Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 15 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

थैंक्स वैरी मच फॉर पोस्टिंग योर फर्स्ट पोस्ट ों माय थ्रेड एंड थैंक्स फॉर थे पं आल्सो.

यू अरे थे मोस्ट वेलकॉमेड ों थिस थ्रेड.

थैंक्स वैरी मच फॉर थे अप्प्रेसिअशन.

इतस ान इममेंसे प्लेअसुरे तो सी नई रीडर्स जोइनिंग ों माय थ्रेड

ी ऍम वैरी हैप्पी तहत थे स्टोरी प्लैसेड यू तहत मच.

कीप रीडिंग एंड रेप्लयिन्ग ऑफ़ कोर्स.
 
अपडेट 135 बोथ स्टिल टुगेदर

सान्वी के सांसें लेने से उस्सकी बूब जैसे फूल रहे थे फिर बैठ रहे थे फिर ऊपर हो रहे थे फिर बैठ रहे थे और आरव को बहोत ाचा फील होने लगा उस तरह से सान्वी के छाती से अपने गाल को लगा कर…… उन् दिनों का याद आगया उससे जब यूनिवर्सिटी जाने से पहले वो एहि सब किया करता था सान्वी के इसी कमरे में इसी बीएड पर…… सान्वी के उँगलियाँ आरव के सर पर फरने लगे थे और सान्वी थोड़ा बहोत जैसे हांफने लगी टी…

अब आगे……………..

आरव ने एक ऊँगली से उस्सकी ब्रा की स्ट्राप को हलके से काँधे से सरकाते हुए उस्सकी काँधे को हलके से चूमा, फिर आहिस्ते से अपने जीब को फेर्रा उस काँधे पर, और आहिस्ते आहिस्ते जीब को फरते हुए ज़रा सा निचे गया सान्वी की बाज़ू और आर्मपिट के बीच पर चाटते हुए… सान्वी की एआरएम उस वक़्त आर्मपिट पर डब्बे हुए थे तो आरव अमित की निचे जीब डालने की कोशिश में था, और अपने ेंख उठाकर सान्वी के चेहरे में देखते हुए अपने जीब को इन बिटवीन थे आर्मपिट डालने को तरय करते जा रहा था, तो उस्सने देखा सान्वी ने ेंखें बांध किये हुए फील कर रही थी उसस्के लीक्स को…..

आरव देखना चाहता था के सान्वी अपने एआरएम को ऊपर करती है या नहीं, ब्रा की स्ट्राप तो काँधे के निचे जा चुकी थी और तब तक वैसे hi जीब फरते हुए आरव ने एक हाथ से दूसरे काँधे की स्ट्राप को भी निचे सरका दिया जो सान्वी ने करने दिया, और उस्सकी तक़रीबन 80% बूब्स बाहर थे निप्पल्स के इलावा…. तब सान्वी ने वैसे ेंखने मुंढे हुए hi अपने उस एआरएम को ऊपर किया जहाँ आरव का जीब चल रहा था…. आरव खुश हुआ और अपने जीब को सान्वी के आर्मपिट पर फरने लगा जिस से सान्वी कसमसाई और एक हलकी सी तड़पती आवाज़ निकली उस्सकी, कुछ “ह्म्म्मम्म” जैसा सुना आरव ने और उस्सकी अमित चाटने लगा उसस्के चेहरे में देखते हुए….

और तभी आरव के निचे का हिस्सा सान्वी के निचे जाँघों पर गया और आरव का पहला हुआ लुंड सान्वी ने अपने जांघ पर दबते हुए फील किया और खुद और ज़्यादा चिपक गयी आरव के जिस्म से निचे के तरफ… आरव ने तब सान्वी की दूसरे बाज़ू के निचे अपना जीब किया और वहां चाटने laga…Saanvi ने दोनों बाहों को ऊपर कर लिया जैसे आरव को वैसे चाटने के लिए पोजीशन देने लगी थी…. ब्रा एक इंच से सिर्फ निप्पल से लगा हुआ था और आरव की एक ऊँगली ब्रा को निचे करने की कोशिश में लगाया मगर क्यूंकि पीछे ब्रा हूकेड थी तो वो ज़्यादा निचे नहीं जा रहा था निप्पल कवर्ड hi था… तब आरव ने उस्सकी साडी को उसस्के पथ के बिल्कुल निचे कर दिया जिस से सान्वी का पथ, कमर, सब साफ़ नज़र आने लगे थे, और आरव अब सान्वी के नवी के पास गया चूमते चाटते hue…apne जीब को सान्वी के नबी के और गोआल गोआल घुमाया जिस से सान्वी ने पैरों को मोड़ कर एक ट्विस्ट लिया और अपने जिस्म को थोड़ा ऐंठने लगी….. मैंवहीले आरव अपने हाथ को सान्वी के बूब्स पर दबाता रहा उनको जैसे हलके हलके मसलते हुए…..

यह सब कर रहा था आरव सान्वी के जिस्म के साथ और सान्वी खामोश लेती हुई थी, उस्सको वो सब करने दे रही थी जैसे पिछले 3 सालों को कम्पेनसाते कर रही थी आरव को, जैसे एक उधार था उस्का आरव पर….. जब आरव उस्सकी पथ को छठ रहा था तब सान्वी का हाथ आरव के सर और गर्दन पर फरने लगी, वो आरव को करेस करती जा रही थी जैसे उसस्के हौसला बढ़ाते हुए, और आरव धीरे धीरे निचे बढ़ता गया चूमते चाटते हुए, नबी के निचे उस्सकी योनि की तरफ बढ़ने लगा था आरव… पेट्टी कोट के निचे आरव ने एक ऊँगली डाला और पेट्टी कोट को और निचे करने की कोशिश किया तब जाके झट से सान्वी ने उस्का हाथ थामा और उसस्के चेहरे में देखने लगी दांतों में अपने होंठों को दबाये हुए…..

आरव ने कहा, “भाबी आप को बिना साडी के देखा करता था याद है एक बार फिर निकलडो नाह साडी को प्लीज!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुमने ब्लाउज करीबन निकल दिया, ब्रा ऑलमोस्ट खोल दिया सिर्फ पीछे के हुक्स बाकी हैं अब साडी निकलूं तो कैसा लगेगा? मैं तो पेट्टी कोट और ब्लाउज में रहती थी नाह पहले?!”

आरव: “आप के बूब्स को बिल्कुल नुदे देखा था जाने वाले दिन याद है? एक बार फिर दिखादो नाह!”

सान्वी: “लो! अब बिना साडी के देखना है या बिना ब्रा के चोसे करो!”

आरव: “मैं तो आप को इन् सब के बिना देखूं, कम्प्लीटली नुदे! ठीक है!”

सान्वी: “और भी शैतान हो गया है तू तो!”

आरव: “प्लीज भाबी निकालो नाह सब!!”

सान्वी: “पागल है किआ बेशरम कहीं का!”

आरव ने दुलार वाले ऐडा में एक बचे की तरह मुंह बनाते हुए कहा, “मुझे कुछ नहीं पता मुझे आप को वैसे देखना है!”

सान्वी: “संजना से बोल नाह उस्सको नुदे नहीं देखता किआ? वैसा hi तो दिखूंगी नाह आरव मैं भी!”

आरव: “बिल्कुल भी नहीं….. आप आप हो वो नहीं!”

सान्वी: “तू मुझे आप आप क्यों कह रहा है तू तो मुझे तू कहता था!”

आरव: “पता नहीं, याद hi नहीं मुझे के कैसे बुलाता था तुम्हें!”

सान्वी तब तक बैठ चुकी थी और अपने ब्रा को काँधे पर ठीक करते हुए उठ रही थी बीएड से, तो आरव ने उसस्के हाथ थम कर उस्सको रोकना चाहा तो सान्वी ने कहा,

“रुक तो, साडी नहीं उतारनी है किआ? यहीं बैठ साडी निकल के अति हूँ, अब खुश मुन्ना?!”

आरव उछलने लाहा ख़ुशी के मारे.

सान्वी बाथरूम के तरफ गयी और बुसस कुछ लम्हों के बाद अपनी पेट्टी कोट और ब्लाउज में वापस आयी बीएड पर आरव के पास तो आरव ने उस्सको ज़ोर से अपने बाहों में जाकर के उसस्के बूब्स को चूमने लगा और ब्लाउज की बटन्स को एक एक करके खोलने लगा और निकल फेंका उस्सकी ब्लाउज को और सान्वी को बीएड पर लेता दिया आरव ने और उसस्के ऊपर चढ़ गया….. सब कुछ बहोत hi फ़ास्ट किया आरव ने…..

हैरानी की बात यह थी के सान्वी ने सब करने दिया, जैसे खुद को उसस्के हवाले कर रही थी… एक वो सान्वी थी जिसस्ने कितना कुछ सुनाया था आरव को उस रात को फ़ोन पर यूनिवर्सिटी में और एक यह सान्वी थी जो पहले की तरह सब कुछ करने दे रही थी आरव ko…to किआ हुआ था अब? बात यह थी के अब सान्वी एक मातुरे आरव के साथ थी बीएड पर, पहले एक दिमाग़ की पैदल आरव के साथ हुआ करती थी….. ऊपर से इतने दिनों की दुरी दोनों के बीच और फिर सही कहा था चावला साहब ने सान्वी को के अब क्यूंकि आरव संजना से सेक्स करने लगा है तो एक्सपेरिएंस्ड हो गया है और फिर प्यार भी जो था उसस्के दिल में सान्वी के लिए शुरू से hi….. मगर सान्वी के दिल में किआ था इस वक़्त? क्यों वो सब कुछ करने दे रही थी आरव को? क्यों नहीं रोक रही थी? किआ सान्वी भी वही सब चाहती थी जो आरव चाहता था? आरव ने यूनिवर्सिटी वाले दिनों में खुलके कहा था सान्वी को के वो उस्सकी जिस्म की हर एक अंग को तराशना चाहता है उसस्के अंदर गहराई में जाना चाहता hai….to किआ अब सान्वी तैयार थी आरव को अपने अंदर लेने के लिए? किआ सान्वी ने जैसे चावला साहब के साथ सब कुछ किया किआ अब आरव को भी करने देगी?

आरव ने फिर से उस्सकी ब्रा की स्ट्राप को सरकाया और काँधे को चूमना और चुस्सना शुरू किया, फिर अपने हाथों को सान्वी के निचे करके उस्सको उन्हुक कर दिया और अब ब्रा बिल्कुल ढीली हो गयी थी तो आरव उस्सकी बूब को चाटते हुए उसस्के निप्पल के तरफ बढ़ने लगा और सान्वी कसमसाती हुई बीएड की चादर को मुठी में भर रही थी आरव के चेहरे में देखते हुए….. आरव के होंठ जब सान्वी की निप्पल्स तक गए तो झट से सान्वी ने अपने हाथ को वहां कर लिया उस्सको अपने निप्पल चुस्सने से रोका…. आरव ने उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा,

“किआ भाबी अब किआ हुआ, प्लीज चुस्सने दो नाह भाबी….”

आरव के हाथ उसस्के चूचियों को ज़ोरों से दबाते हुए मस्सल रहा था, एक बूब बिल्कुल बाहर था निप्पल भी दिख रहे थे , और सान्वी ने उस बूब को भी छिपाया अपने हाथों से और आराम से कहा, “आरव यह सही नहीं है यार… संजना के साथ धोका है यह!”

आरव थोड़ा ग़ुस्सा हुआ और कहा,

“किआ भाबी इतना कुछ तो कर लिया अब कहाँ से संजना आगयी इस में….. मुझसे अब सेहेन नहीं होता भाबी मैं तो अब आप के पेट्टी कोट भी निचे करने वाला हूँ आप के खूबसूरत जाँघों को भी सहलाना और देखना है मुझे….. आप अपने एक तंग को थोड़ा ऊपर करो नाह मैं निचे जाता हूँ अब….. यह कहकर आरव सान्वी के क़दमों में चला गया और उस्सकी पाऊँ को चूमने लगा, उस छुवन से सान्वी के रौंदते खड़े हो गए और उनेक्सपेक्टेद्ली उस ने अपने एक तंग को ऊपर खिंच लिया जिस से उस्सकी पेटीकोट तो ऊपर उठ hi गए और आरव को सान्वी के जाँघों के बीच का नज़ारा दिखा तो झट से आरव ने अपने हाथ को सान्वी के दोनों जाँघों के बीच में किया और सान्वी ने कसमसाते हुए अपने दोनों जाँघों को दबा लिया ज़ोर से जिस के बीच जैसे आरव का हाथ कैद हो गया….

आरव को तो बहोत hi अच्छा लग रहा था सान्वी की नरम जाघों के बीच में अपने हाथ को पाकर, सान्वी भी अपने नरम और गरम जाँघों के बीच खुद आरव का हाथ महसूस करते हुए शर्मा रही थी और कहा,

“आरव अपना हाथ हटा वहां से, प्लीज हत्ता नाह मुझे अजीब फील हो रहा है, शर्म भी आरही है तुमने मुझे वहां कभी भी नहीं छुआ है प्लीज हाथ निकाल वार्ना मैं तुमसे बात नहीं करुँगी कह देती हूँ हाँ!!”

आरव थोड़ा नटकट होने लगा और एक शैतानी मुस्कान के साथ उस्सने सान्वी से कहा, “ऐसा मौका कहाँ मिला था मुझे पहले कभी जो अपने हाथ को वहां डालता मैं, मुझको हाथ निकालने को कह रही हो और खुद मेरे हाथ को कैद किया हैं अपने जाँघों के बीच, किआ भाबी!”

तब सान्वी ने झट से उसस्के हाथ को रिलीज़ किया अपने जाँघों को अलग करते हुए मगर आरव तो इसी इंतज़ार में था और उस्सने तुरंत पेटीकोट को और अलग करके अपने चेहरे को सान्वी के जाँघों से लगाते हुए अपने गाल से सान्वी की एक जांघ को सहलाया, जिस से सान्वी उठ बैठी उस्सको देखते हुए और कहा,

“आरव प्लीज रुको, ऐसा नहीं करते बुसस करो अब उफ़!”

आरव ने कहा, “भाबी मैं ने कहा था नाह के ी वांट तो एक्स्प्लोर योर बॉडी, हर एक अंग को एक्स्प्लोर करना है मुझे….”

सान्वी ने झूठ मुठ के ग़ुस्सा दिखाते हुए बीएड से निचे उतरने की कोशिश में थी के आरव ने उस्सको जकरा और उस्सकी दोनों बूब्स ब्रा से बाहर आगये क्यूंकि ब्रा तो आरव ने उन्हुक कर दिया था और सान्वी पानी पानी हो गयी अपने हाथों को बूब पर करके छुपाने की कोशिश में लगी रही मगर आरव ने एक बूब को मुंह में ले लिया और चूस्ते हुए बात किया, “ऐसे hi देखा था तुमको लास्ट दिन यूनिवर्सिटी जाने से पहले याद है और सिर्फ एक हल्का सा किश किया था इससे, आज तो भर मुंह लेकर खाऊंगा इस्को भाबी!!”

सान्वी ने थोड़ा हँस्ते, थोड़ा ग़ुस्सा करते हुए कहा, “तू इतना ज़्यादा शैतान हो जाएगा मैं ने नहीं सोचा था मैं संजना से तेरा शिकायत करुँगी हाँ!”

आरव ने दूसरे बूब को मुंह में लेते हुए कहा,

“किआ कहोगी संजना से के मैं तुम्हारे बूब को चूस रहा था हम्म बोलो बाबी!! हहहहए!

