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- Dec 5, 2013
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Episode 19
प्रिय. गोविन्द चलो.
गोविन्द. कहाँ जाना है मैडम.
प्रिय. मेरी दोस्त माया क घर.
गोविन्द में प्रिय को देखा तो उस की आंखें फटती रह गयीं.
प्रिय क बाल खुले थे. उस ने हाई हील्स पहन राखी थीं और सिंगल पीेछे ड्रेस पहन रखा था जो स्लीव लेस्स था और उस क घुट्नु तक था.
रेखा. कहाँ जा रही हो प्रिय.
प्रिय. माँ माया क घर जा रही हूँ
रेखा. एक बात बोलूं.
प्रिय. बोलिये न माँ.
रेखा. अछि लग रही हो. ऐसी हे रहा करो. अरविन्द को भी ाचा लगे गए.
प्रिय. थैंक यू माँ.
चलो गोविन्द.
गोविन्द कार ड्राइव करने लगा.
गोविन्द. मैडम आप भी शहर वळून क रंग में रंग गयीं.
प्रिय. क्यों तुम्हें कोई मसला है क्या.
गोविन्द. नहीं मैडम मुझे क्या मसला हो गए. लकिन मुझे लगा था क आप शादी हो क्र यहाँ आई हो तो कोई मेरा जैसा छोटे गाओं सी आया है. मुझे आप सी बात करने का मौका मिले गए.
प्रिय. गोविन्द में जिस घर में रहती हूँ उस घर क तोर तरीके क मुताबिक रहूं गई न.
और तुम ड्राइवर हो और में तुम्हरी मालिक की पत्नी. में तुम सी क्यों बात करूं गई.
गोविन्द. आप ठीक कह रही हो मैडम.
प्रिय जानती थी क वो रौदे हो रही है. लकिन वो गोविन्द को कोई उम्मीद नहीं देना चाहती थी.
माया का घर आ गया और प्रिय उतर गयी.
माया. Hi प्रिय.
प्रिय. डेविल आया है क्या....
माया. नहीं उस क पास टाइम नहीं था
प्रिय साद हो गयी.
माया. में जानती हूँ जो लड़की दानी क पास एक बार जाती है उस को भूल नहीं पति.
प्रिय. दानी....
माया. हाँ उसका नाम दानी है. में न्य दानी सी बात की थी लकिन उस क पास टाइम नहीं है.
प्रिय. तो पहर मुझे क्यों बुलाया.
माया. में जानती हूँ क अरविन्द तुम्हें सटिस्फी नहीं करता. इस लिए तुम दानी सी मिलना चाहती थी.
प्रिय. हाँ
माया. मेरी साथ आओ.
माया ने प्रिय का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में लय गयी.
माया प्रिय क साथ बीएड पैर बेथ गयी.
माया. दानी यहाँ नहीं है लकिन में तो हूँ न.
प्रिय. में समझी नहीं.
माया. में तुम्हें अरविन्द सी बेहतर सटिस्फी क्र सकती हूँ.
प्रिय. किसी...
माया ने प्रिय का हाथ अपने हाथ में लिया और बोली.
तुम बस मेरा साथ दो.
प्रिय ने हाँ में सर हिलाया और माया ने अपने होंठ आगे बढ़ा क्र प्रिय क होंठ चूम लिए.
माया क होंठ मेरी होंतुन सी टच होते हे मुझे झटका सा लगा. और मेरी होंतुन ने खुद हे माया क होंतुन को एक्सेप्ट क्र लिए.
माया क होंठ भट नरम थय. दोनो में किसिंग स्टार्ट हो गयी और दोनो एक दूसरी क होंतुन को चूमने और चूसने लगीं.
दोनो एक दूसरी क होंतुन को चूम रही थीं और माया क हाथ प्रिय क जिस्म पैर घूम रही थय.
माया प्रिय क जिस्म को फील क्र रही थी और प्रिय माया को शर्ट क बटन्स खोल रही थी.
माया ने अपनी शर्ट उतर दी. में हैरान थी क माया ने किसी भी हेसिताशन क बगैर मेरी सामने अपनी शर्ट उतर दी थी.
माया सिर्फ ब्रा में थी.
उफ्फ्फ्फ़ माया भट हॉट थी.... माया में पहर से अपने होंठ मेरी होंतुन सी मिला दिए और में भी पूरी शिद्दत सी माया क होंतुन को चूमने लगी.
