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शलाका - (शरारती मुस्कान के साथ) आपकी चाहने वाली ऊपर क कमरे में आपका इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रही है. इसलिए यहाँ से मत जाइये बहार से अपने कमरे में जाइएगा.
देवा - ठीक है
फिर देवा अपनी आँखे बंद करता है और ऊपर खेतो में एक तरफ जहा घने पेड़ थे वह निकलता है और सीधा अपने कमरे में आता है तो देखता है की देवकी उसका इंतजार कर रही थी.
देवकी – आ गए लात साब कहा चले गए थे तुम?
देवा – अरे काकी तुम कब आयी? देवा ने अंदर आते हुए दरवाजा बंद कर दिया.
देवकी - मुझे तो आये हुए थोड़ी देर हो चुकी है पर तू कहा गया था. खेतो में भी नहीं था.?
देवा – अरे वो पास के खेत में था अपने दोस्तों के साथ वही देर हो गयी.
देवकी - अच्छा आ बैठ भी अब खड़ा hi रहेगा क्या?
देवा - काकी कोई काम था क्या ? (जान बुझ कर)
देवकी - हां रे काम तो था पर वो छोड़ तुझसे कुछ बात करनी थी.
देवा – है काकी बोलो
देवकी – देवा आज मए जब तेरे घर आयी थी अपने मन में कुछ बाते ले कर आयी थी जो मुझे तेरी माँ से करनी थी. और मैने तेरे निकलने के बाद उनसे वो बाते की है. और तेरी माँ ने कहा है ेके घर में सब से पूछ कर बताएगी.
देवा – ऐसी क्या बात है काकी कुछ चाहिए था तो मुझे बता देती. मए हु न जो कहती दे देता.
देवकी - अरे तेरे घर की सबसे अनमोल चीज़ hi मांगी है मैने तेरी माँ से. जब वो तुझे बताये तो सोच समझ कर फैसल करना कोई जबरदस्ती नहीं है. के तू है hi कहे. बाकि की बाते तुझे तेरी माँ hi बताये तो बेहतर रहेगा.
देवा – ठीक है काकी जैसा तुम कहो.
थोड़ी देर की ख़ामोशी उन दोनों के बीच आ जाती है दोनों hi कुछ कह नहीं प् रहे थे न hi कोई आगे बाद रहा था. देवा ने अपना कुरता उतरा और अपने जिस्म से पसीना पोंछने लगा. देवकी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी अब देवा को कुछ न करते देख देवकी उठ कड़ी हुई और बोली.
देवकी – ठीक है देवा मए चलती हु बस तुझसे मिलना था मिल लिया तेरी माँ जो भी कहे उसे ध्यान से सुन कर समझ कर फैसला करना . अब मए चलती हु. जैसे hi देवकी दरवाजे की तरफ बड़ी देवा ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी गॉड में खींच लिया . वो सीढ़ी आकर देवा के लुंड पे बैठी. तो उसकी सिसकारी निकल गयी इतना बड़ा लुंड जो उसकी गांड में चुभा था.
देवकी – seeeeeeeeeeeeee devaaaaaaaaaaa क्या करता है मुझे जाने दे अब जो बात करनी थी कर ली.
देवा – जो करनी थी वो कहा की है अभी? इतना कह कर वो देवकी की नंगी चिकनी कमर को सहलाने लगा और उसके कंधे पे अपनी जबान से चाटने लगा.
देवकी की हालत ख़राब होना शुरू हो गयी. – देवा ऐसा मत कर न
देवा – क्यों तुम hi तो चाहती थी के मए ये करू कल hi तो कहा था करना है .
देवकी - अरे मए भला क्यों कहने लगी.
अब देवा ने अपने हाथो को उसकी कमर से ऊपर कर के उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को थाम लिया हलके हाथो से दबाने लगा जिससे देवकी के निप्पल खड़े हो गए.
देवकी - ohhhhhhhhhhhhhhh देवा क्या जादू है तेर हाथो में इस उम्र में भी तूने मुझे सिर्फ ऊपर से छूकर hi गीला कर दिया ऐसा तो कभी रामु के बापू भी नहीं कर पाया
देवा – “देवकी का चेहरा अपनी तरफ घुमाकर उसकी आँखों में झांकते हुए” काकी जादू पूरा देखना
देवकी ने भी हां में गार्डन हिला दी और शर्मा गयी
देवा ने उसका मुँह अपनी तरफ किया और उसके दोनों पैर अपने दये बाये कर दिए जिससे दवकी की चूचिया अब देवा के सीन में पीसने लगी. देवा उसके होठो को चूमने लगा तो देवकी ने भी साथ दिया फिर देवा ने अपनी जबान देवकी के मुँह में दाल दी और उसके होतो को चूसते हुए उसकी गांड को दबाने लगा साथ hi उसकी गोरी गोरी जंघे जो देवा की गॉड में बैठने पर साड़ी के ऊपर होने से नंगी हो चुकी थी उन्हें सहलाने लगा
देवकी भी देवा के बालो में उंगलिया घूमते हुए इस मिलान का मजा ले रही थी देवा का लुंड एक मोठे डंडे की तरह उसे अपनी छूट के मुँह पे चुभ रहा था और उसकी छूट भी अब पानी बहाने लगी थी.
देवा ने देवकी को खड़ा किया और उसके बदन क एक एक अंग को चूमते हुए उसे नंगी करने लगा देवकी ने ब्रा या पेंटी तो पहनी नहीं थी फिर भी उसकी चूचियों और गांड का शेप कमल का था.
तभी देवकी ने भी देवा की धोती की गाँठ पकड़ के खिंच दी और देवा भी पूरा नंगा हो गया . देवा का जिस्म देख कर देवकी की छूट में आग लग गयी ऐसा विशाल शरीर, पत्थर के सामान कठोर उभरा हुआ सीना, मजबूत हाथ पाँव और सबसे रोचक चीज़ देवकी के लिए . देवा का खड़ा लुंड जो किसी अजगर की भाटी लग रहा था. इतना लम्बा और मोटा लुंड और फूला हुआ सूपड़ा देवकी से रहा नहीं गया वो सीढ़ी देवा की छाती से लग गयी और उसे बेतहाशा चूमने लगी. और चूमते हुए वो धीरे धीरे नीचे आयी और देवा का लुंड पकड़ कर उसे जोर जोर से चूमने लगी . वो बार बार देवा के लुंड को चूमती फिर उसकी जांघो को चूमती और देवा की गांड को अपने नाजुक हाथो से सहलाती वह नाख़ून गदति. फिर जैसे hi वो देवा के लुंड को चूमने लगी देवा ने उसका चेहरा पकड़ के उसके होतो पे अपना लुंड अंदर को दबाया देवकी पहले तो समझी नहीं फिर देवा ने कहा
देवा – काकी मुँह खोलो इसे अंदर डालना है
देवकी - पागल हुआ ये इसे मुँह के छेड़ में नहीं डालते बावले इस के लिए दूसरा छेड़ तैयार है कब से. डालना है तो वह दाल
देवा – अरे काकी मुँह में लो न कभी काका ने मुँह में नहीं दिया क्या.
देवकी ने इंकार में गार्डन हिला दी तो देवा ने फिर इशारा किया देवा का इशारा प् कर देवकी ने अपना मुँह थोड़ा सा खोला तो देवा ने लुंड को होठो में रख क्र हल्का सा धक्का दिया जिससे देवा का सूपड़ा थोड़ा अंदर गया जो देवकी को अच्छा लगा देवकी अब उसे चाटने लगी और फिर देवा और धक्का दिया तो थोड़ा सा लुंड और अंदर गया अब तो देवकी को भी मजा आने लगा देवा का लुंड चूसने में वो बार बार लुंड पूरा मुँह से निकलती और उसपे अपनी जबान फिरती और फिर से मुँह में लेती कोई 10 मिनट तक देवकी देवा का लुंड चुस्ती रही और देवा उसके सर पे हाथ रख कर हलके हॉकर उसके मुँह को छोड़ता रहा फिर दवकी उठी .
