Anjaan Rishte-A Tale of hate and lust. - Page 2 - SexBaba
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Anjaan Rishte-A Tale of hate and lust.

Episode 9

विशाल जैसी हे सुपरस्टोर सी अपनी ड्यूटी कम्पलीट क्र क निकला तो सामने अर्णव और कबीर खरे थय.

कबीर. चल.

विशाल. कहाँ.

अर्णव. चले गए तो पता चल जाए गए.

कबीर ने विशाल को अपनी गारी में बैठाया और ड्राइव करने लगा.

कच दिएर क बढ़ कार एक क्लब क सामने आ क्र रुकी.

टीनू अंदर चले गए.

विशाल ने ये पहली बार देखा था.

अंडे म्यूजिक चल रहा था. लोग डांस क्र रही थय. यहाँ 18 सी लय क्र 80 साल तक की औरतें और मर्द थय.

कच ड्रिंक क्र रही थय और कच डांस क्र रही थय.

कबीर. ये देख.... ये होती है असल ज़िन्दगी.

के ों लेटस डांस.

कबीर और अर्णव डांस करने लगी और विशाल एक कार्नर में खरा हो क्र देखने लगा.

यहाँ कच कपल्स थय और कच सिंगल थय.

सब अपनी धुन में थय. किसी को दूसरी की परवाह नहीं थी.

विशाल की नज़र एक कार्नर पैर गयी जहाँ एक लड़का और एक मातुरे औरत किसिंग क्र रही थय.

विशाल पोर्न देखता था लकिन उस ने लाइव किश पहली बार देखि थी और ये देख क्र उसका लुंड खरा होने लगा था.

विशाल की नज़र उन लोगन पैर जमी थी. और कच दिएर क बढ़ वो लोग किश क्र क अलग हुए और डांस करने लगी.

विशाल की जेब में इतने पेसय भी नहीं थय क वि एक ड्रिंक ले सके.

विशाल एक कार्नर में खरा सब कच देख रहा था.

कच दिएर क बढ़ एक औरत विशाल क पास आई.

औरत. Hi हैंडसम.

विशाल. Hi.

औरत. अरे यू अलोन.

विशाल. नहीं में अपने दोस्तुं क साथ आया हूँ

औरत. तो कहाँ हैं तुम्हारे दोस्त.

विशाल. वो डांस क्र रही हैं

औरत. तो तुम डांस क्यों नहीं क्र रही.

विशाल. मुझे डांस पसनद नहीं है.

औरत. मेरी साथ डांस करो गए.

विशाल चुप हो गया.

औरत. Let's हैवे ा ड्रिंक. उस ने विशाल का हाथ पकड़ा और उसको बार काउंटर पैर लय गयी.

औरत ने बार काउंटर पैर 2 ड्रिंक्स का आर्डर दिए और विशाल क साथ बेथ गयी.

औरत. बी थे वे ी ऍम ललिता.

विशाल.....

ललिता. तुम क्या करते हो विशाल.

विशाल. स्टडी करता हूँ

ललिता. और उस क इलावा.

विशाल. उस क इलावा एक जॉब करता हूँ और बचूं को टूशन पढ़ाता हूँ

ललिता. इसका मतलब सेल्फमेड हो. कहाँ रहते हो.

में एक गाओं सी हूँ. यहाँ एक घर में रेंट पैर रहता हूँ.

ललिता. नीस तो मीट यू.

विशाल. आप क्या करती हैं.

ललिता. कच खास नहीं. में बस लाइफ एन्जॉय क्र रही हूँ.

आवाज़. विशाल let's जो. ये आवाज़ कबीर की थी.

विशाल. में चलता हूँ. इतस नीस तो मीट यू.

ललिता. Ok. I'll सी यू अगेन सम टाइम.

विशाल दोस्तुं क साथ निकल गया.

अर्णव. वो औरत कोण थी.

विशाल. पता नहीं यार. बात क्र रही थी. ललिता नाम था उस का.

कबीर. नंबर तो ले लेता उसका.

विशाल. नंबर तक बात हे नहीं पोहंची.

कबीर. चल नेक्स्ट टाइम.

अमेरिका.

अनिल. प्रिय मुझे तुम सी ज़रूरी बात करनी है.

प्रिय. क्या बात है. तुम मुझे ऐसी अरविन्द क रूम से लय क्र आ गयी.

अनिल. देखो प्रिय मेरी बात दहन सी सुनो.

मुझे पता चला है क तुम एक छोटे गाओं सी आई हो.

प्रिय. हाँ ठीक सुना है तुम ने.

अनिल. अगर तुम्हें इस फॅमिली में सर्वाइव करना है तो तुम्हें अपना लाइफ स्टाइल चेंज करना हो गए.

प्रिय. लकिन किसी..

अनिल. तुम अपना लाइफ स्टाइल अपनी ड्रेसिंग अपना बोलने का तरीका सब बदलना हो गए. तब हे तुम इस फॅमिली में सर्वाइव क्र सकती हो.

प्रिय. लकिन में ऐसा किसी करूं गई.

अनिल. मेरी एक दोस्त है ंकितय में. में तुम्हें उसका नंबर दूँ गई. तुम उस सी कांटेक्ट क्र लेना वो तुम्हारी हेल्प क्रय गई.

प्रिय. थैंक यू अनिल.

अनिल ने प्रिय को अपनी दोस्त का नंबर दिए और प्रिय अपने कमरे में चली गयी.

दूसरी तरफ रॉकी गाओं जा रहा था.

बलराम और हरिलाल दोस्त थय और रॉकी बलराम का बीटा था इस लिए हरिलाल को रॉकी का इंतज़ार था.

रॉकी गाओं पोहंचा तो.

हरिलाल. राकेश केसा है मेरा शेर..

रॉकी. हरी अंकल ी ऍम गुड. हाउ अरे यू. एंड प्लीज कॉल में रॉकी. ी don't लिखे राकेश.

हरिलाल. चल ठीक है. रॉकी. आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई.

रॉकी. नहीं अंकल एवरीथिंग वास् फाइन.

कामिनी देखो कोण आया है.

कामिनी...

हरिलाल की बीवी 48 साल की है. गाओं की औरत है.

देखने में सुन्दर है लकिन गाओं में रहने की वजह सी ज़्यादा अपना ख्याल नहीं रखती.

कामिनी. राकेश केसा है. भाई साहब और भाबी ग किसी हैं.

रॉकी. सब ठीक हैं आंटी लकिन में राकेश नहीं रॉकी हूँ.

कामिनी. ाचा ाचा रॉकी. चल थोड़ा आराम क्र ले.

कामिनी रॉकी को कमरे में लय गयी.

ये तेरा कमरा है....

रॉकी बीएड पैर बेथ गया

रॉकी. आंटी सुनो....

कामिनी. हाँ बोल.

रॉकी. एक बात बोलूं अंकल को नहीं बताओ गई.

कामिनी. नहीं बताओं गई. बोल.

रॉकी. आप भट सुन्दर हो.

कामिनी थोड़ा सा शरमाई और बोली. इस में अंकल को न बताने वाली कोण सी बात है.

रॉकी. अगर में उनकी पत्नी को सुन्दर बोलूं गए तो उनको ाचा तो नहीं लगे गए न.

कामिनी. तो तुम कोण सा गलत नियत सी मुझे सुन्दर बोल रहे हो.

रॉकी. हाँ ये भी है.

कामिनी. चल अब तू आराम क्र.

कामिनी चली गयी.

रॉकी. सोचते हुए..

रॉकी. नियत तो मेरी तुम भट जल्दी जान जाओ गई कामिनी आंटी. बस मौका मिलने दो.

रॉकी बीएड पैर लेत गया.

सुबह प्रिय और अरविन्द की फ्लाइट थी. आदित्य और अनिल उनको एयरपोर्ट साथ चोर्ने आय.

जाते हुए अनिल प्रिय क कान में बोली.

अनिल. अभी ने तुम्हारे लिए मैसेज भेजा है. बोल रहा था क वो तुम्हें भट मिस करे गए.

प्रिय. अभी को थैंक यू बोलना.

अरविन्द और प्रिय प्लेन में बेथ गए.

शर्मा. विशाल कहाँ थय तुम बचे तुम्हारा इंतज़ार क्र रही थय.

विशाल. शर्मा अंकल वो में कच एक्स्ट्रा स्टडीज क लिए रुक गया था.

शर्मा. जब भी तुम ने लेट आना हो तो मुझे बता दिए करो.

विशाल. दुबारा दहन रखूं गए अंकल.

शर्मा. चलो आओ खाना खा लो.

विशाल शर्मा क घर एक कमरे में रहता था.

वो घर क कच काम क्र देता और साथ हे बचूं को पढ़ाता.

उस क बदले शर्मा उस सी कमरे का रेंट नहीं लेता था और विशाल का खाना भी शर्मा क साथ हे होता था.

मरस. शर्मा...

आ जाओ सब लोग खाना खा लो.

मरस शर्मा.

नाम अमला. आगे 42

सब उनको माला बोलते हैं. हाउसवाइफ हैं.

उन क 2 बेटी हैं एक 12 साल का और एक 10 साल का. दोनो स्कूल जाते हैं.

माला. विशाल आज तुम इतना लेट क्यों आय.

विशाल. माला आंटी में स्टडी क लिए रुक गया था.

माला. कोई बात नहीं. अगली बार अपने अंकल को इन्फॉर्म क्र देना

विशाल. ग आंटी.

प्रिय और अरविन्द की फ्लाइट वापस पोहंच चुकी थी और एयरपोर्ट पैर ड्राइवर उनका वेट क्र रहा था.

अरविन्द और प्रिय कार में बैठी और गोविन्द कार चलने लगा.

गोविन्द ने अपना रियर व्यू मिरर प्रिय की आंखूं पैर सेट क्र लिए और बार बार प्रिय को देखने लगा.

गोविन्द. अरविन्द भैया किसी रही आपकी फ्लाइट.

अरविन्द. अछि रही.

गोविन्द. सब ने आपको भट मिस किआ.

अरविन्द. सब मतलब

गोविन्द. मतलब बेगम साहिबा मालिक और रॉकी भैया.

अरविन्द. रॉकी मुझे मिस करे गए. कहाँ है वो

गोविन्द. रॉकी भैया तो क्सक्सक्सववव गाओं गए हैं.

अपने गाओं का नाम सुन क्र प्रिय को अपने माँ बाप की यद् आ गयी.

कच दिएर में हम बलराम हाउस वापस पोहंच गए.

हम दोनो अपने कमरे में चली गए.

अरविन्द. अब डॉ की दी हुई मेडिसिन यद् सी ले लेना. मुझे जल्दी सी जल्दी बचा चाहिए.

प्रिय. समझ गयी.

हम फ्रेश हो क्र बहार आ आ गए. डिनर का टाइम हो रहा था. हम ने डिनर किआ और अपने कमरे में चले गए

कमरे में आती हे अरविन्द ने मेरी कपड़े उतरी और मेरी ऊपर चढ़ गए और कच दिएर में अपना काम क्र क सो गए.

प्रिय को नींद नहीं आ रही थी. प्रिय क मंद में डॉ एलन क साथ गुज़ारा टाइम चल रहा था.

प्रिय सोच रही थी क सेक्स का असल मज़ा तो उसको डॉ एलन ने दिया था.

अरविन्द आज तक प्रिय को वो मज़ा नहीं दे पाया.

प्रिय वो मज़ा पहर सी फील करना चाहती थी. यही सब सोचते हुए प्रिय का हाथ उस क क्लीट पैर चला गया और वो अपने क्लीट को रगड़ने लगी.

प्रिय क दिमाग़ में डॉ एलन का मोटा लुंड और उस क प्रिय की छूट में लुंड घुसा क्र धक्के चल रही थय और प्रिय की अपने हाथ की मूवमेंट बढ़ती जा रही थी.

कच हे दिएर में प्रिय अपने हाथ सी हे झाड़ गयी और उसको कच सुकून मिला.

रॉकी डिनर पैर बैठा था लकिन रॉकी की नज़र कामिनी पैर तिकी थी.

कामिनी रॉकी को देखती तो रॉकी स्माइल क्र देता.

हरिलाल को अंदाज़ा भी नहीं था क क्या हो रहा है. और कामिनी भी ये नहीं जानती थी क रॉकी क दिमाग़ में क्या चल रहा है.

डिनर क बढ़ रॉकी हरिलाल क साथ बैठा था

2 लोग घर क अंदर आए.

इन में सी एक मर्द था और एक औरत थी.

औरत भट हे सुन्दर थी. उस क लम्बे बाल थय पतली कमर और भट हे सेक्सी फिगर था.

रॉकी की उस पैर एक नज़र पररि तो रॉकी का दिमाग़ घूम गया.

रॉकी सोचते हुए. "ये गाओं की औरतें इतनी हॉट किसी हैं. प्रिय तो क़यामत है हे. और ये भी भट हॉट है."
 
Episode 10.

डिनर क बढ़ रॉकी हरिलाल क साथ बैठा था

2 लोग घर क अंदर आए.

इन में सी एक मर्द था और एक औरत थी.

औरत भट हे सुन्दर थी. उस क लम्बे बाल थय पतली कमर और भट हे सेक्सी फिगर था.

रॉकी की उस पैर एक नज़र पररि तो रॉकी का दिमाग़ घूम गया.

रॉकी सोचते हुए. "ये गाओं की औरतें इतनी हॉट किसी हैं. प्रिय क़यामत है. और ये भी भट हॉट है."

हरिलाल. आओ बीटा किसी हो. केसा रहा सफर

औरत. भट ाचा रहा पापा.

हरिलाल. रॉकी ये मेरी बेटी है मालिनी..

और मालिनी ये राकेश है बलराम अंकल का बीटा.

Hi ी ऍम रॉकी.... हाथ बढ़ाते हुए....

मालिनी ने रॉकी सी हाथ मिलाया और साथ खरे आदमी ने रॉकी को घूर क्र देखा.

मालिनी. जब लास्ट टाइम तुम्हें देखा था तो तुम भट छोटे थय.

रॉकी. इसी लिए में आपको पहचान नहीं सका. में सोच रहा था क ये हॉट लड़की कोण है.

आदमी. Hi ी ऍम विष्णु मालिनी का पति..... उस ने तनज़िआ लहजे में बोलै.

रॉकी. नीस तो मीट यू बीआरओ.....

रॉकी ने विष्णु सी हाथ मिलाया.

विष्णु. पापा ग हम अपने कमरे में जा रही हैं

विष्णु और मालिनी अपने कमरे की तरफ चले गए और रॉकी खरा हो क्र मालिनी की मोती गांड को देकने लगा.

"क्या माल है यार.

एक डीएम मस्त. मुझे तो पता हे नहीं था क इस गाओं में इतनी सुन्दर लड़कियां हैं." अब तो इस गाओं में रहना हर पररय गए कच टाइम.

प्रिय अमेरिका सी वापस आ चुकी थी और उस क लिए घर में पहर सी वोही काम स्टार्ट हो गया था.

उस ने घर क काम करने होते थय और रात को अरविन्द अपना काम करता था.

आज रात भी ऐसा हे हुआ. अरविन्द अपना काम क्र क सो गया लकिन प्रिय जाग रही थी.

प्रिय को अरविन्द क साथ सेक्स में ज़रा भी मज़ा नहीं आता था क्यों क अरविन्द जस्ट प्रिय का अंदर डालता था और झाड़ क्र सो जाता था.

प्रिय क मैं में डॉ एलन क साथ बिताया हुआ टाइम बार बार घूम रहा था.

प्रिय पहर से वोही मज़ा महसूस करना चाहती थी. और प्रिय जानती थी क अरविन्द कभी उसको वो मज़ा नहीं दे सकता.

प्रिय क पास एक हे ऑप्शन था क वो अपने हाथ का इस्तमाल करे और प्रिय ने वैसा हे किआ.

अगली सुबह नाश्ते क बढ़ प्रिय ने अपनी सास से बात की.

प्रिय. माँ आप सी एक बात करनी थी.

रेखा. हाँ बोलो.

प्रिय. माँ अनिल ने मुझे माया का कहा था क में माया सी मिलूं.

वो मुझे हाई सोसाइटी में रहने और उठने बैठने में हेल्प करे गई

रेखा. माया कोण है.

प्रिय. माया अनिल को दोस्त है.

रेखा. ठीक है. तुम माया सी बात क्र लो.

प्रिय. में न्य माया से बात की है. उस ने मुझे अपने घर बुलाया है. बस आपकी परमिशन चाहिए.

रेखा. ठीक है चली जाओ.

अरविन्द बीबी ग को इनकी दोस्त क घर चोर दो.

में अरविन्द क साथ गारी में बेथ गयी और अरविन्द ड्राइव करने लगा.

अरविन्द. बीबी ग एक बात पूछूं.

प्रिय. हाँ पूछो.

