Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 14 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

#83.

तभी उड़नतस्तरी वापस पानी से निकलकर अराका द्वीप की ओर बढ़ गयी। लुफासा अभी भी उसी स्थान पर खड़ा था। लुफासा के देखते ही देखते उड़नतस्तरी वापस पानी में समा गयी।

लुफासा को 'सुप्रीम' का इस तरह से भटकाना अच्छा नहीं लगा था, पर वह मजबूर था। वह मकोटा के विरुद्ध नहीं जा सकता था।

लुफासा अब उदास मन से पैदल ही महल की ओर चल दिया।

चलते-चलते वह सोचता भी जा रहा था-

“पता नहीं जैगन इंसान के मृत शरीर के साथ कौन सा प्रयोग कर रहा है?और यह मान्त्रिक भी सीनोर वासी होकर भी द्वीप के नियमों का उलंघन कर रहे हैं। क्यों ना छिपकर पिरामिड के अंदर जाकर देखा जाये कि आख़िर कौन सा प्रयोग कर रहे हैं वहां पर? पर अगर मान्त्रिक को इस बारे में पता चल गया तो?.... तो फिर क्या होगा?...पर उन्हें पता कैसे चलेगा? मैं स्वयं तो उन्हें बताऊंगा नहीं...और मैं तो कोई भी रूप धारण कर सकता हू, मुझे कोई पहचान कैसे पायेगा?"

यह ख्याल दिमाग में आते ही लुफासा ने फ़िर से बाज का रूप धारण कर लिया और पिरामिड की ओर उड़ चला। काफ़ी देर उड़ने के बाद लुफासा को पिरामिड दिखाई देने लगे।

लुफासा सबसे पहले वाले पिरामिड की छत पर उतर गया। छत पर किसी भी प्रकार का कोई रोशनदान या खिड़की नहीं थी।

“यह क्या? इसमें ऊपर से तो अंदर की ओर जा पाना असंभव है। कोई और रास्ता ढूंढता हू।"

पर चारो ओर से गहन निरिक्षण करने के बाद भी लुफासा को पिरामिड के अंदर घुसने का कोई रास्ता नजर नहीं आया।

तभी लुफासा को पिरामिड की ओर आता हुआ मकोटा दिखाई दिया।

मकोटा को देख लुफासा ने मक्खी का रूप धारण कर लिया।

मकोटा ने पिरामिड के दरवाजे के पास पहुंचकर अपने दोनों तरफ देखा और फ़िर अपने हाथ में पकड़े सर्पदंड को दरवाजे से स्पर्श करा दिया।

पिरामिड का दरवाजा एक गड़गड़ाहट के साथ खुल गया।

मकोटा के साथ लुफासा भी मक्खी बनकर पिरामिड के अंदर प्रवेश कर गया।

अंदर से पिरामिड बहुत ही आधुनिक अंतरिक्ष यान की तरह से दिख रहा था। पिरामिड की दीवारों से तेज रोशनी फूट रही थी।

एक छोटी सी गैलरी के बाद एक बहुत ही विशालकाय कमरा था। जिसे देखकर लुफासा हैरान रह गया क्यों कि उस कमरे में एक लगभग 400-500 फुट ऊंचा, एक आँख और चार हाथो वाला एक दैत्य, धातु की जंजीरों में बंधा था, जिसके शरीर से हजारों पतले-पतले पाइप जुड़े हुए थे। उस दैत्य की 2 सिंगे भी थी।

उस पाइप का दूसरा शिरा छोटे-छोटे काँच के ग्लोब से जुड़ा हुआ था और हर उस ग्लोब में एक इंसानी मृत शरीर दिखाई दे रहा था।

अब उस दैत्य को उन मानव शरीरो से क्या दिया जा रहा था, यह लुफासा की समझ में नहीं आया।

उस पूरे कमरे में असंख्य मशीन लगी हुई थी, जिन पर अजीब तरीके से कुछ संकेत दिखाई दे रहे थे और हज़ारों की संख्या में हरे कीड़े उन मशीनो पर काम कर रहे थे।

मकोटा वहां खड़ा उस दैत्य को देख रहा था।

तभी दूर से एक ‘भेड़िया मानव’ चलता हुआ आया। जिसका सिर भेड़िये का और शरीर इंसान का दिख रहा था।

लुफासा समझ गया कि इसी भेड़िया मानव की मूर्ति स्तंभ के रूप में मकोटा महल के ऊपर लगी थी।

मकोटा के पास आकर उस भेड़िया मानव ने झुककर अभिवादन किया।

“जैगन कब तक होश में आ जायेगा वुल्फा?" मकोटा ने वुल्फा को देखते हुए पूछा।

“कुछ कह नहीं सकता मालिक? मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूं।" वुल्फा ने कहा।

तभी वुल्फा की निगाह मकोटा के पास उड़ रही मक्खी पर गयी।

उसने अपने दोनों हाथों को ताली बजाने के अंदाज में मक्खी बने लुफासा पर मार दिया।

एक सेकंड में ही लुफासा मारा गया।

वुल्फा मक्खी को वहीं फेंक मकोटा से बात करने लगा। मक्खी का शरीर तभी धुंआ बनकर हवा में विलीन हो गया।

उधर पिरामिड की छत पर लुफासा इंसानी शरीर में प्रकट हो गया। उसने जोर से एक गहरी साँस ली।

“बेकार में ही एक रूप नष्ट हो गया। अब में कभी मक्खी नहीं बन पाऊंगा।"

लुफासा ने अफसोस प्रकट किया- “पर ये जैगन तो बेहोश है, तो मान्त्रिक ने हमसे झूठ क्यों बोला? वो जैगन को क्यों होश में लाना चाहते हैं? और...और मुझे तो पिरामिड पर भी अधिकार मान्त्रिक का ही लग रहा था। और ये वुल्फा कौन है?......कुछ तो ऐसा जरूर चल रहा है, मान्त्रिक के दिमाग में?....जो अत्यन्त खतरनाक है।.... अब मुझे क्या करना चाहिए?.....मेरे हिसाब से मुझे अभी मानव शरीर का प्रबंध करना चाहिये और सभी पर छिप कर नजर रखनी चाहिए। अब मैं उचित समय आने पर ही कुछ करूगा।"

तभी आसमान में एक जोर की गड़गड़ाहट हुई और इससे पहले कि लुफासा कुछ समझ पाता, एक हेलीकाप्टर जोर की आवाज करता हुआ पिरामिड से कुछ दूरी पर आकर गिरा।

लुफासा बाज का रूप धारण कर उस हेलीकाप्टर की ओर उड़ चला।

लुफासा को कुछ दूरी पर हेलीकाप्टर के अवशेष पड़े दिखायी दिये, जिनसे धुंआ निकल रहा था।

लुफासा ने जमीन पर उतरते ही एक बड़े से शेर का रूप धारण कर लिया और उस हेलीकाप्टर की ओर चल पड़ा।

हेलीकाप्टर पेडों के एक झुरमुट के बीच गिरा पड़ा था। लुफासा ने झांककर उस हेलीकाप्टर में देखा। हेलीकाप्टर में उसका पायलेट मरा हुआ पड़ा था, जो बेचारा इस दुर्घटना का शिकार हो गया था।

लुफासा ने अपने पंजे से पायलेट की सीट बेल्ट को हटाया और उसे अपने मुंह में पकड़कर बाहर निकल गया।

लुफासा, पायलेट के शरीर को मुंह में दबाए पिरामिड की ओर चल दिया।

थोड़ी ही देर में पिरामिड दिखाई देने लगे। कुछ ही देर में लुफासा पिरामिड की सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।

लुफासा ने पिरामिड के दरवाजे पर पहुंचकर, पायलेट की लाश वहीं दरवाजे पर रख दी। इसके बाद लुफासा ने एक जोर की दहाड़ मारी और फ़िर पलटकर सीढ़ियों से उतर, अपने महल की ओर चल दिया।

लाश का सच (आज से 6 दिन पहले....)

(3 जनवरी 2002, गुरुवार, 00:15, सुप्रीम)

लुफासा और सनूरा एक छोटी सी बोट से ‘सुप्रीम’ के साथ- साथ चल रहे थे।

बोट में एक हरा कीड़ा भी था।

“पहले मैं ऊपर जाता हूं और पूरे जहाज को देखकर आता हूं। उसके बाद सोचेंगे कि आगे क्या करना है?" लुफासा यह कहकर बाज बनकर सुप्रीम के एक डेक पर पहुंच गया।

देर रात होने की वजह से उस समय उस डेक पर कोई नहीं था। लुफासा ने फ़िर इंसानी आकृति धारण कर ली, जिससे अगर कोई उसे देख ले तो उसे अटपटा ना महसूस हो।

लुफासा दरवाजे के रास्ते से अंदर आ गया। सामने एक गैलरी जा रही थी। लुफासा उस गैलरी में आगे की ओर चल दिया।

3-4 गलियो को पार करने के बाद जैसे ही वह आगे बढ़ने चला, उसे सामने के मोड़ से किसी के आने की आवाज सुनाई दी।

लुफासा तुरंत बगल में मौजूद एक दरवाजे के अंदर चला गया। वह कमरा अंदर से बाकी जहाज की अपेक्षा थोड़ा ठंडा था।

तभी लुफासा के नाक से एक अजीब सी गंध टकरायी, जो अच्छी तो हरिगज ना थी।

लुफासा ने उस गंध की दिशा में देखा। उसे पॉलिथीन में बंद किसी लड़की की लाश दिखाई दी।

सामान्य कंडीशन में तो लुफासा उधर नहीं जाता, पर अभी वह इस जहाज पर लाश ही तो लेने आया था। लुफासा ने पहले कमरे पर एक नजर मारी और सामने दिख रही, खिड़की को खोल दिया।

ठंडी हवा का एक झोंका उसके चेहरे से टकराया।

बाहर दूर-दूर तक अंधेरा दिखाई दे रहा था। उसने तुरंत अपनी कमर पर बंधा एक लाल रंग का कपड़ा उस खिड़की पर पहचान के लिये बांध दिया।

