अपडेट 67 संजना विथ बोथ में
चावला साहब ने जोश में अपने बाहों को संजना के कमर में कस लिया और उस्सको छत्ते गए उस्सकी पंतय तक यहाँ तक के उस्सकी पंतय को भिगो दिया छाते हुए और संजना अपने पापा पर बैठे हुए hi दोनों टांगों को बिल्कुल फैला दिए और आनंद अपनी नज़रें निचे करके चावला साहब को अपनी बेटी को चाटते हुए देख रहे थे….
वो भी बहोत उत्तेजित हो गए थे और उस्सने संजना को गॉड से सोफे पर कर दिया और अपने लिंग को पंत से बाहर निकला, जिस को संजना ने तुरंत हाथ में लेकर सहलाने लगी चावला साहब के तरफ देखते हुए…. चावला साहब ने उस्सको चाटना बांध किया और देखने लगे के संजना अब अपने बाप की लिंग के साथ किआ करती है… तब तक वो गिलास में व्हिस्की डालने गए आइस कुबेस के साथ दोनों पर नज़र जमाये हुए और वापस आये दोनों गिलास को व्हिशक्य के साथ लेकर, एक संजना के पास रखा उसस्के लिए और अपने गिलास को सिप करते हुए संजना की हरकतों को देखने लगे जो वो कर रही थी अपने पापा के लिंग के साथ…. चावला साहब को बहोत मैं कर रहा था के शूट करे उस एक्शन को अपने मोबाइल से मगर शायद आनंद नहीं पसंद करता इस लिए नहीं शूट किया और देखते रहे एक वोयर की तरह, अदमीरे कर रहे थे बाप बेटी के इस ईन्सेस्तुओस रिश्ते और एनकाउंटर ko….wo बहोत hi उत्तेजित हो चुके थे और उंनका लिंग जैसे पंत से बाहर निकलने वाले थे, वो एक हाथ से अपने लिंग को सहलाते हुए आनंद के तरफ देखा, तो आनंद ने उस्सको इशारे से लिंग को बाहर निकालने को कहा…. तब तक संजना झुक गयी अपने पापा के लिंग पर और जीब निकाल कर उस के लिंग का ऊपरी हिस्से को छाता, गोआल गोआल जीब को घुमाया लिंग की चढ़ के ऊपर जिस से आनंद की आह निकली, और संजना ने लिंग को मुंह में ले लिया नज़रों को चावला साहब पर किये हुए……
चावला साहब खड़े होकर देखते हुए अपना व्हिस्की को फिर एक hi घूंट में निंगाल गया और जल्दी से एक दूसरा बना कर वापस आया, और संजना के पास निचे बैठ कर उस्सकी निघ्त्य को कमर तक उठाया उस्सने और उस्सकी गांड को छाता चावला साहब ने फिर धीरे से उस्सकी पंतय को निचे खिस्काया, मगर संजना ने धीमी आवाज़ में कहा, “हम्म नहीं अभी मत उतारो, अभी टाइम नहीं हुआ उसस्के लिए….” और वापस अपने पापा की लुंड चुस्सने लगी….. आनंद ने फिर इशारे से चावला साहब को अपने लिंग को बाहर निकालने को कहा, तो अब चावला साहब ने अपने पंत उतारे और बॉक्सर को थोड़ा निचे करके अपने लिंग को सनजनके मुंह के पास किया… संजना मुस्कुराते हुए उनके देखा और फिर अपने पापा के चेहरे में देखा जिसस्ने संजना से कहा, “लेलो नाह, उनको भी तो खुश karo…do दो मिल गए आज तुमको मेरी गद्य दो एक साथ मज़े लूटलो अब बेबी!!”
तो संजना एक हाथ से अपने पापा के भीगे हुए लुंड पर हाट चला रही थी और दूसरे हाथ से चावला साहब के लिंग को लिया और सहलाते हुए उनके चेहरे में सर उठा कर देखा फिर जीब घुमाया उनके लिंग पर बिल्कुल उसी तरह जिस तरह अपने पापा के लिंग पर किया था फिर उस्सको अपने मुंह में ले लिया एक हाथ से अपने पापा के लिंग पर हाथ चलाते हुए… इधर चावला साहब को चूस रही थी उधर आनंद के लिंग पर हाथ चलाती जा रही थी……
फिर कुछ देर बाद संजना ने अपने व्हिस्की का गिलास लेकर एक सिप लिया और थोड़ा सा व्हिस्की चावला साहब के लिंग पर चिररका और व्हिस्की को लिंग समेत चुस्सने लगी…. मतलब लिंग से व्हिस्की पी रही थी!!
