Fantasy इच्छाधारी देव - Page 14 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

दोस्तों आप सब लोगो का बहोत बहोत धन्यवाद हमारी प्रॉब्लम को समझ के हमें कुछ समय की मोहलत देने के लिए. जो ऑपरेशन होना था वो हो गया है लेकिन अभी 2 ऑपरेशन और होने है जो की 20-दिन बाद और फिर उसके 20 दिन बाद होंगे लेकिन अब हम भी कोशिश करेंगे के अब आप लोगो को ज्यादा इंतजार न करना पड़े. परिवार का ध्यान रखते हुए आप सब फंस का भी ध्यान रखेंगे.

थैंक्स अगेन
 
अपडेट - 96

गोपाल – क्या हुआ निकल न गाउन आज मूड है मेरा तुझे ठोकने का

सुधा - जरा मुझे बाथरूम से होकर आने दो नहीं तो बीच में जोगी तो आपका hi बैठ जायेगा. फिर आप मुझ पर चिल्लाओगे.

गोपाल – है ये सही बात है. बीच में मए कही नहीं जाने दुगा पहले hi होकर आओ.

सुधा तेजी से बाथरूम में जाती है और गाउन निकल के नई वाली ब्रा पेंटी उतर देती है.

सुधा – देवा……. इसे मेरे बदन पे आप hi देखोगे और कोई नहीं और इसे आप hi उतरोगे मेरे बदन से. आप से पहले मए ये हक़ अपने पति को भी नहीं दूगी. चाहे उस दिन के लिए या उस सुहानी रात के लिए मुझे कितना hi इंतजार क्यों न करना पड़े. प्रॉमिस.

सुधा वही पे मूट के सिर्फ गाउन पहन कर बहार आ जाती है उसने ब्रा पेंटी अपने पास छुपा ली और कमरे में घुसते hi तेजी से दरवाजा बंद कर के लाइट बंद कर दी. गोपाल उसके हाथ में ब्रा पेंटी देख hi नहीं पाया.

गोपाल – अरे लाइट तो चालू कर दो मए अँधेरे में तुम्हे देखूगा कैसे?

सुधा - बहोत कर लिया शहर में तुमने मुझे देख देख कर अब यहाँ नहीं चलेगा. यहाँ अँधेरे में hi काम चलाओ सब है घर में. शहर की तरह अकेले नहीं है अब हम

गोपाल - ठीक है मेरी जान अब आ जाओ जल्दी से

हलाकि सुधा का मन तो नहीं था लेकिन फिर भी अपने होठो पे मुस्कान लती हुई अपनी गांड मटकते हुए ऐडा से गोपाल की तरफ चल दी वो जानती थी के गोपाल की ये बेताबी उसे 5 मिनट से ज्यादा टिकने नहीं देगी. लेकिन सुधा के पास अभी कोई और रास्ता भी नहीं था. वो नंगी हो कर गोपाल से चिपक गयी और गोपाल उसके ऊपर चढ़ गया…………….

उधर देवा एंड ग्रुप तिलिस्म नगरी पहुंच गए थे जहा पे महाराज सुमंत देव और महारानी कौशल्या के साथ रूद्र और नीलम के माता पिता भी थे और महाराज भैरव सिंह और महारानी नीलमणि भी.

देव – आप सब के सामने मए कुछ कहना चाहता हु. हलाकि मेरे पिता महाराज और रानी माँ इस बात को जानते है. किन्तु आप सब इस बात से अनजान है. के दो दिन बाद पृथ्वी लोक पर हम चारो की सगाई का मुहूर्त निकला है.

ये सुनकर सरे hi खुश हो जाते है

सड़ – अरे वाह देव बीटा ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है. एक अरसा पहले ऐसा hi शुभ दिन हमने यहाँ मनाया था और आज वही शुभ घडी लौट के आयी है.

मक – है बीटा आज फिर तुम चारो की सगाई हो रही है. इससे बड़ी ख़ुशी की बात हम माँ बाप के लिए और क्या हो सकती है.

देवा – लेकिन यहाँ बात ये है के हम लोग चाहते है. के आप सब भी वह चल कर सगाई में शामिल हो और हमें आशीर्वाद दे.

अब सभी लोग एक दूसरे को देखने लगते है. तो रूद्र के बाबू जी

रब – क्षमा चाहता हु महाराज आपकी आज्ञा हो तो मए कुछ कहु?

सड़ – अरे ये आप कैसी बात कर रहे है. आप हमारे लिए आदरणीय है आप रूद्र के पिता है. आपको कुछ भी कहने से पहले यहाँ किसी से भी आज्ञा लेने की जरुरत नहीं आप अपनी बात निसंकोच होकर कहिये.

रब – धन्यवाद् महाराज, मेरा ये मत है के हम लोग तो अपने अपने बच्चो की सगाई में पहले भी शामिल hi रहे है. और अब उनके विवाह के समय भी हम सब साथ होंगे hi, किन्तु ये अवसर इनके पृथ्वी लोक के माता पिता का है. तो उनकी ख़ुशी उन्हें hi मानाने दी जनि चाहिए. बाकि जैसा आप का और महारा भैरव सिंह जी का आदेश होगा मए सहर्ष स्वीकार करुगा.

सड़ – महाराज भैरव सिंह जी आपका क्या विचार है.

बीएस – मए तो देव से पहले hi ये बात कह चूका हु जो अभी अभी इन्होने कही. मए इनसे सहमत हु. मन के यह ख़ुशी की घडी आहे और यश चारो आज भी हमारे hi बच्चे है. किन्तु अब इनपर पृथ्वी वासियो का अधिकार हमसे काम नहीं है. और ये ख़ुशी इस बार उन्ही लोगो के लिए है न के हम लोगो के लिए.

सड़ – सच पूछिए तो मेरा खुद का भी यही विचार है. के हमारा अभी वह जाना उचित नहीं है. अब इन औरतो का जैसा विचार हो. ये बताये. हम मर्दो के विचार तो एक से है.

मन – मेरे विचार में हमें जाना चाहिए. अरे मन के हम सब पहले इनकी सगाई में शामिल रह चुके है लेकिन रूद्र भी मेरा बीटा है मैने तो इसकी सगाई देखि नहीं अब मौका मिला है तो क्यों न हम सब भी जाये. क्यों महारानी कौशल्या?

मक – आपका कथन सही है. हम आपसे सहमत है . अब आप लोग भी कुछ कहिये……….. मक ने रूद्र और नीलम के माओ से कहा

नीलम की माँ – महारानी आप दोनों का आदेश हमारे सर आँखों पर. हम आपके आदेश का उलंघन कैसे कर सकते है जैसा आप तय करेंगे हम वैसे hi करेंगे. वैसे अगर आप मेरा विचार पूछ रही है तो मए खुद भी आपसे सहमत हु.

