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Update 042 -
अपना सारा जरूरी सामान अपने हैण्डमेड कामचलाऊ बैग में रखने के बाद मैं उस कमरे में लगे मेरे खून के धब्बों को अपने फटे हुए कपडों से अच्छी तरह से घिस घिस कर मिटाने की कोशिश करने लगी। लेकिन मेरा वह खून अब पूरी तरह से सूख चुका था। जिस कारण जब वो कपडे से साफ नहीं हुआ तो मैंने एक पत्थर के टुकडे को फर्स पर अच्छी तरह से घिसकर अपने खून के सारे धब्बों को पूरी तरह से मिटा दिया। उस कमरे से खून के सारे निशान मिटाने के बाद मैंने बाहर आँगन को भी एक बार फिर अच्छी तरह से चैक किया। लेकिन बारिस के कारण आंगन में गिरा मेरा लगभग सारा खून धूल चुका था।
बस अमर शिला के पास जहाँ मेरे सीने में वो लोहे की रॉड घोंपी गई थी, वहाँ पर मेरा कुछ खून अब रह गया था, साथ ही साथ उस रॉड पर भी मेरा खून लगा हुआ था। इसलिए मैंने अपने जरूरत का सामन छोडकर, बाकी सारा समान जिसमें मेरे कटे-फटे कपडे, प्लास्टिक की खाली बॉटल, मेरा टूटा हुआ मोबाईल आदि सामिल थे, उन सबको मैंने उस जगह पर रख दिया जहाँ मेरा खून अब भी लगा हुआ था, इसके बाद मैंने उस सामान में लाईटर से आग लगा दी। साथ ही साथ लोहे की रॉड को भी उस आग में डाल दिया, ताकि जमीन के साथ साथ उस रॉड पर लगा मेरा खून जल जाऐ और मेरे वहाँ आने के सारे सबूत पूरी तरह से नष्ट हो जाऐं।
ये सारा काम खत्म करके में सीक्रेट रूम के अंदर बापिस चली गई। जैसे ही मैने सीक्रेट रूम का दरवाजा बंद किया तो मेरे गले में डला मोती एकबार फिर ग्लो करने लगा। जिस कारण उस रूम में हरे रंग की रोशनी फैल गई। जिसमें मुझे सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था। अब उस खण्डहर में मेरा कोई भी निशान बाकी नहीं रह गया था। इसलिए मैंने अपने पास रखे सामान को एक बार फिर से अच्छी तरह से देखा। मेरे पास इस वक्त एक काम चलाऊ हैंडबैग के अलावा एक चाकू, एक लाईटर, कुछ पैसे और मेरे सिम कार्ड एवं मैमोर कार्ड सामिल थे। वो सारा सामान अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैंने उन्हें अपने काम चलाऊ हैण्डबैग में संभालकर रख दिया।
जिसके बाद मैं वहीं फर्स पर लेटकर आराम करने लगी। कुछ ही देर बाद ही मैं गहरी नींद में चली गई। मुझे नहीं पता कि मैं कब तक यूँ ही सोती रही, पर जब मेरी आँख खुली तो उस कमरे में एकदम अंधेरा था। यानि मेरे गले में डला मोती फिलहाल ग्लो नहीं कर रहा था। जिसे देखकर मैं पहले तो हैरान हुई पर फिर मैने उसे इग्नोर कर दिया। क्योंकि उस मोती का अचानक ग्लो करना मेरी समझ से बाहर था। इसलिए मैंने सीक्रट रूम का दरवाजा थोडा खोलकर बाहर बाले कमरे में झाँका, तो बाहर भी एकदम अंधेरा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि रात हो चुकी है और अब मेरा यहाँ से निकलने का समय भी हो गया है।
