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- Dec 5, 2013
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Update 062 -
ऑफिस पहूँचकर मैंने सबसे पहले बॉस के पास जाकर अपनी रिपोर्ट सबमिट की और उसके बाद अपनी टीम से मिलने जा पहूँची। काफी दिनों बाद अपनी टीम से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन मैं जानती थी कि अब मैं ज्यादा दिनों तक यहाँ नहीं रहने बाली हूँ। इसलिए मैंने सभी को कैंटीन ले गई और अपने सभी टीम मेम्बर्स को एक छोटी सी ट्रीट दी। असल में अब मैं जितने भी दिन यहाँ रुकने बाली थी। उतने दिन मैं अपनी टीम के साथ इंजॉय करते हुए बिताना चाहती थी। इस दौरान मैंने रचना के साथ भी नॉर्मल तरीके से ही बात की थी और उसे इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं होने दिया था कि मैं उसके और अमन के अफेयर में जब जानती हूँ।
वहीँ दूसरी तरफ पंकज जो पिछली रात मेरे साथ बिता चुका था, वो दूसरों से नजरें चुराकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था, पंकज के ऐसा करने से ना चाहते हुए भी बार बार मेरे चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ रही थी। कैंटीन में बातें करते वक्त ही मैंने अपनी टीम से पिछले एक महिने की सारी रिपोर्ट भी ले ली थी। इसी दौरान बातों ही बातों में मुझे पता चला कि मेरी टीम के लगभग सभी मेम्बर्स को पक्का यकीन है कि इस साल का इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का ऑवार्ड मुझे ही मिलेगा। लेकिन मुझे इससे कोई फर्क पडने बाला नहीं था। क्योंकि मैं जल्द ही अपनी पहचान बदलकर एक नई जिंदगी शुरू करने बाली थी। इसलिए मेरी इस पहचान को अगर यह ऑवार्ड मिल भी जाता है, तो वो मेरे किसी भी काम का नहीं था।
जब मैं भोपाल में थी तो मैंने पहले ही अपनी इस पहचान को हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था और उसके लिए मुझे सबसे पहले इस कम्पनी से रिजाईन देना था। जिस कारण मैंने पहले ही अपना एक रेजिग्नेशन लेटर टाईप कर लिया था और आज मैं उसे अपने साथ ऑफिस में भी लाई थी। सभी लोगों को ट्रीट देने के बाद मैं एक बार फिर बॉस के पास गई और उन्हें अपना रेजिग्नेशन लेटर सौंप दिया। मेरा रेजिग्नेशन लेटर देखकर बॉस काफी ज्यादा हैरान थे। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर मैं अपने कैरियर के पीक पर रिजाईन क्यों दे रही हूँ। इसलिए वो मुझे समझाते हुए बोले
बॉस- निशा यह सब क्या है
मैं पहले से ही बॉस के सबलों के लिए मन ही मन जबाब तैयार कर चुकी थी। इसलिए बॉस का सबल सुनकर मैंने तुरंत उनसे कहा
निशा- सर मेरे कुछ पर्सनल इश्यू हैं। जिस कारण मैं अब यह जॉब कंटीन्यू नहीं कर सकती
बॉस- पर्सनल ईश्यू हैं…. या फिर कहीं और जॉब के लिए एप्लाई किया है। जिस कारण तुम यह रिजाईन दे रही हो। देखो निशा तुम्हारा प्रमोशन होने बाला है और उसके बाद तुम्हें जो सैलरी मिलेगी वो कोई दूसरी कम्पनी तुम्हें नहीं दे पायेगी।
निशा- नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है। मैंने कहीं भी जॉब के लिए एप्लाई नहीं किया है। बस अपने पर्सनल ईश्यू के कारण ही मैं रिजाईन कर रही हूँ।
बॉस- देखो निशा तुम हमारी बेस्ट इम्पलॉय हो और मैंने तुम्हारा नाम इम्पलॉय ऑफ द ईयर के लिए बोर्ड मैंबर के पास भेज दिया है। बोर्ड मेम्बर क्या कहेंगे जब उन्हें पता चलेगा कि जिसे मैं बेस्ट इम्पलॉय बोलता हूँ। वो रिजाईन देकर चली गई।
निशा- लेकिन सर आपको इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं है, मुझे पूरा यकीन है कि इस साल भी इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड हर साल साल की तरह किसी मेल इम्पलॉय को ही मिलेगा और रही बात प्रमोशन की तो आप पहले से ही जानते हैं कि मेरे पास आई.टी. की कोई बडी डिग्री नहीं है। जिस कारण पिछले दो सालों से बोर्ड मेंबर्स ने मेरा प्रमोशन पहले ही रोक कर रखा हुआ है। इसलिए अब मुझे भी इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पडता है….