रूद्र की माँ - आप तीनो की बात सही है. किन्तु मए दोनों महाराज से सहमत हु. मुझे भी लगता है के धरती वासियो के बीच जाकर उनका ध्यान नहीं भटकना चाहिए. और फिर आप लोग ये भी सोचिये के इससे हमारे बच्चे hi मुश्किल में पद जायेगे. वो क्या कह कर मिलवाएंगे हमें उन सब से? ये इनके उस परिवार की खुशियों की घडी है. इसमें कोई व्यवधान नहीं पांडा चाहिए.

मक – लेकिन आप ये मत भूलिए बहन के जिन धरती वासियो की बात आप कर रही है. जब उन्हें आगे चल क इ मतलब विवाह से पहले ये पता चलेगा के हमारे बच्चो की असलियत कुछ और है. तो वही इनसे नाराज भी होंगे के सगाई में हम सब शामिल क्यों नहीं हुए.

अब सभी लोग गहरी सोच में दुब गए. किसी के पास कोई जवाब नहीं था. क्यों के सभी के तर्क अपनी जगह पे सही थे.

शलाका – हलाकि मए सबसे छोटी हु मुझे शायद नहीं बोलना चाहिए बीच में लेकिन मए देख रही हु के सरे बड़े तो उलझ गए है. तो क्या मए कुछ कहु?

बीएस – अरे बेटी तुम्हे कब से पूछने की जरुरत पड़ने लगी. यहाँ बात छोटे बड़े की नहीं है. अगर समाधान है तुम्हरे पास तो जरूर बताओ.

शलाका - देखिये असल में तो ये कोई मुद्दा है hi नहीं. भला आप लोग क्यों न जाये? क्या इसलिए के वह के लोग आप लोगो को नहीं जानते सिर्फ इसीलिए. अरे नहीं जानते तो हम मिलवा देंगे कुछ भी कह के. क्यों के रूद्र और नीलम के माँ बाप तो इनके माँ बाप hi रहेंगे न? उनसे कोई समस्या नहीं होगी. है आप दोनों माता पिता के लिए समस्या है हम मानते है किन्तु वो हम संभल सकते है. कोई बड़ी बात है hi नहीं. आप लोग बेकार में बात को खिंच रहे हो.

सड़ – लेकिन बीटा………….

देवा – कोई वाद विवाद नहीं. अब तय हो गया के आप लोग कल hi आएंगे यानि सगाई से एक दिन पहले किस को क्या कहना है हम सोच लगे. अब हम चलते है सभा समाप्त.

बीएस – देव बीटा हमारी बात तो सुनो तुम…….

रूद्र – क्षमा महाराज लेकिन अब तो देव ने फैसला सुना दिया अब कोई बात नहीं होगी आप सब आ रहे मतलब आ रहे है. no मोरे डिस्कशन.

सभी एक साथ क्या ………?

इधर बाकि सब हसने लगे

देव - कुछ नहीं पिता महाराज ये रूद्र धरती की भाषा में बोल रहा है. लेकिन अब बस अब कोई बात नहीं होगी इस मुद्दे पर.

सभी एक साथ ठीक है जैसा आप सब लोग कहे. हम लोग कल hi आ जायेगे.

देव – ठीक है फिर हम लोग चलते है सुबह होने वाली है आप लोग भी शाम तक आ जाइएगा.

फिर देव, पूनम, शलाका, रूद्र और नीलम वह से निकल के गाँव आ जाते है.
 
अपडेट - 97

देव – ठीक है फिर हम लोग चलते है सुबह होने वाली है आप लोग भी शाम तक आ जाइएगा.

फिर देव, पूनम, शलाका, रूद्र और नीलम वह से निकल के गाँव आ जाते है.

गाँव में देव के बंगले के बेसमेंट में…

देव – चलो ये सब तो हो गया रूद्र तुम्हारे माता पिता को तुम्हारे माता पिता hi कह कर यहाँ घरवालों से मिलवाएंगे और नीलम के भी. बचे पूनम और मेरे माता पिता तो उन के लिए कुछ सोच लगे. अभी सब आराम करते है. और सुबह उठकर मिलेंगे. गुड़ ंत.

सब अपनी अपनी जगह पे पहुंच जाते है.

उधर सुधा को रात भर नींद नहीं आयी थी. क्यों की हर बार की तरह गोपाल ने उसे गरम कर के और खुद झाड़ के सो गया था.

उधर अघोरी अपनी गुफा में अभी सिर्फ दो hi काम कर रहा था. एक तो ठाकुर की देखबहाल और दूसरा अपनी साधना. तभी वह उसका गुरु आता है.

अघोरी – प्रणाम गुरुदेव

गढ़ – आयुष्मान भाव अघोरी , अब वो वक़्त पास आ गया है जब तुम्हे जीन बादशाह से मिलना चाहिए. मए ने अपने तरीके से उसे सब बताया hi है. लेकिन अगर तुम्हे उनकी मदद चाहिए तो तुम्हे hi उसके पास जाना होगा. तुम अभी उसके पास जाओ और उससे मदद मानगो. देर न करो क्यों की तुम्हारा सामना बहोत जल्द रूद्र और उसके मायावी साथियो से होने वाला है.

अघोरी – गुरुदेव मैने बहोत सी शक्तिया हासिल कर ली है और फिर आप खुद भी तो बेहद शक्तिशाली है हमें किसी जीन विन्न की सहायता की भला क्या जरुरत? क्या आप मेरे साथ मिल के उन्हें समाप्त नहीं कर सकते?

गढ़ – मूर्खो जैसी बाटे न किया करो अघोरी, उन्हें अभी भनक भी नहीं है के तुम्हारे ऊपर भी कोई है. यदि उन्हें पता चल गया तो वो अपनी ताकते और बड़ा लगे. और अभी ऐसा समय नहीं के मए उन के सामने औ क्यों के मए समझता हु के तुम hi उन्हें ख़तम कर सकते हो. क्यों के यदि रूद्र और उसके साथी समाप्त हो गए तो तुम्हे तो तुम्हरी मनचाही शक्तिया मिल hi जाएगी लेकिन मए भी बेहद शक्ति शैली हो जाउगा. इसीलिए मए तुम्हारी मदद कर रहा हु. रास्ता मए दिखाऊगा और उस पर चलना तुम्हे है. और यदि मुझे लगा के कही तुम्हे मेरी जरुरत है तो मए उसी पल तुम्हरी सहायता के लिए आ जाउगा अब तुम समय बर्बाद मत करो और जाओ जीन बादशाह के पास.

अघोरी – समझ गया गुरुदेव मए जाता हु.

फिर गढ़ वह से गायब हो जाता है और अघोरी अपनी शक्तियों का कवच वह लगाकर उसी समय जीन लोक की तरफ निकल जाता है.

