Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 8 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

Update 062 -

ऑफिस पहूँचकर मैंने सबसे पहले बॉस के पास जाकर अपनी रिपोर्ट सबमिट की और उसके बाद अपनी टीम से मिलने जा पहूँची। काफी दिनों बाद अपनी टीम से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन मैं जानती थी कि अब मैं ज्यादा दिनों तक यहाँ नहीं रहने बाली हूँ। इसलिए मैंने सभी को कैंटीन ले गई और अपने सभी टीम मेम्बर्स को एक छोटी सी ट्रीट दी। असल में अब मैं जितने भी दिन यहाँ रुकने बाली थी। उतने दिन मैं अपनी टीम के साथ इंजॉय करते हुए बिताना चाहती थी। इस दौरान मैंने रचना के साथ भी नॉर्मल तरीके से ही बात की थी और उसे इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं होने दिया था कि मैं उसके और अमन के अफेयर में जब जानती हूँ।

वहीँ दूसरी तरफ पंकज जो पिछली रात मेरे साथ बिता चुका था, वो दूसरों से नजरें चुराकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था, पंकज के ऐसा करने से ना चाहते हुए भी बार बार मेरे चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ रही थी। कैंटीन में बातें करते वक्त ही मैंने अपनी टीम से पिछले एक महिने की सारी रिपोर्ट भी ले ली थी। इसी दौरान बातों ही बातों में मुझे पता चला कि मेरी टीम के लगभग सभी मेम्बर्स को पक्का यकीन है कि इस साल का इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का ऑवार्ड मुझे ही मिलेगा। लेकिन मुझे इससे कोई फर्क पडने बाला नहीं था। क्योंकि मैं जल्द ही अपनी पहचान बदलकर एक नई जिंदगी शुरू करने बाली थी। इसलिए मेरी इस पहचान को अगर यह ऑवार्ड मिल भी जाता है, तो वो मेरे किसी भी काम का नहीं था।

जब मैं भोपाल में थी तो मैंने पहले ही अपनी इस पहचान को हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था और उसके लिए मुझे सबसे पहले इस कम्पनी से रिजाईन देना था। जिस कारण मैंने पहले ही अपना एक रेजिग्नेशन लेटर टाईप कर लिया था और आज मैं उसे अपने साथ ऑफिस में भी लाई थी। सभी लोगों को ट्रीट देने के बाद मैं एक बार फिर बॉस के पास गई और उन्हें अपना रेजिग्नेशन लेटर सौंप दिया। मेरा रेजिग्नेशन लेटर देखकर बॉस काफी ज्यादा हैरान थे। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर मैं अपने कैरियर के पीक पर रिजाईन क्यों दे रही हूँ। इसलिए वो मुझे समझाते हुए बोले

बॉस- निशा यह सब क्या है

मैं पहले से ही बॉस के सबलों के लिए मन ही मन जबाब तैयार कर चुकी थी। इसलिए बॉस का सबल सुनकर मैंने तुरंत उनसे कहा

निशा- सर मेरे कुछ पर्सनल इश्यू हैं। जिस कारण मैं अब यह जॉब कंटीन्यू नहीं कर सकती

बॉस- पर्सनल ईश्यू हैं…. या फिर कहीं और जॉब के लिए एप्लाई किया है। जिस कारण तुम यह रिजाईन दे रही हो। देखो निशा तुम्हारा प्रमोशन होने बाला है और उसके बाद तुम्हें जो सैलरी मिलेगी वो कोई दूसरी कम्पनी तुम्हें नहीं दे पायेगी।

निशा- नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है। मैंने कहीं भी जॉब के लिए एप्लाई नहीं किया है। बस अपने पर्सनल ईश्यू के कारण ही मैं रिजाईन कर रही हूँ।

बॉस- देखो निशा तुम हमारी बेस्ट इम्पलॉय हो और मैंने तुम्हारा नाम इम्पलॉय ऑफ द ईयर के लिए बोर्ड मैंबर के पास भेज दिया है। बोर्ड मेम्बर क्या कहेंगे जब उन्हें पता चलेगा कि जिसे मैं बेस्ट इम्पलॉय बोलता हूँ। वो रिजाईन देकर चली गई।

निशा- लेकिन सर आपको इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं है, मुझे पूरा यकीन है कि इस साल भी इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड हर साल साल की तरह किसी मेल इम्पलॉय को ही मिलेगा और रही बात प्रमोशन की तो आप पहले से ही जानते हैं कि मेरे पास आई.टी. की कोई बडी डिग्री नहीं है। जिस कारण पिछले दो सालों से बोर्ड मेंबर्स ने मेरा प्रमोशन पहले ही रोक कर रखा हुआ है। इसलिए अब मुझे भी इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पडता है….

मेरी बात सुनकर बॉस ने गंभीर होकर कुछ देर सोचा और बोले

बॉस- देखो निशा तुम एक काबिल इम्पलॉय हो… मैं तुम्हें ऐसे जाने नहीं दे सकता…. अच्छा एक बात बताओ अगर तुम्हारा प्रमोशन हो जाऐ और तुम्हें इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का अवार्ड भी मिल जाऐ। तो क्या तब भी तुम रिजाईन करना चाहोगी

निशा- पता नहीं सर…. मैंने इस बारे में अभी कुछ सोचा नहीं है…..

बॉस- तो फिर अवार्ड सेरेमनी तक रुको… अगर तब तक तुम्हारा प्रमोशन नहीं होता है और तुम्हें अवार्ड नहीं मिलता है…. तो बाद में भी तो तुम रिजाईन दे सकती हो ना…

निशा- हाँ दे तो सकती हूँ… लेकिन बाद में रिजाईन देने का मतलब होगा कि अवार्ड ना मिलने के कारण मैं रिजाईन कर रही हूँ और अपने सीनियर्स पर दबाब बनाने की कोशिश कर रही हूँ। इसलिए मैं नहीं चाहती कि मेेरे बाद में रिजाईन देने पर कोई मेरे कैरेक्टर पर सबाल उठाऐ। बैसे भी सर आप मुझे अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं बैसी लडकी नहीं हूँ जो पैसे और फेम के पीछे भागती है… अगर मेरे पास बास्तव में मेरे पर्सनल ईश्यू नहीं होते, तो मैं बिना किसी प्रमोशन और अवार्ड के ऐसे ही यहाँ काम करती रहती। हाँ यह बात सही है कि अगर मुझे प्रमोशन के साथ साथ इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड भी मिल गया, तो उससे मुझे अपने पर्सनल इश्यू को सॉल्ब करने में थोडी बहुत मदद मिल सकती। और हो सकता है कि तब मुझे रिजाईन देने की जरूरत ही ना पडे। लेकिन मैं यह रिस्क लेकर अपने कैरेक्टर को सबके नजरों में गिरनाना नहीं चाहती। इसलिए मैं पहले ही रिजाईन दे रही हूँ।

मेरी बात सुनकर बॉस ने कुछ देर तक मेरी कही बातों के बारे में सोचा और फिर गंभीर होते हुए बोले

बॉस- ठीक है निशा मैं तुम्हारा यह रैजिग्नेशन एक्सेप्ट कर रहा हूँ।

इतना बोलकर बॉस ने मेरे रैजिग्नेशन को अप्रूव करके उसपर अपने साईन कर दिए और आज की डेट मेंशन करने के बाद स्टाम्प भी लगा दिया। इसके बाद बॉस ने मेरे रैजिग्नेशन लैटर को एक अलग फाईल में संभालकर रखते हुए कहा

बॉस- देखो निशा मैं तुम्हारी प्राब्लम समझ सकता हूँ। इसीलिए मैंने तुम्हारा रैजिग्नेशन आज की डेट में अप्रूब किया है। लेकिन यह बात केवल हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए। फिलहाल मैं तुम्हारा रैजिग्नेशन अपने पास संभाल कर रख रहा हूँ और तुम कम्पनी की पॉलिसी के हिसाब से अपने एक महिने का नोटिस पीरियड पूरा करने के लिए रैगुलर ऑफिस आती रहोगी। असल में मैं अपनी तरफ से एक आखिरी कोशिश करना चाहता हूँ। अगर मैं तुम्हें प्रमोशन और इम्पलॉय ऑफ द ईयर का आवार्ड दिलाने में कामयाब रहा, तो हम दोनों ही यह रैजिग्नेशन बाली बात भूल जाऐंगे और तुम खुद अपने हाथों से यह रैजिग्नेशन फाडकर फेंक दोगी। लेकिन अगर मैं ऐसा कुछ नहीं कर पाया, तो मैं तुम्हारा रैजिग्नेसन अपने सीनियर्स के पास भेज दूँगा और सभी लोगों को तुम्हारे अवार्ड सेरेमनी से पहले ही रिजाईन करने बाली बात बता दूँगा। ताकि कोई भी तुम्हारे कैरेक्टर पर उंगली ना उठा सके।

बॉस की बात सुनकर मैंने कुछ पलों तक इस बारे में सोचा, असल में मुझे अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडने बाला था कि मुझे प्रमोशन या अवार्ड मिल रहा है या नहीं। मैं तो बस किसी भी तरह से बॉस को अपना रैजिग्नेशन देकर यहाँ से जाना चाहती थी। ताकि मैं अपने आगे के प्लान पर काम कर सकूँ। साथ ही साथ मेरा अब इस मैटर पर कोई भी बात करने या सफाई देने का कोई इरादा नहीं था। इसलिए मैंने बॉस का दिल रखने के लिए उनसे कहा

निशा- ठीक है सर… मुझे आपकी बात मंजूर है….

इतना बोलकर मैं बॉस के केबिन से बाहर निकल गई और अपनी टीम के साथ पेंडिंग कामों को पूरा करने में लग गई। ऑफिस का सारा काम खत्म होने के बाद मैं शाम करीब 5 बजे अपने घर के लिए निकल गई। ताकि मैं घर पर कुछ देर रेस्ट कर सकूँ। क्योंकि मेरा प्लान आज रात फिर से उसी पव में जाकर पंकज के साथ इंजॉय करने का था। घऱ पर आकर मैं रात करीब 8 बजे तक सोती रही। जब मेरी आँख खुली तो मैं फटाफट तैयार होकर पव जाने के लिए निकल गई। आज मैं अपने साथ अमन की कार नहीं ले गई थी। क्योंकि आज पंकज अपनी कार से खुद मुझे लेने आया था, जो मेरी कॉलोनी से बाहर खडा होकर मेरा इंतजार कर रहा था।

कार के अंदर बैठते ही मैंने अपनी सरवार कुर्ती निकाल कर एक पॉलीथीन बैग के अंदर रख दी। मैंने सलवार कुर्ती के अंदर एक ब्लू कलर का शॉर्ट जींस और ब्लैक कलर का ऑफ सोल्डर टॉप पहना हुआ था। जिसमें मेरी क्लीवेज साफ साफ दिखाई दे रही थी। मुझे इन कपडों में देखकर पंकज के चेहरे पर चमक आ गई थी। पर मैंने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया और कार के बैक व्यू मिरर में देखते हुए अपने बालों को ठीक करने लगी। तब तक पंकज कार आगे बडा चुका था। जब हम पव पहुँचे तो उस समय रात के करीब 9 बज चुके थे। लेकिन इससे पहले हम पव के अंदर जाते, अचानक से पंकज के मोबाईल पर उसके पैरेंट्स की कॉल आ गई।

इसलिए पंकज उनसे बात करने के लिए पव के बाहर ही रुक गया। जबकि मैं अकेले ही पव के अंदर जा पहुँची। पव के अंदर पहुंचकर मैंने अपने लिए एक बियर ली और बैठने के लिए खाली चेयर देखने लगी। ठीक तभी मेरी नजर पव के अंधेरे कार्नर में बैठे एक कपल पर पडी। लेकिन मैं उस अँधेरे कार्नर में भी उन दोनों को आसानी से पहचान सकती थी। वो दोनों कोई और नहीं बल्कि मेरा पति अमन और मेरी जूनियर रचना थे। उन दोनों को उस पव में देखकर मेरा खून गुस्से से खौलने लगा था।

क्योंकि रचना जो मेरी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी, वो आज ऑफिस में बार बार मुझसे अमन और मेरे पर्सनल मैटर के बारें में बात करने की कोशिश करती रही थी और बार अमन को जीजू जीजू बोलकर मुझसे जानने की कोशिश करती रही कि अमन लंदन से कब बापिस आ रहा है। हाँलाकि कल रात ही पंकज ने रचना और अमन के खिलाफ मुझे सबूत दिखाऐ थे। पर मुझे पंकज की इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था कि अमन यहीं दिल्ली में रचना के साथ रह रहा है। इसलिए आज शाम को घऱ पहुँचकर मैंने ना चाहत हुए भी अमन को कॉल किया था।

उस वक्त अमन ने मुझसे लंदन में होने की बात कही थी और वहाँ पर रात के 1 बजने की बोलकर मुझसे झगडा भी किया था। उस वक्त एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा था कि हो सकता है पंकज को कोई गलत फहमी हुई हो या मुझे पाने के लिए पंकज ने अमन और रचना की कैजुअल मुलाकात पर खीचें गए पुराने फोटो मुझे दिखाकर, मेरे और अमन के बीच गलत फहमी पैदा करने की कोशिश की हो। हाँलाकि पंकज ने अगर ऐसा किया भी होता, तो भी मुझपर कोई फर्क नहीं पडने बाला था। क्योंकि मैं अमन से डॉयवोर्स लेकर नई जिंदगी शुरू करने का पूरा प्लान पहले ही तैयार कर चुकी थी।

पर अब जब मैं अमन और रचना को अपने सामने एक साथ देख रही थी तो मुझे उनके झूठ बोलने और मेरे सामने नाटक करने को लेकर बहुत गुस्सा आ रहा था। उन दोनों को वहाँ देखकर अब मैं उस पव में एक पल भी नहीं रुकना चाहती थी। क्योंकि अब वहाँ पर मेरे और पंकज के एक साथ पकडे जाने का भी डर था। पर अगले ही पल मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना कुछ देर उनके आस पास रहकर उनकी बातें सुनूँ। ताकि मुझे भी तो पता चले कि आखिर उन दोनों के बीच चल क्या रहा है। इस बारे में सोचते ही मैं उस अंधेरे कार्नर का फायदा उठाते हुए और अपने खुले बालों की मदद से अपने चेहरे को ढंक कर, उन दोनों के एकदम पास बाली चेयर पर जाकर बैठ गई।

मैं उन दोनों की तरफ अपनी पीठ करके बैठी हुई थी ताकि वो दोनों मेरा चेहरा ना देख पाऐं। हम लोग इस वक्त जिस जगह बैठे हुए थे, वहाँ ज्यादा लोग नहीं और म्यूजिक की आवज भी वहाँ ज्यादा नहीं आ रही थी। जिस कारण मुझे उन दोनों की आवाजें साफ साफ सुनाई दे रही थीं। मैंने सबसे पहले अपने मोबालईल से पंकज को एक मैसेज टाईप करके सेंड कर दिया। जिसमें मैंने उसे रचना और अमन के पव के अंदर होेने की बात बता दी थी और उसे बाहर अपनी कार में ही मेरा इंतजार करने के लिए बोल दिया था। मैंने अभी पंकज को मैसेज सेंड ही किया था कि तभी मुझे रचना की आवाज सुनाई दी

रचना- अमन यार पता नहीं तुम्हें कभी कभी क्या हो जाता है। तुम्हें पता है ना कि कल निशा बापिस आ गई है। तो फिर यहाँ पव में आने की क्या जरूरत थी। अगर हमें इस तरह किसी ने साथ में देख लिया तो बहुत प्राब्लम हो जाऐगी।

रचना की बात सुनकर अमन गुस्से से चिढते हुए बोला

अमन- तो क्या अब मैं उसके डर के कारण कहीं बाहर निकलना भी बंद कर दूँ।

रचना- ओफ्हो अमन तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रहे हो, अभी तुम उसकी नजरों में लंदन में हो

अमन- वही तो मैं भी बोल रहा हूँ। जब वो जानती है कि मैं इस वक्त लंदन में हूँ। तो फिर उसे क्या सपना आऐगा कि हम दोनों यहाँ पव में इंजॉय कर रहे हैं।

रचना- पता नहीं अमन…. लेकिन मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है।

अमन- ओफ्हो रचना तुम बेकार में ही परेशान हो रही हो। निशा इस एरिया में कभी नहीं आती है। वो केवल अपने काम से मतलब रखती है और किसी पव बगैरह में जाकर इंजॉय करना उसकी आदत नहीं है।

रचना- जो भी हो पर आज निशा ऑफिस में काफी खुश दिखाई दे रही थी। लगता है उसका इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का ऑवर्ड पक्का हो गया है और उसका प्रमोशन भी होने बाला है।

रचना की बात सुनकर अमन एक बार फिर चिढते हुए बोला

अमन- जो भी हो… पर इस अवार्ड और प्रमोशन के बाद भी मैं उसे कभी खुश नहीं रहने दूँगा।

अमन के कहे गए शब्द सुनकर मैं बुरी तरह से हैरान रह गई थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मेरे और अमन के बीच ऐसा क्या हुआ है। जिससे बो मेरे बारे में यह सब कह रहा है। आखिर वो मुझे खुश क्यों नहीं देखना चाहता।

कहानी जारी है .....
 
Update 063-

मैं अमन के कहे गए शब्दों के बारे में अभी सोच ही रही थी कि तभी मुझे रचना की आवाज सुनाई दी, जिसे सुनकर मैंने अपने दिमाग में चल रही बातों को झटक दिया और ध्यान से उन दोनों की बातें सुनने लगी

रचना- अरे यार अमन तुम आखिर निशा से इतनी नफरत क्यों करते हो

अमन- तुम नहीं समझोगी रचना

रचना- अब जब तुम कुछ बताओगे.. तब तो समझ में आयेगा ना

अमन- सच कहूँ तो मुझे नहीं पता कि मैं उससे इतनी नफरत क्यों करता हूँ… वो एक सुंदर और काबिल औरत है… लेकिन उसकी यह कबीलियत मुझसे बरदास्त नहीं होती है। उसके साथ होने पर मुझे ऐसा महसूस होता है, जैसे मैं उसके सामने कुछ भी नहीं हूँ।

रचना- पर क्यों….