मेरी बात सुनकर बॉस ने गंभीर होकर कुछ देर सोचा और बोले
बॉस- देखो निशा तुम एक काबिल इम्पलॉय हो… मैं तुम्हें ऐसे जाने नहीं दे सकता…. अच्छा एक बात बताओ अगर तुम्हारा प्रमोशन हो जाऐ और तुम्हें इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का अवार्ड भी मिल जाऐ। तो क्या तब भी तुम रिजाईन करना चाहोगी
निशा- पता नहीं सर…. मैंने इस बारे में अभी कुछ सोचा नहीं है…..
बॉस- तो फिर अवार्ड सेरेमनी तक रुको… अगर तब तक तुम्हारा प्रमोशन नहीं होता है और तुम्हें अवार्ड नहीं मिलता है…. तो बाद में भी तो तुम रिजाईन दे सकती हो ना…
निशा- हाँ दे तो सकती हूँ… लेकिन बाद में रिजाईन देने का मतलब होगा कि अवार्ड ना मिलने के कारण मैं रिजाईन कर रही हूँ और अपने सीनियर्स पर दबाब बनाने की कोशिश कर रही हूँ। इसलिए मैं नहीं चाहती कि मेेरे बाद में रिजाईन देने पर कोई मेरे कैरेक्टर पर सबाल उठाऐ। बैसे भी सर आप मुझे अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं बैसी लडकी नहीं हूँ जो पैसे और फेम के पीछे भागती है… अगर मेरे पास बास्तव में मेरे पर्सनल ईश्यू नहीं होते, तो मैं बिना किसी प्रमोशन और अवार्ड के ऐसे ही यहाँ काम करती रहती। हाँ यह बात सही है कि अगर मुझे प्रमोशन के साथ साथ इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड भी मिल गया, तो उससे मुझे अपने पर्सनल इश्यू को सॉल्ब करने में थोडी बहुत मदद मिल सकती। और हो सकता है कि तब मुझे रिजाईन देने की जरूरत ही ना पडे। लेकिन मैं यह रिस्क लेकर अपने कैरेक्टर को सबके नजरों में गिरनाना नहीं चाहती। इसलिए मैं पहले ही रिजाईन दे रही हूँ।
मेरी बात सुनकर बॉस ने कुछ देर तक मेरी कही बातों के बारे में सोचा और फिर गंभीर होते हुए बोले
बॉस- ठीक है निशा मैं तुम्हारा यह रैजिग्नेशन एक्सेप्ट कर रहा हूँ।
इतना बोलकर बॉस ने मेरे रैजिग्नेशन को अप्रूव करके उसपर अपने साईन कर दिए और आज की डेट मेंशन करने के बाद स्टाम्प भी लगा दिया। इसके बाद बॉस ने मेरे रैजिग्नेशन लैटर को एक अलग फाईल में संभालकर रखते हुए कहा
बॉस- देखो निशा मैं तुम्हारी प्राब्लम समझ सकता हूँ। इसीलिए मैंने तुम्हारा रैजिग्नेशन आज की डेट में अप्रूब किया है। लेकिन यह बात केवल हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए। फिलहाल मैं तुम्हारा रैजिग्नेशन अपने पास संभाल कर रख रहा हूँ और तुम कम्पनी की पॉलिसी के हिसाब से अपने एक महिने का नोटिस पीरियड पूरा करने के लिए रैगुलर ऑफिस आती रहोगी। असल में मैं अपनी तरफ से एक आखिरी कोशिश करना चाहता हूँ। अगर मैं तुम्हें प्रमोशन और इम्पलॉय ऑफ द ईयर का आवार्ड दिलाने में कामयाब रहा, तो हम दोनों ही यह रैजिग्नेशन बाली बात भूल जाऐंगे और तुम खुद अपने हाथों से यह रैजिग्नेशन फाडकर फेंक दोगी। लेकिन अगर मैं ऐसा कुछ नहीं कर पाया, तो मैं तुम्हारा रैजिग्नेसन अपने सीनियर्स के पास भेज दूँगा और सभी लोगों को तुम्हारे अवार्ड सेरेमनी से पहले ही रिजाईन करने बाली बात बता दूँगा। ताकि कोई भी तुम्हारे कैरेक्टर पर उंगली ना उठा सके।
बॉस की बात सुनकर मैंने कुछ पलों तक इस बारे में सोचा, असल में मुझे अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडने बाला था कि मुझे प्रमोशन या अवार्ड मिल रहा है या नहीं। मैं तो बस किसी भी तरह से बॉस को अपना रैजिग्नेशन देकर यहाँ से जाना चाहती थी। ताकि मैं अपने आगे के प्लान पर काम कर सकूँ। साथ ही साथ मेरा अब इस मैटर पर कोई भी बात करने या सफाई देने का कोई इरादा नहीं था। इसलिए मैंने बॉस का दिल रखने के लिए उनसे कहा
निशा- ठीक है सर… मुझे आपकी बात मंजूर है….
