Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 4 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 29 संजना विथ आरव part 2

संजना ने कहा, “हाँ तुम्हारे डैड ने बताया था, ट्यूसडे को जा रहे हो नाह?” और उस वक़्त संजना ने सोचा 3 महीनों तक उस्सको चावला साहब के साथ फ्री टाइम मिलेगा स्पेंड करने के लिए और वो बहोत खुश होते हुए कड़ी हुई और ख़ुशी के मारे आरव को झुक कर गले लगाते हुए उसस्के गाल पर किश किया!!”

आरव समझा के क्यूंकि वो कुछ शर्मीला है संजना को एप्रोच नहीं कर रहा और कनाडा चला जाएगा इस लिए संजना ने खुद फर्स्ट स्टेप किया और उस्सको किश किया. तो थोड़ा हिम्मत जुटते हुए वो भी खड़ा हुआ और संजना को अपने बाहों में भरके उसस्के मुंह पर किश करना चाहा. मगर संजना ने अपना चेहरा एक तरफ करते हुए कहा, “हम्म्म नहीं इस से ज़्यादा कुछ नहीं, अभी हम इतना नहीं खुल के मिले हैं, धीरे धीरे आदत पड़ना चाहिए इतस तू अर्ली तो दो आल थिस!”

संजना ने उस्सको किश नहीं करने दिया और बात को टालते हुए किसी और टॉपिक पर बात करने लगी. आउट ठीक तभी अंदर से मोबाइल की रिंगटोन सुनाई दिए. और दोनों ने एक दूसरे के चेहरे में देखा और आरव बोलै, “मोबाइल बज रही है तुम्हारे कमरे में!” तो संजना ने कहा, “हाँ मेरा hi मोबाइल है मैं अभी आयी प्लीज वेट.”

संजना ने अपने कमरे के अंदर कॉल लिया जो चावला साहब का था. और बहोत धीरे से धीमी आवाज़ में संजना ने बात की ताके आरव को बाहर सुनाई नहीं दे.

संजना: “जी बोलिये”

चावला साहब: “कहाँ है वो?”

संजना: “लाउन्ज में बैठा है”

चावला साहब: “मत बताना के मेरा कॉल था”

संजना: “बिल्कुल नहीं बताउंगी. आप कहाँ हो जी?”

चावला साहब: “अपने कमरे में”

संजना: “कहीं सान्वी भाबी आप को सुनेगी तो नहीं वो हम दोनों को बहोत देख रही थी यहाँ आप ने देखा किआ?”

चावला साहब: “नहीं मैं ने तो कुछ नहीं देखा था, और यहाँ नहीं सुनेगी वो किचन में है, मेरा कमरा दूर है किचन से और कर्मा बांध है.”

संजना: “सान्वी भाबी हमको घुर्र रहे थे. पूरा वक़्त उस्सकी नज़रें हम दोनों पर थे इंगेजमेंट में, उस ने आप से कुछ कहा तो नहीं?”

चावला साहब: “नहीं विवान साथ में था तो कुछ नहीं कहा जब अकेली होगी तो शायद कुछ कहेगी. मैं ने कुछ भी नहीं ख्याल किया के वो हमको देख रही थी वहां!”

संजना: “आप तो सिर्फ मुझे देख रहे थे, मैं ऊपर पोडियम पर थी तो मुझे सब दिख रहा था, उस्सकी नज़र सिर्फ हम दोनों पर थी! मुझे लगता है उस्सको हम पर शक हो गयी है. आप होशियारी से रिप्लाई करना अगर उस्सने आप से कोई सवाल किया तो okay?”

चावला साहब: “तुम उस्सकी फ़िक्र चोर्रो यह बताओ के तुम्हारे पापा तो पिने गया होगा नाह और तुम आरव के साथ अकेली हो इस वक़्त सही है नाह?”

संजना: “बिल्कुल सही है, मगर मैं ने आरव को लाउन्ज में बिठाया है उस्सको अपने करीब भी नहीं आने दिया”

चावला साहब: “वैरी गुड. गुड गर्ल मऊवः. लव यू.”

संजना: “मुउउउउउह लव यू तू.”

चावला साहब: “तुमको हद से ज़्यादा मिस कर रहा हूँ इस वक़्त मैं तुम्हारे कपडे उतार रहा होता नाह और हम लव करते अभी”

संजना: “हम्म्म मैं भी आप को बहोत मिस कर रही हूँ, कुछ देर पहले कपडे चेंज कर रही थी तो आप को याद कर रही थी”

चावला: “तुम ने चेंज कर भी लिया?”

संजना: “हाँ और किआ करती!”

चावला: “अभी कौन सी ड्रेस में हो?”

संजना: “एक सलवार कमीज़ में”

चावला: “वैरी वैरी गुड डार्लिंग. सुनों मैं रात के बारह बजे तुमसे मिलने ारः हूँ बहोत मैं है तुमसे लव करने को.”

संजना: “इतनी रात को?”

चावला: “हाँ तुम रात को 11.30 को उसी इंगेजमेंट वाली ड्रेस फिर से पेहेन लेना मैं आकर उतारूंगा और लव करेंगे बेबी. बहोत मैं कर रहा है!”

संजना: “पापा होगा घर पर!”

चावला: “वो तो नशे में होगा नाह?”

संजना: “अगर ज़्यादा नहीं पिया तो?”

चावला: “तुम्हारे कप्बोर्ड में मैं ने आज एक बोतल व्हिस्की रखा है गिफ्ट दिया था तुम्हारे पापा को, जब वो वापस आये तो उस्सको पिलाना ताके वो गहरी नींद में सो जाये रात के 12 बजे तक.”

संजना: “okay. तरय करुँगी”

चावला: “अब आरव को जल्दी से डिनर करके वापस भेजो, जब वो घर आजाएगा तब मैं निकलूंगा.”

संजना: “अभी तो 5.30 बजे हैं वो तो रात के 8 बजे डिनर करेगा नाह?”

चावला: “आरी पुगली तुम उस से कहो के तुम 6 बजे डिनर करती हो तो उस्सको भी उसी वक़्त डिनर करना पड़ेगा जब तुम करोगी. तब वो 10 बजने से पहले यहाँ आजाएगा और मैं निकल पाउँगा!”

संजना: “आप किआ कहकर घर से निकलोगे रात को? कहीं सान्वी भाबी को पता नाह चल जाए?!”

चावला: “तुम उस्सकी फ़िक्र मत करो मुझे पता है किआ करना है!”

संजना: “ok थें. सी यू लव यू हॉट, लव यू वैरी मच मुउउउउउउह आप को वहां पर किश दिया मिली किआ?”

चावला: “आआआआहहह हाआआ मिला बहोत स्वीट है बिल्कुल खड़ा होगया बेबी.”

संजना: “हीहीहीहीही अब आरव पूछेगा किश से बात कर रही थी तो किआ बोलूं?”

चावला: “किसी सहेली का नाम लेलो बस!”

संजना: “ोकिए ोकिए bye! सी यू लेटर”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………..
 
अपडेट 30 आरव ट्राइंग तो सडके संजना

संजना जब वापस आयी आरव के पास तो आरव का पहला सवाल था, “किश का फ़ोन था?”

संजना ने तुरंत बिना झिझक के रिप्लाई किया, “वो मेरी एक सहेली थी जो सगाई में नहीं आ पायी मुबारकबाद दे रही थी मुझे.”

आरव ने कहा “ओह गर्ल्स टॉक!”

संजना: “जी… बरी नटखट है वो सहेली, मुझे बहोत सताती है कितना मिस किया मैं ने उस्सको और वो है के कितनी दूर है मुझसे!”

आरव ने कहा, “कोई बात नहीं फिर मिल लेना उस से!”

संजना ने चावला साहब को दिमाग़ में सोचते हुए कहा, “हाँ मिलूंगी ज़रूर बहोत मिस किया उस्सको”

तब आरव ने पूछा, “मुझको मिस नहीं करोगी, मैं तो जा रहा हूँ कनाडा दो दिन बाद!”

संजना ने दिल के अंदर खुश होते हुए कहा, “अभी तो मिले हैं, जान पहचान भी अच्छी तरह से नहीं हुई, मिस तो उनको करते हैं जिनके आदत पर जाती है नाह? तो जब तुमसे आदत हो जाएगी तब मिस करुँगी.”

आरव ने कहा, “हाँ यह भी ठीक है. मगर सगाई के बाद तो अक्सर मिला जाता है एक दूसरे से मगर मैं तो मिलने नहीं आ पाउँगा तुमसे. 3 महीनों तक दूर रहूँगा, मगर मुझे तुम बहोत याद होगी पता है?”

इस्सके जवाब संजना ने सिर्फ “हम्म्म” में दिया.

तो आरव ने कहा, “हम्म्म किआ? कुछ तो बोलो”

संजना: “किआ बोलूं मुझे नहीं पता”

आरव: “वैसे तो मुझे तुमसे अगले हफ्ते मिलना आना होता, फिर शायद तुमको एक दिन घुमाने लेजाता, फिर हम अक्सर मिलते, फिर एक दिन कैंडल लाइट डिनर पर चलते, फिर तुमको एक दिन घर लेजाता, फिर और घूमने जाते, एक दिन सिनेमा लेजाता और हम अक्सर मिलते रहते!”

संजना: “हम्म वो सब तुम्हारे वापस आने के बाद भी तो हो सकता है नाह?!”

आरव “हाँ सही है; तब भी तो हो सकता है सब”

संजना: “अच्छा, अब मैं खाना गरम करती हूँ, इस्पेशल डिश है आज, हम डिनर करेंगे अब!”

आरव: “व्हाट? अभी? डिनर तो रात को करते हैं नाह?”

संजना: “मगर मैं तो 6 बजे डिनर कर लेती हूँ, यह गाओं है बाबू, यहाँ रात के 8 बजे नहीं शाम को hi डिनर करते हैं!”

आरव कुछ हताश होते हुए कहा, “okay फिर!!”

संजना खुश हुई के वो उस्सको डिनर करा पाएगी जल्दी से और वापस भेज देगी ताके चावला साहब यहाँ आ सके.

जब संजना किचन में गयी खाना तैयार करने को तो कुछ देर बाद आरव उसस्के पीछे खड़ा हुआ पाया गया. संजना ने उस्सको आते हुए देखा मगर ऐसा बेहवे किया के उस्सको नहीं पता था के वो वहां आया है, चहूंकने की नाटक किया यह कहते हुए, “ओह! तुम्हे मैं डर गयी तुम यहाँ क्यों आये वहीँ वेट करो नाह, मैं पापा को भी किचन में नहीं आने देती यह मर्दों का प्लेस नहीं है जाओ उधर तुम!” मगर तब तक अचानक से आरव ने उस्सको पीछे दे बाहों में भरते हुए उसस्के गले को पीछे के तरफ चूमने लगा. संजना को समाज में नहीं ारः था के किआ करें. आरव उसस्के कानों में भुनभुना रहा था, “तुम बहोत हॉट हो, मुझे तुमको ऐसे hi बाहों में भरे रहने को मैं कर रहा है, रात तक रहने दो नाह रात को तुम्हारे साथ वक़्त गुज़ारने में बहोत hi मज़ा आएगा….”

संजना सिकुड़ सी गयी उसस्के बाहों अपने आप को ऐसे कैद पाकर और उसस्के दोनों हाथों को अपने कमर से हटाते हुए कहा, “ोफो, हम यह सब नहीं कर सकते अभी वे अरे नई फ्रेंड्स, अभी तो सब्र करो इतनी जल्दी क्यों है तुम्हें?”

मगर आरव ने फिर से उस्सको जकरा इस बार पीछे से नहीं सामने से इतना क्लोज पकड़ा के संजना का पूरा जिस्म आरव के जिस्म से चिपके हुए थे और आरव अपने होंठों को उसस्के गर्दन पर फेरते हुए और उस्सकी खुस्भू सूंघते हुए धीमी धीमी आवाज़ में कहते जा रहा था, “मैं ने कभी भी किसी लड़की को ऐसे बाहों में नहीं भरा पहले, तुम पेही लड़की हो जिस्सको मैं इस तरह अपने बाहों में ले रहा हूँ तुमको देखते hi तुमसे प्यार हो गया मुझे, मैं तुमको कभी नहीं भूल पाउँगा प्लीज एक अच्छा वाला किश तो करने दो नाह प्लीज, देखो कोई भी नहीं हम दोनों बिल्कुल अकेले है ऐसे मौके का फुल फायदा उठाना चाइये हम दोनों को, हम अजनबी तो नहीं है….”

संजना के समझ में नहीं ारः था के किआ करें उस्सने बिल्कुल भी नहीं सोचा था के ऐसा कुछ होगा, उस्सने अपने दोनों हाथों को आरव के छाती पर किया हुआ था ताके उसस्के बूब आरव के छाती को टच नाह हो और थरथराती आवाज़ में संजना ने कहा, “देखो यह ठीक नहीं हमको ये सब कुछ नहीं करना चाहिए अभी एक दूसरे को पहले हम जान ले तब; किआ पता हमारा मांगनी टूट जाये किसी वजा से तो? यह ठीक नहीं है चोर्रो मुझे!”

यह सुनकर आरव ने उस्सको चोररटे हुए पूछा, “किआ? क्यों मांगती टूटेगी भला? अभी अभी मागणी हुई और तुम टूटने की बात कर रही हो क्यों?”

संजना खामोश रही और अपने बाल सवार रही थी निचे देखते हुए. उस्सकी नज़रें आरव के पैरों पर थे वो यह देख रही थी के उसस्के कदम कहीं फिर उसस्के तरफ नाह बढे. और आरव ने देखा संजना के माथे से एक बूँद पसीना टपक रहे थे तो कहा, “तुम मुझसे डर रही हो किआ? अरे मैं तुम्हारा मांगितर हूँ कोई अजनबी थोड़ी हूँ? देखो मैं बहोत शर्मीला और रिजर्व्ड टाइप का लड़का रहा हूँ हमेशा से, अगर सान्वी भाबी को पता चला के मैं ने तुमको ऐसे जकरा था तो वो कभी नहीं यकीन करेगी क्यूंकि मैं ऐसा हूँ hi नहीं. मैं लड़कियों से दूर भागने वालों में से था. मगर तुम बेहद hi खूबसूरत और अच्छी हो के मुझसे रहा नहीं गया और अब भी तुमको वैसे hi अपने बाहों में थामे रहने को मैं कर रहा है, देखो तुम्हारे पापा के आने से पहले मेरी बाहों में hi रहो नाह जब तक वो नाह अजय प्लीज, प्लीज!”

