Fantasy इच्छाधारी देव - Page 42 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

थैंक्स फॉर योर रिव्यु बीआरओ. और आपने सही बात पकड़ी है ये गढ़ अभी अँधेरे में hi है और इसका राज़ खुलने पर मजा आएगा या शायद यही वो वजह बने जिससे कहानी का part ी आये. और न भी आया, और कहानी को इस part में एन्ड दिखने का मूड हो गया तो भी लगभग एन्ड में ये गढ़ सामने आएगा और इसके राज़ भी और इसके पत्ते देख कर आप सबको मजा आएगा क्यों की वो अपने पत्ते बहोत पहले से बिछा चूका है वो उस अघोरी के भरोसे पे नहीं चल रहा है, फ़िलहाल तो यही बता सकता हु बाकि समय आने पे पता चलेगा.
 
अपडेट – 239

पूनम - धोखा……….. देव के साथ dhokha…….mere देव के साथ धोखा करने का सोचा कैसे उसने.

शलाका - धोखा?? क्या बोल रही है किसने किया है धोखा देव के साथ बता मुझे पूनम.

तभी फिर से पूनम ने अपनी आंखे बंद की और फिर जब उसने आंखे खोली तो वो शांत थी.

शलाका - क्या हुआ पूनम तुझे बता मुझे किसने धोखा दिया है देव को किस की मौत आयी है?

पूनम - कुछ नहीं तू छोड़ परेशां न हो.

शलाका - देख पूनम अपनी मीठी बातो से मुझे मत बहला बता क्या हुआ है?

पूनम - अरे मेरी माँ कुछ नहीं हुआ.

शलाका - तो फिर तू अचानक वह से उठकर बहार क्यों आयी , तेरे माथे पे पसीना क्यों आया, तूने ये क्यों कहा देव के साथ धोखा, तू क्रोध में क्यों आयी और फिर अब तू मुस्करा क्यों रही है.

पूनम - अरे मेरी बहना कितना पढ़ती है तू मेरे चेहरे को अरे बोलै न मैने कुछ नहीं हुआ . और मुझे लगा था के उसने देव के साथ धोखा किया है . लेकिन अभी देव ने hi मुझसे संपर्क बनाया था. और उसने बहोत कुछ समझा दिया . तब मुझे याद आया के भला देव को कोई धोखा दे सकता है क्या?. लेकिन मन्ना पड़ेगा चल जबरदस्त चली है उसने.

शलाका - क्या कह रही है कसिने चल चली है. तू एक काम कर बस नाम बता और कुछ मत बोल आगे मए देख लगी उसे.

पूनम - नहीं शलाका उसे अपनी चल चलने दो अभी उसका समय चल रहा है. उसे सही वक़्त आने पे देख लगे. और रही बात नाम की तो वो कोई और नहीं बल्कि रजनी है.

शलाका - क्या?????? रजनी…….. लेकिन वो क्यों चल चलने लगी? हमने तो उसका कुछ नहीं बिगाड़ा न देव ने न किसी और ने, बल्कि देव ने तो उसे त्रिकाल के तिलिस्म से निकल क ीक तरह से जीवन दान दिया, उसे गुलामी से आज़ाद करवाया. फिर वो क्यों धोखा देगी? नहीं नहीं पूनम कुछ तो गलत है जरूर कोई ग़लतफ़हमी हुई होगी. फिर से चेक करना पड़ेगा. और वो मए खुद कर लगी तू टेंशन मत लेना.

पूनम - अरे यार देव से अभी बात होने के बाद मेरी टेंशन तो वैसे भी ख़तम हो गयी और रही बात रजनी ने ऐसा क्यों किया तो है कोई कारन, जो अभी तो ठीक ठीक मुझे भी नहीं पता लेकिन देव ने कहा है के सही वक़्त का इंतजार करना होगा. क्यों के जो बात हमें आज पता चली है वो बात देव शुरू से जनता था लेकिन उसने किसी को भनक भी नहीं लगने दी, जब हम सब आज भी किसी से कुछ नहीं कहा वो तो मुझे hi रजनी की बातो से कुछ छडयन्त्र की या जलन की बदबू आयी और मैने उसके बारे में जानने की कोशिश की लेकिन उसने अपने आपको छुपा के रखा है तू भी कोशिश कर के देख रजनी के बारे में कुछ नहीं जान पायेगी. उसने खुद को एक कोहरे में छुपा के रखा है तिलिस्मी कोहरे में जिसके पर कोई नहीं जा सकता सिर्फ बनाने वाला hi उस में घुस सकता है और इतना बहोत है उस पे शक करने के लिए लेकिन देव ने सब क्लियर कर दिया है ये कह कर की वो खुद को कितना भी छुपा ले देव सब जनता है उसके बारे में क्यों कैसे ये वक़्त आने पे पता चलेगा. लइकन देव का कहना है के हमें भी अपनी तिलिस्मी शक्तियों का इस्तेमाल करके ये बात छुपानी है की हमें उसकी गद्दारी का पता चल चूका है , अगर उसे ये भनक भी लग गयी तो सब गड़बड़ा हो जाएगी तू समझ रही है न. ये मन के चलो के हमें कुछ नहीं पता उससे पहले की तरह hi बाते करनी है, पहले की तरह hi मिल के चलना है उसे दिखाना है के हम सब उस पर भरोसा करते है. बस अब भरोसा करना नहीं है उस पर.

शलाका - मए तो समझ गयी लेकिन सही वक़्त आने पे उसे जरूर समझोगी के हमसे गद्दारी कर के उसने अपनी बहोत बुरी मौत को बुलाया है. हमें वो फसा नहीं सकती.

पूनम - देखेंगे अभी तो चलने दो जो चल रहा है वो वक़्त अभी बहोत दूर है.

फिर दोनों बहने अंदर आ जाती है.

नागार्जुन - भाई ये सब तो हम समझ hi गए लेकिन मुंबई हम क्यों नहीं जा सकते?

पूनम - सही बात है हमें भी मुंबई घुमनी है, क्यों रजनी ?

रजनी - है देव हमें भी लेके चलो न

देव – देख भाई नागार्जुन यहाँ के लिए भी कोई होना चाहिए इसीलिए तू नहीं जा रहा है अभी. दूसरी बात रही इन दो लेडीज की तो रजनी और माय डार्लिंग पूनम तुम दोनों भी समझो उस महल में पहले से भूत और चुड़ैले है तुम दोनों भी जाओगी तो कुछ ज्यादा नहीं हो जायेगा,

देव की बात सुन कर जहा सब मुस्कराने लगे वही पूनम

पूनम - अच्छा जी तो मए अब चुड़ैल हो गयी न आपके लिए. अच्छी बात है आओ जरा मेरे पास मए बताती हु मए कैसी चुड़ैल हु.

देव – अरे मेरे कहने का वो मतलब नहीं था यार.

रूद्र – है अब आया न उठ पहाड़ के नीचे थोड़ी देर पहले मेरी खिचाई हो रही थी. अब बोलो. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई भाभी को चुड़ैल बोलने की. भाभी ये बहोत गलत बात है.

देव – अबे ो रूद्र कहे को आग में घी दाल रहा है बे.

रूद्र – लो जी मए कौन सा घी दाल रहा हु. भाभी को चुड़ैल तो तुमने hi बोलै न

देव – चुप कर रूद्र. वार्ना पिटेगा अब मुझसे.

रूद्र - अरे जा बड़ा आया मुझे पीटने वाला. मेरी भाभी को चुड़ैल बोलता है और तू क्या समझता है मए चुप रहुगा.

देव – रूद्र मेरे बाप अब बस कर दे.

रूद्र - चल ठीक है अब की बार छोड़ देता हु लेकिन आइंदा भाभी को चुड़ैल न बोलना बे.

देव हाथ जोड़ के - समझ गया बाप अब चुप कर तो कुछ और बात कर ले.

सभी उनकी बहस से मजे ले रहे थे यु तो पूनम और शलाका भी लेकिन उनके अंदर एक तूफ़ान जनम ले चूका था.
 
