Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 11 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 84 संजना टेल्स समथिंग

तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई भी नहीं मैं तो मज़ाक कर रही हूँ!!”

चावला साहब ने कहा, “नहीं तुम मज़ाक नहीं का रही थी, मैं तुमको इतना तो पहचानता हूँ के तुम मज़ाक नहीं कर रही थी तुम्हारा किसी और के साथ कुछ नाह कुछ तो ज़रूर है अब बता भी दे नाह मुझे ख़ुशी होगी, और सच में मेरा जमके खड़ा हो गया है देख, ले छह कर देख नाह मुझे बहोत बेचैनी है जान्ने के लिए ी ऍम वैरी एक्ससिटेड हनी तेल्ल में आल!!”

संजना हस्ती जा रही थी मगर कुछ नहीं बता रही थी. चावला साहब बेताब थे सब सुनने के लिए और ज़ोर से संजना के निचे अपने मोठे तन्ने हुए लुंड को दबाते जा रहे थे, फिर कहा, “बोल नाह मेरी jaan…kaun है? या कितने हैं? उफ्फ्फ किआ एक दो से ज़्यादा हैं? हैं बाप रे बोल बोल नाह मैं ख़ुशी से पहले नहीं समां रहा हूँ बता नाह बेबी!!”

संजना ने अपने उँगलियों से दिखाया के 7 हैं!!! चावला साहब के ेंखें मोठे हुए और एक सांस लेते हुए कहा, सात? सात लोग हैं और जो तुमसे हमारे तरह इश्क करते हैं? कब? कहाँ? कैसे करते हैं?”

संजना ने कहा, “हम्म्म नहीं एक और है जिस को अभी अभी जाना है वो नई है तो 8 हुए सब मिलकर!!”

चावला साहब ने संजना को गॉड में उठाया और बैडरूम में लगाए, उस्सको बीएड पर बिठा कर कहा, “okay अब मुझको सब कुछ एक एक करके डिटेल में बता के कब और कैसे सब शुरू हुआ, और कौन कौन है और कब से? मुझको जान्ने से पहले या बाद में? किआ तुम्हारे पापा को पता है? किआ वो तुमको शेयर करता है? हँ? अरे बोल बोल नाह मैं पागल हो रहा हूँ देख यह शैतान खड़ा हो गया!!” और जल्दी से चावला साहब ने अपने पांत उतार दिए और बॉक्सर में बीएड पर बैठ गए अपने लुंड का फॉर्म संजना को दिखाते हुए.

संजना ने हीहीहीही करते हुए उनके लुंड को बॉक्सर के ऊपर hi करेस किया और उस्सने भी एक लम्बी सांस लेकर कहा, “मैं ने होनेस्त्ली आप को बोल दिया 8 हैं….. मैं सच बताने जा रही हूँ आप को. एक नाह एक दिन बताना hi था, अब अगर आप सब सुनकर नाराज़ हुए या आप को ग़ुस्सा आया तो?”

चावला साहब ने कहा, “बिल्कुल भी ग़ुस्सा नहीं आएगा डार्लिंग, मैं तो खुश हो रहा हूँ! मुझे खुद समझ में नहीं ारः के क्यों मुझे ख़ुशी हो रही है जब के मुझको ग़ुस्सा आना चाहिए था नाह? तो एहि बात है तुझ में जो किसी मर्द को तुम्हारे किसी और के साथ होने पर ग़ुस्सा नहीं उतेजिन्ह होता है, तुम हो hi ऐसी के शायद तुमको किसी 9तह या 10तह भी मिल गए तो भी शायद मुझको गुस्सा नहीं आएगा और मय्बे तुम्हारे पापा को भी ऐतराज़ नहीं होगी, पता नहीं किआ है तुझमें जो सेक्स को लेकर तुझपर ग़ुस्सा नहीं अत तुम बताओ नाह मेरी जान सब शुरू से बताओ प्लीज! और सुनों मैं भी अपने बारे में तुमको कुछ बताऊंगा मगर तुम्हारे बताने के बाद पहले तुम!”

संजना ने एक बहोत प्यारी मुस्कान के साथ उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “रियली? आप भी? किआ आप भी किसी और के साथ? हम्म्म? बोलिये नाह?”

चावला: “हाँ अभी अभी शुरू हुआ तुमसे शुरू होने के बाद, वार्ना मेरे ज़िन्दगी में कोई भी नहीं था, तुमसे यह सब करने लगा तो मुझे लगा के उस से भी शायद शामे हो सकता है और हुआ भी….”

संजना ने बड़े प्यार और कोमलता से पूछा, “कौन है? कब मिली? बोलो नाह?”

चावला साहब: “नाह, पहले तुम सब बताओ उसस्के बाद मैं सब बताउगा, मेरा तो सिर्फ एक है तुम्हारे तो 8 है तो तुम पहले बताओ…..”

तो संजना ने बता शुरू किआ इस तरह से:

“आप को याद है वो दिन जब आप आरहे थे कार में और मैं आप को बाहर वेट कर रही थी तो कुछ लोग बाइसिकल से गुज़रे थे आप के कार के पास और आप ने पूछा था वह लोग कौन थे?”

चावला साहब: “हाँ हाँ बिल्कुल याद है, तब मुझको तुमको लेकर जलन फील हो रही थी के कोई और तुम्हारे साथ कुछ करता तो नहीं…. मुझे कुछ शक हुआ था उसी वक़्त मगर तुमने कहा था के वो रघु और उसस्के साथी थे है नाह?”

संजना: “हाँ रघु hi था अप्पने चमचों के साथ”

चावला साहब: “तो किआ रघु? वो तुम्हारे साथ एन्जॉय करता है?”

संजना: “वेट वेट बताती हूँ नाह….. और आप को याद है उस दिन जब आप आये थे तो मैं ने दरवाज़ा खोलने को लेट आयी थी 10 मिनट के बाद? और आप पीछे के तरफ बाहर जाकर बाथरूम के इम्पोसट को बंद किया था?

चावला: “हाँ हाँ सब याद है उसी दिन मैं ने तुमको शूट किया है बाथरूम मैं, उस दिन मुझको थोड़ा शक हुआ था मगर फिर नज़र अंदाज़ कर दिया, तो किआ कोई था यहाँ तुम्हारे साथ? हम्म?”

संजना उनके ेंखों में प्यार से देखते हुए हाँ में सर हिलाया, फिर कहा,

“और उस दिन जब टेंट बनाना वाले टेंट बना रहे थे और सुपरवाइजर और कुछ आदमी अंदर आये थे घर में, तो आप बहोत ग़ुस्सा हो रहे थे के मैं ने क्यों उंनलोगों को अंदर आने दिया और क्यों मैं उस छोटी ड्रेस में उन् लोगों के पास बाहर गयी थी… याद है?”

चावला साहब: “हाँ उस दिन तो मुझे बिल्कुल लग रहा था के तुम जिस तरह ड्रेस थी तुम्हारे पुरे जांघें दिख रहे थे, तुम्हारे क्लीवेज भी बिल्कुल सामने थे, और इतने मर्द लोग सब की नज़रें तुम पर hi ठीके हुए थे तो मुझे बहोत शक हुआ था उस दिन को तो किआ तब भी?”

संजना ने फिर से हाँ में सर हिलाया.

चावला साहब उस मंज़र को याद करने लगे के किश तरह उन् लोगों के नज़र हर बार संजना पर ठीके रहते थे और कैसे उन्हों ने उस सुपरवाइजर से बात किये थे मगर उस्सने कुछ भी नहीं बताया था ….. और चावला साहब सोचने लगे उन् दो दिनों में एक दिन को तो वो बहोत hi लेट पहुंचा था यहाँ और एक दिन तो बिल्कुल भी नहीं आये थे तो संजना बिल्कुल अकेली थी उन् लोगों के बीच….. यह सब सोचकर चावला साहब का लुंड और भी फनफना गए….

और चावला साहब ने संजना को बाहों में भरके लम्बा वाला किश किया और संजना के हाथ को अपने बॉक्सर के ऊपर अपने लिंग पर रखे हुए किश जारी रखा, संजना को खूब चूमा और छाता उन्हों ने और संजना उनके लिंग को अपने कोमल हाथ से रगड़ती गयी काफी देर तक….

उसस्के बाद चावला साहब ने कहा, “अब बताना शुरू करो शुरू से, पहले दिन किश ने तुमको छुवा, किश किया, कैसे शुरू हुआ ेट्स सब पहले दिन से बताओ बेबी…..

