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- Dec 5, 2013
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Update 032 -
इससे पहले गगन कुछ कहता या समझ पाता, मैंने श्रेया को अपनी तरफ खींचा और उसके गाल पर एक किस कर दिया। जिसे देखकर सभी लोग हैरान रह गए, लेकिन तभी रश्मि मुझे डांटते हुए बोली
रश्मि- ये लड़की क्या बदतमीजी है यह। अभी तुम मेरे बॉयफ्रेंड के साथ छेडछाड कर रही थी और अब मेरी फ्रेंड के साथ
निशा- तुम्हारे साथ तो नहीं की ना। बैसे नाम क्या है इसका। हाय कितनी खूबसूरत है। मेरा तो दिल ही आ गया है इसपर
मेरी बात सुनकर श्रेया थोडा शर्माने की एक्टिंग करते हुए बोली
श्रेया- वो वो श्रेया नाम है
ऱश्मि- अरे अब अपना मोबाईल नम्बर भी बता दे इसे
रश्मि की बात सुनकर श्रेया लापरवाही से अपना मोबाईल नम्बर बोलने लगी
श्रेया- ओह हाँ 8891.....
लेकिन श्रेया की बात पूरी होने से पहले ही रश्मि उसे रोकते हुए बोली
रश्मि- अरे डफर यह क्या कर रही है। मुझे तो पहले ही ये लड़की आधी पागल लग रही थी और अब तुम भी पागलों बाली हरकत करने लगी। किसी अंजान को अपना नाम और नम्बर क्यों बता रही हो।
श्रेया- अरे यार सच में यह कितनी खूबसूरत है ना।
तभी पूजा भी हमारे बीच में अपनी टांग अडाते हुए बोली
पूजा- गाईज आखिर यह सब हो क्या रहा है। तुम लोग क्या लेस्बीयन टाईप हो
निशा- नहीं पर इसके लिए तो मैं लेस्बीयन भी बन जाऊंगी
मेरी बात सुनकर श्रेया भी शर्माते हुए बोली
श्रेया- मैं भी... बैसे तुम्हारा नाम क्या है
निशा- सपना
इतना बोलकर मैंने उसे जोर से हग कर लिया और उसके कान में धीरे से फुसफुसाकर बोली
निशा- पागल…. तू यहाँ क्या कर रही है
श्रेया- जो तू कर रही है। क्यों क्या तूने ही सबकी मदद करने का ठेका ले रखा है।
निशा- अच्छा छोड यह सब, ये सब कुछ ज्यादा ही हो रहा है और यहाँ काफी भीड भी है। इसलिए गगन को यहाँ दूर ले जाना पडेगा।
इतना बोलकर मैं श्रेया से अलग हो गई और बोली
निशा- थैंक्स अपना नम्बर देने के लिए मैं रात में तुम्हें कॉल करूँगी। ओके बॉय गाईज
इतना बोलकर मैं वहाँ से जाने लगी तो गगन ने मेरा हाथ पकड लिया। मुझे इसका अंदाजा पहले से ही था। इसलिए मैं उसे गुस्से में घूरने लगी। इससे पहले कोई कुछ समझ पात मैंने एक जोरदार थप्पड उसके गाल पर जड दिया और बोली
निशा- मुझे झूने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी
मेरी बात सुनकर गगन भी गुस्से से भडकते हुए बोला
गगन- और तुमने जो मेरे साथ किया…. वो क्या था
निशा- ये क्या बकवास कर रहे हो तुम। मैं तुम्हें जानती भी नहीं हूँ। इनफेक्ट में तुम लोगो में से किसी को भी नहीं जानती हूँ।
