Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 2 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 10 संजना गोज फॉर ा ड्राइव विथ चावला साहिब

और तुरंत चावला साहिब सनजना का हाथ थामे बाहर निकले अपने 4क्ष4 के तरफ जाते हुए. क्यूंकि बारिश हुए थे वहां से सभी लोग चले गए थे, कोई भाई नज़र नहीं आया और दोनों कार के अंदर बैठे. संजना ऑफ़ कोर्स आगे hi बैठी चावला साहिब के बगल में और उस्सकी वो ब्लैक ड्रेस और ऊपर उठ गयी जिस से उस्सकी जांघें और भी दिखने को मिला चावला साहिब को. (ड्रेस की फोटो अपडेट 5 में देखलो) तो चावला साहिब ड्राइव करते हुए अपने एक हाथ को संजना के जाँघों पर रखा करेस करते हुए और संजना ने मन नहीं किया. अपने होंठ को दांतों में दबाये आगे देख रही थी हलकी सी मुस्कान के साथ. फिर एक नटखटी आवाज़ में संजना बोली, “हे मिस्टर, अपने होने वाली बहु के जाँघों पर हाथ फेरर रहे हो आप? हीहीहीही” तो चावला साहिब बहोत खुश दिखाई दिए और बाएं तरफ झुक कर संजना के लिप्स पर किश किया और कहा, “यू अरे जस्ट ान ादोराबले डार्लिंग, तुम कैसे सिचुएशन से समझौता कर लेती हो यह मुझको बहोत पसंद है. मूवएह”

कच्चे रास्ते से गुज़रते हुए एक सुनसान पहाड़ी जगह पर चावला साहिब ने गाड़ी रोका और गाड़ी से बाहर निकलते हुए संजना को पीछे के सीट पर इन्विते किया. संजना कार से उत्तरी और चरों तरफ देखते हुए कहा, “अगर कोई कहीं से हमको देख रहा हो तो?”

चावला साहिब ने चरों तरफ देखा और कहा, “अरे अभी अभी बारिश हुई है, देखो इस जगह को, लगता है अँधेरा होने वाला है हालां के अभी सिर्फ 4 बजे हैं, इस वक़्त ऐसी जगह पर कौन आएगा भला?” और संजना बोली, “इस जगह पर लोग आते हैं मुझको पता है, कोई भी दिख सकते हैं अचानक, और हम दोनों को कार के पीछे वाले सीट पर बैठे देख लिया तो किआ सोचेंगे? सब गर्बर हो जाएगा, बात पुरे गाओं में फेल जाएगी… सोचिये तो ज़रा, शुरू होने से पहले सब कुछ ख़तम हो जाएगा!”

तो वहीँ दोनों कार के एक तरफ खड़े हुए बात कर रहे थे एक कार के लेफ्ट में एक राइट में पीछे वाले दूर के पास और दूर खोलने hi वाले थे मगर बात किये जा राजे थे अंदर घुस्सने से पहले. चावला साहिब ने संजना से कहा, “बताओ तुम ने क्यों झट से कह दिया के मैं अपने फॅमिली को लेकर एवं तुम्हारे यहाँ? तुमने तो सब गड़बड़ कर दिए, जब तुम्हारे पापा ने पूछा के किआ किया जाए तब तो मैं हमारे बारे में सोच रहा था और तुमने तो सब खराब कर दिए, अब तो मजबूरन तुमको मेरे बेटे से सगाई करनी पड़ेगी!” तो सनजन एक हाथ को कार पर फरते हुए जैसे उस्सको पांच रही हो और मुस्कुराते हुए कहा, “पागल हो आप? आप किआ सोच रहे हो की आप मेरे पापा से अपने बारे में बात करोगे? किआ आप मुझको देखने ए हो यह कहते आप मेरे पापा से? तुरंत आप को खली हाथ वापस लौटना परता तब तो!”

तो चावला साहिब बोले, “अरे नहीं मगर रुमको इतना किश करने के बाद, और यह जान्ने के बाद के तुम कितनी अच्छी किसर हो तुमको सिर्फ अपने लिए चाहता था, मगर अब तो….!” पहिए संजना ने ‘हीहीहीही’ करते हुए कहा, “आइये अंदर आइये मैं आप को समझाती हूँ!”

और खुद पहले वो अंदर गयी कार के दाएं तरफ से और चावला साहिब भी अंदर गयी बाएं तरफ से. जैसे संजना बैठी चावला साहिब तुरंत उस से सत् कर बैठा और अपने हाथों को डायरेक्ट संजना के जाँघों पर किया और फरने लगा तो संजना उनके हाथों को अपने हाथ में लेते हुए कहा, “ठहरये तो, सुनए मुझे किआ कहना है.” तो वो रुक गए अपने हाथों को संजना के हाथ में किये और कहा, “हाँ तो बोलो!”

तो संजना अपनी मीठी बचपने वाले आवाज़ में बोली, “तो सुनए, किआ अगर आप के बेटे ने मुझे अपनाया तो किआ मैं आप के पास नहीं रहूंगी? आप hi के घर में आउंगी नाह? आप के hi घर में रहूंगी नाह? आप ने मुझको अपने बेटे के लिए पसंद किया है नाह? तो बताइये आप किआ मुझको शेयर करना चाहते हो? क्यों आप ने अपने बेटे की शादी वाली बात मेरे पापा से किये थे पहले दिन? वो तो इसी बात पे राज़ी हुआ नाह की आप की बहु बनूँगी? अब बोल्ये?!”

संजना के यह बातें सुनकर चावला साहिब का लुंड हलचल करने लगा उसस्के पंत के अंदर और जैसे के उस्का हाथ संजना के हाथ में था तो उस्सको खींच के अपने लुंड पर दबाया उसस्के चहरे में प्यार से देखते हुए. संजना ने हाथ अपने तरफ खींचने की कोशिश की मगर बेकार था और संजना ने अपने होने वाले ससुर के लुंड को ेरेक्ट महसूस किया अपने मुलायम कलाई पर, और शर्म से नज़रें झुका लिए उस्सको फील करते हुए और हाथ को नहीं खिंचा….. चावला साहिब का जमके खड़ा हो गया था हालां के पंत के अंदर hi था, उस्का फॉर्म साफ़ दिख रहे थे और संजना ने धीरे धीरे अपनी नज़रों को उस जगह पर किया जहाँ उस्का हाथ था याने के चावला साहिब के लुंड पर….. यह शेयर वाली वर्ड को सुनकर चावला साहिब ने फील किया के ‘अपनी बहु को अपने बेटे के साथ शेयर करूँगा यह संजना ने खुद अपने आप मुझे से पूछा!’ और यह बात उस्सकी दिमाग़ में शोर मचा रहा था उस वक़्त. जिस ऐडा से सनजना ने बात की थी वो सुनने लायक था.

और फिर अचानक संजना ने बाहर देखा चरों तरफ नज़रें फरते हुए और कहा, “अब चलिए यह जगह ठीक नहीं है कोई भी हमको यहाँ देख सकता है.”

चावला साहिब बेक़रार हो रहे थे और इंसिस्ट किया के वहीँ पीछे कार में बैठें! संजना ने कहा, “आप ने पी रखे हैं आप को समझ में नहीं ारः मैं किआ कह रही हूँ, किसी ने देखा तब कहना!” फिर तुरंत चावला साहब संजना को जाकर के किश करने लगा एक भूके जानवर की तरह उस पर टूट पड़ा वो, संजना की ड्रेस को बिल्कुल ऊपर उठाते हुए जिस से उस्सकी पथ तक ड्रेस उठ गया और चावला साहिब का मुंह संजना के जाँघों के बीच उसस्के पैंटी पर फरने लगे…… संजना अब भी बाहर चारों तरफ देख रही थी….. और एक सिसक के साथ गर्दन पीछे करते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “ोफो, मुझे बहोत डर लग रहा है, किसी ने देखा तो किआ होगा, आप नशे में हो, यह बिल्कुल ठीक नहीं है उफ़ माआ!!!”

और तबक तक चावला साहिब का मुंह संजना के पंतय को सूंघ और चाट रहा था और संजना जैसे लेट गयी थी सीट पर, फिर भी बाहर देखे जा रही थी आगे पीछे, दाएं बाएं चरों तरफ के कहीं कोई नाह गुज़रे उधर से.

चावला साहिब ने अपने दो उँगलियों को संजना के पंतय की इलास्टिक पर किये और हलके से उस्सको निचे के तरफ करना चाहा संजना के पथ को चाटते हुए, उस जवान 18 साल की जवान जिस्म को अपने आग़ोश में लेकर चावला साहिब बिल्कुल दीवाना हो रहा था और संजना खुद को संभाल नहीं पा रही थी, थोड़ा सरेंडर भी कर रही थी और थोड़ा डर से इधर उधर देखे जा रही थी. जिस वक़्त चावला साहिब उस्सकी पंतय निचे करने की कोशिश करने लगी तो जल्दी से संजना ने अपने पंतय को ज़ोर से पकड़ा और उफ्फ्फ करते हुए एक डिस्टर्बेद और शर्मिंदा और पतली आवाज़ से कहा, “न्यू नहीं यह नहीं” तो चावला साहिब एक प्यासे भूके ग़रीब की तरह ऊपर संजना को देखते हुए कहा, “मुझे तेरा रस चखना है फ़िक्र मत करो कुछ नहीं करूँगा सिर्फ चखूगा तुमको भी मज़ा आएगा देखना मेरा यकीन कर बेबी!”

संजना अपने आप को संभालते हुए कहा, “हम्म्म नहीं वहां वो गन्दी है, मैं भीगी हुई हूँ वहां, नहीं आप यह मत करो!” तो चावला साहिब ने मुस्कुराते हुए खुश दीखते हुए कहा, “आरी पगली इस्को गन्दी नहीं कहते, यह बिल्कुल गन्दी नहीं उसी रस को तो चखना है मुझे, तुम भी एन्जॉय करोगी यकीन मानों, करने दो नाह प्लीज, थोड़ा सा बस थोड़ा सा निचे करदूँ इस पंतय को फिरर देखना….” और संजना अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुए अपने हाथ को हत्ता लिया तो चावला साहिब ने आराम से धीरे धीरे उस्सकी पंतय को निचे करता गया उस्सकी मुलायम सफ़ेद पथ के निचे वाले हिस्से पर अपना जीब चलाते हुए, जहाँ छोटी छोटी ट्रिम की हुई बाल नज़र आने लगे, और फिर ेंखों को संजना के तरफ देखते हुए पूछा, “शेव करती हो? वैरी गुड, बहोत साफ़ है, बाल अभी अभी उगने लगे हैं शेव के बाद, लगता है कल, परसों hi शेव किया हुआ है….”

चावला साहिब का लाढ़ छू रहा था, और संजना अब तक दांतों में होठों को दबाये हुए चावला साहिब को उस एक्शन को करते हुए देख रही थी चेहरे में लाली के साथ और वो एक गर्मी जैसे महसूस कर रही थी उस वक़्त. थोड़ा जिस्म में थरथराहट भी थी संजना के, अपने टांगों को जैसे फैला कर चावला साहिब को पोजीशन देने लगी थी उसस्के लिए आसानी से पंतय को निचे करने के लिए, और जैसे चावला साहिब ने पंतय को जाँघों तक करने की कोशिश किये तो संजना ने खुद अपनी कमर उठाया टेक उस्सकी पंतय निचे जा सके, यह देख कर चावला साहिब खुश हुए के लड़की अब मान गयी है और उस्का भी मैं कर रहा है शायद.

तो पंतय को तक़रीबन संजना के घुटनों तक रोके चावला साहिब ने और अपने जीब को सीधे उस्सकी छूट पर फेर्रा और उसस्के दोनों जाँघों के बीच अपने हाथ डालते हुए संजना के चेहरे में देखा और अपने जाँघों को खोलने के लिए kaha.Sanjana ने अपने एक ऊँगली को दांत से डाब आये हुए चावला साहिब के चेहरे में देख रही थी और थोड़ा सा अपने जाँघों को दोनों तरफ part किये उस्सने और थोड़ा हांफने भी लगी थी उस्सकी दिल की धड़कन बहोत तेज़ हो रहे थे, चेहरा बिल्कुल लाल टमाटर के जैसा हो गया था, कुछ कांप भी रही थी… तो चावला साहिब का हाथ उन् दो जाँघों के बीच गया और उस्का ऊँगली डायरेक्ट संजना के छूट के बीचो बीच और गीली गीली, नरम नरम महसूस करते हुए चावला साहिब ने संजना का पानी ऊँगली में लेकर अपने जीब पर किया संजना को दिखाते हुए. जिस वक़्त उस्का हाथ संजना के छूट पर गए उस वक़्त संजना ने जैसे एक अंगराई लिया और एक लम्बी सिसकती धीमी आवाज़ में “इस्स्स्सह्ह्हह्ह, ह्म्म्मम्म उफ्फफ्फ्फ़” किया. और जब चावला साहिब अपने ऊँगली को मुंह में दाल कर चूसा तो संजना ने उनको देखते हुए कहा, “chhee!!wo कितनी गन्दी है! आप पागल हो और बिल्कुल नशे में हो इस वक़्त!” पहिए चावला साहिब ने उनके दोनों टांगों और फैलाना चाहा तो संजना ने अपने घुटनों पर पंतय दिखाते हुए कहा, “कितना फैलाऊं और नहीं होगा देखो पंतय बीच में रुका हुआ है, बुसस इतने में काम चला ला आप, मुझे अजीब सी फील हो रही है जल्दी करो, पापा सोच रहे होंगे हम कहाँ हैं इतनी देर तक!”

तो चावला साहिब ने उस्सकी पंतय पूरा निकाल दिया और सीट पर रख दिया. संजना ने कोई रेजिस्टेंस नहीं दिखाई पंतय जब उतारर रही थी तब. तब किआ, चावला साहिब ने उस्सकी दोनों जाँघों को बिल्कुल खोल कर एक तंग को लेफ्ट और एक को राइट में करते हुए अपना मुँह उसस्के बीच में दाल कर अपने जीब को सीधे संजना की छूट चाटने लगा. संजना जैसे होश खोने लगी, उस्का एक हाथ चावला साहिब के सर के बालों को अपने मुठी में जाकर लिया और उस्सकी आवाज़ कुछ ऐसी निकली एक सिसक के साथ, “हम्म्म्म आआआहहह स्स्स्सह्शशशश बस्स्स बुसस कीजिये उफ़ मैं नहीं होल्ड कर सकती हूँ रुकिए आप प्लीीाआज़ी!” और उस्सकी पानी और भी ज़्यादा निकलने लगे जिस्सको चलवा अपने मुंह में कैद करता गया. संजना का जिस्म कांपने लगी और उस्सकी टांगें थर्र थार हिल रहे थे और उस्सकी सेंसें बहोत तेज़ हो गयी थी और एकांत बूंद पसीना उसस्के पेशानी से होकर उसस्के गले तक आ चुके थे पर चावला साहिब ने अपने जीब को धीरे से उस्सकी छूट के चढ़ के अंदर ठुस्सा जिस से संजना चिल्ला उठी और कमर को हिल्ला कर एक तरफ किया. चावला साहिब जैसे उस्सकी छूट को एक गोश्त के टुकड़े की तरह खा रहा था. तो जब संजना ने कमर हिल्ला कर एक तरफ कर लिया अपने जिस्म को, चावला साहिब उस्सको दिलाशा देते हुए kaha,”are क्यों डर रही हो, कुछ भी नहीं है, तुमको ओर्गास्म ारः है बुसस!”

इतने में संजना ने एक खौफ्फ़ भरी आवाज़ में कहा, “वो देखो कोई वहां से इस तरफ ारः है, मैं ने कहा था मगर आप मने नहीं अब किआ करूँ मैं उफ़ मेरी माँ!” और जल्दी से चावला साहिब ने उस्सकी पंतय को खुद संजना के निचे किया और कहा “इस पर बैठ जाओ, ड्रेस को निचे करो और बात करो मुझसे!”