अमन- क्योंकि उसे मुझसे ज्यादा इंटेलीजेंट और काबिल होने का कोई हक नहीं है। वो बस एक मिडिल क्लास फैमिली से है। हायर सेकेण्डरी के बाद जब वो कम्प्यूटर साईंस की डिग्री करना चाहती थी। तो उसके माता-पिता उसकी शादी मेरे साथ करवा दी थी, ताकि उन्हें निशा की पढाई का खर्चा ना उठाना पडे। वो काफी खूबसूरत थी और मुझसे कम पढी लिखी थी। इसलिए उस वक्त मैंने सोचा था कि निशा सारी जिंदगी मुझसे दबकर रहेगी। लेकिन शादी के बाद उसने खुद से ही ऑनलाईन पढाई करके कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग सीख ली और बिना किसी कॉलेज में जाये और बिना किसी के कुछ समझाये वो एक टॉप लेवल की प्रोग्रामर भी बन गई।

अमन की बात सुनकर रचना ने कहा

रचना- यह तो अच्छी बात है ना

अमन- क्या खाक अच्छी बात है… वो कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग में इतनी ज्यादा एक्सपर्ट है कि वो मेरे बनाये प्रोग्राम्स को भी बीट कर देती है और उनमें कई सारी गलतियाँ भी निकाल देती थी। जिस कारण मैं अपने आपको उसके सामने कमजोर महसूस करता हूँ। बस इसीलिए मेरे मन में धीरे धीरे उसके लिए नफरत पैदा होने लगी। जब उसने पहली बार मुझसे जॉब करने के बारे में पूछा था, तो उस वक्त मुझे लगा था कि कोई डिग्री ना होने के कारण उसे कभी कोई जॉब नहीं मिलेगी। पर पता नहीं कैसे तुम्हारी कम्पनी ने उसे हायर कर लिया और अब उसे प्रमोशन के साथ साथ इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड भी मिलने वाला है। जो मैं बिल्कुल भी वरदास्त नहीं कर सकता और ना ही उसे कभी खुश देख सकता हूँ।

रचना- अगर ऐसा है तो तुम उससे डायवोर्स लेकर अलग क्यों नहीं हो जाते। हम कब तक यूँ ही छिप छिपकर मिलते रहेंगे। मैंने तुम्हारे चक्कर में अपने पति से भी डायवोर्स ले लिया है और अब तो मैं तुम्हारे बच्चे की माँ भी बनने बाली हूँ।

रचना और अमन की बातें सुनकर मेरा सिर बुरी तरह से चकरा रहा था। मुझे नहीं पता था कि अमन के मन में मेरे लिए इतना ज्यादा जहर भरा हुआ है। पर रचना ने जो आखिरी बात कही उससे मेरा खून खौल गया था। मैंने अमन से कई बार पैरेंट्स बनने के बारे में बात की थी। लेकिन हर बार अमन यह कहकर मेरी बात टाल देता था कि “अभी हमारी उम्र अपने कैरियर पर फोकस करने की है, ना कि बच्चे पैदा करने की।” पर अब मुझे पता चल रहा है कि मेरी सबसे अच्छी दोस्त मेरे पति के नाजायज बच्चे की माँ बनने बाली है और इसमें मेरे पति अमन को कोई प्राब्लम नहीं है। मैं अभी इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी मुझे अमन की आवाज सुनाई दी

अमन- मैं उसे डॉयवोर्स देकर इतनी आसानी से छुटकारा नहीं देना चाहता। बैसे भी जब हमें उससे करोडों का फायदा हो सकता है तो मैं यह मौका कैसे छोड सकता हूँ।

अमन की बात सुनकर रचना हैरान होते हुए बोली

रचना- करोडों के फायदे से तुम्हारा क्या मतलब है

अमन- असल में कुछ समय पहले निशा ने अपने नाम से एक इनश्योरेंस पॉलिसी ली थी। जिसके अनुसार अगर उसकी डेथ किसी एक्सीडेण्ड में होती है तो उसके नॉमिनी यानि मुझे पूरे 10 करोड रुपये मिलेंगे। इसलिए अगर हम निशा को किसी एक्सीडेण्ड में जान से मार दें, तो हमें उससे छुटकारा भी मिल जायेगा और पैसे भी।

अमन की बात सुनकर रचना बुरी तरह से डरते हुए बोली

रचना- त त तुम पागल हो क्या... यह सब फालतू बातें क्यों कर रहे हो। अगर उसे कुछ भी हुआ तो पुलिस हमें नहीं छोडेगी।

रचना की बात सुनकर अमन लापरवाही से बोला

अमन- अरे कुछ नहीं होगा मेरी जान.... मैंने पहले से ही सब प्लान कर लिया है। उसकी माँ तो पहले ही मर चुकी है और बाप हमेशा बीमार रहता है। बस एक भाई है जो अभी बहुत छोटा है। इसलिए वो लोग हमारा कुछ भी नहीं बिगाड सकते

अमन की बातें सुनकर रचना थोडा हिचकिचाते हुए बोली

रचना- प प पर हम यह सब आखिर करेंगे कैसे

अमन- हमें कुछ खास नहीं करना होगा। बस जिस दिन वो आगरा अपने पिता और भाई से मिलने के लिए जायेगी। मैं उस दिन अपनी कार के ब्रेक फेल करवाकर निशा को अपनी कार ले जाने के लिए बोल दूँगा। बस उसके बाद जो कुछ भी होगा उसका अंदाजा तुम लगा ही सकती हो। बैसे भी दिल्ली आगरा हाईवे पर आऐ दिन एक्सीडेंट होते रहते हैं। ऊपर से मेरी सी.एन.जी. कार है, जिस कारण एक्सीडेण्ट होने पर उसमें तुुरंत ब्लॉस्ट हो जाऐगा और गाडी के साथ साथ निशा के भी चिथडे उड जायेंगे।

अमन का प्लान सुनकर रचना एक बार फिर डरते हुए बोली

रचना- पता नहीं पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा अमन… अगर हमारा प्लान फेल हो गया तो…..

अमन- अरे यार तुम चिंता मत करो…. सब ठीक होगा। बस एक बार हम निशा को ठिकाने लगा दैं, उसके बाद हम दोनों को इस तरह छिप छिपकर मिलने की कोई जरूरत नहीं है और हम दोनोें अपने बच्चे के साथ एक अच्छी जिंदगी बिताऐँगे।

अमन की बात सुनकर रचना एक गहरी सांस लेते हुए बोली

रचना- ठीक है… तुम्हें जैसा सही लगे करो, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ। बैसे अब तुम अपने घर बापिस कब जा रह हो….

अमन- फिलहाल तो मैं तुम्हारे साथ ही रहना चाहता हूँ और ऑवर्ड नाईट के एक दिन पहले घर जाने के बारे में सोच रहा हूँ। क्योंकि उस दिन निशा आवार्ड नाईट की तैयारियों में बिजी रहेगी। उसी दिन मैं अपनी कार को किसी गैराज में ले जाकर उसके सीट बगैरह का मटेरियल चेंज करवा लूँगा। ताकि एक्सीडेंट होने पर कार में तुरंत आग लग जाऐ। रही बात ब्रेक फेल करने की, तो यह काम मैं उस दिन करूँगा, जिस दिन निशा आगरा जायेगी।

उन दोनों कमीनों की बातें सुनकर तो मेरा खून गुस्से से खौलने लगा था। अब मेरे सामने अब सारी बातें साफ थी। पता नहीं उन दोनों के बीच कबसे चक्कर चल रहा है और अब तो रचना प्रेग्नेंट भी है। बैसे तो मैंने भी अमन को धोखा दिया था। पर मैं तो खुद ही शान्ति से उससे डायवोर्स लेकर अलग होने बाली थी। लेकिन वो दोनों तो मिलकर मुझे जान से ही मारना चाहते हैं। अगर वो दोनों मेरे साथ यह सब केवल अपने प्यार की खातिर करते, तो शायद मैं उन्हें माफ भी कर देती। लेकिन अब जब वो दोनों मेरी मौत से करोडों रुपये कमाने के बारे में सोच ही रहे हैं। तो फिर अब उन दोनों को माफ करने का कोई फायदा नहीं था। पर मैं उन्हें जान से नहीं मारना चाहती थी।

बल्कि मैं तो चाहती हूँ कि वो दोनों सारी जिंदगी अपनी गलती के लिए पछताऐँ। पर इसके लिए मुझे अपने पुराने प्लान में कुछ चेंज करने पडेंगे। लेकिन फिलहाल मेरा अब यहाँ कोई काम नहीं बचा था। क्योंकि मुझे उन दोनों से जो कुछ भी जानना था, वो मैं जान चुकी थी। बैसे भी मैं अब तक वहाँ बैठकर मैं अपनी बियर खत्म कर चुकी थी। इसलिए मैं जैसे ही अपनी चेयर से उठकर पव के बाहर जाने लगी, ठीक तभी मेरे सामने एक आदमी आकर खडा हो गया। जिसने अपने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था। उस आदमी की कद काठी और उसके कपडों को देखकर मैं तुरंत उसे पहचान गई, वो कोई और नहीं बल्कि पंकज था। इससे पहले मैं उससे कुछ कहती पंकज ने अपने हाथ में पकडा दूसरा मास्क मुझे दे दिया और अपनी आँखों से मुझे वो मास्क पहनने का इशारा किया।

पंकज का इशारा समझते ही मैंने तुरंत उस मास्क को पहन लिया और पंकज के साथ वहाँ से थोडी दूर दूसरी खाली चेयर पर जाकर बैठ गई। ताकि हम दोनों की बातें अमन और रचना ना सुन सकें। हम दोनों के चेहरे पर मास्क लगे होने के कारण हमारे पहचाने जाने का कोई डर नहीं था। बैसे भी कुछ समय पहले आऐ कोरोना पेंडमिक और दिल्ली के पॉलूशन के कारण आम तौर पर लोगों का अपने चेहरे पर फेस मास्क लगाकर रखना अब कॉफी कॉमन हो गया था। अमन और रचना से दूर जाते ही मैंने और पंकज ने अपने चेहरे के मास्क को उतार लिया और पंकज को गुस्से से घूरते हुए बोली

निशा- आखिर तुम अंदर क्यों आऐ… मैं तो बस बाहर आने ही बाली थी। बैसे भी उन दोनों के यहाँ होने पर हम दोनों यहाँ इँजॉय नहीं कर सकते हैं।

मेरी बात सुनकर पंकज मुस्कुराते हुए बोला

पंकज- पहले मैं भी यही सोच रहा था। इसलिए इतनी देर तक अंदर नहीं आया था। लेकिन फिर मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना हम दोनों अपने चेहरे पर मास्क लगाकर उन दोनों के आस पास ही रहें। ताकि हम उन दोनों के खिलाफ कुछ और सबूत इकट्ठा कर सकेंगे। जो तुम्हें अमन से डायवोर्स दिलाने में मदद करेंगे।

अमन की बात सुनकर मैं निऱाश होते हुए बोली

निशा- अब इसका कोई फायदा नहीं है… मैंने अभी अभी उन दोनों की बातें सुनी हैं। उसके हिसाब से अमन मुझे कभी भी डायवोर्स नहीं देगा।

मेरी बात सुनकर पंकज थोडा हैरान होते हुए बोला

पंकज- मतलब

निशा- बताती हूँ बाबा… लेकिन पहले तुम कुछ खाने पीने के लिए लेकर आओ… मुझे बहुत जोरों से भूख लग रही है। उसके बाद हम दोनों तसल्ली से इस बारे में बात करेंगे।

मेरी बात सुनकर पंकज मुस्कुराते हुए हम दोनों के लिए खाने पीने का समान लेने चला गया। मैं इस वक्त अमन और रचना से थोडी दूर बैठी हुई थी। जहाँ से मैं उन दोनों पर आसानी से नजर रख सकती थी। लेकिन मैं जहाँ बैठी हुई थी उस जगह कुछ ज्यादा ही अंधेरा था। जिस कारण अमन और रचना मुझे नहीं देख सकते थे और ना ही मेरे और पंकज के बीच की बातें सुन सकते थे। करीब 5 मिनट बाद पंकज दो बियर और कुछ खाने का सामान लेकर आया। उसके बैठते ही मैंने बियर कैन उठाया और एक घूँट शिप करने के बाद स्नैक्स खाने लगी। तभी पंकज भी बियर का एक घूँट शिप करते हुए बोला

पंकज- अब बताओ… आखिर उन दोनों के बीच क्या बातें हो रहीं हैं…

पंकज की बात सुनकर मैंने बियर शिप करते हुए बोली

निशा- असल में उन दोनों के बीच यह सब काफी लम्बे समय से चल रहा है और रचना अमन के नाजायज बच्चे की माँ भी बनने बाली है। पता नहीं क्यों पर अमन को मेरे टेलेंट और कामयाबी से जलन होती है। उसकी यह जलन कब नफरत में बदल गई इसके बारे में आज तक मुझे भी पता नहीं चला था। अपनी इसी नफरत के चलते वो मुझे पूरी तरह से बर्बाद कर देना चाहता है। यहाँ तक की वो दोनों मिलकर मुझे जान से मारने के बारे में भी सोच रहे हैं।

मेरी बात सुनकर पंकज हैरान होते हुए बोला

पंकज- ब्हॉट…. यह क्या बेबकूफी है… अगर वो तुमसे नफरत करता है तो सीधे सीधी तुम्हें डॉयवोर्स देकर तुम्हें आजाद क्यों नहीं कर देता… आखिर तुम्हें जान से मारने की क्या जरूरत है। क्या बो दोनों यह भी नहीं जानते कि अगर उन दोनों ने तुम्हारे साथ कुछ भी किया तो पुलिस उन्हें नहीं छोडेगी।

निशा- असल में वो मेरी मौत को एक्सीडेंट दिखाने के बारे में सोच रहे हैं। ताकि किसी को भी उनपर शक ना हो और मेरी मौत के बाद वो दोनों करोडों रुपये भी कमा सकें।

मेरी बात सुनकर पंकज एक बार फिर हैरान होते हुए बोला

पंकज- करोडों रुपये कमा सकें….. कोई भला किसी दूसर इंसान की मौत से पैसे कैसे कमा सकता है…

निशा- असल में कुछ समय पहले मैंने अपने लिए एक इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। जिसके हिसाब से अगर मेरी मौत किसी एक्सीडेंट में होती है तो मेरे नॉमिनी यानि अमन को पूरे 10 करोड रूपये मिलेंगे।

मेरी बात सुनकर पंकज एक गहरी सांस छोडते हुए बोला

पंकज- अच्छा तो यह सब बस पैसों के लिए है….

निशा- हुम्म….

मेरे ऐसे ठण्डे रियेक्शन को देखकर पंकज कुछ पलों तक मुझे ऐसे ही देखता रहा और फिर वोला

पंकज- तो फिर अब तुमने आगे क्या सोचा है…. क्यों ना तुम अमन का घर छोडकर मेरे साथ रहने के लिए आ जाओ। इससे तुम उन दोनों कमीनों से सुरक्षित रहोगी। बैसे भी तुम्हारे डॉयवोर्स के बाद तो हम दोनों साथ में रहने ही बाले थे।

निशा- नहीं अभी नहीं…. अमन अवार्ड सेरेमनी के एक दिन पहले ही घऱ बापिस आऐगा। तब तक मुझे उन दोनों से कोई खतरा नहीं है। बैसे भी वो दोनों मुझे अवार्ड सेरेमनी के कुछ दिनों बाद मारने का प्लान कर रहे हैं। इसलिए मैं नहीं चाहती को उन दोनों को हम पर कोई शक हो, बैसे भी मैं सोच रही थी कि अभी अवार्ड सेरेमनी में काफी समय है। तब तक मैं अपनी इँश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी चेंज करवाकर अमन की जगह अपने भाई का नाम लिखवा दूँगी। ताकि अगर वो दोनों किसी तरह अपने प्लान में कामयाब हो भी गए तो मेरे मरने के बाद उन दोनों को फूटी कोडी भी ना मिलेे। बैसे भी मेरे अलावा अब तुम भी उनके प्लान और इरादों के बारे में जानते हो और मुझे तुम पर पूरा भरोसा है, अगर मुझे कुछ हुआ तो तुम मुझे न्याय जरूर दिलवाओगे।

मेरी बात सुनकर पंकज गुस्से से मुझे घूरने लगा

कहानी जारी है..........
 
Update 064 -

इस वक्त पंकज के मन में चल रही बातों को मैं अच्छी तरह समझ सकती थी, असल में अमन और रचना का प्लान सुनने के बाद उसके मन में मुझे खोने का डर समा चुका था। पर मैं उसके मन से यह डर निकालने के बिल्कुल भी मूढ में नहीं थी। इसलिए मैं चुपचाप खाना खाती रही। कुछ देर तक मुझे गुस्से में घूरने के बाद आखिरकार पंकज ने अपने इमोशन को कंट्रोल किया और बोला

पंकज- तो क्या हम बस हाथ पर हाथ रख कर यह इंतजार करते रहें कि वो कब तुम्हें जान से मारते हैं। क्या हम उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाने बाले हैं।

निशा- नहीं ऐसा नहीं है… असल में अवार्ड सेरेमनी तक वो मेरे साथ कुछ भी नहीं कर सकते हैं। अब अगर मुझे उनसे बचना है, तो इसका सबसे आसान तरीका अमन से डॉयवोर्स लेना है। इसलिए मैं सोच रही थी कि अवार्ड सेरेमनी के अगले दिन मैं आगरा अपने पिता और भाई के पास चली जाऊंगी और वहाँ पर मैं उन लोगों को अमन का सारा सच बता दूँगी। ताकि मेरे डायवोर्स लेने के डिसीजन में वो मेरा साथ दें। उसके बाद मैं यहाँ बापिस आकर अपना सारा जरूरी सामान लेकर तुम्हारे साथ सिफ्ट हो जाऊंगी और अमन के खिलाफ डॉयवोर्स केस फाईल कर दूँगी। जब एक बार मैं डॉयवोर्स केस फाईल कर दूँगी, तो फिर अमन चाहकर भी मेरे साथ कुछ नहीं कर पाऐगा। क्योंकि उसके बाद यदि मुझे कुछ भी हुआ, तो सबसे पहला शक अमन और रचना पर ही जाऐगा। इसलिए डॉयवोर्स होते ही हम दोनों किसी दूसरे शहर में सिफ्ट हो जाऐंगे और हमारे वर्क एक्सपीरियंस को देखते हुए हमें किसी भी बडी आई.टी. कम्पनी में आसानी से जॉब भी मिल जाऐगी।

मेरा पूरा प्लान सुनने के बाद पंकज ने कुछ देर सोचा। उसके चेहरे को देखने पर मैं समझ गई कि वो मेरे प्लान से पूरी तरह से संतुष्ट है। इसलिए अच्छी तरह से सोचने के बाद पंकज बोला

पंकज- ठीक है…. मुझे तुम्हारा प्लान एक दम सही लग रहा है। इस बीच हम अमन और रचना पर नजर भी रख सकेंगे और उनके खिलाफ कुछ और सबूत भी इकट्ठा कर लेंगे। ताकि तुम्हें उससे डॉयवोर्स लेने में आसानी हो। बस एक ही प्राब्लम है, असल में हमें नहीं पता कि इस समय वो दोनों कहाँ रह रहे हैं।

पंकज की बात सुनकर मैंने अपनी बियर का आखिरी घूँट शिप करते हुए कहा

निशा- यह तो बहुत ही आसान है…. हम चाहें तो अभी उन दोनों का पीछा कर सकते हैं या फिर जिस दिन चाहें उस दिन ऑफिस खत्म होने के बाद रचना का पीछा कर सकते हैं। आखिर वो और अमन साथ में ही तो रह रहे हैं।

पंकज- हाँ यार यह सही है… तो फिर हम कल रचना का पीछा करते हैं। रात में उनका पीछा करना ठीक नहीं है। रात के अंधेरे में उनके घर का रास्ता समझने और याद रखने में काफी परेशानी होगी।

