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थर्सडे का दिन tha.Anita को फिर बाजार जाना tha.Woh जब ऑटो स्टैंड पहुंची तो उसे दो hi ऑटो दिखी. टीपू स्टैंड पर बैठा हुआ था और अनीता को देखकर मुस्कुराया. अनीता भी उसको देखकर मुस्कुराई की तभी अनीता की कान में आवाज़ आयी, "इस ऑटो में बैठिये मेमसाहब"
अनीता आवाज़ के तरफ देखि तो आवाज़ उसी ऑटो वाले का था जो कुछ दिन पहले उसे बाजार ले जाते वक़्त बार बार आईने में देख रहा था. अनीता समझ गयी की उसके ऑटो की जाने की बारी थी.
वह ऑटो वाला उसे देखकर मुस्कुराया तो अनीता भी हलकी मुस्कुरा दी और गांड मटकती हुयी उसके ऑटो के तरफ चल दी.
अनीता ऑटो में बैठने वाली hi थी की वह ऑटो ड्राइवर उसे रोककर सीट को अच्छे से साफ़ कर दिया. अनीता यह देखकर मुस्कुराने लगी. वह ड्राइवर सीट साफ़ करके bola,"Pichhli बार सीट गन्दा था. आज हम आपको शिकायत का मौक़ा नहीं देंगे".
अनीता यह सुनकर मुस्कुराती huyi,"Thank यू" बोलकर सीट पर बैठने लगी की उस ऑटो वाला का नज़र उसकी गांड पर चली गयी जो अनीता के झुक काट बैठने से बाहर की तरह थोड़ा उभर गयी थी. टीपू उस ड्राइवर को अनीता की गांड देखते हुए देखा और फिर न चाहते हुए भी खुद भी उधर नज़र ले गया मगर तब तक अनीता ऑटो में बैठ गयी.
वह ऑटो ड्राइवर अनीता के बैठने पर poochha,''memsaahab आप कैसी हैं?''.
अनीता यह सुनकर एक पल उसे देखि. अनीता को ऐसे देखते हुए उसका दिल धड़क गया और सोचने लगा की शायद वह कुछ ग़लत बोल दिया मगर अनीता उसे इसलिए देख रही थी क्यूंकि वह यह सवाल सुनकर थोड़ी सोच में पद गयी थी क्यूंकि ऐसा सवाल कोई किसी से मिलते hi पूछता है लेकिन यह ड्राइवर उसे आराम से ऑटो में बैठने के बाद पूछ रहा था. इस तरह का सवालों का वह उम्मीद नहीं कर रही थी.
मगर एक पल उसे देखने के बाद वह हमेशा की तरह मुस्कुराती हुई boli,''achhi हूँ. तुम कैसे हो? ''.
वह ड्राइवर ख़ुशी से bola,"Haan मेमसाहब हम भी अच्छे हैं".
अनीता यह सुनकर मुस्कुरायी और फिर बाहर देखने लगी. ड्राइवर एक पल के लिए अनीता की जिस्म को ऊपर से नीचे तक देखा और थूक घोंटने लगा की तभी कुछ पैसेंजर्स आ गए.
टीपू यह सब बैठा हुआ देख रहा था और पैसेंजर्स के आने के बाद वह उठा और तीन पैसेंजर्स को वह दूसरा ऑटो के तरफ बैठने का इशारा करने के बाद बाकियों को अपने ऑटो में बैठने के लिए बोल दिया.
अनीता वाले ऑटो में सबके बैठने के बाद वह ऑटो चल पड़ा.
पिछले बार के तरह इस बार भी ऑटो ड्राइवर अनीता को बार बार आईने से देख रहा था और अनीता भी उसे कई बार खुद को देखती हुई देख चुकी थी मगर या तो वह ड्राइवर के मुस्कुराने पर खुद भी मुस्कुरा देती या बिना कोई एक्सप्रेशन दिए चुप चाप वापस बाहर देखने लगती.
