Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 16 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

SANJU ( V. R. ) bhaiya kitne update ho gaye but ju ka review pendin hai:waiting:

Aur abhi to usc me bhi story daal di maine:shhhh:
 
भाई लोग, आप को यह जानकर खुशी होगी की मैने एक ओर कहानी अभी पोस्ट की है। यू एस सी मे, तो कृपया अवश्य पढें।।
 
#93.

वृक्ष शक्ति

(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:15, मायावन, अराका द्वीप)

असलम के मरने के बाद अब सुयश की टीम में केवल 10 लोग बचे थे।

जहां एक तरफ सुयश सहित सभी थोड़ा उदास दिख रहे थे, वहीं उनका पीछा कर रहे युगाका की आँखों में खुशी के भाव थे।

“तौफीक!"

जेनिथ ने तौफीक का हाथ थामते हुए कहा- “यहां द्वीप पर हम साधारण जिंदगी तो जी नहीं रहे हैं। ना ही तुम्हारे कोई दुश्मन यहां पर हैं, फिर भी यहां पर तुम मुझसे दूर क्यों रहते हो?"

“देखो जेनिथ मैं वैसा इंसान नहीं हूं जैसा तुम्हे पसंद है।" तौफीक ने बहुत सीरियस अंदाज में कहा- “हर समय दिल की मत सुना करो, कभी-कभी दिमाग भी लगा लिया करो।"

“मैं तुम्हारी इस बात का मतलब नहीं समझी।" जेनिथ ने उलझे-उलझे भाव से कहा- “देखो तुम पहेलियां मत बुझाओ। तुम मुझे सीधे-सीधे बताओ कि तुम क्या कहना चाहते हो?"

“देखो जेनिथ मैं पहले तुमसे प्यार नहीं करता था, पर अब करने लगा हूं। पर पता नहीं क्यों मुझे महसूस होता है कि हम तुम इस जिंदगी में कभी मिल नहीं पायेंगे।" तौफीक ने निराशावादी व्यक्ति की तरह कहा।

यह सुनकर जेनिथ का दिल टूट सा गया।

“ऐसा कह के मेरा दिल क्यों दुखा रहे हो तौफीक?.... मैं जानती हूं कि तुम अपने प्यार का इजहार नहीं कर सकते। तुम दूसरोँ से थोड़ा अलग हो, पर इस तरह से मत बोलो।" इतना कहकर जेनिथ की आँखों से आँसू निकलने लगे।

तभी जेनिथ के गले में टंगे उस देवी के लॉकेट से कुछ चमक निकली और उसने जेनिथ के आँसुओ को सोख लिया। पर यह घटना कोई देख नहीं पाया।

उधर चलते-चलते एलेक्स के जूते के फीते खुल गये। एलेक्स जूते के फीते बांधने के लिये उस जगह पर बैठ गया और अपने जूते के फीते बांधने लगा।

किसी ने एलेक्स को रुकते नहीं देखा, वह सभी आपस में बात करते आगे बढ़ते जा रहे थे।

एलेक्स ने एक नजर आगे जाते हुए सभी लोगो पर मारी, पर उसने किसी को रोका नहीं। उसे लगा कि वह अभी जूते के फीते बांधकर दौड़कर उन लोगो के पास पहुंच जायेगा।

एलेक्स जूते के फीते बांधकर जैसे ही आगे बढ़ने चला, उसे पास के एक पेड़ के पीछे से कुछ खटके की आवाज आयी और एक इंसानी साया दिखाई दिया।

जंगल में इंसानी साया देखकर एलेक्स के मन मे उत्सुकता जागी, वह धीरे-धीरे उस पेड़ की ओर बढ़ा, जिधर से वह आवाज आयी थी।

पर एलेक्स ने एक गलती की, उसने किसी को भी रुकने के लिये आवाज नहीं लगाई।

एलेक्स ने पेड़ के पीछे झांक कर देखा, पर उसे कुछ दिखाई नहीं दिया।

“वह इंसानी साया कहां गया? अभी तो यहीं पर था।" एलेक्स मन ही मन बड़बड़ाया।

तभी एलेक्स को अपने पीछे एक सरसराहट का अहसास हुआ।

एलेक्स एक झटके से पलट गया। उसे अपने पीछे युगाका खड़ा दिखाई दिया, पर इससे पहले कि एलेक्स युगाका से कुछ पूछ पाता या फिर अपने साथियों को इस अंजाने खतरे से आगाह कर पाता, युगाका के हाथो से एक गाढ़े हरे रंग का धुंआ निकलने लगा।

