देखा जाए तोह दीप्ति का कष्ट अभी ख़तम नहीं हुआ है और ज्यादा कठोर होने वाला है पर जब हमदम साथ हो तोह रहें आसान हो जाती हैं . आर्यन तुमको कामयाब होना hi होगा हम सबके लिए ".

रति जोह थोड़ी गुमसुम हो गयी थी ," क्या में साथ नहीं चल सकती , सायद कोई मदद hi कर दूँ ".

मीणा ने तर्क दिया ," नानी माँ कोई और नहीं जा सकता नहीं तोह अणि hi चली जाती पर दिव्या तलवार अपने वररिस को निराश तोह नहीं करेगी ...... जान का खतरा है पर फिर तलवार क्यों चाहेगी की उसके होने वाले मालिक को कुछ हो ".

रति थोड़ा किलास के बोली ," मेरी hi मति मारी गयी थी जोह यह नहीं सोचा , आर्यन को भी कुछ हो सकता है दीप्ति की मदद करने से . अगर हम स्वयंवर में न आते तोह अच्छा होता ".

सारू ने रति का हाथ पकड़ के कहा ," माँ तुम भूल रही हो ुष लड़की (दीप्ति) ने बिना आर्यन को देखे पूजा है कई सालों से फिर भी वह अपनी मौत के सामने हस्ते हुए कड़ी है . भगवन कभी अच्छों के साथ बुरा नहीं होने देगा ".

रति रोटी हुए ," में अपने बेटे को खून का सोच भी नहीं सकती , अगर आर्यन को कुछ हुआ तोह में भी अपनी जान दे दूंगी.... बूहःहःह भूहहहहह ".... जोर जोरसे रोने लगी .....

रति को रूट देख आर्यन उठकर उसके पास घुटनो पे बेथ के उसके आसूं पहुंचा ," मेरी माँ इतनी कमजोर तोह नहीं है और फिर जबतक ज़िंदा हूँ तेरी आँखों में मेरी वजह से नमी क्यों आ रही है ...... में तेरे लिए पूरी दुनिया से लड़ जाऊंगा पर रूकर मुझे कमजोर मत कर माँ ".

रति की कोहली भर आर्यन अपने सीने से लगा लिया ..... मीणा ने खड़े होकर सबको वहां से चलने को कहा तोह सब चल दिए पर डॉली किसी उम्मीद से आर्यन को देख रही थी तब मीणा ने उसका हाथ पकड़ के कहा," तू बाद में मिल लेना अभी नानी माँ को आर्यन hi समझा सकता है अभी ".

सबके बहार जाते hi आर्यन ने रति को बीएड पे लिटा के उसको अपनी आगोश में भर पीठ थप तपते हुए सुलाना लगा . आर्यन को पता था उसकी माँ जगी रही तोह उसको जाने नहीं देगी , इशलिये मीणा से नींद की टेबलेट एक जूस में मिला के लाने को कहा ..... आधे घंटे बाद रति उसके ऊपर लेती hi सू गयी . आराम से उसको बीएड पे लिटा ब्लैंकेट से धक् के माथा चूमा और उसके प्यार छूकर चल दिया .

आर्यन रति को ुष कक्ष में छोड़कर जब सारू के पास पहुंचा तोह नेहा वहीँ बैठी थी तब उसने नेहा को रति का धयान रखने को बोलै . नेहा के जाते hi आर्यन ने दूर लॉक किया तोह सारू ने हस्ते हुए अपनी पावर शील्ड लगा दी .

आर्यन सीधा बीएड पे उसके पास जाकर उसकी गॉड में सर रखकर लेट गया . सारू मुस्करा कर ," आज तोह विवाह और तेरी सुहाग रात है दीप्ति के साथ , वहां जाने के लिए लेट नहीं हो रहा ?"

आर्यन ," वहां जाने में अभी टाइम है और मैंने सोचा अपनी मम्मी सारू डार्लिंग का दूध पी लूँ थोड़ी ताकत मिलेगी ..... hi hi hi hi ".

सारू ने उसका कान उमेठा ," बदमाश यह अपना घर नहीं है , किसी को पता चल गया तोह "...... और सर झुका के अपनी गॉड में लीयते आर्यन का माथा चूमि .

आर्यन ने अपनी दोनों बाजों पीछे करके सारू की कमर पे लपेटी ," कोई कैसे देख सकता है जब अपने शील्ड लगा दी है hi hi hi hi "...... पुछःह पुछठ ..... सारू का गोरा पेट पे चूमने लगा जोह उसके घागरा चोली के बिच के गैप से नेकेड था .

"शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मत कर ..... अह्ह्ह माहि रुक तोह प्लीसीईए "..... आर्यन ने सर उठा के देखा तोह उसके बालों में ऊँगली फिरा के बोली ," मुझे ड्रेस चेंज करने दे और तू भी कर ले , िंह भारी कपड़ों में दिक्कत होगी ".

आर्यन बीएड पे बैठा तो सारू मुस्करा के अपने सूटकेस से एक मैक्सी लेकर बीएड पे राखी तोह आर्यन ने उसकी ज्वेलरी और ड्रेस उतरने में मदद की , ब्रा पेंटी में देख आर्यन का लुंड तन्ना गया . सारू ने टॉवल लपेट के बोलै ," में बस 5 मं में शावर लेकर आयी ".

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उधर रघुभार सिंह बहोत गुस्से में अपने बेटे जबर सिंह के आड़े पे पहुंचा और उसको एक हंटर उतार के बेहरहमी से पीटने लगा ," नालायक , कुत्ते , नीच , गलीच इंसान मेरी 40 साल की म्हणत पे पानी फेर दिया ...... अब बस कुछ मत करना नहीं तोह में खुद तुझे मार दूंगा सूअर कहीं का ".

राजा रघुभार सिंह भले गेरुआ विस्तार में थे पर चेहरे पे गुस्सा किसी साधु का न होकर किसी क्रूर इंसान का था. अपने को शांत कर वह जमीन पे बेथ आँख बांध कर ध्यान लगा लिए .

उधर जमीन पे पड़ा दर्द से करहार के जबर सिंह अभी भी अपने बाप की बातिओं का मतलब समझने की कोशिश कर रहा था .

जखम घेरे hi थे कई लोगों के पर मरहम किसी के पास अभी फिहाल राजपूताना भूमि में किसी के पास न था और जिसके पास था उसको अभी भी कई परीक्षा से गुजरना था ...... सवाल अनेक थे पर जवाब एक भी नहीं ??????

हार्ट हार्ट हार्ट
 
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दोस्तों अपडेट 34 शुरू हो चूका है और दिव्या तलवार hi Deepti-Aryan को अपनी और खींच रही है ..... िश अपडेट का हर part कई राज खोलेगा तोह हर क्वेश्चन मार्क पे ध्यान देना .

धयानवाद हार्ट
 
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