जीन – लोक



जीन बादशाह अपने दुश्मनो के लिए बेहद क्रूर और शक्तिशाली जीन था जिसके पास कई साडी मायावी शक्तिया थी और जिन के डैम पर वो सरे जीन लोक पर राज करता था. यु तो उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी लेकिन यदि किसी से दुश्मनी हो जाये तो उसकी मौत भी कैंप जाती थी. इसीलिए कोई उस पर आक्रमण करता नहीं था. उसकी नगरी में काली शक्तियों का राज था. और साथ hi अच्छे की ताक़त भी उस के साथ थी क्यों की जीन सरे hi गलत नहीं होते और जीन बादशाह बुरी शक्तियों को जितना ज्यादा एकत्रित कर चूका था. उतनी hi अच्छे की ताकते भी उस के साथ थी. वो नगरी भी अपने अप्प में बेहद खूबसूरत थी. बहोत ज्यादा हरियाली, कई सरे जंगल, पहाड़, नदिया सब कुछ था वह. उसी नगरी में जा पंहुचा अपना अघोरी.

दरबान – कौन हो तुम और यहाँ क्यों आये हो?

अघोरी – मुझे मेरे गुरुदेव ने भेजा है मए अघोरी हु. और जीन बादशाह से मिलना चाहता हु.

दरबान - अच्छा तो तुम हो अघोरी तुम्हारे लिए हमें आदेश मिल चुके है जाओ तुम तुम्हारा hi इंतजार कर रहे है हमारे महाराज.

फिर अघोरी को एक सेवक बादशाह के सामने ले जाता है और खुद बहार निकल जाता है. किन्तु वह का कमरा पूरा खली था. अघोरी बेचिअनि से यहाँ वह टहलने लगता है तभी उसे आवाज़ आती है .

……….. आओ अघोरी हम है जीन बादशाह. बोलो कैसे आना हुआ तुम्हारे गुरु ने कहा तुम्हे हमसे कोई काम है?

अघोरी – है जीन बादशाह मुझे तुमसे काम है. इसीलिए मए खुद चल के आया हु इतनी दूर. असल में मुझे तुम्हारी सहायता चाहिए. मेरी कहानी तो तुम्हे मेरे गुरु ने बता hi दी है न?

जब – है बताई है के किस तरह एक मामूली से राजकुमार ने तुम्हारी फाड़ दी थी हहहहहहहहह

अघोरी - वो वक़्त कुछ अलग था अब मेरे पास ताकते है लेकिन….

जब – लेकिन ताकते उनके पास भी है. और जो पहले तुम्हे हरा चुके थे फिर से एक बार तुम्हे हरा चुके है अभी कुछ hi दिन पहले और अब तुम उन्हें मरना चाहते हो है न?

अघोरी – है जीन बादशाह मए उन्हें मरना चाहता हु. क्यों की वो मुझे दो बार हरा चुके है.

जब – देखो अघोरी तुम्हारे गुरु आये थे मेरे पास और उनका मए सम्मान करता हु इसीलिए मए उनकी बात काट नहीं सकता लेकिन तुम शायद नहीं जानते के उनलोगो से लड़ कर तुम खुद अपनी मौत को दावत दे रहे हो. वो न तो पहले साधारण थे न hi अब साधारण है. और उनसे लड़ना मूर्खता है. अरे अपना काम करो जो शक्तिया मिल रही है उनमे खुश रहो दूसरे से कोई मतलब hi क्यों रखते हो?

अघोरी – ये तुम कह रहे हो जीन बादशाह?

जब – है ये स्वयं हम कह रहे है. क्यों की हम ने जो भी हासिल किया है अपनी म्हणत से हासिल किया है किसी को बेवजह नहीं मारा. लेकिन कोई आया तो उसे वो मौत दी है की उसने दुबारा जनम लेने से भी इंकार कर दिया . इसीलिए हम कह रहे है दूसरे की थाली में मत झांको अपना दायरा अपनी म्हणत से बढ़ाओ. न के किसी को मार के उसके हिस्से को हड़पने की कोशिश करो.

अघोरी – मए तो समझा था के तुम मेरी मदद करोगे पर तुम तो प्रवचन देने लगे. लगता है तुम भी दर गए हो उनसे.

जब – दर नाम का शब्द तो हमारे शब्दकोष में है hi नहीं अघोरी. और मैने तुम्हारी सहायता से इंकार भी नहीं किया. हम बस तुम्हे समझा रहे थे. तुम मन जाओ तो अच्छी बात है वार्ना तो हम तुम्हरे साथ है hi.

अघोरी – बस मेरा काम पूरा हुआ तुमने इतना कह दिया के तुम मेरे साथ हो फिर तो अब कुछ बचा hi नहीं. तो फिर आज्ञा दो हमें हम चलते है. बहोत जल्द तुम्हारी जरुरत पड़ेगी तब मिलेंगे.

जब – मेरी एक बात और सुन लो अघोरी. मैने कहा मए तुम्हारे गुरु की इज्जत करता हु ये बात सच है लेकिन तुम्हरी सहायता का कारन सिर्फ यही नहीं है. असल में तुम्हारे गुरु ने एक बार हमारी सहायता की थी जिस के बदले में मैने भी उन्हें वचन दिया था के कभी हमारी जरुरत पड़े तो यद् करना. अब जाकर उन्होंने हमें सहायता के लिए पुकारा है . लेकिन उनसे भी एक गलती हो गई और वो ये के उन्होंने हमें गलत काम के लिए यद् किया है अब हम ठहरे अपने वचन से बंधे हुए इसीलिए हम तुम्हारी सहायता करेंगे और पूरी ताक़त से करेंगे तुम्हरे दुश्मन को अपना खास दुश्मन मन के करेंगे.

लेकिन क्यों की हम जानते है के गलत इरादे तृम्हारे है उन के नहीं. तो हम तुम्हारी सहायता हमेशा नहीं करेंगे सिर्फ एक बार करेंगे इसीलिए तुम सोच समझ के हमारी मदद के मौके का इस्तेमाल करना क्यों के उस जुंग का अंजाम कुछ भी हो दुबारा तुम्हे हमारी सहायता नहीं मिलेगी. और उसके बाद हम दोनों में कोई दोस्ती भी नहीं रहेगी तुम अपने मन की करने को स्वतंत्र होंगे और हम अपने मन की करने के लिए. साथ hi मए तुम्हरे गुरु के उस अहसान से भी मुक्त हो जाउगा तो उनके कहने पे भी मए तुम्हरी सहायता करने या न करने के लिए स्वतंत्र रहुगा ठीक है अघोरी. अब तुम जाओ और जब भी हमारी जरुरत पड़े हमें आवाज़ दे देना हम तुरंत सेना सहित तुम्हारे सामने होंगे और तुम्हारे दुश्मन हमारे दुश्मन. पर एक hi बार के लिए ये यद् रखना .

अघोरी - ठीक है जीन बादशाह मए ये यद् रखुगा और तृम्हारा ये सन्देश भी मए गुरुदेव तक पंहुचा दुगा. वैसे अगर हम सब की ताकते एक साथ होगी तो मुझे तुम्हारी सहायता दुबारा लेने की जरुरत पड़ेगी भी नहीं. चलता हु mae.Fir अघोरी वह से निकल जाता है.