“शायद यह वह कमरा है जहां पर लाशें रखी जाती हैं।" लुफासा बुदबुदाया- “किस्मत से मैं बिल्कुल सही जगह पर पहुंचा हूं। पर सनूरा तो बोट के साथ दूसरी दिशा में है"

फ़िर लुफासा ने वहां मौजूद एक कालीन में लॉरेन की लाश लपेटी और उसे कंधे पर उठाकर जिस दिशा से आया था, उसी दिशा में चल दिया। लुफासा दबे कदमों से चलने की कोशिश कर रहा था।

तभी गैलरी के दूसरे किनारे पर, 2 इंसान दिखाई दिये। लुफासा यह देख रुक गया।

तभी उसे एक कड़कदार आवाज सुनाई दी- “कौन है वहां? रुक जाओ....रुक जाओ, वरना गोली मार दूँगा।"

यह आवाज सुनते ही लुफासा तेजी से एक दिशा की ओर भागा।

उसको भागते देख लारा व सुयश तेजी से उस साये के पीछे भागे।

“मैं कहता हूं रुक जाओ।" लारा के दहाड़ते हुए शब्दो से पूरी गैलरी थर्रा सी गयी- “वरना मैं गोली चला दूँगा।"

लारा की दूसरी धमकी से भी लुफासा की गति में कोई अंतर नहीं आया। वह अभी भी निरंतर भागता जा रहा था।

लुफासा की रफ़्तार इतनी तेज थी कि पीछे से आ रहे लारा को गोली चलाने का भी समय नहीं मिल पा रहा था। तभी लुफासा को सामने सीढ़ियाँ दिखाई दी। वह तेजी से सीढ़ियो को पार कर सामने लगे दरवाजे से बाहर निकल गया।

दरवाजे के दूसरी ओर एक डेक था। वहां पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा सिगरेट पी रहा था, जो कि अल्बर्ट था।

लुफासा को भागते देख अल्बर्ट लुफासा की ओर लपका, जिसकी वजह से अल्बर्ट की सिगरेट वहीं गिर गयी।

पर इससे पहले कि अल्बर्ट लुफासा को पकड़ पाता, लुफासा ने डेक की रैलिंग पर चढ़कर लॉरेन की लाश के साथ ही पानी में छलांग लगा दी।

जारी रहेगा________✍️
 
#84.

‘छपाक’ की तेज आवाज के साथ लुफासा पानी में गिरा। इतनी ऊंचाई से कूदने के बाद भी लुफासा ने लॉरेन की लाश को नहीं छोड़ा था।

लुफासा ने पानी में एक तेज डुबकी लगायी और पानी के अंदर ही अंदर जहाज के दूसरी ओर निकल गया। जहां सनूरा अपनी बोट लिये उसका इंतजार कर रही थी। सनूरा ने लुफासा को अपनी बोट पर खींच लिया।

“ये लाश कहां से मिल गयी?" सनूरा ने लुफासा से पूछा।

“मेरी किस्मत से वहीं एक कमरे में रखी थी।"

लुफासा ने साँसो को नियन्त्रित करते हुए कहा- “पर मैंने उस कमरे की खिड़की पर, पहचान के लिये अपना लाल रंग का कपड़ा लगा दिया है। तुम्हे बोट को उस दिशा में लेना पड़ेगा।"

यह कहकर लुफासा ने सनूरा को एक दिशा की ओर इशारा किया। सनूरा ने बोट को उस दिशा में मोड़ लिया।

सनूरा अपनी बोट को सुप्रीम से चिपका कर चला रही थी, जिससे किसी की नजर बोट पर ना पड़े। कुछ ही देर में सनूरा बोट को लेकर दूसरी तरफ आ गयी।

लुफासा को ऊपर ऊंचाई पर लहराता हुआ अपना लाल कपड़ा दिखाई दे गया। उसने सनूरा को बोट उधर ले चलने का इशारा किया।

सनूरा ने खिड़की के नीचे बोट को ले लिया। उसने बोट की रफ़्तार ‘सुप्रीम’ की रफ़्तार के बराबर सेट कर दी। लुफासा ने उस हरे कीड़े को अपने पंजो में पकड़ा और बाज बन कर जहाज की खिड़की की ओर उड़ चला।

कुछ ही देर में लुफासा ऊपर पहुंच गया। लुफासा ने फ़िर इंसानी रूप धारण कर लिया। चूंकि लुफासा का शरीर समुद्र के पानी से अभी भी भीगा था। इसिलये खिड़की के नीचे उसके कपड़ो से कुछ पानी निकल कर बिखर गया।

स्टोर- रूम में पहुंचकर लुफासा ने हरे कीड़े को स्टोर रूम के दरवाजे के बाहर की ओर उछाल दिया और स्वयं आकर स्टोर रूम में छिपकर बैठ गया।

उसे पता था कि हरा कीड़ा अभी किसी ना किसी को अपना शिकार जरूर बनायेगा और मरने वाले की लाश इसी स्टोर- रूम में रखी जायेगी।

तभी स्टोर- रूम का दरवाजा धीरे से आवाज करता हुआ खुल गया और उसमें से एक साया अंदर आ गया।

उस साये को देख लुफासा एक बोक्स के पीछे छिप गया, पर लुफासा की नजरें अभी भी उस साये पर थी।

उस साये ने पहले उस जगह को देखा, जहां लॉरेन की लाश रखी हुई थी, पर वहां लाश को ना पाकर वह साया एकाएक घबरा गया और स्टोर- रूम का पिछला दरवाजा खोलकर उधर से भाग गया।

लुफासा को वहां बैठे-बैठे लगभग 45 मिनट बीत गये। अब लुफासा थोड़ा परेशान होने लगा था।

तभी दोबारा से स्टोर- रूम का दरवाजा खुला और 2 गार्ड, पैकेट में बंद एक लाश को लेकर आये।

“क्या आफत है यार।" एक गार्ड ने दूसरे गार्ड से कहा- “लाशे ढोने का काम हमारे जिम्मे है। छीSS.....ये

भी कोई काम है?"

“सही कह रहा है यार।" दूसरे गार्ड ने कहा।

उस मृत गार्ड की लाश को उन्होंने एक टेबल पर लिटा दिया। तभी उनकी नजर लॉरेन की लाश वाली जगह पर गयी।

“अरे लॉरेन की लाश कहां गयी?" एक गार्ड ने कहा- “वह तो यहीं रखी थी।"

यह देख दोनो ही गार्ड बहुत ज़्यादा घबरा गये और उस मृत गार्ड की लाश को वहीं छोड़कर कैप्टन को बताने के लिये वहां से भाग गये।

लुफासा ने यह देख उस मृत गार्ड की लाश को उठाया और उसे पानी में फेंक दिया। जिसे सनूरा ने उठाकर बोट पर रख लिया।

इसके बाद लुफासा खिड़की पर चढ़ गया और खिड़की के दूसरी ओर लटककर खिड़की को बंद भी कर दिया। फ़िर उसने वहीं से पानी में छलांग लगाई और जाकर बोट में बैठ गया।

लुफासा ने सनूरा को बोट वहां से हटाने को बोल दिया। सनूरा ने अपनी बोट की गति को बिल्कुल धीमा कर लिया।

‘सुप्रीम’ उसके बगल से होता हुआ आगे निकल गया।

कुछ ही देर में लुफासा और सनूरा अराका पर पहुंच गये। उन्होंने इन दोनों लाशो को भी पिरामिड के बाहर रख दिया।

इसके बाद थके कदमो से दोनों अपने महल की ओर बढ़ गये।

इच्छाधारी लुफासा

(आज से 5 दिन पहले ....4 जनवरी 2002, शुक्रवार, 15:00, अराका द्वीप)

अराका द्वीप के आसमान पर एक बाज काफ़ी ऊंचाई पर उड़ रहा था। उसकी तेज निगाहें अराका द्वीप के सामने मौजूद ‘सुप्रीम’ नामक पानी के जहाज पर थी।

जहाज के ऊपर से एक मोटरबोट को पानी में उतारा जा रहा था।

कुछ ही देर में मोटरबोट में 3 लोग सवार होकर अराका की ओर बढ़ने लगे।

यह देख बाज बने लुफासा ने आसमान से एक तेज डाइव मारी और तेजी से समुद्र की ओर आने लगा।

समुद्र के पास पहुंच कर लुफासा ने पानी में डुबकी मारी और एक छोटी मछली बन पानी में तैरने लगा।

धीरे-धीरे मोटरबोट लुफासा के पास आ रही थी। लुफासा ने पानी में एक गहरी डुबकी मारी औैर अब एक विशालकाय ऑक्टोपस का रुप ले लिया।

लुफासा ने पास आ रही बोट को नीचे से 2 हाथो से पकड़ लिया। बोट को एक झटका लगा और बोट रुक गई।

लुफासा ने बोट को ताकत लगाते देख अपने 2 और हाथो का प्रयोग कर दिया।

अब पानी में बहुत तेज हलचल सी होने लगी।

लुफासा ने बोट को इतनी ताकत से पकड़ रखा था कि बोट आगे जाना तो छोड़ो, वह घूम भी नहीं पा रही थी।

लुफासा बोट को ज़्यादा ताकत लगाते देख कर गुस्सा आ गया। अब वह पूरी ताकत से बोट को पकड़ द्वीप की ओर चल पड़ा।

लुफासा जब द्वीप के पास पहुंचा तो उसे पानी के अंदर हरे कीडो का एक बहुत बड़ा झुंड नजर आया।

यह देख लुफासा ने अपने शरीर को एक जगह पर रोक दिया, जिससे बोट को एक बहुत ही भयंकर झटका लगा।

अचानक लगे इस तेज झटके से दोनों गार्ड उछलकर समुद्र में जा गिरे।

मोटर बोट अब रुक गयी थी।

तभी पानी में गिरे दोनों गार्ड पर हरे कीडो ने हमला कर दिया और उन्हें पानी के अंदर ही अंदर घसीट कर उड़नतस्तरी की ओर बढ़े।