अरविन्द. आप इतनी सुन्दर हो. आप ने क्या सोच क्र अरविन्द भैया सी शादी की.

आप को तो कोई भी ाचा खूबसूरत लड़का मिल जाता.

प्रिय. ये मेरा पर्सनल मटर है.

अरविन्द. बीबी ग हम छोटे लोग हैं हमारा इन लोगन क साथ गुज़ारा नहीं है. आप और में एक जैसी हैं

प्रिय. अरविन्द तुम ड्राइवर हो ड्राइवर हे रहो.

अरविन्द. सॉरी.

थोड़ी दिएर की ड्राइव क बढ़ में माया क घर पोहंच गयी.

माया. प्रिय के. किसी हो.

प्रिय. में ठीक हूँ.

माया. तुम भट खूबसूरत हो.

प्रिय. थैंक यू...

माया. तुम अनिल की दोस्त हो. मुझे भी अपनी दोस्त समझो.

प्रिय. ठीक है.

माया. मुझे अनिल ने तुम्हारे बारे में सब कच बताया है.

लकिन अगर तुम चाहती हो क में तुम्हारी मदद करूं तो तुम्हें सब कच मेरी साथ शेयर करना हो गए.

प्रिय. अनिल ने तुम्हें क्या बताया है.

माया. बस समझ लो सब कच. ऐसी कह लो क तुम्हारे और डॉ एलन क दरम्यान जो हुआ मुझे अनिल ने वो भी बताया है.

प्रिय. इसका मतलब है क तुम आलरेडी सब जानती हो.

माया. हाँ लकिन मुझे पेहली दिन सी आज तक सब बताओ.

प्रिय ने अनिल को अपनी शादी सी ले क्र आज तक सब कच बताया.

माया. प्रिय तुम्हारी बातून सी ये लगता है क हमें 2 पॉइंट्स पैर काम करना है.

तुम्हें हाई सोसाइटी में चलने का काबिल बनाना है. और तुम्हारी सेक्स लाइफ ठीक करनी है.

प्रिय. लकिन किसी..

माया. वो तुम मुझ पैर चोर दो. तुम्हें अरविन्द सटिस्फी नहीं करता.

प्रिय. बिलकुल भी नहीं. में हमेशा डॉ एलन क साथ बिताए टाइम को यद् करती हूँ.

माया. तुम इतनी सुन्दर हो क कोई भी तुम्हारे साथ सोने को तैयार हो जाए गए.

लकिन तुम उसी को अपना जिस्म दो गई जो तुम्हें पसंद हो गए.

जब तक मर्द तुम्हें पसंद नहीं हो गए तुम एन्जॉय नहीं क्र सको गई.

प्रिय. में समझ गयी.

माया. सब सी पहली चीज़ ये है क तुम ऐसी नज़र आओ क मर्द तुम्हें मुरर क्र देखें और खुद तुम्हें एप्रोच करिअन.

प्रिय. लकिन ऐसा किसी हो गए.

माया. खूबसूरत तो तुम हो हे. बस तुम ने ड्रेसिंग ऐसी करनी है जिस सी मर्द तुम्हें देखने पैर मजबूर हो जाएं. और इस क लिए में तुम्हें हेल्प करूं गई.

प्रिय. मुझे क्या करना हो गए.

माया. वो में तुम्हें बताती रहूं गई.

तुम ने बताया क अरविन्द ने आज तक तुम्हें किश भी नहीं किआ.

प्रिय. नहीं.

माया. तुम ने आज तक किसी को किश नहीं किआ.

प्रिय. नहीं.

माया. प्यार की शुरुआत किश सी हे होती है. तुम्हें तो इंटिमेसी का पहला स्टेज हे नहीं पता.

प्रिय. इसी लिए तो में तुम्हारे पास आई हूँ.

गाओं में हरिलाल क घर रॉकी बोर हो रहा था.

अचानक रॉकी ने मालिनी को किचन में जाते देखा. रॉकी उस क पीछे चला गया.

मालिनी किचन में अकेली थी.

रॉकी. Hello सेक्सी लेडी.

मालिनी में पीछे मुरर क्र देखा तो रॉकी खरा था.

मालिनी. किसी हो रॉकी...

रॉकी. आप सी एक बात केहनी थी

मालिनी. हाँ बोलो

रॉकी. आप भट हॉट हो....

मालिनी. ये बात विष्णु क सामने नहीं बोलना. विष्णु गुस्सा हो जाएं गए.

रॉकी. आपका और विष्णु का कोई मैच है हे नहीं. आप इतनी हॉट हो और विष्णु खड़ूस है.

मालिनी. तुम लाइन मर रही हो मेरी पैर.

रॉकी. ऐसा हे समझ लो. लकिन में सच बोल रहा हूँ. वैसी है कहाँ आपका पति.

मालिनी. वो तो काम पैर हैं.

रॉकी. और आप कितने दिन क लिए यहाँ हो.

मालिनी. में तो यहाँ हे रहती हूँ. पापा का कोई बीटा नहीं है.

इस लिए में और विष्णु यहाँ हे रहते हैं और पापा का काम देखते हैं. और विष्णु कभी कभी काम देखने शहर चली जाते हैं

रॉकी. क्या आप मुझे गाओं की सैर करवाओ गई.

मालिनी. हाँ क्यों नहीं. में किचन क कच काम क्र लून पहर हम गाओं में घूमने चलें गए.

रॉकी. थैंक यू. लकिन सिर्फ आप और में कोई और नहीं.

मालिनी. कोई और क्यों नहीं.

रॉकी. में आपकी खूबसूरती को अकेली में देखना चाहता हूँ.

मालिनी. ाचा ठीक है.

ंकितय.

माया. तुम समझ गयी न तुम ने क्या करना है.

प्रिय. हाँ में समझ गयी.

माया. अगर ऐसा करो गई तो मर्द मुरर मुरर क्र तुम्हें देखें गए. लकिन उसी मर्द को रिस्पांस देना जो तुम्हें ाचा लगे

प्रिय. थैंक यू माया. अब में चलती हूँ.

विशाल और उस क दोस्त क्लब में थय.

कबीर और अर्णव क गिर्ल्फ्रेंड्स भी उन क साथ थीं. विशाल अकेला बैठा था.

कच दिएर क बढ़ विशाल को एक आवाज़ आई.

आवाज़. किसी हो विशाल.

विशाल ने पीछे मुरर क्र देखा तो ये ललिता थी.

विशाल. ललिता ग किसी हैं आप.

ललिता. में ठीक हूँ. ललिता ने 2 ड्रिंक्स आर्डर किन.

. तुम बे बताया था क तुम बचूं को टूशन देते हो.

विशाल. ग फ्री टाइम में बचूं को टूशन देता हूँ.

ललिता. यूनिवर्सिटी की फीस और अपना एक्सपेंस सब ऐसी हे पूरा करते हो क्या.

विशाल. साथ एक जॉब भी करता हूँ. बस थोड़ा भट गुज़ारा हो जाता है.

ललिता. ाचा ऐसा करो मुझे अपना नंबर दी दो. में अपनी कच कलगुएस को दी दूँ गई. तुम्हें और तुशंस दिलवा दूँ गई.

विशाल. थैंक यू ललिता ग.

गाओं में.

रॉकी और मालिनी घूम रही थय.

मालिनी रॉकी को गाओं दिखा रही थी.

और दोनो बातें भी क्र रही थय.

रॉकी. मालिनी ग सच बताओं तो जब में ने पहली बार आपको देखा तो आपकी खूबसूरती का दीवाना हो गया.

मालिनी. थैंक यू रॉकी. लकिन में इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ.

रॉकी. अरे मालिनी ग ये तो आप मुझ सी पूछो क आप कितनी सुन्दर हो. विष्णु की जगह अगर में आपका पति होता तो आप सी एक मिनट भी दूर न होता.

मालिनी. लकिन विष्णु को में खूबसूरत नहीं लगती.

रॉकी. विष्णु तो है हे खड़ूस. आप जैसी अप्सरा को तो रॉकी क पास होना चाइये.

मालिनी. और रॉकी क पास क्यों होना चाहिए.

रॉकी. ता क रॉकी आपको खुल क्र प्यार क्र सके.

मालिनी और रॉकी बातें करते करते जंगल की तरफ निकल गए.

रॉकी ने देखा क आस पास कोई नहीं है तो मौका पा क्र बोलै.

रॉकी. मालिनी ग क्या में आपको किश क्र सकता हूँ.

मालिनी. ये तुम किसी बातें क्र रही हो.

रॉकी. मालिनी ग प्लीज सिर्फ एक किश. यहाँ कोई है भी नहीं और किसी को कच पता नहीं चले गए.

सिर्फ एक किश करने दो. प्लीज में आप क आगे हाथ जोड़ता हूँ.

मालिनी. ाचा ठीक है. हाथ मत जोड़ो. किश क्र लो लकिन किसी को कच पता नहीं चलना चाहिए.

किसी को कच पता नहीं चले गए... रॉकी ने मालिनी को अपनी तरफ घुमा लिए.

रॉकी ने मालिनी को अपनी बाहुन में भरा और अपने सी चिपका लिए हुए ज़रा भी दिएर न करते हुए उस क होंतुन से होंठ मिला दिए और मालिनी क होंतुन को चूमने लगा. मालिनी भी किश में रॉकी का साथ देने लगी.

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Episode 11

मालिनी रॉकी को गाओं की सैर करवा रही थी.

मालिनी और रॉकी बातें करते करते जंगल की तरफ निकल गए.

रॉकी ने देखा क आस पास कोई नहीं है तो मौका पा क्र बोलै.

रॉकी. मालिनी ग क्या में आपको किश क्र सकता हूँ.

मालिनी. ये तुम किसी बातें क्र रही हो.

रॉकी. मालिनी ग प्लीज सिर्फ एक किश. यहाँ कोई है भी नहीं और किसी को कच पता नहीं चले गए.

सिर्फ एक किश करने दो. प्लीज में आप क आगे हाथ जोड़ता हूँ.

मालिनी. ाचा ठीक है. हाथ मत जोड़ो. किश क्र लो लकिन किसी को कच पता नहीं चलना चाहिए.

किसी को कच पता नहीं चले गए... रॉकी ने मालिनी को अपनी तरफ घुमा लिए.

रॉकी ने मालिनी को अपनी बाहुन में भरा और अपने सी चिपका लिए हुए ज़रा भी दिएर न करते हुए उस क होंतुन से होंठ मिला दिए और मालिनी क होंतुन को चूमने लगा. मालिनी भी किश में रॉकी का साथ देने लगी.

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रॉकी मालिनी क होंतुन को होंतुन में ले क्र चूसने लगा.

मालिनी अपना सर पीछे करने लगी लकिन रॉकी ने उस क सर क पीछे हाथ रख लिए और उस क होंतुन को अपने होंतुन सी अलग नहीं होने दिए.

मालिनी ने भी रेसिस्ट करना चोर दिए और किश में रॉकी का पूरा साथ देने लगी.

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जैसी हे दोनो क होंठ अलग हुए रॉकी में ज़रा भी दिएर माँ लगते हुए अपने होंठ मालिनी क गाळून पैर लगा दिए और उस क गाळून को और उस की गर्दन को और बाकि जिस्म को चूमने लगा.

रॉकी मालिनी क जिस्म क सब कपरून क बगैर वाले हिस्सून को चूम रहा था.

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रॉकी ने मालिनी को दूसरी तरफ घुमा दिए और उस को पीछे सी हुग क्र क हाथ उस क बूब्स पैर ले गया और उस क बूब्स को दबाने लगा.

रॉकी ने पीछे सी मालिनी की गर्दन पैर होंठ लगा दिए और उसकी गर्दन को चूमने लगा.

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रॉकी भट दिएर मालिनी क मम्मी दबाता रहा और उस क बढ़ रहा और पहर उस को अपनी तरफ घुमाया और उस क जिस्म को कपरून क ऊपर सी हे चूमने लगा.

उफ़ योर अरे सो हॉट..... रॉकी मालिनी क जिस्म को चूमते हुए बोलै.

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अब रॉकी पहर सी खरा हो गया और मालिनी क होंतुन सी होंठ मिला दिए.

रॉकी मालिनी क होंतुन को और उस क फेस को चूमने लगा और उस ने अपना हाथ मालिनी की शलवार क अंदर घुसा दिए.

रॉकी का हाथ छूट पैर टच होते हे मालिनी को झटका लगा और उस ने रॉकी क होंतुन को काट लिए.

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रॉकी. ओह्ह्ह्ह ी लिखे आईटी... तुम ने थोड़ी सी वाइल्ड साइड भी है.

रॉकी ने मालिनी की छूट को रगड़ना स्टार्ट क्र दिए और मालिनी क मुँह सी सिसकियाँ निकलने लगीं.

मालिनी रॉकी क होंतुन को चूम रही थी. दोनो किश क्र रही थय और रॉकी मालिनी की छूट को रैगर रहा था.

मालिनी का जिस्म कांप रहा था और वो झाड़ गयी थी.

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रॉकी ने मालिनी को शोल्डर्स सी निचे दबा क्र अपने आगे बैठा दिए.

उस ने अपनी पंत निचे क्र दी और अपना लुंड बहार निकल लिए.

मालिनी को रॉकी का लुंड देख क्र झटका सा लगा.

उस ने आज तक इतना मोटा और लम्बा लुंड नहीं देखा था.

रॉकी. मुँह में लो.

मालिनी ने इदर उदर देखा तो दूर दूर तक कोई भी नहीं था.

मालिनी ने रॉकी का लुंड पाकर क्र मुँह में लय लिए और चूसने लगी.

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मालिनी भट दिएर तक रॉकी का लुंड चुस्ती रही. वो रॉकी का लुंड मुँह में नहीं ले पा रही थी. उस ने रॉकी का लुंड हाथ सी पाकर रखा रहा और सिर्फ उस की टोपी को मुँह में ले रही थी.

अब मालिनी का मुँह थक गया था.

मालिनी ने लुंड बहार निकल दिए.

मालिनी. अब और नहीं हो रहा में थक गयी हूँ.

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रॉकी. थोड़ी दिएर और प्लीज...

मालिनी. नहीं अब और नहीं क्र सकती. चलो. घर चलते हैं. मालिनी ने अपने कम्प्रे ठीक किये और चलने लगी.

रॉकी को भट गुस्सा आया लकिन वो कच क्र नहीं सकता था इस लिए ख़ामोशी सी मालिनी क पीछे चल पर्रा.

दूसरी तरफ सिटी में.

माया ने प्रिय को कॉल क्र क अपने घर बुलाया...

माया ने प्रिय को एक ड्रेस दिए और कहा ये पहन लो.

प्रिय ड्रेस ले क्र अंदर गयी और देखा तो ये एक सिंगल पीेछे ड्रेस था.

प्रिय ने वो ड्रेस पहन लिए.

प्रिय ने ड्रेस पहना तो वो प्रिय क घुट्नु क थोड़ा ऊपर तक था.

उस क साथ हाई हील्स थीं.... प्रिय ने ड्रेस पहना और बहार आ गयी.

माया. वाओ गर्ल you're हॉट...

अब ये ड्रेस है जिस को लोग मुरर मुरर क्र देखें गए. लकिन तुम रापोंसे उसी को दो गई जो तुम्हें पसंद हो गए.

देखो प्रिय हाई सोसाइटी में मूव करने क लिए तुम्हें ऐसी हे मॉडर्न ड्रेसिंग करनी पररय गई.

और इस से मर्द भी तुम्हरी तरफ अत्त्रक्ट हों गए.

माया प्रिय क पास आई और प्रिय क बाल खोल दिए.

माया. वाओ..... तुम्हें देख क्र तो मेरी हालत खराब हो रही है. मार्डन का क्या हो गए.

प्रिय. इतनी खूबसूरत लग रही हूँ क्या.

खुद देख लो.... माया प्रिय को आईने क सामने ले गयी.

प्रिय ने अपने आप को पहली बार इस ड्रेसिंग में देखा था और प्रिय को भी अपना आप सुन्दर लग रहा था.

आज सैटरडे था और विशाल की यूनिवर्सिटी ऑफ थी.

विशाल अपने कमरे में था उसको माला की आवाज़ आई.

माला. विशाल बाजार सी कच सामान तो ला दो.

विशाल. जी आंटी अभी लता हूँ.

विशाल बाजार चला गया और सामान ले आया.

माला. विशाल तुझे बुरा तो नहीं लगता क में तुझ सी घर का काम करवाती हूँ.

विशाल. नहीं आंटी. आप ने मुझे रहने की जगह दी है. मुझे खाना देते हैं. अगर में थोड़ा सा घर का काम क्र भी देता हूँ तो प्रॉब्लम हे क्या है.

माला. चल ठीक है. आ जा लंच क्र ले. शर्मा ग भी आ रही हों गए लंच करने.

