- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 74,765
अपडेट- 144
रूद्र – भाई क्या फिल्म दिखा दी मजा आ गया. लेकिन तूने पहले इतनी मार क्यों खायी शौक चढ़ा था क्या?
देव – नहीं रे पागल कोई शौक नहीं था. बल्कि पहले तो मैने उसे बातो में उलझने की कोशिश की लेकिन जब वो उस झांसे में नहीं आया तो मए उसकी आहात पे ध्यान लगाने लगा लेकिन उसने वह भी मुझे धोखा दिया और हर बार मुझ पर वार कर के मुझसे दूर हो जाता . तब मैने ध्यान लगाया और जैसे hi उसने मुझ पे पूरी ताक़त से वार किया तो हवा के वेग से मैने अंदाज़ा लगाया और उसे पकड़ लिया. बस उसके बाद उसे छूटने नहीं दिया लेकिन इस सब में सेल ने कई वार किये मुझ पर लिट्रेली बहोत जोर दर वार थे. उसके अब तक पूरा पेट हिल रहा है पता नहीं सेल को किस जंगल से पकड़ के लाये थे.
रूद्र – चल कोई नहीं इसी बहाने तेरे शरीर की मालिश hi होगयी.
ये सभी इसी तरह हँसते हुए बाटे करने लगे उसके बाद रूद्र ने देव के जख्मो पे मलहम लगा दिया. और देव भी आराम करने लगा 2-3 घंटे बाद hi उन्हें रत के खाने के लिए बुलावा आ गया. अब देव भी पहले से बेहतर फील कर रहा था. और उसके जकजहम भी ठीक हो चुके थे. उसकी हीलिंग पावर की कारन. और पेट में भी फुल आराम था. फिर सबने पेट भर के खाना खाया. और वापस अपने रूम में आ गए वो लोग अभी बैठे hi थेआकर के तभी,
सैनिक - क्षमा कीजिये देव सिंह जी आपको महाराज ने यद् किया है.
सबने देव की तरफ देख के बेस्ट ऑफ़ लक के लिए अंगूठा ऊँचा किया. देव ने सब को गार्डन हिला के थँक्स कहा और पूनम की आँखों में देखा मनो वो कह रही हो रानी की मर्जी के बिना उसे मत छूना. और देव भी समझ गया इसीलिए उसे आँखों से hi तसल्ली दे कर निकल गया. और सैनिक उसे राजा के पास ले गया.
राजा - देव सिंह आपसे हमने वादा किया था. उसे निभाने का वक़्त आ गया है. आइये मेरे साथ मए खुद आपको महारानी के कक्ष में छोड़ के आता हु.
फिर देव और राजा साथ साथ चलने लगे.
राजा – देव सिंह तुम्हे ये जो मौका दिया जा रहा है मैने अपनी इस तिलिस्मी दुनिया में ये पहली बार देखा है ऐसा आज तक नहीं हुआ. शायद ये तुम्हारे कर्मो का परिणाम है जो तुम्हे ऐसा सुनहरी अवसर मिल रहा है के तुम हमारी महारनी को भोगोगे. लेकिन मए तुमसे इन अंतिम क्षणों में फिर से एक बार विनती करता हु के हो सके तो लौट जाओ मेरी महारनी को हाथ मत लगाओ. यही तो मेरी धरोहर है. जो मुझे यहाँ आ कर मिली है मंटा हु के ये सब असली नहीं है लेकिन क्या करू मोह पद गया है अब. और मए इसे hi अपनी असल जिंदगी और महारानी को अपनी धर्मपत्नी समझ कर जी रहा हु मेरा ये भ्रम मत तोड़ो देव.