जब – मुर्ख…………
 
भाई अब तक तो यही सोचा है के देव सिर्फ पूनम को hi दुल्हन बनाएगा लेकिन उसके रिलेशन्स में कही कोई कमी नहीं रहेगी. रिलेशन्स तो उसके आपने देखे hi है कैयो से बन चुके है और आगे भी बनेगे लेकिन बीवी का हक़ सिर्फ पूनम का रहेगा. पर अगर आप लोगो की डिमांड हो तो हम इसे कुछ मॉडिफाई कर भी सकते है. अपनी राय जरूर दीजियेगा.

थैंक्स फॉर आस्किंग
 
अपडेट - 98

उधर आधी रत बीत चुकी थी और करीब 3.30 बजे रहे होंगे के देवा की आंख खुलती है वो फ्रेश हो कर अपनी साधना में बैठ जाता है. करीब दो घंटे बाद उसे फ़कीर बाबा नजर आते है .

फब – कैसे हो देवा?

देवा – प्रणाम बाबा, मए ठीक हु आज आपने कैसे आने का कष्ट किया?

फब – देवा तुम्हारी सगाई होने जा रही है पूनम से. तो मुझसे तोहफा नहीं लोगे?

देवा – आपका आशीर्वाद hi हमारे लिए सबसे बड़ा तोहफा है बाबा.

तभी देवा देखता है की उसका हाथ पकड़ के पूनम भी कड़ी है.

फब – मैने hi पूनम को यहाँ बुलवाया है देवा. पिछली बार मेरी hi वजह से तुम दोनों में दूरिया आयी थी. लेकिन इस बार मए ये चाहता हु के तुम दोनों हमेशा के लिए मिल जाओ तो शुभकामनाओ के साथ तुम दोनों की सगाई में कोई तोहफा देना चाहता हु मेरे बच्चो.

पूनम – जैसी आपकी आज्ञा बाबा हमें आपका तोहफा पाकर ख़ुशी होगी ये हमारे भावी विवाहिक जीवन के लिए भी शुभ hi होगा.

फब हवा में हाथ हिलता है तो वह दो खूंखार मोठे तगड़े और बेहद भयानक शेर खड़े नजर आते है जिन्ह फ़कीर बाबा अपने दोनों हाथो से सहला रहे थे.

फब – पूनम बीटा अपना हाथ आगे करो

पूनम अपना राइट हैंड आगे कर देती है. और फ़कीर बाबा एक शेर को आगे कर देते है. वो दौड़ता हु आता है और पूनम के हाथ पे झपट पड़ता है और गायब हो जाता है

फब – बेटी पूनम ये खूंखार शेरनी तुम्हारी कलाई के पास तुम्हरी बांह पे बैठी रहेगी जब तुम्हे इसकी जरुरत हो आंखे बंद कर के उसे यद् करना वो तुम्हरी कलाई से निकल के अपना काम कर के फिर वही आ कर बैठ जाएगी. देवा अब तुम अपने ऊपर के कपडे निकल दो और अपनी पीठ दिखाओ मुझे.

देवा वैसा hi करता है और फ़कीर बाबा दूसरे शेर को सहला के आगे कर देते है वो दौड़ता हुआ आता है और देवा की पीठ में समां जाता है.

फ़कीर बाबा - देवा ये शेर सिंह तुम्हारी पीठ पे विराजमान रहेगा और जरुरत पड़ने पर तुम इसे बुला सकते हो ये बहार आकर तुम्हरी मदद करेगा. ये दोनों कोई मामूली शेर शेरनी नहीं है. एक पूरी सेना इनके सामने कोई महत्त्व नहीं रखती इनकी खुद की कई साडी शक्तिया है. ये पालो में बड़ी से बड़ी सेना को धराशायी कर सकते है. इनका सही इस्तेमाल करना ये दोनों तुम लोगो के साथ अब जिंदगी भर रहेंगे. जब भी ये शेर सिंह बहार आएगा इसकी साथी भी पूनम से निकल के बहार आ जाएगी खुद बा खुद. और फिर ये अपना काम कहातम कर के एक दूजे से मिलेंगे तब hi वापस जायेगे और जब तुम्हारी शादी होगी तुम्हरे साथ साथ इनकी भी मिलान की रत होगी उससे पहले नहीं. अब मए चलता हु ईश्वर करे तुम्हारे साथ अब कुछ बुरा न हो. मेरा आशीर्वाद तुम लोगो के साथ है.

देवा जैसे hi आँखे खोलता है न तो फ़कीर बाबा थे न hi पूनम.

उधर फिर फ़कीर बाबा रूद्र के पास जाते है. वो भी अपनी साधना में hi लीं था.

फब – रूद्र ………

रूद्र – प्रणाम बाबा, मुझे बुला लिया होता आपने आने का कष्ट क्यों किया?

फब – तुम्हे और नीलम को सगाई का तोहफा देना है बीटा तो आना तो मेरा hi बनता है न.

रूद्र – लेकिन बाबा हमारी सगाई तो कल है अभी तो आज का दिन बाकि है न.

फब -है मेरे बच्चे लेकिन उस वक़्त मए आ नहीं पाउगा और तुम लोग भी व्यस्त रहोगे इसीलिए मए आज hi तुम्हे और नीलम को तोहफा देने आया हु.

रूद्र का बिलकुल पास नीलम कड़ी थी इस वक़्त

नीलम – बाबा आपका आशीर्वाद हमारे लिए पर्याप्त है. और फिर आपके hi आशीर्वाद से हम साधारण से असाधारण बन चुके है इच्छाधारी बन चुके है और अब तो मुझे रूद्र जैसा जीवन साथी भी मिल रहा है फिर किसी तोहफे की क्या आवश्यकता है. आपने hi तो इतना कुछ दिया हमें.

फब – है बेटी सही कहा तुमने लेकिन मेरा जी चाहा तो मए तोहफा देने आ गया और ये तो तुम दोनों को लेना hi होगा.

रूद्र – जो आज्ञा बाबा. आपका दिया तोहफा भी हमारे लिए आपका आशीर्वाद hi है.

फ़कीर बाबा अपनी आंखे बंद कर के नीलम की बांह पकड़ लेते है. नीलम को भी अपनी कलाई के पास कुछ गर्मी और जलन सी महसूस होती है जिससे उसकी सिसकारी निकल जाती है. रूद्र बस आश्चर्य से ये सब देख रहा था. कुछ देर बाद फब नीलम का हाथ छोड़ देते है है.

फब - रूद्र अपनी कमीज उतर दो और हमारी तरफ पीठ करो

रूद्र अपनी कमीज उतर के पलट जाता है तो फ़कीर बाबा उसकी पीठ की तरफ हाथ कर के अपनी आँखे बंद कर के कोई मंत्र पड़ते है. रूद्र को अपनी पीठ पे बहोत गर्मी और जलन महसूस होती आहे. लेकिन थोड़ी hi देर में सब ठीक हो जाता है.