संजना को जैसे एक टॉपिक मिल गयी बात को टालने के लिए जब उस्सने सान्वी का नाम लिया तो संजना ने कहा, “तुम ने कहा के तुमने कभी किसी लड़की को नहीं थमा अपने बाहों में तो अपने सान्वी भाबी से भी दूर भागते हो तुम?”

आरव बोलै, “उफ़ तुम उस से खुद पूछ लेना जब वो शादी करके हमारे घर आयी थी तो मैं उसे कितना दूर भागता था अरे शादी के 6 महीनों के बाद मैं ने उस से बात किये…. उसस्के बाद धीरे धीरे उसी ने मुझे अपने करीब किया वार्ना मैं तो शायद कभी भी उसस्के पास नहीं जाता!”

संजना ने उसस्के चेहरे में देखते हुए पूछा, “अच्छा? तो किआ तुमने सान्वी भाबी को कभी गले नहीं लगाया? किआ उस्सको ऐसे कभी नहीं थामे हो तुम?”

आरव: “अरे वो मेरी भाबी है बहोत प्यार है हम दोनों में, देवर भाबी के रिश्ते को नहीं समझोगी तुम, तुम तो अकेली रहती हो तुमको नहीं पता फॅमिली में कैसे ृद्षते होते हैं!”

संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “मतलब तुम अपने भाबी को ऐसे बाहों में लेते हो और अभी अभी कहा के कभी किसी लड़की को ऐसे नहीं थामा है तुमने!”

आरव: “अरे बाबा वो ऐसे वाला पकड़ना नहीं होता है. वो तो प्यार से दुलार से होता है. भाबी ने hi मुझको वैसी आदत डाली है, जब मैं शुरू में दूर भागता था तो मेरे करीब आने के लिए वो अक्सर मुझको बाहों में भर्ती थी ताके मैं अपनापन महसूस कर सकूँ तब से हम बहोत अच्छे दोस्त बन गए ोफो तुम नहीं समझोगी!”

संजना: “क्यों नहीं समझुगी? मैं बुद्धू हूँ किआ? अच्छी तरह से समझती हूँ मैं देवर भाबी के रिश्ते को!”

आरव: “अब बोलो किआ तुमने मेरे घर में शादी करने के बाद विवान भैया के गले नहीं मिलोगी कभी? तो वो वाला प्यार अलग होता है!”

संजना: “हम्म वो वाला जेठ और छोटी भाबी वाला प्यार होता है ठीक है?!”

आरव: “हाँ बाबा, अब मेरे पास औ नाह प्लीज!”

संजना फिर भी कुछ डीप सोचते हुए कहा, “और ससुर बहु वाला प्यार भी तो होते हैं नाह?”

आरव: “हाँ अब मेरे पापा तुमको कितना प्यार करते हैं वैसे hi!”

संजना: “हम्म्म्म वैसे hi सान्वी और तुम्हारे पापा वाला प्यार भी होगा घर में है नाह?”

आरव: “हाँ बिल्कुल. जैसे पापा तुमको प्यार करता है वैसे hi सान्वी भाबी को भी तो करता है, बल्कि वो तो तुमसे पहले घर में आयी है और पापा और वो बहोत hi करीब हैं, पापा तो दिन भर घर में रहते हैं उनके साथ हमसब तो बाहर नौकरी, ऑफिस में होते हैं!”

संजना गहरे ख्यालों में डूब गयी यह सुनने के बाद. और चावला साहब और सान्वी के बारे में सोचने लगी. उस्सने सोचा के उन् दोनों के बारे में सिर्फ एहि मौका है ज़्यादा जान्ने के लिए. पता नहीं संजना के दिल में उस वक़्त सान्वी के लिए थोड़ी सी जलन हो रही थी या संजना यह सोच रही थी के किआ सान्वी को भी ऐसे hi शादी से पहले चावला साहब मिले होंगे?! तो सोचा अब तो आरव से hi यह सब पता करना होगा. तो उस्सने सोचा के उसस्के बाहों में hi जाकर ज़्यादा कुछ पता चल पाएगा. और संजना ने कहा, “okay ठीक है तो मेरे रूम में चलते हैं पापा के आने से पहले निकल आएंगे okay?”

आरव की ख़ुशी का इन्तहा नाह था जब उस्सने यह सुना तो और ख़ुशी से कहा “हाँ okay चलो!”

और संजना खुद आरव का हाथ पाकर कर उस्सको अपने रूम के तरफ ले जाने लगी मुस्कुराते हुए और आरव बहोत hi ख़ुशी से उसस्के पीछे चल दिए ………….

तो बे कॉन्टिनोएड……………………. (1563 वर्ड्स)
 
अपडेट 31 आरव स्टिल तेरे

आरव की ख़ुशी का इन्तहा नाह था जब उस्सने यह सुना तो और ख़ुशी से कहा “हाँ okay चलो!”

और संजना खुद आरव का हाथ पाकर कर उस्सको अपने रूम के तरफ ले जाने लगी मुस्कुराते हुए और आरव बहोत hi ख़ुशी से उसस्के पीछे चल दिए ………….

अब आगे……

कमरे में जाते hi संजना बीएड पर बैठी और आरव को वेलकम करके बैठने को कहा अपने पास. आरव ने पहले चारों तरफ रूम को देखा और कहा, “तुम अकेली सोती हो इतने बड़े कमरे में?” तो संजना ने कहा, “अरे और नहीं तो किआ कौन सोयेगा मेरे साथ अगर अकेली नहीं सोती तो?” यह कहने के बाद संजना के ख्याल में फिर चावला साहब आये! और आरव ने कहा के, “नहीं बुसस ऐसे hi पूछ लिया कमरा बहोत बड़ा और खूब सूरत है, दीखता है के ये एक लड़की का कर्मा है, साफ़ सुथरा, सब कुछ वेल अरेंज्ड है.”

अब संजना वेट कर रही थी के उस से जो जानना चाहती है वो बात करें या आरव उस्सको फिर सडके करें मगर अब आरव चुप था और उस्सको छह भी नहीं रहा था. शायद आरव खुदको एक लड़की के साथ बीएड पे पाकर कुछ शर्मा सा गया या उसस्के समाज में नहीं ारः था के कैसे किआ करें. तो संजना को hi स्टार्ट करना था जो भी करना था. सो, संजना ने उस्का हाथ अपने हाथन में लेकर पूछा, “तो तुम सान्वी भाबी के साथ ऐसे उसस्के कमरे में बीएड पर नहीं बैठते? और वो तुमसे मीठी मीठी बात नहीं करती कभी?”

तब आरव बोलै, “हाँ बिल्कुल बैठता हूँ और वो तो हमेशा मीठी मीठी बातें hi करती है. बहोत प्यार करती है मुझे.”

संजना: “चाह? और तुम उनको कितना प्यार करती हो?”

आरव: “हाँ मैं भी बहोत प्यार करता हूँ उनको, एक वही तो है घर में जिस से प्यार करता हूँ, हाँ हाँ और छोटी दीपू है हमारी दीप्ति, कितना बोलती है कान पाक जाते हैं उस्सकी तोतली बक बक सुनते! तुम होगी तो देखना तुमको चोर्रेगी hi नहीं!”

संजना: “और तुम्हारे पापा कितना प्यार करते हैं सान्वी भाबी से?”

आरव ने संजना को इस सवाल पे उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा, “पता नहीं, दोनों बहोत क्लोज हैं मैं ने कहा न वह दोनों hi तो दिन भर घर में अकेले रहते है तो क्लोसनेस्स तो बढ़ेगा hi…. एक बात बताऊँ तुमको, जब भाबी दीप्ति को जनम देने वाली तजि तो कोई नहीं था घर में डैड ने hi सब कुछ किया था! अगर डैड नहीं होते तो शायद आज भाबी भी नहीं होती!”

संजना: “किआ मतलब सब कुछ किया था? तुम्हारे डैड ने सान्वी भाबी का डिलीवरी करवाया था?”

आरव: “कुछ ऐसा hi समझ लो, क्यूंकि डैड ने सान्वी भाबी को गॉड में उठके कार में डाला और हॉस्पिटल जाने लगे तो रास्ते में hi दीप्ति का सर बाहर आगया था, भाबी दर्द से तड़प रही थी और फिर हॉस्पिटल जाते hi डैड ने फिर भाबी को गॉड में उसी हालत में उठाकर हॉस्पिटल के अंदर मैटरनिटी तक लगाए थे!!”

सान्वी सोच में डूबे रहे कुछ देर फिर कहा, “अरे वह, यह तो बहोत बड़े काम किया था तुम्हारे डैड ने! और तुम्हारे विवान भैया कहाँ थे ऑफिस में?”

आरव: “वो तो इटली गए हुए थे उन् दिनों, मैं था ऑफिस में. डैड दिन भर हॉस्पिटल में रहे थे भाबी के साथ जैसे वही उंनका पति हो! बहोत ख्याल रखा था डैड ने भाबी की, तब से दोनों ज़्यादा क्लोज हो गए और आज भी विवान भैया मज़ाक में सान्वी भाबी से ेकेहते हैं डैड तुम्हारा दूसरा पति है lol”

यह सुनकर संजना को बहोत बेचैनी हुई और चावला साहब पर थोड़ा ग़ुस्सा भी आया. सोचने लगी के इतने करीब क्यों जाना चाहिए था सान्वी को, के खुद उस्का पति उस्सको वैसा कहे! संजना ने मैं में सोचा, ‘आने दो उन्हें मैं उस्सकी खबर खूब लुंगी!’

तब धीरे से आरव ने अपने हाथ को संजना के हाथ पे आहिस्ते आहिस्ते ऊपर के तरफ फरता गया उसस्के काँधे तक और उस्सकी गर्दन पर अपने उंगलियों को हलके से फेर्रा के संजना झट से उठ कड़ी हुई!

तो आरव ने कहा, “किआ हुआ? तुमको चुहता हूँ तो तुम उनकंफर्टबले फील कर रही हो हर बार मैं ने नोटिस किया, किआ मेरा तुमको चुहना अच्छा नहीं लगता?”

संजना तो उस वक़्त सान्वी और चावला साहब को सोच रही थी और ग़ुस्सा थी तो वो अपने आप को कुछ डिस्टर्ब फील कर रही थी उन् सब के बारे में सोचते हुए जो अभी अभी आरव ने कहा उन् दोनों के बारे में. वो तो आरव में कोई भी इंटरेस्ट नहीं ले रही थी और आरव सोच रहा था के संजना उस में इंटरेस्टेड है इसी लिए कमरे के अंदर लाया उस्सको. संजना आरव को कमरे में ले तो आयी मगर अब उस से कैसे पीछा छुड़ाए यह सोच रही थी. कोई बहाना बनाने का सोच रही थी. तो उस्सने कहा, “चाह अब चलो खाना कहते हैं”

आरव को जैसे एक झटका लगा तो कहा, “अरे अभी अभी तो अंदर आये हैं, अभी hi वापस चलें? सुनो तो इधर आओ नाह बीएड पर कुछ अपने बारे में बातें करते हैं.” संजना तो बोर होने लगी थी जैसे, फिर भी गयी उसस्के पास बैठी और इस बार तो आरव ने उस्सको जाकर लिए और उसस्के गर्दन से लेकर उसस्के होठ तक चूमता गया जैसे एक भूके जानवर को कुछ खाने को मिल गया हो वैसा कर रहा था. संजना अपने दोनों हाथों से उस्सको पुश करते हुए कह रही थी, “ोफो चोर्रो नाह नहीं ऐसा नहीं करते सुनों तो पापा वापस आजाएगा अभी नहीं…..”

मगर तब तक आरव ने उस्सको बीएड के ऊपर लेता दिया था और संजना का मुंह आरव के मुंह में था, संजना ने अपना मुंह बांध किया हुआ था और आरव उस्सकी होंठों को चुस्सने लगा था. अपने जीब को उसस्के होंठों पर फरते हुए चूसा और चुम रहा था फिर चूस रहा था मगर क्यों के संजना का मुंह बांध था, वो रेस्पोंद नहीं कर रही थी तो आरव ने कहा, “किआ तुमको किश करना भी नहीं अत? मुंह तो खोलो थोड़ा सा, अपनी जीब निकालो मैं उस्सको अपने मुंह में लेता हूँ फिर देखना कितना मज़ा आएगा तुमको भी!”

संजना ने थोड़ा नखरें दिखते हुए कहा, “नै, मुझे नहीं पसंद यह सब, अब चलो यहाँ से” यह कहकर वो उठने की कोशिश कर रही थी बीएड से के आरव ने उस्सको फिर से दबाते हुए इस बार अपने मुंह को उसस्के चूचियों पर दबाया उस्सकी ड्रेस के ऊपर hi, और आरव को उन् मुलायम, नरम बूब्स को फील करते उस्का खड़ा हो गया जिस को संजना ने अपने सलवार के ऊपर जांघ पर फील किया. संजना सिहर सी गयी और दिल में सोचा, ‘यह तो अपने बाप की तरह hi है, बाप रे! बाप बेटे दोनों पुरे ठरकी है, उस घर में किआ सब मर्द ऐसे हैं? किआ विवान भी ऐसा hi होगा?’

फिर संजना उसस्के चुंगल से चुठ्ने की कोशिश में लगी हुई थी अपने दोनों हाथों को अपने छाती के ऊपर करके आरव के चेहरे को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश किये जा रही थी जबकि आरव भूके भेड़ए की तरह मानलो संजना को नोच रहा था क्यूंकि तब तक आरव का मुंह पूरी तरह से संजना के क्लीवेज पर था और उस्का जीब वहां फेरर रहा था. एक नोक झोंक जैसा चल रहा था दोनों के बीच उस वक़्त. एक स्ट्रगल हो रही थी बीएड पर. फिर अचानक आरव अपने पीठ पर होगया और संजना उसस्के ऊपर थी और आरव ने संजना को अपने बाहों में कैद कर लिया और अपने दोनों टांगों को इस तरह फैलाया आरव ने के संजना उसस्के बीच में थी और उस्सकी पथ का निचे वाला हिस्सा ठीक आरव के लिंग पर था जो उस वक़्त बिल्कुल खड़ा था और संजना उस्सको अपने पथ के निचे महसूस कर रही थी. हालां के दोनों कपडे पहने हुए थे एक आदमी का लिंग एक लड़की के महीन कपडे पर डब्बे तो सब बिल्कुल फील होता है. दोनों एक दूसरे के जिस्म को अपने जिस्म से सट्टे हुए बिल्कुल फील कर रहे थे. तो संजना हांफने लगी थी उस स्ट्रगल से और इस्को रोकने के लिया संजना ने कहा, “वेट, वेट, वेट, सुनों, किश करना चाहते हो नाह मुझे? तो यह स्ट्रगल क्यों आराम से करते हैं नाह किश!”

