Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 24 - SexBaba
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Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

अपडेट 34

PART-2

अब तक .......

आर्यन सीधा बीएड पे उसके पास जाकर उसकी गॉड में सर रखकर लेट गया . सारू मुस्करा कर ," आज तोह विवाह और तेरी सुहागरात है दीप्ति के साथ , वहां जाने के लिए लेट नहीं हो रहा ?"

आर्यन ," वहां जाने में अभी टाइम है और मैंने सोचा अपनी मम्मी सारू डार्लिंग का दूध पी लूँ थोड़ी ताकत मिलेगी ..... hi hi hi hi ".

सारू ने उसका कान उमेठा ," बदमाश यह अपना घर नहीं है , किसी को पता चल गया तोह "...... और सर झुका के अपनी गॉड में लीयते आर्यन का माथा चूमि .

आर्यन ने अपनी दोनों बाजों पीछे करके सारू की कमर पे लपेटी ," कोई कैसे देख सकता है जब अपने शील्ड लगा दी है hi hi hi hi "...... पुछःह पुछठ ..... सारू का गोरा पेट पे चूमने लगा जोह उसके घागरा चोली के बिच के गैप से नेकेड था .

"शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मत कर ..... अह्ह्ह माहि रुक तोह प्लीसीईए "..... आर्यन ने सर उठा के देखा तोह उसके बालों में ऊँगली फिरा के बोली ," मुझे ड्रेस चेंज करने दे और तू भी कर ले , िंह भारी कपड़ों में दिक्कत होगी ".

आर्यन बीएड पे बैठा तो सारू मुस्करा के अपने सूटकेस से एक मैक्सी लेकर बीएड पे राखी तोह आर्यन ने उसकी ज्वेलरी और ड्रेस उतरने में मदद की , ब्रा पेंटी में देख आर्यन का लुंड तन्ना गया . सारू ने टॉवल लपेट के बोलै ," में बस 5 मं में शावर लेकर आयी ".

अब आगे ........

आर्यन ," मम्मी यू अरे लुकिंग सो हॉट , में भी साथ चलता हूँ ". सारू ने उसको मन किया और ड्रेस चेंज का बोल के आर्यन के बैग से एक शॉर्ट्स और t-shirt निकल के देकर बाथरूम चली गयी. शावर में नंगी नहाती अपने hi गूरे मखमली कामुक बदन पे हाथ फिरा के आईने में देखते हुए मुस्करा रही थी , अभी कुछ डिअर बाद उसका लाडला बीटा पूरा बदन दुःका देगा .

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तानी हुयी उत्कृष्ट पूर्ण विकसित दोनों वक्ष , पतली कमर , घेरि नाभि के निचे का सफाचट कटी प्रदेश और जानलेवा मस्त छोटी मटकी का आकर लिए सुडोल नितम्बों के निचे कासी हुयी झांघें किसी शिल्पकार की सजीव मूरत सारू के रूप में बाथरूम में गीले बदन को अपने सजाएं , प्रीतम आर्यन के लिए त्यार कर रही थी ....... सुंदरता जैसे उससे hi शुरू या ुशी पर ख़तम होती होगी . सारू हर हिसाब से बेमिसाल थी पर एक और थी उसके जैसी अपनी सगी बेटी अनीता सिंह (अणि) .

सारू औरत के चूँकि जीवन के सबसे अच्छे पड़ाव पे थी और सयम से भरी हुयी वहीँ अणि तोह नवयौवना के साथ बहोत पावरफुल और ऐटिटूड वाली थी .

अपने बदन को अच्छे से पहुंच के सिर्फ निघ्त्य के निचे पेंटी पहनी और बाल कुछ ड्रायर से सूखा के बाथरूम से बहार निकली तोह आर्यन बस शॉर्ट्स पहने एक टांग पे टांग चढ़ये चेयर पे बैठा फ़ोन पे कुछ देख रहा था की उसको सबकी सिक्योरिटी का स्पेशल ध्यान रखना है .

सारू ने मुस्करा के उसको देखा और मिरर के सामने जा अपने बाल ब्रश करने लगी ...... िश सेक्सी निघ्त्य में उसका बॉडी चउरवे पीछे से सरीर के भूगोल दे रहा था ...... आर्यन की निघन तोह दोनों चूतड़ के कमर से पेंटी के निचे ट्रायंगल वाले जाप का जायजा सही एंगल को देख रही थी. परफेक्ट 45 ° एंगल यानी परफेक्ट नितम्ब के साथ घेरि योनि और उनतोच बैक दूर है मम्मी का यानी डैडी को एंट्री नहीं मिली .

आर्यन को अपना पिछवाड़ा मिरर से घूरता देख सारू इत्र के बोली ," ऐसे क्या देख रहा है ..... जरा यह मेरे कान के टॉप्स निकाल लगता है फस गया है ".

आर्यन भी अपने सेलफोन को साइलेंट कर और कॉल डाइवर्ट का ऑप्शन दबा के सारू की तरफ बढ़ा . मिरर में सिर्फ एक शॉर्ट्स में अपनी तरफ आर्यन को बढ़ता देख जैसे उसकी बलिस्त सीने और हसमुख चेहरे की तरफ सम्मोहित सी होती अपने बेटे की मुरीद सी होकर उसके छुवन का इंतज़ार कर रही थी .

आर्यन ने उसके पीछे से चिपकते हुए लेफ्ट शोल्डर पे किश कर उसके खुले खुसबू दार लम्बे केश को सुंघा और कान को बालों से अनवरत कर प्यार से उसकी टॉप्स निकाल के किश किया . सारू के बदन में उत्तेजना फेल गयी ...... दुसरे कंधे पे भी चुम्बन अंकित करता कान से टॉप्स निकाल के सारू के हाथ में रखकर चूम लिया .

आर्यन ," आप बहोत सूंदर हो , थे मोस्ट ब्यूटीफुल वुमन ों थिस एअर्थ ..... चुम्म्म्म ..... माय मम्मी डार्लिंग ".

सारू अपनी कमर पे उसके मोठे खोंते जैसे लुंड का कड़कपन महसूस की जिसको उसने सारू के पेट पे एक हाथ रख और दुसरे से गर्दन का अगले भाग पे ऊँगली फेर और साइड में चूम लिए . "शह्ह्ह्ह माहि में तेरे लिए तड़प रही हुन्न मुझे बीएड पे ले चल ...... अह्हह्ह्ह्ह .... "

आर्यन ने अपना हाथ की उंगलियन दोनों तरफ से निचे ले जाकर उसकी चूची और छूट को मैक्सी के ऊपर से सेहला दिया गर्दन को चुबलाते हुए ...... सारू पूरी ताकत लगा आर्यन की तरह सिसकती पलट गयी और बिना डिअर किये अपने पैरों के पंजों पे उचकते हुए उसके सर को झुका दोनों के गुलाबी होंठो का संगम करा के चूसने लगी पुछःह पहुछठ चुम्म्म्म चुम्म्म्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह ..... आर्यन ने दोनों हाथों को वहीँ पहुंचा दिया जहाँ घूर रहा था ...... सायद उसके हाथो के लिए परफेक्ट दोनों चूतड़ समां गए और उंगलियन दोनों के चीरे में जा घुसी .

फूलों की टूकरि की तरह उठा hi लिया सारू को जिसने किसिंग करते हुए अपनी टांगें उसकी कमर पे कास अपनी चूची उसके मस्कुलर चेस्ट पे दबा दी ...... अब उसका पिछवाड़े और योनि के बिच का भाग आर्यन के लुंड के उभर को महसूस कर स्वतः hi आगे को हो गया .

आर्यन अपनी जीभ उसकी जीभ से भिड़ा ऐसे hi उठाये हुए बीएड के पास ले गया और खुद बीएड पे प्यार निचे लटका के बेथ उसको अपनी गॉड में बिठा उसके अधरों से सेहद चूसने लगा पुछठ मुह्हह्ह्ह्ह हुम्म्म ....... 5 मं एक दुसरे के होंठो को चूसना के बाद जब सारू की सांस उखड़ने लगी तब किसिंग रोक कर उसकी कमर और पीठ सहलाने लगा ........ सारू अपनी उत्तेजित गुलाबी आँखों से उसको देखती उसके बैएँ कंधे पे सर रख के अपनी बाँहों में कसके साँसे दुरुस्त करने लगी .

आर्यन के हाथ उसके पिछवाड़े से निघ्त्य को उठा उसकी छोटी पेंटी के साइड से नंगे चूतड़ पे पकड़ बना के मसलने लगे तोह सारू आर्यन की गर्दन पे सिसकते हुए चूमने लगी . एक हाथ को निघ्त्य के अंदर दाल उसकी चिकनी कमर और पीठ को सहलाता हुआ ऊपर तक फील करने लगा .

सारू गर्दन को चूमते हुए उसके सामने फेस कर उसकी थोड़ी और निचले लिप्स पे किश करती उसको कामुक निगाह से देखती अपनी जीभ निकाल ऊपर के लिप्स पे फेरी फिर नाक के नथुनों पे फिरा के अपने मोह में उसकी नाक की टिप दबा लिया.

आर्यन ने उसकी निघ्त्य से हाथ निकल उसके दोनों कंधो से पतली दूरी कंधे से सरका के निघ्त्य कमर तक की तोह उसकी दोनों ठूस वक्ष अपने चूचक ताने उसके सीने से लग गए . दोनों हाथो में सारू का चेहरा थाम उसके होंठो को चूसते हुए वह बीएड पे पीठ के बल लेट गया तोह सारू भी और आगे खिसक के शॉर्ट्स में लुंड के उभर पे अपनी छूट कपडे के ऊपर से दबती उसके सीने से लगी तलीनता से अपने दोनों होंठो को चुस्वाति एक ले में अपनी कमर को हलकी हलकी जुम्बिश देती लुंड पे छूट रगड़ने लगी .

सारू आज ज्यादा hi जोश में थी आर्यन के मैदान में देखे प्राकर्म के बाद से और आर्यन भी सही समय पे उसके कक्ष में था सबकुछ भुकार दो प्रेमी अपनी कामलीला में मगन थे . किश तोड़कर वह आर्यन की झांघो पे बेथ उसके शॉर्ट्स को निच्चे कर उसके अजगर जैसे पहन उठाये 'तोपची' को आजाद कर दोनों हाथो में थाम के मुस्करा के आर्यन की आँखों में देखती कातिल मुस्कान लिए बायीं आँख मारी और निच्चे झुकार जोरसे से टोपे को दबा के प्रेकम की एक बूँद को देख ज्यादा रास आने पे जीभ निकाल के टिप पे ेख्ता कर के चटकारा मार के चाट ली सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ...... "यह मेरा है माहि रे बहोत नमकीन सा खट्टा मीठा सा पुछःह पुछठ ....."

आर्यन ने अपने टंगे बीएड से ऊपर कर दोनों हाथों के सहारे पूरा बीएड पे पीछे खिसक गोल मोटा वाला तकिया अपनी गर्दन के निचे लगा के अपने शॉर्ट्स को उतरा फिर अपनी झांघो पे बैठी सारू की निघ्त्य को उतर के साइड में रखा "आपको पास अपना हुनर दिखने का पूरा मौका है , में भी आज अपनी रानी मम्मी के अंदर की चिप्पी कामुक औरत को देखना चाहता हूँ ...... मुहह्ह्ह्ह पुछःह पुछठ "...... सारू के दोनों दूध को बारी बारी चूम के पीछे तकिये पे लेट गया .

सारू अभी भी दोनों हाथ से इतने बड़े लुंड को ऊपर निचे करती अपनी hi कलयाईओं की चूड़ी की खनकती आवाज को सुनती मुस्करा के जीभ अपने होंठो पे फिरा के बोली ," आज में भी अपने तोपची की साड़ी अकड़ निकालके अपना गुलाम बना लुंगी ..... hi hi hi hi hi ...... बहोत बड़ा है तेरा ".......

आर्यन ने उसकी दोनों झांघो पे हाथ फिरते हुए पुछा ," क्या बड़ा है ? सबका ऐसा hi होता है "...... सारू ने दोनों हाथ में लुंड ऊपर से निच्चे तक सेहला के ," किसी का ऐसा नहीं होता , विकराल होने के बाद भी इतना सूंदर और सजीव है ....... तू स्पेशल है तेरा लुंड भी स्पेशल है जिसको रीता ने सही नाम दिया 'तोपची ' ....... तुझे क्या पता जबबपेहली पूरा अंदर गया तोह जैसे पेट के अंदर घुस गया था , में hi जानती हूँ कैसे मैंने झेला था दर्द से hi रूह पहले कांप गयी पर जब इसने अंदर बर्रिश की तोह दर्द को मरहम की तरह ख़तम किया".

आर्यन ," आप जितना ले सको उतना लो , मैंने इशलिये पहली बार पूरा अंदर किया ताकि कभी जोश में पूरा अंदर जाए तोह इश्कि जगह पहले से वहां बन जाये ..... "

सारू ने पीछे खिसक अपने चूतड़ उसके घुटनो पे रखकर जैसे कमान संभल ली और कश्मीरी सेब जितने बड़े टोपे पे अपनी जीभ की कलकारी दिखती चूसने चाटने लगी ...... थूक से लुंड के शाफ़्ट को गीला कर अपनी दोनों ऊँगली लुंड पे लपेट मुठी बना के दोनों मुठी विपरीत दिशा में घूमती ऊपर निचे करती आर्यन का लुंड चूसने लगी .

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आर्यन की आँखों में जैसे वासना के दूर तैरने लगये , सारू को तन्मयता से लुंड चूसता देख के सर हिलने से उसके चेहरे पे आते बालों को आर्यन उसके कान के पीछे करता उसके सर को सबसि दे रहा था पर सारू का जान लेवा वार आर्यन के वीर्ये से भरे बड़े साइज के ांडों को भी गरम कर दिया जब सारू ने अपने तने निप्पल से बारी बारी आर्यन के ांडों पे रगड़ा साइड बी साइड .

सारू के दोनों थांन और आर्यन के ांडों की आपस में रगड़ से गर्मी बढ़ने लगी . सारू ने मूतने वाले छेद को अपने जीभ की टिप पेनी करती अंदर 3 मम अंदर करके घुमाई तोह प्रेकम ज्यादा आने लगा .

सारू ," सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप पुछःह पुछठ ..... बहोत बड़ा है माहि मोह में भी नहीं आता सलरपपपपपपप ..... पर आज पूरा लुंगी ..... बता मजा आ रहा है या नहीं "...... फिर से मोह बड़ा कर 6 इंच तक अपने गले तक लुंड ले डीप सकिंग करने लगी ......

आर्यन मस्ती से विहाल पड़ा उसके सर सहलाता उसकी जाँघों को दबा रहा था," हुम्म्म्मम्म ऐसे hi मम्मीयीय बहोत प्यार से चूसती हो अप्प ...... थोड़ा और अंदर लो ऐसे hi मेरी जान 'सारू' ......" अपना नाम आर्यन के मोह से सुनकर सारू और जोश के साथ उसको जन्नत का वह मजा देने लगी जिस काम में औरत जब दिल से लुंड को चूस के अपने मर्द को अपना गुलाम बना लेती है .......

आर्यन की आंखें भोजील हो गयी पर 2 मं बाद सारू ने टोपे की चमड़ी पीछे रखते हुए अपनी जीभ की टिप टोपे की जड़ की क्यारी में घूमा दी चरों तरह ..... "अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहोत्तत्तत अच्छआ लगगगगग रहा है सारूऊऊ हम्म्म्म्म यह कहाँ से सीखा ....... बस रुक जायो में झाड़ जाऊंगा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह "...... सारू पिछले 10 मं में non-stop आर्यन के लुंड और ांडो पे अपना हुनर दिखा के बेहाल कर दी ...... ऐसा तोह उसकी जुड़वाँ भें मीणा भी नहीं की थी जबकि उसके ब्लोजॉब के सामने आर्यन हार के जल्दी झाड़ जाता है था पर यह कुछ दूसरी दुनिया का सीखा हुआ हुनर उसे कर रही थी सारू ......

( सारू नहीं पिछले जनम वाली पद्मदेवी अपने िश जनम के बेटे आर्यन , महार्यं का पुनर जनम , को वही हुनर दिखा रही थी जिसके लिए पद्मदेवी , महार्यं की लाड़ली रानी बीवी थी )

सारू कामकला की ज्ञानी स्त्री की तरह अपने सामने बीएड पे लीयते नंगे बलिष्ट योद्धा जैसे मर्द को जिसने आज 100 से ज्यादा योद्धा मौत के घात उतर दिए थे स्वयंवर के स्टेडियम में उसको अपने सामने मिम्मया दी ...... सही hi कहा गया है औरत चाहे तोह बड़े से बड़े शर्मा को अपने हुसैन और कामकला से हरा दे बिना वार किये .

आर्यन 12 मं भी िश लगतार हमले को सेह न सका और भलभल के सारू का सर लुंड पे जकड के दबा दिया और झड़ने लगा ......" gurrrrrrrrrrrrrrh ुर्घह्ह्ह्ह सारूऊऊ मेनन गयाआ ....... तू आज मुझे मार डालेगी सारू ुर्घह्ह्ह्ह " .

गूऊऊऊ गूऊऊऊ की आवाज बस नथुनों से आती , अपने हलक में वीर्ये की पिचकारी नहीं जेट शावर की तरह तेज़ एक के बाद 10 पिचकारी की धार डायरेक्ट पेट में उतरती गयी ....... अपने दोनों हाथों के नाख़ून से आर्यन की झांघो को खुरच hi डाला ..... 9 इंची से ज्यादा लम्बाई तक , 5 इंची मोटाई वाला विशाल लौड़ा किसी खुट्टे की तरह मोह फाड़े ऐडा हुआ था...... सारू की आंखें सॉकेट से बहार hi आने वाली थी आसूं बहते हुए ..... जब अपने दोनों हाथों से सारू ने आर्यन के ाँद दबाये तब जाकर पकड़ ढीली हुयी सर से .

आर्यन के हाथ का दबाव काम होने के साथ बांध आंखें भी जैसे सुखद अहसास से खुलने लगी और सारू ने झट से मोह से तोपची को निकाल ख़ूऊओ ख़ूऊ करती खस्ने लगी और उसकी उखड़ी सांसें एक साथ उसकी हालात का ज्ञान जब आर्यन को हुआ तोह झट से सीधा बेथ उसकी कमर और गाल सहलाने लगा ," सॉरी सॉरी मम्मी ..... अप्प ठीक तोह हो "...... चटकककक ..... "चुप्प्प करररर" ..... खोओ खोओ !!!! ....... सारू की हालत देख आर्यन समझ गया की वह काम वासना में आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो गया था मम्मी के साथ .

आर्यन ने सारू को उठा के साइड में बिठाया और उसकी पीठ सहलाता पानी के जग से गिलास में पानी दाल उसको पिलाया तोह सारू भी अपनी सांस दरुस्त होकर पानी पीने लगी आर्यन के हाथ से ..... दुसरे हाथ से उसके आंसूं साफ़ किये और उसकी निघ्त्य से उसका चेहरा साफ़ करने लगा ...... "सॉरी अब आगे कभी ऐसे नहीं करूँगा माफ़ कर दे अपने बेटे को दिल से माफ़ी मांगता हूँ "...... उसकी आवाज में दिल की पुकार थी तोह सारू भी मुश्किल से स्माइल करती उसके गाल पे हलके से चपत लगाती उससे चिपक के उसका पूरा चूमने के बाद चाटने लगी पुछःह पुछठ मुह्हह्ह्ह्ह ......

आर्यन भी अपनी मम्मी का मूड देखकर हस्ते हुए ," पूरा फेस गीला कर दी , अब तोह रुक जा मम्मी क्या तुम ठीक हो ".......

सारू ने उसके लिप्स पे किश किया ," इतनी बातें क्यों करता है , में बस नाराज हुयी की मुझे फिरसे मेरा नाम सारू नहीं पुकारा ...... मेरा नाम में सबके मोह से सुना है पर जब तू प्यार से 'सारू' बोलै तोह लगा में पूरी हो गयी तुझे पाकर ...... पूछह पूछह ी लव यू मेरे माहि ...... मुझे अकेले में सारू बोलकर न जोह तेरे अप्नावट और हमारे नए रिश्ते का पूरा अहसास देता है ".

किश करते हुए आर्यन ने सारू को बीएड पे करवट के बल लिटा के उसके सामने से लिपट के अपने लिप्स से उसका राइट निप्पल पीने लगा ..... सारू अपनी राइट टांग उसके ऊपर रख के अपनी आगे से गीली पेंटी उसके हलके सख्त लौड़े से बिधा के उसके बाल में ऊँगली फेरने लगी . आर्यन का सीधा हाथ दोनों के बिच था जिसको उसने उसकी पेंटी के ऊपर से छूट के चीरे को छेड़ने लगा अपनी ऊँगली फिरा के और दूसरा हाथ उसके बिलकुल नंगे चूतड़ को हलके हलके मसल रहा था क्योंकि पेंटी अब उसके दोनों चूतड़ की दररर में फँसी पड़ी थी जैसे थोंग होती है .

सारू अपनी चूची पिलाते हुए ," ऐसे hi चूस तेरे hi हैं दोनों अह्हह्ह्ह्ह हरामीईईई कुटैय्यिययी काट मत , सीईईई ऐसे hi जीभ फिरा के चाट के चूस ...... छोटी माहि (महिमा) भी तेरे जैसे दूध पीती है सबका" . आर्यन सर उठा के ," अच्छा किस किस का पि ली मेरी स्वीटी पाई गर्ल ".

सारू ने थोड़ा पीछे हो अपनी लेफ्ट निचली चूची ऊपर को तान के आर्यन के सर पे दबाव लगा दिया तोह आर्यन खुद hi चूसने लगा ..... सारू," वह भी तेरी बेटी है किसी को बक्सेगी , गाओं में तेरी दोनों दादी ( वीरा बुआ की दोनों सास ) यहाँ तक की सुखिया काकी का भी दूध पी आयी बहोत तेज़ है मेरी छोटी माहि".

लेकिन अब आर्यन जैसे उसकी कोई बात नहीं सुन्न रहा था बस उसकी चूचियां भाभूदने में लगा था कभी जोरसे से कभी प्यार से कभी दांत भी लगा देता. उसके दोनों हाथ रुक गए थे जिससे सारू को पता चल गया अब बस यह भी चूची hi पीटा रहेगा .

सारू ने अपनी कमर पीछे कर अपनी पेंटी खुद उतर दी और आर्यन से लिपट फिर से अपनी टांग चढ़ा उसके लुंड के टोपे को छूट पे घिसने लगी , वह भी पूरी गीली थी और लुंड भी पूरा तो नहीं पर शाक्त हो गया था .

लुंड को सीधे हाथ से थाम गीले टोपी को छूट के छेद पे लगा अपनी कमर की ताकत लगा दोनों होंठ अपने दांत से बांध कर एक घेरि सांस लेती आगे को धक्का लगी तोह छूट को पूरा 'ो' की शेप में खोलता सूपड़ा छूट के अंदर आ गया और आर्यन तोह मस्ती में अपने दांत जब चूची पे लगया तोह उसके सर के बाल पकड़ के खींची .

दर्द भी हुआ पर अपने बलवान बेटे जोह उसका पुराण पति था उसके आकर्सन के सामने सब दर्द बस आज मिथ्या hi थे..... मुझे राजे( माहि ) पूरा छूट के अंदर चाहिए . अपना जी कड़ा कर आर्यन को पीछे जोर लगा के धकलेटी जैसे उसके ऊपर hi चढ़ गयी थी छूट में लुंड फसाये .

आर्यन भी जब अपना सीधा हाथ उसकी कमर के निचे दाल उसको ऊपर खींच लिया तोह लुंड भी छूट की घेरे तक घुसता चला गया बस 2 इंच hi बहार होगा . आज फिर चीयर दिया आर्यन के तोपची ने सारू को .

बड़ी ावक्वार्ड सी पोस्टिव को आर्यन ने ठीक करते हुए उसकी चूची मोह से अलग कर उसकी दोनों झांघो को एडजस्ट कर उसके दर्द से भरे चेहरे को निचे कर उसके लेफ्ट कान को चीभ से सहलाने लगा और सारू की गांड को दोनों हाथ में दबा के उसकी छूट अपने लुंड पे ऊपर निचे करने में मदद किया तोह सारू का सबर जवाब दे hi गया ......

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सारू ," हुण्णनं अह्हह्ह्ह्ह महियी ..... अह्ह्ह्हह्हह सीईइईसीईई ..... घेरि सांस लेकर हवा नथुनों से निकलते हुए ...... उन्हम्मम्म मायआ ...... चीयर के पहाड़ हे देगा टूउऊउउउ मुझे किसी दिन ..... रुकक्क सांस लेने दे ..... अह्हह्ह्ह्ह हरामीईईई यह अब बड़ा होने लगा मेरी छूट के अंदर hi अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हूंणणन्न ...... "

सारू की बात भी सही थी जोह 8 इंच अंदर तक ली थी उसकी छूट के पानी ने पूरा 12 इंच तक लम्बा और 5 इंची मोटा कर दिया किसी बिजली के खम्बे जैसा सख्त. लुंड को पीछे से दोनों के जोड़ से देखो तोह जितना बहार था नाश पूरी उभरी हुयी और छूट का चाला किसी रबर बंद का काम करता बहोत टाइट कैसा हुआ लग रहा था .......

आर्यन ने हाथ की अपनी एक छोटी ऊँगली अपने थूक से गीली की , सारू दर्द से झुझते आर्यन को देखि पर समझी नहीं पर जब अपनी गांड के छेद को सहलाती हलकी से धंसी तोह आर्यन की मनसा समझ के बोली ," ऊँगली हटा वहां से नहीं तोह ऊँगली काट दूंगी अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण आराम से वहां कुछ नहीं गया ....... सीईईई हम्म्म्म यह कैसा मजा है ुहममममममम ...... हाथ हटा ले कुटिया के बीज नहीं तोह जान से मार दूंगी ".......

आर्यन भी हस्ता हुआ सारू की चूम रहा था की मम्मी खुद को गाली दे रही है पर सारू तोह अपने पिछले जनम की सास रानी मिरदुला को रंडी और कुटिया का बीज कह रही थी ...... पर गालियां दोनों को जोश hi चढ़ा रही थी ....... जहाँ सारू को पिछले जनम का याद था वहीँ आर्यन अपनी मम्मी की एक एक अदा पे फ़िदा होता जा रहा था ...... ऐसे hi सारू का जादू चलता रहा था आर्यन किसी की तरफ देखे hi नहीं .

(मीणा को यह बात पिछले 2-3 दिन से महसूस हो रही थी आर्यन तोह बस सारू को दुमछल्ला (गुलाम) hi बन गया है ...... हर जगह हर वक़त बस सारू hi जैसे चाहिए हो ....... मीणा को बाद में देखते हैं यहाँ दोनों माँ बेटे ने कक्ष में तूफ़ान hi ला दिया हो ......)

आर्यन एक इंच लुंड हिलता अंदर करता तो ऊँगली गांड के छेद से 1 कम बहार निकलता और लुंड बहार निकलता तोह ऊँगली गांड में 2 कम अंदर ....... सारू का ुंचय छेद भी आज आर्यन के इशारे पे उत्तेजित होता छूट को पूरे रास से बहार गीला कर दिया ......

सारू कान, छूट और गांड पे हमले को 3 मं भी बर्दास्त न कर पायी और झड़ने लगी ...... इतना पानी छूट टपका रही थी जैसे मूट दी हो पर अपने ओर्गास्म्स को छीकते हुए माहि का नाम लेकर अभी पूरी झड़ने के बाद संभालती की आर्यन सीधा बेथ के उसको गॉड में बीतए छोड़ने लगा और आखिर कार बीएड से उतर अपनी गॉड में उठाये सारू को दबा डाब छोड़ने लगा "अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मररररररर गईइइइइइ हरमीयी...... ऐसे hi छोड़ अपनी लुगाई को माहि अह्ह्ह्हह्हह सीईइईसीईई हम्मम्मम्मम्म पुछःह पेल और जोरसे" .......

जोश ने तोह िंहथा hi कर दी तब आर्यन ने सारू को उससे रूबरू करवाता बोलै ," साइड में ड्रेसिंग मिरर में देख मेरी चिकनी रांड सारू ..... देख तेरी फटी छूट कितनी बड़ी लुंडखोर है मेरे लौड़े को पूरा लिए रू भी रही है पर हार नहीं मान रही ....... आज तेरी िश कातिल गांड को भी फाड़ना है , अच्छा किया मेरे लिए बचा के राखी है , तू मेरी सबसे मस्त चिकनी लुगाई है सारू में तेरे बिना नहीं रह सकता ...... पूछ पूछ ...... तुझे दिन रात छोड़ना है मुझे बस हमेशा तेरी यह छूट और उसमें मेरा लौड़ा होगा समझी छुटमारानी सारू डार्लिंग "....... सारू ने आर्यन को उत्तेजित कर जब गालियां बकवानी शुरू की तोह हर गन्दा स्तब्ध जैसे आग में घी का काम करता गया ........ दोनों चुदाई के जोश में दुनिया जहां भुल्ये एक दुसरे पे हवाई हो रहे थे .

सारू अपनी कमर हिलाती लुंड को छूट पे जोरसे पटकती और आर्यन निच्चे से धक्का मारता ...... जब गर्दन घुमा के साइड में मीरूर को देखना चाहि तब आर्यन उसको चूमने लगा पर आर्यन की कमर पे टांगें लपेट उसके नितम्बों पे अपनी एड़ी क्रॉस कर दबा के लुंड पे छूट पटकती जैसे झूला hi झूल रही थी उसकी गर्दन पे बाहिएँ लपेट अपने लिप्स चुसवाते हुए .

जब आर्यन ने लिप्स हत्ये तोह झट से पलट के मिरर में देखि तोह खुद को किसी बंदिरया के बच्चे से कपड़े की और जब निघा निचे पड़ी तोह जैसे आंखें बड़ी hi हो गयी उसकी छूट भी आज एक छोटा सा झरना बन सीधा चुतरस कालीन पे टपका रही थी जहाँ छूट रास िखिता हो रहा था पर जब आर्यन ने चूम के उसकी पीठ मिरर की तरफ की तोह पूरी गर्दन घुमा के भी अपने मिलान का आईने में बना आकाश उसकी छूती सी छूट में भीषण लौड़ा को अंदर बहार जाते हुए की सजीव टेलीकास्टिंग उसको अपने आप गर्व महसूस करवा hi गयी ......

आर्यन के निछले होंठ को गर्दन घुमा के दांतों से दबा के िजरहर hi कर दी " " बहोत बड़ा है , बहोत मोटा है, हिंसक है, विकराल भी है पर तेरा लौड़ा अब मेरा है "...... होंठ से खून निकाल के आर्यन को धक्के लगता देख फिरसे जीभ निकाल के खून चूसती हुयी बोली ," अह्ह्ह हम्म्म्म्म बीएड पे ले चल ऐसे hi मुझे सवारी करने दे ..... अह्हह्ह्ह्ह जूल्मीीीी ऐसे hi ले चल , तूने निचे खून निकाला मैंने तेरे ऊपर से लिप्स से ".

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आर्यन उसके देखता बीएड पे पीठ के बल लेट पूरा लुंड छूट की जड़ तक फसाये उसको मैं मानी करने दिया ...... आज सारू की कामुकता जैसे चरम पे थी दोनों हाथों से उसकी बलिष्ट गर्दन पे जकड अपनी कमर ऊपर निच्चे हिलती , आर्यन उसके चूतड़ पे निचे हाथ लगये उसको ऐसा करने में सहयोग कर रहा था ......

न जाने वह कुछ सोच के निच्चे थोड़ा झुकी और आर्यन के निचले घायल होंठ पे अपने लिप्स गोल कर थूक टपका दी लार सी बनते हुए जिसको आर्यन जीभ निकाल के पीने लगा पर सारू ने निचे झुकार निचला होंठ पे लगये अपने थूक को काटे हिशे पे लग्न शुरू किया अपनी जीभ गोल गोल घुमा के ......

आर्यन के लिप्स पे किश करते जीभ से सहलाती बोली ," तू मेरा खसम है तुझे दर्द के साथ झकम देकर मरहम भी में hi लगूंगी रंडी के पीले , जैसे तू मेरे साथ करता है भदवाये स्टेडियम में तोह उन्ह नपुंसक को बड़ा जोश में आकर काट डाला मुझे ठंडा कर अह्ह्ह्हह्हह ...... पूछह पूछह माहि में सिर्फ तेरी हुन्न और तू मेरा है बाकी दुनिया सब मिथ्या है रे बस हम दोनों hi यथार्थ हैं और हमारा यह प्रेम ..... पेल अपनी रांड लुगाई को पहाड़ के मेरी छूट खून निकाल दे ".......

सारू ने स्पीड तेज़ कर जब जोर जोरसे लुंड पे छूट पटकती तोह आर्यन ने अपने हाथ उसके चूतड़ से हटा के उसके दोनों पुष्ट चूचे दबोच के निप्पल अंगूठे और बड़ी ऊँगली से जोरसे मोराद hi दिए ..... "हआ सीईईई में गयी माहि ..... अह्ह्ह्हह्हह में गयी मुझे मादरचोद संभाल मुझे रुकना मत्तत्तत्त उईईईईई माआआ पहाड़ दी ......"

झट से पलट आर्यन ने उसको निचे लेकर 10 इतने जबरदस्त धक्के मारे की सारू की छूट के साथ साथ उसके भी ाँद उबाल के छूट को विरए से भरने लगये ..... दोनों इतनी जोरसे चीख के झड़े की शैलद न होती तोह पूरा अलवर का राजमहल गूंज जाता उनके चरमोत्कर्ष के आननद की पुकार सुनकर . दोनों झड़ते hi रहे 5 मं तक ...... सारू ने आर्यन की गर्दन दबोच राखी थी और नाख़ून भी गदा दिए और आर्यन उसके दोनों चूतड़ को अपने हाथो में कैसे अभी भी रुक रुक के लुंड बहार खींच के थोकक देता ...... फट्ट्ट्ट फट्ट्ट्ट और सारू चीख पड़ती.

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जब दोनों शांत हुए तोह किसी प्रेमी युगल की तरह चूमा छाती करने लगये ," पूछह पूछह पूछह चुम्म्म्म चुम्म्म्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पुछठ ....."

दोनों एक दुसरे को बदस्तूर चूमते जा रहे थे , दोनों के हाथों की उंगलियन एक दुसरे के बालों और सर को सेहला के डील्स दे रही थी ....... एक घंटे से ऊपर का था पहला खूंखार मिलान पर 10 मं भी नहीं गुजरे होंगे दोनों फिर से उत्तेजित हो गए.....

लुंड , छूट से हल्का ढीला होकर बहार नहीं आया था पर फिर से चुदाई का नेक्स्ट दौर शुरू हो गया ...... मगर अब बड़ी सेंसुअल तरीके से एक दुसरे को सेहला के आराम से धक्के मारते चूमते हर 5 मं में पोस्टिव चेंज करते एक दुसरे के ऊपर नाग नागिन की तरह लिपटे अपने प्यार को नयी परिभासा देते मधुर मिलान कर रहे थे ...... कक्ष में ठप्प ठप्प पूछ पूछ और सारू की चूड़ी और पायल के घुंघरू की आवाज आती ...... दोनों के होंठ नहीं बस आंखें hi बात करती , यह भी कुछ सबसे अलग मिलान hi था जिसको सारू पिछले जनम में मरूमस्त आसान बोलती थी यानी दोनों ज्यादा से ज्यादा अपना हर अंग जोड़कर बस छुडाम चुदाई करेंगे बस दोनों गांड हिला के , हर पोजीशन में चूमा छाती नहीं रुकनी चाहिए और मोह से सिर्फ सिसकी और उमाड़ की आवाज आये पर कोई स्तब्ध नहीं .

सारू ने लास्ट में आर्यन के ऊपर लिअत के जब 5 बार चरम पाया तोह उसको भी चरम देकर शाखालित की अपनी छूट में विरए भर के ...... सारू उसके सीने पे अपनी जीभ फिरती आर्यन को शांत कर रही थी बस हो गया .

आर्यन का स्टैमिना इतना था की पूरे राजमहल की औरशन को चैलेंज लेकर छोड़कर रुला दे पर आज सारू ने सभी हदें पार कर आर्यन को चुदाई का असली सुख और तृप्ति दी दो बार . दरसल वह अपने पति रुपी योद्धा को इसकी जीत के बाद स्पेशल इनाम अपने जिस्म से सेवा करके दी .

(पुराने ज़माने में योद्धा जब जीत के आते थे तब उनकी जितनी लुगाई और रखीअल होती बारी बारी उससे छोड़कर उसकी वीरता पे अपनी प्रेम मोहर लगाती और एहि टाइम होता था जब दूसरी नयी औरत भी योद्धा की होना चाहती थी .)

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जब दोनों नार्मल हुए तोह दोनों एक मं खूब हास्य ..... आर्यन ने सारू के सर के बालों को ऊँगली से कंघी की तातरः सहलाने लगा तब सारू बोली ," दीप्ति को अब तू खुश कर पायेगा , लड़की अपनी सुहागरात पे दर्द भी चाहती है निचले हिस्से में और दिल में प्यार भी ...... पर जीती हुयी औरत को अपने पौरष बल का लोहा मनवा देना ताकि जिंदगी भर वह अपनी औकात न भूले ..... प्यार करने के लिए पूरी जिंदगी उसकी पड़ी है .....वह अच्छी लड़की है उसके चक्कर में अपनी िश बुद्धि लुगाई को मत भूल जाना ".

औरत अपना वाहवार कैसे बदल सकती है, जिसको भी पता है की आर्यन आज रात दीप्ति से गंदर्व विवाह करके उसके साथ मिलान भी करेगा सुहागरात पे सब को इर्षा hi हुयी दीप्ति के भाग्ये से सिर्फ मीणा और अणि की छोड़कर ......

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जबर सिंह अपने बाप को घूरता हुआ रूम से बहार निकल दूर बांध कर एक थप्पड़ महामंत्री ( राजा त्रिभुवन सिंह का महामंत्री ) को दिया और थोड़ा खीज के बोलै धीरी आवाज में ," कुत्ते जब मेरे बाप से मिल लिया था मुझे क्यों धोका दिया ".

महामंत्री ने पीछे खड़े 4 सैनिक उसके आगे खड़े हुए तोह उसने उनको हटने को कहा और गर्व से बोलै ," राजा जबर सिंह जी , मैंने आपकी नमक हलाई करते हुए साथ दिया फिर भी जिन्दा हूँ क्योंकि बड़े राजा साहब ने ऐसा ऑफर दिया की में मन नहीं कर सका वही बता ने आया हूँ सुनोगे या मार खा के hi सुनाए ".

राजा जबर सिंह ने आसपास देखा तोह उसका कोई आदमी पास नहीं था पर महामंत्री 4 सैनिक गन और तलवार से लेश देखकर डर गया . मगर था तोह धूर्त hi तोह बोलै ," तुम जैसा सोच रहो हो में वैसा नहीं हूँ में भी राजकुमारी दीप्ति के साथ hi हूँ पर मेरे खुद के बाप ने मुझे मजबूर कर दिया है . आज तक मैंने तुम्हे गलत आदेश भी दिए पर राजा त्रिभुवन सिंह को भी पता था और उनको तुम्हने अंजाम दिया की नहीं ?"

आगे बढ़कर महामंत्री के कंधे पे हाथ रख उसके कान में बोलै ," दीवारों के भी कान होते हैं ".

महामंत्री ने अपने साथ सैनिक को बहार भेजा और खुद राजा जबर सिंह के साथ दुसरे कमरे में चला गया तब राजा जबर सिंह बोलै ," यह तू भी जानता की में अपने बाप के समय कुछ भी नहीं ...... यह दिव्या तलवार , खज़ाना क्या तू ने देखा है या मैंने फिर तू बोल मैंने कब आर्यन का विरोध किया सिर्फ िश लिए की वह दूसरी कासते का है बस रघुभार सिंह के जिन्दा रहते यह हो जाये ऐसा कभी हुआ नहीं ..... याद कर मेरे िश बाप ने कितनी औरशन के मर्द मार के अपने बिस्तर पे सुलाई हैं अपने टाइम पे और तू भी तोह चौदर्य है राजस्थान का तू ने भी बड़े भाई देखा hi होगा ..... मुझे देख मैंने बिस्टेर पे ुष औरत को लाया जोह कीमत लेती हो और यह जोह मेरा बाप है अभी ध्यान में गेरुआ विस्तार में बैठा है सबसे पहले आर्यन जोह राजकुमारी दीप्ति का होने वाला घरवाले है उसके घर की औरत को नंगा करेगा फिर तैने उसका साथ दिया तोह राजकुमारी के साथ तेरे घर की औरशन का देख लियो आखिर तू किसके साथ है ?"

महामंत्री गुस्से से तमतमता हुआ राजा रघुभार सिंह के रूम में घुस उसकी तरफ तलवार लेकर आगे बढ़ा तोह जबर सिंह ने अपनी सीधे हाथ में चिप्पी एक मोठे सोये जैसी छोटी सी कुर्ची से उसकी गर्दन पिरो दी और खून रिसने लगा . महामंत्री दर्द से तड़पता दम लेने के लिए जमीन पे पड़ा झटपटा रहा था .

जबर सिंह अपने बाप की आंखें खुली देख के बोलै ," पिताजी यह नमक हराम आप को मारने वाला था ".

राजा रघुभार सिंह ने बगैर कोई बात बोले ज़मीन पे महामंत्री के तड़पते सरीर की तरफ हाथ बढ़ा के कुछ आँख बंद करके बोलै और उसके hi जैसा महामंत्री उसके सरीर से निकल के जीवट बहरूपिया खड़ा हो गया पर जबर सिंह की यह सब देख के पहात गयी थी .

एक महामंत्री जमीन पे खून से लथपथ और दूसरा उसके सामने जीवट पर अगले hi पल ुष बहरूपिया महामंत्री ने अपना मोह खोल आग बरसता हुए ुष असली महामंत्री की बॉडी जला के राख कर डाली कुछ hi सेकंड में .

रघुभार सिंह ," तुझे भी ऐसे hi मरना हो तोह यहीं खड़ा मत रह और मेरे साथ चल नालायक तेरे से कोई काम नहीं हो सकता ".

फिर ुष बहरूपिया महामंत्री को बोलै," आर्यन के परिवार के जाने के बाद राजमहल पे अपना कब्ज़ा रखना बगैर किसी को पता चले , राज परिवार के किसी भी सदाश को नुक्सान मत पहुंचा देना ".

वह भी सर झुका के बोलै ," जैसे मालिक की इच्छा "....... और वहां से गायब हो गया .

जबर सिंह अपने बाप के पीछे चलता हुआ सोच रहा था की में कमीना हूँ या मेरा बाप मुझसे भी ज्यादा ..... पर रघुभार की आवाज मास्टिक में सुनकर "में कमीनेपन तेरा बाप हूँ पर उसूल का पक्का हूँ "..... झटका hi खा गया लेकिन अगले पल अपने बाप के साथ समशान घाट में पाकर घबरा गया.

राजा रघुभार सिंह ने आँख बांध करके जबर सिंह का हाथ पकड़ के उसको वहां से गायब कर यहाँ समशान में ले आया था.

अगले hi पल रघुभार सिंह ने अपने कमंडल से जल निकाल अपने हाथ से सब तरफ फेंका और एक साथ 700 से ज्यादा पुराने सैनिक जोह कितनो सालों से यहाँ दफ़न थे सब जिन्दा होकर कबर पहाड़ के सामने आ गए ...... सबका डरवाना रूप देखकर जबर सिंह डर कर लगभग अपने कच्चे में लगभग मूट hi दिया था ...... उसके सामने सारे नरकंकाल का रूप धारण किये अपने अस्तर लिए खड़े थे .

राजा रघुभार सिंह ," तुमको िश जीवन से मोक्ष दिला दूंगा अगर मेरे कार्य में सफल हो गया ...... सही टाइम पे तुमको याद करके बुला लूंगा अब तुम जा सकते हो "....... सारे गायब हो गए और राजा रघुभार सिंह फिर से राजा जबर सिंह को अपने साथ उसके hi ख़ुफ़िया आड़े पे ले आया .

जबर सिंह अभी भी थार थार कांप रहा था पर रघुभार ने उसको सामने चेयर पे बैठने को कहा .

रघुभार सिंह ने सांत लहजे में कहा ," जबर तू मेरा इकलौता पुत्र है पर तुझमे राजा होने का एक भी गुण नहीं था पर अपनी चालाकी से तूने काफी अच्छे से सब संभाला पर तू और त्रिभुवन ने आर्यन के मिलने के बाद बहोत गलतियां की . यह स्वयंवर नहीं रखना था दीप्ति का आर्यन से रिश्ता कर उसको दिव्या तलवार और खज़ाना ढून्ढ ने में मदद करते तोह आर्यन, दीप्ति को दोनों दे देता और उससे तुम्हे मिल जाते और तुमसे हमारे खानदान को . तुम क्या समझते हो तुम ुष तलवार को धारण कर सकते हो कदापि नहीं मगर हमने अपने को उसको काबिल कितनी घनघोर तपस्या के बाद बनाया है . आर्यन की जिस सगी मम्मी सारू और भें अनीता पे तुम्हारी बुरी नज़र है और ुष त्रिभुवन की भी थी ....... गलती से भी नज़दीक मत चले जाना उसके परिवार की किसी औरत के पास ...... वह आर्यन से भी ज्यादा शक्तिशाली हैं और उनके hi कारन आर्यन बहोत ताकतवर है . वह अणि िश दुनिया की नहीं पुराणी दुनिया की शक्ति रखती है एक सेक् में पूरा धरती लोक उजाड़ देगी ".

आज सायद जबर सिंह का सबसे बुरा दिन था और एक के बाद एक सदमे मिल रहे थे और बेइज्जती अलग हो रही थी , थोड़ी डिअर चुप रहकर जबर सिंह कुछ सोच के बोलै ," आप कह रहो की आर्यन दिव्या तलवार ले आएगा और हम उसको हासिल कैसे करेंगे जब उसकी माँ और भें इतनी शक्तिशाली हैं फिर तोह हमको कुछ नहीं मिलेगा ".

राजा रघुभार सिंह पहली बार अपने बेटे की नादानी पे मुस्करा के बोले ," कुछ पत्ते छिपे hi रहने दो , समय आने पे पता चल जायेगा ...... राजमहल में जैसे रतिदेवी ने त्रिभुवन से कहा उनको कुछ नहीं चाहिए बस दीप्ति को विवाह करके ले जाएंगे . एक बात तोह साफ़ है रति को कोई लालच नहीं और ना hi आर्यन के परिवार में किसी को , वह यहाँ दिव्या तलवार और खज़ाना के लिए नहीं दीप्ति के लिए आएं हैं और वही आर्यन भी कर रहा है दीप्ति की जान बचा रहा है पर तुम दोनों सब गुड़ गोबर कर दिया ".