चूंकि अब मैं पहले से काफी अच्छा महसूस कर रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे कभी कुछ हुआ ही नहीं था। बस भूख और प्यास जरूर मुझे काफी परेशान कर कर रही थी। लेकिन उसका फिलहाल मेरे पास कोई उपया नहीं था। हाँलाकि मैंने सुबह गांव बालों द्वारा प्रसाद के रूप में चढाऐ गए थोडे से फलों को जरूर खाया था, साथ ही साथ उनके द्वारा छोडा गया पानी भी पिया था। लेकिन वो मेरा पेट भरने और प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं था, लेकिन उनसे मुझे थोडी बहुत एनर्जी जरूर मिली थी। मेरे सीने पर रॉड धंसने से जो घाव हुआ था, उसका दर्द अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था।
इसलिए जब मैंने अपने सीने पर बंधी पट्टी को खोलकर लाईटर की रोशनी अपने घाव को अच्छी तरह से चैक किया, तो मुझे पता चला कि मेरा वह घाव अब पूरी तरह से ठीक हो चुका है और मेरे सिर के बाल भी अब मेरे कंधों तक लम्बे यानि पहले जितने बडे हो गए हैं। जिसे देखकर मैं बहुत ज्यादा हैरान थी, साथ ही साथ खुश भी थी। लेकिन फिलहाल मेरे पास ना तो इस सबके बारे में सोचने का समय था और ना ही इन सबका मेरे पास कोई जबाब था। इसलिए मैंने वहाँ रखा अपना काम चालऊ हैण्डबैग अपने कंडे पर डाला और उस सीक्रेट रूम से बाहर निकल गई।
इसके बाद मैंने उस सीक्रेट रूम का दरवाजा अच्छी तरह से बंद कर दिया और लाईटर की रोशनी में उस कमरे से बाहर निकल आई। फिर मैं आंगन में आकर उस जगह को चैक करने लगी, जहाँ मैंने अपने कपडे और बाकी सामान में आग लगाई थी। जो अब जलकर पूरी तरह से राख हो चुका था। मेरे सीने पर बंधी पट्टी अब भी मेरे हाथ में थी। जिसे मैंने उसी राख के ढेर पर डालकर उसमें भी आग लगा दी। ताकि मेरे वहाँ होने और जिंदा बचने का आखिरी सबूत भी नष्ट हो जाऐ। चूँकि चांदनी रात थी, जिस कारण बाहर पर्याप्त रोशनी हो रही थी। इसलिए मैंने अपना लाईटर बंद करके अपने काम चलाऊ बैग में डाल लिया और उस खण्डहर से बाहर निकल गई।
मुझे उस जंगल में चलते चलते काफी देर हो गई थी। लेकिन मैं हाईवे के आस पास भी नहीं पहूँची थी और ना ही मुझे दूर दूर तक वो तालाब दिखाई दे रहा था। जिसे मैंने सुबह खण्डहर के बाहर खडे होकर देखा था। शायद रात के अंधेरे में मैं रास्ता भटक गई थी। चाँदनी रात होने के बाबजूद जंगल में ख़डे पेडों के कारण पर्याप्त रोशनी अंदर तक नहीं आ रही थी। लेकिन मैं अब उस माहौल की आदी हो गई थी। बैसे भी चलते वक्त बीच बीच में मेरे गले में डला मोती अपने आप ही ग्लो करने लगता था। जिस कारण मुझे अपने आस पास के माहौल का अंदाजा हो रहा था। लेकिन फिलहाल मेरे पास समय देखने का कोई उपाय नहीं था।
जंगल से जानवरों की अजीब अजीब आबाजें आ रहीं थी और कहीं कहीं मुझे जानबरों की चमकती हुई आँखे भी दिखाई दे रहीं थी। पर पता नहीं क्यों मुझे फिलहाल उनसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा था। बैसे भी जो इंशान मौत को इतने नजदीक से देख चुका हो, उसके अंदर से डर अपने आप ही निकल जाता है। लेकिन शर्दियों का मौसम चल रहा था और मैं इस वक्त पूरी तरह से नंगी थी। जिस कारण मुझे अब ठण्ड भी लग रह थी। थोडा और चलने के बाद मुझे दूर कहीं लाईट टिमटमाटी हुई दिखाई दी। इसलिए मैंने तुरंत अपनी रफ्तार बड़ा दी। जब मैं उस लाईट के पास पहूंची तो मैंने देखा की मैं इस वक्त फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस के पास थी।