पंकज की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

निशा- ठीक है…. तो फिर मैं अब उन दोनों पर नजर रखने और उनके खिलाफ सबूत इकट्ठा करने का सारा काम तुम्हारे ऊपर छोडती हूँ। तब तक मैं अपनी इंश्योरोंश पॉलिसी में से नॉमिनी का नाम चेंज करने के अलावा अपने कुछ दूसरे जरूरी काम निपटा लूँगी, साथ ही साथ मैं किसी अच्छे लॉयर से मिलकर डॉयवोर्स से रिलेटेड काम भी पूरे कर लूँगी।

पंकज- ठीक है… तो फिर हम कल से ही अपने अपने कामों पर लग जाते हैं।

हम दोनों इसी तरह कुछ देर तक आपस में बातें करते रहे। इस दौरान हमने अपने लिए खाने पीने का कुछ और सामान मंगवा लिया था। कुछ देर बाद हमने देखा कि अमन और रचना डॉस फ्लोर की तरफ जा रहे हैं। इसलिए हम दोनों ने भी जल्दी जल्दी से अपना खाना और बियर खत्म की, फिर हम दोनों भी अपने अपने चेहरे पर मास्क लगाकर डाँस फ्लोर की तरफ चल पडे। मास्क लगा होने के कारण हमें पहचाने जाने का कोई डर नहीं था। इस दौरान पंकज जानबूझकर अमन और रचना के आस पास खडे होकर मेरे साथ डाँस कर रहा था और जब भी अमन की नजर हम दोनोंं पर पडती तो पंकज कभी मेरे बूब्स सहलाने लगता तो कभी मेरी गाँड सहलाने लगता।

शायद अमन के सामने मेरे साथ यह सब करके उसकी मेल ईगो सेटिस्फाई हो रही थी। इसलिए मैंने भी पंकज को वो सब करने नहीं रोका था। बल्कि मुझे तो अमन के सामने ही किसी दूसरे मर्द की बाहों में होने पर बहुत ज्यादा एक्साईटमेंट हो रहा था। इस बीच मैंने मौका देखकर अपने पर्स में से अपना मोबाईल निकालकर चुपके से अमन और रचना के कई सारे फोटो भी खींच लिए थे। कुछ देर डाँस करने के बाद मैं और पंकज उस पव से बाहर निकल आऐ और अंडर ग्राऊंड पार्किंग की तरफ बड गए। किस्मत से उस अंडर ग्राऊँड पार्किंग में सिर्फ दो कारें खडी हुईं थीं। जिनमें से एक कार हमारी थी।

इस वक्त वो पार्किंग पूरी तरह से सुनसान थी। जिस कारण पार्किंग में पहुँचते ही पंकज अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाया और मुझे अपनी बाहों में भरकर कार की बोनट पर लेटा दिया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाती या उससे कुछ कहती, पंकज ने मेरा शार्ट और पेंटी को उतारकर मुझे कमर के नीचे से पूरी तरह नंगा कर दिया था। पंकज की इस हरकत तो देखकर मैं समझ गई थी कि वो कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड हो गया है। जिस कारण वो यहीँ पार्किंग में मेरे साथ चुदाई करना चाहता है। लेकिन मैं इस तरह पब्लिक प्लेस पर नहीं चुदना चाहती थी। इसलिए मैं उसे धक्का देते हुए बोली

निशा- पंकज यह तुम क्या कर रहे हो… छोडो मुझे… यह जगह इस सबके लिए सेफ नहीं है। अगर किसी ने हमें वो सब करते हुए देख लिया तो प्राब्लम हो जाऐगी।

इससे पहले पंकज मेरी बात का कोई जबाब देता, हमें पार्किंग के अंदर आते दो लोगों की आवाज सुनाई दी। वो दोनों असल में अमन और रचना थे, जिनकी आवाज सुनकर ही मैं उन दोनों को पहचान गई थी। तभी मेरी नजर पंकज के चहरे पर पडी। उसकी आँखों में इस वक्त एक अलग ही प्रकार की चमक थी। जिसे देखकर मैं बुरी तरह से हैरान रह गई। क्योंकि उसकी आँखों को देखकर मैं तुरंत समझ गई थी कि उसे पहले से ही पता था कि अमन और रचना यहाँ आने बाले हैं। इससे पहले मै कुछ कहती पंकज बोल पडा

पंकज- वो दोनों अमन और रचना है। जब तुमने मुझे मैसेज करके इन दोनों के यहाँ होने के बारे में बताया था। तो उस वक्त मैं यहीँ पार्किंग के अंदर अपनी कार में बैठा हुआ था। तभी मेरी नजर इस दूसरी कार पर पडी थी। जो असल में रचना की कार है और वो इसे पहले भी कई बार ऑफिस लेकर आई थी। इसलिए जब हम पव से बाहर आ रहे थे, तो मैंने रचना और अमन को भी पव से बाहर आते हुए देख लिया था। तभी मेरे मन में यह आईडिया आया था….

पंकज की बात पूरी होने से पहले ही मैंने उसे बीच में टोकते हुए कहा

निशा- कैसा आईडिया… क्या तुम अमन के सामने मेरे साथ इंटीमेट होकर अपने मेल ईगो को सैटिस्फाई करना चाहते हो…..

इतना बोलकर मैंने गुस्से में पंकज को घूरा तो वो बुरी तरह से झेंप गया और मुझसे अपनी नजरें चुराने लगा। असल में जब से मैं भोपाल के उस खण्डहर से जिंदा बचकर आई थी। तब से मुझे अपने अंदर कुछ अलग ही बदलाव महसूस होने लगे थे। जैसे मुझे अक्सर अंधेरे में भी साफ साफ दिखाई देता था, मेरे सुनने की छमता भी काफी ज्यादा बड गई थी। जिसकी बजह से ही मैंने आज पव जैसी भीड भाड और शोर शराबे से भरी जगह पर अमन और रचना के बीच चल रही बातें साफ साफ सुन लीं थीं।

इसके अलावा मुझे अपनी शारीरिक ताकत भी अब बडती हुई महसूस हो रही थी और मेरी चोटें भी अब काफी जल्दी भऱ जाती थीं। यहाँ तक की कुछ दिनों पहले जब मैं भोपाल में थी। तब फल काटते वक्त मेरे हाथ में हल्का सा कट लग गया था। जो कुछ ही पलों में मेरे देखते ही देखते पूरी तरह से ठीक हो गया था। हाँलाकि उस वक्त मैं बहुत ज्यादा हैरान हुई थी। पर फिर जब मुझे अपने अंदर कुछ और बदलाव महसूस होने लगे, तो मैंने इसे शक्ति बीज का बरदान समझकर एक्सेप्ट कर लिया था।

अब मैं पूरी तरह से इस बात पर यकीन करने लगी हूँ कि मैं अपने गले में मौजूद शक्ति बीज के कारण ही अब तक जिंदा हूँ। मेरे अंदर आऐ इन बिशेष प्रकार के बदलाव के अलावा मुझे एक और स्पेशल पावर मिली है। जिसकी मदद से मैं किसी भी इँशान की आँखों में देखकर उसके मन में चल रही बातों को आसानी से समझ सकती हूँ। अपनी इसी स्पेशल पावर की हेल्प से मैंने पंकज के मन में चल रही बातों को आसानी से समझ लिया था। जब मैंने पंकज के मन में चल रही बातों को उससे कहा तो वो मुझसे नजरें चुराते हुए बोला

पंकज- नहीं नहीं बो बात नहीं है… मैं तो बस अमन को यह दिखाना चाहता था कि उसने रचना जैसी बेबकूफ लडकी के लिए तुम्हारी जैसी अमेजिंग लडकी को छोडकर कितनी बडी गलती की है।

पंकज का एक्सप्लेनेशन सुनने के बाबजूद भी मैं उसे गुस्से भरी नजर से घूरते हुए बोली

निशा- लेकिन हम दोनों के चेहरे पर मास्क लगा होने पर तुम अमन को इस बात का एहसास आखिर कैसे करवाओगे… क्या तुम चाहते हो कि मैं अपना मास्क उतार दूँ

मेरी बात सुनकर पंकज तुरंत बोला

पंकज- नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना…. हाँ तुम सही कह रही हो कि मैं यह सब बस अपने मेल ईगो को सैटिस्फाई करने के लिए कर रहा हूँ। भले ही अमन को इस बात का पता ना चले की हम दोनों कौन है, लेकिन उसके सामने ही तुम्हारे साथ इंटीमेट होकर मेरे दिल को बहुत सुकून मिलेगा।

पंकज की बात सुनकर मैं कुछ पलों तक खामोश रही और फिर उसकी ईमानदारी देखकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- ठीक है… तुम जो चाहो मेरे साथ वो सब कर सकते हो… लेकिन थोडा जल्दी करना.. क्योंकि यहाँ पब्लिक प्लेस में यह सब करना काफी रिस्की हो सकता है।

मेरी बात सुनकर पंकज खुशी से पागल हो गया था। वो मुझे कमर के नीचे से पहले ही नंगा कर चुका था। इसलिए मेरे हाँ कहते ही उसने बिना देर किए अपने पेंट को खोलकर अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरी चूत में घुसा दिया। जिस कारण मैं कसमसाकर रह गई। तब तक अमन और रचना भी वहाँ आ चुके थे। हमें इस हालत में देखकर उनकी आँखें हैरानी से फटी रह गई थीं। मैं इस वक्त पंकज की कार की बोनट पर लेटी हुई थी और पंकज मेरे दोनों पैरों को फैलाकर मेरी चुदाई कर रहा था। हाँलाकि वो दोनों हमें पहचान नहीं पाऐ थे पर हमें पब्लिक प्लेस पर सेक्स करते हुए देखकर उन्हें काफी अजीब लग रहा था। तभी अचनाक से रचना ने कहा

रचना- सेम ऑन यू गाईज… यह कोई जगह है इंटीमेट होने की… अगर यही सब करना है तो अपने घर पर जाकर करो या किसी होटल में रूम बुक करके यह सब करो।

रचना की बात सुनकर मेरे अंदर अचानक से गुस्से की एक लहर दौड गई थी। इसलिए मैं उसे मूँहतोड जबाब देना चाहती थी। पर मुझे डर था कि कहीं वो और अमन मेरी आवाज ना पहचान जाऐं। इसलिए मैंने अपनी आवाज को थोडा चेंज करते हुए कहा

निशा- ओह शटअप यू फकिंग बिच…. चुपचाप अपनी गाडी में बैठकर यहाँ से दफा हो जाओ और अपने घर या होटल में जाकर अपने पति की नुन्नी के साथ खेलो। मेरा बॉयफ्रेँड असली मर्द है। वो जो चाहे और जहाँ चाहे वो सब कर सकता है, जो वो करना चाहता है। मेरा बॉयफ्रेंड तुम्हारे इस हिजडे पति की तरह नहीं है, जो चार पाँच बियाग्रा खाकर भी दो मिनट में फुस्स हो जाऐ।

मेरी बात सुनकर अमन और रचना बुरी तरह से बौखला गए थे, वहीं दूसरी तरफ पंकज भी बुरी तरह से हैरान होकर मुझे देख रहा था। इससे पहले वो कुछ कहे या अपने मन में मेरे लिए कोई राय बना ले, मैंने अपनी आँखों से मेरे हैंड बैग की तरफ देखने का इशारा किया। जहाँ मेरा मोबाईल फोन कुछ इस तरह से रखा हुआ था। जिसपर अमन और रचना की नजर नहीं पड सकती थी और जिसकी स्क्रीन पर इस वक्त अमन और रचना साफ साफ दिखाई दे रहे थे।

असल में जब अमन और रचना यहाँ आऐ तो मैंने अपने मोबाईल में बीडियो रिकार्डिंग ऑन करके वहाँ सेट कर दिया था। ताकि मैं अमन और रचना को एक साथ रिकार्ड कर सकूं। लेकिन उस वक्त पंकज मेरी चुदाई में इतनी बुरी तरह से खो गया था कि उसे मेरी इस हरकत का पता ही नहीं चला था। लेकिन जैसे ही पंकज की नजर मेरे मोबाईल की स्क्रीन पर पडी तो वो तुरंत ही मेरा प्लान समझ गया था। इसलिए उसने एक भी शब्द नहीं कहा।

कहानी जारी है......
 
Update 065 -

वहीं दूसरी तरफ मेरी कही गई बातों को अमन बरदास्त नहीं कर पा रहा था। इसलिए वो गुस्से से बिफरता हुआ बोला

अमन- शटअप यू स्लट… आखिर तुम्हारी मुझे हिजडा बोलने की हिम्मत कैसे हुई

अमन की बात सुनकर पंकज ने उसे उक्साते हुए कहा

अमन- अच्छा तो अगर तुम असली मर्द हो, तो मेरी तरह अपनी बीबी को यहीँ पर चोदकर दिखाओ…

अमन की बात सुनकर रचना बुरी तरह से डरते हुए बोली

रचना- यह क्या बकवास कर रहे हो तुम…. हम लोग यहाँ पर तुम्हारे सामने कैसे इंटीमेट हो सकते हैं। हम लोग तुम्हारी तरह बेशर्म नहीं है।

निशा- तुम्हारे कहने का मतलब है कि मैं सही बोल रही थी। तुम्हारे पति की नुन्नी बास्तव में छोटी है। जिस कारण तुम लोगों को हमारे सामनेे इंटीमेट होने में शर्म आ रही है। या फिर ऐसा तो नही कि तुम्हारा पति अपनी नुन्नी की जगह अपनी उंगलियाँ यूज करता हो तुम्हें सैटिस्फाई करने में।

मेरे अमन के लण्ड को बार बार नुन्नी बोलने और उसे हिजडा बोलकर उक्साने से अमन गुस्से में पूरी तरह से पागल हो गया था और इसी गुस्से में बिना कुछ सोचे समझे उसने रचना को अपनी गोद में उठाकर मेरी तरह ही अपनी कार के बोनट पर लिटा दिया। अमन की इस हरकत से रचना बुरी तरह से डर गई थी। इसलिए वो अमन को धक्का देकर उसे अपने आपसे दूर करने की कोशिश करते हुए बोली

रचना- अमन….. यह तुम क्या कर रहे हो… यहाँ पब्लिक प्लेस में सबके सामने यह सब करना सही नहीं है।

लेकिन इस वक्त तो अमन के सिर पर अपने आपको असली मर्द साबित करने का भूत सबार हो चुका था। इसलिए उसने रचना की बातों पर कोई ध्यान दिऐ बिना ही, उसकी स्कर्ट और पेंटी उतार कर नीचे फर्स पर फेंक दी। रचना अब बुरी तरह से डर गई थी, जिस कारण वो अमन से छूटने की कोशिश करने लगी। रचना के इस प्रकार बिरोध करने से अमन का गुस्सा और भी ज्यादा भडक गया था। इसलिए उसने बिना कुछ सोचे समझे रचना के गाल पर एक जोरदार थप्पड जड दिया

“च्च्चचचचट्ट्ट्टाटाटाटाकककककककककककक”

थप्पड इतना जोरदार था कि उसकी आवाज उस अंडरग्राऊंड पार्किंग में गूँज गई थी। इससे पहले रचना कुछ कह पाती, अमन ने गुस्से से बिफरते हुए वही शब्द दोहरा दिए जो कुछ देर पहले मैंने रचना से कहे थे।

अमन- ओह शटअप यू फकिंग बिच…. क्या तुम मुझे सबके सामने हिजडा साबित करना चाहती हो। चुपचाप लेटी रहो

इतना बोलकर अमन ने बिना देर किए अपना पेंट खोला और अपना छोटा सा लण्ड रचना की चूत में घुसाकर उसकी चुदाई शुरू कर दी। यह सब देखकर मेरे और पंकज के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। अमन और रचना बाकई में एक नम्बर के नौटंकीबाज थे। क्योंकि उस चुदाई के दौरान अमन और रचना लागातार जोर जोर से बडबडा रहे थे। जिसे सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे वहाँ पर कोई जबरदस्त चुदाई चल रही है।

अमन- आआहहह आहहहहह यू फकिंग बिच… ऐ ले… आज मैं चोद चोद कर तेरी चूत पाड दूँगा…. उम्म्म आआआहहहहह ऐ ले साली राण्ड और जोरे से आआआहहह मजा आ गया मेरी जान…..

रचना- उम्ममम…. आआआआहहहहहह मेरी जाना जरा धीरे….. आआआहहहहह…. दर्द हो रहा है…. अमन प्लीज थोडा आराम से करो…….. आआआहहहहहहहहहह….. उईईईईई माँ….. मार डाला रे…… हाऐऐऐऐऐ….. उउउममममममम…..

उन दोनों की इस ओबर एक्टिंग देखकर मुझे और पंकज को हंसी आ रही थी। क्योंकि जब अमन ने अपना लण्ड पेंट से बाहर निकाला था, तो पंकज उसे देख चुका था। जो बाकई में काफी छोटा था। वहीं दूसरी तरफ पंकज का लण्ड अमन के लण्ड से करीब दुगना बडा था। जिससे वो इस वक्त मेरी चूदाई कर रहा था। पर मैं मजे से उस चुदाई को इंजॉय कर रही थी और उन लोगों की तरह बिल्कुल भी नहीं चिल्ला रही थी। अमन और रचना का यह नाटक ज्यादा देर तक नहीं चला, करीब 5 मिनट में ही अमन ने रचना की चूत में अपना पानी छोड दिया था। जिसके बाद वो रचना से अलग हो गया। अमन के झऱते ही पंकज को हंसी छुट गई और वो अमन का मजाक बनाते हुए बोला

पंकज- क्या यार बस 5 मिनट में ही फुस्स हो गए। तुम दोनों चिल्ला तो ऐसे रहे थे जैसे बडी जबरदस्त तरीके से चुदाई चल रही है और तुम्हारी बीबी भी दर्द होने की क्या गजब नौटंकी कर रही थी। अगर गलती से मैंने अपना लण्ड तुम्हारी बीबी की चूत में घुसा दिया होता, तो पक्का वो मर ही जाती।

इतना बोलकर पंकज ने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकालकर उन दोनों की तरफ कर दिया, जिसे अमन और रचना आँखें फाड फाड कर देख रहे थे। पंकज के लण्ड के सामने अमन का लण्ड बाकई में नुन्नी था। इसलिए जब पंकज ने अपना लण्ड उन दोनों को दिखाया तो उन दोनों को कुछ भी कहते नहीं बन रहा था। तभी मैंने अमन को और ज्यादा गुस्सा दिलाते हुए कहा

निशा- अरे मेरी जान…. भला उस हिजडे की नुन्नी का मुकाबला तुम्हारे इतने बडे और मोटे लण्ड से कैसे हो सकता है। कम ऑन डार्लिंग…. उन लोगों को जाने दो और मुझपर ध्यान दो।

मेरी बात सुनकर पंकज ने एक बार फिर से अपना लण्ड मेरी चूत में घुसाकर मेरी चुदाई शुरू कर दी। जबकी दूसरी तरफ अमन और रचना अब भी हैरानी से हम लोगों को ही देखे जा रहे थे। हम दोनों काफी देर तक पूरे पैशिनेट तरीके से चुदाई करते रहे। जवकि अमन और रचना बैसे ही आधे नंगे खडे होकर आँखें फाड फाड कर हमारी चुदाई देखते रहे। अमन और रचना के सामने इस तरह चुदाई करवाने में मुझे एक अलग तरह का मजा आ रहा था। वहीं दूसरी तरफ पंकज भी अपनी मर्दानगी सावित करने के लिए पूरे जोश में मेरी चुदाई कर रहा था। करीब 40 मिनट की धुँआधार चुदाई के बाद आखिरकर पंकज ने अपना पानी मेरी चूत में छोड दिया और फिर मुझसे अलग हो गया। पंकज से अलग होते ही मैं कार के बोनट से नीचे उतर आई और अपने कपडे पहनने के बाद अमन के एकदम पास जाकर उससे बोली

निशा- कहाँ तुम्हारी 5 मिनट में फुस्स होने बाली नुन्नी और कहाँ मेरे बॉयफ्रेंड का 40-45 मिनट तक चुदाई करने बाला लण्ड। तुम बाकई में एक हिजडे हो….