एलेक्स हैरानी से धुंए को देखने लगा। तभी एलेक्स को अपना सिर नाचता हुआ सा महसूस हुआ और वह बेहोश होकर युगाका के हाथो में झूल गया।

युगाका ने एलेक्स को धीरे से वहीं पेड़ के नीचे लिटाया और स्वयं एलेक्स बनकर, भागकर सुयश की टीम में शामिल हो गया।

किसी को भी यह पता नहीं चल पाया कि एलेक्स बदल चुका है।

युगाका ने एलेक्स का रूप तो धारण कर लिया, पर परेशानी अब उसकी आवाज की थी क्यों कि युगाका में किसी का भी रूप बदलने का हुनर तो था, पर वह अपनी आवाज नहीं बदल सकता था।

और युगाका को पता था कि कोई ना कोई उससे कुछ ना कुछ तो पूछेगा ही? फ़िर वह कब तक नहीं बोलेगा?

तभी चलते हुए सभी को कुछ पौधे दिखाई दिये। यह पौधे देखने में छोटे थे। इन पर सूरजमुखी के समान कुछ फूल और रसभरी के समान कुछ फल लगे दिखाई दिये।

कुछ तितलीयां और भौंरे उस पौधे के पास मंडरा रहे थे, परंतु जैसे ही कोई भौंरा या तितली उस फूल के पास जाने की कोशिश कर रहा था, वैसे ही वह फूल अपनी पंखुडियों को बंद कर लेता था और जैसे तितली या भौंरा उस फूल से दूर हो जाता था, वह फूल पुनः खिल जाता था।

इस प्रकार फूल के खिलने और बंद होने पर एक अजीब सी ध्वनि उत्पन्न हो रही थी और इस ध्वनि को सुन उस पौधे पर लगा रसभरी के समान फल हर बार अलग-अलग रंगो में परिवर्त्तित हो जा रहा था।

उस पौधे को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह फूल नहीं चाहता कि कोई भौंरा या तितली उसमें उपस्थित मकरंद को ले सके।

सभी इस विचित्र पौधे को देख वही रुक गये।

“बड़ा ही विचित्र पौधा लग रहा है।" अल्बर्ट ने पौधे को देखते हुए कहा।

“ऐसा लगता है जैसे कि इस द्वीप के हर पौधे में जीवन है और ये खुद की अपनी समझ भी रखते हैं।" जेनिथ ने कहा।

अभी ये लोग इस प्रकार से पौधे को देख ही रहे थे कि तभी आसमान से एक उड़ती हुई चिड़िया आयी और उस पौधे से एक फल को तोड़कर आसमान में उड़ गयी।

“लगता है यह फल साधारण है, नहीं तो वह चिड़िया इस प्रकार फल को नहीं ले जाती।" सुयश ने कहा।

यह देख युगाका के मन में तुरंत एक ख़याल आया। वह धीरे से आगे बढ़ा और उसने पौधे से एक फल तोड़कर खा लिया।

फल को खाते ही युगाका जानबूझकर जमीन पर गिर गया और अपना गला पकड़कर खांसने की एक्टिंग करने लगा। यह देख सभी डर गये।

क्रिस्टी लपककर एलेक्स बने युगाका के पास आ गयी।

“क्या हुआ एलेक्स?" क्रिस्टी ने अपनी पानी की बोतल को युगाका के मुंह से लगाते हुए कहा- “लग रहा फल अटक गया।....लो पानी पी लो।"

युगाका ने क्रिस्टी के हाथ से पानी पीया। अब उसका खांसना बंद हो गया था। यह देख सभी ने राहत की साँस ली।

क्रिस्टी भी एलेक्स को खड़ा होते देख मुस्कुरा कर बोली- “जंगली बनने को कहा था। जंगली की तरह खाने को नहीं पगलू।" क्रिस्टी की बात सुन सभी मुस्कुरा दिये।

अब युगाका ने बोलने की एक्टिंग करते हुए फ़िर से अपना गला पकड़ लिया।

“कुछ तो परेशानी हुई है एलेक्स के गले के साथ।" सुयश ने सभी को आगाह करते हुए कहा- “कोई भी इस पौधे के फलो को नहीं खाएगा।"

युगाका ने इशारे से सभी को बताया कि उसके गले से आवाज नहीं निकल रही है।

अल्बर्ट ने टॉर्च की रोशनी से युगाका के मुंह में झांककर देखा। अल्बर्ट को कोई परेशानी समझ में नहीं आयी।

“मुझे लगता है कि यह भी कोई आवाज छीन लेने वाला विचित्र पौधा है?" अल्बर्ट ने कहा।

“अब मैं बात किससे करूंगी?" क्रिस्टी की आँखो से अब झर-झर आँसू बहने लगे- “सॉरी एलेक्स.... मैंने तुम्हारा मजाक उड़ाया।"

यह कहकर क्रिस्टी ने युगाका को कसकर झकझोरा।

युगाका एकटक क्रिस्टी को देख रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि अगर एलेक्स उसकी जगह होता तो कैसे व्यव्हार करता?