संजना ने बताना शुरू किया,

“ये तब की बात है जी जब मैं कॉलेज जाती थी और पापा ने मेरे साथ करना शुरू कर दिया था. पापा के बिना मैं नहीं रह पाती थी. पीछे लेने लगे थे पापा मुझे. जब मैं सुबह कॉलेज जाती पापा के साथ और पापा कंपनी की बस में चले जाते तो मैं बस स्टॉप पर स्कूल की बस का वेट करती थी उन् दिनों रघु और एकांत नौजवान लोग मुझसे बस स्टॉप पर चेरर कहानी करते रहते थे… दिन बा दिन उन् जवानों की संख्या बढ़ते गए मेरे पास बस स्टॉप पर. क्यूंकि सब इसी गाओं के थे, सबको मैं जानती थी तो बुसस यूँही एकांत बात कर लेती थी. उन् में वो लड़का जो शराबी है जिस ने हमको कार में देखा था उस दिन, जिस्सके पूर्वजों का ज़मीन है वो भी एते थे मुझे चेररने को, और क्यूंकि उसस्के पास मोटरसाइकिल था वो तो कभी कभी बस को फॉलो करते हुए मेरे कॉलेज तक आजाते थे. क्यूंकि पापा को मेरे जांघें बहोत पसंद थे आप की तरह तो वो मेरे यूनिफार्म को काफी छोटी बनवाते थे जिस में मेरी जांघें खुद दिखे उस्सको बहोत पसंद था के मैं वैसे यूनिफार्म पहनूं. तो वो सब लड़के मेरे जांघ देखते थे और सब एक्साइट होते थे, उन् में से कुछ तो खुले आम बस स्टॉप पर कहते थे के मेरे जाँघों को देख कर सब मुठ मारते हैं और मुझको अपने लिंग को हाथ में पकड़ने को कहते थे. मैं उन् सब के बातों को अनसुना करती रहती थी.

और एक दिन उन् में से दो मेरे बस में चढ़े, और मेरे पास बैठे बुसस में और मेरे जाघों पर हाथ फ्री पुरे रास्ते…. अपने हाथ को अंदर तक किये मेरे पंतय तक…. क्यूंकि ड्रेस छोटे थे बैठने से ड्रेस और भी ऊपर हो जाते थे तो मेरी जांघें ज़्यादा नज़र आते तो उन् लोगों को बहोत ख़ुशी होती और सब बहोत उत्तेजित होते थे…. वो दोनों ने सब बात बाकी के दोस्तों को बता दिए के उन् लोगों ने मेरे जाघों को छुआ और पंतय भी…. तो बाकी के सब वही करना चाहते थे…. पता नहीं मैं क्यों उन् लोगों को रोकती नहीं थी शायद मुझे अच्छा लगता था जब वह लोग वैसा करते थे….

एक एक करके सब बस में गए मेरे साथ किसी दिन को एक, दूसे दिन को एक उसरा और तीसरे दिन को एक तीसरा… आपस में सब मेरे पीछे बात करते थे क ीक नाह एक दिन यह लोग मुझसे सेक्स करेंगे…. मैं तो पापा से करती थी तो मुझे सब पता था के यह लोग किआ चाहते हैं मुझसे…

मगर अस्सल बात तब शुरू हुई जब एक दिन पापा मुझे पहाड़ों पर घुमाने को लगाए थे. वो एक संडे का दिन था, और वहां पहुँचने पर बारिश होने लगे थे. हम दोनों बिल्कुल भीग गए थे. मैं एक छोटी स्कर्ट और ब्लाउज में थी. भीगने की वजह से मेरा ब्लाउज चिपक गए थे मेरे छाती पर और ब्रा और बूब्स दिखने लगे थे, तो पापा को करने का मैं किया… उसी जगह जहाँ पहले बार आप ने मुझे कार में किश किया था और एक बूढ़ा आदमी लड़की काट के वापस आरहे थे वही पापा मुझे बाहों में भरके किश कर रहे थे, मेरे स्कर्ट को ऊपर उठा के पंतय को निचे करके अपने लिंग को मेरे योनि के ऊपर रगड़ने लगे थे, मैं उस्सको बाहों में भरे किश कर रही थी और वो कमर हिलाते हुए रागढ रहे थे के रघु ने सब देख लिया. वो काफी देर से एक पेयर के निचे छुपा हुआ था बारिश से बचने के लिए और खड़ा होकर हम दोनों को कुछ देर से देख रहा था……

तो बे कॉन्टिनोएड………(3000 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
आप की इस प्यारे कमेंट और ओपिनियन के लिए बहोत धन्यवाद डिअर.

आप को एक बात बताऊँ? इस कहानी की टाइटल मैं संजना रखने वाला था... मैं करैक्टर इस में संजना की थी,

और मैं ने hi दोनों चरक्टेर्स को क्रिएट किया दोनों संजना और सान्वी को मैं ने बनाया, मगर सान्वी की भूमिका को इस लिए ऐसा बनाया क्यूंकि वो एक हाउसवाइफ है, घरेलु औरत है हालां के आमिर घर की है मगर घर के अंदर रहने वाली औरत इस से बेहतर तो सोच नहीं पाया दिखने को... अब बहुत सारे लोगों को उस की करैक्टर ज़्यादा पसंद आरहे हैं जैसे आप को.

आप से मैं एक सवाल पूछना चाहता हूँ, मुझे आप ये बताइये के किआ आप ने सभी उपदटेस को शुरू से पढ़े हैं या सिर्फ इंडेक्स से सान्वी वाले उपदटेस पर क्लिक करके पढ़े हैं आप ने?

यह मैं इस लिए पूछ रहा हूँ क्यूंकि आप ने शायद ये तीसरी बार कहा के सान्वी चावला साहब का कितना ख़याल रखती है ेट्स और आप के ख्याल से चावला साहब के तरफ से उनके लिए प्यार नहीं है... और आप को यह भी लगा के सान्वी बहोत जल्दी मान गयी उंनसे हमबिस्तर होने के लिए इसी लिए मुझे लगता है आप सभी उपदटेस को ठीक से नहीं पढ़ते ho....ek पूरी अपडेट लिखे है मैं ने जो सिर्फ इन् दोनों के बारे में है..... 5 सैलून से प्यार हैं इन् दोनों में और आप कह रहे हो के बहुत जल्दी हो गया और इन् के प्यार को ज़्यादा नहीं dikhaya..rahi बात चावला साहब के प्यार की सान्वी के तरफ और उसस्के केयर की तो आप भूल गए जीन दिनों दीप्ति पैदा हुई थी तो कौन ख़याल रखता था सान्वी का? सिर्फ चावला साहब, उसस्के पति सान्वी का उतना ख़याल नहीं रखते थे जितना चावला sahab...pichle 5 सालों से इन् दोनों के बीच गहरा रिश्ता होता चला आया भाई और आप को ऐसा नहीं लगता?? ...

मुझे तो लगता है के आप नहीं पढ़ रहे हो कहानी को सही तरीके से!!

फ़िक्र ना करें आप सान्वी संजना तो नहीं बनेगी मगर जो मैं ने सोचा के कहानी के लिए वो सब तो होकर रहेगा भाई चेंज तो नहीं कर सकता किसी की करैक्टर या रोले को जो होना है वो तो होगा hi इस कहानी में

आप की तवज्जो के लिए बहोत धन्यवाद.

ऐसे hi साथ बने रेहयेगा

थैंक्स वैरी मच.
 
बहोत शुक्रिया भाई. ख़ुशी है के आप ने शुरू से सब उपदटेस पढ़े हैं.

हाँ उस रात को सान्वी जल्दी से ओपन हो गयी इस के बारे में मुझे आप से यह कहना है के हालात को मद्दे नज़र रखते हुए वैसा hi होना चाहिए था, एक कशिश थी दोनों तरफ से एक आग लगी हुई थी, कितने मुश्किलों से अपनी तड़प को बर्दाष्त किया था सान्वी ने चावला साहब से दूर रहकर, चावला साहब रूठा हुआ था उस से कितने दिनों तक, उस्का रहतना, सान्वी का मानना कई दिनों तक, सान्वी ने उनके छाती पर संजना की की हुई लोवेबिट्स देख चुकी थी, मन hi मैं वो दुखी थी, तड़प रही थी, ऊपर से चावला साहब उस से बात नहीं कर रहे थे पिछले 4/5 दिनों से, सान्वी की मानसिक संतुलन बिगड़ गयी थी के घुसे में उस्सने आग लगा दिया था घर में, अब उस दौरान भी थपड खायी थी चावला साहब से फिर डर गयी थी उस आग से.... और उसी वक़्त जब थपड खाने के बाद रो रही थी उनके बाहों में तभी किश किये थे दोनों ने पहले बार 5 सालों में यह पहला किश tha....jism में आग भड़क गए थे और उसी रात को सम्भोग करना लाज़मी हो गया था.... वो उस प्यास को बुझाने का इंतज़ार नहीं कर पायी थी इसी लिए उसी रात को चावला साहब से हमबिस्तर हुई... वैसे वो तो नहीं गयी थी नाह चावला साहब के कमरे में अपने आप? वो तो बुसस निकल रही थी ठंडी हवा खाने के लिए दिल ो दिमाग़ में चावला साहब hi बसे थे उस वक़्त सान्वी के दिल में और देखा के साहब वहीँ बैठे थे किचन में तो दौड़ कर उनके बाहों में चली गयी... अब दोनों तरफ से आग लगी हुई थी बदन में और रात की उस तन्हाई में दोनों फिर मिले तो किआ होगा भाई? वह तो होना बिल्कुल लाज़मी tha...iss में सान्वी ज़्यादा ओपन बिल्कुल नहीं हुई बहोत जड़ो जहद के बाद एक हुए थे दोनों उस रात को........... रही बात चावला साहब ने जो गली दिए थे सान्वी को अरे वो तो नशे के हालत में दिए थे दिल से नहीं नाह? ग़ुस्से में आदमी गाली देताहै, बुरा भला कहता है मगर उस्सको मैं नहीं करता वो ऊपर ऊपर होता है... दिल से कभी बूटा नहीं चाहा है कभी भी चावला साहब ने सान्वी के लिए....

