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अपडेट 79 संजना व्हिले ड्राइविंग
ठीक बारह बजे सान्वी के साथ रहने के बाद चावला साहब घर से निकले संजना के यहाँ जाने के लिए. अब ड्राइविंग तो 2 घंटे तक करना था वहां जाने के लिए, तो 2 बजे वहां रीच होंगे और 1 बजे तो संजना को डेरीविंग के लिए जाना था – तो हुआ यह के चावला साहब ने सान्वी के सामने संजना को फ़ोन करके कह दिया के वो लेट आएंगे तो वो बस से ड्राइविंग के लिए चली जाए और वो उस्सको वहां लेने आएगा ड्राइविंग की लेसन ख़तम होने के बाद.
जिस वक़्त सनजना को वो कॉल आया था, कॉल एन्ड करने के बाद उधर संजना बहोत उदास हो गयी थी क्यूंकि उस्सने तो सोच लिया था के चावला साहब सुबह 9 बजे तक उस के यहाँ आएगा और 9 से 12.30 तक वो उनके साथ अच्छा वक़्त बिताएगी प्यार में. मगर उस्का सपना टूटता नज़र आया उससे. वो चली गयी उस छोटी शेर में अपनी ड्राइविंग स्कूल को 12.30 बजे hi. अपने ड्राइविंग टुटर से काफी दोस्ती हो गयी थी इन् 4 दिनों में. अब वहां भी कुछ हुआ जो चावला साहब को पता नहीं है.
जिस दिन चावला साहब पी कर लुढ़क गए थे उस शहर में, याद है संजना कितनी छोटी स्कर्ट में थी नाह, तो ड्राइविंग सीखाते वक़्त उस टुटर का हाथ कई बार संजना के टांगों को छुआ था और उस आदमी को संजना की अदायें और फ्रेंडलीनेस बहोत hi पसंद आया था. संजना जितनी जल्दी किसी से दोस्ती कर लेती थी और जितनी जल्दी घुल मिल जाती थी किसी से भी, उसी तरह उस आदमी से भी घुल मिल गयी बुसस एक घाटे के ड्राइविंग सीखने के वक़्त.
दूसरे दिन वो आदमी खुद संजना का वेट करने लगा था. और उस दूसरे दिन को बी संजना शार्ट ड्रेस में थी, तो वही हुआ था गियर चेंज करते वक़्त जब संजना से ठीक से नहीं हो पा रहा था तो टुटर को गियर लगाते वक़्त हर बार उस्का हाथ संजना के जांघ को छूटा था. आदमी अब जान बुझ कर बार बार अपने हाथ को उस्सकी जाँघों पर लगता था और संजना कुछ नहीं कहती तो आदमी ने सोचा यह पत्नी वाली लड़कियों में से है, तो वो बार बार किसी न किसी वजह से संजना को छूटा था और संजना बुसस मुस्कुराती रहती थी. संजना को तो सब पता था के मर्द उस्सको क्यों वैसे छूटे हैं फिर भी वो कुछ नहीं कहती थी तो आदमी को बढ़ावा मि रहा था…..
तीसरे दिन को जब संजना गयी थी अकेली hi, चावला साहब उसस्के साथ नहीं आये थे तो, उस रोज़ 1 घाटे के बजाए टुटर संजना के साथ 2 घंटों तक रहे थे. 1 घंटे के ड्राइविंग ट्यूशन के बाद तुरोर ने संजना से पूछा था, “तुम अभी घर जाकर किआ करोगी?” संजना अपनी चुलबुली अदाओं में मुस्कुराते हुए जवाब दिया था, “कुछ ख़ास नहीं फ्री हूँ मैं तो!”
