Fantasy इच्छाधारी देव - Page 25 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

:हहै: बात तो तुम्हारी भी सही है ससुराल तो देव की है तिलिस्म नगरी में लेकिन भाई ये लोग अभी तिलिस्म नगरी में नहीं त्रिकाल के तिलिस्म में है तो यहाँ जो हो जाये वही काम है. यहाँ तो हर कदम चौंकाने वाला hi मिलेगा. और रही बात उस ताऊ की तो आप खुद जान लेना नेक्स्ट अपडेट में के वो कौन है. वेल थैंक यू वैरी मच फॉर योर नीस रिव्यु बीआरओ .
 
भाई ये मन्नू और विठल को लड़की भी मिलेगी , शराब भी मिलेगी, पैसा भी मिलेगा, फैक्ट्री भी लग जाएगी पर पहले अपने दुश्मनो को यानि देव एंड टीम को तो ख़तम कर ले. तुम्हरी ये बात सही है के इन लोगो ने सपने तो देख hi लिए. और है सपनो पे अभी तक कोई टैक्स नहीं है. और तुम्हारे hi मुताबिक देव के दोस्त तो है hi इन लोगो को जहन्नुम पहुंचने को . लेकिन क्या सच में वो लोग इन सब को अघोरी के होते जहन्नुम पंहुचा पाएंगे? या ये लोग hi कुछ खतरनाक कर जायेगे? चारो दिग्गज तो तिलिस्म में भटक रहे है न? या फिर क्या इन्हे मुंबई से अपने दुश्मन ख़तम करने तक देव एंड पार्टी hi पहुंच चुकी होगी तिलिस्म में? सवाल बहोत जवाब सिर्फ एक वेट एंड वाच. थैंक्स फॉर योर लवली रिव्यु भाई .
 
एक डैम सही......... ख्वाब हक़ीक़त बन जाये ऐसा बहोत काम होता है. और जहा सामने देव जैसा पहाड़ हो वह तो नामुमकिन hi होता है. लेकिन मन्नू और विठल के ख्वाब देख लेने का मैं रीज़न ये भी है के उन्हें कहा पता है के उनके सामने कौन खड़ा है अभी तो वो लोग खुद को hi सबसे बड़ा मान के चल रहे है, जहा विठल मन्नू के मुंबई में फैले खौफ से खुश है वही अनाथ टाइप का मन्नू विठल जैसे पावरफुल बन्दे का साथ पाकर hi उड़ने लगा है अभी उन्हें ये कहा पता है के देव एंड टीम के सामने ये सब तो बच्चे hi है. जो देव की एक जहरीली फूंक से hi पानी बन के पिघल सकते है. चलो रहने देते है उन्हें अभी अपनी hi धुन में. जब इनका सामना होगा देव एंड टीम से तो औकात समझ में आ hi जनि है. फिर न किसी की आबरू पे आँख उठा के देख सकेंगे न कोई शराब की फैक्टरी होगी न अफीम की कमाई.

रजनी ने जो कहा अपने अंदाजे पे कहा के अभी तिलिस्म की शुरुआत hi है. वो रजनी के हिसाब से सही है क्यों की वो तो अभी नगरी से निकली है. लेकिन बाकि के चारो तो बहोत आगे आ चुके है न. और अगर सबके नजरिये से देखा जाये तो है उन्होंने सच मच में अभी त्रिकाल का एक किला hi ध्वस्त किया है राजा को हराकर उस नगरी से सकुशल निकल कर. तो आगे तो बढ़ना hi है वो अनजान खतरों से निपटते हुए. और हर कदम मौत का कदम साबित होगा इस सफर में ये तो सभी जानते है. ये भी सच है के हर इंसान या चीज़ के दो पहलु hi होंगे. चाहे वो खतरा हो , ये ताऊ हो, या फिर कोई और. चलिए आगे देखते है ये ताऊ क्या बताता है इन लोगो को. सी यू सून
 
माय डिअर फ्रेंड्स,

आप सबके भरपूर रेविएवस के लिए एक बार आप सबका धन्यवाद इस में मेरे वो साइलेंट रीडर्स भी शामिल है जिन्होंने कहानी पसंद तो की जिसका पता चलता है व्यूज से. लेकिन अपना रिव्यु नहीं दिया. आप सबका एक बार फिर से बहोत बहोत धन्यवाद अपना प्यार इस कहानी के साथ यु hi बनाये रखियेगा. नेक्स्ट अपडेट बस कुछ hi देर में मिलेगा आप सबको.
 
अपडेट - 151

ा – क्या बात है बोल रूद्र ? उस आदमी ने पलट कर रूद्र को देखा और कहा.

रूद्र के साथ सभी चौंक पड़ते है..

अब आगे…….

रदुरा – रे ताऊ तू मुझे जानते है के?

A-Ha जनता हु और मए hi क्या यहाँ इस तिलिस्मी चक्र में हर कोई तुम सब को जनता है.

देव – वो कैसे भला?

