#54.
दोस्तो हम जब भी अटलांटिस के बारे में सोचते ह, हमारी आँखों के सामने सागर में डूबी एक भव्य सभ्यता नजर आनेलगती है।
अटलांटिस देवताओं की वह धरती जिसका जिक्र सर्व प्रथम प्लेटो ने अपनी पुतक ‘टाइिमयस’ और ‘कृटियास’ मैं किया था।
कहते है कि अटलांटिस का विज्ञान आज के विज्ञान से हज़ार गुना बेहतर था। पर एक दिन धरती के जोर से हिलने की वजह से पूरी अटलांटिस सभ्यता सागर में समा गई। तब से लेकर आज तक वैज्ञानिक और आर्कियोलोजिस्ट उस सभ्यता को ढूंढने का प्रयासकर रहे है।
ईश्वर को ब्रह्माण्ड के निर्माण के लिए 7 तत्वो की आवश्यकता थी- अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश, प्रकाश और ध्वनि!
इन्ही सात तत्वों से भगवान ने ब्रह्मांड का निर्माण किया ! लेकिन अभी ईश्वर की सबसे बड़ी अद्वितीय कृति बाकी थी,और वो थी जीवन की उत्पत्ति।
जीवन की उत्पत्ति के लिए ईश्वर ने ब्रह्मकण’ (देव-कण) का निर्माण किया, देव-कण जिसको अंग्रेजी में 'गॉड-पार्टिकल’ कहते हैं। इस देव-कण ने सभी जीवो का निर्माण किया।
आख़िर क्या था वो ब्रह्मकण? जिसने अरबों-खरबों जीवों का निर्माण किया? और जिसने इन्हें इतना अलग अलग बनाया ।
इस कहानी इस कडी में जहां एक और तिलिस्म, जादू, रहस्य, चमत्कार है, वही विज्ञान की एक अद्भुत दुनिया है। जो बिग-बैंग, ब्लैक -होल, नेबुला और डार्क-मैटर जैसे सिद्धांत को खोलती है।
पौराणिक कथाओं और विज्ञान के ताने-बाने से बनी एक अद्भुत कहानी है ये जो आप पढ़ने जा रहे हैं।
आज से लगभग 20,000 वष॔ पहले ग्रीक देवता पोसाइडन ने अपनी पत्नी क्लिटो के लिये धरती पर स्वर्ग की स्थापना की, जिसे अटलांटिस के नाम से जाना गया।
धीरे-धीरे अटलांटिस का विज्ञान इतना उन्नत हो गया की वहांके लोग स्वयं को भगवान मानने लगे। जिसके फल स्वरूप उन्होंने देवता के ख़िलाफ़ ही युद्ध का शुरू कर दीया।
पोसाइडन ने गुस्सा होकर पूरी अटलांटिस सभ्यता को समुद्र में डुबो दिया और क्लिटो को एक अस्वाभाविक (कृत्रिम) द्वीप पर तिलिस्म बनाकर कैद कर दीया ।
उस अस्वाभाविक द्वीप के आसपास का छेत्र बारामूडा त्रिकोण कहलाया । पोसाइडन ने इस तिलिस्म की सुरक्षा का भार 6 इन्द्रियाँ, 7 तत्व, 12 राशियाँ, और ब्रह्मांड के ख़तरनाक जीव जंतुओं, रोमन योद्धाओ, और ग्रीक देवताओ को दिया।
28 द्वारो वाला ये तिलिस्म अभेद्य था। यह तिलिस्म अब सिर्फ शारीरिक कुशलता और बुद्धि से ही तोड़ा जा सकता था ।
अटलांटिस के बचे हुए योद्धा 20000 साल से इसे तोड़ने की कोशिश कर रहे धे, लेकिन सफल नहीं हुए। आख़िरकार हार कर उन्होंने इंसानों का सहारा लिया और धरती के सबसे बुद्धिमान इंसानों को इसमें प्रवेश करवा दिया।
फ़िर शुरू हुई रहस्यों से भरी एक प्रश्न माला।
1.क्या वो साधारण मनुष्य तिलिस्म तोड़ कर क्लिटो को आजाद करवा सके?