इतना बोलकर मैं बॉस के केबिन से बाहर निकल गई और अपनी टीम के साथ पेंडिंग कामों को पूरा करने में लग गई। ऑफिस का सारा काम खत्म होने के बाद मैं शाम करीब 5 बजे अपने घर के लिए निकल गई। ताकि मैं घर पर कुछ देर रेस्ट कर सकूँ। क्योंकि मेरा प्लान आज रात फिर से उसी पव में जाकर पंकज के साथ इंजॉय करने का था। घऱ पर आकर मैं रात करीब 8 बजे तक सोती रही। जब मेरी आँख खुली तो मैं फटाफट तैयार होकर पव जाने के लिए निकल गई। आज मैं अपने साथ अमन की कार नहीं ले गई थी। क्योंकि आज पंकज अपनी कार से खुद मुझे लेने आया था, जो मेरी कॉलोनी से बाहर खडा होकर मेरा इंतजार कर रहा था।
कार के अंदर बैठते ही मैंने अपनी सरवार कुर्ती निकाल कर एक पॉलीथीन बैग के अंदर रख दी। मैंने सलवार कुर्ती के अंदर एक ब्लू कलर का शॉर्ट जींस और ब्लैक कलर का ऑफ सोल्डर टॉप पहना हुआ था। जिसमें मेरी क्लीवेज साफ साफ दिखाई दे रही थी। मुझे इन कपडों में देखकर पंकज के चेहरे पर चमक आ गई थी। पर मैंने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया और कार के बैक व्यू मिरर में देखते हुए अपने बालों को ठीक करने लगी। तब तक पंकज कार आगे बडा चुका था। जब हम पव पहुँचे तो उस समय रात के करीब 9 बज चुके थे। लेकिन इससे पहले हम पव के अंदर जाते, अचानक से पंकज के मोबाईल पर उसके पैरेंट्स की कॉल आ गई।
इसलिए पंकज उनसे बात करने के लिए पव के बाहर ही रुक गया। जबकि मैं अकेले ही पव के अंदर जा पहुँची। पव के अंदर पहुंचकर मैंने अपने लिए एक बियर ली और बैठने के लिए खाली चेयर देखने लगी। ठीक तभी मेरी नजर पव के अंधेरे कार्नर में बैठे एक कपल पर पडी। लेकिन मैं उस अँधेरे कार्नर में भी उन दोनों को आसानी से पहचान सकती थी। वो दोनों कोई और नहीं बल्कि मेरा पति अमन और मेरी जूनियर रचना थे। उन दोनों को उस पव में देखकर मेरा खून गुस्से से खौलने लगा था।
क्योंकि रचना जो मेरी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी, वो आज ऑफिस में बार बार मुझसे अमन और मेरे पर्सनल मैटर के बारें में बात करने की कोशिश करती रही थी और बार अमन को जीजू जीजू बोलकर मुझसे जानने की कोशिश करती रही कि अमन लंदन से कब बापिस आ रहा है। हाँलाकि कल रात ही पंकज ने रचना और अमन के खिलाफ मुझे सबूत दिखाऐ थे। पर मुझे पंकज की इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था कि अमन यहीं दिल्ली में रचना के साथ रह रहा है। इसलिए आज शाम को घऱ पहुँचकर मैंने ना चाहत हुए भी अमन को कॉल किया था।
उस वक्त अमन ने मुझसे लंदन में होने की बात कही थी और वहाँ पर रात के 1 बजने की बोलकर मुझसे झगडा भी किया था। उस वक्त एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा था कि हो सकता है पंकज को कोई गलत फहमी हुई हो या मुझे पाने के लिए पंकज ने अमन और रचना की कैजुअल मुलाकात पर खीचें गए पुराने फोटो मुझे दिखाकर, मेरे और अमन के बीच गलत फहमी पैदा करने की कोशिश की हो। हाँलाकि पंकज ने अगर ऐसा किया भी होता, तो भी मुझपर कोई फर्क नहीं पडने बाला था। क्योंकि मैं अमन से डॉयवोर्स लेकर नई जिंदगी शुरू करने का पूरा प्लान पहले ही तैयार कर चुकी थी।