अब लुफासा ने एक विशालकाय हरे कीड़े का रुप लिया और बोट के बिल्कुल पास आकर लारा को पानी के अंदर से घूरकर देखा।

लारा वॉकी-टॉकी सेट पर सुयश से बात कर रहा था।

“कैप्टन मोटरबोट पुनः रुक गयी है.....। पर मेरे दोनों गार्ड झटका लगने की वजह से समुद्र में गिर गए हैं....... मैं भी बहुत मुश्किल से गिरते-गिरते बचा हूं।......सर वह दोनों गार्ड मुझे पानी में नजर नहीं आ रहे हैं.......पर .....यह.... क्या? .... ये पानी में.....हरा रंग.... नहीं... नहीं......यह....कैसे.....हो सकता है? ये दोनों आँखें...... खटाक.....।"

जैसे ही लारा की नजर हरा कीड़ा बने लुफासा की आँख पर गयी। लुफासा ने पानी के नीचे से लारा को बोट को एक जोरदार टक्कर मारी, जिसके कारण लारा की बोट पानी में डूब गयी।

लारा के पानी में गिरते ही हरे कीडो ने लारा को चीखने भर का भी मौका नहीं दिया और लारा को खिंचकर उड़नतस्तरी की ओर बढ़ गये।

लुफासा अब अपने महल में वापस आ गया, पर अब हर घटना के बाद वह विचलित होने लगा था। जैसे तैसे लुफासा ने अपनी रात बिताई।

अगले दिन लुफासा ने सुबह ही सुबह सनूरा को बुला लिया।

इस समय सनूरा लुफासा के सामने एक कुर्सी पर बैठी थी। लुफासा ने सबसे पहले सनूरा को पिरामिड के अंदर घटने वाली घटना के बारे में सबकुछ बता दिया।

पिरामिड की घटना सुन सनूरा हैरान रह गयी।

“इसका मतलब हमारा सोचना सही था।" सनूरा ने लुफासा को देखते हुए कहा- “मांत्रिक कुछ ना कुछ तो गड़बड़ अवश्य कर रहे हैं? मुझे लगता है कि अब हमें पहले एक बार देवी शलाका को भी जांच लेना चाहिए। उससे हमें और सत्यता का पता चल जायेगा।"

“तुम सही कह रही हो, अब हमें देवी शलाका बनी उस युवती का भी रहस्य पता लगाना होगा।" लुफासा ने कहा और उठकर खड़ा हो गया।

कुछ ही देर में वह दोनो उसी गुफा में पहुंच गये, जहां से 3 रास्ते जाते थे।

“हमें बांये वाले रास्ते पर चलना होगा, सीधा वाला रास्ता देवी शलाका के कमरे तक जाता है, जबकि ये बांया वाला रास्ता, उनके महल के बाहर की ओर जाता है।" लुफासा ने सनूरा से कहा और सनूरा को लेकर बांये वाले रास्ते की ओर मुड़ गया।

कुछ ही देर में वह आकृति के महल के सामने बने एक पेडों के झुरमुट के बीच थे।

“अब हमें अपना रूप परिवर्तन कर लेना चाहिए।"

लुफासा ने कहा-“ तुम सिर्फ बिल्ली का रूप धारण कर सकती हो, इसिलये मैं चूहा बन जाता हूं। पर ध्यान रहे, गलती से कहीं मुझे मार मत देना, नहीं तो मैं फ़िर जीवन में कभी चूहा नहीं बन पाऊंगा।"

“अरे मुझे पता है इस बारे में। मैं भला आपको क्यों मारूंगी।" सनूरा ने मुस्कुराकर कहा और फ़िर होठ ही होठ में कुछ बुदबुदाया। कुछ ही देर में सनूरा बिल्ली बन गयी।

लुफासा ने भी चूहे का रूप धारण कर लिया। अब लुफासा चूहा बनकर आकृति के कमरे की ओर भागा।

सनूरा भी उसके पीछे-पीछे थी।

कमरे में आकृति रोजर को कुछ समझा रही थी। लुफासा और सनूरा भागते हुए कमरे में प्रविष्ट हुए।

आकृति यह देखकर, रोजर को समझाना छोड़, चूहा और बिल्ली को देखने लगी।

बिल्ली चूहे के पीछे पड़ी थी, पर वह चूहे को पकड़ नहीं पा रही थी। चूहे ने भागते हुए एक राउंड रोजर का मारा और फ़िर बिल्ली से बचते हुए वापस दरवाजे से बाहर की ओर भाग गया।

बिल्ली भी चूहे के पीछे-पीछे बाहर निकल गयी।

आकृति के कमरे से निकलकर चूहा, बिल्ली दूर पेडों के झुरमुट की ओर भागे।

पेडों के बीच पहुंचकर लुफासा और सनूरा फ़िर से इंसानी रूप में आ गये।

“देवी शलाका के पास खड़ा, वह इंसान कौन था? और वह अदृश्य दीवार के रहते सीनोर पर आया कहां से?" लुफासा के शब्दो में आश्चर्य भरा था।

“और वह देवी शलाका के पास क्या कर रहा था?" सनूरा ने भी आश्चर्य व्यक्त किया।

“मुझे तो लगता है कि देवी शलाका, मान्त्रिक से भी कुछ छिपा रही हैं? क्यों कि मुझे नहीं लगता कि मान्त्रिक को उस इंसान के बारे में कुछ भी पता होगा?"

लुफासा ने कहा- “क्या हमें मान्त्रिक को उस इंसान के बारे में बता देना चाहिए?"

“नहीं...कभी नहीं।" सनूरा ने कहा- “अगर देवी शलाका और मान्त्रिक दोनो ही हमसे कुछ छिपा रहे हैं, तो हमें भी उनको कुछ नहीं बताना चाहिए और उन दोनों पर नजर रखते हुए ऐसे व्यवहार करना चाहिए, जैसे कि हमें कुछ पता ही ना हो। फ़िर भविष्य में जैसा उिचत लगेगा, वैसा ही करेंगे।"

“ठीक है। फ़िर मैं अभी जाकर जरा ‘सुप्रीम’ को देख लूं। क्यों कि मैंने कुछ हरे कीडो को सुप्रीम से लाश लाने भेजा था। तब तक तुम जिस तरह संभव हो, देवी शलाका और मान्त्रिक पर नजर रखो और कोई भी रहस्यमयी चीज देखते ही मुझे सूचित करो।" लुफासा ने कहा।

सनूरा ने सिर हिलाकर लुफासा की बातों का समर्थन किया।

लुफासा ने अब बाज का रूप धारण किया और सुप्रीम की ओर चल पड़ा।

जारी रहेगा_________✍️
 
#85.

द्वीप से कुछ आगे जाते ही लुफासा को हरे कीड़े, एक बूढ़ी स्त्री को लेकर उड़नतस्तरी की ओर जाते दिखाई दिये।

वह स्त्री मारिया थी। अल्बर्ट की पत्नी मारिया।

तभी एक गड़गड़ाहट की आवाज ने लुफासा का ध्यान आसमान की ओर कर दिया।

लुफासा को आसमान पर उड़ता हुआ एक हेलीकाप्टर दिखाई दिया।

लुफासा की नजर अब कीडो को छोड़ आसमान की ओर थी। तभी उसे वह हेलीकाप्टर द्वीप से दूर जाता हुआ दिखाई दिया।

लुफासा कुछ देर तक हेलीकाप्टर को देखता रहा। तभी लुफासा को द्वीप के किनारे से बहुत तेज तरंगे निकलती दिखाई दी, जो समुद्र में दूर तक चली गयी।

“मुझे अराका के बारे में लगभग सब कुछ पता है, पर मैं आज तक यह नहीं समझ पाया कि इस द्वीप को पानी पर चलाता कौन है? और द्वीप से जो तरंगे निकलती हैं, उसे कौन छोड़ता है?"

लुफासा मन ही मन बुदबुदाया- “हो सकता है, यह भी मान्त्रिक का कोई मायाजाल हो?"

लुफासा को अब वह हेलीकाप्टर हवा में लहराते हुए दिखाई दिया। लुफासा समझ गया कि अब वह हेलीकाप्टर क्रैश होने वाला है।

हेलीकाप्टर का चालक हेलीकाप्टर को नीचे उतारने की कोशिश कर रहा था। हेलीकाप्टर आसमान में किसी परकटे पक्षी की तरह डोल रहा था।

थोड़ी देर के बाद उस हेलीकाप्टर के चालक ने हेलीकाप्टर का संतुलन बनाकर उसे पानी पर उतार लिया। लुफासा अभी भी बाज के रूप में आसमान में था और उसकी तीखी निगाहें हेलीकाप्टर की ओर थी।

लुफासा के देखते ही देखते वह हेलीकाप्टर एक बोट में परिवर्त्तित हो गयी। अब वह बोट अराका द्वीप की ओर बढ़ने लगी।

यह देख लुफासा ने अपने दाँतो को भीचा और आसमान से पानी में एक डुबकी मारी।

डुबकी मारते ही लुफासा ने अपने आप को एक विशालकाय व्हेल मछली में परिवर्त्तित कर लिया।

अब वह उस बोट के बिल्कुल पीछे था।

लुफासा ने बिना कोई आवाज किये पानी में एक जबर्दस्त गोता लगाया, जिससे समुद्र का पानी बोट के पीछे लगभग 50 फुट तक ऊपर उठ गया और इतनी ऊंचाई से वह पूरा पानी एक लहर बनकर, बहुत तेजी से बोट पर आकर गिरा।

तेज आवाज के साथ व्योम की बोट पूरी तरह टूटकर बिखर गयी।

तभी लुफासा को कुछ हरे कीड़े व्योम की ओर बढ़ते दिखाई दिये।

लुफासा समझ गया कि अब हरे कीड़े व्योम को निपटा देंगे। इसिलये वह अब सुप्रीम की ओर बढ़ने लगा।