ा – देव तुम्हरे साथ ऐसी खतरनाक जगह पर रूद्र के आलावा तो कोई और हो hi नहीं सकता और रूद्र के साथ नीलम के आलावा किसी का होना संभव नहीं, रही बात इनकी (पूनम की तरफ इशारा कर के) तो तुम्हरे हर कदम पे राजकुमारी पूनम के सिवाए और कौन हो सकता है वैसे भी राजकुमारी पूनम को तो यु भी हम लोग जानते है आखिर है तो हम इन्ही की प्रजा में से. और ये रानी रजनी जो कल तक इस तिलिस्म में बानी नगरी की रानी थी इन्हे भी सब जानते है. तुम चारो की जोड़ी को तो कोई भुला hi नहीं है. देव, रूद्र हम लोग तो सदियों से तुम लोगो का hi इंतजार कर रहे है जब से इस तिलिस्म का निर्माण हुआ और हम लोग इस तिलिस्म में लाये गए. क्यों की उसी वक़्त हमारा पहला सवाल था के हम इससे कैसे निकलेंगे? और जवाब था जब देव के साथ आप सभी लोग आएंगे और अगर आपने ये तिलिस्म तोड़ दिया तो सभी आज़ाद हो पाएंगे इस तिलिस्म से. क्यों की ये तिलिस्म तो देव और पूनम केन ऍम से बंधा है.

रूद्र – और जे हम न तोड़ पाए तो? हम लोग hi मर गए तो? तुम लोगो की तो लग गयी न फिर से. 14 साल की …….. मतलब उम्र कैद सदियों की. वो क्या है न ताऊ हमारे यहाँ उम्र कैद सिर्फ 14 साल की होव हे.

ा – सही कहा रूद्र ऐसे हालत में हमें फिर एक लम्बा इंतजार करना होगा. जब तक तुम लोग फिर से जनम ले कर, इस काबिल बन कर यहाँ नहीं आते ये चक्र चलता hi रहेगा.

रूद्र – अबे पागल हुआ है क्या? साला और किसी जनम में हमें और कोई काम hi नहीं बस ये तिलिस्म hi घूमते रहे?

ा – नहीं रूद्र तुम लोगो को जो करना हो करो लेकिन नियति तुम लोगो को घुमा फिर के एक दूजे से मिला के यहाँ hi लाएगी हर जनम में जब तक तुम लोग इसे तोड़ नहीं देते. है हर जनम में तुम लोगो की शक्ति जरूर बढ़ती जाएगी. क्यों की इस तिलिस्म की शक्तिया और यहाँ के खतरे भी समय के साथ बढ़ते hi जायेगे इसीलिए.

रूद्र – अबे क्यों डरा रहा है यार. साला पहली बार में hi हालत पतली और पेण्ट गीली हुई जा रही है. अभी तक तो हमने कुछ देखा hi नहीं शादी भी नहीं की इस देव के चक्कर में.

ा – ऐसा है तो फिर तोड़ लो तिलिस्म किसने रोका है? फिर कर लेना शादी और देख लेना. वो सब जो अब तक नहीं देख पाया तू. आखिर उसे तो साथ लिए hi घूम रहा है न. ( नीलम की तरफ देखते हुए कहा).

रूद्र – हो अभी लो. सेल हलवा है क्या? तू भी तो यही है सदियों से ? तू hi तोड़ दे न तू तो सब जनता होगा.

ा – ये मेरा काम नहीं है रूद्र. वैसे मुझे क्यों रोका था राह में?

……….जब तुम सब कुछ जानते हो, हमारा यहाँ आने का प्रयोजन जानते हो तो क्या तुम हमारी मदद कर सकते हो? रूद्र ने उसे गहरी नजरो से देखते हुए कहा .

ा – कैसी मदद?

रूद्र – हमें सही रास्ता बता कर करने वाली मदद.

ा – नहीं ये मए नहीं कर sakta.Kyu के मुझे सिर्फ त्रिकाल के इस गाँव की hi जानकारी है इस गांव की सीमा के बहार क्या है मए नहीं जनता. मए तो ये तक नहीं जनता के इस गाँव के आगे कुछ है भी या नहीं. पर है इतना जरूर बता सकता हु के इस गाँव से निकलने का रास्ता वो सामने जो जंगल नजर आ रहा है न वही से है. वो एक छोटा सा जांगले है. ऐसा सुना है मैने. उसे पर करते hi तुम इस गाँव से बहार निकल जाओगे. उसके आगे क्या है ये मुझे नहीं पता, क्यों के हमें इस गांव से बहार जाने की इजाजत नहीं है. बल्कि इस गाँव में रहने वाला कोई भी शख्स उस जांगले तक भी नहीं पहुंच सकता त्रिकाल ने hi ऐसा इंतजाम कर रखा है. वो मार्ग सिर्फ परदेसियों के लिए hi है. और आज तक कोई भी इस जंगल वाले रस्ते से आता हुआ नहीं दिखा सब यहाँ से बस जाते हुए hi दिखे है.

रूद्र – तो फिर पक्का ये रास्ता तिलिस्म से बहार फेंक देता होगा. और फिर कोई यहाँ से वापस नहीं आ पता होगा. अब ये जरुरी तो नहीं के अंदर जा कर मर hi जाते होंगे सब.