राजा जबर सिंह ," पिताजी वह दूसरी ब्रिडारी का था और हम भी आपकी तरह ऐसे कैसे मान जाते हम ने सोचा अपने अहसान के निच्चे दबा के उससे दिव्या तलवार और खज़ाना लेकर उसको रस्ते से हटा देते या दीप्ति से शादी करा देते अगर कोई चारा न बचता ".

रघुभार सिंह ," तू नीरा hi बेवकूफ है में बहुडरौं की कदर करता हूँ और आर्यन जैसा शूरवीर योद्धा हो तोह एक क्या अपनी 3-4 बेटी उससे बाह्य दूँ ..... वह ताकतवर है , दिमाग़ का धनि है और पैसा रुतबा तोह यहाँ के किसी भी राजा से काम नहीं है उसके पास ........ आज वहां 25000 की भीड़ में ऐसी कोनसी औरत होगी जवान से लेकर भुद्धि तक जोह ुष्पर फ़िदा न हो गयी होगी बता है कोई जवाब और दूसरा दीप्ति कोई साधारण लड़की नहीं है वह दिव्या कन्या है उसको चुना तोह दूर उसके पास कोई नहीं फाटक सकता और आर्यन उसको अपनी गॉड में बिठा के पूरा स्टेडियम घुमा रहा था स्वयंवर जीत के ....... सच्ची पतिव्रता धरम वाली लड़की को हराना मुश्किल नहीं नामुकिन है फिर उसके पति को दुश्मन नहीं दोस्त बना लेना चाहिए पर तू नहीं समझेगा ...... खैर तू वही कर यानी कुछ मत कर सब धूर्त जोह होगी तेरे नाम पे होगी और गाली भी खाने को मिलेगी खा लेना . आर्यन के परिवार की किसी भी औरत पे निगाह मत डालना जिन्दा रहेगा. दिव्या तलवार और खज़ाना राजपूताना में hi रहेगा बस आर्यन को जीत के आने दो ".

राजा जबर सिंह ," पर पिताजी वह राजपूत नहीं है ....... "

रघुभार सिंह ने उसको बिच में टोक के कहा," मालूम है पर स्वयंवर जीतने के बड़ा अब वह तेरा मालिक भी है यह तू ने hi बांया है , बस में चाहता हूँ तू मेरे खानदान का वंश आगे बढ़ा पर वह भी तुझसे नहीं हुआ ...... जा राजमहल तुझे सब पूछ रहे हैं . में अपने ध्यान ख़तम करके आता हूँ और हाँ आर्यन की फॅमिली रात का भोजन करके वापस जा रही है ".

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बिना ने 2 प्लेन रात 10 बजे आर्यन के कहने पे त्यार रखे थे उसकी फॅमिली को वापस दिल्ली ले जाने के लिए जिसको सबको इनफार्मेशन देदी गयी थी ..... राजा त्रिभुवन सिंह के परिवार ने उनको रुकने का बोलै पर डॉ अंजू और ठकुरियन रूपा ( रति की जगह ) ने बड़ी वीरनामाता से कहा की अगली बार अपनी बहु दीप्ति को विवाह करके hi ले जाएंगे पर आप भी हमारी हवेली आएं और दीप्ति को आर्यन से मिलने के लिए न रोके वह वहां जरूर आणि चाहिए . आर्यन और गीता तोह रुक hi रहे हैं .

राजा त्रिभुवन ने कहा ," डॉ मैडम हम सब आपके परिवार का अहसान कभी नहीं भूल सकते पर राजकुमारी दीप्ति हमेशा आर्यन के परिवार की अमानत हमारे साथ है जब पहले भी दिल करे विवाह का बता देना , वैसे अब गीता बेटी मेरी बड़ी बेटी की तरह है ".

राजा त्रिभुवन सिंह ने हाथ जोड़कर कहा ," मेरा सबकुछ अब कुंवरजी ( आर्यन ) और बेटी दीप्ति का hi तोह है क्यों छोटी माँ ?"

रानी मिरदुला ," हम बेटी वाले हैं, आप सब के आगे हम नतमस्तक hi रहेंगे डॉ अंजू मैडम ".

डॉ अंजू ," रानी जी ऐसा मत बोलिये हमने आपसे बड़ा दिल किसी का नहीं देखा फिर आप भूल रहो हो जिसने इतना कोहराम मचा दिया था, गीता को और उसकी छोटी भें hi है दीप्ति तोह अपनी भें का हक़ वह खुद ले लेगी आपसे ..... बस आप मेरी दोनों बेटियों का ध्यान रखना ".

बातों के साथ 9 बजे साही रात्रि भोज शुरू हुआ सब उपस्थित थे सिर्फ आर्यन सारू और रति ( सू रही थी नींद की गोली खाकर ).......

आर्यन और सारू के लिए पुछा गया तोह मीणा ने कहा ," दोनों शिव भकत हैं तोह प्राचीन मंदिर में दर्शन करके आ रहे हैं बस आधे घंटे में ".

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उधर सारू के कक्ष में आर्यन ने सारू की ुनचुइ गांड की सिलाई उदेढ़ hi डाली थी जब आधा टोपा कुटिया पोज़ में सारू की गांड फाड़ने वाला था ..... "मम्मी!!!! डैडी!!!! ........"

अभी आवाज गेट के बहार hi थी पर दोनों झट से अलग हो कपडे ढून्ढ ने लगये .....

आर्यन ने सारू का बाल पे लपेटा हुआ निचे गिरा टॉवल उठा लिया और सारू ने बिस्तर की चादर लपेट ली और महिमा बगैर दूर खोले रूम के अंदर दूर को पार करती एंटर हुयी जबकि सारू की शील्ड तोह दूर से पहले hi पार कर गयी थी .....

चादर अपने बदन पे लपेट सारू उसको देख कालीन पे बेथ दोनों हाथ अपनी छोटी बच्ची माहि के लिए फैला दी पर उसके पास पहोचने से पहले आर्यन ने उसको हवा में उठा लिया तोह जोरसे बोली," डैडी hi hi hi hi ..... डैडी ...... ".

आर्यन ने सारू को इशारा भर सा करा दिया और महिमा अपने डैडी के गाल पे किसी करने लगी और आर्यन भी अपनी बेटी को प्यार करके खेलने लगा ...... जोह शील्ड कोई नहीं तोड़ सका वह महिमा ने भेद भी दी और अंदर आ गयी अपने को रेडी करते हुए सारू ने जब बड़े गुरूजी से पुछा ," गलती तुम्हारी है बड़ा माहि और छोटे माहि को दिल से अलग करके सोचे दोनों एक जैसे हैं तुम्हारे लिए और तुम्हारा अपना तोह अंदर आ सकता है जैसे बेटे जैसा घोडा अर्जुन आया था , तुम्हारी आज बेटी जैसी महिमा फिर एक और आ सकता है जोह तुम्हारे दिल में hi रहा है तब तुमको पता चलेगा ".

सारू डरते हुए ," राज नहीं आना चाहिए कभी ऐसे सामने गुरूजी , में जान दे दूंगी ".

बड़े गुरूजी ," वह नहीं कोई और है जिसको इतना प्यार करती हो ( गीता का नाम सारू के दिमाग़ में कोंढा, तोह बड़े गुरूजी बस मुस्करा दिए ) ...... आर्यन को उसके कर्तव्य पे जाने दो पुत्री वह तुमसे ज्यादा प्यार किसी को नहीं करता पर रिश्ते की वजह से किसी को दिखेगा नहीं पर प्यार तुम्हारा उसके लिए हमेशा पिछले जनम की तरह अमर रहेगा ".

महिमा आर्यन के सीने पे बैठी चिडया ुध खेल रही थी तब सारू ने बाथरूम से कपडे पहनकर आकर उसको अपनी गॉड में लिया और बोली," आजा मम्मी दुधु पिलेंगी ".....

आर्यन बाथरूम में जाकर रेडी हुआ, कहाँ तोह आज सारू की गांड फ़तेह करने वाला था पर बहार आयी मीणा ने सारू का महिमा के लिए प्यार को हथियार की तरह उसे कर उसका शील्ड भेद दिया अणि की सलाह पे .

मीणा हसकर अणि से ," चल अब यहाँ से नहीं तोह मार पड़ेगी और मुझे 2% शेयर चाहिए जीतने के बाद तेरी कंपनी में ".

अणि ने आगे साथ चलते हुए मीणा का गाल चूमा ," मीणा दीदी खुद 5 लाख करोड़ की मालकिन हो पर अपनी गरीब भें को लूटने लगी हो ".

मीणा ," शह्ह्ह्ह ढेरी बोल कोई सुन्न लेगा ...... और मुझे नहीं चाहिए यह पैसा , कंपनी बस मेरा भाई अच्छा रहे खुश रहे ".

अणि कान में ," जिस दिन रति देवी को पता चला की साड़ी दौलत और किंगडम की मालकिन आप हो मार न देगी आपको ".

मीणा हसकर ," हम दोनों भें भाई मर्डर भी जाये या जिन्दा रहे हक़ तोह तेरे पास है पावर ऑफ़ अटॉर्नी का जिस से साड़ी पावर तेरे पास hi आएगी और तू नानी माँ को जलील करने से नहीं चुकेगी ..... याद रखना मेरी बात न मुझे या मेरे भाई को यह सब चाहिए और आर्यन साथ है तोह नानी माँ को भी नहीं कुछ नहीं चाहिए . अणि यहीं तू रति देवी से हारेगी. वह आर्यन के लिए सब कुछ हार सकती है और तू अपने मकसद के लिए आर्यन को भी हार सकती है ". बात मीणा की सच्च hi थी पर कड़वी भी .

दोनों बातें करती निकल गयी गीता से मिलने उसके कक्ष में जहाँ दीप्ति और डॉली , नेहा भी थी .

गीता आज रात 3 बजे अपने खंडन का खज़ाना आर्यन से खुलवाने वाली थी बड़े गुरूजी से सलाह करके ..... इसी खजाने ने गीता की जान को इतने साल खतरे में रखा था पर आज दोनों अपने चाचा मां को भी सज़ा देने का टाइम आ गया था ...... लालच ने 23 साल बाद एक छोटी नवजात बच्ची की जिंदगी आज किस मोड़ पे लाकर कड़ी कर दी थी .

हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट 34

PART - 3

थोड़ा पीछे चलते हैं .....

गीता के कक्ष में जब रति और सारू के आने की बात हुयी तोह अणि वहां से दीप्ति को अपने साथ ले गयी .

अणि जब दीप्ति को लेकर उसके कक्ष में छोड़ने आयी तोह उसने अणि को बैठने को कहा . अणि भी उसका साही राजकुमारी वाला कक्ष देखकर बोली ," इम्प्रेससिवे , वैरी निकलय अरेंज्ड बूत यू योरसेल्फ दो आईटी विथ सो मान्य ऑफ आर्यन भैया स्केचेस "...... कक्ष में बहोत सारे आर्यन के स्केच थे जोह दीप्ति ने खुद अपने हाथों से बनाये थे पर अभी तक आर्यन भी यहाँ नहीं आ पाया था .

दीप्ति ने अणि की तरफ देखा और मैं में सोची ," ऑफ कोर्स आर्यन की सगी भें hi हो सकती है इतनी खूबसूरत और प्यारे दिल वाली , बिलकुल बिंदास काश में भी इतनी सूंदर होती".

अणि हसकर ," में दिल की बात सुन्न सकती हूँ और सुबह का आपको पता है भाभी. वैसे आप मेरी नजर में बहोत खूबसूरत हो और आपका दिल भी बस भाई पे कब्ज़ा बांये रखना ".

दीप्ति थोड़ी जिगेसा से उसका हाथ पकड़ अपने बाजु में बिस्टेर पे बैठकर बोली ," वही तोह अनीता जी , जब माहि को स्टेडियम में उन्होंने पिंजरे में कैद किया आप कुछ नहीं की न मीणा दीदी न गीता दीदी क्यों? ..... में हरपाल यही सोच रही थी आप सब इतनी पावरफुल हो कुछ न कुछ करोगी या फिर मीणा , गीता दीदी , डॉली या नेहा पर मैंने Dimple-Payal दीदी की तरफ बाद में देखा पर किसी ने उनकी ( आर्यन ) मदद नहीं आखिर क्यों ?"

अणि ने अपना दूसरा हाथ अपने हाथ पे रखे दीप्ति के हाथ पे रखा ," स्वयंवर आपका था और भाई आपके लिए hi लड़ा , वैसे उसको किसी की हेल्प की जरुरत नहीं थी ........ ुष समय आपको भी अपने प्यार को बचना था hi फिर हम बिच में क्यों आते भाभी ".

हर बार अणि का भाभी कहना दीप्ति को सबसे ज्यादा सकूं देता फिर वह आर्यन की सगी भें थी और बहोत पावरफुल यह दीप्ति से ज्यादा कोई महसूस नहीं कर पाया पर उम्र से छोटी होने के बाद भी दीप्ति का पूरा सम्मान करती थी ..... यह hi खासियत दीप्ति को गीता से जुड़ा करती थी की वह सबको प्यार और इज्जत की नज़र से देखती थी इतनी बड़ी राजकुमारी और होने वाली राजपूताना की महारानी होकर भी और गुस्सा तोह उसका आज तक किसी ने नहीं देखा पर गीता के हाव भाव hi गुस्से से शुरू होने वाले होते हैं , वह तो किसी औरत का किसी मर्द को मर्द नहीं समझती अपने सामने .

दीप्ति थोड़ा सीरियस होकर ," बस ऐसा लगा उनकी (आर्यन ) बेइजती करके भार कर रहे हैं पर डॉ सा ( जबर सिंह) को में जानती हूँ वह गेम जरूर कहलेंगे ....... मैंने भी उनकी तरह पहली बार गेम कहला पर आज में उनकी (आर्यन की) जीतने से नहीं बल्कि अपने सच्चे दिल से दासी बनकर उनकी जीत पे मोहर लगा दूंगी तुम देख लेना".

अणि (व्) अपने मैं में ," दम है िश लड़की में इसको कुछ नहीं चाहिए पर गीता मौसी के लिए मुश्किल होगी , सब इसको hi प्यार करेंगे ".

अणि ," अच्छा भाभी में चलती हूँ आप भी अपनी मम्मी के साथ टाइम स्पेंड करो मुझे भी काफी कुछ अर्रंगे करना है ".

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मीणा के कक्ष में डॉली अपनी दोनों झांघो के बिच तकिया देब्ये अपनी छूट कपडे के ऊपर से हलके हलके रगड़ रही थी . मीणा , गीता आपस में बात कर रहे थे और नेहा उनकी बात सुन्न रही थी कुर्सी पे बैठे हुए . नेहा को डॉ सलोनी ने रति के पास रहते हुए वापस भेजा था .

गरिमा , डॉ सलोनी की बेटी अब ठकुरियन सुचित्रा की बेटी रूबी से काफी घुलमिल गयी थी और दोनों की दोस्ती भी हो गयी ..... दोनों हम उम्र थी और दोनों मब्ब्स कर रही थी और 2ंद ईयर पास कर 3रद ईयर में पहुंची थी पर रूबी अभी जयपुर के मेडिकल कॉलेज में थी और गरिमा का एडमिशन अब कानपूर से ट्रांसफर होकर दिल्ली के मेडिकल कॉलेज में आर्यन ने करा दिया डॉ कुलदीप का नाइजीरिया विसर्जन करके .

गरिमा अब राजमहल के 3रद फ्लोर पे रूबी के साथ बैठी बियर पि रही थी और उसकी पर्सनल लेडी गार्ड और 2 आर्यन के गार्ड्स रूम से बहार खड़े थे . रूबी चियर्स करती हुयी पहला सवाल पूछी ," बॉयफ्रेंड ??? ".....

गरिमा हस्ते हुए ," मेरे भाई को देखा है कोई लड़का पास फाटक भी नहीं सकता, वैसे मेरे पास टाइम नहीं है िश सबके लिए अपनी स्टडी में बिजी रहती हूँ ".

रूबी ," मतलब बोरिंग लाइफ , तू एक काम कर यहाँ जयपुर ट्रांसफर करवा ले हम खूब मस्ती करेंगे और बर्फ भी दिलवा दूंगी तुझे बहोत सारे लड़के हैं मेरे ग्रुप में ".

गरिमा हसकर ," अभी जोइनिंग भी नहीं दिल्ली में ट्रांसफर लेकर फिर भाई मुझे कही जाने नहीं देगा , बहार सिक्योरिटी देखि फिर भी मीणा दीदी से परमिशन लेकर आयी हूँ तेरे पास ..... तुझे ना नहीं बोल पायी पर इतना तोह में जान गयी हूँ तू भी किसी ख़ास काम से मुझे बुलाई है पार्टी करने ...... सॉरी अगर बुरा लगा तोह बस में थोड़ी मोह पहात हूँ ..... hi hi hi hi".

रूबी हसने लगी और बोली ," में तुमसे ज्यादा हूँ और गलती से आर्यन भैया को भी भला बुरा बोल दी जोह मुझे पहली hi बार में छोटी भें की तरह गले लगा लिए अब उनके सामने जाने से डर्टी हूँ "...... और रोने लगी ......

गरिमा ने अपनी बियर टेबल पे रख रूबी को अपने गले लगा के बोलै ," अरे इतनी ब्यूटीफुल लड़की रोटी हुयी अच्छी नहीं लगती फिर अगर आर्यन भैया की बात है वह किसी से नाराज नहीं होते और ब्यूटीफुल गर्ल्स से तोह बिलकुल नहीं ..... hi hi hi hi ".

रूबी भी अपने आंसूं पहुंचते हुए," हे तू चीप यार , में उनको भाई मानती हूँ बस एक बेवकूफी की वजह से गलती हो गयी और उनको नाराज कर दिया".

गरिमा ने अपनी बोतल उठा कर सिप लेते हुए कहा ," रूबी दो ऑप्शन है या तोह रोटी या डर्टी रह मगर आर्यन भैया को दिल से प्यार करती है भाई वाला या वह वाला ( आँख मारी ) तोह जा के हक़ से मांग वह कभी मन नहीं करेंगे फिर तेरी माँ तोह मामीजी hi उनकी तू ऑटोमेटिकली भें बन गयी है उनकी ".

रूबी अपनी आंखें बड़ी करती ," व्हाट देय यू मैं यार , में बड़ा भाई hi मानती हूँ आर्यन भैया को और मेरी मम्मी की वजह से नहीं ".

गरिमा ," थें गुड फॉर यू क्योंकि उनको देखकर हम सिस्टर्स क्या हमारी मम्मी भी वेट हो जाती है , हे िश सो हैंडसम एंड अट्रैक्टिव कोण औरत बच पायेगी यार और ऊपर से किलर हुनक वाली पर्सनालिटी है उनकी .... hi hi hi hi ".

रूबी ने गरिमा के हाथ पे मारा," में तुमको सीढ़ी साडी लड़की समझी थी पर तुम तोह कुछ और hi लग रही हो ".... hi hi hi hi .

गरिमा इत्र के ," में वेरिगिन हूँ यार , अपने बड़े भाई आर्यन से दिलोजान से प्यार करती हूँ और वह hi मेरे सब कुछ हैं जैसे तेरे लिए बन गए , अगर गलत हूँ तोह यू कैन स्लैप में "....... है है है है ..... दोनों मजाक में कुछ ज्यादा hi खुलने लगी .

रूबी भी हैरानी से गरिमा को देखती रहे फिर कुछ सोचकर अपनी चेयर से तक लगा बियर पीती गरिमा की तरह सूरज को ढलते देखती रहे ...... बियर बोतल ख़तम होने के बाद रूबी दूसरी दोनों के लिए फ्रीज से निकाल के लायी और खोल के गरिमा की तरफ की और पूछी ,"कब से अपने बड़े hi भाई को प्यार करती हो , पता है न उनकी आलरेडी कितनी होने वाली बीवियां हैं ?"

गरिमा ने चियर्स करते हुए कहा ," जबसे होश संभाला , मेरे लिए सब कुछ मेरा बड़ा भाई hi है ..... मुझे सब उसने hi सिखाया बस में उसकी बेटी जैसी हूँ पर अब जवान हो गयी हूँ और उसके अल्वा जिंदगी में कोई मर्द आया hi नहीं उसके जैसा और न आएगा बस अभी उनको बोलै नहीं है पर वह मेरी खाविश मुझसे पहले समझ जाते हैं उनको अंदाज़ा होगा ".

रूबी अपना थूक गटककटे हुए ," क्या वह मुझे भी ...... ी मैं तो से ..... यू अंडरस्टैंड न ".

गरिमा ने उसका हाथ पेट किया ," बहोत बड़ा दिल है मेरे भाई का तू कभी भी राखी बांध लेना ".

रूबी थोड़ा चिढ़कर ," तू उनकी क्लोज कजिन सिस्टर होकर लव करेगी और में क्यों राखी बांधों में भी प्यार करती हूँ आर्यन से ".

गरिमा ने थप्पड़ खींच के मारा ," तमीज से बात कर उनका नाम इज्जत से ले आर्यन भैया बोलकर वह तेरे बड़े भाई लगते हैं और तू उनकी मामीजी की बेटी , रहे बात प्यार की वह उनको फील करा दे वह कभी मन नहीं करेंगे पर अगर यह सब तेरा नाटक है तोह दुर्र रहे वार्ना कहीं की नहीं रहेगी . हमारा भाई हम सब बहेनो की शान है तोह पहले भें बनना सीख और उससे पहले अच्छी एक अच्छी बेटी बन क्योंकि मेरे भाई को पसंद नहीं कोई भी उसकी मम्मी की रेस्पेक्ट न करे और तेरा जल महल का किस्सा हम सबको पता है ".

बियर की बोतल वहीँ रख गरिमा रूम से बहार निकली और अपने गार्ड्स के साथ निच्चे आकर मीणा के कक्ष में पहुंची जस्ट उनके पीछे ...... तब मीणा ने पुछा कैसी रहे पार्टी लगता है सबक सीखा हे आयी है पर अच्छी लड़की है रूबी बस हर दिन उसका घमंड टूट रहा है , तुझे फ्रेंड मानती है .

गरिमा लापरवाह होकर बोली ," थोड़ी नकचढ़ी है पर में सुधर दूंगी जब लड़के सुधर दिए लड़कियां क्या चीज़ है और डॉली दीदी कुछ तोह शर्म करो हम सब भी यही हैं वार्ना आप वाशरूम में जाओ ".

डॉली भी ऐसे hi बीएड पे पड़े हुए ," मुझे भाई की याद आ रही है तोह क्या करूँ ?".

सबका ध्यान डॉली पे गया तोह गीता ने उसको गुस्से से घूरा तोह नज़रे झुके के तकिया साइड रख वाशरूम में चली गयी तब बाकी तीनो हसने लगे .

गीता ," बेशर्मी की भी हद होती है , यह छटांकि सी लड़की के अंदर कितनी आग है ".

मीणा ने हसकर कहा ," गीता दीदी , उसको अपना भाई जब 24 घंटे यादों में hi सटेगा तोह क्या करेगी बिचारि फिर दीप्ति से आर्यन के विवाह का सुनकर तड़प रही है उसके प्यार के लिए ".

गीता थोड़ा सीरियसली बोली ," गरिमा बीटा तू बहार जा अपनी मम्मी के पास हम कुछ प्राइवेट बैठें करने वाले हैं और अणि को यहाँ भेज देना ".

गरिमा का चेहरा उतर गया पर जब वह कड़ी होकर जाने लगी तब मीणा ने कहा ," तू यहीं बेथ गरिमा और अब तू भी बड़ी हो रही है तोह बस बीच में टोकना मत सिर्फ सुन्ना ".

गीता कुछ कहती तभी अणि अंदर आयी ," सब यहीं हैं और डॉली कहाँ है ".

मीणा ने किसी के बोलने से पहले बोलै," फ्रेश होने गयी है , आगे बता क्या करना है ?"

अणि ने गरिमा की तरफ इशारा किया तब मीणा ने कहा ," यह भी तेरी छोटी हैं उसको भी हक़ है सब जान्ने का ".

अणि भी मुस्करा के गरिमा के गले लग ," अरे मेरी सबसे फेवरेट सिस्टर है यह और हर साल कॉलेज में टॉप करती है , इसको में न्यूरोसर्जन बनोगी ..... hi hi hi hi .... पूछह पूछह "..... गरिमा का चेहरा चूमने लगी गीली किसी करती .

गरिमा ," hi hi hi hi ..... अणि दीदी यह मत करो आप पूरा चेहरा गीला कर देती हो किसी करके ..... दुर्र हटो मुझसे में लड़की हूँ ".

अणि ने उसका गाल जीभ से चाट के कहा," वह जब भाई तेरे गाल छाते तोह प्यार और हम चाट ले तोह अत्याचार क्यों ?"

नेहा भी हसकर बोली ," भाई की तोह हर बात मानती है यह , इसके आइडियल हैं वह क्यों गरिमा ? "

अणि ," अच्छा बीटा , जैसे तेरे आइडियल थे अब तू उनके hi नाम का सिन्दूर माथे पे लगने को घूम रही है ".

गीता थोड़ा गुस्सा से ," िश डॉली को बुलाओ और ख़ज़ाने का क्या करना है ? मतलब कब खोलना है और मुझे अपने सो कॉल्ड दो गाओं भी जाना होगा उनकी औकात दिखने ".

मीणा ," आप आर्यन और दीप्ति के साथ वहां जाना कोई सर क्या आँख नहीं उठा पायेगा और उन दोनों कुत्तों (गीता के सेज मामा और चाचा ) को वहीँ सज़ा देना ".

अणि ," बात सही है मीणा दीदी की और बड़े गुरूजी के अनुसार आज रात के 3 बजे खज़ाना खोलना और अभी उसको यहीं रहने दो बाद में हवेली शिफ्ट करा लेना. वैसे गीता मौसी कुछ हम बहेनो को भी मिलेगा आपके ख़ज़ाने से ?"

सब ने बड़ी जिगेसा से गीता की तरफ देखा तोह वह भी हस्ते हुए बोली," सब तुम्हारा hi है जोह चाहे ले लेना , अब खुश ".

डॉली बाथरूम से बहार आकर ," में तोह अपनी दोस्त दीप्ति के साही ख़ज़ाने से गिफ्ट लुंगी ".

गीता चिढ़कर ," उतर गयी तेरी गर्मी !!!! दीप्ति तुझसे बड़ी है और अब वह महारानी भी बनेगी यहाँ की और राजपूताना कौंसिल की चेयरपर्सन तोह थोड़ा छोटे की तरह इज्जत करना सीख ले और तुम सब भी िश बात का ध्यान रखना ".

मीणा हसकर ," इज्जत तोह हम बस एक hi की करेंगे...... क्यों नेहा? ...... सिर्फ आपकी क्योंकि आप hi हम सबकी बड़ी दीदी हो और जाने भी तोह आगे में बड़ी है पर आपकी कितनी इज्जत करती है वैसे hi दीप्ति को भी रहना होगा . महारानी वह बाद में है पहले हमारी भें बनेगी आर्यन से शादी करके ".

नेहा ," वैसे भी दीप्ति ने भी मुझे और डॉली को फ्रेंड मान लिया है ...... हमसे भी तोह उसको कोई प्रॉब्लम नहीं है और जब वह महारानी के गेटउप में होगी तब हम उसके पीछे hi होंगे अपने मोह बंद किये हुए ".

अणि ," वैसे दीप्ति अच्छी नेचर की दरिया दिल लड़की है और सच्च कहूं पर बुरा मत मन्ना शी इस परफेक्ट फॉर भाई , जाने की तरह ".

सब अणि की बात सुनकर चुप्प हो गए पर मीणा ने कहा ," वह दोनों( जाने , दीप्ति) आर्यन को प्यार करती हैं और दोनों अपने अपने देश की बड़ी शख्सियत हैं तोह आर्यन की पावर और रुतबा उनसे मैच करता है इशलिये परफेक्ट जोड़ी लगती है ...... लेकिन हम चरों ( गीता , डॉली , नेहा और मीणा) आर्यन की क्या हैं किसी को बताने की जरुरत नहीं . गीता दीदी उसका पहला प्यार है , मुझे कभी अपने से अलग समझा hi नहीं उसने और यह दोनों तोह उसकी आंखें हैं उसकी लाड़ली छोटी भें तोह परफेक्ट हम मैचिंग से नहीं बल्कि दिल से हर एक आर्यन की परफेक्ट आइडियल वाइफ होंगी ".

मीणा की कॉन्फिडेंस से कही बात में जैसे सबका आंसर था ऐसी सहमति 4 में दिखी . गरिमा भी अपने मैं में सोचते हुए ," सब कितनी लकी हैं जोह भाई इनको इतना प्यार करता है "..... उसकी मनोदशा समझ के मीणा भी कुश होती हुयी यह पक्का आर्यन से अपना हक़ जल्दी मांगेगी .

गीता ," अच्छा छोड़ो सब बातें और अपनी पैकिंग करो तुम सबको डिनर के बाद दिल्ली जाना है पर यह आर्यन कहाँ है जरा बुला उसे ".

अणि ," भाई , मम्मी के कक्ष में सू रहा है आप जगा लो वहां जाकर ".

मीणा ने अणि को आँख दिखा के ," अरे में जाकर उठा के लाती हूँ तुम सब इतने दीप्ति से मिल लो और अणि तू मेरे साथ चल".

दोनों के जाने के बाद गीता सर पे हाथ रखकर ," थोड़ा संभल के रहा करो अणि के साथ वह मीठी छुरी है न जाने कब हाथ काट जाये और गरिमा तू भी अपना ध्यान रखा कर ुष ठाकुर की बेटी रूबी के चक्कर में मत पड़ना और घर की कोई बात उसको मजाक में डिस्क्लोसे मत करना . यह मौका देखकर वार करते हैं इशलिये मुझे ठाकुरों से नफरत है ".

सबने उसकी हाँ में हाँ मिलायी , चंडी देवी की बात कोण काटे ......

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उधर मीणा ने अणि को बोलै ," तू इतनी डिअर कहाँ थी और बड़े गुरूजी ने क्या कहा ".

अणि ने फिर बड़े गुरूजी से पूरा वार्तालाप बतया और बोली ," मम्मी ने शील्ड लगा राखी है और दोनों बहार नहीं आ रहे क्या करें , अब महिमा का hi उसे करना पड़ेगा अर्जुन (घोड़े) को तोह यहाँ ला नहीं सकते ".

मीणा हसकर ," तुझे सबको परेशां करने में hi मजा आता है , वहां हम सौतन को hi भिड़ा देने वाली थी ".

अणि ," अरे में कोई जान के थोड़ी बोली कुछ फिर गलती आप करो उल्टा सीधा आप सोचो और यह दोनों माँ बेटे ( सारू आर्यन ) प्यार में ाँधे होकर एहि भी भूल गए हम कोनसी जगह पे हैं ".

मीणा भी थोड़ा सीरियसली बोली ," अणि बस क्या बचन दोनों का प्यार बढ़ता hi जा रहा है और दोनों को एक दुसरे के सिवाय कोई नज़र नहीं आ रहा है ...... मैंने दीप्ति के साथ सुहागरात का लालच भी दिया आर्यन को मगर सबको साइड कर पहुंच गया सारू मम्मी के पास ".

अणि हसकर ," यानी आपकी लिस्ट रुकी हुयी है, ऐसा करो पहले दोनों को बहार निकलने का सोचा डिनर पे सब पूछें तोह बोल देना शिव मंदिर गएँ हैं ".

अब प्रेजेंट में ......

दीप्ति और रानी मिरदुला ने सबका साथ दिया पर डिनर नहीं किया आर्यन के ना होने की वजह से ...... मीणा ने महिमा को सारू के कक्ष में भेज दिया तोह दोनों जल्दी कपडे पहनकर राजमहल के साही डिनर हॉल में पहुंचे तोह बस रानी मिरदुला , सुचित्रा और दीप्ति थी .....

आर्यन ने आगे बढ़कर रानी मिरदुला से गले लग के माफ़ी मांगी लेट होने की पर चूचिचोर ने अपनी पुराणी माँ का दूध सूंघ hi लिया ...... सुचित्रा ने भी आर्यन को गले लगया और डिनर का बोली .

आर्यन ने दीप्ति को थोड़ा साइड में नज़र निच्चि किये खड़ा देखा तोह उसको अपनी बाँहों में उठा के दोनों गालों पे किश किया. दीप्ति का तोह शर्म से बुरा हाल हो गया उसकी सगी माँ , बड़ी भें और होने वाली सास ( सारू ) सब देख रही थी .

दीप्ति ," प्लीज निचे उतर दिज्ये सब देख रहे हैं प्लीज. ".

आर्यन ने उसका माथा चूमा और निचे उतर के बोलै," अरे सब अपने हैं और सबने हम दोनों का दिल से रिश्ता पक्का किया है ".

सारू ने आर्यन को कहा ," अब उसको तंग मत कर सब तेरी तरह बेशर्म नहीं है कहीं भी अपनी बीवी को चूमा छाती करने लगता है , यह इंडिया है फॉरेन कंट्री नहीं यहाँ कल्चर थोड़ा रिज़र्व है माहि ".

आर्यन ," अच्छा फिर हम दोनों रूम में चूमा छाती करके आते हैं क्यों दीप्ति जी रेडी हो आप "...... hi hi hi hi .

सब हसने लगे तब मीणा भी आ गयी अणि के साथ महिमा को लिए ...... आर्यन ने मीणा को साथ बिठा लिया महिमा को गॉड में लिए ..... दीप्ति को दूसरी तरफ बैठ के सबको अपने हाथ से एक एक बाईट खिला के जोह उसने खाना शुरू किया बस आधे घंटे खाता hi रहा सब 108 डिशेस उसने हज़म कर ली , सारे दास दासियों की रेल hi बना दी सब जल्दी जल्दी एक के बाद एक सब डिश सर्वे किये और फिर डिजर्ट से लेकर सबकुछ टास्ते hi नहीं किया पूरा खा गया .

दीप्ति तोह बस देखती hi रह गयी की आर्यन अकेला hi 20-22 आदमी का खाना खा गया होगा. तब सुचित्रा उसके कान में बोली ," में भी पहली बार इसको रूपा दीदी के यहाँ खाना खाते देखि थी बोलै था जब इतनी म्हणत से बांया है तोह सब डिशेस टास्ते करनी चाहिए ".

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डिनर के बाद जब सुचित्रा के कान में जब मीणा ने कुछ कहा तो वह शर्मा गयी पर गर्दन हिला के सहमति भी जाता दी. आर्यन की फॅमिली डिनर के बाद एयरस्ट्रिप पे पहुंची ...... रति चूँकि नींद में थी तोह आर्यन उसको गॉड में उठा के प्लेन में लिटा दिया और बिना को स्पेशल केयर करने को कहा.

आर्यन गीता सब से गले मिलकर जल्दी दिल्ली आने का बोलकर विदा किया . राजा त्रिभुवन सिंह ने गिफ्ट hi इतने सारे दिए की 8 ट्रक्स अलग से बी रोड दिल्ली भेजने पड़े गिफ्ट्स से भरे .

गीता को दीप्ति अपने कक्ष में ले गयी और आर्यन को राजा त्रिभुवन सिंह के अथिति कक्ष में पहले hi ामन्तिरित करके बुलवाया गया था .

आर्यन के कक्ष में जाते hi राजा त्रिभुवन सिंह और राजा जबर सिंह के साथ सबने खड़े होकर जिन में कई गैन मान व्यक्तियों थे , उनके साथ स्वागत किया.

आर्यन ने बड़ी विनर्मता से जबर सिंह की तबियत का पुछा तोह उसने बस मुस्करा के जबाब दिया की अचनाक से चक्कर सा आ गया था . आर्यन ने उसको आराम करने का कहा तोह बोलै की अब में ठीक हूँ .

साही जाम का पहला गिलास आर्यन की तरफ खुद राजा त्रिभुवन सिंह ने बाध्य तो उसने मन किया ," में आप सब के होते हुए इतने उम्र में बड़े राजाओं के सामने कैसे पी सकता हूँ ? "

राजा त्रिभुवन सिंह ," आर्यन अब तुम कुंवर महार्यं सिंह हो और जल्द hi राजकुमारी दीप्ति के पति भी होंगे तोह मेहमानो में पहला जाम लेकर तुमको माफ़िल की शुरुवात करनी होगी ".

आर्यन ने वहां बैठे 25-30 लोगों की तरफ देखा तोह सब जैसे उसका hi वेट कर रहे थे चियर्स करने में . आर्यन ने गिलास उठा के सबके सामने किया तोह रजवाड़ों की माफ़िल शुरू हुयी और 4 बेहतरीन डांसर गांव पे थिरकने लगी सबकी अट्रैक्शन का केन्देर आर्यन hi था जिससे डांसर उसके पास जाकर उसको रिझाने की कोशिश करती .

आर्यन शर्मा भी रहा था और बाकी सब को देख भी रहा था की उनके काम विस्तार में ठुकमे लगते निर्त्य का आनंद ले रहे थे शराब की चुस्कियां लेकर .

7-8 दासियाँ भी सबको छोटे छोटे कपड़ों में सर्वे कर रही थी ...... आर्यन ने सिर्फ रसम के लिए 1 पेग पिया था थोड़ी डिअर में 10 लड़कियां वहां लायी गयीं एक से एक...... फॉरेन से लेकर इंडियन तक हर तरह की स्पेशल आइटम लग रही थी .

राजा जबर सिंह ," आप कोई सी भी चूस कर लो कुंवरजी , वैसे विदेशी तरय करो उनका अलग hi मजा है ".

आर्यन ने हसकर हाथ जोड़े ," माफ़ करना राजा शभ , गीता और दीप्ति दोनों मार मार के मेरा कचूमर बना देंगी अगर मैंने किसी को भी हाथ लगया आपके टॉय आपको मुबारक ".

सब हसने लगे आर्यन की बात सुनकर तोह एक बुजुर्ग सा व्यक्ति जोह त्रिभुवन का hi रिस्तेदारी में ताऊजी लगता था बोलै," अरे कुंवरजी कभी कभी दुसरे फूल को सूंघना कोई गुनाह नहीं फिर आज तुम्हारा hi दिन है स्वयंवर जीते हो तब हमारे दामाद बन गए हो तोह तुम्हार हक़ है और मर्दों की बात मर्दों में रहेगी ".

आर्यन बस उनकी तरफ हाथ जोड़कर मुस्करा भर दिया ...... तभी एक राजकुमार जोह रानी संगीता का रिश्ते का छोटा भाई था बोलै ," लगता है कुंवरजी को एक से अधिक चाहिए वैसे भी इनके प्राकर्म देखर स्वयंवर में लगा की यह 10 भी काम पड़ेंगी क्यों कुंवरजी?"

आर्यन उसकी बात पे भी मुस्करा रहा था वह जानता था जितना काम बोलेगा उतना काम आगे करना पड़ेगा ...... उसका सेलफोन बजा तोह नाम देखकर कॉल अटेंड करके बोलै ," ठीक है 5 मं में आता हूँ ".

आर्यन खड़ा होकर अपनी जेब से नोटों की 5 दो हज़ार की गद्दी जोह िश मर्दों की माफ़िल के लिए लाया था उसमें से 2 गद्दी डांसर्स को 2 दासियों को और एक उन्ह दस लड़कियों को दिया .

आर्यन ," राजा साहब यह लड़कियां मेरे लिए आयी थी तोह इनकी पूरी पेमेंट के साथ इनके घर भेज दिया जाये या अगर कोई अपनी मर्जी से यहाँ रुकना चाहे तोह वह फ्री है कुछ भी करे ..... आज आपकी पार्टी में आया बहोत अच्छा लगा पर थोड़ा समय मुझे भी लगेगा आपके तौर तरीके सीखने के लिए . मुझे आज्ञा दिज्ये और बहोत बहोत धयानवाद ".

आर्यन ने सबको हाथ जोड़कर परनाम किया जबर सिंह कुछ बोलता उससे पहले राजा त्रिभुवन सिंह ," जाओ आराम करो कुंवरजी , ाचा लगा आप माफ़िल में आये ".

आर्यन वहां से निकल गया तब राजा त्रिभुवन सिंह भी सबको देखकर बोले ," आर्यन बिजनेसमैन है और हम रजवाड़ों के तौर तरीके सीख hi रहा है पर हमको भी उसकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए ".

राजा जबर सिंह ," अरे इतनी म्हणत से सब 10 विर्जिन्स खर्चा करके मंगवाई थी अब इनका क्या? "

राजा त्रिभुवन सिंह ," िंह 10 को वापस जाने दो हम सारा खर्चा डबल कीमत देकर भेज देंगे ...... आप सबके लिए स्पेशल आइटम्स हम अभी मंगवा देते हैं ".

फिर जाम टकराये तब राजा त्रिभुवन सिंह ने उन 10 लड़कियों के जाने के बाद कहा ," जीत और खुसी वाले दिन कुछ पंछी भी आजाद करने पड़ते हैं तोह कर दिए आप सब अफ़सोस न करें और दूसरा कुंवरजी ने यह तोह साबित कर दिया इंकार करके की वह हमारी राजकुमारी का हक़ किसी और को नहीं देना चाहते".

फिर तोह लम्बी पार्टी चली और अपने लिए रात रंगीनी के लिए लड़कियां सेट करते नशे में मेहमान खाने के रूम की तरफ बारी बारी बढ़ गए कबाब और सबब का मजा शराब के साथ लेने .

राजा त्रिभुवन सिंह भी 2 पुराणी स्पेशल आइटम के साथ था और राजा जबर सिंह ने 3 नयी आइटम साथ ले ली थी .

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आर्यन को राजमहल की छत्त पे जाते जब रानी जमुना ने देखा तोह वह भी पीछे चल दी की कुंवरजी इतनी तेजी से छत्त पे क्या करने जा रहे जबकि इनके लिए मर्दों की महफ़िल सजी है . अपनी दासी को जीने का धयान रखने का कहकर वह भी 4थी मंजिल पे पहुंची तोह राजमहल की लम्बी छत्त पे दोनों तरफ देख पहले एक तरफ पूरा घूमी पर आर्यन का कहीं पता न चला .

दूसरी साइड बने जब तीन गुम्बद की तरफ बढ़ी तोह बिच वाले गुम्बद के निचे 2 जिस्म लिपटे एक दुसरे को चूम रहे थे .

हाइट से वह मर्द आर्यन hi लगा तोह सबसे पहले अपने आवाज करने वाले जेवर उतारके नंगे पाओ पहले गुम्बद में निचे बेथ के चुप्प गयी .

"पूछह पूछह आर्यन ी लव यू सो मच ...... मुझे िश तन्न की आग से मुकत कर दे "........ रानी जमुना को बहोत बड़ा झटका लगा यह तोह मेरी ननद सुचित्रा है पर यह आर्यन की मामी का रिश्ता ऐसे निभा रही है क्या ?

आर्यन ने जोरसे से सुचित्रा के चूतड़ दबा के बोलै ," कोई यहाँ आ गया तोह बिना भी दिल्ली चली गयी है ".

सुचित्रा ,"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सीईइईसीईई आराम से दबा , यहाँ कोई नहीं आता में िश राजमहल में hi बड़ी हुयी हूँ और मुझे आज माँ बना hi दे फिर जाने कब मौका मिले".

रानी जमुना का माथा ठनका," यह सुचित्रा भी आर्यन से बच्चा लेना चाहती है , अरे दीप्ति की शादी तो हो जाने दे कहीं यह पकड़ी गयी तोह रिश्ता hi न तुड़वा दे ".

आर्यन ने सुचित्रा को चुम्मा और बोलै," आप मेरे मामीजी पहले हो और में आप को रुस्वा नहीं होने दे सकता , आप मेरे साथ चल रही हो बस और कोई बात नहीं सुनोगे में ".

सुचित्रा," कहाँ ले जा रहा है मुझे , अह्ह्ह्हह गिर जाउंगी "....... आर्यन ने उसको अपनी पीठ पे पड़ीं बिठा लिया और छत्त से जीने की तरफ बढ़ गया ...... सुचित्रा भी खुश हो गयी आर्यन बोलै ," सरप्राइज है बस हम मेरी कार में चल रहे हैं".

रानी जमुना ने 5 मं बाद राजमहल की छत्त से आर्यन की गाडी राजमहल से बहार जाती देखि पर अब उसको आर्यन के लुंड की चब्बी मिल गयी थी सुचित्रा के रूप में ...... जल्दी hi वह आर्यन से अपनी और बड़ी दीदी ( रानी संगीता ) की कोख में बीज डलवाने वाली थी उसके दिल्ली वापस जाने से पहले ..... पर उसको कहाँ पता था की आज सुचित्रा के बाद उसकी बेटी दीप्ति भी आर्यन से सीक्रेट विवाह कर मिलान करने वाली थी .

उधर राजा जबर सिंह की तीनो बीवियों के दिमाग़ में मीणा बड़ी चालाकी से उनसे बात कर रानियों के प्रेग्नेंट होने का राज महिमा और राहुल को दिखा के दाल दी थी की ऐसे बच्चे होंगे जोह उनको पूरी दुनिया में सम्मान दिलवा देंगे .

5 रानियां उम्र के िश पड़ाव में" अभी नहीं तोह कभी नहीं" वाली पालिसी लिए कड़ी थी और स्वयंवर में सबने आर्यन का प्राकर्म देखर तोह उनकी छूट 2-3 बार उसके लिए रू दी थी ...... आज िंह 5ों को अपने बच्चे का क्लियर बाप नज़र आया था आर्यन कई बार ...... आखिर कार मीणा का जादू चल गया था और कितनी का नंबर आर्यन के दिल्ली जाने से पहले लगने वाला था यह तोह समय hi बातयेगा ????

हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट 34

PART - 4 (ा)

( राजकुमारी )

दिल्ली एयरपोर्ट पे जब रति की नींद की खुमारी उत्तरी तोह वह आर्यन का पूछी तोह मीणा और सारू ने जैसे तैसे उसको मन लिया की आर्यन परसो तक आ जायेगा वहां अपना कार्य पूरा करके ......

आर्यन के सब परिवार के सदस्य जितना आज दिन भर आर्यन की स्वयंवर की जीत पे खुश थे अब दिल्ली आकर उदास हो गए थे क्योंकि आर्यन और दीप्ति तोह नहीं आये उनके साथ ...... सब कार्स से सिक्योरिटी के साथ फार्महाउस पहुंचे , चूँकि रात बहोत हो गयी थी तोह सब अपने रूम में तुरंत सूने चले गए .

सारू के रूम में अणि और मीणा थी , सारू 2 चुदाई के जबरदस्त सेशन के कारन ठक्कन होने से सू गयी पर मीणा और अणि अपना प्लान बना के आधे घंटे बाद सोई थी .

मीणा हसकर ," एक विकेट और गिर गया "..... hi hi hi hi .

अणि ,"पर दीप्ति को बुरा लग सकता है ".

मीणा ," दीप्ति से पहले हक़ है सुचित्रा का आर्यन पे और उसको आगे भी आदत डालनी होगी , नानी माँ की तरह रानी मिरदुला भी ज्यादा डिअर आर्यन से दुर्र नहीं रह पायेगी और जल्दी hi उसको पता चल जायेगा की उन्ह दोनों बहेनो का असली बाप क्यों है ?" ....... (अभी ये सवाल hi रहने देते हैं ???)

