अपडेट- 140
यहाँ देव, रूद्र, नीलम, पूनम सभी ख़ामोशी से बैठे थे लेकिन सोच सब के दिमाग में चल रही थी. थोड़ी देर के बाद खाना आ गया और उसके बाद इन्होने खाना खा के वही बिछे गड्डो पे लेटकर आराम किया जब फिर से दरबार लगा तो सैनिक इन्हे बुलाने आ गए. और ये चारो फिर दरबार में खड़े थे.
अब आगे..........
राजा – देखो देव मैने तुम्हारे बारे में सब पता किया है तुम्हारे आने का मकसद भी मुझे पता है. पर उस सब से मेरा कोई वास्ता नहीं है. और जो गलती तुमने की है यहाँ ……..
देव बीच में – मैने कोई गलती नहीं की है गलती आपकी व्यवस्था में है. आप पहले से बता देते या कोई इंतजाम किया होता तो मए भीख देता hi नहीं. वैसे भी मए भीख देने में यकीन नहीं रखता बल्कि उन हालातो को ख़तम करने का इच्छुक रहता हु जिसमे किसी को भीख मांगने की जरुरत hi नरहे. लेकिन यहाँ मेरे पास ऐसे न तो साधन है न hi इतना समय के यहाँ किसी तरह के हालत को सुधरने बैठु. इसीलिए अब ये मत कहियेगा की मैने कोई गलती की है.
राजा - अच्छा ठीक है अनजाने में तुमने गलती की है. और यहाँ के कानून के मुताबिक तुम्हे सजा भी भुगतनी पड़ेगी.
देव – कैसी सजा ?
राजा - गलती क्यों की अनजाने में हुई है इसीलिए सजा में तुम्हे आराम दिया जायेगा. मतलब सजा तुम्हरी पसंद की होगी. मंजूर है?
देव – बिना सुने मए कुछ मंजूर नहीं करुगा इसीलिए पहले आप बता दीजिये बाद में मए सोच के बोलूगा.
राजा – ठीक है. तो पहली सजा ये है के ये भिखारी जिस गली में अनंत कल के लिए भीख मांग रहा था तुम लोगो को सिर्फ वह पर एक वर्ष भीख मांगनी होगी. उसके बाद तुम सब आजाद हो.
क्यों के ये कार्य अनजाने में हुआ है इसीलिए सजा में नरमी है. यदि यही तुमने जानबूझकर किया होता तो तुम्हे भी वह भीख अनंतकाल तक मांगनी पड़ती.
इसके बदले में दूसरी सजा ये है के तुम दोनों पुरुषो को मए आज़ाद कर दुगा अपनी नगरी से बिना कोई सजा दिए लेकिन ये लड़किया हमारी महारानी की दसिया बन कर महल में रहेगी और रोज रत को हमारा दिल भी बहलाएगी और अगर तुम अपने मकसद में कामयाब हो जाते हो जिसके लिए के तुम लोग यहाँ आये हो, तो जब तुम्हरी वापसी होगी इन्हे तुम लोगो को वापस कर दिया जायेगा. और अगर ये भी मंजूर नहीं तो तीसरी सजा ये है के तुम्हे हमारे सबसे खूंखार हथियार से लड़ना होगा. एक ऐसा दानव ऐसा योद्धा जिसे स्वयं त्रिकाल ने बनाया है. जिसने आज तक हार नहीं मणि जब से ये तिलिस्म बना है तब से वही यहाँ का योद्धा है लेकिन है हमारा सेवक. त्रिकाल का तोहफा है वो.
देव – क्या उसके बारे में भी थोड़ा खुल कर बतायेगे महाराज?
रूद्र की तो आँखे गुस्से से लाल हुई पड़ी थी राजा की बात सुन कर hi वो तो देव ने उसे इशारे से रोका हुआ था क्यों की वो जनता था के रूद्र भड़का तो साला बंद बजा देगा. और अभी देव इस मूड में नहीं था वो राजा की ( असल में त्रिकाल की ) पूरी योजना जान लेना चाहता था.
राजा – उसे तुम देख नहीं सकते उसकी लम्बाई चौड़ाई का कुछ अंदाजा नहीं लगा सकते वो अदृश्य है . उसके हाथ hi उसके हथियार है, शक्तिशाली इतना के पहाड़ उठा ले. चट्टान को चुटकी से मसल दे. उससे लड़ने वाला कभी जीवित नहीं रहता. बाकि तो यदि तुमने उसके सामने जाने का फैसला लिया तो खुद समझ hi जाओगे.
रूद्र – अरे लेकिन जब वो दिखेगा hi नहीं तो लड़ेंगे किस्से? और उसे जानेगे कैसे?
राजा – ये तो देव की समस्या है हमारी नहीं. लेकिन अगर तुमने उसे हरा दिया जो के नामुमकिन है तो फिर तुम सब को सम्मान सहित इस नगरी से बिना किसी सजा के विदा किया जायेगा.