देव – महाराज आपने कहा के “महारानी को भोगने का सुनहरी awsar”to उस पर मए आप से कहना चाहुगा के स्त्रियों की कमी नहीं है मुझे. एक चाहता हु एक साथ दस मिलती है. मेरी असल जिंदगी आपसे काम रंगीन नहीं है. बल्कि ये कहु की आपसे भी ज्यादा रंगीन है तो कुछ गलत नहीं होगा. इसीलिए मुझे महारनी को छूने या उन्हें भोगने में कोई दिलचस्पी है नहीं. यहाँ मए अपनी मर्जी से चहु तो कोई कुवारी लड़की भी मेरे साथ सम्भोग के लिए तैयार रहती है और मेरा मन न हो तो मए उस कुवारी लड़की को भी छोड़ देता हु. फिर महारानी तो कोई कुवारी कन्या भी नहीं है. जिन में मेरी कोई खास रुचे हो. मए तो उन्हें इसलिए पाना चाहता हु क्यों की आपने मेरी पत्नी पे गन्दी नजर डालने की गलती कर दी है और अब वो गलती आप सुधर नहीं सकते. इसीलिए मए ये करुगा hi. दूसरी बात के. आप इसे असल समझ रहे है तो जितनी जल्दी ये भ्रम टूटे आपके लिए hi अच्छा है. क्यों की ये आप अच्छी तरह जानते है की इस नगरी का असल में कोई वजूद है नहीं. ये बस एक कारागृह hi है. जहा आप सब अपने कर्मो की सजा को भुगतने आये है. कब किस की सजा पूरी हो जाये और वो यहाँ से चला जाये कोई नहीं जनता. तो फिर इस कारागृह में रोने का क्या लाभ? अपनी सजा पे ध्यान दो, उसे जल्द से जल्द पूरा करो और यहाँ से जितनी जल्दी हो सके निकलने की कोशिश करो क्यों की राजा पिंजरा सोने का हो फिर भी पिंजरा hi होता है. अपनी असल जिंदगी में लौट जाओ . मए कोई अय्याशी करने नहीं जा रहा असल में तो मए खुद भी अभी चाहे अनचाहे इस नगरी का हिस्सा बन चूका हु और मए भी सजा hi काट रहा हु न. और मुझे यहाँ बांध कर नहीं रहना, मेरा मकसद बहोत अलग, बहोत hi ऊँचा है. जिस के सामने ऐसी कई रनिया और ऐसे कई तिलिस्म आने है. ये मेरा एक पड़ाव मात्रा है मेरी मंजिल नहीं.
राजा की गार्डन शर्म से झुक गयी साफ पता चल रहा था के उसे अपनी गलती का पष्टवा है. फिर आखिर वो कमरा भी आ गया जहा महारानी बैठी थी.
राजा – ठीक है देव जैसी त्रिकाल की इच्छा तुम जाओ हमारी महारानी तुम्हारा अंदर इंतजार कर रही है. अब सुबह मुळकत होगी .
इतना सुनते hi देव उस कमरे में अंदर चला जाता है. और राजा वापस मुद कर जाने लगता है देव उसे जाता हुआ देखता है और कमरे का दरवाजा बंद कर देता है.
बहतो बड़ा कमरा था, वो कमरा क्या हॉल का भी बाप था सामान्य घरो में जो हॉल होते है वैसे 4-5 हॉल मिला दिया जाये ितं ाबड़ा कमरा था.
उस कमरे में एक तरफ ड्रेसिंग टेबल टाइप का बना था बड़ा सा आदम कद शीशा. उसके सामने एक बड़ी hi खूबसूरत कुर्सी, कमरे के बीचो बीच एक सेण्टर टेबल जिस पर फ्रूट और दूध पड़ा था. एक तरफ कुछ बड़े संदूक रखे थे जिसमे शायद कपडे हो या कुछ और., दीवारों पे जगह जगह क्रॉस की हुई तलवारे ढल के साथ लगी थी. और उस हॉल नुमा कमरे में बीचो बीच एक किंग साइज बीएड रखा था. जो पूरा फूलो से सजा हुआ था. और उसकी महक से पूरा कमरा hi महक उठा था. वो बीएड hi इतना बड़ा था के उस पर आराम से पसर के 6-7 लोग सो सकते थे पलंग के दोनों तरफ छोटी छोटी टेबल राखी थी जिन पर फानूस रखे थे ( जिसमे मोमबत्ती जलाई जाती है और जो गिलास से ढके होते है) और वो फानूस भी जगमगा रहे थे पीली रौशनी से.
उस पलंग पे कोई औरत बैठी थी सुर्ख लाल साड़ी पहने अपना घूँघट निकल के. और अपने पैर मोड़ के जैसे के आज उसकी सुहागरात हो. और वो देव की दुल्हन. देव को ये सब देख कर आश्चर्य हुआ. वो पलंग के करीब गया.