गगन- तुम झूठ बोल रही हो। उस दिन तुम खुद मेरे साथ मेरे घर गई थी।
निशा- लगता है कि तुम्हारा दिमाग पूरी तरह से खराब हो गया है। अभी कुछ देर पहले तुम इस लड़की को अपनी गर्लफ्रेड बता रहे थे। अब मुझसे कह रह हो कि मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे घर गई थी। तुम किसी अच्छे डॉक्टर से अपना इलाज करवाओ पहले।
इतना बोलकर मैंने झटके से अपना हाथ उससे छुडाया और वहाँ से निकल गई। जैसा कि मुझे उम्मीद थी गगन भी मेरे पीछ पीछे आ रहा था और गगन के पीछे पीछे बाकी लोग भी आ रहे थे। तभी मेरे पास हरीश अंकल का कॉल आया, तो मैंने उन्हें सारी सिचुऐशन बता दी। उन्हें भी मेरा प्लान ठीक लगा। बैसे तो पुलिस वहाँ पहले ही आ चुकी थी और वो हमें देख भी चुके थे। पर ज्यादा भीड होने के कारण वो कोई रिश्क नहीं लेना चाहते थे। इसलिए मैं वहाँ से पैदल पैदल सुनसान जगह की तरफ जाने लगी।
जैसे ही मैं सुनसान जगह पर पहूँची तो मैं एक जगह जाकर रुक गई। गगन भी मेरे पीछे पीछे लगंडाता हुआ आ रहा था। इससे पहले पहले वो मुझ तक पहूँच पाता मुझे उसके पीछे तेजी से आता एक पुलिस ऑफिसर नजर आया, जो मुझे नीचे झुकने का इशारा कर रहा था। इसलिए मैं तुरंत नीचे बैठ गई। जैसे ही मैं नीचे बैठी, ठीक तभी एक गोली सीधी गगने के सर के पार निकल गई और फिर एक के बाद एक 4-5 गोलियाँ उसको जा लगीं। जिसके बाद वो किसी कटे पेड की तरह मेरे एकदम पास नीचे जमीन पर जा गिरा।
ये सब देखकर डर के कारण मेरी हालत खराब हो गई थी। मैंने पहली बाल कोई पुलिस इन्काऊंटर देखा था। अगर थोडी सी भी चूक होती तो वो गोली जो गगन के सर के आर पार निकली है। वो मुझे भी लग सकती थी। मैं गगन को सबक सिखाना तो चाहती थी। पर उसकी जान लेने का फैसला बाकई में बहुत बड़ा था। अभी कुछ ही देर पहले तो वो मेरे साथ खड़ा होकर बातें कर रहा था और अब बेजान होकर मेरे सामने पडा हुआ है। पता नहीं क्यों पर इतने गुनाह करने के बाद भी मैं गगन की मौत पर खुद को दोषी मान रही थी।
मेरा पूरा शरीऱ डर और पश्चाताप के कारण पसीने से भीग गया था। तब तक पुलिस फोर्स और बाकी लोग भी वहाँ आ गए थे। उस पुलिस ऑफीसर ने मुझे सहारा देकर खड़ा किया। पर मुझपर तो सही से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। इसलिए श्रेया मेरे पास आ गई और मुझे सहारा देकर वहां से जा जाने लगी। मेरे बाकी के दोस्त भी मेरे साथ साथ वहाँ से निकल गए। गगन की लाश से दूर आकर अब मुझे कुछ बेहतर महसूस हो रहा था। इसलिए उस इन्काऊँटर बाली जगह से काफी दूर आने के बाद हम सभी एक जगह बैठ गए। कफी देर तक हम सभी के बीच खामोशी छाई रही पर फिर अचानक से रश्मि खुश होते हुए बोली
रश्मि- गाईज आखिरकार हमारा प्लान सक्सेसफुल रहा। वी विन....