देवकी - देवा अब नहीं रहा जाता गाड़ दे न ये खूटा मेरी इस प्यासी जमीन में कई साल हो गए इसका स्वाद लिए वैसे भी जो मैने लिया वो तो इससे आधा भी नहीं था मरियल सा था. जो इतनी देर में तो 3 बार झाड़ जाता पर तूने तो अब तक डाला भी नहीं देख डालते hi झाड़ मत जाना .
देवा( है कर) काकी कब झड़ना है ये मुझे पता है तू चिंता मत कर मए तब तक तुझे पेलूगा जब तक तेरे में चलने की हिम्मत रहेगी.
देवा ने देवकी की एक टांग वही राखी चारपाई पे राखी और खुद नीचे बैठ कर देवकी की बुर पे अपने होठ रख दिए. देवकी तो सर से पैर तक काँप गयी आज तक उसे ऐसा सुख नहीं मिला था किसी ने उसकी छूट पे होंठ नहीं लगाए थे ये पहली बार था
देवकी – devaaaaaaaaaaaaa क्या कर दिया रे तूने मत कर ये गन्दी जगह है.
देवा ने कोई जवाब नहीं दिया और अपनी जबान निकल के देवकी की बुर को चाटने लगा देवा की खुरदुरी जबान अपनी बुर पे महसूस कर के देवकी 2 मिनट में hi देवा का सर अपनी बुर पे दबा कर झाड़ गयी देवा ने भी देवकी का पूरा पानी पी लिया और सीधा खड़ा हुआ.
देवकी तो पागल हो चुकी थी उसने झपट कर देवा का चेहरा पकड़ा और उसके होतो को और गलो को चाटने लगी जिस पर उसकी hi छूट का पानी लगा था. साथ hi वो देवा के गलो और होठो को हल्का हल्का काटने लगी .
देवकी – देवा क्या कमल किया है तूने आज तक अपनी पूरी जिंदगी में मैने ये एक बार भी नहीं किया आज तूने मुझे नया सुख दिया है देवा . बड़ी खुशनसीब होगी वो लड़की तू जिसे अपनी पत्नी बनाएगा उसे तो पूरी दुनिया की ख़ुशी मिल जाएगी. इतना कहते hi देवकी के दिमाग में पूनम का चेहरा आ गया. और चेहरे पे मुस्कान भी.
देवा ने देवकी को वही पलटा के झुकाया और उसके हाथ चारपाई पे रख दिया और पीछे से उसकी बुर पे अपना लोढ़ा सेट कर क एक धक्का मारा तो देवा का सूपड़ा पूरा घुस गया . और देवकी ने हलकी सी चीख निकली. पर जब देवा ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ कर दूसरा धक्का मारा जिसमे देवा का 6 इंच लुंड एक साथ देवकी की बुर को चीरता हुआ घुसा तो उसे दिन में टारे नजर आ गए देवकी , devaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa uiiiiiiiiiiii mmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaahhhhhhhhhhhh देवा
देवा ने बिना रुके अब उसकी चूचिया पकड़ी और आखरी झटके में अपना बाकि का लुंड घुसा दिया देवकी की हालत ख़राब हो गयी
देवकी देवाआआआ नहीं naaaaaaaaaaaaaa रुक jaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaahhhhhh devaaaaaaaaaaaaaa उउउउउउउउउठ्हहहहह देवा आआआआआ
देवा ने उसकी चूचिया पकड़ के बिना देवकी की बात सुने उसे ठोकना चालू कर दिया
देवकी - देवा रुक जा मए मर जोगी यह यह यह यह यह ुह्ह्ह्हह्ह देवा नहीं, दो मिनट रुक जा आआआह्ह्ह्हह्ह ह अहहहह देवा मुझे सांस तो लेने दे पर देवा बिना रुके उसे चोदे hi जा रहा था उसकी पपीते के सामान बड़ी बड़ी चूचिया देवा के पंजे की गिरफ्त में थी देवा ने अब निप्पल को उमेठना शुरू किआ और देवकी की गार्डन पे चूमते हुए उसकी पीठ सहलाते सहलाते धक्के जोर जोर से मरने लगा तभी देवकी ने अपनी छूट को सिकोड़ दिया और भलभला के फिर से झाड़ गयी
देवा ने उसे अपने बहो में लिया और नीचे से उसकी बुर में अपना लुंड सेट कर के देवकी को हल्का सा नीचे पुश किया और उसी समय नीचे से धक्का मारा देवकी अपनी बहे देवा के गले में दाल के देवा को पकड़ा हुआ था देवा अब उसे खड़े खड़े hi छोड़ रहा था और देवकी की चूचिया पी रहा था. देवकी को तो स्वर्ग के दर्शन होने लगे. वो भी देवा को चुम रही थी यहाँ धक्के छूट पे पद रहे थे और उसका अंग अंग ढीला हो रहा था और देवकी कभी देवा के होठ चूमती तो कभी गार्डन कभी कान को चुस्ती कभी देवा के कंधे पे अपने दांत गदा देती इसी खतरनाक चुदाई में देवकी फिर से झाड़ गयी उसका गाला सूख रहा था पर देवा पे तो अभी चुदाई का भूत सवार था देवा ने देवकी को अब खटिया पे लिटाया और उसके पैर अपने कंधे पे रख दिए और खुद नीचे खड़ा हो कर अपना लुंड देवकी की बुर में एक hi झटके में पूरा घुसा दिया इस बार देवकी को ज्यादा तकलीफ नहीं हुई क्यों की उसकी बुर बहोत पानी छोड़ने की वजह से चिकनी भी हो गयी थी और अब तक देवा के लुंड के हिसाब से एडजस्ट भी हो चुकी थी.
देवा लगातार देवकी को छोड़ रहा था तभी उसकी नजर. सामने गयी तो उसने देखा. सामने शलाका कड़ी उसे देख रही थी उसके चेहरे पे हैरानी के साथ साथ मुस्कान भी थी और आँखों में लाल डोरे भी. देवा ने उसे देख के आँख मारी और मुस्करा दिया और उसे इशारे से जाने के लिए कहा
शलाका – चिंता मत करो देवा मुझे आपके आलावा न कोई देख सकेगा न सुन सकेगा. आप मुझसे बात मत करना वार्ना ये आपको पागल समझने लगेगी. और इतना कह के शलाका हसने लगी और देवा से लगे रहने को कहा और वही खड़े हो के देवा की चुदाई देखने लगी .
अब तक देवकी इस पोजीशन में भी दो बार झाड़ चुकी थी और देवा पूरी ताक़त से उसे छोड़ रहा था.
देवकी - aaaaaaaaaahhhhhhh देवा बस कर पूरी कसार आज hi निकलेगा क्या अब छोड़ मुझे मेरी छूट का पानी भी सूख गया है अब जलन हो रही है .
देवा - क्या हुआ काकी पहले तो कह रही थी अच्छे से छोड़ना अब छोड़ने को कह रही हो
देवकी – देवा तूने तो आज इतना छोड़ा है जितना मए रामु के बापू से एक महीने में नहीं चुदती थी.
देवा - बस काकी हो गया थोड़ा सा और ले ले मेरा लोढ़ा और देवा तेज तेज शॉट मरने लगा कमरे में थप थप की आवाजे गूंज रही थी
अब देवा ने देवकी की टंगे सीढ़ी की तो उसकी कमर को कुछ आराम मिला पर वो कुछ सेकंड का था देवा अब देवकी को पूरी तरह गले से लगाया और उसे बहो में भर के उसके होठो पे होठ रखे और तूफानी धक्के मरने लगा देवकी के होठो से गन गन की आवाज़े निकलने लगी वो गहरी साँसे ले रही थी और देवा ने जोरदार धक्का मारा और अपना लुंड देवकी की बच्चेदानी तक दाल के चिपका दिया और अपना पानी देवकी की बुर में छोड़ने लगा देवकी सिहर उठी और एक बार और झड़ने लगी करीब 5 मिनट तक देवा का लुंड रुक रुक कर धार छोड़ता रहा फिर देवा ने अपनी पकड़ ढीली की देवकी की तो हालत ऐसी हो गयी थी जैसे उसे किसी ने कई किलोमीटर तक दौड़ाया हो बाल बिखरे हुए पूरा जिस्म लाल पद गया था और वो हांफ रही थी पर यहाँ देवा उठ के खड़ा हुआ और अपना लुंड देवकी की बुर से निकला तो नार्मल था न उसे कोई थकन थी न hi वो हांफ रहा थान ा कोई चुदाई की थकन. जैसे कुछ हुआ hi न हो उसका लुंड अब तक आधा खड़ा हुआ था . वो देवकी के सिरहाने गया और अपना लुंड देवकी के होठो पे रखा देवकी ने उसे मुस्करा के देखा और देवा का लुंड चूस लिया .