ा – नहीं रूद्र हमारी मान्यताप के अनुसार जितना तुम लोग तिलिस्म में अंदर आ चुके हो अब यहाँ से सिर्फ दो hi सुरतो में निकल सकते हो या तो तिलिस्म को तोड़ कर या मर कर……..

…………. क्यों की अब यहाँ से त्रिकाल भी चाहे तो तुम लोगो को तिलिस्म से बहार नहीं निकल सकता वो रस्ते तुम लोग बहोत पीछे छोड़ आये हो.

रूद्र – dhanyawad.tune तो लगा दिए हमारे ल…….

ा – जब यहाँ तक आये hi हो तो आगे बढ़ने से पहले कुछ खा पि कर आराम कर लो फिर चले जाना.

वह सामने तुम्हे खाना और पानी मिल जायेगा और आराम भी कर लो वह.

फिर वो आदमी चला गया और ये सब उस छोटे से ढाबे टाइप जगह पे आ गए जहा सुखी घास से बानी हुई चाट थी छओ के नीचे चारपाई राखी थी. और सामने hi एक औरत खाना बना रही थी. इनके बैठते hi एक लड़का इन सब के लिए पानी दे गया. सबने हाथ मुँह धोया और ठंडा पानी पीया. और वही सुस्ताने लगे. तीनो लेडीज भी अंदर जाकर फ्रेश हो कर आ गयी थी.

थोड़ी hi देर में खाना लग गया और इन सबने भर पेट खाना खाया. और आराम करने लगे वो ठंडी हवा बहोत अच्छी लग रही थी.

जब वह काफी देर हो गयी तो सब चलने लगे देव ने अपने जेब से कुछ मोहरे निकल के उस ढाबे वाली औरत को दे दी और वह से निकल पड़े. उस जांगले की तरफ.

सभी लोग थोड़ी hi देर में जांगले के पास पहुंच जाते है वह काफी घने और बड़े बड़े पेड़ थे. इस तरफ से उस तरफ का नजारा नहीं मिल प् रहा था. अब ये जांगले कितना बड़ा है ये तो उस में जा कर hi पता चलना था. सबसे आगे देव था फिर पूनम फिर रजनी उसके बाद नीलम और आखरी में रूद्र इस तरह साडी लेडीज को बीच में रख के चल रहे थे ये लोग. ये जांगले आम जांगले के जैसा hi था कोई जादुई चीज़ नहीं नजर आ रही थी. और न hi कोई ऐसा खतरा मालूम पड़ता था. ये लोग अभी खा पी के आराम कर के निकले थे तो शरीर में फुर्ती तो थी hi ये सब तेजी से आगे बढे चले जा रहे थे. पेड़ो से छान के धुप भी आ रही थी इसीलिए चलने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. सभी चौकन्ने थे जरा सी आहात पे सब एक्शन में आने को तैयार इन में से कोई भी अनादि नहीं था लेकिन खतरा इन सब की सोच से कही ज्यादा खतरनाक hi साबित हुआ था हर बार.

जांगले में चलते हुए काफी देर हो चुकी थी. तभी आगे चलती हुई रजनी झटके से अपनी जगह से उछली और पूनम के कंधो को पकड़ के जोर का धक्का दिया जिससे पूनम जमीन पे जा गिरी और रजनी हवा में ऊपर उठ गयी और करीब 20 फुट ऊपर हवा में लटकने लगी.

सभी देख कर हैरान थे के ये क्या हुआ. लेकिन अब सभी चौकन्ने हो चुके थे. देव नीलम पूनम रूद्र चारो के हाथो में तेज तलवारे नजर आ रही थी. और उनकी निगाहे चारो तरफ घूम रही थी. असल में रजनी ने पेड़ की दो मोती बेल को पूनम की तरफ बढ़ते देख लिया था जो पूनम को जकड़ने जा रही थी. बीच में आ जाने की वजह से पूनम तो बच गयी लेकिन वो दोनों बेल रजनी की दोनों बहो से लिपट गयी और उसे hi खनिक के ऊपर उठा दिया. अभी ये सब रजनी को hi देख रहे थे की तभी हर जगह से तेजी से बेल निकलने लगी दो बेल नीलम के हाथो को जकड़ने के लिए बढ़ी लेकिन नीलम ने गज़ब की फुर्ती से खुद को न सिर्फ बचाया बल्कि तेजी से घूमते हुए उस मोती बेल को कटती चली गयी. उधर पूनम के साथ भी यही हुआ. देव और रूद्र भी अपनी तरफ स्पीड में बढ़ती बेलो को काटने में लगे हुए थे. लेकिन तभी नीलम के पीछे से बेल आयी और उसके दोनों हाथो को जकड लिए और नीलम को भी ऊपर हवा में उठती चली गयी पूनम ये देख कर नीलम की तरफ बढ़ने लगी उसका ध्यान जैसे hi भटका तो दो बेल ने पूनम को भी जकड के हवा में तंग दिया इतना hi नहीं रूद्र और देव भी इस हमले से ज्यादा देर तक खुद को नहीं बचा सके. किसी को कुछ समझ में आये उससे पहले hi पांचो हवा में लटके हुए थे. तभी वह एक भयानक हसी गूंज उठी.