अणि ," चलो थोड़ा रेस्ट कर लो हमको भी 3 बजे वहां जाना है , निशांक और उसका चेला राजगुरु संभल लेंगे पर रघुभार सिंह एक बुजदिल की मौत मरने वाला है ".

मीणा हसकर ," बस जबर को तू अभी मत मारना साला मुझे देखना है उसको चेहरा जब उसकी तीनो रानियां आर्यन के 'तोपची' पे बारी बारी ुचलेंगी उसकी नज़रों के सामने ..... ".

सारू नींद में निघ्त्य के ऊपर से अपनी छूट खुजाते हुए बड़बड़ाई ," मेरा तोपची पुछःह पुछठ ".

दोनों मोह पे हाथ रखकर हसने लगये सारू को आर्यन के लुंड के सपनो में खोये हुए देखकर ......

मीणा ," भाई सच्च में प्यार करके सकूं दे देता है , देखो इनको किसी की परवा नहीं बस उसका प्यार hi याद है नींद में भी ".

अणि हसकर ,"यह डैडी से बात नहीं कर रही हैं और डैडी ने बोलै है यह या आर्यन फ़ोन नहीं करेंगे तोह कभी इंडिया नहीं आएंगे ".

मीणा भी जानती थी अब जल्दी से आर्यन और सारू के दिल में राज सिंह को एंट्री नहीं मिलने वाली है पर मुझे समझाना होगा आर्यन को जब मंजू मौसी अमेरिका से वापस आ जाएँगी . मंजू मौसी की बात आर्यन नहीं टलेगा पर सारू मम्मी को अपने से अलग भी नहीं करेगा....... मीणा ने बात का रुख मोड़ा ," तू कुछ वंश का कह रही थी ".

अणि ," उनका वंश नहीं बढ़ना चाहिए किसी भी हालात में नहीं तोह आप फिर बिच में मत बोलना ".

मीणा ," वंश तोह आर्यन का hi बढ़ेगा उसकी रानियों के गर्भ में बस बाप का नाम hi बदलेगा वह जिन्दा थोड़ी रहेगा यह सब देखने के लिए अपने बाप रघुभार की तरह पर अच्छा हुआ आर्यन ने त्रिभुवन को माफ़ कर दिया दीप्ति के लिए".

अणि कातिल स्माइल के साथ ," भाई इतनी आसानी से माफ़ी नहीं देगा , उसको जिंदगी भर की सजा मिलेगी जब भी दोनों रानियों की गॉड में भाई के बच्चे देखेगा जिनको दीप्ति बहोत प्यार देगी एक माँ की तरह ".

दोनों करीब 12:30 बजे सोयीं या बस रेस्ट कर रही थी वह दोनों जाने की क्या प्लानिंग कर रही थी ..... ???

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राजमहल 10 पं ोंवर्ड्स ......

गीता और दीप्ति दोनों उसके कक्ष में बीएड पे बैठे दोनों के लिए ड्रेस और ज्वेलरी सेलेक्ट कर रहे थे मंदिर में गंदर्व विवाह के लिए.

दीप्ति ," दीदी अब मुझे हल्का सा डर लग रहा की आगे क्या होगा ?"

गीता ," हाँ डरने की बात है पर आर्यन पे विश्वास है मुझे वह दिव्या तलवार लाकर तेरी जान जरूर बचा लेगा , तू डर मत ".

दीप्ति थोड़ा शर्मा के ," में उसके लिए नहीं गंदर्व विवाह से डर रही हूँ ".

गीता ," देख एक hi रास्ता है यह गंदर्व विवाह से काम से काम तू सुहागिन बनकर मिलान करेगी नहीं तोह बस दिन रात आर्यन का बिस्तर गर्म करती रहियो पता नहीं फिर शादी भी करे या नहीं . तू अब उसकी अर्धांगी बनेगी फिर सब हमारे सब के हिसाब से होगा ".

दीप्ति थोड़ा हिचकिचा के बोली ," दीदी वह आपकी बात सही है की गंदर्व विवाह करके hi में उनके साथ मिलान करुँगी पर अचानक से सब होना बड़ा अजीब लग रहा है ".

गीता ," अबे यार एक तोह तू इधर उधर की बात बहोत घुमा फिरा के बोलती है ..... अच्छा तुझे आर्यन के लुंड से डर लग रहा है तोह पूरा छूट में मत लेना बस थोड़ा दर्द तो करेगा hi वैसे भी घोड़े का लुंड लगा के घूम रहा है थोड़ी हिम्मत रखना ........hi hi hi hi hi ..... "

दीप्ति की सांसें hi ऊपर निचे होने लगी गीता की बातें सुन्न और जब लगा वह चुप्प नहीं होइ तोह उसके मोह पे हाथ रखा और बोली ," बस बस में समझ गयी अब कुछ मत बोलै ..... इतने गंदे वर्ड्स कोई बोलता है क्या , आप ऐसे मत बोलै करो अच्छा नहीं लगता आपके मोह से ".

गीता हाथ हटा के अब दीप्ति को देख के जोर जोर से हसने लगी ," बन्नो आज अच्छे से तेल लगा ले पक्का तेरी मुनिया की दुर्गति हो जानी है और मेरे मोबाइल में कुछ वीडियो है देख ले काम आएंगे ".

दीप्ति थोड़ा रोष कर ," प्लीज दीदी ऐसे न बोलो मुझे बहोत शर्म आती है ऐसी बात सुनकर , आप मेरी बड़ी दीदी जैसी हो ".

गीता ने दीप्ति की कमर पे हाथ रखकर अपने से चिपका के उसके पुष्ट चूतड़ और एक कड़क चूची पे हाथ फेरे ," अरे शर्म तेरी कल दिखाई भी नहीं देगी , आर्यन बहोत जानदार मर्द है अपनी औरत को खुश करना जानता है , फिर तेरा फिगर और रूप कमाल का है वह सब संभल लेगा ".

दीप्ति ," अह्ह्ह्हह दीदी वहां हाथ मत लगाओ न प्लीज "...... वह कसमसा सी गयी , राजकुमारी थी ऐसे उसको कोई औरत भी उसको टच नहीं कर सकती थी .

गीता भी उसको छोड़कर बोली ," जब तू अपनी बड़ी भें के हाथ से कपड़ों के ऊपर से डर रही है तोह आर्यन के साथ कैसे करेगी , वह बहोत जोरसे से मसलता है कमीना ...... मेरी तोह गांड के पीछे पड़ा रहता है ".

दीप्ति थोड़ा शर्मा के ," उनके साथ ाचा लगता है वह तोह मुझे नुदे hi अपनी पीठ पे जवालामुखी के लावा तक ले गए थे बस वह अहसास hi अलग था दीदी , अपने सपनो के राजकुमार की बाँहों में...... "..... एहि गलती हो गयी थी दीप्ति से जोह उसके मोह से सच्च निकल गया ....

दीप्ति बस सपनो में खो सी गयी तोह गीता और जोर जोरसे हसने लगी ," है है है है ..... मतलब तूने सब चेक hi किया या कुछ और भी अंदर तोह नहीं ले लिया ..... मतलब हमारी बन्नो रानी ट्रेलर देख चुकी हैं".

दीप्ति शर्मा गयी और अपना मोह चुप्पा ली हाथों से पर अब गीता कहाँ छोड़ती पहले उससे पूरा डिटेल्स में पूछ ली तब उसको गले लगा के बोली ," तोह अब डर क्यों रही है आर्यन असली मर्द है उसका बहोत कण्ट्रोल है अपने पर बस उसका साथ देना ...... तू सबसे लकी है हम 6 लड़कियों में जोह तुझे सबसे पहले उसका प्यार मिलेगा ".

दीप्ति भी अपनी बड़ी भें जैसी गीता की बाँहों में लिपट के इमोशनल होकर बोली," मुझे आप ने hi अपना के धनं कर दिया है दीदी आप सबसे अच्छी दीदी हो मेरी ".

गीता ने उसके माथे को चूमा ," तू भी मेरी छोटी भें है बिलकुल मेरी परछाई जैसी , भगवन ने तभी तोह हमको हम सकल बांया है . बस आर्यन की अच्छी जीवन संगनी हमको बनकर रहना होगा उसके ऊपर सबकी जिम्मेदारी है ".

दीप्ति थोड़ा चिंतित होकर ," आज उनको राजमहल की माफ़िल में बुलया गया है वहां शराब के जाम के साथ लड़कियां भी बुलाई जाती हैं. रिवाज में वह सब कुंवरजी को खुश भी करती हैं ".

गीता हसकर ," फिर तोह सब की चीखिआ hi सुनाई देंगी राजमहल में, तू चिंता मत कर , वैसे आर्यन को ऐसे कुछ मजा नहीं आता ..... वह लड़कियां खुद पता लेता है और वहां ज्यादा डिअर नहीं रुकेगा कोई पसंद आयी तोह लेकर निकल गया होगा . बस याद रख वह सब उसकी दासियाँ या रखीअल hi बन सकती है बीवी नहीं . अभी फ़ोन करके पूछती हूँ कहाँ है ?"

दीप्ति ने मन किया पर गीता ने आर्यन को फ़ोन मिलाया तोह उसने बतया की वह मामीजी सुचित्रा के साथ फार्महाउस पे जा रहा है 2 घंटे में आ जायेगा .

दीप्ति की ख़ास दासी भी थोड़ी डिअर बाद आयी और जोह माफ़िल में हुआ उसको बातये . गीता ने हसकर कहा ," वह ऐसे झंटू लोगों के साथ नहीं पीटा और खैरात में मिली लड़की तोह कभी टच न करे बस कोई चलेंगे न कर दे तब तक ...... अच्छा हुआ तेरी दीदी सुचित्रा ले गयी उसको अपने साथ पर कहीं वह hi न लूट ले हमारा सैयाजी को hi hi hi hi ".

दीप्ति पहले खुश हुयी फिर गीता की बात का मतलब समझकर ," छी दीदी कितना गन्दा सोचती हो आप ...... मेरी सुचित्रा दीदी तोह उनकी माँ जैसी हैं और वह मामीजी बोलते हैं ".

गीता हसकर ," दीप्ति अभी तुझे बहोत कुछ पता चलेगा आर्यन के बारे में और तू खुद जानती है आर्यन के आकर्षण से कोई बच नहीं पाती और ठकुरियन सुचित्रा भी आर्यन से बहोत लगाव रखती है फिर अब तोह बड़ी साली भी है रिश्ते से यानि आधी घरवाली ..... हमारे खानदान की बहोत साड़ी खून की सगी औरशन के आर्यन से समभंद है और उनके बच्चे भी तूने देखे हैं ..... मेरी कविता और रीता भाभी सगी मामी है आर्यन की और दोनों उससे hi अपने अपने बेटे ले ली ...... ठकुरियन सुचित्रा को आर्यन तुझसे पहले मिला था , किसको पता था की बाद में तू आर्यन की प्रेमिका है जिसको कई साल से इंतज़ार कर रही है . वहां गाओं में , दिल्ली में फिर जयपुर मैंने पहले भी कई बार दोनों को साथ देखा. फिर बेटे की चाहा ने उनके समभंद पहले hi बना दियो होंगे , फिर क्या फर्क पड़ता है वह मामीजी hi रहेगी ..... कुछ तोह सुचित्रा को चाहिए आर्यन से यह मीणा hi बता सकती है ...... तुझे तोह पता है आर्यन अकेला लड़का है हमारे खानदान में और अब हर किसी को जैसे लड़का या औलाद hi चाहिए आर्यन जैसा और मीणा बटवा भी तोह रही है . सुचित्रा जैसे पहले मीणा के आगे पीछे और अब आर्यन के साथ है पक्का पहले hi सेटिंग हो चुकी होगी ".

दीप्ति थोड़ी परेशां होकर ," आपको बुरा नहीं लगता दीदी , वह आप से इतना प्यार करते हैं और बहोत साड़ी औरशन से रिलेशनशिप भी है उनका ".

गीता हसकर ," देख मेरा बस चलता तोह िश आफत की पुड़िया की जड़ ,आर्यन, को पहले hi मार देती पर ना जाने कोण सी मिटटी का बना है साला में मार hi नहीं पायी आज तक और रही बाकी औरशन की , जब मुझे आर्यन से प्यार हुआ तोह कोई कुछ दिखती hi नहीं और फिर अगर मैंने आर्यन की औरशन को मारना शुरू कर दिया तोह तेरे घर में भी तुझ समेत कोई नहीं बचेगी यह तू भी जान ले . आर्यन सबसे प्यार करता है उसको दुःख नहीं दे सकती में फिर और किसी को बोलने से पहले तुम 5 लड़कियां hi सोचो की मुझे किसको आर्यन से दुर्र करना है जबकि तुम सब भी तोह मेरा hi हक़ बाटने आयी हो , क्या करूँ बस तुम सबको अपनी छोटी भें बना के प्यार भी बाँट लुंगी आर्यन का".

गीता की बात सुनकर दीप्ति सच्च में दुखी hi हो गयी आखिर क्या गलत कहा गीता दीदी ने , बाली सब उनके होने वाले पति पे hi हक़ मांग रही हैं .

गीता ने जाने को फ़ोन मिलाया अमेरिका तोह उसने दुसरे रिंग पे उठा लिया क्योंकि वहां दिन था ..... दोनों ने 5 मं बात की फिर दीप्ति से जाने की बात करवाई सब बातें बता के . गीता जानती थी वह लल्लो चप्पो करना नहीं जानती फिर दीप्ति को नार्मल जाने या मीणा hi कर सकते हैं समझा के .

जाने बड़ी धीरता से कहा ," दीप्ति एक बात याद रखना तुम अपने प्यार को पाने वाली हो बस ुशी में ज़िंदगी जीने की कोशिश करो. याद है आज तुम्हारे पास सबकुछ है पर आर्यन के तुम्हारी लाइफ में आने से पहले यह सब कहीं नहीं था ....... था तोह बस की तुम एक मुसफिर की तरह बस भटक रही थी अपनी मंजिल को पाने के लिए की कब तुम्हारा राजकुमार आएगा , तुम बीमार रहती थी तुमको होस्पिटलिज़्ड भी कितनी बार करुणा पड़ता था , सब तुमको दया की दृष्टि से देखते थे और तुम खुद hi कहती हो की तुमको लोग एक पागल लड़की समझते थे...... फिर आर्यन आया तुम्हारी ज़िंदगी में , देखो अब तुम्हारी सगी माँ रानी मिरदुला जी भी आ गयी हैं वापस , तुम हम सब में सबसे पहले उसकी बीवी होने का सुख फील करोगी जिसके लिए हम सब कबसे तरस रही हैं ...... अब बताओ ओरे क्या चाहिए ?..... इतनी खुशियों के साथ बस एक कड़वा सच्च भी है 'आर्यन सबका है' ...... आज तुमको एक अपना राज बता hi देती हूँ तुम्हे नयी जिंदगी जीने में आसानी होगी "....... फिर आधे घंटे तक जाने ने अपनी माँ सीनेटर मारिए हॉल और आर्यन के प्यार की स्टोरी सुनाई और कैसे जाने को आर्यन मिल गया .....

दीप्ति के लिए यह सब हेरात की बातें न थी पर कभी कभी सच्चाई सामने वाला बोले तोह अच्छा लगता है .....

दीप्ति को अपने जीवन की स्टोरी तोह आर्यन जवालामुखी से आते हुए hi बता दिया था पर दीप्ति भी गीता , जाने या फिर किसी और का वर्शन भी ढेरी ढेरी जान रही थी .

सुचित्रा को अपनी किडनेपिंग वाले दिन आर्यन के गले लगने और कार में उसकी गॉड में बेथ के चूमने से hi दीप्ति को पता लग गया था दोनों बहोत क्लोज हैं. दीप्ति के लिए आर्यन hi सबकुछ था और उसको लिए वह कुछ भी कर सकती है .

जाने से बातें करने के बाद दोनों रिलैक्स होकर फिर से अपने काम में लग गयी ,दोनों ने एक जैसी ड्रेस सेलेक्ट की फिर रेडी होकर एक दुसरे को सजा धजने में लग गयी .

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10:40 पं .......

( बड़ी राजकुमारी सुचित्रा सिंह )

ठकुरियन सुचित्रा सिंह उर्फ़ सूचि आगे 37 साल , हट 5'9" , फिगर 36 -30 -38 , दूध की तरह गोरी चिट्टी , बहोत hi सुन्दर और जिन्दा दिल औरत थी ..... आर्यन को बहोत पसंद करती थी , जबसे मिली पहली hi नज़र में प्यार हो गया पर अपने दिल की भावना अपने दिल में समेत सी ली दीप्ति के लिए जोह उसकी छोटी भें थी ...... मगर प्यार को जितना मारो , जितना डुबाओ , जितना छिपा लो बहार दुगनी ताकत से झलक के आएगा.

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राजकुमारी सुचित्रा सिंह

राजमहल के गेट से आर्यन की रेंज रोवर सुव बहार निकलते hi , सुचित्रा जोह एक पर्पल साड़ी में साइड सीट पे बैठी थी झट से उसकी गॉड में चढ़ गयी ...... आज फिर वह दिन और समय आ गया जब उसको आर्यन की गॉड से उतरना पड़ा अपनी छोटी भें दीप्ति के लिए . सुचित्रा की खुसी देखते hi बनती थी अपने मेहबूब के पहले में बैठे हुए .

सुचित्रा कई बार को अपने दिल को दिलासा दे भी ली थी पर मीणा ने उसके दिल कमजोर से तार को ऐसी स्ट्रेंथ दी की अब वह आर्यन के साथ एक मधुर सरगम बनाने को उतावली थी .

मीणा ने उसकी दहकती राग पे हाथ रखते हुए कहा था ," अपनी ज़िंदगी के 37 साल में से पिछले 19 साल तोह मामीजी आप ने ख़राब hi कर दिए हैं लेकिन ऐसा मौका कभी नहीं आएगा , आर्यन प्यार करने के लिए hi बना है नहीं तोह घर की औरतें और आपकी सगी ननद ठकुरियन रूपा और बहु शीला जोह आर्यन की माजी और चाचीजी है ऐसे hi दीवानी नहीं हो गयी , यह रिश्ता जिस्मानी रिश्ते से बड़ा है दिल से है . यह अपने जीवन में प्यार पाने के हक़ के लिए सबकुछ भूल गयी और आदित्य को तोह आप भी जानती हो वह आर्यन का बीटा है शीला चाचीजी ने मांग लिया प्यार करके ".

ठकुरियन सुचित्रा ," पर दीप्ति को कभी यह पता चला तोह क्या जवाब होगा मेरे पास आर्यन और उसकी शादी होने वाली है अब कुछ दिनों में ".

मीणा ने थोड़ा रॉब सा कहा था ," दीप्ति के लिए इतनी लेडीज हैं क्वेश्चन आंसर करने को पर आप खुद सोच लो अभी सात फेरे नहीं हुए , आपको कभी भी रिग्रेट नहीं होगा दूसरा आप समझदार हैं इसी दीप्ति की जान अपने आर्यन से बिच में प्यार रोककर बचाई थी ...... उसको अधिकार नहीं है आप पे ऊँगली उठा सके ".

मीणा की बातों और सलाह ने जैसे सुचित्रा के जोश को दूंगा कर दिया ..... आप जब चोरी करते हो तोह डर लगता है कहीं पकड़ा न जॉन पर जब कोई आपका साथी बनकर कहे की में ध्यान रखूँगा तुम पकडे न जाओ तोह चोर भी दंगे जोश से बेफिक्री से चोरी को अंजाम देता है .

मीणा ने आर्यन को पहले hi बता दिया था उसको क्या करना है नहीं तोह सुचित्रा को भूल जाये ..... आर्यन भी मान गया की आगे अपने हिसाब से करेगा .

ठकुरियन सुचित्रा तोह आज आर्यन रुपी जैसे ताज महल hi चोरी कर लायी अपना अधूरा प्यार पूरा करने के लिए इतनी खुस थी ...... पर उसकी भी ज़िंदगी बदलने वाली थी .

सुचित्रा की ज़िंदगी में अपने पति के अल्वा कोई मर्द न आया था ..... पर आर्यन hi वह पहला मर्द था जिसने उसके दिल की धड़कन बढ़ा के अपना नाम ुष्पर लिख दिया हो ...... 37 साल की उम्र में प्यार हो गया था और उसके प्रेम में इतनी पागल की शीला ने हलकी सी चिंगारी दी और अगले दिन जयपुर के होटल में नंगी होकर अपनी छूट चटवा डाली .(डिटेल्स के लिए अपडेट 31 , part -6 , पेज 294 )

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आर्यन की गोदी में बेथ सुचित्रा अपनी दोनों टांगें एक तरफ किये आर्यन के गाल , गर्दन चूमे जा रही थी ...... "पूछह पूछह चुम्म्म्म चुम्म्म्म आर्यन आज में बहोत खुश हूँ ".

उसकी कामुकता चरम पे थी पर आर्यन आराम से कार चलते हुए फ़ोन पे बात करता अपनी टीम के फार्महाउस पे पहुंचा जोह अलवर से 15 कम की दुरी पे था . सुचित्रा चूमा छाती करती अपने बदन को आर्यन से रगड़ती रही .

कार को फार्महाउस की पार्किंग में कड़ी कर वह सुचित्रा को अपनी गॉड में लिए एक रूम में पहुंचा तोह नीला ( डॉ अंजू की बॉडीगार्ड) ने सब अरेंजमेंट कर दिया था जोह आर्यन की टीम के साथ रुकी थी .

आर्यन ने स्पेशलय नीला को रोका था यहाँ क्योंकि वह अपने डैम पे एक घेरि साजिस को सुलझा चुकी थी . बिना को दिल्ली रति के साथ भेजा वहां सब सँभालने के लिए .

नीला को देख सुचित्रा शर्म से अपना गुलाबी हुआ चेहरा आर्यन के सीने में छुपा ली . आर्यन उसको लेकर सोफे पे बैठा और नीला को बोलै ," ड्रिंक्स का अर्रंगेमेन्ट्स करो नीला डार्लिंग आज मामीजी के साथ चियर्स करेंगे ..... सूचि मामीजी यह नीला मैडम हैं, मेरी बहोत अच्छी फ्रेंड हैं और राजदार भी आप रिलैक्स हो जायो ".

सुचित्रा कुछ दरी सी , कुछ एक्ससिटेड सी अपने से 16 साल छोटे आर्यन की गॉड में किसी तीनगर की तरह शर्माती दूसरी सांड के साइज की 6 फट से लम्बी रफ़ एंड टफ लड़की के सामने बैठी थी . वह उसकी गॉड से कड़ी होकर बोली ," आर्यन वाशरूम किदार है ".

नीला ने खड़े होकर कहा ," सुचित्रा मैडम थिस वे प्लीज एंड तहत कार्नर दूर इस वाशरूम ".

सुचित्रा के पास एक वैनिटी बैग था जोह कार में रह गया तोह आर्यन ने बोलै ," आप फ्रेश हो जायो में भिजवा देता हूँ ".

आर्यन ने नीला को कार से सुचित्रा का बैग लाने को कहा तोह उसका सेलफोन रिंग हुआ जिसपर गीता का कॉल था उसने उसको बता दिया वह फार्महाउस पे है सुचित्रा मामीजी के साथ ...... फिर बिना से बात हुयी की सब आराम से दिल्ली पहुंच गए . सारू से भी फ़ोन पे बात किया ....... रति को तसली देकर बोलै वह जल्द उसके पास होगा और दीप्ति को भी साथ लाएगा , तू महापंचयत में फंक्शन रखना दीप्ति के स्वागत का .

नीला से आगे के प्लान का डिसकस करके बोलै तुम सब बस नज़र रखो मुझे लगता है कुछ होगा जरूर मेरे जाने के बाद पर एक्शन सिर्फ अणि को hi लेने देना या उससे पूछ के hi लेना , वह हैंडल कर लेगी .

सुचित्रा वापस आयी तोह आर्यन के बगल में बेथ गयी तोह नीला ने भी मुस्करा के उसको एक वाइन का गिलास बाध्य दिया. नीला ने पहले hi आर्यन का डबल पेग बना दिया था आइस दाल के और अपना भी .

चियर्स बोलकर तीनो ने सिप लिया पर आर्यन ने एक घूँट में पेग ख़तम किया और नीला ने भी ...... आर्यन अपना दूसरा पेग बनाते हुए ," मम्मीजी जल्दी ख़तम करो आपको एक डॉगी गिफ्ट करने वाला हूँ ".

सुचित्रा हैरानी से ," पर मुझे कुत्ते पसंद नहीं है आर्यन ".

नीला बस मुस्करा रही थी तोह आर्यन बोलै," आपको पसंद आएगा देखना आप उसको पत्ता पहना के घुमाया करोगी ".

सुचित्रा को कुछ समझ नहीं आया पर आर्यन ने उसके मोह से गिलास लगा उसको पूरा गिलास वाइन पीला दी फिर उसको स्नैक्स में स्ट्रॉबेरी और पिस्ता केक खिला दिया ...... फिरसे उसका गिलास भर दिया .

सुचित्रा भी आर्यन को देख रही थी मुझे इतनी जल्दी जल्दी वाइन क्यों पीला रहा है ???

नीला ने अपना दूसरा पेग ख़तम करके कहा ," सर मुझे फ़ोन कर देना में ुष टॉमी को ले आयेंगी ".

नीला के जाते hi सुचित्रा बोली ," यह नीला किसी को कुछ बोल दी तोह ..... खुद तू हार्ड पी रहा है मुझे वाइन क्यों पीला रहा है ".

आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के चूमा, "वाइन पीने से आपको प्यार करने का ज्यादा मैं करेगा और दर्द भी काम होगा ..... वैसे बुरा न मानो तोह एक बात पूछों यह ठाकुर सहदेव सिंह कैसा आदमी है ?"

अपनी पति का नाम सुनकर सुचित्रा चौंक के बोली ," उससे क्या काम आ गया वह कुछ गलत तोह नहीं किया तुम्हारे खिलाफ ?"

आर्यन हसकर ," मेरे साथ नहीं आपके साथ करने वाला था , मेरी सिक्योरिटी ने पकड़ लिया प्लानिंग तोह आपको मार के रूबी को फासने की थी पर हमारे आदमी उसके पीछे बहोत दिन से लगे थे आज शाम को दबोच लिया था ...... तभी बगैर किसी से मिले अपने गाओं चला गया जरूरी काम से ऐसा फ़ोन पे बोलै ".

सुचित्रा शॉक में आर्यन की बात सुनकर सर इधर उधर हिला के ," नहीं नहीं ..... उसकी इतनी हिम्मत नहीं हो सकती , मेरे बड़े भैया चीयर देंगे उसको अगर उसने ऐसा कभी सोचा भी ".

आर्यन थोड़ा सीरियस होकर बोलै ," मामीजी नीच इंसान को कितना hi सुधार लो वह नहीं सुधेरगा ..... आप दोनों माजी की वजह से मैंने दोनों ठाकुरों को माफ़ कर दिया था अपनी बड़ी बुआ चंदा के कहने पर ठाकुर बलदेव सिंह समझदार व्यक्ति हैं पर आपके पति को आपसे अच्छा कोण जानता है ...... आपको उसको जेल से नहीं छुड़वाना था 4 साल पहले ..... कोई नहीं डिअर आये दुरुस्त आये यह दिखये आपके पति की करतूत. "

आर्यन ने अपनी मोबाइल से रूम का टीवी कनेक्ट कर ठाकुर सहदेव सिंह की 3 वीडियो क्लिप दिखयी एक के बाद एक जिसमे वह पूरी प्लानिंग सुचित्रा को मारने और रूबी को फासने की किया था ...... सुचित्रा की आँखों में आंसूं थे. फिर रूबी की 2 क्लिप चला दी जिसको देखकर सुचित्रा भी हैरान थी ..... एक में वह गरिमा से बात की और उसके थप्पड़ मार के जाने के बाद बोली की तुझे तोह में एक रोड की रंडी बना दूंगी और तेरा भाई आर्यन मेरी छूट का गुलाम बनेगा.

दूसरी क्लिप में अपनी मादरजात नंगी छूट मसलती हुयी सुचित्रा को गाली देती आर्यन से छोड़ने का प्लान बना रही थी .

आर्यन ने नीला को फ़ोन करकर बोलै ," रूबी को लेकर आयो ".

रूबी का नाम सुनकर सुचित्रा भी डर गयी और रोटी हुए बोली ," आर्यन, रूबी नहीं वह मेरी बेटी है उसको िश सब में मत घसीटो प्लीज में हाथ जोड़ती हूँ प्लीज आर्यन , उसको किसी ने भएका दिया है , प्लीज मेरी बेटी को माफ़ कर दो में तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ ".

आर्यन ने सुचित्रा के आंसूं पहुंचकर कहा ," ठीक है में रूबी को िश सबसे अलग रखता हूँ पर एक शर्त पे की मुझे ठाकुर सहदेव सिंह के सामने उसकी बीवी ठकुरियन सुचित्रा सिंह को छोड़ना है तब hi रूबी को नहीं बुलंगा नहीं तोह रूबी को भी अपने किये की सजा भुगतनी पड़ेगी ...... उसने मेरी भें गरिमा को उसे कर मेरे hi साथ डबल क्रॉस खेलने निकली है फिर उसकी अच्छी बातें तोह अपने भी सुनी hi है कैसे नंगी बीएड पे लिअत कर मेरे लुंड पे चढ़ने को त्यार है ".

ठकुरियन सुचित्रा की ज़िंदगी में बहोत बड़ा तूफ़ान आ चूका था उसकी बेटी उसको निचा दिखाना चाहती थी आर्यन से समभंद बना के और उसका पति उसको जान से मारना पर समस्या यह थी वह दोनों आर्यन की फॅमिली के मेंबर्स को भी टारगेट कर रहे थे ..... रूबी ने गरिमा के थ्रू सेंध लगने की सोची और सहदेव सिंह ,आर्यन के बड़े फूफाजी और बड़ी बुआ चंदा को भी मारने के लिए आदमी भेज दिया था पर दोनों फस hi गए , नीला ने अपनी टीम के साथ दोनों का भन्दा फोड़ दिया पूरे सबूत के साथ पर सारे गुंडे दोनों के मार दिए थे तब आर्यन को रिपोर्ट की , सुचित्रा यहाँ आर्यन के सामने अब बेबस थी.

आर्यन ने अपना एक स्ट्रांग पेग बांया तोह सुचित्रा भी गुस्से से बोली ," मेरा भी पेग बनो और तुम अगर मुझे ब्लैकमेल करके कोई गेम खेल रहे हो तुम भूल रहे हो में कोण हूँ? और क्या कर सकती हूँ? मेरी hi जनम भूमि पे बैठकर मुझे तुम धमकी दे रहे हो ".

आर्यन भी हसकर ," अच्छा छूट में खुजली आपके हो रही है मामीजी , में ने हमेशा आपसे एक बेटे का रिश्ता hi निभ्या फिर भी आप मुझसे प्यार करना चाहती थी...... चाहे वह शीला चाचीजी की वजह से हो पर आप इतनी समझदार और मातुरेद लेडी कभी किसी मर्द की बाँहों में जाएगी तोह उसमें कुछ तोह पसंद आया होगा तभी तोह समाज को टाक पे रखकर ऐसा करोगी . अगर मेरे कोई सागा ऐसा आपकी फॅमिली के साथ करता तब आप क्या करती कोई जवाब है ? ठाकुर सहदेव सिंह को मौत एक सेक् में दे देता और कोई पता नहीं लगा पता कब किसने मारा पर ुष कुत्ते को निचा दिखाना जर्रोरी है और मारना या पालना आपकी मर्जी अब बोलो छुडवाओगी उसके सामने ? या फिर उसकी आंखें , मोह बांध रहेंगे पर कान से सब सुनेगा ".

आर्यन चुप हो गया पर सुचित्रा की अकड़ निकल गयी थी पर पूरी तरह नहीं ," तुम अगर यह करके अपने को शूरवीर बन न चाहते हो तोह बन लो पर मेरी भें दीप्ति से नजरे मिला पाओगे जोह तुम उसकी बड़ी भें के साथ जबरदस्ती करना चाहते हो , तुमको मैंने एक अच्छा इंसान समझ के प्यार करने लगी थी ".

आर्यन ने उनको पेग दिया ," आप ने गलत इंसान से प्यार कर लिया जोह अपनों के साथ की गयी गलती या साजिश दुबारा माफ़ नहीं करता ".

सुचित्रा पेग पीते हुए ," में तोह तुम्हारी कुछ लगती hi नहीं बस इक बार बिस्टेर पे उसे करके नोच लो और फ़ेंक दो "...... अब वह रट हुए पि रही थी .

आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के अपनी तरफ खींच तोह विरोध करने लगी पर आर्यन ने उसके हाथ से पेग लेकर टेबल पे रखकर अपनी गॉड में जबरदस्ती बिठा के बोलै ," आप या तोह बहोत बड़ी बेवकूफ हो या शातिर खिलाडी हो , मौत आपके सर पे नाच रही है और आप किसी टीवी सीरियल वाली हरीओने की तरह एक्टिंग कर रही हो ".

आर्यन की बात सुनकर सूचि उसकी तरफ अपना मोह करके ," क्या मतलब , तुम मुझे धमकी दे रहे हो में नहीं डर्टी मरने से अगर मुझे मार के तुमको खुसी होगी तोह मार दे मुझे मेरा गाला दबा दे ".

आर्यन एक कामिनी स्माइल से उसके आंसूं पहुंच के और उसके गाल चूम लिया पर सुचित्रा ने कोई रिएक्शन न दिया .

आर्यन ", अच्छा चलो एक शर्त लगते हैं आप जीती तोह जोह आप चाहो और में जीता तोह आप को पता है क्या करना है . देखने कितनी बहादुर हो "...... उसके कान में कुछ फुसफुसा दिया .....

सुचित्रा ,"में साइड में बेथ जाओं अपना पेग भी पी लुंगी प्लीज"...... और अपने आसूं साफ़ करने लगी .

आर्यन ," नहीं आप यहीं कम्फर्टेबले ठीक हो वहां बेथ के आप रोटी हो मुझे अच्छा नहीं लगता . चलो में अपने हाथ से पिलाता हूँ ".

सुचित्रा, आर्यन के हाथ से पेग पीते हुए ," फिर मुझे रुलाता क्यों है , मैंने कभी तेरे लिए गलत सोचा या किया है , में सिर्फ तुझे प्यार करने की सजा पा रही हूँ ".

आर्यन हसकर ," फिर दीप्ति का राज मुझसे क्यों छुपा दिया और रूपा माजी ने भी कुछ नहीं बतया लेकिन इतना तोह मेरा हक़ था जाने का . आप मुझे बता देती तोह हमारी राह आसान होती , आपके चक्कर में गीता फस गयी अगर उसको कुछ हो जाता तोह एक भी इंसान को में जिन्दा नहीं छोड़ता . जितनी में अपने दुश्मनों से नफरत करता उससे कहीं ज्यादा गीता से प्यार करता हूँ . मैंने अपने बापू से वादा किया था की में उसको खरोंच नहीं आने दूंगा . गीता हमारे परिवार की जान है वह दुनिया दारी नहीं जानती उसको जोह अच्छा लगता है करती है . आपके भाई त्रिभुवन से लेकर आपके ममेरा भाई जबर सिंह भी गीता के साथ आप सबकी जासूसी कर रहे थे पर मेरी सिक्योरिटी के आगे उनकी एक न चली ..... आप सब पयादे हो अभी किंग और क्वीन छुपे हुए हैं देखना मेरे दिव्या तलवार लाते hi सामने आ जायेंगे अपने चेहरे से मुखौटा उतर के तब बहोत तभाई होने वाली है ".

सुचित्रा बस आर्यन का एक एक स्तब्ध दिमाग़ में दाल के सोचने लगी पर अब उसको भी डर लग रहा था की आर्यन किसी बड़ी साजिश की बात कर रहा है .

आर्यन ने नीला को फ़ोन मिलाया ," नीला डार्लिंग ले आ मामीजी के गिफ्ट को ".

सुचित्रा डरते हुए आर्यन को देखि तोह उसने आराम से कहा ," रूबी सेफ है और अपने रूम में सू रही है , उसको तोह एक दांत में सीधा कर दूंगा वह मेरी छोटी भें गरिमा जैसी है बस आपके लाड ने बिगाड़ दिया है पर दिमाग़ की तेज़ है तभी पढ़ने में इंटेलीजेंट है , चिंता न करो वह सेफ रहेगी ".

नीला ने गेट खोला और एक आदमी को लात मारी जोह कुत्ता बना हुआ था और गले में पत्ता था ..... वह उछाल के फर्श पे औंधे मोह गिरा धड़ाम ..... अह्ह्ह्हह मर्डरर गयाए ..... उसके मोह से चीख निकली पर उसके गले में कुत्ते पत्ता और बस एक अंडरवियर पहना नंगा देख सुचित्रा झट से आर्यन की गॉड से उठ कड़ी हुयी ......

आर्यन ने उसकी कमर में हाथ दाल अपनी गॉड में बिठा लिया और पेग उसकी तरफ करता बोलै ," यह है आपका तोफहा मामीजी यह आपको मारना चाहता था ताकि अपनी रखैल क्या नाम है उसका हाँ शमा से शादी करके मलेसिया चला जाए, हाँ नीला इसका पत्ता मुझे पकड़ा इसकी कुटिया और उसके भाई को भी ले आ ".

नीला ने सहदेव वाला पत्ते के लगाम आर्यन की तरफ फेंकी तोह उसने जमीन पे अपने प्यार के निचे दबा ली और सुचित्रा को बोलै ," अभी आपको पूरी स्टोरी पता चल जाएगी , इससे यह पूछो की रूबी का बाप किसको समझता है ?"

सुचित्रा गुस्से से ," शट उप आर्यन यह तुम क्या बोल रहे हो , तुम क्यों ऐसा करके हमको जलील कर रहो और अगर हमारा मिया बीवी का कुछ लड़ाई झगड़ा है तोह हम आपस में निपटा लेते ".

आर्यन हसकर ," ठीक है में कुछ नहीं बोलता जाओ ले जायो अपने शरीफ पति को और समझा देना इसको में अपने हाथों से पहाड़ डालूंगा कभी मेरे सामने पड़ा तोह ".

सुचित्रा न आर्यन की गॉड से उठ पा रही थी और न सहदेव की तरफ देख पा रही थी पर उसको डर लग रहा था क्योंकि आर्यन ने मौसर गन टेबल पे रख दी थी अपनी कमर से निकाल के .

सुचित्रा को कुछ करता न देख आर्यन ने सहदेव को पुछा ," हाँ तोह ठाकुर शभ खातिरदारी में तोह नीला कभी कमी नहीं करती फिर भी भूके लग रहो , आ जाओ सोफे पे बेथ के गाला गीला कर लो लड़ाई झगड़ा , दुश्मनी एक तरफ रिश्ते नाते एक तरफ ".

सहदेव भी आर्यन की बातें सुन्न डरता हुआ बड़ी ाश से देखा जबकि अपनी तरफ निगाह होते hi आर्यन ने सुचित्रा का एक मां ब्लाउज के ऊपर से दबा दिया कसके ......

सुचित्रा जैसे कांप hi गयी और सहदेव भी किलास के बोलै ," चौदर्य शभ आप इसका कुछ भी करो में कुछ नहीं बोलूंगा पर मरने से पहले एक पेग hi पीला दो वैसे भी आप मुझे जिन्दा तोह नहीं रखने वाले "..... बड़ी तमीज से बात कर रहा था नीला की मार खाने के बाद .....

आर्यन ने उसकी लगाम वाले पत्ते से प्यार उठा के एक सोफे की तरफ इशारा किया ..... गिरता पड़ता बड़ी मुश्किल से सिंगल सीट वाले सोफे पे बेथ पाया ..... आर्यन ने स्कॉच की बोतल से उसका एक नेट पेग पूरा गिलास भर के उसको दिया जिसको वह एक सांस में प्यासे आदमी की जैसा पानी की तरह जातक गया.

आर्यन ने उसकी तरफ स्नैक्स किया तोह वो खाने लगा ..... आर्यन का एक हाथ ब्लाउज के ऊपर से सुचित्रा की एक चूची दबाये जा रहा था और वह मोह निचे किये बैठी थी .

सहदेव सिंह फीकी मुस्कान सा दिया पर आर्यन ने गन उसकी तरफ तान के कहा," यह मेरी मामीजी हैं और मेरी लवर भी हम जल्दी hi बच्चा भी पैदा करने वाले हैं तोह सोच समझ के बोलना, सच्च बोलै तोह हो सकता में जिन्दा छोड़ भी दूँ ".

आर्यन ने सुचित्रा का गाल चूमा और कान में बोलै ," यह बदजात मेरे इतना करने भर से आपको देखकर मेरे साथ एक्साइट हो रहा है साले का लुंड खड़ा हो गया पक्का ककोल्ड* है, आप परेशां न हो ान में कुछ भी ऐसा नहीं करने वाला ".

(*ककोल्ड = अपनी बीवी दुसरे से छुड़वाते हुए एक्साइट होने वाला .)

आर्यन का हाथ अपनी चूची से हटा के अपने होंठो से उसका गाल चूमकर उसके सीने में मोह चुप्पा लिया ...... जैसे थैंक्स कहना चाहती हो की मुझे रेस्पेक्ट देने के लिए .

तभी नीला एक 25 साल की औरत और एक 35 साल के आदमी को अंदर लाकर के जमीन पे बिठा दी और जब उसने सहदेव सिंह को सोफे पे मुस्कारते देखा तोह एक डैम आगे बढ़कर उसका गाला पकड़ के उठा के फर्श में दे मारी ," सूअर की औलाद तेरी हिम्मत कैसे हुयी सोफे पे बैठने की , तू मादरचोद अपनी माँ की छूट से भी पैदा होने लायक नहीं है "....... नीला को गुस्से में देख आर्यन को छोड़कर सबकी गांड पहात गयी .

हाइट में बर्बर hi होगा सहदेव सिंह पर जैसे नीला ने उसको उठा के पटका लगा ववे की फीमेल रेसलर हो .

बस अगले 2 मं नीला में अपने पंचेस और किक्स जड़कर सहदेव का पूरा नशा उतार दिया पर आर्यन ने नहीं रोका और सुचित्रा को अपने से कसके चिपकाये पीछे देखने नहीं दिया ...... बस चीखिआ hi सुनाई दी ुष रूम में पर उन्ह दोनों भाई बहेनो की तोह रूह कांप गयी थी .

आर्यन ," बास कर नीला डार्लिंग , जरा दुसरे चूजे को देख तुझे गन्दी नजर से देख रहा है" .

अब ुष शमा के भाई की अफाट आ गयी थी 2 मं में मार मार बेहोश कर दिया और शमा , आर्यन और सुचित्रा के प्यार पकड़ के माफ़ी मांग अपने भाई की जान की भीख मांग रही थी .

आर्यन ने नीला को बोलै ," रुका जा मेरी शेरनी आजा पेग पी ले दोनों गन्दी नाली के कीड़े हैं ".

नीला मुस्करा के ," सर आपकी गॉड में बेथ के पियोगी आज तोह "...... उसकी बात सुन्न के आर्यन बोलै ठीक है पर सुचित्रा की तोह पहले hi गांड पहात गयी थी एक और गीता जैसी जल्लाद लड़की को देखकर .....

(मंद गेम , इंटेलिजेंस और सीक्रेट सर्विस वाले डेली खेलते हैं , यहाँ तोह सब नौसिखिए मुजरिम hi समझो. )

सुचित्रा उठने लगी तोह नीला बोली ," सुचित्रा मैडम में तोह आपके साथ hi सर की गॉड में बैठकर पेग पियोगी आपकी तरह , अपनी छोटी भें समझ के इतनी रिक्वेस्ट नहीं मानेगी ...... आपको पता नहीं होगा में वर्जिन हूँ और एक आदमी पे hi अपना प्यार लौटना छाती हूँ सिर्फ एक दिन मेरे लिए काफी है पर सर के पास कहाँ टाइम है ".

दर्द से भरे तड़पते हुए 2 आदमी और 2 दुखी औरतें यह सुन्न रहे थे की ये 6 फट की सांडी वर्जिन है पर सुचित्रा और शमा तोह अब तक आर्यन की पालतू रांड hi समझ रहे थे ......

आर्यन ने झांग पहला दी उसकी तगड़ी दूसरी झांघो के पात पे अपनी 38 साइज की पत्थर जैसी गांड टिका के बेथ गयी और आर्यन के हाथ से ड्रिंक पि और आर्यन ने शमा को बोलै ," तेरी जान में बक्सा हूँ पर ठकुरियन सुचित्रा जी से पूछ ले , तू तोह इनके घर पे डाका दाल इनको जान से मरवा रही थी ".

शमा ने गीध गिड़ाते हुए कहा ," मैडम में ने कभी सहदेव को नहीं कहा पर यह मेरे भाई के साथ मिलकर आपको मारना hi छाता था , ऊपर से बोलता है की रूबी , राजा त्रिभुवन सिंह की नाजायज बेटी है और अब आप आर्यन सर से सिर्फ इनकी धन दौलत और पावर के लिए अपना जिस्म भी बेच रही हो अपनी बेटी रूबी का भी बेचने वाली हो ".

सुचित्रा ने गन उठा शमा पे गुस्से से निशाना लगा दिया पर शमा का भाई सीने पे आगे आकर गोली खा के गिरा फिर शमा को मारी और लास्ट में सहदेव सिंह को छाती पे ...... तीनो ढेर हो गए 6 फायर किये .

आज 3 लोग ठकुरियन सुचित्रा सिंह ने मौत के घात उतर दिए .....

__________________

सुचित्रा की आँखों से अंगारे बरस रहे थे फिर सोफे पे बेथ आर्यन से लिपट के रोने लगी ....... आर्यन ने नीला को इशारा किया जोह उसकी गॉड से उठ गयी और सुचित्रा को अपनी गॉड में उठा के आर्यन फार्महाउस के 2 फ्लोर पे ुशी रूम में ले गया जहाँ कल रात बिना को छोड़ा था.

सुचित्रा को बीएड पे लिटा के ढेरी ढेरी दोनों के कपड़े उतर के उसपर चा गया ..... सुचित्रा रोटी hi रही िश दौरान सदमे में पर आर्यन ने डिअर न करते हुए उसकी छोटी सी चिकनी छूट में लुंड उतर दिया आधा अब रूना और दर्द भाड़ गया पर आर्यन न रुका ...... वह जितना उसको रोकती रोटी हुए वह उतना hi ज्यादा लुंड को छूट में उतरता चला गया ...... सुचित्रा बस किसी हलाल हुयी मुर्गी की तरह कसकर दबोची हुयी आर्यन की पकड़ से न निकल पायी .