देवा ने इधर उधर देखा तो शलाका जा चुकी थी.
थोड़ी देर के बाद देवकी भी उठ के बैठी तो उसकी चीख निकल गयी उईईईईई माआआआ मार डाला इस देवा ने. जब झुक कर देखा तो उसकी बुर सूज गयी थी और पूरी लाल पद गयी थी.
देवकी - देवा ये क्या किया तूने देख कितनी सुजा दी है.
देवा - मैने तो कहा था चल नहीं पाओगी. तुम hi मुझे उकसा रही थी.
देवकी - मए क्या कीर्ति मुझे तो अपने पति के लुंड की hi आदत थी मुझे क्या पता था की कोई किसी को ऐसे भी छोड़ सकता है तूने तो मेरी बुर फाड़ दी इतना दर्द तो मुझे सुहागरात में भी नहीं हुआ था तब तो मेरे पति ने मुझे दो बार छोड़ा था. तूने एक hi बार में मुझे अधमरा कर दिया रे सैंड कही के. देवा – तो चल दुबारा मए भी छोड़ देता हु. तू मेरे लुंड को पकड़ तो सही ये फिर खड़ा हो जायेगा और फिर चुदाई करेगा तेरी बुर की.
देवकी – मेरा दिमाग ख़राब नहीं हुआ है जो तेरे लुंड को हाथ लागू. मेरी इतने समय की पूरी प्यास तो तूने एक बार में hi बुझा दी. बहोत देर हो गयी है. अब मुझे जाना चाहिए फिर मिलेंगे देवा.
दोनों ने अपने कपडे पहन लिए और देवकी चलने लगी तो उसकी चाल में थोड़ी लड़खड़ाहट थी. वो थोड़ी देर वही पे कमरे में चलती है और फिर बाहर निकल जाती है.
देवा भी कपडे पहन कर हाथ मुँह धो कर खुद को सही करता है. और घर की तरफ निकल पड़ता है.
घर आया तो सब के चेहरे पे आज ख़ुशी की चमक थी. जिसे देख कर देवा को बहोत अच्छा लगता है. फिर वो सब खाना कहते है तो.
देवा – क्या बात है माँ आज इतना बढ़िया खाना बनाया है. और सब लोग खुश भी दिख रहे है. बात क्या है?
दन- अरे बीटा ये बात तो मए सुबह से पूछ रहा हु ये तेरी माँ और भाभी बस मुस्कराये जा रही है कुछ बताती hi नहीं बार बार यही कहती है के देवा के आने तक रुक जाओ फिर बतायेगे.
देवा – क्या बात है माँ अब बता भी दो
फिर सावित्री उन्हें बताती है क देवकी ने अपने बेटे के लिए पायल का हाथ माँगा है और उस पर सब के विचार क्या है बताये.
दन देवा की तरफ देखता है और देवा दन की तरफ फिर दोनों एक साथ मुस्करा देते है.
दन - अरे भाग्यवान ये तो बहोत अच्छी खबर सुनाई तूने मुझे तो कोई एतराज नहीं मए रामु से मिल चुक्का हु बहोत अच्छा लड़का है, क्यों देवा?
देवा – बिलकुल सही है बाबू जी. मुझे भी पायल के लिए रामु सही लगा. माँ वैसे तुमने ये गलत किया. जब सुबह काकी बता के गयी तो बाबू जी से बात कर के उसी समय आप बात को आगे बड़ा देती. मेरे लिए रुकने की क्या जरुरत थी आप लोग इस घर के बड़े है, और फिर भाभी भी तो थी आप के साथ.
सावित्री - है बीटा बहु से तो मैने उसी समय बता दिया था उसने भी तुरंत है कर दी लेकिन मए तेरे बाबू जी को तेरे सामने बताना चाहती थी और दोनों का फैसला एक साथ चाहती थी.
दन- तेरी माँ सही कह रही है देवा अब तू hi तो संभालता है इस घर को तो तेरी सहमति के बिना हम कोई भी फैसला कैसे ले सकते है.
देवा – माँ हम सबने तो है कह दी लेकिन पायल का विचार भी तो जान लो. देवा ने पायल को देख लिया था जो रसोई में कड़ी सब बाटे सुन के मुस्करा रही थी और उसकी मुस्कराहट सब बता रही थी के उसे भी रिश्ता मंजूर है.
देवा – पायल यहाँ आना
पायल - जी भैया
देवा – तुझे ये रिश्ता मंजूर है? तूने भी तो रामु को देखा hi है. अगर na-pasand हो तो अभी कह दे . बाद में मत बोलना.
पायल - जैसा आप सबको सही लगे भैया. मुझे आप लोगो की हर बात मंजूर है. और मुस्करा के वह से चली जाती है.
दिया - देवर जी आप निश्चिन्त रहिये मैने सुबह hi पायल से अकेले में पूछ लिया था. वो बहोत खुश है इस रिश्ते से. बल्कि मुझे तो एक बात और पता चली है?
देवा – वो क्या भाभी?
देइया - पिछले साल जब रामु यहाँ आया था पद्मा काकी के घर अपनी माँ को लेने तो उसने हमारी पायल से दोस्ती भी की थी तब. और पायल तो तब से उसे चाहने लगी है बस दोनों ने न तो एक दूजे से कुछ कहा न उनका प्यार आगे बड़ा न hi ये बात हम सबको पता चली.
देवा – अरे वाह मतलब इस रिश्ते में तो भगवन की भी मंजूरी है क्यों की जो प्यार इनका इन लोगो के दिल में hi पैदा हुआ उसे भगवन ने आगे बढ़ाया है और बात शादी तक पहुंची है. भाई वाह मजा आ गया . माँ सबका मुहमिता करवा दे.
सावित्री - जा बहु मिठाई ले आ . अरे है आप दोनों से एक बात और कहनी है. देवकी ने एक बात और की है.
दन – अब क्या कहा उन्होंने?
सावित्री – उसने देवा के लिए भी लड़की देखि है अपने गाँव में (झूठ).
देवा – अरे माँ मुझे नहीं करनी अभी शादी वादी और पायल की ससुराल साइड तो बिलकुल भी नहीं करनी है. तू उन्हें मन कर दे.
दन – अरे क्या सैंड की तरह भड़कता है सुन तो लेने दे पूरी बात . सावित्री बोलो क्या कहा है देवकी जी ने ?
सावित्री - है तो वो कह रही थी के कल वो लड़की यही आ रही है. अगर हम लोग चाहे तो पद्मा के घर में कल उसे देख सकते है. वो पूनम की सहेली भी है किसी काम से वो कल यहाँ आ रही है.
देवा – अरे माँ मुझे नहीं करनी बोलै न
दन – अरे यार पहले लड़की तो देखले फिर जो तू कहेगा वही करेंगे बस. तू न करना चाहे तो मत करना.
देवा – मुझे नहीं देखनी कोई लड़की मए चलता हु. और वो उठ कर अंदर चला जाता है
दन – क्या हुआ इस लड़के को इसका भी कुछ समझ नहीं आता .
तब सावित्री दन को धीरे से बता देती है के वो लड़की कोई और नहीं अपनी पूनम hi है और अभी सिर्फ देवा को चिढ़ाने के लिए उसने किसी और का नाम लिया है क्यों की वो उसे छेड़ रही थी.
