Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 10 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

ी रोट थी तवो उपदटेस इन 50 मिनट्स ओनली फॉर यू डिअर रीडर्स ऑफ़ थिस स्टोरी

अपडेट 87 संजना कॉन्टिनुएस

संजना उनके लिंग को हाथ में लिए सहलाती जा रही थी और उंनसे कहा, “देखो रघु के बारे में बताया तो आप का कितना मोटा हो गया यह शैतान, हम्म्म किआ अब ये तैयार है?”

चावला साहब ने कहा, “थोड़ा और सुनाओ नाह तब तक ज़रूर तैयार हो जाएगा अभी रेडी नहीं हुआ है यह”

तो संजना ने कहा, “okay तो उस दिन के बारे में बताऊँ जिस दिन आप दरवाज़ा खटखटा रहे थे और मैं ने लेट आकर खोला था?”

चावला: “कौन था अंदर? रघु hi?”

संजना ने हां में सर हिलाया तो चावला साहब ने पूछा, “तो वो कैसे निकला था पीछे से? बाहर जाने का तो रास्ता नहीं है उस्सको तो घरके अंदर से होकर जाना था?”

संजना ने कहा, “मैं ने उस्सको बोल दिया था के टॉयलेट में छुपे रहे मगर वो पीछे चला गया था मैं ने उस्सको समझाया था के जब मैं आप को बाहों में भरके किश करूँ तब वो घर के अंदर से hi मैं दूर से आहिस्ते से निकल जाए और उस्सने वही किया था, मैं ने आप को उस तरफ आप के पीठ करके किश कर रही थी और उस्सको निकलने का इशारा किया था, ी ऍम सॉरी!”

चावला साहब ने कहा, “इस मैकन सॉरी क्यों कहना है तुमने अच्छी तरह से अपना बचाव किया था इतस okay माय डिअर. मुझे पता भी नहीं चला था के कोई अंदर से बाहर निकला घर से सो यू वेरे सक्सेसफुल… मतलब तुम डिफिकल्ट सीटुएशन्स को अच्छी तरह से हैंडल कर सकती हो, मुझे तो ख़ुशी है के तुम इतना होशियार हो और संभाल लिया उतना डिफिकल्ट सिचुएशन उस दिन!”

फिर चावला साहब ने कहा, “मुझे अब उन् 7 में से किसी एक दूसरे के बारे में बताओ, वो kau,n है और कैसे स्टार्ट हुआ उसस्के साथ तेरा अफेयर?”

तो संजना ने कहा, “okay सुनती हूँ, हाँ तो वो मुख्या चाचा का भतीजा याद है आप को मोटरसाइकिल वाला जो जानवर पालता है और बहोत ज़मीन है उसस्के पूर्वजों के?”

चावला साहब ने कहा, “हाँ तेरे पापा का साथी शराबी है जो हाँ याद है तो वो तेरा दूसरा एनकाउंटर था? हाहाहा सब शराबी कबाबी hi मिलता है तुझे किआ, ok ok बोल कैसे उस से पहली बार किया सब डिटेल में बता मुझे ी ऍम एक्ससिटेड तो क्नोव स्वीटहार्ट.”

संजना ने उनके लिंग को चूमा और छठा फिर बोलना शुरू किया…..

“जीन डिवॉन मैं कॉलेज जाती थी और वो मोटरसाइकिल पर मुझसे फ़्लर्ट करता रहता था, तो वो अकेला था जो मोटरसाइकिल पर मुझको शाम को स्कूल छूटने के बाद भी कॉलेज के पास शहर में अत था. गाओं से और कोई भी कभी नहीं अत थे मुझसे मिलने कॉलेज के पास सिर्फ वो अत था. हाँ सुबह को बस में मरे साथ कभी कभी कुछ गाओं के लड़के जाते थे मगर शाम के 3 बजे सिर्फ एक वही अत था मुझको देखने और मिलने और फ़्लर्ट करने…. उस्का नाम अजीब है, उस्सको चुंगल बुलाते हैं पता नहीं क्यों, उस्का असली नाम तो पता नहीं मुझे. हाँ तो वो जब मोटरसाइकिल पर अत तो मेरे सहेली लोग मुझको चेररते थे के ‘देख तेरा आशिक आगया, जा उसस्के फटफटिया पर तुझको घुमाएगा और तेरा दबाएगा….’ मगर मैं उस से सिर्फ बात करती थी क्यूंकि गाओं वाला था. बस कोई 15 मिनट के वेट करने के बाद मिलता था हमको तो उन् 15 मिनट तक वो मुझसे चेरर चार किया करता था, और वो साला मेरे एक दोस्त पर भी डोरे डालता था, मगर मुझसे ज़्यादा इंटरेस्टेड था… 1 महीने तक लगातार आया वो मुझसे मिलने शाम को और कहा के किसी को गाओं में पता मत चलने देना, नाह रघु को नाह बाकी के दोस्तों को… मुजेहः लगा था के उस्का शर्त लगा था उन् सब से के वो मुझको सब से पहले पा लेगा, ऐसा मैं सोचती थी.

अब वो हर बार मुझसे कहता के उसस्के साथ उसस्के m.cycle पर वापस चलूँ बुसस में नहीं. मैं इंकार करती हर बार , मेरे सहेलियां भी मुझको उसस्के साथ जाने को कहते मगर मैं नहीं जाती थी.

फिर रघु ने जब मेरे साथ कर लिया तब उसस्के एक महीने बाद चुंगल तो बराबर अत रहा मुझसे मिलने शाम को, मगर उस्सने तब मुझको छूना शुरू कर दिया था मेरे दोस्तों के सामने, हर जगह छूटा था, मेरे जांघ पर हाथ फरता तो कभी मेरे नितम्बों पर. मेरे सहेलियां कहती मुझको उसस्के साथ जाकर मज़ा करना चाहिए… मुझे तो सब पता था के मर्द लोग किआ करते हैं और कैसे करते हैं क्यूंकि मैं तो एक्सपेरिएंस्ड थी पापा से फिर अब रघु से, तो मुझे लगा के कहीं रघु ने उस चुंगल को कुछ बता तो नहीं दिया है?! तो यह जाने के लिए एक शाम को मैं उस के साथ गयी उसस्के फटफटिया पर. पहले मैं ने उस से ेपूछा के किधर चैलेंज, मैं उस पहाड़ी इलाके के तरफ नहीं जाना चाहती थी, और वो तो चारों तरफ मोटरसाइकिल पर घूमता रहता है तो उस्सको पता था किधर जाना है… मेरा यूनिफार्म तो बहोत छोटी थी तो उसस्के m.cycle पर बैठने से मेरे पुरे जांघें दिखने लगे और मेरे सहेलियों ने मुझे चिढ़ाया “hi सेक्सी” कहकर

वो मुझे किसी और रास्ते में लगाया और उस तरफ कोई भी नहीं दिख रहे थे, रास्ता बिल्कुल सुनसान था और दोनों तरफ जंगल ज्सीएस था… जाते वक़्त उस्का हाथ बार बार मेरे जाँघों को फेरर रहे the…ussne मुझको उसस्के पीठ पर चिपक कर बैठने को कहा टेक मेरे बूब्स उसस्के पीठ पर दबे और वो फील कर सके, मगर मैं ने दूरी रखे हुए थे नहीं चिपकी थी मैं उसस्के पीठ पर….

उस्सने एक कच्चे रास्ते में m.cycle घुमाया और थोड़ा अंदर जा कर रुका…. और मुझे उतरने को कहा और मेरा कॉलेज बैग को m.cycle पर तंग दिया और मेरा हाथ पाकर के एक झाडी के पीछे लगाया. मैं ने जाते वक़्त उस से पूछा, ‘किधर लेजा रहे हो मुझे, मुझे तुमसे एक बात पूछनी है इसी लिए तेरे साथ आयी हूँ….’

झाड़ के पास आकर रुका और बोलै, ‘किआ पूछना है तुझे मुझे तो तुझसे बहोत प्यार करनी है?’

मैं ने पूछा, ‘सच बता, रघु ने तुमसे किआ कहा मेरे बारे में?’

उस्सने कहा, ‘रघु ने? कुछ भी तो नहीं बुसस तुम्हारे बारे में बातें करते हैं हम सब और हम सब मिलकर कहते हैं के तुझ जैसे इस गाओं में कोई भी नहीं , हम सोचते हैं तू कैसे इस गाओं में पैदा हो गयी तुमको तो किसी राजा महाराजा कैग हर पैदा होना चाहिए थे, तू तो बिल्कुल मस्त हीरोइन टाइप है, एकदम मस्त मॉडल दिखती है, यह तेरा गोरा रंग, यह तेरा मस्त फिगर, तेरी मुस्कराहट, तेरी आवाज़, यह तेरी नशीले ेंखें तुझ में वो सब है जो किसी को भी दीवाना बना दे और कोई भी तुझको अपनाना चाहे…. क्यों तुम्हें किआ लगा किआ कहा होगा रघु ने मुझे तेरे बारे में?’

जब उस्सने यह सब कहा तो मैं बिल्कुल छुप हो गयीं और समझ गयी के रघु ने उस्सको कुछ भी नहीं बताया…. और वो अचानक से मेरे सामने घुटनों के बल आगया और मेरे कमर के और अपने बाहों फैलाके मुझको जाकर लिया और मेरे जाघों को चूमते हुए कहा, ‘ख़ास कर तेरी यह जांघें जो तुझको बेहद hi सेक्सी दिखाती है सिर्फ तेरे साथ सोने को मैं करता है तुझको साफ़ साफ़ लव्ज़ों में बोलूं तो तुझे छोड़ने को मैं करता हैउ, तू बहोत hi मस्त सेक्सी बेब है रे संजना तेरी यह छोटी सी यूनिफार्म में तू अपने जाँघों को हमको दिखा कर दीवाना बनती है तू; तुझको ख्यालों में लाकर हम सब मुठ मारते हैं हर रोज़, हर दिन , हर shaam…ab तो तू मेरे बाहों में है आज तो लुंड डायरेक्ट तेरे में डालूंगा main…kyun बोल नाह मजा करेगी मेरे साथ तू?’

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 


अपडेट 88 संजना विथ चुंगल

मैं अपने हाथों को उसस्के सर पर रख कर सपोर्ट की तरह खुद को गिरने से बचा रही थी और वो मेरे जाँघों को चूमता और अपने जीब से चाटता जा रहा था….. क्यूंकि उस्सने मेरे इतने तारीफ़ किया और क्यूंकि मैं ये सब पापा और रघु के साथ कर चुकी थी तो लगा के मुझे उस्सको एक चांस दे देना चाहिए क्यूंकि वो करीबन 2 महीनों से मेरे पीछे लगा हुआ था, मैं ने सोचा के एक बार चांस दे दूंगी तो मेरे पीछे आना बांध कर देगा…. तो मैं ने खुद को उसस्के हवाले किया मगर ऐसा बेहवे करती थी के मुझको वो सब पसंद नहीं है…

उस से मैं ने कहा, ‘नहीं चोर्रो मुझे मैं शोर मचाउंगी, किआ कर रहे हो यह ठीक नहीं है’

उस ने कहा, ‘कोई तेरी आवाज़ नहीं सुनेगा यहाँ यह मेरा अड्डा है यहाँ सिर्फ पेयर पौधे, झाड़ और परिंदे हैं यह सब तो तुझको देख कर सब खुद पागल हो गए हैं और तेरी बदन को देखना चाहते हैं चल यूनिफार्म उतार अब और अपनी अंदर कितना गोरापन छुपाती है दिखा तो, तुझको कच्चा चबा जाने को मैं कर रहा है ri…ahaha!!’

मैं उस के बाहों में कैद थी मगर अंदर अंदर मुझे अच्छा लगने लगा था जिस तरह से वो प्यार से मेरे जाँघों को चुम और चाट रहा था, धीरे धीरे वो ऊपर बढ़ता गया और उसस्के होंठ मेरे पंतय पर पड़े तो मैं सिहर सी गयी और उस्सने पंतय पर जीब चलाया और मैं बेखुद हो गयी और खुद उस्सको थाम लिया कसके, उसस्के समझ में आगया के मैं तैयार थी तो उस्सने मेरे पंतय को निचे करना शुरू किया, थोड़ा सा hi निचे किया था के मैं ने उसस्के जीब की गर्मी अपनी योनि पर फील किया और खुद अपने टांगों को अलग किया फैला कर मगर खड़े hi पोजीशन में…..

उस्का जीब मेरे योनि की पंखुरियों को खोलके चाटते जा रहा था और उस्सको बेशक पता चल गया के मैं गीली हो गयी थी और कहा के, ‘अरे वह तू तो बिल्कुल hi तैयार है, टब hi उत्तेजित हो गयी नाह मेरे चाटने से हम्म बता, मज़ा ारः है नाह तुझे भी, चल तुझको खुश करता हूँ इस पंतय को बिल्कुल निकाल देता हूँ अब और चल उस घांस पर लेट कर करते हैं…..’

मुझे तोडा डर लग रहा था के पिछली बार की तरह कोई हम को देख नाह ले, तो मैं ने उस से कहा, ‘अगर कोई यहाँ आगया और हमको इस हालत में देख लिया तो किआ होगा? मुझे डर लग रहा है…..’