माया ने प्रिय की ड्रेस क शोल्डर्स उतर दिए.
प्रिय ने ब्रा नहीं पहनी थी.
माया. वाओ तुम तो सच में दानी क लिए तैयार हो क्र आई थीं.
माया ने प्रिय को पीछे सी हुग क्र लिए और उस क बूब्स को दबाने लगी
माया मेरी पीछे सी लिपटी थी और मेरी मम्मी दबा रही थी
में हैरान थी. में सोच भी नहीं सकती थी क में एक औरत क साथ ऐसा क्र रही हूँ
माया ने मुझे घोड़ी बना दिए और मेरी जिस्म को और मेरी गांड को फील करने लगी.
माया. वाओ नीस अस्स. माया प्रिय की गांड की दबाने और चूमने लगी
प्रिय माया क सामने झुकी हुई थी और माया प्रिय क जिस्म को और उस की गांड को चूम रही थी.
माया भी अपने कपड़े उतर चुकी थी और अब माया सिर्फ ब्रा और पंतय में थी और प्रिय सिर्फ पंतय में थी
दोनो क होंठ एक बार पहर मिल गए और दोनो एक दूसरी को किश करने लगी.
माया ने प्रिय को हुग किआ और उस क निप्पल्स पैर मुँह लगाया और उस क निप्पल्स चूस लिए.
प्रिय सिसक गयी और माया एक क बढ़ एक प्रिय क निप्पल्स चूसने लगी.
माया ने अपनी ब्रा खोल दी और अब प्रिय ने माया क निप्पल्स अपने मुँह में ले लिए और उस क निप्पल्स को चूसने लगी.
माया को भट मज़ा आ रहा था लकिन प्रिय को भी माया क निप्पल्स चूसने का मज़ा आ रहा था
में खुद पैर हैरान थी क में किसी एक औरत क निप्पल्स को मज़े ले क्र चूस रही थी.
लकिन अगले हे पल माया ने मेरा फेस ऊपर किआ और मेरी होंठ चूम लिए और मुझे पहर सी किश करने लगी.
माया ने किश करते हुए मुझे निचे लेता दिए और उसका हाथ मेरी छूट क ऊपर चला गया.
माया मुझे किश करने लगी और मेरी पंतय क ऊपर सी मेरी छूट को सहलाने लगी.
माया ने मेरी पंतय मेरी टांगून सी अलग क्र दी. अब में माया क सामने पूरी नंगी थी.
माया ने मेरी टांगें खोलीं और मेरी छूट पैर ज़ुबान लगा दी. माया की ज़ुबान मेरी छूट सी टच होते हे मेरी जिस्म में बिजली दौड़ गयी.
मेरा हाथ माया क सर पैर चला गया और माया मेरी छूट चाटने लगी.
माया प्रिय की छूट चाट रही थी और प्रिय का हाथ माया क सर पैर था.
प्रिय माया क सर को अपनी छूट में दबा रही थी.
माया ने 2 उँगलियाँ प्रिय की छूट क अंदर घुसा दिन और मूव करने लगी और साथ हे प्रिय की छूट को चाटने लगी.
प्रिय का जिस्म कम्पनी लगा. उसकी सिसकियाँ बढ़ गयी और उसका जिस्म झटके खाने लगा.
प्रिय ने बेडशीट को दोनो हथुन सी पाकर लिए और अपनी आवाज़ को कण्ट्रोल करने की कोशिश करने लगी.
प्रिय झाड़ गयी थी.
मेरा जिस्म कांप रहा था. में सोच रही थी क शादी क 1.5 साल में में अरविन्द क साथ एक बार भी नहीं झाड़ सकीय और माया क साथ 15 मिनट में हे झाड़ गयी थी.
में उठी और बे इख्तयार हो क्र माया का जिस्म चूमने लगी. में ने माया का पेट चूमा पहर उस की चेस्ट को चूमा और पहर उस क होंतुन को चूमने लगी.
माया. ये अचानक सी मुझ पैर इतना प्यार क्यों आ रहा है तुझे.
में न्य उसको कच भी जवाब नहीं दिए बस उस्सको धक्का दे क्र बीएड पैर लेटाया और उसकी टांगें खोल क्र अपना मुँह उसकी छूट पैर लगा दिए.
