Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 8 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

हहहहए यू थॉट ऑफ़ थे मोबाइल. ी वांटेड तो सी हु अमंग थे रीडर्स विल थिंक तहत तेरे अरे सेक्सुअल क्लिप्स ऑफ़ थम इन थे मोबाइल एंड आईटी इस लॉस्ट... यू अरे थे फर्स्ट तो मेंशन तहत... यू अरे ान अटेंटिव रीडर रोदय बीआरओ

वेल no डाउट इन थे नेक्स्ट अपडेट आईटी विल बे थे कंसर्न, थे मोबाइल..... सो प्लीज बे पेशेंट एंड वेट फॉर थे नेक्स्ट अपडेट तो क्नोव व्हाट हप्पेनेड थें :डी
 
अपडेट 63 इन सर्च ऑफ़ मोबाइल

संजना ने चावला साहब को सोते हुए में बहोत प्यार किया. यहाँ तक के अपने कमरे को अंदर से लॉक कर दिया और चावला साहब के नरम लिंग को चूसा, उस्सको खड़ा करने को तरय किया मगर नाकामयाब रही. उनके के जिस्म पर और कई जगहों पर लोवेबिट्स किये संजना ने, और उनके सीने पर सर रख कर उस्सकी भी ेंख लग गयी.

शाम 6 बजे चावला साहब जागे मगर फिर भी उनके जुबां लड़खड़ा रहे थे और सीधे खड़े नहीं हो पा रहे थे. संजना ने निम्बू पानी दिया मगर फिर पीने से रोका ये कहकर के उनके बप लौ हुए थे इस लिए, तो हॉट कॉफ़ी दिया पिने को और बिस्किट्स वग़ैरा दिया, सर दर्द की गोली दिए. चावला साहब जैसे एक सपनों की दुन्या में फील कर रहे थे खुदको.

शाम हो चूका था और अचानक अपना मोबाइल ढूंढा तो संजना ने कहा के वो चोरी हो गयी और उनके जेब से पैसे भी चुराए किसी ने जब वो बेहाल रास्ते पर पड़े हुए थे. संजना ने उनको सब बात बतायी के कैसे वो उनको दूध कर परेशान हो गयी फिर अपने पापा के साथ उनकी तलाश किये और टैक्सी ड्राइवर के द्वारा घर वापस आये.

चावला साहब ने धीरे से संजना से कहा, “मोबाइल में हमारा वीडियो क्लिप है!!” संजना के चेहरे से रंग ुध गए और बहोत परेशान हुई और पूछा के अब किआ होगा!

मगर चावला साहब ने कहा के फ़िक्र करने की कोई बात नहीं क्यूंकि उसस्के सभी वीडियोस और पिक्स भी पासवर्ड प्रोटेक्टेड हैं और फिर मोबाइल को अनलॉक करने के लिए उस्सकी फिंगर प्रिंट चाहिए वार्ना कोई उस्सको ओपन नहीं कर सकते.

तब संजना की जान में जान आयी, मगर फिर भी चावला साहब ने कहा मगर अगर एक हैकर की हाथ लग गयी तो वो सब क्रैक कर सकता है और वीडियोस भी निकल सकता है इस लिए तुरंत मोबाइल को ढूंढ़ना होगा.

शाम हो गयी थी, सूरज ढल गए थे अँधेरा होने hi वाला था तो संजना ने पूछा, “इस वक़्त अँधेरे में कहाँ ढूंढ़ने जाएंगे मोबाइल को? चावला साहब ने कहा जिस दूकान पर वो पीने को गए थे वहीँ से तलाश करना पड़ेगा वार्ना पुलिस स्टेशन में कह कर ढुँढ़वाना पड़ेगा.

तो आनंद भी साथ निकला चावला साहब की कार में सब उस शहर में वापस गए. चावला साहब ड्राइव तो कर रहे थे मगर अब भी नशे में फील कर रहे थे. वो उस दूकान में पहुंचे और उस आदमी से बात किया जिस्सको रस,2000 दिए थे दो बार के कहीं उस्का मोबाइल तो नहीं गिरा था उधर. मगर उस आदमी ने कहा नहीं बिल्कुल भी नहीं. चावला साहब ने कहा, “देखो यह सोफिस्टिकेटेड मोबाइल है मैं एक कंप्यूटर से उस्का लोकेशन देख सकता हूँ के इस वक़्त वो मोबाइल कहाँ पर है और अगर उस्का लोकेशन यहाँ दिखाई दिया तो पुलिस केस होगा, अगर लिया हो तो वापस करो इसी वक़्त!”

उस आदमी ने कहा, “कमाल है साहब, आप का स्वागत किया, आप को अंदर बैठने को जगह दिया, आप के लिए व्हिस्की लाया जो यहाँ मिलता hi नहीं, मैं ने आप के लिए इतना कुछ किया अब आप मुझ पर छोर्री का इलज़ाम लगा रहे हो? किआ भाई इसीलिए आज कल कोई किसी का मदद hi नहीं करता!”

तो चावला साहब ने उस्सको सॉरी कहा और आनंद से कहा के अब पुलिस स्टेशन hi चलना पड़ेगा. संजना से पूछा के यहाँ पुलिस स्टेशन किधर है. तो संजना ने ड्राइव करने को कहा और आगे बताती गयी जब तक पुलिस स्टेशन पहुंचे.

वहां अंदर जाते hi वहां की इंस्पेक्टर ने चावला साहब को आते देख कर खड़ा हो गए और कहा, “अरे चावला साहब आज आप हमारे छोटे से शहर में कैसे?” चावला साहब ने उस इंस्पेक्टर को देख कर उस्सको गले से लगाया और कहा, “अरे संदीप, तू कब से इधर है? तेरा ट्रांसफर कब हुआ?” संदीप ने कहा, “एक साल हो गया साहब, केहये आप की किआ खिदमत कर सकता हूँ मैं?”

चावला साहब ने उस्सको सब कुछ बता दिया तो इंस्पेक्टर ने चावला साहब से कहा, “अगर मोबाइल स्विच ऑफ है तो लोकेशन का पता नहीं चलेगा. चावला साहब ने कहा के उस्सकी मोबाइल नॉर्टन थेफ़्ट प्रोटेक्शन पर इनेबल्ड है चाहे वो स्विच ऑफ हो या समुन्दर में पानी के अंदर हो फिर भी वो दिखाएगा एक्सएक्ट लोकेशन, और उस्सको रिंग करवा सकते है एक कंप्यूटर से और पूछा के एक कंप्यूटर है के नहीं स्टेशन में. तो इंस्पेक्टर ने अपना लैपटॉप पेश किया. चावला साहब ने पूछा इंटरनेट है के नहीं, तो कनेक्शन था इंटरनेट की – और चावला साहब बैठ गए लैपटॉप पर नॉर्टन वेबसाइट पर लॉगिन करने को… मगर अपना पासवर्ड याद नहीं था, पासवर्ड तो मोबाइल में सेव था, अब फॉरगॉट पासवर्ड टाइप करता तो ईमेल अत फिर नई लॉगिन करना पड़ता पासवर्ड चेंज करना पड़ता इस लिए सोचा के घर फ़ोन करके अपने रेड डायरी से उस्का पासवर्ड ले लिया जाये!! मगर वो सान्वी से बात नहीं करना चाहता था, तो किया यह के विवान को फ़ोन किया संजना के मोबाइल से और विवान से कहा के सान्वी को फ़ोन करके उसस्के लाल डायरी से उंनका नॉर्टन की लॉगिन का पासवर्ड मांगे और संजना के मोबाइल उस्सको पासवर्ड संस करें.

जब विवान ने सान्वी को फ़ोन करके पासवर्ड माँगा तो सान्वी हैरान हुई और उस से कहा, “पिता जी कहाँ हैं उस्का मोबाइल कब से फ़ोन कर रही हूँ स्विच ऑफ ारः है कहाँ से फ़ोन किया उन्हों ने आप को और मुझको क्यों नहीं फ़ोन किया?” विवान बिजी था तो उस्सको इन् सब बातों में नहीं पड़ना था तो कहा के जल्दी से पासवर्ड लेकर उस्सको दें उसस्के पास वक़्त कम है……. सान्वी ने चावला साहब के कमरे से उस्सकी लाल डायरी से नॉर्टन लॉगिन का पासवर्ड विवान को संस किया जो विवान ने संजना के मोबाइल पर संस किया. और संजना ने चावला साहब को दिखाया तब जाके चावला साहब ने लॉगिन किया नॉर्टन वेबसाइट पर.

इंस्पेक्टर देख रहे थे, क्यूंकि खुद उस्सको भी नहीं पता था इन् सब के बारे में. चावला साहब के सभी पक, लैपटॉप, सान्वी की मोबाइल, विवान का मोबाइल और लैपटॉप, सब नॉर्टन वेबसाइट पर दिख रहे थे क्यूंकि सब प्रोटेक्टेड थे एंटी वायरस, मालवारे और एंटी थेफ़्ट से.. संजना सब देख रही वो भी. आनंद देख रहा था मगर कुछ भी नहीं समझ रहा था, संजना फॉलो कर रही थी और समझ गयी के अब किआ होगा….. चावला साहब ने अपने मोबाइल वाले आइकॉन पर क्लिक किया, उस्का मोबाइल नंबर और मोबाइल का मेक गैलेक्सी स8+ एज और कोड दिख रहे थे. तो चावला साहब ने लोकेशन ऑप्शन पर क्लिक किया तो मोबाइल उसी शहर में कोई 100 मीटर की दूरी पर शो हो रहा था और एक ग्रीन लाइट उस पर ब्लिंक हो रहा था….. तो चवा साहब ने इंस्पेक्टर से पूछा, “यह जगह कहाँ है?”

इंस्पेक्टर ने कहा “अरे यह तो यहीं है कोई 100 मीटर यहाँ से उस दूकान के पास एक बार है यह उस बार की लोकेशन है, मतलब मोबाइल उस बार के अंदर है इस वक़्त!” चावला साहब ने कहा के लैपटॉप को साथ लेकर जाना पड़ेगा, क्यूंकि इस लिंक से मोबाइल को रिंग किया जा सकता है, उस्सको शॉट किया जा सकता है चाहे वो ऑफ hi क्यों नाह हो!!

इंस्पेक्टर ने कहा चलो सब चलते हैं और तीन पुलिस ऑफिसर्स को अपने साथ लिया और सब उस बार में गए.

बार में पहुंचे तो चावला साहब इंस्पेक्टर के साथ गए लैपटॉप हाथ में लिए और बार ओनर से इंस्पेक्टर ने कहा के कोई भी नहीं निकलेगा जब तक वो नाह कहे और वहां की इंटरनेट कनेक्शन मांगे जो विफई से मिली तो चावला साहब ने लिंक को अपडेट किया और वापस वहीँ अपने मोबाइल पर कर्सर को किया …. संजना पास कड़ी देख रही थी के वो कैसे मोबाइल को शॉट करवाएगा….. सब लोग जो उस बार में मौजूद थे नहीं समझ रहे थे के किआ हो रहा है…. तो चावला साहब ने उस ऑप्शन पर क्लिक किया जहाँ उसस्के मोबाइल के साइड में लिखा था “मेक योर मोबाइल शॉट”

इंस्पेक्टर और बाकी के लोग चारों तरफ बार में देख रहे थे के किधर से मोबाइल की शॉट की आवाज़ आएगी, और जैसे hi चावला साहब ने शॉट पर क्लिक किया तो एक अजीब सी रिंगिंग, पियर्सिंग टोन सुनाई देने लगे एक आदमी के जेब से…. उस्सने जल्दी से अपने पंत के जेब में हाथ डालके मोबाइल निकला और ज़ोर से कहा, “अरे यह मोबाइल स्विच ऑफ है फिर भी बज रहा है यह किआ जादू है?!”