2.क्या था हिमालय के गर्भ में छुपे उस विद्यालय का रहस्य? जहां वेदो की शिक्षा दी जाती थी।
3.कैलाश पर्वत की गुफा से निकला वेदों का ज्ञान, क्या ग्रीक देवताओ पर भारी पड़ा?
4.क्या म..देव की अलौकिक शक्तियाँ ब्रह्माण्ड के हर विज्ञान से उन्नत थी?
5.क्या संपूर्ण ब्रह्मांड जगत का सार ओऽम शब्द में निहित था?
6.क्या ब्रह्मकन('गॉड-पार्टिकल’) /देव-कण में हि बिग-बैंग का सिद्धांत समाया था?
7.क्या यूनिवर्स की रक्षा के लिए नए सुपर हीरो का जन्म हुआ, जिनके पास भगवान और विज्ञान दोनों की शक्ति थी?
तो दोस्तों देरी किस बात की? आइए सुरु करते हैं, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का राज खोलती अगली कड़ी का, जो आपको इंसान,भगवान और विज्ञान में अंतर करना सिखाएगी, जिसका नाम है: ‘अटलांटिस के रहस्य’
चैपटर-1 'अटलांटिस का इतिहास': 7 जनवरी 2002, सोमवार, 10:00, वाशिंगटन डी.सी., अमेरिका.
ये क्या वेगा?" वीनस ने वेगा को टोकते हुये कहा- “ये तुम मुझे ‘कांग्रेस का पुस्तकालय`( लाइब्रेरी आफ कांग्रेस) क्युं लेकर आ गए? मुझे लगा तुम मुझे घुमाने ले जा रहे हो।"
वेगा ने वीनस को एक बार मुस्कुरा कर देखा और फर अपनी कार को पार्किंग की तरफ घुमा दीया ।
“असल में प्रोफेसर कैरल ने मुझे एक प्रोजेक्ट पर लेख लिखने को कहा है !" वेगा ने कार को भूमिगत पार्किंग की ओर मोड़ते हुये कहा-
“और उस विषय पर कुछ लिखने से पहले, मुझे उसके बारे में जानना भी तो जरुरी है। इसलिए में तुम्हे लेकर दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी आया हूॅ। यहां पर हर विषय पर किताबें मौजूद है।''
“ओह!” वीनस ने गहरे सांस लेकर कहा- “ठीक है, मैं तुम्हारी मदद कर दूंगी. इसके बाद तुम्हें शाम को पार्टी देने का वादा करना होगा।'' वीनस ने मुस्कुराकर वेगा को ब्लैकमेल किया।
“हां...सुयोर!”
वेगा ने कार को पार्किंग में खड़ा किया, कार के इंजन को बंद कर दिया गया। वीनस और वेगा कार से उतर कर बाहर चले गए। वेगा ने इधर-उधर नज़र मारी और वीनस को लेकर लिफ्ट की और बढ़ गया।
"वैसे प्रोजेक्ट की थीम क्या है?" वीनस ने लिफ्ट में कदम रखते हुए पूछा?
“अटलांटिस के रहस्य” वेगा ने कहा!