पूरा लुंड छूट में दाल के hi रुका और उसके आंसूं पहुंच के बोलै ," पूरा चला गया , अब तुझे कभी दिक्कत नहीं होगी सूचि मेरी जान ...... तेरी छूट आज से मेरी हो गयी , आज से यह लुंड मेरा तेरा हो गया ....... कैसा लगा अपने नए पति का लुंड सूचि डार्लिंग ..... चल अब दोनों बच्चा बना ने की प्रैक्टिस करते है ".

सुचित्रा ने अभी थोड़ी डिअर पहले तीन खून कर दिए थे ऊपर से शराब का नशा और अब महा विशाल 12 इंची लुंड उसकी छूट पहाड़ दिया था ...... आर्यन का लुंड उसको अपने पेट तक महसूस हुआ पर अजीब hi सिचुएशन में थी ठकुरियन सुचित्रा ...... दुःख , घिरना और दर्द तीनो एक साथ हो रहे थे पर यह छूट में फसा लुंड जैसे उसके गुनाहों की मुक्ति से आजादी दे रहा था उसकी छूट को पहाड़ के ......

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दर्द से चिक्ति उसने आर्यन को 3-4 थप्पड़ भी मार दिए पर वह उसकी चूचियां दबा के उसके गाल चूस रहा था ......

सुचित्रा ," अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण हरामजादे मार दाल मुझे अपने लुंड से पहाड़ दे मेरी छूट ...... में नहीं जीना छाती मुझे कोई प्यार नहीं करता मेरी अपनी बेटी भी नाहीईई अह्हह्ह्ह्ह माररररररर गईइइइइइइ ...... अह्ह्ह्हह माआआआ मेंननं मररररररर राहीईई हूंणंन्न "......

आर्यन उसके गाल चूस काटते हुए ," मररररर जाना पर मेरे 12-13 बच्चे पैदा करके उनकी शादी करने के आज से 50 साल के बाद ...... तब तक तू मेरी लुगाई बनकर मेरे लुंड की सेवा करेगी "...... पुछठ पुछःह ...... " कितनी टाइट छूट है , साली छूट में ऊँगली भी नहीं की क्या साला मेरा लुंड का कचूमर निकल देगी ".

सुचित्रा जहाँ बदहवास सी होकर आर्यन की बातों सुनकर भी हसी न रोक पायी दर्द के बाद भी वहीँ आर्यन ने उसके लेफ्ट कान में अपनी जीभ घुसा के घूमा डाली तोह बदन में झुरझुरी सी दौड़ गयी ...... आर्यन ने एक हाथ की ऊँगली से उसकी छूट के दाने को रगड़ा और दुसरे से उसके निप्पल्स बारी बारी उमेठा ...... अब उसकी छूट भी अपनी कसवत काम कर के चिकनाई छोड़ रही थी और गीली होने लगी .....

5 मं तक तीन तरफा हमला उसकी उत्तेजना को क्लाइमेक्स तक ले गया पर आर्यन ने उसका कान छोड़ के उसके लिप्स को चूसने लगा तोह उसकी निचे दबी सुचित्रा भी अपनी कमर को ऊपर की तरफ धकेल ने कोशिश की पर आर्यन उसको हिलने नहीं दे रहा था .

जब बर्दास्त ने कर पायी तोह अपनी लिप्स आजाद कार्की तेज़ चीख के साथ झड़ी ," यह हहहहहजजज मेंननननन मररररर जाना है हे भगवन बचा ले अह्ह्ह्ह गयी .... िश दानव से मेंनननन गईइइइइइइइ "........

2 मं तक जैसे उसकी बॉडी बेजान सी रही पर आर्यन उसकी अब एक चूची के निप्पल को चूसते हुए 1-2 इंच लुंड आगे पीछे कर रहा था ...... सुचित्रा भी जैसे हार के उसके निचे दबी उसको मनमानी करने दे रही थी.

ढेरी ढेरी आर्यन की म्हणत रंग लाने लगी ...... हर पल बढ़ते ढकूँ के बाद हलकी से छूट में उठती टीश सूचि को गरम करती आंखें खोल आर्यन को देखने को मजबूर की ...... जब आर्यन ने चूची से मोह हटा सुचित्रा को देखा तोह उसकी आँखों में देखकर बोलै ," ी लव यू सुचित्रा , तू बहोत सूंदर है मेरी जान ..... ी लव यू लोट "......

सुचित्रा ने उसके चेहरे को अपनी तरफ झुका के उसके लिप्स चूसने लगी ..... अब उसकी दोनों टांगें फ्री थी तोह घुंटने मोड़कर आर्यन की कमर पे लपेट वीलडली किस्सेस करती उसकी गर्दन और कंधे को अपनी बाँहों में कस्ती अपनी छूट भी उचकाने लगी .....

हुण्णं हुण्णं पहाड़ कुट्टीयिययी पहाड़ड़ड़ड़ड़ अपनी कुटिया की छूट , हैं में तेरी सुचित्रा डार्लिंग हुन्न्न प्यार कर मेरे राजा मेरा सोना ..... हानंन्न जोरसे ऑररररर जोरसे में आज चुड़ते चुड़ते मर्डर जाउंगी अह्ह्ह्हह्हह सीईईई जोरसे नहीं इतनी तेज़ज़्ज़ज़ नहीं अह्हह्ह्ह्ह ारयणणणणणण में स्वर्गगगगगग में गयीईइ ......

आंखें चढ़ गयी ऊपर को और अबकी बार वह झड़ी नहीं बल्कि साथ में मूट भी दी तोह आर्यन ने लुंड बहार निकाल लिया ...... छूट का भोसड़ा बन गया था , साले लिप्स कांपने के बाद भी बांध hi नहीं हो रहे थे ..... 3 गिलास वाइन , 2 पेग जैसे सुचित्रा का एक्ससिटेमेंट में ब्लैडर की टूंटी खोल दिए ..... मगर सुचित्रा लकी थी उसके सामने आल सीजन स्टार आर्यन था , बड़ी से बड़ी घंडी औरत उसके सामने मूट देती थी चुड़ते हुए फिर सुचित्रा तोह आज असली लुंड से चूड़ी थी .......

बीएड पूरा मूट से गीला हो गया तोह ...... आर्यन ने सुचित्रा को अपनी गॉड में उठाया और बाथरूम में लेजाकर शावर के निचे खड़ा कर उसको और अपने को साफ़ किया , सुचित्रा बस मदहोशी के अलाम में बस उसको सब करता देख रही थी ...... पर आर्यन का अभी भी मोठे फ्लैगपोले की तरह खड़ा लुंड उसको ॉश्चारिये hi दे रहा था की उसने पूरा अंदर कैसे ले लिया और अब छूट और पेट दोनों खाली महसूस हो रहे हैं ......

सुचित्रा की 36 डी साइज की चूची को आर्यन धूता हुआ भी किश करता निप्पल चूस लेता ...... छूट को अच्छे से धोने के बाद किश करके उसको वेस्टर्न टॉयलेट पे बिठा के उसके बालों को एक ड्राई टॉवल में लपेट दिया और खुद बाथरूम से बहार जाकर नीला को कॉल कर जरूरी चीज़ मंगवा लिया .

बाथरूम में घुसकर फिर अपने गीले बदन को टॉवल से साफ़ कर लपेट लिया फिर एक बाथिंग गाउन पहना दिया सुचित्रा को और गॉड में उठा के बोलै ," कितना घूरेंगी , में ऐसा hi रहूँगा बदल नहीं जाऊंगा ....... देख तोह ऐसे रही है जैसे पहली बार किसी आदमी को नंगा देख रही हो ?"

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सुचित्रा ने उसके गले में बाहें दाल के कहा ," आज पहली बार अपने मर्द को देख रही हूँ, तुझे जरा भी रेहम नहीं आया न मुझपर". .......

वह आगे कुछ बोलती पर बैडरूम में नीला को बीएड सही करते देख शर्मा गयी पर आर्यन ने नीला को कहा ," यार मैट्रेस्स भी बदल दे , मेरा मूट निकल गया था तोह वह भी गन्दा होगा ".

नीला भी मुस्करा के बोली ," ok सर , बस 10 मं दिज्ये ...... मैंने बालकनी में 2 चेयर रख दी हैं ".

आर्यन सुचित्रा को गॉड में hi बालकनी में जा बेंत की कुर्सी पे बेथ गया ..... चरों और अँधेरी रात का संता पसरा हुआ था दूर फार्महाउस की बॉउंड्री पे नाईट लैंप जल रहे थे लाइन पटरी ..... सामने छोटी टेबल से एक पेग बना के आधा पि गया और जब सुचित्रा की तरफ किया ," तू बहोत गन्दा है , क्या जरुरत थी नीला को बुलाने की ...... वह क्या सोचेगी की में कितनी गिरी औरत हूँ , अपने पति को मार के दुसरे मर्द का बिस्तर गरम कर रही हूँ और मूट भी दी ".

आर्यन ने सुचित्रा का गाल चूमा ," वह बहोत अच्छी लड़की है और समझदार भी फिर नीला ने उसकी साड़ी करतूत हम सबके सामने खोली है , वह खुश hi होगी ..... और औरत को अपने मर्द के चुनाव का हक़ है , तुमने मुझे चुना है यह उसको पता है ..... अब पेग पि ले डार्लिंग फिर तेरी छूट की ड्रिलिंग भी करनी है ".

सुचित्रा हस्ते हुए उसके कंधे पे मारने लगती है ...... आर्यन उसको एक घूँट में नाक बांध करके उसको बचा हुआ पेग पीला देता है जोह नेट था ...... फिर दूसरा भी ऐसे hi पीकर....

दोनों नंगे होकर आर्यन अपना टॉवल फिर उसका गाउन फर्श पे बिछा देता है.... चूँकि बालकनी में अँधेरा था सुचित्रा मन भी करती है पर आर्यन उसको बोलै," आज में तेरा कुत्ता बनकर तुझे कुटिया की तरह छोडूंगा ".......

डॉगी स्टाइल में सुचित्रा को बालकनी में चौपया बांये पीछे से छूट में लुंड दाल और उसके मोह में बाल वाला टॉवल लपेट के 10 मं में छोड़ छोड़कर उसकी रेल बना देता है ......

पेट में नेट दारू की जलन और नशा होने के बाद सुचित्रा अब अपनी छूट की ठुकाई बड़ी आसानी से मोह टॉवल से बंधे करवा रही थी ...... बीवी बनकर के अपने छुड़वाने से किसी की रखीअल या रांड बनकर छोड़ने का जोह अलग hi मज़ा आता है वह उसको जोश दिला रहा था ...... आर्यन उसका पति नहीं बल्कि उसको अपना बॉयफ्रेंड लग रहा था , जोह सिर्फ कॉलेज टाइम में उसने किस्सों में hi सुना था .

सुचित्रा मान में सोचते हुए ,"यह सेक्स नहीं है, यह तोह प्यार करने की सजा मिल रही है मुझे आर्यन से , ऐसे hi दर्द देकर छोड़ मुझे ...... में भी तेरे निच्चे पिष्कार महिमा जैसा बीटा या बेटी जानूँगी "...... अपने मैं में सब सपने बुनती वह झाड़ गयी तोह आर्यन ने लुंड छूट से निकाल के सूचि को गॉड में उठा अपने लुंड पे बिठा उसको चूमता हुआ रूम में ले आया और सोफे में बेथ सुचित्रा को अपने लुंड पे कुदाने लगा.

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आज तोह गजब का अपने अंदर स्टैमिना देखकर सुचित्रा भी हैरान थी ..... उसको लगा दारु का जोश है पर उसको कहाँ भान था नीला ने पहले hi उसकी वाइन में पैन किलर और एनर्जी बूस्टर टेबलेट मिला दी थी आर्यन के इशारे पर .

एक बार उतर के आर्यन का लुंड चूसी फिर बोली ," अब मेरे ऊपर आकर प्यार कर जब तक बीज नहीं रूप देता मेरी बंजर जमीन पे ".

आर्यन भी अब आखिरी के खुश धक्के बस प्यार से उसकी पूरी बॉडी को सेहलते और चूमते हुए मारने लगा ......

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आखिरी के 15 मं की चुदाई तोह सुचित्रा की जान hi निकाल दी , दर्द नहीं था बस इतना ज्यादा प्यार , इतनी ज्यादा बॉडी की रोब्बिंग ने उसकी छूट का बांध hi खोल दिया 5 बार एक के बाद एक झड़ती गयी झड़ती गयी ......

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और आर्यन ने गुरया के छूट में लुंड ठोका तोह बस विरए की हर पिचकारी इतनी गरम उसकी बच्चेदानी ऐसे भर दी जैसे 8-9 बच्चे एक साथ होंगे .......

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5 मं बाद एक घंटे की पलंगतोड़ चुदाई जैसे सुचित्रा की ज़िंदगी की पहली चुदाई बन गयी जोह सुख के अहसास से उसको नींद की वादियों में ले गयी ....... आर्यन उसके ऊपर से साइड में लुढ़क गया.....

5 मं बाद खड़ा होकर फ्रेश होया फिर सुचित्रा को बीएड पे hi साफ़ कर उसको बाथिंग गाउन पहना दिया ..... एक ब्लैंकेट ुधा के रूम से निकल निचे नीला के पास पहुंचा तोह पेग बना रही थी .

नीला भी ड्रिंक करती खुमारी में hi थी, आर्यन ने उसको घूर के देखा तोह कड़ी होकर नज़रियन झुका के बोली ," सॉरी सर ".

हुआ यह उसने सुचित्रा और आर्यन की पूरी चुदाई लाइव देखि थी सामने रखे अपने लैपटॉप पे तोह गरम हो गयी .

आर्यन ने उसको सिर्फ एक बार अपनी गाओं की हवेली पे सुरप्रीसेली उसकी छूट चाट के झाड़ा था बाथरूम में , आज भी वह स्पर्श नहीं भूली थी . आर्यन उसको छोड़ भी देता तोह छुड़वा लेती पर उसने नीला का सम्मान रखते हुए कहा था जब हम दोनों रेडी होंगे तोह सेक्स करेंगे.

आर्यन ने उसके पास जाकर उसके गिलास से पूरा पेग पीकर उसकी कमर में हाथ दाल उसका मोह दबा के खोला और अपने लिप्स जोड़कर सारा पेग उसके मोह में ढेरी डिग्री उड़ेलने लगा ...... नीला के हलक में शराब जाते hi जैसे मज़ा hi आ गया और पूरी लगन से अपने बॉस का साथ देना लगी ......

5 मं उसको अच्छे से किश करके बोलै ," नीला अभी टाइम नहीं है और तुम भी यह काम अच्छे से करना चाहोगी जल्दबाज़ी में नहीं ..... तोह थोड़ा इंतज़ार करो , तुम वह रात कभी नहीं भूलूंगी ".

नीला भी आर्यन से चिपट के उसकी बाँहों में चिपक के बोली ," में इंतज़ार करुँगी सर पर मेरे लाइफ में आप पहले और आखिरी मर्द होंगे ".

आर्यन हसकर ," अरे यार बाकी सब लड़कों पे जुल्म मत करो , तुम चिंता न करो , जिस दिन मुझे तेरी टक्कर का मर्द दिखा ुशी दिन तेरे हाथ पीले करके विदा कर दूंगा ...... यह ज़िंदगी अकेले नहीं कटेगी नीला और मेरा तुझे पता है , सबको टाइम दूँ तोह एक वीक में एक बार hi नंबर आएगा जब 24 घंटे बस सेक्स में लगा रहूं ...... चल अब उन्ह तीनो मूर्खो भी देख लेते हैं , अच्छा हुआ सुचित्रा ने गोली उनके सर पर नहीं मारी ".

नीला हसकर ," में पहले hi स्विच से बारी बारी तीनो को सर पे लगी चिप्स से बेहोश कर दी थी फायर होने से पहले ".

ठकुरियन सुचित्रा और ठकुरियन रूपा आज की डेट में आर्यन की सबसे पसंद माल बन गयी थी ....... आर्यन दोनों को अपने बच्चे की माँ तोह बनना hi चाहता था अपनी सीक्रेट बीवी बना के पर बहोत पावरफुल वीमेन भी ..... सुचित्रा और राजा जबर सिंह की छोटी भें ( लीलावती ) के लिए उसने दोनों ंप सीट स्टेट की मांगी थी कम ...... राजा जबर सिंह की छोटी भें की कुंडली जब आर्यन को मिली तोह उसने सोच लिया वह औरत उसके hi काम की है .....

नई करैक्टर ......

रानी लीलावती , आगे 28 यरस , विधवा है और एक तीन साल की बेटी है ...... अपनी रियासत की महारानी है जोह राजदरबार चलती है पर उसके खिलाफ भी उसका मंत्री मंडल है जोह राजा जबर सिंह के डर से कुछ नहीं कर सकता .

फिगर 36 -28- 38 hi होगा पर हट 6'3" थी अपने बाप राजा रघुभार सिंह भी एक इंच लम्बी ...... आज आर्यन को देखकर अपने पति की मिर्त्यु के बाद पहली बार गीली हो गयी . ( राजमहल में भी उससे hi के सपने देखती कक्ष में लेती चुद रही थी , झड़ते hi आँख खुल गयी )

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हार्ट हार्ट
 
अपडेट 34

PART - 4 (बी) ( राजकुमारी 2)

अलवर से 30 कम दूर .........

पुराने शिव मंदिर में दिव्या ज्योतिर्लिंग को साक्षी मानते हुए रात के 1:30 बजे आर्यन ने दीप्ति की मांग में सिन्दूर भर अपने नाम का मंगलसुतृ पहनकर उसको अपना जीवनसाथी बना लिया. गीता के लिए यह कठिन पल था उसका हक़ उसकी हंसकाल लड़की राजकुमारी दीप्ति को मिला जिससे मिले हुए एक हफ्ता भी नहीं बीता था पर तकदीर hi सायद कोई ओरे लिख रहा था या पहले hi लिखी जा चुकी थी .

दोनों ने डिज़ाइनर लेहंगा पहना था, दोनों बस कलर से अलग लग रही थी पर रंग रूप में ज़ेरॉक्स कॉपी . आर्यन बारी बारी दोनों को निहारता अपनी तकदीर पे फूला न समां रहा था . एक को उसने आज जीता था वहीँ दूसरी उसको बहोत पहले नादान बचपन में hi उसको जीत लिया था .

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दीप्ति - गीता

आर्यन ने अमेरिका से लौटने के एक हफ्ते पहले कभी यह नहीं सोचा था की गीता के अल्वा कोई और लड़की उसकी बीवी होगी , इवन जाने को भी उसने समझा दिया था की वह सिर्फ गीता से शादी करेगा और अपने परिवार की बाकी औरशन को तोह वह अंगरक्षक बनकर बस अपना नाम hi दिया था ...... 2 लोग जैसे पहले hi जान गए थे की आर्यन की कई बीवियां होंगी उसके जनम से भी क्या उसकी मम्मी सारू के जनम से भी एक साल पहले ...... चौदर्य माधव सिंह और उनकी बेटी रति देवी .

महार्यं , उनका महँ पूर्वज , फिर से रति की सबसे बड़ी बेटी के गर्भ से पैदा होगा...... रति के निस्वार्थ त्याग ने भविष्वाणी को आज हकीकत में बदल दिया था ..... वह उससे दुर्र अलवर के पास एक प्राचीन शिव मंदिर में दीप्ति से गंदर्व विवाह कर चूका था ...... निशांक गुरूजी की उपस्थिति में अलवर के राजगुरुजी द्वारा की गयी विवाह के मंत्रो उचार और गीता ने बड़ी भें बनकर दीप्ति को आशीर्वाद भी दिया .

मगर बहोत दुर्र से बड़े गुरूजी के अलावा अणि , मीणा और सारू ने भी यह गंदर्व विवाह अपनी पावर से देखा पर साथ में शिव भक्त रति ने भी ....... रति , अपने लाल 'माहि' की शिव मंदिर में उपस्थिति महसूस करके hi नींद से जाग गयी पर उसके गुरूजी (निशांक) ने उसको साक्षात् दिखा दिया उसकी बांध आँखों से भी एक सपने की तरह ...... निशांक गुरूजी भी अपनी िश सिंहस्य रति को बहोत मानते थे और उसका वरदान मांगते hi उनको मुक्ति मिलनी थी .

दीप्ति ने सब का आशीर्वाद लिया पर गीता ने उसको गले लगा के बोलै," मेरा सम्मान , गर्व , गरूर और प्यार आज से तेरा भी है मेरी छोटी भें बस यह हमेशा याद रखना ".

आर्यन ने राजगुरुजी के प्यार चुने चाहिए तो उन्हों ने मन कर दिया की आप रिश्ते में गुरूजी की गुरु भाई लगते हो ...... निशांक हसकर ," मेरे प्यार तू छू सकता है मेरे भाई ".

आर्यन हसकर ," में पाखंडी के प्यार नहीं छूटा , चल भाग यहाँ से , साला मर्डर के भी भूत बना घूमता है ".

गीता कुछ बोलती पर निशांक गुरूजी बोले ," एक दिन तुझे यह भूत hi बचेगा , तुझे 100 बीवियों के बाद नयी बीवी मुबारक हो ".

निशांक गुरूजी इतना बोलकर विलुप्त हो गए पर तीन और लोग अब आर्यन की तरफ देखने लगे की 100 बीवियों का राज बता दे.

आर्यन हसकर ," यह निशांक है hi बावला ऐसे hi कुछ भी बक देता है ".

गीता गुस्से से और दीप्ति ॉश्चारिये से आर्यन को गोरी तब राजगुरुजी ने कहा ," निशांक गुरूजी पिछले जनम की बात कर रहे होंगे, में भी चलता हूँ पर पुत्री दीप्ति अपने विश्वास को डगमगने नहीं देना नहीं तोह िश सबका प्रोयोजन hi क्यों था ?"

राजकुमारी दीप्ति ने आगे बढ़कर राजगुरुजी के चरण एक बार और छु लिए ," सौभाग्वती भाव , तुमको मनचाहा वर मिला है हमेशा उसकी परछाई बनना वार्ना यह विशाल संसार उसको तुमसे पार्थक न कर देगा ".

राजगुरुजी के जाते hi गीता ने आर्यन की शेरवानी का कलर पकड़ लिया ," यह तेरी 100 बीवी कहाँ पर हैं बता मुझे , साली एक एक को मार दूंगी ".

तभी बड़े गुरूजी की आवाज गीता के कानो में पड़ी ," पुत्री गीता देवी , अपने hi प्यार पे शक हो रहा है ? ..... फिर तुमने खुद आर्यन की अपने अलावा 5 लड़कियां क्यों चुनी अपना हक़ बाटने के लिए.... डरो नहीं आर्यन को भी याद नहीं वह पिछले जनम में कोण था बस उसका साथ दो ...... तुम hi आर्यन की सच्ची अंगरक्षक हो जैसे वह पूरे परिवार का है , वह तुमसे अलग नहीं है "..... "पुत्री दीप्ति अब समय आ गया है अपने राजकुमार के साथ सफर करने का "...... "आर्यन तुमको िंह दोनों के साथ यहीं से सफर करना होगा जैसे तुमको गायत है पर पर अर्जुन के छोटे भाई चेतक को भी साथ ले लेना ".

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तीनो राजमहल पहुंचे दीप्ति के कक्ष में ,अणि के मंतर ने तोह जैसे आज पूरा राजमहल नींद की आगोश में डूबा रखा था ...... राजा रघुभार सिंह भी उसके पावरफुल मंतर से सोया पड़ा था और उसके बाजु लेती स्त्री भी जिसको उसने वादा पूरा करने के लिए बुलाया था .

गीता कुछ सोचकर बोली ," में दुसरे कक्ष में हूँ तुम दोनों मुझे आवाज दे देना और दीप्ति चल मेरे साथ यह बहरी कपडे चेंज कर ले ".

आर्यन पहली बार इतने आलीशान बने सुख सुविधा और प्रेजेंट टेक्नोलॉजी से सुशोभित राजकुमारी दीप्ति के कक्ष में सब तरफ देखकर मैं hi मैं प्रशंसा करते हुए जायजा ले रहा था .

अपनी तस्वीरों को हर दीवार पे दीप्ति दवारा बांये स्केचेस की सुंदरता और बारीकी देखकर ुष में खोता हुआ खुद को धोंड रहा था ...... बिना देखे बिना मिला दीप्ति जैसे आर्यन को उससे भी ज्यादा जान्ने की कल्पना hi तोह स्केच पे उतर दी थी ...... हर स्केच के निच्चे लिखे 'मेरा माहि' hi उसका सिग्नेचर था .

दीप्ति की पसंद की साजो सजा देखकर आर्यन बोलै ,"अपनी गाओं की हवेली में भी एक स्पेशल ऐसा hi बड़ा रूम दीप्ति के लिए बनवाना पड़ेगा, लेकिन दीप्ति मुझे हर बार नए hi रूप में क्यों दिखती है जोह मुझे hi अचंबित कर देता है ".

दीप्ति के राजकुमारी वाले कक्ष से जुड़ा कक्ष जहाँ उसके सब साजो सम्मान के साथ उसके अस्तर सास्तर भी होते थे एक बड़ा आलीशान बीएड के साथ बुक्स से लेकर कंप्यूटर और बड़ा सा एलसीडी भी था ..... यह दोनों कक्ष एक जैसे hi होंगे पर आर्यन जिसमे था वह बैडरूम कह सकते हो और दूसरा जिसमे गीता के साथ दीप्ति थी उसका प्राइवेट या सीक्रेट रूम जिसमे किसको भी जाने की मनाही थी वह यहाँ धयान या योग करती थी .

गीता अपनी ड्रेस बदल एक लोअर t-shirt दाल के दूसरे कक्ष में जाकर दूल्हे वाली पोशाक पहने आर्यन को देखती हुयी बोली ," यह पहन ले चेंज करके , इतनी भरी ड्रेस पहनकर सुहागरात बनेगा ?"

आर्यन छोङकर थोड़ा डरता हुआ बोलै ," नहीं .... नहीं ..... में ठीक हूँ ऐसे hi और सुहागरात की जरुरत क्या है अभी ?"

आर्यन को नर्वस देखर गीता भी मैं मैं मुस्करा के अपने मैं बोली ," डरता आज भी है मुझसे , कोई नहीं बच्चू अपनी सुहागरात पे में तुझे दुल्हन बनकर पेलुँगी बहोत मजा आएगा ".

गीता थोड़ा प्यार से बोली ," ड्रेस चेंज कर ले और दीप्ति का धयान रखना वह बहोत प्यारी लड़की है , तेरे पास 1 घंटा है फिर हमको तहखाने में जाकर खज़ाना भी खोलना है , मुझे शाम को hi त्रिभुवन ने चाबी दे दी है ठीक रात के 3 बजे हम जायेंगे ".

आर्यन और कुछ बोलता उससे पहले गीता उसके पास जाकर उससे लिपट के उसके होंठो को चूसने लगी फिर उछाल के ुश्कि गॉड में चढ़कर ..... पूछह पूछह चुम्म्म्म चुम्म्म्म मुहह्ह्ह्ह पुछःह ..... ी लव यू जान , तू बस मेरा है और आज तुझे फ्री करती हूँ उसको पूरा प्यार देना ..... पूछह पुछःह "..... 2 मं बाद दोनों अलग हुए तोह गीता ने कहा ," बेस्ट ऑफ़ लक , प्यार से करना सबकुछ दीप्ति के साथ फिर हमको जाना भी है "...... आर्यन के पास जवाब न था बस हाँ बोलै .

गीता लास्ट बार किश करके चली गयी पर आर्यन ने एक बात डीडे कर ली थी की गीता से hi वह विवाह करने के बाद पहला मिलान करेगा उसके साथ , दीप्ति को अभी इंतज़ार करना होगा में अपनी चंदा रानी को उसकी खुसी और प्यार से वंचित नहीं करूँगा वार्ना वह कैसे जीतेगी , मुझे दीप्ति को बस ोरलय सटिस्फीएड करना होगा दिल का मिलान पहले होता है जिस्म से अगर िश्मे मेरी जान भी चली जाए गम नहीं पर गीता का हक़ कोई नहीं ले सकता ".

उधर दीप्ति भी सोचते हुए अपने घेणे , कपडे उतार एक सिंपल रेड कलर का सलवार सुईठे पहनकर रेडी हो गयी .

दीप्ति अपने मैं में ," में गीता दीदी से पहला अपना हक़ नहीं लुंगी , चाहिए मेरी जान hi क्यों न चली जाए. उनका अधिकार पहला है माहि पर , वह किसी देवी की तरह मुझे अपना सब कुछ देकर भी मेरी हर खुसी में ऐसे शामिल हैं जैसे में hi उनकी सगी छोटी भें हूँ वार्ना मेरी अपनी सगी बड़ी दीदी सुचित्रा ने तोह अपना हक़ ले लिया अपने लालच को सिद्ध करते हुए मगर में इतनी खुदगर्ज नहीं हूँ जिसने मुझे इतना प्यार दिया उसको hi रुस्वा कर दूँ ".

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दीप्ति और आर्यन के मैं की स्तिथि को देख , दिल्ली फार्महाउस में अब सारू के रूम में अणि कुछ करती उससे पहले hi मीणा ने उसको रोक दिया ," नहीं अणि , तीनो के प्रेम के बिच मत आना , प्यार क़ुरबानी मांगता है और दीप्ति त्यार है, उसको अगर मार्के hi मुक्ति मिलेगी तोह हम भी रोक नहीं सकते िश अनहोनी को पर आर्यन ऐसा नहीं होने देगा मुझे पूरा विश्वास है ".

सारू भी अब जगी हुयी थी और अणि , मीणा को देख रही थी .......

अणि थोड़ा विचलित होते हुए ," वह दिव्या तलवार , आर्यन को न दिला सकेगी बगैर आर्यन को दिल से अपनाये , मिलान िश सुहागरात पे दोनों को एक पवित्र रिश्ते में बाँध देगा ".

तभी सारू ने अपनी आंखें बांध करके शील्ड मंतर पढ़कर आर्यन के चरों तरफ लगा कमल (लोटस) की शील्ड बना दी और इत्मीनान से बोली ," अब उनको hi अपना भविष्य चुनना होगा थोड़ा आराम कर लो हमको भी जाना पड़ेगा गीता के पास जब वह खज़ाना खोलेगी ".

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आधे घंटे बाद पुराने जंगल में , अणि (व्) अपने महारानी विजयलमक्शी रूप में बैठी थी और बड़े गुरूजी (विशाल पेड़) उसके सामने बैठे थे सिंघासन पे ....

बड़े गुरूजी ," महारानी विजयलक्ष्मी , यह तोह विधि का विधान है ..... अब या तोह तीनो साथ आएंगे ुष दिव्या तलवार के साथ या फिर उन्हे से 2 या कोई भी नहीं . तुम भी जानती हो सच्च वहां सामने आ जायेगा ..... दिव्या तलवार ने िश अधरम और पापी मनुष्यों से भरे धरतीलोक को छोड़ पातळ लोक क्यों चुन लिया था इतने हज़ार साल पहले ताकि उसका अपना मालिक उसको सुरक्षित पा सके, आर्यन को देखकर hi तलवार हमला कर देगी पर दीप्ति को अपनी जान देकर भी तलवार आर्यन को सौपनी होगी ..... नहीं तोह गीता को भी मरना होगा पर आर्यन को तलवार चाहिए hi चाहिए अगर हम सबका मकसद सिद्ध करना है और तुम कोई रोड़ा मत अटका देना आर्यन के लिए अपनी चाहत का ".

Ani(V) चिंतित होकर ," गीता अगर मरी तोह आर्यन पातलाल लोक में hi सबसे लड़कर या तोह सबको मार देगा या वहीँ मरेगा , कोण निकलेगा उसको भार अगर सबको मार के जीत गया ...... सबकुछ एक िश दीप्ति के दिल से जुड़े रिश्ते पे टिका है , मिलान करके दोनों अपने प्यार को अमर बना देंगे तोह राह आसान होगी "

बड़े गुरूजी ," आर्यन को खुद फैसले लेने दो और अगर ऐसा समय आया की आर्यन का आंत निश्चित है तोह रति hi ुष नियति को बदल सकती है ...... तुम भूल रही हो उसके पास वरदान है ".

अणि (व्) थोड़ा घंभीर होकर ," लेकिन रति को कैसे ज्ञात होगा की आर्यन मारा गया, पतलोक तक हमारी शक्तियां काम नहीं करती नहीं तोह अगर आप मुझे कवच प्रदान कर दें में खुद दिव्या तलवार पतलोक तबाह करके ले आउंगी ?"

बड़े गुरूजी ," एहि फरक है तुम्हे और आर्यन में ..... वह किसी को मारने से पहले 100 बार सोचता है और तुमको सब निरये hi दीखते हैं ...... दिव्या तलवार को में भी नहीं पकड़ सकता तोह तुम तोह क्या उसको छु भी पयोगी आर्यन की बिना , मुझे पता है आर्यन जरूर तुमको दिव्या तलवार हासिल करके सौंपना चाहेगा पर मन कर देना इशिमें तुम्हारी भलाई होगी "...... फिर दोनों अपने एक दुसरे को तर्क देते रहे ....

आखिर में बड़े गुरूजी ने कहा ," रति पिछले जनम में महार्यं की अर्धांगी थी , उसकी सच्ची ताकत और अभिमान पर िश जनम में भी वह आर्यन की माँ , प्रेमिका और बीवी बानी है ....... दोनों के दिल जुड़े हैं , आर्यन अगर मारा भी गया तोह रति , मीणा और सारू उसके साथ hi मर्डर जायेंगे ....... रति मरी तोह आर्यन भी जिन्दा नहीं बचेगा , बस तुम अपने गरूर में गलत कदम मत उठा लेना ....... आर्यन को बस दूर से देखो और अगर तुम्हारी मदद की उसको जरुरत होगी तोह अपनी भें अणि से वह खुद मांग hi लेगा ".

अणि (व्) थोड़ा सईआं से बोली ," गुरूजी , रति अपना वरदान आर्यन के 21सत जन्मदिन पे hi इस्तेमाल करेगी मुझे पूरा विश्वास है , पर पतलोक की नागिन विशाखा के लिए मैंने प्रभा* को बुला लिया है , वह 4 बजे तक दिल्ली पहुंच जाएगी ....... अगर प्रभा को आप अपनी शक्ति से सही समय पे दिव्या तलवार के सामने भेज दें तोह विशाखा कुछ नहीं कर पायेगी ".

बड़े गुरूजी मुस्करा कर ," बहोत खूब महारानी , िशबार तुमको सफलता जरूर मिलेगी अपने उदेश में पर आर्यन के दिल में भी अपनी सही जगह ढूंढ लो तोह तुम दोनों अजय हो एक साथ ".

अणि (व्) मैं में ," बस रति को आर्यन से दुर्र कर दूँ फिर आर्यन मेरी बात कभी नहीं टालेगा ".

*प्रभा = आर्यन की कजिन सिस्टर , चची निर्मला की बेटी , जोह साउथ अफ्रीका से इंडिया अपने बड़े भाई से मिलने अणि के कहने पे आ रही है . (प्रभा का 3 मुख वाली नागिन विशाखा से क्या सम्बंद है आगे पता चलेगा??)

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रात 2 पं, अलवर के राजमहल में ........

दीप्ति एक लाल सुईठे सलवार में सर पे पारदर्शी चुनरी रख के अपने कक्ष में एंटर कर आर्यन के प्यार छूई तब आर्यन का ड़याँ अपनी सोचो से टूटा जोह दीप्ति के मखमली आलीशान बीएड पे बैठा था प्यार लटकाये.

आर्यन ने खड़े होकर ,दीप्ति को कंधो से पकड़कर उठा के सामने खड़ा किया ," तुम्हारी जगह मेरे दिल में है राजकुमारी दीप्ति , चरों के निचे में सिर्फ अपने दुश्मनों के सर रखता हूँ , आप फिर कभी मेरे प्यार मत चूना. याद रहे आप मेरी दिल में रहने वाली प्यारी सी दीप्ति हो जोह मेरी दिलरुबा बनकर आज कितनी ज्यादा सूंदर लग रही हैं "...... आर्यन की मीठी वाणी, अपने लिए सम्मान और प्यार देखर दीप्ति गदगद हुए जा रही थी .

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दीप्ति के माथे को उसका दोनों गाल पकड़ के आर्यन ने चूम के अपने गले लगा लिया. दीप्ति ने भी अपनी बाँहों का शिकंजा सा बना लिया आर्यन की पीठ पे और लरजते हुए बोली ," मेरे रूह के मालिक में आपकी और गीता दीदी की दासी आप दोनों के चरणों में छोटा सा स्थान मांगती हूँ ".

आर्यन ने मुस्करा के कहा ," मेरे दिल में तुम सब रहती हो , अब यहीं तुम्हारा घर है, चलो िश रात को थोड़ा यादगार बना ले , जिसकी तुम हकदार हो ".

दीप्ति थोड़ा शर्मा के आर्यन से अलग होकर बोली ," वह बात ऐसी है की आप गीता दीदी से शादी कर लें फिर उसके बाद िश रात की रस्में करेंगे यह में सोच रही थी ".

आर्यन ने मजाक करते हुए कहा ," हाँ यह भी तुम्हारी बात ठीक है पर थोड़ा प्यार तोह अब कर hi लें क्या कहती हो थोड़ा स्वयंवर जीतने का इनाम hi ले लूँ में अपनी िश सूंदर सी जानेमन दीप्ति से "..... है है है है ......

दीप्ति शर्मा के उसकी तरफ पीठ घुमा के बोली ," मेरे माहि , सब आपका hi है , आपको इज्जाजत की जरुरत नहीं है बस मैंने थोड़ा समय माँगा है ".

आर्यन ने आगे बढ़कर उसकी कमर से चिपकते हुए , उसकी चुनरी उतर के प्यार से बीएड पे रख के उसकी गर्दन को चूमा अपने दोनों हाथ से सपाट पेट को पकड़ते हुए दीप्ति के दिल की धड़कन बढ़ा दिया.

आर्यन बड़े प्यार वाली मीठी वाणी में बोलै ," तुम्हे क्या तोफा दूँ िश रात का बोलो मेरी जान "...... उसके शोल्डर को किश करके उसके सूट की चैन पीछे से खोल के कमर तक करके , उसके ब्रा के हुक खोल के पूरी पीठ को बेपर्दा कर दिया और उसकी पीठ पे बने नक़्शे के ऊपर चूम के , अपनी आँख बांध करके एक मंतर सा पढ़कर एक जगह तलवार के निशाँ पे ऊँगली रख दिया ....... नक्शा दीप्ति की पीठ से गायब होने लगा और गायब होकर समय चक्र रुक गया . अब नक्शा आर्यन के अंदर समां चूका था जोह झटपटा रहा था दीप्ति की पीठ पे वापिस स्थापित होने के लिए ...... मगर सज़ा hi थी आर्यन के सरीर में समां के दिव्या तलवार के नक़्शे के लिए .

दीप्ति जोह आर्यन की हरकत पे मदहोशी की खुमारी से झटके से बहार सी आयी पर आर्यन ने उसकी ब्रा का हुक बांध किया और सुईठे की ज़िप वापस ऊपर तक लगा दी .

दीप्ति पलट के देखि तोह आर्यन प्यार से बोलै ," मैंने नक्शा कुछ घंटों के लिए गायब कर दिया है , अब कैसा लग रहा है ?".

दीप्ति का तोह दिल hi इतना हल्का हो गया था और सरीर से जैसे भोज hi उतर गया हो ऐसा महसूस हुआ , वह आर्यन से लिपट गयी और उसके लबों को चूम ली ," आज पहली बार लग रहा है में आज़ाद हूँ, यह आपने कैसे किया मेरे माहि ? "

आर्यन मुस्करा ," एहि तुम्हारा तोफहा है मगर कल सुबह तक यह नक्शा हमेशा के लिए हैट जायेगा तब में स्पेशल गिफ्ट लूंगा अपनी डार्लिंग दीप्ति से, क्यों डौगी न ? "

दीप्ति ख़ुशी से उसकी आँखों में देखकर ," मेरी जान भी आप मांग लो उफ़ नहीं करुँगी मेरे माहि , एहि दीप्ति बस आपकी hi है जबसे िश्मे सांस आयी है ".

आर्यन आँख मार के ," नहीं अस्प्की जान नहीं लूंगा बल्कि छोटी दीप्ति की जान तुम्हारे अंदर डालूंगा मौका मिलते hi तब मुझसे लकी कोई नहीं होगा ".

दीप्ति खुश होती हुयी उससे लिपटी रही पर जब आर्यन की पूरी बात समझ में आयी तोह शर्मा के अपना चेहरा उसके सीने में छुपा के बोली ," हईये मम्मी , ऐसे मत बोलिये मुझे बहोत शर्म आती है. सही वक़त आने पे बहोत साड़ी जान आपको मेरे अंदर डालनी पड़ेगी ".

आर्यन ने दीप्ति के नितम्बों के निच्चे हाथ दाल के उसको अपनी गॉड में उठा के बीएड पे खुद पीठ के बल लेट कर अपने सीने के ऊपर लिटा उसके गुलाबी होंठो को चूसने लगा ...... दीप्ति भी दोनों हाथ उसके कंधे पे रखे आर्यन को चूम रही थी.

हर स्पर्श और चुम्बन दीप्ति की रूह की घेरे तक उतर रहा था ...... आर्यन की जीभ चूसते हुए उसके मोह से सिसकारी निकल गयी जब आर्यन ने उसके मस्त सुडोल चूतड़ों को जोरसे से दोनों हाथ के पंजों में भींच के दबा डाला ...... "अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ाराममम सीईए मेरे महीईई इतनी जोरसे नहीं ुहममममम ...... "

पहली बार किसी मर्द ने उसके पुष्ट चूतड़ को मसला होगा वह भी इतनी जुड़े से पर दर्द के साथ उसकी योनि भी द्रवित होकर दो - तीन बूँद छोड़ती गीली होने लगी .......

आर्यन ने उसको चूमते हुए पलट के निचे लेकर उसके ऊपर आया ," पूछह पूछह ...... में भरी तोह नहीं हूँ न दीप्ति , मगर तुम्हारा पिछवाड़ा मुझे तड़पा रहा था कई दिन से इशलिये रोक नहीं पाया उसको हाथ में लेने से ..... दोनों जैसे मुझे ामंत्रीरत hi करते हैं की तू इनको छु नहीं सकता ".

आर्यन की एहि अदा, औरत को बीएड पे दीवाना बना देती थी , वह तारीफ करते करते अपने सम्मोहन में बांधता हर सुख, दर्द और केयर , मस्ती देता हुआ अपने हर स्पर्शी को जस्टिफाई करके अपनी लुगाई से दासी hi बना लेता था ..... दीप्ति के लिए यह बहोत स्पेशल मोमेंट था.

दीप्ति भी थोड़ा सा हसकर उसके गाल चूमि ," हर लड़की अपने प्रेमी को अपने ऊपर लिटाना चाहती है , आप की ताकत से आपकी बेकरारी का पता चल गया है मेरे मेहबूब, मेरे माहि ".

आर्यन ने फिर एक बार उसके नितम्बों को मसला पर ढेरी से फिर उसके लिप्स को चूमकर बोलै ," जोह मुझे प्यार करते हैं वह माहि या आर्यन बुलाते हैं तोह वही सम्भोदित करो और हाँ तुम मेरी बीवी बन गयी हो तोह मेरी हर चीज़ पे तुम्हारा हक़ है ".

आर्यन एक बार और दीप्ति के गुलाबी गाल चूमकर उठकर बैठा फिर अपना हाथ दुसरे बीएड के पिलो के निचे दाल के एक गिफ्ट बॉक्स निकला जोह उसने कक्ष में आते hi अकेला होते hi छुपा दिया था और अब वह गिफ्ट बॉक्स दीप्ति के हाथ में दिया ," यह तुम्हारा गिफ्ट है पर दूध का गिलास कहाँ है जिसको पीकर सुहागरात को ताकत मिलती है ?"...... एक साथ दो बातें की , दीप्ति को ख़ुशी देकर संसय में दाल दिया .

दीप्ति भी शर्मा के ," वह में दूध लाइ hi नहीं क्योंकि सबसे सीक्रेट जोह रखना था विवाह को और गीता दीदी ने सब रश्में सबके सामने विवाह के लिए बचा के रखने को कहा पर आप 5 मं दो तोह में खुद अभी दूध लेकर आती हूँ ".

आर्यन कातिल मुस्कान लिए बोलै ," कोई बात नहीं , तुम अपना गिफ्ट खोलो ...... में अपना गिफ्ट खोल के दूध पी लूंगा डायरेक्ट मोह लगा के ".

दीप्ति बीएड पे सीढ़ी बैठकर गिफ्ट हाथ में लिए जब आर्यन की बात का मतलब समझी ," की !!!!! ऐसी बातें न बोलिये प्लीज मुझे शर्म आती है ".

आर्यन हसकर ," दीप्ति , प्यार करने वाले शर्म नहीं करते बल्कि बिंदास प्यार करते हैं खुलकर तभी अपने प्यार की घेरे भी बढ़ा लेते हैं एक दुसरे की प्रति ...... तुम खुलकर साथ देती जाओ में तुमको हर दिन प्यार के नए chapter पढता जाऊंगा ....... हम दोनों एक साथ दो बार अर्ध निवस्तर और पूर्ण निवस्तर भी हुए क्या तुम में वासना जाएगी या मुझ में , नहीं क्योंकि हमारा प्यार िश तन्न और मैं से ऊपर आत्मा के मिलान का प्यार है ..... आकर्षित तुम भी हो और में भी एक दुसरे की तरफ लेकिन एक दुसरे के लिए प्यार hi इतना ज्यादा है और विश्वास इतना अधिक की बस यह नस्वर सरीर hi हमको अलग कर रहा है नहीं तोह हम अलग है hi नहीं ..... क्यों तुमको ऐसा कभी नहीं लगा ?"

दीप्ति ने बस हाँ में सर हिला के आर्यन के कंधे पे सर लगा के गिफ्ट बॉक्स खोला ....... उसमे एक platinum-gold चैन में एक बड़े डायमंड पेंडंट पिरोया हुआ था जोह बहोत hi खूबसूरत था . दीप्ति ने उसको अपनी आँखों से छु कर फिर चूमकर उसको आर्यन के हाथ में देकर कहा ,"आप अपने hi हाथो से पहना दिज्ये , मेरी लाइफ का यह आपका तोफहा में कभी नहीं भूलूंगी िश मंगलसुतृ के बाद ".

आर्यन ने दीप्ति के अध् खुले केशों को उसके दौरा उठाने से मंगलसुतृ के ऊपर ुष पेन्डेन्ट को पहना दिया ," आपके गले में आकर तोह इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ गयी , मेरी सुंदरता की राजकुमारी , दीप्ति साइबा ".