देव – थोड़ी देर सोचने के बाद
देव – महाराज मए कुछ कहना चाहुगा लेकिन आपके पास आकर. क्यों की इतनी दूर से कहना मुझे अच्छा नहीं लग रहा है.
राजा – ठीक है तुम हमारे पास आ कर कह सकते हो.
देव राजा के पास चला गया और इतनी आवाज़ में बात करने लगा के कोई और न सुन सके.
वही पूनम और नीलम के चेहरे भी गुस्से से लाल हो चुके थे अब उन पर एक मुस्कान थी क्यों की वो जानती थी के देव राजा के पास जाका उसकी hi मरने वाला है. लेकिन रूद्र सिर्फ अपने क्रोध में जला जा रहा था.
देव – राजा तुम्हारी पहली शर्त. के हम लोग यहाँ एक वर्ष भीख मांगे. हमें मंजूर नहीं क्यों के ये हाथ दे ने के लिए बड़े थे कभी मांगने के लिए नहीं फ़ैल सकते और तुम हम सब को अभी जानते नहीं हो के हम कौन है. हम जिसके सर पे हाथ रख दे वो भिखारी भी तुम जैसे 1000 राजाओ को भीख दे सकता है. इसीलिए हमसे भीख मंगवाने की तुम्हारी औकात नहीं.
दूसरी सजा के तुम इन लड़कियों को अपनी महारानी की दासी बनाओगे और अपना खिलौना वो भी तब तक जब तक हम इस तिलिस्म को न तोड़ दे. तो सुन राजा ये मेरी पूनम है यानि तिलिस्म नगरी की राजकुमारी और मेरी होने वाली महारानी और ये है नीलम एक मणि धरी, शिवभक्तिनि, इच्छाधारी, खूंखार नागिन अरे इसका कटा तो पानी भी नहीं मांगता खुद पानी की तरह बाह जाता है. ये है मेरे परम मित्र रूद्र की होने वाली महारानी. जो के उस से कही ज्यादा खूंखार है वो खुद भी एक इच्छाधारी और मणि धरी है. ये दोनों लड़किया भविष्य की महारानियाँ है. और वो भी ऐसी महारानियाँ जिनके सामने संसार की हर महारानी भीख मांगती नजर आये. और तेरे जैसो के लिए तो ये जिन्दा नर्क की आग hae.To इन्हे दासी बनाने का सपना तू सपने में भी मत देखना वार्ना तेरे सपने में आकर ये वो तबाही मचाएगी के तुझे कभी सपना hi नहीं आएगा. 24 घंटे तेरी आंखे इस दर से खुली रहेगी के कही आँख बंद करते hi ये तेरे सामने में न आ जाये.
अब रही बात तेरी तीसरी सजा की. तो मंजूर तो मुझे वो भी नहीं. क्यों की हमारी गर्दन उड़ाना या हमें मसलना यहाँ किसी के बस की बात नहीं पर है तुम एक राजा हो तो मए इसे तुम्हरी ललकार समझ कर मंजूर करता हु. पर इसमें अगर हर मेरी हुई तो मेरे मरते hi तुम बेशक जीत जाओगे पर अगर जीत हुई जो की होगी hi. तो तुम्हारी सजा क्या होगी? क्या यही के हम लोग यहाँ से निकल जायेगे ? वो तो हम जायेगे hi. और सच कहु जा तो अभी भी सकते है. कोई हमें नहीं रोक सकता न तुम न तुम्हारा कोई अदृश्य योद्धा. पर तुमने हमें ललकारा है. गलती तुमने की और अपनी गलती छुपाने के लिए तुम हमें सजा देना चाहते हो? ऐसा नहीं होगा.
अब मेरी बात को और ध्यान से सुनो जैसा के मैने कहा मुझे तुम्हारी तीरसि बात मंजूर है मए तेरे उस अदृश्य योद्धा को धूल में मिलाउंगा. तुमने हमें तीन सजाओ में से एक चुनने को कहा न अब मए तुम्हे तीन रस्ते देता हु वो भी बिना किसी से सलाह किये.
1. मेरे जीतनेय के बाद तुम हमें यहाँ से निकलोगे साथ hi हम जिस चीज़ की तलाश में है तुम हमें सीधा वह पंहुचा डोज.
राजा - ये मुमकिन नहीं है. ये मेरे बस में नहीं. मए त्रिकाल के नियमो से बंधा हुआ हु.
देव – ठीक है तो दूसरा रास्ता ये है के मुझे अभी त्रिकाल से मिलवा दो मए खुद hi बात कर लगा उससे के मेरे जितने पे मुझे क्या चाहिए. साथ hi ये भी कह दुगा के उसने तुम जैसे मुर्ख को राजा बनाया. जिसने उसके नियम तक सब को नहीं बताये है. तुम बेकार हो किसी काम के नहीं.