और इस में बुरा मानने की कोई बात नहीं है भाई आप का हक़ है मुझसे कुछ भी कहना और पूछना कहानी के बारे में

बल्कि मैं आप का शुक्र गुज़र हूँ के आप ने इस कहानी को इतना पसंद किया ख़ास कर सान्वी की करैक्टर को.....

मैं पूरा कोशिश करूँगा इस करैक्टर को दायरे में hi रखने की मगर फिर कह देता हूँ जो होना है वो तो होगा hi.....

भाई आप की आखरी गुज़ारिश जो है के कभी मैं एक ऐसी कहानी लिखूं जिस में संवी जैसे करैक्टर पर पूरी स्टोरी हो, अच्छा okay कभी बाद में तरय करूँगा...... सोचना पड़ेगा इस बारे में हाँ मुमकिन है कर सकता हूँ... बुसस थोड़े दिन वेट करना होगा ok बही?

थैंक्स वैरी मच भाई आप मि दिलचस्पी के लिए.
 
और एक नई रजिस्टर्ड इस कहानी पर, आप का स्वागत है मेरे थ्रेड पर,

मुझे बहोत ख़ुशी हुई के आप ऑफलाइन से ऑनलाइन आये यहाँ कमेंट करने को, सच में बेहद खुश हुआ मैं आप के इस कमेंट को देख कर आप का पहला कमेंट इस थ्रेड पर मेरे लिए एक ट्रॉफी के जैसा है.

आप लड़की हो यह जान कर और भी ख़ुशी हुई, बहोत सारे लेडीज मेरे ष्प वाले थ्रेड पर कमेंट करते थे मगर बहोत ज़्यादा मुझको पं करते थे और ईमेल से कमेंट करते थे क्यूंकि इरोटिक कहानियों पर उन् को आना अच्छा नहीं लगता था आप की बोल्डनेस की डाट देता हूँ माय डिअर.

थैंक यू वैरी वैरी मच एंड बे थे मोस्ट वेलकॉमेड. :लव:
 
वैरी सॉरी. आप नयी हो तो शायद आप को नहीं पता मैं वीकेंड्स में उपदटेस नहीं दे पाटा हूँ. आप ने अपनी पहले पोस्ट में कहा था क आप ऑफलाइन से मेरे सभी उपदटेस पोस्ट्स ेट्स को पढ़ रही हो, तो किआ कभी नहीं ग़ौर किया कितने बार मैं ने वीकेंड में सॉरी कहा है रीडर्स को? 84 उपदटेस लिखे हैं मैं ने कितने दिनों में? ये नहीं देखा आप ने?

सॉरी अगेन आज शाम तक उपदटेस आजायेंगे.

थैंक्स.
 
अपडेट 85 संजना कॉन्टिनुएस तो तेल्ल

वही पापा मुझे बाहों में भरके किश कर रहे थे, मेरे स्कर्ट को ऊपर उठा के पंतय को निचे करके अपने लिंग को मेरे योनि के ऊपर रगड़ने लगे थे, मैं उस्सको बाहों में भरे किश कर रही थी और वो कमर हिलाते हुए रागढ रहे थे के रघु ने सब देख लिया. वो काफी देर से एक पेयर के निचे छुपा हुआ था बारिश से बचने के लिए और खड़ा होकर हम दोनों को कुछ देर से देख रहा था……

अब आगे……….

संजना ये सब कुछ चावला साहब को सुनाते हुए उन् के चेहरे में देखती जा रही थी के कहीं उन् को बुरा तो नहीं लग रहा यह सब बातें सुनकर, मगर संजना ने देखा के चावला साहब का लिंग पंत में फुल साइज में आगये है तो वो समझ गयी के चावला साहब को सुनने में मज़ा ारः है तो उस्सने कंटिन्यू किया बताना…..

…. “और हम दोनों ने सोचा के उस बारिश में वैसे पहाड़ी इलाके में कोई भी नहीं होगा तो हम दोनों बेफिक्र होकर प्यार कर रहे थे, मेरी पंतय मेरे घुटनों के निचे फंसे हुए थे और पापा मेरे चुतरों पर हाथ दबा कर मेरे योनि के ऊपर रगाहड़ता जा रहा था और मैं ने अपने बाहों को उसस्के काँधे से करके उस्सको अपने आप पर दबाया हुआ था और उसस्के गले को चूस रही थी क्यूंकि मुझे भी मज़ा आने लगा tha…hum दोनों वैसे hi खड़े पोजीशन में hi थे सब करते हुए….. मगर जैसे hi पापा झड़े तो मुझको निचे बिठाया उस्सको चुस्सने के लिए झड़ने के बाद, मैं घुटनों के बल हो कर उसस्के लुंड को मुंह में लिए हुए चूस रही थी के अचानक रघु ने मेरे पीठ पीछे तालियां बजायी और कहा, ‘वह वह वह किआ सन है आनंद, अपनी बेटी को hi छोड़ रहे हो, अरे वह तुमको पता है मैं कब से इस्को देख के खड़ा हो जाता हूँ वह वह किआ बात है बहोत प्यार करती है संजना तुझको आनंद? ज़रा मुझको भी खुश करदे अब रानी!!’

जैसे उस्सकी तालियों को मैं ने सुना झट से पापा के लुंड को चोरर कर कड़ी हुई और अपनी पंतय को ऊपर खिंचा तब तक वो हम दोनों के करीब पहुँच गया था, बिल्कुल भीग गया था वो भी हमारी तरह और पापा के बोलती बंद हो गए थे वो कांपने लगे थे, और मैं भी थरथर कामने लगी थी एक तो बारिश की वजह से दूसरी रघु की मौजूदगी की वजह से….. मैं बहोत hi डर गयी थी और मैं पापा से लिपट के रोने लगी.

पापा ने मुझको रुकने को कहा यह कहकर के वो उस से बात करता है और मुझको वहीँ एक पेयर के निचे छुपने को कहा और वो रघु से बात करने लगा. मैं सब सुन्न रही थी. पापा ने उस से कहा, “रघु यह प्राइवेट बातें हैं इस बात को बाहर नहीं निकलना चाहिए बिल्कुल सुना तुमने? मेरे दोस्त हो नाह तो वादा करो के तुम किसी से भी कभी कुछ नहीं कहोगे सुना तुमने रघु?”

रघु ने कहा, “अरे हर बात की एक कीमत होती है यार, देख तेरी संजना पर मेरी किआ, हर नौजवान की नज़र हैं इस गाओं में, यह इतनी खूबसूरत और जवान हो गयी है के हर कोई इस्को छोड़ना चाहता है, मगर सब से पहले तू ने hi शुरू कर दिया, अब सोच तुझसे hi अगर नहीं रहा गया इस्सकी जवानी देख कर तो हम लोगों पर किआ बीत रही होगी, देख मुझे भी एक मौका देदे, देख यहाँ इस वक़्त हम तीनों के इलावा कोई नहीं; मैं भी तेरी तरह खड़ा खड़ा hi काम तमाम कर लूंगा बुसस एक बार मुझे भी मज़ा कर लेने ने फिर वादा है मेरा के यह बात यहीं के यहीं रहकर रह जाएगी…..” पापा ने ग़ुस्सा होते हुए उस से कहा, “अरे रघु वो कुंवारी है मैं ने सिर्फ ऊपर ऊपर रगड़ा है कुछ नहीं किया उस्सको…..” मैं रघु के तरफ देख रही थी और वो बार बार मुड़कर मुझको ऊपर से निचे देख रहा था पापा से बात करते वक़्त.. मेरी जांघें तो साफ़ दिख रहे थे ऊपर से ब्लाउज चिपकी हुई थी भीग कर, तो वो उत्तेजित हो गया था मुझे दिख रहा था, और मुझको पहले से hi पता था के वो मुझसे यह सब करना चाहता है क्यूंकि कॉलेज जाते वक़्त मुझको कितना चेररता रहता था अपने दोस्तों के साथ….