टुटर का नाम था, नागेश. वो 40 साल के ऊपर का था और संजना के अदाओं और जिस्म का दीवाना होता गया, संजना के साथ उस एक घंटा के दौरान उस्सको लगता के एक जनम बिता रहे थे संजना के साथ…. अब अगले दिन का वो बेकरारी से संजना का इंतज़ार करता. संजना जिस तरह से ड्रेस होती थी, जो खुशभू लगाती थी, जिस तरह से बात करती थी, जैसे हस्ती थी, वो सब नागेश को पूरी तरह से पागल करने लगे थे. संजना बुसस उसस्के दिल में उतर गयी थी और संजना को पता था के वो उस से बहोत इंटरेस्टेड हो रहे थे मगर कुछ नहीं कहती थी जैसे वो उस्सको बढ़ावा डेट जा रही थी शुरू से hi. ऐसा क्यों था? किआ संजना उस वक़्त को याद और फील करती थी जिस दिन पहली बार वो चावला साहब के साथ ड्राइविंग सीख रही थी? किआ उस वक़्त को संजना सोचती थी जब कार को किसी एक कोने में पार्क किया था चावला साहब ने और संजना को चूमने चाटने लगे थे कार के अंदर? किआ उस मंज़र को संजना सोचती थी जब चावला साहब ने संजना को ड्राइविंग सीट पर hi अपने गॉड में बिठा के ड्राइविंग सिखाया था? किश इसी लिए संजना उस आदमी को कुछ ज़्यादा बढ़ावा देती थी? किआ संजना चाहती थी के नागेश भी उसस्के साथ वैसा करे? किआ संजना के लिए कार में किसी एक मर्द के साथ होना एक इरोटिक मोमेंट बन गया था?
तो पूछने पर जब संजना ने नागेश को कहा के वो फ्री है तो नागेश ने पहला सवाल यह किया, “वो आदमी जिस्सके साथ तुम मेरे स्कूल को आयी थी पहली बार, जिस ने तुम्हारे सभी फीस एक साथ भर दिए थे किआ वो तुम्हारा पति है?” संजना ने जवाब दिया के “हाँ वो मेरे पति है क्यों?” तो मैं में आदमी ने सोचा “मतलब लड़की नहीं है यह और सेक्स के बारे में इस्को सब पता है और कोई खतरा नहीं है…. कुमारी लड़कियों के साथ बहोत मैक ह मच होती है शादी शुदा लड़कियों के साथ आसानी से काम बन जाता है…” तो नागेश ने संजना को जवाब दिया, “तो अगर फ्री हो तो एक घंटा और साथ रहे? किआ कहती हो?” संजना उसस्के इरादे भांप गयी थी औरर मुस्कुराते हुए कहा, “और एक घंटा ड्राइव करेंगे?”
तो नागसेह ने कहा, “नहीं ड्राइव नहीं सीखाऊंगा, ड्राइव करूँगा, एक लॉन्ग ड्राइव पर चलें एक घंटा के लिए? उसी दिन को चावला साहब ने पी रखे थे पार्क में कार चोररकार. उस रोज़ संजना दो घंटों के बाद आयी थी वापस शहर में. क्यूंकि चावला साहब नाशी में थे उनको कुछ भी पता नहीं चला था….
तो उस रोज़ नागेश संजना को बहोत दूर ड्राइव करते हुए लगाए थे जहाँ किसी जिव जंतु का कोई ठिकाना नहीं था, उस जगह से संजना को डर भी लगा था. कुछ खतरनाक था वो जगह, घाना जंगल था और कुछ अँधेरा लग रहा था उस तरफ जैसे शाम हो गयी हो…. और वहां एक जगह कार पार्क करके नागेश ने संजना को किश करना चाहा था और डायरेक्ट सेक्स के लिए प्रोपोज़ किया था. संजना को कभी किसी ने आज तक उस तरीके से डायरेक्ट प्रोपोज़ नहीं किया था सीधे सेक्स करने के लिए. वो पहली बार था…. और उस वक़्त संजना के समझ में नहीं आया के किआ कहें , चुप थी कुछ देर मगर उस्सको बहोत अच्छाह लगा था के ये आदमी बहोत फ्रैंक है और सीधा बात किया था… वैसे पहले से संजना समझ गयी थी के नागेश उसस्के अदाओं और जिस्म का दीवाना हो चूका है मगर वो सोचती थी चावला साहब के तरह वो उस्सको छुएगा, हाथ फ्रेगा उसस्के जाँघों पर, किश करेगा गर्दन पर फिर किश करेगा और उसस्के कपडे को सरकाएगा फिर उतारने की कोशिश karega…Sanjana यह सब सोच रही थी, मगर बिल्कुल नहीं सोचा था के उस तरह से सीधे मुंह सेक्स करने के लिए पूछेगा….