राजा – देव मेरी हालत समझो मए मंटा हु गलती मेरी है. और उसी वजह से मए तुम्हे यहाँ से निकल भी दुगा लेकिन उस के आगे मए कोई सहायता नहीं कर सकता क्यों के ये तिलिसिम चक्र बहोत बड़ा है मए खुद नहीं जनता पूरा इसके विषय में. और त्रिकाल किसी से भी मेरे कहने पे नहीं मिलेगा वो खुद जब चाहे किसी से भी बात कर सकता है मेरी इतनी मजाल नहीं के मए त्रिकाल से तुम्हे मिलवा सकू. वो भगवन है हमारा. इस तिलिस्म में बसी नगरी का भगवन.
देव – ठीक है चलो मान ली तुम्हरी विवशता. तुम भी क्या याद रखोगे लेकिन फिर तुम्हे मेरी तीसरी बात माननी होगी के मेरे जीतने के उपरांत हमें यहाँ से निकलने से पहले हम वो रत तुम्हारे शाही मेहमान बन के रहेंगे और तुम्हारी रानी मेरी होगी पूरी रत के लिए. आखिर तुम भी तो हमारी रानियों को अपने पास रखने की बात कर चुके हो न हम से. बोलो मंजूर है? और अगर मए हर भी गया तो भी मेरे तीनो साथियो को तुम सुरक्षित यहाँ से निकलोगे.
राजा के होठ बीच गए और उसने जलती हुई आँखों से देव को घुरा.
देव – अपना जवाब दो राजा तुम्हे मेरी तीनो बातो में से क्या मंजूर है?
राजा अपनी मुठिया भींच कर – देव तुमने आज वो बात कह दी है जो किसी के विचार में आने पर भी हम उसे कड़े से कड़ा दंड देते. लेकिन मए क्यों के घिर चूका हु, मेरे पास कोई रास्ता नहीं है, तुम्हारी पहले की दोनों बाटे मन्ना मेरे वश में नहीं, इसीलिए मुझे तुम्हारी तीसरी बात मंजूर है. पर मए जनता हु इसकी नौबत नहीं आएगी क्यों के मेरे योद्धा से जितना तुम्हारे भी बस में नहीं है. तुम्हारी लाश पड़ी होगी हमारे सामने ये मए जनता हु. और लाश किसी के साथ रत नहीं बिताती. है उसके बाद तुम्हरे साथी तुम्हरे बिना यहाँ से सकुशल बहार निकल दिए जायेगे. आगे उनके साथ क्या होता ये त्रिकाल की मर्जी.
देव – देखते है राजा की किस को क्या मिलता है.
देव वह से उठकर थोड़ा जोर से – ठीक है राजा हमें आपकी तीसरी शर्त मंजूर है. लड़ने का इंतजाम कीजिये.
राजा – तो जैसा की तय हुआ है. देव अकेला हमारे उस अदृश्य योद्धा से लड़ेगा. ये बात मए hi नहीं बल्कि यहाँ का हर निवासी जनता है के उस योद्धा को परास्त करना तो दूर उससे लड़ने की बात सोचना भी आत्म हत्या करने के बराबर है. लेकिन क्यों की हमने हमारी व्यवस्था की गलती के कारन देव को तीन रस्ते बताये जिससे के वो चाहता तो अपनी जान बचा सकता था. लेकिन इसने पहले के दोनों रस्ते बंद कर के हमारी तीसरी शर्त मणि है और साथ hi देव का ये निवेदन है के इस लड़ाई के उपरांत इसके तीनो साथियो को हर हल में छोड़ा जाये क्यों की भीख देने की गलती अनजाने में hi सही लेकिन देव से हुई थी. इसीलिए इस लड़ाई के उपरांत यदि देव हर भी जाता है तो इसके साथियो को इस नगरी से बहार निकल दिया जायेगा. अब रही बात देव की तो यही सही. अब इसकी मदद तो त्रिकाल भी नहीं कर सकता…………….
……………हे अदृश्य योद्धा. हमें यदा कड़ा तुम्हारी आवाज़े सुनाई देती है. जिससे की ये प्रतीत होता है के तुम खुद खली बैठे बैठे परेशां हो रहे हो तो तुम्हारे लिए त्रिकाल की अपार दया से एक शिकार आ रहा है. जिस पर तुम अपना क्रोध निकलने के लिए और इसे मसलने के लिकए पूरी तरह से स्वतंत्र हो. कल तुम्हे इस देव से लड़ना है तैयार रहना.
………… देव तुम्हारी लड़ाई हमारे उस अदृश्य योद्धा से कल प्रातः कल होगी. तुम्हे समय से हमारे खेल मैदान में आना है. तब तक आज की रत तुम और तुम्हारे साथी हमारे मेहमान हो. कल का कल देखेंगे के तुम्हारे साथ क्या किया जाता है.
फिर सभा सम्पत हो गयी और देव अपने साथियो के साथ उसी कमरे में आ गया.