थोड़ा देर बाद ऑटो बाजार पहुँच गया. अनीता बाजार थोड़ा लेट hi पहुंची थी इसलिए भीड़ थोड़ा काम था. वह आदमी भी नहीं आया अनीता की गांड मसलकर मज़ा lene.Anita दो तीन बार इधर उधर देखि मगर वो आदमी कहीं नहीं था. काम भीड़ के बवजूद भी अनीता की गांड मेहफ़ूज़ नहीं रह सकीय और एक बार उसे कोई दबा कर आगे बढ़ गया. अनीता गांड दबाये जाने पर उधर देखि तो एक आदमी को तेज़ी से जाते हुए देखि.
अनीता को उधर देखते हुए पाकर सब्जीवाला puchha"Kuchho हुआ का मेमसाहब?"
अनीता सब्जीवाले के तरफ देखि और "न" में सर हिलायी तो सब्जीवाला वापस सभी तौलने पर ध्यान लगाने लगा. अनीता एक नज़र आस पास देखने के बाद अपनी हाथ पीछे अपनी गांड पर लेजाकर साड़ी ठीक करने hi वाली थी की उसे एक मर्द आता दिखाई दिया.
उस मर्द का नज़र नीचे मोबाइल पर था और अनीता को देखा नहीं था. उसके सर पर गमछा रखा हुआ था धुप से बचने के लिए तो अनीता उसका चेहरा नहीं देख पायी. वह आदमी का ध्यान मोबाइल पर hi था की अनीता अपनी साड़ी ठीक किये बिना अपनी हाथ अपनी गांड से हटा दी.
कुछ देर के बाद अनीता वापस उधर देखि तो वह आदमी चुप चाप मोबाइल में देखता हुआ बाजार में घुसने के बजाय दूसरे तरफ चला गया. उसको जाट देख अनीता एक बार आस पास देखकर चुप चाप अपनी गांड पर की साड़ी ठीक कर ली.
ऐसा नहीं था की वह चाहती थी की वह आदमी आकर उसकी गांड छुए या दबाए मगर वह जानती थी की शायद वह आदमी उसे देखकर गांड दबाकर निकल जाये तो फिर से साड़ी ठीक करने के बजाय एक hi बार ठीक कर लेगी जब वह भी उसकी गांड दबाकर चला जायेगा.
अनीता चुप चाप अपनी गांड पर का साड़ी ठीक करने के बाद सब्जी ले ली और पैसे देकर बाजार से निकल कर ऑटो स्टैंड के तरफ चल दी.
अनीता से पहले पीछे एक कॉलेज का तीनगर बैठा था जिसके कारण अनीता बीच में बैठ गयी और कुछ देर बाद उसकी बायीं तरफ में एक बूढ़ा बैठा गया और उसे देखते hi थोड़ा अजीब तरीके से मुस्कुरा दिया.
अनीता भी हलके से मुस्कुराकर सामने देखने lagi.Ab अनीता की दायीं तरफ वो तीनगर था और बायीं तरफ वो बूढ़ा. अनीता सामने देख रही थी की तभी उसको अपनी बायीं हाथ पर उस बूढ़े की कोहनी महसूस हुयी. अनीता यह महसूस करके घूमकर उसके तरफ देखि मगर वह दूसरे तरफ देख रहा था जहाँ से एक और पैसेंजर आ रहा था. अगले पल वह पैसेंजर सामने बैठा तो अनीता को ध्यान सामने के तरफ चला गया.
अनीता सामने देखने लगी तो उसी वक़्त वह बूढ़ा भी एक बार उसकी क्लीवेज के तरफ देखा और उसके बदन में बिजली दौड़ गयी. अगले पल ऑटो चलने लगी तो वह बुद्धा बायीं तरफ सर करके बाहर देखते हुए अनीता को बाई हाथ के नीचे से कोहनी घुसकर उसकी चूंकि महसूस करने का कोशिश करने लगा.
अनीता अपनी हाथ के पास प्रेशर महसूस करके एक पल के लिए फिर से उस बूढ़े के तरफ देखि मगर उसको बाहर देखते हुए देख चुप चाप सामने देखने लगी.
कुछ सेकण्ड्स तक वैसे hi होता रहा की तभी गाडी ट्रैफिक जैम में अटक गयी. अनीता थोड़ी बोर होने लगी तो वह अपनी दायी तरफ बैठे स्टूडेंट से boli,''hello! What's योर नाम?''.