पर अब जब मैं अमन और रचना को अपने सामने एक साथ देख रही थी तो मुझे उनके झूठ बोलने और मेरे सामने नाटक करने को लेकर बहुत गुस्सा आ रहा था। उन दोनों को वहाँ देखकर अब मैं उस पव में एक पल भी नहीं रुकना चाहती थी। क्योंकि अब वहाँ पर मेरे और पंकज के एक साथ पकडे जाने का भी डर था। पर अगले ही पल मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना कुछ देर उनके आस पास रहकर उनकी बातें सुनूँ। ताकि मुझे भी तो पता चले कि आखिर उन दोनों के बीच चल क्या रहा है। इस बारे में सोचते ही मैं उस अंधेरे कार्नर का फायदा उठाते हुए और अपने खुले बालों की मदद से अपने चेहरे को ढंक कर, उन दोनों के एकदम पास बाली चेयर पर जाकर बैठ गई।
मैं उन दोनों की तरफ अपनी पीठ करके बैठी हुई थी ताकि वो दोनों मेरा चेहरा ना देख पाऐं। हम लोग इस वक्त जिस जगह बैठे हुए थे, वहाँ ज्यादा लोग नहीं और म्यूजिक की आवज भी वहाँ ज्यादा नहीं आ रही थी। जिस कारण मुझे उन दोनों की आवाजें साफ साफ सुनाई दे रही थीं। मैंने सबसे पहले अपने मोबालईल से पंकज को एक मैसेज टाईप करके सेंड कर दिया। जिसमें मैंने उसे रचना और अमन के पव के अंदर होेने की बात बता दी थी और उसे बाहर अपनी कार में ही मेरा इंतजार करने के लिए बोल दिया था। मैंने अभी पंकज को मैसेज सेंड ही किया था कि तभी मुझे रचना की आवाज सुनाई दी
रचना- अमन यार पता नहीं तुम्हें कभी कभी क्या हो जाता है। तुम्हें पता है ना कि कल निशा बापिस आ गई है। तो फिर यहाँ पव में आने की क्या जरूरत थी। अगर हमें इस तरह किसी ने साथ में देख लिया तो बहुत प्राब्लम हो जाऐगी।
रचना की बात सुनकर अमन गुस्से से चिढते हुए बोला
अमन- तो क्या अब मैं उसके डर के कारण कहीं बाहर निकलना भी बंद कर दूँ।
रचना- ओफ्हो अमन तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रहे हो, अभी तुम उसकी नजरों में लंदन में हो
अमन- वही तो मैं भी बोल रहा हूँ। जब वो जानती है कि मैं इस वक्त लंदन में हूँ। तो फिर उसे क्या सपना आऐगा कि हम दोनों यहाँ पव में इंजॉय कर रहे हैं।
रचना- पता नहीं अमन…. लेकिन मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है।
अमन- ओफ्हो रचना तुम बेकार में ही परेशान हो रही हो। निशा इस एरिया में कभी नहीं आती है। वो केवल अपने काम से मतलब रखती है और किसी पव बगैरह में जाकर इंजॉय करना उसकी आदत नहीं है।
रचना- जो भी हो पर आज निशा ऑफिस में काफी खुश दिखाई दे रही थी। लगता है उसका इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का ऑवर्ड पक्का हो गया है और उसका प्रमोशन भी होने बाला है।
रचना की बात सुनकर अमन एक बार फिर चिढते हुए बोला
अमन- जो भी हो… पर इस अवार्ड और प्रमोशन के बाद भी मैं उसे कभी खुश नहीं रहने दूँगा।
अमन के कहे गए शब्द सुनकर मैं बुरी तरह से हैरान रह गई थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मेरे और अमन के बीच ऐसा क्या हुआ है। जिससे बो मेरे बारे में यह सब कह रहा है। आखिर वो मुझे खुश क्यों नहीं देखना चाहता।
कहानी जारी है .....