दीप्ति ने आर्यन के हाथ को अपने हाथ में लेकर चूमा ," आपकी आंखें hi मेरा दर्पण है पतिदेव जी , आप की सूंदर आंखें hi मेरी सुंदरता बढ़ा रही हैं ....... आप ने पहले क्यों नहीं बतया था की आप अँधेरे में भी साफ़ देख सकते हैं ?"...... और इसी के साथ उसने वौइस् कमांड दिया ," लाइट्स ऑफ ..... ओनली नाईट लैंप "...... कक्ष की मैं लाइट बांध हो गयी और नीली प्रकाश वाली 6 लाइट्स ने अपने हलके प्रकाश से कक्ष को रोशन कर दिया ....... ऐसा लग रहा था कक्ष की छत्त को देखकर जैसे आस्मां ऊपर हो और चन्द्रमा और तारे जगमगा गए हो...... दीप्ति का कक्ष स्पेशलय इटली के आर्किटेक्ट ने इंटीरियर डिज़ाइन किया था .

आर्यन मुस्करा के सब देखते हुए अप्प्रेसियते कर रहा था फिर बड़ी दिल्लगी से बोलै ," इतना खूबसूरत कक्ष मैंने नहीं देखा , आप की सुंदरता को यह सही मन्ये दे रहा है ..... लेकिन आप ने भी राजकुमारी दीप्ति की तरह काफी राज उजगार न किये थे , फिर हल बीतये पल के साथ हम मुरीद hi हो रहे थे आपके हर हुनर और गुण पे ....... तलवार बजी का इतना व्हेग वाला प्रहार ने तोह हमको भी डरा दिया , सटीक और कुशलता का प्रमाण . अब तोह हमको भी आपसे तलवार बाजी का हुनर सीखना है ".

दीप्ति भी अब अपना मैं कड़ा करके सोच ली , यह तोह पूरी रात मेरी टैरिफ hi करते रहेंगे पर में अपने मेहबूब , मेरे माहि को अपना जिस्म भी समर्प्रित करुँगी बस मिलान की जिद्द न करें तोह.... अपनी शर्म टाक पे रखकर बस मुस्करा के आर्यन की तरफ पलट गयी .

दीप्ति ने आर्यन के कुर्ते के बटन खोल उसको उतरना शुरू किया और आर्यन की मदद से उतर के उसका बनियान भी उतर दी ....... आर्यन को जब अपने हाथ से बीएड पे लिटा दिया तोह खुद उसकी तरफ पीठ करके अपना लाल सूट उतर दी ....... अपनी गर्दन उठा के मुड़कर आर्यन को अपनी पिंक ब्रा का हुक खोलने को आँखों से इशारा की .

आर्यन जोह उसकी सगमरमर जैसे पीठ 4थी बार देख रहा था मगर बगैर नक़्शे के पहली बार ...... अपने हाथ को दीप्ति की गर्दन से उआकी कमर के बंधी पजामी के नाड़े तक सेहला दिया एक बार फिर ब्रा का हुक खोल दिया ..... आर्यन सोच रहा था अचानक दीप्ति को क्या हो गया जोह उतावली हो गयी है पर वह भी कहीं उसकी हद देखना चाहता था .

दीप्ति ने डिज़ाइनर ब्रा भी उतर के साइड में राखी फिर अपने दोनों हाथ क्रॉस कर नंगी छातियों को ढकती आर्यन की तरफ पलटी जोह टॉपलेस सिर्फ पाजामे में लेता था ...... दीप्ति नजरे झुका के आर्यन को बोली ," एक बार आंखें बंद कर लो मेरे माहि "

आर्यन ने स्माइल चेहरे पे लाते हुए अपनी नीली आंखें बंद कर ली ....... दीप्ति अपने प्रेमी , अपनी पति, माहि को देखती उसके सीने की मजबूती आँखों में भर्ती दोनों टांगें घुटने मोड़कर आर्यन की कमर के आजु बाजु रखकर आर्यन के ऊपर अपने 36 के साइज के अनछुए दूध कलश नंगे सीने पे रखती लेट के आर्यन के लिप्स चूम के बोली," आप अपनी सुहागरात का दूध पी सकते मेरे स्वामी पर बनेगा अपने समय पर hi ".

आर्यन ने भी मुस्करा के आंखें खोली और दीप्ति के छूटे से मटर के दाने जैसे निप्पल को अपने सीने पे महसूस करते अपनी दोनों बाहिएँ उसकी पीठ और चिकनी कमर पे लपेट ली ," सच्च में तुम बहोत सूंदर हो दीप्ति तन्न से hi नहीं मैं से भी और दूध तोह में पी hi लूंगा "..... hi hi hi hi .....

दीप्ति भी मंद मंद मुस्काती आर्यन के ऊपर hi आगे को खिसकी और अपनी दोनों हाथ उसके सर के आजु बाजू रखकर अपनी सबसे सुन्दर छातियां तान के आर्यन की नीली आंखें बड़ी बड़ी कर दी , चूचिचोर, आज बस स्तद्भ hi रह गया इतने उसकिर्षत वक्षों को देखकर , बेस्ट बूब्स विथ बेस्ट निप्पल एंड स्माल अरेओला ...... बस दो की चूचियां दुनिया में दीप्ति से भी अच्छी थी , एक थी जाने जिनको वह खूब चूसा था और दूसरी थी अणि जिसको अभी तक नंगी देखने के बाद भी हाथ नहीं लगया था आर्यन ने एक साल पहले माउंट एवेरेस्ट पे क्लाइम्बिंग के दौरान ....... अणि को आर्यन अपनी बेटी की तरह प्यार करता था जोह उसकी सगी छोटी भी भें थी और ुष समय बस उसको अपने से लिप्त के सरीर की गर्मी hi दिया था .

दोनों मैं चहई दीप्ति की 35-36 की C-Cup वाली चूचियों को हाथों में थाम के उनको प्यार से सेहला और दबा के पूरा अहसास लिया फिर लेफ्ट निप्पल को जीभ से चाट के होंठो में ले पीने लगा ......

( *आर्यन को चूचिचोर, यह नाम गीता ने दिया था और दूसरा नाम 'चूचीधार' भी )

दीप्ति ने जैसे जोश में अपनी दोनों टांगें बींची पर झांघों ने गुणतां से थोड़ा ऊपर जैसे मोटा खम्बा कास लिया हो पर जब उसको अंदजा हुआ तोह मोह खुला hi तोह रह गया ," हैययय राममम एहहहहह क्याआ हैईईई ...... हांण माहि पी लो अपना दूध , आज से में तुम्हारी हुयी मेरे माहि ...... पहला दूध तुमको hi पीलोगी मेरे माहि ..... सीईई काट मत बस चूस लो ...... अह्ह्ह्हह ऐसे hi सीईईई अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण आराम से पी लो ........"

आर्यन पूरा मोह खोल के ज्यादा से ज्यादा ठूस चूचियां को बारी बारी निप्पल समेत दबा दबा के चूस रहा था जैसे खा hi जायेगा अगर दूध न निकला तोह ....... मजे से दोनों की hi आंखें बांध थी , दीप्ति आर्यन के बालों को पकड़े उसका सर अपने चूची पे दबा देती ........

मगर मोठे लम्बे लौड़े को अपनी जांघो से जोरसे भींच के उसकी कठोरता hi नापने लगी ...... आर्यन 10 मं तक चूची चूसने के बाद दीप्ति के अब लिप्स को चूसता हुआ , उसको अपने निचे लेकर पलटा और दोबरा से उसकी छातियों को चूस चूस के ढीला करने लगा , दीप्ति आंखें बांध किये िश नए अहसास की मदहोशी से अपनी कच्ची 2 बार गीली कर दी, जब छातियां दर्द करने लगी तोह आर्यन ला चेहरा हटा के बोली ," अब मेरा सीना दर्द कर रहा है".

आर्यन मुस्करा के 2 मं उसकी चूचियों को चूसा नहीं बल्कि अपनी लम्बी जीभ से चाट चाट के गीला कर सहलाता रहा जैसे मलहम लगा रहा हो ...... बड़ा गुदगुदी वाला अहसास था दीप्ति भी खिलखिलाने लगी ....... hi hi hi hi ....." माहि गुलगुली हो रही है ".

आर्यन थोड़ा निचे खिसका के उसके पेट से निचे नाभि और सलवार के बिच चाटने लगा , छूट रास की खुसबू उसको आ चुकी थी पर पहले दीप्ति के पूरे पथ पे चुम्बन दिया फिर हलके हलके अपने दांत गदा के या जीब से चाट के उसके छोटी सी नाभि को कुरेद डाला ......

दीप्ति का पूरा शरीर कंपकपी से था सा गया, यह तोह सपनो से परए आनद की अनुभूति थी ...... दीप्ति तो जैसे अबोड नवयौवन प्राप्त की कन्या जैसी अब आर्यन के हाथ की कठपुतली बन गयी हो .

दीप्ति को तोह आजतक उसकी मम्मी रानी संगीता और जमुना hi टच करती थी या फिर बस 2 उसकी स्पेशल दासियाँ जोह उसको रेडी करती थी पर आज एक राजकुमारी अपने सपनो के राजकुमार आर्यन के सामने नहीं थी ....... अर्ध निवस्तर वह कामदेव रुपी आर्यन के सामने थी , अपनी पे आ जाये तोह औरतें काम पद जायेंगे आर्यन नहीं थकेगा पर यहाँ तोह अपनी hi प्रेयसी आर्यन के सामने थी जिसको बहोत प्यार से हर स्पर्श का सुख दे रहा था .

अपना मैं कड़ा करके आर्यन ने दीप्ति को अर्ध मिश्रित सुख देने का फैसला किया , यानी हलके दर्द के साथ पूरा मजा बिना पूर्ण मिलाप के .

आर्यन ने दोनों होंठो में दीप्ति के नाभि के नीचे मार्श को कसके चूसा तोह दीप्ति ने उत्तजेना से अपना पथ भींच लिया तोह पुकककक की आवाज आयी जिसको सुनकर आर्यन और दीप्ति हसने लगे पर अगले hi पल आर्यन ने अपना चेहरा उसकी झांघो के जोड़ के बिच कपड़ों के ऊपर से घुसा के उसकी छूट अपने मोह में भर के चूस डाली ..... पेंटी और सलवार सहित आर्यन के मोह में दीप्ति की योनि के आधार भरे हुए थे .

दीप्ति की सांसें रुक गयी और तीसरा बार का स्खलन ने जैसे बाद hi ला दी..... "मम्मी में मररररर गयी , बचोऊ भगवन अह्हह्ह्ह्ह महीईई नहीं ......" रेशमी सलवार और पतली से पेंटी भी जैसे आर्यन के मोह में छलनी का काम करती बस छूट का जूस फ़िल्टर करके भेज रही थी .......

दीप्ति की गांड अब आधा फुट बीएड से ऊपर उठी हुयी थी जिसको आर्यन थामे था और उसके दोनों हाथ आर्यन के सर को अपने योनि प्रदेश से जोड़े हुए थे .......

2 मं बाद स्वतः hi उसकी गांड बीएड पे टिक गयी और आर्यन ने हाथ हटा उसकी एक चूची को मसलने लगा और दुसरे से उसके सलवार का नाडा खोल उतर दिया और पेंटी भी ...... दीप्ति तोह जैसे अभी भी जन्नत की सैर hi कर रही थी ......

आर्यन खुद नंगा होकर अब दीप्ति की कच्ची घुटनो पे बैठकर चाट रहा था जब दीप्ति अपनी मदहोशी वाली आँखों को खोलकर ने उसकी तरफ देखा.... शर्म से अपने चेहरे को तकिये से छुपा लिए .

दीप्ति ने आंखें बांध किये बोलै ," महीईई वह गन्दी हो गयी है , उसका फ़ेंक दो प्लीज ".

आर्यन भी उसकी बात सुनकर उसकी तरफ देखा और बोलै ," ठीक है फ़ेंक देता हूँ पर िश अमृत को पीने से रोका है तुम ने अब आगे मत रोकना ".

दीप्ति की दोनों टांगें उठा अपने कंधे पे रख चूमनी सुरु की तोह दीप्ति फिर से मचल गयी , अपनी छूट दोनों हाथो से ऊपर से देख रही थी पर निचे आर्यन का हथोड़ो जैसा विशाल लुंड उसके चूतड़ के दरार से टकरा रहा था ...... आर्यन तोह उधर उसकी छूट को अभी देख भी नहीं रहा था , पैरों की गुलबलि रंगत वाली ऊँगली से लेकर उसकी चिकनी सफ़ेद जांघो तक पहुंचने में hi 10 मं लगा दिए हर जगह को चूमते चूसते हुए जैसे अपने प्यार की मोहर अपने होंठो से लगा के एरिया मार्क कर रहा हो ........

दीप्ति के दोनों हाथ अपने आप hi खुद की चूचियों से खेल रहे थे छूट से रास की नदी बहते हुए पर आर्यन ने दोनों टांगें उसकी छाती से लगा के गांड के चीरे से लेकर जब छूट की छोटी बांध फांखों को अपनी जीभ से चाट के चटकार मार के सारा रास पी डाला तोह दीप्ति जैसे हिस्टीरिया में hi चली गयी...... यह कैसा सुख का आनंद है जोह कभी मुझे महसूस hi नहीं हुआ .

आर्यन ने दोनों झांघो को पहला के उसकी छूट को खोलना चाहा पर जगह न hi बानी पास छूट की गुलाबी रंगत वाली उभरी पंखुड़ी अब फैलाव से आकर में थोड़ी उभर से काम हो गयी थी...... तब आर्यन मैं में बोलै , अश्वगंधा hi है यह दीप्ति तोह इसकी छूट ऐसे खुलेगी hi नहीं , इसको घोड़ी बना के छोड़ना पड़ेगा पर इसके अमृत तो पहले पि hi लूँ .......

गुलाब की काली सी बांध दीप्ति की योनि को पहले चरों तरफ से चूम के अपने हाथों में उसके वक्ष लेकर और अपने कन्धों पे झांघें संभाले जोह आर्यन ने अपने चिर परचित अंदाज़ में अपनी जीभ को पीना कर के काली सी बांध पंखुड़ी को कुरेदना शुरू किया मनो बस कक्ष में भूकम hi आ गया हो दीप्ति के लिए वह सीत्कार करती रही ," मेरे माहि , मेरे माहि ...... बस करो , दीदी ..... मम्मी ...... गीता दीदी कोई मुझे बचा लो ...... िश मजे से आज मुझे मर्डर hi जाना है ...... प्लीज माहि में मर्डर जाउंगी ...... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सीईई माहि मार hi डोज्ञे मुझे ..... मम्मीयियय ुर्घह्ह्हह्ह्ह्ह माहि ..... गीता दीदी बचा लोओओओओओओ मुझेईई ...... "

दीप्ति ऐसे hi िश नए मजे में चिलाती रही पर जब आर्यन 15 मं तक उसकी छूट के अमृत जूस को पीकर अपना चेहरा हटकर दीप्ति के ऊपर आया तोह 2 मं बाद दीप्ति ने सांसें दुरसत करके हुए उसके चुतरस से साणे पूरे चेहरे को साइड करके बोलै ," अह्हह्ह्ह्ह नाहीईई , महीईई फेस धूऊ लो , बहोत गंदे हो तुम मुझे मार hi डाला था आज तुमने ".

आर्यन भी हसकर ," ठीक है तुम hi साफ़ करो , मेरी साड़ी म्हणत बेकार गयी जब तुमको मजा hi नहीं आया "..... उसकी आँखों में कुटिलता देख दीप्ति भी जान गयी की कितना सरारती है मेरा माहि .

दीप्ति जोह अपनी साँसे दुरसत कर रही थी अपने हाथ से उसका फेस पहुंचे लगी ," हैयययय कभी ऐसा मत सोचना , तुम चाहते हो में ऐसे किश करुणंन ".....

आर्यन ने उसका साइड में पड़ा हुआ सूट उठा के ना में गर्दन हिला के साइड में लिएट गया और चेहरा सूट से फेस साफ़ करने लगा, पर दीप्ति को लगा की आर्यन ने सबकुछ उसकी ख़ुशी के लिया किया और मैंने सिर्फ उसको मन किया ...... क्या फरक पड़ता वह किश कर लेता , सबकुछ उसका hi है तो और प्यार में गन्दा कुछ नहीं होता .....

आर्यन अपना लोअर पहनकर दूर खोल के गीता के कक्ष में चला गया और दीप्ति को बहोत दुःख हुआ की अपनी सुहागरात पे अपने माहि को पूरा प्यार नहीं कर पायी ..... आँखों में आंसूं आ गए ...... ????

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गीता की भी तन्द्रा टूट गयी थी दीप्ति की मस्ती वाली चीखिआ सुनकर पर वह सोई hi कहाँ थी बस अपनी साड़ी जिंदगी रिवर्स hi कर डाली थी सोचते है जनम से लेकर अब तक .......

उसको आज लग रहा था की उसने आर्यन के इंडिया आने के बाद ुष पहली रात गाओं की हवेली टेरेस पे मिलान क्यों नहीं किया? उसके साथ यह शादी और सुहागरात के झंझट पाले hi क्यों थे? उसकी िंह दकनुषी शर्तों ने जाने क्या डॉली और नेहा को भी प्यार की पूर्ण अभूति से वंचित कर दिया? सबसे अच्छी तोह Dimple-Payal हैं जोह अपनी शर्तों पे ज़िंदगी के फैसले करती हैं , यह समाज उनके लिए कुछ भी नहीं बस उनका प्यार और फैसला hi सबकुछ सही है जोह उनके भाई आर्यन की तरफ hi जाता है .

मीणा ने गीता को मुंबई से आने के बाद Dimple-Payal का आर्यन से मिलान और आर्यन की अदृश्य अर्धांगी बनने का विवरण दे दिया था जिससे गीता को कोई इतराज न था. गीता जानती थी की Dimple-Payal के साथ मीणा तीनो आर्यन की जुड़वाँ भेने hi नहीं उसकी आत्मा से जुड़े 3 हिस्से हैं और आर्यन कभी इनसे अलग नहीं है .

गीता को अपनी सोच में डूबा देख आर्यन हस्ते हुए उसके गाल पे किश किया और गॉड में उठा लिया.

गीता हैरान होकर ," तू यहाँ क्या कर रहा है और दीप्ति कहाँ है ??".

आर्यन हसकर उसके लिप्स पे किश करके," दीप्ति ने तुझे बुलाया है की में गीता दीदी के बिना प्यार नहीं कर सकती , अब तू hi सीखा उसको ".

गीता जब तक आर्यन की पूरी बात समझ पाती तब तक वह दीप्ति के कक्ष में गीता को लेकर पहुंचा तोह दीप्ति बीएड पे नंगी बैठी सिमटी से सर घुटनो में छुपाये रू रही थी.

गीता और आर्यन उसको ऐसे देखकर एक बार को डर गए और दोनों अलग होकर दीप्ति को दोनों तरफ से लिपट गए बीएड पे चढ़कर ....... गीता और आर्यन को अपने से लिप्त देख दीप्ति भी रट हुए गीता से कसकर लिपट के रट हुए बोली ," दीदी में बहोत बुरी हूँ , अपने पति को खुश नहीं रख सकीय पहली रात को hi ...... मुझे जीने का का कोई हक़ नहीं ..... बहूओ बहूऊओ ........ "

गीता उसका रोना देखकर अपने मैं में सोची ," मतलब अभी कुछ हुआ hi नहीं क्या फिर यह इतना चीख क्यों रही थी ?"

गीता ने आर्यन की तरफ देखकर इशारे से पुछा की तूने कुछ किया तोह आर्यन ने बस कंधे ुचकर के बता दिया की अभी तक कुछ नहीं किया ...... गीता ," जा ुष कमरे से जूस लेकर आ , में बुलाती हूँ तुझे ".

आर्यन भी उसकी बात समझ के दुसरे रूम में गया और बीएड पे बैठकर सोचा की उसको दीप्ति को ऐसे अकेला छोड़कर गीता के पास नहीं जाना चाहिए था पर िश खड़े लुंड का क्या करूँ साला बेथ hi नहीं रहा था और दीप्ति इसको शांत नहीं कर पाती .

10 मं बाद गीता ने आर्यन को आवाज दी अंदर जाकर दोनों को सिर्फ बदन पे बड़े बड़े टॉवल लपेटे बीएड पे बैठे देखकर आर्यन चौंक hi गया था की यह दोनों जुड़वाँ हंसकाल भेने का बस दूर दूर से दिखा कर hi मुझे जान से मार देंगी.

वाओ कितनी सेक्सी लग रहीं हैं एक आग का गोला तोह दूसरी ताजा बर्फ सी ....... पर दोनों ने बीएड से उतर के सोफे के पास जाकर जब टॉवल उतर के बिकनी में उसको दिखाई दी तोह आर्यन का मोह जैसे खुकलर जमीन hi टच कर जाता अगर लचीला होता . दोनों में उसको क्लीन बोल्ड कर दिया . आर्यन को लूट hi ली थी दोनों चोरी अपने जलवा दिखा के ......

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दीप्ति - गीता

दोनों का कलर ब्लैक एंड वाइट था पर प्यार के अंधे आर्यन को दोनों एक सी hi दिख रही थी ...... दोनों जुड़वाँ भें ने आर्यन को अपना हुसैन दिखा के काबू hi नहीं गुलाम hi बना लिया था ......

अब सवाल था क्या दीप्ति अपनी सुहागरात मन पायेगी गीता की मदद से ???..... यह तोह सारू के अल्वा बड़े गुरूजी भी नहीं जान सकते ुष कमल कवच की वजह से ......

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दिव्या तलवार जब ख़ज़ाने में कुछ 2-3 सेन्टीमीटर्स और धंसी तोह विशाखा की नींद फिर आज में hi दूसरी बार टूटी ...... यानी तगड़ा शिकार आएगा पर दिव्या तलवार का तेज़ देखकर एक बार तीनो मणि जड़ित पहन की बिफिड जीभ से तलवार को बारी बारी चाट के बोली ," तुझे मुझसे कोई अलग नहीं कर सकता , तेरे साथ में नहीं छोड़ सकती. कोई तुझे चूहा तोह मुझे पहले मारना होगा उसको यह कभी होगा नहीं ".

दिव्या तलवार की अंतर्मनन आवाज," तुझे hi मारने आ रही मेरी अंगरक्षक भें इशलिये में भी डर hi रही हूँ अपने मालिक के लिए ".

तीनो की आंखें खुल गयी जब शामे डायलॉग दीप्ति की मोह से न्यास hi निकला .... जोह आर्यन के लुंड से निकले विरए अपनी छूट पे सैन्य गीता के साथ नंगी रगड़ी जिसकी आंखें भी उसकी आवाज सुनकर खुली जोह हलकी सी फुसफात hi थी ...... " तुझे hi मारने आ रही मेरी अंगरक्षक भें इशलिये में भी डर रही हूँ "......

सवाल कई थे तीनो के पास पर जवाब किसी के पास नहीं था ..... ????

हार्ट हार्ट हार्ट
 
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दोस्तों अगले दो अपडेट ज्यादा रोचक थ्रिल्स और एडवेंचर से भरपूर होंगे .....

मेरी कोशिश एक वेडनेसडे और दूसरा सैटरडे को पोस्ट करने की होगी . थोड़ी म्हणत लग रही है दोनों अपडेट लिखने में.

धयानवाद [img=22x0]
 
दोस्तों अपडेट पे hi काम कर रहा हूँ पर अभी टाइम लग रहा है ..... बस मुझे ज्यादा टाइम लगेगा पोस्ट करने में.

आज अपडेट नहीं दे पाउँगा .... सॉरी

कल पक्का पोस्ट करने की कोशिश करूँगा.
 
अपडेट - 34

PART - 5 ( राजकुमारी 3)

गीता ने अपने गले से लिपटी निवस्तर दीप्ति को चुप करा के उसका गाल चूमा ," पागल लड़की कोई सुहागरात को रोटा है, वैसे जब कुछ हुआ नहीं तोह इतना चीख पुकार क्यों कर रही थी ? प्यार के लिए दिल से रेडी होना पड़ता है फिर दिक्कत क्या है , इसके लिए hi तोह तुझे कबसे इंतज़ार था ?"

दीप्ति सुबकते हुए ," दीदी में आपकी शादी और सुहागरात के बाद hi माहि से पूरा प्यार लेना चाहती हूँ और में आज उनको रुस्वा कर दी , माफ़ कर देना दीदी अपनी िश नादाँ भें को ".

गीता भी दीप्ति का साफ़ मैं और अपने लिए सम्मान देखकर िश लड़की की कायल हो गयी , ऐसे भी लोग हैं दुनिया में जोह अपनी जान भी किसी आवर के लिए डाव पे लगा देते हैं ...... यह चोरी बिलकुल मुर्ख है जोह आर्यन को इतने करीब से देखकर भी खुद को रोक ली मेरे लिए , कुछ तोह करना पड़ेगा इश्के लिए ..... हाँ याद आया जैसे जाने और मैंने जयपुर में डिस्को में एन्जॉय करने के बाद आर्यन को अपने हुसैन का जलवा दिखा के प्यार किया था वैसे hi करते हैं हम दोनों भी फिर एक बार दीप्ति को भी जोश चढ़ा तोह खुद आर्यन का हथियार अंदर दाल लेगी पर मुझे इसकी मदद करनी पड़ेगी .

गीता उससे अलग होकर बीएड से कड़ी होकर दीप्ति की एक अंडर गारमेंट्स वाली अलमीरा खोली और उसमे से 2 पीेछे लिंगेरी निकल के वाइट कलर की दीप्ति की तरफ फेंकी बीएड पे और एक खुद अपने लिए ब्लैक कलर की निकाल के बोली ," इसे फेन ले आज हम दोनों आर्यन की बंद बजाते हैं अपने हुस्न के जलवे दिखा कर , मेरी छोटी भें को उसने रुल्या अभी देखना हम दोनों के आगे दम हिलेगा hi hi hi hi ...... हाँ जैसा में कहती हूँ वैसे hi कर नहीं तोह कभी बात नहीं करुँगी , चल जल्दी फेन वह भी बंदूक लोड ( लुंड खड़ा ) किये परेशां होगा ".

दीप्ति ने आंसूं पहुंच के गीता को कपडे उतर के नंगी होकर 2 पीेछे पहनते देखा तब उसको अहसास हुआ की वह खुद नंगी बैठी है कब से ...... गीता आर्डर सा देती उसको बोली," जल्दी फेन नहीं तोह आर्यन से कभी मिलने नहीं दूंगी , समझ में आया ".

दीप्ति भी डरते डरते जल्दी बीएड पे hi बिकनी टॉप और निचे पेंटी फेन के दोनों की डोरी बांध ली , गीता ने 2 टॉवल निकाल के एक उसको दिया और बोली ," इसे लपेट ले और 1 मं में फ्रेश होकर आ बाथरूम से आज हम दोनों भी वही करेंगे जैसा जाने और मैंने जयपुर में किया था , जा जल्दी आ फेस धोकर ".

दीप्ति भी अब संभल गयी थी की गीता दीदी क्या करने वाली हैं पर उसको पता था दीदी सब ठीक hi करेगी ...... 5 मं में फ्रेश होकर आयी तब गीता ने उसको लिपस्टिक , रोष, काजल लगा के त्यार किया और खुद भी हल्का मेक उप का टच दे त्यार हो गयी और आर्यन को आवाज देकर दोनों बीएड पे बेथ गयी .

गीता ," जैसे में करूँ वैसे hi करना देखना बहोत मज़ा आएगा , अब शर्म गयी भाड़ में इतना याद रखना की अपने पिया जी को खुश करना है ".

आर्यन कक्ष में आया तो दोनों को देख के hi बावला सा ठगा सा खड़ा hi रह गया ..... दोनों बीएड से उतर सिर्फ टॉवल में लिपटी सोफे के पास जाकर बारी बारी टॉवल उतर के फर्श पे पहनकी तोह आर्यन को गीता ने टोका," मोह बंद कर ले मचार घुस जायेगा.... hi hi hi hi ........ जा बीएड पे लिअत जा और आँखों पे टॉवल लपेट ले , जब तक हम दोनों कुछ न बोलेन तू कुछ नहीं करेगा यही तेरी सजा है मेरी क्यूट सी गुड़िया जैसी भें को रुलाने की ".

गीता ने जब दीप्ति को अपने गले लगा के गाल चूमा तोह ऐसा लगा एक जैसी सकल की एक लड़की ने अपनी hi लाइव परछाई को चूमा है .

आर्यन के पाजामे में बना तम्बू बता रहा था वह जैसे सम्मोहन में है दोनों के हुसैन के ........ हुस्न बिखरती दोनों लड़कियां 6 फट लम्भी , एक जैसी बॉडी , लगभग शामे hi फिगर था पर कसाव हल्का सा गीता की बॉडी में ज्यादा था .....

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Geeta-Deepti

दोनों का हर एक अंग बेजोड़ था , तानी हुयी बड़े आम सी चूचियां , सुत्वा पथ और नाभि की घेरे भी शामे hi थी ...... पेट जैसे कमर से चिपका हुआ हो , सच्च में 26 इनचेस की कमर और 35-36 के साइज के फुल्ली शेप्ड बहार को निकले चूतड़ उन्ह लम्भी चिकनी टाँगिआन के बलिष्ट कसरती कटवा से जाता रहे थे यह दोनों हुस्न के नायाब रतन है ..... दीप्ति जहाँ दूध की तरह गोरी थी वहीँ डस्की कलर वाली गीता अपने जवले उससे ज्यादा नहीं तोह काम भी नहीं बिखरे रही थी . आर्यन तोह था hi जैसे कलर ब्लाइंड , उसके लिए तोह do-do हुस्न सुंदरी जैसे अपना hi हुकम चला रही हो .

आर्यन अपना थूक गटकता सनउनके पास जाकर जूस की दो बोतल दोनों के आगे कर दिया जोह गीता ने लेने के बाद टॉवल की तरफ इशारा कर बीएड पे जाने को कहा . दीप्ति शर्मा के अपना सर गीता की गर्दन में छुपा ली .

आर्यन ने जब दीप्ति की गांड की दरार में पेंटी धंसी देखि और गीता की छूट का चीरा उबारा हुआ पेंटी के अंदर , टॉवल निचे से उठाते हुए तोह दीप्ति के 3/4थी से अर्धनग्न चूतड़ को छूने को हाथ बढ़ता की गीता ने उसके हाथ पे मारा ," वहां जाकर लेटकर आँख बांध ले टॉवल से, हमको टच नहीं करना जब तक परमिशन नहीं मिले ".

गीता ने दीप्ति को सोफे पे बिठा के खुद निचे कालीन पे बेथ पोज़ बना के आर्यन की ऐसी अपने दोनों को खा जाने वाली नजरों को देखि तोह दीप्ति को मुस्करा के आँख मारी की इशारा की , देख ले एहि है न अपना माहि बन गया हमारे हुस्न का गुलाम .

आखिरी बार बीएड पे पीठ के बल बैठकर आर्यन ने भूकी नज़रों से दोनों को देखा और टॉवल से आंखें बांध ली तब गीता ने दीप्ति को आर्यन के पाजामे में झटके मारते विशाल लुंड की तरफ ऊँगली करके कहा ," आजा अपना गिफ्ट खोलते हैं, साला पिटारा फाड़कर बहार आ जायेगा ".

दीप्ति को भी अंदाज़ था की आर्यन का लिंग जरुरत से ज्यादा बड़ा है पर फुल्ली इरेक्शन वाले रूप में नहीं देखा था और ऐसे देख नज़र झुका के मुस्कारने लगी . गीता जैसे आर्यन को कण्ट्रोल कर थी कभी दीप्ति को अच्छा लगता कभी बुरा पर अब वह वही करेगी जोह दीदी कहेगी बस मिलान नहीं करुँगी .

दीप्ति का हाथ पकड़ के उसको उठा के पहले जूस पिलाया फिर थोड़ा खुद पिया और दोनों बीएड पे अब आर्यन के आजु बाजू बेथ गयी ...... गीता ने झुकार आर्यन के लिप्स पे किश किया और बोली ,"चल थोड़ा जूस पी ले थोड़ी ताकत आएगी ...... बस अभी दीप्ति की थोड़ी झिझक दूर होने दे में तेरी आंखें खोल दूंगी मेरी जान बस थोड़ा और इंतज़ार ".

आर्यन भी स्माइल से बोलै ," मजूर है मेमसाब पर मुझे भी उतना मौका मिलना चाहिए मैं मर्जी का जितना आप को मिल रहा है ".

गीता ने जूस पिलाते हुए कहा ," ठीक है पर तू अभी टच भी नहीं करेगा हम दोनों को ".

आर्यन ने जूस ख़तम करके थम्ब्स दिखा के हाँ कहा तोह गीता ने दीप्ति से कहा ," जैसे में करूँ वैसे hi तू भी करना और हम तीनो एक हैं बस इतना दिमाग़ में रख यहाँ सिर्फ प्यार hi प्यार है".

दीप्ति ने हाँ कहा तोह गीता ने आर्यन के दोनों लिप्स बड़े प्यार से 30 सेक् तक चूसी फिर दीप्ति का सर झुका दी वैसे hi करने को ..... दीप्ति भी आर्यन के गुलाबी लिप्स देखकर पहली बार सोची की कितने प्यारे लिप्स हैं माहि के बहोत hi सूंदर और बारी बारी दोनों को चूसने लगी हलके हलके पर गीता ने उसका हाथ अपने हाथ में ले आर्यन के सीने से लेकर पेट तक सहलाते हुए लुंड के उभर पे पाजामे के ऊपर से रखा और उसकी उंगलियन लपेट के बता दी कसके के पकड़ .......

दीप्ति और जोश से ुष खम्बे की तरह मोठे सख्त लुंड को अपनी अड़कसी मुठी में लपेट के जैसे बवाली hi हो गयी और आंखें जैसे डर से चौड़ी हो गयी ....... यह लिंग इतना बड़ा और मोटा है , यह अंदर किसी औरत के जा hi नहीं सकता है ...... आर्यन भी दीप्ति को बड़ी सिद्दत जवाब में किश कर रहा था .

गीता , दीप्ति का हाथ ऊपर से निच्चे तक पूरे लुंड का जायेगा दिलाकर छोड़ दी और अब आर्यन के राइट निप्पल को किश करती सीने को चूमने लगी , दीप्ति भी सांस फूलने पे किश तोड़कर गीता को देखि फिर वह भी ुशी तरह आर्यन के बलिष्ट सीने की दूसरी तरफ किश करने लगी ........ गीता साथ थी तोह दीप्ति भी अब हिम्मत दिखा रही थी .

आर्यन के अपनी दोनों हाथ उन्ह दोनों की तरफ बढे पर खुद को कण्ट्रोल करके ुर्घह्ह्ह्ह करता वापस बीएड पे रख लिया. दोनों लड़कियों का थोड़ा अनाड़ीपन पर सिध्यत वाला प्यार देख वह भी िश लम्हे का मजा लेने लगा .

दीप्ति पीछे हुयी आर्यन की मस्ती भरी आवाजें सुनकर तोह गीता ने एक डीप बाईट देता किश उसके सीने पे करके बोली ," चल दीप्ति अब गिफ्ट पैक खोल "...... और आर्यन का नाडा पकड़ के उसको खोलने को बोली.

दीप्ति ने शर्मा के नजर झुकी तोह गीता ने उसका हाथ पकड़ के पाजामे का नाडा पकड़ के खोल के आर्यन का पजामा निचे किया पर अगले hi पल एक अजगर को सर उठए बहार आया देख कर वह पिच हटकर बीएड से उतर गयी ," डीडीईई एहहहहहह तोह ..... "

गीता ने हसकर पूरे 12 इंची लम्बे और 4.5 इंची मोठे गूरे सूंदर से विशाल लुंड की गर्दन यानि टोपे के निच्चे से खूंटे की तरह पकड़ के दीप्ति को दिखा के बड़े गर्व से कहा ," दीप्ति बेबी , मीट 'तोपची ' नाम तोह सुना hi होगा ..... hi hi hi hi ...... देख कितना सूंदर और प्यारा है तूने पहले भी देखा था न " और झुकार चूम ली तोह आर्यन के मोह से भी सिसकारी निकल गयी ..... सीईइईसीईई हम्मम्मम्मम्म ..... यस चंदा रानी प्यार कर रे .......

गीता ने ऊँगली के इशारे से दीप्ति को पास आने को कहा और एक हाथ से लुंड को ऊपर निच्चे करने लगी ....... दीप्ति वापस ॉश्चारिये से बीएड पे बैठी तोह उसका हाथ पकड़ के लुंड से टच करवा के बोली ," यह बहोत hi नायब तोहफा है हमारे पति का और तू इतनी बड़ी योद्धा और राजकुमारी होकर डर गयी क्या कभी तूने किसी का नहीं देखा ".

दीप्ति थोड़ा शर्मा के," बस एक दो बार पोर्न मूवी में देखा था अपनी सहेली के साथ पर इश्को कोई कैसे झेल सकता है, अंदर गया तोह में मर्डर hi जाउंगी ".

गीता हसकर ," अभी तक तोह कोई नहीं मरी और वैसे भी हम सब बीवियां लेट चल रहे हैं , तू तोह अब खुलकर प्यार कर तेरी तोह सुहागरात भी है आज ...... जितना तोपची से प्यार करेगी उतना hi तुझे प्यार करेगा ". ( आर्यन अब जानकार भी चुप रहा की अभी उसका रोले नहीं आया है )

दीप्ति दोनों हाथ से पूरा लुंड को प्यार से स्पर्श कर्कटी हुयी पूछी ," यह तोपची अजीब नाम नहीं है ".

गीता हसकर ," हाँ सेना में देखा जाइये तोह बड़ा नाम नहीं है पर तोप से फायर तोह तोपची hi करता है और वैसे भी आर्यन का लुंड किसी घोड़े , गधे से काम है क्या साइज में ...... छोटी भाभी (रीता मामी) ने नामकरण किया था , बस हम सबको भी यह नाम अच्छा लगा तोह जब भी इसको प्यार करते हैं तोपची बोलते हैं "...... गीता भी दीप्ति को पूरा ज्ञान दे रही थी आर्यन के लुंड के बारे में और आर्यन किलास रहा था की यह गीता आज hi सब बक देगी क्या ...... उसका लगा पता नहीं किस किस का नाम ले देगी ...... दीप्ति को सबके नाम नहीं बातये थे आर्यन ने .

आर्यन थोड़ा तड़प के ," तुम मुझे यहाँ लिटा के बस बातें hi करती रहो , अरे अब दर्द हो रहा है कमसे काम तू चूस hi दे चंदा रानी ..... अह्हह्ह्ह्ह ".

गीता ने हसकर कहा ," चिंता मत कर हम दोनों इश्कि सेवा करेंगे बस 5 मं बाद टॉवल हटाना , दीप्ति तू ध्यान से देख कैसे इश्को प्यार करते हैं ".

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गीता बड़े मजे से पहले पूरा कश्मीरी सेब जैसा टोपा बहार निकाल के चूमि फिर छाती और अब मोह पूरा खोल के चूसने लगी ..... पुछःह पुछठ ...... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप मुहह्ह्ह्ह मुहह्ह्ह्ह ...... गुलपपपप गुलपपपप ......

दीप्ति भी बड़े ध्यान से गीता को देख सीख रही थी और वह भी त्यार थी , आर्यन को मजे में आवाज निकलते देख उसकी जांघ और पेट अपने हाथ से सेहला रही थी ..... 3 मं बाद गीता ने मोह हत्या और दीप्ति का सर झुका दिया लुंड पे ...... दीप्ति जानती सब थी पर शर्म और झिझक गीता की मदद से उसकी काम हो रही थी और पेंटी भी पूरी गीली हो गयी थी उत्तेजना से .

दीप्ति भी दोनों हाथो से अब लुंड थाम पहले चूमि फिर जीभ निकाल के छाती और हलके हलके चूसने लगी ...... उसको पहले सोचकर ऐसा करना घिनोना सा लग रहा था पर खुद करते हुए बड़ा मजा आ रहा था और गुदगुदी सी बदन में हो रही थी की , यह तोपची तो मेरा hi है , हाय कितना बड़ा और सख्त है ...... हाय कितना सूंदर और प्यारा है ....... बहोत बड़ा है मेरे माहि का और उसी की तरह स्पेशल भी है ...... कभी कभी जोश में दांत लगा देती तोह आर्यन उफ्फ्फफ्फ्फ़ करता रह जाता ..... गीता ने उसके दोनों बड़े ांडों ( टेस्टिस) को चाट के मरहम सा लगा दिया और बारी बारी दोनों लड़कियां जगह बदल बदल के चाटने चूसने लगी .....

आर्यन के लुंड में दोनों जैसे खोकर दिल से बारी बारी चूस रही थी , दीप्ति नौसिखिए hi थी पर अनुसरण गीता का बखूबी कर रही थी ...... आर्यन ने 10 मं बाद hi खुद hi आँखों से टॉवल निकाल के साइड रखा ...... दोनों के बिकनी टॉप की दूरी खोल के बारी बारी से चूची दबाई तब उनका धयान आर्यन पे गया जोह उनको hi देख के चूची दबाता है रहा था ......

आर्यन ने दोनों की कमर में हाथ दाल अपने ऊपर गिरा के गीता को पहले स्मूच किया फिर दीप्ति को ....... दोनों जैसे अमर बेल की तरह उससे लिपट गयी दोनों की कच्ची छूट रास से भीग गयी थी लुंड चूसते हुए पर अब आर्यन कहाँ रुकने वाला था , उसने गीता को अपने लुंड की तरफ तेल दिया की चूस उसे और दीप्ति की चूचियों पे हुम्ला कर एक हाथ से उसके चूतड़ दबा के दुसरे एक चूची को मसलने लगा और पीने लगा ...... अब बारी थी दीप्ति की मस्ती में सिसकने की ...... महीईई में मर्डरर गयीईइ अह्हह्ह्ह्ह ारामममम सीई ...... यस ऐसे hi ......

दीप्ति की चूची चूस कर उसकी पेंटी उतर के फ़ेंक अपने मोह पे बिठा छूट जैसे अपनी जीभ से झंझोड़ hi डाली और उधर गीता ने 5 मं लुंड चूसा फिर आर्यन के ऊपर लिअत अपनी पेंटी उतर खुद अपनी छूट लौड़े पे घिस घिस के झाड़ गयी .

दीप्ति भी झाड़ गयी तोह आर्यन ने गीता को साइड करके दीप्ति को निचे लिटा और उसकी छूट से लुंड भिड़ा दिया तोह दीप्ति ने आर्यन के सीने पे हाथ रखकर कहा ," में तभी अंदर लुंगी जब दीदी के अंदर मुझसे पहले प्यार करोगे , प्लीज माहि मेरी इतनी रिक्वेस्ट मान लो "......

आर्यन ने उसके लैब चूमे ," चलो ठीक है में ऐसे hi कर लेता हूँ पीछे से अब रुका नहीं जा रहा है ".

दीप्ति शर्मा के ," नहीं नहीं वहां तोह बिलकुल भी नहीं करने दूंगी , यह उन्नातुराल होता है ".

आर्यन हसकर ," पीछे से मतलब तुम उलटी लिअत जाओ में बहार से तुम्हारी वागिना के ऊपर hi घिस घिस कर लूंगा बस 5 मं दो ".

दीप्ति को पेट के बल लिटा के आर्यन उसकी छूट और गांड के ऊपर से लुंड दोनों झांग के बिच घिसता उसकी चूची दबाता हुआ मजे लेने लगा उसके बदन के ...... 5 मं ऐसी तूफानी रगड़ के बाद दीप्ति को भी एक बार झाड़ के अलग हुआ तोह गीता उसके सर पे बेथ अपनी छूट भिड़ा दे आर्यन के लबों से ...... दीप्ति भी आर्यन के ऊपर लिअत गयी अपनी छूट लुंड पे रगड़ती हुई उसका झाड़ दी ...... 3 मं में गीता ने भी उनके साथ hi छूट का पानी छोड़ दिया वह भी आर्यन के लेफ्ट साइड सर सीने पे रखकर लेट गयी ......

आज तीनो को भी बहोत मजा आया , दीप्ति के लिए पहला अनुभव था ओरल और सकिंग करने का पर गीता की मजूदगी ने हर अनुभव आसान सा hi तोह बना दिया था उसके लिए ...... फिर दोनों के बिच एक बहेनो वाला जोह बांड बन चूका था और पति तोह शामे hi है फिर कबतक शर्म करेंगे ......

तीनो बस आंखें बंद किये िश प्रेम को दिल की घेरे में बिठा रहे थे की दीप्ति की मोह से न्यास hi निकला .... जोह आर्यन के लुंड से निकले विरए अपनी छूट के ऊपर सैन्य गीता के साथ नंगी लेती थी आर्यन के ऊपर जिसकी आंखें भी आवाज सुनकर खुली जोह हलकी सी फुसफात hi थी. " तुझे hi मारने आ रही मेरी अंगरक्षक भें इशलिये में भी डर रही हूँ ".

आर्यन और गीता ने दीप्ति को देखा तोह वो भी जैसे हैरान hi थी की यह क्या बोली पर आर्यन समझ गया की यह किसी और की आवाज है यानी दिव्या तलवार वापस नक्शा बना ली है ....... सच्च में दीप्ति की पीठ पे अब नक्शा चमक रहा था और समयचक्र फिर से शुरू हो गया ....... (पर तीनो को पता नहीं चला की 3 घंटे बीत चुके हैं) ....... तीनो का िश प्यार का दिल से समर्पण और लगाव जैसे तीनो को एक hi धड़कन में पिरो दिया था .

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आर्यन ने दोनों को गॉड में उठकर बाथरूम ले गया और तीनो एक साथ नहाये , दीप्ति शर्मा रही थी पर गीता और आर्यन ने उसको भी साथ नेहला लिया ....... तीनो बहार आकर योद्धा वाली ड्रेस पहन लिए जोह आर्यन अपनी साथ लाया था अपने बैग में और गीता को दीप्ति ने अपनी hi स्पेशल वार्डरॉब से निकल के दी ......

आर्यन ने अपना बैग साथ ले लिया और गीता और दीप्ति ने भी एक एक पितु बैग लिया , तीनो अपनी अपनी तलवार और गन्स भी साथ ले लिए जैसे कहीं युद्ध लड़ने जा रहे हो ........

समयचक्र रुकने से अभी hi रात का 2:30 बज रहा था और आर्यन ने आँख बंद की तोह लोटस शील्ड हैट गयी जिसको देखकर सारू भी खुश हो गयी की आर्यन अपनी शक्तियां समझने लगा है जोह सारू से मिली थी ...... आर्यन को शील्ड के समय hi पता चल गया था मम्मी ने ऐसा किया है .

आर्यन ने आँख बंद किये hi कहा ," हम तीनो जा रहे बस हमारे सफर की लिए सुब्कामयियन और आशीर्वाद दिज्ये, बड़े गुरूजी ".

बड़े गुरूजी ," वॉश आर्यन बस क्रोध पे काबू रखना वहां तुम्हारा क्रोध hi तुमको हरा सकता है और बाकी दीप्ति है तुम्हारे साथ , विजयी भाव ".

आर्यन ने आँख खोली तोह सारू, मीणा और अणि सामने कड़ी थी दीप्ति के कक्ष में ....... आर्यन बिना किसी की परवा किये सारू से लग के उसका पूरा चेहरा hi चूम डाला ," मम्मी ी मिस यू सो मच ".