उस तरफ आनंद अपने कमर हिलाते हुए संजना के मुठी में अपने लिंग को जैसे ढाका देते हुए संजना की मुठी को अपने एक हाथ में दबा कर चला रहे थे…. जैसे संजना के मुठी को छोड़ रहा था आनंद…
संजना फिर रुकी, अपने गिलास को ख़तम किया और इस बार चावला साहब के लिंग को हाथ में लिए मुठी बंद करके हाथ चालते हुए और अपने पापा को लिंग को मुंह में लिया चुस्सने को… तब चावला साहब झुके संजना के मुंह को अपने मुंह में लेने को, तो संजना अपने पापा के लिंग को चोरर कर चावला साहब के जीब को मुंह में लिया और किश करते हुए संजना कड़ी हो गयी, और अपने बाहों को चावला साहब के कांधों पर करके, अपने दोनों टांगों को फैला कर चावला साहब के ऊपर दोनों तरफ टांगों को उनके कमर पर कसके लटक गयी और पीछे से उसस्के पापा के संजना के गांड पर अपने लिंग को दबाया पंतय के ऊपर hi थोड़ा रगड़ते हुए…. मतलब अब संजना बीच में थी और दो मर्द दोनों तरफ उसस्के आगे और पीछे खड़े पोजीशन में….
चावला साहब संजना को लेकर चलने लगे उस्सकी बैडरूम के तरफ किश को जारी रखते हुए और संजना को उस्सकी बीएड पर पटका चावला शब् ने, पीछे से आनंद आये. और बीएड क ीक तरफ से चावला साहब गए और दूसरी तरफ से आनंद आये बीएड पर…. तो संजना अब दोनों को देखते हुए मुस्कुराते हुए कहा, “अरे पिज़्ज़ा नहीं खाया अभी तक किसी ने भी, चलो पझले खाते हैं नाह?!
उसस्के पापा ने अपने लुंड को उसस्के मुंह के तरफ करते हुए कहा, आज इस पिज़ा को खाओ नाह, दो दो पिज़्ज़ा है खाने को तुम्हें आज गद्य!!”
और चावला साहब ने कहा, “आरी अभी तो पूरी रात बाकी है, पहले यह कर लें उसस्के बाद डिनर करेंगे बेबी!”
संजना ने नखरे वाली आवाज़ में कहा, “हम्म मुझे नींद आजाएगी यह करने के बाद नाह?!”
आनंद ने कहा, “मैं तुमको जगा दूंगा नाह खाने के टाइम पर!”
संजना ने कहा, “मगर मैं सोऊंगी नाह मेरे बीएड पर?”
तो चावला साहब ने कहा, “आज हम तीनों साथ सोयेंगे बेबी,” संजना तब अपने पापा के तरफ मूढ़ कर कहा, “सच पापा?”
आनंद ने कहा, “बिल्कुल सच गद्य आज पहली बार तुम दो आदमियों के साथ सोवोगी क्यों खुश नहीं हो?”
संजना बहोत खुश होते हुए कहा, “थैंक यू पापा बहोत बहोत hi खुश हूँ क्यों खुश नहीं हूँगी जब दोनों जिस से मैं प्यार करती हूँ एग्री करते हैं तो मुझे क्यों ख़ुशी नहीं होगी, मैं एहि तो चाहती थी नाह मगर सोचा था के आप दोनों पता नहीं राज़ी होंगे के नहीं अब मुझे बहोत ख़ुशी हुई यह देख कर के आप दोनों बिल्कुल राज़ी हो मुझे एक साथ लेने में…. इतस okay एंड फाइन ी ऍम वैरी हैप्पी.”
तो चावला साहब ने अपने सारे कपडे उतारे और आनंद ने भी…. संजना बीएड पर लेते दोनों को नंगे होते देख रही थी, मगर वो अपनी निघ्त्य में hi थी वेट कर रही थी के दोनों मिलकर उस्सको नंगा करें….