तब आरव ने कहा, “वही तो! अब समझी किआ तुम?!” तो उसी पोजीशन में, संजना उसस्के ऊपर hi रही और खुद अपना मुंह उस्सने आरव के मुंह से सताया, और आरव ने मुंह खोल कर जीब निकला तो संजना ने उस्का जीब अपने मुंह में लिया और दोनों एक दूसरे को किश करने लगे…… संजना को आरव के जीब चूस्ते हुए लगा के वो बिल्कुल चावला साहब के जीब को अपने मुंह में लिया हुआ है, बिल्कुल वही स्वाद था और धीरे से आरव का हाथ जो उस वक़्त संजना के पीठ पर थे उस्सने धीरे से संजना की कमीज़ की ज़िप पीठ पर हलके से निचे करे हुए अपने उँगलियों को उसस्के ब्रा की स्ट्रैप्स के निचे किया…… संजना ने ेंखें मुंढे हुए किश के दौरान उसस्के उँगलियों को अपने पीठ पर ब्रा के स्ट्राप के नीचे फील किया तो झट से किश को रोकते हुए उसस्के ऊपर से थोड़ा ज़ोर लगाते हुए उठी यह कहते हुए, “तुम बहोत शैतान हो, मेरा ज़िप भी खोल दिया अब बुसस बहोत किश कर लिया एक पहली बार के लिए इतना काफी है” और अपने दोनों हाथों को पीछे करके अपनी ज़िप वापस लगाने लगी बीएड पर बैठ कर.

तो आरव ने कहा, “पीछे मूढ़ मैं खुद लगा देता हूँ ज़िप को!” संजना ने अपना पीठ उसस्के तरफ किया और आरव ने ज़िप ऊपर करने की बजाए पूरा निचे खिंच दिया और अपना चेहरा संजना के नंगे पीठ पर दबा कर फरने लगा, और जीब चलाने लगा…. थोड़ा सा चूसा भी उन् हिस्सों को जो उस्सको चुस्सने में आसान लगा…. संजना सिमथ गयी झुके हुए उसस्के चेहरे को अपने पीठ पर फील करते हुए कुछ सिहर सी गयी और एक धीमी सी तृप्ति आवाज़ में “उफ्फ्फ इस्स्स्सह्ह्ह” करते हुए बीएड से उतर गयी दोबारा अपना ज़िप को ऊपर करते हुए और तिरछी नज़रों से आरव को देखने लगी जबकि आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “कितनी गोरी है तू और तेरा जिस्म कितनी चिकनी है मैं कर रहा है तुमको खा जॉन”

संजना ने थोड़ा मुंह पहला के कहा, “मैं कोई खाने की चीज़ नहीं हूँ खाना वहां है चलो आओ किचन में, मैं तो चली अब, पहली बार के लिए बहोत कुछ कर लिया तुम ने! ीूउउ” जीब निकाल कर आरव को मोचक करते हुए संजना जल्दी जल्दी चल कर किचन में चली गयी उस्सको बीएड पर वहीँ चोरर कर.

किचन में संजना को ख्याल आया के उस्का मोबाइल उसी बीएड पर तकिये के निचे है और आरव उसी बीएड पर है और कहीं उसस्के हाथ मोबाइल लग गया तो क़यामत आजायेगी क्यों के मोबाइल की स्क्रीनसेवर पर चावला साहब की तस्वीर है और कितने सारे फोटोज हैं उस्का चावला साहब के साथ, अगर एक भी देख लिया तो सब समझ जाएगा, क्यूंकि ने पिक्चर गैलरी में उस्सकी कुछ अधनंगी पिक्स भी थे चावला साहब के साथ और किश करते हुए पिक्स भी थे उस में!!

आरव बाहर नहीं ारः था तो संजना ने सोचा कहीं वो मोबाइल hi तो नहीं देख रहा तो भागते हुए वापस गयी कमरे तक देखने के लिए और उफ़ कहा जब देखा के आरव कमरे से बाहर निकल रहा है अपने कमीज़ को पंत के अंडरट डालते हुए. संजना का दिल बड़े ज़ोरों से धड़कने लगा था. चेहरा लाल हो गया था तो आरव ने उसस्के चेहरे में देखते हुए पूछा, “किआ हो गया? हांफ क्यों रही हो और चेहरा क्यों इतना लाल है?” संजना ने बहाना बनाते हुए कहा, “ऐसे hi तुम ने hi सब किया है! चलो बैठो मैं खाना लगाती हूँ.” तो आरव ने कहा वो वाशरूम जाएगा पहले और संजना ने उस्सको दिखाया किधर जाने को है और जब आरव चला गया तो जल्दी से संजना मोबाइल लेने गयी तकिये के निचे से तो देखा मोबाइल वहां नहीं है!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………………. (1970 वर्ड्स)
 
अपडेट 32 ा आरव लीव्स

संजना ने बहाना बनाते हुए कहा, “ऐसे hi तुम ने hi सब किया है! चलो बैठो मैं खाना लगाती हूँ.” तो आरव ने कहा वो वाशरूम जाएगा पहले और संजना ने उस्सको दिखाया किधर जाने को है और जब आरव चला गया तो जल्दी से संजना मोबाइल लेने गयी तकिये के निचे से तो देखा मोबाइल वहां नहीं है!!”

अब आगे………….

मोबाइल वहां न पा कर संजना के पसीने चुत गए और अब सोचने लगी के किआ जवाब देगी चावला साहब को अगर आरव ने सब देख लिया और बाप बेटे में झगड़ा चलेगा तो, संजना के दिमाग़ में उस वक़्त मोबाइल को चारो तरफ ढूंढ़ते वक़्त बहोत सरे चीज़ों का ख्याल ारः था के सान्वी, चावला साहब सब लोगों को सब पता चलेगा के अश्लील पिक्स खींची गयी है उसस्के और चावला साहब के बीच, और वो बहोत घबराते हुए अपनी मोबाइल चरों तरफ कमरे में उलट पुलट के ढूंढ रही थी के कहीं और नाह रख दिया हो. और खुद से कह रही थी के अब सभी पिक्स को डिलीट करदेगी मोबाइल मिलते hi.

और उफ़ निकली उसस्के मुंह से एक लम्बी सांस चोररटे हुए जब मोबाइल मैट्रेस्स और दीवार के बीच में घुसी हुई मिली. जल्दी से मोबाइल को फिर वहीँ ग़ुस्सा कर वापस किचन में गयी. तब तक आरव भी वाशरूम से एक छोटी सी टॉवल में हाथ पोंछते हुए उसस्के पास आया और फिर से संजना को पीछे से जाकर कर उसस्के गर्दन पर अपने होंठों को फरने लगा.

संजना का दिल अभी तक ज़ोरों से धड़क रहा था तो आरव ने पूछा, “क्यों तुम्हारा दिल इतने ज़ोरों से धड़क रहा है किआ तुमको अब भी मुझसे डर लग रहा है?” संजना ने झूट मुठ के हँस्ते हुए कहा, “मेरा दिल ऐसे hi धड़कता है अब तुम बैठो भी खाना पड़ोसती हूँ देखो कितना कुछ इस्पेशल बना है आज.”

दोनों ने बात करते हुए डिनर किये. आरव क्यूंकि उस वक़्त खाने का आदि नहीं था बहोत कम खाया और संजना ने भी कम hi कहाया. और कुछ देर बाद आनंद वापस आया तो संजना ने अब आरव को वापस जाने को कहा. सूरज ढल रहे थे और संजना ने कहा, “तुमको इतने दूर ड्राइव करना है, आराम से ड्राइव करना और रीच सेफ.” आरव ने धीरे से कहा ताके उसस्के पापा को सुनाई नाह दे, “जाने को मैं तो नहीं कर रहा मगर जाने को कह रही हो तो चला जाता हूँ मगर मेरे कनाडा से वापस आने के बाद मैं तुरंत तुमसे मिलने आऊंगा और हम बाहर घूमने जायेंगे okay? प्रॉमिस करो के चलोगी मेरे साथ और खूब एन्जॉय करेंगे और किश भी खूब करेंगे प्रॉमिस करो के हाँ सब करेंगे!” संजना ने उसस्के हाथों को अपने हाथ में लेकर कागा, “हाँ बाबा प्रॉमिस करती हूँ. अब पापा से मिल लो और निकलो फटाफट”

तो आरव ने अपने होने वाले ससुर से हैंडशेक किया और बाहर निकले तो संजना उसस्के साथ गए उस्सकी कार तक. शाम हो चूका था, अँधेरा शुरू हो रहा था और कार के पास आरव ने फिर संजना को बाहों में भर लिया और किश करना चाहा. संजना उसस्के बाहों में जाकर हुए मुड़कर पीछे देखा फिर चरों तरफ नज़र दौड़ाते हुए कहा, “कोई देख लेगा चोर्रो भी तुम बी नाह शुरू हो जाते हो कहैं भी!” आरव ने कहा, “चलो तुमको अभी के अभी अपने घर लेचलता हूँ, आओ बैठो कार में.” संजना ने मुंह बनाते हुए कहा, “नहीं मैं नहीं जाने वाली तुम्हारे साथ, तुम बहोत शैतान हो! चलो चोर्रो मुझे अब,” तब तक संजना के होंठ आरव के होंठों से मिल गए और दोनों ने एक लास्ट किश किये. और आरव चला गया बार बार संजना को वेव करते हुए.

संजना घर में दाखिल हो hi रही थी के देखा एक कार की हेडलाइट उसस्के ऊपर फ़्लैश कर रही है, वापस मुड़के देखा तो आरव वापस ारः था और हॉर्न बजाय!! वो वापस गयी कथोड़ा घबराते हुए और हैरानी से पूछा के अब किआ हुआ तो आरव ने कहा, “तुम्हारा नंबर तो लिया hi नहीं, जल्दी बोलो तुम्हारा नंबर किआ है?” संजना ने कहा, “नहीं अभी नहीं, कनाडा से वापस औ तब लेना मेरा नंबर.” आरव कार से निकल गया और कहा, “अरे यह किआ बात हुई? तुम्हारा मांगितर हूँ अब तुम्हारा नूबर लेना मेरा हक़ बनता है!” संजना ने आराम से समझाया, “देखो आरव हाँ मानती हूँ के तुम्हारा हक़ बनता है मगर सोचो दूर रहकर एक दूसरे से बिना कोई कांटेक्ट के एक तड़प होगी जिस दिन वापस आओगे मिलने को. अगर नंबर ले लिया हर रोज़ फ़ोन से बात करेंगे, वाट्सअप करेंगे या स्काइप करेंगे, वीडियो कॉल से एक दूसरे को देखेंगे तब वो मज़ा नहीं होगा जब वापस आओगे समझो किआ कहना चाहती हूँ!” आरव ने ग़ौर से संजना के चेहरे में देखते हुए कहा, “अरे वह, तुमतो बड़ी सायानी हो! सच में तब मिलने का मज़ा और hi होगा. चलो ठीक है नहीं लेता तुम्हारा नंबर, वापस आने पर hi लूंगा… अब जुदाई hi सही…. सुना है के दूर होकर प्यार और भी बढ़ता है!” संजना ने कहा “बिल्कुल सही सुना है इसी लिए तो मैं भी वही कहना छह रही थी!” और वो चला गया मगर एक बार और संजना को जाकर के किश करते हुए गया.

संजना वापस घर में गयी तो देखा के उसस्के पापा सोफे पर लेता हुआ कुछ भुनभुना रहा था, तो उसस्के पास बैठी और पूछा, “खाना लगाऊं पापा?” तो आनंद उठ बैठा और संजना को अपने गॉड में बिठा कर बोलै, “आज मैं सच में बहोत खुश हूँ. पता है पहली बार इस घर में इतने लोग आये और इतने सारे लोगों को खाना खिलाया और सब बहोत तारीफ़ कर रहे हैं, मेरी इज़त बढ़ गयी, बहोत खुश हूँ आज.” तो संजना ने कहा “तो इस ख़ुशी में चलो मैं आप को एक ड्रिंक पिलाती हूँ okay?” और संजना ने कप्बोर्ड से वो व्हिस्की का बोतल निकला और आनंद को 2 या 3 पेग पिलाया. एक तो वो देसी थर्रा पीकर आया था अब व्हिस्की का मिलावट वो बिल्कुल तुन हो गया. संजना ने उस्सको वहीँ सोफे पर लेता दिया और वो खर्राटे लेने लगा. तब संजना जल्दी से अपने कमरे से मोबाइल लेकर चावला साहब को फ़ोन किया. तब तक 8.30 पं हो गया था.

चावला साहब उस्का फ़ोन का इंतज़ार में hi था और जवाब देते हुए कहा, “कितने बजे आरव निकला तुम्हारे यहाँ से?” संजना ऐसे बातें कर रही थी जैसे चावला साहब उसस्के सामने हो. थोड़ा शर्माते हुए, थोड़ी अपनी उन् अदाओं से थोड़ी नटखटी आवाज़ में और खुदको आईने में देखते हुए बिल्कुल प्यार में दीवानी जैसे जवाब दिया, “एक घंटा होने को है जब से वो निकला. आप आओ मुझे आप से बहोत ज़रूरी बात भी करनी है आज!”

चावला साहब: “अरे बेबी बात करनी है या कुछ और करना है हमें? मैं तो तुमको अपने अघोष में लेने के लिए तड़प रहा हूँ, तुम्हारे जिस्म को अपने जिस्म पर महसूस करने को तड़प रहा हूँ बात तो फिर कभी करेंगे आज की रात तो बुसस प्यार hi प्यार करेंगे!”