तभी ऐमू चीखता हुआ युगाका के सिर पर जाकर उड़ने लगा-“दोस्त नहीं... दोस्त नहीं.... ये ऐमू का दोस्त नहीं।"

चूंकि ऐमू कुछ समय पहले शैफाली और ब्रूनो के लिये भी ‘गंदी लड़की’ और ‘गंदा कुत्ता’ जैसे शब्दो का प्रयोग कर रहा था इसिलये ऐमू की बात पर शैफाली को छोड़ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।

शैफाली की तेज निगाहें अब एलेक्स बने युगाका पर गई, अचानक शैफाली की आँखों के भाव बदले।

अब उसके चेहरे पर गुस्सा था, पर उसने किसी को कुछ महसूस नहीं होने दिया।

“चुप हो जाओ क्रिस्टी... इस जंगल में सभी को कुछ ना कुछ परेशानी हो ही रही है। कम से कम एलेक्स तुम्हारे साथ तो है। उनके बारे में सोचो जो अब हमारे साथ नहीं हैं।" अल्बर्ट ने क्रिस्टी को दिलासा देते हुए कहा।

सुयश ने भी क्रिस्टी के कंधे पर हाथ रखकर उसे शांत रहने का इशारा किया।

अब क्रिस्टी का रोना कम हो गया था, पर उसने युगाका के हाथ को अभी भी नहीं छोड़ा था।

उधर युगाका का हाथ पहली बार किसी इंसान ने पकड़ा था, इसिलये उसे बहुत ही अजीब सा महसूस हो रहा था।

तभी शैफाली ने धीरे से पास पड़ा, लकड़ी का मोटा डंडा उठाया और युगाका के सिर के पीछे पहुंच गयी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, शैफाली ने वह डंडा जोर से युगाका के सिर पर मार दिया।

एक तेज सी आवाज हुई और युगाका वहीं गिरकर बेहोश हो गया।

“यह तुमने क्या किया?" क्रिस्टी ने ना समझने वाले भाव से शैफाली को घूरा।

“यह एलेक्स भैया नहीं है क्रिस्टी दीदी।" शैफाली ने कहा- “यह कोई बहुरूपिया है, जो एलेक्स भैया बनकर हमारे साथ चल रहा था। कैप्टन अंकल .... इससे पहले कि यह होश में आये, आप इसे तुरंत किसी चीज से बाँध दीजिए।"

शैफाली की बात सुन सभी नीचे पड़े एलेक्स को देखने लगे।

“यह तुम क्या कह रही हो शैफाली?" जैक ने कहा- “इसका चेहरा तो बिल्कुल एलेक्स से मिल रहा है। कहीं तुम गलत तो नहीं हो?"

“अगर आपको लगता है कि मैं गलत बोल रही हूं, तो जरा देर रुक जाइये। अभी इसके होश में आते ही आपको सब पता चल जायेगा।" शैफाली ने नाराज होते हुए कहा।

“नहीं-नहीं.... मेरा यह कहने का मतलब नहीं था। मैं तो बस वैसे ही पुष्टि कर रहा था।" जैक ने घबराकर कहा।

तभी ब्रेंडन पास लगे एक पेड़ की जड़ को चाकू से काटकर ले आया। देखने में वह जड़ काफ़ी मजबूत लग रही थी। ब्रेंडन ने उसी जड़ से युगाका के हाथ उसके शरीर के पीछे करके बांध दिये।

जारी रहेगा________✍️
 
Agla update kal hi de dunga, aaj ka update thoda chhota hai, kuch samay kam mila to is liye kal ek aur update milega :approve:
 
#94.