इंस्पेक्टर ने उसस्के हाथ से मोबाइल लेकर कहा, “यह जादू है mistar,”aur चावला साहब को मोबाइल दिया और कहा, “एहि है साहब?” चावला साहब ने कहा, “अगर यह मेरा नहीं तो मेरे फिंगर प्रिंट से ों नहीं होगा अनलॉक नहीं होगा okay? और अगर मेरे फिंगर प्रिंट से अनलॉक हो गया तो मेरा हुआ ऑलराइट? वहां के मौजूद सभी लोगों ने एक साथ जवाब दिए “यस वे एग्री!” वो आदमी जिस के जेब में मोबाइल था वो भागना चाहता था मगर इंपेक्टर संदीप ने उस्सको थाम लिया और रोके रखा… सब लोग देख रहे थे, संजना मुस्कुरा रही थी चावला साहब को अपने मोबाइल को अपने फिंगर प्रिंट से अनलॉक करते हुए; और मोबाइल अनलॉक हुआ और गैलेक्सी की रिंगिंग टोन बजी और चावला साहब का मोबाइल उनको वापस मिल गयी!! सब लोगों ने तालियां बजाये!

मगर इंस्पेक्टर का काम पूरा नहीं हुआ था, उस्सने उस आदमी को हिरासत में लिया मगर वो आदमी चिल्लाने लगा के उस्सको किसी और ने सिर्फ 500 में वो मोबाइल बेचा आज दिन में... चावला साहब ने उस आदमी से कहा, “500 में ख़रीदा आप ने इस्को? इस्सकी कीमत पता है आप को? “यह 55 हज़ार का है ओरिजिनल है” तब इंस्पेक्टर ने पूछा किआ वो उस आदमी को पहचानता है जिस ने उस्सको मोबाइल बेचा तो उस्सने कहा हाँ वो एक ड्रग एडिक्ट है हमेशा चुराता रहता है अपने ड्रग खरीदने के लिए…. तो इंस्पेक्टर उस्सको उसस्के पास लेचलने को कहा और वो वहां गए और उस्सको पकड़ा… उस्सने सब कबूल किया के चावला साहब नशे में धुत थे तो उस्सने मोबाइल और पैसे चुराए थे उनके… पैसे तो सब खर्च कर चुके थे और मोबाइल उस बार वाले आदमी से बेच दिया था 500 में…..

पुलिस दोनों को लॉक उप में डालने को लेजा रहे थे मगर चावला साहब ने कहा रहने दो माफ़ कर दिया दोनों को क्यूंकि उनको उंनका मोबाइल मिल गया था.

तो बे कॉन्टिनोएड………………
 
अपडेट 64 फाइंडिंग मोबाइल

घर लौटने से पहले चावला साहब ने संजना से पूछा किआ डिनर तैयार कर चुकी है घर पर? तो संजना ने कहा के नहीं कुछ भी नहीं किया है, तो चावला साहब एक ने पिज़्ज़ा ख़रीदे और बुरगेर्स भी और कहा के आज एहि डिनर में खाएंगे, कुछ स्लाड्स वग़ैरा सब कुछ ले लिया और घर वापस जाने लगे संजना के यहाँ.

रघु के शॉप के पास पहुंचे तो आनंद ने कहा, “साहब आप चलिए मैं ज़रा वो लेकर अत हूँ!!” तो चावला साहब ने पूछा, “घर चल कर पियोगे या यहाँ से पी कर आओगे?” आनंद ने कहा, “दोनों हेहेहे”

तो चावला साहब उस्सको वहीँ उतार कर संजना को घर चोर्ने चले गए….. घर आते hi संजना बहोत खुश दिख रही थी और चावला साहब को अपने बाहों में जाकर लिया और किश करने लगी….. वो बहोत hi खुश थी. तो संजना ने चावला साहब से कहा, “आप अब भी लड़खड़ा रहे हो इतनी दूर ड्राइव कैसे करोगे आज आप यहीं रुक जाईये नाह हमारे यहाँ, बस एक रात के liye…kal सुबह चले जाना.”

चावला साहब ने कहा, “किश ने कहा के मैं अभी ड्राइव करूँगा? आज मैं यहीं सोऊंगा वूहू!!!”

संजना ख़ुशी के मारे उछलने लगी और उस्सने भी चिल्ला कर कहा, “Youpieeeeeeeeee!!!!”

और दोनों एक दूसरे को बाँहों में भरे जैसे डांस करने लगे झूमते हुए….. और चावला साहब ने कहा अब मैं अपना दिया हुआ व्हिस्की खुद पियूँगा हहहहए!” संजना ने कहा, “बस थोड़ा सा क्यूंकि आप ने पता नहीं दिन में कितना पिए थे जो अभी तक ठीक से उतरा नहीं है….” चावला साहब ने कहा आरी पागल लड़की, जैसे लोहा लोहे को काटता है उसी तरह शराब शराब को मारता hai…meri दिन वाले नशे को यह व्हिस्की जो अब पियूँगा उस दिन के नशे को बिल्कुल मिटा देगा….”

दोनों बहोत खुश लग रहे थे और संजना ने पूछा, “आज सुबह आप मुझसे रूठे हुए क्यों थे? खफा खफा से लग रहे थे बताइये!” चावला साहब ने ज़ोर से संजना को बाहों में भर के कहा, “अरे मेरी प्यारी डार्लिंग, च्वीट च्वीट बेबी मैं तुमसे बिल्कुल भी खफा नहीं था मैं तो अपने आप से नाराज़ था वो, ेररर एक बिज़नेस पार्टनर से डिस्कशन हुई थी घर से निकलने से पहले इसी लिए मैं उस डिस्कशन को लेकर परेशान था बुसस और कुछ मत पूछना इस बारे में आईटी इस बिज़नेस मैटर्स okay?”

संजना ने कहा okay… और दोनों एक दूसरे को बाहों में भरके किश करने लगे.

कुछ देर बाद आनंद वापस आया, और चावला साहब ने अपने लिए ड्रिंक्स खुद बनाये, आनंद अपना पी रहा था और संजना नहाने चली गयी तब तक. आनंद से यह दिया गया के चावला साहब आज यहीं रुकेगा रात भर और कल घर वापस जाएगा.

चावला साहब का फ़ोन बज रहा था, सान्वी कॉल कर रही थी, चावला साहब ने नहीं उठाया और मोबाइल को साइलेंट मोड पर कर दिया. फिर विवान को मैसेज किया के वो आज घर वापस नहीं आरहे हैं कल सुबह को आएगा यह बात सान्वी को बता दें के वो वेट नाह करें. विवान ने okay में रिप्लाई किया.

और जब विवान ने सान्वी को मैसेज करके कह दिया के उस्का बाप आज वापस घर नहीं आएगा उस्का वेट नाह करें तो सान्वी का मान चैंका! सान्वी के समझ में नहीं ारः था के अब किआ करें, उस्सको समझ में आगया के चावला साहब उस्सको अवॉयड कर रहे हैं इसी लिए उसस्के कॉल्स नहीं ले रहे हैं और बात भी नहीं कर रहे हैं इस लिए जो कुछ कहना है वो विवान को कह रहे हैं!!!

सान्वी ने एक तरीका अपनाया, एक वौइस् कॉल रिकॉर्ड किया और सेंड किया चावला साहब को.

चवा साहब ने वौइस् कॉल को ओपन किया तो उनके ेंख भर आये और ेंसू टपक पड़े! वौइस् छोटी दीप्ति किट hi जो संजना ने रिकॉर्ड करके भेजा. रिकॉर्डिंग में दीप्ति कह रही थी, “दादू दादू कहाँ हो आप वापस औ, वे लव यू एंड वे मिस यू. प्लीज के बैक होम दादू!”

प्यारी दीप्ति की आवाज़ सुनकर चावला साहब टूट गए और अपने ेंसू पांच कर खड़ा होकर घर में एकांत कदम चले और आनंद ने पूछा, “आप की पोती की आवाज़ है नाह? कितनी प्यारी आवाज़ है बच्ची की, आप को ढूंढ रही घर पर नाह मालिक?”

चावला साहब वापस जाने को सोच रहे थे मगर कुछ देर बाद फिर सोचा के संवी अपने पैंतरे इस्तेमाल कर रही है उनको कमज़ोर करने के लिए ुर खुद से कहा, “बची का इस्तेमाल कर रही है मुझे घर वापस लाने के लिए? बहोत होशियार समझती है अपने आप को, दीप्ति से बात करवाके रिकॉर्ड किया?? जा; मैं नहीं आने वाला अब तो मोबाइल को भी स्विच ऑफ कर देता हूँ कल सुबह hi ों होगा अब यह मोबाइल!!”

चावला साहब मोबाइल ऑफ करके वापस ड्रिंक लेने लगे आनंद के साथ बैठ कर लाउन्ज में. और संजना नाहा कर आयी उन् दोनों के सामने. वो सिर्फ एक टॉवल लपेटी हुई थी अपने जिस्म पर और एक टॉवल से अपने बाल पांच रही थी और मुस्कुराते हुए एक एक करके दोनों को देखा, पहले चावला साहब से मुस्कुरायी फिर अपने पापा को देखा और वहीँ लाउन्ज में कड़ी दोनों को देखती रही!! वो टॉवल उस्सकी जाँघों तक hi लपेटे हुए थे और उस्सकी बूब्स तक थे ऊपर, पीला रंग का था जो संजना के स्किन कलर को बहोत निखार रहे थे, कुछ पानी की बूँदें संजना के कांधों पर और तंग पर इधर उधर दिख रहे थे जब लाइट उन् पर पड़ते थे तो चमक रहे थे…. वो बेहद हॉट और सेक्सी लग रही थी जैसे सीधे बीएड पर चढ़ने के लिए तैयार थी….

चावला साहब ने आनंद को देखा फिर संजना को, और आनंद मुस्कुराते हुए चावला साहब को देख रहे थे और संजना के पापा ने पता नहीं इशारे से किआ कहा संजना को जो चावला साहब ने नोटिस किये…. चावला साहब कल वाले दृष्ट को सोचने लगे जिस तरह से उस्सने इसी संजना को अपने पापा के लिंग को चूस्ते हुए देखा था, और फिर संजना के जाँघों पर अपने नज़र किया चावला साहब ने और फिर आनंद को देखा के वो भी अपनी बेटी की जाँघों को hi देख रहे थे….. चावला साहब का जमके खड़ा हो गया और उस्सने आनंद के पंत को देखा के उस्का भी खड़ा हुआ था!!! संजना दोनों को खड़े देख कर मुस्कुरा रही थी अपने चंचल अदाओं से…..

अचानक संजना ने ऊंची आवाज़ में कहा, “हे! हे! वे विल हैवे पिज़्ज़ा फॉर डिनर वूहू!! और दो तीन राउंड किया संजना ने घूमते हुए लाउन्ज में जैसे उस टॉवल में डांस कर रही थी…. और वैसे घूमते हुए वो चावला साहब के गॉड में जा बैठी और अपने बाहों को उनके गले में दाल कर कहा, “हम्म्म मुझे एक किसी दीजिये!” चावला साहब अपना चेहरा एक तरफ करते हुए आनंद को देख रहे थे और संजना ने कहा, “पापा को मत देखिये किआ उनको पता नहीं वो सब जानते हैं नाह?” तो आनंद उन् दोनों को देखते हुए कहा, “अरे मालिक समझ लीजिये के मैं यहाँ हूँ hi नहीं दे दीजिये किसी उस्सको नहीं तो आप की जान खा जाएगी मुझे पता है हाहाहा!”

और तुरंत संजना ने कहा, “हम्म अभी आप को भी मुझे किसी देना है पापा, मैं आप के पास बी आने वाली हूँ हम्म्म!”

चावला साहब सोच रहे थे के संजना ने अंदर अभी कुछ भी नहीं पहनी हुई है नाह पंतय नाह ब्रा… अगर ग़लती से वो टॉवल थोड़ा सा हल्का हुआ तो उस्सकी पूरी नंगी जिस्म उन् दोनों के सामने होगी…. तो चावला साहब ने अपना मुंह संजना के तरफ किया और संजना ने उनके मुंह को अपने मुंह में लिया और उनके जीब चुस्सने लगी अपने बाप के सामने, चावला साहब बार बार आनंद को देख रहे थे, और फिर संजना उठकर अपने पापा के पास गयी और उनके गॉड में बैठी, कुछ इस तरह से बैठी, के उस्सकी टांगें चावला साहब के तरफ थे क्यों के वो आनंद के अपोजिट बैठे हुए थे, और अपने पापा के मुंह में किश करते हुए संजना ने जान बुझ कर अपनी एक तंग को थोड़ा ऊपर किया जिस से चावला साहब को उसस्के जाँघों के बीच का नज़ारा देखने को मिला… और चावला साहब ने देखा के किश करते वक़्त आनंद का हाथ संजना के जाँघों पर आहिस्ते आहिस्ते फरने लगे थे ऊपर के तरफ बढ़ते हुए……

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (3100 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 65 संजना सेदूसिंग….