रश्मि की बात सुनकर मुझे छोडकर बाकी सभी लोग खुश हो गए थे। पर रवि और श्रेया ने मेरी उदासी देख ली थी। इसलिए श्रेया बोली
श्रेया- सपना तुझे क्या हुआ है। तू मूँह लटकाकर क्यों बैठी है
निशा- पता नहीं यार.... मेरे दिमाग में बहुत सारी बातें एक साथ चल रहीं है। अभी कुछ देर पहले ही तो वो गगन हम लोगों के साथ खड़ा था और अब उसकी लाश वहाँ पडी है। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि हमने उसके साथ सही किया या गलत। मुझे अंदर ही अंदर गिल्टी फील हो रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी का मर्डर कर दिया हो।
मेरी बात सुनकर रवि मुझे समझाते हुए बोला
रवि- वो इसलिए क्योंकि तुम एक अच्छे और साफ दिल की लड़की हो। तुम तो अपने दुश्मन का भी बुरा नहीं चाहती है, तो फिर गगन से तो तुम्हारी कोई दुशमनी भी नहीं थी। तुमने जो कुछ भी किया वो हम सब के लिए किया है, उन तीन लडकियों के लिए किया है जिन्होने गगन की बजह से आत्महत्या कर ली थी और उन सभी लडकियों के लिए किया है जो आगे चलकर गगन का शिकार बन सकती थी। तुमने कुछ भी गलत नहीं किया है। इसलिए अपने अंदर चल रही सभी बातों को निकाल दो।
श्रेया भी रवि की बात को आगे बडाते हुए बोली
श्रेया- हाँ सपना रवि सही कह रहा है। तुम्ने कुछ भी गलत नहीं किया है। सच कहूँ तो तुम आज हम सबकी नजरों में हीरो बन गई हो। तुमने हमसे कोई रिश्ता ना होने के बाद भी हमारी मदद की है। अभी कितने दिन हुए हैं हमारी दोस्ती को। मुश्किल से 1 हफ्ता, पर तुमने इस 1 हफ्ते की दोस्ती के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल दी थी। तुम्हारी जैसी दोस्त तो 1किस्मत से मिलती है। बैसे एक बात तो है कि रवि सच में डफर है।
श्रेया की बात सुनकर रवि चिढते हुए बोला
रवि- अब मैं कहाँ से बीच में आ गया
श्रेया- तुम्हारी हॉफ गर्लफ्रेंड का मूड ऑफ है और तुम उसका मूड ठीक करने के लिए कुछ खाने पीने का आईटम लाने की जगह यहाँ खडे होकर बकवास कर रहे हो।
श्रेया की बात सुनकर रवि अपना सर खुजलाते हुए बोला
रवि- ओह सॉरी सॉरी मैं अभी लाया
इतना बोलकर रवि वहाँ से चला गया और वाकी लडकियाँ मुझसे बातें करके मेरा मूड ठीक करने की कोशिश करने लगी। जिस कारण जल्द ही मैं भी नॉर्मल हो गई थी। कुछ ही देर में रवि सबके लिए आईसक्रीम लेकर आ गया। आईसक्रीम देखकर पूजा हैरान होते हुए बोली
पूजा- इतनी शर्दी में आईसक्रीम
रवि- तभी तो लाया हूँ। शर्दी के मौसम में आईसक्रीम खाने का मजा ही कुछ और है। आज ट्राय करके देखो। मजा ना आये तो कहना
रवि की बात सुनकर सबने उससे आईसक्रीम ले ली और खाने लगे। हम लोग काफी देर तक वहाँ बैठे आपस में बातें करते रहे। फिर हम सबने एक रेस्टोरेंट जाकर साथ में खाना खाय़ा और अपने अपने घर के लिए निकल गए। मैंने कल आउट ऑफ सिटी जाने का प्लान कैंसिल कर दिया था। क्योंकि कल दोपहर को हम सभी लोग रवि के फार्म हाऊस पर मिलकर पैसे कलेक्ट करके उन तीनों लडकियों के घर देने जाने बाले थे।
इसलिए कल सुबह मैंने लोकल के ही 1-2 काम खत्म करने का प्रोग्राम बनाया था। होटल जाकर मैं बाथरूम में नहाने चली गई। क्योंकि आज सुबह ही असलम का मेरे पास कॉल आ गया था। जिस कारण मुझे आज एक कस्टमर के पास जाना था। नहाकर तैयार होने के बाद मैंने अपने रूम को अच्छी तरह से लॉक किया और रवि को ड्यूटी पर जाने की बात कहकर ऑटो से असलम की बताई लोकेशन के लिए निकल गई।