शर्मा का अपना कार शोरूम था. और वो दिन में लंच करने घर आ जाता थान

कच दिएर क बढ़ शर्मा भी आ गया.

शर्मा. विशाल बीटा अगर तुम्हें कोई काम नहीं होता तो शोरूम आ जाया करो. मेरी भी कच हेल्प हो जाए गई.

विशाल. ठीक है अंकल जिस दिन काम नहीं हो गए में शोरूम आ जाया करूं गए

लंच क्र क शर्मा चला गया और विशाल अपने कमरे में चला गया.

शाम को विशाल आया और माला सी बोलै.

विशाल. आंटी में दोस्तुं क साथ स्टडी क लिए जा रहा हूँ रात को दिएर हो जाए गई.

माला. ठीक है. जाओ.

विशाल ने स्टडी क लिए नहीं जाना था. उसका और उस क दोस्तुं का प्लान क्लब जाने का था.

विशाल और उस क दोस्त डिनर क बढ़ क्लब चले गए.

कबीर और अर्णव क साथ उनकी गिर्ल्फ्रेंड्स भी थीं. कबीर की गर्लफ्रेंड श्रेया और अर्णव की गर्लफ्रेंड प्रीती.

कबीर और अर्णव अपनी गिर्ल्फ्रेंड्स क साथ डांस करने लगे और विशाल हमेशा की तरह एक कार्नर में बेथ गया.

विशाल की नज़रें ललिता को ढूंढ रही थीं लकिन उसको ललिता कहीं नज़र नहीं आई.

विशाल ने फोन निकला और डरते डरते ललिता को कॉल मिले.

ललिता. Hi विशाल. किसी हो. आज मुझे किसी कॉल किआ.

विशाल. ठीक हूँ ललिता ग. बस ऐसी हे क्लब आया था. आप नज़र नहीं आईं इस लिए सोचा आप सी बात क्र लून.

ललिता. मेरी क्लब न आने की वजह सी मुझे कॉल की तुम ने.

विशाल. आप हे हैं जिस सी में बात करता हूँ. और किसी को तो में जनता हे नहीं.

ललिता. में रात को क्लब नहीं आती. अगली बार जब आई तो तुम्हें मैसेज क्र दूँ गई

विशाल. Ok ललिता ग bye.

विशाल ने देखा क एक लड़की अकेली बैठी थी.

विशाल उस क पास चला गया.

विशाल. Hi अरे यू अलोन.

लड़की. नहीं मेरी फ्रेंड्स हैं मेरी साथ.

विशाल. ी ऍम विशाल...

लड़की. पालवी....

विशाल. कैन ी से समथिंग....

पालवी. यस....

विशाल. आप भट सुन्दर हो....

पालवी. सच में. में आपको सुन्दर लगी...

विशाल. यस.

पालवी देखने में सुन्दर थी लकिन भट मोती थी. और इसी लिए वो बिलकुल अकेली थी.

पालवी. आज तक किसी ने मुझे कॉम्पलिमेंट नहीं किआ.

विशाल. कॉम्पलिमेंट नहीं. मुझे आप अछि लगी तो में न्य बोल दिए.

पालवी. मुझे अपना आप ाचा नहीं लगता. में किसी को किसी अछि लग सकती हूँ

विशाल. आप ऐसा क्यों बोल रही हो. आप सुन्दर हो...

विशाल let's जो...

कबीर की आवाज़ पे विशाल पीछे मुर्रा.

विशाल. आईटी वास् नीस मीटिंग यू....

विशाल चल पर्रा.

पालवी. अरे सुनो तो.....

विशाल ने पालवी की आवाज़ नहीं सुनी और अपने दोस्तुं क साथ निकल गया.

देखो प्रिय हाई सोसाइटी में मूव करने क लिए तुम्हें ऐसी हे मॉडर्न ड्रेसिंग करनी पररय गई.

और इस से मर्द भी तुम्हरी तरफ अत्त्रक्ट हों गए.

माया प्रिय क पास आई और प्रिय क बाल खोल दिए.

माया. वाओ..... तुम्हें देख क्र तो मेरी हालत खराब हो रही है. मार्डन का क्या हो गए.

प्रिय. इतनी खूबसूरत लग रही हूँ क्या.

खुद देख लो.... माया प्रिय को आईने क सामने ले गयी.

प्रिय ने अपने आप को पहली बार इस ड्रेसिंग में देखा था और प्रिय को भी अपना आप सुन्दर लग रहा था.

माया. अब चलते हैं 2ंद स्टेज की तरफ.

प्रिय. 2ंद स्टेज क्या है.

माया. तुम्हें हाई सोसाइटी क स्टैण्डर्ड पैर लाना है.

और तुम्हें सेक्स भी तो सीखना है.

तुम ने तो आज तक किसी को किश तक नहीं किआ.

और इंटिमेसी और रोमांस का स्टार्ट हे किश सी होता है.

प्रिय. हाँ तुम ठीक कह रही हो.

माया. आज तुम्हारा पहला लेसन है. आज तुम किश करो गई.

प्रिय. लकिन किस को...

माया. मुझे......

प्रिय... क्या तुम्हें.....

माया. हाँ... मेरी साथ मेरी कमरे में आओ....

माया ने प्रिय का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में ले गयी.
 
Episode 12

विशाल क्लब सी घर वापस आ गया.

अगली सुबह विशाल यूनिवर्सिटी क लिए निकल रहा था तो शर्मा ने विशाल को बुलाया.

शर्मा. विशाल तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है यहाँ रहने में.

विशाल. किसी बातें क्र रही हैं अंकल.. मुझे कोई प्रॉब्लम क्यों हो गई.

शर्मा. ाचा तुम सी एक भट ज़रूरी बात करनी थी.

विशाल. ग अंकल कहिये.

शर्मा. बचूं क एक्साम्स आ रही हैं. में चाहता हूँ क तुम बचूं को थोड़ा ज़्यादा टाइम दो.

विशाल. ठीक है अंकल में मैनेज करूं गए.

शर्मा. थैंक यू बीटा.

विशाल यूनिवर्सिटी क लिए निकल गया.

रॉकी गाओं में घूम रहा था.

रॉकी इस गाओं की लर्कियूं का देवना हो चूका था.

रॉकी गाओं क एक रस्ते सी जा रहा था उसको आवाज़ आई.

बीटा सुनो........

रॉकी ने पीछे मुरर क्र देखा तो एक बूढ़ा आदमी उस की तरफ भागता हुआ आ रहा था.

रॉकी रुक गया.

रॉकी. क्या हुआ अंकल कोण हैं आप.

आदमी. में ने सुना है तुम बलराम साहब क बेटी हो.

रॉकी. हाँ में बलराम साहब का बीटा हूँ लकिन आप कोण हैं.

आदमी. बीटा में तुम्हें बताओं गए क में कोण हूँ. लकिन पेहली मुझ सी वादा करो क तुम मुखिया ग सी कच नहीं कहो गए.

रॉकी को लगा क ये बूढ़ा आदमी उस से कच मांगना चाहता है.

रॉकी. अंकल कितने पेसय चाहियें आपको. में हरिलाल अंकल को कच नहीं बताओं गए.

आदमी. बीटा मुझे पेसय नहीं चाहियें. मेरा नाम भूषण है. में प्रिय का बाप हु.

रॉकी. ाचा तो प्रिय भाबी आपकी बेटी है.

भूषण. बीटा मुझे सिर्फ इतना बता दो क प्रिय किसी है.

रॉकी. अंकल वो आपकी बेटी है और आपको इतना नहीं पता.

भूषण. बीटा हमें मुखिया ग ने मन किआ है क हम प्रिय क घर वळून क साथ कोई तालुक नहीं रख सकते.

रॉकी. ाचा. मुझे तो कच पता नहीं इस बारे में.

भूषण. बीटा बस मुझे इतना बता दो मेरी प्रिय ठीक है न.

रॉकी. अंकल भाबी बिलकुल ठीक है. आप परेशान न हों. भाबी अरविन्द भाई क साथ अमेरिका गयी है.

भूषण. शुकरिअ बीटा. तुम्हारा भट भट शुकरिअ. तुम खुश रहो. ऊपर वाला तुम्हें हमेशा खुश रखे.

रॉकी था तो भट हे बिगड़ा हुआ लड़का लकिन भूषण को इस हालत में देख क्र रॉकी को तरस आ रहा था.

रॉकी वहां सी वापस हरिलाल की हवेली की तरफ निकल गया.

प्रिय माया क घर पैर थी.

माया ने मुझे वो ड्रेस पहनाया था जो में न्य आज तक कभी नहीं पहना था.

माया. अब चलते हैं 2ंद स्टेज की तरफ.

प्रिय. 2ंद स्टेज क्या है.

माया. तुम्हें हाई सोसाइटी क स्टैण्डर्ड पैर लाना है. और तुम्हें सेक्स भी तो सीखना है. तुम ने तो आज तक किसी को किश तक नहीं किआ. और इंटिमेसी और रोमांस का स्टार्ट हे किश सी होता है.

प्रिय. हाँ तुम ठीक कह रही हो.

माया. आज तुम्हारा पहला लेसन है. आज तुम किश करो गई.

प्रिय. लकिन किस को...

माया. मुझे......

प्रिय... क्या तुम्हें.....

माया. हाँ... मेरी साथ मेरी कमरे में आओ....

माया ने प्रिय का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में ले गयी.

मेरा दिल भट तेज़ी से धारक रहा था. क्या सच में माया मुझे किश करने वाली थी.

में ने कभी सोचा भी नहीं था क मेरी पहली किश एक औरत क साथ हो गई.

प्रिय और माया कमरे में गयीं तो कमरे में पहले सी एक आदमी बैठा था.

प्रिय उसको देख क्र थोड़ी सी घबरा गयी.

प्रिय. ये कोण है.

माया. प्रिय ये मेरा दोस्त है डेविल.

और डेविल ये है प्रिय जिस क बारे में में न्य तुम सी बात की थी.

डेविल. Hello.

आप सच में भट हॉट हो.

थैंक यू.. प्रिय डेविल को देखते हुए बोली.

प्रिय ने डेविल को देखा तो ये एक हैंडसम आदमी था.

इतना हैंडसम क कोई भी लड़की पिघल जाए.

माया. प्रिय डेविल तुम्हें किश करना सिखाए गए.

प्रिय. लकिन माया...

माया. Don't वोर्री. डेविल मेरा भट ाचा दोस्त है. तुम जैसी मुझ पैर ट्रस्ट करती हो वैसी हे डेविल पैर ट्रस्ट करो.

फ्लैशबैक.

डेविल माया की गांड क अंदर झाड़ चूका था. और दोनो बीएड पैर लेती किसिंग क्र रही थय.

माया. दानी मुझे तुम सी एक भट ज़रूरी बात करनी है.

दानी. हाँ बताओ क्या बात है.

माया. मुझे डेविल चाहिए.

दानी. तुम जानती हो न डेविल रिटायर हो गया है.

माया. हाँ. लकिन ये काम सिर्फ डेविल हे क्र सकता है.

दानी. ठीक है काम बताओ.

माया. मेरी एक दोस्त को डेविल की ज़रूरत है. और तुम जानते हे हो डेविल क्या करता है.

दानी. तुम्हरी दोस्त को सटिस्फैक्शन चाहिए.

माया. बिलकुल. और ये काम सिर्फ तुम क्र सकते हो. में किसी और पैर ट्रस्ट नहीं क्र सकती.

दानी. कब मिलना है तुम्हरी दोस्त सी.

माया. में तुम्हें इन्फॉर्म क्र दूँ गई.

दानी. ठीक है. जब भी तुम्हारी दोस्त रेडी हो मुझे टाइम और लोकेशन बता देना.

माया. लोकेशन तो यही हो गई. लकिन इस बात का दहन रकना क प्रिय ने आज तक कभी किश तक नहीं किआ. सो सब सी पेहली उसको जस्ट किसिंग सीखनी है.

दानी. जैसा तुम चाहो गई वैसा हे हो गए.

(जो लोग Devil/Dani सी वाक़िफ़ नहीं. दानी हमारी स्टोरी जीरो तो हीरो का हीरो है, माया और दानी का क्या रिलेशन है ये जीरो तो हीरो क रीडर्स जानते हैं. और जो नहीं जानते उन क लिए एक छोटा सा रिकैप

दानी एक कॉल बॉय था जिस का कोड नाम डेविल था.

डेविल को माया क पति अनुराग ने माया को ब्लैंडफोल्ड क्र क सटिस्फी करने क लिए हिरे किआ था.

अनुराग चाहता था क डेविल अनुराग बन क्र हे माया क साथ सेक्स करे.

लकिन अनुराग ये नहीं जनता था क डेविल ने ब्लैंडफोल्ड हटा दिए और माया और डेविल की दोस्ती हो गयी.

और आज तक उनका रिलेशनशिप चल रहा है.

दानी ने कॉल बॉय कंपनी चोर दी लकिन माया और दानी में एक दूसरे को नहीं छोरा.)

(जीरो तो हीरो)

और अब माया ने दानी को प्रिय को सेक्स सीखने क लिए बुलाया था

प्रेजेंट.

माया. प्रिय डेविल तुम्हें किश करना सिखाए गए.

प्रिय. लकिन माया...

माया. Don't वोर्री. डेविल मेरा भट ाचा दोस्त है. तुम जैसी मुझ पैर ट्रस्ट करती हो वैसी हे डेविल पैर ट्रस्ट करो.

प्रिय. तुम पैर तो पूरा ट्रस्ट है.

माया. बस पहर तुम दोनो स्टार्ट करो. में बहार हूँ.

प्रिय. नहीं माया. तुम यहाँ हे रहो.

माया. तुम मेरी सामने डेविल को किश करो गई.

प्रिय. तुम्हारे यहाँ रहने सी मुझे ाचा लगे गए.

माया ने दानी को देखा.

डेविल. अगर प्रिय ग ऐसा चाहती हैं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

माया. ठीक है में यहाँ बैठी हूँ. माया सामने लगी सोफे पैर बेथ गयी.

डेविल प्रिय क पास बीएड पैर बेथ गया.

डेविल. माया ने मुझे बताया क तुम ने कभी किश नहीं किआ.

प्रिय. नहीं.

डेविल. मेरी तुम बोलने सी कोई मसला तो नहीं है न.

प्रिय. नहीं.

डेविल. ठीक है अब तुम भी मुझे आप नहीं बोलो गई.

प्रिय. ठीक है.

डेविल. तो हम स्टार्ट करें..

प्रिय ने हाँ में सर हिलाया...

मेरी धड़कन बढ़ रही थी.

एक अजान आदमी मुझे किश करने वाला था.

मेरा पहला रियल सेक्स भी एक अनजान आदमी क साथ था और अब एक और अनजान आदमी मुझे किश करने वाला था.

डेविल. मुझे अंदाज़ा हो रहा है क तुम नर्वस हो. में तुम्हें यकीन दिलाता हूँ क तुम इसको एन्जॉय करो गई.

डेविल. में चाहता हूँ क तुम स्टार्ट करो.

सब से पेहली तुम मेरी होंतुन पैर एक किश करो.

मेरी धड़कन और बढ़ गयी. में ने माया को देखा तो माया ने कहा.

माया. दर्रो मत प्रिय. ये तुम्हारे हे फैद्य क लिए है.

अपनी आंखें बंद करो और डेविल क होंतुन पैर किश करो.

में न्य आंखें बंद किन और अपने होंठ आगे बढ़ा क्र डेविल क होंतुन पैर छोटा सा किश किआ.

मेरी होंठ डेविल क होंतुन सी टच होते हे मेरी जिस्म में बिजली दौर गयी.

मुझे पूरा झटका लगा. और में पीछे हो गयी.

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डेविल. Ok that's ा नीस स्टार्ट.

में न्य नज़र निचे झुका क्र राखी थी.

डेविल. के ों प्रिय. तुम्हें मुझे देखना हो गए. चलो अब आगे बढ़ते हैं.

अब तुम ने ऐसी हे किश करना है लकिन थोड़ा सा ज़्यादा.

में न्य पहर सी अपने होंठ डेविल क होंतुन की तरफ बढ़ाए और उस क होंठ चूमे. इस बार डेविल क होंतुन ने भी हरकत की और उस ने भी मेरी होंतुन को चूमा.

मेरी जिस्म कांप उठा. उस ने दो बार मेरी होंतुन को चूमा और में पीछे हो गयी

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मेरी लिए ये एहसास भट न्य था. मेरा जिस्म कांप रहा था. और दिल की धड़कन भट तेज़ हो गयी थी.

डेविल. That's गुड. अब हम दोनो एक दूसरी क होंतुन को होंतुन में लाइन गए.

तुम मेरा ऊपर वाला होंठ अपने होंतुन में लो गई और में तुम्हारा निचे वाला होंठ अपने होंतुन में लून गए.