माया. आआह्ह्ह्हह्ह में न्य ये एक्सपेक्ट नहीं किआ था.
प्रिय माया की छूट को चाटने और चूसने लगी. और माया मुस्कुराते हुए प्रिय को देखने लगी.
माया ने जैसी प्रिय की छूट को छठा था प्रिय भी वैसी हे माया की छूट को चाट रही थी.
माया सिसकियाँ ले रही थी और अपनी कमर हिला क्र खुद प्रिय सी छूट चटवा रही थी.
और कच हे दिएर में माया भी झाड़ चुकी थी.
माया क झड़ने क बढ़ प्रिय माया क ऊपर आ गयी और उस को किश करने लगी.
दोनो में रोमांटिक किसिंग स्टार्ट हो गयी और भट दिएर तक दोनो एक दूसरी क होंतुन को चूमती और चुस्ती रहीं
विशाल यूनिवर्सिटी सी घर आया तो फ्रेश हो क्र अंदर चला गया.
विशाल का कमरा घर क बहार वाली साइड पैर था. वो सिर्फ घर क अंदर बचूं को टूशन पढ़ाने या खाना खाने जाता था.
विशाल शर्मा क फॅमिली मेंबर जैसा बन चूका था लकिन पहर भी विशाल ज़्यादा वहां रहना अवॉयड करता था.
लकिन ललिता क साथ उस रात क बढ़ विशाल चेंज हो चूका था. अब वो ज़्यादा सी ज़्यादा माला क करीब रहने की कोशिश करने लगा था.
विशाल फ्रेश हो क्र अंदर चला गया.
माला. विशाल बेथ में खाना लगाती हूँ.
माला किचन में गयी तो विशाल उस क पीछे चला गया.
माला. तू किचन में क्यों आ गया. में खाना बहार हे ला रही थी न.
विशाल. में न्य सोचा आपकी कच हेल्प करवा दूँ.
माला. सो स्वीट. लकिन मुझे हेल्प की ज़रूरत नहीं है.
विशाल. ाचा पहर आपको कंपनी दे देता हूँ आप अकेली बोर हो जाओ गई.
माला. तुझे यहाँ 1 साल हो गया है. तुझे आज एहसास हुआ क में अकेली बोर होती हूँ.
विशाल. हाँ अब एहसास हुआ क मेरु पायरी माला आंटी अकेली बोर होती हैं. अब में आपको कंपनी दिए करूं गए. विशाल ने माला का हाथ पाकर क्र कहा.
माला को विशाल का हाथ पकड़ना बुरा नहीं लगा लकिन विशाल तो कच और हे सोच रहा था.
विशाल माला क हाथ की नरमी और गर्मी महसूस क्र रहा था.
विशाल में माला का हाथ कच दिएर तक पाकर क्र रखा और पहर चोर दिए.
विशाल. आप जब भी बोर हो मुझे बुला लिए करो हम खूब बातें किआ करिअन गए.
माला. ठीक है. तुझे बता दिए करूं गई.
विशाल. लकिन शर्मा अंकल को मत बताना प्लीज.
माला. उनको क्यों न बताओं.
विशाल. हो सकता है उनको मेरा आप सी बात करना ाचा न लगी और वो मुझे इस घर सी निकल डैन.
में आपको चोर क्र जाना नहीं चाहता. आप और बचे मेरी लिए भट इम्पोर्टेन्ट हो.
माला. ऐसा कच नहीं हो गए. तू बेफिककर हो जा. तेरी वजह सी बचूं ने इतने अचे नंबर लिए हैं. में तुझे कहीं नहीं जाने दूँ गई.
विशाल. लकिन शर्मा अंकल को नहीं बताओ गई. विशाल ने पहर सी माला का हाथ पाकर लिए.
माला. ाचा ठीक है नहीं बताओं गई.
विशाल. थैंक यू आंटी आप भट अछि हो. विशाल ने माला का हाथ चूम लिए.
माला ने फ़ौरन अपना हाथ पीछे खेंच लिए.
लकिन विशाल ने ऐसा ज़ाहिर किआ क उस ने एक्ससिटेमेंट में ऐसा किआ.
विशाल. अब खाना लगा दो प्लीज भट भूक लगी है.
माला ने भी बात इग्नोर क्र दी और खाना लगा दिए.
