Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 15 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

#89.

व्योम धीरे से पानी से बाहर निकला और चलता हुआ उस ब्लू-व्हेल के चेहरे के पास पहुंच गया।

ब्लू-व्हेल बिल्कुल भी हिल नहीं रही थी।

थोड़ा और पास जाने पर व्योम को उस ब्लू-व्हेल का पेट एक जगह से कटा हुआ दिखाई दिया। जहां पर एक दरवाजा लगा हुआ था।

“यह क्या? यह तो नकली व्हेल है.... नहीं नहीं शायद यह कोई पंडुब्बी है जो ब्लू-व्हेल की शकल में है। पर यह तो बिल्कुल सजीव जैसी दिख रही है। अब तो श्योर हो गया कि यह पृथ्वी की टेक्नोलॉजी नहीं है।

शायद यह कोई एलियन का ‘सब स्टेशन’ है, जो वह इंसानो की नजर से छिपाने के लिये इस प्रकार बना कर रखे हैं। पर ... पर यहां पर मैं साँस ले पा रहा हूं। यानी कि यहां पर पर्याप्त ऑक्सीजन है और ऐसा तभी हो सकता है, जब कि यहां रहने वाला भी साँस लेने में ऑक्सीजन का ही प्रयोग करता हो। तो फिर क्या एलियन भी ऑक्सीजन लेते हैं?"

ऐसा लगा जैसे कि व्योम के दिमाग में प्रश्नो की लाइब्रेरी खुल गयी हो।

अब व्योम का ध्यान उन सुरंग की ओर गया। कुछ देर सोचने के बाद व्योम एक सुरंग में दाख़िल हो गया।

वह सुरंग जिस जगह निकली, उसे देखकर व्योम हैरान रह गया।

वह न्यूयॉर्क शहर की डमी लग रहा था और वहां मौजूद बहुत से लोग स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी का निर्माण कर रहे थे।

व्योम कुछ देर सोचता रहा और फ़िर पास से जा रही एक लड़की को रोककर पूछा- “यह कौन सी जगह है?"

लड़की ने व्योम को ऊपर से नीचे तक देखा और फ़िर बोली-

“क्या तुम अपना प्रोग्राम डिलीट कर बैठे हो?"

व्योम को कुछ समझ में नहीं आया, पर उसने धीरे से हां में सिर हिला दिया।

“तो जाकर उस मशीन से अपने को रीबूट कर लो।"

इतना कहकर उस लड़की ने व्योम को एक मशीन की तरफ इशारा किया और आगे बढ़ गयी।

“प्रोग्राम, डिलीट,रीबूट...क्या बोल गयी वह लड़की? कहीं...कहीं मैं किसी कंप्यूटर प्रोग्राम में तो नहीं आ गया।"

अब व्योम की निगाहें उस मशीन की ओर थी, जिसकी तरफ उस लड़की ने इशारा किया था।

व्योम चलते हुए उस मशीन के पास पहुंच गया। मशीन पर काफ़ी बटन लगे हुए थे।

कुछ सोचने के बाद व्योम ने एक बटन को दबा दिया। उस बटन के दबाते ही सामने लगी स्क्रीन रोशन हो गयी और उसमें लगभग 18 साल की आयु वाले एक लड़के की फोटो दिखाई दी।

“कैस्पर आपका न्यूयॉर्क शहर प्रोग्राम में स्वागत करता है। मैं आपकी किस प्रकार मदद कर सकता हूं?" मशीन से आवाज आयी।

“मैं इस शहर के बारे में जानना चाहता हूं?" व्योम ने कहा।

“ये ‘तिलिस्मा प्रोजेक्ट 3.2‘ का न्यूयॉर्क शहर है, यहां पर स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी का निर्माण किया जा रहा है।"

“ये ‘तिलिस्मा प्रोजेक्ट क्या है?" व्योम ने दोबारा पूछा।

“माफ कीजियेगा, मगर इस प्रश्न का जवाब देने के लिये मुझे आपका सुरक्षा कोड जानना होगा।" कैस्पर ने कहा।

“अच्छा वो छोड़ो। ये बताओ कि तुम कौन हो?" व्योम ने प्रश्न को बदलते हुए पूछा।

“मेरा नाम कैस्पर है, मैं इस तिलिस्मा के सारे कंप्यूटर का संचालन करता हूं।" कैस्पर ने कहा।

“क्या यहां पर मौजूद सभी इंसान रोबोट हैं?" व्योम ने पूछा।

“नहीं। यह सब तिलिस्मा प्रोग्राम का हिस्सा हैं। प्रोग्राम के ख़तम होते ही यह सब भी गायब हो जाएंगे।" कैस्पर ने कहा।

“तुम्हारा निर्माण किसने किया?" व्योम ने पूछा।

“मेरा निर्माण किसी ने नहीं किया। मैंने अपना निर्माण स्वयं किया है।" कैस्पर ने कहा- “और आपके प्रश्न पूछने की अवधि अब समाप्त होती है।"

इतना कहने के बाद उस मशीन पर लगी स्क्रीन ऑफ हो गयी।

व्योम केवल इतना समझ पाया कि यह द्वीप किसी दूसरे ग्रह के वासिओ का अड्डा है, जहां की तकनीक बहुत ज़्यादा विकसित है और यह लोग किसी तिलिस्मा नाम के प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहे हैं।

उस स्थान से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, इसलिये व्योम उस सुरंग के रास्ते ब्लू-व्हेल वाले रास्ते पर पहुंच गया।

यहां से निकलने का रास्ता ढूंढने के लिये व्योम अब सुरंग के दूसरे रास्ते में प्रविष्ट हो गया।

दूसरी जगह एक ऐसे स्थान पर जाकर खुली, जो इस ग्रह का वातावरण ही नहीं लग रहा था।

पूरा वातावरण लाल रंग से निर्मित था। वहां पर एक लगभग 500 फुट ऊंची मूर्ति का निर्माण चल रहा था। वह मूर्ति किसी विशाल योद्धा की लग रही थी, जिसके 7 सिर थे और हर एक सिर किसी जानवर का था।

“बाप रे.......... ये कौन सा योद्धा है, इसका एक सिर शेर का, एक घोड़े का, एक बंदर, एक हाथी, एक गाय, एक गरुड़ और एक मगरमच्छ का है। ऐसे योद्धा का तो वर्णन भी नहीं सुना किसी किताब में। मुझे यह जगह बहुत ज़्यादा खतरनाक दिख रही है। मुझे तुरंत यहां से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना होगा।"

व्योम उस जगह से भी निकलकर वापस सुरंग में आ गया और सुरंग के एक नये रस्ते पर चल दिया।

वह रास्ता एक महल में निकल रहा था।

महल के बीचोबीच एक शानदार पानी का फव्वारा चल रहा था। उस फव्वारे के चारो ओर बहुत से कमरे बने थे, पर वहां पर कोई भी नजर नहीं आ रहा था। व्योम ने जल्दी-जल्दी झांक कर अलग-अलग कमरो में देखना शुरू कर दिया।

कोई कमरा बेडरूम जैसा लग रहा था, तो कोई किचन जैसा। एक कमरे में तो किताबें ही किताबें भरी हुई थी।

वहां देखकर साफ पता चल रहा था कि इस क्षेत्र में कोई एक ही आदमी रहता है और वो भी इस समय यहां से कहीं गया है।

एक कमरे में जैसे व्योम ने झांका, वह हैरान रह गया। उस कमरे में चारो तरफ स्क्रीन ही स्क्रीन लगी थी। हर स्क्रीन पर अलग वीडियो चलती दिख रही थी। अधिकतर वीडियो जंगलो के थे।

ऐसा लग रहा था कि किसी जंगल में हजारों वीडियो कैमरे लगे हुए हो।

एक तरफ व्योम को वह दृश्य भी दिखाई दिये, जिसे अभी वह देख कर आया था।

तभी व्योम की नजर एक वीडियो पर जाकर अटक गयी, उस वीडियो में कुछ इंसान जंगल में जाते हुए दिखाई दे रहे थे।

“कहीं ये ‘सुप्रीम’ के लोग तो नहीं क्यूं कि सभी के कपड़े गंदे दिख रहे हैं और जिस प्रकार ये चल रहे हैं, उससे साफ दिख रहा है कि ये लोग इस जंगल से अंजान हैं।"

चूंकि उस वीडियो से आवाज नहीं आ रही थी, इसिलये व्योम यह नहीं जान पाया कि वह क्या बात कर रहे हैं?