संजना ने एक चुलबुली आवाज़ में कहा, “अच्छा जी? किआ पहली बार वो सब करोगे आज की रात? मगर मुझे तो आज की रात आप को और भी तड़पना है. मुझे आप से बहोत सारे सवाल जो करनी है. आप के बारे में मुझे आज वो कुछ पता चला जो आप ने कभी बताया hi नहीं!” और संजना उन् से रूत कर एक बच्चे वाले आवाज़ में बोली, “चलो मैं आप से बात नहीं करती अब, आप ने क्यों वो सब बातें मुझको पहले नहीं बतायी मुझे ग़ुस्सा ारः है!”

चावला साहब ने धीरे से कहा, “अरे कौन सी बात बता दिया आरव ने तुमको जो मैं ने नहीं बताया? मैं तो अपने बारे में तुमको सब कुछ बता चूका हूँ. कुछ भी नहीं छुपता मैं तुमसे मेरी जान!”

संजना ने रोनी आवाज़ बना कर कहा, “हम्म्म्म आप आवो तो बोलूंगी आप बुरे हो मुझसे बात छुपाते हो!”

चावला साहब: “अरे नहीं स्वीटहार्ट मैं तुमसे कुछ भी नहीं छुपता. अच्छा ावुंगा तो पूछ लेना सब बताऊंगा okay बेबी? मगर अभी तो हम दोनों के बारे में बात करो नाह!”

संजना ने तब थोड़ा जैसे मान गयी हो कहा, “हम्म्म्म बोलो किआ कहना है हमारे बारे में?”

चावला साहब, “तुमसे सिर्फ बात करने से, सिर्फ तुम्हारे आवाज़ सुनने से यह मोटा शैतान जो मेरे पंत में है यह बिल्कुल खड़ा हो गया है, दिखाऊं तुमको?”

संजना ने यह सुनकर यूँ कहा, “हीहीहीहीहीहीहीही नै मुझे अभी नहीं देखना आप के मोठे शैतान को, इधर ाजाओ तब उस्का खबर लुंगी हीहीहीहीहीही वो सच में बड़ा शैतान hi है हीहीहीहीहीही”

चावला साहब एक हाथ से अपने लिंग को सहलाते हुए कहा, “एक किसी तो देदो इस्को कितना तड़प रहा है अभी इस वक़्त तुम्हारे साथ hi होता यह अगर आरव नहीं रुकता तो!”

संजना: “हम्म्म मुउउउउउह! मिल गयी किसी?

चावला साहब: “आआह और एक दो नाह”

संजना: “मऊवः मऊवः मऊवः… अब बुसस बाकी यहाँ आने का बाद मिलेगा!”

चावला साहब: “ाहः बहोत खुश हुआ ये, बिल्कुल तैयार हैं तुमसे मिलने के लिए. अभी ख़ुशी से झूम रहा है स्वीटहार्ट.”

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन थे नेक्स्ट पोस्ट…………..
 
अपडेट 32 बी चावला एंड संजना टॉक

संजना: “हम्म्म अब बताओ आप कैसे निकलोगे घर से? किआ कहोगे सबसे के कहाँ जा रहे हो इतने रात को?”

मैं ने सब प्लान कर लिया है बेबी. मैं ने एक दोस्त को फ़ोन करके बोल दिया है के मेरे मिसकॉल मिलने पर घर के लैंड लाइन पर मुझको फ़ोन करे, तब मैं लाउन्ज में फ़ोन लेकर उस से कहूंगा के हाँ अभी निकलता हूँ तुमसे मिलने ारः हूँ. तो सब समझ जाएंगे के किसी का फ़ोन आया तो मिलने जा रहा हूँ!”

संजना: “अरे वह आप तो बहोत hi होशियार हो!”

चावला साहब: “तुम्हारे लिए कुछ भी बेबी!”

संजना: “मगर फिर भी अगर किसी ने आप से पूछा के इतने रात को किश से मिलने जा रहे हो आप तो किआ बोलोगे? आप की सान्वी ज़रूर पूछेगी”

चावला साहब: “हाँ वही पूछेगी और शायद आरव भी पूछेगा क्यूंकि जैसे वो आएगा तब मिसकॉल करूँगा अपने दोस्त को. तो मैं उसी दोस्त का नाम लूंगा जिस्सको समझा दिया है के मुझे कुछ देर के लिए बाहर जाना है और निकलने के लिए मेरा मदद करें, तो उसी का नाम बताऊंगा.”

संजना: “वूऊ! आप के ऐसे दोस्त भी हैं जो ऐसे मदद करते हैं झूट बोलकर?”

चावला साहब: “हर किसी का ऐसा दोस्त होता है जो बुरे वक़्त में काम अत है यह वैसा hi दोस्त है मेरा.”

संजना: “किआ आप ने कभी उस्का ऐसा मदद किया है?”

चावला साहब: “हाँ एक्साक्ट्ली किया है इसी लिए वो बिल्कुल समझ रहा है के मुझे कैसा मदद चाहिए!”

संजना: “मतलब के वो भी किसी से रात में मिलने को जाता है और आप से फ़ोन पर बात करता है और लोग समझते हैं के वो आप से मिलने आया और वो किसी लड़की से मिलने जाता है?”

चावला साहब: “हाँ एक्साक्ट्ली!”

संजना: “अचछह? तो उस्का भी वाइफ नहीं है?”

चावला साहब: “अरे उस्सकी तो शादी hi नहीं हुई, 40 के ऊपर कर है मगर बैचलर है, घर में उस्का माँ बाप भाई बेहेन सब हैं इसी लिए रात को निकलने के लिए उस्सको बहाना ढूंढ़ना पड़ता है तो मैं हेल्प करता हूँ हर बार.”

संजना: “तो किआ आप ने उस्सको बता दिया के आप मुझसे मिलने को आरहे हो?”

चावला साहब: “हाँ मगर उस्सको कहाँ से पता के तुम कौन हो उस्सको बुसस इतना पता है के मैं अपने डार्लिंग से मिलने जा रहा हूँ!”

संजना: “ओह अब मैं समझी. हम्म्म तो आप दोनों रात को अपने अपने मेहबूबा से मिलने के लिए एक दूसरे के हेल्प करते हो घर में लोगों को उल्लू बनाना के लिए हीहीहीहीहीही!”

चावला साहब: “हाँ बेबी इश्क और जुंग में सब जाइज़ हैं नाह!”

संजना बोलने जा रही थी मगर ठीक उसी वक़्त चावला साहब के कमरे के दरवाज़े पर नॉक होती है तो चावला साहब धीरे से फुसफुसाते हुए संजना को कहती है, “रखना मत कोई नॉक कर रहा है मैं वापस बात करता हूँ जस्ट वेट okay स्वीटहार्ट?” संजना ने कहा, “okay”

अब क्यों के कॉल ों पर था तो उस तरफ संजना को सब सुनाई दे रही थी जो चावला साहब के कमरे में बातें हो रहे हैं तो यह हुआ……

सान्वी ने नॉक किया था चावला साहब के दूर पर, चावला साहब ने अपने मोबाइल को बीएड पर अपने पीछे रखा और आवाज़ दिया के “ाजाओ खुला है” वैसे सान्वी बिना नॉक किये hi उनके कमरे में कभी भी अंदर चली जाती है मगर क्यूंकि सान्वी ने सुना के चावला साहब फ़ोन पर थे इसी लिए नॉक किया क्यूंकि अक्सर बिज़नेस के सिलसिले में चावला साहब बात किया करते हैं तब सान्वी नॉक करती है अंदर जाने से पहले.

अब जब चावला साहब ने अंदर आने को कहा तो संजना ने उधर सुना और खुद से कहा, “यह ज़रूर सान्वी भाबी hi होगी, चलो सुनती हूँ!”

उधर सान्वी अंदर दाखिल हुए अपने ससुर के कमरे में और कहा, “पिता जी आरव अभी तक नहीं आया है आप ने पता लगाया के निकला के नहीं वहां से?”

तो चावला साहब ने कहा, “अरे अत hi होगा नाह क्यों फ़िक्र कर रही हो!”

संजना ने सुनकर खुद से कहा, ‘बड़ी फ़िक्र हो रही है देवर की इस्को, किआ वो दूध पिता बच्चा है?’

तब तक सान्वी अपने ससुर के बीएड पर उसस्के करीब बैठ गयी और किसी और अंदाज़ में बात किया, “आप को नींद नहीं आरही किआ? अभी तक कपडे भी नहीं चेंज किया आज आप ने तो हम्म?”

संजना ने सुना और बड़बड़ायी, “चाह ससुर के कपडे भी बदलती हो किआ तुम?”

चावला साहब ने सान्वी से कहा, “अरे नहीं मैं बात कर रहा था एक पार्टनर के साथ”

संजना ने सुना और कहा, “अच्छा जी मैं पार्टनर बन गयी अब!”

सान्वी: “चलिए अब चेंज करिये और सो जाइये, आप थक गए होंगे आज दिन भर के भाग दौड़ में; वैसे पिताजी आई आप की नज़रें सिर्फ संजना पर hi टिक्के रहे मांगनी में? बहोत प्यार करते हो आप उस से नाह? वो भी बार बार आप को hi देख रही थी मैं ने देखा था!”

संजना ने सब सुना और खुद से कहा, “लो! मैं ने ठीक hi नोटिस किया था अब खुद कह भी रही है अब चावला साहब किआ कहेंगे उफ़!”

चावला साहब ने कहा, “अरे वो उस लिबास में खिटनी अच्छी दिख रही थी, खिल रही थी तो वही देख रहा था उससे. बहोत अच्ची लड़की है हाँ प्यार तो करता हूँ उस से क्यों नाह करूँ हम्म?”

यह सुनकर संजना बहोत खुश हुई.

और उधर सान्वी ने अपने ससुर के गाल पर हाथ फरते हुए उसस्के गाल पर एक किश दिया और कहा, “अच्छा ok गूडनिघत पापा, मैं आरव को फ़ोन करके पता करती हूँ के वो ारः है के नहीं.”

शुक्र है संजना ने सान्वी को चावला साहब के बीएड पर बैठते और उसस्के गाल पर हाथ फरते हुए तो नहीं देखा मगर किश करते हुए ज़रूर सुना! और खुद से कहा, “किआ उस्सने किश किया चावला साहब को? इतनी रात को एक बहु अपने ससुर के कमरे में जाती है और उस्सको किश भी करती है?! मैं अभी खबर लेती हूँ उंनका!”

और जैसे hi सान्वी निकल गयी चावला साहब ने फ़ोन वापस लिया और कहा, “hello सुना तुमने?”

संजना ने थोड़े ग़ुस्से में और नाहकरों के साथ कहा, “हाँ सुना!! क्यों जी आप के बहु ने आप को गूडनिघत किश किया नाह?”

चावला साहब: “हाँ किया मगर आरी तू क्यों जलने लगी यह उस्सकी आदत है हम दोनों बहोत क्लोज हैं मेरी जान!”

संजना और भी ग़ुस्से और नखरों के साथ कहती है, “ाहः बहोत क्लोज हो?” इसी के बारे में बात करनी है आप से आप आवो मैं खबर लेती हूँ आप की! बहु की डिलीवरी करवाया और मुझसे कभी इस बारे में कुछ कहा भी नहीं दीप्ति ने सर बाहर निकाल लिया था यह भी नहीं बताया मुझे, और उस हालत में बहु को गॉड में लेकर हॉस्पिटल गए यह सब क्यों छुपाया आप ने मुझसे? बोलो बोलो अब बोलती बंद हो गयी आप की?”

चावला साहब: “ोफो मेरी माँ! उफ़ सुनों तो, क्यों ग़ुस्सा हो रही हो तुम तो ऐसा मत बोलो! तुमसे इतने पास होता हूँ के यह सब बातें करने का वक़्त hi कहाँ मिलता है बेबी? जब तुम्हारे साथ होता हूँ तो सब भूल जाता हूँ मैं, सिर्फ तुम पर कंसन्ट्रेट करता हूँ सिर्फ तुम दिखाई देते हो सिर्फ तुम्हारे साथ होता हूँ और यह 5 साल पुअनि बात कौन याद करेगा तुमको बताने की भला समझो मेरी जान क्यों ऐसा सोच रही हो तुम? तुम्हारे साथ होता हूँ तो सिर्फ और सिर्फ तुम होती हो मेरे ख्यालों में!”

यह सब सुनकर संजना ठंडी पर गयी और नरमी से कहा, “अचछह ok ok कोई बात नहीं. किआ आरव अब तक नहीं पहुंचा? अब आप को निकलना चाहिए नाह?”

चावला साहब, “तुमने अपने पापा को ड्रिंक दिया मेरा वाला?”

संजना: “हीहीहीही हाँ दे दिया वो तो बिल्कुल लुढ़क गया खाना बी नहीं खाया बहोत खुश है कह रहा था.”

चावला साहब, “वैरी गुड स्वीटहार्ट. हाँ आरव करीब होगा आने को मैं चेक करता हूँ…. वेट वेट….. हाँ हाँ आगया उस्सकी कार की हेडलाइट अभी अभी यार्ड में देखा मैं ने…. ओका अब मैं अपने दोस्त को मिसकॉल करता हूँ तब निकलूंगा okay डार्लिंग अब रखता हूँ. सी यू सून!”

संजना ने कहा “okay मऊवः सी यू सून… मगर सुनों निकलने से पहले मुझको बता देना मैं ड्रेस चेंज करुँगी मांगनी वाला पहने के लिए”

चावला: “हाँ अरे एक फोटो भेजो जिस सलवार कमीज़ में थी तुम आरव के साथ. थोड़ी देर में देखूंगा पिछ को वाट्सअप कार्डो. अब रखता हूँ.”

संजना: “okay सेंड करती हूँ bye मुउउउउआअह.”

और संजना ने यह पिछ सेंड किया उनको……..

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तो बे कॉन्टिनोएड…………………………… (2915 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस )
 
अपडेट 33 चावला साहब विथ संजना

चावला साहब फ़ास्ट ड्राइव करते हुए संजना के यहाँ पहुंचे. रात के साढ़े बारह बच चुके थे जब वह उसस्के के यहाँ रीच हुए. संजना बेताब वेट कर रही थी उसी मांगनी वाले ड्रेस पहनकर.