उस्सने कहा, ‘आरी मैं ने कहा नाह के यह मेरा अड्डा है यहाँ कोई भी नहीं अत मैं ने सब सोच समझ कर प्लान किया हुआ है, बहोत दिनों से ऐसी जगह की तलाश करने के बाद यह जगह पाया है मैं ने एक महीने से अत हों यहाँ सत्ता पिने कोई भी नहीं आया इधर आज तक भी तो कौन आएगा अब, तू फ़िक्र मत कर, मस्त होकर एन्जॉय कर मेरे साथ मेरी रानी!! इस गाओं की महारानी है ऋ तू तो!! और मुझ गंगू तेली को तू मिल गयी हाय रे मेरी किस्मत हाहाहाहा’ … बहोत hi खुश हो रहा था वो, और उस्सकी तारीफ़ मुझको आकर्षित किये जा रहा था, मैं खुद को मैं में एक रानी hi सोचने लगी और जैसे वो एक नौकर अपने रानी को नंगा करने जा रहा था ऐसा सोचकर मैं बहोत hi उत्तेजित हो रही थी और उस्सको खुश करने के लिए तैयार थी….

तो उस्सने मुझे वही घांस पर लेटाया और कहा मेरी रानी एक लुंड देखा है कभी तुमने? यह लड़कियों को बहोत पसंद है चल दिखता हूँ तुझे अपने कोमल हाथों में पाकर इस्को और सेहला नाह …..’ उस्सने सोचा मैं पहली बार एक लिंग को देख रही हूँ अपने लौड़े को बाहर निकला उस्सने जो तन्ना हुआ था और हे बड़ा लम्बा और मोटा था, जिस्सको देख कर मेरे मुंह में पानी आगयी जैसे कहते इमली को देख कर आती है….

उस्सने मेरे मुंह के पास अपने लुंड को लगाया और मैं ने खुद अपने हाथ में लिया तो वो सिहर गया और उफ्फ्फ्फ़ कहकर कहा, ‘इस्को प्यार करो नाह रानी, चूमो चाटो इस्को तब अपने मुंह में लेकर चुसो मेरी रानी ाहः’

उस पे तरस ारः था मुझे जिस तरह वो तड़पते हुए मुझे वो सब कह रहा था, मैं तो यह सब करने में माहिर थी मगर उस्सने कभी किसी लड़की को नहीं छुवा था यह मुझे उस्सको छूटे hi पता चल गया और पूछा भी तो उस्सने कहा के उस्का लुंड एक वर्जिन लुंड है आज तक किसी भी महिला ने नहीं छुवा उस्सको उसस्के हाथ के सिवा…. तो मैं उस्सको वो ख़ुशी देने के लिए तैयार हो गयी थी

उसस्के लुंड को सच में मैं ने प्यार किया क्यूंकि वो नया माल था हीहीहीहीहीही, फिर उस्सको चूमा, नज़ाकत से खेला उसस्के साथ फिर छठा उसस्के चेहरे में उस्सको तड़पते हुए देख कर लुंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया चुस्सने के लिए और वो पागलों की तरह चेहरा बनाने लगा था हीहीहीहीही…. मुझे उस्सको उस हालत में देख कर बड़ा मज़ा ारः था…. मैं अपने मुंह में उसस्के लौंद को अंदर बाहर करने लगी तो वो चिल्लाया , ‘अरे आहिस्ते आहिस्ते नहीं तो अभी झाड़ जाऊंगा और एन्जॉय नहीं कर पाउँगा तुझको, अभी तो तेरे जिस्म को देखना बाकी है ठहर जा रानी ठहर जा…..

तब उस्सने मेरे ड्रेस को निकला, और ब्लाउज था अंदर तब एक एक करके उस्सने मेरे ब्लाउज के बटन्स खोले हौले हौले मेरे छाती के रंग को धीरे धीरे और सफ़ेद होते देखते हुए और जल्दी से ब्रा को निकल दिया और अपने मुंह में मेरे बूब लेकर चुस्सने लगा आहिस्ते आहिस्ते बड़े प्यार से सहलाते hue….uss वक़्त उस्का लुंड मेरे जाँघों को छह रहा था और मुझको गुदगुदी हो रही थी तो मैं ने उस से कहा लुंड को हटाने ko…magar उस्सने दबा दिया लुंड को मेरे जाँघों पर तब गुदगुदी होना बांध हुआ…..

मेरे बूब्स को चुस्सने के बाद वो धीरे धीरे निचे चलता गया चाटते चूस्ते हुए और मेरे योनि को फिरसे चूसा और तैयार हुआ अंदर डालने के लिए मगर मैं झट से उठ बैठी यह कहते हुए के मैं वर्जिन हूँ वो अंदर नहीं दाल सकता…. वो बहोत बिनती करता रहा के उस्सको मेरे योनि के अंदर hi डालना है मगर मैं ने मन किया और कहा के ऊपर ऊपर hi रागढ कर खुश होए, या तो अपने मुंह से चुस्सकार उस्सको झाड़ा सकती हूँ यह कहा….

तो उस्सने मेरे योनि के ऊपर अपने लुंड को रगड़ना शुरू किया मेरे जीब को चूस्ते हुए और बहोत hi जल्द कोई 2 या 3 मिनट में झाड़ गया मेरे योनि और पथ के ऊपर मुझे अपने पानी से गिला करके…..

उसस्के बाद कोई 5 मिनट तक वो मुझे अपने बाहों में वैसे hi नंगा लिए रहा और मैं ने कहा अब चलना है तो मैं उठ कर अपने कपडे पेहेन्ने लगी मगर वो और करना चाहता था तो मैं ने इंकार किया तो उस्सने कहा फिर कब मिलेंगे मैं ने कहा बाद में और हम उस जगह से जल्दी से निकले, रास्ते में जाते वक़्त भी उस्का हाथ मेरे जाँघों पर फरता raha…main ने उस्सको गाओं से थोड़ा दूर मुझको उतारने को कहाँ जहाँ बस पैसेंजर को उतारते हैं और मैं चल कर पैदल घर गयी…..

शुक्र है किसी ने भी नहीं देखा और मैं साफल्य घर आगयी बग़ैर किसी के तोके टेक हुए…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 89 चावला साहब रिटर्न्स होम

संजना ने जब चुंगल के बारे में बता दिया चावला साहब को तब तक चावला साहब का बिल्कुल खड़ा हो चूका था, और लुंड संजना के हाट में था तो खुद संजना ने बिना कहे अपने मुंह में लिया चुस्सने को, पहले अपने जीब फेरर कर लुंड के ऊपरी हिस्से पर, जैसे hi मुंह के अंदर लिया के चावला साहब का फ़ोन बजा, उन्हों ने जेब से फ़ोन निकला तो देखा के सान्वी का फ़ोन है, तो झट से अपने लुंड को पंत के अंदर किया और फ़ोन लेकर घर के बाहर निकल गया संजना से यह कहकर के ऑफिस से ज़रूरी फ़ोन था.

सान्वी ने बहोत प्यार से कहा, “hello जी, अगर आप का उसस्के साथ हो गया हो तो हमें भी थोड़ा याद कर लेना जी.”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए उस्सको जवाब दिया, “किआ होगया मेरा? साफ़ साफ़ बोलो नाह?” सान्वी ने बड़े कोमलता से कहा, “ोफो तो जनाब को नहीं पता मैं किश चीज़ के बारे में बोल रही हूँ हम्म्म किआ बात है जी, मस्ती ख़तम नहीं हुई अभी तक अपनी चाहती के साथ? मुझ ग़रीब को भी कुछ वक़्त दे दिया कीजिये नाह हुज़ूर!”

चावला साहब ने कहा, “अरे तुम्हारे साथ तो था मैं आधे दिन!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो किआ आधा दिन है मेरी वक़्त की कीमत जी? बुसस इतना hi जी यह तो बहोत नाइंसाफी हुई मेरे साथ जी!”

चावला साहब धीरे धीरे बात कर रहे थे तो संजना ने सोचा के यह पहली बार है के चावला साहब उस से छुपा कर बात कर रहे हैं यह संजना को अजीब लगा और सोचने लगी के किश से बातें कर रहे है जो इतना आहिस्ता आहिस्ता बात कर रहे हैं और बाहर क्यों गए बात करने के लिए घर के अंदर से भी तो बात कर सकते थे….

संजना ने बाहर जाकर सुन्ना चाहा मगर फिर सोचा के “प्राइवेट बात कर रहे होंगे गोली मारो मुझे किआ!”

उधर सान्वी ने कहा, “कब तक आप का दीदार कर पाऊँगी बोल दो जी नज़रें बिठाये बैठी हूँ कब से आप की याद में, रहा नाह गया इस लिए फ़ोन कर दिया आप की नवाज़िश, करम के आप ने फ़ोन उठा लिया वार्ना हम तो कई दफा हज़ार बार फ़ोन करते थक जाती थी मगर आप उठाते hi नहीं थे पहले हुज़ूर.!”

सान्वी की आवाज़ में एक कशिश थी जो चावला साहब को अपने तरफ जैसे खिंच रहे थे, तो उन्हों ने सान्वी से कहा, “बुसस निकल रहा हूँ दो घंटे में तुम्हारे सामने पेश हो जाऊंगा, अब खुश हुई आप मोहतरमाह?”

सान्वी ने बहोत खुश होते हुए कहा, “अहा मैं मर जवान के हुज़ूर ने मेरी दिल की तड़प और आह सुन ली. बुसस निकल आइये आप जल्दी से हम तड़प रहे हैं आप के दीदार के लिए.”

अब जैसे दिन को सान्वी को अकेली चोरर कर यहाँ संजना के पास आगये थे चावला साहब अब उसी तरह संजना को चोरर के वापस जा रहे थे सान्वी के पास. संजना तड़प उठी उंनसे पूछते हुए के “किआ हुआ क्यों अचानक जा रहे हो आप, आप तो रात तक रहने वाले थे मेरे साथ, क्यों जा रहे हो बोलिये नाह?”

चावला साहब के दिमाग़ में उस वक़्त सिर्फ सान्वी की आवाज़ गूंझ रही थी और उस्सको जल्दी था सान्वी को अपने बाहों में कसके भरने को, तो संजना से कहा के ऑफिस से बहोत ज़रूरी कॉल आया था उस्सको तुरंत ऑफिस जाना होगा.

जब चावला साहब निकले बाहर जाने के लिए तो संजना रो पड़ी, मोठे मोठे ेंसू बहने लगे उसस्के गालों पर. चावला साहब दिल के बहोत नरम थे तो उस से देखा नाह गया तो संजना को बाहों में भरके उस्सको छुप कराया समझाते हुए के ऑफिस का काम बहोत ज़रूरी होता है करोड़ों का नुक्सान हो सकता है अगर वो नहीं गया तो. संजना ने सिसकते हुए कहा, "अभी सिर्फ 3.30 बजे हैं, आप इतनी सवेरे कभी नहीं वापस जाते हो, मैं खुश थी के आप मेरे साथ देर रात तक रहोगे, हम साथ डिनर करेंगे और प्यार करेंगे….. पर आप जाने लगे मुझको अब बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा, बोर हो जाउंगी इतने घंटा बाकी हैं रात होने में!!”

चावला साहब ने कहा, “तुमको अभी मुझे बाकी के 6 लोगों के साथ तुम्हारा सेक्सुअल एनकाउंटर बताना है मत भूलना कल आऊंगा तो सब ठीक से बताना okay, और कल ड्राइविंग के लिए भी जाना होगा आज तो बंक कर दिया कल नहीं, bye स्वीटहार्ट, लव यू मुउआअह….” संजना को किश किया और चावला साहब निकल पड़े वापस सान्वी के पास जाने के लिए.

ड्राइव करते हुए चावला साहब अब सिर्फ सान्वी को सोचते हुए ड्राइव करते जा रहे थे. उनके दिमाग़ में सान्वी की जिस्म, उस्सकी जिस्म किम खुशभु, उस्सकी प्यार भरी आवाज़, उस्सकी सुर्ख लबों की नरमी, उस्सकी जिस्म की गर्मी सब महसूस करते हुए ड्राइव कर रहे थे साहब. वो सोच रहे थे के 5.30 को घर पहुँच जाएगा और तब से रात 1 बजे तक सान्वी के साथ अच्छा वक़्त गुज़रेगा, खूब प्यार करेंगे दोनों, और उनको एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हो रहे थे एक सुकून जैसा फील हो रहा था दिल की गहराई में. कई बार लम्बी सांसें लेते हुए ड्राइव करते आगे बढ़ रहे थे तेज़ रफ़्तार से चावला साहब.