वह स्टूडेंट अनीता को देखकर मुस्कुराते हुए bola,''aunty माय नाम इस....."
अनीता मुस्कुराती हुई boli,''Nice name,but don't कॉल में आंटी ok''.
वह स्टूडेंट ''हाँ'' में सर हिलाया की तभी ऑटो फिर चलने लगी.
वहीँ वह बूढ़ा अभी भी अनीता की हाथ में प्रेशर बना रहा था और वह उसकी चूंकि से कोहनी सताने का कोशिश कर hi रहा था की एक गड्ढे से होते हुए ऑटो आगे बढ़ा और ऐसे में झटके की वजह से अनीता सीट पर थोड़ा आगे सदाकने से बचने के लिए अपनी बाई हाथ सामने वाले रोड पर रख दी.
वह बूढ़े के लिए इतना मौका काफी था अपना कोहनी अनीता की हाथ से नीचे से घुसकर उसकी चूंकि पर सताने के लिए. वह भी चोट लगने से बचने के लिए अपना बाय हाथ आगे वाले रोड पर रख लिया था और दाया हाथ अनीता की चूंकि पर सत्ता दिया.
अनीता सामने देखती हुयी ड्राइवर से boli,''Bhaiyaa थोड़ा आराम से चलाइये auto''...........auto वाले ne,'jee मेमसाहब गड्ढा दिखा नहीं इसलिए हो गयी'' बोलकर सफाई दिया.
बुद्धा यह सुनकर अनीता की चूंकि में कोहनी रगड़ते हुए bola,"Kahin कहीं गड्ढा होता है तो कहीं कहीं पहाड़ जैसा उठा रहता है".
अनीता यह सुनकर उस बूढ़े के तरफ देखि तो वह थोड़ा घबराकर अपना कोहनी अनीता की चूंकि से हटा लिया और नज़र दूसरे तरफ कर लिया. अनीता उसे नार्मल भाव से hi देखि थी. उसकी चेहरे पर गुस्सा या परेशानी का भाई नहीं था मगर फिर भी बुद्धा उसके देखने पर घबराकर दूसरे तरफ देखने लगा.
अनीता उस बूढ़े को देख hi रही थी की तभी ड्राइवर bola,"Haan उठा हुआ ब्रेकर रहता है तो वह दिख जाता है, यह गड्ढा hi कभी कभी समझ नहीं आता है".
यह बात का जवाब कोई नहीं दिया तो ड्राइवर चुप चाप ऑटो चलते रहा. वहीँ अनीता वापस उस स्टूडेंट के तरफ देखकर मुस्कुराती हुयी puchhi,"which क्लास दो यू रीड इन?''
वह स्टूडेंट बोल दिया किस क्लास में पढता था. अनीता मुस्कुराकर उसका बात सुनी और फिर सामने देखने लगी. वह अपनी नयी हाथ अभी भी सामने रोड पर hi राखी हुयी थी. कुछ देर बाद उसे अपनी चूंकि के साइड पर कोहनी फिर महसूस हुयी और वह चुप चाप बैठी रही.
अगला 5 मिनट ऐसे hi होता रहा. वह कोहनी अब ज़्यादा अंदर घुसने का कोशिश नहीं कर रहा था बस उसकी चूंकि के साइड से hi सत्ता हुआ था और ऑटो के चलने से अपने आप थोड़ा इधर उधर हिल रहा था. अनीता इस पांच मिनट के दौरान एक बार उस बूढ़े के तरफ देखि तो वह बाहर देख रहा था और धीरे से धोती के ऊपर से अपना लुंड मसल रहा था.
अनीता उसे ऐसा करता देख चुपके से सामने देखि और फिर अपनी दायी तरफ बैठे स्टूडेंट के तरफ देखकर दुबारा वापस बूढ़े के तरफ देखि तो वह लुंड से हाथ हटा चूका था. अनीता यह देखने के बाद चुप चाप सामने देखने लगी.