में न्य पहर सी अपने होंठ आगे बढ़ाए और डेविल ने अपना हाथ मेरी सर क पीछे रखा और मेरी होंठ को अपने होंतुन में ले क्र चूस लिए.

ये भट हे अलग एहसास था. में न्य भी डेविल क होंठ को अपने होंतुन में ले लिए. और हम दोनो एक दूसरे क होंतुन को चूसने लगे

डेविल मेरा ऊपर वाला होंठ चूस रहा था और में डेविल का निचे वाला होंठ चूस रही थी.

और कच दिएर में हम पहर अलग हो गए.

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डेविल. तुम भट ाचा क्र रही हो. लकिन अब तुम ने इस बात पैर दहन नहीं देना क तुम किसी किश क्र रही हो. या तुम्हारा कोण सा होंठ मेरी होंतुन में है.

अब सिर्फ होंठ चुसो और ये मत सोचो क कोण सा है.

डेविल ने मुझे अपनी तरफ खेंचा और पहर सी होंठ मिला दिए और इस बार हम दोनो एक दूसरे क होंतुन को चूसने लगे.

कभी डेविल मेरा ऊपर वाला होंठ चुस्त तो कभी में उसका और ऐसी हे हम दोनो किश क्र रहिय थय

में न्य इतना ाचा कभी फील नहीं किआ था. ये फीलिंग भट अजीब और अछि थी. मेरी जिस्म में बिजली दौर रही थी. जैसी हे डेविल मेरी होंठ को अपने होंतुन में लेता मुझे झटका लगता.

भट दिएर ऐसी हे किश करने क बढ़ हम अलग हुए

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प्रिय ने माया को देखा तो माया मुस्कुरा रही थी.

माया. ये है इंटिमेसी और रोमांस का पहला स्टेज....

प्रिय. सच में मुझे तो पता हे नहीं था.

माया. आज क लिए इतना काफी है.
 
Episode 13

रॉकी हरिलाल की हवेली वापस आया तो हरिलाल हॉल में बैठा था.

रॉकी. हरी अंकल आप सी एक बात करनी थी.

हरिलाल. बोलो क्या बात है.

रॉकी. अरविन्द भैया की शादी आप ने हे करवाई थी न

हरिलाल. हाँ में न्य हे करवाई थी.

रॉकी. मुझे उन लोगन सी मिलना है.

हरिलाल. तुम उन लोगन सी क्यों मिलना चाहते हो. वो छोटे लोग हैं

रॉकी. बस मुझे मिलना है उन लोगन सी.

हरिलाल. ठीक है बीटा. अगर तुम चाहते हो तो में आज हे भूषण को यहाँ बुला लेता हूँ.

रॉकी. नहीं यहाँ नहीं. में न्य उनका घर देखना है. में देखना चाहता हूँ क आप ने कहाँ सी लड़की उठा क्र बलराम हाउस की बहु बना दी.

हरिलाल. ठीक है अगर तुम देखना हे चाहते हो में तुम्हें वहां भेज देता हूँ.

हरिलाल. हरिया... साहब को भूषण क घर ले क्र जाओ.

हरिया हवेली का मुलाज़िम था. जो दिन में काम करता था और रात में घर चला जाता था.

रॉकी हरिया क साथ चल दिए.

हरिया की फॅमिली हरिलाल क घर नौकर थी.

हरिया की उम्र 40 क आस पास थी. पेहली हरिया का बाप हरिलाल का नौकर था और उस क बढ़ हरिया आ गया.

रॉकी. तुम भी इसी गाओं में रहते हो.

हरिया. ग साहब ग.

रॉकी. तुम्हारे घर में कोण कोण है.

हरिया. में मेरी पत्नी और 2 बचे...

रॉकी. और सब लोग हरी अंकल क घर काम करते हो.

हरिया. ग साहब.

साहब वो रहा भूषण का घर.

रॉकी. ठीक है तुम यहाँ हे रुको में आता हूँ.

प्रिय माया क घर थी.

और माया क कमरे में डेविल प्रिय को किसिंग सीखा रहा था.

माया. आज क लिए इतना काफी है.

डेविल. प्रिय ग आप का क्या ख्याल है आज इतना हे करें.

प्रिय. जैसी तुम लोगन को ठीक लगे.

माया. में सोच रही हूँ क तुम हमें बार बार नहीं मिलो गए. एक बार प्रिय को प्रॉपर किसिंग सीखा दो. जिस सी वो एन्जॉय क्र सके.

क्यों प्रिय.

प्रिय. हाँ. अगर डेविल क पास टाइम है तो मुझे कोई मसला नहीं है.

डेविल. ठीक है. हम फिर सी स्टार्ट करें गए लकिन इस बार तुम ने एन्जॉय करना है.

डेविल ने मुझे अपनी तरफ खेंचा और मेरी होंतुन को चूमने लगा और में भी उस क होंतुन को चूमने लगी.

डेविल ने मुझे किश करते हुए अपना हाथ मेरी टांग पैर रखा और उसको दबा दिए.

में न्य किश तोर दी और डेविल का हाथ हटा दिए.

प्रिय. सिर्फ किश करनी है....

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डेविल. Ok चलो दुबारा करते हैं.

एक बार पहर में न्य और डेविल ने अपने होंठ मिला दिए और एक दूसरी क होंतुन को चूसने लगे.

इस बार डेविल का हाथ मेरी होंतुन से होता हुआ मेरी बूब्स पैर आ गया और उस ने मेरी बूब्स को दबा दिए.

मुझे झटका लगा और में न्य उसको पीछे हटा दिए.

प्रिय. प्लीज टच मत करो. सिर्फ किश करो.

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डेविल. देखो प्रिय किश का मज़ा लेने क लिए तुम्हें खुद को मेरी हवाले करना हो गए. अगर तुम स्ट्रेस में रहो गई तो मज़ा नहीं ले पाओ गई.

प्रिय. लकिन तुम मुझे टच क्र रहे हो.

डेविल. में तुम्हें एन्जॉय करवा रहा हूँ. जस्ट ट्रस्ट में.

प्रिय. Ok.

में न्य एक बार पहर अपने होंठ आगे बढ़ाए और एक बार पहर मेरी और डेविल की किसिंग स्टार्ट हो गयी.

इस बार डेविल अपना हाथ मेरी तंग पैर ले गया और तंग क अंदर वाली साइड सी उस ने मेरी छूट को टच क्र दिए.

मुझे झटका लगा. में किश तोरणा चाहती थी लकिन उस ने अपने दूसरी हाथ सी मेरा सर पाकर रखा था और मुझे किश नहीं तोड़ने दी.

वो मुझे किश करता रहा और उसका हाथ मेरी मम्मी पैर आ गया और वो मेरी मम्मी दबाने लगा. और में भी पूरी तरह उसका साथ देंय लगी और उस क होंतुन को चूमने लगी.

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कच दिएर बढ़ जब हम फिर सी अलग हुए तो डेविल मुस्कुरा रहा था.

डेविल. अब तुम ने सही सी किश किआ है.

प्रिय. में किश में खो गयी थी.

डेविल. ऐसा हे करना है. किश में खो जाओ खुद को मुझे सौंप दो.

में किश करते हुए तुम्हें कितना टच करूं गए तुम्हें उतना हे मज़ा आय गए

माया. प्रिय डेविल सही कह रहा है. उसको. टच करने दो. तुम एन्जॉय करो गई.

डेविल ने एक बार पहर मुझे अपने पास खेंच लिए और मुझे मिस करने लगा.

हम दोनो एक बार पहर एक दूसरी क होंतुन को चूसने लगी.

मुझे फील हुआ क डेविल मेरी ड्रेस को ऊपर क्र रहा है.

उस ने मेरी ड्रेस ऊपर क्र दी और उसका हाथ मेरी गांड पैर चला गया और वो मेरी गांड को दबाने लगा.

में अब डेविल को रोक नहीं रही थी और वो मुझे किश करते हुए मेरी गांड को दबा रहा था.

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हम ने किश तोड़ी.

माया. That's गुड. डेविल चलो अब प्रिय को ज़ुबान वाली किश सिखाओ.

डेविल. प्रिय अब जब हम किश करिअन गए तो अपनी ज़ुबान एक दूसरे क मुँह में डालें गए. तुम अपनी ज़ुबान मेरी मुँह में डालो गई और में अपनी ज़ुबान तुम्हरे मुँह में डालूं गए.

प्रिय. समझ गयी.

में अगर बरही और डेविल क होंठ चूमने लगी. डेविल ने मुझे उठा क्र अपनी गोद में बैठा लिए और हम दोनो एक दूसरे क होंतुन को चूसने लगे

डेविल मेरी ड्रेस को हिप सी ऊपर क्र चूका था और उस क हाथ मेरी गांड पैर थय.

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हम दोनो किश क्र रही थय क माया की आवाज़ आई

माया. मुझे तुम्हरी ज़ुबान नज़र नहीं आ रहा.

हम ने किश नहीं तोड़ी बस अपनी अपनी ज़ुबान एक दूसरे क मुँह में घुसाने लगे और एक दूसरे की ज़ुबान और होंतुन को चूसने लगे.

मुझे भट मज़ा आ रहा था. ऐसा मज़ा में न्य अपनी लाइफ में कभी फील नहीं किआ था.

में पूरी तरह खो क्र डेविल की किश में उसका साथ दे रही थी

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में डेविल की गोद में थी और हम दोनो क होंठ मिले हुए थय.

हम दोनो एक दूसरी को भट पैशन सी किश क्र थे थय.

डेविल ने मेरी ड्रेस मेरी पेट तक उठा दी थी और अब उस ने एक हाथ मेरी ड्रेस क अंदर दाल दिए था और वो मेरी ब्रा क ऊपर आय मेरी मम्मी दबा रहा था.

में खुद को डेविल को सौंप चुकी थी और अब में डेविल को टच करने सी रोक नहीं रही थी.

मुझे मज़ा आ रहा था और में बस इस पल का मज़ा लेना चाहती थी

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डेविल ने मुझे बीएड पैर लेता दिए और मेरी साथ लेत क्र मेरी होंतुन को चूमने लगा

उस का हाथ मेरी छूट पैर चला गया और उस ने पंतय क ऊपर सी मेरी छूट को रैगर दिए.

मेरा जिस्म कांप उठा. लकिन मेरी होंठ अब भी डेविल क होंतुन में बंद थय.

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डेविल अब पंतय क ऊपर सी मेरी छूट को रैगर रहा था. मुझे अपनी छूट गीली होती महसूस हो रही थी.

डेविल मेरी क्लीट को रैगर रहा था और मेरा जिस्म झटके खा रहा था.

डेविल मेरी होंठ चोरता तो मेरी मुँह सी सिसकियाँ निकल जतिन और वो पहर सी मेरी होंठ चूमने लगता.

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इसी दौरान डेविल ने मेरी टांगें ऊपर उठाएं और उस ने मेरी पंतय भी उतर दी थी और में इतनी मस्ती में थी क उसको ऐसा करने सी नहीं रोक पाई.

इस से पहले क में कुछ भी सोच पति डेविल ने एक ऊँगली मेरी गीली छूट क अंदर घुस गयी और उस की ज़ुबान मेरी छूट पैर टच हो गयी.

वो मेरी छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगा और साथ हे मेरी छूट को चाटने लगा.

मेरी हालत खराब हो रही थी. मेरा जिस्म न चाहते हुए भी डेविल का साथ दे रहा था.

मेरी मुँह सी सिसकियाँ निकल रही थीं

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डेविल क मेरी छूट चाटने और ऊँगली डालने सी में मदहोश होती जा रही थी. मुझे मज़ा आ रहा था. मेरा जिस्म कांप रहा था.

में अपने आप को कण्ट्रोल में रखने की कोशिश क्र रही थी लकिन मेरा हाथ न चाहती हुए भी बार बार डेविल क सर पैर चला जाता और में उसे सर पाकर क्र अपनी छूट में दबाने लगती.

मेरी सिसकियाँ बढ़ती जा रही थीं और कच हे दिएर में मेरा जिस्म झटके खाने लगा और में झाड़ गयी.

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डेविल ने मुझे उठाया और मेरा ड्रेस उतर दिए. में अब सिर्फ ब्रा में थी.

में डेविल की कच भी करने सी रोक नहीं रही थी. में हैरान थी क एक अनजान आदमी ने मेरी कपड़े उतर दिए थय और में उसको रोक नहीं रही थी.

उस ने मुझे निचे बैठा दिए और अपनी पंत निचे क्र क अपना लुंड मेरी मुँह क सामने ले आया.

डेविल का लुंड देख क्र मुझे एक बात शॉक लगा.

डॉ एलन का लुंड अरविन्द सी बारे था लकिन ये डॉ एलन सी भी बारे था.

डेविल. मुँह खोलो....

में जानती थी क मुझे क्या करना है क्यों क में डॉ एलन क साथ एक बार पेहली ऐसा क्र चुकी थी.

में न्य माया को देखा तो माया ने हाँ में सर हिलाया.

में न्य डेविल का लुंड पकड़ा और मुँह में ले लिए और चूसने लगी.

कच दिएर क बढ़ उस ने मेरा सर पकड़ा और लुंड को मेरी गले तक घुसा दिए.. मेरा सांस बंद हो गया. डेविल का मोटा लुंड मेरी गले क अंदर तक उतर गया था, और पहर बहार निकल दिए

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में हाथ सी उसका लुंड पाकर क्र हिला रही थी और उसको मुँह में ले क्र चूस रही थी.

उस का हाथ मेरी सर पैर था. उस ने मेरी बाल पाकर रखे थय और वो अपनी मर्ज़ी सी मेरी सर को कण्ट्रोल क्र रहा था.

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उस ने मुझे ऊपर उठाया और मेरी ब्रा भी उतर दी.

अब में पूरी नंगी थी और डेविल भी अपने कपरव उतर चूका था.

माया. तुम लोग एन्जॉय करो में बहार वेट करती हूँ.

माया उठी और कमरे से बहार चली गयी.

क्यों क माया जानती थी क इस क बढ़ जो हो गए शायद प्रिय उस क सामने कम्फर्टेबले हो क्र न क्र पाए.

डेविल ने प्रिय को लेता दिए और उस की छूट पैर अपना लुंड रख क्र उस्सक क्लीट पैर रगड़ने लगा.

वो अपने लुंड सी मेरी क्लीट को रैगर रहा था. और मेरा जिस्म कंपता जा रहा था.

में पागल हो रही थी. में कण्ट्रोल करने की कोशिश क्र रही थी लकिन मुझ सी कण्ट्रोल नहीं हो रहा था.

आखिर मेरी मुँह सी वो शब्द निकल गए जो वो चाहता था.

प्रिय. अंदर डालो.....

डेविल. अरे यू सूरे.

प्रिय. हाँ अंदर डालो प्लीज..... अब मुझे सी और बर्दाश्त नहीं हो रहा. ....

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डेविल ने लुंड प्रिय की छूट पैर रखा और अंदर दबा दिए.

प्रिय की छूट पेहली हे गीली थी. दानी का आधा लुंड भट आसानी सी प्रिय की छूट में घुसा गया.

उस ने अपना लुंड मेरी छूट में घुसा दिए.

मुझे ऐसा लगा जैसी मेरी छूट में गरम रोड घुसा गया.

मुझे ऐसा सुकून ज़िन्दगी में कभी नहीं मिला जैसा सुकून मुझे उस वक़्त उसका लुंड अपनी छूट में ले क्र मिला था.

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वो धक्के लगाने लगा और मेरी ऊपर झुक क्र मुझे किश करने लगा.

डेविल अब धक्के लगा रहा था और प्रिय को छोड़ रहा था. और प्रिय की सिसकियाँ निकलने लगी थीं और कमरे की बहार बैठी माया मुस्कुरा रही थी.

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अब डेविल पूरा लुंड प्रिय की छूट में घुसा रहा था और उसकी ज़ोरदार चुदाई क्र रहा था.

उस का लुंड मेरी अंदर तक महसूस हो रहा था. मुझे इतना मज़ा आ रहा था जो में लफ़्ज़न में बयां नहीं क्र सकती थी.

में चाहती थी क वो और तेज़ करे.

मेरा जिस्म कांप रहा था और में झड़ने लगी थी

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प्रिय झाड़ गयी और डेविल थोड़ी दिएर क लिए रुक गया.

थोड़ी दिएर क बढ़ डेविल लेत गया और प्रिय को अपने ऊपर ले आया.

उस ने अपना लुंड प्रिय की छूट पैर रख क्र अंदर घुसा दिए और प्रिय उस क ऊपर बेथ गयी.

उसका लुंड मेरी छूट की गहराई रक घुस गया. उस ने मेरी गांड पैर हाथ रखा और मुझे ऊपर निचे करने लगा और में उस क लुंड पैर उछलने लगी.

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डेविल ने प्रिय को अपनी तरफ खेंचा और उसको हुग क्र लिए और अपनी कमर हिला क्र उसकी चुदाई स्टार्ट क्र दी.