प्रिय. गोविन्द चलो.
गोविन्द. कहाँ जाना है मैडम.
प्रिय. मेरी दोस्त माया क घर.
गोविन्द में प्रिय को देखा तो उस की आंखें फटती रह गयीं.
प्रिय क बाल खुले थे. उस ने हाई हील्स पहन राखी थीं और सिंगल पीेछे ड्रेस पहन रखा था जो स्लीव लेस्स था और उस क घुट्नु तक था.
रेखा. कहाँ जा रही हो प्रिय.
प्रिय. माँ माया क घर जा रही हूँ
रेखा. एक बात बोलूं.
प्रिय. बोलिये न माँ.
रेखा. अछि लग रही हो. ऐसी हे रहा करो. अरविन्द को भी ाचा लगे गए.
प्रिय. थैंक यू माँ.
चलो गोविन्द.
गोविन्द कार ड्राइव करने लगा.
गोविन्द. मैडम आप भी शहर वळून क रंग में रंग गयीं.
प्रिय. क्यों तुम्हें कोई मसला है क्या.
गोविन्द. नहीं मैडम मुझे क्या मसला हो गए. लकिन मुझे लगा था क आप शादी हो क्र यहाँ आई हो तो कोई मेरा जैसा छोटे गाओं सी आया है. मुझे आप सी बात करने का मौका मिले गए.
प्रिय. गोविन्द में जिस घर में रहती हूँ उस घर क तोर तरीके क मुताबिक रहूं गई न.
और तुम ड्राइवर हो और में तुम्हरी मालिक की पत्नी. में तुम सी क्यों बात करूं गई.
गोविन्द. आप ठीक कह रही हो मैडम.
प्रिय जानती थी क वो रौदे हो रही है. लकिन वो गोविन्द को कोई उम्मीद नहीं देना चाहती थी.
माया का घर आ गया और प्रिय उतर गयी.
माया. Hi प्रिय.
प्रिय. डेविल आया है क्या....
माया. नहीं उस क पास टाइम नहीं था
प्रिय साद हो गयी.
माया. में जानती हूँ जो लड़की दानी क पास एक बार जाती है उस को भूल नहीं पति.
प्रिय. दानी....
माया. हाँ उसका नाम दानी है. में न्य दानी सी बात की थी लकिन उस क पास टाइम नहीं है.
प्रिय. तो पहर मुझे क्यों बुलाया.
माया. में जानती हूँ क अरविन्द तुम्हें सटिस्फी नहीं करता. इस लिए तुम दानी सी मिलना चाहती थी.
प्रिय. हाँ
माया. मेरी साथ आओ.
माया ने प्रिय का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में लय गयी.
माया प्रिय क साथ बीएड पैर बेथ गयी.
माया. दानी यहाँ नहीं है लकिन में तो हूँ न.
प्रिय. में समझी नहीं.
माया. में तुम्हें अरविन्द सी बेहतर सटिस्फी क्र सकती हूँ.
प्रिय. किसी...
माया ने प्रिय का हाथ अपने हाथ में लिया और बोली.
तुम बस मेरा साथ दो.
प्रिय ने हाँ में सर हिलाया और माया ने अपने होंठ आगे बढ़ा क्र प्रिय क होंठ चूम लिए.
माया क होंठ मेरी होंतुन सी टच होते हे मुझे झटका सा लगा. और मेरी होंतुन ने खुद हे माया क होंतुन को एक्सेप्ट क्र लिए.
माया क होंठ भट नरम थय. दोनो में किसिंग स्टार्ट हो गयी और दोनो एक दूसरी क होंतुन को चूमने और चूसने लगीं.
दोनो एक दूसरी क होंतुन को चूम रही थीं और माया क हाथ प्रिय क जिस्म पैर घूम रही थय.
माया प्रिय क जिस्म को फील क्र रही थी और प्रिय माया को शर्ट क बटन्स खोल रही थी.
माया ने अपनी शर्ट उतर दी. में हैरान थी क माया ने किसी भी हेसिताशन क बगैर मेरी सामने अपनी शर्ट उतर दी थी.
माया सिर्फ ब्रा में थी.
उफ्फ्फ्फ़ माया भट हॉट थी.... माया में पहर से अपने होंठ मेरी होंतुन सी मिला दिए और में भी पूरी शिद्दत सी माया क होंतुन को चूमने लगी.