देव – कौन हो तुम ? और हमें इस तरह बांधने का क्या मतलब?

******* मए इस वन का रक्षक हु. बिना त्रिकाल की इजाजत के यहाँ कोई नहीं आ सकता. मेरा नाम वनकु है. तुम लोग तो वही हो न जो त्रिकाल के इस तिलिस्मी चक्र से स्वर्ण मणि लेने आये हो. अब तुम लोग नहीं बचोगे. इस जंगल में कदम रखना तुम लोगो की आखरी गलती साबित होगी. लेकिन मन्ना पड़ेगा इतनी देर तक आज तक कोई नहीं बचा मेरे सैनिको से तुम लोगो ने कैयो को मर गिराया लेकिन मेरे इन खतरनाक सैनिको से नहीं बच पाए. आखिर इन्होने तुम लोगो को पकड़ के लटका hi दिया न. है है है है है …………….

सभी अपनी जगह पे छत पता रहे थे. उनकी तलवारे भी उनका साथ छोड़ चुकी थी. और वनकु अपनी भद्दी हंसी हसे जा रहा था.

रूद्र - अबे सेल वनकु धोखे से हमला करता है. और खुद को तीसमारखाँ समझकर हस्ता भी है आमने सामने की लड़ाई का डैम हो तो आ जाओ अभी पता चल जायेगा कितना डैम है तुझ में और कौन हस्ता है फिर.

वनकु – बकवास मत कर छोकरे तुमने क्या मुझे बेवक़ूफ़ समझा है क्या ? मए यहाँ कोई मॉल युद्ध करने नहीं आया मए इस वन का रक्षक हु. तुम लोगो ने यहाँ बिना इजाजत कदम रखा और मैने पकड़ लिए इसमें धोखे की कोई बात hi नहीं और तुम लोगो को सजा देना मेरा हक़ बनता है. और तुम्हरे हिसाब से अगर ये धोखा है भी तो मुझे कोई फरक नहीं पड़ता के तुम लोग मुझे क्या समझते हो. मए तो वही करुगा जिसका मुझे शौक है . बहोत दिनों से किसी सुंदरी का साथ नहीं मिला. और आज त्रिकाल की मेहरबानी से तीन तीन हसीनाओ का साथ मिलेगा मुझे, आज तो मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं .

देव और रूद्र की आँखे गुस्से से जलने लगी वनकु की मंशा जानकर लेकिन वो अभी सिर्फ छटपटाने के आलावा कुछ नहीं कर प् रहे थे. गुस्सा तो रजनी पूनम और नीलम को भी आ रहा था लेकिन मजबूर वो भी थी. दुश्मन कोई सामने था नहीं जिसे काट डेल और बेबस वो तीनो पूरी तरह थी. उन्हें भी महसूस हो गया के आज तो तीनो की इज्जत गयी hi गयी. न वो खुद को बचने में सक्षम है न उन्हें बचने वाले मर्द इस समय ऐसी स्थिति में है के उनकी रक्षा कर सके.

तभी रजनी अपनी जगह पे नीचे आने लगी उसके दोनों हाथ अभी भी बंधे हुए थे. सब हैरानी से रजनी को नीचे उतारते देख रहे थे.

पूनम – देव कुछ करो रजनी खतरे में है.

वनकु – dev…hahahahahaha देव कुछ नहीं करेगा पूनम. अब जो करुगा मए करुगा तुम देखती जाओ, तुम सब बस यु hi देखते रह जाओगे और एक एक कर के मरते जाओगे. मए तो पहला भोग तेरा hi लगाने वाला था लेकिन इस रजनी ने बीच में आ कर तुम्हे बचाया अब इसका दंड मए इसे पहले दुगा. तुम दोनों के साथ तो मजे करुगा लेकिन इसका वो हल करुगा के जब जब ये जनम लेगी इसकी योनि में आज के दिन का दर्द रहेगा.

ितं में जैसे hi रजनी के पाँव जमीन पे टकराये जमीन पे दो बेल पहले से hi मौजूद थे जिन्होंने रजनी के पाँव जकड लिए साथ hi पूनम और नीलम के साथ भी ऐसा hi हुआ. वो दोनों भी जकड़ी हुई कड़ी रह गयी उन के हाथ पाँव दोनों जकड चुके थे.

तभी रजनी के पैरो की बेल पीछे होने लगी जिससे रजनी जमीन पे पीठ के बल लेटती चली गयी कुछ hi पालो में रजनी इस तरह लेती हुई थी के उसके हाथ पांव अलग अलग फैले हुए दूर बेलो से बंधे हुए नजर आ रहे थे और वो जमीन पे चित्त लेती हुई थी. जैसे सम्भोग के लिए कोई औरत लेटती है.

तभी एक मोती बेल जमीन पे रेंगती हुई आने लगी. लमबाई तो उसकी बढ़ती hi जा रही थी और मोटाई hi करीब 5 इंच की होगी.