वो लोकेशन एक 5 स्टार होटल की थी। जिसके एक आलीशान कमरे में मैं इस वक्त मौजूद थी। जहाँ दो आदमी जिनकी उम्र करीब 40-45 वर्ष थी। वो दोनों वहाँ पर मेरा ही इंतजार कर रहे थे। असलम ने मुझे पहले ही बता दिया था कि दो कस्टमर एक साथ डी.पी. करना चाहते हैं। मेरी पहले भी कई बार डी.पी. हो गई थी। इसलिए मुझे इसमें कोई प्राब्लम नहीं थी। जिसके बदले में वो लोग मुझे डबल पेमेंट यानि पूरे 2 लाख रूयये दे रहे थे। उनमें से एक आदमी को देखकर मैं हैरान रह गई।
वो आदमी और कोई नहीं बल्कि रवि के पिता संजय सक्सेना थे। जिनका फोटो मैंने रवि के मोबाईल में पहले भी देखा था। पर जल्द ही मैंने अपने आप को नॉर्मल कर लिया। क्योंकि मैं फिलहाल जो काम कर रही थी उसमें जान पहचान का कोई मतलब नहीं था। मतलब था तो बस अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने का और अपनी फैंटसी पूरी करने का। इसलिए मैंने उनसे वे बजह जान पहचान बडाने की जगह अपने काम पर फोकस करना ही ठीक समझा।
बैसे भी आज की घटना के बाद अब मैं किसी के साथ ज्यादा जान पहचान बडाना नहीं चाहती थी। बस अपना काम करना यानि दूसरों मजा देना और खुद भी लेना बस यही मेरा प्लान था। जिस कारण होटल रूम में जाकर मैंने सीधे अपने कपडे उतार दिए और उन लोगों के सामने एक दम नंगी खडी हो गई। वो लोग तो पहले से ही इसी इंतजार में थे। इसलिए बारी बारी से दोनों लोगों ने मेरे साथ जी भऱ कर मजे किए। जिसमें मैंने भी उनका भरपूर साथ दिया था। जिस कारण दोनों ही मेरे काम से काफी खुश थे।
पहला राऊंड खत्म होने के बाद हम तीनों ने कुछ देर रेस्ट किया और फिर दो-दो पैग लगाने के बाद एक बार फिर हम लोग शूरू हो गए। इस बार दोनों आदमी एक साथ मेरे ऊपर टूट पडे थे। मैं पहले से ही इस सब के लिए तैयार थी। जिस कारण मैं भी भरपूर उनका साथ देने के साथ साथ खुद भी मजे ले रही थी। कुझ देर तक एक दूसरे को सहलाने और चूमने के बाद उनमें से एक आदमी पीठ के बल लेट गया। जिसके ऊपर मैं बैठ गई और उसका लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया।
इसके बाद दूसरे आदमी ने पीछे से मेरी गाँड में अपना लण्ड घुसा दिया और धक्के मारने शूरू कर दिए। जिसके बाद एक बार फिर मेरी चुदाई शुरू हो गई। कुछ देर इसी पोजीशन में रहने के बाद उन दोनों ने अपनी अपनी पोजीशन चेंज कर ली और फिर से शूरू हो गए। मैं उन दोनों ही आदमियों से काभी इम्प्रेश थी। क्योंकि दोनों काफी जेंटली सेक्स कर रहे थे और खुद मजे लेने के साथ साथ मुझे भी मजा दे रहे थे। साथ साथ वो दोनों हाईजीन का भी पूरा ध्यान रख रहे थे, क्योंकि दोनों ने ही सेक्स के दौरान कंडोम का यूज किया था।
दूसरा राऊंड कुछ ज्यादा ही लम्बा हो गया था। जिस कारण हम तीनों काफी थक गए थे। इसलिए काम खत्म होते ही हम तीनों एक दूसरे की बाहों में सो गए। अगले दिन सुबह करीब 7 बजे मैं उस होटल से निकल कर अपने होटल रूम में जा पहूंची और कपडे चेंज करके आपने ऑफिस का काम खत्म करने के निकल गई। उस दिन मैंने केवल दो लोकेशन पर ही बिजिट किया था। जिसके बाद काम खत्म होते होते दोपहर के 2 बज गए थे। वहाँ से मैं सीधा रवि के फार्म हाऊस पर जा पहूँची, जहाँ बाकी लोग मेरा ही इंतजार कर रहे थे।
कहानी जारी है...........