वेगा की बात सुन वीनस एका एक हैरान कर देने वाली हो गई-
“ये कैसा टॉपिक है? यह तो हमारे विषय से मैच नहीं खाता।"
“मुझे क्या पता यार?” वेगा ने रिसेप्शन के फ्लोर पर स्टेप रख कर कहा- “अब प्रोफेसर ने जो टॉपिक दिया, मैंने वो ले लिया। अब बहस करने का कोई मतलब भी तो नहीं था।"
"बात तो तुम्हारी ठीक है" वीनस ने भी वेगा की बात पर अपनी सहमित प्रस्ताव हुए कहा।
तब तक वेगा रिसेप्शन पर पहुंच गया। वेगा ने अपनी जेब से लाइब्रेरी कार्ड निकाला कर कंप्यूटर में अपनी एंट्री दर्ज़ की। एंट्री के बाद कंप्यूटर ने उसको 4 अंकों का एक डोर- पासवर्ड दे दिया।
लाइब्रेरी का मेन डोर कंप्यूटराइज्ड पासवर्ड से लॉक था। वेगा ने दरवाजे के बगल लगे की पैड पर 4 अंक का पासवर्ड डाला। कांच का दरवाजा हल्की सी आवाज करता हुआ, एक तरफ स्लाइड होकर खुल गया। वेगा वीनस को ले लाइब्रेरी के अंदर घुस गया।
“तुम तो ऐसे यहां चल रहे हो, जैसे रोज-रोज यहां आते हो?“ वीनस ने वेगा को छेड़ते हुए कहा।
“कुछ ऐसा ही समझ लो। वैसे हफ़्ते में 3 दिन तो आता ही हू यहां पर।" वेगा ने चलते चलते जवाब दिया- “वास्तव में मुझे किताबें पढ़ना अच्छा लगता है।"
अब वेगा एक कंप्यूटर मशीन के पास पहुंच गया। उसने कंप्यूटर पर अटलांटिस शब्द टाइप किया ओर सर्च का बटन दबाया।
कंप्यूटर ने एक सेकेंड में ही 1024 किताबों के नाम वेगा के सामने रख दिये।
किताबों के नाम के बाद उनके लेखक का नाम, परकाशन वर्ष आदि विवरण लिखे हुए थे। वेगा की नजर तेजी से किताबों की सूची पर घूमने लगी।
देखते-देखते वेगा की नजर एक किताब के नाम पर रुक गई, किताब का नाम किसी दूसरी भाषा में लिखा था। लेखक का नाम भी समझ नही आ रहा था। मुद्रण वर्ष की जगह सन् 1508 लिखा था।
वेगा कुछ देर तक लेखक के नाम को देखता रहा। तब वेगा ने उस किताब का हॉल नंबर, रैक नंबर और डिटेल को एक छोटे से नोटपैड पर नोट कर लिया और कंप्यूटर को बंद कर, वीनस को ले एक दिशा की ओर चल दिया।
तीन-चार गिलयारों को पार करने के बाद अब वेगा किताबों की एक अनूठी दुनिया में था। एक विशालकाय हॉल में चारो तरफ 50 फुट ऊंची-ऊंची किताबों की रैक में किताबें ही किताबें भरी हुई थी। वीनस आँखे फाड़े उस किताबों के संसार को देखने लगी।
“अद्भुत! इतनी सारी किताबें ....... यह तो एक अलग ही दुनिया लग रही है।" वीनस ने अश्चर्यचकित् होकर कहा।
“लाइब्रेरी औफ कांग्रेस संसार की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है।" वेगा ने मुस्कुराकर वीनस की ओर देखते हुये कहा-
“यहां पर 100 मिलयन किताबें है और हर रोज लगभग 2,000 किताबें बढ़ जाती है। यह तो भला मानो की यह हमारे शहर वाशिंगटन में ही है। नही तो हमें लेख लिखने के लिए किसी और शहर में जाना पड़ता।"
वेगा की नजर अब रैक पर पड़े नंबर पर फिरने लगी। बामुस्किल 30 सेकंड में ही उसे रैक नंबर 35 दिखायी दे गयी। वेगा की नजर अब किताब नं0 823 पर गय। उसने आगे बढ़कर उस रहस्यमयी किताब को रैक से निकाल लिया।
वह किताब लगभग 400 पृष्ठ की थी। वेगा को किताब निकालता देख उस हॉल का लाइब्रेरियन पास आ गया।
“यह किताब हमें 7 दिन के लिए इश्यू करवानी है।” वेगा ने लाइब्रेरियन से कहा ।
लाइब्रेरियन ने उस किताब को ध्यान से देखा और फिर बोला- “सोरी सर,....यह किताब काफी पुरानी है. ...इस ग्रेड की किताब को आप ले नहीं सकते। आपको यही पढ़ना पड़ेगा ।"
वेगा ने लाइब्रेरियन की सुन अपनी नजर इधर-उधर घुमाई। अब उसकी नजर सामने कांच के बने साउंड प्रूफ केबिन की ओर गई। केबिन को देखते हुए वेगा ने कहा-
''ठीक है फिर आप एक केबिन खुलवा दीजीए। वहा बैठ कर यह किताब पढ़ लेता हूँ।"
“सर….पर वो केबिन तो वी.आई.पी. पाठकों के लिए है. तुम्हें यहां कॉमन एरिया में ही बैठकर, यह किताब पढ़नी होगी।'' क्योकी.......!
जारी रहेगा_________