देव – महारानी मेरा नाम देव सिंह है. और आज की रत हम इस कमरे में साथ बिताने वाले है क्या आप जानती है?
रानी – मए सब जानती हु देव, मुझसे कुछ भी छिपा नहीं है. मए तो इस रत का इंतजार कई एनजाइना रातो से कर रही हु.
देव – महारानी???……… आपकी आवाज तो….. आपकी आवाज तो जनि पहचानी लग रही है मुझे?
रानी – ये तो आप hi जाने की आपने मेरी आवाज़ कहा सुनी है मए कैसे बता सकती हु? रानी की आवाज़ में एक छेड़छाड़ वाली खनक थी.
देव – मुझे आपकी आवाज़ सुनी हुई लग रही है. लेकिन मए तो यहाँ किसी को जनता तक नहीं किसी से मेरी बात hi नहीं हुई है फिर ये आवाज़?...... ख़ैर छोड़िये. तो मए ये कह रहा था के आप जानती है मए आपके साथ इस वक़्त क्यों हु?
रानी – मैने कहा न मुझसे कुछ छुपा नहीं है. और जो भी हो रहा है उसमे मेरी पूरी सहमति है. मए इसी रत के लिए यहाँ बरसो से इंतजार कर रही थी. इस जगह की महारानी बन कर. तुम मेरा वो इंतजार हो जो आज पूरा होने वाला है. भला मए क्यों न जाँऊगी.
देव – लेकिन आप कैसे जानती है? क्या महाराज ने आपको सब कुछ बताया है?
रानी – नहीं उनसे तो मेरी कोई बात हुई hi नहीं है. असल में महाराज और हमारे बीच एक सूत्र बंधा हुआ है. वो जब किसी से भी बात करते है तो मुझे सुनाई देता है चाहे मए उनके पास हु या नहीं. वो मुझसे कितनी भी दूर हो मए सब सुन सकती हु. और वो मन hi मन मुझसे बात कर के मेरी रे भी ले सकते है वो भी मुझे सुन सकते है. लेकिन आज वो कुछ नहीं सुन पायेगा. जैसे hi तुम इस कमरे में दाखिल हुए राजा से मेरा संपर्क टूट गया है. जब तक हम दोनों साथ है इस कमरे में तब तक. राजा मुझसे सम्बंधित कोई बात नहीं जान पायेगा. वैसे कल से जो आपकी और महाराज की बाते हुई दरबार में वो सब मुझे पता है और महाराज ने उसी समय मुझसे पूछ कर hi आपको है कहा था.
देव – आश्चर्य है मुझे के आप एक महारानी हो कर मुझ अजनबी के साथ रत बिताने के लिए तैयार कैसे हो गयी?
रानी – अब उसमे मए कुछ नहीं कर सकती. जो है सो है पर अब तुम वह क्या कर रहे हो मए कब से घूँघट निकल के बैठी हु क्या मेरा घूँघट नहीं उठाओगे मेरे राजा? आज की रत तो तुम hi मेरे राजा हो,
देव आगे बढ़ा और पलंग के पास जा के - एक बार फिर से सोच लीजिये मए अपने कदम पीछे नहीं हटाता.
रानी - भला ये बात मए नहीं जानती क्या? ये तो मए बहोत अचे से जानती हु तुम आगे बढ़ो ये मए भी चाहती हु इसमें मेरी मर्जी शामिल है.
देव के होठ बीच गए थे वो अब पीछे नहीं हैट सकता था. वो पलंग पे रानी के समाने बैठ गया और रानी का घूँघट उठा दिया और रानी के मुस्कराते चेहरे पे जैसे hi देव की नजर पड़ी वो ऐसे उछाल के खड़ा हुआ जैसे उसे कई सरे बिछुओ ने एक साथ डांक मारा हो, देव आंखे फाडे सामने बैठी रानी को देख रहा था देव के माथे पे पसीने की बूंदे छलक आयी और उसके हाथ कैंप गए . शरीर के सरे रोम छिद्रो ने एक साथ ढेर सारा पसीना उगल दिया. देव एक डैम शॉकेड हो गया था अपने सामने का नजारा देख कर क्यों की उसके वह होने का तो देव सपना भी नहीं देख सकता था. No..no..no..no.. इतस इम्पॉसियब्ले……
रूद्र – भाई क्या फिल्म दिखा दी मजा आ गया. लेकिन तूने पहले इतनी मार क्यों खायी शौक चढ़ा था क्या?