देव – वनकु ये क्या कर रहे हो. ये मायावी नगरी है तुम किसी के साथ ऐसा नहीं कर सकते. तुम इस तरह किसी औरत का बलात्कार नहीं कर सकते. ये नियमो के विरुद्ध होगा. है तुम चाहो तो हम में से किसी को भी जान से मर सकते हो लेकिन बलात्कार नहीं वनकु………

वनकु - मए इन तीनो के साथ अपनी प्यास बुझाऊगा ये जो आगे बढ़ रहा है न इस हसीना की टैंगो के बीच में ये कोई बेल नहीं मेरा लिंग है. अब देखो सबसे पहले मेरे इस लिंग को शांत करने का मौका मए इस मायावी नगरी की पिछली महारानी इस रजनी को दुगा बहोत आग है न इसमें जो इसने तेरे साथ बुझाने की कोशिश की थी. आज मए इसकी आग बुझाऊगा. देखु तो सही आखिर इसने तुम्हे ऐसा क्या दिया जो तुम इसे अपने साथ ले के घूम रहे हो.

पूनम – देव ………………रोको इसे रजनी मर जाएगी कुछ करो.

रूद्र क्रोध में लाल हो चूका था.

वनकु अगर इनमे से किसी को आंच भी आयी न तो मए इस जांगले को जलाकर रख कर दुगा सेल छोड़ दे इन्हे और हमसे मुकाबला कर. रूद्र बुरी तरह छटपटाते हुए चीख रहा था गुस्से से.

वह वो बेल ( लिंग ) जो काफी मोटा था और एक चिप छिपी लसलसी टाइप चीज लग रहा था. वो सरकता हुआ अब रजनी के दोनों फैले हुए पैरो के बीच पहुंच चूका था और उसकी साड़ी जो उसकी जांघो तक उठ चुकी थी उसके भीतर बढ़ रहा था धीरे धीरे.

देव – पूनम शंकर को यद् करो उसे बुलाओ उसने कहा था तुम जब भी चाहो उसे बुला सकती हो.

इतना सुनते hi पूनम की आँखों में चमक आ गयी . और वो शंकर को यद् करने लगी कुछ hi पालो में पूनम की आंखे खुल गयी और अब वो शांत लेती हुई थी. और तभी उसके होठ हिले

शंकर - वनकु ………………ये क्या कर रहा है क्या तुम्हे त्रिकाल ने इसीलिए यहाँ रखा है? शंकर की आवाज़ जांगले में गूंजने लगी.

वनकु - ओह्ह शंकर तू आ hi गया बहोत दिनों बाद तेरी आवाज़ सुनी है. मए बस अपना काम कर रहा हु मुझे मत रोक त्रिकाल को ये पससंद नहीं आएगा. और तू तो sa-shareer यहाँ है भी नहीं इसीलिए तू मुझे रोक भी नहीं पायेगा चल जा यहाँ से और मुझे मेरा काम करने दे. वार्ना सबसे पहले इस पूनम को hi दाल दुगा जिससे तेरी भी बोलती बंद hi जाएगी. अब जा परेशन न कर मुझे……….

……….है है है है है आ जा मेरी रजनी रानी आज मए तेरी प्यास बुझाता ु अपने इस मोठे लिंग से और तू मेरी प्यास बुझा दे अपनी इस कोमल काया से. वनकु की हवस में डूबी आवाज़ गूंजने लगी और रजनी की चीखे…………..
 
भाई सबसे पहले तो आपके रिव्यु के लिए बहोत बहोत धन्यवाद. अब ये लोग वनकु को कैसे हराएंगे क्या और कौन सी चीज़ इनकी मदद करेगी ये आपको आने वाले अपडेट में पता चल hi jayega,yaha आपकी बात का समर्थन कर के या इंकार कर के आपका सस्पेंस ख़तम नहीं करुगा. आपकी सोच भी सही है. लेकिन ये लोग रपे से रजनी को बचा पाएंगे या नहीं ये भी देखने वाला पॉइंट होगा क्यों की यद् रहे रजनी कोई लीड रोले में नहीं है बल्कि साइड रोले में है. तो आगे देखिये क्या होता है?
 
नैना जजी बहोत बहोत धन्यवाद हमेशा की तरह आपके शानदार, जानदार, लाजवाब रेवो के लिए.

करम किसी का पीछा नहीं छोड़ते चाहे वो कोई इंसान हो या देवी देवता. ये हमारे धरम ग्रन्थ भी कहते है कई देवी देवताओ ने जब धरती पर जनम लिया है तो उन्हें भी कर्मो के अधीन हो कर hi रहना पड़ा है. तो करम हर किसी पर लागु होते है.

अब आते है स्टोरी लाइन पर तो गाँव में तो कुछ नहीं हुआ लेकिन जंगल में ये फिर से एक नयी मुसीबत में उलझ गए है. जहा ये सब मजबूर हो चुके है वही शंकर भी कही न कही मजबूर है क्यों की वो फिजिकली वह नहीं है और वनकु को नहीं रोक प् रहा है साथ hi वनकु ने भी अपनी मनमानी करने की थान hi ली है शंकर को इग्नोर कर के और उसी इरादे से रजनी की तरफ बढ़ रहा है. पूनम और नीलम भी लगभग उसी कंडीशन में जमीन पे पहुंच चुकी है. जब इनकी मदद कोई नहीं कर प् रहा है तो फिर किस तरह ये लोग बचेंगे? बचेंगे भी या इनमे से किसी के साथ कोई दुर्घटना हो जाएगी. वो भी बाकि सब के सामने. ये देखना दिलचस्प होगा. क्या इनमे से किसी का साथ यही तक था? क्या ये 5 फिर से 4 हो जायेगे? या सब मिल कर आगे बड़ेगे? सब पता चल जायेगा नेक्स्ट अपडेट में सो अगेन वेट एंड वाच.