संजना जैसे चावला साहब को सडके कर रही थी उस तरह से अपने पापा को उनके सामने किश करते हुए… एक दिन पहले hi तो चावला साहब ने संजना को अपने बाप के साथ करते हुए देखना चाहते थे तो आज खुद उनके सामने संजना अपने पिता के साथ थे. संजना को पता था चावला साहब को उस्सको अपने पापा के साथ देखना पसंद था…. और उसस्के पापा को भी पसंद था संजना को चावला साहब के साथ देखना तो संजना इस वक़्त दोनों मर्दों को खुश कर रही थी अपने तरीके से……

जब आनंद का हाथ संजना के जांघ पर ऊपर होते गए तो चावला साहब की ेंखें मोठे मोठे होते गए जैसे ेंखें बाहर निकल आएंगे वो देखना चाहते थे के कहाँ तक आननद अपने हाथ को अंदर डालेगा, अउ क्यूंकि संजना नाहा के अभी अभी निकली थी तो चावला साहब अंदाज़न समाज रहे थे के उस्सने अंदर अभी तो कुछ भी नहीं पहनी होगी तो इस इंतज़ार में थे चावला साहब के आनंद का हाथ संजना की योनि पर जाए और वो उस्सको नज़र आये…..

और संजना अपने पापा के जीब चूस्ते हुए चावला साहब के चेहरे में देखते जा रहे थे के वो किआ देख रहे हैं, उस्सको पता था के चावला साहब उसस्के जाँघों के बीच hi देख रहे हैं और जान बुझ कर अपनी टांगों को ऊपर उठा रही थी उनको देखिने के लिए hi….

मगर कुछ लम्हे बाद संजना अपने पापा के गॉड से भी उतरे और यह कहते हुए अपनी कमरे में गयी, “अब मई ड्रेस होक आती हूँ थें वे विल हैवे डिनर okay जेंटलमेन? आप दोनों अपने ड्रिंक्स ख़तम करो फ़ास्ट, ी ऍम हंगरी!” मगर चावला साहब आवाज़ ऊंचा करते हुए कहा, “मेरे साथ एक ड्रिंक तो पी लो पहले तब डिनर करेंगे ठीक है?” तो कमरे के अंदर से संजना ने जवाब दिया ज़ोर से, “okay सर िफ़ यू विश तो एक ड्रिंक ले लुंगी आप के साथ!”

और चावला साहब ने आनंद को देखते हुए मुस्कुराये और कहा, “बहोत नटखट है नाह?”

आनंद ने कहा, “हाँ मेरा hi बिगड़ा हुआ है, ज़्यादा प्यार और दुलार का नतीजा है!”

चावला साहब ने कहा, “दुलार तो मैं भी बहोत करने लगा हूँ भाई, मगर आप का हक़ पहले है, मैं तो बाद में आया नाह?”

आनंद ने तब कहा, “यह तो होना hi था आप नहीं तो किसी के घर तो जाती hi जाती वो…..”

चावला साहब तब अपने गिलास से एक सिप लेते हुए पूछा, “बहोत हैरान हूँ के कैसे तुमने उसस्के साथ शुरू किया होगा, किआ वो मान गयी थी?”

आनंद ने अपने पंत में अपने सामान को सीधा करते हुए कहा, “कहाँ नाह साब मेरे ज़्यादा प्यार और दुलार का नतीजा है, इतना प्यार किया उस से उस्सकी माँ के मरने के बाद के मुझे समझलो के उस से इश्क हो गया उस्सकी बाली उम्र में hi, वो अपनी माँ को रेप्लस करने लगी मेरी ज़िन्दगी में, इतना प्यार करती मुझसे के मैं कहीं भी छुवन उसे वो कुछ नहीं कहती, और मेरा यह नशे की आदत, साला रात को मेरे सात सोती वो तो मुझे मेरी पत्नी दिखती उस में और मैं उसस्के कपडे उतार देता और वो सेहमी हुई नंगी मेरे बाहों में खुद को सिमट लेती तो मैं करने लगता, रगड़ता और वीर्य चोररटा उसस्के जिस्म पर जबकि वो बिल्कुल नहीं समझती के मैं किआ कर रहा हूँ उसस्के साथ…..”

चावला साहब ने उस से कहा, “अरे वो मुझे सब बता चुकी है इस के बारे में क्यों बात करना अब चोर्रो भी जो भी हुआ ाचा hi हुआ, वार्ना मुझे कैसे मिलती वो, ठीक है भाई भूल जाओ बीती बातों को!”

आनंद ने पूछा, “आज रात को आप कहाँ सोओगे?”

चावला साहब ने कहा, “पता नहीं शायद उसी के साथ नाह? वो तो एहि चाहेगी नाह मेरे ख्याल से?”

आनंद ने कहा, “अगर हम दोनों hi आज की रात उसी के बीएड पर सोये तो आप को कोई ऐतराज़ है?”

चावला साहब का जमके खड़ा हो गया बुसस इस बात को सोचकर hi, और उस्सने अब अपने लिंग को पंत के अंदर सीधा करते हुए आनंद से कहा, “किआ वो मानेगी?”

आनंद ने कहा, “आप मुझे जवाब दो किआ आप को ऐतराज़ है उस्सकी बात बाद में करते हैं आप बोलो किआ मैं भी उसी बीएड पर एवं तो आप को ऐतराज़ है के नहीं?”

तो चावला साहब ने कहा, “नहीं नहीं भाई मुझे बिल्कुल भी ऐतराज़ नहीं के आप हमारे साथ बीएड पर रहो, मगर आप यह बताओ किआ संजना राज़ी होगी दोनों को एक साथ बीएड पर सुलाने को?”

आनंद ने कहा, “आप उस से अभी कुछ भी मत बोलना, उस्सको सरप्राइज देंगे जब सोने का टाइम हुआ तब okay? बिल्कुल कुछ भी मत बताना मुझे पता है के वो बहोत खुश होगी क्यूंकि वो दोनों को बराबर चाहती है. और अब आप उस्सको पिलाओगे नाह तो थोड़ा सा ज़्यादा पीला देना देखना कितनी ख़ुशी से दोनों को रिसीव करेगी…”

चावला साहब ने कहा, “okay भाई तुम उस्सको बेहतर जानते हो तो ठीक है!”

आनंद ने कहा, “अरे अभी अभी आप ने नहीं देखा कैसे सिर्फ टॉवल मैं आयी और आप के सामने मुझे किश तरह से किश किया और मेरे हाज़िरी में आप को? अध्नंगी आगयी दो दो मर्दों के paas…to उसस्के लिए यह बड़ी ख़ुशी की बात है क्यूंकि उसस्के दोनों चाहने वाले एक साथ है… वो बेहद खुश है अभी उसस्के लिए मुझ में और आप में कोई भी फर्क नहीं, उस्का प्यार सच्चा है और दिल से चाहती है आप को जैसे मुझको… उसस्के लिए हम दोनों की बहोत एहमियत है उस्सकी ज़िन्दगी में मैं तो सोचता हूँ आप का बीटा इस में पिसेगा!!”

चावला साहब ने कहा, “उस्सकी फ़िक्र आप मत करो, आरव खुश रहेगा संजना के साथ उस्का ख्याल मैं रखूँगा के दोनों खुश रहे… आरव से संजना भी प्यार करने लगेगी उसस्के साथ रेहने के बाद क्यूंकि आरव बहोत प्यारा बच्चा है….”

तो आनंद बोलै, “अरे साहब तो उस्का प्यार आप के साथ बांटेगी नाह? आरव की हिस्से का प्यार संजना आप को दे देगी तो कहीं आरव से वो दूरी नाह बना ले? इस्सके ख्याल रखना होगा आप को क्यूंकि वो आप को बहोत ज़्यादा चाहती है, आरव से तो फिलहाल वो बिल्कुल प्यार नहीं करती मुझे पता है!”

और संजना अपने कमरे से बहार आयी तो दोनों मर्दों के ेंखें फटे रह गए उस्सको देखते hi….. संजना एक पतली सी निघ्य में थी बिना ब्रा के… वही वाली जिस में एक दिन सुबह को चावला साहब ने फ़ोन किया था और अपने पापा को जाकर फ़ोन देने को कहा था और संजना ऐसे hi इसी निघ्य में गयी थी तो चावला साहब ने संजना से वीडियो टॉक किया था तो देखा इस निघ्त्य में है और पूछा था के अपने पापा के सामने इस निघ्त्य में गयी थी बिना ब्रा के, तो संजना ने उस दिन जवाब दिया था के पापा तो इस ड्रेस को जानती है बल्कि उसी ने ख़रीदा हुआ है………

तो अभी संजना उसी निघ्त्य में आयी दोनों मर्द के सामने दोनों में से किसी ने भी नहीं सोचा था के वो वैसे आएगी उन् दोनं के सामने… दोनों मर्द छुप थे बिल्कुल, और संजना जैसे खेलते हुए अपनी बचकानी हरकतों से गयी चावला साहब के पास बैठी और कहा, “कहाँ मेरा ड्रिंक? आप ने नहीं बनाया? मैं आप से और पापा दोनों से चियर्स करुँगी…..” वो आनंद के सामने बैठी थी चावला साहब के पास और उस्सकी बूब साफ़ दिख रहे थे आनंद को, और उस्सकी जांघें तो बुसस कमाल के तक़रीबन 90% सामने थे सिर्फ पंतय वाला हिस्सा छुपा हुआ था… सान्वी दोनों मर्दों को सडके कर रही थी…………

तो बे कॉन्टिनोएड…………. इम्मेडिएटली इन नेक्स्ट पोस्ट
 
अपडेट 66 Sanjana’s हॉट एनकाउंटर विथ….

चावला साहब ने संजना के लिए ड्रिंक बनाया और आइस क्यूब की कमी थी तो संजना फ्रिज से कुबेस लाने गयी…. तब चावला साहब ने आनंद से कहा, “तुम उसे अपने पास बुलाओ, मैं उस्सको तुम्हारे गॉड में बैठे हुए देखना चाहता हूँ, यहाँ से उस्सको निहारना चाहता हूँ. वो मेरे सामने होगी तब, अभी मेरे करीब है तो उस्सको ठीक से नहीं देख पा रहा हूँ…”

आनंद ने कहा, “वही तो मेरा हाल है, मैं उस्सको आप के साथ देखने में बहोत उत्तेजित हो रहा हूँ, मेरे लिए तो वो आप के साथ बेहतर सूट कर रही है ok फिर भी अपने पास बुलाता हूँ, बल्कि मैं तो कहूंगा के वो खुद आएगी कुछ देर बाद आप देख लेना…”

चावला साहब ने पूछा, “यह निघ्त्य तुम ने ख़रीदा था उसस्के लिए? सच है? उस्सने मुझसे एहि कहा था?!”

आनंद: “अरे साहब तो और कौन खरीदेगा उस्सकी पैंतीस और ब्रा मैं hi खरीदता हूँ, मैगजीन्स में देखता हूँ जो सबसे सेक्सी और अट्रैक्टिव लिंगेरिएस होते हैं वही खरीद के लता हूँ उसस्के लिए और उस्सको वैसे सेक्सी देखने में मुझे बड़ा मज़ा अत है, जैसे कुछ नया खरीदता हूँ तो तुरंत पेहेन कर नुमाईश करती है मेरे सामने…. और कभी कभी तो टीवी पर लिंगेरिएस के एड्स आटे हैं तो वो खुद दिखती है मुझे के ‘पापा यह देखो कितनी सेक्सी है मैं इस में किसी लगूंगी?’ तो दूसरे दिन मैं वही खरीद के लता हूँ उसस्के लिए…. उस्सको सेक्सी लग्न और दिखाना बहुत पसंद है… खुद को ज़रा एक्सहिबित भी करती है, मगर सिर्फ मेरे सामने करती थी मुझे पता नहीं था के आप के लिए भी करती है अब तो दोनों के सामने कर रही है, हमको तो खुश होना चाहिए नाह?”