माया ने प्रिय की ड्रेस क शोल्डर्स उतर दिए.
प्रिय ने ब्रा नहीं पहनी थी.
माया. वाओ तुम तो सच में दानी क लिए तैयार हो क्र आई थीं.
माया ने प्रिय को पीछे सी हुग क्र लिए और उस क बूब्स को दबाने लगी
माया मेरी पीछे सी लिपटी थी और मेरी मम्मी दबा रही थी
में हैरान थी. में सोच भी नहीं सकती थी क में एक औरत क साथ ऐसा क्र रही हूँ
माया ने मुझे घोड़ी बना दिए और मेरी जिस्म को और मेरी गांड को फील करने लगी.
माया. वाओ नीस अस्स. माया प्रिय की गांड की दबाने और चूमने लगी
प्रिय माया क सामने झुकी हुई थी और माया प्रिय क जिस्म को और उस की गांड को चूम रही थी.
माया भी अपने कपड़े उतर चुकी थी और अब माया सिर्फ ब्रा और पंतय में थी और प्रिय सिर्फ पंतय में थी
दोनो क होंठ एक बार पहर मिल गए और दोनो एक दूसरी को किश करने लगी.
माया ने प्रिय को हुग किआ और उस क निप्पल्स पैर मुँह लगाया और उस क निप्पल्स चूस लिए.
प्रिय सिसक गयी और माया एक क बढ़ एक प्रिय क निप्पल्स चूसने लगी.
माया ने अपनी ब्रा खोल दी और अब प्रिय ने माया क निप्पल्स अपने मुँह में ले लिए और उस क निप्पल्स को चूसने लगी.
माया को भट मज़ा आ रहा था लकिन प्रिय को भी माया क निप्पल्स चूसने का मज़ा आ रहा था
में खुद पैर हैरान थी क में किसी एक औरत क निप्पल्स को मज़े ले क्र चूस रही थी.
लकिन अगले हे पल माया ने मेरा फेस ऊपर किआ और मेरी होंठ चूम लिए और मुझे पहर सी किश करने लगी.
माया ने किश करते हुए मुझे निचे लेता दिए और उसका हाथ मेरी छूट क ऊपर चला गया.
माया मुझे किश करने लगी और मेरी पंतय क ऊपर सी मेरी छूट को सहलाने लगी.
माया ने मेरी पंतय मेरी टांगून सी अलग क्र दी. अब में माया क सामने पूरी नंगी थी.
माया ने मेरी टांगें खोलीं और मेरी छूट पैर ज़ुबान लगा दी. माया की ज़ुबान मेरी छूट सी टच होते हे मेरी जिस्म में बिजली दौड़ गयी.
मेरा हाथ माया क सर पैर चला गया और माया मेरी छूट चाटने लगी.
माया प्रिय की छूट चाट रही थी और प्रिय का हाथ माया क सर पैर था.
प्रिय माया क सर को अपनी छूट में दबा रही थी.
माया ने 2 उँगलियाँ प्रिय की छूट क अंदर घुसा दिन और मूव करने लगी और साथ हे प्रिय की छूट को चाटने लगी.
प्रिय का जिस्म कम्पनी लगा. उसकी सिसकियाँ बढ़ गयी और उसका जिस्म झटके खाने लगा.
प्रिय ने बेडशीट को दोनो हथुन सी पाकर लिए और अपनी आवाज़ को कण्ट्रोल करने की कोशिश करने लगी.
प्रिय झाड़ गयी थी.
मेरा जिस्म कांप रहा था. में सोच रही थी क शादी क 1.5 साल में में अरविन्द क साथ एक बार भी नहीं झाड़ सकीय और माया क साथ 15 मिनट में हे झाड़ गयी थी.
में उठी और बे इख्तयार हो क्र माया का जिस्म चूमने लगी. में ने माया का पेट चूमा पहर उस की चेस्ट को चूमा और पहर उस क होंतुन को चूमने लगी.
माया. ये अचानक सी मुझ पैर इतना प्यार क्यों आ रहा है तुझे.
में न्य उसको कच भी जवाब नहीं दिए बस उस्सको धक्का दे क्र बीएड पैर लेटाया और उसकी टांगें खोल क्र अपना मुँह उसकी छूट पैर लगा दिए.