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थैंक्स यू वैरी मच भाई फॉर योर वंडरफुल रिव्यु. ये जान कर अच्छा लगा के आप कहानी के पात्रो से जुड़ चुके है और किसी अच्छे पत्र के साथ बुरा होता हुआ आप कहानी में भी बर्दाश्त नहीं कर प् रहे है. लेकिन भाई कहानी कब किस तरफ मुद जाएगी पता नहीं चलता.

वेल.... फ़िलहाल कहानी को ऐसा ु टर्न देने का कोई इरादा नहीं हमारा. और न hi अभी हम चरक्टेर्स के साथ कोई एक्सपेरिमेंट करने के मूड में है. चलिए देखते है आगे क्या होता है रजनी के साथ और आप पूनम नीलम को भूल रहे है वही सब उनके साथ भी करने का सोच बैठा है अपना वनकु. बस ओपनिंग रजनी से कर रहा है. होगा तो पूनम और नीलम के साथ भी वैसा hi. ये हम नहीं कह रहे है, बल्कि वनकु कह चूका है.
 
अपडेट - 152

……….है है है है है आ जा मेरी रजनी रानी आज मए तेरी प्यास बुझाता हु अपने इस मोठे और लम्बे लिंग से और तू मेरी प्यास बुझा दे अपनी इस कोमल योनि से. वनकु की हवस में डूबी आवाज़ गूंजने लगी और रजनी की चीखे…………..

अब आगे……

……..मए त्रिकाल का गुलाम नहीं वनकु ये तू भी जनता है. इन्हे छोड़ वार्ना अंजाम अच्छा नहीं होगा. तू मेरा मुकाबला नहीं कर सकता. शंकर की गुर्राती हुई आवाज़ निकली पूनम के होठो से.

….शंकर तू भूल रहा है के ये मेरी जगह है और फिर मुझ पर त्रिकाल का हाथ भी है. तू मेरा कुछ नहीं बिगड़ पायेगा. चला जा यहाँ से वनकु ने कहा.

शंकर यानि पूनम ने पलट कर देव को देखा जो उसे hi देख रहा था.

शंकर – देव तुम hi बचा सकते हो सबको. फ़कीर बाबा ने तुम्हे बहोत कुछ दिया है.

देव – है लेकिन यहाँ मेरी बहोत सी शक्तिया काम नहीं कर रही है.

शंकर - वो मए जनता हु तुम इस जगह का मानचित्र लेने जब गए थे तो उस समय तुम्हारा पड़ाव कहा हुआ था? और क्या वह से तुम्हे कुछ मिला था जिस से तुम हमेशा वह जा सको बिना रोक टोक.

देव ने थोड़ी देर सोचा और सर उठा कर अपने हाथ की तरफ देखा उसमे वनराज की दी हुई अंगूठी थी.

बिलकुल ठीक देव मए इसी की बात कर रहा हु. तुम इन्हे बचा सकते हो शंकर ने कहा.

देव ने अपनी आंखे बंद की और उस ऊँगली को अपनी हाथ की तरफ किया जो बेल से बंधा था. तभी झटके से वो बेल खुल गयी देव ने दूसरी बेल की तरफ हाथ कर दिया वो भी खुल गयी.

देव जमीन पे कूद के पंहुचा . और उसने अपना हाथ सीधा उस मोती बेल की तरफ किया जो रजनी की साड़ी में गम होने hi वाली थी. वनराज की अंगूठी से एक तेज रौशनी निकली और सीधा जाकर वनकु के उस लिंग से टकराई एक तेज धमाके के साथ उसके चीथड़े उड़ गए. और वनकु की चीख भी गूंज उठी और अचानक सबके सहरीर से बंधी बेल छुट्टी चली गयी. रूद्र दौड़ कर उस लिंग तक पंहुचा और उसे अपने पैर से दबा के खड़ा हो गया जो धीरे धीरे वापस सरक रहा था. लेकिन रूद्र के पैर रख देने से वनकु की चीखे तेज हो गयी इससे उसके दर्द का अहसास हो रहा था. तभी रूद्र ने अपनी कमर से एक बड़ा सा खंजर निकला और सीधा उस लिंग के बीचो बीच घुसा के बहोत आगे तक चीरता चला गया उस लिंग या मोती बेल से खून का फवारा बहा जा रहा था. और वो चीज़ बहोत तेजी से फड़फड़ा रही थी. जैसे किसी जानवर का कटा हुआ धड़ फड़फड़ाता है.

देव – रूद्र छोड़ उसे वापस आ.

रूद्र काफी आगे तक उसे चीयर आया था. उसका गुस्सा तो ठंडा नहीं हुआ था लेकिन वनकु की चीखे गूँज रही थी पूरे जांगले में.