मीणा जोह पास hi कड़ी थी वह दीप्ति की तरफ जाने लगी तोह आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के सारू के साथ बाँहों में लेकर उसको लिप्स पे किश किया ," कैसे हैं मीणा तू मुझसे बगैर मिले कहाँ जा रही है".

अणि ," भाई आपको डिअर हो रही है , अभी कल रात के 10 बजे hi गएँ हैं हम और अभी 5 घंटे भी नहीं हुए आप तोह ऐसे मिल रहो जैसे सात जनम हो गए ".

आर्यन हसकर मीणा और सारू के माथे चूमकर अपनी छोटी भें अणि की तरफ मुड़कर उसको अपनी बाँहों में ले लिया," प्यार करने के लिए सात जनम भी काम होते हैं , ी मिस यू माय बेबी गर्ल ".

अणि का माथा और दोनों गाल चूमने के बाद अणि ने भी अपने बड़े भाई का गाल चूमा और कसकर लिपट गयी जैसे कोई उन्होनी होने वाली हो जिसका उससे पता है ...... आर्यन ने भी उसको अपनी गॉड में बिठा लिया बीएड पे बैठते हुए ," में उन्ह गया और उन्ह आया बस सबका ध्यान रखना , किसी को भी परेशां मत करना समझी ".

अणि भी अपने बड़े भाई की गॉड में बैठकर सर हिला के बोली ," में ध्यान रखूंगी पर मेरी जरुरत हो तोह बुला लेना में आ जाउंगी ".

आर्यन और अणि दोनों जानते थे अणि नहीं आ सकती बस गीता और दीप्ति के लिए अणि ने ऐसा कहा ......

सारू और मीणा उधर गीता और दीप्ति से बात कर रही थी ...... सारू गीता से ," गीता तू गुस्सा मत होना वहां और हाँ आर्यन अगर तेरी वजह से कमजोर पड़े तोह उसका जोश बढ़ना , तुम तीनो जा रहे हो तीनो वापस आना बस एहि वादा करो ".

गीता भी मुस्करा ," मुझे तोह आर्यन कुछ होने नहीं देगा , दीप्ति अब उसकी अर्धांगी बन गयी है तोह यह भी हमारे साथ hi आएगी . दीदी, आर्यन हारने के लिए नहीं बना है वह जरूर जीतेगा मुझे ुष्पर पूरा विश्वास है".

मीणा , दीप्ति से ," शादी मुबारक हो दीप्ति , तुमने हम सबको नयी जिंदगी दी है और हमारी आर्यन से शादी का रास्ता भी साफ़ किया है ".

दीप्ति ," ऐसा न बोलै मीणा , में तुम सबसे अलग नहीं हूँ बस मेरी जान बचने के लिए आर्यन ने ऐसा किया वार्ना में शादी तुम सबके बाद hi करती और दुनिया की नजर में तोह गीता दीदी के विवाह के बाद hi माहि की दुल्हन बानगी ".

मीणा ने उसको गले से लगा के कान में कहा ," आर्यन का साथ देना अगर उसको गुस्सा आये तोह उसको चूमकर मन लेना , तुम्हारी ज़िंदगी से यह दिव्या तलवार वाला श्राप ख़तम हो जाये तब तुम असली ज़िंदगी जी पयोगी पर कुछ पाने के कुछ खोना भी पड़ता है ?"

दीप्ति कुछ मीणा से पूछती उससे पहले अणि बोली ," आप तीनो अब निकलो , टाइम हो रहा है हमको ख़ज़ाने देखने से भाई ने मन कर दिया है ".

आर्यन ने प्यार से कहा ," ऐसा नहीं है अणि बेबी , देख गीता के परिवार का खज़ाना वह खोलेगी और दिव्या तलवार से दीप्ति की ज़िंदगी जुडी है तोह उसकी जान भी बचानी है ...... अगर आप तीनो को ऐसा लगता है में आपको दुर्र रख रहा हूँ तोह चलो मेरे साथ पर परिवार का ध्यान क्यों रखेगा मीणा ".

सारू हसकर आर्यन के गले मिलकर बोली," ठीक है तुम जाओ और जल्दी आओ , मुझे मेरी दोनों बहु मेरे सामने सही सलामत चाहिए समझे ".

गीता और दीप्ति ने सारू के मोह से बहु सुना तोह दोनों ने उसके प्यार छूए तब अणि बोली ," में भी ननद हूँ मेरे भी छु सकती हो अगली बार .... bye ".

गीता गुस्से से उसकी तरफ बढ़ती , वह तीनो गायब हो गयी अणि के मंतर बुदबुदाने पे ...... अब तीनो जरूरी सम्मान लेकर निकल लिए राजमहल के उतर दिशा की तरफ जहाँ तहखाने में जाने का रास्ता था ..... अणि का मंतर आज िश शाही राजमहल को नींद की आगोश में नहीं बल्कि किसी मरघट जैसी शान्ति में तब्दील कर रखे था ..... वैसे भी उसकी पावर यही तक इस्तेमाल हो सकती थी.

अणि अब दिल्ली फार्महाउस पे मीणा और सारू को टेलिपोर्ट करने के बाद उनसे 10 मं बात करके , दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ निकल गयी अपनी सिक्योरिटी के साथ प्रभा को रइवे करने जोह साउथ अफ्रीका से आ रही थी...... पर अणि मैं में हस्ती हुयी यह प्रभा मुझे सरप्राइज देना चाहा रही चाचीजी को साथ लेकर जबकि उसको भी नहीं पता की वह प्रेग्नेंट है , भाई का बीटा निर्मला चाचीजी की कोख में पल रहा है जिसको उन्होंने पूरी दुनिया से छुपा रखा है ...... रति देवी त्यार हो जा प्रभा तेरी सबसे कमजोर दुखती राग है जोह तेरा hi शिकार करेगी अपना अधिकार जमा के .

( संजय सिंह -- ( चाचा) वर्क अस सिविल इंजीनियर इन पव्ड डेप्ट , हट 6'2" , आगे 40यरस ...... आज कल अपनी गोवत जॉब 8 साल पहले छोड़कर, एक आयल कंपनी में , वर्किंग आयल रिग इन साउथ अफ्रीका से अस चीफ ड्रिलिंग इंजीनियर .

निर्मला सिंह -- (चची) , हट 5' 11" , आगे 36यरस, वैरी ब्यूटीफुल एंड लवली , ऑलवेज लव हेर फॅमिली एंड माहि , हद 1 डॉटर प्रभा ......

प्रभा - डार्लिंग कजिन सिस्टर ऑफ़ आर्यन , आगे 18 यरस , दोंग 2 ईयर इंजीनियरिंग इन दुर्बान. ड्रीम बॉय , आर्यन हेर कजिन एल्डर बरोथेर . )

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रात के 2:40 ऍम ......

( समयचक्र जब शुरू हो गया था )

अलवर राजमहल में िश टखने के सबसे निचली अँधेरी 3रद मंज़िल पे एक बड़े से लोहे का दरवाजा था...... जैसे वर्षों से न खुला हो और धुल की एक मोती परत छड़ी हुयी थी ...... उसके सामने तीनो खड़े थे , यहाँ जैसे हमेशा अँधेरा hi रहता हो , दीप्ति ने अपने हाथ में ली हुयी जलती हुयी मशाल से ुष जंग खाये और मकड़ी के जालों से ढके दरवाजे के दोनों तरफ दिवार पे लगी हुयी मशाल जला दी जोह धू धू करके जल गयी तोह आर्यन ने अपनी सर्च लाइट बंद कर दी.

12 फट ऊंचाई और 10 फट चौड़ा यह अँधेरा गलिहारा जलती मशाल की रौशनी में अब हलके प्रकाश में दिख रहा था. तीनो योद्धा की पोषक में यहाँ दीप्ति के कक्ष से आये थे ....... पूरा राजमहल तोह आज अणि के मंतर की वजह से सोया hi पड़ा था .

आर्यन ने जब गौर से दरवाजा देखा तोह 8 फट ऊँचा और 5 फट चौड़ा था ..... उसको चाबी लगाने वाला होल उलटे हाथ की तरफ दिखाई दिया. गीता ने एक जुंग खायी ( रोस्टेड) बड़ी सी 11 इंच लम्बी बड़े दाते दार चाबी अपने बैग से निकाल के आर्यन को दी तोह वह उसको देखने लगा .

गीता ने कहा ," यह चाबी महाराज त्रिभुवन ने दी थी और बतया था की इसी से दरवाजा खुलेगा , 60-70 साल से यह दरवाजा नहीं खुला है तोह आराम से खोलना चोट मत लगवा लेना , सामने 1फट लम्बे नुकीले भाले से लगे हैं िश दरवाजे पे और चाबी से लगता है कितना मोटा यह लोहे का दरवाजा होगा ".

आर्यन कुछ सोचकर ," चंदा रानी यह तेरा खज़ाना है तोह तू hi खोल िश चाबी से , खज़ाना उसके उत्तराधिकारी को खोलना चाहिए , क्यों दीप्ति तू क्या कहती है? "...... जोह दीवार की तरफ देख रही थी ......

आर्यन के मोह से अब अपने लिए तू तुड़ाक वाली वाणी सुनकर उसको अच्छा लग रहा था , हर पत्नी अपने पति से एहि तोह चाहती है.... जगह , लोग और समाज देखकर उसका सही से सम्भोदित करए . गीता दीदी की तरह में भी आर्यन की बीवी हूँ अब उनकी तरह मुझे भी तू बोल रहे हैं , ी लव यू माहि ...... गीता ने जब उसको हिलाया तोह होश में आयी .....

दीप्ति ने सर झुका के कहा ," नहीं माहि, दीदी नहीं खोल सकती िश दरवाजे को , िश में 4 कुंडे लगे हैं इसको खोलने के लिए hi इसका वजन देखकर 40-50 पहलवान जैसे आदमी खींच के खोलते होंगे और उत्तराधिकारी आप भी हैं क्योंकि आप दीदी के मंगेतर भी हैं और जल्दी hi शादी होगी तोह आप hi खोल सकते हैं ".

गीता ने जब दीप्ति की तरफ देखा तोह उसने सामने दिवार पे बने एक बड़े से वाटर पेंट वाले चित्र की तरफ दिखाया जहाँ करीब 50 के करीब सैनिक जंजीरों से ुष दरवाजे को खींच रहे थे पर जोह बहार निकला वह दरवाजा नहीं था बल्कि एक बड़ा लोहा के दरवाजे के आकर का लोहे का स्क्वायर ब्लॉक सा था जोह वजन से भी 2-3 टन का होगा .

आर्यन ने सर्च लाइट से ुष चित्र पे रौशनी दाल एक कपडा अपने बैग से निकाल के उसको हलके से साफ़ किया और ाचे से देखकर बोलै ," दीप्ति कोई और चित्र भी है क्या यहाँ इसकी तरह ?"

दीप्ति थोड़ा चौंक के दोनों को बारी बारी देखकर बोली ," माना में िश राज्य की राजकुमारी हूँ पर में खुद पहली बार यहाँ आयी हूँ और यह तेखाने की तीसरी मंज़िल सबसे निचे की है जोह राजदरबार से भी गुप्त hi होगी , मुझे नहीं लगता पिताजी महाराज , राजगुरुजी और मम्मी के अल्वा किसी को इसका पता हो ".

आर्यन ने सर्च लाइट गीता को दी और दीप्ति को भी िश गलिहारे की दिवार , फर्श और छत्त बारीकी से देखने को कहा .

गीता और दीप्ति राइट साइड और आर्यन लेफ्ट साइड ढून्ढ ने लगा. ( आर्यन और दीप्ति को अँधेरे में भी दीखता था नीली आँखों की वजह से . )

(## दोस्तों में एक बात फिर से रेमिंद करवाना चाहूंगा की गीता , रति के पास अभी तक कोई सुपरनैचरल पावर्स नहीं है .)

गीता को दरवाजे से 7-8 फट दूर राइट साइड एक खूंटी सी दिवार पे दिखी थी पर तीनो को कोई और चित्र या संदेह जनक वास्तु नहीं मिली.

आर्यन," लगता है कुछ नहीं है सिर्फ एक चित्र के अल्वा" , तब गीता बोली," एक खूंटी तोह है वहां पर उसका क्या इस्तेमाल होगा ?"

गीता की बात सच्च थी क्योंकि वह दीवार के रंग जैसी hi थी जोह आर्यन और दीप्ति की नज़र से भी बच गयी ..... दीवार से 1 इंच hi बहार होगी .

आर्यन ने गीता की बाटइ दिशा में देखा तोह खूंटी लकड़ी की hi थी और उसका बहार का सिरा घोड़े के मोह वाली मूरत सा तरसा गया था जोह यहाँ राजमहल में बहोत थी पर दीवार से 6 इंच बहार ..... पर एक खूंटी का पूरा 20 मीटर लम्बे गलिहारे में होना कुछ तोह लोचा है .

आर्यन कुछ सोचकर ," तुम दोनों एक काम करो मेरे पीछे खड़े होना जब में िश खूंटी को दबाओ या खींच लूँ तोह ...... यह hi मुझे पहली चाबी लग रही है फिर लोहे की चाबी काम करेगी ".

दीप्ति कुछ सोचकर ," यह भी तोह हो सकता है खूंटी भ्रम हो या फिर कोई जाल ?"

आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के अपनी तरफ खींचा और उसका गाल चूम लिया ," अगर तुम्हारी बात सच्च निकली तोह तुम मुझे चूम सकती हो ऐसे hi जैसे मैंने अभी किश किया है ".

गीता थोड़ा चिढ़कर बोली ," यार 3 बजने वाले हैं तुझे अभी भी प्यार सूझ रहा है , पहले िश गुथी को सुलझा दे ".

आर्यन हसकर ," तेरी तो दो चुम्मी लूंगा , आजा दोनों मेरे पीछे चुप्प के कड़ी होना एक भी हिस्सा बहार न दिखे खूंटी की तरफ , समझ गयी "....... आर्यन ने बात सीरियस टोन में ख़तम की तोह दोनों को भी लगा कुछ जरूर रहस्मयी है जोह आर्यन ऐसे बोलै है .

तीनो लाइन पटरी खड़े हो गए , सबसे आगे आर्यन , गीता और दीप्ति ....... आर्यन ने खूंटी के हेड पे हाथ रखा और दबा दिया तोह जोह भाले दरवाजे से नुकीला सर लिए निकले हुए थे 8 की संख्या में वह सामे दिवार में जा धसे निकल कर बहोत तेजी से और 8 फट के डीएमटीर में पूरी दिवार hi चिढ गयी थी तेज़ आवाज के साथ .

गीता को दीप्ति ने पीछे से आगे बड़ा दिया और गीता आर्यन को कास ली थी ..... आर्यन ने पीछे गर्दन घुमाई तोह दीप्ति और गीता के सर आजु बाजू थे .

आर्यन ," िश लिए भाले थे कोई सामने से चाबी लगाने की कोशिश करे और वह वहीँ भाले उसको चलनी कर दें ".

गीता थोड़ा डरते हुए गुस्से से बोली ," यह हमको मारने का सडयंत्र रचा हुआ है िंह लोगो ने ख़ज़ाने देने की बजाये ?"

आर्यन हसकर ," नहीं, यह सिर्फ वररिस को खज़ाना मिले िश लिए ऐसा बांया गया है ".

दीप्ति भी थोड़ा चिंतित होकर बोली ," अगर हमसे गलती होती तब क्या होता ?"

आर्यन दोनों की तरफ घूमकर बोलै," तब भी भाले मुझे hi लगते और में झेल सकता था पर अब में गलत हूँ क्योंकि वह देखो भालों के सिरे से जहर रुपी कोई तेजाब भरा था जोह निकल रहा है और दिवार को भी पिघला रहा है ".

दोनों ने ुष तरफ देखा तोह सच्च में दिवार भी पिघल के डेढ़ फट मोटाई में निच्चे गिर रही थी और वह भाले भी जैसे निच्चे गिर के ुष तेजाब रुपी दर्व में गलने लगे , केमिकल फैक्ट्री सी स्मेल के साथ वाष्प पहलने लगी थी वपूर्स के तरह .

आर्यन ने दोनों को वहीँ रुकने को कहा और दरवाजे को गौर से देखकर बोलै ," अब इधर आ जाओ और दोनों अपना चेहरा और नाक कपडे से धक् लो यह स्मेल बहोत ज़हरीली है और नाक में चढ़ रही है ".

दोनों ने वैसा hi किया तब गीता बोली ," तू भी धक् ले , तुझे कुछ नहीं हो रहा क्या".

आर्यन हसकर ," मैंने सांस रोक ली है , तुम भी रोक लो एक मं तक में दरवाजा खोलता हूँ ".

आर्यन ने जंग खायी चाबी ुष दरवाजे में बने उसके ताले के छेद में डाली फिर एक बार क्लॉकवीसे लगा के घूमकर आगे धकेला फिर एंटी क्लॉकवीसे फिर धकेल दिया , ऐसा उसने 11 बार किया तोह चरों कुंडे आवाज करते सीधे हो गए की अब खींच सकते हो जोह पहले लटके हुए थे .

आर्यन ने दोनों की तरफ देखकर कहा," तुम दोनों ऊपर के एक एक कुंडो को पकड़ो में निच्चे के 2 कुंडे पकड़ के खिंच दूंगा तोह यह लोहे के क्यूब सा बाहरी दरवाजा बहार आ जायेगा फिर हम अंदर घुसेंगे ".

गीता कुछ सोचकर ," तू अकेला नहीं खींच सकता क्या ?"

आर्यन भी मुस्करा के ," ठीक है फिर तुम दोनों साइड में बेथ जायो ".

दीप्ति ," दीदी , अगर हम दोनों मदद करेंगे तोह एक hi बार में दरवाजा खुल जायेगा और घरसँ काम होगा ".

गीता ," तू इश्को काम समझ रही है यह तोह मुक्कों से hi इश्को पिचका दे इतनी ताकत है िश में ".

दीप्ति ," दीदी , अगर मेरे माहि ने कहा है तोह हमको मदद करनी चाहिए ".

गीता थोड़ा चिढ़कर ," तेरा माहि और तू बस सही है बाकी सब बेकार , चल अब दम भी लगा लेना ".

आर्यन निच्चे झुकार दोनों कुंडे पकड़ा और गीता सीधे हाथ वाला और दीप्ति उलटे हाथ वाला ...... आर्यन ने 3... 2.... 1 ..... बोलकर डैम लगाने को कहा पर वह तोह जैसे हिला hi नहीं अपनी जगह से 20 सेक् तक खूब जोर आजमाइश लगाने के बाद भी.

गीता हफ्ते हुए ," यह तोह हिल hi नहीं रहा है ".

दीप्ति ," दीदी हम दोनों से नहीं हिलेगा जब माहि कुछ नहीं करेगा तोह ".

गीता ने आर्यन को घूरा ," तू जोर क्यों नहीं लगा रहा है ".

आर्यन हसकर ," अभी टाइम नहीं हुआ है, 1 मं बाद खींच के निकाल दूंगा , तुम दोनों आराम करो ".

गीता ने चिढ़कर एक लात जमा दी आर्यन के सीने पे तोह वह पीछे गिरने लगा तब दीप्ति ने झट से आर्यन का हाथ पकड़ पीछे ुष तेज़ाब में गिरने से बच्या ...... गीता को भी अहसास हुआ की वह क्या कर रही थी पर आर्यन तोह दोनों से मजे ले रहा था.

आर्यन हसकर ," कोई नहीं अब कोई मजाक नहीं और थैंक्स दीप्ति ".

दीप्ति ," अब तुम hi म्हणत करो हम और दीदी साइड में हैं ".

गीता ," आर्यन , हर जगह मजाक नहीं यार अभी तुझे कुछ हो जाता तोह ".

आर्यन हसकर ," फिर मेरा सीना कैसे तेरी लात चूमता , चल साइड हो जायो इश्को में देखता हूँ ".

आर्यन ने दोनों पेअर एक फट आगे दरवाजे के दोनों वेट लिफ्टिंग स्टाइल में जमा के लेफ्ट साइड का ऊपर का कुंडा और राइट साइड का निचे का कुंडा पकड़ के मजबूती से हाथ जमकर बोलै ," जैसे hi में सारा दरवाजा खींच के बहार निकाल दूँ तुम दोनों अंदर घुस जाना पर आगे मत बढ़ना ".

दोनों लेफ्ट और राइट कड़ी हो गयी और आर्यन ने "जय भोलेनाथ" बोलकर ुष 2 टन से ज्यादा वजनी लोहे के क्यूब के आकर के दरवाजे को खींचता हुआ पूरा बहार निकलता चला गया ...... लम्बाई में भी 5 फ़ीट था जब बहार आया पर आर्यन उसको पूरा निकाल के 2 फट की जगह बना दिया तोह दीप्ति और गीता झट से अंदर घुसकर कड़ी हो गयी सर्च लाइट लिए और आर्यन उसके ऊपर चढ़कर उनकी तरफ आकर उतरा तोह सामने 5 पत्थर की सिध्यां थी जोह निचे जा रही थी िश एक बड़ा से हॉल नुमा कक्ष में जोह पूरा खाली था .

आर्यन ने आगे बढ़कर सीढ़ी उतर के आगे बढ़ा सब तरफ देखते हुए तोह दीप्ति ने अपने हाथ में ली हुयी मशाल से िश हाल की दिवार में लगी 4 मशाल जला दी आगे जाकर ..... सब तरफ देखने के बाद आर्यन ने लेफ्ट साइड की तरफ जाकर एक कोने में हाथ से फर्श की धुल हटते हुए दो कुंडे को पत्थर में लगे देखर ऊपर उठा दिया जोह 4×4 फट का होगा और वजन में भी 250 कग से काम न था ......

निचे एक सीढ़ी जाती हुयी नज़र आयी तोह दीप्ति और गीता भी जब आर्यन की तरफ देखि तोह तीनो हसने लगे ...... आर्यन ने दीप्ति के हाथ से मशाल ली और निचे उतरता गया 10 बड़ी सीडी और जीने के साइड में बानी 2 मशाल दिखाई दी तोह जला दी पर रौशनी ने जैसे उनकी आंखें भी बड़ी बड़ी कर दी ....... िश उतने hi बड़े ऊपर वाले के साइज के हॉल में चरों तरफ बस खुले बक्से , बड़े बड़े मर्तबान जोह सोने चांदी जाने क्या क्या हीरे , मोती , अशर्फिया, पैन के साथ भरे थे , सोने और अष्टधातु की पुराणी मुर्तिया से की संख्या न थी ....... यह तोह जैसे पूरी दुनिया hi खरीद लेने के बाद काम नहीं पड़ेगा ......

गीता की तोह आंखें hi चूंड़ियाँ गयी जब दीप्ति ने आर्यन के हाथ से मशाल ले दिवार पे बानी चरों तरफ आधे फट साइज की नाली में आग लगा दी जोह तेल से भरी थी और तब पूरा हॉल चरों और से जगमगा गया ......... पूरा स्वर्णिम प्रकाश पूरे हॉल में फेल गया ......

मगर निच्चे फर्श पे देखकर जैसे गीता चीख hi पड़ी ," आर्यन निच्चे देख सांप hi सांप हैं और हमारी तरफ आ रहे हैं ".

दीप्ति ने भी यह देखा तोह वह भी डर गयी पर आर्यन ने दोनों का हाथ पकड़ा और बोलै ," बस महादेव का नाम लो और यह हमको कुछ नहीं करेंगे अगर हम वररिस हैं तोह और यहाँ देखकर लगता है की कोई कई सो सालों से नहीं आया है ".

गीता डरते हुए ," मुझे नहीं जाना और नहीं चाहिए यह खज़ाना "..... गीता की बात सुनकर आर्यन ने अपना बैग वही सीढ़ी पे रखकर उसको अपनी पीठ पे बैठ लिया और दीप्ति को भी चढ़ा लिया ...... दोनों उसकी गर्दन पे हाथ और कमर पे प्यार लपेट अपनी कसवत बढाती जाता दी दोनों दर्री हुयी हैं .

आर्यन ने सब तरह निगाह दाल के कहा ," डरो मत हमको वहां ुष सिंघासन के पास पहुंचना है ुष्पर बैठना होगा या खिसखणा होगा फिर किसी को बैठना होगा और यह सब सर्प ख़ज़ाने के रक्षक hi लग रहे हैं नहीं तोह हमको अब तक देश hi लेते मारने के लिए ".

दोनों आर्यन की पीठ पे लड़ी थी पर उसके कॉन्फिडेंस को देखकर वह भी अब संभल के देख रही थी ....... सांपो की संख्या बढ़ती hi जा रही थी पर आर्यन के लास्ट सीढ़ी से फर्श पे प्यार रखते hi एक बहोत मोटा 20 फट लम्बा और आधे फट मोटा सांप उसके प्यारों पे लिपट के उसके फेस के सामने फैन फैला के देखा तोह आर्यन ने हाथ जोड़कर महादेव का नाम लिया ," जय भोलेनाथ "...... और ुष सांप को कुछ हिसस हिस्सा के बोलै ......

( दीप्ति भी साँपों की भासा , जानवरो की भासा बोल लेती थी पर अभी आर्यन ने जोह बोलै वह उसने सुनी hi नहीं थी , कोई अलग किस्म की सपनो की भासा जोह उसका लगा की कभी िश धरतीलोक पे तोह बोली नहीं गयी )

गीता और दीप्ति भी डरते हुए ुष इतने बड़े पहन वाले नार्मल किंग कोबरा से 5 गुने आकर वाले सांप का पहन देखकर डर्टी हुयी बोली 'जय भोलेनाथ' .

तीनो को बारी बारी देखकर वह विशाल स्नेप निचे उतर के आर्यन के पेअर आज़ाद कर दिया तोह आगे रास्ता बन गया जिसपर आर्यन चलता जा रहा था पर हर सांप जैसे उसके प्यार एक बार जरूर छूटा चेक करता अलग हो जाता जैसा उसका सम्मान कर रहा हो या चेक कर रहो...... मगर दीप्ति और गीता को ऐसा लगता जैसे वह आर्यन को आगे जाने से रोक रहे हो .

आर्यन का ध्यान जहाँ ुष अष्टधातु वाले सिंघासन पे था वहीँ दीप्ति और गीता का उन्ह हज़ारों की संख्या में सांपो पे ...... कहाँ ख़ज़ाने से पूरा हाल भरा था जिसको खोजने वह तीनो आये थे पर अब तीनो का धयान hi अलग था .......

आर्यन जब ुष सिंघासन के पास पहुंचा तोह गीता को बोलै ," चंदा रानी िश सिंघाशन पे बेथ जा ".

गीता ," नहीं में नहीं बेठुंगी न दीप्ति बैठेगी ..... तू hi बेथ इतने सांपो के बिच ".

आर्यन हसकर ," चलो उतर जायो ुष नागेश ने बता दिया है कोई सर्प हमको नहीं कटेगा ".

गीता छोङकर ," यह नागेश क्यों है और में निचे नहीं उतरूंगी ".

दीप्ति ने आर्यन की पीठ से निच्चे उतर के कहा ," दीदी नागेश वह hi जोह आर्यन को रोका होगा और अब मुझे भी यह खज़ाना बस एक चलवा लग रहा है देखो हम तीनो के अल्वा की किसी की परछाई hi नहीं बन रही है ".

आर्यन हसकर ," बहोत डिअर लगी राजकुमारी जी आपको समझने में यह सब सिर्फ एक मायाजाल है जिसको हमको तोडना है , सामने देखो िश सिंघाशन पे महादेव के शिवलिंग का निशान है पर किसी इंसान के बैठने के लिए नहीं ...... देखो यह अपने में hi विचिरित सा लग रहा है ".

आर्यन ने बोलते हुए सिंघासन hi उठाया तोह जैसे सब गायब हो गया सारा खज़ाना , सारे सर्प और बस एक कोन्ये में गधा बना था .

सिर्फ 3 लोगों की परछाई और पूरा हाल खाली देखकर गीता जैसे भड़क hi गयी ," यह क्या चल रहा है कुछ बटेगा भी और मेरा वह खज़ाना कहाँ गया जिसके लिए इतनी म्हणत करके हम यहाँ पहुंचे ?"

आर्यन ने दीप्ति की तरफ देखा तोह उसके चेहरे पे भी शामे hi पर्सन के भाव थे ...... " मतलब साफ़ है वह खज़ाना ऐसा hi होगा और दिव्या तलवार के साथ hi मिलेगा जोह अलवर राज्य का भी है यानी उष्मी कुछ हिस्सा तुम्हारे पूर्वज का भी होगा क्यों दीप्ति ?"

दीप्ति भी सोचते हुए ," हाँ सब कहते तोह हैं दिव्या तलवार और अपार दिव्या खज़ाना पर यह नहीं पता था की दीदी के पूर्वजों का खज़ाना भी वही है , जहाँ तक मुझे लगता है यहाँ तोह कोई कितने सालों तक आया hi नहीं है तोह किसी के पास उत्तर तोह होने से रहा ".

गीता झुँझला के ," अब क्या करना है , यह भी सोचो साला दिमाग़ की माँ भें कर दी , दीप्ति अपने बाप को दुर्र रखियो नहीं तोह सबसे पहले उसकी हड्डी पसली में तोड़ दूंगी ...... बहनचोद कोई ऐसा मजाक करता है ".

आर्यन ने गुस्से से भरी गीता को बाँहों में लेकर कहा ," मुझे तोह अपना खज़ाना मिल गया तेरे रूप में चंदा रानी अगर मेरा भी कुछ हिस्सा ुष ख़ज़ाने पे बनता हो..... hi hi hi hi hi ...... " ...... आर्यन की ऐसी बात ने जैसे सर्जरी टेंशन hi ख़तम कर दी ......

दीप्ति भी मुस्करा दी तोह गीता भी हसकर ," ाचा मस्का लगा रहा है , वैसे मुझे भी ुष ख़ज़ाने में कोई इंटरेस्ट नहीं था मेरे लिए तू और मेरे माँ ( रति ) का प्यार hi सबकुछ है ".

आर्यन हसकर ," सोच ले डार्लिंग कहीं दीप्ति वह सारा खज़ाना पाकर तुझे कुछ न दे तोह बुरा मत मानियो ".

दीप्ति मुस्करा के ," मेरे लिए मेरा पति hi सबकुछ है तोह खज़ाना मुझे भी नहीं चाहिए वह दीदी ले लेंगी ".

आर्यन एक ठंडी आठ भरता ,"हाश चलो फिर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते हैं , वह दिव्या तलवार के मिलने पे hi साड़ी गुथी सुलझेंगी ...... लेकिन यह इतना आसान नहीं होने वाला इसका अंदजा तोह हो गया है इशलिये अब तुम दोनों भी होशियार रहना और कोई भी परस्तिथि हो बस ठन्डे दिमाग़ से काम लेना ".

दोनों आर्यन की बात सुनकर उससे हाँ कहते हुए लिपट गयी ...... आर्यन ने दोनों को बारी बारी किश किया और अपना बैग उठा के लाया और खोल के उसमे से एक काला छोटा बैग निकाला जिसमे एक सिल्वर का बॉक्स खोल के 2 सफ़ेद बड़े बीज से निकाल के फर्श पे फ़ेंक दिया और आँख बांध करके एक मंतर पढ़ा तोह धुंआ उन्ह बीज से निकल के अपनी दरवानी आकृति लिए दो पिसाच खड़े हो गए हवा में हाथ बांधे और सर झुका के ......

दीप्ति और गीता उन्ह दोनों को दरवानी सकल देखकर आर्यन से लिपट गयी पर जब आर्यन की आवाज सुनी तोह जान में जान आयी ," ज़ुरा और जुड़ी तुम अब तुम यहाँ के पहरेदार हो और हम तीनो के अल्वा कोई यहाँ आया तोह मार के खा सकते हो, तुमको मैंने सिर्फ यहाँ तक की आज़ादी दी है और कोई चालाकी की तोह हमेशा के बंद कर दूंगा ".

दोनों ने अपनी कर्कश आवाज में कहा ," जी मालिक हम गलती नहीं करेंगे , आपने हमको आज़ाद करके जोह अहसान किया है हम कभी नहीं भूलेंगे ".

आर्यन ," अगर मेरे वापस आने तक तुम दोनों अपनी बात पे खरे उतरे तोह दीप्ति के गुलाम बांके रह सकते हो िश पूरे राजमहल में घूमने की सवंत्रता होगी पर खाने को पापी hi मिलेंगे अगर किसी निर्दोष को छुए तोह कैद में वापस आ जाओगे ".

दोनों पिसाच ज़ुरा और जुड़ी ने तीनो को सर झुका के अभिवादन किया और आर्यन दोनों को साथ लिए सीढ़ी से ऊपर चढ़कर जब ुष गेट के बहार आया तोह पिशाचों को बोलै," गेट बंद कर लो अब सिर्फ हम तीनो के अल्वा इसको कोई नहीं खोल पाए" .

वह टखने का बड़ा लोहा वाला गेट अपने आप hi दोनों पिशाचों ने अपनी सकती से बंद कर दिया ....... गीता ," यह भूत कहाँ से आये तेरे पास , कितने डरवाने थे ....... वह दोनों तेरे गुलाम थे ".

आर्यन ने गीता की कमर में हाथ दाल के दीप्ति का भी हाथ पकड़ के तेखाने के गलिहारे से बहार की तरफ चल दिया ," अरे वह मैंने पूरी, उड़ीसा से पकडे थे , यह ेगीपत से किसी अनुष्ठान के लिए 40 मनुष्यों की बलि देने वाले थे 5 साल पहले वहां आकर कोणार्क, सूर्य मंदिर पे ...... में माँ के साथ जगनाथ पूरी गया था तब वहां इनको बड़े गुरूजी के कहने पे बाँध के कैद कर लिया था आज आज़ाद किये हैं , अब मैंने मंतर पढ़ कर उनको बाँध दिया है तोह भाग भी नहीं सकते ".

दीप्ति ," दीदी आपको पता है कल स्वयंवर में माहि ने 12 आत्मा अपने पथ में कैद कर ली थी जोह ुष तांत्रिक त्रिलोचन के hi 12 हिस्से थे ".

गीता ॉश्चारिये से ," तू यह तंत्र मंतर की सकती कहाँ से सीखा देख अब माँ को बाटूंगी की उनका लाडला भूत पालता है ".

आर्यन हसकर ," कभी कभी बुरी सकती को हारने के लिए बुरा बनना पड़ता है , चिंता मत कर शादी वाली रात तुझे 101 भूत गिफ्ट दूंगा ..... hi hi hi hi hi hi"

गीता चिढ़कर ," अगर एक भी भूत आस पास भी नज़र आया तोह सुहागरात को hi तेरा लुंड काट दूंगी , बड़ी हसी आ रही है न ".

दीप्ति भी शर्मा के हसने लगी तोह गीता उसको बोली ," तू अब उन्ह दोनों भूतों के साथ hi रहना तलवार मिलने के बाद भी ".

दीप्ति मुस्करा के गीता की तरह आकर उसके गले लगकर बोली ," ऐसा क्यों बोलती हो दीदी , मैंने तोह कुछ माँगा hi नहीं था माहि hi उनको मेरे गुलाम बना रहा था".

गीता भी हसकर उसके हाथ पकड़ के चलती हुयी बोली ," अरे यह माहि है hi ऐसा और मुझे पता है इश्को न जाने कितनी विद्या आती हैं जिनको कोई आम इंसान सोचकर भी पा नहीं सकता ..... इसको सब हमारे पूर्वज महार्यं का दूसरा रूप मानते हैं और ताकत हरकतें भी वैसी hi हैं ...... हाँ और एक बात उनकी भी 100 से ज्यादा बीवियां थी इश्कि भी अभी 20-25 तोह होंगी hi और रखीअल की संखों का पता तोह यह hi बटेगा ".

दीप्ति भी सीरियस होकर ," दीदी , माहि ने मुझे पहले hi सब बता दिया था स्वयंवर से पहले और जब मेरा वजूद hi इनके हाथ में हैं तोह में कुछ कहने का समर्थ भी कैसे करूँ अगर आप देवी हो तोह माहि मेरे लिए देवता hi है ".

तीनो अब राजमहल की सही घुड़शाल में घुसे तोह राजकुमारी दीप्ति को देखकर उसका घोडा चेतक हिन् हिना दिया फिर आर्यन को साथ देखकर जैसे चुप सा होकर नज़र घुमा लिया ......

दीप्ति ने उसका सर और गर्दन सेहला दी तोह हिन् हिना ने लगा ...... दीप्ति ," चेतक हम लोग अभी निकलेंगे पुराने शिव मंदिर तक फिर वहां से दिव्या तलवार की खोज में और यह मेरी बड़ी दीदी है गीता देवी और तुम्हारी बड़ी मालकिन "

आर्यन ने चेतक को छुए तोह हल्का सा फुंकारा जैसे गुस्सा हो तोह आर्यन बोलै," अबे गुस्सा क्यों होता है चेतक भाई , मैंने तेरी पार्टनर का इंतज़ाम कर दिया है और तेरे पास इशलिये नहीं भेजा हमको लम्बे सफर पे जाना है और तू पहले hi थक जाता "...... आर्यन ने यह बात तब कही जब Deepti-Geeta , चेतक के कट्वच लेने गयी थी पास वाले सास्तर गार में .

आर्यन का हाथ चाट के चेतक बोलै ," अकेले में मिलना , याद रख मैंने hi तुझे राजकुमारी दीप्ति का स्वयंवर जितवा है तोह मेरी सब डिमांड पूरी करना नहीं तोह राजकुमारी को भड़का दूंगा तेरे खिलाफ , समझा ".

आर्यन हसकर ," कोई नहीं हम दोनों दोस्त हैं , में वादा निभंगा ".

आर्यन ने अपने बैग से चेतक को 3 चिलगोजे और पम्पस घास खिलाई जोह वह अर्जुन से मिलकर फार्महाउस से लाया था ...... चिलगोजे चील कर खिला दिए जोह तेहरान से स्पेशलय अर्जुन के लिए मंगवा थे ...... यह खुराक रक्त का संचार माशपेशियों में 4 गुना बढ़ा देता है और भूक भी नहीं लगेगी और काम पानी के साथ 2-3 दिन तक घोडा कितनी hi गर्मी या सर्दी जेहल सकता है ........

दीप्ति ने आकर चेतक को रेडी किया और गीता को अपने पीछे बिठा के पुराने शिव मंदिर की तरफ चल दी , राजमहल के गेट पे नीला की टीम उनके पीछे हो ली जोह उन्ही का वेट कर रही थी ......

आर्यन उन्ह से पहले hi राजमहल से अपनी कार से फार्महाउस पे जाकर अर्जुन को रेडी करके 15 मं बाद प्राचीन शिव मंदिर पहुंचा , नीला अपनी टीम के साथ वापस फार्महाउस जा चुकी थी ......

चेतक एक बार अर्जुन को दूर से घोड़ी समझा था आर्यन को उसकी सवारी करते देखकर पर जब दोनों आमने सामने आये तोह दोनों एक दुसरे को देख के चौंक hi गए दोनों एक जैसे hi कलर बिल्ड में पर अर्जुन के माथे पे एक हल्का सा सफ़ेद बाल वाला निशान था ...... (दोनों सेज भाई hi थे एक hi माँ के पेट से जन्मे थे बस अर्जुन 2 साल बड़ा था .)

आर्यन घोड़े की आवाज निकाल के बोलै ," अर्जुन यह चेतक है तुम्हारा छोटा भाई और चेतक मुझे तुम इशलिये पहली नज़र में पसंद आ गए थे की तुम बिलकुल अर्जुन जैसे हो जोह मेरा छोटा भाई और दोस्त है अब तुम भी ".....

दीप्ति भी खुश होती हुयी घोड़े जैसी भासा में बोली ," क्या सच्च में यह दोनों भाई हैं , मुझे भी अर्जुन बिलकुल चेतक जैसा hi लगा बस चेतक थोड़ा मूडी है और अर्जुन हसमुख और शांत ".

अर्जुन ने आगे बढ़कर चेतक का सुंघा और अपनी गर्दन उसकी गर्दन से रगड़ी ," तू मेरा छोटा भाई , में बता नहीं सकता तुझसे मिलकर मुझे कितनी खुसी हुयी "..... चेतक का भी वही हाल था दोनों की आंखें गीली हो गयी थी.

गीता को कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की यह हो क्या रहा है पर आर्यन ने गीता और दीप्ति का हाथ पकड़ा और उनको मंदिर की तरफ ले गया ...... सबने अपने अस्तर और बैग के साथ योद्धा वाली ड्रेस उतर दी .....

आर्यन एक धोती लपेट लिया और दोनों लड़कियों ने एक एक सूती साड़ी लपेट ली .....

तीनो मंदिर में महादेव के शिवलिंग की पूजा अर्चना के बाद आशीर्वाद लेकर बहार आये तोह आर्यन ने एक बार दीप्ति की और नक़्शे को देखकर बोलै ," अब समय हो गया है हमको निकलना होगा , हमारी अगली मंजिल एक गुफा है ".

तीनो फिर अपनी योद्धा की ड्रेस पहनकर और अपने सास्तर और बैग लेकर पैदल hi ुष रात के अंतिम पहर से पहले मंदिर से लगे घने जंगल की तरफ चल दिए.

अर्जुन को आर्यन ने पकड़ा हुआ था आगे चलते हुए , दीप्ति को चेतक ने और गीता अर्जुन के पीछे और दीप्ति के आगे थी ...... 10 मं बाद वह ुष गुफा वाले रस्ते के सामने खड़े थे जहाँ से दीप्ति और आर्यन कल सुबह अर्जुन के साथ आये थे जवालामुखी से ......

बड़े गुरूजी की आवाज तीनो के मैं में गुंजी ," विजयी भाव मेरे बच्चों , जीत तुम्हारे कदम चूमेगी ".

तीनो ने आँख बांध करके बड़े गुरूजी का अभिवादन किया ......

ुष द्वार के अंदर जाते hi समयचक्र फिर से रुक गया सुबह के 4 बज गए थे ....... तीनो सही समय पे एक अनजान सफर की तरफ बढ़ चले .....

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इधर राजमहल में 4 बजे सबकी मूर्छा टूट गयी थी जोह सू रहे थे वह सू गए और जोह जागते हुए भी अचेत से थे उनकी आंखें खुल गयी ....... किसी को पता न चला सिर्फ राजगुरुजी और राजा रघुभार सिंह के अलावा की किसी ने उनको hi मूर्छित किया था .

राजगुरुजी तोह इशारा समझ गए पर रघुभार सिंह को अब संसय होने लगा की कुछ तोह बहोत बड़ा घटित हो चूका है उनकी जानकारी के बिना और उसकी छोटी भें मिरदुला भी उनके कक्ष में फर्श पे बैठी सोई हुयी है . इतनी सकती तोह आर्यन के पास hi हो सकती है या उसकी दोनों बहेनो ( अणि या मीणा ) के पास .

रघुभार सिंह भी मुस्करा के मैं में बोले ," कभी कभी अनभिग बने रहना भी लाभ hi पहुंचता है पर अगर तुमको ऐसा लगता की तुम तीनो मुझसे दिव्या तलवार को दुर्र रख सकते हो तोह यह तुम्हारी भूल है , जल्दी hi दिव्या तलवार भी मेरी होगी और यह धरतीलोक भी मेरा होगा".

रानी मिरदुला को बिस्तर पे लिटा के कक्ष से बहार जा राजमहल के बगीचे में घास पे बैठकर रघुभार सिंह अपनी साधना में लीं हो गए अब उनको आर्यन और दीप्ति का इंतज़ार था क्योंकि इतना तोह पक्का है की अब बस 8-9 घंटे hi बचे थे दीप्ति को बचने के और आर्यन उसको साथ लिए दिव्या तलवार की खोज में hi गया होगा ....... अपनी काली सकती से उन्होंने अब अपनी काले योद्धा राजमहल के हर द्वार पे लगा एक मंतर कवच से राजमहल hi धक् दिया ..... अब कोई न बहार जा सकता था न कोई अंदर .

राजगुरुजी ने अपने गुरूजी निशांक जी से संपर्क किया तोह उन्होंने पहले hi बता दिया की सब महारानी विजयलक्ष्मी की शक्ति से हुआ था और आर्यन दीप्ति गीता अपने सफर पे निकल चुके हैं ...... तुम भी त्यार रहो रघुभार से हरने के लिए या फिर अपने आशाराम चले जाओ पर राजगुरुजी ने राजमहल में hi रुके का फैसला किया की देखने राजपूताना का इतना बड़ा प्रकर्मी राजा साधु भेस में कितना गिर चूका है ....???

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दिल्ली , फार्महाउस ......

आर्यन जब महादेव के मंदिर में था फिर रति की आँख खुल गयी और उसने हाथ जोड़कर आर्यन के जल्द जल्द आने की पार्थना की ," महादेव , मेरा बस एक hi तोह बीटा है माहि अगर उसको कुछ हुआ तो में भी प्राण त्याग दूंगी मेरे माहि की हमेशा रक्षा करना भगवन ".

सारू के रूम में मीणा जोह उससे चिपकी लेती थी बोली ," सारू मम्मी , आर्यन सब संभल लेगा न मुझे अब डर लगने लगा है ".

सारू ने मीणा के बालों में हाथ फेरते हुए कहा ," हमारा विश्वास hi उसकी ताकत है , तुझे पता है जब भी माँ के पास रहा मुझे हमेशा सुरक्षित hi लगा क्योंकि सिर्फ पावर या पैसे की वजह से नहीं बल्कि मेरी माँ रति देवी , आर्यन के लिए खुद भी किसी को भी मार देगी तोह उसको कोण नुक्सान पहुंचा सकता था ...... पर अब गीता का उसके साथ जाना और दीप्ति जोह हम सबसे अलग है वह जनम से उसके लिए जी रही है दोनों साथ हैं फिर तोह आर्यन को कोई नहीं हरा पायेगा ...... फिर जहाँ गीता खुद चंडी का रूप है तोह दीप्ति की ताकत तोह स्वयंवर के मैदान में hi दिख गयी थी ...... दोनों जान लगा देंगी आर्यन के लिए तू बेफिक्र रह ".

मीणा कुछ सोचकर ," चाचीजी और प्रभा आ रही हैं , अणि लेने गयी है आपको क्या लगता है ?"

सारू हसकर ," अणि पक्का कुछ खिचड़ी पका रही होगी , तू चिंता मत कर वह बहोत मटर गस्ती करती है पर परिवार वालो को हर्ट नहीं करेगी बस मूडी है फिर अब तोह हम सबके लिए 5000 साल पुराणी महारानी विजयलक्ष्मी भी है ".

दोनों अपनी बातों में लगे थे आखिर नींद कैसे आये जब अपना प्यार hi इतना दूर हो .......

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अणि (व्) अपने मैं में यह रति कब अपना वरदान मांगेगी की आर्यन मेरा हो जाये पर उसको सोच से प्रभा ने जग्य जब दौड़ के उसके गले लगी ," अणि दीदी , ी मिस यू ी मिस यू ...... पुछःह पुछठ ".