फब – बीटा रूद्र , नीलम.. मैने तुम्हे ये जो दानव ( ड्रैगन) दिया है ये तुम्हारे हाथ पे और रूद्र तुम्हरी पीठ पे हमेशा रहेंगे जब भी इनकी जरुरत हो इन्हे पुकार लेना ये बड़ी से बड़ी ताक़त का मुकाबला करने में सक्षम है. ये तुम दोनों और तुम्हरे मित्रो या परिवार के आलावा सब के लिए घातक है. ये तुम्हारी आँखों से hi ये समझ जायेगे के कौन तुम्हारा हितेषी है और कौन शत्रु. एक और बात ये जब भी बहार आएगा इसकी जोड़ी दर जो नीलम के पास है वो भी बहार आएगी. और ये अंदर तभी जायेगे जब ये आपस में मिल लगे क्यों के ये अपनी मर्जी से बहार नहीं आ सकते तुम्हारे या नीलम के बुलाने पे hi बहार आएंगे. तो आपसे में मिले बिना ये वापस नहीं जायेगे. कनीतु इन दोनों की मिलान की रत भी तभी आएगी जब तुम दोनों की मिलान की रत होगी यानि तुम सब की शादी के बाद. अब मए चलता हु. जल्दी hi मिलेंगे. तुम्हारी सगाई के बाद.

फिर फ़कीर बाबा गायब हो जाते है रूद्र आँखे खोलता है तो अपने कमरे में अकेला था. वो उठकर फ्रेश होता है और देवा के पास जाता है.

रूद्र – भाई आज बाबा ने मुझे सगाई का तोहफा दिया

देवा – अच्छा मुझे भी दिया, और पूनम को भी. इसका मतलब नीलम को भी दिया होगा.

रूद्र – है भाई नीलम को भी दिया है. तुझे क्या दिया उन्होंने?

देवा अपनी शर्ट खोल कर रूद्र की तरफ पलट जाता है जहा एक खतरनाक शेर आराम से बैठा हुआ था ऐसा टेटू बना था.

रूद्र – क्या बात है मेरे शेर को शेर दिया है बाबा ने ये तो बड़ा hi खतरनाक लग रहा है देवा.

रूद्र उस शेर को यानि देवा की पीठ को सहलाता है तो ये देख कर हैरान रह जाता है के शेर अपनी पूँछ हिला रहा था. जैसे वो जनता हो के रूद्र देवा के लिए क्या है. वो शेर रूद्र को प्यार से देख रहा था.

रूद्र – भाई बहोत कमल के है अपने शेर सिंह ,. यार ये तो मुझे पहचान रहा है और मुझे भी प्यार कर रहा है.

देवा – धत्त्त तेरे की तुझे प्यार किया इसने? कहे का खूंखार सेल में अकाल hi नहीं है.

रूद्र – क्यों बे अकाल कैसे नहीं इसमें और ये धत्त क्यों बोलै तू?

देवा – अबे मैने सोचा था के इसे तुम पे hi पहले छोड़ूगा पर ये तो तेरा यार निकला

रूद्र – सेल मुझ पे छोड़ेगा इसे भाई पे शेर छोड़ेगा. बुला इसे बहार तुम दोनों को यही दौड़ा दौड़ा के मरुँगा मए.

देवा – रहें दे भाई हम दोनों दर गए अब बता तुझे क्या दिया बाबा ने?

रूद्र भी अपनी शर्ट खोल कर देवा की तरफ पलटता है जहा एक बहोत बड़ा और खतरनाक ड्रेगों बना हुआ था. देवा भी उसे सहला के देखता है तो वो ड्रेगों भी देवा के सामने अपनी गार्डन झुका के अपनी पूँछ हिला देता है. जिसे देख कर देवा मुस्करा देता है

देवा – भाई तेरे पास भी बहोत मस्त लेकिन खतरनाक ड्रेगों है और उसने भी मुझे पहचान लिया. और इसका मतलब वो मेरा भी दोस्त है. यानि हमारे ये दोस्त हमारे हर दोस्त के दोस्त है और हर दुश्मन के दुश्मन. वाह मन गए क्या तोहफा दिया है बाबा ने. और इनकी पार्टनर्स भी है हमारी पार्टनर्स के पास. मतलब अब ये भी तभी मिलेंगे जब हम अपनी पार्टनर्स से मिलेंगे. ग्रेट मजा आ गया.

उसके बाद रूद्र अपने अकमरे में चला जाता है और देव भी तैयार होने लगता है. फिर नाश्ते की टेबल पे
 
अपडेट - 99

उसके बाद रूद्र अपने कमरे में चला जाता है और देव भी तैयार होने लगता है. फिर नाश्ते की टेबल पे

दन – है तो बच्चो क्या प्लानिंग है तुम सब की कहा तक पहुंची तैयारियां?

नागार्जुन – बाबू जी बहोत कुछ तो निपट गया है बचा हुआ आज निपट जायेगा.

दन – लेकिन बीटा अब समय hi कहा है. आज से तो मेहमान आने शुरू हो जायेगे न. देवा के ननिहाल से भी आज सब आएंगे.

रूद्र – मेहमानो से याद आया बाबू जी आज मेरे और नीलम के मम्मी दादी भी आएंगे.

दन – अरे वह ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है. पर बीटा वो तो घर के मेंबर हुए न मेहमान नहीं.

रूद्र – बाबू जी यहाँ तो वो मेहमान hi है न.

देवा – तू गधा hi है. वो यहाँ अपने बेटे और बेटी की सगाई के लिए आ रहे है तो ये उनका घर हुआ न मेहमान तो होती हुई सगाई देखने आएंगे न पागल.

दन – देवा सही कह रहा है रूद्र वो यहाँ मेहमान नहीं बल्कि मेज़बान होंगे. क्यों की उनके बच्चो की सगाई है. वो किसी और की सगाई को एन्जॉय करने नहीं आ रहे है.

रूद्र - जी बाबू जी.

दन – तो कितने बजे आएंगे तुम दोनों के मम्मी पापा?

रूद्र – बस आते hi होंगे. किसी भी समय पहुंच जायेगे.

दन – ठीक है मए तो घर पे hi हु. तुम उन्हें लेने चले जाना.

रूद्र – जी बाबू जी

दन – देवा रूद्र के और नीलम बहु के माता पिता के लिए और उनके आराम के लिए पूरा इंतजाम तू खुद देखेगा. किसी और से मत कह देना वो तुम्हरे लिए भी माता पिता hi हुए.

देवा – ठीक है बाबू जी और कोई काम हो तो बता दीजिये क्यों के फिर मए व्यस्त हो जाउगा.

दन – अभी तो तू उन सब के ठहरने का इंतजाम कर दे बाकि कुछ होगा तो मए बता दुगा.

देवा - ठीक है बाबू जी मए उन लोगो के लिए यहाँ गेस्ट रूम्स ठीक करवा देता हु और बाकि मेहमानो के लिए अपने पुराने वाले घर को सही करवा दिया है. और अगर मेहमान बढ़ गए तो फिर पूनम के घर में रुकवा देंगे.

दन – देख लो वैसे उनके घर में भी उनके अपने मेहमान आएंगे तो वह दिक्कत होगी. पर अपने यहाँ सब हो सकता है

देवा – आप निश्चिन्त रहिये मए सब कर लगा.