चावला साहब खुश होते हुए कहा, “बिल्कुल खुश होना चाहिए हमें भाई और हो भी रहे हैं क्यों? यार काश मेरी एक ऐसे बेटी होती और मुझसे अपनी ुंडेरवेअर्स kharidwati…wah कितना मज़ा है इस में एक बिल्कुल अलग सेंसेशन है, है नाह भाई? तुमको बड़ा hi मज़ा अत होगा नाह? तभी तो इतनी कम्प्लीसिटी हैं तुम दोनों के बीच!”

आनंद ने कहा, “साहब, 5 साल पहले से यह सब शुरू हुआ, सोचिये किआ उम्र थी उस्सकी, उस आगे में जब माँ को उस्सकी ब्रा खरीदने चाहिए थे, माँ चल बस्सी, संजना बाली उम्र में hi उस्सकी जिस्म उभर आयी थी, माँ ने पहली ब्रा खरीदी ठीक 3 महीने बाद गुज़र गयी… तब से बाकी के ब्रा मुझको hi खरीदना पड़ा नाह? शुरू में वो थोड़ा झिज्जागति थी मुझसे कहने को के उस्सको दूसरी ब्रा की ज़रूरत है, मगर क्यूंकि रात को मेरे साथ सोने आई थी, तो वो छूना, सहलाना शुरू हो गया था और उस वक़्त उस्सने एक रात को हिमत कर के कह दिया के उस्सकी ब्रा और पैंतीस पुराने हो चुके हैं…. शुरुवात ऐसे हुआ था फिर तो आदत बन गयी हुज़ूर….”

तब तक संजना आ गयी आइस कुबेस के साथ और खड़े होकर कहा, “तुम दोनों मेरे बारे में बातें कर रहे हो हैं के नहीं बोलो बोलो और सच बोलो, क्यों पापा?”

आनंद ने जवाब दिया, “जब तुम जैसे हॉट बेबी हमारे बीच हो तो….”

और चावला साहब ने आनंद की बात को बीच में रोकते हुए ऐड किया, “… तो और किस्की बातें करेंगे भला? जैसे एक हॉट लड़की को रास्ते में चलते हुए देख कर लड़के उस्सको ऊपर से निचे तक देखते हुए उसस्के बारे में बात करते हैं हम वही तो कर रहे हैं और तुम वो बहोत hi हॉट और सेक्सी लड़की हो हमारे बीच इस वक़्त!”

संजना खुश दीखते हुए और हँस्ते हुए कहा, “हीहीहीहीहीही, लड़के? आप दोनों लड़के हो गए हीहीहीहीहीहीही ठीक है मुझे बाजोट अच्छा फील होता है जब कोई मुझको हॉट और सेक्सी कहता है”

और संजना ने अपनी लुभाती अदाओं में आइस कुबेस चावला साहब को दिए और खुद अपने आप अपने पापा के गॉड में गयी जैसे उस ने सुना था के चावला साहब ने आनंद से कहा था उस्सको अपने पास बुलाने को. और गॉड में बैठ के संजना ने कुछ इस तरह से अपने तंग को फैलाया के चावला साहब के ेंखें फटे रह गए उस्सकी जाँघों के बीच के हिस्सा को देखते हुए, उस्सकी पिंक पंतय भी नज़र आने लगे थे, संजना क ीक हाथ में व्हिस्की की गिलास थी और और एक हाथ को उस्सने अपने पापा के गले में डाले हुए थे और अपने होंठों को अपने पापा के गर्दन पर फेरर रही थी…. चावला साहब उस दृष्ट को देख कर ऐसा फील कर रहा था के कोई इरोटिक मूवी का सन देख रहा है और अपने व्हिस्की का गिलास ख़तम किया एक hi घूँट में.

आनंद ने चावला साहब के तरफ देखते हुए संजना के क्लीवेज पर अपना मुंह किया और जीब से संजना के बूब्स क ीक किस्से को छाता, और चावला साहब से एक ेंख मारा आनंद के वैसा करते हुए. संजना ने अपने सर ऊपर उठाते हुए बालों को पीछे झटका और एक नज़र चावला साहब पर दौड़ाई और देखा के वो देख रहे हैं तो उस्सने भी चावला साहब को एक ेंख मारी मुस्कुराते हुए और कुछ सेक्सी अंदाज़ में होंठ पर अपना जीब फरते हुए…. चावला साहब अपने लिंग पर अपने एक हाथ को दबाते हुए गहरी सांस ले रहे थे. और संजना का पिछवारा आनंद के लिंग पर दबे हुवे थे और संजना अपने कमर हिलाते हुए आहिस्ते आहिस्ते उस पर रागढ भी रही थी अपने पापा के लिंग को अपने निचे फील करते हुए…..

चावला साहब का मैं किया के अपने लिंग को पंत से बाहर निकले और हाथ से संजना को दिखाते हुए सहलाये, मगर नहीं समझ रहे थे के आनंद और संजना किआ सोचेंगे अगर उस्सने वैसा किया तो इस लिए खुद को रोके हुए थे लिंग को पंत के अंदर hi दबाते और हाथ से सहलाते हुए.

संजना ने भी अपने पापा को चुम्मते चाटते हुए अपनी व्हिस्की की गिलास को एक घूँट में निंगाल गयी कुछ सिप्स के बाद और चावला साहब के तरफ हाथ बधाई गिलास देते हुए, मतलब एक और पेग की फरमाईश कर रही थी, तो चावला साहब अपने जगह से उठे और संजना के हाथ से गिलास लेने आये तो संजना के जांघ पर अपने हाथ को फेर्रा, तब संजना ने उनके हाथ को थाम लिया और अपने तरफ खींचा, चावला साहब निचे बैठ गए, उस्सकी टांगों के पास, वो अपने पापा के गॉड में थी, आनंद देख रहा था और चावला साहब बैठे हुए संजना के जांघ पर अपने जीब फेर्रा, गिलास को निचे ज़मीन पर रख दिया और संजना के कमर पर हाथ रख के उस्सको चाटने लगे चावला साहब जबकि संजना अपने पापा के चेस्ट चाट रही थी, और आनंद क ीक हाथ संजना के बूब्स सेहला रहा था…..

तो बे कॉन्टिनोएड इन थे नेक्स्ट अपडेट इम्मेडिएटली……
 
अपडेट 67 संजना विथ बोथ में

चावला साहब ने जोश में अपने बाहों को संजना के कमर में कस लिया और उस्सको छत्ते गए उस्सकी पंतय तक यहाँ तक के उस्सकी पंतय को भिगो दिया छाते हुए और संजना अपने पापा पर बैठे हुए hi दोनों टांगों को बिल्कुल फैला दिए और आनंद अपनी नज़रें निचे करके चावला साहब को अपनी बेटी को चाटते हुए देख रहे थे….

वो भी बहोत उत्तेजित हो गए थे और उस्सने संजना को गॉड से सोफे पर कर दिया और अपने लिंग को पंत से बाहर निकला, जिस को संजना ने तुरंत हाथ में लेकर सहलाने लगी चावला साहब के तरफ देखते हुए…. चावला साहब ने उस्सको चाटना बांध किया और देखने लगे के संजना अब अपने बाप की लिंग के साथ किआ करती है… तब तक वो गिलास में व्हिस्की डालने गए आइस कुबेस के साथ दोनों पर नज़र जमाये हुए और वापस आये दोनों गिलास को व्हिशक्य के साथ लेकर, एक संजना के पास रखा उसस्के लिए और अपने गिलास को सिप करते हुए संजना की हरकतों को देखने लगे जो वो कर रही थी अपने पापा के लिंग के साथ…. चावला साहब को बहोत मैं कर रहा था के शूट करे उस एक्शन को अपने मोबाइल से मगर शायद आनंद नहीं पसंद करता इस लिए नहीं शूट किया और देखते रहे एक वोयर की तरह, अदमीरे कर रहे थे बाप बेटी के इस ईन्सेस्तुओस रिश्ते और एनकाउंटर ko….wo बहोत hi उत्तेजित हो चुके थे और उंनका लिंग जैसे पंत से बाहर निकलने वाले थे, वो एक हाथ से अपने लिंग को सहलाते हुए आनंद के तरफ देखा, तो आनंद ने उस्सको इशारे से लिंग को बाहर निकालने को कहा…. तब तक संजना झुक गयी अपने पापा के लिंग पर और जीब निकाल कर उस के लिंग का ऊपरी हिस्से को छाता, गोआल गोआल जीब को घुमाया लिंग की चढ़ के ऊपर जिस से आनंद की आह निकली, और संजना ने लिंग को मुंह में ले लिया नज़रों को चावला साहब पर किये हुए……

चावला साहब खड़े होकर देखते हुए अपना व्हिस्की को फिर एक hi घूंट में निंगाल गया और जल्दी से एक दूसरा बना कर वापस आया, और संजना के पास निचे बैठ कर उस्सकी निघ्त्य को कमर तक उठाया उस्सने और उस्सकी गांड को छाता चावला साहब ने फिर धीरे से उस्सकी पंतय को निचे खिस्काया, मगर संजना ने धीमी आवाज़ में कहा, “हम्म नहीं अभी मत उतारो, अभी टाइम नहीं हुआ उसस्के लिए….” और वापस अपने पापा की लुंड चुस्सने लगी….. आनंद ने फिर इशारे से चावला साहब को अपने लिंग को बाहर निकालने को कहा, तो अब चावला साहब ने अपने पंत उतारे और बॉक्सर को थोड़ा निचे करके अपने लिंग को सनजनके मुंह के पास किया… संजना मुस्कुराते हुए उनके देखा और फिर अपने पापा के चेहरे में देखा जिसस्ने संजना से कहा, “लेलो नाह, उनको भी तो खुश karo…do दो मिल गए आज तुमको मेरी गद्य दो एक साथ मज़े लूटलो अब बेबी!!”

तो संजना एक हाथ से अपने पापा के भीगे हुए लुंड पर हाट चला रही थी और दूसरे हाथ से चावला साहब के लिंग को लिया और सहलाते हुए उनके चेहरे में सर उठा कर देखा फिर जीब घुमाया उनके लिंग पर बिल्कुल उसी तरह जिस तरह अपने पापा के लिंग पर किया था फिर उस्सको अपने मुंह में ले लिया एक हाथ से अपने पापा के लिंग पर हाथ चलाते हुए… इधर चावला साहब को चूस रही थी उधर आनंद के लिंग पर हाथ चलाती जा रही थी……

फिर कुछ देर बाद संजना ने अपने व्हिस्की का गिलास लेकर एक सिप लिया और थोड़ा सा व्हिस्की चावला साहब के लिंग पर चिररका और व्हिस्की को लिंग समेत चुस्सने लगी…. मतलब लिंग से व्हिस्की पी रही थी!!

उस तरफ आनंद अपने कमर हिलाते हुए संजना के मुठी में अपने लिंग को जैसे ढाका देते हुए संजना की मुठी को अपने एक हाथ में दबा कर चला रहे थे…. जैसे संजना के मुठी को छोड़ रहा था आनंद…

संजना फिर रुकी, अपने गिलास को ख़तम किया और इस बार चावला साहब के लिंग को हाथ में लिए मुठी बंद करके हाथ चालते हुए और अपने पापा को लिंग को मुंह में लिया चुस्सने को… तब चावला साहब झुके संजना के मुंह को अपने मुंह में लेने को, तो संजना अपने पापा के लिंग को चोरर कर चावला साहब के जीब को मुंह में लिया और किश करते हुए संजना कड़ी हो गयी, और अपने बाहों को चावला साहब के कांधों पर करके, अपने दोनों टांगों को फैला कर चावला साहब के ऊपर दोनों तरफ टांगों को उनके कमर पर कसके लटक गयी और पीछे से उसस्के पापा के संजना के गांड पर अपने लिंग को दबाया पंतय के ऊपर hi थोड़ा रगड़ते हुए…. मतलब अब संजना बीच में थी और दो मर्द दोनों तरफ उसस्के आगे और पीछे खड़े पोजीशन में….