जैसे hi संजना ने कार hi हेडलाइट्स देखे बाहर उस्सने जल्दी से दरवाज़ा खोला और चावला साहब के बाहों में सिमट गयी. चावला साहब संजना को खड़े खड़े को अपने बाँहों में भरके चैन का सांस ले रहे थे उसस्के मांगनी वाले ड्रेस पर हाथ फरते और महसूस करते हुए. वो घर के अंदर भी चरों तरफ देखे जा रहे थे आनंद को अपने नज़रों से धुनते हुए. संजना ने अपने सर उठाकर चावला साहब के चेहरे में देखा और अपनी जीब निकाली इस उम्मीद से के चावला साहब उस्सको किश करें, उसस्के जीब को अपने मुंह में लें. मगर चावला साहब उस वक़्त आनंद को ढूंढ रहे थे क्यों के तब वह दोनोंचौकठ पर hi खड़े थे. किश करने से पहले चावला साहब ने पूछा, “आनंद किधर है?” संजना ने धीमी आवाज़ में कहा, “अंदर बीएड पर!” फिर चावला साहब ने संजना को अपने गॉड में उठाया जैसे एक बचे को लेते हैं तो संजना ने अपने बाहों को उसस्के गले में डाला और पहले उनके गालों पर किश किया, तब एक हाथ से दरवाज़ा लॉक किया और चावला साहब उस्सको बाहों में लिए दरवाज़ा लॉक करने के लिए वेट किया, फिर उस्सने अपने मुंह को संजना के मुंह से लगाया और किश करते हुए धीरे धीरे उस्सको गॉड में लिए hi आगे बढे संजना के कमरे के तरफ.

संजना बहोत खुश थी, खिल रही थी, नज़र ारः था उस्सकी ख़ुशी. उसस्के होंठों पर, चेहरे पर, नज़रों में सिर्फ ख़ुशी hi ख़ुशी चालक रहे थे. और चावला साहब भी खुश मगर ज़्यादा बेताब थे संजना के अंगों को अपने जिस्म से लिपटने और गहराई से महसूस करने के लिए. संजना के कमरे में दाखिल होने से पहले चावला साहब संजना को वैसे hi बाहों में लिए पहले आनंद के कमरे के पास रुका उस्सको देखने के लिए के किआ वो बिल्कुल नशे में है. संजना को यूँही बाहों में उठाये वो आनंद के कमरे के चौकठ पर रुका, तो संजना ने उनके काँधे पर हलके से मुठी से मारते हुए कहा, “ोफो क्यों रुके हो पापा के कमरे के पास किआ उस्सको दिखा रहे हो के उसस्के बेटी को गॉड में उठाये हो आप?” तो चावला साहब ने धीरे से कहा, “अरे नहीं बुसस कंफर्म कर रहा हूँ के लुढ़का है या नहीं” और संजना को चूमते हुए उसस्के कमरे में गए.

संजना के बीएड पर उसस्के गॉड में लेते hi हुए बैठे और किश जारी रखे दोनों ने एक दूसरे के जीब का रस निचोड़ते हुए. फिर कुछ देर बाद संजना रुके यह कहते हुए, “उफ़ मेरा सांस फूल गया.”

तो चावला साहब ने उस्सको गॉड से उतरा और कहा, “चल कर दिखा इस ड्रेस में ज़रा. संजना ख़ुशी से मुस्कुराते हुए कमरे में उनके सामने चलते हुए आगे गयी फिर वापस आयी, खुद एक दो टर्न मारा और खिलखिला कर हँस्ते हुए पूछा, “बहोत खूबसूरत है नाह?” तो चावला साहब ने कहा, “ड्रेस नहीं, तुम इस ड्रेस को खूबसूरत दिखा रही हो, तुमने इससे नहीं पहना होता तो यह सिर्फ कपडा होता इस में चार चाँद तुम्हारी बदौलत आयी है बेबी.” संजना हुए ज़्यादा हंसी और एकांत कदम और चली ड्रेस को अपने हाथों में थोड़ा ऊपर उठाते हुए तो चावला साहब उस्सको निहारते हुए कहा,

“बेखुद किया देते हैं

तेरा अंदाज़ ये बचकाना

आ दिल में तुझे रख लूँ

ेय दिलबर इ जान आना”

संजना और खिल कर हंसी और कहा,

“आप हो आशिक मेरे ेय हुज़ूर

होना न कभी मुझसे दूर

मर जाउंगी वार्ना होक मजबूर”

फिर हंससने लगी अपनी वही “हीहीहीही” करते हुए और दोबारा उनके गॉड में जा बैठी अपने बाहों का हार उनके गले में डालकर.

चावला साहब का हाथ उसस्के कमर से होकर उसस्के बाज़ू के निचे से होते हुए उस्सकी बूब्स पर पहुंचे और बूब को दबाते हुए कहा, “आरव ने इधर छुवा किआ?” तो नखरों के साथ संजना ने खिलखिलाते हुए पूछा, “क्यों आप को जलन हो रही है हम्म्म? मुझे भी ऐसा hi लगा था जब आप सान्वी के इतना क्लोज थे अब समझे आप हीहीहीही!!... और आरव को मैं कितना रोकती हाँ बहुत छुवा मुझे चारों तरफ मैं जितना हो सकीय उतना बचाई खुद को!”

तो चावला साहब को ज़्यादा प्यार आया ुसस्पर और जाकर के ज़ोर से चूमा उस्सको काफी देर तक अपने हाथों को संजना के जिस्म पर चारों तरफ दौड़ते हुए. संजना ने भी अपने बाँहों का हार उनके गले में डाले हुए किश को बिल्कुल मगन होक रेस्पोंद करती गयी.

फिर चावला साहब ने संजना को सामने खड़े करते हुए कहा, “अब एक एक करके तेरे इस मांगनी वाले घागरा चोली को उतारूंगा, धीरे धीरे हौले हौले…” संजना थोड़ी सी जैसे शर्मा गयी और एक हलकी मुस्कान में कहा, “हम्म्म कैसे? ऐसे?” वो कहके उस्सने चुन्नी को हटाया. तो चावला साहब ने कहा, “नहीं तुम कुछ नहीं निकालो सब मैं करूँगा हम्म्म ऐसे…..” तो उस्सने चुन्नी को निकाल कर आराम से बीएड पर रखा. संजना उसस्के सामने एक डॉल की तरह कड़ी रही मुस्कुराते और उनके चेहरे में देखते हुए. तब चावला साहब ने संजना के छाती पर देखते हुए उस्सकी चोली पर हाथ लगाया, तो संजना सिमट गयी अपने बाहों को क्रॉस करते हुए! फिर चावला साहब बोले, “अरे तो किआ हुआ? कैसे निकलूंगा अगर ऐसे करोगी तो?” संजना अपने दांतों में होंठों को दबाते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “हम्म्म्म नै मुझको अजीब सा फील हो रहा है ऐसे!”

चावला साहब ने उस्सको एक बार बाहों में जकरा, गर्दन पर किश किया फिर सामने खड़ा कराया. और आराम से उसस्के कमर पर चोली के निचे अपने उँगलियों को डालते हुए चोली को ऊपर के तरफ उठाने की कोशिश किये तो संजना ने हँस्ते हुए कहा, “धत आरी आप को पता नहीं के पीछे अटैच्ड है यह हुक्स तो निकला नहीं उतार रहे हो आप भी नाह!!” याद है ऐसा था घागरा चोली इंगेजमेंट वाला:

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चावला साहब के सामने उस्सकी मुलायम बूब्स प्रस्तुत थे और उन् से देखा नहीं जा रहा था तो अपने चेहरे को उसस्के छाती पर दबाया उस्सको जाकर के क्यों के वो तब बिना चुन्नी के थी पुरे क्लीवेज चावला साहब के ेंखों के सामने जो थे…. अपना जीब फेर्रा साहब ने उस्सकी क्लीवेज पर जिस से संजना की आह निकली और कुछ तड़पती जैसे आवाज़ में संजना ने कहा, “हम्म्म मुझे पीछे घूमना चाहिए ताके आप उन्हुक करो नाह!” मगर चावला साहब को बूब्स को चौररने का मैं नहीं कर रहा था और चोली के ऊपर से चाटते किश करते चोली को भीगा दिया….. तब कहा “अच्छा टर्न करो पीठ मेरे तरफ करो”

संजना घूम गयी अपना पीठ उनके तरफ करते हुए तब चावला साहब ने धीरे धीरे अपने उँगलियों से काम लिया उन्हुक करने को एक एक करके धीरे धीरे जिस दौरान संजना की सिसकियाँ सुनाई दे रहे थे. उस्सकी सांसें तेज़ होने लगे थे और जब चावला साहब ने उसस्के चोली को निकाल बाहर किया तो एक पूरी ब्रा तो नहीं मगर कुछ ब्रा के जैसी सिर्फ बूब को लपेटे हुए थे जिस्सकी स्ट्राप नहीं थे जो काँधे के ऊपर होता है, सिर्फ दोनों तरफ से बांधे हुए थे और पीठ पर से hi उस्सको खोलना था, तो चावला साहब संजना के नंगे पीठ को चूमने और चाटने लगे यह कहते, “कितनी चिकनी है ाहः….” और जब उस ब्रा जैसी चीज़ को खोल गिराया तो चावला साहब ने कहा “यह तो एक लव बाईट लगता है!!” तो संजना ने कहा, “यह आप के बेटे का कारनामा है मुझको वहां किश कर रहा था और बाईट भी किया था मुझे तो नहीं पता के निशाँ हुआ है!”

तब चावला साहब ने संजना को घुमाया अपने तरफ, उसस्के दोनों बूब्स नंगे थे उसस्के सामने जिस पर अपने दोनों हाथों को दबाते हुए चावला साहब ने पूछा, “तो आरव ने ये सब भी किया तुम्हारे साथ किआ तुम उस्सको अंदर लेकर आयी थी यहाँ?” संजना उनके गाल पर अपने उँगलियों को फरते हुए एक बाचे की आवाज़ करते हुए कहा, “हम्म्म्म उस्सने ने मुझको ज़बरदस्ती यहाँ लाया और किश करना छह रहा था, मैं ने बहोत मन किया, अपने होंठ नहीं दे रही थी उस्सको मैं ने तो होंठों को बांध कर लिया था फिर उस्सने मुझे बीएड पर धकेला और मुझपर चढ़ रहा था तो मैं मूढ़ गयी तो उस्सको मेरे पीठ hi मिले किश करने को…. हम्म वो ज़बरदस्ती कर रहा था मैं किआ करती!!!”

चावला साहब ने एक शैतानी वाला मुस्कराहट देते हुए कहा, “किआ करें अब उस्का भी हक़ बनता है नाह? खैर चोर्रो अभी तो तुम मेरे हो उस्सकी बात चोर्रो फिलहाल डार्लिंग अब घागरा निकालना है क्यों हम्म्म” और चावला साहब ने संजना की घागरे को निकला और लो हमारी संजना अब पंतय में कड़ी थी उनके सामने. मगर उसस्के गहने सब अभी तक संजना के गले में और कलाई में थे. तो चावला साहब ने अपने दोनों जाँघों को खोला और संजना को उनके बीच लिया फिर उसस्के गले का हार उतारने लगा धीरे धीरे, फिर उसस्के कान की बाली फिर, और एक एक करके चूड़ियां वग़ैरा सब निकला अपने हाथ से चावला साहब ने और रह गया था सिर्फ पंतय……

संजना एक डॉल या मैनेक्विन की तरह उसस्के इशारे पर उस वक़्त जैसे नाच रही थी, कभी पीठ करके, कभी हाथ उठाके तो कभी सामने घूमके…. वो कभी हंस रही थी तो कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी सिमट रही थी मुंह बनाते हुए, कभी जीब निकल कर उनको चिढ़ाते हुए कभी होंठों से मुंह बनके उनको मोचक करते हुए…..

उसस्के बाद चावला साहब ने अब संजना को बीएड पर बैठने को कहा पंतय के साथ hi. वो बैठ गयी, तो चावला साहब अपने घुटनों पे आगये संजना के सामने बीएड के पास और अपने सर को संजना के गॉड में रखते हुए अपने जीब से उसस्के जाँघों को छाता और चूसा…. संजना की सिसकारियां निकल पड़े और वो चावला साहब के सर के बालों में अपने उँगलियों को कसके समेत रही थी जिस दौरान चावला साहब उसस्के जांघें चाट रहे थे….. चावला साहब ने उस्सकी एक तंग को ऊपर किया और एक निचे फिर उस्सकी पंतय पर जीब फरने लगे जिस से संजना की “इससष शस्शहससस” निकली और ज़्यादा ज़ोर से उनके बालों को ुंलियों में समेटा…. फिर संजना बीएड पर अपने आप लेट गयी दोनों हाथों को फैला कर छत्त ताकते हुए! तब चावला साहब खड़े हुए और अपने कपडे को निकला, सब उतार दिया बिल्कुल नंगे हो गए और संजना अपने एक ऊँगली को मुंह में लिए चूस्ते हुए उनको नंगे देखती रही थोड़ा सा मुस्कुराते हुए. फिर संजना ने एक ऊँगली को मोड़ कर चावला साहब को पास आने का इशारा किया उसस्के लिंग को दिखाते हुए मतलब संजना उनके लिंग को अपने पास बुला रही थी मुस्कुराते हुए…..

तो चावला साहब बीएड के ऊपर गए घुटनों के बल से hi और संजना खुद झुक कर उसस्के लिंग के पास आयी और अपने नाज़ुक मुलायम हाटों से उनके खड़े तन्ने हुए लुंड को हाथ में लिया, अपने जीब से छाता जिस से चावला साहब की आह निकली इस बार… फिर संजना ने उस्सको अपने मुंह में लिया और चुस्सने लगी चावला साहब के चेहरे में देखते हुए नज़रें उठाकर. कितना मज़ा ारः था चावला साहब को, कितना बेकरार था वो इस छुवन के लिए मागणी के टाइम से, कितना तड़प रहे थे वो संजना को अपने बाहों में समेटने के लिए और अब वो मौका आया था और उन् के लिए ये जन्नत का सफर था…..

कुछ देर तक संजना उसस्के लिंग का स्पर्श करती रही तब चावला साहब ने कहा, “अब मेरी बारी है बेबी, तुमको वही ख़ुशी देता हूँ अब….” और वो बीएड से निचे उतरे, संजना के पंतय को उतरा और उसस्के दोनों जाँघों के फैलाया और उस्का सर संजना के दोनों टांगों के बीच पाए गए. संजना सिकुड़ती गयी “ाः उउउउफ ीीी ससससससस” करते हुए और अपने हाथ की उँगलियों को चावला साहब के बालों से नहीं हटाया संजना ने. खींच रहे थे उनके बालों को जिस जिस वक़्त उस्सको अजीब फील होती थी…..