और उसस्के पापा उसस्के राइट साइड में बीएड पर गए और चावला साहब संजना के लेफ्ट में, दोनों मर्द बिल्कुल नंगे, लिंग बिल्कुल तन्ने हुए फनफनाते हुए दिख रहे थे संजना को, वो अपनी पीठ पर लेती थी और वेट कर रही थी, थोड़ा हल्का सा नशा हुआ था व्हिस्की पिने से और संजना अपने होंठों पर जीब फरते हुए चावला सजब को एक ेंख मारते हुए उनको अपनी जीब से चेर्रा और धीरे से कहा, “हम्म्म मुझे बाहों में भरलो अपने”…. और फिर मुड़कर अपने पापा से कहा, “पापा आप भी मुझको भरलो बाहों में मेरे पीठ के तरफ से मैं दोनों को अपने जिस्म पर फील करना चाहती हूँ ह्म्म्मम्म टेक में बोथ ऑफ़ यू पलेआएएससससससीई”
चावला साहब तो अपने लिंग को उसस्के मुंह के पास लेजा रहे थे पर क्यूंकि संजना खुद को उन् के बाहों में पाना चाहती थी तो चावला साहब लेट गए बीएड पर संजना के बगल में और उस्सको अपने बाहों में लिया और वैसे hi दूसरे तरफ से आनंद ने भी बीएड पर होकर संजना को उसस्के पीठ से बाहों में भरा, तो चावला और आनंद के बाहें एक दूसरे के बाहों से रागढ रहे थे…. और संजना दोनों मर्दों के बीच बीएड पर एक करवट में उन् दोनों ने बीच में थी… संजना के बाहें चावला साहब के जिस्म से लिपटे हुए थे, जिस दौरान चावला साहब का तन्ना हुआ लुंड संजना के ठीक योनि पर दबे हुए थे और पीछे आनंद का लिंग संजना के नितम्बों पर दबा हुआ था और संजना ने ेंखें बांध कर लिए दोनों को एक साथ फील करते हुए ज़ोर से चावला साहब को बाहों में भरके…..
और कुछ लम्हों के बाद चावला साहब ने संजना के मुंह को अपने मुंह में लेकर उस्सकी जीब चुस्सने लगे जबकि पीछे से आनंद ने संजना का निघ्त्य ऊपर उठाते हुए उस्सकी पंतय को थोड़ा निचे किया उसस्के जाँघों पर और अपने लुंड को उस्सकी चुतरों के बीच दबा कर हलके हलके रगड़ने लगा….. संजना चावला साहब को किश करते हुए, अपने नितम्बों को अपने पापा के तरफ पैरों को मोड़ कर पोजीशन दिया ताके उसस्के पापा को अच्छा पोजीशन मिले रगड़ने को, उस तरह से संजना के टाँगें आधा मोड हुए थे जिस से चावला साहब आगे के तरफ अपने लिंग को उसस्के घुटनों पर दबे हुए फील किये… फिर किश को बरकरार रखते हुए चावला साहब ने संजना की निघ्त्य की पतली सी स्ट्राप को धीरे धीरे काँधे से निचे किया उसस्के बाहों पर और हलके हलके संजना के बाहों से होते हुए स्ट्राप को बिल्कुल निकल दिया और तुरंत निघ्त्य को निचे के तरफ से खिंचा निकलने को जिस्सको आनंद ने बाहर निकालने में हेल्प किया पीछे से….. उसस्के बाद संजना ने अपने बूब्स को चावला साहब के छाती पर दबा कर रगड़ा जैसे उस्सको उस रागढ से बहोत अच्छा फील हो रहे थे, और अपने बाहों में चावला साहब को ज़्यादा ज़ोर से जकरा और उनके जीब को और भी ज़्यादा जोश से चुस्सने लगी….. पीछे से आनंद ने अब संजना की पंतय को बिल्कुल निचे किया उस्सकी घुटनों से भी ज़्यादा निचे, और संजना ने खुद एक तंग उठाया जिस से उसस्के पापा को आसानी हुई पंतय को बिल्कुल बाहर निकाल फेंकने की….. आनंद संजना के गले पर पीछे दांत दबाते हुए उस्सको चूस रहे थे अपने लिंग को उस्सकी जाँघों के बीच ो बीच रगड़ते हुए और आनंद ने एक हाथ संजना के चुतरों से होकर उस्सकी योनि तक लगाया और अपने उँगलियों को उस्सकी छूट पर मसलने लगा, योनि बिल्कुल hi गीली हो गयी थी और आनंद ने अपने ऊँगली को मुंह में दाल कर चूसा फिर दोबारा उँगलियों को उस्सकी छूट पर रगड़ा और इस बार उन् भीगे हुए उँगलियों को चावला और संजना के मुंह के बीच किया, वह दोनों तो किश करे रहे थे, मगर चावला साहब को सब पता था के आनंद किआ कर रहा है, तो उस्सने आनंद के ऊँगली से संजना का रस चूसा और उस रस को खुद संजना के मुंह में डाला किश को जारी रखते हुए…..