पांच मिनट बाद वह बूढ़ा ऑटो वाले को रोकने के लिए बोलै और भाड़ा देकर अपना धोती के सामने हाथ रखे उतर गया. अनीता उसको उतारते देखि तो उसका हाथ धोती के सामने था. अनीता वापस सामने देखने लगी तो ऑटो वाला bola,"Kisi के पास 10 रुपया है तो दे दीजिये. मेरे पास छुट्टा नहीं है".
यह सुनकर सामने बैठा आदमी अपना पॉकेट से पैसा निकल hi रहा था की तब तक अनीता अपनी क्लच से 10 का नोट निकल कर ड्राइवर के तरफ बढाती हुयी boli,"Yeh लीजिये" तो ड्राइवर bola,"Chacha को दे दीजिये".
अनीता यह सुनकर पीछे वाली सीट पर बीच से थोड़ा नयी तरफ सड़क कर उस बूढ़े के तरफ पैसा बढाती हुयी देखि तो बूढ़े को अपने धोती के ऊपर से अपना लुंड मसलकर एडजस्ट करते हुए पायी.
अनीता यह देखते hi जल्दी से तिरछी आँख से सामने वाले पैसेंजर को देखि तो वह अपना पैसा निकलकर ड्राइवर को दे रहा था. अनीता को ध्यान वपए बूढ़े के तरफ तब गया जब वह उसकी हाथ से 10 का नोट लेने लगा.
अनीता उधर वापस देखि तो वह बूढ़ा अपने धोती से हाथ हटा चूका था और अनीता को सामने थोड़ा उभार दिखाई दिया और एक औरत होने के नाते वह समझ चुकी थी की वह क्या था.
अनीता उसके उभर को देखने के बाद अपनी नज़ारे उसके चेहरे पर ले गयी तो दोनों की नज़रे मिली की तभी वह बूढ़ा अपना हाथ लुंड पर एक बार और जल्दी से रखकर धोती ठीक करते हुए नज़र अनीता के चेहरे से हटाकर मुंह घुमा लिया की तभी ऑटो भी चल पड़ी. अनीता भी बिना कुछ बोले या चेहरे पर कोई भाव के वापस सामने देखने लगी. कुछ देर में अनीता भी घर पहुँच गयी.
थर्सडे का दिन tha.Anita को फिर बाजार जाना tha.Woh जब ऑटो स्टैंड पहुंची तो उसे दो hi ऑटो दिखी. टीपू स्टैंड पर बैठा हुआ था और अनीता को देखकर मुस्कुराया. अनीता भी उसको देखकर मुस्कुराई की तभी अनीता की कान में आवाज़ आयी, "इस ऑटो में बैठिये मेमसाहब"
अनीता आवाज़ के तरफ देखि तो आवाज़ उसी ऑटो वाले का था जो कुछ दिन पहले उसे बाजार ले जाते वक़्त बार बार आईने में देख रहा था. अनीता समझ गयी की उसके ऑटो की जाने की बारी थी.
वह ऑटो वाला उसे देखकर मुस्कुराया तो अनीता भी हलकी मुस्कुरा दी और गांड मटकती हुयी उसके ऑटो के तरफ चल दी.
अनीता ऑटो में बैठने वाली hi थी की वह ऑटो ड्राइवर उसे रोककर सीट को अच्छे से साफ़ कर दिया. अनीता यह देखकर मुस्कुराने लगी. वह ड्राइवर सीट साफ़ करके bola,"Pichhli बार सीट गन्दा था. आज हम आपको शिकायत का मौक़ा नहीं देंगे".
अनीता यह सुनकर मुस्कुराती huyi,"Thank यू" बोलकर सीट पर बैठने लगी की उस ऑटो वाला का नज़र उसकी गांड पर चली गयी जो अनीता के झुक काट बैठने से बाहर की तरह थोड़ा उभर गयी थी. टीपू उस ड्राइवर को अनीता की गांड देखते हुए देखा और फिर न चाहते हुए भी खुद भी उधर नज़र ले गया मगर तब तक अनीता ऑटो में बैठ गयी.
वह ऑटो ड्राइवर अनीता के बैठने पर poochha,''memsaahab आप कैसी हैं?''.