दन – मुझे तो ये बच्ची पूनम बहोत पसंद है हमारे घर की छोटी बहु तो यही बनेगी मुझे दोनों रिश्ते मंजूर है. और चलो अब कमरे में चल कर के इस ख़ुशी को मानते है. इतना कह कर दन सावित्री का हाथ पकड़ के अपनी तरफ खींचता है.
सावित्री - छोड़िये भी अब तो सुधर जाइये बच्चो की शादी की बात चल रही है और आपको अपनी पड़ी है.
दन – अरे बच्चो की शादी हो रही है तो क्या हुआ तेरी छूट तो अब तक जवान है न जिसे मेरा लुंड चाहिए वो भी रोज.
सावित्री मुँह घुमा के हसने लगती है. तभी दिया जानबूझकर आवाज़ करती हुई आती है क्यों की उसने दूर से देख लिया था उन्हें रोमांस करते हुए.
फिर सब फुर्सत हो कर अपने अपने कमरों में चले जाते है जहा आज फिर दन सावित्री की कमर तोड़ चुदाई करने वाला था. सावित्री की भी बुर दन के लोडे को याद कर रही थी, पायल अपने आने वाली जिंदगी के हसीं सपनो में खोई थी और देवा किसी उलझन में था रघु आया नहीं था और दिया बस समय का इंतजार कर रही थी के कब वो देवा की बहो में जाये और अपनी छूट कुटवाये.
वही रात के सन्नाटे में ठाकुर अपने खास आदमी भीमा से बात कर रहा था.
भीमा ठाकुर का खास आदमी भीमकाय शरीर एक डैम कला कलूटा लाल आँखे रात तो रात दिन में भी कोई उसे देखे तो पेण्ट में hi मूट दे ऐसा खतरनाक आदमी जो इंसान काम जानवर ज्यादा था उसे लोगो को हाथ से hi फाड़ डालने का शौक था. इतनी ताक़त थी उसके हाथो में.
ठाकुर - भीमा तू जनता है तेरे होते हुए उस कल के लौंडे ने हमारे कितने आदमी मार दिए, मए उस कुत्ते देवा को जिन्दा नहीं देखना चाहता
भीमा - मालिक अगर आप कहे तो उसे मए ख़तम कर देता हु. ठाकुर – नहीं भीमा उसने आसान मौत लेने का समय गवा दिया है अब उसे बहोत बुरी मौत मिलनी है ुर वो भी जिल्लत से भरी हुई मौत सारे गाँव के सामने उस सावित्री को नंगा कर के छोड़ना है वैसे भी इस सावित्री पर तो कब से मेरी नजर है इसे तो अपने लोडे पे बिठाना hi है मुझे और उसकी भाभी को भी और रही बात उसकी बहन की तो उसे उठा कर बाला के हवाले कर देंगे जो उसकी इज्जत के साथ उसकी बोतिया भी चबा जायेगा और ये सब होगा उस देवा की आँखों के सामने तब वो हमारे कदमो पे गिर के अपनी मौत की भीख मांगेगा लेकिन मौत हम उसे तब भी नहीं देंगे उसके बाप को कुत्ता बनायेगे हम उसके भाई को मौत की नींद सुलायेंगे जो एक शराबी है . और उस देवा के हाथ पैर काट के गाँव की गलियों में रेंगने के लिए छोड़ देंगे. वो घिसट घिसट के मरेगा भीमा और मेरा ये सपना तू पूरा करेगा
भीमा – मालिक जैसा आप चाहेंगे वैसा hi होगा.
ठाकुर - एक काम कर भीमा तू कल शहर चला जा और वह से कुछ नए आदमी ले आ
भीमा - मालिक आप उसे कुछ ज्यादा hi अहमियत दे रहे है. मए उसे अकेला ठिकाने लगा दुगा.
ठाकुर - नहीं भीमा जैसा मैने कहा है वैसा कर तू बस और हमारा साहबजादा बाला कहा है.
मालिक - वो फॉर्म हाउस पे है अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा है.
ठाकुर - ठीक है अब जा तू.
उस के बाद ठाकुर अपने कमरे में जाता है जहा ठकुराइन बोलूसे और पेटीकोट में बिस्तर पे लेती हुई थी . ब्लाउज में तानी हुई ठकुराइन की चूचिया कहर ध रही थी उसने पेटीकोट अपनी जांघो तक चढ़ा रखा था . आज उसकी बुर में फिर खुजली मची हुई थी. और वो उम्मीद भरी नजरो से ठाकुर को देखती है और धीरे धीरे अपना पेटीकोट और ऊपर सरकने लगती है . बस छूट से 4 इंच पहले hi वो पेटीकोट छोड़ कर अपने हाथ ब्लाउज पे लती है और एक एक कर के ब्लाउज के होक खोल देती है. ठाकुर ये देख कर सबर खो देता है और दरवाजा बंद कर क्र अपनी धोती निकल फेंकता ऐ और कुरता भी उतर देता है और नंगा hi बिस्तर तक पहुँचता है ठाकुर के माथे पे पसीने की बूंदे आ जाती है ऐसा स्कीन देखक कर.
ठकुराइन बहे फैला कर- आइये ठाकुर साहब आज तो बुझा दीजिये इस आग को
ठाकुर झपट कर उसकी चूचिया पकड़ कर दबा देता है और ठकुराइन का पेटीकोट एक झटके में उसकी कमर तक उठा के उस के ऊपर आ जाता है और अपना खड़ा लुंड जो क मुश्किल से 5” का था ठकुराइन की गरम बुर में दाल देता है ठकुराइन को कोई फरक नहीं पड़ता लेकिन वो ठाकुर को बहो में भर के सिसकने लगती है. ठाकुर बड़ी तेजी से उसे छोड़ने लगता है .
ठकुराइन - थोड़ा आराम से ठाकुर साब थोड़ा आराम से करो
लेकिन ठाकुर पे तो जूनून चढ़ा हुआ था वो सुनता नहीं और बहोत तेजी से ठकुराइन की बुर में अपना लुंड अंदर बहार करता है और कोई 10-15 झटके मार के झाड़ जाता है
ठकुराइन का मूड बहोत बुरी तरह से ख़राब होता है
ठकुराइन - आपको गोलिया दी थी न वैद जी ने ? खाई नहीं क्या ?
ठाकुर - खाई थी
ठकुराइन तो फिर हर बार की तररह आज भी मुझे अधूरा कैसे छोड़ा. मए अभी ठीक से गरम भी नहीं हुई थी और आप ठन्डे भी हो गए.
ठाकुर – ज्यादा आगा लग रही क्या छूट में. कहो तो शहर के किसी कोठे में बिठा दे जहा दिन भर चुदती रहना.
थॉराइन - कोई जरुरत नहीं कोठे पे जाने की अगर किसी और से hi छोड़ना होता तो आपको इलाज के लिए नहीं कहती और ये जो ठाकुर गिरी है न मुझे मत दिखाया करो. दुनिया के सामने hi राणे दो अगर मेरे खंडन वालो को पता चल गया तो यहाँ की ीत भी नहीं बचेगी न तुम्हरी शान बचेगी न पैसा . और न hi वो गैर कानूनी हथियारों और सुम्गलिंग का काम बर्बाद तुम मुझे नहीं मए तुम्हे कर सकती हु. ये बात याद रखना इसलिए मुझसे ऐसी गिरी हुई बात तो भूल के भी मत करना. शुक्र मनाओ की तुम्हारी नामर्दी की बात इस कमरे से बहार नहीं गयी वार्ना किसी को मुँह दिखने के लायक नहीं बचते. और है मुझे जिस दिन किसी दूसरे से छोड़ना होगा न उस दिन तुम्हे दरवाजे पे खड़ा कर दूगी और यही इसी पलंग पे उससे छुडवाउगि. और तुम कुछ नहीं कर पाओगे.
ठाकुर का भी मूड ख़राब हो जाता है और वो बिना कुछ कहे मुँह घुमा के सो जाता है और ठकुराइन वही पे अपनी बुर में उंगलिया दाल के सिसकिया लेके अपनी बुर छोड़ने लगती है और थोड़ी देर के बाद जब वो झाड़ जाती है तो सो जाती है. ये लगभग रोज का था इनका .