जहाँ पास में ही कुछ लोगों के रहने के लिए क्वाटर भी बने हुए थे। वो पूरा ऐरिया तार फेंसिंग से घिरा हुआ था। जो शायद जंगली जानबरों को अंदर आने से रोकने के लिए था। लेकिन एक जगह पर दो तारों के बीच इतनी जगह थी। जिसमें से मैं आसानी से अंदर जा सकूँ। इसलिए मैं तुरंत उसमें से अंदर चली गई और छिपकर आस पास देखने लगी। हाँलाकि ऑफिस तो इस वक्त पूरी तरह से बंद था। पर क्वाटर से कुछ लोगों की आवाजें आ रहीं थी। इसलिए मैं वहाँ खडी झाडियों का सहारा लेकर उस तरफ आगे बड गई। अभी मैं कुछ दूर ही गई थी कि तभी अचानक से मेरे सामने जर्मन सेफर्ड नश्ल के दो बडे बडे कुत्ते आकर खडे हो गए, जो मुझे देखकर गुर्रा रहे थे।
इससे पहले वो मुझे काटते या भौंककर शोर मचाते, अचानक से मेरे गले में डला मोती दो-तीन बार ब्लिंक हुआ, जिसे देखकर वो दोनों कुत्ते चुपचाप वहाँ से चले गए। यह देखकर मैं हैरान होने के साथ साथ खुश भी थी। लेकिन अभी इस बारे में सोचने का मेरे पास समय नहीं था। इसलिए मैं बिना देर किए झाडियों के सहारे आगे बड गई, उन क्वाटर्स के पास पहूंच कर, मैं कुछ सोचती या करती, उससे पहले ही मुझे अपने पास बाले क्वाटर से एक लड़की की कामुक आवाजें सुनाई देने लगी। जिसे सुनकर मैं समझ गई कि उस क्वाटर में जरूर चुदाई चल रही है। पर मैंने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और एक एक करके वहाँ के सभी क्वाटर को चैक करने लगी।
किस्मत से मुझे वहाँ बाहर कोई इंसान या गार्ड नजर नहीं आया था। फिलहार वहाँ बने दो क्वाटर के अंदर गार्ड थे, जो शायद अंदर चुदाई करने में बिजी थे। मुझे पूरा यकीन था कि उन लोगों ने मजे करने के लिए जरूर कॉलगर्लस को वहाँ बुलाया होगा। क्योंकि ऐसे जंगल में कोई भला अपनी फैमिली को तो अपने साथ रखेगा नहीं। खैर जो भी हो मुझे इससे कोई मतलब नहीं था। मैं तो बस अपने लिए कुछ खाने पीने का सामान और कपडे तलाश कर रही थी। वहाँ पर बने दो क्वाटर्स को छोडकर बाकी सभी इस वक्त खाली थे। पर समस्या यह थी कि सभी क्वाटर्स लॉक थे।
लेकिन तभी मेरी नजर सबसे आखिरी क्वाटर के पीछे बाली खिड़की पर पडी जो खुली हुई थी और जिसमें कोई जाली बगैरह भी नहीं थी। इसलिए मैंने एक बार चारों तरफ अच्छी तरह से देखा और फिर उस खिड़की के रास्ते उस क्वाटर के अंदर चली गई। क्वाटर के अंदर जाते ही मैंने उस खिड़की को अंदर से अच्छी तरह बंद कर दिया और स्विच बोर्ड ढूँडकर लाईट ऑन कर दी। इसके बाद मैं उस क्वाटर को अच्छी तरह से चैक करने लगी। शायद वो क्वाटर काफी समय से बंद था। जिस कारण उसमें काफी धूल जमी हुई थी। लेकिन जब मैंने कबर्ड चैक किया, तो उसके अंदर मुझे कुछ कपडे मिल गए।