चावला साहब ने संजना की योनि के पंखुरियों को अपने जीब से खोला, उसस्के बिच अपना जीब चलाया, वो गीली तो हो hi चुकी थी जिस कारण उनके जीब आसानी से फिसलते गए पंखुरियों के बिच.. संजना की बुरी हालत थी चावला साहब के उस एक्शन से…. उस्सकी ेंखें नशीले होते जा रहे थे और उस्सकी आहें भारी होने लगे थे उस्सकी सिसकारियों में तड़प का एहसास था…. चावला साहब ने अपने जीब को उस्सकी योनि के अंदर थोड़ा सा घुसेड़ा जिस से संजना की आह ज़ोर से निकली, वो कसमसाने लगी बीएड पर और अपने जाँघों में चावला साहब के सर को ज़ोर से दबा लिया और हांफने लगी, फिर चावला साहब आहिस्ते से अब अपने ऊँगली को योनि के पंखुरियों पर फेर्रा आहिस्ते आहिस्ते हौले हौले, और थोड़ा सा ऊँगली को छूट के अंदर ठुस्सा जिस से संजना फिर से ज़ोर से “आआह” किया और सर उठाकर रोनी आवाज़ में कहा, “किआ कर रहे हो आप…. मैं वर्जिन हूँ आप भूल गए किआ?”

तो बे कॉन्टिनोएड………………. (2156 वर्ड्स)
 
अपडेट 34 चावला & संजना कंटिन्यू

…..फिर चावला साहब आहिस्ते से अब अपने ऊँगली को योनि के पंखुरियों पर फेर्रा आहिस्ते आहिस्ते हौले हौले, और थोड़ा सा ऊँगली को छूट के अंदर ठुस्सा जिस से संजना फिर से ज़ोर से “आआह” किया और सर उठाकर रोनी आवाज़ में कहा, “किआ कर रहे हो आप…. मैं वर्जिन हूँ आप भूल गए किआ?”

अब आगे…..

चावला साहब संजना की अचानक चहूंकने पर रुका और मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अरे बेबी, क्यों फ़िक्र कर रही हो, मुझे पता है तुम वर्जिन हो वही तो एक्स्प्लोर कर रहा हूँ, तुम्हारी विर्जिनिटी को janeman!”to संजना सिसकारियों के साथ अपनी बचकानी आदत में कहा, “हम्म्म मुझे दर्द होगा नाह जी!” तो चावला साहब ने कहा, “तुमको बिल्कुल दर्द नहीं होने दूंगा स्वीटहार्ट बुसस थोड़ा वेट करो धीरे धीरे कर रहा हूँ, देखो तो कितना भीग गयी हो भला, इतनी पानी!! हाय रे हाय!” और तब संजना ने गर्दन ऊपर उठाते हुए उनके चेहरे में होठों को डेंटन में दबाते हुए देखा और धीमी आवाज़ से कहा, “ह्म्म्मम्म मुझे कुछ हो रहा है जब आप की ऊँगली वहां है तो, निकालो नाह ऊँगली को वहां से, जीब को hi रहने दो, जीब से ज़्यादा अच्छा महसूस होता है, गरम है आप की जीब, ऊँगली तो सख्त है नाह जीब नरम है….”

तो चावला साहब हँसे और फिर से अपने जीब को उस्सकी छूट की चढ़ में जितना हो सका उतना घुसाया नरमी के साथ अपने उँगलियों से पंखुरियों को जितना हो सके उतना हटाते हुए. उस से संजना ने “उफ्फ्फ्फ़” करते हुए अपने मुठी में चादर को जकरा और एक तंग पर ज़ोर लगा कर कमर को बीएड से ऊपर उठा लिया जिस्म को ऐंठते हुए और एक लम्बी सांस को बाहर चोर्रा, फिर “स्स्स्सस्शह्ह्सस्स आआआह्ह्ह्ह” की आवाज़ निकली उसस्के गले से. तब चावला साहब नज़रों को ऊपर करके संजना के अंगराई को देखते हुए जीब को चढ़ के बाहर करके फिर से पंखुरियों को चाटने लगा जिस से जैसे संजना को बहोत आराम मिली, और वो वापस पलंग पर लेट गयी आराम से चादर को मुठी से चोररटे हुए, और थोड़ा बहोत हांफने लगी थी.

कुछ देर तक चावला साहब उसी पोजीशन में उस्सकी योनि को छत्ता रहा तब, संजना ने कहा, “मुझे कुछ नहीं मिल रहा चुहने को या मुंह से फील करने को, अपने मोटा शैतान को इधर करो नाह जी, मैं भी आप को ख़ुशी दूंगी!” चावला साहब फिर हँसे, वो तो ज़मीन पर घुटनों के बल था और संजना बीएड पर लेते हुए तो ज़ाहिर है के संजना को सच में कुछ नहीं मिल रहा था सिवाए फीलिंग्स के, तब चावला साहब बीएड पर गया और अपने टांगों को संजना के सर के तरफ करते हुए अपने मोठे खड़े लिंग को उसस्के चेहरे के तरफ किया और वो खुद संजना के जाँघों के बीच हो गया. 69 पोज़ होगया फिर से.

संजना जिस अंदाज़ से चावला साहब के लिंग को चूस रही थी लगता था के लुंड की भूकी थी और बहोत एक्सपेरिएंस्ड थी चुस्सने में. बॉल को भी सहलाती जा रही थी चूस्ते वक़्त. चावला साहब को हर बार हैरानी होती थी के कैसे इतना कुछ कर लेती है, बिल्कुल एक्सपर्ट लगती है. उस्सने सोचा की सिर्फ नेचुरल चाहत से एक लड़की इतना कुछ कर सकती है एक अधेड़ आदमी के लुंड के साथ जैसे उस्सकी आदत है?” चावला साहब को हर बार हैरत में दाल देती थी संजना अपने हरकतों से. चावला साहब को मज़ा तो बेहद आ रहा था और वो भी पूरी कोशिश में लगे हुए थे संजना के योनि के साथ उस्सको बेहतरीन प्लेअसुरे देने के लिए. कई बार संजना अपने जाँघों में चावला साहब के गर्दन को कस्सके दबा लेती थी जब जब उस्सकी छूट की चढ़ के अंदर चावला साहब कोई हरकत करता था, उस्सकी छूट और भी ज़्यादा गीली होती जा रही थी यह चावला साहब ने नोटिस किया.

उधर संजना लुंड को चोरर hi नहीं रही थी, इतना चूसा लुंड को के उस्का थूक, लाढ़ सब छह रहे थे और उस जगह पर चादर भीग गए थे. तो चावला साहब रुके और संजना के चेहरे के तरफ गए और उसस्के मुंह को अपने मुंह में लिया. जब चावला साहब उस्सकी जीब को चूस रहे थे तो संजना ने खुद अपने एक हाथ को लुंड पर किया और उस्सको मुठी में लेकर हाथ चलाने लगा जैसे मुठ मारते है वैसे किश को बरकरार रखते हुए. दोनों बिल्कुल नंगे थे और चावला साहब ने तब संजना को उस्सकी कमर के निचे एक हाथ करते हुए उस्सको पलटा और संजना बीएड पर पीठ के बल हो गयी. और चावला साहब उसस्के ऊपर पाए गए.

तब संजना ने एक मुस्कान से देखा उनके चेहरे में और एक ऊँगली को मुंह में डालते हुए चूसा और होंठों को दांतों में दबाया और नज़रों से चावला साहब को जैसे एक ेंख मारा. उस्सकी उस हरकत से चावला साहब ने पूछा, “किआ?” तो फिर संजना ने ेंख मारा बिना कुछ कहे. चावला साहब को बहोत प्यार आया उस्सकी इस ऐडा पर और उस्सको बाहों में जाकर के फिर किश करने लगा. संजना अब चावला साहब के जीब को अपने मुंह में भरके मज़े से चुस्सने लगी थी अपने टांगों को दोनों तरफ फैला कर चावला साहब को अपने बीच लेते हुए. और अपने बाहों को पूरी तरह से चावला साहब के पीठ पर कसके बांध लिया था संजना ने.

थोड़ी देर किश करने के बाद संजना रुकी, एक लंबा सांस लिया और थोड़ा सा हांफते हुए उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “अब किआ?” तब तक चावला साहब का मोटा लुंड उसस्के छूट के पंखुरियों के बीच फिसलते हुए रागढ रहे थे, जिस दौरान किश कर रहे थे तब भी वही हो रहा था मगर किश में इन्वोल्वेद थे तो दोनों में से किसी ने उस लुंड और छूट के हिस्से को नहीं ख्याल किया था जैसे, पर जब किश रुके तब संजना फील कर रही थी के उंनका मोटा शैतान उस्सकी योनि के पंखुरियों को जैसे और खोल रहा था इसी लिए पूछा , “अब किआ?” मतलब अब किआ करना है?”

तो चावला साहब ने संजना के काँधे पर अपने दोनों हाथो को रखे हुए अपने कमर को हिलाते हुए लुंड को ज़्यादा ज़ोर से दबाकर लुंड को रगड़ने लगा और खुद एक एक्सटेसी फील करते हुए जैसे मदहोश होने लगा, उनको उस हालत में देख कर संजना ने अपने उँगलियों को उनके सर के बालों में फेर्रा और एक हाथ उनके पीठ पर फेर्रा जिस से चावला साहब कहाणररने लगे और तेज़ी के साथ कमर हिलता गया उस्सकी छूट पर लुंड रगड़ते हुए. तब सनजना ने अपने दोनों टांगों को उठाकर चावला साहब के कमर के ऊपर क्रॉस कर दिया…. उस से चावला साहब का मज़ा दुगना हो गया और उस्सने अपने बाहों को संजना के कमर के निचे करके उसस्के नितम्बों पर करके दबाते हुए रागढ को जारी रखा. और संजना ने अपने जीब को उनके गर्दन पर फर्र्ना शुरू किया तो चावला साहब और पागल होने लगे!!

उनके गर्दन पर जीब फरते फरते संजना ने दो जगहों पर गर्दन में दन्त भी काटे जिस से दो लव बिट्स बन गए चावला साहब के नैक पर, और संजना वाकिफ थी के किआ कर रही है और देख भी रही थी के कितना गहरा निशाँ बना उसस्के सूचक करने से वहां पर….. चावला साहब की रागढ बढ़ता गया कमर ज़्यादा तेज़ी से हिलाते गए और झट से लुंड को ऊपर उठाया अपने पानी को पिचकारी की तरह चोररटे हुए जो संजना के सर के बाल तक भी गए और पथ, बूब्स, नैवेल, गाल, चेहरा पर भी चावला साहब का पानी गया!! संजना ने “हीहीहीही” करते हुए कहा, “किआ आप मुझको नेहला रहे हो अपने पानी से हीहीहीहीहीही”

चावला साहब हांफते हुए उसस्के चेहरे में देख कर बोलै, “मेरी प्यारी बेबी अब मुंह में लो इस्को जल्दी से, बाकी के पानी तुम्हारे पीने के लिया चोर्रा है जल्दी चुसो नाह और ऊपरी वाले हिस्से पर, चढ़ पर खूब जीब को फेर्रो गोआल गोआल घुमा के!!”

संजना ने वही किया, जिस वक़्त संजना की मुलायम हाथ का स्पर्श हुआ उनके लुंड पर तभी चावला साहब थरथरा गए और कहने की ज़रुरत नहीं के जिस दम संजना ने अपने जीब को लुंड के ऊपरी हिस्से पर जीब फेर्रा उन् बचे हुए वीर्य को चाटते हुए तो चावला साहब का किआ हाल था. वो तड़प उठे उस्सकी आवाज़ काफी जोरर से निकले , “आआह्ह्ह्ह्ग स्स्स्सस्स्स्शशषस हाआआईए” और जब संजना ने लुंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया तो चावला साहब सातवे आसमान में पहुँच गए इतनी आनंद आयी उनको. अपने कमर को फिर भी सनजना के सर को हाथ में लिए चावला साहब ने दबाये और उसस्के गले के अंदर कुछ देर लुंड को रहने दिया. तब आखिर में लुंड बाहर निकला और वो बीएड पर लेट गए और प्यारी संजना उनके छाती पर अपने गाल लगाते हुए उनके छाती के बालों से खेलते हुए अपनी नरम और मीठी आवाज़ में कहा, “हम्म्म किआ हुआ जी?” मज़ा आया नाह? हम्म खूब एन्जॉय किया नाह आप ने? प्यास बुझी के नहीं या और प्यास बाकी है अब भी हम्म्म?”

चावला साहब तब भी हांफ रहे थे लेते हुए और संजना के गर्दन को अपने बाज़ू में लेकर अपने छाती पर ज़ोर से दबाते हुए उस्सको किश करने लगे.

तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (1522 वर्ड्स)
 
अपडेट 35 चावला साहब दीद आईटी

दोनों कुछ देर लेते रहे वैसे hi नंगे बीएड पर प्यार में डूबे एक दूसरे को करेस करते हुए. एक घंटा से ज़्यादा बीत गए थे. संजना का सर चावला साहब के छाती से सट्टे हुए थे और उस्का हाथ उनके छाती के बालों पर फेरर रहे थे और बार बार चुम रही थी उनके छाती को. एक बार तो संजना ने उनके छाती के निप्पल को दांतों में दबाया जिस से चावला साहब तड़प उठे, फिर संजना ने उस्सको चूसा और कहा, “मैं यहाँ एक लव बाईट की निशाँ बनाती हूँ.” चावला साहब ने कहा, “okay चलो करो!” तो संजना उनको वहां चुस्सने लगी. काफी देर तक चूसा उस्सने और रुके तो देखा के सच में एक गहरा डार्क रेड निशाँ होगया. चावला साहब ने खुद देखा और सोचा के अब घर पर कुछ दिन तक बिना शर्ट के सान्वी के सामने नहीं जा सकते. जिस वक़्त संजना चावला साहब को वहां चूस रही थी उस्सकी जांघें दोनों चावला साहब के एक जांघ को अपने दोनों जाघों के बीच में लिए हुए थी, और चावला साहब को चूस्ते हुए वहां अपनी योनि रागढ रही थी रह रह kar…usski की योनि की पानी ने चावला साहब के जांघ को उस जगह पर भीगा दिया था.