शलाका - (शरारती मुस्कान के साथ) आपकी चाहने वाली ऊपर क कमरे में आपका इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रही है. इसलिए यहाँ से मत जाइये बहार से अपने कमरे में जाइएगा.
देवा - ठीक है
फिर देवा अपनी आँखे बंद करता है और ऊपर खेतो में एक तरफ जहा घने पेड़ थे वह निकलता है और सीधा अपने कमरे में आता है तो देखता है की देवकी उसका इंतजार कर रही थी.
देवकी – आ गए लात साब कहा चले गए थे तुम?
देवा – अरे काकी तुम कब आयी? देवा ने अंदर आते हुए दरवाजा बंद कर दिया.
देवकी - मुझे तो आये हुए थोड़ी देर हो चुकी है पर तू कहा गया था. खेतो में भी नहीं था.?
देवा – अरे वो पास के खेत में था अपने दोस्तों के साथ वही देर हो गयी.
देवकी - अच्छा आ बैठ भी अब खड़ा hi रहेगा क्या?
देवा - काकी कोई काम था क्या ? (जान बुझ कर)
देवकी - हां रे काम तो था पर वो छोड़ तुझसे कुछ बात करनी थी.
देवा – है काकी बोलो
देवकी – देवा आज मए जब तेरे घर आयी थी अपने मन में कुछ बाते ले कर आयी थी जो मुझे तेरी माँ से करनी थी. और मैने तेरे निकलने के बाद उनसे वो बाते की है. और तेरी माँ ने कहा है ेके घर में सब से पूछ कर बताएगी.
देवा – ऐसी क्या बात है काकी कुछ चाहिए था तो मुझे बता देती. मए हु न जो कहती दे देता.
देवकी - अरे तेरे घर की सबसे अनमोल चीज़ hi मांगी है मैने तेरी माँ से. जब वो तुझे बताये तो सोच समझ कर फैसल करना कोई जबरदस्ती नहीं है. के तू है hi कहे. बाकि की बाते तुझे तेरी माँ hi बताये तो बेहतर रहेगा.
देवा – ठीक है काकी जैसा तुम कहो.
थोड़ी देर की ख़ामोशी उन दोनों के बीच आ जाती है दोनों hi कुछ कह नहीं प् रहे थे न hi कोई आगे बाद रहा था. देवा ने अपना कुरता उतरा और अपने जिस्म से पसीना पोंछने लगा. देवकी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी अब देवा को कुछ न करते देख देवकी उठ कड़ी हुई और बोली.
देवकी – ठीक है देवा मए चलती हु बस तुझसे मिलना था मिल लिया तेरी माँ जो भी कहे उसे ध्यान से सुन कर समझ कर फैसला करना . अब मए चलती हु. जैसे hi देवकी दरवाजे की तरफ बड़ी देवा ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी गॉड में खींच लिया . वो सीढ़ी आकर देवा के लुंड पे बैठी. तो उसकी सिसकारी निकल गयी इतना बड़ा लुंड जो उसकी गांड में चुभा था.
देवकी – seeeeeeeeeeeeee devaaaaaaaaaaa क्या करता है मुझे जाने दे अब जो बात करनी थी कर ली.
देवा – जो करनी थी वो कहा की है अभी? इतना कह कर वो देवकी की नंगी चिकनी कमर को सहलाने लगा और उसके कंधे पे अपनी जबान से चाटने लगा.
देवकी की हालत ख़राब होना शुरू हो गयी. – देवा ऐसा मत कर न
देवा – क्यों तुम hi तो चाहती थी के मए ये करू कल hi तो कहा था करना है .
देवकी - अरे मए भला क्यों कहने लगी.
अब देवा ने अपने हाथो को उसकी कमर से ऊपर कर के उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को थाम लिया हलके हाथो से दबाने लगा जिससे देवकी के निप्पल खड़े हो गए.
देवकी - ohhhhhhhhhhhhhhh देवा क्या जादू है तेर हाथो में इस उम्र में भी तूने मुझे सिर्फ ऊपर से छूकर hi गीला कर दिया ऐसा तो कभी रामु के बापू भी नहीं कर पाया
देवा – “देवकी का चेहरा अपनी तरफ घुमाकर उसकी आँखों में झांकते हुए” काकी जादू पूरा देखना
देवकी ने भी हां में गार्डन हिला दी और शर्मा गयी
देवा ने उसका मुँह अपनी तरफ किया और उसके दोनों पैर अपने दये बाये कर दिए जिससे दवकी की चूचिया अब देवा के सीन में पीसने लगी. देवा उसके होठो को चूमने लगा तो देवकी ने भी साथ दिया फिर देवा ने अपनी जबान देवकी के मुँह में दाल दी और उसके होतो को चूसते हुए उसकी गांड को दबाने लगा साथ hi उसकी गोरी गोरी जंघे जो देवा की गॉड में बैठने पर साड़ी के ऊपर होने से नंगी हो चुकी थी उन्हें सहलाने लगा
देवकी भी देवा के बालो में उंगलिया घूमते हुए इस मिलान का मजा ले रही थी देवा का लुंड एक मोठे डंडे की तरह उसे अपनी छूट के मुँह पे चुभ रहा था और उसकी छूट भी अब पानी बहाने लगी थी.
देवा ने देवकी को खड़ा किया और उसके बदन क एक एक अंग को चूमते हुए उसे नंगी करने लगा देवकी ने ब्रा या पेंटी तो पहनी नहीं थी फिर भी उसकी चूचियों और गांड का शेप कमल का था.
तभी देवकी ने भी देवा की धोती की गाँठ पकड़ के खिंच दी और देवा भी पूरा नंगा हो गया . देवा का जिस्म देख कर देवकी की छूट में आग लग गयी ऐसा विशाल शरीर, पत्थर के सामान कठोर उभरा हुआ सीना, मजबूत हाथ पाँव और सबसे रोचक चीज़ देवकी के लिए . देवा का खड़ा लुंड जो किसी अजगर की भाटी लग रहा था. इतना लम्बा और मोटा लुंड और फूला हुआ सूपड़ा देवकी से रहा नहीं गया वो सीढ़ी देवा की छाती से लग गयी और उसे बेतहाशा चूमने लगी. और चूमते हुए वो धीरे धीरे नीचे आयी और देवा का लुंड पकड़ कर उसे जोर जोर से चूमने लगी . वो बार बार देवा के लुंड को चूमती फिर उसकी जांघो को चूमती और देवा की गांड को अपने नाजुक हाथो से सहलाती वह नाख़ून गदति. फिर जैसे hi वो देवा के लुंड को चूमने लगी देवा ने उसका चेहरा पकड़ के उसके होतो पे अपना लुंड अंदर को दबाया देवकी पहले तो समझी नहीं फिर देवा ने कहा
देवा – काकी मुँह खोलो इसे अंदर डालना है
देवकी - पागल हुआ ये इसे मुँह के छेड़ में नहीं डालते बावले इस के लिए दूसरा छेड़ तैयार है कब से. डालना है तो वह दाल
देवा – अरे काकी मुँह में लो न कभी काका ने मुँह में नहीं दिया क्या.
देवकी ने इंकार में गार्डन हिला दी तो देवा ने फिर इशारा किया देवा का इशारा प् कर देवकी ने अपना मुँह थोड़ा सा खोला तो देवा ने लुंड को होठो में रख क्र हल्का सा धक्का दिया जिससे देवा का सूपड़ा थोड़ा अंदर गया जो देवकी को अच्छा लगा देवकी अब उसे चाटने लगी और फिर देवा और धक्का दिया तो थोड़ा सा लुंड और अंदर गया अब तो देवकी को भी मजा आने लगा देवा का लुंड चूसने में वो बार बार लुंड पूरा मुँह से निकलती और उसपे अपनी जबान फिरती और फिर से मुँह में लेती कोई 10 मिनट तक देवकी देवा का लुंड चुस्ती रही और देवा उसके सर पे हाथ रख कर हलके हॉकर उसके मुँह को छोड़ता रहा फिर दवकी उठी .