संजना की नज़र उस आते हुए आदमी पर था और कहा, “यह दामोदर चाचा है लकड़ी काटने गया होगा देखो उसस्के हाथ में एक कुल्हाड़ी है”

एक अधेड़ आदमी हाथ में कुलहरि लिए कार के तरफ hi बढ़ रहा था अंदर झाँकने की कोशिश करते हुए. और जब कार के पास आगये तो अंदर देखते हुए कहा, “अरे तुम तो आनंदवा की बिटिया हवा नाह? इधर का करात बाटे इस बखत को तू? और ी आदमी कोण बाटे?” संजना ने कांपते आवाज़ में कहा, “चाचा ी हमार होने बाला ससुर बाटे, हम एकरा पहाड़ दिखाने को लावत बा.” तो उस बूढ़े आदमी ने कहा, “तोहार कपार ठीक नैबा का? अइसन मौसम में पहाड़ दिखाने को लावत बा इस्को? अच्छा तो तोहार साडी के बात लग गेल बा, अच्छा बा अच्छा बा” यह कहकर वो बूढ़ा आगे चलने लगे.”

संजना ने अपने छाती पर हाथ रख कर एक लम्बी सांस चोररटे हुए कहा, “उफ़ मेरी माँ, मेरी तो जान hi निकल गयी जैसे!” फिर जल्दी से अपनी पंतय पेहेनते हुए कहा, “अब जल्दी से वापस चलए मुझे और नहीं रहना यहाँ, आप ने मेरे बात का यकीन नहीं किया नाह, किआ होता अगर वो आदमी 5 मिनट पहले एते तो? वो सब कुछ देख लेता!” तो चावला साहिब ने संजना को जाकर के उसस्के मुंह का रस चुस्सने लगा और खुद संजना भी चावला साहिब का जीब अपने मुंह में लेकर चुस्सने लगी उस्सको बाहों में भरके. तक़रीबन 5 मिनट तक किश जारी रहा और उसस्के बाद संजना ने जल्दी से दरवाज़ा खोला और आगे जाकर बैठ गयी और चावला साहिब बहोत खुश दीखते हुए अपने लुंड को पंत के अंदर सीधा करते हुए आगे आये ड्राइविंग सीट पर. चावला साहिब ने अपने लुंड को संजना के मुंह में डालने को सोच रखा था, मगर सोचा कोई बात नहीं अगली बार hi सही.

दोनों घर वापस आये तो देखा के आनंद नशे में धुत्त सोफे पर खर्राटे मार रहे हैं. तो चावला साहिब ने एक शैतानी मुस्कान से संजना को देखा……………..

तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (2400 वर्ड्स)
 
अपडेट 11 संजना स्टिल इन कंपनी ऑफ़ चावला साहब

अपने बाप को नींद में देख कर जिस तरह से चावला साहिब ने संजना को देखा वो समझ गयी के चावला साहिब खुश हैं क्यूंकि उस्सकी डैड सो रहे हैं तो और मौका मिलेगा उनको. मगर संजना अब चाहती थी के उस्का पिता जागे और बात करे के कब चावला साहिब को आना चाहिए अपने परिवार के साथ. तो उस्सने अपने बाप को हिलाते हुए जगाने की कोशिश किये मगर जल्दी से चावला साहिब ने संजना का हाथ थामते हुए धीरे से कहा, “अरे मेरी जान सोने दो नाह इन्हें, हम उस कमरे में चलते हैं, चलो अपनी बैडरूम दिखाओ मुझे वो तो मैं ने देखा hi नहीं अब तक”

मगर इस बार संजना नहीं मान रही थी और एक नटखटी आवाज़ में कहा, “नाह! अब बुसस आज के लिए काफी हैं आप के लिए, आप बड़े वो हो!” तो चावला साहिब ने हँस्ते हुए कहा, “वो?? किआ वो हूँ मैं? बोलो तो ज़रा? समझाओ मुझे के मैं किआ वो हूँ?”

और संजना दो तीन कदम एक तरफ चलते और मुस्कुराते हुए थोड़ा सा हंसी भी फिर घूमके चावला साहिब के चेहरे में देखते हुए कुछ कहने hi जा रही थी चावला साहिब ने उस्सको अपने बाहों में भर लिया, तो संजना ने अपने सर उसस्के सीने पर सट्टे हुए, और चावला साहिब के कमीज़ की गिरेहबान हाथ में पाकर एक बचपने आवाज़ में कहा, “वो, वो हो आप आप अच्छी तरह से समझ रहे हो के मैं किश ‘वो’ के बारे में बोल रही हूँ - बड़े फ़्लर्ट और आशिक टाइप हो आप. आप को लड़कियों को रिझाना खूब अत है, आप पर तो बहोत सारे मर मिठे होंगे मेरे इलावा और कितने हैं आप के पास ऐसे?” तो चावला साहिब को लगा के संजना को शायद थोड़ा जलन होने लगी यह सोचकर के वो दूसरे लड़कियों से साथ भी यह सब करते हैं.

और उस्सने संजना को अपने सीने पर ज़्यादा ज़ोर से चिपकाते हुए पूछा,

“तुम किआ मुझको बदमाश आवारा समझती हो? किआ तुम यह सोचती हो के मैं सभी लड़कियों के साथ यह सब करता हूँ? आरी पागल हो तुम. आज तक मैं ने कभी किसी भी लड़की को नहीं प्यार किया अपने वाइफ के इलावा. किसी भी लड़की को ऐसे बाहों में नहीं भरा, किसी भी लड़की को किश नहीं किया मैं ने, किआ सोचने लगी हो तुम अब भला?”

तो मुस्कुराते हुए संजना ने एक छोटा सा किश किया उनके छाती पर कमीज़ के ऊपर से hi और ऊपर चेहरा करके, थोड़ी सी शैतानी आवाज़ में पूछा, “और अपनी बड़ी बहु से आप प्यार नहीं करते वो तो आप के घर में आप के साथ रहती है? हम्म बोलो बोलो?!”

अपनी बड़ी बहु के बारे में सुनकर चावला साहिब के सामने सान्वी की छबि आगयी. सान्वी का चेहरा उसस्के ेंखों के सामने आयी तो चावला साहिब को याद आया के घर से निकलते वक़्त वो सान्वी से कह गया था के एक डील करने जा रहा है और वापस आकर बताएगा. यह सोचते hi चावला साहिब झट से संजना से अलग हुआ और सोच में डूब गया. और संजना को लगा के ज़रूर कुछ है बड़ी बहु के साथ इसी लिए उस्सने उस्सको अपने सीने से तुरंत अलग कर दिया. और संजना खामोश एक कोने में जाकर कड़ी हो गयी बिना कोई बात बोले. इधर चावला साहिब सोच में था के सान्वी से किआ कहेगा अब. सोचने लगा के आनंद को जगा कर बात को पक्की करनी hi होगी तभी घर जाकर सान्वी से इस बारे में बताएगा के उस्सने आरव के लिए लड़की देखा है और अगले हफ्ते या दो तीन दिन बाद सबको उन्हें देखने को जाना है.

संजना उनको देखे जा रही थी थोड़ा उदास नज़रों से. यह पहली बार हुआ के चावला साहिब ने खुद उस्सको अपने सीने से उस तरह से अलग किया. संजना के दिल को शायद ठेस पोंहचा मगर कुछ नहीं बोली और चावला साहिब को देखे जा रही थी कुछ दूर खड़े होकर.

चावला साहिब ने अपने पेशानी पर हाथ फरते हुए, फिर अपने बालों उंगलियां फेरते हुए बाहर देखा और तब वापस संजना के तरफ देखा. वो परेशान दिख रहे थे. तो संजना खुद चल कर उनके पास आयी और पूछा, “किआ हुआ? जब से आप आये हो बिल्कुल ऐसे नहीं दिखे आप मुझको? किआ आप परेशान हो? कोई प्रॉब्लम हो गयी किआ? मैं ने आप की बड़ी बहु के बारे में पूछा इस के लिए सॉरी. अगर आप उस्सको भी प्यार करते हो तो कोई बात नहीं मुझे कोई हक़ नहीं के मैं आप दोनों के बारे में कुछ कहूं मुझे माफ़ करना प्लीज!”

तो चावला साहिब ने फिरसे संजना को बाहों में भरते हुए जवाब दिया, “तुम बिल्कुल पागल हो लड़की. मैं तो यह सोच रहा हूँ के सान्वी से घर वापस जाकर किआ कहूंगा? मैं उस से यह कहकर घर से निकला के मैं एक ज़रूरी डील करने जा रहा हूँ. वापस जाने के बाद वो सब से पहले एहि पूछेगी के डील का किआ हुआ!! ोफो कुछ नाह कुछ तो बताना hi पड़ेगा उस्सको?”

तो संजना ने अपने कांधों को ऊपर करते हुए बड़ी आसानी से कहा, “अरे तो केहडेना डील कैंसिल हो गयी बात नहीं बही बुसस!” तब चावला साहिब मुस्कुराया और संजना के गालों को किश करते हुए ज़ोर से जकरा और कहा, “अरे तुम ने तो मेरा काम आसान कर दिया, यह क्यों नहीं सूझा मुझे, तुम बड़ी अच्छी हो मेरे लिए, मेरे उलझनों का सलूशन भी तुम्ही हो. थैंक यू स्वीटहार्ट.” तब संजना उनके सीने पर अपना सर रखते हुए कहा, तो मैं यह समझूँ के आप अपनी बड़ी बहु से प्यार करते हो या उस से दररते हो आप हीहीहीहीही?”

चावला साहिब भी हंस पड़ी और कहा, “अरे नहीं वो भी बहोत अच्ची है घर की माँ की तरह है वो, सब कुछ पता है उस्सको घर के बारे और घरवालों के बारे में, बहोत सायानी है वो. घर बहोत अच्छी तरह से संभालती है.”

तब संजना ने कहा, “हम्म तो इसी लिए आप परेशान हो गए के उस्सको आप किआ जवाब डोज? अब मैं समझी. तो किआ मुझे भी उस से डरना चाहिए? किआ वो मुझ पर भी नज़र रखेगी घर में? किआ वो एक सास की तरह बेहवे करती है?”

चावला साहिब संजना का भोलेपन और बचपना देख कर उस्सको और ज़्यादा ज़ोर से बाहों में दबाते हुए कहा, “आरी मेरी गद्य, तुम क्यों फ़िक्र करने लगी मैं हूँगा नाह उसी घर में तुम्हारे साथ. घर का मैं बॉस हूँ सान्वी नहीं….. और तुम ने उस घर में अपने आप को देख भी लिया? हम्म चलोगी नाह मेरे घर में?” जिस्का जवाब संजना का यह मिला चावला साहिब को, “हम्म चलूंगी; आप की बहु बनकर नाह? या कुछ और बनकर चलना है आप कैग हर में?”

यह सुनकर चावला साहिब घबरा सा गया और संजना को अपने गॉड में उठाया एक बच्चे की तरह और उसस्के रूम के तरफ जाने लगे. संजना खामोश रही उनके गॉड में और उनके ेंखों में प्यार से देखती गयी अपने बाहों को उनके कांधों पर करके एक हाथ से चावला साहिब के गाल पर अपनी उँगलियों प्यार के साथ हलके से फेरते हुए……..

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 12 संजना इन हेर बैडरूम विथ हिम

यह सुनकर चावला साहिब घबरा सा गया और संजना को अपने गॉड में उठाया एक बच्चे की तरह और उसस्के रूम के तरफ जाने लगे. संजना खामोश रही उनके गॉड में और उनके ेंखों में प्यार से देखती गयी अपने बाहों को उनके कांधों पर करके एक हाथ से चावला साहिब के गाल पर अपनी उँगलियों प्यार के साथ हलके से फेरते हुए……..

अब आगे……..

जिस तरह प्यार से संजना चावला साहिब के चेहरे पर अपनी उँगलियाँ फेरर रही थी, उस्सको बड़ा मज़ा तो ाही रहा था मगर बेहद प्यार भी ारः था उस वक़्त और कुछ ेमोरिओनल भी लगे चावला साहिब संजना की उस हरकत से. दृष्ट देख कर कुछ ऐसा लगता था के एक बेटी अपने पापा को प्यार कर रही है और उसके गॉड में हैं जिस तरह एक बाप अपनी बेटी को इमोशनली चाहता है उस वक़्त कुछ ऐसा दिख तो रहा था मगर वैसा कुछ था नहीं बात कुछ और hi थी. तभी लोग ऐसे प्यार को वासना का नाम देते हैं बल्कि वासना hi कहते हैं. मगर चावला साहिब तो अपने दिल की गहराई से चाहने लगी थी इस प्यारी चुलबुली नटखटी लड़की को. और लड़की के तरफ से भी तो इतना प्यार चालक रही थी उस्सकी बातों में, अदाओं में, उस्सकी चंचलता में भी चावला साहिब के लिए प्यार दिख रही थी. और जब अभी कुछ देरर पहले पहाड़ों के पास जो कुछ चावला साहिब ने किया थे उसस्के साथ उसस्के बावजूद संजना इस तरह से चावला साहिब को प्यार कर रही थी उस के गॉड में जाकर तो चावला साहिब को किआ समझना चाहिए? एहि नाह के वो राज़ी है अगले स्टेप के लिए इश्क में जाने को? कोई और होती तो बहोत दूर भागती चावला साहिब से, उससे अपने पास भी नहीं आने देती, अपने पिता को कैसे भी करके जगाती, चावला साहिब को धित्कारती, नफरत करती घिना करती. तो ज़ाहिर सी बात है के चावला साहिब को वो छूठ दे रही थी अपने ज़्यादा करीब आने के लिए और चावला साहिब को एक्साक्ट्ली वही लग और दिख रहा था.

संजना को गॉड में लिए उस जगह से चलते वक़्त दोनों एक दूसरे के चेहरे में बड़े प्यार से देखते जा रहे थे जब तक संजना की बैडरूम आ पहुंचे. खुद चावला साहिब अपने दिमाग़ में इस बात को सोचता रहा के ‘अभी अभी कार में मैं ने इस्सके रस पिया, और उसस्के बाद अपने लिंग को छूने को इससे कहा तो यह मन कर रही थी और अब उस्सकी बैडरूम में लेजा रहा हूँ तो मुझसे प्यार कर रही है. समझ में नहीं अत यह चाहती किआ है. फिर भी मैं तो कोशिश को जारी रखूँगा आगे बढ़ने की…’

और चावला साहिब ने संजना को उस्सकी बीएड पर आराम और बड़े प्यार से बिठाया उसस्के नज़रों में देखते हुए. वो मुस्कुराए जा रही थी और थोड़ी से शर्मायी सी भी थी अपने बीएड पर बैठते वक़्त और जल्दी से अपने ड्रेस से अपने जाँघों को धक्का क्यों के जिस वक़्त वो उनके गॉड में थी ड्रेस लटक रहे थे और पंतय भी दिख रही थी, अगर उस वक़्त कोई बैठा होता तो संजना की गांड पर उस्सकी पंतय साफ़ दीखते उनको.