डेविल ने एक हाथ सी प्रिय क बाल पाकर रखे थय और उसकी ज़ोरदार चुदाई क्र रहा था.

प्रिय की ज़ोरदार सिसकियाँ निकल रही थी. और वो एक बार पहर झाड़ चुकी थी.

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डेविल ने प्रिय को घोड़ी बनाया और उस क पीछे सी लुंड उसकी छूट में घुसा दिए

डेविल ने प्रिय क बाल पाकर क्र खेंच लिए और धक्के लगाना स्टार्ट क्र दिए.

प्रिय. आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह यस एससससस आह्ह्ह्हह्ह आअह्हह्ह्ह्हह आअह्हह्ह्ह्हह

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उस क हाथ मेरी कन्धुन पैर थय और वो ज़ोरदार धक्के मर रहा था.

उसका लुंड मेरी छूट की गहराई तक जा रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसी मेरी जिस्म का हर हिस्सा उस क धक्कुन को महसूस क्र रहा था.

मुझे थोड़ा थोड़ा दर्द भी हो रहा था और उस क हर धक्के क साथ मेरी चींख निकल रही थी.

मुझे यकीन हे नहीं हो रहा था क में एक बार पहर झड़ने वाली थी.

प्रिय एक बार पहर झाड़ चुकी थी.

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अब प्रिय का जिस्म उसका साथ चोर चूका था और वो बीएड क साथ लग चुकी थी.

दानी ज़ोरदार चुदाई क्र रहा था और अब वो भी झड़ने लगा था.

उस ने अपना लुंड बहार खेंचा और प्रिय को सीधा लेता क्र उस क मुँह क पास लुंड ला क्र बोलै.

मुँह खोलो.

प्रिय ने मुँह खोल दिए और दानी ने अपना सारा माल प्रिय क मुँह क अंदर निकल दिए.

में बीएड पैर लेती थी और मुँह खोल क्र एक अनजान आदमी क मेरी मुँह में झड़ने का वेट क्र रही थी.

और वो मेरी मुँह को अपने पानी सी भर रहा है.

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वो मेरी मुँह में झाड़ क्र अपने लुंड की तरफ इशारा क्र क बोलै.

मुँह में ले क्र साफ़ करो इस को.

मुझे पता नहीं किआ हुआ और में न्य उसका लुंड पाकर क्र अपने मुँह में लिए और उसको चूसने लगी.

और उस क पानी की आखरी बूँद तक साफ़ क्र दी.

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वो मेरी ऊपर झुका और मेरी होंतुन पैर किश क्र क बोलै.

तुम भट हॉट हो. में ने आज तक तुम जैसी हॉट लड़की नहीं देखि.

उस ने अपने कपड़े पहने और बहार चला गया.

मेरी हालत खराब थी और में बीएड पैर नंगी हे पररि थी.
 
Episode 14

मेरी हालत खराब हो चुकी थी.

में बीएड पैर नंगी पररि थी. मुझे अंदाज़ा भी नहीं था क में कितनी बार झड़ी थी.

मेरी छूट में जलन हो रही थी. और मेरा पेट दर्द क्र रहा था.

पहली बार मेरी छूट क गहराई तक लुंड घुसा था. मेरी धड़कन बरही हुई थी.

में न्य ऐसा मज़ा अपनी ज़िन्दगी में कभी महसूस नहीं किआ था.

मुझे दर्द था लकिन ये दर्द भी मज़ा दे रहा था. और ये मज़ा मुझे मेरी पति ने नहीं एक अनजान आदमी में दिए था जिस को में आज सी पेहली कभी नहीं मिली थी.

में हिल भी नहीं पा रही थी. में बस हरण हो क्र ये सोच रही थी क ऐसा मज़ा कभी मुझे अरविन्द दे पाए गए.

डेविल कमरे सी बहार जा चूका था लकिन में अब भी बीएड पैर हे पररि थी.

मेरी चेहरी पैर स्माइल थी.

दानी कमरे सी बहार निकला तो माया सामने बैठी थी.

माया. सो केसा रहा...

दानी. She's सो हॉट...

माया. वो खुश है.

दानी. ये तो तुम्हें उस सी पूछना चाहिए. ी थिंक ी दीद माय जॉब.

माया. थैंक यू दानी. तुम ने मेरी कहने पैर टाइम निकला.

दानी. It's ok. No नीड तो से थैंक्स. तुम मेरी दोस्त हो तुम्हारे लिए नहीं तो किस क लिए टाइम निकलूं गए

दानी चला गया और माया कमरे में आई.

प्रिय अब भी बीएड पैर नंगी पररि मुस्कुरा रही थी.

माया. तुम्हरी स्माइल देख क्र मुझे लग रहा है क तुम ने भट एन्जॉय किआ.

प्रिय ने हाँ में सर हिलाया.

माया. सो तेल्ल में हाउ वास् डेविल.

प्रिय. हे वास् अमेजिंग...

माया. वो तो मुझे पता है. तुम ने एन्जॉय किआ. तुम्हारी चींखुन की आवाज़ बहार तक आ रही थी.

प्रिय शर्मा गयी.

प्रिय. मुझे आज तक इतना मज़ा कभी नहीं आया.

माया. बस यही में पूछना चाहती थी. अब तुम्हें पता चला क रियल सेक्स क्या है.

प्रिय. तो बे ऑनेस्ट माया. अरविन्द सी नफरत सी होने लगी है. उस ने आज तक कभी मेरी परवाह नहीं की.

माया. अरविन्द को कभी एहसास नहीं होने देना क जो वो करता है तुम्हें उस सी ज़्यादा कच पता है.

अगर उसको ज़रा भी शक हो गया तो तुम कभी एन्जॉय नहीं क्र पाओ गई.

प्रिय. अगर तुम मुझे ऐसी हे गाइड करती रहीं तो में अरविन्द को कभी शक नहीं होने दूँ गई.

माया. और वो तुम्हारे साथ जो भी करे उसको करने देना. अगर तुम उसको रोको गई तो उसको शक हो गए.

प्रिय. समझ गयी.

प्रिय ने गोविन्द को कॉल की और गोविन्द ने आ क्र प्रिय को पिक किआ और प्रिय घर चली गयी.

प्रिय घर पोहंची तो अरविन्द ऑफिस सी घर आ गया था.

अरविन्द. कहाँ गयी थी तुम.

प्रिय. में माया क घर गयी थी.

अरविन्द. कोण माया...

प्रिय. आपको बताया जो था अनिल की दोस्त माया. और आदित्य भाई और अनिल ने भी तो आपको बताया था

अरविन्द. हाँ यद् आया. तुम्हें सोसाइटी क तोर तरीके सीखने क लिए.

ठीक है. टाइम सी घर आ जाया करो.

प्रिय. ग ठीक है.

गाओं में रॉकी प्रिय क बाप भूषण क घर गया.

हरिया. साहब वो रहा भूषण का घर.

रॉकी. ठीक है तुम यहाँ हे रुको में आता हूँ.

रॉकी भूषण क घर चला गया.

भूषण ने रॉकी को देखा तो हैरान रह गया.

भूषण. अरे बीटा आप यहाँ.

रॉकी. हाँ में देखना चाहता था क तुम लोग कहाँ रहते हो.

भूषण. बीटा आओ न बैठो.

रॉकी. नहीं में बैठने नहीं आया.

औरत. सुनिए ग कोण आया है.

रॉकी. बलराम साहब का बीटा आया है. प्रिय का देवर..

औरत भगति हुई बहार आई.

औरत. मेरी प्रिय भी आई है क्या.

भूषण. में न्य बताया था न प्रिय अमेरिका गयी है.

औरत. बीटा आप हमारे घर आय हमारे तोय भाग खुल गए

रॉकी. ज़्यादा खुश होने की ज़रूरत नहीं है. में सिर्फ ये देखने आया हूँ क हरी अंकल ने कहाँ सी एक लड़की को उठा क्र बलराम हौज़े की बहु बना दिए.

भूषण. बीटा आप बार्रे लोग हो हम छोटे लोग हैं.

में भी नहीं चाहता था ये शादी हो लकिन हम मुखिया ग की बात का इंकार नहीं क्र सकते.

और मुखिया ग ने कहा था क हम शादी क बढ़ प्रिय सी या उस क घर वळून सी कोई रिश्ता नहीं रखें गए.

रॉकी. तो ठीक हे तो कहा था हरी अंकल ने. तुम लोगन की तो ये ओकात हे नहीं क तुम हम लोगन सी रिश्ता रख सको.

रॉकी वापस चला गया.

हरिया. साहब देख लिए आप ने भूषण का घर.

रॉकी. हाँ देख लिए. अब मुझे तुम्हारा घर भी देखना है.

हरिया. ठीक है साहब में आपको अपने घर ले क्र चलता हूँ.

हरिया रॉकी को अपने घर ले क्र गया.

हरिया ने रॉकी को एक कमरे में बैठाया.

हरिया. तनु पानी लाओ साहब आए हैं.

कच दिएर क बढ़ एक औरत पानी ले क्र आई.

रॉकी ने उस औरत को देखा तो रॉकी देखता हे रह गया.

हरिया. साहब ये तनु है. मेरी बीवी.

रॉकी सोचते हुए इस गाओं में तो हर औरत एक सी बढ़ क्र एक है.

तनु.

हरिया की बीवी

आगे 32. भट हे सुन्दर थी. गाओं में रहने की वजह सी पढ़ी लिखी नहीं है. और सिर्फ घर का काम करती है.

रॉकी. हरिया. भाबी ग तो भट सुन्दर हैं

तनु शर्मा गयी.

हरिया. तुम जाओ. और वो अपने कमरे में चली गयी..

रॉकी. तुम्हारे घर में और कोण कोण है.

हरिया. मेरी बचे स्कूल जाते हैं और मेरी माँ हैं वो बीमार हैं.

रॉकी. तो दिन में भाबी ग अक़्ली होती हैं.

हरिया. हाँ दिन में वो घर क काम करती है और माँ का दहन रखती है.

रॉकी. ाचा ठीक है चलो.

हरिया. साहब छै तो पी लेती.

रॉकी. नहीं पहर कभी पियें गए. अभी चलो.

रॉकी और हरिया वापस हवेली क लिए निकल गए

रॉकी इस गाओं में जिस औरत को भी देख रहा था वो एक सी बढ़ क्र एक थी.

रॉकी की नज़र बस गाओं की ओर्टन पैर हे थी.

रॉकी हवेली वापस पोहंच गया.

हरिलाल. देख लिए अरविन्द का सुसराल.

रॉकी. हरी अंकल आप ने ाचा नहीं किआ.

हरिलाल. क्या मतलब

रॉकी. आप ने कहाँ सी लड़की को उठा क्र बलराम हाउस की बहु बना दिए.

हरिलाल. बलराम ने मुझे कहा था क कोई पाहि लिखी सीढ़ी सदी लड़की चाहिए.

में न्य उसकी डिमांड पूरी की.

और वैसी भी वो उस घर में उसी वक़्त तक है जब तक वो अरविन्द क बचे को जनम नहीं दे देती. उस क बढ़ तो उअस ने वापस इसी गाओं में आ जाना है.

रॉकी. क्या.....

हरिलाल. लगता है अरविन्द और बलराम ने तुम्हें पूरी बात नहीं बताई. हक़ीक़त यही है क प्रिय सिर्फ वहां बचा पैदा करने क लिए है.

रॉकी को इस बात का पता नहीं था क्यों क बलराम क इलावा कोई नहीं रॉकी सी बात करना पसंद नहीं करता था.

रॉकी. ठीक है. पहर तो कोई मसला नहीं. डैड और अरविन्द ने ाचा प्लान किआ है. ी लिखे आईटी.

उस की असल जगह यही गाओं है.

विशाल शर्मा क बचूं को पढ़ा रहा था.

बचूं क एक्साम्स थय इस लिए विशाल उनको ज़्यादा टाइम दे रहा था.

विशाल यूनिवर्सिटी सी सीधा घर ा आजाता और बचूं को पढ़ाने लगता.

माला और शर्मा दोनो विशाल सी भट खुश थय. विशाल अब उनका फॅमिली मेंबर बन चूका था.

बचूं क एक्साम्स कम्पलीट हो गए और बचूं को छुटियाँ हो गयी और विशाल भी इजी हो गया.

एक दिन विशाल और उस क दोस्तुं ने क्लब जाने का प्लान बनाया.

रात को डिनर क बढ़ विशाल और उस क दोस्त क्लब चले गए.

विशाल क्लब में बैठा था और बाकि दोस्त डांस क्र रही थय.

विशाल को एक आवाज़ आई.

Hi. विशाल....

विशाल ने पीछे मुरर क्र देखा तो ये पल्लवी थी.

विशाल. Hi पल्लवी राइट.

पल्लवी. पिछली बार तुम चले गए और हम बात नहीं क्र सके.

विशाल. मुझे आईडिया नहीं था क तुम बात करना चाहती हो.

पल्लवी. कैन ी सीट विथ यू.

विशाल. सूरे...

पल्लवी..

आगे 28

देखने में खूबसूरत है. लकिन भट मोती है. उस क फ्रेंड्स उस क मोटा होने का मज़ाक ुरते हैं.

पल्लवी. तुम ने लास्ट टाइम जो बोलै था.

विशाल. क तुम खूबसूरत हो....

पल्लवी. हाँ... तुम कहीं मेरा मज़ाक तो नहीं ुर्रा रही थय न. मुझ जैसी मोती लड़की किस को खूबसूरत लगे गई.

विशाल. में ने बिलकुल सच कहा था. तुम्हारी बॉडी किसी है इस सी मुझे कोई फरक नहीं परता.

तुम्हें भी ऊपर वाले ने बनाया है. एंड बिलीव में तुम ऐसी भी भट खूबसूरत हो.

पल्लवी. थैंक यू. तुम मुझ सी भट छोटे हो लकिन बातें भट मातुरे हैं तुम्हारी.

वैसी हाउ ओल्ड अरे यू.

विशाल. ी ऍम 23.

नीस तो मीट यू पल्लवी ने हाथ आगे बढ़ाया

नीस तो मीट यू तू. विशाल ने पल्लवी सी हाथ मिलाया.

पल्लवी. सो we're फ्रेंड्स नाउ राइट.

विशाल. यस. एंड ी गेस ी कैन आस्क फॉर योर नंबर राइट.

पल्लवी. येह सूरे.

पल्लवी ने विशाल को अपना फोन नंबर दे दिए

कच दिएर क बढ़ विशाल और उस क दोस्त क्लब सी वापस आ गए.

रात को विशाल आ क्र घर पैर सो गया

अगले दिन संडे था और विशाल घर पैर हे था.

विशाल का फोन बजा.

ये ललिता की कॉल थी.

ललिता. Hello विशाल तुम फ्री हो क्या.

विशाल. हाँ फ्री हूँ.

ललिता. Ok मेरी घर आ जाओ. में न्य तुम्हें कहा था न में तुम्हें टुइशनस दिलवाएं गई.

विशाल. अभी आ जाओं क्या.

ललिता. हाँ अभी आ जाओ. में तुम्हरा इंतज़ार क्र रही हूँ.

विशाल. Ok में आ रहा हूँ.

विशाल घर क अंदर गया.

विशाल. माला आंटी में कच काम सी जा रहा हूँ.

माला. कहाँ जा रहा है.

विशाल. एक टूशन मिली है उन सी मिलने जा रहा हूँ

माला. ठीक है. शाम को जल्दी आ जाना

विह्सल. ग आंटी.

विशाल ललिता क घर क लिए निकल गया.
 
Episode 15

विशाल का फोन बजा.

ये ललिता की कॉल थी.

ललिता. Hello विशाल तुम फ्री हो क्या.

विशाल. हाँ फ्री हूँ.

ललिता. Ok मेरी घर आ जाओ. में न्य तुम्हें कहा था न में तुम्हें टुइशनस दिलवाएं गई.

विशाल. अभी आ जाओं क्या.

ललिता. हाँ अभी आ जाओ. में तुम्हरा इंतज़ार क्र रही हूँ.

विशाल. Ok में आ रहा हूँ.

विशाल घर क अंदर गया.

विशाल. माला आंटी में कच काम सी जा रहा हूँ.

माला. कहाँ जा रहा है.

विशाल. एक टूशन मिली है उन सी मिलने जा रहा हूँ

माला. ठीक है. शाम को जल्दी आ जाना

विह्सल. ग आंटी..

रॉकी हरिलाल की हवेली पैर बैठा था और हरिलाल गाओं में कच लोगन सी मिलने गया था

हरिलाल की बीवी कामिनी घर क काम क्र रही थी.

रॉकी उठा और कामिनी क पास चला गया.

कामिनी. तू भी अपने हरी अंकल क साथ चला जाता न. यहाँ अकेली बोर हो रहा है.