सान्वी ने हलके से उस्सको हाथ से मारते हुए कहा,

बदमाश कहीं का तू बड़ा बेशरम हो गया है अब आरव ी नेवर थॉट ऑफ़ यू लिखे थिस, तू तो पूरा पागल है, चोरर मुझे, चोरर नाह आरव मुझे कुछ हो रहा है उफ्फ्फ…. चोरर नाह प्लीज आरव…..”

आरव ने उस्सको यूँही जाकर हुए चाटते चूस्ते हुए कहा, “भाबी थोड़ा मुझे भी चख लो अब नाह आईटी इस हाई टाइम तहत ी पूत थिस डीप इन यू भाबी darling…..oh माय गॉड ी हैवे बीन लोंगिंग फॉर थिस फॉर सो मान्य इयर्स माय लवली भाबी….”

यह सब कहते हुए आरव अपने पंत के अंदर पहले हुए मोठे लुंड को दिखा रहा था सान्वी को….

सान्वी ने एक बार निचे वहां देख कर नज़रें एक तरफ करते हुए कहा,

“उफ़ बिल्कुल नहीं बिल्कुल भी कभी नहीं सोचा था के एक दिन तू इतना साहस करेगा मुझसे ऐसे बात करने को हाय राम आअराव तू इतना बदल गया है अब?!”

इतना कहा सान्वी ने के उन् लोगों के गेट के पास स्कूल बस रुक कर हॉंक करने लगा…..

सान्वी जल्दी से कपडे पेहेनते हुए झटपटाते हुए कहा, “ोफो दीप्ति आगयी उस्सको लेने जाना है वार्ना ड्राइवर उस्सको नहीं उतारेगा जब तक मैं उस्सको लेने नाह जाउंगी… सुनों मैं आती हूँ तू जाकर बस को रोक नाह आरव, ी ऍम जस्ट किंग….. और सुन आरव अपने पापा के सामने मुझको मत छूना, मत चेररणा और मत पकड़ना मेरे हाथ को समझे तुम, उसस्के मौजूदगी में मुझसे बिल्कुल क्लोज मत रहना okay? मैं आती हूँ……”

तो बे कॉन्टिनोएड………. (2250 वर्ड्स)
 
अपडेट 136 - आरव डिसअपोइंटेड, सान्वी कन्फ्यूज्ड

सान्वी जल्दी से कपडे पेहेनते हुए झटपटाते हुए कहा, “ोफो दीप्ति आगयी उस्सको लेने जाना है वार्ना ड्राइवर उस्सको नहीं उतारेगा जब तक मैं उस्सको लेने नाह जाउंगी… सुनों मैं आती हूँ तू जाकर बस को रोक नाह आरव, ी ऍम जस्ट किंग….. और सुन आरव अपने पापा के सामने मुझको मत छूना, मत चेररणा और मत पकड़ना मेरे हाथ को समझे तुम, उसस्के मौजूदगी में मुझसे बिल्कुल क्लोज मत रहना okay? मैं आती हूँ……”

अब आगे……

आरव निचे बस के पास दीप्ति को बाहर आने की वेट कर रहा था मगर ड्राइवर ने मैन्युअल दूर को नहीं खोला था क्यूंकि उस स्कूल के रूल में से था के जब तक ड्राइवर के जान पहचान वाला कोई नहीं आये बचे को लेने तो दूर नहीं खोलना चाहिए…. अब आरव ने ड्राइवर से कहा के वो दीप्ति का चाचा है और अंदर से दीप्ति उछलने लगी चाचा चाचा चिल्लाते हुए और बाहर निकलने को मचल रही थी तो ड्राइवर ने एक एक्सेप्शन किया क्यूंकि बची को वैसे मचलते हुए देख कर वो समझ गया के यह आदमी उस्का चाचा hi है, और दूर को ओपन कर दिया, तब झपट के दीप्ति आरव के गॉड में गयी और अपने चाचा को चूमने लगी, सब बस के अंदर से दूसरे बच्चों ने शोर मचाना शुरू कर diya…..tab तक सान्वी आगयी, और ड्राइवर ने कहा, “चाचा के पास जाने के लिए शोर कर रही थी तो मैं ने जाने दिया मैडम, तो सान्वी ने ड्राइवर को okay कहा और बस वापस चला गया और तीनों घर के अंदर गए, दीप्ति अपने चाचा के गॉड में hi रहे.

आरव ने अंदर जाते hi सान्वी से कहा,

“तुमने कपडे वापस बेकार में पहने, वैसे hi रहना चाहिए था दीप्ति को तो मैं ले आया, तुमको वहां आने की ज़रुरत hi नहीं थी देखा!!”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “स्स्स्सह्ह्ह्हह्ह दीप्ति अब सब समझने लगी है बात को दोहराती है जो भी कहना है संभल के कहो वो सब बक देगी अपने दादा या बाप के सामने, या फिर अपनी चची से सब कह देगी उस्सकी बेस्ट फ्रेंड है यह!”

तब आरव ने दीप्ति को प्यार करते, चूमते हुए कहा, “मेरी दीपू संजना चची की बेस्ट फ्रेंड है सच है यह दीपू बेबी? हम्म बोलो तो ज़रा!”

दीप्ति ने चहकती चिडया जैसी आवाज़ में कहा, “हाँ चाचू चची मेरी बेस्ट फ्रेंड है हम साथ लॉन्ग ड्राइव पर जाते हैं वो बहोत अछि है चाचू, मैं उस्सको बहोत प्यार करती हूँ!”

आरव ने धीरे से कहा, “धत तेरी की यह तो मुसीबत की बात है!!”

सान्वी उस्सको सुनकर हँस्ते हुए उस्सको तिरछी नज़रों से देखते हुए धीरे से कहा, “देखा मैं ने कहा नाह?!”

तब तक सान्वी ने चाय बना लिए दीप्ति को देने के लिए, और आरव से पूछा वो चाय पियेगा या नहीं.

कुछ देर बाद, तीनों लाउन्ज में पाए गए और आरव ने दीप्ति को गॉड में लिए हुए पूछा, “बेबी अब कार्टून देखेगी, मैं एक कार्टून वाला कद लगाऊं?!” यह कहते हुए आरव सान्वी को देख रहा था और सान्वी उस्सको इशारे से नाह कह रही थी…. फिर धीरे से आरव ने सान्वी को कहा, “अरे वो घंटे भर कद देखेगी तब तक हम ऊपर एन्जॉय करेंगे नाह!!”

सांविणे मुस्कुराते हुए पूछा, “एन्जॉय? किआ एन्जॉय करेंगे आरव?!”

आरव: “वही जो समझ रही हो और ना समझने की नाटक कर रही हो…. मुझसे अब और इंतज़ार नहीं होता भाबी बस एक बार मेरी उस ख्वाहिश को पूरी करो नाह प्लीज!! इतने सैलून से वेट करता आया हूँ!!”

सान्वी ने उस्सको चेररते हुए मुस्कुराकर पूछा, “कौन सी ख्वाहिश आरव? मुझे नहीं पता हम्म?”

आरव: “वह रे मेरी भोली भली भाबी, तुमको नहीं पता हम्म? अभी देखता हूँ…. देपु बेबी चलो कद लगता हूँ तुम कार्टून्स एन्जॉय करोगी नाह?”

दीप्ति ने हाँ कहा और आरव ने कद लगा दिया और कार्टून शुरू हुआ, दीप्ति पोजीशन लेकर काउच पर बैठ गयी देखने को, और आरव ऊपर जाने लगा सान्वी को आने का इशारा करके.

नाह तो कहा था सान्वी ने मगर आरव के पीछे अपने कमरे में गयी.

जैसे सान्वी कमरे में आयी आरव ने उस्सको बाँहों में भर लिया और किश करने लगा खड़े होते हुए hi. सान्वी नाह चाहते हुए भी अपने बाहों को आरव के काँधे पर कर दिया और उसस्के किश को मज़े से रेस्पोंद किया और दोनों एक दूसरे के जीब चुस्सने लगे.

आखिर दोनों बीएड के पास पाए गए जहाँ, आरव ने सान्वी की साडी खुद अपने हाथ से उतारे, सान्वी ने करने दिया और आरव ने कहा,

“हम वहीँ से कंटिन्यू करते हैं जहाँ पर रुके थे जब बस आयी थी, मतलब मैं तुम्हारे जाँघों को एक्स्प्लोर कर रहा था, तो तुम लेट जाओ नाह भाबी, और एक तंग को ज़रा सा ऊपर करना ताके मैं अछि तरह से उस मुलायम सेक्सी तइस को निहार सकूँ जी भरके…..”

सान्वी ने आरव को हलके से मारते हुए कहा, “इतना बेशरम कब से हो गया रे तू, तू अपनी संजना के जाँघों को नहीं देखता किआ जो मेरे जाँघों के पीछे पड़ा हुआ है?!”

आरव निचे बैठते हुए कहा,

“आप की जिस्म , आप की एवं, आप की बूब्स , आप का फिगर, आप की अदायें सब संजना से बहोत अलग हैं bhabi…wo बहोत ओपन है, सब कुछ फ्री में देती है, आप रिलक्टेंट हो, इस लिए आप के साथ एक अजीब ख़ुशी मिलती है और आप को इतने सालों से जो वेट कर रहा हूँ तो इतनी लम्बी प्यास को कुछ तो आराम से बुझाने का उपाए होना चाहिए !!”

सान्वी ने अपने मुंह पर हाथ रखते हुए कहा,

“अरे वह तुम इतने बड़े बड़े बातें भी करने लगे अब वाओ! यू इम्प्रेस में आरव!”

और सान्वी बीएड पर बैठी hi थी के आरव ने झट से उस्सकी टांगों को ऊपर उठाया जिस से सान्वी को लेटना hi पड़ा और आरव पेट्टी कोट को धीरे धीरे आराम से ऊपर उठता गया जब तक के ड्रेस सान्वी के घुटनों के ऊपर हुए और उस्सकी जांघें नज़र आये और आरव के होंठ सान्वी के जाँघों को चूमने लगा जिस छुवन से सान्वी की यह निकली और उस ने अपने बाहों को पीछे बीएड पर फैलाते हुए जैसे एक अंगराई लेने लगी.

आरव ने पेट्टी कोट को वैसे hi चोर्रा, आधे जांघ के ऊपर और ऊपर गया सान्वी की ब्लाउज को दोबारा खोलने, और निकाल भी दिया पुरे ब्लाउज को और अपने हाथ को सान्वी के पीठ पर करके उस्सकी ब्रा को उन्हुक किया और ब्रा भी निकालने लगा, और सान्वी उसस्के चेहरे में प्यार से देखती रही और धीरे से कहा,

“यह सब करने से तुमको बहोत अच्छा लगता है नाह आरव? मुझको नंगा करने का बड़ा मैं था तेरा नाह?!”

आरव ने जवाब में सान्वी के मुंह पर अपना मुंह कर दिया और उस्सकी बूब्स को मसलते हुए किश करता गया काफी देर तक संवी को, और सान्वी के बाहें आरव के पीठ पर इस तरह से फेरर रहे थे जैसे सान्वी के अंदर की आग भड़क चुकी थी और उस्सको अब सेक्सुअल इंटरकोर्स की सख्त ज़रुरत पढ़ गयी थी….

आरव कुछ लम्हे बाद सान्वी के पथ को किश करते हुए उस्सकी पथ के निचे वाले हिस्से तक गया और उस्सकी पेट्टी कोट और पंतय दोनों एक साथ पाकर के निचे करने में लग गया….. सान्वी ने ेंखने बढ़ कर लिए और चेहरे को अपने हाथों में छुपा लिया एक तड़पती सिसक जैसी आवाज़ करते हुए..

सान्वी के जिस्म के जो हिस्सा कपड़ों से ढाका रहता था, आरव आज पहली बार उन् हिस्सों को देख रहा था, उस्सकी जाघों के थोड़ा ऊपर, और पथ के थोड़ा निचे वाला हिस्सा कुछ ज़्यादा गुलाबी और सफ़ेद रंग के मिलावट के थे, आरव ने अपने जीब फ्री वहां और जैसे जैसे पेट्टी कोट और पंतय निचे होता गया आरव वैसे वैसे उन् हिस्सों पर अपने जीब फरता गया, जबकि सान्वी अपने आप में सिमटती गयी….

आरव बैठ गया बीएड पर सान्वी को पूरी तरह से नंगी देखते हुए, और अपने कपड़े उतारने लगे, उस्सने भी सब कुछ निकल फेंका अपने जिस्म से और सान्वी ने एक ेंख से उसस्के लुंड को देखा जो जमके खड़ा हुआ था, जिस्सको आरव ने सान्वी के जांघ पर चुवाया… फिर ऊपर गया सान्वी के बूब पर अपने लुंड को हाथ में लिए सान्वी के बूब पर अपने लुंड को सत्ताया, और सान्वी ने ेंखें मुंध लिए… सान्वी का पूरा जिस्म कांपने लगा था उस्सको ऐसा फील हो रहा था जैसे पहली बार उस्सको कोई उस स्तिथि में देख रहे हो…. ऐसा फील हो रहा था सान्वी को के आज पहली बार किसी ने उसस्के कपडे उतारे हो…. सान्वी के अंदर वो फीलिंग्स जागे जो एक लड़की उस वक़्त फील करती है जिस दिन पहली बार किसी मर्द से सेक्स करने जाती है…. सान्वी उस वक़्त खुद को नहीं समझ पा रही थी, उसस्के दिल की धड़कनें मामूल से बहोत hi ज़्यादा तेज़ थे, उस्सकी जुबां से एक लव्ज़ नहीं निकल पा रहे थे, वो कुछ बोलना चाहती थी मगर होंठ साथ नहीं दे रहा था, सान्वी के समझ में नहीं ारः था के वो किआ करें उस वक़्त…..

फिर आरव ने सान्वी का हाथ पकड़ा और उसको अपने लुंड पर किया… सान्वी हिचकिचाते हुए एक ेंख खोल कर उस्सको देख रही थी, थोड़ा शर्माते हुए, उस्का दूसरा हाथ उसस्के चेहरे पर था जैसे चेहरा छुपता होई…. एक झिझक के साथ चेहरे में लाली लिए सान्वी जैसे इंकार करना चाहती थी, मगर आरव ने सान्वी के मुठी को अपने हाथ से बांध किया अपने लुंड पर….. तो नाह चाहते हुए भी सान्वी की मुठी में आरव का लुंड पाए गए…… फिर आरव ने एक तड़पती आवाज़ में कहा, “के ों स्वीटहार्ट भाबी सेहलाओ नाह इस्को”….. मगर सान्वी ने सिर्फ उस्सको पकड़ा हुआ था कोई मूवमेंट्स नहीं कर रही थी, तब तक आरव का सर सान्वी के पथ के निचे वाले हिस्से तक गए और आरव ने सान्वी के ठीक छोटे छोटे ट्रिम की हुई पथ के निचे के बालों पर आरव ने अपने होंठों को ब्रश किये और निचे जाने लगा जीब चलाते हुए सान्वी के योनि के तरफ तो झट से सान्वी ने अपने दोनों हाथों से अपनी योनि को ढांक दिए….

आरव ने सर उसस्के चेहरे के तरफ करते हुए कहा, “हम्म्म ोफो यह किआ भाबी, हाथ हाथाओ नाह अब तो मत रोको मुझे….”

तब सान्वी ने हकलाते हुए कहा, “ंन्न नहीं आए आरव मुझे बहोत hi शर्म आरही है मुझसे नहीं होगा यह रुक जाओ प्लीज, मुझे उठना है….. यह सही नहीं मुझे कुछ हो रहा है अब…..”

