अपडेट. 56
दोनों वह जलती हुए चिटा को देख रहे थी
आदमी ....संबु हमें आज रात हे इस मसान के सभी भूतो को अपने ादिन करना होगा
संबु . . ...जैसा आप कहो किन्तु क्या आप ये सब कर पाओगे
अभी आप काफी कमजोर हो बॉस
aadmi....sambu तुम भूल रहे हो
मैं कोण हूँ
मैं हूँ शीतन का पुजारी
तामसिक तांत्रिक त्रिकाल singh...........(T.T.T.S ).
अब आगे ..............
आज देव को मास्को गए हुए 3 दिन बिट चुके थे
सब बहने काफी परेशान थी आवर राणा जी पे गुस्सा भी
क्युकी सबको यही लग रहा था की देव को उन्होंने हे कही पे भेजा है
सौपानलोक ......
रुद्रदेव अपनी मजिल की आवर बढ़ रहा था
जैसे जैसे रुद्रदेव सौपानलोक के मद्य भाग की आवर भाड़ रहा था
वैसे वैसे वह का माहौल बदल रहा था जहा चारो आवर पहले खूबसूरती हे खूबसूरत नज़र आ रहे थी
अब वह डेरी वो खूबसूरती गायब हो रहे थी
खूबसूरत पेड फोड़े मुठा रहे थे छोटे छोटे जिव देखते हे देखते आँखों के सामने कंकाल में परवर्तित हो रहे थे
रुद्रदेव ......ये कैसे मायावी दुनिया है
पल पल में बदल रहे है मुझे बहुत सावधानी आगे बढ़ाते रहना होगा
अभी रुद्रदेव कुछ हे आगे बढ़ा था की उसको ऐसा लगा कोई आवर भी है जो उसको देख रहा है
रुद्रदेव जो कोई भी है सामने आ जाओ अन्यथा तुम्हारा सर्वनास करने में मुझे जरा भी वक़्त नहीं लगेगा
काफी कोशिश के बाद भी कोई नहीं सामने आया तो निराश हो आगे की यात्रा की आवर बढ़ गया किन्तु सावधानी से
काफी आगे एक बहुत बड़ा जंगल नजर आया
देखने में हे बहुत खतरनाक लग रहा था
अभी रुद्रदेव जंगल में प्रवेश करता की किसी अदृश्य सकती ने रुद्रदेव को उठा कर पटका
रुद्रदेव .....कोण है सामने आओ
अदृश्य....... तुम जो कोई भी हो लौट जाओ जहा से भी आये हो अन्यथा हमेशा के लिया तुम्हे यही कैद कर लिया जायेगा
रुद्रदेव ......तुम जो कोई भी हो मेरे मार्ग से हाथ जाओ मुझे आगे बढ़ने दो
अदृश्य .......तुम जैसे यहाँ बहुत से आये आवर बहुत से गया पर हमारे रहते तुम कभी भी महारानी तक नहीं पहुंच सकते
rudradev.....kon महारानी तुम किश महारानी की बात कर रहे हो
अदृश्य ......ये तुम्हारे लिया अंतिम चेतावनी है लौट जाओ यहाँ से
रुद्रदेव .....तुम जो कोई भी हो मैं नहीं जनता तुम मुझे आगे क्यों नहीं बढ़ने दे रहे हो
किन्तु तुम्हारे लिया भी यही आखिरी चेतावनी है मेरा मार्ग से हाथ जाओ
अभी रुद्रदेव अपनी बात भी पूरी नहीं की थी की एक बार फिर रुद्रदेव के सीने पे बहुत जोर से प्रहार हुआ
जैसे हे फिर आगे बढ़ता वैसे फिर से प्रहार होता
डेरी डेरी रुद्रदेव पे रूद्र हावी होने लगा
गुस्से में रुद्रदेव ने अपने अग्नि तत्वा को जंगल की आवर कर दिया किन्तु ये क्या जैसे जैसे जंगल जल रहा था वैसे वैसे फिर से पेड पौदे खतरनाक रूप से भाड़ रहे थे
अदृश्य .......हाहाहा तुम्हे क्या लगता है तुम अग्नि से इसे जला डोज कभी नहीं
अग्नि से वो जलता है जो जीवित सरीर दरी हो
ये एक तिलिस्म है इसका कोई तोड़ नहीं है