तभी उसे सुप्रीम की डेक पर कुछ लोग खड़े हुए दिखाई दिया।

अचानक से उन लोगो ने पानी में गोलियां चलानी शुरू कर दी। “तड़...तड़....तड़....तड़.....तड़...।"

गोलियों की आवाज उस शांत वातावरण में बहुत दूर तक गूंज रही थी।

लुफासा की नजर गोलियों की दिशा में गयी। उसने देखा कि शार्को का एक झुंड सुप्रीम की ओर बढ़ रहा था और सुप्रीम के डेक पर खड़े कुछ लोग उन शार्को पर गोलियां चला रहे थे।

लुफासा ने तुरंत व्हेल की जगह एक विशालकाय ऑक्टोपस का रूप लिया और पानी के नीचे ही नीचे ‘सुप्रीम’ की ओर बढ़ने लगा।

लुफासा के आसपास शार्को का झुंड बढ़ता जा रहा था। शायद कुछ शार्को को गोलियां भी लग गयी थी, क्यों कि लुफासा को पानी में बिखरा कुछ खून भी दिख रहा था।

अच्छा हुआ कि लुफासा ने इतने विशालकाय जीव का रूप लिया था, नहीं तो इन शार्को ने लुफासा को मिनटो में चट् कर जाना था।

तभी लुफासा को पानी में गिरा एक इंसान दिखाई दिया, जो कि लोथार था।

सभी शार्को अब घेरा बनाकर, तेजी से लोथार की ओर बढ़ने लगी।

यह देख लुफासा बीच में आ गया।

चूंकि लुफासा ऑक्टोपस बना पानी की गहराई में था। इसिलये सुप्रीम के लोगो को वह दिखाई नहीं दे रहा था।

पर पानी में मौजूद शार्को को वह विशालकाय ऑक्टोपस दिखाई दे गया था। इसिलये वह लोथार से 15 फुट की दूरी पर ही रुक गयी।

यह देखकर सुप्रीम पर खड़े लोगो ने रस्सी के द्वारा लोथार को खींचना शुरु कर दिया।

लोथार अब तेजी से ‘सुप्रीम’ की ओर जाने लगा।

लुफासा ने यह देख ऑक्टोपस के 2 हाथो से लोथार के दोनों पैर पकड़ लिए जिसकी वजह से रस्सी एक जोरदार झटके से खिंचनी बंद हो गई।

अचानक लोथार को पानी के नीचे किसी विशाल जीव के होने का अहसास हुआ। लोथार के चेहरे के भाव दहशत में परिवर्त्तित हो गए।

‘सुप्रीम’ पर खड़े लोगो को भी यह एहसास हो गया था कि पानी के नीचे कुछ तो है, शार्के अपने आप नहीं रुकी थी। लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, लुफासा ने पूरी ताकत से लोथार को पानी के अंदर खींचा।

‘गुलुप’ की आवाज के साथ लोथार पानी में समा गया।

चूंकि लोथार ने रस्सी छूट जाने के डर से, अपने हाथ में कसकर फंसा रखी थी, इसिलए वह रस्सी भी तेजी से पानी में खिंचती चली गई।

अब ऑक्टोपस बना लुफासा लोथार को पकड़ अराका द्वीप की ओर चल दिया।

चैपटर-9:

ब्रूनो के पंख: (9 जनवरी 2002, बुधवार, 09:30, मायावन, अराका द्वीप)

रात में ब्रेंडन के डरावने सपने ने किसी को भी ठीक से सोने नहीं दिया। इसिलये सुबह सभी के उठने में थोड़ा देर हो गया था।

सभी ने ताजा होकर थोड़ा-थोड़ा खाना खा लिया था।

शैफाली चलती हुई ब्रेंडन के पास पहुंचकर बोली- “ब्रेंडन अंकल, अब आप कैसा महसूस कर रहे हैं?"

“अब बेहतर महसूस कर रहा हूं।" ब्रेंडन ने मुस्कुराते हुए कहा- “कल रात सच में मैं काफ़ी डर गया था।

मैं अपनी पूरी जिंदगी में इतना कभी नहीं डरा।"

“कोई बात नहीं अंकल...वैसे भी यह जंगल इतना विचित्र है कि यहां पर कोई भी आदमी डर सकता है।"

शैफाली ने कहा- “वैसे अंकल,जब आप रात में उठ गये थे, तो आपने किसी को जगाया क्यों नहीं?"

“मैं किसी को परेशान नहीं करना चाहता था।" ब्रेंडन ने शैफाली का शुक्रिया अदा करते हुए कहा- “पर मुझसे इतनी बात करने के लिये धन्यवाद। तुमसे बात करके मुझे थोड़ा अच्छा महसूस हो रहा है।"

“क्या सब लोग तैयार हैं आगे चलने के लिये?" सुयश ने सभी को देखते हुए पूछा।

“यस कैप्टन।" सभी के मुंह से समवेत स्वर निकला।

“कैप्टन ।" तौफीक ने जमीन से खड़े होते हुए कहा- “मैं आप लोगो को एक सुझाव देना चाहता हूं।"

यह सुनकर सभी तौफीक की ओर देखने लगे।

“कैप्टन, मैंने यह ध्यान दिया है कि ब्रूनो नयनतारा पेड़ के पास शैफाली को बचाने के बजाय वहां आराम से बैठ गया था। शायद उसे पता था कि वह पेड़ शैफाली को कोई नुकसान नहीं पहुंचायेगा। उस समय ब्रूनो पेड़ के काफ़ी पास भी था, पर पेड़ ने उसे कुछ नहीं कहा।

ठीक वैसे ही जब आपको उस आदमखोर पेड़ ने अपनी गिरफ़्त में ले लिया था, तब भी ब्रूनो उस पेड़ को काट रहा था, पर उस पेड़ ने भी ब्रूनो को कुछ नहीं कहा। तो मेरा ये कहने का मतलब है कि ब्रूनो यहां के खतरे को भली-भाँति पहचान रहा है और यहां के पेड़ भी ब्रूनो को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं। तो क्यों ना हम जंगल में चलते समय ब्रूनो को सबसे आगे रक्खे। ब्रूनो जहां भी खतरा देखेगा, हमें उस दिशा में ले ही नहीं जायेगा।"

“मैं मिस्टर तौफीक की बातों से पूर्ण रूप से सहमत हूं।" अल्बर्ट ने तौफीक की बातों का समर्थन करते हुए कहा।

बाकी सभी को भी तौफीक की बातें सही लगी। इसिलये अब चलते समय ब्रूनो को आगे कर लिया गया। अब सभी फ़िर से जंगल की ओर चल दिये।

ब्रूनो धीरे-धीरे सूंघकर आगे बढ़ रहा था। कभी-कभी वह कुछ सूंघकर अपना रास्ता भी बदल देता।

इस तरह सभी लोग ब्रूनो के पीछे सतर्कता से चल रहे थे।

युगाका पेडों के पीछे छिपता हुआ, बेआवाज उनका पीछा कर रहा था।

जब भी ब्रूनो खतरा सूंघकर रास्ता बदलता युगाका के चेहरे पर गुस्से के भाव आ जाते। शायद वह नहीं चाहता था कि ब्रूनो सबको बचाता चले।

धीरे-धीरे छोटे पेड़ पीछे छूट गये। अब रास्ते में ऊंचे देवदार सरीखे वृक्ष दिखाई देने लगे थे।

ब्रूनो ने एक नजर उन पेडों पर मारी और उन पेडों के बीच बने पगडंडी वाले रास्ते पर चल दिया।

मौसम शांत था। आज ज़्यादा हवा भी नहीं चल रही थी। फिर भी मौसम में गरमी प्रतीत नहीं हो रही थी।

इन सभी का पीछा कर रहे युगाका की नजर, इस समय उन देवदार सरीखे वृक्ष की ओर थी।

अचानक युगाका के होंठ गोल हुए और उसमें से एक अजीब सी सरसराहट निकली। जो वातावरण में गूंज गयी।

चूंकि वह सरसराहट पेड़ की ध्वनि जैसी प्रतीत हो रही थी, इसिलये किसी का भी ध्यान उधर नहीं गया।

तभी देवदार के वृक्ष भी ठीक उसी तरह सरसराने लगे जैसी ध्वनि युगाका के मुंह से निकली थी।

अब वह वृक्ष हिलने भी लगे थे।

उन देवदार सरीखे वृक्ष पर बेर के समान छोटे फल लगे थे।

“हवा तो चल भी नहीं रही है, फ़िर यह वृक्ष अचानक कैसे हिलने लगे?" अल्बर्ट ने देवदार के वृक्ष की ओर देखते हुए कहा।

“कहीं कोई नया खतरा तो नहीं?" सुयश ने सबको सावधान करते हुए कहा।

तभी ऐमू विचलित होकर जोर-जोर से अपने पंख फड़फड़ाने लगा।

अब ब्रूनो के कान भी खड़े हो गये। वह बार-बार अपने कान उठाकर कुछ सुनने की कोशिश करने लगा।

तभी एक देवदार के वृक्ष से एक बेर रूपी फल टूटा और ब्रूनो के सिर पर आकर गिर गया।

फल के सिर पर लगते ही ब्रूनो ‘कूं-कूं’ करता हुआ वहीँ जमीन पर गिर पड़ा। यह देख शैफाली भागकर ब्रूनो के पास पहुंच गयी।

ब्रूनो का कराहना अब बढ़ता जा रहा था। किसी की समझ में नहीं आया कि क्या हुआ? सभी आश्चर्य से इधर-उधर देख रहे थे।

जारी रहेगा________✍️
 
#86.