इतना कहा संवी ने और उठ बैठी, चादर से अपने जिस्म को ढांकते हुए

आरव को ग़ुस्सा आया, और कहा,

“कमाल है यार इतना कुछ कर लिया हैं हम ने अब सिर्फ करना बाकी है तो यह किआ बचपना है भाबी के ों प्लीज अब तो मुझे खुश कार्डो नाह!”

सान्वी ने सर झुकाये हुए नाह में हिलाया सर को और सर उठाया भी नहीं आरव को देखने के लिए मगर सान्वी फील कर सकती थी के आरव ग़ुस्सा होने लगा है…

आरव बोलै: “कमाल है यार हर बार मेरे साथ ऐसा क्यों होता है? आप तो वही यूनिवर्सिटी वाले दिन को दोहरा रही हो अभी? अगर कुछ नहीं करना था तो कपडे hi नहीं उतरवाती नाह? क्यों खुद को नंगा होने दिया मेरे हाथ से? जाओ, नहीं करता कुछ मैं और मेरे करीब अब आना भी नहीं, नहीं चाहिए तुम्हारे जिस्म रखलो इससे भाई के लिए hi!! मैं चलता हूँ…… खामखां वक़्त बर्बाद किया मैं ने साला इस औरत के चाकर में वह भाई वह!”

और आरव बीएड से उतर कर अपने कपडे पेहेन्ने लगा, जबकि सान्वी वहीँ बीएड पर बैठी रही सर झुकाये हुए तेज़ दिल की धड़कनों के साथ, वो नाह कुछ कह पा रही थी नाह नज़रें उठाकर आरव को देख पा रही थी…. सान्वी उस वक़्त खुद को hi नहीं पहचान रही थी और समझ नहीं पा रही थी के उस्सको किआ चाहिए! वो एक कश्मकश में डूबी हुई थी, उसस्के दिमाग़ में किआ चल रहा था वही जाने, मगर उस वक़्त उस्सको आरव के साथ आगे बढ़ना ठीक नहीं लगा सो मन कर दिया, और बेचारा आरव कमरे से निकल गया ग़ुस्से से दरवाज़े को अपने पीछे पीट कर!

मगर तुरंत फिर दरवाज़े को खोला कोई 30 सेकंड के बाद जब संवी अपने ेंसुओं को पांच रही थी, तो आरव ने पूछा,

“यह किआ ड्रामा है भाबी? अगर नहीं चाहती हो तो रो क्यों रही हो? मैं ने तुम्हारा रपे कर दिया किआ?”

सान्वी ने सर झुकाये हुए उस्सको बाहर जाने को कहा अपने सीने पर चादर दबाये, मगर आरव ने पूछा,

“मैं यह पूछने आया हूँ के आप ने मुझको यह क्यों कहा था के डैड के सामने आप का हाथ मत पकरुन, आप से मज़ाक नाह करूँ आप के ज़्यादा करीब नाह आवुन? वो क्यों यह पूछने आया था!!... कुछ हुआ है किआ? किसी ने कुछ कहा किआ?”

सान्वी ने कहा, “आरव तुम प्लीज इस वक़्त यहाँ से निकलो मुझे कपडे पहनने हैं मैं तुमको फिर कभी बताउंगी, जाओ यहाँ से!!”

“जैसे तुम्हारी मर्ज़ी" कहकर आरव निकल गया.

तो बे कॉन्टिनोएड……….. (2210 वर्ड्स)
 
अपडेट 137 आरव ड्रंक

सान्वी ने कहा, “आरव तुम प्लीज इस वक़्त यहाँ से निकलो मुझे कपडे पहनने हैं मैं तुमको फिर कभी बताउंगी, जाओ यहाँ से!!”

“जैसे तुम्हारी” मर्ज़ी कहकर आरव निकल गया.

अब आगे…….

आरव निचे जाकर अपने बाप की व्हिस्की वाला बोतल से एक पेग बनाया और पीने लगा. दीप्ति ने चिल्ला कर कहा, “चाचू देखो डोनाल्ड डक किआ कर रहा है हीहीहीहीहीही”

आरव व्हिस्की का गिलास लेकर काउच पर दीप्ति के पास बैठ कर उस्सको चूमकर कहा, “हाँ बेबी यह डोनाल्ड डक hi है, इस में आगे तुमको मिक्की माउस और टॉम एंड जेरी भी मिलेगा हम्म्म एन्जॉय करो तुम स्वीटहार्ट!”

तब तक संवी अपने कपडे पेहेन कर निचे आयी और देखा के आरव ने ड्रिंक बनाया हुआ है तो उसस्के पास आकर डांटते हुए कहा, “यह किआ? तुम क्यों पीने लगे अब? वो भी उनके व्हिस्की, उनको पता चल जाएगा!”

आरव ने तिरछी नज़रों से सान्वी को देखते हुए कहा, “तो किआ हुआ? मेरे बाप का माल है!”

इतना कहकर आरव उठकर अपने कमरे में चला गया ऊपर व्हिशक्य का बोतल लिए.

अपने कमरे में जाकर आरव बड़बड़ाने लगा,

“कमाल है यार, उस्सको नंगा कर दिया, आज पेली बार उस्सको कम्प्लीटली नंगा करने दिया उस्सने, उस्सकी जिस्म कितनी आकर्षित करता है मुझे उस्सको अच्छी तरह से पता है, पूरा जिस्म उस्का किश किया, लीक किया मैं ने, खुद तड़पने लगी थी एक्सटेसी में थी, और जब छूट के पास पहुंचा तो अचानक मैडम की सटी सावित्री जाग गयी और रोक दिया मुझको!! तो क्यों खुद को नंगा करने दिया मुझे!! किआ चाहती है यह सान्वी? बूब किश किया, अपने लुंड को उस्सकी चूचियों पर रगड़ा मैं ने यह सब कुछ करने दिया मगर छोड़ने का वक़्त आया तो रोक दिया!! व्हाट थे फ़क दमन बीच!! किसी और से तो नहीं चुदवाती है यह?!”

आरव अब भी ग़ुस्से में था और उस्का ग़ुस्सा जाइज़ भी था. क्यों ग़ुस्सा नाह करें, कोई भी उस हाल में ग़ुस्सा hi करता. सच में जब इतना आगे बढ़ने दिया सान्वी ने तो क्यों आखिर में उस्सको मन किया यह बात कौन समझेगा?

अब सान्वी के मैं में था किआ? क्यों वो वैसा बेहवे करने लगी? क्यों उस्सने रोका आरव को लास्ट टाइम में? अब कहीं ऐसा तो नहीं के जैसे चावला साहब के साथ हुआ था, जब चावला साहब उस से नाराज़ हो गया था उसस्के साथ बात भी नहीं कर रहा था और तब सान्वी खुद नंगी होकर उसस्के सामने गयी थी? किआ सान्वी वैसा चाहती थी? किआ सान्वी को मर्दों को तड़पना चाह लगता था? किआ वो अपना टाइम लेना चाहती थी आरव के साथ सोने से पहले? बात किआ थी? क्यों सान्वी ने रोका उस्सको?

आरव को थोड़ा नशा सा हो गया तो डीडे किया के सान्वी से जाकर पूछे के क्यों उस्सको रोका उस्सने! और वो गया भी….

अपने बाप की व्हिशक्य का बोतल उसस्के जगह पर रखा, सान्वी उस्सको देख रही थी किचन में से…. और आरव उसस्के तरफ बढ़ा कुछ नशे में, और पीछे से सान्वी को जकरा उस्सने. उस वक़्त सान्वी सिंक के पास कड़ी थी….. सान्वी ने उस से कहा, “चोर्रो मुझे देखो दीप्ति सब देख लेगी और संजना को बता देगी, चोर्रो नाह!”

आरव ने सान्वी के पीछे वाले गर्दन के हिस्से को चूमते हुए कहा, “मुझे तुमसे बात करनी है, और तुमको सुन्ना होगा…”

सान्वी: “okay बाबा सुन तो रही हूँ मगर दूर से बात करो मैं ने कहा नाह के अब दीप्ति सब समझती है, अगर उस्सने हमारे तरफ देख लिया तो सब बक देगी, या तो संजना से या तेरे डैड se….ab दूर हत्तो नाह आरव!!”

आरव ने उस्सको चोर्रा और वहीँ एक चेयर पर बैठ गया और सान्वी के कमर को घुररते हुए कहा, “किआ बॉडी है! किआ कलर है, किआ जिस्म है, कितना मरता हूँ मैं इस पे…. और तू है के मुझको तड़पाती जाती है, इतने सालों से तड़प रहा हूँ तुझे दीखता नहीं किआ? क्यों इतना तड़पाती हो मुझे तुम हैं!! अगर मैं पसंद नहीं तो साफ़ साफ़ बता दे, फिर कभी तेरे तरफ देखूंगा बी नहीं!”

सान्वी: “तेरा जुबां लड़खड़ा रहा है आरव, यू अरे ड्रंक, नशे में हो फिर कभी बात करना मुझसे अभी तुमको होश भी नहीं के किआ कह रहे हो!”

आरव: “कौन कहता है के नशे में कोई बात नहीं कर सकता, अरे अब तो हिम्मत हुई है सब तुझसे कहने की, तीन साल से मैं ने सब दबा के रखा हुआ हूँ, तुझे नहीं पता के नशे के हालत में इंसान सब दिल की बात कह देता है?!”

सान्वी: “आरव, चिल्ला क्यों रहे हो? दीप्ति सब सुन रही है!”

आरव: “तो फिर ऊपर चलो वहां बात करूँगा तो नहीं सुनेगी वो, के ओने लेटस जो उपस्तिर…”

सान्वी: “नहीं, ऊपर जाउंगी तो तुम बात नहीं कुछ और करोगे”

आरव: “वही तो!! वही तो भाबी डार्लिंग, वही तो! क्यों नहीं करने दिया तुमने? क्यों इतने करीब आकर रोका मुझको? मुझे जवाब चाहिए, जवाब do…jab इतना कुछ कर लिया तो क्यों आखरी वक़्त में रोका? क्यों किनारे के करीब आकर नैया डुबो दिया मेरा क्यों भाबी क्यों?!”

सान्वी की हंसी चुत गयी और हँस्ते हुए कहा,

“हाहाहा किआ बक रहे हो? कौन सी नैया? किआ किनारा आरव?!”

आरव: “हाँ उदा लो मेरा मज़ाक और, और उड़ाओ मेरा मज़ाक भाबी….. अभी में ने बोलना शुरू किया तो रोने लगोगी और तब मैं खुद को कुसूरवार फील karunga…auraton की यह एक्सपर्ट आइडियाज होते हैं मर्द को कुसूरवार दिखाना और खुद को सेफ कर लेना मुझको पता hai…tum भी तो औरत hi हो नाह? मगर मैं तुमको वैसा मौका नहीं दूंगा रोने को और खुद को सेफ करने ko….to ज़्यादा नहीं कहूंगा….. बुसस इतना मान लो के तुम कुसूरवार हो… अगर मुझको मन करना hi था तो मुझे अपने इतना करीब नहीं आने देना चाहिए था …क्यों खुद को ुंदरेस करने दिया तुमने? क्यों नंगी हो गयी मेरे हाथ से? क्यों मेरे सेक्स को अपने बूब्स पर रगड़ने दिया?!! यह सब नहीं करने देना चाहिए था अगर एन्ड तक नहीं करना था… आग भड़काती हो तो उस में जलना सीखो सान्वी भाबी!!”

सान्वी ने कुछ नहीं कहा, वो खामोश कढ़ी आरव को सुन रही थी….. आरव ने फिर पूछा,

“अरे हाँ यह बताओ के क्यों तुमने यह कहा था के डैड के सामने तुम्हारे हाथ नाह पकरुन, तुम्हारे पास नाह आऊं, तुमसे दूर रहूं? यह बात मेरी समझ में नहीं आयी यह भी समझाना है तुम्हें! के ों इतस योर टर्न तो टॉक नाउ!”

सान्वी ग़ौर से आरव को देख रही थी बात करते हुए और मुस्कुराने लगी आरव के चेहरे में देखते हुए फिर कहा,

“देखो खुद को, तुम एक्साक्ट्ली अपने डैड दिख रहे हो आरव. लगता है तुम उसस्के फोटोकॉपी हो… ऐसे hi बात करता है वो भी पीने के baad…tumhara एक्सेंट, बोलने का ढंग सब तेरे पापा जैसा है, मुझे लगा मैं उस्सको बोलते सुन रही हूँ हेहेहे!”

आरव: “वह मैडम जी वह!! बात को टालना भी औरतों की एक कला है, मैं ने किआ पूछा और तुमने जवाब किआ दिया! इस में मेरे सवालों का जवाब किधर हैं बताओ तो ज़रा? मैं अपने बाप का बीटा हूँ तो no डाउट उस्सकी तरह hi बात करूँगा, आईटी इस इन थे गेन्स मैडम जी, इन थे गेन्स हहहहए, ी वांट तो ड्रिंक मोरे नाउ… एक और पेग बनता हूँ!!”

सान्वी ने उसस्के सामने खड़े होते हुए कहा, “no, no मोरे ड्रिंक्स, तुम अभी बिल्कुल नशे में हो, और नहीं पीने दूंगी, तुमको अब अपने कमरे में जाना चाहिए, एंड यू विल फेल अस्लीप सून, चलो अपने रूम में जाओ, बीएड पर लेट जाओ झट से तुमको नींद आजाएगी देखना…. ी ऍम एक्सपेरिएंस्ड, तुम्हारे डैड को बरसों से इस हालत में देखती आयी हूँ…. जो तो रेस्ट योरसेल्फ एंड स्लीप आरव!!”

आरव: “रियली? ी मस्ट नॉट ड्रिंक? मगर मैं तो पी सकता हूँ….. ok ठीक है तुम कहती हो तो नहीं पीटा, मगर किआ मैं ऊपर चढ़ सकूंगा स्टैर्स को? लड़खड़ा के गिर्र नहीं जाऊंगा?”

सान्वी: “तो निचे अपने डैड के रूम में जाओ सोने!”

आरव: “हम्म्म्म इन हिज रूम? नाह बाबा नाह, ी विल फील हिज प्रजेंस तेरे… बेटर जो उपस्तिर …. प्लीज, टेक में तो माय रूम विल यू?!”

सान्वी ने आरव को अपने काँधे का सहारा देते हुए स्टैर्स के ऊपर लेजाने लगी…. वो देख कर दीप्ति ने टीवी सेट से दौड़े हुए आकर स्टैर्स के पास कड़ी होकर अपनी मम्मी से पूछा, “मम्मी चाचा को किआ हुआ?!”

आरव ने खुद हँस्ते हुए रिप्लाई किया, “चाचू इस ड्रंक बेबी जो, जो तो वाच योर कार्टून्स स्वीटहार्ट!”

दीप्ति ने पूछा, “चाचू ‘ड्रंक’ किआ होता है?!”

सान्वी ने इस बार रिप्लाई किया दीप्ति को, “ोफो दीपू, जाओ टीवी के पास नाह मैं तुमको बाद में समझाउंगी….” और दीप्ति चली गयी अपने कार्टून्स देखने.

स्टैर्स चढ़ते वक़्त आरव का हाथ सान्वी के काँधे पर था और सान्वी के बाज़ू आरव के कमर पर उस्सको होल्ड करते हुए उसस्के रूम तक गए….. रूम के अंदर आते hi आरव ने सान्वी को जाकर हुए hi अपने बीएड पर लेट गया…. सान्वी उसस्के ऊपर थी, पुरे जिस्म आरव के जिस्म पर थे और आरव ने ज़ोर से जकरा हुआ था सान्वी को और उसस्के गाल और गर्दन को इस करने लगा…. सान्वी ने करने दिया, और कुछ पल बाद कहा, “अब बुसस कर लिया किश नाह अब सो जाओ…..”