“अगर यह एलेक्स नहीं है तो एलेक्स कहां है?" क्रिस्टी ने युगाका की ओर देखते हुए कहा।

“कुछ कह नहीं सकते .... अब तो इसके होश में आने पर ही सब कुछ पता चलेगा।" शैफाली ने कहा।

तभी सुयश ने एक बोतल का पानी युगाका के सिर पर डाल दिया। सिर पर पानी पड़ते ही युगाका होश में आ गया।

होश में आते ही उसने अपने बंधे हाथो को देखा और चीख कर बोला- “मेरे सिर पर किसने चोट की.... जल्दी बताओ नहीं तो एक-एक को यहीं मार दूँगा।"

“बंधा तू खुद है और हमें मारने की बात कर रहा है।" जॉनी ने हंसते हुए कहा।

“लगता है पहले तेरी मौत आयी है।" युगाका ने कहा।

तभी आश्चर्यजनक तरीके से युगाका के हाथ पर बंधी जड़ अपने आप ही खुल गयी।

युगाका को इतनी आसानी से अपने हाथ खोलते देख सभी हैरान हो गये।

युगाका अब थोड़ा हिंसक नजर आने लगा था। यह देख तौफीक और ब्रेंडन ने अपने हाथ में चाकू निकाल लिया।

अब सभी सतर्क हो गये थे। किसी भी पल कुछ भी हो सकता था। सभी बस युगाका के अगले कदम का इंतजार कर रहे थे।

युगाका अब अपने असली रूप में आ गया था। उसने गुस्से से एक पेड़ की ओर देखा। तुरंत उस पेड़ की डाली हिली और उसने जॉनी को अपनी गिरफ़्त में ले लिया।

पेड़ की डाली जॉनी के शरीर से लिपट गयी और उसने जॉनी को ऊपर हवा में उठा लिया।

यह देख ऐमू डर के मारे आसमान में उड़कर भाग गया।

तभी तौफीक ने पूरी ताकत से चाकू को युगाका की ओर उछाल दिया।

निशाना तो बिल्कुल सटीक था, पर उसी समय युगाका और चाकू के बीच एक पेड़ की डाल आ गयी। चाकू पेड़ की डाल में धंस गया।

युगाका ने अब घूरकर तौफीक की ओर देखा। तभी जमीन से पेड़ की एक जड़ निकली और तौफीक के चारो ओर लिपट कर उसे जमीन से इस कदर चिपका दिया कि अब तौफीक हिल भी नहीं सकता था।

“ठहरो ...!“ शैफाली ने युगाका की ओर देखकर चिल्लाकर कहा-“ मैंने मारा था तुम्हारे सिर पर डंडा....जो कहना हो मुझे कहो....बाकी सबको छोड़ दो।"

तभी एक पेड़ की डालियां बिल्कुल किसी राक्षस के हाथ की तरह से नीचे आई और शैफाली के शरीर को अपनी गिरफ़्त में ले हवा में टांग दिया।

“रुक जाओ .... ।"

अल्बर्ट यह देखकर चीखा- “उस बच्ची को छोड़ दो। वह अभी छोटी है। जो कुछ कहना है, हम लोगो को कहो।"

“ठीक है .... सबको एक साथ समझाता हूं।" इतना कहकर युगाका ने अपना हाथ हवा में हिलाया।

युगाका के ऐसा करते ही वहां मौजूद सभी पेड़ और पौधे आक्रामक अंदाज में वहां खड़े सभी लोगो से लिपट गये।

तभी एक पेड़ ने हवा में ही एक बड़ी सी कुर्सी का रूप लिया और उस पेड़ की जडों ने, युगाका को हवा में उठाकर, उस कुर्सी पर बैठा दिया।

यह देखकर सब समझ गये कि इस योद्धा से लड़ने का कोई मतलब नहीं है।

“आप हो कौन?" सुयश ने दिमाग लगाते हुए पूछा।

“मेरा नाम युगाका है। मैं इस द्वीप का युवराज हूं। मेरे पास वृक्ष शक्ति है। इस लिये यहां के सारे पेड़ मेरा कहना मानते हैं।"

“हम आपसे लड़ना नहीं चाहते। शैफाली ने भी गलती से आपके सिर पर वार कर दिया था।" सुयश ने साफ झूठ बोलते हुए कहा।

“तुम मनुष्यो की झूठ बोलने की आदत जायेगी नहीं ।" युगाका ने गुस्से में ही जवाब दिया- “अगर उस लड़की ने मुझे गलती से मारा तो तुम लोगो ने मुझे बांधा क्यों?"