तभी व्योम को एक किनारे रखी हुई एक आदमकद मशीन दिखाई दी। उस मशीन पर एक छोटा सा प्लैटफ़ॉर्म बना था।

उसके सिर वाली जगह पर कोई कैमरे जैसी चीज बिल्कुल किसी स्नानघर के शावर की तरह लग रही थी। उस मशीन पर बहुत से अलग-अलग रंग के बटन भी लगे थे।

व्योम उस मशीन के प्लैटफ़ॉर्म पर चढ़कर उसे ध्यान से देखने लगा। देखते-देखते व्योम ने उस मशीन पर लगे एक नीले बटन को दबा दिया।

बटन को दबाते ही ऊपर लगे कैमरे जैसे यंत्र से एक नीले रंग की तेज रोशनी निकलकर व्योम के ऊपर गिरी।

उस रोशनी के गिरते ही व्योम को अपना शरीर लाखों टुकडो में बंटता हुआ सा महसूस हुआ। उसे ऐसा लगा जैसे उसका शरीर किसी अंधे कुएं में गिर रहा हो।

चैपटर-10 (असलम का रहस्य)

(9 जनवरी 2002, बुधवार, 12:30, मायावन, अराका द्वीप)

चलते-चलते दोपहर का समय हो गया था। सुयश ने एक नजर अपने साथियों पर डाली। एलेक्स और क्रिस्टी को छोड़कर सभी के चेहरे उतरे हुए लग रहे थे।

ड्रेजलर की मौत के बाद अब 11 लोग बचे थे। सुयश भी आदमखोर पेड़ से मरते-मरते बचा था।

इस समय सभी छोटे-छोटे पौधो वाले स्थान से गुजर रहे थे।

“ये कैप्टन हमको जंगल में घसीटे जा रहा है। आखिर हमें तलाश किसकी है?" जॉनी ने धीरे से जैक के कान में फुसफुसा कर कहा।

“कैप्टन हमें नहीं घसीट रहा बेवकूफ।" जैक ने भी धीमे स्वर में कहा- “हम खुद उसके पीछे-पीछे चल रहे हैं और हमें इंसानों की तलाश है। शायद इस जंगल के दूसरी ओर कोई कबीला हो? और हमें वहां से किसी तरह की मदद मिल जाए?"

“आदिवासी कबीला!" जॉनी यह सुनकर खुश हो गया- “फ़िर तो वहां पर शराब भी मिल जायेगी। सुना है कबीले वालों के पास बहुत अलग तरह की शराब होती है।"

“अबे नशेड़ी।" जैक ने झुंझलाते हुए कहा- “यहां सबकी जान पर बन आयी है और तुझे शराब की चिंता हो रही है।"

“मुझे कहां चिंता......।" कुछ कहते-कहते जॉनी अचानक किसी आवाज को सुन चुप हो गया।

जॉनी ने मुंह पर उंगली रखकर जैक को भी चुप रहने का इशारा किया।

“खड़-खड़-खड़"

तभी एक आवाज पुनः आयी। अब सभी का ध्यान आवाज की दिशा की ओर गया।

“यह तो सूखी पत्तियो के कुचलने की आवाज है।" शैफाली ने धीरे से कहा।

तभी सब को सामने से आता हुआ एक भयानक जंगली सुअर दिखायी दिया।

जंगली सुअर के नुकीले और लंबे दाँत उसके मुंह से बाहर निकले हुए थे। वह सुअर साइज में काफ़ी बड़ा था। उसके दाँतो की धार बहुत तेज नजर आ रही थी।

“कोई भागना नहीं।" अल्बर्ट ने धीमे स्वर में कहा- “सभी अपनी जगह पर रहें और हिलने डुलने की कोशिश ना करें।"

ऐमू की नजरें भी सुअर पर थी, पर ऐमू ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखायी।

किसी के भी शरीर में तो कोई हरकत नहीं हो रही थी, पर सभी के दिल बहुत तेजी से धड़क रहे थे।

धीरे-धीरे वह जंगली सुअर उनके पास आता जा रहा था। तौफीक और ब्रेंडन ने चाकू निकालकर अपने हाथ में ले लिया था।

तभी डर की वजह से असलम के हाथ से उसका काला लेदर बैग छूटकर जमीन पर गिर गया।

खटके की आवाज सुन अब उस जंगली सुअर का ध्यान पूरी तरह से असलम पर हो गया।

सुअर ने असलम को देखते हुए एक तेज आवाज अपने मुंह से निकाली और दौड़ते हुए असलम की ओर झपटा।

जारी रहेगा________✍️
 
#90.

एक सेकंड से भी कम समय असलम को खतरे का अहसास हो गया। वह तेजी से एक दिशा की ओर भागा।

सुअर असलम को भागते देख तेजी से उसके पीछे दौड़ा। अब सुअर के मुंह से गुस्से भरी फुंफकार निकल रही थी।

असलम जान छुड़ा कर भाग रहा था। तभी असलम के रास्ते में एक पत्थर आ गया।

असलम भागते-भागते उस पत्थर से जोर से टकराया और हवा में उछलकर एक कीचड़ जैसे तालाब में गिर गया।

सुअर कीचड़ देख कर रुक गया। अब वह असलम को देखते हुए अपने अगले 2 पैरों को बारी-बारी से जमीन पर रगड़ने लगा।

सुअर को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि वह असलम पर अपना रोष प्रकट कर रहा हो।

सुअर कुछ देर तक असलम को ऐसे देखता रहा, फ़िर धीरे-धीरे वह जंगल के अंदर कीओर चला गया।

बाकी सभी लोग जो अब तक बुत बने यह नजारा देख रहे थे, सुअर को जाते देख भाग कर असलम की ओर आ गये।

ब्रेंडन ने आगे बढ़कर असलम का लेदर बैग उठाकर अपने गले में टांग लिया।

कुछ ही क्षण में सभी असलम के पास थे। असलम डर की वजह से अभी भी कीचड़ में था।

“बाहर आ जाओ असलम। सुअर अब चला गया है।" सुयश ने कीचड़ में गिरे पड़े असलम को देख कर कहा।

“खतरा ... खतरा .... खतरा।"

तभी ऐमू असलम के ऊपर उड़ता हुआ जोर से चिल्लाया।

सभी हैरानी से ऐमू की ओर देखने लगे। असलम की भी निगाह अपने चारो ओर घूमी, पर उसे आस-पास कुछ नजर नहीं आया।

अब असलम ने उस कीचड़ से निकलने की कोशिश की। मगर असलम के पैर अब कीचड़ में बुरी तरह से फंस गये।

“कैप्टन.... मेरे पैर....।" असलम ने चीख कर कहा- “मेरे पैर इस कीचड़ में पूरी तरह से फंस गये हैं। मैं बाहर नहीं निकल पा रहा हूं।"

यह सुनते ही अल्बर्ट की निगाह निगाहें में चारो ओर घूमी, उसे कुछ दूरी पर कीचड़ से निकलते कुछ बुलबुले दिखायी दिये।

इससे पहले कि असलम को बचाने के लिये कोई और कीचड़ में उतरता, अल्बर्ट चीख कर बोला-

“कीचड़ में कोई मत जाना, यह कीचड़ नहीं खतरनाक दलदल है। जो इसमें असलम को बचाने के लिये उतरेगा, वह स्वयं भी इस दलदल में फंस जायेगा।"

असलम अल्बर्ट की बात सुनकर एकदम से डर गया। वह तेजी से अपने हाथ पैर हिलाकर दलदल से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा।

ऐसा करने की कोशिश में असलम अब दलदल में धंसना शुरू हो गया।

“असलम हिलने-डुलने की कोशिश मत करो।" असलम को हिलते देख अल्बर्ट चीख कर बोला-

“जितना हिलने-डुलने की कोशिश करोगे, उतना तेजी से दलदल में समाओगे। बिल्कुल शांत रहने की कोशिश करो। हम तुम्हें बचाने के लिये कोशिश करते हैं । हम तुम्हें कुछ होने नहीं देंगे।"

“रस्सी....।“ ब्रेंडन चिल्लाया- “हमें रस्सी चाहिये, बिना रस्सी हम असलम को नहीं बचा पायेगे।"

“यहां पर रस्सी कहां से मिलेगी?" सुयश ने अपना दिमाग लगाते हुए कहा- “पेड़ की जड़ ढूंढो.....उसी से रस्सी बनाई जा सकती है। जल्दी करो।"

तुरंत सभी रस्सी की तलाश में इधर-उधर घूमने लगे। परंतु वह अजीब सी जगह थी, उसके आस-पास कोई भी ऐसा घना पेड़ नहीं था, जिससे रस्सी बनाई जा सके।

उधर क्रिस्टी, शैफाली और जेनिथ लकडियों की मदद से असलम को निकालने की कोशिश करने लगे, पर असलम की दूरी किनारे से ज़्यादा होने के कारण वह लकडियों को असलम को नहीं पकड़ा पा रहे थे।

यह देख जेनिथ ने कुछ मोटी-मोटी लकिड़यां असलम के आस-पास फेंकनी शुरु कर दी।

‘डूबते को तिनके का सहारा’ यह कहावत आज चरितार्थ हो रही थी क्यों की असलम जेनिथ के द्वारा फेंकी गयी उन लकडियों को हाथ में पकड़ उनसे बचने की असफल कोशिश कर रहा था।

पर यह कोशिश नाकाफ़ी थी।

सुयश भी तेजी से दिमाग लगा रहा था, पर आसपास ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे वह लोग असलम को बचा सके।

ऐमू असलम के सिर के ऊपर उड़ता हुआ चीख रहा था। अब तक असलम कमर तक दलदल में धंस चुका था।

“कैप्टन....।" एलेक्स ने सुझाव देते हुए कहा- “क्यों ना हम अपने कपड़ो की रस्सी बनाकर असलम को बचाने की कोशिश करे?"

“कोई फायदा नहीं?" अल्बर्ट ने आह भरते हुए कहा- “यह दलदल है। दलदल का खिंचाव नीचे की ओर इतना ज़्यादा होता है की हम कपड़े तो क्या असली रस्सी से भी असलम को नहीं खींच पायेंगे।"

“मतलब!" क्रिस्टी ने आश्चर्य से पूछा- “फिर क्या असलम को बचाने का कोई रास्ता नहीं है हमारे पास?"