अपडेट – 240

देव – अच्छा सुनो अब मेरी बात कल तो मए सिर्फ महल खरीदने जाउगा. उसके बाद वह महल जाना पड़ेगा जिसमे फिलहाल तो कुछ खतरा है hi हलाकि वो मए संभल लगा. लेकिन तुम लोग यहाँ रह कर ये तयारी करो के वह शिफ्ट होने के बाद किस किस चीज़ की जरुरत होगी. वो सब अरांगे करना शुरू करो उसके लिए सोचो अभी किसी और बात में दिमाग नहीं लगाना है. ये बात चन्नो और गुरुम को भी बता देना. और गुरुम को स्पेशली बोलना के कल वो तुम्हारे साथ बैठ कर पूरी प्लानिंग कर ले वह किसी चीज़ की कमी नहीं होनी चाहिए.

रजनी - मेरे होते किसी चीज़ की कमी नहीं पड़ेगी देव तुम निश्चिन्त रहो.

शलाका – है ये तो है रजनी तो है hi हमारे साथ हमें किस बात का दर.

सब शलक की तरफ देखने लगे लेकिन उसके चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान थी.

शलाका - मेरा मतलब रजनी काफी तेज दिमाग रखती है गुरुम को गंगवार की आदत है hi. बाकि अर्रंगेमेन्ट्स के लिए यहाँ पूनम नागार्जुन और चन्नो तो है hi

देव – सही कहा चलो अब बहोत देर हो गयी है आराम किया जाये. शलाका कल रेडी रहना हमें चलना है वह और तू भी तैयार रहने बे रूद्र घोड़े बेच के न सोइयो.

रूद्र - हो

फिर पूनम , शलाका, नीलम, और रजनी वह से निकल जाती है.

देव – नागार्जुन घर का अचे से ख्याल रखना कल . किसी पे भी भरोसा मत करना. चाहे कोई अपना hi क्यों न हो तू ये समझ के चलना के सब दुश्मन है. इस तरह ध्यान रखना. किसी अपने को भी अंदर जाने से पहले मुझसे बात करवाना कोई भी हो. रात में ऐसी व्यवस्था कर दे की कोई अपनी शक्ति से भी घर के अंदर न झांक पाए. जब तक मए न चहु. क्या पता कौन कब कैसे वार कर दे , उससे हमारा तो कुछ नहीं होगा लेकिन हम जाहिर हो सकते है और वो मए नहीं चाहता.

नागार्जुन - ऐसी बाटे क्यों कर रहे हो कोई खतरा महसूस कर रहे हो क्या?

देव – अपनी तो जिंदगी खतरों से भरी हुई है hi मेरे भाई. हर कदम पे खतरा है. मए किसी खतरे से नहीं दर रहा बस सावधान रहने को कह रहा हु.

नागार्जुन - तुम निश्चिन्त हो कर जाओ परिंदे की परछाई भी नहीं पड़ने दुगा घर के अंदर.

फिर रूद्र और देव भी घर के अंदर चले जाते है और सबके साथ बैठ कर खाना कहते है फिर सोने चले जाते है.

जैसे hi देव अपने रूम में जाता है सामने hi फ़कीर बाबा खड़े थे.

देव - प्रणाम बाबा

फब - प्रणाम देव

देव - कहिये बाबा कैसे आना हुआ

फब - देव आज hi रत को तुम्हे अपनी माँ से संसर्ग स्थापित करना होगा. क्यों की समय निकलता जा रहा है बहोत hi काम दिन शेष बचे है. इस बीच वो क्रिया हो जनि चाहिए वार्ना तुम अपने पिता को खो बैठोगे.

देव – लेकिन बाबा अब तक माँ तैयार नहीं है और मए बिना उन्हें तैयार किये कैसे उनके साथ सम्भोग कर सकता हु.

फब - वो मन से तैयार हो चुकी है ये तुम भी जानते हो बस उन्हें भी अब किसी खास मौके की जरुरत है. और तुम शायद नहीं जानते तुम्हारे पिता के शरीर में जो पिशाच है उसे तुम्हारे माँ के बदन की महक आ चुकी है. और आज hi वो अपने मकसद में कामयाब भी हो जाता यदि सही समय पे तुम्हारी माँ तुम्हे देखने के लिए तुम्हारे बाबू जी के पास से उठ न गयी होती तो.

देव - मए समझा नहीं बाबा

फब - आज दिन में तुम्हारे अपने पिता के कमरे बहार निकलते hi तुम्हरी माँ प्रेम के वशीभूत तुम्हरे पिता जी से लिपट गयी थी और उनके बेहोश जिसमे से प्यार कर रही थी. उन्हें चुम रही थी. और अपने बदन को उनके बदन से रगड़ भी रही थी. इसका नतीजा ये निकला के तुम्हरे पिता के शरीर के अंदर का पिशाच जग उठा उसे स्त्री की योनि की गंध ने जगा दिया. वो अपनी कोशिशों से तुम्हरे बाबू जी को जगा के उसी समय सभोग करने के प्रयास में लग गया किन्तु मैने तुम्हरे बाबू जी होश में आने नहीं दिया और काफीसमय तक इस संघर्ष के बाद अचानक तुम्हारी माँ के मन में तुम्हरा विचार आया तो वो तुम्हरे पिता को छोड़ के उनसे दूर हुई और तुम्हे देखने चली गयी इधर मैने अपनी शक्तियों को पिशाच के पहरे पे लगा दिया था. जिससे पिशाच फिर सो गया ये तो तुम्हारी माँ का ध्यान नहीं गया वार्ना उस पिशाच ने तो तुम्हारे बाबू जी के लिंग को उत्तेजित भी कर दिया था यदि तुम्हारी माँ देख लेती तो शायद उसी समय तुम्हारे माता पिता के बीच सम्भोग भी हो जाता और साडी म्हणत व्यर्थ हो जाती और तुम अप्पने पिता को खो देते आज hi. अब इस बात का ध्यान रखना के जब तक तुम्हारा शारीरिक सम्बन्ध तुम्हारी माँ से न हो जाये उन्हें अपने बाबू जी निकट अकेले में मत जाने देना वार्ना अनर्थ हो जायेगा.

देव – बाबा आपने जो रास्ता मुझे बताया था उस हिसाब से अभी मुझे पद्मा काकी या सुधा के साथ पहले सम्भोग करना था जो की अब तक हुआ नहीं है.

देव – वो सिर्फ एक रास्ता था देव और वैसे भी तुमने पद्मा से जो भी बाते कही या जो भी वक़्त उनके साथ बिताया उसे तुम्हारी माँ ने देखा और सुना है. मकसद उन्हें तुम्हारी तरफ आकर्षित करना था जो हो चूका है. अब तुम सम्भोग किस के साथ पहले करते हो ये मायने नहीं रखता. तुम अपनी माँ की तरफ बढ़ो वो अब तैयार है. और जरुरत भी उनके साथ सम्भोग की पहले है इस का सम्बन्ध तुम्हारे बाबू जी की जिंदगी और मौत के साथ है तो ज्यादा मत सोचो और आगे बढ़ो.

ठीक है बाबा जो आज्ञा. मए कुछ करता हु.

फब - ठीक है देव जल्दी करो जो भी करना हो समय नहीं बचा अब. मए सही समय पर तुम्हारे सामने आ जाउगा जिससे तुम्हारी माँ कोई गलत कदम न उठाये क्यों के वो अब तन मन से तैयार जरूर है किन्तु सम्भोग के पश्चात् उन पर इस दुनिया का प्रभाव वापस आ जायेगा. ये वासना होती hi ऐसी है. जब तक सर पे चढ़ के बोलती है सब सही लगता है किन्तु उसके बाद खुद से hi घृणा होने लगती है. ये उनके लिए भी आसान नहीं है. इतना कह कर फब अदृश्य हो जाते है.

देव आंखे बंद कर के सावित्री को देखने लगता है.

उधर सावित्री अपने रूम में सोने चली जाती है. लेकिन सोने से पहले वो नहाने जाती है. वो अपने सरे कपडे उतर के नहाने लगती है. उसके गोर गोर बदन पे इस समय कोई कपडा नहीं था उसका दूध सा गोरा भरा हुआ बदन पानी की बूंदो से चमक रहा था.