मतलब हुआ यह के आनंद ने अपनी बेटी का रस निकाल कर चावला साहब के मुंह में डाला जिस्सको चावला साहब ने वापस संजना के मुंह में डाला उसी के रस को…. और फिर तब आनंद ने खुद अपने उँगलियों को संजना के मुंह में डाला उससे खुद की रस चुस्सने के लिए… वो भी संजना को पता था चुस्सने से पहले के उसी का रस है जो उसस्के पापा ने उसस्के योनि से निकल कर उसस्के मुंह में डाला…..
संजना थोड़ा सा हांफने लगी थी और एक जोश सा दिख रहा यह उस में, उस्सने अपने गर्दन मोड़ कर अपने पापा के मुंह को अपने मुंह में लिया और अब उस्का जीब चुस्सने लगी जबकि इस बार चावला साहब ने उस्सकी छूट पर हाथ फेर्रा, उँगलियों को उसस्के अंदर डाला और उस्का रस निकला और अब उस्सने संजना और आनंद के मुंह में डाला जब वह किश कर रहे थे, और दोनों बाप बेटी किश करते हुए hi उस रस को जीब में लिए और एक दूसरे के मुंह में डाले और जीब चुस्सने लगे…. यह करते वक़्त चावला साहब दोनों बाप बेटी को ख़ुशी भरे नज़रों से देख रहा था…. कितना अपनापन और प्यार था उन् दोनों के बीच जैसे बिल्कुल पति और पत्नी थे वह दोनों…..
संजना की सिसकारियां निकलने लगे थे, क्यूंकि अब चावला साहब का लिंग उस्सकी योनि की पंखुरियों के बीच रगड़ने लगे थे, क्यूंकि गीली थी वहां तो आसानी से फिसलते हुए रगड़ते जा रहे थे ज़ोर से दबाते हुए और पीछे आनंद का लिंग उसस्के नितम्बों के बीच रागढ रहे थे और एकांत बार तो ऐसा हुआ के आनंद और चावला साहब, दोनों के लुंड एक दूसरे से टकराये संजना के जाँघों के बीच से होते हुए….
और चावला साहब ने घुर्राटे हुए पूछा, “कौन निचे लेगा और कौन ऊपर जाएगा?” तो नशीली ेंखों से संजना ने अपने पापा को देखा, और आनंद ने चावला साहब को देखा, तो धीमी सी तड़पती आवाज़ में संजना ने कहा, “पापा आप तो पीछे सालों से लेते आये हो, तो आप आगे लेलो और चावला साहब को पीछे लेने दो क्यों ठीक है नाह पापा?” आनंद ने भी नशीले हालत में कहा के ठीक है जैसा वो चाहे….
तो झट से संजना एप पापा को पीठ पर करके उन् के ऊपर चढ़ गयी अपने दोनों टांगों के फैलाते हुए, और बिना टाइम गंवाए हुए आनंद ने अपना लिंग संजना के अंदर थुश दिया….. चावला साहब ने कुछ पल दोनों को उस पोजीशन में देखा, संजना की आहें तड़पती हुई निकल रहे थे और उस्सकी आवाज़ आने लगे थे कुछ इस तरह से, “हम्म्म्म आअह्ह्ह हा स्स्स्सह्ह्हस्सस्स आआह्ह पापा ऊऊफफफफ फफफफफफफफ स्स्स्सह्ह्हह्ह” संजना को उस तरह से तड़पते हुए देख और सुनकर चावला साहब को बड़ा मज़ा ारः था, और उन्हों ने देखा किश तरह से संजना ने अपने पैरों को मोड़ कर खुद अपनी गांड हिलाते हुए अपने पापा का लुंड अपने अंदर बाहर किये जा रही थी और एक नज़र चावला साहब को भी देखि जा रही थी उसी नशीले ेंखों से…..