ऑफिस पहूँचकर मैंने सबसे पहले बॉस के पास जाकर अपनी रिपोर्ट सबमिट की और उसके बाद अपनी टीम से मिलने जा पहूँची। काफी दिनों बाद अपनी टीम से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन मैं जानती थी कि अब मैं ज्यादा दिनों तक यहाँ नहीं रहने बाली हूँ। इसलिए मैंने सभी को कैंटीन ले गई और अपने सभी टीम मेम्बर्स को एक छोटी सी ट्रीट दी। असल में अब मैं जितने भी दिन यहाँ रुकने बाली थी। उतने दिन मैं अपनी टीम के साथ इंजॉय करते हुए बिताना चाहती थी। इस दौरान मैंने रचना के साथ भी नॉर्मल तरीके से ही बात की थी और उसे इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं होने दिया था कि मैं उसके और अमन के अफेयर में जब जानती हूँ।
वहीँ दूसरी तरफ पंकज जो पिछली रात मेरे साथ बिता चुका था, वो दूसरों से नजरें चुराकर बार बार मुझे ही देखे जा रहा था, पंकज के ऐसा करने से ना चाहते हुए भी बार बार मेरे चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ रही थी। कैंटीन में बातें करते वक्त ही मैंने अपनी टीम से पिछले एक महिने की सारी रिपोर्ट भी ले ली थी। इसी दौरान बातों ही बातों में मुझे पता चला कि मेरी टीम के लगभग सभी मेम्बर्स को पक्का यकीन है कि इस साल का इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का ऑवार्ड मुझे ही मिलेगा। लेकिन मुझे इससे कोई फर्क पडने बाला नहीं था। क्योंकि मैं जल्द ही अपनी पहचान बदलकर एक नई जिंदगी शुरू करने बाली थी। इसलिए मेरी इस पहचान को अगर यह ऑवार्ड मिल भी जाता है, तो वो मेरे किसी भी काम का नहीं था।
जब मैं भोपाल में थी तो मैंने पहले ही अपनी इस पहचान को हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था और उसके लिए मुझे सबसे पहले इस कम्पनी से रिजाईन देना था। जिस कारण मैंने पहले ही अपना एक रेजिग्नेशन लेटर टाईप कर लिया था और आज मैं उसे अपने साथ ऑफिस में भी लाई थी। सभी लोगों को ट्रीट देने के बाद मैं एक बार फिर बॉस के पास गई और उन्हें अपना रेजिग्नेशन लेटर सौंप दिया। मेरा रेजिग्नेशन लेटर देखकर बॉस काफी ज्यादा हैरान थे। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर मैं अपने कैरियर के पीक पर रिजाईन क्यों दे रही हूँ। इसलिए वो मुझे समझाते हुए बोले
बॉस- निशा यह सब क्या है
मैं पहले से ही बॉस के सबलों के लिए मन ही मन जबाब तैयार कर चुकी थी। इसलिए बॉस का सबल सुनकर मैंने तुरंत उनसे कहा
निशा- सर मेरे कुछ पर्सनल इश्यू हैं। जिस कारण मैं अब यह जॉब कंटीन्यू नहीं कर सकती
बॉस- पर्सनल ईश्यू हैं…. या फिर कहीं और जॉब के लिए एप्लाई किया है। जिस कारण तुम यह रिजाईन दे रही हो। देखो निशा तुम्हारा प्रमोशन होने बाला है और उसके बाद तुम्हें जो सैलरी मिलेगी वो कोई दूसरी कम्पनी तुम्हें नहीं दे पायेगी।
निशा- नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है। मैंने कहीं भी जॉब के लिए एप्लाई नहीं किया है। बस अपने पर्सनल ईश्यू के कारण ही मैं रिजाईन कर रही हूँ।
बॉस- देखो निशा तुम हमारी बेस्ट इम्पलॉय हो और मैंने तुम्हारा नाम इम्पलॉय ऑफ द ईयर के लिए बोर्ड मैंबर के पास भेज दिया है। बोर्ड मेम्बर क्या कहेंगे जब उन्हें पता चलेगा कि जिसे मैं बेस्ट इम्पलॉय बोलता हूँ। वो रिजाईन देकर चली गई।
निशा- लेकिन सर आपको इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं है, मुझे पूरा यकीन है कि इस साल भी इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड हर साल साल की तरह किसी मेल इम्पलॉय को ही मिलेगा और रही बात प्रमोशन की तो आप पहले से ही जानते हैं कि मेरे पास आई.टी. की कोई बडी डिग्री नहीं है। जिस कारण पिछले दो सालों से बोर्ड मेंबर्स ने मेरा प्रमोशन पहले ही रोक कर रखा हुआ है। इसलिए अब मुझे भी इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पडता है….