देव – नहीं रे पागल कोई शौक नहीं था. बल्कि पहले तो मैने उसे बातो में उलझने की कोशिश की लेकिन जब वो उस झांसे में नहीं आया तो मए उसकी आहात पे ध्यान लगाने लगा लेकिन उसने वह भी मुझे धोखा दिया और हर बार मुझ पर वार कर के मुझसे दूर हो जाता . तब मैने ध्यान लगाया और जैसे hi उसने मुझ पे पूरी ताक़त से वार किया तो हवा के वेग से मैने अंदाज़ा लगाया और उसे पकड़ लिया. बस उसके बाद उसे छूटने नहीं दिया लेकिन इस सब में सेल ने कई वार किये मुझ पर लिट्रेली बहोत जोर दर वार थे. उसके अब तक पूरा पेट हिल रहा है पता नहीं सेल को किस जंगल से पकड़ के लाये थे.
रूद्र – चल कोई नहीं इसी बहाने तेरे शरीर की मालिश hi होगयी.
ये सभी इसी तरह हँसते हुए बाटे करने लगे उसके बाद रूद्र ने देव के जख्मो पे मलहम लगा दिया. और देव भी आराम करने लगा 2-3 घंटे बाद hi उन्हें रत के खाने के लिए बुलावा आ गया. अब देव भी पहले से बेहतर फील कर रहा था. और उसके जकजहम भी ठीक हो चुके थे. उसकी हीलिंग पावर की कारन. और पेट में भी फुल आराम था. फिर सबने पेट भर के खाना खाया. और वापस अपने रूम में आ गए वो लोग अभी बैठे hi थेआकर के तभी,
सैनिक - क्षमा कीजिये देव सिंह जी आपको महाराज ने यद् किया है.
सबने देव की तरफ देख के बेस्ट ऑफ़ लक के लिए अंगूठा ऊँचा किया. देव ने सब को गार्डन हिला के थँक्स कहा और पूनम की आँखों में देखा मनो वो कह रही हो रानी की मर्जी के बिना उसे मत छूना. और देव भी समझ गया इसीलिए उसे आँखों से hi तसल्ली दे कर निकल गया. और सैनिक उसे राजा के पास ले गया.
राजा - देव सिंह आपसे हमने वादा किया था. उसे निभाने का वक़्त आ गया है. आइये मेरे साथ मए खुद आपको महारानी के कक्ष में छोड़ के आता हु.
फिर देव और राजा साथ साथ चलने लगे.
राजा – देव सिंह तुम्हे ये जो मौका दिया जा रहा है मैने अपनी इस तिलिस्मी दुनिया में ये पहली बार देखा है ऐसा आज तक नहीं हुआ. शायद ये तुम्हारे कर्मो का परिणाम है जो तुम्हे ऐसा सुनहरी अवसर मिल रहा है के तुम हमारी महारनी को भोगोगे. लेकिन मए तुमसे इन अंतिम क्षणों में फिर से एक बार विनती करता हु के हो सके तो लौट जाओ मेरी महारनी को हाथ मत लगाओ. यही तो मेरी धरोहर है. जो मुझे यहाँ आ कर मिली है मंटा हु के ये सब असली नहीं है लेकिन क्या करू मोह पद गया है अब. और मए इसे hi अपनी असल जिंदगी और महारानी को अपनी धर्मपत्नी समझ कर जी रहा हु मेरा ये भ्रम मत तोड़ो देव.