रुद्रदेव .....हाहाहा अब तक नहीं था इस तिलिस्म का तोड़ किन्तु अब है मूरख
अदृश्य .....क्या मतलब है तुम्हारा
रुद्रदेव कुछ कदम पीछे ले कर एक जगह ध्यान में बेथ कर अपने वायु चक्र को जागृत कर वह की वायु को अपने अंदर सामने लगा
डेरी डेरी सम्पूर्ण वायु रुद्रदेव के वायु चक्र में समाहित होने लगी
तभी रुद्रदेव को किसी के चिकने छिलने की आवाजे आने लगी
रुद्रदेव ने अपनी आँखे खोली
अदृश्य .......अह्हह्ह्ह्ह रुक जाओ मुझे समाप्त मत करो मैं अपनी हर स्वीकार करता हूँ तुम्हे आगे बढ़ने की इजाजत है
रुद्रदेव ........तुम्हे तभी जीवनदान मिलेगा अगर तुम मेरी अदीनता स्वीकार करोगे तभी हे तुम्हे जी वंदन प्राप्त होगा
अदृश्य..... मुझे स्वीकार है मैं आपकी गुलामी स्वीकार करता हूँ
रुद्रदेव .......सामने आओ
कुछ पल बाद हवा में कुछ परछाई से नजर आयी जो रुद्रदेव के सामने घुटनो पे बैठी थी
रुद्रदेव .....कोण हो अपना परिचित दो मुझे
अदृश्य .....मैं वायु हूँ मेरा बस यही परिचिया है मुझे इस तिलिस्म की रक्षा करने के लिया रखा गया था
रुद्रदेव .......तुम किश महारानी की रक्षा कर रहे हो
वायु .....मुझे समां करे परन्तु मुझे मेरे ादिन चैत्र के अलावा कुछ नहीं मालूम
रुद्रदेव .....उचित है तुम मेरे चक्र में अपना स्थान घरहान करो
वायु ......जैसे आपकी आज्ञा
वायु रुद्रदेव के वायु चक्र में समाहित हो जाता है
रुद्रदेव को अपने अंदर ऐसा महसूस होता है जैसे एक एक उसके सरीर हल्का आवर फुर्तीला हो गया है
सामने का दर्शाया बदल चूका था एक निर्जन मेडेन के रूप में बस पथरीली जमीं के अलावा कुछ नहीं
रुद्रदेव आगे बढ़ा अभी रुद्रदेव को कोई परेशानी नहीं हुए आगे बढ़ने में
काफी आगे चलने पे रुद्रदेव को एक लाए से बानी नदी बहती हुए दूर से नजर आने लगी जैसे जैसे रुद्रदेव आगे भाड़ा रहा था
वैसे हे वो लावा नदी आवर विशाल नज़र आ रहे थी
रुद्रदेव ......अब ये क्या है ऐसे विशाल नदी वो भी लावा से बानी हुए
कुछ देर रुद्रदेव नदी को पर करने के लिया अलग अलग प्लान त्यार करता है किन्तु सब विफल रहे
तभी रुद्रदेव के कानो में एक हंसी का थका गूंजा जो किसी लड़की का था
रुद्रदेव .....कोण हो तुम
तभी नदी से एक लावा से बानी लड़की का अक्ष नजर आता है
रुद्रदेव .......कोण हो तुम आवर यहाँ क्या कर रहे हो
ladki.....hehehe मुझे वायु की तरह मूरख समजा है क्या जो मैं तुम्हे सब कुछ बता दूँ
रुद्रदेव .........काम से काम अपना नाम तो बताओ ताकि हम बात कर पाए
लड़की .......अग्नि नाम है मेरा सब कुछ भसम करना काम है मेरा
रुद्रदेव ........तुम तो बड़ी खूबसूरत हो अग्नि तुम यहाँ इस वियावान ( निर्जन) एकांत में क्या कर रहे हो
तुम्हारे जैसे खूबसूरती के देवी को तो किसी सही महल में महारानी के पद पे आसीन होना चाइये था
( अब लड़की कोई भी हो अपनी तारीफ से हवा में उड़ने लगती है )
अग्नि ......सच में क्या मैं इतनी खूबसूरत हूँ
पर सब तो मुझसे डरते है कोई मुझे प्रेम नहीं करता