आरव ने सान्वी को बीएड पर पलटा और उसस्के ऊपर चढ़ गया और उसस्के पल्लू को खिंच कर उसस्के बूब मसलते हुए उसस्के छाती को चाटने लगा और अपने कमर दबा कर उसस्के पथ के निचे वाले हिस्से पर रगड़ने लगा ज़ोर से……

तो बे कॉन्टिनोएड………..
 
अपडेट 138 फाइनली!!!

आरव ने सान्वी को बीएड पर पलटा और उसस्के ऊपर चढ़ गया और उसस्के पल्लू को खिंच कर उसस्के बूब मसलते हुए उसस्के छाती को चाटने लगा और अपने कमर दबा कर उसस्के पथ के निचे वाले हिस्से पर रगड़ने लगा ज़ोर से……

अब आगे……

सान्वी उसस्के निचे से निकलने के लिए मचल रही थी मगर आरव ने उस्सको ज़ोर से दबाया हुआ था, और आरव ने अपने होंठों को सान्वी के होंठ से लगाया, पर सान्वी ने मुंह बांध किया हुआ था तो आरव ने अपने जीब को फेर्रा सान्वी के होंठों पर, होंठ को चूसा, सान्वी ने एक बार ेंखें खोल कर उसस्के चेहरे में देखा फिर मुंह एक तरफ करके कहा, “शराब की बह आ रही है तुम्हारे मुंह से चोर्रो मुझे!”

आरव उस्सको किश करते गया और कहा, “अब तो मैं नहीं चौररने वाला तुम्हें आज, बिल्कुल नहीं चोरडूंगा जब तक तुम सरेंडर नाह करो आज…. आज और अभी तो मुझे वो चाहिए hi चाहिए, तुमको फिर से नंगा करूँगा, इस खूबसूरत जिस्म को निहारूँगा, चूमूंगा, चाटूँगा, और एन्जॉय करूँगा जी भरके… और तुम मुझको रोकेगी भी नहीं क्यों ठीक कहा नाह मैंने मेरी प्यारी भाबी?!”

सान्वी उसस्के चेहरे में ग़ौर से देख रही थी जब आरव वो सब कुछ कह रहा था, और उस्सको सुनने के बाद अब सान्वी ने एक बची की तरह आवाज़ करके कहा, “हम्म्म नहीं आरव चोर्रो नाह, मुझे तुमसे बहोत शर्म आती है जब तुम मुझे ुंदरेस करके मेरे जिस्म को देखते हो तो, इसी लिए मैं ने मन किया, मुझे तुमसे अजीब फील होता है, प्यार करती हूँ तुमसे okay सच है मगर वो सब करने के लिए नहीं, प्यार दिल से करती हूँ, प्यार करना जिस्म का मिलना थोड़ा hi होता है आरव? क्यों सेक्स करना चाहिए अगर प्यार करती हूँ तो? ऐसे हमारा प्यार ठीक नहीं है किआ बिना सेक्स के?!”

आरव सान्वी के ऊपर बैठ गया अपने दोनों टांगों को दोनों तरफ उस्सकी कमर पर करके, और उस्सको देखते हुए कहा,

“वह भाबी वह, किआ बहाना ढूंढा है तुमने मुझे रोकने के लिए मगर फिर भी मुझे आज सब करना hi है, चलो तुम्हारे लिए प्यार और सेक्स का मिलाप नहीं मगर मेरे लिए यह प्यार तब परवान चढ़ेगा जब तुमसे पैशनेट, हार्ड सेक्स करूँगा तब मेरा प्यार मुकम्मल होगा…… 3 साल से ज़्यादा , अरे तीन साल किआ 5 सालों से मैं ने प्यार को प्यार रखा, दिल के अंदर दबा कर रखा, मगर अब इस प्यार को जिस्मों के मिलाप से होकर hi गुज़ारना है, मेरे लिए यह बहोत ज़रूरी है, तुम मानों या नाह मानों मुझे तो करना hi करना है….. तुम चाहो या नहीं, इस्को रपे नाम दो या कुछ भी कहो मैं आज करके रहूँगा, इस से पहले के संजना वापस अजय काम तमाम करना है मुझे मुझको अब रोकना मत!”

यह सब कहते हुए आरव अपने कपडे निकाल रहे थे और जब तक बात ख़तम किया पूरा नंगा हो गया था, और नंगा बैठा था सान्वी के ऊपर, सान्वी ने उस्सको नंगा होते देखा, उसस्के सेक्स को भी देखा, आरव का लुंड उसस्के पथ पर दबा हुआ tha…Saanvi ने सब सुना और देखा और उस्सको उस तरह बैठने दिया अपने ऊपर…. उस वक़्त सान्वी ने कोई रेजिस्टेंस नहीं दिखाई…… लगता था वो चाहती थी के आरव आगे बढे मगर ऐसे hi मन करने की नाटक कर रही थी, उस्सकी पल्लू तो सरका दिया था आरव ने मगर उस्सने पल्लू को वापस नहीं किया सीने पर, उस्सकी ब्लाउज के अंदर उस्सकी ब्रा के स्ट्रैप्स और ब्रा की कप साफ़ नज़र आरहे थे उसस्के सांस लेने से उस्सकी चूचियां ऊपर निचे हो रहे थे जिस्सको आरव घुर्र रहा था. संवी उसस्के चेहरे में देखते हुए पूछा,

“तू मेरा रपे करेगा आरव? अगर मैं ने नहीं चाहा और तुमने ज़बरदस्ती मुझको लिया तो वो तो रपे hi होगा!”

आरव उसस्के ऊपर बैठे हुए hi झुक कर उसस्के गालों को छाता और सान्वी के होंटो को चूस कर कहा,

“रपे कैसे होगा, तुम खुद सब करने डौगी और खुद पार्टिसिपेट करोगी और चाहोगी के मैं आगे बढूं ी कैन बेट ों तहत दो यू एग्री?!”

सान्वी थोड़ा सा मुस्काई और कहा, “बहोत पहचान है तुमको मेरा? कैसे कह सकते हो के मैं चाहूंगी और पार्टिसिपेट करुँगी आरव?!”

आरव: “बातों में वक़्त क्यों जाया करना भाबी शुरू करते हैं नाह यह देखो कैसे खड़ा हुआ है तुम इस्को खुश तो करो, मुंह में नहीं लेती हो किआ बोलो? इस्को किश करो, लीक करो, और एक मज़ेदार सूचक करो नाह भाबी!!”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “क्यों तुम्हारी संजना तुमको, किश लीक और सूचक नहीं करती किआ?! हम्म बोलो!”

आरव~ “ोफो भाबी फिर संजना, अभी तुम पर कंसन्ट्रेट कर रहा हूँ नाह क्यों संजना को मेंशन कर रही हो बार बार तुम?!”

सान्वी ने उसस्के लुंड को हाथ से सहलाया और पूछा, “फिर भी मैं जानना चाहती हूँ किआ वो यह सब करती है के नहीं तेरे साथ?!”

आरव: “हाँ करती है मगर मैं चाहता हूँ वही सब तुम करो, मैं चाहता था हमेशा से के तुम वो पहली औरत हो जो मेरे लुंड को चूमे चूसे, मैं चाहता था मेरी विर्जिनिटी तुम्हारे अंदर जाकर ख़तम हो मगर तुमने वो मौका संजना को दे दिया, तुमको वर्जिन लुंड नहीं पसंद था किआ भाबी? जैसे मर्द वर्जिन गर्ल्स को पसंद करते हैं तुमको भी तो मेरा वर्जिन डिक को लव करना चाहिए था, क्यों तुमने मेरे वर्जिन लुंड को संजना के हवाले कर दिया?!”

सान्वी उसस्के के तन्ने हुए लुंड को अपनी मुठी में भरके सेहला रही थी और आराम से उस्सको सुन भी रही थी, और आरव खुश हो रहा था यह सोचते हुए के भाबी अब रास्ते पे आरही है लगता है…. सही में सान्वी जैसे उसस्के बातों में बहके उसस्के तरफ सरेंडर हो रही थी और सान्वी ने यह कहा उसस्के लुंड को सहलाते हुए,

“तुम तो वर्जिन थे संजना के साथ, किआ वो वर्जिन थी?!”

जब सान्वी के मुंह से यह बात निकल गयी तब उस्सने सोचा के उस्सने ग़लती कर दिए और अपने होंठों को दांतों में दबा कर अपनी बात को सुधारने की कोशिश में कहा, “मेरा मतलब है तुमको कैसा लगा एक वर्जिन के साथ अपने वर्जिन सेक्स को डूबोते हुए?!”

तब आरव संवी की साडी निकालते हुए कहा, “भाबी मुझे एक डाउट जैसे था और है के संजना वर्जिन नहीं थी, क्यों के बड़े आसानी से मैं ने उस्सको पेनेत्रते कर दिया था, मगर शी ब्लीडड, खून लगा हुआ था मेरे सेक्स पर और बेडशीट पर bhi…to मैं ने सोचा उस्सकी फिजिकल आस्पेक्ट वैसा होगा, या वो ज़्यादा गीली हो गयी थी इस लिए आसानी से पेनेत्रते हो गया… मुझे तो कोई एक्सपीरियंस नहीं था तो हाउ वोउल्ड ी हैवे known…ab कभी एक और वर्जिन को पेनेत्रते करूँगा तब ट्रुथ का पता चलेगा नाह?!”

बात कह दिया तब तक सान्वी की साड़ी निकल चुकी थी और आरव उस्सकी ब्लाउज निकलने लगा जो सान्वी ने निकालने दिया और ब्रा को भी उन्हुक कर दिया आरव ने सान्वी की हर उस हिस्से को निहारते हुए जो उसस्के ेंखों के सामने नंगे हो रहे थे…. सान्वी की स्किन बहोत मुलायम, सेक्सी, पॉलिशड, सफ़ेद और गुलाबी रंग की मिलावट की थी जिस्सको आरव सालों से पसंद करता आया था और उन् हिस्सों को छुहने, चूमने और चाटने के लिए आरव मरता था…. और अब सब उसस्के सामने वैसे हाज़िर थे तो आरव पागल के तरह टूट पड़ा था उस पर और जहाँ मिलता वहीँ चाटने चुस्सने लगता था…. सान्वी उस्सको चारों तरफ खुद को किश करने दे रही थी, चुस्सने दे रही थी बुसस जब उसस्के गले के हिस्से को चुस्सना शुरू किया तो सान्वी ने रोकते हुए कहा, “नहीं गले पर मत चुसो, रेड मार्क रह जाएगा और दिखेगा, तेरा पापा और भाई को भी दिखेगा तब किआ जवाब दूंगी मैं?!”

आरव ने सोचा, “अब तो मान रही है, कुछ इंकार नहीं कर रही है उम्मीद है के ऐसे hi रहेगी एन्ड तक, मुझे डर है के लास्ट मोमेंट में मुझको रोक नाह दें इस्सकी कोई भरोसा नहीं!!”

ब्रा भी निकला फेंका आरव ने और सान्वी के बूब्स उसस्के सामने थे, आरव टूट पड़ा उस पर, हाथों से मसलते हुए, चूमते हुए, किश करते हुए फिर एक एक निप्पल को मुंह में भरके चुस्सने लगा आरव और सान्वी की जिस्म में आग भड़की तो वो आरव के सर के बाल को मुठी में भरके खींचने लगी, फिर आरव के गाल को चुम्मा, फिर उसस्के चेहरे को सहलाया सान्वी ने…. और कुछ देर उस्सकी दोनों चूचियों को चुस्सने के बाद आरव अपने घुटनों प् होकर अपने लुंड को सान्वी के मुंह के पास किया… सान्वी उस वक़्त सिर्फ अपने पेट्टी कोट में थी लेती हुई बीएड पर…..

और आरव की ख़ुशी का इन्तहा नाह था जब सान्वी ने उसस्के लुंड को हाथ में लेकर अपने मुंह के तरफ किया, उस्सको चूमा, उस्सकी हेड पर जीब फेर्रा और अपने मुंह में ले लिया उसस्के लुंड को…. आरव ने एक लम्बी सांस चोररटे हुए ऊपर छत देखते हुए कहा, “उफ्फ्फ भाआआब्बबीइइइइइइ कितने सालों तक मैं तड़पा हूँ इस छुवन के लिए…. कितने बार सपनों में आप को यह करते हुए देखा है मैं ने आज भी कहीं यह सपना तो nahin….aaaaaaaahhhhhh आईटी फील सो गुड भाबीइइइइइइइ आआह्ह्ह्गगगगगठ्ह!!!”

आरव अपने लुंड पर सान्वी की गरम जीब फील कर रहा था, सान्वी चूस रही थी और अपने जीब को चला रही थी उसस्के लुंड के टिप पर और हाथ भी चला रही थी उसस्के लुंड की लम्बाई पर जिस से आरव पागल होता जा रहा था, उसस्के जिस्म में एक थरथराहट पैदा हुई और आरव ने सान्वी का सर अपने दोनों हाथों में पाकर के अपने लुंड को जितना हो सके उतना सान्वी के मुंह के अंदर ठुस्सा जिस से सान्वी खाणस्ने लगी और उसस्के जांघ पर छोटे छोटे थपड मारते हुए उस्सको लुंड को बाहर निकालने का इशारा किया…. जब आरव ने लुंड बाहर किया तो सान्वी ने कहा, “उफ़ इतना लम्बा है और मेरे थ्रोट के अंदर तुस्ता चला जा रहा है मुझे मार डालना है किआ मेरी सांसें फुल गए इतना मत पुश करो नाह आरव!!”

तब आरव ने कहा,

“भाबी एक 69 पोज़ करते है मैं आप के तरफ निचे जाता हूँ आप ऐसे hi मुंह में लेती रहना मैं आप को निचे लेता हूँ okay!!”

सान्वी ने कुछ नहीं कहा और आरव ने आराम से सान्वी की पेट्टी कोट और पंतय एक साथ निचे किया जैसे पहले किया था, इस बार सान्वी ने हाथ से नहीं ढंका अपने प्राइवेट part को, वो आरव के चेहरे में देख रही थी के कितना ख़ुशी दिख रहा था उसस्के चेहरे में, आरव की ेंखों में एक ख़ुशी की चमक देखा सान्वी ने और मुस्कुराते हुए, हलके से अपने टांगों को फैला दिया इस बार जिस्सको देख कर आरव मुस्कुराया और अपने सर को सान्वी के जाँघों के बीच करके अपने जीब को लगाया सान्वी की योनि पर… आरव का जीब जब सान्वी की योनि को छवि तो आरव ने सान्वी की मुठी में अपने लुंड को ज़्यादा ज़ोर से जकरते हुए फील किया मतलब आरव का जीब जिस वक़्त सान्वी की सेक्स पर लीक हुआ तो सान्वी ने ज़्यादा ज़ोर से उसस्के लुंड को अपने मुठी में जकरा और एक आह निकली सान्वी की गले से…. आरव का जीब सान्वी की पंखुरिओं को ओपन किया और जीब को अंदर डाला……. एकदम गीली हो चुकी थी, पानी बह रहे थे तो आरव ने चाटते हुए कहा,

“भाबी, इतनी गीली हो चुकी हो मतलब आप को भी बड़ा मैं कर रहा था मेरे साथ यह सब करने को तो क्यों अपने मैं को मार रही थी आप हैं?!”

सान्वी ने कहा, “ससष्ठ अब चुप चाप एन्जॉय करो आरव, फील करो, मज़े लूटो संजना के आने से पहले ख़तम करो, अब मुझे भी ज़रुरत है तेरा, बे फ़ास्ट प्लीज….. आज तो बहोत खुश होंगे तुम आरव….. एन्जॉय करो जिस चीज़ के लिए बरसों से तुम तरसते रहे आज तुझको मिल hi गयी आखिर….!”