बीएड पर बैठी संजना ने अब नज़रें निचे झुका लिए, और चावला साहिब खड़े हुवे उसस्के सामने अपने पंत की ज़िप को निचे करते हुए संजना के मुंह को देख रहा था, उस्सकी लरज़ती होंठों को निहार रहा था उस्सकी बूब्स को निहारते हुए सोचा के संजना के चेहरे और मुंह में एक अजीब कशिश दिख रहे हैं, जैसे वो पहले भी किसी लुंड को चूस चुकी है और उस्सको सब पता है के कैसे एक मर्द को खुश करना चाहिए. अब यह, या तो सिर्फ चावला साहिब के दिमाग़ में बात आयी थी क्यों के उस वक़्त वो एहि करवाने को सोच रहा था, इस लिए उसस्के दिमाग़ में ऐसा ख्याल आया, या किआ सच में उस्सकी नज़र संजना को सही पहचान रहे थे? किआ चावला साहिब की तजुर्बा सही बता रहे थे उनको? किआ वो एक नज़र में एक जवान लड़की के ेंखों में और चेहरे में देख कर सही पता लगा सकते थे के लड़की चुस्सने वालों में से हैं? ऐसा होता है नाह के लोग किसी लड़की या औरत के चेहरे और लबों को देख कर अक्सर बातें करते हैं आपस में के “अरे इस्सके शकल तो चुस्सने वाली है, अरे इन् लबों को सिर्फ एक लुंड की ज़रुरत है बाप, अरे इस का मुंह तो लुंड चुस्सने वाली दीखता है बाप!!” ऐसे बातें किया करते हैं कुछ लोग…. तो ऐसे hi चावला साहिब के दिमाग़ में भी बात आयी के संजना ने पहले भी चूसा हुआ है किसी का लुंड. मगर किश का? एक बॉयफ्रेंड का या किक्सी और का? या उस्सकी दिमाग़ की ग़लत फैमि थी यह.

चावला साहिब ने सोचा जिस वक़्त संजना ने उस्का लिंग अपने मुंह में लिया तब उस्सको सही पता चल जाएगा के संजना को कितना एक्सपीरियंस है चुस्सने में. अब जिस वक़्त चावला साहब अपने ज़िप को निचे कर रहे थे तो संजना निचे ज़मीन देख रही थी और आहिस्ते से एक ेंख को थोड़ा सा ऊपर किया जब उनके ज़िप खुलने की आवाज़ सुनी तब, और चावला साहिब उस्सकी नज़रें को hi देख रहे थे के किआ संजना देखती है या नहीं? किआ संजना को पता है के उस्सको क्यों अपने रूम में लाया है उस्सने? यह देखना था चावला साहिब को. और जब देखा के संजना को पता चल गया के चावला साहिब का लुंड उसस्के मुंह के पास आने वाला है फिर भी वो खामोश बैठी है तो चावला साहिब समझ गए के संजना को इंकार नहीं है अगले स्टेप लेने में.

और चावला साहिब ने अपने ग्रे अंडरवियर खड़े पोजीशन में थोड़ा निचे करते हुए एक हाथ से संजना का एक हाथ पकड़ा और अपने लुंड के तरफ किया. संजना अब भी निचे देखते हुए अपने हाथ को थोड़ा अपने तरफ खिंच रही थी जैसे उस्सको इंकार है. और अपने सर को नाह में हिल्ला भी रही थी मगर हलके से. कोई कुछ बात नहीं कर रहे थे सिर्फ एक्शन हो रही थी. संजना की सांसें सुनाई दे रही थी और चावला साहिब के गले से एक तरह की घुररघुराहट सुनने में आ रही थी जिस वक़्त वो सांस ले रहे थे. उस्का लुंड बिल्कुल जमके तन्ने हुए खड़े थे. संजना ने अपने दोनों टांगों को बिल्कुल एक दूसरे से सट्टे हुए आहिस्ते एक अपने नज़रों को ऊपर करते हुए चावला साहिब के मोठे ावज़ार को एक झलक देख कर फिर नज़रें झुका लिया. चावला साहिब सब देख रहे थे और मुस्कुराया जिस वक़्त उस्सने देखा के संजना ने उसस्के लुंड को देख केर वापस निचे देखने लगी.

तब तक नाह चाहते हुए भी संजना का हाथ करीब करीब लुंड के नज़दीक आ गए थे मगर फिर भी वो थोड़ी बहोत अपने हाथ को अपने तरफ खिंच रही थी जिस से चावला साहिब को थोड़ा सख्ती इख्तियार करना पड़ा संजना के हाथ को अपने लिंग पर लेन के लिया.

और संजना ने फील किया के उस्सकी मुठी चावला साहिब के लिंग को ज़रा सा छुवा क्यूंकि उस्सने उस वक़्त अपनी मुठी बांध कर लिया था. चावला साहिब को अच्छा नहीं लगा के उस्सने मुठी बांध कर लिया है तो अब वो बोलै, “प्लीज अब तो सेहला इससे अपने नरम हाथों से, अब तो खुश कार्डो इस्को मेरी जान, कब से तरप रहा है यह तेरी मुलायम हाथ की छुवन को…. प्लीज स्वीटहेरत होल्ड आईटी बेबी…” और मुठी बांध किये हुए hi अब संजना ने सर ऊपर उठा कर चावला साहिब के चेहरे में एक सेहमी नज़र से देखते हुए नाह में सर हिलाया बिना लुंड को देखे.

चावला साहिब बड़े प्यार से उस्सकी मुठी को अपने लुंड पर दबाते हुए कहा, “अरे मैं ने इतना कुछ किया तुम्हारे साथ कार में, मैं ने तो तुझे खुश किया नाह अब तेरी बारी है यह एक गिव एंड टेक का खेल है डार्लिंग प्लीज ज़रा सा खुश तो करो मुझे नाह प्लीज, प्लीज, मत तरपओ और मुझे” संजना उस्सको देखते हुए hi धीमी आवाज़ में बोली, “मुझे बहोत शर्म आ रही है मुझसे नहीं होगा हम्म्म” और उस्सकी आवाज़ फिर वही नटखटी वाली हो गयी यह कहते वक़्त. चावला साहिब ने उस्सकी मुठी और ज़ोर से अपने लुंड पर दबाते हुए कहा, “देखो छह तो रही हो मगर मुठी से मुठी को खोलके आराम से छुवो नाह!” तब संजना ने उसी नटखटी आवाज़ में अपने दोनों पैरों को जम्में पर थपथपाते हुए कहा, “हम्म्म्म नै, देखो मेरा पूरा जिस्म कांपने लगे हैं मुझको बहोत hi अजीब फील हो रहा है नहीं होगा मुझसे, आप मत करो नाह प्लीज.”

चावला साहिब की बर्दाश्त ख़त्म हो रहा था और उस्सने खुद ताक़त का इस्तेमाल करते हुए संजना की मुठी को ज़बरदस्ती खोला और अपने लुंड को उस्सकी मुठी में डाला…... उस वक़्त संजना ने अगर मुठी खोल दिया होता तो उतना मज़ा नहीं अत चावला साहिब को जितना संजना के मुठी के अंदर अपने लुंड को होते हुए महसूस किया. संजना ने ज़ोर से उसस्के लुंड को अपने मुठी में दबाया हुआ था. थोड़ी देर बाद संजना ने सोचा के वो चावला साहिब के लुंड को अपने मुठी में कैद किया हुआ था तब झट से अपने मुठी को खोला और वही नटखटी आवाज़ में कहा, “हम्म्म आप बहोत बुरे हो आप ने जान बुझ का रईस किया, जाओ मैं नहीं छूती इससे अब और वो उस वक़्त सीधे चावला साहिब के मोठे लुंड को अपने चेहरे के करीब देख रही थी. संजना बीएड पर बैठी थी और चावला साहिब खड़े थे तो लुंड संजना के चेहरे के सामने hi तो होगा नाह? उस्सने हाथ वापस खिंच लिए तो अब चावला साहिब ने अपने कमर को थोड़ा पुश करते हुए एक हाथ से संजना के सर को हाथ से अपने तरफ करते हुए अपने लुंड को संजना के गाल पर और होंठों पर रगड़ा, तो संजना ने ेंखें बांध कर लिए और सर को दाएं बाएं हिलाने लगी. मगर चावला साहिब ने कंटिन्यू किया अपने लुंड को उसस्के चेहरे में मलते जा रहे थे और कहा, “अपना मुंह खोलो नाह प्लीज, टास्ते करो इस्को जैसे मैं ने तुम्हारा चखा था कार में….”

और अचानक ना जाने क्यों संजना ने मुंह को खोल दिया और चावला साहिब का लुंड संजना के मुंह में गया तो तुरंत संजना ने मुंह को लुंड के साथ बांध कर लिया. चावला साहिब ने सोचा के ‘कमाल है हाथ से नहीं छूना छाती थी और मुंह में झट से ले लिया किआ लड़की है यह’ चावला साहिब को जैसे एक सुकून मिला जिस दम उस्सने संजना के गरम मुंह को अपने लिंग पर महसूस किया और उधर संजना अपने मुंह में लिंग लिए होल्ड कर रही थी और नाक से गहरी सांसें लेती जा रही थी ेंखें मुंढे हुए. तो चावला साहिब ने ज़रा सा ढाका दिया अपने लुंड को उसस्के मुंह के ज़्यादा अंदर करने के लिए, मगर संजना ने इस तरह से लुंड को मुंह में दबाया हुवा था के लुंड हिल hi नहीं रहा उसस्के मुंह के अंदर, तो चावला साहिब ने कहा, “अरे बेबी ज़रा ढिल्ला करो, ऐसे नहीं आराम से मुंह को थोड़ा खोलो ताके मैं इस्को थोड़ा अंदर बाहर कर सकूँ….”

मगर लुंड को मुंह में लिए हुए hi संजना ने नाह में सर हिलाया ेंखें मुंढे हुए hi. तो चावला साहिब ने अपने दूसरे हाथ से संजना के गालों पर प्रेशर देते हुए उस्सकी मुहं को खोलने की कोशिश किया….. तरस ारः था उस्सको संजना के मुलायम गालों को दबाते हुए के कहीं उस्सको चोट नाह लग जाये, वो इतनी नाज़ुक दिखती थी, फिर भी उस्सने कुछ ज़ोर से उसस्के गालों को दबाते हुए लुंड को हिलने की कोशिश किये और संजना ने मुंह को खोल कर लुंड को हटाते हुए एक लम्बी गहरी सांस लेते हुए ेंखें खोल कर हांफते हुए लुंड को हाथ में पकड़ते हुए कहा,

“मेरी सांसें रुकी हुई थी, आप मुझको मार डालोगे बुसस कीजिये अब मुझसे नहीं होगा” उस दरमियान उस्सने खुद नहीं सोचा के चावला साहिब का भीगा हुआ लुंड अब उसस्के हाथ में है, और चावला साहिब मज़े ले रहे थे अपने लुंड को उसस्के मुलायम हाथ में फील करते हुए. और चावला साहिब ने संजना की ेंखों में देखते हुए कहा, “हाँ देखा न कैसे अब आराम से तुमने इस्को अपने हाथ में लिया है अब सेहलावो इस्को नरमी से प्लीज!” तब झट से संजना ने लुंड को चोर्रा और फिर बचपना आवाज़ में कहा, “ न ा ह ी न, अब बुसस इतना तो किया नाह, लो लो और पाकर लेती हूँ तब बुसस” और उस्सने जल्दी ख़तम करने के लिए चावला साहिब के लुंड को फिर से हाथ में लिए और अपने हाथ को लुंड के लम्बाई तक फेर्रा दो तीन बार और रुक गयी उसके चेहरे में देखते हुए और कहा, “अब बुसस बहोत है इतना पहली बार के लिए, देखो न भीगा हुआ है, मुंह में भीग गया, मेरे हाथ भी देखो कैसे लतपथ लग रहे हैं” चावला साहिब ने तृप्ति आवाज़ में कहा, “प्लीज प्लीज एक बार और सिर्फ अपने जीब को यहाँ फेर्रो बुसस थोड़ा सा इस ऊपरी वाले हिस्से पर जीब फेर्रो तब एन्ड करता हूँ और बाहर निकलते हैं.”

संजना ने उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा, “प्रॉमिस के मैं ने यह किया तो आप बुसस करोगे?” चावला साहिब बेसब्र होते हुए कहा “हाँ प्रॉमिस बेबी प्रॉमिस” तो जल्दी बाहर निकलने के चक्कर में संजना वो भी कर गयी, उस्सने दोनों हाटों से लुंड को थामा और अपने जीब को ऊपर लुंड के चढ़ पर फरने hi जा रही थी एक पानी के बुलबुला जैसा देखा और पुछा, “यह किआ है, थूक है मेरा?” चावला साहिब का प्रेकम निकल रहा था तो उस्सने कहा, “चलो चाटो नाह इसी का इंतज़ार है मुझे,” संजना ने अपनी जीब के पहले हिस्से से उस प्रेकम को छुवा और जीब वापस मुहं में लेते हुए कहा, “हम्म्म नमकीन है, क्यों?” तो चावला साहिब अपने शैतानी मुस्कराहट में कहा, “तुम्हारा पानी भी तो नमकीन थे जब मैं ने कार में चूसा था बेबी, एहि मर्द का पानी होता है, यह मेरा प्रेकम है बेबी चाटो नाह मुझ से और सब्र नहीं हो रहा….”

उस्सने सोचा यह सब सुनकर संजना इंकार करेगी मगर उसस्के बावजूद संजना ने पुरे जीब फ्री उस हिस्से पर और उस्सको मुंह में लेकर लुंड को थोड़ा सा चूस्ते हुए ऊपर सर उठा कर चावला साहिब के चेहरे में देख रही थी के चावला साहिब अपने गर्दन को पीछे किये एक आह ले रहे थे…. संजना थोड़ा सा मुस्काई और लुंड को चुस्ती गयी कोई 2 मिनट तक और रोकते हुए लुंड को मुंह से निकालते हुए कहा, “लीजिये, अब बुसस आप के प्रेकम भी ख़तम हो गए मैं से सब निचोरर लिए अब बाहर चलते हैं आप ने प्रॉमिस किया है भूलना मत.” चावला साहिब बेहद खुश हुए और एक सुकून महसूस हुई उनको. और ख़ुशी से कहा “ok बेबी चलो मैं हमेशा प्रॉमिस निभाता हूँ. चलो माय डिअर. वह बहोत ख़ुशी दिया तुमने मुझे आज बरसों बाद इस लिंग को किसी ने अपने मुंह में लिया है…………….”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………(2479 वर्ड्स)
 
अपडेट 13 चावला साहिब बैक होम एंड टेल्स सान्वी

चावला साहिब बेहद खुश हुए और एक सुकून महसूस हुई उनको. और ख़ुशी से कहा “ok बेबी चलो मैं हमेशा प्रॉमिस निभाता हूँ. चलो माय डिअर. वह बहोत ख़ुशी दिया तुमने मुझे आज बरसों बाद इस लिंग को किसी ने अपने मुंह में लिया है…………….”

अब आगे……………….

उधर आनंद जी सो कर धडपडाते हुए सोफे उठे और बाहर देखा के दिन ढल रहा थे, सूरज डूबने को आया था तो सोचा अभी तक उस्सकी बेटी बाहर है और बाहर देखा तो चावला साहिब की गाडी घर के सामने थी तो समाज गया के वो लोग वापस आगये हैं तो आवाज़ दिया, “संजना?! किधर हो?” और दो कदम hi चले थे के संजना और चावला साहिब संजना के कमरे से निकले और संजना ने अपने पापा से हँस्ते हुए कहा, “बुसस मैं साहिब को अपना कमरा दिखा रही थी पापा”

और तब आनंद ने चावला साहिब से कहा, “आप को इतने दूर तक गाडी चलना है साहेब आप को अब निकलना चाहिए मेरे ख्याल से क्यूंकि अँधेरा होने वाला है, मगर जाने से पहले बताते जाईये के आप लोग कब आ रहे हैं मेरी बेटी को देखने या अंगूठी पहनाने की रसम करने को?” यह बात सुनकर दोनों संजना और चावला साहिब ने एक दूसरे के चेहरे में देखा. संजना मुस्कुरा रही थी और बहोत खुश दिख रही थी. मगर चावला साहिब दुविधा में थे क्यों के वो संजना को अपने खुद के लिए रखना चाहते थे. पर अब तो कोई चारा नज़र नहीं आया तो उनको कहना पड़ा के वो घरवालों से बात करके संजना को फ़ोन करके बता देगा और कुछ आदमियों को यहाँ भेजेगा सब काम को करने के लिए साथ में पैसा भी भेजेगा. तो तुरंत संजना ने धीरे से कहा, “आप खुद भी तो आ सकते हो पैसों के साथ? आदमियों के हाथ क्यों?” यह सुनकर चावला साहब की ख़ुशी की इन्तहा नहीं थी. उस्सने सोचा लो संजना तो खुद उस्सको मौका दे रही है दोबारा वापस आने के लिए. और उस्सको वैसे hi धीरे से कहा, “ज़रूर आऊंगा पक्का वादा” और संजना अपने गेसुओं को एक हाथ से हिलाते हुए अपनी कमर डोला रही थी ख़ुशी से चावला साहिब के चेहरे में देखते हुए.