फिर सब लोग अपने अपने कामो में लग जाते है. इतने में देवा को बीएस का सन्देश मंद में मिलता है के वो लोग बहार वाले खंडहर में पहुंच गए है.

देवा तुरंत रूद्र को साथ ले कर वह पहुँचता है तो वह सुमंत देव, कौशल्या देवी, भैरव सिंह, नीलमणि, रूद्र के माता पिता और नीलम के माता पिता सब आ चुके थे. देवा उनकी वेशभूषा चेंज कर देता है. तो वो लोग भी मॉडर्न कपड़ो में आ जाते है जैसे अभी अभी फ्लाइट से आये हो. अमेरिका से.

देवा उन्हें सब समझा देता है और उन्हें साथ ले कर घर की तरफ चल देता है. दो गाड़ियों में वो लोग घर पहुंचते है एक देवा चला रहा था दूसरी रूद्र.

घर पहुंच कर देवा अपने परिवार वालो को बुलाता है.

दन – अरे वह रूद्र तुम्हरे माता पिता आ गए?

रूद्र - जी बाबू जी ये मेरे पिता जी है, ये माता जी, और ये नीलम के माता पिता.

दन दोनों मर्दो से हेल मिलता है और दोनों औरतो के सामने हाथ जोड़ के अभिवादन और स्वागत करता है.

देवा – और ये मेरे और पूनम के माता पिता है बाबू जी. ये है शिव नगर के महाराज भैरव सिंह जी मेरे पिता, ये महारानी नीलमणि देवी मेरी माँ, दूसरी तरफ ये है पूनम के पिता जी त्रिलोक नगर के महाराज सुमंत देव और ये पूनम की माँ कौशल्या देवी…….. महाराज महारानी ये है मेरे पिता जी दीनानाथ जी और मेरी माँ सावित्री devi.Ye मेरी भाभी दिया, मेरे बड़े भाई रघु, मेरी छोटी बहन पायल.

सब लोग देवा की बाटे सुन कर हैरान परेशां थे लेकिन देवा के होठो पे मुस्कान थी.

दन – देवा इन सब का सही परिचय दो बीटा हमें मिलवाओ कौन है ये?

देवा – बात ये है की बाबू जी उस दिन हम जब मॉल गए थे न तो वह किसी ने महाराज भैरव सिंह जी को लूटने की कोशिश की थी तो मैने इनकी मदद की थी तभी इन्होने मुझे अपना बीटा बना लिया उस हिसाब से ये दोनों मेरे माता पिता है, और उसी दिन इत्तेफ़ाक़ से महारानी कौशल्या देवी की मदद पूनम ने की थी शॉपिंग में तो इन्होने उसे अपनी बेटी बना लिया. और जब हम सब वह इकट्ठे हुए तो हमने इन्हे यहाँ सगाई में आने का न्योता दिया था. इसीलिए मैने कहा के ये मेरे और पूनम के माता पिता है.

सभी लोग देवा के मंद की मन hi मन तर्रीफ़ कर रहे थे की किस खूबसूरती से उसने सच्चे रिश्ते बयां कर दिया और यहाँ किसी को कोई शक भी नहीं हुआ.

दन – बहोत अच्छा किया तुमने देवा की इन्हे यहाँ बुलवा लिया अगर इन्होने तुम्हे और मेरी पूनम बहु को अपने बच्चो के रूप में स्वीकार किया है तो सगाई में शामिल होना इन सबका हक़ भी है.

………मए दीनानाथ आप सब लोगो का यहाँ हार्दिक स्वागत करता हु. और आशा करता हु के आप लोगो को यहाँ किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी. आप लोग अपने बच्चो की सगाई में यहाँ आये और हमारा मान बढ़ाया इसके लिए मए आभारी हु आप सबका.

बीएस – कैसी बाटे करते है आप? आज आप ने हमें स्वीकार कर के हमारा मान बढ़ाया है और हमें इन बच्चो की ख़ुशी में शामिल होने का मौका दिया है हम सब आपके आभारी है.

दन – नहीं महाराज आभार कैसा आपने देवा को बीटा कहा है, मन है तो ये आपका hi बीटा है और पूनम को अपनी बेटी बना के भी आपने उसे अपनाया है तो फिर आभार की बात hi कहा रही महाराज.

सड़ – दन जी हमें महाराज मत कहिये हम आपके समधी hi है और भैरव सिंह जी तो आपके भाई hi हुए न.

दन – लेकिन आप महाराज है तो महाराज hi कहुगा मए तो.

बीएस – अरे कोई महाराज नहीं ये देवा तो ऐसे hi कह रहा है. अब क्या यहाँ भी राजा महाराज है क्या कोई. वो तो बीते ज़माने की बाटे है हमारे पूर्वज राजा महाराजा थे हम तो बस यु hi.

दन – ठीक है भाई साब मए आप लोगो को महाराज या इन्हे महारानी नहीं कहुगा. अब ये आपका hi घर है आप लोग भी आराम कीजिये……….. देवा इन सबका रहने का इंतजाम कहा किया है बीटा?

देवा – ये नीचे वाले कमरे इन्ही चारो कपल्स को दे देते है. बाकि मेहमानो के लिए देखेंगे.

बीएस – बीटा देव अगर कोई समस्या हो तो हम सब पुरुष एक hi कमरे में हो जाते है महिलाओ को एक अलग कमरा दे दो. दूसरे आने वाले मेहमानो को तकलीफ नहीं होनी चाहिए.

देवा – नहीं पिता जी महाराज ऐसी कोई समस्या नहीं है . आपके आशीर्वाद से सब व्यवस्था हो गयी है आप लोग आराम कीजिये.

फिर देवा वह नौकरो को बुलवा के उनके सामान जो देवा ने hi बना दिए थे. सब के कमरों में रखवा देता है. और सब को नाश्ता करवा के कमरे में आराम करने भेज देता है. बहार आ कर

रूद्र – अबे सारा घर तो यही भर गया बाकियो का क्या होगा?

देवा – कौन से बाकि बे? बाकि बचा hi कौन है पगला रहा है बेकार में क्या?

रूद्र – अबे सेल तेरे ननिहाल वाले भी तो आने है.

देवा – उन के लिए मेरा पुराण वाला घर है न वही रुकेंगे वो लोग. उसे भी तो आलीशान बनाया है हमने, और भी कोई आ जाये तो कोई दिक्कत नहीं उस घर में भी 5-6 कमरे है hi मां ममी के लिए दो कमरे चाहिए बाकि जो आएंगे वह सेट होंगे. और कौन सा सबको यहाँ महीनो रहना है?

रूद्र – ये भी ठीक है अब कौन आ रहा है?

देवा – अब मां ममी आएंगे मेरी कावेरी आएगी वो तो ज्योति के साथ रह लेगी. बाबू जी के दोस्त आएंगे शहर से उन्हें भी अपने पुराने घर में रखुगा. बस. बाकि सब यहाँ के लोकल लोग है .