कोई 15 मिनट्स तक दोनों एक दूसरे को लीक और सूचक करते रहे…. जैसे जैसे आरव सान्वी की गहराई में अपना जीब दाल रहा था वैसे वैसे सान्वी की टांगें और फैलते गए यहाँ तक के सान्वी के दोनों टांगें फुल ओपन थे जिस्सके बीच आरव का सर दिख रहा था…. अपने उँगलियों से आरव उस्सकी छूट एक्स्प्लोर करते हुए अपने जीब से चाट रहा था, चूस रहा था, जाँघों को सेहला रहा था, इतना चूसा आरव ने के सारे पानी सुख गए…

उधर सान्वी आरव के लुंड को चूसे जा रही थी और आरव की प्रेकम को चाटते जा रही थी शुरू से hi, वो नमकीन टास्ते सान्वी के जीब पर कई बार आये और उस्सको छाता सान्वी ने…

और उन् 15 मिनट्स के बाद सान्वी ने कहा, “आरव मेरा मुंह दुःख गया रे!”

तो आरव ने सान्वी को अब, छूट से लीक करते हुए धीरे धीरे उस्सकी पथ से होकर, नबी को छत्ते हुए ऊपर उस्सकी बूब्स के तरफ बढ़ते हुए धीरे धीरे सान्वी के गर्दन तक रीच हुआ, और आखिर में सान्वी के जीब को अपने मुंह में ले लिया और एक डीप पैशनेट किश में डूब गए दोनों एक दूसरे के जिस्म पर अपने अपने हाथों को फरते हुए, करेस करते हुए….

दोनों के टांगें एक दूसरे के टांगों में फंसे हुए थे और आरव का लुंड जो शुरू से जमके खड़ा था वैसे के वैसे hi खड़ा था और सान्वी के छूट पर रागढ खा रहे थे किश के दौरान… और तब तक सान्वी की छूट से फिर पानी निकलने लगा था….

किश बरकरार रखते हुए hi संवी ने खुद आरव के लुंड को अपने हाथ से खुद अपने छूट के अंदर इंट्रोडस किया….. आरव को बुसस अपने कमर को हलके से दबाना पड़ा और घुस गया सान्वी की छूट के अंदर फिसलते हुए और आरव की आवाज़ निकली, “स्स्स्सस्स्स्शशशशशशह्ह्ह्ह आआआअह्ह्ह्ह भाबीइइइइइइइ वूऊऊवववववव कितना ाचा लग रहा है आप के भीतरर्र्र ओह माय गऊओऊआआआअद्ड़ड़द्द!”

और सान्वी ने अपने जिस्म को पूरा स्ट्रेच करते हुए गर्दन को बिल्कुल पीछे करके ऊपर देखते हुए, अपने बाहों को आरव के पथ पर करने अपने नाख़ून को उसस्के काँधे पर गड़ाते हुए उस्सकी आवाज़ कुछ ऐसे आयी, “ुउउइइइइइइइइ स्स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह आआआआअह्हह्ह्ह्हह अअअअअरररररआआआआअवव्वव्वव्वव्व एइस्स्स्सस्स्स्स babyyyyyyyy….ab ढाका दो धीरे धीरे sweetheart….koyi जल्दी नहीं बिल्कुल आराम से ढाका दो मेरे अंदर मेरे aarav…love यू माय baby…..ab अपने इस भाबी के अंदर समां जाओ aarav…I ोवे थिस तो यू baby….enjoy योरसेल्फ तो थे फुल्लेस्ट माय डार्लिंग मुउउउउआअआआह्ह्ह्ह!!!”

आरव ने ढाका देना शुरू किया, और जैसे सान्वी ने कहा उस्सने बड़े आराम से सब कुछ गहराई से फील करते हुए ढाका दिया, अपने लुंड को एक एक इनके सान्वी के अंदर घूसस्ते हुए फील किया, सान्वी के अंदर की गर्मी को अपने लुंड पर फील किया आरव ने, अपने लुंड की पूरा लम्बाई पर सान्वी की अंदर की गर्मी और नरमी को फील करते हुए आरव अपने लुंड को अंदर बाहर करता था और धीरे धीरे ढकों की रफ़्तार को बढ़ाया आरव ने… कुछ ऐसा कर रहा था जैसे एक एक बूंद पानी के एक प्यासा एन्जॉय कर रहा था, जैसे एक बंजर ज़मीन पर एक एक पानी का कटरा टपक रहा था, वो फीलिंग होने लगे थे दोनों सान्वी और आरव को… किसी को कोई भी जड़ी नहीं थी, सब कुछ बिल्कुल आराम से फील करते हुए किया जा रहा था, बुसस कुछ ऐसा समझ लिया जाए के स्लो मोशन में सेक्स कर रहे थे दोनों बड़े आराम से सब कुछ महसूस करते हुए…

कहाँ कहाँ किश का हाथ टच हो रहे थे, किश जिस्म के किश कोने को कौन छह रहा था सब फील करते जा रहे थे दोनों, आरव का हाथ कभी सान्वी के कमर पर तो कभी बूब्स पर, सान्वी का हाथ कभी आरव के पोईत पर तो कभी छाती सहलाते हुए, आरव का मुंह कभी उस्सकी बूब्स चाटता , चुस्ता हुआ तो कभी सान्वी के जीब को अपने मुंह में लेकर चूस्ते हुए, इस तरह से ढकों का सिलसिला जारी रहा… दोनों के जिस्म कुछ इस तरह से स्ट्रेच हो रहे थे जैसे दो सांप सेक्स कर रहे थे, एक दूसरे के निचे ऐंठते हुए, कभी आरव सान्वी के ऊपर तो कभी आरव सान्वी के निचे, फिर कभी दोनों एक करवट पर, मगर लुंड छूट के अंदर hi रहे किसी भी मूवमेंट पर…..

बिस्तर बिल्कुल रौंदे हुए थे चादर आधा बीएड पर तो आधा ज़मीन पर हो गए थे, तकिये एक बीएड पर तो एक फर्श पर पाए गए…. कभी दोनों बैठे पोजीशन पे दिखे, तो कभी लेते हुए….. दोनों एक दूसरे को जैसे एक लजतदार पकवान खा रहे थे उस तरह से एन्जॉय करते जा रहे थे.. आरव झड़ने को आया मगर रोका खुद को…. सान्वी भी झड़ने को आयी, अपने ओर्गास्म की पीक रीच हुई मगर उस्सने भी रोका, कण्ट्रोल किया जान बुझ कर अवॉयड किया ओर्गास्म को, और एक दूसरे को फील करते रहे, एक दूसरे के जिस्म के अंदर और भी गहराई से उतरना चाहते थे दोनों, जैसे एक इंटरकोर्स काफी नहीं होता इस लिए डबल, ट्रिपल को सब एक में hi फील करना चाहते थे, ऊपर निचे, निचे ऊपर, बैठ कर, सो कर, झुक कर, हर पोजीशन में भी करते रहे… मगर कब तक एक एन्ड तो होना था आखिर, क्लाइमेक्स तो रीच होना था, कितना कण्ट्रोल भी कर सकते थे…… क्लाइमेक्स रीच हुआ भी तो किश पोजीशन में…..

सान्वी का आधा जिस्म बीएड के बाहर लटका हुआ था, आरव का जिस्म उसस्के ऊपर, सान्वी का सर ज़मीन छह चुकी थी, आरव का एक हाथ ज़मीन पर खुद को संभालने के लिए, दोनों के कमर बीएड पर hi थे और आरव के ढके बड़े रफ़्तार से सान्वी की छूट के अंदर आ रहे थे, सान्वी की तड़पती हुई आवाज़ से कमरा गूंझ रहा था और आरव की कहांरने की और हैंफने की आवाज़ भी भरे हुए थे रूम में जब दोनों ने एक साथ ेकस्तस्य में डूबे ओर्गास्म रीच किया कुछ ऐसे आवाज़ में जैसे कोरस सांग था कोई… “आआआअह्हह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्ह ह्ह्ह्हुउउउउ स्स्स्सस्स्स्शह्ह्शशशशशश घघघघघघघघहहहहहह स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह aaaaaaahhhhaaaaahhhhhhhhhhh!!!”

और कुछ देर दोनों वैसे hi आधा जिस्म ज़मीन पर और आधा बीएड पर पड़े रहे ज़ोरों से हांफते हुए… आरव सान्वी के अंदर hi झाड़ गया, उस्सको बाहर निकालने का मौका hi नहीं मिला….. दोनों का हांफना बांध हुआ तो सान्वी ने कहा, “मुझको ऊपर उठाओ नाह!!”

आरव ने उस्सको ऊपर खिंचा, तब अपने लुंड को बाहर निकला सान्वी के मुंह के पास किया और बिना कुछ कहे सान्वी ने उसस्के बाकी के वीर्य को चूसा... और उस्सको चुस्सने के बाद सान्वी ने उस्सको एक हल्का सा थपड मारते हुए कहा, “क्यों मेरे अंदर झड़े तुम? किआ मुझको प्रेग्नेंट करना है?”

और आरव ने सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरकर कहा, “ऐसा तो मैं ने बिल्कुल सोचा hi नहीं मगर आईडिया बुरा नहीं है भाबी, हाँ हो जाओ प्रेग्नेंट मेरे लिए किसी को पता नहीं चलेगा, भाई से कहना के उस्का है, सिर्फ हम दोनों को पता होगा के अपना hai…kyun?!”

सान्वी ने कहा, “no नेवर, आईटी इस वैरी रिस्की, कभी भी कुछ भी हो सकता है…. मुझे कुछ उपाए करना होगा…..

और दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भरके किश करते रहे काफी देर तक और आखिर में दीप्ति की आवाज़ सुनाई दिए ऊपर, वो चिल्लाते हुए कह रही थी, “चाचू कार्टून एन्ड हो गए हैं आओ कद निकालो, और दूसरी लगाओ नाह!!”

तो बे कॉन्टिनोएड………… (3200 वर्ड्स)
 
अपडेट 139 संजना केस बैक एंड…..

और दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भरके किश करते रहे काफी देर तक और आखिर में दीप्ति की आवाज़ सुनाई दिए ऊपर, वो चिल्लाते हुए कह रही थी, “चाचू कार्टून एन्ड हो गए हैं आओ कद निकालो, और दूसरी लगाओ नाह!!”

अब आगे……….

सान्वी और आरव के उस मिलाप के बाद दोनों कुछ देर वैसे hi लेते रहे दीप्ति को जवाब देकर. एक दूसरे को बाँहों में भरे रहे दोनों. और आरव बहोत hi खुश था. सान्वी ने उसस्के गाल सहलाते हुए पूछा,

“अब तू खुश हुआ नाह? मुझे तुझसे सेक्स करने में पता नहीं क्यों बहोत झिझक हो रही थी, मैं चाहती तो थी शुरू से hi मगर पता नहीं क्यों एक अजीब सी फीलिंग हो रही थी, जैसे तू मेरा बीटा सामान है, तुझको संभाला है, तुमको बहोत दिल से प्यार तो किया है मगर जिस्म देना मुझे बहोत hi अजीब लग रहा था, सोचा था के कभी भी जिस्मानी तालुकात नहीं बनाउंगी तुम्हारे साथ, मगर तुम बड़े ज़िद्दी हो, और फिर मैं नहीं चाहती थी के तुम मुझसे उखड़े उखड़े से रहो, मैं नहीं चाहती थी के मेरे रेफुसल से तुम मुझसे दूर रहो, तो आखिर में यह सब होने दिया अब तो खुश है नाह तू? क्यों खुश नहीं होगा वो तो तेरे चेहरे में दिख रहा है के कितना खुश है तू, मुझको पा जो लिया!”

आरव ने सान्वी को चारों तरफ चूमते हुए कहा, “यह भी कोई पूछने वाली बात है के खुश हूँ केक नहीं, सेहरा में पानी मिल गया मुझको…. थैंक्स, लोड्स भाबी… लव यू सो सो मच. मुउउउउआआआह”

और इतने में दीप्ति ज़ोर ज़ोर से उछलते हुए कहने लगी, “चची! चची! चची!”

तो ऊपर सान्वी जल्दी से बीएड से उत्तरी और कहा, “बाप रे, हे भगवन संजना आगयी, जल्दी कपडा पेहेन और निकल यहाँ से, ोफो मुझे भी अपने कमरे में जल्दी से जाना चाहिए… उफ्फ्फ…. वो गेराज में रीच हुई होगी अब तक, भाग यहाँ से आरव…. और कभी भी उस्सको हमारे बारे में पता नहीं चलना चाहिए okay आरव? इतस आवर सीक्रेट्स!”

आरव जितना जल्दी हो सका अपने पंत और टीशर्ट पहना और जल्दी से निचे गया और दीप्ति को गॉड में लेकर इधर उधर के बातें करने लगा उस्का ध्यान हटाने के लिए ताके वो कुछ नाह कहे संजना से के वो इतने देर तक उस्सकी मम्मी के साथ कमरे में था, आरव ने कार्टून्स वाले बातें किये दीप्ति से के उन् सब कार्टून्स में से कौन ज़्यादा पसंद आया उस्सको और कहा के अपने चची से सभी कार्टून्स जो देखा सब बताएं…..”

तब तक संजना किचन वाले दूर से अंदर दाखिल हो रही थी और आरव को देख कर सरप्राइज होते हुए कहा, “अरे, जान आज तुम इतनी अर्ली कैसे घर आ गए?!” और हुग किया आरव और दीप्ति को एक साथ क्यूंकि दीप्ति आरव के गॉड में थी. और दीप्ति ने कहा, “चाचू आज मुझसे भी पहले घर आगये थे, मम्मी के साथ थे ऊपर कब से!!”

संजना ने बात को अनसुनी किया क्यूंकि ठीक तभी आरव संजना से पूछ रहा था, “यह बताओ के आज तुम कैसे आगयी इतनी जल्दी तुम्हारे पापा तो अभी तक घर वापस नहीं ए होंगे नाह?”

अंदर जाते हुए संजना ने अपनी हैंडबैग को मेज़ पर रख कर एक गिलास पानी लिया पीने के लिए यह कहते हुए, “आज मैं लॉन्ग ड्राइव पर गयी थी, एक हाईवे है मैं हमेशा जानना चाहती थी के वो कौन सी शहर में जाकर निकलता है तो उस में ड्राइव करती गयी जब तक शहर नहीं रीच हुआ, वहां थोड़ी सी शॉपिंग किया, फिर मेरा वो ड्राइविंग मॉनिटर मिला जिस से ड्राइविंग सीखा था, उसस्के साथ कुछ देर रही, और फिर वापस घर आगयी क्यों के ी ऍम टायर्ड, वांट तो टेक ा वार्म बाथ नाउ, सान्वी भाबी किधर है?!”

अब यह बताने की ज़रूरत नहीं के संजना किआ कर रही थी अपने ड्राइविंग टीचर के साथ….. खूब एन्जॉय किया उसस्के साथ उस्सने आज तभी अपने पापा से मिले बिना hi वापस आ गयी क्यूंकि प्यास बुझा दिया टीचर ने आज.

दीप्ति ने पूछा, “वार्म बाथ किआ होता है चची?!”

संजना ने उस्सको आरव के गॉड से अपने गॉड में लेते हुए कहा, “तुमने बाथ ले लिया नहीं नाह? चल आज मैं तुझको भी वार्म बाथ देती हूँ, चल मेरे साथ! हम साथ साथ बाथ करेंगे आज हीहीहीहीही!”