“मैंने इनमें से किसी पेड़ से एक बेर के समान फल को ब्रूनो के सिर के ऊपर गिरते देखा था।" क्रिस्टी

ने सभी को बताया।

तभी सुयश की नजर कुछ दूर पड़े उस बेर जैसे फल की ओर गयी। सुयश ने उसे उठाने के लिये अपना हाथ आगे बढ़ाया, पर अल्बर्ट ने उसे सिर हिलाकर उठाने से रोक दिया।

ब्रूनो का तड़पना अभी भी जारी था। ब्रूनो की यह हालत देख कर शैफाली की आँखों से अब झर-झर आँसू बह रहे थे।

तभी अचानक ब्रूनो के पीठ की खाल ‘चट्-चट्’ की आवाज करके फटना शुरू हो गयी।

यह देख सुयश ने ब्रूनो के पास बैठी शैफाली को तेजी से पीछे खींच लिया।

अब वहां बैठे सभी लोग डरकर ब्रूनो से दूर हो गये।

तभी ब्रूनो की फटी हुई खाल से 2 विशालकाय पंख निकलने लगे।

अब शैफाली भी रोना छोड़कर ध्यान से इस पूरी घटना को देखने लगी थी।

कुछ ही देर में ब्रूनो के पंख पूर्ण विकसित हो गये। अब ब्रूनो ने कराहना बंद कर दिया।

ब्रूनो उठकर अब शैफाली को घूरने लगा।

उसे इस प्रकार हिंसक भाव से घूरते देख ब्रेंडन ने शैफाली को अपने पीछे कर, अपनी जेब से चाकू निकाल लिया।

ऐमू भी ब्रूनो को इस प्रकार बदलते देख घबराकर सुयश के कंधे पर आ बैठा।

सभी की नजर ब्रूनो पर थी। किसी भी पल कुछ भी हो सकता था।

तभी ब्रूनो जोर से गुर्राया और अपने पंख फड़फड़ाकर आसमान में उड़कर सबकी नजर से ओझल हो गया।

सभी के चेहरे पर घोर आश्चर्य के भाव आ गये, सिवाय युगाका को छोड़कर।

युगाका की आँखो में अब एक रहस्यमई मुस्कुराहट थी।

ब्रूनो के गायब हो जाने का सबसे बड़ा सदमा शैफाली को लगा। वह यह झटका नहीं झेल पायी और जोर-जोर से रोने लगी।

सुयश और अल्बर्ट शैफाली को चुप कराने लगे।

तभी ऐमू सुयश के कंधे से उड़ा और शैफाली के पास जाकर जोर-जोर से हंसने लगा-

“हाऽऽऽ हाऽऽऽऽ हाऽऽऽ! सभी ऐमू को उल्लू बनाते थे, पर अब कुत्ता उल्लू बन गया।.... कुत्ता उल्लू बन गया....उल्लू बनकर उड़ गया। ऐमू बच गया....ऐमू का दोस्त बच गया।"

यह सुनते ही शैफाली को बहुत तेज़ गुस्सा आया।

शैफाली ने ऐमू को घूरकर देखा और उसके ऊपर झपट पड़ी- “मैं इस गंदे तोते को जान से मार डालूंगी। इसके सारे पंख नोच लूंगी।"

ऐमू यह देखकर सुयश की ओर भागा- “ऐमू के दोस्त...ऐमू को बचाओ...यह गंदे कुत्ते वाली गंदी लड़की ऐमू को मार डालेगी।"

सुयश ने तुरंत आगे बढ़कर शैफाली को रोक लिया।

उसने झुककर शैफाली के आँसू पोंछे और उसकी आँखो में आँख डालकर शैफाली को समझाना शुरु कर दिया-

“देखो बेटा, शांत हो जाओ। यह जंगल है ही इतनी विचित्रताओ से भरा कि हम यहां चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। देखो उस दिन ड्रेजलर भी मारा गया, पर हम कुछ नहीं कर पाये? आज ब्रूनो के साथ जो भी हुआ, वह भी हमारी कल्पनाओं से परे था। शायद एक दिन हम सब इस जंगल में मारे जायें। इसिलये जो चला गया, उस पर अफसोस करने से कुछ नहीं होगा। और इस ऐमू की बात का बुरा मत मानो, क्यों कि है तो यह भी ब्रूनो की तरह का जीव ही। इसिलये तुम इसे माफ..........।"

तभी सुयश शैफाली को समझाते हुए अचानक से चुप हो गया और शैफाली की नीली-नीली आँखों में देखने लगा।

उसे इस तरह से देखते पाकर शैफाली भी आश्चर्य में पड़ गयी।

“क्या हुआ कैप्टन? आप अचानक बोलते-बोलते चुप क्यों हो गये?" तौफीक ने सुयश से पूछा।

“जरा मेरी आँखों में देखो तौफीक। तुम्हें क्या नजर आ रहा है?" सुयश ने तौफीक से सवाल के बदले सवाल ही कर लिया।

सुयश के अचानक इस तरह विषय बदलने पर सभी को आश्चर्य हुआ और वह सब सुयश की आँखों में देखने लगे।

“आप अपनी आँखों में क्या दिखाना चाहते हैं कैप्टन? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा?" तौफीक ने उलझे-उलझे शब्दो में कहा।

“तुम्हें इस समय मेरी आँखों में क्या दिखाई दे रहा है? मैं केवल यही पूछ रहा हूँ तुमसे।" सुयश ने कौतुहल बनाएं हुए कहा।

“क्यों की मैं आपके सामने खड़ा हूँ इसिलये मुझे आपकी आँखों में मैं स्वयं दिखाई दे रहा हूँ।" तौफीक ने सपाट स्वर में कहा।

“अब जरा शैफाली की आँखों में देखो। उसकी आँखों में आपको क्या दिखाई दे रहा है?" सुयश ने अपने शब्दों को रहस्य की चाशनी में लपेट कर कहा।

तौफीक ने शैफाली की आँखों में झांका और हैरानी से भर गया- “यह क्या? शैफाली की आँखों में तो ऐमू की तस्वीर नजर आ रही है।"

तौफीक के शब्द सुन सभी के साथ-साथ शैफाली भी आश्चर्य से भर उठी। अब सभी बारी-बारी शैफाली की आँखों में झांकने लगे।

यह देख शैफाली ने अपनी आँखों को जोर से रगड़ा और एक बार बंद करके फ़िर से खोला।

अब शैफाली की आँखें सामान्य हो गयी।

“प्रोफेसर, आपको क्या लगता है कि क्या हुआ था शैफाली की आँखों को?"

असलम ने अल्बर्ट से पूछा- “क्यों कि ऐसी विचित्र कला के बारे में तो हमने सुना भी नही?"

“बिल्कुल विस्वास के साथ तो मैं भी कुछ नहीं कह सकता, पर मैं आपको आँखों की थ्योरी के बारे में अवस्य बता सकता हूँ।" अल्बर्ट ने शैफाली की ओर देखते हुए कहा-

“दरअसल हम जब कोई वस्तु देखते हैं तो हमारे आँखों की रेटिना से तरंगे निकलकर उस वस्तु पर पड़ती है और बाद में यही तरंगे लौटकर हमारी आँखों में वापस आ जाती हैं। वापस आयी तरंगों को आँखें, दिमाग तक भेज देता है और दिमाग उसे डीकोड कर जान जाता है कि हमने क्या चीज देखी।

कैमरे की फोटोग्राफी भी कुछ ऐसे ही सिद्धांत पर कार्य करती है। चूंकि शैफाली की आँखें भी चमत्कारी तरीके से आयी थी, शायद तभी से इसकी आँखों में यह गुण आ गया हो। इसिलये मुझे लगता है कि जब शैफाली ने घूरकर ऐमू को देखा, उसी समय शैफाली की आँखों में ऐमू की तस्वीर छप गयी होगी।"

अल्बर्ट के शब्द कुछ खास किसी की समझ में नहीं आये, पर उनकी बात पर किसी ने कोई सवाल नहीं किया।

“ऐसी ही कुछ शक्तियां सांप में भी पायी जाती हैं।" जॉनी ने शैफाली को देखते हुए कहा- “मैंने ऐसा कई किताबो में पढ़ा है।"

“आप किताबें कब से पढ़ने लगे?" जेनिथ ने मुंह बनाते हुए कहा।

“मैं पहले किताबें पढ़ता था।" जॉनी ने अजीब से अंदाज में जेनिथ को जवाब दिया।

“बैंक लूटने के पहले यह किताबें पढ़ते रहे होंगे।" क्रिस्टी का भी जॉनी के प्रति गुस्सा बाहर आया।

“बहस करने का कोई फायदा नहीं है।" सुयश ने सबको शांत कराने के अंदाज में कहा- “यह पेड़ भी रहस्यमयी हैं, इसिलये पहले हमें यहां से हट जाना चाहिए।"

सभी फ़िर से आगे बढ़ने लगे।

हंस का हमला: (9 जनवरी 2002, बुधवार, 11:00, जार्जटाउन वॉटर फ्रंट-पार्क, वांशिगटन डी.सी).