सावित्री मन में - देवा मेरा बीटा है. उस पर पद्मा से ज्यादा मेरा हक़ है. मए पद्मा को देवा के नजदीक यु hi नहीं जाने दूगी उफ्फ्फफ्फ्फ़ जब वो देवा का लुंड दबा रही थी कितना बड़ा लग रहा था देवा ka.Seeeeeeeeaaaahhhhhhhh ये मुझे क्या हो रहा है. काश देवा इस वक़्त यहाँ होता तो मए उसे किसी बात के लिए नहीं रोकती. और पद्मा से पहले उसे अपना जिस्म सौंप देती.

तभी देव दिया को देखने लगता है दिया और रघु आराम से सो रहे थे. देवा अपनी शक्ति से उन्हें बेहोश कर देता है. और रूद्र और नीलम को भी गहरी नींद में दाल देता है. अब उस पूरे घर में बम भी फैट जाये तो देवा और सावित्री के आलावा सुनने वाला कोई नहीं था.
 
अपडेट – 241

तभी देव दिया को देखने लगता है दिया और रघु आराम से सो रहे थे. देवा अपनी शक्ति से उन्हें बेहोश कर देता है. और रूद्र और नीलम को भी गहरी नींद में दाल देता है. अब उस पूरे घर में बम भी फैट जाये तो देवा और सावित्री के आलावा सुनने वाला कोई नहीं था.

देवा तुरनत खड़ा हो जाता है और आंखे बंद कर के खोलता है तो अब देवा के शरीर पर सिर्फ एक टॉवल के आलावा कोई कपडा नहीं था उसके बाल ऐसे लग रहे थे जैसे अभी नाहा के निकला हो उसके बदन पे भी पानी की बूंदे थी. देवा मन में अब माँ को यहाँ बुलवा लगा और जो वो चाहती है उन्हें करने दुगा . . . . .

सावित्री - uiiiiiiiiiiimaaaaaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaaahhhhhh दिया aaaaaaaaaaaaaa ोोू दियाआआआ जल्दी आआआआ इधर कहा हो aaaaaaaaaahhhhhhhhhh uuuuuuuuuuhhhhhhh

देवा तुरंत नीचे जाता है और सावित्री के कमरे का दरवाजा खोल कर अंदर घुस जाता है. और सीधा बाथरूम में पहुँचता है सामने सावित्री अपनी कमर को थामे फर्श पर लेती हुई थी और उठने की कोशिश कर रही थी.

देवा तो सावित्री को अपने सामने यु नंगी लेते हुए देख कर सब कुछ भूल जाता है यु तो उसने सावित्री को कई बार नंगी देखा था लेकिन इतने करीब से और अपने ठीक सामने अकेले में देखने का उसका ये पहला hi मौका था. इतनी साडी औरतो को भोगने के बाद भी एक नजर सावित्री को देखते hi देवा का गाला सूखने लगा दूध सा गोरा बदन बड़ी बड़ी 36 की गोरी तानी हुई चूचिया जिस पर ब्राउन कलर का बड़ा सा ारोला और ½ इंच लम्बे ब्राउन निप्पल थोड़ा निकला हुआ सा गोरा चिकना पेट. मोती मोती केले के तने सी चिकनी जंघे और हलके से बालो से ढकी हुई गुलाबी छूट. जैसे कुछ hi दिन पहले शेव की हो छूट की. उस पर वो पूरी की पूरी पानी से भीगी हुई देवा अभी इस जन्नत को देखने में इतना व्यस्त हो गया के वो भूल hi गया के सावित्री तकलीफ में है

सावित्री भी देवा को अपनी तरफ इस तरह घूरते देख कर शर्म से गाड़ी जा रही थी कोई कपडा भी पास नहीं था के वो खुद को ढँक सके. हलाकि वो तो खुद देवा के साथ इस हालत में आना चाहती थी लेकिन ऐसे अचानक से दोनों का सामना उसे भी थोड़ा विचलित कर रहा था.

सावित्री - देवाआआआ ो देवाआआआआ क्या कर रहा है इधर आ जल्दी से. यु बूत बना क्या देख रहा है?

तब देवा का ध्यान टूटता है

देवा – अरे माँ क्या हुआ?

सावित्री - ओह्ह्ह्हह्हह देव तुम बहार जाओ और दिया को भेजो देखते नहीं मैने कुछ पहना नहीं है अभी.

देवा - छोड़ न माँ भाभी तो गहरी नींद होगी ये लो टॉवल पहना लो

देवा सावित्री को टॉवल लप्पेट देता है

देव – माँ क्या हुआ अब बताओ

सावित्री - वो मए अचानक नहाते हुए फिसल गयी और मेरी कमर में मोच आ गयी है. हिला भी नहीं जा रहा है दिया को उठा के ला वो मुझे बिस्तर तक पंहुचा देगी.

देवा - कमल करती हो माँ. भाभी इतने बड़े पेट से तुम्हे कैसे उठा पायेगी. और वो गहरी नींद में होगी वार्ना तुम्हारी आवाज़ सुन कर मए आ गया भाभी क्यों नहीं आयी . और आ भी जाती तो भी तुम्हे बिस्तर तक ले जाना उनके बस की बात नहीं है चलो उठो मए ले चलता हु.

सावित्री ने देवा का हाथ पकड़ा और उठने लगी तो दर्द के मरे फिर जमीन पे लेट गयी .

सावित्री - देवा रहने दे तू किसी डॉ. को बुला दे यही पे.

देवा – अरे तब तक यही गीले फर्श पे लेती रहोगी क्या चलो अंदर मए ले चलता हु.

इतना कह कर देवा ने बिना सावित्री की कोई बात सुने एक हाथ उसकी गार्डन के नीचे और दूसरा हाथ उसकी गांड के नीचे लगाया और सावित्री को गॉड में उठा लिया.

सावित्री - नहीं उठूगी मए तुझसे बहोत भरी हु मए.

देवा सावित्री को आराम से गॉड में उठा लेता है.

देवा – अरे माँ तू इससे डबल भी होती तो भी मए यु hi आराम से उठा लेता फूलो की तरह नाजुक बदन है तेरा. तू कहा भरी है.

सावित्री को देवा के मजबूत हाथो की पकड़ अपनी गांड पे धंसती हुई सी महसूस हुई तो वो सिहर उठी. वो अपना वजन जानती थी लेकिन देवा का उसे यु उठा लेना hi उसे समझा गया था के देवा का बाहुबल क्या है.

देवा गॉड में लिए हुए अपनी माँ को अपने सीने से चिपकाया और उसके माथे पे चुम लिया सावित्री ने भी अपना हाथ देवा की मजबूत छाती पे रख दिया. और मुस्करा उठी.

देवा – अब चले बिस्तर पर.

सावित्री - मए माँ हु तेरी और तू मुझे बिस्तर पे ले जाने को ऐसे पूछ रहा है जैसे कोई अपनी बीवी से पूछ रहा हो.

देवा – तो क्या हुआ माँ वैसे भी जिस हालत में तुम हो ऐसे भी कोई सिर्फ अपनी बीवी को hi उठता है यानि नंगी पर मैने तो तुझे उठाया है न तो पूछ नहीं सकता.

सावित्री देवा के मुँह से खुद के लिए नंगी शब्द सुन के शर्मा जाती है. और अपने आंखे बंद कर के अपना चेहरा देवा की छाती में छुपा लेती है.

देवा सावित्री को बिस्तर पे लता है और आराम से उसे लिटा देता है सावित्री बिस्तर पे let-te hi कराह उठती है क्यों की उसकी कमर पे वजन पद गया था.

देवा वही राखी एक सिल्क की चादर से सावित्री का पूरा बदन ढँक देता है और अंदर हाथ दाल कर टॉवल खिंच देता है.

देवा – माँ अब तुम लेती रहना उठने की जरुरत नहीं है मए अभी नीचे से आयल लेकर आता हु जिससे तुम्हरी पूरी मोच ठीक हो जाएगी. और सुबह तो तुम हिरणी से भी तेज दौडोगी किसी को पता भी नहीं चलेगा के तुम्हारे साथ रत में क्या हुआ.

सावित्री मुस्कराते हुई देवा को देख रही थी और देवा तुरंत नीचे जाता है अपने पर्सनल क्लिनिक में और वह से कोई आयल लेकर ऊपर आता है.