इससे पहले गगन कुछ कहता या समझ पाता, मैंने श्रेया को अपनी तरफ खींचा और उसके गाल पर एक किस कर दिया। जिसे देखकर सभी लोग हैरान रह गए, लेकिन तभी रश्मि मुझे डांटते हुए बोली
रश्मि- ये लड़की क्या बदतमीजी है यह। अभी तुम मेरे बॉयफ्रेंड के साथ छेडछाड कर रही थी और अब मेरी फ्रेंड के साथ
निशा- तुम्हारे साथ तो नहीं की ना। बैसे नाम क्या है इसका। हाय कितनी खूबसूरत है। मेरा तो दिल ही आ गया है इसपर
मेरी बात सुनकर श्रेया थोडा शर्माने की एक्टिंग करते हुए बोली
श्रेया- वो वो श्रेया नाम है
ऱश्मि- अरे अब अपना मोबाईल नम्बर भी बता दे इसे
रश्मि की बात सुनकर श्रेया लापरवाही से अपना मोबाईल नम्बर बोलने लगी
श्रेया- ओह हाँ 8891.....
लेकिन श्रेया की बात पूरी होने से पहले ही रश्मि उसे रोकते हुए बोली
रश्मि- अरे डफर यह क्या कर रही है। मुझे तो पहले ही ये लड़की आधी पागल लग रही थी और अब तुम भी पागलों बाली हरकत करने लगी। किसी अंजान को अपना नाम और नम्बर क्यों बता रही हो।
श्रेया- अरे यार सच में यह कितनी खूबसूरत है ना।
तभी पूजा भी हमारे बीच में अपनी टांग अडाते हुए बोली
पूजा- गाईज आखिर यह सब हो क्या रहा है। तुम लोग क्या लेस्बीयन टाईप हो
निशा- नहीं पर इसके लिए तो मैं लेस्बीयन भी बन जाऊंगी
मेरी बात सुनकर श्रेया भी शर्माते हुए बोली
श्रेया- मैं भी... बैसे तुम्हारा नाम क्या है
निशा- सपना
इतना बोलकर मैंने उसे जोर से हग कर लिया और उसके कान में धीरे से फुसफुसाकर बोली
निशा- पागल…. तू यहाँ क्या कर रही है
श्रेया- जो तू कर रही है। क्यों क्या तूने ही सबकी मदद करने का ठेका ले रखा है।
निशा- अच्छा छोड यह सब, ये सब कुछ ज्यादा ही हो रहा है और यहाँ काफी भीड भी है। इसलिए गगन को यहाँ दूर ले जाना पडेगा।
इतना बोलकर मैं श्रेया से अलग हो गई और बोली
निशा- थैंक्स अपना नम्बर देने के लिए मैं रात में तुम्हें कॉल करूँगी। ओके बॉय गाईज
इतना बोलकर मैं वहाँ से जाने लगी तो गगन ने मेरा हाथ पकड लिया। मुझे इसका अंदाजा पहले से ही था। इसलिए मैं उसे गुस्से में घूरने लगी। इससे पहले कोई कुछ समझ पात मैंने एक जोरदार थप्पड उसके गाल पर जड दिया और बोली
निशा- मुझे झूने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी
मेरी बात सुनकर गगन भी गुस्से से भडकते हुए बोला
गगन- और तुमने जो मेरे साथ किया…. वो क्या था
निशा- ये क्या बकवास कर रहे हो तुम। मैं तुम्हें जानती भी नहीं हूँ। इनफेक्ट में तुम लोगो में से किसी को भी नहीं जानती हूँ।
गगन- तुम झूठ बोल रही हो। उस दिन तुम खुद मेरे साथ मेरे घर गई थी।