“नहीं।" अल्बर्ट ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा- “दलदल की सामने की साइड से किसी को खींचने के लिये, एक ट्रक खींचने के बराबर ताकत की जरुरत होती है। हां अगर दलदल के ऊपर की तरफ से व्यक्ति को खींचा जाए। तो उसे आसानी से निकाला जा सकता है, पर इस दलदल के ऊपर की तरफ ना तो कोई पेड़ है और ना ही हमारे पास दलदल के ऊपर जाने का कोई साधन। इसिलये अब असलम को बचा पाना बिल्कुल असंभव है।"

तब तक ब्रेंडन, जैक, जॉनी और तौफीक भी थक हार कर लौट आये थे। उन्हें भी आसपास कोई ऐसी चीज नहीं मिली, जिसके द्वारा असलम को बचाया जा सके।

असलम अब सीने तक दलदल में धंस चुका था।

अब उसे भी इस बात का अहसास हो चुका था कि उसका बचना नामुमकिन है। इसिलये वह भी निराश नज़रों से सभी को देख रहा था।

“कैप्टन!" असलम ने निराशा भरी नजर से सुयश की ओर देखते हुए कहा- “मुझे पता है कि अब मेरा बचना नामुमकिन है इसिलये मैं आपको कुछ राज की बात बताना चाहता हूं।"

असलम के रहस्य भरे शब्दों को सुनकर अब सबका ध्यान पूरा का पूरा असलम की बात पर आ गया।

“राज की बात?" सुयश ने उलझे-उलझे शब्दों में कहा- “तुम क्या कहना चाहते हो असलम?"

“पहली राज की बात यह है कि मेरा नाम असलम नहीं ‘मोईन अली’ है।" असलम ने यह बोलकर एकदम से धमाका कर दिया।

“तो ... तो ... असलम कहां है?" सुयश के शब्दों में आश्चर्य का भाव नजर आया।

“मेरे पास समय कम है कैप्टन।" मोईन ने अफसोस भरे स्वर में कहा- “इसिलये में चाहता हूं कि पहले आप लोग मेरी पूरी बात सुन ले। मैं यह बोझ अपने सिर पर लेकर नहीं मरना चाहता।"

इस बार सभी को शांत देखकर असलम ने फ़िर बोलना शूरू कर दिया-

“मेरा नाम मोईन अली है। मेरे पिता का नाम उस्मान अली था। मेरे पिता आज से 16 साल पहले ‘ब्लैक-थंडर’ नामक एक पुर्तगाली पानी के जहाज से इस दिशा में आये थे। उनका जहाज भी बारामूडा त्रिकोण की इन गहराइयों में खो गया था।

किसी तरह वह अपनी जान बचाकर इस द्वीप पर पहुचे। इस द्वीप पर उनके साथ बहुत सी विचित्र घटनाएं घटी। उन्होंने इस द्वीप पर एक बहुत बड़ा खजाना भी देखा। बाद में किसी तरह बचकर वह अपनी सभ्यता तक पहुंच गये। उन्होंने सभ्य दुनिया में अर्द्ध विक्षिप्त होने का नाटक किया और अपने इस पूरे सफर की कहानी को डायरी में लिख लिया।

जब वो मुझसे मिले तो उन्होंने अपनी कुछ यादों और अपनी डायरी को मेरे सुपुर्द कर दिया। मैंने जब इस डायरी को पढ़ा तो मुझे भी इस द्वीप पर आने की इच्छा हुई। मगर छोटी बोट से यहां तक पहुंचना मुस्किल था और वैसे भी सरकार ने इस क्षेत्र को निसिद्ध घोषित कर रखा था। इसिलये मुझे एक योजना बनानी पड़ी।"

“कैसा योजना?" ब्रेंडन से रहा ना गया और वह पूछ बैठा।

“मैंने ‘सुप्रीम’ के सेकेण्ड सहायक कैप्टन असलम को जहाज के न्यूयॉर्क से चलने वाले दिन बेहोश करके एक झरने में फेंक दिया और असलम बनकर इस जहाज पर आ गया और फ़िर न्यू ईयर की रात चालाकी से रोजर और बाकी के चालक दल को बेहोश कर सुप्रीम को जान-बूझकर बारामूडा त्रिकोण की गलत दिशा में मोड़ दिया।"

“कमीने ... तेरा मर जाना ही अच्छा है।" जॉनी ने मोईन को गाली देते हुए गुस्से से कहा- “तेरे कारण ही हम सब पर कष्ट टूट पड़े। तू एक-दो नहीं बल्की 3000 लोगो का हत्यारा है।"

सुयश ने जैसे जॉनी की बात पर ध्यान ही ना दिया हो।

“क्या लॉरेन का मर्डर तुमने किया था?" सुयश के शब्द बिल्कुल शांत थे।

“नहीं कैप्टन... मैंने कोई मर्डर नहीं किया है।" मोईन के स्वर बहुत संयत थे- “मैं तो बस ‘सुप्रीम’ को गलत दिशा में मोड़ने का अपराधी हूं।"

अब तक मोईन गले तक दलदल में धंस गया था।

“तुम्हारे पिता की डायरी कहां पर है?" सुयश ने अगला सवाल किया।

“वह मेरे काले लेदर बैग में है।" मोईन ने आँखों से ब्रेंडन के गले में लटके बैग की ओर इशारा किया।

सुयश की निगाह एक बार ब्रेंडन के गले में लटके बैग की ओर गयी फ़िर पलटकर वापस मोईन पर आ गयी।

“कुछ और ऐसा है, जो तुम कहना चाहते हो?" सुयश ने दलदल का लेवल मोईन के मुंह की ओर जाते हुए देख कर कहा।

“हां, जहाज का फ़्यूल मैंने ही बिखेर दिया था, जिससे आप लोग इस द्वीप पर आने को मजबूर हो जायें। अंततः मैं अपने किये की आप सभी से माफ़ी मांगता हूं। मैं जानता हूं कि मेरा अपराध माफ़ी के काबिल नहीं है। पर यकीन मानिये कैप्टन, मुझे नहीं पता था कि मेरी इतनी छोटी सी गलती के कारण पूरा का पूरा सुप्रीम डूब जायेगा। आखरी बात यह है कैप्टन कि अगर हो सके तो इस रहस्यमय द्वीप का राज पूरी दुनियां के सामने जरूर.... लाना...यही सबके प्रति... आखरी श्रद्धांजली.।"

बाकी के शब्द मोईन के मुंह में ही रह गये। दलदल की कीचड़ उसके गले में चली गयी थी।

शैफाली ने यह देख अपना मुंह फेर लिया।

मरते वक्त मोईन की आँख में आँसू थे और उसके चेहरे पर ढेर सारा पछतावा था।

अब मोईन पूरा का पूरा दलदल में समा गया था। जिस जगह पर मोईन उस दलदल में समाया, उस जगह पर अब कुछ बुलबुले उठ रहे थे।

कुछ दूरी पर छिपे हुए युगाका के चेहरे पर अब सन्तुष्टि के भाव थे।

“अब 10 बचे हैं।" युगाका मन ही मन बुदबुदाया और सभी पर फ़िर से नजर रखने लगा।

जारी रहेगा_______✍️
 
Sach batao bhai log, agar story sahi chal rahi hai, aur aap sabko badhiya lag rahi hai to ise aage badhaau? Warna 4-5 update me nipta du? :?: Kyun ki ab agar aage badhaya to lagbhag 50-60 update aur ho jayenge,l:approve: Kyuki iska plat kaafi bada hai fir, aap sabki kya raay hai?

kamdev99008 , dhalchandarun

SANJU ( V. R. ) avsji

Dhakad boy , parkas

Ajju Landwalia Seen@12

sunoanuj and all my readers🙏🏼
 
#91. (मेगा अपडेट)

डायरी का राज

(9 जनवरी 2002, बुधवार, 13:30, मायावन, अराका द्वीप)

सुयश की नजर अब मोईन के काले बैग पर थी। सुयश ने ब्रेंडन से मोईन का बैग मांगा।

सुयश ने आसपास नजर दौड़ायी। सुयश को कुछ दूरी पर एक साफ क्षेत्र दिखाई दिया।

सुयश उधर आकर एक बड़े से पत्थर पर बैठ गया।

सभी लोग सुयश के चारो ओर बैठ गये। सभी के दिल में उस्मान अली की डायरी को लेकर उत्सुकता थी। वह जानना चाहते थे कि डायरी में आखर लिखा क्या है?

सुयश ने अब मोईन का काला बैग खोलकर, उसमें रखा सारा सामान वहीं पत्थर पर बिखेर दिया।

उस बैग में एक डायरी, एक पुराना नक्शा, एक छोटा सा गले में पहनने वाला लॉकेट व एक पेन रखा था।

सुयश ने पहले लॉकेट को उठा कर देखा। लॉकेट एक सुनहरी धातु की जंजीर से बना था, जिसके बीच

में एक काले रंग का गोल मोती लगा था।

“कैप्टन अंकल!" शैफाली ने कहा- “इस लॉकेट का मोती बिल्कुल वैसा ही है, जैसा कि देवी शलाका के हाथ में पकड़ा मोती था।"

सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर अपनी सहमित दी।

पता नहीं ऐसा उस मोती में क्या था कि जेनिथ लगातार उस मोती को देखे जा रही थी।

सुयश ने एक नजर लॉकेट को घूरते हुए जेनिथ पर डाली और कुछ सोच उसे जेनिथ की ओर बढ़ा दिया।

जेनिथ ने उस लॉकेट को सुयश के हाथ से ले लिया।

जेनिथ अभी भी बिल्कुल सम्मोहित तरीके से उस लॉकेट को देख रही थी।

अचानक वह लॉकेट आश्चर्यजनक तरीके से हवा में उछला और खुद बा खुद जेनिथ के गले में जाकर बंध गया।

यह घटना देख, सब आश्चर्य से कभी जेनिथ को तो कभी उसके गले में बंधे लॉकेट को देखने लगे।

जेनिथ भी अब सम्मोहन से बाहर आ गयी थी।

“यह क्या था प्रोफेसर?" सुयश ने आश्चर्य से अल्बर्ट की ओर देखते हुए कहा- “क्या यह लॉकेट चमत्कारी था? और अगर हां तो इसने जेनिथ को ही क्यों चुना?"