तो उस शाम को चावला साहिब उनके यहाँ से निकले अपने घर वापस जाने को. आनंद और उस्सकी बेटी संजना द्वार पर खड़े उनको वेव कर रहे थे और संजना बहोत खुश दिख रही थी उन् को वेव करते हुए और अपने बाप से छुप कर संजना ने चावला साहिब को एक फ्लाइंग किश भेजा जो उस्सने कैच भी किया और वापस भी किया. संजना हंस रही थी उनको जाते हुए देख कर. क्यूंकि उस को पता था के वो जल्द hi वापस आएंगे.

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जैसे hi चावला साहिब की कार यार्ड में दाखिल हुए तो उन्हों ने देखा सान्वी, दीप्ति को गॉड में लिए उनको देख रही थी, लग रहा था उस्का काफी देर से इंतज़ार किया जा रहा था. अँधेरा हो चूका था, लाइट्स जल गए थे और कार की हेडलाइट सीधे सान्वी पर पारा जिस वक़्त चावला साहिब ने गेट से एंट्री लिया था.

कार से उतारते hi साहब ने दीप्ति को गॉड में लिया क्यूंकि जब वो गेराज में गए तो सान्वी ने बच्ची को उतार दिया क्यूंकि वो अपने दादा के पास जाने के लिए ज़िद कर रही थी. उस्सको गॉड में लिए हुए चावला साहिब सान्वी के तरफ बढ़ते हुए पूछा, “बाकी लोग अभी तक वापस नहीं आये हैं किआ? अकेली हो?” तो सान्वी उनके चेहरे में ग़ौर से देखते हुए कहा, “दोनों आये थे 3 बजे और वापस गए क्यूंकि कोई ख़ास प्रोजेक्ट को ख़तम करना है किसी अग्रवाल वाले उनके वेट कर रहे थे ऑफिस में किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए. रात को देर से आएंगे कह गए हैं दोनों.

तो चावला साहिब ने एक हाथ को सान्वी के काँधे पर किये हुए, दोनों घर के अंदर गए गॉड में दीप्ति के साथ. सान्वी ने जल्दी से एक कप चाय लेकर आये साहिब के लिए. और देते वक़्त पूछा, “तो आप की डील का किआ हुआ? इतनी देर तो आप ने कभी भी नहीं लगाया. रात को वापस आये हो आप. आप को याद भी है कितने बजे सुबह घर से निकले थे? वो भी खुद ड्राइव करके गए, ड्राइवर क्यों नहीं लिया आप ने? थक्के हुए लग रहे हो आप.”

तो चावला साब चाय की गरमा गरम कप से एकांत सिप लेते हुए ख़ुशी से कहा “मेरा डील तो बिल्कुल पक्का हुआ सान्वी और मैं बहोत खुश हूँ!” तब सान्वी ने ख़ुशी से मुस्कुराते हुए पुछा, “अच्छा बड़ी ख़ुशी की बात है, तो अब आप मुझे सब बताईये के कौन सी डील है जो आप ने उन् दोनों से कहने को मन किया था, और अब तो उनको भी बताओगे नाह आप? दोनों मुझसे पूछ रहे थे की आप कहाँ गए हो, कब आओगे…. अब सब समझाओ मुझे!”

चावला साब ने कहा, “डील ऐसी है जिस में तुम सब को शामिल होना होगा, तुम्हें और दीप्ति को भी. पुरे फॅमिली को तैयार होना है इस डील के लिए हाहाहाहा!” तो सान्वी हैरानी से अपने ससुर के चेहरे में देखते हुए कहा, आप ने पी है? शराब की बादभु आयी जब आप ने हंसा तो?!” और दीप्ति ने कहा, “दादा, डैड मुझे भी शामिल हैं?” चावला साहिब अपने मुंह के ऊपर हाथ रखते हुए कहा, “अरे हाँ एकांत पेग भी लिया था डील करते वक़्त!” और दीप्ति से कहा, “हाँ बीटा तुमको भी शामिल होना है हहहहए”

सान्वी कुछ शक की निजगाह से अपने ससुर को देखते हुए कहा, “और किआ आप ने खाना भी खा लिया है? मैं ने इस्पेशल डिश बनायी है आप की ख़ास, अब यह मत कहना के खाना भी खा कर आये हो नहीं तो मैं खफा हो जाउंगी हाँ!” तो चावला साब ने कहा, “अरे नहीं बहोत भूक लगी है ज़रूर कहूंगा बुसस एक शावर लेकर अत हूँ!”

उनके मोबाइल पर कई मेस्सगेस आये संजना के तरफ से मगर चावला साहिब ने जान बुझ कर मोबाइल को साइलेंट किया हुआ था नहीं तो सान्वी को पता चल जाता. उस्सने एक भी जवाब नहीं दिया संजना को, थोड़ा उस्सको तर्पण चाहता tha.aur जब बाथरूम के तरफ जाने लगे तो जल्दी से सान्वी ने टॉवल और कपडे उनके लिए लाकर बाथरूम के हेंगर पर रख दिए. उस वक़्त चावला साब बाथरूम के पास आ चुके थे तो वहीँ खड़े हुए सान्वी ने कहा, “आप के कपडे रख दिए टॉवल के साथ, अभी तक आप ने नहीं बताया के कौन सी डील है, ठीक है नहाने के बाद बता देना. चावला साब उस वक़्त सिर्फ निचे के कपडे में था ऊपर चेस्ट नंगा था और सान्वी उनके बिल्कुल करीब कड़ी थी और सान्वी उनके चेस्ट पर देखते हुए अपने हाथ को हलके से चेस्ट पर फरते हुए हंस कर कहा, “आप के चेस्ट पर कई बाल सफ़ेद हो गए हैं देखा है आप ने?” उस वक़्त चावला साहिब मुस्कुराये और संजना की ख्याल आया उस्सको और वो अंदर घुस गए नहाने के लिए और सान्वी मुस्कुराते हुए वापस दीप्ति के पास गयी.

नहाने के बाद डिनर टेबल पर खाते हुए चावला साहिब ने सान्वी की ज़िद पर कहा, “डील यह है के मैं ने आरव के लिए एक लड़की पसंद किया है बात पक्की कर ली है और अगले हफते हम सब को लड़की देखने जाना है. मैं ने तो उससे देख लिया और उस्सको जानता हूँ अब सगाई करने जाएंगे अगले हफते हे हे!!”

यह सुनकर सान्वी बिल्कुल शॉकेड हुई और कुछ देर खुले मुंह खामोश रही और कुछ देर बाद हँस्ते हुए कहा, “आरव के लिए लड़की देख लिया आप ने, मगर वो तो शादी hi नहीं करना चाहता, कितना शर्मीला है वो आप तो जानते हो, और वो लड़कियों से कितना दूर भागता है! मुझसे कितना शर्माता था जब मैं इस घर में आयी थी तो. याद है आप को. 6 महीनों के बाद उस्सने मुझसे पहली बार बात किया था. कितने मुश्किलों से मैं उसस्के करीब आयी, और आज मुझसे कितना घुल मिल गया है और कितना करीब है मेरे वो….. हाहाहा आरव!!”

तो चावला साहिब ने कहा, हाँ वैसे hi घुल मिल जाएगा अपनी बीवी से भी वो, मुझे यकीन है. लड़की बहोत खूब सूरत है और अच्छी भी, मुझे बेहद पसंद है उसी को आरव की दुल्हन बनाऊंगा मैं. मैं ने जुबां दे दिया है.”

और सान्वी ने सब डिटेल पुछा तो चावला साहिब ने उस्सको बता दिया के वो उसस्के पुअरने गाओं की है और उसस्के एक मुलाज़िम की बेटी है ेट्स ेट्स….

तो सान्वी ने कहा के अब उन् दोनों बहियों को यह बात बतानी है और तैयारियां करनी है अगले हफ्ते की संडे के लिए. तो चावला साहिब ने कहा के जब वो दोनों वापस आये तो एक फॅमिली मीटिंग करेगा और सब समझाएगा. और यह भी कहा के कल वहां फिरसे जाएगा क्यूंकि वो लोग ग़रीब है तो कुछ पैसे देने जाएगा और अपने कुछ आदमितों को लेजाएगा वहां के सभी काम को पूरा करने के लिए. तो सान्वी ने कहा, “मैं भी चलूंगी आप के साथ मैं उस्सको देखना चाहती हूँ.” चावला साहिब यह सुनकर घबरा गया और सोचा के अगर यह गयी तो कबाब में हड्डी बानी रहेगी और उस्सको संजना के साथ वक़्त गुज़ारने का मौका नहीं मिलेगा, तो उस से कहा, “नहीं नहीं सरप्राइज रहने दो संडे को डायरेक्ट देखना उस्सको. मुझे पहले सब काम तो निपटा लेने दो नाह!”

तो सान्वी ने कहा, “आप ने उस्सकी तस्वीर क्यों नहीं िया मोबाइल से हमको देखते नाह?” चावला साहिब कहने जा रहा था के उस्सकी तस्वीर है, मगर सोचा के उस्सने बहोत सारे सेक्सी फोटो लिए हैं संजना की वो सब सान्वी देख लेगी इस लिए खामोश रहा. सान्वी कभी भी चावला साहिब की मोबाइल लेती है और कॉल्स आये तो उनको देती है, मतलब इतने दिनों से उस्का मोबाइल फ्री था घर में कोई भी लेकर उनको देता था मगर अब चावला साहिब ने सोचा मोबाइल को बहोत संभाल के रखना पड़ेगा. फिर भी उनके मुंह से निकल गया, “है उस्सकी तस्वीर मेरे मोबाइल में बाद में तुमको सेंड करता हूँ” तो जल्दी से सान्वी कड़ी हो गयी यह कहते, “कहाँ है आप का मोबाइल मैं अभी देखती हूँ!” यह सुनकर कहवला साहिब का पसीना छूठ गया और कहा, “अरे नहीं अभी चार्ज पर है और ऑफ है रहने दो मैं बाद में तुम्हारे मोबाइल पर सेंड करता हूँ नाह, इतनी उतावले क्यों हो रही हो तुम भला?”

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
अपडेट 14 चावला साहब बैक होम Part ी

” तो जल्दी से सान्वी कड़ी हो गयी यह कहते, “कहाँ है आप का मोबाइल मैं अभी देखती हूँ!” यह सुनकर कहवला साहिब का पसीना छूठ गया और कहा, “अरे नहीं अभी चार्ज पर है और ऑफ है रहने दो मैं बाद में तुम्हारे मोबाइल पर सेंड करता हूँ नाह, इतनी उतावले क्यों हो रही हो तुम भला?”

अब आगे…………

जब चावला साहिब अपने कमरे में गए तो जल्दी से अपने मोबाइल से सभी संजना के सेक्सी फोटोज को अपने लैपटॉप पर एक सिक्योर फोल्डर में सेंड करके लॉक कर दिया पासवर्ड से. और जो नार्मल एकांत तसवीरें थे संजना के उनको सान्वी के मोब पर सेंड किया. फोटोज को देखते hi सान्वी जल्दी से ससुर के कमरे में आयी अपने मोबाइल में तस्वीरों को देखते हुए कहा, “अरे वह यह तो बहोत hi क्यूट और खूब सूरत है. बेहद खूबसूरत, इस्सकी मुस्कराहट कितनी क्यूट है, थोड़ी चुलबुली लग रही है, है नाह पिता जी? आप तो मिल चुके हो नाह तो बताओ उस्सकी बेहेवियर किसी हैं?”

ससुर ने मुस्कुराते हुए संजना की चुलबुली अदाओं को सोचते हुए सान्वी को देखा फिर ख़ुशी से मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ चुलबुली तो है मगर बहोत hi अच्छी और नेक दिल है. काफी भोली भी दिखती है मगर है नहीं, सयानी है मगर बचपना है या बचपना वाली हरकतें हैं. बोलती है तो उस्सकी आवाज़ बहोत अच्छी लगती है उस्सको सुनने को, कोई उस्सको घंटों बोलते हुए सुन सकता है, बहोत मीठी आवाज़ है उस्सकी, मुस्कराहट तो देख hi रही हो. सुशिल भी दिखती है पर है नहीं या तो है सुशिल, डिपेंडस करता है किश के साथ होती है. अगर किसी के करीब है तो शायद उस्सको नार्मल दिखे अगर अजनबी के साथ हो तो शायद बहोत hi शुशील लगे.”

सान्वी अपने ससुर को ध्यान से देख और सुन्न रही थी जब वो संजना की इतनी तारीफ़ कर रहे थे और हँसते हुए कहा, “आप तो उस्सको बहोत अच्छी तरह से जान गए हो? कितनी बार मिले हो उस से आप पिता जी?” तो ससुर ने सोचा के शायद वो बहोत बोल गया संजना के बारे में और सान्वी कहीं कुछ शक नाह करे तो कहा, “अरे जब वो पैदा हुई थी तो मैं वहीँ रहता था और उस्सको एक नेकलेस गिफ्ट किया था वो सब मुझे याद भी नहीं था उसस्के पिता ने याद दिलाया और उस संजना ने उस नेकलेस और मेरे साथ उस्सकी बेबी वाली तस्वीरों को अभी तक संभाल के रखे हुए हैं!” सान्वी अब भी अपने ससुर के हो भाव को देखते हुए कहा, “ओह तो संजना है उस्का नाम, प्यारा नाम भी है. तो किआ वो मान गयी हमारी बहु बनने के लिए, किआ उम्र है? कुछ ज़्यादा यंग नहीं लग रही?!” ससुर ने कहा, “अभी अभी 18 की हुई है, कुछ महीने पहले hi 17 की थी.” यह कहते हुए चावला साहिब के चेहरे चमक रहे थे और एक ख़ुशी दिख रहे थे उनके चेहरे और ेंखों में जो सान्वी ने खूब नोट किया.

सान्वी तब तक कड़ी थी और आहिस्ते आहिस्ते चल कर अपने ससुर के करीब आयी और उसस्के पास बीएड पर बैठी फोटोज को अपने मोबाइल पर देखते हुए और पुछा, “बुसस इतनी hi फोटोज लिए आप ने उस्सकी, या और है देखूं आप के मोबाइल पर अब!” ससुर ने अपने मोबाइल को लेने दिया क्यूंकि सान्वी की आदत थी उस्सकी मोबाइल लेने को इस लिए मन नहीं किया शक पैदा नाह करने के लिए. और सान्वी ने उनके मोबाइल से गैलरी में संजना के वही पिक्स देखे फिर कहा, “जिस तरह से संजना ने आप को पोज़ दिए हैं और जिस तरह खिलखिलाकर हंस रही हैं इन् दो पिक्स में लगता नहीं के आप उसस्के लिए अजनबी हो, लगता है कोई बहोत करीब का रिश्ता है, आप से इतनी घुल मिल गयी वो इतनी जल्दी?” तो ससुर ने कहा, “अरे मैं ने कहा नाह वो बचपन से मेरे तस्वीरों को और उस नेकलेस को संभाल कर रखा है और बचपन से उसस्के पिता ने उस्सको मेरे बारे में बताया है, मेरा कृपा रहा है उन् लोगों पर तो इस लिए वो मुझे जानती है और जैसे मैं मिला मुझको पहचान गयी वो मगर मैं कैसे पहचानता उस्सको, वो तो बेबी थी जब मैं ने उस्सको देखा था…..”