देवकी - देवा अब नहीं रहा जाता गाड़ दे न ये खूटा मेरी इस प्यासी जमीन में कई साल हो गए इसका स्वाद लिए वैसे भी जो मैने लिया वो तो इससे आधा भी नहीं था मरियल सा था. जो इतनी देर में तो 3 बार झाड़ जाता पर तूने तो अब तक डाला भी नहीं देख डालते hi झाड़ मत जाना .
देवा( है कर) काकी कब झड़ना है ये मुझे पता है तू चिंता मत कर मए तब तक तुझे पेलूगा जब तक तेरे में चलने की हिम्मत रहेगी.
देवा ने देवकी की एक टांग वही राखी चारपाई पे राखी और खुद नीचे बैठ कर देवकी की बुर पे अपने होठ रख दिए. देवकी तो सर से पैर तक काँप गयी आज तक उसे ऐसा सुख नहीं मिला था किसी ने उसकी छूट पे होंठ नहीं लगाए थे ये पहली बार था
देवकी – devaaaaaaaaaaaaa क्या कर दिया रे तूने मत कर ये गन्दी जगह है.
देवा ने कोई जवाब नहीं दिया और अपनी जबान निकल के देवकी की बुर को चाटने लगा देवा की खुरदुरी जबान अपनी बुर पे महसूस कर के देवकी 2 मिनट में hi देवा का सर अपनी बुर पे दबा कर झाड़ गयी देवा ने भी देवकी का पूरा पानी पी लिया और सीधा खड़ा हुआ.
देवकी तो पागल हो चुकी थी उसने झपट कर देवा का चेहरा पकड़ा और उसके होतो को और गलो को चाटने लगी जिस पर उसकी hi छूट का पानी लगा था. साथ hi वो देवा के गलो और होठो को हल्का हल्का काटने लगी .
देवकी – देवा क्या कमल किया है तूने आज तक अपनी पूरी जिंदगी में मैने ये एक बार भी नहीं किया आज तूने मुझे नया सुख दिया है देवा . बड़ी खुशनसीब होगी वो लड़की तू जिसे अपनी पत्नी बनाएगा उसे तो पूरी दुनिया की ख़ुशी मिल जाएगी. इतना कहते hi देवकी के दिमाग में पूनम का चेहरा आ गया. और चेहरे पे मुस्कान भी.
देवा ने देवकी को वही पलटा के झुकाया और उसके हाथ चारपाई पे रख दिया और पीछे से उसकी बुर पे अपना लोढ़ा सेट कर क एक धक्का मारा तो देवा का सूपड़ा पूरा घुस गया . और देवकी ने हलकी सी चीख निकली. पर जब देवा ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ कर दूसरा धक्का मारा जिसमे देवा का 6 इंच लुंड एक साथ देवकी की बुर को चीरता हुआ घुसा तो उसे दिन में टारे नजर आ गए देवकी , devaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa uiiiiiiiiiiii mmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaahhhhhhhhhhhh देवा
देवा ने बिना रुके अब उसकी चूचिया पकड़ी और आखरी झटके में अपना बाकि का लुंड घुसा दिया देवकी की हालत ख़राब हो गयी
देवकी देवाआआआ नहीं naaaaaaaaaaaaaa रुक jaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaahhhhhh devaaaaaaaaaaaaaa उउउउउउउउउठ्हहहहह देवा आआआआआ
देवा ने उसकी चूचिया पकड़ के बिना देवकी की बात सुने उसे ठोकना चालू कर दिया
देवकी - देवा रुक जा मए मर जोगी यह यह यह यह यह ुह्ह्ह्हह्ह देवा नहीं, दो मिनट रुक जा आआआह्ह्ह्हह्ह ह अहहहह देवा मुझे सांस तो लेने दे पर देवा बिना रुके उसे चोदे hi जा रहा था उसकी पपीते के सामान बड़ी बड़ी चूचिया देवा के पंजे की गिरफ्त में थी देवा ने अब निप्पल को उमेठना शुरू किआ और देवकी की गार्डन पे चूमते हुए उसकी पीठ सहलाते सहलाते धक्के जोर जोर से मरने लगा तभी देवकी ने अपनी छूट को सिकोड़ दिया और भलभला के फिर से झाड़ गयी
देवा ने उसे अपने बहो में लिया और नीचे से उसकी बुर में अपना लुंड सेट कर के देवकी को हल्का सा नीचे पुश किया और उसी समय नीचे से धक्का मारा देवकी अपनी बहे देवा के गले में दाल के देवा को पकड़ा हुआ था देवा अब उसे खड़े खड़े hi छोड़ रहा था और देवकी की चूचिया पी रहा था. देवकी को तो स्वर्ग के दर्शन होने लगे. वो भी देवा को चुम रही थी यहाँ धक्के छूट पे पद रहे थे और उसका अंग अंग ढीला हो रहा था और देवकी कभी देवा के होठ चूमती तो कभी गार्डन कभी कान को चुस्ती कभी देवा के कंधे पे अपने दांत गदा देती इसी खतरनाक चुदाई में देवकी फिर से झाड़ गयी उसका गाला सूख रहा था पर देवा पे तो अभी चुदाई का भूत सवार था देवा ने देवकी को अब खटिया पे लिटाया और उसके पैर अपने कंधे पे रख दिए और खुद नीचे खड़ा हो कर अपना लुंड देवकी की बुर में एक hi झटके में पूरा घुसा दिया इस बार देवकी को ज्यादा तकलीफ नहीं हुई क्यों की उसकी बुर बहोत पानी छोड़ने की वजह से चिकनी भी हो गयी थी और अब तक देवा के लुंड के हिसाब से एडजस्ट भी हो चुकी थी.
देवा लगातार देवकी को छोड़ रहा था तभी उसकी नजर. सामने गयी तो उसने देखा. सामने शलाका कड़ी उसे देख रही थी उसके चेहरे पे हैरानी के साथ साथ मुस्कान भी थी और आँखों में लाल डोरे भी. देवा ने उसे देख के आँख मारी और मुस्करा दिया और उसे इशारे से जाने के लिए कहा
शलाका – चिंता मत करो देवा मुझे आपके आलावा न कोई देख सकेगा न सुन सकेगा. आप मुझसे बात मत करना वार्ना ये आपको पागल समझने लगेगी. और इतना कह के शलाका हसने लगी और देवा से लगे रहने को कहा और वही खड़े हो के देवा की चुदाई देखने लगी .
अब तक देवकी इस पोजीशन में भी दो बार झाड़ चुकी थी और देवा पूरी ताक़त से उसे छोड़ रहा था.
देवकी - aaaaaaaaaahhhhhhh देवा बस कर पूरी कसार आज hi निकलेगा क्या अब छोड़ मुझे मेरी छूट का पानी भी सूख गया है अब जलन हो रही है .
देवा - क्या हुआ काकी पहले तो कह रही थी अच्छे से छोड़ना अब छोड़ने को कह रही हो
देवकी – देवा तूने तो आज इतना छोड़ा है जितना मए रामु के बापू से एक महीने में नहीं चुदती थी.
देवा - बस काकी हो गया थोड़ा सा और ले ले मेरा लोढ़ा और देवा तेज तेज शॉट मरने लगा कमरे में थप थप की आवाजे गूंज रही थी
अब देवा ने देवकी की टंगे सीढ़ी की तो उसकी कमर को कुछ आराम मिला पर वो कुछ सेकंड का था देवा अब देवकी को पूरी तरह गले से लगाया और उसे बहो में भर के उसके होठो पे होठ रखे और तूफानी धक्के मरने लगा देवकी के होठो से गन गन की आवाज़े निकलने लगी वो गहरी साँसे ले रही थी और देवा ने जोरदार धक्का मारा और अपना लुंड देवकी की बच्चेदानी तक दाल के चिपका दिया और अपना पानी देवकी की बुर में छोड़ने लगा देवकी सिहर उठी और एक बार और झड़ने लगी करीब 5 मिनट तक देवा का लुंड रुक रुक कर धार छोड़ता रहा फिर देवा ने अपनी पकड़ ढीली की देवकी की तो हालत ऐसी हो गयी थी जैसे उसे किसी ने कई किलोमीटर तक दौड़ाया हो बाल बिखरे हुए पूरा जिस्म लाल पद गया था और वो हांफ रही थी पर यहाँ देवा उठ के खड़ा हुआ और अपना लुंड देवकी की बुर से निकला तो नार्मल था न उसे कोई थकन थी न hi वो हांफ रहा थान ा कोई चुदाई की थकन. जैसे कुछ हुआ hi न हो उसका लुंड अब तक आधा खड़ा हुआ था . वो देवकी के सिरहाने गया और अपना लुंड देवकी के होठो पे रखा देवकी ने उसे मुस्करा के देखा और देवा का लुंड चूस लिया .