“देखिये कैप्टन। इस द्वीप पर बहुत अजीब-अजीब सी घटनाएं घट रही हैं।" अल्बर्ट ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा-

“मुझे तो यह घटना भी उसी विचित्र घटना का हिस्सा लग रही है। जैसा कि शैफाली ने उन पत्थरों पर बनी विचित्र आकृतियों को देख कर कहा था कि हमारा इस द्वीप पर आना हमारी नियति थी। तो उस हिसाब से मुझे लगता है कि शायद हम सब किसी बड़ी चमत्कारिक घटना का हिस्सा हैं या बनने जा रहे हैं और हम स्वयं यहां नहीं आये हैं, बल्की हमें यहां लाया गया है। मोईन तो मात्र एक कारक था हमें यहां लाने के लिये।

अगर आप ध्यान से देखें तो धीरे-धीरे हम सभी के साथ कुछ ना कुछ चमत्कारिक घट रहा है। पहले शैफाली की शक्तियों का जागना, फ़िर कैप्टन के टैटू में शक्तियों का समा जाना और अब जेनिथ के साथ भी कुछ ऐसा ही चमत्कारिक होना। यह सब बातें यह बताती हैं कि शायद हमारे किसी जन्म की घटनाएं इस क्षेत्र से जुड़ी हैं। हमारा ‘सुप्रीम’ की दुर्घटना में जिंदा बचना एक इत्तेफाक नहीं है। केवल वही लोग जिंदा बचे हैं, जो किसी ना किसी रूप से इस द्वीप से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।"

“इसका मतलब मुझमें भी कुछ चमत्कारिक शक्तियां है?" जॉनी ने खुश होकर बोला।

“ऐसा जरूरी नहीं है।" जेनिथ ने जॉनी की ओर देखते हुए कहा-“कुछ लोग मर भी तो रहे हैं।"

जॉनी, जेनिथ का कटाक्ष समझ गया। उसने गुस्से से अपने दाँत पीसे, मगर जेनिथ को कोई जवाब नहीं दिया।

“तुम्हें इस लॉकेट को पहनने के बाद क्या महसूस हुआ जेनिथ?" क्रिस्टी ने जेनिथ की ओर देखते हुए पूछा।

“मैं इस लॉकेट को देखकर पहले सम्मोहित सी हो गयी थी।" जेनिथ ने लॉकेट के मोती को छूते हुए कहा-

“पर मुझे ऐसा नहीं लगा कि मेरा इस लॉकेट से कोई भी पुराना संबंध है? ना ही इसको पहनने के बाद मुझे कुछ भी अलग सा महसूस हुआ?"

“पर कैप्टन.... यह चमत्कारी लॉकेट मोईन के पास कहां से आया?" ब्रेंडन ने कहा।

अब सबका ध्यान फ़िर से काले बैग से निकले बाकी सामान पर गया।

अब सुयश ने वह पुराना नक्शा खोल लिया। नक्शे में कुछ पत्थर, पहाड़, नदियां, झरने और कुछ आड़ी-टेढ़ी रेखाएं बनी थी।

“इसको समझने में समय लगेगा।" सुयश ने नक्शे को वापस गोल लपेटते हुए कहा- “हमें पहले डायरी पर ध्यान देना होगा। उसमें जरूर कुछ काम की बातें होंगी।"

सुयश ने अब डायरी को उठा लिया।

पहला पन्ना खोलते ही उन्हें खूबसूरत अक्षरो में उस्मान अली लिखा हुआ दिखाई दिया।

आखिरकार सुयश ने तेज आवाज में डायरी पढ़ना शुरू कर दिया।

“मेरा नाम उस्मान अली है। मैं आपको एक ऐसे रहस्यमय द्वीप के बारे में बताने जा रहा हूं, जिसका अनुभव मैंने स्वयं किया है।

13 दिसंबर 1984 की ठंड भरी रात थी। मैं ‘ब्लैक-थंडर’ नामक पुर्तगाली जहाज से न्यूयॉर्क से प्यूट्रो-रिको जा रहा था। रात का समय था। मैं जहाज के डेक पर खड़ा अपनी दुनियां में कुछ सोच रहा था। तभी मुझे दूर कहीं आसमान में सिग्नल फ़्लेयर उड़ते दिखाई दिये। मैंने तुरंत डेक पर खड़े लोगो का ध्यान सिग्नल फ़्लेयर की ओर करवाया।

हमें लगा कि जरूर कोई दूसरा पानी का जहाज वहां मुसीबत मे है। मैंने तुरंत इस बात की सूचना एक गार्ड के माध्यम से अपने जहाज के कैप्टन को भिजवा दी। कुछ ही देर में कैप्टन सिहत बहुत सारे लोग डेक पर आ गये। सिग्नल फ़्लेयर अभी भी आसमान में फ़ेंके जा रहे थे। मैंने जहाज के कैप्टन को जहाज को उस दिशा में ले जाने को कहा।

पहले तो जहाज का कैप्टन जहाज को उस दिशा में मोड़ने को तैयार नहीं हुआ । पर बाद में यात्रियो की जिद्द के कारण कैप्टन को सभी की बात माननी पड़ी। ब्लैक थंडर सिग्नल फ़्लेयर की दिशा में आगे बढ़ गया। थोड़ी देर में सिग्नल फ़्लेयर दिखने बंद हो गये। हम अंदाजे से समुद्र में काफ़ी आगे तक आ गये, पर फ़िर भी हमें किसी भी शिप के डूबने का कोई निशान प्राप्त नहीं हुआ? तभी अचानक मौसम काफ़ी खराब हो गया और समुद्र की लहरें ऊंची-ऊची उठने लगी।

ब्लैक थंडर किसी तिनके की तरह समुद्र की लहरों पर डोल रहा था। तभी एक जोरदार झटके से शिप के सारे कन्ट्रोल खराब हो गये। अब ब्लैक थंडर रास्ता भटक चुका था। हमें वापसी के लिये कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था। तभी जाने कहां से एक विशालकाय ब्लू व्हेल मछली आ गयी और उसने शिप पर टक्कर मारना शुरू कर दिया।

ब्लू व्हेल से बचने के लिये कैप्टन ने ब्लैक थंडर को एक अंजान दिशा में मुड़वा दिया। ब्लू व्हेल से अब हमारा पीछा छूट चुका था। हम पुनः आगे बढ़े। अभी हम सब डेक पर ही थे कि तभी एक नीली रोशनी बिखेरती उड़नतस्तरी, आसमान से गोल-गोल नाचती हुई हमारे जहाज से कुछ आगे आकर पानी में गिरी।

जिस स्थान पर वह उड़नतस्तरी पानी में गिरी थी, उस स्थान पर समुद्र में एक विशालकाय भंवर बन गयी। भंवर की विशालता और उसकी तेज-गति देखकर कैप्टन ने ब्लैक थंडर को दूसरी दिशा में मोड़ लिया। कुछ आगे जाने पर ब्लैक थंडर अचानक समुद्र में अपने आप रुक गया। कैमरे द्वारा पानी के नीचे देखने पर हमें एक विशालकाय ‘प्लिसियोसारस’ (एक विलुप्तप्राय समुद्री डाइनोसोर) ब्लैक थंडर को पकड़े हुए दिखाई दिया।

कैप्टन ने प्लिसियोसारस पर तारपीडो से हमला कर दिया। प्लिसियोसारस ने डरकर शिप को छोड़ दिया और अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से शिप को घूरता हुआ समुद्र की गहराइयों में गायब हो गया।

ब्लैक थंडर को फ़िर से आगे बढ़ा लिया गया। उसी रात शिप पर सफर कर रहे 400 यात्रियो में से 275 यात्री शिप से अपने आप गायब हो गये।

बहुत ढूंढने पर भी उन यात्रियो का कुछ पता नहीं चला। शिप पर अब कुल 125 यात्री बचे थे। सुबह हमें एक द्वीप दिखाई दिया जो अजीब सी त्रिभुज जैसी आकृति वाला था। ब्लैक थंडर को उस द्वीप की ओर मोड़ लिया गया। हम द्वीप पर पहुंचने वाले ही थे कि तभी अचानक प्लिसियोसारस ने पुनः ब्लैक थंडर पर आक्रमण कर दिया।

इस बार का उसका आक्रमण बहुत खतरनाक था। उसने अपनी अजगर के समान विशालकाय पूंछ से पूरे ब्लैक थंडर को लपेट लिया। प्लिसियोसारस की ताकत के सामने ब्लैक थंडर कुछ भी नहीं था। आखिरकार उस समुद्री दानव ने ब्लैक थंडर को तोड़ डाला। शिप में सवार कुछ बचे यात्री पानी में छलांग लगाकर द्वीप की ओर बढ़ने लगे और अंततः कुल 28 यात्री उस द्वीप पर बचकर पहुंचने में सफल हो गये। उन्ही लोगो में मैं और मेरा दोस्त गिलफोर्ड भी था।