संवी ने हँस्ते हुए कहा, “हाँ आप तो अब तक वैसे hi दीखते हो जैसे पिछले 18 साल दीखते थे मैं ने आप के बहोत वीडियोस और फोटोज देखे हैं ओल्ड वाले, आप बिल्कुल नहीं बदले, इसी लिए उस लड़की ने आप को पहचान लिया देखते hi.” ससुर सोच रहा था के सान्वी कुछ ज़्यादा hi छान बिन कर रही है तो पुछा, “दीप्ति सो गयी किआ?” सान्वी ने मुंह बनाते हुए कहा, “वो कहाँ से सोयेगी अभी, लगी हुई है गेम खेलने में अपने गेम स्टेशन पर, शोर मचा रही है थीब्व थीब्व धूम धूम धाम धाम करते गेम पर मेरे तो कान पाक गए है सुनते सुनते!” तो चावला साहिब ने कहा, “एक ड्रिंक बनाओगी मेरे लिए?” सान्वी ने कहा, “हाँ क्यों नहीं हर रोज़ तो बनती हूँ, वेट.” और वो उठकर गयी व्हिस्की का बोतल लिया एक पेग बनायी और गयी आइस क्यूब लेने किचन के तरफ. तब चावला साहिब अपने मोबाइल पर संजना के मेस्सगेस देखने लगे उफ़ करते हुए के शुक्र है के सान्वी ने सिर्फ गैलरी देखे मेस्सगेस नहीं!

सान्वी आइस कुबेस एक बाउल में लेकर आयी और उनके व्हिस्की वाले गिलास में डाला और फिर बैठ गयी ससुर के पास और पूछा, “और संजना की भाई बेहेन, माता पिता सब कितने हैं?” चावला साहिब ने व्हिस्की का एक सिप लेते हुए सान्वी के चेहरे में देखते हुए कहा, “एक लौटी औलाद है, और माँ चल बस्सी जब संजना 12 साल की थी” सान्वी ने मुंह पर हाथ रखते हुए कहा, “ओह सो सॉरी पुअर गर्ल, तो 12 साल से सिर्फ इस्सकी पापा ने इस्सकी देख भाल किये. ोफो एक जवान बेटी की देख भाल करना बाप के लिए आसान नहीं हुआ होगा नाह? उस्सकी पापा कैसा आदमी है पिता जी? बहोत प्यार करती होगी अपनी बेटी से नाह? बहोत दुःख होगा उनको जब बेटी चली जाएगी शादी करके हम्म?” तो चावला साब ने एक और सिप लेते हुए कहा, “बेवड़ा है साला!”

तो सान्वी ने हैरान होते हुए कहा, “हाय राम, घर में इतनी जवान बेटी अकेली और बाप बेवड़ा? ओह no!” इस बात ने चावला साहिब के मैं को बेचैन कर दिया और वो संजना के बारे में गहरे तरह से सोचने लगा. फिर सान्वी से कहा, “अच्छा अब मैं लैपटॉप से ऑफिस का काम देखता हूँ, के तुम्हारे पति और उसस्के भाई ने ऑफिस में किआ कारनामे किये हैं, तुम अब जाओ दीप्ति का ख्याल करो, बाद में लाउन्ज में मिलते हैं.” जैसे hi सान्वी उसस्के कमरे से निकली चावला साब जल्दी से अपने मोबाइल से वाट्सअप पर संजना के मेस्सगेस देखे और रीड किया उन् 13 मेस्सगेस में संजना ने उनको 1-“ड्राइव सेफ, रीच सेफ” - 2-हैवे यू रीछेड होम बी नाउ?-3 - व्हाई यू अरे नॉट रेप्लयिन्ग? -4- आप मुझे भूल गए किआ घर जाते hi?-5- किआ कर रहे हो?-6- आप की बड़ी बहु के पास होते हो तो मुझको बिल्कुल hi भूल गए आप तो -7- क्यों जी बड़े बहु के साथ एन्जॉय कर रहे हो आप? -6- वो आप के कमरे में है अभी इसी लिए मुझको रिप्लाई नहीं कर रहे हो नाह? -8- मुझको जलन हो रही है हम्म्म रिप्लाई करो नाह प्लीज! – 9 – मैं अब रौंदूंगी अगर आप ने नहीं रिप्लाई किया तो – 10 – कैसा लगा था आप को जब मैं ने आप का वो मुंह में लिया था? – 11 – हीहीहीही कल आप को ज़्यादा खुश करुँगी अब खुश? – 12- अब तो रिप्लाई करो नाह मैं आप के लिए एक बहोत छोटी ड्रेस पहनूंगी कल, और v-cut होगी अगर आप चाहे तो बिना ब्रा के रहूंगी, अब रिप्लाई करो वार्ना मैं मोबाइल ऑफ करती हूँ!!! – 13- ोफो रिप्लाई तो करो मुझको फ़िक्र हो रही है किआ पता आप घर नहीं पहुंचे रास्ते में एक्सीडेंट हो गायिक हो? प्लीज रिप्लाई!!!”

यह सब मेस्सगेस थे और चावला साहिब का खड़ा हो गया पढ़के. आखरी मैसेज बुसस 5 मिनट पहले किया हुआ था.

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 15 चावला साहब बैक होम part ी

चावला साहिब ने तुरंत रिप्लाई किये, “मैं ठीक हूँ बाबा, घर कब का आगया हूँ. बिजी था इसी लिए रिप्लाई नहीं किया और मोबाइल ऑफ करके चार्ज करने को डाला था.”

संजना का तुरंत मैसेज आया, “हम्म्म्म मैं रोने लगी थी अब भी रो रही हूँ आप बड़े निर्दयी हो!”

चावला साब ने यह लिख कर सेंड किया, “अरे मेरी जान don’t क्राई प्लीज मैं तुमको रट नहीं देख सकता प्लीज छुप हो जाओ अब तो टस्ट कर रहा हूँ नाह?”

Sanjana:“hihihihi कैसे रट हुए देख सकते हो टेक्स्ट करते वक़्त हीहीहीहीही”

चावला साब: “नॉटी गर्ल!”

संजना: “हम्म आप के लिए नॉटी hi रेन्हा पसंद करती हूँ क्यों आप को नहीं पसंद के मैं नॉटी रहूं?”

चावला साब: “हाँ हाँ बिल्कुल ऐसे hi रहना हमेशा मेरे साथ मुझको तुम्हारा नौघटीपन बहोत hi पसंद है और वो वाला नॉटी भी!! हेहेहे!”

संजना: ”कौन सा वाला नॉटी ?”

चावला: “तुमको अच्छी तरह से पता है कौन सा वाला नॉटी कह रहा हूँ!”

संजना भोली बनते हुए, “नहीं मुझको नहीं पता कौन वाला नॉटी बताईये नाह!”

चावला: “अभी तो लिखा था तुमने के तुम मुझको कल ज़्यादा खुश करोगी वो वाला नॉटी!”

संजना: “हीहीहीहीही अच्छा वो! वो तो आप नहीं रिप्लाई कर रहे थे इस लिए लिखा था हीहीहीहीही”

चावला: “हम्म बहोत शैतान भी हो तुम मुझे नहीं पता था नॉटी गर्ल!”

संजना: “आप अभी मुझको जानते hi कहाँ हो जी हीहीहीहीही”

चावला: “किआ तुमने इस से पहले किसी के साथ ऐसे चाट किये हैं?”

संजना: “हाँ क्यों?”

चावला शॉकेड होकर लिखता है: “ व्हाट? किश के साथ?”

संजना: “हम्म नहीं बताउंगी जी”

चावला: “तुम झूट बोल रही हो नाह?”

संजना: “पता नहीं”

चावला: “अब तुम मेरे सब्र को आज़मा रही हो!”

संजना: “हीहीहीहीही वो किआ होता है जी?”

चावला: “शट उप विल यू?”

संजना: हीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीही”

Chawla:”kia हीहीहीही कर रही हो जवाब दो मुझे अभी इसी वक़्त”

संजना : “किआ आप मुझको दांत रहे हो? ( ल ो ल वाला स्माइली के साथ) ”

Chawla:”aur नहीं तो किआ?”

संजना: “क्यों?”

चावला: “ोफो संजना छुप भी करो यार!”

संजना: “छुप करुँगी तो कैसे लिखूंगी जी?”

Chawla:”to मत लिखो, मुझे काम है”

और 3 मिनट्स गुज़र गए और संजना की कोई रिप्लाई नहीं आयी…… फिर 5 मिनट्स, फिर 10 मिनट्स तक मैसेज नहीं आये……

चावला साहिब परेशान हो गए तीसरा पेग बना लिया और वेट करता रहा, हर सेकंड के बाद एक मैसेज लिखने वाली 10 मिनट तक खामोश है…… और अपने कमरे में व्हिस्की का गिलास अपने हाथ में लिए चावला साब मोबाइल दूसरे हाथ में लिए पचासों कदम चल चूका था संजना की मैसेज के इंतज़ार में. जब देखा के 15 मिनट्स बीत चुके बिना मैसेज के तो खुद लिखा,

“ोफो अब किआ नाराज़ हो गयी तू? क्यों रुक गयी? रिप्लाई करो नाह!”

फिर भी कोई जवाब नहीं आया, और 5 मिनट वेट किया, तब भी जवाब नाह मिलने पर चावला साहिब ने फिर लिख कर यह सेंड किया;

“सो गयी किआ बेबी? माय स्वीटहार्ट किआ कर रही हो? अच्छा यह बताओ के कैसे ड्रेस्ड हो अभी? निघ्त्य में हो? अरे मैं ने तो तुमको किसी भी निघ्त्य में नहीं देखा, एक पिछ सेंड करो निघ्त्य में प्लीज, ी ऍम वैतिनहज स्वीटहार्ट.”

और 5 मिनट वेट किया जब कोई भी मैसेज नहीं आया तो चावला साब सोचने लगे, के किआ उसस्के पिता वहां आगये होंगे इस लिए उस्सने रिप्लाई करना बंद कर दिया? किआ वो उस से सवाल कर रहे हैं? किआ उसस्के पिता ने मेरे मेस्सगेस पढ़ लिए? किआ आनंद ने मेरे मैसेज पढ़ने के बाद संजना को ज़ोर का थपड मारा? अजीब अजीब तरह के ख्याल आरहे थे चावला साहिब को संजा को सोचते हुए. फिर उसस्के दिमाग़ में एक और खौफनाक ख्याल आया, किआ किसी के साथ और वो मिलती है? किआ कोई उसस्के कमरे में है इस वक़्त और उस से इश्क फार्मा रहे हैं? किआ इस वक़्त उसस्के कपडे उसस्के बदन पर नहीं है? किआ कोई और उसस्के बूब्स को इस वक़्त चूस रहे हैं? इस वक़्त उस्का बाप तो नशे में सो रहा होगा और वो अकेली अपने कमरे में होगी, तो कोई भी उसस्के कमरे में आ सकता है …..यह सब सोचकर चावला साहिब से रहा नाह गया और संजना को कॉल किया. फ़ोन बज रही थी मगर कोई उठा नहीं रहा था… फिर तरय किया no रिस्पांस, फिर और फिर और फिर कॉल करता गया मगर no रिस्पांस…..

चावला साहिब का मैं किया के उसी वक़्त कार निकले और संजना के घर जाए!! वो बहोत hi परेशान होने लगे, और ऊपर से तीन व्हिस्की पी चुके थे तो नर्वस भी होने लगे थे, ग़ुस्सा भी ारः था. उसस्के समझ में नहीं ारः था के किआ करें अब!! और फिर कॉल करता गया कई बार मगर कोई रिप्लाई नहीं कर रहा था. तो अब वीडियो कॉल किया के जैसे वो करने से उस्सको संजना दिख जाएगा, मगर सब ब्लेंक थे….. उस्सने दोबारा वापस से सब मेस्सगेस को रीड किया तो देखा के जिस वक़्त उस्सने लिखा था :”तो मत लिखो, मुझे काम है” उसस्के बाद से hi बिल्कुल कोई मैसेज नहीं आये!!

तो चावला साहिब सोचने लगा, किआ इतनी ग़ुस्से वाली है? या उसस्के दिल को इतना ठेस पहुंचा जब उस्सने वैसा कहा उस्सको? किआ इतनी नाराज़गी सिर्फ इतना कहने से? तब चावला साहिब ने बाकी के ऊपर के मेस्सगेस चेक किये, तो देखा के संजना तो बहोत नार्मल थी और मस्करी कर रही थी, मगर चावला साहिब ने खुद के मेस्सगेस देखे तो खुद से कहा ‘मगर मैं तो उस्सको बहोत सख्ती से जवाब दे रहा था, उस ने पूछा किआ मैं उस्सको दन्त रहा हूँ तो मैं ने कहा हाँ…. तो वो खफा हो गयी शायद…… एक घंटा बीत गया मगर संजना की नाह कोई मेस्सगेस आयी नाह कॉल पिक उप कर रही थी. तो चावला साहिब ने यह भी सोचा के शायद उस्सको नींद आगयी और मोबाइल साइलेंट पर है तो उस्सको कैसे पता चलेगा के मैं कॉल कर रहा हूँ. खुद को दिलाशा दिलाया चावला साहिब ने.

और वो अपने मोबाइल को कमरे में चोरर कर सान्वी के कमरे में गए व्हिस्की के गिलास हाथ में लिए. सान्वी बीएड पर लेती हुई थी और अपनी निघ्टड्रेस में थी. उनको देखते सान्वी बीएड से उठी और धीरे से कहा के दीप्ति को अभी अभी नींद आयी है तो धीरे से बात करें. और सान्वी ने पूछा, “किआ हुआ पिता जी? आप अचानक क्यों आये?” चावला साब सान्वी को ऊपर से निचे तक देखा और सर झुका कर कहा, “बहोत परेशान हूँ, तुमसे बात करने को मैं किया तो चला आया! मुझे एक हुग दो नाह प्लीज!” और सान्वी मुस्कुराते हुए उन् के करीब गयी और उनको सीने से लगाया. फिर उनके सीने से लगे हुए hi पुछा, “क्यों परेशान हो आप? ऑफिस में कुछ प्रॉब्लम दिख गयी लैपटॉप पर किआ?”

बात ऐसी है के जब भी चावला साहिब परेशान होते थे तो सान्वी उनको ऐसे hi आराम देते थे, हर बार पहले से hi एक माँ की तरह उनको सीने से लगाकर प्यार से उंनका सर थपथपाते उस से चावला साहिब को सुकून मिलता था. यह बहोत पहले से ऐसा होता आया है. यह तब शुरू हुआ जब एक दिन कंपनी ने एक बड़ा लोस्स झेला था तब चावला साहिब रो पड़े थे और सान्वी ने तब पहली बार उनको अपने बाहों में लेकर एक बच्चे की तरह हौसला दिलाया था और उस दिन से जब भी चावला साहिब ज़्यादा परेशान होते तो सान्वी के बाहों में बचे की तरह चैन ढूंढ़ते. तो वैसे hi आज भी चावला साहिब सान्वी के बाहों में थे एक बच्चे की तरह. सान्वी ने फिर से उनको बाहों में थामे हुए पुछा, “बताइये के किश बात ने आप को इतना परेशान किया है हम्म?” चावला साहिब अपनी बहु के छाती पर सर दबाये हुए थे और एक गहरी सांस लेते हुए उस्सको संजना के बूब्स याद आये, और एक नज़र सान्वी के बूब्स को देखा और उस्सको लगा के वो संजना के hi बाहों में है. बहोत सुकून महसूस हुआ उनको. मगर उस्सको पता था के यह संजना नहीं सान्वी है तो उसस्के बाँहों से निकल कर कहा, “कुछ ख़ास नहीं बुसस ऐसे hi एक बोझ सा महसूस हो रहा था सीने पर…..” तो सान्वी मुस्कुराते हुए उनके ेंखों में देखते हुए कहा, “नहीं बात तो कुछ और है पिता जी आप कुछ छुपा रहे हो ज़रूर!” तब चावला साहिब ने सोचा “अरे बाप रे इस्को सब पता चल जाएगा अगर मैं ज़्यादा देर यहनन रुका तो, यह बहोत होशियार है मुझसे बात उगलवा लेगी बेहतर है के मैं निकल चलूँ यहाँ से!”