रघु ने पापा से कहा, “तो मैं भी सिर्फ रागढ के और चुम्मा छाती से hi काम चलूँगा न यार, इस में कौन सी बड़ी बात है, अरे तुझको चूस रही थी मुझको भी तो चुस्सके खुश कर सकती है, देख आसान डील है बुसस करने दे तो बात किसी को नहीं बताऊंगा, वार्ना सोचले छोटा सा गाओं है बात दो मिनट में फेल जाएगी और तू और संजना दोनों मुंह दिखने लायक नहीं रहोगे अगर मैं ने सिर्फ एक किसी को भी बता दिया to….aur भाई हर रात की तेरी दारू फ्री मेरे तरफ से आज के बाद, बोल डील अच्छी है के नहीं?!”

पापा और भी ज़्यादा कांपने लगे थे, मैं देख रही थी उसस्के दोनों पैर थरथर कांप रहे थे मुझको अफ़सोस हो रहा था पापा को उस हालत में देख कर, बारिश थमने का नाम नहीं ले रहा था और हम और भी ज़्यादा भीग रहे थे, बदल और बिजली भी कड़कते जा रहे थे मुझको डर भी लग रहा था…. और पापा लाचार होकर रघु को ठहरने को कहा और मेरे पास आया और कहा, “अब मैं किआ करूँ संजना? वो सबको बता देगा ऋ मैं किआ करूँ?!” तो मैं ने खुद पापा से कहा, “करने दो पापा, करने दो उससे मैं उस से बात करुँगी के पक्का वादा करे के अगर मैं ने उस्सको खुश किया तो वो कभी किसी को कुछ नहीं बताएगा, आप फ़िक्र मत करो मैं संभाल लुंगी उससे वो किसी को नहीं बोलेगा कुछ भी!”

तो पापा उसस्के पास जाकर उस्सको मेरे पास आने को कहा. रघु मेरे पास आया और मैं ने पापा से कहा, “आप उधर देखो पापा मुझको मत देखो मुझे बहोत शर्म आएगी अगर आप देखोगे तो….” पापा मूढ़ गया और रघु ने मुझको एक भूके जानवर की तरह लपेटा अपने बाहों में और एक जंगली की तरह मुझको हर जगह चाटने लगा और बहोत जल्द मेरी पैंटी को निचे करके मुझको घुमा के झुकने को कहा, मैं झुकी तो अपने लुंड को मेरे चुतरों पर दबा के रगड़ने लगा, फिर तुरंत मुझको वापस घुमाया और अपने लुंड को मेरे मुंह में डाला और कहा, ‘चूस, मज़े से चूस अपनी बाप को जैसे चूस रही थी वैसे hi चूस” मैं ने उस्सको मुंह में लिख्या और चुस्सने लगी… एकांत बार पापा के तरफ देख रहा था और देखा के पापा मुझको चूस्ते हुए देखने लगे…. रघु को चूस्ते वक़्त मेरे हाथ खुद बा खुद उसस्के कमर पर पहुंच गए और मैं जोश में आगयी और जैसे पापा को चुस्ती थी बिल्कुल वैसे hi मज़े से रघु को चुस्सने लगी और देखा के पापा ने अपने लुंड हाथ में लिए मुठ मारने लगा था मुझको देखते हुए…. रघु भी पापा को देख कर हंस रहा था…..

तब रघु निचे बैठकर मेरे पंतय को पूरा निकाल के निचे रख दिया और मेरे योनि पर अपना जीब फरने लगा और मैं कसमसाती गयी उसस्के सर के बालों को अपने मुठी में जाकर के, पापा को देखा तो वो ज़बरदस्त मुठ मार रहा था मुझको देखते हुए, रघु का एक हाथ ऊपर उठकर मेरे चूचियों को दबा रहा था, मस्सल रहा था पापा पागल होता जा रहा था मुठ मारते हुए और आखिर में रघु ने, मुझको उठाकर अपने गॉड में लिया और लुंड को मेरे निचे रगड़ने लगा बड़े ज़ोरों से… और जल्द hi वो झड़ने लगा और साथ साथ पापा भी मुठ मारते हुए हम दोनों को देखते हुए झाड़ गया…. झड़ने के बाद रघु ने उसस्के लुंड को फिर चाटने और चुस्सने को कहा जो मैं ने किया निचे बैठ कर और वो कहाँरते हुए चिलाय “वाह वाह कितना मज़ा है तेरे अंदर रे संजना मैं तुझको सोच कर मुठ मारा करता था कभी सोचा नहीं था के इतनी जल्दी इतनी छोटी उम्र में hi तुझको छोड़ पाउँगा वह वह रे मेरी किस्मत!! अहहहहहहाआआआआह!”

और मैं ने उस से वादा लिया के वो किसी को इस बारे में किसी को भी नहीं बताएगा तो उस्सने मेरे कान में धीरे से कहा, “कभी नहीं बताऊंगा मगर अब तो जब भी मुझको मैं करे करने देना okay?Jab तेरा बाप घर पे नहीं होगा तब आऊंगा okay यह बात पापा को भी मत बताना यह हमारा सीक्रेट होगा….” तो मैं ने उस्सको धीरे से कहा, “स्सश्ह चुप कर पापा सुनलेगा!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 86 संजना तेल्ल मच मोरे तो चावला

उसस्के बाद हम तीनों एक साथ वहां से निकले थे, रघु बार बार पापा के सामने मेरे पिछवाड़े पर हाथ फरते हुए जा रहा था, पापा से बात भी कर रहा था मगर पापा उस्सको कोई जवाब नहीं देता था. उसस्के दूकान के पास आगये तो पापा ने मुझको घर जाने को कहा और उसस्के साथ उसस्के दूकान में चला गया था पिने को.

मैं घर आकर नहाया और नहाते वक़्त रघु को सोच रही थी के किश तरह जोश में उस्सने मेरे साथ किया था…. पापा बड़े प्यार से करते थे, पापा से तो मैं प्यार करती थी, मगर वो पहली बार हुआ था के बिना किसी से प्यार किये मैं ने वो सब किया था तो उस में मुझे एक अलग और अजीब कशिश हुई थी और बार बार उसस्के करने के तरीके को सोच कर मुझजो कुछ होता था….

चावला साहब का लुंड जमके खड़ा हो गया था संजना के बातों को सुनते हुए और उस्सने अपने ज़िप खोला और संजना के हाथ को अपने लुंड पर किया और कहा, “इस्को सहलाते हुए बयां जारी रख, बोलती जा और सहलाती चल इस्को….”

संजना ने उनके लुंडको अपने मुलायम हाथ में लिया और उनके चेहरे में देखते हुए मुस्कुराकर पूछा, “आप को मज़ा ारः है नाह सुनने से? आप उत्तेजित हो रहे हो नाह? मेरे बारे में किसी और के साथ सेक्स करते हुए सुनकर आप को बहोत अच्छा लगता है नाह? हम्म बोलिये नाह जी!”

चावला साहब ने जवाब में कहा, “कौन उत्तेजित नहीं होगा एक जवान खूबसूरत लड़की के ज़ुबानी ऐसे बयां को सुनते हुए? कोई भी मर्द खड़ा हो जाएगा और तुमको छोड़ना चाहेगा, मगर तू बाकी सुना फिर तुझको मज़े से लेता हूँ अभी…..”

संजना ने बयान को जारी रखने से पहले सोचा, “अभी अभी तो झड़े हैं ये और मुझको प्लीज भी नहीं कर पाए थे, और अब मेरे यह सब बातें बताने से कह रहा है मुझको लेगा, मतलब साफ़ है के यह मुझको किसी और के साथ देख या सुनकर खड़ा हो जाता है इसी लिए पापा के साथ करने को देखना चाहते थे मुझे…. इस्सके यह एक फंतासी होगा मुझको किसी और के साथ देखने को मुझे लगता hai…main किसी से भी करूँ इनको ाचा लगेगा लगता है…..”