इतना बोलकर मैं पंकज की कार में जाकर बैठ गई। जबकि पंकज पहले ही अपने कपडे ठीक करके कार की ड्राईबिंग सीट संभाल चुका था। वहीं दूसरी तरफ अमन और रचना अब भी अधी नंगी हालत में खडे होकर आँखें फाड फाड कर हमें देख रहे थे। लेकिन अब हमें उन दोनों से कोई मतलब नहीं था। इसलिए हम दोनों उस अंडरग्राऊंड पार्किग से बाहर निकल गए। उस पव से थोडी दूर जाते ही मैंने और पंकज ने अपना मास्क निकाल कर एक दूसरे को देखा और फिर हम दोनों की एक साथ हंसी छूट गई। कुछ देर हंसने के बाद पंकज बोला

पंकज- अरे यार आज तो मजा ही आ गया…. अमन की हालत देखी तुमने… जब तुम उसे बार बार हिजडा बोल रही थी तो उसका चेहरा देखने लायक था। मुझे तो पक्का यकीन है कि आज की यह घटना बो सारी जिंदगी नहीं भूलेगा

निशा- हाँ…. वो तो है…. बैसे क्या तुमने रचना का चेहरा नहीं देखा… जब उसने तुम्हारे हथियार को देखा था। तो ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आँखें बाहर निकलकर टपक जाऐंगी। बेचारी अब तक शॉक्ड होगी……

पंकज- और नौटंकी देखी उनकी…. ऐसा लग रहा था जैसे किसी ब्लू फिल्म के एक्टर्स हों।

पंकज की बात सुनकर मुझे अपने मोबाईल में की गई उनकी बीडीयो रिकार्डिंग की याद आ गई थी। इसलिए मैंने तुरंत अपना मोबाईल निकाला और उसमें रिकार्ड की गई बीडियो चैक करने लगी। उन दोनों का बीडियो एकदम क्लीयर रिकार्ड हुआ था। जिसमें उन दोनों के चेहरे भी साफ साफ दिखाई दे रहे थे। इसलिए मैं उस बीडियो को पंकज को दिखाते हुए बोली

निशा- अगर तुम कहो तो मैं सच में उन दोनों को ब्लू फिल्म के एक्टर्स बनने में कुछ मदद कर सकती हूँ। बस मुझे इस बीडियो को इंटरनेट पर डालना है, और फिर वो दोनोें अच्छे खासे फेमस हो जाऐंगे।

मेरी बात सुनकर पंकज हंसते हुए बोला

पंकज- अरे अभी नहीं… अभी तो इस बीडियो की मदद से तुम्हें अमन से डॉयवोर्स लेना है। उसके बाद तुम इस बीडियो के साथ जो चाहो वो कर सकती हो।

निशा- हुम्म ठीक है… जैसा तुम कहो… पर हमें इस बीडियो के अलावा कुछ और सबूतों की जरूरत पडेगी। क्योंकि हम इस बीडियो को डायवोर्स फाईल के साथ कोर्ट में पेस नहीं कर सकते। वर्ना हमारे ऊपर पोर्नोग्राफी का उल्टा केस लग सकता है। इस बीडियो का यूज तो हम बस उन दोनों को ब्लैकमेल करने के लिए तब करेंगे, जब अमन सीधे सीधे तरीके से मुझे डॉयवोर्स देने के लिए तैयार नहीं होगा।

पंकज- ठीक है… तो मैं कल से ही इस काम पर लग जाता हूँ। तो फिर अब आगे क्या करना है…

निशा- मतलब….

पंकज- तुम मेरे साथ मेरे घर चल रही हो ना…

पंकज की बात सुनकर मैं तुरंत उसे मना करते हुए बोली

निशा- बिल्कुल भी नहीं…. आज तुमने कुछ ज्यादा ही थका दिया है मुझे….. अब मैं अपने घर जाकर अच्छे से रेस्ट करना चाहती हूँ। अगर मैं तुम्हारे घर गई तो तुम पक्का फिर से मुझे परेशान करोगे। पता है उस पार्किंग में मैंने कितनी मुस्किल से अपनी चीखें निकलने से रोकी हैं.. तुम तो किसी मैट्रो ट्रेन की तरह धकापक धकापक लगे हुए थे और दूसरी तरफ मेरा दर्द के कारण बुरा हाल हो रहा था।

पंकज- सॉरी मेरी जान…. वो तो बस अमन और रचना के वहाँ होने से मैं कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया था। पर पक्का आगे से मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा….

निशा- ठीक है… पर अभी मुझे घर जाना है

पंकज- प्लीज चलो ना मेरे घर

निशा- नहीं ना…. बैसे भी तो बस कुछ दिनों की ही तो बात है। उसके बाद तो हम साथ में ही रहने बाले हैं।

मेरी बात सुनकर पंकज थोडा निराश होते हुए बोला

पंकज- ठीक है…. तो फिर अपने नॉर्मल कपडे पहन लो…. क्योंकि तुम्हारा घर यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है।

इतना बोलकर पंकज ने अपनी कार को एक सुनसान इलाके में रोड के किनारे खडा कर दिया। जिसके बाद मैंने जल्दी से अपनी सलबार कुर्ती पहनी और अपने बालों को ठीक करने के बाद अपने मेकअप का टचअप करने लगी। तब तक पंकज ने अपनी कार मेरे घर की तरफ मोढ दी थी। अपने घर पहुँचकर मैंने कपडे चेंज किए और फिर बिस्तर पर लेटकर अपने आगे के प्लान के बारे में सोचने लगी। असल में मेरा ऑरीजनल प्लान अमन से डायवोर्स लेने के बाद अचानक से गायव होने और अपनी नई पहचान यानि अमृता चौहान के रूप में नई जिंदगी शुरू करने का था।

पर अब जब मुझे अमन और रचना के प्लान के बारे में पता चल गया था। तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं अमन के प्लान के हिसाब से ही मरने की ही एक्टिंग कर लूँ। उससे मुझे दो फायदे होंगे। पहला तो यह कि मेरे एक्सीडेंट में मरने के बाद मेरे पिता और भाई को मेरी इंश्योरेंस पॉलिसी के पूरे 10 करोड रुपये मिल जाऐंगे। जिससे उन्हें कभी भी पैसों की कोई कमी नहीं होगी और दूसरा फायदा यह था कि मेरी असली पहचान यानि निशा गुप्ता पूरी दुनिया की नजरों में मर जायेगी। बैसे भी मेरे अचानक गायब होने से अच्छा मेरा दुनिया की नजरों में मर जाना ही बेहतर था।

क्योंकि मेरे गायब होने पर किसी को कोई फर्क पडे ना पडे पर मेरा भाई और मेरे पिता जरूर सारी जिंदगी मेरी तलाश करते रहेंगे। लेकिन अगर उन्हें यह पता चल गया कि मैं मर चुकी हूँ, तो वो कुछ दिनों तक दुखी रहने के बाद अपनी अपनी जिंदगी में आगे बढ जाऐंगे और सबसे बडी बात तो यह थी कि मुझे इस सबके लिए ज्यादा कुछ करना भी नहीं था। मुझे तो बस अमन और रचना का प्लान आसानी से पूरा होने देना था और जिस दिन वो मेरा एक्सीडेंट प्लान करेंगे। उस दिन मुझे किसी दूसरी लड़की की लाश का इंतजाम करके जानबूझकर एक्सीडेंट दिखाना था।

बैसे भी अमन अपनी कार में जिस तरह के इंतजाम करने की बात कर रहा था। उसके हिसाब से तो मरने बाले इंशान की पहचान भी नहीं हो पायेगी। यानि सभी को यही लगेगा कि मैं यानि निशा गुप्ता मर चुकी है। इस तरह से सबकी नजरों में मेरी पहचान हमेशा हमेशा के लिए मिट भी जायेगी और मेरे पिता और भाई को पर्याप्त पैसे भी मिल जायेंगे। जिससे मुझे अपनी बाकी की जिंदगी उनकी फिक्र करने की जरूरत भी नहीं होगी और मैं आराम से अपनी दूसरी लाईफ जी सकूँगी। साथ ही मैं मरने से पहले कुछ ऐसे सबूत भी छोड दूँगी जिससे पुलिस को मेरे एक्सीडेंट पर शक हो, जिससे वो मुझे मारने की जुर्म में अमन और रचना को गिरफ्तार कर लें।

इससे मेरा बदला भी पूरा हो जाऐगा। मुझे अपना यह नया प्लान एकदम परफेक्ट लग रहा था। बस एक ही प्राब्लम थी, और वो थी किसी लाबारिस लड़की की लाश का इंतजाम करना। इसके अलावा मुझे अमन और रचना के खिलाफ सबूत भी इकट्ठे करने थे। लेकिन मेरे लिए यह काम पंकज करने बाला था। जो पूरी तरह से मेरे प्यार में डूबा हुआ था। हाँलाकि मैं उसका दिल तोडना तो नहीं चाहती थी। पर मैं यह भी अच्छी तरह से जानती थी कि हम दोनों का ना तो कोई मैच है और ना ही हमारा आगे चलकर कोई फ्यूचर है। इसलिए अगर मैं दुनिया के सामने मर गई तो हो सकता है वो भी अपनी जिंदगी में आगे बड जाऐ।

बैसे भी उसकी हेल्प के बदले मैं कुछ दिनों तक उसकी गर्लफ्रेंड बनकर उसके दिल की हसरतें तो पूरी करने ही बाली हूँ। आखिरकार अपना पूरा प्लान अच्छी तरह से तैयार करने के बाद मैं सो गई।

कहानी जारी है....
 
Update 066 -

मेरा अगल एक हफ्ता पूरी तरह से नॉर्मल तरीके से बीता था। दिन में मैं अपने ऑफिस का काम करती और रात को पंकज के साथ मजे करती। कभी हम किसी पव या क्लब में जाते तो कभी मूवी देखने जाते और फिर पंकज के घर जाकर एक दूसरे को सैटिस्फाई करने के बाद सो जाते। इस दौरान मैंने ऑफिस में किसी को भी इस बात का एहसास भी नहीं होने दिया था कि मैं अपनी जॉब से पहले ही रिजाईन कर चुकी हूँ और केवल ऑवार्ड नाईट तक ही मैं वहाँ पर काम कर रही हूँ।

रिजाईन करने के बाद मैं अब काफी हल्का महसूस कर रही थी। क्योंकि अब मेरे ऊपर किसी भी काम का कोई प्रेसर नहीं था। बैसे तो मैं हमेशा ही अपनी टीम के साथ खुशनुमा माहौल बनाकर रखती हूँ। लेकिन अब तो जैसे मेरे पर ही निकल आये थे। मैं काम के साथ साथ काफी मस्ती भी कर रही थी। बैसे भी ऑवार्ड नाईट को अब बस एक हफ्ता बाकी था। इसलिए पिछले कुछ दिनों में मैंने अपने इँश्योरेंस पॉलिसी में से नॉमिनी के रूप में अमन का नाम हटवाकर अपने भाई का नाम लिखवा दिया था और अपनी पुरानी इंश्योरेंश पॉलिसी को जलाकर नष्ट करने के बाद नई इंश्योरेंस पॉलिसी अपने पिता के घर पोस्ट कर दी थी।

इसके अलावा मैं एक दिन की ऑफिस से छुट्टी लेकर आई.बी हैडक्वाटर जाकर हरीश अंकल के दोस्त और आई.बी. ज्वाईंट कमिश्नर रजीव ठाकुर से भी मिल आई थी। जहाँ उन्होंने मेरे यानि अमृता चौहान के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट चैक करने के बाद मेरा एक छोटा सा इंटरव्यू और फिजीकल टेस्ट भी लिया था। जिसे मैंने आसानी से पास कर लिया था। इसलिए उन्होंने तुरंत ही मुझे आई.बी. में सीक्रेट ऐजेंट के रूप में ज्वाईन भी कर लिया था। हाँलाकि वो मेरे ड्रैगन हार्ट होने की बात जानकर पहले से ही इम्प्रैश थे। लेकिन एक आई.बी. एजेंट का फिजीकली और मेंटली फिट होना भी बहुत जरूरी है। इसलिए उन्हें मेरे इंटरव्यू और फिजीकल टेस्ट की फार्मेलिटी तो करनी ही थी।

सारी फार्मेलिटी पूरी होने के बाद उन्होंने मेरी ट्रेनिंग के लिए देहरादून जाने का इंतजाम भी कर दिया था। जो दिल्ली से मात्र 280 किलोमीटर दूर था। जहाँ मुझे दो हफ्ते बाद पहुँचकर रिपोर्ट करना था। इतना समय मुझे अपने प्लान को पूरा करने के लिए काफी था। क्योंकि अगले हफ्ते ही आवार्ड सेरेमनी थी। जिसके बाद 1-2 दिन के लिए मैं आगरा जाने बाली थी। उसी बीच मुझे अमन के प्लान के हिसाब से अपने एक्सीडेंट में मरने का नाटक भी करना था। अब तक मेरे प्लान के हिसाब से सब कुछ ठीक चल रहा था। पंकज मुझे अमन और रचना के खिलाफ पर्याप्त सबूत लाकर दे चुका था। जिनकी मैंने दो हार्ड कॉपी बनवा लीं थीं।

इसके बाद मैंने एक बडे एडबोकेट की हेल्प से सारे सबूतों के साथ डॉयवोर्स केस फाईल कर दिया था। ताकि मेरे मरने के बाद मेरा एडवोकेट वो सारे सबूत पुलिस को सौंप सके। इसके अलावा मैंने सारे सबूतों की एक हार्ड कॉपी अपने ऑफिस मेें भी संभालकर रख दी थी। ताकि मेरे मरने के बाद यदि मेरे एडवोकेट ने अमन से हाथ मिलाकर वो सारे सबूत नष्ट भी कर दिए, तो पुलिस या मेरे ऑफिस के दूसरे इम्पलॉय को वो सारे सबूत मिल जाऐं और पंकज के पास तो सारे सबूत पहले से ही थे। पंकज जिस कदर मेरे प्यार मेें डूबा हुआ था। उसके हिसाब से तो वो पक्का अमन और रचना को छोडने बाला नहीं था।

इसके अलावा मैं पिछले कुछ दिनों से एक डायरी भी लिख रही थी। जिसमें मैंने अमन के द्वारा मेरे साथ मारपीट करने, मेरे पैसे छुडाने और रचना के साथ मिलकर मुझे जान से मारने की कोशिश करने के बारे में कुछ मनगढंत बातें लिखी हुईं थीं। उस डायरी को भी मैंने अपने ऑफिस में संभालकर रख दिया था। ताकि मेरे मरने के बाद वो डायरी भी अमन और रचना के खिलाफ एक सबूत बन सके। यह सारे काम निपटाने के बाद मेरा प्लान लगभग पूरा हो चुका था। अब बस मुझे एक लडकी की लाश का इंतजाम करना था। जो एक्सीडेंट में मेरी जगह ले सके। इस बारे में मैं काफी दिनोें से सोच रही थी। पर मुझे इसका कोई उपाय नहीं मिल रहा था।

आखिरकार मैंने किसी मुर्दाघर के कर्मचारी को पैसे देकर लाश का इंतजाम करने का प्लान बनया। इसके लिए मैंने दिल्ली के ही एक पुराने मुर्दाघर को सिलेक्ट किया था, जो शहर से थोडा आउटर एरिया में था और वहाँ से लाश ले जाते समय पकडे जाने का भी कोई डर नहीं था। दो दिनों तक वहाँ नजर रखने के बाद आखिरकार मुझे एक 50-60 साल का बूडा कर्मचारी मिल ही गया, जो शायद कुछ ही दिनों में रिटायर्ड होने बाला था। इसलिए वो पूरे 2 लाख रूपये के बदले मुझे किसी लावारिश लडकी की लाश बेचने के लिए तैयार हो गया था। लेकिन जब मैंने उससे लाश मेरी बताई गई लोकेशन पर डिलेवर करने के बारे में बात की तो वो इस सौदे से पीछे हटने लगा।

पर मैंने उसे एकस्ट्रा एक लाख रूपये देने का वादा करके उसे आखिर में तैयार कर ही लिया। बैसे भी किसी लावारिश लाश को बेचने का मौक उसे शायद ही कभी अपनी जिंदगी में मिला होगा। ऊपर से एक दो हफ्ते पुरानी लावारिस लाशों को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं कर्मचारियों की होती है। इसलिए अगर उन्हें किसी लाबारिस लाश को ठिकाने लगाने के पैसे मिलें तो भला कौन मना कर सकता है। पूरी डील फाईनल होने के बाद मैंने उस आदमी को 50 हजार रूपये एडवांश दे दिए और बाकी पेमेंट लाश डिलेवर होने पर उसे देने की बात फाईनल कर ली।

इस मीटिंग के दौरान मैं उस आदमी से अपने चेहरे पर मास्क लगाकर मिली थी। ताकि वो आदमी मुझे पहचान ना सके। लाश का इंतजाम होने के बाद मेरा प्लान लगभग पूरा हो गया था। अब बस मुझे अपने मरने का नाटक करना था। जिसमें अभी कुछ समय था। इसलिए मैं अपने यानि निशा गुप्ता की जिंदगी के बचे हुए दिन पूरी तरह से इंजॉय कर रही थी। इस दौरान मैं रचना से पहले की ही तरह नॉर्मल तरीके से बातें किया करती थी, साथ ही साथ मेरा पंकज के साथ भी ऑफिस के अंदर नॉर्मल रिलेशन था। लेकिन जब भी उसे मौका मिलता तो वो फ्री टाईम में मेरे केविन में आकर मेरे साथ थोडी बहुत मस्ती कर ही लेता था। जिसमें मुझे भी बहुत मजा आता था।

इसी बीच एक दिन मेरे मन में ख्याल आया कि जब मेरे मरने के बाद अमन और रचना जेल में जाने ही बाले हैं तो क्यों ना मैं इन दोनों को ब्लैकमेल करके इनके सारे पैसे ले लूँ। बैसे भी जेल जाने के बाद उनके पास पैसों का क्या काम था। इस बारे में सोचते ही मैं मन ही मन उन दोनों की सेवंग और उनकी प्रापर्टी का हिसाब लगाने लगी। जहाँ तक मुझे पता था। अमन के पास 50 लाख से ज्यादा की सेविंग थी। इसके अलावा उसकी कार और वो फ्लैट जिसमें मैं इस वक्त रह रही हूँ। सब कुछ मिलाकर वो करीब 1 करोड रूपये तो मुझे आसानी से दे ही सकता था।