फिर भी संजना ने उस्सको थोड़ा सताने के लिए उस से पूछा था, “आप को डर नहीं के मैं अपने पति को बोल दूंगी के आप ने मुझको प्रोपोज़ किया?” नागेश ने जवाब में कहा था, “अरे मेमसाब, कुंवारी लड़ककयों को प्रोपोज़ करना खतरनाक होता है क्यूंकि उन् सब तो पता भी नहीं के सेक्स करने से कितना मजा मिलता है, आप तो शादी शुदा हो तो आप को तो उस मजे का पता है इस लिए मेरे ख्याल से एक शादी शुदा औरत से सेक्स करने में कोई खतरा नहीं और बहोत मजा आएगा” संजना बहोत हंसी थी उसस्के बात को सुनकर और कहा था, “और अगर मैं शादी शुदा नहीं हूँ तुमसे झूट कहा तो?” तो नागेश ने कहा, “नहीं ऐसा तो नहीं ह सकता क्यूंकि मैं ने आप को उस आदमी को किश करते देखा था उसस्के कार में मतलब वो आपका पति अगर नहीं तो पति के इलावा कोई अफेयर तो है आप की तो फिर मेरा लाइन क्लियर है मतलब क्यों?”
तो बे कॉन्टिनोएड…………….
ठीक बारह बजे सान्वी के साथ रहने के बाद चावला साहब घर से निकले संजना के यहाँ जाने के लिए. अब ड्राइविंग तो 2 घंटे तक करना था वहां जाने के लिए, तो 2 बजे वहां रीच होंगे और 1 बजे तो संजना को डेरीविंग के लिए जाना था – तो हुआ यह के चावला साहब ने सान्वी के सामने संजना को फ़ोन करके कह दिया के वो लेट आएंगे तो वो बस से ड्राइविंग के लिए चली जाए और वो उस्सको वहां लेने आएगा ड्राइविंग की लेसन ख़तम होने के बाद.
जिस वक़्त सनजना को वो कॉल आया था, कॉल एन्ड करने के बाद उधर संजना बहोत उदास हो गयी थी क्यूंकि उस्सने तो सोच लिया था के चावला साहब सुबह 9 बजे तक उस के यहाँ आएगा और 9 से 12.30 तक वो उनके साथ अच्छा वक़्त बिताएगी प्यार में. मगर उस्का सपना टूटता नज़र आया उससे. वो चली गयी उस छोटी शेर में अपनी ड्राइविंग स्कूल को 12.30 बजे hi. अपने ड्राइविंग टुटर से काफी दोस्ती हो गयी थी इन् 4 दिनों में. अब वहां भी कुछ हुआ जो चावला साहब को पता नहीं है.
जिस दिन चावला साहब पी कर लुढ़क गए थे उस शहर में, याद है संजना कितनी छोटी स्कर्ट में थी नाह, तो ड्राइविंग सीखाते वक़्त उस टुटर का हाथ कई बार संजना के टांगों को छुआ था और उस आदमी को संजना की अदायें और फ्रेंडलीनेस बहोत hi पसंद आया था. संजना जितनी जल्दी किसी से दोस्ती कर लेती थी और जितनी जल्दी घुल मिल जाती थी किसी से भी, उसी तरह उस आदमी से भी घुल मिल गयी बुसस एक घाटे के ड्राइविंग सीखने के वक़्त.