मेरी बात सुनकर बॉस ने गंभीर होकर कुछ देर सोचा और बोले
बॉस- देखो निशा तुम एक काबिल इम्पलॉय हो… मैं तुम्हें ऐसे जाने नहीं दे सकता…. अच्छा एक बात बताओ अगर तुम्हारा प्रमोशन हो जाऐ और तुम्हें इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का अवार्ड भी मिल जाऐ। तो क्या तब भी तुम रिजाईन करना चाहोगी
निशा- पता नहीं सर…. मैंने इस बारे में अभी कुछ सोचा नहीं है…..
बॉस- तो फिर अवार्ड सेरेमनी तक रुको… अगर तब तक तुम्हारा प्रमोशन नहीं होता है और तुम्हें अवार्ड नहीं मिलता है…. तो बाद में भी तो तुम रिजाईन दे सकती हो ना…
निशा- हाँ दे तो सकती हूँ… लेकिन बाद में रिजाईन देने का मतलब होगा कि अवार्ड ना मिलने के कारण मैं रिजाईन कर रही हूँ और अपने सीनियर्स पर दबाब बनाने की कोशिश कर रही हूँ। इसलिए मैं नहीं चाहती कि मेेरे बाद में रिजाईन देने पर कोई मेरे कैरेक्टर पर सबाल उठाऐ। बैसे भी सर आप मुझे अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं बैसी लडकी नहीं हूँ जो पैसे और फेम के पीछे भागती है… अगर मेरे पास बास्तव में मेरे पर्सनल ईश्यू नहीं होते, तो मैं बिना किसी प्रमोशन और अवार्ड के ऐसे ही यहाँ काम करती रहती। हाँ यह बात सही है कि अगर मुझे प्रमोशन के साथ साथ इम्पलॉय ऑफ द ईयर का अवार्ड भी मिल गया, तो उससे मुझे अपने पर्सनल इश्यू को सॉल्ब करने में थोडी बहुत मदद मिल सकती। और हो सकता है कि तब मुझे रिजाईन देने की जरूरत ही ना पडे। लेकिन मैं यह रिस्क लेकर अपने कैरेक्टर को सबके नजरों में गिरनाना नहीं चाहती। इसलिए मैं पहले ही रिजाईन दे रही हूँ।
मेरी बात सुनकर बॉस ने कुछ देर तक मेरी कही बातों के बारे में सोचा और फिर गंभीर होते हुए बोले
बॉस- ठीक है निशा मैं तुम्हारा यह रैजिग्नेशन एक्सेप्ट कर रहा हूँ।
इतना बोलकर बॉस ने मेरे रैजिग्नेशन को अप्रूव करके उसपर अपने साईन कर दिए और आज की डेट मेंशन करने के बाद स्टाम्प भी लगा दिया। इसके बाद बॉस ने मेरे रैजिग्नेशन लैटर को एक अलग फाईल में संभालकर रखते हुए कहा
बॉस- देखो निशा मैं तुम्हारी प्राब्लम समझ सकता हूँ। इसीलिए मैंने तुम्हारा रैजिग्नेशन आज की डेट में अप्रूब किया है। लेकिन यह बात केवल हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए। फिलहाल मैं तुम्हारा रैजिग्नेशन अपने पास संभाल कर रख रहा हूँ और तुम कम्पनी की पॉलिसी के हिसाब से अपने एक महिने का नोटिस पीरियड पूरा करने के लिए रैगुलर ऑफिस आती रहोगी। असल में मैं अपनी तरफ से एक आखिरी कोशिश करना चाहता हूँ। अगर मैं तुम्हें प्रमोशन और इम्पलॉय ऑफ द ईयर का आवार्ड दिलाने में कामयाब रहा, तो हम दोनों ही यह रैजिग्नेशन बाली बात भूल जाऐंगे और तुम खुद अपने हाथों से यह रैजिग्नेशन फाडकर फेंक दोगी। लेकिन अगर मैं ऐसा कुछ नहीं कर पाया, तो मैं तुम्हारा रैजिग्नेसन अपने सीनियर्स के पास भेज दूँगा और सभी लोगों को तुम्हारे अवार्ड सेरेमनी से पहले ही रिजाईन करने बाली बात बता दूँगा। ताकि कोई भी तुम्हारे कैरेक्टर पर उंगली ना उठा सके।
बॉस की बात सुनकर मैंने कुछ पलों तक इस बारे में सोचा, असल में मुझे अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडने बाला था कि मुझे प्रमोशन या अवार्ड मिल रहा है या नहीं। मैं तो बस किसी भी तरह से बॉस को अपना रैजिग्नेशन देकर यहाँ से जाना चाहती थी। ताकि मैं अपने आगे के प्लान पर काम कर सकूँ। साथ ही साथ मेरा अब इस मैटर पर कोई भी बात करने या सफाई देने का कोई इरादा नहीं था। इसलिए मैंने बॉस का दिल रखने के लिए उनसे कहा
निशा- ठीक है सर… मुझे आपकी बात मंजूर है….