मैंने उनमें से एक लोवर और टी-शर्ट निकाल ली, साथ ही साथ मुझे उसमें एक जैकेट भी मिल गई थी। इसके अलावा उस कबर्ड में कुछ पैसे भी रखे हुए थे। जो फिलहाल मेरे बहुत काम के थे। कबर्ड से अपने लिए कपडे निकालने के बाद मैं वहाँ कुछ खाने पीने का सामान तलाश करने लगी। किस्मत से मुझे वहाँ कुछ पैक्ड ड्राईफ्रूट और एक भरी हुई बीयर बॉटल भी मिल गई थी। मैं काफी लम्बे समय से भूखी प्यासी थी। इसलिए मैं ड्राय फ्रूट और बीयर की बोतल लेकर सोफे पर बैठ गई। अभी मैंने बीयर के दो शिप लिए ही थे कि तभी अचानक से मेरी नजर मेरे हाथ पर पडी।
जिसकी थोडी सी जली हुई स्किन निकल गई थी। शायद जंगल में किसी झाडी या पेड़ से रगड खाकर वो निकल गई थी। मैंने देखा कि मेरी जली हुई स्किन के अंदर से मेरी क्लीयर स्किन दिखाई दे रही है। जिसे देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। इसलिए मैंने उस बीयर की बॉटल बापिस से टेविल पर रखा और कमरे से अचैट्ड बाथरूम में घुस गई। किस्मत से बाथरूम में अब भी पानी आ रहा था। करीब 1 घंटे बाद जब मैं बाथरूम से बाहर निकली तो मेरी सारी जली हुई स्किन निकल चुकी थी और अब मैं पहले की तरह ही खूबसूरत दिखाई दे रही थी। इसलिए मैं आईने के सामने खडी होकर अपने आप को बडे गौर से निहारने लगी।
मैंने देखा कि मैं अब पहले से भी ज्यादा जवान और खूबसूरत लग रही हूँ। सबसे अजीब बात तो यह थी कि मेरी आँखों का रंग अब पूरी तरह से बदल चुका था। जहाँ पहले मेरी आँखों का रंग काला था, वो अब बदलकर हरा हो गया था। जिस कारण मैं अब पहले से भी ज्यादा सुंदर दिखाई दे रही थी। जब मुझे इस बात पर पूरा यकीन हो गया कि, उस हादशे के बाद भी मेरी सुंदरता में कोई कमी नहीं आई है। तो मैंने कंघी से अपने बाल अच्छी तरह सुलझाने के बाद कवर्ड से निकाले कपडे पहन लिए। किस्मत से वो कपडे मुझे एकदम फिट आए थे। बस इतनी सी कमी थी कि वो लडकों बाले कपडे थे और थोडे से ढीले भी थे।
पर बिना कपडों के नंगे घूमने से कहीं ज्यादा बेहतर था कि मैं उन कपडों पहन लूं। कपडे पहने के बाद मैंने अपने काम चलाऊ हैंड बैग का सारा सामान अपनी जैकेट की पाकेट में रख लिया और कवर्ड से मिले पैसे भी उसमें रख लिए। इसके बाद मैं दोवारा सोफे पर बैठकर बीयर और ड्रायफ्रूट इंज़ॉय करने लगी। अब मैं वहाँ और ज्यादा देर रुकने का रिस्क नहीं लेना चाहती थी। जिस कारण बियर खत्म होते ही मैं उसी रास्ते से वहाँ से बाहर निकल गई और बापिस से जंगल के रास्ते पर जाकर हाईवे कि तरफ आगे बडने लगी। ड्राई फ्रूट खाने और बियर पीने से मुझे काफी इनर्जी मिल गई थी साथ मेरी थकान भी अभ पूरी तरह से खत्म हो गई थी।
कुछ दूर जाने के बाद ही मैं हाईवे पर पहूँच गई। जिसके बाद मैं अंदाजे से ही एक दिशा की तरफ बागे बडने लगी। क्योंकि मैं पहले कभी इस तरफ नहीं आई थी। करीब 1 घंटे चलने के बाद मुझे एक ढावे के पास रखा ट्रक दिखाई दिया। इसलिए मैं जल्दी से उनके पास जा पहूँची। किस्मत से मुझे वहाँ 4 आदमी ढावे के बाहर आग जलाकर हाथ सेंकते हुए मिल गए। जब मैंने उनसे भोपाल का रास्ता पूछा तो मुझे पता चला कि मैं उल्टे रास्ते आगे बड रही थी। यह सुनते ही मेरा पूरा मूढ खराब हो गया। भोपाल उस ढावे से करीब 30 किलोमिटर दूर था। अगर मैं उल्टे रास्ते नहीं आई होती तो इस वक्त मैं भोपाल से करीब 10 किलोमीटर दूर होती।
कहानी जारी है......