दूसरे दिन वो आदमी खुद संजना का वेट करने लगा था. और उस दूसरे दिन को बी संजना शार्ट ड्रेस में थी, तो वही हुआ था गियर चेंज करते वक़्त जब संजना से ठीक से नहीं हो पा रहा था तो टुटर को गियर लगाते वक़्त हर बार उस्का हाथ संजना के जांघ को छूटा था. आदमी अब जान बुझ कर बार बार अपने हाथ को उस्सकी जाँघों पर लगता था और संजना कुछ नहीं कहती तो आदमी ने सोचा यह पत्नी वाली लड़कियों में से है, तो वो बार बार किसी न किसी वजह से संजना को छूटा था और संजना बुसस मुस्कुराती रहती थी. संजना को तो सब पता था के मर्द उस्सको क्यों वैसे छूटे हैं फिर भी वो कुछ नहीं कहती थी तो आदमी को बढ़ावा मि रहा था…..
तीसरे दिन को जब संजना गयी थी अकेली hi, चावला साहब उसस्के साथ नहीं आये थे तो, उस रोज़ 1 घाटे के बजाए टुटर संजना के साथ 2 घंटों तक रहे थे. 1 घंटे के ड्राइविंग ट्यूशन के बाद तुरोर ने संजना से पूछा था, “तुम अभी घर जाकर किआ करोगी?” संजना अपनी चुलबुली अदाओं में मुस्कुराते हुए जवाब दिया था, “कुछ ख़ास नहीं फ्री हूँ मैं तो!”
टुटर का नाम था, नागेश. वो 40 साल के ऊपर का था और संजना के अदाओं और जिस्म का दीवाना होता गया, संजना के साथ उस एक घंटा के दौरान उस्सको लगता के एक जनम बिता रहे थे संजना के साथ…. अब अगले दिन का वो बेकरारी से संजना का इंतज़ार करता. संजना जिस तरह से ड्रेस होती थी, जो खुशभू लगाती थी, जिस तरह से बात करती थी, जैसे हस्ती थी, वो सब नागेश को पूरी तरह से पागल करने लगे थे. संजना बुसस उसस्के दिल में उतर गयी थी और संजना को पता था के वो उस से बहोत इंटरेस्टेड हो रहे थे मगर कुछ नहीं कहती थी जैसे वो उस्सको बढ़ावा डेट जा रही थी शुरू से hi. ऐसा क्यों था? किआ संजना उस वक़्त को याद और फील करती थी जिस दिन पहली बार वो चावला साहब के साथ ड्राइविंग सीख रही थी? किआ उस वक़्त को संजना सोचती थी जब कार को किसी एक कोने में पार्क किया था चावला साहब ने और संजना को चूमने चाटने लगे थे कार के अंदर? किआ उस मंज़र को संजना सोचती थी जब चावला साहब ने संजना को ड्राइविंग सीट पर hi अपने गॉड में बिठा के ड्राइविंग सिखाया था? किश इसी लिए संजना उस आदमी को कुछ ज़्यादा बढ़ावा देती थी? किआ संजना चाहती थी के नागेश भी उसस्के साथ वैसा करे? किआ संजना के लिए कार में किसी एक मर्द के साथ होना एक इरोटिक मोमेंट बन गया था?