देव – महाराज आपने कहा के “महारानी को भोगने का सुनहरी awsar”to उस पर मए आप से कहना चाहुगा के स्त्रियों की कमी नहीं है मुझे. एक चाहता हु एक साथ दस मिलती है. मेरी असल जिंदगी आपसे काम रंगीन नहीं है. बल्कि ये कहु की आपसे भी ज्यादा रंगीन है तो कुछ गलत नहीं होगा. इसीलिए मुझे महारनी को छूने या उन्हें भोगने में कोई दिलचस्पी है नहीं. यहाँ मए अपनी मर्जी से चहु तो कोई कुवारी लड़की भी मेरे साथ सम्भोग के लिए तैयार रहती है और मेरा मन न हो तो मए उस कुवारी लड़की को भी छोड़ देता हु. फिर महारानी तो कोई कुवारी कन्या भी नहीं है. जिन में मेरी कोई खास रुचे हो. मए तो उन्हें इसलिए पाना चाहता हु क्यों की आपने मेरी पत्नी पे गन्दी नजर डालने की गलती कर दी है और अब वो गलती आप सुधर नहीं सकते. इसीलिए मए ये करुगा hi. दूसरी बात के. आप इसे असल समझ रहे है तो जितनी जल्दी ये भ्रम टूटे आपके लिए hi अच्छा है. क्यों की ये आप अच्छी तरह जानते है की इस नगरी का असल में कोई वजूद है नहीं. ये बस एक कारागृह hi है. जहा आप सब अपने कर्मो की सजा को भुगतने आये है. कब किस की सजा पूरी हो जाये और वो यहाँ से चला जाये कोई नहीं जनता. तो फिर इस कारागृह में रोने का क्या लाभ? अपनी सजा पे ध्यान दो, उसे जल्द से जल्द पूरा करो और यहाँ से जितनी जल्दी हो सके निकलने की कोशिश करो क्यों की राजा पिंजरा सोने का हो फिर भी पिंजरा hi होता है. अपनी असल जिंदगी में लौट जाओ . मए कोई अय्याशी करने नहीं जा रहा असल में तो मए खुद भी अभी चाहे अनचाहे इस नगरी का हिस्सा बन चूका हु और मए भी सजा hi काट रहा हु न. और मुझे यहाँ बांध कर नहीं रहना, मेरा मकसद बहोत अलग, बहोत hi ऊँचा है. जिस के सामने ऐसी कई रनिया और ऐसे कई तिलिस्म आने है. ये मेरा एक पड़ाव मात्रा है मेरी मंजिल नहीं.
राजा की गार्डन शर्म से झुक गयी साफ पता चल रहा था के उसे अपनी गलती का पष्टवा है. फिर आखिर वो कमरा भी आ गया जहा महारानी बैठी थी.
राजा – ठीक है देव जैसी त्रिकाल की इच्छा तुम जाओ हमारी महारानी तुम्हारा अंदर इंतजार कर रही है. अब सुबह मुळकत होगी .
इतना सुनते hi देव उस कमरे में अंदर चला जाता है. और राजा वापस मुद कर जाने लगता है देव उसे जाता हुआ देखता है और कमरे का दरवाजा बंद कर देता है.
बहतो बड़ा कमरा था, वो कमरा क्या हॉल का भी बाप था सामान्य घरो में जो हॉल होते है वैसे 4-5 हॉल मिला दिया जाये ितं ाबड़ा कमरा था.
उस कमरे में एक तरफ ड्रेसिंग टेबल टाइप का बना था बड़ा सा आदम कद शीशा. उसके सामने एक बड़ी hi खूबसूरत कुर्सी, कमरे के बीचो बीच एक सेण्टर टेबल जिस पर फ्रूट और दूध पड़ा था. एक तरफ कुछ बड़े संदूक रखे थे जिसमे शायद कपडे हो या कुछ और., दीवारों पे जगह जगह क्रॉस की हुई तलवारे ढल के साथ लगी थी. और उस हॉल नुमा कमरे में बीचो बीच एक किंग साइज बीएड रखा था. जो पूरा फूलो से सजा हुआ था. और उसकी महक से पूरा कमरा hi महक उठा था. वो बीएड hi इतना बड़ा था के उस पर आराम से पसर के 6-7 लोग सो सकते थे पलंग के दोनों तरफ छोटी छोटी टेबल राखी थी जिन पर फानूस रखे थे ( जिसमे मोमबत्ती जलाई जाती है और जो गिलास से ढके होते है) और वो फानूस भी जगमगा रहे थे पीली रौशनी से.
उस पलंग पे कोई औरत बैठी थी सुर्ख लाल साड़ी पहने अपना घूँघट निकल के. और अपने पैर मोड़ के जैसे के आज उसकी सुहागरात हो. और वो देव की दुल्हन. देव को ये सब देख कर आश्चर्य हुआ. वो पलंग के करीब गया.