अनीता यह सुनकर एक पल उसे देखि. अनीता को ऐसे देखते हुए उसका दिल धड़क गया और सोचने लगा की शायद वह कुछ ग़लत बोल दिया मगर अनीता उसे इसलिए देख रही थी क्यूंकि वह यह सवाल सुनकर थोड़ी सोच में पद गयी थी क्यूंकि ऐसा सवाल कोई किसी से मिलते hi पूछता है लेकिन यह ड्राइवर उसे आराम से ऑटो में बैठने के बाद पूछ रहा था. इस तरह का सवालों का वह उम्मीद नहीं कर रही थी.
मगर एक पल उसे देखने के बाद वह हमेशा की तरह मुस्कुराती हुई boli,''achhi हूँ. तुम कैसे हो? ''.
वह ड्राइवर ख़ुशी से bola,"Haan मेमसाहब हम भी अच्छे हैं".
अनीता यह सुनकर मुस्कुरायी और फिर बाहर देखने लगी. ड्राइवर एक पल के लिए अनीता की जिस्म को ऊपर से नीचे तक देखा और थूक घोंटने लगा की तभी कुछ पैसेंजर्स आ गए.
टीपू यह सब बैठा हुआ देख रहा था और पैसेंजर्स के आने के बाद वह उठा और तीन पैसेंजर्स को वह दूसरा ऑटो के तरफ बैठने का इशारा करने के बाद बाकियों को अपने ऑटो में बैठने के लिए बोल दिया.
अनीता वाले ऑटो में सबके बैठने के बाद वह ऑटो चल पड़ा.
पिछले बार के तरह इस बार भी ऑटो ड्राइवर अनीता को बार बार आईने से देख रहा था और अनीता भी उसे कई बार खुद को देखती हुई देख चुकी थी मगर या तो वह ड्राइवर के मुस्कुराने पर खुद भी मुस्कुरा देती या बिना कोई एक्सप्रेशन दिए चुप चाप वापस बाहर देखने लगती.
थोड़ा देर बाद ऑटो बाजार पहुँच गया. अनीता बाजार थोड़ा लेट hi पहुंची थी इसलिए भीड़ थोड़ा काम था. वह आदमी भी नहीं आया अनीता की गांड मसलकर मज़ा lene.Anita दो तीन बार इधर उधर देखि मगर वो आदमी कहीं नहीं था. काम भीड़ के बवजूद भी अनीता की गांड मेहफ़ूज़ नहीं रह सकीय और एक बार उसे कोई दबा कर आगे बढ़ गया. अनीता गांड दबाये जाने पर उधर देखि तो एक आदमी को तेज़ी से जाते हुए देखि.
अनीता को उधर देखते हुए पाकर सब्जीवाला puchha"Kuchho हुआ का मेमसाहब?"
अनीता सब्जीवाले के तरफ देखि और "न" में सर हिलायी तो सब्जीवाला वापस सभी तौलने पर ध्यान लगाने लगा. अनीता एक नज़र आस पास देखने के बाद अपनी हाथ पीछे अपनी गांड पर लेजाकर साड़ी ठीक करने hi वाली थी की उसे एक मर्द आता दिखाई दिया.
उस मर्द का नज़र नीचे मोबाइल पर था और अनीता को देखा नहीं था. उसके सर पर गमछा रखा हुआ था धुप से बचने के लिए तो अनीता उसका चेहरा नहीं देख पायी. वह आदमी का ध्यान मोबाइल पर hi था की अनीता अपनी साड़ी ठीक किये बिना अपनी हाथ अपनी गांड से हटा दी.
कुछ देर के बाद अनीता वापस उधर देखि तो वह आदमी चुप चाप मोबाइल में देखता हुआ बाजार में घुसने के बजाय दूसरे तरफ चला गया. उसको जाट देख अनीता एक बार आस पास देखकर चुप चाप अपनी गांड पर की साड़ी ठीक कर ली.
ऐसा नहीं था की वह चाहती थी की वह आदमी आकर उसकी गांड छुए या दबाए मगर वह जानती थी की शायद वह आदमी उसे देखकर गांड दबाकर निकल जाये तो फिर से साड़ी ठीक करने के बजाय एक hi बार ठीक कर लेगी जब वह भी उसकी गांड दबाकर चला जायेगा.