चावला साहब संजना को लेकर चलने लगे उस्सकी बैडरूम के तरफ किश को जारी रखते हुए और संजना को उस्सकी बीएड पर पटका चावला शब् ने, पीछे से आनंद आये. और बीएड क ीक तरफ से चावला साहब गए और दूसरी तरफ से आनंद आये बीएड पर…. तो संजना अब दोनों को देखते हुए मुस्कुराते हुए कहा, “अरे पिज़्ज़ा नहीं खाया अभी तक किसी ने भी, चलो पझले खाते हैं नाह?!

उसस्के पापा ने अपने लुंड को उसस्के मुंह के तरफ करते हुए कहा, आज इस पिज़ा को खाओ नाह, दो दो पिज़्ज़ा है खाने को तुम्हें आज गद्य!!”

और चावला साहब ने कहा, “आरी अभी तो पूरी रात बाकी है, पहले यह कर लें उसस्के बाद डिनर करेंगे बेबी!”

संजना ने नखरे वाली आवाज़ में कहा, “हम्म मुझे नींद आजाएगी यह करने के बाद नाह?!”

आनंद ने कहा, “मैं तुमको जगा दूंगा नाह खाने के टाइम पर!”

संजना ने कहा, “मगर मैं सोऊंगी नाह मेरे बीएड पर?”

तो चावला साहब ने कहा, “आज हम तीनों साथ सोयेंगे बेबी,” संजना तब अपने पापा के तरफ मूढ़ कर कहा, “सच पापा?”

आनंद ने कहा, “बिल्कुल सच गद्य आज पहली बार तुम दो आदमियों के साथ सोवोगी क्यों खुश नहीं हो?”

संजना बहोत खुश होते हुए कहा, “थैंक यू पापा बहोत बहोत hi खुश हूँ क्यों खुश नहीं हूँगी जब दोनों जिस से मैं प्यार करती हूँ एग्री करते हैं तो मुझे क्यों ख़ुशी नहीं होगी, मैं एहि तो चाहती थी नाह मगर सोचा था के आप दोनों पता नहीं राज़ी होंगे के नहीं अब मुझे बहोत ख़ुशी हुई यह देख कर के आप दोनों बिल्कुल राज़ी हो मुझे एक साथ लेने में…. इतस okay एंड फाइन ी ऍम वैरी हैप्पी.”

तो चावला साहब ने अपने सारे कपडे उतारे और आनंद ने भी…. संजना बीएड पर लेते दोनों को नंगे होते देख रही थी, मगर वो अपनी निघ्त्य में hi थी वेट कर रही थी के दोनों मिलकर उस्सको नंगा करें….

और उसस्के पापा उसस्के राइट साइड में बीएड पर गए और चावला साहब संजना के लेफ्ट में, दोनों मर्द बिल्कुल नंगे, लिंग बिल्कुल तन्ने हुए फनफनाते हुए दिख रहे थे संजना को, वो अपनी पीठ पर लेती थी और वेट कर रही थी, थोड़ा हल्का सा नशा हुआ था व्हिस्की पिने से और संजना अपने होंठों पर जीब फरते हुए चावला सजब को एक ेंख मारते हुए उनको अपनी जीब से चेर्रा और धीरे से कहा, “हम्म्म मुझे बाहों में भरलो अपने”…. और फिर मुड़कर अपने पापा से कहा, “पापा आप भी मुझको भरलो बाहों में मेरे पीठ के तरफ से मैं दोनों को अपने जिस्म पर फील करना चाहती हूँ ह्म्म्मम्म टेक में बोथ ऑफ़ यू पलेआएएससससससीई”

चावला साहब तो अपने लिंग को उसस्के मुंह के पास लेजा रहे थे पर क्यूंकि संजना खुद को उन् के बाहों में पाना चाहती थी तो चावला साहब लेट गए बीएड पर संजना के बगल में और उस्सको अपने बाहों में लिया और वैसे hi दूसरे तरफ से आनंद ने भी बीएड पर होकर संजना को उसस्के पीठ से बाहों में भरा, तो चावला और आनंद के बाहें एक दूसरे के बाहों से रागढ रहे थे…. और संजना दोनों मर्दों के बीच बीएड पर एक करवट में उन् दोनों ने बीच में थी… संजना के बाहें चावला साहब के जिस्म से लिपटे हुए थे, जिस दौरान चावला साहब का तन्ना हुआ लुंड संजना के ठीक योनि पर दबे हुए थे और पीछे आनंद का लिंग संजना के नितम्बों पर दबा हुआ था और संजना ने ेंखें बांध कर लिए दोनों को एक साथ फील करते हुए ज़ोर से चावला साहब को बाहों में भरके…..

और कुछ लम्हों के बाद चावला साहब ने संजना के मुंह को अपने मुंह में लेकर उस्सकी जीब चुस्सने लगे जबकि पीछे से आनंद ने संजना का निघ्त्य ऊपर उठाते हुए उस्सकी पंतय को थोड़ा निचे किया उसस्के जाँघों पर और अपने लुंड को उस्सकी चुतरों के बीच दबा कर हलके हलके रगड़ने लगा….. संजना चावला साहब को किश करते हुए, अपने नितम्बों को अपने पापा के तरफ पैरों को मोड़ कर पोजीशन दिया ताके उसस्के पापा को अच्छा पोजीशन मिले रगड़ने को, उस तरह से संजना के टाँगें आधा मोड हुए थे जिस से चावला साहब आगे के तरफ अपने लिंग को उसस्के घुटनों पर दबे हुए फील किये… फिर किश को बरकरार रखते हुए चावला साहब ने संजना की निघ्त्य की पतली सी स्ट्राप को धीरे धीरे काँधे से निचे किया उसस्के बाहों पर और हलके हलके संजना के बाहों से होते हुए स्ट्राप को बिल्कुल निकल दिया और तुरंत निघ्त्य को निचे के तरफ से खिंचा निकलने को जिस्सको आनंद ने बाहर निकालने में हेल्प किया पीछे से….. उसस्के बाद संजना ने अपने बूब्स को चावला साहब के छाती पर दबा कर रगड़ा जैसे उस्सको उस रागढ से बहोत अच्छा फील हो रहे थे, और अपने बाहों में चावला साहब को ज़्यादा ज़ोर से जकरा और उनके जीब को और भी ज़्यादा जोश से चुस्सने लगी….. पीछे से आनंद ने अब संजना की पंतय को बिल्कुल निचे किया उस्सकी घुटनों से भी ज़्यादा निचे, और संजना ने खुद एक तंग उठाया जिस से उसस्के पापा को आसानी हुई पंतय को बिल्कुल बाहर निकाल फेंकने की….. आनंद संजना के गले पर पीछे दांत दबाते हुए उस्सको चूस रहे थे अपने लिंग को उस्सकी जाँघों के बीच ो बीच रगड़ते हुए और आनंद ने एक हाथ संजना के चुतरों से होकर उस्सकी योनि तक लगाया और अपने उँगलियों को उस्सकी छूट पर मसलने लगा, योनि बिल्कुल hi गीली हो गयी थी और आनंद ने अपने ऊँगली को मुंह में दाल कर चूसा फिर दोबारा उँगलियों को उस्सकी छूट पर रगड़ा और इस बार उन् भीगे हुए उँगलियों को चावला और संजना के मुंह के बीच किया, वह दोनों तो किश करे रहे थे, मगर चावला साहब को सब पता था के आनंद किआ कर रहा है, तो उस्सने आनंद के ऊँगली से संजना का रस चूसा और उस रस को खुद संजना के मुंह में डाला किश को जारी रखते हुए…..

मतलब हुआ यह के आनंद ने अपनी बेटी का रस निकाल कर चावला साहब के मुंह में डाला जिस्सको चावला साहब ने वापस संजना के मुंह में डाला उसी के रस को…. और फिर तब आनंद ने खुद अपने उँगलियों को संजना के मुंह में डाला उससे खुद की रस चुस्सने के लिए… वो भी संजना को पता था चुस्सने से पहले के उसी का रस है जो उसस्के पापा ने उसस्के योनि से निकल कर उसस्के मुंह में डाला…..

संजना थोड़ा सा हांफने लगी थी और एक जोश सा दिख रहा यह उस में, उस्सने अपने गर्दन मोड़ कर अपने पापा के मुंह को अपने मुंह में लिया और अब उस्का जीब चुस्सने लगी जबकि इस बार चावला साहब ने उस्सकी छूट पर हाथ फेर्रा, उँगलियों को उसस्के अंदर डाला और उस्का रस निकला और अब उस्सने संजना और आनंद के मुंह में डाला जब वह किश कर रहे थे, और दोनों बाप बेटी किश करते हुए hi उस रस को जीब में लिए और एक दूसरे के मुंह में डाले और जीब चुस्सने लगे…. यह करते वक़्त चावला साहब दोनों बाप बेटी को ख़ुशी भरे नज़रों से देख रहा था…. कितना अपनापन और प्यार था उन् दोनों के बीच जैसे बिल्कुल पति और पत्नी थे वह दोनों…..

संजना की सिसकारियां निकलने लगे थे, क्यूंकि अब चावला साहब का लिंग उस्सकी योनि की पंखुरियों के बीच रगड़ने लगे थे, क्यूंकि गीली थी वहां तो आसानी से फिसलते हुए रगड़ते जा रहे थे ज़ोर से दबाते हुए और पीछे आनंद का लिंग उसस्के नितम्बों के बीच रागढ रहे थे और एकांत बार तो ऐसा हुआ के आनंद और चावला साहब, दोनों के लुंड एक दूसरे से टकराये संजना के जाँघों के बीच से होते हुए….

और चावला साहब ने घुर्राटे हुए पूछा, “कौन निचे लेगा और कौन ऊपर जाएगा?” तो नशीली ेंखों से संजना ने अपने पापा को देखा, और आनंद ने चावला साहब को देखा, तो धीमी सी तड़पती आवाज़ में संजना ने कहा, “पापा आप तो पीछे सालों से लेते आये हो, तो आप आगे लेलो और चावला साहब को पीछे लेने दो क्यों ठीक है नाह पापा?” आनंद ने भी नशीले हालत में कहा के ठीक है जैसा वो चाहे….

तो झट से संजना एप पापा को पीठ पर करके उन् के ऊपर चढ़ गयी अपने दोनों टांगों के फैलाते हुए, और बिना टाइम गंवाए हुए आनंद ने अपना लिंग संजना के अंदर थुश दिया….. चावला साहब ने कुछ पल दोनों को उस पोजीशन में देखा, संजना की आहें तड़पती हुई निकल रहे थे और उस्सकी आवाज़ आने लगे थे कुछ इस तरह से, “हम्म्म्म आअह्ह्ह हा स्स्स्सह्ह्हस्सस्स आआह्ह पापा ऊऊफफफफ फफफफफफफफ स्स्स्सह्ह्हह्ह” संजना को उस तरह से तड़पते हुए देख और सुनकर चावला साहब को बड़ा मज़ा ारः था, और उन्हों ने देखा किश तरह से संजना ने अपने पैरों को मोड़ कर खुद अपनी गांड हिलाते हुए अपने पापा का लुंड अपने अंदर बाहर किये जा रही थी और एक नज़र चावला साहब को भी देखि जा रही थी उसी नशीले ेंखों से…..