आधा रास्ता गुजरने के बाद, चावला साहब ने फम रेडियो ों किया तो तलत अज़ीज़ की यह ग़ज़ल आ रहा था जिस्सको साथ साथ चावला साहब ने गाते हुए रास्ता कटा,

बहोत हसीं है मेरा दिल रुबा नाह हो जाए

बहोत हसीं है मेरा दिल रुबा नाह हो जाए

मेरे नज़र में वो काफिर खुदा नाह हो जाए

बहोत हसीं है मेरा दिल रुबा नाह हो जाए

खुश लग रहे थे चावला साहब और जवान दिखने लगे थे और भी ज़्यादा यूँ गुनगुनाते हुए, मुस्कुरा रहे थे, सान्वी की अदाओं को सोच कर उस्सकी आवाज़ को सोच कर और उस्सकी उस ग़ुस्से को सोच कर जब उस्सने आग भड़का दिया था कपड़ों में, यह सब सोखकर चावला साहब हंससने लगे और यूँही सफर काट गयी और वो अपने आलिशान महल जैसा घर के पास एते hi हॉर्न किया ज़ोर से सान्वी को आगाह करने के लिए के वो आगये…. सान्वी उसी वक़्त घडी देख रही थी के दो घंटे हुए के नहीं और उनकी कार की हॉर्न को सुनकर सान्वी का दिल ने जैसे एक बीट मिस किया और दौड़ती हुई गेट के पास आयी, और रिमोट से चावला साहब गेट आलरेडी ओपन कर चुके थे, तो देखा सान्वी गेट तक आगयी है उनको रिसीव करने के लिए, उस्सकी कमर पर चावला साहब की नज़रें पड़े, फिर गेट के अंदर दाखिल होते hi चावला साहब और सान्वी के नज़रें मिले, सान्वी की मुस्कराहट कुछ शर्मीली कुछ हाय में डूबी, थोड़ा हल्का तो थोड़ा गहरा….. सान्वी का जी कर रहा था के झपक के चावला साहब को बाहों में भर ले उसी पल को, मगर वो गेराज के अंदर गए कार को रखने के लिए तब सान्वी चल कर उनके पास गयी गेराज के अंदर और जैसे चावला साहब कार से निकले सान्वी ने उनको अपने बाहों में बहोत ज़ोर से भरके अपने सीने पर दबाते हुए उनके गर्दन पर अपने टिप तोए पर खड़े होकर उनको चुम्मा…. चावला साहब ने वही किया, उनको झुकना पड़ा सान्वी को बाहों में भरने के लिए तो वो झुक कर सान्वी को अपने बाहों में भर लिया और उन्हों ने तो सीधा सान्वी के मुंह को अपने मुंह में लिया, दोनों ने ेंख मुंढे हुए एक दूसरे को किश करते हुए एक दूसरी दुन्या में खो गए थे… गेराज के अंदर से घर में दाखिल होने का एक दरवाज़ा था, बल्कि दरवाज़ा किचन में ओपन होता है, दोनों किश में खोये हुए थे के उस दरवाज़े के पास कड़ी दीप्ति दोनों को शुरू से देख रहे थे, वो देखती रही , देखती रही के कब वो दोनों किश करने से रुके तो वो कुछ कहे मगर इन् दोनों का किश तो ख़तम hi नहीं हो रहा था………..

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
अपडेट 90 बैक इन कंपनी ऑफ़ सान्वी

जब दोनों के किश एन्ड hi नहीं हो रहे थे तो दीप्ति और वेट नहीं कर पायी तो कहा, “दादू, मम्मी, आप किसी कर रहे हो?” दीप्ति की आवाज़ को सुनकर दोनों ने चहूंकते हुए एक दूसरे को चोर्रा दीप्ति के तरफ देखते हुए, और सान्वी अपना मुंह पोंछते हुए दीप्ति के तरफ बढ़ी उस्सको गॉड में उठाने के लिए तो चावला साहब ने सान्वी को धीरे से कहा, “उस्सने सब देखा कहीं वो विवान से तो नहीं कहेगी के दादू और मम्मी किसी कर रहे थे?”

सान्वी ने उनको जवाब दिया, “वो कुछ नहीं समझ रही है अभी, और कब वो विवान से मिलती भी है के उस्सको कुछ बता सके? विवान के पास टाइम hi कहाँ दीप्ति से कभी बात भी करने को, जब दीप्ति सोती है तो वो चले जाते हैं और जब वापस एते हैं तो दीप्ति सोई हुई होती है!”

और तीनों घर के अंदर गए किचन से होकर.

अंदर जाते hi सान्वी ने चावला साहब का टॉवल और कपडे लेकर बाथरूम के पास उंनका वेट करने लगी क्यूंकि उस्सको पता था के वो नहाने आएगा तुरंत क्यूंकि बाहर से आने के बाद सब से पहले वो एहि करता है हमेशा…..

और चावला साहब सच में आये बाथरूम के पास सिर्फ अपने बॉक्सर में, सान्वी उनको देखते हुए मुस्कुरा रही थी और जब वो करीब आये तो सान्वी ने उनके हाथ में टॉवल और कपडे थमाए और चावला साहब ने कपड़ों को लेते हुए सान्वी का हाथ पाकर के बाथरूम के अंदर खिंचा उस्सको. दीप्ति निचे लाउन्ज में टीवी के सामने बैठी एक कार्टून देख रही थी शोर मचाते हुए.

झट से अचानक सान्वी को मौका hi नहीं मिला संभालने को और अंदर चली गयी उनके बाहों में और चावला साहब ने उसस्के गले को छाता, तो सान्वी उनके छाती पर सत् के कहा, “क्यों जी? आज मैं नहीं भरा क्यों संजना के साथ? मुझे क्यों इतना जकरने लगे आते hi?” चावला साहब के बॉक्सर में उंनका लिंग टांके खड़ा हो गया था और सान्वी के पथ के निचे दबा रहे थे चावला साहब कुछ रागढ देते हुए… सान्वी सब महसूस कर रही थी मगर विरोध बिल्कुल भी नहीं कर रही थी बल्कि एन्जॉय किये जा रही थी उनके चैट के बालों में अपने उँगलियों को फरते हुए.

चावला साहब ने कपडे को हेंगर पर लटकाते हुए एक हाथ से सान्वी को थामे हुए कहा, “मुंह तो खोलो नाह तेरे जीब के रस चुस्सना है मुझे….” सान्वी ने कहा, “अरे अभी अभी आते hi तो पीया मेरे जीब का रस आप ने!”

चावला साहब ने कहा, “काफी नहीं था वो अब तो खोलो मुंह को, और जीब बाहर निकालो तो!!” सान्वी मुंह नहीं खोल रही थी और हँस्ते हुए उनके चेहरे में थोड़ी नखरों के साथ उनको सत्ता रही थी जबकि निचे चावला साहब का लिंग सान्वी के जिस्म पर रगड़ते जा रहे थे…. सान्वी के दोनों हाथ उनके छाती पर थे तो चावला साहब ने सान्वी के हाथों को अपने हाथ में लेकर अपने कांधों पर किया और उस से कहा, “मुझको अपने बाहों में कसके जकरो और मेरे जीब को अपने मुंह में लेकर अब तुम चुसो मेरे रस को!”

सान्वी नाह में सर हिल्ला रही थी, और जिस दम उसस्के बाज़ू उठे चावला साहब के काँधे पर होने को तो चावला साहब ने सान्वी के ब्लाउज के निचे उस्सकी पसीने से भीगे हुए आर्मपिट के निचे देखा तो अपने नाक वहां लगाकर एक लम्बी सांस लिया उसस्के पसीने को सूंघते हुए और याद किया किश तरह से उसस्के ब्लाउज में पिछली बार उन्हों ने मुठ मारे थे… जब वह वैसे सान्वी के आर्मपिट के निचे सूंघ रहे थे तो सान्वी उनके चेहरे में देखते हुए पूछा, “यह भी कोई सूंघने की जगह है किआ कर रहे हो आप मेरे पसीने की बादभु है चीइह!!”

चावला साहब ने कहा, “तुझे किआ पता के यह बादभु है या तेरी खुशभु है इस में, मेरे लिए तो यह बहोत hi स्पेशल वाला खुशभु है जिस में से तेरी महक आती है और मुझको उत्तेजित करता है बहोत बहोत एक्साइट होता हूँ इस्को सूंघ कर main…tumhe पता है के मैं चोरी चोरी तेरे कपड़ों को ऐसे hi लेकर सुघट हूँ कई सालों से?!... जब तू निघ्त्य भी निकलती है तो मैं तेरे कमरे में जाकर तेरे निघ्त्य को सूंघता हूँ, तेरे पंतय को भी सुंघा है कई बार धोने से पहले जब तू उस्सको टब में रखती है तब… यह सब पता है तुम्हें हम्म?”

सान्वी बहुत हैरानी से उनको देखते हुए पूछा, "किआ? नहीं मुझको बिल्कुल भी नहीं पता था? आप कब यह सब करते हो? मैं कहाँ रहती हूँ जब आप यह सब करते हो तो? हम्म्म? इतना प्यार करते हो आप मुझसे? क्यों? बताइये मुझे!”

चावला साहब ने तब अपने लिंग को अंडरवियर से बाहर करते हुए सान्वी का एक हाथ पाकर के वहां किया और कहा, "इस्को अपने हाथ से सेहलावो नाह प्लीज!”

सान्वी का एक हाथ उनके काँधे पर था और दूसरा हाथ उनके लिंग पर कर दिया चावला साहब ने तो सान्वी ने इंकार नहीं किया होल्ड कर लिया उनके लिंग को अपने हाथ में और हौले हौले हाथ से सहलाने लगी उनके लिंग को उनके चेहरे में देखते हुए फिर अचानक से लिंग को चोररटे हुए कहा, “हम्म्म नहीं आप ने इससे संजना के अंदर डाला था नाह? तो पहले धोइये इससे तब मैं हाथ में लुंगी…..!”

चावला साहब ने कहा, “चलो तुम्ही धो डालो इस्को अब तब हाथ से नहीं अपने मुंह में ले लेना प्लीज!”

चावला साहब दो कदम शावर के पास गए और सान्वी ने साबुन से अपने हाथ भिगोया और शावर को चावला साहब के लिंग पर डाला, उस्सको वाश किया और अपने साबुन वाले हाथ से उनके लिंग को धोने लगी निचे बैठ कर ऊपर सर उठाकर उनके चेहरे का एक्सप्रेशन देखते हुए अपने दांतों में अपने होंठों को दबाये हुए… हलके हलके अपने मुठी को बांध करके सान्वी उनके लिंग पर हाथ रगड़ती गयी और चावला साहब ऊपर छत देखते हुए एक तड़पती आवाज़ में “आघ्घ्घ्घ स्सश्श्श्शहहस्सस बहुत मज़ा ारः है सान्वी ज़रा अपनी मुठी को और टाइट करो नाह मेरी जान!!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए अपनी मुठी को और टाइट करके साबुन से फिसलती हुए अपने हाथ को चावला साहब को जैसे मुठ मारने लगी…. और चावला साहब अपने कमर को आगे करके जैसे ढाका देने लगे सान्वी के मुठी के अंदर…..

तब चावला साहब ने एक हाथ से शावर को अपने लिंग पर करके उस्सको धोने को कहा और धो दिया तो सान्वी से कहा, “अब मुंह में लेलो नाह स्वीटहार्ट स्स्स्सस्शह्ह्ह बहुत मैं है के तुम इस्को chusso…le लो नाह पलेआएएससससीईए!!”

सान्वी ने अपने जीब से उनके लिंग को पहले छाता और धीरे से मुंह खोलके उनको अंदर लिया जबकि चावला साहब ने सान्वी के सर पर एक हाथ रख कर अपने कमर को हिलाते हुए उसस्के मुंह के अंदर ढाका देने लगे…. सान्वी अपने घुटनों पर गयी और एक हाथ उनके कमर पर रखा सपोर्ट के लिए और एक हाथ से लिंग को संभालते हुए अपने मुंह में उनके लिंग को लेती गयी ऊपर उनके चेहरे में देखते हुए….. चावला साहब के टांगें कांपने लगे थे और वो बेहाल होने लगे थे सान्वी के मुंह के अंदर अपने लिंग को महसूस करते हुए…… सान्वी चूस hi रही थी के लाउन्ज में से दीप्ति ज़ोर से चिल्लाई - “मममममिययययययय!!!”

सान्वी ने झट से उनके लिंग को चोर्रा और धडपडाते हुए बाहर निकली लाउन्ज के तरफ देखने के दीप्ति क्यों इतने ज़ोर से चिलायी…. देखा तो कार्टून्स में एक बड़ा सा जानवर डरावनी चेहरे में स्क्रीन पर फ्रीज हुआ था जिस से दीप्ति डर गयी थी!!”

शावर के अंदर से चावला साहब ने ज़ोर से पूछा, “किआ हुआ दीप्ति को?” तो सान्वी ने कहा, “कुछ भी नहीं कार्टून से डर गयी!”

तो चावला साहब ने सान्वी को वापस अंदर आने को कहा मगर सान्वी ने कहा, “नहीं आप नाहा कर वापस आइये तब बाद में करेंगे जो करना है आप फ्रेश हो जाइये हमारे पास अभी बहोत वक़्त है!” चावला साहब को मजबूरन अकेले नहाना पड़ा……

सान्वी लाउन्ज में बैठी सोचने लगी के कब चावला साहब उसस्के कपड़ों को सूंघते हैं, किश वक़्त वो सब करते हैं वो के पिछले 5 सालों में शो एक बार भी पता बिल्कुल नहीं चला…. और सोचने लगी के कब से वो वैसा करते हैं? सोचा के वो बाहर निकले तो पूछेगी के कब से वो वैसा करता है और कब से उस से प्यार करते हैं जनाब!!

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (2700 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 91 चावला एंड सान्वी हद क्वालिटी टाइम

चावला साहब बाथरूम से निकले और सान्वी को उनकी नज़र ढूंढ रहे थे निकलते hi. वो उस वक़्त सिर्फ अपने बॉक्सर में थे और टॉवल से अपने सर पोंछते हुए लाउन्ज के तरफ बढ़ते गए सान्वी को ढूंढ़ते हुए मगर वो कहीं नहीं दिखी तो चावला साहब ने सोचा वो दीप्ति को ऊपर चौररने गयी होगी तो अपने कमरे में गए, और अंदर जाते hi देखा के सान्वी और दीप्ति दोनों उसस्के कमरे में उंनका वेट कर रहे हैं.