देवा – माँ चलो चादर हटा दो मए मालिश कर देता हु..

सावित्री - लेकिन देवा मैने कुछ पहना कहा है ऐसे में चादर हटाने को बोल रहा है.

देवा - अरे अब कपडे पहन के कौन मालिश करवाता है चलो हटाओ चादर

सावित्री - देवा एक मिनट रुक मुझे पहले एक बात बता.

देवा – पूछो

सावित्री - अभी तेरे सामने कौन है तेरी माँ या कोई और?

देवा थोड़ी देर सावित्री की आँखों में देखता है और उन्हें –पढता है. शायद सावित्री भी आज देवा के साथ बाह जाना चाहती थी. क्यों की वो पद्मा के साथ उसे देख चुकी थी और देवा की बाटे भी सुन चुकी थी.

देवा – इस समय मेरे सामने मेरी माँ hi है. लेकिन साथ hi तकलीफ में डूबी एक औरत भी जिसे आज की रत मेरे साथ की बेहद सख्त जरुरत है. और मए अपनी माँ का हर दर्द आज मिटा देने के लिए तैयार हु.

….. क्या तू इसके लिए सचमुच तैयार है? सावित्री ने देवा की आँखों में देखते हुए पुछा.

देवा – है माँ मए इसके लिए तैयार हु क्यों की नियति ने मुझे चुना है और इससे कुछ बर्बाद नहीं होगा बल्कि बहोत कुछ बर्बाद होने से बचेगा hi मुझ पर यकीन रखो.

देवा ने एक तरह से सावित्री को अपने दिल की बात बोल दी थी हलाकि सावित्री इन सब बात से अनजान कुछ समझ तो नहीं पायी लेकिन वो देव की बातो से संतोष हो गयी.

देवा – और फिर अभी अभी तूने hi कहा के मैने तुझे बीवी की तरह नंगी गॉड में उठाया है तो फिर मुझसे क्या शर्माना तुम्हारा पूरा खजान तो मए देख hi चूका अब क्या छुपा रही हो

सावित्री देवा की बातो से खुश भी हो रही थी के देवा भी उसके प्रति आकर्षित हो रहा है लेकिन एक तरफ उसे माँ बेटे में ये सब होना गलत भी लग रहा था.

सावित्री - देवा फिर सोच ले ये गलत होगा न

देवा – नहीं तुम्हारे लिए hi सब कर रहा हु किसी दिन सब बता दुगा अभी ये चादर हटाओ वार्ना कही देर न हो जाये.

सावित्री - अच्छा चल कर दे. मालिश hi तो करेगा न लेकिन मए यु hi चादर नहीं हटाउगि भले hi तू मुझे बिना कपड़ो के देख चूका है इसका मतलब ये नहीं के मए अब हर वक़्त तेरे सामने बिना कपड़ो के राहु. चल लाइट बंद कर दे.
 
माय डिअर रीडर्स हम बहोत दिनों बाद वापसी कर रहे है फोरम पर. लगभग 50 दिनों के बाद. कुछ खतरनाक सी प्रोब्लेम्स में फसे हुए थे. लेकिन यहाँ आ कर जब अपना पेज खोल कर देखा तो ये देख कर ख़ुशी हुई के काम से काम हमें किसी ने गालिया नहीं दी है. उसके लिए हम आप सबका धन्यवाद करते है और सीधे hi आते है नए उपदटेस पर. एन्जॉय फ्रेंड्स
 
अपडेट - 242

सावित्री - अच्छा चल कर दे. मालिश hi तो करेगा न लेकिन मए यु hi चादर नहीं हटाउगि भले hi तू मुझे बिना कपड़ो के देख चूका है इसका मतलब ये नहीं के मए अब हर वक़्त तेरे सामने बिना कपड़ो के राहु. चल लाइट बंद कर दे.

अब आगे....

देवा उठ कर लाइट बंद करता है तो अपने आप उस कमरे में हलके ब्लू कलर की लाइट जल जाती है कनेक्शन hi ऐसा था के नाईट लैंप जल जाये.

सावित्री - अरे ये भी बंद कर दो न अभी मालिश करनी है सोना नहीं है मुझे.

देवा - नहीं माँ इसे जलने दो. और अब चुप चाप लेती रहना

देवा पलंग के किनारे पे बैठ कर धीरे धीरे सावित्री के बदन से चादर सरकता है इस वक़्त तो चादर की छुअन भी सावित्री के बदन की गर्मी बढ़ा hi रही थी और कुछ आज दिन में हुई घटनाओ का असर भी था के वो बस उसी धरा में बहती जा रही थी. वो खुद छह रही थी के आज देवा न रुके.

देवा सावित्री के बदन से चादर हटा कर अपने हाथ सावित्री के पैरो से लेकर उसकी जांघो तक फेर देता है सावित्री का रोम रोम खिल उठता है और वो मचल जाती है

देवा भी अब सिर्फ ुंडेरवारे में hi था टॉवल वो भी निकल के एक तरफ रख देता है. फिर वो सावित्री की तरफ बढ़ता है और उसे कंधो से पकड़ के धीरे धीरे पलटा देता है. सावित्री को देवा के बदन की खुशबू इस समय पागल बना रही थी. देवा सावित्री की पीठ को सहलाता है और सहलाते हुए अपने हाथ सावित्री की कमर पे रख के हलके हाथ से सहलाने लगता है. सावित्री अपने होठो को भींच लेती है जिससे उसकी सिसकारी न निकले.

तभी देवा आयल सावित्री की पीठ पे गिरता है उसकी ठंडी ठंडी बूंदे जब सावित्री की पीठ पे गिरती है तो सावित्री का पूरा तन बदन हिल जाता है. देवा आहिस्ता से पूरे तेल को सावित्री की कमर और पीठ पे फैला डेटा है और और फिर तेल से भीगे हाथ उसकी उभरी हुई गोल गोल गांड पे लता है और हलके हाथ से दबाने लगता है धीरे धीरे उसके हाथ सावित्री की जांघो के पे चलने लगते है और अंगूठे हलके से उसकी छूट पे टच होने लगते है लेकिन देवा अपने हाथ नीचे ले जाता है और पूरी टैंगो की मालिश कर्त है इसी तरह कोई 10-15 मिनट तक वो सावित्री की मालिश कंधो से पैरो तक करता रहता है और फिर उसे पलटा के सीधा कर देता है अब देवा सावित्री के ऊपर कमर पे बैठा था उसका खड़ा लुंड सावित्री की छूट पे टच हो रहा था सावित्री की साँसे भरी होती जा रही थी इतनी देर से देवा उसके बदन के हर अंग से खेल रहा था.

देवा फिर से आयल उठता है और सामने से सावित्री के कंधो से लेकर बूब्स तक सहलाने लगता है तो सावित्री की सिसकारी निकल hi जाती है अब देवा के दोनों हाथो में सावित्री की भरी और बड़ी बड़ी चूचिया थी. देवा उन्हें नीचे से ऊपर की तारा करते हुए मालिश कर रहा था.

देवा – माँ

सावित्री - हम्म्म्म

देवा – कैसा लग रहा है.

सावित्री जैसे नशे में हो गयी थी - बहोत अच्छा लग रहा है देवा पूरा बदन हवा में उड़ रहा है. तेरे हाथो में तो जादू है

देवा अब सविति की नाभि में बूँद बूँद कर के तेल टपकता है

सावित्री - -seeeeeeeeeee डीईईएवाआआआ क्या कर दिया तूने मत कर न………….

देवा पूरा तेल पेट और कमर पे मलने लगता है फिर अपने हाथो में तेल ले कर उसकी जांघो पे लगाने लगता है वो अभी सावित्री की छूट को टच नहीं कर रहा था. हलाकि सावित्री की छूट तो पूरी भीग चुकी थी. एक तो देवा का टच ऊपर से बार बार देवा का खड़ा लुंड उसकी छूट को छू रहा था. देवा उसकी चूचिया मसल रहा था. जंघे सहला रहा था.

थोड़ी देर बाद सावित्री को सहारा देकर खड़ा करता है.

देवा - मए अब तू एक डैम ठीक हो जाएगी जादू देखना है क्या?