इतना बोलकर मैं बॉस के केबिन से बाहर निकल गई और अपनी टीम के साथ पेंडिंग कामों को पूरा करने में लग गई। ऑफिस का सारा काम खत्म होने के बाद मैं शाम करीब 5 बजे अपने घर के लिए निकल गई। ताकि मैं घर पर कुछ देर रेस्ट कर सकूँ। क्योंकि मेरा प्लान आज रात फिर से उसी पव में जाकर पंकज के साथ इंजॉय करने का था। घऱ पर आकर मैं रात करीब 8 बजे तक सोती रही। जब मेरी आँख खुली तो मैं फटाफट तैयार होकर पव जाने के लिए निकल गई। आज मैं अपने साथ अमन की कार नहीं ले गई थी। क्योंकि आज पंकज अपनी कार से खुद मुझे लेने आया था, जो मेरी कॉलोनी से बाहर खडा होकर मेरा इंतजार कर रहा था।
कार के अंदर बैठते ही मैंने अपनी सरवार कुर्ती निकाल कर एक पॉलीथीन बैग के अंदर रख दी। मैंने सलवार कुर्ती के अंदर एक ब्लू कलर का शॉर्ट जींस और ब्लैक कलर का ऑफ सोल्डर टॉप पहना हुआ था। जिसमें मेरी क्लीवेज साफ साफ दिखाई दे रही थी। मुझे इन कपडों में देखकर पंकज के चेहरे पर चमक आ गई थी। पर मैंने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया और कार के बैक व्यू मिरर में देखते हुए अपने बालों को ठीक करने लगी। तब तक पंकज कार आगे बडा चुका था। जब हम पव पहुँचे तो उस समय रात के करीब 9 बज चुके थे। लेकिन इससे पहले हम पव के अंदर जाते, अचानक से पंकज के मोबाईल पर उसके पैरेंट्स की कॉल आ गई।
इसलिए पंकज उनसे बात करने के लिए पव के बाहर ही रुक गया। जबकि मैं अकेले ही पव के अंदर जा पहुँची। पव के अंदर पहुंचकर मैंने अपने लिए एक बियर ली और बैठने के लिए खाली चेयर देखने लगी। ठीक तभी मेरी नजर पव के अंधेरे कार्नर में बैठे एक कपल पर पडी। लेकिन मैं उस अँधेरे कार्नर में भी उन दोनों को आसानी से पहचान सकती थी। वो दोनों कोई और नहीं बल्कि मेरा पति अमन और मेरी जूनियर रचना थे। उन दोनों को उस पव में देखकर मेरा खून गुस्से से खौलने लगा था।
क्योंकि रचना जो मेरी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी, वो आज ऑफिस में बार बार मुझसे अमन और मेरे पर्सनल मैटर के बारें में बात करने की कोशिश करती रही थी और बार अमन को जीजू जीजू बोलकर मुझसे जानने की कोशिश करती रही कि अमन लंदन से कब बापिस आ रहा है। हाँलाकि कल रात ही पंकज ने रचना और अमन के खिलाफ मुझे सबूत दिखाऐ थे। पर मुझे पंकज की इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था कि अमन यहीं दिल्ली में रचना के साथ रह रहा है। इसलिए आज शाम को घऱ पहुँचकर मैंने ना चाहत हुए भी अमन को कॉल किया था।
उस वक्त अमन ने मुझसे लंदन में होने की बात कही थी और वहाँ पर रात के 1 बजने की बोलकर मुझसे झगडा भी किया था। उस वक्त एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा था कि हो सकता है पंकज को कोई गलत फहमी हुई हो या मुझे पाने के लिए पंकज ने अमन और रचना की कैजुअल मुलाकात पर खीचें गए पुराने फोटो मुझे दिखाकर, मेरे और अमन के बीच गलत फहमी पैदा करने की कोशिश की हो। हाँलाकि पंकज ने अगर ऐसा किया भी होता, तो भी मुझपर कोई फर्क नहीं पडने बाला था। क्योंकि मैं अमन से डॉयवोर्स लेकर नई जिंदगी शुरू करने का पूरा प्लान पहले ही तैयार कर चुकी थी।