रुद्रदेव .......नहीं नहीं तुम गलत हो तुमसे दर इस लिया लगता है क्युकी तुम्हारे तप से सबको तकलीफ होती है
जो भी तुम्हे छुएगा तो उसको बेहताशा दर्द तकलीफ होगी इस लिया सब डरते है
अग्नि .......सच कहा तुमने वैसे तुम्हारा नाम क्या है
रुद्रदेव .....प्रिंस रुद्रदेव सिंह राणा
अग्नि ......तुम प्रिंस हो फिर यहाँ इस जगह क्या कर रहे हो
( ये कही वही तो नहीं है जिनका इंतजार हजारो सालो से हम सबको था पर उनके बारे में तो सुना था वो बहुत क्रोधी है बात बात पे उनको क्रोध जागृत हो जाता है
ये तो बड़ी प्यारी बाटे कर रहे है
है भी अपने नाम की तरह हे खूबसूरत किसी देवलोक के प्रिंस की तरह )
रुद्रदेव .....अग्नि तुमने बताया नहीं तुम किस लिया हो यहाँ पे
अग्नि ...मुझे किसी के सरीर के रक्षा करने का दायित्वा मिला है
रुद्रदेव .....किसका सरीर
Agni.....maharannnni ....नहीं तुम मुझे नहीं चल सकते वायु की तरह
अग्नि बसे में सूर्य पे अग्नि लाए की वर्षा करने लगती है
अग्नि से रुद्रदेव को ज्यादा परेशानी नहीं हुए किन्तु रूद्र को गुस्सा आने लगा था
रुद्रदेव ......रुक जाओ अग्नि मेरे गुस्से को जागृत न करो मुझे आगे बरना है मेरा मार्ग मत रोको
अग्नि ......तुम मुझे अच्छे लगे किन्तु मुझे पराजित किये बिना तुम आगे नहीं बाद सकते हो
रुद्रदेव .....फिर सम्भालो रुद्रदेव के रूद्र को
ऐसे कौन के साथ हे रूद्र अपने अग्नि तत्वा के साथ करोड़ में भरा अग्नि के सामने खफा था
रुद्रदेव के सरीर से विशाल लपटे निकल रहे थी अग्नि की
रुद्रदेव का ऐसा भयंकर रूप देख
अग्नि को अपनी कही बात आ गई की उनको (रूद्र ) गुस्सा जल्दी आता है
अभी अग्नि अपनी सोच में दुभि हुए थी की डेरी डेरी लावा रूपी नदी सूखने लगी अग्नि को अपनी सकती काम होती हुए महसूस हुए तो सामने देखा
जहा लावा रूद्र के मुँह में जा रहा था
डेरी डेरी रूद्र का सरीर विशाल होने लगा
अग्नि ....मुझे समां कर दे रुद्रदेव मेरी एक भूल की इतनी बड़ी सजा न दे मेरा अस्तित्व हे मिट जाये
रुद्रदेव .....मेरी अदितनता स्वीकार करो तुम्हे मुक्त कर दूंगा
अन्यथा तुम्हे अस्तित्व हे समाप्त कर दूंगा
agni.....mujhe आपकी अदीनता स्वीकार है रुद्रदेव मुझे समां कर दीजिये
रुद्रदेव संत होने लगा किन्तु अभी भी उसका सरीर वैसा हे था विशाल रूप में अग्नि से दहकता हुआ
अग्नि रुद्रदेव को परनाम कर रुद्रदेव के अग्नि चक्र में समाहित हो जाती है
अग्नि को अपने चक्र में स्तिथ करते हे रुद्रदेव का सरीर अपने वास्तविक आकर में लौटने लगा था
अब रुद्रदेव को थोड़ी राणावत सी महसूस होने लगे थी अपने सरीर के भीतर दौड़ रहे लावे के कारन बहुत जोरो की प्यास लग रहे थी
जो की रुद्रदेव को यहाँ पर आने के पश्चाताप पहली बार ऐसा महसूस हुआ था
इस वक़्त सामने कुछ दुरी पे विशाल पहाड़ो से बाह्य जर्ना बहुत हे खूबसूरत लग रहा था
रुद्रदेव ......कुछ पानी पे कर विश्राम करके आगे बढ़ाते है .....