और वो भाग गए सान्वी के कमरे से. सान्वी उनको जाते देखते रही कुछ सोचते हुए….. चावला साहिब अपने कमरे में वापस आकर फिर मोबाइल चेक करता है मगर कुछ भी नहीं था तो सोचा के संजना सच में सो गयी होगी. मगर बुरे बुरे खयालात आरहे थे उन् के दिमाग़ में के कहीं कोई और तो संजना को छोड़ तो नहीं रहा है?!! वो इतनी भोली है और मुझसे इतनी आसानी से पैट गयी तो उस्सको कोई और भी पता सकता है ऐसा सोचा चावला साहिब ने, और आखिरकार खुद बीएड पर लेते और उनको नींद ने अपने घेरे में ले लिया!!

सुबह उठे तो सब से पहले मोबाइल देखा तो संजना की कई मेस्सगेस थे. उन् में एहि लिखा था के उस्सको नींद लग गयी थी चाट करने के दौरान hi…. अब चावला साहिब को जल्दी थी वहां जाने को और सभी काम को निपटाने को. सान्वी ने फिर से कहा के वो भी जाना चाहती है, मगर चावला साहिब ने कहा, “अरे मैं शायद देर से वापस लौटूंगा, तुम इतने देर कैसे मेरे साथ रहोगी, बहोत सारे काम हैं वहां मेरा फार्महाउस है जिस्सको डेकोरेट करनी है, वहां एक बड़ा सा टेंट बनवाना है, बहोत कुछ करना है….” और सान्वी बोली, “अरे पिता जी, मैं एक ड्राइवर के साथ दूसरी गाडी में आप के पीछे भी तो आ सकती हूँ नाह? और संजना से मिलकर मैं वापस आजाऊंगी, आप वहां अपने काम संभालना, क्यों आईडिया ठीक है नाह?” फिर भी चावला साहिब नहीं माने और उस्सको घर पर hi रहने को कहा.

चावला साहिब ने कई जगाओं पर फ़ोन किये क्यूंकि उनके बड़े बड़े कॉन्टेक्ट्स थे, टेंट वालों को, डेकोरेटर को, कैटरिंग वालों को, सब को एड्रेस दे दिया और तुरंत वहां पहुँचने को कहा और तैयार होकर घर से निकले ड्राइव करते हुए संजना के घर के तरफ. संजा को बुसस इतना लिख कर सेंड किया, “ी ऍम किंग स्वीटहार्ट”

तो बे कॉन्टिनोएड………………. (3025 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 16 संजना अलोन विथ हिम

संजना ने मैसेज पढ़ा और बहोत खुश थी फिर रिप्लाई किया,

“आप ने नहीं बताया के मैं किआ पहनूं?”

तो चावला साहिब ने ड्राइव करते हुए लिखा, “तुमने खुद तो कल रात को कहा था तुम मेरे लिए एक चौथी ड्रेस पहनोगी नाह? तो तुमको उसी में देखना चाहता हूँ, तुम्हारी जांघें बहोत दिलकश्त हैं उस्सको देखते hi रेन्हा चाहता हूँ, आज उस्सको जी भरके खाऊंगा हेहेहे”

संजन की उस मैसेज को पढ़ते hi एक आह निकली और खिलखिलाते हुए ज़ोर से कूदते हुए एक छोटी बच्ची की तरह चिलायी, “yeeeeeeeeeeeeeeeeehhhhhhh!!”

और एक लास्ट मैसेज लिखा, “ोकिए, आप ड्राइव कर रहे हो तो टस्ट मत करो मैं वेट कर रही हूँ जल्दी आवो आप. मुउआअह. स ु सून”

तो चावला साहिब ने पढ़ा और रिप्लाई नहीं किया मगर अपने लुंड को पंत में बराबर किया क्यूंकि वो हलचल मचा रहा था संजना की जाँघों को सोचते हुए.

उधर संजना नाहा धो कर साझ सवार रही थी चावला साहिब को याद में बसा कर. जैसे उस्सने साहिब को कहा था के एक छोटी ड्रेस पहनेगी वैसे hi एक छोटी ड्रेस पहना जिस में उसकी जांघें जो चावला साहिब को बहोत पसंद था बिल्कुल दिख रहे थे. बैठने से तो पंतय का दिखना पक्का था.

ड्रेस ऐसी थी:

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संजना को याद आया वो स्पेशल परफ्यूम जो चावला साहिब से आरहे थे हर वक़्त जब वो उनके बाहों में जेकरि जाती थी, और यहाँ अपनी पेफमस को देख कर उस्सको एक भी नहीं पसंद आया फिर भी मजबूरन किसी एक दो को लगाया. और थोड़ा मेक उप भी किया और खुद को आईने में देखते हुए कहा, “मुझे तो मेक उप की ज़रुरत hi नहीं, बिना मेक के hi तो सब पसंद करते हैं मुझे हीहीहीही …..”

और थोड़ी देर बाद संजना द्वार पर राह तकती रही चावला साहिब की. अपने बाल को खुले हुए चोरे थे संजना ने क्यूंकि चावला साहिब ने उस दिन उस से कहा था के खुले बाल बहोत पसंद है उनको. जहाँ चौकठ के पास संजना कड़ी थी एक हलकी से हवा की लेहेर चल रही थी जो उसस्के बालों को बार बार उसस्के चेहरे पर कर देते थे और संजना हर बार अपने पतली पतली उँगलियों से बालों को चेहरे से हटती जाती थी सामने देखते हुए.

घर के सामने से बाइसिकल पर कोई गुज़रा सीटी मारते हुए. संजना उस सीटी को पहचानती थी क्यों के यह पहली बार नहीं हुआ था. संजना ने ेंखों को धीमी करके उसस्के तरफ देखा और उस्सने साइकिल रोक दिया और संजना को ऊपर से निचे निहारने लगा. और फिर से सीटी मारा और कहा, आज तो क़यामत ध रही हो अरे वह किआ बात है सेक्सी एंड हॉट गर्ल हम्म्म!” संजना ने कहा, “जाओ यहाँ से वार्ना पत्थर चलके मरूंगी, जाओ!” वो कौन था इस्सके पता बाद में चलेगा.

संजना की नज़रें वहीँ सामने जमी रहे जहाँ चावला साहिब की कार रुकने वाले थे ठीक जहाँ उस आदमी ने साइकिल रोका था. संजना जहाँ कड़ी टी वहां से कोई 20/25 मेट्रेस की दूरी पर. संजना इंतज़ार करते थक गयी, और निचे बैठ गयी जिस से उस्सकी जांघें बहोत ज़्यादा दिखने लगे और उस्सको अपने दोनों टांगों को सतना पड़ा नहीं तो पंतय नज़र आते. और बुसस थोड़ी hi देर बाद वो साइकिल वाला और दो साइकिल वालों के साथ दूसरी तरफ से आकर वही रुके और संजना को चेररने लगे हर तरह की गन्दी बात करते हुए. संजना उन् सब पर चिल्लाई. उन् में से एक ने कहा, “कितना मस्त जांघें है तेरी अपना जीब से चाटने को मैं कर रहा है देगी किआ?” और एक ने कहा, “अरे क्यों नहीं देगी खुद तो बड़े मजे करती है हाहाहाहा, एक दिन छोड़ेंगे इस्को!” एक से तीन लोग क्यों संजना को ऐसे चेरर रहे थे और गन्दी बातें कर रहे थे उसस्के बारे में?

और तभी चावला साहिब की कार एते हुए नज़र आयी तो संजना का चेहरा खिल उठा. चावला साहिब ने तीन साइकिल सवारियों को उस जगह से जाते देखा जहाँ वो कार रोक रहे थे तो आते hi सबसे पहले एहि पूछा संजना से के वो लोग कौन थे. संजना ने अपने बाहों का हार चावला साहिब के गले में डाले हुए खुश मिज़ाजी में कहा, “अरे वही रघु था अपने चमचों के साथ इधर से गुज़र रहा था तो मुझको खड़ा देख कर चेरर रहा था!”

चावला साहिब पीछे मुड़कर कार के तरफ देख कर संजना के कमर में बाहें डाले उसस्के गालों पर चुम्बन करते घर के अंदर दाखिल हो रहे थे और जैसे hi अंदर ग़ुस्से, उस्सने ज़ोर से संजना को बाहों में भरके किश करने लगा. संजना ने भी ज़ोरों से उनको अपने बाहों में जाकर उनके जीब का रस चुस्सने लगी अपने पुरे बदन को उनके जिस्म से सताए हुए.

चावला साहिब ने संजना को खड़े खड़े hi उठा लिया, संजना के पाऊँ ज़मीन पर नहीं बल्कि चावला साहिब के गॉड से लटक रहे थे और किश में दोनों खोये हुए थे. उसी पोजीशन में चावला साहिब संजना को लटके हुए अपने बाहों में लेकर सीधे उस्सकी बैडरूम तक गया और संजना को बीएड पर लेता दिया. और जल्दी से उसस्के जाँघों को खोला और उस्सकी पंतय को चाटने लगा, संजना कसमसा गयी और चादर को अपने मुठी में जाकर के सिसकारियां चौररने लगी जब उस्सकी पंतय चावला साहिब अपने दांतों से निचे उतारने लगे. ज़ोरों से संजना की हांफने की आवाज़ सुनाई दे रहे थे, और उस्का जिस्म बीएड पर रेंग रही थी एक सांप की तरह. उस्सने दोनों टांगों को खुद फैला दिया चावला साहिब को अपनी गोरी छूट उसस्के मुंह के सामने करते हुए. चावला साहिब ने एक नज़र ऊपर उठाकर संजना को तड़पते हुए देखा और, अपने हाथों को उस्सकी चुतरों के निचे करके थोड़ा सा उठाया और अपना जीब उस्सकी छूट पर किया जिस से संजना की “िष्श्षषस, आआआआह ूउउउइइइइइ” निकल गयी. उस्सकी उस मधुर आवाज़ में उन् सिसकती आहों को सुन्ना चावला साहिब को जैसे ा मधुर संगीत सुनाई दे रहा था. वो बेहद खुश थे संजना के साथ वो सब करते हुए.

अपने जीब को संजना की छूट की गीली पंखुरियों को खोला और आहिस्ते आहिस्ते जीब को पंखुरियों के बीच फरते हुए उस्सकी पानी की लाज़त अपने जीब में महसूस करते हुए चावला साहिब ने फिर नज़रों को थोड़ा ऊपर करके संजना की मासूम चेहरे और लाल गालों को देखते हुए उस्सकी बहती पानी को चूसा, और कभी कभार उस्सकी जाघों के बीच भी जीब चलाया जैसे मुहं को पोंछते हुए, फिर संजना की छूट के चढ़ में थोड़ा सा अपने जीब को अंदर करते हुए संजना की गरम छूट की तापमान नाप रहे थे जैसे….

संजना बेहाल होती जा रही थी गहरी गरम सांसें लेते हुए और कभी कभी सर उठाकर चावला साहिब को देख रही थी. एक छोटी बच्ची की आवाज़ जैसे आरही थी उसस्के गले से और “अब बुसस बुसस बुसस कीजिये प्लीहासे मेरा हो गया … होगया मैं झाररर गयी साहाहाब रुक जाओ नाह प्लीज!!!” संजना इतना हांफ रही थी जैसे उस्सकी सांसें रुकने वाला है, लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए छाती पर एक हाथ रख कर उठ बैठी चावला साहिब को देखते हुए और हाथ के इशारे से रुकने को कहते हुए!

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
थैंक यू, यह सब भी आएगा, अभी तो सिर्फ दूसरी बार मिले हैं, अभी तो दोनों तरफ से लस्ट की आग ने घेरे हैं गिफ्ट वग़ैरा से दोनों में किसी को इंटरस्ट नहीं है वैसे आज वाले अपडेट जो कल रात मैं ने लिखा देखना किआ गिफ्ट चावला साहब खुद अपने साथ लेकर जाएगा संजना के यहाँ से :डी

तुम फ़िक्र मत करो, वो सब वक़्त आने पर आएगा.

वैसे पिछ अच्छी है :डी
 
अपडेट 17 संजना इन हिज कंपनी इन हेर बैडरूम

एक छोटी बच्ची की आवाज़ जैसे आरही थी उसस्के गले से और “अब बुसस बुसस बुसस कीजिये प्लीहासे मेरा हो गया … होगया मैं झाररर गयी साहाहाब रुक जाओ नाह प्लीज!!!” संजना इतना हांफ रही थी जैसे उस्सकी सांसें रुकने वाला है, लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए छाती पर एक हाथ रख कर उठ बैठी चावला साहिब को देखते हुए और हाथ के इशारे से रुकने को कहते हुए!

अब आगे……

चावला साहिब मुस्कुराते हुए अपने होंठों पर अपना जीब फेरते हुए संजना को कुछ देर देखा, तब बीएड पर उसस्के पास गया और उस्सको सीने से लगाते हुए बहोत प्यार से और धीरे से कहा, “किआ हुआ मेरी प्यारी बेबी को हम्म्म?” संजना कुछ बोलने की स्तिथि में नहीं थी हांफते जा रही थी और अपने कलाई से ठहरने का इशारा करते हुए अपने सर को चावला साहिब के नंगे सीने से सत्ता दिया. चावला साहिब ने अपना शर्ट और पंत उतार दिए बीएड पर चढ़ने से पहले, वो सिर्फ अपने अंडरवियर में था संजना को अपने सीने से लगाए हुए. वो संजना के पीठ पर अपना हाथ थपथपाते जा रहा था जैसे कोई किसी का हेल्प करता है जब ज़्यादा खांसी आती है तो, मतलब वो संजना को दिलाशा दिला रहा था के सब ठीक है. संजना बिल्कुल ढीली पर गयी थी जैसे कोई 50 कम दौड़ते हुए आकर रुकता है उस्का हाल कुछ वैसा था उस वक़्त, उसस्के सर भी चकराने लगे थे.

तो अचानक चावला साहिब ने पूछा, “तुमने किआ खाया था सुबह को?” तो संजना बोली के कुछ भी नहीं खाया, वो उसस्के आने की ख़ुशी में सब भूल गयी थी. तब चावला साहिब के समझ में आया के क्यों उस्का वो हाल हुवा झड़ने के बाद क्यूंकि वो भूकी पथ से थी और ऊपर से ओर्गास्म हुआ और अचानक हुवा इसी लिए उस्सको वैसा फील हुवा जैसे बेहोश होने वाली थी… तो चावला साहिब झूट मूठ के ग़ुस्सा करते हुए कहा “चलो अभी इसी वक़्त कुछ खालो फिर कंटिन्यू करते हैं.” अब संजना थोड़ा नार्मल हुई थी और कहा के नहीं अब ठीक है, तो चावला साहिब ने कहा के खाना ज़रूरी है, तो पता है संजना ने किआ जवाब दिया? संजना ने बचपने आवाज़ में चावला साहिब के अंडरवियर पर उनके लिंग को छुछ्ते हुए कहा, “मुझे पता है कल मैं ने आप के इस्को ज़्यादा नहीं लिया था और आज आप एहि करने को बोलोगे तो कुछ नहीं खाया क्यूंकि यह खाना है, और अगर अभी कुछ खा लिया तो यह नहीं ले पाऊँगी वार्ना उलटी होगी मुझे! हम्म्म्म!”