और कुछ देर बाद संजना ने चावला साहब के काँधे पर भी दांत गदया और चुस्सने लगी अपनी जाघों को उसी तरह से चावला साहब के दूसरे जांघ को उनके बीच लेकर अपनी योनि को वहां दबाते हुए और रगड़ते हुए….. उस से चावला साहब को महसूस हुआ के संजना की प्यास अभी तक नहीं बुझी थी उस्सको और सेक्स की भूक बाकी थी तो चावला साहब यह सोचकर और संजना को अपने जिस्म पर उस तरह से फील करते हुए वो दोबारा खड़ा हो गए. और उस्सको भी फिर करने को मैं किया. संजना ने उनके लुंड को अपने जाँघों के बीच मोटा होते हुए फील किया और वही “हीहीहीही” करते हुए और दांतों में होंठों को दबाते हे पूछा, “क्यों जी? किआ हुआ? फिर से यह मोटा शैतान उठ गया? इस्को नींद नहीं आती किआ जी?”

चावला साहब अपने लिंग को संजना की जाघों के बीच दबाते हुए कहा, “जब तुम साथ हो, उस्सको तुम्हारा जिस्म छह रहा है तो कैसे उस्सको नींद आएगा भला? यह दोबारा तैयार हो गया करने को. किआ करें डबल किया जाए के नहीं?” थोड़ा सा शर्माते हुए संजना ने कहा, “जैसा आप चाहो!” तो चावला साहब ने संजना के बूब्स के उस हिस्से को चूमा जो उसस्के आर्मपिट के पास है… उस नरम हिस्से को जो बहुत कम कोई चुहता hai…..wahan चुम्मा, जीब फर्रा और चुस्सने laga….Sanjana कसमसा सी गयी और अचानक कहा, “ठहरये वेट वेट वेट!!” यह कहकर वो झट से बीएड से निचे उतर गयी. चावला साहब अपने सीधा खड़े हुए लुंड के साथ बीएड पर दिखे गए, उतारते hi संजना ने अपने ऊँगली से चावला साहब के लुंड को दिखाते हुए “हीहीहीहीहीहीही देखो नाह वो कैसे लम्बा खड़ा देख रहा है ऊपर के तरफ हीहीहीहीहीहीही” चावला साहब हैरान संजना को देखे जा रहे थे और पूछा, “किआ हुआ? क्यों उतर गयी तुम बीएड से?” तो संजना ने अपने निचे वाले होंठ को दांत में दबाते हुए एक हलकी सी मुस्कान में जवाब दिया, “सुसु आयी है बड़ी ज़ोर से अभी आयी नाह!!!” मगर वो तो बिल्कुल नंगी थी और टॉयलेट जाने के लिए तो रूम से निकलना था और किचन के पास से होकर, लाउन्ज के बगल से गुज़र के तब टॉयलेट अत था. तो चावला साहब देखना चाहती थी के किआ बिल्कुल नंगी hi जाएगी वो टॉयलेट …..

और वो बहोत hi हैरान हुए क्यूंकि सच में संजना बिल्कुल वैसे नंगी hi चली गयी पेशाब करने टॉयलेट में. चावला साहब सोचने लगा के अचानक उसस्के बाप का नींद टूट गया और वो उस वक़्त बाहर निकला जब संजना वापस आरहे हैं तो किआ करेगी? किआ संजना ने सोचा इस बारे में? या बावली सी हो गयी क्यूंकि मैं उसस्के साथ हूँ?!” तब चावला साहब भी उठ खड़े हुए और अपना पंथ पहना क्यूंकि वो भी अब टॉयलेट जाना चाहता था दोबारा करने से पहले. धीरे से कमरे से सर बाहर निकाल कर झाँका आनंद के कमरे के तरफ तो देखा के बांध है तो निकले टॉयलेट के तरफ जाने के लिए. साथ में संजना की एक ड्रेस जो रूम में टेंगा हुआ था लेलिया संजना को देने के लिए ताके वो वापस आये तो ड्रेस पहनकर आये.

चावला साहब जब टॉयलेट के पास गए तो देखा के खुला है मगर संजना वहां नहीं है…… अब उस्सकी ड्रेस हाथ में लिए चावला साहब हैरान हुए के किधर गयी. सोचने लगे के गयी कहाँ फिर? पीछे तरफ बाहर जाने वाले दूर को देखा तो वो भी बांध थे…. अब सोचने लगे, आवाज़ तो नहीं दे सकते थे क्यूंकि आनंद जाग जाता या आवाज़ सुन के जाग सकता था. तो चावला साहब खुद पी करने लगे टॉयलेट में खड़े होकर बिना दरवाज़ा क्लोज किये सोच में डूबे के संजना कहाँ ग़ायब हो सकती है….. सोचा के आनंद के कमरे में तो नहीं गयी? किआ नंगी अपने बाप के ककमरे में जाएगी? मगर क्यों? उस्का पेशाब ख़तम नहीं हुआ था के अचानक पीछे से संजना ने उस्सको हलके से ढाका देते हुए “भाव” कहा आउट हंससने लगी धीरे धीरे मुंह पर हाथ रख कर. चवला साहब की पेशाब रुक गयी क्यूंकि वो चहुँक गए सच में और पूछा के वो किधर थी. तब तक पेशाब ख़तम करके, लिंग को वाश करके बाहर निकले, संजना को ड्रेस दिया और कहा बताने को के वो कहाँ थी. तो संजना ने कहा, “बाथरूम के अंदर थी, वाश भी करना था निचे नाह? आप को साफ़ देना चाहती हूँ गन्दी हो गयी थी, आप ने भी तो वाश किया अभी नाह!” तो चावला साहब ने उस्सको गॉड में उठा लिया और चूमते हुए दोनों कमरे के अंदर वापस गए.

चावला साहब ने उस्सको लेता कर उस्सकी योनि को चूमने लगे… तो एक चाह एरोमेटिक खुस्भू आयी तो पूछा, “तुमने परफ्यूम लगाया इधर?” संजना ने धीमी आवाज़ में रिप्लाई किया, “अरे नहीं बाबा ब्यूटी सोप से वाश किया उस्सकी की खुशभू आरही है आप को!” तब चावला साहब ने कहा, “ओह ी सी!” और अपने काम में लग गए. संजना कसमसाने लगी उनके होठों और जीब के तकरार से अपनी योनि पर, उस्सकी सिसकारियां गले के बाहर आने लगे और फिर से संजना ने चादर को भर मुठी ले लिया और जिस्म को ऐंठने लगी सांप की तरह. चावला साहब का जीब उस्सकी छूट की चढ़ के अंदर जैसे घुस्सने की कोशिश में था. और दोनों हाथ के एक एक उँगलियाँ उस्सकी गीली फिसलती पंखुरियों पर हौले हौले रागढ रहे थे. संजना बेहाल होती जा रही थी. चावला साहब ेंखें ऊपर उठाये उसस्के चेहरे में देख रहे थे और सोचने लगे खुद से कहते हुए के ‘संजना को पेनेट्रेशन की ज़रुरत है उस्सको सच्ची ओर्गास्म की ज़रुरत है. इसी लिए मुझपर लव बाईट करते वक़्त अपनी योनि रागढ रही थी मेरे जाँघों पर और बिल्कुल गीली हो गयी थी…. शायद उस्सको पेनेट्रेशन चाइये hi अब….’

इतना सोच ने के बाद चावला साहब संजना के ऊपर चढ़ना चाहा मगर इस से पहले संजना ने जैसे उस्सको भूक लगा हो झट से चावला साहब केलुंड को हाथ में लेकर चुस्सने लगी एक दीवानी की तरह…. वो जैसे अपने होश में नहीं थी, बिल्कुल बड़खुड़ि के आलम में थी उस वक़्त. चावला साहब ने उस्सको जी भर के चुस्सने दिया और खुद आनंद लिया एखन को बांध करके….. संजना चूस रही थी, हाथ से बॉल को सेहला रही थी, जीब को लुंड के चढ़ पर गोआल गोआल घुमा रही थी, सब बिल्कुल परफेक्शन से करती जा रही थी और चावला साहब बिल्कुल एन्जॉय करते जा रहे थे.

आखिर में कुछ देर बाद संजना अपनी बचपने वाली आवाज़ में एक नखरे के साथ बोली, “ह्म्म्मम्म मेरा मुंह दुःख गया अब….” तो चावला साहब ने उस्सको लेटाया और उसस्के ऊपर चढ़ गया और अपने तन्ने हुए लुंड को उसस्के दोनों टांगों को फैला कर छूट की पंखुरियों के बीच फिसलते हुए ऊपर निचे किया एकांत बार फिर लुंड के ऊपरी हिस्से को छूट की छोटी चढ़ पर दबाया जैसे उस्सको वहां इंट्रोडस कर रहा था….. संजना पीठ पर लेते हुए एक लम्बी सांस लेकर अपने ेंखों को बांध कर लिया और दांतों से होंठों को दबा लिया…. उस्सकी बूब्स ऊपर निचे उठक बैठक करते हुए दिख रहे थे उस वक़्त.

चावला साहब के दोनों हाथ संजना के दोनों तरफ बीएड पर थे अपने जिस्म को सपोर्ट करते हुए कमर हिलाते हुए लुंड को संजना के छूट पर राजघते जा रहे थे और धीरे से कहा, “बेबी अब अंदर डालने को मैं कर रहा है डालूं किआ?” संजना ने अंगराई लेते हुए कहा, “पता नहीं आप जानों मुझसे मत पूछिए कीजिये जो करना है आप को…” इस जवाब से चावला साहब का हौसला बढ़ गया के वो अंदर दाल सकता है तो अपने लुंड को उस्सकी वर्जिन छूट की चढ़ के ऊपर फिसलते हुए दबाया थोड़ा सा आहिस्ते से संजना के चेहरे में देखते हुए…. उस वक़्त संजना ने ज़ोर से चावला साहब के दोनों कलाई को पाकर लिए थे और उनके चेहरे में देख रहे थे कुछ शर्मायी, कुछ घबराई, कुछ हांफते हुए…. चावला साहब संजना की ेंखों की गहराई में देखते हुए थोड़ा सा ज़्यादा कमर को दबाते हुए लुंड की ऊपरी हिस्से को अंदर डाला जिस से संजना ने दोनों ेंखें बांध करते हुए “उफ्फ्फफ्फ्फ़” कहा… चावला साहब वही रुके….. फिर थोड़ा सा और अंदर किया, संजना के ेंखों से दो बूंद ेंसू निकल पड़े हालां के ेंखें बांध थे, और जुबां से “ुउउइइइइइ माआ” निकली. चावला साहब वहीँ ruke…matlab आधा लुंड संजना के छूट के अंदर था और आधा बाहर, संजना हांफ रही थी, उस्सकी छाती में उसस्के दिल के धड़कन दिख भी रहे थे और सुनाई भी दे रहे थे…. और उस्सकी तेज़ सांसें ज़ोरों से सुनाई दे रहे थे….. चावला साहब भी थोड़ा सा हांफने लगे थे मगर उस्सको तो एक काम पूरा करना था अभी… और फिर उस्सने कोई एक इंच और अंदर पुश किया…. इस बार संजना ने कोई रिएक्शन नहीं दिया…. मगर अगली बार चावला साहब ने बिना सोचे लुंड को अंदर घुसेड़ hi दिया एक hi झटके में….. संजना ज़ोर से चिलायी “आआआआह्ह्ह्ह उईईई माआआ आआअह्ह्ह्ह” और रोने लगी…… चावला साहब को उस्का रोना बिल्कुल पसंद नहीं था, वो एक छोटी बची की तरह रोटी थी और बहोत तरस अत था…. तो चावला साहब लुंड को अंदर hi रखते हुए संजना के छाती के ऊपर से होते हुए उसस्के ेंसुओं को अपने जीब से पोंछा और उसस्के लबों को चुम्मा…. संजना ने हांफते हुए रोनी आवाज़ में कहा, “निकालो, बाहर निकालो नाह दुःख रहा है !!”

चावला साहब ने उस्सको चूमते हुए कहा, “अगर अभी निकला तो तुमको बहोत जलन होगी वहां, पूरा हो जाने दो तब निकालता हूँ नाह….. मगर संजना अपने कमर को हिलाने लगी और बार बार बोलती गयी, “नै नै निकालो बाहर”… चावला साहब ने सोचा अभी नहीं तो कभी नहीं, जब उस्सने पुरे लुंड को बाहर किया तो संजना ने सोचा के निकल गया मगर चावला साहब ने दोबारा अंदर किया फिर बाहर किया फिर अंदर ठुस्सा और ढाका देता गया उस्सकी वर्जिन छूट के अंदर जो अब वर्जिन नहीं रही… उस दौरान संजना बिलात्ती गयी अपने कमर को लाख हिलाने की कोशिश किये मगर चावला साहब ने ताक़त इस्तेमाल करते हुए उस्सको दबाये रखा अपने निचे और ढाका बढ़ाता गया और रफ़्तार बढ़ता गया जब तक के चावला साहब ने कहाणररते हुए लुंड को बाहर निकला अपने वीर्य को प्रेशर में छोड़ते हुए संजना के पथ से छाती तक… संजना अपने हाथों में मुहं छुपाये रो रही थी तो चावला साहब ने हांफते हुए कहा, “शह्ह्ह्ह आनंद जाग जाएगा तुम्हारी आवाज़ सुनकर छुप भी करो अब हो गया नाह!!” मगर वो रोटी जा रही थी…. चावला साहब के उस हाथ में थोड़ा सा लाल दिखा, जिस में लुंड पकड़े हुए थे, संजना की विर्जिनिटी का खून था और अपने लुंड को भी देखा लम्बाई पर खून लगे हुए थे…. चावला साहब को एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुई, वो ख़ुशी जो कोई जुंग फतह करने की बाद होती है, वो ख़ुशी जो एक बचा पैदा होने के बाद होती है, वो ख़ुशी जो किसी दुश्मन पर फ़तेह करने के बाद होती है…. जैसे एक जुंग जीता है अभी अभी चावला साहब वैसा फील कर रहे थे वो.