मास्को में .....
देव .....आज मुझे यहाँ का कार्य पूरा करके निकलना होगा बहुत मस्ती कर्ली यहाँ पे आ कर
अगर घर पे कुछ भी गड़बड़ हुए तो
रुद्रदेव का सामना मैं नहीं कर पाउँगा
जेनी ......क्या बात है स्वीटहार्ट किस सोच में खोये हुए हो
देव .....कल मैं वापिस लौट रहा हूँ अपने देश
रॉय .....क्या इतनी जल्दी पर क्यों हमारे साथ में तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा है क्या
देव .....बात वो नहीं है रॉय मेरा यहाँ का काम ख़तम हो जायेगा आज रात तक
जेनी .....हमें तो लगा तुम हमारे लिया रुके हो पर तुम तो अपने काम से यहाँ रुके हो
देव .....जेनी मेरा भी एक परिवार है मुझे उन्हें भी टाइम देना होता है आवर रहे बात तुम्हारे साथ रहने की
तो मैं बात करूँगा अगर इजाजत मिली तो मैं लौट आऊंगा
रॉय .....तुम्हे किसकी इजाजत लेनी है
देव ....मेरे जन्मदाता मेरे पिता की
जेनी ......हो तुम्हारे पिता जी वहीँ न जिनसे तुम कल बात कर रहे थे मुझे तो वो बहुत हे ज्यादा पसंद आये
मुझे नहीं लगता वो तुम्हे यहाँ रुकने से मन करेंगे
देव ..( पागल लड़की तुम्हे कैसे समजून जिनका मैं अंश हूँ अगर उन्हें मेरी बात पसंद नहीं आये तो वो मेरे साथ क्या करेंगे पल भर में मेरा अस्तित्व हे मिटा देंगे पिता श्री बचा लेना )
देव .....है देखते है उनसे बात करके
रॉय .....आज नाईट फिर बहार रहने वाले हो क्या
देव ....हम्म्म आज काम पूरा हो जायेगा मेरा सुबह तक लौट आऊंगा
जेनी .....तुम्हे नाईट में बहार नहीं जाना चाइये स्वीटहार्ट पिछले 3 2 रातो से पूरा मास्को के गुंडों को कोई एक एक करके मुर्दे कर रहा है विथ लाइव वीडियो
(देव ......अगर नहीं गया तो आज मारकेश के साम्राज्य का अंत कैसे करूँगा )
देव .....बस आज आज की बात है डार्लिंग
रॉय ......देव एक लड़की है जो तुम्हारे साथ अपनी विर्जिनिटी ब्रेक करना चाहती है
जेनी ......क्या आए कोण है वो लड़की ( गुस्से में )
रॉय ....मेरी सिस्टर नेन्सी फ्रेंड्स मरथा है वो लड़की नेक्स्ट मंथ वो दोनों सदी कर रहे है
देव .....क्या दोनों लड़की हो कर सदी कर रहे है
जेनी .....यहाँ ये सब नार्मल है डार्लिंग
देव ....मुझे क्या है तुम्हारे मर्जी
रॉय .......तो मैं नेन्सी को कॉल करके बोल देती हूँ
जेनी .....दोनों को साथ में आने को बोलना देव दोनों की विर्जिनिटी ब्रेक करेगा नहीं तो किसी की भी नहीं
ये हम सबकी आवर से देव को रेतुर्न गिफ्ट होगा 2 विर्जिनिटी
रॉय ....मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है
देव ....बूत मुझे है तुम
किसी को भी फाॅर्स नहीं करुँगी
अगर दोनों अपनी मर्ज़ी से त्यार हो तो ठीक है नहीं तो मरथा को हे आने का बोलना अकेले
जेनी .......ok देव तुम बहुत स्वीट हो तुम सबका ख्याल रखते हो
अब नाईट से पहले हमारी छूट का भी ख्याल कर लो फिर रात भर आराम रहेगा
देव जेनी आवर रॉय को जैम कर 1 हर तक बदल बदल कर चुदाई करता है
फिर खाना खा कर मारकेश के लंका की आवर निकल जाता है ...........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स............