सावित्री - वो तो देख hi रही हु इतनी देर से मेरे देवा जादू hi तो कर रहा है तू जो मए तुझे रोक hi नहीं पा रही हु वार्ना कभी मैने तुझे खुद को ऐसे छूने भी नहीं दिया था और अभी तो तू मुझे मसल रहा है.

देवा - अब असली जादू देख और उसके लिए मुझे गले लगाओ

सावित्री - ये क्या कह रहा है देवा हम दोनों hi बिना कपड़ो के खड़े है और तू मुझे गले लगाएगा

देवा - ओफ्फो लगाओ तो जादू दिखता हु.

सावित्री देवा के गले में बहे दाल देती है और देवा अपनी बहे सैंट्री की कमर में दाल देता है दोनों के चेहरे आमने सामने थे और दोनों के बदन एक डैम चिपके हुए थे. उनके होठ भी एक डैम पास आ गए थे.

देवा सावित्री की आँखों में देखते हुए उसे तेजी से अपनी तरफ दबाता है और अपने हाथ जो सावित्री की कमर पे थे उन्हें ऊपर नीचे घुमा के दबा देता है सावित्री की चीख निकल जाती है और उसके होठ देवा के होठो से चिपक जाते है उसे तेज दर्द होता है जिस वजह से वो देवा के होठो को काट लेती है.

थोड़ी देर तक दोनों यु hi खड़े रहते है तो देवा सावित्री के होठो को चूसने लगता है. सावित्री भी अनजाने में hi देवा का साथ देने लगती है देवा सावित्री की गांड पे हाथ रख कर उसे अपनी तरफ दबा देता है जिससे सावित्री की नंगी छूट देवा के लुंड पे दबने लगती है और उसे देवा का लुंड छूट में घुसता हुआ महसूस होता है लेकिन देवा ने अब तक ुंडेरवारे नहीं उतरा था जिस वजह से लुंड छूट में नहीं घुस रहा था.

फिर सावित्री देवा से अलग होती है

देवा – कैसा लग रहा है अब मैडम

सावित्री - बढ़िया सर जी बढ़िया ये क्या किया आपने मेरी कमर तो एक डैम ठीक हो गयी.

सावित्री दये बाये मुद के देखती है ऊपर नीचे होती है वो एक डैम ठीक हो चुकी थी.

देवा - कहा था न जादू दिकहुँगा. देख लो लेकिन इस चक्कर में तुमने तो मेरा होठ hi चबा डाला

सावित्री आगे बढ़ती है और देवा के होठो को चुम लेती है – सॉरी देवा वो नस खींच गयी तो दर्द के मरे गलती से हो गया.

देवा सावित्री को गले से लगा लेता hae.dono यु hi नंगे चिपके खड़े थे. अब दोनों में से कोई भी अलग नहीं होना चाहता था.

देवा – अब मए जाऊ माँ?

सावित्री यु hi देवा को खुद से लिपटाये कड़ी थी.

देवा – बोल न मए जाऊ?

सावित्री - आज यही सो जा न देवा ……

देव – माँ मए तुम्हारे मन की हालत समझ रहा हु और इसका जिम्मेदार भी मए hi हु. ये तुम अभी नहीं समझ पाओगी. लेकिन आगे बढ़ने से पहले मए तुम्हे कुछ बताना चाहता हु. जो जानना तुम्हारे लिए जरुरी है.

सावित्री - जानती हु. यही न के तेरे और पद्मा के बीच भी ये सब चल रहा आहे. लेकिन बीटा पूनम को पता चला तो क्या hoga?ye बात सोच कर आगे बढ़ना उसके आलावा मुझे और कोई दिक्कत नहीं और नहीं मए तुझसे या पद्मा से नाराज हु.

देव – वो सब ठीक है माँ और मए वो सब सोच के hi उस मामले में आगे बदउगा लेकिन अभी मए कुछ और बताना चाहता हु तुम्हे.

सावित्री – और क्या बताना है वो भी ऐसे मोड़ पर जहा आज मए तुम्हरे आगोश में इस तरह हु. कोई परेशानी है क्या?

देव - नहीं माँ कोई परेशानी नहीं है लेकिन जो मए कहने जा रहा हु उसे पहले सुन लेना उसे समझने की कोशिश करना उसके बाद तुम जो कहोगी मए उसके लिए तैयार हु.

सावित्री वही राखी एक चादर उठा कर अपने बदन पे दाल लेती है क्यों की वो देव की गंभीर आवाज़ से समझ गयी थी के देव कोई बहोत बड़ी बात करने वाला है जिससे उसे शायद शॉक भी लगे.

सावित्री – बोलो देव क्या कहना चाहते हो.
 
अपडेट - 243

देव – माँ वो मए…………….

सावित्री - क्या बात है देवा बोल न?

देवा – माँ तुम जानती हो मए कौन हु?

सावित्री - ये क्या बेवकूफी भरा सवाल है देवा? भला मए अपने बेटे को नहीं जाँऊगी क्या?

देवा - ये सवाल बेवकूफी भरा लगता जरूर आहे लेकिन है नहीं. क्यों के आज ऐ तुम्हे अपनी सच्चाई बताने जार अहा हु. खुद से परिचित करवाने जार अहा हु तो जरा ध्यान से और सैयाम से सुन्ना

सावित्री – देवा तेरी बातो से मुझे दर सा लग रहा है तुझे क्या हो गया है ये तू कैसी बाटे कर रहा है?

देवा – माँ तुम बस इतना hi जानती हो के मए तुम्हारे और बाबू जी के प्यार की निशानी हु. तुम्हारा बीटा हु. लेकिन सच्चाई सिर्फ इतनी hi नहीं बाकि इससे बहोत आगे की है.

सावित्री - कैसी सच्चाई देवा. और देख तू कुछ मजाक तो नहीं करने वाला न मेरे साथ ?

देवा – नहीं माँ मए जो कुछ बताने जा रहा हु वो उतना hi सच है जितना ये सच है के हम एक दूजे के सामने बैठे है. हमारे शरीर में आती जाती हवा सांस है. जितनी ये बाटे सच है उतनी hi मेरी बोली जाने वाली हर बात सच है.

……..माँ, बचपन से जवानी तक मए भी यही सोचकर जी रहा था के मेरा नाम देवा है मए सूर्यगढ़ का रहने वाला हु. आप और बाबू जी मेरे माता पिता है और यही घर मेरी पूरी दुनिया है. लेकिन कुछ समय पहले मेरा ये भ्रम टूट गया और जो सच मैने जाना वो अद्भुत है.

सावित्री दरी हुई आवाज़ में - कैसा सच देवा? तुझे किसी ने कुछ उल्टा सीधा तो नहीं बोल दिया न? तू हमारा बीटा hi है हमारे दिल का टुकड़ा. तेरी रगो में मेरा hi दूध है और तेरे बाबू जी का hi खून

देवा – मए जनता हु ये hi सच है माँ. अब तुम बताओ कुछ समय पहले एक दिन हम लोग मां के घर से लौट रहे थे तो बाला ठाकुर ने मुझे मारा था वो दिन यद् है?

सावित्री - है यद् है न वो मए कैसे भूल सकती हु.

देवा – क्या तुमने गौर किया के तब से hi मए धीरे धीरे बदलता चला गया गाँव का अनपढ़ और गंवार देवा एक डैम से इतना smart,stylish और पढ़ा लिखा कैसे बन गया. जहा हम एक माध्यम वर्गीय परिवार से थे वही हमारा ये महल जैसा घर मैने कैसे बना लिया? कैसे मैने ठाकुर को उसके कर्मो की सजा दे दी. इतना सब कुछ सिर्फ इत्तेफ़ाक़ तो नहीं हो सकता न?

सावित्री - सच कहु तो कभी कभी मए ये सब सोचती थी लेकिन फिर सोचा के ईश्वर का धन्यवाद करती के भगवन को हम पर दया आयी होगी और उसने hi तुम्हे दुनिया से लड़ने के काबिल बनाया.