अपना सारा जरूरी सामान अपने हैण्डमेड कामचलाऊ बैग में रखने के बाद मैं उस कमरे में लगे मेरे खून के धब्बों को अपने फटे हुए कपडों से अच्छी तरह से घिस घिस कर मिटाने की कोशिश करने लगी। लेकिन मेरा वह खून अब पूरी तरह से सूख चुका था। जिस कारण जब वो कपडे से साफ नहीं हुआ तो मैंने एक पत्थर के टुकडे को फर्स पर अच्छी तरह से घिसकर अपने खून के सारे धब्बों को पूरी तरह से मिटा दिया। उस कमरे से खून के सारे निशान मिटाने के बाद मैंने बाहर आँगन को भी एक बार फिर अच्छी तरह से चैक किया। लेकिन बारिस के कारण आंगन में गिरा मेरा लगभग सारा खून धूल चुका था।
बस अमर शिला के पास जहाँ मेरे सीने में वो लोहे की रॉड घोंपी गई थी, वहाँ पर मेरा कुछ खून अब रह गया था, साथ ही साथ उस रॉड पर भी मेरा खून लगा हुआ था। इसलिए मैंने अपने जरूरत का सामन छोडकर, बाकी सारा समान जिसमें मेरे कटे-फटे कपडे, प्लास्टिक की खाली बॉटल, मेरा टूटा हुआ मोबाईल आदि सामिल थे, उन सबको मैंने उस जगह पर रख दिया जहाँ मेरा खून अब भी लगा हुआ था, इसके बाद मैंने उस सामान में लाईटर से आग लगा दी। साथ ही साथ लोहे की रॉड को भी उस आग में डाल दिया, ताकि जमीन के साथ साथ उस रॉड पर लगा मेरा खून जल जाऐ और मेरे वहाँ आने के सारे सबूत पूरी तरह से नष्ट हो जाऐं।
ये सारा काम खत्म करके में सीक्रेट रूम के अंदर बापिस चली गई। जैसे ही मैने सीक्रेट रूम का दरवाजा बंद किया तो मेरे गले में डला मोती एकबार फिर ग्लो करने लगा। जिस कारण उस रूम में हरे रंग की रोशनी फैल गई। जिसमें मुझे सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था। अब उस खण्डहर में मेरा कोई भी निशान बाकी नहीं रह गया था। इसलिए मैंने अपने पास रखे सामान को एक बार फिर से अच्छी तरह से देखा। मेरे पास इस वक्त एक काम चलाऊ हैंडबैग के अलावा एक चाकू, एक लाईटर, कुछ पैसे और मेरे सिम कार्ड एवं मैमोर कार्ड सामिल थे। वो सारा सामान अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैंने उन्हें अपने काम चलाऊ हैण्डबैग में संभालकर रख दिया।
जिसके बाद मैं वहीं फर्स पर लेटकर आराम करने लगी। कुछ ही देर बाद ही मैं गहरी नींद में चली गई। मुझे नहीं पता कि मैं कब तक यूँ ही सोती रही, पर जब मेरी आँख खुली तो उस कमरे में एकदम अंधेरा था। यानि मेरे गले में डला मोती फिलहाल ग्लो नहीं कर रहा था। जिसे देखकर मैं पहले तो हैरान हुई पर फिर मैने उसे इग्नोर कर दिया। क्योंकि उस मोती का अचानक ग्लो करना मेरी समझ से बाहर था। इसलिए मैंने सीक्रट रूम का दरवाजा थोडा खोलकर बाहर बाले कमरे में झाँका, तो बाहर भी एकदम अंधेरा था। जिसे देखकर मैं समझ गई कि रात हो चुकी है और अब मेरा यहाँ से निकलने का समय भी हो गया है।