यहां से शुरू होता है उस रहस्यमय द्वीप का एक भयानक सफर। इस सफर में आती हैं खतरनाक मुसीबतें जैसे दलदल, जंगली गैंडा, गुरिल्ला, पागल हाथी, भयानक शेर, विशालकाय मच्छर, खतरनाक बीमारियां, जहरीली मकिड़यां, खूनी चमगादड़, तेजाबी बारिश और ना जाने कितनी ऐसी भयानक मुसीबतें, जिन्होने 24 यात्रियो को मौत के घाट उतार दिया।

बाकी बचे 4 लोग किसी तरह बचते-बचाते पहाड़ में शरण लेते हैं। इन बचे हुए 4 लोगो में मैं और गिलफोर्ड भी शामिल थे। तभी हम पर एक विशालकाय आग उगलने वाली ड्रैगन ने हमला बोल दिया। ड्रैगन से घबराकर मैं और गिलफोर्ड एक पहाड़ी गुफा में घुस गए। ड्रैगन ने एक बड़ी सी चट्टान लुढ़काकर गुफा का द्वार बंद कर दिया।

अब मेरे और गिलफोर्ड के बाहर निकलने के सभी रास्ते बंद हो चुके थे। हम दोनो गुफा में बुरी तरह से फंस चुके थे। 2 घंटे बाद हमें ऐसा महसूस हुआ कि जैसे गुफा में कहीं से ताजी हवा आ रही है। हम दोनो अंदाजे से अंधेरे में टटोलते हुए गुफा के अंदर की ओर चल दिये।

काफ़ी देर तक चलने के बाद हमें दूर गुफा में कहीं रोशनी सी प्रतीत हुई। हम अंदाज से लड़खड़ाते हुए उस दिशा में चल दिये। कई जगह पर हम गुफा में पत्थरों से टकराये। हमें बहुत सी चोट आ गयी थी। लगभग एक घंटे तक उस अंधेरी गुफा में चलने के बाद हम उस रोशनी वाले स्थान तक पहुंच गये।

वह गुफा के दूसरी ओर का द्वार था। गुफा से निकलने पर हमने अपने आप को एक खूबसूरत घाटी में पाया। चारो तरफ पहाड़ो से घिरी यह घाटी देखने में काफ़ी सुंदर लग रही थी। कई जगह से पहाड़ो से पानी के झरने गिर रहे थे। हमने घाटी के अंदर जाने के लिये पहाड़ो से उतरना शुरु कर दिया। पहाड़ो से उतरने के बाद हम एक बाग में पहुंचे। बाग में सैकड़ो फलों से लदे पेड़ थे। हमने पेडों से फल तोड़कर खाये और झरने का पानी पीया।

हममें एक नयी ताकत का संचार हो चुका था। रात होने वाली थी इसिलये हम वहीं एक पेड़ पर

चढ़कर सो गये। सुबह कुछ अजीब सी आवाज सुनकर हम दोनों की नींद खुल गयी। हमें एक स्थान पर जमीन से निकलते हुए कुछ इंसान दिखाई दिये। जो उस स्थान पर मौजूद एक देवी की मूर्ति के आगे नाच गा रहे थे। रात में अंधेरा होने की वजह से हम स्थान पर मौजूद देवी की मूर्ति को नहीं देख पाये थे।

तभी पूरी घाटी में एक बहुत ही सुगंधित खुशबू फैल गयी। यह विचित्र सुगंध सूंघकर हम दोनो बेहोश हो गये। होश में आने पर हमने अपने आप को एक विशालकाय मंदिर में खंभे से बंधा हुआ पाया। मंदिर में एक विशालकाय देवी की मूर्ति थी, जिनके गले में एक लॉकेट चमक रहा था। देवी के पैरों के पास हीरे, जवाहरात, रत्न, आभूषण असंख्य मात्रा में बिखरे पड़े हुए थे।

उन रत्नो की चमक इतनी ज़्यादा तेज थी कि शुरु में वहां पर आँख खोलकर रख पाना भी मुश्किल लग रहा था। हमने किताबों में भी कभी इतने बड़े खजाने के बारे में नहीं सुन रखा था। तभी मेरी नजर देवी के पैरों के पास रखी एक लाल रंग की जिल्द वाली पुरानी सी किताब पर पड़ी। वह पुरानी किताब एक रत्न जड़ित थाली में रखी थी, जो उसके विशेष होने की कहानी कह रही थी।

हमारे आसपास कुछ जंगली कबीले के लोग अजीब से धारदार हथियार लेकर खड़े थे। हम हैरानी से कभी मूर्ति की सुंदरता तो कभी उस खजाने को निहार रहे थे। तभी उन जंगलियों में से एक ने हमें खंभे से खोलकर देवी के चरणों में झुकने का इशारा किया। मैंने और गिलफोर्ड दोनों ने देवी के चरणों में झुककर प्रणाम किया। मैंने झुककर प्रणाम करते समय धीरे से उन जंगलियों से नजर बचाकर एक छोटा सा हीरा अपने हाथ में छिपा लिया। अब वह जंगली, देवी की पूजा करने लगे।

तभी मंदिर के बाहर से कहीं से शोर की आवाज सुनाई दी। कई जंगली यह आवाज सुन बाहर की ओर भागे। यह देख उनमें से एक जंगली हमारे पास आया और फ़िर से हमारे हाथ उस खंभे के साथ बांध दिया। हमारे हाथ बांधने के बाद वह भी मंदिर से बाहर की ओर भाग गया। अब मंदिर में मैंऔर गिलफोर्ड ही अकेले बचे थे। यह देख मैंने अपने हाथ में थमें हीरे से अपनी हाथ में बंधी रस्सी को काटने लगा।

लगभग 10 मिनट के अथक परिश्रम के बाद मैंने अपने हाथ की रस्सी को काटकर स्वयं को आजाद करा लिया। फ़िर मैंने गिलफोर्ड के हाथ की रस्सी काटी, जिसमें ज़्यादा समय नहीं लगा। हम दोनो देवी की मूर्ति के पास पहुंचे। मेरी नजर देवी की मूर्ति के गले में पहने लॉकेट पर थी। मैं तेजी से उस मूर्ति के ऊपर चढ़ा और देवी के गले में पड़ा लॉकेट निकालकर अपनी जेब में रख लिया। गिलफोर्ड ने वह लाल जिल्द वाली पौराणिक किताब उठा ली।

अब हम दोनों सावधानी से मंदिर के बाहर निकले। बाहर हमें कुछ हरे कीड़े उन जंगलियों को दौड़ाते हुए नजर आये। ऐसे मेढक जैसे विचित्र कीड़े हमने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखे थे। हम दोनों सबकी नजर बचाकर जंगल की ओर भाग गये। काफ़ी दूर आने के बाद हमने राहत की साँस ली। शाम फ़िर से गहराने लगी थी, इसिलये हमने पेडों के फल खाकर गुजारा कर लिया। हम दोनों वहीं पेड़ के नीचे एक साफ सुथरी जगह देखकर वहीं सो गये।

रात में अजीब सी ढम-ढम की आवाज सुनकर हमारी नींद खुल गयी। हम समझ गये कि जंगली रात के अंधेरे में हमें ढूंढ रहे हैं और वह आस-पास ही हैं। गिलफोर्ड तुरंत लाल किताब को कमर में फंसाकर वहीं एक पेड़ पर चढ़ गया। चूंकि पेड़ सपाट था और मैं इतनी तेजी से पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था। इसिलये मैं वहां से पहाडों की ओर भाग गया।

इस तरह हम दोनों दोस्त अलग-अलग हो गये। मैंने भागकर एक पहाड़ी गुफा में शरण ली। मुझे नहीं पता चला कि उसके बाद गिलफोर्ड का क्या हुआ? गुफा में अंधेरा होने की वजह से हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहा था। अगर कुछ चमक रहा था तो वह था मेरे गले में पड़ा देवी का लॉकेट। तभी मेरी नजर अंधेरे में गुफा के अंदर चमक रहे 2 जुगनुओं पर पड़ी, जो धीरे-धीरे मेरे पास आ रहे थे।

पास आने पर मैं समझ गया कि वह जुगनू नहीं बाल्की किसी जानवर की आँखें हैं। किसी विशालकाय जानवर का अहसास होते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गये। धीरे-धीरे वह विशालकाय आकृति मेरे बिल्कुल समीप आ गयी। उधर गुफा के बाहर से जंगलियों की आवाज आने के कारण मैं गुफा से बाहर भी नहीं जा सकता था।

अब उस विशालकाय जानवर की साँसे भी मुझे अपने शरीर पर महसूस होने लगी थी। धीरे-धीरे आती गुर्र-गुर्र की आवाज से मुझे ये अहसास हो गया कि वह एक पहाड़ी जंगली भालू था। भालू बेहद पास आ गया था और मेरे गले में पड़े उस चमकते लॉकेट को देख रहा था। तभी उस लॉकेट की चमक एकाएक बढ़ सी गयी। भालू हैरान होकर दो कदम पीछे हो गया। मेरे लिये यह बहुत अच्छा मौका था, मैंने अपनी पूरी ताकत से गुफा के अंदर की ओर दौड़ लगा दी।