चावला साहिब को बहोत ज़्यादा प्यार आया उसस्पी उस्सकी यह प्यारी भोली बात को सुनकर और उस्सको बहोत ज़ोर से सीने पर दबाया और बहोत सारे चुम्बन लिए संजना के. अपनी योनि की नदी के सारे पानी बहा कर संजना जैसे थक गयी थी और थका हारा हुआ आदमी कैसे ढीला पर जाता है उस वक़्त संजना वैसे थी. फिर भी उस वक़्त उस्सकी पंतय ज़मीन पर पारी हुई थी और ड्रेस जाँघों के बिल्कुल ऊपर थे तो चावला साहिब का एक हाथ आहिस्ते आहिस्ते उसस्के एक जांघ को करेस कर रहा था. और संजना का एक हाथ उनके अंडरवियर पर उनके लिंग पर था. उसस्के छुवन से चावला साहिब का खड़ा होने लगा था और लुंड का ऊपरी हिस्सा खड़े होकर अंडरवियर से बाहर झाँकने लगा था जिस्सको देख कर संजना ने खिलखिलाकर, “हीहीहीहीहीहीहीहीहीही” किया अपने ऊँगली से वहां इशारा करते हुए. बड़े ज़ोर से हंससने लगी एक हाथ को अपने मुंह पर किये और एक हाथ की ऊँगली को लिंग के तरफ इशारा करते हुए!

उस्सको वैसे हँस्ते हुए देख कर खुद चावला साहिब भी हंससने लगे और कहा, “यह तुमको hi झांक रहा है, तेरे छूने से जाग गया क्यूंकि यह रास्ते भर तुझको सोचते हुए ारः है, अब एक प्यारी सी किश देदे इस्को बेचारा ग़रीब खुश हो जाएगा.” यह सुनकर संजना और ज़ोरों से हंससने लगी यह कहते, “यह ग़रीब? यह टुकड़ा ग़रीब हीहीहीहीहीहीहीहीही!” तो चावला साहिब ने एक तकिये को अपने सर के निचे करके लेट गया, और संजना बैठी रही उसस्के कमर के पास बीएड पर hi और चावला साहिब ने हलके से अपने अंडरवियर को निचे सरकाया जिस से उस्का लुंड आधा दिखने लगा, और उस्सने अब संजना से कहा, “देखो अब तुम्हारी बारी है, मैं कुछ नहीं कहूंगा अब जो करना है तुमको करना है.” तो संजना ज़रा सा मुस्कुराते हुए अपने होंठों को दांतों में दबाते अपने घुटनों के बल बैठी बीएड पर वहीँ चावला साहिब के कमर के पास और उनके चेहरे में देखते हुए अपने दोनों हाथों के पतली ुंलियों से चावला साहब का अंडरवियर और निचे करने लगी वैसे hi होंठों को और ज़ोर से दांतों में दबाते हुए. चावला साहिब खुश नज़र आये और अपने टांगों पे ज़ोर देते हुए अपने कमर को ऊपर उठाया संजना को ढील देने के लिए ताके उस्का अंडरवियर बाहर निकल सके आसानी से.

जब संजना ने अंडरवियर को निचे फेंक दिया तो अपने होंठों पर अपना जीब फेरते हुए चावला साहब के लम्बे मोठे तन्ने हुए लुंड को देखने लगी, फिर चावला साहिब के चेहरे में देखा एक मुस्कान के साथ, और थोड़ा झिझकते हुए एक हाथ को लिंग के तरफ बढ़ाया, फिर वापस कर किया फिर दूसरे हाथ को बढ़ाया मगर उस्सको भी खिंच लिया और दोबारा चावला साहिब के चेहरे में मुस्कुराते हुए देखा तब अपने एक हाथ को आगे बढ़ाते हुए चावला साहिब से kaha,”issko दोनों हाथों में लूँ या एक hi हाथ में?”

चावला साहिब ने मुस्कुरा दिए उसस्के भोलेपन को देख कर और कहा, “जैसे तुझको आसान और अच्छा लगे, पर तू छह तो उस्सको, पाकर तो, सेहला तो सही…. कब तक इंतज़ार करूँ मैं और यह?” संजना ने फिरसे हीहीहीही करते हुए एक हाथ को उस मोठे लुंड पर रखा जिस से चावला साहिब की आह निकली. फिर संजना अपने होंठों को फिरसे दांतों में दबाते हुए एक नज़र चावला साहिब को देख कर अपने दूसरे हाथ को उसस्के बॉल्स पर किया जिस को छुछ्ते hi चावला साब घुर्रा गए. दायां हाथ से लुंड पकड़ा और बयां हाथ से बॉल को सेहला रही थी संजना बिना कुछ सिखाये…… चावला साहिब को कभी कभी शक होता के यह लड़की बहोत कुछ जानती है पर ना जान्ने की ढोंग करती है, क्यूंकि जिस तरह से वो बॉल और लुंड को उसे कर रही थी लगता था के पहले भी कर चुकी है और तजुर्बा है उस्सको. उस्सको कैसे पता चला के बॉल सहलाने और लुंड को हाथ से मुठी ढीली बनाकर हाथ चलाने से मर्द को अचछह लगता है? चावला साहिब संजना के चेहरे में घुररते हुए यह सोच रहा था.

संजना अपने हाथ को धीरे धीरे उनके लिंग पर चला रही थी मुठी को आधा बांध करके उस फॉर्म में जैसे कोई मुठ मारता है. यह देख कर भी चावला साहिब ने सोचा के इस्को यह कैसे पता है के इस तरह से मर्द या लड़का मुठ मारता है? फिर संजना ने थोड़ा सा अपना गर्दन झुकाया और चेहरे को लुंड के ज़्यादा करीब किया, चावला साहिब को कहने की ज़रुरत नहीं पड़ी के उससे चुस्सने को कहे, वो अपने आप hi झुक गयी, मगर चूसा नहीं करीब से लुंड को देख रही थी, जैसे प्यार कर रही हो उस से. जैसे एक बचा एक डॉल को हाथ में लेकर प्यार करता है संजना उस वक़्त कुछ वैसा कर रही थी एक हलकी सी मुस्कान के साथ. और अचानक संजना ने लुंड चोरर दिया और ऊँगली से दिखाते हुए कहा, “देखो वो पानी का बुलबुला उस दिन की तरह…” चावला साहिब का प्रेकम था….. तो अब चावला साहिब ने कहा, “बेबी इतस टाइम तो टेक आईटी इन योर माउथ स्वीटहार्ट, के ों मुझको वो ख़ुशी दो तुमने कल कहा था नाह के आज मुझको ज़्यादा खुश करोगी सो के ों डार्लिंग!” संजना ने एक नटखटी आवाज़ में मुस्कुराते हुए कहा, “हम्म्म आप सच में बड़े वो हो, मुझसे काम निकलवाना खूब अत है आप को हम्म्म” और उस्सने खुद से लुंड को फिरसे हाथ में लिया और प्रेकम को अपने एक ऊँगली से दबाया और गीली गीली उसस्के ऊँगली में लगी तो चावला साहिब ने कहा, “अब ऊँगली को मुंह में दाल कर चखो उस्सको!”

संजना अपनी ऊँगली को देख रही थी होंठ दबाये हुए और वही बचपने आवाज़ में कहा, “नाह” तो चावला साहिब थोड़ा बेकरार होते हुए कहा, “अरे बेबी इतस नेचुरल, मैं ने कितनी बार कल तुम्हारे पानी को ऊँगली में लेकर चूसा था और तुमने देखा भी था नाह, सूचक आईटी हनी.” थोड़ा सा झिझकते हुए संजना ने आखिर ऊँगली को जीब से हलके से छाता तब चूसा उनके ेंखों में मस्करी भड़ी नज़रों से देखते हुए. तो अब फिर चावला साहिब ने सोचा, ‘मैं ने तो सिर्फ चुस्सने को कहा इस्को कैसे पता चला के चाटना है पहले?’ और बिना कहे संजना झुकी और लुंड के ऊपरी हिस्से को अपने मुंह में ले लिया जिस से चावला साहिब थार्र्थरा गए. “आआह्ह” करते हुए चावला साहिब ने तड़पते आवाज़ में कहा, “और अंदर लो नाह इस्को मेरी जान” तो नज़रें उठाये चावला साहिब के चेहरे में देखते हुए संजना और ज़्यादा झुकी और लुंड उसस्के मुंह के और अंदर गया फिर संजना और थोड़ा ऊपर उठाया अपने गर्दन को, फिर निचे किया और अपने जीब को लुंड के छेड़ पर फरते जा रही थी के अचानक चावला साहिब का फ़ोन बजा!! कमरे में बिल्कुल तन्हाई थी एक माखी की भी आवाज़ नहीं सुनाई दे रही थी इन् दोनों के आवाज़ के इलावा और अचानक फ़ोन के बजने से दोनों hi चिहुंक गए. संजना डर गयी और लुंड को चोरर दिया और अपने हाथ को अपने मुंह पर फरर्ते हुए चावला साहिब के चेहरे में सेहमी सी देखने लगी.

चावला साहिब का फ़ोन उसस्के पंत में था जो ज़मीन पर पारा हुआ था. तो उस्सने इशारे से संजना को दिखाया, तो संजना बीएड से उतर कर उनके पंत लेन गयी साथ में उस्सकी पंतय भी वहीँ पारी हुई थी तो संजना वो भी उठा लायी और बीएड पर रख दिया. चावला साहिब ने फ़ोन को रिप्लाई किया,

“हाँ hello कौन है?..... हाँ अच्छा हाँ तो ाजावो एड्रेस सही है हाँ वही, वहां से कोई 200 कंस का रास्ता है, हाँ मैं यहीं पर हूँ ाजावो तुम सब को लेकर. हाँ हाँ okay. मिलते हैं”

संजना अपने दांतों में एक ऊँगली दबाये चावला साहिब को देख रहे थे, और जब उन्हों ने मोबाइल पंत के जेब में वापस रखा तो धीमी आवाज़ में संजना ने कहा, “मूड ऑफ हो गयी अब तो”

तब चावला साहिब ने उस्सको बाहों में भरके कहा, “अरे बेबी यह साले डेकोरेशन और टेंट वाले हैं अपने आदमियों के साथ यहाँ आएंगे सब तैयार करने को वही पूछ रहा था के एड्रेस सही है के नहीं वो निकल चूका है. …. आरी अब तू क्यों मूड खराब कर रही है चल वापस लगजा….” संजना को एक किश करते हुए चावला साहिब ने जैसे फुस्सलाते हुए उस्सको वापस लुंड चुस्सने को कहा.

अब अचानक संजना फिरसे खिलखिला कर हँस्ते हुए अपने ऊँगली से लुंड के तरफ इशारा किया और हँस्ते जा रही थी. हुवा यह था के लुंड बिल्कुल मुरझा गया था तब तक. हँस्ते हँस्ते संजना ने कहा “एक मारा हुआ सांप का टुकड़ा दिख रहा है हीहीहीहीहीहीहीहीहीहीही” वो इतनी हंस रही थी के उसस्के बूब्स हिल रहे थे तो चावला साहिब ने ज़ोर से उसस्के चूचियों को दबाया और कहा, “अब चूस!!” उस्सकी बूब्स के दबने पर संजना की आह नीली और फिर से झुकी लुंड के पास. और अपने हाथ में उस नरम टुकड़े को सहलाने लगी तो चावला साहिब ने कहा, “हाँ देखना अभी तेरे छुहने से कैसे तन्न के खड़ा होता है दोबारा….” और संजना लुंड को ग़ौर से देखते हुए अपने मुलायम हाथ से उस्सको जैसे नया जीवन दे रही थी और आहिस्ते आहिस्ते संजना ने देखा वो जैसे फिर से जीवित हो रहे हैं और धीरे धीरे वो जैम के फिर से खड़ा हो गया. सनजना ने प्रोसेस को ध्यान से देखा और कहा, “अजीब बात है नाह के सिर्फ मेरे छुहने से यह इतना बड़ा और मोटा हो गया फिर से, अभी अभी तो मारा हुवा पारा था निचे सिकुड़ कर हीहीहीही!” और उस्सने उस्सको अपने मुंह में फिर से ले लिया और चुस्सने लगी, चावला साहिब आहिस्ते आहिस्ते कमर को ऊपर निचे कर रहा था जैसे संजना के मुंह के ज़्यादा अंदर डालने के लिए अपने लुंड को…. और चावला साहिब ने उसस्के पंतय को हाथ में लिया और उस्सको अपने चेहरे के पास किया और नाक तक लाकर सूंघने लगा.

संजना ने चूस्ते हुए देखा तो रुक कर कहा, “ये किआ कर रहे हो आप मेरी पंतय के साथ!” चावला साहिब एक हाथ से संजना को अपने लुंड पर दबाते हुए कहा, “इस में तेरी खुस्भू ले रहा हूँ मैं.” संजना बोली, “चीः, वो भी कोई सूंघने की चीज़ है? उस में से किआ खुशभू आएगी भला?” तो चावला साहिब ने कहा, “तू किआ समझती है के खुशभू सिर्फ परफ्यूम में या फूलों में होते हैं? यह सब से बड़ा खुशभू है जो मर्दों को अपनी तरफ खींचती है, मैं इस पंतय को अपने साथ लेजाऊंगा” और उस्सको अपने पंत के पॉकेट में रख लिया. संजना ने बचपने आवाज़ में सर झटकते हुए कहा, “नै नै मेरी पंतय वापस करो मैं किआ पहनूंगी अब?” तो चावला साहिब ने कहा, “आरी यह तेरी निशानी है जो मेरे पास रहेगा, रात को इस्को अपने साथ लेकर सोऊंगा तुम्हारी याद आये तो इस्को चूमूंगा, किश करूँगा लीक करूँगा हेहेहे” संजना ने ेंखों को मोटा मोटा करके उनको देखा और हंस पारी.

फिर चावला साहिब को एक बात सुझा संजना के जाँघों के तरफ देखते हुए उस्सने कहा, “रुक, तू अपनी पंतय वापस पहले अभी; बाद में निकल कर देना.” संजना ने पंतय को लिया और पूछा, “क्यों? क्यों बाद में दूँ?” तो चावला साहिब ने कहा, तू जहाँ बैठी वहां अपने निचे के चादर को देख, तेरे पानी से भीग गयी है!” संजना ने देखते hi अपने दोनों हाथों खुले हुए मुहं पर रखा और कहा, “हाई राम!” तो चावला साहिब ने कहा, “अब पंतय पेहेन ले ताके तेरा पानी पंतय को भीगोड़े तब एक घंटे बाद निकाल कर मुझको देना उस में तब तेरी खुशभू पूरी तरह से बास जाएगी.” संजना ने ज़ोर से कहा, “चींईईईई चींईईई किआ कह रहे हो आप गंदे हो आप चीटीई!!!”

चावला साहिब हंससने लगे और कहा, “तुम अभी नादाँ हो बेबी, तुम्हें किआ पता के छूट की खुशभू किआ होता है मेरी जान!” फिर संजना ने मुंह पहला कर कहा, “आप ऐसे गन्दी गन्दी बातें मत करो मुझे नहीं पसंद हम्म्म”

तो चावला साहिब ने उस्सको फिर गले से लगाया और किश किया और वापस चुस्सने को कहा. संजना फिर झुकी अपने पंतय पहनकर और चावला साहिब के लुंड को अपने मुंह में भर लिया और गर्दन हिलाते हुए चावला साहिब को खुश करने लगी.