निशा- लगता है कि तुम्हारा दिमाग पूरी तरह से खराब हो गया है। अभी कुछ देर पहले तुम इस लड़की को अपनी गर्लफ्रेड बता रहे थे। अब मुझसे कह रह हो कि मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे घर गई थी। तुम किसी अच्छे डॉक्टर से अपना इलाज करवाओ पहले।
इतना बोलकर मैंने झटके से अपना हाथ उससे छुडाया और वहाँ से निकल गई। जैसा कि मुझे उम्मीद थी गगन भी मेरे पीछ पीछे आ रहा था और गगन के पीछे पीछे बाकी लोग भी आ रहे थे। तभी मेरे पास हरीश अंकल का कॉल आया, तो मैंने उन्हें सारी सिचुऐशन बता दी। उन्हें भी मेरा प्लान ठीक लगा। बैसे तो पुलिस वहाँ पहले ही आ चुकी थी और वो हमें देख भी चुके थे। पर ज्यादा भीड होने के कारण वो कोई रिश्क नहीं लेना चाहते थे। इसलिए मैं वहाँ से पैदल पैदल सुनसान जगह की तरफ जाने लगी।
जैसे ही मैं सुनसान जगह पर पहूँची तो मैं एक जगह जाकर रुक गई। गगन भी मेरे पीछे पीछे लगंडाता हुआ आ रहा था। इससे पहले पहले वो मुझ तक पहूँच पाता मुझे उसके पीछे तेजी से आता एक पुलिस ऑफिसर नजर आया, जो मुझे नीचे झुकने का इशारा कर रहा था। इसलिए मैं तुरंत नीचे बैठ गई। जैसे ही मैं नीचे बैठी, ठीक तभी एक गोली सीधी गगने के सर के पार निकल गई और फिर एक के बाद एक 4-5 गोलियाँ उसको जा लगीं। जिसके बाद वो किसी कटे पेड की तरह मेरे एकदम पास नीचे जमीन पर जा गिरा।
ये सब देखकर डर के कारण मेरी हालत खराब हो गई थी। मैंने पहली बाल कोई पुलिस इन्काऊंटर देखा था। अगर थोडी सी भी चूक होती तो वो गोली जो गगन के सर के आर पार निकली है। वो मुझे भी लग सकती थी। मैं गगन को सबक सिखाना तो चाहती थी। पर उसकी जान लेने का फैसला बाकई में बहुत बड़ा था। अभी कुछ ही देर पहले तो वो मेरे साथ खड़ा होकर बातें कर रहा था और अब बेजान होकर मेरे सामने पडा हुआ है। पता नहीं क्यों पर इतने गुनाह करने के बाद भी मैं गगन की मौत पर खुद को दोषी मान रही थी।
मेरा पूरा शरीऱ डर और पश्चाताप के कारण पसीने से भीग गया था। तब तक पुलिस फोर्स और बाकी लोग भी वहाँ आ गए थे। उस पुलिस ऑफीसर ने मुझे सहारा देकर खड़ा किया। पर मुझपर तो सही से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। इसलिए श्रेया मेरे पास आ गई और मुझे सहारा देकर वहां से जा जाने लगी। मेरे बाकी के दोस्त भी मेरे साथ साथ वहाँ से निकल गए। गगन की लाश से दूर आकर अब मुझे कुछ बेहतर महसूस हो रहा था। इसलिए उस इन्काऊँटर बाली जगह से काफी दूर आने के बाद हम सभी एक जगह बैठ गए। कफी देर तक हम सभी के बीच खामोशी छाई रही पर फिर अचानक से रश्मि खुश होते हुए बोली
रश्मि- गाईज आखिरकार हमारा प्लान सक्सेसफुल रहा। वी विन....