इधर सभी को युगाका ने असहाय कर दिया था, उधर पोसाइडन पर्वत की मूर्ति की आँखें शैफाली को हवा में लटके देख लाल हो गयी।

वहां से एक अंजान ऊर्जा शैफाली की ओर बढ़ी और हवा में लटकी शैफाली से आकर टकरायी।

उस ऊर्जा के टकराते ही शैफाली को एक तेज झटका लगा और उसके बाल हवा में लहराये।

“आपने हमें मनुष्य क्यों बोला? क्या आप मनुष्य नहीं हो?" सुयश ने फ़िर युगाका को बातों में फंसाया।

“नहीं....मैं मनुष्य नहीं हूं। मैं अटलांटियन हूं और अटलांटियन मनुष्य से श्रेष्ठ होता है।" युगाका के शब्दो में घमंड साफ नजर आ रहा था।

“तो फ़िर तुम्हे मनुष्यो की मदद की आवश्यकता क्यों है?" इस बार शैफाली ने बीच में बोलते हुए कहा।

युगाका शैफाली के शब्द सुनकर हड़बड़ा सा गया- “किसने कहा कि मुझे मनुष्यो की मदद चाहिये?"

“क्यों देवी क्लिटो को स्वतंत्र नहीं कराना क्या?" शैफाली के शब्द अब रहस्य से भरे थे।

शैफाली के शब्द युगाका को छोड़ किसी की भी समझ में नहीं आ रहे थे।

“त.... तुम्हे कैसे पता?" युगाका के शब्दो में पूरे जहान का आश्चर्य था।

“तुम्हे क्या लगता है कि इस जंगल के सारे पेड़ तुम्हारा कहना मानते है?" शैफाली ने युगाका की बात को काटते हुए, धीरे से हवा में इशारा किया।

सभी पेडों ने शैफाली सहित सभी लोग को नीचे उतार दिया।

“य.... ये कैसे किया तुमने....म... मेरा मतलब है कि आपने?"अचानक से युगाका के अंदर शैफाली के लिये आदर के भाव आ गये।

तभी शैफाली का हाथ पुनः हवा में लहराया और युगाका की कुर्सी बने सभी पेडों ने युगाका का साथ छोड़ दिया।

शान से कुर्सी पर बैठा युगाका ‘धड़ाम’ से जमीन पर आकर गिरा।

युगाका ने हवा में हाथ हिलाया, पर किसी भी पेड़ ने युगाका की बात नहीं मानी।

“मैंने तुम्हे जानबूझकर मारा था।" तभी शैफाली ने गुस्से से कहा-“ क्यों की मैं तुम्हे पहचान गयी थी। तुम 'नयनतारा' पेड़ की दृष्टि को भ्रमित नहीं कर सकते।"

“आप कौन हो? और आप इन पेडों के बारे में इतना कैसे जानती हो?" युगाका ने आदर भरे स्वर में पूछा।

“मैं तो एक साधारण सी लड़की हूं। मुझे भी नहीं पता कि मैं ये सब कैसे जानती हूं?" अचानक से शैफाली फ़िर से सामान्य लगने लगी- “पर अब तुम्हे बताना पड़ेगा कि एलेक्स भैया कहां है?"

“मैंने एलेक्स को यहां से कुछ दूर पहले बेहोश करके एक पेड़ के किनारे छोड़ दिया था। हमें वो वहीं मिल जायेगा।" युगाका ने कहा।

“मुझे आपसे अभी बहुत कुछ पूछना है?" सुयश ने युगाका को देखते हुए कहा- “पर पहले हमें एलेक्स को अपने साथ लेना होगा, कहीं वह किसी मुसीबत में ना फंस जाए।"

सभी ने सुयश की बात पर अपनी सहमित जताई। पर जैसे ही युगाका आगे बढ़ने चला, उसके हाथ में बंधे एक रिस्ट-बैंड पर लगा लाल रंग का रत्न जोर से चमकने लगा। उसे चमकता देख युगाका विचलित हो गया।

“मैं आप लोगो से माफ़ी मांगता हूं, पर मुझे कुछ ज़रूरी काम से तुरंत यहां से जाना पड़ेगा, मगर मैं आपसे वादा करता हूं कि जल्दी ही आप लोगो से वापस आकर मिलूंगा, फ़िर आप जो कुछ पूछेंगे, वो सब मैं बताऊंगा। और हां यहां से 3 दिन की पैदल दूरी पर आपको पोसाइडन पर्वत मिलेगा, वहीं से आपको वापस जाने का मार्ग भी मिल जायेगा।" युगाका ने सभी से माफ़ी मांगते हुए कहा।

वापस जाने के मार्ग के बारे में सुनकर सभी के चेहरे खिल उठे।

सुयश को महसूस हो गया कि युगाका को वास्तव में ही कुछ ज़रूरी काम है, इसिलये उसने कहा-

“ठीक है आप जा सकते हो, पर एलेक्स को जहां छोड़ा था वह स्थान हमें बता दो।"

युगाका ने जल्दी से एलेक्स के बारे में उन्हें बताया और वहां से दौड़ते हुए जंगल में गायब हो गया।

कुछ ही देर में सभी युगाका के बताए स्थान पर पहुंच गये, पर उन्हें वहां कोई नजर नहीं आया।

यह देख जैक बोला- “कहीं वह जंगली हमें बेवकूफ तो नहीं बना गया?"