तो बे कॉन्टिनोएड…………………………… (2425 वर्ड्स)
 
अपडेट 18 बोथ एक्सपेरेंसिंग तोगथेर्नेस
तो चावला साहिब ने उस्सको फिर गले से लगाया और किश किया और वापस चुस्सने को कहा. संजना फिर झुकी अपने पंतय पहनकर और चावला साहिब के लुंड को अपने मुंह में भर लिया और गर्दन हिलाते हुए चावला साहिब को खुश करने लगी.

अब आगे...............

चावला साहिब अपने लिंग को संजना के मुंह में एते जाते हुए देख रहा था और उस नाज़ुक सी लड़की के चेहरे में देख कर उस्सको बेहद प्यार आ रहा था. सनजना भी एकांत बार नज़रों को ऊपर करके उनको देख रही थी चूस्ते हुए. उस्सकी मुलायन हाथ से लुंड को संभाली हुई थी और चुस्ती जा रही थी. चावला साहिब अपने नसीब का शुक्रिया ऐडा कर रहे थे अपने दिल में बहोत खुश होते हुए. और अपने लुंड को संजना के मुंह के अंदर कुछ ज़्यादा ठुसस्ने की कोशिश में भी लगे हुए थे. संजना उनको अपने दूसरे हाथ से उनके पथ पर रख कर पुश करती रहती जब वो वैसा करते तो.

कुछ देर बाद संजना ने लिंग को मुंह से निकला और उसस्के थूक से भीगे हुए लिंग को हाथ से सहलाते हुए चावला साहिब के चेहरे में देखते हुए अपनी बचपने वाली आवाज़ में कहा, “हम्म्म मेरा मुंह दुःख गया, आप का यह बहोत मोटा है, मेरा मुंह hi नहीं खुलता आराम से उतना, मुझे फाॅर्स करके खोलना पड़ता है और इतनी देर में मुंह दुःख गया अब बुसस करो नाह!!” यह कहकर उस्सने अपना सर चावला साहिब के पथ पर रख दिया, बल्कि अपने गाल को रखा पथ पर और हाथ से लिंग को सहलाते हुए उस्सको देख रही थी. फिर अपने एक ऊँगली से लुंड के चढ़ पर गोआल गोआल घुमाते हुए दो उँगलियों के बीच फिरसे उंनका प्रेकम दबाया और दोनों उँगलियों को सताते और हटते हुए एक पतली सी प्रेकम से बाल जैसी पतली लखीर जैसे दिखाई दिए तो संजना ने चावला साहिब को दिखते हुए अपने जीब से उँगलियों को chaata!,phir मुंह को कुछ ऐसे बनाया जैसे खता इमली खा रही हो! तो चावला साहिब ने हँस्ते हुए कहा, “किआ हुआ खता है किआ?”

तो सनजन खिलखिला कर हँस्ते हुए नटखटी आवाज़ में कहा, “खता कहाँ से होगी यह आम है किआ? मैं इस्सकी लाज़त को एक्सप्लेन नहीं कर पाऊँगी, वैसे कुछ ख़ास तो नहीं पर अच्छा लगा मुझे, मैं ने सोचा था के उलटी करुँगी मगर ऐसा कुछ भी तो नहीं हुआ. तो चावला साहिब ने बिनती करते हुए कहा, “बुसस और थोड़ा सा बुसस थोड़ा सा और चूस लो फिर कुछ और करेंगे!” तो संजना ने वही बचपने आवाज़ में इन्कारी अंदाओं में रोनी सूरत बनाते हुए कहा, “हम्म्म नै नै, मैं थक गयी अब यह करते हुए, और किआ कुछ और करना बाकी है अब भी ह्म्म्मम्म नईईई” मगर फिर भी उस्सने खुद सर झुका कर लिंग को दोबारा मुंह में लिया और चुस्सने लगी लिंग को सेहाते हुए. और एक हाथ संजना फिर उनके बॉल्स पर लगाई और बॉल भी साथ साथ बड़े प्यार से नरमी से सहलाने लगी. चावला साहिब जैसे खुद को जन्नत में फील करने लगा था उस वक़्त और आराम से सर को तकिये पे रख कर ेंखों को मुंध लिए उन्हों ने और संजना नज़रें उन् पर करके उनको यह सातवीं आसमानों वाला ख़ुशी दे रही थी.

कोई 5 मिनट तक संजना ने वैसे करना जारी रखा और चावला साहिब उसी पोजीशन में लेते रहे इन्हें मुंढ़ें हुए. संजना को बहोत अच्छा लग रहा चावला साहिब को वैसे आराम से लेते हुए देख कर. वो जानती थी के उनको कितना मज़ा ारः होगा और वो चाहती थी के चावला साहिब को वो मज़ा और खुसी मिले. मगर लुंड के मोठे होने के कारण उस्सको रुकना पारा मुंह जो दुःख गए थे संजना का. तो वो रुकी, सांसें लिए और चावला साहिब के छाती पर अपना सर रख कर उनके पास लेट गयी, एक हाथ लुंड पर रखते हुए बल्कि धीरे से सहलाते हुए. चावला साहिब की ेंख लग गयी थी. संजना उनके चेहरे में देखते हुए बड़े प्यार से उनके गालों पर चुम्बन दिए जिस से उनके ेंखें खुली और उस्सने भी एक सांस लेते हुए कहा, “किआ हुआ? रुक क्यों गयी तुम?”

संजना ने मुस्कुराते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “अब बुसस, मैं थक गयी हूँ, अब आप वो कीजिये जो कहा था करोगे!” तो चावला साहिब ने भी मुस्कुराते हुए कहा, “okay अब तुम अपने पीठ पर लेट जाओ मेरी जगह पर और मैं ऊपर अत हूँ तुम्हारे!” संजना ने अपने होंठों को दांतों में दबाते हुए पोजीशन चेंज किया और चावला साहिब संजना के टांगों के पास बैठा और उस्सकी ड्रेस को उठाते हुए संजना के जाँघों पर किश करते हुए उसस्के पंतय को दोनों हाथों से आहिस्ते से खींच कर बाहर निकला. और पंतय को अपने नाक तक लाकर सुंघा और कहा, “अब मैं इस्को अपने पंत के जेब में रखता हूँ, इस्को अपने साथ लेजाऊंगा, यह तुम्हारे तरफ से मेरे लिए एक ख़ास तोहफा है.” संजना लेते हुए अपने ड्रेस से अपने प्राइवेट part को ढांकते हुए कहा, “हम्म और मेरा तोहफा आप के तरफ से किआ होगा?” तो चावला साहिब ने कहा, “तुम मेरा अंडरवियर रख लो!” संजना खिलखिला कर हंसी “हीहीहीहीहीहीहीही” और वैसे हँस्ते हुए hi कहा, “हीहीही मैं आप के अंडरवियर से किआ करुँगी भला? हीहीहीहीही” चावला साहब ने हँस्ते हुए कहा, “तुम इस्को पहेंलेना कभी कभी पंतय की जगा.” तो संजना ने कहा, “नै; पापा ने पुछा तो किआ बताउंगी?” चावला साहिब ने हँस्ते हुए कहा, “तेरे पापा को तेरे ड्रेस के निचे कैसे दिखेगा, किआ वो ड्रेस उठाकर देखेगा किआ?”

फिर चावला साहिब का मैं खांका! उस्सने कल रात वाली बात याद किया कैसे वो सोच रहा था के संजना के साथ रात को कोई है तो नहीं….. वो कितना फ़िक्र कर रहा था कल रात को जब संजना रिप्लाई नहीं कर रही थी…. तो चावला साहिब संजना के ड्रेस को ऊपर उठाते हुए उस के गदराये जाँघों पर अपने हाथ आगे बढ़ाते हुए संजना के चेहरे में ग़ौर से देखते हुए पुछा, “एक बात बताओ, किआ तुम कल रात सच में नींद में थी जब मेरे मैसेज का जवाब नहीं दे रहे थे?” तो संजना ने “िस्सशशशशशशशश” करते हुए कहा, “आप अपने ऊँगली को क्यों उस सेंसिटिव जगह पर करते हो, अभी भी वहां बहोत सेंसिटिव है वहां मत छुओ नाह प्लीज!” चावला साहिब की ऊँगली उस्सकी छूट पर चला गया था तब तक…. और चावला साहिब ने कहा, “तुमने जवाब नहीं दिया बेबी!”

संजना ने थोड़ा कमर खिस्काते हुए कहा, “ोफो, सोई नहीं होती तो आप को रिप्लाई करती नाह? मुझे नींद आगयी थी क्यों?” और चावला साहिब संजना के ऊपर चढ़ते हुए पुछा, “तुम वर्जिन हो नाह? जब तुम्हारे छूट के चढ़ में मैं ने अपना जीब डाला तो अंदर नहीं जा पाया वर्जिन hi हो नाह या एक ऊँगली दाल कर देखूं?” संजना का चेहरा लाल हो गया इस सव्वल से और फिर भी थोड़ा शर्माते हुए निचे के होंठ को दन्त में दबाते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “हम्म्म कुंवारी हूँ बील्कुल मैं” तो चावला साहिब की सांसें बाहर आये और संजना के ऊपर नंगा चढ़ के अपने लुंड को उस के नाज़ुक जाँघों के बीच हलके से दाबाटे हुए संजना के गर्दन को चाटना शुरू किया. संजना अपने दोनों कलायिओं को उनके छाती पर करके जैसे उंनका वज़न अपने ऊपर कम करने के लिए एक सपोर्ट की तरह किये हुए थे. एक हाथ से चावला साहिब ने संजना के ड्रेस उसस्के पथ तक उठाया और संजना के नबी पर अपने ऊँगली को गोआल गोआल घुमाया जिस से संजना कसमसा सी गयी….

फिर चावला साहिब ने कहा, "तू भी बिल्कुल नंगी होजा नाह, ड्रेस निकलते हैं और तेरी ब्रा भी तेरे चूचियों को तो नहीं चखा हूँ अब तक, चल सब निकाल फेंक अब बेबी!!” संजना तैयार हो गयी और चावला साहिब उसस्के ऊपर से हटे तो संजना ड्रेस निकालते हुए कहा, “मैं तो सोचती थी आप खुद मेरे ड्रेस निकलोगे मुझ पर चढ़ने से पहले हीहीही”

जिस से चावला साहिब मुस्कुराया और कहा, “हाँ मैं भी पागल हो रहा हूँ, ऐसा लगता है मैं एक तीनगर हूँ और किआ करना मेरे को मालूम hi नहीं हाहाहा” फिर तुरंत कहा, “तेरे कॉलेज के दोस्तों में किसी तीनगर ने तेरे को कभी नहीं छुवा है किआ? हम्म सच बता नाह, तुम कभी कभी मुझको बहोत hi चालु लगती हो पता है?”

तब संजना ने कहा, “मैं ने उस दिन आप से कहा था नाह के आप मुझको नहीं जानते जब सब जानोगे मेरे बारे में तो शायद नफरत करोगे या बहोत ज़्यादा प्यार मगर वो सब बताने की अभी टाइम नहीं आया है वक़्त आने पर बताउंगी हहहहए”

चावला साहिब को याद आया के हाँ सच में पहली मुलाक़ात पर hi संजना ने कुछ ऐसा कहा था उन् से. तो अब चावला साहिब सोचने लगा के किआ चीज़ है यह संजना किआ बात छुपा रही है और टाइम आने पर bataegi!!Aur आज भी बात को अनसुना करके वो जिस काम के लिए उतावला हो रहा था उस में लग गया.

तब तक संजना ने अपनी ड्रेस निकाल फेंकी थी और चावला साहिब की ेंखें संजना की छाती पर गर्री रहे उसस्के बूब्स को ब्रा में छुपे देखते हुए, जो हिस्सा ऊपर दिख रहे थे उनको देख कर hi चावला साहिब का लिंग सनसना गया और ज़्यादा तन्न के खड़ा होने लगा और संजना की नज़रें उसी पर जमे हुए थे तो वो खिलखिला कर फिरसे अपनी पतली ऊँगली से इशारा करते हुए लुंड को दिखाया और हंससने लगी. मगर चावला साहिब तो उस्सकी चूचियों को बाहर निकलने का इंतज़ार में था तो संजना बोली, “यह भी नहीं करोगे आप? मुझे hi मेरे ब्रा को उन्हुक करना होगा किआ?” चावला साहिब इतना खोए हुए थे उस्सकी जवान, नरम मुलायम गोरी चूचियों में के जैसे संजना की बात सुनकर वो एक नींद से जागते हुए संजना के कांधों पर हाथ करके उस्का पीठ अपने तरफ घुमाया.

तब संजना की चिकनी गोरी पीठ पर पहले अपना हाथ फेर्रा और आहिस्ते से उस्सकी ब्रा को उन्हुक किया और उस्सको अपने तरफ घुमाया उस्सकी खूबसूरत बूब्स देखने के लिए. संजना थोड़ा सा जैसे शर्माते हुए अपने दोनों हाथों को छाती के ऊपर कर लिया. तो चावला साहिब ने कहा, “कमाल करती हो, निचे नंगी हो सब दिख रहा है, मैं ने किआ कुछ नहीं किया निचे तेरे सेक्स पर और अब ऊपर छुपा रही हो जैसे पहली बार तुझे नंगी देख रहा हूँ आरी हाथ हत्ता!” तो संजना ने हँस्ते हुए अपने हाटों को हटाया और चावला साहिब के ेंखें बड़े बड़े होकर खुले संजना के बूब्स और गोरी गोरी तन्ने हुए निप्पल्स को देखता रहा. संजना कुछ नर्वस जैसे फील कर रही थी उनके सामने वैसे नंगी बैठे हुए और अपने बालों को उँगलियों में घुमाये जा रही थी निचे देखते हुए होठों को डेंटन में दबाये. संजना को पता था के चावला साहिब उसस्के चूचियों को घुर्र रहे हैं और शायद बहोत खुश हो रहे हैं देख कर, और आहिस्ते से संजना ने अपनी नज़रों को खुद अपने चूचियों पर किया और खुद से शर्मा गयी और नज़र फेरर लिया. संजना का दिल धड़कते हुए चूचियों की लेफ्ट में दिख रहा था, वो हिस्सा जहाँ दिल होता है हिल रहा था, और हरी हरी नसें संजना के बूब्स पर भी दिख रहे थे जीन में उस्का खून रवानी ले रहे थे….

अपने ेंखों को वही गाररये हुए चावला साहब ने संजना का हाथ अपने हाथ में लेकर अपने तन्ने हुए लुंड पर किया, संजना ने लुंड को हाथ में ले भी लिया और चावला साहिब के चेहरे में देखे. उस वक़्त एक ऐसा पल था के दोनों में से कोई भी बात नहीं कर रहे थे जैसे एक दूसरे को पता था के किआ करना चाहिए आगे…. तो संजना खुद अपने घुटनों पर हुई और अपने छाती को चावला साहिब के मुंह के पास कर दिया उनके सर को अपने हाथ से वहां सट्टे हुए. खुद तो संजना बच्ची दिखती थी मगर उस वक़्त ऐसा लग रहा था के एक जवान माँ अपने बड़े से बच्चे को अपना दूद पिने को दे रही है. किआ नज़ाकत थी संजना की अदाओं में उस वक़्त, उसस्के चेहरे की एक्सप्रेशन को बयां करना मुश्किल है जिस तरह से उस एक्शन को किया था उस ने. चावला साहिब जैसे उस वक़्त एक जादू के घेरे में पड़े हुए थे और वही कर रहा था जो उस से करवाया जा रहा है, लगता था हु हिप्नोतिसेड हो गए थे.

तो उन्हों ने संजना के छाती पर अपना चेहरा किये हुए बड़े नरमी से अपने जीब को बाहर किया और संजना के नरम बूब पर फेर्रा और जैसे hi उसस्के जीब ने वहां छुवा तो संजना उनके सर को थामे हुए गर्दन को ऊपर उठाया और उस्सकी आह निकल गयी…..

तो बे कॉन्टिनोएड………………
 
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