रॉकी. आप क होते हुए बोरियत किसी.

कामिनी. क्यों मेरी साथ होते क्यों बोर नहीं होता.

रॉकी. आप से नज़र हेट गई तो हे बोर हूँ गए न.

कामिनी. तू कहना क्या चाहता है.

रॉकी. में ये कह रहा हूँ क आप इतनी सुन्दर हो आप को देखता रहता हूँ तो बोरस नहीं होता.

कामिनी. ाचा तुझे इतनी सुन्दर लगती हूँ में.

रॉकी. हरी अंकल क सामने तो नहीं बोल सकता न. लकिन दिल करता है क आपको प्यार करूं.

कामिनी. मुझ में तुझे ऐसा क्या खास नज़र आ गया.

रॉकी. आप में सब कच खास है. बस देखने वाली आँख चाहिए.

कामिनी. और वो आँख तेरी है.

रॉकी. आंटी आप एक बार मौका दो. आपको इतना प्यार करूं गए क आप खुश हो जाओ गई.

कामिनी. और तेरी हरी अंकल का क्या.

रॉकी. आप हरी अंकल को तो नहीं बताओ गई न

कामिनी. और अगर में न्य बता दिए तो.

रॉकी. क्या आप चाहती हो क हरी अंकल मुझे यहाँ सी भेज डैन.

कामिनी. नहीं.

रॉकी. तो पहर हरी अंकल को कच मत बताना.

कामिनी. ठीक है नहीं बताओं गई.

रॉकी. हरी अंकल घर नहीं हैं कमरे में चलो न.

कामिनी. नहीं हरिया घर पैर है अभी.

रॉकी. तो हरिया को कहीं भेज दो न. मालिनी भी अपने पति क साथ कहीं गयी है.

कामिनी ने हरिया को आवाज़ दी.

हरिया ज़रा जा पता क्र क आ मुखिया ग कितनी दिएर में वापस आ रही हैं.

हरिया. ग मालकिन. हरिया निकल गया.

कामिनी चलो कामिनी कमरे में जाने लगी और रॉकी उस क पीछे चल दिए.

कामिनी अभी कमरे क बहार हे पोहकनही थी क रॉकी ने उसको पाकर लिए और देवर सी लगा दिए.

इस सी पहले क कामिनी कच भी बोल पति रॉकी ने अपने होंठ कामिनी क होंतुन सी लगा दिए और कामिनी को किश करने लगा.

कामिनी क पास और कोई रास्ता नहीं बचा था.

उस क होंतुन में भी हरकत आने लगी और वो किश में रॉकी का साथ देने लगी.

और दोनो में किसिंग स्टार्ट हो गयी.

रॉकी अब कामिनी क होंतुन को चूस रहा था और कामिनी भी रॉकी का पूरा साथ दे रही थी.

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रॉकी ने कामिनी की साड़ी का पल्लू सरका दिए और उस क चेस्ट को और उस क बूब्स को किश करने लगा.

रॉकी ने कामिनी क नई निप्पल्स उस क ब्लाउज सी बहार निकल दिए और उनको छुआ लिए.

कामिनी सिसक गयी और रॉकी उस क मम्मी चूसने लगा.

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कच दिएर तक रॉकी कामिनी क मम्मी चुस्त रहा और उस क बढ़ कामिनी ने रॉकी को धक्का दिए और अपने कमरे की तरफ चली गयी

रॉकी कामिनी क पीछे उस क कमरे में चला गया और उसको बीएड पैर लेता क्र उस क ऊपर आ गया.

रॉकी ने एक बार पहर उस क होंतुन को चूमना शरू क्र दिए और कामिनी भी रॉकी का साथ देने लगी.

अब रॉकी कामिनी क जिस्म को चूमने लगा.

कभी रॉकी उसको किश करता और उस क मम्मी दबाता और कबि उसका जिस्म छूने लगता

कशी उस की गर्दन चेस्ट और बाकि जिस्म को चूम रहा था

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दोनो का प्यार अभी शिद्दत पाकर रहा था क हरिया की आवाज़ आई.

मालकिन मालिक आ गए हैं

कामिनी ने रॉकी को धक्का दे क्र अपने ऊपर सी हटा दिए और भाग क्र कमरे सी बहार चली गयी.

हरिया हॉल में था. और हरिलाल बैठा हुआ था.

कामिनी. हरिया जा मालिक क लिए पानी ले क्र आ.

हरिया. किचन में चला गया और कामिनी हरिलाल क साथ आ क्र बेथ गयी.

कच दिएर क बढ़ रॉकी भी बहार आ गया.

रॉकी और कामिनी एक दूसरी को देख क्र मुस्कुराने लगी.

सिटी में.

प्रिय अपने कमरे में बैठी थी. प्रिय डेविल क साथ गुज़ारे हुए टाइम क बारे में सोच रही थी.

उस ने अपनी ज़िन्दगी में ऐसा मज़ा कभी महसूस नहीं किआ था जैसा मज़ा उसको डेविल ने दिए था.

प्रिय एक तरफ डेविल क बारे में सोच रही थी और दूसरी तरफ अरविन्द क बारे में सोच रही थी.

प्रिय को एहसास हो रहा था क जो अरविन्द उस क साथ क्र रहा था वो ज़ुल्म था.

अरविन्द को प्रिय की सटिस्फैक्शन का कोई एहसास नहीं था.

वो चाहती थी क अरविन्द को अपने करीब भी न आने दी लकिन उसको माया की बात यद् आ गयी क अगर उस ने अरविन्द को कच करने सी रोका तो अरविन्द को शक हो जाए गए.

प्रिय यही सब सोच रही थी क उसको एक मैसेज मिला.

Hi....

प्रिय ने देखा तो ये नंबर उस क पास नहीं था.

प्रिय ने रिप्लाई किआ

Who's तेरे....

अभय हेरे..... उधर सी रिप्लाई आया.

कोण अभय प्रिय ने लिखा.

अमेरिका वाला अभी महिंदर का बीटा... अभी....

प्रिय.... ओह सॉरी. मेरी पास तुम्हारा नंबर नहीं था.

अभी. इतस ok... किसी हो आप.

प्रिय. ी ऍम गुड. तुम्हें मेरा नंबर कहाँ सी मिला.

अभी. में न्य अनिल भाबी सी लिए.... वहां सब किसी हैं.

प्रिय. सब अचे हैं. तुम बताओ वहां सब किसी हैं. अंकल आंटी अनिल....

अभी. यहाँ भी सब ठीक हैं..... अरविन्द भाई किसी हैं

प्रिय. अरविन्द भी ठीक हैं.....

अभी. आप तो वापस जा क्र भूल हे गयीं

प्रिय. नहीं में नहीं भूली लकिन तुम लोगन सी बात करने का कोई सोर्स हे नहीं था. मेरी पास कसी का नंबर हे नहीं था.

अभी. कोई बात नहीं. अब मेरा नंबर आ गया न. बात क्र लिए करें

प्रिय. हाँ ज़रूर बात करूं गई.

अभी. टेक केयर bye....

अभी सी बात क्र क प्रिय को अभी की वो नज़रें यद् आ गयीं जिन सी वो प्रिय को देखता था.

प्रिय को ये भी यद् आया क किसी वो और अभी एक दूसरे को न जानते हुए भी एक दूसरे की तरफ अत्त्रक्ट हो रही थय.

प्रिय ने सोचा क शायद उसको अभी क साथ कच और टाइम स्पेंड करना चाहिए था लकिन अब दिएर हो चुकी थी.

गाओं में.

रॉकी. हरिया मेरी बात सुनो.

हरिया. ग साहब...

रॉकी. तुम सी एक ज़रूरी बात करनी है. लकिन वादा करो तुम हरी अंकल को कच नहीं बताओ गए.

हरिया. ठीक है साहब में वादा करता.

रॉकी. मुझे तुम सी कच चाहिए...

हरिया. ग साहब बताइये क्या चाहिए आपको.

रॉकी. मुझे तनु चाहिए....

हरिया. क्या.....

रॉकी. मुझे तुम्हरी पत्नी तनु चाहिए. और उस क लिए में तुम्हें मुँह मांगी कीमत दूँ गए.

हरिया. साहब वो मेरी पत्नी है आप किसी बातें क्र रही हैं...

रॉकी. में तुम्हें एक रात क लिए 1 लाख दूँ गए.

एक लाख सुन क्र हरिया क मुँह में पानी आ गया.

रॉकी. अछि तरह सोचो हरिया.. इतना पैसा तुम ने कभी नहीं देखा हो गए. सिर्फ एक रात की तो बात है.

विशाल ललिता की कॉल सुन कर उस क घर क लिए निकल गया.

विशाल ललिता क बताए हुए एड्रेस पैर पोहंचा तो उस ने दूर बेल्ल बजे..

ललिता ने दरवाज़ा खोला.

ललिता. आ जाओ विशाल....

विशाल ललिता क साथ अंदर चला गया.

तुम बैठो में तुम्हारे लिए कच लती हूँ.

ललिता किचन में चली गयी और कच दिएर क बढ़ 2 गिलास जूस बना क्र ले आई.

उस ने एक गिलास विशाल को दिया और दूसरा गिलास खुद लिए और बेथ गयी.

दोनो जिउस पीने लगी.

विशाल. आप ने बताया था क आप क पास मेरी लिए कोई काम है.

ललिता. जल्दी क्या है पेहली जूस तो पी लो.

विशाल ने जूस खतम क्र क गिलास रख दिए.

ललिता. मेरी पास तुम्हरी लिए काम है.

ये बताओ तुम क्या कम क्र सकते हो.

विशाल. में ने सिर्फ बचूं को टूशन हे पढ़ाई है.

ललिता. ठीक है तुम टूशन हे पढ़ाओ गए.

लकिन आज मेरी बचे घर नहीं हैं.

वो कहीं बहार गए हैं.

तुम कल आ जाना में तुम्हें बचूं सी मिलवा दूँ गई.

विशाल. ठीक है जब बचे घर हों आप मुझे कॉल क्र दिज्ये गए में आ जाओं गए.

ललिता. ठीक है. वैसी कल में क्लब जा रही हूँ अगर चाहो तो वहां आ जाना. और वहां सी मेरी साथ हे आ जाना.

विशाल. नहीं में कल क्लब नहीं आ सकता.

ललिता. Ok में तुम्हें कॉल करूं गई.

विशाल. ठीक है अब में चलता हूँ

विशाल ललिता क घर सी निकला और वापस चला गया.

माला. मिल गया ट्यूशन.

विशाल. हाँ बचूं सी मिलने कल जाना है.

माला. ाचा है. कल बचूं का रिजल्ट भी आ रहा है. जल्दी घर आ जाना.

विशाल. ग आंटी.
 
Episode 16

रॉकी. तो हरिया क्या सोचा तुम ने मेरी ऑफर क बारे में.

हरिया. साहब ग में अपनी पत्नी को किसी आप क पास भेज सकता हूँ.

रॉकी. सिर्फ एक रात की बात है. और तुम्हें में इस क पेसय दे रहा हूँ.

हरिया. साहब आप पैसा तो काफी दे रही हो.

रॉकी. तो पहर दिक्कत क्या है.

हरिया. दिक्कत ये है साहब ग क तनु नहीं मने गई.

रॉकी. तो उससे मानना तुम्हारी ज़िमेदारी है न.

हरिया. ठीक है साहब ग में तनु सी बात करूं गए. लकिन मुझे पेसय एडवांस चाहियें

रॉकी. में तुम्हें आधे पेसय एडवांस दूँ गए और आधे पेसय काम होने क बढ़ दूँ गए.

हरिया. लकिन साहब ग इस बात का किसी को पता नहीं चलना चाहिए.

रॉकी. किसी को पता नहीं चले गए. ये बात हम दोनो क दरम्यान रही गई.

हरिया. ठीक है साहब ग में तनु सी बात करता हूँ

रॉकी हवेली की छत्त पैर चला गया.

कच दिएर क बढ़ कामिनी हवेली की छत्त पैर आ गयी.

कामिनी. तुम हरिया सी क्या बात क्र रही थय.

रॉकी. कच नहीं बस उस सी गाओं की इनफार्मेशन ले रहा था.

कामिनी. तुम्हारे हरी अंकल कच दिन में शहर जा रही हैं.

रॉकी. ाचा शहर क्यों जा रही हैं.

कामिनी. उनको वहां कच काम है.

रॉकी. लकिन आप ये मुझे क्यों बता रही हो.

कामिनी. तुम्हें इस लिए बता रही हूँ क्यों क में यहाँ अकेली हूँ गई.

तुम मेरी साथ अकेली रहना चाहते थय न

रॉकी. ी लव यू कामिनी आंटी. आप ने तो दिल खुश क्र दिए.

बस आप हरी अंकल को जाने दो पहर में आपको बताओं गए क असल ख़ुशी किस को कहते हैं

कामिनी. लकिन हरी अंकल को शक नहीं होने देना.

रॉकी. उनको शक नहीं हो गए. कामिनी आंटी एक बात बोलूं.

कामिनी. हाँ बोलो.

रॉकी. क्या आप हरिया की पत्नी तनु को यहाँ बुला सकती हो.

कामिनी. क्यों. उसको क्यों बुलाना चाहते हो तुम.

रॉकी. कामिनी आंटी मुझे वो अछि लगती है. में उस क साथ एक रात बिताना चाहता हूँ

कामिनी. लकिन वो नहीं मने गई.

रॉकी. आंटी आप उस सी बात तो करो. में उसको मुँह मांगी कीमत देने क लिए तैयार हूँ

कामिनी. एक तरफ तू मेरी साथ टाइम गुजरने का बोल रहा है और दूसरी तरफ तनु.

रॉकी. ारी मेरी प्यारी कामिनी आंटी आप सी तो प्यार है न.

उस क साथ तो अपनी ज़रूरत पूरी करनी है.

कामिनी. अगर उस ने मुखिया ग को कच बता दिए तो. या हरिया को पता चल गया तो.

रॉकी. हरिया को आप मुझ पैर चोर दो आप बस तनु को मनाओ.

कामिनी. ठीक है में आज शाम हे उसको यहाँ बाल्टी हूँ.

विशाल यूनिवर्सिटी सी फ्री हो क्र अपनी जॉब पैर चला गया.

जॉब सी फ्री हो क्र विशाल ने ललिता क घर जाना था.

विशाल ने ललिता को कॉल की

विशाल. Hi ललिता ग. आप क बचे घर पैर हैं क्या. में अभी आ जाओं

ललिता. नहीं अभी तो बची घर पैर नहीं हैं. तुम ऐसा करो रात को क्लब आ जाना. वहां सी मेरी साथ हे घर आ जाओ. बचूं सी भी मिल लेना.

विशाल. ठीक है में आ जाओं गए.

विशाल घर चला गया और चेंज क्र क क्लब चला गया.

आज विशाल क साथ उस क दोस्त नहीं थय क्यों क विशाल सिर्फ ललिता से मिलने गया था.

विशाल और ललिता ने कच टाइम क्लब में बिताया और पहर विशाल ललिता क साथ उस क घर चला गया.

ललिता खुद कार ड्राइव क्र रही थी. ललिता ने कार एक रेस्टोरेंट क बहार रोक दी.

ललिता. चलो....

विशाल. कहाँ चलना है...

ललिता. डिनर क लिए.

विशाल. नहीं उस्सकी ज़रूरत नहीं है.

ललिता. क्यों ज़रूरत नहीं है. हम इतने टाइम सी एक दूसरे को जानते हैं. एटलीस्ट एक डिनर तो क्र सकते हो न मेरी साथ.

विशाल ललिता क साथ चला गया.

ललिता ने डिनर आर्डर किआ और दोनो ने डिनर किआ और पहर ललिता क घर पोहंच गए.

जब वो लोग घर पोहंची तो रात क 10 बज चुके थय

ललिता क घर कोई भी नहीं था. ललिता ने दरवाज़ा खोला और विशाल को अंदर ले आई.

ललिता ने विशाल को बैठाया और अंदर चली गयी और 2 ड्रिंक्स ले क्र आई. उस ने एक ड्रिंक विशाल को दी और एक खुद ली.

ड्रिंक पी क्र विशाल बोलै. ललिता ग आप क बचे कहाँ हैं

ललिता. पेहली तुम मुझे एक सवाल का जवाब दो.

विशाल. पूछिए.

तुम जहाँ जॉब करते हो वहां तुम्हरी सैलरी कितनी है.

विशाल. में part टाइम जॉब करता हूँ इस लिए वो मुझे 7 थाउजेंड देते हैं.

ललिता. और जहाँ टूशन पढ़ाते हो वहां.

विशाल. में सैलरी नहीं लेता. में शर्मा अंकल क घर रहता हूँ और टूशन क बदले वो मुझ सी कमरे का रेंट नहीं लेते और खाना भी उन क साथ हे खता हूँ.