रश्मि की बात सुनकर मुझे छोडकर बाकी सभी लोग खुश हो गए थे। पर रवि और श्रेया ने मेरी उदासी देख ली थी। इसलिए श्रेया बोली
श्रेया- सपना तुझे क्या हुआ है। तू मूँह लटकाकर क्यों बैठी है
निशा- पता नहीं यार.... मेरे दिमाग में बहुत सारी बातें एक साथ चल रहीं है। अभी कुछ देर पहले ही तो वो गगन हम लोगों के साथ खड़ा था और अब उसकी लाश वहाँ पडी है। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि हमने उसके साथ सही किया या गलत। मुझे अंदर ही अंदर गिल्टी फील हो रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी का मर्डर कर दिया हो।
मेरी बात सुनकर रवि मुझे समझाते हुए बोला
रवि- वो इसलिए क्योंकि तुम एक अच्छे और साफ दिल की लड़की हो। तुम तो अपने दुश्मन का भी बुरा नहीं चाहती है, तो फिर गगन से तो तुम्हारी कोई दुशमनी भी नहीं थी। तुमने जो कुछ भी किया वो हम सब के लिए किया है, उन तीन लडकियों के लिए किया है जिन्होने गगन की बजह से आत्महत्या कर ली थी और उन सभी लडकियों के लिए किया है जो आगे चलकर गगन का शिकार बन सकती थी। तुमने कुछ भी गलत नहीं किया है। इसलिए अपने अंदर चल रही सभी बातों को निकाल दो।
श्रेया भी रवि की बात को आगे बडाते हुए बोली
श्रेया- हाँ सपना रवि सही कह रहा है। तुम्ने कुछ भी गलत नहीं किया है। सच कहूँ तो तुम आज हम सबकी नजरों में हीरो बन गई हो। तुमने हमसे कोई रिश्ता ना होने के बाद भी हमारी मदद की है। अभी कितने दिन हुए हैं हमारी दोस्ती को। मुश्किल से 1 हफ्ता, पर तुमने इस 1 हफ्ते की दोस्ती के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल दी थी। तुम्हारी जैसी दोस्त तो 1किस्मत से मिलती है। बैसे एक बात तो है कि रवि सच में डफर है।
श्रेया की बात सुनकर रवि चिढते हुए बोला
रवि- अब मैं कहाँ से बीच में आ गया
श्रेया- तुम्हारी हॉफ गर्लफ्रेंड का मूड ऑफ है और तुम उसका मूड ठीक करने के लिए कुछ खाने पीने का आईटम लाने की जगह यहाँ खडे होकर बकवास कर रहे हो।
श्रेया की बात सुनकर रवि अपना सर खुजलाते हुए बोला
रवि- ओह सॉरी सॉरी मैं अभी लाया
इतना बोलकर रवि वहाँ से चला गया और वाकी लडकियाँ मुझसे बातें करके मेरा मूड ठीक करने की कोशिश करने लगी। जिस कारण जल्द ही मैं भी नॉर्मल हो गई थी। कुछ ही देर में रवि सबके लिए आईसक्रीम लेकर आ गया। आईसक्रीम देखकर पूजा हैरान होते हुए बोली
पूजा- इतनी शर्दी में आईसक्रीम
रवि- तभी तो लाया हूँ। शर्दी के मौसम में आईसक्रीम खाने का मजा ही कुछ और है। आज ट्राय करके देखो। मजा ना आये तो कहना
रवि की बात सुनकर सबने उससे आईसक्रीम ले ली और खाने लगे। हम लोग काफी देर तक वहाँ बैठे आपस में बातें करते रहे। फिर हम सबने एक रेस्टोरेंट जाकर साथ में खाना खाय़ा और अपने अपने घर के लिए निकल गए। मैंने कल आउट ऑफ सिटी जाने का प्लान कैंसिल कर दिया था। क्योंकि कल दोपहर को हम सभी लोग रवि के फार्म हाऊस पर मिलकर पैसे कलेक्ट करके उन तीनों लडकियों के घर देने जाने बाले थे।
इसलिए कल सुबह मैंने लोकल के ही 1-2 काम खत्म करने का प्रोग्राम बनाया था। होटल जाकर मैं बाथरूम में नहाने चली गई। क्योंकि आज सुबह ही असलम का मेरे पास कॉल आ गया था। जिस कारण मुझे आज एक कस्टमर के पास जाना था। नहाकर तैयार होने के बाद मैंने अपने रूम को अच्छी तरह से लॉक किया और रवि को ड्यूटी पर जाने की बात कहकर ऑटो से असलम की बताई लोकेशन के लिए निकल गई।