देवा – है माँ भगवन को दया तो आयी hi इसमें कोई शंका नहीं है लेकिन माँ इससे आगे भी सच ये है के मए जैसे तेरा बीटा हु. उसी तरह मेरा एक और सच भी है. जो आज तुम्हे जानना होगा क्यों की वो वक़्त आ गया है.

सावित्री - तुम बोलो मए सुन रही हु.

देवा – माँ ये बात असल में उस दिन से भी 2-4 दिन पहले शुरू हुई थी जिस दिन बाला ठाकुर ने मुझे मारा था और तुम लोगो के साथ बदतमीजी की थी. पर मए अपनी लाइफ में आये इस बदलाव को मन ने के लिए तैयार नहीं था. तब मुझे इन हालत से और इस सच से अवगत करने वाले फ़कीर बाबा ने मुझे एक रत पहले hi बता दिया था के मुझे मेरी शक्ति के बारे में कल पता चल जायेगा के मए कितना सक्षम हु. दूसरे दिन बाला से टकराव हुआ और मुझे अपनी असलियत पता चली. तब उसी फकीर बाबा ने . मुझे अपनी शक्तियों का कुछ अंश दिया और मुझे योग साधना में बैठने और अपनी शक्तियों को जाग्रत करने का तरीका बताया. जब मए उनके हिसाब से तैयार हुआ तब उन्होंने मुझे बताया के मए देवा नहीं बल्कि उससे भी पहले मए देव सिंह हु. नागलोक का युराज देव सिंह. मए ये सब मैंने को तैयार नहीं था. तो वो मुझे नाग लोक ले गए वह के लोगो से वह के मेरे माता पिता से मिलवाया. पूनम……. मेरी पिछले जनम से hi प्रेमिका रही है ये भी मुझे इसी बीच पता चला फिर कलहानी शुरू हुई के हम लोगो का पूरा सच क्यात है? क्या हुआ था किसी समय में? तो मुझे वह बताया गया के…………………

फिर देव ने सावित्री को पूरी बात बताई जिसे सुन कर सावित्री भी अपने आंसू रोक नहीं पायी और देव के गले लग के जोर जोर से रोने लगी.

देव – तो माँ ये है मेरी पिछले जनम की असलियत और ये उतनी hi सच्ची है जितनी ये बात सच है की इस जनम में मैने तेरी कोख से जनम लिया है और मए दीनानाथ का बीटा हु देवा.

सावित्री भीगी आँखों से मुस्कराते हुए - मए तो तुझे बचपन से hi राजा बीटा कहती थी तू तो सच मच का राजा निकला रे. इतना बड़ा है तू.

देवा – है माँ यही सच है लेकिन मए राजा नहीं सिर्फ राजकुमार hu.aur उसमे मेरी कोई योग्यता नहीं ये उस ईश्वर की मर्जी है. जिस तरह यहाँ के राजा मेरे बाबू जी है वैसे hi नागलोक के असली राजा महाराज भैरव सिंह जी है. न मए यहाँ अपने पिता जी के सामने कुछ हु न hi वह मए अपने पिता महाराज के सामने कुछ हु. मए तो इन लोगो के पैरो की धूल का सामना भी नहीं कर सकता.

सावित्री - है मेरे राजकुमार. बहोत समझदार है तू बहोत बड़ी बड़ी बाते करने लगा है. और मेरी पूनम सचमुच की पारी है. तिल्सिम नगरी की राजकुमारी . वाह….. तेरी तो निकल पड़ी रे.

देवा – माँ अब आगे सुनो…….. आज बाबू जी की जो हालत है वो भी मेरी hi वजह से है. मेरे उन दुश्मनो ने मेरे यहाँ न रहने का फायदा उठा के तुम लोगो पर हमला किया था. और अब बाबू जी को बचने का एक hi रास्ता है और वो है के तुम्हारी कोख में बाबू जी के या यु कह लो बाबू जी के शरीर के अंदर बैठे हुए पिशाच के वीर्य से पझले मेरा वीर्य गिरे. क्यों की वो वह जमा हो जायेगा और जब बाबू जी के भेष में वो शैतान तुम्हारे साथ सम्भोग करेगा तो यु तो उन दुष्टो की योजना है उसी समय उन के अंदर बैठा वो पिशाच बाबू जी के शरीर को नष्ट कर के उनका रूप लेकर हम सब पर काबू प् लेगा लेकिन मेरे वीर्य के असर से वो पिशाच खुद hi जल जायेगा. और मेरे बाबूजी की जिंदगी लम्बी हो जाएगी जैसे वो इस हादसे से पहले थे ठीक वैसे hi नार्मल हो जायेगे उनके अंदर से उस पिशाच को निकलने का यही एक मात्र तरीका hae.jisse उन पर फिर से कोई ऐसा जाल नहीं फेंक पायेगा. न hi तुम पर कोई प्रयोग कर पायेगा क्यों की जिस तरह उन्होंने बाबू जी मोहरा बनाया है हो सकता है कभी वो तुम पर ऐसा प्रयोग कर के तुम्हे वश में कर ले और इससे फिर सबकी बर्बादी की कहानी शुरू हो जाये.

सावित्री की आंखे हैरत से फ़ैल गयी - क्या तू सच कह रहा है?

देव – है माँ मैने जो कुछ भी कहा है वो हर एक शब्द सच है. अभी जो हम रिश्ता बनाने जा रहे थे. वो मए तुम्हे अँधेरे में रख के भी बना सकता था और फिर जब तुम्हारा और बाबू जी का मिलान हो जाता तो वो पिशाच मारा जाता और फिर उसके बाद मए तुम्हारे मंद से हमारे मिलान वाली बात मिटा भी सकता था. लेकिन वो तुम्हरे साथ अन्याय होता.

ये सब तुम्हारे लिए जानना जरुरी था वैसे भी एक न एक दिन तुम्हे हम सब की सच्चाई जननी hi थी. वो महाराज यद् है जो हमारी सगाई में आये थे. उनमे से महाराज भैरव सिंह और महारनी नीलमणि मेरे पूर्व जनम के असली माता पिता है और और दूसरे महाराज और महारनी पूनम के माता पिता . उन्ही के साथ जिन्होंने नीलम को बेटी बना लिया था वो नीलम के सच मच के माता पिता थे और रूद्र को बीटा बनाने वाले उसके असली माता पिता.

सावित्री - हे भगवन तूने तो सब को नचा के रख दिया रे. हमें तो बेवकूफ बनाया hi बनाया लेकिन तुम सबने मिल कर अपने पहले के माँ बाप को भी नचा लिया. तुम्हारी पूरी बात सुन के मुझे लग रहा है तुम सब लोग न पहले सुधरे हुए थे न अब सुधरे हो क्या होगा तुम सब का ईश्वर hi जाने इतने नौटंकी बाज़ बच्चे .
 
रेविएवस के लिए धन्यवाद भाई लेकिन ये इन्सेस्ट स्टोरी नहीं है है बस इन्सेस्ट का कुछ तड़का जरूर है इसमें. लेकिन आप स्टोरी लाइन देखो तो कुछ अलग hi है. इसीलिए सावित्री का देवा की स्लेव बन जाना तो स्टोरी लाइन hi मोड़ देगा न? फिर उनके कारनामो पे hi स्टोरी चलेगी और ये इस स्टोरी की डिमांड नहीं है. इसीलिए ऐसा हो नहीं सकता इस स्टोरी में. है कभी कोई इन्सेस्ट स्टोरी लिखी वो भी मैजिक पे तो जरूर ऐसा करेंगे.
 
अपडेट - 244

सावित्री - हे भगवन तूने तो सब को नचा के रख दिया रे. हमें तो बेवकूफ बनाया hi बनाया लेकिन तुम सबने मिल कर अपने पहले के माँ बाप को भी नचा लिया जब की वो तो इतनी शक्तियों के मालिक है फिर भी. तुम्हारी पूरी बात सुन के मुझे लग रहा है तुम सब लोग न पहले सुधरे हुए थे न अब सुधरे हो क्या होगा तुम सब का ईश्वर hi जाने इतने नौटंकी बाज़ बच्चे. वैसे अब ये भी बता दे तेरे इस सच के बारे में यहाँ और कौन कौन जनता है?