तो संजना ने बताना जारी किया “हाँ तो पापा मेरे साथ करते थे वो अलग तरह का करना होता था और जिस तरह से रघु ने किया था वो बहोत अलग था मेरे लिए… और वैसे मैं ने कभी भी नहीं सोचा था के किसी और के साथ वो सब करुँगी कभी, तो एक अजीब एहसास हुआ था रघु से करने के बाद… जीन दिनों को वो और उसस्के बाकी दोस्त मुझको चेररते थे कॉलेज जाते वक़्त तब मुझको बुसस फ्लिर्टिंग का मज़ा एन्जॉय करना होता था उन् लोगों के साथ इस लिए मैं ज़्यादा उन् लोगों से परेशान कभी भी नहीं होती थी, बुसस फ़्लर्ट समझ कर नज़र अन्द्दाज करती थी… जब वह लोग बुसस में मेरे जाँघों को छूटे थे तब कुछ होता था जैसे जब पहली बार पापा ने वहां छुआ था तो एक सेंसेशन होती है नाह वो होता ज़रूर था मगर वो सिर्फ 10 मिनट मेरे साथ होता था और जब वो लोग चले जाते और मैं कॉलेज पहुँच जाती तो सब ख़तम हो जाते हालां के एक बार तीन मेरे साथ बस में थे एक का हाथ करीब मेरे पंतय तक जा चुके थे उस रोज़ मैं कॉलेज की टॉयलेट में गयी तो देखा के गीली हो चुकी थी उन लोगों के छूने से…. फिर भी उस से ज़्यादा कुछ भी नहीं हुआ था कभी रघु के करने से पहले….

उस दिन को पापा रघु के यहाँ से पिने का बाद घर वापस आया तो मुझको बाँहों में लेकर बहोत रोया यह कहते हुए के उस्सने कभी नहीं सोचा था के मेरे जेईई पारी के साथ एक दिन ऐसा होगा, वो मुझसे माफ़ी मांग रहे थे मगर मैं नहीं रोई, मुझे रोना hi नहीं आया, क्यूंकि शायद मुझको तो अच्छा लगा था जिस तरह से रघु ने मेरे साथ किया था. तो मैं ने पापा को संभाला, चुप कराया और कहा के उस्सको माफ़ी मांगने की कोई ज़रुरत नहीं क्यों के उस में उस्का कोई दोष नहीं था, सब मेरे मर्ज़ी से हुआ था.

और उस रात को पापा ने बहोत ज़्यादा पिया, शाम को रघु के यहाँ फिर से पिने गया था और बहोत लेट वापस आये थे वो भी रघु खुद उस्सको थाम कर घर लाया था. रघु को घर के अंदर देख कर मेरे अंदर कुछ हुआ था, मेरे रौंदते खड़े हो गए थे और वो मुझको इशारे कर रहे था अपने लुंड पर हाथ को फरते हुए…. मेरे दिल के तार बजने लगे the…mujhko कुछ हो रहा था, पापा बिल्कुल बेहोश जैसे थे. रघु ने पापा को उसस्के कमरे के अंदर सुला दिया और मुझको पाकर के मेरे कमरे में लगाया और मैं आराम से चली गयी…..

वहां उस्सने जो मेरे साथ किया उस्का मज़ा कुछ और hi था.. वो बड़े जोश में करता है, बहोत पैशन है उस में सेक्स को लेकर और उस्सने मुझको पीछे लिया उस रात को, बड़ा ज़बर्दत मज़ा किया था उस रात को उस्सने मेरे साथ…. शुरू तो आहिस्ते से किया, मुझको बिल्कुल नंगी किया, मेरे बूब्स को चूसा, मेरे पुरे जिस्म को छठा, चूसा उस्सने, खुद बिल्कुल नंगा हो गया, उस्का लुंड पापा से ज़्यादा मोटा था, कुछ आप के इस मोठे शैतान जैसा है उस्का भी, मगर शायद आप की थोड़ा ज़्यादा मोटा है……”

जब संजना ने यह part कहा तो चावला साहब अपने लुंड को संजना के मुंह के तरफ किया तो संजना ने अपने मुंह में लेकर चावला साहब को चुस्सने लगी उनके चेहरे में उनकी ख़ुशी को महसूस करते हुए…..

मगर कुछ hi देर बाद चावला साहब का फिरसे नरम होने लगा, तो उस्सने अपने लिंग को संजना मुंह से निकला और हाथ में थमते हुए कहा, “जारी रख इस्को सहलाते हुए बोल रघु ने किआ किया उस रत को तेरे साथ आआह्ह्ह्ह!”

तो संजना ने बताया, “उस्सने मुझे निचे इस तरह से छठा और चूसा जैसे पापा ने कभी भी नहीं किया था, वो मेरे पंखुरियों के बीच जीब चला रहा था और उसस्के अंदर मेरे योनि की चढ़ में जीब घुसने की कोशिश में लगा हुआ था अपने जीब से hi… मैं सिसक जाती थी उस्सको रोकते हुए और वो बोलता, ‘अंदर लेने का तेरा मैं नहीं है किआ ऋ?’ मैं तड़पती हुई आवाज़ में उस्सको मन करती रहती….. और उस्सको अंदर डालने को इतना मैं था के मुझे खुद उस से कहना पड़ा के अगर अंदर डालना hi चाहता है तो पीछे डाले!! यह सुनकर उस्सकी ख़ुशी का इन्तहा नाह था और उस्सने मुझको पथ के बल बिस्तर पर घुमा के वो अंदर घुसाया के मैं चिल्ला उठी थी और इतना कसके ढके दिए थे मेरे ासशोले के अंदर के लगा था के फाड़ डालेगा मुझको वहां.. बहोत एन्जॉय किया था उस्सने मेरे साथ….. दो बार किया था उस्सने सुबह के 3 बजे तक मेरे बिस्तर पर था और बहोत खुश होकर सुबह के सादे तीन बजे वापस गया था…..

वो पहला ग़ैर मर्द था जिसस्ने मेरे बीएड पर मेरे साथ रात गुज़ारे थे साहब, अगर आप को बुरा लगे तो मुझे माफ़ करना मुझे आप को सच बताना था सो बता दिया….”

चावला साहब ने आराम से सब सुना और कहा, “और बाकी के 7 लोगों के साथ कब और कैसे हुआ वो सब भी तो बताना है तुझे अभी!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
ी रोट थी तवो उपदटेस इन 50 मिनट्स ओनली फॉर यू डिअर रीडर्स ऑफ़ थिस स्टोरी

अपडेट 87 संजना कॉन्टिनुएस

संजना उनके लिंग को हाथ में लिए सहलाती जा रही थी और उंनसे कहा, “देखो रघु के बारे में बताया तो आप का कितना मोटा हो गया यह शैतान, हम्म्म किआ अब ये तैयार है?”

चावला साहब ने कहा, “थोड़ा और सुनाओ नाह तब तक ज़रूर तैयार हो जाएगा अभी रेडी नहीं हुआ है यह”

तो संजना ने कहा, “okay तो उस दिन के बारे में बताऊँ जिस दिन आप दरवाज़ा खटखटा रहे थे और मैं ने लेट आकर खोला था?”

चावला: “कौन था अंदर? रघु hi?”

संजना ने हां में सर हिलाया तो चावला साहब ने पूछा, “तो वो कैसे निकला था पीछे से? बाहर जाने का तो रास्ता नहीं है उस्सको तो घरके अंदर से होकर जाना था?”

संजना ने कहा, “मैं ने उस्सको बोल दिया था के टॉयलेट में छुपे रहे मगर वो पीछे चला गया था मैं ने उस्सको समझाया था के जब मैं आप को बाहों में भरके किश करूँ तब वो घर के अंदर से hi मैं दूर से आहिस्ते से निकल जाए और उस्सने वही किया था, मैं ने आप को उस तरफ आप के पीठ करके किश कर रही थी और उस्सको निकलने का इशारा किया था, ी ऍम सॉरी!”

चावला साहब ने कहा, “इस मैकन सॉरी क्यों कहना है तुमने अच्छी तरह से अपना बचाव किया था इतस okay माय डिअर. मुझे पता भी नहीं चला था के कोई अंदर से बाहर निकला घर से सो यू वेरे सक्सेसफुल… मतलब तुम डिफिकल्ट सीटुएशन्स को अच्छी तरह से हैंडल कर सकती हो, मुझे तो ख़ुशी है के तुम इतना होशियार हो और संभाल लिया उतना डिफिकल्ट सिचुएशन उस दिन!”

फिर चावला साहब ने कहा, “मुझे अब उन् 7 में से किसी एक दूसरे के बारे में बताओ, वो kau,n है और कैसे स्टार्ट हुआ उसस्के साथ तेरा अफेयर?”

तो संजना ने कहा, “okay सुनती हूँ, हाँ तो वो मुख्या चाचा का भतीजा याद है आप को मोटरसाइकिल वाला जो जानवर पालता है और बहोत ज़मीन है उसस्के पूर्वजों के?”

चावला साहब ने कहा, “हाँ तेरे पापा का साथी शराबी है जो हाँ याद है तो वो तेरा दूसरा एनकाउंटर था? हाहाहा सब शराबी कबाबी hi मिलता है तुझे किआ, ok ok बोल कैसे उस से पहली बार किया सब डिटेल में बता मुझे ी ऍम एक्ससिटेड तो क्नोव स्वीटहार्ट.”