वहीं दूसरी तरफ रचना के पास अपनी खुद की करीब 10-15 लाख रूपये की सेविंग थी। साथ ही साथ उसे अपने पति से डॉयवोर्स के बाद पूरे 30 लाख रूपये और एक फ्लैट मिला था। जिसमें फिलहाल अमन और रचना रह रहे थे। साथ ही साथ अपनी ज्वैलरी और कार बगैरह बेचकर वो भी करीब 80-90 लाख रूपये तो आसानी से इकट्ठा कर ही सकती थी। सारा कैल्कुलेशन करने के बाद मैंने उन दोनों को ब्लैकमेल करके पूरे दो करोड रूपये बसूलने का प्लान बनाया था। असल में मैं उन दोनों को पूरी तरह से निचोड लेना चाहती थी।

ताकि जब पुलिस उन दोनों को मेरे मर्डर के इल्जाम में गिरफ्तार करे, तो उनके पास अपने बचाव में किसी अच्छे एडवोकेट को फीस देने के भी पैसे ना हों। अपने पूरे प्लान के बारे में अच्छी तरह से सोचने के बाद मैंने अपने बैग में से अपना नया मोबाईल निकाला जो मैंने भोपाल में खरीदा था। हाँलाकि शुरूआत में मुझे एक कस्टमर ने नया फोन और नया सिम कार्ड गिफ्ट किया था। लेकिन मेरा वह फोन खण्डहर में गनपत और उसके साथियों ने तोड दिया था। पर उसका सिम कार्ड बच गया था। जिसके बाद मैंने अपने लिए एक नया टैम्प्रेरी मोबाईल फोन खरीदा था।

पर जब मैंने अपनी पहचान बदलकर अमृता की पहचान अपनाने का फैसला किया था। तो मैंने वहाँ भोपाल में ही अमृता के नाम से एक नया सिम कार्ड भी खरीद लिया था। जिसका नम्बर मैंने केवल अपने दोस्तों के अलावा रघू और हरीश अंकल को ही दिया था और अब मेरा वो नम्बर मेरे आई.बी. ज्वाईन करने के बाद मेरे सर्विस रिकार्ड में भी चड गया था। इसलिए मैं अपने उस नम्बर से तो अमन और रचना को बिल्कुल भी ब्लैकमेल नहीं कर सकती थी और ना ही अपने निशा बाले ऑरीजनल नम्बर से उन्हें ब्लैकमेल कर सकती थी। क्योंकि मेरा यह नम्बर रचना और अमन के पास पहले से ही था।

पर मेरे पास वो पुराना सिम कार्ड अब भी मौजूद था। जिसका यूज मैंने कॉलगर्ल बनकर किया था। इसलिए मैंने उस पुराने सिम कार्ड को एक बार फिर अपने नए मोबाईल फोन में डाल लिया। बैसे भी वह फोन ड्यूल सिमकार्ड सपोर्ट करता है। इसलिए मुझे अमृता बाले सिमकार्ड को भी निकालने की जरूरत नहीं थी। इसके बाद मैंने पव में बनाई गई अमन और रचना की बीडियो को थोडा सा एडिट करके रचना के मोबाईल पर सेंड कर दिया और अपने उस फोन को साईलेंट करके अपने केबिन से बाहर आकर अपनी टीम मेंबर्स से बातें करने के बहाने रचना पर नजर रखने लगी। जैसे ही रचना ने अपने मोबाईल की मैसेज टोन सुनकर अपने मोबाईल को चैक किया तो उसका चेहरा डर और हैरानी से सफेद पड गया था।

मैं रचना की ऐसी हालत देखकर पूरे मजे ले रही थी। इसी बीच मैं अपने बाकी टीम मेंबर्स के साथ साथ रचना के साथ भी हंसी मजाक करने लगी। पर रचना तो इस वक्त पूरी तरह से सदमें की हालत में थी। जिस कारण उसने मेरी किसी भी बात पर ध्यान नहीं दिया और बॉशरूम जाने का बहाना करके वहाँ से निकल गई। रचना के वहां से जाते ही मैं समझ गई कि अब वो पक्का मुझे कॉल करने बाली है। इसलिए मैं भी अपने केबिन में बापिस आकर रचना के फोन का इंतजार करने लगी। इसके लिए मुझे ज्यादा देर इंतजार नहीं करना बडा। करीब 5 मिनट बाद ही रचना का मेरे पास कॉल आया। कॉल रिसीब करते ही मैंने अपनी आवाज बदलकर कहा

निशा- बडी देर कर दी मुझे कॉल करने में। मुझे तो लगा था कि बीडियो देखते ही तुम मुझे तुरंत कॉल कर दोगी।

रचना- क कौन हो तुम… और तुम्हारे पास यह बीडियो कैसे आया

निशा- कब आया कैसे आया इसे फिलहाल रहने देते हैं रचना जी…. बैसे भी तुम जैसी रण्डी जो कहीं भी किसी के साथ मूँह मारती फिरती हो। उसके पता नहीं ऐसे कितने बीडियो होंगे।

रचना- क्या बकवास कर रही हो… मैं एक शरीफ लडकी हूँ और उस बीडियो मैं जो लडका है वो मेरे पति हैं।

निशा- अच्छा जी… तो तुम अपने पति के साथ किसी पव की अंडरग्राऊंड पार्किग में यह सब करने के शौक भी रखती हो…. बैसे शायद तुमने मेरी बातों को ध्यान से सुना नहीं। मैंने तुम्हें तुम्हारे नाम से पुकारा है। यानि मैं तुम्हारी पूरी जन्म कुण्डली पहले से जानती हूँ और उस लडके की भी जो तुम्हारे साथ मजे कर रहा है। अमन नाम है ना उसका… अरे हाँ मैं तो भूल ही गई…. वो तो तुम्हारी बॉस और तुम्हारी सबसे अच्छी दोस्त निशा गुप्ता का पति है ना। पर उससे तुमने कब शादी कर ली…. क्या तुम्हारी दोस्त निशा को इस बारे में पता है…

मेरी बात सुनकर रचना बूरी तरह से शॉक्ड थी। उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वो मेरी बात का क्या जबाब दे। इसलिए वो गुस्से से बिफरते हुए बोली

रचना- यह सब झूठ और बकवास है… तुम्हारा यह बीडियो पूरी तरह से फेक है। उस बीडियो में मैं नहीं हूँ और ना ही उसमें अमन है। तुमने पक्का किसी और का बीडियो एडिट करके हम दोनों के चेहरे उसमें डाले हैं।

निशा- अच्छा तो फिर ठीक है… मैं इस बीडियो को इंटरनेट पर डाल देती हूँ। अब अगर वो बीडियो फेक है तो इंटरनेट पर कोई ना कोई ऐसा जरूर होगा जो इसकी पूरी सच्चाई का पता लगा ले।

मेरी बात सुनकर रचना की बूरी तरह से गाँड फट गई थी। इसलिए वो तुरंत बोली

रचना- नहीं….. रुको…. आखिर तुम चाहती क्या हो….

निशा- कुछ खास नहीं बस इस बीडियो के बदले मुझे पूरे दो करोड रूपये चाहिए

मेरी बात सुनकर रचना का मूँह खुला का खुला रह गया…. वो बडी मुश्किल से अपने आप को कंट्रोल करते हुए बोली

रचना- पर मेरे पास इतने पैसे नहीं है… तुम जितना सोच रही हो मैं उतनी पैसे बाली नहीं हूँ।

निशा- मुझे अच्छी तरह से पता है कि तुम मुझे कितने पैसे दे सकती हो और कितने नहीं। तभी तो मैंने बस दो करोड रूपये माँगे हैं… एक करोड तुम्हारे और एक करोड अमन के।

रचना- अगर मैं अपना सब कुछ बेचकर किसी भी तरह से एक करोड रूपये का इंतजाम कर भी दूँ। तो भी अमन कभी भी अपने हिस्से के एक करोड रूपये देने के लिए तैयार नहीं होगा

निशा- कोई बात नहीं तुम अपने हिस्से के एक करोड रूपयों का इंतजाम करो। बाकी एक करोड रुपये मैं अमन की बीबी यानि निशा से बसूल कर लूँगी। इस बीडियो के दम पर वो अमन से डॉयवोर्स लेकर अच्छे खासे पैसे ऐलीमनी के रूप में लेकर मुझे एक करोड रूपये दे ही सकती है।

मेरी बात सुनकर रचना डरते हुए तुरंत बोली बोली

रचना- नहीं नहीं रुको….. मुझे पहले एक बार अमन से बात करने दो… उसके बाद ही मैं तुम्हें कोई जबाब दे सकती हूँ।

निशा- कोई बात नहीं… तुम आराम से बात कर लो…. मैं तुम्हें इस काम के लिए पूरे एक घंटे का समय दे रही हूँ। पर मुझे कॉल करने की जरूरत नहीं है। अगर तुम दोनोें को मेरी शर्त मंजूर हो तो मुझे इसी नम्बर पर मैसेज कर देना। वर्ना एक घंटे बाद मैं यह बीडियो या तो इंटरनेट पर बायरल कर दूँगी या फिर निशा के पास भेज दूँगी।

इतना बोलकर मैंने रचना की कॉल कट कर दी और बापिस अपने केबिन से बाहर निकलकर अपने टीम मेंबर्स से बात करने लगी।

कहानी जारी है.........
 
Update 067 -

मैं अपने टीम मेंबर्स से बातें करने में बिजी थी, इस बीच काफी देर तक रचना बापिस नहीं आई। तो मैं समझ गई कि वो अमन से बात करने में बिजी है। करीब आधे घंटे बाद मेरा मोबाईल बाईब्रेट हुआ। जब मैंने उसे चैक किया तो उसमें रचना का मैसेज डला हुआ था।

“हमें मंजूर है… लेकिन पैसों का इंतजाम करने के लिए हमें कुछ समय चाहिए”

उस मैसेज को पढकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। कुछ देर सोचने के बाद मैंन रचना को रिप्लाई किया

“ठीक है… मैं तुम लोगों को पैसों का इंतजाम करने के लिए पूरे दो दिन का समय देती हूँ। तीसरे दिन तुम्हें मेरी बताई लोकेशन पर पैसे डिलेवर करने ही होंगे। वर्ना मैं क्या कर सकती हूँ। यह बताने की जरूरत नहीं है।”

मैंने उस फोन में ऑटो डिलीट का ऑप्सन ऑन किया हुआ था। जिसकी बजह से मेरा भेजा गया मैसेज एक घंटे बाद अपने आप रचना और मेरे मोबाईल से डिलीट हो जाऐगा। इसलिए मुझे इस बात का बिल्कुल भी डर नहीं था कि रचना मेरे भेजे गए मैसेज का यूज किसी भी तरह से मेरे खिलाफ कर सकती है। मेरे मैसेज सेंड करने के करीब 5 मिनट बाद रचना बापिस आई। उसका चेहरा अब भी पूरी तरह से उतरा हुआ था। बापिस आते ही रचना तबियत खराब होने का बहाना बनाकर आधे दिन की छुट्टी लेकर चली गई। हाँलाकि रचना की हालत देखकर सबको उसकी बातों पर यकीन हो गया था। पर सच क्या है, यह केवल मैं जानती थी।

रचना के जाने के बाद मैंने उस सिम कार्ड को अपने मोबाईल फोन से फिर से बाहर निकाल कर रख लिया था। ताकि रचना और अमन पुलिस की हेल्प से मुझे ट्रैक ना कर सकें। बैसे भी एक हैकर होने के कारण मै इन सब बातों को अच्छी तरह से जानती थी। इसलिए मैंने रचना से ज्यादा देर तक फोन पर बात भी नहीं की थी और ना ही मैंने उसे दूसरी बार कॉल करने दिया था। अगले दो दिन बिल्कुल नॉर्मल तरीके से बीते इस दौरान रचना ने अपने बीमार होने का बहाना बनाकर फिर से दो दिन की छुट्टी ले ली थी। ताकि वह पैसों का इंतजाम कर सके। लेकिन मैं उस पर और अमन पर पूरी तरह से नजर रखे हुए थी।

जिस कारण मुझे पता चल गया था कि अमन और रचना ने अपनी पूरी सेविंग्स बैंक से निकाल ली थीं, साथ ही साथ उन दोनों ने अपने अपने मकान को भी गिरवी रख दिया था। जिससे उनके पास करीब एक करोड अस्सी लाख रूपये इकट्ठे हो गए थे। पर उन्हें अब भी 20 लाख रूपयों की जरूरत थी। जिसके लिए रचना ने अपनी कार के साथ साथ अपनी पूरी ज्वैलरी भी बेच दी थी। वहीं दूसरी तरफ अमन ने भी अपने दोस्तों से कुछ पैसे उधार ले लिए थे। ताकि वो बाकी पैसों का इंतजाम कर सकें। तीसरे दिन सुबह सुबह ही मैंने रचना को मैसेज करके उससे पूछा

“पैसों का इंतजाम हुआ या नहीं”

मेरे मैसेज भेजने के कुछ देर बाद ही रचना का रिप्लाई आया

“हाँ हो गया…. बताओ कब और कहाँ डिलेवर करना है”

रचना का मैसेज पढने के बाद मैंने उसे रिप्लाई किया

“दोपहर ठीक 12 बजे लोटस टेम्पल के गेट नम्बर दो के बाहर पहुँचकर मुझे कॉल करना। आगे की लोकेशन मैं तुम्हें वहीं बताऊंगी। और हाँ पैसे डिलेवर करने के लिए तुम अकेले ही आना, अपने साथ अमन या अपने किसी दोस्त को लाने की कोई जरूरत नहीं है और अगर इस बारे में तुमने पुलिस को कुछ भी बताने की गलती की, तो उसका अंजाम तुम अच्छी तरह से जानती हो।”

मेरा मैसेज पढने के कुछ देर बाद रचना का मेरे पास दोबारा मैसेज आया

“ठीक है… मैं समझ गई… पर पैसे मिलने के बाद, तुम वो बीडियो पक्का हमेशा हमेशा के लिए डिलीट कर दोगी ना”

रचना का मैसेज पढकर मैंने उसे एक आखिरी रिप्लाई किया

“बेफिक्र रहो…. पर मुझसे चालाकी करने की गलती भूलकर भी मत करना। क्योंकि मेरी नजर हर पल तुम्हारे और अमन के ऊपर है। अगर तुम लोगों ने मुझे धोखा देने की कोशिश की तो मेरे साथी तुम्हें और अमन को जान से मारने के बारे में एक पल भी नहीं सोचेंगे, लेकिन उससे पहले तुम दोनों का वो बीडियो बायरल होगा।”

यह आखिरी मैसेज सेंड करने के बाद मैंने अपना मोबाईल तुरंत स्विच ऑफ कर लिया। ताकि रचना या अमन मुझे कॉल ना कर सकें। इसके बाद मैं फटाफट तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गई। जहाँ मैंने 11 बजे तक थोडा बहुत काम किया और फिर एक जरूरी काम का बहाना बनाकर ऑफिस से निकल गई। आज मैं ऑफिस जानबूझकर कैब से आई थी। ताकि जरूरी काम का बहाना बनाकर मैं पंकज की कार अपने साथ ले जा सकूँ। मेरे ऑफिस से लोटस टेम्पल ज्यादा दूर नहीं था। जिस कारण मैं आधे घंटे पहले ही वहां पहुँच गई थी।

मैंने अपने चेहरे पर इस वक्त भी मास्क लगाकर रखा हुआ था और मैं लोटस टेम्पल के गेट नम्बर 2 से थोडी दूर अपनी कार पार्क करके वहां पर नजर रख रही थी। इस दौरान मुझे कुछ भी गडबड महसूस नहीं हुई थी। 12 बजने से ठीक 5 मिनट पहले मुझे वहाँ पर रचना की कार आती हुई दिखाई दी। जिसके ठीक पीछे एक और ब्लैक कलर की कार वहाँ आई थी। जो रचना की कार से कुछ दूरी पर ही रुक गई थी। रचना की कार वहाँ आते ही मैं अपनी कार से उतरी और वहाँ टहलते हुए रचना की कार के एकदम पास से होकर गुजरी। ताकि मैं कार के अंदर झांक सकूँ।

जैसा कि मैंने रचना से कहा था। रचना वहाँ अकेले ही आई थी। उसकी कार में रचना के अलावा और कोई नहीं था। बस कार की पिछली सीट पर दो बडे बडे बैग रखे हुए थे। रचना की कार पर एक नजर डालने के बाद मैं टहलते हुए उस दूसरी कार के पास जा पहुँची। जिसकी ड्राईबिंग सीट पर एक 40-45 साल का आदमी बैठा हुआ था और उसके बगल बाली सीट पर वही बूढा आदमी बैठा हुआ था। जिससे मेरी लडकी की लाश डिलेबर करने की डील फाईनल हुई थी। असल में जब मेरे मन में रचना और अमन को ब्लैकमेल करके पैसे लेने का बिचार आया था।

तभी मैंने अपने प्लान उस बुढे आदमी को सामिल कर लिया था। पर इस काम को करने के लिए उस बूढे आदमी ने अपने एक और साथी को सामिल करने की शर्त रख दी थी, जिसके बाद थोडे से ना नुकुर और मोल भाव के बाद हमारे बीच इस काम के साथ साथ लाश डिलेवर करने के लिए लिए पूरे 10 लाख रूपये में सौद तय हो गया था। इसलिए पिछले दो दिनों से वो दोनों आदमी किसी साऐ की तरह अमन और रचना पर नजर रखे हुए थे और उनके पल पल की खबर मेरे पास पहुँचा रहे थे। उस कार के एकदम पास जाकर मैंने उसे बूढे को थम्स अप का इशारा किया और एक यू टर्न लेकर अपनी कार में बापिस जाकर बैठ गई।

इसके बाद मैंने अपना मोबाईल फोन ऑन कर लिया। जिसके कुछ ही देर बाद रचना का मेरे पास कॉल आया। तो मैंने उसे गाजियाबाद के एक सुनसान इलाके में आने की बात कही। मेरे फोन कट करते ही रचना ने अपनी कार स्टार्ट की और गाजियाबाद हाईबे की तरफ मोढ दी। रचना की कार के पीछे पीछे उस बुढे आदमी की कार भी वहाँ से निकल गई। लेकिन मैंने उनके पीछे जाने के स्थान पर नोयडा हाईबे की तरफ अपनी कार मोढ दी। नोयडा हाईवे के एक सुनसान इलाके में मैंने अपनी कार झाडियों के पीछे छिपा दी और फिर रचना को कॉल करके बीच रास्ते से ही नोडया हाईबे पर आने के लिए बोल दिया।

मेरी इस बात को सुनकर रचना गुस्से से बुरी तरह चिढ गई थी पर वो फिलहाल मेरे हाथों की कठपुतली बनी हुई थी। करीब 1 घंटे बाद रचना मुझसे थोडी दूर एक सुनसान पुल पर खडी हई थी। जिसके नीचे एक सूखा नाला था। मैं इस वक्त उस नाले के एकदम पास खडी हुई थी। जहाँ से मैं रचना और उसके पीछे आई कारों पर असानी से नजर ऱख सकती थी। जैसे ही रचना की कार वहां आकर रुकी तो मैंने उसे कॉल करके पैसों से भरे बैग पुल के नीचे फेंक कर वहाँ से जाने के लिए कहा। जिसे सुनकर पहले तो रचना बुरी तरह से हैरान रह गई थी, पर फिर उसने बिना देर किए तुरंत दोनों बैग पुल के नीचे फेंक दिए और अपनी कार में बैठकर वहाँ से बापिस चली गई।