प्रभा , आगे 18 यरस , 6 फट हट , गोरा कलर , छरहरी बॉडी और फिग 32-24-34 होगा पर पॉलवॉल्ट खेलती थी साउथ अफ्रीका की तरफ से ...... अणि ने भी अपनी छोटी लाड़ली भें को चूमा और फिर अपनी चाचीजी *निर्मला की तरफ बढ़कर उनको गले लगा ली पर चची जितनी हसमुख और जिन्दा दिल लगती थी उतनी hi तेज़ थी बस आर्यन hi इनका सबकुछ था बीटा , बाप उसके बाद लवर , हस्बैंड भी ढाई साल से और अब उसके बच्चे का फादर भी ......

(*निर्मला का बारे में आर्यन जब उनसे मिलेगा तब जानेगे )

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट 34

Part - 6

भगवन भोलेनाथ के मंदिर में दर्शन और आशीर्वाद लेकर तीनो अपनी यात्रा पे आगे बढ़ गए .......

अब आगे .......

आर्यन के आगे गीता बैठी अर्जुन की पीठ पे सवारी करते हुए और दीप्ति अपने घोड़े चेतक पे उनके पीछे पीछे बर्बर दुरी पे तेजी से धरती के अंदर बानी प्रकिर्तिक गुफा वाले रस्ते से तीनो आगे बढ़ते जा रहे थे ..... कुछ समय बाद वह सब ुष दोराहये पे आ गए जहाँ से एक रास्ता दोषी हिल की तरफ सुप्त जवालामुखी की तरफ जाता था और दूसरा आगे की ओरे जोह दिव्या तलवार की वजह से बना था .

आर्यन ने निच्चे उतर के कहा," अब हम आगे पृथ्वी के समुंदर ताल से करीब 100 से 150 कम निच्चे जाने वाले हैं नक़्शे के अनुसार और वहां ऑक्सीजन होना बहोत मुश्किल hi होगा तोह में तुम सबको कुछ खाने को एक समुद्री घास देने वाला हूँ जिससे हमारी बॉडी अभी से लौ ऑक्सीजन पे भी काम मेटाबोलिज्म के साथ काम करेगी और हमको नए वातावरण को अडॉप्ट करने में सहायता भी करेगी ...... आर्यन ने अपने छोटे बैग से एक लाल बॉक्स सा निकला जैसे चमसा रखने वाला बॉक्स होता है ..... उसको खोल के एक चिमटी सी गहरे समुद्री हरे कलर की 4 पिटली रिबन जैसी लसलसी घास निकाल पहले गीता को खिला दिया फिर दीप्ति के मोह में दाल दिया ...... ऐसा hi अर्जुन और चेतक को 10- 10 टुकड़े खिला दिए पर सबके मोह देखने वाले थे , दोनों लड़कियों के चेहरे से पसीना टपक रहा था और दोनों घोड़े जैसे बेचैन hi हो गए और हिनहिना के अपनी व्याकुलता जाता रहे थे .

आर्यन हसकर बोलै ," बस बस 5 मं में तुम सब ठीक होंगे और घेरि घेरि सांस लो , यह रिबन जैसा घास 'प्लांटस' आज तक दुनिया में कोई नहीं खाया है सिर्फ मेरे और अणि के अल्वा ...... यह मरीना ट्रेंच में कई कम निच्चे hi मिलती है जहाँ ऑक्सीजन या लाइट बस 1% से भी काम hi होती है ...... यानी पृथ्वी की घेरे पे पनपने वाली लास्ट वनस्पति है यह ".

गीता मोह बांटी हुयी ," मुझे पानी दे जीभ भी कसली सी हो गयी इसके पेट के अंदर जाते hi गुड़ गुड़ सी हो रही है है जैसे डायरेक्ट बर्फ hi दाल दी हो पेट में इतनी ठंडक का अहसास हो रहा है ".

आर्यन सीरियस होकर ," बस थोड़ी डिअर ऐसा hi रहेगा ,थोड़ा सैयाम रखो और देखना प्यास भी नहीं लगेगी , में और अणि इश्को खाकर माउंट एवेरेस्ट भी चढ़ गए थे बिना ऑक्सीजन मास्क लगा के ".

दीप्ति भी थोड़ी बेचैनी सी बोली ," माहि तुम क्यों नहीं खा रहे हो िश घास को ?"

आर्यन मुस्करा के बोलै ," मुझे जरुरत नहीं है अभी अगर हुयी तोह बाद में खा लूंगा अब हम तेजी से आगे बढ़ते हुए निच्चे की तरफ जाते जायेंगे और अब तुम दोनों अर्जुन पे बैठो में चेतक के साथ रस्ते पे आगे होंगे ".

दीप्ति के पीछे गीता बैठी , दीप्ति की लगाम पे पकड़ से hi अर्जुन पहचान लिया की वह कुशल घुड़सवार है ....... आर्यन ने चेतक की गर्दन सेहला के कहा ," बस मुझपर विश्वास रखना आगे हमको बहोत दुर्र जाना है तेजी से ".

आर्यन ने हलके से लगाम खींच के चेतक को दौड़ा दिया तोह अर्जुन भी दीप्ति के इशारे पे चलने लगा ...... अर्जुन स्पेशल था और चेतक से 4 गुना शक्तिशाली और होनहार भी .

धरती के अंदर पूरी रफ़्तार से उसके गर्भ को नापते टेड़े मेढे पगडण्डी वाले रास्ते से सब आगे बढ़ रहे थे ....... करीब एक घंटे के सफर के बाद जब वह एक जगह पहुंचे तोह पूरी हरयाली और घाना जंगल सा दिखाई दिया मगर एक जल की नदी भी जब सामने दिखने लगी जंगल के िश तरफ तोह सबको हैरानी hi हुयी ..... तीनो की स्पेशल क्लॉक पे माइनस 80 कम फ्रॉम से लेवल दिखा रही थी पर यहाँ ऐसी जगह होना आशम्भव सा hi था .

गीता के साथ दीप्ति भी हैरान hi थी उनको क्या दोनों घोड़ो को भी सांस लेने में तकलीफ नहीं आयी और प्यास दुर्र दुर्र तक नहीं थी .......

आर्यन ने दोनों की तरफ देखकर कहा ," हमको यहाँ गुफा ढूंढी है वही से अगली मंज़िल का पता लगेगा ".

आर्यन अब दोनों लड़कियों के साथ सब तरफ देखने लगा , अर्जुन और चेतक को खुला छोड़ दिया पर हिदायत दी कुछ भी नहीं खाना है न hi पानी पीना है ..... जरुरत होगी तोह फिर समुद्री घास 'प्लांटस' hi खानी है जोह उसने थोड़ी अपने पास रख के बाकी गीता को दे दी .

लेकिन एक चीज़ जोह तीनो नोट की यहाँ सूर्य नज़र नहीं आ रहा था पर प्रकाश वैसा hi था दिन के उजाले की तरह. दीप्ति ने कहा ," हमको सायद फस्या जा रहा की हम जंगल में जाये और नदी को देखो तोह पानी बस बह रहा है पर एक तरंग भी नहीं , इतना स्वाच जल धरती पे मिलना तोह मुश्किल hi है ".

गीता कुछ सोचकर ," पक्का कोई मायाजाल लगता है क्यों आर्यन कहीं हमको यह चलवा hi नज़र आ रहा जबकि कुछ भी खतरा हो सकता है ?"

आर्यन ने घेरि सांस लेकर कहा ,"एहि आसपास कहीं 3रद पड़ाव है पर गुफा अपनी तरफ hi है ुष तरफ नहीं . गीता तुम िंह दोनों घोड़े भाइयों के साथ यहीं रहो और अपनी गन , तलवार को साथ में ले लो . मुझे और दीप्ति को थोड़ा समय भी लग सकता है कोई भी कैसा भी जीव आस पास भी नज़र आये तो मार देना हो सकता है तुम आगे हमारे साथ नहीं जा पायो मगर हमारा यहीं इंतज़ार करना ".

गीता ने भी हामी भरी और उसको किश कर दी फिर दीप्ति के गले मिल उसका गाल और माथा चूमि ...... आर्यन अब दीप्ति के साथ ुष रस्ते को खंगाल ने लगा जिस से अभी वह सब यहाँ आये थे ..... एक चटान में छोटे से छेद को देखकर दीप्ति ने कहा ," क्या यहाँ कोई जीव जैसे सांप , चूहा या क्नोल हो सकता है क्योंकि एक तोह सामने hi बिल सा बना हुआ है ".

आर्यन ने दीप्ति की निगाह का पीछा किया तोह बोलै ," नहीं सिर्फ सर्प प्रजाति hi यहाँ हो सकती है और वह बिल कभी अपना बनती hi नहीं है फिर यहाँ उन्हें किसका खतरा है , इंसान या कोई जीव यहाँ तक जिन्दा कभी आया होगा लगता नहीं है ...... हाँ उधर देखो एक ऊपर की तरफ बड़ा सा कटान है सायद एहि गुफा का मार्ग है ".

दीप्ति ने जब ऊपर देखा तोह एक योनि की तरह का करीब 150 फट एक चटान पे द्वार नज़र आया तोह करीब 1.5 कम दूरी पे कड़ी गीता ने भी उनकी निगाह का पीछा किया और कार्डलेस पे बोली ," वह कोई दुवार सा लग रहा है पक्का अंदर जाने का रास्ता होगा ".

आर्यन ने 4 कदम पीछे होकर ुष खुरदरी चटान की तरफ दौड़ के छलांग लगायी और एक hi जम्प पे ुष योनि रुपी दुवार पे एक उभरे हिस्से को पकड़ के देखा फिर निचे सर करके बोलै ," एहि है , दीप्ति ऊपर आ जायो ".

दीप्ति ने अपनी पीठ और कमर पे कैसे बैग और अस्तर को टाइट किया फिर 10 फट पीछे होकर दौड़ लगा के ुष चट्टान के उभरे हिस्से पे प्यार और हाथ जमा बड़ी तेजी ऊपर पहुंच गयी ...... गीता का तोह मोह hi खुला रहा गया दीप्ति को ऐसे चट्टान पे 45 डिग्री के एंगल पे तेजी से दौड़ते हुए चढ़ते देखकर (आर्यन की तरह जैसे वह पुराने जंगल में विशाल पेड़ पे चढ़ जाता था )...... ऊपर पहुंच आर्यन ने एक हाथ से दीप्ति को थाम अपने पास खड़ा किया फिर अंदर की तरफ दिखा के बोलै ," यह रास्ता है पर कहाँ रुकेगा पता नहीं तोह कुछ भी ैवेघ में मत कर देना हमको सोच समझ के आगे बढ़ना होगा ".

गीता ने दोनों हाथों को सांख्य का आकर देकर चिल्ला के बोली ," जल्दी ख़तम करो िश पहेली को हमे वापस भी जाना है "....... दोनों उसको थम्ब्स उप दिखा के हाँ का इशारा किया .

दुवार के अंदर एक चिकनी गोलाकार चट्टान की दीवारों में बानी सुरंग जैसी थी ..... 6-7फट पारधी की . आर्यन ने जब अपने बैग से एक तुबे जैसी लाइट घूम के ों की और निच्चे पहनकी तोह दिवार से टकराती वह ना जाने कितने निच्चे जाकर उनकी आँखों से विलुपत हो गयी .

आर्यन ने अपना बैग और तलवार कास के बाँधी और दीप्ति को बोलै ," तुम मुझे आगे से पकड़ लो और अपनी तलवार मुझे दो , यह बहोत घेरि गुफा लग रही है ".

दीप्ति की तलवार अपने हाथ में थाम कमर पे साइड पे लगा, आर्यन उसको अपने आगे से चिपटा लिया जैसे बंदिरया अपने बाचे को चिपटा लेती है फिर दोनों हाथ और पैरों को मजबूत कर कूद गया ुष अँधेरी गुफा में ......

आर्यन ुष गुफा में गोल गोल घूमता दिवार को हलके से टच करता दिशा देता पूरी विहग से आगे बढ़ा रहा था दीप्ति को लिए....... तेजी से दोनों अंदर एक अँधेरी जगह की तरफ अग्रसर थे पर 10 मं बाद दोनों को अंदाज़ा हो गया की हम कमसे काम 15-16 कम निच्चे आ चुके हैं पर अब ुष गुफा का व्यास चौड़ा होकर 40-50 मीटर का हो गया पर अँधेरा ख़तम hi नहीं हो रहा था न गुफा .......

जब आर्यन को लगा की गुफा ख़तम होने वाली है तोह दीप्ति को बोलै ," कास के पकड़ो डेड एन्ड आ रहा है हम तेजी से टकरा के रुकेंगे ".

दीप्ति ने गर्दन घुमा के देखा और बोली ," फिर वह लाइट वाली तुबे कहाँ हैं और हो सकता हो 90° पे रास्ता टर्न हो रहा हो ".

आर्यन भी उसकी बात से सहमत होता ," ठीक है में बस एक बार पेअर जमा के डायरेक्शन दे दूंगा थोड़ा जर्क ज्यादा लगेगा तोह रेडी रहो "......

और दीप्ति की बात सच्च hi निकली 45° पे बानी ये गुफा अब 135° का कोने लिए आगे को रास्ता दिखा दी जिसको आर्यन ने बड़ी बखूबी के साथ सही एंगल पे सामने दिवार को पेअर से पत्थर की गुफा की दिवार से टच कर निच्चे को दिशा दी और 8 मं बाद hi निच्चे की तरफ बढ़ते हुए अब दोनों को रौशनी दिखने लगी और उजाला पूरा होता गया पर अब आर्यन सर्किल में घूम के दिशा और गति भी काम करने लगा ......

थोड़ी दूर पे जब उसको जमीन दिखाई दी तोह दीप्ति की कमर पे हाथ दाल के कास लिया और छलांग लकार लैंड किया ....... धपपपप की आवाज के साथ दोनों की चरों और धुल का गुबार सा उठा जमीन पे इतनी फाॅर्स से कदम रखने के कारन .

दोनों धुल चाटने के बाद अब चरों तरफ देखकर चकित थे की यह ऊपर वाले जंगल जैसा hi उनके सामने जंगल था पर आर्यन अभी भी अपनी नजरों से कुछ खोज रहा था ..... अपनी घडी में देखा तोह वह 40 कम निच्चे थे गीता से ......

आर्यन और दीप्ति ने चरों और देख ुष जंगल के अंदर जाने का फैसला किया ..... हाथों में तलवार थाम लिए वह दोनों चरों और देखते आगे बढ़ रहे थे पर एक बात थी यह धरती का हिस्सा तोह नहीं लग रहा था ....... पूरा जंगल रौशनी से जगमग था पर यह सूरज का प्रकाश नहीं था .......

एक घंटे पूरे जंगल की भूल भूलिया में घूमकर अब दोनों को लग रहा था की वह फर्श चुके हैं ...... न कोई जानवर न जीव न हवा चल रही थी पर पूरा हरा भरा जंगल है .

आर्यन रूककर ," दीप्ति जरा अपनी पीठ दिखाना , यह तोह कोई भूल भूलिया लगती है और में तुम्हारे अल्वा किसी को महसूस नहीं कर पा रहा ऐसा क्यों हो रहा समझ नहीं आया क्योंकि अपनों का अहसास मुझे हमेशा होता है ".

दीप्ति भी रुक कर अपनी तलवार और बैग जमीन पे रख अपनी लाठर वाली योद्धा की पोषक की जीप शील्ड हटा के खोली तोह आर्यन भी उसकी ब्रा के हुक खोल के जब नक्शा देखा तोह वह गायब था "......

आर्यन मुस्करा के ," दीप्ति तुमको नक्शा महसूस हो रहा है अपनी पीठ पे ".......

दीप्ति ," माहि में सिर्फ तुमको hi महसूस कर पा रही हूँ और मैं जैसे शांत सा पद गया है ...... नक्शा के कारन एक जकड सी पीठ पे हंसः से होती है अभी वह फील hi नहीं हो रही ...... इसका मतलब नक्शा गायब है ".

आर्यन ," इसका एक hi मतलब है हम पतलोक के द्वार पे खड़े हैं पर यहाँ का चौकीदार कहाँ हैं ?"

दीप्ति कुछ सोचकर बोली ," आर्यन मुझे लगता है नक़्शे और िश जंगल का कोई सम्बद्ध है , एक मं तुम साइड होना "..... आर्यन से दुर्र जाकर दीप्ति ने जब मिटटी देखि जोह राइट जैसी थी और यहाँ घास भी नहीं थी तोह निच्चे बैठकर अपनी नंगी पीठ के बल लेत गयी .

उसकी नंगी पीठ जमीन छूटे hi जंगल गायब हो गया और पूरा अँधेरा के साथ बस एक घेरा गधा सा कोई उनसे 500 मीटर दूरी पे िश वीराने सी जगह पे दिखाई दिया ...... दोनों समझ गए एहि पतलोक का प्रवेश द्वार होना चाहिए ....... ऐसी निर्जीव और खुसकाक जगह उन्होंने नहीं देखि थी पर मंजिल आगे नज़र आ रही थी .

दीप्ति अब मुस्करा के कड़ी हुयी और आर्यन के पास बड़ी ऐडा से चलती हुयी पीठ घुमा के कड़ी हो गयी ...... आर्यन ने भी हसकर उसकी गोरी पीठ से मीठी झाडी फिर उसके कानो को किश करके बोलै ," मुबारक हो अब नक्शा गायब हो चूका है हमेशा के लिए , अगले 2 पड़ाव तोह तुम खुद अपने दिमाग़ में बनने वाली छवि से बताने वाली हो "...... उसकी जीप बांध कर उसको शील्ड पहना दी फिर अपनी तरफ टर्न कर किश करने लगा तोह दीप्ति भी कहाँ पीछे रहती अपने प्रेमी का आलिंगन किये बिना ...... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पहुछठ ..... ी लव यू माहि ी लव यू मेरी जान ......

___________________________

2 घंटे बाद .......

गीता यहाँ अलग hi मुसीबत से जूझ रही थी लम्बी चूंच वाले 2 विशाल कठफोड़वे जैसे पक्षी ुनःपर हमला किये तोह गीता ने दोनों घोड़े अर्जुन और चेतक को चट्टान की दिवार की तरफ धकेल उनसे भीड़ गयी ...... गोली चलने के बाद भी उनपर असर न होते देख अब अपनी दोनों तलवार लिए उनके लिए त्यार थी .....

गीता को एक चीज़ का अंदाज़ा हो गया की वह उसको मारने में नहीं बल्कि Arjun-Chetak के शिकार के चक्कर में हैं ...... तलवार से वार किये उन दोनों के हमले से बचते हुए तब भी जैसे कोई असर hi नहीं हुआ उनके सरीर पे .....

7 फट लम्बी नकली चूंच जैसे पत्थर की hi थी जिसपर गीता ने वार किया पर अपने पंखो के सहारे उन्हों ने उसको दूर उछाल के फ़ेंक दिया ...... गीता संभल के उनकी तरफ फिर दौड़ी तोह दोनों ने Arjun-Chetak को अपनी चूंच में दबा के उड़ने लगे पर गीता ने दोनों का एक एक पंजा एक एक हाथ से पकड़ लिया और दोनों के विशाल देने जैसे पंख फाड़ा फाड़ा के रह गए दोनों ऊपर hi नहीं जा पा रहे थे पूरी ताकत लगाने के बाद भी ......

गीता दोनों हाथ में पकडे पंजों को जोरसे निच्चे करती बोली ," मादरचोद मेरे जिन्दा रहते तोह िंह घोड़ो को तुम नहीं ले जा सकते ....... जय करा शेरा वाली का... "

20 फट लम्बे और 300-400 कग वजन के 80 फट चौड़े पंखो वाले पक्षी की भी जैसे जान निकल गयी की यह कीड़े जितनी लड़की में इतनी ताकत कैसे है ...... मगर किसी को भी नहीं पता था की गीता का एक जूता लड़ाई में पेअर से दूर गिरने से निकल गया था और उसका दिया नंगा पेअर जमीन में धस गया था .

मगर गीता इतना जोर लगा के दोनों को खींची अपने हाथों से की दोनों के मोठे नुकीले पंजे एक साथ मिला के अपने दोने पैरों से जकड ली और एक हाथ का घेरा लेकर पंजो में और दुसरे से हाथ से अपने चमड़े की स्लैक्स से खंजर निकाल के दोनों के प्यार बढ़ दी और दर्द की कर्कश चिनगाढ़ वाली आवाज से पक्षिओं को दोनों घोड़ों को छोड़ना पड़ा जोह जमीन पे गिरे और दोनों सर्पार्ट दौड़ के अपनी िश नयी रखवाली करने वाली देवी की तरफ आये तोह गीता छिलाई ," हराम खुरों मेरी तरफ नहीं वापस जाने वाले रस्ते की तरफ भागो में ज्यादा डिअर इनको रोक नहीं पाऊँगी "......

गीता अब और जोर लगा के निच्चे को खींची तोह दोनों ने चूंच उसके सर पे मारी पर गर्दन झुका के बगैर दोनों के पंजे चोदे वह जमीन में धास्ति चली गयी और Arjun-Chetak बस दहकते रह गए गीता के साथ दोनों पक्षी भी जमीन में ऐसे समां गए तड़पते हुए जैसे दलदल में कोई मगरमछ तीनो को नीचे अंदर खींच लिया हो उनकी कर्कश आवाजें की गूंज भी खामोश हो गयी ......

1 मं भी नहीं गुजरा पर Arjun-Chetak को सामने से अपना अंतिम समय दिख गया ...... सामने ुशी नदी पार जंगल से उन्ह विशाल पक्षी से बड़े बड़े पक्षिओं का पूरा झुण्ड संख्या में 100 से भी ज्यादा था उनकी तरफ आ रहे थे ......

अर्जुन ," चेतक , तू भाग जा हम दोनों यहाँ से नहीं निकल पाएंगे अब तोह सब आर्यन भाई के भी हाथ में भी नहीं है और गीता दीदी कहाँ चली गयी आज कोई नहीं बचेगा अगर गीता दीदी को कुछ हुआ तोह "......

चेतक डरते हुए ,"भैया ,जायेंगे तोह दोनों नहीं तोह साथ मरेंगे अब कहाँ है तू आर्यन जब मुझे बोलता था की में हूँ न "......

दोनों कुछ करते या भागते तबतक जैसे ुष विशाल पक्षिओं का झुण्ड उनसे सिर्फ 100 मीटर hi दुरी तक आ पहुंचा था पर अर्जुन ने जैसे आँख hi बांध कर ली थी ," आर्यन भाई बस मेरे भाई को बचा ले मेरी एहि आखिरी इच्छा है ".

गीता को दो दैत्याकार पक्षिओं के साथ जमीन निगल गयी थी और दोनों घोड़े Arjun-Chetak ुष रस्ते की एक तरफ की चट्टान से लगे अपनी मौत का इंतज़ार कर रहे थे ........ अर्जुन ने आर्यन को भी पुकारा पर सायद यह आवाज भी उसके मालिक कम दोश्त तक नहीं पहुंची थी और 50 मीटर की दूरी पे जैसे उन्ह दैत्याकार पक्षिओं के सरदार जोह सबसे विशाल था उसको आकर एक मिटटी का 10 मीटर बड़ा गोला आकर लगा उलटी तरफ से तोह वह जमीन पे दुर्र जाकर गिरा ......

जैसे चमत्कार hi हो गया था , गीता जमीन पहाड़ के बहार निकली , निचे मिटटी के जैसे कालीन पे hi हवा में कड़ी थी और दोनों हाथों से बड़े बड़े मिटटी के गोले बना जैसे उन्ह पक्षिओं पर वार पे वार पे कर उनको जमीन में धंसती जा रही थी पर सबसे बड़ी बात अब एक रंग बिरंगे चमकते पत्थरों का घेरा उसके चरों तरफ घूम रहा था जोह पक्षी गीता का रुख करता वह घेरा बड़ा होकर उसको लगते hi मूर्छित कर देता और जमीन उसको निगल जाती .....

आखिर कार चंडी देवी गीता की धरती (एअर्थ) की पावर जाग गयी थी जब जमीन में पूरी धंस गयी थी और उसका कारन थी दीप्ति ........ पर Arjun-Chetak भी गीता को अब भूरी कलर की मिटटी जैसे देखकर खुश होने के साथ डर भी गए की यह कोण सा भूत गीता के अंदर घुस गया है पर 5 मं. में सारे पक्षी जमीन में दफ़न थे बस उनकी चूंच बहार थी और तेज़ कर्कश आवाजें गूंजती गीता ने उनकी चूंच भी मिटटी की रस्सी से बाँध कर बंद कर दी ....... बहोत सारे पक्षी अभी ज़िंदा थे पर जमीन में गड़े थे .

10 सेक् में आँख बांध कर गीता नार्मल हुयी तोह रंग बिरंगे छोटे पत्थरों का पावरफुल घेरा उसके अंदर सरीर में समां गया और आंखें भी नार्मल हो गयी ...... वह Arjun-Chetak के पास जाकर उनकी गर्दन सेहला के बोली ," डरो मत हम सुरक्षित हैं पर हम इससे आगे नहीं जा सकते ...... यह तिलसमी द्वार है और हमको यहीं इंतज़ार करना होगा हम एक तरह से कैद में hi हैं ....... में अपनी धरती की पावर उसे कर सकती हूँ पर ऐसा करके hi हम एक तरह से कैद हुए हैं ...... सामने देखो तोह जंगल की तरफ एक अदृश्य दिवार है और हमारे पीछे ुष रस्ते पे भी. अब हमको Aryan-Deepti hi यहाँ से निकाल सकते हैं ".

गीता 3 पड़ाव से पहले hi 2 चरण में hi कैद कर ली गयी पर दीप्ति के कारन उसकी धरती की पावर जाग्रत होते hi कमसे काम उन्ह विशाल पक्षिओं का निवाला बनने से बचा लिया ....... अगर यह तीनो बहार नहीं आ सकते तोह कोई इनके पास अंदर कैसे पहुंचेगा यह तोह वकत hi बटेगा ........ ????

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उधर आर्यन दीप्ति 10 मं तक खूब चूमा छाती के बाद दोनों को होश आया जब लगा गीता किसी मुसीबत में है...... दोनों किश तोड़कर पालते तोह 20-22 कोई 10-12फट ऊँचे दानव साइज के खूंखार रक्षक जैसे प्राणी उनकी ओरे hi बढ़ रहे थे और उनके चलने से धरती भी कांप रही थी .

दीप्ति ने भी झुकार अपनी तलवार उठा के कहा ," माहि , हम गीता की मदद नहीं कर सकते पर मुझसे जमीन में नक्शा टच कर उनकी धरती की शक्ति ( एअर्थ पावर) खोल गयी है , अब धरती मैया से आजतक कोई जीत पाया है क्या कभी ? हम अब उनको दिव्या तलवार को पकार hi आजाद करा पाएंगे उनको कैद कर लिया गया है " .......

आर्यन ," मुझे भी एहि महसूस हुआ और Arjun-Chetak भी खतरे में हैं फिर डिअर मत करो पहले में िंह से निपट लेता हूँ , इनके हाव भाव देखकर लगता है िंहसे बगैर लाडे तोह अंदर जा नहीं पाएंगे ...... बस तुम पीछे रहना में संभल लूंगा ".

_________________

उधर पुराने जंगल में निशांक गुरूजी का प्रतिबिम्ब बड़े गुरूजी से सवाल कर hi दिया ," गुरूजी वह खज़ाना आखिर ुष ख़ज़ाने वाले कक्ष से दिव्या तलवार के साथ कहाँ पहुंच गया है ???? आर्यन और दीप्ति क्या पतलोक वालों को हरा पाएंगे ?????....... "

बड़े गुरूजी शांत चित से बोले ," आर्यन क्या कर सकता है यह हम भी कहाँ पूरी तरह जान पाते हैं पर हाँ उसके अंदर की ताकत hi उसको मदद करेंगी साथ hi उसको प्यार करने वाली स्त्रीओं की शक्तिअन भी मिली हुयी हैं जोह उसको हारने नहीं देंगी बस उसको क्रोध न आ जाये...... जहाँ तक ुष खज़ाना को दिव्या तलवार के साथ गायब होना hi उसकी खोज में सहायक है ...... आर्यन को दीप्ति की जान नहीं बचानी होती तोह कभी दिव्या तलवार हासिल करने नहीं जाता पर बाकी लालची मनुष्य को खज़ाना भी चाहिए ुष तलवार की शक्ति के साथ . खजाने का पातळ लोक के अंदर धस जाना तलवार के साथ ...... भुलबुलिया में एंटर करना ...... वहां पिसाच और दानवों से लड़ना ...... कोई मनुष्य तोह कर नहीं पायेगा अगर किया भी तोह एक बहोत ताकतवर जीव ुष दिव्या तलवार और ख़ज़ाने का लोभी पररहि बन बैठा है, अभी िश से ज्यादा में भी तुमको नहीं बता पाउँगा तोह ढेर रखो आर्यन जहाँ जहाँ जायेगा हम देख hi सकते हैं कुछ कर नहीं सकते ".

इतना बोल को बड़े गुरूजी चुप्पी साध लिए और बाकी की तरह निशांक भी आगे क्या होगा प्रतीक्षा करने लगा ......

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
UPDATE 34

PART - 6 (B) .... Supplementary part

Ani ab Delhi ke farmhouse ki terrace pe apne saamne juice piti Prabha ( Aryan ke Chachaji ki ikloti beti ) ko boli ," Aaj meine tujhe ek doosri duniya ke baare me batungi par mujhe bich me mat tokna vaise bhi tera purane architecture aur mythology mei bahot interest hai na".

Prabha muskara ," Didi aap subha subha mujhe yahan terrace pe akele kya batna chahti ho saaf saaf kaho mein aapki koi baat aaj tak taali hai ".

Ani ne pyari muskaan ke saath kaha ," I know very well my cute little sister now listen carefully , hindi me batati hun ......

धरती पर ही सात पातालों का वर्णन पुराणों में मिलता है। ये सात पाताल है- अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। इनमें से प्रत्येक की लंबाई चौड़ाई दस-दस हजार योजन की बताई गई है। ये भूमि के बिल भी एक प्रकार के स्वर्ग ही हैं।

इनमें स्वर्ग से भी अधिक विषयभोग, ऐश्वर्य, आनंद, सन्तान सुख और धन संपत्ति है। यहां वैभवपूर्ण भवन, उद्यान और क्रीड़ा स्थलों में दैत्य, दानव और नाग तरह-तरह की मायामयी क्रीड़ाएं करते हुए निवास करते हैं। वे सब गृहस्थधर्म का पालन करने वाले हैं।

उनके स्त्री, पुत्र, बंधु और बांधव सेववकलोक उनसे बड़ा प्रेम रखते हैं और सदा प्रसन्नचित्त रहते हैं। उनके भोगों में बाधा डालने की इंद्रादि में भी सामर्थ्य नहीं है। वहां बुढ़ापा नहीं होता। वे सदा जवान और सुंदर बने रहते हैं। "........

Ani ne apni baat sanchep me kahi toh Prabha jor jor se hasne lagi ," hihi hi hi hi hi ...... my elder sister mein aaki knowledge badha deti hun but listen carefully joh meine aaj tak padha hai ..........

( Prabha ne English me sab explain kiya)

Patala is described as filled with splendid jewels, beautiful groves and lakes and lovely demon maidens. Sweet fragrance is in the air and is fused with sweet music. The soil here is white, black, purple, sandy, yellow, stony and also of gold.

The Bhagavata Purana calls the seven lower regions bila-svargas ("subterranean heavens") and they are regarded as planets or planetary systems below the earth. These regions are described as being more opulent than the upper heavenly regions of the universe. The life here is of pleasure, wealth and luxury, with no distress. The demon architect Maya has constructed palaces, temples, houses, yards and hotels for foreigners, with jewels. The natural beauty of Patala is said to surpass that of Swarga. There is no sunlight in the lower realms, but the darkness is dissipated by the shining of the jewels that the residents of Patala wear. There is no old age, no sweat, no disease in Patala.

The Vishnu Purana states....... the seven realms of Patala, which are located one above the other, are seventy-thousand yojanas (a unit of measurement) below the Earth's surface. Each of them extends ten thousand Yojanas. In Vishnu Purana, they are named as from the highest to the lowest as: Atala, Vitala, Nitala, Garbhastimat, Mahatala, Sutala and Patala. In the Bhagavata Purana and the Padma Purana, they are called Atala, Vitala, Sutala, Talatala, Mahatala, Rasatala and Patala. The Shiva Purana, replaces Mahatala with Tala. The Vayu Purana calls them Rasatala, Sutala, Vitala, Gabhastala, Mahatala, Sritala and Patala.

The seven Patalas as well as the earth above them is supported on the head of the tamasic (dark) form of Vishnu, the thousand-headed nāga Shesha. Sometimes, Shesha is described to reside in the lowest region of Patala instead of below it. Below the regions of Patala lies Naraka, the ***** Hell – the realm of death where sinners are punished.

Different realms of Patala are ruled by different demons and Nagas..... usually with the Nagas headed by Vasuki assigned to the lowest realm. Vayu Purana records each realm of Patala has cities in it. The first region has the cities of the daitya Namuchi and Naga Kaliya , in the second Hayagriva and Naga Takshaka; in the third, those of Prahlada and Hemaka; in the fourth of Kalanemi and Vainateya; in the fifth of Hiranyaksha and Kirmira and in the sixth, of Puloman and Vasuki. Bali rules as the sovereign king of Patala.

1)Atala

Atala is ruled by Bala – a son of Maya – who possesses mystical powers. By one yawn, Bala created three types of women – Svairini ("self-willed"), who like to marry men from their own group; Kamayani ("lustful"), who marry Male from any group, and the Punshchali ("those who wholly give themselves up"), who keep changing their partners. When any male enters Atala, these women enchant him and serve him an intoxicating cannabis drink that induces sexual energy in the man. Then, these women enjoy sexual play with the traveller, who feels to be stronger than ten thousand elephants and forgets impending death.

2)Vitala

Vitala is ruled by the god Hara-Bhava, who dwells with attendant ganas including ghosts and goblins as the master of gold mines along with his consort Bhavani and river Hataki here. When fire – fanned by wind – drinks from this river, it spits the water out as a type of gold called Hataka. The residents of this realm are adorned with gold from this region.

3)Sutala

Sutala constructed by Viswakarman, is the kingdom of the pious demon king Bali. The dwarf Avatar of Vishnu, Vamana tricked Bali – who had conquered the three worlds – by begging for three paces of land and acquired the three worlds in his three paces. Vamana pushed Bali to Sutala, but when Bali surrendered to Vishnu and gave away all his belongings to him, Vishnu in return made Bali, richer than Indra, the god-king of heaven. Bali still prays to Vishnu in this realm. Highly impressed by the devotion of Bali, Vishnu gave him a boon that He Himself would perpetually stand as the watchman to Bali's palace.

4)Talatala

Talatala is the realm of the demon-architect Maya, who is well-versed in sorcery. Shiva, as Tripurantaka, destroyed the three cities of Maya, but was later pleased with Maya and gave him this realm and promised to protect him.

5)Mahatala

Mahatala is the abode of many-hooded Nagas (serpents) – the sons of Kadru, headed by the Krodhavasha (Irascible) band of Kuhaka, Takshaka, Kaliya and Sushena. They live here with their families in peace but always fear garuda.

6)Rasatala

Rasatala at the sole of the feet of the universe form of Vishnu is the home of the demons – Danavas and Daityas, who are mighty but cruel. They are the eternal foes of Devas (the gods). They live in holes like serpents.

7) Patala

Patala or Nagaloka, is the lowest realm and the region of the Nagas, ruled by Vasuki. Here live several Nagas with many hoods. Each of their hood is decorated by a jewel, the light of which illuminates this realm. ""

Prabha apni poori baat karke jab chup huyi toh Ani muskara ke boli ," very good my lovely sister par ab samay aa gaya ki tum patalok jaakar Aryan bhai ki madad karo kyonki unka saamna ek bahot jhereeli nagin se hoga usko tum hi sam mohit karke rok sakti ho ".

Prabha badi badi aankhien phaad ke Ani ko hairani aur kotuhal se dekh rahi thi par Ani ke chehre ke bhaav ghambeer dekhkar woh kuch kehti , Ani uska hath pakad ke purane jungle ke samney teleport ho gayi .......

Prabha ab darr chuki thi ki yeh kya ho raha hai uske saath aur Ani didi ke saath yahan ish bhyanak jungle ke saamne kaise aa gayi ...... Ani se haath chuda ke usko dekhne lagi tab Ani ne kaha ," daro nahi baby , abhi tumko bahot kuch jaanana hoga bas mujhpar vishwas rakho phir Aryan bhai se pyar karti ho na sabse chupa ke ".......

Prabha sar hila ke ," nahi nahi aap meri Ani didi nahi ho , kyon ho tum aur mere baare me kya kya jaanti ho ?"

Ani ne bagar uski taraf dekhe aage badhte huye kaha ," mein Ani hi hun aur Aryan bhi yahan jungle me aata hai , uski jaan mushibat me hai agar tum chahti ho usko kuch na ho toh mere picche aa jao nahi toh vapas jaa sakti ho "........

Ani aage jaa jungle me parves kar gayi, Prabha bhi himmat juta ke jab darte darte ander phonchi toh Ani ko Maharani Vijaylakshmi ke roop me dekhkar vishmit hi reh gayi ...... Ander jungli jaanwar aur pakshi sar jhuka ke abhivadan kar rahe the Ani ka .......

Rani Vijaylamkshi ," tumhara suwagat hai Prabha , daro nahi yeh bhi mera (Ani) hi roop hai bas yahan mein Maharani Vijaylakshmi hun aur bahar tumhari badi bhen Anita Singh , ab tumko andazaa ho gaya hoga mein kaise teliport karke yahan laayi ....... Chalo tumko Aryan aur mere Guruji se aur hamare parivaar ke Guruji dono se milwati hun ...... dono apni deh tyaag kar paribimb roop me yahin nivaas karte hain ...... Meri MAA Rati devi , Saroo Didi , Geeta , Meena , Jane , Dolly , Neha bhi Aryan ke saath yahan aa chuke hain toh darna chodkar sabkuch samjhne ki koshish karo ".

Kuch din pehle 18 varsh purn ki yeh yuvti Prabha Singh joh sabse chulbuli thi parivaar me aur Rati ki jaan basti thi ish ladki me kyonki usko apni naani maa Ratidevi jaisa banna tha aur Dr Anju ki tarah doctor bhi ....... Aryan apne bade bhai ko bahot pyar karti thi as lover a bhi ..... Ani uski ideal sister thi uski ek call pe India aa gayi par 2 ghante bhi nahi areoplane ko land huye aur woh ish rahasmayi jungle me apni badi bhen ko Maharani ke roop dekhkar bas dimaagh ke ghode dauda ke sochti yeh sab kyun aur kaise ho raha hai ......

MahaRani Vijaylamkshi ke saamne jab dono Guruji ke partibimb prakat huye toh usne Prabha se dono ka ashirwad lene ko kaha toh usne bhi dono ko naman kiya jameen pe bethkar .......

Dono Guruji ne ashirwad diya phir Bade Guruji bole ," pareshan na ho putri tum puri tarah surkahshit ho aur Maharani ka tumko yahan bulane ka ek hi prayojan tha woh hai tumhara pichla janam aur ish janam me tum ushi teen phen waali apni bhen Vishaka se badla bhi le payogi jiski wajah se tum Sarp yoni dubara na paa saki "...... ishi ke saath Prabha ke maathe ke ander bade Guruji ke haath se prakash punj bheja toh aankhien bandh kar woh apne pichle janam ki sab ghatna dekhti chali gayi aur aankho se aansoon behte rahe .....

Kuch samay paschaat jab Prabha ne apni aankhien kholi aur aansoon phonch ke boli ," mein aa rahi Vishaka..... apni choti bhen ka saamne karne ke liye tyaar ho jaa , mere bhai Aryan ko tu choo bhi nahi payegi ".......

Rani Vijaylamkshi bas muskara ke bade Guruji ki taraf dekhi toh unhone bhi palkien jhapka ke ashvasan diya ki samay aa gaya hai Prabha ko patalok bhejne ka .......

( Doston yeh part Update ka edit kar ke cut kar diya tha , agar aap ne yeh na bhi padha toh story samjhne me koi dikkat nahi hogi ....... English waala part meine translate nahi kiya hai par koi dikkat nahi hogi jab Aryan aur Deepti aage patalok me safar karenge , wahan bhi jarurat ke hisaab se vistaar se pata chal jayega )
 
अपडेट 34

[size=undefined]PART - 7 (ा) ....... ( पतलोक )

अब तक ........

दीप्ति कुछ सोचकर बोली ," आर्यन मुझे लगता है नक़्शे और िश जंगल का कोई सम्बद्ध है , एक मं तुम साइड होना "..... आर्यन से दुर्र जाकर दीप्ति ने जब मिटटी देखि जोह राइट जैसी थी और यहाँ घास भी नहीं थी तोह निच्चे बैठकर अपनी नंगी पीठ के बल लेत गयी .

उसकी नंगी पीठ जमीन छूटे hi जंगल गायब हो गया और पूरा अँधेरा के साथ बस एक घेरा गधा सा कोई उनसे 500 मीटर दूरी पे िश वीराने सी जगह पे दिखाई दिया ...... दोनों समझ गए एहि पतलोक का प्रवेश द्वार होना चाहिए ....... ऐसी निर्जीव और खुसकाक जगह उन्होंने नहीं देखि थी पर मंजिल आगे नज़र आ रही थी .

दीप्ति अब मुस्करा के कड़ी हुयी और आर्यन के पास बड़ी ऐडा से चलती हुयी पीठ घुमा के कड़ी हो गयी ...... आर्यन ने भी हसकर उसकी गोरी पीठ से मीठी झाडी फिर उसके कानो को किश करके बोलै ," मुबारक हो अब नक्शा गायब हो चूका है हमेशा के लिए , अगले 2 पड़ाव तोह तुम खुद अपने दिमाग़ में बनने वाली छवि से बताने वाली हो "...... उसकी जीप बांध कर उसको शील्ड पहना दी फिर अपनी तरफ टर्न कर किश करने लगा तोह दीप्ति भी कहाँ पीछे रहती अपने प्रेमी का आलिंगन किये बिना ...... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पहुछठ ..... ी लव यू माहि ी लव यू मेरी जान ......

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दीप्ति

खूब चूमा छाती करने के बाद दोनों को होश आया जब लगा गीता किसी मुसीबत में है...... दोनों किश तोड़कर पालते तोह 20-22 कोई 10-12फट ऊँचे दानव साइज के खूंखार राक्षश जैसे प्राणी उनकी ओरे hi बढ़ रहे थे और उनके चलने से धरती भी कांप रही थी .

दीप्ति ने भी झुकार अपनी तलवार उठा के कहा ," माहि , हम गीता दीदी की कोई मदद नहीं कर सकते पर मुझसे जमीन पे नक्शा टच कर उनकी धरती की शक्ति ( एअर्थ पावर) खुल गयी है , अब धरती मैया से आजतक कोई जीत पाया है क्या कभी ? हम अब उनको दिव्या तलवार को पकार hi आजाद करा पाएंगे उनको तीसरे पड़ाव से पहले hi कैद कर लिया गया है ".

आर्यन भी चिंतित होकर ," मुझे भी एहि महसूस हुआ और Arjun-Chetak भी खतरे में हैं फिर डिअर मत करो पहले में िंह से निपट लेता हूँ , इनके हाव भाव देखकर लगता है िंहसे बगैर लाडे तोह हम अंदर जा नहीं पाएंगे ...... बस तुम पीछे रहना में संभल लूंगा ".

अब आगे ......

आर्यन ने अपनी तलवार निकाल के उन्ह 10-12 फट ऊँचे 20 से ज्यादा खूंखार दानवो की टोली की तरफ दौड़ लगा, उछाल के छलांग मार के दो के सीने पे जबरदस्त किक जड़ी जोह सबसे आगे थे और तीसरे का सर काट दिया ....... किक खाकर दोनों पीछे अपने 2 साथी को लेकर गिरे धडाममममम........ सब इतनी तेजी से हुआ की बाकी किसी को मौका नहीं मिला वार कर पाते और सर कटे दानव का धाड़ जमीन में गिरा तोह सब दानव गुस्से से चिल्लाकर आर्यन पर वार करने लगे मगर वह उनके हाथ hi नहीं लग रहा था अपनी तेजी से इधर उधर कूदते हुए वार पे वार करने लगा .

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दीप्ति जोह तलवार लिए अपनी बारी का इंतज़ार करने लगी की कोई सा दानव उसकी तरफ भी आये पर आर्यन की दक्षता और वार देखकर बाकी सब ने उसको घेर के अपने शास्त्रों (गदा और तलवार) से घातक से घातक वार करने लगे ...... आर्यन अपनी स्पीड से किसी को लात किसी को घुसे मार के सीधे हाथ से तलवार का वार कर उनके अंग और सर काटने लगा ...... सारे उसकी तेजी देख तिलमिला के रह गए कभी कभी वार आपस में hi एक दुसरे को नुकसान पहुंचते.

शुरू के 2 मं में उसने सबको धुल भी छठा दी थी और 10 से ज्यादा मार दिए थे पर अबकी बार सबने उसपर एक साथ वार कर उसको निच्चे दबा लिया और उसकी तलवार दुर्र फ़ेंक दी चीन के एक दानव ने .

दानवो के बड़े बड़े मुक्के और शक्तिशाली वार भी जब बेअसर hi आर्यन पे साबित हुए जिनको वह रोक के अपना मुक्का लात बार बार जड़ देता तोह समझ गए ये कोई मायावी मनुष्य है , 2-3 तीन ने अपनी तंत्र और राक्षशी शक्ति का उपयोग किया पर उसपर कोई असर नहीं हुआ ..... ुष से टकरा के शक्ति वापस खुद पे लगती जैसे कोई शील्ड आर्यन की बॉडी से लगी हो ...... (यह सारू की कमल कवच की शक्ति थी कोई भी काली सकती उसको भेद नहीं सकती थी )

आर्यन ने एक बार अपना डाव लगा के 4 दानवों को लेकर जोर लगा के एक साथ दुर्र पहनका और उनकी तरफ कूद के अब अपने हाथों की उंगलिओं से hi उनकी आँख फोड़ता , गर्दन तोड़ डाला बाकी सबके वार से बचकर ...... एक बड़ी जम्प मार वह अपनी तलवार उठा लिया और पलट के फिर से बाकी 5-6 दानवों को मारने काटने लगा .

आखिरी वाले का भी सर काट के जब दीप्ति की तरफ पलटा तोह वह मुस्करा रही थी उसकी बहादुरी और स्पीड देखकर ...... दीप्ति भी अभी आर्यन के प्राकर्म को देख के विषमित थी की स्वयंवर में भी कोई िंह दानव जैसा शक्तिशाली योद्धा न थे पर जिस कुशलता से आर्यन ने सबको मार काट डाला वह अदितविया था .