“नहीं...वह झूठ नहीं बोलेगा।" शैफाली ने कहा।

“तो बेहोश एलेक्स इतनी जल्दी कहां चला गया?" क्रिस्टी ने रुंधे गले से कहा- “कहीं वह किसी दूसरे खतरे में तो नहीं पड़ गया?"

“मुझे लगता है कि युगाका जल्दी ही हमसे आकर वापस मिलेगा और वही बताएगा कि एलेक्स इस समय कहां होगा? क्योंकि तुम लोगो ने देखा कि उसके पास कितनी जादुई शक्तियां थी।" जेनिथ ने कहा।

“शक्तियां तो हमारी शैफाली में भी कम नहीं हैं, बस इसे कुछ याद नहीं आ रहा।" अल्बर्ट ने शैफाली को प्यार से देखते हुए कहा।

“सही कह रहे हैं आप प्रोफेसर।" सुयश ने भी शैफाली की तारीफ की- “अगर शैफाली हमारे साथ ना होती तो हम लोग कब का इस जंगल में मारे गये होते?"

“मेरे ख़याल से अब हमें जल्दी से जल्दी पोसाइडन पर्वत पर पहुंचना चाहिए।"

ब्रेंडन ने कहा- “वहीं से हमें निकलने का मार्ग मिलेगा और तब तक युगाका भी आकर हमें सब कुछ बता ही देगा।"

ब्रेंडन की बात सुनकर क्रिस्टी को छोड़ सभी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी। क्रिस्टी अभी भी एलेक्स के लिये चिन्तित नजर आ रही थी।

सभी फ़िर से आगे की ओर बढ़ गये, पर इस बार सभी के कदमो में उत्साह दिख रहा था।

जारी रहेगा_______✍️
 
#95.

हिमालयन यति :

(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:30, ट्रांस अंटार्कटिक-पर्वत-अंटार्कटिका)

जेम्स और विल्मर को शलाका के दिये कमरे में रहते हुए आज एक दिन बीत गया था, पर ना तो शलाका उनसे मिलने आयी थी और ना ही उन दोनों को अपने पास बुलाया था।

जेम्स और विल्मर एक कमरे में बंद ऊब रहे थे। पर उन्हें यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर देवी शलाका से संपर्क कैसे करे?

उस कमरे में ना तो कोई दरवाजा था और ना ही कोई खिड़की? आख़िर वह बाहर जायें तो जायें कैसे?

“यार जेम्स!" हम लोग यहां क्या सोच कर आये थे कि खजाना मिलेगा? पर यहां कुछ मिलना तो छोड़ो, हम यहां खुद ही कैद हो गये।" विल्मर ने निराश होते हुए कहा।

“नकारात्मक मत सोचो दोस्त।" जेम्स ने विल्मर का हौसला बढ़ाते हुए कहा- “वह तो देवी हैं और पता नहीं कितने समय से यहां सो रही थी। अब इतने बाद अगर वो उठी हैं तो बहुत से काम बाकी होंगे। देवी पहले उसको पूरा करेंगी, फ़िर समय निकालकर हम लोगो से मिलेंगी। वैसे वह हमसे काफ़ी खुश हैं। हम तो जो मांगेंगे, उसे वह पूरा करेंगी । तू चिंता मत कर, हमारा खजाना मिलना तो पक्का है।"

“पता नहीं क्यों? पर मुझे तो थोड़ी टेंशन हो रही है।" विल्मर ने कहा- “अगर वह सच में हमसे इतना खुश थी, तो उसी समय क्यों नहीं खजाना देकर हमें वापस भेज दिया? और मान लिया कि उनके पास बहुत काम होंगे जिसकी वजह से वह हमसे नहीं मिल पा रही हैं, तो कम से कम ऐसे कमरे में रखती, जहां कुछ खिड़की व दरवाजे तो होते। उन्होने तो हमें ऐसे कमरे में बंद कर दिया है, जैसे हम उनके मेहमान ना होकर कोई कैदी हैं?"