पर अब जब मैं अमन और रचना को अपने सामने एक साथ देख रही थी तो मुझे उनके झूठ बोलने और मेरे सामने नाटक करने को लेकर बहुत गुस्सा आ रहा था। उन दोनों को वहाँ देखकर अब मैं उस पव में एक पल भी नहीं रुकना चाहती थी। क्योंकि अब वहाँ पर मेरे और पंकज के एक साथ पकडे जाने का भी डर था। पर अगले ही पल मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना कुछ देर उनके आस पास रहकर उनकी बातें सुनूँ। ताकि मुझे भी तो पता चले कि आखिर उन दोनों के बीच चल क्या रहा है। इस बारे में सोचते ही मैं उस अंधेरे कार्नर का फायदा उठाते हुए और अपने खुले बालों की मदद से अपने चेहरे को ढंक कर, उन दोनों के एकदम पास बाली चेयर पर जाकर बैठ गई।
मैं उन दोनों की तरफ अपनी पीठ करके बैठी हुई थी ताकि वो दोनों मेरा चेहरा ना देख पाऐं। हम लोग इस वक्त जिस जगह बैठे हुए थे, वहाँ ज्यादा लोग नहीं और म्यूजिक की आवज भी वहाँ ज्यादा नहीं आ रही थी। जिस कारण मुझे उन दोनों की आवाजें साफ साफ सुनाई दे रही थीं। मैंने सबसे पहले अपने मोबालईल से पंकज को एक मैसेज टाईप करके सेंड कर दिया। जिसमें मैंने उसे रचना और अमन के पव के अंदर होेने की बात बता दी थी और उसे बाहर अपनी कार में ही मेरा इंतजार करने के लिए बोल दिया था। मैंने अभी पंकज को मैसेज सेंड ही किया था कि तभी मुझे रचना की आवाज सुनाई दी
रचना- अमन यार पता नहीं तुम्हें कभी कभी क्या हो जाता है। तुम्हें पता है ना कि कल निशा बापिस आ गई है। तो फिर यहाँ पव में आने की क्या जरूरत थी। अगर हमें इस तरह किसी ने साथ में देख लिया तो बहुत प्राब्लम हो जाऐगी।
रचना की बात सुनकर अमन गुस्से से चिढते हुए बोला
अमन- तो क्या अब मैं उसके डर के कारण कहीं बाहर निकलना भी बंद कर दूँ।
रचना- ओफ्हो अमन तुम मेरी बात समझ क्यों नहीं रहे हो, अभी तुम उसकी नजरों में लंदन में हो
अमन- वही तो मैं भी बोल रहा हूँ। जब वो जानती है कि मैं इस वक्त लंदन में हूँ। तो फिर उसे क्या सपना आऐगा कि हम दोनों यहाँ पव में इंजॉय कर रहे हैं।
रचना- पता नहीं अमन…. लेकिन मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है।
अमन- ओफ्हो रचना तुम बेकार में ही परेशान हो रही हो। निशा इस एरिया में कभी नहीं आती है। वो केवल अपने काम से मतलब रखती है और किसी पव बगैरह में जाकर इंजॉय करना उसकी आदत नहीं है।
रचना- जो भी हो पर आज निशा ऑफिस में काफी खुश दिखाई दे रही थी। लगता है उसका इम्पलॉय ऑफ दा ईयर का ऑवर्ड पक्का हो गया है और उसका प्रमोशन भी होने बाला है।
रचना की बात सुनकर अमन एक बार फिर चिढते हुए बोला
अमन- जो भी हो… पर इस अवार्ड और प्रमोशन के बाद भी मैं उसे कभी खुश नहीं रहने दूँगा।
अमन के कहे गए शब्द सुनकर मैं बुरी तरह से हैरान रह गई थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मेरे और अमन के बीच ऐसा क्या हुआ है। जिससे बो मेरे बारे में यह सब कह रहा है। आखिर वो मुझे खुश क्यों नहीं देखना चाहता।
कहानी जारी है .....