रचना के पीछे पीछे अब भी वही काली कार लगी हुई थी। उस कार में बैठे दोनों आदमियों ने रचना को दो बैग पुल से नीचे फेंकते हुए देखा था। पर उन दोनों ने उन बैग को उठाने की कोई कोशिश नहीं की थी। उन दोनों की इस ईमानदारी को देखकर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई थी। उन लोगों के जाने के बाद मैं अपनी कार को कच्चे रास्ते से होते हुए पुल के नीचे लेकर गई और वहाँ डले दोनोें बैग को अच्छी तरह से चैक करने के बाद अपनी कार में रखकर बापिस दिल्ली की तरफ चल पडी। इतना सारा कैस मैं अपने साथ घऱ पर नहीं ले जा सकती थी।

इसलिए मैंने उनमें से 10 लाख रुपये निकाल कर अपने दूसरे बैग में रख लिए, बाकी 1 करोड 90 लाख रूपये लेकर मैं दिल्ली के नेशनल बैंक की मैन ब्रांच में जा पहुँची। जहाँ मैंने उन पैसों को डिजीटल कैस कार्ड में कंवर्ट करवा लिया। अब वो 1 करोड 90 लाख रूपये एक डेबिड कार्ड जितनी साईज के छोटे से कार्ड के अंदर स्टोर थे। जिन्हें मैं आसानी से कहीं भी ले जा सकती थी। बाकी के 10 लाख रुपये जो मैंने बचा लिए थे। उनमें से 5 लाख रूपये मुझे अभी उस बुढे आदमी और उसके साथी को देने थे। बाकि के 5 लाख रूपये लाश डिलेवर होेन के बाद देने थे और जो 50 हजार रूपये मैंने उसे एडवांस दिए थे वो मैंन बोनस के रूप में उसके पास छोडने का फैसला कर लिया था।

नेशनल बैंक से बाहर निकलकर मैंने अपने हाथों में पकडे खाली बैग पास के ही एक डस्टबिन में फेंक दिए, उसके बाद मैं अपनी कार से एक दूसरी लोकेशन पर जा पहुँची, जहाँ वो बूढा आदमी और उसका साथी मेरा इंतजार कर रहे थे। उनके पास पहुँचते ही मैंने उन्हें पूरे 5 लाख रुपये दे दिए। जन्हें देखकर उनके चेहरे खुशी से चमक उठे थे। हाँलाकि इस सारे काम में उन दोनोें ने बस रचना का पीछा करने और उन दोनों पर नजर रखने का काम ही किया था। बाकी का पूरा प्लान मेरा था और पैसों की डिलेबरी भी मैंने ही ली थी।

पर उन लोगों के रचना का पीछा करने से उसे इस बात पर पूरा यकीन हो गया था कि उसकी हर हरकत पर मेरी नजर है। इसलिए वो चाहकर भी कोई चालाकी नहीं कर पाई थी। उन दोनों को पैसे देने के बाद मैं अपने ऑफिस बापिस लौट आई थी। ताकि किसी को भी मुझपर कोई शक ना रहे। चूंकि दो दिन बाद ही अवार्ड सेरेमनी थी। इसलिए अगले दिन ही अमन घर बापिस आ गया था, ताकि वो अपने प्लान पर काम कर सके, इसके अलावा उसकी और रचना की सारी सेबिंग पहले से ही खत्म हो चुकी थी। अमन के घर बापिस आने पर मैंने उससे नॉर्मल तरीके से ही बात की थी और मैंने उसे इस बात का कोई शक नहीं होने दिया कि मैं उसके और रचना के बारे में सब जानती हूँ।

कुछ देर अमन के साथ समय बिताने के बाद मैं ऑफिस के लिए निकल गई। जहाँ पर मेरी नजर सबसे पहले रचना पर पडी। जिसकी आंखों पर आऐ डार्क सर्किल और चेहरे की रंगत को देखकर मैं तुरंत समझ गई थी कि वो सारी रात रोती रही है। पर मुझे उसपर कोई दया नहीं आ रही थी। मैं पूरा दिन नॉर्मल तरीके से ही अपना काम करती रही।हाँलाकि रचना ने कई बार मुझसे अकेले में बात करके कुछ पैसे उधार मांगने की कोशिश की थी, पर मैंने उसे बहाना बनाकर टाल दिया था। लंच टाईम के बाद जब पंकज मेरे पास मेरे केविन में आया तो उसने मुझसे सबाल किया

पंकज- क्या बात है… आज रचना बार बार तुम्हारे आस पास क्यों मंडरा रही है

निशा- उसे मुझसे कुछ पैसे उधार चाहिए

पंकज- कितनी गिरी हुई लडकी है, किसी के पति को अपने जाल में फंसा लिया और अब उससे ही मदद भी माँग रही है।

निशा- अरे छोडो ना यार…. ऐसे लोगों का कोई कैरेक्टर कहाँ होता है…

पंकज- पर उसे अचानक पैसों की जरूरत क्यों पड गई… जहाँ तक मुझे पता है कि उसके पास पहले से अच्छी खासी सेविंगस् हैं, ऊपर से डॉयवोर्स के बाद उसे अपने एक्स हसबैंड से एलीमनी के रूप में एक बहुत बडा अमाऊंट भी मिला था। इसके अलवा अमन तो है कि उसके साथ। फिर भला वो तुमसे पैसे क्यों माँग रही है।

निशा- लगता है कि वो पूरी तरह से मुझे निचोड लेना चाहती है। ताकि जब अमन और रचना मेरे खिलाफ कोई साजिश करें तो मेरे पास अपने बचाव के लिए कुछ भी ना हो। बैसे आज सुबह अमन भी घर बापिस आ गया है और आते ही मुझसे मेरी सेविंगस् और मेरी ज्वैलरी के बारे में पूछ रहा था।

मेरी बात सुनकर पंकज थोडा हैरान होते हुए बोला

पंकज- व्हॉट… पर क्यों…..

निशा- पता नहीं… बोल रहा था कि वो अपने दोस्तों के साथ कोई बिजिनेश शुरू करने बाला है। जिसके लिए उसे पैसों की जरूरत है। फिलहाल तो मैंने उसे टाल दिया है, पर अब आगे देखते हैं कि क्या होता है। बैसे भी फिलहाल मैं अपनी सेविंग्स में से उसे कुछ भी नहीं देने बाली। क्योंक मेरे पापा काफी लम्बे समय से बीमार चल रहे हैं। इसलिए वो पैसे मैंने उनके इलाज के लिए संभाल कर रखे हैं। रही बात ज्वैलरी की तो उससे मुझे कोई फर्क नहीं पडता। बैसे भी अमन ने मुझे ज्वैलरी के नाम पर आज तक कुछ खास दिलाया नहीं है। जो कुछ भी है वो 4-5 लाख रूपये से ज्यादा की नहीं होगी।

मेरी बात सुनकर पंकज गुस्से में बिफरता हुआ बोला

पंकज- दोनों के दोनों एक नम्बर के कमीने हैं…

निशा- अरे यार अब छोडो भी… बैसे भी हमें उन दोनों के बारे में बात करके अपना मूढ ऑफ करने की कोई जरूरत नहीं है। अच्छा यह बताओ कि तुम मेरे केबिन में क्या कर रहे हो। तुम्हें तो अभी अवार्ड बेन्यू पर तैयारियाँ देखने जाना था ना….

मेरी बात सुनकर पंकज को जैसे कुछ याद आया और वो तुरंत मुस्कुराते हुए मेरे पास आया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाती उसने मुझे अपनी बाहों में उठाया और मेरे केविन में डले सोफे पर जाकर बैठ गया। जिस कारण अब मैं उसकी गोद में बैठी हुई थी।

कहानी जारी है........
 
Update 068 -

पंकज के मुझे यूँ अपनी गोद में बैठाने के कारण मुझे थोडी शर्म आ रही थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मेरे साथ यह सब करना पंकज का फेवरेट काम बन गया था। इसलिए मैंने उसकी इस हरकत पर कोई रियेक्ट नहीं किया। तभी अचनाक से उसने मेरी गर्दन के पास बाले बालों को अपनी एक उंगली से हटाया और मेरी गर्दन पर किस करते हुए बोला

पंकज- वो मैं सोच रहा था कि…..

मैं भी इस वक्त पूरे मूढ में थी, इसलिए मैं भी पंकज के साथ मस्ती करते हुए बोल

निशा- हुम्म… क्या सोच रहे थे तुम

पंकज- मैं सोच रहा था कि क्यों ना आज हम ऑफिस में ही

निशा- ऑफिस में क्या पंकज सर…..

पंकज- क्यों हम आज ऑफिस में ही थोडा बहुत इंटीमेंट हो जाऐं….

पंकज की बात सुनकर मैं उसे धक्का देते हुए बोली

निशा- बिल्कुल भी नहीं…… यहाँ पर वो सब करना ठीक नहीं है….

पंकज- प्लीज…

निशा- नहीं…. बैसे तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हारी यह सब हरकतें कुछ ज्यादा ही बडने लगीं हैं।

पंकज- नहीं ऐसा नहीं है मेरी जान…. पर अब जब अमन बापिस आ गया है, तो हम कुछ दिनों तक शाम को एक साथ टाईम स्पेंड नहीं कर पाऐंगे। बैसे भी कल अवार्ड सेरेमनी है, इसलिए सारा दिन और सारी रात हम उसमें बिजी रहेंगे और फिर उसके बाद तुम आगरा अपने पिता के घर भी जाने बाली हो। तब तक तो तुम्हारे बिना मेरी हालत ही खराब हो जाऐगी। इसलिए आज मुझे थोडा सा प्यार करने दो ना…

पंकज की बात सुनकर मैंने कुछ पल इस बारे में सोचा… असल में वो काफी हद तक सही कह रहा था। क्योंकि अब मेरे प्लान का लास्ट सेग्मेंट शुरू होने बाला था। जिस कारण आज के बाद हम दोनों फिर कभी इंटीमेंट नहीं हो सकते थे। क्योंकि अमन के बापिस आने के बाद आज की रात पंकज के साथ बिताना मेरे लिए पॉसिवल नहीं था और कल अवार्ड सेरेमनी में बिजी होने के कारण हमें इस सबके लिए कोई समय नहीं मिलेगा और अवार्ड सेरेमनी के बाद मैं आगरा जाने बाली थी। जिसके बाद निशा गुप्ता दुनिया की नजरों में मर जाऐगी। यानि आज हम दोनों के पास इंटीमेट होने का आखिरी मौका था। इसलिए मैंने कहा

निशा- ठीक है… तुम मेरे साथ इंटीमेट हो सकते हो….

मेरी बात सुनकर पंकज खुश होते हुए बोला

पंकज- क्या सच में….

निशा- हाँ पर पहले बाहर सभी लोगों से बोलकर आओ की कल रात की अवार्ड सेरेमनी को लेकर हम दोनों के बीच एक बहुत इम्पोर्टेंट मीटिंग चल रही है। इसलिए चाहे जितना जरूरी काम हो, कोई भी हमें एक घंटे से पहले डिस्टर्व ना करे। मेरे ख्याल से इतना समय तुम्हारे लिए काफी होगा, है ना..

मेरी बात सुनकर पंकज मुझे अपनी गोद से उठाकर साईड में बिठाते हुए बोला

पंकज- हाँ हाँ मेरी जान इतना समय काफी है… मैं अभी सभी लोगों को समझाकर आता हूँ

इतना बोलकर पंकज तुरंत मेरे केबिन से बाहर निकला गया। जवकि मेरे चेहरे पर एक बडी सी मुस्कान आ चुकी थी। करीब 5 मिनट बाद जब पंकज बापिस आया तो मैं अब भी वहीं पर बैठी उसके आने का इंतजार कर रही थी। केविन के अंदर आते ही पंकज ने दरवाजा अंदर से अच्छी तरह से लॉक कर दिया। ताकि अचानक से कोई अंदर ना आ सके। इसके बाद पंकज ने मेरी वर्किंग टेबिल पर रखा सारा सामान उठाकर नीचे फर्स पर रख दिया और मुझे अपनी गोद में उठाकर टेबिल पर लेटा दिया, हाँलाकि वो टेबिल ज्यादा बडी नहीं थी। जिस कारण मेरी कमर से नीचे का हिस्सा टेबिल से नीचे लटका हुआ था।

मैंने इस वक्त स्काई ब्लू कलर की टाईट जींस और ब्लैक कलर की फार्मल शर्ट पहनी हुई थी। जो एकदम मेरे फिटिंग की थी। जिस कारण मेरे शरीर की बनाबट उन कपडों में साफ साफ दिखाई दे रही थी। हाँलाकि अमन को मेरे ऐसे कपडे पहनना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। पर आज मैं जानबूझकर उसके सामने ही इस कपडों को पहनकर आई थी। ताकि मैं उसे थोडा चिढा सकूँ, मुझे उस टेविल पर लिटाने के बाद पंकज ने मेरे दोनों पैरों को फैलाया और मेरी गाँड से सटकर खडा हो गया। मेरे टाईट जींस में मेरी गाँड कुछ ज्यादा ही उभरकर बाहर आ गई थी। जिस कारण जैसे ही पंकज का लण्ड मेरी गाँड से टकराया तो वो तुरंत अकडकर खडा हो गया। जिसे मैं कपडों के ऊपर से भी साफ साफ महसूस कर सकती थी।

पंकज का लण्ड खडा होते ही वो अपने लण्ड को कपडों के ऊपर से ही मेरी गाँड और चूत पर रगडने लगा। जिस कारण मेरा चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया था और मेरे मूँह से हल्की हल्की सिसकियाँ भी निकलने लगीं थी। तभी अचनाक से मुझे उस दिन पव के अंडरग्राऊंड पार्किंग बाली घटना याद आ गई। उस दिन भी मैं कुछ इसी पॉजीशन में लेटी हुई थी और तब पंकज ने अमन और रचना के सामने ही मेरी धुँआधार तरीके से चुदाई की थी। मैं अभी इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी पंकज ने अपने हाथों से मेरे पेट को सहलाना शुरू कर दिया था। धीरे धीरे मेरे पेट को सहलाते हुए वो मेरी शर्ट के बटन भी खोल रहा था।

मुझे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था और मैं काफी एक्साईटेड भी हो गई थी। कुछ ही देर में पंकज ने मेरी शर्ट के सारे बटन खोल दिए थे। जिस कारण मेरी ब्लैक ब्रा के अंदर कैद मेरे तने हुऐ बूब्स पंकज के सामने थे। जिन्हें पंकज ने तुरंत अपने हाथों में भर लिया और प्यार से सहलाने लगा। कुछ देर उसी पॉजीशन में रहने के बाद वो मुझसे अलग हो गया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाती पंकज ने मेरे जींस का बटन खोलकर मेरी जींस को मेरे पैरों से अलग कर दिया। अब मेरे चिकने लम्बे पैर पंकज के सामने थे। जिन्हें पंकज पागलों की तरह चूमे जा रहा था।

पंकज की इस हरकत से मेरे पूरे बदन में सनसनाहट दौड गई थी। ऊपर से अपने ऑफिस के अंदर इतने सारे लोगों की नाक के नीचे यह सब करने में मुझे काफी शर्म भी आ रही थी। पर मैं इस फीलिंग को पूरी तरह से एंजॉय करना चाह रही थी। इसलिए मैंने पंकज को अपनी मनमानी करने दी। मेरे पैरों को अच्छी तरह से चूमने के बाद पंकड ने मेरी ब्लैक कलर की पैंटी भी उतार कर फेंक दी थी। अब मेरी चिकनी गोरी चूत पंकज के एकदम सामने थी। खण्डहर में हुए हादशे के बाद मेरी आई ब्रो और सिर के बालों को छोडकर मेरे पूरे शरीर के बाल पूरी तरह से नष्ट हो गई थे और उस घटना के इतने दिनों के बाद भी मेरे बदन पर एक भी बाल नहीं उगा था।

जिस कारण उस घटना के बाद से मुझे ना तो कभी बैक्स करवाने की जरूरत महसूस हुई थी और ना ही अपनी झाँटों को साफ करना पडा था। मेरी गोरी और चिकनी चूत देखते ही पंकज की लार टपकने लगी थी। इसलिए वो तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और मेरे दोनों पैरों के बीच आकर मेरी चूत को किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा। हर बार पंकज के साथ यही होता था। वो जब भी मेरी चिकनी चूत को देखता तो उसे चाटने से अपने आपको रोक नहीं पाता था। हाँलाकि मुझे भी पंकज की यह हरकत काफी पसंद थी। क्योंकि अब तक पंकज इस काम में अच्छा खासा एक्सपर्ट हो गया था।

बैसे भी अब तक मैंने जितने लोगों के साथ भी चुदाई की थी, उनमें से बहुत कम लोग ऐसे थे जिन्होंने मेरी चूत को चाटा था। जबकी अमन जो मेरा पति है, उसने तो आज तक मेरी चूत को अपने हाथों से भी नहीं सहलाया था। पंकज ने इतनी जबरदस्त तरीके से मेरी चूत को चाटा था कि मैं कुछ ही पलों में झर गई थी। पर पंकज नहीं रुका और मेरी चूत का सारा पानी चाट चाट कर साफ कर दिया। मेरी चूत को जी भरकर चाटने के बाद अमन उठकर खडा हो गया और मेरे चेहरे के पास आकर मेरे होंठो को चुमने लगा। पंकज के इस तरह से मेरे होंठों को चूमने से मुझे अपने मूँह में मेरी ही चूत के पानी का का टेस्ट महसूस हो रहा था।

मेरे होंठों को जीभरकर चूमने के बाद पंकज ने मेरी ब्रा की स्ट्रैप खोलकर मेरे बूब्स को आजाद कर दिया और फिर वो मेरे बूब्स को चूमने और सहलाने लगा। पंकज की इन हरकतों से मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं डाईनिंग टेबिल पर रखा कोई लजीज पकवान हूँ जिसे पंकज बडे चाब से खा रहा है। मेरे पूरे बदन को जीभरकर चूमने और सहलाने के बाद पंकज एक बार फिर मेरी गाँड के पास आ गया और अपना पेंट खोलकर मेरी चूत पर अपना लण्ड रगडने लगा। जिसे देखकर मैं समझ गई कि अब बस मेरी चुदाई होने ही बाली है। इसलिए मैंने आने बाले पल के लिए अपने आप को मेंटली तैयार किया और अपने निटले होंठ को अपने दाँतों तले दवा लिया। ताकि मेरे मूँह से कोई आवाज ना निकले।

अगले ही पल पंकज ने अपना लण्ड मेरी चूत के अंदर घुसाना शुरू कर दिया। हाँलाकि मुझे हल्का सा दर्द महसूस हो रहा था। पर एक्साईटमेंट के कारण मैं उस दर्द को पूरी तरह से बरदास्त कर गई और अपनी चुदाई के मजे लेने लगी। अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसाने के बाद पंकज ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए थे। वो करीब 20-25 मिनट तक यूँ ही आराम आराम से मेरी चुदाई करता रहा। इस दौरान में दो बार झर चुकी थी और मजे के सातवे आसमान की शैर कर रही थी। कुछ देर और मेरी चुदाई करने के बाद पंकज ने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और मुझे उठने का इशारा करने लगा।