फिर चावला साहब ने संजना को बाहों में भरके उस्सको फुसलाया एक छोटी बची की तरह के यह पहली बार है इस लिए थोड़ा सा दर्द हुआ, इस्सके बाद कभी दर्द नहीं होगा वग़ैरा वग़ैरा…..

शांत होने के बाद संजना ने कहा, “इस बार आप ने झड़ने के बाद मुझे मुंह में लेने को नहीं कहा क्यों?” तो चावला साहब ने कहा, “खून है इस लिए!” खून शब्द सुनकर संजना घबरा गयी और फिर रोने लगी… चावला साहब ने फिर से उस्सको फुसलाया बहलाया, तब संजना ने कहा, “हम्म्म अब वहां जलन से हो रही है वहां पर फूंको आप…. लगता है चील गया है…..”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….
 
अपडेट 36 चावला साहब रेमें विथ हेर

शांत होने के बाद संजना ने कहा, “इस बार आप ने झड़ने के बाद मुझे मुंह में लेने को नहीं कहा क्यों?” तो चावला साहब ने कहा, “खून है इस लिए!” खून शब्द सुनकर संजना घबरा गयी और फिर रोने लगी… चावला साहब ने फिर से उस्सको फुसलाया बहलाया, तब संजना ने कहा, “हम्म्म अब वहां जलन से हो रही है वहां पर फूंको आप…. लगता है छील गया है…..”

अब आगे…………

चावला साहब ने उस्सकी दोनों टांगों के फैलाते हुए उस्सकी योनि पर फूँक मारा ताके उस्सकी जलन काम हो, और जाँघों पर जो थोड़ा सा खून की लखीर थे उसस्के पानी और चावला साहब के पानी से मिक्स्ड उस्सको उन्हों ने संजना की पंतय से पोंछा और उस्सकी पंतय को अपने पंत के जेब में दाल लिए, और बड़े प्यार से चुम्मियाँ दिए वहां पर. मगर संजना उस्सको हटाते हुए कहा, “नै नै छूना बिल्कुल भी नहीं वहां अभी बहोत hi सेंसिटिव है… अगले तीन चार दिन तक तो छूने बिल्कुल भी नहीं दूंगी वहां हाँ!” चावला साहब हंस पड़े और कहा, “चलो ड्रेस पेहेन लो और चल कर फ्रिज से आइस क्यूब निकालो और वहां पर अप्लाई करो ठंडक पोंहचेगा, या आइस को पानी में दाल कर पिघलने दो कुछ देर फिर उस ठंडी चिल्ड पानी से वहां धोना ठीक हो जाएगा.” तुरंत संजना ने पूछा, अपना मुंह बनाते हुए “आप को यह सब कैसे पता किसी और कुंवारी लड़की के साथ ऐसा किये हो किआ आप?”

चलते हुए फ्रिज के तरफ जाते वक़्त चावला साहब ने जवाब दिया, “अरे इस में पता होने वाली कौन सी बात है कॉमन सेंस है के जहाँ जलन होती है ठंडा पानी या बर्फ लगाने से ठंडक पहुँचता है! और तुम किआ किसी और कुंवारी लड़की की बात करने लगी! बहोत जेलस हो तुम नाह?” फिर संजना ने कहा, “सशह्ह्ह धीरे बोलो आप सुबह के 2.30 बजे हैं पापा जाग जाएगा” फिर उदास होते हुए चावला साहब के चेहरे में देखते हुए कहा, “उस्सने अभी तक कुछ खाया भी नहीं है हम्म्म्म मुझे उस्सको उठके कुछ खिलाना चाहिए था!” तो चावला साहब ने कहा, “नहीं नहीं रहने दो, नींद hi उस्का खुराक है उस्सने मिक्स्ड पिए हुए हैं अगर अभी खाएगा तो उलटी होगी, सुबह उठेगा तो निम्बू पानी देना और दूध देना पिने को उससे!”

एक बर्तन में संजना ने कोई एक लीटर पानी लिया और आइस कुबेस डाले उस में, चावला साहब उसस्के साथ वहीँ थे, संजना ने सिर्फ एक ड्रेस पहना हुआ था, न ब्रा और न पंतय और चावला साहब अपने पंत में थे बिना अंडरवियर के और संजना ने थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा, “आप मेरी और एक पंतय आज तोहफे में लेजा रहे हो अपने साथ?” तो चावला साहब ने रिप्लाई किया, “हाँ उस में तुम्हारा विर्जिनिटी का थोड़ा सा खून लगे हुए हैं और तुम्हारा पानी मिक्स्ड है यह तो एक अनमोल तोहफा है जो ज़िन्दगी भर रखूँगा मैं!” संजना ने अपने होंठों को दांतों में दबाये हुए मुस्कुराकर कहा, “और मैं किआ करूँ आप की अंडरवियर आज भी रखलूं किआ?” “हाँ बिल्कुल रखलो मुझे कोई ऑब्जेक्शन नहीं बल्कि ख़ुशी होगी.” उन्हों ने जवाब दिया.

तब दोनों साथ में बाथरूम में ग़ुस्से और चावला साहब ने संजना के टांगों पर बैठने को कहा और वो पानी वाला बर्तन अपने हाथ में लिया और संजना ने ड्रेस को ऊपर किया दोनों टांगों को फैलाते हुए जिस से उस्सकी योनि बिल्कुल सामने थे और लाल हो गए थे चावला साहब के रागढ से और उनके मोठे लुंड को खाने से, जब सांजना ने टांगों को फैलाया तभी कहा के जलन सा ज़्यादा हो रही है फैलाने से, और चावला साहब ने अपने हाथ में उस ठन्डे पानी को लेकर चिररकाया उस्सकी योनि पर कई बार….. जैसे पहले पानी के चिररके पड़े वहां पर तुरंत संजना ने कहा, “हम्म्म एक ठंडक पहुंची वहां अब!” और 20 मिनट्स तक लगातार पानी वहां चिररकने के बाद बिल्कुल ठंडी हो गयी वहां संजना ने कहा.

तो दोनों वापस कमरे में गए और चावला साहब ने कहा, “अगर फिर दिन में या कभी भी वैसा जलन हुए तो वैसे hi चिल्ड पानी चिररककना उस जगह तब ठीक हो जाएगा” और यह भी कहा के जब वो पेशाब करने जाएगी तब भी जलन हो सकती है तो घबराने को नहीं उसी ठंडी पानी का इस्तेमाल करें. और यह भी कहा के कल वो गिनाए क्रीम लाएगा उसस्के लिए वहां अप्लाई करने के लिए ताके अगर इन्फेक्शन हो तो ठीक हो जाएगा. संजना ने उनको बाहों में भर लिया और उसस्के काँधे पर अपनी थोड़ी रख कर कहा, “आप कितना केयरिंग हो, कितना ख़याल रख रहे हो मेरा, ी लव यू.” चावला साहब उसस्के गालों पर किश करते हुए कहा, “ी लव यू तू स्वीटहार्ट, मेरी जान बन गयी हो तुम अब!” तो संजना ने कहा, “मगर शादी तो आप के बेटे से करुँगी नाह?” तो चावला साहब बोले, “तो किआ हुआ मेरे ेंखों के सामने रहोगी ज़िन्दगी भर, जब भी मौका मिले मेरे बाहों में रहोगी, और जब मैं करे प्यार करेंगे जी भर के.”

तो संजना ने एक गहरी सांस लेते हुए वहीँ उसस्के काँधे पर अपनी थोड़ी रखे हुए कहा, “हम्म्म सान्वी भाबी होगी घर में बहोत प्रॉब्लम होगी हमें मिलने को!” चावला साहब ने कहा, “कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी तुम देख लेना सब कूल गुज़रेंगे. मैं सब कुछ संभाल लूंगा और सान्वी कुछ भी नहीं कहेगी तुम देखना.” तो संजना अब उसस्के सामने बैठ कर उनको देखते हुए धीमी आवाज़ में पूछा, “वो कैसे? वो कितना हम दोनों को देख रही थी मांगनी में, उस्सने खुद आप से पूछा था मैं ने फ़ोन पर सुना जब वो आप के कमरे में आयी थी, तो कैसे कुछ नहीं कहेगी? मैं तो कहती हूँ वो हमारे रास्ते का कांटा बनेगी!”

चावला साहब ने संजना को ज़ोर से जकरते हुए और उसस्के गालों को फिर चूमते हुए कहा, “ऐसा कुछ भी नहीं है तुम ग़लत सोच रही हो, बुसस घर में ाजाओ फिर देखना हमको कितना मौका मिलेगा एक साथ रहने की.” और संजना ने बचपने वाले आवाज़ में कहा, “मुझे और प्यार करो नाह, बहोत प्यार करो” तो चावला साहब ने मुस्कुराते हुए उस्सको अपने छाती से ज़ोर से सत्ता के उसस्के गालों को, माथे को, होंठों को, गर्दन को चुम्मते हुए कहा, “आरी मेरी प्यारी संजना तुमको छोटा सा बना के अपने दिल के अंदर बांध कर लेने को दिल करता है!” तो संजना ने उसी बचपने आवाज़ में कहा, “हाँ करलो बांध अपने दिल के अंदर मुझको!”

और दोनों एक दूसरे के बाहों में बाहें डाले बिस्तर पर लेट गए और चावला साहब का हाथ उस्सकी नरम बूब्स पर डाब गए और उसी पोजीशन में दोनं लेते रहे और उनके ेंख लग गए!.............

अचानक चावला साहब चहूंकते हुए ेंख खोला तो देखा के सुबह के 4.15 बज चुके थे. वो धडपडाते हुए उठे, संजना को जगाया और कहा के उस्सको निकलना है क्यों के उसस्के पापा जागने वाला है….. संजना भी बहोत घबरा गयी वो गहरी नींद में थी बिल्कुल बेफिक्र आराम से चावला साहब के बाहों में सो रही थी जैसे एक शादी शुदा नयी नवेली दुल्हन. संजना के दिल के ढंकने तेज़ हो गयी यह सोचते के उस्का बाप उठ गया होगा क्यूंकि एहि उसस्के उठने का टाइम था…. उस्सने धीरे से अपने कमरे को खोला और बाहर झांकी, फिर मुड़कर चावला साहब से कहा, “वो जाग गए हैं, उस्का कर्मा खुला हुआ है वो मेरे कमरे में ज़रूर आते हैं सुबह को जागने के बाद, कहीं वो आये तो नहीं थे जब हम नींद में थे?” बहोत घबराई हुई थी संजना और उस्सको सुनकर चावला साहब भी हैरत में पद गए और एक दूसरे को वो दोनों देखते रहे कुछ देर तक. तो चावला साहब ने कहा, “मेरे ख्याल से नहीं आये होंगे वो नहीं तो तुरंत चिल्लाता हम दोनों पर…. मुझे अब निकलना चाहिए कैसे भी करके” और उन्हों ने अपने मोबाइल देखा जिस्सको उस्सने साइलेंट मोड पर कर दिया था, उस में 30 मिस्कॉस थे सान्वी के तरफ से और कई मेस्सगेस. वो भी घबरा सा गया और बाहर निकलने लगा.

संजना दर्री हुई थी और उनको होन्शिआरी से निनाकलने को कहा. वो उनके पीछे पीछे चल रही थी दरवाज़े को वापस बंद करने के लिए. फिर जब चावला साहब आनंद के कमरे के पास पहुंचे तो अंदर झाँका तो कोई भी नहीं था, फिर देखा के लाउन्ज और किचन, टॉयलेट सब के लाइट्स ों थे. और संजना से फुस्फुसाते हुए कहा, “वो टॉयलेट गए होंगे!” और संजना धीरे धीरे अपने पाऊँ के टिप पर चलते हुए नंगी पाऊँ दरवाज़े तक गए और खोला तो चावला साहब निकलने hi वाले थे के जब सुना के उस्का पापा उलटी कर रहा था ज़ोरों से खनस्सति हुए….. उस्सकी आवाज़ पीछे के बगीचे से आरहे थे. तब दोनों के जान में जान आयी और हंससने लगे दोनों….. फिर संजना ने अपने बाहों का हार डाला चावला साहब के गले में उस्सको bye bye किश किये और चावला साहब चले गए कार को स्टार्ट करते हुए संजना से ये वादा करके, के वो दिन में आएगा गयेनकोलॉजिकल क्रीम लेकर.

संजना दावती हुई गयी अपने पापा के पास पीछे के बगीचे में, उसस्के सर दबाया जब वो उलटी कर रहे थे और पानी दिया उस्सको वाश करने के लिए. तो आनंद ने पूछा, “मैं ने एक कार को जैसे जाते हुए सुना, कोई कार गुज़रा रास्ते पर तुम्हारे यहाँ आने से पहले किआ?”

संजना ने दन्त में अपने होंठ दबाते हुए और एक हलकी मुस्कान में कहा, “पता नहीं मैं ने नहीं ख्याल किया!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………………. (1564 वर्ड्स)
 
शुक्रिया सिराज भाई... अरे यह लिखे वाला अवार्ड तो अत जाता रहेगा, कब किश के हाथ अजय पता नहीं.... आनंद भाई दोस्त hi है कभी उसस्के पास तो कभी मेरे पास चलता है भाई :डी

रही बात सबसे ज्यादा पोस्ट्स की तो नहीं वो मैं नहीं कर पाउँगा क्यूंकि मेरे यहाँ उतने रीडर्स नहीं हैं... यहाँ आनंद भाई के बजट hi ज़्यादा रीडर्स हैं, अगर मैं ष्प पर होता तब बात और होती... वहां मेरे हज़ारों फोल्लोवेर्स, रीडर्स थे.. सब खो गए अब पता नहीं कौन किधर हैं यहाँ तो केवल 5 /6 रीडर्स hi मेरे कहानी पढ़ते और कमेंट करते हैं, नए में से एक जीतू भाई है और कोई S.khan है , रोदय, अस्बा और राहुल बुसस इतने hi रीडर्स हैं मेरे यहाँ पवार, अगर मेरे रीडर उतने होते जितने लोग आनंद भाई की कहानियों पर रिलीज करते हैं तब बिल्कुल मैं आगे जा सकता था पोस्टिंग्स में मगर इस से भी कोई फरक नहीं पढता

मेरा मतलब यहाँ कहानी लिखे और रीडर्स को खुश करने से हैं...... बाकी के जो हाथ अत है तो ख़ुशी से स्वीकार है :डी

थैंक्स सिराज भाई
 
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