संजना ने उनके लिंग को चूमा और छठा फिर बोलना शुरू किया…..

“जीन डिवॉन मैं कॉलेज जाती थी और वो मोटरसाइकिल पर मुझसे फ़्लर्ट करता रहता था, तो वो अकेला था जो मोटरसाइकिल पर मुझको शाम को स्कूल छूटने के बाद भी कॉलेज के पास शहर में अत था. गाओं से और कोई भी कभी नहीं अत थे मुझसे मिलने कॉलेज के पास सिर्फ वो अत था. हाँ सुबह को बस में मरे साथ कभी कभी कुछ गाओं के लड़के जाते थे मगर शाम के 3 बजे सिर्फ एक वही अत था मुझको देखने और मिलने और फ़्लर्ट करने…. उस्का नाम अजीब है, उस्सको चुंगल बुलाते हैं पता नहीं क्यों, उस्का असली नाम तो पता नहीं मुझे. हाँ तो वो जब मोटरसाइकिल पर अत तो मेरे सहेली लोग मुझको चेररते थे के ‘देख तेरा आशिक आगया, जा उसस्के फटफटिया पर तुझको घुमाएगा और तेरा दबाएगा….’ मगर मैं उस से सिर्फ बात करती थी क्यूंकि गाओं वाला था. बस कोई 15 मिनट के वेट करने के बाद मिलता था हमको तो उन् 15 मिनट तक वो मुझसे चेरर चार किया करता था, और वो साला मेरे एक दोस्त पर भी डोरे डालता था, मगर मुझसे ज़्यादा इंटरेस्टेड था… 1 महीने तक लगातार आया वो मुझसे मिलने शाम को और कहा के किसी को गाओं में पता मत चलने देना, नाह रघु को नाह बाकी के दोस्तों को… मुजेहः लगा था के उस्का शर्त लगा था उन् सब से के वो मुझको सब से पहले पा लेगा, ऐसा मैं सोचती थी.

अब वो हर बार मुझसे कहता के उसस्के साथ उसस्के m.cycle पर वापस चलूँ बुसस में नहीं. मैं इंकार करती हर बार , मेरे सहेलियां भी मुझको उसस्के साथ जाने को कहते मगर मैं नहीं जाती थी.

फिर रघु ने जब मेरे साथ कर लिया तब उसस्के एक महीने बाद चुंगल तो बराबर अत रहा मुझसे मिलने शाम को, मगर उस्सने तब मुझको छूना शुरू कर दिया था मेरे दोस्तों के सामने, हर जगह छूटा था, मेरे जांघ पर हाथ फरता तो कभी मेरे नितम्बों पर. मेरे सहेलियां कहती मुझको उसस्के साथ जाकर मज़ा करना चाहिए… मुझे तो सब पता था के मर्द लोग किआ करते हैं और कैसे करते हैं क्यूंकि मैं तो एक्सपेरिएंस्ड थी पापा से फिर अब रघु से, तो मुझे लगा के कहीं रघु ने उस चुंगल को कुछ बता तो नहीं दिया है?! तो यह जाने के लिए एक शाम को मैं उस के साथ गयी उसस्के फटफटिया पर. पहले मैं ने उस से ेपूछा के किधर चैलेंज, मैं उस पहाड़ी इलाके के तरफ नहीं जाना चाहती थी, और वो तो चारों तरफ मोटरसाइकिल पर घूमता रहता है तो उस्सको पता था किधर जाना है… मेरा यूनिफार्म तो बहोत छोटी थी तो उसस्के m.cycle पर बैठने से मेरे पुरे जांघें दिखने लगे और मेरे सहेलियों ने मुझे चिढ़ाया “hi सेक्सी” कहकर

वो मुझे किसी और रास्ते में लगाया और उस तरफ कोई भी नहीं दिख रहे थे, रास्ता बिल्कुल सुनसान था और दोनों तरफ जंगल ज्सीएस था… जाते वक़्त उस्का हाथ बार बार मेरे जाँघों को फेरर रहे the…ussne मुझको उसस्के पीठ पर चिपक कर बैठने को कहा टेक मेरे बूब्स उसस्के पीठ पर दबे और वो फील कर सके, मगर मैं ने दूरी रखे हुए थे नहीं चिपकी थी मैं उसस्के पीठ पर….

उस्सने एक कच्चे रास्ते में m.cycle घुमाया और थोड़ा अंदर जा कर रुका…. और मुझे उतरने को कहा और मेरा कॉलेज बैग को m.cycle पर तंग दिया और मेरा हाथ पाकर के एक झाडी के पीछे लगाया. मैं ने जाते वक़्त उस से पूछा, ‘किधर लेजा रहे हो मुझे, मुझे तुमसे एक बात पूछनी है इसी लिए तेरे साथ आयी हूँ….’

झाड़ के पास आकर रुका और बोलै, ‘किआ पूछना है तुझे मुझे तो तुझसे बहोत प्यार करनी है?’

मैं ने पूछा, ‘सच बता, रघु ने तुमसे किआ कहा मेरे बारे में?’

उस्सने कहा, ‘रघु ने? कुछ भी तो नहीं बुसस तुम्हारे बारे में बातें करते हैं हम सब और हम सब मिलकर कहते हैं के तुझ जैसे इस गाओं में कोई भी नहीं , हम सोचते हैं तू कैसे इस गाओं में पैदा हो गयी तुमको तो किसी राजा महाराजा कैग हर पैदा होना चाहिए थे, तू तो बिल्कुल मस्त हीरोइन टाइप है, एकदम मस्त मॉडल दिखती है, यह तेरा गोरा रंग, यह तेरा मस्त फिगर, तेरी मुस्कराहट, तेरी आवाज़, यह तेरी नशीले ेंखें तुझ में वो सब है जो किसी को भी दीवाना बना दे और कोई भी तुझको अपनाना चाहे…. क्यों तुम्हें किआ लगा किआ कहा होगा रघु ने मुझे तेरे बारे में?’

जब उस्सने यह सब कहा तो मैं बिल्कुल छुप हो गयीं और समझ गयी के रघु ने उस्सको कुछ भी नहीं बताया…. और वो अचानक से मेरे सामने घुटनों के बल आगया और मेरे कमर के और अपने बाहों फैलाके मुझको जाकर लिया और मेरे जाघों को चूमते हुए कहा, ‘ख़ास कर तेरी यह जांघें जो तुझको बेहद hi सेक्सी दिखाती है सिर्फ तेरे साथ सोने को मैं करता है तुझको साफ़ साफ़ लव्ज़ों में बोलूं तो तुझे छोड़ने को मैं करता हैउ, तू बहोत hi मस्त सेक्सी बेब है रे संजना तेरी यह छोटी सी यूनिफार्म में तू अपने जाँघों को हमको दिखा कर दीवाना बनती है तू; तुझको ख्यालों में लाकर हम सब मुठ मारते हैं हर रोज़, हर दिन , हर shaam…ab तो तू मेरे बाहों में है आज तो लुंड डायरेक्ट तेरे में डालूंगा main…kyun बोल नाह मजा करेगी मेरे साथ तू?’

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 


अपडेट 88 संजना विथ चुंगल

मैं अपने हाथों को उसस्के सर पर रख कर सपोर्ट की तरह खुद को गिरने से बचा रही थी और वो मेरे जाँघों को चूमता और अपने जीब से चाटता जा रहा था….. क्यूंकि उस्सने मेरे इतने तारीफ़ किया और क्यूंकि मैं ये सब पापा और रघु के साथ कर चुकी थी तो लगा के मुझे उस्सको एक चांस दे देना चाहिए क्यूंकि वो करीबन 2 महीनों से मेरे पीछे लगा हुआ था, मैं ने सोचा के एक बार चांस दे दूंगी तो मेरे पीछे आना बांध कर देगा…. तो मैं ने खुद को उसस्के हवाले किया मगर ऐसा बेहवे करती थी के मुझको वो सब पसंद नहीं है…

उस से मैं ने कहा, ‘नहीं चोर्रो मुझे मैं शोर मचाउंगी, किआ कर रहे हो यह ठीक नहीं है’

उस ने कहा, ‘कोई तेरी आवाज़ नहीं सुनेगा यहाँ यह मेरा अड्डा है यहाँ सिर्फ पेयर पौधे, झाड़ और परिंदे हैं यह सब तो तुझको देख कर सब खुद पागल हो गए हैं और तेरी बदन को देखना चाहते हैं चल यूनिफार्म उतार अब और अपनी अंदर कितना गोरापन छुपाती है दिखा तो, तुझको कच्चा चबा जाने को मैं कर रहा है ri…ahaha!!’