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए सान्वी से कहा, "मैं तुमको लाउन्ज में ढूंढ रहा था और सोचा के तुम इस्को ऊपर चरणे गयी होगी…” सान्वी मुस्कुराते हुए उनको देखती जा रही थी और कहा, “क्यों ढूंढ रहे थे मुझे आप? किश लिए?” तो चावला साहब ने कहा, “एक पेग बनाने को कहता नाह!”

सान्वी ने दांतों में जीब दबाते हुए कहा, “ओह सॉरी मैं कुछ और सोच रही थी, सॉरी अभी बनाती हूँ आप का पेग - वैसे डबल बनाऊं या सिंगल?”

अस्सल में सान्वी तो उनको चेरर रही थी यह समझ कर के चावला साहब उस्सको जकरने के लिए ढूंढ रहे थे उस्का मतलब ये था…. उस्का पेग का टाइम हो गया था यह सान्वी बिल्कुल भूल गयी थी उसी के चक्कर में.

तो सान्वी दीप्ति को उनके कमरे में चोरर कर गयी उनके लिए पेग बनाने. तब तक चावला साहब ने डॉ लगाया, अपने बाल में कंघी किये और दीप्ति पर भी थोड़ा परफ्यूम लगाया, तो दीप्ति ने अपनी तोतली जुबां में कहा, “दादू कुस्बू है अछि है हम्म्म्म” तो चावला साहब ने बची को गॉड में उठाके उस्सको प्यार करने लगे तब तक सान्वी अंदर आयी उस्सकी व्हिस्की का गिलास लेकर और कहा, “दादा पोती मैं बहोत प्यार हो रहा है हम्म्म?” और दीप्ति जल्दी से बोली, “मम्मी दादू कुस्बू लगये मेले साथ हम्म अच्छी कुस्बू ै!” सान्वी दीप्ति को सूंघते हुए चावला साहब के करीब होकर उनके छाती से नाक लगाते हुए कहा, “हम्म्म किआ महक रहे है जनाब किश पर बिजली गिराने का इरादा है जी?”

चावला साहब अब भी सिर्फ अपने बॉक्सर में थे और बीएड पर बैठ कर व्हिस्की का एक सिप लेते हुए सान्वी को जवाब दिया, “बिजली गिराने वाली तो तुम हो मुझपर डार्लिंग, बल्कि गिर्रा चुकी हो जल रहा हूँ आराम देदो अब तो!” सान्वी ने हँस्ते हुए दीप्ति को गॉड में लेते हुए कहा, “इस्सके किआ किया जाए यह तो सोकर उठ चुकी है यह अब साथ नहीं चौररने वाली हमारा!”

और सान्वी बैठ गयी चावला साहब के बगल में दीप्ति को गॉड में लिए. सान्वी चावला साहब के जिस्म को देख रही थी बल्कि निहार रही थी. चावला साहब बहोत हैंडसम थे, बहोत गोरा रंग था उंनका और एक बॉक्सर में थे सिर्फ तो उनके जांघें बहोत गोर दिख रहे थे हालां के काळा बाल थे फिर भी वो गोरापन दिख रहे थे, उनके छाती पर भी बाल थे पर जीन जगहों पर बाल नहीं होते जैसे काँधे पर, पथ के हिस्से पर, पीठ पर, उन् सब जगहों पर सान्वी अपनी नज़रें दौड़ा रही थी उनको प्यार से देखते हुए. चावला साहब का जिस्म एक एथलिट के जिस्म के जैसा था वो वर्ज़िश जो करते थे हमेशा से और सॉलिड आदमी थे वो, ताकतवर भी थे, कोई बिमारी नहीं था, हमेशा से हेल्थ टिपटॉप रहे हैं उंनका…. सान्वी उनको देखते हुए सोच रहे थे के उनके दो बेटों में से एक भी उन् की तरह नहीं है, नाह रंग में नाह जिस्म की फीचर्स में, नाह सुंदरता में. और सान्वी ने सोचा “काश एहि मेरे पति होते विवान की बजाए!”

कमाल है उधर संजना ने भी एहि बात कही थी उस दिन के वो चावला साहब से hi शादी करना पसंद करेगी आरव की बजाए और अब सान्वी भी एहि खयालात पाल रहे थे! अगर यह दो औरतें मिल गए तो कहीं चावला साहब के बुरे दिन नाह शुरू हो जाए?! मगर चावला साहब बहोत स्मार्ट भी थे, इंटेलीजेंट, बिज़नेस मंद रखने वाले इंसान को ऐसे hi नहीं कोई नुक्सान पहुंचा सकते थे. बॉस वो थे, दो औरतें हो या चार उनको सब संभालना खूब अत था. उन्हों ने अपने दिमाग़ में सब सेट कर लिया हुआ था बहोत पहले से hi के कैसे संजना के इस घर में आने के बाद वो दोनों को संभालेगा बिना कोई औरतों वाले इश्यूज के. मगर जब उस्सने संजना को शुरू में पाया था तब तो सान्वी सिर्फ बहु थी, तब उस्का प्लान और था और अब सान्वी भी उस्सकी अपनी हो चुकी थी, तो मतलब अब उसस्के पहले प्लान को रद्द करके कुछ नया hi सोचा और प्लान किया होगा चावला साहब ने के कैसे दो दो औरतों को संभालेगा घर में. क्यूंकि दिन भर दोनों बेटे तो ऑफिस में रहेंगे, और घर पर वो होता है हर रोज़, और अब संजना के आने के बाद, सान्वी भी घर में होगी, तो चावला साहब ने सब अपने दिमाग़ में सेट कर लिया था के कब कैसे दोनों को खुश रखे…. बुसस उन् दिनों का इंतज़ार था के कब संजना भी घर का एक सदस्य बनने!!

सान्वी ने दीप्ति को बीएड पर रख दिया और अपने हथेली को चावला साहब के पीठ पर फरते हुए उनके गले को किश किया और सर को उनके खान्धे पर रख कर कहा, “अब आप को टीशर्ट पेहेन कर छुपाना नहीं पड़ेगा अगर संजना ने आप के छाती पर निशाँ बनाया तो हम्म?”

चावला साहब ने तब ख्याल किया के उसस्के गले या छाती पर कहीं संजना की किये हुए लोवेबिट्स तो नहीं और सान्वी से पूछा, “कहीं कोई निशाँ है किआ?” तो सान्वी ने उनके गाल को चूमते हुए कहा, “नहीं बिल्कुल भी नहीं है, क्यों? आज उसस्के साथ आप ने कुछ नहीं किया किआ?”

चावला साहब ने सान्वी के चेहरे में देखते हुए थोड़ा सीरियस होकर कहा, “तुम क्यों सिर्फ संजना संजना संजना करती जा रही हो? उस से तुमको भी प्यार हो गया किआ? कमाल है यार उसस्के यहाँ से निकल के तुम्हारे पास आगया हूँ फिर बी तुम उसी के बारे में बातें किये जा रही हो!!”

सान्वी ने तुरंत उनको जाकर के सॉरी कहा, और कहा, “तो अपने बारे में, मतलब हमारे बारे में बात करूँ जी?”

चावला साहब ने कहा, “हाँ यह हुई नाह बात!”

तो सान्वी ने पूछा, “आप एक बात बताइये मुझे, आप कब मेरे कपड़ों को सूंघते हो के मुझको आज तक बिल्कुल भी पता नहीं चला? और कब से यह करते हो आप? मेरा मतलब है के मैं तो यहाँ आप के घर में पिछले 5 सालों से हूँ नाह? तो कब से वैसा करना शुरू किया आप ने, और दिन के किश टाइम को वैसा करते हो आप, प्लीज मुझे समझाइये आप.”

चावला साहब गिलास ख़तम करते हुए हंससने लगा सान्वी को देखते हुए. सान्वी सीरियस थी सवाल करने के बाद मगर उनको हँस्ते हुए देख कर वो भी हंससने लगी और हँस्ते हुए पूछा “बोलिये बोलिये कोई बहाना नहीं चलेगा!” और उन् दोनों को हँस्ते हुए देख कर दीप्ति भी बीएड पर हंससने लगी, तो दोनों ने मुड़कर दीप्ति को हँस्ते हुए देख कर ये दोनों और भी ज़ोर से हंससने लगे जिस्सको सुनकर दीप्ति भी ज़ोर ज़ोर से हंससने लगी.

हँस्ते हुए hi चावला साहब ने अपना गिलास सान्वी को दिया और पेग बनाने के लिए, सान्वी ने गिलास लेते हुए कहा, “आप ने एक डबल पिया अभी पता है नाह? एक और डबल लाती हूँ उसस्के बाद बुसस okay?” चावला साहब हँस्ते जा रहे थे संवी को देखते हुए!!

सान्वी भी हँस्ते हुए hi गयी उनके लिए पेग बनाने और आइस कुबेस लेने किचन से…. खुद उनको सोच कर हंस रही थी, और आइस कुबेस गिलास में डालते हुए सान्वी हँस्ते हुए बड़बड़ायी, “पता नहीं किआ किआ करते थे मेरे कपड़ों के साथ और कब से जो मेरे पूछने पर इतना हंससने लगे, अभी खबर लेती हूँ उंनका! एक छोटे बचे की तरह बेहवे कर रहे हैं जैसे पकड़े जाने पर हंससने लगे बताना पड़ेगा मुझे मैं जान कर hi दम लुंगी हाँ!!”

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 92 स्टिल टुगेदर

सान्वी डबल व्हिस्की गिलास में आइस कुबेस के साथ लेकर वापस आयी उनके पास तो वो फिर से सान्वी को देख कर हंससने लगे ज़ोर ज़ोर से जिसको देख कर दीप्ति भी बिना वजा के हंस रही थी…. और सांई अपनी हंसी को रोकते हुए उनके चेहरे में द्देखते हुए उनको गिलास थमाती है और उन् से सत् कर बैठ कर मुस्कुराते हुए कहती है, “हाँ तो बताइये, जवाब दीजिये मुझे मैं वेट कर रही हूँ हाँ!!”

चावला साहब ज़्यादा ज़ोर से हंससने लगे जब सान्वी ने फिरसे पूछा तो. तो फिर सान्वी ने कहा, “देखिये, आप ऐसे हंस कर बहाना बनाने की कोशिश मत कीजिये, मैं जानना चाहती हूँ बोलिये नाह प्लीज” सान्वी ने कुछ नटखटी आवाज़ में पूछा

चावला साहब ने हँस्ते हुए कहा, “मेरा हंसी तो रुकने दो तब नाह बताऊंगा हाहाहाहाहा!!!” और वो हँस्ते hi जा रहे थे जैसे भांग पिया हो!!” सान्वी थोड़ा हँस्ते हुए मगर थोड़ा रूठते हुए मुंह बनाते हुए उनको तिरछी नज़रों से देख रही थी. चावला साहब ने अपने एक हाथ को सान्वी के काँधे पर रखा और एक हाथ में गिलास था जिस से वो सिप ले रहे थे बार बार, मगर हंस भी रहे थे…. सान्वी वेट कर रही थी के उंनका पागलपन वाला हनस्सना रुके…. और उस हंसी को रुकते हुए व्हिस्की का गिलास ख़तम हो गया और साहब ने एक और पेग की दरख्वास्त की सान्वी से. सान्वी मन कर रही थी मगर चावला साहब ने कहा दो डबल हुए 4, तो अब एक सिंगल ला दिया जाए 5 हो जाएगा तब बुसस!”

सान्वी ने कहा, “देखिये अभी hi आप की लास्ट लाइन जो आप ने कहा नशे में धुत कहा एक और पिने से आप बिल्कुल नॉक आउट हो जाओगे जनाब!”

चावला साहब को बहोत मज़ा ारः था और उस्सको और बहोत पिने को मैं कर रहा था हालां के हल्का सा नशा छाने लगा था तो वही उठे, सान्वी के हाथ से गिलास लिया और चले गए खुद अपने पेग बनाने को, सान्वी उनके पीछे पीछे गए दीप्ति को वही वेट करने को कहकर, और जब चावला साहब आइस कुबेस लेने गए किचन में तो सान्वी उसस्के सामने आयी और झट से चावला साहब ने सान्वी को अचानक जकरा और सान्वी का मुंह उनके मुंह में कैद हो gaya….Chawla साहब का हाथ सान्वी के जिस्म पर फरने लगे और सान्वी खुद को खोने लगी अपने आप को उनके बाहों में ढीला करते हुए सान्वी ने खुद को उनके हवाले कर दिया….