अनीता चुप चाप अपनी गांड पर का साड़ी ठीक करने के बाद सब्जी ले ली और पैसे देकर बाजार से निकल कर ऑटो स्टैंड के तरफ चल दी.
अनीता से पहले पीछे एक कॉलेज का तीनगर बैठा था जिसके कारण अनीता बीच में बैठ गयी और कुछ देर बाद उसकी बायीं तरफ में एक बूढ़ा बैठा गया और उसे देखते hi थोड़ा अजीब तरीके से मुस्कुरा दिया.
अनीता भी हलके से मुस्कुराकर सामने देखने lagi.Ab अनीता की दायीं तरफ वो तीनगर था और बायीं तरफ वो बूढ़ा. अनीता सामने देख रही थी की तभी उसको अपनी बायीं हाथ पर उस बूढ़े की कोहनी महसूस हुयी. अनीता यह महसूस करके घूमकर उसके तरफ देखि मगर वह दूसरे तरफ देख रहा था जहाँ से एक और पैसेंजर आ रहा था. अगले पल वह पैसेंजर सामने बैठा तो अनीता को ध्यान सामने के तरफ चला गया.
अनीता सामने देखने लगी तो उसी वक़्त वह बूढ़ा भी एक बार उसकी क्लीवेज के तरफ देखा और उसके बदन में बिजली दौड़ गयी. अगले पल ऑटो चलने लगी तो वह बुद्धा बायीं तरफ सर करके बाहर देखते हुए अनीता को बाई हाथ के नीचे से कोहनी घुसकर उसकी चूंकि महसूस करने का कोशिश करने लगा.
अनीता अपनी हाथ के पास प्रेशर महसूस करके एक पल के लिए फिर से उस बूढ़े के तरफ देखि मगर उसको बाहर देखते हुए देख चुप चाप सामने देखने लगी.
कुछ सेकण्ड्स तक वैसे hi होता रहा की तभी गाडी ट्रैफिक जैम में अटक गयी. अनीता थोड़ी बोर होने लगी तो वह अपनी दायी तरफ बैठे स्टूडेंट से boli,''hello! What's योर नाम?''.
वह स्टूडेंट अनीता को देखकर मुस्कुराते हुए bola,''aunty माय नाम इस....."
अनीता मुस्कुराती हुई boli,''Nice name,but don't कॉल में आंटी ok''.
वह स्टूडेंट ''हाँ'' में सर हिलाया की तभी ऑटो फिर चलने लगी.
वहीँ वह बूढ़ा अभी भी अनीता की हाथ में प्रेशर बना रहा था और वह उसकी चूंकि से कोहनी सताने का कोशिश कर hi रहा था की एक गड्ढे से होते हुए ऑटो आगे बढ़ा और ऐसे में झटके की वजह से अनीता सीट पर थोड़ा आगे सदाकने से बचने के लिए अपनी बाई हाथ सामने वाले रोड पर रख दी.
वह बूढ़े के लिए इतना मौका काफी था अपना कोहनी अनीता की हाथ से नीचे से घुसकर उसकी चूंकि पर सताने के लिए. वह भी चोट लगने से बचने के लिए अपना बाय हाथ आगे वाले रोड पर रख लिया था और दाया हाथ अनीता की चूंकि पर सत्ता दिया.
अनीता सामने देखती हुयी ड्राइवर से boli,''Bhaiyaa थोड़ा आराम से चलाइये auto''...........auto वाले ne,'jee मेमसाहब गड्ढा दिखा नहीं इसलिए हो गयी'' बोलकर सफाई दिया.
बुद्धा यह सुनकर अनीता की चूंकि में कोहनी रगड़ते हुए bola,"Kahin कहीं गड्ढा होता है तो कहीं कहीं पहाड़ जैसा उठा रहता है".
अनीता यह सुनकर उस बूढ़े के तरफ देखि तो वह थोड़ा घबराकर अपना कोहनी अनीता की चूंकि से हटा लिया और नज़र दूसरे तरफ कर लिया. अनीता उसे नार्मल भाव से hi देखि थी. उसकी चेहरे पर गुस्सा या परेशानी का भाई नहीं था मगर फिर भी बुद्धा उसके देखने पर घबराकर दूसरे तरफ देखने लगा.