आज वेगा का जन्मदिन था। सुबह से ही वेगा बहुत खुश था।

कल वेगा को युगाका की तरफ से

जोडियाक वॉच उपहार में जो मिली थी।

वेगा ने लाल रंग की टी शर्ट पर काले रंग की लेदर की जैकेट पहन रखी थी।

कपड़े पहनने के बाद वेगा ने अपने आप को शीशे में निहारा और कार की चाबी ले गेट की ओर बढ़ा। तभी उसे जोडियाक-वॉच का ख्याल आया।

वह वापस पलटकर अंदर आया और जोडियाक-वॉच को बॉक्स से निकालकर अपने दाहिने हाथ पर पहन लिया।

कुछ ही देर में वह कार पर सवार हो वीनस से मिलने जा रहा था।

आज मौसम बहुत सुहाना था। वेगा ने कार में फुल गति में संगीत चला रखा था।

वीनस ने ‘जार्जटाउन वॉटर फ्रंट-पार्क’ के गेट पर ही वेगा से मिलने को कहा था।

कुछ ही देर में वेगा ने कार को पार्क की पार्किंग में लगा दिया और कार को लॉक कर उसकी चाबी को उंगलियों में नचाता, सीटी बजाता पार्क के मुख्य दरवाजे की ओर चल दिया।

कुछ दूरी से ही वेगा ने वीनस को गेट पर खड़े हुए देख लिया था।

वीनस ने भी गुलाबी रंग की बहुत सुंदर सी ड्रेस पहन रखी थी।

“क्या बाऽऽऽत है बर्थडे ब्बोय!" वीनस ने वेगा की तारीफ करते हुए कहा- “आज तो बिल्कुल कहर ही ढा रहे हो।"

वेगा वीनस की बात को सुनकर धीरे से मुस्कुरा दिया और वीनस का हाथ पकड़ अंदर की ओर चल दिया।

“तो कहां से शुरू किया जाये?" वेगा ने वीनस की ओर देखते हुए पूछा।

“पहले ‘पोटोमैक नदी’ की ओर चलते हैं। आज मौसम बहुत अच्छा है। ‘कायक’ चलाने में मजा आ जायेगा।" वीनस ने कहा।

(‘कायक’ एक प्रकार की बहुत पतली वॉटर क्राफ्ट बोट होती है, जिसे चप्पू से चलाया जाता है। इस चप्पू को पैडल कहते हैं।)

“ठीक है।"

वेगा ने वीनस की बात पर अपनी सहमती जताई। दोनो पोटोमैक नदी के पास पहुंच गये।

वहां से दोनों एक-एक ‘कायक’ लेकर पानी में उतर गये। धीरे-धीरे दोनों की ‘कायक’ नदी के बीच में पहुंच गयी।

पोटोमैक नदी का वह हिस्सा इस मौसम में ‘पंछी विहार’ के लिये जाना जाता था।

इस मौसम में बहुत से ‘टुंड्रा हंस’ सुदूर स्थलो से यहां विहार करने आते थे।

आज भी बहुत से हंस नदी के चारो ओर ‘कलरव’ कर रहे थे। वेगा और वीनस यह नजारा देखकर बहुत खुश हो गये।

“कितना सुंदर नजारा है।" वीनस ने कहा- “हँसो के जोड़े, पंखो को ओढ़े, नीले पानी में कितने खूबसूरत लग रहे हैं।"

“अरे वाह! तुम तो कविता करने लगी।" वेगा ने मुस्कुराते हुए कहा- “वैसे ये ‘टुंड्रा हंस’ हैं, ये बहुत ही शांत और सुंदर पक्षी होते हैं। ये पानी में सिर डालकर अपना भोजन ढूंढते हैं।"

“अच्छा! तुम्हें तो बहुत पता है इन पक्षीयों के बारे में।" वीनस ने कहा।

“सब किताबो का ज्ञान है। तुमने तो देखा ही है लाइब्रेरी में।" वेगा ने वीनस को याद दिलाते हुए कहा।

तभी एक अकेला हंस का घूमता हुआ वेगा की ‘कायक’ के पास आ गया।

वेगा श्वेत से हंस की खूबसूरती को निहारने लगा।

तभी अचानक उस हंस की आँखों के भाव परिवर्तित हो गये और उसने अपनी चोंच से वेगा पर हमला कर दिया।

जारी रहेगा______✍️
 
#87.

वेगा इस अंजान पल के लिये तैयार नहीं था, वह हड़बड़ाकर पीछे झुका।

जिसकी वजह से वेगा का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया और वेगा पोटोमैक नदी के पानी में गिर गया।

यह देख वीनस चीख उठी।

वेगा पानी के अंदर पूरा डूब गया।

चूंकि वेगा एक अटलांटियन था ।इसिलये वह पानी के अंदर भी साँस

लेना जानता था, पर यह बात वह वीनस से शेयर नहीं करना चाहता था। इसिलये उसने अपना सिर पानी के बाहर निकाला।

वेगा अपनी कायक से थोड़ा सा आगे आ गया था। वीनस भी अब उससे कुछ दूरी पर थी।

वेगा पर हमला करने वाला उस हंस ने जैसे ही वेगा को पानी से बाहर सिर निकालते देखा, उसने फ़िर से अपनी चोंच से वेगा पर हमला किया।

यह देख वेगा ने पानी में एक डुबकी मारी और पानी के अंदर ही अंदर तैरकर कुछ आगे फ़िर पानी से अपना सिर निकाला।

हंस पानी पर बैठकर अपनी नज़रें इधर-उधर घुमा रहा था। उसने जैसे ही वेगा को देखा, वह अपने पंख फड़फड़ाता हुआ वेगा की दिशा में आ गया।

वेगा जानता था कि ‘टुंड्रा हंस’ के पंख में बहुत ताकत होती है, अगर उस हंस का पंख भी वेगा से टकरा जाता तो वेगा की हद्दियाँ टूट जानी थी।

वेगा ने 2 से 3 बार अलग-अलग जगह बदल कर पानी से निकलने की कोशिश की, पर हर बार वह हंस वेगा को देख उसकी ओर दौड़ पड़ता।

वेगा को समझ नहीं आ रहा था कि हंस को क्या हो गया? और वह एकदम से ऐसे क्यों व्यवहार करने लगा?

नदी में बोटिंग कर रहे बहुत से लोगो का ध्यान, अब उन्ही की ओर था।

विचित्र बात यह थी कि वह हंस वेगा के अलावा और किसी पर नहीं झपट रहा था।

यह देख वेगा ने अब थोड़ी देर पानी के नीचे रहना ही उचित समझा।

तभी हंस ने अपना सिर पानी के नीचे डाला और इससे पहले कि वेगा कुछ समझ पाता, वेगा के कंधे को अपनी चोंच से जख्मी कर दिया।

वेगा के कंधे से खून की एक पतली लकीर निकल कर नदी के पानी में मिलने लगी।

तभी वेगा की जोडियाक वॉच से एक नन्हा सा कण निकलकर वहां के पानी में मिल गया और देखते ही देखते वह कण एक नीले रंग के केकड़े में बदल गया।

नीला केकड़ा कैंसर राशि का प्रतीक था।

चूंकि वेगा का ध्यान उस हंस की ओर था, इसिलये वेगा इस घटना को देख नहीं पाया। वह अभी भी आश्चर्य से उस हंस को देख रहा था, जो कि पानी की सतह पर बैठकर वेगा को ही घूर रहा था।

तभी उस हंस ने पानी में अपनी चोंच दोबारा डाली, वेगा तो पानी के अंदर एक डाइव मारकर बच गया, पर वह हंस इस बार नहीं बच सका।

नीले केकड़े ने हंस की चोंच को तेजी से पकड़ लिया।

हंस दर्द से कराह उठा, उसने अपने पंजो से केकड़े को हटाने की बहुत कोशिश की, पर उस नीले केकड़े ने हंस की चोंच को नहीं छोड़ा।

यह देख हंस ने अपने पंख फड़फड़ाये और केकड़े सहित आसमान में उड़ गया।

वेगा ने यह देखकर राहत की साँस ली और अपनी कायक के पास पानी से बाहर निकल गया।

वेगा को सही देख वीनस के चेहरे पर खुशी के भाव उभरे।

“लगता है तुमने कभी किसी हंसनी को छेड़ दिया था, जो यह हंस पागल होकर तुमसे बदला लेने आया था?" वीनस ने हंसते हुए वेगा को छेड़ा।

“मैंने तुम्हे कब छेड़ा?" वेगा ने वीनस को आँख मारते हुए कहा।

“मुझे छेड़ने की सोचना भी नहीं।" वीनस ने वेगा को प्यार भरी चेतावनी दी।

तभी छपाक की आवाज के साथ नीला केकड़ा आसमान से पानी में गिरा।

“लो आ गया तुम्हारा भाई, तुम्हे बचाकर अपने घर में।" वीनस ने पानी में केकड़े को गिरते देख कहा-

“मुफ़्त में आसमान की सैर भी कर आया।"

वेगा का आधा शरीर अभी भी पानी के अंदर था। तभी कुछ दूरी पर वेगा को पानी में हलचल होती दिखाई दी।

एक सेकंड से भी कम समय में वेगा ने पानी से निकली शार्क की पूंछ देख ली। उसने जोर से चीखकर वीनस को खतरे से आगाह किया-

“वीनस ... भागो यहां से ... शार्क आ रही है यहां पर।"

तभी बाकी बोटिग कर रहे लोग को भी उस शार्क की पूंछ दिखाई दे गयी।

शार्क को देख सब तरफ अफरा तफरी मच गयी।

वेगा पानी से छलांग लगा कर तुरंत अपनी कायक में बैठा और कायक को तेजी से किनारे की ओर लेकर जाने लगा।

वीनस ने भी अपनी कायक को किनारे की तरफ चलाना शुरु कर दिया।

वेगा के कंधे से अभी भी खून की बूंदे पानी में गिर रही थी।

तभी शार्क ने अपना शरीर पानी के बाहर निकाला, वह एक ‘बुल शार्क’ थी।

शायद वह एक ‘फ़िमेल बुल शार्क’ थी, क्योंकी उसकी लंबाई 11 फुट के पास दिख रही थी।

उस शार्क ने दूर से वेगा को देखा और उसकी ओर झपटी।

“शायद यह ‘बुल शार्क’ समुद्र के रास्ते नदी में आयी है, किनारा तो अभी काफ़ी दूर है। कैसे बचूं मैं इस शार्क से?" वेगा बड़बड़ाते हुये तेजी से अपना दिमाग चला रहा था।

शार्क अब वेगा के बिल्कुल नजदीक आ गयी थी।

तभी पानी में गिरा केकड़ा दूसरी राशि ‘मीन’ में परिवर्त्तित होकर एक ‘टाइगर शार्क’ में बदल गया।

उधर बुल शार्क ने वेगा के कायक को एक तेज टक्कर मारी। वेगा की कायक पूरी की पूरी हवा में उछल गयी। वेगा ने कायक के उछलते ही पानी में छलांग लगा दी और एक शक्तिशाली डाइव पानी के अंदर मारी।