और संजना दीप्ति को लेकर ऊपर चढ़ रही थी के सान्वी अपने कमरे से निकल रही थी तो संजना ने सान्वी से कहा, “इस्सकी कपडे देते जाओ भाबी, आज मैं इस्को नहलाऊंगी,” और दीप्ति ने अपनी मम्मी से कहा, “यस मम्मी मैं चची के साथ वार्म बाथ करुँगी!”

तो सान्वी निचे एक नज़र आरव को देख कर वापस गयी दीप्ति के कपडे देने संजना को और जब वह दोनों बाथरूम के अंदर चले गए तो जल्दी से सान्वी वापस आयी आरव के पास और पूछा,

“कैसे आज इतनी सवेरे आगयी संजना तुमने पूछा किआ?!”

आरव: “हाँ अपने पापा से नहीं मिली, लॉन्ग ड्राइव करने गयी और अपने ड्राइविंग टीचर से मिलकर वापस आगयी कहा उस्सने……”

सान्वी ने कहा,

“देखा गर 15 मिनट पहले आयी होती तो हम पकड़े जाते आज. वो चुप चाप आकर दीप्ति से पूछती के मैं कहा हूँ तो दीप्ति कह देती के मई तुम्हारे साथ हूँ तुम्हारे कमरे में!”

आअराव: “दीप्ति ने कहा भी, उस्सने बोल दिया के मैं उस से पहले आज घर आगया हूँ और तुम्हारे साथ था कब से! … मगर शायद संजना ने उस्सकी बात नहीं सुनी!”

सान्वी: “हाय राम अब नहाते वक़्त उसस्के कुछ बोल दिया तो?!”

आरव ने सान्वी को अपने बाहों में जकरते हुए कहा, “अरे मेरी प्यारी भाबी, तो किआ हुआ बताने दो हम कह देंगे के मैं तुमसे ऐसे hi गप्पे मार रहा था और किआ!”

और दोनों फिर किचन में एक दूसरे को बाहों में भरके किश करते रहे काफी देर तक.

और उधर जब संजना अंदर बाथरूम में थी दीप्ति के साथ तो दीप्ति से पूछा, “दीपू, यह बता तुमने किआ कहा था के आज तेरा आरव चाचा तुझ से पहले आगये थे काम से और तुम्हारे मम्मी के साथ थे उसस्के कमरे में? हम्म बता मुझे किआ हुआ था!”

दीप्ति ने बड़े आराम से कहा, “हाँ, आज मम्मी नहीं आयी थी मुझको स्कूल बस से लेने, चाचा आये थे मम्मी तो बहुत देर बाद आये जब मैं बस से निकल चुकी थी तब.”

सान्वी: “तेरी मम्मी उस वक़्त कौन सी ड्रेस में थी दीपू?”

दीप्ति: “साडी में थी!”

संजना: “और अभी जो साडी पहनी है है उसी में थी?”

दीप्ति: “हाँ!”

संजना ने फिर पूछा, “ाचा फिर किआ हुआ, चाचा कब गए थे तेरी मम्मी के कमरे में? किआ तू भी उनके साथ थी?”

दीप्ति ने फिर बड़े आराम से बताया,

“दो बार गए थे चाचू मम्मी के साथ, पहली बार जब मुझको कार्टून का कद दाल कर देखने को दिया, फिर बहोत देर बाद चाचू वापस आये और व्हिस्की पिया. मम्मी उस पर चिल्लाई के दादा की व्हिशक्य क्यों पी रहे हैं, चाचू ने कहा मेरे बाप का माल है और मम्मी और वो किचन में रहे कुछ देर. फिर चाचा को मम्मी सहारा देकर उसस्के रूम में लगाई और बहोत देर तक वहीँ रहे चाचू के रूम में जब तक तुम वापस आयी तब चाचू निकले और मम्मी भी निकल कर अपनी कमरे में चली गयी साडी हाथ में लिए हुए!”

संजना खुश हुई और दीप्ति से कहा, “अरे वह दीपू तुझे तो सब पता है, तुमने इतना कुछ देखा वाओ, तो तेरा चाचा तेरी मम्मी के साथ जाता है पता नहीं कब से इन् दोनों में इश्क है, मुझे थोड़ा सा शक जैसा था मगर अब तो यकीन हो गया!”

दीप्ति ने कहा, “मम्मी और चाचू बहोत प्यार करते हैं पापा से भी ज़्यादा मम्मी और चाचू में प्यार है, मैं ने बहोत बार चाचू को मम्मी को किश करते और होल्ड करते देखा है ऐसे, ज़ोर से!” और दीप्ति ने संजना को ज़ोर से जाकर के दिखाया के किश तरह से आरव उस्सकी मम्मी को जकार्ता है!”

संजना बिल्कुल नाराज़ नहीं हुई बल्कि खुश दिखने लगी और ख़ुशी ख़ुशी दीप्ति को नहलाया और कहा,

“दीपू, जो कुछ मैं ने तुमसे अभी पूछा और जो कुछ भी तुमने मुझे बताया कभी मत कहना अपनी मम्मी या अपने चाचू से समझ गयी बेबी? नहीं तो मम्मी तुमको बहोत डाँटेगी समझी नाह?!”

दीप्ति ने कहा, “नहीं बताउंगी okay चची!”

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नहाने के कुछ देर बाद जब संजना सान्वी से मिली किचन में तो उस्सको घुर्र घुर्र के देखती जा रही थी और कई बार उस्सको हुग किया संजना ने….. आप सब को याद होगा के लेस्बियनिस्म रिलेशनशिप दोनों के बीच हो चुके हैं चावला साहब के साथ…

तो उस से भी कुछ देर बाद आरव ने कहा के वो गोल्फ क्लब का एक चक्कर लगाने जा रहा है और दीप्ति को कार में लेकर चला गया. उन् दोनों के जाते hi, संजना ने संवी को किश किया किचन में hi…..

सान्वी ने हँस्ते हुए उस से कहा, “किआ हुआ तुझे? बहोत प्यार ारः है किआ आज?”

संजना ने सान्वी के बूब्स पर हाथ फरते हुए उस्सकी गर्दन को किश किया फिर अपने जीब चलाई सान्वी के चेहरे पर और उसस्के होंठों पर उस्सको जाकर के, सान्वी ने मुंह खोल दिया और दोनों एक दूसरे के जीब को चुस्सने लगे एक दूसरे के जिस्म पर हाथ फरते हुए….

संजना का हाथ सान्वी के ब्रा के अंदर गए और उस्सने संवी के निप्पल को अपने उँगलियों में दबाते हुए गोआल गोआल उँगलियों को घुमाने लगी…..

किश करने के बाद संजना ने ने सान्वी को बाहों में भरते हुए कहा,

“आरव के साथ भी एन्जॉय करती हो नाह? तुम दोनों में खूब मज़ा होता है नाह भाबी? मुझसे तो मत छुपाना मुझे पता चल चूका है और मुझे कोई ओब्जेक्शन्स नहीं है बुसस इतना बता दो के कब से, हमारी शादी से पहले यह शादी के बाद से?!!

तो बे कॉन्टिनोएड………….
 
अपडेट 140 संजना एंड सान्वी टुगेदर

“आरव के साथ भी एन्जॉय करती हो नाह? तुम दोनों में खूब मज़ा होता है नाह भाबी? मुझसे तो मत छुपाना मुझे पता चल चूका है और मुझे कोई ओब्जेक्शन्स नहीं है बुसस इतना बता दो के कब से, हमारी शादी से पहले यह शादी के बाद से?!!

अब आगे….

यह सब कहते हुए संजना के हाथ सान्वी के बूब्स दबा चुके थे और उसस्के होंठ सान्वी के गर्दन पर चूमते हुए फेरर रहे थे जिस से सान्वी के रोवाण रोवाण खड़े हो गए थे. सान्वी के समझ में नहीं ारः था के किआ जवाब दें संजना को, उस्सको सब कुछ सच सच बता दे या बात छुपाये उस से. मगर सान्वी ने सोचा के संजना बहोत तेज़ लड़की है उस से बात छुपाना आसान नहीं और झूट बोलकर सान्वी उसस्के नज़रों में गिरना नहीं पसंद करती थी, वैसे सान्वी ने यह भी सोचा के जब संजना को कोई ऑब्जेक्शन नहीं तो उस्सको बेहतर है सब कुछ सच बताना.

और फिर सान्वी ने यह भी सोचा के उसस्के और संजना के बीच एक सेक्सुअल बॉन्डिंग भी हो चुकी है, दोनों एक दूसरे को बहोत पसंद करते है तो क्यों झूट बोलना उस से! संजना वैसी लड़की नहीं थी के एक सेक्सुअल रिलेशनशिप के लिए कोई तमाशा करे, वो खुद एन्जॉय करती ऐसे रिलेशनशिप को लेकर तो सान्वी ने सब कुछ सच बताने को सोचा संजना को.

सान्वी ने संजना के हाथ पाकर कर उस्सको अपने रूम में लगायी और बिठा कर बात बताना शुरू किया. संजना को सब कुछ डिटेल में समझाया सान्वी ने के कबसे आरव उसस्के साथ इंटरेस्टेड था और यूनिवर्सिटी के दिनों को किश तरह से दोनों में एक टाइप का झगड़ा भी हो गया था और फिर दोनों के बीच एक कोल्ड वॉर जैसा हो गया फिर दूरी हो गयी थी और अब उसस्के शादी के बाद आरव फिर से उसस्के तरफ झुकने लगा और किश तरह से अब पहली बार दोनों के बीच एक सेक्सुअल एनकाउंटर हुआ.

संजना ने कहा,

“धत! और मैं सोच रही थी के बरसों से आप दोनों में यह रिश्ता है, मगर आज पहली बार हुआ आप दोनों के बीच? किआ भाबी? आप इतने सालों से उसस्के साथ एन्जॉय कर सकती थी तो क्यों नहीं किया किश ने रोका था आप को? आप जवान हो वो आप से भी जवान ज़िन्दगी को खूब एन्जॉय करना चाहिए था नाह? जवानी सिर्फ कुछ दिनों के लिए होती है, कब एन्जॉय करोगी बूढी होने के बाद यह सब मौका हाथ से निकल जाता है!”

सान्वी मुस्कुराते हुए संजना को देखती जा रही थी और कहा,

“तुम कैसे इतनी आसानी से यह सब कह गयी ऋ? तुझे कुछ नहीं होता ग़ैर मर्दों के साथ सेक्स करने से?!”

संजना: “क्यों कुछ होना चाहिए भाबी? सब मर्द एक जैसे होते हैं. सब के पास एक लौड़ा होता है और सब उस्सको हमारे अंदर डालना चाहते हैं और हम भी उस्सको अपने अंदर लेना चाहते हैं, बुसस उस्सको फील करना और पसंद करना होता है, कोई पसंद आ जाए तो इस में हर्ज hi किआ है एन्जॉय करने को?! मेरे लिए तो लाइफ एन्जॉय करने के लिए है वो चाहे कैसे भी हो बुसस एन्जॉय करो और मस्त रहो और किआ!”

उस वक़्त दोनों बीएड पर लेते हुए थे और संजना ने सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरके किश करने लगी और संवी ने भी संजना को जाकर लिया और दोनों एक दूसरे को चूमने चाटने लगे…. उस में संजना बहोत ज़्यादा हॉर्नी लग रही थी और वो सान्वी के ऊपर चढ़ गयी और उसस्के मुंह के अंदर अपने जीब डाला जिस्सको सान्वी ने ले लिया चुस्सने को और आहिस्ते आहिस्ते संजना ने सान्वी की पल्लू को हत्ता दिया और उसस्के चूचियों को मसलने लगी और हलके से उस्सकी ब्रा को खोल डाला फिर सान्वी के बूब्स चुस्सने लगी और सान्वी कसमसाने लगी संजना के निचे……

कुछ देर उस्सको बूब्स सूचक करने के बाद संजना सान्वी के पथ चाटती गयी और निचे के तरफ उसस्के नबी को लीक करती गयी और उस्सकी पेट्टी कोट को निचे करते हुए उस्सकी पंतय भी निचे करने लगी और उस्सकी छूट को लीक करने लगी संजना जबकि सान्वी अपने ेंखों को मोठे मोटे खोलके चाट देख रही थी गहरी सांसें लेते हुए…. और संजना ने कहा,

“मुझे भी आप से प्यार हो गया है तो आरव और चावला जी को क्यों नहीं होगा? आप को hi सेक्स एन्जॉय करने के काबिलो, इतनी हसीं बॉडी है, आप की अदाएं इतने कमाल की है के कोई भी आप के साथ सेक्स करने के लिए मचल सकता है सान्वी बहजबी… बड़ा मज़ा अत है आप के साथ!!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए एक नटखटी ऐडा में कहा, “चल कामिनी, तुझे एक लड़का होना चाहिए था तू लड़की कैसे बन गयी!” और उस पर संजना ज़ोर से हंसी और सान्वी की पंतय को पूरा बाहर निकल कर उसस्के टांगों को फैला कर अपने सर को उसस्के जाँघों के बीच दाल कर सान्वी की रस को चाटने चुस्सने लगी!

तो सान्वी की तड़पती आवाज़ निकली, “ओह माय गॉड, किआ कर रही है तू ऋ, मुझको गिला कर दिया उफ़ बुसस कर नाह संजना उफ़ मेरी माँ!”

संजना ने अपने दो उँगलियों को सान्वी के चढ़ के अंदर घुसेड़ते हुए कहा, “आप एक बहोत hi हॉट और सेंसुअल लेडी हो भाबी, कोई भी मर्द आप को ऐसी लेता पसंद करेगा इसी लिए तो चावला जी फ़िदा हुए हैं आप पर तो आरव क्यों नहीं होगा, आप की फिगर, आप की बॉडी आप की अदाएं कमाल के हैं, आप की नज़ायकाट जान लेवा है तो मैं कैसे खुद को सम्भालूंगी? मुझे भी आप से इश्क हो गया है भाबी सान्वी भाबी….. आप बुसस एन्जॉय करो नाह भाबी, ऐसे मौके बार बार थोड़े hi आते हैं!”

सान्वी संजना के सर को अपने हाथों में थामे हुए सिसकारियां लेते हुए तड़पती जा रही थी और संजना उस्सको वो ख़ुशी देने लगी थी जिस्सकी पहचान सान्वी को पहली बार हो रहे थे…. लास्ट बार तो चावला साहब साथ थे तब संजना ने सान्वी के साथ सेक्सुअल एनकाउंटर किया था मतलब थ्रीसम हुआ था मगर आज पहग्ली बार सान्वी अपनी ज़िन्दगी में अकेली एक औरत के साथ थी और एक और एक संजना जैसी जवान और खूबसूरत औरत से उत्तेजित हो रही थी. यह संवी के ज़िन्दगी में कब्जिओ भी नहीं हुआ था इस से पहले.

अपनी तड़पती आवाज़ में hi सान्वी ने कहाँरते हुए कहा,

“तू किआ मेरी जिस्म को पसंद करती है तो मुझे किआ तुमसे प्यार नहीं है संजना? मुझे भी तो तेरी जिस्म बहोत पसंद है, अपने कपडे भी उतार नाह, मुझे भी तेरी जिस्म को चुस्सने चाटने दे अब, मुझे भी तुझे छूने का मैं कर रहा है ri…chal कपडे उतार अपने भी, फटाफट कर नाह….!”

और दोनों ने एक पल में अपने अपने कपडे बहोत hi रफ़्तार से उतारे और दोनों नंगी जवान औरतें बिस्तर पर पाए गए एक दूसरे के जिस्म को मसलते, चूस्ते चाटते हुए!