देवा ने इधर उधर देखा तो शलाका जा चुकी थी.
थोड़ी देर के बाद देवकी भी उठ के बैठी तो उसकी चीख निकल गयी उईईईईई माआआआ मार डाला इस देवा ने. जब झुक कर देखा तो उसकी बुर सूज गयी थी और पूरी लाल पद गयी थी.
देवकी - देवा ये क्या किया तूने देख कितनी सुजा दी है.
देवा - मैने तो कहा था चल नहीं पाओगी. तुम hi मुझे उकसा रही थी.
देवकी - मए क्या कीर्ति मुझे तो अपने पति के लुंड की hi आदत थी मुझे क्या पता था की कोई किसी को ऐसे भी छोड़ सकता है तूने तो मेरी बुर फाड़ दी इतना दर्द तो मुझे सुहागरात में भी नहीं हुआ था तब तो मेरे पति ने मुझे दो बार छोड़ा था. तूने एक hi बार में मुझे अधमरा कर दिया रे सैंड कही के. देवा – तो चल दुबारा मए भी छोड़ देता हु. तू मेरे लुंड को पकड़ तो सही ये फिर खड़ा हो जायेगा और फिर चुदाई करेगा तेरी बुर की.
देवकी – मेरा दिमाग ख़राब नहीं हुआ है जो तेरे लुंड को हाथ लागू. मेरी इतने समय की पूरी प्यास तो तूने एक बार में hi बुझा दी. बहोत देर हो गयी है. अब मुझे जाना चाहिए फिर मिलेंगे देवा.
दोनों ने अपने कपडे पहन लिए और देवकी चलने लगी तो उसकी चाल में थोड़ी लड़खड़ाहट थी. वो थोड़ी देर वही पे कमरे में चलती है और फिर बाहर निकल जाती है.
देवा भी कपडे पहन कर हाथ मुँह धो कर खुद को सही करता है. और घर की तरफ निकल पड़ता है.
घर आया तो सब के चेहरे पे आज ख़ुशी की चमक थी. जिसे देख कर देवा को बहोत अच्छा लगता है. फिर वो सब खाना कहते है तो.
देवा – क्या बात है माँ आज इतना बढ़िया खाना बनाया है. और सब लोग खुश भी दिख रहे है. बात क्या है?
दन- अरे बीटा ये बात तो मए सुबह से पूछ रहा हु ये तेरी माँ और भाभी बस मुस्कराये जा रही है कुछ बताती hi नहीं बार बार यही कहती है के देवा के आने तक रुक जाओ फिर बतायेगे.
देवा – क्या बात है माँ अब बता भी दो
फिर सावित्री उन्हें बताती है क देवकी ने अपने बेटे के लिए पायल का हाथ माँगा है और उस पर सब के विचार क्या है बताये.
दन देवा की तरफ देखता है और देवा दन की तरफ फिर दोनों एक साथ मुस्करा देते है.
दन - अरे भाग्यवान ये तो बहोत अच्छी खबर सुनाई तूने मुझे तो कोई एतराज नहीं मए रामु से मिल चुक्का हु बहोत अच्छा लड़का है, क्यों देवा?
देवा – बिलकुल सही है बाबू जी. मुझे भी पायल के लिए रामु सही लगा. माँ वैसे तुमने ये गलत किया. जब सुबह काकी बता के गयी तो बाबू जी से बात कर के उसी समय आप बात को आगे बड़ा देती. मेरे लिए रुकने की क्या जरुरत थी आप लोग इस घर के बड़े है, और फिर भाभी भी तो थी आप के साथ.
सावित्री - है बीटा बहु से तो मैने उसी समय बता दिया था उसने भी तुरंत है कर दी लेकिन मए तेरे बाबू जी को तेरे सामने बताना चाहती थी और दोनों का फैसला एक साथ चाहती थी.
दन- तेरी माँ सही कह रही है देवा अब तू hi तो संभालता है इस घर को तो तेरी सहमति के बिना हम कोई भी फैसला कैसे ले सकते है.
देवा – माँ हम सबने तो है कह दी लेकिन पायल का विचार भी तो जान लो. देवा ने पायल को देख लिया था जो रसोई में कड़ी सब बाटे सुन के मुस्करा रही थी और उसकी मुस्कराहट सब बता रही थी के उसे भी रिश्ता मंजूर है.
देवा – पायल यहाँ आना
पायल - जी भैया
देवा – तुझे ये रिश्ता मंजूर है? तूने भी तो रामु को देखा hi है. अगर na-pasand हो तो अभी कह दे . बाद में मत बोलना.
पायल - जैसा आप सबको सही लगे भैया. मुझे आप लोगो की हर बात मंजूर है. और मुस्करा के वह से चली जाती है.
दिया - देवर जी आप निश्चिन्त रहिये मैने सुबह hi पायल से अकेले में पूछ लिया था. वो बहोत खुश है इस रिश्ते से. बल्कि मुझे तो एक बात और पता चली है?
देवा – वो क्या भाभी?
देइया - पिछले साल जब रामु यहाँ आया था पद्मा काकी के घर अपनी माँ को लेने तो उसने हमारी पायल से दोस्ती भी की थी तब. और पायल तो तब से उसे चाहने लगी है बस दोनों ने न तो एक दूजे से कुछ कहा न उनका प्यार आगे बड़ा न hi ये बात हम सबको पता चली.
देवा – अरे वाह मतलब इस रिश्ते में तो भगवन की भी मंजूरी है क्यों की जो प्यार इनका इन लोगो के दिल में hi पैदा हुआ उसे भगवन ने आगे बढ़ाया है और बात शादी तक पहुंची है. भाई वाह मजा आ गया . माँ सबका मुहमिता करवा दे.
सावित्री - जा बहु मिठाई ले आ . अरे है आप दोनों से एक बात और कहनी है. देवकी ने एक बात और की है.
दन – अब क्या कहा उन्होंने?
सावित्री – उसने देवा के लिए भी लड़की देखि है अपने गाँव में (झूठ).
देवा – अरे माँ मुझे नहीं करनी अभी शादी वादी और पायल की ससुराल साइड तो बिलकुल भी नहीं करनी है. तू उन्हें मन कर दे.
दन – अरे क्या सैंड की तरह भड़कता है सुन तो लेने दे पूरी बात . सावित्री बोलो क्या कहा है देवकी जी ने ?
सावित्री - है तो वो कह रही थी के कल वो लड़की यही आ रही है. अगर हम लोग चाहे तो पद्मा के घर में कल उसे देख सकते है. वो पूनम की सहेली भी है किसी काम से वो कल यहाँ आ रही है.
देवा – अरे माँ मुझे नहीं करनी बोलै न
दन – अरे यार पहले लड़की तो देखले फिर जो तू कहेगा वही करेंगे बस. तू न करना चाहे तो मत करना.
देवा – मुझे नहीं देखनी कोई लड़की मए चलता हु. और वो उठ कर अंदर चला जाता है
दन – क्या हुआ इस लड़के को इसका भी कुछ समझ नहीं आता .
तब सावित्री दन को धीरे से बता देती है के वो लड़की कोई और नहीं अपनी पूनम hi है और अभी सिर्फ देवा को चिढ़ाने के लिए उसने किसी और का नाम लिया है क्यों की वो उसे छेड़ रही थी.