पोटोमैक नदी के अंदर पानी का बहाव ज़्यादा तेज था। पानी को काटते हुए वेगा का शरीर नदी की तली की ओर जाने लगा।

बुल शार्क भी वेगा के पीछे-पीछे लपकी।

पानी की तली में जाकर वेगा ने अपने चारो ओर नजरें दौड़ाई, पर पानी में पत्थरो के सिवाय उसे ऐसा कुछ नजर नहीं आया जिससे वह इस बुल शार्क से बच पाता।

अब वेगा को मुंह फाड़े वह बुल शार्क अपनी ओर आती हुई दिखाई दी।

लेकिन इससे पहले कि वेगा अपने बचाव में कुछ और सोच पाता, वेगा और बुल शार्क के बीच टाइगर शार्क आ गयी।

टाइगर शार्क साइज में बुल शार्क से भी ज़्यादा बड़ी थी। टाइगर शार्क को देखकर बुल शार्क घबरा गयी, पर इससे पहले कि वह भाग पाती, टाइगर शार्क ने बुल शार्क पर आक्रमण कर दिया।

वेगा ने टाइगर शार्क को देख भगवान को धन्यवाद दिया और तुरंत पानी से अपना सिर निकालकर किनारे की ओर तैरने लगा।

उसे डर था कि कहीं बुल शार्क को मारकर टाइगर शार्क उसके पीछे ना पड़ जाये।

वीनस ने वेगा को तैर कर किनारे की तरफ आते देख लिया था, वह अब चिल्ला कर वेगा को जल्दी आने को कह रही थी।

नदी के पानी के अंदर घमासान युद्ध हो रहा था जिसकी वजह से पानी काफ़ी उछल रहा था।

थोड़ी ही देर में वेगा किनारे पर पहुंच गया। वेगा को सलामत देख वीनस उसके गले से लग गयी।

किनारे पर खड़े सभी लोग ने ताली बजाकर वेगा का स्वागत किया और करते भी क्यों ना आख़िर उसने मौत को जो मात दी थी, क्योंकि किसी ने भी टाइगर शार्क को नहीं देखा था।

उधर टाइगर शार्क ने बुल शार्क को मार दिया और फ़िर से एक छोटे कण में परिवर्त्तित होकर पानी से बाहर आ गयी।

वह एक कण इतना नन्हा था कि वैसे भी किसी को नजर नहीं आना था।

वह कण वापस वेगा की जोडियाक वॉच में समा गया था।

उधर किनारे पर खड़े एक आदमी ने वेगा को एक तौलिया पकड़ाकर चेंजिंग रूम की ओर जाने का इशारा किया।

वेगा दूसरे कपड़े तो लाया नहीं था, पर चेंजिंग रूम में जाकर उसने ड्रायर में अपनी जींस, टी शर्ट और अंडर गारमेंट को सुखा कर फिर से पहन लिया।

भीगी हुई जैकेट को उसने ऐसे ही एक पैकेट में रख लिया। वेगा अब बाहर निकलकर वीनस के पास आ गया।

तभी एक इंसान फर्स्टएड किट लेकर वहां आ गया। उसने वेगा के कंधे की ड्रेसिंग कर दी।

“बाल-बाल बचे आज तुम।" वीनस ने कहा- “एक साथ 2-2 खतरे में थे तुम।"

“पानी बहुत ठंडा था। चलो चलकर कॉफ़ी पीते हैं।" वेगा ने ज़्यादा बात ना करते हुए विषय को बदल दिया।

वीनस ने एक बार अजीब सी निगाहों से वेगा को देखा और फिर वेगा के साथ कॉफ़ी शॉप की ओर चल दी।

कॉफ़ी शॉप के अंदर ज़्यादा भीड़ नहीं थी, फिर भी दोनों कॉफ़ी का ऑर्डर देकर बाहर रखी टेबल के पास बैठ गये।

थोड़ी ही देर में वेटर उनकी बताई कॉफ़ी उन्हें सर्व करके चला गया।

“तुम्हे क्या लगता है वेगा? अचानक से यह हंस और बुल शार्क ने तुम पर हमला क्यों कर दिया?" वीनस ने कॉफ़ी का घूंट भरते हुए वेगा से पूछा।

“टुंड्रा हंस वैसे तो काफ़ी शांत होता है, पर वह अपने साथी को खतरे में देखकर बहुत उग्र हो जाता है।"

वेगा ने वीनस की आँखों में देखते हुए कहा- “मैंने देखा वो हंस अकेला था। हो सकता है कि मेरे जैसे दिखने वाले किसी इंसान की वजह से उसका साथी मर गया हो और मुझ पर वो हंस, वही इंसान समझकर हमला कर दिया हो।

अब रही बात बुल शार्क की, तो यह नदी आगे जाकर समुद्र से मिलती है। जिसकी वजह से अक्सर इस नदी में समुद्र से शार्क आ ही जाती है। मैंने कई बार समाचार में देखा था कि बुल शार्क को पोटोमैक नदी में पहले भी देखा गया है। हो सकता है कि मेरे कंधे से बहते खून की गंध सूंघकर बुल शार्क यहां आ गयी हो?"

“शायद तुम ठीक कह रहे हो।" वीनस ने प्यार जताते हुए कहा- “पर अगर आज तुम्हे कुछ हो जाता तो मैं तो जीते जी ही मर जाती।"

“इतना प्यार करती हो मुझसे?" वेगा ने वीनस को प्यार से देखते हुए कहा।

“अरे नहीं रे ....तुम्हारे मरने के बाद मुझे इतनी बड़ी-बड़ी पार्टी कौन देगा और इस इंजायमेंट के बिना जिंदा रहने का क्या मतलब है?" वीनस ने विषय परिवर्तन कर वेगा को छेड़ा।

“अच्छा तो तुम मेरे से नहीं बल्कि मेरी पार्टियो से प्यार करती हो।" वेगा ने वीनस का कान पकड़ कर जोर से खींचा।

वेगा और वीनस की नोक-झोंक से, इतने बड़ी दुर्घटना के बाद भी माहौल फ़िर से एक बार खुशनुमा हो गया।

कॉफ़ी ख़तम कर वेगा ने कॉफ़ी का भुगतान किया और वीनस को लेकर एक दिशा की ओर चल दिया।

जारी रहेगा_______✍️
 
#88.

तिलिस्मा का निर्माण

आज से 4 दिन पहले.....

(5 जनवरी 2002, शनिवार, 14:00, सामरा राज्य का समुद्र तट, अराका द्वीप)

व्योम को होश आ गया। सूरज बिल्कुल सिर पर चमक रहा था। व्योम ने एक बार अपनी आँखे खोली, फ़िर तेज रोशनी की वजह से वापस बंद कर ली।

व्योम ने पहले अपनी आँखो को दोनों हाथो से रगड़ा और फ़िर धीरे-धीरे उसे खोल दिया।

वह इस समय समुद्र के किनारे पानी पर पड़ा था।

लहरें बार-बार आकर उसके शरीर को चूम रही थी, जिसकी वजह से उसके कपड़े अभी भी गीले थे। समुद्र की लहरो के उसके शरीर पर टकराने की वजह से उसके कपड़ो में काफ़ी ज़्यादा रेत लगी हुई थी।

व्योम धीरे से खड़ा हुआ और अपने शरीर पर लगी रेत को अपने हाथो से झाड़कर साफ करने लगा।

कपड़े पर लगी रेत साफ करके व्योम ने पहले एक नजर समुद्र की लहरो पर मारी और फ़िर उस रहस्यमय द्वीप पर मौजूद जंगल की ओर देखा।

व्योम ने एक गहरी साँस ली और फ़िर अपने सफर के बारे में याद करना शुरू कर दिया कि कैसे किसी ने असलम को मारकर झरने में फेंक दिया था। फ़िर कुछ दिन बाद असलम ने न्यूयॉर्क बंदरगाह पर आकर स्मिथ के सामने अपने बारे में बताया, जिसकी वजह से व्योम हेलीकाप्टर के द्वारा बारामूडा त्रिकोण के रहस्यमय क्षेत्र में पहुंचा।

फ़िर जब धुंध ने उसका हेलीकाप्टर खराब कर दिया, तो उसने हेलीकाप्टर को पानी पर उतारकर बोट बना लिया। तभी उसे एक सुनहरी रोशनी दिखाई दी। जब उसका ध्यान रोशनी की ओर था, तभी पीछे से समुद्र की लहरें अचानक ऊपर उठी और उसकी बोट पर आकर गिर गयी।

बोट टूट गयी, पर व्योम ने समय रहते पानी में छलांग लगा कर अपनी जान बचा ली। पानी में गोता लगाते ही उसे पानी के अंदर एक चमकीली रोशनी बिखेरती उड़नतस्तरी दिखाई दी। यह देख उस पर बेहोशी सी छा गयी। बेहोश होने के पहले उसने केवल इतना देखा कि वह एक सुनहरे मानव के हाथो में है।

“बड़ा ही अजीब और रहस्यमयी क्षेत्र है यह तो।" व्योम मन ही मन बुदबुदाया- “पता नहीं कौन था वह सुनहरा मानव? जिसने मुझे बचाया। यह तो अच्छा हुआ कि मैं इस द्वीप के पास था, वरना मुझे समुंदर की लहरो में खो जाना था।"

अब व्योम की नजर अपनी अपनी बेल्ट में फंसे एक बैग की ओर गयी। उसने बैग से सारा सामान निकालकर वहीं जमीन पर बिखेर दिया और उसे चेक करने लगा।

बैग में जरूरत का वह सारा सामान था जो दुर्घटना के पहले ही व्योम ने अपने पास रख लिया था।

बैग में एक वॉटरप्रूफ रिवॉल्वर, उसकी कुछ गोलियां, एक धारदार बड़ा चाकू, एक लाइटर, एक शक्तिशाली पेंसिल-टॉर्च, पतली मगर बेहद मजबूत नायलोन की रस्सी, एक छोटा कैमपास, एक छोटी मगर शक्तिशाली दूरबीन, एक नोटबुक और एक बॉल पेन था।