फिर देवा कावेरी को कॉल कर के आज hi आने का न्योता दे देता है. और बाबू जी को बोल कर सुन्दर लाल और रजनी को बुलवा लेता है . सब लोग धीरे धीरे आ रहे थे. और देवा अपने हिसाब से उन्हें सेट कर रहा था.

नागार्जुन, शलाका, गुरुम तैयारियों में लगे हुए थे देवा और रूद्र मेहमानो में . पूनम और नीलम खुद को तैयार कर रही थी अब सब को दिखने के लिए तो उन्हें नार्मल hi तैयार होना था इसीलिए कभी फेसिअल तो कभी वेक्स तो कभी मेहंदी इन्ही सब में बिजी थी वो दोनों और साथ में पायल भी थी. पायल को तो सच में इन सब की जरुरत भी थी क्यों की वो पूनम और नीलम की तरह मैजिक से तो कुछ कर नहीं सकती थी और न hi पूनम या नीलम उसे मैजिक से तैयार कर के अपनी पोल खोल सकती थी अभी.

तभी एक पुलिस की जीप आकर देवा के बंगले के सामने रूकती है. सरे गार्ड्स सतर्क हो जाते है. और गेट खोल देते है. तो गाड़ी अंदर जाकर पोर्च में रूकती है सामने हॉल में सभी लोग बैठे थे. तो सबकी नजर बाहर जाती है……..
 
भाई सबसे पहले तो आपके कमेंट के लिए धन्यवाद और आपको कहानी क अपडेट की प्रतीक्ष रहती है ये जान कर अच्छा लगा



अब आप के सवाल का जवाब - हम नेक्स्ट अपडेट रेडी कर चुके है उसमे इस बात का जवाब भी है जो आपने. अभी पुछा है. क्यों के आपने बिलकुल वही सोचा है जो सोच कर मैने नेक्स्ट part लिखा है सो प्लस वेट कीजिये और एन्जॉय कीजिये.



धन्यवाद साथ बने रहिये
 
राज भाई वेलकम है आपका पहले तो थैंक यू वेर्री मच फॉर योर वंडरफुल कमेंट. आप के विचार जान कर ाचा लगा. हम खुद बी यही मानते है इसीलिए इस स्टोरी में आपको सेक्स और मैं स्टोरी दोनों hi मिलेंगे हलाकि मेरी तमन्ना ऐसी स्टोरी लिखने की है जिसमे सेक्स और काम हो जाये मीन्स ओनली 5 तो 10% बाकि मैं स्टोरी hi हो. लेकिन वो इस स्टोरी में अब मुमकिन नहीं क्यों की प्लाट hi कुछ ऐसा है के सेक्स डालना hi पड़ेगा अब . लेकिन अगर मेने कोई दूसरी स्टोरी लिखी तो फुल पावर वाली होगी सेक्स एक डैम डाउन हो जायेगा. पर ये स्टोरी आपको हर तरह का अनुभव करवाएगी एडवेंचर , action,sex,romance,emotion, मैजिक सब कुछ.



आप के कमेंट के लिए धन्यवाद.



साथ बने रहिये
 
अपडेट – 100 (सेंचुरी)

तभी एक पुलिस की जीप आकर देवा के बंगले के सामने रूकती है. सरे गार्ड्स सतर्क हो जाते है. और गेट खोल देते है. तो गाड़ी अंदर जाकर पोर्च में रूकती है सामने हॉल में सभी लोग बैठे थे. तो सबकी नजर बाहर जाती है……..

दन – देवा बीटा ये पुलिस यहाँ क्यों आयी है?

देवा बहार देख कर मुस्करा देता है. – कुछ नहीं बाबू जी ये भी हमारे मेहमान hi है सगाई में आये है.

जीप से कावेरी उतरती है पुलिस की वर्दी में और हॉल में आकर सबसे मिलती है

कावेरी – क्या देवा इतनी जल्दबाजी में बुलवा लिया अरे पहले से बता देते तो तयारी से आती मए भी.

देवा – तुम्हे तयारी की क्या जरुरत है ज्योति है न तुम्हारे लिए तुम्हारी साडी तैरैया तो एक प्रकार से हुई पड़ी है. वैसे अकेली कैसे आयी तुम्हरे पति देव नहीं आये?

कावेरी – अरे उन्हें ड्यूटी से फुर्सत कहा. इसीलिए मए hi चली आयी.

देवा – अच्छा किया अब आओ बैठो पहले नाश्ता कर लो फिर मए तुम्हे हवेली छोड़ आउगा.

फिर कावेरी वह सब के साथ बैठ जाती है बाते करने और नाश्ता कर के फ्री होती है और फिर दिया उसे अंदर ले जाती है तो वह उसे लेडीज के साथ कोई एक घंटा लग जाता है बातो में. फिर देवा उसे अपनी गाड़ी में बिठा कर हवेली छोड़ आता हर और एक बार फिर से सबको कल टाइम से आने का बोल देता है.

इसी तरह की तैयारियों में दिन निकल जाता है. मेहमान सरे आ hi चुके थे. देवकी के घर से भी सब आ चुके थे जो की पूनम के घर पे hi रुके थे. और देवा के ननिहाल वाले भी सब आ गए. और रत में सब क साथ खाना खाने के बाद देवा अपने रूम में चला गया. आराम करने. पूरे गाँव में धीरे धीरे सन्नाटा पसारने लगा. रसोइये सुबह जल्दी आने वाले थे जिन्हे गुरुम और नागार्जुन hi सँभालने वाले थे. नीलम पूनम के पास थी, और रूद्र देवा के रूम में सो रहा था. देवा को जाने क्यों नींद नहीं आ रही थी. तो वो छत पे चला जाता है. और टहलने लगता है. थोड़ी देर के बाद उसे छत पे आहात सुनाई देती है. वो देखता है के दिया आयी हुई थी.

दिया – क्या हुआ देवा तू यहाँ क्यों टहल रहा है?

देवा – भाभी बस यु hi नींद नहीं आ रही थी. सोचा टहल लू. पर तुम क्यों जग रही हो इस वक़्त?

दिया – नींद तो मुझे भी नहीं आ रही थी. मए अपने रूम से निकली hi थी के तुझे ऊपर आते देखा इसीलिए मए भी ऊपर आ गयी एक बात बताओगे?

देवा – है क्यों नहीं , पूछो न?

दिया – मुझे ये दोनों महाराज और महारानियो की तेरी कहानी कुछ हजम नहीं हुई. और उस दिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था ये मए भी जानती हु अगर हुआ होता तो मुझे तू या पूनम कुछ न कुछ जरूर बताते, आखिर चक्कर क्या है कौन है ये लोग और इतने इम्पोर्टेन्ट कैसे और क्यों है तेरे लिए के तूने इनकी वजह से बाबू जी से झूठ बोलै?

देवा – आप सच कह रही है. आपका शक और आपकी सोच सब सही है. मए वादा करता हु के आपको सब सच बता दुगा लेकिन बस कल का दिन निकल जाने दो. और मेरे एक झूठ से अगर इतने सरे चेहरों पे खुशिया आ रही है. और किसी का कोई नुकसान नहीं हो रहा तो ऐसा झूठ तो अच्छा hi हु न भाभी?