थोड़ी देर बाद सब कुछ शांत हो गया.

देव – शंकर तुमने कहा था के तुम पूनम को मुसीबत में नहीं पड़ने डोज. और उसे बचा लोगे. फिर आज क्या हो गया तुम पहुंचे नहीं?

शंकर - देव मए झूठ नहीं बोलता लेकिन त्रिकाल ने मुझे दूसरी जगह उलझा दिया जिससे मेरा ध्यान पूनम से हैट जाये. और फिर उसने यहाँ हमला करवा दिया. इसीलिए मए यहाँ नहीं पहुंच पाया पर आगे से ऐसा नहीं होगा. और तुम्हे भी वनराज को नहीं भूलना चाहिए था.

देव – है मए उनकी दी हुई अंगूठी को भूल hi गया था. लेकिन ये तो सब तिलिस्मी है यहाँ वनराज की अंगूठी ने अपना काम कैसे कर दिया?

शंकर – हर जगह पे प्राकृतिक चीजे hi है चाहे वो धरती लोक हो, नागलोक हो, तिलिस्म नगरी हो, या त्रिकाल का ये तिलिस्मी चक्र प्रकृति अपना स्वाभाव नहीं बदलती. हम उसे इस्तेमाल अपने तरीके से कर सकते है. अब पानी शीतल होता है, प्यास बुझाता है तो वो हर जगह बुझायेगा ऐसा तो नहीं के सिर्फ धरती लोक पे hi प्यास बुझायेगा यहाँ आकर भूख मिटाएगा या जलाएगा. उसी तरह ये पेड़ ये वन जैसे वनराज के राज्य में है वैसे hi यहाँ hae.unka प्रभाव तो हर जगह एक सा रहेगा तो उनकी शक्ति भी असर हर जगह करेगी इसीलिए मैने तुम्हे वनराज की यद् दिलाई. कुछ भी व्यर्थ नहीं होता किसी से भी मिलना इस संसार में व्यर्थ का नहीं है. अगर आप किसी से मिल रहे हो मतलब आपके करम उससे कही न कही जुड़े होते है फिर चाहे वो किसी भी जनम के क्यों न हो. हर किसी का कोई न कोई मतलब कोई मकसद जुड़ा है. इसे मत भूलना.

रूद्र – शंकर क्या तुम बता सकते हो स्वर्ण मणि कहा है या उस तक कैसे पहुंचे?

शंकर - रूद्र क्यों भूल जाते हो ये बात बार बार? तुम सब जानते हो के ये त्रिकाल का तिलिस्म है और ये पूनम और देव के नाम से बंधा है. यानि इनके आलावा कोई नहीं जनता के स्वर्ण मणि कहा है हलाकि जानते तो ये दोनों भी नहीं है लेकिन अगर कोई उस मणि तक पहुंच सकता है तो वो है पूनम और देव या फिर इनसे दुगनी म्हणत कर के तुम और नीलम भी पहुंच सकते हो. क्यों किट ुम लोगो को इनका साथ हासिल है और शक्तिया भी तुम लोगो के पास बहोत ज्यादा है. लेकिन तुम चारो के आलावा तो कोई यहाँ के बारे में जनता hi नहीं सिवाए त्रिकाल के. क्यों की उसने hi ये सब बनाया है. रही बात मेरी तो मए सिर्फ वही तक जा सकता हु जहा तक पूनम के कदम पद चुके है. उससे आगे नहीं. और मए जहा जा hi नहीं सकता उसके बारे में कैसे बता सकता हु?

रूद्र – समझ गया भाई तू इंदिरेक्ट्ली इंकार hi कर रहा है? भले hi मजबूर है तू मए समझ सकता हु.

शंकर - पुरे ब्रम्भाण्ड में ऐसा कोई नहीं जो तुम्हे स्वर्ण मणि तक पंहुचा सके सिवाए देव और पूनम के और मजे की बात बताऊ मेरी शक्तिया मुझे बता रही है के ये दोनों उस मणि तक पहुंच कर भी उसे हासिल नहीं कर पाएंगे.

रूद्र - अबे हार्ट अटैक देगा क्या?

शंकर – पूरी बात तो सुन ले.

रूद्र – बोल लेकिन हार्ट अटैक न देना भाई

शंकर - मए ये कहना चाहता हु के पूनम या देव भी उस मणि को हासिल नहीं कर पाएंगे अगर उस वक़्त तुम और नीलम इनके साथ न हुए तो. ये उस मणि तक पहुंच कर भी उससे उतनी hi दूर होंगे जितने ये इस वक़्त है. इसीलिए ध्यान रखना एक दूजे का साथ न छोड़ना.

देव – शंकर मए कुछ पुछु?

शंकर - पूछ देव लेकिन जल्दी मेरा समाया यहाँ पूरा होने वाला है मुझे जाना होगा जल्दी hi.

देव – क्या हम सही मार्ग पे है?