देव – महारानी मेरा नाम देव सिंह है. और आज की रत हम इस कमरे में साथ बिताने वाले है क्या आप जानती है?
रानी – मए सब जानती हु देव, मुझसे कुछ भी छिपा नहीं है. मए तो इस रत का इंतजार कई एनजाइना रातो से कर रही हु.
देव – महारानी???……… आपकी आवाज तो….. आपकी आवाज तो जनि पहचानी लग रही है मुझे?
रानी – ये तो आप hi जाने की आपने मेरी आवाज़ कहा सुनी है मए कैसे बता सकती हु? रानी की आवाज़ में एक छेड़छाड़ वाली खनक थी.
देव – मुझे आपकी आवाज़ सुनी हुई लग रही है. लेकिन मए तो यहाँ किसी को जनता तक नहीं किसी से मेरी बात hi नहीं हुई है फिर ये आवाज़?...... ख़ैर छोड़िये. तो मए ये कह रहा था के आप जानती है मए आपके साथ इस वक़्त क्यों हु?
रानी – मैने कहा न मुझसे कुछ छुपा नहीं है. और जो भी हो रहा है उसमे मेरी पूरी सहमति है. मए इसी रत के लिए यहाँ बरसो से इंतजार कर रही थी. इस जगह की महारानी बन कर. तुम मेरा वो इंतजार हो जो आज पूरा होने वाला है. भला मए क्यों न जाँऊगी.
देव – लेकिन आप कैसे जानती है? क्या महाराज ने आपको सब कुछ बताया है?
रानी – नहीं उनसे तो मेरी कोई बात हुई hi नहीं है. असल में महाराज और हमारे बीच एक सूत्र बंधा हुआ है. वो जब किसी से भी बात करते है तो मुझे सुनाई देता है चाहे मए उनके पास हु या नहीं. वो मुझसे कितनी भी दूर हो मए सब सुन सकती हु. और वो मन hi मन मुझसे बात कर के मेरी रे भी ले सकते है वो भी मुझे सुन सकते है. लेकिन आज वो कुछ नहीं सुन पायेगा. जैसे hi तुम इस कमरे में दाखिल हुए राजा से मेरा संपर्क टूट गया है. जब तक हम दोनों साथ है इस कमरे में तब तक. राजा मुझसे सम्बंधित कोई बात नहीं जान पायेगा. वैसे कल से जो आपकी और महाराज की बाते हुई दरबार में वो सब मुझे पता है और महाराज ने उसी समय मुझसे पूछ कर hi आपको है कहा था.
देव – आश्चर्य है मुझे के आप एक महारानी हो कर मुझ अजनबी के साथ रत बिताने के लिए तैयार कैसे हो गयी?
रानी – अब उसमे मए कुछ नहीं कर सकती. जो है सो है पर अब तुम वह क्या कर रहे हो मए कब से घूँघट निकल के बैठी हु क्या मेरा घूँघट नहीं उठाओगे मेरे राजा? आज की रत तो तुम hi मेरे राजा हो,
देव आगे बढ़ा और पलंग के पास जा के - एक बार फिर से सोच लीजिये मए अपने कदम पीछे नहीं हटाता.
रानी - भला ये बात मए नहीं जानती क्या? ये तो मए बहोत अचे से जानती हु तुम आगे बढ़ो ये मए भी चाहती हु इसमें मेरी मर्जी शामिल है.
देव के होठ बीच गए थे वो अब पीछे नहीं हैट सकता था. वो पलंग पे रानी के समाने बैठ गया और रानी का घूँघट उठा दिया और रानी के मुस्कराते चेहरे पे जैसे hi देव की नजर पड़ी वो ऐसे उछाल के खड़ा हुआ जैसे उसे कई सरे बिछुओ ने एक साथ डांक मारा हो, देव आंखे फाडे सामने बैठी रानी को देख रहा था देव के माथे पे पसीने की बूंदे छलक आयी और उसके हाथ कैंप गए . शरीर के सरे रोम छिद्रो ने एक साथ ढेर सारा पसीना उगल दिया. देव एक डैम शॉकेड हो गया था अपने सामने का नजारा देख कर क्यों की उसके वह होने का तो देव सपना भी नहीं देख सकता था. No..no..no..no.. इतस इम्पॉसियब्ले……