चावला साहब सान्वी को किश करते जा रहे थे जैसे कभी एन्ड नहीं होने वाला हो वो किश, सान्वी ेंखें मुंध कर रेस्पोंद करती गयी खुद को उनके आग़ोश में अपने जिस्म को ढीला करके…. इतना लम्बा किस किया के दोनों के सांसें फूलने लगे तब, सान्वी ने खुद हांफते हुए उन् के छाती पर सर रख कर लम्बे सांसें लेने के बाद कहा, “किआ जी, मेरे जीब को खा लेने का मैं था किआ आप का, मुझे लगने लगा था के मेरे जीब मेरे मुंह में से ग़ायब हो गए हैं!!!” और इस बार संजना हंससने लगी यह कहने के बाद…. तो फिर से दोनों का हनस्सना शुरू हुआ और ज़ोर ज़ोर से हंससने लगे दोनों…. अंदर से दीप्ति ने भी उन् दोनों को हँस्ते हुए सुनकर हंससने लगी और चिल्ला कर फुकरा, “मुम्ममइय्यययय”

चावला साहब ने डबल नहीं ट्रिपल पेग बनाया था, सान्वी ने ख्याल नहीं किया किश में खोने के बाद. दोनों वापस उनके कमरे में गए, दोनों खामोश थे और दोनों के अंदर दाखिल होते hi दीप्ति ने उन् दोनों को देख कर हंससने लगी, तो चावला साहब सान्वी को और सान्वी चावला साहब के चेहरे में देखते हुए दोनों ने एक साथ कहा, इस को किआ हुआ अब क्यों हमको देख कर हंससने लगी और फिर से हंससने का सिलसिला शुरू हुआ….. कभी कभी ऐसा होता है ज़िन्दगी में के बिना किसी वजह के हँस्ते हैं लोग, छोटी छोटी बातों पर हंसी आजाता है कोई नार्मल भी बात होती है तो उनको फनी तरीके से लेते हुए हंससने लगते हैं लोग, तो एहि हुआ था दीप्ति की हंसी को फनी लेते हुए दोनों ज़ोरों से हंससने लगे थे और रुकने का नाम नहीं ले रहे थे… दोनों के पथ में दर्द हो गए हँस्ते हँस्ते…..

फिर कोई 15 मिनट्स के बाद चावला शाहब ने उस ट्रिपल पेग में से तक़रीबन 2 पेग निंगाल गए थे और नशा छाने लगा था उनको और सान्वी ने तब ख्याल किया के वो इतनी देर टेक क पेग नहीं ख़तम किये हैं तब पूछा, के अभी टेक क पेग नहीं एन्ड हुआ, तब लो फिर से ज़बरदस्त हंसी शुरू हुई जब चावला साहब ने कहा के उस्सने 1 नहीं बल्कि 3 पेग डाला था गिलास में हाहाहाहा!!! खूब हँसे दोनों ने और सान्वी थोड़ा खफा होते हुए बीएड से उठी और कहा, “आप एक चीते बचे की तरह बेहवे कर रहे हो, पी लेते हो तो और भी एक नटखट, नॉटी बच्चा बन जाते हो, मैं दीप्ति को ऊपर चोरर कर गेम खेलने के लिए देकर आती हूँ तब तक सो मत जाईयेगा गेम” चावला साहब ने एक दो कदम थोड़ा लदखाते हुए लिया और हँस्ते हुए कहा, “okay बेबी बाबए लव यू मऊवः सी यू हहहहहए!”

सान्वी ने दीप्ति को ऊपर उसस्के बीएड पर चोर्रा गेम थमा कर उस्सको. बीएड चारों तरफ से बांध था जिस में से डिप्टी बाहर नहीं निकल सके. गेम खेलने में माहिर थी वो और बहोत पसंद करती थी. तो उस से छुटकारा पाने के लिए अक्सर सान्वी उस्सको गाने थमा देती थी और वो घंटो बैठ कर गेम कहलती रहती थी.

सान्वी ने एक क्विक शावर लिया और निघ्त्य में निचे गयी वापस चावला साहब के कमरे में. अस उसुअल उसकी निघ्त्य के पतली पतली स्ट्रैप्स थे, घुटनों के ऊपर रीच होती थी निघ्त्य जिस में उस्सकी उभरे हुए जांघें साफ़ दिख रहे थे, ब्रा के बिना उसस्के बूब्स उस निघ्त्य की क्लॉथ मटेरियल पर रगड़ते हुए उस्सकी निप्पल के दोनों पॉइंट्स को सामने देखते हुए दिखा रहे थे, और जब वो चावला साहब के कमरे में रीच हुई तो देखा के चावला साहब नशे में कुछ बड़बड़ा रहे हैं, धीरे से उनके करीब गयी मगर समझना मुश्किल था के हु किआ कह रहे हैं…. सान्वी को उंनसे बहोत प्यार करने का मैं था और उस्सको डर था के कहीं वो इतने नाशी में नाह हो जाए के कुछ कर hi नहीं पाए इसी लिए रात होने का इंतज़ार नहीं किया सान्वी ने और इसी वक़्त निघ्त्य में चली आयी उनके पास मगर निराश लगने लगी थी उनको उस हालत में देख कर…..

सान्वी उनके पास बैठी और उनके पीठ पर खुद को सत्ता कर सान्वी ने उनके पीठ पर अपने होंठों को फरते हुए उनके गर्दन के पीछे वाले हिस्से तक गयी और वहां जीब को फेर्रा सान्वी ने – चावला साहब अब भी सिर्फ बॉक्सर में hi थे और सान्वी ने अपने एक हाथ को उनके बॉक्सर के ऊपर से hi उनके लिंग को टटोलते हुए छुवा…. चावला साहब ने सान्वी के हाथ को अपने हाथ में लेते हुए किश किया और संवी के उँगलियों को अपने मुंह में दाल कर चुस्सने लगा, उस से सान्वी कसमसा गयी और सिकुड़ सी गयी फिर उस्सने चावला साहब के काँधे पर दांत गड़ाते हुए वहां चुस्सने लगी, सान्वी चावला साहब का कांधा चूस रही थी और चावला साहब उसस्के ुनःलीयां चूस रहा था…

और कुछ देर बाद चावला साहब पीठ के बल बीएड पर लेट गया तो सान्वी चावला साहब के जाँघों को चूमने लगी और आहिस्ते आहिस्ते चूमते हुए ऊपर के तरफ बढ़ती गयी जब तक के वो उनके बॉक्सर तक गयी और उनके लिंग पर बॉक्सर के ऊपर से जी अपने हाथ लगाया तो देखा के साहब खड़े नहीं हुए हैं!! सान्वी को अच्छा नहीं लगा, उस्सने सोचा के अगर ज़्यादा नशा हो गया है तो वो कुछ भी नहीं कर पाएगा, सान्वी को खुश नहीं कर पाएगा उस हालत में संवी ने सोचा और दुःख होने लगा सान्वी को, थोड़ा ग़ुस्सा भी आने लगा था उस्सको; और फिर सोचा के वो खुद उनको कुछ करने के लायक बना सकती है, उनके लिंग को खड़ा कर सकती है वही, और मुस्कुराते हुए सान्वी ने उनके बॉक्सर को उतारने की कोशिश किये……

और अचानक चावला साहब ने सर ऊपर उठाकर कहा, “क्यों? किआ सोच रही हो के मैं लुढ़क गया? हम्म्म?” और हंससने लगे चावला साहब, तब सान्वी समझी के वो नाटक कर रहे थे और अपने मुठी से ज़ोरों से मुंह बनाते हुए सान्वी ने उनके छाती पर मारा, और फिर प्यार से अपने गालों को उनके छाती से लगाकर उंनसे प्यार करने लगी…..

चावला साहब ने उसस्के गर्दन पर अपना हाथ रख कर करेस करते हुए पूछा, 2अब नहीं जानना तुम्हें के मैं कब से तुम्हारे कपड़ों को सूंघता आया हूँ?!”

सान्वी बिल्कुल भूल गयी थी उस बात को तो उसस्के चेहरे में एक चमक आया और झट से कहा, “अरे हाँ बताइये कब से आप मेरे कपड़ों से इश्क फरमाते हो?” सब डिटेल में बोलिये मुझे!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (3000 वर्ड्स फ्रॉम लास्ट 2 उपदटेस)
 
अपडेट 93 चावला साहब एक्सप्लाइन्स हेर

सान्वी बिल्कुल भूल गयी थी उस बात को तो उसस्के चेहरे में एक चमक आया और झट से कहा, “अरे हाँ बताइये कब से आप मेरे कपड़ों से इश्क फरमाते हो?” सब डिटेल में बोलिये मुझे!!”

अब आगे………..

चावला साहब ने सान्वी को उनके पास बैठने को कहा, और वो खुद उठ बैठे. सान्वी के काँधे पर हाथ रख कर हलके से अपने उँगलियों को वहां पर फेर्रा, फिर आहिस्ते आहिस्ते अपने उँगलियों को निचे उसस्के बूब्स के तरफ करने लगा, तो सान्वी ने उनके हाथ को थाम कर कहा, “आप तो वो बताने वाले थे मुझे नाह?

तो चावला साहब ने कहा, “अब तुम ऐसे निघ्त्य में आगयी हो मेरे सामने तो कैसे खुद को रोकूं मैं यह बता? कितना चाहता था मैं तुमको ऐसे देखने के लिए और तू कितने नखरें किया करती थी मुझे खुद को इस तरह अपने निघ्त्य में दिखाने के लिए, और अब खुद बा खुद चली आयी निघ्त्य में मेरे सामने! सच है जो मांगने से नहीं मिलता वो बे मांगे हासिल हो जाते हैं!”

सान्वी ने अपने छाती पर अपने बाल को ऊपर करके धक् दिया और चावला साहब के हाथ को अपने हाथ में जाकर कर कहा, “ोफो आप प्लीज बताइये नाह कब से आप मेरे कपड़ों को सूंघते हो और कब यह सब करते हो आप?”

तो चावला साहब थोड़ा नशीले आवाज़ में कहा,

“हम्म!! उन् दिनों को तुम और मैं इतने करीब नहीं आये थे, हम वहां लाउन्ज में बैठे टीवी देख रहे थे, याद नहीं कौन सा सेरिअल्स अत था जो न तुम न मैं मिस करता था कभी, तब तुम्हारी शादी को कोई 6 या 7 महीने हुआ होगा….”

तो सान्वी हैरत से उठकर पूछा, “व्हाट तभी से आप वो सब करते थे??!”

चावला साहब ने कहा, “ोफो, आरी पूरी बात तो सुनों नाह! तब कुछ नहीं हुआ था पर सुनों कैसे सब शुरू हुआ था धत तेरी की!!”

तब सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “ok, ok ठीक है आप बोल्ये, सॉरी!”

तो चावला ने कहा, “हाँ तो हम टीवी देख रहे थे और तुम मेरे राइट में बैठी हुई थी” और अब सान्वी बोली, “मैं हमेशा आप के राइट में hi बैठी हूँ वहां!”

चावला साहब ने तब कहा, “तुम उस शाम को सभी किचन के कामों को जल्दी जल्दी निपटा रही थी क्यूंकि तुमको वो सीरियल मिस नहीं करना था. तो जल्दी जल्दी काम करने से तुम पसीने पसीने हो गयी थी, साडी में तू थी और मेरे पास जल्दी से आकर बैठी थी क्यूंकि सीरियल शुरू हो रहा था, और तुमने अपने दोनों हाथों को ऊपर करके अपने बालों को पीछे करके बंद लगाया था. यह वही वक़्त था, वही दिन था वही लम्हा था जिस दिन को मैं ने पहली बार तुम्हारे पसीने को सुंघा था, तुम्हारे हाथ उठाने से, ब्लाउज के निचे, आर्मपिट पर भीग गया था और मैं तुम्हारे लेफ्ट मैं बैठा था तो वो तुम्हारे पसीने की खुशभु मुझको बहोत पसंद आया था…. मैं उस्सको और महसूस करना चाहता था, और एक बार उस्सको सुगना चाहता था उसी वक़्त, मेरे ध्यान सीरियल पर बिल्कुल नहीं था उस दिन मैं तुम्हारे पसीने को सूंघना चाहता था और एक baar…..main थोड़ा सा और तुम्हारे करीब खिसक कर बैठा था ताके तुम्हारे जिस्म की खुशभू को दोबारा सूघ सकूँ मगर क्यों के तुमने हाथ को निचे किया हुआ था तब वो नहीं आ रही थी, फिर भी मैं ने कैसे बी करके तुमको, तुम्हारे गर्दन के पास सुंघा, हलकी सी महक आयी थी मगर वो नहीं जो तुम्हारे आर्मपिट से आयी थी…..”

चावला साहब रुके तो सान्वी ने पुछा, “उन् दिनों तो आरव जल्दी घर वापस आजाता था नाह और मुझसे बात करना शुरू कर दिया था तो उस दिन को वो यहाँ नहीं था किआ?” चावला साहब ने जवाब दिया,

“वो घर पर hi था, मैं उसी के डर से तो तुम्हारे और करीब नहीं बैठ सका था, मैं बार बार पीछे ऊपर के तरफ देख रहा था के कहीं वो वहां से मुझको तुम से सट्टे हुए नाह देख ले, वो अपने कमरे में कुछ काम कर रहा था कंप्यूटर पर उस वक़्त.”

सान्वी उनके चेहरे में देखते हुए पूछा, “6/7 महीने शादी के बाद, मतलब तब मैं 5 या 6 महीने की प्रेग्नेंट थी राइट?”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ दीप्ति तेरे पथ में थी तब…”

और सान्वी ने फिर पूछा, “फिर किआ हुआ था?”

चावला बोलै, “सीरियल के एन्ड होने के बाद तू अपनी शावर लेने जाती थी हर शाम को, वो मुझे पता था, तो जब तू बाथरूम के अंदर चली गयी तो मैं ने तेरे ब्लाउज टब से लिया और उसस्के आर्मपिट के निचे सुंघा,,,. सूंघता रहा जब तक तू नाहा कर बाहर नहीं निकली…..”