चावला साहब से रहा नाह गया और वो उन् दोनों के ऊपर चढ़ा, संजना के गांड पर हलके से थपड मारा और वो जगह लाल हो गया जहाँ उन्हों ने थपड मारा, और चावला साहब ने अपने लिंग को संजना के गांड के छेड़ में थोड़ा सात हुक लगाके ठुस्सा और थोड़ा ज़ोर लगाके अंदर घुसेड़ दिया खुद “आआअह्ह्ह्ह” करते हुए और संजना की चीख निकली “uuuuuuiiiiiiiiiii मम्माआआ आआआआह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ पापा दो दो मेरे अंदर हैं ओह माय गूऊऊडड़डडडडड!!! Aaaaaaaaaahhhhhh,” चावला साहब ने ढाका देना शुरू किया उस्सकी गांड में और निचे से आनंद ढाका दे रहा था उस्सकी छूट में, दोनों मर्द दोनों तरफ से ज़ोरों से ढके देने लगे और संजना कहाँणररते हुए तड़पती आवाज़ में हांफते हुए “आआअह्ह्ह्हह उउउउउइइइइइइइ माआआआ उफ्फ्फफ्फ्फ़ स्स्स्सस्स्स्शशशशश आआह आआह यह यह यह यह हां हआ…. होऊ!!!”

संजना सिसकने लगी थी और दो बार झाड़ गयी थी उसी दौरान मगर कुछ नहीं बोल रही थी क्यों के उस्सको लगता था वो इस दुन्या में नहीं है एक अजीब सी फीलिंग हो रही थी जैसे किसी बड़े ड्रग को लिया हुआ है, जैसे ऑपरेशन करने से पहले अनेस्तेसिअ की इंजेक्शन दिया जाता है तो कैसा फील होता है उस वक़्त संजना उस हालत में थी जैसे 100% किसी नशीली चीज़ लिया है उस्सने….. होश ो हवाज़ नहीं थी इतना मज़ा आया उस्सको के दुन्या से दूर किसी जन्नत जैसी जगह में खुद को पाया संजना ने उन् दो मर्दों के बीच…

संजना को उस तरह से कहाणररते और चिलाते हुए देख कर दोनों मर्द एक साथ झड़े… दोनों ने अपने अपने लिंग को एक साथ निकाले बाहर और एक ने संजना के गांड को भिगोया अपने पानी से और आनंद जो निचे था उसस्के वीर्य खुद उसस्के पथ पर गिर्रा जिस्सको संजना ने अपने पथ से दबा कर अपने पापा पर जैसे बेहोश hi होगयी हांफते हुए…

तीनों हांफ रहे थे, संजना बीच में थी, दो मर्दों के बीच… उसस्के बूब्स को किसी को टाइम hi नहीं मिला छूने को, दोनों बूब उसस्के पापा के छाती पर दबे हुए थे जैसे कुचल रहे थे आनंद के छाती पर, संजना के ऊपर चावला साहब ने अपने वज़न से दबाया हुआ था उस्सको, संजना दोनों के बीच जैसे कुचलती जा रही थी….

और आखिर में चावला साहब एक तरफ हुए और पीठ के बल बीएड पर लेट गया हांफते हुए और संजना भी उसस्के बाद अपने पापा पर से उठी और वो भी पीठ के बल लेती हांफते हुए hi… और आनंद छत ताकते हुए हंससने लगा धीरे धीरे, उस्सको सुन कर चावला साहब भी हंससने लगे तब उन् दोनों को देख कर संजना भी हंससने lagi…kaafi देर तक तीनों ज़ोर ज़ोर से हँस्ते रहे ख़ुशी के मारे….. क्यों हंस रहे थे किसी को पता नहीं था, ऐसा एक इमोशन हुआ के खुद बा खुद हंसी आयी थी…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (5120 वर्ड्स फ्रॉम आल थ्री उपदटेस)
 
सॉरी दोस्तों, रीडर्स ऑफ़ थिस स्टोरी दिल से मुआफी चाहता हूँ अपडेट नहीं दे पाया इस लिए.

जबसे इस थ्रेड को शुरू किया है शायद hi किसी दिन अपडेट मिस हुआ वो भी सिर्फ संदेस या सतुरदेस को होता है.

बात दर अस्सल यह है के वीकेंड में मैं अपने फॅमिली लोगों को रेफुसे नहीं कर सकता. कभी कहीं जाना होता है, कभी कोई ज़रूरी काम होता है तो कभी घर में hi किसी को रिसीव करना पड़ता है.

इस लिए आप सब से यह कहना चाहता हूँ के वीकेंड्स में आप लोग उपदटेस एक्सपेक्ट नाह करे इस थ्रेड पर.

मैं ने सोचा था हर रोज़ दो उपदटेस पोस्ट करके इस कहानी को जितना जल्द हो सके फिनिश कर दूंगा.... मगर वैसा करना बहोत मुश्किल लग रहा है सिर्फ वीकेंड्स के वजह से.

ी सिंकेरलय अपोलोगइसे तो आल.

थैंक्स एवरीवन.
 
अपडेट 68 चावला स्पेंट थे नाईट तेरे

सुबह 4.30 बजे चावला साहब की नींद कुछ आवाज़ों से टूटी, धानंद अपनी बेटी के ऊपर था, छोड़ रहा था फिर से उठने से पहले क्यूंकि वो उसी टाइम को उठता है हर रोज़ और बग़ीचे में कुछ काम करके अपने काम पर जाने के लिए रेडी होता है. संजना की सिसकती तड़पती आवाज़ भी आये थे चावला साहब को वो फुस्फुसाते हुए अपने पापा से कह रही थी, “साहब की नींद टूट जाएगी, आहिस्ता पापा, मत जगाओ उन्हें उफ्फ्फ्फ़, आआह्ह्ह्ह पापाआआ मत करो नाह अभी रात को काम से वापस आओगे तो करना नाह! स्स्स्सस्शह्ह्ह पापा, उफ्फ्फ्फ़ वो जाग जाएंगे नाह!!”

चावला साहब ने सोते हुए रहने की नाटक किये, वो वैसे hi पड़े रहे बीएड पर दोनों को धीमी ेंख को खोल कर देखते हुए, उनको बड़ा hi मज़ा ारः था बाप बेटी को करते हुए देख कर…. अभी कुछ घंटे पहले hi दोनों ने उसस्के अंदर ग़ुस्साये थे अपने अपने लिंग को पर अभी फिरसे ले रही थी अपने पापा के मुस्सल को अपने अंदर….

संजना पीठ पर थी लेते हुए, आनंद उसस्के ऊपर था, उस्सकी जांघें फैली हुई थी और आनंद पेल रहा था उस्सको, एकांत बार तो संजना की टांगें चावला साहब के टांगों से टकराये और उस्सकी बाहें भी चावला साहब के जिस्म से टकराये कई बार जब तक उसस्के पापा उसस्के साथ करता रहा, बीएड भी हिल रहे थे जिस से चावला साहब का बदन भी बीएड पर हिल रहा था….

करने के बाद आनंद उतर गया बीएड से और अपने बहार के काम में लग गया, वही सुबह को चाय वग़ैरा बनता था संजना के लिए, वो तो दिन के 10 बजे सो कर उठती थी.

तो आनंद के जाने के बाद संजना चावला साहब के चेहरे में बड़े प्यार से देखती रही, कई बार किश भी किया और उनको अपने बाहों में जाकर लिया यह समझते हुए के वो नींद में हैं. दोनों बिल्कुल नंगे थे रात भर, बल्कि तीनों नंगे सोये थे, कुछ खाया पिया नहीं था किसी ने पिज़्ज़ा वैसा के वैसा hi रह गया, नशे में थे तीनों और करने के बाद सोते रह गए थे सुबह तक….

चावला साहब भी तो सुबह 5 बजे उठ जाता है जब सान्वी किचन में होती है तो, मगर अभी सोने का ढोंग कर रहा था संजना के पास…. कोई 30 मिनट्स तक संजना उनको बाहों में भरे लेते रहे और संजना का हाथ उनके लिंग पर गया तो देखा के खड़ा हुआ hai…tab उस्सने कहीं पढ़ा था के मॉर्निंग इरेक्शन कहते है उनको जो सुबह सुबह खड़ा होता है लिंग….. मगर उस्सको नहीं पता था के चावला साहब ने उस्सको अपने पापा के साथ करते देखा तभी से उंनका खड़ा हुआ है….

मगर चावला साहब को फिलहाल करने का मात्र नहीं था बिल्कुल…. कल रात की संजना की डबल पेनेट्रेशन के बाद उस्का हो गया था….. संजना उठ कर टॉयलेट कई वैसे नंगी hi, तब चावला साहब अपने पीठ पर लेट कर सान्वी को याद किया….. उस्सने सोचा इस वक़्त सान्वी किचन में पहुँच गयी होगी और चावला साहब को घर पर नहीं पाकर पता नहीं कैसे रियेक्ट किया होगा, विवान से किआ बात किया होगा, किआ पूछा होगा….

चावला साहब ने दिल में ठान लिया था के सान्वी से दूरी रखेगा अब क्यूंकि सुबह को निकलते वक़्त सान्वी ने उसस्के दिल को ठेस पहुचायी थी, चावला साहब यह सोचता था के सान्वी खुद उन् से हमबिस्तर होना चाहती है मगर नखरें भरी हुई है सटी सावित्री बनना चाहती hai…iss कारण चावला साहब ने सोचा कौन बेकार में अपना वक़्त बर्बाद करे एक तो मिल hi गयी है इधर और यह भी तो अब घर की एक सदस्य बनने hi वाली थी तो घर में बैठे बिठाये मिल जाएगी संजना unnko…to सान्वी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी उनको…. यह चावला साहब सोच और समझ रहे थे.

उन्हों ने सोचा पता नहीं कितने फ़ोन किये होंगे सान्वी ने उनको, शायद इस वक़्त भी फ़ोन कर रही होगी, मोबाइल तो कल रात से स्विच ऑफ कर दिए थे, तो अब ों करने को मैं कर रहा था चेक करने के लिए के कितने मिसकॉल आये होंगे सान्वी की… मगर फिर सोचा के अगर ों करेगा और सान्वी अभी अभी फ़ोन कर रही होगी तो… इस लिए मोबाइल को नहीं ों किया तब तक संजना वापस आयी टॉयलेट से और देखा के चावला साहब जागे हुए हैं तो ख़ुशी से बीएड पर उंनसे लिपट गयी और उनको चूमते हुए कहा, “आप जाग गए जनाब? अच्छी नींद आयी नाह? हम्म आज पहली रात गुज़ारे आप ने मेरे साथ मेरे बीएड पर खुश हुए आप हुज़ूर?”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए संजना को बाहों में भर कर कहा, “हम्म्म बहोत hi खुश हूँ, बहोत एन्जॉय किया बहोत अच्छी नींद आयी, मगर अब तो जल्दी से घर जाना पड़ेगा मुझे!”

संजना ने तब बच्चों वाली हरकत में मुंह बनाते हुए कहा, “क्यों मुझे ड्राइविंग स्कूल नहीं चौररने चलोगे आज आप? भूल गए किआ मुझको आज दूसरे दिन का ट्यूशन है ड्राइविंग की? कुछ भी नहीं पढ़ा है मैं ने रूट कोड्स वग़ैरा… कल लेसन याद करना चाहिए था मगर हम तीनों तो बिजी थे नाह आप hi की वजह से….. आप की मोबाइल खो गए थे, आप नशे में गिर्र पड़े थे ेट्स ेट्स….”

चावला साहब ने उस से कहा, “ठीक है 10 बजे घर से निकलेंगे और तुमको वहां चोरर कर मैं वापस घर चला जाऊंगा और तुम आज बस से वापस घर अजना okay?.... और मुझे बताओ जिस ड्राइवर ने मेरे कार को यहाँ तक ड्राइव करके लाया था उस्सने कितने पैसे लिए थे तुमसे?”

संजना नहीं बताना चाहती थी, उस्सने कहा कोई बात नहीं उस्सकी फ़िक्र नाह करें…. मगर चावला साहब को पता था कैसे पता लगाना है वो पता लगा लेगा….

संजना के पापा ने 6 बजे चावला साहब से मुलाकात किये और काम के लिए निकलने से पहले चावला साहब से कुछ बातें किये जब संजना नहाने गयी थी. उस्सने चावला साहब से कहा,

“अब क्युके आप को पता है हमारा रिश्ता कैसा है संजना के साथ तो उसस्के शादी के बाद मुझसे मिलने तो आने देना कुमसे कम 2 हफ़्तों में एक बार, उसस्के बिना मेरा जीना दुश्वार हो जाएगा साहब.”