अनीता उस बूढ़े को देख hi रही थी की तभी ड्राइवर bola,"Haan उठा हुआ ब्रेकर रहता है तो वह दिख जाता है, यह गड्ढा hi कभी कभी समझ नहीं आता है".
यह बात का जवाब कोई नहीं दिया तो ड्राइवर चुप चाप ऑटो चलते रहा. वहीँ अनीता वापस उस स्टूडेंट के तरफ देखकर मुस्कुराती हुयी puchhi,"which क्लास दो यू रीड इन?''
वह स्टूडेंट बोल दिया किस क्लास में पढता था. अनीता मुस्कुराकर उसका बात सुनी और फिर सामने देखने लगी. वह अपनी नयी हाथ अभी भी सामने रोड पर hi राखी हुयी थी. कुछ देर बाद उसे अपनी चूंकि के साइड पर कोहनी फिर महसूस हुयी और वह चुप चाप बैठी रही.
अगला 5 मिनट ऐसे hi होता रहा. वह कोहनी अब ज़्यादा अंदर घुसने का कोशिश नहीं कर रहा था बस उसकी चूंकि के साइड से hi सत्ता हुआ था और ऑटो के चलने से अपने आप थोड़ा इधर उधर हिल रहा था. अनीता इस पांच मिनट के दौरान एक बार उस बूढ़े के तरफ देखि तो वह बाहर देख रहा था और धीरे से धोती के ऊपर से अपना लुंड मसल रहा था.
अनीता उसे ऐसा करता देख चुपके से सामने देखि और फिर अपनी दायी तरफ बैठे स्टूडेंट के तरफ देखकर दुबारा वापस बूढ़े के तरफ देखि तो वह लुंड से हाथ हटा चूका था. अनीता यह देखने के बाद चुप चाप सामने देखने लगी.
पांच मिनट बाद वह बूढ़ा ऑटो वाले को रोकने के लिए बोलै और भाड़ा देकर अपना धोती के सामने हाथ रखे उतर गया. अनीता उसको उतारते देखि तो उसका हाथ धोती के सामने था. अनीता वापस सामने देखने लगी तो ऑटो वाला bola,"Kisi के पास 10 रुपया है तो दे दीजिये. मेरे पास छुट्टा नहीं है".
यह सुनकर सामने बैठा आदमी अपना पॉकेट से पैसा निकल hi रहा था की तब तक अनीता अपनी क्लच से 10 का नोट निकल कर ड्राइवर के तरफ बढाती हुयी boli,"Yeh लीजिये" तो ड्राइवर bola,"Chacha को दे दीजिये".
अनीता यह सुनकर पीछे वाली सीट पर बीच से थोड़ा नयी तरफ सड़क कर उस बूढ़े के तरफ पैसा बढाती हुयी देखि तो बूढ़े को अपने धोती के ऊपर से अपना लुंड मसलकर एडजस्ट करते हुए पायी.
अनीता यह देखते hi जल्दी से तिरछी आँख से सामने वाले पैसेंजर को देखि तो वह अपना पैसा निकलकर ड्राइवर को दे रहा था. अनीता को ध्यान वपए बूढ़े के तरफ तब गया जब वह उसकी हाथ से 10 का नोट लेने लगा.
अनीता उधर वापस देखि तो वह बूढ़ा अपने धोती से हाथ हटा चूका था और अनीता को सामने थोड़ा उभार दिखाई दिया और एक औरत होने के नाते वह समझ चुकी थी की वह क्या था.
अनीता उसके उभर को देखने के बाद अपनी नज़ारे उसके चेहरे पर ले गयी तो दोनों की नज़रे मिली की तभी वह बूढ़ा अपना हाथ लुंड पर एक बार और जल्दी से रखकर धोती ठीक करते हुए नज़र अनीता के चेहरे से हटाकर मुंह घुमा लिया की तभी ऑटो भी चल पड़ी. अनीता भी बिना कुछ बोले या चेहरे पर कोई भाव के वापस सामने देखने लगी. कुछ देर में अनीता भी घर पहुँच गयी.