सान्वी ने अपने मुंह पर हाथ रखते हुए कहा, “हाय राम, आप मेरे बैडरूम में आये थे जब मैं नहाने गयी थी तब? और आप को डर नैन लगा के आरव आप को मेरे बेरूम में देख लेता तो?”

चावला: “उस वक़्त मेरे लिए तुम्हारे पसीने की खुस्भु सूंघना बहोत ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट था इस लिए आरव की मौजूदगी ने मुझे नहीं रोका. मेरा जी करता था के मैं उस ब्लाउज को लेकर अपने कमरे में चला जॉन, कभी तुमको वापस नाह करूँ, मगर तू उस्सको ढूंढ़ती, इस लिए उस्सको वापस रखना पड़ा…. अफ़सोस के सात मुझे बाहर जाना पड़ा जब तू निकलने वाली थी बाथरूम से. और फिर उसी रात को जब तुम डिनर सर्वे करने लगी थी तो मैं छुपके से दोबारा तुम्हारे रूम में गया था और फिरसे उस ब्लाउज को लेकर खूब सुंघा tha…tumhari महक आरही थी उस में, लगता था तुम उस वक़्त मेरे साटन हो वहां ऊपर जबकि तुम यहाँ खाना सर्वे कर रही थी…..”

सान्वी ने उनके दोनों गालों पर किश किये और उनको सीने से लगाते हुए पूछा, “और उस दिन के बाद आप ने हर रोज़ वही किया?”

तो चावला साहब ने कहा, “हर रोज़ तो नहीं मगर शुरू में हाँ तक़रीबन हर रोज़ जब तुम नहाने जाती तो मैं तुम्हारे निकले हुए कपडे को ज़रूर सूंघता था, मगर हर रोज़ तो तू नहीं भीगती थी पसीने में इस लिए एक्साक्ट्की वही पसीने वाला खुशभु तो नहीं अत मगर मैं ने तब तुम्हारे बदन की खुशभु को पहचान लिया था, पता चल गया था के तुम्हारे उतारे हुए कपडे में किसी खुस्भु अति है… और एक रोज़ मैं ने तुम्हारी निघ्त्य को लिया हेंगर से, तुम एक hi निघ्त्य को तीन या चार रोज़ पहनती हो नाह तो उस में तुम्हारी खुशभु बसे हुए रहते थे….. फिर एक दिन ब्रा लिया और बाद में एक दिन पंतय उठाया… उन् सब में तुम महकते थे….”

सान्वी के दिल में बहोत तड़प जाएगी यह सब सुनने के बाद और उस्सको चावला साहब पर बहोत बहोत प्यार आया उस्सकी ेंखें भर आयी और चावला साहब को बहोत ज़ोर से से बाहों में भरे रट हुए पूछा, “आप मुझसे इस कदर प्यार करते थे? तो आप ने तभी क्यों नहीं कहा था मुझे?! चावला साहब ने कहा, “यह कहने की बात है? यह तो महसूस करने की बात है, तुम ने सब तब महसूस करना शुरू किया था जब दीप्ति पैदा हो गयी थी तब…. मैं तबसे तुम्हारे करीब धीरे धीरे बढ़ता गया और तुम महसूस करती गयी….. अब अगर मैं ने तुमसे कह दिया होता तो बताओ किआ होता? सब उल्टा भी हो सकता था, तुम इस घर को चोरर कर चली गयी होती मुझपर ठरकी का टैग लगा कर और मेरे बेटों से मुझको अलग करा कर उनके दिल में मेरे लिए नफरत पैदा कर के! …. आज बता रहा हूँ तो तुमको प्यार दिख रहा है, तब कहा होता तो मैं बुरा दीखता तुमको, सेक्सुअल मणिअक कहती तू मुझे….. इन पिछले 5 सालों मैं ने इस प्यार को धीरे धीरे सींचा, पाला, पोसा तब नाह जाके तू मेरी बाहों में आयी और आज निघटज्ञ में मेरे सामने आयी हो? हम्म्म बोलो स्वीटहार्ट!!”

सान्वी ने अपने जीब को उनके मुंह में दाल दिया और उन् के ऊपर खुद चढ़ गयी और अपने हाथ को उनके छाती से फरते हुए उनके बॉक्सर तक लगाई………….

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 94 ा वैरी स्पेशल मोमेंट

सान्वी का हाथ उनके बॉक्सर के अंदर जा रही थी उनके लिंग को करीबन थाम hi लिया था तब चावला साहब ने किश को रोकते हुए सान्वी को अपने बगल में करते हुए कहा, “ठहरो तो ज़रा कुछ और कहना है तुम्हें….” मगर सान्वी के जिस्म में जैसे आग भड़की हुई थी उस्सने बुसस ‘हम्म्म्म’ किया और उनके छाती पर अपना जीब फरने लगी उनके एक हाथ के उँगलियों में अपने उँगलियों को जाकर कर. फिर सान्वी ने सोचा पता नहीं किआ कहना छह रहे हैं चावला साहब तो रुकी और उनके चेहरे को चुम कर अपने छाती को उनके छाती पर दबा कर उन् के जिस्म के ऊपर होते हुए कहा, “okay ठीक है, बोलिये किआ कहना है हम्म्म्म?”

सान्वी मस्त हॉट सेक्सी डॉल लग रही थी उस वक़्त और चावला साहब ने उस्सको पीठ पर लेते हुए उस्सको अपने पथ पर संभाले हुए उसस्के गाल से उसस्के बाल को हटाते हुए कहा,

“उन् दिनों को मुझे एक डर भी लगा रहता था के अगर मैं ने उस वक़्त तुमसे कहा के तुम मुझे बहोत पसंद हो और मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ तो कहीं तुमने रिजेक्ट किया और घबरा गयी या बात को नहीं समझी तब मैं कैसे उस सिचुएशन को सम्भालूंगा. तुम मेरे इज़त करती थी वो मुझे दीखता था, मैं भी तुम्हारी इज़त करता था इस लिए हमारे रिश्ते को मैं तोडना नहीं चाहता था, मैं ने सोचा था के धीरे धीरे शायद तुमको दिख जाएगा के मैं तुमको चाहने लगा हूँ, मगर तुम प्रेग्नेंट थी तो तुम अपने प्रेगनेंसी पर ज़्यादा कंसन्ट्रेट कर रही थी उन् दिनों… याद है एक दिन मैं ने तुमसे पूछा था के बची ने लात मारा अंदर किआ तुमने फील किया? तब तुम बहोत hi शर्मा गयी थी मुझको जवाब देने के लिए और वहां से उठ कर चली गयी थी बिना मुझको रिप्लाई किये.”

सान्वी ने उनके गाल पर अपनी उँगलियों को फरते हुए उनके गाल पर किश किया और बहोत प्यार और कोमलता से कहा, “हम्म्म्म मुझको अच्छी तरह से याद है वो दिन!” तो चावला साहब ने पूछा, “तो अभी बताओ क्यों तुम ने रिप्लाई नहीं किया था और उस वक़्त तुमने कैसा फील किया था और क्यों उठ कर चली गयी थी बिना मुझे जवाब दिए?”

सान्वी जिस तरह से उन् पर लेती हुई थी उस्सकी योनि डायरेक्ट चावला साहब के लिंग के ऊपर था जो तन्ना हुआ था और सान्वी हलके हलके से अपनी कमर को हिल्ला भी रही थी उनके लिंग को अपने पथ के निचे फील करते हुए, सान्वी की जैसे लाड टपक रही थी उस वक़्त, और बार बार चावला साहब के होंठों को चुम रही थी जब वह बातें कह रहे थे, तो ज़्यादा ज़ोर से अपने कमर को उनके लिंग पर दबाते हुए सान्वी ने जवाब दिया, “आप भी 5 साल पुराणी बात पूछ रहे हो अभी मुझसे, फिर भी बताती हूँ, मुझे अच्छी तरह से याद है उस रोज़ मैं घहबरा सी गयी थी जब आप ने मुझसे वो पूछा था, वही सवाल विवान ने पूछा होता तो मुझे नार्मल लगता मगर क्यूंकि आप ने पूछा था तो मुझे बहोत अजीब लगा था और मुझे नहीं पता था के आप को रिप्लाई करूँ के नहीं सच में मुझको बहोत शर्म आयी थी आप को रिप्लाई करने के लिए, मुझे लगा था के आप मेरे पथ पर हाथ रख कर फील करने ावोगे इस लिए वहां से चली गयी थी…..”

चावला साहब को लगा के अगर सान्वी उस तरह से अपने कमर हिलाती रही उसस्के लुंड पर तो वो झाड़ सकता है इस लिए वो उठ बैठा और सान्वी को अपने गॉड में बिठाया बीएड पर hi अपने तकिये से पीठ करके. सान्वी के पुरे बाल खुले थे और बार बार चावला साहब के चेहरे पर जा रहे थे जिस्सको बार बार या तो खुद सान्वी हटाती थी या चावला साहब hi हटते थे, तो उस तरह से बैठने से बाल उनके चेहरे पर नहीं आते.

तो जब सान्वी उसस्के गॉड में आयी तब चावला साहब उसस्के बूब्स को प्रेस करते हुए कहा, “मगर जब 8तह मंथ हो गया था तब मैं ने तुम्हारे पथ पर अपना सर लगाया था एक दिन दीप्ति की दिल की धड़कन सुनने के लिए वो याद है तुम्हें?”

सान्वी ने कहा, “हाँ तब मैं आप के कुछ ज़्यादा क्लोज होने लगी थी क्यूंकि आप मेरा बहोत केयर करने लगे थे, मुझको कोई काम नहीं करने देते थे आप, किचन में भी नहीं जाने देते थे, बाहर से खाना मंगवाते थे और मुझको बीएड रेस्ट के लिए कहते थे, तभी से आप ने मेरे कमरे में आना शुरू किया था. और आप को मेरा उतना केयर करते हुए देख कर मुझे लगा के आप मेरा इतना ख्याल रख रहे हो तो खुद बा खुद आप से क्लोज हो गयी थी, आप में एक बहोत अच्छा फ्रेंड दिखने लगा था मुझे उस वक़्त और आप मुझको इंटरनेट से पेजेज डाउनलोड करके प्रेग्नेंट मोठेर्स के आर्टिकल्स देते थे पढ़ने के लिए के मुझको किआ किआ करना चाहिए, और मैं वो सब करती थी जो आप कहते थे अछि प्रेगनेंसी के लिए और अच्छी डिलीवरी के लिए, तब मुझको आप से शर्म आना बांध हो गया था इसी लिए उस दिन जब आप ने कहा था के आप को दीप्ति की धड़कन मेरे पथ के अंदर सुन्ना है तो मैं ने इंकार नहीं किया था, आप ने कितने देर तक अपने कान को मेरे पथ से लगाया हुआ था याद है?!”

चावला साहब ने कहा, “हम्म वही वक़्त था जब मैं ने तुमको प्यार करना शुरू किया था!! उसी वक़्त को मैं तुम्हारे ड्रेस को ऊपर उठाकर डायरेक्ट तुम्हारे पथ पर कान लगाना चाहता था और तुम्हारे जिस्म की गर्मी को फील किया था उस दिन और ऊपर से तुमने अपने हथेली को मेरे सर के ऊपर फेर्रा था याद है? उस से मेरे जिस्म के रोवाण रोवाण खड़े हो गए थे यह तुमको नहीं पता था!!”

सान्वी ने कहा, “और मैं ने उस वक़्त आप में एक पिता देखा था, लगा था के मेरे पापा होते तो शायद ऐसे hi अपनी पोती की दिल की धड़कन को सुनते इस लिए आप को छुवा था उस रोज़…… मगर जिस दिन हम कार में जा रहे थे और दीप्ति ने सर बाहर निकाल लिया था और आप ने मुझको गॉड में उठके कार में डाला था और पुरे रास्ते जिस तरह से आप ने मेरा ख्याल रखा था, जिस तरह से आप मुझको हौसला देते हुए ड्राइव कर रहे थे जिस तरह हॉस्पिटल रीच होने पर आप ने मुझको फिर दीप्ति के सर समेत मुझको गॉड में उठाकर भागते हुए अंदर मैटरनिटी वार्ड में लगाए थे, उस दिन पहली बार मैं ने अपने बाहों को आप के हांडी पर करके आप को उस तरह से होल्ड किया था, मैं पैन में थी फिर भी मुझको आप बहोत फील हो रहे थे, आप के माथे से पसीना टपक रहा था जो मैं ने अपने हाथ से रब किया था, और जिस वक़्त आप ने मुझको लेटाया था वार्ड के बीएड पर दीप्ति के सर को आप ने अपने हाथ में संभाला था, तो मैं ने देखा के आप मेरे जिस्म को बिल्कुल नहीं देख रहे थे आप की नज़र सिर्फ दीप्ति के सर पर थे, उस दिन मैं आप की बहोत इज़त करने लगी और शायद प्यार भी…. उसी दिन, उसी वक़्त, उसी लम्हे से आप मेरे फवौरीते हो गए थे और उस दिन से आप को मैं ने दिल में बसा लिया था, लवर की तरह नहीं मगर एक, कैसे कहूं जैसे राधा और कृष्णा की जोड़ी होती है नाह, तो उस दिन आप मेरा कान्हा बन गए थे सोच लिया आप से वैसे hi दिल में प्यार करुँगी मगर कभी बताउंगी नहीं…… फिर तो आप ने मेरी इतना केयर किया उन् चार दिनों को जब मैं वार्ड में एडमिट थी के आप के लिए मेरा प्यार हज़ार गुनाह बढ़ गया… आप ने वो सब किया था जो एक पति को करना चाहिए था, आप को जितना खुश देखा था मैं ने दीप्ति के आने पर विवान में मुझको वो ख़ुशी नहीं नज़र आयी थी मुझे… लगता था दीप्ति के पिता आप हो विवान nahin…aap को पता है वहां के नर्स समझ रहे थे के आप फादर हो बची की मुझसे पूछा और कहा भी था एक नर्स ने के आप का पति आप का बहोत ख्याल रखते हैं…!!”