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आर्यन

आर्यन जब उसकी तरफ बढ़ा तोह ढेरी ढेरी दीप्ति की मुस्कराहट काम होने लगी और डर सा चेहरे पे दिखा ...... जमीन के कम्पन से लगा कोई हैवी एयरोप्लेन जमीन पे क्रैश हुआ हो .

आर्यन भी जब पलटा तोह धरती में बने पतलोक के प्रवेश द्वार से एक महकाये दानव (उन्ह मारे गए दांव जैसा hi) बहार निकला के जमीन पे कूड़ा था ...... उसकी आंखें लाल अंगारो सी जल रही थी और सीधे हाथ की कटारी सी 8फट से भी लम्बी तलवार आग से लिपटी थी ....... दिखने में hi करीब 18 फट ऊँचा , 6 फट चौड़ा और डरवाना था . सर पे यमराज वाला काला मुकत सींघ वाला पहने सरीर पे सिर्फ निच्चे एक धोती टाइप का नीला विस्तार कमर से झांघो तक ढके था और गले में मोती सोने की रतन जड़ित कई बड़ी बड़ी माला पहने था ..... सीधे पेअर में सोने का मोटा बड़ा कड़ा उसकी विशालता का भकान करता था .

ऐसा जीव दीप्ति क्या आर्यन ने भी कभी नहीं देखा था वह भी ॉश्चारिये चकित था की ीनता विशाल काये चलता फिरता जीव ऊपर से दानव . आर्यन की तरफ जब तलवार का वार उसकी कमर पे किया तोह आर्यन की तलवार तोह टूट hi गयी बचाव करते हुए पर आर्यन उड़ता हुआ भी वार के साथ 100 मीटर दूर जाकर गिरा पर उसको चोट नहीं लगी थी ....... आर्यन भी उसकी स्पीड देखकर हैरान था जबकि इतना भारी भरकम है विशाल होने के साथ साथ hi .

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धरतीपकड़ दानव

दीप्ति जोरसे चीखी ," महीईईई....... सम्भालो अपने को ".

दानव का धयान जब पलट के दीप्ति की तरफ गया तोह आर्यन को यह मौका मिल गया , वह पूरी ताकत लगा जामें पे दौड़ के साथ जब उसके ऊपर 50 फट ऊँची छलांग लगा दोनों हाथो की मुठी बना के सर पे वार किया तोह दानव को तोह असर नहीं हुआ मुकत के कारन पर आर्यन की टांग पकड़ के अपने सीधा हाथ से जमीन में दे पटका ...... आर्यन जमीन में 8 फट अंदर घुस गया था इतनी जोर की पटक से .......

आर्यन भी ुष दानव की ताकत और फुर्ती देखकर समझ गया यह कोई मामूली दानव नहीं , यह तोह यह पतलोक के द्वार का राक्षश "धरतीपकड़" है या उसका कोई ख़ास सैनिक ......

आर्यन अभी उठता ुष पहले hi ुष दानव ने दीप्ति को पकड़ना चाहा तोह दीप्ति ने भी चल्लंघ लगा उसके बाजु पे तलवार का भरपूर वार किया पर ुष दातये को तोह खरोच भी नहीं आयी ...... मगर दीप्ति को पकड़ने के लिए दुसरे हाथ से जैसे hi छूआ तोह उसकी चीख निकल गयी ahhhhhhhhhhhhhhh ...... और हाथ हटा लिया जोह हिस्सा दीप्ति की बॉडी के पास चूहा था वह गाल गया था चुने से जिसमे उसकी 3 उंगलियन और अंगूठा सहीद हो गए ...... ahhhhhhhhhhhhh मरररररररर गयाआआआ....... उसकी तलवार भी जमीन पे गिर गयी ....... उसका कृदं बहोत तेज़ था दर्द की वजह से जैसे यह वीरानी सी जगह भी जागृत हो गयी थी पर न ऊपर आस्मां था न कोई दीवार क्योंकि यह पतलोक और पृथ्वीलोक के बिच का हिस्सा था ....... वीरान और जीवन रहित .

दीप्ति ने फिर से तलवार से उसके प्यार पे वार किया पर दानव ने उसकी तलवार पकड़ के खींचा जिससे दीप्ति उसके प्यार से टकरा के गिर गयी पर उसका उल्टा प्यार घुटनो तक गाल के गिरने लगा ...... फिर अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की चीख के साथ वह पीछे जमीन में बेथ गया ........ आर्यन भी दीप्ति की बहादुरी और हिम्मत देखकर खुश हुआ पर दानव की हालत देख समझ गया दीप्ति को कोई मर्द अभी टच नहीं कर सकता ...... पर कैसे अब तोह हमारा विवाह भी हो चूका है???

दानव चिल्ला hi तोह पड़ा "मायावी लड़की कोण है तू ? तू मुझे नहीं हरा सकती , यह कैसी शक्ति है तेरे पास ? " .......

अब ुष ने दीप्ति के ऊपर जब अपना मोह खोल के आग के अंगारे बरसा दिए तोह आर्यन जो पहले hi त्यार था वह नज़दीक जा दीप्ति के आगे खड़ा हो ....... कमल की शील्ड ने आर्यन दीप्ति को घेरा हुआ था और दीप्ति को आर्यन ने अपने साथ लगा लिया था तोह कोई असर hi नहीं हुआ ....... 2 मं तक जब लगातार आग बरसाने के बाद भी ुनःपर दानव की अग्निवर्षा बेअसर साबित हुयी तब ुष दानव को समझ में आया की यह दोनों आम मनुष्य नहीं है पर यहाँ आये कैसे ?

दानव ने सोचकर पत्र बदला ," कोण हो तुम और यहाँ क्यों आये हो ???? पक्का मायावी हो जोह मेरे वार से अभी जिन्दा बच्चे हो ? "

आर्यन और दीप्ति भी खड़े होकर उसकी तरफ देखकर संभल चुके थे पर आर्यन ने दीप्ति को अपने से पीछे hi रखा और ुष दानव से कहा ," हम दिव्या तलवार की खोज में आये हैं , हमारा उसको ढूढ़ना बहोत जरुरी है , तुम क्यों हो जोह हमको रोक रहे हो ?"

दानव भी हैरान था यह दोनों पतलोक में ुष दिव्या तलवार के लिए अपनी जान की परवा किये बगैर यहाँ आये हैं ........ कुछ सोच के चाल चलते हुए बोलै ," ुष तलवार के लिए तुमको पतलोक के अंदर जाना होगा और पतलोक का दवार को में महा दानव धरतीपकड़ hi खोल सकता हूँ मगर में क्यों जाने दूँ तुमको पतलोक ?"

आर्यन थोड़ा सोचकर बोलै ," फिर हमको तुम्हे मार के hi अंदर जाना होगा , बेहतर होगा हमको जाने दो वैसे भी तुम घायल हो मर्डर के तुम को क्या मिलेगा ? ....... यह मेरी पत्नी है और इसकी जान बचने के लिए दिव्या तलवार तक हमको पहुंचना है , तुमको मार के हम पतलोक का चौकीदार नहीं खोना चाहते ".

दानव हसकर ," हाहाहाहाहा ...... हाहाहाहाहा ........ हाहाहाहाहा ....... तुम दोनों मायावी मनुष्य होकर अपने को शक्तिशाली समझ रहे हो पर तुमको गायत नहीं है की पतलोक में तुम्हारी कोई माया काम नहीं करेगी और मुझे घायल करके तुम अपने को शूरवीर समझ रहे हो तोह यह तुम्हारी बहोत बड़ी भूल है ...... अभी तक मैंने अपनी शक्ति दिखाई hi कहाँ है , मुझे कोई नहीं मार सकता और तुम जैसे थुच मनुष्यों को में अपना भोजन बना लेता हूँ "..... है है है है है है है है है ......... उसका अठास बहोत hi डरवाना था ......

धरतीपकड़ (दानव ) ने अपना आकर घटा के 10 फट के करीब कर लिया पर लग अभी भी वह डरवाना और बदसूरत hi था ......

धरतीपकड़ ," तुझे अब मेरा नाम भी पता है पर किसी ने यह नहीं बतया की मुझे कोई हरा के hi पतलोक के अंदर जा सकता जोह कभी हज़ारों सालों से नहीं हुआ ".

दीप्ति की तरफ इशारा करके बोलै ," िश सुंदरी को में अपनी गुलाम बना के रखूँगा और तू जोह कोई भी है फूट ले यहाँ से जा तेरी जान बक्शी िश सुंदरी के लिए ".

आर्यन जोरसे हँसा ," है है है है ...... अबे या तोह तू नीरा बेवकूफ है या आँख का अँधा ..... बावले यह लड़की नहीं साक्षात् मौत का रूप है इसको जोह छु लिया वह परलोक सिधार गया देख अपने हाथ की उंगलियन और गाला हुआ प्यार फिर भी इसके चक्कर में है ....... जरा डाइलोगे सही मार की मुझे गुलाम बनेगा और िश लड़की को जाने देगा ..... hi hi hi hi hi ..... "...... आर्यन भी उसका उपहास उड़ाने लगा तोह दीप्ति के चेहरे पे भी फीकी मुस्कान आ गयी क्योंकि धरतीपकड़ कोई मामूली दानव उसको नहीं लग रहा था पर आर्यन की चिंता थी उसे .

दानव भी जोरसे अठास मार के हँसा और आँख बांध करके मंतर पड़ा तोह उसके हाथ प्यार ठीक होने लगे ...... फिर आँख खोलकर आर्यन को घूरता हुआ चिल्लाया ," मूर्क मनुष्य अब तोह जिन्दा नहीं रहेगा और िश लड़की को तेरे सामने hi नंगा करके .......ahhhhhhhhhhhhh ..... "

उसकी बात अधूरी hi रह गयी आर्यन ने उसकी बात पूरी होने से पहले hi उछाल के ग़ुस्सा जब उसके मोह पे ज्यादा तोह उसके 4 दांत टूट गए और खून निकला फोहरा के साथ तोह दर्द से अह्ह्ह चिल्लाया ...... गुस्से से नीली आंखें जोह लाल हो चली थी आर्यन की ...... फिर तोह जैसे उसके बाद उसके ऊपर लात मौके की इतनी तेज बरसात की दानव संभल नहीं पा रहा था और अधमरा सा मार खाकर जमीन पे गिरा .....

आर्यन ने जब जमीन पे गिरे हुए धरतीपकड़ के पेट पे जोरसे लात मारी तोह उसने दोनों हाथ से उसके प्यार के वार रोक के पकड़ लिया पर आर्यन ने दूसरा पेअर की किक से उसकी एक आँख पे मारी और दोनों हाथ का वार उसके सीने पे किया तोह दानव तिलमिला के उसको पीछे उछाल दिया आर्यन को और चिल्ला के अपनी देनी आँख पे हाथ रखा जोह फूट गयी और उससे खून बह रहा था ...... आर्यन की किक से उसकी देनी आँख फूट गयी थी .

आर्यन भी गुस्से से पीछे जमीन पे गिरते hi फुर्ती से खड़े होते hi फिर पिल पड़ा...... धरतीपकड़ पे लात ग़ुस्से जैसे हथोड़े की माफिक ुष्पर बरस रहे थे ...... " सुअर की औलाद तू मेरी दीप्ति को गुलाम बनेगा , उसको नंगा करेगा ...... मादरचोद में तेरी माँ चूड दूंगा कुटिया के जानने , हराम के बीज आज तुझे अपने पैदा होने पे अफ़सोस hi होगा "..... दीप्ति भी आर्यन का उग्रह रूप देखकर डर भी रही थी की यह कैसी शक्ति है आर्यन के पास जोह इतनी तेजी से किसी चांडाल की तार दानव को मार रहा है .

हर गुजरते पल के साथ धरतीपकड़ की हालात बाद से बदतर होती जा रही थी , वह कुछ कर hi नहीं पा रहा था पर उसके पास अब एक hi रास्ता बचा था वह झट से धरती में समां गया पर आर्यन ने हाथों से उसकी एक टांग पकड़ ली जोह धरती में घुसते हुए आ गयी जिससे आर्यन भी धरती के अंदर समता चला गया .......

धरती के अंदर दानव के घाव भरने लगे पर आर्यन उसको वहां भी ग़ुस्से से मारता रहा ....... दोनों जब 100 फट अंदर धस गए तोह दानव ने अपना पावरफुल मंतर पढ़ा जिससे आर्यन को झटका लगा और वह बहार सतह पे आकर गिरा ......

आर्यन खड़ा हुआ तोह धरतीपकड़ भी खुश होता अब सही सलामत बहार आया की धरतीपकड़ उसको ऐसे hi नहीं बोलते क्योंकि िश शक्ति की वजह से मुझे कोई हरा नहीं सकता पर आर्यन को देखकर हैरान था की यह जिन्दा कैसे बच गया और यह hi उसकी सबसे बड़ी भूल थी जिसका उसको घमंड था .......

दानव की धरती वाली पावर का आर्यन पे कोई असर न हुआ पर कैसे ? अभी वह सोच hi रहा था की दीप्ति ने अपनी तलवार आर्यन की तरफ फेंकी और बोली ," मार डालो िश बेहिसी दरिंदे को आर्यन यह पतलोक की चौकीदारी के लायक नहीं है".

धरतीपकड़ भी अब आर्यन से डर रहा था क्योंकि जितनी तेजी से िश मनुष्य ने उसको धरती के अंदर भी मारा था और शक्ति मंतर का असर नहीं हुआ तोह यह बहोत ज्यादा शक्तिशाली है ...... यह मनुष्य नहीं हो सकता पक्का राक्षश या दानवी शक्ति भी इसके पास है मायावी होने के साथ पर वह भी मुझे नहीं हरा सकते .

आर्यन ने गुस्से से तलवार से उससे वार करने शुरू किये तोह वह भी बस अपनी अंगारो वाली तलवार से बचाव hi कर पा रहा था क्योंकि अब आर्यन की तलवार भी उसकी शक्ति से जड़ित थी ...... ृक्क जाए रुकक्क जाए , मुझे छोड़ दे ".......

मगर डिअर हो चुकी थी पहले आर्यन ने उसकी दोनों हाथ काट चूका था ...... अपनी लात उसके सीने में गदा के चिल्ला ," दीप्ति मेरी जान hi नहीं मेरी रूह की मलिका है और तू ने ुष्पर बुरी नियत दिखा के अपनी मौत मांग ली धरतीपकड़ ...... तेरी आँखों में दिख रहा की तू ने कितने निर्दोष लोगों को मारा है कितनी स्त्रीओं की इज्जत तार तार की है ...... बहोत नाज है न तुझे अपने लौड़े पे आज देख में क्या करता हूँ ".

उसके बाद तोह दीप्ति भी आर्यन के घिनोना कीर्त्या देखर पलट गयी की में यह नहीं देख सकती पर हर गुजरते समय के साथ धरतीपकड़ की चीखिआ गूंज रही थी ...... उसका पतलोक , उसके मंतर , उसकी शक्तियां भी आज सब बेकार hi साबित हुयी ...... पतलोक से भी उसके कई सुभचिन्तक भी इतनी गन्दी दर्दनाक मौत के बस मूक दरसक hi बने रहे .

(आर्यन ने धरतीपकड़ को नंगा कर उसका 2 फट लम्बा लौड़ा काट डाला और अपनी तलवार में लौड़ा पिरो के उसकी गांड में ठूस दिया फिर उसकी दोनों टाँगे काटी फिर उसका सीना पहाड़ के उसका दिल निकल उसके मोह में ठूस दिया )

आर्यन चिलता हुआ ," जा अब नरकलोक अपने कुकर्मो की सजा भुगत तेरा समय पूरा हो गया पतलोक में" ....... और उसका सर काट के दीप्ति के पैरों की तरफ फेंका और तलवार के वार ने ठीक दीप्ति के पेअर के पास धरतीपकड़ का कटा हुआ मुंड तलवार से बेहद दिया था जोह जमीन में आधी धंस गयी सर से घुसकर दिल से बहार आती हुयी ......

दुर्दांत आंत हुआ धरतीपकड़ का और पतलोक के महाबली को भी घेरा आघात हुआ की उनका चौकीदार ( पतलोक के द्वार का रक्षक , पहरेदार मारा गया ) ...... आर्यन और दीप्ति को पतलोक के अंदर प्रवेश होते हुए देखकर सबने अपनी जगह पे hi रहना ठीक समझा .....????

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धरतीपकड़ ने दीप्ति के बारे में गलत बोलकर आर्यन की ताकत hi जैसे ललकार दी थी , धरतीपकड़ को कोई मनुष्य , दानव , देवता , जानवर भी नहीं मार सकते थे पर एक आत्मा आर्यन के अंदर ऐसी थी जिसको महसूस करके hi पतलोक के भी प्राण सूख गए ...... यह धरतीलोक से पतलोक तक कैसे आया और वह भी जीवट है जबकि यह तोह 40,000 साल पहले hi देह त्याग दिया था ....... अब दिव्या तलवार को ले जाने से इसको क्यों रोक सकता है ....

पतलोक में अचानक 7 लोक के स्वामी और महाबली ीखेते हुए तब एक बुजुर्ग से 10 फोन वाले सर्प ने कहा जोह सबका आदरनिये था ," यह महार्यं का अवतार है , इसके अंदर 5 और आत्मा समाहित हैं जोह की आशम्भव है इतनी शक्ति धारण करना पर हम उसको रोके तोह मौत को गले लगाने वाली बात होगी ....... दिव्या तलवार भी जब यहाँ प्रकट हुयी थी तब hi हमको समझ जाना चाहिए था की एक दिन उसका मालिक आएगा जोह पतलोक को भी नष्ट कर सकता है ".

दूसरा 4 फैन वाला सर्प ( अर्ध सर्प अर्ध दानव जैसा दिखने वाला) बोलै ," महाबली आप भी उससे डर रहे हैं जबकि आपको कोई हरा नहीं सकता , उसने धरतीपकड़ को hi तोह मारा है ...... में अभी उसको मार के निगल जाऊंगा आप बस आज्ञा दिज्ये "...... वह जैसे टेश में था .......

तब एक सूंदर से औरत जोह वेश भूसा से महारानी लग रही थी बोली ," नागदंश तुम तोह क्या हम सब भी उसको मिलकर नहीं रोक सकते अगर वह अपनी पे आ गया ........ सुकर है उसकी शक्ति अभी सोई हुयी हैं , हमको अदृश्य होकर उसको दिव्या तलवार तक पहुंचने देना चाहिए ...... वैसे भी ुष शक्तिशाली तलवार को इसके अल्वा कोई धारण नहीं कर सकता जिसने कोशिश की मारा गया ........ बस कोई ुष पागल विशाखा के पास सूचना भेजो की जान प्यारी है तोह दिव्या तलवार से दूर हो जाये ".

बुजुर्ग नाग ," महारानी सही बोल रही है , अपने hi हाथो अपने पतलोक का विनाश करवाना वह भी ुष दिव्या तलवार के लिए जोह हमारा थी hi नहीं क्यों लालच करना , विशाखा को सन्देश पहुंच गया होगा उसके यहाँ पतलोक में कदम रखते hi ....... कोई कुछ नहीं करेगा उसको यहाँ से जल्द से जल्द दिव्या तलवार ले जाने दो यह हमारा आदेश है ....... आज के बाद दिव्या तलवार के जाते hi नागदंश तुम पतलोक के प्रवेश द्वार की जिम्मेदारी उठाये ".

जितनी जल्दी सभा हुयी उतनी जल्दी hi ख़तम भी हो गयी की आर्यन को खुद दिव्या तलवार हासिल करनी होगी , हमको कुछ नहीं करना ......... वह आर्यन से नहीं ुष के अंदर चट्टी (6तह) आत्मा से डर रहे थे जोह उसके अंदर बड़े गुरूजी ने प्रवेश की थी उसके जनम के समय जब वक़त रुक गया था और सफ़ेद रौशनी सारू के बेटे माहि के अंदर समां गयी थी .

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दीप्ति ने पलट के धरतीपकड़ के सर मुंड पे अपनी लात रख हाथ से अपनी तलवार भार निकाली , जमीन में धुल में रगड़ी फिर एक कपडे से साफ़ की और मय्यन में रख ली खून पहुंच के ....... आर्यन उसके पास पहुंचा अब वह नार्मल था और अपने गले से लगा लिया उसका माथा चूम के ...... दीप्ति की ख़ुशी और उमाड़ का ठिकाना न था , धरतीपकड़ के गुस्से दिलाने के बाद जिस कुर्ता से आर्यन ने उसको एक आम योद्धा की तरह मार डाला वह उसकी दीप्ति के लिए प्यार को दर्शाता था लेकिन वह कहाँ जानती थी की जिस धरतीपकड़ को आर्यन ने मारा उसको कोई इंसान क्या कोई भी नहीं मार पाटा वह अजय था पर अमर नहीं बन पाया आर्यन के कारन .

दीप्ति ने आर्यन के गाल पे चूमा," आप मुझसे इतना प्यार करते हो की में आज बहोत खुश हूँ "....... आर्यन भी हसकर," मुझे तुमसे पहली नज़र में भी प्यार हो गया जब तुमको देखा फिर तुम्हारे मेरे लिए इतनी केयर और अपनापन मुझे तुम्हारा होने से रोक नहीं पाया फिर चंदा रानी ( गीता ) का तुमसे लगाव और प्यार मेरी ज़िंदगी में तुमको ला hi दिया ....... अब आगे बढ़ना चाहिए गीता अभी भी कैद में होगी ".

दीप्ति आर्यन अपने को साइट कर जब ुष गहरे और बड़े गधे में देखे तोह एक तरफ बड़ा सा द्वार नज़र आया , दोनों गधे में कूड़े जोह 50 फट घेरा था और गोलाकार द्वार से जब अंदर प्रवेश किये जिसपर कोई दरवाजा नहीं था .

दरवाजा तोह धरतीपकड़ के मरते hi विलुपत हो गया पर द्वार ऐसे hi बना था जैसे कभी दरवाजा hi न हो ....... अंदर जब एंटर किये तोह सब तरफ प्रकाश hi था दिन जैसा जबकि द्वार के पीछे ुष्पर बिलकुल अँधेरा ........ सामने ऊपर आसमान ,निच्चे हरयाली , पेड़ पौधे , चिडया , कुछ जानवर भी दिखे पर कोई भी खूंखार नहीं था ......

अच्छी वायु बह रही थी और दूर तक रास्ता दिख रहा था , दोनों आगे बढ़ते गए करीब आधे घंटे बाद उनको दूर एक बस्ती सी नज़र आ रही थी जब दोनों नजदीक पहुंचे तोह उनको कुछ 2-3 मंज़िल की बिल्डिंग और लोग दिखे , कुछ मानव जैसे , कुछ दानव जैसे , कुछ अर्ध सर्प , अर्ध दानव , कुछ पूर्ण सर्प ....... कुछ बहोत सूंदर स्त्रीयां कुछ बहोत सूंदर मर्द भी .

आर्यन ने जब एक मनुष्य की तरह दिखने वाले से पुछा की यह कोनसी जगह है ........ उष्ण दोनों को ऊपर से निच्चे तक घूरा और बोलै ," मनुष्य होकर तुम यहाँ क्या कर रहो है 'अटल लोक' में ?"

आर्यन थोड़ा सोचकर बोलै ," हम किसी को ढूंढ रहे हैं जोह हमारी मदद करे ".

वह दोनों को देखता रहा फिर बोलै ," तुम हमारी भासा भी जानते हो तोह तुमको पता होना चाहिए की िश पश्चिन नगर के प्रमुख से कुछ नहीं चिपटा तुम उनके पास जाओ उनकी आज्ञा के बगैर यहाँ नहीं रुक सकते ...... िश रास्ते पे 7 योजन की दूरी पर नगर है वही पूछ लेना उनका महल कहाँ है "...... इतना कहकर आगे बढ़ गया .....

7 लोक बहोत बड़े थे, एक लोक 80 योजन ( यहाँ की मापने की इकाई यानी 1क कम ) का होगा .......

आर्यन फिर दीप्ति से ," तुम क्या कहती हो हमको नगर जाना चाहिए की नहीं ?"

दीप्ति मुस्करा ," हम वहां क्या करेंगे जबकि हमको अटल(1) नहीं , विटाला(2) होकर सुटला(3) के बाद तळतळा(4) जाना है जोह हमारा चौथा पड़ाव होगा ऐसा मेरे मस्तिक में नक़्शे पे दिख रहा है".

आर्यन भी उसके छेड़ते हुए ," फिर तोह में बेकार में hi कोशिश कर रहा था जबकि मंजिल का तुमको पहले से पता है ".

दीप्ति भी भाव देते हुए बोली ," हम भी अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे की आप पूछें हम बातें .... hi hi hi hi ".

तभी वहां कई सैनिक आकर उनको घेर लिए जोह की सब स्त्री hi थी सैनिक के रूप में , उनकी लीडर बोली ," तुमको अभी हमारे साथ पश्चिन चलना होगा यह नगर प्रमुख का आदेश है , नहीं तोह हमको बंदी बनाना होगा तुम दोनों को".

भीड़ भी इकठी होने लगी तोह दीप्ति ने आर्यन का हाथ पकड़ के कहा ," हम दोनों त्यार हैं पर याद रहे यह मेरा खाबंद ( हस्बैंड ) है , कोई बुरी नज़र राखी तोह में बिच से चिर दूंगी ".

लीडर ," हमको बस नगर प्रमुख ने भेजा है तुम दोनों को सही सलामत वहां लाने के लिए ".

दोनों को एक बड़ी से रथ में बिठा के वह 20 के करीब सैनिक महिला चल दी नगर की तरफ , रथ को 6 घोड़े के जैसे 4 पेअर वाले पशु बहोत तेज़ गति से कीच रहे थे पर अजीब बात थी कोई पहिया ( व्हील ) नहीं था बस रास्ते से 2 फट हवा में hi वह रथ जिसमे सब सवार होकर बैठे थे सरपट भागा जा रहा था .......

Aryan-Deepti एक साथ बैठे थे पर सब स्त्री सैनिक आर्यन को hi देख रही थी आखिर इतना सुन्दर पुरुष उन्होंने नहीं देखा था ऊपर से मनुष्य जिनका खून और विरए बहोत स्वादिस्ट होता है..... पर दीप्ति सबकी मनसा समझते हुए आर्यन के गाल चूम के उसके हाथ अपनी दोनों छाती में दबोच के सर को उसके कंधे पर रख ली थी ...... जैसे की िश से दूर रहो यह मेरा है .

लीडर भी मुस्करा के बोली ," तुम इश्को यहाँ क्यों लेकर आयी हो , सब मौका मिलते hi इश्को अपना गुलाम बनने की कोशिश करेंगी ...... फिर इतना खूबसूरत मनुष्य आजतक नहीं देखा हम सब ने भी ".

दीप्ति थोड़ा जोश के साथ बोली," यह कोई साधारण पुरुष नहीं है , दिव्या तलवार के मालिक हैं तोह सोच समझ के बोलना और देखना कही मौत को गले न लग्न पड़े ".

दिव्या तलवार का मालिक सुनते hi सब जैसे शॉक hi हो गयी और आर्यन से डर रही थी , दीप्ति ने मुस्करा के सबको देखा और फिर आर्यन का सर अपनी तरफ घुमा के उसको आँख मारी फिर उसके लिप्स चूसने लगी तोह आर्यन भी खुश होता बस उसका साथ देने लगा ....... इतनी स्त्री योद्धा के बिच उसने दीप्ति को hi वार्तालाप करने दिया .

योद्धा स्त्रीयां भी बस तड़प hi सकती थी क्योंकि जिसको वह मामूली इंसान सोच रही थी वह तोह दिव्या तलवार का दिव्या पुरुष निकला हमको नहीं मिलेगा बस नगर प्रमुख ( रानी) hi अब मजए लेंगी पर यह सूंदर युवती ( दीप्ति) अपने पति को आसानी से नहीं देगी किसी को .......

करीब आधे घंटे बाद जब िश भाव नगर में एंटर किये तोह दीप्ति और आर्यन अपनी आँखों से देखते hi रह गए , पूरा स्वर्ण नगरी hi था यह नगर यानी सबकुछ गोल्ड से बना था और हर जगह बड़े बड़े रतन लगे थे .

दीप्ति और आर्यन आम इंसान होते तोह लालच आ hi जाना था पर दोनों खुश होते हुए बस िश नगर की बहवटा देख रहे थे ........ ऐसा सेहर तोह धरतीलोक पे मिलना मुश्किल है , सब लूट पात hi मचा देंगे ........ आर्यन को अंदाज़ा हो रहा था की करीब वह नगर में 200 कम आ चुके हैं तोह िश नगर को बनने में hi अरबों टन सोना लगा होगा पर यहाँ कोई इलेक्ट्रिसिटी से नहीं बल्कि बड़े बड़े रत्नो की लाइट से पूरी नगर रोशन था पर ऊपर आस्मां जैसे हल्का नीला hi लग रहा था .

रस्ते में स्त्री , पुरष , बच्चे को बज़्ज़ार और रस्ते में देखकर बस दोनों अपनी सोचों में गम थे ....... दोनों दिव्या तलवार से ध्यान हटा बस पतलोक के िश पहले नगर को देखकर भौंचके थे पर उनको कहाँ पता था वह पतलोक के लाखों में से एक हिस्से को देख रहे हैं ...... ना जाने कितने अनगिनत बड़े बड़े नगर और राज्य यहाँ हैं अलग अलग लोक में जोह हज़रों गुना सूंदर और मूल्वान हैं .

सब सैनिक एक बड़ी सूंदर इमारत के सामने रुक गए और वह लीडर सैनिक स्त्री उनको अंदर ले गयी तोह अंदर की सुंदरता देहकर दोनों खो hi गए , एक बहोत बड़े राजशी हॉल में जब पहुंचे तोह एक राजशी पोषक पहनी सूंदर स्त्री ने दोनों का अभिवादन किया तोह ुष लीडर ने सर झुका के अभिवादन कर पीछे रुक गयी .......

Aryan-Deepti ने भी हाथ जोड़कर उसको सर झुका के नमस्ते किया क्योंकि सब खड़े हो गए 35 सिंघासन से जिससे समझते डिअर नहीं लगी एहि नगर प्रमुख है ....... 25-26 साल की यह औरत नहीं बल्कि काम की देवी hi लग रही थी सुंदरता और कामुकता में ......

नगर प्रमुख ," में हूँ िश नगर की रानी स्वर्णलता , Aryan-Deepti तुम दोनों का स्वागत है , बातें बाद में करेंगे मेरे साथ चलो पहले विश्राम गृह में ".

वह ुष हाल से बहार निकल गयी उसके पीछे वह दोनों भी हॉल से सीधे हाथ पे चल दिए ...... उसकी मटकती छोटे वस्त्रों में गांड की लचक देख आर्यन का तोह ईमान hi दोल गया , ऐसी कातिल पुष्ट चूतड़ की थिरकन कभी नहीं देखि पर दीप्ति ने उसकी पीठ पे मारा ," गीता दीदी को बाटूंगी तुम क्या कर रहे हो "......

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रानी स्वर्णलता

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आर्यन भी खीज के अपनी निगाह ुष गलिहारे की दिवार पे मारता अब इधर उधर देखता हुआ चल रहा था ...... स्वर्णलता के नितम्ब की थरकन जैसे कानो तक फील हो रही थी , तीनो एक कक्ष में पहुंचे तोह उसने उनको फ्रेश होने को कहा पर दीप्ति ने मोर्चा सम्बहला ," मुझे आप से अकेले में बात करनी है अभी ".

स्वर्णलता ने एक पूरी नजर आर्यन पे मारी दोनों की आंखें मिली तोह जैसे उसने सन्देश hi भेज दिया हो आर्यन को की तुम मुझे पसंद हो .

स्वर्णलता ," ठीक है चलो मेरे साथ, आर्यन तुम स्नान कर लो धरतीपकड़ को मार के अभी भी उसके खून की बदबू आ रही है , हम आते हैं ".

आर्यन कुछ बोलता उससे पहले hi दीप्ति ने हाथ दिखा के उसको चुप करवा दिया ," तुम फ्रेश हो जायो में आती हूँ , किसी से कुछ बात मत करना ".

दीप्ति के जाते hi आर्यन भी अपना सामान रख पूरे कक्ष को देखकर उसकी सजावट और विलाश्ता पे खुश हो रहा था की ऐसा hi चंदा रानी के लिए बनूँगा पर गीता की याद आते hi आर्यन भी सतर्क होकर हमको जल्द यहाँ से निकलना होगा गीता अभी भी कैद होगी वहां उसकी हालत पता नहीं क्या होगी , हे भगवन मेरी गीता का ख्याल रखना में उसके बिना नहीं रह सकता .......

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दीप्ति जब स्वर्णलता के कक्ष में पहुंची तोह उसने कहा ," देखो रानी स्वर्णलता , तुम जिसको रिझाने की कोशिश कर रही हो वह दिव्या तलवार का मालिक है और उसने सिर्फ धरतीपकड़ को इशलिये मार दिया क्योंकि सिर्फ उसने मुझे गन्दी नज़र से देख गंदे सब्द बोलने चाहे तोह अपने यह रूप का जादू ख़तम करो और हमको अगली मंजिल तक जाने दो इसी में सबकी भलाई है ....... तुम्हारा नगर और पराजय बहोत अच्छी है सिर्फ एक युवक के लिए सब डाव पे मत लगाओ ".

रानी स्वर्णलता को अपनी यह तोहीं लगी तभी उसके मस्तिक में सन्देश आया माया का ," यह सही बोल रही है उनकी मदद करो और अपनी जान बच्चो वह तुम्हारे रूप जाल में कुछ डिअर फस सकता है पर बाद में तुम किसी को बाटने के लिए जीवित नहीं होगी ".

पतलोक के राजा माया की चेतावनी तोह अंदर तक हिला दी स्वर्णलता को पर अपने पे काबू करते हुए बोली ," महाराज मैंने कामलता और पुष्पलता को भी संदेसा भेज दिया है आर्यन ने धरतीपकड़ को मारा ुष का तोफा देने के लिए हम ूतस्थित हैं ".

राजा माया ," उसके लिए तुमको धरतीलोक जाना होगा बस अभी उसको दिव्या तलवार लेकर जल्द से जल्द जाने दो नहीं तोह पतलोक hi तबाह हो जायेगा तुम्हारी मूर्खता के कारन , मेरे आदेश का पालन करो ".

दीप्ति के हिलने पे रानी स्वर्णलता अपने होश में आयी और बोली," दीप्ति , तुम भी स्नान करके त्यार हो जायो और में वादा करती हूँ की कोई आर्यन पे निगाह नहीं डालेगी मगर मेरी एक शर्त है और में तुमको ऐसी चीज दूंगी की तुम दोनों को कोई पुरे पतलोक में कहीं भी जाने से नहीं रोकेगा ".

दीप्ति कुछ सोचकर ," ठीक है आर्यन के अल्वा कुछ भी मांग सकती हो ".

स्वर्णलता खुश होकर ," में अपनी दो बड़ी बहेनो के साथ पृथ्वीलोक आऊँगी तब हम तीनो को आर्यन धरतीलोक घूमने ले जायेगा तब तुमको कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए ".

दीप्ति ," में समझ रही हूँ पर रानी होकर भी तोह आप को कितने लोग मिल जायेंगे फिर मेरा पति hi क्यों ?"

रानी स्वर्णलता ," तुम चिंता न करो अगर वह नहीं चाहेगा हम में से कोई आगे नहीं बढ़ेगा पर आर्यन की झलक hi हिरदय में उतर गयी बस हाँ कर दो मुझे अच्छा लगेगा , मैंने आजतक किसी मर्द के लिए मिन्नत नहीं की फिर हम धरतीपकड़ की मिर्त्यु का पुरष्कार hi देंगे ".

दीप्ति कुछ सोचकर ," ठीक है आर्यन के साथ घूमने की परमिशन में देती हूँ और बाकी की परमिशन तुमको गीता दीदी से लेनी होगी जोह कैद हो गयी हैं ".

रानी स्वर्णलता खुश होकर दीप्ति के गले लगी और बोली ," दिव्या तलवार को अगर आर्यन ने पा लिया तोह गीता भी वहीँ आ जाएगी पर तुमको एक बात बता दूँ आर्यन से भी कहना की विशाखा को देखते hi मार दे नहीं तोह इतहास फिर धूरा जायेगा और तुम उसको खो डौगी ".

दीप्ति ," में याद रखूंगी और वह क्या तोहफा है जोह देने वाली थी ?"

रानी स्वर्णलता ," तुम रेडी हो जायो, में जाते हुए दूंगी . दीप्ति तुम बहोत सौभाग्वती हो जिसको आर्यन जैसा पति मिला ".

दीप्ति वापस जाते हुए पलट के बोली ,"यह मुझसे ज्यादा कोण जानता है ".

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दीप्ति जब कक्ष में पहुंची तोह स्नानग्रह से आर्यन के गाने की आवाज आ रही थी ...... " तू मायके मत जइयो मत जइयो मेरी जान ....."

दीप्ति भी मुस्करा के द्वार बंद कर जल्दी से स्नानग्रह में पहुंची तोह 5 युवतिओं को अंदर झांकता देख गुस्से से आग बबूला होकर सबको आगे बढ़कर पीछे धक्का दी और अंदर देखि तोह आर्यन पूरा नंगा नाहा रहा था एक बाथ टब नुमा सोने की हौज में गाना गाते हुए ...... पांचो युवती कड़ी होकर जल्दी से भागी कड़ी होकर और दीप्ति उनके पीछे ," रुको नहीं तोह सबको मार दूंगी "......

सब द्वार खोलकर बस कड़ी hi रह गयी और पलट के उसके पास जा प्यार पकड़ ली हमको माफ़ कार्डो हम दासी तोह बस मेहमान को नहलाने आयी थी ...... दीप्ति भी उनकी गिड़गिड़ात देखकर मैं में हसी अब खुद कभी आर्यन को इमेजिन कर नाहा नहीं पयोगी ...... hi hi hi hi .....

दीप्ति ," आगे ऐसी गलती न हो समझी , भागो यहाँ से "......

दीप्ति ने द्वार बांध किया उनके भागते hi और खुद अब ध्यान से कक्ष देखती ऊपर चाट को देख रही थी की आर्यन ने उसको गॉड में उठा लिया और चूमते हुए स्नानग्रह में ले गया वह मन करती रही पर बिलकुल निर्वस्त्र करके उसको ुष हौज जैसी बाथटब में ले गया ......

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नुदे दीप्ति

दोनों प्रेमी किसी नागो की तरह लिपट एक दुसरे को किश करते , सहलाते हुए नाहा रहे थे ....... उनको खुद नहीं अहसास था पर यह प्यार की निस्चल क्रीड़ा उनको पूरा जो करती थी .

दीप्ति भी अब शर्मा नहीं रही थी , पिछले 10-12 घंटो में आर्यन के लिए इतनी स्त्री और युवती की कामुक निगाह उसको अपने प्रीतम पे कब्ज़ा दिखने के लिए विवश कर दी थी ........ पूछह पूछह चुम्म्म्म चुम्म्म्म चुम्म्म्म चुम्म्म्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पुछठ........

अपनी योनि को आर्यन के विशाल सख्त लिंग पे रगड़ती जब दो बार शखालियत और संतुस्ट होकर उसके लुंड और जूते से गीता ने सिखाये अनुभव से प्यार कर चूमती , चाट लेती कभी चूस के 10 मं में झाड़ के आधा विरए पि भी गयी ....... आर्यन पे भी जैसे पतलोक की सुन्दर और मादक स्त्रीओं का जादू आज ज्यादा hi उसको उत्तेजित कर रखा था .

आर्यन ," दीप्ति , कुछ तोह जादू है यहाँ की महिला को देखकर में कुछ ज्यादा hi उत्तेजित हो गया था "...... आखिर कर आर्यन ने दुर्घटना से सावधानी भली वाली सोच वयक्त की दीप्ति को .

वह भी मुस्करा के आर्यन का गाल चूम के बोली ," आप चिंता न करो जबतक में हूँ कोई मोह उठा के आपके करीब आयी तोह उसकी आंखें फूड दूंगी बस अपना दिमाग़ गीता दीदी को जल्द से जल्द रिहा करने में लगाए ". आर्यन के लिए चेतावनी , चिंता और प्यार तीनो एक hi लाइन में दीप्ति ने बोल दिए.

आर्यन (मैं में ) यह इतनी भी सीढ़ी नहीं है जितना में समझ रहा था तभी मुझे ब्लोजॉब देकर ठंडा की , वाह ऋ किस्मत इतनी सूंदर सूंदर स्त्री को छु भी नहीं सकता काश मीणा यहाँ होती तोह तलवार मिलने के बाद एक हफ्ता यहीं ऐश करता .

दीप्ति उसकी तन्द्रा भांग करते हुए," जल्दी रेडी होते है , रानी स्वर्णलता ने भोजन पे बुला है ".

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रानी स्वर्णलता ने भोजन करके दोनों को पतलोक की पोषक में विदा किया अपनी मोहर देकर जोह पतलोक के दुसरे लोक में आसानी से जाने के लिए थी .

Aryan-Deepti के साथ एक स्त्री योद्धा ( वही लीडर योद्धा) अपने रथ पे 3 घंटे में उनको 'विटाला लोक' के अंदर रानी स्वर्णलता की स्वर्ण मोहर दिखा के ले गयी जोह भूतों और पिसाच का राज्य था पर यहाँ भी सब सोने से hi बना था तब स्त्री योद्धा ने बतया की इसी लोक से स्वर्ण सब पतलोक में जाता है और यहाँ के गॉब्लिन्स स्वर्ण निकलने में माहिर होते हैं ...... पहले दो नदी पार की जोह की यहाँ की दो महारानी के नाम थी फिर स्वर्ण से बानी एक विशाल नगरी को पार किया .

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जब तीनो 'सुटला लोक ' में प्रवेश किये तोह वहां द्वार पे hi विष्णु भगवन का बड़ा सा मंदिर था तब स्त्री योद्धा ने बतया की यह महाबली बलि का लोक है और यह विष्णु भगवन के वामन अवतार का मंदिर है ....... स्वयं भगवन ने िश लोक की रक्षा का वरदान दिया है .

Aryan-Deepti ने भाव मंदिर में जाकर भगवन विष्णु की पूजा की तोह स्वयं िश लोक के राजगुरुजी ने वहां आकर दोनों को आशीर्वाद दिया और पूजा करवाई ......

दोनों ने उनका आशीर्वाद लिया तब राजगुरुजी बोले ," भगवन विष्णु तुम्हारी रक्षा करेंगे परन्तु वॉश यह धयान रहे अगर दिव्या तलवार के लिए तुम ने किसी को नुक्सान पहुंचा तोह कोई भी तुम्हारी मदद न करके बल्कि सब तुमको दण्डित जरूर करेंगे . महार्यं अपने दिव्या तलवार को हासिल कर वापस अपने लोक में जाने में hi तुम्हारी भलाई है ".

आर्यन भी सर झुका के बोलै ," गुरुदेव में तोह बस अपनी पत्नी दीप्ति के प्राण बचने हेतु hi यहाँ पतलोक तक आया हूँ , में धरतीपकड़ को भी मारना नहीं चाहता था पर उसने दीप्ति पे कुदृस्ति डाली तो सजा देनी पड़ी ..... में इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ ".

राजगुरुजी ने आर्यन को अपने गले लगा के कहा ," पुत्र तुम कोण हो िश बात से अभी अनजान हो पर समय बलवान होता है सब ठीक hi करेगा बस अपने कर्तव् से मत डिगना वार्ना सब कुछ बिखर जायेगा. हाँ धरतीपकड़ को उसके को कर्मो की सजा मिलनी hi थी जिसको सिर्फ तुम hi मार सकते थे तभी तो तुम इतनी आसानी से यहाँ तक पहुंच गए सब ऋणी है तुम्हारे ..... विजयी भाव !!!! "

दीप्ति कुछ सोचकर ," गुरूजी , अगला पड़ाव मेरे पति को मुझसे चल से चीन न ले ".

राजगुरुजी ," ढेर रखो पुत्री फिर दिव्या तलवार को पाना इतना आसान तोह नहीं , भगवन विष्णु और राजा बलि महाराज का आशीर्वाद तुम दोनों को मिला है अपने प्रेम पे विश्वास रखो ".

राजगुरुजी से आज्ञा लेकर फिर दोनों स्त्री योद्धा के साथ िश भाव लोक को देखते आगे बढ़ रहे थे ...... बिलकुल पृथ्वीलोक की तरह बस दानव और राक्षश इंसानी रूप लिए हुए थे ....... स्त्री योद्धा ने बतया यह पतलोक का सबसे सूंदर और सुव्यस्थित लोक है ...... यहाँ हर तरफ खुशाली है न कोई चल कपट सब मिलनसार हैं असुरा, दानव होने के बाद भी ...... पृथ्वीलोक भी कुछ नहीं इसके सामने यहाँ राजा बलि महाराज का सुशासन इसको समर्ध करता है ".

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दीप्ति ने अपनी जिज्ञासा वक्त की ," फिर पतलोक वाले सब यहाँ क्यों नहीं रहते ?"

स्त्री योद्धा मुस्करा के ," सब लोक अपने में एक लोक हैं , क्या आप हमेशा यहाँ रहना चाहती हो नहीं न क्योंकि अपना लोक अच्छा हो या बुरा हमको अपना hi लगता है ....... फिर पृथ्वी लोक से तोह लाख गुना बेहतर है यह सब लोक हाँ कुछ बुरी सोच वाले सब जगह होते हैं ".

आर्यन ने उससे पुछा ," तळतळा लोक के बारे में कुछ बताओ ".

स्त्री योद्धा ," वह राजा माया का लोक है और वहीँ पहुंचकर पता चल जायेगा की वह कितने शक्तिशाली हैं , िश लोक को कोई पार नहीं कर पता क्योंकि वहां की मोह माया में hi खो कर अपने प्राण त्याग देता है , में वहीँ द्वार तक आपको छोड़ दूंगी उसके आगे आप दोनों को जाना है ...... मेरी मनो तोह वापस चलो रानी स्वर्णलता के साथ रहो वहां कोई कष्ट नहीं होगा ".

दोनों चुप hi रहे और रथ में बैठे एक दुसरे का हाथ पकडे इधर उधर देखते रहे , दोनों को अंदजा था की अब उनकी असली परीक्षा शुरू होगी क्योंकि पृथ्वी लोक की मोहमाया तोह दोनों को छु न सकीय पर पतलोक की असली मोहमाया वहां से 100 गुना ज्यादा है जिससे निकलना आसान नहीं .

दीप्ति को पता था की आर्यन सब संभल लेगा पर राजा माया के आगे तोह स्वयं भगवन को भी झुकना पड़ा था और हम ठहरे मनुष्य ....... ?

[size=undefined]उधर आर्यन जितनी तेजी से तळतळा लोक की तरफ बढ़ रहा था उतनी hi ज्यादा गभरहट राजा माया को हो रही थी की वह कितना विनाश करेगा उसके लोक में ??

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