मैं उस के बाहों में कैद थी मगर अंदर अंदर मुझे अच्छा लगने लगा था जिस तरह से वो प्यार से मेरे जाँघों को चुम और चाट रहा था, धीरे धीरे वो ऊपर बढ़ता गया और उसस्के होंठ मेरे पंतय पर पड़े तो मैं सिहर सी गयी और उस्सने पंतय पर जीब चलाया और मैं बेखुद हो गयी और खुद उस्सको थाम लिया कसके, उसस्के समझ में आगया के मैं तैयार थी तो उस्सने मेरे पंतय को निचे करना शुरू किया, थोड़ा सा hi निचे किया था के मैं ने उसस्के जीब की गर्मी अपनी योनि पर फील किया और खुद अपने टांगों को अलग किया फैला कर मगर खड़े hi पोजीशन में…..

उस्का जीब मेरे योनि की पंखुरियों को खोलके चाटते जा रहा था और उस्सको बेशक पता चल गया के मैं गीली हो गयी थी और कहा के, ‘अरे वह तू तो बिल्कुल hi तैयार है, टब hi उत्तेजित हो गयी नाह मेरे चाटने से हम्म बता, मज़ा ारः है नाह तुझे भी, चल तुझको खुश करता हूँ इस पंतय को बिल्कुल निकाल देता हूँ अब और चल उस घांस पर लेट कर करते हैं…..’

मुझे तोडा डर लग रहा था के पिछली बार की तरह कोई हम को देख नाह ले, तो मैं ने उस से कहा, ‘अगर कोई यहाँ आगया और हमको इस हालत में देख लिया तो किआ होगा? मुझे डर लग रहा है…..’

उस्सने कहा, ‘आरी मैं ने कहा नाह के यह मेरा अड्डा है यहाँ कोई भी नहीं अत मैं ने सब सोच समझ कर प्लान किया हुआ है, बहोत दिनों से ऐसी जगह की तलाश करने के बाद यह जगह पाया है मैं ने एक महीने से अत हों यहाँ सत्ता पिने कोई भी नहीं आया इधर आज तक भी तो कौन आएगा अब, तू फ़िक्र मत कर, मस्त होकर एन्जॉय कर मेरे साथ मेरी रानी!! इस गाओं की महारानी है ऋ तू तो!! और मुझ गंगू तेली को तू मिल गयी हाय रे मेरी किस्मत हाहाहाहा’ … बहोत hi खुश हो रहा था वो, और उस्सकी तारीफ़ मुझको आकर्षित किये जा रहा था, मैं खुद को मैं में एक रानी hi सोचने लगी और जैसे वो एक नौकर अपने रानी को नंगा करने जा रहा था ऐसा सोचकर मैं बहोत hi उत्तेजित हो रही थी और उस्सको खुश करने के लिए तैयार थी….

तो उस्सने मुझे वही घांस पर लेटाया और कहा मेरी रानी एक लुंड देखा है कभी तुमने? यह लड़कियों को बहोत पसंद है चल दिखता हूँ तुझे अपने कोमल हाथों में पाकर इस्को और सेहला नाह …..’ उस्सने सोचा मैं पहली बार एक लिंग को देख रही हूँ अपने लौड़े को बाहर निकला उस्सने जो तन्ना हुआ था और हे बड़ा लम्बा और मोटा था, जिस्सको देख कर मेरे मुंह में पानी आगयी जैसे कहते इमली को देख कर आती है….

उस्सने मेरे मुंह के पास अपने लुंड को लगाया और मैं ने खुद अपने हाथ में लिया तो वो सिहर गया और उफ्फ्फ्फ़ कहकर कहा, ‘इस्को प्यार करो नाह रानी, चूमो चाटो इस्को तब अपने मुंह में लेकर चुसो मेरी रानी ाहः’

उस पे तरस ारः था मुझे जिस तरह वो तड़पते हुए मुझे वो सब कह रहा था, मैं तो यह सब करने में माहिर थी मगर उस्सने कभी किसी लड़की को नहीं छुवा था यह मुझे उस्सको छूटे hi पता चल गया और पूछा भी तो उस्सने कहा के उस्का लुंड एक वर्जिन लुंड है आज तक किसी भी महिला ने नहीं छुवा उस्सको उसस्के हाथ के सिवा…. तो मैं उस्सको वो ख़ुशी देने के लिए तैयार हो गयी थी

उसस्के लुंड को सच में मैं ने प्यार किया क्यूंकि वो नया माल था हीहीहीहीहीही, फिर उस्सको चूमा, नज़ाकत से खेला उसस्के साथ फिर छठा उसस्के चेहरे में उस्सको तड़पते हुए देख कर लुंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया चुस्सने के लिए और वो पागलों की तरह चेहरा बनाने लगा था हीहीहीहीही…. मुझे उस्सको उस हालत में देख कर बड़ा मज़ा ारः था…. मैं अपने मुंह में उसस्के लौंद को अंदर बाहर करने लगी तो वो चिल्लाया , ‘अरे आहिस्ते आहिस्ते नहीं तो अभी झाड़ जाऊंगा और एन्जॉय नहीं कर पाउँगा तुझको, अभी तो तेरे जिस्म को देखना बाकी है ठहर जा रानी ठहर जा…..

तब उस्सने मेरे ड्रेस को निकला, और ब्लाउज था अंदर तब एक एक करके उस्सने मेरे ब्लाउज के बटन्स खोले हौले हौले मेरे छाती के रंग को धीरे धीरे और सफ़ेद होते देखते हुए और जल्दी से ब्रा को निकल दिया और अपने मुंह में मेरे बूब लेकर चुस्सने लगा आहिस्ते आहिस्ते बड़े प्यार से सहलाते hue….uss वक़्त उस्का लुंड मेरे जाँघों को छह रहा था और मुझको गुदगुदी हो रही थी तो मैं ने उस से कहा लुंड को हटाने ko…magar उस्सने दबा दिया लुंड को मेरे जाँघों पर तब गुदगुदी होना बांध हुआ…..

मेरे बूब्स को चुस्सने के बाद वो धीरे धीरे निचे चलता गया चाटते चूस्ते हुए और मेरे योनि को फिरसे चूसा और तैयार हुआ अंदर डालने के लिए मगर मैं झट से उठ बैठी यह कहते हुए के मैं वर्जिन हूँ वो अंदर नहीं दाल सकता…. वो बहोत बिनती करता रहा के उस्सको मेरे योनि के अंदर hi डालना है मगर मैं ने मन किया और कहा के ऊपर ऊपर hi रागढ कर खुश होए, या तो अपने मुंह से चुस्सकार उस्सको झाड़ा सकती हूँ यह कहा….

तो उस्सने मेरे योनि के ऊपर अपने लुंड को रगड़ना शुरू किया मेरे जीब को चूस्ते हुए और बहोत hi जल्द कोई 2 या 3 मिनट में झाड़ गया मेरे योनि और पथ के ऊपर मुझे अपने पानी से गिला करके…..

उसस्के बाद कोई 5 मिनट तक वो मुझे अपने बाहों में वैसे hi नंगा लिए रहा और मैं ने कहा अब चलना है तो मैं उठ कर अपने कपडे पेहेन्ने लगी मगर वो और करना चाहता था तो मैं ने इंकार किया तो उस्सने कहा फिर कब मिलेंगे मैं ने कहा बाद में और हम उस जगह से जल्दी से निकले, रास्ते में जाते वक़्त भी उस्का हाथ मेरे जाँघों पर फरता raha…main ने उस्सको गाओं से थोड़ा दूर मुझको उतारने को कहाँ जहाँ बस पैसेंजर को उतारते हैं और मैं चल कर पैदल घर गयी…..

शुक्र है किसी ने भी नहीं देखा और मैं साफल्य घर आगयी बग़ैर किसी के तोके टेक हुए…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 89 चावला साहब रिटर्न्स होम

संजना ने जब चुंगल के बारे में बता दिया चावला साहब को तब तक चावला साहब का बिल्कुल खड़ा हो चूका था, और लुंड संजना के हाट में था तो खुद संजना ने बिना कहे अपने मुंह में लिया चुस्सने को, पहले अपने जीब फेरर कर लुंड के ऊपरी हिस्से पर, जैसे hi मुंह के अंदर लिया के चावला साहब का फ़ोन बजा, उन्हों ने जेब से फ़ोन निकला तो देखा के सान्वी का फ़ोन है, तो झट से अपने लुंड को पंत के अंदर किया और फ़ोन लेकर घर के बाहर निकल गया संजना से यह कहकर के ऑफिस से ज़रूरी फ़ोन था.