व्योम ने सबकुछ चेक करने के बाद वापस अपने बैग में डाल लिया। व्योम ने खड़े होकर एक बार फ़िर उस रहस्यमयी द्वीप की ओर देखा। अब उसके दाँत गुस्से से भींच गए।

“अब मैं इस रहस्यमयी द्वीप का रहस्य जानकर ही रहूँगा।" व्योम मन ही मन बुदबुदाया और उठकर जंगल की ओर चल दिया।

व्योम को जंगल काफ़ी घना दिखाई दे रहा था।

व्योम के पैरो के नीचे से अब रेत ख़तम होने लगी थी। घास और झाड़ियां उसके पैर के नीचे आने लगी थी।

तभी अचानक व्योम किसी अदृश्य चीज से जोर से टकरा कर गिर गया।

“ये क्या था?" व्योम ने अपनी नजरों को इधर-उधर दौड़ाकर देखा, पर उसे अपने आस-पास कोई चीज दिखाइ नहीं दी।

व्योम उठकर खड़ा हुआ और उसने फ़िर अपने कदम को बढ़ाकर जंगल के अंदर जाना चाहा, पर इस बार व्योम सतर्क था।

व्योम का शरीर फ़िर किसी अदृश्य वस्तु से टकराया। चूंकि इस बार व्योम सतर्क था इसिलये इस बार वह गिरा नहीं।

व्योम ने तुरंत अपने बैग से चाकू निकालकर अपने दाहिने हाथ में ले लिया।

इस बार व्योम ने खुद आगे ना बढ़कर अपना बांया हाथ आगे बढ़ाकर देखा। उसका हाथ किसी अदृश्य दीवार से टकराया।

व्योम ने उस दीवार को टटोलकर देखा, वह अदृश्य दीवार उसे किसी सख्त धातु की बनी दिखाई दी।

व्योम को समझ नहीं आया कि यह कौन सी धातु है, जो इस कदर पारदर्शी है कि उसके आर-पार की हर वस्तु बिल्कुल साफ दिखाई दे रही है।

व्योम ने चाकू की मूठ से उस अदृश्य दीवार पर एक चोट करके देखा। कोई आवाज तो नहीं हुई पर व्योम का हाथ जरूर इस वार से झनझना उठा।

इस बार व्योम ने थोड़ा और आगे बढ़कर जंगल में घुसने की कोशिश की, पर वहां भी वह अदृश्य दीवार थी।

आधे घंटे के अंदर व्योम ने बहुत सी स्थानो से जंगल में घुसने की कोशिश की। मगर सब व्यर्थ गया, अदृश्य दीवार हर जगह मौजूद थी।

“यह कैसी दीवार है, ऐसी दीवार के बारे में तो मैने कभी सुना भी नहीं। पता नहीं कौन सी तकनीक का प्रयोग करके इस दीवार को बनाया है?"

व्योम मन ही मन बुदबुदाया- “ऐसे तो मैं जंगल में घुस ही नहीं पाऊंगा। अगर मैं जंगल में प्रवेश नहीं कर पाया तो मैं खाऊंगा-पीयूंगा क्या?"

लगभग 2 घंटे की मेहनत के बाद व्योम समझ गया कि जंगल के अंदर घुसने का कोई रास्ता नहीं है। इसिलये उसने अब अपना लक्ष्य परिवर्तन कर दिया।

उसने एक बड़ी सी लकड़ी के नीचे अपने चाकू को बांधकर मछलियों का शिकार करना शुरू कर दिया।

व्योम ने आग जलाकर कुछ मछलियों को पका लिया। खाने की समस्या तो हल हो गयी थी, अब बची थी पीने की समस्या। तो व्योम ने देखा कि कुछ नारियल के पेड़ समुद्र किनारे पर भी थे।

व्योम ने नारियल को तोड़ उसका पानी भी लिया। दिन ख़त्म हो गया। व्योम ने वहीं समुद्र के किनारे पर आग जलाकर रात बिताई।

अब व्योम की यही रोज की दिनचर्या बन चुकी थी। वह रोज पहले कुछ देर तक उस जंगल में अंदर घुसने का रास्ता ढूंढता, फ़िर मछलियों का शिकार करके उन्हें पकाकर खाता।

धीरे-धीरे ऐसे करते हुए दिन बीतने लगे। आज व्योम को होश आये 4 दिन बीत चुके थे।

व्योम एक पत्थर पर बैठकर अपने चाकू पर धार लगा रहा था कि तभी उसे समुद्र के पानी में एक

ब्लू-व्हेल दिखाई दी।

“यह कैसे पॉसीबल है? ब्लू-व्हेल तो समुद्र के गहरे पानी में रहती है। यह इस द्वीप के इतने किनारे तक कैसे आ गयी? किसी भी द्वीप के किनारे पर तो काफ़ी कम पानी होता है। ऐेसे में ब्लू-व्हेल इतने कम पानी में कैसे तैर सकती है?"

यह विचार दिमाग में आते ही व्योम ने अपने बैग को चेक किया और तुरंत पानी में छलांग लगा दी।

व्योम पानी के अंदर ही अंदर तैर रहा था।

थोड़ी ही देर में पानी के अंदर द्वीप की जमीन दिखाई देना बंद हो गयी।

“यह कैसे संभव है? यह द्वीप की जमीन इतनी जल्दी कैसे ख़त्म हो गयी?"

अब व्योम एक बार पानी के ऊपर आया और अपने फेफड़ो में जोर की हवा भरकर, उसने दोबारा डाइव मार दी।

अब वह कम से कम 25 मिनट तक पानी के अंदर रह सकता था। पानी के अंदर अब कहीं भी व्योम को ब्लू-व्हेल नहीं दिखाई दे रही थी।

व्योम धीरे-धीरे पानी के नीचे और नीचे जा रहा था।

समुद्र का पानी अंदर से साफ था, इसिलये अंदर का नजारा बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा था।

तभी नीचे का नजारा देखकर व्योम हैरान रह गया क्यों कि वह द्वीप समुद्र की तली से जुड़ा हुआ नहीं था। वह पानी पर तैर रहा था।

“यह कैसे संभव है? यह द्वीप तो पानी पर तैर रहा है। और....और नीचे से देखने पर यह द्वीप किसी विशालकाय पानी के जहाज के जैसा लग रहा है। थोड़ा और पास चलकर देखता हूं।"

यह सोचकर व्योम ने थोड़ा और पास जाकर नीचे से द्वीप की सतह को देखा। नीचे से द्वीप की सतह किसी सुनहरी धातु की बनी दिख रही थी।

“यह तो किसी धातु का बना कोई कृत्रिम द्वीप लग रहा है। इतने विशालकाय कृत्रिम द्वीप को किसने बनाया होगा? मुझे तो यह कोई ‘एलियन’ की टेक्नोलॉजी लग रही है? मनुष्य अभी इतना विकसित नहीं हुआ कि इस प्रकार की कोई रचना कर सके? कहीं यह एलियन का कोई बहुत बड़ा अंतरिक्ष-यान तो नहीं?"

व्योम के दिमाग में ऐसे ही अजीब-अजीब से विचार आ रहे थे।

तभी व्योम को उस ब्लू-व्हेल का ख़याल आया। उसने चारो तरफ नजर दौड़ा कर देखा, पर ब्लू-व्हेल उसे कहीं दिखाई नहीं दी।

व्योम को पानी के नीचे आये हुए 10 मिनट बीत चुके थे।

व्योम अभी इसी उलझन में फंसा था कि तभी द्वीप के एक निचले हिस्से से, एक काँच की लगभग 10 फुट लंबी, आदमकद कैप्सूलनुमा ट्यूब गोली की रफ़्तार से निकली और पानी में कहीं जाकर गायब हो गयी।

व्योम तेजी से तैरकर उस जगह पहुंच गया, जहां से वह काँच की ट्यूब निकली थी।

द्वीप में उस जगह पर एक दरवाजा दिखाई दे रहा था, जो कि धीरे-धीरे बंद हो रहा था।

व्योम बिना समय गंवाए उस रास्ते में प्रविष्ट हो गया। व्योम के अंदर घुसते ही वह दरवाजा स्वतः ही बंद हो गया।

ये एक बहुत चौड़ी सुरंग थी, जिसमें पानी भरा हुआ था। व्योम लगातार तैरते हुए आगे बढ़ रहा था।

लगभग 10 मिनट तक तैरने के बाद व्योम को पानी में वही ब्लू-व्हेल खड़ी हुई दिखाई दी। ऐसा लग रहा था जैसे ब्लू-व्हेल वहां सो रही हो। ऊपर पानी की सतह पर उजाला भी दिख रहा था।

एक बार तो व्योम ब्लू-व्हेल को वहां देखकर डर सा गया, पर फ़िर वह ब्लू-व्हेल से थोड़ी दूरी बनाकर पानी की सतह पर निकला।

बाहर का नजारा देखकर वह पूरी तरह से हैरान रह गया। वह एक बहुत बड़ा विशालकाय कमरा था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी पहाड़ को अंदर से खोखला करके उस कमरे को बनाया गया हो या फ़िर वह कोई विशालकाय पिरामिड हो।

उस कमरे में किनारे-किनारे पत्थरो से फ़्लोर बनाया गया था। एक नजर में वह कोई बहुत बड़ा स्वीमिंग पूल जैसा नजर आ रहा था। कमरे में चारो तरफ सुरंग जैसे कई रास्ते बने थे।

वहीं एक किनारे पर ब्लू-व्हेल सो रही थी।

“यह जगह तो किसी इंसान द्वारा बनायी गयी लग रही है या फ़िर एलियन द्वारा?"

जारी रहेगा______✍️
 
avsji

SANJU ( V. R. )

dev61901

kamdev99008

Aap sab ke reviews pending hai :blush1:
 
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