लॉकेट से निकली रोशनी मेरा मार्गदर्शन कर रही थी। मैं भागते-भागते थककर चूर हो गया, परंतु उस गुफा का दूसरा सिरा मुझे नहीं मिला। गनीमत यही थी कि पता नहीं कहां से मुझे ऑक्सीजन मिल रही थी। कुछ देर आराम करने के बाद मैं पुनः आगे की ओर चल दिया। घड़ी पास में ना होने की वजह से मुझे समय का अहसास नहीं हो पा रहा था।

जाने कितने घंटे मैं इसी तरह से चलता रहा। प्यास, भूख और थकान से मैं पूरी तरह से थककर चूर हो गया था। अंततः बहुत दूर मुझे एक रोशनी सी दिखाई दी। रोशनी देख मुझ में नयी ताकत का संचार हो गया।

वैसे मेरे शरीर में जान तो नहीं बची थी, फिर भी मैं रोशनी को देख आगे बढ़ता रहा। आखिरकार मैं गुफा के मुहाने तक पहुंच गया। वह शायद द्वीप का कोई दूसरा किनारा था क्योंकी समुद्र अब मेरे सामने था। सबसे पहले मैंने वहां लगे पेडों से पेट भरकर फल खाये और एक तालाब का पानी पीया।

फ़िर वहीं एक पेड़ पर चढ़कर सो गया। थकान और पेट भर जाने के कारण मैं कितनी देर तक सोता रहा, मुझे नहीं पता चला। जब मैं जागा तो सूर्य निकल रहा था। शायद मैं 24 घंटे तक सोया था। लेकिन मैं अब अपने आप को काफ़ी ताज़ा महसूस कर रहा था। अब मुझे यहां से निकलने के बारे में सोचना था।

पर कैसे...? बिना बोट के मैं समुद्र में ज़्यादा दूर तक जा भी नहीं सकता था। पर यहां बोट कहां से मिलती? धीरे-धीरे उस जगह पर रहते हुए मुझे कई दिन बीत गये, पर मुझे उस द्वीप से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। भला यही था कि द्वीप के उस किनारे पर किसी भी प्रकार की मुसीबत नहीं थी। मैं रोज पेड़ के फल खाता और तालाब का पानी पी रहा था।

मैं उस द्वीप की जिंदगी से बोर होने लगा। एक दिन मैंने एक बोट बनाने का सोचा। फिर क्या था मैंने वहां लगे बांस के पेडों से कुछ बांस तोड़ लिये और जंगली बेल व पेड़ की जडों से सबको आपस में बांध लिया। इसी तरह मैंने 2 लकड़ी के चप्पू बना लिये। अब मैं लकड़ी के उस बेड़े पर बैठकर समुद्र में कुछ दूर तक जाने लगा। अब मैं नुकिले काँटो को छोटी-छोटी लकडिय़ों में पिरो कर उसे तीर और भाले का रूप देने लगा और मछलिय़ों का शिकार करने लगा।

मछलिय़ों को कच्चा खाना मेरे लिये बहुत मुश्किल था, पर मुझे आग जलाना अभी आया नहीं था। इसिलये कच्ची मछलिय़ों से ही काम चलाना पड़ रहा था। कुछ दिन और बीत गये। अब मेरी बोट भी थोड़ी और बड़ी हो गयी थी। मैंने कुछ जडों को पेड़ की छाल से बांधकर 10-12 टोकरियां भी बना ली। अब मैं समुद्र में खाना भी लेकर जाने को तैयार था। अब परेशानी केवल पानी की रह गयी थी। क्यों कि समुद्र में ज़्यादा से ज़्यादा दिन जिंदा रहने के लिये पानी का होना सबसे ज़्यादा जरुरी था।

फिलहाल इसका मेरे पास कोई उपाय नहीं था। फिर दिन बीतने लगे। मुझे द्वीप के उस किनारे पर रहते हुए 55 दिन बीत गये। आखिरकार एक दिन मुझे पत्थरों से आग जलाना भी आ गया। फिर तो मुझे मजा ही आ गया। अब मैं मछलिय़ों को पकड़ कर उन्हें पका कर भी खाने लगा।

जब 2 दिन और बीत गये तो अचानक से मेरे दिमाग में मिट्टी के घड़े बनाने का प्लान आया। मैंने 1 दिन के अंदर 20 बड़े-बड़े मटके बना लिये और उन्हें आग में पकाकर पक्का भी कर लिया। अब समुद्र में पानी की समस्या भी ख़त्म हो गयी थी। अब फाइनली मैंने इस द्वीप से निजात पाने का सोचा। अब मैंने कुछ और बांस तोड़कर अपने बेड़े को बड़ा बनाया। फिर 12 टोकरियां में खाने के फल और 20 मटको में तालाब का साफ पानी भरके उन सबको पेड़ की जडों से अच्छी तरह से बांधकर निकल पड़ा उस विशालकाय समुद्र में एक अंतहीन सफर पर।

धीरे-धीरे समुद्र में दिन बीतने लगे। शार्क, बड़ी मछिलयां और तूफान, ना जाने कितनी ऐसी मुसीबतो का सामना करते हुए मुझे 25 दिन बीत गये। मेरे पास अब सारा खाना ख़त्म हो गया था। पानी भी केवल एक मटकी में ही बचा था। 2 दिन बाद वो भी ख़त्म हो गया। 2 दिन के बाद मेरे शरीर में इतनी भी जान नहीं बची थी कि मैं उठकर खड़ा भी हो सकूं।

आख़िर मैं बेहोश होकर अपने बेड़े पर गिर गया। मुझे जब होश आया तो मैंने अपने आपको अंजान जहाज पर पाया। उस जहाज के लोगो को रात के अंधेरे में मेरे गले में पड़े लॉकेट की रोशनी दिखाई दी थी। जिसके बाद उन्होंने मुझे जहाज पर खींच लिया था। उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछा, पर मैंने पागल होने का नाटक कर उन्हें कुछ नहीं बताया।

जहाज वालों ने अमेरिका पहुंचकर मुझे पुलिस के हवाले कर दिया। बाद में पुलिस ने मेरा फोटो समाचार पत्र में प्रकाशित करवा दिया।

इस तरह मेरे घरवाले मुझे वहां लेने आ पहुंचे। जब पुलिस को यह पता चला कि मैं ब्लैक थंडर पर था, तो उन्होंने मुझसे जहाज के बारे में पूछने की बहुत किशिश की, पर मैं पहले के समान ही पागलो की तरह एक्टिंग करता रहा और मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया।

धीरे-धीरे समय बीतता गया। मैंने अपने पूरे सफर को कलमबध्द कर अपनी डायरी में लिख लिया। उसके बाद मैंने अपनी याद के सहारे उस द्वीप का एक नक्शा भी बनाया। मेरा लड़का मोईन अभी छोटा है। मैंने यह सोच रखा है कि जब वह बड़ा हो जायेगा तो मैं ये सारी चीज़े उसके सुपुर्द कर दूंगा।"

इतना पढ़कर सुयश शांत हो गया और बारी-बारी सबका चेहरा देखने लगा। कुछ देर के लिये वहां पर एक सन्नाटा सा छा गया।

जारी रहेगा________✍️
 
तो लो भैया असलम उर्फ मोइन का सारा राज खोल दिया है।😓
 
#92.

इस सन्नाटे को तोड़ा अल्बर्ट की आवाज ने- “ब्लैक थंडर’ और ‘सुप्रीम’ की कहानी में बहुत सी चीज़े कॉमन हैं। जैसे उड़नतस्तरी का दिखना, भंवर का बनना, ब्लू व्हेल का दिखना, जहाज से यात्रियो का गायब होना, द्वीप पर भयानक मुसीबतों का सामना करना, हरे कीड़े का दिखना, देवी का मंदिर मिलना आदि। जबकि ब्लैक थंडर आज से 16 साल पहले इस द्वीप पर आया था और हम 16 साल बाद यहां आये हैं। इसका मतलब यहां जो भी घटनाएं घटती हैं यह सब किसी के द्वारा क्रिएट की जाती हैं।"

“प्रोफेसर।" ब्रेंडन ने कहा-

“जो भी हो, पर इस डायरी के माध्यम से हमें हमारे कई सवालो के जवाब मिल गये। जैसे ‘सुप्रीम’ के सामने भंवर कैसे बनी? जहाज से गायब हो रहे लोगो को हरे कीड़े ही ले जा रहे थे और शायद सुप्रीम को भी पानी के नीचे से ‘प्लिसियोसारस’ ने ही तोड़ा हो।"

“सही कहा ब्रेंडन.... ।" सुयश ने ब्रेंडन की बात का समर्थन किया।

“पर कैप्टन कुछ बातें और भी हैं, जो हमारे लिये आगे खतरा बन सकती हैं।" तौफीक ने कहा-

“जैसे प्लिसियोसारस और ड्रेगन टाइप के दैत्यआकार जीव भी हमारे आसपास हैं और यह जंगल भी भयानक जंगली जानवारों से भरा पड़ा है। अब रही बात इस द्वीप पर रहने वाले जंगली लोगो की तो वो भी किसी प्रकार से हमारे दोस्त की श्रेणी में नहीं आते।"

“इसका मतलब हम जिन जंगलियो को अपनी जिंदगी समझकर ढूंढ रहे हैं, वह हमारे लिये मौत भी साबित हो सकते हैं।" जॉनी ने डर से कांपते हुए कहा।

“कैप्टन... हमें हरे कीडो को भी नहीं भूलना चाहिये। जब वह 16 साल पहले इस द्वीप पर थे तो आज तो उनकी संख्या लाखों में भी हो सकती है।" क्रिस्टी ने अपने विचार व्यक्त किये।