सान्वी ने बहोत प्यार से कहा, “hello जी, अगर आप का उसस्के साथ हो गया हो तो हमें भी थोड़ा याद कर लेना जी.”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए उस्सको जवाब दिया, “किआ होगया मेरा? साफ़ साफ़ बोलो नाह?” सान्वी ने बड़े कोमलता से कहा, “ोफो तो जनाब को नहीं पता मैं किश चीज़ के बारे में बोल रही हूँ हम्म्म किआ बात है जी, मस्ती ख़तम नहीं हुई अभी तक अपनी चाहती के साथ? मुझ ग़रीब को भी कुछ वक़्त दे दिया कीजिये नाह हुज़ूर!”

चावला साहब ने कहा, “अरे तुम्हारे साथ तो था मैं आधे दिन!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो किआ आधा दिन है मेरी वक़्त की कीमत जी? बुसस इतना hi जी यह तो बहोत नाइंसाफी हुई मेरे साथ जी!”

चावला साहब धीरे धीरे बात कर रहे थे तो संजना ने सोचा के यह पहली बार है के चावला साहब उस से छुपा कर बात कर रहे हैं यह संजना को अजीब लगा और सोचने लगी के किश से बातें कर रहे है जो इतना आहिस्ता आहिस्ता बात कर रहे हैं और बाहर क्यों गए बात करने के लिए घर के अंदर से भी तो बात कर सकते थे….

संजना ने बाहर जाकर सुन्ना चाहा मगर फिर सोचा के “प्राइवेट बात कर रहे होंगे गोली मारो मुझे किआ!”

उधर सान्वी ने कहा, “कब तक आप का दीदार कर पाऊँगी बोल दो जी नज़रें बिठाये बैठी हूँ कब से आप की याद में, रहा नाह गया इस लिए फ़ोन कर दिया आप की नवाज़िश, करम के आप ने फ़ोन उठा लिया वार्ना हम तो कई दफा हज़ार बार फ़ोन करते थक जाती थी मगर आप उठाते hi नहीं थे पहले हुज़ूर.!”

सान्वी की आवाज़ में एक कशिश थी जो चावला साहब को अपने तरफ जैसे खिंच रहे थे, तो उन्हों ने सान्वी से कहा, “बुसस निकल रहा हूँ दो घंटे में तुम्हारे सामने पेश हो जाऊंगा, अब खुश हुई आप मोहतरमाह?”

सान्वी ने बहोत खुश होते हुए कहा, “अहा मैं मर जवान के हुज़ूर ने मेरी दिल की तड़प और आह सुन ली. बुसस निकल आइये आप जल्दी से हम तड़प रहे हैं आप के दीदार के लिए.”

अब जैसे दिन को सान्वी को अकेली चोरर कर यहाँ संजना के पास आगये थे चावला साहब अब उसी तरह संजना को चोरर के वापस जा रहे थे सान्वी के पास. संजना तड़प उठी उंनसे पूछते हुए के “किआ हुआ क्यों अचानक जा रहे हो आप, आप तो रात तक रहने वाले थे मेरे साथ, क्यों जा रहे हो बोलिये नाह?”

चावला साहब के दिमाग़ में उस वक़्त सिर्फ सान्वी की आवाज़ गूंझ रही थी और उस्सको जल्दी था सान्वी को अपने बाहों में कसके भरने को, तो संजना से कहा के ऑफिस से बहोत ज़रूरी कॉल आया था उस्सको तुरंत ऑफिस जाना होगा.

जब चावला साहब निकले बाहर जाने के लिए तो संजना रो पड़ी, मोठे मोठे ेंसू बहने लगे उसस्के गालों पर. चावला साहब दिल के बहोत नरम थे तो उस से देखा नाह गया तो संजना को बाहों में भरके उस्सको छुप कराया समझाते हुए के ऑफिस का काम बहोत ज़रूरी होता है करोड़ों का नुक्सान हो सकता है अगर वो नहीं गया तो. संजना ने सिसकते हुए कहा, "अभी सिर्फ 3.30 बजे हैं, आप इतनी सवेरे कभी नहीं वापस जाते हो, मैं खुश थी के आप मेरे साथ देर रात तक रहोगे, हम साथ डिनर करेंगे और प्यार करेंगे….. पर आप जाने लगे मुझको अब बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा, बोर हो जाउंगी इतने घंटा बाकी हैं रात होने में!!”

चावला साहब ने कहा, “तुमको अभी मुझे बाकी के 6 लोगों के साथ तुम्हारा सेक्सुअल एनकाउंटर बताना है मत भूलना कल आऊंगा तो सब ठीक से बताना okay, और कल ड्राइविंग के लिए भी जाना होगा आज तो बंक कर दिया कल नहीं, bye स्वीटहार्ट, लव यू मुउआअह….” संजना को किश किया और चावला साहब निकल पड़े वापस सान्वी के पास जाने के लिए.

ड्राइव करते हुए चावला साहब अब सिर्फ सान्वी को सोचते हुए ड्राइव करते जा रहे थे. उनके दिमाग़ में सान्वी की जिस्म, उस्सकी जिस्म किम खुशभु, उस्सकी प्यार भरी आवाज़, उस्सकी सुर्ख लबों की नरमी, उस्सकी जिस्म की गर्मी सब महसूस करते हुए ड्राइव कर रहे थे साहब. वो सोच रहे थे के 5.30 को घर पहुँच जाएगा और तब से रात 1 बजे तक सान्वी के साथ अच्छा वक़्त गुज़रेगा, खूब प्यार करेंगे दोनों, और उनको एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हो रहे थे एक सुकून जैसा फील हो रहा था दिल की गहराई में. कई बार लम्बी सांसें लेते हुए ड्राइव करते आगे बढ़ रहे थे तेज़ रफ़्तार से चावला साहब.

आधा रास्ता गुजरने के बाद, चावला साहब ने फम रेडियो ों किया तो तलत अज़ीज़ की यह ग़ज़ल आ रहा था जिस्सको साथ साथ चावला साहब ने गाते हुए रास्ता कटा,

बहोत हसीं है मेरा दिल रुबा नाह हो जाए

बहोत हसीं है मेरा दिल रुबा नाह हो जाए

मेरे नज़र में वो काफिर खुदा नाह हो जाए

बहोत हसीं है मेरा दिल रुबा नाह हो जाए

खुश लग रहे थे चावला साहब और जवान दिखने लगे थे और भी ज़्यादा यूँ गुनगुनाते हुए, मुस्कुरा रहे थे, सान्वी की अदाओं को सोच कर उस्सकी आवाज़ को सोच कर और उस्सकी उस ग़ुस्से को सोच कर जब उस्सने आग भड़का दिया था कपड़ों में, यह सब सोखकर चावला साहब हंससने लगे और यूँही सफर काट गयी और वो अपने आलिशान महल जैसा घर के पास एते hi हॉर्न किया ज़ोर से सान्वी को आगाह करने के लिए के वो आगये…. सान्वी उसी वक़्त घडी देख रही थी के दो घंटे हुए के नहीं और उनकी कार की हॉर्न को सुनकर सान्वी का दिल ने जैसे एक बीट मिस किया और दौड़ती हुई गेट के पास आयी, और रिमोट से चावला साहब गेट आलरेडी ओपन कर चुके थे, तो देखा सान्वी गेट तक आगयी है उनको रिसीव करने के लिए, उस्सकी कमर पर चावला साहब की नज़रें पड़े, फिर गेट के अंदर दाखिल होते hi चावला साहब और सान्वी के नज़रें मिले, सान्वी की मुस्कराहट कुछ शर्मीली कुछ हाय में डूबी, थोड़ा हल्का तो थोड़ा गहरा….. सान्वी का जी कर रहा था के झपक के चावला साहब को बाहों में भर ले उसी पल को, मगर वो गेराज के अंदर गए कार को रखने के लिए तब सान्वी चल कर उनके पास गयी गेराज के अंदर और जैसे चावला साहब कार से निकले सान्वी ने उनको अपने बाहों में बहोत ज़ोर से भरके अपने सीने पर दबाते हुए उनके गर्दन पर अपने टिप तोए पर खड़े होकर उनको चुम्मा…. चावला साहब ने वही किया, उनको झुकना पड़ा सान्वी को बाहों में भरने के लिए तो वो झुक कर सान्वी को अपने बाहों में भर लिया और उन्हों ने तो सीधा सान्वी के मुंह को अपने मुंह में लिया, दोनों ने ेंख मुंढे हुए एक दूसरे को किश करते हुए एक दूसरी दुन्या में खो गए थे… गेराज के अंदर से घर में दाखिल होने का एक दरवाज़ा था, बल्कि दरवाज़ा किचन में ओपन होता है, दोनों किश में खोये हुए थे के उस दरवाज़े के पास कड़ी दीप्ति दोनों को शुरू से देख रहे थे, वो देखती रही , देखती रही के कब वो दोनों किश करने से रुके तो वो कुछ कहे मगर इन् दोनों का किश तो ख़तम hi नहीं हो रहा था………..

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
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