दन – मुझे तो ये बच्ची पूनम बहोत पसंद है हमारे घर की छोटी बहु तो यही बनेगी मुझे दोनों रिश्ते मंजूर है. और चलो अब कमरे में चल कर के इस ख़ुशी को मानते है. इतना कह कर दन सावित्री का हाथ पकड़ के अपनी तरफ खींचता है.
सावित्री - छोड़िये भी अब तो सुधर जाइये बच्चो की शादी की बात चल रही है और आपको अपनी पड़ी है.
दन – अरे बच्चो की शादी हो रही है तो क्या हुआ तेरी छूट तो अब तक जवान है न जिसे मेरा लुंड चाहिए वो भी रोज.
सावित्री मुँह घुमा के हसने लगती है. तभी दिया जानबूझकर आवाज़ करती हुई आती है क्यों की उसने दूर से देख लिया था उन्हें रोमांस करते हुए.
फिर सब फुर्सत हो कर अपने अपने कमरों में चले जाते है जहा आज फिर दन सावित्री की कमर तोड़ चुदाई करने वाला था. सावित्री की भी बुर दन के लोडे को याद कर रही थी, पायल अपने आने वाली जिंदगी के हसीं सपनो में खोई थी और देवा किसी उलझन में था रघु आया नहीं था और दिया बस समय का इंतजार कर रही थी के कब वो देवा की बहो में जाये और अपनी छूट कुटवाये.
वही रात के सन्नाटे में ठाकुर अपने खास आदमी भीमा से बात कर रहा था.
भीमा ठाकुर का खास आदमी भीमकाय शरीर एक डैम कला कलूटा लाल आँखे रात तो रात दिन में भी कोई उसे देखे तो पेण्ट में hi मूट दे ऐसा खतरनाक आदमी जो इंसान काम जानवर ज्यादा था उसे लोगो को हाथ से hi फाड़ डालने का शौक था. इतनी ताक़त थी उसके हाथो में.
ठाकुर - भीमा तू जनता है तेरे होते हुए उस कल के लौंडे ने हमारे कितने आदमी मार दिए, मए उस कुत्ते देवा को जिन्दा नहीं देखना चाहता
भीमा - मालिक अगर आप कहे तो उसे मए ख़तम कर देता हु. ठाकुर – नहीं भीमा उसने आसान मौत लेने का समय गवा दिया है अब उसे बहोत बुरी मौत मिलनी है ुर वो भी जिल्लत से भरी हुई मौत सारे गाँव के सामने उस सावित्री को नंगा कर के छोड़ना है वैसे भी इस सावित्री पर तो कब से मेरी नजर है इसे तो अपने लोडे पे बिठाना hi है मुझे और उसकी भाभी को भी और रही बात उसकी बहन की तो उसे उठा कर बाला के हवाले कर देंगे जो उसकी इज्जत के साथ उसकी बोतिया भी चबा जायेगा और ये सब होगा उस देवा की आँखों के सामने तब वो हमारे कदमो पे गिर के अपनी मौत की भीख मांगेगा लेकिन मौत हम उसे तब भी नहीं देंगे उसके बाप को कुत्ता बनायेगे हम उसके भाई को मौत की नींद सुलायेंगे जो एक शराबी है . और उस देवा के हाथ पैर काट के गाँव की गलियों में रेंगने के लिए छोड़ देंगे. वो घिसट घिसट के मरेगा भीमा और मेरा ये सपना तू पूरा करेगा
भीमा – मालिक जैसा आप चाहेंगे वैसा hi होगा.
ठाकुर - एक काम कर भीमा तू कल शहर चला जा और वह से कुछ नए आदमी ले आ
भीमा - मालिक आप उसे कुछ ज्यादा hi अहमियत दे रहे है. मए उसे अकेला ठिकाने लगा दुगा.
ठाकुर - नहीं भीमा जैसा मैने कहा है वैसा कर तू बस और हमारा साहबजादा बाला कहा है.
मालिक - वो फॉर्म हाउस पे है अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा है.
ठाकुर - ठीक है अब जा तू.
उस के बाद ठाकुर अपने कमरे में जाता है जहा ठकुराइन बोलूसे और पेटीकोट में बिस्तर पे लेती हुई थी . ब्लाउज में तानी हुई ठकुराइन की चूचिया कहर ध रही थी उसने पेटीकोट अपनी जांघो तक चढ़ा रखा था . आज उसकी बुर में फिर खुजली मची हुई थी. और वो उम्मीद भरी नजरो से ठाकुर को देखती है और धीरे धीरे अपना पेटीकोट और ऊपर सरकने लगती है . बस छूट से 4 इंच पहले hi वो पेटीकोट छोड़ कर अपने हाथ ब्लाउज पे लती है और एक एक कर के ब्लाउज के होक खोल देती है. ठाकुर ये देख कर सबर खो देता है और दरवाजा बंद कर क्र अपनी धोती निकल फेंकता ऐ और कुरता भी उतर देता है और नंगा hi बिस्तर तक पहुँचता है ठाकुर के माथे पे पसीने की बूंदे आ जाती है ऐसा स्कीन देखक कर.
ठकुराइन बहे फैला कर- आइये ठाकुर साहब आज तो बुझा दीजिये इस आग को
ठाकुर झपट कर उसकी चूचिया पकड़ कर दबा देता है और ठकुराइन का पेटीकोट एक झटके में उसकी कमर तक उठा के उस के ऊपर आ जाता है और अपना खड़ा लुंड जो क मुश्किल से 5” का था ठकुराइन की गरम बुर में दाल देता है ठकुराइन को कोई फरक नहीं पड़ता लेकिन वो ठाकुर को बहो में भर के सिसकने लगती है. ठाकुर बड़ी तेजी से उसे छोड़ने लगता है .
ठकुराइन - थोड़ा आराम से ठाकुर साब थोड़ा आराम से करो
लेकिन ठाकुर पे तो जूनून चढ़ा हुआ था वो सुनता नहीं और बहोत तेजी से ठकुराइन की बुर में अपना लुंड अंदर बहार करता है और कोई 10-15 झटके मार के झाड़ जाता है
ठकुराइन का मूड बहोत बुरी तरह से ख़राब होता है
ठकुराइन - आपको गोलिया दी थी न वैद जी ने ? खाई नहीं क्या ?
ठाकुर - खाई थी
ठकुराइन तो फिर हर बार की तररह आज भी मुझे अधूरा कैसे छोड़ा. मए अभी ठीक से गरम भी नहीं हुई थी और आप ठन्डे भी हो गए.
ठाकुर – ज्यादा आगा लग रही क्या छूट में. कहो तो शहर के किसी कोठे में बिठा दे जहा दिन भर चुदती रहना.
थॉराइन - कोई जरुरत नहीं कोठे पे जाने की अगर किसी और से hi छोड़ना होता तो आपको इलाज के लिए नहीं कहती और ये जो ठाकुर गिरी है न मुझे मत दिखाया करो. दुनिया के सामने hi राणे दो अगर मेरे खंडन वालो को पता चल गया तो यहाँ की ीत भी नहीं बचेगी न तुम्हरी शान बचेगी न पैसा . और न hi वो गैर कानूनी हथियारों और सुम्गलिंग का काम बर्बाद तुम मुझे नहीं मए तुम्हे कर सकती हु. ये बात याद रखना इसलिए मुझसे ऐसी गिरी हुई बात तो भूल के भी मत करना. शुक्र मनाओ की तुम्हारी नामर्दी की बात इस कमरे से बहार नहीं गयी वार्ना किसी को मुँह दिखने के लायक नहीं बचते. और है मुझे जिस दिन किसी दूसरे से छोड़ना होगा न उस दिन तुम्हे दरवाजे पे खड़ा कर दूगी और यही इसी पलंग पे उससे छुडवाउगि. और तुम कुछ नहीं कर पाओगे.
ठाकुर का भी मूड ख़राब हो जाता है और वो बिना कुछ कहे मुँह घुमा के सो जाता है और ठकुराइन वही पे अपनी बुर में उंगलिया दाल के सिसकिया लेके अपनी बुर छोड़ने लगती है और थोड़ी देर के बाद जब वो झाड़ जाती है तो सो जाती है. ये लगभग रोज का था इनका .