“मेरे हिसाब से कैप्टन... हमें अब जंगल में भागने की जगह कोई एक सुरक्षित स्थान देखकर वहां अपना डेरा जमा लेना चाहिये। कम से कम कुछ दिन और जिंदा तो रहेंगे।" जैक ने कहा।

“देखिये आप सबके विचार अपनी जगह बिल्कुल सही हैं।" सुयश ने सबको समझाते हुए कहा- “पर इस कहानी में बहुत सी सकारात्मक चीज भी हैं। जैसे जंगल के लोगो ने किसी को मारा नहीं था और इस प्रकार की चमत्कारी देवी की पूजा करने वाले बेवकूफ नहीं हो सकते। हम उन्हें समझा सकते हैं और यह भी हो सकता है कि पिछले 16 साल में वह खुद भी सभ्य बन गये हो और सबसे बड़ी बात यह है कि इस जंगल में कोई तो ऐसा भाग है, जहां पर कोई खतरा नहीं है और वहां से हम भी उस्मान की तरह से इस द्वीप से निकल सकते हैं।"

सुयश की बात सभी को सही लगी। इसिलये अब किसी ने कोई सवाल नहीं किया और सभी आगे की ओर बढ़ गये।

चैपटर-11

अद्भुद्द तकनीक:


आज से 3 दिन पहले....(6 जनवरी 2002, रविवार, 16:30, सामरा राज्य, अराका)

युगाका त्रिकाली के साथ सामरा महल की छत पर टहल रहा था।

“देखो त्रिकाली ।" युगाका ने त्रिकाली को देखते हुए कहा- “तुम जानती हो कि अराका पर सामरा और सीनोर दोनों ही रहते हैं और हमारे बीच की प्रतिस्पर्द्धा, हज़ारों साल पहले ही दुश्मनी में परिवर्त्तित हो गयी थी। अब हम रहते तो एक ही द्वीप पर हैं, पर दोनों ही जातियों के लक्ष्य बिल्कुल अलग-अलग हैं।

जहां सीनोर जाति के लोग मकोटा के जाल में फंसकर, अपनी ताकत बढ़ाने के लिये, अंधेरी शक्ति के देवता जैगन को जगाने में लगे हैं। वहीं पर सामरा जाति के लोग तिलिस्मा को तोड़कर, देवी ‘क्लिटो’ को मुक्त कराकर, काला मोती से शक्ति प्राप्त करना चाहते हैं। अब देवता पोसाईडन के श्राप के अनुसार कोई मनुष्य ही तिलिस्मा में प्रवेश कर उसे तोड़ सकता है।

तिलिस्मा को तोड़ने वाला मनुष्य मस्तिष्क से बहुत शक्तिशाली होगा। देवता पोसाईडन नहीं चाहते थे कि हर तुच्छ मानव तिलिस्मा में प्रवेश करे। इसिलये उन्होंने तिलिस्मा के पहले मायावन का निर्माण किया। तिलिस्मा का रास्ता मायावन से होकर जाता है। चूंकि तिलिस्मा मायावन से 100 गुना ज़्यादा खतरनाक है इसिलये तिलिस्मा में प्रवेश करने के पहले हर मनुष्य को मायावन की परीक्षा को पार करना आवश्यक है।

अब जो भी जहाज इस क्षेत्र में फंस कर आ जाता है, हमारी कोशिश उनके यात्रिओं को तिलिस्मा में भेजने की रहती है, जबकि सीनोर के लोग उसको मारकर उसकी लाश को अंधेरे के देवता जैगन को जगाने के लिये प्रयोग करते हैं।"

“भाई, फ़िर तो लुफासा का अब कुछ करना पड़ेगा?" त्रिकाली ने युगाका को देखते हुए कहा- “वह मकोटा के जाल में फंसकर लगातार लाशो को पिरामिड में भेज रहा है। यहां तक कि वह अपनी शक्तियों का भी खुलकर प्रदर्शन कर रहा है।

अगर वह ऐसे ही हरे कीडो के द्वारा लोगो को मारता रहा तो तिलिस्मा तक तो कोई पहुंच नहीं पायेगा और अगर तिलिस्मा नहीं टूटा तो ना तो देवी क्लिटो को कभी मुक्ति मिलेगी और ना ही हम कभी शक्तिशाली हो पायेंगे। तो भाई, फ़िर इससे पहले कि लुफासा ‘सुप्रीम’ के सारे लोगो को मारकर पिरामिड में भेजे, हमें उन सारे मनुष्यो को बचाकर मायावन तक लाना ही होगा।"

युगाका, त्रिकाली की बात सुनकर विचलित हो गया और छत पर इधर-उधर टहलने लगा।

“मैं जानता हूं त्रिकाली कि तुम क्या कहना चाहती हो, पर तुम जानती हो कि हम लुफासा जितने शक्तिशाली नहीं है और हम अभी लुफासा का सामना नहीं कर सकते। क्योंकि तुम्हारे पास केवल रूप बदलने की शक्ति है और मेरे पास रूप बदलने के अलावा केवल वृक्ष को नियंत्रण करने की शक्तियां हैं।

जबकि लुफासा के पास इच्छाधारी शक्ति है। वह इस शक्ति से किसी भी जानवर का रूप धारण कर सकता है। इसके अलावा हम देवी शलाका के द्वारा बनाए गये नियमों के हिसाब से युद्ध करते है, जबकि लुफासा किसी नियम को नहीं मानता। इसिलये हमें जब तक बाबा का आदेश नहीं मिल जाता, तब तक हम सीधे-सीधे लुफासा से युद्ध नहीं कर सकते और तुमने देखा कि कल हम रोजर और लॉरेन बन कर जहाज पर गये भी थे, पर क्या हम लोथार को वहां से ला पाये।

एक बार फ़िर लुफासा जीत गया। यहां तक कि मैं तो तौफीक की गोलियों से घायल भी हो गया था। ये तो कहो बाबा ने समय रहते मेरी जान बचा ली। नहीं तो मेरा तो अंत ही हो गया था। अब यह साफ हो गया है कि हम सुप्रीम के सारे लोगो को एक साथ मायावन नहीं ला सकते। इसिलये हमें लुफासा के अगले कदम का इंतजार करना पड़ेगा और उसके हिसाब से ही कोई प्लान करना पड़ेगा।"

लेकिन इससे पहले कि त्रिकाली कोई और जवाब दे पाती, युगाका को आसमान में कुछ काले बादल अराका द्वीप से निकलकर कहीं और जाते हुए दिखाई दिये।

“ये तो मकोटा के तिलिस्मी बादल है और इनका प्रयोग वो तभी करता है, जब उसे कुछ बड़ा करना होता है। कहीं वह सुप्रीम को डुबाकर सारे यात्रिओं को एक साथ मारने की तो नहीं सोच रहा? जरूर ऐसा ही है ... त्रिकाली... तुरंत मेरे साथ चलो।"

युगाका चीखकर बोला और तेजी से महल की छत पर बने एक कमरे की ओर भागा।

त्रिकाली भी उसके पीछे थी।

युगाका कमरे में प्रविष्ट हो गया। कमरा काफ़ी बड़ा था। कमरे में सबकुछ लकड़ी से ही बना हुआ था।

कमरे की दीवार और छत भी लकड़ी की ही थी। कमरे में बहुत से अजीब-अजीब तरह के लकड़ी के उड़ने वाले वाहन भी रखे थे।

उनमें से कुछ वाहन हेलीकाप्टर, कुछ ड्रोन की भांती के थे, फर्क केवल इतना था कि वह सब वाहन लकड़ी के बने थे और उनके ऊपर की ओर किसी पारदर्शी ऊर्जा की छत लगी थी।

युगाका और त्रिकाली एक वाहन में बैठ गये। वह वाहन छोटा, परंतु आकार में गोल एक ड्रोन की भांती था। जिसके ऊपर लकड़ी के 4 छोटे- छोटे पंखे लगे हुए थे।

वाहन के अंदर 2 आरामदायक सीट भी थी और बहुत से रंग- बिरंगे बटन भी लगे थे।

वाहन में बैठने के बाद युगाका ने कमरे के छत की ओर देखा। युगाका के देखते ही लकड़ी की छत सरक कर एक किनारे हो गयी।

युगाका ने लकड़ी के ड्रोन को एक दिशा की ओर इशारा किया और वह ड्रोन तेजी से उड़कर उस दिशा में चल दिया, जिधर वो काले बादल गये थे।

कुछ देर उड़ने के बाद उन्हें ‘सुप्रीम’ दिखना शुरु हो गया। वह काले बादल अभी सुप्रीम से कुछ दूरी पर थे।

“केमोफ्लाज।" युगाका ने ड्रोन के अंदर बैठे-बैठे ही बोला।

युगाका के यह बोलते ही ड्रोन का रंग आसमान के रंग से इस कदर मैच हो गया कि बहुत ध्यान से देखने पर ही अब ड्रोन दिख रहा था। एक तरीके से वह अदृश्य हो गया था।

तभी सुप्रीम को एक झटका लगा और वह मुड़ना शुरु हो गया।

बादल बहुत तेजी से सुप्रीम की ओर बढ़ने लगे।

अब तो घनघोर काले बादलों के बीच कड़कती हुई बिजली भी सभी को साफ दिख रही थी। बादल के गरजने का शोर भी थोड़ा-थोड़ा सुनाई देने लगा था।