चूंकि अब मैं पहले से काफी अच्छा महसूस कर रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे कभी कुछ हुआ ही नहीं था। बस भूख और प्यास जरूर मुझे काफी परेशान कर कर रही थी। लेकिन उसका फिलहाल मेरे पास कोई उपया नहीं था। हाँलाकि मैंने सुबह गांव बालों द्वारा प्रसाद के रूप में चढाऐ गए थोडे से फलों को जरूर खाया था, साथ ही साथ उनके द्वारा छोडा गया पानी भी पिया था। लेकिन वो मेरा पेट भरने और प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं था, लेकिन उनसे मुझे थोडी बहुत एनर्जी जरूर मिली थी। मेरे सीने पर रॉड धंसने से जो घाव हुआ था, उसका दर्द अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था।
इसलिए जब मैंने अपने सीने पर बंधी पट्टी को खोलकर लाईटर की रोशनी अपने घाव को अच्छी तरह से चैक किया, तो मुझे पता चला कि मेरा वह घाव अब पूरी तरह से ठीक हो चुका है और मेरे सिर के बाल भी अब मेरे कंधों तक लम्बे यानि पहले जितने बडे हो गए हैं। जिसे देखकर मैं बहुत ज्यादा हैरान थी, साथ ही साथ खुश भी थी। लेकिन फिलहाल मेरे पास ना तो इस सबके बारे में सोचने का समय था और ना ही इन सबका मेरे पास कोई जबाब था। इसलिए मैंने वहाँ रखा अपना काम चालऊ हैण्डबैग अपने कंडे पर डाला और उस सीक्रेट रूम से बाहर निकल गई।
इसके बाद मैंने उस सीक्रेट रूम का दरवाजा अच्छी तरह से बंद कर दिया और लाईटर की रोशनी में उस कमरे से बाहर निकल आई। फिर मैं आंगन में आकर उस जगह को चैक करने लगी, जहाँ मैंने अपने कपडे और बाकी सामान में आग लगाई थी। जो अब जलकर पूरी तरह से राख हो चुका था। मेरे सीने पर बंधी पट्टी अब भी मेरे हाथ में थी। जिसे मैंने उसी राख के ढेर पर डालकर उसमें भी आग लगा दी। ताकि मेरे वहाँ होने और जिंदा बचने का आखिरी सबूत भी नष्ट हो जाऐ। चूँकि चांदनी रात थी, जिस कारण बाहर पर्याप्त रोशनी हो रही थी। इसलिए मैंने अपना लाईटर बंद करके अपने काम चलाऊ बैग में डाल लिया और उस खण्डहर से बाहर निकल गई।
मुझे उस जंगल में चलते चलते काफी देर हो गई थी। लेकिन मैं हाईवे के आस पास भी नहीं पहूँची थी और ना ही मुझे दूर दूर तक वो तालाब दिखाई दे रहा था। जिसे मैंने सुबह खण्डहर के बाहर खडे होकर देखा था। शायद रात के अंधेरे में मैं रास्ता भटक गई थी। चाँदनी रात होने के बाबजूद जंगल में ख़डे पेडों के कारण पर्याप्त रोशनी अंदर तक नहीं आ रही थी। लेकिन मैं अब उस माहौल की आदी हो गई थी। बैसे भी चलते वक्त बीच बीच में मेरे गले में डला मोती अपने आप ही ग्लो करने लगता था। जिस कारण मुझे अपने आस पास के माहौल का अंदाजा हो रहा था। लेकिन फिलहाल मेरे पास समय देखने का कोई उपाय नहीं था।
जंगल से जानवरों की अजीब अजीब आबाजें आ रहीं थी और कहीं कहीं मुझे जानबरों की चमकती हुई आँखे भी दिखाई दे रहीं थी। पर पता नहीं क्यों मुझे फिलहाल उनसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा था। बैसे भी जो इंशान मौत को इतने नजदीक से देख चुका हो, उसके अंदर से डर अपने आप ही निकल जाता है। लेकिन शर्दियों का मौसम चल रहा था और मैं इस वक्त पूरी तरह से नंगी थी। जिस कारण मुझे अब ठण्ड भी लग रह थी। थोडा और चलने के बाद मुझे दूर कहीं लाईट टिमटमाटी हुई दिखाई दी। इसलिए मैंने तुरंत अपनी रफ्तार बड़ा दी। जब मैं उस लाईट के पास पहूंची तो मैंने देखा की मैं इस वक्त फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस के पास थी।