तो पूछने पर जब संजना ने नागेश को कहा के वो फ्री है तो नागेश ने पहला सवाल यह किया, “वो आदमी जिस्सके साथ तुम मेरे स्कूल को आयी थी पहली बार, जिस ने तुम्हारे सभी फीस एक साथ भर दिए थे किआ वो तुम्हारा पति है?” संजना ने जवाब दिया के “हाँ वो मेरे पति है क्यों?” तो मैं में आदमी ने सोचा “मतलब लड़की नहीं है यह और सेक्स के बारे में इस्को सब पता है और कोई खतरा नहीं है…. कुमारी लड़कियों के साथ बहोत मैक ह मच होती है शादी शुदा लड़कियों के साथ आसानी से काम बन जाता है…” तो नागेश ने संजना को जवाब दिया, “तो अगर फ्री हो तो एक घंटा और साथ रहे? किआ कहती हो?” संजना उसस्के इरादे भांप गयी थी औरर मुस्कुराते हुए कहा, “और एक घंटा ड्राइव करेंगे?”
तो नागसेह ने कहा, “नहीं ड्राइव नहीं सीखाऊंगा, ड्राइव करूँगा, एक लॉन्ग ड्राइव पर चलें एक घंटा के लिए? उसी दिन को चावला साहब ने पी रखे थे पार्क में कार चोररकार. उस रोज़ संजना दो घंटों के बाद आयी थी वापस शहर में. क्यूंकि चावला साहब नाशी में थे उनको कुछ भी पता नहीं चला था….
तो उस रोज़ नागेश संजना को बहोत दूर ड्राइव करते हुए लगाए थे जहाँ किसी जिव जंतु का कोई ठिकाना नहीं था, उस जगह से संजना को डर भी लगा था. कुछ खतरनाक था वो जगह, घाना जंगल था और कुछ अँधेरा लग रहा था उस तरफ जैसे शाम हो गयी हो…. और वहां एक जगह कार पार्क करके नागेश ने संजना को किश करना चाहा था और डायरेक्ट सेक्स के लिए प्रोपोज़ किया था. संजना को कभी किसी ने आज तक उस तरीके से डायरेक्ट प्रोपोज़ नहीं किया था सीधे सेक्स करने के लिए. वो पहली बार था…. और उस वक़्त संजना के समझ में नहीं आया के किआ कहें , चुप थी कुछ देर मगर उस्सको बहोत अच्छाह लगा था के ये आदमी बहोत फ्रैंक है और सीधा बात किया था… वैसे पहले से संजना समझ गयी थी के नागेश उसस्के अदाओं और जिस्म का दीवाना हो चूका है मगर वो सोचती थी चावला साहब के तरह वो उस्सको छुएगा, हाथ फ्रेगा उसस्के जाँघों पर, किश करेगा गर्दन पर फिर किश करेगा और उसस्के कपडे को सरकाएगा फिर उतारने की कोशिश karega…Sanjana यह सब सोच रही थी, मगर बिल्कुल नहीं सोचा था के उस तरह से सीधे मुंह सेक्स करने के लिए पूछेगा….
फिर भी संजना ने उस्सको थोड़ा सताने के लिए उस से पूछा था, “आप को डर नहीं के मैं अपने पति को बोल दूंगी के आप ने मुझको प्रोपोज़ किया?” नागेश ने जवाब में कहा था, “अरे मेमसाब, कुंवारी लड़ककयों को प्रोपोज़ करना खतरनाक होता है क्यूंकि उन् सब तो पता भी नहीं के सेक्स करने से कितना मजा मिलता है, आप तो शादी शुदा हो तो आप को तो उस मजे का पता है इस लिए मेरे ख्याल से एक शादी शुदा औरत से सेक्स करने में कोई खतरा नहीं और बहोत मजा आएगा” संजना बहोत हंसी थी उसस्के बात को सुनकर और कहा था, “और अगर मैं शादी शुदा नहीं हूँ तुमसे झूट कहा तो?” तो नागेश ने कहा, “नहीं ऐसा तो नहीं ह सकता क्यूंकि मैं ने आप को उस आदमी को किश करते देखा था उसस्के कार में मतलब वो आपका पति अगर नहीं तो पति के इलावा कोई अफेयर तो है आप की तो फिर मेरा लाइन क्लियर है मतलब क्यों?”
तो बे कॉन्टिनोएड…………….