विल्मर की बात में दम था, इसिलये जेम्स ने इस बार कोई विरोध नहीं किया।

जेम्स भी अब बैठे-बैठे थक गया था। इसिलये वह उठकर कमरे में ही टहलने लगा।

टहलते-टहलते जेम्स की निगाह एक दीवार पर चिपके दरवाजे के स्टीकर पर गयी।

स्टीकर देखकर उसे थोड़ा सा अजीब लगा। इसिलये वह दीवार के पास जाकर स्टीकर को देखने लगा।

वह एक साधारण स्टीकर ही था। ध्यान से देखने पर जेम्स को उस स्टीकर के दरवाजे पर एक उभरा हुआ लाल रंग का बटन दिखाई दिया।

जेम्स ने धीरे से उस बटन को दबा दिया।

बटन दबाने पर उसका रंग बदल कर लाल से हरा हो गया, पर कहीं से कोई आवाज नहीं आयी।

तभी जेम्स को स्टीकर देखते हुए एक अजीब सा अहसास हुआ।

एक बार फ़िर जेम्स ने स्टीकर को छूना चाहा, पर स्टीकर पर हाथ लगाते ही जेम्स को अपना हाथ दरवाजे के पार होता दिखाई दिया।

जेम्स ने एक बार विल्मर की ओर देखा। विल्मर कुर्सी पर आँख बंद किये हुए बैठा था।

जेम्स ने वापस स्टीकर की ओर देखा और धीरे से अपना एक हाथ स्टीकर के अंदर कर दिया।

दूसरी ओर खाली स्थान देख जेम्स पूरा का पूरा उस स्टीकर में घुस गया।

जेम्स के सामने एक गैलरी सी दिखाई दी। जिसमें हल्का उजाला था। जेम्स उस गैलरी में आगे बढ़ गया।

थोड़ा चलने के बाद जेम्स को हर तरफ दरवाजे ही दरवाजे दिखने लगे।

जेम्स ने घूमकर चारो ओर के दरवाजो को देखा, पर पलटने पर वह खुद भूल गया कि वह किस दरवाजे से यहां आया था।

अब जेम्स घबरा गया। काफ़ी देर तक उसने अंदाजा लगाने की सोची, पर उसे कुछ समझ नहीं आया।

अंततः वह एक दरवाजे से बाहर निकल गया। वह रास्ता एक बर्फ़ की गुफा में निकला था।

एक बार तो जेम्स खुश हो गया कि उसने बाहर निकलने का रास्ता खोज लिया, पर सामने का नजारा देख वह चकरा गया क्यों कि उसे अपने अगल-बगल चारो तरफ बर्फ़ के पहाड़ दिखाई दे रहे थे।

“यह मैं कहां आ पहुंचा? यह अंटार्कटिका नहीं है। अंटार्कटिका का एक-एक चप्पा मैं पहचानता हूं, वहां इतने पहाड़ नहीं है और...और वहां की बर्फ़ का रंग भी इतना सफेद नहीं है।....पर मैं 10 कदम के अंदर अंटार्कटिका से इतना दूर कैसे आ सकता हूं?” जेम्स मन ही मन बुदबुदाया।

जेम्स गुफा से निकल कर बाहर आ गया। तभी उसे अपने सामने एक 30 इंच लंबा पैर का निशान बर्फ़ पर बना दिखाई दिया।

“हे भगवान ... ये किस दैत्य के पैरों के निशान हैं बर्फ़ पर?" जेम्स के चेहरे पर आश्चर्य ही आश्चर्य दिख रहा था-“ये मैं कहां आ गया? मुझे तुरंत वापस जाना होगा।"

इतना सोचकर जेम्स जैसे ही वापस जाने के लिये घूमा, उसे अपने पीछे की गुफा गायब दिखाई दी।

“अब ये गुफा कहां गायब हो गयी?" गुफा को गायब देख जेम्स डर गया- “अब मैं वापस कैसे जाऊंगा?"