69 पोज़ किया दोनों ने, सान्वी का मुंह संजना की छूट चाट रही थी और संजना सान्वी की रस निकाल रही थी अपने पतली पतली उँगलियों से उस्सकी छूट को खुरदते हुए…. उस दौरान दोनों की सिसकारियों से कर्मा गूंझ रहा था और उनको ख्याल hi नहीं था के आरव और दीप्ति घर में दाखिल हो चुके थे…..

आरव ने कमरे से कुछ आवाज़ें सुनते हुए दीप्ति को गॉड में लिए आहिस्ते आहिस्ते कमरे के तरफ बढ़ने लगे दीप्ति को खामोश रहने का इशारा karke…donon बिल्कुल चोरों की तरह कमरे के तरफ ऊपर चढ़ रहे थे…..

कमरे के पास आकर आरव ने कमरे के दरवाज़े से कान लगाया और एक नॉक किया बिना कोई आवाज़ किये तो धडपडाते हुए संजना झट से बिस्तर से निकल के अपने कपडे लेने लगे और आरव ने दरवाज़ा खोलने की कोशिश किया तो अंदर से लॉक्ड पाया दरवाज़े को और दीप्ति ने ज़ोर से आवाज़ दिया, “मम्मी, चाची आप ने दरवाज़ा क्यों लॉक किया है? आप लोग किआ कर रहे हो अंदर?!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……..
 
अपडेट 141 आरव टैक्स सान्वी अगेन

उस दिन आरव को कुछ पता नहीं चला क्यूंकि, जल्दी से दोनों महिलाएं कपडे पेहेन कर उसस्के सामने आये यह बहाना करते हुए के सान्वी के कमर में दर्द था तो संजना उस्सकी मस्सगे कर रही थी.

उसस्के बाद कुछ ख़ास नहीं हुआ. सब घर पर hi थे मगर संजना और आरव अपने कमरे में थे और सान्वी दीप्ति के साथ किचन में चली गयी थी. सान्वी के मैं में सिर्फ वो मंज़र घूम रहा था जो उस ने संजना के साथ गुज़ारे थे कमरे के अंदर और वो उत्तेजित हो रही थी और उस्सको अपने शरीर की प्यास बुझाने की ज़रुरत पड़ने लगी थी. मगर उस वक़्त वो लाचार थी. कुछ भी नहीं था उस वक़्त खुद की प्यास बुझाने के लिए, आरव बिजी था और चावला साहब ग़ायब.

संजना आरव के साथ अपने कमरे में बीएड पर लेते हुए बातें कर रहे थे और संजना ने आरव से कहा,

“आज पापा ने एक अजीब बात कहे हैं मुझे!”

आरव ने हैरानी से पूछा, “ऐसा किआ कह दिया तुम्हारे पापा ने भला?”

“उस्सने तुम्हारे पापा को ुरगेंटली बुलाया है और मुझे भी मगर तुमको नहीं, कुछ ख़ास बातें करनी है उससे हम दोनों से उस ने कहा!”

आरव: “तो इस में किआ है? चली जाना उस से मिलने पापा के साथ कल!”

संजना अपने मैं में यह सोचते हुए के दोनों ससुर और बाप मिलकर उस्सको छोड़ना चाहैंगुए शायद इसी लिए उसस्के पापा ने बुलाया है दोनों को एक साथ मगर यह तो वो आरव को नहीं बता सकती थी और मैं hi मैं वो गरम होने लगी थी दोनों मर्दों के बीच अपनी शरीर को पाते हुए ख्यालों में. और यह बात संजना ने सान्वी को भी बताना भूल गयी थी.

सान्वी कुछ देर बाद लाउन्ज में काउच पर बैठी, दीप्ति को गेम्स देकर सोच में डूबे सोचने लगी खुद से बड़बड़ाते हुए;

“कमाल है, आरव के साथ भी मैं ने सेक्स कर लिया, और हैरानी की बात है के उस्सकी पत्नी के साथ भी बाप रे, मैं किआ बन गयी हूँ अब?! ससुर के साथ, देवर के साथ अब उसस्के पत्नी के साथ भी!! मैं तो ऐसी बिल्कुल नहीं थी….. ये सब कैसे और क्यों हो गया?! यह सब इस संजना की वजह से हुआ है, बहोत हॉट और सेंसुअल है वो, सब उस्सको पसंद करते हैं….. इतने सालों से आरव चाहते हुए भी मुझसे कुछ नहीं कर पाया था और जबसे यह संजना उस्सकी लाइफ में आयी आरव का भी हौसला बढ़ गया मेरे ज़्यादा करीब आने का और मेरे साथ सोने का, चावला जी ने सही कहा था उस दिन!… संजना में कोई मैगनेट है किआ जो कोई भी उसस्के पास जाती है तो दूसरी औरतों को भी पा लेते हैं?! ससुर ने भी तो संजना से सेक्स करने के बाद hi मुझसे किया! वार्ना सिर्फ झपटा झपटी थे उनके साथ!! मगर एक बात है, विवान क्यों संजना के तरफ नहीं आकर्षित होता? किआ विवान ने कभी संजना को उस नज़र से देखा है कभी? आज विवान से बात करुँगी, पूछूँगी के उस्सको संजना किसी लगती है और उस्का किआ ख्याल है संजना के बारे में!”

यह सब सोचते हुए सान्वी की ेंख लग गयी, और आरव निचे आया जब संजना शावर ले रही थी तो देखा सान्वी कितनी प्यारी लग रही है काउच पर लेती हुई. उस्सने दीप्ति को इशारे से छुप रहने को कहा और धीरे से सान्वी की गर्दन पर अपना जीब चलाया जिस से चिहुंक कर सान्वी झपट कर उठ बैठी. और झट से आरव को बाहों में भरके चूमने लगी दीप्ति के सामने और दीप्ति खीखीखी हंससने लगी नज़रें चुरा कर देखते हुए दोनों को. – ऐसा दीप्ति के सामने बहोत बार हुआ है जब सान्वी और आरव एक दूसरे को किश या प्यार कर रहे हों…. इस लिए तो संजना ने दीप्ति को बेहला फुसला कर सब कुछ पता लगा लिया था इन् दोनों के बारे में.

आरव ने सान्वी का हाथ पाकर कर उस्सको खींचते हुए चावला साहब के कमरे में लगाया और खड़े पोजीशन में उस्सको दीवार से चिपका कर किश करने लगा उस्सकी साडी की पल्लू को निचे करके हाथ से उसस्के बूब्स को मसलते हुए. सान्वी बार बार फुसफुसा रही थी, “ोफो संजना आजायेगी, चोर्रो किआ कर रहे हो, चोर्रो नाह आरव!” मगर आरव ने उस्सकी ब्लाउज के कुछ बटन्स खोल दिया था और सान्वी का एक बूब उसस्के मुंह में था जिस्सको आरव चुस्सने लगा था दूसरे बूब को दबाते हुए. और अपना कमर को सान्वी के पथ की निचे दबाते जा रहा था कस्सके अपने तन्ने हुए लुंड को रगड़ते हुए कपडे के अंदर से hi….. सान्वी बाहर झांके की कोशिश कर रही थी के कहीं दीप्ति या संजना नज़र ना आये, और तब तक आरव ने झुक कर सान्वी की साडी और लंहगे को ऊपर उठाया और उसस्के जाँघों पर अपना एक हाथ फरते हुए ऊपर उस्सकी पंतय तक किया जिस से सान्वी सिमट गयी और उस्सकी आह निकली.

आरव ने जल्दी से अपनी प्यारी भाबी की पंतय को निचे किया उस्सकी घुटनों तक और झट से अपने ज़िप को निचे करके अपने लुंड को बाहर किया अउ कमर मोड़ कर झुक गया और अपने लुंड को अपनी भाबी की गीली छूट के अंदर थुश दिया. सान्वी की आह निकली और उस्सने आरव को अपने बाहों में भरते हुए दर्री हुई आवाज़ में सिसकारियों के साथ कुछ हांफते हुए कहा,

“उफ़ मेरी माँ! किआ होगा अगर संजना अचानक निचे आगयी तो? तुम कितने बेसब्र हो गए हो आरव!”

उस्सकी छूट के अंदर ढाका देते हुए और कहाणररते हुए आरव ने कहा, “अरे मेरी सेक्सी भाबी, वो नाहा रही है इसी लिए तो एक क्विकी मारने चला आया आप के साथ… मज़ा तो लेलो माय सेक्सी bhabi…aaaaah…. मुझको अपने अंदर गहरायी में फील तो करो नाह bhabi…aah कितना मज़ा ारः है वाओ….. यू अरे सो हॉट भाबी ह्म्म्मम्म्म्म!”

सान्वी उस्सको सुनकर, उसस्के गर्दन को चाटने लगी और उसस्के लुंड को अपने गहराई में फील करते हुए कहा, “और सब मेरे को दे रहे हो तो किआ संजना के साथ कुछ नहीं करेगा तू हँ?!”

धक्कों को तेज़ करते, हांफते हुए आरव ने कहा, “उस्का मूड नहीं है आज कह दिया उस्सने, इसी लिए तो प्यास बुझाने तुम्हारे पा चला आया स्वीटहार्ट….”

और अपने टांगों पर और ज़ोर लगाते हुए आरव ने तड़पती आवाज़ से अपने लुंड को ज़बरदस्त तरीके से और ठुस्सा सान्वी के अंदर जिस से सान्वी की आह ज़ोर से निकली और खुद अपने हाथ को अपने मुंह पर रखते हुए सान्वी ने एक नज़र फिर से बाहर किया तो देखा दीप्ति ने उस्सकी आवाज़ सुनली और उस तरफ देख रही थी अपने गेम खेलते हुए, और आरव झड़ने को आया तो झट से लुंड को बाहर निकाल कर सान्वी के छूट के ऊपर दबाया अपने वीर्य को उस्सकी पथ और जाँघों पर बहाते हुए, और तेज़ी से हांफते हुए सान्वी के जीब को चुस्सने लगा यूँही खड़े हुए पोजीशन में hi सान्वी को दीवार से चिपकाए हुए!! उस वक़्त सान्वी का एक तंग ऊपर था जिस को आरव ने एक हाथ से संभाला हुआ था, मतलब सान्वी एक तंग पर थी जिस दौरान आरव उस्सको छोड़ रहा था उस दीवार से चिपकाये हुए.

सान्वी ने हांफते हुए धीरे से कहा, “अब मेरा तंग चोर्रो मेरा दूसरा तंग दुखने लगा है उफ़!” जब आरव ने तंग को चोर्रा तो सान्वी वहीँ बैठ गयी निचे और आरव ने अपने लुंड को उस्सने मुंह के पास किया जिस्सको सान्वी ने ख़ुशी से अपने मुंह में ले लिया और एक नज़र बाहर दौड़ा कर अपने प्यारे देवर के बचे हुए वीर्य को चुस्सने, चाटने लगी आरव को खुश करते हुए अपने नज़रों को ऊपर उठाकर उसस्के चेहरे में ख़ुशी और सुकून देखते हुए……

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 142 Sanjana’s डैड एक्सप्लोडेस ा बम ों थम!!

दूसरे दिन संजना और चावला साहब तैयार हुए संजना के पापा से मिलने जाने के लिए और वहां पहुंचे.

मोबाइल से संजना ने अपने डैड से कांटेक्ट करके बता दिया था के वह दोनों उस से मिलने को निकला चुके हैं तो वो घर पर वेट कर रहा था.

संजना बहोत hi सेक्सिली ड्रेस्ड थी क्यूंकि वो सोच रही थी के दोनों मिलकर उस से खूब एन्जॉय करेंगे. और जाते वक़्त ड्राइविंग के दौरान चावला साहब और वो एहि बातें करते हुए जा रहे थे, चावला साहब का हाथ पुरे रास्ते संजना के जाँघों को सहलाते रगड़ते हुए गए.

एक दो पेग पीन ेके बाद चावला और आनंद लाउन्ज में बैठे बातें किये जा रहे थे और संजना किचन से आती जाती हुई दिखाई दे रही थी हर बार. कोई दो ःघंटे के बात चीत के बाद आनंद ने संजना को पास बुलाया और चावला साहब से कहा,

“तो अब मैं असली मुद्दे पर राटा हूँ. मालिक मुझे 10 करोड़ रूपए चाहिए और आप को मुझे वो देना hi पड़ेगा!”

यह सुनकर दोनों संजना और चावला को झटका लगा. कुछ देर ख़ामोशी चाह गयी लाउन्ज में, और संजना कभी चावला साहब को तो कभी अपने पापा को देखती. फिर संजना ने उस खामोसी को तोड़ते हुए कहा,

“पापा आप को चढ़ गया है पता नहीं किआ बकने लगे हो आप!”

मगर आनंद ने खड़े होते हुए कहा,

“बिल्कुल नहीं चढ़ा है अभी और मैं जानता हूँ के मैं किआ कह रहा हूँ. – चलो समझाता हूँ बात मैं आप दोनों सुनिए और तुम संजना कुछ मत बोलो चावला साहब को डीडे करने दो!”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “okay ठीक है बताओ किआ बात है, आराम से बोलो!”

आनंद के कहा, “मेरी कंपनी रेसीवेर्शिप में चला गया है, मुझे फुल तजुर्बा है, आयरन से अल्लिमिनियम में सब तब्दील करना है, मार्किट की पहचान भी है मुझे, सभी क्लाइंट्स, कस्टमर्स के नाम के लिस्ट है मेरे पास, और मैं बहोत बाध्य तरीके से चला पाउँगा, मैं कंपनी को खरीदना चाहता हूँ, मैं भी अब मालिक बनना चाहता हूँ, यह स्टील कंपनी अब मेरी होगी – 100 कोर की कंपनी है 10 कोर में मिल रहा है दिलवाडो मुझे यह कंपनी मालिक! आप के लिए तो 10 करोड़ एक मामूली सी रकम होगी है नाह?!”

यह सुनकर संजना चावला साहब के चेहरे में गंभीरता से देख रही थी मगर सर हिलाते हुए नाह कह रही थी चावला साहब को.

तो चावला साहब ने आनंद से कहा, “अरे तो मैं खुद क्यों नाह खरीद लूँ इस कंपनी को? तुम को मैनेजर बना दूंगा तुमको मैनेजर की तनख्वा मिलेगी, तुम hi चलना, मैं खुद खरीद लेता हूँ नाह इस में कौन सी बड़ी बात है?!”

मगर आनंद ने कहा,

“नहीं मैनेजर नहीं मुझे मालिक बनना है, ी वांट तो बे थे ओनर ऑफ़ थे कंपनी. आप मालिक हो, क्यों और मालिक बनना है आप को? मुझे भी मालिक बनने दो नाह!”

चावला साहब ने कहा,

“ऐसी बात है तो तुम बैंक से लोन अप्पी करो ज़रूर मिलेगा, मैं गारंटी दूंगा!”

आनंद ने थोड़े ग़ुस्से में होते हुए कहा, “साला यह अमीरज़ादे अपने पैसों के बारे में अत है तो क्यों इतनी कंजूसी दिखाने लगते हैं हम्म? किआ आप के पास 10 करोड़ नहीं है? 100 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर है आप की बिज़नेस की और उस में से 10 कोर मुझको नहीं दे सकते? मैं ने तुमको संजना दिया, मज़ा कर वाया इस्सके साथ, बाप बेटे दोनों ने मजा किया मेरी बेटी के साथ, खुद हम दोनों ने भी मजा किया इस्सके साथ इस के बदले एक कंपनी नहीं खरीद सकते मेरे लिए? शरीर शेयर करना मंज़ूर है पैसा नहीं? हैं?!”

यह सुनकर संजना बिच में ज़ोर से बोली, “पापा यह किआ बात कर रहे हो आप? इस में हमारा रिश्ता कहा से आगया भला?!”