वो लोकेशन एक 5 स्टार होटल की थी। जिसके एक आलीशान कमरे में मैं इस वक्त मौजूद थी। जहाँ दो आदमी जिनकी उम्र करीब 40-45 वर्ष थी। वो दोनों वहाँ पर मेरा ही इंतजार कर रहे थे। असलम ने मुझे पहले ही बता दिया था कि दो कस्टमर एक साथ डी.पी. करना चाहते हैं। मेरी पहले भी कई बार डी.पी. हो गई थी। इसलिए मुझे इसमें कोई प्राब्लम नहीं थी। जिसके बदले में वो लोग मुझे डबल पेमेंट यानि पूरे 2 लाख रूयये दे रहे थे। उनमें से एक आदमी को देखकर मैं हैरान रह गई।
वो आदमी और कोई नहीं बल्कि रवि के पिता संजय सक्सेना थे। जिनका फोटो मैंने रवि के मोबाईल में पहले भी देखा था। पर जल्द ही मैंने अपने आप को नॉर्मल कर लिया। क्योंकि मैं फिलहाल जो काम कर रही थी उसमें जान पहचान का कोई मतलब नहीं था। मतलब था तो बस अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने का और अपनी फैंटसी पूरी करने का। इसलिए मैंने उनसे वे बजह जान पहचान बडाने की जगह अपने काम पर फोकस करना ही ठीक समझा।
बैसे भी आज की घटना के बाद अब मैं किसी के साथ ज्यादा जान पहचान बडाना नहीं चाहती थी। बस अपना काम करना यानि दूसरों मजा देना और खुद भी लेना बस यही मेरा प्लान था। जिस कारण होटल रूम में जाकर मैंने सीधे अपने कपडे उतार दिए और उन लोगों के सामने एक दम नंगी खडी हो गई। वो लोग तो पहले से ही इसी इंतजार में थे। इसलिए बारी बारी से दोनों लोगों ने मेरे साथ जी भऱ कर मजे किए। जिसमें मैंने भी उनका भरपूर साथ दिया था। जिस कारण दोनों ही मेरे काम से काफी खुश थे।
पहला राऊंड खत्म होने के बाद हम तीनों ने कुछ देर रेस्ट किया और फिर दो-दो पैग लगाने के बाद एक बार फिर हम लोग शूरू हो गए। इस बार दोनों आदमी एक साथ मेरे ऊपर टूट पडे थे। मैं पहले से ही इस सब के लिए तैयार थी। जिस कारण मैं भी भरपूर उनका साथ देने के साथ साथ खुद भी मजे ले रही थी। कुझ देर तक एक दूसरे को सहलाने और चूमने के बाद उनमें से एक आदमी पीठ के बल लेट गया। जिसके ऊपर मैं बैठ गई और उसका लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया।
इसके बाद दूसरे आदमी ने पीछे से मेरी गाँड में अपना लण्ड घुसा दिया और धक्के मारने शूरू कर दिए। जिसके बाद एक बार फिर मेरी चुदाई शुरू हो गई। कुछ देर इसी पोजीशन में रहने के बाद उन दोनों ने अपनी अपनी पोजीशन चेंज कर ली और फिर से शूरू हो गए। मैं उन दोनों ही आदमियों से काभी इम्प्रेश थी। क्योंकि दोनों काफी जेंटली सेक्स कर रहे थे और खुद मजे लेने के साथ साथ मुझे भी मजा दे रहे थे। साथ साथ वो दोनों हाईजीन का भी पूरा ध्यान रख रहे थे, क्योंकि दोनों ने ही सेक्स के दौरान कंडोम का यूज किया था।
दूसरा राऊंड कुछ ज्यादा ही लम्बा हो गया था। जिस कारण हम तीनों काफी थक गए थे। इसलिए काम खत्म होते ही हम तीनों एक दूसरे की बाहों में सो गए। अगले दिन सुबह करीब 7 बजे मैं उस होटल से निकल कर अपने होटल रूम में जा पहूंची और कपडे चेंज करके आपने ऑफिस का काम खत्म करने के निकल गई। उस दिन मैंने केवल दो लोकेशन पर ही बिजिट किया था। जिसके बाद काम खत्म होते होते दोपहर के 2 बज गए थे। वहाँ से मैं सीधा रवि के फार्म हाऊस पर जा पहूँची, जहाँ बाकी लोग मेरा ही इंतजार कर रहे थे।
कहानी जारी है...........