शंकर – देव जैसा के मैने कहा अभी के मुझे आगे की जानकारी नहीं है. और मैने तो मानचित्र भी नहीं देखा है वो भी तुमने hi देखा है तो उसी से गड़ना कर लो. वैसे जहा तक मेरा अंदाजा है तुम लोग शायद सही दिशा में हो लेकिन मए पक्के टूर पे नहीं कह सकता. ये तुम लोगो के ऊपर निर्भर करता है. अपनी सूझ बुझ से आगे बढ़ो किसी के बहकावे में मत आना और एक दूजे का साथ मत छोड़ना चाहे कुछ भी हो जाये एक दूजे पे विश्वास रखना. अब मए चलता हु.

तभी पूनम के शरीर को हल्का सा झटका लगा और वो सामान्य हो गयी. और दौड़ कर देव के गले से लग गयी देव ने उसे अपनी बहो में भर लिया और रजनी को भी अपने पास बुलाकर उसे भी गले से लगा लिया

देव – तुम ठीक हो?

रजनी - है मए ठीक हु देव. तुम्हारा बहोत बहोत धन्यवाद तुमने मेरी जान बचा ली वार्ना आज मेरी जिंदगी का आखरी दिन होता.

देव – नीलम सब ठीक है न ?

नीलम - जी देव भैया हम सब ठीक है.

ये लोग आगे चलने लगे लेकिन जैसे जैसे ये लोग जांगले में आगे बढ़ रहे थे अँधेरा भी बढ़ता जा रहा था. क्यों के आगे जांगले गहराता जार अहा था.

रूद्र - उस ताऊ की माँ की आंख कह रहा था के ये जंगल ज्यादा बड़ा नहीं है यहाँ तो ये ख़तम होने का नाम hi नहीं ले रहा है.

नीलम – क्यों तुझे कही जाना है क्या डेट पे? ये जांगले ख़तम हो भी जायेगा तो क्या बड़ा काम हो जायेगा हमारा सफर तो ख़तम नहीं होगा न?

रूद्र - अरे मेरी चंद्रमुखी तू तो बड़ी हो गयी रे कितनी समझदारी की बात कही है ये तो हम में से कोई जनता hi नहीं था. थैंक्स फॉर इन्फॉर्म

नीलम - अन्य टाइम सर जी

रूद्र – चोंच बंद रख अपनी बड़ी आयी सर जी वाली यहाँ चलते चलते हालत ख़राब हो रही है और तुझे मसखरी सूझ रही है?

नीलम - न जी सूझ तो और भी बहोत कुछ रहा है आप कहो तो शुरू हो जाऊ? नीलम ने रूद्र को आंख मरते हुए शोख ऐडा से कहा.

रूद्र – देख नीलम चुप हो जा भगवन के लिए चुप हो जा मए सदा हुआ हु तू और मत सदा यार.

इनकी ऐसी hi चुहल बजी चलती रही

देव – रूद्र - मुझे लगता है हम लोग जांगले से बहार पहुंचने वाले है पहले अंदर घुटन टाइप की लग रही थी लेकिन अब हवा धीरे धीरे खुल रही है. लेकिन अभी रत भी गहरी होती जा रही है तो सुबह hi आगे बड़ेगे चल टेंट लगा देते है यही पर.

रूद्र – तू सच में भाई है मेरा मए भी यही कहने वाला था यार चल जल्दी कर थोड़ा कमर तो सीढ़ी कर hi लेते है

नीलम धीरे से - बस अपनी कमर hi सीढ़ी करना मेरी टंगे उठा कर मेरी कमर मत तोड़ देना.

रूद्र ने जलती हुई आँखों से उसे देखा तो वो मुस्करा के पूनम की तरफ भाग गयी.

थोड़ी देर में टेंट लग गया और सभी अंदर लेट कर आराम करने लगे. धीरे धीरे कर के सबको नींद आ गयी लेकिन देव और रूद्र ने बरी बरी से जग कर निगरानी की रत भर.

सुबह की पहली किरण के साथ hi सभी अपने नित्य करम में लग गए और फिर रजनी ने hi खाने पीने का इंतजाम किया नाश्ता कर के ये लोग उठ खड़े हुए.

रूद्र - चलो आगे चले

देव ने भी गार्डन हिलायी और सभी आगे बढ़ने लगे.

इस बार उन्हें कुछ नहीं होता वो करीब तीन घंटे तक आगे बढ़ते रहे और जांगले ख़तम होने को आ गया सामने hi हरियाली नजर ा रही थी. पर जैसे hi जांगले ख़तम हुआ इन सब की बुद्धि hi चक्र गयी सामने का नजारा देख कर. क्यों की सामने जोट है उसकी तो उन में से किसी ने कल्पना तक न की थी.
 
भाई धन्यब्वाद आपके रिव्यु के लिए. लेकिन इस तिलिस्म का निर्माण तो कहानी लिखने से पहले हम कर चुके अपने मंद में. और सॉरी तो से के ये अभी और चलेगा क्यों की बहार आने के बाद यहाँ पे घाटी हुई घटनाओ का सीध सम्बन्ध होगा. और वही नहीं दिखाई तो आप लोग hi कंप्लेंट करोगे. वैसे बहार का मजा तो लगभग 100 के ऊपर उपदटेस में ले चुके है न और आगे भी लेना hi है तो थोड़ा यहाँ की दुनिया को एन्जॉय कर लो.
 
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