चावला साहब से रहा नाह गया और वो उन् दोनों के ऊपर चढ़ा, संजना के गांड पर हलके से थपड मारा और वो जगह लाल हो गया जहाँ उन्हों ने थपड मारा, और चावला साहब ने अपने लिंग को संजना के गांड के छेड़ में थोड़ा सात हुक लगाके ठुस्सा और थोड़ा ज़ोर लगाके अंदर घुसेड़ दिया खुद “आआअह्ह्ह्ह” करते हुए और संजना की चीख निकली “uuuuuuiiiiiiiiiii मम्माआआ आआआआह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ पापा दो दो मेरे अंदर हैं ओह माय गूऊऊडड़डडडडड!!! Aaaaaaaaaahhhhhh,” चावला साहब ने ढाका देना शुरू किया उस्सकी गांड में और निचे से आनंद ढाका दे रहा था उस्सकी छूट में, दोनों मर्द दोनों तरफ से ज़ोरों से ढके देने लगे और संजना कहाँणररते हुए तड़पती आवाज़ में हांफते हुए “आआअह्ह्ह्हह उउउउउइइइइइइइ माआआआ उफ्फ्फफ्फ्फ़ स्स्स्सस्स्स्शशशशश आआह आआह यह यह यह यह हां हआ…. होऊ!!!”
संजना सिसकने लगी थी और दो बार झाड़ गयी थी उसी दौरान मगर कुछ नहीं बोल रही थी क्यों के उस्सको लगता था वो इस दुन्या में नहीं है एक अजीब सी फीलिंग हो रही थी जैसे किसी बड़े ड्रग को लिया हुआ है, जैसे ऑपरेशन करने से पहले अनेस्तेसिअ की इंजेक्शन दिया जाता है तो कैसा फील होता है उस वक़्त संजना उस हालत में थी जैसे 100% किसी नशीली चीज़ लिया है उस्सने….. होश ो हवाज़ नहीं थी इतना मज़ा आया उस्सको के दुन्या से दूर किसी जन्नत जैसी जगह में खुद को पाया संजना ने उन् दो मर्दों के बीच…
संजना को उस तरह से कहाणररते और चिलाते हुए देख कर दोनों मर्द एक साथ झड़े… दोनों ने अपने अपने लिंग को एक साथ निकाले बाहर और एक ने संजना के गांड को भिगोया अपने पानी से और आनंद जो निचे था उसस्के वीर्य खुद उसस्के पथ पर गिर्रा जिस्सको संजना ने अपने पथ से दबा कर अपने पापा पर जैसे बेहोश hi होगयी हांफते हुए…
तीनों हांफ रहे थे, संजना बीच में थी, दो मर्दों के बीच… उसस्के बूब्स को किसी को टाइम hi नहीं मिला छूने को, दोनों बूब उसस्के पापा के छाती पर दबे हुए थे जैसे कुचल रहे थे आनंद के छाती पर, संजना के ऊपर चावला साहब ने अपने वज़न से दबाया हुआ था उस्सको, संजना दोनों के बीच जैसे कुचलती जा रही थी….
और आखिर में चावला साहब एक तरफ हुए और पीठ के बल बीएड पर लेट गया हांफते हुए और संजना भी उसस्के बाद अपने पापा पर से उठी और वो भी पीठ के बल लेती हांफते हुए hi… और आनंद छत ताकते हुए हंससने लगा धीरे धीरे, उस्सको सुन कर चावला साहब भी हंससने लगे तब उन् दोनों को देख कर संजना भी हंससने lagi…kaafi देर तक तीनों ज़ोर ज़ोर से हँस्ते रहे ख़ुशी के मारे….. क्यों हंस रहे थे किसी को पता नहीं था, ऐसा एक इमोशन हुआ के खुद बा खुद हंसी आयी थी…..
तो बे कॉन्टिनोएड…………… (5120 वर्ड्स फ्रॉम आल थ्री उपदटेस)