तो चावला साहब ने कहा, “अरे हर हफ्ते में आएगी, उस्सको ड्राइविंग सीखवा रहा हूँ इसी लिए नाह के वो तुमसे मिलने आ सके यहाँ, जितना चाहो मिलना उस से बल्कि मैं तो कहूंगा कभी कभार हम दोनों एक साथ आएंगे तुमसे मिलने और मौज मस्ती करेंगे तीनों मिलकर कल रात की तरह क्यों?”

आनंद बहोत खुश हुआ और कहा, “हाँ क्यों नहीं मालिक, शादी के बाद तो वो शायद और भी खुल जाएगी और उस्सको भी ज़्यादा ज़रुरत पड़ेगी हमारे मस्तियों की है नाह?”

चावला साहब ने कहा, “हाँ बिल्कुल शादी के बाद सेक्स लाइफ उनकी और बढ़ावा देगी उस्सको मस्ती करने की, हम खूब एन्जॉय करेंगे भाई वो है hi ऐसी के उसस्के साथ कभी मैं नहीं भरता और आरव तो उस्सको वैसे ख़ुशी कभी भी नहीं दे पाएगा तो हमको hi संजना को वो सब खुशियां देना होगा नाह? हेहेहे”

और आनंद काम के लिए चला गया. नहाने के बाद संजना ने चावला साहब को ब्रेकफास्ट सर्वे किया उसस्के नहाने के बाद और थोड़ा गप्पे शाप्पे मारे दोनों ने, किश विस्स किये और 8 बजे थे तो चावला साहब अपने मोबाइल देख रहे थे बार बार बिना ों किये तो संजना ने कहाः के वो बस से आज चली जाएगी ड्राइविंग और चावला साहब को वापस घर जाने को कहा अगर चाहे तो. दिख रहा था के चावला साहब बेताब थे इसी लिए संजना ने सोचा के क्यों उनको रोकना जबकि उस्सकी ड्राइविंग लेसन तो 1 बजे को था तो 10 से 1 बजे तक वो करती भी किआ उस शहर में, तो चावला साहब भी निकलने को तैयार हुआ. संजना को बाहों में भरके खूब प्यार किया, किश किये और 8.30 सुबह को चावला साहब वहां से निकले घर वापस जाने के लिए.

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट पोस्ट इम्मेडिएटली.
 
अपडेट 69 चावला रिटर्न्स होम

वहां से निकलते hi ड्राइविंग करते हुए चावला साहब ने मोबाइल ों किया, और देखा के 92 मिस्सकल्स हैं सान्वी के तरफ से, रात भर उस्सने कॉल्स किये और बहोत सारे मेस्सगेस भी सेंत किये थे जीन में से कुछ ऐसे थे,

- आप मुझसे से नाराज़ हो पिता जी? सॉरी.

- मैं ने आप का दिल तो नहीं दुखाया नाह?

- मुझे लगता है आज सुबह मैं ने आप को ठेस पहुंचाई उसस्के लिए ी ऍम वैरी सॉरी.

- प्लीज रात को बाहर मत रहए घर वापस ाजाईये नाह, आप का इंतज़ार कर रहे हैं हम, दीप्ति भी बार बार पूछ रही है के दादा कहाँ है

- आज यह पहली बार है के आप रात को घर पर नहीं हो हम माँ बेटी बिल्कुल अकेले है, रात के 11 बज गए और विवान आज रात को 1.30 को वापस आएगा क्यों हमको ऐसे अकेले चोर्रा आप ने? आप तो फॉरेन भी नहीं जाते कभी इस लिए के मैं और दीप्ति अकेले होते हैं तो आज कैसे हमको आप ने अकेले कैसे चोरर दिया पिता जी?

- एक बात बताऊँ? आप को मिस कर रही हूँ. आप की आदत हो गयी है घर में, विवान से ज़्यादा आप के साथ इस घर में रहती हूँ शायद इसी लिए मिस कर रही हूँ आप को.

- कहाँ हो आप? किसी होटल में या संजना के घर? आप को व्हिस्की मिली? किश ने आप का ड्रिंक बनाया? होप आप को अपने पसंद का ड्रिंक मिला होगा.

- अब विवान आगया है मैं सोने की कोशिश करती हूँ (सेंत ात 2.ऍम)

- नींद नहीं आरही है (3.ऍम)

- अब भी नहीं सोई हूँ (4.ऍम)

- आप ने क्यों मोबाइल ऑफ रखा है रात भर? क्यों आप मुझसे और खुद को सज़ा दे रहे हो पिता जी? मुझे माफ़ कार्डो नाह प्लीज!” (5 ऍम)

- लो मैं आज रात भर सो नहीं पायी और अब किचन में हूँ और लगता है के अब आप अपने कमरे से बाहर निकलोगे, आप के कमरे के दरवाज़े पर मेरी नज़र जमी हुई है!” (5.15 ऍम)

और फिर कोई मैसेज नहीं थे. चावला साहब ने खुद से कहा, ‘आज सुबह जब वो किचन में थी तब लास्ट मैसेज सेंड किया उसस्के बाद अब तक कोई मैसेज नहीं….. शायद अब नींद आगयी हो उस्सको, मगर दीप्ति किआ करेगी अगर सान्वी इस वक़्त सो गयी तो?’

चावला साहब फ़ास्ट ड्राइव करते हुए जाने लगे, मगर उस वक़्त तो जगह जगह पर ट्रैफिक जैम थे और उस्सको रुकना पद रहा था बार बार…. और खुद बड़बड़ाते हुए यह कहते गए, “हम्म अब समझ में आयी सान्वी को मेरी एहमियत…. मैं तो बात भी नहीं करूँगा सही ढंग से उस से…. इग्नोर करूँगा उस्सको, दूरी रखूँगा, अब समझेगी के कोई किसी को चाहता है तो कैसा लगता है….. पता नहीं किआ समझती है अपने आप को, अब दिखाऊंगा तुझे सान्वी ….. यह ठीक नहीं वो ठीक नहीं, हुग तक ठीक है, यह मत करो, ऐसा मत करो, कोई आजाएगा, वो जाग जाएंगे…… अब देखता हूँ के कब तुमको मौका मिलेगा यह सब मुझसे कहने को….. मौका hi नहीं दूंगा मैं… घर पर रहकर भी घर पर नहीं हूँगा देख लेना…. मुझको तड़पाती है, अब खुद तडपेगी तब समझेगी तू!!”

और 10.30 को चावला साहब घर पहुंचे. गेराज में कार रखने के बाद वो पीछे के दरवाज़े से घर के अंदर गए अपनी चाभी से खोलकर. घर बहुत सुनसान था, कोई भी आवाज़ नहीं आरही थी कहीं से भी… वो चल कर किचन के तरफ गए तो भी कोई नहीं दिखा. वो समझ गया के सान्वी ज़रूर सो रही होगी क्यूंकि रात भर जाएगी थी.

तो वो अपने कमरे में चले गए. कुछ इधर उधर किया फिर कोई एक घंटे बाद वो ऊपर गए सान्वी के कमरे के तरफ, उस्का कर्मा खोला तो अंदर कोई भी नहीं था… उस्सकी बीएड पर उस्सकी वही निघ्त्य राखी हुई थी जिस में वो हर सुबह को रहती है…. चावला साहब ने चारों तरफ देखने के बाद उस्सकी निघ्त्य को अपने हाथ में लिया और अपने नाक के पास लेट हुए उस्सको सुंघा…. उस में सान्वी की खुशभो आरही थी, वो पागल होने लगा उस्का लिंग खड़ा हो गया, उस्सको सान्वी को बाहों में भरने का मैं किया, सान्वी की पसीने की खुशभू कुछ डिओडोरेंट से मिक्स आरही थी उस्सकी निघ्त्य से, फिर चावला साहब उस निघ्त्य को हाथ में लिए कमरे में और कुछ ढूंढ़ने लगे….. फिर कमरे में कुछ पेर्फुमेस के खुशभू आये, और छोटी दीप्ति के उतारे हुए कपडे दिखे एक चेयर पर,. तो चावला साहब समझ गया के दोनों माँ बेटी तैयार होकर बाहर गए हैं…. फिर उस्सने सान्वी की एक ब्लाउज और साडी को देखा जो वो पहनती है दिन में निघ्त्य उतरने के बाद, चावला साहब ने उस साडी की ब्लाउज को उठाया और उसस्के बाँहों के निचे, आर्मपिट के निचे वाले हिस्से को सुंघा, अब भी वो थोड़ी भीगी हुई जैसी थी और उस में सान्वी का पसीना था उस्सको चावला साहब ने सुंघा…. उस्का लिंग फिर जमके खड़ा हुआ….. उस्सने निघ्त्य को वापस बीएड पर रखा और उस ब्लाउज को लेकर अपने कमरे में चले गए.

अपने कमरे में संवी की ब्लाउज के साथ बीएड पर लेट कर चावला साहब सान्वी की पसीने के खुशभू सूंघते जा रहे थे, और अपने लिंग को बाहर निकला पंत से और उस ब्लाउज को अपने लुंड पर रगड़ना शुरू किया, वो ख्यालों में सान्वी को अपने बाहों में महसूस कर रहे थे और ब्लाउज को कभी नाक के पास तो कभी अपने लिंग पर रगड़ते जा रहे थे जब तक के उसस्के वीर्य ने ब्लाउज को टर्र नाह किया…..

हाँ वो झाड़ गए मुठ मारते हुए सान्वी की ब्लाउज पर… और हफते हांफते हंससने लगे ……

फिर जल्दी से अपने वीर्य को एक टिश्यू से पोंछा, साफ़ किया और सान्वी की ब्लाउज को सूंघते हुए वापस उसस्के कमरे में रखने गए जहाँ से लिया था फिर वापस अपने कमरे में चले गए. अब सोचने लगे के कहाँ गयी होगी सान्वी…. क्यों उस्सको मैसेज नहीं किया जाने से पहले? किआ अब सान्वी ने भी जान बुझ कर ऐसा किया? किआ अब वो बदला ले रही थी चावला साहब से? किआ सान्वी अब यह चाहती थी के अब चावला साहब उस्सको मैसेज कर कर के पूछे के वो कहाँ है, घर पर क्यों नहीं है? किआ अब एक कोल्ड वॉर चलने लगा था उसस्के और सान्वी के बीच?

एक hi तरीका था जान्ने के लिए के सान्वी कहाँ है विवान को फ़ोन किया चावला साहब ने और पूछा के सान्वी और दीप्ति कहाँ गए हैं. मगर विवान ने कहा के उस्सको नहीं पता सुंभा जब वो निकले तो दोनों घर पर hi थे, तो विवान ने कहा के वो बिजी है उनको खुद सान्वी को फ़ोन करके पूछने को कहा यह कहकर के शायद मॉल गयी होगी कुछ खरीदने को.

चावला साहब ने सान्वी को कोई फ़ोन नहीं किया बुसस घर में बैठे उस्का वेट किया.,, और एक पेग व्हिस्की का बनाया, टीवी ों किया और एक डाक्यूमेंट्री देखने लगे नेशनल जियोग्राफिक चैनल पर. एक से दो, दो से तीन पेग व्हिस्की हो गया और 12 बज गए मगर सान्वी का पता नहीं था. हाथ में मोबाइल लिया और सान्वी के सभी मेस्सगेस को फिर से पढ़ा चावला साहब ने…. थोड़ा नशा होने लगा और अब फ़िक्र भी करने लगा के सान्वी रात भर सोई नहीं है तो बची के साथ किधर होगी?! सेक्स के बारे में भी फिर सोचने लगे और खुद से कहा, और अगर सान्वी इस वक़्त किसी और के बाहों में होगी ेश करते हुए तो??!! यह सोच कर उस्सको झटका जैसे लगा और सोचने लगे के अगर संजना की तरह वो भी कस्सी से मुंह मरवाती होगी तो? अगर उस्सको भी दो दो मर्दों के बीच पाया गया तो?