जहाँ पास में ही कुछ लोगों के रहने के लिए क्वाटर भी बने हुए थे। वो पूरा ऐरिया तार फेंसिंग से घिरा हुआ था। जो शायद जंगली जानबरों को अंदर आने से रोकने के लिए था। लेकिन एक जगह पर दो तारों के बीच इतनी जगह थी। जिसमें से मैं आसानी से अंदर जा सकूँ। इसलिए मैं तुरंत उसमें से अंदर चली गई और छिपकर आस पास देखने लगी। हाँलाकि ऑफिस तो इस वक्त पूरी तरह से बंद था। पर क्वाटर से कुछ लोगों की आवाजें आ रहीं थी। इसलिए मैं वहाँ खडी झाडियों का सहारा लेकर उस तरफ आगे बड गई। अभी मैं कुछ दूर ही गई थी कि तभी अचानक से मेरे सामने जर्मन सेफर्ड नश्ल के दो बडे बडे कुत्ते आकर खडे हो गए, जो मुझे देखकर गुर्रा रहे थे।
इससे पहले वो मुझे काटते या भौंककर शोर मचाते, अचानक से मेरे गले में डला मोती दो-तीन बार ब्लिंक हुआ, जिसे देखकर वो दोनों कुत्ते चुपचाप वहाँ से चले गए। यह देखकर मैं हैरान होने के साथ साथ खुश भी थी। लेकिन अभी इस बारे में सोचने का मेरे पास समय नहीं था। इसलिए मैं बिना देर किए झाडियों के सहारे आगे बड गई, उन क्वाटर्स के पास पहूंच कर, मैं कुछ सोचती या करती, उससे पहले ही मुझे अपने पास बाले क्वाटर से एक लड़की की कामुक आवाजें सुनाई देने लगी। जिसे सुनकर मैं समझ गई कि उस क्वाटर में जरूर चुदाई चल रही है। पर मैंने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और एक एक करके वहाँ के सभी क्वाटर को चैक करने लगी।
किस्मत से मुझे वहाँ बाहर कोई इंसान या गार्ड नजर नहीं आया था। फिलहार वहाँ बने दो क्वाटर के अंदर गार्ड थे, जो शायद अंदर चुदाई करने में बिजी थे। मुझे पूरा यकीन था कि उन लोगों ने मजे करने के लिए जरूर कॉलगर्लस को वहाँ बुलाया होगा। क्योंकि ऐसे जंगल में कोई भला अपनी फैमिली को तो अपने साथ रखेगा नहीं। खैर जो भी हो मुझे इससे कोई मतलब नहीं था। मैं तो बस अपने लिए कुछ खाने पीने का सामान और कपडे तलाश कर रही थी। वहाँ पर बने दो क्वाटर्स को छोडकर बाकी सभी इस वक्त खाली थे। पर समस्या यह थी कि सभी क्वाटर्स लॉक थे।
लेकिन तभी मेरी नजर सबसे आखिरी क्वाटर के पीछे बाली खिड़की पर पडी जो खुली हुई थी और जिसमें कोई जाली बगैरह भी नहीं थी। इसलिए मैंने एक बार चारों तरफ अच्छी तरह से देखा और फिर उस खिड़की के रास्ते उस क्वाटर के अंदर चली गई। क्वाटर के अंदर जाते ही मैंने उस खिड़की को अंदर से अच्छी तरह बंद कर दिया और स्विच बोर्ड ढूँडकर लाईट ऑन कर दी। इसके बाद मैं उस क्वाटर को अच्छी तरह से चैक करने लगी। शायद वो क्वाटर काफी समय से बंद था। जिस कारण उसमें काफी धूल जमी हुई थी। लेकिन जब मैंने कबर्ड चैक किया, तो उसके अंदर मुझे कुछ कपडे मिल गए।
मैंने उनमें से एक लोवर और टी-शर्ट निकाल ली, साथ ही साथ मुझे उसमें एक जैकेट भी मिल गई थी। इसके अलावा उस कबर्ड में कुछ पैसे भी रखे हुए थे। जो फिलहाल मेरे बहुत काम के थे। कबर्ड से अपने लिए कपडे निकालने के बाद मैं वहाँ कुछ खाने पीने का सामान तलाश करने लगी। किस्मत से मुझे वहाँ कुछ पैक्ड ड्राईफ्रूट और एक भरी हुई बीयर बॉटल भी मिल गई थी। मैं काफी लम्बे समय से भूखी प्यासी थी। इसलिए मैं ड्राय फ्रूट और बीयर की बोतल लेकर सोफे पर बैठ गई। अभी मैंने बीयर के दो शिप लिए ही थे कि तभी अचानक से मेरी नजर मेरे हाथ पर पडी।