देव – यहाँ के लोगो में सिर्फ भाभी जानती है और अब आप. बाकि तो सब मेरे hi साथी है. लेकिन यहाँ आने के बाद मेरे साथियो में गुरुम और चन्नो शामिल हुए जिन्हे मैने सब बता दिया था और उन्हें भी अपनी शक्तियों का कुछ अंश देकर उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाया .

अब बात आती है उन की बारी जिन्होंने ये सब शुरू किया. यानि इस कहानी के शुरुआती बिंदु उनसे भी मिल लो.

देव ने कुछ देर आंखे बंद की और फिर आंखे खोल कर अपनी माँ को सामने देखने का इशारा किया तो वह धीरे धीरे धुआँ उठने लगा और फिर उस धुए ने एक आकृति का रूप ले लिया जिसे देख कर ये पता चल रहा था की कोई साधु वह खड़ा है.

सावित्री - देवा ye…..ye…. कौन है? कही ये hi तो……….?

देवा – है माँ सही पहचाना यही है फ़कीर बाबा.

देवा – प्रनामा बाबा

सावित्री ने भी अपने हाथ जोड़ दिए - प्रणाम बाबा

फब – खुश रहो पुत्री सदा सौभाग्यवती रहो

तभी सावित्री को अपनी हालत का अंदाजा हुआ और उसने तुरंत वही राखी चादर से अपना नंगा पैन धक् लिया

सावित्री - क्षमा करे बाबा मए इस हालत में आपके सामने हु.

फब – कोई बात नहीं पुत्री मए समझ रहा हु के देव ने तुम्हे इसी हालत में रोक कर सब बताया तो तुम्हे अपना होश भी नहीं रहा लेकिन जो भी देव ने तुम्हे बताया है वो सब पूर्णतय सत्य है. इसीलिए इस पर या इसकी किसी भी बात पर संदेह मत करना. ये सब नियति hi है. इंसान तो कर्मो से बंधा होता है. और अपने कर्मो के आधार पर hi जनम लेकर अपना जीवन बीतता है.

सावित्री – नहीं बाबा मए कोई संदेह नहीं कर रही इस पर, क्यों की अगर ये चाहता तो सब कुछ कर भी लेता और मेरे दिमाग से सब मिटा भी देता लेकिन इसने सब कुछ सच बता कर. अच्छा hi किया. मुझे भी तो पता चला इसका असली राज़ जो दुनिया वालो के लिए सपने में भी मुमकिन नहीं है. वो सच आज मए जानती हु. और मए खुश हु बाबा. आपने इसे सही राह दिखाई इसके बिछड़े हुए और इसकी याद में तड़पते हुए माँ बाप से इसे मिलवाया. मए इसकी उस माँ के दिल की हालत का अंदाज़ा लगा सकती हु. क्या बीती होगी उस बेचारी पर जब उस समय उस लड़ाई में इसकी…………….

……………मुझसे तो इसके लिए वो लफ्ज़ बोले भी नहीं जायेगे और उस माँ ने इसे hi उस हालत में देखा होगा. और फिर आपके कहने पर उसने इतने साल इसका इंतजार किया. धन्य है वो माँ और उसका पुत्र प्रेम. उसे मेरा प्रणाम है.

फब - है बेटी तुमने सही कहा बहोत तरसे है वो लोग देव और पूनम के लिए.

सावित्री – बाबा इतना सब होने पर भी देव को आपने उन्हें क्यों नहीं सौपा यदि हमारे सामने साडी बाटे रख के देव जाना चाहता तो हम उसे कभी नहीं रोकते उन माँ बाप का अधिकार इस पर हमसे कही ज्यादा है उन्हें उनके इतने लम्बे इंतजार के बाद भी कुछ नहीं मिला वो माँ आज भी अपने इस लाल को सीने से लगन ेके लिए तरस hi रही है वो भी हमारी वजह से? मए ये सोच कर hi शर्मिंदा हो रही हु.

फब - नहीं बेटी ऐसा मत सोचो और दुखी भी मत हो क्यों की हर इंसान का एक कर्म क्षेत्र होता है और वो जहा जनम लेता है उसे वही के हिसाब से चलना होता है ये इसके पहले के माँ बाप का प्रेम hi था जो इसे ये सब यद् रहा वार्ना मौत तो सबको आती है और फिर उस आत्मा का पुनर्जन्म भी होता hi है.

यदि सब ऐसा सोचने लगे तो जीवन चक्र आगे hi नहीं बढ़ेगा किसी की मौत का कोई अर्थ hi नहीं निकलेगा क्यों की वो दुबारा जनम लेकर अपने पहले के रिश्तेदारों के पास चला जायेगा ऐसे तो साडी सृष्टि hi रुक जाएगी.

इसीलिए ईश्वर जैसा जिसे चलता है बहोत सोच समझ कर hi चलता है उस से बड़ा कोई नहीं. इसीलिए तुम बेफिक्र होकर रहो और अपने देवा को वही प्रेम दो जो उसे बचपन से देती आयी हो. और उसके साथ hi जैसे की अभी हालत बन गए है तो अब जो देव करने जा रहा है उसमे भी इसका साथ पूरे मन से देना तभी तुम्हारे पति की आयु लम्बी होगी और दुश्मनो की चल नाकाम होगी. उसके आगे तो देव है hi उनसे निपटने के लिए. किन्तु उनका सामना करने से पहले तुम्हारे पति को उनके चंगुल से सुरक्षित निकलना पहला और महत्वपूर्ण काम है देव के लिए.

सावित्री – जो आज्ञा बाबा.

फब – देव मए चलता हु अपना ख्याल रखना .

देव – जी बाबा प्रणाम

फिर वह से फब गायब हो जाते है. और रह जाते है सिर्फ देव और सावित्री .

देव – माँ क्या तुम तैयार हो ?

सावित्री - है मेरे लाल मए तैयार हु तुझे एक नए रूप में पाने के लिए.

देवा बिना कुछ कहे सावित्री के तन से लिपटी चादर को पकड़ के धीरे से अलग करता है और उस को गॉड में उठता है और बिस्तर पे लिटा देता है. लेकिन सावित्री उससे चिपकी hi हुई थी वो उसे नहीं छोड़ती तो देवा सावित्री के ऊपर आ जाता है और अपने होठ सावित्री के होतो से जोड़ देता है.

दोनों फिर से बुरी तरह एक दूसरे के होठो को चूसने लगते है. देवा के हाथ सावित्री की चूचियों पे चले जाते है और वो उन्हें दबाने लगता है. अपनी ऊँगली और अंगूठे में निप्पल को लेकर मसलने लगता है. सावित्री भी देवा की पीठ सहलाते हुए सिसक रही थी और अपनी एक तंग देवा की कमर पे लपेट के उसे और जोर से खुद से चिपका देती है.

तभी बहार तेज आंधी चलने लगती है कमरे की खिड़किया खुली थी तो तेज हवा अंदर आने लगती है. लेकिन देवा और सावित्री का ध्यान इन बातो पे था hi कहा. वो तो दोनों एक दूजे में सामने के लिए व्याकुल हुए जा रहे थे. देवा धीरे धीरे नीचे आता है सावित्री के पेट पे चूमता है फिर अपनी जबान सावित्री की गहरी नाभि में दाल देता है.

जिससे सावित्री के बदन में एक आग सी जलने लगती है और वो मचल कर अपने हाथो से अपने hi बेटे के सर को अपनी नाभि पे दबाने लगती है. बिना एक शब्द बोले दोनों अपने अपने प्यार का इजहार कर रहे थे.

फिर देवा ने अपने हाथ ऊपर किये और सावित्री के बूब्स को जोर से मसलने लगा...

फ्रेंड्स अभी अपडेट ख़तम नहीं हुआ नेक्स्ट पेज में कंटिन्यू है सो रीड मोरे....
 
अपडेट - 245

सावित्री- uumm...uumm..aahh...aaram से देवा...

थोड़ी देर तक देवा ने बूब्स मसलता रहा जिससे सावित्री खुमारी से भर्ती जा रही थी फिर देवा घुटनो पर बैठ कर बूब्स को चूसने लगा...

देवा ने अपनी जीभ सावित्री के निप्पल पर फिरनी सुरु की तो सावित्री की आह निकलने लगी...