ललिता. और अगर तुम किसी और जगह टूशन पढ़ाओ गए तो तुम्हारी क्या एक्सपेक्टेशंस हैं. कितना चार्ज करो गए.

विशाल. 5 थाउजेंड. पैर मंथ.

ललिता. देखो विशाल में न्य तुम सी झूट बोलै था. मेरी बचे यहाँ नहीं हैं.

विशाल. तो कहाँ हैं आप क बचे

ललिता. वो फॉरेन में स्टडी क्र रही हैं. और मेरी हस्बैंड भी वहां हे हैं. में यहाँ बिज़नेस देखती हूँ. अकेली.

विशाल. तो पहर आप ने मुझे क्यों बुलाया.

ललिता. मेरी पास तुम्हरे लिए टूशन तो नहीं लकिन मेरी पास तुम्हरे लिए एक काम है.

विशाल . क्या काम है.

ललिता. अगर तुम मेरा ये काम करो गए तो में तुम्हें एक मंथ का 5 थाउजेंड नहीं 1 दिन का 10 थाउजेंड दूँ गई.

विशाल. ऐसा क्या काम है जिस क इतने ज़्यादा पेसय मिलाएँ गए

ललिता. मेरी साथ आओ.

ललिता ने विशाल का हाथ पकड़ा और अपने कमरे में लय गयी. और बीएड पैर बैठा दिए.

ललिता विशाल क साथ डेथ गयी.

ललिता. तुम कभी किसी औरत क साथ अकेली हुए हो.

विशाल. कभी नहीं.

ललिता. कभी सेक्स किआ है.

विशाल. नहीं...

ललिता. पोर्न मूवी तो देखि हे हो गई.

विशाल. हाँ देखि है....

ललिता. बस तुम ने वोही सब मेरी साथ करना है.

विशाल ने ये सुना तो उस क होश ुर्र गए.

विशाल. ये आप किसी बातें क्र रही हैं.

ललिता. यही काम है तुम्हारे लिए. और मुझे यकीन है क तुम ये काम भट अचे सी करो गए.

ललिता विशाल क सीने सी हाथ घूमते हुए उस क लुंड पैर हाथ ले आई और पंत क ऊपर सी उसका लुंड सहलाने लगी

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पहली बार विशाल क लुंड को किसी ने टच किआ था. उस क जिस्म में बिजली दौर गयी.

विशाल. ललिता ग ये आप क्या क्र रही हैं

ललिता ने विशाल क मुँह पैर हाथ रख क्र उसको चुप करवा दिए और पंत क ऊपर से विशाल क लुंड क साथ खेलने लगी.

ललिता. में आज तुम्हें बताओं गई क एक औरत को किसी खुश किआ जाता है.

तुम बचूं को टूशन देते हो आज में तुम्हें टूशन दूँ गई.

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ललिता. तुम ने आज एक कभी किसी औरत को छुआ तक नहीं.

विशाल. नहीं.

ललिता ने विशाल का हाथ पकड़ा और अपनी ड्रेस क निचे सी अपनी छूट पैर रख दिए और बोली

लो छू लो आज. ये तुम्हरी जन्नत है....

ललिता की छूट एक डैम गरम थी. और बिलकुल नरम और मुलायम थी

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ललिता. सेहलाओ इसको...

विशाल हलके हथुन सी ललिता की छूट को सहलाने लगा. उस क दिमाग़ की बत्ती गुल हो चुकी थी.

उस को कच भी समझ में नहीं आ रहा था.

उस क सामने बस एक औरत बैठी थी और विशाल जैसा वो बोल रही थी वैसा करता जा रहा था.

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ललिता. केसा लग रहा है.

विशाल. भट ाचा लग रहा है.

ललिता. तो थोड़ा और ाचा फील करो.... ललिता ने विशाल का हाथ अपनी पंतय क अंदर घुसा दिए.

ललिता की छूट गीली थी और अब विशाल को ललिता की छूट का गीला पैन और गर्मी अचे सी महसूस हो रही थी.

अब विशाल का जिस्म गरम हो रहा था और उस क लुंड में तनाव आ रहा था.

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ललिता खरी हो गयी और उस ने विशाल को धक्का दे क्र बीएड पैर लेता दिए.

ललिता विशाल की गॉड में बेथ गयी और उस क हाथ पाकर क्र अपनी गांड पैर रखे और अपनी गांड को विषाल क लुंड पैर रगड़ने लगी.

विशाल का लुंड खरा होता जा रहा था.

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अब ललिता ने अपनी ड्रेस ऊपर उठा दी और पहर सी अपनी गांड को विशाल क लुंड पैर घिसने लगी.

विशाल ललिता की गांड को देख रहा था और पंतय क स्ट्राप ललिता की गांड की लकीर सी ऊपर जा रहा था.

ये नज़ारा विशाल को पागल बना रहा था

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ललिता अब विशाल की तरफ मुर्री और विशाल क ऊपर आ गयी. वो एक बार पहर विशाल क ऊपर बेथ गयी और अपनी छूट को विशाल क लुंड पैर रेगरबे लगी.

ललिता क मुँह सी हलकी हलकी सिसकियाँ भी निकल रही थीं.

विशाल क हाथ ललिता की गांड पैर थय और वो ललिता की गांड को फील क्र रहा था.

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ललिता विशाल क लुंड पैर अपनी छूट को रगरती जा रही थी और विशाल को भी भट मज़ा आ रहा था.

ललिता विशाल क ऊपर झुक गयी और उस ने विशाल क होंतुन पैर अपने होंठ रख दिए

विशाल क होंतुन सी ललिता क होंठ टच होते हे विशाल को बिजली का झटका लगा और उसका लुंड एक डीएम तन्न गया.

ये विशाल की ज़िन्दगी की पहली किश थी. विशाल ने ऐसा पेहली कभी फील नहीं किआ था.

ललिता ने विशाल क होंठ चूमे और पहर सी अपनी छूट को उस क लुंड पैर रगड़ने लगी.

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ललिता ने अपनी पंतय उतर दी और एक बार पहर विशाल क होंतुन को चूमा और उस क मुँह पैर आ क्र बेथ गयी.

ललिता अपनी छूट को विशाल क होंतुन क पास ले आई और उस क होंतुन पैर रख दिए.

विशाल पोर्न देखता था इस लिए वो जनता था क ललिता क्या चाहती है. उस ने अपनी ज़ुबान ललिता की छूट पैर लगा दी और चाटने लगा

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ललिता अपनी कमर हिला क्र विशाल से छूट चटवा रही थी और उस क बालून को पाकर क्र उस क सर को अपनी छूट की तरफ खेंच रही थी.

उस की सिसकियाँ निकल रही थीं और तेज़ होती जा रही थीं

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ललिता. आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी हे चटूओ आह्ह्ह्हह्ह रुकना मत्तट आअह्ह्ह्हह ललिता का जिस्म कम्पनी लगा और उस अपना हाथ अपने मुँह पैर रख लिए और अपनी सिसकियाँ कण्ट्रोल करने लगी.

ललिता झाड़ गयी थी.

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वो विशाल क ऊपर सी उठ गयी.

ललिता. आज क लिए इतनी टूशन काफी है. I'll सी यू नेक्स्ट टाइम....

गाओं में.

तनु. मालकिन ये आप क्या बोल रही हैं

कामिनी. तुझे ये करने क पेसय मिलाएँ गए. जितने तू चाहे गई.

तनु. नहीं नहीं मालकिन में ये नहीं क्र सकती.

कामिनी. अछि तरह सोच ले तनु. ऐसा मौका बार बार नहीं मिलता.
 
Episode 17

ललिता अपनी कमर हिला क्र विशाल से छूट चटवा रही थी और उस क बालून को पाकर क्र उस क सर को अपनी छूट की तरफ खेंच रही थी.

उस की सिसकियाँ निकल रही थीं और तेज़ होती जा रही थीं

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ललिता. आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी हे चटूओ आह्ह्ह्हह्ह रुकना मत्तट आअह्ह्ह्हह ललिता का जिस्म कम्पनी लगा और उस अपना हाथ अपने मुँह पैर रख लिए और अपनी सिसकियाँ कण्ट्रोल करने लगी.

ललिता झाड़ गयी थी.

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वो विशाल क ऊपर सी उठ गयी.

उस ने विशाल की पंत खोली और निचे क्र दी. विशाल का पहले सी खरा लुंड बहार आ गया.

ललिता निचे बेथ गयी और विशाल क लुंड को चाटने लगी.

ललिता. वाओ मुझे तो अंदाज़ा हे नहीं था क तुम्हारा इतना बारे हो गए.

ललिता विशाल क लुंड को अपनी ज़ुबान सी चाटने लगी

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विशाल का किसी औरत क साथ ये पहला एक्सपीरियंस था लकिन वो वीडियोस देखता था और जनता था क ललिता अब क्या करने वाली है.

ललिता ने विशाल का लुंड पकड़ा और मुँह में लय लिए.

ललिता क होंठ विशाल क लुंड पैर टच होते हे विशाल की आंखें बंद हो गयीं.

ऐसा मज़ा विशाल ने अपनी लाइफ में कभी महसूस नहीं किआ था.

ललिता का मुँह अंदर सी गरम था और विशाल को भट मज़ा आ रहा था. ललिता विशाल क लुंड को चूस रही थी

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ललिता कच दिएर विशाल का लुंड चुस्ती रही और कच दिएर क बढ़ विशाल क ऊपर आ गयी और उस क लुंड पैर बेथ गयी.

ललिता अपने लुंड को विशाल की छूट पैर रगड़ने लगी.

विशाल ललिता की छूट की गर्मी महसूस क्र रहा था और ललिता की छूट गीली होने की वजह सी वो विशाल क लुंड पैर स्लिप हो रही थी

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ललिता ने विशाल का लुंड पकड़ा और अपनी छूट क सुराख़ पैर रखा और दबाव डालने लगी.

विशाल का लुंड ललिता की गीली छूट में उतरने लगा.

विशाल को लगा जैसी उसका लुंड गरम भट्टी में घुस रहा है

ललिता की छूट भट गरम थी एयर विशाल का लुंड ललिता की छूट की गर्मी सी और ज़ोर सी खरा हो रहा था.

ललिता सलौली कमर हिलने लगी और विशाल का लुंड ललिता की छूट क अंदर बहार होने लगा

विशाल क लिए ये उसकी ज़िन्दगी का सब सी हसीं अबुभव था.

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ललिता अब अपनी कमर तेज़ी सी हिलने लगी और विशाल का लुंड तेज़ी सी ललिता की छूट में अंदर बहार होने लगा.

विशाल को कच समझ नहीं आ रही थी. उस का दिमाग़ काम करना चोर चूका था. वो बस माज़ी में गम था.

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ललिता की गरम छूट को विशाल भट दिएर नहीं सेह पाया. अचानक उसका जिस्म झटके खाने लगा और उस क लुंड ने ललिता की छूट क अंदर लावा उगलना शरू क्र दिए.

ललिता को विशाल का गरम लावा अपनी छूट क अंदर महसूस हुआ तो वो रुक गयी और विशाल ललिता की छूट क अंदर झाड़ता रहा.

ललिता. ये क्या क्र दिया तुम ने.

विशाल. मुझ सी कण्ट्रोल नहीं हुआ.... विशाल परेशान हो गया.

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ललिता. कोई बात नहीं तुम्हारा पहली बार है ऐसा हो जाता है

ललिता विशाल क ऊपर सी उठ गयी और बीएड पैर लेत गयी.

ललिता यहाँ आओ मेरी पास.

विशाल ललिता क पास आया तो ललिता ने विशाल को अपने बाज़ू पैर लेता लिए.

ललिता. केसा लगा तुम्हें.

विशाल. भट मज़ा आया.

ललिता. परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. तुम्हारी पहली बार था इस लिए इतना जल्दी हो गया. अब थोड़ा रिलैक्स हो जाओ.

विशाल का जिस्म गरम था. उस कस लुंड में झड़ने क बढ़ भी जान बाकि थी.

ललिता. थोड़ा रिलैक्स हो जाओ. पहर हम दुबारा स्टार्ट करते हैं

विशाल. में दुबारा नहीं क्र पाऊँ गए.

ललिता. तुम ज़रूर क्र पाओ गए.

विशाल. आप इतना सूरे किसी हैं.

ललिता. क्यों क में न्य तुम्हारे जूस ने सेक्स वाली गोली मिले थी. में नहीं चाहती थी क तुम्हारा पहला एक्सपीरियंस खराब हो और न हे मेरा.

विशाल को अब समझ में आने लगा था क उसका जिस्म इतना गरम क्यों हो रहा था और उस क लुंड में अभी तक जान क्यों बाकि थी.

क्यों क जब विशाल हाथ सी करता था तो एक बार झड़ने क बढ़ 2 घंटे तो उसका लुंड दुबारा खरा नहीं होता था.

कच दिएर क बढ़ ललिता उठी और एक बार पहर विशाल क लुंड पैर झुक गयी और उस को मुँह में ले लिए.

ललिता ने जैसी हे विशाल का लुंड मुँह में लिए उस का लुंड पहर सी खरा होने लगा

ललिता विशाल का लुंड उस वक़्त तक चुस्ती रही जब तक क उसका लुंड पूरा तनाव में आ गया.

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अब दोनो ने अपने कपड़े उतर दिए और दोनो नंगे हो गए

ललिता बीएड क किनारे पैर घोड़ी बन गयी और विशाल बीएड सी निचे खरा हो गया

विशाल ने लुंड ललिता की छूट में घुसा दिए और धक्के लगाने लगा.

ललिता. आअह्ह्ह्हह ऐसी हे करो आराम आराम सी आअह्हह्ह्ह्ह एससससस

विशाल सलौली धक्के लगाने लगा और ललिता को छोड़ने लगा.

विशाल आप अपनी स्पीड बढ़ाता जा रहा था और कच हे दिएर में ललिता झाड़ गयी

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ललिता बीएड पैर लेत गयी और विशाल को अपने पीछे लेता दिए

विशाल ने लुंड को ललिता की छूट पैर रखा और अंदर दबा दिए.

अब विशाल कॉंफिडेंट हो गया था और खुद कण्ट्रोल क्र रहा था

विशाल धक्के लगाने लगा और ललिता को छोड़ने लगा.

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विशाल ज़ोरदार चुदाई क्र रहा था. उसको अंदाज़ा नहीं था क उस ने कण्ट्रोल किसी करना है और एक बार पहर ज़ोरदार चुदाई की वजह सी विशाल झाड़ गया.

लकिन इस बार विशाल ने लुंड बहार खेंच लिए और ललिता क पेट पैर झाड़ गया.

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ललिता विशाल को देख क्र मुस्कुराई. और बोली

ज़्यादा ज़ोर सी करो गए तो ऐसा हे हो गए.

विशाल बीएड पैर लेत गया.

ललिता. आज क लिए इतनी टूशन काफी है

विशाल. ललिता ग अब में जाओं

ललिता. आज रात मेरी साथ हे रुक जाओ न.

विशाल. नहीं... अंकल नाराज़ हों गए में उनको बता क्र नहीं आया

ललिता. ठीक है जाओ. I'll सी यू नेक्स्ट टाइम.

विशाल ने कपड़े पहने और ललिता ने एक गाउन निकल क्र पहन लिए.

ललिता. सुनो अपनी टूशन फी तो लेते जाओ.

ललिता ने 10 हज़ार निकल क्र विशाल को दिए.

विशाल. इसकी ज़रूरत नहीं है.

ललिता. में न्य कहा था न अगर मेरा काम करो गए तो टूशन सी ज़्यादा पैसा दूँ गई.

विशाल. थैंक यू ललिता ग.

विशाल ने पेसय लिए और निकल गया.

रात क 12 बज रही थय

विशाल ने एक कैब बुक को और घर क लिए निकल गया.

विशाल ललिता क घर सी निकला तो सोच रहा था.

ये ाचा है... मज़ा भी और पेसय भी...

कहाँ पूरी मंथ क 5 हज़ार और कहाँ 2 घंटे क 10 हज़ार...

विशाल आज मर्द बन चूका था. उस को वो मिल गया था जिस क बारे में वो सिर्फ सोचा करता था.

विशाल क पास मैं गेट की चाबी थी. विशाल ने दरवाज़ा खोला और ख़ामोशी सी अपने कमरे में जा क्र सो गया.

गाओं में.

कामिनी ने हरिया की पत्नी तनु को अपने पास बुलाया

तनु. मालकिन आप बे बुलाया

कामिनी. मेरी पास तेरी लिए एक काम है. और वो काम करने क तुझे मुँह मांगे पेसय मिलाएँ गए

तनु. क्या काम है मालकिन

कामिनी. तुझे रॉकी क साथ एक रात गुज़ारनी है.

तनु. मालकिन ये आप क्या बोल रही हैं

कामिनी. तुझे ये करने क पेसय मिलाएँ गए.