काले बादलों ने अब सुप्रीम को किसी बूमरैंग की तरह घेरना शुरु कर दिया।

युगाका और त्रिकाली को अंधेरा हो जाने की वजह से अब आसमान से साफ दिखाई नहीं दे रहा था। इसिलये युगाका ने अपने लकड़ी के ड्रोन को सुप्रीम से थोड़ा दूर आकर पानी की लहरों पर उतार लिया।

ना जाने कौन सी तकनीक थी। अब ड्रोन का रंग पानी के रंग से मिलने लगा था।

पारदर्शी ऊर्जा के कारण हवा और बारिश की बूंदे ड्रोन के अंदर नहीं आ रही थी।

अब हवाएं भी बहुत तेज हो चुकी थी। समुद्र की लहर सैकडो फुट ऊपर उछल रही थी। रह-रहकर अजीब सी फ़्लैशलाइट बिखेरती बिजली बादलों में कड़क रही थी।

घने काले बादलों की वजह से चारों ओर घोर अंधकार हो गया था। अब जहाज तेजी से अराका द्वीप की ओर बढ़ने लगा।

बादल जहाज के काफ़ी पास आ गए थे। हवा में ऊंचे-ऊंचे उछलती समुद्र की लहरों से इतना भयानक शोर हो रहा था, मानो आज प्रलय निश्चित हो।

कुछ देर में सुप्रीम से नौकाओं को पानी में उतारा जाने लगा।

अराका अब शनैः-शनैः पास आता जा रहा था।

बादल अब जहाज के ऊपर तक आ गये थे। बिजली की तेज चमक व गड़गड़ाहट दूर तक सुनाई दे रही थी।

सुप्रीम लहरों का सामना नहीं कर पा रहा था। वह किसी कागज के जहाज की भांती लहरों पर डोल रहा था।

तभी युगाका की तेज निगाहों ने समुद्र की लहरों के बीच एक विशालकाय ऑक्टोपस को देखा।

“सावधान रहना त्रिकाली, लुफासा विशालकाय ऑक्टोपस का रूप लेकर आ चुका है। हमें अब पानी के नीचे जाना होगा।"

इतना कहकर युगाका ने ड्रोन में लगा नीले रंग का बटन दबा दिया। ड्रोन एक झटके से पानी के अंदर आ गया।

तभी ऑक्टोपस ने पानी के नीचे से अपनी विशालकाय भुजाओं से ‘सुप्रीम’ को पकड़ लिया।

सुप्रीम को एक तेज झटका लगा, पर वह ऑक्टोपस के हाथों से फिसल गया।

इस बार ऑक्टोपस ने अपनी सभी भुजाओं से सुप्रीम को जोर से पकड़ लिया। सुप्रीम को इस बार और तेज झटका लगा।

अब ऑक्टोपस ने अपने शरीर से एक गाढ़े काले रंग का द्रव्य सुप्रीम के प्रोपेलर के पास लगे कैमरे पर उगल दिया, जिससे सुप्रीम के क्रू सदस्यों को बाहर का दृश्य ना दिखाई दे।

हल्की-हल्की बूंदे भी गिरना शुरु हो गई थी । काले भयानक बादल पूरे जहाज के ऊपर छा गये थे।

बादल बहुत जोर से गरजकर पूरे आसमान को कंपाए दे रहे थे।

तभी आसमान से एक बिजली कड़क कर युगाका के ड्रोन के पास जा गिरी। युगाका का ड्रोन लहराया। युगाका बाल-बाल बचा था।

समुद्र की लहरों ने अब विकराल रूप ले लिया था।

तभी युगाका को पानी के अंदर उड़नतस्तरी आती हुई दिखाई दी।

उड़नतस्तरी पानी के काफ़ी नीचे चल रही थी इसिलये उसकी हलचल ऊपर महसूस नहीं हो रही थी।

इसी के साथ उडनतस्तरी से हजारों हरे कीडो ने निकलना शुरु कर दिया।

तभी युगाका को 2 गोताखोर पानी में आते दिखाई दिये, जो कि सुप्रीम के प्रोपेलर की ओर जा रहे थे।

कुछ हरे कीड़े यह देख उनकी ओर लपके और इससे पहले कि दोनों गोताखोर कुछ समझ पाते हरे कीडो ने उन दोनो को कई जगह पर काट लिया।

दोनो गोताखोरों की लाश पानी में तैरने लगी।

हरे कीडो को सब तरफ फैलते देख युगाका ने अपने ड्रोन को सुप्रीम से थोड़ा दूर कर लिया।

अब ऑक्टोपस ने सुप्रीम को पानी के अंदर खेंचना शुरु कर दिया था।

बहुत से लोग पानी पर तैरने की कोशिश कर रहे थे।

तभी युगाका को एक मोटरबोट सुप्रीम से दूर जाती हुई दिखाई दी। चूंकि हरे कीडो की वजह से युगाका सुप्रीम के पास कुछ नहीं कर पा रहा था। इसिलये वह मोटरबोट के पीछे-पीछे पानी के अंदर ही अंदर चल पड़ा।

अब जहाज टूटकर बड़ी तेजी से पानी में समाने लगा। मौत का ऐसा भयानक तांडव शायद ही किसी ने देखा हो।

बादल भी उनकी मौत पर जोर-जोर से चीख रहे थे।

कुछ ही क्षण में भयानक आवाज करता हुआ ‘सुप्रीम’ पानी के अंदर समा गया।

तभी एक भयानक धमाका समुद्र के अंदर हुआ। आग जहाज के ईंधन टैंक तक पहुंच गयी थी।

इस भयानक धमाके की वजह से ऑक्टोपस का शरीर चिथड़े-चिथड़े होकर पानी में बिखर गया।

लुफासा का एक रूप और मारा गया था।

“बहुत अच्छा!" युगाका यह देखकर खुशी से झूम उठा- “एक रूप और ख़तम हुआ लुफासा का।"

हरे कीड़े इस समय पानी के अंदर डूबे जहाज से लाशो खींचकर उड़नतस्तरी के अंदर ले जा रहे थे।

थोड़ी देर में मोटर बोट के लोग वापस वहां जाने लगे, जहां सुप्रीम डूबा था। शायद उन्हें किसी जिंदा व्यक्ती की तलाश थी।

युगाका थोड़ा सा दूरी बनाकर मोटरबोट पर नजर रख रहा था।

तभी मोटरबोट के लोगो ने बोट पर किसी को चढ़ाया, जो कि दूरी अधिक होने की कारण युगाका व त्रिकाली को दिखाई नहीं दिया।

हरे कीडो ने तब तक पानी के अंदर की सभी लाशो को उड़नतस्तरी के अंदर पहुंचा दिया था और अब वो सब लहरों पर तैर रही लाशो की ओर झपटे।

युगाका ने अपना ड्रोन उस मोटरबोट और हरे कीडो के बीच कर लिया।

यह देख हरे कीडो ने गुस्से में युगाका के ड्रोन पर हमला कर दिया।

“बेड़ा गर्क।" युगाका ने गुस्से से झल्लाकर कहा- “ये तो अब हमारे पीछे पड़ गये।"

युगाका के ड्रोन से इतने कीड़े चिपक गये, कि विंड-स्क्रीन से बाहर कुछ नजर ही नहीं आ रहा था। युगाका के पास कोई ऐसा हथियार नहीं था, जिससे कि वह उन कीडो को मार सकता।

हरे कीडो ने अब ड्रोन को पानी में खींचना शुरु कर दिया।

“इससे पहले कि लुफासा फ़िर से रूप बदलकर आये या फ़िर ये हरे कीड़े हमें खींचकर उड़नतस्तरी तक ले जाएं, हमें अपने बचाव का कोई उपाय तो देखना ही पड़ेगा।" युगाका के चेहरे पर थोड़ी सी घबराहट नजर आने लगी।

यह देख त्रिकाली का हाथ गुस्से से हवा में लहराया।

इसी के साथ समुद्र का पानी आश्चर्यजनक रूप से नुकीले भालों में बदल गया और सारे हरे कीडो के शरीर में जाकर धंस गया। अब उनके ड्रोन पर एक भी हरा कीड़ा नहीं बचा था।

यह देख आसपास के सारे हरे कीड़े वहां से भाग खड़े हुए। युगाका और त्रिकाली भी इस घटना से हैरान हो गये।

“ये....ये....कैसे किया तुमने?" युगाका ने आश्चर्य से कहा।

“म....मुझे भी नहीं पता, मैंने तो बस गुस्से में ऐसे ही हाथ हिलाया था, पर यह पानी बर्फ़ कैसे बना, यह मुझे नहीं पता?" त्रिकाली ने उलझे-उलझे स्वर में कहा।

“लगता है कोई ना कोई शक्ति तुम्हारे अंदर भी है, पर इसका तुम्हें स्वयं ज्ञान नहीं है। बाबा से इसके बारे में पूछना पड़ेगा।" युगाका ने त्रिकाली की ओर देखते हुए कहा।

उधर मौके का फायदा उठाकर, वह मोटरबोट अराका तक पहुंच गयी थी।

तब तक हरे कीडो ने लहरों पर तैर रही बाकी बची लाशो को भी पानी में खींच लिया था।

अब वहां रूके रहने का कोई फायदा नहीं था। इसिलये युगाका और त्रिकाली भी वहां से अराका की ओर चल दिये।

जारी रहेगा_______✍️
 
BHAI LOG, USC ME BHI EK STORY DAALI HAI, TIME MILE TO USKA BHI REVIEW DENA:pray:
 
kamdev99008

SANJU ( V. R. )

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Meri usc story ko bhi padho bhai log 🙏
 
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