पंकज की इस हरकत पर मैं बुरी तरह से हैरान थी। क्योंकि आज से पहले कभी भी पंकज ने मेरी चुदाई बीच में नहीं छोडी थी। हाँलाकि मैं अब तक पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी। पर पंकज ने अब तक अपना पानी नहीं छोडा था। पंकज का इशारा मिलते ही मैं तुरंत उठकर खडी हो गई। जिसके बाद उसने मुझे इस बार पेट के बल उस टेबिल पर लेटा दिया और मेरी गाँड के ऊपर अपना लण्ड रगडने लगा। जिसे देखकर मैं एक बार फिर हैरान रह गई। क्योंकि हम दोनों के इतने दिनों के रिलेशनशिप के दौरान यह पहली बार हुआ था जब पंकज ने मेरी गाँड मारने की इच्छा जाहिर की थी।

अब जब यह हमारे बीच की आखिरी चुदाई थी। तो मैंने उसे अपनी गाँड मारने से नहीं रोका और चुपचार अपनी गाँड थोडी और ऊपर उठा दी। ताकि वो आसानी से मेरी गाँड मार सके। मेरा इशारा मिलते ही पंकज ने बिना देर किए अपना लण्ड मेरी गाँड के छेद पर ऱखकर दवाव बनाना शुरू कर दिया। मैं अब तक कई बार अपनी गाँड मरवा चुकी थी। जिस कारण मेरी गाँड थोडी लूज हो गई थी। इसलिए पंकज का लण्ड बिना किसी प्राब्लम के धीरे धीरे मेरी गाँड के अंदर जाने लगा। हाँलाकि मुझे अपनी गाँड में तेज दर्द का एसहास हो रहा था। पर मैं चाहकर भी चीख नहीं सकती थी। बर्ना ऑफिस में मौजूद सभी लोगों को यह पता चल जाता कि ऑफिस के अंदर मेरी चुदाई चल रही है।

जब पंकज का लण्ड करीब आधा मेरी गाँड के अंदर चला गया तो पंकज कुछ पलों के लिए रुक गया। मुझे लगा कि वो अब अपना लण्ड इससे ज्यादा मेरी गाँड के अंदर नहीं घुसाऐगा। पर तभी पंकज ने मेरी सोच को गलत साबित करते हुए अपने एक हाथ से मेरे बालों को पकडा और दूसरे हाथ से मेरी कमर को थामने के बाद अपने लण्ड को मेरी गाँड से थोडा बाहर निकाल कर अचानक से पूरी ताकत के साथ धक्का मारा। जिस कारण उसका लण्ड मेरी गाँड को चौडा करते हुए पूरा अंदर तक चला गया। पंकज की इस हरकत से मेरे शरीर में दर्द की एक तेज लहर दौड गई थी। पर मैं चाह कर भी चीख नहीं सकती थी।

इसलिए मैं किसी नागिन की तरह फुंफकार कर रह गई और गुस्से में अपना सिर पीछे करके पंकज को घूरने लगी। मुझे गुस्से में देखकर पंकज ने झेंपते हुए अपने दाँत दिखाऐ और फिर धीरे धीरे मेरी गाँड मारने लगा। जिस कारण कुछ देर बाद ही मेरा दर्द गायब हो गया और मुझे भी गाँड मरवाने में मजा आने लगा। इसलिए मैं भी अपनी कमर को हिला हिलाकर उसका पूरा साथ देने लगी थी। मेरा इशारा मिलते ही पंकज ने अपनी स्पीड बाडा दी और पूरे जोश के साथ मेरी गाँड की धज्जियाँ उडाने लगा।

करीब 20 मिनट तक धुँआधार तरीके से मेरी गाँड मारने के बाद आखिरकार पंकज ने अपना पूरा पानी मेरी गाँड के अंदर छोड दिया और मुझसे अलग हो गया। पंकज के अलग होने के बाद भी कुछ देर तक मैं उसी पॉजीशन में खडी रहकर अपने आप को कंट्रोल करने की कोशिश करती रही। जब मैं कुछ नॉर्मल हुई तो मैंने देखा कि पंकज अपने कपडों को ठीक करके मेरे ठीक पीछे सोफे पर बैठकर अब भी बेशर्मी से मेरी गाँड निहार रहा है। पंकज की इस हरकत को देखकर मैंने उससे कुछ नहीं कहा और चुपचाप नीचे फर्स पर पडे अपने कपडे उठाकर अपने ऑफिस के अटैच्ड बाथरूम में घुस गई।

कहानी जारी है......
 
सॉरी दोस्तों व्यक्तिगत कारणों से मैं कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ सिटी गया हुआ था। जिस कारण मैं अपडेट पोस्ट नहीं कर पाया। आज से नियमति रूप से कहानी के अपडेट आते रहेंगे।
 
Update 069 -

जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो मैंने अपने पूरे कपडे पहने हुए थे और अब मैं पहले की ही तरह फ्रैस ही लग रही थी। इस दौरान पंकज मेरी टेबिल पर रखा सारा सामन फिर से पहले की तरह सेट कर चुका था और अब वो सोफे पर बैठकर मेरे बाहर आने का इंतजार कर रहा था। जिसे देखकर मैं काफी खुश थी। इसलिए मैं खुद ही उसकी गोद में जाकर बैठ गई और उसके होंठों पर एक लाईट किस करते हुए बोली

निशा- अब तो खुश हो ना मेरी जान…..

मेरी बात सुनकर पंकज के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई, उसने मुझे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया और मेरी गर्दन पर प्यार से किस करते हुए बोला

पंकज- बहुत बहुत बहुत ज्यादा खुश हूँ…. मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि तुमने मुझे बो सब करने दिया

निशा- जब तुम्हारा वो सब करने का इतना ज्यादा मन था, तो फिर भला मैं तुम्हें मना कैसे कर सकती थी। पर तुमने आज मुझे बहुत दर्द दिया है….

मेरी बात सुनकर पंकज थोडा झेंपते हुए बोला

पंकज- सॉरी मेरी जान.. पता नहीं कैसे मैं इतना ज्यादा एक्साईटेड हो गया था… असल में मेरा मन कई दिनों से तुम्हारी गाँड मारने का कर रहा था। पर मेरी तुमसे इस बारे में कहने की हिम्मत ही नहीं हुई और आज जब मुझे मौका मिला तो मैं अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं कर पाया। पर वादा करता हूँ अगली बार मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा

पंकज की बात सुनकर मैं उसे गुस्से में घूरते हुए बोली

निशा- मतलब तुम फिर से मेरी गाँड मारने का प्लान कर रहे हो

पंकज- अरे नहीं… ऐसी बात नहीं है… मैं बस यह कह रहा था कि आगे कभी ऐसी सिचुऐशन आऐ तो….

इससे पहले पंकज अपनी बात पूरी करता मैंने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा

निशा- बस बस मैं सब समझती हूँ… सभी मर्द लडकियों की गाँड देखकर भूखे भेडियों की तरह टूट पडते हैं…. अब जो हो गया सो हो गया… इसलिए इन सब बातों को छोडो और जाकर अपना काम करो… हम काफी देर से ऑफिस के अंदर बंद हैं, पता नहीं बाकी लोग हमारे बारे में कैसी कैसी बातेें कर रहे होंगे…

इतना बोलकर मैं पंकज की गोद से उठ गई और अपनी चेयर पर बापिस बैठकर फाईलों को उलट पुलट करने लगी। मुझे एक बार फिर अपने काम में बिजी देख पंकज चुपचाप मेरे केबिन के बार निकल गया। उस दिन मैं काफी देर तक ऑफिस के पेंडिग काम निपटाती रही और रात करीब 9 बजे घर बापिस आई। घर पर अमन मेरा काफी देर से इंतजार कर रहा था और मुझसे कुछ बात करना चाहता था। पर मैं थके होने का बहाना बनाकर सोने चली गई।

अगले दिन अवार्ड सेरेमनी थी। जिस कारण मैं अमन के जागने से पहले ही ऑफिस के लिए निकल गई थी। ताकि अवार्ड नाईट की तैयारियाँ देख सकूँ और अमन को इग्नोर कर सकूँ। अवार्ड वेन्यू पर पहुँचकर अपने हिस्से के सारे जरूरी काम खत्म करने के बाद मैं दोपहर में जल्दी घर बापिस आ गई। उस वक्त अमन घर पर नहीं था, इसलिए मैं रेस्ट करने लगी। शाम को अमन के आने के बाद हम लोग तैयार होकर आवर्ड बेन्यू पर जा पहूँचे। जहाँ पर कम्पनी के लगभग सभी कर्मचारी अपने अपने फैमली मेम्वर्स के साथ आये हुये थे।

टीम लीडर होने के कारण मैं सबसे आगे बाली रो में अपने बॉस के साथ बैठी हुई थी और मेरे बगल में अमन बैठा हुआ था। किस्मत से रचना को मेरे एकदम पीछे बाली सीट मिली हुई थी। जिस कारण अमन और रचना एक दूसरे से बातें नहीं कर पा रहे थे। आज मैंने अवार्ड नाईट के लिए एक पिंक कलर की डिजायनर साडी पहनी हुई थी। जिसमें मैं बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। उस आवर्ड सेरेमनी के दौरान कई सारे इम्प्लॉय ने अपनी अपनी परफार्मेंस दी थी, जिन्में से मैं भी एक थी।

असल में मैंने एक गाना गाया था, जिसके खत्म होने के बाद सभी लोगों ने खूब तालियाँ बजाईं थीं। इन सारी परफार्मेंश के बीच कम्पनी के बडे लीडर्स अपने अपने एक्सपीरियंस को शेयर करके सभी इमप्लॉय को मोटीबेट कर रहे थे। हाँलाकि ज्यादातर सीनियर्स मुझे पर्सनली जानते थे। इसलिए उनके लेक्चर में कहीं ना कहीं मेरा जिक्र जरूर होता था। जिस कारण उस अवार्ड सैरेमनी में मैं और मेरी टीम काफी ज्यादा हाईलाईट हो गई थी। सारी परर्फार्मेंश पूरी होने के बाद ऑफिसियली आवार्ड सेरेमनी शुरू हो गई। जिसमें कई सारी कैटेगरी थीं, लेकिन दो कैटेगरी ऐसी थीं, जिन पर हर साल सभी इम्पलॉय की नजरें रहतीं है।

पहली वेस्ट टीम अवार्ड और दूसरी इम्प्लॉय ऑफ दा ईयर अवार्ड। किस्मत से बेस्ट टीम का अवार्ड मेरी ही टीम को मिला था। जिस कारण हमारी पूरी टीम काफी खुश थी। सबसे पहले मैंने अपने सभी मेल टीम मेम्बर्स से हाथ मिलाकर उन्हें बधाई दी, इसके बाद रचना को छोडकर बाकी सभी फीमेल टीम मेम्बर्स से गले मिलकर उन्हें भी मुबारकबाद दी, हाँलाकी रचना ने भी मुझसे गले मिलने की कोई कोशिश नहीं की थी। सभी टीम मेम्बर्स को मुबारकवाद देने के बाद मै स्टेज पर गई और कम्पनी सी.ई.ओ. के हाथों से बेस्ट टीम का अवार्ड लिया।

जब मैं स्टेज से नीचे आकर बापिस अपनी चेयर पर बैठी तो एक एक करके दूसरी कैटेगरी के आवार्ड का भी अनाउँसमेंट होने लगा। जिसमें मेरा और मेरे टीम मेम्बर्स का कोई इंट्रेस्ट नहीं था। सबसे आखिर में नम्बर आया इम्प्लॉय ऑफ दा ईयर अवार्ड का। जिसे सुनकर सभी लोगों की धडकने तेज हो गईं थी। पर जब इम्पलॉय ऑफ दा ईयर के लिए मेरा नाम अनाऊँश हुआ तो मैं बुरी तरह से हैरान रह गई। क्योंकि मैंने इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं की थी। मेरा नाम अनाऊंस होते ही मेरे सभी टीम मेम्बर्स एक बार फिर मुझे मुबारकवाद देने लगे, और फिर मेरे बॉस के अलावा दूसरे सीनियर्स ने भी मुझे मुबारकवाद दी।

जिसके बाद मैंन सभी को थैंक्स कहा और स्टेज पर जाकर कम्पनी सी.ई.ओ. के हाथों से अपनी अवार्ड ट्राफी ली। जब में स्टेज पर ट्राफी अपने हाथ में थामे हुए थी। तो उस वक्त अमन और रचना के चेहरे पर गुस्सा साफ साफ दिखाई दे रहा था। जिसे देखकर मैं और भी ज्यादा मुस्कुरा रही थी। क्योंकि अपने दुश्मनों को तडपाने में मुझे अब काफी मजा आने लगा था। अवार्ड सैरेमनी खत्म होने के बाद मैं और अमन अपने घर जाने के लिए निकल गए। इस बीच रास्ते में अमन ने मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं की थी, जबकि मुझे अमन की इस हालत पर मन ही मन हंसी आ रही थी।

मैं उसे अभी और भी ज्यादा जलाना चाहती थी, इसलिए मैं रास्ते में ही अपने पापा को फोन करके मुझे अवार्ड मिलने की बात उन्हें बताने लगी। मेरी इस हरकत से अमन और भी ज्यादा जल भुन गया था। तभी हमारी बातों के दौरान पापा ने मुझे आगरा आने के लिए कहा। चूँकि अमन को जलाने के लिए मैंने फोन स्पीकर पर कर रखा था। इसलिए पापा की आवाज अमन ने भी साफ साफ सुन ली थी। अमन तो जैसे इसी मौके का इंतजार कर रहा था, इसलिए पापा की बात सुनकर उसके चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान आ गई थी।

लेकिन मैं इतनी आसानी से अमन को कोई भी मौका नहीं देना चाहती थी। इसलिए मैंने पापा को बिजी होने का बहाना बनाकर फिर कभी आने के लिए बोल दिया। जिसे सुनकर अमन के अरमान एकबार फिर उसके दिल में ही रह गए। इस बीच घर जाते वक्त रास्ते में मैंने खुद से अमन से कोई भी बात करने की कोशिश नहीं की थी। जिसे देखकर अमन को यह बात अच्छी तरह से समझ में आ गई थी कि मुझपर उसके नाराज होने से कोई फर्क नहीं पड रहा है। जिस कारण उसने ही पहल करने का फैसला कर लिया और घर पहुंचकर मुझसे बात करने की कोशिश करने लगा।

लेकिन आज फिर मैं उसे थके हुए होने का बहाना बनाकर सोने चली गई। आखिरकार अगले दिन जब मैं और अमन कॉफी पी रहे थे तो अमन एकबार फिर मुझसे बात करने की कोशिश करने लगा और बोला

अमन- तो फिर कैसा चल रहा है ऑफिस में

अब मैं उसे और ज्यादा इग्नोर नहीं कर सकती थी, बर्ना अमन को मुझपर शक हो सकता था। इसलिए मैं भी उससे पूरी तरह नॉर्मल होकर बोली

निशा- सब बढिया ही चल रहा है… बैसे कल तो तुम मेरे बॉस और मेरी टीम के बाकी मेम्बर्स से भी मिल चुके हो। इससे तो तुम्हें थोडा बहुत अंदाजा लग ही गया होगा

मेरा जबाब सुनकर अमन थोडा झेंपते हुए बोला

अमन- अरे नहीं… मेरा मतलब था कि अब आगे का तुम्हारा क्या प्लान है

निशा- मतलब

अमन- मतलब यही कि अब जब तुम्हें इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड मिल ही चुका है। तो फिर क्या तुम अब भी इसी जॉब को कन्टीन्यू रखना चाहती हो या फिर रिजाईन करके किसी दूसरी कम्पनी में एप्लाई करना चाहती हो।

अमन की बात सुनकर मैंने लापरवाही से जबाब दिया

निशा- पता नहीं…. फिलहाल मैंने इस बारे में कुछ भी सोचा नहीं है, बैसे मुझे लगता है कि अब जब तुम्हारा कैरियर भी स्टेबल चल रहा है और मैं भी अपनी जॉब में अच्छा कर रही हूँ। तो क्यों ना हम दोनों पैरेंट्स बनने के बारे में सोचा

अब तक जितनी बार भी मेरी अमन से इस टॉपिक पर बात हुई है। अमन ने हर बार मुझसे झगडा किया है। इसलिए मैं देखना चाहती थी कि आज अमन का क्या रिऐक्शन होगा। जैसा कि मुझे उम्मीद थी, मेरी बात सुनकर अमन कुछ देर खामोश रहा और फिर एक गहरी सांस लेकर बोला

अमन- तुम्हारा आईडिया बुरा नहीं है… हम इस बारे में सोच सकते हैं…. पर अभी हमारे पैरेंट्स बनने से जरूरी है कि हम अपने पैरेंट्स की खुशी का ध्यान रखें

निशा- मतलब

अमन- मतलब यह मेरी जान कि कल जब तुम्हारे पापा ने तुम्हें आगरा आने के लिए कहा और तुमने उन्हें मना कर दिया तो मुझे यह अच्छा नहीं लगा

निशा- क्यों… ऐसा मैंने क्या गलत कर दिया…. हम दोनों इतने दिनों से एक दूसरे से दूर दूर रह रहे हैं। इसलिए मैं चाहती हूँ कि कुछ दिनों तक हम एक साथ रहें। बैसे भी तुम्हारी जॉब का कोई भरोसा नहीं है। पता नहीं कब तुम्हें आउट ऑफ सिटी जाना पडे। बस इसीलिए मैंने पापा से मना कर दिया। बैसे भी मैं सोच रही थी कि हम दोनों एक साथ आगरा चलें… पापा हम दोनों को एक साथ देखकर बहुत खुश होंगे

अमन- अरे नहीं बाबा मैं अभी तुम्हारे साथ आगरा नहीं जा सकता, लेकिन पापा की हेल्थ को देखते हुए तुम्हें जरूर उनसे मिलने जाना चाहिए।

निशा- हाँ यार तुम सही कह रहे हो… पर….