जितने तू चाहे गई.

अगर तू नहीं करना चाहती तो कोई बात नहीं लकिन अगर तू करे गई तो जितने पेसय तू चाहे गई मिलाएँ गए.

तनु. नहीं नहीं मालकिन में ये नहीं क्र सकती.

कामिनी. अछि तरह सोच ले तनु.

ऐसा मौका बार बार नहीं मिलता.

चाही तोय हरिया सी भी पूछ ले.

ये बात सिर्फ मेरी तेरी रॉकी और हरिया क दरम्यान रही गई. किसी को पता नहीं चले गए.

तनु. नहीं मालकिन में ऐसा नहीं क्र सकती.

कामिनी. अगर तू चाहती है क हरिया को पता न चले तो भी मुझे बता देना.

हरिया को पता नहीं चले गए.

तनु. मेरा जवाब पहर भी यही रही गए

कामिनी. तू अछि तरह सोच ले. में तुझे 2 दिन का टाइम दे रही हूँ उस क बढ़ मुझे जवाब देना.

सिटी.

प्रिय को अभी का मश्ग आया.

अभी. किसी हो.

प्रिय. अछि हूँ तुम किसी हो.

अभी. तुम्हें मिस क्र रहा हूँ

प्रिय. सच बताओं तो में भी तुम्हें मिस क्र रही हूँ

अभी. तुम सी एक बात करनी थी.

प्रिय. बोलो.

अभी. जब सी में न्य तुम्हें पहली बार देखा था तुम्हारा देवना हो गया था.

प्रिय. सच में.

अभी. हाँ बिलकुल सच. में न्य अनिल भाबी को बताया भी था लकिन ुनहु ने बोलै क तुम शादी शुदा हो.

प्रिय. में भी तुम्हारी तरफ अत्त्रक्ट होने लगी थी लकिन हमें ज़्यादा टाइम नहीं मिला.

अभी. बस यही रिग्रेट है. जब हम ने बात करना शरू की तब हे तुम वापस चली गयीं.

प्रिय. मुझे भी बढ़ में एहसास हुआ क मुझे तुम सी और बात करनी चाहिए थी.

अभी. पेहली तो में तुम सी बात करने सी डरता था लकिन जब तुम सी बात की तो एहसास हुआ क तुम भट अछि हो.

प्रिय. सच बताओं तो मुझे तो तुम पहले दिन सी अचे लगे थय. लकिन मुझे समझ नहीं आ रही थी क तुम सी बात किसी करूं.

में एक छोटे सी गाओं सी आई थी और वहां में न्य कभी कसी सी बात नहीं की थी.

अभी. मुझे भी लगा था क तुम गाओं सी आई हो तो शायद तुम मुझ सी बात न करो.

प्रिय. बस हम दोनो सोचते हे रह गए और टाइम निकल गया.

अभी. प्रिय एक बात बोलूं.

प्रिय. हाँ बोलो

अभी. में भट टाइम सी ये बोलना चाहता था. लकिन बोल नहीं पाया....

प्रिय. बोलो

अभी. तुम भट सुन्दर हो. में न्य आज तक तुम जैसी सुन्दर लड़की नहीं देखि.

प्रिय. थैंक यू...

अभी. भट बार में न्य सोचा क काश तुम अरविन्द की जगह मेरी बीवी होती.

प्रिय. लकिन में अरविन्द की बीवी हूँ.

अभी. हाँ बस यही तो मसला है.... ाचा चलो में बढ़ में बात करूं गए.

प्रिय. ठीक है. अरविन्द भी आने वाले हों गए. उन क सामने फोन नहीं निकलती उनको बुरा लगता है.

अभी. अपना ख्याल रखना. Bye.

प्रिय. Bye.
 
Episode 18

तनु और हरिया रात की अपने घर में बैठी थय.

तनु. आज मालकिन ने मुझे बुलाया था.

हरिया. क्यों... तुझे क्यों बुलाया... क्या बोल थी थी मालकिन.

तनु. वो है न मालिक क दोस्त का बीटा रॉकी...

हरिया. हाँ.

तनु. मालकिन चाहती है क में उस क साथ एक रात गुज़रूँ..

हरिया. क्या...

तनु. मालकिन ने कहा क वो मुझे मुँह माँगा पैसा दे गई.

हरिया. तो तू ने क्या बोलै.

तनु. में न्य मालकिन को बोलै क में ऐसा नहीं क्र सकती. मालकिन ने मुझे 2 दिन का टाइम दिए क सोच क जवाब दूँ.

हरिया. में भी तेरी सी बात करना चाहता था.

तनु. क्या बात.

हरिया. रॉकी ने मुझे भी बोलै था क अगर में एक रात क लिए तुझे उस क पास चोर दूँ तो वो मुझे मुँह माँगा पैसा दे गए

तनु. और तू ने क्या कहा.

हरिया. में न्य भी इंकार क्र दिए.

तनु. तू ने ाचा किआ.

हरिया. लकिन तनु मेरी एक बात सुन. अगर हम चाहें तो इस मोके सी फ़ायदा उठा सकते हैं.

तनु. तू कहना क्या चाहता है हरिया...

हरिया. देख तुझे मालकिन ने कहा है क वो तुझे मुँह मांगे पेसय दी गई. और मुझे रॉकी ने कहा है क वो मुझे मुँह मांगे पेसय दे गए

तनु. तो

हैरया. क्यों न हम दोनो इस सी फ़ायदा उठाएं. तू मालकिन सी पेसय लय और में रॉकी सी पेसय लून.

तनु. तू चाहता है क में रॉकी क साथ रात गुज़रूँ.

हरिया. तनु इस य ाचा मौका हमें नहीं मिले गए पैसा कमाने का. हम दोनो सी पेसय लाइन गए. और एक रात हे की तो बात है.

तनु. लकिन हरिया मुझे ये ठीक नहीं लग रहा.

हरिया. ज़रा सोच तनु. हम दोनो उन सी ढेर सारा पैसा लाइन गए. पहर तुझे जो चाहिए हुआ तू ले लेना. कपड़े गहने सब कच.

तनु. कह तो तू ठीक रहा है. लकिन तुझे कोई मसला नहीं हो गए मेरी उस क साथ रात बिताने सी.

हरिया. अरे पागल में खुद तुझे उस क पास भेज रहा हूँ तो मुझे मसला क्यों हो गए. और तू यही सोचना क तू मेरी साथ है

तनु. लकिन में तेरी शिव किसी क साथ नहीं सोइ आज तक.

हरिया. तो आज क बढ़ भी तो तू कसी क साथ नहीं सोए गई. बस एक रात की बात है. हमारे पास ढेर सारा पैसा आ जाए गए.

पैसा देख क्र तनु का दिल भी ललचाने लगा

तनु. ठीक है तो पहर तू मुझे शहर ले क्र जाए गए और में अपनी मर्ज़ी की चीज़ें लून गई

हरिया. ठीक है हम दोनो शहर चलें गए.

तनु. ठीक है तू रॉकी को बोल देना क में तैयार हूँ और में मालकिन को बोल देती हूँ.

हैरया. लकिन मालकिन को बोलना क किसी सी कोई बात न करे.

तनु. ठीक है.

विशाल रात को दिएर सी घर पोहंचा और सो गया.

और सुबह उठते हे यूनिवर्सिटी चला गया.

कबीर. क्या हुआ आज भट खुश लग रहा है.

विशाल. कच नहीं यार बस ऐसी हे.

कबीर. नहीं कोई बात तो है. तेरी चेहरे पैर परेशानी होती है लकिन आज तेरी चेहरी पैर परेशानी नहीं है.

विशाल. तो क्या में तुझे खुश ाचा नहीं लगता.

अर्णव. अरे मेरी जान ाचा लगता है. इसी लिए तो पूछ रही हैं. क हमेशा साद रहने वाला लड़का आज खुश किसी.

विशाल. बस इतना समझ ले क लाइफ में कच चेंज आ गया है.

कबीर. चल ठीक है यार इतना बता दिए तू ने तो यही काफी है.

विशाल की लाइफ में सच में चेंज आ गया था.

अब विशाल की सोच और उस की नज़र बदल चुकी थी.

अब विशाल हर लड़की को एक हे नज़र सी देख रहा था. और वो कसी को भी देखता तो उस क सामने ललिता का नंगा जिस्म आ जाता. और वो अपने आप को उस लड़की या औरत क साथ इमेजिन करने लगता

ललिता ने विशाल को जो मज़ा दिखाया था वो उस मेज़य को पहर सी महसूस करना चाहता था.

विशाल यूनिवर्सिटी में भी अब लर्कियूं सी ज़्यादा बात करने की कोशिश करने लगा था.

लकिन अभी तक उसको लड़की को ठीक सी एप्रोच करना नहीं आ रहा था. लकिन उस ने ये सोच लिए था क अब वो अपनी कोशिश जारी रखे गए और एक गर्लफ्रेंड बनाए गए

विशाल देखमे में तो हैंडसम था हे लकिन उस क गरीब होने की वजह सी कोई भी लड़की उस सी ज़्यादा दिएर बात करना पसंद नहीं करती थी. लकिन अब विशाल उसको चेंज क्र रहा था.

खेर यूनिवर्सिटी क बढ़ विशाल अप्पनइ जॉब पैर चला गया.

विषम एक मार्ट पैर केशियर की जॉब करता था. विशाल ने यहाँ भी अपना काम करना स्टार्ट क्र दिए. विशाल हर आने वाली औरत सी बात करने की कोशिश करने लगा.

कोई औरत शान सी अचे सी बात करती तो कोई उसको भाव न देती.

विशाल अपना ड्यूटी टाइम ख़तम क्र क वापस घर आ गया.

घर आया तो शर्मा ने उसको अंदर बुलाया.

बचूं का रिजल्ट आ गया था.

दोनो बचूं क भट ाच्य मार्क्स आय थय.

माला. विशाल तुम्हरी म्हणत की वजह सी दोनो बचे भट ाच्य मार्क्स लाए हैं.

माला ने विशाल को गले लगा लिए.

विशाल शर्मा क फॅमिली मेंबर की तरह बन गया था और सब उसको अस फॅमिली मेंबर हे ट्रीट करते थय.

लकिन पिछली रात जो हुआ था उस क बढ़ माला का विशाल को ऐसी गले लगाना नार्मल नहीं था.

पहली बार विशाल ने माला क जिस्म की गर्मी और उस क बदन की खुशबु महसूस की.

विशाल क हाथ खुद हे माला की कमर पैर चले गए और उस ने माला को हुग क्र लिए.

माला. तुम ने भट ाच्य सी पढ़ाया बचूं को और ये सब तुम्हारी वजह सी हे हुआ है.

विशाल का दहन सिर्फ माला क जिस्म पैर था. वो माला की ज़ुल्फ़ुन की खुशु महसूस क्र रहा था. लकिन थोड़ी दिएर में हे विशाल का लुंड हरकत में आ गया. और इस सी पहले क माला को ये महसूस होता. विशाल ने माला को चोर दिए.

विशाल. थैंक यू आंटी. लकिन में अकेली कच नहीं क्र सकता था ये इन दोनो की म्हणत है.

शर्मा. माला डिनर लगाओ.

माला आंटी डिनर लगाने चली गयी और विशाल शर्मा और बचूं क सतह डाइनिंग टेबल पैर बेथ गया.

सब डिनर करने लगी लकिन आज विशाल की नज़र माला पैर थी.

माला ने डीप गाला पहन रखा था और विशाल माला का क्लीवेज देखने की कोशिश क्र रहा था

माला को बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था क विशाल माला का क्लीवेज देखने की कोशिश क्र रहा है. लकिन आज विशाल माला का जिस्म स्कैन क्र रहा था.

विशाल ने डिनर किआ और अपने कमरे में चला गया.

विशाल ने कमरे में जाते हे पल्लवी को मैसेज किआ.

विशाल. Hi.

पल्लवी. Hi विशाल किसी हो.

विशाल. में ाचा हूँ तुम किसी हो.

पल्लवी. में भी अछि हूँ. क्या क्र रही हो.

विशाल. तुम्हरे बारे में हे सोच रहा था.

पल्लवी. क्या सोच रही थय मेरी बारी में.

विशाल. तुम्हारा ख्याल आ गया तो सोचा क तुम सी बात लड़ लून.

पल्लवी. विशाल तुम करते क्या हो.

विशाल. में स्टूडेंट हूँ और साथ part टाइम जॉब्स भी करता हूँ

पल्लवी. Part टाइम जॉब्स क्यों करते हो.

विशाल. अपना खर्चा चलने क लिए.

पल्लवी. माँ डैड पॉकेट मनी नहीं देती क्या.

विशाल. मेरी माँ डैड ग़रीब हैं. वो मुझे कच नहीं देती.

पल्लवी. ओहो that's सो साद.

विशाल. अगर तुम मेरी गरीब होने की वजह सी मुझ सी बात नहीं करना चाहती तो it's OK. मुझे इस की आदत है.

पल्लवी. क्या मतलब है तुम्हरा.

विशाल. मतलब ये क कोई भी लड़की जो मुझ सी बात करती है. जब उसको पता चलता है क में गरीब हूँ तो वो मुझ सी बात करना चोर देती है.

पल्लवी. तुम ऐसा क्यों सोचते हो. मुझे फरक नहीं परता क तुम गरीब हो.

विशाल. सच में.

पल्लवी. तुम्हरी और मेरी स्टोरी शामे है. मुझ सी लड़के इस वजह सी बात नहीं करते क्यों क में मोती हूँ. और तुम सी लड़कियां इस वजह सी बात नहीं करते क तुम गरीब हो.

विशाल. तुम खूबसूरत हो यार. Don't बे लिखे तहत.

पल्लवी. जब तुम्हें मेरी मोठे होने सी कोई प्रॉब्लम नहीं है तो मुझे तुम्हारे गरीब होने सी प्रॉब्लम क्यों हो गई.

विशाल. थैंक यू.

पल्लवी. दोस्ती में थैंक यू नहीं होता समझे.

विशाल. हाँ समझ गया.

पल्लवी. पहर बात हो गई अभी में सो रही हूँ.

विशाल. गुड नाईट.

पल्लवी. गुड नाईट.

प्रिय अरविन्द क निचे लेती हुई थी और अरविन्द प्रिय की छूट में लुंड घुसा क्र धक्के मर रहा था.

प्रिय अरविन्द को कोई रिस्पांस नहीं दे रही थी.

प्रिय क दिमाग़ में डेविल और उसका हैंडसम बदन और उसका मोटा लुंड घूम रहा रहा

किसी वो प्रिय की चींखें निकलवा रहा था.

किसी प्रिय क जिस्म का अंग अंग कांप रहा था.

डेविल क जाने क बढ़ प्रिय बीएड सी हिल भी नहीं पा रही थी.

अरविन्द प्रिय क अंदर झाड़ क्र निचे उतर चूका था लकिन प्रिय को कोई परवाह नहीं थी.

प्रिय को बस डेविल चाहिए था. अरविन्द बाथरूम में गया और चेंज क्र क वापस आया और सो गया

प्रिय ने अपना मोबाइल निकला और माया को मैसेज किआ.

प्रिय. Hi....

माया. Hi प्रिय किसी हो....

प्रिय. माया ी वांट डेविल..

माया. कल दिन 12 बजे मेरी घर आ जाना

प्रिय I'll बे तेरे.

गाओं में.

हरिया और तनु दोनो हवेली आय.

हरिया रॉकी क कमरे में चला गया और तनु कामिनी क कमरे में चली गयी.

कामिनी. क्या सोचा तू ने तनु.

तनु. में तैयार हो मालकिन...

कामिनी. भट चाय. अब ये बता क कब आय गई रॉकी क पास.

तनु. मालकिन जब आप बोलो. लकिन मालकिन पेसय.

कामिनी. हाँ हाँ तुझे पेसय मिल जाएं गए.

तनु. मालकिन एक बात और है.

कामिनी. क्या बात है.

तनु. मालकिन हरिया को या किसी और को भी इस बात का पता नहीं चलना चाहिए. और आप रॉकी बाबू को भी ये नहीं बताना क आप की मेरी सी क्या बात हुई है.

कामिनी. तू बेफिक्र हो जा और जब में बलों आ जाना.

दूसरी तरफ.

हैरया. साहब ग मुझे आपकी ऑफर मंज़ूर है.

रॉकी. गुड. पहर कब ले क्र आ रहा है तनु को मेरी पास

हरिया. जिस दिन वो बोले गई में आपको बता दूँ गए.

रॉकी. ठीक गए तुझे आधे पेसय एडवांस और आधे काम होने क बढ़ मिल जाएं गए.

हैरया. ठीक है मालिक.

रॉकी. और उसको अचे सी तैयार क्र क लाना.

हरिया. आप बेफिक्र हो जाओ मालिक. आप खुश हो जाओ गए.
 
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