सावित्री- aahh.Deva...karte raho..uuummm...- ohh...aise hi ..aahh...taras गयी थी मए इन लम्हो के लिए देवा………..

देवा निप्पल चूसते हुए सावित्री के पेट को सहलाते हुए सावित्री की छूट को सहलाता है...

सावित्री- aahh...karte raho...maza आ रहा hai...aahhh...

देवा ने फिर सावित्री के एक बूब्स को मुँह में भरा और चूसने laga..sath hi साथ अपना हाथ सावित्री की छूट पर फिरता raha...aur धीर धीर अपनी दो ऊँगली एक साथ सावित्री की आग सी धधकती चूतमे दाल दी और धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा जहा से सावित्री गरम और चिकना पानी छोड़ रही थी.

सावित्री- uumm...aahh..Deva...choose lo...aaahh...maaa..aise hi...uumm.. ूनंगली निकालो देवा अब इस ऊँगली से काम नहीं चलेगा …. मेरे ला…. देवा मुझे तृप्त कर दे…. समां जा मुझमे देवा….

अब देवा भी पूरा गरम हो गया था और वो सावित्री के बूब्स को जोर से चूसते हुए काट भी रहा था...

सावित्री- aaiiii..Deva..kato मत na..aahhh...nhi na...ohh..plzz... aahh..mmmaaaa...

देवा ने सावित्री के दोनों बूब्स को चूसे कर लाल कर दिया और साथ में उसके हाथ ने सावित्री की छूट का पानी निकल दिया...

फिर देवा सावित्री की चूचिया मसलते हुए साथ में अपनी जीभ उसके पेट पर फिरने laga...sath hi हाथ से सावित्री की छूट का दाना सहलाने लगा...

और जीभ फिरते हुए सावित्री की नाभि पर पहुंच gaya...aur जीभ नाभि में दाल दी...

सावित्री तो जैसे पागल hi हो गई थी और jor-jor से आवाज़े निकलने लगी...

सावित्री- aahh...Deva...kya kiya...aahh...pagal कर डोज tum...ohh..maa...kha जाओ mujhe...aaahhh..

अब सावित्री ने भी अपनी टाँगे पूरी खोल दी और देवा ने भी जल्दी से सावित्री की छूट को मुँह में भर लिया...

देवा- ओह्ह्ह्हह्हह्हआआआ uumm..uumm..uumm..

सावित्री- aahhh...aaahh...Deva…...kha jao...aaahhh ..

देवा सावित्री की छूट को दांत गदा रहा था और चूसे जा रहा था... सावित्री भी अपनी गांड उठा कर छूट को देवा के मुँह में भर रही थी...

सावित्री- है Deva...kha jao...oohh..joor se..yes...yes..uiiiiiiiiiii maaaaa...aaahhhh

देवा ने फिर छूट के अंदर अपनी जीभ घुसा दी...

सावित्री- aaaahhhhhh....joor se...ohh ...yess...yess..yess..

सावित्री जोश में आकर अपने हाथ से देवा के सर को छूट पर दवाने लगी..

थोड़ी देर बाद देवा ने छूट चूसना बंद किया और खड़ा होकर अपने लुंड को छूट पर सेट किया...

देवा ने हल्का सा धक्का मारा तो आधा सूपड़ा छूट में चला गया...

और तभी तेज बिजली चमकी और झमाझम बारिश शुरू हो गयी देवा ने एक नजर खिड़की के बहार देखा तो सावित्री ने भी उसकी नजरो का पीछा किया फिर दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा और मुस्करा दिए. देवा ने फिर से अपना ध्यान छूट पे लगाया तो समझ गया की छूट बहोत गरम है क्यों की बहोत दिनों से इसमें लुंड नहीं गया बाबू जी का..

और फिर देवा ने एक जोरदार धक्का मारा और आधे से ज्यादा लुंड अंदर...

सावित्री- aaaiiiiiiii...maaarrrr...gaaaaii...aaaaahhhhh...aaahhh...devaaaaaaaaaaaa

देवा- बस थोड़ा दर्द और... माँ बस हो गया अब तो

और देवा ने दूसरा धक्का मारा जिससे लगभग पूरा लुंड hi अंदर चला गया बस 2 इंच hi बहार था क्यों की दन से देवा का लुंड बड़ा hi था और मोटा भी साथ hi उम्र के हिसाब से भी देवा का लुंड ज्यादा मजबूत था वो जनता था के पूरी ताक़त लगाना सही नहीं है क्यों की सावित्री एक आम औरत है जो देवा की शक्ति को नहीं झेल पायेगी इसीलिए देवा अब रुक गया लेकिन सावित्री के पसीने निकलने लगे थे उसके सर से चुदाई का भूत उतर चूका था उसकी आँखों में आंसू आ गए थे.

देवा ने झुक कर सावित्री की चुकी को मुँह में भरा और उसकी एक निप्पल को मसलते हुए दूसरी को चूसने लगा सावित्री भी देवा के सर को सहलाते हुए हलके हलके सिसक रही थी थोड़ी देर के बाद सावित्री की बुर देवा के लुंड के हिसाब से एडजस्ट हो गयी तो देवा नेहलके धक्के मरना शुरू कर दिए सावित्री अब भी सिसक रही थी लेकिन अब उसकी सिसकारियां दर्द की नहीं मजे किट hi

सावित्री- aaahhhhhh...Deva ...ohh...maarrrr..gai...aahh..maaaa...oohh..oohh..itna दर्द तो तेरे बाबू जी के साथ भी कभी नहीं हुआ ree………………..aaahhhahhhhh

सावित्री की सील टूटने के जैसा दर्द उसे दुबारा मिल रहा था उसे लग रहा था के उसने लुंड पहली बार अंदर तक लिया tha...isliye वो दर्द से तड़प रही थी...

देवा ने सावित्री को नार्मल करने के लिए झुक कर उसे किश करना सुरु कर दिया और हाथ से उसकी गांड सहलाने लगा...

थोड़ी देर बाद जब सावित्री नार्मल हुई तो उसने अपनी गांड हिलना सुरु कर दिया....

सावित्री- aahh..ab ठीक है देवा ...सुरु हो jao...aur अब रुकना मत मए तरस गयी थी तेरे लिए देवा…. तू सिर्फ मेरा है मेरे रहते तू किसी और का नहीं हो सकता देवा…… छोड़ मुझे आज देवा समां जाओ मुझमे पूरा.

देवा ने सावित्री का पेअर उठाया और धक्के मरना सुरु कर दिया....

सावित्री- aaahh...aahh..aahh...uumm..karte रहो Deva..aahhh..

देवा- कैसा लग रहा Maa...asli लुंड खा kar..haaa..

Savitri-uuuummmmmm…..pahli baar…..itna..aahhh…maza……aaahhhhhh…

देवा- है माँ ...मज़े lo...yes...yes...yes...

सावित्री- aahh…maza…aaa…gggayyyyaa…aahhh…..aahhh..ahhh... तू तो पने बाप से भी ज्यादा मजेदार निकला रे

देवा अब फुल स्पीड से सावित्री को छोड़ने लगा और सावित्री गांड उठा -उठा कर देवा का लुंड खा कर मज़े लेने लगी....

देवा- yes...yess...yess..wah माँ ...मस्त छूट hai...ekdum टाइट ...आह्हः...

Savitri-to मज़े lo...aahhh...joor से देवा ...और तेजज ..aaahhh..mae तो समझ रही थी तेरे बाप की चुदाई से मेरी पूरी ढीली हो गयी होगी लेकिन तुझे टाइट लग रही है. शायद तेरा लुंड तेरे बाप से ज्यादा मोटा है इसलिए क्यों की मुझे भी बहोत कैसा हुआ लग रहा है देवायआ,,,, उईईईईई आअह्हह्ह्ह्ह छोड़ता जा देवा रुक मत.

तभी देवा ने एक और तगड़ा धक्का मारा जिससे पूरा लुंड सावित्री की बुर में जड़ तक समां गया सावित्री की चीख निकल गयी और उसकी आंखे भी बहार को आ गयी

सावित्री aaaaaaaaaaaahhhhhhh…devaaaaaa………aaaaahhhhhhuuuuuuuhhhhh
 
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