चावला साहब सान्वी के चेहरे में बहोत प्यार से देख रहे थे जिस वक़्त सान्वी यह सब कहती जा रही थी, दोनों ने एक दूसरे के पंजों को अपने मुठी में जाकर हुए थे बात करते हुए और दोनों पिछले गुज़रे हुए दिनों में चले गए थे याद करते और बात करते हुए…

चावला साहब ने एक लम्बी सांस लेते हुए कहा, “तुम भी मुझको प्यार करने लगी थी, और मैं तुमसे प्यार करने लगा था, तुम्हारी जिस्म की खुस्भु मुझे पसंद था फिर हम पिछले 5 साल एक दूसरे से इतने दूर क्यों रहे सान्वी? क्यों हमने एक दूसरे को नहीं कहा के हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं? क्यों हम दोनों hi खामोश रहे इतने सालों तक?”

सान्वी ने कहा, “हम इस लिए खामोश रहे क्यूंकि हम रिश्तों का पालन कर रहे थे, हम अपने मर्यादा में रहना चाहते थे, हम एक दूसरे को तकलीफ नहीं देना चाहते थे इस लिए हम खामोश रहे इतने सालों तक मगर अब बंद टूट चूका है और हम ने मर्यादा पार कर दिया है, यह आज नहीं तो कल होना hi था, इतने सालों तक कोई भी अपने प्यार को छुपा नहीं सकता…… मैं उस दिन इसी लिए पागल हो गयी थी क्यूंकि मैं आप से 5 सालों से प्यार करती आयी और आप मुझसे वैसा सुलूक कर रहे थे वो मुझसे सेहेन नहीं हुई थी के जिस इंसान को मैं अपना कान्हा मानती हूँ वो मुझसे इतने दिन तक कैसे रूठे हुए रह सकते हैं…..” और सान्वी रो पड़ी यह सब कहते हुए….. ज़ोर से रोने लगी और चावला साहब ने उस्सको बहोत hi ज़ोर से अपने बाहों में जाकर कर खुद अपने ेंसू बहाये सान्वी से माफ़ी मानते हुए…..

तो बे कॉन्टिनोएड... (3000 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 95 थे हॉट एनकाउंटर

मैं उस दिन इसी लिए पागल हो गयी थी क्यूंकि मैं आप से 5 सालों से प्यार करती आयी और आप मुझसे वैसा सुलूक कर रहे थे वो मुझसे सेहेन नहीं हुई थी के जिस इंसान को मैं अपना कान्हा मानती हूँ वो मुझसे इतने दिन तक कैसे रूठे हुए रह सकते हैं…..” और सान्वी रो पड़ी यह सब कहते हुए….. ज़ोर से रोने लगी और चावला साहब ने उस्सको बहोत hi ज़ोर से अपने बाहों में जाकर कर खुद अपने ेंसू बहाये सान्वी से माफ़ी मानते हुए…..

अब आगे…..

इतने दिल के दुखड़े रोने के बाद अब वक़्त था जिस्म की प्यास को बुझाने का, और कहते हैं नाह के नज़रों से होकर सीधे दिल में उतरती है, तो मैं कहता हूँ के दिल में उतरने के बाद जिस्म के हर एक हिस्से को झिँजोरर देता है और लिंग और योनि तक रीच होता है वही जो पहले नज़रों से होकर दिल तक पहुँचता है वो लिंग और योनि में जाकर एन्ड होता है, यह मेरा, कासिनर का कहना है, आप लोग मानों या नाह मानों असलियत एहि है प्यार की…. प्यार दिल से शुरू होता है या कभी तो नज़रों से शुरू होकर दिल तक पहुँचता है और एन्ड वहीँ जोटा जहाँ मैं ने कहा अभी…. :डी

हाँ तो सान्वी वो पतली सी निघ्त्य में थी, पतली पतली स्ट्रैप्स कांधों पर, जाँघों के ऊपर उठे हुए थे, पिछले एक घंटे के बातों करने के दौरान निघ्त्य और भी ज़्यादा ऊपर हो गए थे, उसस्के काँधे पर स्ट्रैप्स बार बार बाज़ू पर सरक जाते थे, चावला साहब बार बार उस्सकी नंगी कांधों को चुम भी रहे थे बात करते वक़्त, सान्वी का हाथ भी बार बार उनके बॉक्सर पर भी जा रहे थे वही बातें करते वक़्त, चावला साहब का लिंग पुरे खड़े रहे पिछले एक घंटे के बात चित करते वक़्त और क्यों के सान्वी को चावला साहब ने ऊपर उठाकर बैठा लिया था सान्वी गॉड से फिसल कर बीएड पर चली गयी उनके बाहों में hi रहते हुए और और तभी अपने हाथ को उनके बॉक्सर पर फर्टी जा रही थी बात करते वक़्त भी….

और आखिर में जब लास्ट वर्ड्स कह दिए थे दोनों ने तो एक दूसरे को जाकर लिए थे फिर से और सान्वी की काँधे पर से स्ट्राप बिल्कुल सरक कर निचे हो गयी थी तो चावला साहब सान्वी के कांधों को चुस्सने लगे थे और सान्वी सर को थोड़ा सा निचे करके उनके छाती को चूस रही थी रेड मार्क्स करने के लिए; अब रब जाने सान्वी यह जोश में कर रही थी या जान बुझ कर संजना को जलाने के लिए, जिस वक़्त वो चावला साहब के चेस्ट के जगह जगह को चूस कर लाल कर रही थी उस वक़्त सान्वी के दिल ो दिमाग़ में किआ संजना था? किआ वो उस वक़्त सोच भी रही थी के कल संजना उनके कमीज़ उतारेगी तो यह लोवेबिट्स देख कर चावला साहब से सवाल करेगी? यह औरत के दिल की बात कभी किसी को नहीं पता चल सकता और वो बताएगी तो कभी भी नहीं :डी

फिर दोनों एक दूसरे को वैसे hi जकड़े चुम्मते चाटते हुव लेट गए, चावला साहब पीठ के बल गए क्यूंकि सान्वी उनपर खुद चढ़ गयी थी, चावला साहब सान्वी को अपने निचे करना चाहते थे मगर सान्वी ने खुद एक हाथ को बीएड पर करके उनको उस तरफ किया जिस से चावला साहब समझ गया के सान्वी उनके ऊपर होना चाहती है, तो जनाब बीएड पर पीठ के बल हुए और सान्वी उन् के पुअर चढ़ गए….

सान्वी के चेहरे में एक ज़बरदस्त भड़के हुए आग जैसे दिख रहे थे, चावला साहब एक पल के लिए जैसे घबरा सा गया उस्सको वैसे देख कर, उस्सने जैसे एक रूप बदला था उस वक़्त, उसस्के बाल खुले हुए दोनों कांधों से होकर कुछ चेहरे पर भी लटके हुए थे और सान्वी ने अपने दोनों टांगों को चावला साहब के एक एक तरफ करके अपनी गांड को ठीक उसस्के लिंग पर किया और जैसे एक घोड़े पर बैठ गयी थी और अब उस घोड़े को काबू में करके उस्सको भगाना था सान्वी को… सन कुछ ऐसा hi लग रहा था !!

सान्वी ने अपने कमर को उनके लिंग पर हिलना शुरू किया मुंह खुले hi था और चावला साहब के चेहरे में देख रही थी उस एक्शन को करते वक़्त, तो चावला साहब ने अपने हाथ उठाते हुए सान्वी के निघ्त्य के स्ट्रैप्स को धीरे धीरे निचे करने लगे जिस से उस्सकी दोनों बूब्स चावला साहब के नज़रों के सामने आगये…. ऐसा लगता था के दोनों बूब्स चावला साहब से बातें कर रहे थे… सान्वी के हिलने की वजह से बूब्स आगे पीछे हो रहे थे चावला साहब के चेहरे के सामने… तो उन्हों ने थोड़ा सा गले को ऊपर उठाकर एक बूब को चुम्मा फिर जीब फेर्रा, फिर दूसरे बूब को किश किया, फिर एक बूब को चुस्सने लगे एक हाथ को सान्वी के कमर पर करके… सान्वी हांफ रही थी और उस्सकी आवाज़ धीमी धीमी निकलती जार यही थी जैसे, “हम्म्म स्स्स्सह्ह्ह, आआह ऊऊह्ह्ह!!!” उस्सकी रागढ बढ़ती जा रही थी चावला साहब के बॉक्सर के ऊपर, और चवा साहब सेहेन नहीं कर पाया, वो बोल पड़ा, “अरे रुको, रुको नाह बॉक्सर के अंदर से निकालो तो उस्सको मेरी जान!!”

बहुत hi रपीड़ितय के साथ, झपट कर सान्वी थोड़ा निचे खिसकी उनके घुटनों तक और उस्का चेहरा सीधे बॉक्सर के पास रुका, और सान्वी ने बड़े प्यार से मगर जल्दबाज़ी में उनके बॉक्सर को दोनों हाथों से पाकर के निचे खिंचा और अपने मुंह को सीधे उनके लिंग पर किया जिस से चावला साहब की आवाज़ आह के साथ निकले.

और होना किआ था! सान्वी जैसे बहोत भुकी थी, बड़े प्यार से अपने हाथों से लिंग को थामा, प्यार दे उस्सकी लम्बाई पर नज़रें दौड़ाई और अपने मुंह में ले लिया…. चावला साहब सिहर गए और संवी को जैसे एक सुकून हासिल हुई चावला साहब के चेहरे में देखते हुए वो उनको चुस्सने लगी अपने एक हाथ को उनके जाघों पर फरते हुए…..

चावला साहब ने अपने दोनों टांगों को फैलाया ताके सान्वी उनके बीच आये और वो खुद उठ बैठे सान्वी के सर पर अपना हाथ फरते हुए और धीरे धीरे उस्सकी निघ्त्य को बाहर किया चावला साहब ने मगर सान्वी ने चुस्सना जारी रखा उनको देखते हुए…. सान्वी सिर्फ पंतय में थी, चावला साहब नंगे हो चुके थे, और चावला साहब ने सान्वी के कमर को पाकर कर अपने तरफ किया तो सान्वी ने लुंड को नहीं चोर्रा मगर अपने कमर को उनके तरफ कर दिया तो चावला साहब उस्सकी पंतय उतारने लगे, निकालते हुए चावला साहब ने सान्वी की योनि को छाता और उस्सको अपने ऊपर लेलिया लेट कर जिस से एक 69 पोज़ हो गए….. 69 पोज़ हाँ मगर सान्वी उनके ऊपर थे चावला साहब निचे पीठ पर लेते हुए, सान्वी के दोनों टांगें चावला साहब के चेहरे के दोनों तरफ थे और उस्सकी योनि पर चावला साहब जा जीब चलने लगा था… बिल्कुल गीली हो गयी थी सान्वी, चावला साहब का जीब फिसलते हुए उस्सकी योनि का रस चूस रहे थे

कोई 7 मिनट्स तक दोनों उसी पोजीशन में एक दूसरे को चूस्ते रहे और चावला साहब के भी प्रेकम निकल पड़े जिस्सको सान्वी ने छाता और चूसा, फिर खुद सान्वी रुक गयी यह कहते, "मेरा मुंह दुःख गया, जबड़ा जैसे सुन हो गए, यह कहकर वो मुस्कुरायी और पोजीशन चेंज कर के अपने दांतों में होंठों को दबाकर सान्वी उनके लिंग पर फिर से बैठी और इस बार लुंड के ऊपर hi अपने कमर हिलाते हुए अपनी योनि की पंखुरियों के बीच उनके लुंड को फिसलते हुए रगड़ती गयी उनके चेहरे में देखते हुए….. चावला साहब लेते हुए सान्वी के चेहरे में देखते जा रहे थे एन्जॉय करते हुए, लुंड अभी सान्वी के अंदर ग़ुस्से नहीं थे सिर्फ पंखुरियों के बीच ो बीच रगड़ती जा रही थी सान्वी और कभी कभी अपने हाथ को भी लुंड के ऊपरी हिस्से पर फेरर रही thi..jab पीछे हिलती थी तो लुंड का ऊपरी हिस्सा दीखता था तो अपने हथेली से सान्वी उस्सको छूती……

चावला साहब से सेहेन नहीं हो रहे थे उनको डर था के कहीं वो उसी पोजीशन में झाड़ ना जाए इस लिए उन्हों ने सान्वी को अब अपने निचे घुमाया और मिशनरी पोजीशन में होकर, दोनों ने एक दूसरे के मुंह को अपने मुंह में लेते हुए एक दूसरे के जीब चुस्सने लगे और तभी चावला साहब के लिंग जैसे रास्ता ढूढ़ रहे थे संवी के योनि के अंदर घुस्सने के लिए तो सान्वी के खुद अपने हाथ से उनके लिंग को थामा और खुद अपने छूट के अंदर लिंग के ऊपरी हिस्से को छूआ तो चावला साहब ने कमर को पुश किया और उंनका लुंड सान्वी के अंदर आराम से फिसलते हुए घुस गया

सान्वी की आह निकली, “ीिस्स्सस्स्स्शह्ह्ह ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह आआआह्ह्ह्ह हैं जी ऐसे hi अब ढाका दीजिये नाह ji….zoron से ज़बरदस्त वाले धक्के चाहिए मुझे करए नाह जी आआअह्ह्ह्हह स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह!!!!”