अमन- बस अब कोई पर बर नहीं… तुम आगरा जा रही हो और यह मेरा फाईनल डिसीजन है।

निशा- पक्का ना…. तुम कुछ दिनों तक अकेले मैनेज कर लोगे ना…

अमन- हाँ बाबा कर लूँगा… बैसे भी जब मैं आउट ऑफ सिटी जाता हूँ तो सब कुछ अकेले ही तो मैनेज करता हूँ। बैसे भी तुम तो बस एक दो दिन के लिए ही जा रही हो। तुम्हारे आगरा से बापिस आने के बाद हम किसी अच्छे गॉयनोलॉजिस्ट के पास जाकर तुम्हारी कॉपर टी निकलवा लेंगे। ताकि हम पैरेंट्स बनने की तैयारी कर सकें।

अमन की बात सुनकर मैंने खुश होते हुए अमन को अपने गले लगा दिया और बोली

निशा- ओह थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू मेरी जान… यू आर द बेस्ट हसबैंड इन द वर्ड… तुम्हें मेरे साथ मेरे मायके बालों की भी कितनी फिक्र रहती है।

मेरी बात सुनकर अमन खुश होते हुए बोला

अमन- तो फिर कब जाने का प्लान है

निशा- अब अगर ऐसा है तो मैं सोच रही हूँ कि क्यों ना कल ही चली जाऊं… आज मैं ऑफिस जाकर कुछ दिनों की छुट्टी ले लूँगी और ऑफिस से आते वक्त पापा और भाई के लिए कुछ गिफ्ट भी ले लूँगी।

अमन- हुम्म यह ठीक रहेगा…. बैसे तुम्हारे पास पैसे तो हैं ना.. अगर पैसों की जरूरत हो तो मुझे बोल दो, मैं अभी तुम्हारे अकॉऊंट में पैसे ट्रांशफर कर देता हूँ।

अमन की बात सुनकर मैं पूरी तरह से हैरान रह गई थी। आज पहली बार था जब अमन खुद से मुझे पैसे देने की बात कर रहा था। पहले तो मेरा मन हुआ कि उससे पैसे ले ही लेती हूँ। पर फिर मैंने सोचा कि अब इसके पास बचा ही क्या है। थोडे बहुत चिल्लर बची होगी। उसे लेने से क्या फायदा। इसलिए मैंने कहा

निशा- नहीं नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है। मेरे पास अभी पैसे हैं। बैसे भी तुम्हें अपने पैसे सेव करने चाहिए.. ताकि जब हम पैरेंट्स बने तो हम अपने बच्चे की हर जरूरत को पूरा कर सकें।

मेरी बात सुनकर अमन खुश होते हुए बोला

अमन- उम्मम तो फिर ठीक है… जैसी तुम्हारी मर्जी… बैसे अगर तुम चाहो तो कल मेरी कार ले जा सकती हो।

निशा- नहीं रहने दो… मैं बस से या ट्रेन से चली जाऊंगी

अमन- अरे अब ले भी जाओ… मेरे सामने नखरे दिखाने का कोई फायदा नहीं है। क्योंकि मुझे अच्छी तरह से पता है कि जब भी मैं आउट ऑफ सिटी जाता हूँ तो तुम चुपके से मेरी कार अपने साथ ले जाती हो। इसलिए मैं सोच रहा हूँ कि अपनी यह कार मैं तुम्हें गिफ्ट कर देता हूँ और अपने लिए कोई दूसरी कार खरीद लेता हूँ।

अमन की बात सुनकर मैं एक बार फिर खुश होते हुए बोली

निशा- क्या सच में….

अमन- हाँ बाबा सच में…. तुम मेरी कार आगरा ले जा सकती हो…

निशा- तो फिर ठीक है… मैं कल तु्म्हारी कार लेकर ही आगरा जाऊंगी।

इसी तरह हम दोनों कुछ देर तक आपस में बातें करते रहे और फिर मैंने अपने पापा को भी कॉल करके अगले दिन आगरा आने के बारे में बता दिया। मेरे आगरा जाने से अमन काफी ज्यादा खुश था। क्योंकि अब बो मुझे मारने का अपना प्लान पूरा कर सकता था। पर उसे यह नहीं पता था कि मैं उसके प्लान के बारे में पहले से ही सब कुछ जानती हूँ। इसलिए अमन के ऑफिस जाने के बाद मैं भी अपने ऑफिस के लिए निकल गई और बॉस से 3 दिनों की छुट्टी ले ली।

कहानी जारी है........
 
Update 070 -

इसबार छुट्टी देने में बॉस ने कोई आना कानी नहीं की थी। हालाँकि आगरा जाने और बापिस आने के लिए एक दिन कॉफी था। लेकिन यह मेरी पापा और भाई से आखिरी मुलाकात होने बाली थी। इसके बाद मैं निशा के रूप में उनसे फिर कभी नहीं मिल पाऊँगी। इसीलिए मैं एक दो दिन उनके साथ बिताना चाहती थी। कुछ देर ऑफिस में काम करने के बाद मैं हाफ टाईम में ही ऑफिस से निकल गई और घर जाने की जगह मैं सीधे मॉल जाकर अपने पापा और भाई के लिए ढेर सारी शॉपिंग करने लगी। इसके बाद मैं एक कम्प्यूटर शोरूम पर गई जहाँ मैंने दो नऐ लेटेस्ट हाई स्पीड लैपटॉप खरीदे।

जिनके बिल मैंने अलग अलग बनबाये थे। एक बिल मैंने अपने भाई के नाम से बनवाया था और दूसरा बिल मैंने अमृता के नाम से बनवाया था। लैपटॉप खरीदने के बाद मैंने दो नए लेटेस्ट स्मार्ट फोन भी खरीद लिए थे। जिनके बिल भी मैंने लैपटॉप की तरह अलग अलग अपने भाई और अमृता के नाम पर बनवाया था। इसके बाद मैंने मॉल में गर्लस् सेक्सन में जाकर अपने साईज के कुछ मार्डन कपडे, शू, एक बैगपैक और दूसरा जरूरी सामान भी खरीद लिया जो मैं अमृता बनने के बाद यूज करने बाली थी।

यह सारी शॉपिंग मैंने अपने यानि निशा गुप्ता के सेविंग एकाऊंट से की थी। क्योंकि मैं अब अपने उस अकॉऊंट को पूरी तरह से खाली करने बाली थी। ताकि मेरे मरने के बाद अमन को एक फूटी कौडी भी ना मिले। सारी शॉपिंग करने के बाद मैं कैब बुक करके अपने घर बापिस आ गई। घर पर बापिस आते ही मैंने सबसे पहले अपने पुराने लैपटॉप का सारा इम्पोर्टेंड डाटा अपने नये लैपटॉप में ट्रांशफर किया। खासकर ड्रेगन हार्ट से रिलेटेड सारा डाटा। इसके बाद मैंने अपने पुराने लैपटॉप को रीसेट कर दिया। ताकि उसमें से कोई भी डाटा रिकवर ना हो सके।

इसके बाद मैंने अपने लिए खरीदा सारा सामान अपने बैगपैक के अंदर सेट कर लिया और उसमें अमृता के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट, डेबिड कार्ड, डिजीटल कैस कार्ड के अलावा दूसरा जरूरी सामान भी रख लिया। जिसकी जरूरत मुझे बाद में पड सकती थी। फिर मैंने उस बैग पैक को एक बडे से बैग के अंदर रखकर उसके ऊपर अपने कुछ सलवार सूट दूसरा जरूरी सामान रख लिया। ताकि अगर अमन उस बैग को खोलकर देखे तो उसे अंदर छिपाऐ गए बैगपैक के बारे में कुछ भी पता ना चले। यह सारा काम खत्म करते करते शाम हो गई थी और अमन के घर आने का समय भी हो गया था।

इसलिए मैंने पापा और भाई के लिए जो शॉपिंग की थी, उसे एक दूसरे बैग में जल्दी से पैक करके किचिन में जाकर खाना बनाने लगी। जब अमन घर बापिस आया तो उसने देखा कि मैंने अपना सामान पैक कर लिया है। जिसे देखकर वो समझ गया कि मैं कल पक्का आगरा जाने बाली हूँ। इसलिए अमन ने उस दिन मुझसे काफी प्यार से बातें की और मेरे खाने की खूब तारीफ की। हाँलाकि मुझे अमन का सारा नाटक समझ में आ रहा था। पर मैं भी उसकी बातों पर खुश होने का दिखावा करती रही।

रात में जब अमन ने मेरे साथ इंटीमेट होने की कोशिश की तो मैंने पीरियड का बहना बना दिया। क्योंकि मैं उसके साथ अब बिल्कुल भी फिजीकल नहीं होना चाहती थी। अगले दिन सुबह सुबह ही मैं आगरा के लिए निकल गई। मैं अच्छी तरह से जानती थी कि अमन ने पक्का कार के ब्रेक बायर को हाफ कट किया होगा, ताकि बीच रास्ते में अचानक से ब्रेक फेल होने कारण मेरा एक्सीडेंट हो जाऐ। इसलिए दिल्ली से बाहर निकलने से पहले ही मैंने एक गैराज में जाकर सबसे पहले कार का ब्रेक बायर चेंज करवाने का फैसला किया। ताकि मैं पूरी तरह से सुरक्षित आगरा पहुँच सकूँ।

जब मैंने गैराज में जाकर अपनी कार का ब्रेक बायर चैक करवाया, तो मेरा शक यकीन में बदल गया। क्योंकि उस कार का ब्रेक बायर बाकई में हाफ कट किया गया था। इसलिए कार के ब्रेक बायर को चेंज करवाने के दौरान मैंने सारी प्रासेस काफी ध्यान से देखी थी। ताकि बापिस आते वक्त मैं खुद ही उस कार के ब्रेक फेल कर सकूँ। ब्रेक बायर चेंज करवाने के बाद मैं बिना देर किए आगरा के लिए निकल गई। दिल्ली से आगरा की दूरी करीब 230 किलोमीटर है। इसलिए करीब तीन घंटे के सफर के बाद मैं आखिरकार आगरा पहूँच ही गई। जहाँ पर मेरे पापा और भाई मेरे आने का इंतजार कर रहे थे।

अपने पापा के घर पहुँचते ही मैंने सबसे पहले अमन को कॉल करके आगरा पहुँचने के बारे में बता दिया। लेकिन अमन तो जैसे मेरी आवाज सुनकर शॉक्ड ही हो गया था। क्योंकि उसने मेरे जिंदा आगरा पहुँचने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। पर वो यह बात मुझसे जाहिर नहीं कर सकता था, इसलिए उसने मुझसे काफी प्यार से बात की थी। कुछ देर अमन से बात करने के बाद मैं अपने पापा और भाई से बातें करने में बिजी हो गई। मैं आगरा आकर अपने परिवार से मिलकर काफी खुश थी। अपने पापा और भाई से ढेर सारी बातें करने के बाद मैंने उन्हें वो सारे गिफ्ट दिए, जो मैंने उनके लिए खरीदे थे।

पहले तो पापा और भाई ने मुझसे वो गिफ्टस् लेने से साफ मना कर दिया था। पर मेरे जिद करने पर आखिरकार वो लोग मान ही गए। गिफ्ट्स देने बाद हम तीनों ने एक साथ लंच किया और फिर मैं अपने पुराने दोस्तों से मिलने चली गई। वो दिन यूँ ही सबसे मिलने और बातें करने में कब बीत गया, पता ही नहीं चला। अगले दिन सुबह का नाश्ता करने के बाद मैं अपने भाई को लेकर मार्केट गई जहाँ मैंने उसे एक स्पोर्ट बाईक और दूसरा जरूरी सामान भी दिला दिया। हाँलाकि मैं उसे एक हाईस्पीड लैपटॉप, लेटेस्ट मोबाईल फोन और ढेर सारे कपडे पहले ही गिफ्ट कर चुकी थी। ऊपर से यह नई स्पोर्ट बाईक और दूसरे जरूरी सामान देखकर वो बुरी तरह से हैरान था।

इसलिए उसने मुझसे वो बाईक और दूसरा सामान लेने से बिल्कुल मना कर दिया, लेकिन जब मैंने बडी बहन होने का हक जताते हुए उसे डांटा और अपनी कसम दी तो आखिरकार मेरा भाई वो सब लेने से मान गया। अपने भाई के लिए शॉपिंग करने के बाद जब हम घर बापिस गए, तो नई बाईक और इतना सारा सामान देखकर पापा बुरी तरह से हैरान रह गए, और उन्होंने मुझे इतना ज्यादा पैसा खर्चा करने पर बहुत डांटा। लेकिन मैंने उनके गुस्से को हंसी में टाल दिया। बैसे भी यह मेरी अपने पापा और भाई से आखिरी मुलाकात थी। तो भला मैं अपने पापा की डांट का बुरा कैसे मान सकती थी।

थोडी देर उन्की डाँट सुनने के बाद आखिरकार मैंने उन्हें मना ही लिया था। जिसके बाद हम तीनों ने आपस में बातें करते हुए एक साथ लंच किया। मेरा भाई नई बाईक मिलने से बहुत खुश था और वो अब अपनी नई बाईक को लेकर कहीं घूमने जाना चाहता था। इसलिए अपने भाई का मन रखने के लिए मैं उसके साथ घूमने निकल गई। उस पूरे दिन मेरा भाई मुझे अपनी नई बाईक पर बैठाकर आगरा के आस पास की कई जगह घुमाता रहा। जिसमें हम दोनोें भाई बहनों ने काफी इंजॉय किया था। यह पहली बार था जब हम दोनों भाई बहनों ने बडे होने के बाद इतना सारा समय एक साथ बिताया था।

असल में मेरा भाई मुझसे करीब 6-7 साल छोटा है और जब मैं 18 साल की हुई थी, तभी मेरे माता पिता ने मेरी शादी करवा दी थी। उस समय मेरा भाई बहुत छोटा था, जिस बजह से शादी के बाद मुझे अपने भाई के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका ही नहीं मिला था। हाँलाकि हमारी अक्शर फोन पर बातें होती रहती थी और कभी कभार मैं उन लोगों से मिलने आगरा भी आती रहती थी। पर मैं कभी भी एक दो दिन से ज्यादा घऱ पर नहीं रुकी थी और माँ के गुरजने के बाद मेरा आगरा आना लगभग बंद हो गया था। ऊपर से ज्यादा एज डिफरेंस होने के कारण मेरा भाई मुझसे कम ही बात किया करता था।

लेकिन इस बार जब मैं आगरा आई तो मैंने अपने भाई से ढेर सारी बातें की थी। जिस कारण वो अब पूरी तरह से मेरे साथ कंंफर्टेबल हो गया था। रात में घऱ बापिस आने के बाद मैंने अपने हाथों से अपने पापा और भाई के लिए खाना भी बनाया। इतने दिनों बाद मेरा हाथों का बना खाना खाकर वो दोनों काफी खुश थे। डिनर करने के बाद हम तीनों देर रात तक आपस में बातें करते रहे। लेकिन पापा की एज ज्यादा होने और अक्सर बीमार रहने के कारण वो जल्द ही सोने चले गए। इसलिए पापा के जाने के बाद मैंने अपने भाई को कई सारी बातें समझाती रही, ताकि वो फ्यूचर में अपने कैरियर को अच्छी तरह से सेट कर सके और अपने साथ साथ पापा का भी ध्यान रख सके।

हाँलाकि पैसे ट्रांशफर करने बाली बात मेरे और मेरे भाई के बीच सीक्रेट थी, पापा को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था, क्योंकि मैं जानती थी कि पापा कभी भी मुझसे पैसे लेने के लिए तैयार नहीं होंगे। अपने भाई को कई सारी बातें समझाने के बाद आखिरकार हम दोनों भी सो गए। रात को देर से सोने के कारण अगले दिन मैं काफी देर तक सोती रही और फिर मेरी सुबह की शुरूआत पापा के हाथों से बनी चाय से हुई। तब तक मेरा भाई मार्केट से हम लोगों के लिए नाश्ता भी ले आया था। इसलिए चाय नाश्ता करने के बाद हम लोग नहा धोकर तैयार हुए, जिसके बाद मैं अपने पापा और भाई को अपनी कार से मथुरा वृन्दावन घुमाने ले गई। क्योंकि मैं अपने पापा और भाई के साथ अपनी जिंदगी के आखिरी पलों को यादगार बनाना चाहती थी।

पापा अपने छोटे से परिवार के साथ मथुरा बृन्दावन घूमकर काफी खुश थे। हम लोगों ने वहीं पर एक अच्छे से होटल में लंच भी कर लिया था। सासा दिन घूमने के बाद शाम करीब 5 बजे हम लोग घर बापिस लौट आऐ। जिसके बाद हम लोगों ने कुछ देर रेस्ट किया और फिर शाम के समय अपने पापा और भाई के साथ खाना खाने के बाद। मैंने आखिरी बार अपने पापा और भाई को गले लगाया और फिर मैं दिल्ली बापिस आने के लिए घर से निकल गई। मेरी कार में हाईब्रिड फ्लूल सिस्टम है, जिस कारण वह पैट्रोल और सी.एन.जी. दोनों से चल सकती है। इसलिए मैंने आगरा से बाहर निकलने से पहले ही अपनी कार के सी.एन.जी. टैंक और पैट्रोल टैंक को फुल करवा लिया था, ताकि फुल टैंक होने के कारण एक्सीडेंट के बाद कार पूरी तरह से नष्ट हो जाऐ।

इसके अलावा मैंने दो प्लास्टिक कैन में एक्सट्रा पैट्रोल भी ले लिया था। आगरा से कुछ दूर आगे जाने के बाद मैंने एक सुनसान इलाके में खडी एक ब्लैक कलर की एस.यू.वी. के एकदम पास अपनी कार रोक दी और अपने चेहरे पर मास्क लगाकर कार से बाहर आ गई। असल में उस गाडी में वही बूडा आदमी अपने साथी के साथ बैठा हुआ था। जिससे मेरी लावारिस लडकी की लाश डिलेवर करने की डील हुई थी। मेरे वहाँ पहुँचते ही उन दोनों ने अपनी एस.यू.वी. में से एक 24-25 साल की लडकी की लाश निकालकर मेरी कार की पिछली सीट पर रख दी। उस लडकी की लाश पर ना तो कोई कपडा था और ना ही कोई ज्वैलरी। इसलिए उन लोगों ने उस लाश को एक सफेद रंग की चादर से ढंक रखा था।

असल में मुर्दाघर में आने बाली सभी लावारिस लाशों के कपडे, ज्वैलरी और दूसरे सामान को निकाल लिया जाता है। ताकि फ्यूचर में यदि कोई अपने रिश्तेदारों को तलश करता हुआ वहां आऐ, तो उन लाशों के सामान और कपडों को देखकर वो उनकी पहचान कर सके। जब उन दोनों ने लडकी की लाश को सही तरीके से कार की पिछली सीट पर रख दिया तो मैंने उन्हें डील से हिसाब से बकाया 5 लाख रूपये भी दे दिए। जिन्हें लेकर वो दोनों बिना किसी सबाल जबाब के तुरंत वहाँ से बापिस दिल्ली के लिए निकल गए, जब उन दोनों की एस.यू.वी. मुझसे काफी दूर निकल गई, तो मैं बापिस से अपनी कार की ड्राईबिंग सीट पर बैठ गई और अपनी कार आगे बडा दी।

जब मैं दिल्ली से आगरा आ रही थी तो मैंने अपने एक्सीडेंट के लिए एक परफेक्ट लोकेशन पहले ही सिलेक्ट कर ली थी। जहाँ से दिल्ली करीब 1 घंटे की दूरी पर थी। मैं शाम के समय आगरा से दिल्ली के लिए निकली थी, जिस कारण जब मैं उस लोकेशन पर पहुँची तो अच्छी खासी रात हो गई थी और चारों तरफ अंधेरा भी फैल चुका था। अपनी सिलेक्ट की गई लोकेशन पर पहुँचे के बाद मैंने अपनी कार कच्चे रास्ते पर नीचे उतार दी और हाईवे से कुछ दूर आने के बाद मैंने अपनी कार बंद करके उससे बाहर निकल आई।

कहानी जारी है........
 
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