दिया – बात तो तेरी सही है और मैने भी यही सोचा इसीलिए सब के सामने कुछ नहीं कहा. वैसे ये लोग जो भी है बहोत अचे है. तुम्हे तो सच मच अपने बेटे के जैसा hi चला रहे है. महारानी नीलमणि तो तुझसे ऐसे बात कर रही थी जैसे सच में तुम्हारी माँ hi हो.

देवा – माँ तो माँ hi होती है न उसका स्वाभाव कभी बदल सकता है क्या?

दिया – क्या मतलब? मए समझी नहीं.

देवा – आपसे कहा न मैने भाभी के मए आपको सब सच सच बता दुगा अभी आप परेशां मत हो और है उन में से किसी को भी किसी चीज़ की कमी न होने पाए इस बात का आप ध्यान रखना क्यों के अगर वो मेरे माँ बाप है तो आपके तो एक तरह से सास ससुर hi हुए न तो अब अपने सास ससुर का ध्यान रखना पूरा पूरा. समझी डार्लिंग

दिया मुस्कराते हुए – जी मेरे मुन्ने के पापा जरूर ध्यान रखूगी अपने नए सास, ससुर का.

फिर देवा दिया को गले से लगा लेता है और उसे लिप किश करता है. थोड़ी देर के बाद देवा उसे छोड़ देता है.

देवा – अब आप जाओ और आराम करो आपको ज्यादा देर जागना नहीं चाहिए.

दिया – कल तो तुम्हे भी दिन भर आराम नहीं मिलेगा. जाकर सो जाओ तुम भी . या मूड हो तो यही सो जाये दोनों सुबह जल्दी नीचे चले जायेगे.

देवा – नहीं मए अपने होने वाले बच्चे की माँ को इतने कठोर फर्श पे सुला के उसे परेशां नहीं करुगा. है परेशां करना hi होगा तो मखमल के बिस्तर पे लिटा कर परेशां करुगा . समझी मेरी जान. अब जाओ आराम करो.

दिया फिर देवा के गले लग जाती है और फिर अपने कमरे में चली जाती है. देवा नागार्जुन से संपर्क करता है.

देवा – नागार्जुन…………..

नागार्जुन – क्या हुआ देव सब ठीक है न?

देव – है भाई सब ठीक है तुमने पूरे इंतजाम कर दिए है न?

नागार्जुन – है देव मैने सब इंतजाम कर लिए है कोई टेंशन नहीं है. अभी मुंबई से कोई खतरा नहीं है और न hi अघोरी से. सब पर हमारी पूरी नजर है इस बार कोई लापरवाही नहीं है हमारी तरफ से अगर किसी ने कोई छु चा की तो फाड् डालेंगे सालो को फिर जिसे जो समझाना होगा देखा जायेगा. पर उम्मीद नहीं किसी के एक्शन में आने की सब अपबनी hi तैयारियों में है. जो की है तो हमारे खिलाफ hi लेकिन फ़िलहाल कुछ नहीं करने वाला कोई. अघोरी कल जीन लोक गया था जीन बादशाह से मिलने लेकिन अभी तक उसकी तरफ से जल्दी अटैक का कोई संकेत नहीं है,

देवा – तुम पूरे एरिया को शील्ड कवर कर दो इस वक़्त कोई भी यहाँ ध्यान देगा तो समझ जायेगा के यहाँ बहोत साडी शक्तिया इकट्ठी है. दोनों महाराज महारानी, मए रूद्र तुम पूनम नीलम शलाका गुरुम सब की शक्तिया दूर से hi समझ आ जाएगी उन लोगो को .

नागार्जुन ठीक है देवा मए एक खास सुरक्षा चक्र लगा देता हु. जिससे यहाँ की शक्तियों की भनक बहार न जाये.

देवा – बस पिता जी महाराज का ग्रुप यहाँ से सकुशल चला जाये फिर उन लोगो को देख लगे. मए नहीं चाहता पिछली बार की तरह अघोरी या कोई और आक्रमण करे.

नागार्जुन - तुम चिंता मत करो. मए शील्ड कवर दे hi रहा हु. उसी काम में लगा हुआ हु मए भी. वैसे भी फ़कीर बाबा है hi उन्होंने इस तरफ सोच कर पहले से सबकी शक्तिया अदृश्य hi की हुई है उन्होंने मुझसे बात की थी.

देवा – ठीक है कल पूरी तरह सावधान रहना.

नागार्जुन - ठीक है देवा मए शलाका और गुरुम तीनो संभल लगे हम लोग ज्यादा सावधान रहेंगे कल. तुम चिंता मत करो पिछली बार की तरह इस बार उस अघोरी को कोई मौका नहीं मिलने वाला है पिछली बार हम में से कोई भी इस तरफ सोच कर सावधान नहीं था जब के उसने तुम्हारे सगाई वाले दिन हमले की पूरी योजना बनाई हुई थी. इसीलिए वो सफल रहा. पर इस बार उसने वही कदम उठाया तो अपनी मौत को दावत hi देगा समझो. और उससे ऐसी बेवकूफी की उम्मीद नहीं है. क्यों की इस बार हम में से कोई भी असावधान नहीं है. तुम आराम करो.

देवा – ठीक है सरे इंतजाम कर के तुम भी सो जाओ. और शलाका को भी सोने दो

फिर देवा भी अपने कमरे में आकर सो जाता है.

इधर नागार्जुन और शलाका बेसमेंट वाले रूम में बैठे आराम कर रहे थे.

शलाका - क्या हुआ देवा से क्या बात हो रही थी?

नागार्जुन – कुछ नहीं देवा को चिंता हो रही थी के पिछली बार की तरह कोई खतरा न आ जाये कल के दिन उसी विषय में बात कर रहे थे.

शलाका – पहली बात तो ऐसा होगा नहीं और अगर कल उस सेल अघोरी ने या किसी और ने कुछ किया तो उनकी तो मए फाड़ के रख दूगी

नागार्जुन मुस्कराते हुए– तुम गुस्से में बहोत खूबसूरत लगती हो शलाका………..
 
दोस्तों



आज का अपडेट दे दिया है. आप सब लोगो के साथ चलते चलते आज 100 अपडेट पूरे हो गए. इसका पूरा श्रेय आप लोगो को है जिन्होंने हमारी कहानी को सराहा और हमें आगे बढ़ने में सहयोग दिया. हमें उम्मीद HI नहीं थी के पहली कहानी HI हम ऐसी लिख पाएंगे जिसे इतने सरे व्यूज मिलेंगे और लोग इतना पसंद करेंगे. आप सब रीडर्स का बहोत बहोत धन्यवाद.

कीप सपोर्टिंग अस ऑलवेज.



थैंक यू वेर्री मच फॉर आल माय रीडर्स. इन्क्लूडिंग साइलेंट रीडर्स
 
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