आनंद वापस चलकर मेज़ के पास आया, एक पेग बनाया और गिलास हाथ में लिए सिप करते हुए, एक बॉस वाले स्टाइल में कहा, “अली मिली प्याली संजू बेबी, सब रिश्तों के बारे में hi है स्वीटहार्ट. सब लस्ट और सेक्स से hi जुडी हुई है….. अभी अगर चावला साहब ने मुझे 10 करोड़ नहीं दिया तो वो बम फोड़ूंगा के सबके सिटी पित्ती गुल हो jaegi…mujhe अपने प्लान बी पर मत आने दो तुम दोनों…. मुझे बुसस 10 कोर चाहिए बुसस!!”

संजना ने फिर से चावला साहब को देखते हुए कहा,

“पापा शट उप विल यू किआ बक रहे हो आप!! आप को सच में चढ़ गया है!” और संजना चावला साहब के पास बैठ कर उनके बाहों को थाम कर अपने सर को उनके सीने पर रख देती है.! चावला साहब बहोत हैरान आनंद को गिलास सिप करते हुए देख रहे थे. और वो भी खड़े हो गए और कहा,

“अब तुम मुझे ग़ुस्सा दिला रहे हो आनंद, और हाँ बीच में संजना को लेन की कोई ज़रुरत नहीं, हमारे बीच जो कुछ हुआ वो सब हमारे मंज़ूरी से हुई थी, और जो रिश्ता बना है वो हमारे बीच हैं किसी और को नहीं पता और नाह कभी पता होगा. तुम इतना निचे मत गिरो के खुद नाह उठ पाओ! सोचो किआ बकवास कर रहे हो 1करोड़ पाने के लिए. मैं तुमको कोई पैसा नहीं देने वाला. अगर चाहो तो कंपनी मैं खरीद लेता हूँ. मैं बिज़नेस मन हूँ. मुझे पता है कहाँ पैसा लगाना है और किआ करना है…. तुमसे नहीं होगा, सब लुटा डोज तुम!”

आनंद यह सुनकर ज़ोरों से हंससने लगा, काफी देर तक हंस्ता गया और दोनों चावला साहब और संजना उस्सको घुररते रहे.

और काफी हंससने के बाद एक दरिंदे का लुक देते हुए आनंद झुक कर चावला साहब के ेंखों में देखते हुए, होंठ से टपकते हुए लाड में कहा,

“अबे ो मालिक के बचे किआ समझता है तू? सिर्फ तू मालिक बन सकता है? चल अब तेरे खोपड़ी के अंदर की वासना का पर्दा फाष्ट करता हूँ बे चावला!”

संजना ग़ुस्से से लाल होते हुए ज़ोर से चिल्लाई अपने पापा पर यह कहते हुए, “पापा व्हाट थे हेलल इस थिस? आप चावला जी से बदतमीज़ी से पेश आ रहे हो!!”

आनंद ने संजना के गालों पर अपने उँगलियों को फरते हुए कहा, “हाहाहाहा अल्ले मिली प्याली संजू हाहाहाहा सुन अब तुझे भी बहोत मजा आने वाली है मेरे आगे के बातों को सुनकर….. ग़ौर से सुन मिली संजू बेबी!”

और आनंद चावला साहब के तरफ बढ़ते हुए कहा:

“तू किआ समझ रहा था इतने दिनों से मैं अपनी बेटी को छोड़ता था? हैं? अरे चावला साले में तेरी बेटी को छोड़ता था बाली उम्र से, और तुझको खुद अपनी बेटी को छोड़ने को दिया और उसस्के भाई से भी छुड़वाया मैं ने हाहाहाःहाहा भाई बेहेन की शादी करवाई मैं ने हाहाहाहाहा दोनों बाप और बीटा इस्को छोड़ते हैं और यह चुदवाती है हाहाहाःहाहा!!!”

संजना बहोत ज़ोर से चिल्लाई “सस्शह्ह्हूँउउत्तत्तत्त उउउउउउउपपपपपपप पाआपपणायआ!!!”

आनंद ने और भी ज़ोर से हँस्ते हुए कहा, “कौन सा पापा कैसा पापा? तेरा असली पापा यह है मैं नहीं! मैं ने तो तुझको पाल पास कर बड़ा किया और खूब छोड़ा भी हहहहहहहह!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
अपडेट 143 आनंद डिस्क्लोसेस आल सीक्रेट्स

संजना बहोत ज़ोर से चिल्लाई “सस्शह्ह्हूँउउत्तत्तत्त उउउउउउउपपपपपपप पाआपपणायआ!!!”

आनंद ने और भी ज़ोर से हँस्ते हुए कहा, “कौन सा पापा कैसा पापा? तेरा असली पापा यह है मैं नहीं! मैं ने तो तुझको पाल पास कर बड़ा किया और खूब छोड़ा भी हहहहहहहह!!!”

अब आगे…….

संजना का लाल चेहरा देखने लायक था उस वक़्त आनंद के बातों को सुनकर. उस्का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और उस्सको सांसें लेने में तकलीफ होने लगी थी, वो कभी चावला साहब के चेहरे में देखती तो कभी आनंद की और उस ने रोना शुरू कर दिया. चावला साहब संजना को सीने से लगाकर हौसला देने में लगा हुआ था के आनंद ने अपने उसी शैतानी हंसी में कहा,

“किआ हुआ? झटका लगा दोनों बाप बेटी को? हम्म? जिस्म थरथराने लगे अब?”

तो संजना ने उसस्के तरफ देखते हुए रोकर पूछा, “पापा आप सब झूट बोल रहे हो नाह सिर्फ पैसा पाने के लिए? केहदो के सब झूट बोल रहे हो आप ऐसा नहीं हो सकता मैं आप की बेटी हूँ है नाह पापा??”

आनंद ने ज़्यादा ज़ोर से हँस्ते हुए कहा,

“अरे तो किआ फड़क परता है मैं तेरा पापा हूँ या यह? दोनों से शरीर बाँट चुकी हो, दोनों के साथ सोती हो, तो किआ फरक पड़ता है भला? हम्म? एन्जॉय तो दोनों से hi करती हो नाह? हाँ मुझसे बाली उम्र से रगड़ते हुए शुरू किया था और इस्को डायरेक्ट होल दे दिया है नाह हाहाहाहा!”

वैसे hi रट हुए संजना ने कहा, “आप को शर्म अणि चाहिए अपनी बेटी के साथ ऐसे बातें करते हुए पापा!”

आनंद ने वैसे hi शैतानी हंसी हँस्ते हुए कहा, “कैसी शर्म? तुझको शर्म आयी है कभी किसी भी मर्द के साथ जिस्म सेंखते वक़्त? बता तो ज़रा? कौन सी शर्म तुझसे? तेरी समझ में कुछ नहीं आरही है नाह तो सुन सब डिटेल्स में समझाता हूँ, और तू भी सुन चावला मालिक हाहाहाहा मालिक, बहोत मालिक मालिक भोंक चूका हूँ और अब कोई और मुझको मालिक बुलाएगा, अब वो वक़्त आगया है के मुझको मालिक बुलाया जाए!....

तो ग़ौर से सुनों तुम दोनों……

और आनंद चलते हुए चावला साहब के पास गया जो उस वक़्त एक पुतले की तरह सोफे पर बैठा हुआ था जैसे उस्सको एक शॉक लगा हुआ है, उस्का हालत बहोत खराब था उस वक़्त वो कुछ बीते हुए दिनों में खोया हुआ था और आनंद ने बयां जारी रखा…..

“याद है चावला? वो दिन याद है जब मैं तेरा नौकर हुआ करता था हम्म? 19 साल पहले की बात है….. अरे ोये संजू डार्लिंग, यह तेरी माँ को छोड़ता था मेरी ग़ैर हाज़िरी में…. मेरी पत्नी के साथ इस्सके अफेयर था, अपने नौकर की बीवी को छोड़ता था यह…. तेरी माँ बहोत hi खूबसूरत, हॉट और सेक्सी थी, तुझसे भी बहोत ज़्यादा हॉट और सेक्सी थी, फोटो में देखा है नाह? तो उन् दिनों की बात है जब मेरे सेक्स की ऑपरेशन हुआ था. डॉक्टर ने मुझको 15 महीनों के लिए सेक्स करने से मन किया था नहीं तो लुंड की नस पहात जाती meri…to मैं तेरी माँ के साथ शारीरक सम्बद्ध नहीं रख पाटा था उन् दिनों, और यह चावला तेरी माँ की प्यास बुझाता था मगर मुझे कुछ नहीं पता था, मैं तो इस के नौकरी में लगा रहता था और यह तेरी माँ के साथ गुलछर्रे उडाता था…. सिर्फ यह नहीं तेरी माँ ने कई औरों के साथ भी मज़े किये हैं…. मुझको सब बहोत बाद में पता चला था… तू भी बिल्कुल अपनी माँ पर hi गयी है इसी लिए सब के साथ तू भी आसानी से सो जाती hai…kia तू समझती है के मुझे नहीं पता के तू रघु और कितनों के साथ मजा किये हैं? सब पता है मुझे तेरी माँ की खून भी तेरे अंदर बराबर है… एहि सोचकर तो मैं ने तेरे साथ बाली उम्र में hi शुरू किया था, मुझे पता था के अगर तुझ में तेरी माँ जैसी हॉटनेस हैं तो तू भी ज़रूर छुडवाएगी उसी की तरह… इसी का फायदा तो उठाया था मैं ने तुझे पाने को…. और हाँ चावला साहब, उन् दिनों तू अपने ज़मीन बेच बाच कर शहर जाने के तैयारी में लगे हुए थे जब मुझे पता चला के इस्सकी माँ, सावित्री प्रेग्नेंट है. वो 3 महीने की प्रेग्नेंट थी तेरे लिए और मई ने तो उसस्के साथ उस से 10 महीने पहले से सेक्स नहीं किया था तो वो प्रेग्नेंट कैसे हुई? मेरा उस्का झगड़ा हुआ और मैं ने एकांत झापड़ लगाया उससे तो उस्सने सब बक दिया के तू छोड़ता था उसे मेरे पीठ पीछे, और उसस्के पथ में तेरा hi बचा है और वो तुझको बताना चाहती थी, मगर तभी मेरे खोपड़ी में यह सब शैतानी खयालात आगये थे. पता तो नहीं था बेटी होगा या बीटा मगर मैं ने उसी वक़्त सोच लिया था के बचे को पालूंगा मगर आखिर में इस्सके जायदात का हिस्सा तुझसे लेने आऊंगा किसी दिन….

अफ़सोस के इस्को जनम देने के बाद सावित्री मर गयी, अच्छा भी हुआ नहीं तो वो तुझे बता देती के बची तेरी है. मगर मैं ने राज़ छुपाया. इस दिन के लिए. और फिर मैं तेरे एहसानों के टेल डब्बा जो हुआ था, कैसे तुझसे उन् दिनों को बेहेज़ करता? कैसे तुझसे लड़ता, तू ताकतवर था, आमिर था, मालिक था ज़मींदार था, सबके नज़रों में तेरी बड़ी इज़त थी, मैं एक मामूली नौकर था, कोई भी मेरे बातों का यकीन नहीं करता, सब यह समझते के मैं तेरे प्रॉपर्टी में से हिस्सा चाहता हूँ इसी लिए नौटंकी कर रहा हूँ… तो मैं छुप रहा उस वक़्त…..

फिर जब तुमने मुझको यह फार्महाउस गिफ्ट किया और संजना के पैदा होने पर उस्सको वो कीमती नेकलेस देने आया तो मुझे लगा के कहीं तुझको पता नहीं के वो तेरी बची है इसी लिए तू उस्सको इतनी कीमती नेकलेस दे रहा है और यह फार्महाउस दे रहा है… मैं तब डर गया था… मैं सोच रहा था के तुझे पता है के संजना तेरी औलाद है…..

मगर बाद में सोचा के सावित्री फड़फड़ा रही थी तुझे बताने के लिए के वो तेरी औलाद है, मगर मैं ने उस्सको मन kiya…tab सोचा के अगर तुझको पता होता तो सावित्री उतना नहीं तड़पती मरने से पहले तुझे बताने के लिए….. तो मुझे यकीन हुआ के नहीं तुझे कुछ भी नहीं पता क्यूंकि , 3 महीने की प्रेगनेंसी तो नज़र नहीं आती और तबसे लेकर 9तह महीने तक तू बहोत बिजी हो गया था अपने ज़मीन वग़ैरा बेचने और शहर शिफ्ट होने में तो तू उस से बिल्कुल मिला hi नहीं था और मैं नज़र रख रहा tha…to मुझे यकीन था के तुझको कुछ भी नहीं पता… मगर बाद में पूरा यकीन हुआ जब तू यान से चला गया…..”

मैं संजना को अपनी बेटी समझ कर पालने में लग गया…. इस को बहोत प्यार दिया, अफेक्शन दिए, नाज़ों से पाला…. मगर जब यह कोई 11 साल की हुई तो इस में सावित्री की चाबी उभरने लगी और मेरे साथ सोती थी तो मुझको दिखने लगा के इस में भी वही गर्मी है जो इस्सकी माँ में थी….. जिस्म की छुवन, बदन की रागढ बिस्तर पर रातों में उस प्यार को हवस में बदल दिया इस्सके जिस्म से सावित्री की खुशभु आने लगी थी mujhe…aur हमारे बीच तभी से सेक्सुअल सम्बन्ध शुरू हुआ….. हाय कितनी मुलायम थी इस्सकी जिस्म हाय हाय ोये बहोत hi मजेदार बची पैदा किया है तुमने रे चावला!! ाहः! खुद चख कर देख लिया नाह तुमने भी? है नाह बिल्कुल सावित्री की लाजत इस में भी? अरे हाँ तुझको कभी सावित्री नहीं दिखा किआ इस में रे चावला? कभी नहीं बताया इस्को के इस में सावित्री महेक्ति है? हम्म नहीं बताया तुमने? कैसे बताता? तू इस्को यह तो नहीं बता सकता नाह के तू इस्सकी माँ को छोड़ता था! हाहाहाहा!!”

आनंद के इस बयां को सुनते वक़्त संजना ने कई बार अपने कानों को बांध कर लिए अपने हाथों से और चावला के पेशानी से पसीने की बूँदें टपकने लगे जिस्सको उस्सने अपने जेब से रुमाल निकल कर poncha….aur संजना ने टिश्यू लाकर उस्सको दिया….

संजना ने रोना बांध कर दिया था और आनंद को ग़ौर से सुनने लगी थी, और सब सुनते हुए संजना ग़ौर से चावला साहब के चेहरे में देख रही थी, फिर भी उसस्के दिल में चावला साहब के लिए और भी प्यार उभर रहा था और चावला साहब सोच रहा था के वो उस से नफरत करने लगेगी. मगर संजना ने बड़े ज़ोर से अपने बाहों को चावला साहब के गले में डालकर उस्सको अपने बाहों में भरा और उसस्के गालों को चूमा. और कहा, “आप मेरे असली पापा हो हम्म बोलो किआ यह सच है? मेरे पापा?!” और वो ज़ोर से रोने लगी चावला साहब को वैसे hi बाहों में भर कर.

आनंद ने देखते हुए कहा,

“अरे वह बेटी के दिल में अब बाप का प्यार उभरने लगा वाओ!! छुड़वाने के बाद बाप का प्यार जागने लगा? और तेरा किआ हाल है चावला? तेरा खड़ा तो नहीं हो रहा उस तरह से संजना को अपने जिस्म से सत्ता कर? हैं हाहाहाहाहा!!...... अब आगे के बातों को सुनों तुम दोनों……..

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
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