अब चावला साहब व्हिस्की का गिलास हाथ में लिए, सिप करते हुए फिर से सान्वी के कमरे में गए ऊपर. अब वो यह देखना चाहते थे के सान्वी ने कौन सा ड्रेस पहनकर बाहर गयी हुई है.

उनको सान्वी के सभी ड्रेसेस का पता tha….usski एक एक ड्रेस को पहचाते थे चावला साहब… और उन् में से कई ड्रेस उस्सने खुद ख़रीदे थे सान्वी के लिए साडी से लेकर सलवार कमीज़ और ड्रेसेस भी….. जीन और पैन्ट्स और टॉप्स भी….

तो सान्वी के वार्डरॉब को खोला चावला साहब ने और एक एक करके उसस्के ड्रेसेस को देखने lage….aur उस्सको पता चल गया के एक जीन्स और एक टॉप मिसिंग है मतलब सान्वी उस में ड्रेस होकर बाहर गयी है…. और वो टॉप और जीन्स खुद चावला साहब ने ख़रीदे थे उसस्के लिए.

फिर चावला साहब वापस गए टीवी के सामने अपने ड्रिंक सिप करते हुए और वेट करने लगे संवी की मगर नाह उस्सको कॉल किया नाह hi मेस्सगेस भेजे ये जान्ने के लिए वो किधर है.

दिन के 1 बजे चावला साहब के मैसेज वाली रिंगटोन बजे. जब देखा तो सान्वी की मेसज थी, तो जल्दी से देखा, लिखा था,

“आप घर वापस आगये या अभी भी बाहर हो?”

चावला साहब को ग़ुस्सा आया और बड़बड़ाया, “साली यह तो बता के तू कहाँ मुंह मारा रही है!!” और उस्सने मोबाइल को काउच पर फेंक कर वापस टीवी देखने लगे…. रिप्लाई नहीं किया……

फिर कुछ देर बाद मैसेज आयी, लिखा था, “मैं अभी विवान के पास हूँ ऑफिस में, मॉल गयी थी और दीप्ति को खूब घुमाया अब यहाँ से कोई ड्राइवर हमें घर चौररने आएगा थोड़ी देर में! अगर आप को भूक लगे तो खाना रेडी है, आप माइक्रो वेव में हीट करके खा लीजिये, हम बुसस एते हैं! – मुझे बड़ी भूक लगी है (स्माइली था एन्ड में)

चावला साहब ने ज़ोर से कहा, “नहीं खता मैं, मुझे और पीना है, तू आएगी तो बात भी नहीं करूँगा तुमसे, तेरे हाथ से खाना भी नहीं खाऊंगा, करले जो करना है….. मुझको यारो माफ़ करना मैं नशे में होओओओओओओ किआ? मैं नशे में हूवूँन” अमिताभ की आवाज़ में यह गुनगुनाते हुए चावला साहब व्हिस्की का बोतल और अपने गिलास लिए टीवी ऑफ करके अपने कमरे में चले गए…..

तो बे कॉन्टिनोएड………….(2960 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 70 सान्वी रिटर्न्स होम

चावला साहब अपने कमरे में पी कर बिल्कुल तुन हो गए थे. पथ के बल अपने बीएड पर पड़ा हुआ था और खर्राटे की आवाज़ सुनाई दे रहे थे. एहि देखा सान्वी ने उनके कमरे में जाने के बाद.

सान्वी जब आयी तो गेराज में उनके कार देख कर खुश हुई के वो वापस आगये हैं और सोचा के अंदर जाकर उनको खूब सुनाएगी के क्यों घर वापस नहीं आये कल रात और क्यों एक भी मैसेज को नहीं रिप्लाई किया और मोबाइल को क्यों ऑफ किया हुआ था, मगर अब चावला साहब को उस हाल में देख कर किआ करती भला? दीप्ति को लेकर गयी थी उन् से मिलाने को और दीप्ति पूछती रही, “मां दादू बिमाल है, वो को लाए है?”

संजना ने दीप्ति को निचे उतरा और चावला साहब को सीधा किया बीएड पर और उनको सुला दिया और कमरे से निकल गयी व्हिस्की के बोतल और गिलास लेकर. सान्वी ने खुद से कहा, “सोना मुझे चाहिए था और जनाब यहाँ सोये हुए हैं घोड़े बेचके… आखिर इनको हो किआ गया है इतने क्यों पी रहे हैं आज कल ये? थे कहाँ ये रात भर यह भी नहीं बताया मुझे, अब खाना वन खाया के नहीं पता नहीं, अरे अगर कुछ नहीं खाया होगा तो इनके बप फिर से लौ हो जाएगा…. वापस उनको देखना पड़ेगा मुझे……”

संवी ने दीप्ति को गेम दिया खेलने के लिए और वापस गयी चावला साहब के कमरे में और उनको उठाने की कोशिश किये उनको हिलाते हुए और फुँकारते हुए, “पिता जी, उठिये किआ आप ने कुछ खाया या नहीं? आप की बप लौ हो जाएगी अगर नहीं खाया तो कुछ खा लीजिये फिर सो जाना… उठिये bhi!!”nSaanvi उनको अपने हाथों से ऊपर उठाने की कोशिश कर रही थी तो चावला साहब बेखुदी की हालत में लड़खड़ाते जुबां में कहा, “संजना, संजना तुम mujhe…hmmm ीरर्र हम्म्म्म!” यह सुनकर सान्वी ने उनको वापस बीएड पर कर दिया और सोचने लगी के ये संजना का नाम क्यों ले रहे हैं? इस्सके मतलब साफ़ है के ये रात भर वहीँ ठहरे थे, मैं अब किआ करूँ? संजना का फ़ोन नंबर होंगे इनके पास मैं उसी को फ़ोन करके पता करती हूँ…..”

सान्वी ने चावला साहब का फ़ोन लिया जो उनके टेबल पर थे, हमेशा से वो कभी भी उनके फ़ोन लेती है और उसे भी करती है मगर आज सान्वी दांग रह गयी यह देख कर के उंनका मोबाइल अनलॉक hi नहीं हो रहे थे थे और फिंगरप्रिंट रिक्वेस्ट कर रहे थे, तो संजना ने सोचा कब से यह फिंगरप्रिंट से अनलॉक करते हैं मोबाइल को…. सान्वी सोचती रही के अब किआ करे फिर सोचा के अभी के अभी उनके फिंगर प्रिंट से hi अनलॉक कर सकते हैं मोबाइल को… तो सान्वी ने चावला साहब की एक ऊँगली पाकर के सेंसर पर रखा पर नहीं अनलॉक हुआ फिर दूसरा ऊँगली फिर तीसरा फिर अंगूठा किसी से भी नहीं अनलॉक हो रहे थे…. अस्सल में सान्वी उनके ऊँगली को उस पोजीशन में नहीं लगा रहे थे जैसे चावला साहब लगते हैं सेंसर को डिटेक्ट करने के लिए…. तो सान्वी ने मोबाइल वापस रखा और फिर निकल गए उनके कमरे से….

क्यूंकि सान्वी रात भर सोई नहीं थी वो अपनी बीएड पर लेते हुए सोच रही थी के क्यों चावला साहब संजना का नाम ले रहे थे नींद में, किआ इतना लगाओ हो गया है उनको संजना से के नींद में उस्का नाम ले रहे hein…..deepti भी बीएड पर आगयी अपने माँ के पास और दोनों माँ बेटी को नींद यह गए….. सान्वी तो बिल्कुल नहीं सोई थी रात भर तो नींद आना लाज़मी था……

पुरे 4 घंटे सोई सान्वी, बिना करवट बदले एक hi नींद में सोती रही वो तो दीप्ति जाग कर गेम्स खेलने लगी और गेम की साउंड ने सान्वी को जगा दिया शाम के 5 बज चुके थे.

संजना जल्दी से चावला साहब के कमरे में गयी तो वो वैसे hi बीएड पर पड़े हुए थे जैसे बेहोश हैं… सान्वी ने उनको हिल्ला कर झटके दे देकर उठाया….. चावला साहब ेंखें खोले, सान्वी ने उंनसे पूछा के “आप ने कुछ खाया है के नहीं?” उन्हों ने ेंखें खोले, सान्वी को देखा, अपने ेंखों को मस्ला और बिना कुछ कहे उठकर टॉयलेट चले गए….

सान्वी उनके बीएड पर बैठी रही उंनका वेट करते. जब वो वापस आये तो सान्वी खड़े होकर उनके तरफ बढ़ते हुए कहा, “ोफो पापा जी आप क्यों इतना पीने लगे हो आज कल, कुछ खाया भी नहीं चलिए खाना लगाती हूँ आप का बप लौ हुआ था याद है नाह, आइये मैं खाना पड़ोसती हूँ.”

मगर चावला साहब वापस बीएड पर लेट गए बिना कुछ कहे. उंनका सर दर्द कर रहा था मगर सान्वी से कुछ नहीं कहा. सान्वी निकलते हुए दरवाज़े तक जा चुकी थी यह सोचते हुए के चावला साहब उसस्के पीछे आरहे हैं, मगर मुड़के देखा तो पाया के वो लेते हुए हैं बीएड पर, तो सान्वी वापस उनके पास गयी और पूछा, “अरे किआ हुआ? नहीं खाना है किआ?” तो चावला साहब ने नाह में सर हिलाया और हाथ के इशारे से सान्वी को बाहर जाने को कहा दरवाज़े के तरफ दिखाते हुए.

पहले पिछले पांच सैलून में कभी भी ऐसा नहीं हुआ था के चावला साहब ने सान्वी की अपने कमरे से बाहर जाने को कहा हो, वो भी दरवाज़ा दिखते हुए, सान्वी को झटका लगा और उस्का दिल ज़ोर से धड़का और वो चुप चाप वहां से निकल गयी….. बाहर एते एते सान्वी के ेंखों से दो बूंद इन्सस्सों के टपके मगर बिना कुछ कहे वो किचन में चली गयी…. खुद बी कुछ नहीं खाया था और बहोत भूक लगी थी उससे भी मगर जो हुआ उस से उस्का जैसे पथ भर गया और वो काम काज में लग गयी.

उधर चावला साहब कमरे से बाहर निकले और अपना व्हिस्की के बोतल ढूंढ़ने लगे, सान्वी उस्सको वापस ड्रावर पर रख दिया था…. जहांसे चावला साहब ने गिलास लिया पीने के लिए वहां सान्वी को दिख रहे थे के वो फिर से पीने जा रहे हैं, तो जल्दी से उनके पास आयी और उनके हाथ से गिलास छीन लिया और कहा, “बहोत हुआ, अब आप नहीं पिएंगे, खाना है तो खाइये वार्ना जाकर टीवी देखिये पीना नहीं है!”

चावला साहब ने जैसे उस्सको दिखाते हुए बोतल हाथ में लेकर टीवी ों करके बोतल से hi पीने लगे…..

सान्वी उनके पास गए, और कहा, “किआ हो किआ गया है आप को? क्यों पी रहे हो इतना, कोई प्रॉब्लम है किआ? कल रात आप कहाँ ठहरे थे? संजना के यहाँ नाह? क्यों? वापस क्यों घर नहीं आये? कितनी साड़ी बातें करनी है आप से कितने सारे जवाब देना है आप को मुझे, बताइये नाह आप क्यों नहीं आये थे वापस? कोई प्रॉब्लम हुआ किआ?”

चावला साहब ने टीवी का वॉल्यूम बहोत हाई किया और इशारे से सान्वी को जाने को कहा… तब तक दीप्ति ऊपर से स्तैर पर निचे उतारते हुए कहा, “दादू दादू और उन् के तरफ दौड़ती हुई गयी, और उस्सको चावला साहब ने गॉड में लेते हुए कहा, “हम्म किसी है मेरी गद्य हम्म? कहाँ गयी थी आज घूमने गयी थी बेबी?”

सान्वी को लगा के बरसों के बाद उनकी आवाज़ सुन रही है, और वो सर झुकाये हुए वहां से वापस किचन में चली गयी और सोचने लगी क्यों चावला साहब उस से बात तक नहीं कर रही है……

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
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