जेम्स ने अपने आप को एक मैदान में खड़े पाया। उसे समझ में नहीं आया कि अब वो कहां जाये? तभी आसमान से बर्फ़ गिरना शुरू हो गयी।

पहले ही जेम्स को ठंड लगने लगी थी और अब उस अनचाही बर्फ़ ने जेम्स का शरीर गलाना भी शुरू कर दिया।

अब जेम्स के पास और कोई चारा नहीं था, उन विशालकाय कदमों का पीछा करने के अलावा। कुछ सोच जेम्स उन कदमों के निशान के पीछे चल पड़ा।

थोड़ा आगे जाने पर उसे वो कदमों के निशान एक गुफा की ओर जाते हुए दिखाई दिये।

आसपास कुछ और ना होने की वजह से जेम्स भी उस गुफा की ओर चल दिया।

जेम्स ने बाहर से ही धीरे से झांक कर गुफा में देखा।

जेम्स को गुफा में कोई दिखाई नहीं दिया। गुफा के छत की ओर एक गोल सा सुराख था, जिसमें से होकर बर्फ़ ने गुफा में एक छोटा सा पहाड़ बना दिया था।

वह गुफा आगे जाकर सुरंग में बदलती दिख रही थी। आसमान से गिरती बर्फ़ से बचने के लिये जेम्स उस गुफा के एक किनारे खड़ा हो गया।

जेम्स को वहां खड़े हुए अभी ज़्यादा देर नहीं हुआ था कि अचानक जेम्स को गुफा के अंदर का बर्फ़ का टीला हिलता हुआ सा दिखाई दिया।

यह देख जेम्स डरकर वहीं दीवार से चिपक गया।

अब वह बर्फ़ तेजी से हिली और उसमें से एक 12 फुट का विशाल यति निकल आया।

यति को देख जेम्स बहुत डर गया और वह गुफा से चीखकर बाहर की ओर भागा।

यति की नजर भी जेम्स की ओर गयी। वह भी जेम्स के पीछे भागा।

मुस्किल से 5 सेकंड में ही यति ने जेम्स को अपने हाथों में पकड़ लिया।

यति ने एक बार ध्यान से जेम्स की ओर देखा। जेम्स ने डर के मारे अपनी आँखे बंद कर ली।

उसे लगा कि यति अब उसे खाने जा रहा है। जेम्स के मुंह से एक तेज चीख भी निकल गयी।

तभी जेम्स को अपना शरीर हवा में झूलता हुआ महसूस हुआ। जेम्स ने एक झटके से अपने आँखे खोली। उसने देखा कि यति हवा में ऊंचे-ऊंचे कूदता हुआ किसी दिशा में जा रहा है और वह यति के हाथों में है।

बस इससे ज़्यादा जेम्स कुछ नहीं देख पाया क्यों की अब वह बेहोश हो चुका था।

ऊंची छलांग लगाता हुआ वह यति एक विशालकाय पर्वत के पास पहुंच गया।

पर्वत पर एक बर्फ़ से लदा हुआ घर बना था।

घर बर्फ़ से इतना ज़्यादा ढका था कि यही नहीं पता चल रहा था कि वह घर किस चीज से बना है।

उस घर का दरवाजा छोटा था।

यह देख यति का आकार अपने आप छोटा होने लगा।

अब यति का आकार इंसान के बराबर हो गया और वह जेम्स को लेकर उस घर में दाख़िल हो गया।

पता नहीं यति किस प्रकार चल रहा था कि उसके पैरों से रत्ती भर भी आवाज नहीं हो रही थी।

2 कमरे पारकर यति एक बड़े से हॉल में पहुंचा।

उस हॉल के बीचोबीच एक काले रंग के पत्थर से निर्मित शिवाला बना था। जिसके पास एक सफेद दाढ़ी वाला बूढ़ा बैठा भगवान की पूजा कर रहा था।

यह तिब्बत का एक भिक्षुक नीमा था।

यति ने धीरे से शिवाला को सिर झुकाया और सामने की ओर चुपचाप बैठकर नीमा की पूजा ख़तम होने का इंतजार करने लगा।

लगभग 10 मिनट के बाद नीमा ने अपनी पूजा ख़तम करके अपनी आँखे खोली।

आँख खोलते ही नीमा की नजर यति और उसके पास बेहोश पड़े जेम्स की ओर गयी।

“यह कौन है हनुका?" नीमा ने यति की ओर देखते हुए पूछा।

“मुझे भी नहीं पता। मुझे ये म.. हा….देव की ‘योग-गुफा’ में मिला था।"

हनुका ने कहा- “मुझे शकल से ये विदेशी दिखाई दिया, इसिलये इसे मैं आपके पास ले आया।"

“गुरुत्व शक्ति के प्रकट होने का समय आ रहा है। हो सकता है ये वही चुराने के लिये यहां आया हो।"

नीमा ने कहा- “आप इसे रूद्राक्ष और शिवन्या को सौंप दो। वही देखेंगे कि इसका आगे क्या करना है?"

“जी धर्मगुरु!" इतना कहकर हनुका जेम्स को ले वहां से बाहर निकल गया।

जारी रहेगा_________✍️
 
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