माया. आआह्ह्ह्हह्ह में न्य ये एक्सपेक्ट नहीं किआ था.
प्रिय माया की छूट को चाटने और चूसने लगी. और माया मुस्कुराते हुए प्रिय को देखने लगी.
माया ने जैसी प्रिय की छूट को छठा था प्रिय भी वैसी हे माया की छूट को चाट रही थी.
माया सिसकियाँ ले रही थी और अपनी कमर हिला क्र खुद प्रिय सी छूट चटवा रही थी.
और कच हे दिएर में माया भी झाड़ चुकी थी.
माया क झड़ने क बढ़ प्रिय माया क ऊपर आ गयी और उस को किश करने लगी.
दोनो में रोमांटिक किसिंग स्टार्ट हो गयी और भट दिएर तक दोनो एक दूसरी क होंतुन को चूमती और चुस्ती रहीं
विशाल यूनिवर्सिटी सी घर आया तो फ्रेश हो क्र अंदर चला गया.
विशाल का कमरा घर क बहार वाली साइड पैर था. वो सिर्फ घर क अंदर बचूं को टूशन पढ़ाने या खाना खाने जाता था.
विशाल शर्मा क फॅमिली मेंबर जैसा बन चूका था लकिन पहर भी विशाल ज़्यादा वहां रहना अवॉयड करता था.
लकिन ललिता क साथ उस रात क बढ़ विशाल चेंज हो चूका था. अब वो ज़्यादा सी ज़्यादा माला क करीब रहने की कोशिश करने लगा था.
विशाल फ्रेश हो क्र अंदर चला गया.
माला. विशाल बेथ में खाना लगाती हूँ.
माला किचन में गयी तो विशाल उस क पीछे चला गया.
माला. तू किचन में क्यों आ गया. में खाना बहार हे ला रही थी न.
विशाल. में न्य सोचा आपकी कच हेल्प करवा दूँ.
माला. सो स्वीट. लकिन मुझे हेल्प की ज़रूरत नहीं है.
विशाल. ाचा पहर आपको कंपनी दे देता हूँ आप अकेली बोर हो जाओ गई.
माला. तुझे यहाँ 1 साल हो गया है. तुझे आज एहसास हुआ क में अकेली बोर होती हूँ.
विशाल. हाँ अब एहसास हुआ क मेरु पायरी माला आंटी अकेली बोर होती हैं. अब में आपको कंपनी दिए करूं गए. विशाल ने माला का हाथ पाकर क्र कहा.
माला को विशाल का हाथ पकड़ना बुरा नहीं लगा लकिन विशाल तो कच और हे सोच रहा था.
विशाल माला क हाथ की नरमी और गर्मी महसूस क्र रहा था.
विशाल में माला का हाथ कच दिएर तक पाकर क्र रखा और पहर चोर दिए.
विशाल. आप जब भी बोर हो मुझे बुला लिए करो हम खूब बातें किआ करिअन गए.
माला. ठीक है. तुझे बता दिए करूं गई.
विशाल. लकिन शर्मा अंकल को मत बताना प्लीज.
माला. उनको क्यों न बताओं.
विशाल. हो सकता है उनको मेरा आप सी बात करना ाचा न लगी और वो मुझे इस घर सी निकल डैन.
में आपको चोर क्र जाना नहीं चाहता. आप और बचे मेरी लिए भट इम्पोर्टेन्ट हो.
माला. ऐसा कच नहीं हो गए. तू बेफिककर हो जा. तेरी वजह सी बचूं ने इतने अचे नंबर लिए हैं. में तुझे कहीं नहीं जाने दूँ गई.
विशाल. लकिन शर्मा अंकल को नहीं बताओ गई. विशाल ने पहर सी माला का हाथ पाकर लिए.
माला. ाचा ठीक है नहीं बताओं गई.
विशाल. थैंक यू आंटी आप भट अछि हो. विशाल ने माला का हाथ चूम लिए.
माला ने फ़ौरन अपना हाथ पीछे खेंच लिए.
लकिन विशाल ने ऐसा ज़ाहिर किआ क उस ने एक्ससिटेमेंट में ऐसा किआ.
विशाल. अब खाना लगा दो प्लीज भट भूक लगी है.
माला ने भी बात इग्नोर क्र दी और खाना लगा दिए.