चावला साब सान्वी के गर्दन पर अपने जीब चालाते हुए कमर को हिलाते हुए एक से बढ़कर एक ज़बरदस्त धक्का देने लगे, रफ़्तार के साथ और सान्वी पागल होने लगी उनके निचे, उस्सकी जिस्म में एक आग जैसी बढकने लगी , सान्वी अपने सुध बुध खोने लगी और उस्सकी जिस्म सांप की तरह रेंगने लगी बीएड के चादर को अपने मुठी में जाकर हुए सान्वी बहोत जल्द hi अपने ओर्गास्म पर रीच हो गयी चिलाते हुए, “आआआअह्ह्ह्हह स्स्स्सस्शह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्ह्हह्ह हाआनंनं हहहाआन और आऔऊररररर मज़ाआ आए रहा है जीईई स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह” ऐसे कहते हुए सान्वी ने अपने बाहों में बहोत hi ज़ोर से कसके चावला साहब को जकरा के चावला साहब को लगा के उस्सको सांसें लेने में तकलीफ होने लगे… वो ज़ोरों से हैंफने लगे थे पर धक्कों को बरकरार रखा और कुछ hi लम्हों के बाद वो भी झड़ने को आये और झट से लिंग को बाहर निकाल कर अपने पिचकारी को चोर्रा सान्वी के पथ से लेकर उसस्के बूब्स और गर्दन tak…sab लेथ पथ कर दिया भिगो के सान्वी को…

सान्वी भी ज़ोरों से हांफ रही थी और उस्सकी पूरा छाती ऊपर निचे हो रहे थे उस तरह से हैंफने से और वो मुस्कुराते हुए चावला साहब के चेहरे में बड़ी ख़ुशी के साथ देख रही थी… चावला साहब भी उस्सको देखते हुए मुस्कुराकर उसस्के चेहरे के पास अपने लिंग को लगाए और बिना कहे सान्वी ने उनके लिंग को अपने मुंह में लेकर बाकि के वीर्य को छाता और चूसा चावला साहब के ेंखों की गहराई में देखते हुए… चावला साहब ने संवी के गर्दन के निचे अपने बाहों को करके उस्सको अपने बाहों में ज़ोर से पकड़ा और दोनों ने एक दूसरे के जीब को मुंह में लिया और किश करते हुए बीएड पर लेट गए बहोत ख़ुशी के साथ… दोनों के दिल को बहुत आराम और सुकून हासिल हुए, जैसे सेहरा में थड़ा पानी मिल गया और दोनों टर्र हो गए….

तो बे कॉन्टिनोएड………………
 
अपडेट 96 आफ्टर ा फ्यू मोनथस

चावला साहब और सान्वी के प्यार का परवान ऊपर चढ़ता गया दिन बा दिन. उधर, संजना से मुलाकातें भी बढ़ती गयी. चावला साहब इन् दो औरतों के बीच खुद को बहोत अच्छी तरह से मैनेज कर रहे थे और दोनों के साथ बराबर प्यार बाँट रहे थे. हु इन् दोनों में कभी भी किसी किस्सम की अंतर नहीं करते, डिफरेंस नहीं दिखाते, जो एक के लिए पसंद करते वही दूसरे के लिए भी लेते, एक गिफ्ट संजना को देते तो बिल्कुल वैसा hi गिफ्ट सान्वी को भी. एक दिन संजना से इश्क फरमाते तो दूसरे दिन सान्वी को बराबर वैसे इश्क करते; कभी अगर रात को सान्वी से सेक्स करते तो दिन में संजना को खुश करते……

चावला साहब को संजना और सान्वी में किआ अंतर हैं सब पहचान चुके थे, वो दोनों को अपने अपने रूप और रंग में पसंद करते थे. संजना बहुत ज़्यादा चंचल, चुलबुली और खुली थी जबकि सान्वी घरेलु और ज़्यादा मातुरे थी. सान्वी की एप्रोच चावला साहब के तरफ बिल्कुल अलग थे, और संजना का तरीका उसस्के करीब होने की बहुत अलग. संजना जब चावला साहब से मिलते तो जैसे एक हमउम्र के दोस्त से मिल रही हो, दोनों की केमिस्ट्री भी बहुत हटके था. वह दोनों अगर पब्लिक में नज़र एते मॉल में या पार्क में या कहीं भी तो लगता एक बाप बेटी साथ चल रहे हैं, संजना पब्लिक में किसी के भी सामने चावला साहब के कमर में हाथ दाल कर चलती या उन् के काँधे पर भी अपने बाज़ू बढ़ा देती थी.

मगर जब कभी सान्वी चावला साहब के साथ पब्लिक में होती तो वो एक दूरी कायम रखती थी, दोनों के बीच कुछ है यह कभी भी किसी को नहीं पता चलता, नज़रों से इशारों में बात हो जाते थे मगर पब्लिक में बिल्कुल ससुर बहु वाला hi रिश्ता नज़र अत. किसी को कभी कोई भी भनक नहीं लगा के इन् दोनों के बीच कोई नाजाइज़ तालुकात है.

तो यह सीसलसीला चलता रहा ऐसे hi इन् तीनों के बीच कुछ महीनों तक जब तक के आरव वापस आया और उस्सकी शादी संजना के साथ बड़े धूम धाम से मनाई गयी.

संजना की, चावला साहब के घर में बहु की रूप में आये हुए 3 महीने बीत चुके थे…… जिस दिन वो दुल्हन के रूप में घर में आयी एक नया आटोमेटिक बंव कार गिफ्ट में मिली उस्सको चावला फॅमिली के तरफ से क्यूंकि उस्सने ड्राइविंग सीख लिया था और ड्राइविंग लाइसेंस मिल चुकी थी उस्सको… आरव के कनाडा से वापसी के बाद वो उस से मिलने जाने लगा था और यह सब तय हो गया था के उस्सको नयी कार मिलेगी शादी के दिन घर पर और वो जितना चाहे अपने पापा से खुद ड्राइव करके मिलने जा सकती है. सान्वी को भी पता था के संजना को एक नया कार दिया जाएगा और उस्सको कोई ऐतराज़ नहीं थी. बुसस एहि एक चीज़ थी जो सान्वी को नहीं दिया था चावला साहब ने क्यूंकि उस्सको ड्राइविंग नहीं आती थी. चावला साहब ने एक रोज़ सान्वी से कहा भी के वो भी ड्राइविंग सीक ले टेक उसस्के लिए भी एक वैसा hi कार खरीद सके चावला साहब, मगर सान्वी ने कहा उस्सको कोई इंटरेस्ट नहीं है. सान्वी ने जाकवाब में उन् से कहा था, “मुझे आप मिल गए मेरे लिए एहि बहोत है मुझे कार नहीं आप चाहिए!”

तो शादी के 3 महीने बाद

शादी के पहले हफ्ते संजना कार लेकर अपने पापा से मिलने हफते में 2 या 3 दिन जाती थी. तीसरे हफ्ते में, हफ्तेर में सिर्फ 2 दिन गयी थी. चौथे हफ्ते में संजना अपने पापा से मिलने हफ्ते में कभी 2 बार तो कभी एक hi बार जाती. हाँ वीकेंड्स में कभी सैटरडे को जाती, वहीँ रहती फिर मंडे मॉर्निंग को वापस आती. चावला साहब और सान्वी ने देखा के जब संजना अपने पापा के पास चली जाती तो उन् दोनों के साथ रहने का अच्छा मौका मिलता था तो इन् दोनों ने संजना को अपने पापा से मिलने और वहां वीकेंड्स में रहने को ेन्सॉरगे किया और आरव से भी कहा के संजना को जितना अपने पापा के यहाँ जाना है उनसे जाने दे…. आरव को भी कोई प्रॉब्लम नहीं था के संजना बार बार या हर रोज़ अपने पापा से मिलने जाती. कभी कभी तो ऐसा होता था के चावला साहब संजना को चोरर कर वापस आते थे और रात को आरव उस्सको लेने वहां जाते थे…. खुद अपने प्रोग्राम्स बनाते थे सब मिलकर.

हाँ शादी से पहले hi चावला साहब ने संजना को बता दिया था के उस्का रिश्ता सान्वी से भी है. संजना बहोत खुश हुई थी और कहा था के उस्सको शक था. और संजना को कोई भी प्रॉब्लम नहीं था उस में. उस ने चावला साहब को जवाब में कहा था के जब आप मुझको अपने पापा के साथ जाकर सेक्स करने दे सकते हो तो मैं क्यों आप को रोकूंगी सान्वी के साथ करने के लिए, आप भी फ्री हो, मैं भी फ्री हूँ, हर कोई फ्री है इस दुन्या में जो मर्ज़ी आये वो करने के लिए, ऐसा संजना को सोच था.

एक मिली भगत भी थी तीनों के बीच, जैसे के जब कभी संजना अपने पापा के यहाँ जाते थे रहने को और अचानक आरव वहां उस से मिलने को जाता बिना बताये तो चावला साहब जल्दी से संजना को फ़ोन करके बता देता था के आरव वहां ारः है अपने पापा से दूर रहो अगर कुछ कर रहे हो तो एन्ड करो…. इस से पहले तो सान्वी बताता सब चावला साहब को के आरव वहां जा रहा है संजना से मिलने उस्सको फ़ोन करके बता दो के वो वहां ारः है…. हाँ सान्वी को भी सब बता दिया गया था के संजना का अपने पापा के साथ कैसा रिश्ता है…. यह जान कर सान्वी बहोत हैरान हुई थी मगर जब चावला साहब ने सब समझाया उस्सको के बिना माँ की लड़की अपने बाप के साथ अकेली रहती है और पापा को बहोत ज़्यादा प्यार करती है तो यह हो जाता है जैसे हम दोनों के बीच हुआ…. तो सान्वी समझ गयी और उस बात को इग्नोर किया और फिर भी संजना को वो भी उतना hi प्यार करती जितना चावला साहब. सान्वी की प्यार में खोट नहीं थी और ना hi संजना के प्यार में खोट था, दोनों दिल के सच्चे थे और प्यार करते तो सच्चे दिल से करते और दोनों वफादार थे… वफादार इस तरह के जिस्सके साथ चाकर है तो किसी और को पता नहीं चलने देते, अपनों को दुःख नहीं देते मतलब जो राज़ की बात है वो पता नहीं चलने देते अपनों को ताके अपनों को दुःख नाह हो… और जिनके साथ राज़ वाला रिश्ता है उस से बिल्कुल वफ़ा करते…. हाँ अपने पति से ज़रूर बेवफाई करते मगर आशिक से वफ़ा क्यों के यह प्यार का मुआमला था, ाहिक से प्यार था तो वफ़ा करना पड़ता, वैसे पति से भी बहोत प्यार था, उस रिश्ते को बाखूबी निबाहते थे दोनों सान्वी और संजना, इतनी अच्छी तरह से उस शादी के रिश्ते को निभाते के पति को बिल्कुल भी शक नहीं होते, शक की गुंजाइश hi नहीं hote…upar से चावला साहब जैसे मज़बूत सपोर्ट जो थे दोनों को.

तो इन् तीनों में बहोत मेल था. तीनों एक दूसरे को बहोत स्ट्रॉन्ग्ली सपोर्ट करते थे.

और संजना की दीप्ति के साथ बहोत जल्दी बड़ी दोस्ती हो गयी, इतना के दीप्ति संजना के बिना रहती hi नहीं थी, माँ से ज़्यादा संजना के साथ वक़्त बिताती थी. संजना की कोई छोटी बेहेन या भाई नहीं था कभी तो उस्सको दीप्ति में एक छोटी बेहेन दिखती थी इस लिए वो दीप्ति से बेहद प्यार करती, यहाँ तक के एक दिन जब अपने पापा के यहाँ जा रही थी तो दीप्ति को अपने साथ लेजाना चाहा.

सान्वी कुछ एग्री नहीं कर रही थी मगर चावला साहब ने कहा ठीक है लेजाने दो. तो संजना ने कुछ ऐसा कहा था संवी और चावला साहब को, “अरे मैं तुम दोनों के लिए रास्ता क्लियर कर रही हूँ, दोनों कबूतरों दिन भर अकेले मस्ती करो नाह!!” सान्वी हंसी थी उस बात पर. और संजना दीप्ति को कार की किध सीट में बांध कर पीछे के सीट में बिठाकर अपने पापा के यहाँ गयी थी सुबह 10 बजे और वापस आयी थी शाम के 7 बजे विवान और आरव के वापस आने से पहले.

तो बे कॉन्टिनोएड……………… (1400 वर्ड्स)
 
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