जिसकी थोडी सी जली हुई स्किन निकल गई थी। शायद जंगल में किसी झाडी या पेड़ से रगड खाकर वो निकल गई थी। मैंने देखा कि मेरी जली हुई स्किन के अंदर से मेरी क्लीयर स्किन दिखाई दे रही है। जिसे देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। इसलिए मैंने उस बीयर की बॉटल बापिस से टेविल पर रखा और कमरे से अचैट्ड बाथरूम में घुस गई। किस्मत से बाथरूम में अब भी पानी आ रहा था। करीब 1 घंटे बाद जब मैं बाथरूम से बाहर निकली तो मेरी सारी जली हुई स्किन निकल चुकी थी और अब मैं पहले की तरह ही खूबसूरत दिखाई दे रही थी। इसलिए मैं आईने के सामने खडी होकर अपने आप को बडे गौर से निहारने लगी।
मैंने देखा कि मैं अब पहले से भी ज्यादा जवान और खूबसूरत लग रही हूँ। सबसे अजीब बात तो यह थी कि मेरी आँखों का रंग अब पूरी तरह से बदल चुका था। जहाँ पहले मेरी आँखों का रंग काला था, वो अब बदलकर हरा हो गया था। जिस कारण मैं अब पहले से भी ज्यादा सुंदर दिखाई दे रही थी। जब मुझे इस बात पर पूरा यकीन हो गया कि, उस हादशे के बाद भी मेरी सुंदरता में कोई कमी नहीं आई है। तो मैंने कंघी से अपने बाल अच्छी तरह सुलझाने के बाद कवर्ड से निकाले कपडे पहन लिए। किस्मत से वो कपडे मुझे एकदम फिट आए थे। बस इतनी सी कमी थी कि वो लडकों बाले कपडे थे और थोडे से ढीले भी थे।
पर बिना कपडों के नंगे घूमने से कहीं ज्यादा बेहतर था कि मैं उन कपडों पहन लूं। कपडे पहने के बाद मैंने अपने काम चलाऊ हैंड बैग का सारा सामान अपनी जैकेट की पाकेट में रख लिया और कवर्ड से मिले पैसे भी उसमें रख लिए। इसके बाद मैं दोवारा सोफे पर बैठकर बीयर और ड्रायफ्रूट इंज़ॉय करने लगी। अब मैं वहाँ और ज्यादा देर रुकने का रिस्क नहीं लेना चाहती थी। जिस कारण बियर खत्म होते ही मैं उसी रास्ते से वहाँ से बाहर निकल गई और बापिस से जंगल के रास्ते पर जाकर हाईवे कि तरफ आगे बडने लगी। ड्राई फ्रूट खाने और बियर पीने से मुझे काफी इनर्जी मिल गई थी साथ मेरी थकान भी अभ पूरी तरह से खत्म हो गई थी।
कुछ दूर जाने के बाद ही मैं हाईवे पर पहूँच गई। जिसके बाद मैं अंदाजे से ही एक दिशा की तरफ बागे बडने लगी। क्योंकि मैं पहले कभी इस तरफ नहीं आई थी। करीब 1 घंटे चलने के बाद मुझे एक ढावे के पास रखा ट्रक दिखाई दिया। इसलिए मैं जल्दी से उनके पास जा पहूँची। किस्मत से मुझे वहाँ 4 आदमी ढावे के बाहर आग जलाकर हाथ सेंकते हुए मिल गए। जब मैंने उनसे भोपाल का रास्ता पूछा तो मुझे पता चला कि मैं उल्टे रास्ते आगे बड रही थी। यह सुनते ही मेरा पूरा मूढ खराब हो गया। भोपाल उस ढावे से करीब 30 किलोमिटर दूर था। अगर मैं उल्टे रास्ते नहीं आई होती तो इस वक्त मैं भोपाल से करीब 10 किलोमीटर दूर होती।
कहानी जारी है......